अपडेट 127(स)
झड़ने के काफी देर तक दोनों लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए वैसे hi लेते रहे… जब दोनों थोड़ा संभाले तो चाचा को थोड़ा होश आया… पर शिलाजीत के कारन और कुवह बेटी के साथ चुदाई के कारन लुंड अभी भी लोहा बना हुआ था…
चाचा- अरे भाई साब तो छत पर hi हैं हम देखकर आते हैं बहार क्या हो रहा है
पल्ली- क्या पापा मुझे ऐसे छोड़ कर जाओगे..
पल्ली ने अपना नंगा जिस्म दिखते हुए चाचा से कहा…
चाचा पल्ली को देखते hi एक बार फिर से बहकने लगे. उनका लुंड तो जैसा था वैसा hi खड़ा था तबसे
चाचा- बीटा जा नहीं रहा तुझे छोड़ कर तो कोई मुर्दा भी न जाये.. बस एक मिंट में आ जायेंगे.
Palli-theek है पापा जल्दी आओ..
चाचा ने नीचे गिरा हुआ पजामा पहना और बहार निकल गए जैसे hi आगे को जाने को हुए उनके पेअर में कुछ फंसा उन्होंने नीचे देखा तो कपडा था चाचा ने उठाया तो देखा साड़ी थी…
चाचा मन में सोचने लगे जब आया था तब तो साड़ी यहाँ नहीं थी और ये तो कुछ कुछ वैसी hi लग रही है जैसी ममता ने पहनी थी… और फिर उनकी नज़र ब्लाउज पर पड़ी उसे उठाकर देख कर तो उनको यकीन हो गया की ये ममता की साड़ी और ब्लाउज hi हैज वो भी वो वाले जो आज ममता ने पहन राखी थी..
चाचा सोचने लगे- ममता की साड़ी और ब्लाउज यहाँ क्या कर रहे हैं.. कहीं ममता यहीं तो नहीं और यहीं है तो उसके कपडे ऐसे क्यों पड़े हैं.
कहीं उसने हमें पल्ली के साथ देख तो नहीं लिए?
चाचा के मन में कई तरह के सवाल आने लगे.
चाचा जल्दी से छत की तरफ भागे वहां जाकर देखा तो कोई नहीं था. फिर बापिस आये और सोचने लगे ये भैया भी नहीं दिख रहे.. चाचा इधर उधर नज़र मरने लगे… बापिस अपने कमरे की तरफ आते हुए उनकी नज़र मौसी वाले कमरे की खिड़की पर पड़ी जिसमे से रौशनी आ रही थी… दरवाज़ा बंद था पर खिड़की खुली देखकर चाचा उसकी और बढ़ गए न जाने क्यों उनका दिल ज़ोरो से धक् धक् कर रहा था…
जैसे hi वो पास पहुंचे उन्हें हलकी सिसकियाँ सुनाई देने लगी… जिसे सुनते hi चाचा ने तुरंत खिड़की से अंदर झांक कर देखा तो चाचा के पैरों के बीच से ज़मीन खिसक गयी .
अंदर बिस्तर पर उनकी पत्नी अपनी पीठ पर लेती हुई थी पेटीकोट कमर में इकठा हो रखा था, ब्रा में से दोनों छुछियां बहार थी, टंगे फैली हुई थी और उन टांगों के बीच उनके दोस्त उनके भाई थे जो लगातार आगे पीछे हो कर अपने लम्बे से लुंड को उनकी पत्नी की छूट में अंदर बहार कर रहे थे.

चाचा का शरीर वहीं पर जैम गया उनका गाला जैसा सूख सा गया वो बहुत कुछ बोलना चाहते थे पर उनकी आवाज़ निकल hi नहीं रही थी.. अपनी पत्नी को किसी और से चुड़ते देख और वो भी अपने सबसे जिगरी दोस्त के साथ… चाचा के मन में भावनाओ का तूफान उठने लगा उन्हें समझ नहीं आ रहा था की क्या करें.. अपनी पत्नी से झगड़ा करें या अपने दोस्त से क्या छोड़ दें दोनों को और फिर कभी उनकी शकल न देखें.
चाचा यही सब सोच रहे थे की उनके लुंड पर अचानक से उन्हें कुछ महसूस हुआ… उन्होंने किसी तरह से कमरे से नज़र हटाकर देखा तो पाया उनकी बेटी पूरी नंगी उनके बगल में कड़ी है और उनके लुंड को पकड़ कर उसे सहला रही hai…unhe ये भी नहीं पता चला की कब पल्ली ने उनका पजामा नीचे उतर दिया है.. अब चाचा ने अपने लुंड पर ध्यान दिया तो पाया की ऐसा हाल उनके लुंड का शायद hi कभी हुआ पर फिर सोचा जो आज हो रहा है वो भी पहले कब हुआ था अपनी बेटी के नंगे जिस्म को देखकर न जाने कैसे चाचा के मन का तूफान शांत होने लगा..
अचानक से उनके होंठों पर एक मुस्कराहट आ गयी… न जाने उनके मन में ऐसा क्या चल रहा था.. उन्होंने पल्ली को पकड़ा और अपने कमरे की तरफ जाने लगे जहाँ वो पल्ली को पहले छोड़ रहे थे.
पर अचानक से दरवाज़े पर जाकर रुक गए… पल्ली को समझ नहीं आया उसके पापा कर क्या रहे हैं.
Palli-kya हुआ पापा?
चाचा- कुछ नहीं बीटा.. हमसे प्यार करती हो?
पल्ली- सबसे ज्यादा पापा ये भी कोई पूछने की बात है.
ये कहकर पल्ली ने अपने नंगे बदन को चाचा के नंगे बदन से चिपका दिया और गले लग गई.
चाचा ने उसके बदन पर प्यार से हाथ फिरते हुए पुछा- मेरा साथ देगी हमेशा?
पल्ली- हाँ पापा हमेशा
पल्ली ने अपने पापा के लुंड को मुठियाते हुए कहा वो जानती थी की चाचा ने शराब पि है और इसीलिए ऐसी बहकी बहकी बातें कर रहे हैं…
चाचा ने पल्ली का जवाब सुना और फिर उसको गले से लगाए हुए hi कमरे के अंदर न जाकर बगल वाले कमरे के दरवाज़े की तरफ बढ़ गए और फिर एक हाथ बढाकर धक्का देकर दरवाज़े को धक्का दे दिया और दरवाज़ा खुल गया.
खुलते hi पल्ली की नज़र अंदर पड़ी तो वो चौंक गयी.. अंदर उसकी मम्मी एक करवट पर लेती हुई थी उनका पेटीकोट कमर में था साड़ी और ब्लाउज का अत पता नहीं था.. छुछियां ब्रा के बहार लटकी हुई थी और एक छुच्छी पर एक हाथ था जो उसे मसल रहा था… नीचे नंगी छूट में से एक लम्बा लुंड अंदर बहार हो रहा था… और हर धक्के के साथ उसकी मम्मी का पूरा शरीर हिल रहा था..

उसने अपनी मम्मी के पीछे लेते इंसान को देखा तो और चौंक गयी वो तो ताऊजी थे. हालाँकि पल्ली ने इतनी सी hi उम्र में काफी कुछ चुदाई देख और कर ली थी पर ये सब देख कर वो भी चौंक गयी थी…
उसने एक नज़र अपने पापा के ऊपर डाली जो की लगातार बिस्तर पर चल रही चुदाई की और hi देखे जा रहे थे . पल्ली को दर सिर्फ पापा का hi था की माँ को ऐसे देख न जाने वो कैसे व्यवहार करें… कहीं गुस्सा न हो जाएं पर उनके हावभाव और लुंड के तनाव से तो ऐसा कुछ नहीं लग रहा था…
तभी चुड़ते हुए चची की नज़र अचानक से दरवाज़े पर खड़े अपने पति और बेटी पर पड़ी और वो चौंक कर जितनी जल्दी से पापा से अलग हो सकती थी हो कर कड़ी हो गयी साथ hi पेटीकोट को नीचे कर दिया और अपनी छूछीयो को पास पड़ी चादर से ढल लिए…
वहीं पापा भी चाचा और पल्ली को देखकर घबरा गए.
उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्या बोलेन क्या करें और जल्दबाज़ी में उन्होंने पास पड़े तकिये से अपने लुंड को धक् लिए.
चची पल्ली और पापा तीनो hi घबरा रहे थे वहीं चाचा सिर्फ ख़ामोशी से बिना किसी भाव के बस दोनों को देखे जा रहे थे… दोनों बिलकुल नंगे अभी तक दरवाज़े पर खड़े थे चाचा का लुंड आसमान की और इशारा कर रहा था…
चची तो मरे घबराहट के रोने जैसी हो गयी थी उन्हें समझ नहीं आ रहा था अब क्या होगा…
चाचा ने फिर सबको देखते हुए एक कदम आगे बढ़ाया साथ hi पल्ली भी एक कदम आगे बढ़ी ऐसे hi अगला कदम चची और पापा की नज़रें बस चाचा पर hi जमी हुई थी…
चाचा बिस्तर के पास जाकर रुक गए और चची को देखने लगे चची घबराने लगी.. पापा ने चची को बचने के लिए बीच में आना ठीक समझा और बोले- राजन मेरी बात सुन… ममता बहु को और पल्ली को जाने दे मैं तुझे सब समझाता हूँ.
चाचा ने एक बार पापा की तरफ देखा.. और फिर से चची की तरफ और चची को बिस्तर पर बैठने का इशारा किआ… चची बिस्तर पर बैठ गयी… पल्ली को भी इशारा करके चाचा ने बिठा लिए… इस माहौल में भी पापा की नज़र जब पल्ली के नंगे बदन पर पड़ी तो उनका लुंड तकिये के नीचे ठुमके मरने लगा…
चाचा ने चची की और देखते हुए पुछा- ये सब कैसे शुरू हुआ.
पापा बीच में बोले- मैं समझाता हूँ…
चाचा- नहीं भैया इसे hi बोलने दीजिये…
चची ने डरते हुए धीरे धीरे बोलना शुरू किआ और उनकी चुदाई देखने से लेकर अपनी चुदाई तक साडी बात बतादि…
चाचा- क्या तुझे ाचा लगा?
चची- नहीं वो मैं हाँ.
चाचा- मुझे सच जवाब चाहिए.. जो भी सच हो…
चची- हाँ..
Chacha-Palli? तुझे
पल्ली- हाँ पापा..
चाचा- भैया?
पापा- अरे तू ये क्यों पूछ रहा है.
चाचा- हाँ या न?
पापा- हाँ..
चाचा- तो तुम्हे हमारी पत्नी को छोड़कर ाचा लगा…?
Papa-tu एक hi बात क्यों बार बार पूछ रहा है?
चाचा- जब लगा तो बोलने में क्या हर्ज़ है भैया..
किसी के समझ नहीं आ रहा था चाचा के मन में क्या था.
चची- वैसा hi लगा जैसा तुम्हे अपनी बेटी को छोड़कर लगा..
चची के मुँह से अचानक ये सुनकर सब हैरान रह गए और चाचा भी उन्हें हैरानी से देखने लगे जैसे उन्हें उम्मीद नहीं थी की चची अचानक से ऐसा कुछ बोलेंगी…
चची- जब तुम अपनी सगी बेटी को छोड़ सकते हो, भग्गू की बहु को छोड़ सकते हो तो मैंने भाई साब से छुड़वा लिए तो क्या पाप हो गया..
चाचा एक तक बस चची की और देखे जा रहे थे जबकि चची के चेहरे पर अब घबराहट नहीं थी.
Chachi-aur मेरे और भाई साब के बीच जो हुआ वो भी तुम्हारी वजह से तुम्हारी और पल्ली की चुदाई देखकर हम खुद को रोक नहीं पाए.
पापा- रहने दे बहु बस अब चुप हो जा..
चाचा- नहीं भैया आज बोलने दो इसे.. मैं चाहता हूँ ये आज सब बोले…
चची- तुम सब नहीं सुन पाओगे..
चाचा- आज मैं सब सुन्ना चाहता हूँ..
पल्ली- मम्मी पापा अब बस करो.
चची- नहीं बीटा तेरे पापा को सब जानने का हक़ है और बताना मेरा फ़र्ज़ मैं अब और छुपा कर पल पल ग्लानि में नहीं मरना चाहती.
चची- पल्ली के पापा यहाँ बैठो.
चची ने चाचा को अपने सामने बिस्तर पर बिठा दिया. पापा और पल्ली पहले से hi बैठे थे..
और चची ने बोलना शुरू किया और कर्मा के साथ चुदाई से लेकर अनुज जग्गू प्रेमा इन सब के बारे में सब कुछ सच सच बता दिए, चची की बात सुनते हुए चाचा और पापा के चेहरे के भाव देखने लायक थे. उन्हें यकीन hi नहीं जो रहा था की उनकी पीठ पीछे ये सब हो रहा था और उन्हें खबर तक नहीं थी.
चाचा की आँखें तो एक तक बस चची पर जमी हुई थी.. वहीं पापा भी हैरान थे. पल्ली तो पहले से सब जानती hi थी बस उसे दर था की अब उसके पापा न जाने क्या करेंगे गुस्से में.
चची- ये सब था जो तुम्हे नहीं पता था.. पर पता होना चाहिए था. अब जो तुम चाहो फैसला कर सकते हो हम मानेंगे.
चाचा कुछ नहीं बोले और सर झुकाये बस नीचे की और देख रहे थे…
पापा- कर्मा और अनुज को तो मैं बताऊंगा उन्होंने अपनी चची के साथ ये सब किआ.. अपनी बहन जैसी पल्ली के साथ.. राजन मेरे भाई मुझे मेरी गलती के लिए साथ hi मेरे बच्चों की गलती के लिए हो सके तो माफ़ करदे. मैं तेरे हाथ जोड़ता हूँ.
चाचा ने कुछ देर पापा की और देखा और फिर आखिरकार बोले- भैया नहीं.. मुझे नहीं लगता की इसमें कर्मा की अनुज की या ममता पल्ली किसी की भी गलती है. या आज जो कुछ हुआ उसमे किसी की भी गलती है.
चची- ये तुम क्या बोल रहे हो.
चाचा- नहीं ममता आज हमे बोल लेने दो. शरीर की भूख कहो या हवस ऐसी hi चीज़ है जो इंसान को वो सब करने पर मजबूर कर देती है जो उसे नहीं करना चाहिए.. चाहे तुम्हारा बचपन में मौसी के साथ वो सब करना हो या आज हमारा अपनी hi बेटी को छोड़ना.. है तो सब हवस के कारन hi. शरीर कीभूख के कारन hi. और जब आज सब सच बता hi रहे हैं तो मेरा भी एक सच है
सब लोग चाचा को ध्यान से देखने लगे.
चाचा- भैया तुम्हे तुम्हारी मौसी के साथ वो सब करते हुए देख कर हमारे मन में भी कुछ अजीब ख्याल आने लगे और वो ख्याल कब हवस में बदल गए कोई नहीं जनता. और उसका शिकार हुई मेरी अम्मा..
सब चाचा की बात सुनकर चौंक गए.
चची- क्या अम्मा?
पापा- छोटी मौसी कैसे?
चाचा- हाँ ममता तुम्हारी सास.. अपनी सगी माँ के साथ हमने वो सब किआ है जो आज अपनी बेटी के साथ किआ…
चची- पर ये सब कब कैसे..
चाचा- वो लम्बी कहानी है फिर कभी सुनाऊंगा अभी बस इतना जान लो की यहाँ सब एक बराबर हैं सब पापी हैं या कोई भी नहीं. तो ये सब सुनकर मेरे बारे में सच जानकर तुम बताओ हमारे साथ रहना चाहोगी.?
चची कुवह देर तक चुप रही और बोली- अभी तुमने hi कहा या तो सब पापी हैं या कोई नहीं.. हाँ मुझे थोड़ा दुःख है की तुमने ये सब मुझसे छुपा के रखा. पर अब हम एक दुसरे को बेहतर जान गए हैं.
चाचा- दुःख तो हमें भी है की अपनी hi पत्नी को सच न बता सका और न hi जान सका.. पर अब से ऐसा कुछ नहीं होगा..
चची- बिलकुल सही कहा तुमने अब से ऐसा कुछ नहीं होगा..
पापा- ठीक है तो सब अब जाकर सो जाओ और हम भूल जायेंगे इस रत के बारे में.. जैसे कभी कुछ हुआ hi नहीं.
Chacha-nahi भैया एक बात है.
पापा- क्या ?
चाचा ने सबकी तरफ देखा और बोले- हम इस रात को भूलना hi नहीं चाहते?
चची- मतलब?
चाचा- मतलब ये की न जाने क्यों तुम्हे भैया से छुड़वाते देख और तुम्हारी कर्मा और बाकि सब की चुदाई की बात जानकर हुमैने गुस्सा की जगह उत्तेजना हुई. हमारा लुंड और ज़्यादा कड़क हो गया.. ये देखो..
चची- तुम कहना क्या छह रहे हो
चाचा- यही की हम नहीं चाहते की सब पहले जैसा हो.. हम अभी बोल तो दें की हम भूल जायेंगे पर आज नहीं तो कल हमारा मन पल्ली को छोड़ने को फिर करेगा और शायद हम रोक भी नहीं पाएंगे.
पापा- ये बात तो है एक बार करने के बाद दोबारा सामान्य रहना असंभव के बराबर है.
Chachi-iska मतलब आगे भी
चाचा- सीधा मतलब ये है की हुमैने तुम्हारे कर्मा या बाकि सब या भैया से छुड़वाने से कोई परेशानी नहीं है बल्कि मैं साथ दूंगा.
पल्ली- सच पापा?
चाचा- एक दम सच. और नहीं किसी को कुछ छुपाने की ज़रूरत होगी.
पापा- बस एक बात का ध्यान रखना की किसी बहार वाले को खबर न हो.
चाचा- सब अपने hi हैं बहार कोई नहीं बताएगा..
चची- हाँ बहार तो कोई नहीं बताने वाला.
चाचा- वैसे एक बात है भैया ये बच्चे तो हमसे भी आगे निकले.
Papa-wo तो है यार हमने तो कभी सोचा hi नहीं था पर.
चची- हमारे बच्चे गलत नहीं है भैया बस जैसे हवस के आगे हम मजबूर हैं वैसे वो.
पल्ली- अरे मम्मी अब बात हो गयी हो तो बताओ क्या करना है. मुझे खुजली हो रही है.
सब के चेहरे पर पल्ली की बात सुनकर मुस्कराहट आ गयी..
Chachi-to क्या करना है चची ने शरमाते हुए चाचा से पूछा.
चाचा- चलो फिर घर सोते हैं चलके.
चाचा की बात सुनकर पल्ली का मुँह उतर गया और थोड़ा थोड़ा चची का भी. पर चची बिस्तर से कड़ी हुई और बहार जाने को हुई की चाचा ने उनका हाथ पकड़ लिए और उनके ऊपर पड़ी चादर को पकड़ कर खींच लिए.
चची- अरे ये क्या कर रहे हो?
चाचा ने कोई जवाब न देते हुए उनके पाटिकट को भी पकड़ कर नीचे खींच दिया. और हंसने लगे.
पल्ली भी खिलखिलाकर हंसने लगी
चची ने झूठा गुस्सा दिखते हुए कहा- क्या कर रहे पेटीकोट पहात जायेगा अभी.
चाचा- तो पहना क्यों है उतर दो.
चची- हटो घर जाना है सोने.
Chacha-acha अब हुई से मज़ाक
और चाचा ने चची को पकड़ कर पहले उनका पेटीकोट उतरा और फिर ब्रा भी अब चची भी बाकि सबकी तरह नंगी हो गयी.
चाचा ने फिर चची को धक्का देकर बिस्तर पर घोड़ी बना दिया और उनकी छूट पर एक बार पीछे से थूका और फिर पापा की तरफ देख कर बोले- लो भैया अपना अधूरा काम निपटाओ.
पापा तो हैरान हो गए की चाचा उन्हें खुद उनकी बीवी को छोड़ने को बोल रहे हैं.. और ऐसे hi बैठे रहे
चाचा- क्या हुआ भैया नहीं छोड़ना?
पापा ने भी इस बार ज़्यादा नहीं सोचा और तकिया एक तरफ फेंका और जल्दी से चची के पीछे जगह ली और लुंड को उनकी छूट पर रखा.. चाचा ये सब बड़े ध्यान से देख रहे थे की उनकी बीवी की छूट में किसी और का लुंड घुसाने वाला है.
पापा ने ज़ोर लगते हुए अपने लुंड को चची की छूट में घुसा दिया जिसे चाचा ने बखूबी देखा वहीं बिस्तर के दूसरी तरफ पल्ली अपनी छूट को सहला रही थी अपनी मम्मी और ताऊजी की चुदाई देखते हुए.
लुंड जाते hi चची के मुँह से एक सिसकी निकल गयी..
पापा- कैसा लग रहा है राजन अपनी बीवी की छूट में अह्ह्ह मेरा लुंड देखकर?
चाचा- भैया आना तो मुझे गुस्सा चाहिए पर न जाने क्यों लुंड तन रहा है. अब रुको मत छोड़ो साली को.
पापा- अह्ह्ह्ह हान्न्म
चची- ohhhhhhhhhhhh भाई सब अह्ह्ह.. देखो पल्ली के पापा तुम्हारे भैया मेरी छूट छोड़ रहे हैं.. तुम्हारे सामने.
पल्ली- अह्ह्ह पापा अब तुम भी आ जाओ कब तक इंतज़ार करवाओगे..
पल्ली ने अपनी छूट को मसलते हुए कहा..
चाचा ने भी एक बार पापा और चची की और देखा और फिर उतर कर बिस्तर की दूसरी और पहुंच गए.. जहाँ उनकी बेटी उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी..
चाचा के पास पहुंचते hi पल्ली ने झुककर तुरंत अपने पापा के लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी.
चाचा- aahhhhhhhhhh बीटा ऐसी hiiiiiiiiiii ohhhhhhhhhhhh. सच में बेटी तुम पर गयी है ममता.
चची- ohhhhhhhhhhhh हाँ जैसी चुड़क्कड़ माआ वैसी hi बेटीईई.. अह्ह्ह
चची ने पापा के धक्को को झेलते हुए जवाब दिया…
पल्ली ने दो मिनट hi लुंड चूसा और फिर करवट लेकर लेट गयी और अपने पापा को इशारा किआ.
चाचा ने भी बिना किसी देरी के छलांग लगाई और पल्ली के पीछे वैसे hi करवट लेकर लेट गए और पल्ली की तंग उठा कर पीछे से अपने लुंड को एक बार फिर से अपनी बेटी की छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगे

दोनों इस तरह से चुदाई कर रहे थे की सामने पापा और चची की चुदाई को आराम से दरख सकें..
Palli-aahhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पापाआआअह्ह्ह्हह्हह छोडोऊ अपनी बेटीईई को..
चची- ohhhhhhhhhhhh हांण छोड़ो जी अपनीईई बेटीईई को.. सबसे ज़्यादा तुम्हारा हक़ है िस्किई छूट par…ahhh भाईसाहब
पापा- यी तो सही कहा अह्ह्ह्हह सबसे ज़्यादा हक़ बेटीइ पर बाप का अह्ह्ह्हह hi ताऊ होता है… और बेटीईई पल्ली जैसी हो तो हक़ ज़रूर वसूलना चाहिए.
पल्ली- हाँ ताऊ जी अह्ह्ह्हह हैं पापाहहह लेलुओ अपना हक़ और तेज़ छोड़ो..
चाचा- सारा हक़ लुन्गाहहहह बेटा अभी तो तेरी छोटी सी गांड भी मारनी है ..
Palli-kyaaahh आह्हः पापा सवह में…
चाचा- हाँ बेटाःह्ह्ह्हह्ह सच में तेरी गांड का तो न जाने कबसे दीवाना हूँ मैं
पल्ली- तो मार लो पापाः आह्हः घुसा देना अपना लुंड आअह्ह्ह्ह अपनी बेटीइ की गांड में..
चाचा- भैया एक काम आह्ह्ह्ह करते हैं..
पापा- अहहह्ण ुह्ह्ह्ह हाँ बता न.
पापा ने चची की छूट में धक्के मारते हुआ कहा..
चाचा- अभी इनकी चूर मरने के बाद, हम लोग इन दोनों माँ बेटी की गांड एक साथ मरेंगे एक hi समय पर दोनों की गांड में लुंड घुसाएँगे.
पापा तो चाचा की बात सुनकर साथ hi चची की गांड मरने की सोचकर और उत्तेजित हो गए साथ hi उनके धक्के भी तेज़ हो गए…
पापा- आह्ह्ह्हह मज़ाआ आ जायेगा भाई… ममता की गांड तो न जाने मैं कबसे मरना चाहता था. जब जब साड़ी में घूमता देखता था तो मन होता था लुंड घुसेड़ दूँ.
पापा इतना जोश में आ गए. की चची को छोड़ते हुए उन्होंने अपनी एक उंगली को आगे ले जाकर चची के मुँह में घुसा दिया जिसे चची ने चूस कर गीला किआ और फिर पापा ने वो उंगली पीछे लेकर चची की गांड के भूरे छेड़ में घुसा दी…

चची- ohhhhhhhhhhhh आह भाई साब यह क्या…
चची की दोहरे हमले से और साथ hi इस एहसास से के उनके पति के सामने वो चुद रही हैं इस एहसास से वो और उत्तेजित होती जा रही थी..
बिस्तर के दूसरी तरफ चाचा भी पल्ली को तगड़े धक्के लगाकर छोड़ रहे थे उन्हें भी ये सोचकर जोश चढ़ रहा था की वो अपनी सगी बेटी को अपनी hi पत्नी और भाई साब के सामने छोड़ रहे हैं
इसी तरह दोनों जोड़े चुदाई में लगे रहे और थोड़ी hi देर में दोनों झाड़ गए साथ में…
जहाँ पापा ने चची की छूट को रास से भर दिया.. वहीं चाचा को अपनी बेटी की छूट में झड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ…
जब चाचा और पापा चची और पल्ली से हेट तो दोनों माँ बेटी ने अपने पुराने अनुभव को दिखते हुए और दोनों मर्दों को और हैरान करते हुए जल्दी hi 69 के आसान में आ गयी और एक दुसरे की छूट को चाट कर साफ़ करने लगी..
चाचा और पापा जिनका लुंड पहले से hi खड़ा था इस नज़ारे को देखकर और कड़क हो गए..
छूट के साथ साथ दोनों माँ बेटी ने एक दुसरे की गांड पर भी पूरा ध्यान लगाया और… चाट चाट कर आने वाले प्रहार के लिए तैयार किआ… उधर चाचा और पापा से सबर नहीं हो रहा था…
जब चची और पल्ली का एक दुसरे की छूट से मन भर गया तो दोनों अलग हुई.. और फिर चची पापा के सामने और पल्ली चाचा के सामने जाकर झुक गयी और दोनों के लुंड को मुँह में ले लिए.. और उसके बाद पूरी म्हणत से चूसने लगे..
पापा- भाई तेरी बीवी क्या लुंड चूसती है.. आह्ह्ह्हह लगता है उखड hi लेगी..
चाचा- भैया अभी बेटी का हुनर देखोगे तो दांग रह जाओगे.
चची और पल्ली अपनी तारीफ सुनकर और ज़ोर लगाकर चूसने लगे और जब वो अपने काम से संतुष्ट हो गए तो उन्होंने लुंड को मुँह से निकला और घूम कर एक दुसरे के बगल में अपनी अपनी सुन्दर गांड को हवा में उठा कर घोड़ी बन गए..
चाचा और पापा ने भी बिना देरी के अपनी अपनी साथी की गांड के पीछे जगह ली.. और कुछ देर तक दोनों उन खूबसूरत मॉस के गोलों की खूबसूरती का कभी आँखों से तो कभी हाथ सहलाकर लुत्फ़ उठाते रहे और फिर थोड़ा और मन नहीं भरा तो दोनों ने अपने अपने चेहरे सामने चूतड़ों में लगा दिए और चाटने लगे.
और कुछ hi देर में दोनों की जीभ चची पल्ली की गांड के भूरे छेड़ को छेड़ रही थी जिसके वजह से दोनों hi सिसकियाँ ले रही थी.. पापा पूरी कोशिश कर रहे थे अपनी जीभ को चची की गांड ने घुसाने की और यही कोशिश चाचा की थी की वो पल्ली की गांड को अपनी जीभ से hi छोड़ लें.
कुछ देर यूँ hi करने के बाद चाचा ने मुँह हटाया और देखा पापा अभी भी चची की गांड में लगे हुए थे..
चाचा- अरे भैया कब तक हमारी बीवी की गांड में घुसे रहोगे आगे बढ़ो..
पापा- अरे अभी घुसे कहाँ है अब घुसेंगे..
चाचा- तो हो जाओ तैयार.
पापा- हम तो कबसे तैयार हैं ये गांड मरने के लिए.
पापा ने चची के एक चूतड़ को मसलते हुए कहा.
चाचा ने भी अपने लुंड को पकड़ा और पल्ली की गांड के छोटे से छेड़ पर लगाया और पापा की तरफ देखा तो उन्होंने भी अपने लुंड के टोपे को चची की गांड पर लगा दिया… दोनों ने फिर एक दुसरे को देखा और फिर मुस्कुराये ..
चाचा ने एक हाथ से लुंड को पकड़ा और दुसरे से पल्ली की कमर को और बिलकुल यही पापा ने किआ और फिर दोनों साथ बोले:- दम लगा के हईशा.
और दोनों ने एक साथ धक्का लगाया और दोनों के लुंड माँ बेटी की गांड में एक साथ घुस गए.. साथ hi माँ बेटी की ाः भी साथ निकली…
पल्ली- आह्ह्ह्हह पापा तुम्हारा लुंड घुस गया मेरी गांड में..
चाचा- हाँ बीटा अह्ह्ह्हह्हह ऐसा मज़ा मुझे जिंगदी में कभी नहीं आया… आह्ह्ह्हह क्या गरम माखन जैसी गंड़द है तेरई.
पापा- होगीई क्यों नहीं जब माँ की ऐसी है तो बेटी की भी वैसी hi होगी.. अह्ह्ह ममताआठ तेरी गांड.
चची- ुघ्हहह भाई साब पल्ली के पापा देर किस बात की है गाड़ दो खूंटा.
चची की बात सुनकर दोनों ने दो चार झटके मरे और पूरा लुंड गांड के अंदर समां गया…
पल्ली- आह्ह्ह्हह हाय यकीन नहीं हो रहा मेरे पापा का लुँड्ड्ड मेरी गांड में है…
चाचा- यकीन कर ले बेटाःह्ह्ह्हह्ह क्यूंकि शायद hi ऐसा दिन जाये अब जिसमे ये लुंदड़ आअह्ह्ह तेरी गांड में न जाये..
चची- लुंड टूओ भाईसाहब निहहह भी पूरा घुसा दियाःहहहहह रीई मेरी गांड में.. आह्ह्ह्हह..
पापा- तुमने hi बोलाः था खूंटा गाड़ने को तो गाड़ दियाःहहहहह.
पल्ली- अब बातें बंद करूह पापा और मिटाओ मेरी गांड की खुजली..
फिर क्या था दोनों hi लग गए अपनी अपने सामने की गांड का भरता बनाने में.. दोनों तगड़े धक्के लगाकर जड़ तक लुंड को गांड में ठोकते फिर बापिस खींचते और फिर पूरा ठूंस देते.. दोनों माँ बेटी की सिसकियाँ और आहें पूरे कमरे में गूँज रही थी..

साथ hi जांघों के चूतड़ों पर टकराने की आवाज़ जो की एक ले में आ रही थी जैसे की चुदाई का संगीत हो. पूरे कमरे में गूँज रहा था..
इसी बीच माँ बेटी ने प्यार दिखते हुए चेहरा आगे बढ़ा कर एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे.. ये देखकर मर्दों के धक्के थोड़े और तेज़ हो गए..
इसी तरह की तूफानी गांड चुदाई के कुछ देर बाद जब माँ बेटी घोड़ी बानी थक गयी तो चाचा और पापा बिस्तर पर बैठ गए और पल्ली और चची उनकी तरफ पीठ करके उनके लुंड को अपनी मस्त गांड में लेकर उछलने लगे…

चाचा और पापा को तो जैसे सब कुछ मिल गया था वो आराम से देख दोनों गैंडों को अपने लुंड पर उछलने का मज़ा ले रहे थे .. चची और पल्ली भी बहुत गरम हो गयी थी और पूरे जोश के सतह अपने चूतड़ों को पटक रही थी..
और इसी जोश में आकर दोनों कुछ देर बाद झाड़ गयी…
झड़ने के बाद दोनों hi थोड़ी शांत हुई तो पाप ने पल्ली की गांड मरने की इच्छा जताई तो पल्ली तुरंत उठकर पापा के ऊपर बैठ गयी ुर चची ने अपने पति का लुंड गांड में लिए…

और फिर से शुरू हो गया ये चुदाई का खेल पापा पल्ली की गांड मरकर इतने उत्तेजित हो गए की कुछ hi देर में उसकी गांड में अपना रास भर बैठे.. वहीं चाचा भी जैसे hi झड़ने को हुए उन्होंने उन्होंने अपने लुंड को चची की गांड से निकल कर पल्ली के मुँह में घुसा दिया और पल्ली भी अपने पापा का सरा रास पि गयी..
इसके बाद चारो कुछ देर यूँ hi आराम करते रहे पर पल्ली ने दोनों के लुंड को बरी बरी से चूस कर एक बार फिर खड़ा कर दिया बाकि का साथ शिलाजीत ने किआ जो अत्यधिक मात्रा में ली गयी थी..
जब दोनों लुंड खड़े हुए तो पल्ली ने ज़िद्द की की वो दोहरी चुदाई चाहती है जिसमे सिवाय चाचा के किसी को परेशानी नहीं थी क्यूंकि उन्हें लग रहा था खिन दो लुंड से पल्ली को चोट न पहुंचे पर चची और पल्ली के आगे उनकी एक न चली और उन्होंने मन्ना पद..
इसके बाद चची ने पल्ली के दोनों छेदों को छत कर गीला किआ साथ hi पल्ली उस समय दोनों के लुंड चूस कर गीले कररही थी..
जब दोनों को सही लगा तो चाचा को बिस्तर पर लिटा दिया गया और पल्ली ने उनके ऊपर आके उनके लुंड को अपनी गांड से भिड़ाया और बैठ गयी.
दो चार मिनट ऐसे hi उछलने लगी तब तक चची ने पापा के लुंड को एक बार और चूस कर तैयार किआ और फिर पापा पल्ली और चाचा की टैंगो के बीच आये और आपने लुंड को पल्ली की छूट के ऊपर लगया और फिर अंदर धकेल दिया..
और उनका लुंड पल्ली की छूट में समां गया..
चाचा को पल्ली की गांड और कस्ती हुई महसूस हुई साथ hi उन्हें ये भी एहसास हुआ की पापा का लुंड पल्ली की छूट में घुस रहा है बस दोनों के बीच एक पतली सी दीवार है.. इस एहसास से चाचा और उत्तेजित हो गए साथ hi ये उनके जीवन की पहली दोहरी चुदाई थी और वो भी उनकी बेटी के साथ इस ख्याल से hi चाचा का लुंड और फूल गया और चाचा ने नीचे से कसके धक्के लगाने शुरू किये… पापा भी चाचा की गति देखकर उनके साथ ले से ले मिलाने लगे.. और पल्ली तो जैसे पागल सी होती जा रही थी दोहरे हमले से.
चची अपनी बेटी का साथ देने के लिए कभी उसकी छूछीयो मसलती तो कभी उसके होंठों को चूमती

पापा और चाचा मिलकर पल्ली के दोनों छेदों को अचे तालमेल के साथ छोड़ रहे थे और जिसका नतीजा ये हुआ की कुछ hi देर में पल्ली पापा के लुंड पर झड़ने लगी… झड़ने के बाद शांत हुई तो पापा ने उसकी छूट से लुंड निकला और वो भी चाचा के लुंड. से फिसल कर साइड में लेट गयी.
पल्ली के हटते hi चची ने दोनों लोदों पर हमला कर दिया और बरी बरी से दोनों को चूसकर अपनी बेटी के दोनों छेदों का स्वाद लेने लगी…
जब तक चची ने लुंड को तैयार किआ तब तक पल्ली फिर से उठ कर बैठ गयी और बोली..
पल्ली- हटो मम्मी हो गए दोनों साफ़.
चची- तू अभी और करवाएगी क्या?
पल्ली- और नहीं तो क्या.
चाचा- बस पल्ली थक जाएगी तू रहने दे अब.
पल्ली- अरे पापा कल तो हम जा hi रहे हैं रमन भैया की शादी में और वहां तो मौका मिलने से रहा.. इसलिए यहाँ hi जी भर के छुड़वा लेने दो.
पापा- पल्ली की ज़िद्द है बिना पूरी किये आज तक मणि है.
पल्ली- और नहीं तो क्या ताऊजी.. चलो पापा लेटो जल्दी..
और इतना कहते hi पल्ली ने चाचा को लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ कर जल्दी से उनके लुंड को छूट में लेकर बैठ गयी.
चची- देखो तो ये लड़की कितनी उतावली है..
पापा ने भी हँसते हुए पल्ली के पीछे जगह बनाई और लुंड को इस बार गांड में घुसा दिया और फिर से शुरू हो गयी पल्ली की दोहरी चुदाई इस बार पापा और चाचा दोनों ने hi जल्दी ले बनाली और ताबड़तोड़ दोनों छेदों को पेलने लगे..
चची भी बीच में आकर कभी पापा को चूमती तो कभी पल्ली को तो कभी चाचा को… इसी दौरान पापा ने चची को पकड़ कर उनका चेहरा पल्ली के चूतड़ों के ऊपर रख दिया और चची दोनों लुंड को पल्ली के छेदों में आते जाते हुए देखने लगी.
कुछ पल बाद पापा ने पल्ली की गांड से लुंड निकल कर चची के मुँह में घुसा दिया और चची ने भी बेटी की गांड से निकले लुंड को बड़े चौ से चूसा और फिर पल्ली की गांड पर थूक कर दोबारा से लुंड को गांड पर रख दिया

और फिर से शुरू हो गयी दोहरी चुदाई और अगले 15 मीन्स तक काफी अचे से पल्ली को दोनों ने रौंदा और फिर पल्ली एक बार फिर से झड़ने लगी..
और इस बार झाड़ कर उसने पापा को हटने को बोलै तो पापा ने उसकी गांड से लुंड निकला और फिर वो खिसक कर चाचा के लुंड से दूर हटकर लेट गयी… और आराम करने लगी…
बेटी की जगह तुरंत माँ ने ली.. और चची जल्दी से चाचा के लुंड को छूट में लेकर उछलने लगी अगले hi पल पापा ने भी अपने लुंड को उनकी गांड में घुसा दिया और इस बार चची दोहरी चुदाई का मज़ा लेने लगी.
चाचा भी अपनी बीवी को पहली बार किसी और के साथ मिलकर छोड़ रहे थे और इसमें उन्हें एक अलग hi एहसास हो रहा था और इसी कारन वो और तेज़ी से नीचे से धक्के लगा रहे थे… चाचा की गति के साथ पापा भी ले मिलकर गांड मार रहे थे.. पापा के लिए ये नया एहसास था की किसी की बीवी को उसी के साथ मिलकर छोड़ रहे थे.

करीब 20 मिनट्स ककी घमासान चुदाई के बाद तीनो के hi सबर ने जवाब दे दिया था.. और तीनो hi एक के बाद एक धीर होने लगे.. पहले चची झड़ी अपने पति के लुंड पर और फिर चाचा और पापा ने भी एक साथ चची के दोनों छेदों की सिंचाई कर दी… फिर सब लोग अलग होकर लेट गए और देखा तो पल्ली तब तक सो चुकी थी.
तीनो उसे देखकर मुस्कुराने लगे और फिर अब बाकि सब भी थक चुके थे… तो सब सोने लगे ममता चची ने घर जाकर सोने की बात कही तो पापा और चाचा ने मन कर दिया और चारो hi ख़ुशी से नंगे hi एक बिस्तर पर सो गए.. एक कोने पर पापा दुसरे पर चाचा और बीच में दोनों माँ बेटी…
देर से सोने के बाद भी बरसों की आदत के कारन चची की आँख सबसे पहले खुली और उठ कर खुद को नंगा पाया आस पास नज़र घुमाई तो रात जो हुआ याद आया..
जल्दी से उन्होंने चाचा को जगाया चाचा भी आँखें मलते हुए उठे..
कुछ पल उन्हें भी लगे सामान्य होने में
चची- अब उठो जी सारा काम निपटा लो फिर निकलना भी है..
चाचा- हाँ हाँ उठ रहे हैं वैसे भी पता है मायके जाने की जल्दी तो तुम्हे रहती hi है.
चची- अरे सुबह सुबह शुरू मत हो जाओ तुम.. हम तो जा रहे हैं न जाने कपडे कहाँ पड़े हैं हमारे..
Chacha-are आराम से बोलो पल्ली और भैया उठ जायेंगे.. और इधर पड़े हैं तुम्हारे कपडे.. हमारी तरफ..
चची उठी और चाचा की तरफ से कपडे उठाये और कमरे के बहार निकल गयी चाचा भी उठे एक नज़र नंगी सोइ पल्ली पर डाली और प्यार से उसकर सर पर हाथ फेरा फिर वो भी उठ खड़े हो गए.. और कमरे से बहार निकल गए तो देखा चची आंगन में कड़ी पेटीकोट चढ़ा रही थी..
चाचा रुक कर उन्हें देखने लगे साथ hi अपने कपडे भी पहनने लगे…
Chachi-aise क्या देख रहे हैं जी.
चाचा- अपनी पत्नी को देख रहे हैं.. शादी के इतने साल बाद भी तुम्हारा बदन उतना hi कामुक है.
चची- ाचा आज ऐसा क्या हो गया..
चाचा- रात जो हुआ उससे हमारा नजरिया hi बदल गया है और देखना हमारा रिश्ता भी नया होगा..
चची- हैं ग सच में.
चाचा- सच में मेरी रानी.
ये कहकर चाचा ने चची को बाँहों में भर लिए और एक दुसरे के होंठों को चूसा और फिर चची ने धक्का देकर चाचा को दूर हटाया और बोली- अरे हटो अब बड़े काम पड़े हैं. तुम भी जाओ और जानवरों का काम देख कर आओ जल्दी निकलेंगे तो आराम से पहुँच जायेंगे..
इसके बाद दोनों बहार से दरवाज़े को भिड़ा कर अपने अपने काम में लग गए इधर उनके जाने के थोड़ी देर बाद पापा की आँख खुली उठकर देखा तो पल्ली को नंगा बगल में सोते पाया और फिर रात की साडी बात याद आई तो मुस्कुरा कर पल्ली के सर पर हाथ फेरा और उठ गए..
कपडे पहन कर सुबह के नित्यकर्म करके बहार निकले तो चाय की तालाब लगी अब कोई था तो नहीं और सोचा की ममता को क्या hi बोलूं वो भी आज जाना है तो कामो में लगी होंगी.. इसलिए खुद रसोई में घुस गए और सामान ढूंढ कर चाय चढ़ाई hi थी की देखा पल्ली बिलकुल नंगी hi रसोई में अंगड़ाई लेती आ रही है..
पल्ली- क्या कर रहे हो ताऊजी?
पापा- चाय राखी है पीयेगी?
Palli-are मुझे जगा देते मैं बना देती..
पापा- अरे तो क्या हो गया… तू कपडे तो पहन ले.
वैसे पल्ली को यूँ नंगा घूमता देख पापा का लुंड एक बार फिर से फन उठाने लगा..
Palli-kyun ताऊजी ऐसे अछि नहीं लग रही.
पापा- अरे पागल है तू भी बिलकुल.
पल्ली- ताऊजी तुम कुछ बोल रहे हो और तुम्हारा ये कुछ और
पल्ली ने पापा के लुंड की और इशारा किआ जो अपनी पूरी औकात में आकर पाजामे में तम्बू बनाये खड़ा था.
Papa-ab जब तू ऐसे घूमेगी घर में तो ये तो ऐसे बोलेगा hi न.
फिर क्या था पल्ली ने बिदाई के रूप में पापा से एक और बार चुदाई करवाई… और सुबह hi पापा के लुंड से मलाई निकल कर पि गयी.. जब पापा पल्ली के मुँह में झाड़ कर शांत हुए तो बोले- न जाने तुम लोगो के जाने के बाद मेरा क्या होगा..?
पल्ली- अरे ताऊजी मैं हूँ न आपको परेशां नहीं रहने दूंगी…
इसके बाद पल्ली भी कपडे पहन कर अपने घर चली गयी और पापा भी अपने काम में लग गए.
और थोड़े समय बाद पल्ली ममता चची और चाचा.. पल्ली के मां के यहाँ जाने के लिए बस में निकल पड़े… और वहां क्या क्या हो रहा है ये तो हमारे दोस्त DREAMBOY40 अपनी कहानी सपना या हकीकत में आपको बता hi रहे हैं .
बाकि कर्मा के पापा का और कनक गाओं में क्या हो रहा है ये जानने के लिए साथ बने रहे..
अपने कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्.