Incest Katha Chodampur Ki - Page 22 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

दोस्तों खुशखबरी

चोदामपुर- सपना या हकीकत स्पेशल अपडेट आ गया है.

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अपडेट 1


पधारें और प्रयास को सफल बनाएं.

निवेदक: DREAMBOY40 TharkiPo

धन्यवाद्
 
दोस्तों आप सभी को बहुत बहुत बधाई और धन्यवाद कि आप सभी के प्यार के प्रेम और सहयोग के कारण आज हमारी कहानी के 40 लाख व्यूज हो गए हैं जब आरंभ किया था तो सोचा नहीं था पर आप लोगों के साथ की वजह से ये कारवां आगे बढ़ता गया। आशा है इसी तरह आप लोग साथ बने रहेंगे और ये गिनती यूं ही बढ़ती रहेगी।

तो इसी खुशी में कुछ ही देर में आपके सामने पेश करूंगा एक मेगा अपडेट जिसके आपको गरमा गर्म रिव्यू देने होंगे और जाड़े के इस मौसम में गर्मी लानी होगी।

बहुत बहुत धन्यवाद।

 
बस में बैठे हुयी ममता चची, राजन चाचा और पल्ली एक सफर की और निकल पड़े थे दरअसल ममता चची के भाई कमलनाथ के बेटे रमन की शादी थी तो उनका पूरा परिवार जानीपुर शहर जा रहा था शादी को अटेंड करने पर अचानक से राजन चाचा और चची की नज़रें आपस में मिली और उन्हें बीती रात की साडी घटनाएं एक बार फिर से याद आने लगी… वो घटनाएं शायद जिसकी वजह से उनकी पूरी जिंगदी में एक नया मोड़ ले लिए था.

अपडेट 127 (ा)

तो ऐसा क्या हुआ था बीती रात जो ममता चची और चाचा के दिमाग में घूम रहा था तो इसके लिए चलते हैं एक दिन पीछे.. और शुरुआत करते हैं तबसे जब कर्मा के पापा और राजन चाचा ने कर्मा और बाकि सब को कालक गाओं के बहार छोड़ा और बापिस हो लिए..

बाप्सी लौटते हुए शाम होने को थी और गाओं से पहले शहर पहुँचते पहुँचते अँधेरा हो चला था..

शहर पहुँच कर राजन चाचा ने पापा की तरफ देखा और बोले:- भैया आज तो अकेले हो रात कैसे कटेगी?

पापा ने चाचा को सवालिया नज़रों से देखा और पुछा- कैसे कटेगी मतलब?

चाचा- अरे भैया समझो तो, आज तुम्हारा घर खली है..

पापा- अरे पता है खली है तो क्या हुआ… साफ़ साफ़ बोल न

चाचा- अरे भैया तुम भी न, समझते hi नहीं हो.. हम कह रहे की आज अकेले हो तो?

Papa-akele हैं तो क्या?

चाचा- एक अद्धा पकड़ लें?

पापा- पगला गए हो क्या, मरवाओगे.. तुम्हारी भाभी को पता चला न तो दोनों की लग जाएगी..

चाचा- अरे जब भाभी यहाँ हैं hi नई न hi बच्चे हैं तो पता कैसे चलेगा.

पापा- ाचा ममता बहु और पल्ली नहीं है…

चाचा- अरे तभी तो तुम्हारे घर में बैठेंगे… मैं खाना साथ खाने के बहाने से आ जाऊंगा… वहीं पिरोगराम बना लेंगे.

पापा- मुझे तो सही नहीं लग रहा..

चाचा- तुम्हारा मन है की नहीं लेने का? हुए वैसे भी कल हमें ममता और पल्ली को लेकर जाना है मायके उसके.

Papa-acha हाँ बताया तो था तेरे सेल के लड़के का ब्याह hai..kya करें अरे मन तो है पर तू समझता नहीं..

चाचा- अरे तो ले लो न क्या दिक्कत है.. कभी कभी तो चलता है कौनसा हम रोज़ लगते हैं. इतना ाचा मौका है

पापा- कुछ गड़बड़ हो गई तो?

Chacha-are कुछ नहीं होगा. हम सब संभल लेंगे..

और ये कहकर चाचा ने गाड़ी एक तरफ मोडली और 5 मीन्स बाद एक ठेके के बहार रुकी जिसपर से 5 मीन्स बाद hi चाचा हाथ मैं अख़बार में एक बोतल छिपा कर लाये..

और बैठते हुए पापा के हाथ में पकड़ा दी.

Papa-are तूने तो अधः बोलै था ये पूरी क्यों ले आया..

चाचा- अधः था hi नहीं. और सुनो सपेशल वाली है, बास नहीं मरती है.

पापा- हमें बना रहा है बॉस नहीं मरती… तू आज फंसवायेगा…

चाचा- नहीं फंसेंगे यार पिछली बार जब ममता और पल्ली मायके गए थे तब नहीं लगाई थी किसी को पता चला था क्या? और सच में बास नहीं मरती हमने सूंघा है.

पापा- अरे तो ज़रूरी है क्या तब नहीं चला तो अब भी नहीं चलेगा..

चाचा- अरे भैया बच्चों जैसे मत करो अब. इतना मस्त मूड बना है.

Papa-theek है मारो मत अब… पर चखने में क्या रखेगा?

पापा ने एक हलकी मुस्कान के साथ कहा.

चाचा- जे हुई न बात… बताओ क्या लें नमकीन ले लें या पकोड़े?

पापा- पकोड़े तो ठन्डे हो जायेंगे पर मज़ा भी पालक के पकोड़े के साथ hi है.

चाचा- ममता से बनवा लेंगे.

Papa-shaq नहीं होगा उसे की रात को अचानक पकोड़े की फरमाइश क्यों हुई.

Chacha-wo सब हम संभल लेंगे…

और ये कहकर चाचा ने जीप एक और जगह रोक दी…

और उतर कर गए थोड़ी देर में एक हाथ में पालक और बेसन और दुसरे में और सामान लेकर आकर बैठ गए सामान को पीछे रखा..

पापा- अरे सब्जी तो ठीक पर तू दवाई की दुकान पर क्या लेने गया था?

चाचा- अरे भैया अब पकोड़े बनवाएंगे तो रात में ममता को खुश भी तो करना पड़ेगा न.

चाचा ने एक शरारती मुस्कान के साथ कहा..

पापा भी हँसते हुए उन्हें झड़ते हुए बोले:- कभी कभी तो लगता hi नहीं तू एक जवान लड़की का बाप हो गया है.

जवान लड़की का जीकर होते hi चाचा की नज़रो के सामने पल्ली का बदन घूम गया पर फिर उन्होंने ध्यान हटाया और ऐसे hi बातें क करते दोनों आगे बढे और एक कपड़ो की दुकान पर गाड़ी रोकी और कुछ hi देर में दो थैलियां और जीप में राखी गयी.. और गाओं की और निकल पड़े.

गाओं पहुँच कर सबसे पहले जिससे जीप लेकर आये थे उसके यहाँ गए और जीप उसे दी.. पापा ने उसे कुछ पैसे देने चाहे पर उसने आपस की बात कहके मन कर दिए उसके बाद वहां से पैदल घर की और आते हुए दोनों आगे की तरकीब भिड़ने लगे.

Papa-sun ऐसा कर बोतल घर रख देते हैं तू बाकि सामान लेकर अपने घर जा और वहां बात संभल.. मैं बाघ जाकर जानवरों के काम निपटा आता हूँ.

चाचा- ठीक है तो बोतल तुम hi ले जाओ. हम जा रहे हैं घर.

Papa-theek है जब सब हो जाये तो आ जईओ. और सुन ध्यान रखियो किसी को शक न हो नहीं तो पता है न.

Chacha-are भैया तुम फ़िक़र न करो हम सब संभल लेंगे..

इसके बाद दोनों अलग हुए.. और अपने अपने रस्ते चल दिए…

पापा बाघ में पहुँच कर काम निपटने लगे वहीं चाचा अपने घर पहुँच कर चची को पटाने में लग गए. चची और पल्ली को चाचा ने एक एक थैली पकड़े जिसमे एक में एक सुन्दर सी साड़ी थी तो दूसरी में सूट.. जिसे देखकर hi दोनों खुश हो गए..

पल्ली- अरे वाह मैं तो ये सूट रमन भैया के तिलक में पहनूंगी कितना ाचा है न मम्मी?

म चची- हाँ ऋ बहुत खिल रहा है तुझ पर.

पल्ली- और तुम्हारी साड़ी भी बड़ी सुन्दर है मम्मी तुम कब पहनोगी?

म चची- अभी सोचा नहीं पर साड़ी तो सच में सुन्दर है.. मन्ना पड़ेगा तुम्हारी पसंद को पल्ली के पापा..

चाचा अपना दांव सही पड़ता देख मन hi मन खुश हो रहे थे और बोले- ाचा तुम लोगो को तो कपडे मिल गए हमारा क्या?

म चची- तो तुम अपने लिए भी ले आते लाये क्यों नहीं.

Chacha-are हमें शोक नहीं कपड़ो का.

Palli-to फिर क्या चाहिए तुम्हे पापा?

चाचा- अरे हमें क्या चाहिए कुछ नहीं बस आज मन है की पालक के पकोड़े मिल जाएं, भैया भी छह रहे थे तो बस साथ बैठ कर खा लेंगे.

म चची- ाचा भाई साहब का नाम लेकर अपना काम बना रहे हो, वैसे अपना भी लोगे तब भी मिल जायेंगे.. पल्ली जा बेसन खरीदले दुकान से.

Chacha-are लाये हैं सब हम, बेसन पालक देखो उस थैले में है.

म चची- देखो तो सब ले आये हैं और बन कैसे रहे थे की मन कर रहा है मिल जाएं तो… जा पल्ली पालक और बेसन तैयार कर मैं आकर सकती हूँ.

पल्ली- ठीक है मम्मी. पल्ली ये कहकर ख़ुशी से भाग गयी सामान उठाकर

मौका पाकर चाचा ने चची को बाहों में जकड कर अपनी जेब से एक छोटी सी इतर की बोतल उनके हाथों में थमा दी और बोले लो अब तुम और महकेगी.

म Chachi-are क्या बात है आज तो पूरा बाजार hi उठा लाये क्या ऐसा क्या है आज?

चाचा- अरे बस मन हुआ तो ले लिए और कल तुम्हारे भैया के यहाँ भी जाना है इसलिए ले आये की हमारी बीवी वहां सबसे ज़्यादा सुन्दर लगे और महके भी..

म चची- क्या बात है ग बड़े अलग अलग मूड में लग रहे हो ग?

र चाचा- अरे मूड तो रात को बनेगा hi मेरी रानी..

और ये कहते हुए चाचा ने अपनी जेब से एक छोटी सी डिबिया निकल कर चची के हाथ में पकड़ा दी..

चची- ीमे का है.

चाचा- शिलाजीत है हमारे खाने में मिला देना..

चची- है दिया आज तो मार डालने का इरादा है..

चाचा- नहीं तुम्हारी मरने का..

इनकी बातें चल hi रही थी की पीछे से पल्ली की आवाज़ आई और चची चाचा से छूटकर रसोई में भागी.

वहीं चाचा अपना काम बनते देख खुश हो रहे थे.. अपने कमरे में जाकर उन्होंने कपडे बदले और बहार आकर इंतज़ार करने लगे

दूसरी और पापा ने भी सरे जानवरों को खाना वन खिलाया और उन्हें अंदर बंधा, और जल्दी से बोतल थामे घर की और चल दिए हालाँकि वो दिखा नहीं रहे थे पर उत्सुकता उनके अंदर भी हो रही थी आज पीने की ऐसा नहीं की दोनों hi पीने के आदि थे पर जब भी महीने चार महीने में मौका मिलता था तो छुप के लगा लेते थे और ये बात सिर्फ ये दोनों hi जानते थे.

जब तक पापा घर पहुंचे और कपडे बदल कर हाथ वाथ धो कर खाट लगाकर बैठे तब तक चाचा के यहाँ से मस्त पकोड़ों की खुशबु आने लगी थी.

चची पकोड़े सेक रही थी और पल्ली अपनी मम्मी की मदद कर रही थी… तभी चची को याद आया की उन्होंने शिलाजीत की डिबिया कहाँ रखड़ी कहीं पल्ली को न मिल जाये.. उन्होंने नज़र इधर उधर दौड़कर देखा तो पाया की पल्ली के बगल में hi स्लिप पर राखी हुई थी..

चची ने पल्ली को पानी लेने के बहाने पीछे भेजा और उसके जाते hi चची ने डिब्बी उठाई और खोली तो देखा डिब्बी आधी खली थी, उन्हें थोड़ा अजीब लगा की नयी डिबिया आधी खली कैसे है.. पर पल्ली न आकर देखले इस वजह से उन्होंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया और साथ hi डिबिया को उठाकर अपने पल्लू में बांध लिए.

पर चची को ये नहीं पता था की ये शिलाजीत की डिबिया आधी खली कैसे हो गयी.. पर हुआ ये था की पकोड़े की चटनी बनाते हुए पल्ली की नज़र स्लिप पर राखी एक डिबिया पर पड़ी थी और उसने खोल के देखा तो उसे लगा पापा पकोड़े के लिए hi कोई मसाला लाये हैं और ये hi सोचकर उसने आधी डिबिया को पकोड़े की चटनी में खली कर दिया और अचे से मिला दिया. अब आगे ये शिलाजीत वाली चटनी क्या गुल खिला सकती है ये देखने लायक होगा…

खैर कुछ देर बाद पकोड़े बनकर तैयार थे.. तो थोड़े पकोड़े और चटनी अलग करके चची ने अपने और पल्ली के लिए रख लिए बाकि के बर्तन में रखकर चाचा को दे दिए…

चची- और कुछ भी चाहिए हो तो बताओ..

Chacha-nahi नहीं बस इतना बहुत है, हाँ सुनो भैया अकेले हैं तो थोड़ा सा उनके पास hi बैठेंगे सोने के टाइम तक आ जायेंगे..

चची- ठीक है देखना पर ज़्यादा देर मत करना…

चाचा- नहीं नहीं जल्दी आएंगे हम..

चाचा ने ख़ुशी ख़ुशी पकोड़े चटनी ली और बड़ी उत्सुकता से घर से निकल गए…

एक मिनट बाद hi वो कर्मा के घर में थे जहाँ पापा पहले से तैयार थे,

चाचा ने अंदर आते hi पुछा- कहाँ है जुगाड़ भैया?

पापा- पहले ये बता किसी को शक तो नहीं हुआ,

Chacha-are बिलकुल नहीं भैया पहले hi सारा जुगाड़ करके आये हैं हम. कपडे देखकर दोनों खुश हो गए.. अब ये बताओ कहाँ बैठना है..

पापा- छत पर चल वहीं बैठेंगे.

Chacha-haan ये सही रहेगा.. सीधा आकर कोई देख भी नहीं सकता.. सामान ले चलें खत वगैरह..

पापा- अरे सब है वहां मैंने चादर उसके ऊपर गद्दा बिछा रखा है साथ hi गिलास वगेरा भी हैं..

चाचा- अरे वाह भैया तुमने तो पूरा इंतेज़ाम कर रखा है.. चलो फिर.

Papa-haan चल…

और दोनों छत पर जाकर बैठ जाते हैं. चाचा बड़ी फुर्ती से पकोड़े वगेरा निकलकर रखते हैं चटनी सजाई जाती है. छत के hi सीढ़ियों के कोने पर लगा बल्ब अछि खासी रौशनी दे रहा था..

सारा सामान अचे से लगाने के बाद चाचा बोतल निकलते हैं अख़बार से और ऐसे खुश होते हैं जैसे किसी कमसिन काली को पहली बार नंगा कर रहे हो…

चाचा- कितना समय हो गया न भैया.. जब पिछली बार बैठे थे..

पापा- हाँ रे तबसे कभी मौका hi नहीं बना…

चाचा ने छोटे होने का फ़र्ज़ निभाया और जल्दी से दोनों गिलास में थोड़ी दारू और पानी का ऐसा घोल तैयार किआ जिसे अक्सर जाम के नाम से जाना जाता है..

दोनों ने एक एक गिलास को उँगलियों से थमा और मुस्कुराते हुए पीने की जो वर्षों पुराणी परंपरा का पहला उसूल है की पीने से पहले जाम को टकराना होगा उसका पालन किआ… और फिर चाचा ने किसी प्यासे की तरह जिसे न जाने कबसे पानी न मिला हो उस गिलास को होंठों से लगा लिया और मुँह बनाते हुए एक hi सांस में पूरा जातक गए..

पापा- अरे थोड़ा आराम से इतनी भी क्या जल्दी चाचा- क्या करें भैया पहला था न रुका hi नहीं गया…

पापा- बिलकुल बेसब्र है तू.. ले कुछ खता भी रह साथ में नहीं तो ज़्यादा चढ़ जाएगी..

चाचा- हाँ हाँ तुम भी लो भैया..

पापा ने भी जाम उठाकर होंठों से लगाया और एक घूँट मारा साथ hi एक पकोड़े को चटनी से भिगाया और उसका भी निवाला लिए.

चाचा जैसे पहला जैम जातक कर थोड़ा शांत हुए और अपनी बीवी के बनाये हुए पकोड़ों का आनंद लेने लगे.

पापा- कुछ भी कहो पकोड़े मस्त बने हैं.

चाचा- और भैया साथ hi ये चटनी भी कमाल की है. कमाल कर दिया ममता रानी ने.

पापा- घर के खाने की बात hi कुछ और है.

चाचा- ये तो लाख रुपये की बात की है भैया तुमने.

ऐसे hi बातों के बीच दोनों धीरे धीरे जाम बनाकर पीते जा रहे थे.. साथ hi पकोड़े भी चल रहे थे थोड़ी hi देर में दोनों पर ाचा सुरूर था… दारू अपना दम खुम दिखा रही थी.

चाचा- भैया हम दिल से बताएं तो इस दुनिया में तुमसे ज्यादा इज्जत कई की नहीं करते.

पापा- हमसे ज्यादा अचे से तेरी लुगाई भी नहीं जानती होगी तुझे.. ये भी तो बात है..

चाचा- बिलकुल सही भैया हम क्या हैं तुमसे बेहतर कोई नहीं जानता..

पापा- हाँ हम जानते हैं तुम कितने हरामी हो.

चाचा- अब का करें भैया हो जाता है कभी कभी… वैसे हरामी बनाने वाले भी तुम hi हो..

पापा- अरे हम कैसे बनाये तुम्हे हरामी तू पहले से hi है. भूल गया वो मंजू भाभी वाली बात.

Chacha-are वो तो बहुत पुराणी बात है बचपना था तब.

पापा- मूंछ आ गयी थी भर भर के और बचपना बता रहा है.. याद है मुझे पहले जब घरों में व्यवस्था नहीं थी तो हलकी होने औरतें खेतों में जाती थी और जब मंजू भाभी नयी नयी ब्याह के आई थी तो तब तुझे मैंने उनके नंगे चूतड़ों को चुपके देख कर अपनी नुन्नी हिलाते हुए पकड़ा था..

चाचा- ाचा इतनी पुराणी बात बोल रहे हो तो पूरी बात कहो न की पकड़ने के बाद मुझे रोकने की जगह तुमने क्या किआओ नहीं याद?

पापा- अरे चल वो तो ऐसे hi.

चचा- ऐसे hi क्या भाभी के चूतड़ों को देख कर तुम भी तो अपनी नुन्नी निकल कर हिलने लगे थे..

पापा- नुन्नी होगी तुम्हारी हमारा तो लुंड है… और क्या करते क्या गोल मटोल गांड थी यार रहा hi नहीं गया…

चाचा- वाह भैया हमारी नुन्नी तुम्हारा लुंड.. ये कौनसी बात हुई… वैसे भैया कांड तो तुमने भी काम नहीं किये..

पापा- चल चल हमने क्या किआ..

चाचा- ज़्यादा भोले मत बनो.. हम तो भाभी की गांड देखकर हिलाते थे तुम तो…

Papa-hum तो क्या…

चाचा- मुँह न खुलवाओ भैया हमारा.. हमने आज तक किसी को बोलै नहीं है..

Papa-aisi कौनसी बात है जो तूने किसी को नहीं बताई आज तक..

Chacha-are छोडो..

Papa-are बता तो..

चाचा- सही में बोलेन मुँह तो नहीं बनाओगे.

पापा- अरे झतु तुम्हारी बातों से भी मुँह बना है कभी हमारा…

चाचा- तो सुनो

चाचा थोड़ा सा आगे झुककर बहुत धीरे से बोले..:- जो तुम अपनी मौसी के सोने पर उनके चूतड़ों पर अपना रास गिरते थे न वो हमें पता है..

ये सुनकर पापा की तो आँखें बड़ी हो गयी वो तो दारू का नशा था जो झटका थोड़ा हल्का laga.par फिर भी खुद को बचने की आखिरी कोशिश करते हुए नज़रें छुपकर बोले

पापा- ऐसा कुछ नहीं है… तू कुछ भी मत बोल..

चाचा- ाचा हम कुछ भी बोल रहे हैं या तुम मुकर रहे हो भैया.

पापा- हमने ऐसा कुछ किआ hi नहीं..

चाचा- अरे अपनी आँखों से देखा है हमने और वो भी एक बार नहीं…

पापा ने कुछ सोचा फिर हार मानते हुए बोले- ाचा हम मानते हैं की हम मौसी के चूतड़ों को देखकर हिलाते भी थे और उनके ऊपर झड़ते भी थे… पर तूने कब और कैसे देखा?

चाचा- जे हुई न बात. हम बताते हैं.

चाचा ऐसे बोले जैसे जीत मिल गयी हो…

चाचा- तुम्हे याद है जब तुमने हमें मंजू भाभी वाली बात पर पकड़ा था उसके बाद से हम रोज़ सुबह छुपकर उनकी गांड देखते थे और हिलाते थे.

पापा- हाँ.

चाचा- तो एक दोपहर को हम खेत से घर आ रहे थे तो भाभी को हाथ में लोटा लिए जाते हुए देखा .हम समझ गए की भाभी हलकी होने जा रही हैं

तो सोचा क्यों न गांड दर्शन किये जाएं और इसी लिए हम तुम्हे बुलाने चल दिए.. तुम्हारे घर पर पहुँच कर हम हमेशा की तरह धड़ल्ले से घुसता चला गया देखा आंगन में कोई नहीं था… तो एक कमरे में झाँका और वहां भी कोई नहीं था फिर तुम्हारी मौसी के कमरे में झाँका तो देखा तुम खत के किनारे खड़े हुए थे मौसी एक करवट पर सो रही थी तुम्हारा निक्कर घुटनो में लटका हुआ था और तुम्हारा हाथ तुम्हारे लुंड पर चल रहा था…

पहले तो हमें बड़ा अजीब लगा की तुम मौसी के साथ ये सब क्यों पर लुंड हमारा भी तन गया तभी तुम्हारे लुंड से धार निकली और मौसी की साड़ी पर गिरने लगी.. और तुमने अपना पूरा रास मौसी की गांड पर गिरा दिया उसके बाद झुककर अपनी निक्कर जब ऊपर करने लगे तो हम वहां से भाग लिए.

पापा- अबे सेल बड़ा हरामी निकला तू… हम तो सोचते रहे की ये किसी को भी नहीं पता.

चाचा- और क्या उसके बाद तो हम इसी मौके की तलाश में रहते की कब मौसी सोएं और कब तुम्हारा कांड देखने को मिले.

पापा- वो सब तो ठीक है तूने ये बात किसी को बताई तो नहीं.

चाचा- कसम से भैया ये राज अभी तक हमारे सीने में सीमेंट की तरह जमा हुआ है.

पापा- तू हमारी जान है.

चाचा- पर भैया ये बताओ की मौसी ने कभी तुम्हे पकड़ा नहीं क्या?

पापा- नहीं यार कभी नहीं कई कई बार तो हमें लगता था मौसी जगी हुई हैं और सब जानती हैं. पर उन्होंने कभी कुछ खुद से कहा नहीं और उससे आगे बढ़ने की कभी हमारी हिम्मत हुई नहीं.

चाचा- धत्तत्त ाचा खासा मौका छोड़ दिया.

पापा- क्या मौका छोड़ दिया.

चाचा- अरे जब मौसी ने कुछ नहीं बोलै तो आगे कोशिश करनी चाहिए थी न… क्या पता जुगाड़ हो जाती.

पापा- पागल हो क्या आगे क्या जुगाड़ करते मौसी थी वो हमारी.

चाचा- ाचा मौसी थी तो उनके चूतड़ों पर क्यों झड़ते थे.

पापा- वो तो बस ऐसे hi.

चाचा- ऐसे hi नहीं बताओ बताओ.

पापा- अरे क्या बताएं यार मौसी का बदन देखते थे तो न जाने क्यों बदन सनसना जाता था और लुंड तन जाता था एक बार उन्हें नहाते देख लिए था बस तबसे hi ये सब शुरू हो गया था.

चाचा- ये बात तो है क्या गदराया बदन था उनका.. बिलकुल जैसे अभी मंजू भाभी का है.

पापा- अबे मंजू भाभी का नाम क्यों ले दिया… लुंड खड़ा हो गया.

पापा ने पाजामे के ऊपर से hi लुंड को मसलते हुए कहा.. जो की बिलकुल लोहे जैसा कड़क हो रखा था..

चाचा- अरे लुंड तो भैया हमारा भी खड़ा हो गया. मंजू भाभी चीज hi ऐसी हैं.

चाचा ने भी पापा की नक़ल करते हुए वैसा hi किआ..

अब दोनों को लग रहा था मंजू भाभी की और मौसी की यादों की वजह से उनका ये हाल है.. अब दोनों अंदर दे कितने ठरकी थे ये आप देख hi चुके हैं उसपर मिल गया दारू का साथ और रही सही जो कसार थी वो शिलाजीत ने पूरी कर दी.

पापा- तूने मेरा राज संभल कर रखा तो इनाम में तुझे मैं एक राज की बात और बताता हूँ.

चाचा- हैं कोई और राज भी छुपाये बैठे हो क्या. बड़े हरामी हो भैया. हेहेहे

पापा- अरे सुनेगा या दन्त hi निपोरेगा..

चाचा- हाँ सुनाओ न. किसके बारे में है..

पापा- सुन अभी दो दिन पहले मैं कर्मा और मंजू भाभी बाजार गए थे याद है..

इधर जहाँ कर्मा के पापा अपनी और मंजू तै की काम लीला की कहानी चाचा को सुना रहे थे..

दोस्तों अपडेट कफी लम्बा है तो एक बार में पोस्ट नहीं हो रहा इसलिये तीन पार्ट्स में कर रहा हूँ अगला PaRt भी ज़रूर देखें.

धन्यवाद्
 
अपडेट 127 (बी)

वहीं दुसरे घर में ममता चची और पल्ली पकोड़े वगेरा खा चूक थे साथ hi रसोई का काम भी निपट चूका था.. दोनों माँ बेटी ने मिलकर कल जाने के लिए थैले भी तैयार कर लिए थे.

पल्ली- मम्मी सारा काम हो गया अब मैं कपडे बदल लूँ खुजली सी हो रही है.

म चची- ठीक है बदल ले बिटिया मैं दूध गरम कर दूँ तब तक..

पल्ली- ठीक मम्मी.

इसके बाद पल्ली कपडे बदलने चली जाती है और चची चूल्हे पर दूध चढ़ा देती हैं…

इधर पल्ली कपडे बदलकर आती है और क्यूंकि सिर्फ सोना था तो उसने एक पुराणी टीशर्ट और नीचे पजामा पहन लिए बिना किसी अंतवस्त्र के..

जब तक पल्ली आती तब तक ममता चची ने दूध उबाल लिए था और तीन गिलास में भर दिया था… और फिर चुपके से एक गिलास में साड़ी में बंधी डिबिया निकली और बड़ी सावधानी से शिलाजीत को दूध में मिला दिया और उस गिलास को थोड़ा अलग रख दिया..

और फिर पल्ली को आवाज़ लगाई जो अगले hi पल रसोई में आ गयी..

चची-. ले बीटा दूध पि ले

चची ने एक गिलास उसकी और बढ़ा दिया..

पल्ली ने हमेशा की तरह मुँह सिकोड़ते हुए दूध पि लिए..

म चची- अब ये न जाने कब आएंगे दूध दोबारा ठंडा हो जायेगा.

पल्ली- तो वहीं दे आती हूँ न मम्मी.

म चची- हाँ नही नहीं वहां क्या देने जाएगी.

चची ने कुछ याद करते हुए कहा..

पल्ली- अरे नहीं क्या ठंडा हो जाये इससे अच्छे अभी दे आती हूँ 5 मिंट का काम है.

चची ने कुछ सोचा और बोली- ठीक है दे आ पर धयान से सुन ये गिलास तेरे पापा का है और ये भाई साब का.

पल्ली- इसमें अलग अलग क्या है तो दोनों में दूध hi..

म चची- अरे भाई साब वाले में काम चीनी है जबकि तेरे पापा को ज़्यादा मीठा पसंद है. इसलिए. अब बता बिना गड़बड़ के दे आएगी न..

पल्ली- अरे हाँ मम्मी ऐसे बोल रही हो जैसे न जाने कितना बड़ा काम हो.

म चची- ाचा मेरी माँ जा तू मैं पेशाब से होकर आती हूँ.

पल्ली- ठीक है. जाओ.

इतना कहकर चची तो चली गयी पल्ली ने भी दोनों गिलास हाथ में उठाये और उठाते hi बापिस रख दिए.

पल्ली- बाप रे बड़े गरम हैं हाथ जल जायेगा. एक काम करती हूँ डोलची में ले चलती हूँ. पर अलग अलग कैसे ले जाउंगी.

अरे ये मम्मी भी न सब पि लेंगर ताऊ जी मीठा काम मीठा एक hi में कर लेती हूँ.

इसके साथ hi पल्ली ने दोनों गिलास के दूध को डोलची में पलट लिए और दोनों गिलास हाथ में लेकर डोलची तंग कर निकल पड़ी.

वहीं छत पर पापा और मंजू तै की कामलीला सुनकर चाचा का बुरा हाल था.

चाचा- अरे भैया क्या बवाल सुना दिया लुंड साला ठुमके लगा रहा है. यकीन नहीं हो रहा की तुमने अपना लोढ़ा चुसवा लिए मंजू भाभी से.

पापा- अरे यकीन करो तुमसे झूठ थोड़े hi बोलेंगे.

चाचा- ये लो इसी बात पर आखिरी है.

पापा ने भी आखिरी जाम को पकड़ा और दोनों ने जातक लिए.

चाचा- भैया मज़ा आ रहा है. खासकर तुम्हारी और मंजू भाभी वाली बात सुनकर. लुंड फटने को हो रहा है.

पापा- यही हाल हमारा भी है. याद करते hi लुंड झटके खाने लगा.

चाचा के सर पर भी सुरूर चढ़ा हुआ था.

चाचा- भैया तुमने हमें अपना राज बताया अब एक राज की बात हम बताएँगे तो तुम्हारे कान खड़े हो जायेंगे

पापा- ऐसा क्या राज है तेरा.

चाचा- अरे सुनोगे?

पापा- हाँ बोल तो सही.

चाचा- सुनो… तुमने तो सास से लुंड hi चुसवाया है, हम तो बहु की बजा भी चुके.

Papa-matlab ठीक से बता.

चाचा- अरे मंजू भाभी की बहु, भग्गा की बहु..

पापा- चल बना रहा है हमें.

चाचा- तुम्हारी कसम भैया.

पापा- अरे वो तो बड़ी कासी हुई चीज़ है यार सच में छोड़ दिया तुमने उसे.

चाचा- हाँ भैया सच में

पापा- कब कैसे बता जल्दी.

चाचा- वो क्या हुआ कुछ दिन पहले.

और इसके बाद चाचा ने उनके और प्रेमा भाभी के बीच हुई चुदाई की पूरी कहानी सुनादि बस इतना बदलकर की वो ममता चची समझ उनके पास लेते थे न की पल्ली.

पापा भी लुंड दबाते हुए बड़ी उत्सुकता से सुन रहे थे. और जब बात ख़त्म हुई.

पापा- वाह भाई ये तूने कमाल का काम किआ है.. बहुत hi चोखी बहु की ले ली. उसका तो सब कुछ गदराया हुआ है.

चाचा- वो सब तो ठीक है भैया. बस एक दुःख है.

पापा- कैसा दुःख?

चाचा- तुम छोड़ नहीं पाए भाभी को.

पापा- अरे उसमे दुःख क्या आने दे बापिस इस बार मौका मिलते hi तंग देंगे लुंड पर.

चाचा- ये बात.. पर भैया हमें न भूल जाना . मंजू भाभी के हम आपसे पहले के आशिक़ हैं.

पापा- ाचा तो जरा हमारी भी जुगाड़ कर बहु की ठीक से मुँह दिखाई कर सकें?

चाचा- सिर्फ मुँह दिखाई या ठुकाई.

हेहेहे..

चाचा- वैसे मज़ा तो तब आएगा भैया जब हम दोनों सास बहु दोनों hi हमारे लोदों पर उछाल रही होंगी..

पापा- अरे सपने मत दिखा रात का जुगाड़ भी नहीं है हमारे पास.

चाचा- वैसे भैया काम तो रज्जो भाभी भी नहीं हैं.. छुछियां देखो जैसे बड़े बड़े पापीती..

पापा- उसकी छुछियां के भर के नीचे hi तो दीन्या दबा जा रहा है..

चाचा- हाहाहाहा भैया सही बोले हो.

ये सब बातें hi चल रही थी की नीचे से आवाज़ आई:- पापा??? ताऊजी,?

और दोनों hi उछाल पड़े और अकस्मात् hi के मुँह से निकल गया

चाचा- हाँ पल्ली?

पापा- अरे पल्ली आ रही है बोतल छुपा जल्दी से.

चाचा ने नशे में किसी तरह से बोतल को गद्दे के नीचे घुसा दिया..

पल्ली अपने पापा की आवाज़ छत से आती सुनकर छत की और चल पड़ी और छत पर जाकर देखा तो चाचा और पापा दोनों गद्दे पर बैठे हुए थे पल्ली को थोड़ा अजीब लगा.

पल्ली- तुम लोग ऊपर क्यों बैठे हो?

चाचा- आ गयी बीटा आजा.

पापा- अरे वो ऐसे hi मन किआ तो ऊपर hi बैठ गए.. तू बता खाना पीना हो गया

पल्ली- हाँ ताऊजी खाना पीना क्या अब पकोड़े खा कर किसका मन करेगा खाने का इसलिए और कुछ नहीं बनाया.

पल्ली ने उनके पास आते हुए कहा..

पापा- सही किआ इन्ही से पेट भर गया.

चाचा और पापा दोनों hi पूरी कोशिश कर रहे थे बिलकुल साधारण रहने की.. पर दारू अपना पूरा असर दिखा रही थी..

इतने में पल्ली पास आ गयी और बोली- पापा और कितनी देर रुकोगे मम्मी ने तुम दोनों लोगो के लिए दूध भेजा है.

चाचा- हैं . बस थोड़ी देर और बीटा..

Papa-haan बीटा बस 5 मिंट.

पल्ली वहीं घुटनो पर बैठ गयी और दोनों के लिए दूध निकला.. इतने दोनों आपस में आँखों से न जाने क्या इशारे करते रहे..

पल्ली- लो ताऊजी दूध और ये रहा तुम्हारा पापा..

पहले से चटनी में मिली शिलाजीत खा चुके दोनों लोगो को पल्ली ने शिलाजीत मिला हुआ दूध और दे दिए.

अब चाचा और पापा ये छह रहे थे की पल्ली जल्दी से जाये और उसके लिए उनका दूध पीना जरुरी था क्यूंकि उसके बिना वो बिलकुल नहीं जाती.

पापा ने चाचा को इशारा किआ की जल्दी से गदक ले और पल्ली को भेजे और इसी के साथ दोनों ने सांस रोक के गिलास साफ़ कर दिए…

पल्ली- अरे वाह बड़ी जल्दी पि लिए.. लाओ दो मैं ले जाती हूँ..

और पल्ली जैसे hi गिलास लेने आगे हुई उसका घुटना गद्दे में किसी चीज़ से टकराया.

उसने मन में सोचा ये क्या है और तुरंत पीछे होकर गद्दा उठाकर हाथ डाला और जो हाथ आया उसे पकड़ कर बहार निकल लिए देखा तो पल्ली की नज़रें बड़ी हो गयी और पल्ली के हाथ में बोतल देखकर चाचा और पापा की.

पल्ली- ाचा तो ये हो रहा था छत पर इसके लिए पकोड़े बनवाये थे.. अभी मम्मी को बताती हूँ.

चाचा- अरे बीटा ऐसा नहीं है मेरी बात सुन तो.

पल्ली बोतल ले कर कड़ी हो गयी और बोली- अब जो भी सुनना मम्मी को सुनना.

और इसके साथ hi जाने लगी.

Papa-beta पल्ली सुन तो..

पल्ली- ताऊजी तुम्हारी शिकायत तो मैं तै से करुँगी.

Papa-are बैठा क्या है जा रोक न उसे.

चाचा- हाँ हाँ भैया .

चाचा किसी तरह खड़े हुए और पल्ली जो सीढ़ियों तक पहुँच चुकी थी उसे रोकने के लिए लड़खड़ाते हुए उसके पीछे भागे..

पल्ली भी अपने पापा को अपनी तरफ आता देख हँसते हुए भागी..:- पापा अब कोई फायदा नहीं अब तो ये बात मम्मी को पता चलेगी hi..

चाचा- पल्ली मेरी गुड़िया रुक तो सही. मेरी बिटिया सुन न.

पल्ली आगे आगे सीढ़ियों से उतर रही थी और चाचा उसके पीछे..

पल्ली सीढ़ियों से उतारकर खिलखिलाते हुए आंगन में भागने लगी और बोतल दिखा दिखा कर चाचा की चिढ़ा रही थी.

चाचा लड़खड़ाते हुए उसके पीछे उससे रोकने को बोल रहे थे.

आंगन में भागते हुए पल्ली माँ पापा के कमरे में घुस गयी…

उसके पीछे पीछे चाचा भी..

पल्ली बीएड के किनारे भाग रही थी तो चाचा भी उसके पीछे और फिर एक दीवार के सामने जाकर पल्ली को रुकना पड़ा.

चाचा- बीटा वो बोतल दे दे… और अपनी मम्मी से कुछ नहीं कहना.

पल्ली- ाचा ऐसे कैसे न कहूं

और पल्ली ने चाचा को हटाकर उनके बगल से भागने की कोशिश की.

पर चाचा ने फुर्ती दिखते हुए उसे पीछे से पकड़ लिए..

और एक हाथ से उसे जकड कर दुसरे हाथ से उसके हाथ से बोतल छीनने की कोशिश करने लगे… इसी तरह से खुद को और बोतल को बचने के चक्कर में पल्ली आगे को झुक गयी और बोतल को चाचा की पकड़ से और आगे कर दिया.

चाचा भी आगे होकर बोतल पकड़ने की कोशिश करने लगे… अब आलम ये थे की पल्ली आगे को झुकी हुई थी और उसके पीछे से उससे चाचा चिपके हुए थे और बोतल पकड़ने की पूरी कोशिश कर रहे थे..

चाचा ने ऐसे बात न बनते देख अपना हाथ जो बोतल के पास था उसे थोड़ा सा पीछे ले आये और प्यार से बोले:- पल्ली मेरी गुड़िया दे दे न बोतल तू तो मेरी प्यारी बेटी है न.

और ये बोलकर चाचा उसको मानाने के लिए उसकी कमर को सहलाने लगे .

पल्ली- और जो तुम लोग कर रहे हो पापा वो गलत है न एक तो दारू पि रहे हो और वो भी सबसे झूठ बोलकर.

चाचा- बच्ची इस बार माफ़ करदे आगे से ऐसा कभी नहीं होगा…

चाचा के हाथ कमर से होते हुए अब पल्ली के पेट को सहलाने लगे… उनके मन में पल्ली को मानाने के साथ साथ और भी भाव आने लगे.

जब उन्हें अपनी अवस्था का एहसास हुआ और हाथों में बेटी के मखमली बदन का एहसास होते hi.. चाचा के शरीर में खून तेज़ी से दौड़ने लगा..

लुंड जो पल्ली द्वारा देखे जाने पर दर से थोड़ा सा ढीला हो गया था वो बिलकुल अकड़ गया और क्यूंकि वो पीछे से पल्ली से चिपके हुए थे तो उनका कड़क लुंड उनकी बेटी के गोल मटोल भरे हुए चूतड़ों में चुभने लगा.

पल्ली को जैसे hi अपने चूतड़ों पर कुछ चुभा उसे एक पल न लगा समझने में की ये उसके पापा का लुंड है और ये एहसास होते hi पल्ली की छूट भी गीली होने लगी साथ hi उसके शरीर में करंट सा दौड़ गया…

चाचा के हाथ पेट को सहलाते हुए धीरे धीरे से ऊपर होकर उनकी बेटी की लटकती हुई बड़ी बड़ी छूछीयों पर आ गए और वो हलके से hi कपडे के ऊपर से hi उन्हें सहलाने लगे..





जिसका असर सीधा पल्ली की छूट पर हुआ जो की पानी बहाने लगी वहीं चाचा का लुंड भी ठुमके लगाने लगा अपनी बेटी के चूतड़ों में हाथ में बेटी की भरी हुई छूछीयो के एहसास से चाचा गंगना गए.. बाकि अब शिलाजीत और दारू का भी पूरा असर हो रहा था. चाचा ये भूलते जा रहे थे की वो यहाँ इस हालत में हैं किस लिए.

पल्ली तो वैसे भी कई दिनों से न छोड़ने के कारन ऊपर से अपने पापा के साथ दोबारा इस हालत में होने की वजह से और उत्तेजित हो रही थी वो भी बाकि सब भूल कर अपने पापा के लुंड को अपने चूतड़ों पर और हाथों को छूछीयो पर महसूस मदहोश होने लगी.

चाचा पर अब नशा और उत्तेजना पूरी तरह हावी हो गए और उन्होंने पल्ली के कान में बोलै- बीटा मम्मी को बताना मत..

अब ये बात उन्होंने दारू के लिए बोली या जो वो कर रहे हैं उसके लिए.. वो hi जानें..

अपने पापा की बात सुनकर पल्ली ने बस सर हिलाया और फिर क्या था चाचा ने वैसे hi झुके झुके hi हाथों से खींचकर पल्ली की टीशर्ट के गले को नीचे सरका दिया और पल्ली की दोनों बड़ी बड़ी छुछियां बहार लटक गयी जिन्हे अगले hi पल चाचा ने अपने हाथों में भर लिए और मसलने लगे.





पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पापा..

चाचा तो जैसे अपनी बेटी की नंगी छूछीयो का एहसास होते hi पागल हो गए और तुरंत पल्ली को पकड़ कर घुमा लिए पल्ली के हाथों से बोतल छूट कर बीएड पर गिर गयी..

अब पल्ली और चाचा आमने सामने हो गए… और चाचा ने बिना किसी देरी के अपने सर को झुककर अपनी बेटी की छुच्छी को मुँह में भर लिए… और चूसने लगे. दुसरे हाथ से दूसरी को मसलने लगे..

पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पापा ुहम्मम्मम्मा मज़ाआ आए रहा हैईईई आईसीईई hiiiiiiiiiii..

दोनों तरफ से कोई विरोद नहीं था… बल्कि उत्सुकता थी.. पल्ली अपने हाथों को चाचा के सर पर घुमा कर अपने पापा को और ज़ोर से चूसने के लिए उकसा रही थी.. वहीं चाचा को तो जैसे जन्नत मिल गयी थी…

चाचा का लुंड इतना फूल गया था शिलाजीत के कारन की फटने की हालत में था और चाचा को दर्द हो रहा था..

चाचा ने एक पल के लिए अपने मुँह को पल्ली की छुच्छी से हटाया और दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए उसकी टीशर्ट के छोर को पकड़ा और पल्ली के सर के ऊपर से निकल दी.. और पल्ली ऊपर से नंगी हो गई.. चाचा का मुँह बापिस पल्ली की छुच्छी पर लग गया. और चूसने लगे साथ hi उनके हाथ पल्ली की चिकनी कमर से होते हुए पल्ली के चूतड़ों पर पहुँच गए और पाजामे के ऊपर से hi मसलने लगे…

पल्ली तो अपने पापा की हरकतों से उत्तेजना के नशे में बाह रही थी. पापा के हाथ उसके चूतड़ों को आते की तरह गूंथ रहे थे… होंठ छूछीयो को चूस रहे थे… वहीं नीचे चाचा के लुंड का बुरा हाल था टोपा सूज चूका था और उसी कारन चाचा ने पल्ली किरासीली छूछीयो से मुँह हटाया और नीचे झुककर पल्ली के पाजामे की लास्टिक में हाथ फंसाये और नीचे सरका दिया अगले hi पल पल्ली अपने पापा की आँखों के सामने पूरी नंगी कड़ी थी ..

पल्ली को नंगा बदन देख चाचा की आँखों में चमक आ गयी और कुछ पल तो वो ऐसे hi अपनी बेटी के नंगे कातिलाना बदन को घूरते रहे… हर सांस के साथ ऊपर नीचे होती हुई छुछियां… चाचा यूँ hi मंत्र मुग्धा होकर देखते hi रहते पर उनके लुंडके दर्द ने उनका ध्यान भांग किआ और चाचा ने पल्ली को पीछे धकेल कर बिस्तर पर गिरा दिया साथ दोनों टैंगो को पकड़ कर फैला दिया और झुककर बैठ गए

चाचा के सामने उनकी बेटी की छूट आ गयी क्या खूबसूरत छूट थी… हलकी हलकी रुए जैसी झांटें, नीचे तना हुआ छूट का दाना और गीले रसीले छूट के होंठ जो ये गवाही दे रहे थे की उनकी बेटी भी उनकी तरह hi गरम हो चुकी है.. चाचा के मुँह में बेटी की छूट को देखकर पानी ा रहा था और मन में कई ख्याल की ये उनकी अपनी बेटी की छूट है… उनका अपना खून

और चाचा से और नहीं रुका गया और झुककर उन्होंने अपने होंठ पल्ली की छूट के होंठों पर लगा दिए..

पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहम्मम्मम्मा पापाआआअह्ह्ह्हह्हह hiiiiiiiiiii…

चाचा जीभ निकल कर पल्ली की छूट को टटोलने लगे… चाटने लगे.. अपनी बेटी की छूट के स्वाद का आनंद लेने लगे.

इससे पहले जब भी पल्ली और उनके बीच कुछ हुआ था या तो ूँजने मैं या अचानक से पर आज दोनों की hi मर्ज़ी सेहो रहा था.

पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पापा कहा जोऊ मेरिइइइइइ छूट कोह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह्हह पापाआआअह्ह्ह्हह्हह अंदर तक दालुओ…

चाचा पल्ली की हर एक बात को मानते हुए उसकी छूट को खुश करने में लगे हुए थे…

पल्ली को भी ऐसा एहसास कभी नहीं हुआ था जो की खुद के पापा की जीभ को अपनी छूट पर महसूस कर के हो रहा था .उसकी छूट से तरंगे निकल रही थी जो की उसके पूरे शरीर में सनसनी फैला रही थी..

पल्ली- पापाआआअह्ह्ह्हह्हह ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ुघ्हहहहहाआआआआ माआआअह्ह्ह ohhhhhhhhhhhh आईसीईई hiiiiiiiiiii माआआअह्ह्ह मैंन गईइइइइइ….

पल्ली ज़्यादा देर तक अपने पापा की जीभ के हमले को नहीं सह पाई और उनके सर को अपनी छूट पर दबाकर झड़ने लगी.

चाचा भी अपनी बेटी की छूट से निकलते हुए अमृत रूपी रास को किसी रेगिस्तान के प्यासे की तरह सारा का सारा चाट गए और उसके बाद खड़े हुए और तुरंत अपने कपडे उतर फेंके और पूरे नंगे हो गए दोनों hi भूल चुके थे की वो कहाँ हैं किस हाल में है याद था तो सिर्फ एक दुसरे का बदन.

पल्ली ने जब अपने पापा का कठोर खड़ा लुंड देखा तो उसकी छूट फिर से पानी बहाने लगी..

पल्ली ने न जाने क्या सोचते हुए बोलै- पापा अब तुम क्या करने वाले हो.

चाचा जो की उत्तेजना और शराब के नशे में धुत्त थे सही गलत से दूर अपनी बेटी के सुन्दर चेहरे को देखते हुए एक हाथ से अपने लोहे जैसे लुंड को सहलाते हुए बोले- हम अपनी गुड़िया रानी को प्यार करेंगे… खूब सारा प्यार गहरा सा प्यार.

पल्ली- पापा क्या ऐसा प्यार बाप बेटी को करना चाहिए..

चाचा- बिलकुल करना चाहिए मेरी गुड़िया रानी… बेटी के ऊपर बाप का सबसे ज़्यादा हक़ होता है तो प्यार करने में कैसी दिक्कत…

और ये कहकर चाचा ने अपने लुंड को पकड़ कर पल्ली की छूट के होंठों पर रख दिया और हल्का हल्का आगे पीछे करके घिसने लगे.

पल्ली- ohhhhhhhhhhhh पापा… क्या सच में तुम मुझे ये वाला प्यार करने वाले हो…

चाचा- ओह्ह्ह्ह हैं मेरी गुड़िया अभी पापा अपने लुंड को अपनी गुड़िया रानी की छोटी सी प्यारी सी छूट में डालेंगे और बहुत सारा प्यार करेंगे..

चाचा अगर होश में होते तो शायद hi कभी ये बोल पते और ये बात कहीं न कहीं पल्ली भी समझ रही थी… साथ hi उसे अपने पापा के साथ ऐसी बातें करने में एक अलग hi उत्तेजना महसूस हो रही थी… चाचा तो जैसे पागल हो गए थे उत्तेजना के कारन..

चाचा- बीटा अब पापा अपने लुंड को तुम्हारी छूट में घुसाने जा रहे हैं तैयार हो

अब चाचा को क्या पता की उनकी गुड़िया बेटी लुंड के लिए तो हमेशा hi तैयार रहती है.

पल्ली- हाँ पापा मैं तैयार हूँ तुम मुझे प्यार करो..

Chacha-meri प्यारी बेटी….

चाचा ने ये कहकर लुंड के सूज चुके टोपे को पल्ली की छूट के द्वार पर रखा और बोले- ले पल्ली पापा का प्यार..

और एक धक्का लगाया…

वहीं छत पर पापा परेशां होकर कुछ देर तक तो यूँ hi बैठे हुए खुद को तो कभी चाचा को कोस रहे थे की आखिर उन्होंने क्यों ये दारू पीने की सोची और फंस गए अब क्या जवाब देंगे कर्मा की माँ को… खैर थोड़ा रुकने के बाद उन्होंने सोचा ये राजन अभी तक आया क्यों नहीं कहीं पल्ली ने बता दिया और ममता और उसकी लड़ाई तो नहीं हो रही..

जाकर देखना पड़ेगा कही गड़बड़ न हो जाये राजन नशे में भी है उसे संभालना भी होगा ..

ये सोचते हुए पापा उठे और जल्दी जल्दी से सारा सामान बंटोरे गिलास वगेरा उठाये और नीचे आये… देखा तो घर में कोई नहीं दिख रहा था… पापा को लगा चाचा और पल्ली घर चले गए हैं तो उन्हें चिंता सताने लगी साथ hi दारू के नशे ने चिंता को और बढ़ा दिया की कहीं वहां लड़ाई न हो रही हो..

बर्तनो को रसोई में रख सोचा जा कर देखता हूँ क्यूंकि सिर्फ बनियान में बैठ कर पी रहे थे तो अपने कमरे से शर्ट लेने के लिए आगे बढे..

कमरे के दरवाज़े पर पहुँच कर उन्होंने हल्का सा दरवाज़ा खोलने के लिए हाथ बढ़ाया hi था की उनकी नज़र कमरे के अंदर के नज़ारे पर पड़ी और उनकी. आँखें श्री जैसे जैम सा गया… क्यूंकि अंदर का दृश्य hi कुछ ऐसा था.





बिस्तर पर पल्ली पूरी नंगी टंगे फैलाये लेती हुई थी उसकी टैंगो के बीच राजन चाचा थे जिनकी कमर लगातार आगे पीछे हो रही थी और उनका लुंड उनकी बेटी की छूट के अंदर बाहर हो रहा था, हर झटके के साथ पल्ली की छुछियां उछाल कूद कर रही थी..

पापा तो जैसे जैम से गए उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की उनका भाई जैसा दोस्त अपनी hi बेटी को छोड़ रहा था.. ये सोचते hi पापा को वो अंताक्षरी वाली रात याद आ गयी जब उन्होंने भी पल्ली के मादक जिस्म को भोगा था… पर फिर भी अपनी hi बेटी के साथ… ये सब देखकर साथ hi शराब और शिलाजीत की वजह से उनका लुंड उनके पाजामे में एक बार फिर से लोहे की रोड जैसा तन गया… लुंड का टोपा छोटे सेब जैसा हो गया

अंदर का नज़ारा इतना उत्तेजित करने वाला था जी की पापा बेहद गरम हो गए और उन्हें कुवह नहीं सूझा तो अपने पाजामे को नीचे सरका दिया और लुंड बहार निकल कर कमरे के अंदर देखकर मुठियाने लगे. और अंदर तो जैसे चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था बाप बेटी के बीच दोनों hi बहरी दुनिया से बेफिक्र थे…

वहीं अपने घर में ममता चची पेशाब कर आई थी उसके बाद सारा बचा हुआ काम निपटाया बिस्तर लगा लिए. और सोचने लगी ये पल्ली अभी तक बापिस क्यों नहीं आई.

एक तो वो भी बोलकर गए हैं लेट आने के लिए और ये लड़की भी वहीं जा कर बैठ गयी.

थोड़ी देर और इंतज़ार करने के बाद भी पल्ली नहीं आई तो उन्हें गुस्सा आने लगा… इन दोनों को मैं बताती हूँ यहाँ अकेली हूँ और ये दोनों कोई फ़िक़र hi नहीं hai..dono बाप बेटी एक जैसे hi है.

चची ने कुण्डी लगाई दरवाज़े की और निकल ली कर्मा के घर की और. जहाँ कमरे में बाप और बेटी की गणगौर चुदाई चल रही थी.. पल्ली अपने घुटनो और सर के बल घोड़ी बानी हुई थी और उसके पापा पीछे से अपने लुंड को उसकी छूट में अंदर तक पेल पेल कर उसे छोड़ रहे थे…





पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहम्मम्मम्मा पापाआआअह्ह्ह्हह्हह छोडोऊ अपनी गुडियाःजः को आअज दिखा दो सारा प्याररर.

चाचा- हाँ मेरिइइइइइ गुड़िया ohhhhhhhhhhhh हांण ली अपनी पापाआआअह्ह्ह्हह्हह का प्यार अपनीईई छूट में…. आह्ह्ह्हह क्या मस्त्त्त छुट पाई है बेटीईई तूने.

पल्ली- और तेज़ छोड़ूऊऊओ पापाआआअह्ह्ह्हह्हह…. अपनी सरीईई गर्मीी निकाल दोओओओ .

चाचा- हैं बेटीईई हानंन्न ohhhhhhhhhhhh.

वहीं कमरे के बहार खड़े पापा बाप बेटी की चुदाई देखकर साथ hi ऐसी उत्तेजित करने वाली बातें सुनकर हर पल के साथ गरम होते जा रहे थे, उनका हाथ उनके लुंड पर तेज़ी से चल रहा था…

तभी उन्हें दरवाज़े पर आहात सुनाई दी… वो एक दम चौकन्ने हो गए की इस वक़्त कौन हो सकता है और दरवाज़ा तो खुला hi है.. कहीं अंदर आकर ये सब देख लिए तो ये सोचकर पापा ने जल्दी से पाजामे को किसी तरह ऊपर किआ पर उनका पजामा भी उनके खड़े लुंड को नहीं छुपा प् रहा था.

पापा जैसे hi लपक कर आँगन में आये तो देखा ममता चची भी आँगन में आ चुकी थी.. जिन्हे देखकर पापा के तो होश उड़ गए और सोचने लगे की ममता ने अगर वो नज़ारा देख लिए तो पक्का इनका घर टूट जायेगा जो मैं कभी नहीं होने देना चाहता… जैसा भी है मेरा दोस्त hai..bhai है.

पापा जहाँ इस सोच में पड़े हुए थे. की चची की आवाज़ से होश में आये

चची- भाई साब पकोड़े खा लिए?

पापा- ुहं? हाँ हाँ खा लिए खा लिए.

चची- भूख हो तो और कुछ भी बनाऊं?

पापा- नहीं नहीं पेट भर गया है पूरा.. दूध भी पि लिए .

चची- चलो ाचा है पल्ली और उसके पापा कहाँ हैं.

पापा- वो वो दोनों तो अभी ँनीक निकले हैं षायद बाघ में गए होंगे. भैंसों को बांधने.

पापा ने दोनों को बचने के लिए जैसे तैसे झूठ बोलै..

चची- ाचा.. अरे भाई साब वो बर्तन कहाँ हैं पकोड़े के धूल लेती हूँ मैं.

पापा- वो रसोई में हैं और रहने दो मैं दे दूंगा साफ करके.

चची- अरे भाई साब हमारे होते हुए आप बर्तन धोयेंगे तो पाप चढ़ेगा हम पर.

ये कहकर चची रसोई की तरफ चल di..Papa उन्हें जाते हुए देखने लगे पीछे से पापा को चची की पीठ दिख रही थी उनकी कमर और फिर नीचे उभरी हुई गांड चलते हुए मटकते चूतड़ों को देखकर पापा का लुंड फिर से और तन गया… साथ hi उन्हें कमरे का दृश्य फिर से याद आ गया… जिससे उनकी हालत और बुरी हो गयी… साथ hi शिलाजीत और शराब पूरा असर दिखा रही थी.

पापा अपनी उत्तेजना के हाथों मजबूर होकर रसोई में चची के पीछे पीछे चल दिए.. चची रसोई में जाकर बर्तन धोने लगी थी पापा रसोई में जाकर उन्हें देखने लगे… चची को अंदाज़ा भी नहीं था शायद की पापा वहां हैं..

पापा का ध्यान चची के मादक बदन पर था बर्तन धोने की वजह से हिलता हुआ बदन, साथ hi साड़ी और ब्लाउज के बीच झांकती हुई चिकनी कमर पर जब पापा की नज़र पड़ी तो पापा तो जैसे बेकाबू हो गए उनका लुंड पजामा फाड़ कर बहार आने की कोशिश करने लगा…





पापा फिर भी जो थोड़ा बहुत होश था उसके सहारे खुद को रोके हुए थे… उनका अंतर्मन उन्हें रोक रहा था पर उनकी हवस और उत्तेजना शराब के नशे में मिलकर इतनी बाद चुकी थी की अंतर्मन की आवाज़ hi उन तक नहीं पहुँच रही थी..

पापा के कदम धीरे धीरे से चची की और बढ़ने लगे उनकी नज़र चची के चूतड़ों और कमर पर hi तिकी हुई थी..

जब फैसला सिर्फ दो कदम का रह गया तो चची को किसी के होने की आहात हुई और उन्होंने नज़र घुमा कर देखा तो पापा को पाया.. उन्हें थोड़ा अजीब लगा पर फिर भी पुछा- भाई साब आप यहाँ कुछ चाहिए क्या?

ये पूछते हुए चची की नज़र उनके चेहरे पर गयी और चची ने जब उनकी आँखों में देखा तो उन्हें कुछ अलग सा एहसास हुआ क्यूंकि पापा की आँखें लाल हो चुकी थी चची को ऐसा लगा की पापा नशे में हैं… वहीं उन्होंने जब पापा की नज़रों का पीछे किआ तो देखा वो तो उनके चूतड़ों को hi घूर रहे हैं ये जानकार चची को सच में बड़ा अजीब लगा की आज अचानक से भाई साब को क्या हो गया.. पहले तो कभी उन्होंने मुझे ऐसे नहीं देखा..

चची अपना ध्यान बर्तन में लगते हुए और थोड़ा घबराते हुए ये सब सोचने लगी.. उन्होंने एक बार फिर से नज़र घुमा कर देखा तो पापा को और करीब पाया.. साथ hi इस बार उनकी नज़र पाजामे के उभर पर भी चली गयी जिसे देखकर उनकी सांसें और तेज़ हो गयी..

चची-( मन में) हाय दिया ये आज भाई साब को क्या हो गया.. ऐसे क्यों कर रहे हैं कहीं इनकी नज़र गलत तो नहीं है. और आँखें भी कैसी कर राखी हैं… और अपना वो भी कैसे खड़ा कर रखा है… क्या करूँ…

चची के मन hi मन में अजीब कश्मकश चल रही थी और फिर अचानक से उन्हें अपनी कमर पर पापा के हाथ महसूस हुए और अगले hi पल वो हाथ चची के पेट पर कास गए और पापा ने चची को खुद से चिपका लिया…





चची की तो हालत ख़राब हो गयी… उन्हें अपने चूतड़ों के बीच पापा का लुंड चुभता हुआ महसूस हुआ.. चची पापा की बाहों में फड़फड़ाने लगी.

चची- भाई साब ये क्या कर रहे हो, छोडो मुझे.. कोई देख लेगा तो गजब हो जायेगा….

पीछे से पापा अपनी कमर हिला हिला कर अपने लुंड को चची की गांड पर घिसे जा रहे थे… साथ hi उनके हाथ चची के पेट को मसल रहे थे पापा की चेहरा चची के कंधे पर था..

पापा- आह्ह्ह्हह ममता bahu…aahhh क्या बदन है तुम्हारा… इतनी बड़ी छुछियां… ये चूतड़.. देखकर रुका नहीं जा रहा..

चची को ये तो यकीन हो चूका था की पापा अभी नशे में हैं पर फिर भी वो दर रही थी की न जाने आगे क्या गड़बड़ हो जाये वहीं पापा थे जो लगातार उनके बदन से खेल रहे थे…..

अब पापा के हाथों ने चची के पल्लू को नीचे गिरा दियाथा और अब उनकेहथ ब्लाउज के ऊपर से hi चची की बड़ी बड़ी चूचियों को मसल रहे थे…

चची- aahhhhhhhhhh भाई साब छोडो ये गलत है.. पल्ली के पापा को पता चल गया तो अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह गज़ब हो जायेगा…

हालाँकि पापा की हरकतों से चची भी गरम हो रही थी और सोच भी रही थी की जब बेटों से छुड़वा सकती हूँ तो बाप से क्या दिक्कत है पर इतनी जल्दी मान कर वो पापा को उनके बारे में गलत नहीं सोचने देना चाहती थी.

पापा- कुछ नहीं होगा ..ाहहममम क्या मस्त बड़ी बड़ी छुछियां हैं… ममता रानी teri..ahhh

पापा बेदर्दी से चची की छूछीयो को मसलते हुए बोले.

चची- aahhhhhhhhhh भाई साब दुःख रहा है छोडो मुझे..

पर पापा कहाँ सुनने वाले थे उनका लुंड चची की गांड की दरार में खलबली मचा रहा था जिसका असर चची की छूट पर भी हो रहा था..

पापा ने हाथों को थोड़ा स्थिर किया और चची के ब्लाउज के बटन खोलने लगे..

चची पापा को न करने को बोल रही थी लगातार पर कुछ hi पलों में चची का ब्लाउज खुल गया था… और ब्रा में कैद चची की भरी भरकम छुछियां जो हर साँस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी बहार आ गयी… पापा ने उन छूछीयो पर अगले hi पल एक एहसान और किआ और ब्रा के कप को नीचे खींचकर उन्हें आज़ाद कर दिया..

चची- nahiiiiiiiiiiiii भाई साब ये गलत है छोडो अब.

पापा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या भरी भरकम छुछियां हैं तुम्हारी ममता बहु.. आह्ह्ह्हह कितनी मुलायम ाहहजज

पापा ने चची की अब नंगी हो चुकी छूछीयो को मसलते हुए कहा…

चची- भाई साब बस करो किसो को पता चला तो हमारा घर टूट जायेगा हुम्म्म्मम्ह्म्मम्म्म्म

चची इससे आगे बोलती की पापा ने एक हाथ ऊपर लेकर उनके चेहरे को घुमाया और अपने होंठों को चची के होंठों पर रख दिया… और जोर लगाकर चची के रसीले होंठों को चूसने लगे.

चची को अब पूरा यकीन हो गया की पापा ने कुछ पियहि जब उन्हें उनके होंठो पर एक अजीब सा स्वाद मिला और फिर अगले hi पल पापा की जीभ भी उनके मुँह में सैर कर रही थी.. हाथ नंगी छूछीयो पर चल रहे थे… और लुंड पीछे से साड़ी फाड़ कर गांड में घुसने को बेताब tha…papa ने चची की जीभ चूसते हुए hi कब उनके ब्लाउज को उनकी बाहों से निकल कर नीचे फेंक दिया उन्हें खुद पता न चला.

जी भर के चची के होंठों और जीभ को चूसने के बाद पापा ने चची को घुमाया और उनका चेहरा अपनी तरफ कर लिए और झुक कर चची की एक छुच्छी को मुँह में भर लिए… और चूसने लगे.

चची के मुँह से हलकी हलकी सिसकियाँ निकलने लगी… पापा का खड़ा लुंड बार बार चची की जांघ से टकरा रहा था जिसे पापा ने एक हाथ नीचे लेजाकर पाजामे को नीचे खिसककर बाहर निकल लिए

पापा बदल बदल कर चची की दोनों छूछीयों का मज़ा ले रहे थे पापा का लुंड फटने को हो रहा था… और उसी को शांत करने के लिए पापा ने चची का एक हाथ पकड़ा और उसे अपने लुंड पर रख दिए.

चची का हाथ जैसे hi पापा के नंगे गरम लुंड पर पड़ा तो चची के शरीर में एक करंट सा दौड़ गया और अगले hi पल उन्हें न जाने क्या हुआ उन्होंने हाथ हटाया और पापा को धक्का देकर कमरे की और भागी.. पापा के हाथ में उनकी साड़ी का पल्लू आ गया… जिसे पापा ने पकड़ कर खींचा तो चची की साड़ी खुलने लगी साथ hi चची भी एक दो बार घूम गयी.

और चची की साड़ी पूरी तरह से खुल कर नीचे गिर गयी और एक छोर पापा के हाथ में रह गया जिसे पापा ने छोड़ दिया.. और चची की और दोबारा लपके..

चची पापा को अपनी और आता देख दोबारा भागी कमरे की और और उन्हें मौसी के कमरे का दरवाज़ा दूर से खुला दिखा जो की माँ पापा के कमरे के बगल में था.. चची उसी की और भागी पर जैसे hi चची कमरे के करीब पहुंची और अंदर घुसने वाली थी उनकी नज़र बगल वाले कमरे के अंदर दरवाज़े के बीच से पड़ी तो चची के पेअर ठिठक गए.. और वो जहाँ थी वहीं जैम गयी…

उन्होंने देखा की अंदर उनकी बेटी पूरी नंगी होकर लेती हुई है और उसके ऊपर उनके पति जो की पूरे नंगे हैं ऊपर नीचे हो रहे हैं उनके पति का लुंड उनकी बेटी की छूट के अंदर बहार हो रहा है..





हालाँकि माँ बेटी ने साथ में न जाने कितनी बार चुदाई की थी और एक दुसरे को चुड़ते हुए भी देखा था पर अपनी बेटी को उसके hi पिता से चुड़ते देख चची की तो सांसें अटक सी गयी…

कैसे एक पिता का लुंड बेटी की छूट से अंदर बहार हो रहा था. उन्होंने शायद hi कभी ऐसा सोचा था की उन्हें ऐसा कुछ कभी देखने को मिलेगा… चची जहाँ इस नज़ारे को देखकर जैम सी गयी थी वहीं पापा उनके पीछे आ चुके थे और चची को अंदर झांकते देख वो समझ चुके थे की चची सब देख चुकी हैं..

ऊपर से पापा की उत्तेजना इतनी बढ़ चुकी थी की उन्होंने कुछ नहीं सोचा समझा उन्हें तो बस चची का बदन दिख रहा था.. पापा ने पहले hi अपनी बनियान और पाजामे के साथ साथ कच्चे को भी उतर फेंका और पूरी तरह से नंगे हो गए..

और फिर इस सब से बेफिकर चची अंदर अपने पति और बेटी की चुदाई देखकर जमी हुई कड़ी थी पर उनकी छूट ये सब देखकर गीली हो कर पानी बहा रही थी..

पापा चची के पीछे आये और नीचे झुककर उनके पेटीकोट को नीचे से पकड़ा और ऊपर उठा लिए और उठाकर कमर तक कर दिया नीचे का दृश्य देखकर पापा की आँखें चमक गयी क्यूंकि नीचे से चची पूरी नंगी थी कोई कच्ची नहीं थी… चची की नंगी गांड देखकर पापा से रुका नहीं गया और उन्होंने पेटीकोट को कमर पर hi इकठा किआ और दुसरे हाथ पर थूक कर अपने लुंड के टोपे पर थूक लगाया और चची को हल्का सा आगे को झुका दिया..

चची को अब तक ये खबर hi नहीं थी की उनके पीछे कोई है उनका पेटीकोट ऊपर उठ चूका है वो तो बस कमरे के अंदर की चुदाई देखने में मगन थी.. चची का ध्यान जब टूटा जब पापा ने अपने लुंड को उनकी गीली छूट के द्वार पर रखकर और साथ hi एक हाथ से उनके मुँह को दबाकर एक धक्का लगाया और पापा का लुंड टोपा सही दो इंच चची की छूट में घुस गया..

चची की चीख निकल गयी होती अगर पापा ने उनका मुँह बंद नहीं किआ होता.. कुछ पल बाद चची को एहसास हुआ की पापा का लुंड उनकी छूट में है.. ये एहसास होते hi उनकी छूट और गीली हो गयी साथ पापा के लुंड पर कास गयी.. अब चची का सारा विरोध ख़त्म हो गया..

साथ hi पापा ने भी वैसे hi मुँह दबाये हुए hi कुछ और करारे धक्के लगाए और अपना पूरा लुंड चची की छूट में घुसा दिया…

और कुछ पल रुके जब उन्हें लगा चची अब कुछ नहीं बोलेंगी तो उन्होंने अपना हाथ उनके मुँह से हटा दिया और साथ hi उनकी कमर को थम कर पीछे से धक्के लगाकर उन्हें छोड़ने लगे. चची का पेटीकोट उनकी कमर में अटका हुआ था छुछियां ब्रा के बहार थी.. उनके गोल भरे भरे चूतड़ पापा के हर धक्के के साथ लहरा रहे थे..





पापा तो जैसे जन्नत में थे उनका लुंड जो तबसे तकलीफ में था अब जाकर उन्हें आराम मिला था साथ hi ये एहसास की वो अपने सबसे करीबी भाई जैसे दोस्त की पत्नी को छोड़ रहे हैं और जबकि वो कमरे के अंदर अपनी सगी बेटी को छोड़ रहा है..

चची का भी यही हाल था वो भी अब पूरी तरह से पापा के लुंड का मज़ा ले रही थी जो उनकी छूट में अंदर बहार हो रहा था… एयर क्यों न लें जब उनकी बेटी और पति एक दुसरे के साथ इस सुख का आनंद ले सकते थे तो वो क्यों न अपनी प्यास बुझाएं.

चची के लिए ये सब बहुत उत्तेजित करने वाला था की अपने पति और बेटी की चुदाई देखते हुए अपने पति के बड़े भाई जैसे दोस्त खुद के जेठ से चुदाई करवाना… और यही कारन था की चची पापा के लुंड पर झड़ने लगी…

पापा और चाचा पर शिलाजीत का असर था तो वो दोनों तो लगे हुए थे बिना रुके.

झड़ने के बाद चची आगे हो गयी और पापा का लुंड उनकी छूट से निकल गया पापा उन्हें हैरानी से देखने लगे..

चची ने मुद कर पापा के लुंड को हाथ में पकड़ा और उसे पकड़ कर उन्हें मौसी के कमरे के अंदर ले गयी.. और बिस्तर के किनारे पहुँच कर पापा के सामने बैठ गयी उनका हाथ अब भी पापा के लुंड पर था और फिर पापा की आँखों में देखते हुए चची ने पापा के लुंड को मुँह में भर लिए… और चूसने लगी.





पापा तो जैसे जन्नत में पहुंच गए चची के गरम मुँह का एहसास अपने लुंड पर पाकर… अब आग दोनों तरफ बराबर लगी थी.. चची पापा के लुंड को ज़्यादा से ज़्यादा मुँह में भरकर चूसने लगी वहीं पापा भी अपनी कमर हिला हिलाकर चची के मुँह को छोड़ रहे थे…

चची ने कुछ देर तक पापा के लुंड को चूसा और फिर जब उनसे खुद की छूट की खुजली बर्दाश्त नहीं हुई तो उन्होंने बड़े hi कामुक ऐडा के साथ पापा को बीएड पर लिटा दिया और खुद उनकी तरफ पीठ करके अपने दोनों पेअर पापा की कमर के दोनों और किये और नीचे होकर लुंड को थमा और उस पर अपनी छूट रख कर बैठ गयी.

पापा के मुँह से एक दबी हुई सिसकी निकल गयी साथ hi चची के मुँह से भी. चची कुछ पल बाद पापा के लुंड पर उछलने लगी… पापा का ध्यान चची के चूतड़ों पर था जो उनकी आँखों के सामने उछाल कूद कर रहे थे.





वहीं बगल के कमरे में चाचा तूफानी रफ़्तार से पल्ली की छूट की कुटाई कर रहे थे… थप थप की आवाज़ से पूरा कमरा गूँज रहा था पल्ली अपने पापा के ऊपर थी और उसका बुरा हाल था… नीचे से चाचा दनादन लुंड को छूट में पेल रहे थे और इसी तरह पेलते हुए उन्होंने पल्ली को कास के खुद से चिपका लिया… और फिर कास के कुछ धक्के लगाए और फिर अपने लुंड के रास को अपनी बेटी की छूट में खली करने कर दिया… वहीं अपने पापा को अपनी छूट में झड़ते देख पल्ली भी ज़्यादा देर नहीं रुक पाई और चाचा के साथ झाड़ गयी….





कॉन्टिनोएड इन 127स
 
अपडेट 127(स)

झड़ने के काफी देर तक दोनों लम्बी लम्बी साँसे लेते हुए वैसे hi लेते रहे… जब दोनों थोड़ा संभाले तो चाचा को थोड़ा होश आया… पर शिलाजीत के कारन और कुवह बेटी के साथ चुदाई के कारन लुंड अभी भी लोहा बना हुआ था…

चाचा- अरे भाई साब तो छत पर hi हैं हम देखकर आते हैं बहार क्या हो रहा है

पल्ली- क्या पापा मुझे ऐसे छोड़ कर जाओगे..

पल्ली ने अपना नंगा जिस्म दिखते हुए चाचा से कहा…

चाचा पल्ली को देखते hi एक बार फिर से बहकने लगे. उनका लुंड तो जैसा था वैसा hi खड़ा था तबसे

चाचा- बीटा जा नहीं रहा तुझे छोड़ कर तो कोई मुर्दा भी न जाये.. बस एक मिंट में आ जायेंगे.

Palli-theek है पापा जल्दी आओ..

चाचा ने नीचे गिरा हुआ पजामा पहना और बहार निकल गए जैसे hi आगे को जाने को हुए उनके पेअर में कुछ फंसा उन्होंने नीचे देखा तो कपडा था चाचा ने उठाया तो देखा साड़ी थी…

चाचा मन में सोचने लगे जब आया था तब तो साड़ी यहाँ नहीं थी और ये तो कुछ कुछ वैसी hi लग रही है जैसी ममता ने पहनी थी… और फिर उनकी नज़र ब्लाउज पर पड़ी उसे उठाकर देख कर तो उनको यकीन हो गया की ये ममता की साड़ी और ब्लाउज hi हैज वो भी वो वाले जो आज ममता ने पहन राखी थी..

चाचा सोचने लगे- ममता की साड़ी और ब्लाउज यहाँ क्या कर रहे हैं.. कहीं ममता यहीं तो नहीं और यहीं है तो उसके कपडे ऐसे क्यों पड़े हैं.

कहीं उसने हमें पल्ली के साथ देख तो नहीं लिए?

चाचा के मन में कई तरह के सवाल आने लगे.

चाचा जल्दी से छत की तरफ भागे वहां जाकर देखा तो कोई नहीं था. फिर बापिस आये और सोचने लगे ये भैया भी नहीं दिख रहे.. चाचा इधर उधर नज़र मरने लगे… बापिस अपने कमरे की तरफ आते हुए उनकी नज़र मौसी वाले कमरे की खिड़की पर पड़ी जिसमे से रौशनी आ रही थी… दरवाज़ा बंद था पर खिड़की खुली देखकर चाचा उसकी और बढ़ गए न जाने क्यों उनका दिल ज़ोरो से धक् धक् कर रहा था…

जैसे hi वो पास पहुंचे उन्हें हलकी सिसकियाँ सुनाई देने लगी… जिसे सुनते hi चाचा ने तुरंत खिड़की से अंदर झांक कर देखा तो चाचा के पैरों के बीच से ज़मीन खिसक गयी .

अंदर बिस्तर पर उनकी पत्नी अपनी पीठ पर लेती हुई थी पेटीकोट कमर में इकठा हो रखा था, ब्रा में से दोनों छुछियां बहार थी, टंगे फैली हुई थी और उन टांगों के बीच उनके दोस्त उनके भाई थे जो लगातार आगे पीछे हो कर अपने लम्बे से लुंड को उनकी पत्नी की छूट में अंदर बहार कर रहे थे.





चाचा का शरीर वहीं पर जैम गया उनका गाला जैसा सूख सा गया वो बहुत कुछ बोलना चाहते थे पर उनकी आवाज़ निकल hi नहीं रही थी.. अपनी पत्नी को किसी और से चुड़ते देख और वो भी अपने सबसे जिगरी दोस्त के साथ… चाचा के मन में भावनाओ का तूफान उठने लगा उन्हें समझ नहीं आ रहा था की क्या करें.. अपनी पत्नी से झगड़ा करें या अपने दोस्त से क्या छोड़ दें दोनों को और फिर कभी उनकी शकल न देखें.

चाचा यही सब सोच रहे थे की उनके लुंड पर अचानक से उन्हें कुछ महसूस हुआ… उन्होंने किसी तरह से कमरे से नज़र हटाकर देखा तो पाया उनकी बेटी पूरी नंगी उनके बगल में कड़ी है और उनके लुंड को पकड़ कर उसे सहला रही hai…unhe ये भी नहीं पता चला की कब पल्ली ने उनका पजामा नीचे उतर दिया है.. अब चाचा ने अपने लुंड पर ध्यान दिया तो पाया की ऐसा हाल उनके लुंड का शायद hi कभी हुआ पर फिर सोचा जो आज हो रहा है वो भी पहले कब हुआ था अपनी बेटी के नंगे जिस्म को देखकर न जाने कैसे चाचा के मन का तूफान शांत होने लगा..

अचानक से उनके होंठों पर एक मुस्कराहट आ गयी… न जाने उनके मन में ऐसा क्या चल रहा था.. उन्होंने पल्ली को पकड़ा और अपने कमरे की तरफ जाने लगे जहाँ वो पल्ली को पहले छोड़ रहे थे.

पर अचानक से दरवाज़े पर जाकर रुक गए… पल्ली को समझ नहीं आया उसके पापा कर क्या रहे हैं.

Palli-kya हुआ पापा?

चाचा- कुछ नहीं बीटा.. हमसे प्यार करती हो?

पल्ली- सबसे ज्यादा पापा ये भी कोई पूछने की बात है.

ये कहकर पल्ली ने अपने नंगे बदन को चाचा के नंगे बदन से चिपका दिया और गले लग गई.

चाचा ने उसके बदन पर प्यार से हाथ फिरते हुए पुछा- मेरा साथ देगी हमेशा?

पल्ली- हाँ पापा हमेशा

पल्ली ने अपने पापा के लुंड को मुठियाते हुए कहा वो जानती थी की चाचा ने शराब पि है और इसीलिए ऐसी बहकी बहकी बातें कर रहे हैं…

चाचा ने पल्ली का जवाब सुना और फिर उसको गले से लगाए हुए hi कमरे के अंदर न जाकर बगल वाले कमरे के दरवाज़े की तरफ बढ़ गए और फिर एक हाथ बढाकर धक्का देकर दरवाज़े को धक्का दे दिया और दरवाज़ा खुल गया.

खुलते hi पल्ली की नज़र अंदर पड़ी तो वो चौंक गयी.. अंदर उसकी मम्मी एक करवट पर लेती हुई थी उनका पेटीकोट कमर में था साड़ी और ब्लाउज का अत पता नहीं था.. छुछियां ब्रा के बहार लटकी हुई थी और एक छुच्छी पर एक हाथ था जो उसे मसल रहा था… नीचे नंगी छूट में से एक लम्बा लुंड अंदर बहार हो रहा था… और हर धक्के के साथ उसकी मम्मी का पूरा शरीर हिल रहा था..





उसने अपनी मम्मी के पीछे लेते इंसान को देखा तो और चौंक गयी वो तो ताऊजी थे. हालाँकि पल्ली ने इतनी सी hi उम्र में काफी कुछ चुदाई देख और कर ली थी पर ये सब देख कर वो भी चौंक गयी थी…

उसने एक नज़र अपने पापा के ऊपर डाली जो की लगातार बिस्तर पर चल रही चुदाई की और hi देखे जा रहे थे . पल्ली को दर सिर्फ पापा का hi था की माँ को ऐसे देख न जाने वो कैसे व्यवहार करें… कहीं गुस्सा न हो जाएं पर उनके हावभाव और लुंड के तनाव से तो ऐसा कुछ नहीं लग रहा था…

तभी चुड़ते हुए चची की नज़र अचानक से दरवाज़े पर खड़े अपने पति और बेटी पर पड़ी और वो चौंक कर जितनी जल्दी से पापा से अलग हो सकती थी हो कर कड़ी हो गयी साथ hi पेटीकोट को नीचे कर दिया और अपनी छूछीयो को पास पड़ी चादर से ढल लिए…

वहीं पापा भी चाचा और पल्ली को देखकर घबरा गए.

उन्हें समझ नहीं आ रहा था क्या बोलेन क्या करें और जल्दबाज़ी में उन्होंने पास पड़े तकिये से अपने लुंड को धक् लिए.

चची पल्ली और पापा तीनो hi घबरा रहे थे वहीं चाचा सिर्फ ख़ामोशी से बिना किसी भाव के बस दोनों को देखे जा रहे थे… दोनों बिलकुल नंगे अभी तक दरवाज़े पर खड़े थे चाचा का लुंड आसमान की और इशारा कर रहा था…

चची तो मरे घबराहट के रोने जैसी हो गयी थी उन्हें समझ नहीं आ रहा था अब क्या होगा…

चाचा ने फिर सबको देखते हुए एक कदम आगे बढ़ाया साथ hi पल्ली भी एक कदम आगे बढ़ी ऐसे hi अगला कदम चची और पापा की नज़रें बस चाचा पर hi जमी हुई थी…

चाचा बिस्तर के पास जाकर रुक गए और चची को देखने लगे चची घबराने लगी.. पापा ने चची को बचने के लिए बीच में आना ठीक समझा और बोले- राजन मेरी बात सुन… ममता बहु को और पल्ली को जाने दे मैं तुझे सब समझाता हूँ.

चाचा ने एक बार पापा की तरफ देखा.. और फिर से चची की तरफ और चची को बिस्तर पर बैठने का इशारा किआ… चची बिस्तर पर बैठ गयी… पल्ली को भी इशारा करके चाचा ने बिठा लिए… इस माहौल में भी पापा की नज़र जब पल्ली के नंगे बदन पर पड़ी तो उनका लुंड तकिये के नीचे ठुमके मरने लगा…

चाचा ने चची की और देखते हुए पुछा- ये सब कैसे शुरू हुआ.

पापा बीच में बोले- मैं समझाता हूँ…

चाचा- नहीं भैया इसे hi बोलने दीजिये…

चची ने डरते हुए धीरे धीरे बोलना शुरू किआ और उनकी चुदाई देखने से लेकर अपनी चुदाई तक साडी बात बतादि…

चाचा- क्या तुझे ाचा लगा?

चची- नहीं वो मैं हाँ.

चाचा- मुझे सच जवाब चाहिए.. जो भी सच हो…

चची- हाँ..

Chacha-Palli? तुझे

पल्ली- हाँ पापा..

चाचा- भैया?

पापा- अरे तू ये क्यों पूछ रहा है.

चाचा- हाँ या न?

पापा- हाँ..

चाचा- तो तुम्हे हमारी पत्नी को छोड़कर ाचा लगा…?

Papa-tu एक hi बात क्यों बार बार पूछ रहा है?

चाचा- जब लगा तो बोलने में क्या हर्ज़ है भैया..

किसी के समझ नहीं आ रहा था चाचा के मन में क्या था.

चची- वैसा hi लगा जैसा तुम्हे अपनी बेटी को छोड़कर लगा..

चची के मुँह से अचानक ये सुनकर सब हैरान रह गए और चाचा भी उन्हें हैरानी से देखने लगे जैसे उन्हें उम्मीद नहीं थी की चची अचानक से ऐसा कुछ बोलेंगी…

चची- जब तुम अपनी सगी बेटी को छोड़ सकते हो, भग्गू की बहु को छोड़ सकते हो तो मैंने भाई साब से छुड़वा लिए तो क्या पाप हो गया..

चाचा एक तक बस चची की और देखे जा रहे थे जबकि चची के चेहरे पर अब घबराहट नहीं थी.

Chachi-aur मेरे और भाई साब के बीच जो हुआ वो भी तुम्हारी वजह से तुम्हारी और पल्ली की चुदाई देखकर हम खुद को रोक नहीं पाए.

पापा- रहने दे बहु बस अब चुप हो जा..

चाचा- नहीं भैया आज बोलने दो इसे.. मैं चाहता हूँ ये आज सब बोले…

चची- तुम सब नहीं सुन पाओगे..

चाचा- आज मैं सब सुन्ना चाहता हूँ..

पल्ली- मम्मी पापा अब बस करो.

चची- नहीं बीटा तेरे पापा को सब जानने का हक़ है और बताना मेरा फ़र्ज़ मैं अब और छुपा कर पल पल ग्लानि में नहीं मरना चाहती.

चची- पल्ली के पापा यहाँ बैठो.

चची ने चाचा को अपने सामने बिस्तर पर बिठा दिया. पापा और पल्ली पहले से hi बैठे थे..

और चची ने बोलना शुरू किया और कर्मा के साथ चुदाई से लेकर अनुज जग्गू प्रेमा इन सब के बारे में सब कुछ सच सच बता दिए, चची की बात सुनते हुए चाचा और पापा के चेहरे के भाव देखने लायक थे. उन्हें यकीन hi नहीं जो रहा था की उनकी पीठ पीछे ये सब हो रहा था और उन्हें खबर तक नहीं थी.

चाचा की आँखें तो एक तक बस चची पर जमी हुई थी.. वहीं पापा भी हैरान थे. पल्ली तो पहले से सब जानती hi थी बस उसे दर था की अब उसके पापा न जाने क्या करेंगे गुस्से में.

चची- ये सब था जो तुम्हे नहीं पता था.. पर पता होना चाहिए था. अब जो तुम चाहो फैसला कर सकते हो हम मानेंगे.

चाचा कुछ नहीं बोले और सर झुकाये बस नीचे की और देख रहे थे…

पापा- कर्मा और अनुज को तो मैं बताऊंगा उन्होंने अपनी चची के साथ ये सब किआ.. अपनी बहन जैसी पल्ली के साथ.. राजन मेरे भाई मुझे मेरी गलती के लिए साथ hi मेरे बच्चों की गलती के लिए हो सके तो माफ़ करदे. मैं तेरे हाथ जोड़ता हूँ.

चाचा ने कुछ देर पापा की और देखा और फिर आखिरकार बोले- भैया नहीं.. मुझे नहीं लगता की इसमें कर्मा की अनुज की या ममता पल्ली किसी की भी गलती है. या आज जो कुछ हुआ उसमे किसी की भी गलती है.

चची- ये तुम क्या बोल रहे हो.

चाचा- नहीं ममता आज हमे बोल लेने दो. शरीर की भूख कहो या हवस ऐसी hi चीज़ है जो इंसान को वो सब करने पर मजबूर कर देती है जो उसे नहीं करना चाहिए.. चाहे तुम्हारा बचपन में मौसी के साथ वो सब करना हो या आज हमारा अपनी hi बेटी को छोड़ना.. है तो सब हवस के कारन hi. शरीर कीभूख के कारन hi. और जब आज सब सच बता hi रहे हैं तो मेरा भी एक सच है

सब लोग चाचा को ध्यान से देखने लगे.

चाचा- भैया तुम्हे तुम्हारी मौसी के साथ वो सब करते हुए देख कर हमारे मन में भी कुछ अजीब ख्याल आने लगे और वो ख्याल कब हवस में बदल गए कोई नहीं जनता. और उसका शिकार हुई मेरी अम्मा..

सब चाचा की बात सुनकर चौंक गए.

चची- क्या अम्मा?

पापा- छोटी मौसी कैसे?

चाचा- हाँ ममता तुम्हारी सास.. अपनी सगी माँ के साथ हमने वो सब किआ है जो आज अपनी बेटी के साथ किआ…

चची- पर ये सब कब कैसे..

चाचा- वो लम्बी कहानी है फिर कभी सुनाऊंगा अभी बस इतना जान लो की यहाँ सब एक बराबर हैं सब पापी हैं या कोई भी नहीं. तो ये सब सुनकर मेरे बारे में सच जानकर तुम बताओ हमारे साथ रहना चाहोगी.?

चची कुवह देर तक चुप रही और बोली- अभी तुमने hi कहा या तो सब पापी हैं या कोई नहीं.. हाँ मुझे थोड़ा दुःख है की तुमने ये सब मुझसे छुपा के रखा. पर अब हम एक दुसरे को बेहतर जान गए हैं.

चाचा- दुःख तो हमें भी है की अपनी hi पत्नी को सच न बता सका और न hi जान सका.. पर अब से ऐसा कुछ नहीं होगा..

चची- बिलकुल सही कहा तुमने अब से ऐसा कुछ नहीं होगा..

पापा- ठीक है तो सब अब जाकर सो जाओ और हम भूल जायेंगे इस रत के बारे में.. जैसे कभी कुछ हुआ hi नहीं.

Chacha-nahi भैया एक बात है.

पापा- क्या ?

चाचा ने सबकी तरफ देखा और बोले- हम इस रात को भूलना hi नहीं चाहते?

चची- मतलब?

चाचा- मतलब ये की न जाने क्यों तुम्हे भैया से छुड़वाते देख और तुम्हारी कर्मा और बाकि सब की चुदाई की बात जानकर हुमैने गुस्सा की जगह उत्तेजना हुई. हमारा लुंड और ज़्यादा कड़क हो गया.. ये देखो..

चची- तुम कहना क्या छह रहे हो

चाचा- यही की हम नहीं चाहते की सब पहले जैसा हो.. हम अभी बोल तो दें की हम भूल जायेंगे पर आज नहीं तो कल हमारा मन पल्ली को छोड़ने को फिर करेगा और शायद हम रोक भी नहीं पाएंगे.

पापा- ये बात तो है एक बार करने के बाद दोबारा सामान्य रहना असंभव के बराबर है.

Chachi-iska मतलब आगे भी

चाचा- सीधा मतलब ये है की हुमैने तुम्हारे कर्मा या बाकि सब या भैया से छुड़वाने से कोई परेशानी नहीं है बल्कि मैं साथ दूंगा.

पल्ली- सच पापा?

चाचा- एक दम सच. और नहीं किसी को कुछ छुपाने की ज़रूरत होगी.

पापा- बस एक बात का ध्यान रखना की किसी बहार वाले को खबर न हो.

चाचा- सब अपने hi हैं बहार कोई नहीं बताएगा..

चची- हाँ बहार तो कोई नहीं बताने वाला.

चाचा- वैसे एक बात है भैया ये बच्चे तो हमसे भी आगे निकले.

Papa-wo तो है यार हमने तो कभी सोचा hi नहीं था पर.

चची- हमारे बच्चे गलत नहीं है भैया बस जैसे हवस के आगे हम मजबूर हैं वैसे वो.

पल्ली- अरे मम्मी अब बात हो गयी हो तो बताओ क्या करना है. मुझे खुजली हो रही है.

सब के चेहरे पर पल्ली की बात सुनकर मुस्कराहट आ गयी..

Chachi-to क्या करना है चची ने शरमाते हुए चाचा से पूछा.

चाचा- चलो फिर घर सोते हैं चलके.

चाचा की बात सुनकर पल्ली का मुँह उतर गया और थोड़ा थोड़ा चची का भी. पर चची बिस्तर से कड़ी हुई और बहार जाने को हुई की चाचा ने उनका हाथ पकड़ लिए और उनके ऊपर पड़ी चादर को पकड़ कर खींच लिए.

चची- अरे ये क्या कर रहे हो?

चाचा ने कोई जवाब न देते हुए उनके पाटिकट को भी पकड़ कर नीचे खींच दिया. और हंसने लगे.

पल्ली भी खिलखिलाकर हंसने लगी

चची ने झूठा गुस्सा दिखते हुए कहा- क्या कर रहे पेटीकोट पहात जायेगा अभी.

चाचा- तो पहना क्यों है उतर दो.

चची- हटो घर जाना है सोने.

Chacha-acha अब हुई से मज़ाक

और चाचा ने चची को पकड़ कर पहले उनका पेटीकोट उतरा और फिर ब्रा भी अब चची भी बाकि सबकी तरह नंगी हो गयी.

चाचा ने फिर चची को धक्का देकर बिस्तर पर घोड़ी बना दिया और उनकी छूट पर एक बार पीछे से थूका और फिर पापा की तरफ देख कर बोले- लो भैया अपना अधूरा काम निपटाओ.

पापा तो हैरान हो गए की चाचा उन्हें खुद उनकी बीवी को छोड़ने को बोल रहे हैं.. और ऐसे hi बैठे रहे

चाचा- क्या हुआ भैया नहीं छोड़ना?

पापा ने भी इस बार ज़्यादा नहीं सोचा और तकिया एक तरफ फेंका और जल्दी से चची के पीछे जगह ली और लुंड को उनकी छूट पर रखा.. चाचा ये सब बड़े ध्यान से देख रहे थे की उनकी बीवी की छूट में किसी और का लुंड घुसाने वाला है.

पापा ने ज़ोर लगते हुए अपने लुंड को चची की छूट में घुसा दिया जिसे चाचा ने बखूबी देखा वहीं बिस्तर के दूसरी तरफ पल्ली अपनी छूट को सहला रही थी अपनी मम्मी और ताऊजी की चुदाई देखते हुए.

लुंड जाते hi चची के मुँह से एक सिसकी निकल गयी..

पापा- कैसा लग रहा है राजन अपनी बीवी की छूट में अह्ह्ह मेरा लुंड देखकर?

चाचा- भैया आना तो मुझे गुस्सा चाहिए पर न जाने क्यों लुंड तन रहा है. अब रुको मत छोड़ो साली को.

पापा- अह्ह्ह्ह हान्न्म

चची- ohhhhhhhhhhhh भाई सब अह्ह्ह.. देखो पल्ली के पापा तुम्हारे भैया मेरी छूट छोड़ रहे हैं.. तुम्हारे सामने.

पल्ली- अह्ह्ह पापा अब तुम भी आ जाओ कब तक इंतज़ार करवाओगे..

पल्ली ने अपनी छूट को मसलते हुए कहा..

चाचा ने भी एक बार पापा और चची की और देखा और फिर उतर कर बिस्तर की दूसरी और पहुंच गए.. जहाँ उनकी बेटी उनका बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी..

चाचा के पास पहुंचते hi पल्ली ने झुककर तुरंत अपने पापा के लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी.

चाचा- aahhhhhhhhhh बीटा ऐसी hiiiiiiiiiii ohhhhhhhhhhhh. सच में बेटी तुम पर गयी है ममता.

चची- ohhhhhhhhhhhh हाँ जैसी चुड़क्कड़ माआ वैसी hi बेटीईई.. अह्ह्ह

चची ने पापा के धक्को को झेलते हुए जवाब दिया…

पल्ली ने दो मिनट hi लुंड चूसा और फिर करवट लेकर लेट गयी और अपने पापा को इशारा किआ.

चाचा ने भी बिना किसी देरी के छलांग लगाई और पल्ली के पीछे वैसे hi करवट लेकर लेट गए और पल्ली की तंग उठा कर पीछे से अपने लुंड को एक बार फिर से अपनी बेटी की छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगे





दोनों इस तरह से चुदाई कर रहे थे की सामने पापा और चची की चुदाई को आराम से दरख सकें..

Palli-aahhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पापाआआअह्ह्ह्हह्हह छोडोऊ अपनी बेटीईई को..

चची- ohhhhhhhhhhhh हांण छोड़ो जी अपनीईई बेटीईई को.. सबसे ज़्यादा तुम्हारा हक़ है िस्किई छूट par…ahhh भाईसाहब

पापा- यी तो सही कहा अह्ह्ह्हह सबसे ज़्यादा हक़ बेटीइ पर बाप का अह्ह्ह्हह hi ताऊ होता है… और बेटीईई पल्ली जैसी हो तो हक़ ज़रूर वसूलना चाहिए.

पल्ली- हाँ ताऊ जी अह्ह्ह्हह हैं पापाहहह लेलुओ अपना हक़ और तेज़ छोड़ो..

चाचा- सारा हक़ लुन्गाहहहह बेटा अभी तो तेरी छोटी सी गांड भी मारनी है ..

Palli-kyaaahh आह्हः पापा सवह में…

चाचा- हाँ बेटाःह्ह्ह्हह्ह सच में तेरी गांड का तो न जाने कबसे दीवाना हूँ मैं

पल्ली- तो मार लो पापाः आह्हः घुसा देना अपना लुंड आअह्ह्ह्ह अपनी बेटीइ की गांड में..

चाचा- भैया एक काम आह्ह्ह्ह करते हैं..

पापा- अहहह्ण ुह्ह्ह्ह हाँ बता न.

पापा ने चची की छूट में धक्के मारते हुआ कहा..

चाचा- अभी इनकी चूर मरने के बाद, हम लोग इन दोनों माँ बेटी की गांड एक साथ मरेंगे एक hi समय पर दोनों की गांड में लुंड घुसाएँगे.

पापा तो चाचा की बात सुनकर साथ hi चची की गांड मरने की सोचकर और उत्तेजित हो गए साथ hi उनके धक्के भी तेज़ हो गए…

पापा- आह्ह्ह्हह मज़ाआ आ जायेगा भाई… ममता की गांड तो न जाने मैं कबसे मरना चाहता था. जब जब साड़ी में घूमता देखता था तो मन होता था लुंड घुसेड़ दूँ.

पापा इतना जोश में आ गए. की चची को छोड़ते हुए उन्होंने अपनी एक उंगली को आगे ले जाकर चची के मुँह में घुसा दिया जिसे चची ने चूस कर गीला किआ और फिर पापा ने वो उंगली पीछे लेकर चची की गांड के भूरे छेड़ में घुसा दी…





चची- ohhhhhhhhhhhh आह भाई साब यह क्या…

चची की दोहरे हमले से और साथ hi इस एहसास से के उनके पति के सामने वो चुद रही हैं इस एहसास से वो और उत्तेजित होती जा रही थी..

बिस्तर के दूसरी तरफ चाचा भी पल्ली को तगड़े धक्के लगाकर छोड़ रहे थे उन्हें भी ये सोचकर जोश चढ़ रहा था की वो अपनी सगी बेटी को अपनी hi पत्नी और भाई साब के सामने छोड़ रहे हैं

इसी तरह दोनों जोड़े चुदाई में लगे रहे और थोड़ी hi देर में दोनों झाड़ गए साथ में…

जहाँ पापा ने चची की छूट को रास से भर दिया.. वहीं चाचा को अपनी बेटी की छूट में झड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ…

जब चाचा और पापा चची और पल्ली से हेट तो दोनों माँ बेटी ने अपने पुराने अनुभव को दिखते हुए और दोनों मर्दों को और हैरान करते हुए जल्दी hi 69 के आसान में आ गयी और एक दुसरे की छूट को चाट कर साफ़ करने लगी..

चाचा और पापा जिनका लुंड पहले से hi खड़ा था इस नज़ारे को देखकर और कड़क हो गए..

छूट के साथ साथ दोनों माँ बेटी ने एक दुसरे की गांड पर भी पूरा ध्यान लगाया और… चाट चाट कर आने वाले प्रहार के लिए तैयार किआ… उधर चाचा और पापा से सबर नहीं हो रहा था…

जब चची और पल्ली का एक दुसरे की छूट से मन भर गया तो दोनों अलग हुई.. और फिर चची पापा के सामने और पल्ली चाचा के सामने जाकर झुक गयी और दोनों के लुंड को मुँह में ले लिए.. और उसके बाद पूरी म्हणत से चूसने लगे..

पापा- भाई तेरी बीवी क्या लुंड चूसती है.. आह्ह्ह्हह लगता है उखड hi लेगी..

चाचा- भैया अभी बेटी का हुनर देखोगे तो दांग रह जाओगे.

चची और पल्ली अपनी तारीफ सुनकर और ज़ोर लगाकर चूसने लगे और जब वो अपने काम से संतुष्ट हो गए तो उन्होंने लुंड को मुँह से निकला और घूम कर एक दुसरे के बगल में अपनी अपनी सुन्दर गांड को हवा में उठा कर घोड़ी बन गए..

चाचा और पापा ने भी बिना देरी के अपनी अपनी साथी की गांड के पीछे जगह ली.. और कुछ देर तक दोनों उन खूबसूरत मॉस के गोलों की खूबसूरती का कभी आँखों से तो कभी हाथ सहलाकर लुत्फ़ उठाते रहे और फिर थोड़ा और मन नहीं भरा तो दोनों ने अपने अपने चेहरे सामने चूतड़ों में लगा दिए और चाटने लगे.

और कुछ hi देर में दोनों की जीभ चची पल्ली की गांड के भूरे छेड़ को छेड़ रही थी जिसके वजह से दोनों hi सिसकियाँ ले रही थी.. पापा पूरी कोशिश कर रहे थे अपनी जीभ को चची की गांड ने घुसाने की और यही कोशिश चाचा की थी की वो पल्ली की गांड को अपनी जीभ से hi छोड़ लें.

कुछ देर यूँ hi करने के बाद चाचा ने मुँह हटाया और देखा पापा अभी भी चची की गांड में लगे हुए थे..

चाचा- अरे भैया कब तक हमारी बीवी की गांड में घुसे रहोगे आगे बढ़ो..

पापा- अरे अभी घुसे कहाँ है अब घुसेंगे..

चाचा- तो हो जाओ तैयार.

पापा- हम तो कबसे तैयार हैं ये गांड मरने के लिए.

पापा ने चची के एक चूतड़ को मसलते हुए कहा.

चाचा ने भी अपने लुंड को पकड़ा और पल्ली की गांड के छोटे से छेड़ पर लगाया और पापा की तरफ देखा तो उन्होंने भी अपने लुंड के टोपे को चची की गांड पर लगा दिया… दोनों ने फिर एक दुसरे को देखा और फिर मुस्कुराये ..

चाचा ने एक हाथ से लुंड को पकड़ा और दुसरे से पल्ली की कमर को और बिलकुल यही पापा ने किआ और फिर दोनों साथ बोले:- दम लगा के हईशा.

और दोनों ने एक साथ धक्का लगाया और दोनों के लुंड माँ बेटी की गांड में एक साथ घुस गए.. साथ hi माँ बेटी की ाः भी साथ निकली…

पल्ली- आह्ह्ह्हह पापा तुम्हारा लुंड घुस गया मेरी गांड में..

चाचा- हाँ बीटा अह्ह्ह्हह्हह ऐसा मज़ा मुझे जिंगदी में कभी नहीं आया… आह्ह्ह्हह क्या गरम माखन जैसी गंड़द है तेरई.

पापा- होगीई क्यों नहीं जब माँ की ऐसी है तो बेटी की भी वैसी hi होगी.. अह्ह्ह ममताआठ तेरी गांड.

चची- ुघ्हहह भाई साब पल्ली के पापा देर किस बात की है गाड़ दो खूंटा.

चची की बात सुनकर दोनों ने दो चार झटके मरे और पूरा लुंड गांड के अंदर समां गया…

पल्ली- आह्ह्ह्हह हाय यकीन नहीं हो रहा मेरे पापा का लुँड्ड्ड मेरी गांड में है…

चाचा- यकीन कर ले बेटाःह्ह्ह्हह्ह क्यूंकि शायद hi ऐसा दिन जाये अब जिसमे ये लुंदड़ आअह्ह्ह तेरी गांड में न जाये..

चची- लुंड टूओ भाईसाहब निहहह भी पूरा घुसा दियाःहहहहह रीई मेरी गांड में.. आह्ह्ह्हह..

पापा- तुमने hi बोलाः था खूंटा गाड़ने को तो गाड़ दियाःहहहहह.

पल्ली- अब बातें बंद करूह पापा और मिटाओ मेरी गांड की खुजली..

फिर क्या था दोनों hi लग गए अपनी अपने सामने की गांड का भरता बनाने में.. दोनों तगड़े धक्के लगाकर जड़ तक लुंड को गांड में ठोकते फिर बापिस खींचते और फिर पूरा ठूंस देते.. दोनों माँ बेटी की सिसकियाँ और आहें पूरे कमरे में गूँज रही थी..





साथ hi जांघों के चूतड़ों पर टकराने की आवाज़ जो की एक ले में आ रही थी जैसे की चुदाई का संगीत हो. पूरे कमरे में गूँज रहा था..

इसी बीच माँ बेटी ने प्यार दिखते हुए चेहरा आगे बढ़ा कर एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे.. ये देखकर मर्दों के धक्के थोड़े और तेज़ हो गए..

इसी तरह की तूफानी गांड चुदाई के कुछ देर बाद जब माँ बेटी घोड़ी बानी थक गयी तो चाचा और पापा बिस्तर पर बैठ गए और पल्ली और चची उनकी तरफ पीठ करके उनके लुंड को अपनी मस्त गांड में लेकर उछलने लगे…





चाचा और पापा को तो जैसे सब कुछ मिल गया था वो आराम से देख दोनों गैंडों को अपने लुंड पर उछलने का मज़ा ले रहे थे .. चची और पल्ली भी बहुत गरम हो गयी थी और पूरे जोश के सतह अपने चूतड़ों को पटक रही थी..

और इसी जोश में आकर दोनों कुछ देर बाद झाड़ गयी…

झड़ने के बाद दोनों hi थोड़ी शांत हुई तो पाप ने पल्ली की गांड मरने की इच्छा जताई तो पल्ली तुरंत उठकर पापा के ऊपर बैठ गयी ुर चची ने अपने पति का लुंड गांड में लिए…





और फिर से शुरू हो गया ये चुदाई का खेल पापा पल्ली की गांड मरकर इतने उत्तेजित हो गए की कुछ hi देर में उसकी गांड में अपना रास भर बैठे.. वहीं चाचा भी जैसे hi झड़ने को हुए उन्होंने उन्होंने अपने लुंड को चची की गांड से निकल कर पल्ली के मुँह में घुसा दिया और पल्ली भी अपने पापा का सरा रास पि गयी..

इसके बाद चारो कुछ देर यूँ hi आराम करते रहे पर पल्ली ने दोनों के लुंड को बरी बरी से चूस कर एक बार फिर खड़ा कर दिया बाकि का साथ शिलाजीत ने किआ जो अत्यधिक मात्रा में ली गयी थी..

जब दोनों लुंड खड़े हुए तो पल्ली ने ज़िद्द की की वो दोहरी चुदाई चाहती है जिसमे सिवाय चाचा के किसी को परेशानी नहीं थी क्यूंकि उन्हें लग रहा था खिन दो लुंड से पल्ली को चोट न पहुंचे पर चची और पल्ली के आगे उनकी एक न चली और उन्होंने मन्ना पद..

इसके बाद चची ने पल्ली के दोनों छेदों को छत कर गीला किआ साथ hi पल्ली उस समय दोनों के लुंड चूस कर गीले कररही थी..

जब दोनों को सही लगा तो चाचा को बिस्तर पर लिटा दिया गया और पल्ली ने उनके ऊपर आके उनके लुंड को अपनी गांड से भिड़ाया और बैठ गयी.

दो चार मिनट ऐसे hi उछलने लगी तब तक चची ने पापा के लुंड को एक बार और चूस कर तैयार किआ और फिर पापा पल्ली और चाचा की टैंगो के बीच आये और आपने लुंड को पल्ली की छूट के ऊपर लगया और फिर अंदर धकेल दिया..

और उनका लुंड पल्ली की छूट में समां गया..

चाचा को पल्ली की गांड और कस्ती हुई महसूस हुई साथ hi उन्हें ये भी एहसास हुआ की पापा का लुंड पल्ली की छूट में घुस रहा है बस दोनों के बीच एक पतली सी दीवार है.. इस एहसास से चाचा और उत्तेजित हो गए साथ hi ये उनके जीवन की पहली दोहरी चुदाई थी और वो भी उनकी बेटी के साथ इस ख्याल से hi चाचा का लुंड और फूल गया और चाचा ने नीचे से कसके धक्के लगाने शुरू किये… पापा भी चाचा की गति देखकर उनके साथ ले से ले मिलाने लगे.. और पल्ली तो जैसे पागल सी होती जा रही थी दोहरे हमले से.

चची अपनी बेटी का साथ देने के लिए कभी उसकी छूछीयो मसलती तो कभी उसके होंठों को चूमती





पापा और चाचा मिलकर पल्ली के दोनों छेदों को अचे तालमेल के साथ छोड़ रहे थे और जिसका नतीजा ये हुआ की कुछ hi देर में पल्ली पापा के लुंड पर झड़ने लगी… झड़ने के बाद शांत हुई तो पापा ने उसकी छूट से लुंड निकला और वो भी चाचा के लुंड. से फिसल कर साइड में लेट गयी.

पल्ली के हटते hi चची ने दोनों लोदों पर हमला कर दिया और बरी बरी से दोनों को चूसकर अपनी बेटी के दोनों छेदों का स्वाद लेने लगी…

जब तक चची ने लुंड को तैयार किआ तब तक पल्ली फिर से उठ कर बैठ गयी और बोली..

पल्ली- हटो मम्मी हो गए दोनों साफ़.

चची- तू अभी और करवाएगी क्या?

पल्ली- और नहीं तो क्या.

चाचा- बस पल्ली थक जाएगी तू रहने दे अब.

पल्ली- अरे पापा कल तो हम जा hi रहे हैं रमन भैया की शादी में और वहां तो मौका मिलने से रहा.. इसलिए यहाँ hi जी भर के छुड़वा लेने दो.

पापा- पल्ली की ज़िद्द है बिना पूरी किये आज तक मणि है.

पल्ली- और नहीं तो क्या ताऊजी.. चलो पापा लेटो जल्दी..

और इतना कहते hi पल्ली ने चाचा को लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ कर जल्दी से उनके लुंड को छूट में लेकर बैठ गयी.

चची- देखो तो ये लड़की कितनी उतावली है..

पापा ने भी हँसते हुए पल्ली के पीछे जगह बनाई और लुंड को इस बार गांड में घुसा दिया और फिर से शुरू हो गयी पल्ली की दोहरी चुदाई इस बार पापा और चाचा दोनों ने hi जल्दी ले बनाली और ताबड़तोड़ दोनों छेदों को पेलने लगे..

चची भी बीच में आकर कभी पापा को चूमती तो कभी पल्ली को तो कभी चाचा को… इसी दौरान पापा ने चची को पकड़ कर उनका चेहरा पल्ली के चूतड़ों के ऊपर रख दिया और चची दोनों लुंड को पल्ली के छेदों में आते जाते हुए देखने लगी.

कुछ पल बाद पापा ने पल्ली की गांड से लुंड निकल कर चची के मुँह में घुसा दिया और चची ने भी बेटी की गांड से निकले लुंड को बड़े चौ से चूसा और फिर पल्ली की गांड पर थूक कर दोबारा से लुंड को गांड पर रख दिया





और फिर से शुरू हो गयी दोहरी चुदाई और अगले 15 मीन्स तक काफी अचे से पल्ली को दोनों ने रौंदा और फिर पल्ली एक बार फिर से झड़ने लगी..

और इस बार झाड़ कर उसने पापा को हटने को बोलै तो पापा ने उसकी गांड से लुंड निकला और फिर वो खिसक कर चाचा के लुंड से दूर हटकर लेट गयी… और आराम करने लगी…

बेटी की जगह तुरंत माँ ने ली.. और चची जल्दी से चाचा के लुंड को छूट में लेकर उछलने लगी अगले hi पल पापा ने भी अपने लुंड को उनकी गांड में घुसा दिया और इस बार चची दोहरी चुदाई का मज़ा लेने लगी.

चाचा भी अपनी बीवी को पहली बार किसी और के साथ मिलकर छोड़ रहे थे और इसमें उन्हें एक अलग hi एहसास हो रहा था और इसी कारन वो और तेज़ी से नीचे से धक्के लगा रहे थे… चाचा की गति के साथ पापा भी ले मिलकर गांड मार रहे थे.. पापा के लिए ये नया एहसास था की किसी की बीवी को उसी के साथ मिलकर छोड़ रहे थे.





करीब 20 मिनट्स ककी घमासान चुदाई के बाद तीनो के hi सबर ने जवाब दे दिया था.. और तीनो hi एक के बाद एक धीर होने लगे.. पहले चची झड़ी अपने पति के लुंड पर और फिर चाचा और पापा ने भी एक साथ चची के दोनों छेदों की सिंचाई कर दी… फिर सब लोग अलग होकर लेट गए और देखा तो पल्ली तब तक सो चुकी थी.

तीनो उसे देखकर मुस्कुराने लगे और फिर अब बाकि सब भी थक चुके थे… तो सब सोने लगे ममता चची ने घर जाकर सोने की बात कही तो पापा और चाचा ने मन कर दिया और चारो hi ख़ुशी से नंगे hi एक बिस्तर पर सो गए.. एक कोने पर पापा दुसरे पर चाचा और बीच में दोनों माँ बेटी…

देर से सोने के बाद भी बरसों की आदत के कारन चची की आँख सबसे पहले खुली और उठ कर खुद को नंगा पाया आस पास नज़र घुमाई तो रात जो हुआ याद आया..

जल्दी से उन्होंने चाचा को जगाया चाचा भी आँखें मलते हुए उठे..

कुछ पल उन्हें भी लगे सामान्य होने में

चची- अब उठो जी सारा काम निपटा लो फिर निकलना भी है..

चाचा- हाँ हाँ उठ रहे हैं वैसे भी पता है मायके जाने की जल्दी तो तुम्हे रहती hi है.

चची- अरे सुबह सुबह शुरू मत हो जाओ तुम.. हम तो जा रहे हैं न जाने कपडे कहाँ पड़े हैं हमारे..

Chacha-are आराम से बोलो पल्ली और भैया उठ जायेंगे.. और इधर पड़े हैं तुम्हारे कपडे.. हमारी तरफ..

चची उठी और चाचा की तरफ से कपडे उठाये और कमरे के बहार निकल गयी चाचा भी उठे एक नज़र नंगी सोइ पल्ली पर डाली और प्यार से उसकर सर पर हाथ फेरा फिर वो भी उठ खड़े हो गए.. और कमरे से बहार निकल गए तो देखा चची आंगन में कड़ी पेटीकोट चढ़ा रही थी..

चाचा रुक कर उन्हें देखने लगे साथ hi अपने कपडे भी पहनने लगे…

Chachi-aise क्या देख रहे हैं जी.

चाचा- अपनी पत्नी को देख रहे हैं.. शादी के इतने साल बाद भी तुम्हारा बदन उतना hi कामुक है.

चची- ाचा आज ऐसा क्या हो गया..

चाचा- रात जो हुआ उससे हमारा नजरिया hi बदल गया है और देखना हमारा रिश्ता भी नया होगा..

चची- हैं ग सच में.

चाचा- सच में मेरी रानी.

ये कहकर चाचा ने चची को बाँहों में भर लिए और एक दुसरे के होंठों को चूसा और फिर चची ने धक्का देकर चाचा को दूर हटाया और बोली- अरे हटो अब बड़े काम पड़े हैं. तुम भी जाओ और जानवरों का काम देख कर आओ जल्दी निकलेंगे तो आराम से पहुँच जायेंगे..

इसके बाद दोनों बहार से दरवाज़े को भिड़ा कर अपने अपने काम में लग गए इधर उनके जाने के थोड़ी देर बाद पापा की आँख खुली उठकर देखा तो पल्ली को नंगा बगल में सोते पाया और फिर रात की साडी बात याद आई तो मुस्कुरा कर पल्ली के सर पर हाथ फेरा और उठ गए..

कपडे पहन कर सुबह के नित्यकर्म करके बहार निकले तो चाय की तालाब लगी अब कोई था तो नहीं और सोचा की ममता को क्या hi बोलूं वो भी आज जाना है तो कामो में लगी होंगी.. इसलिए खुद रसोई में घुस गए और सामान ढूंढ कर चाय चढ़ाई hi थी की देखा पल्ली बिलकुल नंगी hi रसोई में अंगड़ाई लेती आ रही है..

पल्ली- क्या कर रहे हो ताऊजी?

पापा- चाय राखी है पीयेगी?

Palli-are मुझे जगा देते मैं बना देती..

पापा- अरे तो क्या हो गया… तू कपडे तो पहन ले.

वैसे पल्ली को यूँ नंगा घूमता देख पापा का लुंड एक बार फिर से फन उठाने लगा..

Palli-kyun ताऊजी ऐसे अछि नहीं लग रही.

पापा- अरे पागल है तू भी बिलकुल.

पल्ली- ताऊजी तुम कुछ बोल रहे हो और तुम्हारा ये कुछ और

पल्ली ने पापा के लुंड की और इशारा किआ जो अपनी पूरी औकात में आकर पाजामे में तम्बू बनाये खड़ा था.

Papa-ab जब तू ऐसे घूमेगी घर में तो ये तो ऐसे बोलेगा hi न.

फिर क्या था पल्ली ने बिदाई के रूप में पापा से एक और बार चुदाई करवाई… और सुबह hi पापा के लुंड से मलाई निकल कर पि गयी.. जब पापा पल्ली के मुँह में झाड़ कर शांत हुए तो बोले- न जाने तुम लोगो के जाने के बाद मेरा क्या होगा..?

पल्ली- अरे ताऊजी मैं हूँ न आपको परेशां नहीं रहने दूंगी…

इसके बाद पल्ली भी कपडे पहन कर अपने घर चली गयी और पापा भी अपने काम में लग गए.

और थोड़े समय बाद पल्ली ममता चची और चाचा.. पल्ली के मां के यहाँ जाने के लिए बस में निकल पड़े… और वहां क्या क्या हो रहा है ये तो हमारे दोस्त DREAMBOY40 अपनी कहानी सपना या हकीकत में आपको बता hi रहे हैं .

बाकि कर्मा के पापा का और कनक गाओं में क्या हो रहा है ये जानने के लिए साथ बने रहे..

अपने कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्.
 
फिर क्या था पल्ली ने बिदाई के रूप में पापा से एक और बार चुदाई करवाई… और सुबह hi पापा के लुंड से मलाई निकल कर पि गयी.. जब पापा पल्ली के मुँह में झाड़ कर शांत हुए तो बोले- न जाने तुम लोगो के जाने के बाद मेरा क्या होगा..?

पल्ली- अरे ताऊजी मैं हूँ न आपको परेशां नहीं रहने दूंगी…

इसके बाद पल्ली भी कपडे पहन कर अपने घर चली गयी और पापा भी अपने काम में लग गए.

और थोड़े समय बाद पल्ली ममता चची और चाचा.. पल्ली के मां के यहाँ जाने के लिए बस में निकल पड़े… और वहां क्या क्या हो रहा है ये तो हमारे दोस्त ड्रीमबॉय40 अपनी कहानी सपना या हकीकत में आपको बता hi रहे हैं

अपडेट 128

जहाँ चोदामपुर में काफी कुछ बदलाव आया था वहीं कालक गाओं के मेहमान रात भर के परिश्रम के बाद काफी देर तक सोते रहे.

कर्मा वाले कक्ष माँ की जब नींद खुली तो पाया वो अपने बेटे की बाहों में बिलकुल नंगी हैं, एक पल को बेटे के चेहरे की और देखा तो कर्मा गहरी नींद में सोया हुआ था अपने बेटे को देखकर उन्हें न जाने क्यों बड़ा प्यार आया और उसी तरह हाथ बढाकर उसके चेहरे को सहलाने लगी फिर कुछ याद आया और इधर उधर देखा तो सेविका कहीं नहीं दिखी… माँ ने भी जल्दी hi उठना सही समझा… और जैसे hi उठने लगी उनका एक पेअर किसी चीज़ से टकराया और जिसके टकराते hi माँ के चेहरे पर मुस्कान आ गयी क्यूंकि बिना देखे भी वो बता सकती थी ये क्या चीज़ है. ये उनके बेटे का प्यारा पर लम्बा और कड़क लुंड है… बीटा सो रहा है पर ये जाग रहा है..

माँ ने लुंड की और देखा तो उनका मन एक बार फिर से डोलने लगा. पर खुद को ये समझा कर की अंजना देश है. सावधान रहना चाहिए उन्होंने खुद को रोक लिए. पर खुद को एक बार लुंड को चूमने से न रोक सकीय. और फिर उठ कर अपने कपडे पहनने लगी.

बाकि के दोनों कक्ष में भी यही हाल था मौसी अनुज से पहले उठ चुकी थी और अभी उनकी नज़र अनुज के तन्नाए हुए लुंड पर hi थी. खड़े और कड़क दुमदार लुंड को देखकर मौसी का मन machalnlaga..unhe फिर से खुमार सा चढ़ने लगा साथ hi छूट की चींटियां एक बार फिर से रेंगने लगी… मौसी ने खुद को संभालना चाहा मन और मस्तिष्क की बहस चल रही थी.. इसी बहस के बीच न जाने कब और कैसे मौसी का हाथ अनुज के लुंड के पास पहुँच गया और अगले hi पल मौसी की उंगलियां अनुज के लुंड से टकराई तो मौसी के शरीर में जैसे बिजली सी दौड़ गयी और उन्हें जैसे होश आया की वो क्या कर रही थी तुरंत उन्होंने अपना हाथ पीछे खींचा मौसी ने भी खुद को किसी तरह से संभल लिए… और उठ कर कपडे पहनने लगी..

वहीं तीसरे कक्ष में थोड़ा अलग हुआ था यहाँ पहले आँख जग्गू की खुली और आँखों को मलते हुए जैसे hi वो उठा उसे एक गजब का नज़ारा देखने को मिला, बगल में उसकी मम्मी यानि मंजू तै सो रही थी पर हैरानी की बात ये थी की उनकी साड़ी जिसके नीचे कोई पेटीकोट या कच्ची नहीं थी वो जांघों तक उठी हुई थी और जग्गू को अपनी मम्मी के चूतड़ों के हल्का हलके दर्शन हो रहे थे जिसे देखते hi जग्गू का लुंड बिलकुल कड़क हो गया.. तै की पीठ जग्गू की और थी जग्गू ने एक बार अपनी मम्मी के चेहरे की और देखा तो उसे लगा उसकी मम्मी अभी भी सो रही हैं, वहीं जग्गू की आँखें बड़ी होकर अपनी मम्मी के नंगे चूतड़ के हिस्से पर गाड़ी हुई थी.

जग्गू एक तरफ किस्मत को धन्यवाद् कह रहा था की उसे इतना मस्त नज़ारा देखने को मिला. वहीं सोच रहा था काश मम्मी की साड़ी थोड़ी और ऊपर होती तो मज़ा hi आ जाता.

जग्गू एक हाथ से लुंड को मसलते हुए अपनी मम्मी के मादक चूतड़ों का गदराया पैन देख रहा था उसने कुछ मन में सोचा और अपना एक हाथ आगे बढाकर अपनी मम्मी के चूतड़ों पर हलके से रख दिया और सहलाने लगा… जग्गू को ये लग रहा था की उसकी मम्मी सो रही है पर तै जाग चुकी थी और जग्गू की हरकतों को देख और महसूस कर रही थी…

अपने बेटे के हाथ को चूतड़ों पर महसूस कर तै की प्यासी छूट एक बार फिर से पानी बहाने लगी… वहीं तै को न जागते देख उसकी हिम्मत बढ़ी और अब वो चूतड़ों को हल्का हल्का दबाने लगा पर अब भी इतनी हिम्मत नहीं थी की वो साड़ी को और ऊपर उठा कर अपनी मम्मी के नंगे चूतड़ों को देखले..

तै जो कल से hi प्यासी थी उनकी हालत और ख़राब हो रही थी.. उनकी छूट में रह रह कर खुजली हो रही थी… तभी अचानक से कक्षा के बहार हलचल हुई और जग्गू तुरंत बीएड से उठकर खड़ा हो गया अपने ऊपर एक धोती लपेट ली…

और साथ hi एक चादर से अपनी मम्मी को भी धक् दिया और कुछ पल बाद hi सभ्य ( कर्मा की माँ) ने कक्ष में प्रवेश किया

सभ्य- अरे जग्गू बीटा जीजी उठी नहीं अभी.. उठा उन्हें सब जाग गए हैं.

जग्गू- हाँ चची अभी उठता हूँ

जग्गू का ध्यान बिना ब्रा के ब्लाउज में कैद सभ्य की बड़ी बड़ी छूछीयों पर खुद hi चला गया.. जो की ब्लाउज में बहार आने की कोशिश कर रही थी.

सभ्य- उठाकर बहार जहाँ कल खाना खाया था वहां ले आ.. सब वहीं इकठ्ठा हो रहे हैं.

जग्गू ने खुद को संभाला और नज़रें हटाई और बोलै- चची ठीक है तुम चलो मैं मम्मी को लेकर आता हूँ.

सभ्य- ठीक है बीटा.

सभ्य मुड़कर जाने लगी तो जग्गू की नज़र एक बार फिर उसके मटकते चूतड़ों पर गयी.. और फिर वो कक्ष के बहार चली गयी तो एक बार फिर से जग्गू अपनी मम्मी को देखा और फिर चादर हटाई और चादर हटते hi तै ने भी नाटक किआ की वो उठ गयी हैं.

और फिर दोनों तैयार हो गए. और थोड़ी देर में सब लोग बहार खाने वाले कक्ष में थे. जहाँ तीनो लड़के एक जगह खड़े होकर बातें कर रहे थे, वहीं तीनो औरतें एक जगह इकट्ठी थी,

सभ्य- एक तो यहाँ का रहन सहन अजीब है बिना पेटीकोट और कच्ची बनियान के ऐसा लगता है जैसे नंगे घूम रहे हैं..

मंजू तै- हाँ बन्नो सँभालते सँभालते परेशां हो जाते हैं.

मौसी- और बच्चों को भी तो देखो बस एक धोती दी है… बेचारों ने कभी धोती नहीं पहनी.

सबकी बातें चल रही थी की तभी एक सेविका आई और सबको बैठने का इशारा किआ .. सब लोग बैठ गए

और कुछ पल बाद hi बड़ी माँ और उनकी बेटी भी आ गए .. हम सबने खड़े होकर उनका सम्मान किआ तो उन्होंने हम सब को दोबारा बिठा दिया और फिर नाश्ता आया सबने नाश्ता किआ..

और फिर सब कुछ हटवा कर बड़ी माँ ने साडी सेविकाओं को बहार भेज दिया और बस हम सब रह गए.

बड़ी माँ- उम्मीद है आपको हमारी मेहमान नवाज़ी पसंद आई होगी..

सबने ख़ुशी से हाँ में सर हिलाया.

बड़ी माँ- तो अब मुख्या बात पर आते हैं. हम जानते हैं की आपलोग इतनी दूर से यहाँ जिस लक्ष्य से आये हैं, आपकी नियत अछि है आपको सच में ज़रुरत है पर हमेशा ऐसा नहीं होता कुछ लोग यहाँ लालच और लोभ में भी आते हैं. ये सोचकर की हमारे पूर्वजो की अनौखी धरोहर के प्रयोग से वो धनि हो जायेंगे या ताकत वॉर.

माँ- पर हमारा ऐसी कोई नियत नहीं है बड़ी माँ.

बड़ी माँ- हम जानते हैं पर इसी वजह से हमारे पूर्वजो ने कुछ नियमो और प्रक्रिया को बनाया जिससे ज़रुरत मंद की मदद भी हो जाये और लालची को कुछ हाथ भी न लगे.

अगर अपना लक्ष्य पाना है तो उस प्रक्रिया से होकर गुजरना hi पड़ता है..

में- कैसी प्रक्रिया बड़ी माँ… .

बड़ी माँ- कई चरण हैं प्रक्रिया के…

पहले तो तुम में से किसी एक को पुत्र कालजंग से कुश्ती करनी पड़ेगी..

हम सब उनकी बात सुन कर चौंक गए.. कालजंग से कौन लड़ेगा.. साला उसका आकर देखा है..

मंजू तै- बड़ी माँ हम में से कोई कालजंग के बराबर तक क्या आस पास तक नहीं तो कैसे लड़ सकते हैं.

बड़ी माँ- हम जानते यें है पर आपको भी बराबरी का मौका मिलेगा. पहली प्रक्रिया के तीन चरण हैं.. बल, बुद्धि कौशल.

यदि कोई बल में काम है तो बुद्धि में या कौशल में ज़्यादा होगा hi.. आगे बढ़ने के लिए तीन में से दो चरण में विजयी होना आवश्यक है. नहीं तो आप सब को बापिस जाना पड़ेगा..

हम सब बड़ी माँ की बात सुनकर थोड़ा चिंता में आ गए की अब ये तीन में से दो चरण कैसे जीते जायेंगे.

बड़ी माँ- पहला चरण यानि खुश्ती का मुक़ाबला आज शाम को होगा. अपनी योजना अनुसार किसी एक को तैयार करलें.. समय आने पर आपको सूचित करके बुला लिया जायेगा..

इतना कहकर बड़ी माँ तो वहां से चली गयी और हम लोगो के मन में धक् धक् चालू हो गयी..

माँ- कालजंग से तीनो में से कौन लड़ेगा..

अनुज- माँ लड़ेगा नहीं ये बोलो कौन पिटेगा.

माँ- तू चुप कर वैसे भी उन्होंने ये सब बताकर और परधानी बढ़ा दी हैं.

मंजू तै- जग्गू या कर्मा में से hi कोई होगा.

जग्गू- मैं तैयार हूँ. मैं लड़ लूंगा काले दानव से.

मौसी- नहीं जग्गू तुम तीनो में सबसे लम्बा कर्मा hi है तो मेरे हिसाब से उसे hi कोशिश करनी चाहिए.

कर्मा- हाँ मैं hi कोशिश करूँगा.

इस बात पर सब राज़ी हुए और आगे क्या करना है कैसे करना है सोचने लगे.. काळा दानव को हारने की तरकीबें सोचने लगे पर कहीं न कहीं ये सब को पता था की मैं जग्गू या अनुज में से कोई भी या शायद साथ भी उस काले दानव कालजंग से नहीं जीत सकते थे.

(कर्मा की जुबानी)

दिमाग में ज़्यादा खिचड़ी पाक रही थी तो मैंने सोचा थोड़ा बहार घूम लिए जाये देखा तो जाये की कैसा है आस पास का माहौल और कालक गाओं.

तो मैं महल में पहले घूमा तो कुछ खास नहीं दिखा सिवाए नंगी सेविकाओं के जिनको देखकर लुंड ने अंगड़ाई तो ली पर मैंने उसे चुप करा दिए.. और महल के पीछे की तरफ गया जहाँ एक बड़ा सा बाघ था और उसमे घूमने लगा काफी ाचा लग रहा था पक्षियों के चहचहाने की आवाज़ आ रही थी थोड़ा आगे चला तो एक मधुर सी हंसी की आवाज़ मेरे कानो में गयी. और मैं उस आवाज़ को खोजते हुए आगे बढ़ने लगा.. थोड़ा आगे जाकर और पेड़ों की आड़ से झंकार देखा तो कोई लड़की या औरत थी जो एक छोटे से कुत्ते के बच्चे को हाथों में उठाये उससे बातें कर रही थी खेल रही थी.

मैं थोड़ा आगे बढ़ा तो चेहरा समझ आया वो बड़ी माँ की बेटी चित्रावती थी… बड़ी hi मासूमियत से वो उस नन्हे पिल्लै के साथ खेल रही थी..

मैं आगे बढ़कर उसकी तरफ पंहुचा तो उसकी नज़र मुझपर गयी उसने एक बार मुझको देखा और फिर बापिस पिल्लै में लग गयी.

में- बहुत सुन्दर और मासूम..

चित्रावती ने मेरी आवाज़ सुनकर भी मेरी तरफ नहीं देखा .

चित्रावती-

बहुत hi मासूम और सुन्दर है ये छोटी सी जान.

छल कपट से परे, जिससे भरे पड़े हैं इंसान.

प्यार दो तो तुम hi हो दुनिया इनकी,

न चाहिए धन दौलत या कोई कीमती सामान.

उसे देखते हुए hi चित्रावती ने कहा.. बात तो उसने सही कही थी..

में- मैं सहमत हूँ आपके हर कथन से,

मासून जानवर hi प्रेम करते हैं पूरे मन से.

इस बार उसने मेरी और देखा और हल्का सा मुस्कुराई..

चित्रावती- कहीं तुम हमें अपने शब्दों के जाल में तो नहीं फंसा रहे हो.

इस तरह बात करके कहीं हमारी तुकबंदी की आदत का मज़ाक तो नहीं बना रहे हो.?

में- ऐसा मत सोचिये यूँ तो तनिक भी नहीं है.

बचपन से hi मैंने बहुत कवितायेँ पढ़ी हैं.

आपकी ये आदत मुझे सवह में बहुत भाई है.

इसलिए आपकी विधि मैंने भी अपनी है.

चित्रावती इस बार मेरी तरफ घूम कर और मुझे देखते हुए hi बोली- यदि ऐसा है तो तुमसे बातें कर हमें बड़ी ख़ुशी मिलेगी.

हम दोनों कविता प्रेमियों की आपस में खूब जमेगी.

करीब एक डेढ़ घंटे तक मैं और चित्रावती साथ रहे काफी बातें की पिल्लै के साथ खेला उससे बातें कर ये जान गया की चरित्र से कितनी मासूम और साफ है. और जितनी सुन्दर वो बहार से है उससे कहीं सुन्दर अंदर से. उसने शाम की कुश्ती के लिए मेरा हौसला. भी बढ़ाया और फिर मुझे थोड़ा सा आराम करने के लिए बोलकर चली गयी. मैं भी महल के अंदर आया और जहाँ हमारे सोने के कमरे थे वहीं जाकर आराम करने का सोचा.. अपने कमरे में घुसने hi वाला था की बगल वाले कमरे से कुछ आवाज़ें आ रही थी सोचा देखता हूँ शायद बाकि सब यहीं होंगे. उस कमरे के करीब पहुंचा तो एक जनि पहचानी सी थप थप की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी, जिसे सुनते hi मैं समझ गया की ये चुदाई की आवाज़ है..

मैंने सोचा ये तो अनुज और मौसी का कमरा है इसमें कौन हो सकता है..

मैं अंदर बढ़ा पर इतने परदे थे की ुनहु हटाए बिना देखना नामुमकिन था मैं परदे के पास पहुंचा hi था की एक जनि पहचानी आवाज़ मेरे कानो में गयी- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह कितनी केसीई हुई है.

ये आवाज़ सुनते hi मैं समझ गया की ये अनुज की आवाज़ है मेरा दिल ज़ोरो से धड़कने लगा जी की अनुज किसके साथ है कहीं मौसी के साथ तो नहीं ये कब हो गया क्या अनुज सच में मौसी को छोड़ रहा है.. मेरा दिमाग नए नए समीकरण बनाने लगा शायद रत को साथ सोते हुए उनके बीच ये सब हो गया..

अनुज तो मुझसे भी तेज़ निकला.. अपनी hi मौसी को छोड़ लिए.. मैं वहीं खड़ा खड़ा ये सब सोच रहा था मेरा लुंड मेरी धोती में तन गया था..

तभी अंदर अनुज ने कुछ ऐसा बोलै जिससे मैं पूरी तरह चौंक गया बमेरे कदमो से ज़मीन खिसक गयी.. मैं वहीं जमा का जमा रह गया..

अनुज- ohhhhhhhhhhhh माआआअह्ह्ह कितनी मस्त गाआंण्ड है तुम्हारी… अह्ह्ह्हह्हह मेराआह्ह्ह्ह लुंदड़ जकसडडड लिआआ हैई…

ये शब्द सुनकर तो जैसे मेरा खून hi सूख गया मुझे अब कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये सब कब कैसे क्यों हो गया.. मई. बूत बना बस ये सब सोच रहा था कुछ पल बाद मैं थोड़ा संभाला और खुद को किसी तरह से अंदर झांकने को तैयार किया और एक एक करके परदे हटाने लगा कांपते हाथों से हर परदे के बाद मेरी धड़कन बढ़ती जा रही थी… अब सामने बस एक आखिरी पर्दा बचा था जिसे मैंने हाथ से पकड़ रखा था और फिर एक लम्बी साँस भरकर उसे एक तरफ सरका दिया तो सामने का नज़ारा देख कर मेरी आँखें बड़ी हो गयी..

इसके आगे क्या हुआ है जानिए अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्.
 
ये शब्द सुनकर तो जैसे मेरा खून hi सूख गया मुझे अब कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये सब कब कैसे क्यों हो गया.. मई. बूत बना बस ये सब सोच रहा था कुछ पल बाद मैं थोड़ा संभाला और खुद को किसी तरह से अंदर झांकने को तैयार किया और एक एक करके परदे हटाने लगा कांपते हाथों से हर परदे के बाद मेरी धड़कन बढ़ती जा रही थी… अब सामने बस एक आखिरी पर्दा बचा था जिसे मैंने हाथ से पकड़ रखा था और फिर एक लम्बी साँस भरकर उसे एक तरफ सरका दिया तो सामने का नज़ारा देख कर मेरी आँखें बड़ी हो गयी..

अपडेट 129

सामने बीएड के किनारे पर अनुज खड़ा हुआ था और उसकी कमर बड़ी तेज़ी से आएगी पीछे हो रही थी उसका लुंड गांड के छेड़ से किसी पिस्तौल की तरह अंदर बहार हो रहा था… अनुज के हाथों ने कमर को कसकर थमा हुआ था और बहुत hi तगड़े धक्के लगाकर गांड मर रहा ... अनुज को जांघें थप की आवाज़ के साथ चूतड़ों से टकरा रही थी…

अनुज- ohhhhhhhhhhhh माआआअह्ह्ह ohhhhhhhhhhhh माआआअह्ह्ह बहुतत्त कासी हुई गांड है तुम्हारी..

मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था जो सामने हो रहा था उसे देखकर.. समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ… सामने मेरा भाई हमारी माँ की गांड मार था.. मेरा लुंड लोहे की तरह कड़क हो चूका था..

और तभी एक चीख के साथ उसने अपने लुंड को जड़ तक गांड में गाड़ दिया और झड़ने लगा.

अनुज- ohhhhhhhhhhhh माआआअह्ह्ह तुम्हारीईई गांड…. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

मैं बस बूत बना हुआ देख रहा था. झड़ने के बाद अनुज ने लुंड बहार निकला और गांड के पीछे से हैट गया गांड के छेड़ से अनुज का रास बहकर बहार आ रहा था.

अनुज बगल में बैठकर हांफने लगा.. और तभी जो हुआ उसे देखकर मेरी आँखें एक बार फिर से बड़ी हो गयी… माँ जो घोड़ी बानी हुई थी सीढ़ी हुई और फिर घूम गयी और जब मेरी नज़र उनके चेहरे पर गयी तो सब कुछ अचानक से बदल गया..

वो माँ नहीं थी बल्कि कोई सेविका थी जिसे अनुज माँ बनाकर छोड़ रहा था.. इतने में अनुज की नज़र भी मुझ पर पड़ी और उसने मुझे दरवाज़े के पास खड़ा देखा तो थोड़ा घबरा गया..

Anuj-are भैया तुम यययहां कब आये..

में- बस अभी देख रहा हूँ अपना काम निपटा लिए तूने.

अनुज- वो वो बब भैया वो इतने इतनी नंगी औरतों को नंगा देखकर काबू नहीं हुआ..

में- ाचा पर काबू करना सीख… हम घर पर नहीं हैं ..

अनुज को ये सोचकर थोड़ा चैन मिला की शायद मैंने उसके मुँह से माँ नहीं सुना और वो माँ का नाम लेते हुए सेविका की गांड मार रहा था..

खैर मैं बात को ज़्यादा नहीं बढ़ाना चाहता था क्योंकि मेरा ध्यान अभी सिर्फ शाम को होने वाले मुक़ाबले पर था तो मैं उसे वहीं छोड़कर बापिस अपने कक्ष की और आ गया और आगे कैसे क्या करना है ये सोचने लगा… थोड़ी देर बाद hi तीनो औरतें भी वहीं आई… बिना ब्रा और पेटीकोट के उनकी गांड और छूछीयो को देखकर मेरा मन तो बहका पर मैंने किसी तरह से खुद को संभाला और फिर हम सब लोग शाम के मुक़ाबले के बारे में बात करने लगे.

थोड़ी देर बाद hi खाने का समय हुआ तो सब साथ में खाना खाने गए.. और फिर वहां से सब साथ hi बापिस आये और मुक़ाबले की तयारी करने लगे.

सब चिंता में थे और जायज भी था.. मुझे कुछ भी नहीं पता था की मैं कैसे उस काळा दानव का सामना करूँगा..

पर मुक़ाबला तो करना था कैसे इसका जवाब मेरे या किसी के पास भी नहीं tha…khair इसी तरह सोचते हुए समय बीता और आखिर हमें मुक़ाबले के लिए बुलावा भी आ गया.

कुछ सेविकाएं हमें लेकर महल के पीछे कुछ दूर लेकर गयी वहां पहुंच कर देखा की एक अखाडा जैसा बना हुआ था… सेविकाओं ने सब को अपनी अपनी जगह पर बिठा दिए अखाड़े के एक तरफ वहीं दूसरी तरफ साडी सेविकाएं कड़ी थी और कुछ hi देर में बड़ी माँ और उनकी बेटी चित्रावती भी आ गयी.

और अपने आसान पर जाकर बैठ गयी और उनके बगल में चित्रावती भी बैठ गयी..

और तभी एक तरफ से धरती को मसलते हुए कला दानव भी आ गया जिसे देखकर मैंने बड़ी मुश्किल से किसी तरह से उसको हारने के लिए मन में जो योजनाएं बनाई थी वो सब गायब हो गयी. जितनी भी हिम्मत जुताई थी वो उसको सामने किसी लम्बी सी ईमारत की तरह खड़ा देख साडी हिम्मत हवा हो गयी.

सब लोग बैठ चुके थे और मैं और कला दानव मिटटी के घेरे में बने थे तभी बड़ी माँ कड़ी हुई

बड़ी माँ- वैसे तो सब जानते हैं पर फिर भी नियमो को दोहराना हमारा फ़र्ज़ hai,niyam आम कुश्ती के मुक़ाबले जैसे hi हैं, घेरे से तीन बार बहार निकलने पर या घेरे में hi एक बार hi चित्त होने पर मुक़ाबला ख़त्म हो जाएगा दोनों प्रतिद्वंदी तैयार हो.

मैंने डरते हुए सर हिलाकर हाँ कहा वहीं कालजंग ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखकर बस सर हिला दिया.

तभी पीछे से माँ की आवाज़ आई: कर्मा बीटा संभल कर,

मौसी- हाँ कर्मा संभल कर. ध्यान से.

मेरे साथ वाले भी दर रहे थे क्यूंकि उन्हें भी पता था कालजंग को कुश्ती में हराना बड़ा मुश्किल था साथ hi न तो मैं पहलवानी करता था. जो कोई दांव पेंच दिखा कर हरा दूँ.

खैर मैंने सबकी और देखा और सर हिलाकर उन्हें देख मुस्कुराया.. फिर एक बार बड़ी माँ और चित्रावती की और देखा जो मुझे देख मुस्कुरा रही थी.

बड़ी माँ के इशारे पर मुक़ाबला शुरू हुआ और वो कला दानव मेरी तरफ किसी भूखे शेर की तरह बढ़ने लगा. मैं इधर उधर होकर उससे बचने की कोशिश करने लगा. मैं घेरे में जगह का प्रयोग करते हुए उससे दूर रहने की कोशिस करने लगा, क्यूंकि मुझे पता था अगर मैं इसके हाथ आ गया तो खेल ख़त्म तो जितना हो सके इससे दूरी बनानी है वो भी घेरे में रहकर.. दूसरा शायद इसे थोड़ा ऐसे hi थका सकता हूँ.

कालजंग भी मुझे पकड़ने की पूरी कोशिश कर रहा था जैसे hi उसका हाथ मेरे करीब आता मेरी और साथ साथ माँ और बाकि सब की धड़कनें तेज़ हो जाती, मैं पूरी कोशिश कर रहा था पर घेरे से बहार नहीं जा सकता था तो बड़ी मुश्किल हो रही थी.. और कब तक मैं बचता उसने मुझे एक तरफ लेजाकर घेर लिए और फिर हाथ बढ़ाया तो मेरे भागने के बाद भी उसके हाथ में मेरा पेअर आ गया और अगले hi पल मैं हवा में था… उसने मुझे दोनों हाथो से उठा लिए और घेरे में घूम घूम कर मुझे उठाये हुए सब को दिखा दिखा कर अपनी ताकत का प्रदर्शन करने लगा… मेरे घरवाले परेशां होकर मुझे उतरने की गुज़ारिश कर रहे थे.. पर उस पर कोई फर्क नहीं था साला मुझे किसी बच्चे की तरह उठाकर घूम रहा था..

मुझे तो लग रहा था जैसे मैं किसी ऊँचे से पेड़ पर लटका हुआ हूँ और कभी भी पके हुए आम की तरह टपक सकता हूँ..

और कुछ हुआ भी ऐसा hi कालजंग ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के बाद मुझे घेरे से बहार फ़ेंक दिया.. मेरे घरवालों की चीख के बीच मैं बहार ज़मीन पर जा गिरा मेरा सर और सीना ज़मीन पर जा टकराया कुछ पल के लिए तो लगा की सब घूम रहा है आँखों के आगे अँधेरा सा हो गया पर फिर थोड़ा होश आया तो आँखें खुली और सब कुछ दिखा आस पास..

धीरे धीरे खुद को खड़ा किआ सीने में दर्द हो रहा था खड़े होकर घरवालों की और देखा सब के सब परेशां थे माँ और मौसी को देखकर लग रहा था कब रो दें पता नहीं.. जग्गू और अनुज भी परेशां हो कर देख रहे थे…

खैर मैं धीरे धीरे घेरे के अंदर आया और अगली बार के लिए तैयार हो गया काल जुंग मुझे देख मुस्कुरा रहा था वैसे वो चाहता तो मुझे तभी चित कर सकता था और मुक़ाबला ख़त्म हो जाता पर नहीं उसने ऐसा नहीं किआ क्यूंकि वो मेरे साथ खेलना चाहता था.. मुझपर अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहता था..

बड़ी माँ के इशारे के बाद अगला राउंड शुरू हुआ और इस बार वो तेज़ी से मेरी और बढ़ा और लगा किसी बड़ी गाड़ी की तरह मुझे उदा देगा कहते हैं न जब मुसीबत का समय आता है तो इंसान के अंदर एक अलग hi ताकत या क्षमता आ जाती है और वो शायद मेरे साथ हुआ और जैसे hi वो मेरी तरफ कूड़ा मैंने एक तरफ छलांग लगाडी जिससे उसके सामने से हैट में उसकी दे तरफ गिर गया.. वो क्यूंकि तेज़ी से कूड़ा था तो उसकी गति इतनी थी की वो बिलकुल घेरे के किनारे पहुँच गया और मुझे लगा बहार निकल जायेगा पर उसने किसी तरह से खुद को रोक लिए..

तभी मेरा दिमाग काम किआ की इससे ाचा मौका मुझे मिल hi नहीं सकता.. और मैंने जल्दी से उठ कर अपनी पूरी ताकत के साथ पीछे से उसके घुटनो के जोड़ पर वार किआ जिससे उसके दोनों घुटने आगे की और मुद गए बस मुझे ये hi चाहिए था फिर पीछे से एक धक्का उसकी पीठ पर और कालजंग घेरे के बहार अपने घुटनो पर पड़ा हुआ था. .

इसके साथ hi सब ख़ुशी से चीख पड़े जग्गू आउट अनुज चीख रहे थे वहीं माँ मौसी और तै खुश से भगवन को धन्यवाद कर रही थी..

सब हैरान थे की ये क्या हुआ बड़ी माँ और चित्रावती की आँखें बड़ी हो गयी थी उन्हें यकीन नहीं हो रहा था जो भी हुआ उसे देखकर.. यकीन तो मुझे भी नहीं हो रहा था ..

सबसे बुरा हाल कालजंग का था शायद उसके समनं को ठेस पहुंची थी वो काफी देर तक बैठा रहा और फिर जब खड़ा होकर घूमा तो मैं उसका चेहरा देख कर दर गया अब उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी बल्कि गुस्सा था आँखें लाल हो रही थी…

बड़ी माँ- दोनों प्रतिद्वंदी तैयार ये मुक़ाबले का आखिरी दौर होगा जो भी ये दौर जीतेगा वो मुक़ाबला जीत जायेगा .

इसी के साथ मुक़ाबला शुरू हुआ कालजंग मेरी और बढ़ा मैंने भागने की कोशिश की पर इस बार वो तैयार था और उसने मुझे कमर से दबोच लिए और फिर उठा लिए. इसके बाद अगले hi पल मैं ज़मीन पर चित पड़ा हुआ था… मुक़ाबला ख़तम हो चूका था कालजंग मेरे सर के पास खड़ा हुआ था और आँखों में देखते हुए मनो कहना छह रहा था की मेरा उसे बहार निकलना बस एक तुक्का था वो चाहता तो मुक़ाबला कभी भी ख़त्म कर सकता था और ये सच भी था

खैर मैं हार चूका था, कालजंग जीत गया था बड़ी माँ मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी चित्रावती भी… खैर अनुज और जग्गू ने आकर मुझे उठाया तब तक माँ और मौसी तै भी आ गयी माँ ने मुझे गले से लगा लिए.. बिना ब्लाउज के उनकी बड़ी बड़ी चूचियों पर सर रखकर बड़ा आराम मिल रहा था मेरी पीठ और सीने में दर्द था…

बड़ी माँ- मुक़ाबला ख़त्म हुआ.. अगला मुक़ाबला कल होगा तब तक आराम कीजिये..

ये कहकर बड़ी माँ और चित्रावती चली गयी कालजंग भी निकल गया बचे हम लोग और हम सब भी अपने कक्ष की और चल दिए माँ मुझे खुद से दूर नहीं कर रही थी..

में- हार गया मैं अब बस दो मुक़ाबले बचे हैं जो दोनों hi हमें जीतने होंगे..

माँ- तू अभी ये मत सोच आराम कर

तै- हाँ बीटा आराम कर सब बाद में देखा जायेगा कितना बुरी तरह पटका है कल्मुये ने .. कीड़े पड़ेंगे नासपीटे के

तै की बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी मेरे कक्ष में आकर हम सब लोग बैठ गए जग्गू ने सेविका से कहकर गरम पानी की व्यवस्था करवा दी..

थोड़ी hi देर में सेविका ने गरम पानी कर दिया..

मंजू तै- चल बचुआ हम नहला देते हैं तुझे

में- तै मैं कोई बच्चा थोड़ी hi हूँ जो तुम नहलाओगी.. मैं नाहा लूंगा..

मंजू तै- हमारे लिए बचुआ hi है. और पीठ पर निशान हैं चोट के आराम से साफ़ करने होंगे..

में- माँ देखो न..

Maa-ab मैं क्या कहूं तू जाने और जीजी जानें..

मौसी- नहला लेने दे न उनका मन है तो..

जग्गू- हाँ भाई नहले क्या दिक्कत है..

हँसते हुए उसने कहा जैसे मज़ाक उदा रहा हो..

में- तू नहले कोई दिक्कत नहीं है तो..

मंजू तै- अब कोई कुछ नहीं बोलेगा चल कर्मा…

तै मुझे लेकर नहाने के घर में ले गयी.. बाकि सब बहार hi बैठे थे..

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
थोड़ी hi देर में सेविका ने गरम पानी कर दिया..

मंजू तै- चल बचुआ हम नहला देते हैं तुझे

में- तै मैं कोई बच्चा थोड़ी hi हूँ जो तुम नहलाओगी.. मैं नाहा लूंगा..

मंजू तै- हमारे लिए बचुआ hi है. और पीठ पर निशान हैं चोट के आराम से साफ़ करने होंगे..

में- माँ देखो न..

Maa-ab मैं क्या कहूं तू जाने और जीजी जानें..

मौसी- नहला लेने दे न उनका मन है तो..

जग्गू- हाँ भाई नहले क्या दिक्कत है..

हँसते हुए उसने कहा जैसे मज़ाक उदा रहा हो..

में- तू नहले कोई दिक्कत नहीं है तो..

मंजू तै- अब कोई कुछ नहीं बोलेगा चल कर्मा…

तै मुझे लेकर नहाने के घर में ले गयी.. बाकि सब बहार hi बैठे थे..



अपडेट 130


तै मेरे साथ स्नानघर के अंदर गयी, और वहां एक बड़ा सा ड्रम जैसा रखा हुआ था पानी से भरा हुआ तै ने उसमे हाथ डालकर देखा.

तै- पानी तो सही गरम है आ बैठ यहाँ पतली पर.

तै ने एक पतली सरकते हुए कहा..

में- तै रहने दो मैं नाहा लूंगा तुम क्यों परेशां हो रही हो..

तै- चुपचाप बैठा रह..

मैंने भी सोचा ये नहीं मानेंगी छोडो वैसे भी क्या जा रहा नहलाने देता हूँ इन्हे hi.. और मैं पतली पर बैठ गया..

तै लोटे में पानी लेकर मेरे ऊपर डालने लगी गरम पानी बदन पर पड़ा तो मुझे आराम मिल रहा था सेल कालजंग ने बड़ी तेज़ तेज़ पटका था तो चोट लगी थी. तै मेरे पीछे खड़े होकर मेरे सर और पीठ पर पानी दाल रही थी और एक हाथ से घिस रही थी मेरी पीठ को…

तै- मुये ने कैसे पटका है पीठ नीली पद गयी बछुआ तेरी, नासपीटा कहीं का.

में- अरे तै कब तक ऐसे गरियाती रहोगी तुम भी अब छोड़ी भी

तै- हमारा बस चले तो मुँह नचले उस काळा राक्षस का.

मैं तै की बातें सुन सुनकर मुस्कुरा रहा था वहीं तै गरम पानी से मेरी पीठ को घिस घिस कर साफ़ कर रही थी. पीठ को साफ़ करने के बाद तै सामने की और आई और बोली ला अपने पेअर फैला और मेरे सामने आ कर बैठ गयी… मैंने पेअर फैलाये और जब उनकी और देखा तो मेरी आँखों में चमक आ गयी . मुझे नहलाते हुए तै के कपडे गीले हो चुके थे जिससे उनका ब्लाउज गीला होकर पूरी तरह से उनकी बड़ी बड़ी छूछीयों से चिपक गया था और ऐसा प्रतीत हो रहा था उनकी छूछीयों नंगी हैं.. और यहाँ के नियम अनुसार अंदर बनियान तो थी नहीं तो तै के बड़े बड़े पापीती साफ़ नज़र आ रहे थे जिन्हे देखते hi मेरे लुंड में तनाव आने लगा..

तै मेरे घुटनो को घिस रही थी जिससे थोड़ा ऊपर एक गीली धोती में मेरा लुंड तम्बू बना रहा था और धोती गीली होने से उससे चिपक गयी थी, घिसते हुए तै की नज़र भी अचानक से तम्बू पर पड़ी तो वो भी थोड़ा सा चौंक गयी और फिर बार बार कनखियों से देखते हुए पैरों को मलने लगी.

तै की प्यास जो कल रात में अधूरी रह गयी थी एक बार फिर से उन्हें सताने लगी वो रह रह कर मेरे लुंड को निहारती और फिर नज़र हटा लेती उनकी साँसे गरम होती हुई मुझे महसूस हो रही थी… मेरी नज़र भी तै की छूछीयो से हैट नहीं रही थी.. हालाँकि तै को मैं एक बार छोड़ ज़रूर चूका था पर वो जल्दबाज़ी वाली चुदाई थी . तै के मांसल गदराये बदन को मसाला नहीं था.. उनकी हलब्बी छूछीयो को निचोड़ा नहीं था.. और आज उन्हें ऐसे देखकर मेरा लुंड झटके पर झटके खा रहा था… जिसे यूँ झटके खता देख तै पागल हो रही थी. कल रात अपने बेटे के साथ जो हुआ और बाद में उसकी सेविका की चुदाई देखकर तै की छूट पहले hi कुलबुला रही थी और अभी मेरा लुंड झटके लेते देख और तड़पने लगी…

थोड़ी देर बाद मैंने hi तै का ध्यान बंटाया और बोलै- तै पेअर हो गए..

तै- ुहंमम? हैं हाँ अब अब खड़ा हो जा छाती और पेट भी कर देती हूँ..

मैंने कुछ नहीं कहा और खड़ा हो गया, धोती मेरे लुंड को सँभालने में असमार्ट साबित हो रही थी और लुंड खड़ा होने से ऊपर को उठ गयी थी जिससे मेरी गोलियां तै की आँखों के लिए नंगी हो गयी थी…

तै भी मेरे लुंड को तो कभी मुझे निहारते हुए धीरे धीरे कड़ी हुई और उन्हें इस तरह से भीगा हुआ खड़ा देख मेरा लुंड ठुमके मरने लगा…





लगभग नंगी हो चुकी छूछीयो को देखकर मेरा मन बहक रहा था तै को भी पताचल गया था मेरी नज़रें कहाँ हैं, और उन्होंने जब मेरी नज़र का पीछा किआ और अपनी छाती पर देखा तो हैरान रह गयी उन्हें अब इस बात का एहसास हुआ की गीला होकर उनका ब्लाउज पारदर्शी हो गया है और उनकी छुछियां बिलकुल नंगी के सामान hi हैं ये एहसास होते hi तै शर्मा गयी और जल्दी से दूसरी और घूम गयी…

तै के घूमने से एक और बिजली नेरे ऊपर गिरी.. उनके घूमने से मेरी तरफ उनकी पीठ हो गयी जो की गीले ब्लाउज में बिलकुल नंगी hi लग रही थी मेरी नज़र जब थोड़ा नीचे फिसली तो नंगी भीगी हुई मांसल कमर और उसकी सिलवटें हाय मन कर रहा था जीभ लगाकर चाट लूँ…. और जब उससे भी नीचे नज़र गयी तो मैं जैसे पागल सा हो गया तै की साड़ी बिलकुल तै के बड़े बड़े चूतड़ों से चिपकी हुई थी… और पारदर्शी होकर उनके सुन्दर चूतड़ों की झलक दिखा रही थी…





ऐसा नज़ारा देखकर मेरा तो खुद से काबू hi ख़तम हो गया.. मेरे कदम धीरे धीरे से उनकी तरफ बढ़ने लगे मैं तै के पीछे जाकर खड़ा हो गया और जैसे hi थोड़ा आगे हुआ मेरा खड़ा लुंड उनकी पीठ से टकरा गया… जिसके साथ hi मुझे तै की एक सिसकी सुनाई दी.. और उसी के साथ मैंने अपने घुटनो को थोड़ा सा मोड़ा जिससे मैं तै के बडाबर हो सकूँ और एक हाथ आगे लेजाकर तै के चर्बीदार पर सपाट पेट पर रख लिए और अगले hi पल उन्हें अपनी तरफ खींच लिए जिससे वो मुझसे चिपक गयी मेरी छाती उनकी पीठ से और मेरा लुंड उनके चूतड़ों में साड़ी के ऊपर से hi घुस गया…

तै- आअह्ह्ह्हह कर्मा बेटाःह्ह्ह्हह्ह क्या कर रहा है…

में- अपनी तै के साथ नाहा रहा हूँ..

मैंने लुंड को उनके चूतड़ों पर घिसते हुए बोलै साथ hi मेरे हाथ उनके पेट और नाभि को मसल रहे थे..

तै- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहमममममम… यह गलत है बचुआ..

में- सब सही है तै..

ये कहकर मैंने एक और झटका मर कर लुंड को उनके भरे हुए चूतड़ों में घुसा दिया..

और अपने हाथों को उनके पेट से उठा कर ऊपर उनके कन्धों तक लाया और उनके पल्लू को पकड़ कर नीचे फ़ेंक दिया… और फिर अपने हाथों को उनके गीले ब्लाउज पर रखकर एक एक करके ब्लाउज के बटन खोलने लगा…

तै बंद आँखें करके बस सिसकियाँ लेती जा रही थी.. कुछ hi देर में ब्लाउज तै के शरीर का साथ छोड़ कर नीचे पड़ा था और तै के हलब्बी गुदाज चुके मेरे हाथ में थे….





तै तो वासना में पागल हो कर बस आहें भर रही थी मैंने उनकी गर्दन को चूमते हुए उनकी बड़ी चिंता छूछीयो को मसलना शुरू किआ और फिर उन्हें अपनी तरफ घुमा लिए और अपने मुँह को उनकी एक भीगी हुई छुच्छी पर रख कर चूसने लगा…

तै- ohhhhhhhhhhhh बछजाहहहह बससससससस…. ओह्ह्ह्ह..

मैं तो पागलों की तरह तै की छूछीयो का रास पीने में जुट गया एक छुच्छी को मसलता और दूसरी की चूसता तै मेरे सर को अपनी छूछीयो पर दबा रही थी… और मेरा जोश बढ़ा रही थी .. .





मेरी धोती कहीं खुल के नीचे गिरी हुई थी और मेरा नंगा लुंड तै के पेट पर दस्तक दे रहा था… जो की उनकी त्वचा का स्पर्श पाकर और खूंखार हो गया था… मैंने एक हाथ नीचे लेजाकर तै के पिछवाड़े पर रखा और गीले चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से hi मसलने लगा.

तै ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा

तै- मत कर बीटा सब बहार हैं … कोई आ जायेगा..

मेरे भी तभी ख्याल आया की देर होगी तो कोई भी अंदर आ सकता है और हमें देख लिए तो गड़बड़ हो कयेगी मैंने भी अभी देर करना ठीक नहीं समझा पर लुंड मैंने को तैयार नहीं था मैंने रिस्क लेने की सोची और तै की साड़ी को खींच दिया और तै पूरी नंगी हो गयी उनका नंगा गदराया हुआ बदन देखकर तो मैं अपना काबू खो बैठा और तै को पकड़कर घुमा दिया..

तै- आठ नहीं कर्मा बचुआ क्या क्र रहा है बस्स्स uhhhhhhhhhhhhhmmmaaaaaaa

और इसी दबी हुई चीख के साथ मेरा लुंड तै की छूट में गछह से घुस गया… तै हाथ पीछे कर कर के मुझे मार कर रुकने के लिए बोल रही थी पर मैं चाहकर भी नहीं रुक सकता था और मैंने तै को आगे झुकादिअ और उनकी कमर थामकर पीछे से खचाखच धक्के लगाने लगा.

में- ुहममम आह्हः तै क्या मज़ेदार छूट है तुम्हारिई आह्ह्ह्ह…

कुछ पल बाद तै भी अपनी छूट की प्यास को रोक नहीं पाई और मेरा लुंड पाकर हवा में उड़ने लगी.. उनकी छूट मेरे लुंड पर कास गयी और तै मेरा अब पूरा साथ देने लगी..

तै- आह्हः राजा क्या लोढ़ा है रे तेरा, जब जाताआहहहहहह है छूट को भर देता है

में- तो ले लो तैई आह्ह्ह्ह इसे अपनी गरम छूट में और निचोड़ लो सारा…

तै- आह्ह्ह्हह मेरे बलमा कूट ऐसे hi मेरी इस निगोड़ी छूट को और शांत कार्डो कूट के.

तै की गरम बातें सुनकर मेरे धक्के और तेज़ हो गए… और मैं तूफानी धक्कों से तै को छोड़ने लगा…





तै- आठ आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह क्याआअह्ह्ह छोड़ता है रीई तूऊऊह्ह्न आह्ह्ह्ह मैं मर गयी…

और कुछ hi देर में तै की गरम छूट मेरे लुंड पर झड़ने लगी… उनके झड़ते hi मैंने भी अपना ध्यान लुंड पर लगाया और झड़ने की कोशिश करने लगा.. क्यूंकि समय मेरे पास भी ज़्यादा नहीं था.. और करीब 5 मिनट और ताबड़तोड़ धक्के लगाने के बाद मैं झड़ने को हुआ तो मैंने उनकी छूट से लुंड निकल कर उन्हें घुमा दिया और अपना लुंड उनके मुँह में घुसा दिया…

और दो तीन बार मुँह में झटके मरने के बाद hi मैं झड़ने लगा मेरा रास तै के मुँह में भरने लगा जिसे गटकने के अलावा उनके पास और कोई चारा नहीं था… जब रास की एक एक बूँद मैंने तै के मुँह में निचोड़ दी तो उनके मुँह से अलग हुआ तो तै बुरी तरह से हांफ रही थी..

तै- आठ आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह ओह्ह्ह दिया रे तू तो जान hi ले लेता… बिलकुल घोडा है रे तू..

में- और तुम मेरी घोड़ी हो मेरी प्यारी तै..

तै- हैट अब बातें मत बना और अपने कपडे पहन कर बहार जा और किसी सेविका से बोलकर मेरे कपडे भिजवा दे. कोई पूछे तो बोल्दियो की मैं नहाने वाली हूँ.

में- ठीक है मेरी घोड़ी तै.

तै- हॉट बदमाश..

तै ने मुझे मरते हुए कहा तो मैंने एक बार उनके चूतड़ों को मसाला और फिर अपनी धोती लपेटते हुए बहार निकल गया.

कक्ष में आकर देखा तो सब वैसे hi बैठे थे..

मौसी- हमें तो लगा तू आज नाहा hi नहीं पायेगा..

में- मैंने बोलै था तै को मत भेजो..

माँ- अरे पर जीजी कहाँ हैं?

में- अब वो नाहा रही हैं, अनुज जा सेविका से बोलदे की तै के कपडे ले जाये अंदर.

अनुज ने उठकर तुरंत बोल दिया मैं भी अपना सर पोंछकर सबके साथ बैठ गया.. मौसी और माँ मेरी पीठ देखने लगी की चोट के निशान कहाँ कहाँ पर और थे…

थोड़ी देर बाद तै भी आ गयी और हमारे पास hi बैठ गयी और हम सब लोग बातें करने लगे..

(अस 3रद पर्सन)

उधर कोसों दूर कर्मा के घर का दरवाज़ा किसी ने खटखटाया तो थोड़ी देर बाद पापा ने खोला तो सामने घूंघट ओढे एक औरत कड़ी थी.

पापा उसे हैरानी से देखते हुए पहचानने की कोशिश करने लगे. उस औरत ने थोड़ा सा पल्लू पीछे किआ और बोली- नमस्ते चाचाजी.

तो पापा को पहचानने में आई और पापा ने भी तुरंत आशीर्वाद दिया- खुश रह बहु आ अंदर आ.

वो औरत और कोई नहीं बल्कि प्रेमा भाभी थी.

प्रेमा भाभी को पापा ने दरवाज़े के अंदर आने दिया और बोले- बीटा तेरी चची वगेरा तो कोई है नहीं तो बता कैसे आना हुआ.

प भाभी- जानती हूँ चाचा, तभी तो मैं आपके लिए खाना लेकर आई हूँ.

पापा- अरे बीटा तूने क्यों तकलीफ की

प भाभी- इसमें क्या तकलीफ चाचा जी अभी तक ममता चची थी तो उनके यहाँ से आ जाता पर अब वो भी नहीं हैं. चलिए आप बैठ जाएं मैं गरम करदेती हूँ.

पापा- ठीक है बीटा अब मैं क्या बोलूं.

प भाभी – कुछ नहीं चाचाजी बस बैठो और खाओ वैसे भी पल्ली मुझे आपका ख्याल रखने को बोल कर गयी है.

पापा- पल्ली भी न बिलकुल hi पागल है..

पापा ने पल्ली की जवानी को याद करते हुए और सुबह और रात की चुदाई की यादों को याद करते हुए अपने लुंड को चुपके से मसला और खत पर आकर बैठ गए.. भाभी खाना लेकर रसोई में चली गयी गरम करने..

इधर पापा बहार बैठ कर इंतज़ार करने लगे.. तभी पापा को कुछ गिरने की आवाज़ आई.. तो पापा जल्दी से उठ कर रसोई की तरफ गए और जो देखा उसे देखकर तो पापा की आँखें चौड़ी हो गयी..

भाभी का पल्लू एक तरफ उनके हाथ में था जिससे उनका नंगा पेट और ब्लाउज में क़ैद बड़ी बड़ी छुछियां सामने थी, सपाट पेट और उसके बीच में गोल नाभि देखकर पापा के मुँह में पानी आने लगा.. .. लुंड में भी खून का बहाव दौड़ने लगा. भाभी अपने पेट और सीने से कुछ साफ़ करने की कोशिश कर रही थी जिससे उनके छूछे ब्लाउज में थिरक रहे थे.





पापा तो ये देख बहकने लगे की तभी भाभी की नज़र पापा पर पड़ी और वो वैसे hi अपने आप को साफ़ करते हुए बोली- चाचाजी वो मैं घी ढूंढ रही थी रोटी के लिए और शायद ये बूरा गिर गया मेरे ऊपर..

पापा- अरे कोई नहीं बीटा गिर गया तो गिर गया… ला मैं घी उतर देता हूँ.

पापा ने आगे बढ़ते हुए कहा.. भाभी ने अपने पल्लू को अभी भी वैसे hi पकड़ा हुआ था.. पापा धीरे धीरे बढ़ाते हुए भाभी के पास पहुँच गया और घी उठाने के लिए आगे बढे पर भाभी वैसी hi अपनी जगह पर कड़ी रही, तो घी उतरने के लिए पापा को उनके बिलकुल करीब जाना पड़ा, पापा की नज़र बड़ी मुश्किल से भाभी के चिकने पेट पर से हैट रही थी. पापा का लुंड भाभी के इतने करीब होने से खड़ा होने लगा..

पापा ने घी उठाने के लिए खुद को उठाया और आगे हुए तो उनका शरीर बिलकुल भाभी के शरीर से सात गया और पापा का खड़ा लुंड भाभी के पेट पर पाजामे के अंदर से चुभने लगा… जिससे भाभी के अंदर से एक आह निकल गयी.

इसके आगे क्या हुआ जानिये अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्

 
एक बढ़िया और नए तरह का पोस्ट किआ है पारिवारिक चुदाई संग्रह में एक बार जाकर ज़रूर देखें और अपनी प्रतिक्रिया दें..

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