Incest Katha Chodampur Ki - Page 27 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

अपडेट 160


चोदामपुर

चोदामपुर में एक और गर्मी की रात थी पर बहार की गर्मी से ज़्यादा यहाँ के लोग अंदर की गर्मी से परेशां थे और उससे छुटकारा पाने के लिए पूरी कोशिश करते रहते थे,

ऐसे hi कोशिशें कई जगह जारी थी, आइये थोड़ा ताका झांकी करते हैं..

पूरी दोपहर अचे से चुदाई करने के बाद प्रेमा अब बिलकुल संस्कारी बहु की तरह अपने घर पर थी और अपने काम निपटा रही थी,

एक आदर्श बहु वाले सरे गन हैं प्रेमा में बड़ों के सामने हमेशा झुक के रहना और वो बिलकुल ऐसा hi करती थी या करती क्या थी कर hi रही थी,

प्रेमा अपने ससुरजी राजपाल के आगे झुकी हुई थी और राजपाल पीछे से अपनी बहु को स्नेह दे रहे थे, राजपाल का प्रेम उनके लुंड से होता हुआ प्रेमा की संकरी गांड में भर रहा था...

प्रेमा बीएड के किनारे झुकी हुई थी साड़ी और पेटीकोट कमर पर इकठा थे ब्लाउज तो बदन पर था hi नहीं ब्रा थी उसमे से भी दोनों चूचियां बहार झूल रही थी और पीछे थे ससुर जी...

पीछे से राजपाल अपनी बहु की कासी हुई गांड मार रहे थे.. कुर हर धक्के के साथ आहें भर रहे थे .





प्रेमा जो भले hi पूरी दोपहर हवस का नंगा खेल खेली हो अपने ससुर जी की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी...

प्रेमा- ओह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह paaaaapaaajjiiiiiiiiii आराम से...

राजपाल - ओह्ह्ह्हह बहु क्याआअह्ह्ह गांड haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh टेरिइइइइइ अह्ह्ह्हह्हह ाराअहमममम hi तो nahiiiiiiiiiiiiiiii होता..

प्रेमा- ओह्ह्ह्ह हम्म्म वैसी पापजीई गांड तो मम्मी जी की भीईई काम nahiiiiiiiiiiiiiiii है... लगता है बहुत्तत्त ahhhhhhhhhh म्हणत की haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh अपनी...

राजपाल- हाँ बहुउउ बिलकुल जैसे अभी टर्रे पीछे कर रहा हुण्णं वैसी हीईई टेरिइइइइइइ सास के पीछे भी की हैईईई...

प्रेमा- ुहममम पापाजी इनकी कोई खबर हीी आपको...?

राजपाल- अह्ह्ह्ह उससस नालायक का नाम मत ले बहुउउउउ,

राजपाल ने गुस्से में प्रेमा की गांड में धक्का लगते हुए कहा..

प्रेमा- ahhhhhhhhhh पापजीई आराम से, उनका गुस्सा मेरिइइइइ गाआआद्द पर क्यों निकल रहे हो

राजपाल- हाँ उस हरामजादे का जो नाम भी लेगा उस घर में... हम उसकी माँ छोड़ देंगे...

प्रेमा- अह्ह्ह्हह पापजीई हमारी भी???

राजपाल- हाँ बहु तेरी तो छोड़ने का बड़ा मन है बड़ा गठीला माल हैं संधान जी...

प्रेमा- क्या पापा जीई बेटी को छोड़ रहे हो, और माँ की बात कर रहे हो....

प्रेमा ने साथ देते हुए कहा, आज प्रेमा अपने ससुर को पूरी तरह से खुश करने के मूड में थी और करे भी क्यों न क्यूंकि इसके बदले में उसने अपने ससुर से कुछ माँगा जो था और वो था की आज रात उसे ममता पल्ली के यहाँ सोना था इसलिए वो अपने ससुर को पूरी तरह से संतुष्ट करके जाना चाहती थी.. वहीं राजपाल ने भी बहु को स्वीकृति दे दी थी पर बदले में उसकी गांड को कुछ देर के लिए माँगा था जिसे प्रेमा ख़ुशी ख़ुशी देने को तैयार हो गयी थी..

वहीं दूसरी और नीलेश और बाकि सब की योजना थी आज रात को भी पूरी तरह से आनंद लेने की तभी तो प्रेमा को भी बुलाया गया था पर उनकी योजना में एक अड़चन आ गयी और वो थी पल्ली की माहवारी, पल्ली ने अपनी मम्मी को बताया तो फिर और कर भी क्या सकते थे.. ममता ने ये बात सबको बताई तो योजना को थोड़ा बदलना पड़ा वहीं पल्ली ने कहा वो थक गयी है तो आज रात सोना hi चाहेगी..

वहीं प्रेमा को भी तब तक ममता अपने साथ ले आई थी, सब खाना पीना खा चुके थे, फिर ये तय हुआ की रात में किसी घर को खली छोड़ना सही नहीं है इसलिए दोनों घरो में अलग अलग समूह में बाँट जायेंगे...

और इसी तरह करीब आधे घंटे बाद राजन के घर में ममता, पल्ली और विनीत थे, विनीत का वैसे तो मन था पहले से hi की रार भर ममता ममी और पल्ली दोनों माँ बेटी के खूब मज़े करेगा पर पल्ली की माहवारी से उसको अपनी प्यारी ममता ममी के साथ आनंद लेना था,

वहीं ममता के पति राजन, और विनीत की मम्मी शशि साथ hi प्रेमा और नीलेश ये चरों नीलेश के घर में रुकने वाले थे, शशि और प्रेमा की जोड़ी को दोनों अधेड़ उम्र के मर्दों को संतुष्ट करना था खैर अभी तो यहाँ सब बातों में लगे हुए थे और शशि प्रेमा के मायके के बारे में बात कर रही थी उससे वहीं राजन भी था और नीलेश जानवरों को बांधने गए थे,

वहीं ममता के घर में थोड़ा नज़ारा बदला हुआ था पल्ली अपने कमरे में सो रही थी वहीं विनीत से ममता ममी को देखकर ज़्यादा सबर नहीं हुआ और उसने ममता को दबोच लिए और कुछ पल बाद ममता के रसीले होंठों को चूसते हुए वो उसके चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से hi मसल रहा था..

ममता- आह्हः बाबू थोड़ा रुक जाओ दरवाज़ा लगा आती हूँ..

Vineet-ruka hi तो नहीं जा रहा मामी, पल्ली वैसे भी नहीं है अब बस हम दोनों हैं आज रात अपनी ममी का पूरा ख्याल रखूँगा..

ममता- सोचा तो हमने भी ऐसा hi कुछ है बाबू की निचोड़ hi लेंगे तुमको..

ये कहकर ममता दरवाजा लगाने चली गयी और विनीत अपने कपडे उतारकर तयारी करने लगा...

वहीं दूसरी तरफ नज़ारा काफी बदल चूका था नीलेश के आते hi सब शुरू हो गए थे और अभी दृश्य बड़ा hi कामुक था,

राजन हमारी प्यारी शशि की बड़ी बड़ी छूछीयों के बीच अपने लुंड को फंसकर उन्हें छोड़ रहे थे वहीं उनके बगल में प्रेमा और नीलेश एक करवट पर लेते हुए थे और नीलेश का लुंड प्रेमा की छूट के अंदर बहार हो रहा था..





प्रेमा- अह्ह्ह ओह्ह्ह चाचाजी अह्ह्ह मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की मैं कभी इतना छोडूंगी...

नीलेश- क्या हुआ बहु मज़ा nahiiiiiiiiiiiiiiii आ रहा क्याःह्ह्ह..

प्रेमा- ऐसी बात नाहीई है चचाजीइ बहुत मज़ाआ आ रहा हीी जितना मैं आज भर में चूड़ी हूँ उतना तो उस मादरचोद ने शादी से अब तक nahiiiiiiiiiiiiiiii छोड़ा होगा...

शशि- ुहममम बहु तू उसको छोड़ और अपनी ज़िन्दगी के मज़े ले,

राजन- और ऐसा बदन पाकर भी अगर उसका मज़ा खुद और दूसरो को न लेने दिया तो बेकार है..

Shashi-aur क्या तेरे आस पास देख कितने hi लुंड हैं जो तेरी छूट में घुसने को एक इशारे पर तैयार हैं तो मज़े ले उनके.

प्रेमा- अह्ह्ह ले रही हूँ बुआ उसका hi नतीजा है को अभी ससुर से गांड मरवा कर आ रही हूँ और अब चाचाजी से चुद रही हूँ..

सब प्रेमा की इस बात पर हंस पड़े... वहीं राजन ने शशि को उठाकर घुमा दिया और प्रेमा और नीलेश की और मुँह करके बिस्तर पर घोड़ी बना दिया और पीछे से फिर अपने लुंड को शशि की गरम छूट में घुसा दिया और धक्के लगाकर छोड़ने लगे..





दोनों औरतें एक दुसरे के बगल में चुद रही तह, नीलेश पीछे से प्रेमा को छोड़ते हुए उसकी चूचियों से खेल रहे थे तो वहीं प्रेमा अपने ऊपर लटक रही शशि की चूचियों को मुँह में लेकर चूस लेती..

राजन- ahhhhhhhhhh भैया सच में तुम्हारी भें छोड़ने जैसा मज़ा कहीं नहीं है...

राजन ने शशि को छोड़ते हुए हँसते हुए कहा..

नीलेश- हाँ साले जैसे तुम्हारी तो वो कुछ है hi nahiiiiiiiiiiiiiiii..

राजन- है हमारी बहन है और हम पक्के वाले भेनचोद हैं...

इस बात पर सबका ठहाका कमरे में गूँज गया...

वहीं दूसरी और बात अब इधर भी आगे बढ़ चुकी थी और सिर्फ आगे नहीं काफी आगे बढ़ चुकी थी..

दरवाज़ा बंद करके आके ममता को विनीत ने फुर्सत नहीं लेनी दी और उसके ब्लाउज और साड़ी को उतर फेंका और ममता की छूछीयों को चूसने लगा,

ममता- हेहर हे बाबू बड़ी हड़बड़ी में हो, हम कहीं भागी थोड़े hi जा रहे हैं..

विनीत- ुहहमममआ ओह्ह्ह मामी तुम्हारी चूचियों को देखकर न जाने हमने कितनी बार मुठिया है अब मौका मिला है..

ममता- तो चूस लो बाबू खली कार्डो ममी की छूछीयों को...

विनीत पूरे जोश से ममता की छूछीयों को चूस रहा था...

वहीं दुसरे घर में उसकी मम्मी मूतने के लिए बाथरूम में गयी हुई थी और प्रेमा बहु दोनों मर्दों के बीच अकेली पद गयी थी जिसमे एक तरफ से नीलेश उसकी छूट की सेवा कर रहे थे वहीं उसके मुँह में राजन का लुंड था...

पर प्रेमा पूरी म्हणत से दोनों को खुश करने की पूरी कोशिश कर रही थी.





राजन- ahhhhhhhhhh कभी कभी सोचता हूँ ाचा hi हुआ जो भग्गू ऐसा निकला नहीं तो हमें प्रेमा जैसी बहु कभी छोड़ने को नहीं मिलती..

नीलेश- नहीं रे प्रेमा बहु जैसी गदराई बदन वाली औरत को संभालना अकेले मर्द की बस की नहीं है और खासकर भग्गू जैसे तो बिलकुल भी नहीं..

राजन- अगर भग्गू ाचा होता तो भी हमसे चुदवाती बहु..

नीलेश- चुदवाती हमसे नहीं तो किसी और से..

नीलेश ने प्रेमा की छूट में धक्का लगते हुए कहा...

दोनों प्रेमा को छोड़ते हुए उसके बारे में ऐसे बात कर रहे थे जैसे वो वहां पर है hi नहीं, वहीं प्रेमा उनकी बातों को सुनते हुए दोनों छोर से लुंड का मज़ा ले रही थी...

राजन- ahhhhhhhhhh बहु आईसीईईई hiiiiiiiiii चूस अपनी चाचआ का लुँड्ड़डडडड अह्ह्ह्ह क्याःह्ह्ह गरम मुँह है रे तेरा...

नीलेश- छूट तो बिलकुल भट्टी हैईईईई अह्ह्ह..

राजन- ahhhhhhhhhh ज़रूर बहु की माँ भी बड़ी गरम औरत होगीइइइइइइ अह्ह्ह.

इस बात पर प्रेमा ने उसका लुंड मुँह से निकला और बोली- आज सब मेरी माँ के पीछे hi क्यों पड़े हो...

नीलेश- सब? सब कौन?

प्रेमा- आज पापाजी भी बोल रहे थे ऐसा hi की संधान जी बड़ी सही माल हैं वगेरा वगेरा..

नीलेश- हाहाहा राजपाल भाईसाब भी न हर तरफ नज़र गदा के रखे हैं,

राजन- वैसे हमें तो लगता है सही कह रहे होंगे माल तो होगी बहु की माँ..

प्रेमा- ओह्हो चाचाजी यहाँ बेटी सामने नंगी पड़ी है तुम माँ के सपने देख रहे हो ..

शशि- यही तो इन मर्दों की फितरत होती है बहुरिया हमेशा एक छूट और के पीछे पड़े रहते हैं..

शशि ने कमरे के अंदर आते हुए कहा..

Prema-dekho न बुआजी मैं सामने हूँ नंगी और चाचाजी मेरी माँ की गांड मेइब घुसे जा रहे हैं..

राजन- अरे बहु कहाँ घुसा जा रहा हूँ एक बार मौका तो मिले..

इस बात पर प्रेमा भी हंसने से खुद को रोक नहीं पाई...

वहीं शशि ने आ जाने के बाद अपने लिए जगह बनाई तो आसान एक बार फिर बदल गए राजन और नीलेश दोनों अपनी पीठ पर लेट गए वहीं प्रेमा राजन के ऊपर आकर उसके लुंड पर सवार हो गयी और शशि अपने भैया के मोठे लुंड को छूट में भर के बैठ गयी.. और दोनों hi अपनी अपनी छूट में लुंड लेकर उसपर उछलने लगी..





प्रेमा- उह्ह्ह चचाजीइ वैसे आप निकले तो बड़े छुपे रुस्तम..

प्रेमा ने राजन से चुड़ते हुए नीलेश के सीने पर हाथ फिरते हुए कहा...

नीलेश- कैसे बहुउउउउ..

नीलेश ने अपनी बहन को छोड़ते हुए जवाब दिया..

प्रेमा- मैं तो कभी सोच भी नहीं सकती थी की तुम अपनी बहन को छोड़ते होंगे वो भी इतने सालो से..

राजन- ये बात तो सही कही तूने बहु.. बताओ हमें तो हर बात बताते थे हमें तक खबर नहीं होने दी..

राजन ने नीचे से धक्के लगते हुए प्रेमा की छूछीयों को दबाते हुए बोलै..

नीलेश- अरे तो का करते कैसे बताते की हम अपनी सगी बहन की गरम छूट को छोड़ते हैं.

शशि- अह्ह्ह्ह भैया आराम से.. वैसे सही बात है हर किसी के कुछ न कुछ राज़ ऐसे होते हैं जो किसी को नहीं पता होते..

प्रेमा- किसी के भी राज खोलने का सबसे बढ़िया तरीका है चुदाई..

राजन- सही कहा बहु, कितनी समझदार है तू..

Prema-kya बात है चाचाजी बड़ी तारीफ था कर रहे हो मेरी अब और क्या चाहिए..

राजन- तेरी गांड बहुरिया..

राजन ने हँसते हुए कहा..

प्रेमा- वो भी ले लो चाचा तुम्हारे लिए सरे दरवाज़े खुले हैं...

शशि और नीलेश दोनों की बातें सुन हँसते हुए चुदाई कर रहे थे..

पर प्रेमा और राजन अपनी बात को लेकर काफी गंभीर थे जिसके कारन कुछ पल बाद hi राजन ने प्रेमा की छूट से लुंड निकल कर उसकी गांड के द्वार पर रख दिया और जिस अंदर सरकने में प्रेमा ने उसकी मदद की और कुछ hi पलों में राजन का लुंड प्रेमा की गांड की गहराई नाप रहा था..





प्रेमा- ओह्ह्ह्हह चचाजीइ अह्हह्ह्ह्ह अब तो खुश हो नाहहहह..

राजन- ahhhhhhhhhh बहुउउ जिसका लुंड तेरी गांड में होगा उसके तो भाग hi खुल जायेंगे...

शशि- एते वाह राजू भैया बड़ी जल्दी गांड में घुस गए..

राजन- क्या करें शशि मन हुआ बहु की कासी हुई गांड की सैर करने का तो घुसा दिया...

शशि- हाय भगवन ऐसी बहुरिया सब को दे जो सबका इतना ख्याल रखे...

प्रेमा- चिन्ताः मत करो बुआअह्ह्ह विनीत के लिए ऐसी hi लड़की ढूंढूंगी..

शशि- अह्ह्ह हम्म्म बहु ऐसी hi चाहिए होगी जो हमारे घर के हालात को समझे और ख़ुशी ख़ुशी शामिल भी हो,

राजन- बिलकुल हमारी प्यारी बहु प्रेमा की तरह..

राजन ने प्रेमा की गांड मरते हुए कहा...

प्रेमा- अब तो गांड भी दे दी चचाजीइ अह्ह्ह्ह अब क्या चाहिए...

राजन- तेरी माँ की गांड बहुउउझ.

इस बात पर सब ज़ोर ज़ोर से हंसाने लगे...

वहीं दुसरे घर में अब काफी बदलाव आ चूका था ममता और विनीत दोनों hi पूरी तरह से नंगे थे और ममता नीचे बैठी हुई विनीत का लुंड चूस रही थी या यूँ कहें की विनीत ममता का मुँह छोड़ रहा था तो ज़्यादा सही होगा..

ममता के नूह से लगातार गगगगगगुणु ग्ग्ग्गू की आवाज़ें आ रही थी वहीं विनीत ममता के सर को पकड़े हुए अपने लुंड की ठोकर ममता के गले तक कर रहा था...

विनीत- ुहहमममआजमममी ahhhhhhhhhh चुसू आईसीईईई hiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह सलीईई क्याआअह्ह्ह चुसतीई है तूऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह...

विनीत से आईसीईईई बातें सुनकर ममता की उत्तेजना और बढ़ रही थी.. वहीं विनीत का जोश तो पहले से hi बढ़ा हुआ था... कुछ देर और ममता के गले को छोड़ने के बाद विनीत ने अपना लुंड उसके मुँह से निकला और उसे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके पैरो को चौडाते हुए उनके बीच आ गया और फिर अपने मुँह को ममता की बहती हुई छूट पर लगा दिया और चाटने लगा..

ममता- आह्हः बाबू आईसीईईई hiiiiiiiiii आह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत्तत्त ाची से सिखाया है तुम्हारीइइइइइइइ मम्मी ने..

एक तरफ जहाँ भांजे ममी का प्रेम उमड़ रहा था तो वहीं दूसरी तरफ भी प्रेम की कोई कमी नहीं थी...

प्रेमा और राजन के बाद नीलेश और शशि भी ज़्यादा देर तक उनसे पीछे नहीं रहे और शशि ने अपने भैया का लुंड अपनी छूट से निकल कर अपनी गांड में समां लिए था और उछाल उछाल कर अपने भैया के मोठे लुंड से गांड मरवा रही थी.





बगल में राजन नीचे से धक्के लगाकर प्रेमा की गांड को लगातार चौड़ा कर रहा था...

नीलेश- अह्ह्ह्हह शशि ओह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा हीी...

शशि- मज़ा तो आयेगा hi भैयाहहहह अपनी बहन की गांड जो मार रहे हो...

राजन- एईई बायत ताऊ सही हैई अपनी बहन बेटी की गांड का मज़ाआ hi अलग हीी...

प्रेमा- अह्ह्ह चाचा मेरे में मज़ा nahiiiiiiiiiiiiiiii आ रहा क्या तुम्हे...

राजन- ारी बहु बहुतत्त आ रहा है और सच कहूं तेरी गांड भी बहुत मस्त haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh... मैं बस उस रिश्ते की बात कर रहा था जो की उत्तेजना को और बढ़ा देता है...

प्रेमा- हहै चाचा मज़ाक कर रही थी मैं..

राजन- जनता हूँ बहुरिया, तू बहुत समझ दार है...

दोनों जोड़े एक दुसरे के बगल में हवस के खेल में लगे हुए थे जो शायद hi कहीं और खेला जा रहा होगा...

नीलेश- ahhhhhhhhhh समझ दार नहीं होती तो अभी तुझसे ऐसे गांड मरवा यही होती..

Rajan-is हिसाब से तो शशि सब्स्र ज़्यादा समझदार है...

शशि- वो तो मैं हूँ भैया... क्यों प्रेमा..

प्रेमा- सही कहा बाआ

और अपनी बात साबित करने के लिए प्रेमा ने आगे झुककर शशि के होंठों को चूम लिए जिसमे शशि ने भी पूरा साथ दिया उसके बाद न जाने दोनों औरतों में आँखों hi आँखों मेइब क्या बात हुई की दोनों hi एक दुसरे की और झुक गयी और दोनों ने hi अपनी अपनी गांड से लुंड निकल दिया और उससे पहले की दोनों मर्द कुछ समझ पते दोनों औरतों ने hi ेल दुसरे की गांड से निकले हुए लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी..





शशि ने प्रेमा की गांड से निकले राजन के लुंड को मुँह में भर लिए और प्रेमा ने शशि की गांड से निकले शशि के भैया के लुंड को..

राजन- ahhhhhhhhhh भैया ये तो जन्नत है...

नीलेश- ahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहममम हनननननन सहीई कहा तूने...

राजन- कशह्ह्ह अह्ह्ह्हह ये सब पहली शुरू हुआआ होताआ..

नीलेश- ahhhhhhhhhh कशह्ह्ह... पर अभी जितना मिल रहा है बटोर लो...

राजन- सहीई कहा भैयाहहहह..

इसके बाद दोनों hi औरतों ने बापिस लुन्डों पर कब्ज़ा कर लिए पर जहाँ प्रेमा ने राजन के लुंड को अपनी गांड में लिए वहीं शशि इस बार अपने भैया के और मुँह करके बैठी और उनका लुंड अपनी खुजलाती हुई छूट में lia..aur उछाल उछाल कर भैया के मोठे तगड़े लुंड से अपनी छूट की खुजली को मिटने लगी...

Shashi-ahhhh भैया ओह्ह्ह्ह मज़ाआ आ रहा है...

नीलेश- ahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ुहममम मेरिइइइ गुडियाःठ्हहह बहन....

नीलेश को जब भी शशि पर बहुत प्यार आता था तो वो बचपन से उसे ऐसे hi पुकारता था और अभी भी वही हो रहा था बस प्यार लुंड के रूप में बहन के अंदर जा रहा था,

शशि- अह्ह्ह्ह भैया chodoooooooooooohjhhh अपणीइइइइइइ बहन कोऊ aahhhhhhhhhh ..

राजन और प्रेमा भी दोनों भाई बहन की उत्तेजना देखकर खुद भी उत्तेजित हो रहे थे वहीं शशि और नीलेश की जबरदस्त चुदाई चल रही थी..

जहाँ माँ अपने सेज भाई के लुंड पर कूद रही थी तो वहीं बेटे के लुंड पर भी एक गदराई औरत कूद रही थी.

ममता विनीत की पूरी खातिर कर रही थी और उसकी मेहमान नवाज़ी में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी... और खातिरदारी के लिए ममता ने विनीत के सामने अपनी रसीली छूट को परोस रखा था जिसे विनीत का लुंड काफी ज़ोरों से चख रहा था





विनीत नीचे से धक्के लगा लगाकर ममता की छूट का काफी अचे से स्वाद ले रहा था ममता भी विनीत की चुदाई की रफ़्तार और जवान लुंड पाकर बहुत खुश थी...

ऐसा नहीं था की उसे अपने पति या नीलेश के साथ मज़ा नहीं आता था बल्कि बहुत आता था पर उसे ये बदलाव ाचा लगता था, जहाँ उसके पति और नीलेश यहाँ तक की उसके भाई की चुदाई में संयम होता था वहीं जवान लड़के जैसे कर्मा अनुज और विनीत में जवानी का जोश था एक जूनून सा होता था, और ममता को दोनों hi पसंद थे..

ममता- ahhhhhhhhhh बाबूउउउ बाबूउउउ अह्हह्ह्ह्ह बढ़िया ऐसी हीईई छोड़ते राहूऊ ..

विनीत- ahhhhhhhhhh ममी तुम्हारे जैसीई मामी होतो जिंदगी भर छोड़ता रहूं..

ममता- किसने रोका है फिर अह्ह्ह्ह अह्ह्ह दिखाओ हमें कितना दम है तुम्हारे लोडे निब बाबू...

विनीत- ahhhhhhhhhh ममी देख लो डुम्मम्मम्म तो इतना haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh की तुम्हारी छूट को रुला के hi छोड़ुंगाःह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ले salliiiiiiiiiiiiiii..

विनीत ने उत्तेजित होकर और तेज़ धक्के लगते हुए कहा जिसका असत ममता पर भी वैसा hi हुआअह्ह्ह..

ममता- आह्हः दिखायःहहह अह्ह्ह्ह भेनचोद, मदरचूऊऊडड़डडडड चुसड़द्द वैसी हीईईई जैसीईए अपणीइइइइइइ रनडीई माँ को छोड़ता haiiiiiiiiiiiiiaaahhhhhh..

विनीत ममता की बातों से और जोश में आकर छोड़ने लगा,

विनीत- साली रंडी तो तुझे बना कर छोडूंगा आज मेंनननननननन

ममता- तो छोड़ड़ड़ड़ ना मदररररछोड़ड़ड़, दिखा क्याआआआ क्या सिखायाः तेरी रनडीई मा नई...

दोनों के hi बीच काफी घमासान चुदाई चल रही थी और साथ hi एक दुसरे की बातों से भी बहुत उत्तेजित होते जा रहे थे

यहाँ जितनी तेज़ बीटा छोड़ रहा था वहीं दुसरे घर में माँ उतनी hi आलरामकता से चुद रही थी, नीलेश ने शशि को आगे अपनी और झुका रखा था और उसको कसकर पकड़ कर नीचे से ताबड़तोड़ धक्के लगाकर अपनी बहन को छोड़ रहे थे...

वहीं शशि अपने भैया के सीने में अपने सर को झुकाये सिसकियाँ लेने के अलावा कुछ नहीं कर प् रही थी..

वहीं पीछे से राजन और प्रेमा दोनों भाई बहन को देखकर अपनी चुदाई का आनंद ले रहे थे इसी बीच प्रेमा राजन के लुंड से उठ गयी तो उसकी गांड से राजन का लुंड निकल गया, प्रेमा ने पलट कर उसे मुँह में भर लिए और अपनी गांड का स्वाद उस पर चखने लगी कुछ पल चूसने के बाद प्रेमा ने राजन को इशारा किआ और राजन ने समझते हुए हामी भरी और मुस्कुराया और आगे बढ़ा, वहीं नीलेश जिसके धक्के थोड़े से धीमे हुए थे सांस भरने के लिए उसने राजन को अपनी टैंगो के बीच जगह बनाते देखा तो वो भी समझ गया...

और धीरे हो गया वहीं शशि को आस पास की कोई खबर नहीं थी वो बस अपने भाई के सीने में सर को छुपाये हुए लम्बी लम्बी सांस भर रही थी..

पर अगले hi पल उसे अपने पीछे कुछ महसूस हुआ और फिर उसकी गांड में कुछ घुसा जिसके एहसास से वो एक पल को चौंकी ज़रूर पर अब वो इन सब की इतनी अभ्यस्त हो चुकी थी, इतनी चुद चुकी थी की तुरंत संभल गयी..





वहीं राजन ने भी बिना देरी किये ालने लुंड को पूरा शशि की गांड में उतर दिया... और हलके धक्कों से उसकी गांड मरने लगे...

शशि के लिए ये सब उसके परिवार में आम हो चूका था पर मज़ा उसे हर बार पिछली बार से ज़्यादा आता था जब दो लुंड एक साथ उसके अंदर जाते थे..

वहीं इससे सबसे ज़्यादा उत्तेजित नीलेश थे जो की पहली बार अपनी बहन को किसी के साथ बाँट रहे थे वो भी अपने दोस्त के साथ नीलेश का लुंड फूलता जा रहा था,

वहीं राजन को भी वैसा hi महसूस हो रहा था...

और इसी जोश में आकर दोनों की गति बढ़ने लगी... कुछ hi देर में शशि की गांड और छूट में तूफानी धक्के पढ़ने लगे, ममता प्रेमा और पल्ली को कई बार दोनों मिलकर छोड़ चुके थे तो एक दुसरे के साथ ले बनाने में समय नहीं लगा तो दोनों मिलकर शशि को टारे दिखा रहे थे..

वहीं प्रेमा बगल में बैठी इस मज़ेदार दृश्य का आनंद उठाते हुए स्पानी छूट सहला रही थी...

उसे तीनो के हाव् भाव और गति से इतना तो अंदाज़ा हो गया था की बिना झड़े तीनो में से कोई रुकने वाला नहीं है..

राजन को अपने लुंड पर जो की शशि की गांड में था नीलेश के लुंड का एहसास हो रहा था और राजन ये सोच सोचकर उत्तेजित हो रहा था की वो अपने सबसे अचे दोस्त की बहन को उसके साथ मिलकर छोड़ रहा है...

वहीं यही ख्याल नीलेश के मन में भी था, और ये सोचकर उनका जोश दुगना होता जा रहा था, शशि को भी इस बात का एहसास था ऊपर से दो मोठे मोठे लुंड उसके छेदों में अंदर बहार हो रहे थे ..

तीनो hi ज़्यादा देर तक अपने आप को रोक नहीं पाए और कुछ hi देर में तीनो स्खलित होने लगे,

राजन ने शशि की गांड को तो नीलेश ने अपनी बहन की छूट को अपने रास से भर दिया

झड़ने के बाद पहले राजन ने पीछे से अपना लुंड निकला और शशि नीलेश के लुंड से उठी तो प्रेमा जैसे इसी के लिए तैयार बैठी थी उसने तुरंत शशि को प्रेत के बल लिटा दिया और उसकी छूट और गांड से रास चूसने लगी..

शशि एक बार फिर से सिसकियाँ लेने लगी, अपनी गांड और छूट में प्रेमा की जीभ को महसूस करके वहीं दोनों मर्द बिस्तर के सिरहाने से टिक कर बैठ गए और हांफते हुए प्रेमा और शशि को देख रहे थे..

वहीं दुसरे घर में भी चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था, विनीत ने ममता को झुका रखा था और पीछे से दनादन धक्के लगा लगा कर ममता को अपनी चुदाई का हुनर दिखा रहा था जो उसकी मम्मी ने उसे सिखाया था,

विनीत ममता की कमर को थामे सटासट उसे छोड़ रहा था





ममता भी विनीत के लुंड का पूरा आनंद उठा रही थी और मज़े से चुद रही थी..

ममता- अह्ह्ह्ह बबबबबू और तगड़े धक्के लगाओ अह्ह्ह्ह दिखाओ अपनी मम्मी के दूध का दम..

ममता जानबूझकर ऐसी बातें करके विनीत को उत्तेजित कर रही थी जिसका नतीजा उसे उसकी छूट में मिल रहा था..

हर धक्के के साथ ममता की भरी छुछियां लहरा रही थी....

विनीत- ले सआईईई रनडीईई आह्हः आअज टेरिइइइइइइ चूऊत्त का भोसड़ा बना दूंगाःह ..

ममता- आह्हः बाबू तुम क्या तुम्हारा बाप भी आ जाये और कोशिश करले...

दोनों ऐसे मज़ाक करते हुए चुदाई का पूरा मज़ा ले रहे थे... पर ममता और विनीत दोनों hi उत्तेजना के शिखर पर थे और कभी भी झाड़ सकते थे और सबसे पहले ममता का बांध टूटा और वो विनीत के लुंड पर झाड़ गयी... ममता के झड़ने के बाद विनीत ने उसकी छूट से लुंड निकला और ममता को घुमाकर अपने सामने बिठा दिया और अपना लुंड ममता के नूह में भर दिया और उसे छोड़ने लगा ममता भी उसका साथ देने लगी

और कुछ देर बाद hi विनीत ने ममता के मुँह को अपने रास से भर दिया जिसे ममता ख़ुशी ख़ुशी जातक गयी...

इसके बाद दोनों एक दुसरे से चिपक कर आराम करने लगे...

वहीं नीलेश के यहाँ दोनों औरतों का आपसी प्रेम काफी देर तक चलता रहा, प्रेमा ने शशि की छूट की छूट और गांड को अचे से छठा उसके बाद शशि ने भी प्रेमा बहु की छूट और गांड दोनों का स्वाद अचे से चखा फिर उसकी चूचियों का और फिर दोनों औरतें काफी देर तक एक दुसरे के होंठों और जीभ को चूसती रही...

उन दोनों को देखकर hi राजन और नीलेश के लुंड दोबारा से टैंकर फुंकारने लगे,

राजन- अरे वाह मज़ा hi आ गया तुम लोगो का प्यार देख कर..

शशि- हाँ भैया दिख रहा है तुम्हारा मज़ा देखो कैसे फुंकारें मार रहा है..

शशि ने राजन के लुंड को पकड़ते हुए कहा...

प्रेमा- सही कह रही बुआ बिलकुल तन गए हैं लोडे दोनों के..

प्रेमा ने नीलेश के लुंड को अपने मुँह में भरते हुए जवाब दिया...

शशि ने भी राजन के लुंड को मुँह में भर लिए तो दोनों मर्दों के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल गयी...

शशि और प्रेमा दोनों hi अपनर अपने गरम मुँह का कमाल दिखने लगी और कुछ देर में hi दोनों लुंड थूक से चमक रहे थे..

आगे का प्रोग्राम बना और उसी अनुसार नीलेश बिस्तर पर पीठ के बल लेट गए तो प्रेमा नीलेश के ऊपर आई और फिर उनके लुंड को अपनी गांड पर टिका कर नीचे बैठ गयी वहीं नीलेश भी नीचे से धक्के लगाकर प्रेमा की गांड का मज़ा उठाने लगे, वहीं राजन प्रेमा के बगल में आकर खड़े हो गए और अपना लुंड प्रेमा के मुँह में भर दिया जिसे प्रेमा ख़ुशी ख़ुशी चूसने लगी इसके साथ hi शशि भी दूसरी और आकर प्रेमा की एक छुच्छी को चूसने लगी





प्रेमा तो इस तिहरे हमले के आनंद से दोहरी होने लगी..

गांड में लुंड, मुँह में दूसरा लुंड और छुच्छी पर मुँह और क्या चाहिए था...

नीलेश- ahhhhhhhhhh बहुउउ टेरिइइइइइइ गंडड,

राजन- ahhhhhhhhhh भैया सिर्फ गांड hi nahiiiiiiiiiiiiiiii मुँह भी बहुत गरम ही...

शशि- पूरा बदन hi एक दम माखन है बहुरिया kaaah..uhhmmaaa

शशि ने उसकी छुच्छी को मुँह से निकलर हुए कहा..

प्रेमा बेचारी क्या बोलती मुँह में लुंड जो घुसा हुआ था वो तो बस बाकि तीनो के लिए एक स्वादिष्ट भोग की तरह थी जिसको तीनो hi अपने अपने तरीसे से चख रहे थे..

प्रेमा इसी सब के बीच सोचने लगी की कुछ दिन पहले तक कैसी थी उसकी ज़िन्दगी, रूखी, दुःख से भरी हुई, पति की नाराजगी सास के तने, कुछ भी ाचा नहीं था और सबसे ख़राब होती थी रात जब अकेले बिस्तर पर वो न जाने कितनी देर या तो तड़पती रहती थी या रोटी थी अपने पति की वजह से और आज देखो कहाँ वो एक के प्रेम के लिए तरसती थी आज तीन तीन लोग एक साथ उसके बदन से खेल रहे हैं..

तभी नीलेश ने एक ज़ोर का झटका उसकी गांड में लगाया तो जाकर उसका ध्यान बापिस आया...

वहीं राजन ने भी उसके मुँह से लुंड निकल लिए था नीलेश ने नीचे से hi उसकी दोनों टैंगो को पकड़ के फैलाया तो प्रेमा समझ गयी की आगे क्या होने वाला है, पहले भी कई बार नीलेश और राजन उसकी दोहरी चुदाई कर चुके थे और शशि की होती देख उसे ये तो अंदाज़ा हो गया था की थोड़ी hi देर में उसके अंदर भी दो लुंड होंगे और हुआ भी ऐसा hi ..

पेअर फैलते hi राजन उसकी टैंगो के बीच आ गया और फिर बिना किसी इंतज़ार के उसने अपना काम पूरा कर लिए और अगले hi पल प्रेमा जी की छूट में राजन का लुंड था और प्रेमा दो दो लुन्डों से एक साथ चुद रही थी, उसको ये भरा भरा एहसास पसंद था और दोहरे हमले से वो पागल सी हो रही थी की उसकी उत्तेजना और आनंद को बढ़ने के लिए शशि ने भी हाँथ बंटाया और उसकी छूट के डेन को सहलाने लगी .. साथ hi उसके होंठों को चूम कर उसका उत्साह बढ़ा रही थी...





प्रेमा तो जैसे उत्तेजना और मज़े से पागल हो गयी उसके मुँह से लगातार सिसकियाँ और आहें निकल रही थी..

प्रेमा- अहह आईसीईईई hiiiiiiiiii छोड़ूऊओ mujheeeeeeaaahhhhhhhhhhh

राजन चाहहहछा आईसीईईई hiiiiiiiiii और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ छोड़ूऊओ आअह्ह्ह्ह

राजन- ahhhhhhhhhh ुहम्म्म्म बहुउउउउ..

प्रेमा- मेरी गांड मारो चाचाजी अह्ह्ह्हह मारो मेरी छूट अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्ह मारो सालूविझ आईसीईईई हीइइइइइइइ छोडोऊ तुमसीई अपणीइइइइइइ मा भीईई छुडवाआ लूंग़ीीीु..

प्रेमा मज़े से दोहरी होती हुई ये सब बड़बड़ा रही थी... और बड़बड़ाये क्यों न इतना मज़ा जो मिल रहा था उसे..

और इसी मज़े का नतीजा ये हुआ की वो ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाई और स्खलित हो गयी ..

और उसके स्खलन का वेग इतना तेज़ था की वो बिलकुल बेहोश सी हो गयी... नीलेश ने उसे अपने ऊपर से हटाकर बगल में लिटा दिया... जहाँ वो ज्यों की त्यों लेट गयी..

वहीं दुसरे घर में चुदाई का दूसरा दौर चल चूका था और इस समय काफी उफान पर था, ममता बिस्तर पर एक बार फिर से चौपाया बानी हुई थी और अपने बड़े बड़े चूतड़ों को हवा में उठाया हुआ था जिनके ऊपर विनीत चढ़ा हुआ था और विनीत का लुंड ममता की गांड के अंदर बहार हो रहा था...





ममता ने भी विनीत की खातिर दरी के लिए अपनी गांड की ऊंचा उठाकर उसके लिए परोस रखा था और उसके गांड का मखमली गरम स्वाद विनीत का लुंड ले रहा था..

Vineet-ahhhhhhhhhh ममी बड़ी चिकनी और मक्खन जैसी गांड है तुम्हारी...

ममता- तुम्हारा लोढ़ा भी माखन में चाकू के जैसे वार कर रहा है बाबू बहुत्तत्त गरम है...

विनीत - जब तुम्हारी भट्टी जैसी गांड में तपेगा तो गरम तो होगाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हीई मामी..

ममता- तो इसमेटी अपना रास भरररर के ठन्डागः कार्डो बाबूउउउउ ..

विनीत- करूंगा ममी अह्ह्ह्ह पूरी गंडड को अपनी रस से भर दूंगाःह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्हह्ह ममी तुम मेरे साथ मेरे गाओं चालुहह..

ममता- क्यों बाबू

विनीत - अह्ह्ह्हह पापा और ताऊजी बहुत खुश होंगे तुमसे मिलकर...

ममता- आह्हः खुश होंगे या हमें भी तुम्हारी तरह घोड़ी बनाकर ठोकते रहेंगे...

Vineet-uhhmmmaaaammmiii ठोकने में hi तो माज़ाअह है तुम चीज़ hi हो ठोकने लायक....

ममता- आएंगे हम बाबू सब आएंगे फिर मिलकर चुदाई करनाआ...

यहाँ ममी भांजे की चुदाई और आगे की योजना बन रही थी वहीं दूसरी और शशि का बुरा हाल हो रहा था

प्रेमा के झड़ने के बाद वो तो ठक्कर चूर हो गयी थी पर दोनों मर्दों के लुंड फिर भी खड़े हुए झूल रहे थे बस फिर क्या था दोनों टूट पड़े शशि पर और अभी नज़ारा बड़ा दिलचस्प था... प्रेमा जो की अब बापिस से जोश में आ चुकी थी वो राजन के लुंड को चूस चूसकर और गीला कर रही थी वहीं नीलेश पीठ के बल लेते थे और शशि उनके पैरों की और चेहरा किये अपने भैया भैया का लुंड गांड में लिए उछाल रही थी..

प्रेमा ने कुछ देर और राजन के लुंड को चूसा और फिर छोड़ दिया जिसके बाद राजन तुरंत नीलेश और शशि की टैंगो के बीच आ गया जिसका स्वागत नीलेश और शशि दोनों hi अपनी टंगे फैलाकर किया और फिर राजन ने अपने लुंड शशि जी की छूट में घुसा दिया...





शशि एक बार फिर से दो दो लुन्डों से छोड़ने का मज़ा लेने लगी..

शशि- अह्ह्ह छोड़ूऊओ भेंचोड़ड़ूऊऊ ahhhhhhhhhh अपनी बहन को एक सअअअअअतःहःहः आह्ह्ह्हह..

शशि की बातों से उत्तेजित होकर नीलेश और राजन और तूफानी धक्कों से शशि को छोड़ने लगे..

शशि तो मज़े और आनंद के सागर में गोते लगा रही थी दोनों आँखें बंद थी

बदन मज़े से अकड़ रहा था पूरे बदन में जैसे खून की जगह वासना बाह रही थी और महसूस हो रहे थे बस दो लुंड जो उसकी छूट और गांड से अंदर बहार हो रहे थे...

प्रेमा बगल में बैठी हुई इस घनघोर चुदाई का मज़ा लेते हुए अपनी छूछीयो को मसल रही थी...

कमरे में जैसे वासना का तूफ़ान सा आया हुआ था जो हर पल के साथ बढ़ता जा रहा था शशि के मुँह से सिसकियाँ और चीखें निकल रही थी वहीं नीलेध और राजन पसीने में नहाये गुर्रा रहे थे..

प्रेमा को तो दर लग रहा था की अगर ऐसी चुदाई उसकी हो तो वो तो बेहोश hi हो जाएगी..

और फिर चुदाई का तूफ़ान बिलकुल अपने शिखर पर पहुँच गया शशि का बदन पूरा अकड़ गया और वो थरथराने लगी जिससे नीलेश और राजन उसे संभल नहीं पाए और वो बगल में नीचे लेट गयी..

पर नीलेश और राजन तो जैसे अधूरे में अटक गए पर उसी वक़्त प्रेमा उनकी मदद के लिए आगे आई और दोनों के लुंड बरी बरी चूसते हुए मुठियाने लगी और फिर जल्दी hi दोनों ने hi अपना अपना रास छोड़ दिया नीलेश ने पहले प्रेमा का मुँह भरा और फिर राजन ने जिसे वो ख़ुशी ख़ुशी जातक गयी...

शशि तो आँखें मूंदे बड़ी बड़ी सांसें भर रही थी, बाकि तीनो भी बिस्तर पर गिर गए अब किसी में कुछ और करने की ताकत नहीं बची थी...

जल्दी hi तीनो नींद के आगोश में खो गए थे दूसरी और विनीत भी ममता की गांड में झड़ने के बाद उससे चिपक कर सो गया...

सरलपुर

एक आम सुबह थी और सब अपने अपने काम में लगे हुए थे, रिमझिम की सास को आज मायके जाना था उसी की तयारी चल रही थी, वहीं रमन को भी दो दिन के लिए काम के सिलसिले से बहार जाना पद रहा था जिस वजह से रिमझिम थोड़ी उदास थी पति से दूर रहने का दुःख ऊपर से दो दिन सूखा hi सोना पड़ेगा, चुदाई की ऐसी लत लगी थी की बिना छूट की खुजली मिटाये नींद hi नहीं आती थी इसी लिए रसोई में काम करते हुए थोड़ी झुंझलाई हुई थी और इस बात को रमन भी अचे से समझ रहे थे... खैर तय ये हुआ था की रमन अपनी अम्मा को बस अड्डे छोड़कर दुसरे शहर निकल जायेगा... इसी चहल पहल से घर भरा हुआ था.

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
अपडेट 161


कालक जंगल

यहाँ जंगल में एक तरफ एक और माँ बेटे की जोड़ी कुछ अलग hi गुल खिला रही थी,

मंजू के पेअर मुड़े हुए थे बदन पर सिर्फ एक साड़ी थी और वो भी सिर्फ कमर के इर्द गिर्द लिपटी हुई , मंजू की बड़ी बड़ी छुछियां एक ले में नाच रही थी और मंजू के ऊपर उसका बीटा जग्गू चढ़ा हुआ था अपनी मम्मी के पैरों को अपने कंधे पर चढ़ाये हुए था और जग्गू का लुंड उसकी मम्मी की गांड के छेड़ से अंदर बहार हो रहा था





जग्गू- अह्ह्ह्हह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह मम्मी तुम्हारी गाआआद्द कितनी चिकनईईई है ऐसा लग रहा है मेरा लुंड निचोड़ लेगीइ...

मंजू- ahhhhhhhhhh लाल्ल्लाहहह ओह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh ुह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ज

जग्गू के धक्के हर पल के साथ बढ़ाते जा रहे थे और मंजू की सिसकियाँ और कुछ पल बाद hi जग्गू ने अपने रास को अपनी मम्मी की गांड में उढेल दिया और फिर दोनों वहीं एक दुसरे के बगल में लेट कर हांफने लगे...

दोनों कालक जंगल से बहार के रस्ते पर पहुँच चुके थे और जहाँ सबके मिलने का तय हुआ था वहां पहुँच चुके थे काफी समय पहले hi पर अभी तक कर्मा और बाकि सब का कोई अत पता नहीं था तो समय गुजरने के लिए जग्गू वो hi कर रहा था जो उसे सूझ रहा था और वो था उसकी गदराई हुई मम्मी की चुदाई,

मंजू भी अपने बेटे की जवानी के जोश के आगे हार मान चुकी थी, पिछले कुछ समय में hi जग्गू ने उसे इतना छोड़ा था की वो पूरी तरह से संतुष्ट हो गयी थी.

जग्गू- अह्ह्ह्हह मम्मी सही में मज़ा आ गया..

जग्गू ने लम्बी सांस भरते हुए कहा..

मंजू- वो सब तो ठीक है पर ये लोग अभी तक आये क्यों नहीं हमे तो चिंता हो रही है..

जग्गू- हाँ अब तक तो यहाँ मिल जाना चाहिए था सबको.

मंजू- कहीं किसी मुश्किल में न फंस गए हो..

जग्गू- अब कर भी क्या सकते हैं सिवाए इंतज़ार के, पता भी नहीं न किधर होंगे, जो ढूँढा जाये..

मंजू- हम तो बस ये मन रहे हैं की बस जल्दी मिल जाएं..

जग्गू- अरे मम्मी मिल जायेंगे तुम चिंता मत करो..

जग्गू ने करवट लेकर अपनी मम्मी के नंगे बदन को बाहों में भरते हुए कहा..

पर तुरंत hi मंजू ने उसे झटक दिया..

मंजू- अब तू दूर hi रह हमसे अभी चिपकेगा तो फिर तेरा डंडा खड़ा हो जायेगा और फिर हमारे पीछे पद जायेगा..

जग्गू- अरे मम्मी तो क्या हुआ

जग्गू ने हँसते हुए कहा..

मंजू- न बाबा हम अब और नहीं छुड़वा सकते तबसे न जाने कितनी बार छोड़ चूका है कभी रस्ते में आराम के बहाने तो कभी किसी और के और यहाँ पहुँचने के बाद तो चैन hi नहीं लेने दिया है तूने..

Jaggu-kya करें मम्मी अब हर रोज़ तो अपनी माँ को छोड़ने का मौका नहीं मिलता न तो रहा नहीं जाता.

मंजू- पर अब रह हम बताये दे रहे हैं की अब हम नहीं करवाएंगे.

इधर माँ बेटे की मीठी नोकझोक चल रही थी तो वहीं कालक जंगल के किसी दुसरे छोर पर भी कुछ दिलचस्प हो रहा था..

सभ्य - तो कर्मा अनुज तुम अपनी बुआ को कबसे छोड़ रहे हो..

ये सवाल सुनकर कर्मा और अनुज की सिटी पित्ती गम हो गयी थी वहीं शालू की तो आँखें बड़ी हो गयी थी..

Karma-kkkkkyaa माँ, बुउआ को ननहीइ ऐसा कुछ ननहीइ है..

अनुज- हाँ माँ क्या बोल रही हो तुममम?

दोनों ने सफाई देते हुए कहा..

सभ्य- अब सच बोलोगे या कान खींचूंगी तब बोलोगे..

अनुज- माँ सच hi तो बोल रहे हैं..

सभ्य- बच्चा माँ हूँ तुम्हारी अपने अंदर से निकला है तुम्हे तो हमारे सामने ज़्यादा न बनो.. बताओ ये सच है की नहीं

इसके जवाब में अनुज कुछ बोलने वाला hi था की कर्मा ने उसे चुप करवा दिया

कर्मा- हाँ माँ ये सच है..

ये सुनकर शालू तो बिलकुल चौंक गयी..

शालू- हाय ढैय्या ये क्या बोल रहा है तू कर्मा, तू अनुज और शशि जीजी?? ये सब कबसे कैसे क्यों..

सभ्य- शालू शांत हो जा सरे सवालों का जवाब मिलेगा और ये दोनों hi देंगे..

कर्मा- पूछो माँ क्या जानना है तुम्हे?

सभ्य- सब कुछ शुरू से अंत तक..

अनुज बेचारा परेशां होकर इधर उधर देखे जा रहा था..

कर्मा- ठीक है सब बताऊंगा पर बात लम्बी है..

शालू- जैसी भी हो सब बता..

कर्मा- पर उतना समय बर्बाद करके क्या फायदा एक काम करते हैं आगे चलते हैं और रस्ते में मैं सब कुछ बताता चलता हूँ..

सभ्य ने कुछ सोचा और बोली ठीक है ये सही रहेगा.

शालू- हाँ जीजी..

तो कुछ hi देर में सब कपडे वगेरा पहन कर सामान लेकर चलने लगे और कर्मा ने बोलना शुरू किआ..

कर्मा- माँ तुम ये तो जानती hi हो की पापा और बुआ के बीच के सम्बन्ध के बारे में..

ये सुनकर अनुज और शालू दोनों hi चौंक गए,

अनुज- क्या पापा और बुआ के बीच मतलब..

शालू- जीजाजी अपनी सगी बहन के साथ.

सभ्य- क्यों चौंक रही है शालू जब माँ अपने बेटे से चुद सकती है तो बहन भाई से क्यों नहीं..

शालू तो ये सब सुनकर बिलकुल hi हैरान थी..

सभ्य - और कर्मा ये सम्भन्ध वगेरा छोड़ और खुल कर बता अचे से..

कर्मा - हाँ तो तुम्हे पता है hi की पापा और बुआ चुदाई करते हैं..

सभ्य- हाँ पता है..

शालू - क्क्क्य साछहयई जीजी तुम्हे ये पहले से पता है?

सभ्य- हाँ शालू पता है..

शालू- जीजी तुम्हे पता है की जीजाजी तुम्हारे पति अपनी hi सगी बहन को छोड़ते हैं?

अनुज बेचारा सबके चेहरे को बरी बरी देखे जा रहा था,

सभ्य- हाँ ऋ लड़ो पता है,

सभ्य ने आगे बढ़ाते हुए कहा..

शालू- तो पता चलने के बाद तुमने क्या किआ..

सभ्य- कुछ नहीं..

शालू- है ढैय्या मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा...

सभ्य- थोड़ा समय दे शालू सब समझ आ जायेगा, तू आगे बोल कर्मा.

कर्मा- हाँ तो रिमझिम दीदी के ब्याह से पहले जब बुआ और विनीत घर आये थे तब एक दिन मैंने बुआ और पापा को बाघ में चुदाई करते छुपके से देख लिए था...

शालू- है ढैय्या ये जीजाजी तो बड़े वैसे निकले...

सभ्य- शालू पूरी बात तो सुन अभी से राइ मत बना..

शालू- क्या न बनाऊं जीजी तुम्हे पता नहीं क्या हो गया है..

सभ्य- कुछ नहीं हुआ है तू थोड़ा सबर रख थोड़ा और पूरी बात सुन तो ले.... कर्मा तू आगे बोल..

कर्मा- हाँ तो उन्हें देखने के बाद मेरे मन में भी बुआ को लेकर उसी प्रकार के विचार आने लगे..

शालू- वो तो आएंगे hi जब अपने पापा और बुआ को ऐसे देखेगा तो.. बढ़ो का असर hi तो पड़ता है बच्चों पर...

कर्मा- तो फिर उसके बाद याद है हम लोग गाड़ी से बुआ के यहाँ गए थे और गाड़ी में जगह काम थी और बुआ को मेरे ऊपर बैठना पड़ा था...

सभ्य- आ अच्छा हाँ याद है...

कर्मा- हाँ तो तभी वैसे भी बुआ के लिए मेरे विचार बदले हुए थे और ऊपर से वो मी ऊपर बैठी थी तो मेरा लुंड खड़ा हो गया था जो बुआ को भी महसूस हुआ अपनी गांड में..

शालू- है दिया...

कर्मा- और फिर धीरे धीरे से मैं अपना आप खोने लगा और फिर बुआ भी गरम हो गयी और धीरे धीरे बात चुदाई तक पहुँच गयी थी..

अनुज- वाह भैया सबके होते हुए तुमने गाड़ी में hi बुआ को छोड़ लिया..

शालू- बताओ कर्मा तो बच्चा था पर शशि जीजी से भी नहीं रोका गया..

कर्मा- हालत hi ऐसे हो गए मौसी की कोई खुद को रोक hi नहीं पाया... और उसी दिन पहली बार मेरी और बुआ की चुदाई हुई और फिर हम लोग उनके गाओं पहुँच गए...

कर्मा ने अपनी और माँ की बात को छुपाते हुए बताया..

सभ्य- नहीं कर्मा सच सच बता सब कुछ..

कर्मा- यही सच है माँ बताया तो..

सभ्य- नहीं ये अधूरा है पूरा सच बता..

शालू- अधूरा है तो पूरा सच क्या है..

शालू और अनुज दोनों hi हैरानी से सभ्य और कर्मा की और देख रहे थे...

सभ्य- पूरा सच ये है की उस दिन गाड़ी में सिर्फ शशि की hi चुदाई नहीं हुई थी..

ये सुनकर तो शालू और अनुज के कान खड़े हो गए और कर्मा अपना सर खुजाने लगा.

कर्मा- माँ??

कर्मा ने सभ्य से सवाल पुछा..

Sabhya-haan कर्मा अब बहुत हो गया अब सबको सच पता चलना चाहिए, सबको सब कुछ.

अनुज- कैसा सच माँ, और क्या मतलब है सिर्फ बुआ नहीं चूड़ी थी फिर और कौन ?

शालू- हाँ जीजी अब पूरी बात बताओ.

सभ्य- तो शुरू से बात उससे भी पहले की है कुछ दिन पहले... पर बात कुछ ऐसे शुरू हुई की जाने अनजाने मैं और कर्मा करीब आने लगे..

शालू- माँ बेटे हो तो करीब आओगे hi न जीजी..

सभ्य- वैसा करीब नहीं कुछ और तरीके से करीब जैसे एक माँ बेटे को नहीं आना चाहिए, कर्मा मुझसे ज़्यादा बातें करने लगा था ज़्यादा समय मेरे साथ बिताने लगा.. मुझे बार बार गले लगता..

शालू- ाचा फिर...

कर्मा- अगर सब कुछ hi बताना है माँ तो बात थोड़ी सी और पहले से शुरू करनी होगी...

शालू- हे ढैय्या ये हो का रहा है कितनी बातें छुपी हुई हैं..

सभ्य- इसके पहले क्या है कर्मा..

कर्मा- जहाँ से इस सब की शुरुआत हुई...

सभ्य- कहाँ से..

कर्मा- याद है जब राजन चाचा का घर बन रहा था तो ममता चची और पल्ली हमारे घर रुकी थी एक दो दिन के लिए..

सभ्य- हाँ तो..

फिर कर्मा ने सबको बताना शुरू किआ की कैसे वो पल्ली को पढ़ते हुए उसने और पल्ली ने सभ्य और नीलेश की चुदाई देखि और फिर कैसे उसने पल्ली को छोड़ा और फिर ये सिलसिला आगे चला और फिर ममता के साथ क्या हुआ उसके बाद कैसे अनुज और ममता ने उन्हें पकड़ा और फिर वो चारो hi एक साथ चुदाई करने लगे..

इतना सुनने पर शालू का चेहरा तो देखने लायक था साथ hi सभ्य के चेहरे पर भी हैरानी थी...

शालू- हमें तो विश्वास नहीं हो रहा की ममता जीजी और पल्ली तुम दोनों से एक साथ.. माँ और बेटी एक साथ...

सभ्य- सब कुछ हो सकता है शालू हम भी तो इन दोनों की माँ हैं और तू मौसी है फिर भी हुआ न हमारे बीच..

शालू- पर हमारी परिस्थिति अलग थी..

सभ्य- हम करें तो परिस्थिति और कोई और करे तो गलती..

Shalu-jeeji हमें तो कुछ समझ नहीं आ रहा क्या बोलेन...

पर साथ hi दोनों की hi छूट ये सब सुनकर इतनी गीली हो गयी थी इस बात से भी दोनों इंकार नहीं कर सकती thi...wohin दोनों लड़को के लुंड भी बिलकुल नुकीले होकर खड़े थी.

सभ्य- कुछ मत बोलो शालू.. कर्मा तू आगे बोल..

फिर कर्मा ने आगे बताना शुरू किआ की माँ पापा की चुदाई देखकर और माँ के नंगे बदन को देखकर कैसे वो उनकी और आकर्षित हो गया और फिर उनके करीब आने की कोशिश करने लगा और छोटे छोटे हादसे जो उनके बीच हुए फिर माँ का उससे नाराज़ होना और फिर कैसे अंत में गाड़ी में बुआ के बाद कर्मा ने अपनी माँ को भी छोड़ा..

शालू और अनुज तो ये सुनकर बिलकुल सुन्न रह गए उन्हें तो यही लगता था की कर्मा और सभ्य के बीच पहली चुदाई मजबूरी में मुक़ाबले के दौरान हुई पर सच कुछ और hi निकला,

शालू तो सोच में थी उसकी बहन अपने hi बेटे से चूड़ी वो भी इतने समय पहले... उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करे क्या बोले..

वहीं अनुज भी ये जानकार हैरान था की उसके भाई और माँ इतने दिनों से चुदाई करते आ रहे हैं और उसके भाई ने उसे नहीं बताया....

कुछ देर तक सब खामोश रहे... फिर सभ्य ने चुप्पी तोड़ी...

सभ्य- हम जानते हैं की ये सब सुनकर तुम लोगो को झटका लगा होगा जो की बिलकुल स्वाभाविक भी है और हो सकता है हमारे लिए नाराज़गी भी हो पर बस इतना चाहते हैं की जो भी मन में हो उसे बोलो, गुस्सा दिखाओ सवाल हो तो पूछो..

कर्मा- हाँ माँ बिलकुल सही कह रही हैं ममता चची और पल्ली वाली बात माँ को नहीं पता थी मुझे और अनुज को पता थी वैसे hi माँ और मेरी सिर्फ हम दोनों को..

कर्मा और सभ्य दोनों hi अनुज और शालू को देखकर उनके चेहरों को पढ़ने की कोशिश कर रहे थे अंत में एक लम्बी सांस भरके शालू बोली- जीजी क्या बीटा पैदा किआ है तुमने... इसने किसी को नहीं छोड़ा..

ये बात शालू ने गुस्से में कही या कैसे ये hi सोच रहे थे की अनुज बोलै- पर भैया तुम मुझे तो बता सकते थे न जब बाकि सब बताया तो..

कर्मा- हाँ अनुज पर क्या करता मुझे समझ नहीं आ रहा था कैसे बताऊँ मेरी हिम्मत hi नहीं हुई कभी बुआ के बारे में और बाकि सब के बारे में मैंने तुझे खुद से बताया पर माँ के बारे में बताने की हिम्मत hi नहीं हुई..

सभ्य- हाँ बीटा ये इतना आसान नहीं था पर अब सोच लिए की कुछ नहीं छिपाएंगे...

शालू- आगे बता कर्मा मैं जानना चाहती हूँ की और क्या क्या छुपाया गया है...

इसके बाद कर्मा आगे बताता गया जो भी बुआ के यहाँ हुआ वो फिर कैसे उनका पूरा परिवार इस हवस के खेल में शामिल हो गया जिसे सुनकर शालू और सभ्य दोनों की hi आँखें बड़ी हो गयी थी...

उसके बाद चोदामपुर बापिस आने के बाद क्या क्या हुआ जैसे कजरी की चुदाई और फिर जग्गू की भाभी प्रेमा की और अंत में कैसे ममता पल्ली जग्गू कर्मा और अनुज मिलकर एक साथ चुदाई करते हैं वो भी... कर्मा ये सब बोलकर चुप हो गया क्यूंकि अनुज को ये सब बातें पता थी तो उसके लिए नया नहीं था पर सभ्य और शालू तो बिलकुल हैरान थी और इस वक़्त वो लोग एक जगह रुके हुए थे आगे भी नहीं बढ़ रहे थे...

तभी अनुज बोलै- भैया तुम मंजू तै के बारे में तो बताना भूल hi गए..

और फिर अनुज ने बड़े गर्व से कालक गाओं में उनके और मंजू तै के बीच हुई चुदाई के बारे में बताया .

अनुज इतना कह hi पाया था की शालू की एक आवाज़ से सबका ध्यान उसकी तरफ गया...

शालू- बसससससससस

चोदामपुर

चोदामपुर में एक सुहानी सुबह थी पूरा गाओं उठ कर सुबह की दिनचर्या में लगा हुआ था, और पूरे गाओं में हमारे खास कुछ परिवार भी शामिल थे...

रात को देर तक चुदाई करके सोने के बाद भी आदत अनुसार ममता जल्दी उठ गयी तो देखा विनीत मस्त सोया हुआ था तो मेहमान को बिना जगाये ममता ने अपने कपडे पहने और झाड़ू लेकर सफाई में लग गयी झाड़ू लगते हुए दुसरे कमरे में देखा तो पल्ली भी अभी सो hi रही थी...

झाड़ू लगाने के बाद दोनों को सोता छोड़ ममता ने नित्य क्रिया निपटाई और फिर घर की कुण्डी बहार से लगाकर निकल गयी.. और सीधा कर्मा के घर का दरवाज़ा खटखटाया जिसे कुछ hi देर में शशि ने खोला जो अभी सिर्फ एक पेटीकोट और ब्लाउज में थी...

गेट खोलते hi ममता अंदर आ गयी और दरवाज़ा तुरंत बंद करके बोली- क्या कर रही हो जीजी ऐसे कोई देख लेता तो..

शशि- अरे कोई नहीं देखता और हमें पता था तुम hi हो हमारी प्यारी भाभी..

ये कहकर शशि ने ममता को अपनी बाहों में भरलीआ और ममता को चौंकाते हुए उसके होंठों को भी चूसने लगी...

ममता पहले तो चौंकी पर फिर उसे भी मज़ा आने लगा..

कुछ पल बाद शशि ने उसके होंठों को छोड़ा और कहा - सुप्रभात भाभी..

mamta-haaye नन्द जी क्या तरीका है सुप्रभात करने का, सुबह हो तो ऐसी..

शशि- अब यही कड़ी रहोगी की अंदर चलोगी...

ममता- अरे लो तुम्हारे सुप्रभात के चक्कर में हम भूल hi गए जिसके लिए आये थे..

शशि- अरे क्या हुआ भाभी?

शशि ने अंदर चलते हुए कहा साथ ममता भी चलदी

ममता- ये कहाँ हैं? और भाई साब भी सुबह हो गयी है जानवरों को चारा डालना है गोबर हटाना है कब जायेंगे...

शशि- आओ खुद hi देखलो भाभी...

ये कहकर शशि उन्हें कर्मा के पापा के कमरे के अंदर लेकर गयी जहाँ जाकर ममता की आँखें चौड़ी हो गयी..

कमरे में बिस्तर पर उसके पति और नीलेश पूरे नंगे बिस्तर पर सो रहे थे और उन दोनों के बीच हमारी संस्कारी सुशील बहु प्रेमा थी जो दोनों के बीच मादरजात नंगी सो रही थी..

राजन ने पीछे से नंगी प्रेमा को पकड़ रखा था.. नीलेश अपनी पीठ के बल लेते हुए थे..

ममता- है ढैय्या देखो तो यहाँ सूरज सर पर नाच रहा है और ये सब घोड़े बेचकर सो रहे हैं..

शशि - क्या करें भाभी रात को कछु ज़्यादा hi म्हणत हो गयी..

ममता- म्हणत तो तुम्हारे सपूत ने भी की हमारे ऊपर पर काम भी तो करना होता है ... अभी उठती हूँ..

ममता- अरे ऐ जी उठाऊ भाई साब उठो, बहुरिया बीटा उठ जा अब..

कुछ hi पालो में ममता ने सबको जगा दिया और सब आँखें मलते हुए उठे प्रेमा तो उठाते hi जल्दी से बिस्तर से कूदि..

prema-haaye ढैय्या इत्ती देर तक सोते रहे वहां पापाजी इंतज़ार कर रहे होंगे.. गड़बड़ हो गयी..

ममता- अरे बहुरिया कछु नहीं हुआ कहे परेशां हो रही है आराम से तैयार हो .

नीलेश- हाँ आराम से हो ममता बहु छोड़ आएगी तुझे..

नीलेश ने बिस्तर से उठकर अपना कच्चा पहनते हुए कहा...

ममता- और का..

राजन- अरे ससुर देर हो गयी आज तो चलो जल्दी जल्दी चलते हैं भैया काम पड़ा है सारा..

नीलेश- हाँ चल जल्दी..

ममता- अरे ऐसे hi जाओगे का ?

राजन - ऐसे कैसे मतलब?

ममता- अपने कच्चे में देखो तम्बू खड़ा कर रखा है और भाई साब तुमने भी....

तब तक प्रेमा कपडे पहन तैयार हो चुकी थी..

दोने ने hi देखा तो लुंड सेक्सः में खड़े थे..

राजन- धत्त तेरे की ऐ एक काम करो न तनिक चूस दे...

ममता- हम कछु नहीं करेंगे पहले hi देर हो चुकी इत्ते काम पड़े हैं..

राजन- अरे तो बहार कैसे जायेंगे हम..

ममता- ीे हैं तो तुम्हारी बहन इनसे करवाओ जो करवाना है चल बहुरिया वैसे भी बहुत देर हो गयी...

ममता प्रेमा को पकड़ कर जाते हुए बोली..

शशि- छिनार भाभी, हमारा काम बढ़ा रही हो.. रख लेंगे हम अपने भाइयों का ख्याल...

शशि ने पीछे से बोलते हुए उन्हें चिढ़ाया.. और फिर अपने घुटनों के बल बैठ गयी...

शशि- आओ जल्दी भैया...

उधर ममता प्रेमा को उसके घर छोड़कर घर पहुंची और बहार से कुण्डी खोलकर सीधे रसोई में जाकर चाय चढ़ाई... और फिर सोचा की चलो अब पल्ली और विनीत को जगा दिया जाये उसने पहले पल्ली के कमरे में देखा तो पल्ली वहां नहीं थी उसने सोचा लगता है पल्ली जाग गयी है और बाथरूम में होगी..

फिर उसने विनीत के कमरे में देखा तो देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी..

विनीत खड़ा हुआ है और उसकी प्यारी लाड़ली बेटी नीचे बैठकर विनीत का लुंड बड़े प्यार से चूस रही है





उठ गए तुम लोग ममता ने अंदर आते हुए कहा...

विनीत और पल्ली ने ममता को देखा पल्ली ने अपना काम जारी रखा वहीं विनीत ने जवाब दिया- हाँ मामी उठ गया पर सुबह लुंड खड़ा रहता है तो पल्ली उसी के लिए मदद कर रही है...

ममता- कोई बात नहीं मैंने चाय चढ़ा दी है तुम लोग आओ ख़तम करके...

विनीत- अरे ममी सुनो तुम भी आ जाओ न दोनों मिल कर चूसोगी तो जल्दी निकल जायेगा..

विनीत की बात सुन ममता मुस्कुराई और फिर आकर अपनी बेटी के बगल में बैठ गयी.. आखिर विनीत उनके यहाँ मेहमान था और उसे कैसे मन करती..

बस फिर क्या था दोनों माँ बेटी लग गयी उसकी सेवा में .

कभी बेटी लुंड चूसती तो माँ ाँद तो कभी इसका उल्टा कुल मिलकर विनीत जन्नत में था....

यहाँ विनीत को एक साथ दो दो के मज़े मिल रहे थे वहीं दूसरी तरफ उसकी माँ एक साथ दो दो लुन्डों को चूसकर उनका पानी जातक चुकी थी और अब चाय चढ़ा रही थी वहीं राजन और नीलेश दोनों hi शशि के मुँह में झड़ने के बाद अपने काम के लिए निकल गए थे.

वहीं एक तरफ प्रेमा घर में घुसते हुए थोड़ा घबराई हुई थी की देर होने की वजह से उसके ससुर कहीं गुस्सा न करें, ममता के सामने तो वो कुछ नहीं बोले थे जिसका फायदा उठाकर प्रेमा तुरंत बाथरूम में नहाने के लिए घुस गयी थी और फिर कुछ देर बाद निकली, और रसोई में घुस गयी और चाय बनाने लगी पर हुआ वही जिसका प्रेमा को दर था..

उसके ससुर जी की आवाज़ आई..

राजपाल- बहु ज़रा यहाँ आना तो...

प्रेमा ने घबराते हुए जवाब दिया- आई पापाजी..

बेचारी प्रेमा बुरी फांसी, खैर कुछ देर बाद प्रेमा अपने ससुर के कमरे में थी और अपने ससुरजी से सजा प्राप्त कर रही थी..

साड़ी कमर तक उठी हुई थी, ब्लाउज खुला हुआ था और खच्ची जांघों में फांसी हुई थी और प्रेमा दरवाज़े की ओट में झुकी हुई थी और पीछे से उसके ससुर जी पूरे नंगे होकर अपना लुंड उसकी छूट में अंदर बहार कर रहे थे....





राजपाल- अह्ह्ह्ह बहुउउउ अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह.. क्या रसीली छूट पाई है रीई..

प्रेमा- आराम से पापजीई अह्ह्ह

राजपाल- अह्ह्ह बहु वैसीईए क्याहहह किहा रात भर तूने पल्ली के यहांनंन..

प्रेमा राजपाल के इस सवाल से थोड़ी चौंक गयी और फिर संभल कर बोली- कुछःह नाहीइ पापाजी बस वो hi औरतों की बातें और कुछ खास नाहीइ..

Rajpal-ahhhh ुहममम तुझे ाचाहहह तो लगा ना..

प्रेमा- हैं हानंन्न पापजीई ाचा लगा..

राजपाल- ओह्ह्ह्ह समझ सकता हूँ अभी तू घर में अकेलिई पद जाती हैई ऐसा किआ कर कभी कभार ममता और पल्ली को तू भी यहीं बुला लिए कर..

राजपाल ने बहु की छूट में धक्के लगते हुए कहा..

प्रेमा- हॉँण्णन पापजीई बुला लिएआग करूंगीए ..

प्रेमा बेचारी चुड़ते हुए सोच रही थी कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं हो गयी..

सरलपुर

रिमझिम का मूड आज कुछ ठीक नहीं था सुबह सुबह सरे काम निपटने के बाद साथ hi अपने सास और न चाहते हुए भी अपने पति को भेजने के बाद उसे फुर्सत मिली तो जाकर नहाने गयी, वहीं उसके ससुरजी चरण सिंह आँगन में बैठे बैठे रेडियो पर पुराने गांव के साथ चाय की चुस्कियों मज़ा ले रहे थे...

तभी रिमझिम नहाकर बहार निकली कपड़ों से भरी बाल्टी और सर पर टोलिया लपटे हुए, एक एक करके आँगन में पड़ी रस्सी पर कपड़ों को फ़ैलाने के बाद रिमझिम ने सर का तौलिए खोला और अपने बालों को झटक कर सूखने लगी... इसी बीच हमारे चरण सिंह जी का ध्यान भी अपनी छोटी बहु पर गया और फिर टिक hi गया, रिमझिम की कमर और साथ hi स्लीवलेस ब्लाउज में उसका गोरा कामुक बदन चमक रहा था... बालों को झटकने से ब्लाउज में उसकी हिलती चूचियां क़हर ध रही थी..

चरण सिंह की तो आँखें एक पल को अपनी बहु पर जैम सी गयी पर किसी तरह से खुद को संभाला और सोचने लगे.. कुछ भी कहो मेरे दोनों बेटों ने क्या किस्मत पाई है एक से बढ़कर एक बहुएं मिली हैं..

इसी बीच उनकी नज़र न चाहते हुए भी रिमझिम पर चली गयी और उसी बीच बालों को झटकते हुए रिमझिम की साड़ी का पल्लू नीचे खिसक गया और जो नज़र सामने आया उसे देखकर तो चरण सिंह की आँखें चौड़ी हो गयी...

ब्लाउज से आधी बहार झांकती गोरी गोरी छुछियां नीचे खुला नंगा कामुक पेट जिसकी त्वचा देखने में hi माखन से ज़्यादा चिकनी लग रही थी और पेट के बीचों बीच कामुक प्यारी गहरी नाभि जिस देखकर hi मुँह में पानी आ जाये ..





अपनी छोटी बहु के इस नज़ारे को देखकर चरण सिंह की तो सांसे hi थम गयी उनके मुँह में पानी आ गया तो उनका हाथ जिसमे कप था खुद बा खुद होंठों तक पहुँच गया और चरण सिंह अपनी बहु के बदन को देखते हुए चाय की चुस्की लेने लगे जैसे वो चाय नहीं अपनी बहु की नाभि को चूस रहे हो... उसकी चिकनी कमर पर पानी की ठहरी हुई बूँदें देखकर चरण सिंह के मुँह में पानी आने लगा...

उन्होंने देखा की उनके पाजामे के अंदर उनका लुंड अपना सर उठा चूका है तो जल्दी से उन्होंने अपनी टांगों को एक के ऊपर एक रख. लिया और उसे छुपा लिए... वहीं रिमझिम भी बाल झाड़कर अंदर चली गयी...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
आ रहीं हूं जल्दी ही चोदमपुर, स्वागत नहीं करोगे।





आखिर कौन है ये नया मेहमान या कोई पुरानी पहचान, दोस्तों क्या किसी को कोई अंदाज़ा है। पर एक बात तो तय है कि इनके आने से चोदमपुर में बहुत कुछ खड़ा होगा, सवाल भी बवाल भी।

अपने जवाब ज़रूर दें।
 
अपडेट 162


चोदामपुर

सुबह का कान निपटा कर साथ hi खाना पीने खाकर राजन और उसका परिवार नीलेश के यहाँ थे क्यूंकि अब शशि और विनीत जा रहे थे पर जाने से पहले वो सबको जल्दी hi अपने यहाँ आने का न्योता देकर गए साथ hi वडा भी लिए..

राजन और नीलेश का मन भी पूर्वी और सावित्री के बारे में सोचकर छलांगे मरने लगा..

खैर अभी तो वो लोग चले गए थे तो अब काम पर ध्यान देना था इसीलिए नीलेश भी मोटरसाइकिल लेकर अपने नए बन रहे पूल वाले घर की और निकल गए देखने के लिए की आगे क्या और कैसे होना है वहीं राजन भी अपने खेतों के काम में लग गया बाकि औरतें अपने काम में व्यस्त थी..

खैर नीलेश पूल वाले घर से बापिस अपने बाघ में बापिस आये तो बाघ के बहार से hi उन्हें कोई साया बाघ के अंदर दिखा जिससे नीलेश थोड़ा सोच में पद गए की कौन हो सकता है, जल्दी से मोटरसाइकिल को कड़ी करके अंदर जाकर देखा तो थोड़ा हैरान रह गए...

कालक जंगल

कालक के जंगल में माहौल थोड़ा गरमाया हुआ था, कर्मा और उसकी माँ का सबकुछ सच बताने के फैसले की प्रतिक्रिया जैसी उन्होंने सोची थी वैसी नहीं आई थी, या फिर ऐसी तो शायद किसी ने उम्मीद hi नहीं की थी...

अनुज ने जैसे hi मंजू तै का किस्सा पूरा hi किआ था की शालू की एक आवाज़ से सबका ध्यान उसकी और गया..

शालू- बसससससससस अब बंद करो..

शालू ने चिल्लाते हुए बोलै जिससे सब चौंक गए..

अनुज- क्क्क्य हुआ मौसी...

शालू- बस्स्स अब सब चुप्प कोई कुछ नहीं बोलेगा...

शालू ने गुस्से भरी आवाज़ में कहा तो अनुज चुप हो गया सभ्य और कर्मा भी शालू के इस अचानक से चिल्लाने से हैरान थे..

कुछ देर तक सिर्फ ख़ामोशी छै रही कोई कुछ नहीं बोलै और फिर अचानक से जैसे कोई बांध पानी के तेज़ बहाव से टूट पड़ता है वैसे hi शालू के आँखों का बांध भी टूट गया और वो बिलख बिलख कर रोने लगी..

उसे इस तरह रोटा देख बाकि तीन लोग बिलकुल परेशां हो गए सभ्य ने जल्दी से जाकर अपनी छोटी बहन को बाहों में भरकर छुप करने की कोशिश की, तो इस बार सबको और हैरान करते हुए शालू ने उसे धक्का देकर अपने से दूर कर दिया..

सभ्य - शालू क्या कर रही है ये क्या हुआ है रो क्यों रही है .?

सभ्य ने घबराते हुए शालू पर प्रश्नों की बौछार कर दी

शालू- दूर रहो जीजी तुम हमसे, बस दूर रहो

शालू ने रट हुए जवाब दिया, और फिर रोने लगी..

कर्मा- मौसी शांत हो जाओ और आखिर माँ ने ऐसा क्या किआ जो तुम ऐसे बोल रही हो?

शालू- कर्मा बड़ो के बीच में बोलने की कोई ज़रुरत नहीं है .

कर्मा अपनी मौसी का गुस्से वाला रूप पहली बार देख रहा था इसलिए वो भी चुप हो गया किसी को समझ नहीं आ रहा था की क्या हो गया मौसी को यूँ अचानक..

सभ्य - शालू आखिर हुआ क्या है क्यों रो रही है क्यों इतना गुस्सा आखिर हमारी गलती तो बता दे..

शालू- गलती? गलती तुम्हारी नहीं जीजी गलती मेरी है... गलती मेरी है जो मैं तुम्हारे गाओं चली आई..

शालू ने गुस्से में रट हुए कहा

सभ्य - ये क्या कह रही है तू, शालू सेक्सः समझ कर बोल.

शालू- सोच समझ कर hi बोल रही हूँ और अभी तो सब समझ आया है.

सभ्य- देख लड़ो शांत हो जा..

सभ्य ने फिर से प्यार से मानाने की कोशिश करते हुए कहा..

शालू- रहने दो जीजी अब समझ आ गया है मुझे कितनी बड़ी गलती करदी मैंने चोदामपुर आकर.. क्या सोचा था क्या हो गया..

अनुज और कर्मा बस दोनों को देखे जा रहे थे क्या करें कैसे किसे समझाएं उन्हें समझ नहीं आ रहा था,

सभ्य- आखिर हुआ क्या है ऐसे क्यों बोल रही है तू शालू?

शालू- हुआ क्या है? हुआ ये है की मेरी ज़िन्दगी बर्बाद हो गयी है. चोदामपुर आने से. पहले परेशां थी पर काम से काम खुद की अपने पति की आँखों में आँखें दाल के देख तो सकती थी.. पर यहाँ आकर...

सभ्य- कुछ नहीं बदला है..

शालू- सब बदल गया है जीजी, और साडी गलती मेरी hi है, औलाद के लालच में अंधी होकर न जाने क्या क्या करती चली गयी... पहले बेऔलाद hi सही पर पतिव्रता तो थी अब देखो अपनी उम्र के आधे लड़को से चुद रही हूँ..

शालू रो रो कर बड़बड़ाये जा रही थी

सभ्य- शालू बस अब चुप हो जा,

शालू- बहुत बड़ी गलती हो गयी मुझसे पहली चोदामपुर आकर और फिर दूसरी यहाँ आकर, सब पता था की जो हो रहा है गलत हो रहा है पर खुद से झूठ पर झूठ बोलती गयी कभी मजबूरी तो कभी हालात पर हो क्या रहा था सब अपनी अपनी हवस मिटा रहे थे और वो भी अपने hi परिवार में.. और मैं भी इसमें शामिल होती चली गयी.. घिन आ रही है मुझे खुद से...

सभ्य- शालू बस कर बहुत हो गया तू अब ज़्यादा hi बोल रही है..

शालू- क्यों जीजीई सच सुना नहीं जा रहा, क्या परिवार है तुम्हारा पति अपनी सगी बहन को छोड़ता है, पत्नी अपने बेटे से चुदती है और बीटा उसकी तो पूछो मत बस जो दिखे उसी की टांगों के बिच घुस जाता है. अरे कुत्ता भी अपने घर से दूर जाकर हगता है..

सभ्य - शालू अब बस चुप हो जा और अगर तुझे लगता है मेरा परिवार ख़राब है गलत अहइ तो रहने दे पर जो तूने किया क्या उसके लिए हमने तुझसे कोई जबरदस्ती की...

शालू- यही तो मेरी गलती थी की तुम्हारे साथ आती चली गयी, हर गलती पर सोचा की कोई नई बहन है मेरी मेरा परिवार है.. पर उस चक्कर में अपने पति को भूल गयी, कैसे आँखें मिलाऊँगी मैं उनसे अब... उन्हें अब तक एक बच्चा भी नहीं दे सकीय पर उन्होंने आज तक मुझसे कुछ भी न कहा, और ऐसे पति को मैं धोखा दे रही हूँ...

सभ्य - शालू पति मेरे भी हैं तू एक बार सुन तो ले सही...

शालू- क्या सुनु और मेरे पति तुम्हारे पति की तरह अपनी बहन पर नहीं चढ़ाते हैं...

सभ्य- शालूऊ अब बस्स्स बहुत बोल चुकी तू.

शालू- क्या बोल चुकी मैं, और मुझे तुमसे यही उम्मीद थी जीजी जिसने अपने बाप को नहीं छोड़ा वो अपने बेटों को कैसे छोड़ेगी... मुझे समझ जाना चाहिए था..

सभ्य- शालूऊ..

इतना कहने के साथ hi सभ्य फुट फुट कर रोने लगी...

कर्मा और अनुज भी ये बात सुनकर साथ hi अपनी माँ का रोना देखकर बिलकुल स्तब्ध रह गए कर्मा ने आगे बढ़कर अपनी माँ को संभाला

कर्मा- माँ माँ छुप हो जाओ माँ...

अनुज भी अपनी माँ के पास पहुँच गया और उसे सँभालने लगा...

कर्मा- क्या हुआ है मौसी अभी तक सब ठीक था और अचानक हम सब तुम्हारे दुश्मन बन गए..

कर्मा ने थोड़ा गुस्सा दिखते हुए कहा..

शालू- क्यूंकि अब सब समझ आ गया है की कितनी गलत हो चुकी हूँ मैं तुम सब की वजह से..

कर्मा- अपनी बहन को ऐसे बोल रही हो ये गलत नहीं है, और अपने बाप को भी नहीं छोड़ा इसका क्या मतलब है..

शालू- अपनी प्यारी माँ से hi पूछ न वो तुझे बताएगी अपनी करतूत..

कर्मा ने ये सुनकर अपनी माँ की और देखा जो की बस रोये जा रही थी...

कर्मा- क्या बात है माँ? पहले रोना बंद करो. और बताओ आखिर क्या बात है.

शालू- बताओ जीजी बतादो मेरी बात का क्या मतलब है... तुम तो अपने बच्चों से कुछ नहीं छिपाती न..

कर्मा और अनुज बस देखे जा रहे थे की आखिर ये हो क्या रहा है.

शालू- नहीं बता पाओगी और नहीं बताओगी तुम..

कर्मा- आखिर बात क्या है मौसी, क्यों माँ को ऐसे बोल रही हो.

शालू- बात ये है की तेरी माँ किसी को नही छोड़ती न बेटे को और न hi अपने बाप को..

कर्मा- मौसी सही सही बताओ क्या बात है

कर्मा ने चिल्लाते हुए कहा. ावहिं सभ्य अब भी लगातार रोये जा रही थी और अनुज उसे चुप करने की कोशिश कर रहा था,

शालू- तो सुन इनकी शादी के कुछ महीने बाद ये नानी के यहाँ आई हुई थी यानि अपने मायके.. उस दौरान हम सब आँगन में hi सोते थे तो एक रात को मेरी नींद पेशाब की वजह से खुली और मैंने उठ कर जो देखा न वो देखकर मेरा सर चक्र गया, जीजी अपनी खत पर एक करवट होकर लेती हुई थी पर सबसे बड़ी बात जीजी की साड़ी कमर पर से ऊपर उठी हुई थी यानि वो पेट के नीचे बिलकुल नंगी थी और खत के बगल में तेरे नाना खड़े हुए थे वो भी नीचे से बिलकुल नंगे और उनके हाथ में उनका लुंड था जिसमे से रास की धार निकल रही थी, और तेरी माँ के चूतड़ों को भीगा रही थी,

मैं तुरंत पलट कर आँखें बंद करके लेट गयी और उस रात में इतना रोइ की मेरी अपनी सगी बहन अपने hi बाप के साथ वो भी सबके होते हुए..

ये सुनकर कर्मा और अनुज तो बिलकुल सुन्न रह गए, कुछ देर के लिए बिलकुल सन्नाटा छ गया, फिर कर्मा की आवाज़ आई

कर्मा - क्या ये सच है माँ?

सभ्य इस समय चुप हो गयी थी और अपने आंसुओं को पोंछते हुए बोली- हाँ जो भी इसने कहा सच है..

ये सुनकर तो अनुज और कर्मा और हैरान हो गए उनकी माँ अपने hi पिता के साथ वो भी इतना पहले से ये तो उन्होंने सोचा भी नहीं था कभी की ऐसा हो सकता है.

इतना बोलने के साथ hi सभ्य कड़ी हुई और चलने लगी..

कर्मा ने अनुज को उसके साथ जाने का इशारा किआ..

अनुज अपनी माँ के साथ साथ चला गया..

वहीं कर्मा ने अपना ध्यान मौसी की और लगाया..

कर्मा- अगर ये बात तुम्हे पता थी मौसी तो अब तक किसी को क्यों नहीं बताया...

Shalu-kyunki मुझे लगा था की मुझे किसी ने नहीं देखा पर तेरी माँ ने और शायद बापू ने भी मुझे देख लिए था और अगले hi दिन अपनी शादीशुदा ज़िंदगी का हवाला देकर तेरी माँ ने मुझसे कसम ली थी की ये मैं कभी किसी को न बताऊँ..

कर्मा- तो आज क्यों कसम तोड़ दी मौसी..

कर्मा ने चिल्लाते हुए कहा...

शालू- क्यूंकि ज़रूरी था तेरी माँ ने जो किआ उसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए और मैंने जो गलत किआ उसकी मुझे ये कहकर वो फिर से रोने लगी..

कर्मा को समझ नहीं आ रहा था की अचानक ाचा खासा सब था और अब क्या हो gaya...wo क्या करे... उसका भी सर चक्र रहा था, शालू अब भी वहीं बैठकर रोये जा रही थी..

कुछ hi देर में सभ्य और अनुज बापिस आये और सभ्य आयकर बोली- अनुज, कर्मा थोड़ी देर के लिए यहाँ से जाओ हमें शालू से कुछ बात करनी है.

कर्मा सोचने लगा अब ऐसी कौनसी बात है जो छुपाई जाये..

पर माँ की बात मानते हुए वो और अनुज आगे बढ़ गए..

अनुज- भैया ये सब क्या हो गया सब सही था और अब अचानक.

कर्मा- इसीलिए मैंने माँ से कहा था की सब्मिट बताओ हर किसी में सच बर्दाश्त करने की ताकत नहीं होती और वो hi मौसी के साथ हुआ वो बर्दाश्त नहीं कर पाई .

Anuj-haan ये गलत फैसला था सब कुछ बताने का, वैसे भैया तुम्हारे और माँ के बीच जो पहले से हुआ उससे मुझे कोई परेशानी नहीं है .

कर्मा- मैं जनता हूँ अनुज और मुझे पता था की तू समझेगा.

कर्मा ने अनुज के कंधे को थपथपाते हुए कहा..

अनुज- पर अब क्या होगा.. क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा.

कर्मा- अब हम कुछ नहीं कर सकते बस थोड़ा समय दे दोनों को शांत होने दे..

अनुज- वैसे भैया वो माँ और नाना वाली बात तुम्हे क्या लगता है.

कर्मा- होने को तो कुछ भी हो सकता है अनुज और हो सकता है ऐसा हो भी...

अनुज- हाँ जब फूपाजी और पूर्वी दीदी के बीच हो सकता है तो नाना और माँ के बीच क्यों नहीं..

कर्मा- ाचा अगर ये सच भी है तो क्या तेरी नज़रों में माँ की इज़्ज़त काम हो जाएगी या उनके लिए तेरा नजरिया बदल जायेगा..

अनुज- नहीं बिलकुल नहीं भैया माँ मेरे लिए हमेशा मेरी माँ जैसी hi रहेगी चाहे मैं उन्हें खुद छोड़ लूँ या चाहर उनके और नाना के बारे में पता चल जाये..

कर्मा- यही मैंने सोचा था..

यहाँ ये दोनों बातें कर रहे थे की उनके पास दोनों बहनें आ गयी..

सभ्य- कर्मा अनुज अब हमें चलना चाहिए, और जल्दी से जल्दी गाओं पहुंचना है.

कर्मा- ठीक है माँ, चलते हैं.

अनुज- हाँ .

सभ्य- एक और बात जो भी अभी हुआ इसके बारे में अब कोई बात नहीं होगी..

सभ्य की आवाज़ में आदेश था जिसे दोनों बेटो ने स्वीकारा..

शालू के चेहरे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं थी.. खैर चारो चलने लगे .. कर्मा और अनुज के मन में अब भी सवाल थे की उसकी मौसी और माँ के बीच न जाने क्या बात हुई होगी खैर कर्मा आगे रास्ता देखता हुआ साबको चलता रहा पर आपस में कोई ख़ास बातचीत नहीं हो रही थी, चारो के मन में hi तूफ़ान था जिसमे चारो खोये हुए थे.

रुक रुक कर पूरी रात चलते रहे और सुबह होने तक वो लोग दरवाज़े पर पहुँच गए..

जहाँ जग्गू और मंजू उन्हें मिले... सबके बीच थोड़ी बहुत बातें हुई वैसे ज़्यादातर तो मंजू और जग्गू hi कर रहे थे और बाकि सब बस जवाब दे रहे थे..

जग्गू और मंजू दोनों को hi चारो का व्यवहार कुछ अजीब लगा पर सोचा शायद कालक में जो हुआ उस वजह से थोड़े चिंतित हैं की घर जाकर क्या होगा वैसे यही चिंता दोनों माँ बेटे को भी थी...

खैर फिर वहां सबने अपने पूरे कपडे पहने जो उनके थैले ने थे और फिर सब बापिस चोदामपुर के लिए निकल गए... कर्मा ने पास hi के गाओं से एक गाडी वाले को किराये पर कर लिए जो की उन्हें चोदामपुर छोड़ने वाला था और फिर रस्ते भर भी ज़्यादा कुछ नहीं हुआ अधिकतर लोग थके होने के कारन सोते रहे...

चोदामपुर पहुंचते पहुँचते शाम हो गयी.. कर्मा ने अपने घर के बआहर गाड़ी रुकवाई और फिर उतारकर दरवाज़ा खटखटाया इतने बाकि सब भी उतर गए..

कुछ देर बाद दरवाज़ा खोला और जिसने खोला उसे देखकर सब लोग हैरान रह गए..

कर्मा- आप कौन????

कर्मा ने सामने कड़ी औरत को देखते हुए कहा,

औरत ने उसे देखा और फिर उसके सर पर हाथ फेरा और बोली- हाय हमारा लाल कितना बड़ा हो गया है...

कर्मा और अनुज दोनों हैरान रह गए साथ बाकि सब भी.. खासकर सभ्य हैरान और परेशां दोनों थी उसे देखकर..

कर्मा सोच रहा था वैसे hi साला मौसी की वजह से दिमाग ख़राब पूरा रास्ता ऐसे गुजरा जैसे किसी के मातम से आ रहे हो और अब ये बाला कौन है..

सामने एक अधेड़ उम्र की औरत थी, बदन पूरा भरा हुआ, छुछियां मंजू चची की टक्कर वाली, मांसल पेट, गहरी नाभि, कमर में पड़ी सिलवटें कुल मिलकर एक ाचा खासा भरा हुआ माल था,





पर माल कैसा था उससे भी बड़ा सवाल ये था की ये आखिर है कौन?

जो की सबके मन में था इतने में सभ्य कर्मा के बगल में आकर कड़ी हो गयी और सबको हैरान करते हुए झुककर उस औरत के पेअर छूने लगी..

जिसे देखकर कर्मा अनुज और हैरान रह गए.. इतने में पीछे से नीलेश भी वहां पहुंचे जो अपने परिवार को देखकर बहुत खुश थे.

कर्मा और बाकि सब नीलेश से मिले जिसके बाद नीलेश सबको अंदर आने को कहा और बहार खुद जाकर गाड़ी वाले का हिसाब करने लगे..

अब साडी भीड़ कर्मा के आँगन में लगी हुई थी..

वो औरत एक खत पर बैठी थी, और सभ्य उसके पास और अभी शालू उस औरत के पेअर छू रही थी...

कर्मा और अनुज ये देखकर हैरान थे की ये कौन हैं मंजू और जग्गू भी, इतने में पल्ली और ममता को भी सबके आबे की खबर लग गयी थी तो वो दोनों भी दौड़ी चली आई थी..

ममता और पल्ली भी सबको देखकर खुश हो गए. ममता ने पल्ली को इशारा किआ तो वो और ममता रसोई में चली गयी और कुक्सह hi देर में पल्ली ने सबको पानी पिलाया और ममता ने चाय चढ़ा दी थी..

ितमे में नीलेश भी आ गए थे खैर भीड़ वाला माहौल था सब के पास सुनाने के लिए कहानियां थी कोई किसी से बात कर रहा था कोई किसी से, इधर कर्मा और अनुज इसी में परेशां थे की ये औरत आखिर है कौन, सभ्य और शालू भी अभी अपनी मन की दुविधा को एक तरफ करके सबसे बातों में लगे हुए थे..

कर्मा ने नीलेश से इशारे में पुछा की ये औरत कौन है?

नीलेश ने जवाब इशारे की जगह बोल के दिया- अरे कर्मा, अनुज तुमने अपनी तै के पेअर छुए की नहीं...

कर्मा सोच में पद गया की ये नयी ताई कब पैदा हो गयी..

इतने में वो औरत खुद बोल पड़ी- अरे अरे रहने दो लल्ला बेचारे पहचानते hi कहाँ है, दोनों बहुत प्यारे हैं इन्हे देखकर hi हमारे कलेजा में ठंडक पद गयी.

खैर मजबूरी में hi सही कर्मा और अनुज ने उस औरत के पेअर छुए जिसके बदले में औरत ने दोनों के हाथ चूम कर आशीर्वाद दिया...

खैर चाय आई और फिर सबने पि एयर फिर जग्गू और मंजू अपने घर के लिए निकल gaye...wohin नीलेश ने भी सबसे कहा की सफर से आये हो आराम करलो थक गए hoge...jo की सही बात भी थी..

अपने कमरे में जाते हुए कर्मा ने एक बार मौसी को देखा जो की सबके सामने तो बिलकुल सही लग रही थी पर अकेले में उनका मुँह अभी भी बना हुआ tha...khair कर्मा ने एक लम्बी सांस ली और फिर अपने बिस्तर पर जाकर पसर गया..

वैसे साडी ख़ुशी एक तरफ और बापिस अपने बिस्तर पर लेटने का सुख एक तरफ और उसी अपने बिस्तर अपनेपन और आराम को कर्मा सह नहीं पाया और कब उसकी नींद लग गयी उसे खुद पता नहीं चला..

सरलपुर

रिमझिम और चंचल ने सबको रात का खाना करवा दिया था और बस अब रसोई का काम समेत रहे थे, वहीं हमारे घर की राजकुमारी पढाई में व्यस्त थी, पर आज ख़ुशी के पेट में एक अलग सी गुदगुदी हो रही थी क्यूंकि आज रात ये तय हुआ था की रिमझिम बहु को अकेले न सोने दिया जाये इसलिए ख़ुशी को उसके साथ सोना था और उसी बारे में सोच सोच कर ख़ुशी को एक अजीब सी उत्तेजना हो रही थी, उसे याद आ रहा था की कैसे सोते हुए उसने रिमझिम भाभी को चूमा था और ये सोच सोच कर वो गरम होती जा रही थी, और उसने आअज भी मन बना लिए था की अगर मौका मिला तो वो पीछे नहीं हटेगी..

वहीं घर के मुखिया अपने कमरे में बिस्तर के सिरहाने बैठे थे और आज कल जो उनके साथ हो रहा था उसे लेकर चिंतन में थे, क्यूंकि अपनी बहुओं को लेकर उनके मन में ऐसे ख्याल आने लगे हैं, जबकि ये गलत है, उन्हें अपने आप पर काबू करना चाहिए.. ये सब सोच hi रहे थे की रिमझिम दूध लेकर उनके कमरे में आई..

रिम- लो पापाजी दूध पी लीजिये

चरण सिंह- अरे बहु पेट भर गया आज रहने दे..

रिम- नहीं पापाजी दूध तो आपको पीना hi पड़ेगा.

रिमझिम की इस बात पर चरण सिंह की नज़र अपने आप hi रिमझिम की छूछीयों पर चल गयी और जिनका उभर देखकर चरण सिंह के मन में बिजली दौड़ने लगी फिर भी किसी तरह उन्होंने खुद को संभाला और नज़र हटाई..

चरण Singh-chal अब तू इतना बोल रही है तो पिलदे दूध..

Rim-ye हुई न बात ाचा आपने अपनी बप की दवाई ली..

चरण सिंह- ंन्न नहीं .

रिम- तो पहले वो लो पापाजी दूध बाद में पि लेना..

रिमझिम ने दूध अलग रख दिया और घूम कर टेबल पर पड़ी दवाई उठाई साथ hi गिलास में पानी भरने लगी,

वही चरण सिंह की नज़र तो अपनी बहु पर hi जैम गयी, साड़ी में कासी हुई उसकी गांड, ब्लाउज और साड़ी के बीच झांकती नंगी चिकनी और दूध सी गोरी कमर और ब्लाउज में से दिखती मखमली पीठ,





हाय क्या बदन है बहु का चरण सिंह मन hi मन सोचने लगे...

तभी गिलास लेकर रिमझिम पलटी तो चरण सिंह ने अपना चेहरा घुमा लिए और फिर रिमझिम ने दवाई दी जिसे चरण सिंह ने ली. और फिर रिमझिम चरण सिंह को दूध पीकर hi सोने की बोलकर जाने लगी तो चरण सिंह पीछे से बहु की गांड को तबतक निहारते रहे जब तक वो ओझल न हो गयी और ये सब करते हुए उनका हाथ अपने आप hi उनके कड़क होते लुंड पर आगया..

चरण सिंह- को जब ये एहसास हुआ की वो अपनी बहु को देखकर अपना लुंड मसल रहे हैं तो उन्होंने खुद का हाथ खींच लिए और खुद को धिक्कारने लगे.

वहीं रिमझिम अपना सारा काम निपटा कर अपने कमरे में पहुँच चुकी थी और बस चद्दर वगेरा ठीक कर रही थी और सोच रही थी की आज उसे बिना चुदाई के hi गुजारनी पड़ेगी...

तभी उसे किसी ने अपनी बाहों में अचानक से भर लिए जिससे वो चौंक गयी और जब उसने चेहरा घुमाकर देखा तो हँसते हुए बोली - क्या ख़ुशी दीदी तुमने तो हमें डरा hi दिया...

ख़ुशी- डरा दिया या भैया की याद दिला दी...

रिम- अरे तुम भी न दीदी.

ख़ुशी- वैसे अब याद आये या कुछ भी आये आज सोना तो तुम्हे मेरे साथ hi है भाभी..

रिमझिम और ख़ुशी में शादी के कुछ hi दिनों में एक अलग hi रिश्ता बन गया था ननद भाभी के साथ साथ दोनों अछि सहेलियां भी बन गयी थी और जिसका कारन शायद उनकी उम्र में ज़्यादा अंतर नहीं होना भी था... तो दोनों एक दुसरे से खूब मज़ाक करती थी और मस्ती करती थी...

रिम- अब क्या करें चलो चला लेंगे तुमसे hi काम..

ख़ुशी- अरे हमसे क्या काम चला लोगी..

रिम- अरे कुछ नहीं दीदी

रिमझिम ने हँसते हुए जवाब दिया..

ख़ुशी- वैसे भाभी तुम्हे नींद तो आ जाएगी न भैया के बिना...

रिम- अब क्या बताएं दीदी नींद का.

ख़ुशी- क्यों नहीं आएगी...

रिम- पता नहीं..

रिमझिम ने शरमाते हुए कहा...

ख़ुशी- अरे भैया नहीं तो क्या हुआ मैं तो हूँ भाभी मुझे पकड़ कर सो जाना..

ख़ुशी ने रिमझिम को जकड़ते हुए कहा..

रिमझिम इस बात पर पलटी और ख़ुशी के बदन पर हाथ फिरते हुए बोली- सोच लो ननद रानी बाद में हम पर इलज़ाम लगादो की हमने तुम्हारी इज़्ज़त लूट ली...

इस बात पर ख़ुशी का भी पलटवार आया देख लेते हैं की कौन किसकी इज़्ज़त लूटता है...

ये कहकर ख़ुशी ने रिमझिम को धक्का देकर बिस्तर पर बिठा दिया और खुद भी उसके बगल में उसकी तरफ चेहरा करके बैठ गयी...

रिम- वैसे ननद रानी तुम सुन्दर तो बहुत हो, तुम्हारे पति या बॉयफ्रेंड के तो मज़े hi मज़े हैं.

ख़ुशी- धत्त्त भाभी, और मुझसे ज़्यादा सुन्दर तो तुम हो मैं लड़का होती तो अब तक चूम लेती तुम्हे..

रिम- चूमने के लिए लड़का होने की क्या ज़रुरत..

रिमझिम ने शरमाते हुए कहा.. और हंसाने लगी.

पर इस बात को ख़ुशी ने गंभीरता से ले लिए..

ख़ुशी- अरे ये भी सही कहा भाभी..

और ये कहकर ख़ुशी ने रिमझिम का सर पकड़ कर अपनी और कर लिए जैसे उसे चूमने hi वाली हो..

ख़ुशी- बताओ चूम लूँ?

रिम- इतनी हिम्मत है तुम्हारे अंदर ननद रानी?

ख़ुशी- अभी तुमने ख़ुशी की हिम्मत देखि hi कहाँ है.

ये कहकर ख़ुशी ने अपना सर झुककर रिम के गाल पर चूम लिए..

रिम- अरे धत्त ये क्या है ुए कोई चूमना होता है.

ख़ुशी- तो फिर क्या होता है चूमना भाभी.

रिम- जब तक होंठ आपस में कुश्ती न करें वो चूमना hi क्या..

ख़ुशी- धत्त्त भाभी तुम बड़ी वो हो.

Rim-ab तुमने hi पुछा चूमना क्या होता है तो मैंने बता दिया..

ख़ुशी- एते तो वो थोड़े hi कर सकते हैं हम लोग.

रिम - अब तुमने hi अपने भैया की कमी पूरी करने की बात कही थी और वो तो हमें ऐसे hi चूमते हैं.

ख़ुशी- ने शर्म से अपना चेहरा ढँक लिया- भाभी तुम भी न तुम्हे शर्म नहीं आ रही..

रिम- नहीं बल्कि तुम ऐसे शर्मा रही हो जैसे नयी नवेली दुल्हन हो..

ख़ुशी- मैं नहीं शर्माती

रिम - तो फिर हमें चूमो,. चूसो हमारे होंठों को..

रिमझिम ख़ुशी को चिढ़ाते हुए बोली

ख़ुशी- भाभी ज़्यादा मत बोलो हम चूस भी लेंगे..

Rim-to दर क्यों रही हो चूसो न.

ख़ुशी- हमें शर्म आती है.

रिम- हमने कहा hi था हिम्मत नहीं है तुम्हारे अंदर.

ख़ुशी- ाचा ठीक है पर तुम भैया को तो नहीं बताओगी न.

रिम- अरे हम क्यों बताने लगे उन्हें हम लड़कियों की बात..

मन hi मन ख़ुशी बहुत उत्तेजित और खुश भी हो रही थी मन तो उसका बहुत कर रहा था अपनी भाभी के होंठों को फिर से चूमने का पर खुल के कैसे कहती.

पर मज़ाक में जो भी बातें हो रही थी उसे बहुत्तत्त मज़ा आ रहा था वहीं रिमझिम तो बेचारी के साथ खेल रही थी, और कहीं न कहीं ख़ुशी का बदन उसे भी आकर्षक लगता था. वहीं अपनी बहन पूर्वी और चची माँ सबके साथ वो औरत के साथ सम्भोग सुख को भोग चुकी थी तो उसे ख़ुशी के साथ क्या आपत्ति होती..

ख़ुशी- भाभी सच में?

रिम- अरे तुम रहने दो.

ख़ुशी- ाचा ाचा ठीक है, मुझे भी एक बार करके देखना है.

रिम- सच्ची तो फिर करो..

अब दोनों के hi चेहरे एक दुसरे के सामने थे पर कोई पहल नहीं कर रहा था, रिमझिम चाहती तो थी पर वो सब कुछ ख़ुशी की तरफ से होने देना चाहती थी.

वहीं ख़ुशी पहल करने से दर भी रही थी और झिझक रही थी ये सोचकर न जाने उसकी भाभी उसके बारे में क्या सोचेगी..

ख़ुशी की झिझक को रिमझिम अछि तरह से समझ रही थी..

रिम- ाचा दोनों करते हैं देखते हैं कैसा लगता है पर तुम बताओ सच में करना है..

ख़ुशी- हाँ भाभी सच में

ख़ुशी उछालते हुए उत्सुकता से बोली....

दोनों ने धीरे धीरे से अपना चेहरा आगे बढ़ाना शुरू किआ रिमझिम ने अपना एक हाथ ख़ुशी की गर्दन पर रख लिए तो देखा देखि ख़ुशी ने भी वैसा hi किआ..

जब दोनों के चेहरे बिलकुल पास आ गए तो दोनों ने एक दुसरे की आँखों में देखा और फिर न जाने क्या इशारा हुआ की दोनों hi आगे बढ़ गयी और अगले hi पल दोनों के होंठ आपस में मिल गए...





जिसके साथ hi दोनों के बदन में एक करंट सा दौड़ गया खासकर ख़ुशी के जिसने इससे पहले ऐसा कभी महसूस नहीं किआ था, उसको अपनी छूट में नमी साफ़ साफ़ महसूस होने लगी अपनी भाभी के रसीले होंठों का स्वाद पाकर..

वहीं रिमझिम को भी ख़ुशी के ुनछुये गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठों का कोमल स्पर्श बहुत मीठा लगा..

पर एक अंजनी झिझक से दोनों अगले hi पल अलग हो गयी और हांफते हयद डीके दुसरे को देखने लगी..

पर दोनों के बीच बढाती उत्तेजना साफ़ महसूस की जा सकती थी.

रिमझिम ने दोबारा चेहरा आगे किआ तो ख़ुशी तो पहले hi मन बना कर आई थी की वो आज पीछे नहीं हटेगी उसने भी अपना चेहरा आगे कर दिया, और एक बार फिर से दोनों के होंठ मिल गए पर इस बार पहले से भी ज़्यादा उत्सुकता और आक्रामकता के साथ दोनों hi एक दुसरे के होंठों के रास को पीने लगी, ख़ुशी के लिए तो ये एहसास बेहद नया पर उतना hi मज़ेदार था उसे उसकी भाभी के होंठों का स्वाद बहुत पसंद आ रहा था जिसे वो बड़ी आक्रामकता से चूस रही थी, ख़ुशी की उत्सुकता रिमझिम को भी बहुत भ रही थी...

कुछ hi देर में ख़ुशी को कुछ और सिखाते हुए रिमझिम ने अपनी जीभ ख़ुशी के मुँह में घुसा दी जिससे ख़ुशी तो उत्तेजना से पागल हो गयी और अपनी भाभी की जीभ को चूसने लगी इसके बाद ख़ुशी ने भी ऐसा hi किआ दोनों hi बहुत गरम हो गयी थी खासकर ख़ुशी जिसके साथ ये पहली बार हो रहा था,

ख़ुशी ने अब तक हालाँकि फ़ोन पर काफी ऐसे फिल्में देखि थी पर आज खुद से वो महसूस करके उत्तेजना से पागल होती जा रही थी और इतनी फिल्में वो देख चुकी थी की क्या करना है उसे पता था बस उससे मिलने वाले आनंद से वो अनजान थी..

कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे... पर अब ख़ुशी उत्तेजना के सफर पर काफी दूर निकल आई थी जहाँ से लौटना उसके लिए अब मुमकिन नहीं लग रहा था..

इसीलिए ख़ुशी ने अगले hi पल रिमझिम को धक्का देकर बिस्तर पर लिए दिया और साड़ी के पल्लू को खींचकर नीचे कर दिया रिमझिम के ब्लाउज से झांकती चूचियां और उसका नंगा पेट ख़ुशी के सामने आ गयी जिसे देखकर ख़ुशी खुद को रोक नहीं पाई और झुककर अपने होंठ उसने अपनी भाभी के पेट पर लगा दिए





अपनी भाभी के चिकने पेट को वो जगज जगह चूमने लगी, रिमझिम को ये बहुत ाचा लग रहा था और जैसा वो चाहती थी की ख़ुशी पहल करे वैसा hi हो रहा था..

पर फिर भी खुद को ख़ुशी की नज़रों में ाचा साबित करने के लिए वो कुछ न कुछ बड़बड़ाने लगी

रिम- ahhhhhhhhhh ख़ुशी दीदी एहहह अह्ह्ह क्या कररही हो अह्ह्ह्ह ये मत करो गुदगुदी होती है आह्हः..

जिसे सुनकर ख़ुशी का मनोबल और बढ़ रहा था और ख़ुशी को ऐसा लग रहा था की वो नियंत्रण में है और सब उसके अनुसार हो रहा है पर असल में कुछ और hi था पर सबसे ज़रूरी ये था की दोनों को hi जो वो चाहती थी मिल रहा था..

ख़ुशी अपनी भाभी के पेट के हर एक हिस्से को चाट चूस रही थी और उसी में आगे बढ़ते हुए उसने अपनी जीभ को रिमझिम की नाभि में घुसा दिया और चूसने लगी...

रिम- ahhhhhhhhhh didiiiiiiiiiii uiiiiiiiiii माआ मत करूऊऊऊ अह्ह्ह्हह..

ख़ुशी तो रिमझिम की सिसकियों से और उत्तेजित हो रही थी और उसी उत्तेजना वश और जब उसका मन अपनी भाभी की नाभि से भगाया तो उसने अपना ध्यान ऊपर की और लगाया और भाभी के ब्लाउज के बहार झांकती गोरी गोरी छूछीयो को चाटने लगी..





रिमझिम का तो बुरा हाल होने लगा वहीं ख़ुशी पूरे जोश में थी अपनी भाभी के बदन को देखकर उससे रुका नहीं जा रहा था..

Rim-ahhhhhhhhhh didiiiiiiiiiii मत करूऊऊऊ अह्ह्ह्ह ये सही नहीं हैईईई..

Khushi-uhmmmm बस्स्स भाभीई सब सहीई है, तुम्हे ाचा लग रहा है न?

रिम- हानंन्न पररर..

ख़ुशी- पररर वार्डर छोडो भाभी और मज़ा उठाओ इस पल का.

ख़ुशी उसकी नज़रों में अपनी भाभी को मन रही थी वहीं रिमझिम अपनी ननद से खेल रही थी पर जो मज़ा उसकी ननद उसे दे रही थी उससे रिमझिम इंकार नहीं कर सकती थी.

रिम- अह्ह्ह्ह didiiiiiiiiiii तुम्हारी जीभ अह्ह्ह्ह कितनी गरम लग रही है..

ख़ुशी बेहद खुश थी की वो अपनी भाभी के बदन से खेल प् रही है..

और उसी क्रम को आगे बांधते हुए ख़ुशी ने अगला कदम भी बढ़ाया जो काफी बड़ा कदम था उसने रिमझिम को कंधे से ऊपर उठाया और फिर उसकी पीठ पर हाथ लेजाकर उसके ब्लाउज की डोरी को पीछे से खोल दिया और अगले hi पल अपनी टीशर्ट भी उतारदी .





रिमझिम तो ख़ुशी के इस कदम से चौंक गयी साथ hi ब्रा में ख़ुशी को देखकर साथ hi उसकी उठी हुई चूचियों और नंगी पेट की त्वचा को देखकर रिमझिम के मुँह मेइब भी पानी आ गया पर रिमझिम ने खुद को संभाला और फिर से शर्माने का नाटक करने लगी..

रिम- अरे दिया didiiiiiiiiiii ये क्या किआ, अह्ह्ह हम ज़्यादा आगे नहीं बाद रहे है क्या?

ख़ुशी- कुछ नहीं हो रहा भाभी डर्टी क्यों हो..

ये कहकर ख़ुशी ने एक बार फिर से रिमझिम के होंठों को अपने होंठों में भर लिए.

ख़ुशी को खुद का नियंत्रण में होना बहुत भ रहा था उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके पास कोई नयी शक्ति आ गयी हो...

वहीं रिमझिम तो बहुत खुश थी जैसा वो चाहती थी सब उससे भी ाचा हो रहा था सब ख़ुशी hi कर रही थी उसे कुछ करने की ज़रुरत hi नहीं पद रही थी..

रिमझिम के होंठों को चूसते हुए hi ख़ुशी ने एक बार फिर से उसे बिस्तर पर लिटा दिया और फिट होंठों को अलग करके बोली- ओह्ह्ह भाभी कितने रसीले होंठ हैः तुम्हारे..

रिमझिम ने भी शर्माने का नाटक करते हुए जवाब दिया- हाय ढैय्या दीदी क्या बोल रही हो....

ख़ुशी- अभी दिखती हूँ भाभी

ये कहकर ख़ुशी ने रिमझिम के ब्लाउज का पकड़ कर खींच लिए और ख़ुशी की ख़ुशी और बढ़ गयी जब उसे अंदर कोई ब्रा नहीं दिखी...





रिमझिम ने चौंकने का नाटक किआ और बोली- हाय ढैय्या दीदी ये क्या किआ ब्लाउज क्यों उतरा मेरा देखो मैं बिलकुल नंगी हो गयी..

रिमझिम ने ये कहते हुए अपने हाथों से अपनी चूचियों को ढँक लिए..

ख़ुशी- हाय भाभी कितनी सुन्दर हो तुम बिलकुल पारी जैसी भैया के तो मज़े hi मज़े हैं और आज की रात मेरे..

रिम- धत्त्त दीदी क्या बोल रही हो आज की रात से क्या मतलब है तुम्हारा?

ख़ुशी- सच बोल रही हूँ भाभी और आज की रात से मतलब है मैं तुम्हारे रूप पूरा खजाना लूट कर रहूंगी..

Rim-jeeji हमें शर्म ा रही है... ऐसे मत कहो कुछ कुछ होता है,

ख़ुशी- कहाँ क्या होता है भाभी..

रिम- पूरे बदन में..

ख़ुशी- ाचा लाओ ज़रा मैं भी तो देखूं क्या हो रहा है मेरी प्यारी भाभी को.

ये कहकर ख़ुशी ने रिमझिम के दोनों हाथों को पकड़ कर उसकी छुच्छी से हटा दिया और रिमझिम की बड़ी बड़ी संतरे जैसी चूचियां ख़ुशी के सामने आ गयी जिसे देखकर ख़ुशी के मुँह में पानी आ गया वहीं रिमझिम ने शर्माने का नाटक जारी रखा..

ख़ुशी अपनी भाभी की छूछीयों को देखकर खुद को रोक नहीं पाई और दोनों हाथों से उन पर कब्ज़ा जमाते हुए वो उन्हें हल्का हल्का चूमने लगी..





ख़ुशी के इस प्रहार से तो रिमझिम मज़े से दोहरी हो गयी उसका सीना तन गया साथ hi उसके हाथ ख़ुशी के बदन पर फिसलने लगे और ख़ुशी के हाथों में तो जैसे खजाना लग गया था, वो अपनी भाभी की छूछीयों को कभी दबती तो कभी उन्हें चूमती चाटती और कभी उनके बीच अपना चेहरा रगड़ती...

रिम- ओह्ह्ह्हह दीदी आह्ह्ह्हह्ह maaaahhhhhhhhhhhh बसससससससस आह्ह्ह्हह आईसीईईई hiiiiiiiiii...

ख़ुशी को अपनी ये नयी शक्ति अछि लग रही थी वो अपने अनुसार अपनी भाभी के मुँह से सिसकियाँ निकलवा रही थी.

रिम- आह्हः दीदी तुम बड़ी वो हो ..

रिमझिम ने सिसकियाँ लेते हुए कहा..

ख़ुशी- क्या हुआ मेरी प्यारी भाभी ऐसे क्यों बोल रही हो..

ख़ुशी ने अपने मुँह से रिमझिम की चुकी को निकलते हुए कहा.

रिम- और क्याःह्ह्ह तुमने मुझे तो नंगा कर दिया और खुद देखो..

ख़ुशी- ओह्ह्ह भाभी बस इतनी सी बात..

ये कहकर ख़ुशी तुरंत सीढ़ी हुई और अगले hi पल उसने अपनी ब्रा को निकल फेंका





जिसके साथ hi रिमझिम की आँखों के सामने ख़ुशी की ठोस अमरुद जैसी चूचियां आ गयी... जिन्हे देखकर hi रिमझिम के मुँह में पानी आ गया..

ख़ुशी की चूचियां बहुत hi आकर्षक और सुन्दर थी एक पल के लिए तो रिम्मी का मन किआ की अभी उन्हें मुँह में भर ले पर उसने खुद को रोककर रखा वो अभी और ख़ुशी को अपने बदन से खेलने देना चाहती थी... पर वो उन्हें सराहने से खुद को नहीं रोक पाई...

रिम - हाय बड़े सुन्दर अमरुद हैं तुम्हारे दीदी.. बिलकुल कैसे हुए गोल गोल परफेक्ट..

ख़ुशी अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर खुश हुई और जवाब में बोली- पर मुझे तुम्हारे ये संतरे ज़्यादा पसंद आये भाभी...

ख़ुशी एक बार फिर से रिमझिम की चूचियों की दबाते हुए बोली..

रिम- और मुझे तुम्हारे...

ख़ुशी- तो आओ अदला बदली कर लेते हैं..

रिम- अदला बदली वो कैसे???

ख़ुशी- आईसीईईई..

ख़ुशी ने ये कहकर खुद को रिमझिम के ऊपर झुकाया और फिर अपनी चूचियों को रिमझिम की चूचियों के ऊपर लेकर उन पर घिसने लगी





रिमझिम को ख़ुशी की इस हरकत से हंसी भी आ रही थी साथ hi उसकी चूचियों को महसूस करके उत्तेजना भी हो रही थी...

वही हाल ख़ुशी का भी था जो अपनी भाभी के साथ इतना घुल कर खुश थी..

Rim-are didiiiiiiiiiii क्या कर रही हो कैसी गुदगुदी हो रही है न..

ख़ुशी - मुझे तो मज़ा आ रहा है बहुत सॉफ्ट सॉफ्ट सा लग रहा है..

रिम- हाँ दीदी ाचा तो मुझे भी लग रहा है...

ये कहकर रिमझिम ने ख़ुशी को अपनी बाहों में जकड लिए और दोनों की चूचियां आपस में डाब गयी... रिमझिम की उत्तेजना अब काफी ज़्यादा बढ़ गयी थी और उसकी छूट हर पल के साथ पानी बहा रही थी वही ये हाल ख़ुशी का भी था पर इतना सब होने के बाद भी ख़ुशी के मन में अब भी झिझक थी...

पर रिमझिम ने ख़ुशी की झिझक को दूर करने का और आगे बढ़ने के लिए एक उपाय निकला और ख़ुशी को अपने सीने से लगाकर अपने निचले हिस्से को ख़ुशी की जांघ से रगड़ने लगी पर हलके से, इसका एहसास ख़ुशी को भी हुआ और उसके मन में आया लगता है भाभी गरम हो गयी हैं इसलिए उनका बदन अपने आप ये सब कर रहा है यही सही मौका है ख़ुशी...

ख़ुशी मन hi मन ये सोचते हुए खुश हो रही थी..

ख़ुशी ने रिमझिम की बाहों में रहते हुए hi अपना एक हाथ नीचे किया और. साड़ी के ऊपर से hi रिमझिम की एक जांघ को सहलाने लगी..

रिमझिम समझ गयी की जो वो चाहती थी वो हो गया है तो उसने ख़ुशी पर अपनी पकड़ और बढ़ा दी..

जिससे ख़ुशी और निश्चित हो गयी की उसकी भाभी अभी उसके कब्ज़े में है .

ख़ुशी ने चेहरा झुककर एक बार फिर से रिमझिम के होंठों को चूसना शुरू कर दिया साथ hi वो अपने हाथ को रिमझिम की जांघ से लेकर चूतड़ों तक सहलाने लगी..

रिमझिम ने अपने हाथों को पकड़ ख़ुशी के बदन पर ढीली छोड़ दी तो ख़ुशी का काम और आसान हो गया, भाभी के होंठों को चुस्त्र हुए ख़ुशी ने अपने आप को थोड़ा एक तरफ किआ और अपने हाथ को रिमझिम की चूचियों को दबती हुई उसके पेट पर ले गयी और फिर उसके चिकने पेट को मसलते हुए धीरे धीरे और नीचे ख़ुशी का हाथ फिसलता गया ...

और फिर अचानक से रिमझिम की जैसे सांस hi अटक गयी क्यूंकि ख़ुशी ने अपना हाथ साड़ी के ऊपर से hi रिमझिम की दोनों टैंगो के बीच रख दिया जिसके एहसास से hi रिमझिम तड़प उठी...

Rim-ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh didiiiiiiiiiii हटाआऊवो अह्ह्ह्हह्हह

ख़ुशी को रिमझिम का यूँ सम्भोग सुख में तड़पना बड़ा ाचा लगा..

ख़ुशी- क्यों भाभी.

रिम - वहां हठ्ठ मत लगाऊऊ didiiiiiiiiiii फिर हम खुद को रोक नाहीइ पाएंगेएइ.

ख़ुशी- तो मत रोकु भाभीई

ख़ुशी ने साड़ी के ऊपर से hi रिमझिम की छूट को हथेली में भरते हुए कहा..

रिमझिम बिलकुल तड़प उठी वहीं ख़ुशी का भी अपनी भाभी को यूँ देख कर बड़ा मज़ा आ रहा था.

दोनों इस सम्भोग सुख में बाह रही थी की तभी एक आवाज़ से दोनों का ध्यान बापिस आया, रिमझिम का फ़ोन बजने लगा..

जिसकी आवाज़ सुनकर दोनों को थोड़ा होश आया रिमझिम ने सिरहाने पर हाथ बढाकर फ़ोन उठाया तो देखा पतिदेव का था रिमझिम ने तुरंत स्क्रीन को ख़ुशी को दिखाया और चुप रहने का इशारा किआ..

जिसके बाद ख़ुशी ने भी हाँ में सर हिलाया...

रिमझिम ने फ़ोन उठाया.. और अपनी साँसों को काबू में करके बोली.

रिम- Hello..

रमन- कैसी हो मेरी जान,

रिम- ाचा तो अब याद आई है हमारी..

रमन- तुम्हारी याद तो हमेशा hi रहती है जान बस काम ख़त्म नहीं हुआ था.

रिम- अब हो गया

रमन- हाँ तुम बताओ सो गयी थी क्या..

रिम- नहीं तो, नींद hi नहीं आ रही..

ख़ुशी अपनी भाभी को बातें करते हुए मुस्कुरा कर सुन रही थी वही रिमझिम भी शर्मा कर बातें करते हुए रिमझिम को इशारे कर रही थी.

रमन- नींद तो मुझे भी नहीं आ रही... तुम्हारी लिए बिना कहाँ नींद आती है,

रिम- वही हाल मेरा भी है,

रमन- ाचा मेरा तो तुम्हारी आवाज़ सुनकर hi खड़ा हो गया है..

रिम- हैं क्या खड़ा हो गया है..

रमन- ाचा जैसे तुम्हे पता hi नहीं है..

ख़ुशी ने जब ये बात सुनी तो वो उत्सुकता से रिमझिम से चिपक कर लेट गयी और उसकी बातें सुनने की कोशिश करने लगी जिसे रिमझिम ने और आसान कर दिया फोर को स्पीकर पर करके...

रिम- नहीं पता तुम बताओ न क्या खड़ा हो गया है..

रमन- अरे तुम भी न बहुत शरारती हो गयी हो.. और क्या खड़ा होता है, हमारा लुंड..

ख़ुशी को अपने भैया के मुँह से लुंड सुनकर थोड़ा अजीब सा पर ाचा सा एहसास सा हुआ..

रिम- ाचा बड़ा कमीना है तुम्हारा लुंड,

रिमझिम ने लुंड पर ज़ोर डालते हुए ख़ुशी के कानो में बोलै जिससे ख़ुशी बुरी तरह शर्मा गयी..

रमन- कमीना क्यों भाई ऐसा क्या किआ इसने.

रिम- बताओ वहां खड़ा हो कर तुम्हे परेशां कर रहा है..

रमन- हाँ ये तो है परेशां तो कर रहा है अब तुम hi बताओ क्या करूँ इसका..

रिम- इसको सजा मिलनी चाहिए..

रमन- ाचा क्या सजा मिलनी चाहिए..

रिम- जेल में डालूंगी इसे तो मैं..

रमन- कौनसी जेल में..

रिम - अपनी जेल में डालूंगी इसे और खूब म्हणत करवाउंगी तब hi ये सुधरेगा..

रिमझिम की इन बातों से भाई बहन दोनों hi उत्तेजित हो रहे थे..

रमन- अरे वाह ये तो बड़ी सही सजा चुनी है तुमने वैसे नाम क्या है तुम्हारी जेल का..

रिम- वो तुम्हे पता है रिमझिम ने शरमाते हुए कहा..

रमन- नहीं तुम बताओ न..

रिम- धत्त्त मैं नई बता रही..

रमन- बोल्दो न मैंने भी तो बोलै..

वही बगल में ख़ुशी भी रिमझिम को बोलने के लिए इशारा कर रही थी.

रिम - चुत.

रमन- हाय छूट का नाम सुनते hi तो लुंड ठुमके मरने लगा..

रिम - हैं साछहयई?

रमन- और क्या...

रिम- सच कहें तो हमारी छूट भी गीली है रो रही तुम्हारी याद में..

रमन- हमारी याद में या हमारे लुंड की..

अपने भैया भाभी की ऐसी बातें सुनकर ख़ुशी का पूरा बदन उत्तेजना में तप रहा था उसकी कच्ची भी पूरक तरह गीली हो चुकी थी...

वहीं रिमझिम पति और ननद को एक साथ संभल रही थी ये सोचकर बहुत उत्तेजित होती जा रही थी

रिम- दोनूः की..

रिमझिम ने गरम होते हुए कहा और अपने आप hi उसने ख़ुशी का हाथ पकड़ कर साड़ी के ऊपर से hi अपनी छूट पर रख दिया..

ख़ुशी को तो जैसे वो चाहती थी वो मिल गया.. वो कब से आगे बढ़ने का प्रयास कर रही थी पर भैया के फ़ोन की वजह से रुकना पड़ा था पर अब वो रुकने वाली नहीं थी...

उसने तुरंत साड़ी के ऊपर से hi रिमझिम की छूट को सहलाना शुरू कर दिया...

जिससे रिमझिम की एक सिसकी निकल गयी..

रमन- क्या हुआ

रिम- कुछ नहीं..

रमन- कुछ तो हुआ है बताओ.

रिम- कुछ नहीं ये तुम्हारी याद में रो रही है उसे सहला कर चुप करा रही हूँ..

रिमझिम ने ख़ुशी के हाथ को अपनी छूट पर महसूस करते हुए जवाब दिया.

रमन- हाँ चुप कराओ उसे और समझाओ जल्दी hi आऊंगा और उसके लिए उसका मनपसंद लॉलीपॉप लाऊंगा...

रिम- हाँ इसे लॉलीपॉप चाहिए..

अपने भैया भाभी की बातों को सुनकर ख़ुशी की उत्तेजना बढाती जा रही थी और उसी उत्तेजना वश उसने आगे बढ़ने का फैसला लिए..

ख़ुशी ने रिमझिम की कमर पर से साड़ी को पकड़ा और नीचे खींचने लगी कुछ थोड़ी सी मसक्कत और थोड़ी रिमझिम की मदद से वो कामयाब भी हो गयी और अगले hi पल रिमझिम की साड़ी पेटीकोट सहित बीएड पर पड़ी थी और ख़ुशी की आँखों के सामने उसकी भाभी पूरी नंगी लेती हुई थी..

उधर रिमझिम अपने पति से बात करने में इतना खो गयी की उसे उसकी साड़ी उतरने तक का एहसास नहीं हुआ जबकि उसने खुद अपने चूतड़ उठाकर अपने चूतड़ों के नीचे से साड़ी निकलने में उसकी मदद की थी.

ये एहसास होते hi रिमझिम ने एक हाथ से अपनी छूट को ढँक लिए... और ख़ुशी से इशारो इशारों में शिकायत करने लगी पति अभी भी फ़ोन पर hi था..

इधर ख़ुशी ने रिमझिम का हाथ हटाकर अपनी भाभी की चिकनी गीली छूट को देखा तो जैसे उसके मुँह का पानी hi सूख गया वो आज पहली बार अपने अलावा किसी और की छूट देख रही थी... और रिमझिम की छूट में न जाने ऐसा क्या था की ख़ुशी खुद को रोक hi नहीं पाई और उसने अपने होंठ अपनी भाभी की छूट से लगा दिए..

रिमझिम की छूट का नमकीन एहसास अपनी जीभ पर महसूस कर ख़ुशी को तो जैसे नयी ऊर्जा मिल गयी वहीं रिमझिम का बदन ख़ुशी के होंठ छूट पर पड़ते hi अकड़ गया, उसके मुँह से अचानक सिसकी निकली जिसे सुनकर रमन भी फ़ोन पर Hello hello करने लगा..

कुछ पल बाद जाकर रिमझिम शांत हुई तो रमन को जवाब दिया साथ hi अपनी टैंगो के बीच उसकी छूट चाटती हुई ननद को देखने लगी...

ख़ुशी अभी तक देखि हुई साडी फिल्मों के अनुभव को अपनी भाभी की छूट पर दिखा रही थी और उसका असर भी उसे रिमझिम की आहों और चेहरे पर बदलते भावो से पता चल रहा था..

रिमझिम के लिए पति से बात करना मुश्किल होता जा रहा था.. वो सिर्फ हाँ हम्म्म में जवाब दे रही थी और दे भी कैसे उसकी प्यारी ननद उसकी छूट को ऐसे चाट रही थी जैसे जन्मो की भूखी हो





उधर रमन बार बार रिमझिम से पूछ रहा था की वो सो तो नहीं गयी पर उसे क्या पता उसकी बीवी उसके बिस्तर पर नंगी होकर उसकी सगी बहन से छूट चटवा रही थी..

ख़ुशी की जीभ रिमझिम की छूट में तरंगे पैदा कर रही थी जो की उसके पूरे बदन में फ़ैल रही थी और उसके लिए पति से बात कर पाना मुश्किल होता जा रहा था इसीलिए रिमझिम ने ख़ुशी दीदी आ गयी बोलकर फ़ोन रख दिया...

रिम- आअह्ह्ह्ह didiiiiiiiiiii uiiiiiiiiii माआ आआह्ह्ह्हह्ह काअशुध्ह..

फ़ोन रखने के बाद रिमझिम ख़ुशी के सर को अपनी छूट पर दबाते हुए बड़बड़ाने लगी..

अपनी भाभी से इस तरह के उत्साहवर्धन के बाद तो ख़ुशी और उत्सुकता से उसकी छूट चाटने लगी और जिसका फल भी उसे जल्दी hi मिला या सही कहें तो रास मिला, भाभी की छूट का रास जो की उसके मुँह और चेहरे पर लगा हुआ था...

झड़ने के बाद रिमझिम की तो जैसे जान hi निकल गयी वो कुछ देर तक पड़ी पड़ी हांफती रही...

वहीं ख़ुशी को तो जैसे खुद पर गर्व हो रहा था की उसने अपनी भाभी को चरमसुख प्राप्त करवा दिया..

रिमझिम ने अपनी ननद को देखा जिसके चेहरे पर अब भी उसकी छूट का रास लगा हुआ था रिमझिम को उसपर बहुत प्यार आया और उसने उसे ऊपर खींच लिए और ख़ुशी के पूरे चेहरे को चूमने लगी जिसपे उसे अपनी hi छूट का स्वाद मिल रहा था...

रिमझिम ने ख़ुशी के होंठों को प्यार से चूमा और बोली- अब भाभी की बरी...

इसके बाद क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्
 
चलिए दोस्तों कुछ मज़ेदार करते हैं, कहानी से आप किन्हीं भी अपनी पसन्द के दो किरदारों की जोड़ी बनाकर बताएं जिन्हें आप साथ देखना पसंद करते हैं या भविष्य में देखना चाहेंगे, वो कोई भी हो सकते हैं ज़रूर अपने जवाब दर्ज़ करें।

बहुत बहुत धन्यवाद
 
पंखुड़ी चाची से मिलने के लिए और उन्हें अच्छे से जानने के लिए अभी पारिवारिक चुदाई संग्रह देखें।


 




और क्या क्या हुआ पंखुड़ी चाची के साथ जानने के लिए पारिवारिक चुदाई संग्रह देखें
 
त्योहार की वजह से ये पूरा हफ्ता व्यस्त था दोस्तों, समय नहीं मिल पा रहा है, जल्दी ही समय मिलते ही अपडेट दूंगा, साथ बनाए रखें।
 
अपडेट 163


सरलपुर

सरलपुर की एक और सुहानी सुबह थी, पक्षी चहचहा रहे थे सूरज ओट से बस निकलने hi वाला था पर हमारी रिमझिम के कमरे में तो कुछ अलग hi नज़ारा था, ननद और भाभी दोनों बिलकुल नंगी एक दुसरे की बाहों में लिपटी हुई अभी भी नींद के आगोश में खोई हुई थी और खोएं भी क्यों न दोनों रात को इतना देर तक जगती जो रही थी, और रात की बात तो क्या hi बयां करें दोनों ननद भाभी के बीच ऐसा रिश्ता बन गया था जो शायद hi बनना चाहिए, धीरे धीरे से ख़ुशी की नींद खुली आँखें खोल कर खुद की हालत पर गौर किआ तो रात का सारा किस्सा ताज़ा हो गया,

ख़ुशी के बदन का शायद hi कोई हिस्सा होगा जिसका रिमझिम ने अपनी जीभ से स्वाद न चखा हो, वहीं ख़ुशी तो अपनी भाभी की जीभ के आगे हार मान चुकी थी न जाने कितनी बार उसकी मुनिया ने पानी बहाया ये उसे भी याद नहीं पर इतना याद था की उसकी प्यारी भाभी उसकी मुनिया से निकले सरे पानी को जातक गयी... और तो और भाभी ने उसकी गांड के छेड़ को भी नहीं छोड़ा बल्कि अपनी जीभ और उँगलियों को उसकी भी सैर करवा दी, एक बार तो ख़ुशी सिर्फ गांड चटवाने से hi झाड़ गयी थी, उसे खुद से थोड़ी शर्म भी आने लगी जब उसने सोचा की उसने भी तो भाभी के बदन के साथ बिलकुल वैसा hi किआ,

रात के एहसास को याद करके उसका बदन फिर से खिल उठा, तभी उसे बहार से कुछ आवाज़ आई तो वो जल्दी से उठ कर बैठ गयी, उसे एहसास हुआ की सब उठ चुके हैं तो वो अपने कपडे बिस्तर पर तलाशने लगी, जो रात की कुश्ती में कहीं दूर फ़ेंक दिए गए थे

ख़ुशी बिस्तर से कड़ी हो hi रही थी की उसे रिमझिम के हाथ ने पकड़ कर बापिस खींच कर गिरा लिए और अगले hi पल रिमझिम उसके ऊपर आ गयी...

ख़ुशी कुछ समझती तब तक तो उसके होंठों को रिमझिम के होंठ चूसने भी लगे थे, शुरूआती हैरानी के बाद ख़ुशी भी अपनी भाभी का साथ देने लगी, कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो रिम उसकी आँखों में देखते हुए उसकी नाक से नाक लगाकर बोली- कहाँ जा रही हो मेरी रानी मुझे छोड़कर.

ख़ुशी ने भी उसी अंदाज़ में जवाब दिया- हाय हम आपको छोड़कर कहाँ जायेंगे मेरी जान.

रिम- ाचा जी लगता है ननद रानी बड़ी हो गयी है.

ख़ुशी- ओह्ह्ह भाभी जैसा मज़ा तुमने दिया है उसके बाद तो बड़ी hi houngi.ahhh ऐसा लगता है की अब सब प् लिए ऐसा मज़ा कभी नहीं आया...

रिम- अरे मेरी लड़ो अभी तो मज़ा अधूरा hi है,

ख़ुशी- अधूरा कैसे,

रिम- पूरा तो तब आएगा जब एक कड़क लम्बा लुंड तुम्हारी इस मुनिया में घुसकर इसकी कुटाई करेगा..

रिमझिम ने ख़ुशी की छूट को अपनी छूट से घिसते हुए कहा जिससे ख़ुशी की भी सिसकी निकल गयी.

ख़ुशी- कहाँ भाभी अभी हमारी किस्मत में लुंड कहाँ अभी तो तुम्हारी ये उंगलियां और जीभ hi बहुत है.

रिम- एक बार लुंड ले लिए तो हमारी जीभ और उंगलियां पूरी नहीं पड़ेगी तुमको.

ख़ुशी- पर क्या करें लुंड तुम्हारे पास होता तो मज़ा आता.

रिम- हमारे पास लुंड तो नहीं पर लुंडवाला ज़रूर है.

ख़ुशी- लुंडवाला मतलब..

रिम- मतलब हमारे पास कोई है जिसके पास कड़क दुमदार लुंड है जो तुम्हारी मुनिया की अचे से कुटाई कर सकता है..

रिमझिम ने ख़ुशी की छूट को हाथ से सहलाते हुए कहा.

ख़ुशी- साछहयई भाभी ? कौन है?

रिम- हाय ख़ुशी तो देखो ख़ुशी की..

ख़ुशी- अब खुद hi ख़ुशी देती हो और खुद hi चिढ़ाती हो. बताओ न कौन है...

रिम- वो हैं...

रिमझिम इतना hi बोल पाई की बहार से चंचल की आवाज़ आई- रिम्मी, ख़ुशी उठी नहीं क्या अभी..

जिसे सुनकर दोनों तुरंत उठ गयी और अपने अपने कपडे पहनने लगी जल्दी जल्दी...

ख़ुशी ने तो जल्दी से पजामा t-shirt पहन लिए पर रिमझिम साड़ी में लगी हुई थी तो ख़ुशी कपडे पहनकर निकल गयी और कुछ देर बाद रिमझिम भी...

इधर चंचल उन दोनों को जवाब देकर अपने ससुरजी के कमरे की और चल दी, क्यूंकि ससुर जी ने पुकारा था की बहु ज़रा कपडे निकल दे तो नाहा लूँ, वैसे ये काम सासु माँ करती थी पर अभी वो नहीं थी.

चरण सिंह अपने बिस्तर पर बैठे थे इतने में चंचल आई..

चरण- आ गयी बहु देख एक कोई धुला कुरता और पजामा निकल दे, अरे तू नाहा भी ली.

चरण सिंह ने उसके गीले बालों को देखकर कहा.

चंचल - हाँ पापाजी बिना नहाये रसोई में कहाँ जाती हूँ..

चंचल बोलते हुए अलमारी खोलकर कपडे देखने लगी.

चरण- अरे हाँ तुम औरतों के नियम भी न..

चंचल - अब जो नियम माँ जी अपने समय से मानती आई हैं वो हमें भी आगे बढ़ाना है

चरण- बड़ी खुशनसीब है तुम्हारी सास जो ऐसी बहु मिली.

चंचल - बहु नहीं पापाजी बहुएं, हमारी रिम्मी भी बड़ी अछि है.

चरण- हाहाहा ाचा बाबा बहुएं, बस ऐसे hi तुम्हारा प्यार आपस में बना रहे.

ये कहते हुए अक्समात hi चरण सिंह की नज़र चंचल की पीठ पर पद गयी ब्लाउज और साड़ी के बीचनाङ्गी पीठ और कमर देखकर चरण सिंह का एक दम से मूड hi अलग हो गया,





चंचल की कमर में पड़ी सिलवटों को देखकर तो चरण सिंह की नज़रें जैसे उस पर जैम सी गयी ऊपर से उसकी चिकनी कोमल त्वचा पर हलकी हलकी पानी की बूँदें थी.. जिसे देखकर चरण सिंह के गले का पानी सूख गया..

उन्हें अपने पाजामे में लुंड कड़क होता हुआ महसूस होने लगा इतने में चंचल ने कपडे निकल दिए थे और उन्हे बिस्तर पर रख दिया और बोली- नाहा लो पापाजी

ये कहकर वो चली गयी और चरणसिंघ बेचारे सुन्न से बैठे रहे उन्हें समझ नहीं आ रहा था की उन्हें हो क्या रहा है, क्यों वो अपनी बहुओं को देखकर अपना काबू खो देते हैं, किसी को अगर इस बारे में पता चला तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी उसकी.. उसका परिवार उसके बहु बेटे जो उसे इतनी इज़्ज़त से देखते हैं सेवा करते हैं वो क्या सोचेंगे उसके बारे में...

इसी ग्लानि भाव को लेकर चरण सिंह बाथरूम में नहाने घुस गए.

चोदामपुर

कर्मा थका हरा सोता रहा और फिर अपने नाम की आवाज़ कई बार उसके कानो में पड़ी तो उसकी नींद टूटी,

उठकर ध्यान दिया तो उसके पापा उसे बुला रहे थे,

उठकर कमरे से बहार आंगन में जाकर देखा तो सब आंगन में इकठा थे, राजन चाचा और पापा खाना खा रहे थे, मुझे देखकर ममता चची बोली- कर्मा चल तू उठा तो सही इतनी देर से सब आवाज़ दे दे कर बुला रहे थे, 9 बज चुके अब जा हाथ मुँह धो ले और खाने के लिए बैठ जा,

माँ और वो नयी तै रसोई में थी पल्ली खाना परोस रही थी, और ममता चची बर्तन धो रही थी,

मैं हाथ मुँह धोकर आया, और फिर चची से पुछा- मौसी कहाँ है?

म चची - अरे शालू का सर दर्द कर रहा था तो आराम कर रही है हमने कहा सो जाओ तुम थोड़ा आराम मिलेगा.

मौसी के नाम पर माँ ने एक बार मुझे देखा, और फिर अपने काम में लग गयी..

मैं भी दूसरी खत पर बैठ गया जहाँ अनुज खा रहा था पल्ली दो थाली लेकर आई और एक मुझे देकर दूसरी खुद साथ में लेकर बैठ गयी सबने बातें करते हुए एक दुसरे के बारे में पूछते हुए खाना ख़त्म किआ,

भरपेट खाना खाकर कर्मा और अनुज को ाचा लग रहा था आखिर इतने दिनों बाद घर का खाना मिला था और घर बापिस आने का सुकून...

खा कर कर्मा उठा और छत पर चला गया टहलने के लिए,

टहलते हुए जो भी हो रहा था उस बारे में सोच hi रहा था की पीछे से अनुज भी आ गया..

अनुज- क्या सोच रहे हो भैया अकेले अकेले.

कर्मा- कुछ नहीं बस ऐसे hi टहल रहा था.

अनुज- अरे भैया मेरा तो दिमाग hi ख़राब हो गया है सब कितना मस्त चल रहा था मैं तुम माँ और मौसी पर मौसी ने सारा कुछ ख़राब कर दिया..

कर्मा- हनन ख़राब तो कर दिया..

अनुज- और अब ये नयी तै का क्या चक्कर है, पता नहीं कौन है कहाँ से आ गयी ये.

कर्मा- हाँ यार पता नहीं मैंने भी पहले नहीं देखा कभी...

अनुज- मैं सोच रहा था पापा या माँ से पूछूं पर अकेले टाइम hi नहीं मिल रहा.. और ऊपर से.

कर्मा- ऊपर से क्या ?

अनुज- लुंड बैठने का नाम नहीं ले रहा है, बिना चुदाई के शांति नहीं मिलेगी.

कर्मा- अभी सोचियो भी मत सब हैं.

अनुज- वही तो परेशानी है भैया एक बार लुंड शांत हो जाये तो दिमाग भी काम करेगा.

कर्मा अनुज की इस बात पर हंसने लगा और बोलै- क्यों तू लुंड से सोचता है क्या?

अनुज- अरे नहीं भैया प्रेशर काम हो जायेगा न..

अरे किस चीज़ का प्रेशर काम हो जायेगा पीछे से पल्ली ने कहा..

दोनों ने मुद कर देखा तो पीछे पल्ली कड़ी थी..

अनुज- ाचा हुआ पल्ली तू आ गयी देख मेरे पाजामे में कैसा तम्बू बना हुआ है एक बार अपनी मस्त छूट दे दे..

पल्ली- बस आते hi सबसे पहले तुझे यही चाहिए.

अनुज- अरे नहीं यार पर हाल तो देख मेरा.

अनुज ने अपना पजामा नीचे करके अपना तना हुआ लुंड दिखते हुए कहा..

पल्ली- अरे जानती हूँ और सच कहूं तो मैं भी भैया और तुझसे छोड़ने के लिए कबसे इंतज़ार कर रही हूँ.

अनुज- तो फिर देर क्यों कर रही है आजा..

पल्ली- नहीं कर सकती न.

कर्मा- क्यों क्या हुआ सब ठीक है न?

Palli-haan भाई सब ठीक है बस माहवारी आई है..

कर्मा- ाचा..

अनुज- धत्त्त तेरे की. किस्मत hi ख़राब है..

पल्ली- ज़्यादा मुँह मत बना नौटंकी कहीं का मुँह इस्तेमाल कर सकती हूँ..

ये कहते हुए पल्ली उसके सामने घुटनो पर बैठ गयी और उसका लुंड मुँह में भर के चूसने लगी..

अनुज को तो जैसे सुकून मिल गया..

अनुज- ahhhhhhhhhh पल्ली सच में कितना आराम मिल रहा है अह्ह्ह ऐसे hiiiiiiiiii क्या चुसतीई है तूऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

कर्मा उन दोनों को देख रहा था और देखकर उसका लुंड भी बिलकुल कड़क हो गया था पर वो अभी हालत की नज़ाकत को समझता था इसलिए उन दोनों को जारी रखने को बोलकर खुद सीढ़ियों की तरफ आकर खड़ा हो गया ताकि कोई और ऊपर आये तो उन्हें सावधान कर सके..

अनुज जो इतना भरा हुआ था उसे ज़्यादा देर नहीं लगी और उसने अपना सारा रास जल्दी hi पल्ली के मुँह में उढेल दिया...

और फिर खुद कर्मा के पास जाकर उसकी जगह ले ली.. और कर्मा ने उसकी.. अब पल्ली के मुँह में कर्मा का लुंड था जिसे वो पूरी शिद्दत से चूस रही थी..

कुछ देर पल्ली ने कर्मा का लुंड चूसा और फिर उसके बाद कर्मा के हाथ पल्ली के सर पर आ गैर तो पल्ली समझ गयी की आगे क्या होने वाला है तो उसने अपने मुँह को ज़्यादा से ज़्यादा खोल्दिया और अगले hi पल से उसके मुँह में लुंड अंदर बहार होने लगा, कर्मा पल्ली का मुँह छोड़ने लगा, पल्ली इसकी आदि हो चुकी थी तो उसे पता था की कब क्या करना है और अभी उसे बस अपना मुँह कर्मा के लुंड के लिए खुला रखना था,

थोड़ी hi देर में कर्मा का रास भी पल्ली के गले से नीचे जा चूका था और पल्ली की प्यास दो शिकार कर के मिट चुकी थी..

खैर फिर तीनो साथ hi नीचे आये तो सब लोग सोने को तयारी कर रहे थे पल्ली अपने मम्मी पापा के साथ अपने घर चली गयी, अनुज के कमरे पर नयी तै का कब्ज़ा हो गया था तो दोनों भाइयों को कर्मा के कमरे में सोना था, और कुछ कर भी नहीं सकते थे पल्ली के साथ कर नहीं सकते थे ममता चची चाचा के साथ चली गयी थी माँ पापा के साथ और मौसी की तो पूछो hi मत.. दोनों ऐसे hi बातें करते करते सो गए..

वहीं दुसरे कमरे में चुदाई और प्रेम का मिला जुला खेल अपने चरम पर था, जहाँ दोनों बच्चे शांति से सो रहे थे वहीं उनके बाप उसका बिलकुल उलट कर रहे थे, नीलेश ने अपनी बीवी को अपने नीचे दबाया हुआ था और लम्बे गहरे धक्के लगाकर छोड़ रहे थे, नीलेश का लुंड किसी मशीन की तरह सभ्य की छूट से अंदर बहार हो रहा था, सभ्य भी सिसकियाँ ले लेकर अपने पति का हौसला बढ़ा रही थी, नीलेश पत्नी के रसीले होंठों का स्वाद लेते हुए उसकी गरम छूट में धक्के लगा रहे थे





ये सिलसिला कुछ देर और चला और फिर नीलेश ने कहा की वो झड़ने वाला है तो सभ्य ने उसका रास पीने की इच्छा जताई जिसे नीलेश ने तुरंत पूरा किआ और सभ्य के मुँह में अपना लुंड दे दिया और कुछ देर बाद hi सभ्य के मुँह में उसके पति का वीर्य था..

क्यिर झड़ने के बाद दोनों शांत होकर लेट गए सभ्य आँखें मूँद कर लेती थी और नीलेश उसके नंगे खूबसूरत बदन को निहार रहे थे, नीलेश जानते थे की वो चाहे कितनी भी और औरतों को छोड़ लें यहाँ तक की अपनी बहन, या दोस्त की पत्नी ममता, या जवान लड़कियां जैसे पल्ली और प्रेमा इन सब के बाद भी उसकी पत्नी की जगह कोई नहीं ले सकता और वो ये भी जानते थे की गाओं की शायद hi कोई औरत होगी जो कामुकता और सुंदरता के मामले में सभ्य से 21 होगी,

नीलेश को थोड़ा अटपटा भी लग रहा था की वो बहार सब के साथ ये सब करके उसकी बीवी को धोखा दे रहे थे, और रह रह कर न जाने क्यों उन्हें अपने बच्चों का ख्याल आ रहा था, जबसे उन्हें पता चला था की उनके बच्चे चुदाई के खेल में उनसे भी आगे हैं तो उनके मन में एक अलग hi रोमांच सा आ गया था, अपनी पत्नी को देखते हुए वो ये सब सोच में डूबे हुए थे,

वहीं सभ्य आँखें बंद करके यही सोच रही थी की उसके पति उसे कितना चाहते हैं और कितने अचे हैं, और मैं हूँ जो की अपने hi बेटों के साथ, क्या शालू सही कह रही थी मेरे बारे में, भले hi कर्मा के पापा शशि के साथ वो सब करते हैं अपनी सगी बहन के साथ तो क्या मुझे अपने hi बेटों के नीचे सोने का हक़ मिल गया,.

क्या करूँ मैं कुछ समझ नहीं आ रहा शालू मुझसे नाराज़ है और न जाने कब तक नाराज़ रहेगी, और कब तक मैं इस सब को अपने पति से छुपाउंगी, जितना छुपाउंगी उतना hi ये बात अंदर hi अंदर मुझे कटेगी. मैं इन्हे अँधेरे में नहीं रख सकती.

दोनों hi अपनी अपनी उधेड़बुन में सो गए..

वहीं शालू बिस्तर पर पड़ी हुई सोच में डूबी हुई थी: क्या मैंने बेकार में hi जीजी और बच्चो पर इतना गुस्सा कर दिया, अगर वो लोग गलत हैं तो अब मैं भी उसमे उतनी hi गुनेहगार हूँ, वो मेरे लिए सब कुछ छोड़ कर कालक गाओं गए और बदले में मैं उन्हें क्या दे रही hun.par जो भी इस परिवार में हो रहा है वो गलत है, हर तरीके से गलत, समाज में इसे पाप कहते हैं..

क्या करू क्या सही क्या गलत समझ नहीं आ रहा... अह्ह्ह...

वहीं चोदामपुर के एक और घर में माहौल थोड़ा अलग था, राजपाल बीवी और बेटे के आर से खुश भी थे वहीं उनके और बहु के कार्यक्रम बंद होने पर उदास भी, खैर अभी तो उदास होने का भी समय उनके पास नहीं था क्यूंकि वो बिस्तर पर लेते हुए थे और उनके ऊपर उनका लुंड अपनी छूट में लेकर उनकी पत्नी और हम सब की मंजू तै उछाल रही थी...

मंजू- ahhhhhhhhhh maaaahhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्ह जीईई बहुत मज़ा आ रहा है

राजपाल- हाँ ऋ तेरी छूट में तो जादू है अह्ह्ह्ह ऐसे hi उछाल मेरे लुंड पर..

मंजू- ahhhhhhhhhh लूउठ्ज आठ

वहीं घर के दुसरे कमरे में भी दो प्रेमियों का मिलान हो रहा था,

प्रेमा अपने देवर के आगे झुक कर उसका लुंड चूस रही थी और फिर लुंड को अचे से गीला करने के बाद प्रेमा ने अपनी मस्त गोल गांड को घोड़ी बनकर जग्गू के सामने परोस दिया था जिसका स्वाद जल्दी hi जग्गू ने अपने लुंड को दिला दिया और अभी प्रेमा के चूतड़ हर धक्के के साथ हवा में लहार रहे थे, जग्गू पूरे जोश के साथ अपनी भाभी को छोड़ रहा था, दोनों बिछड़े प्राणियों की तड़प साफ़ देखि जा सकती थी और उसी तड़प को मिटने के लिए दोनों देर रात तक लगे रहे और अंत में जग्गू का रास अपने तीनो छेड़ो में लेने के बाद प्रेमा को चैन आया और फिर दोनों सो गए..

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत धन्यवाद्

 
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