पापा का माथा ठनका.. ये सभ्य की छुछियां तो नहीं हैं... पापा तुरंत पहचान गए अरे भाई पहचाने कैसे न... शादी कितने साल हो गए और इतने सैलून में शायद hi कोई ऐसी रात रही होगी जब इन हाथों में पत्नी की बड़ी बड़ी छुछियां न आई हो... तो पहचानते कैसे नहीं...
पापा का दिमाग चलने लगा अगर ये सभ्य नहीं है तो शालू hi हो सकती है.... अरे ये क्या हो गया... उसकी सांसो से ये तो पक्का है की वो सोइ नहीं है...
क्या सोचेगी वो मेरे बारे में अब अगर कहीं अपनी जीजी को बता दिया तो मेरा घर टूट जायेगा..
पापा का लुंड ये सब सोचते हुए मुरझा गया... पापा को समझ नहीं आ रहा था की अब क्या करें जैसे थे वैसे hi रुक गए हाथ वहीं छुच्छी पर रुका हुआ था...
अपडेट 121
एक अजीब धर्मसंकट में फंसे हुए कर्मा के पापा के दिमाग में हर तरह के ख्याल आ रहे थे की अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा वैसा हुआ तो क्या होगा...
जहाँ मन में एक तरफ दर था की उनकी पत्नी या घर में किसी को पता चल गया तो वो कैसे कभी किसी से नज़रें मिला पाएंगे...
वहीं मौसी के बदन का मखमली एहसास उन्हें ये सब छोड़कर इस पल का लुत्फ़ उठाने के लिए गुमराह कर रहा था... और थे तो पापा मर्द hi हाथ आई इतनी मस्त गदराई औरत को जो नंगी होकर बाहों में पड़ी है उसे कैसे जाने दे... उनकी उत्तेजना उनके दर पर हावी होने लगी और उसी कारन से उनके हाथ मौसी की छूछीयो पर कसने लगे... मौसी की नरम छूछीयो का एहसास होते hi पापा का लुंड दोबारा कड़क होने लगा और वो हौले से मौसी की छुच्छी को दबाने लगे...
मौसी तो बेचारी फांसी हुई थी कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करें क्या न करें.. सोच तो लिए था की जीजाजी को थोड़ी देर ये समझने देती हूँ की मैं जीजी हूँ और मौका मिलते hi उठ जाउंगी... पर एक एक पल बिताना मुश्किल होता जा रहा था... ऊपर से जीजाजी का हाथ जो उनकी नंगी छूछीयो और दूसरा पेट पर घूम रहा था वो न चाहते हुए भी मौसी को उत्तेजित कर रहा था....
वहीं पीछे कर्मा के पापा ने अपनी साली के मांसल गदराये चिकने बदन का मज़ा लेना शुरू किआ hi था की उनकी आँखों के सामने एक बार फिर से अपनी पत्नी का चेहरा आ गया जिसके आते hi कई सरे खाया फिर से उनके दिमाग में घुस गए एक बार फिर से उनका हाथ जहाँ था वहीं रुक गया...
एक कश्मकश मन में चलने लगी... मैं ये सही नहीं कर रहा, मेरी पत्नी मुझसे इतना प्यार करती है सम्मान करती है, एक बिलकुल आदर्श पत्नी है मैं उसी की सगी बहन के साथ ये सब...?
जहाँ कर्मा के पापा अपनी पत्नी के बारे में सोच कर खुद को कुछ भी गलत करने से रोक रहे थे वहीं उनसे कुछ hi दूरी पर उनकी वही आदर्श पत्नी पूरी नंगी होकर अपने सेज बेटे का मुसल जैसा लुंड अपनी छूट में लेकर चुद रही थी...
कर्मा और उसकी माँ दोनों एक तरफ करवट लिए हुए थे
आगे माँ पीछे बीटा आगे माँ की छूट जिसमे पीछे से बेटे का लुंड अंदर बहार हो रहा था...

माँ बेटे पूरे परिवार के बीच चुदाई के ऐसे खेल में मगन थे जो ज़माने के लिए सबसे बड़े पाप में से था... पर दोनों माँ बेटे हवस की ऐसी नदी में बहराहे थे जिसके बहाव के आगे सरे सही गलत के पत्थर तेज़ बहाव से या तो कटजाते हैं या साथ बहने लगते हैं...
कर्मा का लुंड माँ की छूट से लगातार माध्यम गति से अंदर बहार हो रहा था कर्मा ने अपने धक्कों को और तगड़ा करने के लिए माँ के ऊपर के हिस्से को थोड़ा सा आगे खिसका दिया और खुद थोड़ा सा नीचे सरक कर धक्के लगाने लगा जिससे जगह बन गयी और अब वो लम्बे लम्बे धक्के लगाकर अपनी माँ की रसीली गरम छूट का मज़ा ले रहा था... माँ भी पहले पति और अब बेटे के लम्बे लुंड से छोड़कर जैसे जन्नत की सैर कर रही थी... वो भी अपने पति के होते हुए...
जहाँ हर तरफ वासना और उत्तेजना का खेल चल रहा था वहां कोई कैसे सो सकता था अपने माँ और पापा की मस्ती भरी चुदाई देख कर अनुज चादर ओढ़ कर लेट तो गया था पर नींद आँखों से कोसों दूर थी... मन में कई सवाल घूम रहे थे की जब वो गया था माँ पापा की चुदाई देखने तो भैया और मौसी यहीं थे पर जब आया तो नहीं थे... वो लोग कहाँ गए होंगे क्या वो लोग भी मेरी तरह माँ पापा की चुदाई देख रहे थे... वैसे क्या मस्त लगती हैं माँ छुड़वाते हुए.. माँ का नंगा बदन बड़ी बड़ी छुछियां...
ये hi सोचते हुए एक तरफ करवट लेकर अनुज अपने लुंड को बहार निकल कर सहला रहा था काफी देर तक सहलाने के बाद भी रहत न मिलने पर उसने दूसरी तरफ करवट ले ली.. और अब उसका चेहरा कर्मा और बाकि सब की तरफ हो गया... चादर को चेहरे से थोड़ा सा हटा के देखा तो बगल में चादर में कोई महसूस हुआ...
उसने सोचा लगता है मौसी और भैया बापिस आ गए... और सो रहे हैं...
पर वो क्या जनता था की उस चादर में उसकी माँ चुद रही है वो भी उसके सेज भाई से...
कुछ देर सोने की कोशिश करने के बाद भी अनुज को नींद नहीं आ रही थी आखिर उसको कुछ ख्याल आया और उसने तुरंत hi अपना हाथ अपनी चादर से निकला और बगल वाली चादर की तरफ ले जाने लगा
और कुछ hi पल में उसने अपना हाथ बगल वाली चादर में घुसा दिया... और थोड़ा इधर उधर करने के बाद उसका हाथ एक कोमल गुदगुदी और नरम सी चीज़ पर पड़ा जिसे पहचानने में उसे देर न लगी की ये छुच्छी है... अनुज खुश हो गया की जैसा उसने सोचा था की मौसी की छुच्छी से कुछ मज़े लिए जाएं वैसा hi हुआ और तो और मौसी की छुच्छी नंगी मिल गयी उसे... और यही सोचकर वो हलके हलके हाथ से उसे दबाने लगा और साथ hi दुसरे हाथ से अपने लुंड को मुठिए रहा था...
इधर एक हाथ छुच्छी पर पड़ने के बाद पहले तो माँ को लगा की कर्मा hi उनकी छुच्छी को दबा रहा है... पर जैसे hi एहसास हुआ की कर्मा के दोनों हाथ तो मेरे चूतड़ों पर हैं...
तो माँ को एक झटका लगा... और फिर वो हाथ धीरे धीरे से उनकी छुच्छी को दबाने भी लगा.. माँ को कुछ पल बाद यकीन हो गया की हो न हो ये हाथ उनके पति का तो नहीं है तो ये अनुज... माँ को जैसे hi ये एहसास हुआ उन्हें एक और झटका लगा... एक पल को तो उन्हें लगा पीछे हो जॉन पर पीछे से तो कर्मा ने कसके पकड़ रखा था और दनादन लुंड छूट में पेल रहा था...
माँ के मन में ढेरों सवाल घूमने लगे.. आखिर अनुज ये क्या कर रहा है इससे पहले तो कभी उसने मेरी चुकी को इस तरह से नहीं छुआ कहीं उसे मेरे और कर्मा के बारे में पता तो नहीं चल गया... ये तो अनर्थ हो जायेगा.. कहीं वो किसी को बता न दे... क्या करूँ अभी कुछ किसी को बोल भी नहीं सकती अगर कोई जाग गया और मुझे इस हालत में कर्मा के साथ देख लिए तो.. मुझे शांत hi रहना होगा... माँ ने खुद को शांत रखने की hi सोची और इंतज़ार करने लगी साथ hi कर्मा से चुड़ते हुए उसके लुंड का आनंद तो छूट में मिल hi रहा था...
उधर अनुज पूरी छुच्छी को अचे से छू कर देख रहा था क्यूंकि पिछले कई दिनों से वो और कर्मा मिल कर मौसी की छूछीयो को चूसते थे तो उसे किसी भी प्रकार का दर नहीं था.. और उसे बहुत ख़ुशी हुई ये महसूस कर के छुच्छी के आस पास कोई कपडा नहीं है... उसने निश्चित करने के लिए दूसरी छुच्छी और ऊपर छाती और कंधे तक हाथ ले जाकर देखा और जैसे hi ये एहसास हुआ की मौसी ऊपर से नंगी हैं.. उसक लुंड ठुमके मरने लगा वो मन hi मन खुश हो गया... तभी उसका हाथ गर्दन से होते हुए मौसी के कान से टकरा गया जिसे उसने अपनी उँगलियों से महसूस किआ और उसे कुछ अजीब लगा... उसने दोबारा दे पूरे कान को छूओ कर देखा... उसका खून तेज़ी से दौड़ने लगा उसके मन में एक ख्याल घर करने लगा... अनुज ने फ़ौरन अपना हाथ कान से हटाया और बापिस छुच्छी पर रख दिया... और टटोलने लगा जैसे कुछ जांचना छह रहा हो और जैसे hi उसका शक धीरे धीरे यकीन में बदला उसके हाथ पत्थर जैसे होकर वहीं जैम गए...
दरअसल जब अनुज का हाथ कान पर लगा तो उसे आशा थी की उसके हाथ में मौसी के छोटे छोटे कान के झुमके आएंगे पर ऐसा नहीं हुआ कान बिलकुल खली था... और उसे अचे से याद था की सोने से पहले जी उसने मौसी के कानो में उन झुमको लो देखा था... साथ hi वो ये बात भी जनता था की उसकी माँ हमेशा सोने से पहले अपने कान और नाक में पहनी हुई चीज़ों को निकल देती थी क्यूंकि उसे पहन कर सोना ाचा नहीं लगता था...
तो सरे सामूकरणो को मिला कर उसे यकीन होने लगा की ये मौसी नहीं बल्कि उसकी माँ है.. और यकीन करने के लिए उसने बापिस छुच्छी पर हाथ रख कर टटोल कर ध्यान से महसूस कर के देखा और क्यूंकि वो पिछले कई दिनों से मौसी की छुच्छी को चूस रहा था और दबा रहा था उसे ये छुच्छी ज़्यादा गोल पर उससे थोड़ी काम फैली हुई पर कड़क महसूस हुई... जिससे उसे यकीन हो गया की ये छुच्छी उसकी मौसी की नहीं बल्कि उसकी माँ की है जो ऊपर से बिलकुल नंगी होकर उसके बगल में लेती hai...Y
ये सोचते hi अनुज का तो बुरा हाल हो गया.. घबराहट और उत्तेजना दोनों से hi उसके दिल की धड़कन बेहद तेज हो गयी... न जाने कब से वो अपनी माँ की नंगी छूछीयो को महसूस करना चाहता था और आज वो उसके हाथ में थी पर घबरा रहा था की कहीं माँ गुस्सा हो गयी तो और पापा को बता दिया तो मुझे तो बहुत मार भी पड़ेगी और साथ hi घर छोड़ना पड़ेगा... वो अलग... घबराहट के साथ साथ उत्तेजना भी थी की अपनी माँ की नंगी चुकी उसके हाथ में है ये सोचते hi उसका हाथ माँ की चुकी पर कास गया जिससे उत्तेजित होकर उसके लुंड ने एक बूँद वीर्य की टोपे पर बहा दी...
जहाँ एक तरफ अनुज आगे बढूं या न बढूं क्या करूँ इस सोच में फंसा हुआ था वहीं उसके पापा का भी हाल उसी तरह था एक तरफ था मौसी का मखमली नंगा बदन वहीं फुसरी तरफ घर टूटने का दर...
पापा भी नए नए समीकरण बनाने लगे.. तभी उनके मन में ख्याल आया की ये तो साफ़ ज़ाहिर है की शालू जाग रही है और जागते हुए भी यदि उसने मुझे अभी तक नहीं रोका इसका क्या कारन हो सकता है... कहीं वो भी तो ये नहीं चाहती कहीं पति के जाने की वजह से वो उत्तेजित हो गयी हो... या फिर कहीं वो इसलिए तो चुप नहीं की उसे ऐसा लग रहा हो की मैं उसे उसकी जीजी समझ रहा हूँ... अगर ऐसा है तो आगे बढ़ने में क्या हर्ज़ है अगर कुछ हुआ भी तो बोलडूँगा की मैं उसे उसकी जीजी समझ रहा था...
दिमाग की स्वीकृति मिलते hi पापा के हाथ फिर से मौसी की छूछीयो पर चलने लगे... वही लुंड एक बार फिर से कड़क हो गया और पीछे से मौसी के चूतड़ों में चुभने लगा... मौसी जो अब तक थोड़ी शांत हो पाई थी उन्हें लगने hi लगा था की जीजाजी सो गए हैं और वो सही मौका देखकर उठने hi वाली थी की
फिर से जीजाजी के हाथ उनकी छूछीयों पर चलने लगे और मौसी को एक बार फिर से उत्तेजित करने लगे...
पापा तो इस बार पूरे जोश में थे क्यूंकि बचने का उन्होंने एक उपाय सोच hi रखा था तो पापा अब्ब अपने दोनों हाथों से मौसी की बड़ी बड़ी छूछीयों को दबाकर मज़े ले रहे थे साथ hi उनका लुंड बिलकुल कड़क होकर मौसी के चूतड़ों को भेद रहा था जो मौसी को महसूस हो रहा था.. ये वही लुंड था जो अभी थोड़ी पहले उनकी बहन की छूट की प्यास बुझा रहा था और मौसी साफ़ साफ़ देख चुकी थी के ये लुंड छूट की प्यास कितने अचे से बुझा रहा था... मौसी की छूट गीली होकर उत्तेजना रुपी रास को बहा रही थी....
पापा कुछ ज़्यादा hi जोश में आते जा रहे थे और अब उन्होंने दिमाग की जगह शायद लुंड से सोचना शुरू कर दिया था जिस कारन कुछ देर तक अपनी साली की भरी भरकम छूछीयो को गूंथने से मन नहीं भरा तो पापा ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मौसी की कमर में हाथ डालकर उन्हें थोड़ा सा अपनी तरफ घुमा लिए और मौसी की बगल के नीचे से सर निकलकर अपना चेहरा आगे लेजाकर अपने होंठों को मौसी की एक छुच्छी पर रख दिया और होंठों पर नरम सुखद एहसास पहली बार पते hi पापा के लुंड ने कुछ बूंदे छोड़ दी और पापा बहुत गरमा गए और मौसी की नरम नरम छुच्छी को चूसने लगे एक हाथ से दूसरी को मसलते और एक को चूसते...
मौसी के शरीर में तो जैसे करंट सा दौड़ गया.. एक पल को उनका मन हुआ की उठ कर भाग जाएं पर दर से शरीर ने साथ नहीं दिया वहीं चूसै के कारन उनकी छूट में छींटे रेंगने लगे...
मौसी तड़पने लगी... पापा को तो जैसे जन्नत मिल गयी.. और वो मौसी की छूछीयो के रास को पीने में पूरी तरह खो गए... वहीं उनके बगल में उनके बेटे का लुंड उनकी पत्नी की छूट में खो रहा था... कर्मा लुंड को टोपे तक बहार लता और फिर अपने जन्मद्वार में बापिस जड़ तक घुसा देता..
माँ का हाल बुरा था एक तरफ छूट में बेटे का मुसल जैसा लुंड अंदर बहार हो कर जन्नत की सैर करवा रहा था तो दूसरी तरफ दुसरे बेटे के हाथ छूछीयो पर परेशां भी कर रहे थे और उत्तेजित भी कर रहे थे...
वहीं अनुज को समझ नहीं आ रहा था क्या करे खुश होकर माँ की बड़ी बड़ी नंगी छूछीयों का लुत्फ़ उठाये या छोड़ दे क्यूंकि माँ के गुस्सा होने का दर भी था...
पर अनुज की उम्र के लड़के दिमाग से काम और लुंड के टोपे से ज़्यादा सोचते हैं... और यही हाल अनुज का था दर तो था पर ऐसा मौका इतनी गदराई हुई औरत की बड़ी बड़ी पर नरम छुछियां नंगी हाथ में हो और वो गदराई घोड़ी कोई और नहीं खुद की सगी माँ हो कौन ऐसा मौका छोड़ना चाहेगा... अनुज नेभी वही किआ और माँ की छुच्छी को धीरे धीरे दबाना शुरू कर दिया...
माँ को ये महसूस हुआ तो वो उत्तेजित भी हुई और साथ hi सोचने लगी की ये सब क्या हो रहा है... और क्या किस जाये अभी...
अनुज अब दर भूल कर एक हाथ से लुंड को मुठियाते हुए एक हाथ से माँ की छूछीयो को बदल बदल कर मसल रहा था...
माँ बेचारी दोनों बेटों के बीच फांसी हुई थी... हालाँकि माँ के बदन को तो ाचा लग रहा था चुड़ते हुए छूछीयो को दबाये जाना उनके आनंद को और बढ़ा रहा था... पर मन कह रहा था ये सही नहीं है...
अनुज ने कुछ देर छूछीयो को दबाया पर इंसान लालची होता है हमेशा थोड़ा और थोड़ा और चाहिए होता है यही अनुज के साथ हो रहा था...
माँ की नंगी छूछीयो मसलने को मिलने के बाद अब अनुज को कुछ और चाहिए था... उसने कुछ और की तलाश में वो रिस्क लिए जिसका नतीजा क्या हो सकता है उसने सोचा तक नहीं और अपने चेहरे को निकलकर अपना मुँह माँ की एक छुच्छी पर टिका दिया...
और अपने चेहरे पर माँ की नरम छूछीयो को महसूस करने लगा...
माँ को जैसे hi अपनी छूछीयो पर अनुज का मुँह महसूस हुआ उनके मुँह से सिसकी निकलने को हुई जिसे उन्होंने रोक लिए.. एक पल को तो उन्होंने सोचा की अनुज को दूर करें पर कुछ गलत न हो जाने के दर ने उन्हें रोक दिया..
वहीं अनुज कुछ देर इसी तरह रुका रहा और माँ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया या वकीसी भी तरह का विरोध न पाकर उसकी हिम्मत बढ़ गयी और उसने मुँह खोल कर एक छुच्छी को मुँह में भर लिए और दूसरी को हाथ से दबाने लगा...
माँ मज़े और घबराहट दोनों से hi तड़प उठी एक बेटे का लुंड छूट में अंदर बहार हो रहा था जबकि दूसरा बीटा चुकी को चूस रहा था वो भी पति और सगी बहन के बगल में होते हुए... एक पल को माँ सोचने लगी क्या होगा मेरे परिवार का... पर छूट में लुंड और छुच्छी चूसै एक साथ हो रही हो तो कुछ भी सोचना आसान बात नहीं..
और वही माँ के साथ हो रहा था दिमाग कह रहा था जो हो रहा है गलत है पर शरीर को जो मज़ा मिल रहा था वो झुडलाया नहीं जा सकता था तो माँ ने अभी दिमाग को थोड़ी देर के लिए रोका और शरीर के मज़े पर ध्यान दिया... और अपने दोनों बेटो की सेवा का आनंद लेने लगी... न कर्मा को पता था की अनुज माँ के दूध चूस रहा है न hi अनुज को पता था की उसका बड़ा भाई उनकी माँ छोड़ रहा है...
अनुज तो जैसे जन्नत में था जिसके सपने न जाने कब से देखता था वो छुछियां आज उसके मुँह में थी और वो उनका रास पि रहा था एक हाथ से दूसरी छुच्छी को दबा रहा था वहीं दूसरा हाथ अपने लुंड पर चल रहा था... अनुज ने जोश में आकर अपनी चादर को अपने ऊपर से हटा कर फेंक दिया था.. वहीं माँ का ऊपर का हिस्सा छुछियां और ऊपर का हिस्सा चादर से बहार आ गया tha...baki पीछे का हिस्सा चादर में था जिसके अंदर चुदाई का तूफ़ान आया हुआ tha...aur एक माँ बेटे के प्रेम का अनोखा दृश्य चल रहा था...
जहाँ कर्मा की माँ अपने दोनों बेटों की सेवा से तृप्त हो रही थी वहीं पापा अभी भी मौसी की छूछीयो को चूसने में लगे हुए थे... और साथ hi कमर हिलाकर मौसी की जांघ पर अपने लुंड को घिस रहे थे... पीछे से...
मौसी बेचारी बस जो हो रहा था होने दे रही थी साथ hi उनकी छूट पानी बहा रही थी एक मन कर रहा था जीजाजी कास के उनके बदन को मसल दें... छूछीयो का रास तो पि hi लिए है अब पूरे शरीर की प्यास बुझा दें वहीं उनका दिमाग उन्हें रोक रहा था...
छूछीयो को चूसते हुए पापा भी जोश में आ गए और आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपना हाथ मौसी के पेट पर फिरते हुए उनका पेटीकोट जहाँ बंधा था उस पर फिरने लगे.. मौसी की तो जैसे साँसे अटक गयी उन्हें समझ नहीं आ रहा था अब क्या करें... इसी उधेड़बुन में उनका हाथ चादर से आगे निकल गया और उन्होंने कर्मा की पीठ पर चादर के ऊपर से hi हाथ रख diya...kyunki कर्मा की पीठ उनकी तरफ थी... अपनी पीठ पर हाथ पड़ते hi कर्मा सहम गया और रुक गया उसके धक्के भी बाहर हलके हो गए...
उसे ये तो समझ आ गया की ये मौसी hi है पर अभी वो क्या करे क्यों की वो माँ के साथ अधूरा खेल नहीं छोड़ना चाहता था..... कुछ देर तक इंतज़ार किआ तो मौसी का हाथ यूँ hi उसकी पीठ पर टिका रहा और फिर अचानक से हैट गया.. कर्मा ने रहत की सांस ली और बापिस अपनी माँ की छूट छोड़ने में लग गया... साथ hi उसे मौसी का भी ख्याल था की शायद मौसी माँ पापा की चुदाई देखकर गरम हो गयी थी और इसीलिए उससे अपनी छूछीयो को चुसवा कर अपनी गर्मी शांत करवाना चाहती हैं...
उधर मौसी का हाथ इसलिए पीछे हैट गया क्यूंकि पापा का हाथ कुछ आगे बढ़ गया था और वो पेटीकोट के नाड़े वाली जगह उँगलियों को घूमते हुए उसे नीचे खिसकने की कोशिश कर रहे थे... अपनी साली को पूरा नंगा करने के ख्याल से hi उनके शरीर में सनसनी हो रही थी...
मौसी ने अपना हाथ बापिस लेकर पेटीकोट को कमर के पास से एक तरफ पकड़ लिया जिससे पापा का मिशन पेटीकोट उतरो जन्नत पाओ कामयाब न हो सके...
जब पेटीकोट नीचे नहीं खिसका ज़ोर देने पर भी तो पापा ने दूसरा रास्ता अपनाने की सोची और अपनी उँगलियों को जहाँ नाडा बंधा होता है वहां ले गए और हलके हलके से उसमे उँगलियों को फंसकर उसे खोलने की कोशिश करने लगे... मौसी झटपटाने लगी...
सिर्फ मौसी hi नहीं झटपटा रही थी एक तरफ अनुज अपनी माँ की चुकी को चूसकर इतना उत्तेजित हो गया की कब उसका रास उसकी गोलियों से बहकर उसके लुंड में आ गया पता hi नहीं चला... और उसकी शक्ति इतनी ज़्यादा थी की अनुज का पूरा शरीर अकड़ने सा लगा और हो भी क्यों न पहली बार अपनी माँ की नंगी छूछीयो को चूसते हुए शिखर तक पहुंचा था... मुँह छूछीयो से हैट गया हाथ लुंड पर और कास गया आँखें बंद हो गयी और फिर एक बार उसका मुँह खुला और लुंड ने पिचकारी मारनी शुरू कर दी जैसे hi पहली धार निकली तो न जाने अनुज के दिमाग में अचानक से क्या सूझा की उसने खुद को थोड़ा सा ऊपर खिसका कर अपने लुंड के टोपे का निशाना अंदाज़े से अपनी माँ की चूचियों की और कर दिया... पहले तो अनुज का मुँह छूछीयो से हटने पर माँ को थोड़ा अजीब लगा था.. माँ ये सोच hi रही थी की अनुज ने चूसना बंद क्यों कर दिया क्यूंकि उन्हें भी कहीं न कहीं मज़ा आ रहा था.. की तभी माँ को छूछीयो पर एक गरम सा एहसास हुआ और फिर एक और इस बार गरम द्रव्य चूचियों से गलती तक गिरा... माँ जैसी रोज़ छोड़ने वाली औरत को समझते देर न लगी की ये क्या है...
ये कुछ और नहीं बल्कि उनके छोटे बेटे का लुंड रास था जिसे वो अपनी माँ की नंगी छूछीयो पर बरसा रहा था एक के बाद एक धार माँ की चूचियों से लेकर चेहरे तक को भीगा रही थी

और फिर कुछ पल बाद ये सिलसिला थम गया पर तब तक माँ की छुछियां और चेहरा अनुज के रास से भीग चूका था... जब अनुज का झड़ना बंद हुआ तो वप लम्बी सांसे लेता हुआ सीधा होकर लेट गया और अब जो ख्याल उत्तेजना वश उसने परे रख दिए थे बापिस मन में कौंधने लगे और अब तो दर और था की जो अभी उसने किआ उसके बाद माँ न जाने क्या करेगी अब... तो अनुज ने तो डरके जल्दी से चादर उठाई और अपना मुँह धक् कर सोने की कोशिश करने लगा...
वहीं माँ तो अपने छोटे बेटे के रास से भीग क्र बेहद उत्तेजित हो गयी ये सोचकर की पति के होते हुए वो एक बेटे से चुद रही है दुसरे का वीर्य उसके चेहरे और छूछीयो पर भरा हुआ है और वो भी पति के बगल में होते हुए भी माँ ये सोचकर कर इतनी उत्तेजित हो गयी की वो खुद भी झड़ने लगी उनका शरीर कंपनी लगा साथ hi उनकी छूट सिकुड़ने लगी और कर्मा के लुंड के इर्द गिर्द कास गयी जिसका नतीजा ये हुआ की कर्मा जो इतनी देर से माँ की चुदाई में लगा हुआ था वो भी इसे संभल नहीं पाया और लुंड को. माँ की छूट में जड़ तक घुसा के रुक गया और अपने लुंड रास से अपनी माँ की छूट को सींचने लगा..
कुछ पल बाद जब कर्मा एयर माँ दोनों hi अपने अपने स्खलन से के शिखर से नीचे उतरे तो माँ को थोड़ा होश आया और वो जल्दी से चादर हटाकर उठी और टटोल कर पैरों में पड़ा हुआ पेटीकोट उठाया और नंगी hi बाथरूम की तरफ भाग गयी...
कर्मा ने भी अपनी सांसे शांत की, उसे माँ उठकर जाती हुई महसूस हुई वो बेहद खुश था अपनी माँ को छोड़ने का मौआ मिलने पर और उसी ख़ुशी में मुस्कुराते हुए लेट कर सोच hi रहा था की तभी अचानक से उसे मौसी का ख्याल आया..
अब तक जहाँ उधर माँ बेटों का खेल चल रहा था कर्मा के पापा अपने मिशन में लगे हुए थे और करीब करीब कामयाब भी हो गए थे मौसी के पेटीकोट के नदी की गांठ बस खुल hi गयी थी... मौसी की सांस अटकी हुई थी की अब कैसे रोकेंगी वो खुद को नंगा होने से अपने जीजाजी के हाथों से...
पापा ने नाड़े को खोल कर ढीला किआ और फिर उसमे हाथ फंसा कर नीचे खिसकने लगे जैसे hi पेटीकोट छूट के नीचे पहुंचा की अचानक से मौसी चादर के बहार निकल गयी...
पापा के हाथ से और चादर से मौसी दोनों से hi बहार निकल गयी... पापा फिर सोच में पद गए की शायद वो ज़्यादा आगे बढ़ गए इसलिए बहार खिसक गयी एक बार फिर पापा के दिमाग में वही चलने लगा की क्या शालू जो अभीहुआ वो अपनी जीजी को बता देगी?
अगर ऐसा हुआ तो न जाने क्या होगा... मैं कैसे नज़रें मिला पाउँगा किसी से... कहीं कुछ देर के सुख के लिए मैंने कोई बहुत बड़ी गलती तो नहीं करदी...
पापा इतनी गहरी सोच में पद गया की उनकी हिम्मत नहीं हुई की चादर के बहार देखें की मौसी कहाँ हैं और वैसे hi चादर के अंदर सोते रहे...
अब पापा को तो लग रहा था की मौसी उनकी हरकतों की वजह से चादर से बहार निकल गयी पर बात कुछ और hi थी जैसे hi कर्मा को मौसी का ख्याल आया था वैसे hi वो पलटा और चादर में हाथ डालकर मौसी को अपनी तरफ खींच लिए था नहीं तो मौसी ने तो खुद को हालत के हवाले कर hi दिया था...
कर्मा ने खुद पीछे खिसक कर अनुज की तरफ हो गया साथ hi मौसी को अपनी चादर में छुपा लिए जिसमे अब तक वो और उसकी माँ चोदामपट्टी कर थे...
मौसी बेचारी कुछ समझ पति तब तक वो बाप की बाँहों की जगह बेटे से चिपकी हुई थी... जब उन्हें कुछ समझ आया तो मौसी ने रहत की सांस ली... और शुक्र मानाने लगी कर्मा का की उसने सही समय पर बचा लिए...
पर इन सब में वो ये भूल hi गयी की वो ऊपर से बिलकुल नंगी है और साथ hi उनका पेटीकोट भी जांघों में अटका हुआ है इधर कर्मा ने मौसी को खुद से चिपका लिए और चिपकते hi उसे एक नया एहसास हुआ की मौसी तो नंगी हैं पूरी.. लगता है मौसी ज़्यादा hi गरम हो गयी माँ पापा की चुदाई dekhkar...ye सोचकर कर्मा मौसी की छूछीयो को दोनों हाथों से भींचने लगा....
कर्मा तो मनो फूले नहीं समां रहा था अभी एक बहन को छोड़ा था और अब दूसरी नंगी बाँहों में थी... कर्मा का लुंड फिर से सर उठाने लगा जिसे ये सोचकर की अबधेरे में किसे पता चल रहा है कर्मा ने पजामा सही से नहीं पहना था और लुंड बहार hi था... जो एक बार फिर से अपनी पूरी औकात पारा गया था और चिपकने की वजह से कर्मा का नंगा लुंड मौसी के नंगे चूतड़ों की दरार में घुस गया और जिसका स्पर्श पते hi मौसी के शरीर में करंट दौड़ गया और उन्हें अपनी स्थिति का आभास हुआ की उनका पाटिकट रो उनके घुटनो में है...
एक पल को उन्होंने सोचा की जल्दी से पेटीकोट फिर से पहन ले पर चूतड़ों पर कड़क लुंड का एहसास उनके इरादों को कमज़ोर कर रहा था साथ hi अपनी जीजी जीजाजी की चुदाई देखने से जीजाजी की वो साडी हरकतों से मौसी बहुत उत्तेजित हो गयी थी.. और अब वो सुकून चाहती थी तो जो हाथ पेटीकोट ऊपर करने के लिए नीचे गया था वो कहीं और रुक गया और फिर कर्मा को एहसास हुआ की मौसी थोड़ा ह दल रही हैं जिसे समझते कर्मा को देर नहीं लगी की मौसी छूट में उंगलिया कर रही हैं.
कर्मा और जोश में आकर उनकी छूछीयों को मसलने लगा साथ hi अपने लुंड को उनकी चूतड़ों की दरार में घिस रहा था...
मौसी को एहि चाहिए था वो किसी तरह से खुद की छूट को शांत करना चाहती रही और तिहरा हुम्ला उनकी पूरी मदद कर रहा था और अंत मैं हुआ भी कुछ ऐसा hi कुछ देर बाद hi मौसी भरभरा के अपनी उँगलियों पर झड़ने लगी कर्मा को भी ये साफ़ महसूस हुआ पर मौसी के झड़ने के कुछ पल बाद hi मौसी ने अपने पेटीकोट को ऊपर खिसका के बंधा और फिर कर्मा को हैरान करते हुए उसकी चादर से बहार निकल गयी और अपनी अलग चादर लेकर उसे ओढ़ लिए और सोने लगी...
कर्मा कुछ करता उससे पहले hi उसे कदमो की आहात सुनाई दी तो वो भी सर अंदर करके चुपचाप लेट गता कर्मा की माँ ने आकर देखा बीच में थोड़ी सी जगह खली है तो वहीं घुस गयी और बगल में चादर ओढ़ कर जो लेता था उसकी चादर में घिस गयी... थोड़ा आगे खिसक कर जब लेती और बदन एक दुसरे से स्पर्श हुआ तो पता चला माँ अपनी बहन यानि मौसी की चादर में घुस गयी हैं...
मौसी को भी अपनी बहन का बदन महसूस हुआ अपने बदन पर माँ ने हाथ बढाकर मौसी को बड़े होने के नाते खुद से चिपकाया तो थोड़ी हैरानी हुई की उनकी छोटी बहन ऊपर से नंगी है... माँ के हाथ मौसी की नंगी छूछीयो पर पद गए...
माँ को थोड़ा अजीब लगा पर ज़्यादा न सोच कर वो मौसी की अपने से ऐसे hi चिपकाये हुए सोने लगी मौसी भी थक गयी थी तो अपनी बड़ी बहन की बाहों में उन्हें आराम मिल रहा था तो दोनों hi बहनें एक साथ सो गयी वहीं बाकि लोग भी अपने अपने दिमाग में उधेड़बुन करते हुए सो गए... यही सोचते हुए की आने वाली सुबह क्या रंग दिखाएगी. .
इसके आगे अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्...