Incest Katha Chodampur Ki - Page 26 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

नई अपडेट पर कल से काम शुरू होगा... और बहुत जल्दी आपके सामने भी होगी
 
इधर पीछे से अनुज ने गुर्राते हुए अपनी एक एक बून्द निचोड़ दी... और माँ से चिपके हुए हांफने लगा माँ ने कुछ पल और इंतज़ार किआ और फिर खुद आगे खिसक गयी तो अनुज का लुंड उनकी छूट से निकल गया जो की झड़ने के बाद भी बिलकुल सख्त होकर खड़ा था... माँ की छूट से अनुज का रास बहकर बहार आ रहा था जिसे माँ ने अपनी गीली सारी से पांच लिए..

माँ के हटने पर अनुज को भी जैसे होश आया वो खुद से नाराज़ था की वो इतना ाचा मौका मिलने के बाद भी माँ को ठीक से छोड़ नहीं पाया और झाड़ गया... उसे इस बात का बहुत दुःख हो रहा था....



अपडेट 151


सभ्य और अनुज

सभ्य आगे बढ़कर उठ कड़ी हुई वहीं अनुज का दुःख और दर से बुरा हाल था झड़ने के बाद सोचने लगा की न जाने माँ क्या करेगी अब कहीं गुस्सा तो नहीं हो जाएगी मुझसे और फिर अगले hi पल सोचता की काश सही से छोड़ पता साला लुंड डालते hi झाड़ गया, एक बार भी माँ की गरम छूट का मज़ा नहीं उठा पाया... अनुज इसी ूढेबुन में लगा हुआ था की सभ्य के शब्दों ने उसे होश में लाया..

सभ्य - अब ऐसे बैठा hi रहेगा या ऊपर भी चढ़ना है...

अनुज- ओह्ह्ह्हह हैं हैं हांण माँ चालू..

अनुज तुरंत उठ खड़ा हुआ उसे एक बात से थोड़ी शांति मिली की उसकी माँ की आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था बड़े hi साधारण तरीके से माँ ने उसे ऊपर चलने को बोलै था...

पर गौर करने वाली बात ये थी की सभ्य ने अपनी साड़ी को अभी तक नीचे नहीं किआ था वो अभी तक गीली उसकी मांसल कमर पर लिपटी हुई थी जिसके कारन उसके बड़े बड़े चूतड़ अब भी नंगा थे उसके बेटे के सामने...

अनुज आगे बड़ा और आगे जाकर दीवार के सहारे घुटनों पर बैठ कर चौपाया बन गया...

सभ्य- ये क्या कर रहा है तू ऐसे घोडा क्यों बन गया..

अनुज- माँ अब तुम मेरी पीठ पर पेअर रखकर ऊपर चढ़ जाना इससे आराम से चढ़ पाओगी...

सभ्य- तुझे लगता है ऐसे हो पायेगा..

अनुज- हाँ माँ बिलकुल...

सभ्य को अनुज को ऐसे देखकर अजीब लग रहा था क्यूंकि उसे तो याद भी नहीं न जाने कितनी बार वो ऐसे hi घोड़ी बन के चूड़ी थी और आज अपने बेटे को नंगा देख कर वैसे hi उसे अजीब लग रहा था पर साथ hi अनुज का लुंड जो उसके नीचे झूल रहा था उसे देखकर सभ्य की छूट में भी खुजली हो रही थी...

खैर सभ्य आगे बड़ी और दीवार को पकड़ कर एक पेअर अनुज की पीठ पर रखा और फिर ऊपर चढ़ी और दोनों पेअर अनुज की पीठ पर टिका दिए..

माँ का पूरा भर अपनी पीठ पर अनुज को भरी तो लगा पर इतना नहीं की उसे कोई परेशानी हो..

Sabhya-Lalla संभालना हम चढ़ रहे हैं अब..

अनुज- ठीक है माँ आराम से चढ़ो...

सभ्य ने दोनों हाथ ऊपर टिकाये और ज़ोर लगाकर ऊपर की तरफ चढ़ने की कोशिश करने लगी... एक बार नहीं हुआ दूसरी बार कोशिश करके उसने अपने पेअर को भी दीवार पर एक जगह टिका दिया साथ hi नीचे से अनुज ने झुके हुए hi ऊपर उठ कर अपनी माँ को और ऊपर कर दिया जिससे सभ्य का चढ़ना आसान हो गया और फिर वो ऊपर चढ़ गयी.. माँ के चढ़ते hi अनुज ने धोती और थैला उठाया और तुरंत छलांग लगाकर ऊपर चढ़ गया...

सभ्य सूखी जगह को देख रही थी पर अभी भी कोने में hi कड़ी थी.. जिसे देखकर अनुज ने पुछा..

Anuj-kya हुआ माँ अंदर की तरफ चलो न यहाँ भीग क्यों रही हो अब भी..

सभ्य- देख अंदर जगह अब भी सूखी है..

अनुज- ये तो ाचा है न सूखी जगह hi तो चाहिए थी हमें..

सभ्य- अरे पागल पर हमारे कपडे गीले हैं कितने अगर हम जायेंगे तो वो भी कपड़ों की वजह से गीली हो जाएगी...

अनुज- फिर अब क्या करें..

सभ्य- कुछ नहीं कपडे यहीं दाल देते हैं...

और ये कहकर सभ्य ने अपने खुले हुए ब्लाउज को अपने बदनसे अलग कर दिया...

अनुज की तो आँखें हैरानी से फटी रह गयी उसको यकसँ नहीं हुआ की उसकी माँ खुद से उसके सामने पूरी नंगी हो रही है वैसे तो वो लगभग नंगी hi थी पर फिर भी खुद से कहना और बदन पर कपडे का एक भी टुकड़ा न होना बड़ी बात थी...

ब्लाउज के बाद सभ्य ने साड़ी को पकड़ा जो उसकी कमर से लिपटी हुई थी और उसे भी खोलकर अलग कर दिया...

अब सभ्य बिलकुल मादरजात नंगी अपने बेटे के सामने कड़ी थी जो उसे बस आँखें फाड़े देखे जा रहा था

क्या बदन है माँ का बिलकुल काम की मूरत... ऐसा लगता है की माँ का बदन सिर्फ छोड़ने और भोगने के लिए बना है हर तरफ से कामुकता की मूरत, और अगर कोई इस हालत में माँ को देखले तो खड़े खड़े झाड़ जाये...





और इस बात की सहमति अनुज के लुंड ने भी रास की एक बूँद छोड़कर जताई...

सभ्य को तो जैसे फ़र्क़ hi नहीं पद रहा था या वो ये दिखा hi नहीं रही थी की ये कुछ भी अलग है.. साड़ी उतारकर सभ्य ने उसका एक छोर निचोड़ा और उससे अपने गीले बदन को पोंछा और फिर साड़ी को एक तरफ रख दिया और अंदर चली गयी..

सभ्य- अब वहां क्या खड़ा है बदन पोंछकर अंदर आ जल्दी...

अनुज को होश आया तो उसने भी अपनी धोती को अलग किया और निचोड़कर उससे अपने बदन को पोंछा और अंदर आ गया बारिश से बचकर दोनों hi राहत महसूस कर रहे थे...

अनुज की नज़रें अब भी माँ के नंगे बदन से नहीं हैट रही थी और ये बात माँ को भी महसूस हो रही थी...

सभ्य- बीटा एक काम कर वो केले से पत्ते तोड़ ला यहाँ बिछा दे थोड़ा आराम दायक हो जायेगा...

अनुज तुरंत केले से कई सरे पत्ते तोड़ लाया जिसे सभ्य ने बिछाकर एक बिस्तर तैयार कर दिया ..

और फिर उस पर बैठ गयी,

सभ्य- अब थोड़ा आराम मिला है...

अनुज- हाँ माँ सही कह रही हो.. बुरे फंसे बारिश में..

हालाँकि वो भले hi ये बोल रहा था पर मन hi मन बारिश का धन्यवाद कर रहा था की ये बारिश की वजह से hi था की उसकी माँ उसके बगल में बिलकुल नंगी बैठी है... और कुछ देर के लिए hi सही पर मेरा लुंड माँ की छूट के अंदर तक तो गया..

एक तरफ उसको दुःख भी था तो दूसरी तरफ ख़ुशी भी... पर अनुज ने अब अपना दिमाग चलना शुरू किआ की भले hi कुछ पल के लिए hi सही मैंने माँ को छोड़ा मेरा लुंड उनकी छूट में गया और अपना रास भी छोड़ा और इस सबके बाद भी माँ गुस्सा नहीं है बल्कि बिलकुल शांत नज़र आ रही हैं साथ hi खुद से नंगी भी हुई इसका मतलब यही है अनुज की ऐसा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा तो अभी करना है जो भी करना है...

शालू और कर्मा

मौसी भी ये कहकर वैसे hi पहले की तरह पीछे कर्मा से टिक कर बैठी पर वैसे hi उनके मुँह से एक चीख निकल गयी....

क्यूंकि इस बार मौसी जैसे hi बापिस बैठी तो. कर्मा के लुंड को अपने चूतड़ों के बीच फंसने की जगह वो उस पर hi बैठती चली गयी... और कर्मा का लुंड उनकी छूट में घुसता चला गया...

एक आह्हः के और पानी के छाप के साथ मौसी बैठ गयी और कर्मा का लुंड पहली बार उसकी मौसी की गरम कासी हुई रसीली छूट में जड़ तक समां गया था...

इस बात का एहसास जैसे hi दोनों को हुआ तो दोनों hi अपने अपने तरीके से प्रतिक्रिया देने लगे..

मौसी को यकीन नहीं हो रहा था की उन्होंने कर्मा का लुंड जिसे वो अपना बीटा मानती है उसे छूट में भर लिए है...

पिछले कुछ दिनों से इकठी हुई उत्तेजना साथ hi काफी समय से प्यासी और सूनी पड़ी छूट कर्मा के कड़क और लम्बे लुंड को अंदर पाकर ख़ुशी से आंसू बहाने लगी, रिसने लगी... छूट की दीवारों ने लुंड को अचे से जकड लिए..

मौसी इस एहसास से पागल सी होने लगी उन्हें पता था ये गलत है पर साथ hi इतना ाचा भी लग रहा था...

वहीं कर्मा तो उत्तेजना के सागर में गोते लगा रहा था अपनी मौसी की छूट में लुंड डालकर वो बेहद खुश था उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसने अपनी मौसी की छूट को भी भेद लिए था...

पहले ममता चची फिर बुआ फिर माँ, मंजू तै और अब मौसी.. वो ख़ुशी से पागल हो रहा था..

शालू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह तेराः वोओओओओ...

कर्मा- ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह हाँ मौसी लगता है सांप बिल में घुस्सस्स गया है... अहह

कर्मा के हाथ पानी के अंदर hi मौसी की चिकनी कमर और पेट पर रेंगने लगे..

शालू- ओह्ह्ह्हह काफी तगड़ा सांप है री. पूरा बिल भर गया है. बिल छोटा पद रहा है..

..

शालू ने भी कर्मा का साथ देते हुए कहा...

मौसी के मुँह से ये सुनकर उनकी छूट में hi कर्मा के लुंड ने एक झटका दिया...

कर्मा- अब सांप घुस गया है तो बिल को बड़ा कर के hi निकलेगा मौसी.

शालू को कर्मा का लुंड अपनी छूट में फूलता हुआ महसूस हुआ तो उसकी एक आह निकल गयी

शालू- अह्ह्ह्हह वो कैसे लल्ला..

कर्मा -. खुदाई करके मौसी...

कर्मा ने मौसी के दोनों छूछीयों को मसलते हुए कहा...

शालू- खुदाई वो कैसे होगी...

शालू के मुँह से अपने आप hi ये निकल गया...

कर्मा तो जैसे इसी पल के इंतज़ार में था.

कर्मा-. अभी दिखता हूँ मौसी.

इसी के साथ कर्मा ने मौसी की कमर को पकड़ा और उसे ऊपर उठाया और फिर दोबारा नीचे छोड़ दिया कर्मा का लुंड मौसी की छूट से लगभग पूरा बहार निकला और फिर खच से बापिस समां गया.. इसके साथ hi नीचे से अपनी कमर के झटके भी लगाना शुरू कर दिए ..

शालू- ओह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह तेराः आह्हः सांपप्पप्प..

अब मौसी को खुद को रोकना भी नामुमकिन हो गया और वो अपने भांजे के लुंड पर उछलने लगी... कर्मा भी नीचे से अपने लुंड की चोट मौसी की छूट में मरने लगा..





हर झटके के साथ पानी में छाप छाप आवाज़ आने लगी जो माहौल को और उत्तेजक बना रही थी...

कर्मा- ahhhhhhhhhh मौसी कैसीईई लग रहीए है खुदाआईईईइहह्ह..

शालू की बड़ी बड़ी छुछियां हर झटके के साथ उछाल कूद कर रही थी.

शालू- ओह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह अब्बब्बब्बब्ब ये नाहाटककककककज. अह्ह्ह छौऊड़ड़ड़ड़ आह्ह्ह्हह...

कर्मा- कौनसा नाटकककक मौसियी..

कर्मा ने अपने झटको को और तेज़ करते हुए पुछा...

शालू- अह्ह्ह्हह एई सांपप्पप्प और बिल्ल्ल काठ नाटककककक आअह्ह्ह्हह तेराः लुंड आह्ह्ह्हह कीटनाआ बड़आहहह ही री...

कर्मा- ओह्ह्ह्ह मौसीय तुम्हारी चुत के लिए hi बनाए हैईईई...

शालू- ओह्ह्ह्हह तो छोड़ड़ड़ड़ड़ अपणीइइइइइइ मौसीईई कोऊ और कर उसकी पीएसीई चूऊत्त की कुटाई...

कर्मा- ahhhhhhhhhh क्या मस्त छूट है मौसी तुम्हारीइइइइइइइ अह्ह्ह्ह मज़ाआठ आ रहा है..

शालू- इस्स्स्सस्सीीी छूट की वजह सीई आअज ये देखना हुआआ हैई..

कर्मा- क्या मौसियी..

शालू- इसी निगोड़ी कीईई अह्ह्ह प्यास की वजह से आअज नंगी होकर अपने भांजे से चुद रही हूँ... और क्या क्या करवाएगी न जानिए ये...

कर्मा- टोह्हह्हह इसमेटी बुरा क्या है मौसी... जो ाचा लगे वो करते जउओ...

शालू- आह्ह्हह्ह्ह्ह और तेज़ आअज सरई खुजलिई मिटाह्ह्ह दी..

कर्मा ने शालू के पैरों को अपनी पीठ के पीछे कर थोड़ा आगे की और झुकाया और कमर थम कर दे दाना दान छूट की कुटाई करने लगा..





अब शालू भी पूरी तरह से चुदाई और कर्मा के लुंड की मार के मज़े में गोते लगा रही थी अब कुछ भी गलत सही का ध्यान नहीं था बस ध्यान था तो अपनी छूट में अंदर बहार होते कर्मा के तगड़े लुंड का और दोनों के घर्षण से जो आनंद की चिंगारियां उठकर पूरे बदन में फ़ैल रही थी उस पर......

कर्मा भी अपनी माँ की बहन को छोड़कर फूले नहीं समां रहा था और ताबड़तोड़ धक्कों के साथ अपनी मौसी को छोड़ रहा था....

दोनों के hi चेहरे पानी से बहार थे जबकि बदन अंदर थे और पानी के अंदर hi चुदाई का एक ऐसा तूफ़ान आया हुआ था जिसने पूरे पानी के साथ साथ दोनों के बदन में उत्पात मचाया हुआ था... हर बढ़ाते पल के साथ दोनों की उत्तेजना बढाती जा रही थी...

शालू जो की काफी दिनों से चुदाई के इस परमसुख से वंचित थी आज कर्मा के अपने सेज भांजे के तगड़े लुंड की दुमदार चुदाई से जल्द hi उस चरम सुख के शीर्ष पर पहुंच गयी और फिर भरभरा के झड़ने लगी... उसकी छूट का रास कर्मा के लुंड के साथ इर्द गिर्द होते हुए पानी में मिल गया उसका बदन अकड़ा और फिर ढीला पद गया...

शालू आगे को गिरने लगी तो कर्मा ने उसके पैरों को छोड़ा और एक पेअर को गद्दे की सतह पर टिका दिया साथ hi एक हाथ से दीवार का सहारा भी दिलवा diya...Wohin कर्मा पर अभी कोई असर नहीं था वो मौसी के एक पेअर को उठाये दुसरे हाथ से एक छुच्छी को मसलते हुए अब भी उनकी छूट की कुटाई किये जा रहा था...





कर्मा- आअह्ह्ह्ह मौसियी कभी सोचाआ नहीं था मैं तुम्हेईई छोड़ पाउँगा...

शालू जो की एक बार झड़ने के बाद थोड़ी शांत हो गयी थी उसने अपने भांजे की बात सुनते हुए साथ hi छूट में अब भी चलते हुए लुंड को महसूस कर जवाब दिया..

शालू- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह पाउँगा से क्या मतलब तू चाहता था आह्हः पहले से की हमारे बीच ऐसा कुछ हो...

कर्मा- ahhhhhhhhhh मौसी सच कहूं तो जिसकी ऐसी मौसी होगी वो कैसे रोक पायेगा खुद को...

कर्मा ने आगे झुककर मौसी के रसीले होंठों को एक बार चूसते हुए कहा...

शालू- है ढैय्या लल्ला कितना गन्दा है तू.. अपनी hi मौसी को छोड़ना चाहता था...

कर्मा - मौसी अह्ह्ह्ह अगर गन्दा होने पर तुम्हे छोड़ने का मौका मिले तो कौन गन्दा नहीं बनना चाहेगा...

शालू को न जाने क्यों कर्मा की बातें सुनकर ाचा लग रहा था इसीलिए वो और उसका साथ दे रही थी..

शालू- पर तू नहीं जनता मैं तेरी मौसी हूँ सगी मौसी... और मौसी भांजे के बीच ये सब गलत है लल्लाह

कर्मा- अह्ह्ह मौसी अगर ाचा लगता है तो कुछ गलत nahiiiiiiiiiiiiiiii मेरे पास लुंड है तुम्हारे पास चुत अगर गलत होता तो लुंड तुम्हारी छूट में घुसता hi नहीं..

कर्मा ने शालू की छूछीयों को मसलते हुए कहा साथ hi नीचे से लगातार झटके भी लगा रहा था..

शालू- ओह्ह्ह्हह ये क्याहहह कह रहा है लल्लाह.. इसका मतलब तू मुझे पहले भी छोड़ देताह..

कर्मा- अगर मौका मिलता तो ज़रूर...

शालू- क्यों पर

कर्मा- तुम्हारा बदन hi इतना लाजवाब है मौसी कौन नहीं छोड़ना चाहेगा.. तुम्हारी बड़ी बड़ी छुछियां, मांसल गोल मटोल बड़ी गांड.. हर तरह से छोड़ने के लायक बदन है...

शालू- अह्ह्ह्हह बदन तो जीजी का भी मस्त है मुझसे भी ज़्यादा तो क्या तू उन्हें भी छोड़ना चाहता था...

कर्मा ने इस बात का जवाब नहीं दिया बस अपने झटके तेज़ कर दिए..

शालू- बोल कर्मा क्या तू अपनी माँ को भी छोड़ना चाहता था पहले से hi... जैसे मुझे छोड़ रहा है.. क्या उनकी छूट में भी अपने इस तगड़े लुंड को दाल कर ऐसे hi छूट की कुटाई करना चाहता था..

कर्मा मौसी की बातों से बेहद उत्तेजित होता जा रहा था...

शालू- अब जवाब दे आह्ह्ह्हह कर्मा तेरी तो चाहत पूरी हो गयी होगी न अपनी माँ को सबके सामने छोड़ कर... जो तब मजबूरी लग रही थी वो तेरी इच्छा थी न..

शालू की हर बात क्र साथ कर्मा का झटका उसकी छूट में और तेज़ लग रहा था... साथ hi शालू को भी इस सब में बहुत मज़ा आ रहा था वो भी बेहद उत्तेजित हो गयी थी झड़ने के बाद भी...

शालू- शायद hi कोई ऐसा लड़का होगा कर्मा जिसने अपनी माँ और मौसी दोनों को hi छोड़ा होगा पर तूने ये किया है..

कर्मा इतना उत्तेजित हो गया था की उसने शालू की बाजुओं से अपनी बाजुओं को निकल कर बुरी तरह से उसे जकड कर खुद से चिपका लिया और दनादन पुण्ड पेल्नर लगा...

शालू- अह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhh आराम से लल्लाह किसकी छूट ज़्यादा ाछीइ लगी तुझे मेरिइइइ या तेरी मा कीईई अह्ह्ह्ह..

अब कर्मा से भी सहना बिलकुल नामुमकिन हो गया तो उसने अपने दोनों पैरों को पानी में उठा लिए साथ hi दीवार से दूर हो गया और ताबड़तोड़ मौसी को छोड़ने लगा ..

पेअर लगे न होने से और कोई सहारा न होने पर दोनों पानी के अंदर जाने लगे...

शालू- ओह्ह्ह्हह कर्माहहहह हम पानी में.. ुहब्फदपपपपपदफ्जल.

शालू इतना hi बोल पाई की दोनों के चेहरे पानी के अंदर आ गए शालू तो दर गयी की ये कर्मा क्या कर रहा है आज डूबा कर hi मानेगा ...

वहीं कर्मा को बस चुदाई की पड़ी थी कुछ hi पालो में दोनों पानी के अंदर थे और कर्मा लगातार अपनी मौसी को छोड़ रहा था वो इतना उत्तेजित हो चूका था की छह कर भी नहीं रुक सकता था.. उसकी गोलियों का रास उसे अपने लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था..

इसलिए उसका पूरा ध्यान मौसी की चुदाई पर था और वो उन्हें छोड़ भी वैसे hi रहा था





हर झटके के साथ शालू की छुछियां पानी में उछाल कूद कर रही थी वहीं उसकी सांस फूलती जा रही थी उसे लग रहा था आज उसके जीवन का आखिरी दिन होने वाला है... इसी बीच शालू को अपने बदन पर कर्मा के हाथ और कस्ते हुए महसूस हुए और उसे छूट में लुंड फूलता हुआ भी महसूस हुआ...

और फिर एक गुर्राने की आवाज़ के साथ कर्मा ने उसकी छूट में चार पांच तगड़े धक्के लगाए और फिर वो थोड़ा शांत हो गया.. शालू को अपनी छूट भी उसके रास से भरी हुई लगी...

कर्मा के शांत होते hi उसकी पकड़ हलकी हुई तो शालू ने ऊपर आने की कोशिश की और अब कर्मा को भी होश आया तो उसने अपने पेअर ज़मीन पर टिकाये और मौसी और खुद के चेहरे को पानी के ऊपर ले आया...

बहार आते hi शालू बुरी तरह सांस लेने लगी... कुछ देर तक दोनों अपनी सांस को काबू में करने की कोशिश करते रहे..

इसके बाद अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
पर अनुज ने अब अपना दिमाग चलना शुरू किआ की भले hi कुछ पल के लिए hi सही मैंने माँ को छोड़ा मेरा लुंड उनकी छूट में गया और अपना रास भी छोड़ा और इस सबके बाद भी माँ गुस्सा नहीं है बल्कि बिलकुल शांत नज़र आ रही हैं साथ hi खुद से नंगी भी हुई इसका मतलब यही है अनुज की ऐसा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा तो अभी करना है जो भी करना है.



अपडेट 152
अनुज और सभ्य

थोड़ी देर यूँ hi बैठने के बाद और दिमाग चलने के बाद भी अनुज को कुछ ऐसा नहीं सूझ रहा था की बात आगे बढ़ा सके... ऊपर माँ का नंगा बदन उसे कुछ सोचने hi नहीं दे रहा था..

बार बार अनुज अपने दिमाग पर ज़ोर दाल रहा था की कुछ सोच अनुज कुछ सोच,

क्या कर रहा है कुछ तरकीब लगा..

फिर उसके मन में ख्याल आया की इतना क्या सोचना एक बार तो वैसे भी लुंड छूट में घुस चूका है तो दोबारा क्यों नहीं...

अनुज- माँ ये कपडे उतरने का भी कोई फायदा नहीं हुआ.

सभ्य- मतलब.

Anuj-matlab बदन तो हमारा फिर भी गीला है.

सभ्य- अब क्या करें लल्ला गीला तो है पर कोई कपडा भी तो नहीं है पोंछने के लिए.

अनुज- हाँ पर एक तरीका है.

सभ्य- क्या?

अनुज- हवा से पानी सूख जाता है न.

सभ्य- हाँ..

अनुज- तो मैं तुम्हे फूँक मार मार कर सूखा देता हूँ.

सभ्य- धत्त पागल ऐसे तो सूख गए.

अनुज- अरे सच्ची माँ अभी दिखता हूँ..

सभ्य- रहने दे नहीं सूखा पायेगा...

अनुज- ओफ्फो तुम करने तो दो..

सभ्य- ाचा ठीक है बाबा जो मन करे कर..

अनुज माँ की मंज़ूरी मिलते hi खुश हो गया और माँ के पैरों की और आकर बैठ गया और माँ के एक गीले पेअर को फूँक मरने लगा..

पर पानी इतनी जल्दी कहाँ सूखने वाला था...

सभ्य- हमने कहा था न नहीं सूखेगा...

अनुज- अरे रुको न माँ करने तो दो...

Sabhya-acha ठीक है चिल्ला क्यों रहा है...

अनुज ने दोबारा सर झुकाया और इस बार फूँक मरने की जगह जहाँ पानी की बूँद थी वहां पर अपने होंठ रख दिए और बूँद को चाट लिए..

सभ्य- उठ ये क्या कर रहा है..

अनुज- अरे माँ पहले पानी को चाट लूंगा फिर फूँक से सूखा दूंगा...

और ये बोलकर बिना माँ के जवाब का इंतज़ार किये अनुज बापिस माँ के पैरों को चूमने चाटने में लग गया..

सभ्य- अह्ह्ह अछहहआ..

सभ्य ने असमंजस में कहा..

वहीं अनुज के तो मज़े शुरू हो गए, अपनी माँ के मांसल चिकने बदन को चूमने चाटने लगा और माँ के बदन से पानी के साथ साथ उनका रास भी चाटने लगा...

सभ्य को भी अनुज के होंठों का एहसास बदन पर होने लगा पर वो कुछ बोली नहीं...

वहीं अनुज के हौसले तो बढ़ाते जा रहे थे पिंडलियों को चूमते चाटते हुए वो धीरे धीरे से ऊपर बढ़ने लगा घुटनो को चूमते हुए अनुज धीरे धीरे माँ की गदराई हुई जांघों तक आ गया..

और ज्यों ज्यों अनुज के होंठ सभ्य के बदन को चूम रहे थे उसका बदन गरम होता जा रहा था उसकी छूट में चीटियां सी रेंग रही थी.. साथ hi वो उत्तेजित होती जा रही थी पर वो अनुज को रोकने का कोई प्रयास नहीं कर रही थी...

अनुज ने ऊपर बढ़ाते हुए बड़ी चालाकी से जांघों को चूमा और फिर आगे होकर माँ के पेट को चूमने चाटने लगा हर चुम्बन के साथ अनुज और ऊपर बढ़ता जा रहा था





माँ की रसीली नाभि और पेट को चूमते हुए अनुज का चेहरा जल्दी hi माँ की दोनों छूछीयों के बीच पहुंच गया..

सभ्य अनुज की हरकतों से तड़प उठी थी उसके मुँह से बार बार सिसकियाँ निकल रही थी अनुज के चेहरे को करीब पाकर hi सभ्य का सीना तन गया और उसकी चूचियां और ऊपर उठ गयी..

पर अनुज के मन में कुछ और था उसने माँ की रसीली कोमल चूचियों को छुआ भी नहीं बल्कि उनके बीच में चूमते हुए और ऊपर सीने पर चूमने लगा..

सभ्य तो मनो तड़प कर रह गयी...

अनुज पर बिना रूकावट के अपना काम किये जा रहा था गर्दन को चूमते हुए वो माँ के चेहरे पर पहुंच गया और चेहरे पर भी चूमने चाटने लगा...

सभ्य बस एक गुड़िया की तरह अपने बेटे को खुद के बदन से खेलने दे रही थी कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी...

अनुज ने हिम्मत करते हुए माँ के चेहरे को चूमते हुए उनके होंठों को भी एक दो बार चूम लिए और कुछ खास प्रतिक्रिया न पाकर वो माँ के रसीले होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा...





सभ्य जो वैसे hi बेहद उत्तेजित हो चुकी थी कुछ न कर सकीय और बेटे को अपने होंठों का रास पीने दे रही थी...

अनुज काफी देर तक अपनी माँ के रसीले होंठों को चूसता रहा और फिर छोड़ने के बाद बापिस से गर्दन को चाटने चूमने लगा... पर इस बार सभ्य खुद को रोक नहीं पाई और उसने अनुज को खुद से चिपका लिए और उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसे जगह जगह चूमने लगी..

वहीं अनुज की तो ख़ुशी और उत्तेजना का ठिकाना नहीं रहा वो भी माँ को साथ देता देख और जोश में आकर उनके बदन को चाटने चूमने लगा





सभ्य- ahhhhhhhhhh ुहमममममम लाल्ल्लाःह्ह्ह...

अनुज- ुह्ह्ह्हहममममआ

दोनों एक दुसरे के उत्साह को ऐसे hi बढ़ा रहे थे...

अनुज तो जैसे आस्मां में उड़ रहा था उसे लग रहा था की जैसे वो जो छह रहा है वो हो रहा है

वहीं सभ्य के मन में क्या था किसी को नहीं पता था... अनुज अपनी माँ के बदन का पूरा स्वाद ले रहा था और इसी स्वाद को और बढ़ने के लिए अनुज ने झुककर माँ की दोनों छूछीयों को अपने हाथों में भर लिए और मसलने लगा, सभ्य बेटे के हाथों द्वारा छुच्छी मर्दन से जैसे पिघल सी गयी और अपने बदन को ढीला छोड़ दिया..

अनुज को अपनी ये नयी ताकत अछि लग रही थी जिससे वो अपनी गदराये बदन वाली माँ के बदन के साथ एक गुड़िया की तरह खेल रहा था और जैसा वो छह रहा था वैसा hi हो रहा था, अनुज की ख़ुशी और उत्तेजना दोनों का hi कोई ठिकाना नहीं था,

अनुज ने आगे झुककर एक और हिम्मत का काम किआ और माँ की एक छुच्छी को अपने मुँह में भर लिए... और चूसने लगा पूरे ज़ोरों के साथ...





सभ्य- ओह्ह्ह लाल्ल्लाःह्ह्ह ुहमममममम

वहीं अनुज माँ की रसीली छूछीयो का रास पीने में लगा हुआ था... उसे तो जैसे जन्नत का सारा सुख यहीं मिल रहा था बचपन में जिन छूछीयो को चूस चूसकर दूध पिया था आज उन्ही छूछीयो से रास पि रहा था..

सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह ाराअहमममम से लाल्ल्लाहहह...

सभ्य के हाथ खुद बा खुद अनुज के सर पर आगये थे और वो उसे अपनी छुच्छी पर दबा कर और ज़ोर से पीने के लिए उत्साहित कर रही थी... काफी देर तक ये सिलसिला चलता रहा और अनुज अपनी माँ की बड़ी बड़ी छुछियां का रास पीटा रहा... पर अब अनुज के लुंड की दुखन इतनी बढ़ गयी की उसका ध्यान बापिस उस पर गया ..तो उसने माँ की छूछीयों सर मुँह हटाया और जहाँ अब तक वो ऊपर का सफर तय कर रहा था उसने नीचे का सफर शुरू किआ और अपने हाथ को माँ के पेट पर फिरते हुए नीचे उनकी छूट के करीब ले गया और फिर जैसे hi अपनी कनपटी उँगलियों को माँ की रसीली गरम छूट से स्पर्श कराया तभी माँ ने उसका हाथ अपने हाथ से झटक दिया, अनुज को थोड़ी हैरानी हुई पर उसने सोचा शायद माँ अब हाथ नहीं उसका लुंड चाहती हैं...

इसलिए अनुज थोड़ा आगे हुए और माँ की जांघों को फैलते हुए उनके बीच आ गया और अपने लुंड को पकड़ा तो उसके हाथ काँप रहे थे उन्ही कांपते हाथों के साथ उसने अपने लुंड को माँ की गीली छूट के मुहाने पर स्पर्श कराया hi था की अचानक से वो हुआ जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी,

माँ ने अनुज को धक्का देते हुए हटा दिया.

सभ्य- अब बस लल्ला आराम से बैठ..

ये शब्द सुनते hi, अनुज का तो जैसे दिल बैठ गया, उसके सरे सपने टूट गए, उसे समझ hi नहीं आ रहा था की अचानक से ये क्या हो गया..

सभ्य अनुज को हटाकर सीढ़ी होकर बैठ गयी वहीं उसने अनुज को देखा तो वो वैसे hi टकटकी लगाकर उसे hi देखे जा रहा था...

की तभी एक आवाज़ की और दोनों का ध्यान गया तो दोनों की आँखें फैट गयी साथ hi एक पल को दिल भी रुक गया..

दोनों ने देखा की जिस छत के नीचे वो बैठे थे उसके एक तरफ का हिस्सा टूट कर नीचे गिरा है...

अगले hi पल दोनों ने होश संभाला और उठे और भागे उठकर अनुज पहले कूड़ा और फिर नीचे से जल्दी से अपनी माँ को उतरा और फिर जल्दी से कोने में पड़े कपडे और थैला उठाये hi थे की छत का और हिस्सा टूटकर गिरने लगा दोनों बुरी तरह से दर गए और ऐसे hi भागे...

सभ्य- यहाँ से निकल लल्ला जल्दी से जल्दी न जाने कब ये पूरा hi ढह जाये..

अनुज- हाँ माँ चलो सीढ़ियां उस तरफ हैं .

दोनों भूल चुके थे की अभी कुछ पल पहले उनके बीच क्या हो रहा था, जब बात जान पर बन जाये तो एक पल के लिए hi सही साडी हवस फुर्र हो जाती है..

बारिश तो बंद हो चुकी थी पर हर तरफ पानी भरा हुआ था दोनों माँ बेटे बिलकुल नंगे किसी तरह से सीढ़ियां चढ़ते हुए बहार निकले और ऊपर चढ़कर. बहार का नज़ारा देखा तो और डरने वाला था...

हर तरफ पानी hi पानी नज़र आ रहा था कहीं ज़मीन का अटपटा hi नहीं लग रहा था..

सभ्य- लल्ला चल इस जगह से जल्दी निकलते हैं न जाने कब ढह जाये और हम गिर जाएं...

अनुज- हाँ माँ चलो उस तरफ चलते हैं.. जिधर से आये थे..

सभ्य- हाँ चल...

दोनों माँ बेटे आगे बढ़ने लगे आगे आगे अनुज पीछे पीछे सभ्य.. थोड़ा आगे चलते hi अनुज का पेअर एक जगह कीचड में फंस गया...

सभ्य- क्या हुआ?

Anuj-kuch नहीं माँ पेअर कीचड में फंस गया...

सभ्य- निकलने में मदद करूँ..

अनुज- नहीं माँ तुम आगे चलो थोड़ा दूर होकर नहीं तो तुम्हारा भी फंस जायेगा.. मैं निकल लूंगा..

सभ्य- ठीक आ जल्दी.

सभ्य ये कहकर अनुज के रस्ते से थोड़ा दूर हटते हुए आगे बढ़ने लगी वहीं अनुज अपना पेअर निकल कर धीरे धीरे आगे बढ़ने की कोशिश करने लगा और इसी बीच उसकी नज़र अपनी नंगी माँ पर पड़ी और जो ख्याल कुछ देर के लिए गायब हो गए थे वो पल भर में बापिस आ गए, लुंड जो सिकुड़ गया था उसमे फिर से एक नयी ऊर्जा भरने लगी और इस सब की वजह थी माँ की बड़ी गोल मटोल गांड जो हर कदम के साथ ऊपर नीचे हो रही थी...





माँ के चूतड़ों को यूँ ऊपर नीचे होते देख पल भर में hi अनुज का लुंड पूरा तन गया... वहीं सभ्य मस्त गदराई घोड़ी की तरह चली जा रही थी...

अनुज अपनी माँ की मदमस्त गांड को देखकर उसके पीछे जैसे खिंचा हुआ सा चलने लगा, उसे पता भी नहीं चला की कब वो कीचड से बहार आ गया और अब अपनी माँ से थोड़ी दूर hi चल ने लगा . जिससे उसकी गांड के इस अद्भुत नज़ारे को लगातार देख सके...

सभ्य को ये खबर ज़रूर थी की अनुज उसके पीछे पीछे चल रहा है और ये अंदाज़ा भी था की अभी उसकी नज़र कहाँ होगी इसीलिए वो खुद भी न जाने क्यों अपनी गांड को थोड़ा और मटका मटका कर चलने लगी...

वहीं अनुज से नज़ारे को सहना मुश्किल होता जा रहा था उसका हाथ खुद बा खुद उसके लुंड पर पहुंच गया और उसे मुठियाने लगा अपनी माँ के पीछे चलते हुए..

किसने hi सोचा था की जंगल के बीच में वो और उसकी माँ बिलकुल नंगे घूम रहे होंगे और वो अपनी माँ की गांड को देखते हुए अपने लुंड को सहला रहा होगा,

दोनों थोड़ा सा आगे बढ़ते hi जा रहे थे की अचानक से सभ्य की आह निकल गयी..

Anuj-kya हुआ माँ?

अनुज ने चिंता से पुछा..

Sabhya-lagta है अब मेरे दोनों पेअर कीचड में घुस गए...

अनुज- रुको मैं मदद करता हूँ,

Sabhya-nahi रुक तू नहीं तो तू भी फंस जायेगा मैं निकलती हूँ...

ये कहकर सभ्य आगे की और बढ़ने की कोशिश करने लगी.. पर जैसे hi उसने आगे को ज़ोर लगाया उसका संतुलन बिगड़ गया और वो बेचारी आगे को गिर गयी . खुद को गिरने से बचने के लिए उसने अपने हाथों को आगे कर टिका दिया जिसका नतीजा ये हुआ की उसके हाथ भी अब कीचड में घुस गए और वो बेचारी कीचड के बीच नंगी चौपाया बन गयी ..

सभ्य- अह्ह्ह लाल्ल्लाहहह मेटे तो हाथ भी फंस गए..

अनुज- मैंने बोलै था माँ मुझे निकलने दो .रुको अब आया..

सभ्य- हाँ लल्ला जल्दी आ .

Anuj-keechad में छाप छाप करते हुए अपनी माँ के करीब पंहुचा तो उसकी हालत और ख़राब हो गयी क्यूंकि जिस हालत में अभी माँ थी चौपाया बानी हुई उससे उसकी गांड और बड़ी एयर बहार को निकली हुई नज़र आ रही थी...

अनुज तो जैसे माँ की गांड की सुंदरता में खोता चला गया वहीं जैसे जैसे माँ निकलने की कोशिश करती तो गांड और हिलती जिसे देखकर तो अनुज का लुंड फटने को तैयार हो गया...





अनुज का हाथ माँ को बचने की जगह एक बार फिर से लुंड पर पहुंच गया...

सभ्य- अनुज बीटा क्या कर रहा है जल्दी निकल मुझे..

अनुज- ुह्ह्हह्ह?? हाँ हाँ माँ निकलता हु अब्बी..

अनुज माँ के थोड़ा करीब आया और फिर झुककर निकलने के लिए आगे बढ़ा पर उसका ध्यान अब भी माँ के चूतड़ों और उनके बीच झांकती उनकी रसीली छूट उसके ऊपर गांड का भूरा छेड़ इसी पर टिका हुआ था जो हर पल उसकी उत्तेजना को बढ़ता जा रहा था... उसके लुंड से रास की बूँद एक एक करके बहार आ रही थी...

फिर भी अनुज ने किसी तरह ध्यान हटाकर माँ को कीचड से निकलने की कोशिश करने लगा और माँ की कमर को पकड़ कर उठाने लगा और ज़ोर लगाने लगा...

सभ्य- ahhhhhhhhhhl लल्ला पेट से नहीं...

अनुज- हाँ माँ कुछ हो hi नहीं रहा..

सभ्य- ऐसा कर एक एक करके पेअर निकलने की कोशिश कर..

अनुज- ठीक माँ अभी करता हूँ...

इसके बाद अनुज एक बार फिर माँ की गांड के पीछे गया और उसपर नज़र गड़ाए हुए hi एक जांघ को पकड़ कर उठाने लगा पर जैसे hi उठाने की कोशिश की तो उसका तना हुआ लुंड माँ की जांघ से स्पर्श हुआ और स्पर्श होते hi अनुज को लगा जैसे उसके बदन में बिजली दौड़ गयी.. उसका लुंड झटके मरने लगा बस फाई अनुज से रुकना मुश्किल हो गया .

अनुज ने एक लम्बी सांस भरी और माँ की जांघ को छोड़ते हुए खुद को माँ के पीछे झुकाया और एक हाथ से माँ के चूतड़ को थमते हुए दुसरे से लुंड को थमा और फिर एक पल को कुछ सोचा और अगले hi पल...

सभ्य की एक तेज़ सिसकी निकल गयी...

सभ्य- आह्ह्ह्हम्म्म्मा..

अनुज ने अपने लुंड को माँ की छूट के द्वार पर टिकाया और बिना समय गंवाए और माँ को इस बार सोचने या हटने का मौका दिए बिना एक झटका लगाकर लुंड को अंदर घुसा दिए... करीब आधा लुंड उसकी माँ की छूट में समां गया जिसकव साथ hi उसकी माँ के मुँह से सिसकी निकल गयी...

सभ्य- ahhhhhhhhhhl लाल्ल्लाहहह ये क्याःह्ह्ह कियाआ निकालललललललल..

अनुज ने माँ की बात का कोई जवाब दिए बिना दोनों हाथों से उनकी कमर को थमा और फिर एक और तगड़ा झटका दिया जिसके साथ hi पूरा लुंड सरसराता हुआ माँ की छूट में जड़ तक समां गया...

अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ज.

सभ्य- अनुजजज्जजज निकाआल ीसीईए मत्तत्तत कर..

अनुज- अब मत रोको maaaahhhhhhhhhhhh बहुत तडपाआआ हँ तुम्हारीइइइइइइइ चुत के लिए..

अनुज ने लुंड को बहार खींच कर दोबारा झटका देते हुय्र कहा... और जैसे आसमान ने भी उसके साथ सहमति जताई और बारिश फिर से शुरू हो गयी...

सभ्य- ahhhhhhhhhhl ढैय्या पारर ये सही nahiiiiiiiiiiiiiiii है बेटा...

अनुज- जिसे करने में इतना अच्छा लगता हो वो गलत कैसे हो सकता है माँ...

अनुज अब माध्यम गति से माँ को छोड़ने लगा..

वहीं सभ्य भी लुंड छूट में जाने के बाद बहकने लगी और उसका विरोध कमज़ोर पड़ने लगा...

अनुज माँ के ऊपर चढ़कर अचे से उसे धीरे धीरे धक्कों के साथ छोड़ने लगा





अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh इतनी मस्त छूट है तुम्हारीइइइइइइइ आह्हः ऐसा मज़ाआ कभी नहीं आया...

सभ्य- ahhhhhhhhhhl ढैय्या कमीने शर्म नहीं आ रही तुझे....

अनुज- अब्ब्ब कोई शर्म nahiiiiiiiiiiiiiiii मा बस मुझे तुम्हारी छूट चाहिए...

अनुज ने अपने धक्कों की गति को बढ़ाते हुए कहा

सभ्य- उह्ह्ह जिस चुत से निकला था आज उसी को छोड़ रहा है..

अनुज- तभी तो माँ आज मुझे मेरा हक़ मिलाः है, अपने जन्म अह्ह्ह स्थान में बापिस समां जाने काठ.

सभ्य- कितमाह बेशरम हो गया है टूउउउ..

अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh मादरचोद बन गया हूँ तो बेशरम बनने में क्या बुराई है...

अनुज से ऐसी बातें करके सभ्य हर पल और उत्तेजित हो रही थी और यही असर अनुज पर भी पद रहा था...

सभ्य- शर्म nahiiiiiiiiiiiiiiii आती तुझे खुद को गली देते हुए..

अनुज- ahhhhhhhhhh माह मादरचोद गली nahiiiiiiiiiiiiiiii ये तो दुनिया का सबसे बड़ा सुख है आज पता चला है..

अनुज ने हाथ आगे बढाकर माँ की भरी छूछीयो को हाथ में भरके मसलते हुए कहा..

सभ्य- ahhhhhhhhhhl तोहह अब खुश है न.. मादरचोद...

अनुज माँ के मुँह से अपने लिए मादरचोद सुनकर और जोश में आ गया और तेज़ तेज़ झटके माँ की छूट में लगाने लगा...

अनुज- अह्ह्ह मुझसे ज़्यादा खुशःह्ह तो तुम्हे होनाः चाहिए maaaahhhhhhhhhhhh परिवार के सरे मर्दों के लुंड से चुद गयी अब तुम...

पापा फिर भैया और अब मैं...

अनुज की ये बात जब सभ्य को समझ आई तो न जाने क्या हुआ उसके बदन में अकड़न सी होने लगी.. वो ये सब सोचते हुए बेहद उत्तेजित हो गयी..

सभ्य- ahhhhhhhhhhl और तेज़्ज़ज़ छोड़ड़ड़ड़ड़ मादरचोद.... अह्ह्ह्हह लाल्ल्लाहहह..

सभ्य ये कहते हुए अपनी गांड को पीछे उसके लुंड पर पटकने लगी

अनुज माँ का ये रूप देखकर बावला सा हो गया और तेज़ी से उसे छोड़ने लगा..

अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh ईई लोओओओओ बेटे का लुंड...

सभ्य- ahhhhhhhhhhl हॉँण्णन और तेज़...

अनुज- कितनी नसीब वाली आह्ह्ह्हम्म्म्म हो maaaahhhhhhhhhhhh जो घर्र में hi तीन तीन लुंड मिल गयी..

सभ्य- ahhhhhhhhhhl हॉँण्णन नसीब वाली तो हूँ अह्ह्ह्ह छोड़ड़ड़ड़ अपनी माँ को लल्लाह और तेज़..

सभ्य उत्तेजना में सब होश खो बैठी थी और अनुज के लुंड से पूरे मज़े लेकर चुद रही थी...

अनुज भी माँ का साथ पाकर खुश था और बेहद उत्तेजित भी हो गया था उसे एक बार फिर से अपना रास लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था...

और उसके झटके माँ की छूट में और तेज़ और गहरे होते जा रहे थे...

वहीं दो चार पलों बाद hi सभ्य का बदन अकड़ते हुए कंपनी लगा वो थरथराने लगी और थरथराते हुए hi वो हाथों पर अपना वजन नहीं सह पाई और आगे गिर गयी जिससे अनुज का लुंड माँ की छूट से बहार निकल गया..

अनुज को भी जैसे hi एहसास हुआ की उसकी चुदाई से माँ झाड़ गयी है वो आप खो बैठा और उसका लुंड भी धार के बाद धार छोड़ने लगा... जो की माँ की पीठ और चूतड़ों को और भीगने लगी... खैर जब दोनों का झड़ना ख़त्म हुआ तो दोनों शांत हुए इसके बाद अनुज ने माँ को कीचड से निकला और दोनों आगे भी बढ़ने लगे..

अनुज अब झड़ने के बाद जब उत्तेजना उसके दिमाग से उतरी तो उसे फिर से दर और शर्म लगने लगी की जो अभी उसने किया उसका क्या असर माँ पर हुआ होगा वो अब माँ से आँख तक नहीं मिला प् रहा था...

वहीं सभ्य बिना किसी भाव के बिना कुछ बोले आगे बढाती जा रही थी सभ्य की ख़ामोशी अनुज को और डरा रही थी..

दोनों के hi बदन कीचड से पूरी तरह साणे हुए थे... बारिश एक बार फिर से थम गयी थी...

पर सभ्य आगे चले जा रही थी और रुकने का नाम तक नहीं ले रही थी... अनुज बिना बोले उसके पीछे पीछे चला जा रहा था...

दोनों आगे चलते चलते एक झील के किनारे पहुँच गए तब जाकर सभ्य ने मुड़कर अनुज की और देखा और बोलै - ये वही तालाब है जहाँ हमें आना था?

अनुज- देखता हूँ..

फिर अनुज ने याद किया तालाब की पहचान के बारे में जो जो बताया था वो इससे मेक खता है की नहीं..

कुछ पल सोचने के बाद और जांचने के बाद अनुज माँ की तरफ मुदा और मुस्कुरा कर कहा ये वही तालाब है माँ...

जिसे सुनकर सभ्य के चेहरे पर भी शांति के भाव आ गैर...

अनुज ने हाथ में लटके थैले से पोटली निकली और थैला माँ को दे दिया सभ्य ने थैला लिए उसमे से गीले कपडे साड़ी वगेरा ली और वहीं तालाब के किनारे झाड़ियों के पास बिछा दिया वहीं अनुज आगे गया पोटली लेकर और कालक रानी को याद करए हुए हाथ में पोटली लिए तीन बार तालाब में डुबकी लगायी और तीसरी बार निकल कर देखा तो पाया सच में पोटली के नीचे का रंग गायब हो चूका था मतलब शक्ति जाग्रत हो गयी थी..

अनुज खुश होता हुआ बापिस किनारे पर माँ के पास आया और पोटली दिखते हुए बोलै- माँ रंग गायब हो गया मतलब शक्ति जाग गयी..

सभ्य- चलो आखिर जिस काम के लिए आये थे वो हुआ अब तू बैठ आराम कर ये थैले में रख मैं नहलेति हूँ तालाब में ये कीचड से पूरा बदन खुजा रहा है..

अनुज- खुजा तो मेरा भी रहा है माँ मेज भी नाहा लेता हूँ...

सभ्य ने एक पल सोचा और फिर बोली- ठीक है...

केला नगर ( बुआ फूफाजी का गाओं)

यहाँ बुआ की ससुराल में कुछ नज़ारा ऐसा था की जो इस घर के लिए तो कुछ नया नहीं था पर कोई और देख लेता तो शायद पागल hi हो जाता...

हमारे कर्मा की प्यारी बुआ हमेशा की तरह बिलकुल नंगी होकर बिस्तर पर लेती हुई थी और उनके पीछे लेता हुआ शख्स बुआ की एक तंग उठाकर पीछे से सटासट उनकी छूट में लुंड अंदर बहार कर रहा था...





बुआ- ahhhhhhhhhh बीटा ुह्ह्ह्ह ऐसे hi छोड़ अपनी अम्मा को अह्ह्ह्ह ऐसे hiiiiiiiiii...

सख्स- ओह्ह्ह्हह्ह अम्मा बहुत मज़ाआ आ रहा है क्या छूट है तुम्हारी मन करता है रोज़ छोड़ता रहूं...

वहीं उनके बगल में बिस्तर के किनारे हमारी सबकी प्यारी पूर्वी जो मायके आई हुई थी बेचारी को मायके में भी कोई आराम नहीं मिल रहा था और अपने ताऊ और पापा के लुन्डों के बीच फांसी हुई थी पापा का मुँह में था और ताऊजी यानि कर्मा के बड़े फूफा जी का उनकी भतीजी की रसीली छूट में और दोनों छोर से hi पूर्वी दोनों की लोदों की सेवा में लगी हुई थी.





दोनों hi छोर से पूर्वी की अछि ठुकाई हो रही थी पर ऐसा नहीं था की उसे ये पसंद नहीं था ये सब तो उसे अपने पापा और ताऊजी का प्यार लगता था जिसे वो ख़ुशी ख़ुशी ग्रहण कर रही थी चुत और मुँह दोनों तरफ से...

वहीं उसके बगल में बिस्तर पर पूर्वी की तै, बुआ की जेठानी थी जो की अपने भतीजे विनीत के लुंड पर कूद रही थी...

और खूब सिसकियाँ ले लेकर अपनी छूट को भतीजे से मरवा रही थी...





विनीत भी नीचे से सटासट धक्के लगाकर अपनी तै की छूट के मज़े ले रहा था...

लेकिन एक मिनट अगर विनीत अपनी तै को छोड़ रहा था तो उसकी मम्मी यानि बुआ को कौन अम्मा अम्मा कहते हुए छोड़ रहा था जिसे वो बीटा भी कह रही थी...

देखना पड़ेगा.

बुआ को छोड़ने वाला और कोई नहीं बल्कि अपनी प्यारी पूर्वी के पति और बुआ के दामाद पंकज थे जो की ससुराल में अपनी सासु माँ से पूरी खातिर करवा रहे थे...

और कुछ देर और छोड़ने के बाद उन्होंने अपना रास अपनी सास की छूट में भर दिया और हांफने लगे...

शशि- क्यों दामाद जी कब तक हमें अम्मा अम्मा पुकारके छोड़ते रहोगे...

पूर्वी ने अपने पापा का लुंड मुँह से निकल कर जवाब दिया- पता नहीं मुम्ममय हम तो खूब बोलते हैं पर इनकी हिम्मत नहीं होती कई कई बार तो हमें भी इनकी अम्मा बनना पड़ता है...

पंकज: अरे मम्मी जी का करें सोचते तो बहुत कुछ हैं पर हिम्मत hi नहीं होती... विनीत - एक बार तो हिम्मत करनी पड़ेगी जीजाजी फिर मज़े hi मज़े हैं...

पंकज- कोशिश तो ज़रूर करेंगे.

अब आप सोच रहे होंगे की ये पंकज का क्या चक्कर है ये अचानक कहाँ से टपक पड़ा तो ये जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा..

जैसा की आप जानते हैं की रिमझिम की शादी के दौरान पंकज ने पूर्वी के चक्कर में अपनी सास यानि शशि को छोड़ लिए था ( अपडेट 61 देखें), पंकज को ये तो एहसास हो गया था तब hi की जिसे उन्होंने छोड़ा वो पूर्वी नहीं थी तो छोड़ी खोजबीन और विचार करने के बाद वो बिलकुल निश्चित हो गए की उन्होंने अपनी सासु माँ को छोड़ा साथ hi उनके ऊपर मोटा भी था...

ये बात जानकर तो और पंकज की हवस का ठिकाना नहीं रहा, और रहे भी कैसे जो एक बार शशि जैसी गदराई औरत को छोड़ले वो कैसे खुद को काबू में रख पायेगा...

बस पंकज फिर से ऐसा hi मौका ढूंढने लगा और एक दिन जब वो और पूर्वी घूमने आये तो पंकज को ये मौका मिल भी गया और रसोई में सासु माँ को अकेला पाकर पंकज ने मौके पर चौका मार दिया...

शशि तो वैसे hi लुंड देखकर कहाँ रुक पति है, तो थोड़ा सा न नुकुर करने के बाद शशि ने भी पूरे ज़ोरों से उससे छुड़वाया...

इसके बाद ये बात शशि ने अपनी बेटी पूर्वी को भी बताई तो पूर्वी अपनी माँ से काम तो थी नहीं दोनों माँ बेटी ने योजना बनाई और एक रात को पंकज के साथ दोनों ने मिलकर खूब चुदाई करवाई और उसी रात के दौरान पूर्वी ने अपने घर की साडी सच्चाई अपने पति को बता दी जिसे सुनकर पंकज ने गुस्से की जगह अलग प्रतिक्रिया दी और माँ बेटी दोनों को एक बार और छोड़ा... बस फिर क्या था जब भी दामाद और बेटी घर आते थे ऐसे hi सेवा होती थी.. और तो और अपने ससुराल का खुला माहौल देखकर पंकज का मन अपने परिवार पर भी डोलने लगा...

अब वो अपनी मम्मी के बदन के लिए पागल हो चुके थे और किसी भी तरह उन्हें भोगना चाहते थे पर हिम्मत नहीं होती तो कभी पूर्वी को तो कभी अपनी सास को अपनी माँ बना कर छोड़कर खुद को शांत करने की कोशिश करते थे...

अब बापिस.

पंकज- तुमने बात की रिमझिम से..

पूर्वी ने फिर से लुंड निकला मुँह से और बोली- हाँ की न.

शशि- ाचा घूमने वाली बात?

पंकज- हाँ मम्मी...

पूर्वी- तुम बड़े मरे जा रहे हो मेरी बहन को छोड़ने के लिए.

पंकज- अरे तुम्हारी बहन माल भी तो ऐसा है की कौन रोक पाए उसे देखकर..

सावित्री- ये तो सही बात है उसके बाप चाचा और भाई न रोक पाए तो तुम तो वैसे भी जीजा हो...

Pankaj-wohi तो बड़ी मम्मी, वैसे भी एक नयी छूट किसे बुरी लगती है...

Poorvi-ek नहीं सब सही रहा तो दो...

शशि- दो कैसे..

पूर्वी- रिम्मी बोल रही थी वो अपने जेठ और जेठानी को भी मन रही है साथ चलने के लिए वो भी बड़ी मस्त है.

Pankaj-kuch गड़बड़ हुई तो?

पूर्वी- मैंने और रिम्मी ने योजना बनाई है सब सही हुआ तो सब मस्त हो जायेगा...

पूर्वी ने ताऊ के लूँ पर उछालते हुए कहा...

Pankaj-ye तो और ख़ुशी की बात हो गयी, एक के बदले दो दो...

विनीत- काश मैं भी चल पता .एक दो वार hi देखा है रिम्मी दी की जेठानी को बड़ा गदराया माल है...

फूपाजी- हाँ और उसकी ननद वो क्या काम है इस उम्र में भी होश उदा देती है...

बड़े फूपाजी- अरे मुझे तो समदाब बड़ी पसंद आई थी किसी दिन मौका मिला तो ज़रूर छोडूंगा...

Savitri-are संधान को तो छोड़ दो...

सब ऐसे hi मज़ाक करते हुए आगे चुदाई करने लगे...

सरलपुर

चरण सिंह का तो सुबह से hi बुरा हाल था रात को बड़ी बहु का वो रूप देखने के बाद उनके मन से वो उसकी तस्वीर जा hi नहीं रही थी.. इसी लिए मन लगाने शोरूम तक गए थे पर वहां भी कोई खास काम नहीं था तो बापिस घर की और निकल पड़े.. रस्ते भर यही सोचते रहे की ये गलत है मैं बहु के बारे में ऐसा सोच रहा हूँ पर रह रह कर बहु का कमसिन बदन भी याद आ रहा था..

ऐसे hi चलते चलते घर की और बढ़ गए..

वहीं जिसके ख्याल में वो डूबे हुए थे उनकी बड़ी बहु चंचल इस सब से बेखबर होकर हॉल में लगे पंखे पर लगी धुल को साफ़ कर रही थी...

पंखे के नीचे टेबल लगाया और फिर अपनी सारे को ऊपर करके ठूंस लिए जिससे टेबल लगाने में आसानी हो... जिससे उसकी लगभग एक गोरी चिकनी तांघ घुटनो तक नंगी हो गयी थी ..

इधर वो काम में व्यस्त थी की तभी चरण सिंह भी कमरे में घुसे और सीधा हॉल की तरस बढे और जैसे hi वो हॉल में सोफे के करीब पहुंचे और उनकी नज़र बहु पर बड़ी उनकी आँखें बड़ी हो गयी... बहु को देखते देखते वो कब सोफे पर बैठ गए उन्हें पता hi नहीं चला...

उनकी नज़र तो बस जैम गयी बहु की नंगी कमर और पेट पर गहरी नाभि पर जो साड़ी और ब्लाउज के बीच में नंगे दिख रहे थे...





चरण सिंह के मुँह में ये नज़ारा देखकर hi पानी आने लगा...

उनका मन हो रहा था की अभी उठे और अपनी बहु की नाभि में जीभ डालकर उसे चूस lein...unhe. ऐसा लग रहा था की बहु की नाभि उन्हें ावाद देकर बुला रही थी.. पापजीई पापजीई.. एक बार और आवाज़ आई तो चरण सिंह होश में आये तो देखा उनकी बहु चंचल hi उन्हें पुकार रही थी...

चंचल- पापजीई क्या हुआ कहाँ खो गए...

चरण सिंह - ककककक कुछ नहीं बहहु कक्क ककया हुआ..

चंचल- अरे पापजीई ये टेबल पकड़ लेंगे हमें उतरना कहीं गिर न जाये..

चरण- हैं हाँ अभी पकड़ता हूँ...

ये कहकर चरण सिंह उठे और टेबल एक तरफ से पकड़ ली..

चंचल टेबल पकड़ने के बाद धीरे से दूसरी तरफ घूम कर आराम से उतरने लगी अब दूसरी तरफ चेहरे की वजह से जैसे hi चंचल नीचे बैठी तो उसका गोल भरी भरकम साड़ी में कैसा हुआ पिछवाड़ा चरण सिंह के चेहरे के सामने आ गया जिसे देखकर चरण सिंह एक बार फिर बहकने लगे पर ये कुछ पल को hi हुआ और चंचल नीचे उतर गयी...

चंचल- पापाजी तुम बैठो हम चाय लेकर आते हैं तुम्हारे लिए...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्

 
सभ्य- चलो आखिर जिस काम के लिए आये थे वो हुआ अब तू बैठ आराम कर ये थैले में रख मैं नहलेति हूँ तालाब में ये कीचड से पूरा बदन खुजा रहा है..

अनुज- खुजा तो मेरा भी रहा है माँ मेज भी नाहा लेता हूँ...

सभ्य ने एक पल सोचा और फिर बोली- ठीक है...


अपडेट 153

अनुज और सभ्य

दोनों माँ बेटे तालाब के पानी में बिलकुल नंगे नाहा रहे थे अनुज यूँ तो माँ से घबरा रहा था पर अपनी माँ के गदराये बदन से आँखें नहीं हटा प् रहा था जो की पानी की बूंदों से और चमक रहा था, माँ अपने पूरे बदन को पानी दाल डालकर साफ़ कर रही थी, कमर के नीचे का बदन तो पानी में था और ऊपर का बहार,

अनुज की आँखें माँ की बड़ी बड़ी छूछीयों से हैट नहीं रही थी, उन्हें देख देखकर अनुज के मुँह में पानी आ रहा था पर माँ थी जो लगता है जाने अनजाने अनुज को तड़पने में लगी हुई थी.. और अपनी छाती को पानी से धो रही थी..





अनुज का लुंड पानी के अंदर hi एक बार फिर से तन गया था,

एक पल को तो उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसने माँ को छोड़ लिए hi इन्ही चूचियों को मुँह में भर के इनका रास पिया है.. उसका मन एक बार फिर से माँ के बदन के लिए तड़पने लगा...

वो बेचारा अपना नहाना छोड़ माँ को बस देखे hi जा रहा था...

जाने अनजाने में hi hi उसका हाथ धीरे धीरे सरकता हुआ अपने लुंड पर पहुँच गया और धीरे धीरे से मुठियाने भी लगा अपनी माँ के कामुक बदन को देखते हुए..

एक पल को फिर उसके मन में वो सब ख्याल आने लगे की कैसे गाओं से कालक के इस सफर ने उन सब की ज़िन्दगियों को बदल दिया, आज उसके सामने उसकी माँ नंगी होकर नाहा रही है जिसे वो छोड़ चूका है... इन कुछ दिनों में कितना कुछ बदल गया है.. पहले भाई का माँ को छोड़ना और अब उसका, न जाने क्या होगा जब वो सब लोग बापिस जायेंगे तो, क्या सब पहले जैसा हो जायेगा या नहीं या कैसा लगेगा जब वो घर में माँ को छोड़ेगा..

यही सब सोचते हुए अनुज काफी उत्तेजित हो गया ऊपर से कुछ hi दूरी पर माँ का नंगा कामुक बदन..

अनुज का लुंड अपने पूरे लोहे की रोड जैसा कड़क हो गया एक बार फिर से हवस उसके सर चढ़ने लगी और उसी वासी भूत वो धीरे धीरे अपनी नंगी माँ की और बढ़ने लगा..

उसका एक हाथ लुंड पर hi था जो कड़क लुंड को सहला रहा था, माँ के करीब पहुंच गया तो माँ ने उसे सवालिया नज़रों से देखा पर अनुज ने कोई जवाब न देते हुए माँ की नंगी पीठ पर हाथ रखा और उन्हें आगे की और झुकाने लगा, और उसकी हैरानी के लिए माँ भी जैसा वो छह रहा था झुकने लगी अनुज ने माँ को और झुका कर उसके हाथ पानी में टिका दिए और एक बार फिर से माँ को घोड़ी बना दिया.

सभ्य बिना किसी विरोध के घोड़ी बन भी गयी, अनुज यी देखकर तुरंत माँ के पीछे दोबारा आया और अपने तड़पते हुए लुंड को पकड़ के एक बार फिर से माँ की छूट के द्वार पर रखा और कच्छ से धक्का लगाया, पानी की छाप के साथ एक बार फिर से उसका लुंड उसकी माँ की गरम छूट में घुस गया.

Sabhya-ahhhhhhmmm

अनुज को तो यकीन hi नहीं हो रहा था की ये सब इतनी आसानी से हो जायेगा... पर अब अगर हो गया है तो उसने भी पूरे मज़े लेने शुरू कर दिए और तालाब के किनारे हलके पानी में माँ को छोड़ने लगा..





हर धक्के के साथ सभ्य के मुँह से एक सिसकी निकल रही थी वहीं अनुज भी आनंद की गुर्राहट निकल रहा था...

सभ्य यूँ तो कोई पहल नहीं कर रही थी... पर चुदाई से मिलने वाले मज़े को और छूट में अंदर बहार होते हुए बेटे के लुंड की तरंगों को अपने बदन में महसूस कर सभ्य भी उत्तेजना के सागर में बाह रही थी...

जग्गू और मंजू

जग्गू और मंजू का सफर बाकि दोनों जोड़ियों की तरह इतना दिलचस्प तो नहीं रहा पर माँ बेटे ने उसे दिलचस्प बनाने में कोई कसार नहीं छोड़ी थी... जब तक बारिश होती रही तब तक दोनों माँ बेटे उसी पत्थर पर चुदाई करते रहे शायद hi कोई ऐसा आसान होगा जिसमे मंजू की छूट में जग्गू का लुंड न घुसा हो...

खैर बारिश बंद होने के बाद दोनों hi कपडे पहन कर निकल लिए, रस्ते भर अपनी माँ के बदन को देखकर जग्गू की नियत कई बार बिगड़ी पर मंजू ने साफ़ कर दिया था की अगला पड़ाव तालाब hi होगा, तो जग्गू भी मन मार कर चलता रहा हालाँकि जल्दी तालाब तक पहुंचने के चक्कर में उसने बड़ी सावधानी और जैसा बताया गया था वैसे hi सारा रास्ता चुना और जल्दी hi दोनों तालाब पर पहुँच गए.. जिसके बाद मंजू ने पोटली की शक्तियों को जागृत किआ और सब कुछ निपटने के बाद अब बरी थी जग्गू की म्हणत के फल की जो की तालाब के बीच में एक पठार पर बैठ कर वो ले रहा था.





जग्गू तालाब के किनारे जहाँ पानी काम था वहीं पर एक पत्थर पर बैठा हुआ था पूरा नंगा और उसके सामने पैरों के बीच उसकी मम्मी यानि मंजू बैठी और मंजू के मुँह में जग्गू का लुंड था जिसे मंजू पूरी शिद्दत से चूस रही थी...

और भाई चूसे भी क्यों न उसका बीटा कितनी सावधानी और बुद्धिमानी से उनको तालाब पर इतनी जल्दी ले आया था.. उसी का इनाम मंजू अपने बेटे के लुंड को अपने गरम मुँह में भरकर दे रही थी...

जग्गू - ahhhhhhhhhh मम्मी ओह्ह्ह आअह्ह्ह्हह क्याआअह्ह्ह मस्त चूसती हो आह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा है...

मंजू ने जवाब में सिर्फ जग्गू की आँखों में देखा और मुँह के अंदर hi लुंड के टोपे पर जीभ फिरने लगी ..

जग्गू अपनी माँ के इस करतब से सिहरने लगा और जोश में आकर उसने अपने हाथ अपनी मम्मी के सर पर लगाकर अपने लुंड पर दबा दिया जिससे उसका पूरा लुंड उसकी मम्मी के मुँह में चला गया और नीचे से झटके लगा लगा कर वो अपनी मम्मी का मुँह छोड़ने लगा...

मंजू के मुँह से गगगगगगुणु ग्ग्ग्गू की आवाज़ें निकलने लगी जो की जग्गू के लिए एक मधुर संगीत जैसी थी..

जग्गू- अह्ह्ह्हह मम्मी अह्ह्ह्ह अपनी मम्मी के मुँह छोड़ने से ज़्यादा मज़ा शायद hi कभी आये...

मंजू बेचारी क्या बोलती बीटा मुँह में लगातार लुंड घुसा रहा था जो गले तक भर रहा था,

जग्गू को कुछ देर बाद अपना रास लुंड में भरता हुआ महसूस हुआ तो उसने खुद को रोका क्यूंकि वो इतनी जल्दी झड़ना नहीं चाहता था...

तो उसने अपनी मम्मी के मुँह से लुंड निकला और पत्थर से उठ गया और अपनी जगह मम्मी को पठार पर लिटा दिया और तुरंत उनकी टांगों के बीच आकर एक बार फिर से अपना लुंड अपने जन्मस्थान अपनी मम्मी की रसीली छूट में घुसा दिया...

और माँ बेटे की चुदाई एक बार फिर से शुरू हो गयी... जग्गू पत्थर पर ठीके हुए लगातार धक्के लगाने लगा





मंजू- ahhhhhhhhhh बेटा ओह्ह्ह्ह ैससससीईए हीईई..

जग्गू- अह्ह्ह्हह मम्मी ओह्ह्ह्हह तुम्हे कितना भीई छोड़ लूँ मन nahiiiiiiiiiiiiiiii भरता..

मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह ीी मा की छूट है टेरिइइइइइइ इससे भी मन भररर गया तो लगेगाआ कहाँ...

जग्गू - तुम्हे कैसा लगा अह्ह्ह अपने बेटे का लुंड मम्मी??? ग

मंजू - अह्ह्ह एई भी पूछने की बायत है री... वो भी तब जब तेरी माँ तेरे नीचे नंगी लेट कर तेरे मुसल से अपनी छूट की कुटाई करवा रही है...

जग्गू- अह्ह्ह्हह मम्मी पर सुनके अच्छा लगता haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh

मंजू- ahhhhhhhhhh तो सुन्नन लल्लाह आह्ह्ह्ह तेरा लुंड तेरी मम्मी की चुत को भर रहा हैईईई अह्हह्ह्ह्ह ऐसा मज़ा दे रहा है जो बस एक बीटा hi दे सकता है ..

दोनों माँ बेटे ऐसी बातें कर कर के एक दुसरे की उत्तेजना को बढ़ा रहे थे, साथ hi यूँ खुलेआम चुदाई करना उन्हें वैसे hi अंदर तक उत्तेजित कर रहा था उनकी हवस अपने चरम पर थी और तभी एक माँ यूँ खुलेआम अपने बेटे से छुड़वा रही थी...

इसी बीच जग्गू ने अपनी मम्मी की छूट से लुंड निकला और उन्हें उठाया और फिर पत्थर को पकड़वा कर झुका दिया और फिर पीछे से अपनी मम्मी की छूट को एक बार फिर से भेद दिया...

मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह लगता है सरे आसान यहीं अपना लेगा पानी में..

जग्गू- अह्ह्ह्हह मम्मी मेरा बीएस चले तो कभी निकलू hi न यहाँ से बस तुम्हे छोड़ता रहूं..

जग्गू ने अपनी मम्मी की कमर को थामकर उनकी छूट में करारे धक्के लगते हुए कहा...





मंजू- ahhhhhhhhhh बेटाः मैं भी यही चाहती हूँ की तेरा लोढ़ा मेरी छूट की कुटाई करता रहे ऐसे hiiiiiiiiii...

जग्गू - अह्ह्ह चिंता न करो मम्मी अब ये लुंड रोज़ तुम्हारी छूट की सैर करेगा चाहे कुछ भी हो जाये बिना तुम्हारी छूट मरे अब मुझे चैन नहीं आएगा...

मंजू- तो मार लेना बेटा. कहीं भी झुका कर घुसा दियो... और छोड़ लिओ मुझे, तेरी माँ कभी तुझे मन नहीं करेगी...

जग्गू- अह्ह्ह्हह मम्मी सच में..

मंजू- हॉँण्णन बाछहुआअ सच्चीई तेरे पापाः के सामने भी छड़वा लुंगी तुझसव...

अपनी माँ की ये बात सुनकर और उस दृश्य की कल्पना मात्रा से hi जग्गू खुद पर से काबू खो बैठा और दो तीन तगड़े धक्के लगाकर लुंड को छूट से निकला और मम्मी को घुमाकर जल्दी से उनके मुँह में घुसा दिया और झड़ने लगा..

मंजू का मुँह बेटे के रास से भरने लगा जिसे वो धीरे धीरे से गटकने लगी...

ऐसे hi जब मामला शांत हुआ तो दोनों किनारे पर आकर लेट कर आराम करने लगे...

कर्मा और शालू

गद्दे में पहली चुदाई के बाद दोनों मौसी भांजा बहार निकला दोनों के बीच hi एक अजीब सी ख़ामोशी थी..

हवस के बहाव में आकर जो एक बार हो चूका था अब मौसी के मन में उसको लेकर कहीं न कहीं ग्लानि के भाव आ रहे थे साथ hi कर्मा खुद से ऐसा कुछ नहीं करना चाहता था जिससे मौसी उससे नाराज़ हो इसलिए वो कुछ नहीं बोल रहा था और मौसी को थोड़ा समय दे रहा था जिससे वो खुद से सब समझ सकें... इसी बीच दोनों कपडे पहन कर जो गद्दे के पास थे पहनकर बिना एक दुसरे से खास बातचीत किये आगे बढ़ने लगे...

रस्ते भर कुछ खास नहीं हुआ और लगातार चलते रहने की वजह से जल्दी hi अपनी मंज़िल पर पहुँच गए अब तक शालू का मन भी थोड़ा ठीक हो चूका था और दोनों बातचीत करते हुए बढ़ रहे थे, जैसे hi दोनों तालाब के करीब पहुंचे और पहचाना की यही तालाब है तो शालू को बहुत ख़ुशी हुई आखिर इसी काम के लिए तो वो कालक गाओं आई थी उसने जल्दी से पोटली निकली और अपने कपडे उतर कर तालाब में घुस गयी और पूरे निर्देशित विधि अनुसार पोटली की शक्तियों को जागृत किआ और इसमें सफल भी हुई..

अब जाकर उसे काफी हल्का हल्का महसूस हो रहा था, काफी खुश भी थी और हो भी क्यों न उसे अब अपनी संतान होने का सपना साकार होता जो दिख रहा था...

कर्मा भी अपनी मौसी को देखकर खुश था.. हवस और चुदाई एक तरफ पर ये बात भी सच थी की सब एक दुसरे से बहुत प्रेम करते थे और करें भी क्यों न परिवार जो थे..

शालू पोटली की शक्तियों को जागृत करके ख़ुशी ख़ुशी बहार निकली और फिर पोटली को थैले में रख दिया ..

इधर मौसी को नंगा पानी से निकलते देख कर्मा का मन और लुंड दोनों hi पलटने लगे... हालाँकि वो जनता था की इस वक़्त कुछ भी करना सही नहीं होगा पर लुंड पर किसकी चली है .

शालू- लल्ला सूरज ढलने को है क्या करें.. मेरे हिसाब से तो रात में आगे बढ़ना सही नहीं होगा...

कर्मा - हाँ रात यहीं बिताते हैं मौसी सुबह जल्दी निकल लेंगे..

शालू - ठीक है...

कर्मा- मैंने आते हुए थोड़ा पीछे अमरुद के पेड़ देखे थे मौसी तुम आराम करो मैं खाने को लेकर आता हूँ ..

शालू- सही में, अगर मिल सकें तो ले आ भूख तो मुझे भी लगी है..

शालू ने अपनी साड़ी को वहीं रेट पर बिछाते हुए कहा...

कर्मा- अभी लाया मौसी

शालू- ध्यान से कर्मा.. और ज़्यादा दूर मत जाना न मिले तो कोई बात नहीं..

Karma-are अभी गया और अभी आया मौसी तुम चिंता मत करो और आराम करो..

कर्मा ये बोल कर चला गया तो शालू वहीं साड़ी पर बिलकुल नंगी लेट गयी.. आसमान की और देखते हुए लेटते hi उसकी आँखें बंद हो गयी शायद पूरे दिन की थकान की वजह से... चाँद की चांदनी में शालू का नंगा गोरा बदन चमक रहा था, बिलकुल काम देवी लग रही थी...

ऐसी हालत में उसे कोई देखे तो शायद खड़े खड़े झाड़ जाये..

कर्मा ने झोली भरकर अमरुद तोड़े इतने के दोनों का अचे से पेट भर जाये और खुद नंगा होकर अमरुद को अपनी धोती में लपेट कर बापिस मौसी की और चल पड़ा जैसे hi कर्मा तालाब के थोड़ी पास पहुंचा तो उसे एक आवाज़ सुनाई दी जिसे सुनकर उसका दिल धक् से हो गया...

शालू- अह्ह्ह्हह कर्माहहहह कर्माहहहह...

उसकी मौसी परेशां आवाज़ में बार बार उसे पुकार रही थी.. कर्मा को किसी मुसीबत का अंदेसा हुआ और उसने तुरंत दौड़ लगाई और जैसे hi तालाब के पास पहुँच कर देखा तो पाया...

उसकी मौसी नंगी तालाब किनारे उसको पुकारते हुए इधर उधर कूद रही है और बार बार अपने बदन को झाड़ रही हैं...

कर्मा तुरंत उसके पास पहुंचा

कर्मा- मंमौसीय क्क्क्य हुआ... क्यों चीख रही हो तुम.

शालू- अह्ह्ह्हह ककरमा ककरमा यी देख एईई चिपक चिपक गयी है...

शालू ने अपने कंधे को दिखते हुए कहा बार बार तो कर्मा ने देखा की मौसी के कंधे पर एक Jonk(Leech) चिपकी हुई थी... और उसी वजह से मौसी चिल्ला रही थी...

शालू- अह्ह्ह्हह कर्मा जल्दी हटा इसे नहीं तो ये मेरा खून चूस जाएगी..

शालू ने डरते हुए कहा...

कर्मा- ाचा रुको मौसी मैं हटाता हूँ इसे .

शालू- अह्ह्ह्हह नहीं ऐसे निकलेगा तो घाव हो जायेगा ये पकड़ लेगी..

कर्मा- तो कैसे निकलूं मौसी निकालनी तो पड़ेगी hi न.

शालू- कुछ और कर पर जल्दी सोच मुझे घबराहट हो रही है..

कर्मा- घबराओ मत मौसी मैं कुछ सोचता हूँ,

कर्मा कुछ सोचते हुए बोलता है, जोंक जोंक जोंक किस्से मरती है नमक से..

शालू- अब यहाँ नमक कहाँ से लाएंगे... अरे कर्मा कुछ कर मुझे बड़ा दर लग रहा है...

Karma-Mausi पहले तो तुम हिलना बंद करो एक जगह बैठो मैं कुछ सोचता हूँ...

कर्मा शालू को वहीं बिठा देता है.. वो भी जनता था की जोंक को ऐसे पकड़ कर खींचना ठीक नहीं होता इससे जोंक त्वचा में घाव कर सकती है... नमक कहाँ से लॉन तालाब का पानी भी खरा नहीं है...

कर्मा- ाचा मौसी अभी कटा तो नहीं है न ज़्यादा उसनर...

शालू - नहीं अभी कोई दर्द तो नहीं लग रहा ..पर तू जल्दी कुछ कर..

कर्मा- क्या करूँ नमक कहाँ से लॉन...

तभी कर्मा के दिमाग में कुछ आया पर वो सोच में पद गया..

शालू- जल्दी करना कर्मा हटा इसे..

कर्मा- अभी हटाता हूँ मौसी... पर तुम ऐसे hi बैठी रहो और अपनी आँखें बंद करो..

शालू- अब आँखें बंद क्यों..

कर्मा- मौसी जोंक हटवानी है तो जल्दी बंद करो बिना सवाल किये..

शालू- चल ले कर्ली अब हटा...

शालू ने अपनी आँखें बंद की और इंतज़ार करने लगी कुछ पल बाद hi उसे अपने कंधे पर एक गरम चीज़ का एहसास हुआ...

और ये गरम एहसास धीरे धीरे बढ़ने लगा ..

इधर कर्मा की योजना कुछ अलग थी पर उसके दिमाग में उस समय वही आया..

कर्मा ने अपने लुंड को पकड़ा और उसका सिरा मौसी की और किआ और फिर उसके लुंड से मूट की धार निकलने लगी जिसका निशाना उसने जोंक पर बनाया और कुछ पल hi हुए होंगे की पेशाब की धार पड़ते hi जोंक मौसी की त्वचा से हटकर नीचे गिर गयी कर्मा ने ये पढ़ा था की पेशाब में नमक की मात्रा होती है .. इसलिए उसने ये नुस्खा अपनाया

पर जोंक के हटने के बाद भी न जाने क्यों कर्मा का मूतना बंद नहीं हुआ जबकि अपनी मौसी के बदन पर तो वो इसलिए मोटा न ताकि जोंक हैट जाये और वो हैट कर नीचे गिर गयी थी और इस बात का एहसास शायद मौसी को भी हुआ और इसीलिए मौसी ने तुरंत आँखें खोल कर देखा तो पहली नज़र अपने कंधे जहाँ जोंक चिपकी थी वहां पड़ी और उसे वहां न देखकर थोड़ी रहत हुई और फिर नज़र उठाकर देखा तो मौसी की आँखें चौड़ी हो गयी...

शालू ने कभी सपने ने भी नहीं सोचा था की कर्मा उस पर म्यूटेगा पर ये सच में हो रहा था,

कर्मा के पेशाब की गरम धार को बदन पर महसूस कर न जाने शालू को क्या हुआ उसके बदन में बिजली सी दौड़ने लगी, चाहती तो वो हैट सकती थी या कर्मा को मन कर सकती थी पर न जाने क्यों उसे न हटा जा रहा था और न hi मन किआ जा रहा था पूरे बदन में उत्तेजना की एक लहार दौड़ रही थी,

यही हाल कर्मा का था उसे पता था की जोंक के हटते hi उसे रुक जाना चाहिए था पर अपनी मौसी पर मूतने के ख्याल से hi वो इतना उत्तेजित हो गया था की खुद को रोक नहीं प् रहा था.

वहीं रोकना तो अलग कर्मा ने एक कदम और बढ़ाते हुए पेशाब की धार को कंधे से होते हुए अब शालू की बड़ी बड़ी छूछीयों पर कर दिया जिससे शालू की दोनों छुछियां पेशाब की गरम धार से तुरंत नाहा गयी..

शालू तो इस एहसास से और गैंगगना गयी उसके साथ ऐसा कभी नहीं हुआ था उसकी चूचियों पर बहता कर्मा का मूट उसे एक अलग hi एहसास दे रहा था... शालू बस स्तब्ध हुई इस पल को महसूस कर रही थी, इधर कर्मा के मूट की धार जब हलकी पढ़ने लगी तो कर्मा ने आखिरी हिम्मत दिखते हुए एक बहुत hi रिस्क वाला काम किआ..

एक कदम आगे बढ़ाते हुए कर्मा ने अपनी हलकी हो चुकी धार का निशाना सीधा शालू के चेहरे पर लगा दिया और कर्मा का मूट शालू के चेहरे से जाकर टकराना लगा कुछ hi पालो में शालू का पूरा चेहरा उसके भांजे के मूट से भीग गया था, कर्मा का मूट ख़तम हो चूका था.. पर वो वैसे hi खड़ा हुआ था शायद जो हो गया उसे अब समझ नहीं आ रहा था की आगे क्या होगा, पर उसका लुंड बिलकुल अकड़ा हुआ था अभी जो हुआ उसे सोच सोच कर hi

शालू तो जैसे कर्मा की इस हरकत से बिलकुल भौचक्की रह गयी थी उसका पूरा चेहरा और बदन मूट से नहाया हुआ था, कुछ पल तक सब ऐसे hi शांत रहा न कर्मा ने कोई हरकत की और न hi शालू ने बस शालू के बदन से कर्मा का मूट टपक रहा था...

कुछ पल बाद जैसे अचानक से बिजली कौंधी हो वैसे hi शालू आगे की और लपकी और जब तक कर्मा कुछ समझ पता तब तक कर्मा का लुंड शालू के मुँह में था और वो उसे पागलों की तरह चूसने लगी... कर्मा मौसी की इस हरकत से हैरान रह गया उसे समझ hi नहीं आया की अचानक मौसी को क्या हुआ पर जो हुआ ाचा हुआ ये सोचकर वो मौसी के गरम मुँह का मज़ा लेने लगा...

शालू बुरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और उतनी hi ज़ोरों से कर्मा के लुंड को चूस रही थी, जैसे उसे उखड कर अपने मुँह में hi समां लेगी कर्मा भी अब पूरे जोश में आ चूका था उसने अब मौसी को पीछे धकेला जिससे मौसी के दोनों हाथ पीछे टिक गए और कर्मा ने मौसी के सर को पकड़ा और अपने लुंड को आगे पीछे करते हुए मौसी के मुँह को छोड़ने लगा...





शालू तो पहले hi इतनी उत्तेजित थी की वो क्या इंकार करती वो अपना मुँह फाड़े कर्मा को उसका मुँह छोड़ने दे रही थी..

धीरे धीरे कर्मा अपना लुंड मौसी के गले में और गहराई में उतरता जा रहा था हर झटके के साथ थोड़ा और बढ़ जाता और कुछ पल बाद कर्मा की गोलियां मौसी के होंठों से टकरा रही थी कर्मा का लुंड मौसी के गले तक तबाही मचा रहा था,

शालू की आँखों से आंसुओं की धार लगातार बाह रही थी मुँह से लुंड के साथ साथ थूक बहार आ रहा था पर शालू थी जो की रुकने को तैयार नहीं थी..

कर्मा ने पूरा लुंड जड़ तक घुसा कर एक बार पूरा बहार निकला तो शालू बुरी तरह से खांसने लगी... पर कर्मा था की बेचारी को खांसने तक का मौका नहीं दिया और दोबारा लुंड जड़ तक घुसा दिया शालू के मुँह में...

और इस बार सिर्फ लुंड घुसाया hi नहीं बल्कि उसके साथ साथ रास की धार भी शालू के गले में छोड़ने लगा, जिसे गटकने के सिवा शालू के पास और कोई चारा नहीं था... और वो ख़ुशी ख़ुशी जातक भी गयी..

लुंड रास की एक एक बूँद अपनी मौसी के गले में निचोड़ने के बाद कर्मा ने अपना लुंड बहार निकला तो शालू वहीं लेट कर खांसने लगी... वहीं कर्मा उठा और जहाँ शालू ने साड़ी बिछाई थी लेटने के लिए उस पर जाकर लेट गया...

शालू कुछ देर वहीं लेती हुई खांसती रही और फिर उठी और कड़ी होकर कर्मा के पास गयी,

कर्मा को समझ नहीं आ रहा था की अब मौसी क्या करेगी... क्या गुस्सा होगी यह नहीं... वो शालू को देखकर ये hi सोच रहा था वहीं शालू ने बिना किसी भाव के आगे बढ़ कर अपने दोनों पैरों को कर्मा की कमर के दोनों तरफ करते हुए नीचे बैठी और एक हाथ से कर्मा के लुंड को पकड़ा और नीचे होते हुए उसे अपनी छूट के मुहाने रखा और नीचे हो गयी कर्मा का लुंड एक बार फिर मौसी की छूट में समां गया...

कर्मा- आअह्ह्ह्ह मौसियी ओह्ह्ह..

शालू- अह्ह्ह्हह लाल्ल्लाहहह ुहममम

शालू ने सिसकियाँ लेते हुए कर्मा के लुंड पर उछालना शुरू कर दिया..





नीचे से कर्मा भी धक्के लगते हुए मौसी को छोड़ने लगा...

कर्मा- ahhhhhhhhhh मौसी बहुत मज़ा आ रहा है क्या गरम कासी हुई छूट है .

शालू- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह लाल्ल्लाहहह मज़ाआ तो आएगा hi तुझे अपनी मौसी और माँ दोनों को जो छोड़ लिए है तूने...

न जाने क्यों शालू को चुड़ते हुयव कर्मा से ऐसी बातें करने में बहुत मज़ा आता था...

कर्मा- ahhhhhhhhhh मौसी जब माँ और मौसी ऐसी गाद्राआईई हो तो कौन लड़का chhodega...aaahhh..

शालू- और जबब्ब बेटे का लुँड्ड़डडडड ऐसेमुसल्ल हो तो हर माँ और मौसीईई ऐसे hiiiiiiiiii उछाल उछाल कर अपनी छूट कुटवायेगीइ...

कर्मा- ahhhhhhhhhh मौसी आईसीईईई hiiiiiiiiii..

शालू- अपने मौसा की चुत को छोड़ रहा है तू शर्म nahiiiiiiiiiiiiiiii आ रही तुझे उनका हक़ मरते हुए..

कर्मा - उनका हक़ nahiiiiiiiiiiiiiiii मार रहा मौसी बस उनके आने तक इसका ख्याल रख रहा हूँ...

शालू- जैसे अपनी माँ की छूट का भी रखा था तूने अपने पापा के लिए...

शालू की ये बात सुनकर कर्मा और जोश में आ गया और नीचे से शालू की कमर को थामकर तेज़ तेज़ थापें लगाने लगा..

शालू भी जानती थी की ऐसी बातों से कर्मा पर क्या असर होता है इसलिए जान कर वो उसे और उत्तेजित कर रही थी...

कर्मा - ahhhhhhhhhh ओह्ह्ह मौसियी

शालू- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह लाल्ल्लाहहह ुहममम आह्ह्ह्हम्म्म्म..

कर्मा की हर थप ऐसी थी की शालू की सिसकी निकल रही थी...

कर्मा- ahhhhhhhhhh मौसीईई सचहहह में मोसाआ बड़े नसीब वाले हैंण्ण्न..

शालू- अह्ह्ह्हह क्यों री अब तो टूउउउ भी नसीब वाला हो गया ना..

कर्मा- ahhhhhhhhhh हाँ मौसी अब जाकर नसीब खुला हीी आह्हः मेरा जब तुमने अपनी गरम छूट खोली है मेरे लिए..

शालू- अह्ह्ह्हह लाल्ल्लाहहह छूट तो पहले भी खुली थी तू कभी हिम्मत तो करता.. आज तो तेरे मूट से नाहा भी लीई अह्हह्ह्ह्ह

शालू खुद hi ये बात कहकर और खुद उसे सोचकर hi बेहद उत्तेजित हो गयी...

कर्मा- ahhhhhhhhhh मौसीईई कैसे हिम्मत करता इस पर पहले hi मौसा हक़ जमाये बैठे थे..

शालू- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह अब्बब्बब्बब्ब बात मत कर और तेज़्ज़ छोड़ अपणीइइइइइइ मौसीईई कोऊ..

कर्मा ने मौसी की बात मानी और सटासट धक्के लगाने लगा साथ hi मौसी अपनी उत्तेजना के शिखर पर थी और अपनी छूट को कर्मा के लुंड पर पटकने लगी...

और जिसका नतीजा ये हुआ की अगले कुछ hi पलों में मौसी का बदन अकड़ने लगा और वो अपने भांजे के लुंड पर झड़ने लगी... झड़ते हुए वो आगे कर्मा के ऊपर गिर गयी जिसका फायदा उठाते हुए कर्मा ने उनके रसीले होंठों को चूस लिए साथ hi नीचे से लगातार सटासट उन्हें छोड़ता रहा...

जब मौसी का झड़ना बंद हो गया और वो शांत हो गयी तो कर्मा ने उन्हें अपने ऊपर से उठाया और वही पलट कर घोड़ी बना दिया और पीछे जगह लेकर अपने लुंड को बापिस मौसी के बड़े बड़े चूतड़ों के बीच घुसा दिया और उन्हें छोड़ने लगा...





मौसी बेचारी जो अभी अभी झाड़ के शांत हुई थी उनके बदन में कर्मा की चुदाई से एक बार फिर से तरंगे उठने लगी, साथ hi अब कर्मा भी कुछ ज़्यादा hi तगड़े धक्के लगा रहा था..

कर्मा की जांघें लगातार मौसी के भरी चूतड़ों से टकरा रही थी और एक टेबल जैसा मधुर संगीत उत्पन्न कर रही थी...

कर्मा- ahhhhhhhhhh मौसीईई तुम्हारी चुतड़फड़ड़ड़..

शालू- अह्ह्ह्हह लाल्ल्लाहहह ुह्ह्हह्ह्ह्ह daiyyaaa..reee

कर्मा - लगताआ haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh तुम्हारीइइइइइइइ चुत मेरी सरीईओईईई जान खींच लेगीइ...

Shalu-naaahiiiii लल्ला अह्ह्ह्हह जान तो मेरिइइइइ ले लेगाः तेरा ये मुसल्ल ओह्ह्ह...

कर्मा ने और थापों को तेज़ करते हुए अपने एक अंगूठे से मौसी की गांड के भूरे छहद को कुरेदने लगा....

शालू- अह्ह्ह्हह लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ोीुईयय..

शालू कर्मा की इस हरकत से गंगना गयी... वहीं कर्मा तो वैसे भी आखिरी गियर लगाए हुए था और कुछ देर बाद कर्मा ने मौसी की गांड को छेड़ को कुरेदते हुए अंगूठा उनकी गांड में घुसा दिया... जिससे मौसी की एक तेज़ आअह्ह्ह्ह निकल गयी..


Shalu-ohhhhh ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह

कर्मा मौसी को छोड़ते हुए लगातार गुर्रा रहा था

कर्मा- ahhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह मौसियी.

और कुछ पलों बाद hi कर्मा के साबरा का बांध टूट पड़ा और वो मौसी की छूट को अपने रास से भरने लगा, मौसी भी छूट में कर्मा के लुंड के प्रहार साथ hi गांड में उसका अंगूठा ऊपर से जैसे hi उन्हें कर्मा का रास अपनी छूट में भरता हुआ महसूस हुआ मौसी भी भरभरा कर झड़ने लगी..

और कांपते हुए आगे गिर गयी कर्मा उनकी छूट में लुंड धंसाए हुए उनके ऊपर गिर गया ..दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे कर्मा थोड़ी देर बाद मौसी के ऊपर से हटकर वो साइड में लेट गया, शालू भी एक करवट लेकर कर्मा से चिपक कर लेट गयी और दोनों बुरी तरह से थके होने के कारन तुरंत सो गए, नंगे hi तालाब के किनारे.


थके होने के कारन दोनों hi गहरी निबेन्ड में सोये जब रात ढालकर सुबह की और जाने लगी तब कुछ तेज़ आवाज़ों से कर्मा अचानक से जल्दी से उठकर बैठ गया,

उसने खुद की आँखों को मसल रहा के खोला और ध्यान से इधर उधर देखने लगा शालू नंगी होकर उससे चिपक कर सो रही थी..

कर्मा ने ध्यान से देखा तो उसे कुछ भी अलग नज़र नहीं आया फिर भी वो उठा और तालाब के किनारे गया और थोड़ा पानी पिया साथ hi अपना मुँह धोया जिससे उसकी नींद पूरी तरह खुल जाये, मुँह धोते hi कर्मा को एक आवाज़ सुनाई दी और जब उसने अपनी दे तरफ मुद कर देखा तो उसकी जान हलक में अटक गयी...

सभ्य और अनुज

तालाब में थोड़ी देर घोड़ी बनकर अपने बेटे से छोड़ने के बाद अब सभ्य भी इन पलों का आनंद लेने लगी..

तालाब में छोड़ने के बाद उसने अनुज का हाथ पकड़ा और उसे तालाब से बहार किनारे पर ले गयी जहाँ पहले hi उसने अपनी साड़ी बिछा राखी थी, वहां लेजाकर अनुज को उसने साड़ी पर पीठ के बल लिटा दिया और फिर खुद अपने बेटे के ऊपर आकर उसके लम्बे लुंड को अपनी छूट में भरकर उसकी सवारी करने लगी...





अनुज तो माँ के इस खुलेपन से जैसे जन्नत में पहुँच गया, कहाँ वो माँ को छोड़ना चाहता था और कहाँ आज माँ खुद उसके लुंड पर कूद रही है... अनुज इस पल का पूरा मज़ा ले रहा था, वो ध्यान से अपनी माँ को अपने लुंड पर उछलता हुआ देख रहा था, कैसे माँ की छूट उसके लुंड. को बार बार निगल रही थी कैसे माँ के साथ साथ इनकी भरी भरी छुछियां ऊपर नीचे कूद कूद कर नाच दिखा रही थी...

अनुज से रहा नहीं गया और उसने हाथ बढाकर अपनी माँ की उछलती छूछीयो को दोनों हाथों से थम लिए और उन्हें मसलने लगा...

अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ज तुम बहुत सुन्दर होऊ अह्ह्ह..

सभ्य- हॉँण्णन तेरी लुँड्ड़डडडड पर उछाल रही हुन्न्न नंगी होकररररर इसलिए तुझे तो सुन्दर लागुनगीइइइइइइ hiiiiiiiiii....

अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh ऐसा nahiiiiiiiiiiiiiiii haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh तुम सच में हमेशा सी सुन्दर लगतीीीी थिई मुझीऐ...

सभ्य- चलललल झुठाआ..

अनुज - साछहयई माहहह पूरे गाओं में सबसे ज़्यादा सुन्दर और गदरायी हुई और कामुक औरत हो तुमममममम माँ...

सभ्य- अछहहाहहहहह तुझीऐ कैसी पता..

अनुज- ओह्ह्ह जब तुम कहीं बहार जाती हो गाओं में तो तुम्हे देखकर गाओं अह्ह्ह्ह गाओं के सरे मर्द अपने लुंड मसलते हैं तुम्हे देखकर और तुम्हे छोड़ने के सपने देखते हैंण्ण्ण्ण्ण्न..

सभ्य- ऑररररर ये तुझीऐ कैसे पटाहहहह की वो सब ैसाआ करते हैं

अनुज- ahhhhhhhhhh माह मैंने खुद सुना है कईई कईई बार...

सभ्य- ahhhhhhhhhhl ढैय्या कमीने तुझीऐ शर्म nahiiiiiiiiiiiiiiii आई अपनी माँ के बारे में गन्दी बातें सुनते हुए,

सभ्य ने अपनी गांड को अनुज के लुंड पर गोल गोल घूमते हुए कहा...

अनुज- ahhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आईसीईईई hiiiiiiiiii... अह्ह्ह शर्म का, पता nahiiiiiiiiiiiiiiii मा पर थोड़ा अजीब सा लगता था...

सभ्य- तो कभी तूने रोका nahiiiiiiiiiiiiiiii किसी को...

अनुज - रोक तो सकता था maaaahhhhhhhhhhhh पारर सच तो सच है न तुम्हे कौन nahiiiiiiiiiiiiiiii छोड़ना चाहेगा... और सच तो ये है की मैं भी न जाने कबसे शायद जबसे लुंड खड़ा होना शुरू अह्ह्ह्हह हुआ तबसे hi तुम्हे चाहता हूँ...

अनुज ने ये कहकर माँ की एक छुच्छी को मुँह में भर लिए...

सभ्य- अह्ह्ह लल्लू कितनाः बेशरम है तू अपनी माँ के साथ वो सब करना चाहता था जो दुसरे चाहते थे..

अनुज- उह्ह्हा हाँ माँ और हमेशा चाहूंगा अब चाहे बेशरम कहो या मादरचोद...

सभ्य- ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुझे बड़ा शौक़ है मादरचोद बनने का..

अनुज- हाँ माँ तुम सोच भी नहीं सकती उतना..

सभ्य- मुझे भी तो दिखा ज़रा कितनाः.

अनुज- अभी दिखता हूँ

ये कहकर अनुज ने माँ को पकड़कर एक तरफ करवट ली और घूम कर ऊपर आ गया अब माँ नीचे और अनुज ऊपर था लुंड ान भी छूट में था, अनुज ने माँ के पैरों को मोड़ कर कंधे पर रखा और फिर माँ की छूट में लम्बे लम्बे धक्के लगाने लगा...





अनुज का लुंड जड़ तक माँ की छूट में अंदर बहार हो रहा था जिससे माँ की भी सिसकियाँ निकल रही थी .

सभ्य- ahhhhhhhhhhl ढैय्या लल्ला आईसीईईई hiiiiiiiiii...

अनुज- ुहममम maaaahhhhhhhhhhhh

सभ्य- और तेज़ छोड़ड़ड़ड़ड़ अपणीइइइइइइ माँ को madarchod...ahhhh

अनुज- हांण आह्ह्ह्हम्म्म्म लिए लूओ अपने बेटी का लुँड्ड़डडडड अपणीइइइइइइ गरम कैसीईई छूट ने माहहह...

सभ्य - अह्हह्ह्ह्ह हांण करले अपना इतनी सालूऊऊन का सपनाआ पूराआआह्ह्ह्ह.. आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़ड़ड़ड़ अपणीइइइइइइ मा की छूट को...

माँ की बात सुन सुनकर अनुज और उत्तेजित होता जा रहा था और हर पल के साथ उसके धक्के और घातक होते जा रहे थे

अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh हनननननन आयजहह सरीईई कसररररर निकलूंगा तुम्हारी छूट पर...

वहीं अनुज का उसकी छूट में हर धक्का सभ्य की उत्तेजना की तरंगों को पूरे बदन में फैला रहा था जिसके कारन सभ्य भी मज़े और आनंद में खोई हुई थी...

सभ्य- अह्ह्ह्ह दिखा दिए आअज लाल्ल्लाःह्ह्ह मेरिइइइ चुत को अपने लुँड्ड़डडडड का डुम्मम्मम्म

अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh हनननननन लोओओओओओओओ...

सभ्य के हर कथन के साथ अनुज की चुदाई और भीषण होती जा रही थी... वो अपना पिछले सारा अनुभव जो भी उसे चुदाई का था वो पूरा इस्तेमाल करते हुए माँ को छोड़ रहा था साथ hi खुद को झड़ने से रोक रहा था . पर उसकी माँ की बातें उसे और उत्तेजित करते हुए मुश्किल कर रही तक..

सभ्य- ahhhhhhhhhhl ढैय्या आह्ह्ह्हह क्या मत्तत्तत छोड़ रहा हीी मादरचोद...


अनुज- तुम्हारीइइइइइइइ भी चूऊत्त कुछ काम nahiiiiiiiiiiiiiiii माः...

सभ्य- ीसीईई चूऊत्त से निकलाआआ था टूउउउउ आअज बापिस ीसीईई में समाआ जाआ...

अनुज- हांण मा आअज बापिस्स्सस्स्स्स अपनी जन्मस्थान मेंनननन जाए रहा हूँ माआहहहहहहहहह आह्हः ahhhhhhhhhh अह्ह्ह..

अनुज ने तगड़े धक्के लगते हुए कहा...

सभ्य- दिखादर मेरिइइइइ छूट को लाल्ल्लाःह्ह्ह की इसने एककककककक मर्द को जनआह्ह्ह्हह हैईईई अह्ह्ह...

सभ्य की इस बात के बाद अनुज इतना उत्तेजित हो गया की 8-10 जान लेवा प्रहार किये अपनी माँ की छूट में की सभ्य भी उसके प्रहार सह नहीं पाई और झड़ने लगी उधर अनुज ने भी इन धक्कों के बाद अपनी माँ की छूट में समर्पण कर दिया और उसे अपने रास से भर दिया...

दोनों की हालत चुदाई के बाद ख़राब हो गयी थी दोनों hi बुरी तरह से हांफ रहे थे और थक भी गए थे अनुज अपना लुंड सभ्य की छूट से निकल कर वहीं बगल में पसर गया वहीं सभ्य ने अपने पेअर सीधे किये और वैसी hi लेती रही उसकी छूट से बेटे का रास बहकर नीचे साड़ी पर टपकने लगा पर अभी दोनों माँ बेटे को कुछ मतलब नहीं था..

दोनों hi कुछ देर में नींद के आगोश में समां गए...

अनुज न जाने कब तक सोता रहा की अचानक से उसे नींद में hi अपनी माँ के चीखने की तेज़ तेज़ आवाज़ें सुनाई दी और जिनगी सुनकर उसकी नींद खुली और जो उसने सामने देखा उससे उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी...

उसकी माँ बार बार उसका नाम लेकर उसे पुकार रही थी, उसकी माँ के पीछे एक बड़ा सा साया था जिसने माँ को पकड़ रखा था, माँ अभी भी पूरी नंगी थी...

तभी जब तक वो कुछ और करता या सोचता पीछे से उसे भी दो लोगों ने पकड़ लिया...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्.
 
अपडेट 154

सरलपुर

रिमझिम अपनी जेठानी को घूमने के लिए मन कर बहुत खुश थी अब उसे बस शाम का इंतज़ार था जब उसके पति आएं और वो उन्हें राज़ी करे, उसका बहुत मन था घूमने जाने का सबके साथ, खैर इसी सोच में वो बिस्तर पर आकर लेट गयी और उसकी आँख लग गयी...

इस घर की राजकुमारी यानि ख़ुशी थोड़ी देर पहले hi अपनी सहेली के यहाँ से पढाई करके लौटी थी, और अब कपडे बदलने के बाद उसे भूख लगने लगी तो उसे रिमझिम भाभी का ख्याल आया और वो खाने के लिए रिमझिम को बुलाने जाती है...

बहार कहीं नहीं दिखती तो वो रिमझिम और रमन के कमरे में जाकर देखती है तो उसकी नयी भाभी आराम से सो रही थी, रिमझिम को सोता देख वो सोचती है, भाभी को क्या जगाना अब सो रही हैं तो सोने दूँ, ये सोचकर वो पलट कर जाने hi लगती है की तभी उसकी नज़र एक जगह आकर रुक गयी उसने देखा की भाभी की साड़ी का पल्लू साइड हो गया है, और भाभी का स्पॉट पेट और गोल सुन्दर नाभि नज़र आ रहे थे साथ hi ब्लाउज में कैसे हुए रिमझिम के गोल मटोल चुच्चों पर भी ख़ुशी का ध्यान गया ..





न जाने क्यों अपनी भाभी के नंगे पेट को यूँ देखकर ख़ुशी के मन में एक अलग तरह की भावनाएं आने लगी...

वो सोचने लगी भाभी सच में कितनी सुन्दर और कामुक हैं, जब उनका बदन देखकर मुझे तक कुछ कुछ होने लगा तो मर्दों का क्या hi हाल होता होगा...

सच में रमन भैया कितने लकी हैं जो उन्हें भाभी जैसी बीवी मिली...

पर भाभी होने के बाद भी भैया मेरे बारे में वो सब न जाने क्यों सोचते हैं... भाभी के साथ मेरा नाम ले लेकर वो सब करते हैं...

इसी सोच विचार में और भाभी के बदन को देखते हुए ख़ुशी कब बीएड के पास आ गयी उसे ध्यान hi नहीं रहा...

भाभी के चिकने पेट को देखकर न जाने क्यों ख़ुशी की उत्तेजना बढ़ने लगी उसके मन में एक अजीब सी जिज्ञाषा जागने लगी उसका मन न जाने क्यों करने लगा की वो भाभी के मखमली पेट को छूकर देखे उसकी त्वचा को महसूस करे...

इसी जिज्ञासा और उत्तेजना वस् वो बीएड के करीब बैठ गयी और भाभी के पेट की त्वचा को ध्यान से देखने लगी... देखते हुए उसे न जाने क्या हुआ उसे होश भी नहीं रहा उसका चेहरा आगे बढ़ता चला गया और ख़ुशी को तब होश आया जब उसका गाल रिमझिम के पेट की नंगी त्वचा पर स्पर्श हुआ...





और जैसे hi उसे ये एहसास हुआ की वो क्या कर रही है तो उसने तुरंत खुद को पीछे कर लिए... पर उसकी जिज्ञासा और उत्तेजना थी की बढाती hi जा रही थी,

उसने अपने सर को झटका और किसी तरह से खुद को संभाला और उठ कड़ी हुई...

हे भगवन ये क्या कर रही थी मैं एक लड़की होक अपनी hi भाभी के साथ..

कहीं भाभी जाग जाती तो न जाने क्या सोचती मेरे बारे में...

पर सच में भाभी का बदन कितना प्यारा है, कितना कोमल लग रहा था गाल पर..

एक बार और छूकर देखूं?

पर कहीं भाभी जाग गयी तो .. नहीं यार गहरी नींद में हैं थोड़ा सा छूने पर थोड़े hi जगेंगी...

यही सब सोचकर और हिम्मत जूता कर ख़ुशी दरवाजे से बापिस बीएड के पास आ गयी और झुककर दोबारा बीएड के पास बैठ गयी...

उसने ध्यान से रिमझिम के चेहरे की और देखा तो वो अब भी आराम से सो रही थी ये ये निश्चित करने के बाद ख़ुशी ने एक बार फिर से चेहरे को आगे बढ़ाया और दोबारा से रिमझिम के पेट को अपने चेहरे से छुआ...

उसके बदन में एक अजीब सी सिरहन दौड़ गयी उसे अपनी छूट हलकी हलकी सी पनियति हुई महसूस हुई...

वो हौले हौले से अपने चेहरे को अपनी भाभी के पेट से रगड़ने लगी.. ख़ुशी जो बहुत मज़ा आ रहा था साथ hi वो हर पल उत्तेजित होती है रही थी, और उसी उत्तेजना के वस् में आकर अब तक जो वो चेहरे को रगड़ रही थी उसने और आगे बढ़ते हुए हिम्मत दिखाई और अपनी भाभी के पेट को अपने होंठों से चूमने लगी... कभी पेट तो कभी सुन्दर नाभि को चूमती, धीरे धीरे वो इतनी उत्तेजित हो गयी की वो साडी फ़िक़र भूल गयी और पेट और नाभि को चूमते हुए ऊपर बढाती गयी और रिमझिम के होंठों को भी उसने चूम लिए और इतने से भी मन नहीं भरा तो एक होंठ को अपने होंठों के बीचे फंसा कर चूसने लगी...





इसके बाद रिमझिम थोड़ा नींद में hi कसमसाई तो ख़ुशी को बापिस जैसे होश आया और वो डरकर तुरंत पीछे हैट गयी और भाग गयी...

ख़ुशी के जाते hi रिमझिम की आँखें हलकी सी खुली साथ hi उसके चेहरे पर एक मुस्कान फ़ैल गयी...

चोदामपुर

यहाँ गर्मी की एक आम दोपहर थी और ज्यादातर गाओं वाले अपने अपने घरों में आराम कर रहे थे, हमारे किरदार भी घर में hi थे, पर आराम थोड़ा कुछ और प्रकार का था...

राजन और ममता के घर में लोग इक्कठे थे और कार्यक्रम पहले hi शुरू हो चूका था,

हमें तो बिलकुल यकीन नई हो रहा की ऐसा भी हो सकता है...

ममता जो की पीठ के बल लेती हुई थी उसने अपने ऊपर चढ़े हुए नीलेश के धक्कों को छूट में सहते हुए कहा...

प्रेमा- आअह्ह्ह्ह चछहई यही तो छूट का कमाल है अह्ह्ह्ह जो न सोचो वो भी करवा देती है...

प्रेमा इस वक़्त घोड़ी बानी हुई थी बदन पर सिर्फ एक ब्लाउज था और कमर से नीचे बिलकुल नंगी थी वहीं उसके पीछे से राजन उसकी कासी हुई गांड का मज़ा ले रहा था...





नीलेश- आह्ह्ह्हम्म्म्म बहहू तेरी बात सुनकर तो और मज़ा आ गया...

ममता- हाँ आह्ह्ह्हम्म्म्म हैं भाई साब तुम्हारा मज़ा मुझे अपनी कोख तक महसूस हो रहा है...

नीलेश- क्या करूँ बहु ममता, एक तो बहु की कहानी ऊपर से तेरी कासी हुई छूट कैसे रोकें खुद को...

ममता- रुकने को बोल कौन रहा है भाई साब बस ऐसे hi ठोंकते रहो....

राजन- कुछ भी सोचा नहीं था की राजपाल भैया अपनी बहु पर hi चढ़ जायेंगे..

नीलेश- अरे क्या करें बहु भी तो प्रेमा जैसी थी... वो क्या मैं भी नहीं रोक पता...

राजन- छुपे रुस्तम हैं राजपाल भैया...

आज राजपाल यानि प्रेमा के ससुर जी को शहर जाना पद गया था तो वो घर पर अकेली थी, इस मौके का भरपूर फायदा उठाते हुए प्रेमा ममता के यहाँ आ गयी और अब अपने राजन चाचा से अपनी गांड कुटाई करवा रही थी साथ hi सबको अपने और अपने ससुर के बीच हुए काण्ड की खबर भी दे रही थी, जिसे सुनते हुए बाकि लोग और उत्तेजित हो रहे थे जिसका असर उनकी चुदाई पर दिख रहा था... वहीं हमारी पल्ली अभी पढाई के लिए अपनी सहेली लड़ो के पास पढ़ने गयी थी... तो अभी सिर्फ ये चारो hi थे..

ममता- वैसर ahhhhhhhhhh क्या बात है प्रेमा बहु कमाल कर दिया आह्हः तूने..

प्रेमा- का हुआए चाची..

ममता- पिछले कुछ hi दिनों में तूने कितने लुंड ले लिए और तो और अब अपने ससुर का भी ले बैठी...

राजन- हाँ अह्ह्ह्ह कमाल तो प्रेमा बहु का बदन है जो एक बार देखले रोक hi nahiiiiiiiiiiiiiiii पता अह्ह्ह्ह क्या गांड है बहु तेरी...

प्रेमा- हाँ छाछीइ ये सब ahhhhhhhhhh कर्मा का किआ धरा है... उसने hi शुरुआत कराइ थी और अब देखो...

ममता- कर्मा की तो का hi बोलेन हमारी शुरुआत भी तो उसी ने करि थी... अब उसके बाप से भी चुद रहे हैं...

प्रेमा- चची कछु भी हो सकता है, हो सकता है आने वाले समय दोनों बाप बेटे से एक साथ चूड़ो...

प्रेमा की यूँ hi कही हुई बात का ममता पर जितना असर हुआ ुसस्स कहीं ज़्यादा नीलेश पर हुआ वो सोचने लगे, कल्पना करने लगे की कैसा होगा अपने बेटे के साथ चुदाई करना, एक hi औरत को बेटे के साथ बांटना... अब तक वो ये तो समझ चुके थे की चुदाई के मामले में हवस के मामले में उनका बीटा उनसे भी आगे था...

तो प्रेमा ने जो अभी बोलै वो उन्हें पूरी पूरी संभावना लग रही थी...

और यही सोचकर नीलेश और उत्तेजित हो गए जिसका असर ममता की छूट को महसूस हो रहा था, नीलेश ममता के ऊपर लम्बे लम्बे तागड़व धक्कों के साथ छोड़ रहे थे...





ममता - आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह भाई साहणब्ब अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह आईसीए hiiiiiiiiii....

राजन- आह्ह्ह्हह भैइय्या आज मेरिइइइइ बीवी की छूट फाड़ hi डालोगे...

राजन ने अपनी बीवी को नीलेश से चुड़ते देख कर कहा.... साथ hi तेज़ी से प्रेमा की गांड मरते हुए भी..

उधर नीलेश की उत्तेजना अपने चरम पर थी साथ hi उनके धक्के इतने तेज़ थे की ममता भी नहीं सह पाई और दोनों एक साथ झड़ने लगे...

इधर राजन अपनी बीवी को अपने दोस्त से चुड़ते और फिर झड़ते देख और उत्तेजित हो गया साथ hi प्रेमा की कासी हुई गांड ने जैसे उसका लुंड निचोड़ लिए और वो प्रेमा की गांड में झड़ने लगा, और प्रेमा तो पहले hi झाड़ चुकी थी.. सरे लोग झड़ने के बाद अलग हुए और लेट कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगे..

प्रेमा- अह्ह्ह्हह क्या दोस्ती है चाचा... पति अपनी पत्नी को अपने सामने छुड़वा रहा है.

राजन- आह्ह्ह्हह बहु दोस्ती hi तो है जो भैया के सामने अपनी बीवी और बेटी दोनों परोसडी हैं...

राजन की बात सुनकर नीलेश को एक भावात्मक झटका लगा, उन्हें एहसास हुआ की सच में उनके दोस्त ने उनके लिए क्या क्या किआ है.. वो मन hi मन ये सब सोचने लगे...

खैर सब को भूख लगी थी तो ममता ने सबको खाना खिलाया, खाना खाने के बाद ये तय हुआ की अभी समय है और एक दौर और हो सकता है...

शुरुआत नीलेश ने प्रेमा की छूट चाटने से की जो की आगे झुककर राजन का लुंड चूसने लगी वहीं राजन अपनी पत्नी की बड़ी सी गांड को अपने मुँह पर रखकर अपनी जीभ को उसके गांड के छेड़ से अंदर बहार कर रहे थे...

कुछ देर तक चूसै का खेल यूँ hi चला उसके बाद प्रेमा ने दोहरी चुदाई की इच्छा जताई जो की उसकी काफी दिनों से नहीं हुई थी...

नीलेश और राजन क लिए तो ये नेकी और पूछ पूछ वाली बात थी कुछ hi देर में राजन नीचे लेता हुआ था प्रेमा उसका लुंड अपनी छूट में लक्सर उसके ऊपर और वही पीछे से नीलेश का लुंड प्रेमा की. गरम गांड से अंदर बहार हो रहा था....





प्रेमा दो लुंड एक साथ लेकर मज़े से दोहरी होती जा रही थी...

प्रेमा- आअह्ह्ह्ह चछहई आअह्ह्ह्हह आईसीईईई hiiiiiiiiii छोडोऊ मेरी दोनों छेदों को आह्हः...

मां जो बगल में बैठी अपनी चूचियों को मसल रही तहज वो तीनो का हौसला बढ़ा रही थी ..

ममता- हाँ जी ऐसे हीई और तेज़ छोड़ो भाई साब... दोनों मिलके इसकी खुजली मिटा सो साली रंडी की...

प्रेमा- आअह्ह्ह्ह हॉँण्णन चछहई बोलो चाचा से कोई रहम बा करें.. और तेज़...

ममता उठ कर आगे आई और प्रेमा के चेहरे के आगे अपनी गांड को लहराते हुए झुक गयी और उसके चेहरे को अपने पटेलों के बीच दबा लिए...

ममता- ahhhhhhhhhh ले साली रैंड बड़ा शौक है न तुझे छोड़ने का. ले चाट मेरी गांड साली रंडी...

ममता चची गन्दी गन्दी गलियों से सबको और उत्तेजित कर रही थी और असर हुआ भी करीब 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद प्रेमा ने समर्पण कर दिया और झाड़ गयी...

और राजन पर गिर गयी कुछ देर बाद नीलेश ने उसकी गांड सी लुंड निकला और फिर राजन ने भी उसे अपने लुंड से उतर कर साइड में सुला दिया... इसके बाद बरी आई हमारी प्यारी ममता चची की जो तुरंत अपने पति के लुंड को छूट में लेकर बैठ गई और पीछे से नीलेश ने उनकी गांड को भेदा और दोहरी चुदाई शुरू हो गयी...





ममता चची के दोनों छेदों से लुंड अंदर बहार होने लगे...

इस तरह की चुदाई में राजन चाचा बेहद उत्तेजित हो जाते थे क्यूंकि अपनी पत्नी को इस तरह से बाँटने का एहसास उन्हें बहुत उत्तेजित कर देता था...

खैर कुछ देर तक घमासान दोहरी चुदाई चली और फिर तीनो के एक साथ झड़ने पर समाप्त हो गयी...

तीनो जब थक कर अगल बगल लेट गए तो नीलेश ने राजन से पुछा- कल कोई ज़रूरी काम तो नहीं है तुझे?

राजन- नहीं तो ऐसा कुछ खास नहीं है.. क्यों क्या हुआ...

नीलेश - कुछ नहीं बस एक काम था कल...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्

नीलेश
 
हमारी कहानी दूसरे स्थान पर पहुंची है दोस्तों जिसमे आप सभी का उतना ही योगदान है जितना मेरा, हम सब ने मिल कर इसे यहां पहुंचाया और आगे भी पहुंचे इसके लिए कोशिश करते रहेंगे।





आप सभी लोगों को बधाई और सभी का बहुत बहुत धन्यवाद्,
 
कर्मा ने ध्यान से देखा तो उसे कुछ भी अलग नज़र नहीं आया फिर भी वो उठा और तालाब के किनारे गया और थोड़ा पानी पिया साथ hi अपना मुँह धोया जिससे उसकी नींद पूरी तरह खुल जाये, मुँह धोते hi कर्मा को एक आवाज़ सुनाई दी और जब उसने अपनी दे तरफ मुद कर देखा तो उसकी जान हलक में अटक गयी...



अपडेट 155


शालू और कर्मा

पहले तो उसे कुछ चमकती हुई आँखें दिखाई दी और फिर ध्यान से देखा तो पाया की भेड़ियों का एक झुण्ड है जो तालाब के दूसरी तरफ से उसकी तरफ hi आ रहा है..

कर्मा की गांड पहात गयी..

एक पल को तो वो सुन्न पद गया पर अगले hi पल जैसे उसकी साडी ऊर्जा बापिस आ गयी हो वो मुद कर जल्दी से भगा और साथ hi मौसी मौसी चिल्लाने लगा, कर्मा की आवाज़ सुनकर शालू भी घबरा कर उठ गयी और उसे ऐसे सहीखते हुए भागते आते देख दर गयी उसे लगा कुछ गलत है, इधर कर्मा जैसे hi बिस्तर के पास पंहुचा उसने जल्दी से थैला उठाया और कपडे समेटते हुए बोलै- भागो मौसी भेड़ियों का झुण्ड हमारी तरफ आ रहा है...

जिसे सुनकर शालू की गांड का खूबसूरत और कैसा छेड़ भी एक बार को लप्लपा गया और वो घबरा कर बोली- क्या करें अब कर्मा..

इतने में कर्मा ने सरे कपडे उठाकर थैले में दाल लिए थे और मौसी का हाथ पकड़ा और उन्हें ख्वेंचते हुए भागने लगा..

दोनों मौसी भांजा बिलकुल लडाटजा नंगे अपनी जान बचाकर भाग रहे थे...

पीछे से उन्हें भेड़ियों के आने का भी आभास हो रहा था, पूरी जान लगाकर भाग रहे थे, किस दिशा में जा रहे थे कोई ध्यान नहीं था अभी बस किसी तरह से जान बचानी थी... भागते भागते अचानक से कर्मा का सर किसी चीज़ से टकराया और वो धड़ाम से गिर गया, जिसके साथ hi मौसी की भी चीख निकल गयी..

कुछ पलों के लिए तो कर्मा का सर hi घूम गया इतनी तेज़ वो टकराया था, कर्मा ने किसी तरीके से खुद को सम्हालते हुए सामने देखा तो एक और हैरान करने वाला दृश्य था, सामने एक बहुत hi सुडौल और सुन्दर, रंग में बिलकुल काला, बदन से ताकतवर दीखता हुआ घोडा खड़ा था और कर्मा उसी से टकरा कर गिरा tha..wo घोडा ज्यों का त्यों खड़ा था और अभी गर्दन घुमा कर उन दोनों की और hi देख रहा था .

इधर मौसी ने पीछे देखा तो पाया की उनके पीछे की झाड़ियां हिल रही थी मतलब भेड़िये या कोई उनके पीछे था..

शालू - कर्मा कोई पीछे है उठ जल्दी ..

कर्मा मौसी की चीख सुनकर जगा और तुरंत उठ खड़ा हुआ और एक पल में hi कुछ सोचा मौसी को पकड़ा अपनी और ख्वेंसः और ऊपर उठाने लगा..

कर्मा- मौसी जल्दी से घोड़े पर चढ़ जाओ...

Shalu-ahhhhh पर तुझव घोडा हांकना आता भी है..

Karma-wo सब बाद में देखा जायेगा अभी तुम कबाड़हुआहहहह

कर्मा ने नीचे से शालू के नंगे चूतड़ों पर ज़ोर लगते हुए कहा...

शालू ने भी किसी तरह से घोड़े की गर्दन और पीठ को पकड़ कर घोड़े की पीठ पर चढ़ गयी....

शालू को चढाने के बाद कर्मा ने शालू को थैला पकड़ाया और फिर खुद भी घोड़े को पकड़ कर उछाला और उसकी पीठ पर चढ़ गया, घोडा तो जैसे इसी का इंतज़ार कर रहा था और दोनों के चढ़ते hi घोड़े ने दौड़ लगाडी...

कर्मा और शालू ने घोड़े को कसकव पकड़ लिया ताकि गिर न जाएं क्यूंकि घोडा काफी तेज़ दौड़ने लगा...

कुछ hi पालो में घोडा काफी दूर निकल आया और अब उन्हें भेड़ियों का कोई नमो निशान तक आस पास नहीं दिख रहा था, तब जाकर दोनों की सांस में सांस आई..

शालू- है ढैय्या कर्मा आज तो मर hi जाते..

कर्मा- हाँ मौसी भला हो इस घोड़े का जो सही वक़्त पर मिल गया...

शालू- वोऊ तो ठीक है पर अब इसे रोक तो सही,

कर्मा - मौसी मुझे नहीं पता ये कैसे रुकेगा... मुझे घुड़सवारी नहीं आती..

शालू - हाय दिया, पप्फहीर चढ़ा hi क्यों...

Karma-peeche भेड़िया पड़े थे और कोई चारा था...

दोनों मौसी भांजे पूरे नंगे घोड़े पर बैठकर सवारी कर रहे थे आगे मौसी और पीछे से मौसी से चिपक कर भांजा पर अभी नंगे होने के बाद भी दोनों के hi मन में कोई हवस या उत्तेजना नहीं थी और हो भी क्यों पहले जान बचालें चुदाई के लिए तो पूरा जीवन पड़ा है

शालू- कुछ तो कर इसकी पीठ पर मार या कुछ और कर...

कर्मा- कर के देखता हूँ,

और कर्मा घोड़े की पीठ पर हलके से मरता है पर कोई असर नहीं होता घोडा हौले हौले दौड़ता रहता है...

Shalu-kuch नहीं हो रहा और तेज़ मार..

कर्मा- मौसी इसने हमारी जान बचाई है इसे मार नहीं सकता.. और वैस्व भी किसी भी जानवर को मरना तो पाप है..

Shalu-phir क्या करेगा..

कर्मा घोड़े की पीठ पर हल्का हल्का हाथों से सहलाने लगता है पर इसका असर कुछ उल्टा hi होता और न जाने घोड़े को क्या होता है वो अचानक से बहुत तेज़ दौड़ने लगता है कर्मा और शालू गिरने से बाल बाल बचते हैं...

शालू- दर के मरे कर्मा कर्मा चिल्लाती है..

कर्मा - मौसी शांत हो जाओ थोड़ी देर रुको तो सही...

इधर घोडा लगातार कुछ देर भागता है और एक जगह जाकर रुक जाता है जहाँ मोती मोती घास थी ... घोडा अपने दोनों आगे वाले पैरों को हवा में उठता है और शालू और कर्मा को पीछे घास में गिरा देता है...

गिरते हुए शालू चीखती ज़रूर है पर घास में गिरने से दोनों को hi कोई चोट वगेरा नहीं लगती..

उन्हें गिरा कर घोडा तुरंत दौड़ कर वहां से निकल जाता है...

शालू- कितना अजीब घोडा था न वहां मिला बिठाकर यहाँ ले आया और अब यहाँ गिरा कर भाग गया..

कर्मा- लगता है हमें भेड़ियों से बचने के लिए hi आया था..

शालू- वो सब तो ठीक है लल्ला पर न जाने कहाँ छोड़ कर गया है न दिशा पता है न जगह अब बापिस कैसे जायेंगे..

शालू घास पर से उठकर खड़े होकर इधर उधर देखते हुए कहती है...

कर्मा- कुछ न कुछ सोचना पड़ेगा..

शालू- ला अब थैले से कपडे निकल मेरे पहन लूँ.. और जल्दी कर पता नहीं हम इस जंगल के कौनसे कोने पर हो..

कर्मा- क्या ज़रुरत है मौसी ऐस hi अछि लग रही हो..

शालू - धत्त्त पगला कहीं का, ऐसे hi नंगी घूमूं ...

Karma-aur क्या..

Shalu-na बाबा न बहुत घुमली अब उजाला होने वाला है.. कपडे पहनते हैं और बहार निकलने का रास्ता ढूंढते हैं...

शालू कर्मा के हाथ से थैला लेते हुए कहती है और फिर उसमे से साड़ी निकलकर अपने बदन पर लपेटने लगती है...

कर्मा- थोड़ी देर बाद पहन लेना मौसी..

कर्मा शालू की साड़ी को पकड़ते हुए कहता है और मुस्कुराता है..

शालू- कर्मा मार खायेगा अब तू छोड़ मेरी सारी..

कर्मा- ाचा ठीक है छोड़ दी...

ये कहकर कर्मा साड़ी को छोड़ देता है..

तो शालू साड़ी आगे लपवतने लगती है की तभी अचानक से कर्मा फिर से साड़ी खींच लेता है और शालू फिर से बिलकुल नंगी हो जाती है...

शालू- कर्माआह्ह्ह्ह

ये कहकर शालू कर्मा के पीछे दौड़ती है, कर्मा हँसता हुआ साड़ी को नीचे रखकर उस पर बैठ जाता है,

तो शालू झूठा गुस्सा दिखते हुए कर्मा क्क कान पकड़ लेती है...

कर्मा- आअह्ह्ह्ह मौसियी दर्द हो रहा है..

शालू- क्यों बच्चू मौसी के साथ मस्ती करेगा...

शालू का ये बोलना था की एक आवाज़ दोनों के कानो में पड़ती है और दोनों चौंक जाते हैं...

सभ्य और अनुज

अनुज न जाने कब तक सोता रहा की अचानक से उसे नींद में hi अपनी माँ के चीखने की तेज़ तेज़ आवाज़ें सुनाई दी और जिनगी सुनकर उसकी नींद खुली और जो उसने सामने देखा उससे उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी...

उसकी माँ बार बार उसका नाम लेकर उसे पुकार रही थी, उसकी माँ के पीछे एक बड़ा सा साया था जिसने माँ को पकड़ रखा था, माँ अभी भी पूरी नंगी थी...

तभी जब तक वो कुछ और करता या सोचता पीछे से उसे भी दो लोगों ने पकड़ लिया...

अब आगे

अनुज का तन बदन मन सब तुरंत जग गया और उसने देखा की सामने उसकी माँ चीख रही है माँ को उसके बालों के साथ किसी बड़े साये ने पकड़ रखा है माँ चिल्ला रही और छूटने की कोशिश कर रही है और माँ को जिसने पकड़ रखा है वो और कोई नहीं बल्कि कालजंग था...

उसने अपने इर्द गिर्द देखा तो दो लोगो को पाया जो की उसने कई बार कालक गाओं में hi देखे थे अक्सर कालजंग के साथ... अनुज ने ताकत दिखते हुए पहले एक को धक्का देकर गिरा दिया और फिर दुसरे को और झट से पास में बिछी हुई साड़ी को उठाया और अपनी माँ के ऊपर फेंका..

माँ ने अपने हाथों से किसी तरह से साड़ी को पकड़ा और अपने नंगे बदन पर दाल ली और किसी तरही से अपने नंगे बदन को ढकने की कोशिश करने लगी...

अनुज जैसे hi साड़ी को माँ के ऊपर फेंकने के बाद सीधा हुआ तो अचानक से उसके मुँह पर एक घूँसा पड़ा जिसके पड़ते hi वो पीछे जाकर गिरा,

सभ्य- अनुजजज्जजज... अनुजजज्जजज लल्लाह..

कुछ पल के लिए तो अनुज का सर hi चक्र गया उसे ऐसा लग रहा था किसी ने उसके मुँह पर हथोड़ा मार दिया है.. और वो हथोड़ा और किसी का नहीं बल्कि कालजंग का हाथ hi था,

बाकि दोनों कालजंग के साथियों ने फिर से अनुज को पकड़ लिए...

अनुज- कालजंग छोड़ मेरी माँ को सेल,

सभ्य- हाँ कालजंग छोड़ दो हमें, हमें जाने दो...

सभ्य अपने आप को उसके हाथ से छुड़ाने की कोशिश करती है कालजंग ने उसे एक गुड़िया की तरह एक हाथ के नीचे दबा रखा था...

अनुज- साली छोड़ नहीं तुझे मार डालूंगा मैं.. मादरचोद...

कालजंग - खामोश.....

कालजंग अपनी भरी आवाज़ में अचानक से चिल्लाता है तो अनुज और सभ्य दोनों hi दहल जाते हैं..

फिर भी अनुज हिम्मत करके बोलता है..

अनुज- तूने हमें क्यों पकड़ा है कालजंग हम मुक़ाबला जीत कर आये हैं...

सभ्य- हाँ कालजंग हमें छोड़ दे..

सभ्य ने अपने बदन को साड़ी से छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए कहा...

कालजंग- छोड़ देंगे अवश्य छोड़ देंगे..

अनुज- तो छोड़ न सेल और तूने हमें यूँ इस तरह पकड़ा hi क्यों है...

कालजंग- प्रतीक्षा क्यों कर रहे हो बांध दो इसे..

कालजंग ने अपने दोनों चेलों से कहा...

जिसके बाद उन दोनों चेलों ने अनुज को एक पेड़ से बांध दिया..

इस बीच सभ्य और अनुज दोनों hi उनसे ऐसा न करने के लिए चीखते चिल्लाते रहे....

दोनों ने अनुज को अचे से बांध दिया और फिर खुश होकर कालजंग की और देखने लगे...

अनुज- सेल एक बार छोड़ मुझे फिर तुम तीनो मादरचोदो की चटनी बना दूंगा... छोड़ मेरी माँ को..

कालजंग ने अनुज के कहे अनुसार सभ्य को छोड़ दिया, कालजंग से छूटते hi सभ्य नीचे गिर पड़ी उसने जल्दी से साड़ी को अपने पूरे बदन पर धक् लिए...

अनुज और सभ्य को हैरानी हुई की अनुज के कहते hi कैसे उसने सभ्य को छोड़ दिया...

सभ्य- मेरे बेटे को छोड़ दो कालजंग हमें जाने दो मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है...

अनुज- नहीं माँ इस हराम के जाने के सामने हाथ मत जोड़ो... छोड़ सेल क्यों परेशां कर रहा है हमें...

कालजंग- प्रतिशोध...

सभ्य और अनुज साथ में बोले- क्या..

कालजंग- हाँ प्रतिशोध के लिए...

सभ्य- कैसा प्रतिशोध हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है..

कालजंग- अपमान किआ है तुम सब ने खासकर तुम्हारे बड़े बेटे ने हमारा पूरे कालक गाओं के सामने...

अनुज- अपमान कहाँ सेल बल्कि तूने hi भैया को चोट पहुंचे थी और इसी लिए तुझे मुक़ाबले से निकल भी दिया था...

कालजंग- आज तक हमें कोई पराजित नहीं कर पाया, पूरे कालक गाओं के लिए रानी माँ और चित्रावती के लिए हम hi सबसे बेहतर योद्धा थे पर तुम्हारे पुत्र ने ये सब नष्ट कर दिया...

अनुज- सेल तो भैया ने तुझे बिलकुल ईमानदारी से हराया था तुझे अपनी हार स्वीकार करनी चाहिए.. नाकि उसे लेकर रोना चाहिए..

कालजंग- खामोश हो जा... हम रट नहीं हैं, बल्कि रूज़ तो अब तुम लोग... जब हम अपने हर अपमान का प्रतिशोध लेंगे तुमसे..

सभ्य- नहीं कालजंग हमें माफ़ कार्डो हमारा कोई मतलब नहीं था तुम्हे अपमानित करने का.

सभ्य अपनी साड़ी को अपने बदन पर ओढ़े हुए कड़ी कालजंग के आगे गिड़गिड़ा रही थी

अनुज- नहीं माँ इस मादरचोद से माफ़ी मत मानगो सेल तू इतना hi बड़ा योद्धा समझता है खुद को तो एक बार खोल न सेल दो दो के साथ मिलकर छुपकर हुम्ला करता है और खुद को योद्धा कहता है... तू डरपोक है सेल डरपोक..

कालजंग- हम डरपोक हैं, हम डरपोक, देख बालक अभी तू जितना बोल रहा है उस एक एक बात का उत्तर मिलेगा तुझे... और पहला उत्तर ये देख...

ये कहकर कालजंग ने सभ्य के बदन पर पड़ी सारी को पकड़ के खींच दिया, सभ्य साड़ी के साथ साथ घूमती चली गयी और फिर पूरी नंगी हो गयी...

इसके साथ hi एक तेज़ चीख अनुज के मुँह से निकली... वहीं सभ्य भी चिल्लाई...

सभ्य ने तुरंत अपने दोनों हाथों को अपने बदन पर रख लिए एक हाथ से छूछीयो और एक हाथ से अपनी छूट को ढंकने की नाकाम कोशिश करने लगी..

अनुज- सेल मादरचोद मैं तुझे छोडूंगा nahiiiiiiiiiiiiiiii...

वहीं कालजंग और उसके चेलों की नज़र तो सभ्य के कामुक नंगे बदन पर तिकी हुई थी अनुज की चीखें और धमकियाँ उन तीनो पर कोई असर नहीं कर रही थी...

दोनों चेले सभ्य को यूँ देखकर अपनी अपनी लार टपका रहे..

कालजंग- आह्ह्ह्हह क्या कामुक बदन पाया है तूने, पहली बार जब तुझे देखा तबसे hi इसे भोगने की लालसा होने लगी थी.. अह्ह्ह्ह पर कालक के नियमो में बंधा हुआ था पर यहाँ ये जंगल है और यहाँ सिर्फ मेरा राज चलता है...

Anuj-sale तेरा राज नहीं चलता तू धोखेबाज़ है हिम्मत है तो एक बार खोल के दिखा न तुझे यही गाड़ दिया तो कहना..

कालजंग- अनुज की और देख कर मुस्कुराया, तुझसे हम बाद में निपटेंगे, और रही बात गाड़ने की हूँ ज़रूर गड़ेंगे अपने लिंग को तेरी माँ की कामुक योनि में..

अनुज - कालजंग.....

अनुज ये सुनकर गुस्सा भी हुआ पर साथ hi घबरा भी गया, वहीं सभ्य भी चिल्लाई पर वो जानती थी की दोनों बुरी मुसीबत में फंस चुके थे...

अनुज- मा मा तुम भाग जाओ, जल्दी से भाग जाओ..

अनुज ने बोलै और सभ्य की और देखा पर वो ज्यों की त्यों कड़ी रही...

अनुज- तुम मेरी चिंता मत करो माँ तुम भाग जाओ..

कालजंग- बिलकुल अगर तुम चाहो तो भाग सकती हो और हम तुम्हे रोकेंगे भी नहीं और न hi तुम्हारे पीछे आएंगे...

अनुज- माँ अब तो भाग जाओ.

कालजंग- पर एक बात याद रखना की अगर तुम भाग गयी तो अपने इस पुत्र को हमेशा के लिए भुला देना... फिर इससे कभी नहीं मिल पाओगी..

कालजंग की बात सुनकर सब्ब्या बुरी तरह से दर गयी...

सभ्य- नननननाहीईई तुमममममम उसे कुछ नहीं करोगे...

अनुज- मुझे कुछ नहीं होगा तुम भाग जोऊ यहाँ से...

सभ्य तस की मास कड़ी रही

अनुज- माँ चली जाओ ना मैं तुमसे विनती करता हूँ..

अनुज रट हुए बोलै.. सभ्य की आँखों से भी आंसुओं की धार बाह रही थी पर वो वैसे hi अपने हाथों से खुद को ढकने की नाकाम कोशिश करते हुए सर झुकाये हुए कड़ी रही...

कालजंग सभ्य का समर्पण देख मुस्कुराया और बोलै- वाह ये होता है माँ का पुत्र के प्रति प्रेम जो अपने पुत्र के लिए सब कुछ कर सकती है.. तो क्या तुम अपने पुत्र के लिए अपने इन हाथों को हटा नहीं सकती और हमें अपने कामुक बदन के दर्शन नहीं करा सकती..

ये कहते हुए उसने सभ्य के हाथों को पकड़ कर हटाकर दोनों तरफ कर दिया... जिससे सभ्य की छुछियां और पूरा बदन छूट समेत सबकी आँखों के सामने उजागर हो गया...

चेला 1- ahhhhhhhhhh मालिक सच में क्या बदन पाया है इसने ऐसे कामुक बदन की महिलातो मैंने आज तक नहीं देखि,

चेला 2- हैं सही कहा तूने, सच में ऐसा बदन तो सिर्फ एक hi काम के लिए बनाया जाता है और वो भोगने क्व liye...ahhh मालिक अब तो रहा नहीं जाता...

सभ्य के बारे में दोनों ऐसी बातें करते हुए हंस रहे थे बेचारी सभ्य सब के बीच बिलकुल नंगी कड़ी थी और उन दोनों की ऐसी. बातें सुन शर्म और बेइज़्ज़ती से गाड़ी जा रही थी...





अनुज और सभ्य दोनों की आँखों से आंसू बाह रहे थे वहीं कालजंग और उसके चेले बहुत खुसब थे...

कालजंग- बिलकुल सही फैसला किआ वैसे तुमने , आह्ह्ह्हह्ह अब हम तुम्हारे इस मादक बदन को भोगेंगे इसे चूमेंगे चाटेंगे, मसालेंगे,

अनुज- कालजंग बस्स्स कर...

कालजंग- तुम्हारे इन बड़े बड़े उभारों को निचोड़ निचोड़ कर इनका रास पीयेंगे... तुम्हारी इस रसीली योनि को अपने मुसल से कूटेंगे और तब तक कूटते रहेंगे जब तक हम तृप्त नहीं हो जाते...

चिल्ला 1- मालिक..

कालजंग- बिलकुल मेरे चेलों हमारे बाद तुम इसके साथ जो करना चाहो जैसे चाहो कर सकते हो, तुम्हे खली थोड़े hi जाने देंगे हम...

और जब ये हम तीनो को तृप्त कर देगी तब जाकर हमें कहीं संतुष्टि मिलेगी साथ hi प्रतिशोध मिलेगा हमें अपने अपमान का... जो कालक की भरी सभा में हुआ था...

अनुज- भें के लोडे मादरचोद तू सम्मान के लायक भी नहीं है, हमें बांधकर बड़ा हिम्मतवाला बनता है न...

कालजंग- चीख ऐसे hi मूर्ख क्यूंकि तेरी चीखें सुनकर हमारे कानो को आनंद आ रहा है ऐसा लग रहा है जैसे हमने अपना प्रतिशोद ले लिए है पर असली ठंडक तो तब पहुचेंगी इन कानों को जब हम तेरी माँ के बदन को कुचलेंगे और उसकी चीखें उसकी सिसकियाँ हमारे कानो में पड़ेंगी...

ये कहकर कालजंग आगे बड़ा और सभ्य की एक छुच्छी की और हाथ बढ़ाया तो सभ्य ने उसे एक ज़ोर का चांटा गाल पर मार दिया पर सभ्य हैरान हो गयी क्यूंकि चांटे का असर कालजंग पर कुछ न हुआ...

सभ्य- खुद को बहुत बड़ा मर्द समझता है न तू, पर तू नामर्द है एक औरत को मजबूर कर उसके साथ ये सब करना चाहता है, मर्द वो है जिसके साथ औरत खुद से राज़ी होकर सब करे...

कालजंग को सभ्य की बात पर गुस्सा आ जाता है और वो सभ्य के बालों को पकड़कर बोलता है- तुच्छ स्त्री, वैश्य कहीं की हुमैने नामर्द बोलती है, अपने बेटे के साथ भी सम्भोग करने वाली मुझे पाठ पद्धति है..

सभ्य- हाँ हराम के जाने अपने बेटे से चूड़ी हूँ मैं, खुल्ला बोलती हूँ चूड़ी अपने बेटे से, ख़ुशी ख़ुशी चूड़ी क्यूंकि वो मर्द है तेरी तरह नामर्द नहीं... एक मर्द का लुंड है मेरे बेटे के पास तेरी तरह नहीं... मर्द होता न तो मैं या कोई भी औरत खुद तेरे सामने टंगे फैला देती जैसे मैंने अपने बेटे के सामने फैलाई समझा...

अनुज अपनी माँ की बात सुनकर हैरान रह गया पर साथ hi उसे आगे क्या होगा ये सोचकर बहुत दर भी लग रहा था..

कालजंग- ाचा अगर तू खुद हमसे सम्भोग करे तो तेरी नज़र में हम मर्द कहलायेंगे हैं न..

सभ्य- हाँ पर ऐसा कभी नहीं हो सकता...

कालजंग- तू खुद अपने इन भरी भरकम नितम्बों को हमारे लिंग पर परखेगी तो मर्द कहलाऊंगा मैं,

सभ्य- देखता जा सपने क्यूंकि ये कभी नहीं होने वाला..

कालजंग- और यदि ऐसा हो की तू खुद हमारा लिंग तू अपनी इस रसीली योनि में पकड़कर घुसायेगी तब तो मर्द कहलायेंगे न

सभ्य- ऐसा कभी नहीं हो सकता..

कालजंग हंसने लगा - बस अगर इनसब से हम मर्द कहलायेंगे तो ऐसा ज़रूर होगा...

सभ्य- नननननाहीईई..

सभ्य और अनुज दोनों hi हैरान थे की ऐसा न जाने कालजंग आगे क्या करने वाला है..

कालजंग- चेले ज़रा सुराही तो निकल..

कालजंग ने अपने चेले से कहा,

चेले ने अपनी पीठ पर टंगे एक थैले से एक मिटटी की सुराही निकली जिस पर ढक्कन लगा हुआ था.. और निकल कर कालजंग के हाथों में पकड़ा दी..

कालजंग उसे लेकर सभ्य की और बड़ा.. सभ्य और अनुज दोनों घबराने लगे की न जाने अब ये क्या करने वाला है...

सभ्य- कककककया क्या हीी इसमे..

अनुज- रुक जा मादरच क्या कर रहा है...

कालजंग ने आगे बढ़ाते हुए अपने चेलों को इशारा किआ तो उन दोनों ने आकर सभ्य को दोनों हाथों को पकड़ लिए...

अनुज- छोड़ दो मेरी माँ को सालो तुन्हे मार डालूंगा मैं..

सभ्य भी बुरी तरह दर गयी..

सभ्य- छोडो मुझे क्या कर रहे हो तुम छोडो मुझे...

कालजंग सभ्य के बिलकुल करीब पहुंच गया और फिर सुराई के मुँह को सभ्य के चेहरे के बिलकुल करीब लाया और फिर सुराई के ढक्कन को सभ्य की नाक के नीचे सत्ता दिया और हल्का सा ढक्कन खोला और कुछ पल बाद hi बंद कर दिया...

ढक्कन खुलते hi एक तेज़ और तीखी सी गंध सभ्य की नाक में घुस गयी और उसे ऐसा लगा जैसे कुछ ठंडा ठंडा ठंडा सा उसके बदन में चला गया हो...

अनुज- क्या कर रहा है तू मेरी माँ के साथ मादरचोद छोड़ उन्हें मैं तुझे ज़िंदा नहीं छोडूंगा..

कालजंग सुराई लेकर पीछे हटा और फिर दोनों चेलों ने भी सभ्य को छोड़ दिया... कालजंग ने चेले को सुराई बापिस पकड़ा दी तो चेले ने वहीं थैले के बगल में रख दी.

Anuj-kya किआ है तुमने मेरी माँ के साथ, क्या है उस सुराई में बता सेल...

कालजंग- देखता जा मुर्ख कुछ hi क्षणों में तुझे पता चल जायेगा..

वहीं सभ्य को लग रहा था जैसे उसका दिमाग बिलकुल हल्का सा हो गया था, और कुछ पल बाद उसके बदन में एक सनसनी सी होने लगी, एक अजीब सी खुजली उसके पूरे बदन में होने लगी उसकी चूचियां बिलकुल कड़क हो गयी उसकी छूट गीली होकर खुजाने लगी..

सभ्य- ुहममम ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह

सभ्य ये कहते हुए तड़पने लगी, वो अपने हाथों से खुद के बदन को सहलाने लगी अचानक से उसके बदन में एक तेज़ उत्तेजना उसे महसूस हो रही थी...

अनुज- क्या हो रहा है तुम्हे माँ? तुम ठीक हो ना, क्या किआ है तुमने मेरी माँ के साथ मादरचोदों.

कालजंग और चेले सभ्य के बदन को मचलते हुए देख रहे थे...

सभ्य अगले hi पल रेट में लोट पॉट होने लगी उसके बदन में जैसे उत्तेजना इतनी बढ़ गयी की उससे संभालना मुश्किल हो गया था, उसके बदन जैसे एक साथ लाखों चीटियां रेंगने लगी हो..

सभ्य अपने बदन को रेट में घिसने लगी पूरे बदन को रेट में घिसती तो कभी अपने हाथों से मसलती,

अनुज ये सब देखकर कागि घबरा रहा था और चीख भी रहा था पर न तो कालजंग पर कोई असर हो रहा था और सभ्य तो अभी किसी और hi दुनिया में थी जैसे... सभ्य का पूरा बदन रह रह कर अकड़ रहा था कुछ hi पलों में उसका पूरा बदन रेट से सं गया था जिसके बाद वो और कामुक लग रही थी यूँ रेट में तड़पती हुई...

इसी बीच कालजंग उसे देखते हुए आगे बढ़ा और मचलती हुई सभ्य के पास जाकर खड़ा होकर उसे देखने लगा...





सभ्य अपने बदन की उत्तेजना से लड़ने की पूरी कोशिश कर रही थी...

इसी बीच कालजंग ने अपनी कमर पर बंधी धोती को खोल कर नीचे गिरा दिया और वो नीचे से पूरा नंगा हो गया, उसकी दोनों विशालकाय टैंगो के बीच उसका कला डरावना लुंड झूलने लगा...

जिसे अगले hi पल वो हाथ से मुठियाने लगा सभ्य के नंगे तड़पते बदन को देखते हुए,

अनुज- nahiiiiiiiiiiiiiiii सेल दूर हो जा मेरी मा से...

इधर सभ्य की नज़र जैसे hi कालजंग के लुंड पर पड़ी तो उसकी उत्तेजना और बढ़ गयी उसका बदन और ताड़पन्र लगा, खुजली और तेज़ हो गयी...

सभ्य ने किसी तरह से खुद को रोका हुआ था..

कालजंग ने अपने लुंड को मुठियाते हुए सभ्य को दिखाया और पुछा- चाहिए तुझे ये...

सभ्य ने किसी तरह से खुद से लड़ते हुए अपने सर को ना में हिला दिया, जिसे देखकर कालजंग मुस्कुराने लगा...

सभ्य के बदन और दिमाग में एक अजीब और गहरी जुंग चल रही थी बदन जहाँ सुख छह रहा था वहीं दिमाग उसे रोक रहा था की ऐसा न करे ये सब कालजंग की चाल है... पर बदन की तड़प इतनी बढाती जा रही थी की दिमाग का ज़ोर काम होता जा रहा था..

इधर अनुज चीख चीखकर अपना गाला फाड़ रहा था पर उसकी चीख का चिल्लाने का किसी पर कोई असर नहीं हो रहा था...

इधर कालजंग मुस्कुराते हुए नीचे अपने घुटनो लार बैठ गया,

उसके दोनों चेले बड़ी ख़ुशी से उसके आगे बढ़ने का इंतज़ार कर रहे थे,

कालजंग सभ्य के पास घुटनो पर बैठ गया और फिर उसने सभ्य के नंगे बदन को अपने दोनों बड़े बड़े हाथों में पकड़ा और एक गुड़िया की तरह घुमाकर उसे अपने सामने घोड़ी बना दिया, सभ्य जो की अब अपने होश में नहीं थी उसे रोक नहीं प् रही थी...

घोड़ी बनाकर कालजंग ने सभ्य के पीछे जगह ली उधर अनुज बुरी तरह से रट हुए चिल्लाने लगा... और उसे रुकने को बोलने लगा..

कालजंग ने हँसते हुए अपने चेलों की और देखा और फिर अनुज को और फिर अपने लुंड को पकड़ कर बोलै- देख मूर्ख अब हमारा प्रतिशोध पूरा होने जा रहा है देख कैसे तेरी माँ की योनि में हमारा ये मुसल घुसेगा और उसको बर्बाद कर देगा...

आज पता चलेगा की कालजंग को अपमानित करने का क्या नतीजा होता है..

अनुज- nahiiiiiiiiiiiiiiii रुक जाआआ कमीनी मादरचोद...

कालजंग हँसता हुआ अपने घुटनो को थोड़ा फैलाकर खुद को सही स्थिति में लता है, सभ्य के पीछे, सभ्य जो की बेचारी खुद का बचाव करने में अब बिलकुल असमर्थ थी वो कालजंग के आगे घोड़ी बानी तड़प रही होती है..

कालजंग सबका ध्यान अपनी और करके अपने लुंड को पकड़ता है और सभ्य के चूतड़ों के बीच, उसकी छूट की तरफ आगे बढ़ता है.

और अगले hi पल पूरे जंगल में एक भयानक चीख गूँज जाती है...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
कालजंग हँसता हुआ अपने घुटनो को थोड़ा फैलाकर खुद को सही स्थिति में लता है, सभ्य के पीछे, सभ्य जो की बेचारी खुद का बचाव करने में अब बिलकुल असमर्थ थी वो कालजंग के आगे घोड़ी बानी तड़प रही होती है..

कालजंग सबका ध्यान अपनी और करके अपने लुंड को पकड़ता है और सभ्य के चूतड़ों के बीच, उसकी छूट की तरफ आगे बढ़ता है.

और अगले hi पल पूरे जंगल में एक भयानक चीख गूँज जाती है...

अपडेट 156

चीख इतनी भयावह थी की पूरा जंगल दहल गया था, पक्षी फड़फड़ाकर आकाश में चक्कर लगाने लगा रहे थे, अनुज ने अपनी आँखें ज़ोर से बंद की हुई थी वो अपनी माँ के साथ कालजंग का ये कृत्या नहीं देख सकता था..

उसके कानो में जब ये चीख गूंजी तो उसका दिल दहल गया, कुछ अनचाहा होने के दर से उसका मन ऐसा लगा भरी होकर सीने में गढ़ता जा रहा था, पर चीख इतनी भयानक थी की उसकी आँखें बिना खुले नहीं रह पाई, उसने आँख खोल के देखा तो बिलकुल हैरान रह गया, सामने का दृश्य ऐसा था की जो भी देखता उसकी आँखें फटी की फटी रह जाती,

सभ्य के घुटनो के पास खून था, जो रेट को अपने रंग में रंगकर लाल कर रहा था, खून देखकर अनुज का दिल और धक् से कर गया, उसने सभ्य की और देखा तो वो अब भी वैसे hi घोड़ी बानी हुई थी..

पर उसके पीछे कालजंग एक बड़े पेड़ सा ज़मीन पर पड़ा हुआ था और उसके लुंड पर एक धारीदार पत्थर आधा घुसा हुआ था, लुंड से खून की एक धार बहकर नीचे गिर रही थी... और वहीं उसने देखा की एक साया कालजंग के बगल में खड़ा है... बिलकुल नंगा पर हाथ में पत्थर और डंडा लिए और जब अनुज की नज़र उसके चेहरे पर पड़ी तो अनुज की आँखों से ख़ुशी के आंसू छलक पड़े..

सामने उसका भाई कर्मा खड़ा था, कर्मा ने गिरे हुए कालजंग के सर पर एक डंडा और मारा तो कालजंग अपना बचा कुछ होश भी खो कर बेहोश हो गया, अपने मालिक का ये हाल देखकर दोनों चेले थार थार काँप रहे थे, इधर कालजंग को सँभालने के बाद कर्मा ने अपना ध्यान उन दोनों की और किआ तो दोनों की फैट गयी, कर्मा ने अगले hi पल दोनों पर डंडा बरसाना शुरू कर दिया,

अनुज के मन को ये सब देखकर बहुत ख़ुशी मिल रही थी तभी उसे अपने बगल में कोई महसूस हुआ उसने चेहरा घुमाकर देखा तो उसकी ख़ुशी और बढ़ गयी, बगल में उसकी मौसी थी जो उसे खोल रही थी और अगले hi पल अनुज आज़ाद था,

छूटते hi अनुज भी दोनों चेलों पर बरस पड़ा..

दोनों भाइयों ने मिलकर दोनों का अछि तरह से भुर्ता बना दिया, और मार मार कर अधमरा कर दिया, फिर जाकर सब एक दुसरे से मिले अनुज अपनी मौसी और भाई के गले से चिपक गया और उसकी आँखों में से आंसुओं की धार ये बता रही थी की वो कितना खुश था और पहले कितना दर भी गया था, सभ्य अब भी वहीं रेट में पड़ी तड़प रही थी, उसे कुछ भी होश नहीं था..

कर्मा- अनुजज माँ को क्या हुआ है?

शालू भी दौड़कर नंगी तड़पती हुई अपनी बड़ी बहन के पास पहुंची और उसे बाहों में भर लिए .

अनुज बोलने hi जा रहा था की कर्मा ने अनुज को धक्का देकर एक तरफ गिरा दिया और खुद भी साथ में गिर गया,

अनुज ने मुद कर देखा तो कालजंग दोबारा लड़खड़ाते हुए खड़ा हो गया था और डंडा हाथ में लेकर उनकी तरफ घुमा रहा था... उसका लुंड आधा कटा हुआ उसके बदन से लटक रहा था, जिससे खून की धार लगातार बाह रही थी, अभी पहले से भी ज़्यादा भयावह लग रहा था,

एक बार फिर से उसने कर्मा की और डंडा घुमाया तो कर्मा लुढ़कते हुए बच गया और खड़ा हो गया इससे पहले कालजंग दोबारा कोशिश करता इतने में कर्मा की नज़र वागल में पड़ी एक सुराई पर पड़ी और उसने कूद कर सुराई को उठाया और फिर उछाल कर उसे कालजंग के सर पर दे मारा और सर पर लगते hi सुराई फूट गयी साथ hi कालजंग एक कटे पेड़ सा धम्म से वहीं गिर पड़ा,

सुराई के फूटते hi एक तेज़ तीखी गंध कर्मा की नाक में गयी जिससे उसे अजीब सा एहसास हुआ जैसे सर चक्र सा रहा हो, यही हाल अनुज और शालू का भी था, वहीं सभ्य तो और ज़्यादा तड़पने लगी...

कर्मा ने अपने सर को झटका और बोलै चलो यहाँ से जल्दी निकालो..

कर्मा ने अपनी नंगी माँ को पकड़कर उठाया और अपने कंधे पर लटका लिए अनुज ने अपना सामान उठाया और सब भागते हुए वहां से निकल गए,

वहां खून के ढेर में कालजंग और उसके दोनों चेले बेसुध पड़े हुए थे और उनकी हालत देखकर लग नहीं रहा था की बिना किसी की मदद के ये उठ भी पाएंगे...

कर्मा की टोली आगे भागते हुए जा रही थी, पर साथ hi उसका सर भी चक्र रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था की ऐसी नाज़ुक परिस्थिति में भी उसका लुंड क्यों तना हुआ है.. फिर भी किसी तरह वो अपनी माँ को उठाये आगे बढ़ रहा था,

वहीं सभ्य अपने बेटे के कंधे पर पड़ी हुई आहें भर रही थी और उसका बदन मचल रहा था...

अनुज और सभ्य का भी यही हाल था दोनों के सर चक्र रहे थे और दोनों को hi अपने बदन में एक अजीब सा एहसास हो रहा tha,anuj का लुंड बिलकुल कड़क हो कर झूल रहा था तो शालू की छूट पनिया रही थी अभी चारो में सिर्फ शालू hi थी जिसके बदन पर कपडे थे, अनुज अपनी इस स्थिति से परेशां था की ऐसा क्यों हो रहा फिर अनुज ने दिमाग लगाया तो उसे सब समझ आ गया की ऐसा उस सुराई की वजह से हुआ है पर अब बहुत देर हो चुकी थी...

आगे चलते हुए वो लोग एक घने बाघ के अंदर घुस गए, कर्मा का सर अब काफी चक्र रहा था साथ hi उसका बदन भी अब अजीब सा बर्ताव कर रहा था उसे लग रहा था की वो जैसे बहुत उत्तेजित हो रहा है, पर बिना चाहे bhi...wohin सभ्य का बदन बुरी तरह से मचल रहा था, कर्मा का अब उसे उठा पाना तक मुश्किल हो रहा था और दो चार कदम आगे बढ़ा hi था की कर्मा अपने और सभ्य के भर को संभल नहीं पाया और दोनों माँ बेटे घास में गिर पड़े, कर्मा अपनी पीठ के बल गिरा था और सभ्य उसके कंधे पर होने की वजह से उसके ऊपर, गिरते hi सभ्य की आँखों के सामने कर्मा का खड़ा लुंड आ गया..

अनुज और शालू ने मुड़कर देखा तो शालू चिंता में बोली - जीजी कर्मा क्या हुआ संभलके..

अनुज और शालू दोनों उनकी मदद करने आगे बढे hi थे की अगले hi पल दोनों के कदम ठिठक गए, सामने का दृश्य देखकर दोनों को hi समझ नहीं आया की अब क्या करें.. शालू की तो आँखें फटी की फटी hi रह गयी..

सभ्य जो की इतनी देर से उत्तेजना और बदन की प्यास में जल रही थी वो कर्मा का लुंड देख कर ऐसे बिजली की रफ़्तार से झपटी जैसे एक भूखी शेरनी अपने शिकार पर और इससे पहले कर्मा कुछ समझता तब तक तो उसकी माँ उसके ऊपर बैठ चुकी थी और कर्मा का लुंड उसकी माँ की छूट में घुस चूका था

ऊपर से अब कर्मा पर भी पूरी तरह सुराई की महक का असर हो चूका था और रही सही कसार उसकी माँ की छूट ने कर दी जो उसके लुंड को अपने अंदर समाये हुए थी... सभ्य ने कर्मा के लुंड पर अपने चूतड़ों को पटकना शुरू कर दिया था , लुंड अंदर घुसने के बाद बेचारी को तड़प से थोड़ी रहत मिली थी, सभ्य ने अपने दोनों हाथ पीछे टिकाये कर्मा की छाती के दोनों तरफ और फिर अपनी छूट को अपने बेटे के लुंड पर पटक पटक कर उससे चुदाई करने लगी नीचे से कर्मा भी कब तक शांत रहता तो नीचे से कमर के झटके लगा लगा कर अपनी माँ को छोड़ने लगा..





ये दृश्य देखकर अनुज और सभ्य तो बिलकुल hi स्तब्ध रह गए, हालाँकि अनुज को अंदाज़ा था ऐसा क्यों हो रहा है पर फिर भी सामने अपनी माँ को अपने भाई से छुड़वाते देखना वो भी जंगल के बीच में बिलकुल hi चौंकाने वाली स्थिति थी, पर उसके दिमाग पर भी अब तक काफी असर हो चूका था, सुराई की महक और बाकि सामने माँ और भाई की चुदाई अनुज को पता भी न चला की कब वो अपनी माँ और भाई की चुदाई देखते हुए मुठियाने लगा..

वहीं शालू जो की एकलौती अभी तक कपड़ो में थी उसके लिए सब कुछ बेहद मुश्किल होता जा रहा था, सुराई की महक का असर उस पर भी काफी हो चूका था साथ hi अपने सामने अपनी बहन को उसके सेज बेटे से छुड़वाते देख, उसके बदन में एक अजीब सी तड़प हो रही थी, पूरे बदन में एक खुजली का एहसास हो रहा था और उसी खुजली और कामोत्तेजना से छुटकारा पाने के लिए शालू के हाथ खुद बा खुद उसके कपड़ो को बदन से अलग करने लगे, कुछ hi पालो में उसकी साड़ी और पेटीकोट नीचे पड़ा हुआ था और उसके हाथ अपनर बदन को मसल रहे थे नज़रें सामने चल रही माँ बेटे की अनदेखी चुदाई पर तिकी हुई थी,

तभी शालू की नज़र अनुज की और पड़ी और फिर उसके खड़े लुंड पर भी जिसे हाथ में लेकर वो मुठिया रहा था, वहीं उसी वक़्त अनुज ने भी अपनी मौसी को बिलकुल नंगा देखा और दोनों की hi आँखें मिली... और जैसे की सब अपने आप हो गया दोनों एक दुसरे की और झपटे और अगले कुछ पलों में अनुज खड़ा था और शालू को उसने अपने ऊपर टेंगा हुआ था..

शालू ने अपने हाथ अनुज के गले में डेल हुए थे... और अनुज मौसी की दोनों जांघों को थामे हुए उन्हें अपने लुंड पर उछाल रहा था .





शालू जो अब तक अपने एक भांजे से चूड़ी थी अब दुसरे के लुंड पर उछाल रही थी, अनुज की तो जैसे किस्मत hi खुल गयी थी पहले माँ और फिर अब मौसी..

चारो लोग अपना सब कुछ भूलकर हवस के ऐसे खेल में मगन थे जो शायद कभी किसी ने देखा हो,

सुराई की महक की वजह से चरों के दिमाग और बदन इतने उत्तेजित हो चुके थे की चुदाई के अलावा किसी और चीज़ के बारे में सोचना या करना दोनों hi इस समय असंभव था..

सभ्य कर्मा के लुंड पर कूदती हुई सिसकियाँ ले रही थी ऐसा लग रहा था वो किसी नशे में हो ..

सभ्य- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaahhhhhhhhhhhh.

नीचे से कर्मा माँ की छूट को सटासट छोड़ते हुए गुर्रा रहा था..

कर्मा- ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaahhhhhhhhhhhh uhhhhhhhhhhhhh हम्म्म्म आअह्ह्ह्ह...

और ये हाल सिर्फ माँ बेटे का hi नहीं था, शालू और अनुज का भी यही था, खड़े रहकर चुदाई करना दोनों के लिए ज़्यादा देर मुमकिन नहीं था तो दोनों ने आसान बदल लिए था और अब अनुज भी कर्मा की तरह लेता हुआ था और शालू उसके पैरों की और मुँह करके उसके लुंड पर कूद रही थी...





शालू- ओह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh हनननननन आईसीए hiiiiiiiiii...

अनुज- ahhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह मौसियी ओह्ह्ह

अनुज अपनी मौसी की गरम छूट को छोड़ते हुए आहें भर रहा था...

माँ बीटा और मौसी भांजे के जोड़े की चुदाई से आस पास सिर्फ ठप्प ठप्प और सिसकियों की hi आवाज़ आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे जंगल में हवस का वासना का किसी ने संगीत छेड़ दिया हो...

इतनी देर की तड़पन और उत्तेजना के कारण सबसे पहले सभ्य अपने शिखर पर पहुंची....

कर्मा ने अपनी माँ को नीचे से पकड़ के रखा और लगातार गहरे धक्के उसकी छूट में लगता रहा जिसका असर ये हुआ की सभ्य का बदन बुरी तरह कांपने लगा और फिर वो बेटे के लुंड पर भरभरा के झड़ने लगी...

सभ्य का स्खलन इतना तेज़ और तगड़ा था की झड़ने ke.baad वो बिलकुल बेहोश सी होकर गिर पड़ी...

कर्मा को जब सभ्य की हालत का एहसास हुआ तो उसने अपनी माँ की छूट से लुंड निकल लिए सभ्य वहीं बेसुध सी पड़ी रही... कर्मा ने फिर नज़र उठाकर देखा तो सामने का नज़ारा देखकर उसका लुंड और झटके खाने लगा, मौसी को अनुज के लुंड पर कूदता देख वो उत्तेजना से भर गया और खुद बा खुद उसके कदम उनकी और बढ़ने लगे....

कुछ कदम बढाकर वो शालू और अनुज के पास पहुँच गया जहाँ शालू अनुज के लुंड पर कूदने में मगन थी, कर्मा शालू के पास जाकर खड़ा हुआ तो शालू का ध्यान कर्मा पर गया और फिर उसके खड़े तने हुए मुसल पर, एक और कड़क लुंड देखकर शालू ने उत्तेजित होते हुए कर्मा के लुंड को पकड़ लिए और धीरे धीरे सहलाने लगी





नीचे से अनुज लगातार करारे धक्के अपनी मौसी की छूट में लगाए जा रहा था,

अनुज और कर्मा के लिए किसी औरत को एक साथ बाँटना कोई नयी बात नहीं थी पर शालू के लिए ये बेहद नया और अलग था, एक साथ दो दो लुंड उसकी सेवा में थे वो भी उसके भांजो के, ऊपर से जंगल में ये खुले में..

शायद सुराई की महक का नशा नहीं होता तो वो ये कर भी नहीं पाती... शालू ने कर्मा के लुंड के टोपे को ध्यान से देखा और फिर अपने होंठों पर जीभ को फेरते हुए उसे अपने मुँह में भर लिए...

कर्मा- ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मौसी...

कर्मा को जब अपने लुंड पर मौसी के गरम मुँह का एहसास हुआ तो उसके मुँह से सिसकी निकल गयी...

नीचे से अनुज ये सब देखकर और उत्तेजित होता जा रहा था और हर पल के साथ उसके धक्के और तेज़ मौसी की छूट में लग रहे थे, शालू तो अपनर अंदर दो लुंड लेने से बिलकुल उत्तेजना के शिखर पर पहुँच गयी..

दोनों भाइयों ने दोनों चोर से धक्के लगाकर शालू को उस पार पंहुचा दिया और शालू झड़ने लगी उसका बदन कंपनी लगा उसकी छूट अनुज के लुंड पर कास गयी जो की काफी था अनुज के लुंड से पिचकारी निकलने के लिए तो अनुज भी अपनी मौसी की छूट को अपने रास से भरने लगा.... शालू और अनुज दोनों झड़ने के बाद थोड़े शांत हो गए पर कर्मा का अभी नहीं हुआ था,

कर्मा ने अनुज के झड़ते hi तुरंत शालू को उसके ऊपर से उठाया और खुद नीचे लेटते हुए शालू को अपने ऊपर खींच लिए और नीचे से दनादन उसे छोड़ने लगा..

कर्मा के झटके कुछ पलों में hi तूफानी हो गए





अनुज जो झड़ने के बाद लेट कर ये देख रहा था उसके अरमान अपनी मौसी और भाई की चुदाई देखकर फिर से जागने लगे और लुंड तो उसका झड़ने के बाद भी बैठा hi नहीं था... वहीं थोड़ी दूर लेती हुई सभ्य को थोड़ा होश आया तो सभ्य की नज़र भी अपनी बहन और अपने बेटे की चुदाई पर hi गयी, उसके बदन में एक बार फिर से बिजली दौड़ गयी...

वो मचलती हुई उठ कर उनके पास आ गयी अपने बेटे के लुंड को अपनी बहन की छूट से अंदर बहार होते हुए देखने लगी... इधर कर्मा जो अब तक किसी तरह खुद को रोके हुए था उससे और नहीं रुका गया पर जैसे hi कर्मा झड़ने को हुआ तो उसने शालू को पलट कर नीचे गिरा दिया और उसकी छूट से लुंड निकल लिए और उठ कर अपने लुंड को बगल में बैठी अपनी माँ के मुँह में घुसा दिया, जो की शायद इसी इंतज़ार में थी और लुंड मुँह में जाते hi उसे तेज़ी से चूसने लगी..

कर्मा ने भी झटके देते हुए कुछ hi पालो में अपने लुंड को अपनी माँ के गले तक ठूंस दिया....

अनुज और शालू ये नज़ारा देखकर एक बार फिर से चौंक गए और उत्तेजित हो गए, इधर कर्मा अपनी माँ के गले में लुंड डालकर खुद को रोक नहीं पाया और अपने रास की धार को अपनी माँ के गले में भरने लगा जिसे सभ्य तुरंत गटकने लगी..





अपनी बहन को अपने hi सेज बेटे का रास पीते देख शालू से रहा नहीं गया, उसने आज तक ऐसी उत्तेजना कभी महसूस नहीं की थी, कर्मा ने झड़ने के बाद लुंड अपनी माँ के मुँह से निकला तो उसके साथ साथ थोड़ा रास भी सभ्य के होंठों से बहकर बहार आने लगा, कर्मा लुंड निकल कर एक तरफ बैठ कर हांफने लगा वहीं सभ्य भी अपनी सांसें इकठी कर रही थी..

पर सभ्य को ज़्यादा देर तक आराम का मौका नहीं मिला और सबको चौंकाते हुए शालू अपनी बहन पर कूद पड़ी और पागलों की तरह उसके चेहरे पर लगे कर्मा के लुंड रास को चाटने लगी और फिर अपनी बहन के होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगी... सभ्य पहले तो शालू की हरकत से चौंकी पर कुछ hi पालो में उतनी hi उत्सुकता से उसका साथ देने लगी...

इन दोनों बहनो का प्यार का ये खेल देखकर दोनों भाइयों का बुरा हाल हो गया, अपनी माँ और मौसी का ये रूप देखकर वैसे hi शायद कोई खुद को रोक पाए उसके ऊपर से तो उनपर नशा भी था, दोनों माँ और मौसी को देखते हुए तेज़ी से अपने अपने लुंड मुठिया रहे थे..

पर दोनों बहनो को तो जैसे कोई होश hi नहीं था एक दुसरे के बदन में खोई हुई थी शालू ने अपनी बहन के होंठों को छोड़ा तो नीचे उसकी गर्दन को चूमते चाटते हुए उसकी बड़ी बड़ी छूछीयों को चूसने लगी...





सभ्य अपणु बहन के होंठों को अपनी चूचियों पर महसूस कर पागल सी होती जा रही थी... काफी अचे से छुछियां चूसने के बाद शालू नीचे की और बढ़ी और अपनी बहन के मांसल पेट को चूमते हुए आखिर में उसकी रसीली गीली छूट तक पहुँच गयी,

अपनी बहन की छूट देखकर शालू से रुका नहीं गया और तुरंत अपने होंठों को उसने सभ्य की छूट से चिपका दिया और चाटने लगी..

शालू के होंठ छूट पर लगते hi एक साथ तीन सिसकियाँ निकली एक सभ्य की तो एक एक कर्मा और अनुज की जो अपनी मौसी और माँ का ऐसा मिलान देख पागल हो रहे थे...

कर्मा से रुका नहीं गया और वो शालू मौसी के पीछे पहुंच गया जो की झुककर अपनी बहन की छूट चाटने में लगी थी कर्मा ने शालू के पीछे घुटनो के बल बैठते हुए जगह ली और अपने लुंड को पकड़कर एक बार फिर से मौसी की छूट पर रखकर अबदार घुसा दिया..

शालू ने कर्मा का लुंड घुसाने पर एक बार अपना मुँह सभ्य की छूट से हटाया और एक अह्ह्ह भरी फिर बापिस अपनी बहन की छूट में मुँह घुसा दिया...

कर्मा ने पीछे से मौसी की कमर को थम कर छोड़ना शुरू कर दिया...

अब जब कर्मा शुरू हो गया तो अनुज कहाँ पीछे रहने वाला था वो भी तुरंत उठकर अपने लुंड को थामे अपनी माँ के पेट पर चढ़कर बैठ गया, और अपने लुंड को अपनी माँ की दोनों छूछीयों के बीच फंसा कर अपनी कमर के झटके लगते हुए माँ की बड़ी बड़ी छूछीयों को छोड़ने लगा...

अब छूट में बहन की जीभ पहले से hi क़हर ध रही थी ऊपर से अपने इतने करीब कड़क लुंड पाकर सभ्य खुद को कैसे रोकती तो बस अपने बेटे की मदद करते हुए सभ्य ने अपना चेहरा आगे कर के कर दी अब अनुज के लुंड का टोपा माँ की छूछीयों के बीच से निकलता और माँ के रसीले होंठों के बीच घुस जाता जिसका माँ अपने होंठ खोल के पूरे प्रेम के साथ स्वागत करती...





अनुज अपने तीर नुमा लुंड से माँ के दो दो निशानों को भेदने लगा.. और ये करने में अनुज को इतना मज़ा आ रहा था की शायद उसने जिसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी...

अनुज- ुह्ह्ह्हहममममआ ahhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आईसीईईई hiiiiiiiiii....

अनुज की सिसकियाँ सुनकर जब कर्मा का ध्यान उनकी और गया तो कर्मा का लुंड मौसी की छूट में फूलने लगा, उसके सामने पहली बार उसका भाई उसकी माँ के साथ वो सब कर रहा था जो अब तक वो खुद करता आया था...

कर्मा को समझ नहीं आ रहा था की ये सब क्यों कैसे हो रहा है पर उसे इतना पता था की जो हो रहा है वो उसे रोक नहीं सकता इसलिए जितना हो सके इसका आनंद लो ...

साथ hi कर्मा को अपनर माँ और भाई को इस प्रकार वासना में लिप्त देखकर एक अलग hi उत्तेजना हो रही थी...

उसी उत्तेजना वश कर्मा ने मौसी की छूट में और तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए जिसके कारन मौसी भी उतनी hi और आलरामकता से अपनी बहन की छूट में जीभ से वार करने लगी, वहीं जीभ का असर सभ्य पर भी दिख रहा था जो उतनी hi आलरामकता से अनुज का लुंड चूस रही थी... अनुज अपनी माँ की छूछीयों और मुँह के बीच आनंद ले रहा था,

चारो किसी न किसी तरह एक दुसरे से जुड़े हुए थे, और एक दुसरे को और उत्तेजित कर रहे थे... शालू अपनी बहन की छूट को तब तक चाटती रही जब तक सभ्य की छूट ने हार मानकर शालू के मुँह में अपना रास न छोड़ दिया.. साथ hi कर्मा पीछे से लगातार शालू को छोड़ hi रहा था... और उधर अनुज अपनी माँ के मुँह को चैन नहीं लेने दे रहा था,

सभ्य के झड़ने के बाद शालू ने अपना मुँह उसकी छूट से हटाया, और फिर आगे होकर कर्मा के लुंड को अपनी छूट से भी निकल दिया..

कर्मा को ये ाचा नहीं लगा तो वो शालू को दोबारा से उसी आसान में लेन की कोशिश करने लगा पर शालू उसके सामने से हैट कर एक तरफ हो गयी और कर्मा के लुंड को थम कर आगे की और जहाँ सभ्य लेती थी उस और खींचा, कर्मा जो वैसे भी छूट के लिए तड़प रहा था आगे बढ़ता चला गया... जब कर्मा अपनी माँ की दोनों टैंगो के बीच आ गया तो शालू ने कर्मा के लुंड को झुककर एक बार चूसा और फिर उसको पकड़ कर अपनी बहन यानि कर्मा की माँ की छूट के द्वार पर टिका दिया...

इसके आगे कर्मा को कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी और उसने एक धक्का लगाकर अपने लुंड को फिर से अपनी माँ की छूट में सरका दिया..

क्यूंकि सभ्य के सीने पर अनुज बैठा था तो उसे कुछ नहीं दिख रहा था इसलिए जब लुंड उसकी छूट में गया तो उसे एहसास हुआ... की कर्मा ने दोबारा लुंड उसकी छूट में भर दिया है और इस एहसास से hi वो गंगना गयी...

शालू की छूट में भी काफी खुजली मच रही थी पर फिर भी उसने खुद लुंड लेने की जगह कर्मा का लुंड सभ्य की छूट में घुसा दिया..

क्यूंकि अपनी छूट की खुजली से ज़्यादा उसे इस चीज़ की जिज्ञासा और उत्तेजना थी की कैसे एक बीटा अपनी माँ की छूट में लुंड घुसता है कैसे एक माँ की छूट को बीटा छोड़ेगा... माँ बेटे की चुदाई देखना hi एक बहुत बड़ी बात थी ऊपर से ये तो उसकी सगी बहन और सागा बीटा है बस यही सोचकर शालू का तन मन तड़प रहा था और उसी जिज्ञासा को शांत करने के लिए उसने कर्मा का लुंड सभ्य की छूट पर टिका दिया था और खुद पीछे होकर अपनी छूट में उंगलिया करते हुए कर्मा के लुंड को उसकी माँ की छूट के अंदर बहार होते हुए देख रही थी...

सभ्य के लिए भी बेहद उत्तेजित करने वाली परिस्थिति थी उसके दोनों बच्चों के लुंड एक साथ उसके बदन में अंदर बहार हो रहे थे, दोनों लड़के एक साथ उसके बदन को ऐसे इस्तेमाल कर रहे थस जैसा किसी बेटे को नहीं करना चाहिए पर सच्चाई यही थी, छोटे बेटे जा लुंड मुँह में और बड़े बेटे का छूट में एक माँ को और क्या चाहिए...

उतनी hi उत्तेजित करने वाली घटना दोनों भाइयों के लिए भी थी, पहले भी वो कई साडी औरतों को एक साथ बाँट चुके थे पर आज जिसे वो बाँट रहे थे वो और कोई नहीं बल्कि उनकी सगी माँ थी जिसे दोनों भाई दोनों छोर से बजा रहे थे...

अपनी माँ की ऐसी सेवा करने वाले बच्चे बड़े नसीब से मिलते हैं और सभ्य का नसीब बहुत ाचा था जो दो बेटे दोनों hi दुमदार लुंड वाले उसने पैदा किये थे जो अपनी माँ की सेवा के लिए हमेशा तैयार थे..

वहीं दोनों बेटों का भी भाग्य hi था जो इतनी गदराई मस्त माँ पाई थी जो अपने बेटों की हर ज़रुरत पूरी करने में सख्सम थी, हर भूख मिटा सकती थी चाहे पेट की हो या लुंड की...

इधर बेचारी शालू का बुरा हाल था कहाँ सभ्य दो दो लुन्डों से मज़े ले रही थी वहीं, शालू अपनी उँगलियों से काम चला रही थी, और फिर कुछ देर बाद जब शालू से रहा नहीं गया तो उसने कर्मा को पकड़ कर पीछे खींच लिए जिससे कर्मा का लुंड उसकी माँ की छूट से निकल गया अब शालू की बरी थी थोड़ा सुख प्राप्त करने की ...

और कुछ पलों बाद hi नज़ारा थोड़ा बदला हुआ था कर्मा अब नीचे बैठा हुआ था वहीं उसकी गॉड में उसकी मौसी और माँ दोनों का सर था, मौसी घोड़ी बानी हुई थी और मौसी के पीछे से अनुज उनकी रसीली छूट को अपने मुसल से कूट रहा था,

दोनों बहनें बरी बरी से कर्मा के लुंड को चूस चाट रही थी...

कर्मा तो ये आनंद पाकर जन्नत में था वहीं अनुज भी अपनी माँ और मौसी का ये तालमेल देख और जोश में आ कर मौसी को छोड़ रहा था...

सभ्य ने कर्मा के लुंड को अपने मुँह में ठूंस कर अपने चेहरे को उसके लुंड पर दबाते हुए गले तक ठूंस लिए..

कर्मा- ओह्ह्ह्ह मा ahhhhhhhhhh...

कर्मा अपनी माँ के मुँह की गर्मी को अपने लुंड पर महसूस करते हुए बोलै उसकी आँखें मज़े से बाब्ड हो गयी.. की तभी एक और सनसनी उसके बदन में फ़ैल गयी जिसकी वजह से उसे अपनी आँखें खोलनी पड़ी उसने देखा की जहाँ उसका लुंड उसकी माँ के मुँह में जड़ तक समाया हुआ है, वहीं उसकी मौसी ने उसकी गोलियों को अपने मुँह में ठूंसा हुआ है और चूस रही है...

कर्मा को तो लगा उसका लुंड उसकी माँ के मुँह में hi पिघलने वाला है शायद hi आजतक उसने कभी ऐसा महसूस किआ हो.. कर्मा बिलकुल झड़ने की कगार पर hi था की उसके लिए ाचा हुआ की माँ ने उसका लुंड अपने मुँह से निकल दिया तब जाकर उसे थोड़ी रहत मिली पर ये रहत ज़्यादा देर की नहीं थी क्यूंकि माँ ने लुंड अपने मुँह से निकला तो तुरंत अपनी बहन के मुँह में घुसा दिया.. शालू भी अब अपनी बहन की तरह दो दो लुन्डों के मज़े लेने लगी..





शालू कर्मा के लुंड को पूरी शिद्दत से चूसने लगी..

वहीं अनुज पीछे से उसकी छूट का भरता बना रहा था.. साथ hi उसके आनंद को और बढ़ने के लिए सभ्य अपनी बहन की छूट के डेन रगड़ रही थी..

शालू तो इस तिहरे हमले से पागल सी होती जा रही थी... और कुछ देर बाद hi शालू अनुज के लुंड पर झड़ने लगी....

उसका बदन थरथराने लगा वहीं उसकी छूट अनुज के लुंड पर कास गयी, सभ्य ने जब अपनी बहन को झड़ते देखा तो तुरंत अनुज को उसकी छूट से लुंड निकलने को कहा और अनुज ने तुरंत निकल भी लिए..

लुंड निकलते hi सभ्य ने अपना मुँह शालू की छूट से चिपका दिया और उसका रास चाटने लगी..

इधर अनुज जो अब खली था वो अपनी माँ के पीछे जो की झुककर शालू की छूट चाट रही थी उसके पीछे जगह बनाई और अपने लुंड को पीछे से अपनी माँ की छूट में घुसा दिया...

कर्मा का ये देख बुरा हाल हो गया उसका भाई उसके सामने पहली बार माँ को छोड़ रहा था.. कर्मा का लुंड मौसी के मुँह में झटके मरने लगा, उतना hi उत्तेजित अनुज भी था अपने भाई और मौसी के सामने माँ को छोड़ने पर... अनुज तेज़ी से और पोइरे उत्साह से माँ को छोड़ने लगा उसके लिए रुकना अब बहुत मुश्किल हो रहा था...

और इसी कारण धक्का लगते हुए कुछ hi पलों में अनुज गुर्राया और अपने लुंड को जड़ तक माँ की छूट में घुसा दिया और फिर जोर जोर से हांफते हुए झड़ने लगा अपनी माँ की छूट को अपने रास से भरने लगा... अनुज का जब झड़ना ख़तम हुआ तो वो पीछे हुआ और अपने लुंड को माँ की छूट से निकल कर पीछे घास पर लेट गया

कर्मा ने जब अपने भाई को माँ की छूट में झड़ते देखा तो उसका साबरा भी टूट गया और वो मौसी के मुँह में झड़ने laga...Shalu का मुँह कर्मा के लुंड रास से भरने लगा... शालू बड़ी उत्सुकता से उसे गटकने लगी..

कर्मा ने झड़ने के बाद शालू के मुँह से लुंड निकला और वो भी अनुज की तरह पीछे की और लेट गया...

इधर सभ्य ने शालू की छूट से मुँह हटाया और उसे घुमाकर अपने सामने किआ और उसके होंठों से अपने होंठों को मिला दिया और दोनों बहाने कर्मा के रास के साथ एक दुसरे के मुँह से खेलने लगी..

माँ कर्मा के रास को मौसी के मुँह से चाट चाट कर गटकने लगी वहीं मौसी को भी माँ के साथ ये उत्तेजक काम करने में मज़ा आ रहा था...

जब कर्मा का रास दोनों बहनो ने चाट चाट कर गतत लिए तो शालू ने अपनी बड़ी बहन को अपने मुँह के ऊपर बिठा लिए और नीचे लेट कर सभ्य की छूट से अनुज का रास चूसने लगी..

सब्ब्या शालू की जीभ के प्रहार से एक बार फिर से आनंद के सागर में गोते लगाने लगी.. शालू बड़ी मेहनत से अपनी बहन की छूट चाट रही थी ताकि अपने भांजे क्र रास को सारा का सारा निकल कर पि जाये...

और उसकी इसी म्हणत का नतीजा था की उसे दुगना फल मिला, शालू की जीभ का जादू सभ्य की छूट पर ऐसा चला की वो एक बार फिर झड़ने लगी और शालू के मुँह में अनुज के रास के साथ साथ सभ्य की छूट का रास भी घुलने लगा जिस शालू बड़ी ख़ुशी से गटकने लगी... और एक सक बूँद गटकने तक नहीं रुकी झड़ने के बाद सभ्य भी घास पर गिर गयी और हांफने लगी वहीं शालू भी ऊपर हो कर अपनी बहन से चिपक कर लेट गयी उसने एक बार कर्मा और अनुज को देखा तो वो दोनों तो सो चुके थे सभ्य की आँखें भी बंद थी... शालू को भी अपनी आँखें भरी सी लग रही थी उसने भी अपनी बहन को खुद से चिपकाया और आँखें बंद कर्ली...

चोदामपुर

ममता- अरे बुला के नहीं ले ताऊजी को अभी??

ममता ने रसोई में से hi काम करते हुए पुछा..

पल्ली - अरे मम्मी वो तो तबसे फ़ोन पर hi लगे हुए हैं पता नहीं सुबह सुबह किस्से बतिया रहे हैं... मैंने बोलै भी जल्दी चलो चाय ठंडी हो रही है..

ममता- तो क्या बोले..

पल्ली - बोले 5 मिंट में आ रहे हैं.

इधर राजन भी नहाके खुद को गमछे से सूखते हुए आँगन में आकर बैठ गया..

राजन- आये नहीं न अभी भाई साब... ले पल्ली ज़रा तेल लगदे बालों में

पल्ली- कहाँ आये बस 5 मिंट 5 मिंट बोले जा रहे हैं..

पल्ली ने अपने पापा के हाथों से तेल की शीशी लेकर उनके पीछे बैठते हुए कहा..

राजन- हाँ जाने क्या बात है आज भोर में हमसे भी कह रहे थे की आज कहीं जाना नहीं...

ममता- कोई बात होगी..

पल्ली- जाने का बात है हमसे तो कोई कछु बताता hi नहीं है...

अरे कौन का नहीं बताता हमारी पल्ली बिटिया को..?

नीलेश ने आँगन में आते हुए कहा तो सबका ध्यान उनकी तरफ गया..

पल्ली- तुम hi नहीं बताते ताऊजी, कब से बुला रहे थे चाय के लिए हम..

ममता- बैठिये भाई साब हम चाय लेटर हैं गरम करके..

नीलेश राजन के बगल में आकर बैठ जाता है...

राजन- का बात है भाई साब पहले हमसे बोले की कहीं जाना मत फिर खुद फ़ोन में लगे हो सब ठीक है न?

नीलेश- हाँ रे सब ठीक है..

राजन- पर बात का है?

नीलेश- अरे वो भी पता चलेगी तनिक सबर कर..

ममता- और का आये बैठ नहीं पाए तुम लोगो ने सवालों की झड़ी लगाडी.

ममता ने चाय देते हुए कहा..

नीलेश- अरे पल्ली देखियो अगर दोपहर में प्रेमा आ सके तो बुला लिओ..

पल्ली- का ताऊजी जब से प्रेमा भाभी हैं वही भ रही हैं तुमको.. हमको तो कोई देखता hi नहीं है.

Nilesh-are पगली तू तो हमारी बिटिया है तेरी जगह कोई नहीं ले सकता..

पल्ली- वैसे भाभी को भी बुला रहे हो लगता है कोई बड़ा प्रोग्राम है ताऊजी आज का..

नीलेश- बस तू देखती जा..

यहाँ ये सब बातें चल रही थी और ममता राजन और पल्ली के मन में जिज्ञासा थी की नीलेश क्र मन में क्या चल रहा है...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्

 
पल्ली- वैसे भाभी को भी बुला रहे हो लगता है कोई बड़ा प्रोग्राम है ताऊजी आज का..

नीलेश- बस तू देखती जा..

यहाँ ये सब बातें चल रही थी और ममता राजन और पल्ली के मन में जिज्ञासा थी की नीलेश क्र मन में क्या चल रहा है.



अपडेट 157


सरलपुर

अँधेरा ढल चूका था, रिमझिम अपने ससुराल में रसोई में रोटियां सेकने में लगी हुई थी तो वहीं उसकी जेठानी चंचल बहार सबको खाना खिला रही थी,

रिमझिम के पति, जेठ, ससुरजी, सास और ननद सब टेबल पर मौजूद थे, चंचल गरमा गरम रोटियां रसोई से लेकर सबको परोस रही थी... कहते हुए सामान्य सी बातें हो रही थी आपस में...

माधुरी (सास): अरे रमन बीटा,

रमन: हाँ अम्मा...

घर में सब बच्चे माधुरी को अम्मा कह कर hi पुकारते थे..

माधुरी: वो तेरी ममी की तबियत कुछ ठीक नहीं है सोच रही हूँ मिल आऊं, तू कल बस अड्डे तक छोड़ आएगा मुझे..

ख़ुशी - अरे अम्मा क्या हुआ ममी को तुमने बताया नहीं..

माधुरी- अरे ऐसे कोई बड़ी बात नहीं है, फ़ोन आया रहा बोल रही थी मिलने को और थोड़ा बुखार वगेरा भी है... तो बस इसीलिए सोचा घूम आऊं..

चरण सिंह: अरे कोई नहीं मिल आओ...

ख़ुशी- मैं भी चलूंगी अम्मा..

माधुरी - अरे अरे तू क्या करेगी जाकर...

ख़ुशी- क्यों मैं भी मामी से मिल आउंगी... बहुत दिन हो गए हैं..

माधुरी- पर..

ख़ुशी- पर वॉर नहीं अम्मा मैं भी चलूंगी..

चरण सिंह: अरे ले जाओ न जब इसका इतना मन है तो, तुम्हारा भी साथ हो जायेगा...

माधुरी- अरे बस मैं तो इसकी पढाई के लिए hi कह रही थी अगले महीने hi परीक्षा हैं...

चरण सिंह - ये बात तो सही है बिटिया अब आखिरी के महीने में ढील मत दे, एक बार पर्चे हो जाने दे फिर आराम से घूम कर आना..

चेतन: और क्या सब चलेंगे एक साथ..

चंचल- और क्या रिम्मी ने भी अभी तक गाओं नहीं देखा है हमारा वो भी घूम आएगी...

माधुरी ने अपनी सास की प्लेट में रोटी रखते हुए कहा..

माधुरी- न बा बहुरिया बस एक hi रख, और क्या ये बढ़िया रहेगा तो कल हम चले जाते हैं, पर ख़ुशी के पर्चों के बाद सब चलेंगे...

इधर जब चंचल बगल में खड़े होकर सबसे बात कर रही थी तभी रमन की नज़र अचानक अपनी भाभी के मांसल चिकने पेट पर पड़ी...

जिसे देखते hi रमन को एक अजीब सा एहसास हुआ.. चिकनी कमर मांसल गेहुअन कैसा हुआ पेट और साड़ी के बीच से झांकती हुई गोल गहरी नाभि...





रमन के मुँह में खाना होते हुए भी ये नज़ारा देखकर पानी आ गया.

उसको पाजामे के अंदर अपना लुंड ताँता हुआ महसूस हुआ...

वो अपनी भाभी के बदन की सुंदरता में खो hi गया था की एक आवाज़ ने उसका ध्यान बापिस खींचा..

माधुरी- रमन, रमन..

रमन: हाँ हाँ अम्मा..

माधुरी- तो फिर छोड़ आएगा न कल हमें.

चेतन- अरे छोड़ आएगा अम्मा क्यों चिंता कर रही हो..

रमन- हाँ अम्मा छोड़ आएंगे.

ख़ुशी- अम्मा लौटोगी कब..

माधुरी- लौट आएंगे दू तीन दिन में...

चरण सिंह - सही है अब दो दो बहुएं आ गयी हैं तो घूमो मज़े से..

चंचल- और का पापा जी, अब साडी जिम्मेदारी हमारी है अम्मा को अब चैन से घूमन दो..

चरण सिंह - अरे हम कहाँ रोक रहे हैं बहुरिया..

यहाँ बातें चल रही थी वहीं बेचारा रमन अपनी भाभी के बदन के बारे में सोच रहा था.. यार वैसे सोचना गलत है पर भाभी का बदन क्या मस्त भरा हुआ और कैसा हुआ है.. एक बार मिल जाये तो मज़ा आ जाये... और गलत क्या है जब हम अपनी बहन को नहीं छोड़ रहे तो ये तो भाभी hi हैं... उस दिन भी पीछे से खुले ब्लाउज में क्या लग रही थी...

यही सब सोचते हुए खाना ख़त्म हुआ और सब अपने अपने कमरों की और चले...

चोदामपुर

ममता- ताला तो लगा दिया है.

राजन- अरे हाँ लगा दिया है.. ऐसे hi चिंता करती हो...

ममता- अरे चिंता तो होती है न, और ये भाई साब न जाने क्या सोचे बैठे हैं जो बता hi नहीं रहे..

राजन- अरे वो भी थोड़ी देर में पता चल hi जायेगा न, कहे पेट में दर्द कर रही हो अपने..

ममता- अरे अजीब नहीं लग रहा तुम्हे की भाई साब बे बाघ तक hi मोटरसाइकिल लेकर आने को क्यों कहाँ हैं? पल्ली के पापा?

राजन- अरे चल जायेगा पता. थोड़ा सबर तो करो..

ममता- अरे वही तो नहीं होता, अब ये पल्ली और प्रेमा न जाने कहाँ रह गयी..

राजन- अरे वो दोनों सीढ़ी वहीं पहुंच रही हैं.. अब तुम थोड़ा काम सोचो और चलो चुपचाप..

दोनों पति पत्नी मोटरसाइकिल पर सवार होकर कर्मा के बाघ की और जा रहे थे जहाँ नीलेश ने उन्हें बुलाया था,

बाघ के अंदर मोटरसाइकिल लेजाते हुए hi राजन को पल्ली और प्रेमा भी वहीं दरवाज़े पर मिल गयी...

राजन ने बाघ के अंदर नीलेश की मोटरसाइकिल के बगल में अपनी मोटरसाइकिल कड़ी की और फिर उसका ध्यान तीसरी मोटरसाइकिल पर गया जो वहां कड़ी थी..

राजन- अब ये किसकी मोटरसाइकिल है?

पल्ली- मेरी है पापा...

पल्ली ने मज़ाक करते हुए कहा..

तो प्रेमा और पल्ली हंसाने लगे वहीं ममता भी मुस्कुराई..

राजन- तेरे बाप ने भी ली कभी मोटरसाइकिल.

राजन ने बापिस मज़ाक करते हुए कहा.

पल्ली- यही तो मत पूछो मेरे बाप ने तो न जाने क्या क्या लिए है...

सब लोग पल्ली की बात पर हंसाने लगे.

ममता- अब यही खड़े रहोगे सब या अंदर भी चलें..

राजन- हाँ भाई चलो नहीं तो तेरी मम्मी के पेट दर्द हो जायेगा बिना जाने...

सरे चलते हुए पेड़ों के बीच से होते हुए बाघ के अंदर जहाँ झोपड़ी और छोटा तुबेल का कमरा बना था वहां पहुँच कर थोड़ा दूर से देखा तो नीलेश सामने खड़े थे, और उनके सामने खत पर कोई औरत और एक आदमी बैठे थे जिनकी पीठ उनकी तरफ थी..

नीलेश के अलावा किसी और को वहां पाकर सब थोड़ा सोच में पद गए साथ hi सचेत हो गए की कुछ गलत न लगे..

इतने में नीलेश की नज़र सब पर पद गयी तो नीलेश ने बोलै- अरे आ गए तुम लोग आओ आओ..

तब उस औरत ने पलट कर देखा तो ममता राजन पल्ली और प्रेमा चारो के चेहरे पर एक अंजनी सी ख़ुशी दौड़ गयी..

ममता- अरे दिया... जीजी..

ममता ये कहकर उस औरत की और भागी और वो औरत भी ममता को आते देख ख़ुशी से कड़ी हो गयी और ममता उसके गले लग गयी... और बोली- कइसन हो हमर रसीली भौजी...

और ये कहकर उस औरत ने ममता की साड़ी के ऊपर से hi ममता के दोनों चूतड़ों को भींच दिया जिससे ममता उछाल पड़ी...

ममता- रसीली तो तुम हो रही हो देखो तो हर जगह से रास टपक रहा है..

इससे आगे वो कुछ बोलती की पल्ली भी अपनी मम्मी को हटाकर उसके गले से चिपक गयी- हाय मेरी सबसे प्यारी बुआ..

जी हाँ दोस्तों ये कोई और नहीं बल्कि अपने कर्मा और अनुज की बुआ और नीलेश की बहन शशि थी, जिसके बारे में और इनके परिवार के बारे में आप सब कुछ जानते hi हैं वही थी..

शशि- अरे हमारी गुड़िया मेरी प्यारी बच्ची ये कहकर शशि ने पल्ली के गलों को चूम लिए..

वहीं शशि के बगल में खड़े विनीत ने भी अपने राजन मां और ममता ममी साथ hi प्रेमा भाभी को नमस्ते किआ...

शशि से मिलने के बाद पल्ली विनीत से भी मिली

Palli-kya विनीत भैया किटंर बड़े हो गए तुम तो..

विनीत- और तुम तो जैसे अभी तक उतनी hi हो न ..पहले इतनी सी थी और अब देखो..

विनीत ने अपनी नज़र पल्ली के बदन पर मरते हुए कहा...

ममता- बड़े तो तुम हो गए हो बाबू.. पहले कैसे छोटे से निक्कर में फिरते रहते थे, .

शशि- और राजू भैया का हाल चल है..?

राजन- अरे बस अब तू आ गयी तो और ाचा हो गया, का मज़ेदार तरीके से आई होबीना किसी खबर के.

शशि- अब ये सब तो भैया से hi पूछो भैया... इन्होने बुलाया तो हम आ गए..

राजन- कैसे भी आ गए अब बहुत ाचा किआ..

इतने में प्रेमा आगे बढ़कर शशि के पेअर छूने लगी..

शशि- अरे भग्गू की बहुरिया... हाय तुम तो और सुन्दर होती जा रही हो बहुरिया..

प्रेमा ये सुनकर शर्मा गयी..

ममता- और का सुन्दर तो है बहुरिया.

शशि- और एक वो नासपीटा भग्गू देखो तो क्या किस्मत पाई है...

विनीत भी चुपके से प्रेमा भाभी के बदन को निहारते हुए मन hi मन सहमति दे रहा था..

ममता- अरे भाई साब तो यहाँ क्यों बुलाया चलो न घर चलते हैं अपनी प्यारी नन्द की सेवा तो करने दो हमें इतने दिनों में आई हैं...

नीलेश- अरे सेवा के लिए hi तो बुलाया है... सब लोग बैठो तो सही....

राजन- घर hi चलते न भैया...

Nilesh-are बैठ न कुछ बात करनी है...

नीलेश की बात सुनकर राजन ममता शशि एक खाट पर प्रेमा पास में पढ़े एक बैठने वाले पीड़ा पर और पल्ली और विनीत चारे के ढेर पर बैठ गए नीलेश अपनी जगह से दो कदम आगे आये और सबके बीच बोलना शुरू किआ... तो सबका ध्यान नीलेश पर hi था...

नीलेश- देखो हम जितने भी लोग यहाँ है सब एक दुसरे को अचे से जानते हैं थोड़ा काम या ज्यादा. और तुम सब लोग hi हमें बहुत प्रिय हो... ये बात भी सच है तो कुछ बात है जो हम तुमसे करना चाहते हैं..

शशि- अरे भैया काहे घुमा रहे हो सीधा मुद्दे पर आओ न...

ममता- कैसा मुद्दा.. हमें भी पता चले..

नीलेश- बता रहे हैं, बता रहे हैं. ाचा तो बात ये है की हम जितने भी लोग हैं हम सब की hi कुछ न कुछ ऐसी बातें हैं... जो की किसी को नहीं पता, सिवाए हमारे...

राजन- भैया क्या बोल रहे हो कुछ पल्ले नहीं पद रहा..

पल्ली- हाँ ताऊजी कुछ समझ hi नहीं आ रहा..

नीलेश ने अपने सर को खुजाया और फिर बोले- अरे मतलब ये है की जो शशि को हमारे बारे में पता है की हम सब आपस में क्या करते हैं..

ये सुनकर सब थोड़ा चौंक गए और बात सँभालने के लिए बोले..

ममता- कककककया करते हैं भाई साब क्या पता है...

शशि- चुदाई करते हैं और क्या मेरी चुदड़ो भौजी...

शशि के मुँह से ये सुनकर चारो के हाव भाव बदल गए

राजन- नन्ना नहीं ऐसा कुछ नहीं है शशि..

ममता- अरे हाँ क्क्क्य बोल रही हो तुम..

नीलेश- ममता राजन शांत हो जाओ, हमने hi शशि को हमारे बारे में बताया है..

ममता- क्यों भाई साब..

शशि- जैसे तुम्हारे कुछ राज़ है वैसे hi हमारी भी बातें हैं भाभी..

पल्ली- कैसी बात बुआ..

शशि- एक तो ये की मैं और भैया आपस में चुदाई करते हैं वो भी पिछले 18-20 सालों से...

ये सुनकर तो सब बुरी तरह से चौंक गए..

राजन- क्क्क्य ये क्यों .. तुम दोनों लोग भाई बहन हो... और तुम्हारा बीटा यहीं है उसके सामने ये सब

ममता- हठाअण...

नीलेश- हाँ जैसे राजन जैसा तुम्हे पल्ली को छोड़ने में मज़ा आता है वैसे hi हमें आता है... और रही बात विनीत की तो वो भी तुम्हे पता चलेगा...

पल्ली- वाह ताऊजी बुआ जी क्या छुपे रुस्तम निकले बताओ इतने सैलून तक किसी को पता तक नहीं चलने दिया...

शशि- हाँ बिटिया डरते थे सबसे..

ममता- हाय मैं समझ सकती हूँ जीजी.. अपने hi भाई से करवाने का सुख.. बहुत मज़ाआ आता है...

शशि- तुम कैसे समझ सकती हो..

ममता- मैंने भी इस बार अपने भाई से करवाया है न इसलिए..

नीलेश- क्या करवाया करवाया लगा रखा है ममता खुल के बोलो...

ममता- वो इस बार जब मैं अपने भतीजे की शादी में गयी थी तो मैंने भी अपने भैया से छुड़वाया था...

शशि- क्या बात कर रही हो भाभी... ये तो मज़ेदार बात है...

ममता- हाँ पर तुम लोगो जा शुरू कैसे हुआ...

नीलेश- आराम से बैठो ये थोड़ी लम्बी कहानी है .. बताते हैं..

पल्ली - जल्दी सुनाओ न ताऊजी मुझे तो अभी से कुछ होने लगा है..

पल्ली ने अपनी जांघें आपस में रगड़ते हुए कहा...

नीलेश- हाँ बीटा बता रहा हूँ, ममता राजन तुमहु याद है जब कर्मा पेट में था...

सरलपुर

रिमझिम की ससुराल में खाना पीना खाकर सब लोग अपने अपने कमरों में जा चुके थे और हरेक कमरे की के हालत अलग होकर भी एक hi थे...

हमारी राजकुमारी ख़ुशी कमरे में आई और बेचारी पढाई करते करते सो गयी...

वहीं उसके रमन भैया जो खाने के वक़्त से hi बेहद उत्तेजित थे अपनी उत्तेजना को अपनी पत्नी की छूट पर निकल रहे थे..





रिमझिम पीठ के बल लेती हुई अपनी कासी हुई छूट में अपने पति के धक्कों को सहते हुए सिसकियाँ भर रही थी...

रिम- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh हनननननन आईसीए hiiiiiiiiii छोडोऊ मेरी राहाजाआ अह्ह्ह्हह

रमन- ली आह्ह्ह्ह सआईईई आअज टेरिइइइइइइ चूऊत्त का भरता बना दूंगा....

रिम- ahhhhhhhhhh तो बना दे न भेनचोद आअह्ह्ह्ह दिखा तेरे मुसल में कितना दम है...

रमन को अपनी बीवी के मुँह से गली सुनकर उसे छोड़ना और उत्तेजित करता था और हुआ भी ऐसा hi रिमझिम की बातों से रमन और उत्तेजित हो गया और दनादन रिमझिम को पेलने लगा... और करीब 5 मीन्स और ताबड़तोड़ चुदाई के बाद रिमझिम का बदन जवाब दे गया और वो झड़ने लगी और रमन भी बिलकुल शिखर पर hi था तो उसने अपने लुंड को अपनी बीवी की छूट से निकलकर उसके मुँह में भर दिया और रिमझिम अपने पति के लुंड से निकला हुआ सारा रास जातक गयी तो रमन तेज़ तेज़ हांफता हुआ पलट कर लेट गया साथ hi रिमझिम को अपने सीने से चिपका लिए...

जब दोनों की सांसें थोड़ी साधारण हुई तो रिमझिम अपने पति के सीने पर हाथ फिरते हुए बोली

रिम- अरे सुनो जी हमें कुछ चाहिए तुमसे..

रमन- तुम्हारे लिए तो जान हाज़िर है बताओ मेरी रानी क्या चाहिए...

रिम- जान नहीं कुछ दिन चाहिए अपनी जान के.

रमन - मतलब..

रिम - आज न मेरे पास पूर्वी का फ़ोन आया था..

रमन- ाचा कैसी हैं साली साहिबा...

रिम- बहुत अछि है अब सुनो आगे..

रमन- हाँ बताओ...

रिम- वो पूर्वी और जीजाजी अगले हफ्ते घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं और वो चाहती है की हम लोग भी उनके साथ घूमने चलें..

रमन- ाचा वो चाहती है और तुम क्या चाहती हो..

रिम - मैं भी यही चाहती हूँ,

Raman-uhmmmm फिर तो सोचना पड़ेगा पर अम्मा भी तो जा रही हैं कल, इनसे पूछना पड़ेगा..

रिम - अम्मा तो दो तीन दिन में लौट आएँगी... हमें अगले हफ्ते जाना है... चलो न शादी के बाद कहीं घुमाया भी नहीं है तुमने..

रमन- ाचा ठीक ठीक है मैं बात करूँगा अम्मा पापा से..

रिम- सच्ची.

रमन - हाँ

रिम- तो और सुनो सिर्फ अम्मा बाबा से hi नहीं भाई साब से भी बात करनी होगी तुम्हे.

रमन- हाँ उनसे भी पूछ लूंगा वो मन नहीं करेंगे.

रिम- अरे नहीं भाई साब और जीजी भी हमारे साथ चलें इसके लिए तुम्हे मानना होगा भाई साब को..

रमन - क्या वो लोग भी चलेंगे?

रिम- हाँ मैं चाहती तो हूँ की वो भी चलें, जीजी को तो मैंने मन लिए है बस तुम भाई साब को मन लो..

रमन- हम्म्म वो सब तो ठीक है पर भैया दुकान छोड़कर जाने के लिए मान जाएं बड़ी बात होगी...

रिम- यही तो तुम्हारा काम है उन्हें मानना, सोचो न कितना मज़ा आएगा हम 6 लोग साथ घूमेंगे मस्ती करेंगे..

Raman-maza तो आएगा चलो ठीक है.. मैं पूरी कोशिश करूँगा भैया को मानाने की..

रिम- ये हुई न बात

रमन- पर इसके बदले में मुझे क्या मिलेगा..

Rim-kya चाहिए...

रमन- तुम्हारी ये कासी हुई गांड..

रमन ने रिमझिम के गांड के छेड़ पर उंगली फिरते हुए कहा..

रिम- बस इतनी सी बात ये लो ये कहकर वो उठकर तुरंत अपने पति के सामने घोड़ी बन गयी..

रमन ने भी तुरंत बीवी के पीछे जगह ली और झुककर उसकी गांड के छेड़ को चाटने लगे..

रिमझिम ahhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह की सिसकियाँ लेने लगी..

थोड़ी देर बाद रमन सीधा हुआ और अपने कड़क लुंड को पत्नी के छोटे से गांड के छेड़ पर रखकर दबाया और अंदर घुसा दिया...

इसके बाद पूरे कमरे में सिसकियों और थप थप की आवाज़ें गूंजने लगी...

वहीं उनके बड़े भैया वाले कमरे में भी हालात कुछ इसी प्रकार थे...

और कुछ इसी तरह का संगीत उनके कमरे में भी गूँज रहा था...

चेतन अपनी बीवी की छूट में दनादन लम्बे लम्बे धक्के लगाकर छोड़ रहे थे..





चंचल पूरी नंगी होकर अपनी पीठ के बल टंगे फैलाये पड़ी हुई थी और उसकी टैंगो क्र बीच हमारे चेतन महाशय थे जो की अपने लुंड को लगातार लम्बे लम्बे धक्के लगाकर अपनी बीवी को जोरदार तरीके से छोड़ रहे थे...

हर झटके के साथ चंचल की बड़ी बड़ी छुछियां हवा में उछाल कूद कर रही थी....

चंचल- अह्ह्ह्ह साजनजीई आईसीईईई hiiiiiiiiii..

चेतन- आह्ह्ह्हम्म्म्म रानी क्या छूट है टेरिइइइइइइ ओह्ह्ह्हह मज़ाआ आ रहा है...

चंचल- अह्ह्ह्ह तो लीजिये न मज़ाआ ahhhhhhhhhh और छोडोऊ... छोड़ छोड़ के फारदो इसे..

दोनों इसी तरह की बातें करते हुए एक दुसरे को उत्तेजित कर रहे थे और उस उत्तेजना का असर दोनों के बदन पर दिख रहा था....

इसका नतीजा भी यही हुआ की चंचल कुछ देर बाद अपने पति के लुंड पर झड़ने लगी ..पर चेतन अब भी लगा हुआ था... पर उसके लिए भी दिल्ली ज़्यादा दूर नज़र नहीं आ रही थी..

चंचल जब झड़ने के बाद शांत हुई तो उसने अपने पीछे खिसक कर अपनी छूट से पति का लुंड निकल दिया और चेतन को चौंकाते हुए तुरंत घूम कर अपने मुँह में भर लिए... और पूरे जोश के साथ चूसने लगी... चेतन जो पहले hi झड़ने की कगार पर था अपनी बीवी के मुँह ौड जीभ की गर्मी नहीं सह पाया और उसके लुंड ने रास की धार छोड़ दी..

उसके बाद जो हुआ उससे तो चेतन और हैरान हो गया, उसकी बीवी उसके लुंड से निकली एक एक रास की बूँद को निचोड़ कर जातक गयी.. चेतन का तो जैसे दिमाग hi सुन्न पद गए..

वो हांफते हुए बीएड के सिरहाने से तक लगा कर बैठ गया..

चेतन- अह्ह्ह ओह्ह्ह आज क्या हो गया तुम्हे..

चंचल- हमें का हुआ..

चेतन- अरे कमाल hi करदी आज तो, वैसे तो लुंड मुँह में लेने में भी न नुकुर करती हो आज तो रास भी पि गयी..

चंचल- क्यों जी तुम्हे पसंद नहीं आया...

चेतन- अरे पसंद हम तो कबसे तुमसे ये करने को बोलते रहते थे मिन्नतें करते थे..

चंचल- तो तुम चाहते हो हम ऐसा किया करें ..

चेतन- कोई पागल hi होगा जो नहीं चाहेगा...

चंचल- पर इसके बदले में हमें भी कुछ चाहिए..

चेतन- ाचा तो ये हमें फंसने के लिए दाना डाला गया था चेतन ने मज़ाक करते हुए कहा...

चंचल- और क्या अब बताओ फंसे की नहीं..

चेतन- बिलकुल फंसे तुम फंसाओ हम न फंसे ऐसा कैसे हो सकता है... बताओ क्या चाहिए तुम्हे..

फिर चंचल ने पूरी बात चेतन को बताई जिसकी प्रतिक्रिया में चेतन बोलै- बायत तो तुम्हारी सही है, शादी के बाद से hi हमने तुमको घुमाया hi नहीं है कही... पर दुकान छोड़कर जाने का कुछ करना पड़ेगा..

चंचल- पापाजी देख लेंगे दो चार दिन क्या हो जायेगा..

चेतन- ठीक है मैं कल पापा से पूछता हूँ, और पूरी कोशिश रहेगी की जैसा हमारी बीवी चाहती है वैसा hi ho..ab खुश..

Chanchal-bahut खुश..

चेतन- तो अब हमें भी खुश कार्डो..

चंचल- कैसे खुश होंगे आप?

चेतन- ज़रा इसे मुँह में लेकर अचे से प्यार से दोबारा जगाओ न...

Chanchal-na जी ना ये जाग गया तो फिर मुझे तंग करेगा, कमीना कहीं भी घुस जाता है..

चेतन- अब तुम हो hi इतनी कड़क दमदार माल के बिना घुसे रहा भी नहीं जाता....

चंचल- चलो अब बस करो..

ये कहकर चंचल पति के दोनों पैरों के बीच बैठ गयी और झुककर उसके लुंड को मुँह में भर लिए...

जिसके साथ hi चेतन की सिसकियाँ और चंचल के लुंड चूसने की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी...

वहीं घर के एक और कमरे में भी माहौल कुछ अलग सा hi था... पर ज़्यादा अलग नहीं था...

चरण सिंह ने आज अपनी बीवी को इस बात का उलाहना देते हुए मन लिए था की तीन चार दिन तक अब वो सूखे रहेंगे और इसी बात को पल बनाकर चरण सिंह नापनी पत्नी की बड़ी सी गांड के बीच छोटे भूरे से गांड के छेड़ तक पहुँच गए थे और अपना गूंथा भी गाड़ दिया था...

माधुरी बीएड पर पीठ के बल लेती हुई थी पर बिलकुल बीएड के किनारे हमारे चरण सिंह बीएड के बगल में बिलकुल नंगे खड़े थे अपनी पत्नी के पैरों को अपने कन्धों पर दाल रखा था और अपना लुंड उसकी गांड में बड़ी तेज़ी से अंदर बाहर कर रहे थे...





उनकी गति और चेहरे केभाव देखने से तो लग रहा था की वो अपनर लक्ष्य के करीब hi हैं....

और था भी कुछ ऐसा hi पर इससे पहले वो झड़ते उनकी पत्नी ने पहले हार मान ली और झड़ने लगी...

पत्नी जे झड़ते hi चरण सिंह भी खुद को रोक नहीं पाए और अपने रास की पिचकारी से बीवी की गांड को भर दिया.. और बिस्तर पर पत्नी के बगल में पसर गए .

माधुरी- अह्ह्ह ऐसी चुदाई करोगे तो हमारा जाने का मन hi नहीं करेगा..

चरण सिंह- तो मत जाओ न मेरी रानी..

चरण सिंह ने अपनी पत्नी को अपने सीने से चिपकते हुए कहा .. और दोनों इसी तरह बातें करते करते सो गए...

चोदामपुर

शशि- और अब तो हमारे जमाई राजा भी सब जानते हैं और शामिल भी होते हैं और ये सब सिर्फ कर्मा की वजह से..

ममता- ये तो है जीजी यहाँ भी अभी जो हो रहा है सब कर्मा के कारन hi है..

नीलेश- ये सब सुनकर गर्व और उत्तेजना दोनों महसूस कर रहे थे...

पल्ली- वाह बुआ हमें तो यकीन नहीं हो रहा की तुम अपने बेटे यानि विनीत भैया से चुदती हो वो भी फूपाजी के सामने..

विनीत- अरे पगली सिर्फ सामने नहीं मैं पापा और ताऊजी मिलकर एक साथ भी छोड़ता हैं मम्मी को..

राजन- वाह भाई क्या परिवार है.. मज़ा आता होगा..

शशि- अब तो जितना तुमने बताया उस हिसाब से तुम्हारा परिवार भी तो हमारे जैसा hi है भैया..

राजन- हाँ ये भी सही कहा..

पल्ली- सही कहा या गलत कहा पर अब ये सबकी कहानी सुनकर मेरी चड्डी गीली हो गयी है..

प्रेमा- सही कह रही हो पल्ली हमारा भी यहीहै है है अब तो रहा नहीं जा रहा..

नीलेश- पर बीटा रहना तो पड़ेगा क्यूंकि अभी एक चीज़ और है..

राजन- अब क्या है भैया.

शशि- हाँ भैया अब कौनसी चीज़ रह गयी...

नीलेश मुस्कुराये और कहा- विनीत राजन अपनी अपनी मोटरसाइकिल पर पल्ली प्रेमा और ममता को बिठाओ और मेरे पीछे पीछे आओ...

नीलेश ये कहकर बाघ से बहार निकलने लगे वहीं नीलेश के अलावा बाकि सब इसी सोच में थर की न जाने कहाँ जाना है......

कालक जंगल

मंजू- ahhhhhhhhhh जग्गू पता नहीं क्या करके मानेगा तू..

जग्गू- अह्ह्ह्हह मम्मी क्या हुआआ ओह्ह्ह..

मंजू- हुआ क्या जब देखो कही भी शुरू हो जाता है बस साड़ी उठता है और घुसा देता है अपनी मम्मी की छूट में..

मंजू आगे की और झाड़ियों के बीच में झुकी हुई थी और उसके पीछे जग्गू था जो अपनी मम्मी की साड़ी को कमर तक उठाकर पीछे से मम्मी की छूट में लुंड पेल रहा था..





जग्गू- अह्ह्ह्हह मम्मी जिसकी मम्मी इतनी मस्त हो वो लुंड नहीं घुसायेगा तो क्या करेगा अह्ह्ह अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह.. और वैसे भी पिछली बार कितनी देर पहले छोड़ा था..

जग्गू ने और तेज़ धक्के लगते हुए कहा...

मंजू- ाचा कितनी देर पहले अभी घंटा भर भी नहीं हुआ, ऐसे तो हम पहुंच गए..

जग्गू- अरे मम्मी क्यों परेशां हो रही हो मज़े लो न अह्ह्ह्ह क्या मस्त छूट है तुम्हारी...

मंजू- तू अपने साथ साथ मेरी भी आदत बिगड़ रहा है..

जग्गू- कैसे मम्मी.

Manju-kaise क्या अभी इतनी चुदाई कर रहा है फिर घर जाकर कुछ नहीं मिलेगा तब मन करेगा..

जग्गू- तो तब भी ऐसे hi साड़ी उठा कर पेल दूंगा तुम्हारी छूट को..

मंजू- ahhhhhhhhhh बड़ा हिम्मत वाला अह्ह्ह बीटा ऐसी hiiiiiiiiii मरोड़..

जग्गू ने मम्मी की चूचियों को मसलना शुरू कर दिया... तो मंजू सब भूल गयी क्या बोल रही थी..

इसी तरह करीब 10 मीन्स की चुदाई के बाद दोनों hi माँ बेटे झाड़ गए...

और बैठ कर हांफने लगे...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्

 
अनुज- हम्म्म देखते हैं..

चरों अमरुद कहते हुए आने वाले समय के बारे में सोच रहे थे..

चारो के hi मन में काफी कुछ था सोने से पहले जो हुआ उसे लेकर पर एक दुसरे से बात करने की झिझक भी थी...



अपडेट 159


कालक जंगल

चारो ने अमरुद खा लिए तो उसके बाद एक अजीब सी चुप्पी सबके बीच थी जिसे कर्मा ने तोडा..

Karma-vwaise मुझे लगता है दिन कुर रात का कोई अंतर नहीं है.. चांदनी रात है हम आगे बढ़ सकते हैं..

Sabhya-par लल्ला रात को खतरा ज़्यादा होगा न..

कर्मा- माँ खतरा तो दिन में भी होगा, ऊपर से अभी हम में किसी को नींद नहीं आ रही है तो समय ख़राब करने से ाचा है आगे hi बढ़ाते हैं..

शालू- मुझे समझ नहीं आ रहा..

कर्मा- दिन में चलने से बेहतर है रात में hi चलें गर्मी भी काम लगेगी.. वैसे भी चांदनी रात है..

अनुज- कह तो सही रहे हैं भैया.

सभ्य- ठीक है फिर सब तैयार हो तो चलते हैं पर किस दिशा ने बढ़ना है पता है?

कर्मा - उसका अंदाज़ा मैंने लगा लिए है.. बस सब साथ रहना हम कोशिश करेंगे थोड़ा रुक रुक के सुबह तक चलते रहे फिर आराम करेंगे...

सबने इस पर हामी भरी तो सब चल पड़े और करीब सुबह होने तक काफी सफर तय कर लिया था पर चारो hi काफी थक गए थे तो सबने फिर से मिलकर कुछ फलों से अपनी भूख मिटै अभी सुबह होने में करीब एक डेढ़ घंटा था पर आगे चलने की हिम्मत औरतें तो बिलकुल नहीं कर रही थी ... तो सबने तय किआ अब आराम hi किया जाये... पर जहाँ वो रुके थे वहां घास तो थी पर खुजली वाली अगर उस पर सोते तो खुजली हो जाती इसलिए उस पर बिछाने के लिए कुछ चाहिए था...

तो दोनों बहनों को एक. बार फिर से बलिदान देना पड़ा और दोनों बे अपनी अपनी साड़ी उतर कर दी जिसे मिलकर बिछा दिया गया.

दोनों बहनें जंगल के बीच अपने बेटों और भांजो के सामने सिर्फ एक ब्लाउज में थी नीचे से पूरी नंगी... वहीं लड़को को धोती भी धक् काम रही थी और दिखा ज़्यादा रही थी तो दोनों ने थोड़ी शर्म और संकसर दिखते हुए अपनी अपनी धोती अपनी माँ और मौसी को देदी..

जब सभ्य और शालू ने उन धोतियों को अपनी कमर पर लपेटा तो ऐसा लग रहा था की दो ढाई ढाई किलो के तरबूज़ों को आधे किलो की थैली में रखने का प्रयास कर रहे हो..

धोती जब लड़को की कमर पर थी तब ढँक काम रही थी और दिखा ज़्यादा रही थी..

पर दोनों बहनो की कमर पर ढंकने की बात तो दूर ेओ उन दोनों को और कामुक और बना रही थी जिसका असर दोनों भाइयों के लोदों पर भी हो रहा था पर थके होने जी वजह से किसी में कुछ अलग से कोशिश करने की हिम्मत नहीं थी और फिर आराम करने के लिए चरों लेट गए और सो गए..

सबसे पहले हमेशा की तरह सभ्य की नींद खुली तो अंगड़ाई लेते हुए वो उठी... आँखें मलते हुए उठकर खुद को देखा तो कुछ पल के लिए चौंक गयी नीचे से पूरी नंगी थी और कर्मा की दी हुई धोती बगल में पड़ी हुई थी वैसे भी उसका कोई फायदा नहीं था उसे लपेटने के बाद भी नंगी hi रहती थी वो इसलिए कुछ देर हालत को समझने के बाद वो उठी...

अब नंगा यूँ बिना कपड़ो के रहना उठना उसके लिए ज़्यादा चौंकाने वाला नहीं रह गया था... आखिर पिछले कई दिनों से यही तो हो रहा था...

उसने देखा दिन काफी हो चूका था पर आसमान में बदल थे तो धुप हलकी hi थी.. इसी बीच इधर उधर देखते हुए उसने पाया की बगल में उसकी बहन सो रही है.. उसका भी ऐसा hi हाल था मतलब नीचे से पूरी नंगी thi..Shalu के नंगे चूतड़ देखकर सभ्य को एक अलग hi उत्तेजना का एहसास हुआ ओर उसने उन्हें एक तरफ किआ और फिर शालू के चूतड़ों को सहलाते हुए उसे उठाया...

शालू अपनी जीजी के हिलने से उठी और अंगड़ाई वगेरा लेकर आँखें मलकर उसने अपनी जीजी को देखा...

शालू- क्या हुआ जीजी..?

सभ्य- दिन हो गया शालू उठ जा कब तक सोयेगी

शालू- हाँ जीजी उठ रही हूँ..

शालू ने ुवासी लेते हुए कहा... और देखा की वो नीचे से बिलकुल नंगी है पहले तो थोड़ा चौकी पर फिर अपनी जीजी को भी उसी तरह देखा तो फिर सामान्य हो गयी..

दोनों ने देखा की दोनों भाई अभी तक सो रहे हैं पर दोनों के लुंड जाग चुके हैं ... लुंड पर नज़र मरने के बाद दोनों बहनो की नज़र आपस में एक बार ज़रूर मिली पर बात को घूमने के लिए सभ्य बोल पड़ी- मुझे तो बड़ी तेज़ पेशाब आ रहा है.. चल करके आते हैं..

सभ्य ने उठाते हुए कहा...

और नीचे पड़ी कर्मा की धोती को उठाकर अपनी कमर पर लपेटने लगी तो शालू बोली - अरे रहने दो न जीजी कहे लपेट रही हो, हम hi तो हैं यहाँ, वैसे भी तुम्हारी इतनी बड़ी है इसमें छुपेगी नहीं ..

सभ्य- का बोली का बड़ी है?

शालू ने उठाते हुए सभ्य के भरे हुए चूतड़ों को दबाते हुए कहा- तुम्हारी ये दिग्गी जीजी.

सभ्य- है ढैय्या कितनी बेशरम होती जा रही है तू शालू देख कैसे दबा रही है..

शालू- जीजी अभी तो दबाने से इतना चिहुँक रही हो मैंने तो इन्हे छाता और..

शालू इतना बोलत्व बोलते रुक गयी, भले hi नशे में चरों के बीच काफी कुछ हो चूका था पर ऐसे सामने से खुलकर बोलने की झिझक अब भी थी..

सभ्य- ाचा अब चल भी बड़ी तेज़ पेशाब आ रही है..

शालू- हाँ जीजी चलो...

दोनों गदराई बहनें नीचे से बिलकुल नंगी होकर अगर इस हालत में उन्हें कोई नपुसंक भी देखले तो उसका भी खड़ा हो हाय उस हालत में थोड़ी आगे बढ़ी और एक झड़ी के मॉस बैठ गयी ..

सभ्य जहाँ बैठी शालू उससे थोड़ा पीछे बैठ गयी.. बैठते hi सभ्य की छूट से मूट की धार निकलने लगी...

और शालू भी मूतने लगी पर मूतने के साथ साथ शालू की नज़र अपनी बहन के नंगे चूतड़ों पर थी... वो ये जानती थी की उसकी बहन का बदन बेहद कामुक और आकर्षक है, एक औरत होने के बाद भी उसे देखकर उत्तेजना होने लगती है तो मर्दों का क्या hi हाल होता होगा...

दोनों बड़े चूतड़ उनके बीच गांड का भूरा छेड़ कुछ भी ऐसा नहीं था जो भोगने लायक नहीं हो उसकी जीजी के पूरे बदन में...

खैर सभ्य का मूतना ख़त्म हुआ और शालू का भी सभ्य उठकर चलने लगी और शालू उसके पीछे थी, सभ्य के नंगे हिलते चूतड़ देखकर शालू के मन में एक अजीब सी उत्तेजना होने लगी, उसके मन में पहले के वो पल जब उसने अपनी बहन के साथ वो सब किआ था उसकी यादें ताज़ा होने लगी, नशे में hi सही पर उस आनंद को वो भुला नहीं प् रही थी, उसका मन बहक रहा था ऊपर से सामने उसकी बहन का अधनंगा बदन उसकी प्यास को और बढ़ा रहा था..

शालू का मन नहीं माना तो उसने पीछे से सभ्य को अपनी बाहों में भर लिए और जिससे पहले तो सभ्य थोड़ा चौंकी पर फिर हंसाने लगी

सभ्य- अरे शालू क्या हुआ,

सभ्य ने प्यार से अपना हाथ कंधे की और लेजाकर अपनी छोटी बहन के चेहरे को सहलाते हुए पुछा..

शालू सभ्य के नंगे पेट को सहलाते हुए बोली- कुछ नहीं जीजी बस तुम पर बहुत प्यार आ रहा है..

शालू अपने नंगे निचले बदन को पीछे से अपनी जीजी के बदन पर घिसने लगी

सभ्य- तू भी न बिलकुल बच्ची है अभी भी...

सभ्य को अपने चूतड़ों पर शालू की नंगी छूट के घिसने का एहसास हो रहा था पर अभी उसने कुछ सोचा नहीं..

पर वो खड़े खड़े शालू की और घूम गयी और एक बार शालू को गले से लगाया और अपनी छोटी बहन पर प्यार जताया और फिर मुद कर आगे चलने लगी...

आगे चलते हुए दोनों hi बिस्तर के पास जहाँ कर्मा और अनुज सो रहे थे वहां पहुंची और कर्मा को जगाने के लिए आगे झुकी और घुटनो पर हो गयी...

सभ्य के झुकते hi शालू की आँखें और बड़ी हो गयी साथ hi उसका बुरा हाल हो गया, सभ्य के झुकने से उसके चूतड़ और फैलकर शालू के सामने आ गए और उसकी गांड के छेड़ से लेकर छूट तक सब सामने आ गए..





बस ये नज़ारा देखकर शालू अपना आप खो बैठी और उसने झुककर अपने चेहरे को अपनी जीजी के चूतड़ों के बीच घुसा दिया, और अपनी जीभ से उसकी छूट को चाटने लगी..

सभ्य शालू के अचानक हमले से चौंक गयी... पर साथ hi शालू की जीभ अपनी छूट में महसूस करते hi सभ्य के पूरे बदन में करंट दौड़ गया..

सभ्य - ahhhhhhhhhh सायःहलूउउ ये क्या कर रहीइइइइइइइ haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh..

शालू ने बिना कोई जवाब दिए अपने हाथों से जीजी के दोनों चूतड़ों को और कास लिए और ज़ोर लगा कर उसकी छूट चाटने लगी..





सभ्य के मन में भी जो भी सब कुछ हुआ उसे लेकर उत्तेजना थी.. उसके भी मन में वो आनंद ताज़ा था पर किसी तरह से वो खुद को संभाले हुए थी और उन बातों को साथ hi अपनी उत्तेजना को मन में दबा रखा था पर शालू की जीभ छूट में घुसते hi सभ्य का निश्चय कमज़ोर पद गया और फिर टूट गया..

सभ्य- आअह्ह्ह्ह शालूऊ ओह्ह्ह्हह्ह ुह्ह्हम्म्म...

सभ्य झुकी हुई अपने हाथों के बल टिक गयी और अपनी छूट और गांड पर अपनी बहन की जीभ का आनंद लेने लगी..

जो कुछ थोड़ा सा भी विरोध था सभ्य के मन में सब छु हो गया, बगल में दोनों बेटे सो रहे थे जिनके लुंड बिजली के खम्भों की तरह आसमान की तरफ तने हुए थे सभ्य ने अब तय कर लिए की अब जो हो रहा है उसे पूरी तरह से अनुभव करे जो बाद में होगा वो बाद में देखा जायेगा...

इसी बीच उत्तेजना में आकर पहले तो उसने अपने बदन पर जो मात्रा एक कपडा था ब्लाउज उसके भी बटन खोल दिए और वो भी उतर फेंका और फिर थोड़ा एक तरफ को खिसकी क्यूंकि अभी उसका चेहरा कर्मा के सीने की और था तो अपने उलटे हाथ को खिसकते हुए वो कर्मा की जांघों के ऊपर आ गयी..

शालू को इस बात का कोई असर नहीं था वो बस अपनी बहन की छूट चाट रही थी जैसे वो कोई स्वादिष्ट व्यंजन हो..

सभ्य ने एक नज़र कर्मा के खड़े लुंड को देखा और फिर अगले hi पल उसे अपने मुँह में भर लिए, कर्मा जो नींद में था उसे पता hi नहीं था उसके आस पास हवस का कैसा खेल चल रहा है...

जितने जोश और आक्रामकता के साथ शालू सभ्य की छूट चाट रही थी उसी जोश के साथ सभ्य अपने बेटे कर्मा का लुंड चूसने लगी...

कर्मा नींद में hi कसमसाने लगा और कुछ देर बाद उसकी आँखें खुली तो सामने का नज़ारा देखकर उसकी नींद खुद बा खुद उड़ गयी... उसकी माँ झुककर उसका लुंड चूस रही है वहीं उसकी माँ के पीछे उसकी मौसी थी जिसका मुँह उसकी माँ के चूतड़ों में घुसा हुआ था..

ये सब देखकर कर्मा में मुँह से एक सिसकारी निकल गयी.. - ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh..

ये सुनकर उसका मुँह लुंड में भरे हुए hi सभ्य ने नज़रें उठाकर कर्मा के चेहरे की और देखा पर लुंड चूसना जारी रखा...





इस तरीके से नींद टूटे कौन नहीं चाहता.. इस तरीके से जागना कहीं नक कहीं हर बेटे का सपना होता है की उसकी माँ उसका लुंड चूसते हुए उसे उठाये वही सपना अभी कर्मा का पूरा हो रहा था और उसी कारन उसके मुँह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थी..

कर्मा- ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माँ ओह्ह्ह्हह्ह ुहम्म

इधर लगातार सिसकियों की आवाज़ से धीरे धीरे अनुज की नींद टूटी तो धीरे धीरे आँखों को मलते हुए उसने आँखें खोली और फिर जब सामने का नज़ारा देखा तो कर्मा की तरह उसकी नींद भी तुरंत गायब हो गयी... उसने देखा की उसकी माँ झुककर उसके भाई का लुंड चूस रही है वहीं उसकी माँ के पीछे उसकी मौसी है जो अपना मुँह उसकी माँ की खूबसूरत गांड में घुसाए हुए है ये सब देखकर अनुज का लुंड जो पहले से तना हुआ था और फूल गया..

वहीं बाकि तीनो इस बात से बेखबर थे की अनुज जाग चूका है.. सभ्य को तो तब जाकर पता चला जब कर्मा का लुंड चूसते हुए एक और लुंड उसके होंठों पर आकर टिक गया...

सभ्य ने एक पल को अपनी नज़र उठाकर देखा और फिर अनुज को देखकर कर्मा का लुंड मुँह से निकल कर अनुज का लुंड मुँह में भर लिए...

जिसके साथ hi अनुज के मुँह से भी सिसकी निकल गयी तो कर्मा ने आँख खोल कर देखा साथ hi शालू ने भी की अनुज भी जाग गया है... पर कोई भी अलग प्रतिक्रिया नहीं दी किसी ने भी और न hi जो कर रहे थे वो रुका कुर अनुज भी यही चाहता था,

सभ्य अब अपने दोनों बेटों के लुंड को बदल बदल कर चूसने लगी... सभ्य खुद को इस समय इतना भाग्यवान मान रही थी की मुँह में दो दो बेटों का लुंड है और पीछे से बहन छूट और गांड चाट रही है...

शालू ने अब छूट चाटने के बाद अपना ध्यान अपनी जीजी की गांड के भूरे कैसे हुए छेड़ पर लगाया, तो सभ्य के मुँह की कसावट अनुज के लुंड पर और बाद गयी जो अभी उसके मुँह में था..

शालू अपनी जीभ को नुकीला करके अपने हाथों से अपनी जीजी के चूतड़ों को फैलाकर अपनी जीभ को जीजी के गांड के छेड़ में अंदर बहार करने लगी...

सभ्य तो मज़े से दूभर होने लगी.. साथ hi अपने मज़े को वो अपने दोनों बेटों के साथ बांटते हुए बरी बरी उनका लुंड चूस रही थी...

सभ्य पूरी लगन से अपने दोनों बेटों के लुंड की सेवा कर रही थी पर वहीं दोनों इतने बेसब्री हो रहे थे की दोनों अपनी माँ के मुँह में लुंड घुसा रहे थे पहले तो सभ्य ने दोनों को अलग अलग चूसने की कोशिश की पर फिर अनुज ने उसका सर पकड़ लिए एक जगह और फिर अपने भाई का लुंड माँ के मुँह में होते हुए भी अपना लुंड उसके मुँह में घुसा दिया..

सभ्य अपने दोनों बेटों के लुंड एक साथ मुँह में लेकर बेहद उत्तेजित हो गयी वहीं कर्मा और अनुज को भी जब ये एहसास हुआ तो वो भी और जोश में आ गए और कर्मा नीचे से ओहिज अनुज आगे से धक्का लगाकर अपनी माँ के मुँह को एक साथ छोड़ने लगे.....





दोनों के लिए hi एक बेहद उत्तेजित करने वाला पल था जब उनकी माँ एक साथ उनका लुंड चूस रही थी.. वहीं शालू लगातार पीछे से सभ्य की गांड अपनी जीभ से छोड़ रही थी..

लेकिन थोड़ा असहज और कष्ट दायक होने के कारन ज़्यादा देर तक सभ्य दो लुंड मुँह में नहीं रख पाई और आखिर उसने अपना चेहरा पीछे खींच लिए और हांफने लगी... और कुछ पल बाद दोबारा अनुज के लुंड को मुँह में भर लिए...

वहीं शालू ने अपनी जीजी की गांड से जीभ निकलकर चेहरा उठाया और कर्मा को अपने पास आने का इशारा किआ... कर्मा अपने जगह से उठ कर अपनी माँ के पीछे शालू की और चला गया वहीं अनुज अब भी अपनी माँ से लगातार लुंड चुसवाने का मज़ा ले रहा था..

कर्मा को अपने पास बुलाकर शालू ने अपनी जीजी की गांड चटनी जारी राखी साथ hi एक हाथ से कर्मा का थूक से सना हुआ चिकना लुंड पकड़कर मुठियाने लगी कुछ देर तक उसने और सभ्य की गांड को जीभ से छोड़ा फिर मुँह हटाया और कर्मा का लुंड मुँह में भर कर दो चार बार उसे चूसा और फिर अपने मुँह से निकल लिए और फिर अपनी बहन के पीछे से हटते हुए कर्मा के लिए जगह बनादि..

तो कर्मा समझ गया उसकी मौसी कल की तरह hi उसे उसकी माँ को छोड़ते हुए देखना चाहती है.. ऊपर से वो उत्तेजित भी था तो उसकेलिये तो ये जीत hi जीत थी...

कर्मा ने अपनी माँ के पीछे जगह ली पर शालू ने अब भी उसका लुंड पकड़ा हुआ था जब कर्मा ने जगह ले ली तो शालू ने कर्मा का लुंड पकड़ा और उसके टोपे को उसकी माँ की छूट पर घिसने लगी.

जिस एहसास से दोनों माँ बेटे सिहरने लगे...

दो चार बार लुंड को छूट पर घिसने के बाद जी की बहुत गीली हो चुकी थी शालू ने लुंड को एक बार मुँह में भरकर चूसा और फिर लुंड को पकड़ कर कर्मा को हैरान करते हुए अपनी जीजी की गांड के कैसे हुए छेड़ पर रख दिया और कर्मा को मुस्कुराते हुए आगे धक्का लगाने का इशारा किआ...

कर्मा के लिए ये नया तो नहीं था इससे पहले भी वो अपनी माँ के पीछे वाले छेड़ की कई बार सैर कर चूका था पर अभी अपनी मौसी के सामने ये उसको एक नया एहसास दे रहा था उसने भी ज़्यादा न सोचते हुए अपनी मौसी के इशारे पर अपनी कमर का झटका लगाया और अपने लुंड के टोपे को अपनी माँ की संकरी गांड के छेड़ में घुसा दिया..

जिसके साथ hi सभ्य का मुँह अनुज के लुंड से निकल गया और उसके मुँह से - आअह्ह्ह्हह कर्मा नक्कल गया कुछ पल बाद बापिस उसके मुँह में अनुज का लुंड घुस गया..

कर्मा धीरे धीरे धक्के लगाकर अपने लुंड को माँ की गांड में अंदर बहार करने लगा और अपना पूरा लुंड माँ की गांड में घुसा दिया... और फिर धीरे धीरे गति बढ़ाते हुए उसकी गांड मरने लगा.





शालू थोड़ा पीछे होकर माँ बेटे के बीच के ये मनमोहक दृश्य देख्न्स लगी माँ दोनों बेटों के बीच में थी एक उसका मुँह छोड़ रहा था तो दूसरा उसकी गांड.. अपने बेटों की हवासका पत्र बनती अपनी जीजी को इस तरह देखकर शालू को एक अलग hi एहसास हो रहा था..

पर साथ hi उसकी छूट भी अब लुंड के लिए कुलबुला रही थी..

वहीं सभ्य के दोनों बेटे दोनों छोर से उसकी सेवा में लगे हुए थे हालाँकि अनुज को ये अंदाज़ा नहीं था की उसका बड़ा भाई उसकी माँ की गांड मार रहा है..

कुछ देर तक माँ बेटों के इस कामुकता भरे नाटक का दर्शक बनने के बाद शालू भी अब उसमे शामिल होना चाहती थी और इसी लिए शालू उठी और जाकर अनुज जहाँ बैठा था उसकी कमर के दोनों तरफ पेअर करके कड़ी हो गयी...

अनुज जो अब तक अपनी माँ के मुखमैथुन का सुख भोग रहा था अब उसे भी चुदाई की इच्छा हो रही थी उसने अपने ऊपर कड़ी मौसी को देखा तो एक मुस्कान उसके चेहरे पर फ़ैल गयी..

अनुज- ओह्ह्ह मौसी लगता है तुम्हे भी घोड़े की सवारी करनी है...

अनुज ने मज़ाक करते हुए कहा..

शालू- हाँ बचुआ तेरा घोडा तैयार तो है न..

शालू ने मज़ाक ने hi जवाब दिया

वहीं अपने मुँह में लुंड भरे हुए सभ्य ने अपनी बहन के चूतड़ों को अपने ऊपर देखा तो उसने अपने मुंह से अनुज का लुंड निकल दिया और साथ hi अपने आप को थोड़ा पीछे खिसका लिए साथ hi अपनी बहन की मदद के लिए अनुज का लुंड लुंड सीधा पकड़ कर रखा

सभ्य- ले शालू बैठजा मैंने घोडा सीधा खड़ा कर रखा है

सभ्य ने मज़ाक में शामिल होते हुए कहा..

लुंड को सभ्य ने सीधा पकड़ा हुआ था जिसके ऊपर शालू ने जल्दी hi अपने चूतड़ टिका दिए और लुंड को छूट में लेकर उछलने लगी...

अब नज़ारा कुछ यूँ था की अनुज अपनी पीठ के बल लेता हुआ था शालू उसके ऊपर थी और उसके लुंड को अपनी छूट में लेकर उछाल रही थी वहीं शालू के पीछे सभ्य थी जो की ध्यान से अपने छोटे बेटे का लुंड अपनी छोटी बहन की छूट में अंदर बहार होता हुआ देख रही thi,bSabhya के पीछे कर्मा था जो की अपनी माँ की कासी हुई गांड को अपने तगड़े लुंड से छोड़ रहा था...

सभ्य ध्यान से अपनी बहन के चूतड़ों के बीच से अंदर बहार होते हुए अनुज के लुंड को साथ hi शालू के भरे हुए चूतड़ों को और उनके बीच शालू की गांड के कैसे हुए छेड़ को देख रही थी... उसे देखते हुए सभ्य के मन में कुछ ख्याल आया और उसके होंठों पर मुस्कराहट और अगले hi पल शालू के मुँह से एक कामुक सिसकी निकली जिसकी वजह थी उसकी बहन की जीभ.. जी हाँ सभ्य ने अपनी जीभ को अपनी बहन की गांड के छेड़ पर रखा और उसे कुरेदने लगी..

शालू- ओह्ह्ह जीजी अछहहाहहहहह आआह्ह्ह्हह्ह ऐसे hiiiiiiiiii... ओह्ह्ह अनुज ऐसे hiiiiiiiiii सवारी कराए मुझे देख टेरिइइइइइ मा मेरिइइइइ गाआआद्द चायत रहीइइइइइइइ haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh...

अनुज ने जब ये सुना की उसकी माँ उसकी मौसी की गांड चाट रही है, तो उसका जोश और बढ़ गया कुर वो तेज़ी से धक्के लगाने लगा

शालू तो इस एहसास से पागल सी होने लगी क्यूंकि नीचे से अनुज लगातार लम्बे लम्बे धक्के लगाकर उसे छोड़ रहा था.... ऊपर से गांड में बड़ी बहन की जीभ पीछे से कर्मा को भी अपनी माँ की ये हरकत दिख रही थी जिसे देखकर वो और खुश होते हुए अपनी माँ की गांड मार रहा था...

कर्मा- ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaahhhhhhhhhhhh uhhhhhhhhhhhhh हम्म्म्म क्याआअह्ह्ह गांडडडड है तुम्हारीइइइइइइइ ओह्ह्ह्ह...

सभ्य क्या बोलती उसका मुँह तो शालू की गांड में था शायद इसीलिए शालू ने अपनी बहन की जगह जवाब दिया- ओह्ह्ह हाँ कर्मा मार अपनी माँ की गांड और तेज़ मार... अपने लुंड से और गहरा बना दे इसीहहहह अह्ह्ह्ह..

अनुज ने जब ये सुना तो वो बिलकुल चौंक गया की उसका भाई उसकी माँ की गांड मार रहा है, वो भी न जाने कब से ये सपना देखता था की वो अपनी माँ की गांड मारेगा और आज उसका भाई वो उसके सामने कर रहा था, इस एहसास से hi अनुज पागल सा हो गया और तूफानी धक्के लगाकर शालू को छोड़ने लगा. जिससे शालू की हालत बुरी हो गयी, छूट में अनुज के तूफानी धक्के और गांड में उसकी माँ की जीभ बस्सस.

शालू इस दोहरे हमले को ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और अनुज के लुंड पर झड़ने लगी, उसका पूरा बदन कांपते हुए अकड़ने पगा पर अनुज नहीं रुका और लगातार छोड़ता रहा..

इधर झड़ने के बाद शालू शांत पद गयी और खुद hi अनुज के लुंड से पलट कर साइड में लेट गयी... सभ्य के सम्मे एक बार फिर अनुज का लुंड आ गया जिसे उसमे मुँह में भर लिए...

उधर अनुज जो वैसे hi पूरे जोश में था अपने भाई और माँ से बच्चों की तरह ज़िद्द करते हुए बोलै - भैया मुझे भी मरने दो न माँ की गांड..

अनुज के इस तरह बोलने से सबको हंसी आ गयी..

वही कर्मा ने अपने बड़े भाई होने का फ़र्ज़ निभाया और अपना लुंड अपनी माँ की गांड से बहार निकला जो की लुंड निकलने के बाद भी वैसे hi खुला सा रहा,

कर्मा के हटते hi बड़ी तेज़ी से अनुज ने उसकी जगह ली, उसके चेहरे पर उत्सुकता साफ़ दिख रही थी और हो भी क्यों न अपनी माँ की गांड मरने का मौका हर किसी को थोड़े hi मिलता है...

उसने अपनी माँ के गांड के छेड़ को देखा जो धीरे धीरे बंद हो रहा था और अपने सामान्य आकर में आता जा रहा था..

सभ्य घुटनो और हाथों के बल झुकी हुई अपने बड़े बेटे से गांड मरवाने के बाद अब छोटे का लुंड लेने का इंतज़ार कर रही थी, वो मन में सोच रही थी की दुनिया में शायद hi कुछ मायें ऐसी होंगी जिनको ये पल नसीब हुआ हो.. ये सोचकर उसकी उत्तेजना बढाती जा रही थी साथ hi गांड में खालीपन का एहसास भी जो कर्मा के लुंड के निकलने से हो रहा था,

सभ्य - जल्दी कर लल्लाह क्यों इंतज़ार कर रहा है..

सभ्य ने उत्तेजित होकर कहा..

खैर अनुज ने माँ की गांड की खूबसूरती को निहारते हुए कांपते हाथों से अपने लुंड को पकड़ा और उसे आगे ले जाने लगा उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की वो न जाने कब से इसका इंतज़ार कर रहा था, अपने लुंड के टोपे को अनुज ने माँ की गांड के अब बंद हो चुके छेड़ पर रखा और फिर एक नज़र सबको देखा जैसे इस खूबसूरत पल की याद को सबके साथ बाँट कर रखना चाहते हो,

फिर अनुज ने अपने हाथ से लुंड को पकड़ा और धीरे धीरे उसे अपनी माँ की गांड में सरकने लगा.





सभ्य की गांड ने भी धीरे धीरे खुल कर अपने छोटे बेटे के लुंड लिए जगह बनाई...

अनुज का लुंड दो इंच उसकी माँ की गांड ने घुस गया तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, उसने ख़ुशी से अपने भाई और मौसी को देखा जो उसकी ख़ुशी को देख खुश हो रहे थे वहीं सभ्य ने भी अपनी गर्दन घुमा कर उसे मुस्कुराते हुए आगे बढ़ने का इशारा किआ..

अनुज ने बड़ी सावधानी से अपने पूरे लुंड को कुछ hi धक्कों में जड़ तक माँ की गांड में सरका दिया..

अनुज- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितनी गरम गांड है तुम्हारी अह्ह्ह्ह ये तो जैसा मैंने सोचा था उससे भी बहुत ज़्यादा ाचा है...

शालू- ाचा तो तूने सोचा था की तू अपनी माँ की गांड में अपना लुंड घुसायेगा..

अनुज- ुह्ह्ह्हहममममआ ahhhhhhhhhh हाँ मौसी बहुत बार जब भी घर में साड़ी में माँ की गांड देखता तो सोचता था की माँ की गांड मरने में कितना मज़ा आएगा.

शालू - देख लो जीजी कैसा मादरचोद बीटा पैदा किया है तुमने...

सभ्य- ुहम्म्म्म बेटे मादरचोद है तभी तो आज ये सुख मिल रहा है मुझे शालू.. अह्ह्ह अनुज अब मार अपनी माँ की गांड और पूरा करले अपनी वर्षों की इच्छा...

कर्मा- सही बात है माँ की गांड hi कुछ ऐसी है की कोई खुद को कैसे रोक सकता है...

कर्मा ने अपने खड़े लुंड को मुठियाते हुए कहा..

अनुज- हाआआआबणन भैया सहीई कहा तुमने ओह्ह्ह्हह भैया इतनी रसीली गांड मैंने आज तक nahiiiiiiiiiiiiiiii मारीइइइइइइइ इतनीई तो बाआआअह्ह्ह्ह कीई भी nahiiiiiiiiiiiiiiii थी...

अनुज ने अब अपनी माँ की गांड में धक्के लगते हुय्र कहा.

अनुज के ये बोलते हीई कर्मा को झटका लगा और उसने अपना माथा पकड़ लिए...

और माँ के चेहरे की और देखने लगा पर माँ ने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी बल्कि सिसकियाँ लेती हुई अनुज से अपनी गांड मरवा रही थी..

कर्मा ने जब ये देखा तो चैन की सांस ली उसने मौसी की और देखा जो अपनी छूट को सहलाने में व्यस्त थी साथ hi अनुज और सभ्य को देख रही थी...

कर्मा ने अनुज को आँखों hi आँखों में चुप रहने का इशारा किआ तो अनुज को समझ आया और वो चुप होकर अपना सारा ध्यान माँ की गांड पर लगाकर उसे मरने लगा..

सभ्य अपना चेहरा ज़मीन पर टिकाये अपने छोटे बेटे से गांड चुदाई का मज़ा ले रही थी...





इधर कर्मा अपनी मौसी के बगल में जा कर खड़ा हो गया और अपने लुंड को उसके मुँह के आगे कर दिया जिसे शालू ने तुरंत अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी...

कर्मा भी अब अपने भाई को माँ की गांड मरता देख काफी उत्तेजित हो चूका था तो उसने अपना हाथ शालू के सर के पीछे लगाया और उसके मुँह को छोड़ने लगा...

शालू जो झड़ने के बाद दोबारा उत्तेजित हो चुकी थी उसे और क्या चाहिए था एक लुंड और वो अभी उसके मुँह में था...

उधर अनुज अपनी माँ की गांड पाकर जन्नत में था और इसी मज़े के आगे वो ज़्यादा देर टिक नहीं पाया और उसने अपनी माँ की गांड को अपने रास से सींच दिया..

पर अनुज पर तो जैसे झड़ने का कोई असर नहीं हुआ झड़ने के बाद भी वो बिना रुके लगातार धक्के पर धक्के लगता जा रहा था, और उसका लुंड भी बिलकुल ज्यों का त्यों तना हुआ था, यही थी माँ की गांड की गर्मी जिसने बेटे के लुंड में एक अलग hi जोश भर दिया था..

अनुज तो ज्यों का त्यों था पर सभ्य ने आसान बदलने की इच्छा जताई क्यूंकि वो चौपाया बानी बानी थक गयी थी..

तो अनुज ने वहीं अपनी माँ को बिछी हुई साड़ी के ऊपर पीठ के बल लिटा दिया और एक बार फिर से गांड में लुंड घुसा के छोड़ने लगा...

उधर कर्मा ने भी अपनी मौसी से अचे से लुंड चुसवाया और फिर मौसी को अपनी माँ के बगल में पीठ के बल लिटा दिया और टैंगो के बीच आकर अपना लुंड उसकी छूट में घुसा कर छोड़ने लगा..

दोनों बहनें अपनी पीठ के बल एक दुसरे के बगल में लेती थी बस एक दुसरे से उल्टा सभ्य के पेअर शालू के चेहरे की और थे और वैसे hi शालू के सभ्य की और दोनों के hi पैरों के बीच रक एक भाई था और दोनों भाइयों के लुंड दोनों बहनों की छूट और गांड से अंदर बाहर हो रहे थे..





शालू- ahhhhhhhhhh जीजीई पहले तो मुझे बडीइइइइ ग्लानीय हो रहीइइइइइइइ थी पर अब्ब्ब्ब मैं इस सब की बिनायआ nahiiiiiiiiiiiiiiii रह पाउंगी अह्ह्ह्ह..

सभ्य- ओह्ह्ह ओह्ह्ह्ह आह्हः हाँ शालू सही कह रही है तूऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह न जानिए घर्रर जाकर क्याःह्ह्ह होगा...

अनुज- ओहहहह्ज maaaahhhhhhhhhhhh मैं भी अब तुम्हारी गांड के बिना नहीं यह पाउंगाहहह...

कर्मा- ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मौसी पर घर जाकर क्या हम सब ऐसा कर पाएंगी...

शालू- तुह्हह्ह्ह्ह अभी मेरी चुत पर ध्यान देहहहह कर्माहहहह जो होगा देखा जायेगा..

सभ्य- हाँ ीीीहहहह सही हीी जो होगा वो तब होगा अभियई जो हो रहा है उसके मज़े लूओ.

शालू- हाँ जीजी मैं भी चोदामपुर जाने से पहले सब कुछ करलेना चाहती हूँ..

सभ्य- ahhhhhhhhhh हांण लल्लाह ऐसे होई अपणीइइइइइइ माँ की गाआआद्द का भरता बनाआआह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह मदररररछोड़ड़ड़...

अपनी माँ के मुँह से गली सुनकर अनुज और जोश में आकर उनकी गांड मरने लगा..

अनुज- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह maaaahhhhhhhhhhhh हनननननन मेंनननन मादरचोद हूंणंन्न अह्ह्ह maaaahhhhhhhhhhhh..

सभ्य- दिखाहहहह लाल्ल्लाहहह कितना दम है तेरे लुँड्ड़डडडड मेंनननन अपणीइइइइइइ माआ कोऊम..

अब सभ्य भी अपने पूरे चरित्र में आ चुकी थी जैसे वो छुड़वाना पसंद करती थी वो एक माँ थी संस्कारी ग्रहणी थी सबकी नज़रों में इसलिए खुद को रोक कर रखती थी पर अपने पति फिर बड़े बेटे और अब छोटे बेटे के सामने भी उसका वही रूप खुल कर आ चूका था जैसी वो थी..

अनुज को एक बार फिर से अपनी गोलियों का रास लुंड की और भरता हुआ महसूस होने लगा था पर वो चाहकर भी खुद को रोक नहीं पा रहा था, साथ hi सभ्य भी अपनी उत्तेजना के शिखर पर थी क्यूंकि पहले कर्मा और फिर अनुज से लगातार वो गांड मरवा रही थी, और फिर एक पल ऐसा आया जब दोनों माँ बेटे एक साथ झड़ने लगे और एक दुसरे से चिपक कर पसर गए दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे..

अनुज का लुंड अब ढीला होकर धीरे से उसकी माँ की गांड से बहार निकल गया जिसके साथ hi उसका रास भी बहार बहकर आने लगा...

इधर कर्मा ने भी अपनी मौसी को छोड़ते हुए अपनी गति पहले थोड़ी धीमी की और फिर अपने लुंड को उनकी छूट से निकल लिए, और लुंड निकलने के बाद उसने बगल में पड़ी अपनी हांफती हुई माँ के चेहरे के ऊपर अपना लुंड लहरा दिया, जिसे हांफने के बावजूद असभ्य ने तुरंत अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी कुछ देर अपना लुंड चुसवाने के बाद कर्मा ने लुंड उसके मुँह से निकला तो सभ्य बापिस लेट कर आराम करने लगी..

अपनी माँ के मुँह से लुंड निकल कर कर्मा बापिस अपनी मौसी के पैरों के बीच आया और फिर मौसी के पैरों को मोड़कर बापिस उनके कंधे की और कर दिया जिन्हे मौसी ने खुद पकड़ लिए.. और ऐसा करने से मौसी की छूट और गांड और खुल कर कर्मा के सामने आ गयी तो कर्मा झुका और झुककर अपने चेहरे को अपनी मौसी की छूट पर लगा दिया और जीभ निकलकर छूट से लेकर गांड तक फिरने लगा...

जिससे मौसी अह्ह्ह कर्मा की सिसकियाँ लेती है, कर्मा कई बार मौसी की छूट और गांड को चाटता है और फिर खड़ा हो जाता है और अपने लुंड को पकड़ कर मौसी की छूट पर आगे पीछे घिसने लगता है, जिससे शालू सिहरने लगती है और कुछ पल ऐसा करने के बाद कर्मा अपने लुंड को रोकता है और एक धक्का लगता है...

जिससे शालू की आँखें बड़ी हो जाती हैं और उसके मुँह से आह्हः ओह्ह्ह्ह कर्मा की सिसकियाँ निकलने लगती हैं और उसकी वजह थी की कर्मा अपने लुंड के टोपे को घिसते हुए छूट से गांड और फिर छूट और बापिस गांड के छेड़ तक लता है और टोपे को गांड के छेड़ पर फिट करके तुरंत धक्का लगा देता है जिससे उसके लुंड का टोपा मौसी के गांड के छेड़ को फैलता हुआ अंदर घुस जाता है..

मौसी की आँखें बड़ी हो जाती हैं और वो तेज़ी से साँसे लेने लगती हैं साथ hi ओह्ह्ह कर्मा आह्ह्ह्ह ये सिसकियाँ निकल रही होती हैं..

ऐसा नहीं था की शालू ने पहले गांड नहीं मरवाई थी उसके पति ने उसकी गांड को जब मौका मिला खूब बजाय था पर अभी पिछले कुछ समय से गांड में कुछ नहीं गया था साथ hi कर्मा का लुंड भी काफी मोटा था जिससे गांड काफी कासी हुई लग रही थी और शालू को ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसके अंदर बड़ा मुसल घुसा दिया हो..

कर्मा- ओह्ह्ह्हह्हह मौसी कितनी कासी हुई है तुम्हारी gand..ahhh..

शालू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ओफ्फफ्फ्फ्फ़ ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह तेराः मुसल भी तुयहहह कितनाः मोटा है...

कर्मा अपना थोड़ा सा लुंड घुसाए हुए hi उसे आगे पीछे करते हुए मौसी की गांड में अंदर बहार करने लगा





शालू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ओफ्फफ्फ्फ्फ़ ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh आराम सीई ओह्ह्ह्ह..

शालू जो की अपनी गांड को कर्मा के लुंड जे अनुसार फ़ैलाने की कोशिश कर रही थी उसने कर्मा की आँखों में देखते हुए कहा..

कर्मा- मौसीईई ahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह ुहम्म्म्म..

कर्मा ने महसूस किआ अब मौसी की गांड थोड़ा थोड़ा खुलने लगी है तो उसने हर धक्के के साथ अपना लुंड और अंदर घुसाने लगा, और कुछ देर और थोड़ी म्हणत के बाद hi उसका पूरा लुंड मौसी की गांड में था और अब मौसी भी थोड़ा शांत हो चुकी थी पर अब तो ऐसा लग रहा रहा जैसे उसकी गांड में किसी ने पूरा का पूरा मुसल घुसा के रख दिया है...

कर्मा ने अब आगे के कार्यक्रम पर ध्यान लगाया और धीमे धीमे धक्कों से मौसी की गांड मरने लगा..

सभ्य और अनुज वागल में पड़े सुस्ता रहे थे, वहीं अब गांड मरे जाने से शालू भी पूरे जोश में आ चुकी थी ...

शालू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कर्माहहहह मार आईसीईईई hiiiiiiiiii मेरिइइइइ गाआआद्द भी आईसीईईई hi माएर जैसे तू अपणीइइइइइइ मा कीईई मारता है.. ahhhhhhhhhh...

शालू की बात सुनकर सभ्य तुरंत उठ गयी और उनके बगल में आकर बैठ कर देख्नर लगी की सच में उसका बेटा उसकी बहन की गांड मार रहा है...

सभ्य- है ढैय्या शालू तू तो सच में गांड मरवा रही है री..

अनुज भी ये सुनकर बगल में आ गया और अपने भाई को मौसी की गांड मरते हुए देखने लगा...

ये देखकर एक बार फिर से उसका लुंड कड़क होने लगा,

शालू- हाँ जीएजीइइइइइइ ahhhhhhhhhh देखो तुम्हारा अह्ह्ह्ह बेटाः अपने मुसल से मेरिइइइइ गाआआद्द मार रहाःहठ्ह हैईईईई..

सभ्य- टेरिइइइइइइ गांड hiiiiiiiiii इतनीई मस्त haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh शालू मुझे पता था की कभी न कभी तो इनका लुंड तेरी गांड की सैर ज़रूर करेगा...

कर्मा- हॉँण्णन maaaahhhhhhhhhhhh सही कहा बड़ी मस्त गांड haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh मौसीईई की...

अनुज- मज़ाआ आ गया अब मौसी की गांडडडड भी मरने को मिलेगीइइइइइइओ .

अनुज ने अपने लुंड को मुठियाते हुए कहा...

सभ्य- तू मौसी की गांड बाद में मारियो पहले इधर आ और अपने लुंड से अपनी माँ की छूट शांत कर, तबसे सिर्फ गांड मरवाई है छूट में खुजलिई हो रही हीी..

अनुज ऐसे मौके को कैसे जाने देता और माँ के पीछे जाकर तुरंत अपना लुंड उनकी छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगा ..

दोनों बहनों की आहें और चीखें एक बार फिर से गूंजने लगी...

वहीं दोनों भाई गुर्राते हुए अपने अपने सामने पड़ी महिलाओं को भोग रहे थे जो की उनकी माँ और मौसी थी...

कर्मा का लुंड अब पिस्टन की तरह मौसी की गांड से अंदर बहार हो रहा था और मौसी की चीखें लगातार तेज़ होती जा रही थी और एक पल ऐसा आया की मौसी की एक चीख निकली और फिर उनका पूरा बदन अकड़ने लगा और वो थरथराते हुए झाड़ गयी उसका झड़ना इतना तेज़ था की वो पीछे होकर गिर गयी और कर्मा का लुंड उसकी गांड से निकल गया, वहीं कर्मा जिसका लुंड अब भी खड़ा था उसे समझ नहीं आ रहा था की वो झाड़ क्यों नहीं रहा है माँ की फिर मौसी की गांड मरने के बाद भी वहीं उसके लुंड में तकलीफ भी हो रही थी...

मौसी को पास्ट देखकर कर्मा ने अपनी माँ का रुख किआ और अपने लुंड को माँ के मुँह में घुसा दिया.. सभ्य एक बार फिर से अपने दोनों बेटों के बीच आए गयी...

और दोनों छोर से उसकी सेवा होने लगी पर वहीं कर्मा छह कर भी झाड़ नहीं पा रहा था वो कोशिश कर रहा था पर उसका रास लुंड से बहार नहीं निकल रहा था साथ hi उसे तकलीफ हो रही थी.. इस को सभ्य ने भी तुरंत पढ़ लिए और boli-kya हुआ कर्मा कुछ परेशानी है क्या..

कर्मा- ने अपना लुंड माँ के मुँह से निकला और पीछे होकर बोलै- पता नहीं माँ क्या हुआ है मैं झाड़ hi नहीं प् रहा कोशिश कर रहा हूँ की रास निकलव पर निकल hi नहीं रहा बल्कि दर्द हो रहा है...

जिसे सुनकर बाकि तीनो hi थोड़ी चिंता में पद गए

सभ्य - रुक मैं देखती हूँ...

ये कहकर सभ्य आगे हो गयी अनुज ने ुड़की छूट से लुंड निकल लिए..

सभ्य आगे होकर कर्मा के आगे बैठ गयी और उसके लुंड को आराम से. पकड़ लिए और मुठियाने लगी..

और कर्मा के चेहरे को ध्यान से देखने लगी sabhya-kaisa लग रहा है लल्लाह.

कर्मा- माँ लग तो ाचा रहा है पर ऐसा लग रहा है लुंड भरता जा रहा है और कुछ निकल नहीं रहा...

सभ्य- ऐसा क्या हो गया कबसे हो रहा है ये..

कर्मा- रात तक तो सब सही था..

अनुज- कही उस दवाई का तो कुछ असर नहीं

अनुज ने भी चिंता जताते हुए कहा..

अब शालू भी पास में आकर देख रही थी.. वहीं कर्मा की तकलीफ बढाती जा रही थी..

सभ्य ने कुछ सोचा और फिर कर्मा के लुंड को मुँह में भर लिए और पूरा धीरे धीरे उसे पूरा अपने गले तक उतर लिए और एक हाथ से उसकी गोलियों को सहलाने लगी...

उधर अचानक से शालू को जाने क्या सूझा वो तुरंत उठकर कर्मा के पीछे गयी और नीचे घुटनो पर बैठ कर कर्मा के चूतड़ों को फैलाया और अगले hi पल कर्मा के मुँह से एक ाः निकली..

शालू अपनी जीभ निकल कर कर्मा के गांड के छेड़ को चाटने लगी...

कर्मा का तो इस एहसास से बुरा हाल हो गया, अनुज की भी ये देखकर आँखें चौड़ी हो गयी की उसकी मौसी उसके भाई की गांड चाट रही है..

वहीं इसका सबसे ज़्यादा असर सभ्य पर पड़ा क्यूंकि शालू की जीभ का असर कर्मा पर हो रहा था और कर्मा इतना उत्तेजित हो गया की उसने अपनी माँ का चेहरा अपने लुंड पर दबा दिया और जड़ तक लुंड उनके मुँह में घुसा दिया, जिससे सभ्य की टी सांस hi बंद हो गयी... वो तो अव्हा हुआ की अगले hi पल उसने लुंड बापिस खींचा और अपनी माँ के मुँह को छोड़ने लगा.. पीछे से ुड़की मौसी लगातार उसकी गांड चाट रही थी...





कर्मा को समझ नहीं आ रहा था की उसके साथ क्या हो रहा है एक तरफ तो वो इतना उत्तेजित महसूस कर रहा था की उसका लुंड hi फैट जायेगा पर वो छह कर भी स्खलित नहीं हो प् रहा था...

वहीं सभ्य और शालू पूरी कोशिश में लगे हुए थे अनुज खड़ा ल्हाड़ा देख रहा था उसे अपने भाई की चिंता हो रही थी खैर सभ्य ने एक बार लुंड को अपने मुँह से निकला वहीं और एक दो बार गहरी सांस ली और फिर उसके बाद कर्मा के लुंड को अपने मुँह में लेकर अंदर तक घुसती गयी जब तक की उसके होंठों कर्मा की गोलियों से ना टकरा गए, वहीं शालू ने भी ठीक उसी समय कर्मा के दोनों चूतड़ों को फैलते हुए अपनी जीभ को नुकीला करके कर्मा की गांड के छेड़ को कुरेदा साथ hi थोड़ा अंदर की और घुसाने की कोशिश की बस कर्मा को लगा की उसका लुंड दबाब से फैट जायेगा...

उसने खुद को सँभालने के लिए एक गहरी सांस ली और फिर उसके लुंड से जैसे फुव्वारा छूट पड़ा उसकी माँ के गले में, जिससे सभ्य भी चौंक पड़ी साथ hi अचानक ऐसा होने से उसको उबकाई आई तो उसने खुद का चेहरा पीछे खींच लिए पर कर्मा के लुंड से धार निकले जा रही जो की सभ्य के चेहरे और बदन पर गिर रही थी और अगले hi पल सब को अंदाज़ा हुआ ये किस की धार थी तो सब हैरान रह गए क्यूंकि ये जिसका सब इंतज़ार कर रहे थे वो तो बिलकुल नहीं था बल्कि ये तो कर्मा के मूट की धार थी जो की उसकी माँ के गले से लेकर चेहरे के साथ साथ बदन को भी भीगा रही थी.. सभ्य की आँखें धार की वजह से बंद थी पर उसे पूरा अंदाज़ा था ये क्या है...

ये देखकर सब हैरान थे सिवाए कर्मा के जो आँखें बंद किये सुकून से बस मोटे जा रहा था, उसे इतनी रहत मिल रही रही जिसकी उसे कबसे तलाश थी..

वही. सभ्य घुटनो के बल बैठी हुई अपने बेटे के मूट में नाहा रही थी..

शालू और अनुज दोनों hi टकटकी लगाए ये अजीब सा दृश्य देखे जा रहे थे,. दोनों माँ बेटे की आँखें बंद थी पर अब कर्मा के मूट की धार काम होने लगी तो धीरे से उसने आँखें खोली और उसी समय सभ्य ने भी आँखें खोली..

कर्मा सामने का नज़ारा देखकर चौंक गया क्यूंकि सामने उसकी माँ पूरी भीगकर बैठी है और उसके लुंड से अब भी धार निकल रही है जो उसकी माँ के पेट को भीगा रही है, कर्मा तो बिलकुल हैरान रह गया जब उसे समझ आया की अभी क्या हुआ है और उतने hi हैरान बाकि सब भी थे,

क्यूंकि एक माँ बेटे के सामने बिलकुल नंगी उसके मूट से नहीं हुई बैठी थी, सब बिलकुल चुप थे किसी को समझ नहीं आ रहा था क्या बोलेन क्या कहें,

अब करना का मूतना भी बंद हो चूका था साथ hi जो भी हुआ उस वजह से उसका लुंड भी हल्का सा मुरझा गया था और उसके टोपे से अब भी पेशाब की बूँदें टपक रही थी...

अनुज को लग रहा था भले hi भैया ने जानकार नहीं किआ पर ये ज़्यादा हो गया है माँ ज़रूर गुस्सा करेंगी .

शालू को ये तो पता था की सभ्य को इस वक़्त कैसा लग रहा होगा क्यूंकि जोंक निकलते हुए कर्मा ने उसके ऊपर भी मोटा था, पर उसकी जीजी कैसी प्रतिक्रिया करेगी वो उसे समझ नहीं आ रहा था, कर्मा भी असमंजस में बिलकुल मूर्ती बना खड़ा हुआ था,

वहीं सभ्य की नज़र सामने थी और उसके सामने कर्मा का मुरझाया हुआ लुंड था जिसके टोपे पर से एक मूट की बूँद लटक रही थी, कुछ पल सब शांत रहा और फिर अगले hi पल सभ्य आगे की और लपकी और कर्मा के लुंड को मुँह में भर लिए..

सभ्य के इस कदम से सब हैरान रह गए वहीं शालू के चेहरे पर मुस्कान आ गयी... उसने मन में सोचा, मेरी hi बहन हैं..

खैर सभ्य फिर से बुरी तरह से कर्मा का लुंड चूसने लगी जैसे एक एक बूँद उसके मूट की निचोड़ लेना चाहती हो...

अनुज तो सबसे ज़्यादा हैरान रह गया माँ की इस प्रतिक्रिया से, साथ hi उसका लुंड उत्तेजना से और तन गया वहीं कर्मा भी बापिस पूरे मूड में आ गया, सभ्य मुस्कुराती हुए उसका लुंड चूस रही थी..

कर्मा- ओह्ह्ह्हह्हह मा जब जब लगता है मैं तुम्हे समझता हूँ तुम मुझे गलत साबित कर देती हो..

Shalu-par मैं समझती हूँ..

सभ्य ने कर्मा का लुंड मुँह से निकला और उसके सामने अपनी टंगे चौड़ी करके लेट गयी और बोली - समझने की ज़रुरत नहीं है लल्ला बस जो सही लगे करता जा..

ख़त्म ने अपने सामने बिलकुल नंगी उसके मूट में नहीं हुई माँ को देखा और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी जिसे देख सभ्य भी मुस्कुरा दी..

कर्मा को इसके आगे कुछ निर्देश की ज़रुरत नहीं थी कर्मा ने थोड़ा आगे खिसक कर अपने लुंड को एक बार फिर से अपनी माँ की छूट में घुसा दिया और अगले hi पल दनादन धक्के लगाने लगा...

कर्मा अब तक झाड़ा नहीं था तो अभी वो पूरी उत्तेजना और जोश से अपनी माँ को छोड़ने लगा वहीं सभ्य जो की अभी जो कुछ हुआ उसे सोच सोच कर उत्तेजित हुए जा रही थी, कर्मा तूफानी धक्को से अपनी माँ को छोड़ने लगा..





सभ्य- है ढैय्या आह्ह्ह्हम्म्म्म लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह maaaahhhhhhhhhhhh...

कर्मा - उह्ह्ह ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह maaaahhhhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ज हाँ .

शालू और अनुज टकटकी लगाए माँ बेटे की चुदाई देखे जा रहे थे, साथ hi अनुज अपना लुंड मुठिया रहा था, शालू ने ये देखा तो उसके पास गयी और उससे बोली- तो लल्ला तू अपनी मौसी की छूट को शांत नहीं करेगा..

बस ये सुनकर तो अनुज की बांछें खुल गयी और कुछ पल बाद नज़ारा ये था की अनुज भी उसी आसान में उसी गति से अपनी मौसी को छोड़ रहा था जितनी तेज़ उसका भाई उसकी माँ को...

और कुछ पल बाद की घमासान चुदाई के बाद कर्मा ने अपनी माँ की छूट को अपने रास से भर दिया, और उसके थोड़ी देर बाद अनुज का रास उसकी मौसी के मुँह में था...

खैर इतनी तगड़ी चुदाई के बाद सब बैठकर हांफ रहे थे की सभ्य बोली..

सभ्य- तो कर्मा अनुज अपनी बुआ को कब से छोड़ रहे हो तुम..

ये सवाल सुनकर अनुज कर्मा और शालू के कान खड़े हो गए..

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
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