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इधर
रिद्धिमा की बात सुनकर डॉ. रंडी को एक धक्का सा लगा था , ये धक्का उनके ईगो को नहीं बल्कि दिल में लगा था ..
वो वंहा से चली गयी थी और उसके पीछे चले गए थे डॉ. चुटिया ..
डॉ. रंडी एक पेड़ के निचे जाकर बैठ गयी थी , सांसे तेज थी धड़कनो ने जैसे तूफ़ान hi मचा दिया हो वो अपने पुरे रफ़्तार में धड़क रही थी और साथ में आँखों में दो बून्द आंसू जो उनके मनोदशा का बयां करने को काफी था …….
“रानी ……..”
डॉ. चुटिया ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा , वो पलट कर डॉ. को देखने लगी उसकी आंखे लाल हो चुकी थी …….
“क्या सच में मेरा प्यार कमजोर था चुन्नी ..????”
डॉ. रंडी का गाला भरा हुआ था
“नहीं रानी , तुम्हारा प्यार कमजोर नहीं था वो तो मेरी hi गलती थी …”
“है तुम्हारी गलती थी लेकिन क्या मुझे तुम्हे एक मौका नहीं देना चाहिए था , क्या मुझे तुम्हारी माफ़ी पर गौर नहीं करना चाहिए था ?? क्या प्रेम में तुम्हारा इतना भी हक़ नहीं बनता था की तुम्हे माफ़ी न मिले ?? क्या तुम्हारे मेरे लिए प्रेम को मुझे नहीं समझना चाहिए था ?? क्या सच में मैं बस हमेशा से hi अपने hi बारे में सोचती रही ?? मेरे ईगो ने hi मुझे मेरे प्यार से दूर रखा चुन्नी ..”
डॉ. रंडी अपना मुँह हाथ में बढ़ाये हुए रो रही थी , डॉ. चुटिया के जीवन में ये ऐसी ायरत थी जीका सम्मान डॉ. के दिल में बहुत hi ज्यादा था , उसने इस ायरत को कभी टूटते हुए नहीं देखा था , एक ऐसी शक्श जो तुफानो से भी टकरा जाये लेकिन आज ……….
लेकिन आज वो टूटी सी लग रही थी और यही बात डॉ. चुटिया के साइन को जला रही थी ………
“नहीं रानी , तुम सही थी हर चीज में तुम hi सही थी …. मैंने तुमसे बेवफाई की लेकिन फिर भी तुमने अपने दिल से मेरे लिए प्यार को काम नहीं किया , है खुद को मुझसे दूर जरूर कर लिया , तुम्हारे पसंद न होते हुए भी मैंने मैरी को अपने साथ रखा और काजल के साथ रहा , लेकिन तुमने फिर भी मुझसे प्यार किया , कई बार ऐसा हुआ है की हम दोनों में वैचारिक मतभेद हुए , लड़ाइआ हुई लेकिन फिर भी तुमने मुझे प्यार किया ……… तुमने न कभी मुझे भुलाया न hi कभी अपने दिल में मेरे लिए पल रहे प्रेम को काम किया तुम मेरी hi बानी रही और मैं तुम्हारा “
डॉ. रंडी रट रट जैसे हंस पड़ी ,
“चुटिया कही के “ और अपने हाथो में रखे पिस्तौल से सीधे डॉ. चुटिया के पैरो में एक गोली मार दी ‘धाय ‘
“मादरचोद … ये क्या कर रही हो ???”
डॉ. चुटिया बुरी तरह से लड़खड़ाते हुए दर्द के कारन कूदने लगे , गोली घुटनो के निचे लगी थी लेकिन बड़ी hi सफाई से किसी हड्डी को बिना कोई नुक्सान पहुचाये …
लेकिन खून निकलने बुरी तरह से बहाने लगा था और साथ hi दर्द में डॉ. चुटिया का हल बुरा था
“ये मुझे धोखा देने के लिए और उस मैरी के साथ सोने के लिए “
डॉ. रंडी ने बड़ी hi ऐडा के साथ कहा और डॉ. चुटिया को अपने पास खींच लिया और पूरी ताकत से उन्हें अपने साइन में लगा लिया
“न जाने कितने दिन से ये करना चाहती थी मेरे चुन्नी लाल “
उन्होंने उसे खींचते हुए अपने होठो को डॉ. चुटिया के होठो में दाल दिया , डॉ. एक तरफ तो दर्द से छटपटा रहे थे दूसरी तरफ अपनी रंडी की ऐडा से के भी कायल हुए जा रहे थे ……..
दोनों की आंखे बंद हो गयी थी वही डॉ. रंडी ने अपने जीन्स की जेब से एक रुमाल निकालकर डॉ. चुटिया के पैरो में बंद दिया ..
“थोड़ा अपने पापो को काट लो चुन्नी लाल फिर तुम्हे बताती हु मुझसे दूर रहने की सजा क्या होती है “
दोनों अपने hi सुध में मगन थे की उन्होंने कोलाहल सुनाई दी दोनों hi सतर्क हो गए थे , थोड़ी दूर जाने पर hi उन्हें आदिवासियों की तरह कई लोग नदी की तरफ जाते दिखाई दिए उन्होंने बड़ी hi सावधानी से उनका पीछा किया और थोड़ी दूर जाने पर उन्होंने जो देखा उसे देखकर उनकी आंखे hi फैट गयी ..
सामने दो पूर्ण नग्न इंसान अजय और रिद्धिमा को ले जा रहे थे , और आश्चर्य ये था की वो सभी पानी में भी चल रहे थे , वही उन्हें जाते देखकर दूसरे समूह की उत्तेजना बढ़ तो गयी थी लेकिन वो कर कुछ नहीं प् रहे थे …
सभी हल्ला मचा रहे थे तभी उनमे से एक विशालकाय इंसान आगे आया और सभी को शांत किया ….
“देखो वो लोग तो अब गए , हम भद्रेंगा समूह वालो को यंहा आने में देर हो गयी और वो सनपोंगा वाले उन्हें उठा कर ले गए … अब पछताए हॉट क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ..”
उसकी बात सुनकर सभी का चेहरा उतर गया तभी एक ायरत सामने आयी ..
“शिकारी महामात्र आप हमें ऐसे निराश न करे , हम हार नहीं मानेंगे , हमें उन दोनों प्रेम के पंछियो को अपनी कैद में करना hi होगा ,हवस की आग ने हमारी जिंदगी को hi बर्बाद कर दिया है , हमें रोज रोज hi सम्भोग की जरुरत पड़ती है वो भी हमारी आग को और भी बढ़ा देती है , क्या ये कोई नये हुआ की वो लोग तो प्रेम भरा जीवन जिए और हम हवस की आग में जलते रहे , हमारा कोई परिवार नहीं , हमारा समाज बस जिस्म की भूख के पीछे hi भागते हुए खाप जा रहा है , ऐसा समाज भी किस काम का जंहा प्रेम न हो , बस शारीरिक भूख hi सर्वोपरि हो , और जिन्हे प्रेम हो जाता है वो जाकर सनपोंगा समूह से जाकर मिल जाते है ताकि उनके साथ कोई सामूहिक सम्भोग न करे … ऐसे तो हम यु hi जलते रहेंगे, हमें उनसे लड़ना चाहिए ..”
वो ायरत बहुत hi गुस्से में आकर बोल रही थी
इस पर शिकारी महामात्र मुस्कुराये
“लड़ाई और वो भी सनपोंगा वालो से … तुम पागल हो गयी हो चुड़ैलाम , लड़ाई बस हमारे विनाश का कारन hi बनेगी , प्रेम ने उन्हें हमसे कही जयदा शक्तिशाली बना दिया है और ये बात तुम भी जानती हो “
“लेकिन उनकी संख्या हमसे काम है “
चुड़ैलाम की बात सुनकर महामात्र के चेहरे में एक अजीब सी उदासी छ गयी
“कितनी दुखद बात है की उनकी संख्या हमसे काम है , काश हम सभी सनपोंगा समूह में होते हम सभी को प्रेम हो जाता …”
उसकी इस उदासी को देखकर चुड़ैलाम उसके बिलकुल hi करीब जा पहुंची
“महामात्र , प्रमुख शिकारी बाबा ने बहुत पहले जो भविष्यवाणी की थी क्या वो सच होगी , क्या सच में कोई महापुरुष आएगा और हमारे इस ताप को मिटाएगा , क्या कोई महापुरुष सच में है जो हमें प्रेम सिखाएगा और हम सभी मुक्त हो सकेंगे ..क्या ये पीड़ा हमारे साथ hi हमसे जाएगी या सच में कोई आने वाला है ..”
चुड़ैलाम की बात सुनकर महामात्र ने एक गहरी साँस ली
“क्या कहु ये रूपवती चुड़ैलों की सरदारिणी चुड़ैलाम , हम तो योनि और लिंग के मिलान से बहार नहीं आ प् रहे है , मुझे तो अब भी नहीं लगता की कोई सामान्य मनुष्य जो अजीब तरीके से दीखता हो एक बहुत hi सूंदर महिला और एक नादान नौकर के साथ हमारे जीवन में प्रवेश करेगा , जो जख्मी होगा और लुढ़कता हुआ हमसे मिलेगा , जो हमारे दुखो को भगाएगा ,हमें प्रेम करना शिखायेगा ,जब हमारे दुखो की सिमा बढ़ जाएगी , हम खुद इस ताकत से मुकत होने को तड़फेंगे तब उसका अवतरण होगा … अजीब सी बहविष्यवाणी थी ये प्रमुख शिकारी बाबा की, जो उन्होंने जंगल की रेखा खींचने के समय की थी , मुझे तो लगता है की वो महज हमें सांत्वना hi दे रहे थे ताकि सभी शिकारी और चुड़ैल उनकी बातो को सही मानकर उस महापुरुष की प्रतीक्षा में बैठे रहे और ये हवस की यातना को सहते रहे ..”
महामात्र ने ये खा hi था की सभी की नजर झाड़ियों से लुढ़ककर आते हुए एक इंसान पर गयी , सभी तुरंत hi सचेत होकर अपने अपने हथियार सम्हाल लिए … उनके सामने डॉ. चुटिया जमीं में पड़े थे ….
थोड़ी देर पहले ..
डॉ. रंडी और डॉ. चुटिया दोनों hi उनकी बाटे सुन रहे थे ,
“चुन्नी ये बेचारे तो सच में दुखी hai,hame इनकी मदद करनी चाहिए “डॉ. रंडी उनकी दुखद कहानी को सुनकर बोल उठी थी
“पहली चीज तो ये बेचारे नहीं है, और दूसरी हमें चुप चाप यंहा से निकल लेना चाहिए , हम साधारण इंसान है और ये लोग शिकारी चुड़ैल , हमें अजय और रिद्धिमा को ढूंढना चाहिए … “
डॉ. ये कहकर पालते hi थी लेकिन तभी डॉ. रंडी ने महामात्र की साडी बाटे सुनी जो की भविष्यवाणी थी उनकी आँखों में चमक आ गया ..
“चुन्नी ..” उन्होंने बड़े hi प्यार से डॉ. चुटिया को देखा
“ऐसे मत देखो , तुम्हारा प्यार हमेशा मुझे महंगा पड़ता है , अभी गोली मार्कर तुम्हारा दिल नहीं भरा क्या ???”
डॉ. चुटिया किसी अनजाने दर से काँप गए थे , डॉ. चुटिया की बात सुनकर डॉ. रंडी बस हलके से मुस्कुराई और तेजी से पलटते हुए उन्हें पकड़कर सीधे झाड़ियों से बहार फेक दिया ..
डॉ. चुटिया लुढ़कते हुए उन सभी के सामने आ पहुंचे थे , सभी के हथियारों की नोक उनके सामने थी ……
“कौन हो तुम हे मानव और यंहा क्या कर रहे हो ..”
एक गरजती हुई आवाज सुनकर डॉ. का रूह तक काँप गया था , सामने महामात्र खड़ा था ,अपने हाथो में रखे भले को डॉ. चुटिया के गर्दन पर टिकाये हुए ..
डॉ. चुटिया ने बस अपने मोतियों जैसे चमकते हुए दन्त उन्हें दिखा दिए वो खुद भी बुरी तरह से घबराये हुए थे और उन्हें कुछ भी नहीं सूझ रहा था …..
उनके यु दन्त दिखने पर उनके काळा और महज हड्डी की खोपड़ी जैसे चेहरे में मोतियों जैसे दन्त चमक उठे थे ..
“अद्भुत , महामात्र क्या ये वही महापुरुष है …देखो इसका चेहरा कितने अजीब है और इसके पैरो के जखम देखो ये लुढ़कता हुआ हमारे पास आया है “चुड़ैलाम ने हलके से महामात्र के कानो में कहा …
“लेकिन ये तो अकेला है, इसकी प्रेयषी कहा है ?? “ महामात्र फुसफुसाया
तभी झाड़ियों से डॉ. रंडी निकली, और आते hi डॉ. के बालो सहलाती हुई उनके होठो में हल्का सा चुम्मन दे दिया
“लगी तो नहीं जणू “डॉ. रंडी हलके से मुस्कुराते हुए बोली , डॉ. चुटिया उन्हें खा जाने वाली निगाहो से देख रहे थे
लोग कभी डॉ. चुटिया को देखते तो कभी डॉ. रंडी को , डॉ. रंडी के रूप और डॉ. चुटिया के अजीब से चेहरे को देखकर सभी इसी आश्चर्य में थे की ये दोनों युगल कैसे हो सकते है , उनके रूप अरु यौवन और मादकता से भरे हुए चल ढल को देखकर सभी शिकारियों के मुँह में एक बार पानी आ गया ..वो अपने पास कड़ी चुड़ैलों के कूल्हे को सहलाने लगे थे , महामात्र का भी हाथ चुड़ैलाम के कूल्हों पर चला गया था जिसे चुड़ैलाम ने झटके से हटा दिया ..
“हे महापुरुष आप कौन है , मैं चुड़ैलाम भद्रेंगा समूह के चुड़ैलों की मुखिया आप को प्रणाम करती हु आप का नौकर कहा है “चुड़ैलाम ने हाथ जोड़ लिए थे उसकी आँखों में आशा की एक किरण चमक उठी थी, वही महामात्र उन्हें अभी भी संदेह की दृष्टि से देख रहा था
“नौकर ??? होगा यही कही लेकिन तुम्हे कैसे पता चला की हमारे साथ हमारा नौकर भी है “ डॉ. रंडी थोड़ा चूकते हुए बोली , और डॉ. रंडी की बात सुनकर चुड़ैलाम के आँखों की चमक और भी बढ़ गयी वो दंडवत होकर डॉ. चुटिया के चाहरणो में गिर गयी जो अभी अभी खड़े हुए थे ..
चुड़ैलाम की आँखों में आंसू थे
“आ गए आ गए हमारे दुखो को हारने वाले , महामानव महापुष आ गए , हमें प्रेम की शिक्षा देने वाले आ गए .. भविषयवानी सच्ची थी , पमुख सीकरी झूठे नहीं थे …”
उसको देखकर जैसे सबको होश आया और यद् आयी वो भविष्यवाणी वाली बाटे जो वो अपने पूर्वजो से सुना करते थे ..
सभी दंडवत हो गए थे , केवल महामात्र hi बचा था जो अभी भी सनका की निगाहो से डॉ. चुटिया को घर रहा था ..
तभी अपने सर में हाथ रखे झुंझुलाये हुआ परिमल वंहा पचुचा , वो अभी अभी होश में आया था ..और उसे पता hi नहीं था की यंहा क्या हो रहा है , वो अभी तक किसी की नजर में नहीं आया था क्योकि उसका बेहोश शरीर झाड़ियों में छुप गया था सभी दंडवत थे और परिमल को जैसे hi थोड़ा होश आया उसकी नजर सभी पर पड़ी और साथ hi महामात्र पर भी वो थोड़ा डरा लेकिन फिर उसने डॉ. चुटिया और डॉ. रंडी को भी देख लिया , वो कोई प्रश्न पूछता उससे पहले hi डॉ. रंडी कड़क आवाज में बोल उठी
“कहा मर गया था तू सेल नौकर , पूरा नादान hi है तू “
परिमल उनके मच से ऐसा सुनकर वही जैम सा गया डॉ. रंडी का चेहरा गुस्से में दिख रहा था और कमर में एक पिस्तौल भी दिख रही थी , वो बस वही चुप होकर खड़ा रह गया ……
“नादान नौकर ….”महामात्र के मुँह से निकल गया और उसने तुरंत hi डॉ. चुटिया का पेअर पकड़ लिया …
“माफ़ी माफ़ी हे महापुरुष माफ़ी …. हमें हवस की आग से निकलकर प्रेम का अमृत पिलाने वाले माफ़ी … इस नादान को माफ़ कर दो “
डॉ. चुटिया की निगाहे डॉ. रंडी पर गड गयी , और डॉ. रंडी ने एक शरारती सी मुस्कान के साथ बस उन्हें हलके से आँख मार दी ………
इधर
रिद्धिमा की बात सुनकर डॉ. रंडी को एक धक्का सा लगा था , ये धक्का उनके ईगो को नहीं बल्कि दिल में लगा था ..
वो वंहा से चली गयी थी और उसके पीछे चले गए थे डॉ. चुटिया ..
डॉ. रंडी एक पेड़ के निचे जाकर बैठ गयी थी , सांसे तेज थी धड़कनो ने जैसे तूफ़ान hi मचा दिया हो वो अपने पुरे रफ़्तार में धड़क रही थी और साथ में आँखों में दो बून्द आंसू जो उनके मनोदशा का बयां करने को काफी था …….
“रानी ……..”
डॉ. चुटिया ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा , वो पलट कर डॉ. को देखने लगी उसकी आंखे लाल हो चुकी थी …….
“क्या सच में मेरा प्यार कमजोर था चुन्नी ..????”
डॉ. रंडी का गाला भरा हुआ था
“नहीं रानी , तुम्हारा प्यार कमजोर नहीं था वो तो मेरी hi गलती थी …”
“है तुम्हारी गलती थी लेकिन क्या मुझे तुम्हे एक मौका नहीं देना चाहिए था , क्या मुझे तुम्हारी माफ़ी पर गौर नहीं करना चाहिए था ?? क्या प्रेम में तुम्हारा इतना भी हक़ नहीं बनता था की तुम्हे माफ़ी न मिले ?? क्या तुम्हारे मेरे लिए प्रेम को मुझे नहीं समझना चाहिए था ?? क्या सच में मैं बस हमेशा से hi अपने hi बारे में सोचती रही ?? मेरे ईगो ने hi मुझे मेरे प्यार से दूर रखा चुन्नी ..”
डॉ. रंडी अपना मुँह हाथ में बढ़ाये हुए रो रही थी , डॉ. चुटिया के जीवन में ये ऐसी ायरत थी जीका सम्मान डॉ. के दिल में बहुत hi ज्यादा था , उसने इस ायरत को कभी टूटते हुए नहीं देखा था , एक ऐसी शक्श जो तुफानो से भी टकरा जाये लेकिन आज ……….
लेकिन आज वो टूटी सी लग रही थी और यही बात डॉ. चुटिया के साइन को जला रही थी ………
“नहीं रानी , तुम सही थी हर चीज में तुम hi सही थी …. मैंने तुमसे बेवफाई की लेकिन फिर भी तुमने अपने दिल से मेरे लिए प्यार को काम नहीं किया , है खुद को मुझसे दूर जरूर कर लिया , तुम्हारे पसंद न होते हुए भी मैंने मैरी को अपने साथ रखा और काजल के साथ रहा , लेकिन तुमने फिर भी मुझसे प्यार किया , कई बार ऐसा हुआ है की हम दोनों में वैचारिक मतभेद हुए , लड़ाइआ हुई लेकिन फिर भी तुमने मुझे प्यार किया ……… तुमने न कभी मुझे भुलाया न hi कभी अपने दिल में मेरे लिए पल रहे प्रेम को काम किया तुम मेरी hi बानी रही और मैं तुम्हारा “
डॉ. रंडी रट रट जैसे हंस पड़ी ,
“चुटिया कही के “ और अपने हाथो में रखे पिस्तौल से सीधे डॉ. चुटिया के पैरो में एक गोली मार दी ‘धाय ‘
“मादरचोद … ये क्या कर रही हो ???”
डॉ. चुटिया बुरी तरह से लड़खड़ाते हुए दर्द के कारन कूदने लगे , गोली घुटनो के निचे लगी थी लेकिन बड़ी hi सफाई से किसी हड्डी को बिना कोई नुक्सान पहुचाये …
लेकिन खून निकलने बुरी तरह से बहाने लगा था और साथ hi दर्द में डॉ. चुटिया का हल बुरा था
“ये मुझे धोखा देने के लिए और उस मैरी के साथ सोने के लिए “
डॉ. रंडी ने बड़ी hi ऐडा के साथ कहा और डॉ. चुटिया को अपने पास खींच लिया और पूरी ताकत से उन्हें अपने साइन में लगा लिया
“न जाने कितने दिन से ये करना चाहती थी मेरे चुन्नी लाल “
उन्होंने उसे खींचते हुए अपने होठो को डॉ. चुटिया के होठो में दाल दिया , डॉ. एक तरफ तो दर्द से छटपटा रहे थे दूसरी तरफ अपनी रंडी की ऐडा से के भी कायल हुए जा रहे थे ……..
दोनों की आंखे बंद हो गयी थी वही डॉ. रंडी ने अपने जीन्स की जेब से एक रुमाल निकालकर डॉ. चुटिया के पैरो में बंद दिया ..
“थोड़ा अपने पापो को काट लो चुन्नी लाल फिर तुम्हे बताती हु मुझसे दूर रहने की सजा क्या होती है “
दोनों अपने hi सुध में मगन थे की उन्होंने कोलाहल सुनाई दी दोनों hi सतर्क हो गए थे , थोड़ी दूर जाने पर hi उन्हें आदिवासियों की तरह कई लोग नदी की तरफ जाते दिखाई दिए उन्होंने बड़ी hi सावधानी से उनका पीछा किया और थोड़ी दूर जाने पर उन्होंने जो देखा उसे देखकर उनकी आंखे hi फैट गयी ..
सामने दो पूर्ण नग्न इंसान अजय और रिद्धिमा को ले जा रहे थे , और आश्चर्य ये था की वो सभी पानी में भी चल रहे थे , वही उन्हें जाते देखकर दूसरे समूह की उत्तेजना बढ़ तो गयी थी लेकिन वो कर कुछ नहीं प् रहे थे …
सभी हल्ला मचा रहे थे तभी उनमे से एक विशालकाय इंसान आगे आया और सभी को शांत किया ….
“देखो वो लोग तो अब गए , हम भद्रेंगा समूह वालो को यंहा आने में देर हो गयी और वो सनपोंगा वाले उन्हें उठा कर ले गए … अब पछताए हॉट क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ..”
उसकी बात सुनकर सभी का चेहरा उतर गया तभी एक ायरत सामने आयी ..
“शिकारी महामात्र आप हमें ऐसे निराश न करे , हम हार नहीं मानेंगे , हमें उन दोनों प्रेम के पंछियो को अपनी कैद में करना hi होगा ,हवस की आग ने हमारी जिंदगी को hi बर्बाद कर दिया है , हमें रोज रोज hi सम्भोग की जरुरत पड़ती है वो भी हमारी आग को और भी बढ़ा देती है , क्या ये कोई नये हुआ की वो लोग तो प्रेम भरा जीवन जिए और हम हवस की आग में जलते रहे , हमारा कोई परिवार नहीं , हमारा समाज बस जिस्म की भूख के पीछे hi भागते हुए खाप जा रहा है , ऐसा समाज भी किस काम का जंहा प्रेम न हो , बस शारीरिक भूख hi सर्वोपरि हो , और जिन्हे प्रेम हो जाता है वो जाकर सनपोंगा समूह से जाकर मिल जाते है ताकि उनके साथ कोई सामूहिक सम्भोग न करे … ऐसे तो हम यु hi जलते रहेंगे, हमें उनसे लड़ना चाहिए ..”
वो ायरत बहुत hi गुस्से में आकर बोल रही थी
इस पर शिकारी महामात्र मुस्कुराये
“लड़ाई और वो भी सनपोंगा वालो से … तुम पागल हो गयी हो चुड़ैलाम , लड़ाई बस हमारे विनाश का कारन hi बनेगी , प्रेम ने उन्हें हमसे कही जयदा शक्तिशाली बना दिया है और ये बात तुम भी जानती हो “
“लेकिन उनकी संख्या हमसे काम है “
चुड़ैलाम की बात सुनकर महामात्र के चेहरे में एक अजीब सी उदासी छ गयी
“कितनी दुखद बात है की उनकी संख्या हमसे काम है , काश हम सभी सनपोंगा समूह में होते हम सभी को प्रेम हो जाता …”
उसकी इस उदासी को देखकर चुड़ैलाम उसके बिलकुल hi करीब जा पहुंची
“महामात्र , प्रमुख शिकारी बाबा ने बहुत पहले जो भविष्यवाणी की थी क्या वो सच होगी , क्या सच में कोई महापुरुष आएगा और हमारे इस ताप को मिटाएगा , क्या कोई महापुरुष सच में है जो हमें प्रेम सिखाएगा और हम सभी मुक्त हो सकेंगे ..क्या ये पीड़ा हमारे साथ hi हमसे जाएगी या सच में कोई आने वाला है ..”
चुड़ैलाम की बात सुनकर महामात्र ने एक गहरी साँस ली
“क्या कहु ये रूपवती चुड़ैलों की सरदारिणी चुड़ैलाम , हम तो योनि और लिंग के मिलान से बहार नहीं आ प् रहे है , मुझे तो अब भी नहीं लगता की कोई सामान्य मनुष्य जो अजीब तरीके से दीखता हो एक बहुत hi सूंदर महिला और एक नादान नौकर के साथ हमारे जीवन में प्रवेश करेगा , जो जख्मी होगा और लुढ़कता हुआ हमसे मिलेगा , जो हमारे दुखो को भगाएगा ,हमें प्रेम करना शिखायेगा ,जब हमारे दुखो की सिमा बढ़ जाएगी , हम खुद इस ताकत से मुकत होने को तड़फेंगे तब उसका अवतरण होगा … अजीब सी बहविष्यवाणी थी ये प्रमुख शिकारी बाबा की, जो उन्होंने जंगल की रेखा खींचने के समय की थी , मुझे तो लगता है की वो महज हमें सांत्वना hi दे रहे थे ताकि सभी शिकारी और चुड़ैल उनकी बातो को सही मानकर उस महापुरुष की प्रतीक्षा में बैठे रहे और ये हवस की यातना को सहते रहे ..”
महामात्र ने ये खा hi था की सभी की नजर झाड़ियों से लुढ़ककर आते हुए एक इंसान पर गयी , सभी तुरंत hi सचेत होकर अपने अपने हथियार सम्हाल लिए … उनके सामने डॉ. चुटिया जमीं में पड़े थे ….
थोड़ी देर पहले ..
डॉ. रंडी और डॉ. चुटिया दोनों hi उनकी बाटे सुन रहे थे ,
“चुन्नी ये बेचारे तो सच में दुखी hai,hame इनकी मदद करनी चाहिए “डॉ. रंडी उनकी दुखद कहानी को सुनकर बोल उठी थी
“पहली चीज तो ये बेचारे नहीं है, और दूसरी हमें चुप चाप यंहा से निकल लेना चाहिए , हम साधारण इंसान है और ये लोग शिकारी चुड़ैल , हमें अजय और रिद्धिमा को ढूंढना चाहिए … “
डॉ. ये कहकर पालते hi थी लेकिन तभी डॉ. रंडी ने महामात्र की साडी बाटे सुनी जो की भविष्यवाणी थी उनकी आँखों में चमक आ गया ..
“चुन्नी ..” उन्होंने बड़े hi प्यार से डॉ. चुटिया को देखा
“ऐसे मत देखो , तुम्हारा प्यार हमेशा मुझे महंगा पड़ता है , अभी गोली मार्कर तुम्हारा दिल नहीं भरा क्या ???”
डॉ. चुटिया किसी अनजाने दर से काँप गए थे , डॉ. चुटिया की बात सुनकर डॉ. रंडी बस हलके से मुस्कुराई और तेजी से पलटते हुए उन्हें पकड़कर सीधे झाड़ियों से बहार फेक दिया ..
डॉ. चुटिया लुढ़कते हुए उन सभी के सामने आ पहुंचे थे , सभी के हथियारों की नोक उनके सामने थी ……
“कौन हो तुम हे मानव और यंहा क्या कर रहे हो ..”
एक गरजती हुई आवाज सुनकर डॉ. का रूह तक काँप गया था , सामने महामात्र खड़ा था ,अपने हाथो में रखे भले को डॉ. चुटिया के गर्दन पर टिकाये हुए ..
डॉ. चुटिया ने बस अपने मोतियों जैसे चमकते हुए दन्त उन्हें दिखा दिए वो खुद भी बुरी तरह से घबराये हुए थे और उन्हें कुछ भी नहीं सूझ रहा था …..
उनके यु दन्त दिखने पर उनके काळा और महज हड्डी की खोपड़ी जैसे चेहरे में मोतियों जैसे दन्त चमक उठे थे ..
“अद्भुत , महामात्र क्या ये वही महापुरुष है …देखो इसका चेहरा कितने अजीब है और इसके पैरो के जखम देखो ये लुढ़कता हुआ हमारे पास आया है “चुड़ैलाम ने हलके से महामात्र के कानो में कहा …
“लेकिन ये तो अकेला है, इसकी प्रेयषी कहा है ?? “ महामात्र फुसफुसाया
तभी झाड़ियों से डॉ. रंडी निकली, और आते hi डॉ. के बालो सहलाती हुई उनके होठो में हल्का सा चुम्मन दे दिया
“लगी तो नहीं जणू “डॉ. रंडी हलके से मुस्कुराते हुए बोली , डॉ. चुटिया उन्हें खा जाने वाली निगाहो से देख रहे थे
लोग कभी डॉ. चुटिया को देखते तो कभी डॉ. रंडी को , डॉ. रंडी के रूप और डॉ. चुटिया के अजीब से चेहरे को देखकर सभी इसी आश्चर्य में थे की ये दोनों युगल कैसे हो सकते है , उनके रूप अरु यौवन और मादकता से भरे हुए चल ढल को देखकर सभी शिकारियों के मुँह में एक बार पानी आ गया ..वो अपने पास कड़ी चुड़ैलों के कूल्हे को सहलाने लगे थे , महामात्र का भी हाथ चुड़ैलाम के कूल्हों पर चला गया था जिसे चुड़ैलाम ने झटके से हटा दिया ..
“हे महापुरुष आप कौन है , मैं चुड़ैलाम भद्रेंगा समूह के चुड़ैलों की मुखिया आप को प्रणाम करती हु आप का नौकर कहा है “चुड़ैलाम ने हाथ जोड़ लिए थे उसकी आँखों में आशा की एक किरण चमक उठी थी, वही महामात्र उन्हें अभी भी संदेह की दृष्टि से देख रहा था
“नौकर ??? होगा यही कही लेकिन तुम्हे कैसे पता चला की हमारे साथ हमारा नौकर भी है “ डॉ. रंडी थोड़ा चूकते हुए बोली , और डॉ. रंडी की बात सुनकर चुड़ैलाम के आँखों की चमक और भी बढ़ गयी वो दंडवत होकर डॉ. चुटिया के चाहरणो में गिर गयी जो अभी अभी खड़े हुए थे ..
चुड़ैलाम की आँखों में आंसू थे
“आ गए आ गए हमारे दुखो को हारने वाले , महामानव महापुष आ गए , हमें प्रेम की शिक्षा देने वाले आ गए .. भविषयवानी सच्ची थी , पमुख सीकरी झूठे नहीं थे …”
उसको देखकर जैसे सबको होश आया और यद् आयी वो भविष्यवाणी वाली बाटे जो वो अपने पूर्वजो से सुना करते थे ..
सभी दंडवत हो गए थे , केवल महामात्र hi बचा था जो अभी भी सनका की निगाहो से डॉ. चुटिया को घर रहा था ..
तभी अपने सर में हाथ रखे झुंझुलाये हुआ परिमल वंहा पचुचा , वो अभी अभी होश में आया था ..और उसे पता hi नहीं था की यंहा क्या हो रहा है , वो अभी तक किसी की नजर में नहीं आया था क्योकि उसका बेहोश शरीर झाड़ियों में छुप गया था सभी दंडवत थे और परिमल को जैसे hi थोड़ा होश आया उसकी नजर सभी पर पड़ी और साथ hi महामात्र पर भी वो थोड़ा डरा लेकिन फिर उसने डॉ. चुटिया और डॉ. रंडी को भी देख लिया , वो कोई प्रश्न पूछता उससे पहले hi डॉ. रंडी कड़क आवाज में बोल उठी
“कहा मर गया था तू सेल नौकर , पूरा नादान hi है तू “
परिमल उनके मच से ऐसा सुनकर वही जैम सा गया डॉ. रंडी का चेहरा गुस्से में दिख रहा था और कमर में एक पिस्तौल भी दिख रही थी , वो बस वही चुप होकर खड़ा रह गया ……
“नादान नौकर ….”महामात्र के मुँह से निकल गया और उसने तुरंत hi डॉ. चुटिया का पेअर पकड़ लिया …
“माफ़ी माफ़ी हे महापुरुष माफ़ी …. हमें हवस की आग से निकलकर प्रेम का अमृत पिलाने वाले माफ़ी … इस नादान को माफ़ कर दो “
डॉ. चुटिया की निगाहे डॉ. रंडी पर गड गयी , और डॉ. रंडी ने एक शरारती सी मुस्कान के साथ बस उन्हें हलके से आँख मार दी ………