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- Dec 5, 2013
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बड़ी माँ- बहुत अचे तो अब जब दोनों पक्ष तैयार हैं और सरे नियम सबको पता हैं तो जल्दी hi मुक़ाबला शुरू किआ जायेगा… पहले सैनिक कौन बनेगा इसका फैसला सिक्का उछाल कर किआ जायेगा…
एक सिक्का बड़ी माँ ने हम सब को दिखाया जिसमे एक तरफ फूल बना था तो दूसरी तरफ बकरी .
बड़ी माँ यदि बकरी आई तो कालजंग पहले जायेगा.. और यदि फूल आया तो कर्मा..
बड़ी माँ ने सिक्का मुझे दिया और मैंने वो हवा में उछाल दिया…
अपडेट 138 ा
चोदामपुर में पापा आज बड़े चहक रहे थे, और चहकें भी क्यों न सुबह सुबह hi इतनी मस्त छूट छोड़ने को मिल गयी थी सच में पल्ली ने ये काम तो बहुत hi ाचा किआ है, जब आएगी तो उसे उसकी पसंद का एक सूट dilaunga..nashta करके और नाहा धो कर वो मोटरसाइकिल पर शहर की और चल दिए थे खेत के लिए और घर का कुछ सामान जो लेना था मोटरसाइकिल चलते हुए उनके मन में कुछ अजीब अजीब से ख्याल भी आ रहे थे, भाभी की वो बात उनके मन में रह रह कर आ रही थी की मैं दोनों बेटों और बाप तीनो से चुद चुकी हूँ अब…
उन्हें कर्मा और अनुज का ख्याल आया की उनके बच्चे उतने भी छोटे नहीं रहे जितना वो समझते हैं, ममता, पल्ली और प्रेमा बहु तीनो औरतों को वो मेरे से पहले hi छोड़ चुके हैं और मुझे कोई खबर नहीं हुई…
वैसे देखा जाये तो ये उन दोनों की hi बदौलत है जो मैं तीनो को भोग पाया, अगर वो शुरुआत नहीं करते तो शायद ये मेरे पास कभी आती hi नहीं… वैसे इसमें सब कुछ कर्मा का hi किआ धरा होगा, अनुज शरारती है पर इतनी हिम्मत नहीं की इतने बड़े बड़े कदम उठा ले.. चलो एक बात अछि है की दोनों भाई सब कुछ साथ hi कर रहे हैं, चुदाई भी.. ये सोचकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, पर कुछ और भी उनके दिमाग में आ गया और वो कुछ यादों में खो गए..
सुबह सुबह जल्दबाजी में hi सही पर छूट की कुटाई करवाकर आज भाभी काफी खुश और चहक रही थी, लोक गीत गुनगुनाते हुए घर के सरे काम निपटा रही थी, नीलेश के साथ चाय पि कर राजपाल यानि ससुर जी फिर से चलव गए थे भैंसो को चारा वगेरा करने और जब तक बापिस आये तब तक भाभी ने खाना वगेरा बना कर सब कुछ कर लिए था..
आते hi बहु ने खाना लगा दिया तो राजपाल बैठ गए खाना खाने,
राजपाल ने खाना खाया और हाथ धोते हुए बोले: बहु कोप्ते तो बड़े स्वादिष्ट बनती है तू..
भाभी- तुम्हे पसंद आये पापाजी?
राजपाल- अरे पसंद आये उन्ही की वजह से हम दो रोटी ज़्यादा खा गए.
Bhabhi-to क्या हुआ हम तो कहते हैं और कहानी चाहिए थी..
राजपाल: नहीं बीटा अब तो एक निवाले की भी जगह नहीं है पेट में.. तू भी खा ले अब.
भाभी: हाँ बस लगा hi रहे हैं.
राजपाल- बहुत बढ़िया तब तक थोड़ा सुस्ता लें पेट भर गया है..
कहकव राजपाल हंसने लगे..
वहीं भाभी भी हँसते हुए खाना खाने के लिए बैठ गयी..
खाना खाने के बाद उन्होंने झूठे बर्तन धोये और फिर जब सारा काम निपटा कर फ्री हुई तब तक राजपाल ताऊ भी नींद से उठ चुके थे,
राजपाल- ाचा बहु अब हम निकलते हैं खेत की तरफ, पानी लगाना है तो उसके लिए रास्ता खोदना पड़ेगा.
भाभी- पापाजी हम का सोचरे थे की हम भी चलें का खेत में तुम्हारे साथ?
राजपाल- अरे तू क्या करेगी खेत में?
भाभी- यहाँ हम अकेले परेशां हो जाते हैं पल्ली वगेरा भी नहीं है जो उनके यहाँ चली जाएं.. पूरा घर भी सुनसान है.
राजपाल- ये बात तो सही कही तूने पर खेत में. कहीं तू परेशां न हो जाये.
भाभी- नहीं पापाजी परेशानी कैसी हमें तो ाचा लगेगा..
राजपाल- ाचा ठीक है चल और ऐसा कर दोपहर का खाना भी बांध ले वहीं खा लेंगे.
भाभी- ठीक है पापाजी अभी बांधते हैं
भाभी ने खुश होते हुए कहा और कुछ पल बाद hi ससुर बहु घर में ताला मारकर निकल पड़े.
कालक गाओं
सब की नजर घुमते हुए सिक्के पर थी और सिक्का हवा में घुमते हुए नीचे की और आने लगा और फिर आवाज़ के साथ ज़मीन से टकराया और फिर थोड़ा नाचने के बाद ठहर गया, बड़ी माँ ने आगे बढ़कर सिक्का देखा और पहिए एलान किआ..
सिक्के पर बकरी आई है तो पहली बारी कालजंग की होगी और कर्मा लुटेरा होगा…
ये सुनकर मेरे मन को चैन आया, वहीं मेरे साथ के लोगो ने भी रहत की सांस ली, मौसी और माँ को मुझपर भरोसा तो था पर उतना hi कुछ गलत होने का दर भी था, जो जायज़ भी था पर पहली बारी कालजंग की थी इस कारन दोनों को थोड़े समय के लिए hi सही राहत जरूर मिल गयी थी..
बड़ी माँ- तो कालजंग पहले जायेगा और आखिरी जरूरी बात मुक़ाबला शुरू होते hi सवारियां लुटेरे का विरोध नहीं कर सकती जैसा लुटेरा चाहेगा वो उनके साथ कर सकता है सवारियों को बचने की जिम्मेदारी सैनिक की है…
सबने सहमति में सर हिलाया,
बड़ी माँ- अब सब लोग नाव की और चलो..
मैं, बड़ी माँ कालजंग और उसकी माँ हम एक किनारे कड़ी नाव के पास गए,
तालाब के एक किनारे से दुसरे किनारे की बीच की दूरी करीं 200 मीटर तो थी hi मतलब नाव से एक सवारी को छोड़कर बापिस आना मतलब 400 मीटर की दूसरी और इसी बीच मुझे यानि लुटेरे को लूट मचानी थी…
बड़ी माँ- सब तैयार हैं
मैंने और कालजंग ने हाँ में सर हिलाया माँ और बाकि सब परेशां थे की आगे क्या होने वाला है…
बड़ी माँ- क्यूंकि निर्णायक की भूमिका चित्रावती निभा रही है तो अब से वही सरे निर्देश देगी..
सब लोग चित्रावती की और देखने लगे,
चित्रावती- मुक़ाबला शुरू किया जाये
उसने बिना किसी भाव से बोलै न जाने क्यों वो मुझे अभी भी नाराज लग रही थी पर अभी मेरे पास उन सब चीज़ों से ज़्यादा जरुरी काम था..
मुक़ाबला शुरू होते hi कालजंग ने नाव का चप्पू उठाया और फिर वो जैसे सोचने लगा की पहले किसे ले जाया जाए… उसने एक बार बड़ी माँ को देखा और फिर अपनी माँ को और फिर कुछ सोचकर अपनी माँ का हाथ पकड़ा और नाव की और ले जाने लगा… मैं बस खड़ा हुआ देख रहा था क्यूंकि उनके नाव में बैठने से पहले मैं कुछ नहीं कर सकता था.. बड़ी माँ बिना किसी भाव के ये सब देख रही थी वहीं लोगो में ख़ुसूइ पुसुर हो रही थी की कालजंग ने पहले अपनी माँ को चुना बड़ी माँ से पहले.. खैर किनारे पर पहुँच कर जैसे hi नाव में चढ़ने वाले थे उसने अचानक से अपनी माँ का हाथ छोड़ दिया और बड़ी माँ का हाथ पकड़ लिए और उन्हें खींच कर अपनी नाव में चढ़ा लिए मतलब मैं और उसकी माँ किनारे पर रह गए…
नाव में चढ़ाते मैं भी हरकत में आ गया और उसकी माँ की और बढ़ने लगा, पर तभी कालजंग ने नाव में कुछ ऐसा किआ जिससे मैं क्या सभी लोग हैरान रह गए उसने अचानक से बड़ी माँ को पकड़ा और उनके ब्लाउज में हाथ डाले और उस पकड़ कर चीयर दिया और उनके शरीर से अलग कर दिया…

बड़ी माँ अचानक से बिलकुल ऊपर से बिलकुल नंगी हो गयी उनकी बड़ी बड़ी छुछियां सबकी आँखों के सामने आ गयी, क्या खूबसूरत चूचिया थी बेहद बड़ी पर सुडोल मैं तो उनको देखते hi खो सा गया और मेरे मुँह में पानी आने लगा के आह क्या सुन्दर चूचियां थी उधर बड़ी माँ को ऊपर से नंगा कर कालजंग ने जल्दी से चप्पू उठाया और नाव चलने लगा, मैं बड़ी माँ की छूछीयों की खूबसूरती में खो सा गया था, तभी मुझे माँ की आवाज़ आई कर्मा खड़ा क्यों है कुछ कर…
और मुझे होश आया की बीटा मुक़ाबले पर ध्यान दे, मैं तुरंत कालजंग की माँ की और बढ़ा और उसकी साड़ी को पकड़ कर जल्दी जल्दी खींचते हुए उतर दिया और कालजंग की माँ सबके सामने नीचे से बिलकुल नंगी हो गयी, मेरा एक अंक पक्का हो गया, मैंने एक नजर बड़ी माँ पर डाली जो अभी भी अपनी छूछीयो को बहार किये हुए हमारी तरफ देख रही थी, मेरा लुंड तो बड़ी माँ की छूछीयों को देखकर hi लोहे का हो चुका था कालजंग की माँ के बड़े और नंगे चूतड़ों को देखकर फुंकारें मरने लगा..
मैंने कालजंग की माँ को घुमाया और आगे की तरफ झुककर अपने लुंड को उसकी छूट के द्वार पर टिकाया और बिना किसी देरी के फच्च से घुसा दिया… मेरा लुंड उसकी छूट की दीवारों को फैलता हुआ आधा अंदर चला गया…
एक बार ये नजारा कालजंग ने मुद कर जरूर देखा और देखते hi उसकी गति और बढ़ गयी… वहीं मुझे 4 अंक और मिल गए… वहीं मेरा लुंड कालजंग की माँ की छूट में जाता देख बाकि सब पर भी कुछ अलग hi असर हो रहा था, माँ अपने बेटे को ऐसे खुले में अनजान औरत की चुदाई करते देख गरम हो रही थी उनकी छूट गीली हो गयी थी, वहीं मंजू तै का भी यही हाल था, मौसी की छूट तो गीली हो रही थी पर साथ hi उन्हें आगे क्या होगा इसका दर सत्ता रहा था..
पर उत्तेजना उन पर भी हावी हो रही थी… अनुज और जग्गू का तो और भी बुरा हाल था एक तो इतने लोगो के सामने चुदाई देखना और दूसरो बात अपनी माओं और मौसी के सामने चुदाई देखमा उनकी कामोत्तेजना को एक अलग hi स्टेट पर पहुंचा रहा था, उनकी उनकी धोतियों में तम्बू बन गए थे..
मैंने कालजंग की माँ की छूट में धक्के लगाने शुरू कर दिया था, साथ hi उसे छोड़ते हुए मैं उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा और फिर उसे खोल कर उसके शरीर से अलग कर दिया, मेरे हाथ में दो अंक और आ गए और ये अंक कुछ ज़्यादा hi बड़े और भरी थे, जो की ब्लाउज उतरजाने से खुल कर बहार आ गए थे, जिन्हे में हाथों में लेकर मसलने लगा, कालजंग की माँ. अब पूरी तरह से नंगी थी… और सबके सामने में अपने लुंड को उसकी छूट में दनादन पेल रहा था, कालजंग करीब करीब दुसरे किनारे पहुंच चूका था, मैं अब कालजंग की चाल समझ गया था वो बड़ी माँ की छूछीयों से मेरा ध्यान बहका कर मेरा समय व्यर्थ करवाना चाहता था, वैसे तरकीब बुरी नहीं थी अगर किसी ने पहले चुदाई न की हो आउट वो देखलो बड़ी माँ की छुछियां तो अपना नाम भो जाये मुक़ाबला तो दूर की बात है खैर किस्मत से हमारा छोड़ू होना हमारे काम आ गया यहाँ पर…
थप थप थप की आवाज़ के साथ मेरी जांघें कालजंग की माँ के चूतड़ों से टकरा कर उनमे लहार पैदा कर रही थी..
इसके आगे क्या हुआ इसके part बी में जो की बहुत hi जल्द अपडेट मिलेगी अभी इतनी पोस्ट इसलिए कर रहा हु क्यूंकि आप सब से कमिटमेंट की थी तो पढ़ें और एन्जॉय करें.
धन्यवाद्
एक सिक्का बड़ी माँ ने हम सब को दिखाया जिसमे एक तरफ फूल बना था तो दूसरी तरफ बकरी .
बड़ी माँ यदि बकरी आई तो कालजंग पहले जायेगा.. और यदि फूल आया तो कर्मा..
बड़ी माँ ने सिक्का मुझे दिया और मैंने वो हवा में उछाल दिया…
अपडेट 138 ा
चोदामपुर में पापा आज बड़े चहक रहे थे, और चहकें भी क्यों न सुबह सुबह hi इतनी मस्त छूट छोड़ने को मिल गयी थी सच में पल्ली ने ये काम तो बहुत hi ाचा किआ है, जब आएगी तो उसे उसकी पसंद का एक सूट dilaunga..nashta करके और नाहा धो कर वो मोटरसाइकिल पर शहर की और चल दिए थे खेत के लिए और घर का कुछ सामान जो लेना था मोटरसाइकिल चलते हुए उनके मन में कुछ अजीब अजीब से ख्याल भी आ रहे थे, भाभी की वो बात उनके मन में रह रह कर आ रही थी की मैं दोनों बेटों और बाप तीनो से चुद चुकी हूँ अब…
उन्हें कर्मा और अनुज का ख्याल आया की उनके बच्चे उतने भी छोटे नहीं रहे जितना वो समझते हैं, ममता, पल्ली और प्रेमा बहु तीनो औरतों को वो मेरे से पहले hi छोड़ चुके हैं और मुझे कोई खबर नहीं हुई…
वैसे देखा जाये तो ये उन दोनों की hi बदौलत है जो मैं तीनो को भोग पाया, अगर वो शुरुआत नहीं करते तो शायद ये मेरे पास कभी आती hi नहीं… वैसे इसमें सब कुछ कर्मा का hi किआ धरा होगा, अनुज शरारती है पर इतनी हिम्मत नहीं की इतने बड़े बड़े कदम उठा ले.. चलो एक बात अछि है की दोनों भाई सब कुछ साथ hi कर रहे हैं, चुदाई भी.. ये सोचकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, पर कुछ और भी उनके दिमाग में आ गया और वो कुछ यादों में खो गए..
सुबह सुबह जल्दबाजी में hi सही पर छूट की कुटाई करवाकर आज भाभी काफी खुश और चहक रही थी, लोक गीत गुनगुनाते हुए घर के सरे काम निपटा रही थी, नीलेश के साथ चाय पि कर राजपाल यानि ससुर जी फिर से चलव गए थे भैंसो को चारा वगेरा करने और जब तक बापिस आये तब तक भाभी ने खाना वगेरा बना कर सब कुछ कर लिए था..
आते hi बहु ने खाना लगा दिया तो राजपाल बैठ गए खाना खाने,
राजपाल ने खाना खाया और हाथ धोते हुए बोले: बहु कोप्ते तो बड़े स्वादिष्ट बनती है तू..
भाभी- तुम्हे पसंद आये पापाजी?
राजपाल- अरे पसंद आये उन्ही की वजह से हम दो रोटी ज़्यादा खा गए.
Bhabhi-to क्या हुआ हम तो कहते हैं और कहानी चाहिए थी..
राजपाल: नहीं बीटा अब तो एक निवाले की भी जगह नहीं है पेट में.. तू भी खा ले अब.
भाभी: हाँ बस लगा hi रहे हैं.
राजपाल- बहुत बढ़िया तब तक थोड़ा सुस्ता लें पेट भर गया है..
कहकव राजपाल हंसने लगे..
वहीं भाभी भी हँसते हुए खाना खाने के लिए बैठ गयी..
खाना खाने के बाद उन्होंने झूठे बर्तन धोये और फिर जब सारा काम निपटा कर फ्री हुई तब तक राजपाल ताऊ भी नींद से उठ चुके थे,
राजपाल- ाचा बहु अब हम निकलते हैं खेत की तरफ, पानी लगाना है तो उसके लिए रास्ता खोदना पड़ेगा.
भाभी- पापाजी हम का सोचरे थे की हम भी चलें का खेत में तुम्हारे साथ?
राजपाल- अरे तू क्या करेगी खेत में?
भाभी- यहाँ हम अकेले परेशां हो जाते हैं पल्ली वगेरा भी नहीं है जो उनके यहाँ चली जाएं.. पूरा घर भी सुनसान है.
राजपाल- ये बात तो सही कही तूने पर खेत में. कहीं तू परेशां न हो जाये.
भाभी- नहीं पापाजी परेशानी कैसी हमें तो ाचा लगेगा..
राजपाल- ाचा ठीक है चल और ऐसा कर दोपहर का खाना भी बांध ले वहीं खा लेंगे.
भाभी- ठीक है पापाजी अभी बांधते हैं
भाभी ने खुश होते हुए कहा और कुछ पल बाद hi ससुर बहु घर में ताला मारकर निकल पड़े.
कालक गाओं
सब की नजर घुमते हुए सिक्के पर थी और सिक्का हवा में घुमते हुए नीचे की और आने लगा और फिर आवाज़ के साथ ज़मीन से टकराया और फिर थोड़ा नाचने के बाद ठहर गया, बड़ी माँ ने आगे बढ़कर सिक्का देखा और पहिए एलान किआ..
सिक्के पर बकरी आई है तो पहली बारी कालजंग की होगी और कर्मा लुटेरा होगा…
ये सुनकर मेरे मन को चैन आया, वहीं मेरे साथ के लोगो ने भी रहत की सांस ली, मौसी और माँ को मुझपर भरोसा तो था पर उतना hi कुछ गलत होने का दर भी था, जो जायज़ भी था पर पहली बारी कालजंग की थी इस कारन दोनों को थोड़े समय के लिए hi सही राहत जरूर मिल गयी थी..
बड़ी माँ- तो कालजंग पहले जायेगा और आखिरी जरूरी बात मुक़ाबला शुरू होते hi सवारियां लुटेरे का विरोध नहीं कर सकती जैसा लुटेरा चाहेगा वो उनके साथ कर सकता है सवारियों को बचने की जिम्मेदारी सैनिक की है…
सबने सहमति में सर हिलाया,
बड़ी माँ- अब सब लोग नाव की और चलो..
मैं, बड़ी माँ कालजंग और उसकी माँ हम एक किनारे कड़ी नाव के पास गए,
तालाब के एक किनारे से दुसरे किनारे की बीच की दूरी करीं 200 मीटर तो थी hi मतलब नाव से एक सवारी को छोड़कर बापिस आना मतलब 400 मीटर की दूसरी और इसी बीच मुझे यानि लुटेरे को लूट मचानी थी…
बड़ी माँ- सब तैयार हैं
मैंने और कालजंग ने हाँ में सर हिलाया माँ और बाकि सब परेशां थे की आगे क्या होने वाला है…
बड़ी माँ- क्यूंकि निर्णायक की भूमिका चित्रावती निभा रही है तो अब से वही सरे निर्देश देगी..
सब लोग चित्रावती की और देखने लगे,
चित्रावती- मुक़ाबला शुरू किया जाये
उसने बिना किसी भाव से बोलै न जाने क्यों वो मुझे अभी भी नाराज लग रही थी पर अभी मेरे पास उन सब चीज़ों से ज़्यादा जरुरी काम था..
मुक़ाबला शुरू होते hi कालजंग ने नाव का चप्पू उठाया और फिर वो जैसे सोचने लगा की पहले किसे ले जाया जाए… उसने एक बार बड़ी माँ को देखा और फिर अपनी माँ को और फिर कुछ सोचकर अपनी माँ का हाथ पकड़ा और नाव की और ले जाने लगा… मैं बस खड़ा हुआ देख रहा था क्यूंकि उनके नाव में बैठने से पहले मैं कुछ नहीं कर सकता था.. बड़ी माँ बिना किसी भाव के ये सब देख रही थी वहीं लोगो में ख़ुसूइ पुसुर हो रही थी की कालजंग ने पहले अपनी माँ को चुना बड़ी माँ से पहले.. खैर किनारे पर पहुँच कर जैसे hi नाव में चढ़ने वाले थे उसने अचानक से अपनी माँ का हाथ छोड़ दिया और बड़ी माँ का हाथ पकड़ लिए और उन्हें खींच कर अपनी नाव में चढ़ा लिए मतलब मैं और उसकी माँ किनारे पर रह गए…
नाव में चढ़ाते मैं भी हरकत में आ गया और उसकी माँ की और बढ़ने लगा, पर तभी कालजंग ने नाव में कुछ ऐसा किआ जिससे मैं क्या सभी लोग हैरान रह गए उसने अचानक से बड़ी माँ को पकड़ा और उनके ब्लाउज में हाथ डाले और उस पकड़ कर चीयर दिया और उनके शरीर से अलग कर दिया…

बड़ी माँ अचानक से बिलकुल ऊपर से बिलकुल नंगी हो गयी उनकी बड़ी बड़ी छुछियां सबकी आँखों के सामने आ गयी, क्या खूबसूरत चूचिया थी बेहद बड़ी पर सुडोल मैं तो उनको देखते hi खो सा गया और मेरे मुँह में पानी आने लगा के आह क्या सुन्दर चूचियां थी उधर बड़ी माँ को ऊपर से नंगा कर कालजंग ने जल्दी से चप्पू उठाया और नाव चलने लगा, मैं बड़ी माँ की छूछीयों की खूबसूरती में खो सा गया था, तभी मुझे माँ की आवाज़ आई कर्मा खड़ा क्यों है कुछ कर…
और मुझे होश आया की बीटा मुक़ाबले पर ध्यान दे, मैं तुरंत कालजंग की माँ की और बढ़ा और उसकी साड़ी को पकड़ कर जल्दी जल्दी खींचते हुए उतर दिया और कालजंग की माँ सबके सामने नीचे से बिलकुल नंगी हो गयी, मेरा एक अंक पक्का हो गया, मैंने एक नजर बड़ी माँ पर डाली जो अभी भी अपनी छूछीयो को बहार किये हुए हमारी तरफ देख रही थी, मेरा लुंड तो बड़ी माँ की छूछीयों को देखकर hi लोहे का हो चुका था कालजंग की माँ के बड़े और नंगे चूतड़ों को देखकर फुंकारें मरने लगा..
मैंने कालजंग की माँ को घुमाया और आगे की तरफ झुककर अपने लुंड को उसकी छूट के द्वार पर टिकाया और बिना किसी देरी के फच्च से घुसा दिया… मेरा लुंड उसकी छूट की दीवारों को फैलता हुआ आधा अंदर चला गया…
एक बार ये नजारा कालजंग ने मुद कर जरूर देखा और देखते hi उसकी गति और बढ़ गयी… वहीं मुझे 4 अंक और मिल गए… वहीं मेरा लुंड कालजंग की माँ की छूट में जाता देख बाकि सब पर भी कुछ अलग hi असर हो रहा था, माँ अपने बेटे को ऐसे खुले में अनजान औरत की चुदाई करते देख गरम हो रही थी उनकी छूट गीली हो गयी थी, वहीं मंजू तै का भी यही हाल था, मौसी की छूट तो गीली हो रही थी पर साथ hi उन्हें आगे क्या होगा इसका दर सत्ता रहा था..
पर उत्तेजना उन पर भी हावी हो रही थी… अनुज और जग्गू का तो और भी बुरा हाल था एक तो इतने लोगो के सामने चुदाई देखना और दूसरो बात अपनी माओं और मौसी के सामने चुदाई देखमा उनकी कामोत्तेजना को एक अलग hi स्टेट पर पहुंचा रहा था, उनकी उनकी धोतियों में तम्बू बन गए थे..
मैंने कालजंग की माँ की छूट में धक्के लगाने शुरू कर दिया था, साथ hi उसे छोड़ते हुए मैं उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा और फिर उसे खोल कर उसके शरीर से अलग कर दिया, मेरे हाथ में दो अंक और आ गए और ये अंक कुछ ज़्यादा hi बड़े और भरी थे, जो की ब्लाउज उतरजाने से खुल कर बहार आ गए थे, जिन्हे में हाथों में लेकर मसलने लगा, कालजंग की माँ. अब पूरी तरह से नंगी थी… और सबके सामने में अपने लुंड को उसकी छूट में दनादन पेल रहा था, कालजंग करीब करीब दुसरे किनारे पहुंच चूका था, मैं अब कालजंग की चाल समझ गया था वो बड़ी माँ की छूछीयों से मेरा ध्यान बहका कर मेरा समय व्यर्थ करवाना चाहता था, वैसे तरकीब बुरी नहीं थी अगर किसी ने पहले चुदाई न की हो आउट वो देखलो बड़ी माँ की छुछियां तो अपना नाम भो जाये मुक़ाबला तो दूर की बात है खैर किस्मत से हमारा छोड़ू होना हमारे काम आ गया यहाँ पर…
थप थप थप की आवाज़ के साथ मेरी जांघें कालजंग की माँ के चूतड़ों से टकरा कर उनमे लहार पैदा कर रही थी..
इसके आगे क्या हुआ इसके part बी में जो की बहुत hi जल्द अपडेट मिलेगी अभी इतनी पोस्ट इसलिए कर रहा हु क्यूंकि आप सब से कमिटमेंट की थी तो पढ़ें और एन्जॉय करें.
धन्यवाद्






























