Incest kahani - Shikari Ki Bimari - Page 5 - SexBaba
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Incest kahani - Shikari Ki Bimari

अपडेट 33
इधर

रिद्धिमा की बात सुनकर डॉ. रंडी को एक धक्का सा लगा था , ये धक्का उनके ईगो को नहीं बल्कि दिल में लगा था ..

वो वंहा से चली गयी थी और उसके पीछे चले गए थे डॉ. चुटिया ..

डॉ. रंडी एक पेड़ के निचे जाकर बैठ गयी थी , सांसे तेज थी धड़कनो ने जैसे तूफ़ान hi मचा दिया हो वो अपने पुरे रफ़्तार में धड़क रही थी और साथ में आँखों में दो बून्द आंसू जो उनके मनोदशा का बयां करने को काफी था …….

“रानी ……..”

डॉ. चुटिया ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा , वो पलट कर डॉ. को देखने लगी उसकी आंखे लाल हो चुकी थी …….

“क्या सच में मेरा प्यार कमजोर था चुन्नी ..????”

डॉ. रंडी का गाला भरा हुआ था

“नहीं रानी , तुम्हारा प्यार कमजोर नहीं था वो तो मेरी hi गलती थी …”

“है तुम्हारी गलती थी लेकिन क्या मुझे तुम्हे एक मौका नहीं देना चाहिए था , क्या मुझे तुम्हारी माफ़ी पर गौर नहीं करना चाहिए था ?? क्या प्रेम में तुम्हारा इतना भी हक़ नहीं बनता था की तुम्हे माफ़ी न मिले ?? क्या तुम्हारे मेरे लिए प्रेम को मुझे नहीं समझना चाहिए था ?? क्या सच में मैं बस हमेशा से hi अपने hi बारे में सोचती रही ?? मेरे ईगो ने hi मुझे मेरे प्यार से दूर रखा चुन्नी ..”

डॉ. रंडी अपना मुँह हाथ में बढ़ाये हुए रो रही थी , डॉ. चुटिया के जीवन में ये ऐसी ायरत थी जीका सम्मान डॉ. के दिल में बहुत hi ज्यादा था , उसने इस ायरत को कभी टूटते हुए नहीं देखा था , एक ऐसी शक्श जो तुफानो से भी टकरा जाये लेकिन आज ……….

लेकिन आज वो टूटी सी लग रही थी और यही बात डॉ. चुटिया के साइन को जला रही थी ………

“नहीं रानी , तुम सही थी हर चीज में तुम hi सही थी …. मैंने तुमसे बेवफाई की लेकिन फिर भी तुमने अपने दिल से मेरे लिए प्यार को काम नहीं किया , है खुद को मुझसे दूर जरूर कर लिया , तुम्हारे पसंद न होते हुए भी मैंने मैरी को अपने साथ रखा और काजल के साथ रहा , लेकिन तुमने फिर भी मुझसे प्यार किया , कई बार ऐसा हुआ है की हम दोनों में वैचारिक मतभेद हुए , लड़ाइआ हुई लेकिन फिर भी तुमने मुझे प्यार किया ……… तुमने न कभी मुझे भुलाया न hi कभी अपने दिल में मेरे लिए पल रहे प्रेम को काम किया तुम मेरी hi बानी रही और मैं तुम्हारा “

डॉ. रंडी रट रट जैसे हंस पड़ी ,

“चुटिया कही के “ और अपने हाथो में रखे पिस्तौल से सीधे डॉ. चुटिया के पैरो में एक गोली मार दी ‘धाय ‘

“मादरचोद … ये क्या कर रही हो ???”

डॉ. चुटिया बुरी तरह से लड़खड़ाते हुए दर्द के कारन कूदने लगे , गोली घुटनो के निचे लगी थी लेकिन बड़ी hi सफाई से किसी हड्डी को बिना कोई नुक्सान पहुचाये …

लेकिन खून निकलने बुरी तरह से बहाने लगा था और साथ hi दर्द में डॉ. चुटिया का हल बुरा था

“ये मुझे धोखा देने के लिए और उस मैरी के साथ सोने के लिए “

डॉ. रंडी ने बड़ी hi ऐडा के साथ कहा और डॉ. चुटिया को अपने पास खींच लिया और पूरी ताकत से उन्हें अपने साइन में लगा लिया

“न जाने कितने दिन से ये करना चाहती थी मेरे चुन्नी लाल “

उन्होंने उसे खींचते हुए अपने होठो को डॉ. चुटिया के होठो में दाल दिया , डॉ. एक तरफ तो दर्द से छटपटा रहे थे दूसरी तरफ अपनी रंडी की ऐडा से के भी कायल हुए जा रहे थे ……..

दोनों की आंखे बंद हो गयी थी वही डॉ. रंडी ने अपने जीन्स की जेब से एक रुमाल निकालकर डॉ. चुटिया के पैरो में बंद दिया ..

“थोड़ा अपने पापो को काट लो चुन्नी लाल फिर तुम्हे बताती हु मुझसे दूर रहने की सजा क्या होती है “

दोनों अपने hi सुध में मगन थे की उन्होंने कोलाहल सुनाई दी दोनों hi सतर्क हो गए थे , थोड़ी दूर जाने पर hi उन्हें आदिवासियों की तरह कई लोग नदी की तरफ जाते दिखाई दिए उन्होंने बड़ी hi सावधानी से उनका पीछा किया और थोड़ी दूर जाने पर उन्होंने जो देखा उसे देखकर उनकी आंखे hi फैट गयी ..

सामने दो पूर्ण नग्न इंसान अजय और रिद्धिमा को ले जा रहे थे , और आश्चर्य ये था की वो सभी पानी में भी चल रहे थे , वही उन्हें जाते देखकर दूसरे समूह की उत्तेजना बढ़ तो गयी थी लेकिन वो कर कुछ नहीं प् रहे थे …

सभी हल्ला मचा रहे थे तभी उनमे से एक विशालकाय इंसान आगे आया और सभी को शांत किया ….

“देखो वो लोग तो अब गए , हम भद्रेंगा समूह वालो को यंहा आने में देर हो गयी और वो सनपोंगा वाले उन्हें उठा कर ले गए … अब पछताए हॉट क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ..”

उसकी बात सुनकर सभी का चेहरा उतर गया तभी एक ायरत सामने आयी ..

“शिकारी महामात्र आप हमें ऐसे निराश न करे , हम हार नहीं मानेंगे , हमें उन दोनों प्रेम के पंछियो को अपनी कैद में करना hi होगा ,हवस की आग ने हमारी जिंदगी को hi बर्बाद कर दिया है , हमें रोज रोज hi सम्भोग की जरुरत पड़ती है वो भी हमारी आग को और भी बढ़ा देती है , क्या ये कोई नये हुआ की वो लोग तो प्रेम भरा जीवन जिए और हम हवस की आग में जलते रहे , हमारा कोई परिवार नहीं , हमारा समाज बस जिस्म की भूख के पीछे hi भागते हुए खाप जा रहा है , ऐसा समाज भी किस काम का जंहा प्रेम न हो , बस शारीरिक भूख hi सर्वोपरि हो , और जिन्हे प्रेम हो जाता है वो जाकर सनपोंगा समूह से जाकर मिल जाते है ताकि उनके साथ कोई सामूहिक सम्भोग न करे … ऐसे तो हम यु hi जलते रहेंगे, हमें उनसे लड़ना चाहिए ..”

वो ायरत बहुत hi गुस्से में आकर बोल रही थी

इस पर शिकारी महामात्र मुस्कुराये

“लड़ाई और वो भी सनपोंगा वालो से … तुम पागल हो गयी हो चुड़ैलाम , लड़ाई बस हमारे विनाश का कारन hi बनेगी , प्रेम ने उन्हें हमसे कही जयदा शक्तिशाली बना दिया है और ये बात तुम भी जानती हो “

“लेकिन उनकी संख्या हमसे काम है “

चुड़ैलाम की बात सुनकर महामात्र के चेहरे में एक अजीब सी उदासी छ गयी

“कितनी दुखद बात है की उनकी संख्या हमसे काम है , काश हम सभी सनपोंगा समूह में होते हम सभी को प्रेम हो जाता …”

उसकी इस उदासी को देखकर चुड़ैलाम उसके बिलकुल hi करीब जा पहुंची

“महामात्र , प्रमुख शिकारी बाबा ने बहुत पहले जो भविष्यवाणी की थी क्या वो सच होगी , क्या सच में कोई महापुरुष आएगा और हमारे इस ताप को मिटाएगा , क्या कोई महापुरुष सच में है जो हमें प्रेम सिखाएगा और हम सभी मुक्त हो सकेंगे ..क्या ये पीड़ा हमारे साथ hi हमसे जाएगी या सच में कोई आने वाला है ..”

चुड़ैलाम की बात सुनकर महामात्र ने एक गहरी साँस ली

“क्या कहु ये रूपवती चुड़ैलों की सरदारिणी चुड़ैलाम , हम तो योनि और लिंग के मिलान से बहार नहीं आ प् रहे है , मुझे तो अब भी नहीं लगता की कोई सामान्य मनुष्य जो अजीब तरीके से दीखता हो एक बहुत hi सूंदर महिला और एक नादान नौकर के साथ हमारे जीवन में प्रवेश करेगा , जो जख्मी होगा और लुढ़कता हुआ हमसे मिलेगा , जो हमारे दुखो को भगाएगा ,हमें प्रेम करना शिखायेगा ,जब हमारे दुखो की सिमा बढ़ जाएगी , हम खुद इस ताकत से मुकत होने को तड़फेंगे तब उसका अवतरण होगा … अजीब सी बहविष्यवाणी थी ये प्रमुख शिकारी बाबा की, जो उन्होंने जंगल की रेखा खींचने के समय की थी , मुझे तो लगता है की वो महज हमें सांत्वना hi दे रहे थे ताकि सभी शिकारी और चुड़ैल उनकी बातो को सही मानकर उस महापुरुष की प्रतीक्षा में बैठे रहे और ये हवस की यातना को सहते रहे ..”

महामात्र ने ये खा hi था की सभी की नजर झाड़ियों से लुढ़ककर आते हुए एक इंसान पर गयी , सभी तुरंत hi सचेत होकर अपने अपने हथियार सम्हाल लिए … उनके सामने डॉ. चुटिया जमीं में पड़े थे ….

थोड़ी देर पहले ..

डॉ. रंडी और डॉ. चुटिया दोनों hi उनकी बाटे सुन रहे थे ,

“चुन्नी ये बेचारे तो सच में दुखी hai,hame इनकी मदद करनी चाहिए “डॉ. रंडी उनकी दुखद कहानी को सुनकर बोल उठी थी

“पहली चीज तो ये बेचारे नहीं है, और दूसरी हमें चुप चाप यंहा से निकल लेना चाहिए , हम साधारण इंसान है और ये लोग शिकारी चुड़ैल , हमें अजय और रिद्धिमा को ढूंढना चाहिए … “

डॉ. ये कहकर पालते hi थी लेकिन तभी डॉ. रंडी ने महामात्र की साडी बाटे सुनी जो की भविष्यवाणी थी उनकी आँखों में चमक आ गया ..

“चुन्नी ..” उन्होंने बड़े hi प्यार से डॉ. चुटिया को देखा

“ऐसे मत देखो , तुम्हारा प्यार हमेशा मुझे महंगा पड़ता है , अभी गोली मार्कर तुम्हारा दिल नहीं भरा क्या ???”

डॉ. चुटिया किसी अनजाने दर से काँप गए थे , डॉ. चुटिया की बात सुनकर डॉ. रंडी बस हलके से मुस्कुराई और तेजी से पलटते हुए उन्हें पकड़कर सीधे झाड़ियों से बहार फेक दिया ..

डॉ. चुटिया लुढ़कते हुए उन सभी के सामने आ पहुंचे थे , सभी के हथियारों की नोक उनके सामने थी ……

“कौन हो तुम हे मानव और यंहा क्या कर रहे हो ..”

एक गरजती हुई आवाज सुनकर डॉ. का रूह तक काँप गया था , सामने महामात्र खड़ा था ,अपने हाथो में रखे भले को डॉ. चुटिया के गर्दन पर टिकाये हुए ..

डॉ. चुटिया ने बस अपने मोतियों जैसे चमकते हुए दन्त उन्हें दिखा दिए वो खुद भी बुरी तरह से घबराये हुए थे और उन्हें कुछ भी नहीं सूझ रहा था …..

उनके यु दन्त दिखने पर उनके काळा और महज हड्डी की खोपड़ी जैसे चेहरे में मोतियों जैसे दन्त चमक उठे थे ..

“अद्भुत , महामात्र क्या ये वही महापुरुष है …देखो इसका चेहरा कितने अजीब है और इसके पैरो के जखम देखो ये लुढ़कता हुआ हमारे पास आया है “चुड़ैलाम ने हलके से महामात्र के कानो में कहा …

“लेकिन ये तो अकेला है, इसकी प्रेयषी कहा है ?? “ महामात्र फुसफुसाया

तभी झाड़ियों से डॉ. रंडी निकली, और आते hi डॉ. के बालो सहलाती हुई उनके होठो में हल्का सा चुम्मन दे दिया

“लगी तो नहीं जणू “डॉ. रंडी हलके से मुस्कुराते हुए बोली , डॉ. चुटिया उन्हें खा जाने वाली निगाहो से देख रहे थे

लोग कभी डॉ. चुटिया को देखते तो कभी डॉ. रंडी को , डॉ. रंडी के रूप और डॉ. चुटिया के अजीब से चेहरे को देखकर सभी इसी आश्चर्य में थे की ये दोनों युगल कैसे हो सकते है , उनके रूप अरु यौवन और मादकता से भरे हुए चल ढल को देखकर सभी शिकारियों के मुँह में एक बार पानी आ गया ..वो अपने पास कड़ी चुड़ैलों के कूल्हे को सहलाने लगे थे , महामात्र का भी हाथ चुड़ैलाम के कूल्हों पर चला गया था जिसे चुड़ैलाम ने झटके से हटा दिया ..

“हे महापुरुष आप कौन है , मैं चुड़ैलाम भद्रेंगा समूह के चुड़ैलों की मुखिया आप को प्रणाम करती हु आप का नौकर कहा है “चुड़ैलाम ने हाथ जोड़ लिए थे उसकी आँखों में आशा की एक किरण चमक उठी थी, वही महामात्र उन्हें अभी भी संदेह की दृष्टि से देख रहा था

“नौकर ??? होगा यही कही लेकिन तुम्हे कैसे पता चला की हमारे साथ हमारा नौकर भी है “ डॉ. रंडी थोड़ा चूकते हुए बोली , और डॉ. रंडी की बात सुनकर चुड़ैलाम के आँखों की चमक और भी बढ़ गयी वो दंडवत होकर डॉ. चुटिया के चाहरणो में गिर गयी जो अभी अभी खड़े हुए थे ..

चुड़ैलाम की आँखों में आंसू थे

“आ गए आ गए हमारे दुखो को हारने वाले , महामानव महापुष आ गए , हमें प्रेम की शिक्षा देने वाले आ गए .. भविषयवानी सच्ची थी , पमुख सीकरी झूठे नहीं थे …”

उसको देखकर जैसे सबको होश आया और यद् आयी वो भविष्यवाणी वाली बाटे जो वो अपने पूर्वजो से सुना करते थे ..

सभी दंडवत हो गए थे , केवल महामात्र hi बचा था जो अभी भी सनका की निगाहो से डॉ. चुटिया को घर रहा था ..

तभी अपने सर में हाथ रखे झुंझुलाये हुआ परिमल वंहा पचुचा , वो अभी अभी होश में आया था ..और उसे पता hi नहीं था की यंहा क्या हो रहा है , वो अभी तक किसी की नजर में नहीं आया था क्योकि उसका बेहोश शरीर झाड़ियों में छुप गया था सभी दंडवत थे और परिमल को जैसे hi थोड़ा होश आया उसकी नजर सभी पर पड़ी और साथ hi महामात्र पर भी वो थोड़ा डरा लेकिन फिर उसने डॉ. चुटिया और डॉ. रंडी को भी देख लिया , वो कोई प्रश्न पूछता उससे पहले hi डॉ. रंडी कड़क आवाज में बोल उठी

“कहा मर गया था तू सेल नौकर , पूरा नादान hi है तू “

परिमल उनके मच से ऐसा सुनकर वही जैम सा गया डॉ. रंडी का चेहरा गुस्से में दिख रहा था और कमर में एक पिस्तौल भी दिख रही थी , वो बस वही चुप होकर खड़ा रह गया ……

“नादान नौकर ….”महामात्र के मुँह से निकल गया और उसने तुरंत hi डॉ. चुटिया का पेअर पकड़ लिया …

“माफ़ी माफ़ी हे महापुरुष माफ़ी …. हमें हवस की आग से निकलकर प्रेम का अमृत पिलाने वाले माफ़ी … इस नादान को माफ़ कर दो “

डॉ. चुटिया की निगाहे डॉ. रंडी पर गड गयी , और डॉ. रंडी ने एक शरारती सी मुस्कान के साथ बस उन्हें हलके से आँख मार दी ………
 
अपडेट 34
मैं और रिद्धिमा अभी अभी गहरी नींद से जगे थे , दिन भर की थकन से उन्हें ये गहरी नींद आयी थी …

दोनों अभी एक पेड़ के निचे बैठे हुए थे

“अजय मुझे दोनों डॉ. और परिमल के लिए चिंता हो रही है , अगर वो आदिवासियों के हाथ लग गए तो ??“

मैं ने मुस्कुराते हुए उसे देखा

“मुझे तो बस बेचारे चुटिया डॉ. और परिमल के लिए चिंता हो रही है , पता नहीं वो डायन रंडी उनके साथ क्या करेगी “

रिद्धिमा ने एक हलके सी चपत मेरे सर में लगा दी

“वो उतनी बह बुरी नहीं है जितना तुम उन्हें समझते हो, वो अच्छी है लेकिन बस थोड़ी खूंखार है “

इतना बोलकर रिद्धि जोरो से हंस पड़ी

“है पूरी चुड़ैल है वो “

“चुड़ैले इतनी भी खतरनाक नहीं होती “ रिद्धि के चेहरे में हलके सी मुस्कराहट आ गई , हम दोनों की आंखे मिल चुकी थी

“सही कहा चुड़ैले तो बहुत hi प्यारी होती है , और मेरी चुड़ैल तो दुनिया की सबसे सूंदर लड़की है , जिसे मैं किसी खास पल में ायरत बनाऊंगा “

मेरी आवाज बहुत hi धीमी हो गयी थी मैं रिद्धि के थोड़ा और पास सरक गया , सांसे एक दूसरे की सांसो से टकरा रही थी और रिद्धि की मेरी बात सुनकर hi हलकी सी आह निकल गई …

हमारे होठ मिलने hi वाले थे की हमारे कानो में एक आवाज पड़ी

“क्या ये सच है रमिया ??? “

“है वस्तावैया ..”

“महापुरुष आ चुके है पूरी कथा सत्य है , मतलब अब भद्रेंगा वालो को भी प्रेम का ज्ञान मिल जायेगा “

मैं और रिद्धि अपनी किश भूल कर उस बात को सुनने लगे थे

“है महापुरुष वो भी एक स्त्री और एक नौकर के साथ … “

वस्तावैया की बात सुनकर हमारे कण खड़े हो गए

“ये क्या हो रहा है अजय , किस बारे में बात कर रहे है ये लोग ..”

रिद्धि ने हलके स्वर में कहा था

“मुझे क्या पता इन्ही से पूछ लेते है “

मैं पास hi खड़े एक शिकारी और एक चुड़ैल को देखने लगा ..

‘आखिर आप लोग किस महापुरुष की बात कर रहे है “मैं कुछ बोल पता उससे पहले hi ररिधिमा बोल उठी थी

वो दोनों भी हमें hi देखने लगे , और उन्होंने बताना शुरू किया , पहले शिकारी बाबा की भविष्यवाणी की बात की गयी और फिर ये भी बताया गया की कैसे किस हालत में उन्हें महापुरुष मिले ….

“कही डॉ. चुटिया hi तो नहीं “

मैं रिद्धि को देख रहा था , उसने भी है में hi सर हिलाया

“अब क्या होगा ??”

“क्या पता की क्या होगा जो भी होगा मंजूरी खुदा होगा , “

इधर

डॉ. चुटिया एक बड़े से पेड़ के निचे बैठे हुए डॉ. रंडी को बड़े hi गुस्से से देखे जा रहे थे , असल में वो गुस्सा नहीं बल्कि नाराजगी थी

“बड़े क्यूट लगते हो मुँह फुलाए हुए “ डॉ. रंडी ने उनके गलो को दबाकर कहा

“यंहा कहा फंसा दिया मुझे “

“अरे इन लोगो को तुम्हारी जरुरत है देखा नहीं बेचारे कितने परेशां है , तुम क्या अपने ज्ञान से इन लोगो को मदद नहीं कर सकते…”

“लेकिन कैसे रंडी ???”

डॉ. ने एक गहरी सांसे छोड़ी

“सिंपल है …. अपने आप को पहचानो चुटिया , तुम कौन हो ये समझो … तुम बहुत कुछ कर सकते हो , तुम एक ऐसे इंसान हो जो लोगो की मदद करता है , मुसीबत में उनके साथ खड़ा रहता है , तुम वो हो , तुम एक मोटिवेशन स्पीकर हो , तुम साइकोलोजिस्ट हो एक फिलोसोफर हो , जागो मेरे चूतिये जागो समझो यद् करो की तुम कौन हो “

“लेकिन ये लोग शिकारी है चुड़ैल है “

“क्या फर्क पड़ता है की ये लोग कौन है , फर्र्क तो सिर्फ इस बात से hi पड़ता है की तुम कौन हो “

डॉ. रंडी की बात से जैसे डॉ. चुटिया के आँखों के सामने अँधेरा सा छ गया , ऐसा लगा जैसे सर घूम रहा है , ऐसा लगा जैसे उनकी रूह hi इस शरीर से अलग होकर ब्रम्हांड में विचरने चली गयी हो , सामने पूरा ब्रम्हांड hi नाचने लगा है , डॉ. चुटिया खुली हुई आँखों से hi सपनो की किसी दुनिया में खो चुके थे जंहा उन्हें अहसास हुआ की वो के महँ वक्तित्वा है जिसका जन्म hi सृस्टि की भलाई के लिए हुआ है …

पुरे आकाश में सैर करते हुए वो फिर से पृथवी में आ गए और सीधे अपने शरीर में समां गए ..

उनकी आंखे अचानक से खुल गयी और वो सीधे खड़े हो गए

“तुमने सही कहा रंडी मेरा जन्म hi सृष्टि की बलाई के लिए हुआ है ..

और वो सीना तने हुए भद्रेंगा समूह के शिकारी प्रमुख शिकारी महामात्र की और बढ़ने लगे वही उनकी चाल देख कर डॉ. रंडी के चेहरे में एक कातिलाना सी मुस्कान खिल गयी थी ……

“आईये महा पुर्शूस , हमें प्रेम का पथ पढ़ने वाले हमें इस वासना के दलदल से निकलने वाले आईये …” शिकारी महामात्र के साथ साथ वंहा खड़े सभी लोगो ने हाथ जोड़ कर डॉ. चुटिया को प्रणाम किया ..

“सभी का कल्याण को , हे शिकारियों , हे चुड़ैलों तुम सभी के जीवन में वासना ने एक बीमारी का रूप ले लिया है और तुम सभी के सभी इस बीमारी से परेशां हो … लेकिन इससे पर नहीं प् सकते क्यों की तुम्हारा दिमाग hi ऐसा चाहता है , तुमने अपने मन से बगावत करनी होगी , प्रेम तभी जन्म लेता है जब मन को हम वासना के उप्पेर ले जाये , जब तक मन वासना में या वासना के hi विचारो में भागता रहेगा तब तक मन में प्रेम का जन्म नहीं होगा ..”

डॉ. चुटिया की आवाज में एक निर्भयता और अपनत्वा था जिसे सुनकर सभी मंत्र मुग्ध होकर वही बैठ गए , वही कुछ लोग जाकर उनके लिए एक सिहासन नुमा आसान ले आये , डॉ. चुटिया भी बड़े hi शांति के साथ उस्मने पैरो को मोड़कर बैठ गए थे , उन्हें यकीं हो गया था की वो इन लोगो को इनकी बीमारी से आजादी दिला सकते है और भगवन ने उन्हें इस काम के लिए नियुक्त किया है ..

वो अपना कर्म करने को उत्सुक थे और गंभीर भी ..

शिकारी महामात्र ने अपने हाथ जोड़ लिए

“हम क्या करे महापुरुष की हम अपने मन को काबू में कर सके ..”

डॉ. चुटिया के होठो में हलकी सी मुस्कान आ गयी ..

“सभी पहले तो मुझे महापुरुष कहना बंद करो , और मुझे बस डॉक्टर साहब बोलै करो या केवल डॉ.

दूसरी बात मन को काबू में करने के लिए वासना से लड़ना नहीं है बलकि उसे अपना ऐसा दोस्त बनाना है की वो खुद पर आपका कण्ट्रोल काने की इजाजत दे दे “

सभी हैरान थे वही पास खड़ा परिमल भी इस बात से हैरान हो गया साथ hi वो चकित था की डॉ. एक महापुरष है , वो तो उन्हें एक नार्मल सा इंसान hi मन रहा था .. वही डॉ. की बात सुनकर डॉ. रंडी भी थोड़ी हैरान थी , उन्हें पता था की डॉ. चुटिया के मंझे हुए खिलाडी है और भाषण और ज्ञान देने में एक्सपर्ट भी है लेकिन अभी अभी उन्होंने जो बोलै था वो थोड़ा अजीब तो था ……

“वासना से दोस्ती ??? आखिर कैसे ??”

वंहा बैठी चुड़ैलों की प्रमुख चुड़ैलाम कुंडा बोल उठी

“बहुत आसान है , पहली चीज ये की ये तुम लोगो को एक वरदान के रूप में मिली है और वरदान को कोई भी खोना नहीं चाहता , तुम तो सोच रहे हो की तुम इससे आजादी चाहते हो लेकिन तुम्हारा सबकसकीयस मंद , तुम्हारा अवचेतन मन इससे आजादी नहीं चाहता बल्कि वो तो इसे एक ताकत समझता है और तब तुम कैसे इससे आजाद हो पाओगे जब तुम इसे एक वरदान समझते हो …

इसलिए पहले तुम्हे ये बात hi अपने दिमाग से निकालनी होगी की ये कोई गलत चीज है , तुम इसके साथ एक प्रेम का भाव लाओ , तुम सम्भोग करो और खुलकर करो और इसे गलत भी न समझो भूल जाओ की तुम्हे इससे आजाद होना है बल्कि इसके मजे लो, इसका आनद लो …”

“लेकिन महापुरुष … माफ़ कीजियेगा डॉ. साहब ये कैसे हो सकता है , मजा तो हमें इसमें आता hi है “

शिकारी महामात्र फिर से बोल उठा था , वही डॉ. चुटिया के होठो में एक मुस्कान आ गयी

“मजा तो आता है शिकारी लेकिन आनंद नहीं , तुम उसे महसूस नहीं करते तुम्हे बस अपनी हवस hi मिटानी है न की एक दूसरे के शरीर को महसूस करना है … इसलिए पहले मैं तुम्हे कुछ सांसो की एक्सरसाइज सिखाऊंगा जिसे करके तुम थोड़े शांत हो जाओगे ..

चलो अब सभी ऐसे बैठ जाओ ..”

सभी को डॉ. ने दोनों पैरो को मोड़कर बैठने को कहा जिसे हम सुखासन कहते है ..

“अब एक गहरी साँस अंदर लो , अब उसे छोड़ दो …सभी अपने पेट में हाथ रखो “

सभी ने अपने पेट में हाथ रखा

“अब सांसो को छाती में नहीं बल्कि अपने पेट में आता और जाता हुआ महसूस करो , जब सांसे अंदर आएगी तो तुम्हारा पेट फूलेगा और जब सांसे बहार जाएगी तो साथ hi तुम्हरा पेट भी अंदर जायेगा … इसे बेल्ली ब्रीथिंग कहा जाता है .. तुम सभी को 10 बार बेल्ली ब्रीथिंग करनी है “

सभी गहरी सांसे लेने और फिर उसे छोड़ने लगे थे , हर एक साँस के साथ वो खुद को और भी शांत महसूस कर रहे थे , सभी के चेहरे में एक शांति उतरने लगी थी , उन सभी के साथ साथ डॉ. रंडी और परिमल भी पास बैठे हुए ये कर रहे थे ..

10 सांसे लेने के बाद सभी ने आंख खोली , सभी के चेहरे में एक मुस्कान और शांति थी ..

“मन थोड़ा शांत हुआ न .. अब गहरी साँस लेनी है 4 की गिनती तक , 1,2, 3, 4,… अब 4 की गिनती तक इसे रोके रखना है 1,2,3,4 .. अब 4 की गिनती तक इसे छोड़ना है 1,2,3,4 अब 4 की गिनती तक इसे फिर से बहार रोके रखना है 1,2,3,4 ….

इस तरह से एक चक्र या सर्किल पूरा हुआ , इसे बॉक्स ब्रीथिंग कहा जाता है … 4 की गिनती को अपने हिसाब से बढ़ाया या घटाया जा सकता है … खैर अब इसे भी सभी 10 बार करेंगे ..”

डॉ. के आदेशानुसार सभी बॉक्स ब्रीथिंग करने लगे थे डॉ. खुद भी सभी को समझते हुए ये करने लगे .. मन में एक शांति उतर आयी थी ……….

10 बार बॉक्स ब्रीथिंग करने के बाद सभी ने आंखे खोली , सभी के चेहरे में न सिर्फ शांति थी बल्कि एक प्रसन्ता भी थी सभी को लग रहा था की महापुरुष सच में कोई चमत्कारी है , उनके भटके हुए और बेचैन मन को उन्होंने खुछ hi देर में इतना शांत कर दिया था …..

“बहुत खूब कैसा लग रहा है अब ..”

डॉ. के सवाल पर शिकारी महामात्र ने हाथ जोड़ लिए

“डॉ. आपने तो जादू कर दिया , जीवन में पहली बार मुझे इतनी शांति का आभास हो रहा है “

डॉ. के चेहरे पर भी एक मुस्कान आ गयी

“अब इसी शांति का उपयोग करके तुम लोग वासना से खुद को मुकत कर सकोगे … लेकिन पहले इसी शांति के साथ तुम्हे सम्भोग में प्रवेश करना होगा , तब सम्भोग के नए आयाम तुम्हारे सामने खुलते जायेंगे और साथ hi साथ तुम्हारे अंदर प्रेम का भी जन्म होने लगेगा .. इस लिए आज और अभी से तुम सबको एक एक साथी धुंध लेना है , तुम्हे बस उसके साथ hi सम्भोग करना होगा लेकिन अभी नहीं आज रात मैं तुम लोगो को सम्भोग की विभिन क्रियाओ के बारे में बताऊंगा .. मैं अपनी प्रेमिका डॉ. रानी के साथ तुमने समझाऊंगा की सम्भोग को प्रेम में कैसे बदला जाता है ….”

ये कहकर डॉ. चुटिया ने मुस्कुराते हुए डॉ. रंडी की और देखा , वही डॉ. की बात सुनकर डॉ. रंडी की आंखे बड़ी हो गयी थी और वो गुस्से से उन्हें घर रही थी , डॉ. चुटिया ने बस उन्हें आँख मार दी ……

 
अपडेट 35
वो पूर्णिमा की रत थी चारो तरफ चाँद का प्रकाश फैला हुआ था , उसकी झीनी रोशनी में पूर्ण नंग शरीर दिखाई दे रहे थे बस मन और रिद्धि थे जिनके शरीर में कपडे थे , सामने सनपोंगा समूह की सबसे बुजुर्ग महिला बैठी थी जिसे सब आदर से माता चुड़ैल कहते थे ,

माता चुड़ैल की उम्र कुछ 120 साल बताई जा रही थी उनके प्रेमी शिकारी की मृत्यु कुछ दिनों पहले hi हुई थी इसलिए वो इस समूह की माता थी , माता का मतलब था की अब उनका सम्भोग कल ख़त्म हो चूका था अब वो किसी से सम्भोग नहीं करेगी ..

माता चुड़ैल भी बस कुछ दिनों की महेमान थी उसके बाद फिर से ये पद खली हो जाने वाला था क्योकि सांगपोंगा समूह की प्रथा के अनुसार प्रेमी या प्रेमिका की मृत्यु के कुछ दिनों के बाद hi उनके साथी की भी मृत्यु हो जाती थी , ऐसे भी शिकारी और चुड़ैल आसानी से नहीं मरते ……

हम दोनों को सबसे सामने बैठाया गया सामने माता चुड़ैल बही हुई थी , सब तरफ बस एक hi चर्चा थी की आज की रत महापुरुष बधरेंगा समूह के लोगो को प्रेम का पथ पढ़ने वाले है , सभी उन्हें अतुलित कौसल से अचंभित थी की कैसे थोड़े hi देर में उन्होंने सभी के मन को शांत कर दिया..

ये खबर उनतक एक गुप्तचर लाया था जो की खास बधरेंगा समूह के लोगो की गतिविधियों पर निगरानी के लिए नियुक्त किया गया था .

इन सबको नजरअंदाज करते हुए माता चुड़ैल हमें hi देख रही थी …….

“कितनी प्यारी जोड़ी है तुम दोनों की आज की रत , मध्य रात्रि को सुबह मुहूर्त है तुम दोनों के मिलान का “

मिलान का मतलब तो हम दोनों hi समझते थे और इसी के कारन मिलान शब्द सुनते hi हमारे चेहरे टमाटर की तरह लाल हो गए ….

“ओह्ह तो तुम शर्मा रहे हो … प्रेम में शर्म तो आम इंसानो की निशानी है , तुम दोनों उनसे बहुत hi अलग हो , तुम्हे तो खुलकर प्रेम करना है , ये जमीं ये आसमान ये नदी का बहता हुआ पानी भी तुम्हारे पहले मिलान को याद रखेगा ऐसा प्रेम तुम्हे करना है ..”

माता चुड़ैल के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी

“लेकिन क्या इस शरीर का मिलान hi प्रेम है ??”

मेरे मुँह से अनायास hi निकल गया जिससे माता चुड़ैल की मुस्कान और भी गहरी हो गयी

“नहीं लेकिन शरीर का मिलान प्रेम की अभिवक्ति तो है न , प्रेम के तो विभिन्न रूप है हम किसी सजीव या निर्जीव चीजों से भी प्रेम करते है , लेकिन अभिवक्ति में तो भेद होता hi है , तुम अपनी प्रेमिका से प्रेम करने वाले हो या कहु की प्रेम की अभिवक्ति करने वाले हो वो अभिवक्ति भी इतनी गहन होनी चाहिए की शरीर के मिलान से hi रूह का मिलान भी हो जाये , तुम दोनों की आत्मा भी एक हो जाये वो मिलान hi प्रेम की सही अभिवक्ति होगी …”

माता चुड़ैल के बोलने के बाद मैंने एक नजर रिद्धिमा पर डाली जो की सर झुकाये हुए बैठी थी बस मंद मंद मुस्कुरा रही थी

“आज महापुरुष बदरंग वालो को प्रेम का पथ पढ़ाएंगे , वो प्रेम जिसके बारे में हम उन्हें कभी समझा नहीं सके , वो प्रेम जो हवस की उस आग से कही ऊँचा है जिसमे एक शिकारी और एक चुड़ैल जलते है , वो प्रेम जो होता है तो होता है या होता hi नहीं , उस प्रेम का पथ महापुरुष बधरेंगा वालो को कैसे शिखाएँगे ये तो मैं नहीं जानती लेकिन विधि के इस विधान में मुझे पूरा भरोषा है और हम भी उनका साथ देंगे हम सभी अपने प्रेमी के प्रेम में आज उतरेंगे ताकि आज का माहौल hi प्रेम में डूब जाये , सर्वत्र बस प्रेम की hi वर्षा हो और उस प्रेम की ऊर्जा में डूबकर बधरेंगा के शिकारी और चुड़ैल भाई बहनो के मन में भी प्रेम प्रफुल्लित हो जाये ..”

माता चुड़ैल की बात सुनकर सभी उमंग से भर उठे और एक hi साथ चिल्लाने लगे

‘शिकारी बाबा की जय जय जय …………’

इधर

डॉ. रंडी गुस्से में डॉ. चुटिया के पास आ गयी ,

“तुम खुद को समझते क्या हो मैं तुम्हारे साथ …….. छी तुमने सोच भी कैसे लिया “

“लेकिन ये पहली बार तो नहीं है न , हमारे जिस्म तो पहले भी मिल चुके है “ डॉ. चुटिया के चेहरे पर अब भी शरारती मुस्कान थी

लेकिन उनके बात को सुनकर डॉ. रंडी थोड़ी झेप गयी

“है लेकिन वो बात अलग थी चुटिया तब हम प्यार में थे “

डॉ. रंडी की आवाज थोड़ी कोमल सी हो गई थी

“तो अब नहीं है क्या ..???” डॉ. चुटिया अब भी उनकी आँखों की गहराइयों में झाकने की कोशिस कर रहे थे

“यु मेरे आँखों में मत देखो , तुम मुझे नहीं पढ़ पाओगे “

“बस इसलिए क्यों की तुमने खुद को बंद कर लिया है ……. आज भी मेरी गलती से नाराज हो ??”

एक बार डॉ. रंडी ने नज़ारे उठाकर डॉ. चुटिया को देखा वो अब भी उनकी आँखों में hi देख रहे थे और डॉ. रंडी ने झट से नज़ारे निचे कर ली , उस खूंखार और जालिम कही जाने वाली मादकता और यौवन से भरपूर उस मासूम से चेहरे वाली महिला के चेहरे पर शर्म की लाली देखकर डॉ. चुटिया के मन में एक हलचल सी उठ गयी और होठो में एक मुस्कान …….

“गलती से नाराज नहीं हुआ जाता चुटिया बस सजा दी जाती है और मैंने वो सजा तुम्हे दे दी … हिसाब बराबर ..”

“तो अब … एक नयी शुरुवात करे ??”

“नयी शुरुवात तो नए लोग करते है या वो जो एक दूजे को भूल जाते है , हम तो कभी एक दूसरे से जुड़ा hi नहीं हुए न hi बदले … तुम आज भी अपने वसूलो पर ठीके हो और मैं भी तो कैसे हम नयी शुरुवात कर सकते है ??”

डॉ. चुटिया ने एक गहरी साँस छोड़ी

“हम दोनों hi अब नए है रंडी …. मैं चुटिया हु हमेशा से लेकिन बस तुम्हारे लिए , तुम रंडी हो हमेशा से लेकिन बस मेरे लिए ..”

डॉ. चुटिया की बात सुनकर डॉ. रंडी के चेहरे की मुस्कान और भी गहरी हो गयी थी उन्होंने नजर उठाकर डॉ. को देखा और अपना चेहरा पास लेट हुए अपने हाथो को उनके बालो में फंसा लिया , डॉ. चुटिया का चेहरा खींचकर उन्होंने अपने होठो के पास ला लिया था , दोनों की सांसे टकरा रही थी …………

“आँखे बंद करके बोली की तुम मुझसे उतना hi प्यार करते हो ??”

डॉ. रंडी ने बड़ी hi बेताबी से कहा था ..

“आंखे खोलकर भी बोल सकता हु और नींद में सोया हुआ भी बोल सकता हु , लेकिन ये गलत होगा मैं तुमसे उतना प्यार नहीं करता जितना पहले करता था “

डॉ. रंडी ने आश्चर्य से डॉ. चुटिया को देखा ……

“इस जुदाई ने मेरे प्यार को तुम्हारे लिए और भी बढ़ा दिया है , मैं तुम्हारे लिए hi हु मेरी रंडी “

डॉ. का कहना था और डॉ. रंडी ने उत्तेजना में उनके सर जोरो से अपने पास खिंच लिया दोनों के होठ मिल चुके थे , दोनों hi एक दूसरे में डूबकर एक दूसरे के होठो के रास को पि रहे थे ……..

तभी

“महापुरुष ोूह माफ़ करना डॉ. साहब …… सब तैयार हो चुके है लेकिन एक समस्या है ..”

सामने शिकारी महामात्र खड़ा था दोनों ने खुद को अलग किया और उसकी और देखने लगे ..

“क्या समस्या है ..??” डॉ. उसके इस तरह अचानक आने से थोड़ा चीड़ सैग ए थे

“सभी को उनका साथी मिल गया है लेकिन एक चुड़ैल ने आपके नौकर को अपना साथी बना लिया है , “

उसकी बात सुनकर दोनों hi हंस पड़े थे किसी चुड़ैल ने परिमल को पसंद कर लिया था ..

“कोई बात नहीं , आज का दिन शुभ है आज जो होगा अच्छा hi होगा , मध्य रात्रि से प्रेम पूर्ण सम्भोग शुरू हो जायेगा ..”



डॉ. चुटिया ने आदेश दिया …..
 
अपडेट 36
मध्य रात्रि का समय आने वाला था सभी के मन में एक बेचैनी और एक उत्सुकता ने जन्म ले लिया था , सभी अपने प्रेमी से होने वाले मिलान को लेकर उत्सुकता में मरे जा रहे थे लेकिन महापुरुष के सख्त आदेश थे की मध्य रात्रि से पहले कोई सम्भोग नहीं करेगा, ये पहली बार था की बदरंग समूह के लोगो ने इस तरह संयम रखा था लेकिन ये संयम कभी भी टूट सकता था ये बार शिकारी महामात्र को भी पता थी इसलिए मध्य रात्रि तक उन्होंने शिकारी और चुड़ैलों को एक दूसरे से दूर रखा था ताकि किसी भी तरह से उनके अंदर वासना की बह्वाना प्रवेश hi न करे साथी चुनने के बाद उन्हें म्हणत के कामो में लगा दिया गया था …

इधर

रिद्धिमा और मेरा भी हाल कुछ ऐसा hi था हम दोनों को hi अलग अलग कामो में वयस्त रखा गया था ताकि हमारे मन में वासना का जन्म न हो , दिन भर कड़ी मेहनत करवाई गयी ..

शाम होते होते माता चुड़ैल ने एक बोम्ब सभी के उप्पेर फोड़ दिया , वो महापुरुष से मिलने के लिए बदरंग के छेत्र में जाना चाहती थी , सभी असमंजस में थे लेकिन माता चुड़ैल का कहना था की अब समय आ गया है की बदरंग और सनपोंगा के शिकारी और चुड़ैल एक हो जाये और ये महापुरष के मार्गदर्शन में hi हो सकता था , माता चुड़ैल का मन्ना था की अब सनपोंगा वालो को बधरेंगा के शिकारी और चुड़ैलों की मदद करनी चाहिए ताकि सभी प्रेम पूर्ण जीवन जी सके ..

ऐसे तो इस बात को लेकर सनपोंगा में सभी राजी थे लेकिन एक hi दिक्कत सभी के सामने थी और वो ये थी की बधरेंगा वाले उनपर टूट न पड़े और अपनी हवस मिटने में न लग जाये , इसका इलाज अब माता चुड़ैल के पास था वो थे डॉ. चुटिया यानि की महापुरुष …

उन्होंने एक दूत के जरिये संदेसा भेजवाया और कुछ hi देर में महापुरष और शिकारी महामात्र के द्वारा निमंत्रण स्वीकार कर लिया गया …

माता चुड़ैल कुछ लोगो के साथ बधरेंगा वाले इलाके में चल पड़ी …

दोनों hi पक्षों में इस बात की सहमति बानी की कोई भी बधरेंगा समूह का शिकारी या चुड़ैल सनपोंगा वाले किसी भी शिकारी या चुड़ैल से सम्भोग की कोशिस नहीं करेगा , सभी महापुरुष के निर्देश से hi चलेंगे जिसे उन्होंने साथी स्वीकार किया है बस उनके साथ hi सम्भोग किया जायेगा …….

इस प्रस्ताव और उसकी स्वीकृति के बाद से hi दोनों समूहहो में गजब का उत्साह और उमंग देखने को मिल रहा था , न जाने कब से ये लोग एक दूसरे के दुशमन थे और माता चुड़ैल के एक पहल और महापुरष के होने मात्रा से hi ये इतना आसान हो गया था …

रत हो चुकी थी और पूर्णिमा की उस रात सभी के जीवन में एक महवपूर्ण परिवर्तन आने वाला था , दोनों समूह एक हो चुके थे लेकिन पूर्णतः नहीं अभी भी उन्हें रहना अलग अलग hi था ..

लेकिन आज के उत्सव के उपलक्ष में दोनों समूहों के सभी सदस्यों को एक hi जगह पर इकट्ठा होकर सम्भोग करना था ,स्थान नदी का किनारा चुना गया , नदी के किनारे रेट को पानी के द्वारा गिला किया गया था इस काम में मैं भी लगा हुआ था , वही बड़ी बड़ी मसाला जलने का बंदोबस्त था , बहुत hi बड़े जगह को साफ़ किया गया था जिसमे करीब 200 से 300 जोड़े आराम से सम्भोग कर सके , पुरे स्थल के बिच में एक बड़ा सा सिहषण बना था जो की माता चुड़ैल के लिए था साथ hi दो बड़े बिस्तर रेट में लगाए गए थे जिसमे से एक महापुरुष उर्फ़ डॉ. चुटिया और उनकी प्रेमिका उर्फ़ डॉ. रंडी के लिए था वही दूसरा बिस्तर मेरे और रिद्धिमा के लिए लगाया गया था , मुझे यकीं hi नहीं हो रहा था की थोड़े hi देर में यंहा लगभग 300 जोड़े एक साथ सम्भोग करने वाले है , लेकिन ये सच होने वाला था……

नदी के किनारे साफ सफाई करते वक्त hi मुझे परिमल भी मिल गया , वो आकर सीधे मेरे गले से लग गया ..

“भाई तेरे भाई को उसकी गर्लफ्रेंड मिल गयी , तुझे यकीं नहीं होगा की एक चुड़ैल ने मुझे प्रोपोज़ किया वो भी सीधे सेक्स करने के लिए “

साला कमीना , लोग हमें उठा कर ले गए और ये मिलते hi मुझे ये बता रहा है , न की मेरा हल चल hi पूछ रहा है , शायद वो मेरे चेहरे का भाव समझ गया था ..

“अबे तेरा हल चल क्या पूछना सभी लोगो से सुन लिया पूरी कहानी , तुम लोगो तो मुझे छोड़ कर hi चले गए और साला ये लोग मुझे महापुरुष का नौकर समझकर कबाड़ी वाला काम करवा रहे है “

उसकी बात सुनकर मैं हंस पड़ा था ..

“सेल कर ले काम मुफ्त में चुड़ैल भी तो मिल रही है , और चुड़ैले बहुत hi हसीं होती है , सुना है की बहुत hi सेक्सी भी होती है “

“है भाई बहुत सूंदर है तेरी भाभी … मैं तो यही उससे शादी करके घर बसा लूंगा , मेरे बच्चे भी शिकारी और चुड़ैल पैदा होंगे “

“अबे सेल तू कौन सा शिकारी है , ऐसे भी एक चुड़ैल के काम सकती को तू टक्कर दे पायेगा ?? वर्ण मुझे hi बिच में आना पड़ेगा सुना नहीं है क्या चुड़ैले केवल शिकारियों से संतुष्ट होती है … फिर क्या करेगा ..”

मेरी बात सुनकर परिमल चीड़ गया और गुस्से से मुझे देखने लगा

“छी छी सेल भाभी माँ के सामान होती है कमीने , तू अपनी hi भाभी के बारे में ऐसा बोल रहा है , और तू उसकी फिक्र मत कर मेरी रानी ऐसी नहीं है “

“ोूहः रानी ..”

“है अब उसका नाम तो मुझे नहीं पता लेकिन मैं उसे रानी कहकर hi बुलाता हु , बहुत सूंदर है यार “

“अच्छा चल बेस्ट ऑफ़ लक मेरे शेर आज तू भी अपनी विर्जिनिटी तोड़ दे , बन जा रानी का राजा …”

………

मध्य रात्रि होने वाली थी और मुझे सनपोंगा समूह के लोग तैयार करने ले गए ..

मैं नग्न था , नंगाड़े बज रहे थे मेरे बाजु में मेरी जान रिद्धि कड़ी थी पुरे माहौल में शोर था उमंग थी , मेरा और रिद्धिमा का तिलक किया गया और हम दोनों को कपडे उतरने के निर्देश दिए गए , वंहा उपस्थित सभी इंसान hi नंग था और अब हम भी हो चुके थे ..

रिद्धिमा और मेरा शरीर तेल से चमक रहा था ये कोई विशेष प्रकार का तेल था जो उन लोगो ने हमारे शरीर में माला था , हम दोनों को पानी में डूबने कहा गया और हमारे डूबते hi चारो और से लोग उत्साह से चीख उठे ..

मैं रिद्धिमा के हाथो को पकड़कर उसे पानी से बहार निकला और हमारे सामने माता चुड़ैल हाथ में एक मिटटी का घड़ा लिए कड़ी थी , हम दोनों को वो बरी बरी से दिया गया जिसमे एक मीठे स्वाद वाला मादक द्रव्य था जिसे पिटे hi सामने का सारा नजारा रंगीन लगने लगा था , रिद्धिमा के चमकते हुए जिस्म को देखकर जो हल मेरा हो रहा था शायद वही हल उसका भी हो रहा था , हम दोनों की hi आंखे नशे में चूर हो चुकी थी हम दोनों एक दूसरे के पास आये और सीधे एक दूसरे के होठो पर टूट पड़े …

हमें चारो और से हंसी की आवाज सुनाई दी और साथ hi माता चुड़ैल की भी

“शिकारी अपनी प्रेमिका को लेकर अपने जगह पर जाओ , लेकिन थोड़ा होश में भी आ जाओ इतनी जल्दबाजी भी किस बात की है …”

उनकी बात का hi असर था की हम दोनों एक दूसरे से अलग हुए , और मैंने रिद्धि का हाथ पकड़ उसे उस बिस्टेर की और ले गया जो की हमारे लिए hi लगाया गया था ..

वानः कोई अपने साथी के साथ नाच रहा था तो कोई उसके मुँह में मुँह डेल हुए चुम रहा था , सभी जैसे मदहोश से हो गए थे लेकिन तभी एक आवाज गुंजी ..

“अभी समय नहीं हुआ है …”

ये डॉ. चुटिया थे , पतले दुबले काळा रंग के हड्डियों का ढांचा लग रहे थे और वो भी पुरे नग्न , वही उनके साथ hi डॉ. रंडी भी कड़ी थी जिनका जिस्म आज पुरे भराव में दिखाई दे रहा था , नग्न होते हुए भी डॉ. रंडी बहुत hi सूंदर दिखाई दे रही थी एक आभा उनके पुरे शरीर से जैसे जहर रही हो ..

डॉ. का प्रभाव इतना था की सभी रुक गए थे , सभी जाकर अपने साथी के साथ बरी बरी से नदी में डुबकी लगा रहे थे और उस मादक द्रव्य का सेवन का अपने अपने स्थान में आ रहे थे , सभी बस बेताबी से बैठे हुए थे की कब महापुरुष सम्भोग की आज्ञा दे लेकिन डॉ. ऐसी कोई भी आदेश नहीं दे रहे थे जब तक की सभी लोग वंहा आ नहीं गए , सभी की आंखे मतवाली थी और मन बेचैन ……

“सभी सुबह बताये अनुसार गहरी सांसे लेंगे 10 गहरी सांसे और उसके बाद अपने साथी के रूप को निहारते हुए जिस्म के हर हिस्से को प्रेम से सहलाते हुए एक हो जायेंगे , लेकिन सभी को सांसो पर hi ध्यान देना है और साथ hi शरीर में उठाने वाली संवेदनाओ पर भी , कोई जल्दबाजी नहीं करेगा “

और इसके साथ hi बिगुल बज गया था , सभी गहरी सांसे लेने लगे , साथ hi मैं और रिद्धिमा भी , गहरी सांसे लेते लेते मन में थोड़ी शांति तो आयी लेकिन वो मादकता अभी भी नहीं गयी थी , मन शांत होने पर मुझे समझ आया की असल में वो डरवाया जो हमें पिने दिया गया था वो कोई उत्तेजक द्रव्य नहीं बल्कि एक ऐसा द्रव्य था जिससे हमारी उत्तेजना काम होती , और शरीर में एक मस्ती छ जाती थी …

इसका प्रयोग सनपोंगा वाले अपनी उत्तेजना को प्रेम में बदलने के लिए किया करते थे , ताकि मस्ती में भी रहे लेकिन उत्तेजना के अधिकता से बचकर प्रेम और रोमांस का मजा ले सके ..

रिद्धिमा और मेरी निगहर मिली दोनों की आंखे आधी बंद थी और आधी खुली , हलके हलके सुरूर सा छाया हुआ था , उसके गोर चेहरे पर अब भी पानी की बुँदे थी और गीले बालो से अब भी वो मोती हलके हलके जहर रहे थे , बड़ी बड़ी काली आँखों से वो मुझे हिरानी के जैसे निहार रही थी उसके मादक गुलाबी होठ फड़फड़ाते हुए मुझे अपनी और बुला रहे थे , उसके होठो पर पानी की कुछ बुँदे पड़ी थी जो उसे और भी मादक बना रही थी ..

मैं उसके पास आया और उन मादकता से भरे हुए मई के प्यालो को अपने होतो में समां लिया , उसके हाथ भी मेरे सर को कास रहे थे और वो मुझे अपनी और बड़ी hi बेताबी से खींचे जा रही थी लेकिन हमारे होठो का मिलान बहुत hi प्रेम पूर्ण था हम एक दूसरे के होठो को बड़े hi इत्मीनान से चूस रहे थे , जिस्म एक दूसरे के करीब आ रहा था और मैंने उसे बिस्तर में लिटा दिया ..

उसके गीले जिस्म में पानी की नरमी अब भी बाकि थी और मेरा जिस्म भी अभी गिला hi था दोनों के जिस्म मिल रहे थे और एक संवेदना हमारे जिस्मो में उभरने लगी थी , लेकिन हम अभी भी एक दूसरे के होठो में hi खोये हुए थे , उसके होठो की नरमी से मेरा मन गर्म हुए जा रहा था और लिंग में एक सुरसुरी सी दौड़ती हुई महसूस हो रही थी ..

मेरा लिंग भी उसकी जांघो के पास आकर रगड़ खाने लगा था , जिससे वो और भी उत्तेजित होकर मेरे होठो को चूसने लगती ………

“गहरी सांसे लो , अपने महबूब को महसूस करो , वो कोई भोग की वस्तु नहीं है बल्कि वो तुम्हारी संगनी है , उसे पूरा महसूस करो … उसके रोम रोम में डूबने की कोशिस करो , उसे अपना बनाना और उसका हो जाने की कोशिस करो … “

डॉ. की आवाज सभी के कानो में आयी ..

हम दोनों ने कुछ गहरी सांसे ली और मन थोड़ा और शांत हो गया और हम दोनों hi एक दूसरे के आँखों में डूब से गए मैं हलके हलके से उसके नाक को चूमने लगा था , वो मुझे अपनी और खींचते हुए अपनी दांतो में मेरे गलो में हलके हलके से गाड़ने लगी hi ..

उसने मुझे अपनी और और जोरो से खिंचा ..

“मैं तुम्हारी हो गयी हु जान अब किसी की बात मत सुनो बस मुझे अपना बना लो , और दुरी बर्दास्त नहीं होती “

रिद्धिमा ने मेरे कानो में हलके से फुसफुसाया था , उसकी फुसफुसाहट hi इतनी मादकता लिए थी की मेरा लिंग अपने पुरे आकर में आकर जैसे फटने को तैययर हो गया , इतने दिनों बाद मैंने फिर से उस उत्तेजना कोई महसूस किया जिसमे मैं रोज hi रहा करता था ..

“है मेरी जान मैं तुम्हे अपना बना लूंगा “

मैं उसके होठो को अपने होठो में भरते हुए कहा था , और मेरा लिंग उसके योनि के उप्पेर रगड़ खाने लगा था उसने अपना हाथ निचे करते हुए अपने टैंगो को फैलते हुए मुझे अपने अंदर आने का आमंत्रण दिया और मेरे लिंग को पकड़ कर उसे अपने योनि के द्वार पर रगड़ने लगी ..

“ाःह मर जाऊंगा अब अंदर करने दो “ मैं उत्तेजना के सिखर पर पहुंच गया था लेकिन मैंने महसूस किया की मैं उसकी मर्जी का गुलाम हु ..

“रुक जाओ मेरे राजा , बस थोड़ी देर और “

उसने बड़े hi प्यार से मेरे कानो को हलके से कटा और मेरे लिंग को अपने योनि की बाहरी दीवारों पर हलके हलके रगड़ने लगी , जितना उत्तेजित मैं था उतनी hi वो भी हो गयी थी और इसका सबूत उसके योनि से बहाने वाला पानी था जिससे मेरा लिंग पूरी तरह से गिला हो चूका था , वो मेरे लिंग को अपनी योनि के दिवार से बिलकुल hi सत्ता चुकी थी और हलके मुस्कान के साथ मुझे इशारा दे दिया की वो क्या चाहती है , उसके काम रास में भीगा हुआ मेरा लिंग उसके योनि में सामने को तैयार था, मैंने हल्का सा hi धक्का दिया था मेरे लिंग का सूपड़ा hi उसके योनि में अभी प्रवेश कर पाया था और उसने मुझे बहुत hi बुरी तरह से जकड लिया …….

“jaaaaaaaaaaaaaannnnnnnnn “वो मेरे गलो पर अपना दन्त गाड़ने लगी थी , लेकिन दर्द की जगह मुझे बस मजा hi आ रहा था , उसके योनि की मुलायमता में मैं खो सा गया था , बहार क्या हो रहा है मुझे इसका कोई भी आभास नहीं रह गया था , दूसरे धक्के में मैं उसके पूरी तरह से अंदर था हम दोनों hi गहरी सांसे लेने की कोशिस कर रहे थे लेकिन उत्तेजना और मजे में ऐसे खो चुके थे की हमने अपनी सुध बुध hi खो डाली थी …..

रिद्धिमा मजे में चीखते हुए मेरे पीठ में अपने नाख़ून गाड़ने लगी थी

मैं भी पूरी तरह से इस नशे में चूर हो चूका था , कमर हिलते गए और आहे निकलती रही , और अचानक से ऐसा लगा जैसे मैं जहर रहा हु , मेरे अंदर से कुछ बहार सीधे मेरे जान के पेट में जा रहा है , और ………

आँखों के सामने अँधेरा था उस परमसुख में मैं ऐसा खो गया था की मुझे न दुसरो की कोई खबर थी न hi अपनी hi कोई खबर रह गयी थी , सब कुछ बस शांत हो चूका था , रिद्धिमा का भी शायद वही हल था, हम दोनों hi एक दूसरे से लिपटे हुए पड़े रहे आंखे बाद थी और जिस्म से होते हुए रूह तक एक हो चुकी थी ………..
 
अपडेट 37
मेरी आंखे खुली तो मैं बिस्टेर में नहीं बल्कि रेट में पड़ा हुआ था, इससे पहले की मैं कुछ समझ पता मुझे कुछ ांहो की आवाजे सुनाई दी,

मैंने नज़ारे उठाई तो मैंने नदी के रेट में सिर्फ एक मर्द और एक ायरत को पाया , दोनों hi सम्भोग में लिप्त थे और इतने खोये हुए थे की उन्हें मेरे होने का आभास तक नहीं हो रहा था , दोनों hi पूर्ण नग्न थे जैसे की मैं भी था , मैं उन्हें देख कर चौक गया था क्योकि मैं तो पुरे शिकारी समूह के साथ उनके बिच में था लेकिन ये क्या …??

मैं कहा था ..????

नहीं ये जगह तो वही लग रही थी , नदी का वैसा hi किनारा लेकिन कुछ तो बदला बदला लग रहा था , वंहा पूर्ण शांति थी उन दोनों के अलावा किसी और का आभास भी मुझे नहीं हुआ ..

मैं उठ खड़ा हुआ और उस जोड़े की तरफ बढ़ा जो की मेरे कुछ hi दुरी में सम्भोग में मस्त था ,

जैसे जैसे मैं पास जा रहा था मेरे दिल की धड़कने और भी तेज होते जा रही थी , मैं जब उनके बिलकुल hi पास पंहुचा तो जो मैंने देखा वो देख कर मेरी आंखे खुली की खुली रह गयी मुझे तो खुद पर भी विस्वास नहीं हो रहा था , क्या मैं सपना देख रहा था ..

मैंने अपने गलो को दो बार जोरो से मारा लेकिन ये सपना नहीं था , मैं दर्द का आभास कर पा रहा है और साथ hi मन में उठाने वाले व्याकुलता का भी ..

सामने मेरी बहन शिरीन थी , पूर्ण नग्न और सम्भोग के मजे में डूबी हुई , आँखे आंधी बंद थी जैसे मजे में इतनी खोयी हुई है की दुनिया की कोई सुध hi नहीं रह गयी हो, वही एक बलसाली मेरे hi उम्र का लड़का उसके शरीर को अपने सरीर से निचोड़ रहा था , वो भी बुरी तरह से हाफ रहा था जैसे अब बस वो चरम सुख के करीब hi हो , शिरीन उस लड़के के पीठ पर अपने नाख़ून गदा रही थी ..

ये देख कर मेरे अंदर कुछ जल सा गया , मैं गुस्से में चूर हो गया था लेकिन मुझे ये भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर मैं कहा हु और यंहा कैसे आया, और ये शिरीन यंहा कैसे आ गयी ..

“शिरीन …”

मैंने गुस्से से भरकर कहा , उसने आंखे खोली और वो चीख पड़ी …

उसके साथ hi उसके उप्पेर सोया हुआ लड़का सक्रिय हुआ और अपने पास hi रखे भले को उठा कर बहुत hi तेजी से पलटा उसके भले का नोक सिद्ध मेरे गले के पास था लेकिन ………….

उस लड़के और मेरी निगाहे मिली और हम एक दूसरे को आश्चर्य से बस देखते hi रह गए ………

हम दोनों hi आवक थे साथ hi साथ शिरीन भी …

“टी टी टी चू तुम कौन हो “ मैं बड़े hi मुश्किल से बोल उठा वही उस लड़के ने एक बार शिरीन को देखा वो की आंखे फाडे हुए मुझे hi देख रही थी …….

“तुम कौन हो , यंहा हमारे इलाके में क्या कर रहे हो “

वो लड़का गरजा , उसकी गरज ऐसी थी जैसे की बदल गरज रहा हो , उसकी मांसपेशिया फड़कने लगी थी , शरीर पसीने से भीगा हुआ था और चारे में आश्चर्य के साथ hi साथ चरमसुख के ना पाने का गुस्सा भी दिखाई दे रहा था ……

वो गुस्सा तो बहुत था लेकिन साथ hi साथ आश्चर्य से हम तीनो का एक hi हाल था …..

“मैं मैं तो अजय हु , मैं तो अभी अभी यही था रिद्धिमा के साथ , शिकारी महामात्र और माता चुड़ैल के साथ … हम सभी सम्भोग कर रहे थे , सामूहिक सम्भोग “

“क्या बोल रहा है तू … सामूहिक सम्भोग … वो तो बस किसी उत्सव में किया जाता है , सच सच बता कौन है तू ..”

वो अपने भले को मेरे गले में थोड़ा और गाड़ते हुए बोलै

तभी शिरीन सामने आ गयी ..

“रुक जाओ भैया …” वो सामने आयी और उसके हाथो से भले को मुझसे थोड़ा दूर किया

“ये तो बिलकुल hi आपके जैसे hi दीखता है हर चीज वैसे hi , वही आवाज वही शरीर और ………”

उसकी नजर मेरे लिंग में थम गयी थी , वो पास आकर मेरे लिंग को पकड़ने लगी मैं दर कर थोड़ा पीछे हो गया ..

“भैया देखिये इसके लिंग में उसी जगह पर टिल है जंहा आपके है “

सामने खड़ा हूबहू मेरे जैसे दिखने वाला लड़का भी आंखे फाडे मेरे लिंग को देख रहा था , आश्चर्य में उसका मुँह भी खुला रह गया ..

“कौन हो तुम , और तुम मेरे जैसे कैसे दीखते हो “

इस बार वो आराम से बोलै था ..

“मैं क्या कहु मेरी तो कुछ समझ hi नहीं आ रहा और ये लड़की तुम्हे भैया बोल रही है जबकि ये तो मेरी बहन शिरीन है “

मैं हड़बड़ाते हुए बोलै ..

“पागल हो क्या ये मेरी बहन है सुप्रिया .. और मैं हु ाजन्य , घुघर के प्रमुख शिकारी सरदार विजयभाम का बीटा “

वो फिर से गरजते हुए बोलै ..

“घुघर के सरदार ..??? मैं अजय हु लखनपुर का मुखिया विजय सिंह का बीटा “

मेरी बात सुनकर वो दोनों hi एक दूसरे को देखने लगे ..

“ये लखनपुर कहा है ???”

उस लड़की ने पूछा ..

“लखनपुर … वो … घुघर के पास hi एक गांव है “

मेरी बात सुनकर वो लड़का फिर से ताव में आ गया और अपना भला उठा कर फिर से मेरे गले में लगा दिया

“इस जंगल में बस घुघर hi एक गांव है, हम शिकारियों और चुड़ैलों का गांव … सच सच बता बहरूपिये तू कौन है और मेरे रूप में यंहा क्या कर रहा है ……”

उसकी बात सुनकर मेरा सर दर्द करने लगा था , मैं पागलो जैसे इधर उधर देख रहा था ये मेरे साथ क्या हो रहा था ……

“मैं सच hi कह रहा हु मैं अजय हु , और लखनपुर और साहनपुर नाम के दो गांव भी है जो की घुघर से थोड़ी दूर पर hi है … दोनों गांवो में दुश्मनी है और घुघर को शिकारियों का गांव भी कहते है , वंहा एक मैदान है घुघर का मैदान जिसमे शिकारी बाबा का मंदिर भी है “

“शिकारी बाबा ??? ये कौन है हमारे घुघर में तो कोई भी मंदिर नहीं है किसी भी शिकारी बाबा की “ उसने फिर से अपने दन्त कड़कये लेकिन तभी शिरीन या कहे सुप्रिया सामने आ गयी ..

“भैया मुझे लगता है की ये कोई बहरूपिया नहीं है बल्कि बस किसी मुसीबत में फंस गया है , इसकी बातो में सच्चाई है कोना हम इसे तांत्रिक जेतरा के पास ले चले वो हमें बता सकती है की ये सच बोल रहा है की झूठ …”

उस लड़के ने एक बार अपनी बहन को देखा और फिर एक बार मुझे

“हुयउममम ठीक है जेतरा के पास hi ले चलते है इसे “

इतना कहकर उसने भला मेरे पीठ के पीछे लगा दिया , वही दोनों ने गले में पास hi पड़े फूलो की माला दाल ली और कमर में पत्तो से बना करधन जैसे वस्त्र अपहण लिया जो केवल उनके गुप्त अंगो को छिपा रहा था ऐसा पोशाक मैंने अफ्रीका के घने जगलो में रहने वालो को hi पहनते हुए देखा था , या फिर शिकारी समूह के आदिवासियों को जिसे हम बधरेंगा समूह के लोगो के नाम से जानते थे और उनके साथ hi मिलकर मैं सामूहिक सम्भोग में लिप्त था लेकिन ये मैं कहा पहुंच गया था ????

“चुप चाप चलते जाओ “

वो लड़का मेरे पीछे था उसका भला मेरे पीठ के पीछे लगा हुआ था , वही वो लड़की सामने चल रही थी …….

हम दोनों सभी थोड़े hi दूर एक पहाड़ी में चढ़ते हुए एक गुफानुमा जगह पर पहुंचे , अंदर मसाला जल रही थी , एक काळा रंग के पत्थर की मूर्ति बानी हुई थी जिसके पास एक ायरत बाल बिखराये हुए बैठी थी , उस ायरत के शरीर में मात्रा फूलो की माला थी वही कमर में बस कुछ पटटे लपेटे हुई थी …

“आओ ाजन्य आओ सुप्रिया … और ये तुम्हारे साथ कौन है मैं सूंघ नहीं पा रही हु …(उसने हमें बिना देखे hi कहा था ) ाजन्य ??? दो दो ाजन्य ???”

वो तेजी से पलटी हम उसके पास पहुंच चुके थे ………

“जमुना काकी ?????” मेरे मुँह से अनायास hi निकल गया …

उसके साथ साथ सभी मुझे आंखे फाडे देख रहे थे ..

“ये..?? ये ??? क्या है … और क्या कहा तुमने मुहे जमुना ???”

वो महिला भी आश्चर्य में पद गयी थी ..

“जेतरा ये हमें नदी के किनारे मिला जब हम सम्भोग में वेस्ट थे …ये खुद को अजय कहता है और कहता है की ये कई शिकारी और चुड़ैलों के साथ नदी में सम्भोग में लिप्त था , खुद को किसी लखनपुर का रहने वाला बताता है ”

वो लड़की बोल उठी ..

“ये सही बोल रहा है …”

जेतरा ने अजीब निगाहो से मुझे देखा , जबकि उसकी बात सुनकर दोनों और भी चौक गए

“लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है जेतरा की ये सही बोल रहा है यंहा कोई भी लखनपुर नाम का गांव नहीं है और यंहा हमारे अलावा कोई भी शिकारी और चुड़ैलों का समूह भी नहीं है “

वो लड़का थोड़ा गंभीर हो चूका था ..

“मैं जानती हु ाजन्य लेकिन ये सही बोल रहा है , इसकी हर बात सही है मैं सूंघ सकती हु , इसके शरीर में तुम्हारी hi खुसबू है , इसके खून में तुम hi हो .. ये कोई और नहीं बल्कि तुम hi हो …..”

जेतरा की बात से हम सभी एक दूसरे को निहारने लगे थे ..

“लेकिन ये कैसे हो सकता है जेतरा ….”

ाजन्य बोल उठा था ..

“मुझे नहीं पता ाजन्य की ये कैसे हो सकता है लेकिन ये हुआ है ये सही है “ जेतरा ने बिना कोई भाव चेहरे में लाये हुए कहा

“इसे सरदार के पास ले चले……??????” सुप्रिया ने अपने भाई को देखते हुए कहा

“नहीं सुप्रिया अभी इसे हमारे समूह में ले जाना सही नहीं होगा ,ऐसे भी अभी पिता जी के खिलाफ कई शादियात्रा चल रहे है , कई बार उन्हें जान से मरने की कोशिस हो चुकी है , कही इसे देखकर समूह में वद्रोह ने भड़क जाये “ ाजन्य थोड़ा सोचते हुए बोलै था

“है ाजन्य सही कह रहा है सुप्रिया , समूह में कुछ लोग अभी तुम्हारे पिता और हमारे सरदार के खिलाफ साजिस कर रहे है ऐसे में इस नए आश्चर्य को वंहा ले जाना सही नहीं होगा , अभी इसे छिपा कर hi रखो , क्यों न इसे मेरे पास hi छोड़ जाओ “

जेतरा ने बड़े hi वासना से पूर्ण आँखों से मुझे देखा , मैं इस आँखों को अच्छे से पहचानता था ये वही थी जिसे मैंने भोगा था , हूबहू वैसी hi , जमुना काकी के जैसे …

लेकिन उसकी बात सुनकर सुप्रिया हंस पड़ी

“अच्छा इसे छोड़ जाये ताकि तुम अपनी वासना इससे शांत करो , यद् रखो तुम एक तांत्रिक हो और तुम्हारा किसी शिकारी से सम्बन्ध बनाना सही नहीं है … “

“लेकिन ये तो कोई शिकारी नहीं है “ जेतरा ने थोड़े गुस्से से सुप्रिया को देखा

“नहीं ये शिकारी hi है वर्ण ये सामूहिक सम्भोग की बात क्यों करता अगर इसकी बाटे सही है तो ये भी एक शिकारी hi है , और मैं तुम्हे अच्छे से जानती हु जेतरा तुम मेरे भाई के साथ सम्बन्ध बनाना को बेचैन हो रही हो , वो नहीं मिला तो उसके जैसे दिखने वाला hi सही क्यों ..??” सुप्रिया के होठो में एक मुस्कान आ गयी थी जिससे जेतरा चीड़ सी गयी ,वही ाजन्य हँसाने लगा

“तुम्हे कभी मैं नहीं मिलूंगा जेतरा न hi मेरे जैसे दिखने वाला ..” ाजन्य हस्ते हुए कह रहा था .. जिसपर जेतरा और भी चीड़ गयी थी

“देखना एक दिन मैं तुम्हारे साथ सम्भोग जरूर करुँगी ाजन्य , मैं इस शैतान की पूजा करके तुम्हे अपना बना लुंगी “

जेतरा ने अपनी उंगली उस काळा रंग के पथ्थरो से बने हुए मूर्ति की और इशारा करते हुए कहा , वही ाजन्य उसकी बात पर हंस पड़ा

“इस जन्म में तो नहीं जेतरा ..”

“इस जन्म में नहीं तो किसी और जन्म में hi सही लेकिन तुम्हारे लिए मेरी इक्छा कभी ख़त्म नहीं होगी ाजन्य , तुमसे सम्भोग की मेरी कामना हर जन्म में मेरे साथ hi चलेगी ….”

उसकी बात सुनकर सुप्रिया और ाजन्य जंहा हँसाने लगे वही मेरे दिमाग की बत्ती जल गयी

“मैंने .. मैंने तुम्हारे साथ सेक्स .. मतलब सम्भोग किया है , शिकारी बनाना के बाद … वो तुम थी या तुम्हारे जैसे दिखने वाली जमुना काकी … शायद वो तुम hi थी जैसे की ाजन्य मैं hi हु “

सभी मुझे आंखे फाडे देखने लगे .. मैंने आगे बोलै

“तुम्हारे मन में मेरे लिए तीव्र आकर्षण उठा था और तुमने एक साधारण मनुष्य होकर भी खुद को मेरी गुलाम बनाना स्वीकार कर लिया , शायद तुमने कोई शक्ति मिली थी चुड़ैलों से … इसलिए तुम मेरी गुलाम बन गयी …. मैंने तुम्हरे साथ सम्भोग किया है … मतलब … मतलब क्या ये वो तुम्हारा दूसरा जन्म था ????… क्या ये ाजन्य मैं hi हु किसी और जन्म में ???”

मेरी बात सुनकर सभी आवक से एक दूसरे को देखने लगे थे ……

“लेकिन ये कैसे हो सकता है , अगर ये तुम मैं hi हु , और ये मेरा hi दूसरा जन्म है तो भी तुम यंहा कैसे आ सकते हो …??”

ाजन्य फिर से थोड़ा गरजा था

“टाइम ट्रेवल … आप लोगो ने मूवी नहीं देखि क्या , कितनी साडी मूवीज बानी है इसपर “ मैं उत्तेजना में बोल उठा लेकिन सभी मुझे अजीब निगाहो से देख रहे थे जैसे कोई और भी भाषा सुन ली थी …

“ये क्या बोल रहे हो तुम “

“ओह्ह माफ़ करना मतलब की समाया की यात्रा , हो सकता है की मैं किसी दूसरे समय से इस समय में आ गया हु , यानि किसी तरह से मैं भूत काल में आ गया हु “

सभी मेरी बात सुनकर असमंजस में पड़े हुए एक दूसरे के चेहरे को hi देखने लगे थे … कोई कुछ भी नहीं बोल पा रहा था

“ये कौन सा सं है , मतलब तारीख क्या है अभी “

“ये क्या होता है ???”

सभी ने एक साथ कहा .. मैं इन्हे कैसे समझौ ये तो मुझे भी समझ में नहीं आ रहा था , मैं कॉन्फिडेंट भी नहीं था की मैंने टाइम ट्रेवल किया है और अपने hi पुरवा जन्म में पहुंच गया हु ..

सभी चुप थे की अचानक जेतरा बोल उठी

“इसे वैद्य जी के पास ले जाना होगा , हो न हो वही इसकी बातो को समझ सकते है “

जेतरा की बात पर सभी ने एक साथ सर हिलाया

“कौन वैद्य जी??” मेरे मुँह से अनायास hi निकल पड़ा

“हमारे समूह के वैद्य , वैद्य चक्र “ ाजन्य ने थोड़े गर्व के साथ कहा ,

वही मेरे दिमाग में एक नाम कौंध गया कही ये डॉ. चुटिया तो नहीं ???????????
 
अपडेट 38
पहाड़ी के निचे एक छोटी सी कुटिया थी , फूलो से सजी हुई ये कुटिया बहुत hi सूंदर लग रही थी , शांत वातावरण में विणा का मधुर संगीत गूंज रहा था , इस जंगल में इतना मनोरम दृश्य देखकर जैसे आँखों को बेहद hi सुकून मिल रहा था, कुटिया के बहार एक अधेड़ उम्र का साधु भगवा वस्त्र पहने हुए बड़ी बड़ी काली दाढ़ी मूंछो वाला और बड़ी बड़ी जताये लिए बैठे पथ्थर के ोखले में कुछ कूट रहा था , ध्यान से उसे देखने पर मेरा मन प्रशन्न हो गया …..

“ये तो ….”

मैं कुछ बोलने hi वाला था की ाजन्य ने बात काट दी

“ये है हमारे वैद्य चक्र ….”

मैं डॉ. चुटिया को साधु के वेश में देख रहा था , तो डॉ. चुटिया पुरवा जन्म में भी एक वैद्य hi थे और लोगो को ज्ञान बताने का काम किया करते थे , ये सोचकर hi मेरे चेहरे में एक मुस्कान सी आ गयी …

हम कुटिया में प्रवेश करने hi वाले थे की ..

“अरे ाजन्य बहुत दिनों के बाद आये “

पास hi एक हमारी hi उम्र का युवक हाथो में गया का हरा चारा लिए हुए खड़ा था और बड़े hi प्रेम भाव से ाजन्य को देख रहा था ..

“पुष्पक मेरे दोस्त “ ाजन्य आगे बढ़कर उससे गले मिलता है

“परिमल …??” मेरे मुँह से अनायास hi निकल गया , परिमल एक छोटी सी सफ़ेद रंग की धोती पहने हुआ था , शायद इस जन्म में भी उसे कुस्ती का सूक रहा हो उसका शरीर अभी भी बहुत hi पुष्ट और सुडोल दिखाई दे रहा था , मेरे मुँह से परिमल सुनकर वो मुझे ाशकहरया से घूरने लगा ..

“ाजन्य ये तो ..?? “ वो कुछ बोल पता उससे पहले hi ाजन्य ने उसे रोक दिया

“है यही गुथ्थी सुलझाने के लिए तो हम यंहा आये है , वैद्य जी तो बहुत hi वयस्त लग रहे है “

“है ये तो हमेशा से hi अपने ायसाधियो के प्रयोग में वयस्त रहते है , इन्हे ायसाधियो से और माता जी को अपने विणा के वादन से फुर्सत hi नहीं मिलती .. तुम लोग बैठो मैं कुछ खाने का बंदोबस्त करता हु “

पुष्पक मुझे घूरता हुआ वंहा से निकल गया

“क्या ये सभी भी शिकारी है और माता जी कौन है ??” मैंने एक स्वाभाविक सा प्रश्न किया

“नहीं वैद्य जी और माता जी यानि की वैद्य जी की पत्नी महाऋषि जी , और ये पुष्पक तीनो hi आम इंसान है , ये कही दूर से यंहा आये थे कई सालो पहले , पुष्पक को इन्होने गॉड लिया है , ये आम इंसान है इसलिए समूह से दूर इन्हे कुटिया बनाकर दे दिया गया लेकिन इनका हमारे समूह में बहुत सम्मान है , ये यंहा जंगल में घूमकर ायसाधिया इकठ्ठी करते है और बाहरी दुनिया के बारे में बस इन्हे hi जानकारी है , चलो ..”

हम अंदर गए और आहात सुनकर वैद्य जी ने अपना सर उठाया वो बस मुझे देखते hi रह गए , इससे पहले कोई कुछ कहे वैद्य की पत्नी माता महाऋषि भी बहार आ गयी जैसा की मुझे संदेह था उन्हें देखते hi मेरे मन प्रसन्नता से भर गया था , वो डॉ. रंडी hi थी ………

दोनों hi मुझे बड़े hi गौर से देख रहे थे वही मैं उन्हें बड़े hi अपनत्व से देखता हुआ मुस्कुरा रहा था …….

हम सभी उनके पास hi बैठ चुके थे और ाजन्य ने उन्हें साडी बात बताई ……..

“समय यात्रा , ये कैसे हो सकता है ???“

वैद्य चक्र हैरान थे ….

“डॉ. साहब .. ओह्ह सॉरी मतलब माफ़ कीजियेगा वैद्य जी … क्या आप बता सकते है की ये समय कौन सा है .. तारीख क्या है .. ये कौन सा काल है ??” मैंने उत्सुकता से उनसे कहा

वो मुझे गंभीर भाव से देखने लगे ..

“1276 “

उन्होंने गंभीर शब्दों में कहा

“1276 िशवी ???”

मेरे मुँह से अनायास hi निकल गया

“नहीं 1276 विक्रम सम्वत , बौद्ध पंचांग का 1763 और शका सम्वत में काल है 1141….. ये िशवी क्या होता है “ वैद्य जी की बातो से मैं प्रभावित हुआ

मैंने स्कूल में शका सम्वत और विक्रम सम्वत के बारे में पढ़ा था ,हमारा हिन्दू पंचांग विक्रम सम्वत में आधारित है और हमारे देश का नेशनल संवत है ..

जंहा विक्रम सम्वत 57 बस से शुरू हुआ था वही शका सम्वत 78 अड़ से …

“1276 विक्रम सम्वत मतलब 1276-57 = 1219 िशवी … मैं आया हु 2019 िशवी से मतलब 2076 विक्रम सम्वत से …. अभी से लगभग 800 साल बाद से “

मरी गणना सुनकर सभी दांग थे , सभी बस एक दूसरे को देख रहे थे …..

“लेकिन कैसे ?????” वैद्य जी ने फिर से पूछा

इस बार मैंने अपने जीवन की पूरी कहानी उन्हें बता दी की कैसे मैं एक शिकारी बना और यंहा उपस्थित सभी लोग मुझसे जुड़े हुए है , मैंने सभी को बताया की उनका आने वाले जन्म में क्या नाम होगा और क्या काम होगा …. बात करते करते रात हो चुकी थी लेकिन अभी तक किसी की उत्सुकता ख़त्म नहीं हो रही थी ..

“वैद्य जी जेतरा के कहे अनुसार ये सच कह रहा है , क्या इसका ये अर्थ हुआ की सच में ये मेरा hi रूप है मेरा hi दूसरा जन्म ??”

ाजन्य की बात सुनकर वैद्य जी मुस्कुराये ..

“निश्चित hi … ये सत्य कह रहा है , मेयर अध्यन ये बताता है की ऐसा संभव है की एक मनुष्य बार बार एक hi स्थान में जन्म ले जो उसे प्रिय हो और वही कार्य करे जो उसने पुरवा के जामणो में किया था , हम अपने जीवन में देखते है की किसी कार्य के लिए हमारे अंदर एक तीव्र रूचि का जन्म अनायास hi हो जाता है जैसे मेरा ायसाधियो और ग्रंथो से प्रेम , महाऋषि का विणा और तीर- तलवारो से प्रेम और पुष्पक का कुश्ती के दावपेचों से प्रेम अनायास hi उमड़ गया क्या ये केवल कोई संजोग है या फिर हमारे पिछले जन्मो के संस्कार .. और जैसे की ये लड़का कह रहा है की ये सभी काम हम अगले जन्म में भी रूचि पूर्वक कर रहे है …. एक बात बताओ अजय क्या महाऋषि आने वाले जन्म भी इतनी hi खतरनाक होगी “

वैद्य जी के चेहरे में एक मुस्कान उभर गयी

“अवश्य .. इससे भी अधिक ..” मेरी बात सुनकर वंहा सभी की हंसी छूट गयी थी ………..
 
:lol1: सही है काम बाँट कर करना चाहिए :अप्प्रोवे:

हमने भी ज्ञान बताने का काम को

लोगो की चड्डी उतरने का काम और को

और चित चाट कर खुद को मासूम बताने का काम भाई को दे रखा है :lol1:
 
:thanks: dhanywad dark soul bhai ..:)

sahi kaha mane bhi jab fir se padha to kutiya ko kutiya hi padha :lol1:

sala roman me likhane ka yahi problam hai ki kai word ko ham achche se nahi likh sakte ... aise ye meri last roman story hogi do story likhi roman me ab kaan pakad liya hai :lol1:

chukra naam chutiya ko hi modify karke toda ancient type se bana diya :lol1: aise wo chukra nahi balki chukra hai :lol1:

चुकरा नहीं चुक्रा है ... :approve:
 
:थैंक्स: धन्यवाद फ़फ़ भाई :)

भैया रीडर पहले और राइटर बाद में है इसलिए वो न लिखने के बहाने देते रहते है और बहुत साडी स्टोरी पढ़ना उनकी प्राथमिकता है ..

उल्टा मेरे साथ है

मैं राइटर पहले और रीडर बाद में हु इसलिए लोगो को स्टोरी न पढ़ पाने के बहाने देता रहता हु और स्टोरी लिखना मेरी प्राथमिकता रही है :अप्प्रोवे:

काम के कारण लिखना छूट गया था , साला फिर से लोखड़ौन लग गया और वो भी ऐसा की क्लिनिक भी बंद करवा दिए लोग ..

कुछ दिन घर में हु तो 4-5 दिन जो मिले है पूरा फायदा उठा लू :अप्प्रोवे:
 
अपडेट 39
बाटे हो चुकी थी लेकिन एक सवाल अब भी मेरे दिमाग में बार बार आ रहा था जिसे आख़िरकार मैंने पूछ hi लिया ..

“वैद्य जी एक सवाल का उत्तेर मुझे समझ नहीं आ रहा है .. की आखिर मैं यंहा कैसे आ पंहुचा …??? और मैं तो अपनी प्रेमिका के साथ सम्भोग कर रहा था फिर आखिर ये कैसे हो गया की बस मैं hi यंहा आ गया ..”

मेरी बात सुनकर वैद्य जी ने एक गहरी साँस ली

“इसका कोई उत्तेर मेरे पास नहीं है वात्स्य लेकिन शायद तुम्हारा आना भी विधि का कोई विधान हो .. कोई ऐसा कार्य तुम्हारे hi कारन सम्मपन होने वाला हो “

ये उत्तेर कोई ठोस उत्तेर तो नहीं था लेकिन दिल को तसल्ली देने के लिए ठीक hi था ..

“तुम यही रुक जाओ मैं पुष्पक से कहकर तुम्हारे लिए यंहा रहने की व्य्वश्था करता हु “

ये कहकर वैद्य जी वंहा से चले गए , साथ hi ाजन्य और सुप्रिया भी जाने को हुए …

मैं उन्हें छोड़ने के लिए बहार तक उनके साथ hi आया

सुप्रिया जाने से पहले मुझसे लिपट गयी ..

“मुझे एक और भाई मिल गया , तुमको छोड़ कर जाने का मन नहीं कर रहा “

उसके ऐसा करने से जंहा ाजन्य थोड़ा मुस्कुराया वही मैं कुछ नर्वस सा हो गया , ये सुप्रिया थी जो शिरीन की हमशक्ल थी , उसने मुझे भाई के नाते जरूर गले लगाया था लेकिन यंहा भाई के साथ क्या क्या करने की आजादी है ये मैं नदी के किनारे देख hi चूका था , वही उसके पोस्ट वक्ष जो की अभी भी खुले हुए उसके साइन में झूल रहे थे वो मेरे नंगी छतियो में गाड़ने लगे थे , मैं अब भी बिलकुल hi निर्वस्त्र hi था ..

उसके शरीर के सुखद अहसास से मेरे लिंग में थोड़ी हरकत सी होनी शुरू हो गयी जिसे शायद सुप्रिया ने भांप लिया ..

“ओह्ह तो तुमको अपनी बहन की याद आ रही है इसलिए तुम्हारा लिंग उत्तेजित हो रहा है “

सुप्रिया ने बहुत hi बेबाकी से कहा और मैं बुरी तरह से झेप गया , जिसे देखकर ाजन्य और सुप्रिया दोनों hi हंस पड़े ..

“अरे तुम क्यों ऐसे झेप रहे हो , तुम शिकारी हो और तुम्हारे साथ सम्भोग करने में मुझे कोई भी आपत्ति नहीं होगी “

सुप्रिया की बात सुनकर मैं थोड़ा आश्चर्य में पद गया था , मैंने ाजन्य को देखा जो की अब भी सामान्य hi था ,

“लेकिन तुम तो मेरी बहन हो “ मैंने उसी आश्चर्य वाले आवाज में कहा

“अरे बहन से अच्छी चुड़ैल कौन हो सकती है सम्भोग के लिए “

ये ाजन्य था जो बड़े hi गर्व से ये बात कह रहा था

“लेकिन हमारे लिए बहन से सम्भोग करना पाप मन जाता है “

मैंने सफाई दी जिसे सुनकर वो दोनों hi चौक गए

“क्या ?? लेकिन ऐसा क्यों भला ??”

दोनों एक साथ बोल उठे थे की तभी वैद्य जी वंहा आ गए और हमारी बात सुनकर बोलने लगे

“क्योकि अलग अलग देश काल के नियम अलग अलग होते है … आज भी सामान्य मनुष्यो के लिए माँ और संकाश ओउरतो से और सगी बहनो से सम्भोग करना पाप के श्रेणी में आता है … लेकिन शिकारी और चुड़ैलों में ये नियम लागु नहीं होते उनके अपने hi नियम है , यंहा जो जिससे चाहे सम्भोग कर सकता है बस दोनों की उस सम्भोग के लिए राजी हो , इससे शिकारियों और चुड़ैलों के अंदर की वासना शांत हो जाती है , इन्हे प्रेम करना नहीं आता तुम पहले एक सामान्य मनुष्य थे तुम्हारी एक प्रेमिका भी थी तो तुम्हे तो पता hi होगा की प्रेम करना क्या होता है ……”

वैद्य जी की बात सुकर मैंने हां में सर हिलाया

“इस शिकारी समूह में एक प्रधान शिकारी होंगे की इस समूह के पहले शिकारी होंगे जो प्रेम करेंगे और आगे भी शिकारियों के कल्याण के लिए और उन्हें प्रेम सीखने के लिए एक भविष्यवाणी करेंगे .. और वो भविष्यवाणी एक महापुरुष के बारे में होगी जो की आप hi होंगे डॉ. के रूप में “

मैंने अपनी बात कही वही ाजन्य और सुप्रिया इसे सुनकर हँसाने लगे

“शिकारी और चुड़ैलों को प्रेम हो जाये ऐसा हो hi नहीं सकता , हम सम्भोग करते है वो भी जिससे दिल चाहे , हम क्यों बांध कर रहना पसंद करेंगे वो भी एक hi के साथ “ ाजन्य के बोलने से मुझे कोई उत्तेर नहीं सुझा मैंने बस कंधे ुछका दिए ……

वही सुप्रिया फिर से मेरे पास आ गयी और बेहद hi मादक आवाज में मेरे कानो में बोली

“अब तुम यंहा हो हमारे समूह में , तो पुराणी सभी नियमो को भूल जाओ , ीनः के अपने नियम है … तो कल तैयार रहना मैं तुम्हारे साथ सम्भोग करना चाहती हु क्या तुम तैयार हो “

ये प्रश्ताव था मेरी बहन का मेरे लिए सम्भोग का प्रश्ताव ..

मेरे लिए ये जितना अजीब था उतना hi उत्तेजक भी था उसकी आवाज सुनकर hi मेरा लिंग अपने पुरे तनाव में आ गया था जिसे देखकर सुप्रिया के साथ साथ ाजन्य भी हँसाने लगा था ..

अजीब भाई है बहन ऐसा कर रही है और ये हंस रहा है , लेकिन फिर मुझे याद आया की ये भी तो मैं hi हु….

“ाजन्य तुम जाओ आज मैं अपने इस भाई के साथ रात गुजरूंगी “सुप्रिया ने बड़े hi ऐडा के साथ मेरे लिंग को अपने हाथो में ले लिया

ाजन्य वंहा से हसते हुए चला गया था वही वैद्य जी भी मुस्कुराते हुए कुटिया के अंदर चले गए …..

“शिरीन बीटा ये क्या कर रही हो देखो गलत हो जायेगा “

मेरे मुँह से अनायास hi निकला

“तुम अपनी बहन को बीटा बोलते हो इतना प्यार ???”

सुप्रिया ने मेरे लिंग पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी ,मुझे याद आया की ये मेरी बहन शिरीन नहीं है … और है भी :lol1:

“आठ सुप्रिया बहन ऐसा मत करो “

“वह भ्राता श्री आप की बाटे तो मुझे और भी उत्तेजित कर रही है “

उसने मेरा लिंग छोड़कर मेरा हाथ थम लिया और कुटिया से थोड़ी दूर बने एक दूसरे झोपड़े की और चल पड़ी , वंहा दरवाजे के पास खड़ा पुष्पक हमें देख कर थोड़ा चौका ..लेकिन सुप्रिया ने उसे दरवाजे से हटा दिया और मुझे ले जाकर घर के बने बिस्टेर में लिटा दिया ..

ये बिस्तर धान के सूखे हुए घास का बना था जिसे हमारे तरफ पैरा कहा जाता है और कही कही पुआल कहा जाता है , एक जगह इकठ्ठा करके उसके उप्पेर ek-do चादर बिछा दी जाती है जिससे एक अच्छा गद्देदार और गर्म बिस्टेर तैययर हो जाता है ..

जंहा एक और मैं उत्तेजना में मारा जा रहा था वही दूसरी और पुष्पक भी उत्तेजित मालूम हो रहा था , उसका मुँह सूखे जा रहा था और वो बस आंखे फाडे हुए सुप्रिया को hi देख रहा था , कभी कभी वो थोड़ा थूक जातक लेता आँखों में अजीब सा भाव था …

“तुम क्या देख रहे हो जाओ बहार जाओ और alaw(aag) जलाओ ..”

सुप्रिया ने पुष्पक को धमकी भरे स्वर में कहा वो बेचारा तुरंत hi वंहा से निकल गया ..

अब सुप्रिया मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी ..

“बड़ी प्यारी बाटे करते हो अनजाने इंसान तुम , मेरे भाई का हमरूप हो तुम तुम्हे तो आज निचोड़ दूंगी शिकारी “

वो अपने कमर में बंधे हुए पत्तो के हार को निकाल फेकि , ऐसे भी उनके होना या न होना एक hi जैसे था ..

अब मैं भी अपने शर्म और दुविधा से बहार आ चूका था , है मुझे पता था की ये मेरी hi बहन है लेकिन बहन के साथ सम्भोग तो मेरे काल प्रदेश में नियम के विरुद्ध था यंहा नहीं ..

मैंने अपने लिंग को सहलाते हुए उसे इशारा किया

“क्या इस काल में भी लिंग की चूसै की जाती है “

वो मुस्कुरा उठी ..

“काल बदलते है मनुष्य नहीं , न hi मनुष्य की भावनाये .. और सम्भोग की कला तो मनुष्य जीवन के प्रारम्भ से hi अपने साथ लेकर आता है … और हम चुड़ैल तो संभोग में निपूर्ण hi होती है “

उसकी आवाज और जिस्म दोनों में मादकता और जवानी छलक रही थी

“तो आओ …….”

मेरा कहना था की जैसे उसे स्वीकृति मिल गयी , वो थोड़ी झुककर मेरे लिंग को अपने मुँह में लेने लगी , मैं किसी स्वर्ग में चला गया था , उसके थूक से भरे हुए होठो ने मेरे लिंग को भी भिगो दिया था..

“आअह्ह्ह सुप्रिया “ वो मेरे लिंग को ऐसे चूस रही थी की मैं जन्नत की शेर करने लगा ..

“सुप्रिया नहीं बहन बोलो “

उसने थोड़े और जोरो से मेरे लिंग को मसली

“आह बहन …“ मेरे मुँह से निकल गया

थोड़ी देर तक चूसने के बाद वो मेरे उप्पेर आयी और खुद की योनि में अपने हाथो से मेरे लिंग का प्रवेश करवा दिया , उसकी योनि में जैसे कोई नदी hi बाह रही थी , गीली योनि भी थोड़ी गर्मी लिए हुए थी ..

“वाह ..” मैं आनंद में डूब गया

“आह भैया … सच में आप दोनों एक hi हो , वैसा hi कठोर लिंग और वही जोश और वही प्यारी बाटे “

सुप्रिया मेरे लिंग में अपने योनि को रगड़ते हुए खुद रही थी और झुककर उसने मेरे होठो में अपने होठो को दाल दिया , वो मेरे होठो को बहुत hi बुरी तरह से चूसने लगी थी साथ hi साथ अपने कमर को तेजी से चला रही थी ..

मजे में मैं भी कमर हिला हिला कर उसका सहयोग कर रहा था ..

थोड़े देर बाद hi मैंने उसे निचे पटक दिया और खुद उसके उप्पेर आ कर कमान सम्हाल ली ..

गीली योनि में अपने कड़े लिंग का वार करते हुए मैं अपनी hi बहन को भोग रहा था, जो उस काल में संभव नहीं हो सका था वो इस काल में इतनी आसानी से और सहजता से मुझे हासिल हो रहा था ..

मेरा ध्यान उसके चेहरे पर गया उसके बाल बिखरे हुए थे और मुँह खुले हुए , वो बार बार हर धक्के का पूर्ण आनद उठा रही थी आंखे आधे बंद हो चुकी थी जैसे वो स्वर्ग की सैर कर रही हो , हर धक्के के साथ उसके मुँह से हलकी हलकी सी सिसकी निकल जाती ..

उसके शरीर में कई जगह पर godana(tattoos) बने हुए थे जो उसके सुंदरता को और भी निखार देते थे , मैं उसे भोगते हुए उसके चेहरे में आये भावो को देख रहा था जिससे मुझे उसपर और भी प्यार आ रहा था मैं धक्को को काम करके उसे चूमने लगा , वो भी उसके गीले होठो में अपने होठो को दाल दिया ,

मेरी जीभ उसके जीभ से मिल रही थी , और मैं उसके होठो को अपने भीगे होठो से और भी गिला कर रहा था , उसने आंखे खोलकर मुझे देखा उसके होठो में एक मुस्कान आ गयी ..उसने मेरे बालो को पकड़ते हुए मुझे अपने वक्षो को तरफ खिंच लिया ..

इन वक्षो को मैं बहुत hi देर से देख रहा था लेकिन इनमे वो आकर्षण अभी पैदा हुआ मैं उसके उभरे निप्पल्स को अपने होठो में बढ़ाकर चूसने लगा ..

“bhaiiiiiiiiii…….. तुम तो ाजन्य से भी अच्छे हो “उसने मेरे बालो को सहलाया तो मैंने हलके से उसके निप्पल्स को काट दिया

“आह ..” वो थोड़ी शांत दिख रही थी और मैं भी , मेरी कमर अब भी हलकी हलकी चल रही थी और उसके योनि के रास में भीगा हुआ मेरे लिंग की उभरी हुई नशे योनि के दिवार में फंसकर मुझे आनंद की अनुभूति करवा रही थी ..

आज तक मैंने बहुत सम्भोग किया था लेकिन रिद्धिमा के साथ किया सम्भोग जैसे एक अलग hi एक्सपीरियंस देने वाला था वैसे hi सुप्रिया से किया गया सम्भोग भी मुझे कुछ नयी अनुभूतियों से परचित करवा रहा था …

कभी हलके तो कभी तेज धक्को के साथ मैं उसके जिस्म से खेल रहा था , वो भी मेरा पूरा साथ देते हुए खुद को मेरे लिए समर्पित कर रही थी , थोड़े देर तक ऐसे hi एक दूसरे से खेलने के बाद मैंने फिर से स्पीड पकड़ ली और तेज धक्के लगते हुए उसके योनि में झरने लगा ..

उसने मुझे बहुत hi जोरो से भींच लिया था और मेरे साथ hi साथ वो भी अपने योनि को संकुचित करते हुए मेरे रास को अपने अंदर बहरते हुए झरने लगी ………

हम दोनों के hi होठो में एक मुस्कान थी उसने बड़े hi प्यार से मुझे देखा और मेरे होठो को अपने होठो में भर लिया …………
 
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