Incest Katha Chodampur Ki - Page 30 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

अपडेट 175

सरलपुर

रात को हुए घटनाक्रम के बाद सुबह शांत थी हालाँकि चेतन छुप छुपकर रिमझिम के बदन को नास्ता करते हुए निहार रहा था और आने वाले सुखद कल की कल्पना कर रहा था, वहीं रमन हमेशा की तरह छुप कर अपनी बहन को निहार रहा था, और कहीं न कहीं चंचल भी अपने देवर को देखकर कुछ कुछ मन hi मन ख्याल पका रही थी. वहीं उसे उसके ससुर तिरछी नज़रों से ताड़ रहे थे और साड़ी में झांकती उसकी कमर देख कर उत्तेजित हो रहे थे.

खैर नाश्ता हुआ और फिर चेतन रमन अपने काम पर और ख़ुशी कॉलेज निकल गयी, दोनों बहुएं घर के काम में और चरण सिंह हाल में बैठ कर टीवी देखने का बहाना करते हुए अपनी जवान बहुओं को देख नैन सुख भोग रहे थे...

काम के बाद दोनों बहुएं नहाने के लिए चली तो चरण सिंह अपने कमरे में आ गए इसका फायदा उठाते हुए दोनों एक hi बाथरूम में घुस गयीं और दोनों पानी बचते हुए साथ नहाने लगी...





नहाने का प्रोग्राम थोड़ा लम्बा चला क्यूंकि देवरानी जेठानी ने एक दुसरे के बदन को अचर से साफ़ किया खासकर छूट गांड और छूछीयो का विशेष ध्यान रखा गया जिन्हे दोनों ने hi चाट चाट कर साफ़ किया. एक दुसरे के होंठों और जीभ को भी खूब चूसा... खैर नहाना होने के बाद दोनों आराम करने लगी जो की रात भर की चुदाई और सुबह जल्दी उठने के कारण ज़रूरी भी हो जाता था, इसीलिए दोनों बहुएं अपने अपने कमरों में जाकर सो गयी...

उधर थोड़ी देर बाद चरण सिंह उठे तो उन्हें हर भारतीय आम इंसान की तरह चाय की तालाब लगने लगी, आंगन में आकर देखा कोई नज़र नहीं आया तो वहीं सोफे पर बैठ कर चंचल को पुकारा चंचल जो नींद में थी उसे कोई खबर hi नहीं थी, अगली आवाज़ रिमझिम को दी उसने भी नहीं सुना, कुछ देर में खुद खड़े हुए सोचा बहुएं कहाँ हैं जो सुन hi नहीं रही,

उठकर चेतन और चंचल के कमरे की और गए तो दरवाज़ा भिड़ा हुआ था थोड़ा धक्का लगाया तो खुल गया चरण सिंह ने दरवाज़ा खोलते हुए चंचल को पुकारा और अंदर झांक कर देखा और फिर जो देखा उसे देख थोड़ा ठिठक से गए.. अंदर बिस्तर पर बहु चंचल सो रही थी कपडे सोने की वजह से अस्त व्यस्त हो गए थे पल्लू नीचे गिर गया था जिस वजह से चरण सिंह को एक बेहद कामुक नज़ारा देखने को मिल रहा था.

चंचल का सपाट मगर गदराया हुआ पेट कामुक नाभि साड़ी और ब्लाउज के बीच नंगा देखकर चरण सिंह का मन ठहर सा गया.





कैसे हुए ब्लाउज में चंचल की चूचियों का उभर जो की हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी...

चरण सिंह की नज़र तो बहु के मादक पेट और कामुक नाभि पर से हैट hi नहीं रही थी... दरवाज़ा खोले वो ऐसे कमरे में झाँक रहे थे कुछ देर के बाद उन्हें ख्याल आया की वो कहाँ खड़े हैं अगर किसी ने देख लिया तो जवाब देना मुश्किल हो जायेगा. इसलिए कुछ सोचते हुए दतवाज़े से पीछे हेट और भरी मन के साथ जाने लगे पर दो तीन कदम बढ़ाये थे की मन नहीं माना, अंदर की हवस ने सही गलत के बोध पर कब्ज़ा कर लिया और चलते कदम रुक गए, कुछ देर यूँ hi खड़े रहने के बाद चरण सिंह दोबारा कमरे की और घूम गए और उसके दरवाज़े के पास आये, फिर से दरवाज़े को धकेला और फिर घर में सब तरफ देखा खासकर रिमझिम के कमरे को तो वो बंद था फिर बड़ी सावधानी से दरवाज़ा खोलकर वो अंदर घुस गए और आराम से उसे बापिस भिड़ा दिया.

अब चरण सिंह की नज़र बापिस चंचल के गदराये बदन पर थी, उसकी हर सांस के साथ फूलती छुछियां उसका मांसल चिकना पेट, बीच में गहरी नाभि देखकर hi चरण सिंह का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, उन्हें अपनी धोती के अंदर लुंड में हलचल साफ़ महसूस हो रही थी, कुछ देर यूँ hi नैन सुख लेने के बाद चरण सिंह के पेअर आगे को बढे और वो बिस्तर के पास पहुँच गए, चंचल के चेहरा देखा तो वो गहरी नींद में सो रही थी. चरण सिंह का दिल ज़ोरो से धड़क रहा था क्यूंकि अभी वो जिस अवस्था में थे अगर कोई देख लेता तो वो कोई भी सफाई देने में असमर्थ होते.. कोई और क्या अगर चंचल खुद भी जाग जाए तो वो क्या उत्तर देंगे उन्हें समझ नहीं आ रहा था.

पर कहते हैं न जब सर पर उत्तेजना का बुखार चढ़ जाता है तो कुछ और समझ नहीं आता वही हाल चरण सिंह का था, बेचारे अपनी हवस के आगे मजबूर थे..

चरण सिंह ने कांपते हुए हाथ धीरे धीरे आगे बढ़ाये और फिर उनके हाथ उनकी बहु के मांसल सपाट पेट से छू गए और छूटे hi चरण सिंह के बदन में करंट दौड़ गया और चरण सिंह ने अपना हाथ बापिस खींच लिया. उन्हें ऐसा लग रहा था की उनकी उँगलियों पर उसकी बहु के नरम पेट का एहसास अब भी था. चरण सिंह का मन फिर मचलने लगा उन्होंने चंचल के चेहरे को देखते हुए अपना हाथ हलके से फिर से उसके पेट पर रख दिया एक बार फिर से ये एहसास उनके बदन में करंट दौड़ा गया..

चंचल अब भी गहरी नींद में थी, चरण सिंह ने बहु के पेट पर धीरे धीरे हाथ चलना शुरू किया अह्ह्ह्ह इस एहसास से अपने हाथ पर बहु के नरम पेट को महसूस करके चरण सिंह का लुंड पूरी तरह से तन गया, उनकी उत्तेजना अब उनके सर पर चढ़ चुकी थी, चरण सिंह धीरे धीरे चंचल के पूरे पेट को सहलाने लगे और बीच में उसे हल्का सा मसल भी देते, नाभि को बीच में छेड़ रहे थे, चरण सिंह को बहुत मज़ा ा रहा था ऐसा उत्तेजित करने वाला एहसास उन्हें आज तक नहीं हुआ था, पेट और कमर को अचे से सहलाते हुए और चंचल के न जागने पर चरण सिंह की हिम्मत बढाती जा रही थी.. बहु को ऐसे देख उनका गाला सूख सा रहा था उनका मन हो रहा था की बहु के बदन को जी भर के चूमें चाटें.

पर साथ hi दर भी था, पर दर की उत्तेजना के आगे कहाँ चलती है, उन्होंने मन में सोचा की अब तक तो चंचल जाएगी नहीं लगता है गहरी नींद में है इसका फायदा उठाना चाहिए.. ये सोचते हुए चरण सिंह के पूरे बदन में सिरहन दौड़ गयी उनके हाथ अब भी बहु के नंगे पेट पर थे, उन्होंने चंचल के चेहरे को एक बार और देखा और उसे अब भी सोता पाया तो बस उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला कर लिया.

चरण सिंह वहीं अचे से झुक कर बैठ गए और चंचल की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर आएगी झुकते हुए अपने चेहरे को धीरे धीरे से उसके पेट पर झुकाने लगे

और अगले hi पल चरण सिंह के होंठ चंचल के पेट से टकराये तो अपने होंठों पर बहु के बदन का स्वाद पाकर चरण सिंह बिलकुल पागल से हो गए और इस पल का पूरा फायदा उठाते हुए चंचल के पेट को चूमने चाटने लगे..

चंचल जो नींद में थी उसे उसे अपने बदन के साथ कुछ होने का एहसास हो रहा था, उसे नींद में hi ाचा एहसास हो रहा था, वो नींद में रिमझिम के साथ बिताये पल के सपने देख रही थी, पर चरण सिंह ने ज्यूँ hi उसके पेट को चेतना चूमना शुरू किया उसका बदन उस एहसास को महसूस करने लगा और प्रतिक्रिया देने लगा , अंदर hi अंदर उसकी नींद कमज़ोर होने लगी पर चरण सिंह इस समय सब भूल कर उसके बदन को चूमने चाटने में लगे हुए थे, चरण सिंह ने आगे बढ़ाते हुए अपनी जीभ बहु की नाभि में घुसड़ी और चूसने लगे.

इस एहसास को चंचल का बदन भी शांत रहकर सहन नहीं कर पाया और उसकी नींद खुल गयी चंचल ने हलके से आँखें खोल कर देखा तो एक पल को बिलकुल चौंक गयी और जब उसे समझ आया की क्या हो रहा है तो वो बिलकुल स्तब्ध रह गयी.. उसने देखा की उसके पिता सामान ससुर जी उसके बिस्तर पर बैठ कर उसकी कमर को थामे उसकी नाभि में जीभ घुसा कर ऐसे चूस रहे हैं जैसे अभी उसमे से रास फुट निकलेगा.

चंचल को तो बिलकुल समझ नहीं आ रहा था क्या करे एक पल को उसका मन हुआ उठे और धक्का देकर ससुर जी को उठादे और उन्हें अचे से इस बारे में सुनाये पर न जाने क्यों उसके बाद के हालत को झेलने के लिए वो खुद को तैयार नहीं कर प् रही थी वो नहीं चाहती थी की उसकी वजह से घर में कुछ भी कलेश हो, वहीं साथ साथ चंचल का बदन भी जैसे उसके कब्ज़े में से निकल रहा था उसके ससुरजी के चूमने चाटने से उसे ाचा लग रहा था पूरे बदन में एक सिरहन दौड़ रही थी, उसकी छूट गीली हो कर बाह रही थी, मन और मस्तिष्क के बीच बेचारी चंचल फांसी हुई थी उसकी नाभि में ससुर जी की जीभ उसके पूरे बदन पर जादू कर रही थी. वो छह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी.. तभी उसने देखा की ससुरजी अपना चेहरा उसकी और कर रहे हैं तो दर से उसने तुरंत आँखें बंद कर ली और सोने का नाटक करने लगी, चरण सिंह ये देख कर निश्चिंत हुए की बहु अब भी सो रही है.

चंचल मन hi मन सोच रही थी की ये पापाजी को क्या हुआ जो मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं क्या सच में ये मुझे इन नज़रों से देखते हैं क्या होता जा रहा है सबको पहले रिमझिम ख़ुशी, फिर मेरे पति का रिम्मी का नाम लेना , फिर मेरा और रिम्मी का ऐसा रिश्ता बनना और फिर उसने बताया की देवर जी भी मेरे साथ करना चाहते हैं और अब पापाजी तो सबसे दो कदम आगे निकल गए, क्या करूँ मैं पर ये जानते हुए भी की सब गलत है फिर भी मुझे इतना ाचा क्यों लग रहा है, ओह्ह्ह्ह ये पापाजी की जीभ इतना मज़ाआ दे रही है, जो हो रहा है होने देती हूँ देखती हूँ पापाजी कहाँ तक जाते हैं, यही सोचकर चंचल अपने ससुरजी की हरकतों का मज़ा लेने लगी...

इधर चरण सिंह ने जी भर के अपनी बहु की नाभि को चूसा पर अब उनसे रुका नहीं जा रहा था उनका लुंड बिलकुल फटने को हो रहा था इसलिए खड़े होते हुए चरण सिंह ने पजामा और कच्चा नीचे सरकते हुए जल्दी से अपना लुंड बहार निकल लिया वहीं अपनर बदन पर हाथ या होंठ महसूस न कर चंचल को नान में आया की अचानक क्या हुआ पापाजी चले गए क्या इसलिए ुसंस बहुत सावधानी से अपनी आँखों को बिलकुल हल्का सा खोल के देखा तो एक बार फिर चौंक गयी क्यूंकि सामने ससुर जी का नंगा लुंड था उनके कड़क खड़े लुंड को देखकर न जाने क्यों चंचल का मुँह सूखने लगा वो आज पहली बार पति के अलावा किसी दुसरे मर्द का लुंड देख रही थी वो भी उसके ससुर का, चंचल के लिए ये पल बेहद मुश्किल होता जा रहा था उसकी छूट में उसे हज़ारों चीटियां रेंगती हुई महसूस हो रही थी और वो छूट को खुजाना छह रही थी वहीं उसका मन कर रहा था की ससुर जी का लुंड पकड़ के देख लूँ वहीं उसका मुँह सूखा जा रहा था, पर वो बेचारी कुछ नहीं कर सकती थी, सिवाए सोने के नाटक के.

वहीं चरण सिंह तो अब दर भूल चुके थे अपनी बहु के बगल में लुंड निकल कर खड़े थे ये जानते हुए की अगर बहु जाग गयी तो बवाल हो जायेगा फिर भी वो खुद को रोक नहीं पा रहे थे..

चंचल ने देखा ससुर जी उसकी और बढ़ रहे हैं तो उसने फिर से आँखें बंद कर ली कुछ देर तक उसे उसके बदन पर कोई एहसास नहीं हुआ फिर अपने पेट पर बापिस उसे एक गरम एहसास हुआ वो समझ गयी की बापिस ससुरजी उसे चूम रहे हैं पर कुछ देर बाद उसे कुछ अलग लगा ये होंठों का तो एहसास नहीं था इसी लिए एक बार फिर से उसने सावधानी से आँखें खोल कर देखा तो फिर से चौंक गयी उसके ससुर जी उसकी साइड में बैठकर अपने लुंड को उसके नंगे पेट पर रगड़ रहे थे, इस एहसास से hi चंचल की छूट और पनिया गयी, उसका पूरा बदन मनो ऐंठने लगा जिसे उसने किसी तरह से काबू में रखकर सोने का नाटक करती रही, वहीं चरण सिंह तो अपने लुंड को बहु के पेट पर रगड़ कर जन्नत में थे, उनका लुंड का टोपा रगड़ते हुए बहु की नाभि में घुसा तो उन्हें और मज़ा आ गया और वो उसे hi बहु की छूट समझकर हलके हलके धक्के लगाने लगा..

और चंचल को भी जैसे hi ये एहसास हुआ वो मचल उठी उसकी छूट में खुजली मचने लगी साथ hi तड़पने लगी अपनी नाभि में ससुरजी का लुंड महसूस कर एक पल को उसका मन हुआ की अभी पापाजी के लुंड को पकड़े और अपनी छूट में घुसवा ले पर इतनी हिम्मत वो नहीं दिखा पाई पर जो हिम्मत आज चरण सिंह ने दिखाई वो बकै काफी थी और उसी हिम्मत का रास उनकी गोलियां से बहता हुआ उनके लुंड में भर गया और फिर एक दबी आह के साथ उनका लुंड अपने रास से बहु की नाभि और पेट को भीगने लगा, चंचल को भी जैसे hi पेट पर ससुरजी के रास का गरम एहसास हुआ उसकी छूट पानी छोड़ने लगी..

जब चरण सिंह का झड़ना ख़त्म हुआ तो वो घबराने लगे उन्हें एहसास हुआ की उन्होंने क्या कर दिया है बहु के पेट को अपने रास से भीगा देखकर चरण सिंह हड़बड़ा गए सोचा की जल्दी से कपडे से पांच देता हूँ और उसके लिए जल्दी से पजामा ऊपर किया और कपडा उठाया hi था की घर की घंटी किसी ने बजे और चरण सिंह की गांड फटने लगी अभी उन्हें कुछ समाज नहीं आ रहा था तो जो सूझा वो किआ और पहात से कमरे से भाग निकले..

चंचल को दरवाजे के बंद होने की आवाज़ आई तो उसने आँखें खोल कर देखा, उसने जैसे hi देखा दरवाज़ा बंद है जल्दी से उसने अपनी सारे जांघों तक उठाई और गीली कच्ची को एक तरफ सरकाया और अपनी छूट में दो उंगलियां घुसा कर तेज़ी से अंदर बहार करने लगी साथ hi दूसरा हाथ उसके पेट पर था जिससे उंगलियों से वो ससुर का रास बटोरने लगी और फिर उंगलियों को अपने मुँह में लेजाकर चूसने लगती और ससुर के रास को चाट रही थी उसे ससुर के रास का स्वाद बहुत कुछ पति के रास जैसा hi लग रहा था

चंचल अभी जो कर रही थी उसके बारे में दो दिन पहले सोच भी नहीं सकती थी और अभी वो अपनी छूट में उंगलियां करते हुए अपने पेट से अपने ससुर का रास उठा उठाकर चख रही थी. चंचल पहले से hi इतनी उत्तेजित थी की जल्दी hi उसकी छूट ने रास छोड़ दिया पर तब तक वो पेट से सारा रास चाट चुकी थी झड़ने के बाद वो कुछ शांत हुई और जो हुआ उसके बारे में सोचने लगी और फिर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.. फिर वो उठी और कपडे लेकर बाथरूम में घुस गयी.

वही चरण सिंह चंचल के कमरे से निकले तो घर की घंटी बार बार बज रही थी खुद को थोड़ा शांत करके दरवाज़ा खोला तो सामने अपनी पत्नी को देखकर वैसे hi दर गए जैसे मम्मी के पर्स से चोरी करने के बाद बच्चा..

चरण सिंह- अरे तुम आ गयी.

माधुरी- हाँ कबसे घंटी बजा रही हूँ कोई खोल नहीं रहा कहाँ रहे तुम.

माधुरी ने अंदर आते हुए कहा.

चरण Singh-are वो वो मैं आराम कर रहा था.

माधुरी- और बहुएं?

चरण सिंह- बहु बहुएं भी सो रही हैं तुम तुम फ़ोन कर देती तो लेने आ जाता तुम्हे.

माधुरी - अरे तो क्या हुआ रिक्सा पकड़ के आ गयी.

इतने में रिमझिम भी बहार आ गयी और आकर सास के पेअर छुए और फिर चंचल भी आ गयी जिसे देखकर चरण सिंह घबरा गए पर बदली हुई साड़ी देखकर सोच में भी पद गए साथ hi चंचल का व्यवहार बिलकुल सामान्य लगा तो थोड़ा मन को तसल्ली हुई.

दोनों बहुएं सास की खातिरदारी में लग गयी ऐसे hi फिर समय निकल गया शाम को सब बापिस लौटे और फिर सब ख़ुशी ख़ुशी खाना खा रहे थे तभी रमन ने सही मौका समझा और बात राखी

रमन- अरे भैया हम लोग जाने वाले हैं तो क्यों न ख़ुशी को भी ले चलें.

ख़ुशी तो ये सुनकर खुश हो गयी वहीं चंचल और चेतन का प्लान बिगड़ता दिखा.

चेतन- पर उसकी पढाई.

ख़ुशी- अरे भैया एग्जाम हो चुके अब मैं फ्री हूँ मैं भी चलूंगी.

इसके आगे चेतन क्या बोलता

रमन- अरे मेरी विनीत से बात हुई तो मैंने उसे भी पूछ लिया है..

चरण सिंह को वैसे तो बहुओं का जाना ाचा नहीं लग रहा था फिर भी बोले- सही किआ जा रहे हो तो सरे बच्चे घूम आओ साथ में.

रिम- अगर मेरी मानो तो मैं कहूँगी की मुनमय पापाजी आप दोनों भी चलो सब फॅमिली चलते हैं घूमने तो मज़ा आएगा.

ये सुनकर तो चरण सिंह की बांछें खिल गयी वहीं चेतन रमन और चंचल तीनो का मूड बिगड़ गया.

रमन ने एक बार इशारा करके रिमझिम को रोकने की कोशिश भी की पर अब देर हो चुकी थी.

ख़ुशी - हैं ये सही रहेगा मम्मी पापा भी चलेंगे वैसे भी वो घुमते नहीं हैं.

माधुरी - अरे तुम बच्चे घूम आओ कहाँ हमें साथ लिए फिरोगे.

चरण सिंह- सही बात hai.waisw भी तुम लोग पहाड़ो में जा रहे हो वहां तुम्हारी मम्मी की तबियत ख़राब हो जाती है.

ख़ुशी- मेरे पास एक ाचा आईडिया है.

रमन- क्या?

ख़ुशी- क्यों न गाओं चलें सब मिलकर इसी बहाने नया घर भी देख आएंगे.

चेतन- हाँ आईडिया तो ाचा है गाओं घूमने भी नहीं गए कबसे.

चरण सिंह- हाँ भाई ये तो सही कहा जबसे नयी कोठी बनवाई है तबसे कहाँ गए हैं गाओं जायेंगे तो ाचा हो जायेगा.

रमन- ये आईडिया तो मुझे भी सही लग रहा है. गाओं hi चलते हैं कुछ दिन के लिए.

रिम- इसी बहाने मैं भी गाओं घूम आउंगी.

माधुरी- हाँ बहुएं भी देख आएँगी अपना गाओं, अरे मैं तो कहती हूँ की तेरी बहन जीजा और भाई विनीत तो आ hi रहे हैं न

रिम- हाँ मम्मी जी..

माधुरी- तो ऐसा कर संधान और समधी जी से भी बोल दे और चंचल तू भी अपनी मम्मी को बोल दे सब मिलकर चलेंगे.

रिम- क्या मम्मी पापा को?

चंचल- मम्मी को भी?

सब माधुरी की बात पर थोड़ा अचंभित थे पर सबको उनकी बात सही भी लग रही थी.

चरण सिंह- सही कह रही है तुम्हारी सास जब चलना hi है तो सब चलो वहां मज़ा भी आयेगा सब के ज़ात फिर कभी ऐसा मौका मिले न मिले

माधुरी- कल दिन में मैं खुद दोनों संधान से बात करुँगी और मन लुंगी अपने साथ के लिए..

रिमझिम और चंचल दोनों को hi अपनी योजना थोड़ी बदलती दिखी फिर भी अपने परिवार से मिलने की ख़ुशी में वो खुश थी. चेतन रमन दोनों भाइयों को अपनी योजना बदले जाने का दुःख था पर गाओं में जाने पर दोनों को hi कुछ होने की उम्मीद थी.

वहीं चरण सिंह भी खुश थे की बहुओं के साथ जा रहे थे ऊपर से आज की बात पर चंचल ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी..

खैर सरे फैसले हो चुके थे और फिर खा पि कर सब अपने अपने कमरों में थे, कुछ बातें कर रहे थे तो कुछ चुदाई पर साथ hi आने वाले समय की योजना बना रहे थे...

चोदामपुर

(कर्मा की ज़ुबानी)

माँ को छोड़ने के बाद मैं ाचा महसूस कर रहा था तो अपने कमरे में आकर लेट गया और फिर ख्याल आया और फ़ोन निकला और अंजलि को फोटो भेजने लगा साडी फोटो भेजने के बाद थोड़ा रुका की वो देखे कुछ देर में hi उसका रिप्लाई आ गया- थैंक्यू.

में- फोटो भेजने के लिए कैसा थैंक्यू

अंजलि- फोटो के लिए भी कुर आज दिन के लिए भी.

में- दिन के लिए मतलब.

अंजलि- तुम हमारे साथ गए पूरा दिन दिया उसके लिए.

में- अरे वो तो कुछ भी नहीं है थैंक्यू मत बोलो.

अंजलि- ाचा फिर क्या बोलूं?

में- कुछ मत बोलो बस कभी तुम मेरे साथ चल लेना..

अंजलि - ाचा जी बदला लोगे.

में- बदला नहीं बस ऐसे hi.

अंजलि- अरे समझ गयी कोई बात नहीं तुम बता देना मैं चलूंगी.

में- ये हुई न बात..

अंजलि- हाँ पर एक दो दिन पहले बताना मेरी तरह स्टैंड पर पहुँच कर मत बताना. हेहेहे.

में- ः अरे नहीं पहले hi बताऊंगा, वैसे तुम्हे हॉरर फिल्मो के अलावा और क्या पसंद है..

और इसी तरह करीब घंटे भर हम दोनों ने मश्ग में बात की और एक दुसरे को जाना फिर सो गए.

अगली सुबह चोदामपुर की आम सुबह थी सब अपने अपने काम में लगे हुए थे हमारे यहाँ सब नाश्ता कर रहे थे, तभी दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई अनुज दरवाज़ा खोल कर आया तो साथ में नीतू के पापा यानि दीं दयाल चाचा थे.

पापा- अरे दीनू आओ आओ बैठो. सुनो दीनू के लिए चाय लाओ.

चाचा एयर और पापा के बगल में बैठ गए. माँ ने उन्हें चाय दी.

दीं दयाल- अरे भैया हम का कह रहे थे की कल की पूरी तयारी है?

पापा- कल की ?

दीं दयाल- भूल गए पात पूजा है कल.

पापा- अरे हाँ हमारे तो ध्यान से hi निकल गया.

माँ- अरे मैं तो बच्चों को बोलने hi वाली थी की पत्ते इकठा कर लाएं आज.

शान्तो- अरे पर इस पात पूजा में हॉट का का है नाम सुना है हमने कभी देखि नहीं.

माँ- अरे जीजी का है की फसल कटती है तो उसी की ख़ुशी के लिए मानते हैं पात पूजा, सरे अनाज का ढेर इकठा कर के उन्हें पूजते हैं.. बहुत से पत्तों और फूलों को पीसकर उनका रास निकलते हैं और एक दुसरे को लगते हैं..

में- और भांग बनती है. जिसकी ज़िम्मेदारी दीनू चाचा की होती है हर बार.

पापा- और हमें पता है ये अभी उसी के लिए आये हैं.

इस पर सब हंसने लगे.

दीनू चाचा - अरे भैया तुम भी न उसके लिए कहाँ आइये हैं.

पापा- ाचा फिर किसके लिए?

दीनू चाचा - आये तो वैसे उसी के लिए थे हेहेहे.

ये सुनकर सब हंसने लगे.

Papa-are हम समझ गए आज तुम्हारा सारा कोटा ले आएंगे शहर से खुश.

दीनू चाचा - बस और का चाहिए.

माँ- थोड़ी हलकी बनाना इस बार भैया पिछली बार खुद hi दो दिन सोते रहे थे.

दीनू चाचा - का भाभी तुम भी मज़ाक करती हो.

ऐसे hi हंसी मज़ाक चलता रहा इसी बीच मैंने फ़ोन देखा तो अंजलि का गुड मॉर्निंग का मश्ग था जिसको ख़ुशी से मैंने भी रिप्लाई किया फिर मैं और अनुज चले गए बाघ में पत्ते इकठे करने थे, जग्गू भी आ गया फिर मिलकर फूल और पत्ते इकठे किये इसमें hi दोपहर हो गयी इसी बीच मेरा फ़ोन बजा उठाकर देखा तो प्रेमा भाभी का था.

में - हाँ भाभी.

प्रेमा भाभी - सुनो कर्मा भैया समय निकल के थोड़ी देर में घर आना मुझे ज़रूरी बात करनी है..

में- क्या हुआ कोई गड़बड़ है kya.jaggu भी मेरे साथ है बताओ

प्रेमा भाभी - आओ तभी बताती हूँ और जग्गू भैया को भी ले आना.

यव कहकर फ़ोन रख दिया. माइनर जग्गू से पुछा - तेरे घर कोई बात हुई है क्या? भाभी का फ़ोन था ऐसे ऐसे.

जग्गू- नहीं तो मुझे तो नहीं याद .

में- चल देखेंगे थोड़ी देर में..

फिर काम पूरा किया और पत्तों के गठर बनाकर पीसने को देकर आये और बापिस आकर बाघ में तुबेल पर नहाये तीनो फिर अनुज घर की और चला गया. मैं और जग्गू चले गए उसके घर दरवाज़ा भाभी ने खोला और फिर दरवाज़ा बंद करके हम दोनों को अपने कमरे में ले गयी..

घर पर ताऊ और भग्गू नहीं थे तै के नहाने की आवाज़ आ रही थी बाथरूम से.

में- भाभी क्या हुआ क्या बात है.

प्रेमा भाभी- वो भी पता चल जाएगी पहले कुछ और काम करते हैं ये बोलकर वो मेरे सामने नीचे बैठ गयी और पजामा नीचे खिसका कर लुंड निकल लिया..

में- भाभी क्या कर रही हो तै घर पे hi हैं पकड़ लेंगी.

प्रेमा भाभी- कुछ नहीं होगा

ये कहकर उन्होंने मेरा लुंड मुँह में भर लिया साथ hi जग्गू को अपने पास आने का इशारा किया.

जग्गू भी पास आते हुए बोलै- भाभी ये समय सही नहीं है मम्मी ने देख लिया तो सबकी कुटाई हो जाएगी.

पर प्रेमा भाभी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया बल्कि उसका लुंड भी निकल लिया और मेरे से मुँह हटाकर चाटने लगी फिर बापिस मेरे लुंड को..

अब भले hi तै घर पर थी पर जब लुंड भाभी के गरम मुँह में हो तो मज़ा तो आने वाला hi था तो मैं मज़े से कराहने लगा वही हाल जग्गू का भी था हालाँकि उसकी साथ hi पहात भी रही थी पर मज़े को वो नकार भी नहीं सकता था,

इसी बीच मैंने भाभी का पल्लू एक तरफ सरका दिया और ब्लाउज के ऊपर से उनकी चूचियां दबाने लगा,

भाभी ने मुँह को लुंड से हटाया और कुछ देर के लिए कड़ी हुई और अपनी साड़ी को उतर फेंका और फिर अगले hi पल. अपना ब्लाउज खोलने लगी कुछ hi देर में ब्लाउज और फिर ब्रा भी नीचे पड़ी थी और भाभी सिर्फ पेटीकोट में हमारे सामने थी, साला दर भी लग रहे था समझ भी नहीं आ रहा था की क्या हो रहा है पर भाभी को ऐसे देख मन और लुंड दोनों खुश थे मैंने सोचा तै को छोड़ चूका हूँ ज़्यादा क्या hi होगा और भाभी की चूचियों पर झपट पड़ा मुझे देख जग्गू भाभी के पीछे गया और उनका पेटीकोट उठा अपना मुँह उनकी गांड में फंसा दिया..

भाभी की आँखें बंद हो गयी दोहरे मज़े से मैं चूचियां चूस रहा था और जग्गू गांड और छूट चाट रहा था, चूचियों को चूसने क्र बाद मैंने दोबारा से लुंड उनके मुँह में घुसा दिया, भाभी मज़े से चूसने लगी..

इधर जग्गू ने जब भाभी की छूट गांड को अचे से चाट लिया तो खड़ा हुआ और अपना लुंड लेकर भाभी के मुँह के सामने कर दिया भाभी ने मेरा लुंड से मुँह हटाया और उसका लुंड चाटने लगी, मैंने पीछे जगह खली देखि तो भाभी के पीछे गया पेटीकोट को कमर पर इकठा किया और लुंड को पकड़ कर टोपे को उनकी छूट के द्वार पर रख धक्का लगाया और लुंड सरकता हुआ भाभी की गरम छूट में घुस गया...

जिसके साथ hi भाभी की जग्गू के लुंड पर घुटी हुई सिसकी निकली.

मैं भाभी की कमर पकड़ कर उन्हें छोड़ने लगा और भाभी जग्गू का लुंड चूस रही थी





भाभी के गरम छेदों के मज़े में हम तै नाम की टेंशन को भूल hi गए थे की तभी आवाज़ आई- हाय दिया ये क्या हो रहा है...

आवाज़ सुनकर हम तीनो hi चौंक गए और देखा तो तै सामने कड़ी थी कुछ पलों के लिए मेरी भी फटी पर फिर सोचा क्या hi होगा देखा जायेगा,

मंजू तै- हम पूछते हैं क्या हो रहा है ये... और तू छिनाल तुझे ये सब करते शर्म नहीं आई.

तै भाभी को गली देते हुए आगे बढ़ी.. की भाभी वहीं अपनी जगह कड़ी हो गयी और बोली - मम्मी जी जब तुम्हे नहीं आती तो मुझे क्यों आएगी..

हम दोनों बस खड़े खड़े मुँह टांक रहे थे.

मंजू तै- अरे करम तू करे रंडियों जैसे शर्म मुझे आएगी आज तेरी खैर नहीं.

ये कह तै गुस्से में आगे बढ़ी.

प्रेमा भाभी- तो मम्मी अपने बेटे से रात को रंडियों की तरह छोड़ना किसके करम हैं.

ये सुनते hi तै के पैरों से तो जमीन खिसक गयी वहीं जग्गू की भी पहात गयी मैं भी मुँह खोल के देखता रह गया और फिर जब समझ आया तो धीरे से जग्गू को बोलै- सेल हरामी मादरचोद बताया भी नहीं.

पर वो तो सुन्न खड़ा था और तै भी..

प्रेमा भाभी ने आगे बोलना शुरू किया- मम्मी जी जब तुम्हारी छूट में इतनी खुजली है की बेटे का लुंड भी खा गयी तो सोचो मेरे में कितनी होगी.

तै बिलकुल चुप थी.

प्रेमा भाभी- अब जैसे तुमने तरीका निकला है मिटने का मैंने भी निकला है और ये भी कहती हूँ की दोनों से मैं पहले से चुद रही हूँ.

इसके बाद प्रेमा भाभी आगे बढ़ी और मंजू तै के पास जाकर उनको कंधे से पकड़ लिया और पास कड़ी खत पर बैठा दिया मंजू तै को तो जैसे सांप सूंघ गया था.

प्रेमा भाभी- देखो मम्मी तुम्हारी बात मुझे पता है और मैंने तुम्हे अपनी बतादि है, और सच कहूं तो मुझे तुम्हारे और जग्गू से कोई दिक्कत नहीं है न hi मैं किसी को बताउंगी.

मंजू तै अपनी बहु को देख रही थी और उसकी बातें समझने की कोशिश कर रही थी,

वहीं हम दोनों ऐसे hi खड़े हुए देख रहे थे क्या हो रहा है.

प्रेमा भाभी- मम्मी देखो घुमा फिरा के कहने से ाचा है मैं सीढ़ी बात करूँ.

मंजू तै- कैसी सीढ़ी बात.

अब मंजू तै के मुँह से तब से कुछ निकला था.

प्रेमा भाभी- हमारे पास तीन रस्ते हैं.. उनमे से हम अभी कोई एक चुन सकते हैं.

मंजू Tai-kaise रस्ते .

प्रेमा भाभी- पहला तुम मुझे रोको और लड़ो मैं तुम्हारे और जग्गू के बारे में सबको बताऊँ और फिर यही बवाल.

मंजू तै- नहीं नहीं मुझे घर में कोई बवाल नहीं चाहिए. दूसरा रास्ता क्या है?

प्रेमा भाभी- जैसा चल रहा है वैसा चलने दो एक दुसरे के बारे में जानकार भी अनजान बने रहे.. और अपनी अपनी ज़रूरतें पूरी करते रहे.

ये सुन तै ने कुछ सोचा और फिर बोली मुझे ये सही लग रहा है जो हो गया है उसे बदल नहीं सकती तो मुझे ये मंजूर है.

ये कहकर तै उठने लगी फिर उठाते उठाते बोली- वैसे तूने तीन रस्ते बोले थे तीसरा क्या है?

ये सुन भाभी मुस्कुराई और उठ कर फिर से मेरे और जग्गू के पास आई और अपने दोनों हाथों में हमारे लुंड पकड़ के मुठियाते हुए बोली - तीसरा रास्ता है मम्मी जी की यहाँ काफी लुंड हैं हम मिल बाँट कर प्यार से खा सकते हैं.

तै ने ये सुना और फिर सोच में पद गयी जग्गू को अपनी भाभी की बात सुनकर हैरानी हुई की भाभी क्यों बानी बनाई बात बिगड़ रही है अभी ाचा खासा तो मम्मी मान गयी थी दुसरे रस्ते के लिए.

मुझे जहाँ तक है अंदाज़ा हो गया था की क्या होने वाला है या तो अभी या कुछ समय में..

तै कुछ देर तक कुछ नहीं बोली तो हमारे लुंड मुठियाते हुए भाभी बोली- क्या हुआ मम्मी जी?

इस पर तै ने ना में सर हिलाया और फिर कड़ी हुई और दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगी उन्हें बढ़ता देख प्रेमा भाभी का मुँह थोड़ा उतरा शायद उन्होंने जैसा सोचा था वैसा नहीं हुआ...

वही तै के मन में क्या था कोई नहीं जनता था तै दरवाज़े तक गयी और फिर रुक गयी रुक कर दरवाज़ा बंद किया और फिर मुद कर मुस्कुराते हुए बोली- सावधानी से किया करो ये सब काम मेरी जगह कोई और देख लेता तो.

ये सुनकर सब के चेहरे खिल गए .

प्रेमा भाभी- अरे मम्मी तुम्हे दिखाना था तभी तो खुला छोड़ा था..

ये कहकर भाभी ने हमारे लुंड छोड़े और भाग कर गयी और अपनी सासु माँ से चिपक गयी...

तै ने भी उसे बाहें खोल कर सीने से चिपका लिया वो अपनी बहु की ख़ुशी और उत्साह देख कर मुस्कुरा रही थी हम दोनों लड़के भी अब खुश थे और मैंने जैसा सोचा था वैसा hi हुआ था, पर प्रेमा भाभी का उत्साह इतने में कहाँ थमने वाला था उन्होंने ख़ुशी जताते हुए तै के चेहरे को पकड़ा और अपने होंठ उनके होंठों से मिला दिए, तै तो एक पल को चौंक hi गयी क्यूंकि जीवन में पहली बार कोई औरत उन्हें इस तरह चूम रही थी वो भी उनकी बहु बस ये hi सोच तै हैरान थी पर वहीं प्रेमा भाभी का उत्साह एक अगल hi श्रेणी का था और इतना असरदार था की उनकी सासु माँ भी उसके असर से नहीं बच पाई और कुछ hi देर में उनका साथ देने लगी..

सास बहु दोनों की जीभ आपस में अटखेलियां कर रही थी जिसे देख हिम दोनों के hi लुंड ठुमके मार रहे थे..

भाभी ने फिर उन्हें चूमते हुए hi तै के कपड़ो को उतरना शुरू किया तै भी बहु के हाथों नंगी होने में उत्तेजित हो रही थी.

कुछ hi देर में तै और भाभी दोनों हमारे सामने नंगी कड़ी थी सास बहु को बिलकुल नंगा देख हम दोनों के hi लुंड फुंकार रहे थे इसके बाद भाभी ने हमसे बोलै- तुम लोग कब तक देखते रहोगे.

बस इससे ज़्यादा निमंत्रण की हमें ज़रूरत नहीं थी मैंने जानकर जग्गू को उसकी मम्मी के पास धकेला मैं उसे उसकी माँ के साथ देखना चाहता था और खुद भाभी के पीछे जगह ली





मैं अपना लुंड पीछे से भाभी की गांड में घिसते हुए उनके बदन से खेलने लगा वहीं जग्गू अपनी मम्मी के साथ ये hi कर रहा था. कभी चूचियां मसलता तो कभी भरा मांसल पेट..

आज जग्गू के घर में भी सब कुछ खुल चूका था सास बहु दोनों साथ में छोड़ने को तैयार थी.. अब बुआ और ममता चची के घर की तरह यहाँ भी उत्तेजना ने रिश्तों पर कब्ज़ा कर लिया था..

खैर ज्ञान बाद में छोडूंगा पहले सामने जो छूटें हैं उन्हें छोड़ा जाये...

अब समय आगे बढ़ने का था तो हम लोग भी आगे बढे मैंने भाभी को बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उनकी टैंगो के बीच आ गया और अपना मुँह उनकी रसीली छूट से लगा दिया वहीं जग्गू ने तै को बिस्तर पर बैठाया और अपने लुंड को उनकी बड़ी चूचियों के बीच फंसकर उनकी चूचियों को छोड़ने लगा.





प्रेमा भाभी- अह्ह्ह्ह कर्मा भैयाआआह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह चातुओ aiseeeeeeeeee हीई .

मेरा तो मुँह बंद था क्या hi बोलता बस जवाब मैं उनकी छूट को कास के चूस दिया..

जग्गू - ओह्ह्ह्ह मम्मी आह्ह्ह्हह तुम्हारी छुछियां कितनी नरम है आह्हः मज़ा आ रहा है.

मंजू Tai-haan बच्चा बचपन में इन्ही को चूस चूस कर बड़ा हुआ है और आज अपना लुंड बड़ा करके उन्ही को छोड़ रहा है.

प्रेमा भाभी- अरे मुनमय अब तुमने hi दूध पीला कर बढ़ा किया है अब तुम्हारा क़र्ज़ तो उतरेंगे hi न देवर जी.

मंजू तै- हाँ बहु अचे से सेवा करवाउंगी अब अपने बदन की...

जग्गू और मैं दोनों की बातें सुन उत्तेजित हो रहे थे साथ hi जग्गू को एक ख़ुशी ये थी की चुदाई की वजह से hi सही काम से काम उसकी माँ और भाभी एक दुसरे झगड़ नहीं रही बल्कि साथ दे रही है...

इसी जोश में आकर जग्गू ने अपनी मम्मी की छूछीयो से लुंड निकला और उन्हें पीछे की तरफ लिटा दिया और खुद उनकी छूट में मुँह घुसा diya.wohin उसकी भाभी और मैं भी पीछे नहीं थे और हमने जगह बदल ली थी अब मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और भाभी नीचे बैठ कर मेरा लुंड चूस रही थी...





उधर जग्गू से अपनी छूट चुसवाते हुए तै अपनी भरी भरकम चूचियों से खेल रही थी.

मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ का चूसता है तूऊऊऊह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह खा जा आज अपनी मम्मी की छूट को,

में- अह्ह्ह्हह्हह तै चूसती तो तुम्हारी बहु भी मस्त है देखो कैसे लुंड को गले तक फंसा कर चूस रही है..

मंजू Tai-haan बहु किसकी है चूसेगी hi मर्द को खुश करने की साड़ी कलाएं आती हैं मेरी बहु को.

इस बात पर भाभी ने मेरे लुंड से मुँह को हटाया और बोली- और जो नहीं आती वो तुम सीखा देना मम्मी जी...

और ये कहकर बापिस मेरा लुंड मुँह में भर लिया,

मंजू Tai-haan बहु बिलकुल अब तो तुझे सब सीखना है और तुझसे सीखना भी है.. वैसे अपने देवर को बड़ा ाचा सिखाया है तूने छूट चेतना अह्ह्ह्ह...

भाभी के मुँह में मेरा लुंड था तो उनकी तरफ से मैंने जवाब दिया- अरे तै जब सामने रसीली छूट हो तो बाँदा अचे से चाटता hi है और ये तो वो छूट है जिसमे से ये निकला था तो इसे तो अछि तरह चाटेगा hi.

मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ सही बोल रहा है बरसो पहले इसी छूट से निकला था तू रे आज उसी में घुस रहा है.

जग्गू अपनी मम्मी की बातें सुन उत्तेजित हो रहा था और तेज़ी से उनकी छूट चूस रहा था इधर भाभी मेरा लुंड छोड़ मेरी गोलियों को मुँह में भर के चूस रही थी... जिससे मेरी आह्हः निकल रही थी... मुझसे अब रुकना मुश्किल हो रहा था इसलिए मैंने आगे बढ़ाते हुए भाभी को अपनी जगह झुका दिया और पीछे से उनकी कासी छूट में अपना लुंड घुसा दिया और उनकी कमर को थामे उन्हें छोड़ने लगा वहीं जग्गू भी अपनी मम्मी की छूट को चाट कर ऊपर को हुआ और अपना लुंड उनकी छूट में रखकर धक्का लगा कर अंदर घुसा दिया और छोड़ने लगा





कुछ hi पलों में सास बहु की दमदार चुदाई होने लगी भाभी को छोड़ते हुए मैं माँ बेटे की चुदाई देख रहा था साला ये जान कर बड़ी ख़ुशी हो रही थी की अकेला मैं hi नहीं मेरा दोस्त भी मादरचोद है.. पहले विनीत फिर अनुज और अब जग्गू मादरचोद बेटों की गिनती बढाती जा रही थी जो की मुझे जान कर ाचा लग रहा था..

तै हमारे सामने जग्गू से छोड़ने पारणे उत्तेजित हो रही थी

मंजू तै- अह्ह्ह्हह जग्गू बच्चा छोड़ अपनी मुनमय की छूट को आह्ह्ह्ह कर्मा को दिखा अपनी माँ को छोड़ कर ahhhhhhhhhh..

जग्गू- हानंन्न मम्मी लो अपने बेटे के लुंड को आह्ह्हह्ह्ह्ह और तुम भी भाभी को दिखाओ की तुम कितनी बड़ी रंडी हो जो अपने बेटे से चुद रही है.

मंजू Tai-haan लाल्ल्लाहहह हम रंडी हैं अह्ह्ह छोड़ अपनी रंडी माँ को madarchod..ahhh

प्रेमा भाभी- अह्ह्ह्ह रंडी माँ का मादरचोद बेटाहः और मैं रंडी सास की रंडी बहु..

तीनो hi एक दुसरे के सामने चुदाई स्व बेहद उत्साहित और उत्तेजित हो गए थे जिस कारन खुल कर अश्लील बातें कर रहे थे...

में- अह्ह्ह्हह्हह क्या जोड़ी है सास बहु की... ऊपर से भाभी क्या रसीली छूट है तुम्हारी.

प्रेमा भाभी- ओह्ह्ह भैया अह्ह्ह्हह तुम्हारा लुंड बहुत मज़ा दे रहा है..

जग्गू- अह्ह्ह मम्मी ओह्ह... कर्मा सिर्फ भाभी की hi नहीं मम्मी की छूट भी बहुत रसीली है...

कर्मा- हाँ जनता हूँ तै की छूट का स्वाद मैं पहले चख चूका हूँ..

इस पर भाभी और जग्गू दोनों हैरान हो गए.

जग्गू- कब ये कब हुआ मुझे तो पता hi नहीं...

में- तै से पूछ

जग्गू- बताओ न मम्मी.

मंजू Tai-haan बाछआहहह तेरा ये दोस्त बहुत बड़ा छोड़ू है एक बार तो ये हमें कनक जाने से पहले hi छोड़ चूका था और फिर कनक गाओं में तो दोनों भाइयों ने एक साथ छोड़ा तेरी माँ को...

जग्गू- सेल हरामी बताया नहीं तूने मुझे..

जग्गू ने गरियाते हुए कहा.

में- तूने बताया मुझे अपने मादरचोद बनने का राज़.

जग्गू- सेल अगर पहले बता देता तो मैं पहले hi छोड़ लेता अपनी मम्मी को अह्ह्ह्ह.

जग्गू ने अपनी माँ की छूट में धक्के लगते हुए कहा.

मंजू तै- अब कौनसा देर हो गयी है बचुआ वैसे भी जब से शुरू किया है कोई सा दिन जाने देता है तू बिना चोदे...

प्रेमा भाभी- ओह्ह्ह मम्मी जी भैया जाने दे न दें तुम खुद से नहीं जाने देती होगी तुम्हारी छूट काम प्यासी थोड़े hi है..

प्रेमा भाभी ने मुझसे चुड़ते हुए कहा साथ hi मैं उनकी छुछियां भी चूस रहा था...

मंजू तै- हाँ बहु ये तू तूने सहीईई कहा... यह आज ाचा लग रहा है नहीं तो हम दोनों झगड़ते रहते थे...

प्रेमा भाभी- हाँ मम्मी जी चुदाई से हम करीब आ गए

इतना कहकर भाभी मेरे लुंड से आगे होकर निकल गयी और बोली- मुझे अपनी मम्मी जी के पास छोड़ो कर्मा भैया..

में- ओह्हो इतना प्यार सासु माँ से..

मैंने उन्हें चिढ़ाया

मंजू तै- हाँ तो खबर दर किसी ने हमारी बिटिया को चिढ़ाया तो.

जग्गू- देख रहा है कर्मा बहु के मिलते hi बेटों को डांटने लगी..

में- चल इन्हे और करीब कस्र देते हैं..

ये कहकर जहाँ तै लेती थी मैं भाभी को वहीं ले गया और तै के मुँह पर भाभी की छूट रखकर बैठा दिया और भाभी को आगे की और झुका दिया जिससे दोनों सास बहु 69 की स्तिथि में आ गयी और फिर हम दोनों ने बापिस उनकी टैंगो में जगह ली और लुंड को दोबारा छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगे

भाभी आगे झुकी तो सामने उनकी सास की छूट थी जिसमे से देवर का लुंड अंदर बहार हो रहा था भाभी को आगे कुछ बताने की ज़रुरत नहीं पड़ी और वो उनकी छूट के डेन को जीभ से छेड़ने लगी .





तै को तो जैसे hi महसूस हुआ वो सिसकने लगी... वहीं उन्हें वैसे भी उत्तेजना हो रही थी सामने बहु की छूट थी और उसमे से मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था जिसे तै बड़े ध्यान से देख रही थी पर उनका ध्यान छूट में चल रहा बेटे का लुंड और बहु की जीभ भटका रहे थे.

मंजू तै- ahhhhhhhhhh तुम सब बच्चे मिलकर ये क्या कर रही हो आह्ह्ह्हह हमारे साथ आअह्ह्ह्ह ...

जग्गू- क्या हुआ मम्मी

मंजू तै- अह्ह्ह्हह ऐसा मज़ाआहहह आज तक नहीं आया अह्ह्ह्हह बहु टेरिइइइइ जीभ...

तै पहले तो हिचक रही थी पर उत्तेजित होने पर उन्होंने भी सामने बहु की छूट पर जीभ लगाडी और वो क्स्टने लगी जो उनकी बहु उनके साथ कर रही थी प्रेमा भाभी पहले भी ये सुख पल्ली ममता चची और शशि बुआ से ले चुकी थी पर अभी अपनी सास से छूट चटवाने का मज़ा अलग hi था.

हम दोनों लड़के भी अब पूरे जोश में थे और तेज़ी से दोनों को छोड़ रहे थे





जहाँ हम दोनों लुन्डों से छोड़ छोड़ कर दोनों सास बहु को खुश कर रहे थे वहीं वो दोनों भी एक दुसरे की छूट के साथ छेड़ छड़ कर रही थी जिसका नतीजा ये था की पूड़ा कमरा सिसकियों से भरा हुआ था साथ hi थप थप थप की आवाज़ गूँज रही थी...

मंजू तै के लिए ये सब नया था तो वो ज़्यादा देर तक सह नहीं पाई और अपनी बहु के नीचे दबे दबे वो झड़ने लगी उनका शरीर कंपनी लगा... अपनी माँ को झाड़ता देख और उनकी छूट को लुंड पर कसता हुआ महसूस कर जग्गू भी शिखर पर पहुँच गया और झड़ने लगा.. अपनी माँ की छूट को रास से भरने लगा... भाभी ने जब सामने माँ की छूट को बेटे के रास से भरता देखा तो वो भी इतनी उत्तेजित हुई की झड़ने लगी भाभी को झाड़ता देख मैंने भी कॉकस कर उनकी छूट में तगड़े धक्के लगाए और अपना रास उनकी छूट में छोड़ दिया...

जग्गू ने अपना रास तै की छूट में भरने के बाद लुंड निकल तो तुरंत भाभी ने छूट को मुँह में भर लिए और मैंने इधर उनकी छूट से लुंड निकला तो लुंड निकलते hi मेरे रास की धार तै के चेहरे पर गिरी साथ hi और रास बहकर बहार आने लगा तो तै ने भी अपना मुँह बहु की छूट से लगा दिया और उसका स्वाद लेने लगी... हम दोनों झड़ने के बाद साइड बैठकर हांफ रहे थे.. और दोनों को एक दुसरे की छूट में जीभ अंदर बहार करते हुए देख रहे थे...

जग्गू- मज़ा आ गया यार.

में- हाँ यार मज़ा तो आ गया सेल पहले hi बता देता तू की तू तै को छोड़ता है.

जग्गू- यार बताना तो छह रहा था पर डरता था.

में- अबे मुझसे कैसा दर.. देख बात सामने आई तो मज़ा hi आया न.

जग्गू- हाँ ये तो है वैसे बताया तूने भी नहीं की तूने मम्मी को छोड़ा था.

में - वही बात के डरता था की न जाने तू क्या सोचेगा..

जग्गू- अबे इतने अचे से जनता है तू मुझे फिर भी.. ाचा एक बात पूछूं...

में- हाँ पूछ .

जग्गू- तूने कनक गाओं में चची को सबके सामने छोड़ा था तो तेरा तबसे दोबारा मन नहीं हुआ कभी चची को छोड़ने का. क्यूंकि तुझे और चची को देखकर hi मेरे मन में मम्मी को छोड़ने की भावना जगक थी.

जग्गू के इस प्रश्न से मैं थोड़ा सोच में पद गया की क्या करूँ क्या सच बताऊँ या नहीं क्यूंकि अभी मैं अनुज मौसी और माँ के अलावा ये बात किसी को नहीं पता थी पर मुझे उससे झूठ बोलना भी ाचा नहीं लग रहा था मैं कुछ बोलता उससे पहले hi भाभी और तै उठ कर हमारे पास आ कर बैठ गयी...

मंजू तै- हाय आज तो तुम बच्चों ने हमारी जान hi निकल दी.

तै ने मेरे बगल में बैठते हुए कहा मैंने भी उन्हें खुद से चिपका लिया

प्रेमा भाभी- नहीं मम्मी अब तो नयी जान भरी है अब देखना तुम्हे कितने मज़े करवाती हूँ मैं..

भाभी जग्गू की गॉड में बैठ गयी..

मंजू तै- ाचा अब भी कोई बात है जो हमें नहीं पता.

जग्गू- अरे मम्मी बहुत सी बातें हैं...

प्रेमा भाभी- सबसे पहले तो मैं सबको कुछ बताउंगी जो किसी को नहीं पता.

मंजू तै- ाचा ऐसी का बात हाउ बहुरिया.

प्रेमा भाभी- यही की मैं और पापाजी भी चुदाई करते हैं.

ये बात सुन तै और जग्गू दोनों चौंक गए.

मंजू तै- हे भगवन तू अपने ससुर के साथ भी..

जग्गू- ये कब हुआ भाभी.

मंजू तै- सारा घर hi चुदाई में लगा पड़ा है हमारा तो, कब से चल रहा है ये सब बहुरिया.

प्रेमा भाभी- जब तुम सब लोग कनक गाओं गए थे तभी शुरू हुआ.

मंजू तै- हमको पता था तेरे ससुर को कुछ दिन छूट नहीं मिलेगी तो वो कुछ न काण्ड कुछ ज़रूर करेंगे, और हमारा शक सही निकला अपनी बहु को hi छोड़ बैठे.

जग्गू- भाभी अचे से बताओ कैसे क्या हुआ .

फिर भाभी ने सबको पूरी बात बताई... भग्गू के उन्हें नंगा निकलने से लेकर ताऊ द्वारा चुदाई तक और कैसे अब भी रात को वो एक बार छोड़ते हैं छुप कर...

मंजू तै- हाय कितना नालायक है भग्गू ऐसे कोई करता है का अपनी बीवी के साथ खैर बहुरिया जो हुआ ाचा हुआ हमें तुझसे कोई शिकायत नहीं है.

ये कहकर तै ने भाभी को गले से लगा लिया.

जग्गू- अब ये जान गयी हो तो और भी चीज़ें जान लो मम्मी.

इसके बाद जग्गू ने हम सब और ममता चची पल्ली इन सब के बारे में भी बताया जिसे तै आँखें फाड़ फाड़ कर सुन रही थी इसके बाद प्रेमा भाभी ने एक और बूम फोड़ा वो था मेरे पापा और राजन चाचा के साथ शामिल होने का कैसे शशि बुआ आई और क्या क्या हुआ सब कुछ हालाँकि ये साडी बातें मुझे पता थी क्युकी पापा ने खुद बताई थी. पर जग्गू और तै के तो होश उड़े हुए थे.

मंजू तै- हाय ढैय्या ये का हो गया है गाओं को सब के सब लगे हुए हैं.

जग्गू- बताओ नीलेश चाचा शशि बुआ के साथ और राजन चाचा अपनी बेटी पल्ली के साथ... कर्मा तुझे पता था ये सब?

मैंने हाँ में सर हिलाया और बोलै- हाँ बुआ और पापा का तो पहले से पता था बाकि जो अभी भाभी ने बताया वो कुछ दिन पहले hi पता चला..

प्रेमा भाभी- ममता चची ने बताया होगा.

में- हाँ उन्होंने भी और

जग्गू- और?

में- पापा ने.

इस पर सब चौंक गए

प्रेमा Bhabhi-kya ये बात चाचा ने तुम्हे बताई भैया?

में- हाँ

फिर मैंने सबको मेरे और झुमरी के बीच जो हुआ उसके बाद पापा के द्वारा पकड़े जाने से लेकर अंत तक सब बता दिया..

सब हैरान थे .

जग्गू- साला इतना कुछ तो हमें पता hi नहीं था.

प्रेमा भाभी- हाँ हालाँकि ज़्यादातर मुझे पता था बस ये चाचा और तुम्हारी वाली बात छोड़के.

मंजू तै- हाय ढैय्या ये सुन सुनकर मेरी तो छूट hi पानी छोड़ रही है इतना सब हो रहा है गाओं में...

ये कहकर तै उठी और तुरंत मेरे लुंड को छूट में लेकर बैठ गयी..

उधर जग्गू ने भी भाभी की छूट में वहीं लिटाकर लुंड घुसा दिया

भाभी मेरी और तै की टैंगो के बीच थी तो उन्होंने अपना सर थोड़ा सा घुमाया और मेरे लुंड को अपनी सास की छूट में आता जाता देखने लगी फिर अगले hi पल उन्होंने अपनी जीभ निकली और तै के गांड के छेड़ पर फिरने लगी..





मंजू Tai-ahhhhhhhhhh बहूऊऊऊरिय्याहहह अह्ह्ह का कर रही है तू हमारे साथ ाः..

भाभी तो जवाब नहीं दे प् रही थी पर जग्गू कुछ ज़्यादा hi उत्तेजित हो रहा था...

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह भाभी आह्हः मम्मी तुम्हे कर्मा से चुड़ते देख बड़ा अलग सा महसूस हो रहा है लग रहा है लुंड फूल गया है ..

जग्गू भाभी को तेज़ी से छोड़ते हुए बोलै और साथ hi उनकी चूचियों को दबा रहा था....

मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ हमें भी आह्हः देख तेरी माँ तेरा दोस्त छोड़ रहा है आह्ह्ह्ह देख कैसे लुंड घुसा घुसा कर छोड़ रहा है...

मंजू तै ऐसे hi बातें कर खुद भी उत्तेजित हो रही थी और जग्गू को भी कस्र रही थी...

जग्गू- हाब मम्मी तुम भी तो रंडियों की तरह उसके लुंड पर उछाल रही हो .. ahhhhhhhhhh.

मंजू तै- ahhhhhhhhhh बाछहुआअ हम हैं रंडी आह्हः और अब जब सब जान गए हैं तो खुल के मज़े लेंगे आज तो कर्मा से चुद रहे हैं इसके बाप से भी छोड़ेंगे तो तब भी तू देखेगा.

जग्गू- हाँ मम्मी मैं तुम्हे सबसे चुड़ते हुए देखना चाहता हूँ..

मंजू तै- ahhhhhhhhhh हमार बाछहुआअ..

इधर सास की गांड अचे से चाटने के बाद भाभी ने सर घुमा कर जग्गू की और देखा और इशारा किया जग्गू भी भाभी का इशारा समझ गया और उसने तुरंत अपना लुंड उनकी छूट से निकल लिया जिसके बाद भाभी वहां से हटी और बगल में आ कर तै के चूतड़ों को फैलाया साथ hi जग्गू के लुंड मुँह में भर कर गीला कर दिया.

जब भाभी ने तै के चूतड़ों को फैलाया तो तै को लगा की वो फिर से उनकी गांड को चाटने वाली है और उन्हें तभी अपने गांड के छेड़ पर कुछ गरम सा महसूस हुआ तै को लगा की बहु की जीभ है पर अगले hi पल उनका भ्रम टूट गया क्यूंकि जग्गू का लुंड उनकी गांड के छेड़ को फैलता हुआ घुस गया

मंजू Tai-ahhhhhhhhhh हाय ढैय्या मार डाला...

भाभी उनके बगल में आई और उनको सहलाते हुए बोली - बस मम्मी हो गया अब दो दो लुन्डों से छोड़ने का मज़ा लो..

मंजू तै- ahhhhhhhhhh शैतान बता कर नहीं डलवा सकती थी हमारी हालत ख़राब कर दी.

में- बता कर डालता तो ये भाव कहाँ देखने को मिलता तै...

जग्गू- अह्हह्ह्ह्ह अब तो तुम्हारी गांड और कासी कासी लग रही है मम्मी.

प्रेमा भाभी- लगेगी hi दोनों तरफ से लोडे जो घुसे हैं मम्मी के अंदर. हेहेहे.

मंजू तै- तुझे बड़ी हंसी आ रही है कमीनी अभी एहि दो लोडे तेरे अंदर घुसवाऊँगी.

प्रेमा भाभी- इसी का तो इंतज़ार है मुझे मम्मी जी, तुम्हारे बाद मेरी बारी...

भाभी ने ये कहकर तै के होंठो को चूम लिया. तो तै मुस्कुराते हुए बोली - रंडी कहीं की...

इतने में हम दोनों ने भी अछि ले बना ली थी और अब अछि गति से तै के दोनों छेदों को सुख दे रहे थे.





भाभी पीछे से अपनी छूट घिसते हुए अपनी सास का हौसला बढ़ा रही थी..

मुझे जग्गू के साथ मिलकर उसकी माँ को छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा था, एक अजीब hi एहसास था की मैं बेटे के साथ मिलकर उसकी माँ को छोड़ रहा हूँ पर अब ये एहसास मुझे खूब मिलने वाला था ये पता था साथ hi ये भी सोचना था जो भी आज घटित हुआ और जो राज़ की बातें खुली उनका आने वाले समय पर क्या प्रभाव पड़ने वाला था...

खैर उसे छोड़ मैंने तै की चुदाई पर ध्यान दिया जिसमे तै लगातार सिसकियाँ भर भर के दोनों छेदों में लुंड ले रही थी पर वो इस मज़े को ज़्यादा नहीं सह पाई और जल्दी hi झाड़ गयी अपनी सास की जगह भाभी ने ली पर जगह में अदला बदली थी अब मैं भाभी की गांड मार रहा था और जग्गू छूट, भाभी पूरे उत्साह के साथ दोनों छेदों की चुदाई का मज़ा लेने लगी वहीं तै बगल में हांफते हुए अपनी बहु को चुड़ते देख रही थी और आने वाले समय के बारे में सोचते हुए अपनी चूचियों से खेल रही थी...

( अस 3रद पर्सन)

जहाँ कर्मा जग्गू के घर में व्यस्त था वहीं अनुज कुछ न कर रहा हो ऐसा कैसे हो सकता था, अनुज अभी ममता चची के यहाँ उनके कमरे में था और बिलकुल नंगा था और बिस्तर के किनारे खड़ा होकर चौपाया बानी पल्ली की कमर को थामे उसे छोड़ रहा था और पल्ली आगे झुककर अपनी नंगी मम्मी की छूट को चाट रही थी...





अनुज दोनों माँ बेटी की सेवा में लगा हुआ था..

ममता- अनुज ऐसी हीई छोड़ इसे वैसे भी अब तू काम hi आता है घर पर

अनुज- नहीं चची मुझे तो जैसे hi मौका मिलता है छोड़ता हूँ तुम्हे...

पल्ली का मुँह बंद था उसकी मम्मी की छूट से..

ममता- ाचा मुझे लगा तू अपनी माँ की छूट में घुसा रहता है इसलिए काम आता है..

अनुज चची को बात सुन एक पल को चौंका फिर मज़ाक करते हुए बोलै- क्या चची तुम भी... मेटे सामने दो दो छूट हमेशा हैं फिर क्या ज़रुरत.

ममता - अरे बचुआ तुझे अपनी माँ की छूट के बारे में नहीं पता देख लेगा तो बिना चोदे नहीं छोड़ेगा इतनी रसीली है.

अनुज- ाचा बोल तो ऐसे रही हो जैसे अभी देखि हो.

ममता- देखि है बचुआ और चखी भी है..

अनुज- कुछ भी.

ममता- अरे बचुआ सच में

इसके बाद ममता चची ने अनुज को ुंक्व पल्ली और माँ के बीच जो हुआ वो बता नाता कर अनुज को उत्तेजित कर अपनी और तगड़ी चुदाई कराइ. हालाँकि अनुज को इस बारे में माँ से पहले hi पता लग चूका था पर वो फिर भी अनजान बनने का नाटक कर मज़े लेता रहा और दोनों को भरपूर छोड़ने के बाद माँ बेटी को संतुष्ट करने के बाद जाकर शांत हुआ..

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 




ये कौन कौन हो सकते हैं? अपनी अपनी पसंद बताएं...
 
अपडेट 176

सरलपुर

घूमने जाने की योजना में जो बदलाव हुए थे उसका असर सब पर hi था कुछ बदलाव से खुश थे तो कुछ के मन में ये शंका थी की जो उन्होंने सोचा है वो कैसे हो पायेगा.. पर कुल मिलकर योजना तो बन चुकी थी अगली सुबह hi माधुरी ने रिमझिम से अपने मइके फ़ोन लगाने को कहा और अपनी समाधान से करीब घंटा भर बात की और उनकी न नुकुर के बाद चलने को मन hi लिया हालाँकि वो रिमझिम के चाचा चची के लिए राज़ी नहीं करवा पाई क्यूंकि जानवरो और खेतों को देखने के लिए कोई न कोई चाहिए था... तो अंत में ये फैसला हुआ था की विनीत और रिमझिम के मम्मी पापा उनके साथ चलेंगे हालाँकि संधान ने एक बार रिमझिम के पापा से पूछकर hi पक्का करने को कहा था..

रिमझिम ने उसके बाद पूर्वी से बात की और उसे पूरी कहानी बताई दोनों बहनें सोचने लगी की कैसे कैसे और क्या क्या कर सकेंगी वो इस यात्रा के दौरान.

चंचल और चेतन ने रात में इस बारे में बात की थी फिर चेतन ने कहा वैसे सब होंगे तो फायदा भी है समय निकलना आसान हो जायेगा ऊपर से गाओं में कितनी जगह है अपनी..

चरण सिंह बेहद खुश थे की वो अपनी मस्त बहुओं के साथ समय बिता पाएंगे.

रमन को रिमझिम ने समझा दिया की गाओं जाने में ज़्यादा फायदे हैं.

तो कुल मिलकर सब लोग तैयार थे अपनी अपनी योजनाओं के साथ और आने वाले समय का इंतज़ार कर रहे थे.

चोदामपुर

(कर्मा की ज़ुबानी)

जग्गू के साथ मिलकर उसकी भाभी और माँ को छोड़ने में बड़ा मज़ा आया खैर उन्हें शांत करके और खुद होकर मैं घर आ गया तो वहां देखा पात पूजा की तैयारियां चल रही हैं फूलों और पत्तों के रास से भरी हुई बाल्टियां राखी हैं. और साडी औरतें बाकि तैयारियों में लगी हैं, कई तरह का खाना बनता था और हर प्रकार के अनाज की पूरी से भोग लगता था जैसे गेहूं मक्का बाजरा चावल तो इन सब की तयारी मैं औरतें एक शाम पहले से जुट जाती थी.

हर साल मेरा परिवार, जग्गू का, राजन चाचा का और नीतू का परिवार मिलकर हमारे यहाँ hi पात पूजा मानते थे, क्यूंकि पूजा आँगन में होती थी और हमारा आँगन थोड़ा बड़ा भी था इसलिए.

अनाज की बोरियों को आँगन के बीच में रखकर उनके ऊपर पत्ते फूल रखे जाते थे और फिर पूरी विधि से उनकी पूजा होती थी...

खैर अभी मेरा कोई खास काम नहीं था इसलिए मैदान की और निकल गया जहाँ मैच चल रहा था, साथ hi नीतू का बड़ा भाई सरजू भी वहीं मिल गया फिर क्या था खेल में लग गया और बिलकुल अँधेरा होने तक खेलता रहा.

फिर आते हुए सरजू मेरे साथ टहलता हुआ चल दिया हम बातें करते हुए आने लगे.. चांदनी रात थी तो ाचा खासा उजाला था सब दिख रहा था

सरजू- और कर्मा कहाँ चल रहा है आज कल जुहाड?

में- कैसा जुगाड़ बे..

सरजू- ाचा हमसे होशियार मत बनो तुम्हारी गाडी आज कल कहाँ के चक्कर लगा रही है हमें सब पता है.

में- ाचा कहाँ के लगा रही है. कछु भी मत बोल सेल.

सरजू- गैंदपुर के क्यों चक्कर लग रहे हैं हमें नहीं पता का कहो तो अब नाम भी बता दें.

में- अबे ऐसा कुछ नहीं है ज़्यादा मत सोच.

सरजू- अरे बस कर कितना छुपायेगा अछि लड़की है सुन्दर भी बहुत है पहली बार हमने देखा तो हमारा भी मन डोला था पर उसने मिलते hi भैया बोलकर पत्ता काट दिया.

में- हेहही. अबे शकल देखि है अपनी.

सरजू- तो सेल शकल से तो तुम भी शाहरुख़ खान नहीं हो.

में- हमें ज़रुरत hi नहीं है .

सरजू- वो सह छोड़ थोड़ा संभल के रहना उसका बाप बड़ा सख्त आदमी है कहीं कुस्ज गड़बड़ हुई तो साला घर पार बात आ जाएगी और फिर तेरे पापा तेरी गांड तोड़ देंगे.

में- अबे कुछ नहीं होगा ज्ञान मत पेल.

सरजू- सेल एक तो हम बता रहे हैं तो गांड फुला रहे हो.

में- ाचा ठीक है तू औरतों की तरह रूठ क्यों हो रहा है, चल पेप्सी पिलाता हूँ तुझे.

सरजू- अबे पेप्सी भी पी लेंगे पर उससे पहले तुम्हे कुछ नज़ारे दिखता हूँ.

में- कैसे नज़ारे?

सरजू- चल तो सही दिखता हूँ.

ये कहकर सरजू मुझे खेतों की और ले गया और एक खेत में जहाँ झाड़ियां ज़्यादा थी उसके अंदर घुसता ले गया

में- अबे कहाँ घुसा रहा है कोई सांप कीड़ा काट लेगा.

Sarju-bas फटने लगी तेरी. आना है तो आ नहीं तो जा बापिस.

में- आ रहा हूँ..

खैर झाड़ियों के अंदर जाकर देखा तो बीच में थोड़ी जगह खली थी और वहां खली बोर बिछे हुए थे..

में- सेल यहाँ ये तूने बिछाए हैं क्या, गांड मरवाने तो नहीं लाया तू यहाँ अपनी.

सरजू - चुप कर बे... और आराम से बैठ और धीरे धीरे बात करना आवाज़ नहीं होनी चाहिए.

में- क्यों क्या है यहाँ.

सरजू- अबे चुप और है नहीं होने वाला है... वो देख दूरदर्शन शुरू होने वाला है.

सरजू ने इशारा किया तो देखा तो एक औरत बगल के खेत से होते हुए हमारी और आ रही थी पर काम रौशनी की वजह से उसका चेहरा नहीं देख समझ आ रहा था.

में- ये कौन है बे.

मैंने धीमी आवाज़ में पुछा.

सरजू- अबे मुझे क्या पता hoga.tu बस जो होने वाला है वो देख चुप चाप.

वो औरत और पास आती गयी और हम दोनों बिलकुल चुप हो गए खैर वो औरत आई और झाड़ियों के सामने आकर थोड़ी आगे होकर लोटा रखते हुए बैठने लगी .

मैं समझ गया साला हरामी यहाँ छुपकर औरतों को हगते हुए देखता था मैंने उसके कोहनी मारी . गुस्से में पर उसने चुप रहने का इशारा किआ और सामने देखने को इशारा किया.

और सामने देखने पर मैंने पाया की औरत अपनी सारे कमर तक उठा कर बैठ चुकी थी और चाँद की चांदनी में उसकी गोरी और बड़ी गांड चमक रही थी, दोनों चूतड़ दो मटको जैसे लग रहे थे.. वैसे तो मुझे ये सही नहीं लग रहा था पर उस औरत की गांड देखकर मेरा लुंड हरकत करने लगा था...

कुछ hi पलों में एक सीटी की आवाज़ आने लगी तो मैं समझ गया वो मूट रही है.

उसकी सीटी की आवाज़ से मेरा लुंड बिलकुल तन गया तभी कुछ हरकत से मेरा ध्यान बगल में गया तो देखा सरजू हरामी तो पजामा नीचे सरका कर लुंड निकल कर मुठिया रहा है गांड देखते हुए... मैंने बापिस नज़र सामने की और उस की मस्त भरी हुई गांड देखने लगा और उसे देखते हुए कब मेरा खुद का हाथ मेरे लुंड को मुठियाने लगा मुझे पता hi नहीं चला, कुछ भी कहो गांड बिलकुल मस्त थी मेरी अनुभवी नज़रों ने चूतड़ों की गोलाई और अकार से ये तो अंदाज़ा लगा लिया था की ये कोई बड़ी उम्र की औरत है क्यूंकि भाभियों की गांड इतनी बड़ी नहीं होती ऐसे चूतड़ कई बच्चे निकलने के बाद होते हैं..

खैर मैं आकलन में लगा हुआ था बस हाथ में कलम की जगह लुंड था, वहीं मेरे बगल में सरजू मुठिया रहा था बिना रुके.

इतने में hi दोनों के खड़े लौडों पर धोखा हो गया और वो औरत गांड धोकर कड़ी हो गयी और जाने लगी...

सरजू- धत्त्त मादरचोद थोड़ी देर रुक जाती बस निकलने hi वाला था..

फुसफुसाते हुए बोलै.

में- हाँ यार

सरजू- क्यों वैसे बड़ा बन रहा था पर खुद भी मुठियाने लगा न.

में- हाँ हाँ क्या करता यार चूतड़ देख के लोढ़ा फुंकार मरने लगा.

सरजू- बोलै था न मज़ा आ जायेगा तुझे.

में- हाँ सेल मस्त जगह ढूंढ राखी है तूने हरामी.

सरजू- ाचा बीटा हम hi मज़े करवाएं और हम hi हरामी. बड़ा कमीना है रे तू.

मैंने उस औरत को खेत के बहार जाते हुए देखकर कहा.

में- वो सब छोड़ ये बता ये थी कौन.

सरजू- अरे मुझे क्या पता मैं भी तो तेरे बगल में hi हूँ.

में- अरे तू रोज़ देखता है तो तुझे पता होगा मुझे लगा.

सरजू- अबे एक तो अँधेरा होता है ऊपर से ज़्यादातर औरतें इसी की तरह काम निपटा कर चली जाती हैं वैसे भी कहीं पीछे देख लिया और मुझे देख लिया तो गाओं. वाले गांड तोड़ देंगे मेरी.

में- हाँ ाचा सुन चलके देखते हैं न कौन है.

सरजू- अबे चूतिया है क्या सेल उसने देख लिया तो लोडे लग जायेंगे.

में- अबे छोड़ूमल तो अभी यहाँ से जाकर थोड़े न देख रहे हैं घूमकर चलते हैं रस्ते पर तो देख सकते हैं न.

सरजू- पर तुझे देखना hi क्यों है.

में- अबे तुझे नहीं जानना की इतनी मस्त गांड वाली है कौन क्या पता कुछ जुगाड़ हो जाये.

सरजू- हाँ यार एक बार जानने का मन तो है.

में- चलें फिर .

सरजू- हाँ चल पर ध्यान से.

में- हाँ चल न गांड पहले लूप लूप करने लगती है तेरी.

हम दोनों झाड़ियों से निकले और उस औरत पर नज़र रखते हुए दूसरी तरफ से चल कर रस्ते पर पहुँच गए पर वो हमसे आगे थी करीब 200 मीटर तो जल्दी जल्दी कदम बढ़ने लगे.

में- ाचा वैसे तूने कभी किसी का चेहरा देखा है

सरजू- हाँ जब कभी रौशनी अछि हो और किस्मत उससे भी अछि तो कभी कभार औरतें पलट भी जाती हैं.

में- किस किस को देखा है फिर.

सरजू- उठ्णन्न एक तो वो पोखर के बगल में जो घर है न उसकी.

में- ाचा सही में.

सरजू- हाँ रे बड़ी मस्त और कासी हुई गांड है साली की..

मैंने मन में सोचा ाचा हुआ मेरे घर में hi शौचालय बना है नहीं तो ये मेरी घर की औरतों की भी गांड देख लेता.

में- और किसकी.

सरजू- तुझे बड़ा मज़ा आ रहा है.

में- बता न .

हम बातें करते हुए आगे बढ़ाते जा रहे थे वो औरत और हमारी दूरी आधी रह गयी थी.

सरजू- कल्लू की बहन कजरी की देखि खूब ब्याह से पहले.

में- ाचा जी सही है.

मैंने सोचा तूने देखि hi मैंने छोड़ी भी है

सरजू- और तेरे जैदी की माँ को देखा है.

में - मतलब

सरजू- अबे मंजू तै को.

में- सेल हरामी.

सरजू- अब हरामी क्या अब है उनकी गांड तो देखली पर सही कहूं बड़े गोल गोल चूतड़ हैं तै के अगर तू देखले तो लुंड का पानी निकल जाये.

में- और?

सरजू- और क्या प्रेमा भाभी की भी देखने को मिल जाती एक बार पर भाभी हगने बैठी hi नई बस सास को करवाने आई थी

में- हेहही सेल सही हुआ.

सरजू- ऐ चुप देख वो मुद रही है जल्दी चल.

में- हाँ भाग .

हम लोग भाग कर औरत के करीब पहुंचे और ऐसे आगे पहुँच गए की उसे कुछ अजीब न लगे फिर बहाने से पलट कर औरत का चेहरा देखा तो मैं दांग रह गया

पर मुझसे भी ज़्यादा हैरान परेशां सरजू हो गया क्यूंकि वो औरत कोई और नहीं बल्कि रज्जो चची थी यानि सरजू की माँ.

सरजू का तो मुँह hi बन गया वहीं रज्जो चची ने हमें देखा तो बोली- ऐ सरजू कर्मा कहाँ घूम रहे हो दोनों.

सरजू के मुँह से तो शब्द नहीं निकल रहे थे..

मैंने hi बात सँभालते हुए बोलै- अरे चची मैच खेल के आ रहे हैं.

Rajjo-tum लोग भी न ऊँट हो गए हो और गेंद बल्ले के पीछे पड़े रहते हो. चलो अब घर सरजू चल.

में- आ रहे हैं चची थोड़ी देर में. वो मैच सरजू जीता है न तो मुझे पेप्सी पिलानी पड़ेगी इसे.

रज्जो- तुम और तुम्हारा मुआ मैच. जल्दी आना और सुन सरजू मैं कर्मा के यहाँ जा रही हूँ घर में नीतू होगी तो उससे खाना ले लेना और लड़ना मत .

सरजू ने सर हिला दिया. इसके बाद चची चली गयी.

में- चलें भाई पेप्सी पिलाता हूँ तुझे.

मैंने ये कहके उसकी और मुस्कुरा कर देखा तो उसके चेहरे का रंग उतरा हुआ था और उतरे भी क्यों न जिस औरत की गांड देख कर वो और मैं अभी कुछ देर पहले मुठिया रहे थे वो उसकी माँ थी..

वो मुझसे नज़रें नहीं मिला प् रहा था..

में- अब चलेगा भी.

मैंने उसे बोलै तो वो नज़रें नीचे किये हुए hi आगे बढ़ने लगा.

मैंने सोचा सही मौका सेल से मज़े लेता हूँ.

में- यार वो नंगी गांड वाली औरत तो चची hi निकली.. जिसे देखकर हम लोग लुंड हिला रहे थे.

माइनर जानकर अश्लील शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा..

मेरी बात सुनकर वो बस हम्म्म बोलै और चलता रहा.

में- वैसे कुछ भी हो गांड मस्त है चची की.

मेरे ये कहते hi वो रुक गया और गुस्से में बोलै- कर्मा बस अब और कुछ भी बोलै न तो देख लियो.

में- क्यों अब बात अपनी माँ पर आई तो गांड किलास गयी तेरी, दूसरो की औरतों को देखता था तो मज़ा आता था.

मेरी बात सुनकर वो झेंप गया.

में- देख एक न एक दिन ये होना hi था जैसी करनी वैसी भरनी, अब तू जग्गू की माँ की देखकर हिलता था मैं तेरी माँ की देखकर हिला रहा था.

सरजू- अब बस कर और कुछ मत बोल समझ गया मैं आगे से ये सब बंद कर दूंगा..

में- बिलकुल सही समझा वैसे एक बात और भी है.

सरजू- क्या.

में- छोड़ तेरा मुँह बन जायेगा .

सरजू- अभी जो हुआ उससे ज़्यादा मुँह क्या hi बनेगा..

में- रुक दुकान आ गयी पेप्सी लेकर आता हूँ.

यव कहकर मैं पेप्सी लेकर आया फिर एक तरफ आकर हम दोनों एक पेड़ के किनारे खड़े होकर पेप्सी पीते हुए बतियाने लगे.

सरजू- अब बता न क्या बात है.

में- बताऊंगा पहले तू बता की जो पूछूंगा उसका सच सच जवाब देगा.

सरजू- हाँ पूँछ सही सही जवाब दूंगा.

में- तुझे चची की गांड कैसी लगी.

सरजू- सेल तुझसे बोलै की उस बारे में बात मत कर.

में- और तूने अभी खुद hi बोलै की सही सही जवाब देगा.

सरजू- ाचा पूछ.

में- पूछा तो चची की गांड कैसी लगी?

सरजू- सेल कैसे बता सकता हूँ वो माँ है मेरी.

में- ाचा तब जो देखते हुए लुंड हिला रहा था तब.

सरजू- तब तो पता नहीं था न की मम्मी होंगी वो.

में- अबे मैं बस इतना पूछ रहा हूँ की गांड कैसी लगी ये मत सोच मम्मी की है या तै की. और बता.

सरजू कुछ पल चुप रहा फिर बोलै- अछि लगी मस्त..

में- सिर्फ मस्त या कुछ और.

सरजू- हाँ मस्त और कैसी लगेगी.

में- ाचा सीधे शब्दों में पूछूं तो मरने लायक लगी की नहीं.

सरजू- क्या बोल रहा है तू ये सब सेल.

में- अगर सोच वो गांड तेरी मम्मी की न होती तो मरता??

सरजू- हाँ फिर क्या दिक्कत होती.

में- ाचा और अभी जब तुझे पता है की तेरी मम्मी की थी वो गांड तो क्या मौका मिलने पर दोबारा देखना चाहेगा.

सरजू- चल सेल नहीं ये तो गलत होगा.

में- गलत सही का ज्ञान मत छोड़ बस हटा देखेगा या नहीं..

सरजू चुप हो गया.

में- सोच दोबारा मौका मिले तेरी माँ की बड़ी गोल मटोल गांड देखने का तो क्या तू पीछे हैट जायेगा नज़र घुमा लेगा?

सरजू चुप चाप मेरी बात सुन रहा था बिना जवाब दिए.

में- बता सेल देखेगा की नहीं...

सरजू- क्या बात कर रहा है कर्मा सेल तू अपनी माँ के बारे में ऐसा कैसे सोच सकता हूँ मैं.

में- ाचा नहीं सोच सकता तो उनकी गांड के बारे में बातें सुनकर तेरे पाजामे में तम्बू क्यों बन रहा है.

मैंने इशारा कर उसे बताया तो उसने खुद के पाजामे मेइब बने तम्बू को देखा ौड झेंप गया.

सरजू- वो तो वो मुठ मर रहा हूँ तब से hi.

में- अब तो सच बोलदे भोसड़ी के.

सरजू- हाँ यार मम्मी जी की गांड के बारे में सोच कर hi खड़ा हो रहा है साला जितना छह रहा हूँ की न सोचूं उतना hi सोच रहा हूँ.

में- अब बोलै न तू सच.

सरजू- पर है तो ये गलत.

में- गलत क्या है.

सरजू- मम्मी के बारे में सोच न इस तरह.

में- अबे लोदु गलत क्या है चची की इतनी मस्त गांड है हम जवान लोंदे हैं अब नंगी गदराई गांड देखकर लुंड खड़ा नहीं होगा तो काहे बात के मर्द .

सरजू- पर अपनी माँ की hi देखकर खड़ा होना गलत है.

में- अबे छूट और लुंड रिश्ते नहीं देखते, लुंड बस छेड़ देखता है और जहाँ मिलता है घुस जाता है.

सरजू- चल ऐसे नहीं होता

में- ाचा एक बात बता मान ले तेरी मम्मी नंगी तेरे सामने हैं और झुककर अपने छेड़ दिखते हुए लुंड का इंतज़ार कर रही हैं और तू उनके पीछे है तेरे हाथ में तेरा लुंड है और तू लुंड अपनी मम्मी की छूट पर लगता है और अंदर घुसारा है..

तो बता लुंड अंदर जायेगा की नहीं...

सरजू. तो मेरी ये बात सुन बिलकुल हक्का बक्का रह गया.. साथ hi उसकी साँसे तेज़ चलती हुई महसूस हुई.

में- घुसेगा की नहीं तेरा लुंड तेरी मम्मी की छूट में?

सरजू ने ये सुना और वहीं खड़े खड़े अपना पजामा नीचे खिसकाया और लुंड बहार निकल कर तेज़ी से हिलने लगा.

एक तो रात हो चुकी थी और हम पेड़ों की ओट में थे तो देखे जाने का कोई दर नहीं था.

इधर सरजू तो अपने लुंड को आँखें बंद कर मसाले जा रहा था और कुछ hi पालो में वो आहें भरने लगा मुझे समझ गया ये झड़ने वाला है और जुएभी ऐसा hi कुछ hi पालो में उसके मुँह से निकला ओह्ह्ह मम्मी अह्ह्ह्हह तुम्हारी गांड कीत्नीईईई मस्त्त्त है अह्ह्ह्ह मम्मी...

इन सब के साथ उसका लुंड रास छोड़ने लगा जो ज़मीन पर गिरने लगा, रास की एक एक बूँद निचुड़ने तक उसके मुँह से मम्मी मम्मी की ाआहें निकलती रही और अंत में शांत हुआ तो जाकर पजामा ऊपर किया और फिर मेरी और देख मुस्कुराया,

सरजू- सेल हरामी मेरी मम्मी के नाम की hi मुठ मरवा दी तूने.

में- मैंने नहीं मरवाई लोदु मन में तेरे hi थी.

सरजू- हाँ यार पर मज़ा आ गया.

में- सोच मुठ मरने में इतना आया तो अपनी मम्मी की छूट मरने में कितना आएगा.

सरजू- ऐसा कभी होगा नहीं..

में- क्यों नहीं होगा.

सरजू- सेल अगर मम्मी को भनक तक लग गयी न तो मेरा खून कर देंगी.

में- अबे लोदु ऐसे डरेगा तो हो गया काम. तो ये क्यों भूल रहा है की वो औरत भी है और हर औरत लुंड की भूखी होती है चाहे वो सगी माँ क्यों न हो.

सरजू- फिर भी क्या कर सकते हैं.

में- धीरे धीरे शुरुआत कर क्या पता तू सफल हो जाये.

सरजू- पता नहीं यार.

में- तू सच में छोड़ना चाहता है तो बता जुगाड़ करवाऊं.

सरजू- हाँ यार चाहता हूँ करवा न कोई जुगाड़.

Me-theek है फिर मुझे सोचने दे और कक से जो जो मैं कहता जॉन वो तू करता जा और जल्दी hi तेरी माँ तेरे लुंड पर उछलेगी.

सरजू- सच में.

Me-par मेरी एक शर्त है.

Sarju-kya

में- मुझसे भी छुड़वाएगा चची को.

सरजू- सेल हरामी मुझे पता था तू ऐसा कुछ ज़रूर बोलेगा. पर एक बार मुझसे तो छुड़वा ले फिर अंग्रेजी फिल्मो की तरह साथ में छोड़ेंगे.

में- ये हुई न बात चल ठीक है कल से मिशन मादरचोद चालू तेरा.

सरजू- धत्त्त तेरी की क्या नाम है हेहेहे.

फिर हम दोनों बात करते करते अपने अपने घर आ गए..

मेरे घर में तो औरतों का जमावड़ा लगा था, ममता चची, पल्ली, प्रेमा भाभी, मंजू तै, रज्जो चची, lado.maa मौसी, और शान्तो तै.. सब खाना वन बनाने में लगे थे वहीं सरे मर्द राजन चाचा के यहाँ थे और भांग पिसाई हो रही थी...

अब इतने लोगो के बीच छह कर भी कुछ नहीं हो सकता था पर हाँ उसी बीच अनुज मेरे पास आया और उसने मुझे अपने और संतो तै के बीच जो कुछ हुआ बताया जिसे सुनकर मुझे थोड़ी हैरानी हुई. मैं सोचने लगा की संतो तै का माजरा क्या है समझना पड़ेगा जितना सरल लगती है उससे कहीं जटिल है संतो की पहेली जिसे जल्दी hi सुलझाना पड़ेगा वहीं अब जब अनुज ने उन्हें छोड़ hi लिए है तो मैं भी बिना चोदे तो नहीं छोड़ने वाला, माइनर और अनुज ने संतो तै को कैसे मिलकर छोड़ना है उसकी योजना बनाई पर वो भी अभी पूरी करना संभव नहीं था. उसके बाद मैंने फ़ोन देखा और अंजलि की चाट खोली तो उसका कोई मश्ग नहीं था जिस पर मैंने hi अपनी तरफ से गुड नाईट का मश्ग कर दिया और अपने बिस्तर पर पसर कर सो गया..

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद
 
इस अपडेट को पढ़ने से पहले रेविसिओं के लिए अपडेट 176 ज़रूर पढ़ लें ताकि आपको पिछली कहानी याद रहे और अचे से कनेक्ट कर पाएं देरी के लिए माफ़ी चाहूंगा अब आगे से इतना विलम्ब नहीं होगा और रेगुलर उपदटेस आते रहेंगे. अपने सुझाव आते रहने दें

अपडेट 177
सरलपुर

अगली सुबह का वक़्त था सब लोग नाश्ते की टेबल पर जमा थे और आगे की प्लानिंग कर रहे थे, क्यूंकि कल hi सबको गाओं जाना था तो इस पर चरण सिंह ने सुझाव दिया की वो आज hi चले जाते हैं और घर की साफ़ सफाई और बाकि सब इंतेज़ाम देख लेंगे , सबको ये सुझाव पसंद आया और सबकी सहमति भी थी इस पर फिर माधुरी बोली- ऐ जी मैं भी चलती हूँ तुम बहार का काम तो करवा लोगे पर घर के काम कोई औरत करवाए वो ज़्यादा सही है.

चरण सिंह- अरे नहीं भाई तुम रहने दो वहां जाओगी काम करने और तबियत ख़राब कर बैठोगी. और परेशानी हो जाएगी.

माधुरी- नहीं हो रही तबियत इतनी जल्दी ख़राब.

चेतन- नहीं मम्मी पापा ठीक कह रहे हैं तुम रहने दो.

माधुरी- मैं तो मदद के लिए hi कह रही थी, वैसे ख़ुशी को ले जाओ.

रमन- अरे इसे ले जाओगे तो काम बढ़ा देगी काम नहीं करवाएगी

रमन ने मज़ाक करते हुए कहा, जिस पर सब हंस पड़े वहीं ख़ुशी गुस्से का नाटक करते हुए बोली- ऐसा नहीं है भैया मैं सब काम करवा सकती हूँ, पर मैं जाउंगी नहीं मुझे आज कॉलेज जाना है असाइनमेंट सबमिट करने.

माधुरी- फिर तो एक hi सबसे बढ़िया उपाय है, अपनर साथ चंचल बिटिया को ले जाओ, उस पर हमें पूरा भरोसा है वो सब अचे से निपटा लेगी.

चंचल अपना नाम सुनकर थोड़ा चौंक गयी पर क्या बोल सकती थी बेचारी ने नज़रें बचाकर अपने पति की और देखा, जो की खुद मम्मी की बात से थोड़ा चौंक गया था पर अब बोल दिया था मुनमय ने तो वो भी सीधे कुछ नहीं बोल सकता था

चंचल का नाम सुन चरण सिंह खुश हुए पर मन में दबाते हुए बोले- अरे क्यों बहु को परेशां करती हो मैं करवा लूंगा सब जाकर तुम ज़्यादा सोचो मत.

माधुरी- अरे रहने दो तुम हमें पता है तुम कितना करवा लोगे काम खुद लग जाओगे गाओं के लोगो से मिलने में और सब धरा का धरा रह जायेगा वैसे भी पहली बार समधी संधान आ रहे हैं हम नहीं चाहते कोई परेशानी हो.

अब सास को इतना बोलते देख चंचल से रहा नहीं गया हालाँकि उसे अजीब लग रहा था पर उसकी आदत थी सास की हर इच्छा को पूरा करना तो उसी नाते वो बोल पड़ी- मैं चली जाउंगी मम्मी जी.

इस पर चेतन ने उसे हैरानी से देखा तो उसने आँखों से शांत रहने का इशारा किआ. चंचल की हाँ सुनकर तो चरण सिंह के मन में लड्डू फूटने लगे उनका मन अपने और बहु के साथ बिताने वॉर समय के. सपने संजोने लगा.

चरण सिंह- अरे मैं तो कह रहा हूँ रहने दो अकेले जारवा दूंगा मैं सरे काम.

माधुरी- तू बता बहु तुझे कोई परेशानी है जाने में.

चंचल – नहीं मम्मी जी इसमें कैसी परेशानी और बस एक दिन की बात है कल सब लोग आ hi जाओगे.

माधुरी – तो फिर ये तय रहा.

चरण सिंह- चेतन बीटा अब बहु भी जा रही है तो दुकान के किसी लड़के को भेज और एक बस की टिकट मंगवा ले. बाद में मिले न मिले.

चेतन- हाँ पापा सही बोलै तुमने अभी फ़ोन करता हूँ.

माधुरी- अरे रिम्मी बीटा तेरी बात हो गयी न सबसे कब तक आ जायेंगे सब.

रिमझिम – हाँ मम्मी जी, पापा मम्मी और विनीत तो शाम तक आ जायेंगे और पूर्वी और जीजाजी रात को खाने से पहले.

माधुरी- ठीक है फिर भी तू फ़ोन करके खोज खबर लेती रहियो.

खाना ख़त्म हुआ और थोड़ी देर बाद चंचल और चेतन कमरे में थे, चेतन ने बीवी को पीछे से बाहों में जकड रखा था और उसके मांसल पेट को मसलते हुए बोल रहे थे- अरे यार आज रात सूखा hi सोना पड़ेगा तुम तो चली जाओगी.

चंचल- ाचा तो तुम्हे बस मेरी इसीलिए ज़रुरत रहती है,

चंचल ने झूठा गुस्सा दिखते हुए कहा.

चेतन- धत्त्त ऐसी बात नहीं है तुम तो हर तरीके से हमारे लिए ज़रूरी हो और तुम्हारे बिना हम अधूरे.

चंचल- चलो चलो ज्यादा देवदास न बनो कल तक की बात है, फिर तो साथ hi साथ है.

चेतन- ओह्हो मेरी शायर बीवी.

चंचल- अब जाओ तुम हमें तयारी भी होना है निकलने के लिए तुमने टिकट मंगवा लिए.

चेतन – हाँ बोल दिए है थोड़ी देर में लड़का दे जायेगा.

इसके बाद चेतन ने जाने से पहले बीवी के होंठों को चूसा और फिर चला गया.

थोड़ी देर बाद hi दुकान का लड़का आकर टिकट दे गया बस दो घंटे बाद की थी, रिमझिम अपनी जेठानी की पैकिंग में मदद कर रही थी.

रिम- क्या जीजी तुम पहले जा रही हो मैंने सोचा साथ चलते मस्ती करते हुए.

चंचल- क्यों है न मस्ती के लिए तेरी प्यारी ननद उसके साथ कर लिओ मस्ती .

चंचल ने कपडे रखते हुए कहा.

रिम- अरे जीजी जो मज़ा इन भरे पपीता में हैं वो उन संतरो में कहाँ.

ये कहकर रिमझिम ने चंचल की चूचियों को दबा दिया.

चंचल- उईईई माहहह तू भी न बड़ी कमीनी है, और मुझसे मस्त तो तेरे ये खरबूजे हैं.

ये कहकर बदला लेते हुए चंचल ने रिमझिम की चूचियों को दबा दिया, पर इस पर चीखने की बजाये रिमझिम ने चंचल के हाथों को पकड़ लिए और ऊपर से दबाव बनाते हुए अपनी चूचियां दबवाने लगी,

रिम- अह्ह्ह्ह जीजी अचे से दबाओ न,

चंचल- कुटियाः. कितनी बेशरम है तू,

रिम- अरे जीजी तुम्हारी छुछियां hi कमाल की हैं, रहा नहीं जाता वैसे संभल के रखना कहीं रस्ते में ससुर जी hi ना होश खो बैठें.

चंचल- धत्त कुछ भी बोलती है, ससुर हैं वो हमारे ऐसे कैसे सोच सकते हैं.

रिमझिम इस बात पर चंचल के करीब आई और उसकी कमर मसलते हुए बोली- जीजी ये बदन रिश्ते नहीं देखता बस प्यास देखता है और तुम्हारे बदन को देखकर अचे ाचो की प्यास जाग जाये.

रिमझिम की बात सुनकर चंचल ने कहा तो कुछ नहीं पर उसे ससुर के साथ हुआ वो हादसा याद आ गया जब उसके ससुर उसके पेट पर झाड़ कर गए थे.

रिमझिम ने चंचल के पेट को मसलते हुए बात जारी राखी- जीजी सच बोल रही हूँ अगर ससुरजी ने तुम्हारी चूचियां एक बार नंगी देखली तो उनका लुंड खड़ा होकर तुम्हारी छूट में घुसाने से वो खुद भी नहीं रोक पाएंगे.

चंचल- चल ऐसा कुछ नहीं है तू ज़्यादा hi गन्दी होती जा रही है,

फिर कुछ सोच कर चंचल बोली- अगर ऐसा हुआ तो?

रिम- मतलब

चंचल- मतलब अगर ऐसा हुआ तो मैं क्या करुँगी?

रिम- करना क्या है टंगे खोल के मज़े से छुड़वाना अपने ससुर जी से.

चंचल- छू छी कैसी बातें करती है तू.

रिम- मैं तो सच बोलती हूँ मैं होती तो यही करती पर उन्हें तो तुम hi पसंद आई हो जीजी.

चंचल- मैं नहीं पसंद मम्मी जी ने बोलै मुझे ले जाने को. और क्या तू सच में करवा लेती ससुर जी से?

रिम- और क्या बिलकुल लुंड मिले तो क्यों मन करना?

चंचल – और देवर जी का क्या?

रिम- उनका क्या उन्हें तुम्हारी दिलवा देती हिसाब बराबर.

चंचल- धत्त्त.

इससे आगे दोनों की बातें होती की बहार से चरण सिंह की आवाज़ आई- चंचल बहु तैयार हो गयी बीटा टिकट दे गया है लड़का समय हो रहा है निकलने का.

चंचल- आई बाबूजी.

रिम – देखा अभी से बुला रहे हैं..

चंचल उसे कोहनी मरती हुई बोली- चल अब मस्ती बहुत हुई चलते हैं..

जल्दी hi चंचल और रिमझिम दोनों बहार आई रिमझिम के हाथ में चंचल का बैग था पर चरण सिंह की नज़र चंचल पर थी जो की नीली साड़ी में कमाल की लग रही थी उसका दूध सा बदन नीली साड़ी में और खिल के उभर रहा था जिसे देखकर Hi चरण सिंह का लुंड धोती में hi हल्का सा सर उठाने लगा,





अपने ससुर के ऐसे देखने को चंचल ने भी महसूस किआ पर वो कुछ बोली नहीं खैर टैक्सी वाला बहार hi खड़ा था.

थोड़ी देर बाद चरण सिंह और चंचल बस स्टैंड पर थे चरण सिंह ने वहां पर एक बस कंपनी वाले को टिकट दिखाया तो वो उन्हें उनके लाउन्ज में ले गया और बोलै सर जी आप 15 मीन्स यही आराम करो आपकी बस 15 मीन्स बाद लगेगी तो आप को बुला लेंगे साथ hi अनाउंसमेंट भी होगी.

खैर चरण सिंह तो अगले 15 मीन्स बस यही सोचते रहे की आगे क्या क्या हो सकता है क्या सच में वो जो चाहते हैं वो हो सकता है. खैर तभी अनाउंसमेंट से उनका ध्यान भांग हुआ और दोनों फिर बस तक पहुंचे वहां बस के बहार टिकट दिखाई तो कंडक्टर ने एक लड़के को बोलै की ऐ साब और मेम साब को ु5 और 6 में बिठा कर आ.

इसके बाद लड़के के पीछे दोनों अंदर घुसे जहाँ अंदर जाकर लड़का थोड़ा आगे जाकर रुका और फिर साइड के एक केबिन का दरवाज़ा खोला और दिखा कर बोलै ये रही आपकी सीट बाबूजी.

चरण सिंह- और दूसरी?

Ladka-babuji दो hi हैं ध्यान से देखो.

चरण सिंह ने अंदर जहां कर देखा तो एक केबिन था जिसमे दो तकिये लगे थे नीचे कुछ बिछा हुआ था, जिस्व देख चरण सिंह कुछ समझ नहीं पाए.

चरण सिंह- अरे बीटा हमने अलग अलग सीट बुक की थी एक नेरी और एक इस बिटिया की.

लड़का- बाबूजी वो मुझे नहीं पता मुझे तो जो बोलै मैं वो सीट दिखा रहा हूँ कोई परेशानी है तो कंडक्टर से बात करलो.

चरण सिंह उसकी बात सुनकर चंचल को देखकर बोलते हैं जो खुद सरे मामले को समझने की कोशिश कर रही थी.

चरण सिंह- बीटा मैं कंडक्टर से बात करके आता हूँ.

इस पर चंचल सर हिलती है, चरण सिंह चले जाते हैं तो चंचल केबिन के अंदर झांक कर देखती है तो उसे पूरा मामला समझ आ जाता है की उसके और ससुरजी के लिए ये hi सीट बुक हुई है एक hi केबिन वाली वो सोचने लगती है की ये उसके साथ हो क्या रहा है पहले ससुरजी का उसके साथ वो सब होना फिर पेट पर झड़ना अब अकेले गाओं जाना और फिर अब ये एक hi केबिन, कहीं रिमझिम की बात सच तो नहीं ये सोचकर hi उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी, और ये सब जो हो रहा है समझ नहीं आता हालात hi ये सब करवाना चाहते हैं या कोई और. वो ये सब सोच रही थी तभी पीछे से चरण सिंह भन्नाते हुए आये.

चरण सिंह- एक काम ठीक से नहीं करते सेल सब मुफ्त खोर हैं.

चंचल- क्या हुआ बाबूजी?

चरण सिंह- अरे हुआ क्या नालायक ने एक hi केबिन की टिकट बुक करवाई अब इनके पास और कोई सीट खली नहीं है बोल रहे हैं अगली बस में जाना या इन्ही सीट पर जाना पड़ेगा.

चंचल ने कुछ सोचा और फिर मन में कहा अब जो हो रहा है होने देती हूँ वैसे भी अगली बस का इंतज़ार करना बेवकूफी होगी इसलिए बोली- कोई बात नहीं बाबूजी अब जो गलती हो गई सो हो गयी चलो अब इसमें hi चलते हैं.

जवाब सुनकर चरण सिंह खुश हो गए की एक छोटे से केबिन में बहु और वो साथ होंगे पर फिर भी. बनते हुए बोले- अरे बहु कुछ घंटो की बात है तू अंदर आराम करना मैं बहार यहीं रह लूंगा.

चंचल- नहीं बाबूजी ऐसे कैसे हम आराम करेंगे और तुम यहाँ बहार खड़े रहोगे, और तुमने hi कहा बाबूजी की कुछ देर की बात है.

चरण सिंह- तुझे परेशानी तो नहीं होगी.

चंचल- नहीं बाबूजी वैसर भी दो लोगो की जगह है hi तो आ जाओ आराम से चले जायेंगे.

बस ये सुनके hi चरण सिंह मन hi मन ख़ुशी से झूम उठे बस चेहरे पर दिखाया नहीं.

वहीं ये कहकर चंचल आगे को झुककर केबिन के अंदर घुसी तो चरण सिंह के सामने बहु की बड़ी सी गांड साड़ी में कासी सामने आ गयी जिसे देख कर hi चरण सिंह का ईमान डोलने लगा, खैर चंचल अंदर होकर एक तरफ तकिये को खड़ा कर तक लगा कर आधी बेथ सी गयी इसके बाद चरण सिंह भी अंदर आ कर उसी तरह बैठ गए दोनों में से hi कुछ देर कोई कुछ नहीं बोलै, इतने में hi बस चलने को हुई तो वही लड़का बापिस आया और दो पानी की बोतल पकड़ा गया साथ hi जाते हुए केबिन का दरवाज़ा भी खिसका कर बंद करता हुआ चला गया..

दरवाज़ा बंद होते hi चंचल का दिल तेज़ी से धड़कने लगा, उसे न जाने क्यों अजीब सा एहसास होने लगा बार बार उसके मन में रिमझिम के शब्द गूंजने लगे साथ hi वो मंज़र भी याद करने लगी जब ससुरजी ने उसके पेट पर अपना रास छोड़ा था.

वही हाल चरण सिंह का था उन्हें तो बिन मांगे सब मिल रहा था पर मन घबरा रहा था की कहीं कुछ गलत न हो जाये और बहु नाराज़ हो गयी तो किसी को बता दिया तो, बहुत बदनामी होगी पूरा परिवार बिखर जायेगा ये सब सोचकर उनका मन रुक जाता पर एक नज़र बहु के गदराये कैसे हुए बदन पर डालते hi सब कुछ भूल जाते..

चरण सिंह- अरे बहु आराम कर ले तू अब लम्बा सफर है.

चंचल- हाँ बाबूजी तुम भी लेट जाओ नहीं तो ऐसे तो तुम्हारी गर्दन पीरा जाएगी.

चरण सिंह- हाँ कह तो तू सही रही है.

इसके बाद दोनों hi आगे खिसक कर लेट गए, चंचल का दिमाग तो ट्रैन से भी तेज़ भाग रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे कभी सोचती कहाँ फंस गयी तो कभी रिमझिम की बातों को सोचने लगती की क्या सच में ऐसा हो सकता है. काफी सोचने के बाद उसे कुछ समझ नहीं आया तो उसने आँखें बंद की और सोने की कोशिश करने लगी..

कुछ देर चरण सिंह भी मन hi मन सोच में डूबे हुए थे एक मन उनसे कहता ये सब गलत है और दूजा मन बहु के करीब जाने को उकसाता, मन के द्वन्द के बीच hi चरण सिंह ने बहु के चेहरे की और नज़र डाली तो पाया बहु की आँखें बंद है, बस इस मौके का फायदा पाकर वो बहु के पूरे बदन को ऊपर ऐ नीचे देखने लगे,

गोरी मुलायम कमर, ब्लाउज में कासी हुई बड़ी बड़ी छुछियां रसीले होंठ सुन्दर चेहरा, ये देखते हुए चरण सिंह का लुंड खड़ा होने लगा.

चंचल सोने की कोशिश कर रही थी पर चलती बस में इन हालत में नींद आये तो कैसे इसीलिए आँखें बंद किये लेती हुई थी..

चरण सिंह कोई न कोई तरीका ढूंढ रहे थे की कैसे भी कुछ हो फिर न जाने ऐसा मौका कभी मिले न मिले… और अंत में कुछ नहीं सूझा तो चरण सिंह ने एक रिस्क लेने की सोची उन्होंने देखा चंचल की आँखें अब भी बंद हैं तो उन्होंने अपनी भी आँखें बंद की और कुछ देर यूँ hi सोने का नाटक करने के बाद करवट लेकर चंचल की और पालते और पलट कर अपना हाथ बहु के पेट पर रख दिया…

अपने पेट पर हाथ का स्पर्श होते hi चंचल की आँख तुरंत खुली उसने देखा की ससुर जी का हाथ पेट पर है और उनकी आँखें बंद हैं ये सब देख न जाने क्यों चंचल के होंठों पर मुस्कराहट आ गयी उसने बापिस आँखें बंद कर्ली और वैसे hi लेती रही चरण सिंह ने भी हाथ को वैसे hi छोड़ दिया. क्यूंकि हाथ साड़ी के ऊपर था तो साड़ी के ऊपर से भी चरण सिंह अपनी बहु के कोमल पेट की त्वचा को महसूस कर प् रहे थे. कुछ देर तक बहु की कोई प्रतिक्रिया न पाकर चरण सिंह की हिम्मत बड़ी वहीं चंचल दिल थामे अपने ससुर की हरकतें देख रही थी की उसके ससुर जी उसके साथ क्या क्या करने वाले हैं.

चरण सिंह ने अपना हाथ धीरे से चंचल के पेट पर सहलाना शुरू किआ, और बहुत हलके से उसके पेट को सहलाने लगे, चंचल को भी महसूस हुआ की बाबूजी उसके पेट को सहला रहे हैं, फिर कुछ पल बाद उनका हाथ बापिस पेट पैट ठहर गया पर इस बार जब रुका तो चंचल को झटका लगा क्यूंकि इस बार बाबूजी के हाथ और उसके पेट के बीच साड़ी नहीं थी, सहलाते हुए चरण सिंह ने बहु की साड़ी के पल्लू को एक तरफ कर दिया था और अब बहु के नंगे पेट को अपनर हाथ पर महसूस कर रहे थे.

चंचल को भी अपने पेट पर बाबूजी के हाथ का एहसास एक अजीब सी सिरहन दे रहा था उसे ऐसा लग रहा था जिस जगह पेट पर उनका हाथ है वो जगह गरम हो रही है और उसमे से गर्मी निकल कर पूरे बदन में फ़ैल रही है. चंचल को अपनी छूट में एक अलग hi नमी का एहसास हो रहा था पर चंचल खुद को काबू में किये यूँ hi सोने का नाटक करती रही,

वहीं हर गुज़रते पल के साथ चरण सिंह की हिम्मत और बेसब्री बढाती जा रही थी उनकी हालत ऐसी थी की हाथ में बहु का रसीले गुलाब जामुन जैसा बदन था जिसे वो चख नहीं प् रहे थे..

कुछ समय यूँ hi रहने के बाद चरण सिंह का हाथ फिर से चंचल को अपने पेट पर फिसलता हुआ महसूस हुआ इस बार नंगी त्वचा पर उनके हाथ की फिसलन महसूस कर चंचल को और अजीब सा महसूस हो रहा था.

उतना hi मज़ा चरण सिंह को आ रहा था बहु के कोमल पेट को अपनी उँगलियों से स्पर्श करने में उनका लुंड अब तक बिलकुल खड़ा हो चूका था. बहु की नरम त्वचा बिलकुल माखन जैसी लग रही थी. पर कहते हैं न इंसान की भूख बढाती hi रहती है. वही हाल चरण सिंह का था बहु की और से कोई प्रतिक्रिया न पाकर चरण सिंह का जोश बढ़ता जा रहा था, खैर.

चंचल को एहसास हुआ की उसकी साड़ी का पल्लू अचानक से नीचे की और खिसक रहा है और कुछ पल बाद उसका पल्लू उसके पेट और सीने से हटकर नीचे हो गया था. चंचल समझ गयी उसके ससुर जी की हिम्मत बढाती जा रही है अगर रोका नहीं गया तो कहीं कुछ गलत न हो जाये.

उसे समझ नहीं आ रहा था की क्या करे वो बाबूजी को रोके या ऐसे hi सोने का नाटक करे. क्या वो रोककर बाबूजी का सामना कर पायेगी. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी जिसका पूरा फायदा चरण सिंह उठा रहे थे, वो इतने जोश में आ गए थे की भूल गए की बहु कभी भी उठ सकती है. पल्लू हटने के बाद बहु का नंगा पेट गहरी नाभि ब्लाउज में कासी हुई ऊपर निचे होती बड़ी छुछियां, ये सब देखकर उनका मन और लुंड डोलने लगे. और इसी जोश ने आकर अब वो चंचल के पेट को सहलाने की जगह उसकी कोमल त्वचा को मसलने लगे अपनीईई उंगलियों से उसके नरम पेट को आते की तरह गूंथने लगे..

बाबूजी की इस हरकत से चंचल का हाल बुरा होता जा रहा था उसका पूरा बदन सिहर रहा था छूट गीली हो रही थी और उसे समाज नहीं आ रहा था क्या करे बाबूजी को रोके या नहीं, अगर रोकूं तो क्या कहूं. कैसे रोकूंगी, उसके बाद क्या होगा.?

वो ये सब सोच रही थी उसी बीच बाबूजी ने उसके कमर के हिस्से को थोड़ा ज़्यादा मसल दिया जिससे वो हिल गयी और चरण सिंह की पल भर के लिए गांड फैट गयी उन्हें लगा चाचा उठ गयी है पर चंचल ने अगले hi पल नाटक को बापिस सँभालते हुए दूसरी तरफ करवट लेकर लेट गयी तो जाकर चरण सिंह की जान में जान आई…

पर इस सब के बाद भी चरण सिंह का हाथ अब भी बहु की कमर पर hi था.

चंचल की तो साँसे तेज़ हो गयी थी उसने किसी तरह खुद को अपने काबू में रखा हुआ था..

चरण सिंह ने भी थोड़ी सावधानी बरती और कुछ देर यूँ hi लेते रहे और बहु की तरफ से किसी प्रतिक्रिया का इंतज़ार करते रहे. पर साथ hi सामने देख रहे थे जो उन्हें और बेसबर कर रहा था क्यूंकि सामने बहु की गोरी चिकनी पीठ थी जो की ब्लाउज में आधे से ज़्यादा दिख रही थी साथ hi नीचे कमर का हिस्सा जिसे देखकर चरण सिंह का मन दोल रहा था और वो ये भी सोच रहे थे की बहु कितनी खूबसूरत है.

चरण सिंह का मन फिर से डोलने लगा उन्हें लगा मसलने के बाद भी बहु ने कुछ बोलै नहीं बस पलट कर लेती है साथ hi ऐसा भी नहीं होगा की वो इतनी गहरी नींद में हो, हो सकता है बहु भी मज़ा ले रही हो. ये पता करने का तो यही तरीका है की आगे कोशिश करते रहनी है.

ये सब सोच कर और एक नए जोश के साथ चरण सिंह थोड़ा आगे खिसक कर चंचल के और करीब हो गए और फिर से उनका हाथ चंचल के पेट पर चलने लगा. चंचल को फिर से एहसास हुआ की बाबूजी की हरकतें फिर से शुरू हो चुकी हैं पर न जाने क्यों वो उन्हें रोक नहीं प् रही है. इसी बीच चंचल को कपनी पीठ पर बाबूजी का दूसरा हाथ महसूस हुआ जो की ब्लाउज से बहार उसके नंगे बदन को सहलाने लगा.

चंचल और बहकने लगी एक हाथ पेट पर पहले hi था और दूसरा अब पीठ पर, वहीं चरण सिंह का तो जोश चरम पर था, वो पूरी तरह से इस मौके का फायदा उठाना छह रहे थे,

चंचल को भी अपनर बदन पर बाबूजी के हाथ न चाहते हुए भी अचे लग रहे थे तभी बाबूजी ने पीठ पर चलता हुआ हाथ हटा लिया तो चंचल को ाचा नहीं लगा उसे उनके हाथ का स्पर्श ाचा लग रहा था उसने सोचा अब ाचा लगा तो बाबूजी ने हटा लिया की तभी उसको जो महसूस हुआ उसके बाद उसने खुद को बड़ी मुश्किल से प्रतिक्रिया देने से रोका, क्यूंकि उसे पीठ पर एक गरम सा एहसास हुआ जिसे वो जल्दी hi समझ गयी की क्या है.

चरण सिंह पीछे से बहु की नंगी पीठ को चूमने लगे थे, जहाँ जहाँ बदन नंगा दीखता वो वहां होंठों को रख कर चूम लेते, बाबूजी की इस हरकत से तो चंचल बिलकुल पागल सी हो गयी अब बाबूजी को रोकने का विचार पूरी तरह से उसके मन से गायब हो गया वो बस इस पल को और ससुर की हरकतों को महसूस कर गरम होने लगी.

चरण सिंह एक और कदम आगे बढे और अपनी जीभ निकल कर बहु के बदन को चाट भी ले रहे थे, पीठ को चाटने चूमने के बाद चरण सिंह थोड़ा और खिसके और बहु से पीछे से बिलकुल चिपक गए, चंचल को भी अपनी पीठ पर बाबूजी के चिपकने का एहसास हुआ पर उससे भी ज़्यादा एहसास उसे अपनर चूतड़ पर बाबूजी के खड़े चुभते लुंड का हुआ जिस्व महसूस कर उसकी छूट पनियाने लगी.

वहीं चरण सिंह पीछे से चिपक कर बहु के बदन के नशे में बिलकुल धुत्त होकर आगे को हाथ लेजाकर उसके पेट को मसलते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगी जिससे चंचल की हालत ख़राब होने लगी उसका बदन मचलने लगा. चरम सिंह साथ hi अपने कड़क लुंड को बहु के चूतड़ों पर भी घिस रहे थे तो इस तिहरे हमले का प्रहार चंचल से सहना मुश्किल होता जा रहा था… उससे सोने का नाटक करना मुश्किल होता जा रहा था,

चरण सिंह पेट मसलते हुए थोड़ा और आगे बढे और अब ऐसा लग रहा था की उनके हाथ अपने आप hi चंचल के बदन के उतर चढ़ावों को नाप रहे थे. चरण सिंह का चंचल की जीभ पर चूमे जाना चंचल को बहका रहा था वो मुठी भींचे किसी तरह सोने का नाटक कर रही थी…

वहीं नीचे चरण सिंह का लुंड चंचल के नितम्बों में प्रहार पर प्रहार कर उसके प्रतिरोध की दीवार को कमज़ोर कर रहा था. चरण सिंह ने चंचल की इस ख़ामोशी का और फायदा उठाने का सोचा और उनके हाथ पेट से सरकते हुए ऊपर की और सरकने लगे और ब्लाउज के ऊपर पहुँच चंचल की बड़ी बड़ी छूछीयो को ब्लाउज के ऊपर से hi हलके हलके दबाने लगे बस फिर क्या था चंचल तो मनो हवा में उड़ने लगी. चरण सिंह भी मनो बहु की चूचियां हाथ में भर बिलकुल गंगना गए आह क्या नरम एहसास था ब्लाउज के ऊपर से hi सही पर ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था.

चंचल को अपने पिछवाड़े में ससुरजी का लुंड और ताकत से घुसता हुआ महसूस हुआ लगा कपडा फाड् कर उसकी गांड में घुस जायेगा.

चंचल तो बेचारी अब चरण सिंह के हाथों की कठपुतली बन चुकी थी जिसवो मनचाहे ढंग से नचा रहे थे पर मज़े की बात थी की चंचल को नाचने में बहुत मज़ा भी आ रहा था…

कुछ देर तक ब्लाउज के ऊपर से छुछियां दबाने के बाद चरण सिंह ने लेते लेते hi ब्लाउज के हुक टटोलने शुरू किये और जल्दी hi वो हुक तक पहुंच गए जिसके बाद उन्होंने अगले पड़ाव की और कदम बढ़ाया और हुक खोलने का प्रयत्न करने लगे, चंचल बेचारी तो ससुर जी की हरकतों से इस कदर उत्तेजित थी की रोकने का ख्याल तक उसके दिमाग में नहीं था.. चरण सिंह जल्दी hi पहला हुक खोलने में कामयाब हो गए और फिर दूसरा फिर तीसरा और कुछ hi पालो में बहु का ब्लाउज खुल चूका था और उसके दोनों पैट अलग अलग थे..

चरण सिंह ने जल्दी से ब्रा के ऊपर से hi चूचियों को एक बार फिर से जकड लिए और उनको मथने लगे, चंचल के मुँह से न चाहकर भी आह आह निकलने लगी. चरण सिंह तो पूरे जोश में थे उन्हें अब यकीन हो गया की अब बहु उनके कब्ज़े में है.. चंचल का तो ब्लाउज खुलने पर और बुआ हाल हो गया वो सोचने लगी की इतने लोगो के बीच वो अपने ससुर से इस तरह बस में छुछियां दबवा रही है. रिमझिम का कहना सच होता जा रहा है.

चरण सिंह का पूरा ध्यान बहु की चूचियों पर hi था और अब वो पूरी तरह से बहु की चूचियों के मज़े लेना चाहते थे इसलिए उन्होने ब्रा के कप को पकड़ा और नीचे खिसकाया जिससे बहु की एक छुच्छी बहार आ गयी क्यूंकि वो ये सब पीछे लेट कर रहे थे तो उन्हें दिखा तो नहीं तो अंदाज़े से hi कर रहे थे. इसके बाद दुसरे कप को भी नीचे कर दूसरी क्हुची को भी आज़ाद कर लिया और जैसे hi नंगी चूचियों को हाथ में भरा hi था किसी ने केबिन के दरवाजे पर ठोका और बोलै- साब सब बहार आ जाओ यहाँ बस 15 मीन्स रुकेगी जिसका बाथरूम वगेरा जाना हो या कुछ खाना हो ले आये.

चरण सिंह तो अचानक से बिलकुल दर गए वही हाल चंचल का भी था खैर चरण सिंह ने तुरंत अपने हाथ पीछे खींच लिए और अपने कपडे सही करने लगे साथ hi बहु की चूचियों पर बापिस उसका पल्लू दाल दिया. चंचल अब भी आँखें बंद किये लेती थी.

इसके बाद चरण सिंह ने चंचल को हिलाया तो चंचल ने ऐसे नाटक किआ जैसे नींद से जगी हो तो चरण सिंह बोले- बहु बस रुकी है मैं कुछ खाने को लेकर आता हूँ

चंचल- जी बाबूजी.

चंचल ने वैसे लेते लेते hi जवाब दिया.

चरण सिंह देखो तो कितनी बड़ी ड्रामेबाज़ है बहु भी जरा सा हिलने से उठ गयी और अभी कास के चूचियां मसल रहा था तो सोने का नाटक कर रही थी.

इसके बाद चरण सिंह ने बड़ी सावधानी से उतना hi दरवाज़े खोला जितनी ज़रुरत थी ताकि कोई अंदर न देख सके और फिर निकल कर दरवाज़ा बंद कर चले गए, ससुर के जाने के बाद चंचल उठी जल्दी से छूछीयो को ब्रा में दाल के ब्लाउज बंद किया और साड़ी ठीक की और फिर सर पर हाथ रख कर सोचने लगी की ये हुआ क्या, और क्या होता जा रहा है मैं कैसे अपने hi ससुर के साथ ये सब कर रही हूँ ये सब कितना गलत है पर इसमें मुझे इतना मज़ा क्यों आ रहा है. क्या कसरन मैं, क्या रिमझिम ने जैसा कहा वो सच है.

यही सब सोच रही थी की केबिन का दरवाज़ा खुला और चरण सिंह ने अंदर कोल्डड्रिंक की बोतल राखी तो चंचल ने पकड़ कर अंदर की ताकि बाबूजी अंदर आ सकें और चरण सिंह ने अंदर आकर अपनी कलाई पर तंगी पन्नी को चंचल को दिया जिसमे समोसे थे जिसे चंचल ने खोला और दोनों ने नाश्ता किआ जिस दौरान चरण सिंह ने मज़े लेने के लिए पूछा- बहु कोई परेशानी तो नहीं हो रही तुझे सफर में.

जिस पर चंचल ने समोसा कहते हुए बिना किसी भाव के कहा- नहीं बाबूजी मैं तो सो रही थी आराम से.

जिसे सुनकर चरण सिंह खुश हो गए की बहु भी लगता है पूरी तरह राज़ी है खैर खाने के कुछ देर बाद बस चल पड़ी…

बस चलते हुए करीब आधा घंटा हो चूका था और चरण सिंह के केबिन में बड़ा hi मस्त माहौल था, चंचल एक बार फिर सीढ़ी लेती हुई सोने का नाटक कर रही थी वहीं उसका पल्लू नीचे पड़ा हुआ था, ब्लाउज खुला हुआ था दोनों पैट इधर उधर थे ब्रा के कप नीचे थे और दोनों बड़ी छुछियां बहार थी जिनमे से एक को चरण सिंह एक हाथ से धीरे धीरे दबा रहे थे तो दूसरी पर उनका मुँह लगा हुआ था, चरण सिंह बहु की एक छुच्छी को बिलकुल बच्चे की तरह चूस कर उसका स्वाद चख रहे थे, चंचल का हाल तो बहुत ख़राब था पर वो किसी तरह खुद को संभाले हुए लेट कर अपने ससुरजी से अपनी चूचियां चुसवा रही थी,

आज पहली बार उसके पति के अलावा कोई मर्द उसके बदन से ऐसे खेल रहा था वो भी उसके खुद के ससुर ये सोच कर hi उसकी छूट पनिया रही थी की वो अपने पति को धोखा भी दे रही है तो अपने ससुर के साथ पर ये सब इतना गलत होते हुए भी इतना ाचा क्यों लग रहा है क्यों मैं बाबूजी को रोक नहीं पा रही हूँ.

वहीं बहु की मनोदशा से अनजान चरण सिंह तो उसकी छुछियां चूस चूस कर लाल कर रहे थे दोनों चूचियों को बदल बदल कर चूस रहे थे पर वहीं उन्हें उनका खड़ा लुंड अब तकलीफ दे रहा था, वो इतने उत्तेजित हो गए थे की उनका लुंड अब फटने को हो रहा था पर चरण सिंह बहु के बदन से हटने का नाम नहीं ले रहे थे पर जब दर्द असहनीय हो गया तो चरण सिंह ने जल्दी से अपना पजामा नीचे खिसकाया और साथ hi कच्चा भी और लुंड बहार निकल लिया जो की अपनी बहु की जवानी देख अकड़ा हुआ था, चरण सिंह थोड़ा आगे खिसक कर घुटनो के बल बहु के बगल में बैठ गए, हालाँकि केबिन की ऊँचाई काम होने से उन्हें थोड़ा झुकना पद रहा था पर अभी लुंड की तकलीफ ज़्यादा ज़रूरी थी, एक हाथ से बहु की चुकी दबाते हुए दुसरे हाथ से लुंड को मुठियाने लगे.

फिर अगले hi पल दिमाग में कुछ और आया तो हलके से चंचल का हाथ पकड़ा,

जिसका एहसास होते hi चंचल को लगा की क्या हुआ बाबूजी को अब तक चूचियां ोी रहे थे अचानक हाथ क्यों पकड़ रहे हैं, तभी उसके हाथ में एक गरम और कड़क एहसास हुआ जिसके एहसास से hi चंचल गंगना गयी उसे समझ गया उसकी मुठी में बाबूजी का लुंड था, चंचल लुंड की गर्मी और उसके कड़क पैन को महसूस कर पिघलने लगी पल भर को मन हुआ की आँखें खोल कर इस लुंड को देखे कैसा है बाबूजी का लुंड, छूने से तो कितना कड़क लग रहा है, छूने में तो बिलकुल चेतन के लुंड जैसा है, लगता है बाप बीटा एक जैसे hi हैं.

वहीं चरण सिंह ने बहु की मुठी में अपना लुंड पकड़ा कर उसकी मुठी को अपने हाथ से हिलने लगे, बहु के नरम हाथ से मुठियाने में चरण सिंह को बड़ा मज़ा आ रहा था पर हर पल के साथ उनका लालच और उत्तेजना बढाती जा रही थी और क्यूंकि हाथ पकड़ कर मुठियाना थोड़ा मुश्किल भी हो रहा था तो चरण सिंह ने बहु के हाथ से लुंड निकल लिए जिसका दुःख मन hi मन चंचल को हुआ पर अगले hi पल उसे एक गरम एहसास अपने होंठों पर हुआ और वो समझ गयी की बाबूजी अपना लुंड मेरे होंठो से चुवा रहे हैं, शालू का मन किआ वो अभी मुँह खोले और लुंड को अंदर भर के जीभरके चूसे पर किसी तरह से उसने सोने का नाटक जारी रखा वहीं चरण सिंह लुंड के टोपे को बहु के होंठों और चेहरे पर लगातार घिस रहे थे बहु के रसीले होंठों पर घिसने से एक अलग hi सुख मिल रहा था ऐसा लग रहा था उनका लुंड फैट जायेगा इस सुख से और कुछ देर बाद यह एहसास और बढ़ गया उनके लुंड का टोपा फूलने लगा और अगले hi पल चरण सिंह को लगा की जैसे उनके बदन की साडी ताकत उनके लुंड मैक इकठा हो गयी है और अगले hi पल वो ताकत लुंड के रस्ते निकलती हुई महसूस हुई,

चंचल को अपने होंठों और चेहरे पर अचानक से एक गरम और चिपचिपा सा एहसास हुआ और फिर और वो समझ गयी उसके बाबूजी के लुंड ने अपना पानी उसके चेहरे पर छोड़ दिया है चरण सिंह मुठी कैसे हुए आँखें बंद किये झड़ते रहे और चांडाल का चेहरा अपने ससुरजी के रास से भीगता रहा जब झड़ने के बाद चरण सिंह शांत हुए तो उन्हें लग रहा था जैसे उनकी साडी शक्ति hi निकल गयी है शायद hi इससे पहले वो कभी इतना जबरदस्त स्खलित हुए होंगे शायद ये बहु के साथ की वजह से था, ठक्कर बगल में लेटते हुए उन्होंने बहु को देखा तो पाया बेचारी का पूरा चेहरा उनके रास से सना हुआ है आँख गाल मुँह सब पर रास hi रास, लेटने के बाद चरण सिंह ने आँखें बंद कर ली.. कुछ देर केबिन में सन्नाटा रहा और फिर थोड़ी देर बाद चंचल हिली, अपनी आँखों को पोंछते हुए हलके से खोल कर देखा तो बाबूजी वागल में आँखें बंद किये लेते हुए थे,

चंचल को एक बहुत अजीब सा एहसास हो रहा था , इससे पहले उसके साथ कभी कुछ ऐसा नहीं हुआ था, चेहरे पर उसके ससुर का रास लगा हुआ था, वो भी बस में इतने लोगो के बीच एक तरफ तो उसके मन में ग्लानि का भाव आ रहा था वहीं दूसरी और उसकी छूट लगातार पानी बहा रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था किसकी सुने बदन की या मन की. खैर उसने अपने पर्स से रुमाल निकला और अपने चेहरे पर लगे रास को पोंछने लगी और फिर कुछ पानी और रुमाल की मदद से चेहरे को साफ़ कर लिया बगल में पड़े ससुरजी को देखा तो सो रहे थे जैसे न जाने कितना काम करके थक गए हो.

चंचल भी सब सोचते हुए अपने कपड़ ठीक करके लेट गयी तो उसकी आँख भी लग गयी और तब खुली जब कोई केबिन के दरवाज़े को पीट के बोल रहा था की उनका स्टॉप आ गया है.

जल्दी जल्दी दोनों ससुर और बहु उतरे तब तक कंडक्टर ने सामान भी उतर दिया था इसके बाद रिक्शा करके दोनों गाओं के लिए निकल गए, गाओं के नज़दीक hi चंचल ने सर पर पल्लू कर लिए था क्यूंकि गाओं में इन सब पर बड़ा गौर किआ जाता था, गाओं के घर पहुंचे तो बहार hi एक मज़दूर और उसकी बीवी उनका इंतज़ार कर रहे थे. जिन्होंने चरण सिंह और चंचल को देखते hi प्रणाम किआ.

चरण सिंह- और पुत्तन कैसे हो .

पुत्तन – आशीर्वाद है चाचाजी.

इसके बाद चरण सिंह ने पुत्तन के बगल में एक भरे हुए बदन वाली सांवली सी औरत पर नज़र डाली.

चरण सिंह- ये कौन है?

पुत्तन – का चाचाजी तुम्हारी बहु है भूल गए का तुम्ही तो ब्याह करवाए थे,

इसके बाद पुत्तन की बहु आगे आई और चरण सिंह के पाऊँ छुए तो चरण सिंह ने भी उसकी पीठ पर हाथ फिरकर आशीर्वाद दिया, इतने में पुत्तन ने सारा सामान रिक्शे से उतर लिया था, और फिर चरों घर के अंदर आ गए घर ज़्यादा गन्दा तो नहीं लग रहा था, फिर भी काफी काम की ज़रुरत थी.

पुत्तन ने खत डालकर चरण सिंह को बिठाया वहीं चंचल घूम फिर कर घर की हालत देखने लगी साथ hi पुत्तन की बहु ब्बि थी.

पुत्तन की बीवी – बढ़िया हुआ जीजी तुम आ गयी अब घर में रौनक आ जाएगी.

चंचल- नहीं री रौनक तो तब आएगी जब पूरा परिवार आ जायेगा कल

पुत्तन की बीवी – ाचा सब लोग आ रहे हैं का ? अब यहीं रहोगे का?

चंचल- अरे नहीं बस कुवह दिन छुट्टियां बितानी थी तो सोचा अपने गाओं से बढ़िया कोई जगह कहाँ.

पक्ब- ये तो सही कहा जीजी सबसे लल्लनटॉप है अपना गाओं,

चंचल- पर सबके आने से पहले बहुत काम है पूरा घर साफ़ करना होगा ठीक से लगाना होगा.

पक्ब- उसकी फ़िक़र मत करो जीजी सब हो जायेगा बस तुम बताती रहना मैं करा दूंगी सब.

पुत्तन – अरे सुन ज़रा चाय बना ला चाचाजी और बड़ी भाभी के किये.

पक्ब- हाँ लाइ. अभी आई जीजी.

इसके बाद चाय पानी हुआ, और आगे क्या करना है तय हुआ, पुत्तन और चरण सिंह को चंचल ने सरे सामान की लिस्ट बतादि जो चाहिए था अगले कुछ दिनों के लिए, वहीं पुत्तन की बीवी कुछ hi देर में 5 औरतों को ले आई घर की सफाई के लिए, चरण सिंह सामान लेने गए तो चंचल को पुत्तन की बीवी ने कहा की वो बस बैठ कर बताती रहे क्या करना है हम सब कर देगी, हुआ भी ऐसा hi चंचल सबको निर्देश देती रही और काम होता रहा और जब तक चरण सिंह लौटे तब तक घर बिलकुल साफ़ हो चूका था.

चरण सिंह- अरे वाह बहु घर तो बिलकुल चमका दिया तूने.

चंचल- माइनर नहीं बाबूजी ये तो गैंडा का कमाल है ये औरतों को बुला ले सब इन सब ने किआ है मुझे तो इसने हाथ भी नहीं लगाने दिया.

इसके बाद चरण सिंह ने खुश होकर अपनी जेब से 1100 रस निकले और पुत्तन की बीवी गैंडा को दिए, साथ hi 2 हज़ार और उन औरतों में बाँटने के लिए. खैर इसके बाद गैंडा और चंचल ने मिलकर सारा सामान लगाया जो चरण सिंह लाये थे इसके बाद गैंडा अपने घर चली गयी तो चंचल ने भी नाहा धो लिए और हलकी घर की सारी पहन ली.

वहीं चरण सिंह पुत्तन से बहार कुछ बात कर रहे थे.

चरण सिंह- अरे वो अभी तक नहीं आया बिना बिजली के कैसे काम चलेगा.

पुत्तन – यहाँ की यही दिक्कत है चाचाजी 15 दिन रात में बिजली आती है और 15 दिन दिन mein.abhi दिन का महीना चल रहा है.

चरण सिंह- अरे तभी तो बिना इन्वर्टर के काम नहीं चलेगा.

पुत्तन – बात कर आया हूँ आज कारीगर नहीं था न उसके पास आज की रात रुकना है कल भोर में hi पकड़ लाऊंगा उसे.

चरण सिंह- पर गर्मी में रात में कैसे सोयेंगे बहु भी तो है.

पुत्तन – अरे चाचाजी गाओं है ये छत पर सोना गर्मी कहाँ लगती है.

चरण सिंह- चल ठीक है देखते हैं.

इसके बाद चरण सिंह कुछ सोचते हुए अंदर आ गए. थोड़ी hi देर में गैंडा खाना लेकर आ गयी दोनों के लिए जिसके खाने के बाद चंचल बोली गैंडा तू भी यहीं सजा न आज.

गैंडा- नहीं जीजी वो अम्मा बीमार है न घर पर और बच्चे भी हैं तो देखभाल के लिए रुकना होता है. ये भी खेत पर सोते हैं फसल के लिए जानवरो का खतरा रहता है.

चंचल- ठीक है फिर कोई बात नहीं.

गैंडा- फिर भी कोई ज़रुरत हो तो फ़ोन कराइ देना चाचाजी से.

चंचल- नहीं अब कुछ नहीं चाहिए तू आराम से जा.

शाम हो चली थी अब घर में सिर्फ चंचल और उसके ससुर जी थे और चंचल के मन में फिर से धक् धक् होने लगी थी, ये रात उसे न जाने क्यों लगता था बहुत भरी होने वाली थी, इतने बड़े घर में वो और सिर्फ उसके ससुर जी, और जो कुछ बस में हुआ उसके बाद तो उसे कुछ समाजग नहीं आ रहा था क्या होगा. ये सब सोच रही थी की उसका फ़ोन बजा देखा तो रिमझिम का फ़ोन था जिसे देख उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी और वो फ़ोन उठा के बात करने लगी..

वहीं चरण सिंह की तो ख़ुशी का ठिकाना नहीं था आज पूरे घर में बस वो और चंचल बहु थे और उन्हें पूरा यकीन था की जो कुछ बस में हुआ उसके बाद तो बहु उन्हें किसी भी चीज़ के लिए नाजी रोकेगी. इसीलिए उन्होंने घर का दरवाज़ा बंद किआ, साथ hi अपनी जेब से एक गोली निकली जो की वियाग्रा की थी ये उन्होंने सामान लेते हुए पुत्तन से छुपकर बाजार में ले ली थी, जल्दी से गोली खाई, क्यूंकि आज वो बहु को हर तरह से संतुष्ट करना चाहते थे साथ hi उसके बदन का पूरा लुत्फ़ उठाना चाहते थे. आँगन में देखा तो बहु फ़ोन पर बात कर रही थी, तो उन्होंने कमरे से गद्दे छड़दार और तकिया वगेरा उठाया और छत पर ले जाकर दो बिस्तर बिलकुल अगल बगल बिछा दिए.

मन hi मन खुश थे की दो बिस्तर तो बहाना है सोना तो रात भर एक hi बिस्तर पर है. खुले आसमान के नीचे बहु को छोड़ने ने मज़ा आ जायेगा, ऊपर से ये चांदनी रात बहु का बदन कितना मस्त लगेगा इसमें..

ये सब सोचते हुए वो बिस्तर पर लेट गए एक और.

वहीं चंचल ने भी बास्त करते हुए बाबूजी को ऊपर जाते देखा था तो कुछ देर बाद करते हुए वो भी ऊपर आ गयी उसका और रिमझिम का ऐसा hi था वो एक बार बातों में लग जाएं तो उनकी बातें ख़तम नहीं होती थी, चंचल छत पर घुमते हुए बात कर रही थी साथ hi आस पास दूर दूर तक खेत खलियान देख रही थी उसे ये शहर से ाचा लग रहा था. ठंडी ठंडी हवा चल रही थी. खैर थोड़ी देर बाद रिमझिम ने फ़ोन रख दिया तो उसके बाद वो बिस्तर के पास आई.

Chanchal-are बाबूजी तुम क्यों लाये बिस्तर मुझे बोलदेति मैं ले आती.

चरण सिंह- अरे कोई नहीं बहु वैसे भी आज बहुत काम किआ है तूने थोड़ा मैंने कर लिए तो क्या हुआ.

चंचल- चलिए ठीक है मैं पानी ले आती हूँ.

चरण सिंह- बहु तुझे परेशानी तो नहीं होगी आज बिजली नहीं है तो छत पर सोने में.

चंचल – नहीं बाबूजी कैसी परेशानी इतनी ठंडी हवा चल रही है.

चरण सिंह- फिर तो बढ़िया है वैसे कल इन्वर्टर भी लग जायेगा.

चंचल- कोई दिक्कत नहीं है बाबूजी.

इतना कह चंचल नीचे चली गयी और ुवार लेते चरण सिंह फूले नहीं समां रहे थे, की बहु को परेशानी नहीं है वहीं गोली का असर भी हो रहा था और उनका लुंड भी उन्हें अकड़ा हुआ महसूस हो रहा था लुंगी में. .

थोड़ी देर में चंचल ने पानी लेकर रख दिया फिर दुसरे बिस्तर पर लेट गयी.

चरण सिंह भी उसकी तरफ कनखियों से देखते हुए लेते रहे उन्हें समझ नहीं आ रहा था की कैसे शुरू करें, वहीं चंचल के दिल की धड़कन तेज़ थी वो आँखें बंद किये सोच रही थी अगर बाबूजी ने फिर से कुछ किआ तो वो क्या करेगी उसे समझ नहीं आ रहा था. रिमझिम से बात करते हुए कई बार उसने सोचा रिमझिम को सब बतादे जो बस में हुआ पर फिर भी बता नहीं पाई हिम्मत नहीं हुई. और अब जो कुछ होगा उस नहीं पता वो क्या करेगी.

चरण सिंह ने कनखियों से एक बार फिर से चंचल को देखा क्यूंकि चांदनी रात थी तो ाचा खासा उजाला था और क्यूंकि उनका घर दो मंज़िला था छत के चरों और 4-4 फुट की दीवार थी और आस पास कोई दो मंजिला घर भी नहीं था इसलिए किसी के द्वारा देखे जाने का दर भी नहीं था.

चरण सिंह ने देखा चंचल की आँखें बंद हैं तो उन्होंने सोचा- लगता है बहु शर्मा रही है और लगता है बस वाला नाटक hi जारी रखना चाहती है सोने का, वैसे बुराई भी क्या है मुझे छोड़ने को मिल जाये बस अब वो सोने का नाटक करे या जागने का, ये सोचकर चरण सिंह आगे खिसके और खिसक कर चंचल के बिस्तर पर बिलकुल उसके करीब पहुंच गए जिसका एहसास चंचल को भी हुआ और उसका दिल और ज़ोरो से दौड़ने लगा.. पर वो यूँ hi लेती रही.

चरण सिंह कुछ देर यूँ hi पास में लेते रहे, फिर धीरे से उन्होंने अपना हाथ बढ़ाया और चंचल के पेट पर रख दिया, जिसके रखते hi चंचल के बदन में जैसे बिजली सी दौड़ गयी और उसने प्रतिक्रिया में बाबूजी को का हाथ पकड़ कर पेट से हटा दिया, पर ये सब किआ उसने आँखें बंद किये हुए वैसे hi लेटकर.

चंचल की इस प्रतिक्रिया से चरण सिंह बिलकुल हैरान रह गए उन्होंने ऐसी प्रतिक्रिया की तो उम्मीद भी नहीं की थी, वहीं चंचल को खुद को नहीं पता था की उसने ये सब कैसे कर दिया वो बस साँसे थामे लेती थी. हालाँकि उसकी छूट भी पनिया रही थी साथ hi दोपहर में जो हुआ उसके बाद से hi उसकी छूट खुजा रही थी और आज तो यहाँ चेतन भी नहीं था जिससे वो अपनी खुजली मिटा लेती.

चरण सिंह तो बिलकुल hi स्तब्ध थे फिर उन्होंने सोचा की पहली बार है तो बहु झिझक रही है इसलिए कुछ देर इंतज़ार के बाद उन्होंने दोबारा चंचल के पेट पर हाथ रखा और दोबारा चंचल ने पकड़ कर हटा दिया.

इसके बाद तो चरण सिंह की गांड फटने लगी उन्हें लगने लगा की बीटा कुछ ज़्यादा hi सोच लिए यहाँ तो बहु छुने भी नहीं दे रही, अगर ज़्यादा कुछ हुआ तो कही गड़बड़ न हो जाये ये सब सोचकर वो बापिस अपने बिस्तर पर खिसक आये, बुरा तो बहुत लग रहा था की साला क्या सोचा था क्या हुआ, शायद बहु अभी उत्तेजित नहीं है इसीलिए वहीं गोली के असर की वजह से खुद का लुंड पूरे तनाव पर था तो हाथ यूँ hi लेजाकर उसे धोती से निकल कर मुठियाने लगे.

चंचल को भी एहसास हो गया की ससुर जी उससे दूर खिसक गए हैं उसका एक मन राहत महसूस कर रहा था वहीं दूसरा छह रहा था की बाबूजी उसे और छुएं उसके बदन के साथ खेलें.. थोड़ी देर कुछ नहीं हुआ हालाँकि नींद दोनों की hi आँखों से गायब थी, चरण सिंह अपने लुंड को मुठिया तो रहे थे पर वो उतना hi कड़क होता जा रहा था…

वहीं चंचल को पेशाब लगने लगी पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो कैसे उठ कर जाये पर पेशाब भी ज़ोरो की लगी थी, उसने हलके से आँखें खोल कर देखा तो पाया ससुर जी की आँखें बंद हैं पर तभी उसकी नज़र उनके हाथ पर गयी जो उनके लुंड पर चल रहा था.

चंचल ने दोबारा आँखें बंद कर ली और सोचने लगी ये बाबूजी कितने बेशरम हो गए हैं कैसे खुले में हिला रहे हैं पकड़ कर. पर उसका पेशाब भी उसे रुकने नहीं दे रहा था, आखिर मजबूर होकर वो उठी और बिना ससुरजी की और देखे छत के एक कोने को और चली गयी, चरण सिंह को भी आभास हुआ चंचल के उठने का यो उन्होंने आधी आँखें खोल कर देखा तो पाया की बहु छत के कोने की और जा रही है, वो समझ गए मूतने जा रही है चंचल कोने में आई और एक तरफ जहाँ पुराण सामान रखा हुआ था उसके पीछे जक्कर बैठ गयी और मूतने लगी.

वहीं चरण सिंह देख तो रहे थे पर क्यूंकि चंचल कबाड़ की आड़ में थी उन्हें कुछ नहीं दिख रहा था हाँ बस कुछ hi पालो में उनके कानो में एक मधुर सीटी की आवाज़ गूंजी जिसे सुन उनका लुंड और खड़ा हो गया.

वहीं चंचल मूतते हुए भी सोच रही थी ये क्या हो रहा है उसके और बाबूजी के बीच कैसे अब से वो उनसे नज़रें मिला पायेगी. जैसे hi उसे मूट की सीटी निकली उसे एहसास हुआ की बाबूजी भी इसे सुन रहे होंगे ये सोचकर hi उसे एक अजीब एहसास हुआ सनसनी सी हुई बदन में. उसकी छूट की खुजली बढाती जा रही थी,

चरण सिंह ध्यान से बहु की मूट की सीटी सुन रहे थे और अपना लुंड हिला रहे थे कुछ देर बाद सीटी बंद हुई तो समझ गए बहु का मूतना हो गया है उन्होंने सोचा अब कुछ नहीं हो सकता तो बहु को खड़ा लुंड तो दिखा hi सकता हूँ कटा पता थोड़ी उत्तेजित हो जाये. इसलिए अपने लुंड के पास से धोती हटा दी और अपने हाथ साइड मेइब कर लिए लुंड बिलकुल सीधा खड़ा हुआ था और आँखें बंद कर लेट गए. कुछ पल बाद उन्हें चंचल के कदमो की आवाज़ आई जो जल्दी hi पास आ गए फिर उन्हें आभास हुआ की चंचल बिस्तर पर बैठी है और फिर कुछ नहीं. वो सोचने लगे चंचल ने उनका लुंड देखा भी की नहीं या शर्मा के मुँह फेर लिए होगा, तभी उन्हें फिर से आभास हुआ जैसे चंचल हिल रही है, वो ध्यान से सुनने लगे उन्हें कुछ समझ नहीं आया बस चंचल के हिलने का आभास हो रहा था तभी अगले hi पल उन्हें अपने लुंड पर एक बेहद गरम एहसास हुआ और अगले hi पल उस एहसास ने लुंड को अपने अंदर समां लिए….

चरण सिंह ने तुरंत आँखें खोल कर देखा तो बिलकुल हैरान रह गए उन्हें लगा कहीं उन्हें दिल का दौरा न पद जाये क्यूंकि उनका दिल इतनी तेज़ी से धड़कने लगा और धड़ाके भी क्यों न सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था, उन्होंने देखा की उनकी बहु चंचल उनकी कमर के दोनों तरफ पेअर करके बैठी है उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट को उठाकर कमर पर पकड़ा हुआ है और उनका लुंड उनकी बहु की गरम छूट में पूरा समाया हुआ है…

हालाँकि हैरान तो खुद चंचल भी थी अपनी हारकर पर उसे समाजग नहीं आ रहा था की उसने ऐसा कैसे कर किआ वो पेशाब करके आई और उसकी नज़र उसके ससुर के खड़े लुंड पर पड़ी बस उसके बाद वो खुद को रोक नहीं पाई और अब वो अपनर ससुर के ऊपर बैठी थी और उनका लुंड उसकी छूट में समाया हुआ था, आज पहली बार उसकी छूट में उसके पति के अलावा किसी का लुंड घुसा था वो भी उसके अपने ससुर का ये सोच कर hi उसका बदन सिहर रहा था…

चरण सिंह ने ये सब देखा तो बस ये hi बोल पाए – ओह्ह्ह्हह बहूऊऊऊरिय्याहहह.

चरण सिंह के हाथ बहु के पीछे उसके चूतड़ों पर पहुँच गए और उन्होंने चूतड़ों को थम उन्हें थोड़ा ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया जिससे चंचल को भी होश आया और वो भी अपने चूतड़ उछलने लगी. अब उसने सोचा जब सब हो hi गया है तो क्यों न पूरे मज़े hi लिए जाएं. ये सोच चंचल आगे झुकी अपने हाथों को आगे टिका कर चरण सिंह के ऊपर लेट गयी.. चरण सिंह को तो मनो साडी खुशियां मिल गयी थी.. बहु उनके लुंड पर उछाल रही थी आह कितनी कासी हुई और गरम छूट है बहु की.

चरण सिंह ने बहु के चेहरे को पास देखा तो खुद को रोक नहीं पाए और अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया और चूसने लगे. चंचल को तो अब सब मंज़ूर था वो बाबूजी का होंठ चूसने में बहुत मज़े से साथ देने लगी. जल्दी hi दोनों एक दुसरे की जीभ भी चूस रहे थे साथ hi नीचे चंचल अपने चूतड़ों को लगातार उछाल काट अपनी छूट को अपने ससुर के लुंड पर पटक कर अपनी छूट की खुजली मिटा रही थी…





होंठों के अलग होने के बाद चरण सिंह हाथ आगे लाये और चंचल के ब्लाउज को खोलने लगे जल्दी hi ब्लाउज के सरे हुक खुले हुए थे और चंचल ने ब्लाउज अपनी दोनों बाजुओं से निकल फेंका अब वो सिर्फ ब्रा में थी जिसे भी चरण सिंह ने ऊपर सरका दिया और चंचल की भरी चूचियों को बहार निकल कर चूसने लगे वहीं इन सब के बाद भी चंचल ने अपनी छूट को बाबूजी के लुंड पर पटकना जारी रखा.

चंचल- अह्ह्ह्ह बाबूजी आह्हः aiseeeeeeeeee हीई चुसोऊ..

चरण Singh-ahhhh बहुउउ aiseeeeeeeeee छुछियां कभी नहीं देखि मैंने.

चंचल- अह्ह्ह्ह बाबूजी तो आज देखलो, आह्ह्ह्ह औरर चूस भी डालो.

वहीं क्यूंकि चंचल काफी देर से उछाल रही थी तो उसकी रफ़्तार थोड़ी धीरे पद गयी, चरण सिंह ने भी ये देखा तो उन्होंने तुरंत चंचल को पलटा और खुद ऊपर आ गए और ऊपर से धक्के लगाकर बहु को छोड़ने लगे.

चरण सिंह- आह्हः बहुउउउउ क्याह गरम छूट है टेरिइइइइ आह्ह्ह्ह लगता है लुंड पिघल जायेगा.

चंचल भले hi ससुर से चुद रही थी पर फिर भी उसके लिए इतना खुले शब्दों को सुन न और बोलना थोड़ा अजीब लग रहा था और वो झिझक भी रही थी..

चंचल- अह्ह्ह्ह बाबूजी अह्ह्ह्ह

वहीं इतनी उत्तेजना ऊपर से गोली का असर भी इस सबकी बदौलत चरण सिंह बहु की तगड़ी चुदाई कर रहे थे, हर धक्के के साथ चंचल की छुछियां खूब उछाल कूद कर रही थी…

जिन्हे बीच में थम कर चरण सिंह मसल रहे थे, चंचल भी बाबूजी की चुदाई के पूरे मज़े ले रही थी दोपहर से जो खुजली उसकी छूट में हो रही थी उसे बाबूजी का लुंड अचे से मिटा रहा था… चरण सिंह के लिए तो ये एक सपने जैसा था की वो अपनी hi इतनी गदराई हुई बहु को खुले आसमान के निचे छोड़ रहे थे. वहीं चंचल तो एक अलग hi दुनिया में उड़ रही थी,





चरण सिंह- अह्ह्ह बहु अह्ह्ह ले अपनी गरम छूट में अपनर ससुर का कड़क लुंड आअह्ह्ह मेरी बहुउउउउ आह्ह्ह्हह्ह.

चरण सिंह उत्तेजित होकर ये सब बोलते हुए बहु की चुदाई कर रहा था वहीं उनकी बातों से चंचल उत्तेजित होती जा रही थी पहली बार पति के अलावा किसी और से छोड़ना वो भी ससुर से ऊपर से ऐसी बातें ये सब चंचल और देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ने लगी, चरण सिंह को अपने लुंड पर बहु की छूट कस्ती हुई महसूस हुई तो उन्हें समाज आया की बहु झाड़ रही है बस इस एहसास के साथ वो खुद को भी नहीं रोक पाए और उन्होंने तुरंत बहु की छूट से लुंड निकला और उसकी छूट के ऊपर अपने लुंड से पिचकारियां मरते हुए झाड़ गए.

चंचल झड़ने के बाद वैसे hi कुछ देर शांत लेती रही वही चरण सिंह भी झड़के हांफ रहे थे, अब जब चुदाई का तूफ़ान थमा तो फिर से सन्नाटा पसर गया, चंचल को रक बार फिर से ग्लानि होने लगी की उसने ये कैसा पाप कर दिया है, पर उसे मज़ा भी कितना आया पर चेतन उनके साथ तो ये धोखा है न, पर अगर मैं उन्हें भी किसी और की दिला दूँ तो सब बराबर हो जायेगा, रिमझिम को सब बताना hi पड़ेगा, वहीं चरण सिंह तो मज़े के बाद लेते हुए थे उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की उन्होंने बहु को छोड़ लिए है. इसलिए वो चंचल की और पालते और उसे बाहों में भर लिए.

चरण सिंह- बहु इतना मज़ा ज़िन्दगी में कभी नहीं आया.

चंचल- हम्म्म

चरण सिंह- क्या हुआ बहु तू इतनी शांत क्यों क्या तुझे ाचा नहीं लगा.

चंचल – वो बात नहीं बाबूजी पर जो भी हुआ गलत हुआ न.

चरण सिंह- तुझे मज़ा आया?

चंचल- बात मज़े की नहीं है बाबूजी.

चरण सिंह- तू बता आया की नहीं.

चंचल- आया. बहुत आया.

चरण सिंह- तो अगर मज़ा आया तो इसमें सही गलत क्या.. अपने मज़े के लिए आपही ख़ुशी के लिए तूने अगर कुछ किआ तो इसमें गकत क्या है.

चंचल- पर चेतन उनके साथ तो धोखा हुआ.

चरण सिंह- अरे तू खुद सोच अगर तेरी जगह चेतन होता और उसे किसी को छोड़ने का मौका मिलता तो वो छोड़ता या नहीं.

चरण सिंह ने चंचल को ये कहते हुए खुद से और चिपका लिए साथ hi उसके पेट को मसलने लगे.

चंचल- हाँ करते तो.

चंचल को ससुरजी का छुऊन अब और ाचा लग रहा था.

चरण Singh-kya करते खुल के बोल.

चंचल- वहीं जो हमने किआ.

चरण Singh-kya कहते हैं उसे जो हमने किआ.

चंचल- वो मैं नहीं बोल सकती मुझे शर्म आती है.

ये कहकर चंचल ने अपना चेहरा बाबूजी के सीने में छुपा लिया.

चरण सिंह- अरे अब कैसी शर्म बीटा, बोल न तेरे मुँह से सुनके ाचा लगेगा.

चंचल- नहीं न बाबूजी.

चरण सिंह- मेरी बात नहीं मानेगी बोल न एक बार.

चंचल- च च चुदाई.

ये कहकर चंचल शर्मा गयी.

चरण सिंह- मेरी प्यारी बहु, ाचा बहु एक काम कर न.

चंचल- क्या?

चरण सिंह- अपने कपडे उतर न तुझे नंगी देखना है.

चंचल- धत्त बाबूजी अभी मन नहीं बगरा तुम्हारा,

हालाँकि ये सुनकर चंचल के मन में हल्का सा कुछ हुआ.

चरण Singh-tere बदन को देखकर किसका मन भर सकता है एक बार में तो बिलकुल नहीं.

चंचल धीरे से मुस्कुराते हुए उठ कर बैठी और फिर कड़ी हो गयी और धीरे धीरे अपने कपडे उतरने लगी पहले साड़ी फिर पेटीकोट अंत में अधिखुली ब्रा उतर कर पूरी नंगी खुली छत पर अपनर ससुर के सामने कड़ी थी और उसने ऐसी उत्तेजना कभी महसूस नहीं की थी जैसी उसे अभी इस पल में हो. रही थी, वहीं चरण सिंह ने ज्यों ज्यों बहु को नंगा होते देखा उनका लुंड ताँता गया और बहु के गदराये बदन को देख चरण सिंह जा लुंड पूरा तन गया था साथ hi उनका गाला सूखने लगा था,

चरण सिंह- आठ बहु तू बहुत सुन्दर है तेरे जैसा बदन मैंने आजतक नहीं देखा.

ये कहकर चरण सिंह ने बहु को पकड़ कर बिस्तर पर गिरा लिया और उसपर टूट पड़े पूरे बदन पर चूमने चाटने लगे कभी उसकी गर्दन चूमते तो कभी हिन्थ कभी चूचियां तो कभी उसके पेट को चाटते फिर नाभि को चूसते.





ऐसे hi चुम्मा छाती का सिलसिला तब ठहरा जब चरण सिंह की जीभ चंचल की छूट में थी और चंचल का तो मज़े से बुरा हाल था, चरण सिंह बहु की छूट को ऐसे चाट रहे थे जैसे वो दुनिया का आखिरी खाना है. वहीं चंचल का पूरा बदन ससुर की जीभ पर नाच रहा था.

कुछ hi देर में चंचल ने अपनी छूट का रास एक बार फिर से छोड़ दिया पर इस बार उसे गटकने के लिए चरण सिंह तैयार थे. और बहु की छूट से निकले रास को शरबत की तरह पि गए.

चंचल थोड़ा शांत हुई तो बोली- अह्ह्ह्हह बाबूजी क्या जीभ चलत्र हो तुम.

चरण सिंह- अरे वस् अब तू बता क्या तुझे मुँह चलना आता है?

चंचल समझ गयी और उठकर बाबूजी की टैंगो के बीच आई और उनके लुंड को पकड़ा फिर बोली – यही चाहते हो न बाबूजी की मैं इसे चूसूं?

चरण सिंह- हाँ बहु चूस मेरे लुंड को.

चंचल- ओह्ह्ह बाबूजी आपको शर्म नहीं आ रही अपनी बहु से ऐसे बोल रहे हो.

चरण सिंह- जब सामने तेरे जैसी बहु नंगी हो तो शर्म नहीं आती बहु बस हवस आती है.

चंचल – बड़े गंदे हो बाबूजी अपने बेटे की बहु के साथ ये सब कर रहे हो.

चंचल ये सब जानकार बोल रही थी क्यूंकि जितना ये बातें चरण सिंह को उत्तेजित कर रही थी वही उतना hi बोलते हुए चंचल उत्तेजित हो रही थी.

चंचल ने बाबूजी की आँखों में देखा और फिर उनके लुंड को अपनी जीभ स्व निकल कर छाता तो बाबूजी के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल गयी.

चंचल ने फिर और अचे से लुंड चूसना शुरू किया और पूरी लगन से लुंड चूसने लगी कुवह hi देर में चरण सिंह का पूरा लुंड चंचल के मुँह में था और चरण सिंह बस सिसकियाँ लेने के अलावा कुछ नहीं कर प् रहे थे कुछ देर के बाद चरण सिंह ने खुद चंचल के मुँह से लुंड निकल उसे रोका क्यूंकि वो एक बार फिर से चोदे बिना नहीं झड़ना चाहते थे,

चरण सिंह ने चंचल को बापिस बिस्तर पर लिटा लिए और उसकी टैंगो के बीच आकर अपना लुंड एक बार फिर उसकी छूट पर लगाया तो चंचल ने रोक दिया,

चरण सिंह- क्या हुआ बहु छोड़ने दे न.

चंचल- यहाँ नहीं बाबूजी?

चरण Singh-matlab.

चंचल मुस्कुराते हुए उठी और छत के किनारे बानी द्वेवार को पकड़ कर झुक गयी और अपने चूतड़ हिलाकर चरण सिंह को बुलाते हुए बोली

चंचल- आओ न बाबूजी छोड़ो अपनी बहु को पर मैं ये खेत खलियान देखते हुए छोड़ना चाहती हूँ.

चरण सिंह तो और खुश हो गए ुनहु पता था बहु जितनी खुलेगी उतना मज़ा देगी बस चरण सिंह दौड़कर बहु कस पीछे गए और उसकी कमर को थम पीछे से लुंड को उसकी छूट पर सेट किआ ौड फिर बहु की कमर को थामे छोड़ने लगे.

ठंडी हवा चंचल की चूचियों पर लग रही थी उससे चंचल को और उत्तेजना हो रही थी की कैसे वो पूरी नंगी होकर छत पर अपने ससुइ से चुद रही है कोई सामने वाले खेत में हो तो उसकी हिलती चूचियों को देख सकता है पर गाओं में कौन इतनी रात को जगता है.

वहीं चरण सिंह कस तो मज़े hi थे जो बहु खुद खुल क्र छुड़वा रही थी… चरण सिंह के लिए ये रात सौगात लेकर आई थी पर साथ hi दोनों के लिए ये ऐसी रात थी जिसके बाद सिर्फ उनकी hi नहीं पूरे परिवार की ज़िन्दगी बदलने सकती थी पर दोनों को अभी इससे कोई मतलब नहीं था दोनों hi इस रात का पूरा लुत्फ़ उठाना चाहते थे और हुआ भी कुछ ऐसा hi, रात में करीब तीन बार अलग अलग तरह से चरण सिंह ने अपनी बहु को छोड़ा वहीं चंचल हर चुदाई के बाद और खुलती गयी और अंत की चुदाई में तो ससुर को गलियां देकर उसके लुंड पर उछालते हुए झड़ी थी. खैर करीब सुबह 3 बजे दोनों नंगे hi एक दुसरे से चिपक कर सोये अब देखते हैं की आगे आने वाली सुबह इनकी ज़िन्दगी में क्या बदलाव लाने वाली थी.
 
क्ष फोरम की जगह ये ऐड फोरम बन चूका है. रियली इर्रिटेटिंग एड्स.
 
भाइयों ये इतने एड्स मुझे hi दिख रहे हैं या सबको करते हैं परेशां इनका कोई इलाज़ है या फोरम hi छोड़ना पड़ेगा
 
अपडेट 178

सरलपुर

गाओं में सुबह हो चुकी थी पर छत पर दोनों बहु और ससुर एक दुसरे से चिपके हुए बिलकुल नंगे सो रहे थे, की तभी चंचल का फ़ोन बजा तो उसकी आवाज़ से उसकी नींद खुली आँखें मलते हुए फ़ोन उठाया तो फ़ोन पर रिमझिम थी,

रिम- जीजी ओह्ह्ह जीजी अभी तक सो रही हो क्या?

चंचल पहात से नींद खोलकर बोली- नन्ही नहीं तो उठी हुई हूँ.

रिम- तुम्हारी आवाज़ से तो लगा सो hi रही हो,

चंचल- नहीं वो कल काम किआ था न इसलिए थोड़ा तबियत ढीली है.

रिम- ठीक तो हो न दवाई ले लो.

चंचल- नहीं नहीं ित्मी भी नहीं है बस थोड़ी थकावट है.

रिम- क्यों भाई ऐसा क्या काम कर लिया जो थकावट हो गयी, कहीं बाबूजी की सेवा तो नहीं कर रही थी.

चंचल- ककया धत्त पागल तू भी न.

रिम- ाचा सुनो हम लोग निकल रहे हैं कुछ सामान तो नहीं लाना.

चंचल- नहीं कल बाबूजी ले आये थे सब कुछ.

रिम- ठीक है फिर निकलते हैं हम.

इसके बाद फ़ोन कटा तो चंचल को रहत आई और सोचने लगज की इस लड़की से कुछ भी छुपाना कितना मुश्किल है पूरी जासूस है, इसके बाद उठने लगी तो अपने बदन पर ध्यान दिया जो पूरा नंगा था फिर अपने बाबूजी पर भी तो खुद को ससुर के साथ नंगा देख चंचल को शर्म सी आने लगी इसी बीच चरण सिंह की भी आँख खुली तो उन्होंने बहु को बगल मेज बैठे देखा उसका नंगा बदन देख वो खुद को रोक नहीं पाए और उसके नंगे भरे हुए चूतड़ों को सहलाने लगे, जिस पर चंचल हे पलट कर देखा तो ससुर जी उठे हुए थे..

चंचल- प्रणाम बाबूजी.

चरण सिंह- प्रणाम बहु, काश तू हमेशा ऐसे hi नंगी होकर प्रणाम करे मुझे तो जीवन सफल हो जाये.

चंचल- क्या बाबूजी रात से अब तक मन नहीं भरा तुम्हारा अभी.

चरण सिंह- तुझसे भी मन भर जाये ऐसा कोई मर्द नहीं होगा.

अपनी तारीफ सुन चंचल थोड़ा शरमाई और फिर बोली

चंचल- अब उठिये रिम्मी का फ़ोन आया था वो लोग निकल गए हैं.

चरण सिंह- क्या निकल गए इतनी जल्दी.

चंचल- जल्दी नहीं 8 बज रहे हैं.

चरण सिंह- अरे 8 बज गए पता hi नहीं चला..

चंचल – तभी तो चलिए अब उठिये .

ये कहकर चंचल भी बिस्तर से उठाने लगी और अपने कपडे पहनने लगी

चरण सिंह बहु को कपडे पहनते देखने लगे और सोचने लगे कितने खुशनसीब हूँ मैं जो रात इस बदन को भोगने का मौका मिला, लुंड बहु को देख फिर से तनाव की स्थिति में आने लगा पर अभी नीचे जाना था और बाकि काम भी ज़रूरी थे, खैर इसके बाद नीचे आ गए और बिस्तर रखा चंचल जल्दी से कपडे उठा कर बाथरूम में घुस गयी वहीं चरण सिंह थोड़ी देर रात की मनोहर यादों को याद लरते रहे बीच में लुंड को मुठिया कर मुस्कुराते फिर अंत में हारकर सोचा अब आगे का देखा जाये और कपडे पहनने लगे अपनी धोती और कुरता पहना hi था की दरवाज़ा बजने लगा, चरण सिंह ने खोला तो सामने गैंडा थी.

गैंडा- चाचाजी नमस्ते.

चरण सिंह- नमस्ते बीटा.

गैंडा- चाचाजी चाय लेकर आये हैं.

चरण सिंह- अरे कितना ख्याल है तुझे हमारा. आ अंदर आ.

गैंडा को चरण सिंह ने दरवाजे से हटकर जगह दी और वो अंदर गयी, अंदर जाते हुए उसकी मटकती गांड पर चरण सिंह की नज़र पड़ी तो मन hi मन सोचने लगे, गैंडा भी बड़ी गदराई हुई है, गांड तो देखो इसकी और छुछियां भी बड़ी हैं, रंग भले hi सांवला हो पर एक डैम कैसा हुआ बदन है. फिर खुद को जब ये सोचता पाया तो मन hi मन खुद को किसने लगे की बहु को क्या छोड़ लिए अब तो हद औरत को उसी नज़र से देखने लगा हूँ.

गैंडा अंदर आई और आंगन में बैठ चाय निकलने लगी और चरण सिंह भी वहीं पीछे से बैठकर उसके बदन को छुपकर निहारने लगे, इतने में चंचल बाथरूम से नाहा कर निकली और सामने गैंडा को देख बालों को झड़ते हुए बोली- अरे गैंडा तू कब आई.

गैंडा- अभी आई जीजी लो चाय पी लियो.

चंचल- रख अभी जल चढ़ा आऊं फिर पीती हूँ बाबूजी को दे दे तब तक

ये बोलकर चंचल चली गयी छत पर.

गैंडा- चाचाजी तुम लोगे?

चरण Singh-haan तू देगी तो क्यों नहीं लूंगा.

गैंडा- अभी देती हूँ.

हालाँकि ये बोलकर गैंडा को न जाने क्यों अजीब सा एहसास हुआ उसे लगा जैसे चाचाजी कुछ दो अर्थी बात कर रहे हैं उसके दत्त पर उसने मन का वहां समझ ताल दिया और चरण सिंह को चाय दी.

चरण सिंह ने चाय की एक चुस्की ली और गैंडा को देखते हुए बोले- बहुत स्वादिष्ट है.

ये सुनकर न जाने क्यों गैंडा खुद बा खुद शर्मा गयी.

खैर इसके बाद कुछ खास नहीं हुआ दोपहर तक चंचल गैंडा के साथ मिलकर बचे हुए काम निपटती रही वहीं चरण सिंह पुत्तन के साथ मिलकर इन्वर्टर लगवाने में लगे रहे,

4 बजे करीब जब घर के बहार से गाडी के हॉर्न की आवाज़ आज तो चंचल ख़ुशी से भाग कर दरवाज़ा खोल बहार आई, बहार आकर देखा तो गाडी रुकी और उसमे से उसकी सास माधुरी, ख़ुशी, विनीत, रिमझिम के मम्मी पापा और उसके पति चेतन निकले. भले hi एक दिन अलग रही हो पर अपने परिवार को देख चंचल बड़ी खुश हो रही थी. दौड़कर उसने सास के फिर रिमझिम के मम्मी पापा का आशीर्वाद लिए पेअर छूकर वहीं विनीत ने उसके पेअर छुए और बोलै कैसी हो दीदी?

चंचल- खुश रहो विनीत शादी के बाद अब मिले हो.

यूँ hi सब से बात होने लगी और बाकि विनीत और चेतन गाड़ी से सामान उतरने लगे तभी उसे ध्यान आया और उसने चेतन से पुछा- ऐ जी रमन भैया और रिम्मी कहाँ है?

माधुरी- मैंने कहा था न ये दो मिनट नहीं रुकेगी अपनी लाड़ली देवरानी के बारे मैं पूछे बिना.

सावित्री( रिमझिम की मम्मी)- हमारी रिम्मी के तो भाग खुल गए बहन जैसी जेठानी पाकर.

ख़ुशी – क्या भाभी बस भाभी को मिस किआ मुझे नहीं.

चंचल- अरे तू तो मेरी बिटिया है तेरी याद तो सबसे ज़्यादा aai(chanchal ख़ुशी के गलों को सहलाते हुए बोली फिर रिमझिम की मम्मी को बोली -नहीं मौसी भाग हमारे खुले हैं रिमझिम को पाकर अब बताओ तो वो है कहाँ.

माधुरी- आ रही है.. बीटा

ख़ुशी- आ नहीं रही लो आ गए

ख़ुशी ने पीछे आती हुई गाडी की और इशारा किआ जो की कुछ hi पालो में उनके पास आकर रुक गयी.

माधुरी – ले आ गयी तेरी रिम्मी. बेसब्री हो रही थी.

चंचल- मम्मी जी तुम भी न, मैं तो सबका hi इंतज़ार कर रही थी.

इतने में गाड़ी का दरवाज़ा खुला और रिमझिम बहार निकली साथ hi दूसरी और से रमन भी आकर चंचल के गले लग गयी.

माधुरी- ये देखो तो कोई कह सकता है दोनों बस एक दिन के लिए अलग हुई थी.

रिम- तो क्या हुआ मम्मी एक दिन भी बहुत होता है.

चंचल- चलो अब सब अंदर पानी वाणी पिलो वहीं बातें करते हैं.

रिम- अभी नहीं जीजी तुम्हारे लिए मैं कुछ लाइ हूँ वो तो देख लो.

चंचल- मेरे लिए क्या लाइ है, तू भी पागल है मैंने बोलै तो था मुझे कुछ नहीं चाहिए.

रिम- अरे जीजी डांटने लग जाती हो देखो तो सही.

चंचल- ाचा दिखा क्या लाइ है.

रिम- खुद जाकर देखो गाड़ी में है.

चंचल- क्या है गाड़ी में तू पहेलियाँ बुझा रही है.

ख़ुशी- भाभी देखलो न गाड़ी में जाकर.

चंचल- ाचा ाचा देखती हूँ तुम लोग भी न.

चंचल जैसे hi आगे बढ़कर गाड़ी की तरफ आई गाडी का पिछले दरवाज़ा खुला और जो सामने दिखा उसे देख चंचल बिलकुल चौंक गयी…

चंचल- अम्मा..

सामने चंचल की माँ थी जिसे देख चंचल बेहद खुश हो गयी और भागकर उनके गले से लग गयी. अपनी माँ को यूँ अचानक देख चंचल की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा साथ hi वो भावुक भी हो गयी और माँ के गले लगे हुए hi उसकी आँखों से आंसू बाह निकले वहीं उसकी माँ ने भी अपने कलेजे के टुकड़े जैसी बेटी को गले से लगा लिए, दोनों माँ बेटी का मिलान जारी था और सब भावमय होकर ये देख रहे थे की तभी गाड़ी की दूसरी तरफ से आवाज़ आई- सारा लाड अपनी अम्मा को hi दिखाड़ेगी बिटिया?

ये सुनकर जैसे hi चंचल ने देखा तो उसकी ख़ुशी दुगनी हो गयी क्यूंकि दूसरी और उसके पिता खड़े थे जिन्हे देख चंचल भाग कर उनके पास गयी और उनके पेअर छूकर उनके सीने से लग गयी..

दोनों से मिलने के बाद चंचल काफी भावुक हो रही थी,

चंचल- अम्मा बाबा मैं बहुत खुश हूँ तुम दोनों को देखकर, सच में आज तो मुझे चौंका hi दिया तुमने.

चंचल की अम्मा – अरे लाडो हमने नहीं ये सब किआ धरा इस बदमाश का है, हम लोग तो मन कर रहे थे की घर खेत छोड़ कर कैसे आ पाएंगे पर इसकी ज़िद्द के आगे हमें झुकना पड़ा.

उन्होंने रिमझिम की और इशारा करके कहा. ये सुनकर चंचल ने रिमझिम को ज़ोर से गले लगा लिए और रो पड़ी- रिमझिम तू वहुत अछि है तूने इतना सोचा.

रिमझिम उसे चुप करने की कोशिश करते हुए बोली- जीजी ख़ुशी का मौका है तुम रो रही हो, और इसमें मैंने क्या किआ जब सारा परिवार ख़ुशी से इकठ्ठा हो रहा है तो अम्मा बाबा नहीं आते ऐसा कैसे होता, ये तो मैंने पहले hi सोच रखा था.

चंचल- मेरी बहन.

ख़ुशी- अब ख़ुशी के मौके पर सीरियल कीतरह आंसू न बहाओ दोनों बहुओं अंदर चलो बाकि सब बातें अंदर करेंगे.

रिम- हाँ चलते हैं वैसे कैसा लगा मेरा गिफ्ट जीजी

चंचल- तेरी तरह बहुत प्यारा.

चंचल ने रिमझिम के गाल को चूमते हुए कहा. इसके बाद सब अंदर आए गए.

चोदामपुर

रात को सोया मैं तो मेरी नींद किसी के जगाने से खुली, देखा तो पल्ली थी,

पल्ली- उठो भैया उठो.

में- क्या हुआ पल्ली सोने देना.

मैंने करवट बदलते हुए कहा,

पल्ली- उठो अभी 5 बज गए पूजा करनी है न नहालो नहीं तो अभी ताऊजी डांटेंगे.

फिर मुझे याद आया आज तो पात पूजा है जल्दी से उठा वाशरूम में घुस गया फिर नाहा धो लिए फिर पात पूजा की एक पोषक होती थी जिसमे मर्द ऊपर से नंगे रहते थे सिर्फ एक गमछा रहता था गले में और नीचे धोती पहननी होती थी मैं भी वही पहनकर बहार आया धीरे धीरे सरे लोग जमा होने लगे क्यूंकि सूरज निकलने के साथ hi पहली किरण के साथ भोग लगाया जाता था.

साडी औरतें सुन्दर नयी नयी साड़ी में थी और सब प्यारी लग रही थी, पल्ली, लाडो, और नीतू ने भी साड़ियां पहनी थी, मेरी तरह अनुज, जग्गू, सरजू, बिरजू इन सबने भी धोती पहनी हुई थी, औरतों में शान्तो तै, मंजू तै, माँ, ममता चची, शालू मौसी, रज्जो चची, प्रेमा भाभी थी वहीं आदमियों में राजपाल ताऊ( जग्गू के पापा), दीं दयाल चाचा, राजन चाचा, पापा और मौसा जी थे..

पूजा का समय हुआ तो सबने एक एक करके पूजा शुरू की पति पत्नी साथ में कर रहे थे बाकि सब अलग अलग, सबने जो पकवान बने थे उनसे अनाज के ढेर को भोग लगाया टीका किआ. उनके पेअर छूकर आशीर्वाद लिए.. इसके बाद जो भोग था उसे सरे पकवान में मिला लिए गया और फिर हम सब मर्द प्रसाद को बर्तनो और बड़े बड़े थालों में भरकर बाघ में लेकर आये और आस पास के जानवरों को प्रसाद खिलाया, वहीं औरतें पेड़ों को तिलक और भोग करके पूज रही थी. क्यूंकि ये मन जाता है की जो भी अन्न पैदा होता है उसपर पहला हक़ बेजुबान जानवरों और पेड़ पौधों का होता है फिर इंसानो का, इसलिए सभी जानवरो को खिला कर हम बापिस आये फिर सबको प्रसाद मिला जिसे सबने चौ से खाया सब आराम से बाघ में बैठ कर प्रसाद खा कर बैठे hi थे तो मंजू तै बोली- लो भाई पूजन तो हो गया अब तुम लोंगो का हुड दांग शुरू होगा…

दीं Dayal-bilkul भाभी हमारा मामला तो पूरा तैयार है,

रज्जो चची – जीजी इनसे कहो थोड़ा काम करें बीते साल दो दिन होश नहीं लिए थे.

इस पर सब हंस पड़े.

दीं दयाल- ऐ तुम चुप karo.bahut बोलती हो.

राजपाल- ऐ दीनू सही तो बोल रही है बहुरिया थोड़ा काम करेगा तो का हो जायेगा त्यौहार ख़ुशी मानाने के लिए है, औंधे होकर सोने के लिए नहीं.

दीं दयाल- नहीं भाई साब हम ध्यान रखेंगे.

पापा- वो तो पता चलेगा थोड़ी देर में.

मंजू तै- वैसे कहाँ घोंटे हो यहाँ यो नहीं दिख रही.

दीं दयाल- अरे सरजू बिरजू को भेजा है भाभी ला रहे होंगे.

राजन- अरे लो आ गए दोनों.

दोनों एक बड़े से ड्रम को साइकिल पर रख कर ला रहे थे फिर हम सबने मिलकर ड्रम को उतरा..

शान्तो- अरे ये भांग तो आ गयी पर वो रास बनाया था जो पत्तियां कूट कूट कर वो कहाँ है.

पापा- अरे हाँ कर्मा झोपड़िया खोल कर रास की बाल्टियां ले आ, सुबह वहीं रखवा दी थी. अनुज जग्गू, सरजू बिरजू तुम भी जाओ बकै बाल्टियां हैं.

मैं और सब लड़के हमारे बाघ में बानी झोपडी से बाल्टियां लेकर आये पूरी 10 बाल्टियां थी. खूब रास बना था जमके खेल होने वाला था.

खैर अब रास भी आ गया तो सबसे पहले लाडो और पल्ली क्यूंकि वो दोनों hi सबसे छोटी थी और लड़कियां थी तो प्रथा के अनुसार उन्होंने बाल्टियों से थोड़ा रास लेकर पेड़ पौधों और जानवरो को रंग से टीका लगाया और फिर काम ख़तम अब सब खेल सकते थे.

सरे मर्द जहाँ एक तरफ भांग पीने में लग गए वहीं औरतें और हम बच्चे ऐसे hi इंतज़ार कर रहे थे क्यूंकि, भांग पीने का मन तो हम लड़को का भी था पर पहले बड़े थोड़ा पीले तो hi बच्चो को मिलती थी. यहाँ तक की औरतें भी जिनका मन होता था वो भी एक दो गिलास जातक लेती थी.

एक एक दो दो गिलास सब मर्दो ने जातक ली थी तो शान्तो तै बोली- अरे तुम लोग hi सब पि जाओगे की हम लोगो के लिए भी छोड़ोगे.

पापा- अरे क्यों नहीं भाभी, ऐ दीनू. एक बड़ा वाला दे तो भाभी के लिए इन्हे भी दिखा चोदामपुर की भांग का जलवा,

दीं दयाल चाचा ने जल्दी से जोश में गिलास भरकर दिया जिसे संतो तै ने सबको हैरान करते हुए तुरंत जातक लिए फिर चाचा ने दूसरा दिया जिसे भी तै गटकने लगी.

और जैसे hi गटकने के बाद पीछे मुड़ी तो पापा और राजन चाचा ने पहले hi योजना बना राखी थी और रास से भरे दो लोटे संतो तै के ऊपर फेंके जिससे तै का ऊपरी हिस्सा पूरा भीग गया.

संतो- अरे अरे ी का कर रहे हो,

पापा- क्यों भौजी भांग तो देखली अब चोदामपुर का देवर भाभी का खेला भी देख लिओ.

संतो- ाचा तो हम भी देखते हैं. ये कह संतो तै ने भी लोटा उठाया और रास से भर कर पापा पर फ़ेंक दिया. बस फिर क्या था इसी के साथ hi शुरू हो गया खेल सबसे पहले तो मैं दो गिलास भांग गटकी मेरे साथ सरे लड़के थे वहीं देखा तो आज औरतें भी पीछे नहीं थी यहाँ तक प्रेमा भाभी और रज्जो चची भी ख़ुशी ख़ुशी गिलास क्र बाद गिलास चढ़ा रही थी.

तभी एक चीख से हमारा सब का ध्यान दूसरी और गया तो देखा पापा और राजन चाचा ने संतो तै को कंधे और पैरों से पकड़ उठा रखा था और उन्हें एक और लेकर जा रहे थे और तै चीख रही थी. बाकि सरे लोग देखकर हंस रहे थे.

दोनों उन्हें लेकर गए और हमारे तुबेल की हौदी में गिरा दिया जो पानी से भरी हुई थी.. तै अपने मुँह से पानी हटती हुई कड़ी हुई तो सब की नज़र उन पर और जैम गयी क्यूंकि गीले होने की वजह से उनके कपडे बिलकुल उनके बदन से चिपक गए थे साथ hi ब्रा पंतय वो पहनती नहीं थी तो और काम बन गया यहाँ तक की ब्लाउज में से उनकी चुकी का कला हिस्सा यहाँ तक निप्पल भी साफ़ नज़र आ रहा था.

सब का ध्यान उस्तराफ था की तभी एक और आवाज़ आई पलट कर देखा तो पाया दीनू चाचा ने मंजू तै को भीगा दिया था और अब तै बगल में पड़ा गोबर उठा कर चाचा के पीछे भाग रही थी, बस इसी के साथ खेल पूरी तरह शुरू हो गया जिसके हाथ जो लग रहा था उससे दुसरे को भीगने या गन्दा करने की कोशिश हो रही थी, खेल मेइब देवर भाभी की मस्तियाँ सबसे ज़्यादा होती थी.

खैर अभी तो चारो तरफ भगा दौड़ी मची हुई थी कोई किसी से चुप रहा था तो कोई किसी को मार रहा था, मेरे पीछे प्रेमा भाभी गोबर लेकर पड़ी हुई थी मैं पेड़ों के पीछे भाग रहा था, तभी भाभी की चीख सुनाई दी तो मैंने पलट कर देखा तो पाया की भाभी पूरी भीगी हुई हैं और बगल में सरजू पानी की बाल्टी लिए हुए खड़ा है, सेल ने मौके पर चौका मार दिया,

प्रेमा भाभी- सरजू भैया तुम्हे तो मैं बताती हूँ.

ये कहकर भाभी ने गोबर सरजू की और फेंका जो की बेचारे के मुँह पर hi लगा, सेल ने मुझे तो बचा लिए पर खुद खा गया, खैर गोबर लगते hi सरजू भगा पर मौका देखकर माइनर भाभी को पीछे से पकड़ लिए और उठा कर ले जाने लगा भाभी छटपटाने लगी, ितमे में पीछे से न जाने कहाँ से जग्गू आ टपका और वो भी भाठी को लेजाने में मेरी मदद करने लगा, उसने भाठी क्र पेअर पकडे और मैंने चूचियों से उन्हें थमा हुआ था भाभी गीली तो थी hi मैंने इशारे से जग्गू को बता दिया कहाँ जाना है और बाघ के कोने पर hi भैंसों को खिलने का भूसा रखा रहता था मैंने और जग्गू ने भाभी को उसी में फ़ेंक दिया तो भूसा उनकस बदन से चिपक गया, उन्हें फेंकने के बाद हम इतने पर hi नहीं थामे बल्कि हाथ से भूसा लेकर भाही के ब्लाउज में छूछीयो के बीच घुसाने लगे वहीं जागहु ने भी नीचे से साड़ी उठा कर अपनी भाभी के चूतड़ों में भी भूसा लगा दिया इसके बाद भाभी को भूसे से सराबोर कर हम दोनों तो वहां से भाग लिए वहीं भाभी दोनों को गरिया रही थी और कड़ी होकर अपने ऊपर से भूसा हटाने की कोशिश करने लगी पर गीले होने की वजह से हर जगह चिपका हुआ था, भाभी ने इधर उधर देखा तो भूसे की झोपडी तीन और से घिरी हुई थी तो कोई नहीं देकज रहा था भाभी ने अपने सीने से साड़ी का पल्लू हटाया और झड़ने लगी.. इतने में hi उसी तरफ बचते बचते जग्गू के पापा आ गए और जब उन्होंने बहु को वहां देखा तो खुश हो गए और तुरंत उसे पकड़ लिए,

प्रेमा- आठ पापाजी क्या कर रहे हो कोई देख लेगा तो गड़बड़ हो जाएगी.

राजपाल- अरे बहु रात से hi कुछ नहीं मिला है देख ये कैसे खड़ा है अब इसे आराम दे दे.

ताऊजी ने अपनी धोती हटाकर अपना खड़ा लुंड दिखते हुए कहा.

प्रेमा- पर पापाजी मेरी हालत भी देखो हर जगह भूसा लगा हुआ है.

राजपाल- हाँ ये किसने किआ.

प्रेमा- कर्मा और जग्गू भैया हैं न.

Rajpal-av देवर हैं मज़ाक तो करेंगे hi न.

एक काम कर मेरे पीछे आ मैं धुलवाता हूँ ये.

ये कहकर ताऊजी भाठी को बाघ से बगल में बने खेत के किनारे ले गया जहाँ मेड जो दो खेतो के बीच पानी के आवागमन के लिए बनाई जाती थी उसमे पानी भरा था साथ hi थोड़ी ऊंची ऊंची झाड़ियां थी ताऊ जी ने भाभी को वहीं घुसा दिया और खुद भी घुस गए, भाभी ने भी जल्दी से साड़ी को उठा कर , अपने चूतड़ों को उस बहते पानी में धोने लगी तो ताऊजी न्र मौका देखा की बहु की साड़ी ऊपर है hi धोती साइड कर खड़ा लुंड बहार निकला और भाभी के नीचे लेट गए पानी में. दोनों पर hi भांग का असर था इसलिए दिमाग उतना ठीक से सोच नहीं रहा था भाभी ने भी ससुर का लुंड देखा तो रुक्स नहीं गया और उन्होंने उसे छूट से लगाया और फिर नीचे होकर अपने अंदर समां लिए अब एक मेध में ताऊजी लेते हुए थे और उनके ऊपर उनकी बहु उनका लुंड अपनी छूट में लिए बैठी थी ताऊजी का लुंड सहित पूरा हिस्सा और भाभी की कामत तक पानी में डूबा हुआ था. यहाँ तो ससुर बहु की चुदाई चालू हो चुकी थी. और मैं जग्गू भाभी को भूसे में गिराकर भागे तो हमारा सामना लड़कियों की गैंग से हो गया जिसमे लाडो पल्ली और नीतू थी.

तीनो के hi हाथ में कीचड थी मतलब नूह कला करने का पूरा इंतेज़ाम मैंने उनके पीछे देखा तो बिरजू का मुँह कीचड से सना हुआ था मतलब उसे ये लोग शिकार बना चुके थे. लाडो और पल्ली कीचड लेकर जग्गू की और भागे तो वो एक तरफ भगा वहीं नीतू मेरी तरफ भागी मैं दूसरी तरफ भगा… मैं अपने तुबेल की हौदी की और भगा सोचा इसे तो उसी में गिरा कर मज़े लूंगा…

मैं जैसे hi हौदी के पास पहुंचा मुझे आवाज़ें सुनाई दी. माइनर झांक कर देखा की क्या है तो हैरान रह गया क्यूंकि सामने नज़ारा hi कुछ ऐसा था, पापा और राजन चाचा ने मंजू तै को अपने बीच में पानी में लिटाया हुआ था, तै का ब्लाउज खुला था और उनकी दोनों चूचियां बहार थी जिन्हे एक को पापा चूस रहे थे और दूसरी को दबा रहे थे वहीं तै की टैंगो के बीच राजन चाचा थे जिनका मुँह तै की छूट पर लगा जुआ था क्योंकि उनकी साड़ी का अत पता नहीं था और पेटीकोट कमर मेज इक्कठा था.

नज़ारा देख मेरा दिमाग घूम गया पर साथ hi याद आया की पीछे नीतू है मैंने सोचा अगर इस्नर देख लिए तो गड़बड़ हो जाएगी इसलिए मैं बापिस उसकी और भगा तो उसनर मुझ पर कीचड फेंका जो मेरे सीने पर लगा क्यूंकि चेहरा मैंने ढँक लिया. मैंने फिर उसे पीछे से पकड़ा और पकड़ कर बगल वाले गन्ने कस खेत में खींच ले गया.. खेत के थोड़ी अंदर जाकर जब मुझे लगा की काफी अंदर आ गए हैं मैंने उसे पलट. कर खुद से चिपका लिया वो भी मुझसे चिपक गयी. मैंने जल्दी से उसके होंठो पर होंठ रख दिए और हमारा चुम्बन शुरू हो गया वो भांग. की वजह से थोड़ी और आक्रामक लग रही थी.

पर मुझे भी पता था की पिछली बार क्या हुआ था और मैं वो गलती नहीं करना चाहता था. चुम्बन के बाद मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़ मेरी धोती के ऊपर लुंड पर रख दिया वैसे भी लुंड को कल से hi आराम नहीं मिला था.

नीतू ने भी लुंड पकड़ा तो जैसे उसके बदन में करंट दौड़ गया, उसने तुरंत धोती साइड करके लुंड बहार निकल लिए और फिर उसपर हाथ फिरते हुए मेरे होंठ चूस रही थी, मैं भी बहकाने लगा, और मेरा हाथ उसकी कमर पर फिसलने लगा, मैं उसकी साड़ी के अंदर हाथ दाल उसके चिकने पेट पर फिरने लगा हाय क्या नरम और मुलायम त्वचा थी उसकी. हम लोग लगे हुए hi थे की अचानक से किसी के आने की आवाज़ आई तो हम तुरंत अलग हो गए छुपते हुए मैंने देखा तो पल्ली और लाडो थे जो हमें हु ढूंढ रहे थे. मैंने नीतू को इशारा किआ तो वो आगे बढ़ उन दोनों से जा मिली,

पल्ली- दीदी कर्मा भैया नहीं पकडे गए क्या?

नीतू – नहीं आये तो इधर hi थे पता नहीं कहाँ गए.

मैं दूसरी और से छुपता छुपता हुआ पेड़ के पीछे से दूसरी तरफ से बहार निकला तो देखा एक पेड़ के पीछे ममता चची को दीनू चाचा ने दबा रखा है और रास लगाने के बहाने उनके भरे हुए बदन को छू रहर हैं.. चची भी बगल से मिटटी उठा उठा कर उन्हें लगा रही हैं, चची की साड़ी का पल्लू नीचे लटका हुआ है जिससे दीनू चाचा को उनके मस्त खरबूजों और भरे हुए गदराये पेट का नज़ारा मिल रहा था,

मैंने सोचा सही है देवर भाभी की पूरी मस्ती चल रही है.. मैं उन्हें छोड़ आगे बढ़ा आउट झोपडी के पास पहुंचा तो देखा की मौसी को पापा ने पकड़ रखा है और अपनी साली के बदन को खूब रगड़ रगड़ कर रास दाल दाल कर नहला रहे हैं, पापा रास भरे हाथ लेकर मौसी के चेहरे गर्दन और पेट पर मॉल रहे थे, मौसी भी जितना हो रहा था हाथ चला चला कर पापा को लगा रही थी साथ hi जीजाजी जीजा कह के खिल खिला रही थी.. पापा को मौसी के साथ मस्ती करते देख मेरा भी इमाम डोलने लगा पर सोचा यही तो मस्ती का मौका है सबको मिलनी चाहिए.

साथ hi झोपडी के अंदर से भी आवाज़ें aa,rahi थी समझ आ रहा था अंदर भी मस्ती चालू है.. मैं घूम कर गया और झोपडी के अंदर देखा तो अलग hi दृश्य चल रहा था माँ और राजन चाचा ने मिलकर रज्जो चची को पकड़ रखा था, राजन चाचा ने पहले तो रास से भरी बाल्टी रज्जो चची क्र ऊपर दाल उन्हें नहला दिया और फिर बगल में पड़े भैंस का चारा उन पर दाल दिया.

रज्जो- आईये आह्ह्ह्हह जीजी हम तुम्हे नहीं छोड़ेंगे है दिया देखो कैसे दो दो लोग पकड़े हो हमें.

माँ- ाचा हुमरिन नहीं छोड़ेगी,

कहकर माँ ने रज्जो चची का पल्लू नीचे सरका दिया और बोली- ऐ भैया भरो तो अपनी भौजी की छाती में भूसा जो कोई बैल घुस जाये इसके ब्लाउज में.

इसका फायदा राजन चाचा भी खूब उठा रहे थे अब तो पल्लू हटने से रज्जो चची की बड़ी छुछियां गहरी नाभि वाला पेट सामने था जिस पर राजन चाचा रगड़ रगड़ भूसा लगा रहे थे और रज्जो चची बिलबिला रही थी माँ की बाहों में.

तभी राजन चाचा को अपने चेहरे पर हाथ महसूस हुए उन्होंने पलट कर देखा तो मंजू तै थी जो उनके चेहरे पर गोबर मॉल रही थी, मंजू तै की हालत देख तो मैं हैरान रह गया पूरी भीगी हुई थी ब्लाउज के ऊपर के तीन बटन खुले हुए थे, साड़ी तो उत्तरी हुई थी जिसे उन्होंने खुद से यूँ hi लपेट रखा था,

तै ने राजन चाचा को पकड़ा और उनपर कूद पड़ी और उन्हें पीछे की और गिरा लिए और उनकी कमर पर बैठ गयी और उनके चेहरे पर बगल से मिटटी उठा कर लगाने लगी, चाचा से सहूटते hi रज्जो चची खुश हो गयी क्यूंकि वो छूट गयी थी इधर माँ राजन चाचा और मंजू तै की कुश्ती देख हंस रही थी, इसी का फायदा उठा रज्जो चची ने उठाया और बगल में पड़ी बाल्टी उठा माँ को नहला दिया. पर इसके बाद भी नहीं मानी और माँ के बदन पर भूसा मलने लगी माँ भी थोड़ी हैरान हुई पर फिर वो भी चची से बदला लेने लगी, और दोनों की hi गुथम गुथी चालू हो गे, बगल में राजन चाचा और मंजू तै की कुश्ती अब भी चालू थी, उनके hi बगल में माँ और चची लड़ रही थी कभी माँ ऊपर आकर चची को मल्टी तो कभी चची माँ को. बड़ा मज़ा आ रहा था साथ hi gadraye.bheege बदन वाली औरतों को ऐसे खुश्ती करते देख कर लुंड भी खड़ा हो रहा था, और सिर्फ मेरे hi नहीं करीब करीब हर मर्द का यही हाल था सबकी धोती उठी हुई थी, एक तो भांग का नशा ऊपर से भीगी हुई गदराई कामुक औरतें लुंड तो खड़ा होगा hi. मैं ये सब देख hi रहा था की न जाने पीछे से कहाँ से प्रेमा भाभी आई और उन्होंने मेरे चेह्रद पर कीचड लगा दिया मैंने भी बदला लिए और उन्हें पकड़ कर वहीं गिरा लिए और उनके ऊपर मिटटी मलने लगा, अब सास बहु आस पास hi अलग अलग मर्द से कुश्ती कर रही थी.

माँ जैसे hi चची पर भरी पड़ने लगी तो न जाने कहाँ से मौसा जी पीछे से आ गए और उन्होंने माँ को पकड़ लिया और उनपर भूसा रगड़ने लगे, अब उनकी तो साली भी थी और भाभी भी पूरा हक़ बनता था खेलने का यही वो करने लगे, मौसा के आने का फायदा रज्जो चची ने भी खूब ुतः और माँ का पल्लू नीचे गिरा उनके सीने पर भूसा लगाने लगी, क्यों जीजी हमारे ब्लाउज में बैल घुसा रही थी.

माँ- आइए राजजु आह्हः मान जा, ऐ भैया तुम तो छोडो हेहेहे.

पर मौसा जी भी भांग के नशे में फुल मूड में थे और पीछे से जितना हो सके खुद को माँ स घिस रहे थे..

उनके बगल में राजन चाचा और मंजू तै की कुश्ती में अचानक से मंजू तै का ब्लाउज का हुक टूट गया तो वो उसे पकड़ने लगी इसी का फायदा उठा राजन चाचा ने उन्हें अपनी गोदी में भर लिए और लेकर तुबेल की हौदी की और भागे इसी भागा दौड़ी मेज तै की साड़ी पीछे hi कहीं गिर गयी पर उसकी फ़िक़र कीड़ी को नहीं थी चाचा ने उन्हें लेजाकर तुबेल की हौदी में गिरा दिया.

रज्जो चची ने ये देखा तो मौसा से बोली- भैया जीजी को भी वहीं ले चलो.

बस फिर क्या था मौसा ने माँ को पीछे से उठाया और रज्जो चची ने माँ के पेअर पकड़े और दोनों उन्हें उठा कर हौदी की और लेकर गए फिर उन्हें हौदी में गिरा दिया और खुद भी घुस गए. जहाँ पहले से राजन चाचा और मंजू तै थे.. ये मैंने देखा तो मैब भी प्रेमा भाभी को उठा कर हौदी की और चल पड़ा, हौदी भी काफी बड़ी थी क्यूंकि इसमें hi हम अपनी भैंसो और बैल वगेरा को नहलाते थे इसलिए बड़ी बनवाई थी आज उसमे मस्त गदराई हुई दुधारी भैंस और सांड नाहा रहे थे, मैंने भी भाभी को हौदी के अंदर गिराया और खुद भी घुस गया अब जो भी हौदी को देखता वो उसमे चला आता, पापा भी मौसी को लेकर हौदी में घुस गए, और फिर करीब करीब सब लोग hi हौदी में थे, और नहाने लगे अनुज ने तुबेल चला दिया था तो बहता पानी ठंडा ठंडा सबकी भ रहा था, मंजू तै ने खुले ब्लाउज को साड़ी से ढँक लिस था संतो तै भी थी जो की लगभग पारदर्शी कपड़ो के कारन बिलकुल नंगी सी लग रही थी. मेरे बगल में अनुज था जिससे मैंने पुछा तू कहाँ था तो उसनर कान में बोलै मैं तो मज़े ले रहा था, खेत में संतो तै की गांड मरी.

मैंने कहा बढ़िया मज़े ले रहा है तू और मैं भी तै का स्वाद जल्दी hi चखूँगा खैर हौदी में कुछ देर लोग यूँ hi बैठे रहे और खुद को साफ़ कर रहे थे, दीनू चाचा क्र कहने पर अनुज और बिरजू ने सब लोगो में भांग एक बार फिर बनती और सबने उसका मज़ा लिए.

राजपाल- चली फिर अब घर चला जाये.

उन्होंर इसलियर भी कहा क्यूंकि औरतो को इस हालत में देख उनका लुंड कड़क हुआ पड़ा था.

पापा- हाँ हाँ चलते हैं.

मंजू तै- हाँ भाई चलो. अब आराम करते हैं.

ये सब कह तो रहे थे की घर चलो आराम करते हैं पर सबके मन में था की असलु खेल तो अब शुरू होगा, भांग का नशा अब तो ठडक से चढ़ पाया था, मेरा भी मन मचल रहा था और लुंड कुछ राहत मांग रहा था. अक्सर यही होता था असली खेल वो खेल जो सबके सामने नहीं हो सकते थे वो बाघ से आकर hi खेले जाते थे.

खैर धीरे धीरे सब लोग घर की और चल दिए जग्गू का परिवार अपने घर चला गया वहीं दीं दयाल चाचा का भी जाने लगा तो मैंने नीतू को अकेले में मिलने का इशारा किआ… राजन चाचा का परिवार हमारे साथ hi घर जा रहा था, दरवाज़े पर पहुँच कर hi मैंने कुछ भूलने का बहाना बनाया रज्जो चची के घर की और आ गया जहाँ मेरे कहे अनुसार नीतू दरवाज़े पर hi कड़ी थी. मैं उसके पास गया तो उसने आस पास देखा कोई नहीं था और बोली- क्या हुआ क्यों बुला रहे थे.

में- तुझसे अकेले में कुछ काम था.

नीतू- बताओ न अभी करदेती हूँ तुंहारा काम.

उसने नशीली आँखों से कहा. जिसे देख मेरा लुंड फनफनाने लगे.

में- एक काम कर तेरी जहाँ भैंस बांधती हैं वहां आ 5 मीन्स में.

नीतू- ठीक है आती हूँ.

इसके बाद मैं बगल से होते हुए दीवार कूद कर वहां पहुँच गया. ये उनकी hi घर के पीछे खली जगह थी जो उसके घर की पिछली दीवार से लगकर hi एक छप्पर पड़ा हुआ था और बाकि चारो तरफ से कच्ची दीवार से बाउंड्री बानी हुई थी उसकी भैंसों का सारा काम यहीं होता था. घर के अंदर से hi एक पतली गली यहाँ आती थी.

कुछ hi देर में नीतू भी आ गयी पीछे देखती हुई. मैं एक छोटी सी दीवार जो मेरे पेट तक आती थी उसी के पीछे छुपा हुआ था, ताकि कोई आये तो बैठ कर छुप सकूँ.

नीतू- अब बताओ क्या हुआ भैया.

में- साड़ी मेज तू बहुत सुन्दर लग रही है.

नीतू- हैं न मैं तो हूँ hi सुन्दर.

में- थोड़ा पास आ अचे से देखने तो दे.

नीतू- लो आ गयी पास.

ये कहकर वो दीवार के इस तरफ मेरे बिलकुल पास आई तो मुझसे रुका नहीं गया और मैंने उसे जकड लिए.

नीतू- ओह्ह्ह्ह भैया.

मैंने उसके चेहरे की ओट देखा उसकी आँखों में नशा दिख रहा था न जाने भांग का था या वासना का.

फिर से मेरे होंठ उसके होंठों से मिल गए और मैं उसके रसीले होंठो को चूसने laga.Wo भी मेरा पूरा साथ दे रही थी. मेरा लुंड पूरा टांके खड़ा था मैंने फिर से उसका हाथ पकड़ अपने लुंड पर रख दिया, जिसे नीतू ने दोबारा पकड़ लिए उसके कोमल हाथ लुंड पर बहुत अचे महसूस हो रहे थे

मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे सरका दिया और उसकर सीने को चूमने लगा, क्या मस्त बदन था उसका बिलकुल माखन जैसा. मैं नीचे बैठा और ब्लाउज और साड़ी के बीच उसके नंगे पेट को चूमने लगा बहुत कोमल था उसके बीच उसकी गोल नाभि देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया तो मैंने तुरंत होंठ उससे भिड़ा दिए, जिससे नीतू सिसकने लगी… हम दोनों hi बिलकुल नशे में थे वासना के भी और भांग के भी की तभी एक आवाज़ आई – क्या हो रहा है ये

और ये सुन हम दोनों की गांड फैट गयी सामने देखा तो रज्जो चची थी, नीतू ने जल्दी से अपना पल्लू ऊपर किआ मैंने भी लुंड को धोती से ढंकने की कोशिश की.

रज्जो चची शायद नहाने के लिए जा रही थी क्यूंकि अभी वो हमारे सामने केवल पेटीकोट और ब्लाउज में थी. हिम दोनों को तो बिलकुल सांप hi सूंघ गया था.

रज्जो- आईये लड़की अंदर चल तुझे तो मैं बताती हूँ, ज़्यादा गर्मी आ रही है न.

चची का इतना बोलना था की नीतू वहां से भागी अब अकेला में तक और मेरी भी गांड पहात रही थी.

रज्जो- ऐ कर्मा तुझे शर्म है की नहीं. तुम दोनों एक दुसरे को भाई बहन कहते हो और ये सब करते हो. शर्म नहीं आती.

चची ने गुस्से में आवाज़ दबाते हुए कहा क्यूंकि वो नहीं चाहती थी उनकी आवाज़ सुनकर कोई इधर आये. साथ hi वो मेरी दीवार के इस तरफ आकर कड़ी हो गयी जहाँ नीतू कड़ी थी.

मैं क्या बोलता चुपचाप मुँह झुकाये खड़ा था, पर एक चीज़ थी पता नहीं भांग की वजह से या मेरी हवस की वजह से साला लुंड ज्यों का त्यों खड़ा हुआ था.

रज्जो- अब ये बात किसी बहार वाले को पता चल जाये तो कितनी बदनामी होगी, बहुत बार से देख रही हूँ, कुक्सह नहीं कहा सोचा बच्चे हो समझ जाओगे पर बच्चे ये सब करते हैं क्या. बोल.

में- वो चची गलती हो गयी.

रज्जो- गलती ये कोई छोटी गलती लगती है तुझे एक बार अगर मेरी बेटी का नाम ख़राब हो गया तो ब्याह नहीं होगा उसका साडी जिंदगी कुंवारी बिठा कर नहीं रखनी मुझे वो.

मैंने सोचा अब इन्हे भड़ास निकलने hi दो वैसे भी बचने का तरीका खुद रज्जो चची ने अपने आप hi मुझे बता दिया था. साथ hi मैं ये भी ध्यान दे रहा था की चची मेरे लुंड को न देखने की कोशिश कर रही थी पर उनकी नज़र बार बार मेरे लुंड पर जा रही थी.

रज्जो- अब बोल चुप क्यों है कोई है जवाब तेरे पास,

मैं अब थोड़ा रहत मेज था मुझे पता था चची मुझसे कितना भी चिल्ला लें पर ये बात किसी से कहेंगी नहीं बदनामी के दर से. तो मैंने दिमाग चलना शुरू किआ.

में- क्या बोलू चची मैं बहुत शर्मिंदा हूँ माफ़ कर दो चची.. गलती हो गयी. मैं बहुत दुखी होकर बोलने लगा तो उनका रवैया थोड़ा ठंडा हुआ.

रज्जो- यही बात मैं तुम्हे समझा रही हूँ लल्ला की ये सब गलत है बहुत गलत.

में- चची मैं जनता हूँ ये सब गलत है पर पता नहीं क्यों इतना ाचा लगता है की खुद को रोक hi नहीं पता.. मैं पापी हूँ चची बहुत बड़ा पापी हूँ.

ये कहकर मैं रोने की एक्टिंग करता हुआ नीचे बैठ गया और उनके पैरों को पकड़ कर रोने का नाटक करने लगा

रज्जो चची बेचारी ने सिर्फ पेटीकोट पहना हुआ था और वो भी मेरे पेअर पकड़ने से नीचे खिसक रहा था,

अब वो परेशां थी की मुझे संभाले या पेटीकोट को

रज्जो- कर्मा लल्ला रो मत मैं समझ गयी तू भी दुखी है पर अब मेरी बात मान रोना बंद कर. चची फुसफुसाते हुए बोल रहे थी.

में- कैसे बंद करूँ चची देखो तुम्हारा ितमे कहने और गुस्सा करने के बाद भी ये देखो कैसे अकड़ा हुआ है सरे फसाद की जड़ ये hi है.

मैंने अपना लुंड पूरी तरह से धोती से निकल कर दिखते हुए कहा तो लुंड देखकर वो भी एक पल को ठिठक गयी क्यूंकि खड़ा तगड़ा लुंड देख औरत के मन में रक पल को तो इच्छा जगती hi है, ऊपर से भांग का नशा. फिर भी चची ने खुद को सँभालते हुए बोली- नहीं कर्मा कुछ गलत नहीं है तू जवान है अभी और जवानी में ये सब होता है बदन में गरमी होती है… जोश होता है पर जोश के साथ होश भी तो रखबा चाहिए. अब नीतू कुंवारी है तेरी बहन है उसके साथ उंच नीच हो जाये तो उसकी जिंदगी ख़राब हो जाएगी न.

में- तुम सही कह रही हो चची मैं अपनी गलती मंटा हूँ और आगे से कभी गलती नहीं करूँगा बस इस बार माफ़ कार्डो.

ये कहकर मैंने दोबारा से चची के घुटने पकड़ कर उनके पैरों में सर रखा पर मेरे पकड़ने से हुआ ये की पेटीकोट नीचे की और खिंचा और ज़ोर लगने से नीचे खिसकता चला गया जब तक चची पेटीकोट संभालती की तभी पीछे से किसी की आवाज़ आई- मम्मी ओह्ह्ह मम्मी. कहाँ हो?

शायद बिरजू था जो चची को बुला रहा था, अब चची को ऐसी हालत में मेरे साथ कोई देखता तो क्या hi समझता इसलिए चची जल्दी से छिपने के लिए मेरे आगे नीचे बैठ गयी.

पर बैठने पर वो भूल गयी की उनका पेटीकोट तो नीचे उनके पैरों में था और मेरे सामने चची की नंगे ष्हतद थे क्यूंकि चची दूसरी और घूम कर बैठी थी. अब चची की नंगी गांड देख मेरा तो दिमाग hi घूम गया, साला लुंड ठुमके मरने लगा, मेरा लुंड चची के चूतड़ों से केवल दो इंच दूर था, मैंने सोचा अब जो होगा देखा जायेगा कर्मा करदे शिकार..

मैंने जल्दी से हथेली पर थूक लेकर लुंड के टोपे पर लगाया आगे की और झुका और चची के कान के पास मुँह करके बोलै फुसफुसा कर बोलै- चची बिरजू गया क्या,

रज्जो- शहहहहह पता नहीं.

में- देखो न झांक कर.

चची को भी बात सही लगी तो वो झांकने के लिए आगे झुकी और उनकी गांड उठकर मेरे सामने आ गयी.

मुझे बस इतना hi हिलना था अपनी पोजीशन बनाने के लिए. मैंने अपने लुंड को पकड़ा और चची की छूट के द्वार पर बिलकुल सत्ता दिया पर छुने नहीं दिया,

वहीं चची ने देखा की बिरजू और साथ hi लड़ो भी थे तो वो बापिस बैठने के लिए जैसे hi पीछे हुई मेरी योजना काम कर गयी और मेरा लुंड उनकी छूट में सरसराता हुआ घुस गया.

चची की चीख निकलते हुए बची. चची वहीं के वहीं जैम सी गयी. बेचारी कुछ बोल नहीं प् रही थी न hi आवाज़ कर प् रही थी क्यूंकि कुछ भी करती तो लड़ो और बिरजू उन्ह्र अधनंगी हालत में मेरे साथ देख लेते तो नीतू तो नहीं वो फंस जाती बुरी तरह से.

फिर भी रज्जो चची वैसे hi फुसफुसा रही थी बहुत हलके से अह्ह्ह्हह कर्मा निकल.

अब मैं इतना शरीफ तो कटाई नहीं था जो छूट में गया हुआ लुंड निकल लूँ.

मैंने चची के चूतड़ों को थमा और हलके हलके से लुंड को अंदर करने लगा और कुछ hi पालो में मेरा पूरा लुंड रज्जो चची की छूट में था.. अब चची कुछ बोल नहीं रही थी बस गहरी सांस ले रही थी.

मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किये, बहुत धीरे पैट लम्बे लम्बे जो की पूरा लुंड उनकी छूट में समां जाये. चची की छूट काफी गरम और गीली थी. गाओं की औरतों की छूट घर और खेत के काम करने से कासी हुई hi होती है उनके गदराये बदन की तरह.





खैर ज़िन्दगी के भी अजीब फंदे हैं छोड़ने बेटी आये थे और लुंड माँ की छूट में था पर माँ भी काम नहीं थी. मैंने धक्का लगते हुए हल्का सा गर्दन उठा कर देखा तो लाडो और बिरजू जा चुके थे पर अब जाएँ या नहीं मेरा काम बन चूका था, मुझे चची की गरम छूट मिल चुकी थी मैंने अब अपनी गति बधाई और चची को तेज़ी से छोड़ने लगा. चची भी अब कुछ नहीं बोल रही थी कोई विरोध नहीं कर रही थी. मुझे यकीन नहीं हो रहा था मैं सरजू की माँ छोड़ रहा था.

मैंने खुद को यकीन दिलाने साथ hi चची की प्रतिक्रिया पता करने के लिए एक. चीज़ सोची और लुंड को चची की छूट से निकल लिया तो चची ने तुरंत पलट कर देखा जैसे उन्हें ाचा नहीं लगा.

में- चची पलट कर लेट जाओ. ऐसे मेरे घुटने दुःख रहर हैं.

चची ने सिर्फ मुझे देखा पर कुछ कहा नहीं और पलट कर अपने पैरों से पेटीकोट को निकला और पेअर फैला कर पीठ के बल लेट गयी.

अब मेरे सामने उनकी छूट ब्लाउज में बंद छुछियां थी सबसे पहले तो मैंने जल्दी से लुंड को बापिस उनकी छूट में घुसा दिया क्यूंकि उन्हें शांत रखने के लिए ये बहुत ज़रूरी थी मैं फिर से लम्बे लम्बे धक्के लगाकर चची को छोड़ने लगा साथ hi उनके चेहरे को भी देख रहा था की कैसी प्रतिक्रिया दे रही है… मेरे हर धक्के के साथ उनका मुँह थोड़ा खुलता मैं समझ गया चची चुदाई का मज़ा ले रही हैं, मैं उनकी कमर को थामे लगातार उन्हें छोड़ रहा था फिर मुझे कुछ सूझा तो मैंने हाथ आगे बढ़ाये और चची के ब्लाउज को खोलने लगा, हैरानी की बात ये थी की चची ने मुझे नहीं रोका और फिर मैंने उनका ब्लाउज खोल कर दोनों पतों को अलग किआ और ब्रा नीचे करके उनकी भरी भरकम चूचियों को बहार निकल लिए अह्ह्ह क्या बड़ी बड़ी मुलायम छुछियां थी चची की जिन्हे मसलते हुए मैं उन्हें छोड़ने लगा…





उनकी चूचियों को देख मेरे मुँह में. पानी आने लगा तो मैंने आगे झुककर उनकी चुकी को मुँह में भर लिए और बेतहाशा चूसने लगा साथ hi लगातार उन्हें चोदे भी जा रहा था इसी बीच चची के पेअर मेरी कमर पर कास गए और उन्होंने हाथों से मेरी पीठ को कास लिए मैं समझ गया चची झड़ने वाली हैं और ये ख्याल से hi मुझे भी अपना रास लुंड में भरता हुआ महसूस हुआ..

खैर मैंने खुद को रोकने की कोशिश की पर चची की छूट का कसना साथ hi उनका बदन का अकड़ना मुझे भी उनके साथ चरम सुख के वेग में बहा ले गया.

और जल्दी hi मेरे लुंड ने पिचकारी छोड़ी और चची की छूट को अपने रास से भर दिया. झड़ने के बाद कुसग देर यूँ hi रहने के बाद तै ने मुझे धकेल के ऊपर से उठा दिया और बैठे बैठे hi अपने कपडे पहनने लगी और मुझसे फुसफुसाते हुए बोली- अब तो हो गयी न तेरी गर्मी शांत अब नीतू के पास नहीं दिखना.

ये कहकर वो कपडे पहन चली गयी और मैं भी मस्त होकर उठा चुपचाप से दीवार फंड कर बहार आ गया गली में, बड़ा खुश था की एक और छूट मेरे लुंड को नसीब हो गयी वो भी इतनी गदराई हुई रज्जो चची की, और रही बात नीतू की तो देखते हैं कब तक रज्जो चची बचा पाती हैं उसे मुझसे.

खैर यहाँ तो मैं खुश था पर बाकि घरो में भांग का नशा क्या असर दिखा रहा था वो जानने के लिए अगली अपडेट का इंतज़ार करें पर उससे पहले इस पर अपना कीमती रिव्यु ज़रूर देते जाएँ.
 
अपडेट 179



सरलपुर

सब लोग अंदर आकर बैठे हुए थे गर्मी में ठंडी ठंडी कोल्डड्रिंक अलग hi ठंडक दे रही थी और खूब ठहाके लगाकर बातें हो रही थी…

आगे बढ़ने से पहले नए लोगो से मिलवाना ज़रूरी है, चंचल के माता पिता,

उदयवीर( चंचल के पिता)- चंचल के पिता बिलकुल गाओं के किसान, खेतों में पसीना बहा बहा कर शरीर बिलकुल कैसा हुआ, रोबदार मूंछें, पर बहुत hi सीधे साढ़े इंसान हैं.

बिमला (चंचल की माता)- ये भी गाओं की शुद्ध ग्रहणी, जानवरो और घर के काम करने से बदन कैसा हुआ है पर गदराया हुआ, रंग गोरा, कामुक बदन है, इन्हे देख कर पता चलता है की चंचल को खूबसूरती कहाँ से मिली है.

खैर चंचल के माता पिता के आ जाने से खुशियां बढ़ सी गयी थी और अब सब हर प्रकार से खुश थे, खैर थोड़ी देर बातों के बाद तय हुआ की थोड़ी देर सब आराम कर लें क्यूंकि सफर से आये हैं.

घर में कुल 6 कमरे थे जिसमे हर जोड़े को एक एक कमरा दे दिया गया था अब बचते थे बेचारे दो कुंवारे ख़ुशी और विनीत तो ये तय हुआ की ख़ुशी रिमझिम और रमन के साथ कमरा बांटेगी और विनीत ने खुद से बोलै वो आंगन में hi खुश है फिर भी ज़रुरत पड़ेगी तो अपने ताऊ और तै जी के कमरे में शरण लेगा.

खैर थोड़ी देर बाद पूर्वी और रिमझिम पूर्वी और पंकज( पूर्वी का पति) के कमरे में थे पंकज रमन के साथ आंगन में बातचीत में व्यस्त थे तो दोनों बहनें यहाँ बातों में व्यस्त थी.

पूर्वी- बढ़िया गाओं है ये तेरी ससुराल रिम्मी, और ये घर भी ाचा बना हुआ है.

रिम- वो तो है अब तो लोग भी कितने सरे हक गए न.

पूर्वी- हाँ मज़ा आ रहा है.

रिम- मज़ा तो अभी और आएगा.

पूर्वी- कैसे.

रिम- कैसे क्या तू खुद सोच तीन जवान बहुएं, तीन गदराई हुई कामुक सास, और एक कुंवारी ननद, दूसरी और तीन जवान शादीशुदा पर प्यासे मर्द, तीन ठरकी अधेड़ उम्र के बूढ़े और एक कुंवारा जवान मर्द इनको एक hi घर में रखेंगे तो कुछ न कुछ समीकरण तो बनेंगे hi.

रिमझिम की बात सुन पूर्वी हंसने लगी और बोली- अगर नहीं बनेंगे तो हम बनाएंगे

ये कहकर दोनों ताकि मरकर हंसने लगी.

चोदामपुर

जहाँ कर्मा सबको बोलकर घर के बहार से hi नीतू से मिलने चला गया था वहीं बाकि सब आकर घर में बैठे hi थे की कर्मा की नयी नवेली संतो तै से भांग झेली नहीं गयी और वो बाथरूम में जाकर उल्टियां करने लगी तो बाकि सबने उनकी मदद की उलटी करने के बाद नीलेश ने अपनी भाभी को कमरे में लेजाकर लिटा दिया और वो सोने लगी वहीं बाकि सब यानि सभ्य शालू ममता पल्ली नीलेश राजन शैलेश और अनुज आंगन में आकर बात करने लगे…

ममता – लगता है जीजी से चोदामपुर की भांग नहीं झेली गयी.

Sabhya-are पी भी तो कितना गयी ऐसे पि रही थी जैसे पानी

राजन- और नहीं तो क्या हर किसी से नहीं झेली जाती भांग.

शालू – वैसे पि तो हमने भी बहुत सर घूम रहा है.

शैलेश – हाँ यार जब तक सही से भांग चढ़ पाई तब तक खेल ख़तम हो गया अभी तो मज़ा आना शुरू हुआ था.

ममता- अरे भैया बहार थोड़े hi खेलेंगे पूरे दिन और रही खेल की बात वो तो कभी भी खेल सकते हैं..

पल्ली जो की सुबह से हुई रगड़े और भांग के नशे से उत्तेजित थी उसकी छूट में खुजली मच रही थी पर सबके सामने बेचारी क्या hi बोलती पर उसने एक उपाय सोचा और बोली- मम्मी मैं जा रही हूँ नहाने तुम लोग बातें करो,

ममता- ठीक है बीटा भूख तो नहीं लगी.

पल्ली- अनुज तू भी चल वो भांग से थोड़ा सर घूम रहा है.

सभ्य- अरे तो जा क्यों रही है यही सजा न.

पल्ली – नहीं तै नहाने का मन कर रहा है और कपडे घर पर हैं ये सरे देखो कैसे गंदे हो रखे हैं.

सभ्य- ठीक है अनुज जा बीटा छोड़ आ इसे.

अनुज अपनी माँ की बात सुनकर उठा तो अकस्मात् hi उसकी नज़र अनुज की धोती में बने उभर पर गयी जिससे देखकर सभ्य के चेहरे पर मुस्कान आ गयी वो समझ गयी ये छोडंर के साथ छोड़ कर भी आएगा, वैसे ये उभर देखा तो ममता राजन शालू और नीलेश ने भी पर सबको hi पता था क्या होने वाला है इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा और दोनों निकल गए.

जैसे hi पल्ली और अनुज पल्ली के घर में घुस hi रहे थे वैसे hi पल्ली की नज़र सामने से आते हुए कर्मा पर पड़ी, जो की रज्जो चची को छोड़कर ख़ुशी से झूमता हुआ चला आ रहा था.

पल्ली ने तुरंत आवाज़ लगाकर उसे रोका- भैया

कर्मा- अरे पल्ली अनुज तुम लोग यहाँ बाकि सब कहाँ हैं.

पल्ली- बाकि सब तुम्हारे घर पे हैं, मैं और अनुज बहाना बना कर आये हैं.

कर्मा- कैसा बहाना.

पल्ली- अरे ज़्यादा भोले मत बनो आ जाओ तुम भी अंदर चलो, बहुत दिन hi गए दोनों भाई से एक साथ सेवा करवाए हुए.

अनुज- इसकी खुजली बहुत बढ़ रही है भैया.

कर्मा- तो क्या हुआ मिटाना हमारा काम है चल पल्ली.

तो क्या हुआ अगर कर्मा अब्बी कुवह देर पहले hi रज्जो चची को छोड़ कर आ रहा था तो पल्ली जैसी जवान सूंदर लड़की को कौन मन कर सकता था, इसलिए दोनों भाई घुस गए अंदर, अनुज ने दरवाज़ा बंद किआ और फिर जल्दी hi तीनो एक कमरे में बीएड पर नंगे थे जहाँ पल्ली अपनी एक करवट पर लेती हुई थी जिसके पीछे अनुज लेता हुआ था अनुज का लुंड पल्ली की कासी हुई गांड में अंदर बहार हो रहा था वहीं कर्मा पल्ली के चेहरे के पास लेता था और पल्ली के कर्मा के कड़क लम्बे लुंड को चूस रही थी.. उन्हें देखकर यही लग रहा था की ये सिर्फ अभी एक शुरुआत थी आगे बहुत कुछ होना था..

वहीं कर्मा के घर में जब पल्ली और अनुज चले गए तो ममता दरवाज़ा बंद करने गयी इधर बाकि लोग आँगन में बैठ बातें कर hi रहे थे की बापिस आते हुए ममता चुपके से हाथ में बाल्टी लिए आई और पीछे से शैलेश के ऊपर पलट कर पूरा तर दिया..

इससे सब लोग चौंक पड़े और खिलखिलाकर हंसने भी लगे,

ममता- क्यों भैया बहुत बोल रहे थे न के जब मज़ा आना शुरू हुआ तो खेल बंद हो गया.

शैलेश- भाभी अब हम तुम्हे नहीं छोड़ेंगे,

ये कहकर मौसा ममता चची के पीछे भागे सब लोग उनको देख हंस रहे थे, चची पूरे आँगन में भाग रही थी इधर उधर वहीं शैलेश उनके पीछे थे, उन्होंर जल्दी से एक बाल्टी उठाई भरी हुई और हमले के लिए तैयार थे पर ममता के लगातार भागने से वो कुछ कर hi नहीं प् रहर थे तब भी एक जगह मौका देख उन्होंने बाल्टी को झूलकर पानी फेंका तो वो ममता की जगह उनकी साली यानि सभ्य पर पड़ा जो की ऊपर से नीचे भीग गयी.

इसे देखकर जहाँ सभ्य चौंकी वहीं बाकि सब और मज़े लेने लगे, हालाँकि सभ्य के गदराया बदन से भीगकर कपडे चिपक गए जो उसे और कामुक बनाने लगे साथ hi भांग का नशा तो लोगो के लुंड पर असर होना ज़रूरी था, शालू एक तरफ बचते बचते हुए पूरे मज़े लव रही थी देख कर, सभ्य ने भीगने का बदला लेने के लिए न जाने क्या दिमाग में आया तो दो दिन पहले hi कोल्हू से भरकर तीन ड्रम आये थे कड़वे tel(sarson का तेल) उसमे से एक का ढक्कन खोला और कटोरी भर कर शैलेश के ऊपर फ़ेंक दिया बेचारे का सीना और पेट तेल से भीग गया अब पानी तक तो ठीक था पर तेल तो वैसे भी इतना चिकना होता है तो उससे बचने को शैलेश भागे पर सभ्य ने दूसरी कटोरी भरी और उनके पीछे भागने लगी, अब कर्मा के मौसा जी आगे आगे और और उसकी भीगी माँ पीछे पीछे जिसके बड़े चूतड़ भीगी साड़ी भागते हुए देखकर सबके लुंड तन रहे थे राजन चाचा का भी बुरा हाल था ये सब देख कर…

अब दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है यही यहाँ हुआ और ममता ने दूसरी और से शैलेश को घेर लिए और इधर से सभ्य ने बेचारे दोनों गदराई हुई औरतों के बीच ऐसे फंसे की नीचे hi बैठना पड़ा बस फिर क्या था दोनों ने आराम से कटोरी से शैलेश को तेल से नहलाना शुरू किआ जहाँ सभ्य तेल को उनके बदन पर गिरा रही थी वहीं ममता हाथों से तेल को उनके बफन पर मॉल रही थी अब भांग का नशा ऊपर से इतनी गदराई औरतों ने घेरा हुआ था साथ ममता का बदन पर हाथ फिरना धोती के नीचे उनका लुंड अकड़ रहा था और धोती जो की बिलकुल गीली होकर चिपक कर पारदर्शी हो रही थी और उन्होंने किस रंग की चड्डी पहनी थी वो सब को दिखा रही थी.

शालू अपने पति को चिढ़ाते हुए बोली – क्यों जी कैसी लगी मालिश.

शैलेश – दो लोग मिलकर हुम्ला कर रहे हैं, अरे भाई सब कैसे मर्द हो तुम दोनों अकेले मर्द का शोषण हो रहा है और तुम मज़े ले रहे हो बैठ कर.

अब शैलेश ने दोनों की मर्दानगी को छेड़ा तो जोश में आना hi था वैसे नीलेश ने तो अपनी चाल पहले hi चल दी थी और चुपके से सबका ध्यान उनकी और लगा देख एक लोटा तेल का भर लिए था और जब तक किसी को खबर होती तब तक तो वो लोटा उन्होंने अपनी गदराई साली पर उढेल दिया था अचानक हुए हमले से शालू बिलकुल hi चौंक गयी बेचारी के पूरे बदन पर तेल फ़ैल गया, खैर इसके बाद भी नीलेश यहाँ पर hi नहीं रुके बल्कि उन्होंने तेल उड़ेलने के बाद लोटा फेंका और उस तेल को अपनी साली के बदन पर लगाने लगे और इसी बहाने साली के गदराये बदन को छूने का मज़ा उठा रहे थे,

शालू- हाय ढैय्या जीजा छोडो नाहीइइइइइइ जीजी देखो जीजा कोऊ.

शालू चिल्ला रही थी पर साथ hi अपने पति के सामने जीजा से ऐसे छुए जंव पर उत्तेजित हो रही थी. इधर कुछ पल के लिए जैसे hi सबका ध्यान शालू पर था उसका पूरा फायदा राजन ने उठाया और उन्होंने कटोरी या लोटा तो छोडो पूरा जग तेल से भरा और छुपके से अपनी सभ्य भाभी के पीछे गए और उनके ऊपर उढेल दिया सभ्य तो पूरी तेल से नाहा hi गयी, पूरे आँगन में जिधर देखो तेल hi तेल बाह रहा था..

सभ्य बेचारी कुछ पल तो बिलकुल चौंक कर कड़ी hi रही और उसके बाद राजन के पीछे भागी… राजन आगे आगे बचते हुए भाग रहे थे की शालू जो खुद तेल में तर होकर बदले की तलाश में थी उसने हाथ में लिए कटोरे मेज भरे हुए तेल को राजन के सामने से मारा तो राजन ने बचने की कोशिश की और उलटे पाऊँ भागे पर पीछे से सभ्य आ रही थी तो बेचारे ने ब्रेक लगाने की कोशिश की पर ज़मीन पर तेल की वजह से उनका पेअर फिसला धड़ाम से अपने चूतड़ों पर गिरे उनके गिरते hi सभ्य भी अपने आपको रोक नहीं पाई तेल की वजह से और राजन के ऊपर गिर गयी..

सभ्य का तेल से सना हुआ ब्लाउज और उसके क़ैद मोती चूचियां राजन के सीने में धंसी तो राजन का तो रोम रोम खिल उठा, वहीं जैसे hi सभ्य पूरी गिरी तो उसे भी आपही जांघ पर एक कड़क एहसास हुआ जिसकर बाद सभ्य को समझ आ गया वो क्या है, कोई और वक़्त होता तो बहुत अजीब लगता पर एक तो भांग का नशा ऊपर से इतनी मस्ती चल रही थी तो सभ्य ने ध्यान मस्ती पर लगाया..

दोनों के गिरने का फायदा शालू ने भरपूर उठाया और दोनों के ऊपर तेल डालने लगी और फिर नीचे बैठकर जमीन से तेल मॉल मॉल कर राजन के बदन पर लगा मॉल रही थी, वहीं सभ्य भी जितना उठ प् रही थी उससे यही कर रही थी और राजन के नंगे बदन पर हाथ फिरा फिरा कर उसे चिकना कर रही थी, वहीं राजन के तो मज़े hi मज़े थे दोनों गदराई बहनो के बीच फंस कर वो भी नीचे हाथ में तेल मॉल मॉल कर सभ्य के गदराये बदन पर हाथ फिरा रहे थे कभी कोमल कनार को छूइटे तो कभी गदराये चूतड़ों को.

राजन- भाभी आज हम न छोड़ेंगे दोनों को.

शालू- अरे जीजा पहले खुद को तो बचालो.

जहाँ दोनों बहनें राजन में लगी हुई थी वहीं दोनों के पति ने ममता को अपना शिकार बनाया हुआ था दोनों ने ममता को नीचे बिठाया हुआ था क्यूंकि दोनों hi ममता को छोड़ चुके थे तो दोनों hi बिलकुल फ्री थे ममता के साथ और उसे शैलेश ने पीछे से पकड़ा हुआ था और आगे से उसके बदन पर नीलेश तेल दाल रहे थे, शैलेश पीछे बैठे बैठे तेल को उसके बदन पर मॉल रहे थे और इसी बहाने कभी चूचियां दबाते तो कभी साड़ी के ऊपर से hi उसकी छूट खुजा रहे थे, वहीं ममता को भी पीठ पर शैलेश का लुंड ठोकर मार मार कर अपना एहसास करा रहा था,

पर ममता भी कहाँ काम थी उसने भी सामने खड़े नीलेश की धोती पकड़ ली और उसे खींचने लगी नीलेश एक हाथ से धोती पकड़े हुए दुसरे से शैलेश का साथ देने की कोशिश कर रहे थे, पूरा आँगन ऐसा लग रहा था जैसे सरसो के तेल का तरड़ ताल हो हर जगह तेल hi तेल था ऊपर से अब तो सरे लोग बिलकुल तेल में सराबोर हो चुके थे

शालू ने जब दोनों को ममता के साथ देखा तो औरत होने के नाते दूसरी औरत की मदद करने के लिए भागी पर राजन को जैसे उसी मौके की तलाश थी उसने शालू को भागता देखा तो उसकी साड़ी का पल्लू पकड़ लिए अब शालू तेल की वजह से रुक तो नहीं पाई सीढ़ी फिसलती हुई आगे हुई और उसकी साड़ी उसकी कमर से खुलती चली गयी और राजन के हाथ में hi रह गयी, इधर शालू आगे फिसल कर सीढ़ी नीलेश से टकराई जिसकर टकराते hi नीलेश का संतुलन बिगाड़ा और उनके हाथ से धोती छूट गयी जो की तब्सर ममता खींच रही थी, साथ hi शालू के गिरने से नीलेश आगे गिरे ममता पर जो की पीछे लेट गयी शैलेश पर, .

शैलेश को तो मज़ा आ गया क्यूंकि उनका लुंड ममता की गद्देदार गांड में धंस गया पर साथ hi ममता की जान hi निकल गयी क्यूंकि ऊपर से नीलेश वो भी जिसके बदन पर सिर्फ चड्डी बची थी वो भी खड़े लुंड को छुपाने में असफल हो रही थी ममता के ऊपर गिरे, एक पल को तो ममता को यूँ लगा जैसे नीलेश का लुंड साड़ी और चड्डी फाड़ कर सेंधा उनकी छूट में समां गया है क्यूंकि गिरने से लुंड की ठोकर सीढ़ी ममता की छूट पर पड़ी, वहीं नीलेश को अपनी पीठ पर एक गुदगुदा एहसास हुआ जो की शालू की बड़ी बड़ी छुछियां का उनकी पीठ पर डाब जाने के कारन था, साथ hi क्यूंकि साड़ी नहीं थी तो नीलेश को अपनी पीठ पर शालू के नंगे पेट का एहसास हुआ जिससे वो और उत्तेजित हो गए, खैर खिलखिलाते हुए सब गिरने के बाद इधर उधर हुए तो शैलेश की नज़र अपनी पत्नी पर पड़ी जिसके बदन से साड़ी गायब थी. साथ hi पेटीकोट भी तेल में भीगे होने के कारन पारदर्शी हो चूका था और उसके बदन से ऐसा चिपका हुआ था की हर एक उतर चढ़ाव देखा जा सकता था. वहीं सीधे होने पर शालू की नज़र जीजा की जांघों के बीच स्व हैट नहीं रही थी क्यूंकि ऐसा लग रहा था की लुंड अभी कच्चा फाड़ के बहार आ जायेगा. साथ hi कच्चा भी ऐसे चिपका हुआ था की लुंड की नस तक नज़र आ रही थी, शालू तो उसे देख और गरम होने लगी…

अपनी पत्नी को दो अन्य मर्दो के सामने यूँ देखकर शैलेश को एक अलग hi प्रकार की उत्तेजना हुई साथ hi एक अजीब सा एहसास हुआ, अगर भांग का नशा न होता तो शायद उनकी प्रतिक्रिया कुछ अलग होती, पर अभी जो प्रतिक्रिया उन्होंने दी वो खुद को hi छौंकर वाली थी, अपनी पत्नी को ऐसे देख शैलेश खड़े हुए और बगल में पड़ी ममता का साड़ी का पल्लू खींचने लगे और जब तक ममता उन्हें रोक पति तब तक तो साड़ी उसके बदन से अलग हो चुकी थी अब दो औरतों की साड़ी उतर चुकी थी और वो गीले पारदर्शी पेटीकोट में अपना गदराया बदन दिखा दिखा कर मर्दों के लोडे खड़े कर रही थी.

वहीं शैलेश की तर्ज राजन ने भी जब अपनी पत्नी को बिना साड़ी के देखा तो हालाँकि उन्हें अधिक फ़र्क़ नहीं पड़ा पर अपने फायदे के लिए उन्होंने वही किआ जो शैलेश ने किया था और जल्दी से लपक कर सभ्य भाभी की साड़ी का पल्लू पकड़ उसे खींचने लगे वही सभ्य ने जब ये देखा तो अपना बचाव करते हुए वो दुसरे हाथ से राजन की धोती खींचने लगी, दोनों के hi हाथ में एक दुसरे की धोती थी कुछ पल खींचातानी यूँ hi चली की फिर खुद को बचने के लिए सभ्य ने दिमाग लगते हुए उठकर भागने का फैसला किआ जैसे hi उठ कर भागी तो राजन भी उसके साथ उठे और भगव तेल की वजह से सभ्य का पेअर फिसला और नीचे गिरी पर गिरते हुए वो राजन की धोती को खोलते हुए ले गयी, जैसे hi राजन की धोती खुली उसने भी सभ्य की साड़ी को पकड़ कर खींचा जिस्व सभ्य बचा नहीं पाई और उसकी साड़ी भी उसके बदन से अलग हो गयी नीचे लेती सभ्य को शायद hi कभी राजन ने ऐसे देखा हो पेटीकोट ब्लाउज में वो भी दोनों इस कदर भीगे थे की सब कुछ दिखा रहे थे वहीं दोनों के बीच सभ्य का गदराया सपाट पेट और बीच में गोल गहरी नाभि जिसे देख कर hi राजन का मन गंगानने लगा, और उसका नज़र नीचे लेती सभ्य ने देखा कैसे राजन का लुंड उनकी चड्डी में ऊपर नीचे ठुमके मार रहा है..

नीलेश ने जब सबकी तरह अपनी बीवी की भी साड़ी उतारते देखा तो वो तो इतने उत्तेजित हुए की उन्होंने थोड़ी दूर में उठने की कोशिश कर रही शालू को दबोच कर गिरा लिए और उसे लिटा कर ज़मीन से तेल हाथों में घिसकसर उसके बदन पर लगाने लगे और सबसे पहले तो उन्होंने शालू के नंगे पेट को निशाना बनाया..

और उसे तेल लगाने के बहाने हाथों से मसलने लगे, शालू आह जीजा अब रहने दो ये सब की सिसकियाँ भरने लगी.. राजन ने जब ये देखा तो उन्होंने सोचा ऐसा मौका शायद hi कभी मिले और उन्होंने भी जल्दी से सभ्य को एक बार फिर से दबोच लिए और नीलेश की देखा देखि उन्होंने भी थोड़ी झिझक के साथ अपना हाथ सभ्य के गदराये पेट पर रख दिया.. अह्ह्ह उसके कोमल पेट की त्वचा को हाथ लगते hi राजन के बदन में जैसे बिजली दौड़ गयी..

सभ्य- अह्ह्ह्हह भैया छोडो न अब तो पूरा तेल में भीगा दिया तुमने

राजन- ऐसे कैसे छोड़ दूँ भाभी कभी कभी तो खेलने का मौका मिलता है साथ में.

राजन अपनर हाथ को सभ्य के पेट पर सहलाते हुए बोल रहे थे सभ्य भी नीचे लेती हुई राजन के हाथों में मछली की तरह तड़प रही थी..

वहीं चाहे उँचाहे सभ्य भी ये बात स्वीकार कर रही थी की राजन की इन स्पर्श से वो उत्तेजित हो रही थी साथ hi उसकी छूट भी गीली हो रही थी.

उधर शैलेश ने जब ये देखा की राजन उनकी गदरायी हुई साली से अकेले मज़े ले रहा है वो भी उस साली से जीवके बदन को छू बगैर लेने जे ख्याल से उनका लुंड खड़ा हो जाता था, हालाँकि उनका सम्मान शैलेश बहुत करते थे पर ये भी मानते थे की बड़ी साली का बदन ऐसा है किसी का भी इमां दोल जाये और राजन को उस बदन से खेलते देख उनका भी इमां दोल रहा था, तो शैलेश भी लालच मैं आकर उठे और सभ्य राजन की और भागे उनके भागते hi ममता ने उनकी धोती पकड़ लिए जो वैसे hi आधी खुली थी पूरी तरह खुल कर ममता के हाथ में hi ा गयी और बाकि दोनों की तरह शैलेश भी अब सिर्फ एक कच्चे में थे जिसमे उनका खड़ा लुंड साफ़ दिखाई दे रहा था.

राजन सभ्य के पास पहुँच कर शैलेश भी सभ्य के बगल में लेट गए अब सभ्य के दोनों तरफ दो पराये मर्द थे एक देवर तो एक जीजा, और दोनों hi सभ्य के दोनों और लेट गए शैलेस भी राजन की तरह सभ्य के बदन पर हाथ फिरने लगे, सभ्य को भांग का नशा और साथ hi दो लोगो के बदन पर चलते हाथ अब बेहद उत्तेजित करने लगे वो दोनों के बीच पड़ी सीसिया रही थी. तेल की वजह से चिकना होने पर सभ्य का बदन और कामुक लग रहा था, और उस पर दोनों को हाथ फिरने में उतना hi मज़ा आ रहा था.

सभ्य की उत्तेजना का एक कारन ये भी था की राजन और शैलेश दोनों के लुंड hi दोनों तरफ से उसकी जांघों पर ठोकर मार रहे थे, पति के होते हुए गैर मर्दो से ऐसे बदन का मसलवाना शैब्या कस लिए अलग hi एहसास था. एक और अजीब ब्बि लग रहा था वहीं एक अलग प्रकार की उत्तेजना भी हो रही थी.

वही ममता नीलेश और शालू की और लुढ़क गयी और नीलेश अब पेट और कमर के साथ साथ शैली की चूचियों को भी हल्का हल्का ब्लाउज के ऊपर से सहला रहे थे, तेल की वजह से शालू क चिकना बदन और चिकना हो रहा था.

ममता ने पास आकर अपनी शरारत शुरू कर दी और सीधा हमला नीलेश पर न बोल उसने शालू पर किआ और अपने हाथ आगे ले जाकर शालू की छूछीयो पर रख उन्हें मसलने लगी जिससे शालू की तो सिसकियाँ तेज़ हो गयी.. वहीं नीलेश की उत्तेजना बाद गयी वो अपना लुंड शालू की जांघो पर एक तरफ से घिस रहे थे वहीं शालू तो दोहरे हमले से गंगना रही थी छूछीयो का ममता द्वारा मसाले जाना बदन पर चलता नीलेश का हाथ जो कभी नंगे पेट को मसलता तो कभी नाभि को कुरेदता. शालू तो तड़पते हुए अपने होश खोने लगी…

इधर दूसरी और भी उत्तेजना का वैसा hi सैलाब आया हुआ था, सभ्य अभी भी दोनों के बीच में एक चिड़िया की तरह फड़फड़ा रही थी तो वहीं दोनों बाज की तरह सभ्य को नोच रहे थे. साथ hi दोनों के लुंड लग रहा था कच्चा फाड़ कर सभ्य की जांघों में hi आज नया छेड़ बनाकर. घुस जायेंगे.. सभ्य की सिसकियाँ लगातार चल रही थी और दोनों hi उसे दबाये हुए थे उतने नहीं दे रहे थे.. तभी सभ्य को अचानक से एक चीख सुनाई दी तो उसने और बाकि दोनों ने भी उस चीख की और देखा तो देखकर चौंक गए क्यूंकि ममता ने दो कदम आगे बढ़ाते हुए शालू का ब्लाउज खोल लिए था और उसे उतारकर अलग फ़ेंक दिया, जिस वजह से शालू चीखी थी, शालू की बड़ी बड़ी छुछियां जो की ब्रा में अंदर काम और बहार ज़्यादा थी उन्हें देखकर तो सबके होश hi उड़ रहे थे, नीलेश तो उसके बराबर में लेते बस उसकी चूचियों को देखे जा रहे थे और मन hi मन सोच रहे थे सारा यौवन लगता है इन दोनों बहनों में hi बाँट दिया है कामदेव ने, राजन का मुँह भी खुला का खुला हुआ था शालू को ऐसे देखकर उनको तो लग रहा था जैसे किसी ने रिमोट से पॉज बटन दबा दिया हो, शैलेश भी अपनी बीवी को सबके सामने सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में देख पागल से होने लगे उत्तेजना से, उनका लुंड कच्चे क्र अंदर hi ठुमके लगा रहा था,





दोनों के शालू को मंत्रमुग्ध होकर देखने का फायदा सभ्य ने उठाया और वो दोनों की पकड़ से छूट कर भागी, राजन और शैलेश ऐसे खोये थे की उन्हें पता भी नहीं चला की सभ्य कब उनके हाथ से निकल गयी है, सभ्य ने आगे पहुंच कर अपनी बहन का बदला लेने के चक्कर में ममता को पकड़ कर उसके ऊपर बैठ गयी और उसका ब्लाउज खोलने लगी शालू ने भी जल्दी से उठ कर अपनी जीजी की मदद की और ममता के हाथ पकड़ लिए और जिसका नतीजा हुआ की जल्दी hi ममता का ब्लाउज भी खुल गया और दोनों बहनो ने उसे ममता के बदन से अलग कर फ़ेंक दिया,

अब ममता भी शालू की तरह सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में थी शालू इतने में नहीं रुकी और ब्लाउज के ऊपर से ममता की पापीती जैसी छुछियां दबाने लगी, नीचे दबी हुई ममता अपने हाथ पेअर मार रही थी…

उधर सरे मर्दों का बुरा हाल था ये सब देखकर एक तो औरतें िट्जे काम कपड़ो में ऊपर से तेल से भीगे होने के कारन लगभग ऐसा hi लाफ रहा था की नंगी हैं.. तीनो के लुंड बिलकुल फटने को हो रहे थे,

सबसे बुरा हाल राजन का था क्यूंकि पहले तो सभ्य के बदन से खेलना और फिर शालू को इस हालत में देखना उन्हें लग राग था की उनका लुंड फैट जायेगा, अनजाने में hi वो अपने लुंड को कच्चे के ऊपर से hi सहलाते हुए तीन गदराये बदन की औरतों की कुश्ती देख रहे थे..

नीलेश भी किसी तरह सांस ठाणे बैठे हुए थे हालाँकि उनका मन तो कर रहा था की लुंड निकल कर अब्बी किसी की गांड में घुसा कर खूब छोड़ें पर सबके होने की लाज शर्म उन्हें रोके हुई थी,

वहीं तीनो औरतों की गुथम गुत्थमगुत्था जारी थी, ममता ने पलटी मार कर सभ्य को नीचे कर लिए था और अब उसके ब्लाउज को खोलने की कोशिश कर रही थी वहीं शालू उसे रोकने की कोशिश कर रही थी…

इधर नीचे लेती सभ्य हाथ पाऊँ चला कर ममता को हटाने की कोशिश कर रही थी और इसी बीच सभ्य के हाथ में ममता के पेटीकोट का हिस्सा आ गया जिसे सभ्य ने पीछे से पकड़ के ऊपर उठा दिया और ममता के बड़े बड़े चूतड़ सबके सामने आ गए, अंदर पंतय ममता पहनती नहीं थी तो दोनों नंगे चूतड़ सबके सामने आ गए जिनके सामने hi शैलेश और राजन बइठस थे हालाँकि वहां मौजूद तीनो hi मर्द ममता के बदन को भोग चुके थे पर अभी परिस्थिति hi ऐसी थी की उसे ऐसे देख उनकी सांसें चलने लगी… सभ्य वहीं नहीं रुको बल्कि पेटीकोट ऊपर कर ममता के चूतड़ों को मसलने लगी.. जिससे सामने बैठे लोग उसकी खुलती बंद होती छूट साफ़ देख प् रहे थे..

राजन से और सहना मुश्कल हो गया ुनहु लगा की अगर लुंड को आराम नहीं मिला तो उनका लुंड एयर दिमाग दोनों hi फैट जायेगा, इसलिए राजन उठे और ममता और सभ्य की और आगे बढे और जल्दी दोनों के पास पहुँच कर दोनों की hi टैंगो के बीच झुककर बैठ गए और फिर अपना कच्चा नीचे कर खड़ा लुंड निकला और आगे होते हुए ममता के चूतड़ों पर चल रहे सभ्य के हाथों के ऊपर हाथ रख दोनों चूतड़ों को हल्का सा फैलाया और अपने लुंड के टोपे को अपनी पत्नी के गांड के छेड़ पर रखकर धक्का लगाया तो तेल की वजह से गांड और लुंड इतने चिकने थे की लुंड सरसराता हुआ ममता की गांड में समां गया..

जिसके साथ hi ममता के मुँह से एक चीख निकल गयी… सब लोग राजन की ये हरकत देख हैरान रह गए, नीलेश शैलेश शालू ये सोचने लगे की ये अचानक हुआ क्या साथ hi उनकी उत्तेजित भी हो गए की कैसे राजन ने सबके सामने अपनी पत्मि की गांड में लुंड घुसा दिया था. हालाँकि सभ्य को तो ठीक से समझ नहीं आया ये हुआ क्या है बस उसे अपने हाथों पर किसी के हाथ महसूस हुए थे अपने ऊपर ममता के होने से वो नीचे का कुछ देख hi नहीं प् रही थी. शालू की नज़र तो राजन के लुंड पर और ममता की गांड पर जैम सी गयी उसके खुद के बादब में सौ चीटियां रेंग रही थी.

नीलेश ने कुछ पल बाद होश संभल कर बोलै- ये यह क्या कर रहा है रे कुछ तो शर्म कर.

राजन ने एक और करारा धक्का लगाकर पूरा लुंड बीवी की गांड में तेल दिया और बोले- भैया शर्म आराम गयी भाड़ में हमसे नहीं रुका गया और..

ये कहकर राजन हलके हलके धक्के लगाकर ममता की गांड मरने लगा जिस पर ममता भी सिसकने लगी.

सभ्य जो की अभी तक अनजान थी उसने सिसकती हुई ममता को देखा और साथ hi उसे अपनी जांघों पर जांघें टकराने का एहसास होने लगा उसे कुछ आशंका तो हुई पर निश्चित करने के लिए उसने बोलै- क्या हुआ है जी किसने क्या किआ.

नीलेश कुछ बोलते उससे पहले ममता जो की सभ्य के ऊपर बैठी थी वो सभ्य की आँखों में देखते हुए बोल पड़ी- आह्हः जीजी देखो न अपने अपने देवर को सबके सामने तुम्हारे ऊपर बिठा कर अपना लुंड मेरी गांड में घुसा दिया है अह्ह्ह जीजी.

ममता की ये बात सुनकर सभ्य के बदन में तो जैसे झुरझुरी सी दौड़ गयी, उसका पूरा बदन सिहर गया जैसे hi उसे एहसास हुआ की राजन उसके ऊपर लेती ममता की गांड मार रहा है और वो उनके नीचे सिर्फ एक पेटीकोट में लेती है.. बाकि तीनो तो इस नज़ारे को बिना पालक झपकाए देखे जा रहे थे हालाँकि शालू उनसे दूर नहीं थी

वो ममता और सभ्य के सर की और hi थोड़ा हैट कर बैठी हुई थी, ये सब देख कर उसका हाथ भी खुद बा खुद अपनी छूट को पेटीकोट के ऊपर से hi सहला रहा था,

सभ्य तो अचम्भे में और उत्तेजना में थी की उसके साथ क्या हो रहा है उसका बदन इतना उत्तेजित हो रहा था, की उससे संभाले नहीं संभल रहा था, अपनी गांड मरवाती हुई ममता उसके ऊपर झुकी हुई उसके चेहरे के भावों को देख रही थी, उसे सभ्य की आँखों में वासना के डोरे तैरते साफ़ दिख रहे थे इसी का फायदा उसने उठाया और खुद की गांड को और फैलते हुए अपने पति के लिए वो सभ्य पर और झुक गयी और यूँ कहें की उसके ऊपर लेट सी गयी और अगले hi पल ममता ने अपने होंठ सभ्य के होंठों पर रख दिए और उसके होंठों को चूसने लगी, सभ्य भी इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की वो ममता को किसी भी ढंग से रोक नहीं पाई और ममता का साथ देने लगी ये देखकर बाकि बचे लोगो में जो थोड़ा बहुत साबरा और शर्म बची थी वो भी गायब हो गयी ममता के आगे झुकने का असर सभ्य पर और इसलिए पड़ा की अब ममता नीचे से भी सभ्य के बदन से पूरी तरह चिपक गयी और ज्यों ज्यों राजन ममता की गांड में झटके मार रहे थे वैसे वैसे ममता की छूट उसकी छूट से रगड़ खा रही थी जिससे सभ्य की उत्तेजना तो बढाती hi जा रही थी. शालू भी आगे बढ़ी और उसने भी अपने होंठ दोनों के होंठो के बीच घुसा दिए अब तो तीनो गदराई हुई औरतें एक दुसरे के होंठों को पीने लगी जिस्व देख कर शैलेश उठे बिलकुल उत्तेजना से सुन्न होकर अपना कच्चा नीचे सरकाया और अपनी पत्नी शालू जो की आगे की और झुककर सभ्य और ममता को चूम रही थी उसके पीछे जगह ली और उसका पेटीकोट ऊपर की और कर तुरंत बिना किसी देरी के अपना लुंड राजन की नक़ल करते हुए अपनी बीवी की गांड में घुसा दिया, जिसके साथ hi शालू जो ममता और सभ्य के होंठों में व्यस्त थी वो अलग हुई और उसकी चीख निकल गयी जिसे सुन राजन और नीलेश ने देखा तो वो समझ गए, यहाँ तक की राजन ने तो शैलेश का हौसला भी बढ़ाया- ये हुई न बात कह कर.

अपनी पत्नी को छोड़ते हुए शालू की गांड मरै देखकर राजन को एक अजीब एहसास हो रहा था, वो सोच रहे थे शालू की गांड मरने में कितना मज़ा आ रहा होगा शैलेश को, बड़ा नसीबवाला है, अपनी बीवी की गांड मारते हुए सोच किसी और की बीवी के बारे में रहे थे, वैस्व ये तो हर पुरुष की प्रवत्ति होती है और यहाँ तो चुदाई सामने hi चल रही थी. शैलेश भी पूरे आनंद की नदी में बाह रहे थे दूसरो के सामने चुदाई करने में ुनहु एक बड़ा hi अद्भुत सुख मिल रहा था हो उन्हें कभी नहीं मिल था. शैलेश ने भी शालू की कमर को थाम अपना पूरा लुंड बीवी की गांड में घुसा दिया और सबको देखते हुए गांड मरने लगे

ये सब देखकर नीलेश भी उठे और पहले उठकर सबस्व अलग गए और जिस कमरे में संतो सो रही थी उसकी बहार से कुण्डी लगाडी और फिर वहीं खड़े होकर अपना कच्चा उतर पूरा नंगा हो गए और फिर सभ्य और ममता के सर के पास आकर बैठ गए जो की अभी भी एक दूजे के होंठों में खोई हुई थी वहीं बगल में सर टिकाये शालू भी थी जो की अपनी गांड मरवाते हुए सिसकियाँ ले रही थी और ममता और सभ्य की जीभ और होंठों की कुश्ती देख रही थी इसी बीच उसे दोनों के होंठों के बीच कुछ घुसता हुआ दिखा उसको जब एहसास हुआ की वो क्या उसकी छूट ने पानी की कुछ बूँदें टपका दी.. क्यूंकि सामने उसके जीजा जो की जीजी और ममता के सर के पास बैठे थे उन्होंर दोनों के होंठों के बीच अपनर लम्बे लुंड को घुसा दिया था जिसे तुरंत hi सभ्य न्र अपना मुँह खोल अपने अंदर ले लिया वहीं ममता भी बचे हुए हिस्से पर जीभ फिरा कर चाटने लगी.. ये देख शालू के साथ शैलेश की भी उत्तेजना बढ़ गयी उनके हाथों का दबाव शालू की कमर पर बढ़ गया और उनके धक्के और गति दोनों hi और घातक हो गयी.





राजन ने भी देखा कैसे भाई साब के लुंड को दोनों औरतें मिलकर मज़े दे रही हैं जिनमे एक उनकी पत्नी है दूसरी भाई साहब की पत्नी ऊपर से उनका खुद का लुंड अपनी पत्नी की गांड में अंदर बहार हो रहा है, हालाँकि ममता को ऐसे कई बार दोनों मिलकर छोड़ चुके थे पद पर अभी सबके होने से बात hi अलग थी ऊपर से भांग के नशे ने सभी की उत्तेजना को कई गुना बढ़ा दिया था, जो कुवह भी आज इस आँगन में हो रहा था वो बिना भांग के होना बहुत मुश्किल था.

खैर राजन जो की ये सब देख इतने उत्तेजित हो चुके थे उन्होंने ममता की गांड में और तेज़ और लम्बे धक्के लगाने शुरू किये, वो लुंड पूरा सिरे तक बहार लेट और फिर बपुईस जड़ तक घुसा देते.

वहीं शालू पति से गांड मरवाते हुए अपने जीजा के लुंड को सभ्य और ममता जीजी से चुसवाते देखकर अपनी होंठों को काट रही थी, उसका मन तो कर रहा था की वो भी आगे बढ़ उस लुंड को मुँह में भर ले पर पति के सामने की झिझक ने उसे रोका हुआ था. इसी बीच सभ्य अपने पति की गोलियों को मुँह में भरकर चूस रही थी तो उनका लुंड ममता के मुँह में था. वहीं पीछे से ममता अपने पति के लम्बे लम्बे अपनी गांड में झेल रही थी तभी राजन का लुंड बहार आते हुए ममता की गांड से निकल गया और उसे बापिस डालने के लिए जैसे hi उन्होंने नीचे देखकर पकड़ा उनकी नज़र नीचे ममता की जांघों और फिर छूट के ऊपर चिपके हुए पेटीकोट पर पड़ी जो की बिलकुल छूट का अकार बता रहा था ये सब देखकर राजन का लुंड उनके हाथ में ठुमके मरने लगा, राजन कुछ पल सभ्य की छूट को पेटीकोट के ऊपर से hi निहारते रहे पर फिर उन्होंने कुछ ऐसा किआ जिससे की सभ्य और राजन दोनों की hi सिसकी निकल पड़ी…

राजन ने अपने लुंड को पकड़ा और थोड़ा नीचे झुककर उसे सीधा पेटीकोट के ऊपर से hi सभ्य भाभी की छूट पर लगा दिया और पेटीकोट के ऊपर से hi छूट पर थपथपाने लगे, जिसका एहसास पाकर hi सभ्य तड़प उठी, उसके बदन में बिजली दौड़ गयी.. और ऐसा hi कुछ राजन के साथ भी हुआ उसे तो यकीन hi नहीं हो रहा था जो वो कर रहा था उसे देखकर

पर ये सब सभ्य संभल नहीं पाई या न जाने क्या हुआ की वो तुरंत ममता को धक्का देकर उठ गयी, जिससे एक पल को राजन चौंक गए और ममता भी, ममता पीछे पति की और देखने लगी की उन्होंने क्या किआ..

लेकिन सभ्य किसी से कुछ नहीं बोली बल्कि उठकर लगभग घुटनो पर दौड़ती हुई अपने पति नीलेश के पास गयी और उसके सामने पहुँच कर सभ्य ने जो किया वो देख सब हैरान रह गए, सभ्य ने अपने पेटीकोट की डोरी पकड़ कर खींच दी और अगले hi पल पेटीकोट को अपनी टैंगो से अलग कर दिया और सबके सामने सभ्य नीचे से बिलकुल नंगी हो गयी जबकि ऊपर ब्लाउज था, ये सब देख कुछ पल तो सब जमे hi रह गए, राजन और शैलेश का तो सभ्य को यूँ देख मुँह hi खुला रह गया, वहीं सभ्य को तो जैसे सब्के होने से फ़र्क़ hi नहीं पड़ा वो पेटीकोट उतर कर नीलेश के सामने टांगें चौड़ी कर लेती और नीलेश के लुंड को पकड़ कर अपनी रसभरी छूट पर रगड़ने लगी.

राजन और शैलेश पहली बार सभ्य की सुन्दर रसीली छूट देखकर मंगरा मुग्ध हो गए, कैसे तेल और रास की वजह से उसकी छूट चमक रही थी. नीलेश भी अब और रुक नहीं सकते थे लुंड पर पत्नी की छूट जा एहसास होते hi नीलेश बे धक्का लगाकर लुंड अंदर घुसा दिया जिसके घुसते hi सभ्य और नीलेश की आह निकली पर बाकि सब की भी जो आँखें और मुँह फाड़े ये देख रहे थे.. नीलेश ने सभ्य की छूट में हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये तो साथ hi ऊपर हाथ ले जाकर पत्नी का ब्लाउज खोल्नर लगे शायद सभ्य को इस हाल में देखकर वो इतने उत्तेजित हो गए थे, और साथ hi वो अपने साडू और दोस्त को दिखाना चाहते थे की देखो मेरी पत्नी की चूचियां कितनी मस्त हैं अपनी पत्नी को सबके सामने नंगा करने में उन्हें एक अलग hi एहसास हो रहा था… सभ्य को अब नंगे होने या न होने से फ़र्क़ hi नहीं पद रहा था उसे तो छूट में मची खुजली से मतलब था जो की उसके पति का लुंड मिटा सकता था.

जल्दी hi सभ्य का ब्लाउज और ब्रा दोनों अलग कर दिए नीलेश ने और अब अपनी पूरी नंगी पत्नी को लिटा कर छोड़ रहे the,aur सभ्य हर धक्के के साथ सिसक कर पूरे आंगन का तापमान बढ़ा रही थी बाकि उसकी उछलती हुई चूचियां साथ hi उस्क्स कैसा हुआ बदन पति के द्वारा चोदे जनर पर बेहद कामुक लग रहा था





शालू के लिए भी ये एहसास बिलकुल hi अनूठा था वो पहली बार जीजी जीजा की चुदाई ौसे खुल्लम खुल्ला देख रही थी वही हाल ममता राजन और शैलेश का भी था, राजन तो बेचारा जबसे सभ्य हैट कर गयी थी तबसे hi लुंड थामे वैसे hi रुक कर इस अद्भुत दृश्य का आनंद ले रहा था, शैलेश का भी यही हाल था हालाँकि उनका लुंड अब भी शालू की गांड में था जिस कुछ पल होने के बाद वो आगे पीछे चलने लगे.

ममता ब्बि अब उस सम्मोहन से बहार आई और कड़ी होकर उसने अपनी ब्रा और पेटीकोट उतर फेंका और पूरी नंगी हो गयी और फिर से पति के सामने घोड़ी बन गयी तब तक राजन भी पूरे होश में क्या एक्स्ट्रा जोश में आ चुके थे और अपनी पत्नी की गांड मरने लगे..





वही जोश शैलेश में भी दिख रहा था हो की एक करवट पर लेटकर पीछे से शालू की गांड मार रहे थे शालू ने भी ममता और सभ्य की तरह पूरे कपडे उतर दिए थे और नंगी हो कर अपने पति से एक करवट पर लेटकर गांड मरवा रही थी,





शैलेश ने तो कभी ज़िन्दगी में भी नहीं सोचा था की उनके साथ कभी ऐसा कुछ होगा सोचने लगे की चोदामपुर आकर उन्होंने अपनी ज़िन्दगी का सबसे सही फाइल्स लिए था, न जाने ये चोदामपुर उन्हें और क्या क्या दिखने वाला था,

दूसरी तरफ सभ्य की उत्तेजना का तो आज कोई सनी hi नहीं था अब वो अपनस पति को लेटकर उनका लुंड अपनी छूट मेजन लेकर उछाल रही थी. नीचे से नीलेश भी पूरे जोश में आकर अपनी पतनः की छूट की तड़प मिटा रहे थे.. पूड़ा आंगन चुदाई की थालों और सिसकियों से गूँज रहा था. राजन और शैलेश दोनों को hi सभ्य के गोल चूतड़ों के अचे से दर्शन हो रहे थे जिसके बीच से नीलेश का लुंड अंदर बहार हो रहा था

वैसे तो सबके लिए hi जो आज हो रहा था वो बिलकुल hi अलग और अविश्वसनीय था पर उतना hi उत्तेजित करने वाला भी इसी उत्तेजना का नतीजा था की कुछ पालो ने राजन गुर्राने लगे और गुर्राते हुए राजन अपने रास की धार बीवी की गांड में छोड़ने लगे.. और कुछ hi पालो में अपना पूरा रास उन्होंने पत्नी की गांड में उढेल दिया, और फिर पीछे ममता को पकड़े हुए एक तरफ गिर गए लुंड अभी भी उसकी गांड में फंसा हुआ था.

कुछ देर बाद शालू सुर शैलेश ने एक अचे पति पत्नी होने का उदहारण दिया और दोनों एक साथ hi झड़ने लगे और झड़ने के बाद वो भी वैसे hi लेट गए और नीलेश सभ्य की चुदाई देखने लगे इधर सभ्य और नीलेश की तगड़ी चुदाई चल रही थी जिसे देखकर hi लग रहा था की दोनों hi झड़ने के करीब हैं





और हुआ भी ऐसे hi कुछ hi पालो ने सभ्य की एक घुटी हुई चीख निकली और उसका बदन थरथराने लगा जिसे नीलेश ने पकड़ खुद से चिपका लिए और नीचे से सटासट धक्के मरते रहे जैसे hi सभ्य का झड़ना ख़त्म हुआ तो नीलेश भी ज़्यादा देर टिक नहीं पाए और अपनी पत्नी की छूट को अपने रास से भरते हुए झाड़ गए.

अब चुदाई का तूफ़ान शांत हो चूका था तो पूरे आँगन क्या पूरे घर में सन्नाटा फ़ैल गया, सभ्य वैसे hi आँखें बंद किये नीलेश के ऊपर पड़ी हुई थी अब जब सब शांत हो चूका था तो सब एक दुसरे की और नज़र मिलाने से कतराते रहे थे, किसी को समझ नहीं आ रहा था की कोई क्या बोले… हर किसी के मन में ढेरो सवाल थे पर जवाब देने की स्थिति में अभी कोई नहीं था, उत्तेजना निकलने के बाद मन में शर्म और ग्लानि के भाव आ रहे थे, इसी बीच सभ्य आँखें खोले कुछ सोच रही थी वो सोचते हुए धीरे से नीलेश के ऊपर से उठी और बगल में पड़ी साड़ी हाथ बढाकर उठाई और फिर उससे खुद को लपेट कर अपने बाकि कपडे उठा कर बाथरूम में घुस गयी न किसी की तरफ उसने देखा और न hi किसी ने उससे कुछ कहा, ये देख शालू ने भी अपनी साड़ी को उठा वैसा hi किआ और वो भी बाथरूम में घुस गयी जल्दी से रह गए तीन मर्द और ममता जिसे तीनो hi कई बार भोग चुके थे तो ममता ने सबकी और मुस्कुरा कर देखा और इशारे से समझने की कोशिश की सब ठीक है थोड़ा टाइम दो.

इसके बाद वो भी उठी और रसोई की और चली गयी, हालाँकि बाकि बचे लोग सब साधारण थे सिवाए शैलेश के जिनके मन में काफी सवाल थे पर एक बात थी की नशे की वजह से सर सबका घूम रहा था, औरतों के बाद मर्दो ने भी अपने अपने कपडे जो भी थे वो पहने और वो लोग आँगन में जो तेल बिखरा था उसे साफ़ करने लगे,

राजन- आधा ड्रम बरदबड हो गया भैया.

नीलेश – अरे छोड़ न तुझे तो मज़ा आया न.

राजन- मज़े की तो पूछो मत दिल खुश हो गया . क्यों शैलेश बाबू.

शैलेश – भाई मज़ा तो बहुत आया. पर आगे क्या होगा ये सोच रहा हूँ.

राजन – अरे शैलेश बाबू जो जो रहा है उसका मज़ा लो आगे की फ़िक़र आगे पर छोडो.

शैलेश – फिर मज़ा तो खूब आया.

नीलेश – अब बातों में मत लोगो ये सब साफ़ करना है.

वो तीनो आँगन की सफाई में लग गए वहीं सभ्य कुछ देर में नाहा कर निकली तब तक ममता ने चाय बना दी थी तो वो बोली- जीजी चाय बन गयी है सबको दे दो मैं भी नहाकर आती हूँ बहार.

ये कहकर वो बाथरूम में घुस गयी वहीं सभ्य ने चाय निकल कर आंगन में काम कर रहे मर्दो को दी हालाँकि इस दौरान उसने किसी से नज़रें नहीं मिले और सबको चाय देकर थोड़ी बहुत सभ्य ने खुद भी पि पर शायद उसका सर घूम रहा था इसलिए वो बिस्तर पर लेट कर सो गयी. कुछ देर बाद शालू निकली तो उसने देखा तीनो मर्द आँगन की सफाई कफ रहे हैं. रसोई मेइब उसके लिए चाय राखी थी पर उसका मन नहीं हुआ उसने देखा जीजी कहाँ हैं तो उसने पाया वो सो रही है इसलिए वो भी जीजी के बगल में जाकर लेट गयी और सो गयी.

ममता ने बहार आकर देखा तो दोनों सो रही थी तो उसने उन्हें सोने दिया, वैसे सर तो उसका भी घूम रहा था तो उसने राजन को बताया की वो भी सभ्य जीजी के साथ सोने जा रही है कुछ काम जो तो बताना

इसके बाद ममता भी सो गयी वहीं तीनो मर्दो ने करीब अगले डेढ़ दो घंटो की म्हणत के बाद आँगन बिलकुल चमका दिया फिर तीनो बरी बरी नहाये इसके बाद सोचा क्या किया जाये तो तीनो का hi मत था की थक गए हैं थोड़ा आराम वो भी कर लेते हैं इसके बाद तीनो hi दुसरे कमरे में जाकर सो गए,

इसके बाद क्या घटित हुआ वो अगली अपडेट में अपने कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
अपडेट 180

चोदामपुर

जग्गू का घर

जहाँ कर्मा के घर में भांग ने एक अलग hi धमाल मचाया था वहीं दुसरे घर भी इससे बचे हुए नहीं थे,

बाघ में खेलने के बाद जग्गू और उसका परिवार घर पहुंचा जहाँ राजपाल और प्रेमा ने किसी तरह से मौका निकल कर एक बार चुदाई कर ली थी वहीं जग्गू और मंजू दोनों का बुरा हाल था, जग्गू इतनी देर तक भीगे कपड़ो में गदराई औरतों कक देखने के बाद साथ hi एक बार तो उसने अपनी मम्मी को देखा था राजन और नीलेश चाचा के बीच में कैसे दोनों पूरे मज़े ले रहे थे उसकी मम्मी के बदन से यही सब सोच सोच कर उसका लुंड तना हुआ था पर उसे अभी तक शांति नहीं मिली थी, वही हाल मंजू का था जिन्हे देवरो की छेड़ा कहानी ने इतना भड़का दिया था की मन कर रहा था की सबके समनर hi चुद जाने को, और ऐसा नहीं था की प्रेमा और राजपाल उत्तेजित नहीं थे बल्कि चुदाई के बाद तो जैसे उनके बदन की गर्मी और बढ़ी हुई थी, वहीं भांग का नशा भी चरों पर पूरा चढ़ा हुआ था, इसी बीच चरों घर पहुंचे और सबसे अंत में जग्गू घुसा और मुद कर दरवाज़ा बंद करने लगा इसका फायदा प्रेमा ने उठाया और अपने देवर के साथ मज़ाक करते हुए पीछे से जाकर उसकी धोती खींची और साथ hi उसका कच्चा भी पकड़ कर नीचे उसकी टैंगो तक खींच दिया. और फिर खिलखिलाकर भागी,

ये सब इतना जल्दी हुआ की जग्गू कुछ समझ नहीं पाया और प्रतिक्रिया वश जैसे hi वो प्रेमा को पकड़ने को लपका कच्चा पैरों में होने की वजह से उसके पेअर फंस गए और वो धड़ाम से नीचे गिरा तो उसकी मम्मी पापा ने पलट कर देखा तो पाया जग्गू पूरा नंगा नीचे पड़ा है उसका कच्चा पैरों में है और धोती अलग पड़ी है हालाँकि बेटे का खड़ा लुंड देख जहाँ मंजू की आँखों में चमक ा गयी वहीं राजपाल थोड़ा सा झेंप गए,

प्रेमा की खिलखिलाहट से दोनों समझ गए ये प्रेमा की सररत है, जग्गू फुर्ती में उठा और कच्चा पैरों से बहार निकल प्रेमा को पकड़ने भगा, वहीं मंजू भी नशे में होने की वजह से मूड में थी तो वो भी प्रेमा के पीछे भागी- नासपीटी हमाये लल्ला को गिरती है बहुत गर्मी है तेरे अंदर अभी बताती हूँ.

माँ बेटे प्रेमा के पीछे पद गए और प्रेमा हँसते खिलखिलाते हुए इधर उधर भाग रही थी

प्रेमा भाभी- मम्मी नहीं माफ़ कार्डो जग्गू भैया, हेहेहे पापा बचाओ.

राजपाल खड़े खड़े देख हंस रहे थे अपणु बहु और बच्चों को यूँ मज़ाक करते और खिलखिलाते देख ाचा लग रहा था उन्हें पर तभी जग्गू ने प्रेमा को पकड़ लिया और पकड़ कर नीचे गिरा दिया वहीं मंजू भी अपनी बहु को पकड़ कर उसके ऊपर आ कर बैठ गयी.

जग्गू ने अब अपना बदला लेना शुरू किया और प्रेमा की साड़ी पकड़ कर खींच दी,

प्रेमा अपनी सास और देवर के नीचे फांसी छोड़ने की दुहाई मांग रही थी, साथ hi पापाजी बचाओ देखो दो दो लोग अकेले को घेरे हुए हैं..

राजपाल को ये दृश्य हंसी के साथ साथ उत्तेजना भी दिला रहा था की बीटा पुरा नंगा था वही बहु अब सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में रह गयी थी, उनके मन में ख्याल आ रहा था की जैसे मैं बहु को छोड़ता हूँ अगर जग्गू भी अपनी भाभी के साथ करेगा तो क्या होगा, ये सब सोचकर उनका लुंड बिलकुल फड़फड़ा उठा,

जग्गू तो अब पूरे जोश में आ चूका था और अब वो प्रेमा के सर के पास बैठ उसके ब्लाउज को खोलने की कोशिश कर रहा था और बोल रहा था- भाभी हमें नंगा किआ न अब देखो.

वहीं मंजू भी बहु के ऊपर बैठी अपने बेटे की मदद कर रही थी इसी बीच नीचर पड़ी प्रेमा फड़फड़ा रही थी और बात बार अपने ससुर से बचने के लिए कह रही थी, प्रेमा अपने हाथ फड़फड़ाते हुए चला रही थी उसी बीच उसने हाथ आगे लेजाकर अपनी सास की साड़ी पकड़ ली और साड़ी पकड़ कर ऊपर उठाने लगी और ऊपर उठाकर हाथ से कुछ टटोल टटोल कर देखने लगी साड़ी को ऊपर करने के बाद उसने पेटीकोट को भी पकड़ लिए और उसे भी कमर तक कर दिया जिससे उसकी सास के बड़े बड़े चूतड़ बिलकुल नंगे हो गए, राजपाल दूर से ये नज़ारा देख एयर उत्तेजित हो गए की पत्नी बहु और बेटे के सामने अपनी गांड नंगी किये बैठी है, वहीं सास की साड़ी ऊपर करने के बाद जैसे प्रेमा ने तो पूरा प्लान बनाया हुआ था और अपनी सास के चूतड़ों को मसलने लगी जिस्व देख राजपाल का लुंड और गोते खाने लगा..

उधर जग्गू ने अपनी भाभी का ब्लाउज उतर कर अलग फेंक दिया था और अब तो ब्रा भी जग्गू के हाथ में थी और उसकी प्यारी सुन्दर गदराई भाभी ऊपर से बिलकुल नंगी हो चुकी थी, अब क्यूंकि जग्गू और मंजू प्रेमा और राजपाल के बारे में जानते थे तो उनके मन में तो कोई झिझक नहीं आई प्रेमा कक ससुर के सामने नंगा करने में, पर राजपाल का तो ये देख बुरा हाल था की उसकी जवान बहु को उनका छोटा बीटा जो की खुद नंगा था और उनकी पत्नी जिसके चूतड़ नंगे थे

जग्गू अब इतना उत्तेजित हो चूका था की उसे कुछ समाजग नहीं आ रहा था और सामने भाभी के नंगे सुडौल छूछीयो को देखकर उसके मुँह में पानी आ गया और उसने तुरंत अपना मुँह अपनी भाभी की एक छुच्छी पर लगा उसे चूसना शुरू कर दिया अपनी छुच्छी पर मुँह पड़ते hi प्रेमा सिसक पड़ी जिसकी सिसकी पर राजपाल का ध्यान गया तो वो चौंक hi गए की उनका बीटा अपनी भाभी की छुच्छी पि रहा है सबके सामने और उसकी माँ कुग्ग नहीं कह रही.

इधर प्रेमा छुच्छी चुसवाने से गरम होने लगी तो उसनर उसी की प्रतिक्रिया में अब तक उसकव हाथ जो की सास के चूतड़ों को मसल रहे थे उन्हें आगे बढ़ा उसने अपनी उँगलियों को सास की छूट पर ऊपर से फिराया तो मंजू जो की बिलकुल प्यासी थी वो सिहर उठी और उसकर मुँह से आह निकल गयी, पर प्रेमा यही पर नहीं रुकी उसने अपनी दो उँगलियों को सास की गीली छूट में एक साथ घुसा दिया जिससे मंजू चीख पड़ी उसकी आँखें बंद हो गयी. पत्नी की चीख सुन जब राजपाल न्र देखा की उसकी बहु की उंगलियां अपनी सास की छूट में अंदर बहार हो रही हैं तो राजपाल भी अपना आप खो बैठे और अपनी धोती और कच्चा उतर बिलकुल नंगे हो सामने का नज़ारा देख लुंड हिलने लगे… वहीं जग्गू ने भी मम्मी की चीख सुनकर भाभी की छुच्छी समूह हटा गर्दन उचका कर देखा तो पाया की उसकी भाभी उसकी मम्मी की छूट को उंगलियों से भेद रही हैं वो भी पापा के सामने ये सोच उसका लुंड ठुमके मरने लगा इधर जग्गू के सीधे होने से उसका लुंड प्रेमा के सर के करीब आ गया था और जैसे hi प्रेमा की नज़र देवर के खड़े और फड़फड़ाते हुए लुंड पर पड़ी तो वो खुद को रोक नहीं पाई और उसने सर आगे को खिसका कर जग्गू के लुंड को मुँह में भर लिए… जिससे जग्गू की आह्हः निकल गयी, बस राजपाल का इतना देखना था की उनके सबर का बांध टूट गया वो अपनी जगह से उठ कर आये और अपनी पत्नी के पीछे बहु और पत्नी दोनों की टैंगो के बीच जगह ली, अपनी बहु के हाथ को पकड़ उसकी उँगलियों को पत्नी की छूट से बहार निकला और अगले hi पल पत्नी की छूट में अपना लुंड घुसा दिया,

मंजू- अह्ह्ह्ह जीईईईई. अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह

जग्गू और प्रेमा ने भी जब ये देखा की पापा ने हमारे सामने hi मम्मी की छूट में लुंड घुसा दिया है तो उन्हें तो जैसे खुली छूट मिल गयी वहीं मंजू जो की कबसे लुंड की तलाश में थी वो पति का लुंड छूट में डलवा कर मस्त होने लगी उसने फिर नहीं सोचा क्या सही है क्या गलत.

राजपाल पत्नी की कमर थामे उसे छोड़ने लगे वहीं प्रेमा पपोरे जोश के साथ जग्गू का लुंड चूस रही थी, इसी बीच दोनों बाप बेटो की नज़र आपस में मिली तो राजपाल ने उसे आँखों से मज़े लेने का इशारा किआ बस जग्गू को और क्या चाहिए था,

नीचे लेती प्रेमा जिसकर ऊपर बैठ कर उसकी सास ससुर से चुद रही थी वहीं वो खुद देवर का लुंड चूस रही थी उसके हाथ लेकिन कहीं आउट hi व्यस्त थे वो जगह थी उसकी सास का ब्लाउज पर ब्लाउज खोल्नर का वर्षों का अनुभव होने के कारन प्रेमा ने बिना देखे सास का ब्लाउज खोल दिया जिसके खुलते hi सास की बड़ी बड़ी छुछियां उसके ऊपर लटक गयी क्यूनि मंजू ब्रा तो पहनती hi नहीं थी, अब इतना सब हो रहा था तो जाहिर सी बात है प्रेमा कक छूट भी कुल बुला रही होगी तो उसने खुद को अपनी सास के नीचे से पीछे की और खिसकाया और पीछे खिसक कर जब उसकी छूट सास के मुँह के नीचे आ गयी तो वो रुक गयी और अपना पेटीकोट बिलकुल ऊपर तक उठा कमर तक कर दिया और सास के सामने अपनी नंगी रसीली छूट परोस दी. बहु ेकी स्वादिष्ट छूट देख मंजू ने भी एक पल का भी संकोच नहीं किआ और अपना मुँह उसकी छूट में लगा दिया..

ये जब राजपाल ने देखा तो बस देखते hi रह गए पहली बात किसी औरत को दूसरी औरत की छूट चाटते देख रहे थे वो भी अपनी पत्नी को अपनी बहु की वो तो बस नज़रें गड़ाए इसी नज़ारे को देखे जा रहे थे पर साथ hi उनका दिमाग भी बहुत तेज़ी से चल रहा था. जग्गू अभी भी अपनी भाभी के गरम मुँह का मज़ा ले रहा था वहीं उसकी भाभी प्रेमा की छूट उसकी मम्मी चाट रही थी और उसकी मम्मी को उसके पिता छोड़ रहे थे, एक परिवार हमेशा यही चाहता है की लोग आपस में जुड़े रहे और अगर परिवार इस तरह से जुड़ जाये तो कभी आपस में मन मुटाव होने का सवाल hi पैदा नहीं हो सकता.

मंजू अपनी बहु की छूट को पूरी लगन से चाट रही थी और जितना चाटती उतना hi प्रेमा की छूट आउट कुलबुला रही थी प्रेमा को अब लुंड चाहिए था वहीं जग्गू ने भी प्रेमा के मुँह से लुंड निकला क्यूंकि अब उसे भी चुदाई करनी थी, साथ hi अपने पिता के सामने चुदाई करने के ख्याल से hi उसे बहुत कुछ हो रहा था दोनों को उठाते देख प्रेमा ने सुझाव दिया की चलो कमरे में चलते हैं और उठकर उसने अपना पेटीकोट वहीं छोड़ दिया और जग्गू को लुंड से थामे कमरे के अंदर ले गयी, बच्चो को अंदर जाते देख राजपाल ने भी बीवी की छूट से लुंड निकला और अंडे की और चल दिया साथ में मंजू भी थी, मंजू ने जाते हुए अपने सरे कपडे रस्ते में hi उतर दिए और अपनी बहु, बेटे और पति की तरह बिलकुल नंगी हो गयी.

अब कमरे में कुछ hi पालो में एक अलग माहौल था, बिस्तर के एक तरफ प्रेमा लेती थी जिसके पेअर बिस्तर से बहार थे और उनके बीच उसका प्यारा देवर था जिसका लुंड प्रेमा की छूट में अंदर बहार हो रहा था, वहीं उसके सर से सर लगाकर बिस्तर के दूसरी और पेअर करके मंजू थी जिनके पैरों मेइब पति थे जो की उसकी छूट की कुटाई कर रहे थे, बाप बेटे एक दुसरे को देखते हुए मुस्कुरा कर एक दुसरे का हौसला बढ़ाते हुए मज़े ले रहे थे. राजपाल को ये देख ख़ुशी और हैरानी दोनों हो रही थी की उनका बीटा किसी भी तरह से चुदाई के मामले में नौसिखिया तो नहीं था, वहीं दोनों सास बहुएं अपनी अपनी छूट की कुटाई करवाते हुए एक दुसरे के बगल में पड़ी सिसक रही थी.






दोनों की छुछियां झटके के साथ सीने पर उछाल कूद कर रही थी, राजपाल के मन में कई प्रश्न भी उठ रहे थे साथ hi अलग अलग प्रकार की इच्छाएं भी जाग रही थी, एक माँ बेटे के सामने बिलकुल नंगी होकर चुद रही थी ये कैसे हो रहा था, वहीं उनकी बहु कितने आराम से अपनी सास और ससुर के सामने देवर से चुद रही थी ये केवल भांग का असर था या कुछ और.

प्रेमा- आह्ह्ह्हह जग्गू भैया आह्ह्ह्ह aiseeeeeeeeee चूड़ो आह्ह्ह्हह मम्मी.

जग्गू- ओह्ह्ह भाभी हाँ बड़ी मस्त और गरम छूट पाई है तुमने.

मंजू- अह्ह्ह्ह लल्लाह ऐसे hi छोड़ बहु को आज इसकी साडी खुजली मिटा के रख दे.

मंजू भी अपनी चूचियों को मसलते हुए बेटे को उकसा रही थी और पति से चुद रही थी.

राजपाल की उत्तेजना सब की बातें सुन और बढाती जा रही थी.

राजपाल – आह्ह्ह्ह सास बहु दोनों hi रंडियां हो एक नंबर की.

प्रेमा- आह्ह्ह्हह पालजी अभी तुमने रंडी पैन देखा hi कहाँ है.

ये कहकर प्रेमा को न जाने क्या हुआ की वो जग्गू को हटा उठ कड़ी हुई और फुर्ती में बिस्तर के दूसरी और खड़े ससुरजी को पकड़ा और उनका लुंड अपनी सास की छूट से निकल उन्हें बिस्तर पैर बैठा लिए और खुद उनके सामने बैठकर उनका लुंड से गप्प्प से मुँह में भर लिए.

बहु की इस हरकत से राजपाल बिलकुल चौंक गए उन्हें नहीं लगा था की बहु सास और देवर के सामने ये सब करेगी पर बहु के मुँह में लुंड का एहसास वो भी बीवी और बेटे के सामने इससे राजपाल का तो पूरा बदन hi सिहर गया, बगल में कड़ी पत्नी उन्हें hi देख रही थी जग्गू भी दूसरी तरफ से इधर hi गया था और अपने पिता और भाभी की कामलीला देख रहा था, प्रेमा ने कुछ पल और ससुरजी का लुंड चूसा और फिर कड़ी होकर दूसरी तरफ मुँह करके उनके लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर लगाया और नीचे सरकती हुई बैठ गयी और ससुर का पूरा लुंड छूट में समां लिए… राजपाल की आँखें बहु की छूट के आनंद से बंद हो गयी ुनहु तो लगने लगा जैसे वो आनंद की नदी ने गोते लगा रहे हैं वहीं उनका लुंड माखन की किसी गरम पोटली में अंदर बहार हो रहा है, राजपाल ाचा खासा बहु की छूट के आनंद में डूबे हुए थे, की कुछ आवाज़ों से उनका ध्यान बापिस आया उन्होंने आँखें खोल उन आवाज़ों की और देखा तो उनकी आँखें बिलकुल फटी की फटी रह गयी उन्होंने देखा की उनकी पत्नी अपने भरी बदन को उनके बगल मून लिए झुकाये हुए है और पीछे से उनका बीटा अपनी माँ की छूट में लुंड घुसा रहा है, उनका खुद का बीटा अपनी सगी माँ छोड़ रहा है.






ये देखकर राजपाल के दिमाग के तो सरे तार hi गड़बड़ा गए ऊपर से उनकी बहु उनके लुंड पर ऐसे कूद रही थी जैसे पूरा लुंड अपनी छूट से उखाड़ लेगी इधर बगल से उनका बीटा अपनी सगी माँ को झुककर पीछे से लुंड पेल रहा था और उनकी पत्नी अपने बेटे से छुड़वाते हुए उन्हें नशीली आँखों से देख रही थी पत्नी की आँखों में उन्हें वासना साफ़ दिखाई दे रही थी.

राजपाल के लिए अब सहना मुश्किल होता जा रहा था इतने सरे सवाल ऊपर से लुंड फटने को हो रहा था साथ hi भांग का नशा, ऊपर से लुंड पर कूदती हुई बहु जिसका परिणाम ये हुआ की जल्दी hi राजपाल के लुंड से रास की धार निकलने लगी और बहु की छूट में भरने लगी… राजपाल के झड़ने का वेग ऐसा था की उन्हें लगमे लगा जैसे लुंड से उनके बदन की पूरी ऊर्जा बहती जा रही है, झड़ने के बाद वो पीछे की और लुढ़क गए उनकी आँखें बंद हो गयी… तेज़ तेज़ सांसें चल रही थी. कुछ hi पल में वो एक मीठी सी नींद में खो गए थोड़ी देर hi सोये होंगे की अचानक से उनकी नींद खुली, तुरंत आँखें खोल कर देखा तो नज़ारा कुछ बदला नहीं था ज़्यादा समनर देखा तो बहु झुकी हई है बीटा पीछे से उसे छोड़ रहा है और बीवी बहु के आगे बैठकर उसके होंठ चूमते हुए दोनों का हौसला बढ़ा रही है






कुछ hi पालो में उन्हें जग्गू की गुर्राहट सुनाई दी और उसके बाद जग्गू ने कुछ धक्के कास कास के अपनी भाभी की छूट में लगाए और फिर अह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह करते हुए अपना रास उसकी छूट में भर दिया.. इसके बाद वो तीनो भी थक कर बैठ गए मंजू ने सामने पति की और देखा तो पाया वो उन्हें hi देख रहे थे

मंजू- क्या सोच रहे हैं जी?

प्रेमा- हम जानते हैं पापाजी तुंहरे दिमाग में अभी लाखों सवाल होंगे और हम तुम्हारे हर सवाल का जवाब देंगे.

इसके बाद जग्गू मंजू प्रेमा ने राजपाल को सब कुछ बताया जो जो उन्हें पता था जैसे की माँ बेटे की चुदाई कैसे हुई, अपने कर्मा जग्गू के बारे में प्रेमा ने बताया फिर नीलेश राजन ममता पल्ली और जो भी सब कुछ बताने योग्य था , ये सब सुनकर न जाने किटमि बार तो राजपाल की आँखें चौड़ी हुई पर अंत में उनका हाल ये था की उनकस लुंड शायद hi इतना कड़क कोई कहानी सुनकर हुआ होगा, फिर क्या था पूरा परिवार एक बार फिर से चुदाई के इस खेल में जुट गया जहाँ जग्गू और राजपाल दोनों ने बदल बदल कर सास बहु दोनों की खूब चुदाई की हालाँकि इतना चुदाई के बाद भी जब लेते तो राजपाल ने ममता को छोड़ने की इच्छा ज़रूर जताई जिस पर मंजू ने उन्हें बोलै- अरे बस अब ज़्यादा कुलांचे न मारो जो मिलना होगा मिल जायेगा जल्दी hi इसके बाद वो लोग भी एक दुसरे से चिपक कर सो गए.

( कर्मा का घर)

सोने के बाद सब hi थोड़ा लेट उठे और जब उठे तो सब भगा दौड़ी में लग गए क्यूंकि अँधेरा हो चूका था, औरतों को खाना बनाना था घर के काम करने थे और मर्दों को जानवरों का चारा डालना था, खैर उठने के बाद सभ्य ने संतो का दरवाज़ा खोला और पाया की वो अब भी बेसुध होकर सो रही थी, जिस पर ममता ने कहा- ये जीजी तो अब दीनू भैया की तरह तीन दिन बाद hi उठेंगी. इसके बाद ममता अपने घर चली गयी और शालू और सभ्य काम में लग गए, रसोई में काम करते हुए शालू बोली- जीजी आज जो कुछ हुआ सही हुआ गलत.

सभ्य- अब सही गलत का तो मैंने छोड़ना सोच दिया है पर सब कुछ अचानक हुआ की सोचने सँभालने का समय hi नहीं मिला.

शालू- हाँ जीजी भांग ज़्यादा hi चढ़ गयी थी.

सभ्य- मुझे भी तभी तो सबके सामने नंगी होकर छुड़वा रही थी.

शालू- तुम क्या जीजी नंगे तो सब थे.

सभ्य – पर अब अजीब सा लग रहा है, शैलेश और राजन भैया से कैसे नज़रें मिलाएंगे.

शालू- अरे जीजी अब आज नहीं कल मिलनी तो पड़ेगी तो मैं तो कहती हूँ साधारण रहेंगे जैसे कुछ हुआ hi न हो.

सभ्य- हम्म्म कुछ ऐसा hi करना पड़ेगा नहीं तो कब तक मुँह छुपाते रहेंगे..


दूसरी और ममता के न जाने कितनी बार दरवाज़ा पीटने के बाद दरवाज़ा खुला तो देखा सामने अनुज है जो की शकल से लग रहा था की सो कर उठा है और कपडे भी आनन फानन में पहने हैं.

ममता- कितनी गहरी नींद में हो तुम कबसे दरवाज़ा पीट रही हूँ.

अनुज- वो चची.

ममता अंदर आते हुए- चल वो सब छोड़ तू पल्ली कहाँ है.

ये कहते हुए वो कमरे में घुसी तो देखा कर्मा और पल्ली दोनों एक दुसरे की बाहों में नंगे सो रहे हैं,

ममता- इन दोनों को देखो कैसे मज़े से सो रहे घोड़े और कपडे सब बेचकर.

इसके बाद ममता पल्ली और कर्मा को जगती है, जो की सर मलते हुए उठाते हैं,

ममता पल्ली को अपने साथ काम में लगा लेती है वहीं कर्मा और अनुज अपने घर चले आते हैं.

दूसरी और राजन शैलेश और नीलेश जानवरों को खिलने पिलाने के बाद बाघ में hi बैठकर आज जो हुआ उस पर चर्चा कर रहे थे,

राजन- क्या लगता है भाई साब ममता का तो ठीक है पर भाभी और शालू की क्या प्रतिक्रिया होगी जो हुआ आज इसके बाद.

शैलेश – हाँ यार हम भी यही सोच सोच के घबरा रहे हैं की भाभी और शालू से कैसे नज़रें मिलाएंगे.

राजन- ममता का तो ठीक है उसके साथ कोई परेशानी नहीं है.

शैलेश- असली परेशानी तो शालू और भब्बी की है

शैलेश ने परेशां होकर बोलै.

नीलेश – अरे परेशां मत हो यार नशे में थे जो हो गया सो हो गया अब चिंता करके क्या होना है.

शैलेश – पर भाईसाब चिंता तो हो रही है न

राजन- शैलेश बाबू तुम चिंता बहुत करते हो.

नीलेश- हाँ थोड़ा चिंता को साइड में रख ज़िन्दगी के मज़े लो.

शैलेश- भाई साब मज़े लेने के बाद hi तो हे हाल हुआ है. समझ नहीं आ रहा क्या करें.

राजन- अरे शैलेश बाबू तुम एक काम करो हमारे साथ चलो आज की रात ऐसे मज़े दिलाते हैं तुम्हे की साडी चिंता भूक जाओगे.

शैलेश – कहाँ?

राजन- अरे हमारे घर hi.

ये सुनते hi शैलेश के मन में ममता का ख्याल आया और याद करने लगा दोपहर में उसका कैसा हुआ बदन.

शैलेश – पर शालू भी तो है.

राजन- अरे कुछ नहीं होगा बाकि देखलो की आज जैसा मज़ा ज़िन्दगी में कहहि नहीं लिए होगा तुमने.

हालाँकि मन तो लार रहा था शैलेश का भी क्यूंकि शालू एयर शभ्य से नज़रें मिलाने में वो दर रहा था साथ hi उसको ये उत्तेजना हो रही थी की वो आज ममता को राजन के साथ मिलकर छोड़ेगा.

इसी जबून में उसने नीलेश को देखा फ़ो नीलेश ने आँखों hi आँखों में उन्हें. जाने को कह दिया.

शैलेश – फिर शालू?

नीलेश- अरे क्यों चिंता करते हो , हम सब संभल लेंगे.


इसके बाद शैलेश बड़े खुश हुए की उन्हें आज शालू के सवालों की जगह ममता की गांड और छूट मिलेगी वो भी उस्क्स पति के साथ में. शैलेश के लिए ये बहुत अजीब hi और उत्तेजित करने वाला ख्याल था जिसे वो दिमाग से निकल hi नहीं प् रहे थे पति के साथ मिलकर उसकी पत्नी को छोड़ना उसके सामने उसकी पत्नी की छूट में लुंड घुसना,

इसीलिए शैलेश मौका मिलते hi मान गए, और राजन के साथ जाना तय कर लिए वहीं नीलेश अपने घर चले आये.


सरलपुर

आपस की मस्ती मज़ाक में शाम हो गयी तो फिर शाम को सबने जल्दी hi औरतों ने खाना बना कर खा पि लिए इसके बाद कुछ कुछ अलग अलग समूह बन मुख्यतः उम्र के हिसाब से चारो लड़के पंकज, विनीत रमन और चेतन साथ में गाओं घूमने खेतों की और निकल गए और आगे क्या क्या करना है यहाँ उसकी जुगाड़ बिठाने लगे, वहीं तीनो जवान बहुएं और ननद एक साथ गप्पें लड़ा रहे थे, और तीनो समाधी चौपाल पर बैठे आपस में बात करते हुए गाओं की ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे. और तीनो संधान छत पर टहलते हुए आपस में बतिया रही थी.

माधुरी- कुछ भी कहो गाओं की हवा की बात hi कुछ और है.

सावित्री – सही कहा तभी तो हमारा तो मन hi नहीं करता गाओं छोड़ के कहीं जाने का.

बिमला – हाँ जीजी तुम लोग न जाने क्यों शहर में बेस हो गाओं में रहो आराम से.

माधुरी- देख रही हु सावित्री बहन कितनी चांट है ये बिमला.

बिमला – है ढैय्या जीजी हमने का किआ हम कैसे चांट हुए.

माधुरी- ाचा पहले hi दोनों को जीजी बोल्दिया जिससे खुद छोटी साबित हो जाएं.

ये कहकर माधुरी ने सावित्री को ताली दी और दोनों हंस पड़ी वहीं बिमला शर्माकर मुस्कुराते हुए बोली – का जीजी तुम भी हम तो बस सम्मान में बोले.

सावित्री- सम्मान भी बुद्धों का hi हॉट है बिमला जीजी.

इस बात पर तो माधुरी और सावित्री दोनों hi खिलखिलाकर हंस पड़ी वहीं बिमला भी खुद को रोक नहीं पाई हंसने से, बात से ज़्यादा हंसी सावित्री के बिमला को जीजी कहने पर आई.

माधुरी- अरे यार ये है जिंदगी तो हमें तो बड़ा ाचा लग रहा है तुम दोनों से मिलकर, हम उम्र लोगो से मिले तो हंसी मज़ाक भी हो जाता है.

सावित्री- जे बात तो बिलकुल सही कही नहीं तो घर बार में कहाँ होता है अरे हमारे तो भाग अचे हैं की हमारी देवरानी बहुत अछि है और मज़ाकिया भी तो पूरा दिन अचे से काटता है.

बिमला- और रात…?

इस बात पर भी तीनो हंस पड़े,

माधुरी – अरे सही बात है और हम पहले hi कह दे रहे हैं की अब से हम बस नाम की संधान हैं रिश्ता हमारा दोस्ती का होगा. बताओ मंज़ूर है.

सावित्री- मंजूर है हमें

बिमला- अब दोस्ती को कैसे मन कर सकत हैं. हम ही तैयार हैं.

माधुरी- जे बात


ये कहकर तीनो गले लगी एक दुसरे के. और हटने के बाद बिमला बोली- जीजी बताया नहीं रात कैसे कटती है.

माधुरी- ले दोस्ती हुई नई की ये तो तुम्हारी रात की कहानी पूछने लगी.

सावित्री – अरे बिमला रानी तुम पूछ का रही हो आज रात hi आ जाना समनर से दिखा देंगे.

इस बात पर माधुरी हंसी और बिमला मुँह छुपा कर शरमाते हुए हंसने लगी.

माधुरी- वैसे सही कह रही हूँ जवानी तक तो ठीक है पर एक बार बच्चों का ब्याह हो जाये तो हम औरतों की जिंदगी तो बेरंग हो जाती है.

सावित्री – का बात हो गयी संधान जी कछु हुआ का.

माधुरी- अरे हुआ कछु नहीं देखा जाये तो हमारे पास सब कुछ है दो बेहद प्यार करने वाले बेटे, भगवन की तरह पूजने वाली बहुएं.

बिमला- तो. फिर का कमी है .

माधुरी – अरे जो ये अभी हम कर रहे हैं न मस्ती इसकी, सबको लगने लगता है की अब इस उम्र में कहाँ मस्ती का मन होता होगा.

सावित्री- जे तो मुँह की बात छीनली तुमने, सही कहें तो मस्ती की सही उम्र यही हॉट है.

बिमला- पर समाज तो कछु और hi सोचत है न.

माधुरी- तभी तो तुम जैसी सहेलियों की ज़रुरत होती है, जिनसे मन की कह सको, सुन सको मस्ती मज़ाक कर सको.

सावित्री – और का हम औरतों को hi समाज का देखना पड़ता है ये मरद लोग अभी शाम को गिलास लेकर बैठ जायेंगे और हो गई दोस्ती.

बिमला- तो का करें जीजी हम भी ले लें गिलास.

माधुरी- वो भी मिल जायेंगे बोलो तो सही बिमला रानी.

बिमला- वैसे बात सही कही मर्दो का जीवन हमसे सही है.

माधुरी- और का अब सब को लगता है इस उम्र में हम औरतों कॉस्का मन नहीं होता.

सवित्र- किसका

माधुरी- अरे समझो न

बिमला- का समझें?

सावित्री- बड़ी सहेली बन रही थी अब खुलके बोलै भी नहीं जा रहा.

माधुरी- अरे चुदाई का, सबको लगता हाउ हमारा मन नहीं होता अब चुदाई का. अब खुश.

माधुरी ने थोड़ा शरमाते हुए कहा.

सावित्री और बिमला उसका शर्माना देख हंस पड़े.

Savitri-haan अब हुई खुल कर बात,

माधुरी- हाँ तो सबको यही लगता है पर कोई नहीं जनता की जवानी से भी ज़्यादा लुंड इस उम्र में चाहिए.

सावित्री- ये बात तो बिलकुल सही कही संधान जी, जवानी में तो कैसे भी काम चल जाता है मुश्किल तो अभी होता है.

बिमला- सही कह रही हो जीजी मन तो बहुत करता है खुल कर पति से बोलते भी नहीं बनता नहीं रो बोलेंगे की इस उम्र में ये का सूझता है तुम्हे.

माधुरी- अरे बोल भी दो तो क्या कर लेते हैं एक बार छोड़ कर औंधे मुँह सो जाते हैं इन्हे कटा पता अभी तो इंजन गरम हो पाया है.

इस पर तीनो ठहाके मार हंस पड़ी.

सावित्री- अरे इन मर्दों का यही है और सही कहूं तो मरद अपनी लुगाई के साथ hi एक बार में औंधा होता है वही किसी दुसरे की मिल जाये तो पूरी रात नहीं सोने देता.

बिमला- ऐसे कैसे.

माधुरी- सही कह रही है सावित्री, बिमला रानी, ये मरद जाट है hi ऐसी चीज़ जो की घर की दाल खाकर बिलकुल ऊब जाती है और फिर हमें छोड़ना उनके लिए बस एक काम होता है.

बिमला- हाँ ये तो हम भी मानते हैं.

सावित्री – वहीं कहीं बहार की कोई और सब्जी मिल जाये तो छोड़े नहीं छोड़ते.

माधुरी- हाँ यही तो रोना है, गर्मी दिखाओ तो रैंड कहते हैं न दिखाओ तो बहार मुँह मरते हैं.

बिमला- हाँ जीजी और बदनामी अलग.

सावित्री – वैसे एक बात सही कहें. तो मर्दों की भी गलती नहीं है.

माधुरी- मतलब.

सावित्री- अब देखो जैसे वो हमसे ऊब जाते हैं हम भी तो ऊब जाते हैं एक hi लुंड घौंट घौंट कर.

बिमला- पर जीजी हम औरतें बहार मुँह तो नहीं मरती फिरती.

माधुरी- हनन

सावित्री- अरे सच्ची सच्ची कहो अगर बदनामी का दर न हो और नया लुंड मिले तो कौनसी औरत मन करेगी,

बिमला- ना जीजी ऐसे थोड़े hi होता है.

माधुरी जो की सावित्री की बात से अपने और अपने भाई के रिश्ते के बारे में सोचने लगी और सोच कर बोली- सही कह रही हो सावित्री बहन, हम औरतें नहीं करती क्यूंकि डर्टी हैं हमारी बदनामी ज़्यादा होती हज पर कोई ऐसा मिल जाये जहाँ बदनामी का दर न हो तो बिलकुल हर औरत कर लेगी.

बिमला- बोल तो ऐसे रही हो जीजी जैसे खुद भी कर लोगी.

Savitri-mauka मिले तो काहे नहीं.

बिमला- पर पति को धोखा देना. ये तो पाप है न.

माधुरी- पर अपने मन को मरना भी तो पाप hi है.

सावित्री- हमारा तो ये मन्ना है की पाप तो जाने ूँजने इंसान से होते hi हैं तो अगर कुछ करके खुद को ख़ुशी मिल जाये तो उसमे कोई पाप नहीं है.

बिमला- सही बात कह रही हो जीजी पर हम सबके मरद तो ऐसे नहीं हैं न.

सावित्री हंस कर बोली- हर औरत को यही लगता है बिमला पर सरे मरद एक जैसे hi हॉट हैं.

माधुरी- सही कहा, और इसका उदहारण बताऊँ.

Bimla-batao.

माधुरी- जब तुम और समधी जी आये थे न बिमला जैसे hi तुम गाडी से निकली थी और अचानक से हवा के झौंके से तुम्हारा पल्लू उदा था, मैंने ख़ुशी के पापा को देखा तुम्हारी इस गदराई कमर को देखकर उनकी आँखें चमक गयी थी.

ये कहकर माधुरी ने बिमला की कमर डाबड़ी.

सावित्री- लो भाई बिमला रानी तुमने तो आते hi एक शिकार कर लिया.

बिमला जो की माधुरी के कमर दबाने से थोड़ा चीखी थी खुद को रोकते हुए बोली – का जीजी ऐसे मत बोलो हम काहे शिकार करेंगे समधी जी का.

माधुरी- आरी बौड़म तुम करो न करो वो तो करेंगे hi न.

सावित्री- अरे हो सकता है आज माधुरी बहन पर चढ़ते हुए तुम्हे hi न सोचें,

सावित्री और माधुरी इस बात पद हंस पड़ी वहीं बिमला को भी ऐसी बातों में मज़ा आ रहा था बस वो खुल कर नहीं जाता रही थी, लड़की की सास थी कहीं कुछ गलत न सोच ले ये सोचकर.

माधुरी- अरे हाँ कहीं छूट हमारी फटे और नाम तुम्हारा हो.

खैर इस बात पर तो बिमला भी खुद को हंसने से रोक नहीं पाई, तीनो काफी देर तक हंसती रही इस बात पर तो,

सावित्री- हम तीनो को देखकर अभी कोई नहीं कहेगा की हम संधान हैं और न जाने कितने समय बाद मिली हैं.

Madhuri-kyunki हम संधान नहीं हैं सहेलियां हैं आज से.

बिमला जो की बस यही सोच रही थी क्या सही में समधी जी उसे उन नज़रो स्व देख रहे थे हालाँकि वो ब्याहता लड़की की माँ थी उसे मर्दों का पता था फिर भी ये जानना एक अलग hi एहसास देता है.

सावित्री- अरे ये देखो बिमला रानी तो सपनो में खो भी गयी समधी जी के.

माधुरी और सावित्री ताली मर के हंसी.

बिमला ने भी सोचा अब शर्माना छोड़ खुल के रहना hi सही है जब ये दोनों नहीं शर्मा रही तो मैं क्यों शरमाऊं यर सोच कर बोली- अरे मैं तो सोच रही थी की मैं तो समधी जी को संभल लूँ पर मेरे इनको कौन संभालेगा.

सावित्री- कैसी बात करती हो बिमला रानी काम हैं क्या? माधुरी ऐसे hi घोंट लेगी.

इस पर माधुरी शरमाई और बिमला और सावित्री हंसी.

माधुरी- कोई नई अदला बदली कर के देख लेंगे एक बार.

सावित्री- अरे अरे अदला बदली से ध्यान आयी एक मज़ेदार बात.

माधुरी- क्या?

कुछ दिन पहले हउमै देवरानी को न जाने कहाँ से एक नयी सी किताब मिली तो उसने उसमे से पढ़कर हमें जो बताया उससे तो हम चौंक hi गए.

माधुरी- ऐसा क्या बता दिया.

सावित्री- अरे जे hi सब था की बढाती उनर के साथ क्यों होता है पतियों का प्यार और इच्छा काम.

बिमला- ाचा क्या लिखा था.

सावित्री- बाहर साडी चीज़ें थी जो औरतें करती हैं ताकि ुनहु और उनके पति को मज़ा मिले और ख़ुशी भी.

माधुरी- ाचा क्या थी चुनें भी बताओ हम भी तरय करेंगे.

सावित्री- पहला तो लिखा था गांड मरवाना.

माधुरी- हहै जे तो न जाने कब से हम करते आ रहे हैं.

बिमला- जे लिखा हो न लिखा हो पति बिना गांड मरे छोड़ते कहाँ हैं.

सावित्री- अरे होती हैं कोई कोई सरीफ छोड़ी उनके लिए होगा दूसरा था पति को पसंद होता है की उनकी औरत बिस्तर पर बिलकुल रंडी बन जाये गन्दी गन्दी बातें करे जैसी छुड़ाई करें उसके मज़े ले और शर्माए न.

माधुरी- जे बात तो मैंने लायक है.

बिमला- हाँ ये भी चिढ़ते हैं जब मैं बिस्टेर पर शराफत दिखती हूँ तो.

सावित्री- चिढ़ेंगे hi. और उसमे ये भी था अदला बदली,

बिमला- मतलब.

सावित्री -मतलव जमाना बदल गया है, अब पति पत्नी एक दुसरे से ूबें न और खुश रहे उसके लिए क्या करते हैं की आपस में पत्नियों को डाल बदल कर छोड़ते हैं जिससे दोनों को नया स्वाद मिल जाता है साथ hi ये सब एक दुसरे की मर्ज़ी से होता है.

बिमला- हाय ढैय्या जीजी बताओ पति के सामने किसी और से कैसे छुड़वा सकता है कोई.

सावित्री- ये hi तो बात है उसमे ये भी लिखा था की पतियों को अव्हा लगता है ये सड़ला बदली का खेल और सबसे ज़्यादा तो पति hi चाहते हैं खेलना. क्यूड किसी और को छोड़ना साथ hi अपनी बीवी को चुड़ते हुए देखना बहुत पसंद आता है पतियों को.

बिमला- क्या क्या सहीएजें आ गयी हैं अब ज़माने में.

माधुरी- और ज़माने के साथ रहोगी तो हु खुश रह पाओगी बिमला रानी.

सावित्री- सही बात है.

बिमला- पर हमें का करना है.

माधुरी- करना ज़्यादा कुछ नहीं है बस पूअर्स मज़े लेने हैं जितना मौका मिले लूट लो..

सावित्री- ये हुई न बात सहेली

बिमला- मैं का करूँ मुजगे तो कुछ समझ नहीं आ रहा.

माधुरी- तुम मेरे इनको अपने जलवे दिखाओ अपने ब्लाउज की घाटी दिखाओ और देखो कहाँ तक जाते हैं ये.

बिमला- धत्त जीजी बात करने बोलने तक ठीक है पर सच में नहीं होगा हमसे शर्म से मर जायेंगे हम

सावित्री- मरोगी तो नहीं मरवा ज़रूर लोगी.

Bimla-dhatt ाचा हमें तो बड़ा बोल रही हो तुम लोग का का करोगे वो तो बताओ.

माधुरी- हम भी ढूंढेंगे कोई न कोई शिकार.

सावित्री – बिमला तुम्हारे पति कैसे हैं कसके छोड़ते हैं की नहीं.

बिमला- जीजी एक बार नीचे आ गयी तो रात भर पेलते रहेंगे.

माधुरी- ाचा तो लगता है मुझे फिर रिम्मी के पापा को hi अपने जलवे दिखने होंगे.

ऐसे hi मस्ती मज़ाक करते हुए तीनो नयी नयी सहेलियां नीचे आ गयी और अपने अपने कमरों में चली गयी.


अब इनकी प्लानिंग कितनी कामयाब होती है या होती भी है की नहीं और बाकि सब की प्लानिंग क्या है ये देखने के लिए आगे पढ़ें अपने कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
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