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अपडेट 15
कोई 2 सप्ताह बाईट होंगे , मैं कॉलेज नहीं गया था , सुबह से शाम तक बस अखाड़े में म्हणत करता रहता और रत को चाचियों के साथ मजे करता , मेरे घर में अखाडा जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही थी इसलिए घर वालो को पता था की एक पहलवान की डाइट क्या होनी चाहिए , मेरी पूरी डाइट hi चेंज कर दी गयी थी और माँ ने सही कहा था अखाड़े में vargis(exercise) करने से मेरे अंदर कुछ अलग hi परिवर्तन हो रहे थे , मैं अपनी हवस में काबू प् रहा था लेकिन वही स्टैमिना और भी ज्यादा बढ़ने लगा था, मैं अपने अंदर खून के परवाह को भी महसूस कर सकता था (जो लोग रेगुलर एक्सरसाइज करते है वो इससे इत्तेफाक रखते होंगे, नशो में खून का बहाना भी पता चलता है हैवी वेट एक्सरसाइज के बाद )
जेने का अपना अलग hi मजा आ रहा था , और मेरे मसल्स भी तेजी से बाद रहे थे , ऐसे पिता जी के कारण मैं बचपन से hi एक्सरसाइज करता आ रहा था लेकिन अब मैं रूल्स को भी फॉलो करने लगा था जैसा की यंहा के पहलवान करते थे , और मेरे परिवार के मायनो में वो पहलवान योद्धा कहलाते थे ..
सुबह सुबह का वक़्त था मैं परिमल के साथ कुस्ती लड़ रहा था, ऐसे तो मैं 2 सप्ताह में hi अच्छे अच्छे पहलवानो को पास्ट कर दे रहा था लेकिन परिमल भी काम नहीं था उसने तो बचपन से hi इसकी ट्रेनिंग ली थी इसलिए वो मेरे सामने टिक पता था ..
एक दूसरे को उठा कर पटकने में हमें बहुत मजा आता , शरीर मिटटी से सना हुआ था और पसीने से भीगा हुआ , ये अखाडा मंदिर के पास hi था और वही थोड़ी दूर में गजराज चाचा का घर था , हमें एक गाड़ी उनके घर की और जाते हुए दिखाई दी ..
सभी की नज़ारे उस गाड़ी पर थी ..
“ये तो रिद्धिमा की गाड़ी है “ किसी ने कहा और हम सभी की निगाहे उस और चली गयी , गाड़ी तेजी से वंहा से निकल गयी , उसमे रिद्धिमा के अलावा एक अधेड़ उम्र की ायरत भी बैठी हुई थी जो हमें hi घूरे जा रही थी ..
हमने इस और जयदा ध्यान नहीं दिया और फिर से अपने काम में लग गए , वही थोड़ी देर बाद hi मैंने देखा की वो अधेड़ उम्र की ायरत हमसे कुछ दूर पर hi कड़ी है और हमें hi देखे जा रही है , थोड़ी hi देर बाद रिद्धिमा भी वंहा आयी और आते hi मुझे और परिमल को देखकर उसने हाथ हिलाया , मैंने भी जवाब में हाथ हिलाया ,इसे देखकर उस ायरत ने रिद्धिमा से कुछ पूछा और फिर उसके चेहरे के भाव अचानक से बदलने लगे , मैं और परिमल उसकी और hi जा रहे थे लेकिन अब वो ायरत दरी हुई लगने लगी , मेरी निगाहे उसके जिस्म में चली गयी थी और मेरे अंदर का हवस भी जगाने लगा था , लेकिन वो ायरत ऐसे भागी जैसे कोई भूत देख लिया हो ..
“हे भगवन मुझे बचा ले , ये मुझसे क्या हो गया ..”
वो बार बार यही चिल्ला रही थी , उसकी बात को सुनकर न सिर्फ हम लोग बल्कि रिद्धिमा भी उसे अजीब निगाहो से देख रही थी …….
वो दौड़ते हुए सीधे कार में जा घुसी ..
“ये कौन है और इसे क्या हो गया “
परिमल बोल उठा था
“ये हमारे घर की नौकरानी है लेकिन मेरी माँ जैसी है , जमुना काकी “
रिद्धिमा ने हलके आवाज में कहा , उसकी निगाहे मेरे शरीर कोई घर रही थी , मैं मिटटी में सना हुआ था और पसीने से नहाया हुआ था , मेरे शरीर पसीने से चमकने लगा था , रिद्धिमा की आँखों से hi पता चल रहा था की मेरा शरीर उसके अंदर कुछ बदल रहा है ..
“मुझे भी चलना चाहिए “ वो भी तेजी से पलटी और कार की और भागी , पीछे से गजराज काका चिल्लाते रहे लेकिन फिर कार तेजी से वंहा से निकल गयी थी …….
“इन दोनों को क्या हो गया , ऐसा लगा की कोई भूत देख लिया हो “परिमल चिंतित दिख रहा था
“हम दोनों भूत से काम भी कहा दिख रहे है “ मेरी बात सुनकर परिमल जोरो से हंस पड़ा था …
इधर
रिद्धिमा रोज hi कॉलेज जाती लेकिन उसे न तो परिमल दिखाई देता न hi अजय , न hi राखी रेखा न देवनद और न hi शिरीन उसे दिखाई दी ,उसे अजय के हेल्थ की चिंता होने लगी थी ..
अजय के हॉस्पिटल में भर्ती कराये 2 सप्ताह हो चुके थे , उसने हॉस्पिटल में पता किया था तो उसे पता लगा की अजय को उसी दिन रात तक छुट्टी मिल गयी थी …
रिद्धिमा ने गजराज के घर जाकर राखी रेखा से मिलने की सोची , शायद उससे उसे अजय के बारे में पता चल सके ..
वो जमुना काकी को लेकर गजराज के घर की और निकल पड़ी , रिश्ते में उन्हें वो अखाडा दिखाई दिया जिसमे पहलवान वर्गीस कर रहे थे , और एक दूसरे के साथ कुश्ती खेल रहे थे ..
“वह कैसे मस्त मस्त जवान और ताकतवर लोग है , इनमे से एक कोई मिल जाए तो चुड़ैलों की दी गयी ताकत का इस्तमाल कर लू , मजा hi आ जायेगा “
जमुना ने अखाड़े की और देखते हुए कहा ..
“क्या काकी आप भी जब देखो बस यही सब बाटे “
रिद्धिमा का दिमाग ऐसे भी ख़राब था और अब जमुना की बाटे सुनकर वो और भी चिढ गयी थी
“अरे बेटी तुझे भी समझ आएगा , एक बार जब तेरा कौमार्य भांग होगा तो तुझे भी समझ आएगा की प्रेम का मिलान क्या होता है , और उसका सुख क्या है .. फिर तू भी उसके पीछे भागेगी :डी “
जमुना की बात सुनकर रिद्धिमा बुरी तरह से चिढ गयी ..
“छियई आप hi करो ये सब , और अगर आपने फिर से ऐसी बात की न तो देखना मैं आपसे बात hi नहीं करुँगी “
जमुना रिद्धिमा के गुस्से को समझ गयी थी इसलिए वो चुप रह गयी ..
जमुना को कभी एक चुड़ैल ने एक सकती दी थी की वो किसी भी एक मर्द को अपनी और आकर्षित कर सकती है और इससे वो मर्द उसके लिए दीवाना हो जायेगा उसकी हर बात मानेगा , जमुना ने इसका प्रयोग करके सुलभ फंसा लिया था , इसके बदले उसे एक लड़की को चुड़ैल बनाना था जो जमुना ने रिद्धिमा के जरिये पूरा कर दिया , इससे चुड़ैल फिर से खुस होकर उसे फिर से वो सकती दे दी थी की वो फिर से किसी एक लड़के को अपनी और आकर्षित कर सकती थी ..
जमुना ने जब उन मर्दो को लड़ते हुए देखा तो उसके साइन में दबी वो इक्छा फिर से अंगड़ाई लेने लगी,
रिद्धिमा गजराज के घर के अंदर थी वो जमुना अखाड़े तक आ गयी और अपने सपनो के राजकुमार की तलाश करने लगी , उसने अब कोई जवान मर्द को फ़साने की सोच ली , और सामने दो जवान मर्द एक दूसरे से लड़ रहे थे मिटटी और पसीने में बीज हुए उनके बदन को देखकर जमुना के योनि में पानी आने लगा था , वो उनके शरीर की लचक और बाजुओं की ताकत को देखकर hi मचल रही थी ..
लेकिन वो दोनों में फैसला नहीं कर प् रही थी की वो किसे चुने दोनों hi मस्त लग रहे थे ..
तभी उसे दोनों में से एक का वो देव पसंद आ गया जिसमे उसने सामने वाले को पूरा उठा कर जमीं में पटका था ..
“आह क्या ताकत है इसकी और शरीर , वाह इसके शरीर में आया हुआ पसीना देख कर hi मेरा मन दोल रहा है , यही वो जवान मर्द है जिसे मुझे फंसना है “
जमुना ने तय कर लिया था और उसने मंत्र का प्रयोग करके जादू चला दिया , एक बार उस लड़के ने जमुना की और देखा ,
जमुना खुश हो गयी थी की उसे उसका साथी मिल गया जो उसकी हर प्यास को भुझायेगा , लेकिन तभी उसे पता नहीं क्यों दिल में एक घबराहट सी होने लगी , वो समझ नहीं पा रही थी की उसे ऐसा क्यों हो रहा है , ऐसा लगा जैसे वो खुद उस मर्द की तरफ त्रिवरा आकर्षण से भर रही है ,
तभी उन दोनों मर्दो ने अपना हाथ उठाया , जमुना जब पीछे देखि तो रिद्धिमा उन्हें hi हाथ दिखा रही थी , रिद्धिमा भी उस तक पहुंची ..
“तुम इन दोनों को जानती हो “
“है ये गजराज काका का बीटा परिमल है … और वो …”
रिद्धिमा की नज़ारे अजय के जिस्म पर पद चुकी थी , उसका दबा हुआ आकर्षण फिर से जाग गया था उसे अपने hi आप शर्म सी आने लगी थी ..
उसके जिस्म का हर कटाव देख कर रिद्धिमा अजय के बांहो में जाने के लिए मचलने लगी थी
“अरे वो दूसरा कौन है जल्दी बता …”
जमुना की सांसे जैसे रुक सी गयी थी
“अरे वही तो है अजय तुम उसे नहीं जानती क्या ???”
“क्या ..?? “ जमुना अवाक् रह गयी थी उसने अजय को फिर से एक बार ध्यान से देखा , उसने पिछली बार जब अजय को देखा था तब वो छोटा था अब तो वो पूरा मर्द बन गया था वो भी तगड़ा मर्द जिसे देखकर उसकी वासना तक जाग गयी थी …
वही अजय भी उसे वासना से भरी निगाहो से देख रहा था , जमुना को समझ आ चूका था की उसके हवस की आग ने उसे फंसा दिया है , वो आने वाले वक़्त की सोचकर बुरी तरह से घबरा गयी थी
“हे भगवन मुझे बचा ले , ये मुझसे क्या हो गया ..”
वो रट हुए भागी ..
“अरे इसे क्या हो गया ..” परिमल और अजय कुछ समझने की कोशिस करने लगे , वही रिद्धिमा भी जमुना के इस व्यवहार से विचलित हो उठी थी ……….
परिमल और अजय रिद्धिमा के नजदीक आ चुके थे , रिद्धिमा अजय के नंगे जिस्म को देखकर बस खो सी गयी थी , उसे पसीने और मिटटी से भरे अजय के बदन की खुशबू पागल कर रही थी , वो यंहा उसकी सलामती जानने hi आयी थी लेकिन फिर भी वो अजय से कोई बात नहीं कर प् रही थी ..
अगर थोड़ी देर वो और वंहा रुक जाती तो शायद खुस को कण्ट्रोल hi नहीं कर पति और अजय से चिपक जाती ..
उसने जल्दी से वंहा से निकलना hi ठीक समझा और जाकर कार में घुस गयी और तेजी से कार चला दिया …
“काकी क्या बुरी चीज में फंसा दिया तुमने , जब जब अजय के सामने होती हु तो पता नहीं क्या हो जाता है “
रिद्धिमा गाड़ी चलते हुए अपनी सांसो को सम्हाल रही थी , लेकिन जमुना चुप hi बैठी थी
“क्या हो गया काकी तुम ऐसे मुर्दो जैसे क्यों बैठी हो और वंहा से ऐसे चिल्लाते हुए क्यों भागी जैसे तुम्हारा सब कुछ लूट गया हो “
जवाब में जमुना रोने लगी थी , उसे रट हुए देख कर रिद्धिमा बुरी तरह से दर गयी
“क्या हुआ काकी बताओ तो सही “
लेकिन जमुना का रोना बंद नहीं हुआ ..
“मेरी वासना ने मुझे बर्बाद कर दिया बेटी , मैं अब उस शिकारी की गुलाम बन जाउंगी वो मुझे जैसे चाहे वैसे उपयोग में लाएगा , मुझसे अपनी वासना शांत करेगा “
जमुना के चेहरे में पूरा दर फ़ैल गया था, वही रिद्धिमा ने जोरो से ब्रेक लगा दिया
“मतलब … मतलब तुमने उस सकती का उपयोग अजय के ऊपर किया “
जमुना ने हां में सर हिलाया और रिद्धिमा जोरो से हंस पड़ी ,हंस हंस कर उसके पेट में दर्द उठाने लगा था ,
जमुना उसे पागलो की तरह हसते हुए देख रही थी लेकिन उसके चेहरे में कोई भी परिवर्तन नहीं था ..
जमुना के चेहरे पर फैले दर्द को देखकर रिद्धिमा ने खुद को रोका
“तो फ़िक्र क्यों कर रही हो , तुम तो यही चाहती थी न की कोई तुम्हारे साथ ऐसा करे वैसा करे , ये तो अच्छा hi हुआ न , अब तो अजय तुम्हे पूरी तरह से संतुस्ट कर देगा ..”
रिद्धिमा ने उसे छेड़ा , लेकिन जमुना के चेहरे पर अब भी ख़ुशी नहीं थी
“मैंने अपनी ताकत का गलत उपयोग किया है बीटा इसलिए मुझे ये सजा मिली है , जीवन भर एक शिकारी की गुलाम बनने की सजा , अगर मैं किसी दूसरे की ऊपर ये इस्तमाल करती तो वो मेरा गुलाम बन जाता लेकिन वो एक शिकारी है और चुड़ैलों का जादू शिकारी पर काम नहीं करता वो उल्टा hi पद जाता है और मैं कोई चुड़ैल भी नहीं हु की इस जादू से पीछा छुड़वा पाव ..
मैंने अपने जिस्म की वासना को मिटने के लिए क्या क्या नहीं किया, शुलभ के जाने के बाद से मैं तड़फ रही थी , इसलिए मैंने ये फैसला किया और तुम्हे ….”
इतना बोल कर वो अचानक से चुप हो गयी
रिद्धिमा अब भी उसे घर रही थी ..
“और मुझे क्या काकी , तुमने अपनी हवस मिटाने के लिए मेरा इस्तमाल किया ??? तुमने इस सकती को पाने के लिए मुझे चुड़ैल बनवा दिया ???”
रिद्धिमा की आवाज गुस्से और दर्द से भर गयी थी , जमुना को अपनी गलती का अहसास हो गया था उसने रिद्धिमा के सामने अपने हाथ जोड़ लिए
“मुझे माफ़ कर दो बेटी , एक तो मैं पहले से hi एक कर्ज में बंधी हुई थी और फिर सुलभ का जाना , मैं कमजोर हो गयी थी बेटी , मैं अंधी हो गयी थी … “ जमुना का रोना बढ़ गया था
“तुमने अपना कर्ज चुकाने और अपनी हवस पूरी करने के लिए मुझे बलि पर चढ़ा दिया … काकी मैंने तुम्हे अपनी माँ मन था और तुमने मेरे hi जीवन के साथ खेला “
“नहीं बेटी , तुझे भी तो इसकी जरुरत थी न “
“तुमने अजय को देखा , तुम्हे लगता है की वो कभी बदला लेगा .. तुमने मेरे दिमाग में ये डाला था की वो बदला लेगा , तुमने मुझे डराया था तुमने मेरे दिमाग से खेला , मेरे जस्बातो से खेला और मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया “
“मुझे इसकी सजा मिल गयी बेटी ,मैं अब जीवन भर एक शिकारी की गुलाम बन कर रहूंगी “
जमुना की बात सुनकर रिद्धिमा जोरो से हंस पड़ी लेकिन उसकी उस हंसी में भी दर्द था ..
“शिकारी की गुलाम , या वैश्य .. और तुम्हे तो इसमें भी मजा hi आएगा ,तुम यही तो चाहती थी न की कोई तुम्हारे जिस्म की प्यास बुझाये , तुम्हारी तो ऐश हो गयी काकी , जाओ जाओ अपने मालिक के पास बन जाओ उसकी रंडी , रखैल या जो भी तुम बनना चाहो .. जाओ यंहा से “
रिद्धिमा चिल्ला उठी थी उसने कार का दरवाजा खोल दिया था
जमुना बस सुबकते हुए उसे देख रही थी ..
“काकी इससे पहले की मैं गुस्से में आकर कुछ गलत कर जाऊ , चले जाओ यंहा से … तुमको मैंने अपनी माँ की तरह मन है इसलिए मैं तुम्हे कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहती , भला इसी में है की अभी मेरी नजरो से दूर हो जाओ “
रिद्धिमा की आंखे जल रही थी , गुस्सा उसकी आँखों से hi दिखाई दे रहा था ……
जमुना रट हुए निचे उतर गयी थी और रिद्धिमा ने गाड़ी तेजी से वंहा से निकाल दी ……
कोई 2 सप्ताह बाईट होंगे , मैं कॉलेज नहीं गया था , सुबह से शाम तक बस अखाड़े में म्हणत करता रहता और रत को चाचियों के साथ मजे करता , मेरे घर में अखाडा जाने की परंपरा सदियों से चली आ रही थी इसलिए घर वालो को पता था की एक पहलवान की डाइट क्या होनी चाहिए , मेरी पूरी डाइट hi चेंज कर दी गयी थी और माँ ने सही कहा था अखाड़े में vargis(exercise) करने से मेरे अंदर कुछ अलग hi परिवर्तन हो रहे थे , मैं अपनी हवस में काबू प् रहा था लेकिन वही स्टैमिना और भी ज्यादा बढ़ने लगा था, मैं अपने अंदर खून के परवाह को भी महसूस कर सकता था (जो लोग रेगुलर एक्सरसाइज करते है वो इससे इत्तेफाक रखते होंगे, नशो में खून का बहाना भी पता चलता है हैवी वेट एक्सरसाइज के बाद )
जेने का अपना अलग hi मजा आ रहा था , और मेरे मसल्स भी तेजी से बाद रहे थे , ऐसे पिता जी के कारण मैं बचपन से hi एक्सरसाइज करता आ रहा था लेकिन अब मैं रूल्स को भी फॉलो करने लगा था जैसा की यंहा के पहलवान करते थे , और मेरे परिवार के मायनो में वो पहलवान योद्धा कहलाते थे ..
सुबह सुबह का वक़्त था मैं परिमल के साथ कुस्ती लड़ रहा था, ऐसे तो मैं 2 सप्ताह में hi अच्छे अच्छे पहलवानो को पास्ट कर दे रहा था लेकिन परिमल भी काम नहीं था उसने तो बचपन से hi इसकी ट्रेनिंग ली थी इसलिए वो मेरे सामने टिक पता था ..
एक दूसरे को उठा कर पटकने में हमें बहुत मजा आता , शरीर मिटटी से सना हुआ था और पसीने से भीगा हुआ , ये अखाडा मंदिर के पास hi था और वही थोड़ी दूर में गजराज चाचा का घर था , हमें एक गाड़ी उनके घर की और जाते हुए दिखाई दी ..
सभी की नज़ारे उस गाड़ी पर थी ..
“ये तो रिद्धिमा की गाड़ी है “ किसी ने कहा और हम सभी की निगाहे उस और चली गयी , गाड़ी तेजी से वंहा से निकल गयी , उसमे रिद्धिमा के अलावा एक अधेड़ उम्र की ायरत भी बैठी हुई थी जो हमें hi घूरे जा रही थी ..
हमने इस और जयदा ध्यान नहीं दिया और फिर से अपने काम में लग गए , वही थोड़ी देर बाद hi मैंने देखा की वो अधेड़ उम्र की ायरत हमसे कुछ दूर पर hi कड़ी है और हमें hi देखे जा रही है , थोड़ी hi देर बाद रिद्धिमा भी वंहा आयी और आते hi मुझे और परिमल को देखकर उसने हाथ हिलाया , मैंने भी जवाब में हाथ हिलाया ,इसे देखकर उस ायरत ने रिद्धिमा से कुछ पूछा और फिर उसके चेहरे के भाव अचानक से बदलने लगे , मैं और परिमल उसकी और hi जा रहे थे लेकिन अब वो ायरत दरी हुई लगने लगी , मेरी निगाहे उसके जिस्म में चली गयी थी और मेरे अंदर का हवस भी जगाने लगा था , लेकिन वो ायरत ऐसे भागी जैसे कोई भूत देख लिया हो ..
“हे भगवन मुझे बचा ले , ये मुझसे क्या हो गया ..”
वो बार बार यही चिल्ला रही थी , उसकी बात को सुनकर न सिर्फ हम लोग बल्कि रिद्धिमा भी उसे अजीब निगाहो से देख रही थी …….
वो दौड़ते हुए सीधे कार में जा घुसी ..
“ये कौन है और इसे क्या हो गया “
परिमल बोल उठा था
“ये हमारे घर की नौकरानी है लेकिन मेरी माँ जैसी है , जमुना काकी “
रिद्धिमा ने हलके आवाज में कहा , उसकी निगाहे मेरे शरीर कोई घर रही थी , मैं मिटटी में सना हुआ था और पसीने से नहाया हुआ था , मेरे शरीर पसीने से चमकने लगा था , रिद्धिमा की आँखों से hi पता चल रहा था की मेरा शरीर उसके अंदर कुछ बदल रहा है ..
“मुझे भी चलना चाहिए “ वो भी तेजी से पलटी और कार की और भागी , पीछे से गजराज काका चिल्लाते रहे लेकिन फिर कार तेजी से वंहा से निकल गयी थी …….
“इन दोनों को क्या हो गया , ऐसा लगा की कोई भूत देख लिया हो “परिमल चिंतित दिख रहा था
“हम दोनों भूत से काम भी कहा दिख रहे है “ मेरी बात सुनकर परिमल जोरो से हंस पड़ा था …
इधर
रिद्धिमा रोज hi कॉलेज जाती लेकिन उसे न तो परिमल दिखाई देता न hi अजय , न hi राखी रेखा न देवनद और न hi शिरीन उसे दिखाई दी ,उसे अजय के हेल्थ की चिंता होने लगी थी ..
अजय के हॉस्पिटल में भर्ती कराये 2 सप्ताह हो चुके थे , उसने हॉस्पिटल में पता किया था तो उसे पता लगा की अजय को उसी दिन रात तक छुट्टी मिल गयी थी …
रिद्धिमा ने गजराज के घर जाकर राखी रेखा से मिलने की सोची , शायद उससे उसे अजय के बारे में पता चल सके ..
वो जमुना काकी को लेकर गजराज के घर की और निकल पड़ी , रिश्ते में उन्हें वो अखाडा दिखाई दिया जिसमे पहलवान वर्गीस कर रहे थे , और एक दूसरे के साथ कुश्ती खेल रहे थे ..
“वह कैसे मस्त मस्त जवान और ताकतवर लोग है , इनमे से एक कोई मिल जाए तो चुड़ैलों की दी गयी ताकत का इस्तमाल कर लू , मजा hi आ जायेगा “
जमुना ने अखाड़े की और देखते हुए कहा ..
“क्या काकी आप भी जब देखो बस यही सब बाटे “
रिद्धिमा का दिमाग ऐसे भी ख़राब था और अब जमुना की बाटे सुनकर वो और भी चिढ गयी थी
“अरे बेटी तुझे भी समझ आएगा , एक बार जब तेरा कौमार्य भांग होगा तो तुझे भी समझ आएगा की प्रेम का मिलान क्या होता है , और उसका सुख क्या है .. फिर तू भी उसके पीछे भागेगी :डी “
जमुना की बात सुनकर रिद्धिमा बुरी तरह से चिढ गयी ..
“छियई आप hi करो ये सब , और अगर आपने फिर से ऐसी बात की न तो देखना मैं आपसे बात hi नहीं करुँगी “
जमुना रिद्धिमा के गुस्से को समझ गयी थी इसलिए वो चुप रह गयी ..
जमुना को कभी एक चुड़ैल ने एक सकती दी थी की वो किसी भी एक मर्द को अपनी और आकर्षित कर सकती है और इससे वो मर्द उसके लिए दीवाना हो जायेगा उसकी हर बात मानेगा , जमुना ने इसका प्रयोग करके सुलभ फंसा लिया था , इसके बदले उसे एक लड़की को चुड़ैल बनाना था जो जमुना ने रिद्धिमा के जरिये पूरा कर दिया , इससे चुड़ैल फिर से खुस होकर उसे फिर से वो सकती दे दी थी की वो फिर से किसी एक लड़के को अपनी और आकर्षित कर सकती थी ..
जमुना ने जब उन मर्दो को लड़ते हुए देखा तो उसके साइन में दबी वो इक्छा फिर से अंगड़ाई लेने लगी,
रिद्धिमा गजराज के घर के अंदर थी वो जमुना अखाड़े तक आ गयी और अपने सपनो के राजकुमार की तलाश करने लगी , उसने अब कोई जवान मर्द को फ़साने की सोच ली , और सामने दो जवान मर्द एक दूसरे से लड़ रहे थे मिटटी और पसीने में बीज हुए उनके बदन को देखकर जमुना के योनि में पानी आने लगा था , वो उनके शरीर की लचक और बाजुओं की ताकत को देखकर hi मचल रही थी ..
लेकिन वो दोनों में फैसला नहीं कर प् रही थी की वो किसे चुने दोनों hi मस्त लग रहे थे ..
तभी उसे दोनों में से एक का वो देव पसंद आ गया जिसमे उसने सामने वाले को पूरा उठा कर जमीं में पटका था ..
“आह क्या ताकत है इसकी और शरीर , वाह इसके शरीर में आया हुआ पसीना देख कर hi मेरा मन दोल रहा है , यही वो जवान मर्द है जिसे मुझे फंसना है “
जमुना ने तय कर लिया था और उसने मंत्र का प्रयोग करके जादू चला दिया , एक बार उस लड़के ने जमुना की और देखा ,
जमुना खुश हो गयी थी की उसे उसका साथी मिल गया जो उसकी हर प्यास को भुझायेगा , लेकिन तभी उसे पता नहीं क्यों दिल में एक घबराहट सी होने लगी , वो समझ नहीं पा रही थी की उसे ऐसा क्यों हो रहा है , ऐसा लगा जैसे वो खुद उस मर्द की तरफ त्रिवरा आकर्षण से भर रही है ,
तभी उन दोनों मर्दो ने अपना हाथ उठाया , जमुना जब पीछे देखि तो रिद्धिमा उन्हें hi हाथ दिखा रही थी , रिद्धिमा भी उस तक पहुंची ..
“तुम इन दोनों को जानती हो “
“है ये गजराज काका का बीटा परिमल है … और वो …”
रिद्धिमा की नज़ारे अजय के जिस्म पर पद चुकी थी , उसका दबा हुआ आकर्षण फिर से जाग गया था उसे अपने hi आप शर्म सी आने लगी थी ..
उसके जिस्म का हर कटाव देख कर रिद्धिमा अजय के बांहो में जाने के लिए मचलने लगी थी
“अरे वो दूसरा कौन है जल्दी बता …”
जमुना की सांसे जैसे रुक सी गयी थी
“अरे वही तो है अजय तुम उसे नहीं जानती क्या ???”
“क्या ..?? “ जमुना अवाक् रह गयी थी उसने अजय को फिर से एक बार ध्यान से देखा , उसने पिछली बार जब अजय को देखा था तब वो छोटा था अब तो वो पूरा मर्द बन गया था वो भी तगड़ा मर्द जिसे देखकर उसकी वासना तक जाग गयी थी …
वही अजय भी उसे वासना से भरी निगाहो से देख रहा था , जमुना को समझ आ चूका था की उसके हवस की आग ने उसे फंसा दिया है , वो आने वाले वक़्त की सोचकर बुरी तरह से घबरा गयी थी
“हे भगवन मुझे बचा ले , ये मुझसे क्या हो गया ..”
वो रट हुए भागी ..
“अरे इसे क्या हो गया ..” परिमल और अजय कुछ समझने की कोशिस करने लगे , वही रिद्धिमा भी जमुना के इस व्यवहार से विचलित हो उठी थी ……….
परिमल और अजय रिद्धिमा के नजदीक आ चुके थे , रिद्धिमा अजय के नंगे जिस्म को देखकर बस खो सी गयी थी , उसे पसीने और मिटटी से भरे अजय के बदन की खुशबू पागल कर रही थी , वो यंहा उसकी सलामती जानने hi आयी थी लेकिन फिर भी वो अजय से कोई बात नहीं कर प् रही थी ..
अगर थोड़ी देर वो और वंहा रुक जाती तो शायद खुस को कण्ट्रोल hi नहीं कर पति और अजय से चिपक जाती ..
उसने जल्दी से वंहा से निकलना hi ठीक समझा और जाकर कार में घुस गयी और तेजी से कार चला दिया …
“काकी क्या बुरी चीज में फंसा दिया तुमने , जब जब अजय के सामने होती हु तो पता नहीं क्या हो जाता है “
रिद्धिमा गाड़ी चलते हुए अपनी सांसो को सम्हाल रही थी , लेकिन जमुना चुप hi बैठी थी
“क्या हो गया काकी तुम ऐसे मुर्दो जैसे क्यों बैठी हो और वंहा से ऐसे चिल्लाते हुए क्यों भागी जैसे तुम्हारा सब कुछ लूट गया हो “
जवाब में जमुना रोने लगी थी , उसे रट हुए देख कर रिद्धिमा बुरी तरह से दर गयी
“क्या हुआ काकी बताओ तो सही “
लेकिन जमुना का रोना बंद नहीं हुआ ..
“मेरी वासना ने मुझे बर्बाद कर दिया बेटी , मैं अब उस शिकारी की गुलाम बन जाउंगी वो मुझे जैसे चाहे वैसे उपयोग में लाएगा , मुझसे अपनी वासना शांत करेगा “
जमुना के चेहरे में पूरा दर फ़ैल गया था, वही रिद्धिमा ने जोरो से ब्रेक लगा दिया
“मतलब … मतलब तुमने उस सकती का उपयोग अजय के ऊपर किया “
जमुना ने हां में सर हिलाया और रिद्धिमा जोरो से हंस पड़ी ,हंस हंस कर उसके पेट में दर्द उठाने लगा था ,
जमुना उसे पागलो की तरह हसते हुए देख रही थी लेकिन उसके चेहरे में कोई भी परिवर्तन नहीं था ..
जमुना के चेहरे पर फैले दर्द को देखकर रिद्धिमा ने खुद को रोका
“तो फ़िक्र क्यों कर रही हो , तुम तो यही चाहती थी न की कोई तुम्हारे साथ ऐसा करे वैसा करे , ये तो अच्छा hi हुआ न , अब तो अजय तुम्हे पूरी तरह से संतुस्ट कर देगा ..”
रिद्धिमा ने उसे छेड़ा , लेकिन जमुना के चेहरे पर अब भी ख़ुशी नहीं थी
“मैंने अपनी ताकत का गलत उपयोग किया है बीटा इसलिए मुझे ये सजा मिली है , जीवन भर एक शिकारी की गुलाम बनने की सजा , अगर मैं किसी दूसरे की ऊपर ये इस्तमाल करती तो वो मेरा गुलाम बन जाता लेकिन वो एक शिकारी है और चुड़ैलों का जादू शिकारी पर काम नहीं करता वो उल्टा hi पद जाता है और मैं कोई चुड़ैल भी नहीं हु की इस जादू से पीछा छुड़वा पाव ..
मैंने अपने जिस्म की वासना को मिटने के लिए क्या क्या नहीं किया, शुलभ के जाने के बाद से मैं तड़फ रही थी , इसलिए मैंने ये फैसला किया और तुम्हे ….”
इतना बोल कर वो अचानक से चुप हो गयी
रिद्धिमा अब भी उसे घर रही थी ..
“और मुझे क्या काकी , तुमने अपनी हवस मिटाने के लिए मेरा इस्तमाल किया ??? तुमने इस सकती को पाने के लिए मुझे चुड़ैल बनवा दिया ???”
रिद्धिमा की आवाज गुस्से और दर्द से भर गयी थी , जमुना को अपनी गलती का अहसास हो गया था उसने रिद्धिमा के सामने अपने हाथ जोड़ लिए
“मुझे माफ़ कर दो बेटी , एक तो मैं पहले से hi एक कर्ज में बंधी हुई थी और फिर सुलभ का जाना , मैं कमजोर हो गयी थी बेटी , मैं अंधी हो गयी थी … “ जमुना का रोना बढ़ गया था
“तुमने अपना कर्ज चुकाने और अपनी हवस पूरी करने के लिए मुझे बलि पर चढ़ा दिया … काकी मैंने तुम्हे अपनी माँ मन था और तुमने मेरे hi जीवन के साथ खेला “
“नहीं बेटी , तुझे भी तो इसकी जरुरत थी न “
“तुमने अजय को देखा , तुम्हे लगता है की वो कभी बदला लेगा .. तुमने मेरे दिमाग में ये डाला था की वो बदला लेगा , तुमने मुझे डराया था तुमने मेरे दिमाग से खेला , मेरे जस्बातो से खेला और मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया “
“मुझे इसकी सजा मिल गयी बेटी ,मैं अब जीवन भर एक शिकारी की गुलाम बन कर रहूंगी “
जमुना की बात सुनकर रिद्धिमा जोरो से हंस पड़ी लेकिन उसकी उस हंसी में भी दर्द था ..
“शिकारी की गुलाम , या वैश्य .. और तुम्हे तो इसमें भी मजा hi आएगा ,तुम यही तो चाहती थी न की कोई तुम्हारे जिस्म की प्यास बुझाये , तुम्हारी तो ऐश हो गयी काकी , जाओ जाओ अपने मालिक के पास बन जाओ उसकी रंडी , रखैल या जो भी तुम बनना चाहो .. जाओ यंहा से “
रिद्धिमा चिल्ला उठी थी उसने कार का दरवाजा खोल दिया था
जमुना बस सुबकते हुए उसे देख रही थी ..
“काकी इससे पहले की मैं गुस्से में आकर कुछ गलत कर जाऊ , चले जाओ यंहा से … तुमको मैंने अपनी माँ की तरह मन है इसलिए मैं तुम्हे कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहती , भला इसी में है की अभी मेरी नजरो से दूर हो जाओ “
रिद्धिमा की आंखे जल रही थी , गुस्सा उसकी आँखों से hi दिखाई दे रहा था ……
जमुना रट हुए निचे उतर गयी थी और रिद्धिमा ने गाड़ी तेजी से वंहा से निकाल दी ……