Incest Katha Chodampur Ki - Page 8 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

उनका मुँह न बोल रहा था और उनका बदन कुछ और बोल रहा tha....main पेट को मसलते हुए उनकी पीठ को चाट रहा था जिससे ममी की हलकी सिसकिया ले रही थी....

तभी किसी के आने की आहात हुई और वो और मैं दर गए.... अब आगे..

अपडेट 43

ममी झट से रसोई के दरवाजे की तरफ मुँह करके कड़ी हो गयी... जिससे उनका पीछे से खुला हुआ ब्लाउज न दिखे... मैं उनके पीछे खड़ा हो गया... कुछ पल बाद बुआ रसोई में आई... और मुझे देखकर बोली...

बुआ- अरे कर्मा तू क्या कर रहा है yahan...or चारु चाय एक दो कप और बढ़ा दे तेरे जीजाजी भी पिएंगे और शायद जेठ जी भी...

चारु म- ठीक है दीदी...

में- वो मैं पानी पीने आया था पर ममी को देखा यहाँ तो सोचा मैं भी पि लूंगा चाय और इसी बहाने बातें भी हो जाएगी कुछ ममी से..

और ये कहकर मैंने बुआ को आँख मार दी जो चारु ममी मेरे आगे होने की वजह से नहीं देख सकती थी बुआ मेरा इशारा समझ gayi...or साथ hi मैंने पीछे से ममी के चूतड़ को मसल dia...mami बेचारी दर गयी इस अचानक हुए हमले से पर कुछ जताया नहीं चेहरे से....

बुआ- चलो करो तुम लोग अपनी बातें और चाय बन जाये तो जल्दी ले आना...

और बुआ ये ककहकार चली gayi...unke जाते hi चारु ममी मेरी तरफ पलट गयी

चारु म- क्या कर रहा था तू अगर दीदी देख लेती तो पता है क्या होता....

में- कुछ नहीं होता mami...main कुछ गलत थोड़े hi कर रहा था. मैं तो बस अपनी ममी को खुश कर रहा था...

और ये कहके मैंने उन्हें बाँहों में भर लिया... गरम तो वो भी थी इसलिए मेरे बदन से चिपक gayi...mere हाथ उनके चूतड़ों पर पहुंच गए और उसे मसलने lage...wo मेरी पीठ पर हाथ चला रही थी..

मैंने फिर उन्हें उठा कर रसोई की स्लिप पर बिठा diya....wo मेरी आँखों में देखते हुए बड़ी कामुक मुस्कान दे रही थी...

मैं उनकी इस मुस्कान पर फ़िदा हो गया तो मैंने अपना चेहरा आगे किआ और अपने होंठो को उनकी तरफ बढ़ने लगा तो वो अपना चेहरा पीछे करने लगी और होंठो को दूर कर लिए.. मुझे समझ नहीं आया ये ऐसा क्यों कर रही है फिर अचानक से उन्होंने खुद अपने होंठो को मेरे होंठो से चिपका दिए और चूसने lagi...mujhe भी उनके रसीले होंठो को चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था....





हम दोनों एक दुसरे के होंठो के रास को पीने में लगे हुए the...mujhe लगा भी नहीं था की मिलने के पहले दिन hi ममी और मैं इतने करीब आ jayenge...par जिस्म की भूख, छूट की प्यास और खड़ा लुंड ये सब कहाँ देखते हैं....

और मेरा लुंड भी अब चट्टान की तरह खड़ा था ममी का वो गदराया हुआ बदन देख कर मुझे उन्हें छोड़ने की लालसा बढाती जा रही थी... मैंने उनके होंठों को चूसते हुए अपने हाथ उनकी छूछीयो पर रख दिए और उन मख्हन के पर्वतो को सहलाने लगा... इतने बड़े बड़े और मुलायम छुछियां थी ममी की... ब्लाउज के ऊपर से hi मैं उनकी कोमलता का माप लेने लगा... ममी के हाथ मेरे ऊपर और टाइट हो गए वहीं वो और ज़ोरों से मेरी जीभ को चूसने lagi...mera लुंड बहुत हार्ड हो गया था मैंने ममी का हाथ पकड़ कर पाजामे के ऊपर से hi लुंड पर रलह दिया... ममी के तो जैसे लुंड को छूटे hi करंट दौड़ गया....

वो और मैं दोनों hi उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगे... ममी मेरे लुंड को पाजामे के ऊपर से hi दबा रही thi...jisse वो और हार्ड होता जा रहा था और अब लुंड में दर्द भी होने लगा था... मैंने होंठों को अलग किआ ममी के होंठों से और बोलै

Me-mami लुंड में दर्द हो रहा है कुछ करो न...

ममी मेरे से लुंड सुनकर शर्मा गयी...

चारु म- मैं क्या karun..tu शांत करले न जैसे करता है हाथ से...

Me-mami खड़ा अपने किआ है और शांत मैं करूँ ये क्या बात हुई...

चारु म- मैं क्या कर सकती हूँ अब इसमें..

में- आप शांत करो न इसे..

चारु म - नहीं पागल है क्या शर्म आती है मुझे..

में- अरे ममी अब क्या शर्माना और बाइक पर भी तो किआ था..

चारु म- अभी कोई भी आ सकता है बाइक की बात और थी...

Me-nahi ममी कुछ करो प्लीज इसकी हालत देखो आप..

ये कहकर मैंने लुंड को पाजामे से बहार निकल लिए और ममी उसे नंगा देखकर बिक्कुल चौंक hi गयी... ममी मेरे लुंड को आँखें पहाड़ कर देखे जा रही thi...lund की फूली हुई नसें.... पर्पल topa...uspar उभरती एक दो वीर्य की बूँदें... अपने आप ऊपर नीचे झटके खाना... ममी तो जैसे उसमे खो hi गयी और लुंड के सामने सम्मोहित हो गयी थी...

ममी का हाथ खुद बा खुद मेरे लुंड पर पहुंच गया और उसे थाम लिए लुंड पर ममी का हाथ लगते hi मेरे मुँह से आह्ह्ह्हह nikali...to उनके मुँह से भी सिसकारी निकल गयी...

ममी का हाथ मेरे लुंड पर आगे पीछे चलने लगा और मेरे हाथ उनकी छूछीयो par...mera लुंड तो अब ममी के हाथो में फुंकारने laga...maine ममी को पकड़कर स्लिप से नीचे उतर लिया मेरा लुंड अब बेकाबू होता जा रहा था... मैंने ममी को बोलै-

में- ममी हाथ से ज़्यादा कुछ नहीं हो रहा देखो कितना टाइट हो गया है कुछ और करो न...

चारु म - क्या मैं क्या...

मैंने उनके कंधो को पकड़ कर नीचे की तरफ दबाया तो वो समझ गयी और नीचे बैठ gayi...ab मेरा लुंड उनके मुँह के सामने tha....wo बार बार अपनी जीभ अपने होंठों पर घुमा रही थी... ममी के मन में अब भी झिझक थी पर मुझसे अब रुका नहीं जा रहा था तो मैंने खुद hi लुंड के टोपे को उनके होंठो से टच कर दिया ममी को तो जैसे इसी का इंतज़ार था और उन्होंने तुरंत मेरे टोपे को अपने होंठों में कैद कर लिए और उनकी जीभ मेरे लुंड के टोपे पर घूमने लगी...

Me-Aaahh ममी क्या गरम मुँह है tumhara....aahhhh ऐसे hi जीभ लगाओ अह्ह्ह्हह हॉँण्णन....

चारु म- म्ह्म्म्मम्म

और ममी मेरे लुंड को पूरी शिद्दत से चूसने लगी मैंने हाथ नीचे लेजाकर ममी के ब्लाउज के हुक्स को खोल दिया और फिर ममी ने खुद अपने हाथो से पकड़ कर अपनी दोनों छूछीयो को बहार निकल lia....or लुंड चूसने में लगी रही..





मेरी नज़र तो उनकी छूछीयो पर टिक गयी... जैसा सोचा था ममी की छुछियां उससे भी प्यारी थी मेरा मन कर रहा था की अभी झुक कर इन्हे मुँह में भरकर चूस लूँ और इनका सारा दूध पि जॉन.... पर लुंड उनके मुँह से बहार ऐनी को राज़ी नहीं tha....main हाथ नीचे लेजाकर उनके बड़ी बड़ी छूछीयों को दबाने लगा ममी के चूसने की गति और बढ़ gayi....mujhe लुंड पर बहुत ाचा लग रहा था.. ममी का यूँ मन लगाकर चूसने से ये पता चल रहा था की उन्हें भी बहुत मज़ा आ रहा था लुंड चूसने में.... तभी अचानक से ममी ने मेरे लुंड को मुँह से निकल दिया और कड़ी हो गयी...

मैं हैरान हो gaya...ki अचानक से ममी को क्या हो गया...

Me-kya हुआ ममी यूँ उठ क्यों गयी बहुत मज़ा ा रहा था...

ममी ने गैस की तरफ देखा और बंद करदी

चारु म- चाय बन गयी है और तू है की झड़ने का नाम hi नहीं ले रहा...

में- नहीं ममी ऐसे नहीं आप कुछ और भी करो न...

चारु म- बहुत देर हो गयी है चाय भी बन गयी hai...abhi ठीक नहीं कर्मा कोई आ जायेगा...

में- कोई नहीं आएगा ममी मैं जल्दी hi झाड़ jaunga...is बार छूछीयो को उसे करेंगे हम...

और मैं स्लिप पर गांड टिका कर बैठ गया ममी मेरी टैंगो के बीच में आ कर झुक गयी और फिर से एक बार मेरे लुंड को मुँह में भरा और एक दो मिनट तक जितना अंदर तक लेकर चूस सकती थी चूसा और फिर निकल कर मेरे केले को अपने दोनों पपीता के बीच फंसा लिए और ऊपर नीचे करने लगी..





आअह्ह्ह्हह उनके मुलायम छूछीयो का मेरे लुंड पर स्पर्श इतना ाचा लग रहा था... मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने मख्हन में अपना लुंड घुसेड़ रखा हो... ममी अपनी छूछीयो को मेरे लुंड पर ऊपर नीचे कर रही thi...jab मेरा लुंड उनकी छूछीयो से ऊपर निकलता तो ममी अपनी जीभ निकल कर उसे चाट leti...main तो जैसे जन्नत में था मेरी आँखें बंद थी और मैं ममी की छूछीयों को छोड़ने का मज़ा ले रहा tha....tabhi फिर से अचानक से किसी के आने की आहात हुई तो ममी तुरंत दर गयी और कड़ी हो गयी और अपनी साड़ी का पल्लू अपने सीने पर दाल लिए जिससे उनके नंगी छुछियां धक् gayi...maine भी जल्दी से अपना पजामा ऊपर खींचा इस बार देखा तो रिमझिम दीदी thi...wo तो मुझे वहां देखते hi खुद hi शर्मा gayi...phir बोली-

रिमझिम- ममी बानी नहीं चाय अभी...

चारु- हाँ रिम्मी बन गयी बस दाल hi रही हूँ...

Rimjhim-daal दो आप मैं ले जाती hun...or तू क्या कर रहा है यहाँ?

में- मैं भी चाय पियूँगा तो ममी की हेल्प कर रहा था बनाने में

रिमझिम- बड़ी हेल्प कर रहा होगा तू...

Me-main ममी को बोर होने से बचा रहा था...

तब तक ममी ने चाय दाल थी पर शायद घबराहट से उनसे थोड़ी चाय फर्श पर गिर गयी...

चारु- ले रिम्मी ले जा चाय मैं ये साफ़ करके आती हूँ...

Rimjhim-koi नहीं मणि बाद में हो जायेगा...

Charu-nahi बीटा चीटियां लग jayegi...tu लेजा और सबको दे....

रिमझिम दीदी चाय और गिलास लेकर चली गयी...

Me-mami अब तो कुछ करो न रहा नहीं जा रहा लुंड फटने को हो रहा है...

चारु- नहीं बीटा अब कुछ नहीं.... अभी बाल बाल बचे hain...or अब मुझे वहां जाना भी hai...nahi तो सब पूछने लगेंगे... बस ये साफ़ करके जाती हूँ main...tu भी खुद से शांत करके जेक सो जा अब...

ये कहते हुए ममी ने अपनी छूछीयो को भी अंदर दाल लिए और ब्लाउज भी बंद कर दिया...

मैंने कुछ नहीं बोलै मैं सोचने लगा क्या किया जाये जिससे ममी मान जाये क्यूंकि मेरा लुंड बहुत टाइट हो चूका था बिना इसको शांत किये नहीं सो सकता था main...wohin ममी ने एक गन्दा कपडा उठाया और झुक कर घुटनो पर बैठ कर पोंछा मरने लगी... उनके झुकने से उनके बड़े बड़े चूतड़ मेरे सामने आ gaye...mujhse अब तो बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल हो गया तो मैं अपना कण्ट्रोल खो बैठा...

मैंने अपना पजामा नीचे खिसका दिए और उनके पीछे घुटनो पर आ गया और उनके पैरो से उनकी साड़ी और पेटीकोट को उठाकर कमर पर जल्दी से चढ़ा दिया... मेरे इस अचानक हमले से वो चौंक गयी...

Charu-Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh क्या कर रहा hai....abhi मत कररररम..

उनकी साड़ी कमर तक होते hi उनकी बड़ी गांड मेरे सामने ा gayi....or हैरानी की बात ये थी की ममी ने भी बुआ की तरह पंतय नहीं पहनी thi...unki मस्त चिकनी छूट जो अभी काफी गीली नज़र आ रही थी और गांड मेरे सामने थी और मैंने भी देर न करते हुए अपना लुंड पकड़ा और उसे ममी की छूट के होंठों पर लगाया और एक झटका मारा मेरा लुंड ममी की छूट में घुस गया...

चारु- aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मायआ ुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह छूट फाड़ di...aahhhhhh

में- ममी धीरे कोई सुन लेगा.....

चारु- लुंड घुसेड़ने से पहले सोच लेता ये...

में- ाःह ममी क्या रसीली छूट है तुम्हारी.... मज़ा आए रहा है और ये ककहकार मैंने उनकी कमर को पकड़ कर दो तीन झटके मरे और लुंड पूरा चारु ममी की छूट में घुस गया....

मैं भी बिना डर करते हुए अपनी कमर आगे पीछे करने laga...jissse लुंड ममी की छूट से अंदर बहार होने laga....mami के हाथ में अब भी पोंछा hi hai...or वो भी हाथ हिलके साफ़ करने लगी इधर मैं अपने धक्के के साथ ममी की छूट मरने लगा....





ममी चाय के निशानों को साफ़ कर रही thi....mujhe बहुत मज़ा आ रहा रहा उनकी गरम भट्टी जैसी छूट में मेरमलुण्ड हर पल गरम होता जा रहा tha....jisse मेरे धक्के तेज़ होते जा रहे थे..... और वहीं ममी भी अब पोंछा वगेरा छोड़ कर अब अपनी गांड पीछे करके मुझसे छूट मरवा रही thi...pahli बार शायद इतना बड़ा लुंड लिए था ममी ne...mami भी मुझे और तेज़ करने को बोल रही thi...main और तेज़ ममी को छोड़ने लगा और फिर कुछ hi पालो में ममी की बॉडी अकड़ने लगी और वो झड़ने lagi...par उनका झड़ना इतना खतरनाक था की मैं यहाँ अब और नहीं सह पाया और उनकी छूट में धार मरने लगैक के बाद एक पिचकारी से पूरी छूट को भर diya....jisse ममी आगे फर्श पर गिर गयी... और लेट गयी मेरा लुंड भी छूट से बहार निकल गया...

Charu-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मायआ बीटा अब तू जा मुझे भी जाना होगा... बहुत लेट हो गया...

ममी ने अपने कपडे थूक करते हुए कहा...

Me-mami गीत के बाद कमरे में मिलना मेरे वाले में....

Charu-haan वो बाद में अभी जा और मैं और ममी अपनी चैन लेकर किचन से बहार निकल आये... और मैं अपने रूम में और ममी गीतों में.... अपनी छूट में मेरा रास लिए हुए बैठ गयी....

इसके बाद की दास्ताँ अगली अपडेट में...

आप लोग प्लीज कमैंट्स kariye...or सुझाव देते रशिये शुक्रिया...
 
सॉरी गाइस वास् बिजी सीन्स लास्ट तवो थ्री डेज विल अपडेट अस सून अस पॉसिबल
 
Me-mami गीत के बाद कमरे में मिलना मेरे वाले में....

Charu-haan वो बाद में अभी जा और मैं और ममी अपनी चैन लेकर किचन से बहार निकल आये... और मैं अपने रूम में और ममी गीतों में.... अपनी छूट में मेरा रास लिए हुए बैठ gayi...ab आगे...

अपडेट 44

मुझे यकीन नहीं हो रहा था की मैंने ममी जैसी गदराये बदन वाली औरत को छोड़ लिए tha...main बिस्तर पर पड़े हुए एहि सोच रहा tha...main बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था जब मेरा लुंड दोबारा उनकी छूट में घुसेगा और मैं जी भर के मसल मसल कर उसको छोडूंगा...

तभी विनीत भी पास में अपने बिस्तर पर आकर लेट गया...

व्- अरे भाई ये जल्दी से गीत ख़तम हो... लुंड खड़ा है बुरी तरह से...

में- किसके साथ का प्लान है आज तेरा...

व्- दीदी बोल रही थी की वो आज हमारे साथ सोयेगी...

में- आज पूर्वी दीदी को बजायेगा...

व्- बजायेगा क्या भाई bajayenge....hum दोनों के साथ सोयेंगी वो..

में- अबे नहीं यार मेरा कुछ और प्लान है आज तू मज़े ले दीदी क साथ...

व्- और प्लान मतलब भाई कोई और जुगाड़ भी है क्या.?

में- बस थोड़ा वेट कर सब पता चल जायेगा...

विनीत खुश होते हुए भाई अब किसकी बरी है....

में- तू बस वेट कर अपने आप पता चल जायेगा तुझे...

व्- भाई ये बोल कर उत्सुकता बड़ा दी वेट hi तो नहीं होता..

Me-karna पड़ेगा मेरे लाल... मज़े लेने है न...

व्- हाँ भाई मज़े तो लेने हैं....

में- तो बस चुप चाप से वेट कर...

और फिर कुछ देर हम ऐसे hi बातें करते रहे फिर मैंने बोलै तू बैठ मैं थोड़ा छत पर टहल आता हूँ और वहां से निकल गया....

फिर मैं छ्हात पर पहुंचकर घूमने laga...phir फ़ोन निकलकर माँ को कॉल kia...unse थोड़ी देर बात की फिर फ़ोन कट कर दिए...

और फिर टहलने लगा और फिर थोड़ी देर बाद रिमझिम दीदी के कमरे में जो ऊपर hi था लेट gaya....or सोचते सोचते कब मेरी आँख लग गयी पता hi नहीं चला...

किसी की आवाज़ मेरे कानो में पद रही thi...jab आँख खोल धीरे से तो देखा रिमझिम दीदी कड़ी थी हाथ में गिलास लेकर और मुझे जगा रही थी...

रिमझिम- क्या बक्त है आज मेरे कमरे में hi सोयेगा क्या..

मैं जागते हुए उनको तरफ देखते हुए बोलै...

Me-haan मेरी जान तुमसे चिपक kar....ek hi बिस्तर पर....

रिमझिम- बेशर्म है तू पूरा...

Me-main बेशरम बिलकुल nahi...waise गीत ख़त्म हो गए..

Rim-haaannnnn हो गए और तू दूध पि ले...

में- तुम्हारे दूध पिने हैं

तो दीदी ने अचानक से अपनी साड़ी का पल्लू सीने से हटा दिया और बोली ले पीले...





मैं तो चौंक गया उन्हें देखकर भले hi मैं रिमझिम दीदी को छोड़ चूका था पर उनको देखकर hi हर बार मेरा लुंड खड़ा हो जाता था और जब वो ऐसी अदाएं दिखाएं तो बात hi क्या thi....meri नज़र तो उनकी कमर और छूछीयो पर hi टिक गयी...

वो मेरी तरफ बढ़ी और मुझे दूध की गिलास दिए जिसे मैंने एक hi सांस में ख़त्म कर diya...or फिर रिमझिम दीदी का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिए.. और खींचते hi वो मेरे ऊपर का कर गिरी और हमारे होंठों का आपस में मिलान हो गया... मैं दीदी के होंठों को चूसने laga...didi भी बहुत शिद्दत के साथ. एरा साथ दे रही thi...kal रात के बाद से hi उनकी चुदाई नहीं हुई थी इसलिए वो भी काफी गरम थी...

उनका एक हाथ अपने आप मेरे लुंड को पाजामे के ऊपर से hi सहलाने लगा जबकि उनके मीठे रसीले होंठ अभी भी मेरे होंठो को चूस रहे थे





उनकी जीभ मेरे मुँह में जाकर अटखेलियां कर रही थी और मैं भी उनकी जीभ को चूस रहा था फिर मेरी जीभ उनके मुँह में जाती और वो उसकी भी खूब सेवा करती उनके होंठो में ऐसा रास था जो मैं हमेशा पीटा रहना चाहता tha...man hi नहीं करता था उनके होंठो को छोड़ने ka...par उन्होंने जब अपने होंठों मो हटा लिए तो मैंने उन्हें वहीं बिस्तर पर गिरा दिया...

और उनकी गर्दन को चूमने चाटने लगा फिर उनके सीने को चूमने laga...phir ब्लाउज के ऊपर से hi उनकी छूछीयो को चूमा तो उनकी आअह्ह्ह्हह निकल गयी.... फिर मैं उनकी छूछीयो को चूमते हुए नीचे आया और उनके चिकने नंगे मखमली पेट पर अपने होंठ टिका diye...ahhhhh क्या एहसास था उनके पेट की स्किन इतनी कोमल थी जैसे मैं किसी ice-cream को चाट रहा hun...aisa स्वाद निकल रहा था उसमे ...मैं दीदी के पेट को हर जगह चाटने लगा





चाटने के साथ मेरा हाथ उनकी कमर को सहलाने और मसलने laga...didi के हाथ मेरे सर पर घूम रहे थे वहीं उनकी आँखें बंद थी और वो मुझे अपने शरीर का सुख दे रही थी... मैंने पेट को चूमते चाटते हुए उनके ब्लाउज के हुक्स को खोल दिया तो दीदी ने उसे अपने बाजुओं से उतर कर फ़ेंक दिया... अब वो मेरे सामने ब्रा में थी मैंने अपने मुँह को दोनों छूछीयो के बीच फंसा दिए और चूमने चाटने laga...wo अचानक से तड़पने lagi...phir मैंने अपना हाथ पीछे लेजाकर उनकी ब्रा के हुक को खोल दिए और उनकी नंगी पीठ पर हाथ फेरने लगा... साथ hi उनकी छूछीयो के बीच की मुलायम जगह को अपनी जीभ से चाट रहा था...

फिर मैंने हाथो से उनकी ब्रा के स्ट्रैप्स को खींच कर अलग कर दिया अब रिमझिम दीदी ऊपर से बिलकुल नंगी thi...or मैं उनकी छूछीयो पर टूट पड़ा और मुँह में भरकर चूसने लगा वहीं दुसरे को हाथ से मसलने लगा... दीदी ने मेरे सर को कास कर पकड़ लिए और अपनी छूछीयो पर दबाने लगी.... मैं उनकी छूछीयो को जितना भर सकता था मुँह में भर के चूसने लगा तो वहीं जीभ से निप्पल को छेड़ता...... दीदी ने अपने हाथ नीचे लेजाकर मेरी t-shirt ऊपर उठा दी तो मैंने भी छूछीयो से मुँह हटाकर t-shirt निकलने में उनकी मदद की और फिर बापिस अपने काम पर जुट Gaya....mera मन कर रहा था की मैं दीदी की छूछीयो का सारा रास आज hi निचोड़ कर पि जॉन... दीदी अब अपने हाथ मेरे नंगे बदन पर चला रही थी... हम दोनों hi ऊपर से बिलकुल नंगे the...mera लुंड मेरे पाजामे में तम्बू बना कर खड़ा था...

छूछीयो को चूसते हुए मैं हाथ नीचे लेकर गया और उनकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया पर ठीक से नहीं खोल प् रहा था तो दीदी और मैं एक पल के लिए एक दुसरे से अलग हुए और अपने बचे हुए कपडे उतर कर बिलकुल नंगे हो गए...

दीदी का नंगा बदन रोशनी में नहाया हुआ चमक रहा tha...wohin मेरा लुंड खम्बे की तरह खड़ा हुआ था.. रिमझिम दीदी की नज़र मेरे लुंड पर hi तिकी हुई थी...

वो थोड़ा आगे बढ़कर आई और मेरे सामने बैठ गयी और मेरे लुंड को पकड़ लिए मेरा लुंड अब उनके चेहरे के सामने था और वो हाथ से उसे पकड़कर हल्का हल्का सहलाकर उसकी कठोरता का एहसास कर रही थी साथ hi लुंड के टोपे को ध्यान से देख रही थी...

और जैसे hi मेरे वीर्य की एक बूँद मेरे टोपे के छेड़ से उभरकर ऊपर आई दीदी ने अपनी जीभ फिरकर उसे चाट लिए... मेरे मुँह से एक आह्ह्ह्हह निकल गयी उनकी जीभ का एहसास अपने लुंड पर होते hi...phir वो अपनी जीभ से मेरे पूरे लुंड पर चाटने लगी ऊपर से नीचे तक उसे गीला करने लगी...

Me-Aaahh दीदी ऐसे hi मज़ा आ रहा है बहुत... फिर दीदी जहाँ मेरे लुंड पर टोपे की खाल मिलती है वहां जीभ फिरने लगी मुझे बहुत मज़ा आने laga....mera लुंड फुंकारने लगा मैंने सोचा अगर दीदी को नहीं रोका तो मैं यहीं झाड़ जाऊंगा...

मैंने लुंड को दीदी के मुँह के अंदर दाल दिए जिससे उस जगह उनका चेतना बंद हुआ अब दीदी लोल्लिपोप की तरह मेरा लुंड चूसने लगी...





वो लुंड चूसते हुए मेरी आँखों में देख रही thi...kya नज़ारा था उसके होंठों के अंदर बहार होता हुआ मेरा लुंड... उसकी झूलती हुई छुछिया और साथ hi उनकी प्यारी आँखें जो मुझे न जाने क्या क्या बोल रही thi...didi लुंड को पूरी शिद्दत जे साथ चूस रही थी और मुझे उतना hi आनंद मिल रहा tha...kahan रिमझिम दीदी कल तक एक कुंवारी लड़की थी जिसकी शादी चार दिन बाद होनी थी आज वो मेरे सामने नंगी बैठकर जो उनका भाई लगता हूँ उसका लुंड चूस रही thi....phir दीदी ने अगले कई मिनट्स तक मेरा लुंड मुँह में अंदर तक ले ले कर चूसा और फिर नीचे आकर मेरे ांडो को चाटने लगी वो हर जगह अपनी जीभ फिरा रही थी... फिर मेरी एक गोली को अपने मुँह में भरकर चूसने lagi...or उसके बाद दूसरी को भी मैं तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था... फिर दीदी ने गोलिओ को छोड़ा और अपनी छूछीयो की हाथ से पकड़ा और ऊपर लेकर मेरे लुंड को दोनों के बीच फंसा diya...un नरम मॉस के पहाड़ो का मेरे लुंड पर एक दम कोमल सा एहसास हो रहा था... उन्होंने आँखों से मुझे लुंड हिलने का इशारा किआ तो मैं अपने लुंड को उनकी छूछीयो के बीच घिसने लगा उन्होंने अपने दोनों पपीता को अपनी जगह पर सही से पकड़ रखा था ताकि मेरा केला दोनों को घिसा हुआ अंदर बहार हो रहा था वहीं दीदी ने फिर अपनी जीभ बहार निकली और जैसे hi मेरे लुंड का टोपा उनकी घाटियों के बीच से ऊपर आता था वो जीभ से उसे चाट लेती थी...





रिमझिम दीदी अब एक पूरी तरह से चुड़क्कड़ औरत बन गयी थी और हो भी क्यों न वो पूर्वी दीदी से बड़ी भी थी बस उनकी शादी hi नहीं थी और कल तक वो कुंवारी भी थी वर्ण उनका बदन भी पूर्वी की तरह रगड़ कर छोड़ने लायक था... मैं दीदी की छूछीयो को छोड़ रहा था.... मेरे लुंड को एक बहुत सुखद अनुभव मिल रहा था.. छूछीयो की कोमल स्किन लुंड पर जब घिस रही थी तो कुछ अलग hi मज़ा दे रही थी... फिर जब कुछ देर बाद दीदी ने अपनी छूछीयो को हटाया तो मैंने उन्हें जल्दी से उठाकर बीएड पर सीधा लिटा दिया और उनकी टैंगो के फैला दिया और बीच में बैठ गया और ध्यान से उनकी छूट को देखने laga...kya प्यारी छूट थी दीदी की मखमली si...ras से पूरी तरह नहीं hui...honth अब भी आपस में जुड़े हुए... बहार से बिलकुल गोरी और अंदर से सुर्ख gulabi...use देखकर मेरे मुँह में पानी भरने लगा तो मैंने झट से अपना मुँह उनकी छूट से चिपका दिया... दीदी तो झटके खाने लगी और उनके हाथ खुद बा खुद मेरे सर पर आ गए मैं भी अपनी जीभ निकल कर उनकी छूट के ऊपर फिरने लगा...

Rim-aahhhh कर्मा भाई auseeeeeeeeeeeeeeee hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii chaaaaaaaaaaaaattttttttttttttt अपनीइ बहनणननणणन कोई chhooooooooooottttttttt.........

मैं अपने काम में व्यस्त था तो वहीं दीदी सिसकारियां लेकर मेरा हौसला बड़ा रही thi....main अपनी जीभ को नुकीली करके उनकी छूट के अंदर तक चाट रहा tha...or दीदी अपनी कमर को हिलाकर अपनी छूट को मेरे मुँह पर घिस रही थी... और साथ hi aaahhhhhhhhhh कर्मा जैसी सिसकारियां ले रही थी....

मैंने उंगलिअ लेजाकर उनके छूट के डेन को रगड़ने लगा साथ hi छूट में जीभ घुसेड़ कर चाटने लगा और एक उंगली को उनकी गांड के छेड़ के आस पास घूमने लगा... दीदी एक हाथ से मेरा चेहरा अपनी छूट पर दबा रही थी तो वहीं एक हाथ से अपनी छूछीयो को मसल रही थी और कुछ पल ऐसे hi सिलसिला चला तो अचानक से दीदी की आवाज़ आणि बंद हो गयी और उनके हाथ मेरे सर पर कास गए और मुझे छूट पर चिपका diya...or वो झटके कहते हुए झड़ने लगी...

उनकी छूट का रास बाह बाह कर मेरी जीभ पर आने laga..main उसे पिने laga....jab तक दीदी का रास बहता रहा उन्होंने मेरा सर अपनी छूट पर दबाये रखा और मैं भी स्वाद ले लेकर उनकी छूट का रास पिता raha...or जब उनकी छूट का झरना बंद हुआ तब मैंने अपना सर उनकी छूट से हटाया और जल्दी से उठकर बैठ गया... और उनकी टैंगो के बीच आ गया और अपना अब लोहे जैसे बन चुके लुंड को हाथ में थमा और उनकी छूट के मुँह के ऊपर rakha...mere लुंड का स्पर्श अपनी छूट पर पते hi उनकी छूट में तो जैसे करंट दौड़ गया और उनकी कमर खुद से उठाने लगी मेरा लुंड अंदर लेने के liye...ab मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने एक झटका मारा और लुंड उनकी छूट में घुस गया...

रिम- आह्ह्ह्ह कर्मा ाराआआअम्मम्म से...

में- बहुत टाइट छूट है दीदी तुम्हारी अह्ह्ह्हह्हह

और मैं आगे झुककर उनके होंठो को चूसने लगा और आराम से धक्के मरते हुए धीरे धीरे पूरा लुंड उनकी छूट में घुसेड़ dia....or फिर जब देखा अब दीदी तैयार हैं तो उनके होंठो को छोड़ा और अपने हाथ उनकी जांघो में फंसा कर धक्के मरने laga...didi भी हर धक्के के साथ अह्ह्ह्हह कर्मा ाः कर्मा और तेज़ बोल रही थी जिससे मेरा जोश और बढ़ गया और मैंने अपने धक्को की गति और तेज़ करदी.... और मैं अब दीदी को असली चुदाई के सुख का अनुभव करवा रहा था...





रिमझिम दीदी का मुँह खुला का खुला hi रह रहा था पर उनके मुँह से से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी...

मैं बेरहमी से अपने लुंड को उनकी टाइट सी चुत के अंदर बहार किये जा रहा tha...kal रात तो उनकी पहली चुदाई थी... इसलिए मैंने उन्हें बड़े प्यार और आराम से छोड़ा था पर आज मैं उन्हें चुदाई के असली रूप से अवगत करना चाहता था... ये दिखाना चाहता था की क

जितना मज़ा प्यार और आराम से चुदाई में है उससे कहीं ज़्यादा ऐसे ताबड़तोड़ और रगड़ कर छुड़वाने में hai....poore कमरे से बस थप थप थप की आवाज़ें आ रही थी.... मेरे हिप्स उनकी जांघो से टकराते तो उनकी मांसल जांघो में एक लहार सी दौड़ जाती.... मेरा लुंड दीदी की छूट की दीवारों को घिसता हुआ अंदर बहार हो रहा था तो मुझे ऐसा लग रहा था कहीं इतनी तेज़ घरसँ से चिंगारी न निकल जाये.... पर चिंगारी का तो पता नहीं पर दीदी की छूट से रास की धार ज़रूर निकलने लगी और दीदी ने कसकर मेरे हाथो को पकड़ लिए और झड़ने लगी... उनके झड़ते हुए भी मैं लगातार उनकी छूट में लुंड पेलता जा रहा tha....or जैसे hi दीदी का शरीर थोड़ा ढीला pada....maine उन्हें पलट कर अपने ऊपर कर लिए अब दीदी ऊपर थी और मैं नीचे से उन्हें छोड़ने लगा....

जैसे दीदी को कुछ होश आया तो दीदी भी खुद से अपनी गांड उठाकर मेरे लुंड पर पटकने लगी





दीदी अब बड़े मज़े ले कर अपनी गांड को मेरे लुंड पर घुमा रही थी उनकी गरम भट्टी जैसी छूट में मुझे बहुत आनंद मिल रहा था... उनकी छूट लुंड का अंदर hi अंदर मस्सगे कर रही थी... जिस तरह से वो गांड घुमाकर लुंड को निचोड़ रही थी उससे कहीं ये नहीं लग रहा था की दीदी की सील कल hi टूटी है... पर मैं कौन होता हूँ शिकायत करने wala...mujhe तो बहुत मज़ा आ रहहा था... रिश्तो में चुदाई का आनंद hi अलग होता है खुद के लिए भी और लुंड के लिए bhi...mujhe भी वही आनंद मिल रहा था... तो जब दीदी का कमर घूमना थोड़ा बंद हुआ तो मैं फिर दीदी को तूफानी धक्को से छोड़ने लगा और दीदी फिर से चुदाई के सुखसागर में गोते लगाने लगी... दीदी ऊपर उछालते उछालते थक गयी तो मैंने उन्हें साइड में बिस्तर पर लिटा दिया और फिर उनके पीछे लेटकर लुंड एक बार फिर से उनकी छूट में घुसेड़ diya...or फिर शुरू हो गयी चुदाई एक्सप्रेस आज मैं रिमझिम दीदी को जी भर के छोड़ना चाहता था जिससे हम दोनों को hi थोड़ी शांति मिले... और मैं वैसा कर भी रहा था





और दीदी भी मेरा पूरा साथ दे रही thi...wo ये ध्यान रख रही थी की उनकी आवाज़ न निकले जिससे कोई बहार सुन पाए पर उनका मुँह बार बार ऐसे बन रहा था जैसे वो चिल्लाने वाली हैं... पर उनके मुँह से आवाज़ नहीं निकल रही thi......maine आगे हाथ लेजाकर उनकी छुच्छी को थाम लिए और उसे मसलने लगा.... तो दीदी की अब पहली बार ऐसी आवाज़ निकली इतनी देर में जो मुझे सुनाई दी..

Rim-aahhhh भाई अह्ह्ह क्या कर रहा है तू.... ऐसा मज़ा मुझे आजतक कभी aaya....na ऐसा कभी फील हुआ.... चुदाई का सुख ऐसा होता है ये पता होता तो कबका छुड़वा लेती... अह्हह्ह्ह्ह क्या लुंड है तेरा...

में- ाःह मेरी रानी क्या मस्त छूट है तेरी... अह्हह्ह्ह्ह दीदी मैं तुम्हे हमेशा छोड़ते रहना चाहता हूँ....

रिम- हम्मम्मम्मम्म मैं तो तेरी हूँ मेरे राजा तू जब जहाँ चाहेगा अपनी टंगे खोल दूंगी... और तेरा लुंड अपनी छूट में ले लुंगी... अपने पति के सामने भी तुझसे छोड़ने को तैयार हूँ मैं ....

में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी रांड है तू अब से आठ आठ आठ आठ आठ

और मैं और तेज़ धक्क्को से दीदी को छोड़ने लगा...

रिम- आह्ह्ह्ह कर्मा तेरे लुंड पर मेरा सबबबबबबबबब बी कुर्बान hai...aaahhhhhh छहःछहूऊऊडड़ड़.....

और ये बोलते hi दीदी एक बार फिर से झड़ने लगी और उनके बाद मैं भी अब और खुद को रोक नहीं पाया और रिमझिम दीदी की छूट में अपने वीर्य की वर्षा कर di...poori छूट मेरे रास से भर गयी और जैसे hi दीदी थक कर अपने पेट पर गिरी मेरा लुंड छूट से निकल गया और उनकी छूट से मेरा रास बहकर बहार तक आने लगा... दीदी वैसे hi वहां लेट कर अपनी सांसे ठीक कर रही थी वहीं मैं भी सीधा लेता हुआ था पर मेरा लुंड झड़ने के बाद bhi...ab भी खम्बे की तरह खड़ा tha...thodi देर बाद दीदी को जब थोड़ा होश आया तो वो लुढ़क कर मेरे पास आई और मेरे होंठों को चूम लिए और चूसने लगी जैसे चुदाई का शुक्रिया ऐडा करना चाहती हो... मैंने भी अपनी जीभ उनके मुँह में घुसेड़ दी जिसे वो चूसने lagi....unka हाथ सरकते हुए फिर मेरे लुंड पर पहुंच गया और उसे पकड़ कर वो बोली

रिम- इसका क्या करना है अब?

में- दीदी मुझे तुम्हारी गांड भी मारनी है...

मैंने सीधे शब्दों में पूछ lia...to रिमझिम दीदी भी सोच में पद गयी..

रिम- मैंने सब कुछ तुझे दे दिया है रे तो गांड भी तेरी हो hai..or जब छूट का कुंवारा पैन तूने छहीना तो मैं तो यही चाहती हूँ की मैं अपनी ससुराल अपने सरे छेड़ तुझसे खुलवा कर hi जॉन...

मैंने उन्हें तुरंत पलट दिया और पेट पर लिटा दिया... मैंने उनके टैंगो के बीच आकर उनके दोनों चूतड़ों को फैलाया और अपना मुँह उनकी गांड के छेड़ पर टिका दिया... और उसे चाटने लगा....

Rim-karmmmmmaaaaaaaaaaaaahhhhhjjhjh मेरी गांड.....

मैंने अपनी जीभ नुकीली की और दीदी की गांड के छहद में घुसेड़ने laga...didi तो अपनी गांड उठाकर मेरी जीभ को और अंदर लेने की कोशिश कर रही thi...jab दीदी का छहद मैं गीला करने लगा उसके बाद थोड़ा तेल उठाया और दीदी की गांड पर टपका दिया और चूतड़ों को पूरा गीला कर दिया िर फिर उनके बड़े चूतड़ों को मसलते हुए उसकी मस्सगे करने लगा..

साथ hi कुछ तेल अपने लुंड पर लगा लिया जिससे वो भी छींकना हो गया और मैंने दीदी की गांड के पतों को फैलाया ोे और अपना लुंड उस पर घिसने लगा....



रिमझिम दीदी की गांड का भूरा छेड़ मुझे अपनी और खींच रहा था ...पर मैं थोड़ा और खुद को तड़पना चाहता था.. लेकिन दीदी से रहा नहीं गया और बोली जल्दी दाल न कर्मा क्यों तड़पा रहा है.....

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट mein...aaplog कमैंट्स करके सुझाव ज़रूर दें
 
रिमझिम दीदी की गांड का भूरा छेड़ मुझे अपनी और खींच रहा था ...पर मैं थोड़ा और खुद को तड़पना चाहता था.. लेकिन दीदी से रहा नहीं गया और बोली जल्दी दाल न कर्मा क्यों तड़पा रहा hai.....ab आगे..

अपडेट 45

मैं फिर भी लुंड के टोपे को छूट और गांड के छेड़ो के बीच घिसता रहा..

में- दीदी तुम तैयार हो na...thoda दर्द होगा...

रिम- हाँ मेरे bhaiya...mere सैयां ग दाल दो अपना लुंड अपनी बहन की गांड mein...banado मुझे अपने इस लुंड की घुलम...

मैंने एक बार और अपने लुंड पर थूका लुंड पहले से hi तेल की वजह से चिकना था और मैंने गांड के छेड़ पर लुंड का टोपा लगा कर एक हाथ से दीदी की कमर को पकड़ा और एक झटका दिया.. तो लुंड फिसल कर ऊपर की तरफ हो गए... मैंने इस बार लुंड को हाथ में पकड़ के धक्का दिया तो मेरे लुंड टोपा बड़ी मुश्किल से अंदर घुस गया.... मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा लुंड छील गया hai....wohin दीदी ने अपने हाथ से अपना मुँह दबा रखा था जिससे उनकी चीख न निकले पर उनकी आँखों से आंसू बाह बाह कर बहार आ रहे थे... पर अभी मेरा काम पूरा नहीं हुआ था. क्यूंकि अभी तो बस टोपा hi गांड में घुसा था... मैंने देखा की अब दीदी थोड़ा ठीक हुई है तो फिर से एक झटका मारा लुंड 3 इंच अंदर और घुस गया...

रिमझिम दीदी के मुँह से दबी हुई आवाज़ें बहार आ रही थी उनका शरीर दर्द से तड़प रहा था... मैं हाथ नीचे लेजाकर दीदी के छूट को सहलाने लगा जिससे उनका थोड़ा ध्यान बाटे और कुछ देर बाद ऐसा hi हुआ दीदी थोड़ी शांत हुई तो मैंने इस बार ज़ोर के दो तीन झटके मरे और पूरा लुंड दीदी की गांड में घुस गया... दीदी तो बिन पानी मछली जैसे तड़पने लगी अगर मैंने उन्हें कास कर नहीं पकड़ रखा होता तो वो लुंड निकल कर अलग गिर जाती पर मैंने उन्हें खुद से चिपकाये रखा और उनके शरीर को जगह जगह चूमने laga...sath hi छूट को भी सहला रहा था और दुसरे हाथ से उनकी छूछीयो को मसलने लगा...

जिससे थोड़ी देर बाद दीदी थोड़ी शांत हुई और अपनी गांड हिलने लगी ...मैं समझ गया दीदी अब तैयार हैं तो मैंने लुंड के झटके दे कर दीदी की कासी हुई मख्हन जैसी गांड मरना शुरू कर diya...do बड़े खरबूजों के बीच जाता हुआ मेरा लुंड देखके मुझे बहुत ाचा लग रहा tha...ab दीदी को भी ाचा लग रहा था और अब आराम समझे लेकर अपनी गांड में लुंड ले रही थी...





Rim-aahhhh कर्मा मेरे bhai.....mazaaaaa आए रहा hai....gaaaaaannnnddd में बहुत आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तेरे लुंड ने मेरी भुख बड़ा दी hai.....ab नहीं लगता की मैं कभी बिना चूड़े रह paungi...aahhhhhhhh...aahhhh

में- इतना मस्त शरीर छोड़ने के लिए hi बना hai...ab तक तुमने इस पर अन्याय किया पर अब तुम्हे इसे पूरा सुख देना होगा आअह्ह्ह्ह दीदी....

रिम- हननननन ऐसे hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii.....aaaahhhhhhhhhhhh मेरी गांड....

में- साली randiiiiiiiiiiiiiiiiiii क्या गाआआनंनंड्डड़ है तेरी अह्हह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा है...

रिम- अभह सेल तेरा लुंड hi ऐसा है बहनचोद जिसे एक बार दिख दे वो तेरी रंडी बन कर hi रहेगी...

में- तू बनेगी मेरिइइइइइ रंडी....

रिम- मैं तो पहले hi बन चुकी हु ... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ये लुंड तो तू अपनी माँ को भी दिखादे वो भी अपनी छूट पटक पटक कर छुड़ेगी तुझसे... अह्ह्ह्ह मादरचोद.... मेरी गाआआनंनंड्डड़...

में- उससे पहले मैं तेरी माँ की गांड मरूंगा साली बड़े बड़े चूतड़ लेकर घूमती रहती है...

रिम- मार ले मुम्ममय की भी बना ले माँ बेटी दोनों को raand...dono को एक साथ छोड़ना...

मैं और दीदी दोनों hi ऐसी बातों से गरम हो रहे थे और मेरे धक्क्के भी सततत पद रहे थे और उनके चूतड़ों से टकरा रहे थे दीदी के चूतड़ हर धक्के के साथ लहार रहे थे...

रिम- आह्ह्ह्ह मादरचोद ahhhhhhhhhhh फायआडडडडडडडड दे मेरी gand......ohhhhhhhhh गधे के लुंड से...

Me-le साआईई थोड़ा आराम से चिल्ला सब सुन लेंगे फिर सबके सामने तेरी गांड मारनी पड़ेगी....

Rim-to मार लियो सेल उन्हें भी तो अपना लुंड दिखा.....

और ये कहते हुए दीदी आगे की तरफ गिर गयी और झड़ने लगी मैंने धक्के जारी रखें फिर जब दीदी थक गयी तो मैं लेट गया और दीदी मेरे ऊपर बैठ गयी और लुंड पकड़ कर अपनी गांड के छहद पर टिका diya...or फिर नीचे बैठ कर लुंड को फिर से गांड में पे लिए.... दीदी की पीठ मेरी तरफ थी तो मुझे अपना लुंड उनकी टाइट गांड में आता जाता हुआ साफ़ दिख रहा था... उनकी गांड का छेड़ जो अब तक कुंवारा था अब मेरे लुंड के चारो तरफ एक मुठी जितने आकर में फैला हुआ था और लुंड पर रगड़ रहा था...





मैंने नीचे से गांड उठा उठाकर उनकी टाइट गांड में लुंड पेल रहा tha...wo बस आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्ह्ह्हह की सिसकारियां ले रही थी....

मैं उनकी कमर को पकड़ कर उन्हें छोड़ रहा tha...hum दोनों hi अब बहुत गरम हो चुके थे और अब बस लुंड और गांड का खेल चल रहा tha....thapp ठप्प की आवाज़ें एक ले में गूँज रही थी...

रिमझिम दीदी भी अब इस घर की बाकि औरतों की तरह बन चुकी थी... चुदाई की प्यासी... और लुंड के लिए bhookhi...matlab अब वो भी पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी किसी भी तरह की चुदाई के लिए...

मेरा धक्के अब बिल्किल तूफानी हो चुके थे और मैं चाहकर भी खुद को नहीं रोक प् रहा था दीदी की गांड इतनी गरम और टाइट थी की लुंड अपने आप अंदर बहार हो रहा tha...or फिर एक समय ऐसा आया मैंने अपना लुंड पूरी तरह से उनकी गांड के अंदर तक घुसा दिया और वहीं रुक गया और फिर अपने रास की धार छोड़ड़ड़ di...ek के बाद एक पिचकारी ने दीदी की गांड को भर दिया और वहीं दीदी भी मेरी पिचकारी गांड में पते hi झड़ने लगी... हम दोनों एक दुसरे से चिपक के साथ में झाड़ रहे the...or तब तक चिपके रहे जब तक एक एक बूँद मेरे लुंड ने उनकी गांड में नहीं छोड़ दी उसके बाफ उन्होंने पलट कर मेरा लुंड मुँह में लेकर चाट कर साफ़ kia...pr फिर मुझे किश करके मुझे भी उसका सस्वाद चखाया.... और फिर मेरी बाहों में लेट गयी....

रिम- कर्मा तुझसे एक बात पूछूं?

में- हाँ दीदी पूछो न...

रिम- तू चची को कबसे छोड़ रहा है?

में- क्याआआ....

इसके आगे क्या हुआ सब अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं और अपने सुझाव दें.....
 
रिम- कर्मा तुझसे एक बात पूछूं?

में- हाँ दीदी पूछो न...

रिम- तू चची को कबसे छोड़ रहा है?

में- क्याआआ....

अपडेट 46

में- ये क्या बोल रही हो दीदी तुम?

रिम- देख कर्मा मैं जानती हूँ तेरे और चची के बारे में मैंने खुद देखा hai...to अगर तू मुझे सचमें अपना मंटा है तो मुझे सब बता सच सच...

में- दीदी आप क्या जानना चाहती हो आप बस अपने पर ध्यान दो न...

Rim-nahi कर्मा ये मेरा भी परिवार है और मुझे सब जानना है अब तू बता मुझे बताना चाहता है या नहीं...

में- दीदी मेरी बात मनो आपको झटका लगेगा सच सुनकर और मैं नहीं जनता आप कैसे पचा पाओगी सब कुछ...

रिम- नही कर्मा मुझे अभी सब जानना है तुझे मेरी कसम बता सब...

Me-are दीदी ये कसम क्यों... खैर आपको सुन्ना है तो सुनो फिर...

और फिर मैंने सब कुछ जो भी परिवार में अब तक हुआ था सब कुछ उन्हें बता दिया.. उनके चेहरे पर आचार्य के भाव the...wo आँखें बड़ी करके सुनती जा रही thi...or फिर मैंने उन्हें साडी बात बता के ख़त्म कर दी...

वो नीचे की तरफ नज़र किये किसी सोच में डूब सी गयी...

में- दीदी तुम्हे सच जानना था मैंने सब बता दिया अब तुम इसे किस तरह लेती हो वो तुम्हारे ऊपर है... पर कुछ भी सोचने या राइ बनाने से पहले इसके बारे में. अचे से सोचलेना... सबके नज़रिये से sochna...phir किसी नतीजे पर पहुंचना... अभी आप आराम से अकेले में सोचो और सो जाओ मैं जा रहा हूँ...

दीदी ने बस एक बार गर्दन हिला कर मेरा जवाब दिए और फिर मैंने उठकर अपने कपडे पहने और बहार आ gaya...raat काफी हो चुकी थी... मैंने सोचा अब मुझे भी चलकर सोना चाहिए पर मुझे कहीं न कहीं मन में ये लग रहा था की मैं कुछ भूल रहा हूँ...

मैं फिर नीचे विनीत और अपने कमरे में आ गया तो देखा विनीत वहां पर नहीं था... मुझे फिर याद आया की वो पूर्वी दीदी के साथ सोने वाला है तो मैं अपने बिस्तर पर जाकर लेट gaya...or आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगा....

थोड़ी देर बाद गेट खुला मुझे लगा विनीत hoga...maine आँखें बंद किये हुए hi जवाब दिया...

में- आ गया tu...aaj तो तू वहीं सोने वाला था...

पर उधर से कोई जवाब नहीं आयी बस गेट बंद होने की आवाज़ आई तो मैंने आँखें खोल कर देखा तो चौंक गया सामने चारु ममी कड़ी थी और नाराज़गी से मेरी तरफ देख रही थी... मैं तो ममी के बारे में भूल hi गया था की माइबे उन्हें खुद मिलने को बोलै था...

चारु म- कहाँ था तबसे तू तीन बार देख कर जा चुकी hun...kitni मुश्किल से गया को सुलाके छिपकर आए और देखा तो यहाँ तू है hi नहीं...

Me-sorry ममी वो मैं किसी काम में फंस गया था...

चारु म- ाचा बीटा इस वक़्त कैसा काम

Me-are ममी शांत हो जाओ अब तो मिल गए न...

ये कहके मैं मुस्कुराने लगा,

चारु म- ये विनीत कहाँ गया है सोने..

में- वो शायद ऊपर सोने की बात कर रहा था ममी...

चारु म- ये तो और भी बढ़िया है फिर...

और ये ककहकार ममी ने अपनी सारी का पल्लू नीचे गिरा दिया..





उनका पल्लू नीचे गिरते hi मेरी आँखें बड़ी हो गयी उनका सपाट पेट गहरी नाभि ब्लाउज में क़ैद बड़ी बड़ी छुछियां मेरे सामने आ गयी... और मेरी नज़र बस वहीं टिक गयी... मेरा लुंड जो अभी थोड़ी देर पहले रिमझिम दीदी की गांड में झड़ने के बाद शांत था वो ये नज़ारा देखकर अपना फन उठाने लगा...

मैंने जल्दी से अपनी t-shirt उतर di...or ममी का हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिए और वो मेरे ऊपर गिर gayi...girne के साथ hi वो मेरे शरीर से बिलकुल चिपक गयी... और और मेरे होंठों ने उनके होंठों को ढूंढ लिए और हम दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे... मैंने पलट कर उन्हें लिटा दिया और खुद उनके ऊपर आ गया..





और फिर मेरे और ममी के होंठ कुश्ती करने lage...ek दुसरे के होंठों को खा जाने की कोशिश कर रहे थे....

ममी के हाथ मेरे शरीर पर घूम रहे थे वहीं मेरे उनकी कमर पर ...इस वक़्त यहाँ कोई भावनाये नहीं thi...or न hi कुछ सही galat...ya अचे बुरे का ज्ञान tha....is वक़्त दो शरीर थे जो एक दुसरे की मदद से अपने जिस्म की भूख शांत कर रहे the...dono तरफ सिर्फ हवस thi...jo रिश्ते नाते सब भूल चुकी thi...ek ोारत जो अपने बेटे जैसे भांजे के साथ अपनी हवस को मिटा रही thi...jisse वो सिर्फ आज hi मिली thi...hawas और जिस्म की प्यास इंसान को कहीं भी पंहुचा सकती है.... दो जोड़ी होंठ थे जो एक दुसरे का रास निचोड़ने में लगे हुए थे.....

फिर जब होंठो का दंगल ख़त्म हुआ तो मैंने उनके होंठो को छोड़ा और फिर तुरंत अपना मुँह उनकी नंगी कमर पर लगा दिया और चाटने लगा....





मेरी जीभ उनके पेट के हर नंगे हिस्से पर घूमने लगी ममी के मुँह से सिसकारियां निकलने लगी मैंने उनकी नाभि में जीभ घुसेड़ दी और चाटने लगा mami...apani आवाज़ को दबाते हुए अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह कर रही थी...

मैं ममी को चाटने में लगा हुआ था हाथो को ऊपर लेजाकर ब्लाउज के ऊपर से hi उनकी छूछीयो को मसलने laga...ahhhhhhh क्या नरम और भरे हुए वो मांस के पापीती मेरे हाथो में जैसे फिहल रहे थे मैं उन्हें पूरी तरह से अपने हाथो में समां लेना चाहता था तो मैंने उनकी ब्लाउज के हुक खो खोलना चालू कर दिया और ब्लाउज के खुलते hi उनकी काली ब्रा बड़ी बड़ी छूछीयो को अपने अंदर संभाले हुए मेरे सामने आ गयी मैंने ब्रा के कप्स को नीचे खिसका कर उनकी छूछीयो को बहार निकल लिए.... क्या बड़ी बड़ी नरम छुछियां थी... नरम और कोमलता से भरी हुई... कामुकता के दूध से भरी हुई देखते hi मुँह में पानी आ गया और मैंने देर न करते हुए अपने मुँह को उनकी बड़ी बड़ी कोमल छूछीयो पर रख दिया और चाटने लगा चूसने laga....unke रास को पीने लगा



अपने मुँह को उन्दोनो पपीता के बीच रखकर उनकी कोमलता का एहसास चेहरे पर महसूस कर रहा था साथ hi हाथो से उन्हें आते की तरह गूंथ भी रहा था...

मुझे बहुत मज़ा आ रहा tha...or इतनी कामुक बड़ी और कोमल छूछीयो को भोगने में किसको मज़ा नहीं आएगा... मैं सब कुछ भूलकर बस छूछीयो की सेवा में समर्पित था वहीं चारु ममी भी मेरे सर पर हाथ फिरकर और साथ में अह्ह्ह्हह कर्मा चूसो अह्ह्ह्ह चूसो ममी की छूछीयों को पि जाओ इनका सारा रास... अह्ह्ह्ह बीटा...

मैं छुच्छी को मुँह में भरकर उनके निप्पल्स पर जीभ से कुरेद रहा tha....phir एक हाथ नीचे लेजाकर मैं उनके पेट और नाभि को सहलाते हुए और नीचे ले गया और फिर साड़ी का छोर पकड़ कर उसे खींचने लगा धीरे धीरे साड़ी खुलने लगी पर उनके बैठो होने की वजह से पूरी तरह नहीं खुल रही थी... तो उन्होंने ये देखते हुए अपने भरी भरकम चूतड़ों को ऊपर उठाया और साड़ी निकलने में मेरी मदद की और अगले hi पल साड़ी उनके बदन से दूर नीचे पड़ी थी अब ममी एक पेटीकोट और खुले हुए ब्लाउज में मेरे सामने थी...

मैं ममी की छूछीयों को छोड़कर उनके पैरो के बीच बैठ gaya...or धीरे धीरे पेटीकोट को ऊपर उठाते हुए उनके पैरो को चूमने लगा जैसे जैसे मैं ऊपर बढ़ता जा रहा था ममी की सिसकियाँ तेज़ होती जा रही थी... पेटीकोट अब उनकी जांघो तक पहुंच चूका था मैं उनकी मोती मांसल जांघो को चूम रहा tha...sath hi मेरा हाथ दूसरी जांघ को सहला रहा था... ममी की आँखें बंद हो चुकी थी... और वो अपना सर इधर उधर पटक रही थी... मैं और ऊपर बड़ा अब मेरे सामने उनकी पंतय आ gayi...meti उंगलियां भी पंतय के आस पास घूमने लगी और ममी तो जैसे बेकाबू होती जा रही थी.... मैंने पेटीकोट को पूरा कमर तक चढ़ा दिया और फिर पंतय के ऊपर से hi छूट को सहलाने लगा....

चारु म- anmmmmmmmmmmmmmmmmmmmm aaaahhhhhhhhhhjhhh बास्स्स्सस्स...

मैं कोई जवाब न देते हुए अपने काम में लगा हुआ था... उनकी पंतय आगे से पूरी गीली हो चुकी थी मैंने पंतय के ऊपर hi अपने होंठों को टिका दिया और ममी की कमर अपने आप ऊपर उठाने लगी... मैं पंतय के ऊपर hi अपनी जीभ फुरा रहा था जिससे ममी और ज़्यादा तड़प रही थी वो मेरी जीभ अपनी नंगी छूट पर महसूस करना चाहती thi...or जब उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ तोह उन्होंने खुद अपनी पंतय को मेरा नूह हटाकर नीचे खिसका दिया और उनकी रसीली geeli..nangi छूट मेरे सामने आ gayi...do चिपके हुए होंठ गोरी लाल छूट उसमे से बहता हुआ रास...

ममी की छूट को देखकर लग रहा था की उनकी चुदाई ज़्यादा नहीं हुई hai...or अपना एक भी बच्चा न होने से पूरी कसावट बाकी hai...unki छूट की खूबसूरती देखकर मेरे मुँह से लार टपकने lagi...maine अपनी जीभ को उनकी छूट पर फिरा दिए और उनकी छूट के बहते हुए रास को चाट लिए... ममी सिहर uthi...maine भी देर न करते हुए फिर अपने होंठों को उनके छूट पर टिका दिया और चाटने laga...mami के हाथ मेरे सर को अपनी छूट पर दबाने लगे.. मैं और टाइट से अपनी जीभ को उनकी छूट में घुसेड़ने लगा फिर मैं उनके चुत के दाने को जीभ से चाटने लगा और छूट में दो उंगलियों को घुसेड़ दिया....

च ममी- आह्ह्ह्ह कर्मा आह्ह्ह्ह हनणननणम maaaaaaaaaaa uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh...

मैं उनकी छूट के दान को जीभ से छेड़ रहा था...





वो मज़े में डूबी हुई थी... मेरे सर को पकड़ कर अंदर घुसेड़ने की कोशिश कर रही thi...lag रहा था वो मेरा पूरा सर अपनी छूट के अंदर घुसेड़लेना चाहती ho...maine फिर उंगलिओ को बहार निकला और छूट के होंठों को अपने होंठो में भर लिए और एक एक होंठ को चूसने laga...mami की पूरी बॉडी झटके खाने lagi...phir मैंने अपनी एक उंगली को ममी की गांड के छहद पर लगाया और कुरेदने laga...mami ने अपने मुँह पर हाथ रखकर अपनी आवाज़ को बहार आने से roka...choot को लगातार चाटते हुए मैं ममी के गांड के छेड़ के साथ भी खेल रहा tha...phir मैंने छूट से मुँह हटाया और नीचे लेजाकर उनकी गांड के छेड़ पर रख दिया और अपनी जीभ से उसपर दबाब बनाने लगा ममी तो जैसे पागल सी hi हो गयी थी... जीभ से उसकी गांड के छेड़ को चाटते हुए मैं एक हाथ से उनकी छूट के दानो को सहलाने लगा ....ममी तो लगता है अब किसी और hi दुनिया में थी आँखें ऊपर को चढ़ी हुई थी पूरा शरीर अकड़ रहा था और मुँह से से आह्ह्ह्हह्ह hmmmmmmmmmm और गुर्राने की आवाज़ें आ रही थी...

फिर कुछ पल बाद अचानक से सब रुक गया... उनकी आवाज़ बंद हो गयी शरीर अकड़ कर रुक गया कमर और गांड और ऊपर उठ गयी.. मेरी जीभ अब भी गांड के छेड़ पर thi....ek पल के लिए उनका शरीर बिलकुल स्थिर हो गया जैसे उनमे जान hi न हो और फिर अचानक से उनकी छूट से पानी की पिचकारियां बहने lagi...or मेरे चेहरे और माथे को भीगा दिया





उनकी छूट से पानी ऐसे बाह रहा था जैसे किसी ने टंकी खुली छोड़ दी हो....

मैंने पहली बार किसी औरत को ऐसे झड़ते हुए देखा tha...unki छूट से पानी रुकने का नाम नहीं ले रहा था और फिर जब ये सिलसिला रुका तो पूरा बिस्तर गीला tha...or ममी बापिस नीचे निढाल होकर गिर गयी... ऐसे जैसे उनके शरीर में अब जान hi नहीं बची हो... वो एक कटे पेड़ की तरह बिस्तर पर गिर गयी मैंने भी एक दो बार उनकी गांड के छेड़ को छठा और फिर अपना मुँह हटा लिए और अपना लोअर और कछहा उतर कर पूरा नंगा हो गया... वहीं ममी को अब कुछ होश आने लगा तो उन्होंने अपनी आँखें खोली और धीरे से उठी और मेरी आँखों में देखते हुए मेरा सर पकड़ा और मेरे होंठों को चूमने lagi...mere पूरे चेहरे पर अपनी जीभ से चाट चाट कर अपनी छूट का पानी साफ़ कर रही थी और उसका स्वाद ले रही thi......mami ने मेरे पूरे मुँह को छठा फिर मेरे बदन को चूमने लगी जगह....

सीने पर चाटने लगी phir...pet पर जीभ से छठा तो मुझे एक अलग एहसास हुआ और फिर उन्होंने अपनी जीभ मेरी नाभि में डालके चूसा... और फिर थोड़ा और नीचे जाकर मेरे लुंड को पकड़ लिए जो की बिलकुल एक लोहे की रोड की तरह सख्त हो चूका था... उन्होंने उसे अपने हाथ में थमा तो मेरी आह्हः निकल गयी और फिर अगले hi पल उन्होंने लुंड को टोपे को मुँह में भर लिए और लुंड के टोपे पर अपनी जीभ फिरने लगी.... मैं आँखें बंद करके उस एहसास का नाज़ा लेने लगा...

चारु ममी ने फिर लुंड को थोड़ा और अपने मुँह में भर लिए और चूसने lagi....unke गरम मुँह में. लुंड को बड़ा सुख मिल रहा था...

Me-Aaahh ममी ऐसे hi ाहजहह पुरा अंदर तक लेकर चूसो अह्ह्ह ममी...

ममी पूरी शिद्दत से मेरा लुंड चूसे जा रही थी... मेरे हाथ उनके सर के पीछे पहुंच गए और मैं उनके सर को पकड़ कर अपनी कमर आगे पीछे करने laga...kuch देर आराम से करने के बाद मैंने अपना दबाब बढ़ा दिया और लुंड को उनके मुँह में अंदर बहार करने लगा उनके मुँह को छूट की तरह छोड़ने लगा... ममी के मुँह से बस हूई घुईऊ की आवाज़ निकल रही thi...or फिर मैंने सर को और टाइट पकड़ कर अपना पुरा लुंड ममी के मुँह में घुसेड़ diya...or अंदर बहार करने लगा..





मैं उनके मुँह को छोड़ रहा tha...mami की आँखों से आंसू बहते हुए बहार आ रहे थे.... मुझे ममी को ऐसे देखना बड़ा ाचा लग रहा था... उनके गले तक पहुँचता मेरा lund...unke होंठ मेरे लुंड के इर्द गिर्द कैसे हुए... वाह क्या नज़ारा था....

ममी भी बिना किसी विरोध के मुझे उनका मुँह छोड़ने दे रही thi....kitna अलग hi एहसास था कल तक जिस ोारत को मैं जनता भी नहीं था मिला तक नहीं tha...aaj मेरा लुंड पूरा उसके मुँह में घुसा हुआ hai...kya किस्मत है कर्मा तेरी...

मैं ये सोचते हुए ममी के मुँह को छोड़ता रहा फिर कुछ देर बाद लुंड निकला तो ममी खांसने लगी और उनकी आँखों से आंसू और बहने lage....thodi देर बाद ममी नार्मल हुई तो मैंने उनसे मेरे ाँद चूसने को बोलै वो ख़ुशी ख़ुशी चूसने lagi...unhone एक ाँद को मुँह में भर लिए और चूसने लगी और दुसरे को उंगलिओ से सहलाने लगी फिर यही दुसरे ाँद के साथ किआ कुछ देर ऐसे hi चुसवाने के बाद मैंने ममी को पीछे लिटा दिया और... उनकी कमर पर आकर बैठ गया... और अपने लुंड को उनकी छूछीयो के बीच फंसा दिया ...उन नंगी छूछीयो को एहसास लुंड पर पाकर मेरे अंदर एक अलग hi एनर्जी आने लगी मैं उनके छूछीयो को छोड़ने लगा...





ममी अपना सर उठाकर अपनी जीभ बहार निकल कर मेरा टोपा जब उनकी छूछीयो से बहार आता तो उसे चाटने lagi....unki छूछीयो में एक अलग hi एहसास tha...lund पर ऐसा महसूस हो रहा था जैसे किसी मखमली चीज़ के बीच में फंसा हुआ है...

ममी ने अपने दोनों हाथो से छूछीयो को मेरे लुंड के लिए थम रखा था और मैं अपनी कमर हिला हिला कर अपने केले को उनके पपीता के बीच रगड़ रहा था... उसके ऊपर से उनकी जीभ मेरे टोपे का बहार इंतज़ार करती और जैसे hi मेरा लुंड घाटी से बहार निकलता उस पर वो अपनी स्नेहभरी थपकी दे देती...

कुछ देर तक मैं ऐसे hi उनकी छूछीयो को छोड़ता रहा फिर लुंड निकल कर एक दो बार उनके मुँह में दिए और फिर नीचे की तरफ उनकी टैंगो के बीच आकर बैठ गया...

और लुंड को पकड़ कर उनकी छूट पर ऊपर नीचे घिसने लगा...

चारु म- आअह्ह्ह्हह क्या कर रहा है बीटा अब और मत तड़पा daaaaaalllllllllllll दे न....

में- दाल रहा हूँ पहले ठीक से बताओ क्या डालूं और कहाँ दालु...

चारु म- बड़ा कमीना है तू bhi...bina मुझसे बुलवाये नहीं मानेगा...

में- बिक्कुल नहीं...

चारु म- अह्हह्ह्ह्ह मेरे राजा डालदे अपना ये मुसल जैसा लुंड मेरी ओखली में और कूट कूट के चटनी banade...aaahhhhhh बीटा अब मत तदपबमेरी छूट को...

मुझसे भी अब रुकना बहुत मुश्किल हो गया था तो मैंने लुंड को छूट के मुँह के ऊपर रोका और एक झटका मार कर अंदर कर दिया...

लुंड अंदर जाते hi ममी की एक चीख निकल गयी...

चारु म- अह्ह्ह्हह maaaaaaaaaaa.. बहुत मस्त ललललललंनंद है तेरा....

Me-mammmmmiiiiiii तुम्हारी चुत बहुत टाइट है.....

और ये ककहकार मैं धीरे धीरे कमर हिलने लगा और लुंड को थोड़ा और अंदर किआ और फिर एक दम लगा कर धक्का मारा तो प्पोरा लुंड उनकी छूट में समां गया ममी एक बार और चीखने को हुई तो मैंने हाथ से उनका एक मुँह बंद कर दिया फिर हाथ हटा लिया....

चारु म - आह्ह्ह्हह पूरा एक बार मेइइज्जनमण हूऊईसीएएएडडडडड दिया aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh मीटररररीईईईई छहोऊत फैट गयी..

और फिर मैंने एक हाथ उनके छुच्छी पर रखा और ममी को छोड़ने लगा.....





Me-Aaaahhhhhhhhh ममी क्या टाइट और गरम छूट है तुम्हारी अहहहहजहहह ऐसा लग रहा है जैसे मेरा लुंड किसी भट्टी में हो...

चारु म- आअह्हह्ह्ह्ह चुद ऐसे hi अह्हह्ह्ह्ह फाड़ दे ममी की छूट बीटा अह्ह्ह्हह तेरा मोटा लम्बा लुंड बहुत मज़े दे रहा है...

मैं ममी की एक छुच्छी को मसलते हुए ममी को छोड़ रहा tha....har धक्के के साथ उनकी दूसरी छुच्छी ऊपर नीचे हो रही थी...

में- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ममी मां तुम्हे छोड़ते नहीं क्या ऐसी छूट तो बिना चूड़ी हुई कुंवारी लड़कीओ की होती है....

चारु म- वो मादरचोद छहोडा तो बात hi kyaaaaaaaaaaaahhhh हानंन्न ऐसे hi.....to बायत hi क्या thi....saleeeee ने मेरी बहन की मौत के बाद मुझसे शादी तो कर्ली पर कभी मेरे जिस्म की भूख नहीं मिटा paya....or मिटाये भी कैसे भड़वे का लुंड hi मूंगफली जैसा है और सेल को बस पैसा कमाने से मतलब है... बीवी की छूट में चाहे आग लगी रहे....

उनकी बात सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया और मैं तेज़ धक्को से उन्हें छोड़ने लगा...

Me-mammmi पिछली बार कब चूड़ी थी...

चारु म- मुझे तो याद भी नहीं कब उसकी मूंगफली घुसी थी मेरी छूट में और याद भी कैसे होगा 2-3 मिनट्स में झाड़ के लेट जाता hai...ahhhh तभी तो तेरा लुंड देखके खुद को रोक नहीं पाई बहुत संभल कर रखा था खुद को पूरी पतिव्रता औरत बन कर रही अब तक पर अब nahi...ahhhhj लुंड लेने का सुख भी मुझे भुगतना है....

ममी की बातों से मैं भी और गरम होने लगा था...

में- तो ले साली रांड आज तेरी छूट की प्यास मिटा दूंगा बहुत खुजली है न तेरी छूट mein...sali रंडी अह्ह्ह्ह

चारु म- आअह्ह्ह्ह मादरचोद बना लो मुझे रंडी apani...tere जैसे मस्त लुंड की घुलम बनने को तैयार हूँ मैं अह्ह्ह्हह्हह तेरा लुंड मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा है आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे पता नहीं था कोई इतनी अंदर तक भी जा सकता है क्या......

Me-mera जा सकता है तेरे पति की मूंगफली नहीं जा सकती...

और ये कहकर मैंने लुंड को छूट से निकल लिए और पलट काट लेट gaya...mami अचानक से हैरान होकर मेरी तरफ देखने lagi...unka चेहरा ऐसा था जैसे मैंने उनसे उनका सब कुछ छीन लिए हो...

चारु म- क्या हुआ कर्मा निकाल क्यों लियाए मत कर ैसाअअअअ अह्ह्हह्ज...

Me-sali randiiiiiiiiiiiiiiiiiii तेरे बाप का नौकर नहीं hun...apani छूट लेकर मेरे लुंड पर खुद उछाल और अपनी छूट छुड़वा...

ममी तुरंत उठ कर मेरी तरफ पीठ की और अपने दोनों पेअर मेरी कमर के दोनों तरफ किये और लुंड को छूट के छेड़ पर सेट कर के बैठ गयी और बैठने के साथ hi एक बाप फिरसे मेरा लुंड उनकी छूट में सरसराता हुआ घुस गया... और ममी अपनर बड़े चूतड़ों को उछालते हुए छोड़ने लगी....

मैं भी नीचे से अपनी कमर को उठाकर लुंड उसकी छूट में पेलने laga...kuch देर ऐसे hi उछलने के बाद वो थक कर पीछे हो गयी और पीछे हाथ टिकलिये और ऐसे hi रुक गयी मैं नीचे से उन्हें छोड़ रहा था...





चारु म- पूरी ज़िन्दगी में मेरे पति ने इतना आनंद मुझे नहीं दिया जो तू दे रहा है मुझे Karma...ahhhhhhhh बीटा छहःछहूऊऊडड़ड़ अपणीइइइइइइ ममी को...

में- मैंने बोलै न आज तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा आह्ह्ह्ह...

Charu-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh बीटा निकल दे मेरी छूट की garmi...bana ले रैंड मुझे आअह्ह्ह्ह

में- चल फिर जल्दी से कुटिया बन ja....ab तुझे कुटिया बना कर छोडूंगा...

ममी लुंड से उठकर मेरे सामने कुटिया के पोज़ में आ gayi...unke बड़े बड़े चूतड़ मेरे सामने थे मैं झटसे लुंड को दोबारा छूट में घुसेड़ diya...or हाथों से उनके चूतड़ों को मसलते हुए छोड़े लगा... उनके गद्देदार चूतड़ हर धक्के पर मेरी जांघों से टकराते और लहार uthate...poore कमरे में थप्प्प्प ठप्प्प की आवाज़ आ रही थी जिसकी गति बढाती hi जा रही थी...





उनके बद्र बड़े बड़े छूछे हवा में आगे पीछे झूल रहे थे.....

चारु म- आअह्ह्ह्हह मायआ ुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह हांण बछ्ह ऐसे होई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अभ बहुत ाचा.... ऐसे hi....

में- आह्ह्ह्हह बोल साली कौन है tu....bata मुझे...

चारु म- मैं तेरी रैंड hun...aise hi चूड अपनी रंडी को... आह्ह्ह्ह... मेरी छूट तेरे नाम है जब चाहे तब छोड़ अब...

में- अपने पति के सामने chudwayegi.ujhse...

चारु- हांण छुडवाउंगी उस भड़वे को भी तो पता चले की असली लुंड और चुदाई कैसी होती है...

में- साली रंडी है tu...jab चाहूंगा जहाँ चाहूंगा छुड़ेगी...

Charu-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh हानंन्न हमेशा जब और जहाँ तू चाहेगा...

में- जिससे भी मैं चाहूंगा उससे chudegi....ahhhhh

चारु- पूरा hi रंडी बना कर छोड़ेगा तू मुझे kya...doosro से bhiiiiiiiiiiiaa अह्ह्ह्हह्हह चुदवयेगा.....

मैंने अपने धक्क्को की स्पीड बढ़ा दी और बोलै- क्यों तुझे परेशानी है कोई.... रंडी है तू तुझे जहाँ चाहे वहां छुडवां मेरी मर्ज़ी ...

Charu-aaaaaaaaaaaaaj हननननन रंडी हूँ main...chudwa दे जिससे चाहे पर तू हमेशः ऐसे hi छोड़ना मुझे....

में- तुझे तो हमेशा छोडूंगा हो साथ hi तेरी बेटी भी मेरे नीचे hogi...or मेरा लुंड उसकी छूट में....

चारु ममी- अह्ह्ह नहीं बीटा वुहःहःहःहः अभी बछहहीीी haiiiiiiiiii.....use रहने दे....

मैंने ये सुनकर अपना लुंड अचानक से उनकी छूट से निकालिए...

ममी की अचानक लुंड निकलने से हालत ख़राब हो गयी और वो तड़पने lagi...anhh कर्म्मा बापिस डाल जल्दी अह्ह्ह प्लीज बीटा ...

में- बोल गया को छुडवायेगी या नहीं...

Charu-aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh हानंन्न छुडवाउंगी beta....maaa तो छोड़ ली है बेटी को भी छोड़ लेना पर अभी लुंड बापिस दाल de...main मर जाउंगी नहीं तो ..

Me-aaj के बाद मुझे किसी चीज़ के लिए मन नहीं होनी चाहिए..

चतु- नहीं होगी बीटा अब लुंड बापिस दाल दे न...

मैंने फिर से लुंड बापिस दाल दिया और फिर उसी तेज़ स्पीड में छोड़ने लगा...

ममी की तो जैसे जान में जान आ gayi...aaahhhhhhh पूंऊऊरा दाल दे और मैं ममी को दजकधक छोडंर laga.....jmain भी काफी देर से झाड़ा नहीं था तो मेरी गति भी अपने आप बढाती चली जा रही थी पर उनकी सिसकियाँ भी बढाती जा रही thi...or जब मेरे धक्के जा. तूफानी हो गए और फिर से ममी की कमर झटके खाने लगी मैंने फिर भी धक्क्के लगाना जारी रखा क्यूंकि अब रुकना मेरे लिए भी संभव नहीं था... तभी मुझे ममी की छूट टाइट होती हुई महसूस हुई और फिर उनकी छूट से रास की पिचकारियां मेरे लुंड के साथ साथ बहार आने lagi...har झटके के साथ छूट से पानी की धार बहार निकलती..





ये देखकर मैं बहुत उत्तेजित हो गया और फिर दो तीन झाकतो के बाद मैंने अपना लुंड ममी की छूट में जड़ तक घुसेड़ दिया और अपने रास की पिचकारियां छोड़ने लगा और उनकी छूट को अपने रास से भर diya...mera रास उनकी छूट को भरे जा रहा था....

ममी तो बेसुध लड़ी हुई थी उन्हें कुछ होश नहीं थी... उनके ओर्गास्म इतना ताकतवर था की अब उनके शरीर में बिलकुल जान hi नहीं बची थी...

मैंने भी अंत तक जब तक मेरे लुंड ने झड़ना बंद नहीं किआ उनकी छूट में लुंड घुसेड़ कर रखा और फिर बहार निकल लिए और उनके बगल में लेट gaya...mami अभी भी हिली नहीं thi...wao तस के मास वैसी hi पड़ी हुई थी फिर मैं उन्हें उठाया तो वो जैसे होश में aaai....or उठाते hi मुझसे चिपक gayi...or मुझे पूरे शरीर पर चूमने lagi...or फिर अपने होंठों को हटाकर बोली...

चारु ममी- कर्मा मुझे बच्चा dede...mujhe तेरा बच्चा अपनी कोख में चाहिए...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में आप लोग प्लीज कमैंट्स करते रहिये और देर से अपडेट देने के लिए माफ़ी चाहूंगा दोस्तों थोड़ा बिजी tha....par फ्री होते hi अपडेट देता रहूँगा... शुक्रिया
 
ममी अभी भी हिली नहीं thi...wao तस के मास वैसी hi पड़ी हुई थी फिर मैं उन्हें उठाया तो वो जैसे होश में aaai....or उठाते hi मुझसे चिपक gayi...or मुझे पूरे शरीर पर चूमने lagi...or फिर अपने होंठों को हटाकर बोली...

चारु ममी- कर्मा मुझे बच्चा dede...mujhe तेरा बच्चा अपनी कोख में chahiye...ab आगे

अपडेट 47

में- क्या ममी ?

चारु ममी- हाँ कर्मा मुझे तेरे बच्चे की माँ बनना है... मुझे भी अपनी कोख से बच्चा पैदा करना है और जैसा सुख जीवन में पहली बार मुझे तूने दिया है... मैं चाहती हूँ की मुझे माँ बनने का सुख भी तू hi दे...

में- मुझे कोई परेशानी नहीं ममी पर बाकि सब कैसे होगा किसी को पता चल गया तो...

चारु ममी- वो सब तू मुझपर छोड़ दे मैं सब संभल लुंगी.... भगवान् जनता है की गया को मैंने अपनी बेटी से बढ़कर पला है पर एक बार मैं भी एक औरत का जो सबसे बड़ा सुख का अनुभव होता है वो महसूस करना चाहती hun..tere मां के अब बस की नहीं की वो मेरी गॉड भर sakein...bata मैं क्या करूँ?

में- मेरी प्यारी ममी आप जो बोलोगी वैसा hi होगा... अआप मेरा बछ्ह पैदा करोगी...

और ये कहकर मैंने उन्हें गले लगा लिए... वो मेरी बाहों में समां गयी... मैंने उनके होंठो को ऊपर उठाया और अपने होंठों से मिला दिया और बड़े प्यार से उनको चूसने लगा... फिर जब होंठ अलग हुए तो ममी बोली

चारु ममी- मैंने ये बिस्तर तो पूरा गिला कर दिया सुबह कोई देखेगा तो क्या जवाब देगा...

में- कोई कुछ नहीं बोलेगा ममी...

चारु ममी- नहीं एक काम करते हैं इसको भीगा कर रख देती हूँ नहीं तो इसमें से बदबू आने lagegi...or सबको पता चल जायेगा...

Me-zaroori है क्या ममी अभी...

चारु ममी- हाँ बीटा तू बस 5 मीन्स रुक मैं आती हूँ...

वो सारी उठाने लगी तो मैंने बोलै ऐसे hi चली जाओ न सब सो रहे होंगे...

चारु ममी- नहीं बीटा ऐसे kaise...blouse भी नहीं पहना है...

Me-nahi ममी जाओगी तो ऐसे hi जाओगी नहीं तो नहीं...

चारु ममी-: बीटा मत कर किसी ने देखलिए तो बहुत बदनामी हो जाएगी meri...samjha कर...

में- तुम मुझे मन कर रही हो ममी...

चारु Mami-aaj तू मुझे मरवा कर hi दम lega...or ये ककहकार वो गीला बिस्तर उठा लेती hain...or गेट खोल कर बहार निकलने लगती हैं ममी ने सिर्फ पेटीकोट और ब्रा पहनी thi...mera लुंड इस ख्याल से hi की ममी घर में इस हालत में घूमेंगी टाइट होने लगता है...... मुझे भी ऐसा नज़ारा देखना था तो मैं नंगा hi उनके पीछे पीछे निकल आता हूँ...

पूरे घर में अँधेरा फैला हुआ था कुछ भी साफ़ नहीं दिख रहा था मुझे बस ममी की रूपरेखा दिख रही thi..mami मुझसे आगे आगे छुपती छुपाती हुई चल रही थी और मैं बेफिक्र होकर उनके पीछे चल रहा tha...mera लुंड पूरी तरह से तन चूका था..... ममी ने पीछे मुद कर देखा और मुझे देखकर चौंकाते हुए बोली तू क्यों आ गया बहार और वो भी बिलकुल नंगा...

Me-aapse दूर रहने का मन hi नहीं कर रहा था.....

और ये ककहकार मैं उनसे पीछे से चिपक गया... और पेट पर हाथ फिरने लगा वहीं दुसरे हाथ से छूछीयो को दबाने लगा...

चारु- ये क्या कर रहा है अभी कर्मा समझा कर कोई देख lega...tu कमरे में जा मैं बस इसे भिगो कर आ रही हूँ...

मैंने उनकी बात को अनसुना करते हुए पीछे से उनकी ब्रा का हुक खोल दिया.. और ब्रा निकल दी...

चारु- ये क्या कर रहा है कर्मा ब्रा क्यों निकल di...karma मुझे दर लग रहा है...

वो इतना बोल hi रही थी की मैंने उनके पेटीकोट का नैरा भी खोल दिया और ममी जब तक उसे pakadpaati...wo उनके पैरो में गुर चूका tha...maine जल्दी से उनको उठाया तो वो बिलकुल उनके पैरो से अलग हो गया अब मैं और ममी दोनों पूरे नंगे घर के बीच में the...koi भी हमें इस हालत में देख सकता tha...mami काफी दरी हुई thi...or घर के बीच में इस तरह मेरे साथ नंगा होना एक तरफ से उनकी उत्तेजना को बढ़ा भी रहा tha...maine हाथ लगाकर देखा तो उनकी छूट गीली थी...

चारु- कर्मा बस तूने पूरा नंगा कर दिया मुझे अब तू जा मैं बस ये गद्दा डालकर आती हूँ...

Me-aise कैसे अकेले जाने दूँ तुम्हे mami...main भी चलता हूँ...

चारु- ठीक है तू मानेगा तो है नहीं चल जल्दी से कर के आते हैं... पर मेरी ब्रा और पेटीकोट का क्या...?

Me-yahin रहने दो आते हुए ले लेंगे...

चारु- जैसा तुझे ठीक लगे पर अब चल तो सही...

में- एक मिनट रुको

और मैंने उन्हें थोड़ा आगे की तरफ झुकाया और. अपने घुटने मोड़ कर लुंड उनकी छूट में. घुसेड़ doya....mami की चीख निकलते निकलते बची...

चारु- shhhhhhhhhhhh hmmmmmmmmmmmm एई क्या कर दिए लुँड्ड़डडडडडड अभी क्यों दाल दिया....

में- ऐसे hi चलना है बाथरूम तक...

और ये ककहकार मैं धक्के देना चालू कर दिया और मेरा पूरा लुंड उनकी छूट के अंदर घुस गया और मैं फिर से उन्हें छोड़ने लगा...

Charu-shhhhhhhhhhhh कर्मा नहीं यहाँ nahiiiiiiiiiiiiiii बीटा अह्ह्ह

में- जाना तो ऐसे hi पड़ेगा.. अह्ह्हम्म्म

और मैं धक्क्के लगते हुए धीरे धीरे ममी को आगे बढ़ने लगा...





हर कदम के साथ मेरे धक्के ममी की छूट में लग रहे थे जिससे हर कदम के साथ उनके मुँह से एक आठ निकल जाती थी... धीरे धीरे मैं ममी को छोड़ते हुए बाथरूम तक ले गया बाथरूम के अंदर घुस कर मैंने वहां की लाइट जला दी लहिर गेट बंद कर दिया ममी ने मुझे एक बार तजोड़ा डुलने को बोलै अब ममी को भी इसमें मज़ा आब्राहा tha.....or फिर उन्होंने झुक कर बाल्टी में चादर डाली तो मैं उनकी कमर पकड़ कर धक्के लगते हुए छोड़ने लगा... मैंने ममी को 5 मिनट्स तक वहीं ऐसे hi झुकाके छोड़ा वो अपनी आवाज़ दवाये हुए बाल्टी को पकड़ कर अपनी छूट में मेरा लुंड ले रही थी... पर ममी ज़्यादा देर तक लुंड के प्रहार नहीं सह पाई और झड़ने लगी.... ममी का शरीर कांपते हुए झड़ने लगा और वो बाथरूम में नीचे गिर गयी... और ज़ोर ज़ोर से हांफने लगी मेरा लुंड उनके गिरने की वजह से बहार निकल गया था जो उनकी छूट के रास से चमक रहा था...

जब उनकी साँसे ठीक हुई तो वो मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराने लगी मैंने अपने लुंड को पकड़ कर उनके चेहरे पर मरने लगा तो उन्होंने झट से अपना मुँह खोल कर मेरा लुंड मुँह में भर लिए और चूसने लगो...

Me-Aaahh ऐसे hi चूस साली randi....kya गजब का चूसती है तू...

ममी मेरी गालियां सुनकर और जोश में चूसने लगी...

Me-theek से पूरा गीला कर दे मेरे लुंड ko...ab मैं तेरी ये टाइट गांड मरूंगा....

गांड का नाम सुनते hi ममी आँखों में मुझे मन करने लगी...

और फिर लुंड मुँह से निकल कर बोली- नहीं कर्मा यहाँ nahi...beta कमरे में चल कर मार lena...yahan मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगी चीखने से...

में- बहन की लोदी जितना बोलै जाये उतना कर और ये बोलकर मैंने उन्हें उठाकर घुमा दिया और फिर से बाल्टी के सहारे झुका diya...or उनकी गांड पर अपना मुँह टिका diya...or गांड के छेड़ को चाटने laga...unhe अपनी गांड चटवाने में मज़ा आने laga...mami ने अपने हाथ बाल्टी से हटाकर दीपर के सहारे टिक गयी और अपने हाथ पीछे लेकर अपने दोनों चूतड़ों को फैला दिया जिससे मुझे उनकी गांड चाटने में और आसानी हो... मैंने अपनी जीभ उनके गांड के छेद पर लगा दी और अंदर डालने laga...mami किसी तरह से अपनी आवाज़ को दबाये हुए थी पर फिर भी उनके मुँह से अह्ह्म्म अहहज ऐसे थोड़ी आवाज़ें आ रही थी... मैंने थोड़ी देर तक जीभ से चाट कर चारु ममी की गांड के छेड़ को गीला कर दिए और फिर खड़ा हो गया और अपना लुंड ममी की छूट और गांड पर ऊपर नीचे घिसने laga...mami की गांड भी ऊपर नीचे होकर मेरे लुंड का मज़ा ले रही thi....phir मैंने लुंड को छूट के मुँह पर लेकर धक्का देकर अंदर धकेल dia...or लुंड एक बार फिर से ममी की छूट में समां गया... ममी ने एक बार फिर से गहरी सांस li...maine धीरे धीरे धक्के लगते हुए ममी से पुछा...

में- ममी पहले कभी गांड मरवाई है...

चतु ममी- हाँ बीटा तेरे मां ने मरी है पर उनके और तेरे लुंड में ज़मीन अस्मा का अंतर है... तो आराम से करना प्लीज...

मैंने फिर दो चार धक्के छूट में और मार्के... लुंड को बहार निकल लिए... ममी ने अपने हाथो से अपने चूतड़ों को फैला रखा था जिससे मुझे गांड का छहद बिलकुल आसानी से और खुला हुआ दिख रहा था... मैंने लुंड पर थोड़ा थूक और लगाया और टोपे को ममी के गांड के छहद पर रखा और एक धक्का लगाया... लुंड फिसल गया मैंने दोबारा से लुंड को पकड़ा और छेड़ पर रखकर फिर से धक्का दिया तो लुंड का टोपा गांड को चीरता हुआ अंदर चला गया...





Me-Aaahh mamiiiiiiiiii

ममी- ahhmmmmmmmmmm karmaaaaaaaaaa

ममी की आँखों से आंसू आ रहे थे वो ऐसे hi झुकी हुई मेरे लुंड द्वारा गांड में दिए हुए दर्द को सहन करने की कोशिश कर रही thi...awaaz नहीं निकल सकती थी... ममी की गांड काफी टाइट thi...kyunki मेरा लुंड बहुत फंसा हुआ अंदर जा राजा था...

दर्द के बावजूद भी ममी ने मुझे रोका नहीं और मैं भी धीरे धीरे ज़ोर लगता रहा और फिर मेरा पूरा लुंड चारु ममी की गांड के अंदर tha...thodi देर ऐसे hi रुकने के बाद ममी ने अपनी गांड थोड़ी पीछे करके मुझे इशारा किया तो मैं समझ गया और धक्के लगाकर ममी की गांड मरने laga....ab ममी भी आराम से मज़े लेते हुए अपनी गांड मरवा रही thi...or मैं एक ले बनाकर उनकी गांड मार रहा था... उनकी गांड के अंदर मेरे लुंड को ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लुंड किसी गरम माखन की पोटली में hain...unke बड़े बड़े बड़े चूतड़ मेरे हर धक्के के साथ लहरा रहे थे...

थोड़ी देर तक ऐसे hi गांड मरने के बाद मैंने चारु ममी को थोड़ा सीधा किआ बिना गांड से लुंड निकले और बाथरूम का गेट खोल दिए साथ hi लाइट भी बंद कर di....or फिर धीरे धीरे ममी की गांड मरते हुए मैं उन्हें धक्का दे कर आगे चलने लगा.... मेरा लुंड गांड में लिए हुए चारु ममी आगे आगे चल रही thi..ghar के बीच में हम दोनों hi नंगे थे... ये सोचने में hi एक अति कामुक दृषिअ लगता है पर ये सच में हो रहा tha...main ममी की मुश्किलों को और बढ़ा रहा था... और चलते चलते भी धक्के लगा रहा था उनकी गांड में... ममी थोड़ा डरते हुए गांड मरवाने का मज़ा लेते हुए आगे आगे चल रही थी...





या यूँ कहें की मैं उन्हें अपने धक्को से चला रहा था.... वो बेचारी अपनी गांड को मेरे लुंड पर टंगे हुए मेरी कठपुतली बानी हुई थी...

मैं और ममी अब आंगन में आ चुके the...wohin मेरे धक्को की रफ़्तार थोड़ी बाद चुकी thi...aise आंगन में ममी की गांड मरने में बहुत मज़ा आ रहा tha..pakade जाने का दर उत्तेजना को और बढ़ा रहा था... ममी भी भले hi दर रही थी.. पर ऐसी चुदाई पाकर वो भी बहुत खुश thi...angan पार करते हुए हमारे साइड में बड़े फूपाजी और बड़ी बुआजी का गेट था तो मैंने ममी को धक्का देकर मोड़ दिया उनके गेट की तरफ और गेट के बहार जाकर हम रुक गए...

ममी मेरी तरफ हैरानी भरी नज़रो से देखने लगी...

चारु- कर्मा यहाँ क्यों ले आया प्लीज अपनर कमरे में ले चल दीदी और जीजाजी जाग जायेंगे तो गड़बड़ हो जाएगी...

मैंने उनकी बात न सुनते हुए उनके दोनों हाथो को गेट की चौखट पर टिका दिया और लुंड गांड से बहार निकल लिए और उनके बड़े चूतड़ों को मसलने और मरने laga...mami कसमसाने लगी..





मेरे हर चूतड़ों पर चांटे के बाद उनके चूतड़ थरथराने लगते... हर थप्पड़ जो को उनकी गांड पर पद रहा था उनकी काम वासना को बढ़ा रहा था....

चारु म- कर्मा प्लीज challlllllllllllllll

ममी अपनी बात पूरी कह पति उससे पहले hi मैंने अपना लुंड गांड में घुसेड़ दिया और ममी को बड़े फूपाजी और बुआ के गेट पर झुकाके उनकी गांड मरने लगा





ममी बिलकुल चुप होकर मुझे उनकी गांड मरने दे रही थी... एक दर भी था उनके मन में की कहीं कोई बहार आ गया तो और यही दर उनकी उत्तेजना को और बढ़ा रहा था... मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.. इस तरह से ममी की गांड मरने में...

चारु ममी इतनी उत्तेजित हो गयी की अगले कुछ hi पालो में झड़ने लगी वो चीखे न इसलिए मुझे उनका मुँह अपने हाथो से दबाना pada...par मैं लगातार बिना रुके उनकी गांड में लुंड पेलता रहा... फिर कुछ देर बाद ममी थोड़ी नार्मल हुई तो मैंने ममी को पकड़ा और मोड़ कर अपने कमरे की तरफ ले जाने लगा... ममी भी धीरे धीरे कदम बढाती हुई चलने लगी हर कदम के साथ लुंड गांड के अंदर बहार हो रहा था... अपने कमरे के अंदर पहुंच कर मैंने गेट बंद किआ और ममी को पकड़ कर वहीं तेज़ धक्क्को से उनकी गांड मरने लगा...





ममी के मुँह से अब सिसकारियां निकल रही थी...

ममी- ahhmmmmmmmmmm मर मेरी गांड फायआडडडडडडडड डीईई.... मामिछोड़ड़ड़ड़ sale...kya लुंड है तेरा .... आआह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसा लुंड देखके तो तेरी माँ भी खुद को रोक न पाए. छुड़वाने से....

में- ाःह तेरी गांड क्या मस्त haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii हं हं हैंण्ण्ण्ण्ण्न अगर तू मेरी माँ होती साली रंडी तो तुझे रोज़ छोड़ता घर में नंगी hi रखता.....

में- मुझे तो छोड़ लिए मादरचोद अब अपनी माँ को भी छोड़ लेना.... लुंड दिखा डीओ अपना... खुद छूट में उछाल उछाल कर छुडवायेगी....

माँ का नाम सुनकर मेरे धक्के और तेज़ हो गए...

ऐसे खड़े खड़े छोड़ते हुए थक गए तो मैंने ममी को बीएड पर झुका दिया और कुटिया बनाकर बीएड पर उनकी गांड मरने लगा...





चारु- अह्हह्ह्ह्ह कर्मा ऐसा सुख मुझे कभी nahiiiiiiiiiiiiiii मिला रे.... जितना मज़ा मुझे एक राआत में टून्नने दिया है ज़िन्दगी में कभी nahiiiiiiiiiiiiiii aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhh aaaya...aaajjj मुझे पूरी औरत होने का एहसास हुआ है.... छहःछहूऊऊडड़ड... चुदाई क्या होती है आअज पता चला है....

Me-mmujje भी बबबहूत मज़ा आ रहा है ममी तुम तुंहारी गांड और छूट बहुत मस्त है.... एक डैम चुड़क्कड़ औरत हो तुममममम जइसीइइइइइइइ मुझे पसंद Hain...ahhhhhh गांड कितनी गरम है....

ममी.....

चारु- मार मार के पहाड़ दे beta...tujhe मेरा बेताआए होना चाहिए tha...to रोज़ तुझसे अपनी गांड और छूट मरवाती अपने बेटे को सरे सुख देती...

में- ममी में भी माँ होती hai...or तुम हो मेरी माँ और मैं बीटा हूँ या न सही पर तुम्हारी कोख ने अपना बीज गिरा कर तुम्हे माँ ज़रूर बनाऊंगा...

ममी ऐसे झुके झुके थक गयी थी तो उन्होंने पोजीशन बदलने को बोलै... तो मैंने ममी को पलट कर पीठ के बल लिटा दिया और उनकी टंगे मोड़ कर उनके कंधे पटक कर दी जिससे उनकी छूट और गांड खुल कर ऊपर की तरफ आ गयी और मैंने उनकी गांड के छेड़ पर एक बार थूका.... और फिर लुंड ममी की गांड में दाल दिया





ममी की गांड मेरा पूरा लुंड आसानी से निगल गई और एक बार फिर से गांड मरने का सिलसिला शुरू हो gaya...mami की गांड में लुंड डालने से ये एहसास हो रहा था की ये गांड बानी hi है बड़े लुंड से मरवाने के liye...andar से टाइट और मखमली वहीं बहार से उनके गद्देदार और चूतड़ जो हर थप के साथ अपना नृत्य दिखते the...or उनका भरपूर साथ देती थी ममी की बड़ी छुछियां जो हर थप के साथ ऊपर नीचे हो रही थी...

थोड़ी देर तक ऐसे hi गांड में लुंड पेलने के बाद मैं ममी के पीछे लेट गया और साइड में लटके गांड में लुंड दाल कर धक्क्के लगाने लगा...





मेरी स्पीड हर धक्के के साथ बढाती जा रही थी वहीं अब ममी भी इतनी थक चुकी थी की उनके मुँह से अब सिसकारियां भी नहीं निकल रही thi....main उनकी शरीर को कास कर पकड़े हुए उनकी गांड में लुंड अंदर बहार कर रहा tha...mujhe भी अब अपने लुंड में वीर्य का दबाद बनता हुआ महसूस हो रहा था मैंने धक्को की गति और बढ़ा दी और जब मुझे लगा के अब मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने लुंड को ममी की गांड से निकल कर उनकी छूट में घुसेड़ दिया और दो तीन hi झटके मारे थे की मेरे लुंड ने हार मान ली और मैंने लुंड को जड़ तक अंदर पेल दिया और उनकी छूट में अपनी पिचकारियां छोड़ने लगा... मेरे रास की धार अपने अंदर महसूस करते hi ममी एक बार और झड़ने लगी... ममी और मैं साथ झाड़ रहे थे मैंने उनकी पूरी चुत को अपने रास से भर diya...main ये पक्का करना चाहता था की वो जब यहाँ से जाएं तो उनकी कोख में मेरा बीज हो... इसलिए मैंने अपने रास की एक एक बूँद उनकी छूट में गिरा दी और जब मैंने अपना लुंड चारु ममी की छूट से निकला तो मेरे रास से उनकी छूट भर गयी थी और रास बहार तक बहकर आ रहा था...





ममी के शरीर में तो अब जैसे जान hi नहीं बची थी वहीं मैं भी पूरी तरह से थक गया tha....abhi ममी को अपने कमरे में जाना था पर मैंने सोचा थोड़ी देर में वो चली जाएँगी अभी थक गयी हैं तो ऐसे hi चिपक कर मैं आँखें बंद करके लेट गया... और कब मुझे नींद आ गयी पता hi न चला...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं की आपको कहांणी कैसे लग रही है... शुक्रिया
 
ममी के शरीर में तो अब जैसे जान hi नहीं बची थी वहीं मैं भी पूरी तरह से थक गया tha....abhi ममी को अपने कमरे में जाना था पर मैंने सोचा थोड़ी देर में वो चली जाएँगी अभी थक गयी हैं तो ऐसे hi चिपक कर मैं आँखें बंद करके लेट गया... और कब मुझे नींद आ गयी पता hi न चला...

अपडेट 48
मैं माँ की एक बड़ी और मुलायम छुच्छी को मसलते हुए दूसरी छुच्छी को पूरा मुँह में भरकर चूस रहा था... माँ भी अपने हाथो से मेरे सर को अपनी छूछीयो पर दबा रही थी... मैंने अपने हाथ को माँ के खुले हुए ब्लाउज पर रखा और उसे माँ के मादक जिस्म से अलग कर दिया अब माँ ऊपर से बिलकुल नंगी थी... और नीचे साड़ी लटकी हुई थी मैं माँ के पीछे गया और अपना खड़ा लुंड उनकी गांड पर चिपका दिया और घिसने लगा दोनों बड़े बड़े तरबूज़ों के बीच mein...or साथ hi उनकी दोनों छूछीयो को गूंथने लगा...





माँ की छूछीयो को मसलकर ये एहसास हो रहा था जैसे ये सिर्फ मेरे लिए hi बानी हैं पहले मुझे दूध पिलाने के लिए और अब मेरे हाथो से मसलने के liye....par माँ के चूतड़ों का कहर मेरे लुंड पर सहना बहुत मुश्किल होता जा रहा था लुंड लोहे की तरह टाइट हो गया tha...ye बात माँ ने भी महसूस की और तुरंत घूम कर मेरे सामने बैठ गयी और मेरी आँखों में देखने lagi...or देखते hi देखते मेरे लुंड को पकड़ कर उस पर हाथ फिरने lagi....or फिर अपनी जीभ बहार निकली और लुंड के टोपे को जीभ से सहला दिए..

अह्हह्ह्ह्ह क्या आनंद था ये जब माँ अपने बेटे के लुंड पर ऐसे प्यार जताये तो बेटे की हालत कैसी हो सकती है... वैसी hi हालत मेरी thi...poore शरीर का खून मनो बहकर लुंड में आ रहा ho...or फिर माँ ने वही प्रक्रिया dohradi...agar मई बैठा नहीं होता तो ज़रूर गिर चूका होता... ऐसा लगा जैसे मेरा पूरा शरीर निर्जीव है सिवाय मेरे लुंड को छोड़कर जो मुझे मेरी माँ से जोड़ रहा है.... और फिर माँ ने मेरे टोपे को मुँह में भर लिया और चूसने लगी... मेरे निर्जीव शरीर में जैसे फिर से ऊर्जा दौड़ gayi....maa ने लुंड को चूसना शुरू कर दिया और चूसते हुए वो लगातार मेरी आँखों में देख रही थी मनो मुझे एहसास दिलाना छह रही हो की देख तेरी माँ तेरा loda...tera musal..apane मुँह में लेकर प्यार कर रही है उसे चूस रही है





मैं माँ की लुंड चूसै में खो सा गया... माँ लुंड चूसते हुए अपने दोनों हाथ मेरे लुंड पर चला रही thi...mera बड़ा सा लुंड माँ के छोटे से मुँह में जाता हुआ बड़ा प्यारा लग रहा था... फिर माँ ने अचानक से लुंड को मुँह से निकल दिया और मुझे खड़े होने का इशारा किआ तो मैं खड़ा हो गया और माँ ने मेरे लुंड को अपने दोनों छूछीयो के बीच ले लिए मैं समझ गया. माँ क्या चाहती hai...or मैं अपनी कमर को हिलाकर माँ की छूछीयो को छोड़ने laga...maa की कोमल और बड़ी छूछीयो के बीच रगड़ कर मेरे लुंड को एक असीम आनंद मिल रहा था... माँ मेरी आँखों में देखते हुए अपने दोनों हाथो से छूछीयो को पकड़े हुए मुझे छोड़ने का आनंद दे रही थी...





माँ की आँखों में देखते हुए उनकी छूछीयो को chodna...un छूछीयो को जिनका दूध पीकर मैं बड़ा hua...wo छुछियां जो हमेशा से एक माँ का उसकी औलाद के प्रति ममता का प्रतीक रही hai...wo छुछियां जिन्होंने हमेशः अपनी औलाद की प्यास मिटै है वही छुछियां आज अपने बेटे के लुंड की प्यास बुझा रही थी... बेटे के जिस्म की भूख को शांत कर रही थी... मेरा लुंड उनकी छूछीयो की रगड़ें से बहुत कठोर हो गया और माँ का चेहरा देखकर मुझे उनपर बहुत प्यार आ रहा था कामुकता और ममता का मिषहरण उनकी आँखों में दिख रहा tha.....hawas और प्रेम का मिला जुला संगम सिर्फ माँ hi दिखा सकती है... मैंने माँ की छूछीयो से लुंड निकल लिए और बिना किसी चेतावनी के उनके मुँह में घुसेड़ diya....or माँ ने वही किआ जो हर माँ हमेशा करती है अपनी औलाद की ख़ुशी के लिए हर कष्ट सह लेती hai...unhone अपना मुँह खोला और मुझे आँखों से इशारा किया के छोड़ले अपनी माँ का muh....shant करले अपने लुंड को बीटा... और मैंने भी लुंड को झटके से अंदर घुसेड़ दिया और फिर अंदर बहार करने लगा



मेरे हाथ माँ के सर को पकड़कर अपने लुंड पर दबा रहे the....main माँ के मुँह को छूट की तरह छोड़ रहा tha...or माँ ने अपने मुँह को अपने बेटे की हवस और लुंड की प्यास बुझाने के लिए बेटे के हवाले कर दिया था..... माँ को ऐसे अपनी हवस के लिए इस्तेमाल करना मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रहा था... माँ के मुँह से गु गु गु की आवाज़ें निकल रही थी और जैसे hi लुंड बहार आता तो माँ की लार भी बहार आ jati...maa मुझे मुख छोडन का पूरा सुख दे रही thi....or मेरी भी उत्तेजना माँ के मुँह में दिए गए हर धक्के के साथ बढाती जा रही thi...or कुछ झटके बाद hi मुझे लगा की मेरी गोलियों का सारा रास बहकर मेरे लुंड में आ रहा है माँ ने भी ये महसूस किआ और तुरंत अपना मुँह पीछे हटा लिए और खोल लिए जैसे मुझसे अंदर पिचकारी मरने को उकसा रही हो माँ का ये खेल देखकर तो मैं अपने चरम पर पहुँच gaya...or उनके खुला मुँह जिसके इंतज़ार में था वो उन्हें दे दिया और अपनी पिचकारी का निशाना उनके मुँह में लगाने लगा..





मेरे लुंड से पिचकारी की धार निकलने लगी कुछ माँ के खुले मुँह में गिरी तो कुछ उनके चेहरे पर और कुछ उनकी छूछीयो पर.... झड़ते हुए मेरी आँखें बंद हो गयी... मैंने महसूस किआ की माँ ने मेरे लुंड को बापिस अपने मुँह में ले लिए है और मेरे लुंड की एक एक बूँद को निचोड़ कर साफ़ कर रही है...

और जब झड़ना बंद हुआ तो मैंने अपनी आँखें खोली तो पहले तो सब कुछ धुंधला सा दिखा पर जब साफ़ हुआ तो मैं बुरी तरह से चौंक गया... मैं अभी तक सपना देख रहा था.... मेरा लुंड माँ के नहीं बुआ के मुँह में था... फिर अगले hi पल मुझे पुरा होश आया तो मैंने कमरे में देखा तो मैं और हैरान रह gaya...Main जहाँ रात को सोया था वहीं tha...Bua मेरा लुंड चूस रही थी पर चौंक वाली बात ये थी की उनके पीछे से बड़े फूपाजी बुआ को पीछे से छोड़ रहे थे... फिर मैंने कमरे में और नज़रें daudai...wohin मेरे राइट में पूर्वी दीदी नीचे बैठी हुई है और विनीत का लुंड चूस रही hai....or लेफ्ट में फूपाजी अपनी भाभी यानि बड़ी बुआ को पीछे से छोड़ रहे हैं और उनका मुँह मेरे बगल में लेती चारु ममी की छूट में हैं और उसे जीभ से चाट रही हैं वहीं चारु ममी भी बुआ का सर अंदर दबा रही है अपनी छूट पर...

मुझे लगा मैं सच में कोई सपना देख रहा हूँ और दोबारा आँखें बंद कर ली... फिर अचे से आँखों को मसल कर दोबारा खोला तो देखा वो सब तो सच में हो रहा है...... बुआ अपने जेठ से चुद रही hain..or साथ hi मेरा लुंड चूस रही है... पूर्वी दीदी अपने भाई का लुंड चोप्स रही है... बड़ी बुआ अपने देवर से चुड़ते हुए अपने भाभी की छूट चाट रही hai...jab थोड़ा हैरानी का भाव मेरे सर से हटा तो लुंड अभी झड़ने के बाद भी दोबारा खड़ा हो गया ऐसा नज़ारा देखकर...

में- आप सब yahan...ye क्या कैसे हो रहा है...

बुआ ने मेरे लुंड को मुँह से बहार निकला और कहा सब समझती हूँ बीटा पहले आराम से आँखें तो खोल कर बैठ...

में- मैं जाग चूका हूँ bua...ab प्लीज बताओ मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा...

मेरी बात सुनकर बुआ आगे हो कर बैठ गयी जिससे बड़े फूपाजी का लुंड उनकी छूट से निकल gaya....or फिर बाकि सब भी जो भी कर रहे थे उसे छोड़कर आराम से बैठ gaye...main बुआ पूर्वी दीदी विनीत और चारु ममी एक खाट पर और बड़े फूपाजी बड़ी बुआ और फूपाजी एक खाट पर.... किसी के बदन पर कोई कपड़ा नहीं tha...sab बिलकुल नंगे थे...

में- बुआ अब बताओ भी न...

बुआ- ाचा सुन मेरे बच्चे... तुझे तो पता hi है की भाई साब मुझे छोड़ना चाहते...

ये सुनकर मैंने बड़े फूपाजी की तरफ देखा तो उन्होंने अपनी नज़रें झुका ली...

बुआ- दूकान वाली वाट तो मैंने तुझे बताई hi thi...muske बाद भी जब भी ये मुझे अकेला देखते तो छेड़खानी करते the...kal रात को खाने के टाइम भी जब मैं किचन में थी तो भाई साब मुझे अकेला देखकर आये और पीछे से पकड़ लिए और मेरे पेट को मसलने लगे... मैंने चौंकाते हुए कहा छोड़िये भाई साब कोई देख lega...par ये नहीं मन रहे थे तो फिर किसी के आने की आहात हुई तो वो मुझसे अलग हो गए पर बोले रात को 2 बजे मुझे आंगन में मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँगा..

मैंने कोई जवाब नहीं diya....or फिर भाई साब चले gaye...main अपने कामो में लग गयी जब सब ख़त्म हुआ तो मैं अपने कमरे में गयी सोने के liye...par भाई साब की बात मेरे मन में चल रही thi....phir मैंने जब तेरे फूपाजी आये सोने तो उन्हें साडी बात बतादि... तो तेरे फूपाजी ने बोलै की देखो Shashi..main भी भाभी को छोड़ चूका हूँ विनीत भी छोड़ता hai...agar भैया तुम्हे छोड़ना चाहते हैं तो एक तरह से जायज़ भी hai...or वैसे भी जब इतने लोग चुदाई में शामिल हैं तो मुझे नहीं लगता की ये बात ज़्यादा दिन तक छुप भी पायेगी एक न एक दिन उन्हें हमारे बारे में पता लग्न hi hai...to मुझे कोई परेशानी नहीं है अगर तुम भैया से चुदवाती हो तो... हाँ पर मैं चाहता hun...ki ये फैसला तुम्हारा ho...jo तुम्हारा मन करे वो तुम कर सकती ho.....ye सुनकर मुझे मेरे पति पर बहुत प्यार आया और मैंने उन्हें चूम लिए और फिर हम दोनों ने एक घंटे तक खूब चुदाई की.... फिर जब दो बजने को हुए तो मैंने बोलै मैं जा रही हूँ... तो तेरे फूपाजी ने कहा जाओ पर आंगन में hi रहना... मैं अपनी बीवी को चुड़ते हुए देखना चाहता hun...main मुस्कुरा कर कड़ी हुई और एक मैक्सी दाल कर बहार आ gayi...main बहार आ कर आँगन में कड़ी hi हुई थी की भाई साब ने मुझे पीछे से पकड़ लिए मैंने जब ठीक से देखा तो भाई साब पूरे नंगे the...or मैक्सी के ऊपर से hi मेरी चूचियों को दबाते huye...meri गर्दन को चूमने लगे...

Bua-bhai साब आपको यकीं था की मैं आउंगी जबकि मैंने तो कोई जवाब नहीं दिया था...

बड़े फूपाजी- हाँ बहु मुझे पूरा भरोसा था की तुम अपने भाईसाब की प्यास बुझाने ज़रूर आओगी... इसलिए पहले से hi पूरी तैयारी में हूँ...

बुआ- अगर मैं अभी मन कर दू तो....

बड़े फूपाजी- नहीं बहु मुझे पता है तू इतना बड़ा जुल्म नहीं करेगी मुझ पर...

बुआ- आपका भरोसा गलत्तपपपपपपपपममममहंममम

मैं पूरी बात बोल पाती उससे पहले hi भाई साब ने मेरे होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया और चूसने lage...jo मेरे कुछ बचे हुए नखरे थे वो भी ख़त्म हो gaye....or अपने पति के बड़े bhai...jeth से छुड़वाने के बारे में सोचकर मेरी छूट गीली हो गयी... और मैं भी भाईसाब का पूरा साथ देने lagi...phir भाई साब ने मेरे हाथ ऊपर करके मेरी मैक्सी को भी उतर दिया और मैं और भाई साब दोनों पूरी तरह से नंगे एक दुसरे के सामने थे.. भाई साब फिर से मेरे होंठो को चूमने lage...or हाथो से मेरी नंगी छूछीयो को दबाने लगे भाई साब ने मेरा हाथ पकड़कर अपने लुंड पर रख दिया और बापिस मेरी छूछीयो को मसलने लगे...

मेरा हाथ लगते hi भाई साब का लुंड झटके खाने लगा मैं अपने हाथ उनके लुंड पर आगे पीछे करने लगी...

कुछ देर होंठो को चूसने के बाद भाई साब ने अपना ध्यान मेरी चूचियों पर लगाया और उन्हें चूसने और चाटने लगे ...एक को मसलते तो दूसरी को चूसते और वहीं उनका दूसरा हाथ मेरे चूतड़ों को मसल रहा tha...wo मेरे पूरे शरीर को भोगने में लगे हुए थे और मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी... फिर अचानक से भाई साहब मुझसे अलग हुए और मुझे घुमा diya...or इससे पहले मैं कुछ समझ पाती भाई साब का लुंड मेरी छूट में था...

मैंने बुआ की बात सुनकर बड़े फूपाजी की तरफ देखा तो वो एक बच्चे की तरह अपना बचाव करते हुए बोले- मैं क्या करता मेरा वो फटने को हो रहा था...

बड़े फूपाजी अब भी थोड़ा झिझक रहे ठगे शायद अभी भी ये सब उनके लिए नया था...

बुआ- हाँ तो अगले hi मिनट ने भाई साब का लुंड मेरी छूट से अंदर बहार हो रहा tha...or मुझे तू जनता है की लुंड छूट में घुसने के बाद... मैं सब भूल सी जाती hun...main भी अपनी गांड हिला हिलाकर भाई साब से छुड़वाने लगी अपनी आवाज़ बिलकुल काम करने की कोशिश करने लगी...

हमारी चुदाई चल hi रही थी की अचानक से तेरे और विनीत के कमरे का गेट khula...awaaz से हम दोनों hi दर गए और इधर खम्बे के पीछे छुप गए पर भाईसाब का लुंड अब भी मेरी छूट में hi tha...gate खुलते hi हम थोड़े हैरान हो गए क्यों की तेरे कमरे से किसी औरत का साया निकला..

मुझे तो ज़्यादा हैरानी नहीं हुई क्यूंकि मुझे लगा पूर्वी या दीदी होंगी पर जैसे hi कमरे की रौशनी ठीक से बदन पर पड़ी तो मैं भी चौंक गयी... सामने चारु थी सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में हाथ में चादर liye....bhai साब तो और भी ज़्यादा चौंक गए... पर उसके बाद चौंकाने वाली एक और बात हुई की तू भी उसके पीछे आया और वो भी बिलकुल नंगा.....

भाई साब तो बूत बने हुए बस देखे जा रहे the...halanki मुझे लगा tha..ki तेरे और चारु के बीच कुछ है जब तुम दोनों को मैंने किचन में देखा था तभी से पर ये सब इतनी जल्दी होगा इसका अंदाज़ा नहीं था...

चारु ममी बुआ की बात सुनकर थोड़ा शर्मा सा gayi...mera लुंड भी बुआ की बातों से अकड़ गया था तो मैंने पूर्वी दीदी को इशारा किआ तो वो आकर तुरंत मेरा लुंड को चाटने लगी वहीं अब मैंने हाथ से चारु ममी के छूछीयो को थाम लिए और उन्हें चिपका lia...vineet भी अपनी मुम्ममय की छूछीयो को सहलाते हुए बात सुन रहा था वहीं दूसरी खत पर बड़ी बुआ फूपाजी और बड़े फूपाजी के लुंड पकड़ कर सहला रही थी... फिर बुआ ने आगे बताना शुरू किया...

बुआ- हम दोनों जमे हुए बस सामने देखे जा रहे थे फिर तूने चारु को पीछे से पकड़ लिए और फिर उसको पूरा नंगा कर दिया और साथ में छोड़ने भी लगा ये नज़ारा देखकर मेरी छूट ने तो अपना पानी छोड़ दिया वहीं भाई साब भी मेरी छूट में झड़ने lage...par बिना हिले खम्बे का सहारा लिए हम दोनों ऐसे hi खड़े रहे...

फूपाजी- और तुम्हे इस हालत में देखने वाले बस सिर्फ ये दो लोग hi नहीं थे...

Me-matlab

फूपाजी- जब तेरी बुआ भैया से मिलने के लिए कमरे से निकली तो चुदाई करने के बावजूद मेरा लुंड दोबारा खड़ा हो gaya...apani बीवी को बड़े भाई से चुड़ते देखने की तीव्र इच्छा मेरे मन में aai...main भी थोड़ी देर बाद चुपके से करे वाले बाथरूम में घुस गया और बहार वाला गेट थोड़ा सा खोला तो आंगन साफ़ दिखने लगा और नज़र घुमाई तो देखा भैया शशि के होंठों को चूम रहे the...ye नज़ारा देखते hi मेरा लुंड अकड़ gaya...tabhi मेरे मन में एक विचार आया और मैं चुपचाप से छुपता चिपटा हुआ भैया के कमरे में पहुंच गया... जैसा सोचा गेट बहार से बंद था तो मैंने आहिस्ता से कुण्डी खोली और अंदर घुस गया अंदर भाभी सो रही थी तो चुपचाप से उनको jagaya...bhabhi मुझे देखकर दर गयी और बोलने लगी की तुम्हारे भैया सो रहे हैं देख लेंगे... मैंने उन्हें बोलै देखो भैया हैं hi नहीं करे में तो जब उनका दर थोड़ा ख़त्म हुआ तो मैंने उन्हें शशि और भैया की पूरी बात बतादि और उनसे बोलै चलो देखते हैं...

बड़ी बुआ- पहले तो मुझे यकीं नहीं हुआ पर इस घर में कुछ बी हो सकता है ये सोचकर मैं उठ gayi...sach कहूं तो इनके और शशि के बारे में सोचकर मेरी छूट भी गीली हो गयी थी तो मैं देवर जी के पीछे पीछे कमरे से निकली और निकल कर अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया जिससे किसी को शक न हो और सीढ़ियों के पीछे छुप गए और इन दोनों को देखने लगे..

फूपाजी - भैया और शशि की रासलीला देखकर मेरा लुंड भी बिलकुल अकड़ गया था... वहीं मैंने देखा की भाभी भी अपनी छूट को साड़ी के ऊपर से hi मसल रही thi...or फिर भाई साब फिर शशि को छोड़ने लगे और उसके कुछ देर बाद hi तू और चारु बहार आए गए तो हम दोनों से hi नहीं रुका गया मैंने वहीं सीडी के पीछे hi भाभी के पीछे होकर उनका थोड़ा झुका दिया उनकी साड़ी को कमर के ऊपर उठाकर अपना लुंड भाभी की छूट पर सेट करके अंदर दाल diya...or भाभी के मुँह पर हाथ रखकर इन्हे छोड़ने laga...main मन में ये hi सोच रहा था की एक hi आंगन में तीन जगह चुदाई चल रही है और तीनो hi एक दुसरे से छुपे हुए hain...hum दोनों भाई एक दुसरे की बीवियों को छोड़ रहे थे... पर अब हम लोग बहुत आगे निकल आये थे और न बापिस जाने का कोई रास्ता है और न hi इरादा ये सोचकर मैं भाभी को छोड़ने लगा और साथ में बाकि दोनों जगह भी नज़र रखे हुए था.....

बड़े फूपाजी- मैं तो बिलकुल hi हैरान हो गया था की कर्मा मेरे सेल की बीवी के साथ कैसे ये सब पर मेरा लुंड फिर भी तन के खड़ा था झड़ने के बाद भी शायद एक वजह ये भी थी की शशि से मिलने आने से पहले मैंने एक वियाग्रा की गोली खा ली थी जिससे मैं बिना रुके अचे से शशि को छोड़ सकूँ...

ये सुनकर सब फूपाजी की तरफ देखने लगे तो वो बोले- मेरी उम्र हो गयी है यार कुछ तो सोचना पड़ता है न...

सब लोग उनका बहाना सुनकर हंसाने लगे

Phoopaji-bhaiya ये सब मत लिए कीजिये सेहत के लिए अछि नहीं रहती...

बड़े Phoopaji-theek है आगे से नहीं लूंगा हाँ तो कर्मा सुन फिर तू जब चारु को छोड़ते हुए बाथरूम के अंदर ले जा रहा था वो नज़ारा देखकर तो जैसे मेरा लुंड लोहे का हो gaya...itana टाइट शायद hi इस उम्र में. हुआ होगा मेरा कभी... मेरी कमर अपने आप आगे पीछे होने लगी और मैं बहु को छोड़ने laga...is बार मेरे धक्क्के भी काफी तेज़ हो गए थे तो बहु ने मुझे आराम से करने को कहा... पर मुझे आराम कैसे आता जिसे मैं न जाने कबसे छोड़ना चाहता था आज मेरा लुंड उसकी छूट में था और उसके ऊपर से तेरा और चारु का चुदाई का दृश्य... मैंने बहु की दोनों छूछीयो को थम लिए और लम्बे लम्बे झटके लगाने laga....bahu ने भी अपने मुँह पर हाथ रख लिए... जिससे आवाज़ न निकले... तभी कुछ देर बाद तुम लोग बाथरूम से बहार निकले और फिर चलते हुए तू चारु को छोड़ रहा tha...main काफी उत्तेजित हो गया तुम्हारी चुदाई देखकर और मेरे धक्क्के बहु की छूट में बहुत तेज़ लग रहे थे पर हम आवाज़ नहीं होने दे रहे the......phir तुम लोग अपने कमरे में जाने की वजाये मेरे कमरे के दरवाज़े पर के पास पहुंचे और वहां दरवाज़े को टिका कर चुदाई करने लगे फिर तूने अपना लुंड बहार निकल कर चारु के चूतड़ों को मसलने के बाद दोबारा लुंड घुसेड़ा तो मुझे दिखा की तू चारु की गांड मर रहा है... मेरी हालत तो और ज़्यादा ख़राब हो गयी बड़ी मुश्किल से मैं खुद को काबू में रखे हुए tha...phir तुम लोग अपने कमरे में चले गए तो मुझे थोड़ी रहत मिली और मैं बहु को पूरी गति से छोड़ने laga...meri कमर जितनी तेज़ हिल सकती थी उतनी तेज़ हिल रही थी और लुंड बहु की गरम छूट में अंदर बहार हो रहा tha....or फिर कुछ hi देर में वो बिंदु आ गया जो मुझे पता था जल्द आएगा मैं और बहु दोनों झड़ने लगे... मैंने अपना सारा वीर्य बहु की छूट ने भर दिया और मैं ऐसा महसूस करने लगा जैसे मेरी साडी जान निकल गयी hai...or बहु से टिक गया... तभी हमारे कानो में कुछ आवाज़ आए रही थी हमने ध्यान दिया तो वो सीढ़ियों के पास से आ रही थी मैंने बहु को चुप चाप रहने का इशारा किया और बहित चुपके से हम दोनों वहां पहुंचे और जो देखा वो देखकर मुझे बहुत बड़ा झटका laga....mera छोटा भाई पूरा नंगा था और मेरी बीवी जो की पूरी तरह से नंगी थी उसे झुककर बुरी तरह से छोड़ रहा tha....unke चेहरे पर सिर्फ हवस थी.... ये अपनी भाभी की छूट में बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था



और दोनों के हाव भाव से ये साफ़ प्रतीत हो रहा था की दोनों hi अपने शिखर के बहुत करीब हैं और हु भी ऐसा hi अगले मिनट में hi दोनों एक दुसरे जे साथ झड़ने lage....or जब उनका स्खलन ख़त्म हुआ तो दोनों की नज़र हम पर पड़ी और दोनों hi... सहम गए...

फूपाजी- भैया को देखकर तो मैं बिलकुल दर गया मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ...

Bua-main जानती थी की ये अब कुछ नहीं बोल पाएंगे तो मुझे hi कुछ करना होगा... तो मैं सबको भाई साब के कमरे में ले गयी और बिठा दिया तबसे अब तक कोई कुवह नहीं बोलै tha...or मैंने बोलै मुझे पता था की कभी बा कभी ये दिन आएगा जब हमें एक दुसरे के बारे में पता चलेगा hi chalega...to जब आज बात खुल गयी है तो मैं चाहती हूँ के सबको सब कुछ पता हो...

बड़े फूपाजी- क्या बात और कौनसी बात खुल गयी hai...kabse चल रहा है ये सब इन दोनों का...

Bua-bhai साब भूलिए मत जिसके लिए आप उन्हें बोल रहे हैं आप भी वही कर रहे थे...

बड़े फूपाजी- जनता हूँ पर मुझे फिर भी जानना hai...sab कुछ जो तुम बताने को कह रही हो...

बुआ- बिलकुल आपको जानने का पूरा हक़ hai....or फिर मैंने पूरी कहानी हमारे परिवार की भाई साब को batadi...bhai साब आँखें बड़ी करके सब सुनते rahe...or जब बात पूरी हुई तो मैंने उनसे बस एक सवाल पुछा की अब आप बताएं आपका फैसला क्या hai...halanki मैंने सवाल पूछने के बाद जब नीचे देखा तो उनके लुंड को देखकर hi फैसला समझ आ रहा था पर फिर भी मैं जानना चाहती थी उनके मुँह se....tabhi तेरे बड़े फूपाजी ने बोलै- तो पूर्वी और विनीत कर्मा सब शामिल हैं इसमें?

बुआ- हाँ भाई साब..

बड़े फूपाजी- सावित्री पूर्वी और विनीत को बुला कर लाओ यहाँ...

फिर दीदी गयी और कुछ hi देर में पूर्वी और विनीत कमरे में आ गए दोनों hi बिक्कुल नंगे थे..

बड़ी बुआ- ये दोनों ऐसे hi सो रहे थे तो ऐसे hi बुलाले..

वहीं पूर्वी और विनीत भाई साब को देखकर वो भी नंगी हालत में बिलकुल हैरान थे...

बड़े फूपाजी- बैठो बच्चो...

दोनों बैठ गए...

बड़े फूपाजी- अभी मुझे हमारे परिवार के बारे में बहुत सी बातें पता चली हैं जो मुझे पता नहीं thi...or तुम लोगो को देखकर उसमे कोई शकक नहीं की तुम दोनों hi अपनी मर्ज़ी से शामिल ho...waise तो समाज की नज़र में ये सब पाप hai...or एक घृणित अपराध है अपने hi परिवार के लोगो के साथ सम्भोग karna...par मुझे लगता है की हम लोग काफी आगे निकल आये हैं बापिस जाने के liye...main आज अगर तुम्हे रोक भी दूँ या बंद भी करदु ये सब तो भी आज नहीं तो kal...mauka मिलते hi तुम दोबारा करने से नहीं chukoge...to मैं बिना बात के नियम कानून नहीं बनाना चाहता जब मैं जनता हूँ के वो टूटेंगे hi...doosri बात मेरा मन खुद भी अब तुम लोगो में शामिल होने का है... मुझे दुःख भी है की पहले ये सब क्यों नहीं हुआ पर अब जो हुआ है तो बहुत ख़ुशी है.. मुझे... पर हमें कई बातों का ध्यान रखना होगा की इस बारे. में किसी को भी खबर न हो और घर के अंदर हम चाहे जो करें बहार हमें बिलकुल साधारण परिवार की तरह व्यवहार करना होगा..

सबने भाई साब की बातों में सहमति दी...

बड़े फूपाजी- तुम सब को इस हालत में देखकर मेरा बहुत मन है की मैं अभी शुरू हो जॉन पर मैं चाहता हूँ की अब सब कर्मा के सामने और साथ ho...akhir उसी की वजह से ये सब हुआ hai...to चलो सब कर्मा के कमरे में...

चारु ममी- इसके आगे की कहानी मैं बताती हूँ तुझे... जब हम दोनों चुदाई के बाद झाड़ कर लेट गए तो तेरे साथ मेरी आँख भी लग गयी फिर काफी देर बाद मेरी आँख खुली तो मुझे याद आया की मुझे तो अपने रूम में जाना होगा नहीं तो कोई यहाँ देखलेगा तो क्या होगा... मैंने झट से कपडे पहने और गेट खोल कर बहार निकली hi थी की जो मुझे दिखा उसे देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी... सरे लोग नंगे मेरे सामने खड़े the...bachhhe बड़े sab...main बिलकुल दर भी गयी की ये हो क्या रहा है aaj...main पीछे की तरफ गिरने लगी तो सावित्री दीदी ने मुझे पकड़ लिए और अपने गले से लगा लिए और फिर सबने मुझे अब तक की साड़ी कहानी बता दी... कैसे तूने शशि दीदी को गाड़ी में छोड़ा से लेकर विनीत से छुड़वाने तक... सब कुछ और जब बात ख़त्म हुई तो मेरी छूट पानी बहा रही थी जिसे सावित्री दीदी ने महसूस किआ और मुस्कुरा कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए... पहली बार किसी औरत ने मुझे चूमा तो मेरा पूरा बदन सोबर gaya...main और सावित्री दीदी एक दुसरे के होंठों का रास पीने लगे पर जीजाजी ने रोक दिया और बोलै कर्मा को साथ ले लेते हैं ab...to हम रुक गए और कमरे में आ गए यहाँ तू सोया हुआ था पर तेरा लुंड टैंकर खड़ा था तो शशि दीदी से रुका नहीं गया और उन्होंने झट से मुँह में भर लिए और झुककर चूसने लगी....

बड़े फूपाजी- हालाँकि मैंने hi सबको रोका था पर मैं खुद को hi नहीं रोक पाया बहु की बड़ी गांड को देखकर और फिर उसकी छूट में पीछे से लुंड दाल दिया और बोलै की जब तक कर्मा जाग नहीं जाता तब तक जो चाहे कर सकते हो और फिर चुदाई शुरू हो गयी और फिर उसके आगे तू समझ गया होगा......

में- सब समझ गया फूपाजी और मैं बहुत खुश हूँ की आप भी सब समझ gaye.....to अब साड़ी बातें तो हो चुकी तो कुछ और किया जाये...

बड़े फूपाजी- बिलकुल शुरू हो जाओ मैं तो कबसे इस इंतज़ार में था.....

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट mein...aap लोग प्लीज कमैंट्स करके बताएं कैसी लगी अपडेट.. शुक्रिया..
 
में- अब समझ गया फूपाजी और मैं बहुत खुश हूँ की आप भी सब समझ gaye.....to अब साड़ी बातें तो हो चुकी तो कुछ और किया जाये...

बड़े फूपाजी- बिलकुल शुरू हो जाओ मैं तो कबसे इस इंतज़ार में था.....

अपडेट 49
हालाँकि फूपाजी ने बोल दिया था शुरू करने को पर कोई फिर भी अपनी जगह से नहीं hila....shayad सब शुरुआत करने में झिझक रहे the....mere लुंड का तो पहले से hi बुरा हाल tha...itane सरे लोगो को नंगा देखकर लगभग पूरा परिवार hi यहाँ था.... ऊपर से पूर्वी दीदी का गरम मुँह मेरे लुंड पर कहर ध रहा था...

में- आप लोग रुके क्यों हो किसी को कुछ नहीं करना क्या...

ये कहकर मैंने पूर्वी दीदी के मुँह से अपने लुंड को निकल लिए और उन्हें ऊपर की तरफ खींच कर अपने ऊपर कर लिए जिससे उनकी छुछियां मेरे सामने आ gayi...maine एक हाथ से उनकी एक छुच्छी को दबाया और वहीं दूसरी चुकी को मुँह में भर lia......or चूसने लगा... पूर्वी दीदी के मुँह से एक अह्ह्ह्ह कर्मा की सिसकारी nikali...or पूर्वी दीदी भी शायद बहुत गरम हो गयी थी तो उन्होंने अपना एक हाथ नीचे लेजाकर मेरे सख्त लुंड को पकड़ा और अपनी कमर को और पैरों को एडजस्ट करके लुंड को छूट के मुँह पर रखा और नीचे हो गयी जिससे मेरा लुंड उनकी छूट की दीवारों को चीरता हुआ अंदर घुस gaya...or पूर्वी दीदी की गरम छूट में घुस कर मेरे लुंड को तो जैसे रहत मिल gayi....jab मेरा लुंड पूर्वी दीदी की छूट में पूरा समां गया तो मैंने उनकी छुच्छी से मुँह हटाया और आस पास देखा तो नज़ारा वैसा hi था पर सब लोग हम दोनों को hi देख रहे थे... उधर दीदी ने भी लुंड पर उछालना चालू कर दिया और मैं दोनों हाथो से उनके चूतड़ों को मसलते हुए बोलै- अरे आप सब कब शुरू hoge...bade फूपाजी आप सबसे बड़े हो आप बताओ आप को किसे छोड़ना है....

मेरे द्वारा ऐसे बिलकुल खुले तरीके से पुछे जाने से बड़े फूपाजी पहले तो थोड़े ठिठक गए फिर थोड़ा सोच कर बोले

बड़े फूपाजी- मैं तो अभी बहु के साथ hi करना चाहूंगा...

मैंने उनको थोड़ा चिढ़ाने के लिए बोलै- क्या करना चाहोगे आप बुआ के साथ...

बड़े फूपाजी मेरी बात समझ गए और मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखा

बड़े फूपाजी- बहु को छोड़ना चाहूंगा...

और ये कहकर बड़े फूपाजी ने बुआ को पास आने का इशारा किआ तो बुआ तुरंत उठ कर अपनी नंगी गांड मटकते हुए फूपाजी के पास चली गयी... और बड़े फूपाजी के पास जाकर अपने आप को थोड़ा झुकाया और अपने होंठों को बड़े फूपाजी के होंठों पर रख दिया और चूसने lagi...idhar फूपाजी ने बड़े फूपाजी को अपनी बीवी के साथ लगते देखा तो वो भी उठे और चारु ममी की तरफ बढ़ गए क्यूंकि चारु ममी को मेरे अलावा और किसी ने अभी तक नहीं छोड़ा था... और चारु ममी को पकड़ कर उनके होंठों को चूसा फिर उनकी छूछीयो को और फिर देर न करते हुए अपना मुँह उनकी छूट में लगा दिया और चाटने lage...baki बस विनीत और बड़ी बुआ बचे हुए थे और वो भी अपने काम में लग गए... बड़ी बुआ नीचे बैठ कर विनीत का लुंड चूसने लगी.....

पूर्वी दीदी की रफ़्तार मेरे ऊपर उछलने की और तेज़ हो गयी थी और अब जैसे hi वो नीचे गिरती एक थप की आवाज आती हमारी जांघों के टकराने se...or उनके बड़े बड़े चूतड़ हर टकराव के साथ ऊपर नीचे हो कर लहार jate...baki कमरे का नज़ारा भी अब कुछ ऐसा hi tha...mere बगल में बड़े फूपाजी बैठे हुए थे बीएड से पेअर लटका कर और बुआ उनके लुंड को छूट में लेकर उछाल रही थी... वहीं मेरी दूसरी और फूपाजी भी उसी पोजीशन में थे और चारु ममी अपनी छूट में फूपाजी का लुंड लेकर उछाल रही थी और अपनी कमर घुमा रही थी... वही दुसरे बीएड पर विनीत भी हमारी तरह बैठा हुआ था और बड़ी बुआ अपनी पीठ विनीत की तरफ करके उसका लुंड छूट में लेकर उछाल रही थी... पूरे कमरे में चुदाई का खेल पूरे चरम पर था.





चार लुंड... चार छूटों की यात्रा कर रहे थे... परिवार के बीच ऐसी चुदाई का दृषिअ बिलकुल अकल्पनीय था पर इस परिवार में ये सच में हो रहा tha...ek hi परिवार के लोग और ऊपर से रिश्तेदार भी इस कामुक खेल में शामिल the...main और चारु ममी... रिश्तेदार hi तो थे...

पूर्वी दीदी को छोड़ते हुए मैं पूरे कमरे में नज़र घुमा रहा था और जितना इस दृषिअ को देख रहा था उतना hi मुझे ये एक सपने जैसा लग रहा tha...or लगे भी क्यों न ऐसा नज़ारा आखिर कहाँ देखने को मिलता hai...jahan बड़े फूपाजी अपने छोटे भाई की बीवी को अपनी बीवी, छोटे भाई, और साथ में उनके बच्चो के सामने छोड़ रहे थे.... फूपाजी अपने भाई के सेल की बीवी को छोड़ रहे थे पूरे परिवार के सामने जबकि उनकी बीवी उनके बड़े भाई से चुद रही है उनकी भाभी को उनका खुद का बीटा छोड़ रहा hai...unki बेटी को उनके सेल का लड़का छोड़ रहा है... और शायद ये सब बातें सिर्फ मेरे hi नहीं सबके मन में चल रही थी... इसीलिए सब गरम और उत्तेजित थे और पूरे कमरे से बस थप थप थप और सिसकीओ की आवाज़ें आ रही थी...

रिश्तों में चुदाई समाज के लिए जीतनी गलत है उतना hi उत्तेजित भी करती hai..or यहाँ तो इतने सरे रिश्तों के बीच चुदाई का खेल चल रहा था.. माँ बेटे पति और बेटी के सामने जेठ से चुद रही hai....mera लुंड इन ख्यालों से hi पूर्वी दीदी की छूट ने फूल रहा था जिसे वो बी महसूस कर रही थी... मैंने दीदी के गदराये हुए चूतड़ों को पकड़ लिए और नीचे से गांड उठाकर उनकी छूट में अंदर तक झटके मरने लगा दीदी और मस्त हो गयी....

पूर्वी- अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मा देखो कर्मा कितनी बुरी तरह छोड़ रहा है तुम्हारी बेटी ko....tum रणदीव की तरह उछाल रही हो ताऊ जी के लुंड par...aaahhhh पापा देखऊऊऊऊ Ahhhhhhhhhhh...

बुआ- छोड़ कर्मा बीटा और तेज़ छोड़ इस रंडी ko..iski माँ भी रंडी है और बेटी भी रंडी hai...is घर की हर औरत रंडी है...

बड़े फूपाजी- ह्म्म्मम्म बहु क्या गरम छूट पाई है tune...or उतनी hi गरम बेटी निकली है अपनी छूट से....

फूपाजी- हम भैया बहुत गरम है दोनों बेटी को भी चख कर देखिये मेरी आपको मज़ा आ जायेगा....

चारु- ओह्ह्ह्हह्हह कैसा परिवार है तुम्हारा बाप बेटी को छोड़ने के लिए दे रहा है अपने भाई को.... अह्हह्ह्ह्ह मैं तो गयी....

बड़ी बुआ- इसी में मज़ा है चारु... और अब तू भी ये मज़ा ले.... अह्ह्ह्ह विनीत बीटा और तेज़ मार अपनी तै की छूट... और तेज़ मार...

विनीत वैसे भी अपनी माँ और बहन की चुदाई देखकर बहुत गरम था तो उसने अपने झटके और बढ़ा दिए...

में- असली नाज़ा तो ऐसे परिवार की चुदाई में hi है चारु mami....ahhhh पूर्वी दीदी तुम्हारी छूट अब भी बहुत टाइट है...

और मैं दीदी को और तेज़ छोड़ने लगा साथ में उनकी गांड में एक उंगली घुसा दी और अंदर बहार करने लगा... दीदी इस दोहरे हमले की वजह से और साथ hi कमरे में दुसरे लोगो की चुदाई देखके अति उत्तेजित हो गयी और झड़ने lagi...apane लुंड पर उनकी छूट का पानी मैंने महसूस किआ और मेरा पूरा लुंड जब उससे तर हो गया तो मैंने लुंड छूट से निकला और दीदी को तुरंत बीएड के नीचे की तरफ मुँह करके झुका दिया और फिर अपने लुंड के सुपडे को उनकी गांड के छेड़ पर रखा और एक झटका मारा और लुंड 3 इंच अंदर घुस गया... दीदी के मुँह से चीख निकल गयी जिसे सुनकर सबका ध्यान हमारी तरफ आ गया था... वो तो ाचा था की रिमझिम दीदी और गया ऊपर सो रही थी... नहीं तो वो भी सुन लेती...

दो तीन झटको में hi लुंड पूर्वी दीदी की गांड में पूरा घुसा हुआ था और उनकी गरम मखमली गांड ने मेरे लुंड को अंदर से जकड़ा हुआ था.... मैं अपनी कमर हिलाकर दीदी की गांड मरने laga...mera लोढ़ा उनकी टाइट गांड में फँस कर जा रहा था जिससे और मज़ा आ रहा था...

उधर चारु ममी भी फूपाजी के लुंड पर झड़ने लगी तो फूपाजी ने भी झट से उनकी छूट से लुंड निकला और गांड के छेड़ पर टिका diya...charu ममी ने भी देर न करते हुए तुरंत नीचे होकर अपनी गांड नीचे करके पूरा लुंड अपनी गांड में समां लिए...

मुझे और फूपाजी को देखकर विनीत ने भी अपना लुंड बड़ी बुआ की छूट से निकला और गांड में फिट कर दिया और फिर बड़े फूपाजी ने भी बुआ की गांड का रास्ता अपनाया....

जहाँ अब तक छूट चुदाई हो रही थी वहीं अब लुंड और गांड का खेल चालू हो गया था...





फिर से चार लुंड चारो गांड की सेवा में लग गए...

चारु ममी- ahhmmmmmmmmmm जीएफजीइइइइइइ ाराआआअम्मम्म से... अह्ह्ह मैंने कभी सोचा भी नहीं था की ये शादी में जाकर मुझे ऐसे काम करने padenge...ahhhh मज़ा आ रहा है इतना तो मैं शायद कई महीनो में नहीं chudunnnnnggggggggggiiiiiiiiii...

फूपाजी- अह्ह्ह्हह बहुत टाइट गांड है तुम्हारी charu....abhhhh लगता है साला मरता hi nahiiiii....ahhhhh लुंड रगड़ कर जा रहा है...

चारु- उन्हें फुर्सत hi कहाँ अपने काम se...jo मेरी छूट और gandddddddddd पर ध्यान जाये....

में- ऐसी गांड और छूट पर तो सबका ध्यान जाता है ममी.... तुम्हारी गांड भी बिलकुल पूर्वी दीदी जैसी है... makhmali....or गरम...

फूपाजी- हाँ कर्मा बीटा बिलकुल सही कह रहा है तू.... ऐसा लगता है लुंड अंदर hi पिघल जायेगा...

बड़े Phoopaji-haannnn shashiiiiiiiiiiii वैसे बहु की गांड में भी जन्नत hai....jitni बड़े चूतड़ हैं इतनी Hi टाइट और कोमल गांड है अंदर से... मैंने तो सोचा था बहु की छूट से ाचा कुछ हो hi नहीं सकता पर गांड तो बढ़कर nikali.....ahhh बहु मज़ा आ रहा है...

Bua-to मारो भाई saab...hnnn और तेज़ मारो मेरी गाआआनंनंड्डड़ रगड़ रगड़ के फाड़ दो.... Ahhhhhhhhhhh बहुत दिनों से नज़र थी न आपकी इस गांड पर... जब भी मैं कुछ काम करती थी तो मेरे चूतड़ों को घूरते रहते थे... आज मसलो भाई साब जितना चाहते हो...

बुआ की बातें सुनकर बड़े फूपाजी और गरम हो गए और बुआ के बड़े बड़े चूतड़ों को मसलते हुए तेज़ी से गांड में लुंड पेलने लगे...

बड़े फूपाजी- तो ले bahu...hmmmm आअह्ह्ह्ह ये ले आह्ह्ह्हह क्या गांड है तेरी...

विनीत भी बड़ी बुआ की गांड में तेज़ तेज़ झटके लगते हुए बोलै- हाँ ताऊजी मारो मेरी मम्मी की gand...or मैं तै जी की गांड फाड़ता हूँ.. इतनी मस्त गांड लेकर घूमती हैं दोनों की मन करता hai..jahan देखो वहीं लुंड घुसेड़ दो...

बड़ी बुआ- अह्ह्ह बीटा मार vineeeeeeeeeeeeeet अपनी तै जी की गांड maar...bhar दे अपने लोडे से मिटा दे मेरी साडी खुजली....

इधर पूर्वी दीदी बस आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह की सिसकारियां लेते हुए मुझसे अपनी गांड मरवा रही थी...

उनकी गांड ने मेरा लुंड चारो तरफ से पकड़ रखा था और ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लुंड किसी चले से अंदर बहार हो रहा था...





पूर्वी दीदी अपने सर को बीएड पर रखे हुए और गांड उठाकर मुझसे मरवा रही थी... मैंने एक हाथ नीचे बढाकर उनकी छूट को सहलाने laga...to उनके मुँह से सिसकारियां और तेज़ आणि शुरू हो gayi...phir मैंने अपने धक्क्को की गति को बढ़ाते huye...apani दो उंगलियों को उनकी छूट में दाल diya...or अंदर बहार करने laga....unki गांड मेरे लुंड पर और ज़्यादा टाइट हो गयी... और मैं तेज़ झटको से गांड पेलने लगा...

उधर फूपाजी भी चारु ममी की बहुत मस्त होकर गांड मर रहे the...charu ममी को उन्होंने बीएड पर hi घोड़ी बना रखा था और पीछे से लुंड अंदर बहार कर रहे थे...... उनके कूल्हे जैसे hi चारु ममी के चूतड़ों से टकराते तो एक थप की आवाज़ के साथ ममी के बड़े चूतड़ों में एक लहार सी दौड़ jati...mami की गांड बहुत काम चूड़ी थी इसलिए फूपाजी का लुंड बहुत कसके अंदर जा रहा था जिससे फूपाजी और मस्ती में खोते जा रहे थे...

बड़े फूपाजी अब भी तंग नीचे करके बैठे थे और बुआ उनकी तरफ पीठ करके उनके लुंड को गांड में लेकर उछाल रही थी... उनके छुछियां हर धक्के के साथ ऊपर नीचे हो रही thi...wohin उनकी गांड में बड़े फूपाजी का लुंड आता जाता हुआ साफ़ दिख रहा था...

विनीत ने भी बड़ी बुआ को बीएड के सहारे झुका रखा था और उनकी गांड मार रहा था....

थोड़ी देर बाद hi पूर्वी दीदी दोहरे हमले को सह नहीं पाई और गांड में मेरे लुंड और छूट में मेरी उंगलियां होने से झड़ने लगी... झड़ने के करीब एक दो मिनट तक मैं उनकी गांड मरता रहा और जब उनका झड़ना बंद हुआ तो वो बीएड पर गिर gayi...or मेरा लुंड उनकी गांड से निकल गया...

मेरा लुंड निकल गया तो मैंने खड़ा हुआ और बुआ के पास जाकर खड़ा हो गया जहा वो बड़े बड़े फूपाजी से अपनी गांड मरवा रही थी और मैंने अपना लुंड उनके चेहरे के पास कर दिया जिसे उन्होंने तुरंत अपने मुँह में ले lia...or अपनी बेटी की गांड का रास जो मेरे लोडे पर लगा था उसे चाटने लगी... नीचे से बुआ ने अपनी टंगे ऊपर उठा ली थी और अब बड़े फूपाजी नीचे ऐ कमर उठा उठा कर बुआ की गांड मार रहे थे वहीं बुआ गांड मरवाते हुए मेरे लुंड को अंदर तक लेकर चूस रही थी... थोड़ी देर बाद जब पूर्वी दीदी को होश आया तो वो भी उठकर हमारे पास ा गयी और नीचे बुआ और फूपाजी की टैंगो के बीच बैठ गयी... और अपना मुँह आगे बढाकर बुआ के चूतड़ों को चूमने लगी चाटने लगी और जीभ निकल कर बड़े फूपाजी के लुंड और बुआ की गांड का जहाँ मिलान हो रहा था वह रखड़ी और आते जाते हुए लुंड को चाटने lagi...phir कुछ पल बाद बड़े फूपाजी ने अपने झटके रोके शायद थकने की वजह से तो पूर्वी दीदी ने बुआ की गांड से बद्र फूपाजी का लुंड निकला और अपने मुँह में ले लिए... वहीं बुआ बिना रुके मेरा लुंड चूसने में लगी rahi...wohin पूर्वी दीदी के मुँह में बड़े फूपाजी अपना लुंड देखकर बहुत मस्त हो गए...

बड़े Phoopaji-ahhhhh मेरी बेटी ऐसे hi कितना अच्छा चूसती है तू... मेरी बिटिया rani..ahhhhh चूस अपने ताऊ जी का लुंड ahhhhhhhhhhhhhhhhhh....

पूर्वी दीदी ने अहम्म्म्म करते हुए अपना काम जारी रखा... और कुछ पालो बाद लुंड को बहार निकल कर बापिस अपनी मुम्ममय की गांड पर लगा दिया जिसे बड़े फूपाजी ने धक्का देकर अंदर फिर से घुसा दिया और अंदर बहार करने लगे





मैं हाथ नीचे लेजाकर बुआ के छूछीयो को मसलने लगा और साथ में अपना लुंड चुसवा रहा था.. वहीं बाकि दोनों जगह भी चुदाई ज़ोरो से चल रही थी चारु ममी मेरे पीछे की तरफ झुकी हुई थी घुटने और हाथो पर और फूपाजी का लुंड उनकी गांड से अंदर बहार हो रहा tha....wohin विनीत और बड़ी बुआ भी लगे हुए the...phir पूर्वी दीदी ने बुआ यानि अपनी मम्मी की जांघो को खोला और अपना मुँह उनकी छूट पर टिका दिया जहाँ उनके मुँह से ज़रा सा नीचे बड़े फूपाजी का लुंड बुआ की गांड से अंदर बहार हो रहा था वहीं पूर्वी दीदी अपनी मम्मी की छूट चाटने लगी... बुआ तो इस तिहरे हमले से झटपटा uthi....gand में जेठ का लुंड, छूट में बेटी की जीभ और मुँह में भतीजे का लुंड.... ममी ने एक पल के लिए मेरा लुंड मुँह से निकल दिया और सिसकारियां लेने लगी तो मैंने उनका सर पकड़ कर दोबारा लुंड मुँह में घुसा दिया और उनके मुँह को छोड़ने लगा उनके मुँह से घु घु की आवाज़ आ रही थी पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा tha...bua ज़्यादा देर तक ये हमला नहीं सह पाई और झड़ने लगी... झड़ने के साथ hi उनका शरीर ढीला पद gaya...or वो पीछे बड़े फूपाजी पर गिर गयी जिन्होंने उन्हें अपनी बाँहों में कास लिए... बड़े फूपाजी का लुंड अब भी बुआ की गांड में था पर वो अभी बिना हिले डुले उन्हें पकड़े हुए थे.. वहीं पूर्वी दीदी ने बुआ की छूट को चेतना जारी रखा और उनका सारा रास पि गयी... मैंने भी अपना लुंड बुआ के मुँह से निकल लिए और नीचे आकर पूर्वी दीदी के मुँह में दिया जिसे उन्होंने थोड़ा और चूसा... तब तक बुआ की भी हालत ठीक हो गयी तो मैंने पूर्वी दीदी के मुँह से अपना लुंड निकला और बुआ की छूट के ऊपर रख कर धक्का लगाया और उनकी छूट में घुसेड़ दिया......

बुआ की तो जैसे साडी जान बापिस आ गयी अपने अंदर दो लुंड लेकर.. बड़े फूपाजी को भी जैसे ये एहसास हुआ की मैंने अपना लुंड बुआ की छूट में घुसेड़ दिए है वो भी उत्तेजित हो गए और नीचे से बुआ की गांड मरने लगे वहीं मैं उनकी छूट में पूरा लुंड डालकर तगड़े झटके मरने लगा...

Bua-aaahhh बछ्ह ह्म्म्मम्म्म्म bhaaaaiiiiiiiiiiii सायबबबबबबबबब ooooooooohhjhjhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh फआयआयड दाहाआलो मेरिइइइइइइइइ छ्हःहूऊऊत orrrrrrrrrrrr गांण्ड्ड्ढड मज़ाआ आए रहा है... पूर्वी दीदी उठी और उठ कर पहले मुझे किश किआ और फिर अपनी मुम्ममय के मुँह में जीभ डालकर चूसने लगी... और फिर अपनी मुम्ममय की छूछीयों को चूसने lagi...main हाथ से पूर्वी दीदी की गांड को सहलाने लगा जो उनके झुके होने की वजह से मेरे करीब थी... वही बड़े फूपाजी अपना हाथ बढ़ा कर दीदी की छूछीयो को दबा रहे थे... दीदी ने भी अपनी मुम्ममय की छूछीयों से मुँह हटाया और बड़े फूपाजी के होंठों पर रख दिया और दोनों एक दुसरे के होंठों के रास को पीने lage...phir बुआ ने मुझसे हटने को कहा और मैंने बुआ की छूट से लुंड निकल लिए तो बुआ बड़े फूपाजी के लुंड से उठकर कड़ी हुई तो उनका लुंड बुआ की गांड से निकल गया... और वो तुरंत पलट कर दोबारा बड़े फूपाजी की तरफ अपना मुँह करके बैठ गयी और उनका लुंड अपनी छूट में ले लिए वहीं बुआ ने हाथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़ा और पीछे अपनी गांड के छेड़ पर रख दिया.. बड़े फूपाजी का लुंड पहले hi उनकी छूट में घुस चूका था और वो अपने हाथो से बुआ की बड़ी छूछीयों को मसल रहे the...maine भी पीछे से धक्का लगा कर बुआ की गांड में लुंड पूरा दाल दिया... और फिर बिना रुके मैं और बड़े फूपाजी बुआ को मिलकर छोड़ने लगे कुछ झटके बाद hi हम एक ले बनाकर बुआ के दोनों छेड़ो को छोड़ रहे थे....





बुआ की सिसकारियां ये साफ़ बता रही थी की उन्हें कितना मज़ा आ रहा था... मेरा लुंड बुआ की गांड में पूरा घिस घिस कर जा रहा tha...unki गांड का छही मेरे लुंड के चारो तरफ एक रिंग बनाकर लिप्त हुआ tha...wohi उनकी छूट में बड़े फूपाजी अपने लुंड से उन्हें मज़ा दे रहे थे... तभी मेरे पीछे से पूर्वी दीदी उठी और बड़े फूपाजी के मुँह पर अपनी छूट रखकर बैठ गयी बड़े फूपाजी ने भी अपनी जीभ निकल कर अपनी बेटी जैसी भतीजे की छूट का स्वागत किया... पूर्वी दीदी की पीठ बुआ की तरफ थी और वो अपनी छूट चतवते हुए आगे की तरफ झुक गयी वहीं बुआ ने अपना सर झुकाके अपना मुँह पूर्वी दीदी की गांड पर लगा दिया और गांड के छेड़ को चाटने लगी फिर जीभ दाल कर उससे कुरेदने लगी.... पूर्वी दीदी इस दोहरे हमले से सिहर उठी... उनकी छूट उनके ताऊजी चाट रहे थे तो वहीं गांड उनकी अपनी मुम्ममय... बड़ा hi कामुक दृषिअ बना हुआ था..

बड़े फूपाजी नीचे थे तो वहीं बुआ उनके ऊपर उनका लुंड छूट में लिए हुए थी मैं बुआ के पीछे से उनकी गांड मार रहा था दूसरी और बड़े फूपाजी के मुँह पर पूर्वी दीदी की छूट थी और वो उसे चाट रहे थे वहीं बुआ पीछे से अपनी बेटी की गांड में जीभ डालकर चाट रही थी.... पूर्वी दीदी के मुँह से सिसकारियां और चीखे निकल रही थी....

पूर्वी- बहुत मज़ा आए रहा है ताऊ जी ऐसे hi छतो मेरी छूट अह्ह्ह मा डालो अपनी जीभ मेरी गांड में अह्हह्हंदर tak....karma मार मेरी माँ की गांड और तेज़ और तेज़ ...ताऊजी आप भी और तेज़ छोड़िये माँ को...

हम चारो लोग hi अपनी मस्ती में मगन थे वहीं दूसरी और भी उतनी hi कामुक चुदाई चल रही थी...

बड़ी बुआ लेती हुई थी सिर्फ उनका सर वो अपनी कोहनियों पर उठाये हुए थी और फूपाजी का लुंड चूस रही thi..wohin उनकी टैंगो के बीच चारु ममी थी जो बड़ी बुआ ki...apane पति की बहन की छूट चाट रही थी झुककर और चारु ममी के पीछे विनीत था जो उनकी छूट में लुंड डालकर उन्हें छोड़ रहा था...





चारु ममी बड़ी शिद्दत से बड़ी बुआ की छूट चाट रही थी ... उन्होंने इससे पहले किसी भ्ही औरत के साथ कुछ नहीं किआ था ये उनका पहली बार था इसलिए उन्हें एक नयेपन का आनंद मिल रहा था और साथ में मज़ा भी आ रहा था वहीं विनीत चतु ममी जैसी गदराये हुए बदन की औरत को छोड़ कर बड़ा खुश था और तेज़ झटको से ममी की छूट छोड़ रहा tha....wohi फूपाजी अपनी भाभी से अपना लुंड चुसवा रहे थे आँखें बंद करके....

विनीत - आअह्ह्ह्ह ममी क्या choooooooooot है तुम्हारी मज़ा आआ रहा है.... अह्ह्ह्ह

और विनीत के धक्के और तेज़ हो गए.... तभी कुछ मीन्स बाद विनीत का लुंड अपनी छूट से निकल दिया और पकड़ कर अपने गांड के छहद पर रख दिया लगता है ममी को गांड मरवाने में अब बहुत मज़ा आ रहा tha...wohin फूपाजी भी अब नीचे लेट गए और बड़ी बुआ उनके ऊपर चढ़ गयी और लुंड अपनी छूट में ले लिए और उछाल उछाल कर छोड़ने लगी.... वहीं विनीत ने ममी को बीएड के सहारे खड़ा कर लिए और उनकी गांड मर रहा था....





फूपाजी और विनीत डुबो के hi धक्के. काफी तेज़ थे.... फूपाजी बड़ी बुआ को रोककर और उनकी कमर पकड़ काट नीचे से धक्के लगा रहे थे वहीं विनीत ममी की गांड बहुत तेज़ी से मर रहा था.....

तभी हमारी तरफ से एक चीख गूंजी जिससे मेरा ध्यान इधर आया तो वो चीख पूर्वी दीदी की थी जो बड़े फूपाजी की जीभ पर झड़ने लगी thi...wohin बुआ अभी भी पूर्वी दीदी की गांड चाट रही थी और जैसे hi उनका झड़ना बंद हुआ वो थक कर साइड में गिर गयी और आँखें बंद करके लेट गयी पूर्वी दीदी के अलग होते hi मैंने महसूस किआ बड़े फूपाजी की स्पीड भी बुआ की छूट में बढ़ने लगी और कुछ देर बाद फूपाजी ने बुआ को कसकर खुद से चिपका लिए और कुछ लम्बे लम्बे झटके मरने लगे तो बुआ ने झट से उठने को बोलै तो मैं उठ गया बूत मैंने अपना लुंड उनकी गांड से नहीं निकला फिर बुआ ने तुरंत hi बड़े फूपाजी का लुंड मुँह में भर lia...or अपने गले तक उतर लिए और कुछ hi पालो की देरी के बाद बड़े फूपाजी बुआ के मुँह में झड़ने lage...maine भी बुआ की खली छूट में हाथ रख कर छूट के डेन को मसलता हुआ बुआ की गांड मरने laga...bua ने बड़े फूपाजी के लुंड से निकलते रास को पि लिया और फिर उनके लुंड को चाट कर साफ़ कर दिया फूपाजी वहीं बैठे बैठे आराम करने लगे....

उधर विनीत की गति भी बहुत तेज़ हो गयी थी

विनीत- अह्ह्ह्हह मामी अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह बहुत mazaaaaaaaaaaa आ रहा haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii....

और फिर कुछ धक्को के बाद विनीत ने अपना रास चारु ममी की गांड में उढेल दिया... चारु ममी भी हांफती हुई नीचे लेट gayi...unke बगल में hi बड़ी बुआ और फूपाजी की चुदाई अब भी चालू थी तभी एक आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की चीख के साथ बड़ी बुआ का शरीर अकड़ा और फिर वो भी झड़ने लगी... फूपाजी के चेहरे से भी लग रहा था की वो भी अपने चरम पर hain....badi बुआ झड़ने के बाद फूपाजी के ऊपर से हटकर साइड में लेट गयी वहीं फूपाजी ने अपना लुंड अपने वागल. में लेती हुई चारु ममी के मुँह में दाल दिया और कुछ hi पालो में उन्होंने अपना रास चारु ममी के मुँह में छोड़ड़ड़ दिया... और ममी ने सारा रास पि लिया पर फिर भी आखिर की कुछ बूंदे ममी के चेहरे पर गिर गयी और फिर फूपाजी पीछे होकर बीएड के सिरहाने से टीकाकार बैठ gaye...ab सिर्फ में और बुआ बाकि थे और हम दोनों का खेल अब भी जारी था मैं बुआ की गांड मर रहा था...





बुआ मुझे और तेज़ कर्मा कह कर उकसा रही थी और मेरे धक्के भी तेज़ होते जा रहे the....thode टाइम में मेरी गति बहुत तेज़ हो गयी जो बुआ भी नहीं सह पाई और झड़ने लगी... उनकी कमर झटके खाने लगी और ुबकि चुत से पानी बहने लगा और अंत मैं वो एक बार Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh बोलकर शांत हो गयी... मैं अभी नहीं झाड़ा था तो मैं अभी भी लगा हुआ था मुझे अपने लुंड में वीर्य का दबाव महसूस हो रहा था मैं काफी करीब था झड़ने के लेकिन तभी मुझे कुछ याद आया और मैंने बुआ की गांड से लुंड निकल lia...mere हटते hi बुआ ज़मीन पर बैठ gayi....main जल्दी से चारु ममी के पास गया और उनके पैरो के बीच आकर अपना लुंड उनकी छूट में घुसेड़ दिया और धक्के मरने लगा और कुछ झटको बाद hi मेरे लुंड ने रास की पिचकारी छोड़ दी... मैंने अपने लुंड को जड़ तक ममी की छूट में घुसेड़ रखा tha...or उनकी छूट को अपने रास से भर diya...jab मेरा झड़ना ख़त्म हुआ तो मैंने लुंड बहार निकला तो बड़ी बुआ ने आगे बढ़कर मेरा लुंड मुँह में ले लिए और चाट चाट कर साफ़ कर दिया.... और फिर मेरे लुंड को निकल कर अपना मुँह चारु ममी की छूट पर लगा दिया.... और छूट में से बहकर बहार आ रहे मेरे रास को चाटने लगी... पूर्वी दीदी भी उठ कर आ गयी और बड़ी बुआ की टैंगो के बीच जाकर उन्हें खोला और फिर बुआ के पूरे शरीर को थोड़ा घुमा दिया और फिर अपना मुँह बड़ी बुआ की छूट में लगा diya...main और फूपाजी बीएड से उठ गए और उन्हें पूरी जगह di...ab बड़ी बुआ चारु ममी की छूट चाट रही thi...or पूर्वी दीदी बड़ी बुआ की तभी पूर्वी दीदी को अपनी टैंगो के बीच कुछ महसूस हुआ उन्होंने देखा तो बुआ यानि उनकी मुम्ममय थी जो उनकी टैंगो को खोल चुकी थी और अपना मुँह उनकी छूट में लगा रही थी.... तभी चारु ममी ने बुआ की टैंगो को पकड़ कर अपनी और खींच लिए अब बुआ की छूट चारु ममी के मुँह के पास थी तो उन्होंने अपना मुँह बुआ की छूट पर लगा दिया और चाटने लगी.... हम सरे मर्द आँखें फाड़ के ये नज़ारा देख रहे the...bed पर एक चैन बानी हुई थी... कोई किसी की छूट चाट रही थी तो कोई अपनी छूट किसी से चटवा रही थी





बुआ पूर्वी दीदी की छूट चाट रही थी पूर्वी दीदी बड़ी बुआ की तो बड़ी बुआ चारु ममी की और चारु ममी बुआ ki....bahut hi मस्त नज़ारा था ये ...चार ोारतें एक hi परिवार की इस कामुक दृषिअ की भागीदार thi....is नज़ारे को देखकर मेरा लुंड तो दोबारा तन गया था वहीं मैंने देखा फूपाजी और विनीत भी अपने लुंड को सहला रहे थे और उनका लुंड भी तन रहा tha...bade फूपाजी तो बस आँख गड़ाए देखे जा रहे थे और अपने लुंड को मसल रहे the...halanki उनका लुंड अभी खड़ा नहीं हुआ था ....

ध्यान से देखा बीएड पर तो दिखा अब चारु ममी की जीभ बुआ की गांड में है और उंगलिया छूट में हैं वहीं बुआ भी पूर्वी दीदी की गांड चाट रही thi...or छूट के डेन को सहला रही थी... पूर्वी दीदी अपनी तै की छूट में जीभ डेल हुई थी और गांड में दो उंगलियों को अंदर बहार कर रही thi....wohin बड़ी बुआ चारु ममी की गांड के छहद को अपनी जीभ से छोड़ रही thi...or छूट को सहला रही थी... तभी थोड़ी देर बाद बीएड से दबी हुई आवाज़ें आने लगी जो इस बात का संकेत थी की कोई झड़ंने वाला है और चारु ममी ने सबसे पहले अपनी छूट का पानी बहा दिया जिसे बड़ी बुआ शरबत की तरह चाटने lagi...udhar चारु ममी झड़ते हुई बुआ की छूट को और कसके छोड़ रही थी और गांड में भी जीभ अंदर तक घुसेड़ दी तो बुआ से बी सहा नहीं गया और बुआ भी झड़ने लगी चारु ममी के ऊपर जिसे चारु ममी चाटकर साफ करने लगी वहीं माँ के झड़ते hi बेटी ने भी अपनी रसधार अपने माँ के मुँह में छोड़ दी... और फिर बड़ी बुआ भी पूर्वी दीदी की जीभ पर झड़ने lagi....jhadne के 5 मीन्स बाद तक वो लोग ऐसे hi लेती रही... और फिर उठ कर बैठ गयी तो एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी कभी कोई किसी के होंठों को चूसता तो कभी कोई किसी के





उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो भूल चुकी हैं के हम सब भी हैं कमरे mein...jab एक दुसरे के होंठो से फुर्सत मिली तो फिर छूछीयो पर टूट पड़ी...

बड़ी bua...apani देवरानी की छूछीयो यानि बुआ की छूछीयो को चूसने लगी तो वहीं चारु ममी और दीदी बड़ी बुआ की एक एक छुच्छी को चूस रही थी... और साथ में एक दुसरे की छूछीयो को भी दबा रही थी... bua...badi बुआ की छूछीयो को को मसलते हुए अपनी छूछीयो को चुसवा रही थी... ऐसे hi मुँह और छुछियां बदलती रही जब तक हर एक मुँह ने हर एक छुच्छी का स्वाद न चख लिए हो... ये सब देख कर मेरा लुंड तो दोबारा लोहे की तरह कड़क हो गया था और मैं बीएड से उठा और उनके पास चल दिया...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट mein...aap लोग प्लीज कमैंट्स करके बताएं कैसी लगी आपको ये अपडेट शुक्रिया...
 
ऐसे hi मुँह और छुछियां बदलती रही जब तक हर एक मुँह ने हर एक छुच्छी का स्वाद न चख लिए हो... ये सब देख कर मेरा लुंड तो दोबारा लोहे की तरह कड़क हो गया था और मैं बीएड से उठा और उनके पास चल दिया...

अपडेट 50

मैं बीएड के करीब पंहुचा hi था की बड़ी बुआ ने झट से मुझे पकड़ लिया और मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी और खींचा और फिर मुँह में भर lia...mujhe तो ये hi चाहिए tha...badi बुआ का गरम मुँह और जीभ मेरे लुंड पर अपना कमाल दिखने लगे और मुझे उनके मुँह में थोड़ी रहत मिली... मेरी पहल देखकर बाकि सब भी तयारी में लग गए... विनीत ने अपनी मम्मी यानि बुआ को पकड़ा और उन्हें बिठाकर उनकी छुछियां चूसने लगा वहीं बुआ भी अपने बेटे का लुंड सहला रही थी... बड़े फूपाजी ने चारु ममी को अपने पास बुला लिए तो पूर्वी दीदी अपने पापा के पास गयी और फूपाजी ने उनके होंठो को चूसना शुरू कर diya....to इस तरह ये कामुक खेल फिर से शुरू हो गया...

me-Aaahh बुआ क्या मस्त चूसती हो... और अंदर तक लो हम्म्म

बड़ी बुआ मेरे लुंड को अंदर तक ले कर चूसने lagi...maine बड़ी बुआ की टैंगो को पकड़ कर अपने सर की तरफ घुमा लिए और उनकी छूट नेरे मुँह के सामने आ गयी और मैंने जीभ निकल कर उनकी छूट पर फिरदी जिससे जीभ का एहसास छूट पर होते hi बड़ी बुआ के मुँह की पकड़ मेरे लुंड पर और टाइट हो gayi...or फिर मैं बिना किसी देरी किये उनकी छूट चाटने लगा... हम दोनों 69 की पोजीशन में th...wohin मेरे बगल में बाप बेटी का प्यार परवान चढ़ रहा था... पूर्वी दीदी टंगे खोल कर बीएड पर लेती हुई थी और उनके पापा यानि फूपाजी अपनी बेटी के पैरों के बीच बैठे हुए थे और उनका मुँह बेटी की छूट से लगा था.. उनकी जीभ बेटी की छूट ने अंदर बहार हो रही थी तो वहीं उनकी एक उंगली बेटी क गांड के छेड़ में घुसी हुई थी... पूर्वी दीदी ने एक हाथ से अपने पापा के सर को अपनी छूट में दबा रखा था तो वहीं दुसरे हाथ से अपनी एक छुच्छी को मसल रही थी और सिसकिया लेती हुई अपने पापा का उत्साह बढ़ा रही थी..

अगर बाप बेटी इतने मगन थे एक दुसरे में तो माँ बीटा कैसे पीछे रह सकते थे.. पूर्वी दीदी और फूपाजी के वागल में hi...bua नीचे बैठी हुई थी और अपने बेटे यानि विनीत के लुंड को हाथ से ऊपर नीचे कर रही थी और उसकी गोलियों को मुँह में लेकर चूस रही थी... विनीत का तो जैसे बुरा हाल tha...ohhh मुम्ममय आह्ह्ह्हह कहके तड़प रहा था पर बुआ अपने काम में लगी हुई थी विनीत पीछे बीएड पर गिर गया तो बुआ ने गोलियों को मुँह से निकला और अपनी दोनों छूछीयो को पकड़ा और लुंड को उनके बीच फंसा लिए और ऊपर नीचे करने लगी....

विनीत- अह्ह्ह मुम्ममय तुम्हारी छूछीयो के बीच लुंड को बहुत मज़ा मिल रहा hai...ahhhh टोपे पर जीभ से छतो...

बेटे की इच्छ्हा का पालन बुआ ने तुरंत अपनी जीभ निकल कर किआ और लुंड के टोपे पर जीभ फिरने लगी...

वहीं दूसरी तरफ चारु ममी बड़े फूपाजी का लुंड चूस रही thi....jo उनकी म्हणत से अपने पूरे रंग में आ चूका था... वहीं बड़े फूपाजी अपने सेल की बीवी का सर अपने लुंड पर दबा रहे थे और अपना पूरा लुंड उनके मुँह में डालने की कोशिश कर रहे थे और कुछ देर बाद उनकी ये कोशिश कामयाब हो गयी चारु ममी ने बड़े फूपाजी का पूरा लुंड अपने मुँह में ले कर गले तक उतर लिया... इसी के साथ बड़े फूपाजी के मुँह से कुछ गुर्राने जैसे आवाज़ निकलने lagi...or वो चारु ममी का सर पकड़कर उनके मुँह को छोड़ने lage...charu ममी के मुँह से बस गु गु गु की आवाज़ें निकल रही थी साथ में उनके होंठों के कोने से थूक टपक रहा tha...jo लुंड के अंदर बहार होने से बहार आ रहा था....

मैंने अपना ध्यान अब बड़ी बुआ की छूट से हटाकर गांड पर कर दिया था और अब उनकी गांड में अपनी जीभ को अंदर बहार कर रहा था... बुआ की गांड मेरी जीभ पड़ते hi सिकुड़ जाती और मेरी जीभ को जकड़ने की कोशिश karti...par उससे पहले hi मेरी जीभ बहार hoti...wohin दूसरी तरफ बड़ी बुआ ने भी अपना ध्यान लुंड से हटाकर मेरे ांडो पर लगा लिए था और मेरे दोनों गोलिओ को एक साथ मुँह में भरकर चूस रही thi...phir वो गोलिओ को निकलती और लुंड को एक मिनट तक चूसती गले के अंदर तक लेकर और फिर बापिस लुंड को निकल कर गोलियों को अगले एक मिनट तक चूसती वो ये प्रक्रिया बार बार मेरे लुंड पर दोहरा रही थी और मेरा लुंड तो जैसे लोहे की रोड बन चूका tha...main और बड़ी बुआ एक दुसरे को मौखिक सुख देने में व्यस्त थे तो वहीं मेरे बगल में दृश्य काफी तरक्की कर चूका tha..ab फूपाजी बैठे थे और उनका लुंड उनकी बेटी पूर्वी के मुँह में tha...jise वो बड़ी शिद्दत से चूस रही thi....phoopaji आँखें बंद करके अपने लुंड पर अपनी बेटी के मुँह का आनंद ले रहे थे वहीं उनके बगल में बुआ ने विनीत के लुंड को बहार निकल दिया था और उसकी तरफ पीठ करके उसके ऊपर बैठ रही thi...apane बेटे के लुंड को छूट के मुँह पर रखकर नीचे बैठ गयी और विनीत का लुंड उसकी माँ की छूट में समां गया... जिससे उसके मुँह से एक आअह्ह्ह्ह मुम्ममय की सिसकारी निकल गयी... जिसे सुनकर पूर्वी ने अपना सर उठाकर देखा... बेटी के मुँह से लुंड निकलते hi फूपाजी की भी आँखें खुल gayi...phir पूर्वी दीदी ने अपनी माँ की तरह hi पापा की तरफ पीठ की और उनके लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के मुँह पर टिकाया और नीचे सरकते हुए बैठ गयी जिससे उनके पापा का लुंड पूरी तरह उनकी छूट में समां gaya...or बाप बेटी दोनों के मुँह से hi एक सिसकारी निकल गयी....





फूपाजी नीचे से अपनी कमर उठा उठा कर बेटी को छोड़ने लगे वहीं विनीत भी अपनी मुम्ममय की कमर को पकड़ कर अपना लुंड अंदर बहार करने laga...wohin उनके बगल में मैं और बड़ी बुआ एक दुसरे में खोये हुए थे...

इस बीएड पर जहाँ ये हाल था तो वहीं दुसरे बीएड पर बड़े फूपाजी लेते हुए थे वहीं उनके ऊपर चारु ममी उनके लुंड को थूक से गीला करके अपनी दोनों छूछीयो के बीच में फंसा कर ऊपर नीचे कर रही... और फिर बड़े फूपाजी ने उन्हें अपने ऊपर की और खींच लिए और उनके होंठो को अपने होंठों में भर लिए और चूसने लगे... और साथ hi एक हाथ अपने पेट से नीचे लेजाकर अपने लुंड को पकड़ा और चारु ममी की छूट के ऊपर घिसने lage...or फिर छूट के मुँह पर लेकर अंदर की और धकेल दिया... जिससे उनका लुंड कुछ इंच चारु ममी की छूट में घुस गया... लुंड घुसते hi चारु ममी और आक्रामक होकर बड़े फूपाजी के होंठों को चूसने लगी साथ में hi अपने चूतड़ों को धीरे धीरे नीचे करके पूरा लुंड अपनी छूट में समां लिए और फिर अपनी गांड उछाल कर लुंड को अंदर बहार करने lagi...bade फूपाजी ने ममी के होंठों को छोड़ा और छूछीयो को चूसते हुए उनकी चुदाई करने लगे...

इधर मैंने भी अब अपना लुंड बड़ी बुआ की छूट में साल दिया था और उन्हें कुटिया बनाकर पीछे से उनकी छूट मार रहा था साथ में उनके बड़े चूतड़ों को मसल रहा था पूरे कमरे में थप थप थप की आवाज़ें आ रही thi....kahi से सिसकारियां तो कहीं से दबी हुई आवाज़ें निकल रही थी.... पारिवारिक चुदाई का खेल अपने चरम पर tha...badi बुआ को छोड़ते हुए मैं सोचने लगा... की एक महीने पहले ये परिवार कितना साधारण था और अब देखो माँ बेटे से चुद रही hai...beti बाप se...bua भतीजे से....

क्या ये सब मेरी वजह से हुआ है या ये इनके मन के अंदर की ख्वाहिश थी जो मैं बहार ले आया और अब पूरी भी करवा रहा हूँ... और मुझे एक बात और समझ में आई के असली मज़ा सब के साथ hi आता है... अकेले में मैंने इन सब औरतो को छोड़ा था और चाहता तो आगे भी छोड़ सकता था पर जितना मज़ा अभी सबके साथ आ रहा था पहले नहीं आया... खैर मैं अपने खयालो से बहार निकला और बड़ी बुआ की छूट पर ध्यान लगाया और तेज़ धक्को से उन्हें छोड़ने लगा ...

और तभी मैंने देखा के फूपाजी ने पूर्वी दीदी को उठाया और उठाकर अपने साथ दुसरे बीएड पर जहाँ बड़े फूपाजी के ऊपर चारु ममी चुद रही थी वहां ले गए और फिर उनके बगल में बैठ गए और पूर्वी दीदी को भी घुमाकर अपने ऊपर बिठा लिया और लुंड को दोबारा पूर्वी दीदी की छूट में दाल दिया...

अब दोनों भाई भाड़े फूपाजी और फूपाजी अगल वागल में एक hi पोजीशन में बैठे थे और दोनों एक hi पोजीशन में अपने ऊपर बैठी ोारत को छोड़ रहे the....jahan बड़े फूपाजी चारु ममी को अपने सीने से कसके चिपका कर नीचे से गांड उठा कर छोड़ रहे थे तो फूपाजी भी अपने भाई की नक़ल करते हुए बिलकुल उसी तरह अपनी बेटी की छूट मार रहे थे....

पूर्वी- अह्ह्ह्ह पाआआआपा mazaaaaaaaaaa aaaaaaaaaaaaajhhhhhhhhh रहा haiiiiiiiiiiiiiiii

फूपाजी- hmmmmmmmmmm अह्ह्ह

वहीं चारु ममी और बड़े फूपाजी भी बस आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह करके सिसकिया लेते हुए चुदाई कर रहे थे.......

मैंने जब उनकी तरफ देखा तो मैं भी बुआ को छोड़ते हुए उनके करीब ले गया और बीएड के नीचे उन्हें घोड़ी बना कर छोड़ने लगा... मेरे पीछे पीछे विनीत और बुआ भी आ गए और विनीत भी मेरी तरह घोड़ी बनाकर पीछे से अपनी मुम्ममय को छोड़ने लगा...

हम दोनों नीचे बड़ी बुआ और छोटी बुआ को छोड़ रहे थे वहीं हमसे बगल में बीएड पर बड़े फूपाजी और फूपाजी चारु ममी और पूर्वी दीदी को...





मैंने धक्के देते हुए बड़ी बुआ को थोड़ा आगे बढ़ाया तो वो आगे हो गयी और फिर अपनी गर्दन आगे करके फूपाजी की गोलियों को चाटने लगी इसका एहसास होते hi फूपाजी का लुंड पूर्वी दीदी की छूट में और टाइट हो गया... और उनके झटके बी थोड़ी और तेज़ हो गए....

बड़ी बुआ फूपाजी की गोलियों को मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं बुआ की छूट को और तेज़ी से मरने लगा... विनीत भी अपनी मम्मी को और तेज़ झटको से छोड़ रहा tha...or बड़े फूपाजी भी चारु ममी को अपने सीने से लगाए हुए चोदे जा रहे थे...... .

फिर बड़ी बुआ ने फूपाजी की गोलिओ को मुँह से निकला और ऊपर उठाकर अपनी जीभ पूर्वी दीदी के गांड के छेड़ पर rakhdi...or पूर्वी दीदी और फूपाजी के हर धक्के के साथ जीभ दीदी की गांड को कुरेदने लगी जिससे पूर्वी दीदी का मज़ा और बढ़ गया...

पूर्वी- pappppaaaaaaaaa......mmmmmmmmm ाआईईईइस्सस्सस्स हठियईईई....

पूर्वी दीदी की आवाज़ सुनकर बुआ ने बगल में देखा और फिर खुद भी आगे बढ़कर अपनी जीभ चारु ममी की गांड के छेड़ से भिड़ा थी जिसके नीचे छूट में बड़े फूपाजी का लुंड तेज़ी से अंदर बहार हो रहा था....

बुआ की जीभ गांड पर पड़ते hi चारु ममी भी पूर्वी दीदी की तरह सिसकिया लेने लगी..

चारु ममी- आह्हः हॉँण्णन didiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii जीईजाजी ऐसे hi छहःछहुआउद्द्द्दिये मममममुज्ज्ज्झहहह्हीईई....

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह mainnnnnnnnnnnngayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

और इसी के साथ hi चारु ममी झड़ने लगी और बड़े फूपाजी के लुंड पर अपना पानी छोड़ने लगी...

उधर चारु ममी के झड़ने में देर नहीं हुई की पूर्वी दीदी भी दोहरा हुम्ला नहीं सह पाए और अपने पापा के लुंड को अपने रास से भीगा दिया......

उनका झड़ना देख कर मेरे और विनीत के धक्के भी काफी तेज़ हो गए थे और हम दोनों hi बुआ और बड़ी बुआ को काफी तेज़ धक्को से छोड़ड़ड़ड़ रहे थे पर उनकी जीभ अपने सामने की गांड पर होने की वजह से उनके मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी...

पूर्वी दीदी का झड़ना जब बंद हुआ तो थोड़ी देर बाद फूपाजी ने उन्हें थोड़ा उठा कर अपना लुंड उनकी छूट से निकला और फिर थोड़ा नीचे गांड के छेड़ पर रख diya...wo अब अपनी बेटी की गांड मरना चाहते थे... पूर्वी दीदी ने भी अपने पापा की इच्छ्हा पूरी करते हुए अपने चूतड़ों को थोड़ा फैलाकर अपना वजन नीचे छोड़ दिया और फिर अपने पापा के लुंड को अपनी गांड में समाती चली गयी... फूपाजी का लुंड आधे से ज़्यादा उनकी बेटी की गांड ने घुस gaya...or जो आधा बचा था उसे उन्होंने एक करारे झटके के साथ अंदर कर diya..jiske साथ पूर्वी के मुँह से एक चीख निकल गयी...

मैंने भी बड़ी बुआ को अपनी तरफ खींचा और अपना लुंड उनकी छूट से निकल कर उनकी गांड के छेड़ पर रखा और एक तगड़ा धक्का मारा जिससे पूरा लुंड एक बार में उनकी गांड में घुस gaya...par बुआ के मुँह से एक बड़ी तेज़ चीख निकल गयी.... पहले से चूड़ी होने के कारन गांड थोड़ी खुली हुई थी फिर बी बड़ी बुआ को थोड़ा दर्द ज़रूर हुआ... और मैं फिर बिना रुके बड़ी बुआ की गांड मरने laga.....bua भी और तेज़ और तेज़ बोलकर मेरा उत्साह बढ़ने लगी...

उधर चारु ममी के झड़ने के बाद चारु ममी को बड़े फूपाजी ने थोड़ा ऊपर उठाया तो उनका लुंड ममी की छूट से निकल गया जिसे तुरंत बुआ ने आगे बढ़कर अपने मुँह में ले लिए... विनीत पीछे से लगातार बुआ को चोदे जा रहा था...

बुआ बड़े फूपाजी का लुंड चूसने लगी और चारु ममी को उठाकर फूपाजी ने ऊपर कर लिया और फिर चारु ममी बड़े फूपाजी के मुँह पर अपनी छूट टीकाकार बैठ गयी जिसे बड़े फूपाजी बड़े चौ से अपनी जीभ निकल कर चाटने लगे.. तो चारु ममी दोबारा से गरम होने लगी

चारु ममी- ओह्ह्ह्हह jeeeejjjaaaajiiii....meri छुटटटटट...

मैंने बड़ी बुआ को उठाया और उन्हें साइड बीएड के दूसरी तरफ लिटाया और पीछे लेटकर उनकी गांड मरने लगा...

बुआ विनीत से गांड मरवाते हुए बड़े फूपाजी का लुंड चूस रही thi...jo चारु ममी को अपने चेहरे पर बिठाकर उनकी छूट चाट रहे थे...

उनके बगल में फूपाजी अपनी बेटी यानि पूर्वी दीदी को अपने ऊपर बिठा कर उनकी गांड मर रहे थे...

तभी विनीत के धक्के भी काफी तेज़ हो गए और काफी तेज़ धक्को से वो अपनी मुम्ममय को छोड़ने laga...jise बुआ ज़्यादा देर तक सह नहीं पाई और झड़ने lagii...bua के झड़ने के बाद विनीत ने अपना लुंड उनकी छूट से निकला और मेरे पास आकर बड़ी बुआ के मुँह में दाल दिया....

उधर बुआ झड़ने के बाद जब शांत हुई तो फिर से बड़े फूपाजी के लुंड को चूसने लगी...





चारु ममी अपनी छूट चटवाने से काफी उत्तेजित हो गयी थी और बड़े फूपाजी को और तेज़ चाटने को कह रही थी...

चारु ममी- जीजाजी अंदर तक chaaatiye.....kha जाआएं मेरी छूट ko...maaaaaaaa........

और सतह में अपनी छूछीयो को मसल रही थी...

वहीं पूर्वी दीदी की गांड से फूपाजी का लुंड अंदर बहार हो रहा था और फूपाजी अपना मुँह आगे करके अपनी बेटी की बड़ी बड़ी छूछीयों को चूस रहे थे...

पूर्वी दीदी तो बस ओह्ह्ह पापा के नाम का जाप करती हुई अपनी गांड मरवाने में व्यस्त थी....

वहीं दुसरे बीएड पर बड़ी बुआ मेरे और विनीत के लुंड की सेवा कर रही थी मैंने बड़ी बुआ के पीछे लेटकर साइड होकर उनकी गांड में लुंड को काफी तेज़ी से अंदर बहार कर रहा था मेरा एक हाथ उनकी चूतड़ों पर था तो वहीं दुसरे से मैं उनकी एक छुच्छी को मसल रहा tha...wohin अब विनीत अपनी तै जी के मुँह को पकड़ कर अपनी कमर हिला हिला कर छोड़ रहा tha...bua के मुँह से बस गु गु गु की आवाज़ें निकल रही थी.....

दुसरे बीएड पर फूपाजी ने फिर से पूर्वी दीदी की गांड से लुंड निकल कर दोबारा उनकी छूट में दाल दिया और उनके होंठो को चूसते हुए छोड़ने लगे... इधर बड़े फूपाजी ने अपने ऊपर से चारु ममी को हटाया और फिर बुआ को अपनी तरफ खींचा जिससे बुआ के मुँह से उनका लुंड निकल गया और बड़े फूपाजी बुआ के होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगी...

चारु ममी बड़े फूपाजी के चेहरे से उतारकर हांफती हुई वहीं बैठ gayi....shayad ममी ने लगातार इतनी देर तक कभी चुदाई का खेल नहीं खेला होगा इसलिए थक गयी थी...

पर विनीत को उनका ये आराम करना नहीं भय और उसने जाकर ममी को उठाकर तुरंत घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लुंड ममी की गांड पर रखकर एक धक्का दिया तो लुंड ममी की गांड में घुस gaya...jisse उनकी एक चीख निकल गयी... फिर विनीत ने दो तीन और धक्क्के मरे और अपना पूरा लुंड ममी की गांड में दाल diya...or फिर उनकी कमर पकड़ कर उन्हें छोड़ने लगा...

बड़े फूपाजी ने बुआ के होंठों को थोड़ी देर चूसा और फिर अपने होंठों को हटाया और फिर खड़े हो गए... और अपने भाई और भतीजी को चुदाई करते हुए देखा जहाँ पूर्वी दीदी फूपाजी के ऊपर बैठ कर अपनी छूट अपने पापा से मरवा रही थी तो... फूपाजी के हाथ अपने आप उनके लुंड पर पहुंच गए और वो फिर घूम कर पूर्वी दीदी और फूपाजी के पैरो के बीच में गए और अपने छोटे भाई के लुंड को उसकी बेटी की छूट में आते जाते देखने लगे और फिर अपने लुंड पर अपने हाथो से थूक लगाया और फिर अपने लुंड के टोपे को अपनी भतीजी यानि पूर्वी दीदी की गांड के छेड़ पर टिका दिया और फिर तुरंत hi एक धक्का मारा तो उनका लुंड दो इंच दीदी की गांड में घुस गया....

पूर्वी दीदी- aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaa

इसी चीखके साथ पूर्वी दीदी ने अपनी गर्दन घुमाकर देखा तो उनके ताऊजी पीछे थे और उनका लुंड दीदी की गांड में था दीदी ने मुस्कुरा कर ताऊ जी को आगे बढ़ने का इशारा kia..phir क्या था ताऊ जी ने दो तीन करारे झटके लगाए और पूर्वी दीदी की गांड में अपना लुंड पूरा घुसेड़ दिया.... फूपाजी ने भी अपने बड़े भाई की इस काम में मदद की अपनी बेटी के चूतड़ों को फैलाकर... जैसे अपने बड़े भाई के लुंड का अपनी बेटी की मखमली गांड में स्वागत कर रहे हो...

क्या दृषिअ था ये भी एक बाप के ऊपर उसकी बेटी उसका लुंड अपनी छूट में लेकर बैठी थी... वहीं बाप बेटी का दूसरा छेड़ अपने बड़े भाई के लुंड के लिए परोस रहा tha....mano कह रहा हो की लीजिये भैया आप भी इस लजीज़ और रसभरे पकवान का स्वाद चख कर देखिये...

आखिर पूर्वी दीदी के अंदर दोनों लुंड पूरी तरह समां चुके थे छूट में बाप का तो गांड में बाप जैसे ताऊ जी ka...dono का ये प्रेम पाकर पूर्वी की तो ख़ुशी का ठिकाना hi नहीं रहा.... वहीं दोनों भाइयों ने अपने आपस के प्यार का प्रतीक देते हुए धक्के लगाना चालू काट दिया और बहुत जल्द hi एक ले प्राप्त कर्ली जिससे दोनों पूर्वी को अचे से छोड़ने lage...apane दोनों छूड़ों के इस मर्दन से पूर्वी दीदी तो किसी और hi दुनिया में थी...

बगल में विनीत चारु ममी की गांड को तेज़ी से मार रहा था





पूर्वी- आह्ह्ह्हह्ह मायआ...... देखऊऊऊऊ प्पपाआआ और ताऊउउउउ जज्जीी मिलकर मुझेईईई चुड्ड़र्ड रहीये हैं..... आह्ह्ह्हह्ह मायआ ुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह बबहटतर mazaaaaaaaaaa. आए रहा hai...ahahhhhhh...

बड़े Phoopaji-haannnn आअह्हह्ह्ह्हह क्या गांड पाई है तूने पूर्वी बीटा बिलकुल अपनी माँ Jaisi....garam और बिलकुल मखमली.... आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह छोटे भठाई बड़ी मास्स्सरत्रत्त्त है तेरी बेटीईई की गानंदददद....

फूपाजी- हन्नन bhaiyaaaaaaaaaaaaaaa आपकी भीईई टूओ बेटीईई है poorvi.....jitna मेरा हक़क़क़क़क़ है उतना hi अआप्का. है...

भाइयों के इस प्यार का असर पूर्वी के चेहरे पर साफ़ दिख रहा था जो आअंखें बंद करके दो लुंड से छोड़ने का सुख भोग रही थी वहीं उनके बगल में विनीत अपनी बहन को अपने पापा और ताऊजी से चुड़ते हुए देख रहा tha.or..charu ममी की गांड को तूफानी धक्को से छोड़ रहा था

..चारु ममी की नज़र पूर्वी दीदी की चुदाई पर थी.....

बुआ वहां से उठकर मेरे और बड़ी बुआ के पास आ गयी जहाँ ने बड़ी बुआ की गांड मर रहा था ...और आकर अपना सर झुकाके बड़ी बुआ के होंठों को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगी...

मैंने अपना लुंड बड़ी बुआ की गांड से nikala...or बुआ को इशारा किआ तो बुआ ने अपनी जेठानी की गांड से निकला हुआ लुंड तुरंत बिना किसी झिझक के अपने मुँह में भर लिए और चूसने lagi...bua के हवस और रंडी पैन को देखते हुए मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ gayi...jab बुआ ने मेरा लुंड एक डैम साफ़ कर दिया तो मैंने बड़ी बुआ को सीधा लिटा दिया पीठ पर और उनके ऊपर बुआ को... उल्टा कर के झुका दिया जिससे बड़ी बुआ और बुआ दोनों 69 की पोजीशन में आ गयी और एक दुसरे की छूट सामने आते hi भूखी शेरनियों की तरह एक दुसरे की छूट पर टूट पड़ी दोनों देवराज और जेठानी....

बुआ जहाँ जीभ को नुकीला कर करके अपनी जीभ बड़ी बुआ की छूट चाट रही थी वहीं बड़ी बुआ बुआ के बड़े चूतड़ों को मसलते हुए छूट छात्रहि थी...

मैं भी कब तक दूर रहता तो मैं बुआ के पीछे और बड़ी बुआ के सर की तरफ गया और अपना लुंड बड़ी बुआ जो बुआ की छूट चाट रही थी उनके पास कर दिया तो उन्होंने अपना मुँह छूट से हटाया और झट से लुंड अपने मुँह में ले लिए और चाटने lagi....bua से करीब 1 मिनट तक लुंड चुसवाने के बाद मैंने अपना लुंड उनके मुँह से निकला तो वो बापिस अपनी देवरानी की छूट चाटने लगी और मैंने अपने लुंड को बुआ की छूट के ऊपर उनकी गांड के छेड़ पर रखकर अंदर घुसेड़ diya...jiske घुसते hi बुआ के मुँह से एक दबी हुई आवाज़ निकली क्यूंकि उनका मुँह बड़ी बुआ की छूट चाटने में लगा हुआ था.. और फिर मैं बुआ की गांड मरने लगा वहीं वो दोनों एक दुसरे की छूट चाटने में व्यस्त थी...





जहाँ एक तरफ दो भाइयों का प्यार परवान चढ़ रहा था तो उनकी पत्नियां कैसे पीछे रह जाती और एक दुसरे को मौखिक सुख देकर वो अपने प्यार का परिचय दे रही थी...

पर पूर्वी दीदी के लिए अब ये hi भाइयों का प्यार असहनीय होता जा रहा tha....apane पापा और ताऊ जी के लुंड को एक साथ लेकर वो हवस और कामुकता के सागर में गोते लगा रही थी.. दोनों लुंड का प्रहार पूर्वी दीदी से और ज़्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं हुआ और उनके मुँह फटा का फटा रह गया पर उनके मुँह से एक आवाज़ नहीं निकली और इसी के साथ पूर्वी दीदी झड़ने लगी उसका पूरा शरीर कामोत्तेजना में झटके खा रहा था और आखिर वो एक बिना जान की गुड़िया की तरह अपने पापा के सीने पर गिर gayi...par दोनों के लुंड अब भी उसके दोनों छेड़ो से अंदर बहार हो रहे थे पर पूर्वी की हालत ऐसी थी की अब उससे छोड़ना तो दूर आँखें भी नहीं खोल रही thi...to दोनों भाइयों ने अपने अपने लुंड को पूर्वी दीदी की छूट और गांड से निकला फिर पूर्वी को साइड में लिटा दिया और वो हांफते हुए आराम करने lagi...wohin विनीत ने जब ये देखा की उसकी बहन झाड़ कर साइड में लेट गयी है तो उसने चारु ममी की गांड से अपना लुंड निकला और उन्हें आगे धक्का देते हुए अपने पापा के ऊपर बिठा दिया और फूपाजी ने भी अपने लुंड को तुरंत ममी की छूट पर सेट किया और फिर ममी के बैठते hi लुंड उनकी छूट में समां gaya...unke लुंड को छूट में लेते hi फूपाजी ने चारु ममी को अपने सीने से चिपका लिए और बड़े फूपाजी तो जैसे इसी इंतज़ार में थे और उन्होंने अपना लुंड चारु ममी की गांड पर टिका के अंदर धकेल दिया और फिर कुछ hi झटको के बाद दोनों भाइयों के लुंड एक बार फिरसे छूट और गांड में पूरी तरह समां gaye...or फिर दोबारा से उसी ले में दोनों चुदाई करने लगे बस फ़र्क़ सिर्फ इतना था के तब पूर्वी दीदी थी और अब चारु ममी... जिन्होंने यहाँ आने से पहले कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा की उन्हें यहाँ आकर अपनी ज़िन्दगी का सबसे ज़्यादा चुदाई का अनुभव milega...kahan वो एक लुंड के लिए तरसती थी वहीं आज दो लुंड उनके शरीर में समाये हुए थे...

विनीत चारु ममी को अपने पापा और ताऊजी के हवाले करके कमरे से बहार निकल गया शायद मूतने गया होगा...

पूर्वी को अब कुछ होश आया था पर वो अभी भी वैसी hi पड़ी हुई बाकि सबकी तरफ देख रहीथी....

चारु ममी आअह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह की सिसकारियां लेते हुए चीड़ रही थी...

फूपाजी- अह्ह्ह्ह चारु मज़ा आ रहा है नाहा हम दोनों भाइयो के लुंड से या हमारी खइरादरी में कोई कमी रह गयी हो तो....

बड़े फूपाजी- हाँ बड़ा नसीब वाला ह मेरा साला जो ऐसा माल मिला है उसे पत्नी के रूम में... आह्हः क्या गदराई गांड है तेरी....

चारु ममी तो कुछ बोलने की हालत में नहीं थी... वो बस आँखें बंद करके दोहरे आनंद का मज़ा ले रही थी....

दुसरे बीएड पर मैं काफी देर तक बुआ की गांड मरता रहा और वो दोनों एक दोप्सरे की छूट चाटती रही और फिर बुआ झड़ने lagi...choot में बड़ी बुआ की जीभ और गांड में मेरा मुसल बुआ आनंद को और नहीं सह पाए और झाड़ गयी बुआ के झड़ते hi मैंने उनकी गांड से लुंड निकला और उन्हें बड़ी बुआ के ऊपर से हटा दिया और बड़ी बुआ को साइड की तरफ करके पीछे से उनकी गांड में लुंड दाल diya...or धक्क्के मरने laga....badi बुआ भी बड़ी ख़ुशी से अपनी फंड मरवाने लगी वहीं बुआ पीछे बैठकर हमारा उत्साह बड़ा रही थी..





बड़ी bua-aaahhh मेरा बीटा Karmaaaaaahhhhhhhhhhhh ऐसे hi मर अपनी बुआ की गांड बछ्ह ऐसे hi...

बुआ तो शायद ज़्यादा hi उत्तेजित हो गयी थी...

बुआ- हाँ कर्मा फाड़ दे दीदी की गांड अपने मुसल se....dikhade इस रंडी को अपने लुंड का dum....gaand फाड़ के रख दे इसकी..

मैं बुआ की बातों को सुनकर थोड़ा चौंका भी वहीं उत्तेजित हो गया ये hi हाल कमरे में मौजूद हर शक्श का tha...par बुआ के ऐसे बोलने ने आग में घी का काम किआ और सबकी उत्तेजना को और बढ़ा दिया और सबके धक्के और तेज़ हो gaye....main भी बुआ को तेज़ी से छोड़ने laga...wohin बड़े फूपाजी और फूपाजी ने चारु ममी को अब पलट लिए था अब चारु ममी की पीठ फूपाजी की तरफ थी जबकि मुँह बड़े फूपाजी की or...or उनका लुंड उनकी छूट में था और फूपाजी का गांड में.. और दोनों उछाल उछाल कर उनको छोड़ रहे थे...

उधर विनीत भी अब बापिस आ गया था और आते hi वो हमारे पास आया और अपने लुंड को अपनी मुम्ममय के मुँह में दाल दिया जिसे बुआ ने बिना किसी झिझक के चूसना शुरू कर diya....thodi देर लुंड चुसवाने के बाद विनीत ने अपना लुंड निकला और दुसरे बीएड पर चला गया और फिर जहाँ पूर्वी लेती हुई थी उसके पीछे जाकर लेट गया और अपना लुंड अपनी बहन के चूतड़ों के बीच रखकर घिसने लगा.. पूर्वी को विनीत के लुंड का एहसास हुआ तो वो भी और पीछे होकर अपने भाई से चिपक gayi..vineet ने भी बड़े प्यार से अपनी बहन को अपनी बाँहों में भर कर खुद से चिपका लिए और फिर उसके चेहरे को अपनी तरफ करके अपने होंठों को उसके होंठों को रख दिया और फिर दोनों भाई बहन एक दुसरे के होंठों को चूसने lage...or विनीत ने फिर अपना हाथ नीचे लेजाकर अपने लुंड को अपनी बहन के गांड के छेड़ पर रोक दिया और फिर धक्का देकर अंदर सरका दिया... विनीत के लुंड के अंदर जाते hi पूर्वी के मुँह से सिसकारी निकली जो उसके मुँह में hi दबकर रह गयी... और फिर विनीत पीछे लेटकर अपनी बहन की गांड मरने लगा....

उधर मेरे से गाने मरवाने से बड़ी बुआ ज़्यादा देर नहीं टिक पाई और वो भी काफी देर से खुद को रोक रही थी जो अब नहीं रोक पाई और फिर झड़ने lagi.....badi बुआ झड़ने के बाद थक गयी तो मैंने भी उनकी गांड से लुंड निकला और बुआ वहीं लेट कर आराम करने kagi.....maine फिर बुआ को पकड़ा और नीचे लेट गया और बुआ मेरे ऊपर आई और मेरी तरफ पीठ करके अपने डुबो पेअर मेरे दोनों तरफ किये और फिर मेरे लुंड को अपनी गांड में लेकर नीचे बैठ गयी और मैं बी नीचे से अपनी गांड उठा कर उनकी गांड मरने लगा....

उधर चारु ममी का दोनों फूपाजी ने छोड़ छोड़ कर बुरा हाल कर दिया था ...चारु ममी के मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकल रही thi...wo बस मुहहह खोल रही थी चीखने के लिए पर उनके मुँह से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी...





और कुछ hi देर बाअद चारु ममी इस दोहरे हमले के आगे हार गयी और उनका बादाम झटके कहते हुए ढीला पड़ने लगा और वो झड़ने लगी... और झड़ते झड़ते वो पीछे फूपाजी के ऊपर गिर गयी.... और फिर कुछ देर बाद फूपाजी और बड़े फूपाजी ने धक्के लगाना बंद किआ और उन्हें भी साइड में लिटा दिया...

इधर विनीत भी पूर्वी दीदी को कुटिया बनाकर उनकी गांड मार रहा tha....or उनके बड़े बड़े चूतड़ों को मसलते हिये धक्के पर धक्के लगाए जा रहा था...

पूर्वी दीदी अपने भाई की इस चुदाई से काफी गरम हो चुकी थी और अपनी गांड पीछे करके मरवा रही थी...

पूर्वी- अह्ह्ह भाई मेरे मार मेरी gaand....faad दे अपनी बहन की गांड भेनचोद ....अह्ह्ह्ह और तेज़ मार आह्ह्ह्हह .....उधर देख कर्मा कैसे हमारी माँ को उछहल उछहहाल कर उनकी गांड मार रहा hai.....deekh टूउउ भी और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ मेरी मार...

और इधर सच में मैं बुआ की गांड बहुत तेज़ी से मार रहा था वहीं बड़ी bua...apani देवरानी के छूछीयो को मसलती तो कभी होंठों अपने होंठों में लेकर चूसने लगती...





बड़ी बुआ हम दोनों को और तेज़ चुदाई के लिए उकसा रही thi...or मैं भी पूरी गति से अपनी बुआ की गांड मार रहा था....

Bua-aaahhh कर्म्मा मेरिइइइइइइइ गाआआनंनंड्डड़.... आआअह्ह्ह मीरे बाआआकवह्ह्ह्हहीी आएससीईए hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...

Me-Aaaahhhhhhhhh बुआ क्या मस्त गांड हसु है तुम्हारी जितना भी मारो मन नहीं भरता....

इधर मैं बुआ की गांड बुरी तरह से मार रहा था तो उधर फूपाजी ने बड़ी बुआ को अपने पास बुला लिए... और फिर बड़े फूपाजी ने बड़ी बुआ को अपने ऊपर बिठा लिया और अपना लुंड अपनी बीवी की छूट में घुसेड़ दिया वहीं पीछे से फूपाजी ने अपना लुंड अपनी भाभी की गांड में दाल दिए.... और फिर से एक बार दोहरी चुदाई का सिलसिला शुरू हो गया...

बड़े फूपाजी अपनी बीवी को अपने भाई के साथ बांटकर एक अलग उत्तेजना महसूस कर रहे थे जिसका असर उनके धक्को में साफ़ दिख रहा था वो बड़ी बुआ की छूछीयो को दबा रहे थे...

वहीं अपने बड़े भाई के साथ अपनी भाभी को छोड़कर फूपाजी को एक परम सुख मिल रहा tha...na जाने उनका कब का एक ुंकाः सपना पूरा हो रहा था.....





दोनों भाई मिलकर बड़ी बुआ को बेरहमी से छोड़ रहे थे...

बड़ी बुआ को भी अपने पति और देवर से एक साथ चुसवाने में बहुत सुख मिल रहा tha...pati अगर खुद बीवी को अपने भाई के साथ बांटे जिससे वो पहले से चुदती हो तो बीवी के लिए तो इससे अच्छी कोई बात नहीं है...

विनीत के धक्क्के भी पूर्वी की गांड में बहुत तेज़ हो गए थे अपनी तै जी और माँ की चुदाई देखकर और वो भी उतनी hi तेज़ी से अपनी बहन की गांड मार रहा था... पूर्वी भी अपनर भाई से खुलकर गांड मरवा रही थी अगर वो कुछ देर पहले न झड़ी होती तो अभी झाड़ चुकी होती जिस हिसाब से उसका भाई उसकी गांड मार रहा था... और फिर एक चीख के साथ उसका और हम सबका ध्यान दूसरी तरफ गया ये चीख बड़ी बुआ की थी जो दो दो लुंड के प्रहार से झाड़ रही थी पर उनके साथ hi फूपाजी और बड़े फूपाजी भी अपना रास उनकी छूट और गांड में छोड़ने लगे और वो भी झड़ने lage...teeno एक साथ झड़े और एक दुसरे के ऊपर पड़े रहे कुछ देर फिर फूपाजी उठे और उठने के साथ hi उनका सिकुड़ा हुआ लुंड बड़ी बुआ की गांड से निकला और लुंड के निकलते hi फूपाजी का रास भी बड़ी बुआ की गांड से बहकर बहार आने laga...phir बड़ी बुआ बी अपने पति के ऊपर से उठी और साइड में लेट गयी... मैं और विनीत अभी भी माँ बेटी की गांड मार रहे थे लेकिन तभी विनीत ने एक गुर्राहट के साथ पूर्वी दीदी की गांड में दो तीन तगड़े झटके लगाए और वो भी दीदी की गांड में सिंचाई करने laga...or जब उसका रास ख़त्म हुआ तो वो पीछे बक्त गया वहीं पूर्वी दीदी ने पीछे मुद कर उसका लुंड मुँह में ले लिए और चाट कर साफ़ किआ....

इन सब का झड़ना देखकर मैं भी अब अपने चरम पर था और बुआ को पागलो की तरह छोड़ रहा था.... और मैंने एक हाथ बढाकर बुआ की छूट पर रख दिया और उनके छूट के डेन को सहलाने laga....bua शायद जैसे िसिंपल का इंतज़ार कर रही थी और भरभरके झड़ने lagi....maine बुआ की गांड मरना जारी रखा और जब बुआ नार्मल हो गयी थी तो मुझे लगा की अब मेरा भी छूटने वाला है तो मैंने लुंड को तुरंत बुआ की गांड से निकला और उनके मुँह के आगे आकर खड़ा हो gaya...or फिर अपने लुंड का रास उनके चेहरे पर छोड़ diya...mere रास ने उनके चेहरे को भीगा दिया





फिर जब पिचकारियां थोड़ी हलकी हुईं तो बुआ ने लुंड को मुँह में ले लिए और तब तक चूसती रही जब तक एक एक बूँद न निचोड़ ली हो और फिर लुंड को साफ़ करके बहार निकल दोय तो मैं वहीं लेट गया और बुआ को अपनी बाहों में भर लिए और उनसे चिपक कर लेट गया उधर पूर्वी दीदी उठकर हमारे पास आई और बुआ के चेहरे पर लगे मेरे रास को छाता और फिर बुआ के साथ होंठों को मिलकर उनके साथ बांटने लगी यही प्रक्रिया कई बार करने के बाद बुआ का चेहरा बिलकुल साफ़ हो गया तो दीदी ने अपनी मुम्ममय के होंठों को एक बार फिरसे चूसना शुरू किआ और फिर बुआ के मुँह में जीभ डाल दी जिसे बुआ ने चूसा फिर पूर्वी दीदी भी अपनी मुम्ममय से चिपक कर लेट गयी... मैंने कमरे में नज़र घुमाकर देखा तो चारु ममी वैसे hi नंगी पड़ी हुई सो गयी thi...subah के 5 बज रहे थे पर यहाँ अभी सोना बाकि था बाकि लोग भी सोने की तैयारी में hi थे और फिर मैं बुआ की छूछीयो को पकड़कर और उनके ऊपर पेअर चढ़कर आँखें बंद करके लेट गया और कब सो गया मुझे खुद पता न चला.....

दोस्तों कैसी लगी आप सबको ये अपडेट ज़रूर कमेंट करके bataayein....aapke कमैंट्स hi हैं जो मुझे आगे लिखने को प्रेरित करते हैं....
 
गाइस प्लीज कमेंट एंड तेल्ल में योर व्यूज एंड रेविएवस ऑफ़ थे story...aap लोग नहीं बताओगे तो स्टोरी लिखने की कोई वजह नहीं बचती मेरे पास
 
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