Incest Katha Chodampur Ki - Page 5 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Katha Chodampur Ki

लास्ट अपडेट में अपने देखा के कर्मा और विनीत मिलकर सावित्री बुआ को छोड़ते hain...phir कर्मा बाथरूम की तरफ आता है अब आगे...

अपडेट 26
मैं बाथरूम में घुसा और फिर चुपचाप से बहार की तरफ का गेट खोला जो आंगन में खुलता tha...maine बहुत धीरे से गेट khola...or बहार झांक कर देखा तो वहां कोई नहीं था... मैंने सोचा वहां hi होगा अचे से देखने के बाद भी कोई नहीं mila...phir मैं बापिस मुदा तो एक चीज़ पर मेरा दिमाग गया.. खिड़की के बगल mein...gamchha और चप्पल पड़ी थी.... मैंने सोचा ये पहले तो यहाँ नहीं थी... मुझे अचे से याद hai...or गमछा किसका हो सकता है ye....nahi कर्मा कुछ तो है... इतने हलके में मत ले.. गमछा या तो फूपाजी डालते हैं या बड़े फूपाजी और अगर इनमे से कोई बहार था तो गड़बड़ होने वाली है... मुझे पता लगाना hi hoga...maine झट से बाथरूम की तरफ से रूम के अंदर gaya...jahan विनीत और बुआ अब भी लगे हुए थे... विनीत बीएड पर लेता हुआ tha...or बुआ अपने भतीजे के लुंड को गांड में लेकर उछाल रही थी और अपनी उँगलियों से अपनी छूट को छोड़ रही थी...





बड़ा hi उत्तेजित करने वाला सन था एक पल को मेरा मन हुआ के बाकि सब बाद में देखा जायेगा अभी मैं भी शामिल हो जॉन चुदाई के खेल mein...par मैंने खुद को रोका और सोचा वो बहुत ज़रूरी है... और कपडे पहनने लगा......

Savitri-aaahhhhhh Ahhhhhhhhhhh कर्मा तू कहाँ आह्ह्ह्ह जा रहा है बछ्ह....

में- बुआ ज़रूरी फ़ोन आ गया आता हूँ... आप लगे रहो...

व्- जल्दी आ karma...aaahhhh बहुत मज़ा ा रहा है ..

Me-aata हूँ...

ये कहकर मैं रूम से निकल gaya...maine आंगन में सब जगह देखा फिर भागकर ऊपर गया दोनों रूम देखे एक मैं रिमझिम दीदी सो रही थी... दुसरे में कोई नहीं था बापिस आया पूर्वी दीदी के रूम में तो बुआ सो रही thi...phir मैंने अपना और विनीत वाला रूम देखा तो वो भी खली tha....phir मैं बुआ फूपाजी वाले रूम की और गया तो गेट बंद था मैंने कान लगा कर सुनने की कोशिश की तो ये फील हुआ के कोई तो अंदर hai...phir मुझे विनीत की बात याद आई.. के बुआ फूपाजी के रूम में भी दो तरफ गेट hain..main झट से पीछे की तरफ उस रूम से सटे बाथरूम में गया और अंदर घुस गया फिर मैंने बड़े धीरे धीरे बाथरूम के दुसरे गेट पर जो रूम की तरफ खुलता था हाथ लगाया और आराम से खींचा तो वो खुल गया अभी कुछ इंच खुला था तो मुझे बस बीएड का किनारा दिखा पर कुछ आवाज़ ज़रूर आई... मैंने गेट को थोड़ा और खोला और सर को घुमा कर देखा तो दांग रह gaya...maine जो देखा मुझे उसपर यकीं नहीहो रहा था ये कैसे हो सकता है.... मेरे सामने का नज़ारा hi कुछ ऐसा था..

सामने बीएड के नीचे की साइड पूर्वी दीदी बैठी हैं उनका पल्लू नीचे गिरा हुआ है... ब्लाउज के सरे बटन खुले हैं और वो बिलकुल खुला हुआ है उनका चिकना पेट नंगा दिख रहा hai...pet से ऊपर उनकी ब्रा नीचे हो राखी है और उनके दोनों बड़ी बड़ी रसीली छुछियां बहार hain...or कोई उन्हें मसल रहा है और पूर्वी दीदी की आँखें बंद हैब मुँह खुला हुआ है और सिसकारियां निकल रही hai...or सबसे बड़ी हैरत की बात जो शख्स इस वक़्त उनके साइड में बैठ kar...unki छूछीयो से खेल रहा hai...wo और कोई नहीं बल्कि उनके पापा यानि फूपाजी हैं....





मैं ये नज़ारा देखकर सुन्न पद गया मेरा लुंड बिलकुल फटने को तैयार tha...ek बाप अपनी बेटी के no की शादीशुदा है एक बच्चे की माँ है उसके छूछीयो से खेल रहा tha....mujhe तो जैसे ये देखकर सांप सूंघ गया tha...baap बेटी की ऐसी अद्भुत रासलीला और ऊपर से पूर्वी दीदी की नंगी सेक्सी छुछियां मुझसे से कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने अपना लुंड पाजामे को नीचे खिसका कर बहार निकल lia...or हिलने लगा मेरी नज़र उन्ही लार तिकी हुई थी....

(अस 3रद पर्सन)- दोस्तों आप सोच रहे होंगे के ये जो अभी कर्मा ने देखा बुआ और फूपाजी के रूम में ये सब कैसे hua...to थोड़ा सा पीछे चलते हैं समय में और देखते हैं...

जब कर्मा और विनीत बुआ के रूम और बाथरूम में घुस जाते हैं तभी पूर्वी का बच्चा रोने लगता hai....wo उठती है और उसे अपनी छुच्छी को बहार निकलती है और बच्चे के मुँह में एक निप्पल डालके उसे दूध पिलाने लगती है थोड़ी देर बाद बच्चा फिर सो जाता है तो वो दूध पिलाना बंद करती है और अपने कपडे ठीक करती है... अपनी माँ को देखती है वो अभी भी सो रही thi..to सोचती hai....chalo चाय पि jaye...phir रूम से बहार आती है और किचन में जाकर सोचती है अकेले के लिए क्या चाय बनाई जाये तो फिर पहले कर्मा और विनीत के रूम में जाती है तो वहां कोई नहीं होता...

पूर्वी- ये दोनों कहाँ गए इस waqt...chalo तै जी से पूछ लेती हु...

फिर वो अपनी तै के रूम की और बढ़ती है जब गेट पर पहुँचती है तो उसे कुछ आवाज़ें आती hain...use समझते देर नहीं लगती ये किस चीज़ की आवाज़ें हैं. मन hi मन मुस्काती hai....tai और ताऊ जी तो इस उम्र में भी लगे रहते hain...mujhe तो लगा था ताऊ जी दुकान पर hain.....mera बड़ा मन कर रहा है के मैं भी तै और ताऊ जी को dekhun....wo पहले तो खुद को डांटती है के नहीं ये गलत है... पर सोचती है के थोड़ा सा देख कर चली जाउंगी... और खिड़की के पास जाकर अंदर झांकने लगती hai...or जो देखती है उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती hain......tai जी नीचे बैठती हैं और कर्मा उनके सामने खड़ा है... और वो उसका लुंड बहार निकल रही है... और जैसे hi कर्मा का लुंड बहार आता है तो पूर्वी की आँखें और बड़ी हो जाती hain...haaye राम कितना बड़ा लुंड है कर्मा ka...or मोटाई तो देखो... इसे छूट में जो लेगा मज़ा आएगा use...ye सोचकर उसकी छूट गीली होने लगती hai...phir बुआ जैसे hi कर्मा के लुंड चूसना शुरू करती है तो पूर्वी मुँह जैसे अपने आप सूखने लगता hai....uski जीभ बार बार उसके होंठों को सहलाने लगती है... पूर्वी अंदर देखे जा रही थी और उसके शरीर में गर्मी का एहसास बढ़ा जा रहा tha...uske हाथ अकस्मात् hi अपने आप चलने लगते hain...or धीरे से उसका पल्लू नीचे गिर जाता hai....uske हाथ उसकी गर्दन से लेकर चेस्ट तक रेंगने लगते hain....phir ब्लाउज के ऊपर से hi उन बड़ी बड़ी दूध से भरी छूछीयों को दबाने लगते हैं और उसके मुँह से अपने आप एक आह निकल जाती है जहाँ एक हाथ छूछीयो से. खेल रहा है वहीं दूसरा सपाट और चिकने पेट की सैर पर निकल पड़ता hai...kamre के तूफ़ान के साथ साथ पूर्वी के अंदर का तूफ़ान भी बढ़ता जा रहा tha...tabhi वो देखती है के कर्मा और तै जी ने अपनी पोजीशन चेंज की है अपनी तै के बड़े चूतड़ों को देखकर... उसके चूतड़ों में कसाव आने लगता है और फिर जैसे hi कर्मा अपनी जीभ तै की छूट पर रखता है... पूर्वी भी साड़ी के ऊपर से hi अपनी छूट को दबोच लेती hai...or मसलने लगती hai.....or अब वो इतनी गरम हो गयी थी की वो कहाँ कड़ी है क्यों कड़ी है उसे कुछ होश नहीं tha....wo ब्लाउज के हुक खोलती है और अपनी बड़ी बड़ी दूध से भरी हुई टाइट छूछीयो को ब्रा नीचे करके बहार निकल लेती hai...or अपनी उँगलियों से निप्पल्स को छेड़ने लगती hai...wo देखती है के कर्मा अब तै जी के पीछे खड़ा हो गया है... और अपना लुंड उनकी छूट के मुँह पर लगता है... पूर्वी नीचे से अपनी साड़ी और पेटीकोट ऊपर तक उठा कर उन्हें कमर तक कर लेती है और पंतय के ऊपर से hi छूट को रगड़ने लगती है और जैसे hi कर्मा तै की छूट में धक्का लगता है और उसका लुंड छूट में अंदर जाता है पूर्वी का मुँह खुला रह जाता है... पूर्वी को लगता है वो लुंड उसकी छूट के अंदर गया है और वो पंतय साइड करके दो उंगलियां छूट के अंदर दाल देती hai...udhar कर्मा तै की छूट में लुंड को पेल रहा था और इधर पूर्वी उंगलिओ को अपनी छूट mein...dono तरफ चुदाई का खेल जारी है....

ठीक इससे कुछ देर पहले विनीत और पूर्वी के पापा यानि कर्मा के फूपाजी अपनी डेरी पर बैठे हुए सोच रहे थे के कोई ग्राहक hi नहीं दिख रहा आएगा तो चलो घर चलकर थोड़ा आराम hi किया जाये और मौका मिला तो शशि के साथ तो कुछ चुदाई भी हो जाएगी... काफी दिन हो गए बिना चोदे.... और वो डेरी का शटर गिरते हैं अपना गमछा लेकर घर की और निकल पड़ते हैं.. घर में घुस कर देखते हैं तो सन्नाटा है.... तो किचन में जाकर पानी निकलकर पीने लगते हैं तभी उनकी नज़र उनके भैया भाभी के बहार कड़ी हुई उनकी बेटी पूर्वी पर पड़ती hai...or जब वो थोड़ा आगे बढ़कर उसकी हालत देखते हैं तो चौंक जाते hain...ki उनकी बेटी को ये क्या हो गया है.... पूर्वी की साड़ी और पेटीकोट कमर पर हैं नीचे से पूरी नंगी है पंतय साइड में करके अपनी छूट में उंगलिया कर रही hai...or उसके छुछियां ब्लाउज बहार हैं.... पहले तो उन्हें गुस्सा आता है की इसको क्या हो गया है जो इतनी बेशर्मी पर उतर आई hai...koi देख ले तो घर में दो जवान भाई भी hain...par फिर उनका ध्यान एक बात पर जाता है उनका लुंड पूरी तरह से टाइट खड़ा hai...wo थोड़ा झेंप जाते हैं के अपनी hi बेटी को देखकर उनका लुंड खड़ा हो रहा है... फिर वो ध्यान से देखते हैं पंतय में कैसे हुए उसके चूतड़ों को देखकर उनका लुंड और फूल जाता है और झटके मरने लगता है





पूर्वी की गांड hi कुछ ऐसी थी की मुर्दो का लुंड भी खड़ा करदे ये तो जीता जगता इंसान tha...Phoopaji का हाथ खुद hi लुंड के ऊपर चला जाता है... और उसे लुण्डि के ऊपर से मसलने लगते हैं जब मन नहीं मंटा तो लुंगी को सौदे करके अपना धरी वाला कच्चा नीचे खिसकते हैं और लुंड बहार निकल लेते hain...or अपनी बेटी की गांड को देखकर मुठियाने लगते हैं.. पूर्वी पूरी दुनिया से बेखबर अपनी आवाज़ को दबाये हुए कर्मा और तै जी की चुदाई देख रही थी और साथ hi खुद की छूट को उंगलिओ से सुख देने की कोशिश कर रही थी...

उधर फूपाजी के पेअर अपने आप hi धीरे धीरे आगे बढ़ने लगते हैं और वो अपनी बेटी के ठीक पीछे जाकर खड़े हो जाते hain...tabhi उनकी नज़र उस नज़ारे पर पड़ती है जिसे उनकी बेटी देखकर अपनी छूट को छोड़ रही थी अंदर कर्मा उनकी भाभी जी को घोड़ी बनाकर पीछे से छोड़ रहा tha....ye देखकर तो उनको झटका लगता hai...ke उनकी भाभी अपने बेटे की उम्र के जो की उनका भतीजा लगता है उससे अपनी छूट मरवा रही hai...unka बुरा हाल हो जाता है उनका मन ये सब रोकना भी चाहता था और लुंड को तो कुछ और hi मंज़ूर tha...unki एक नज़र अपनी भाभी के बड़े चूतड़ों पर पड़ती hai..or उनके दिमाग से सही गलत का सारा ज्ञान गायब हो जाता है... वो काबू में नहीं रहते और अपना हाथ पूर्वी की कमर पर रख देते है और उससे पीछे से चिपक के खड़े हो जाते हैं.... पूर्वी को जैसे hi ये एहसास होता है की किसी का हाथ उसकी कमर पर है वो फ़ौरन मुड़ती है और अपने पापा को देखकर बहुत दर जाती है... पूर्वी को जैसे सांप सूंघ जाता है जैसे काटो तो खून नहीं... पूर्वी के घूमने से उसकी बड़ी बड़ी छुछियां उसी पापा के सामने आ जाती हैं और उनकी नज़र उन पर टिक जाती है... इतनी बड़ी बड़ी और टाइट छुछियां वो भी खुद की बेटी की उन्हें देखकर फूपाजी का लुंड ठोकरे मरने लगता है और वो काबू खो देते hain...or जो हाथ पूर्वी की कमर पर थे अब वो उसके चूतड़ों पर पहुंच जाते हैं और वो अपनी बेटी के चूतड़ों को पकड़ कर मसल देते है...





पूर्वी अपने पापा के इस कदम से घबरा जाती hai...or तभी उसके पेट पर उसे कुछ चुभता हुआ लगता है तो वो नीचे देखती है के उसके पापा का लुंड उनके कच्चे से बहार है और उसके पेट पर टक्कर मार रहा है... वो ये देखकर बिलकुल hi सहम जाती है उसे समझ नहीं आता अब वो क्या kare...or एक बार लुंड की तरफ और देखती है और फिर नज़रें फिरने के चक्कर में घूम जाती hai...jo उसे बाद में फील होता है के एक और बड़ी गलती thi...uske पापा पीछे से उससे चिपक जाते हैं उनका लुंड उसकी गांड की दरार में घुस जाता है और उनके हाथ उसके छूछीयो की तरफ बाद जाते हैं.... पूर्वी बुरी तरह से गरम हो चुकी thi...phir भी उसके मन के एक छोटे से हिस्से में अब भी था के ये सब गलत हो रहा है और वो खुद को और पापा को रोकने की कोशिश कर रही thi....tabhi अंदर की आवाज़ से उनका ध्यान फिर से अंदर जाता hai....unhone देखा के कर्मा ने अपना लुंड तै की छूट से निकल लिए है और साइड हैट गया और तै उसे लुंड बापिस डालने को बोल रही हैं... तभी कोई और कर्मा की जगह आता है और अपना लुंड तै जी की छूट में घुसेड़ देता है.....

ये देखकर पूर्वी और पापा दोनों की आँखें फटी की फटी रह gayi...ke तै जी को सिर्फ कर्मा hi नहीं एक और कोई छोड़ रहा है और जब उन्हें ये नज़र आया ये कोई और नहीं बल्कि विनीत है तो उनकी तो जैसे आँखें hi जैम gayi...Poorvi का bhai...Phoopaji का बीटा उनकी भाभी ko...apani माँ जैसी ताई को छोड़ रहा tha...or कर्मा ने अपना लुंड तै जी के मुँह में दाल dia..wo एक साथ दो दो जवान लुंड को खुश कर रही thi...or अपने अंदर ले रही थी ये देखकर पूर्वी और फूपाजी के अंदर जो रहा सहा सही गलत का भाव था वो भी मिट गया और उसकी जगह हवस और उत्तेजना ने ले ली..... फूपाजी के हाथ पूर्वी के नंगे छूछीयो पर कास gaye...or पूर्वी ने भी अपनी गांड अपने पापा के लुंड से पूरी तरीके से चिपका दी और ऊपर नीचे करने लगी..





दोनों hi हवस और शरीर की प्यास में बिलकुल बेसुध हो चुके थे... पूर्वी अब बिना किसी विरोध के अपने पापा से अपनी छूछीयो को मसलवा रही थी और साथ hi अपनी गांड पर उनका लुंड महसूस कर रही thi...uska मुँह खुला हुआ tha....or मुँह से हलकी हलकी सिसकारियां निकल रही थी... उधर उनका ध्यान कमरे में हो रही रासलीला पर भी था अब देखा तो कर्मा लेता हुआ था और तै जी उसका लुंड गांड में लेकर उछाल रही थी और विनीत का लुंड उनके मुँह में था जिसे वो शिद्दत से चूस रही थी... फूपाजी ने आगे झुककर पूर्वी के एक चुके को अपने मुँह में ले लिए और चूसने लगे.. और जैसे hi उन्होंने चूसना शुरू किआ उनके मुँह में पूर्वी के निप्पल से उसका मीठा दूध आने laga...ye सोचकर उनका लुंड और टाइट हो गया पूर्वी की छूट भी इस ख्याल से बहने लगी के मैब आज अपना दूध अपने बाप को पीला रही hun...kya कभी कोई बेटी ऐसा करती hogi...or इसी उत्तेजना मैं उसका हाथ उसके बाप के लुंड पर चला गया और उसे पकड़ लिए... फूपाजी का लुंड कर्मा जैसा तो नहीं पर एक नार्मल लम्बाई वाला tha...bas अपनी लम्बाई के हिसाब से ज़्यादा मोटा था जो उसकी मुठी ने भर के आ रहा था... जब फूपाजी के लुंड पर उनकी बेटी के हाथ पड़े तो उन्हें एक बेहद सुखद अनुभव प्राप्त हुआ... मुँह में बेटी के निप्पल से बहता हुआ doodh...lund पर बेटी का हाथ इस अनुभव को पाते हुए उनका खुद का हाथ बेटी की छूट पर पहुंच गया और पापा का हाथ अपनी छूट पर महसूस होते hi पूर्वी ने अपना हाथ छूट से हटा लिए और अपनी छूट की ज़िम्मेदारी पापा के हाथ को दे दी....





बेटी की रास बहती छूट में हाथ लगते hi फूपाजी की कमर अपने आप झटके मरने लगी और वो पूर्वी के हाथ को hi छोड़ने लगे... पूर्वी के हाथो की पकड़ भी फूपाजी के लुंड पर थोड़ी टाइट हो गयी और इधर फूपाजी ने अपनी उंगली पूर्वी की छूट में ghusadi...andar ऐसा लगा जैसे गरम भट्टी में उन्होंने अपनी उंगली दाल दी हो...

पूर्वी पापा की उंगली छूट में घुसते hi सिसक पड़ी.... बेटी की आवाज़ को दबाने के लिए फूपाजी ने अपने होंठो को पूर्वी के होंठों पर रख diya...or अपनी बेटी के रसीले होंठों का रास पीने लगे इधर से पूर्वी भी अपने पापा का पूरा साथ दे रही thi...thodi देर बाद जब दोनों के होंठ अलग हुए तो कमरे के अंदर देखने के लिए फूपाजी फिर से पूर्वी के पीछे आ गए और एक हाथ से छूट में उंगली करने लगे तो वहीं दुसरे से छूछीयो को सहला रहे the...unka लुंड पूर्वी की दंड की दरार में पंतय के ऊपर से रगड़ रहा tha...kamre के अंदर का सन बहुत hi उत्तेजक tha...karma और विनीत अब एक साथ तै जी को छोड़ रहे the...karma का लुंड गांड में था तो वहीं विनीत का छूट में जैसे जैसे कमरे के अंदर चुदाई अपने चरम पर पहुंच रही थी... फूपाजी और पूर्वी भी उत्तेजना के समंदर में बहते जा रहे थे...

फूपाजी का लुंड पूर्वी की दरार में ऐसी ठोकरे मार रहा था मनो अभी पंतय को चीरकर छूट में समां jayega...unki उंगलियां भी पूर्वी की छूट में काफी तेज़ चल रही थी जिसका असर पूर्वी पर साफ़ दिख रहा था पूर्वी अपने होंठ काटते हुए खुद को चीखने से रोक रही थी और फिर अगले hi pal...wo एक हलकी आअह्ह्ह के साथ पापा की उँगलियों पर झड़ने लगी और उधर अपनी उँगलियों पर बेटी का रास का अनुभव होते hi फूपाजी भी खुद को न रोक पाए और बेटी की गांड को अपने रास से भीगने lage....poora गीला करने लगे.... दोनों थोड़ी देर बिना किसी हरकत के ऐसे hi खड़े रहे फिर जब साँसों की स्पीड नार्मल हुई तो फूपाजी बोले बेटी चल कमरे में चलते हैं... पूर्वी ने भी हाँ कर दिए....

फूपाजी- तेरी माँ कहाँ है?

पूर्वी- मेरे कमरे में सो रही है...

फूपाजी- तो चल मेरे कमरे में चलते हैं..

और उन दोनों ने थोड़ा बहुत अपने कपडे ठीक kiye...or जल्दी से कमरे की और निकल gaye....kamre में पहुँचते hi जल्दी से गेट बंद किआ or...phir से एक दुसरे से चिपकने लगे... पूर्वी बीएड पर जाकर बैठ गयी और फूपाजी भी उसके बगल में बैठ गए और पल्लू नीचे गिरा दिए... पूर्वी का ब्लाउज तो पहले से hi खुला हुआ था तो छुछियां बहार आ गयी और फूपाजी उनके साथ खेलने लगे...

यही वो पल था जब कर्मा ने इन्हे देखा tha....to आगे की कहानी हमारे चाहते कर्मा की ज़ुबानी....

मैं तो बस उन दोनों को देखे जा रहा था की कैसे बाप बेटी एक दुसरे के शरीर से मज़े ले रहे hain...phir फूपाजी ने पूर्वी दीदी के छूछे को मुँह में भर लिए और चूसने lage....or फिर उन्होंने थोड़ी देर चूसने के बाद अपना मुँह खोला और बहुत सारा वाइट वाइट कुछ दीदी के छूछे पर गिरा दिए जिससे उनका पूरा छूछा भीग गया और फिर वो उसे चाटने lage......main सोचने लगा की ये क्या चीज़ है और फिर जैसे hi मेरे दिमाग में ख्याल आया मुझे मेरा लुंड फूलता हुआ महसूस hua...wo पूर्वी दीदी का दूध है जो वो बच्ची को पिलाती हैं.... आआह्ह्ह्हह और आज अपने बाप को पीला रही हैं... परिवार की हवस का ये खेल देखकर मैं खुद को कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा tha..phir फूपाजी ने दुसरे छूछे के साथ भी ऐसा hi kia...phir उन्होंने पूर्वी दीदी का हाथ पकड़ा और अपनी लुंगी के बीच में लुंड पर रख दिए और पूर्वी दीदी उसे हिलने lagi....kuch देर बाद वो खड़े हुए और अपने कपडे निकलने लगे इधर पूर्वी दीदी ने भी अपनी साड़ी और पेटीकोट को नीचे खिसका दिए उनकी नंगी गांड देखकर तो मैं पागल hi हो गया क्या मस्त लग रही तह... ब्लाउज बिलकुल खुला हुआ साड़ी और पेटीकोट पंतय जांघो में फँसी हुई थी....





फिर उन्होंने अपना ब्लाउज और ब्रा पूरी तरह से अपने शरीर से अलग कर दिए और ऊपर से बिलकुल नंगी हो gayi....phir अपने पैरों को हिलाया तो साड़ी और पेटीकोट भी नीचे गिर gaya...or फिर उनकी पंतय जो के भीगी हुई थी... उसे हुई उन्होंने उतर दिए और बिक्कुल नंगी हो गयी अपने बाप के सामने.... फूपाजी भी पूरी तरह नंगे होगये और उनका लुंड अपनी बेटी के नंगे बदन को देख कर अकड़ रहा tha...wohin फूपाजी की आँखें पूर्वी दीदी के एक एक अंग को नंगा अपनी आँखों में उतर रहे the...phir वो बीएड पर जाकर नीचे की और पेअर करके बैठ gaye...or पूर्वी दीदी को पकड़ कर उन्हें अपने ऊपर झुकाया और किश करने लगे थोड़ी देर किश करने के बाद फूपाजी पीछे की और लेट gaye...idhar पूर्वी डीसी थोड़ा और झुक गयी और अपने पापा के लुंड को हाथ में ले lia...or हिलने लगी... उनके झुकने की वजह से उनकी गांड मेरी तरफ आ गयी और फिर वो थोड़ा और झुकी और झुक कर फूपाजी के लुंड के टोपे को चाट लिए फूपाजी तो जैसे जन्नत में the...idhar मेरी हालत ख़राब थी मैं सिर्फ देखना नहीं चाहता था कुछ करना चाहता था मेरे लुंड में भी दर्द हो रहा था उधर पूर्वी दीदी ने फूपाजी के लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी...





उनका सर मुझे फूपाजी के लुंड पर ऊपर नीचे होता हुआ दिख रहा था पहिए दीदी ने अपने पैरो को थोड़ा सीधा किआ और आराम से झुक कर लुंड चूसने लगी... पर उनके ऐसा करने से मेरी हालत और ख़राब होने lagi....kyunki अब मेरी आँखों के सामने पूर्वी दीदी की गांड थी...





उनकी choot...bhoori गांड का ched...mere लुंड में बड़ी ज़ोरो से दर्द होने laga...mujhse अब सिर्फ देखा नहीं जायेगा मैंने socha...phir उनकी गांड को देखा तो जैसे लुंड को उसका खाना दिख रहा था... फूपाजी अपनी आँखें बंद करके अपनी बेटी से लुंड चूसै का मज़ा ले रहे थे पूर्वी दीदी का पूरा ध्यान अपने पापा के लुंड पर tha.....mere कदम अपने आप उनकी तरफ बढ़ने लगे मैं बीएड के किनारे पूर्वी दीदी की गांड के पास जाकर खड़ा हो गया... मुझे कुछ सही गलत, ाचा बुरा, कुछ भी नहीं पता था मुझे तो बस अपने लुंड में होता हुआ दर्द दिख रहा था और पूर्वी दीदी की gand....lund ने एक और ठुमका मारा तो मैं जैसे हिम्मत से भर गया और बस एक लाइन दिमाग में आई जो होगा देखा jayega...phir तुरंत मैंने अपने हाथ पर थूका और उसे अपने लुंड के टोपे पर लगा लिए और अपने लुंड को थोड़ा चिकना कर लिए....

और फिर बिना किसी देरी के अपने लुंड को हाथ में पकड़ा और एक हाथ से जल्दी से पूर्वी दीदी की कमर और अपना लुंड उनकी छूट के मुँह पर रखा और धक्क्क मार दिए लुंड तीन इंच अंदर घुस गया.... पूर्वी दीदी का मुँह वहीं रुक गया उनकी चीख फूपाजी के लुंड की वजह से उनके मुँह में hi डाब गयी....





मुझे तो जैसे दर्द से रहत मिल गयी... पूर्वी दीदी की टाइट छूट के अंदर मेरे लुंड को जो गर्मी मिल रही थी मुझे बड़ा सुख दे रही thi...par तुरंत पूर्वी दीदी ने फूपाजी के लुंड को मुँह से निकला और आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह करती हुई पीछे मुड़ी और मुझे देखा तो चौंक gayi...maine उनकी कमर को दोनों हाथो से पकड़ लिए और एक और झटका मार दिए जिससे लुंड आधे से ज़्यादा अंदर चला गया.... पूर्वी दीदी के मुँह से बस aaahhhhhhhhhhhhhhh निकला उधर फूपाजी की भी आँखें आवाज़ और पूर्वी दीद के मुँह से लुंड निकलने की वजह से खुल gayi....unhone पूर्वी दीदी की आँखों में देखा तो आंसू थे फिर उन्होंने पीछे देखा उठकर उन्हें मैं दिखा और मुझे देखकर वो चौंक गए....

फूपाजी- कर्मा तू... तू... यहाँ...

उनके जवाब देने से पहले मैंने उनकी बेटी की छूट में लुंड का एक और झटका मारा और पूरा लुंड पूर्वी दीदी की छूट में घुस गया ....

पूर्वी- aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaa....... कर्मा...

फूपाजी थोड़ी देर तो समझते hi रहे की ये हुआ क्या अभी फिर उनकी आँखों में गुस्सा आने लगा शायद उनकी जगह मैंने उनकी बेटी की छूट में मैंने लुंड घुसेड़ दिए इस वजह से या उनके सामने उनकी बेटी को छोड़रहा था इसलिए पर वो बहुत गुस्से में दिखे और गुस्से में बोले....

फूपाजी- कर्मा ये क्या hai...teri.....

वो इससे आगे कुछ बोल पाते इतने में पूर्वी दीदी बोल पड़ी...

पूर्वी- आह्ह्ह्हह कर्मा बता कर डालना चाहिए था na....dekh दर्द हुआ मुझे इतना बड़ा लुंड है तेरा ....

उनकी बात सुनकर मुझे हैरानी hui...or मुझसे भी कहीं ज़्यादा हैरानी मुझे फूपाजी के चेहरे पर दिखी...

फूपाजी- मेरे घर की साड़ी औरतें hi एक नंबर की रांड हैं....

पूर्वी दीदी ने इस बात पर कुछ नहीं कहा और मुझसे बोली..

पूर्वी- कर्मा थोड़ा आराम से कर न भाई....

मैं भी उनकी कमर पकड़ कर उन्हें हाकडे धक्को से छोड़ने लगा...

फूपाजी ने फिर कुछ न सोचते हुए कदम आगे बढ़ाये और तुरंत अपनी बेटी का मुँह पकड़कर अपना लुंड पूर्वी दीदी के मुँह में दाल dia....idhar में उनकी छूट को छोड़ रहा था और दूसरी तरफ से उनके पापा का लुंड उनके मुँह को छोड़ रहा था





मैंने ये देखकर अपने झटके तेज़ कर diye...or अब कसकर उनकी छूट का कचूमर बनाने laga...ek बच्चा होने जे बाद भी उनकी छूट बेहद टाइट थी और अंदर से भट्टी जैसी गरम थी... मुझे तो बहुत मज़ा मिल रहा tha...unki छूट में लुंड पेलने mein...maine साथ साथ उनके चूतड़ों को मसल रहा tha....idhar मेरी स्पीड बढ़ने से पूर्वी दीदी के चूसने की रफ़्तार भी बढ़ gayi...or वो फूपाजी के लुंड को बुरी तरीके से चूसने लगी... फूपाजी अब सारा गुस्सा भूल चुके थे और मज़े ले रहे the...mere हिप्स दीदी के चूतड़ों से टकरा क्र थप थप थप की आवाज़ कर रहे the...mera जोश भी अब बढ़ता जा रहा था उसके साथ साथ मेरे धक्को की स्पीड bhi....mera लुंड पूर्वी दीदी की छूट में बहुत तेज़ अंदर बहार हो रहा tha....or फिर वो मेरे लुंड लार झड़ने लगी . .. और अपनी बेटी का झड़ना फूपाजी भी बर्दाश्त नहीं कर paye...apani बेटी के मुँह में अपनी रास धार छोड़ने लगे... बेटी भी किसी आदर्श रैंड की तरह अपने पापा का सारा रास पि gayi...or एक बेटी का बाप का रास पीना देख कर मैं भी बहुत उत्तेजित हो गया और पूर्वी दीदी को बुरी तरीके से छोड़ने laga...mera लुंड एक मशीन की तरह से उनकी छूट से अंदर बहार हो raha....tha वो बस आहहहहहहहहह का एक रदम में बोले जा रही थी...

पूर्वी- आह्ह्ह्ह कृष्णा छोड़ भेनचोद फाड़ दे आअह्हह्ह्ह्ह अपनी बहिन की छूट...

पूर्वी दीदी छुड़ाते हुए बहुत गरम हो गयी थी जिससे मैं और फूपाजी दोनों hi हैरान थे...

पूर्वी- देखो न पापा कैसे छोड़ रहा है ....अह्ह्ह्ह कर्मा मेरी छूट ko....tumhari बेटी की छूट को... तुंहरे सामने छोड़ छोड़ कर चटनी बना रहा hai...aaaahhhh कर्मा वैसे hi छोड़ जैसे तै जी को छोड़ रहा tha.....aaahhh

मैं समझ गया की इन्होने hi देखा था मुझे और विनीत को चिड़ै करते huye...main और तेज़ छोड़ने लगा और फिर दो चार तेज़ झटके मार के पूर्वी दीदी की छूट में अपना रास उढेल dia....ek एक बाद एक बहुत सी धरें मैंने उनकी छूट में भर di....or फिर जब मेरा झड़ना बंद हुआ तो मैं थक कर उनके ऊपर hi बीएड पर लेट गया और वो भी बीएड पर पड़ी rahi...mera लुंड उनकी छूट में था फूपाजी हमारी तरफ hi देख रहे थी पर कुछ नहीं कहा और फिर वो भी लेट gaye...maine फिर अपने आप को पूर्वी दीदी की बॉडी से हटाया और साइड होकर लेता तो मेरी नज़र बाथरूम के दरवाज़े पर gayi...to वहां सावित्री बुआ और विनीत खड़े the...wo हमें देख कर थोड़े शॉकेड थे मैंने उनकी तरफ देखते हुए एक स्माइल करदी...

फिर इसके बाद क्या हुआ वो अगली अपडेट में आप सब प्लीज पढ़ते रहिये और कमैंट्स करते रहिये... शुक्रिया....
 
XXX-Porn-Lisa-Ann-GiF-25.gif
 
लास्ट अपडेट में अपने देखा कैसे कर्मा पूर्वी दीदी और फूपाजी को खेलते हुए देखलेता है और फिर पूर्वी दीदी को छोड़ता hai....ab आगे...

अपडेट 27
मैं फूपाजी और पूर्वी दीदी तीनो बीएड पर नंगे लेते हुए the...gate पर विनीत और सावित्री बुआ कड़ी थी वो भी बस एक पेटीकोट पहने हुए थी और ऊपर से उन्होंने साड़ी ओढ़ राखी thi....Vineet बस अपने कच्चे में tha...hum सब एक दुसरे को देख रहे the...koi कुछ नहीं बोल रहा tha....mere अलावा सभी के मन में सवाल थे, काफी देर तक कोई कुछ नहीं बोलै मैंने विनीत को आगे आने का इशारा किआ वो आया तो पीछे पीछे बड़ी बुआ भी ा गयी... फूपाजी की नज़र अपनी भाभी के नंगे दीखते हुए बदन पर thi..wo दोनों भी आकर बीएड पर बैठ गए....

में- देखो हम सबने hi एक दुसरे को देख लिए है और जानते हैं के हम क्या कर रहे the...to छिपा कर तो कोई फायदा नहीं hai...jo हो गया उसे बदला नहीं जा सकता और न hi झुठलाया जा सकता है...

मैंने सबकी आँखों में देखा सब मुझे hi देख रहे the...or मेरी बात को ध्यान से सुन रहे थे...

मैंने अपनी बात को आगे बढ़ाया

में- तो अब बात ये है की आगे क्या किआ jaye...humare पास दो रस्ते हैं... एक तो जो हुआ उसे भूल कर इस बारे में किसी से बात न करें और जैसे पहले थे वैसे rahein...par वो बहुत मुश्किल है एक बार छूट को लुंड का स्वाद लग गया और लुंड छूट में चला गया तो उसे दूर रखना काफी मुश्किल होता hai....khair...

दूसरा रास्ता ये है के जो हुआ है वैसे hi रहने दें और एक दुसरे के साथ मज़े karein....jab एक बार हो सकता है तो दोबारा करने में मुझे कोई नुक्सान नज़र नहीं आता अगर हमें ाचा लगता है to...par किसी पर कोई दबाब नहीं हैं हम एक फॅमिली हैं और उसका ख्याल भी रखना है एक दुसरे की िछहों का तो जिसको ये सब मंज़ूर है वो आगे करता रहेगा एक दुसरे के साथ और जिसको नहीं वो बंद कर सकता हैं कोई उसे मजबूर नहीं karega....or सबसे पहले मैं hi फैसला लेता हूँ मैं तो ये सब आगे भी करना चाहूंगा....

और ये कहते हुए मैंने अपना हाथ पूर्वी दीदी के चुके पर रख dia...wo सब मेरी और देख रहे थे तो कभी एक दुसरे की और दूसरा जवाब विनीत का था वो भी बोलै मैं भी कर्मा के साथ hun...or अपना लुंड मसलने laga...phir कुछ देर ख़ामोशी रही कुछ नहीं बोल रहा था तभी मुझे अपने लुंड पर हाथ महसूस हुआ वो पूर्वी दीदी का tha...mera लुंड जो आधा खड़ा था वो उनके हाथ के स्पर्श से पूरी तरह खड़ा होने लगा मैंने भी उनकी तरफ पलटा और उनके छूछीयो को दबाने लगा मैंने देखा उनका दूसरा हाथ फूपाजी के लुंड पर है..

पूर्वी- मैं भी कर्मा और विनीत के साथ hun.....sach कहूं तो जैसा मैंने आज महसूस किआ पहले नहीं किआ अपने पापा के साथ और जब कर्मा ने मेरे साथ वो किआ तो मुझे लगा मुझे वो सब मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी तो अब मैं पीछे नहीं हैट सकती...

और ये कहकर वो मेरी तरफ पलट गयी और मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी... पूर्वी दीदी के पलटने से उनकी गांड फूपाजी की तरफ हो गयी... फूपाजी ने भी दीदी को पीछे से पकड़ लिए और अपना लुंड बेटी की नंगी गांड की दरार में घिसते हुए बोले मैं भी बच्चो के साथ हूँ....

अब सबकी नज़र बड़ी बुआ पर thi...unhone कहा... अरे हमार ख़ुशी तो तुम सब बच्चा में hi hai...jaise बच्चे खुश वैसे मैं khush..or ये कहकर उन्होंने अपनी साड़ी जो ओढ़ राखी थी नीचे गिरा दी और पेटीकोट भी उतर कर बिलकुल नंगी हो गयी...

में- सब लोग राज़ी हैं ये तोह बहुत बढ़िया hua...par अब सबके मन में काफी सवाल होंगे तो किसका किसके साथ कैसे स्टार्ट हुआ सब बता देते hain...phir मैंने अपनी और सावित्री बुआ की पहली चुदाई के बारे में बता दिए पर ये नहीं बताया की उन्हें बुआ के धोखे में छोड़ा tha...pr फिर सबने अपनी अपनी कहानी सुना दी और सुनकर सब गरम हो गए थे और अब खेल आगे बढ़ा....

पूर्वी दीदी ने मेरे होंठों को चूसना जारी रखा और उधर फूपाजी दीदी की कमर में हाथ डेल अपना लुंड उनके चूतड़ों में घिस रहे the....main दीदी के दूध भरे छूछीयो को दबा रहा था और फिर अपना मुँह झुकाके उनके एक छूछे को अपनर मुँह में भर लिए और चूसने लगा...

बीएड के कोने पर विनीत तै जी के छूछीयो को चूस रहा tha...or अपनी बहन के नंगे जिस्म को भी देख रहा tha....udhar फूपाजी जी पूर्वी दीदी के पीछे गांड पर अपना मुँह लगाकर उनके चूतड़ों को और उनकी छूट को चाट और चूस रहे the...maine थोड़ी देर hi दीदी के छूछे को चूसा था की उसमे से दूध की धार मेरे मुँह में आने लगी.... मुझे वो मीठा सा दूध बड़ा टेस्टी लगा और मैं ज़ोर लगाकर चूसने लगा... और काफी देर तक चूसता रहा जब तक उनका पूरा दूध खली न हो गया हो फिर दुसरे छूछे को मुँह में भर लिए और चूसने laga...thodi देर बाद अचानक से दीदी के मुँह से आअह्ह्ह्ह निकला और वो मुझसे चिपक सी गयी.... मैंने सर उठाकर देखा तो फूपाजी ने अपना लुंड पीछे से hi अपनी सगी बेतीहल की छूट में घुसा दिए था... क्या नज़ारा था एक बाप अपनी बेटी की छूट में लुंड घुसा रहा tha...uska अपना beta...or लड़की का भाई वही दो फ़ीट की दूरी पर ये सब देख रहा था उसके मां का लड़का उसके छूछे चूस रहा था और उसकी तै जी उसके भाई से अपनी छूट चटवा रही थी.... फूपाजी के लुंड घुसाने से सब लोग रुक gaye....or इस मनमोहक दृश्य का आनंद लेने लगे... विनीत ने भी अपना मुँह तै की छूट से ऊपर उठाकर देखा उसके पापा का लुंड उसकी बहन की रास भरी छूट में tha...uska लुंड फूल गया और उसने अब और इंतज़ार न करते हुए बुआ को पलटा और अपना लुंड बुआ की छूट में घुसेड़ दिए और उन्हें घोड़ी बनाकर छोड़ने लगा... इधर मेरा लुंड भी फटने को था मई झट से बैठ गया और अपना लुंड पूर्वी दीदी के मुँह के पास कर दिए और उन्होंने झट से मेरा लुंड अपनी गर्दन आगे बढ़ा कर मुँह में ले लिए और चूसने लगी... फूपाजी अब रदम बनाकर अपनी बेटी को छोड़ रहे the...or वो मेरा लुंड चूस रही थी...





मुझे बेहद मज़ा ा रहा था पूर्वी दीदी एक रंडी की तरह बड़े अचे से लुंड चूस रही थी... मेरा आधा लुंड मुँह में लेती और फिर उसे चाट देती... पीछे से फूपाजी सततत अपनी बेटी की छूट में अपना लुंड पेल रहे थे... उनके चेहरे पर एक अजीब ख़ुशी थी शायद ये ख़ुशी वो hi महसूस कर सकता था जिसने अपनी बेटी को छोड़ा हो... और बेटी जब पूर्वी जैसी हो तो कोई भी बाप कैसे रोके खुद को उधर बीएड के दूसरी तरफ पोजीशन चेंज हो चुकी thi...ab बुआ पहले की तरह hi घोड़ी बानी हुई थी और विनीत उनकी गांड मार रहा tha...mujhe कुछ और करने का मन हुआ मैंने अपना लुंड पूर्वी दीदी के मुँह से निकला और बुआ के सामने जा जाकर खड़ा हो गया मेरे हटते hi फूपाजी ने पूर्वी दीदी को भी घोड़ी की तरह झुका लिए और उसे छोड़ने lage......bua ने मेरा लुंड अपने मुँह में ले लिए और चूसने लगी और साथ में विनीत से अपनी गांड भी मरवा रही थी...





मैं बुआ से लुंड चुसवाने लगा बुआ भी काफी ाचा लुंड चूसती थी पर अब मेरा मन चुदाई का था लुंड चुसवाने का nahi...maine विनीत को इशारा किआ जगह बदलने का उसने झट से बुआ की गांड से अपना लुंड निकल लिए और मैं बुआ के पीछे आ गया और अपना लुंड एक hi झटके में बुआ की गांड में दाल diya...bua aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh कर गयी... मेरा लुंड उनकी गांड में धंसता चला गया और मुझे एक बिगड़ सुखद एहसास hua....udhar विनीत बुआ की गांड से हटने के बाद बुआ के सामने न जाकर पूर्वी दीदी के सामने जा कर खड़ा हो गया... पूर्वी दीदी ने झट से अपने भाई का लुंड पकड़ा और उसपर जीभ फिरने लगी.... विनीत पहली बार अपने लुंड पर अपनी बहन की जीभ का एहसास pakar...mast हो गया और आँखें बंद करके उस सुखद अनुभव का आनंद लेने लगा... फिर पूर्वी दीदी ने उसके लुंड को मुँह में ले लिए और चूसने लगी... फूपाजी ये सब पीछे से देखते हुए और गरम होते जा रहे थे... उनकी beti...unke बेटे का लुंड चूस रही थी और वो उसकी छूट मार रहे the...unke झटके और तेज़ हो गए इधर मैं बुआ की झुककर गांड में लुंड पेले जा रहा था....





बुआ भी बहुत मज़े ले लेकर अपनी गांड मरवा रही thi....main उधर बाप बेटे और बेटी का कार्यक्रम देख कर बहुत गरम हो रहा था और बुरी तरीके से बुआ की गांड मार रहा tha....bua भी अपने देवर और उनके बच्चो की चुदाई देख कर गरम हो कर गांड पीछे कर कर के लुंड गांड में ले रही थी....

अपनी बेटी की छूट में लुंड क्व झटके मरते हुए अब फूपाजी की स्पीड और ज़्यादा बढ़ गयी थी और उसी स्पीड से पूर्वी अपने भाई का लुंड चूस रही thi...phir फूपाजी ज़्यादा देर तक अपनी बेटी की छूट की गर्मी को नहीं झेल पाए और बोले बेटी मेरा निकलने वाला hai....aaahhhhhhhhhh क्या छूट है तेरी... aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh.......

पूर्वी- आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह आह्ह्ह्हह्ह हाँ पापा अंदर hi दाल दो मुझे तुम्हारा रास अपनी छूट में लेना है मेरे पापा का रास आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जिससे मैं पैदा हुई वही मेरी छूट में जायेगा.... aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मायआ....

फूपाजी इस बात को सुनकर और नहीं रुक सके और अपनी बेटी की छूट में अपने लुंड से रास की धार मरने लगे और उसकी छूट को भीगा dia....or फिर उन्होंने अपना लुंड पूर्वी की छूट से निकला और फिर बीएड के सिरहाने से टिक कर बैठ gaye...or साँसे नार्मल करने lage...udhar फूपाजी के हटते hi विनीत ने झट से अपना लुंड पूर्वी के मुँह से निकला और अपनी बहन की छूट में घुसेड़ दिए... वो तो न जाने कबसे इसी पल का इंतज़ार कर रहा था... और दो झटको में hi पूरा लुंड पूर्वी दीदी की छूट में था... और वो सटासट अपनी बहिन की टाइट छूट को छोड़ने लगा... विनीत को तो जैसे सब मिल गया था कहाँ वो छूट के लिए तरस रहा था और कहाँ आज पहले अपनी तै और अब अपनी सगी बहिन की छूट मार रहा था... जिनके वो सपने देखता था आज उसका लुंड उसी छूट में tha...or वो ये सब सोचते हुए मेरी तरफ देखने लगा जैसे शायद आँखों में hi मुझे इन सब के लिए शुक्रिया कह रहा ho...maine भी मुस्कुरा कर उसका जवाब दिए और बुआ जी की गांड को और तेज़ मरते हुए अपनी उंगलियां उनकी छूट में घुसेड़ दी... वो मचलने लगी...

उधर पूर्वी ने पीछे मुड़कर भाई से पोजीशन बदलने को कहा वो घोड़ी बने हुए थक गयी थी..

कर्मा को उसने बीएड पर लिटा दिए और अपने दोनों पेअर उसकी कमर के दोनों तरफ कर के उसके लुंड को पकड़ा और छूट के मुँह पर निशाना लगाया और नीचे फिसलती चली gayi...or धम्म से अपने भाई के ऊपर बैठ गयी... विनीत ने भी उसके बड़े छूछे पकड़ लिए और उसके होंठों को चूसने laga....or नीचे से गांड उठा उठा कर अपनी बहन को छोड़ने लगा पूर्वी भी अपनी गांड को उसके लुंड पर पटक रही थी...





फूपाजी लेते हुए बस अपने बच्चो की चुदाई देख रहे थे...

मैंने बुआ की गांड से लुंड निकला और एक झटके में छूट में दाल दिए ताबरतोड़ झटके lagaye...or बुआ उन्हें सह नहीं पाई झाड़ गयी.... मेरा पूरा लुंड उन्होंने अपनी छूट के रास से भीगा dia...wo सर नीचे झुकाके आह्हः आह्ह्ह्हह कर रही थी फिर आगे की और गिर गयी.... और मेरा लुंड उनकी छूट से बहार निकल गया.... मैंने पूर्वी दीदी और विनीत की और देखा वो चुदाई में व्यस्त थे दीदी आगे की और झुकी हुई थी और दोनों भाई बहिन एक दुसरे के होंठों को चूस रहे थे... विनीत का लुंड दीदी की छूट में अंदर बहार हो रहा tha...aage झुके होने की वजह से उनके चूतड़ खुले हुए थे और पूर्वी दीदी की गांड का क्यूट सा भूरा छेड़ मुझे दिख रहा tha...use देखकर मेरा मन ललचा रहा tha...or पूर्वी दीदी की जैसी गांड न मरू ये कैसे हो सकता था... मेरा लुंड पहले से hi बुआ की छूट के रास से भीगा हुआ था... मैं पूर्वी दीदी और विनीत की टैंगो के बीच गया वो दोनों भाई बेफिक्र होकर चुदाई कर रहे थे और एक दुसरे के होंठों का रसपान कर रहे थे.... उनकी गांड का छेड़ करीब से देखकर मेरा लुंड फूलने लगा जैसे अगर मैंने खुद नहीं डाला तो वो मेरे शरीर से निकल कर खुद hi घुस जायेगा उसमे....

मैंने उसे तड़पना ठीक नहीं समझा और झट से अपना लुंड उनकी गांड के छेड़ पर टिकाया और एक हाथ उनकी कमर पर रखा इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने धक्का लगाया और मेरे लुंड का सूपड़ा दीदी की गांड में घुस gaya....or उन्होंने तुरंत अपने होंठों को विनीत से छुड़ाया और aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh करके एक चीख उनके मुँह से निकली और गर्दन घुमा कर मुझे देखा.....

पूर्वी- आअह्ह्ह्हह कर्मा मेरी gandddddddddd अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बता कर दाल deta....itna बड़ा लुंड है तेरा....

इस नज़ारे को देखकर फूपाजी का लुंड भी फिर खड़ा होने लगा ...और वो उसे हाथ से सहलाने लगे...

में- दीदी kya...aaahhhhhh मस्त गांड है तुम्हारी देख कर रुका hi नहीं gaya...udhar नीचे से विनीत उनके छूछीयो को चूसने लगा थोड़ी देर तक रुकने के बाद दीदी थोड़ी नार्मल हुई और अपनी कमर को थोड़ा पीछे धकेला तो मैं समझ gaya...maine आराम से धीरे धीरे ढके लगाने चालू किये जिससे दीदी को ज़्यादा दर्द न हो और हर धक्के पर लुंड एक इंच अंदर घुस जाता ...और कुछ धक्को बाद मेरा लुंड पूरा उनकी गांड में था.. वो तेज़ तेज़ साँसे ले रही थी... विनीत भी हलके हलके धक्के मार रहा था नीचे से और फिर मैंने अपना आधा लुंड निकल कर एक धक्का मारा बापिस दीदी की गांड में और दीदी की चीख निकल gayi...or उसी के साथ उनकी बॉडी अकड़ गयी और वो झड़ने lagi...maine विनीत को छोड़ने को बोलै और खुद भी दीदी की गांड मरने laga....wo झड़े जा रही थी कुछ टाइम बाद उनका झड़ना बंद हुआ तो वो आगे विनीत के ऊपर गिर गयी और अपना सर उसके कंधे पर रख लिया... अपनी बेटी झड़ना देख कर फूपाजी का लुंड भी पूरी तरह से टाइट हो गया और वो उठ कर गए और अपनी भाभी यानि बड़ी बुआ के मुँह पर अपना लूँ

मैंने और विनीत ने उनकी चुदाई जारी राखी और थोड़ी देर बाद वो फिर से गरम हो कर छुड़वाने लगी....

अपनी बेटी का झड़ना देख कर फूपाजी का लुंड फिर से पूरी तरह से खड़ा हो गया और उन्होंने उठ कर अपना लुंड अपनी भाभी के पास जाकर उनके होंठों पर रख dia...bafi बुआ ने भी अपने देवर के लुंड को झट से मुँह में भर किआ और चूसने लगी....

इधर थोड़ी देर में पूर्वी काफी गरम हो गयी थी और अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह करके बोलते हुए छुड़वा रही थी...

पूर्वी- अह्ह्ह मारो सालो chodo.....chodo अपनी बहिन ko....aaahhh भाई फाड़ दाल मेरी छूट ko.....aahhhh अह्ह्ह कर्मा मेरी गांड का कचूमर बना दे ...ये बानी hi तेरे जैसे लुंड के लिए है ...आह्ह्ह्ह देखो न पापा कैसे ये दोनों भाई अपनी बहिन को छोड़ रहे hain...gand मर रहे hain....dekho पापा तुम्हारी प्यारी बेटी को राउंड रहे हैं अपने लुंड से...





मैं और विनीत उनकी बातें सुनकर और उत्तेजित हो गए और तेज़ से उन्हें छोड़ने लगे मुझे उनकी गांड से विनीत का लुंड छूट में महसूस हो रहा tha...apani बेटी की बात सुनकर फूपाजी ज़्यादा गरम हो गए और बड़ी बुआ के बाल पकड़ कर उनके मुँह को छोड़ने लगे अपने लुंड से....

कमरे में बस आअह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह और थप थप थप और चुदाई की hi आवाज़ें आ रही thi...or कमरे का दृषिअ भी बहुत कामुक था एक बेटी अपने दो भाइयों से अपने पापा और तै के सामने अपनी छूट और गांड मरवा रही थी... वहीं उसके पापा उसकी तै के मुँह में लुंड डालकर चुसवाने में लगे हुए थे...

फिर पूर्वी ने हम दोनों से मरवाते हुए फूपाजी को पास बुलाया और उनका लुंड मुँह में भर लिए बुआ भी जल्दी उठ कर आई और मेरा लुंड जो की पूर्वी दीदी की गांड में जा रहा था वजह जीभ निकल कर चाटने लगी उधर पूर्वी दीदी के अब तीनो छेड़ो में लुंड था छूट में भाई ka...gand में ममेरे भाई का और मुँह में बाप का....





वो तीनो लुंड को अपने अंदर लेके बहुत गरम hi रही थी... उसके बाप और भाई भी अपने अपने लुंड उसके अंदर घुसा रहे the..main भी उसकी गांड मरे hi जा रहा था ऐसी माखन सी गांड थी उसकी की मेरा मन hi नहीं हो रहा था के उनकी गांड से कभी लुंड nikalun......phir मैंने झट से उनकी गांड से लुंड निकालिए और उसे बुआ जो की गांड और लुंड को चतवरहि थी उनके मुँह में दाल diam...bua भी चूसने लगी अपनी भतीजी की गांड का स्वाद वो मेरे लुंड से ले रही थी...





दीदी की गांड का छेड़ बिलकुल खुला हुआ था मेरे लुंड ने उनकी गांड को खोल दिए tha....bua अपनी भतीजी की गांड से निकले लुंड को चाट रही thi...phir मैंने उनके मुँह से लुंड निकल कर बुआ के मुँह को पूर्वी दीदी की गांड के छेड़ पर रख दिए और वो उसमे जीभ दाल डालकर चाटने lagi.....apani जीभ अपनी भतीजी की गांड से लगते hi...unke शरीर में भी खून तेज़ी से दौड़ने लगा उधर ये नज़ारा देखकर फूपाजी भी बहुत गरम हो गए थे.. विनीत तो जैसे अपनी बहन की छूट में खो सा गया था उसी किसी से कोई मतलब नहीं था वो बस अपनी बहिन की छूट को छोड़ने में व्यस्त था.... पूर्वी अपनी गांड पर अपनी तै जी की जिब्बी महसूस करके सिहर रहीथी अगर थोड़ी देर पहले वो झड़ी नहीं होती तो अब झाड़ गई hoti...phir मैंने उनका सर हटा कर अपना लुंड बापिस पूर्वी दीदी की गाब्द में दाल दिए और अब कसके गांड मरने लगा विनीत भी मेरी ताल से ताल मिलकर अपनी बहिन को छोड़ने laga...humare झटको की स्पीड इतनी तेज़ थी की पूर्वी दीदी के मुँह से फूपाजी का लुंड निकल गया और अब आगे झुककर अपनी छूट और गांड मरै का मज़ा लेने lagi....udhar फूपाजी का लुंड पूर्वी दीदी के मुँह से निकला तो उन्होंने अपनी भाभी को pakada...or हम लोगो के ऊपर झुका दिए और पीछे से छूट में लुंड दाल दिए और छोड़ने लगे....





देवर भाभी की चुदाई के वागल में जो भाइयो और बहनो की चुदाई चल रही थी वो काफी तूफानी हो गयी थी.... विनीत और मेरे धक्के तो जैसे आज पूर्वी दीदी की जान लेने वाले थे .....उनके मुँह से बस आअह्ह्ह उईईईईई उईईईईई ma...hahn हाँ ये निकल रहा था और वो आँखें बंद करके मरवा रही thi...phir कुछ झटको के बाद hi उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ और वो झड़ने लगी.... विनीत और मैंने उनके पकडे रखा नहीं तो उनकी बॉडी पूरी अकड़ गयी थी और वो आगे निकल जाती विनीत भी अपनी बहिन का झड़ना बर्दाश्त नहीं कर पाया और बहिन की छूट को अपने रास से भरने laga....bua मेरे पीछे हाथ करके अपनी उंगली मेरी गांड में घुसेड़ने लगी और अचानक उससे मुझे पता नहीं क्या हुआ मैंने पूर्वी दीदी की कमर को पकड़ कर अपना लुंड जड़ तक उनकी गांड में घुसेड़ दिए और झड़ने लगा...

धार के बाद धार से मैंने उनकी गांड को भर dia....or हांफने लगा और फिर अपने लुंड को उनकी गांड से बहार निकला लुंड बहार निकलते hi बुआ ने मुँह में ले लिए और चाट कर साफ़ कर दिए और फिर अपना मुँह पूर्वी दीदी की गांड से लगा दिए और जीभ दाल कर मेरे रास को जो उनकी गांड से बह रहा था चाटने लगी.... विनीत ने भी लुंड छूट से निकला और पूर्वी दीदी के नीचे से निकल गया पूर्वी दीदी ऐसे hi गांड उठा कर अपनी छूट और गांड अपनी तै से चटवा रही thi...wohim फूपाजी अपनी भाभी की छूट जमकर मार रहे थे अचानक से उन्होंने अपना लुंड छूट से निकला और अपनी भाभी की गांड पर फिट किया और घुसेड़ दिए लुंड आसानी से अंदर चला गया और कुछ झटको बाद hi फूपाजी बड़ी बुआ की गांड में झड़ने लगे इधर फूपाजी ने झड़ने के बाद लुंड निकला और बीएड पर बैठ gaye...main और विनीत भी साइड में बैठे हुए आराम करने lage....phir बुआ और पूर्वी दीदी अपने आप 69 में आ गए और एक दुसरे की छूट और गांड से रास चाट चाट कर निकलने lage...bada hi कामुक दृषिअ था पर हम सब hi कई बार झाड़ चुके थे और टाइम भी काफी हो गया था तो अब वहीं खुद को रोकने का फैसला kia....jab पूर्वी दीदी और बुआ का छूट चेतना बंद हुआ तो वो अलग हुई और फिर बुआ ने पूर्वी दीदी को पकड़ा और उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगी दीदी भी साथ देने लगी फिर लुक देर बाद छोड़ दिए और अलग हो गए सब एक दुसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे और सबके चेहरे पर संतुष्टि thi....phir हम सब ने अपने अपने कपडे पहने विनीत और बुआ के कपडे मैं भाग कर ले आया और पूर्वी दीदी ने बाथरूम में जाकर खुद को साफ़ किआ बुआ ने bhi....or फिर सब रेडी हो गए तो बहार आ गए... अभी भी कोई नहीं जगा था तो सब कुछ ठीक tha...phir जब मैं और विनीत जाने लगे तो फूपाजी ने मुझे अपने पास बुलाया और बोले शुक्रिया कर्मा आज तेरी वजह से मुझे बहुत बड़ी ख़ुशी मिली है और मेरे कंधे पर थपथपाकर बहार निकल गैर... मुझे भी बड़ा acha.laga फिर मैं और विनीत खेतो की तरफ निकल गए...

इसके आगे क्या हुआ वो अगली अपडेट mein..aaap लोग पढ़ते रहे और प्लीज कमैंट्स करते रहे.. शुक्रिया
 
Hi कैन समवन तेल्ल में हाउ तो मेक इंडेक्स ऑफ़ updates...and िफ़ समवन कैन मेक आईटी फॉर में आईटी विल बे ा हूजे फवौर अस ी वांट तू ऐड इंडेक्स
 
लास्ट अपडेट में अपने देखा कैसे हम सब लोग साथ में चुदाई करते hain...phir मैं और विनीत साथ में निकल जाते hain..kheto की तरफ...

अपडेट 28
मैं और विनीत खेतो की तरफ घूम रहे थे... विनीत मन hi मन मुस्कुराता हुआ मेरे साथ चल रहा tha...or फिर मैंने पुछा क्या हुआ भाई आज तो कुछ बोल hi नहीं रहा...

व्- भाई क्या बोलूं मैं तूने तो एक hi दिन में मेरी ज़िन्दगी बदल दी...

में- चल चल सेंटी मत हो...

व्- भाई सच में कहाँ मैं छूट के लिए तरस रहा था और आज hi अपनी तै जी और अपनी खुद की सगी बहिन को छोड़ा है वो भी पापा के samne....bhai ाचा हुआ तू रुक गया...

में- अबे तू ऐश कर भाई है तू मेरा...

व्- भाई बस एक बार माँ को और राज़ी करले बस....

मैं भी सोचने लगा के गाड़ी में बुआ को छोड़ा था उसके बाद से कुछ नहीं हुआ मेरा उनके sath...baat आगे बढ़ानी पड़ेगी...

में- वो भी हो जायेगा कोशिश करते hain...par देखना है कहीं हमसे पहले बड़े फूपाजी न पेल दें बुआ को...

और ये कहके मैं हंसने laga...wo भी हंसने लगा की सच में भाई ताऊजी न छोड़ दें माँ ko...or हम ये hi मज़ाक करते हुए थोड़ी देर घूमे और फिर घर आ गए....

घर आकर मैं छत पर चला gaya....wahan खड़ा होकर गाओं की तरफ देखने लगा फिर घर पर फ़ोन करके थोड़ी देर बात की तो सब ठीक थे माँ सबके सामने थी ज़्यादा बात नहीं हो pai...Anuj ने इशारो इशारो में बता दिए के वो पढाई करने पल्ली के घर चला जाता है वो साथ में hi पढ़ते hain...main मन hi मन मुस्कुराया के मेरा भाई भी मेरे जैसा hi hai...phir फ़ोन कट किआ तो पीछे से आवाज़ आई... ोये hero...kya हाल हैं तो तेरे...

मैंने मुद कर देखा तो रिमझिम दीदी thi...ek साड़ी में मेरे पास ा रही थी...

में- अरे दीदी tum....mere हाल तो ठीक हैं तुम बताओ...

रिम- मेरे तो जैसे थे वैसे hi हैं

में- मतलब खूबसूरत...

रिम- आह्हः लाइन मार रहा hai..didi पर....

में- सच बोल रहा हूँ आप साड़ी में बहुत खूब सूरत लगती हो...

रिम- रहने दे तू तो कल से गया है टाइम भी मिला तुझे फिर मुझसे बात करने का...

में- दीदी आपने खुद भी देखा इतना काम था...

Rim-chal बातें मत बना और ये बता सच में साड़ी अछि लग रही है मुझपर...

और वो मुझे अपनी साड़ी दिखने लगी...





में- अरे दीदी इतनी अछि लग रही हो की क्या hi कहूं...

रिम- सच बोल...

में- मुझे तो जलन हो रही है आपके होने वाले पति से....

रिम- सच में न चल आखिरकार मुझे साड़ी बांधनी सीख गयी... खुश होते हुए बोलने लगी...

में- साड़ी बांधने में क्या दिक्कत है उसमे क्या सीखना है..

रिम- तुझे आसान लगता है बड़ी मुश्किल से बांधती है साड़ी...

में- कुछ भी मत बोलो दीदी, साड़ी बांधने में क्या सीखना...

रिम- ाचा तो तू बांध के दिखा दे...

में- हाँ मैं बांध दूंगा...

रिम- चल ठीक है लगी शर्त?

में- हाँ लगी....

रिम- चल...

और दीदी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने कमरे में ले आए....

रिम- चल अब शुरू हो जा....

में- ठीक है न अभी लो

और मैं उनके बिलकुल पास जाकर खड़ा हो गया और उनका पल्लू हटा dia...wo मेरे सामने एक छोटे से ब्लाउज में आ gayi...unka चिकना पेट मेरे सामने tha....bade बड़े बूब्स ब्लाउज में दो पहाड़ जैसे थे...

मैं फिर साड़ी हटाने के बहाने उनकी कमाए से हाथ लगाने लग गया मेरा लुंड पूरा खड़ा हुआ था और मेरे उनके पीछे खड़े होने की वजह से उनकी गांड के ऊपर रगड़ रहा tha....or फिर ऐसे hi दीदी की पूरी साड़ी खुल gayi....mere सामने वो पेटीकोट और ब्लाउज में थी...

उनका चिकना पेट देखकर मैं खुद को कण्ट्रोल hi नहीं कर प् रहा था मन कर रहा था अभी चाट lun...mera हाथ अपने आप hi उनके पेट को सहलाने लगा मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं माखन पर हाथ घुमा रहा hun...thodi देर तक ये hi करता रहा और अपना लुंड उनकी गांड से घिसता रहा... मेरे दोनों हाथ उनके पेट और कमर को सहला रहे थे.... मैं उनकी नाभि से भी खेल रहा tha....unki साँसे भी तेज़ तेज़ थी....

फिर उन्होंने हलकी सी आवाज़ में कहा.

रिम- कर्मा वो साड़ी पहना न...

मेरे दिमाग से तो साड़ी निकल hi गयी thi...maine साड़ी को हाथ में लिए और उनकी कमर को दबाते हुए और सहलाते हुए उनके शरीर के इर्द गिर्द घूमने laga...jab जब मेरा हाथ उनके शरीर से टच होता तो उनकी एक हलकी सी आह्ह्ह्हह निकल जाती... मैं भी खूब मज़े ले ले कर साड़ी बांध रहा था पर जब काफी देर तक नहीं बंधी तो दीदी बोली..

रिम- रहने दे देख लिए न नहीं बांध सकता हर koi...ab समझ आया....

में- हाँ दीदी समझ गया मुझसे नहीं बंधी..

फिर उन्होंने साड़ी मुझसे अपने हाथ में ले ली और अचे से बांधने लगी.... मैं उन्हें देखे जा रहा था मुझे वो साड़ी बांधते हुए बहुत प्यारी लग रही थी... उन्होंने साड़ी पूरी बांधली और फिर मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा... मुझे अपनी तरफ देखता पाया तो कहने लगी क्या देख रहा है टुकुर टुकुर..?

में- दीदी सचमे आप न बहुत सूंदर हो...

रिम- हाँ हैं कर्मा मान लिए और कितनी बार बोलेगा...

में- जब जब तुम्हे देखूंगा बोलूंगा...

और ये कहते हुए मैं उनके बिलकुल. पास चला गया और उनके सामने खड़ा हो gaya...or उन्हें देखने लगा...

रिम- तुझे क्या हुआ इतना सीरियस क्यों है... और खड्ड्प्पोप.....

उनकी बात पूरी हो पति इससे पहले hi मैंने अपने होंठों को दीदी के होंठो के ऊपर रख दिए और उन रसीले होंठो को चूसने lagaaa...kya रसीले होंठ थे दीदी के जैसे शहद घुला हुआ हो... दीदी पहले तो थोड़ा घबराई बूत फिर उन्होंने भी मेरा साथ देना चालू कर दिए ...





मुझे दीदी को किश करने में बहुत मज़ा ा रहा tha....hum दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसते hi जा रहे थे करीब 8-10 मीन्स तक हम एक दुसरे को चूसते rahe....or जब अलग हुए तो बहुत तेज़ तेज़ हांफ रहे the...wo पीछे हटके दीवार से जाकर टिक गयी मैंने उनके फिर से करीब गया और फिर से अपने होंठ उनके होंठो से भिड़ा दिए....





और होंठों को चूसते हुए उनका पल्लू भी नीचे गिरा dia....mere हाथ दीदी के पेट पर फिर से रेंगने लगे... और मेरे होंठ उनके होंठो पर फिर मैंने किश तोड़ी और थोड़ा नीचे जाकर उनकी गर्दन पर चाटने लगा फिर उनकी चेस्ट और फिर अपने होंठ उनकी चिंकी कमर से सत्ता diye....waaah क्या एहसास था ऐसा लगा जैसे मैं आइस क्रीम चाट रहा हूँ. ...मैं उनके पेट को चूमने और चाटने लगा....





उनके मुँह से सिसकारियां निकल रही थी... मैं अपने होंठ चलाये जा रहा था फिर दीदी ने कुछ देर बाद मुझे चेहरा पकड़ कर ऊपर किया और फिर से मेरे होंठो को चूसने लगी ..... थोड़ी देर किश करने के बाद मैं दीदी के पीछे गया और उनकी गर्दन को चूमने लगा और साथ hi कमर को मसलने लगा





दीदी और मैं दोनों गरम होते जा रहे the...main अब उनकी गर्दन को चूमते हुए उनकी कमर को मसल रहा था मेरा लुंड उनकी साड़ी के ऊपर से hi उनकी गांड की दरार में घिस रहा tha....maine दीदी को थोड़ा आगे जाकर धक्का दिए तो दीदी बीएड पर गिर गयी मैं भी उनके पीछे जाकर उनसे चिपक कर लेट गया और फिर से उनकी गर्दन और चेहरे को चूमने लगा





उनके बड़े बड़े छूछे ब्लाउज से बहार आने को बेताब थे मेरा लुंड उनकी गांड में घुसने को बेताब tha....or मैं अपनी कमर हिला हिला कर उनके चूतड़ों पर लुंड को घिस रहा था...

दीदी बस मेरा नाम बार बार लिए जा रही थी साथ में आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्हह्ह भी कर रही थी....

रिम- आह्ह्ह्ह कर्मा अब रुकजा....

Me-kyun दीदी ाचा नहीं लग रहा hai...or ये कहकर मैंने उनके कान के नीचे जो सॉफ्ट हिस्सा होता है उसे अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगा...

रिम- आह्ह्ह्ह कर्मा आह्ह्ह्ह हनणननणम नहीं bhai..ye सही नहीं hai....or भी कुछ हो जायेगा ... मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगी...

में- मत रोको न दीदी....

रिम- कर्मा बस कर ...

और ये कहके दीदी उठ कर कड़ी हो गयी और अपने कपडे ठीक करने lagi...main उन्हें देखता रहा उनके मुझे मन करने और लुंड खड़ा होने पर भी जाने पर कोई गुस्सा नहीं aaya....wo अपने कपडे ठीक करके बहार निकल गयी मैं बस उन्ही के बारे में सोचता हुआ वहां लेता रहा..

मैं भी दीदी को लेकर खुद कंफ्यूज था के दीदी के साथ आगे बढ़ना चाहिए या नहीं.... उनकी शादी है उनके साथ ये सब करना ठीक होगा की nahi....tabhi दीदी बापिस कमरे में आई और बोली खाना लग गया है चल khale...or ये कहते हुए मुस्कुराकर चली गयी.. मैं मन hi मन सोचने लगा इस लड़की को समझना बड़ा मुश्किल है और उठ कर नीचे आ गया खाने के लिए...

इसके बाद क्या हुआ वो अगली अपडेट mein...aap लोग प्लीज पढ़ते रहिये और कमैंट्स करते रहिये शुकरिअ...
 
लास्ट अपडेट में अपने पढ़ा कर्मा और रिमझिम के बीच काफी कुछ होता है और फिर रिमझिम पीछे हैट जाती है अब आगे...

अपडेट 29
नीचे से विनीत की फिर से आवाज़ आई और मैं नीचे आ gaya...or सब लोग खाना खाने लगे.... सब वहीं थे बड़ी बुआ और बड़े फूपाजी, बुआ और फूपाजी, रिमझिम दीदी, पूर्वी दीदी, मैं और Vineet...Badi बुआ रोटियां सेक रही थी और बुआ सब को दे रही थी खाना... मैंने देखा बड़े फूपाजी बुआ को काफी चुप चुप कर देख रहे hain...unki गांड को और छूछीयो पर नज़र फिरा रहे the....sahi है जब छोटे भाई ने उनकी बीवी को छोड़ लिए तो उनका भी हक़ बनता hai.....main सोचते हुए मुस्कुराने laga....ki क्या कर दिए है मैंने इस परिवार mein...sab एक दुसरे को छोड़ना चाहते hain...baap बेटी को छोड़ चूका है ...भाई बहन को छोड़ चूका hai...dewar भाभी को, बीटा तै जी को, और अब जो बचे हैं वो भी कुछ न कुछ करना चाहते हैं...

मैं यही सोचने लगा के सिर्फ यहीं नहीं अपने घर में भी मैंने ये hi सब कर दिए है... Mamta-chachi को छोड़ा पल्ली को भी और सबसे खास अपनी माँ को bhi.....kya सच में मैं इतना ठरकी हूँ सचमें मेरी वजह से ये सब हो रहा hai...aise hi कुछ देर सोचा और एक ख्याल आया nahi...main कुछ किआ नहीं है... मैंने बस इनके अंदर की जो भावनाएं थी उनको बहार निकला है.. छोड़ना तो ये सब चाहते hi थे...

तभी बुआ की आवाज़ से मैं होश में आया...

बुआ- और लेगा क्या....

में- आप डौगी....

बुआ- हाँ तू लेगा तो क्यों नहीं दूँगी..

और फिर इस बात का मतलब समझ कर बुआ शर्मा gayi...meri नज़र सामने गयी तो पूर्वी दीदी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी... मैंने भी उनकी आँखों में देखा और मुस्कुराया....

फिर सब ने खाना खाया और फिर जो भी जिसका काम था सबने kia...main आंगन में बैठा रहा पूर्वी दीदी के बच्चे को खिलता रहा फिर मैंने देखा फूपाजी अपने कमरे में चले गए हैं बुआ भी जा रही hain...to मैंने सोचा क्यों न देखा जाये कुछ हो बुआ के साथ to...main भी उनके कमरे में चला गया...

मैंने देखा के फूपाजी बीएड पर पेट के बल उलटे लेते हुए हैं और बुआ अपने हाथ में तेल निकल रही है...

में- क्या हुआ फूपाजी और बुआ ये तेल किसलिए है...

Bua-are कुछ नहीं इनके कंधे अकड़ रहे हैं थोड़ा दर्द है तो मालिश करने की कह रहे हैं...

में- क्या हुआ फूपाजी ज़्यादा दर्द तो नहीं...

फूपाजी- नहीं बीटा बस मालिश हो जाएगी तो ठीक हो jayega..tu बता नींद नहीं ा रही क्या?

Me-nahi अभी नींद नहीं ा रही थी तो सोचा के आप लोगो से बात कर लूँ थोड़ी बहुत...

फूपाजी- अरे बिलकुल ठीक किआ बैठ जा फूपाजी वैसे hi उलटे लेते लेते आँखें बंद करके मुझसे बात कर रहे थे..

बुआ- हाँ बीटा बहैठ जा जबसे आएं तबसे तो फुर्सत hi नहीं मिली किसी ko....ghar की याद तो नहीं ा रही?

Me-nahi बुआ आप हो न घर की याद क्यों ayegi...tum हो न मेरा ख्याल रखने के लिए..

बुआ- अरे अपने बच्चे का ख्याल नहीं रखिंगी तो और किसका रखूंगी...

फिर वो तेल की शीशी लेकर फूपाजी की पीठ पर बैठ gayi...or तेल हाथ में डालकर फूपाजी के कंधे पर लगाने लगी..

में- बुआ आपको मालिश करनी आती है...

फूपाजी- अरे बीटा तेरी बुआ तो इतनी अछि मालिश करती hai....ke बस शरीर में ताज़गी आ जाती है...

में- मुझे भी सीखना है मालिश करना वो कभी कभी माँ और पापा के दर्द होता है न तो उनकी भी कर दिए करूँगा...

बुआ- कितना प्यारा बच्चा है रे karma...le सीख न जैसे जैसे मैं तेरे फूपाजी को कर रही हूँ देखता जा बस..

में- पर बुआ देखने से ज़्यादा समझ नहीं आ रहा मुझे पता नहीं चलेगा के मैं गलत कर रहा हूँ या सही ...

Bua-to फिर कैसे सीखेगा...

में- साथ में karke...aap फूपाजी के करते रहो और मैं देख कर पीछे से आपकी मालिश करता हूँ तो आप बता भी डौगी की सही कर रहा हूँ या गलत..

Bua--aise कैसे हो पायेगा कर्मा...

फूपाजी- अरे करने दो न तुम्हारी भी थकान दूर हो jayegi....or वो भी सीख जायेगा...

बुआ- तेल से मेरा ब्लाउज ख़राब हो जायेगा न.....

में- कोई नहीं बुआ मैं बिना तेल के करूँगा न मुझे तो बस सीखना है...

बुआ थोड़ी असमंझस में थी और बोली- ाचा तो..

मैं बिना देर किये उनके पीछे घुटनो पर खड़ा हो गया अपने दोनों घुटने फूपाजी की कमर के दोनों तरफ karke...or मैंने अपने दोनों हाथ बुआ के कंधे पर रख दिए और दबाने लगा...

में- ऐसे hi न बुआ...

बुआ- हाँ ऐसे hi बीटा..

मैं उनकी मालिश करने laga....maine उनका पल्लू आगे की तरफ गिरा dia....or उनके कन्धों को दबाने laga...bua उधर फूपाजी की मालिश कर रही थी...

फूपाजी आँखें बंद करके उलटे लेट कर मालिश का मज़ा ले रहे थे....

फूपाजी- इस बार आम कैसे आये हैं कर्मा बाघ में....?

मैं बुआ के कंधे से हाथो को सरकता हुआ उनकी बड़ी बड़ी छूछीयो पर ले आया और उन्हें ब्लाउज के ऊपर से hi सहलाने लगा और छूछीयो को दबाते हुए बोलै

में- आम तो बहुत बड़े बड़े और रसीले आये हैं phoopaji....poora रास भरा हुआ है andar...apka देखते hi चूसने को मन कर जाये...

और ये कहते हुए मैं बुआ के ामू को दबा रहा था... बुआ चेहरा घुमा कर मेरी तरफ गुस्से से देखते हुए आँखें दिखने लगी और मुँह चला कर बिना आवाज़ निकले बोल रही थी छोड़ क्या कर रहा hai....maine उनकी बातो पर ध्यान न देते हुए.. दबाना जारी रखा और बोलै....

में- मैं अचे से कर रहा हूँ बुआ?

बुआ बेचारी और क्या बोलती...

बुआ- हम्म्म्म आठ हाँ सही कर रहा है....

फूपाजी- तो फिर ले hi आते न थोड़े बहुत...

में- सामान बहुत हो गया था न phoopaji...papa से बोलडूँगा शादी में आएंगे तो ले आएंगे...

और ये कहते हुए अब मेरा एक हाथ बुआ के छूछीयो पर था और एक हाथ उनकी नंगी कमर और पेट पर चल रहा tha...bua चाहते हुए भी कुछ नहीं बोल प् राहु थी... मुझे उनके पति की मौजूदगी में उनको मसलने में बड़ा मज़ा आ रहा था... मेरा लुंड भी अब बिलकुल टाइट हो चूका था और मैं पीछे से चिपक कर बुआ के चूतड़ों पर उसे घिस रहा था...

फूपाजी- ठीक है बोल्डेन और तेरी पढाई का क्या चल रहा है...

में- पहले साल तो निकल गया फूपाजी छुट्टियों के बाद अगला शुरू hoga...pahle में तो सब कुछ थूक hi रहा...

और ये कहते हुए मैं अपने दोनों हाथ बुआ के ब्लाउज के हुक पर ले गया और उन्हें खोलने laga....bua मेरी तरफ देख कर न न कर के सर हिलती रही पर मैं नहीं माना और मैंने उनका ब्लाउज खोल दिए अब उनकी छुछियां ब्रा में कैद नज़र आ रही थी...





मैंने फिर उनकी ब्रा के ऊपर से hi उनकी छूछीयो को दबाने लगा बुआ मुझे न न भी कर रही थी और छूछीयो के दबाने से उनका मुँह एक आह के लिए खुल जाता tha...mujhe ऐसे उन्हें उनके पति क रहते हुए तड़पने में बहुत मज़ा आ रहा था...

फूपाजी- चल जल्दी से तू भी पढाई ख़त्म करले और फिर तेरी भी शादी के बारे में सोचा जाये...

में- कहाँ फूपाजी अभी शादी अभी तो मेरी उम्र hi क्या hai....main तो अभी बच्चा hi hun...hain न बुआ...

और ये कहते हुए मैंने अपना लुंड ज़ोर से बुआ की गांड में दबाया और उनकी ब्रा को ऊपर कर दिए...

फूपाजी- हाँ जनता हूँ कितना बच्चा है तू( वो आज जो भी कुछ हुआ दोपहर में शायद उसको याद करके बोल रहे थे)

बुआ- ाहजहममम तेरा तू बड़ा हो गया है ...मुआ अब कहाँ छोटा रहा तू......

बुआ ने अपनी गांड पर लुंड महसूस करते हुए kaha...or मैंने ब्रा ऊपर करके नंगी छूछीयो को मसलने का काम ले lia...ab मैं बुआ की नंगी छूछीयो को मसल रहा था और वो अपने पति के ऊपर बैठी thi...bada hi उत्तेजित दृश्य था....

में- कहाँ फूपाजी आप के और बुआ के लिए तो मैं बच्चा hi हूँ ना....

और ये कहकर मैंने अपनी गर्दन आगे की और बुआ की एक छुच्छी की मुँह में भरकर चूसने लगा..





बुआ की तो जैसे हालत ख़राब होने लगी वो अपना मुँह इधर उधर करने लगी.... मैं उनके चुच्चू को चूसे जा रहा था और उनके दुसरे छूछे को दबा रहा था बुआ गरम हो रही थी पर दर भी tha...unke पति के साथ होने का...

फूपाजी- हाँ हमारे लिए तो तू बच्चा hi rahega...are शशि थोड़ा कास के दबाना यहाँ पीठ पर थोड़ा जान लगा कर...

बुआ फूपाजी के कहने अनुसार दबाने के लिए. आगे हो गयी जिससे उनकी गांड उठ gayi...mujhe तो बस इसी मौके की तलाश thi...maine झट से उनकी साड़ी जो उनके बैठने की वजह से घुटनो तक थी पेटीकोट के साथ उठाया और ऊपर करने लगा उनकी टंगे नंगी हुई और फिर मैंने झटके से साड़ी और पेटीकोट को कमर पर चढ़ा दिए उनकी नंगी गांड देख कर मुझे हैरत हुई की बुआ ने पंतय नहीं पहनी thi...mujhse रहा नहीं गया और मैंने उनके चूतड़ों को मसल दिए





मैं उनके चूतड़ों को दोनों हाथो से मसलने laga...bahut मज़ा ा रहा tha...mera लुंड तन कर पूरी तरह खड़ा हो गया था मैंने लोअर नीचे करके अपना लुंड बहार निकल lia....bua पीछे मुद मुद कर देख रही थी और मुझसे रुकने को बोल रही थी पर मई अपना काम करता जा रहा था बुआ भी फूपाजी की मालिश कर रही थी...

मैंने बुआ की छूट पर उंगलियां लगाई तो वो गीली थी मतलब बुआ गरम तो है बूत दर से न न कर रही hain....main उनकी छूट को रब करने लगा... वो आँखें बंद karke...apana मुँह खोले बस फूपाजी की पीठ िर कंधे को दबा रही थी और उसी वजह से उनकी गांड भी आगे पीछे हो रही thi...maine तेल की शीशी साइड से उठाई और थोड़ा तेल हथेली में लेकर अपने लुंड पर लगा लिए और बाकि थोड़ा बुआ के चूतड़ों पर और उनकी मालिश करने laga...bua के चूतड़ों को दबाते हुए मैं उनकी छूट और गांड के छेड़ को भी उंगलिओ से छेड़ रहा tha...maine थोड़ा झुककर उनकी छूट को देखा वो बिलकुल गीली थी होंठ थोड़े खुले हुए थे फिर मेरी नज़र बुआ के गांड के भूरे छेड़ पर gayi...gand की दरार में वो भूरा सा छेड़ बहुत प्यारा लग रहा था... उसे देखकर मेरा लुंड और ठोकरे मरने laga...ab मुझसे भी सहन नहीं हो रहा था तो मैंने अपने लुंड को पकड़ा और बुआ की छूट के मुँह पर रख दिए और धीरे से ज़ोर लगाया लुंड तेल की वजह से चिकना था तो आसानी से बुआ की छूट में घुसता चला gaya...bua आअह्हह्ह्ह्हह करते हुए पीछे मुद कर देखा और उनकी आँखों में दर था वो अब भी नहीं नहीं कर रही थी

बुआ की आअह्ह्ह्ह सुनके फूपाजी बोले- क्या हुआ.

Me-are वो मैं मालिश कर रहा हूँ न बुआ की तो शायद बुआ को ाचा लगा isliye...aise hi करता राहु न बुआ?

फूपाजी- हाँ बीटा ऐसे hi कर और आराम दे बुआ को...

फूपाजी अनजाने में मुझे अपनी बीवी को छोड़ने क लिए बोल रहे थे... और मैं उनकी बात न मनु ऐसा कैसे हो सकता है... मैंने बुआ की कमर को पकड़ा और एक धक्का मरकर पूरा लुंड बुआ की छूट में घुसेड़ दिए...





बुआ का चेहरा ऊपर की तरफ उठ गया और एक और आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गयी उनके मुँह से

में- बुआ अचे से कर रहा हूँ न main...aaapko ाचा लग रहा है... ऐसे hi करूँ और?

बुआ- आअह्ह्ह ह्म्म्मम्म्म्म हैं ऐसे hi karrrrrrrrrrrrrrr...

Me-theek है बुआ और फिर मैं बुआ को हलके हलके धक्को से छोड़ने laga...main ज़्यादा तेज़ नहीं हिल रहा था क्यूंकि फूपाजी को पता लग सकता था तो मैं लम्बे लम्बे झटके बुआ की छूट में मार रहा था बुआ आँखें बंद करके अपने हाथ दबा रही थी फूपाजी की पीठ पर और हर झटके के बाद बुआ का मुँह खुल जाता और फिर बंद हो jata...bua के बड़ी बड़ी छुछियां धक्को के साथ झूल रही थी....





मुझे फूपाजी की मौजूदगी में बुआ की छूट मरने में बहुत मज़ा ा रहा tha...aaj मैं बुआ को दूसरी बार छोड़ रहा था और दोनों बार बुआ को चुपचाप होकर छोड़ना पड़ा था पिछली बार भाई और भाई और बेटे की वजह से तो आज पति की वजह se....bua भी यही सोचकर काफी गरम हो गयी थी की वो अपने पति की पीठ पर बैठके अपने भतीजे से चुद रही है और फिर बुआ का शरीर अचानक से रुक गया वो जैसी थी वैसी hi जैम गयी और उनकी कमर झटके खाने lagi...main समझ गया बुआ झाड़ रही हैं ...मैंने बुआ की साड़ी उनकी छूट के नीचे लगाडी जिससे उनका रास फूपाजी की पीठ पर न gire....bua काफी देर तक ऐसे hi मेरे लुंड पर झड़ती रही और फिर जब शांत हुई आगे खिसक कर साइड में बैठ गई और मेरा लुंड उनकी छूट से निकल गया मैं हैरान होकर बस उनकी तरफ देखता रह गया क्यूंकि मेरा लुंड टाइट था और तन के खड़ा tha...or बुआ ने बिना अपना ब्लाउज बंद किये अपने पल्लू को ऊपर कर लिए और बिना मेरी तरफ देखे hi बीएड से उठ गयी और बाथरूम में चली gayi...or वहां से जाकर बोली के कर्मा जा अब तू भी जाकर सजा हो गई malish...bua ने मेरे साथ कलपद कर दिए... मैं समझ नहीं प् रहा था क्या karun...maine उठकर अपना पजामा ऊपर किआ और फूपाजी को बोलकर निकल gaya...mujhe गुस्सा ा रहा था की मेरा लुंड खड़ा छोड़कर बुआ चली gayi.....main कमरे से निकला और अपने और विनीत के कमरे में आया तो देखा गेट बंद था मैंने धक्का दिए तो खुल गया क्यूंकि लॉक नहीं था अंदर का नज़ारा और सेक्सी था तो मैंने झट से गेट बंद कर दिए और पीछे मुद कर देखा तो विनीत पूर्वी दीदी की छूट मार रहा था उनके पीछे से बीएड पर... मैं सोचने लगा मैं पूर्वी दीदी को तो भूल hi gaya...maa नहीं तो बेटी सही... विनीत उनकी छूट को तगड़े धक्को से छोड़ रहा था...





मैं जल्दी से दीदी के सामने गया और अपना लुंड बहार निकल के उनके होंठो पर रख dia....didi ने भी मेरा लुंड देखते hi अपना मुँह खोल लिए और लुंड को मुँह में भरके चूसने lagi...mujhe दीदी के मुँह में बड़ा मज़ा आ रहा था तभी विनीत के धक्के और तेज़ हो gaye...or मैंने उसके चेहरे की और देखा तो उसके भाव देख कर पता चल गया की ये जल्दी झड़ने वाला है... वो पूर्वी दीदी की कमर पकड़ कर बुरी तरह से उनको छोड़ रहा था और दीदी मेरा लुंड चूस रही thi....aise hi कुछ मिनट्स और छोड़ने के बाद विनीत ने दो तीन लम्बे झटके मरे और वो अपनी बहिन की छूट को अपने रास से भरने laga....kuch देर तक दीदी की छूट में झड़ने के बाद उसने अपना लुंड निकला और फिर बीएड पर गिर गया और आराम करने लगा पर दीदी को अभी आराम कहाँ था मैंने दीदी का चेहरा पकड़ा और अपना लुंड उनके मुँह के अंदर बहार करने laga...ek भाई को उसकी बहिन की छूट में झाड़ता देख मैं और गरम हो gaya...or बुरी तरह से उनका मुँह छोड़ने laga....maa का किआ बेटी को तो भुगतना hi पड़ता... मैं दीदी के मुँह को छूट की तरह छोड़ रहा था





दीदी का मुँह का एहसास गरम गरम सा मेरे लुंड पर हो रहा tha...main उनसे अपना लुंड चुसवाते raha...maine विनीत से पुछा क्यों बे थक गया...?

व्- हाँ भाई तबसे दीदी को छोड़ रहा हूँ एक बार तो दीदी मेरा सारा रास मुँह में लेकर जातक गयी और इस बार छूट में... थक hi गया मैं तो...

में- बहुत hi बड़ी चुड़क्कड़ है दीदी दोपहर को भी कितना चूड़ी और अब भी तूने छोड़ लिए और अभी भी लगी हुई hai....choos अपने भाई का लुंड रांड साली.....

व्- हाँ भाई बहुत hi छुडासी hai...lund के लिए मन hi नहीं करती जो अपना बाप और भाइयो से एक साथ छुडवाले वो कितनी बड़ी रैंड होगी...

दीदी बस हम दोनों की बातें सुने जा रही थी कुछ बोल नहीं प् रही थी क्यूंकि मुँह में तो मेरा लुंड था..

व्- तू कहाँ था..

में- तेरी माँ छोड़ रहा था...

व्- क्या ....सच में!??

में- अबे मतलब छोड़ने की तरय कर रहा था....

व्- कुछ बात बानी फिर

में- अभी तो नहीं पर जल्दी hi बन जाएगी....

दीदी ये सुनकर मेटि तरफ देखने lagi...maine उसे फिर से लुंड पर दबा दिए तू क्यों रुक गयी साली रंडी लुंड choos...teri माँ को छोड़ू....

मैं काफी गरम हो गया था इसलिए गली दे दे कर लुंड चुसवा रहा था फिर मैंने दीदी के मुँह से लुंड nikala.....lund निकलते hi वो खस्ने लगी.... जब थोड़ा नार्मल हुई तो मैंने बोलै चल अब ाँद चूस मेरे दीदी ने तुरंत मेरे एक ाँद को मुँह में भर लिए और चूसने lagi....mera लुंड और टाइट हो गया दीदी बदल बदल कर मेरे दोनों बॉल्स को चूस रही थी... फिर मैंने उन्हें रोक दिया क्यूंकि अब मैं चुदाई करना चाहता था और मैंने दीदी को लिटा दिए और उनकी टैंगो के बीच आ गया दोनों टंगे अपने कंधे पर रखली और अपने लुंड को pakada...kyunki मुझे पूर्वी दीदी की गांड बहुत पसंद थी इसलिए मैंने उनकी गांड मरने का फैसला किआ और लुंड के टोपे को छूट के नीचे लेजाकर उनकी गांड के छेद पर रखा और धक्का मारा तो दो इंच लुंड अंदर घुस gaya....didi की चीख निकल गयी.... विनीत हम दोनों को देख रहा था मैंने उसकी बहिन की गांड में लुंड घुसेड़ दिया....

पूर्वी- आअह्हह्ह्ह्हह भेनचोद मेरी गांड फाड़ दी रंडी की aulaad.....ye तेरी माँ की गांड नहीं है जो बिना बताये लुंड घुसेड़ देता है....

में- साली रैंड है तू तेरी गांड छूट और मुँह में कभी भी लुंड दाल सकता हूँ मैं रंडी है तू मेरी.... रखैल बनेगी तू मेरी...

मैं और दीदी गाली दे देकर एक दुसरे का जोश बढ़ा रहे थे और मैं अब दीदी की गांड में पूरा लुंड घुसेड़ कर उनकी गांड मरने लगा.....





में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह रंडी क्या टाइट गांड है तेरी ले मेरा पूरा लुंड खा जा अपनी गांड में..... मेरा बस चले तो हमेशा अपना लुंड तेरी गांड में डालकर रखूं....

पूर्वी- तो मार न भेनचोद किसने रोका है मार अपनी बहिन की गांड बना ले उसे छोड़ छोड़ कर रंडी जैसे तू अभी मेरी माँ को छोड़ कर आया है... आह्ह्ह्हह माँ बेटी दोनों को छोड़ दिए तूने.....

मैं सोचने लगा की इसे कैसे पता चल gaya..main कुछ बोलता उससे पहले विनीत बोल पड़ा...

व्- ये क्या बोल रही हो दीदी... कर्मा क्या ये सच है?

पूर्वी- ाहजहह कर्मा तू मुझसे नहीं छुपा सकता जब तूने मुझे अपना लुंड मुँह में चूसने के लिए दिया मुझे तभी किसी की छूट के पानी का टास्ते आया... मैं आधा तो जान गयी थी बाकि तूने खुद बोल्दिए karma...kyun सही बोलै न....

में- हाँ मेरी रंडी सही बोल रही है छोड़ा मैंने तेरी माँ ko...sali रंडी नखरे करती है पूरी चुदाई किये बिना छोड़ कर चली गयी इसलिए माँ की सजा बेटी भुगत रही है....

व्- भाई तू फिर छिपा क्यों रहा था...

में- वो इसलिए की तुझे लगता मैंने खुद छोड़ लिए और तुझसे नहीं छुड़वाया..

व्- अबे भाई तू ऐसा समझता है क्या mujhe...tune अगर मम्मी को छोड़ लिए है तो इससे अछि बात hi क्या है फिर तो बहुत जल्द मेरा लुंड भी उनकी छूट में होगा....

में- बस मुझपर भरोसा रख....

पूर्वी- आह्ह्ह्हह्ह बहिन से तेरा मन नहीं भरा क्या जो माँ की छूट भी चाहिए...

में- तेरी माँ चीज़ hi ऐसी है साली देखते hi लुंड खड़ा हो जाता hai....tu भी माँ पर गयी है...

और ये कहते हुए मैं दीदी को घोड़ी बना देता हूँ और पीछे से लुंड गांड में घुसेड़ देता हूँ और गांड मरने लगता हूँ....





व्- भाई भरोसे की क्या बात है मेरे सामने तू मेरी सगी बहन की गांड मार रहा है और क्या दूँ तुझे....

मैं उसकी बात सुनकर हंसने लगता हूँ....

पूर्वी- क्या भाई है मेरे एक गांड मार रहा है तो दूसरा माँ को छोड़ने की फ़िराक़ में है...

में- तू बता रंडी कैसा लगा तुझे अपनी माँ की छूट का टास्ते मेरे लुंड पर...

पूर्वी- बहुत मस्त था रे.... aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh कर्मा फाड़ मेरी gaand.....ohhh बड़ी छुडासी छूट है माँ की जल्दी से छोड़ use...mujhe भी उसे तुम दोनों से चुड़ते हुए देखना hai...sAli रैंड बड़ी गांड मटकती फिरती है...

में- तुझे और तेरी माँ को एक साथ chodenge....tu अपनी माँ की छूट चाटेगी और फिर मेरा लुंड खुद पकड़ कर अपनी माँ की छूट में डालेगी.....

पूर्वी- aahhhhhhhhhhhhhh कर्मा भेनचोद मज़ा ा रहा है हाँ लगाउंगी तेरा लुंड अपनी माँ की छूट में आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह क्या लुंड है रे तेरा aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh फाड़ दे अपनी दीदी की गांड......

मैं भी खड़े खड़े उसको छोड़ते हुए थक गया तो बीएड पर पीठ पर लेट गया और पूर्वी दीदी मेरे ऊपर आ गयी और मेरी कमर के दोनों तरफ पेअर करके बैठ गयी और फिर लुंड गांड के छेड़ पर फिर से टिकाया और नीचे बैठने लगी तो लुंड तुरंत hi घुसता हुआ अंदर चला गया.... मैंने उसको पकड़ा और अपने ऊपर झुका लिए और उसके होंठों को चूसने laga....or नीचे से गांड उठा कर उनकी गांड में लुंड पेलने लगा.... फिर मैंने उनके होंठो को छोड़ा और उनकी गांड मरते हुए पुछा...

में- दीदी तेरा पति तुझे ठीक से छोड़ता नहीं है क्या जो तू इतनी छुडासी है...

पूर्वी- अरे वो भी बहुत बड़ा ठरकी है रोज़ छोड़ता है मुझे और मेरी गांड भी उसी ने मार मार कर बड़ी की hai...par उसका लुंड तुम्हारे जैसा नहीं है re...main तो तेरा लुंड देखके hi दांग रह गयी thi.....or मेरी छूट पानी बहाने लगी thi.....aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh

मैं अब दीदी की गांड तबीयत से मार रहा था...

Me-phir भी तेरी छूट में इतनी खुजली है...

पूर्वी- जो मज़ा अपने भाइयों और बाप से छोड़ने में है वो पति में kahan...or सच कहूं तो तेरी बहिन बहुत बड़ी चुड़क्कड़ hai....main कितना भी छोड़ लूँ मुझे काम hi लगता है....

Me-phir तो तू बिलकुल अपने भाई जैसी है मुझे भी चुदाई चाहिए हर वक़्त....

पूर्वी- तो फाड़ दे न मेरी गांड बड़ी खुजली है इसमें...

मैंने उसकी पीठ पर हाथ लेजाकर उसे खुद से चिपका लिए दीदी ने भी अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिए और खुद को मेरे हवाले कर दिए... मैं तेज़ तेज़ झटके उनकी गांड में मरने लगा





पूर्वी- ाएष्ठ हाँ कर्मा aahjhhhhhhhh....chod मेरी गांड आअह्हह्ह्ह्ह और तेज़ कर्मा....

मैं और तेज़ उनकी गांड मरने लगा अब मुझे भी अपना रास लुंड में भरता हुआ फील हुआ और मेरे धक्के और तेज़ हो gaye....or फिर दीदी बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ने लगी... दीदी की कमर झटके खाने lagi....or फिर मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और दीदी की गांड में झाड़ गया... ...दीदी मेरे ऊपर वैसे hi लेती रही... विनीत भी हम दोनों को देखता हुआ सो गया और मेरा लुंड गांड में लिए हुए दीदी और मैं भी सो gaye...kareeb दो घंटे बाद में जाएगा तो देखा दीदी विनीत घोड़ी बनाकर छोड़ रहा है....

Me-tum लोगो को नींद नहीं ा रही क्या....

व्- इसकी गांड देखकर लुंड खड़ा हो गया इसलिए दाल दिए....

पूर्वी- सालो पूरी रत छोड़ोगे kya....gand और छूट दोनों सूज गयी hain...ab तो छोड़ दो...

पर दीदी को देखकर मेरा भी मन कर गया और फिर मैंने और विनीत ने दीदी को एक बार फिरसे छोड़ा मिलकर और फिर हम तीनो सो गए......

उसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट mein...aap पढ़ते रहिये कमैंट्स करते रहिये शुकरिअ..
 
पूर्वी- सालो पूरी रत छोड़ोगे kya....gand और छूट दोनों सूज गयी hain...ab तो छोड़ दो...

पर दीदी को देखकर मेरा भी मन कर गया और फिर मैंने और विनीत ने दीदी को एक बार फिरसे छोड़ा मिलकर और फिर हम तीनो सो गए......

उसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट mein...aap पढ़ते रहिये कमैंट्स करते रहिये शुकरिअ.. अब आगे...

अपडेट 30
रात में लेट सोने के बाद मैं सुबह देर तक सोता raha...phir एक मीठी सी आवाज़ मेरे कानो में पड़ने lagi...Karma उठ जा karma....bahut लेट हो गया hai...kaafi सो लिए उठ ja...maine हलकी सी आँखें खोल कर देखा तो सामने चिकना पेट दिखा जिसके ऊपर साड़ी उड़ उड़ कर कभी उसे धक् रही थी तो कभी मेरी आँखों को सेकने के लिए नंगा कर देती...





मस्त चिकनी कमर देख कर मेरी आँखें पूरी खुल गयी और मेरी नज़र वहीं पर टिक gayi...main कमर और आवाज़ से बिना चेहरे की तरफ देख कर समझ गया ये रिमझिम दीदी hain.....subah तो लुंड वैसे भी खड़ा रहता है और सामने ऐसा नज़ारा हो तो लुंड स्टील का हो जाता है और वो hi हाल मेरा हुआ...

रिम- चल उठा तो सही तू, इतनी देर तक कैसे सोता रहा... मां जी को पता चलेगा तो सोचेंगे हमने तुझे बिगड़ दिया....

मैं कुछ नहीं बोलै और उठ कर बैठ गया और उनकी कमर को hi देखता रहा...

रिम- अरे क्या हुआ तुझे कुछ बोलता क्यों नहीं है रे....

मैंने कुछ नहीं बोलै और अपने हाथ उनकी कमर में दाल दिए और अपने होंठों को उनके पेट पर रख दिया



वो मेरे अचानक ऐसा करने पर चौंक गयी...

Rim-aahhhh कर्मा क्या कर रहा है कोई देख lega...chhod मुझे...

मैं बिना सुने उसके पेट को चाट रहा था चूम रहा tha...wo मन कर रही थी फिर जब मैं नहीं मन तो वो अचानक से मुझे हटा कर जाने लगी तो मैंने रिमझिम दीदी की साड़ी का पल्लू पकड़ लिए और वो आगे निकली तो वो मेरे हाथ में ा गया और उनका पूरा पेट और कमर... ब्लाउज में कैद उनकी छुछियां मेरे सामने ा गयी...





जिन्हे देख कर मेरा लुंड ठुमके मरने laga...maine उन्हें बापिस खींचा तो वो सिमट कर्म म्मुझ्से आके चिपक गयी..

मैं उनकी कमर पर हाथ चलने laga....didi की साँसे बहुत तेज़ चल रही thi..or मेरे हाथ उनके पेट पर.....

उनके माथे पर पसीने की कुछ बूंदे ा गयी थी... वो मेरे पास भी रहना चाहती थी और नहीं bhi...or उनके चेहरे पर ये दुविधा साफ नज़र ा रही थी... पर मुझसे रुका नहीं गया और मैंने अपने होंठों को उनके होंठो के ऊपर रख diya...or चूसने लगा पहले तो दीदी थोड़ा चौंक गयी और फिर मेरा साथ देने लगी...





मैं उनके होंठो के मीठे रास को पीने laga....mera लुंड खड़ा होक उनके पेट से लग रहा tha....kaafi देर तक उनके होंठो का रास पान करने के बाद मैंने उन्हें घुमा दिया और फिर उन्हें घुमा दिए जिससे अब मैं उनके पीछे था मेरा खड़ा लुंड उनकी गांड पर घिस रहा tha....or टाइट होता जा रहा tha...wo कर्मा बस कर रहने दे ये सब बोले जा रही थी..... मैंने पीछे से उनके पल्लू को दोबारा पकड़ा और नीचे गिरा दिया और ब्लाउज के ऊपर से hi छूछीयो को सहलाने लगा





वो सिहर उठी और ...आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह करने लगी मैंने उनका चेहरा पकड़ा और एक बार फीस उनके होंठो को चूसने लगा साथ में उनके पेट और छूछीयो को भी मसल रहा था.... दीदी भी अब गरम होने लगी thi...mera लुंड लगातार उनकी गांड पर ठोकरे मार रहा tha....tabhi बहार से एक आवाज़ aai...ohhh रिम्मी कहाँ रह gayi...beta....

और रिमझिम दीदी मुझसे खुद को छुड़ाकर अपने कपडे ठीक कर के भाग gayj...ek बार फिर मेरा लुंड खड़ा रह gaya.....maine सोचा कोई नहीं कोई तो छूट मिलेगी hi अभी न सही देर में और मैं लुंड को एडजस्ट करके बहार आया तो आंगन में सब बैठे थे और नाश्ता कर रहे the...main भी जल्दी से जाकर बाथरूम में फ्रेश हो कर आया और पूर्वी दीदी और बड़े फूपाजी के साथ आकर बैठ गया...

बड़ी बुआ ने मुझे नाश्ता लेकर दिए..

बड़े फूपाजी- और कर्मा तेरा मन भी लग रहा है न यहाँ पर...

में- अरे फूपाजी यहाँ मन कैसे नहीं lagega...man लगाने वाली हर चीज़ है यहाँ पर...

पूर्वी दीदी मेरी बात सुनकर मुस्कुराने lagi...or वहीं विनीत भी थोड़ा हंसा...

पूर्वी- मन कैसे नहीं लगेगा ताऊ जी हम सब हैं न इसका ख्याल रखने के लिए...

बी फूपाजी- चलो ये तो बहुत बढ़िया hai...or सुन शर्माना मत कुछ भी चीज़ चाहिए हो तो मांग लेना...

में- नहीं फूपाजी शर्म kaisi...or जो भी मुझे चाहिए होता है वो दीदी और बुआ जी मुझे दे देती हैं...

मेरी ये बात सुनकर साडी औरतें मन hi मन मुस्कुरा रही थी... वैसे सच भी तो है सब hi मुझे कुछ न कुछ दे hi रही थी...

फिर ऐसे hi बातें करते करते सबने नाश्ता ख़त्म किआ और फूपाजी और बड़े फूपाजी अपनी अपनी दुकान पर चले गए रिमझिम दीदी और पूर्वी दीदी बच्चे को लेकर ऊपर चले gaye...main और विनीत आंगन में बैठे बात कर रहे थे... बड़ी बुआ और बुआ किचन में थी...

व्- आज क्या करें यार कुछ काम भी नहीं है.... पूर्वी दीदी तो छूने भी नहीं देगी पूरी रात बहुत छोड़ा है उसे...

में- हाँ बेचारी की छूट की चटनी बना दी आज तो...

तभी बुआ की आवाज़ आई कर्मा इधर आ मेरे कमरे में...

विनीत मेरी तरफ देख कर मुस्कुराने laga...mujhe भी लगा मौका सही है अगर कुछ हो सके तो...

में- देख दोनों दीदी ऊपर हैं शायद hi नीचे ayengi...tu एक काम कर बड़ी बुआ को उनके कमरे में ले जा और चुदाई में लग जा जिससे मुझे सही से टाइम मिल जाये बिना किसी के डिस्टर्ब किये...

व्- समझ गया भाई वैसे भी मेरा मन भी हो रहा था चुदाई ka..or कैसे भी कर भाई मुझे भी माँ को छोड़ने का बड़ा मन है...

में- बस जैसा कहता हूँ करता जा...

मैं फिर उठा और बुआ के कमरे में जा pahucha...bua बीएड के पास कड़ी thi...mere रूम में जाते hi बोली की गेट बंद karde....wo थोड़ी गुस्से वाली आवाज़ में बोल रही थी...

मैंने गेट बंद कर दिए और बुआ के सामने आकर बैठ गया...

बुआ- ये क्या कर रहा था तू... तुझे इसलिए रोका था यहाँ पर... तुझे पता है अगर किसी को ज़रा सी भनक भी लग गयी तो कितनी बदनामी हो जाएगी...

मैं कुछ नहीं बोलै बस उन्हें सुने जा रहा था...

बुआ- उसदिन गाड़ी में जो कुछ हुआ चल हम दोनों की गलती थी पर रात को तुझे शर्म नहीं आई अपने फूपाजी के वहां होते huye...ye सब करने ki...agar उन्हें पता चल जाता तो मालूम है क्या होता...

मैंने फिर भी कुछ नहीं बोलै

बुआ- देख अगर तू सिर्फ मेरे तक रहता तब भी बात कुछ नहीं थी पर जो तू आज कर रहा था... रिमझिम के sath...tujhe अंदाज़ा भी है अगर कोई देख लेता या रिमझिम किसी को बोलदे तो क्या मुँह दिखने लायक रहूंगी मैं... वो तुझे भाई बोलती hai...or बहिन के साथ ये सब...4 दिन बाद उसकी शादी है इसका तो ख्याल कर...

मतलब आज बुआ ने मुझे और रिमझिम को देख लिए tha...tabhi भड़क रही hain...b

मैं कुछ नहीं बोलै बुआ गुस्से में मेरी तरफ देखती जा रही थी...

बुआ- तुझे सर्फ छूट चाहिए न बड़ी आग है न तेरे लुंड में ले बुझले...

और ये ककहकार बुआ ने अपना पल्लू नीचे गिरा diya...unki ब्लाउज में कासी हुई छुछिया मेरी आँखों के सामने ा गयी उनका भरा हुआ नंगा pet...meri आँखें उसी पर टिक गयी





बुआ- ले करले अपने अरमान पूरे....

मैं समझ नहीं प् रहा था अभी क्या जवाब दू बुआ ko...unke हर एक सवाल का जवाब था मेरे पास मैं चाहता तो अभी उनका मुँह बंद करवा सकता था पर मुझे उनकी बात भी जायज़ लग रही thi...or ऊपर से वो गुसी में थी तो मैं उनके सामने अभी जवाब देकर हम दोनों के बीच दूरियां नहीं लाना चाहता था... मैं चाहता था की मैं उनके सरे सवालों का जवाब दूँ पर जब वो शांत हो... क्यूंकि गुस्से से इंसान की समझने की शक्ति काम हो जाती है और जो मैं करना चाहता था उसजे लिए उनका अचे से समझना बहुत ज़रूरी tha...doosra उनको ऐसे देख कर मेरा लुंड जो थोड़ा उनके गुस्से से मुरझा गया था बापिस खड़ा होने लगा tha...to उस वक़्त मैंने वो किआ जो मुझे सही लगा...

मैंने अपना चेहरा आगे बढाकर अपने होंठों को बुआ की नाभि पर लगा दिए....





बुआ थोड़ा हैरान सा हुई और फिर उनके मुँह से एक ाहजह निकल gayi....main उनकी नाभि में जीभ डालकर चाटने laga...or उनके कमर हाथो से मसलने laga...wo आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह करने लगी मैं आँखें बंद करके उनकी नाभि को चूस रहा tha...mujhe उनकी बॉडी थोड़ी हिलती हुई फील हुई तो मैंने नज़रें खोल कर देखा तो बुआ ने अपना ब्लाउज और ब्रा खोल उतर दी थी और ऊपर से बिलकुल नंगी हो गयी thi...main भी खुश था के काम से काम ये गुस्सा तो नहीं कर रही हैं न और मुझे छोड़ने को भी milega...main अपना मुँह ऊपर लेजाकर उनके एक छूछे को मुँह में भरकर चूसने लगा और दुसरे को मसलने लगा... मेरा लुंड लोहे जैसा हार्ड हो गया था और पाजामे के अंदर दर्द कर रहा था तो मैंने हाथ नीचे लेजाकर अपना पजामा नीचे खिसका दिए और लुंड बहार आ gaya....udhar मैं उनके चुच्चू चूसने में बिजी था तब तक बुआ ने अपनी साड़ी और पेटीकोट भी उतर दिए था पंतय उन्होंने पहनी नहीं थी तो बुआ मेरे सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी....

उनको नंगा देख कर मेरा तो और जोश बढ़ गया फिर क्या था मैंने भी झट से अपने सरे कपडे उतर फेंके और बिलकुल नंगा हो गया और बुआ का चेहरा पकड़ कर अपने होंठों को उनके होंठों पर रख दिया... मैं बुआ के होंठों को चूस रहा था बूत बुआ कोई रिस्पांस नहीं दे रही thi....maine थोड़ी देर बाद उनके होंठो को छोड़ा और फिर से उनके छूछीयो को चूसने laga...or साथ में एक हाथ नीचे ले जाकर उनके बड़े बड़े चूतड़ों को मसलने लगा... फिर दूसरा हाथ भी नीचे लेजाकर बुआ की छूट पर फिरने लगा...

बुआ कोई रिस्पांस नहीं दे रही thi...wo ऐसे दिखा रही थी की वो ये सब मेरे लिए कर रही है और इसमें उसकी कोई मर्ज़ी या मज़ा शामिल नहीं hai...main भी देखना चाहता था के बुआ कब तक ये खेल खेल सकती hai...maine अपनी दो उंगलियां बुआ की छूट में घुसेड़ di...bua का मुँह खुल गया बूत फिर उन्होंने खुद को संभाला और फिर से वैसी hi हो gayi....main कुछ देर ऐसे hi उनकी छूछीयो को चूसते हुए उनकी छूट में ऊँगली करता raha....unki छूट भी काफी गीली हो गयी thi....ab मेरा लुंड भी पूरा टाइट था और मुझसे सहन नहीं हो रहा tha...main भी देखना चाहता था के बुआ ने अब तक तो सह लिए पर असली टेस्ट तो अब है....

मैंने बुआ को बीएड पर लिटा दिए और उनकी टैंगो के बीच आ गया... मैंने अपने लुंड को पकड़ा बुआ की छूट तो पहले से hi गीली थी तो मैं लुंड को बुआ की छूट के ऊपर घिसने laga...bua पूरी तरह से खुद को रोकने की कोशिश कर रही thi...but फिर भी उनकी कमर मेरे लुंड का छूट पर स्पर्श होने से ऊपर की तरफ झटके मार रही थी... फिर मैंने अचानक से लुंड को बुआ की छूट के मुँह पर जाते hi धक्का दिए और वो आधा अंदर घुस गया बुआ की छूट को चीरता hua...bua खुद की चीख इस बार नहीं रोक पाई और aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh की चीख उनके मुँह से निकल गयी... मैंने एक और झटका दिए और मेरा लुंड पूरा बुआ की छूट में घुस gaya....mujhe तो जैसे जन्नत मिल gayi...main चाहे कितनी भी चुदाई कर लूँ पर जब मेरा लुंड छूट में जाता है तो हर बार ऐसा मज़ा आता है मुझे जैसे मेरी पहली चुदाई ho....or फिर मैंने बुआ की कमर को पकड़ा और तगड़े तगड़े झटके देने लगा पहले कुछ झटके तो बुआ ने खुद को सँभालने की कोशिश की बूत फिर नहीं रोक पाई और बोलने लगी..

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह बछ्ह... Karma...aise hi छोड़ आअह्ह्ह्ह बुआ को...





उनकी बड़ी बड़ी छुछियां हर झटके के साथ उछाल कूद कर रही thi...main उनकी कमर को पकड़ कर उन्हें झटके पर झटके दिए जा रहा tha...main और तेज़ उन्हें छोड़ने लगा कमरे में थप थप थप की आवाज़ें बुआ की सिसकियों के साथ मिल रही thi...ab बुआ पूरी तरह गरम हो गयी thi...or अपने छूछीयो को मसलने लगी साथ में आह्हः अह्हह्ह्ह्ह कर्मा छोड़ बुआ को फाड़ दे मेरी छूट अह्हह्ह्ह्ह बच्चा छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़... ये सब बोल रही thi....maine अपने धक्के चालू रखे और जैसे hi मुझे ये लगा के बुआ झड़ने वाली हैं मैंने लुंड उनकी छूट से बहार निकल lia...bua के तो. जैसे मैंने प्राण निकल लिए हो बुआ तड़पने लगी....

बुआ- आअह्ह्ह कर्मा क्या हुआ बीटा बापिस दाल मेरा बछ्ह जल्दी बापिस दाल मेरी छूट में अपना लुंड बछ्ह...

में- नहीं बुआ मैं यहाँ ये सब करने नहीं आया हूँ... अगर किसी को पता चला तो. कितनी बदनामी होगी...

बुआ- बच्चे ऐसे मत बोल मत तड़पा अपनी बुआ को... बच्चा मैं मर जाउंगी....

में- नहीं बुआ ये सब ठीक नहीं है...

बुआ- कर्मा मत tadpa...main मर jaungi...main माफ़ी मांगती हु तुझसे मैं ज़्यादा boldia...maaf करदे अपनी बुआ ko...main तेरे हाथ जोड़ती हूँ कर्मा...

मुझे उनका हाथ जोड़ने वाली बात का बुरा लगा मैंने सोचा मैं उन्हें छोड़ भी रहा हूँ और उनसे हाथ भी जुड़वाँ रहा हूँ ये तो गलत hai...meri बुआ हैं वो बड़ी हैं बचपन में दूध पिलाया हैं उन्होंने mujhe....mujhe उनके साथ ऐसा नहीं करना चाहिए और मैंने तुरंत hi अपना लुंड बापिस उनकी छूट में दाल diya....bua की तो जैसे जान में जान बापिस आ गयी

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह बछ्ह...

और मैं बुआ को छोड़ने लगा पर इस बार मैंने थोड़ा मज़े लेकर बुआ को और खोलकर चुदाई करने की सोची के बुआ से गन्दी गन्दी बातें करता हूँ देखते हैं क्या होता है....

में- ले साली रंडी ले ले मेरा लुंड बहुत खुजली है न तेरी छूट mein...badi सटी सावित्री बन रही थी अब कैसे लुंड लेकर छुड़वा रही है...

बुआ पहले तो सुनकर थोड़ी चौंक गयी पर शायद उनको इससे और मज़ा भी आया तो बोली...

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह हॉँण्णन मैं रंडी hun....chod अपनी रंडी बुआ को और गाली दे मुझे.... आ आह्ह्ह्ह तेरा लुंड hi ऐसा है के मैं खुद रंडी बनने को तैयार हूँ....

में- है hi तू चुड़क्कड़ भें की lodi...pyasi छूट वाली... बड़े नखरे दिखा रही थी na...or साली जो अपने भाई के लुंड से तू छूट और गांड फड़वाती है अपनी उसका क्या...???

बुआ फिर से चौंक गयी और बोली

बुआ- कीकाअह्ह्ह्हह्हह कह रहा है तू कर्मा एहजहहह...

में- रंडी अभी भी छिपाएगी.... सच बोल अब....

Bua-aaahhh हांण छोड़ता है तेरा बाप भी मुझे आअह्ह्ह्ह तेरे जैसा hi लुंड है uska....khoob चूड़ी हूँ मैं अपने भाई se....or अब उसके बेटे से भी चुद रही हूँ...

और बुआ ये कहते हुए मेरे लुंड पर झड़ने लगी... उनकी कमर और गांड बीएड से ऊपर उठ gaya...or कनार और पूरी बॉडी झटके खाने लगी और वो छूट से पानी बहाने lagi...or फिर धम्म से वो बापिस बीएड पर गिर गयी और आँखें बंद करके लेती रही...

फिर थोड़ी देर बाद आँखें खोली और मुझे अपने ऊपर खींच लिए और मेरे होंठों को चूसने लगी मैं भी साथ देने laga...phir बुआ ने मुझे लिटा दिया और मेरे लुंड को चूसने लगी... बुआ मेरे लुंड को ज्यादा से ज़्यादा मुँह में ले रही थी और साथ में ऐसा लग रहा था की कुछ मेरे लुंड को अंदर की तरफ खींच रहा है साथ में उसकी जीभ मेरे लुंड के टोपे पर अपना कमाल दिखा रही thi...meri आँखें मज़े मैं बंद थी और मैं मस्त होकर लुंड चूसै का मज़ा ले रहा था... फिर थोड़ी देर बाद मुझे एहसास हुआ के बुआ ने अपने मुँह से लुंड निकल दिए है... मैंने आँखें खोल कर देखा तो बुआ मेरे ऊपर बैठ रही थी मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के मुँह में दिए और फिर नीचे होती चली गयी जिससे मेरा लुंड unki.choot में सरकता चला गया और फिर बुआ पूरी तरह से मेरे लुंड पर बैठ gayi...or एक बार फिर से छूट लुंड का खेल शुरू हो गया...





मैं बुआ के छूछीयो को पकड़ कर मसलने लगा बुआ उछाल उछाल कर मेरा लुंड अपनी छूट में ले रही थी....

बुआ- आअह्ह्ह कर्मा बड़ा मज़ा ा रहा है re....ab से तुझे कभी मन नहीं करुँगी बीटा छोड़ने को जब मन करे छोड़ लेना अपनी रंडी बुआ को...

में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बुआ बहुत मस्त माल हो तुम... तुम्हे चोदे बिना रह hi नहीं सकता मैं...

बुआ- ाचा ाःह बच्चा तुझे मेरे और भैया जे बारे में कब से और कैसे पता है...

में- जिस दिन तुम आई थी और पापा तुम्हे बाघ में छोड़ राहु थे तब मैंने देख लिए था...

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह बछ्ह और tez.......ohhh तूने किसी को बताया तो nahi...or हानंन्न उस दिन भैया से मिलने के बाद मुझसे रहा hi नहीं गया बिना चूड़े...

में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बुआ मज़ा आया था पापा से छोड़ने में या मुझसे छोड़ने में ज़्यादा ा रहा है..

बुआ- बीटा दोनों की hi बात अलग है... मैं तो सोचती हूँ तुम दोनों से एक साथ छुड़वाने में कितना मज़ा ayega...jab बाप और बीटा दोनों मेरी छूट फाड़ेंगे...

बुआ की बात सुनकर मेरा सारा रास मेरे ांडो से निकल कर मेरे लुंड में भर gaya...main भी उस दृषिअ को इमेजिन करने लग गया और ज़्यादा देर तक खुद को रोक न पाया ऐसे कामुक दृषिअ को सोचकर और बुआ की छूट में अपना फव्वारा छोड़ दिए... बुआ भी मेरे ऊपर गिर गयी... और हम दोनों आराम करने लगे... फिर बुआ मेरे साइड में लेट गयी और मेरे सर पर हाथ फेरने lagi....mera बछ्ह......

में- बुआ एक बात पूछूं?

Bua-haan मेरे राजा पूछ न..

Me-tum और पापा कब से चुदाई कर रहे हो और कबसे शुरू हुआ ये सब...

बुआ- ाचा तो पापा और बुआ की चुदाई की कहानी सुन्नी है लल्ला को..

में- हाँ बुआ बताओ न सब...

बुआ- ाचा तो आराम से मुझसे चिपक कर लेट मैं सब बताती हूँ...

फिर मैं हाथ बुआ के पेट और छूछीयो पर रखकर लेट गया और बुआ बताने लगी...

बुआ- जब तेरी माँ की पेट में तू था ये बात तब की hai...mujhe याद है भाभी का 6 महीना चल रहा था तो मैं वहां ा गयी थी मदद करने के लिए... मैं घर के सरे काम करने लगी... पूरा घर मैंने संभल लिए tha...bhabhi भी बहुत खुश थी और भैया bhi...par मुझे अंदर की बात बाद में पता चली जब एक रात मैं दूध गरम करके भाभी के लिए ले जा रही thii...to मैंने उन्हें बात करते सुना...

भैया- क्या करूँ यार तुम्हे तो पता है न मैं तुम्हे बिना चोदे एक भी दिन नहीं रह सकता पर बच्चे की वजह से छोड़ भी नहीं sakta....mere लुंड का तो बुरा हाल है...

भाभी- बस कुछ दिन और निकल लो आप जल्दी झड़ते भी तो नहीं हो... नहीं तो मैं मुँह में लेकर hi आपको झाड़ा दूँ....

भैया- नहीं यार छूट में मज़ा आता है मुझे इसलिए जल्दी नहीं jhadta...dekh कैसे अकड़ रहा है तेरी छूट के liye...maine भी थोड़ा सा अंदर झंकार देखा तो दांग रह gayi...tera पापा का बड़ा सा लुंड मेरे सामने आ गया उसे देखकर नेरी छूट में अपने आप पानी बहाने laga...phir मैं काफी देर तक अपने भैया का लुंड देखती रही.....

फिर वहां से हटके अपने कमरे ने जाकर लेट गयी और खुद को कोसने लगी की कैसे अपने भाई के लुंड को देखकर गरम हो रही hai...us लाज शर्म तो रही hi नहीं hai...or ये सब करते करते मैं सो gayi...kuch दिन नैने ये बात दिमाग में से बिलकुल निकल सी hi दिए पर जब भी मैं खुद को शांत करने के लिए खुद को मसलती तो भैया का लुंड hi मेरी आँखों. के सामने आता मैं उनके लुंड के hi सपने देखती और अपनी छूट की प्यास बुझती के ये सोच सोच कर के मेरे भैया hi मुझे छोड़ रहे है ...

ये सब ऐसे hi चलता रहा कुछ दिन और फिर एक दिन मैं भैया का खाना लेकर बाघ में गयी तो देखा वो वहां खत पर बैठ कर लुंड बहार निकल कर हिला रहे hain..main तो जैसे जैम सी gayi...or फिर भैया ने मुझे देख lia...or हड़बड़ा कर उन्होंने अपना लुंड छुपा लिए मैंने खाना उनके लिए निकला और बैठ गयी भैया ने बिना कुछ बोले खाना खाया और न hi मैंने कुछ bola..par मेरी छूट बहुत गीली हो गयी थी और मेरे दिमाग से उनका लुंड हैट hi नहीं रहा tha...mujhe पेशाब आ रहा था तो मैं उठ कर कड़ी हुई और पेशाब कस लिए जाने lagi...par भैया को लगा मैं गुस्से में जा रही हूँ तो भैया ने मेरा हाथ पकड़ लिए... और बोले मेरी बात सुनती jaa...aise मत जा...

मैं क्या बोलती मेरे समझ नहीं ा रहा tha...par मैंने फिर भी हिम्मत करके बोल दिए के भैया पेशाब जा रही हूँ...

भैया को ये लगा मैं पेशाब का बहाना करके घर चली jaungi...to बोले तू यहीं करले पीछे की तरफ मैं पसेठ करके खड़ा हूँ...

मुझे तो कुछ समझ hi नहीं ा रहा tha..ki क्या करना है या नहीं तो उन्होंने बस एक बार कहा और मैं उनकी बात मान गयी और उनसे थोड़ी दूर हटकर अपनी साड़ी उठा कर बैठ gayi...or मूतने lagi...mujhe सही गलत कुछ समझ नहीं ा रहा था मेरी पेशाब ख़तम हुई तो मैंने मुद कर देखा के भैया मुझे hi देख रहे थे उनकी नज़र मेरे चूतड़ों पर thi...or वो अपना लुंड मसल रहे थे ....

मैं भी काफी दिनों से नहीं चूड़ी थी तो गरम हो गयी थी और भैया भी...

फिर मैं पेशाब ख़त्म हो गया था उसके बाद भी काफी देर तक साड़ी को ऊपर किये हुए ऐसे hi बैठी रही और भैया को देखती जा रही थी... वो अपना लुंड मसल रहे the....phir उन्होंने अपना कदम मेरी िर बढ़ाया तो मेरी तो जैसे जान अटक गयी वो आये और उन्होंने मुझे उठाया जैसे मैं बैठी थी वैसे hi कड़ी हो गयी साड़ी ोे पेटीकोट अभी नहीं कमर पर अटका हुआ था वो मुझे कमर से पकड़ कर खत तक ले गए और झुका दिया मुझे खत पर मैं तप बस माँ की गुडिअ की तरह जैसे उन्होंने रखा मैं हो गयी... फिर भैया ने अचानक से मेरे नंगे चूतड़ों पर हाथ फेरा ये पहला मौका था जो भैया ने मुझे कहीं ऐसी जगह टच किआ था और फिर मुझे अपनी छूट पर कुछ महसूस हुआ और जब तक मैं समझ पाती ये क्या है वो मेरे अंदर घुस गया tha...bhaiya ने मेरी छूट में अपना लुंड पेल दिए... और दो तीन झटको में उनका पूरा लुंड मेरी छूट में. था... मेरी छूट भरी हुई महसूस हो रही thi...phir भैया मुझे मेरी कमर पकड़ कर छोड़ने लगे...

इस चुदाई में कोई भाई या बहिन नहीं tha...is चुदाई में सिर्फ दो जिस्म थे जो काफी समय से जिस्म की भूख में तड़प रहे थे जो आज खाना मिलने पर अपनी अपनी भूख मिटा रहे थे... भैया मुझे बेदर्दी से छोड़ रहे थे पीछे से मेरे चूतड़ों पर उनके कूल्हे टकरा कर थप थप की आवाज़ें कर रहे थे....





और फिर कुछ देर बाद मेरा बाँध टूट गया मैं अपने भैया के लुंड पर खाद gayi....or ये देखकर भैया भी मेरे साथ झड़ने लगे और मेरी छूट में hi अपना रास उढेल dia....main आगे को खाट पर गिर gayi...mujhe आज इतने दिनों बाद छोड़कर बड़ा ाचा लग रहा था और वो भी अपने भाई se...ab तक हम दोनों में से किसी ने कुछ नहीं बोलै था...

फिर थोड़ी देर बाद भैया मेरे पास आकर कान में बोले तू नाराज़ तो नहीं है na...maine उनकी तरफ देख कर मुस्कुरा दिए और न में सर हिला dia...bhaiya को तो जैसे जो चाहिए था वो मिल gaya...or फिर भैया ने मेरे सरे कपडे उतर कर नंगा कर दिए और खुद भी नंगे हो गए और फिर बाघ में मुझे शाम तक छोड़ा.... उसके अगले दिन hi उन्होंने मेरी गांड भी मारी और फिर जब तक मैं वहां रही तव तक रोज़ तेरे पापा ने मुझे छोड़ा तेरे जन्म होने के बाद tak...or उसके बाद हमें जब भी मौका मिला हमने चुदाई की जिसमे आखिरी बार में तूने देख लिए था...

बुआ की और पापा की चुदाई की कहानी सुनकर मेरा लुंड पूरी तरह टाइट हो गया था... मैं बुआ के छूछीयो को मसलने लगा और उठ कर उनके मुँह में अपना लुंड दे dia...wo चूसने लगी थोड़ी देर चूसने के बाद मैंने लुंड निकला और बुआ को लिटा दिए और उनकी टंगे पकड़ कर उनके कंधो तक kardi....jisse उनकी छूट और गांड ऊपर की और उठ गयी.... मैंने अपना लुंड हाथ में लिए और बुआ की छूट पर घिसने लगा फिर थोड़ा नीचे ले जाकर बुआ की गांड के छेड़ पर रखा और धक्का मारा और लुंड बुआ की गांड में घुसेड़ dia....bua की चीख निकली आअह्ह्ह्ह कर्मा गांड फैट गयी......

मैंने थोड़ा लुंड बहार खींच कर एक दो झटके और मरे और लुंड पूरा गांड में चला गया और मैं उनकी गांड मरने laga....bua की गांड एक दम गरम भट्टी जैसी थी जिसने मेरा लुंड गरम हो रहा tha....bua की गांड मरने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था





बुआ मुझे उकसा रही थी उनकी गांड मरने के लिए...

बुआ- आअह्ह्ह मार अपनी बुआ की गांड सेल maar...aahhhh मज़ा आ रहा है.... दिखा अपना पूरा दम...

में- हाँ साली ले पहले बाप से गांड मरवाई तूने अब बेटे से भी marwa....or अब बता कौन है tu....meri?

बुआ- मैं तेरी रंडी बुआ hun...jab तू चाहेगा तब तुझसे छोडूंगी....

में- और जिससे मैं चाहूंगा उससे छुड़ेगी?

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह तू तो अपनी बुआ को सचकी रंडी बना कर hi मानेगा re...par तू जिससे बोलेगा उसके नीचे लेट जाउंगी... आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मर गांड मेरी....

वो भी इन बातों से गरम हो रही thi....or गांड उठा उठा कर लुंड को गांड में ले रही थी...

में- और रिमझिम को छुडवायेगी मुझसे?

Bua-haan बच्चा छुडवाउंगी रिमझिम क्या उसकी माँ को भी छुडवाउंगी, पूर्वी को भी.. सबको छोड़ दे तू बस मुझे भी ऐसे hi छोड़ते rahio....aahhhh

में- आअह्ह्ह्हह बुआ क्या गांड है तुम्हारी बिलकुल रंडी है तू अपनी बेटी को मुझसे छुड़वाने के लिए राज़ी है....

Bua-hasnnnnnn तो क्या हुआ उसकी छूट है तेरे पास लुंड है दाल डीओ साली की छूट में और फिर मैंने बुआ को साइड में लिटा दिए ोे उनके पीछे जाकर उनकी गांड मरने लगा...





मैंने बुआ की एक तंग उठा राजहि थी और बुआ की गांड में लुंड पेल रहा था....

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह कर्मा मार सेल मेरी गांड मार फिर तुझसर अपनी बेटी भी छुडवाउंगी....

मैं मन hi मन सोचने लगा बुआ मैं उसे पहले छोड़ चूका हूँ...

Me-aah बुआ मज़ा ा रहा है तेरी गांड mein....aaahhhh साली रैंड आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह....

Bua-maar साले आअह्हह्ह्ह्ह मादरचोद... सबको छुडवाउंगी तेरे इस मुसल से, तेरी माँ की गांड में भी दलवाउंगी... तेरा ये लुंड उसे भी तो पता चले क्या लुंड पैदा किआ ही usne....sali की गांड देखि है क्या मस्त है....

अपनी माँ के बारे में सुनकर और उनकी गांड के बार्स में सोचकर मैं बहुत गरम hi गया और खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पाया और झड़ने लगा बुआ की गांड में मेरे साथ बुआ भी झड़ने लगी...

इसके आगे क्यक हुआ अगली अपडेट में... शुक्रिया..
 
बहुत जल्द मिलेगी भाई अपडेट
 
सॉरी गाइस अपडेट इस लॉन्ग सो it's टेकिंग टाइम विल पोस्ट अस सून अस पॉसिबल
 
Bua-maar साले आअह्हह्ह्ह्ह मादरचोद... सबको छुडवाउंगी तेरे इस मुसल से, तेरी माँ की गांड में भी दलवाउंगी... तेरा ये लुंड उसे भी तो पता चले क्या लुंड पैदा किआ ही usne....sali की गांड देखि है क्या मस्त है....

अपनी माँ के बारे में सुनकर और उनकी गांड के बार्स में सोचकर मैं बहुत गरम hi गया और खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पाया और झड़ने लगा बुआ की गांड में मेरे साथ बुआ भी झड़ने लगी.....

अपडेट 31

मैंने अपने लुंड का पूरा रास बुआ की गांड में भर dia...mujhe काफी ाचा लग रहा था... और मैं उनसे चिपक कर लेता raha....or फिर बोलै बुआ मुझे तुम्हे कुछ बताना है...

बुआ- हाँ बोलै बछ्ह...

में- हो सकता है के तुम्हे ये सब सुनकर झटका lage..par बातों को समझने की कोशिश करना...

बुआ- ऐसा क्या hai..beta जो मैं चौंक जाउंगी...

में- बुआ आपको पता है की विनीत भी आपको छोड़ना चाहता है..

बुआ- हाँ इसके अंदाज़ा तो मुझे भी है... गाडी में जिस दिन तूने मुझे पहली बार छोड़ा था उसके बाद कुछ ऐसा hi विनीत और मेरे साथ हुआ tha..usne मेरा ब्लाउज खोल कर छुछियां दबाई थी और उसका हाथ मेरी छूट तक भी पहुंचा tha...uske बाद भी यहाँ आने पर उसने कई बार मेरे करीब आने की कोशिश की बूत मैंने उसे दूर कर दिया...

में- तो क्या आप. विनीत को नहीं छोड़ने डौगी...

बुआ- बच्चा वो मेरा बीटा है... ये कैसे हो सकता hai..maa बेटे के बीच ऐसा सम्भन्ध नहीं हो सकता ये पाप है...

में- बुआ तुमने मुझे हमेशा अपना बीटा माना है तो मेरे साथ भी तो पाप hi है.. पापा आपके भाई हैं उनके साथ करना भी तो फिर पाप hi hua...main आपको गलत नहीं कह रहा की अपने गलत किआ पर अगर हमारे साथ कर सकती हो और विनीत के साथ नहीं तो ये उसके साथ गलत hoga....or क्या तुम नहीं चाहती विनीत से छोड़ना???

बुआ- आअह्ह्ह कर्मा सच कहूं तो अपने बेटे के साथ चुदाई के नाम से hi मेरी छूट बहने लगती है.. एक माँ और बेटे का ऐसा मिलान ...एक माँ के लिए इससे ज़्यादा ख़ुशी की क्या बात हो सकती hai...ke वो अपने बेटे को जिस्म की ख़ुशी दे sake..use वहीं बापिस अंदर ले सके जहाँ से वो निकला hai..beta मैं तो कबसे चाहती hun...par डर्टी भी हूँ कहीं किसी को पता चल गया तो मुँह दिखने लायक नहीं रहेंगे हम...

Me-bua आपके और पापा के बारे में किसी को पता चला आज tak...or कौन batayega...or जो चीज़ तुम दोनों को इतनी ख़ुशी दे सकती है वो गलत कैसे हो सकती hai...aap खुद hi socho...or समाज की छोडो अपने बारे में socho...basss...

बुआ- और तेरे फूपाजी का क्या उन्हें कभी पता चला तो.....

में- अरे मेरी प्यारी बुआ अभी तो आपको बहुत कुछ जानना बाकी hai...he हे हे ....

बुआ- तुझे हंसी आ रही है बता न कोई बात है क्या....

में- हाँ जानेमन बात तो hai...pahle एक किश तो देदो....

फिर बुआ ने अपना सर आगे करके मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने lagi...kuch देर बाद उन्होंने अपने होंठ हटा दिए...

बुआ- अब तो बता...

में- बुआ ध्यान से सुन्ना और थोड़ा हैरान करने वाली बात है तो समझने की कोशिश करना...

बुआ- अब बता भी न..

फिर मैंने बुआ को सब बताना स्टार्ट किआ कैसे मैंने उनकी जगह गलती से बड़ी बुआ को छोड़ा फिर विनीत के साथ बड़ी बुआ की चुदाई और फिर फूपाजी और पूर्वी दीदी का हमें dekhna...or फिर उनका आगे बढ़ना से lekar...hum सब की chudai...kaise फूपाजी ने पूर्वी दीदी को छोड़ा, मैंने और विनीत ने उन्हें छोड़ा फूपाजी ने बड़ी बुआ को छोड़ा सब कुछ उन्हें बता दिए... ये सब सुनने के बाद बुआ की आँखें बड़ी हो गयी thi...wo कुछ नहीं बोली बस बूत बने हुए मेरी और देखे जा रही थी जैसे यकीं करने की कोशिश कर रही हो जो भी अभी मैंने बोलै उस पर....

मैं भी सोच में पद गया के कहीं मैंने गलती तो नहीं करदी बुआ को ये सब बता कर...

Me-kya हुआ बुआ चुप क्यों हो...

बुआ कुछ नहीं बोली और उठ कर बैठ गयी मैं दर गया ोाता नहीं बुआ अब क्या करेगी तभी बुआ ने आगे बढ़ कर मेरे लुंड को कुछ में ले लिया और चूसने लगी....

में- साली रंडी मुझे डरा hi दिए....

बुआ बिना कुछ बोले मेरे पैरो के बीच में जाकर मेरी आँखों में देखते हुए मेरा लुंड चूसने लगी...





मेरा लुंड उनके चूसने से पहले जो आधा खड़ा था पूरा टाइट होकर टॉप की तरह बन गया. और बुआ उसे लोल्लयपोप की तरह चूस रही थी.... मुझे बहुत मज़ा ा रहा था....

में- तो बुआ कैसा लगा सब कुछ जान कर...

बुआ ने मेरा लुंड आपने मुँह से बिकल दिए और बीएड पर सीधे लेट गयी और टाँगे फैलादी....

बुआ- सब बताउंगी पहले अपने इस मुसल को मेरी छूट में दाल.....

मैं भी बिना देर किये उनके पैरो के बीच पहुँच गया और अपना लुंड हाथ में पकड़ा और उनकी छूट पर टिका कर एक hi झटके में अंदर घुसेड़ dia....or उनकी कमर पकड़ कर झटके मरने laga...mere लुंड को एक बार फिर से सुकून मिल गया...

में- ाःह बुआ क्या रांड हो tum...do बार चूड़ी हो अभी... और फिर से छोड़ने लगी....

बुआ- उउउउइइइइइइइ maaa....tune बात hi ऐसी बताई है कर्मा के मेरी छूट में. खुजली बढ़ gayi...or ये तेरा मोटा लुंड hi मिटा सकता है...

में- तो जो मैंने अभी बताया उससे तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं है

और ये बोलकर मैंने अपने धक्के और तेज़ कर दिए बुआ की छूट mein..to बुआ की भी आह्हः करके सिसकारियां निकलने लगी...





बुआ- आअह्ह्ह्ह भेनचोद छोड़ मुझे ...aaahjhhhhhhhhhh और हाँ मुझे कुछ परेशानी नहीं है... मुझे परेशानी तब होगी जब तुम मुझे शामिल नहीं करोगे अपने साथ....

में- साली कितनी बड़ी रंडी है tu...khud के बेटे से छोड़ने की बहित जल्दी है तुझे...

बुआ- कर्मा तू जनता नहीं तुम आज ये सब बता कर कितना सुख दिया है तूने मुझे... जैसा मैं चाहती थी हमेशा से वैसे hi है ये सब तो... के सब साथ में एक साथ चुदाई karein...koi रोकटोक न ho...mere तो मन की इच्छा पुरी हो gayi...aaahhhhh ऐसे hi आह्ह्ह्हह...

में- मेरा भी यही सपना है बुआ के मैं जहाँ जॉन प्यार baantu...or उनकी हवस को बहार laun...he हे हे...

बुआ- आअह्ह्ह बछ्ह मेरी तो ज़िन्दगी badaldi...tune आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह क्या लुंड है रे तेरा.... मज़ा दे देता है poora....ab तक क्यों नहीं छोड़ा तूने मुझे....

में- तू आ जाती अपनी छूट लेकर कंही भी छोड़ देता....

बुआ- आअह्ह्ह कर्मा मुझसे तो इंतज़ार नहीं हो रहा जब तू और विनीत साथ में मुझे chodoge...wo भी तेरे फूपाजी क्र सामने...

में- मुझे दिख रहा है रंडी तू कितना मचल रही है अपने बेटे के लुंड से छुड़वाने के लिए...

बुआ- हाँ मेरी छूट से पानी बाह रहा है ये सोच सोच कर के पूर्वी मेरी बेटी न पहले hi अपने भाई और बाप से छुड़वा लिए hai...maa से भी बड़ी रैंड निकली वो तो...

में- है तो तेरी hi बेटी साली इतनी बड़ी रैंड है कितना भी छुडवाले थकती नहीं है....

और ये ककहकार मैंने बुआ की टैंगो को अपने कंधे पर रख लिया और फिर उन्हें तेज़ी से छोड़ने लगा....

बुआ- अह्हह्ह्ह्ह छोड़ karma....chod अपनी बुआ ko...mitade मेरी छूट की साडी खुजली... दाल दे मेरे अंदर तेरा ये danda...aaaahhhhhh अह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhhgh

मेरे धक्के बहुत तेज़ हो गए थे...





Bua-aaahhh आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह बछ्ह पेल दे आज अपनी बुआ को... आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह

में- ाःह बुआ क्या चुड़क्कड़ औरत है तू sali.....waise देखो कितने नखरे कर रही थी और अब तेरी छूट नहीं भर रही...

बुआ- तेरा लुंड hi ऐसा है मेरी जान जो एक बार ले lega...wo दोबारा छोड़ने आएंगी hi आएंगी...

में- बुआ क्या गांड है teri...sali सबको तूने दीवाना बना रखा है apana...wo साला तेरा जेठ तेरी गांड देख देख के मुठ मरता है...

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह क्या सच में जेठ जी bhi...tujhe कैसे पता...

में- जब तू और तेरी रैंड बेटी उस दिन खेत में हगने गई थी न तो वो साला तुम्हारे पीछे छिपकर तुम्हारी गांड देख कर मुठ मार रहा था.. ..

Bua-hey भगवन क्या हो गया है मेरे परिवार ko....sabko ठरक छड़ी हुई है...

में- छुडवायेगी जेठ से अपने....

बुआ- आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह बछ्ह जल्दी से आअह्ह्ह्ह

और बुआ बिना मेरी बात का जवाब दिए मेरे लुंड पर झड़ने lagi.....iske बाद करीब आधे घंटे तक और मैंने बुआ को अलग अलग पोजीशन में छोड़ा... और जब झड़ने को हुआ तो बुआ ने बोलै वो मेरा रास पीना चाहती है तो मैंने उन्हें बिठाया और उनकी मुँह में लुंड की धार छोड़ दी और अपने रास से उनका चेहरा भीगा दिया...





तब जाकर मैं और बुआ शांत huye...or फिर हम दोनों थोड़ी देर ऐसे hi एक दुसरे की बाहों में लेते rahe...phir बुआ उठ कर नहाने चली तो मैं भी उनके पीछे गया जहाँ मैं उनकी गांड और छूछीयो के साथ मस्ती करते हुए nahaya...or फिर बहार आ गया बुआ इतनी चुदाई से थक गयी थी तो सो रही थी... अपने रूम में आकर देखा तो विनीत भी सो रहा था, थक तो मैं भी गया था इसलिए मैं भी बिस्तर पर गिर गया तो कब सो गया पता hi नहीं चला....

शाम को पूर्वी दीदी ने मुझे जगाया और बोली- उठ जा कर्मा कितना soyega...chal उठ जल्दी

मैंने अपनी आँख खोली तो देखा मैं अकेला सो रहा था विनीत नहीं था...

पूर्वी- चल उठ चाय पि ले चाय बन गयी है....

में- दीदी मुझे तो दूध पीना है...

पूर्वी- चल तो दूध पी ले चलके

में- आपका doodh...pilao न...

पूर्वी- तू ज़्यादा बदमाश हो गया है , तू पियेगा मेरा दूध तो बच्चा क्या पियेगा...

Me-main भी तो बछ्ह हूँ न दीदी पिलाओ न..

पूर्वी- बस बस नाटक मत कर सब समझती हूँ कितना बच्चा है तू..

दीदी ने अपने ब्लाउज के हुक्स खोल दड़िये और छूछीयो को ब्रा के ऊपर निकल लिए..

मैंने चेहरा आगे बढाकर उनके छूछे को मुँह में भर लिए और तुरंत hi मेरे मुँह में दूध आने लगा





दीदी की छूछीयो से दूध पीना एक बड़ा hi कामुक दृषिअ tha....main बदल बदल कर दोनों छूछीयो से दूध पि रहा था और शायद सारा hi पि जाता अगर बहार से बुआ की आवाज़ फिर से नहीं आ जाती...

बुआ की आवाज़ सुनकर हम लोग बहार आ गए बहार आके मैंने चाय pi..or फिर मैं और विनीत गाओं में घूमने चले गए...

व्- भाई फिर क्या हुआ माँ के साथ आज तुझे बुलाया था न...

में- बुआ गुस्से में थी मुझे खूब डांटा...

विनीत दर गया सचमें bhai...yaar ये तो गड़बड़ हो gayi...ab क्या होगा....

में- कुछ नहीं होगा बस तुझे बुआ को छोड़ने का प्लान मन से निकलना होगा कुछ दिनों के लिए...

विनीत मेरी बात सुनकर काफी उदास हो गया

Me-kya हुआ मुँह क्यों लटका रहा hai...badi बुआ और पूर्वी दीदी तो हैं hi न...

व्- पर भाई मैं मुम्ममय को hi छोड़ना चाहता था... तुझे नहीं पता कितना मन करता है.... एक एक दिन बड़ी मुश्किल से गुज़र रहा hai.....tujhme एक उम्मीद दिखी थी पर अब वो भी चली गयी...

में- अरे कोई नहे, शादी के बाद दोबारा तरय कर लिओ, क्या पता बुआ का गुस्सा शांत हो जाये...

V-akele में तो मम्मी मुझे करीब भी नहीं आने देती...

मैं मन hi मन मुस्कुरा रहा था...

Me-par अब क्या कर सकते hain...chal घर चलते हैं....

फिर विनीत मुँह लटका सा लेकर मेरे साथ घर आ गया मुझे उसे तड़पने में बहुत मज़ा आ रहा था....

घर आकर मैं तुरंत ऊपर गया रिमझिम दीदी से milne...dekha तो वो टीवी देख रही थी...

हमेशः की तरह बहुत खूबसूरत लग रही thi...main जब भी उन्हें देखता था मुझे बड़ा सुकून मिलता था..

मुझसे रहा नहीं गया तो मैं उनके पीछे जाकर बैठ गया और जैसर hi उन्होंने पीछे मुद कर देखा ...मैंने अपने होंठों को उनके होंठो से लगा दिए...





मैं उनके रसीले होंठो का स्वाद लेने laga...kuch सेकण्ड्स बाद hi दीदी भी मेरा साथ दे रही थी... और हम दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने में लग gaye...unke होंठ मुझे बड़े मीठे और रसीले लग रहे थे... और थे भी इतने सॉफ्ट सॉफ्ट जैसे मैं कोई आइसक्रीम खा रहा हूँ... जो मेरे होंठों में पिघलती जा रही hai...waise कहने को तो मैंने उन्हें अचानक से किश किआ था जिसपर चाहती तो वो नाराज़ हो सकती थी बूत शायद उन्हें भी मेरी ये शैतानियां पसंद आती थी और वो मेरा साथ भी देती thi...jis तरह अभी किश में मेरा साथ दे रही थी...

किश करते करते मैं एक हाथ उनकी कमर से घुमाया और जहाँ पर कमर नंगी होती है वहां पर दबाने laga...haaaye क्या चिकनी माखन जैसी कमर है दीदी ki..pakado तो हाथ हटाने का मन hi नहीं करता था...





दीदी मुझे और कसके पकड़ कर किश करने lagi...or मैं उनकी नाभि कमर पेट पर अपना हाथ फिरा रहा tha...didi भी गरम होती जा रही थी और मैं bhi...didi के हाथ मेरे सर पर चल रहे थे... जैसे मैं कहीं चला न जॉन और उन्होंने मुझे पकड़ रखा था और अब अपनी जीभ मेरे मुँह में डालदी मैं उनकी जीभ चूसने लगा.... मुझे बहुत आनंद मिल रहा tha....phir मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाली तो वो ऐसे चूसने लगी जैसे मेरी जीभ से कुछ निकल रहा हो और वो उसकी प्यासी हो...

मैं भी गरम हो गया था मैंने दीदी को धक्का देकर बीएड पर लिटा दिए और उनके ऊपर लेट गया और उनके होंठो को दोबारा चूसने laga...unke रसीले होंठो को जितना चूसो उतना काम लगता था...





मैं बेरहमी से उनके होंठो को चूसने लगा और फिर चूसने चाटने की ज़िम्मेदारी जीभ ने ले li...kabhi उनकी जीभ मेरे मुँह में आकर खेल करती तो कभी मेरी उनके मुँह में जाकर.... एक दुसरे के मुँह का स्वाद हम दोनों ने ले लिए tha....or अब भी लिए जा रहे the....phir किश तोड़ कर मैं उनके पूरे कामुक बदन पर हाथ फिरने laga....upar से neeche....unke पेट से उनकी साड़ी के परदे को हटाया और उनके पैरो के पास से चूमते हुए ऊपर की और बढ़ gaya...unki नाभि पर मेरे होंठों के छूटे hi उनके मुँह से एक सिसकारी निकल gayi....or मैं ऊपर जाकर उनकी गर्दन को चाटने लगा..





मेरे होंठ जब गर्दन पर पड़े टी रिमझिम दीदी और ज़्यादा उत्तेजित हो गयी... और आह्ह्ह्ह कर्मा आह्ह्ह्ह जैसी सिसकारियां उनके मुँह से निकक्ने lagi...main कभी उनकी गर्दन को चूमता चाटता तो कभी उनके होंठो को चूसने lagta...kaafi देर तक ऐसे अदला बदली करने के बाद..... मैं बापिस उनकी कमर पर गया और अपने होंठ रख दिए और उनकी नंगी कमर और पेट को चाटने लगा... ऐसी माखन जैसी कमर को चाटने का आनंद hi कुछ अलग था जो मैं बस पीते रहना चाहता tha....maine उनकी नाभि में अपनी जीभ डाली और चाटने लगा... हाय क्या मज़ा आ रहा था... रिमझिम दीदी का भी बुरा हाल था और मेरा उनसे भी zyada....main उनकी छूछीयो की तरफ बढ़ा और उन्हें ब्लाउज के ऊपर से hi दबाने laga...blouse के ऊपर से hi उनकी छुछियां बड़ी मस्त लग रही thi....badi बड़ी और सॉफ्ट soft...phir मैंने उनके ब्लाउज के हुक्स खोलने शुरू किये तो उनका कोई विरोध नहीं आया ये देखकर मैं खुश हो गया और जैसे hi दीदी के ब्लाउज के आखिरी हुक खुला ब्रा में कैद उनके छूछे मेरी आँखों के सामने आ gaye...meri तो आंखें उन्ही पर टिक gayi...itna सुन्दर नज़ारा tha...ki आँखें हैट hi नहीं रही थी...





दीदी की बड़ी बड़ी छुछियां ब्रा से बहार आने को बेताब थी जैसे वो ब्रा उनके लिए बानी hi नहीं है.... मैं अपने आप पर काबू खोता जा रहा था.... मैंने तुरंत अपने होंठ दीदी के होंठों से टिका दिए और उन्हें choosa...phir उनके पूरे चेहरे को छठा chooma...phir थोड़ा नीचे आकर उनकी गर्दन पर फिर उनकी chest...unke बदन का जो भी हिस्सा मुझे नंगा दिखा मैंने हर जगह अपने होंठों से उसे छठा...

रिमझिम दी तो जैसे वासना में पागल हो चुकी थी और बस कर्मा अह्ह्ह्ह कर्मा आह करे जा रही थी मैंने भी चाटते हुए उनके ब्लाउज को उनके शरीर से अलग कर दिया अब मेरे सामने वो ब्रा में थी.... कुछ पल तो मैं उन्हें ऐसे hi बूत बना देखता रहा..

मैंने बड़ी देर बाद अपने थूक को अंदर निगलते हुए उनकी आँखों में देखा और वो जैसे मेरा इशारा समझ gayi...or उन्होंने तुरंत hi मेरी आँखों में देखते हुए अपनी ब्रा उतर di...meri तो जैसे साँसे hi रुक गयी.... इतनी सुन्दर छुछियां थी unki...lag रहा था दुनिआ की सबसे खूबसूरत चीज़ है. तो ये hi हैं





मेरी जान जैसे उन ुचलत्ते दो सॉफ्ट सॉफ्ट से मॉस के पहाड़ों में बस गयी thi...main तो आँखें फाड़े बस उन्हें देखे जा रहा था मेरी आगे बढ़ कर उनको छूने की इच्छ्हा थी पर जैसे. मेरे अंदर हिम्मत hi नहीं हो रही थी...

दीदी मेरी हालत देख कर मुझ पर मुस्कुराई और फिर अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ा और अपनी छुच्छी पर रख दिए ... उनकी नरम और भरी हुई चुच्चू का मेरे हाथ पर स्पर्श पते hi...mere अंदर तो जैसे एक करंट सा दौड़ गया... जैसे उस टच ने मेरे अंदर जान फूँक दी... मैंने देर न करते हुए जल्दी से दुसरे छूछे पर भी हाथ रख लिए और उन्हें सहलाने laga....unko ज़ोर से दबाने या मसलने का पाप मैं नहीं करना चाहता tha...main उन्हें सहला रहा था हाथो पर इतना सॉफ्ट एहसास हो रहा था जैसे मैं मलाई को दबा रहा हूँ





रिमझिम दीदी के चेहरे से बस आठ निकल रही थी और उनके चेहरे पर सिर्फ वासना के भाव the...aaj वो मुझे बिलकुल नहीं रोक रही thi...balki मेरा साथ hi दे रही थी जिससे मेरा मज़ा दुगुना होता जा रहा tha...mera लुंड बिलकुल टाइट हो कर फटने की हालत में था पर मैं इतनी भी देर के लिए उनके छूछीयो से हाथ नहीं हटाना चाहता था...

मैं काफी देर तक उनकी छूछीयो से खेलता रहा और फिर जब मेरे मुँह में ज़्यादा hi पानी आ गया तो मैंने अपना मुँह आगे बढ़ा कर उनकी एक छुच्छी पर रख दिया और चूसने लगा...





काफी देर तक मैं उन दोनों मौसमी के रास को निचोड़ निचोड़ कर पीटा raha...mere लुंड ने भी उनके अतः सुंदरता के समर्पण में दो बूँद अपनी टोपे पर छोड़ दी thi...maine सोचा अब मैं आगे बढ़ सकता हूँ और अपना. हाथ नीचे ले जाकर अपने पाजामे को नीचे खिसका diya...or दीदी का हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर रखा hi था उनकी उंगलिओ ने मेरे लुंड को छुआ hi था के पीछे से आवाज़ आई... रिमझिम कहाँ है बीटा तू... और दीदी ने तुरंत अपना हाथ बसपिस खींच लिए और चिल्ला कर बोली..

रिम- आए मम्मी...

और फिर तुरंत अपने कपडे पहनने लगी...

मेरे मुँह से बस एक hi शब्द निकला... सत्यानाश...

दीदी अपनी ब्रा और ब्लाउज पहन कर चली gayi...or मैं खड़ा लुंड लिए हिये हाथ में बैठा रहा....

इसके आगे क्या हुआ जानने के लिए पढ़ते रहे और कमैंट्स करके अपने फीडबैक देते रहे..... शुक्रिया....
 
Back
Top