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विनीत ये कहते हुए बिस्तर पर लेट गया तो ममता ने विनीत के ऊपर आकर उसका लुंड अपनी गांड में लेकर बैठ गयी, लुंड गांड में घुसते hi सूजन सिंह ने उसके पैरों के बीच जगह ली और अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, और दोनों ताऊजी और भतीजा धीरे धीरे ले बनाने लगे ममता की दोहरी चुदाई की, और उसे दोनों और से छोड़ने लगे,
ममता भी हर झटके पर आहें भरते हुए चिल्ला कर उनका उत्साह बढ़ने लगी, अब आगे...
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जहाँ विनीत तो अपने ताऊजी के साथ मिलकर ममता की दोहरी चुदाई करने लगा था वहीँ सभ्य पेशाब करने के बाद बाहर आई तो उसने आँगन में खुद को अकेला पाया, हालाँकि सभ्य को सरे hi कमरों से आहें सुनाई दे रही थी तो सभ्य ने सोचा शायद विनीत अपनी मम्मी के कमरे में चला गया होगा, यही सोच सभ्य अपनी ननद शशि के कमरे की और बढ़ी और दरवाज़े के पास पहुँच कर दरवाज़े को खोल कर देखती है तो सामने का नज़ारा देख कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है,
सामने उसकी ननद शशि उसके बेटे कर्मा के लुंड पर उछाल रही होती है, कर्मा बिस्तर के किनारे टांग लटका कर लेता है और शशि उसका लुंड लिए वैसे hi टांगें लटका कर उसके ऊपर उछाल रही होती है,

शशि की नज़र भी अपनी भाभी पर पड़ती है जो बिलकुल नंगी होकर दरवाज़े से झाँक रही है,
शशि- अंदर आ जाओ भाभी क्या झाँक रही हो,
शशि की बात सुनकर सभ्य अंदर आती है,
सभ्य- अरे वाह यहाँ तो बुआ भतीजे का प्यार दिख रहा है,
सभ्य ने पास आकर शशि की मोती छुछियां पकड़ते हुए कहा,
शशि- ननद भाभी का भी दिखने लगेगा तुम कहो तो,
शशि हाथ आगे बढ़ा कर सभ्य को खुद से चिपका लेती है, कर्मा नीचे लेट कर लगातार धक्के लगता रहता है अपनी बुआ की छूट में,
सभ्य- मैं तो चाहती हूँ इतनी प्यारी ननद से प्यार नहीं मिला तो भाभी का जीवन बेकार है,
ये कहकर सभ्य अपने होंठ शशि के होंठों से भिड़ा देती है और दोनों पागलों की तरह एक दुसरे के होंठों को चूसने लगती हैं, कर्मा भी अपनी बुआ और माँ का कामुक मिलान देख और उत्तेजित होकर बुआ की छूट में धक्के लगाने लगता है,
दोनों ननद भाभी काफी देर तक एक दुसरे के होंठों को चूसती हैं, और जब दोनों के होंठ अलग होते हैं तो दोनों के hi चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान होती है, सभ्य शशि के होंठों से नीचे सरकते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगती है तो शशि माँ बेटे के हमलो से आहें भरने लगती है,
सभ्य थोड़ा और नीचे सरकती है और शशि के एक छूछे को मुँह में भर कर चूसने लगती है और दुसरे को हाथ से मसलने लगती है, शशि अहहैं भरते हुए सभ्य के सर को पकड़ कर अपनी चूचियों पर दबाने लगती है.
शशि- अह्हह्ह्ह्ह मेरिइइइइइ राहाँदददद भाभीयी अह्हह्ह्ह्ह कितिया पी जा मेरा दूध सारा पीजा,
सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म...
सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह भाभीयी तुम्हारे साथ ये सबबबब करने के लिए मैं न जाने कब से बेचैन थी अह्ह्ह्हह्हह ाजजज मौका मिलाआहहह हैई,
कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh सही कहा, तुम दोनों को एक साथ छोड़ने का मौकाअहह मुझे भी पहली बार मिलने वल्लाह है,
सभ्य- ुहम्म्म्म मैंन तो अपनी रंडी ननद का स्वाद आअज अचे से चखूंगी.
सभ्य अपना मुँह पल भर के लिए शशि की चुकी से हटा कर कहती है और फिर से उसे मुँह में भर लेती है,
कर्मा अपनी बुआ की कमर को थामे लगातार धक्के लगता रहता है, और उसे अपने लुंड पर उछलता रहता है, सभ्य कुछ देर शशि की चुकी चूसने के बाद उसके पेट और नाभि को चाटती हुई नीचे बैठती चली जाती है और नीचे बैठ कर पहले तो शशि की छूट के दाने को अपनी जीभ से सहलाती है जिससे शशि की हालत ख़राब होने लगती है. और शशि अपने चरम की और बढ़ जाती है, शशि की झड़ने के करीब देख सभ्य उसकी छूट से जीभ हटती है और अपने बेटे की गलियों को चाटने लगती है जो की हर धक्के के साथ ऊपर नीचे हो रही होती हैं,

कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह माहहहह बुआहहहहह ओह्ह्ह्हह्ह मज़ाआ आ रहा है,
कर्मा भी दोहरे मज़े से सिहरने लगता है, सभ्य पर इतने पर hi नहीं रूकती और कर्मा की टांगें थोड़ी और फैला कर अपनी जीभ को नुकीला कर कर्मा के गांड के छेड़ को कुरेदने लगती है जिससे कर्मा का पूरा बदन hi अकड़ने लगता है,
कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआहहहह अह्ह्ह्हह्हह,
शशि को भी अचानक से कर्मा का लुंड अपनी छूट में फूलता हुआ महसूस होता है,
कर्मा गुर्राते हुए दो चार तगड़े धक्के अपनी बुआ की छूट में लगता है जिससे शशि भी अपने चरम पर पहुँच जाती है उसी समय कर्मा भी बुआ की छूट में झड़ने लगता है अपने रास से बुआ की छूट को भरने लगते है..
दोनों का झड़ना ख़त्म होता है तो सभ्य अपने बेटे का लुंड अपनी ननद की छूट से निकलती है और उसे मुँह में भर कर साफ़ करती है, लुंड साफ़ करने के बाद सभ्य शशि को कर्मा के ऊपर से हटा कर उसके बगल में hi बिस्तर के किनारे लिटा देती है
शशि- दोनों को एक साथ झड़वा दिया भाभी तुमने.
सभ्य- तभी तो तुम दोनों का मिला हुआ रास चखने को मिल रहा है मुझे.
ये कहकर सभ्य अपना मुँह शशि की छूट में घुसा देती है और जीभ घुसा घुसा कर अपने बेटे और ननद के मिश्रित रास को चाटने लगती है,
कर्मा शांत होते हुए इस नज़ारे को देखता है, वहीँ शशि अपनी भाभी की जीभ का आनंद लेते हुए दोबारा गरम होने लगती है,
सभ्य जब संतुष्ट हो जाती है तो शशि की छूट से मुँह हटती है पर अब शशि पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी होती है और वो अपनी भाभी पर टूट पड़ती है और सभ्य की चूचियों को चूसने लगती है...
शशि तो पागलों की तरह अपनी भाभी के बदन को चाटती चूमती है जिससे हर पल सभ्य की आहें तेज़ होती जाती hain.itne में कर्मा का लुंड भी दोनों की कामुक हरकतें देख सर उठाने लगता है, तो दोनों औरतों का ध्यान खड़े लुंड पर जाता है,
शशि- इधर आ बीटा इस मोठे लुंड को हमारे पास ला,
बुआ मेरे लुंड को घूरते हुए कहती हैं
सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह रंडी अभी मन नहीं भरा तेरा मेरे बेटे के लुंड से.
शशि- तेरा भरा आज तक रैंड?
दोनों की कामुक बातों को सुनते हुए कर्मा उनके पास जाकर लुंड आगे कर देता है और दोनों hi उसके लुंड पर टूट पड़ती हैं

एक साथ दो जोड़े गरम होंठ कर्मा के लुंड पर चलने लगते हैं जिससे कर्मा सिसकने लगता है.
कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह माहहहह बुआहहहहह ओह्ह्ह्हह्ह मज़ाआ आए रहा है, कबसे दोनों को एक साथ छोड़ने की इच्छा थी अह्हह्ह्ह्ह आअज पूरी हो रही है.
(कर्मा की ज़ुबानी)
शशि- बेटाःह्ह्ह आज तेरी बुआ और माँ तुझे जन्नत की सैर कराएंगी.
बुआ ने मेरा लुंड अपने मुँह से निकल कर माँ के मुँह में घुसते हुए कहा, कुछ देर ऐसे hi लुंड चूसने के बाद बुआ बोली- ुहम्म भाभी अब लल्ला के लुंड की सवारी करो मुझे भी देखना है कैसे चुदती हो अपने बेटे से,
सभ्य- मेरी छूट तो वैसे भी लुंड के लिए कुलबुला रही थी,
शशि- ाहहब तो अब मितवती हूँ तुम्हारी खुजली अपने भतीजे के लोडे से,
बुआ माँ को पकड़ कर मेरे ऊपर चढ़ा देती हैं और माँ भी तुरंत मेरा लुंड पकड़ कर अपनी छूट में घुसा लेती हैं, मैं माँ के चूतड़ों को पकड़ कर नीचे अपने लुंड पर उछलने लगा वहीँ बुआ भी माँ के चूतड़ों को मसलने लगी,

शशि- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाभी कैसा लग रहा है अपने बेटे से चुद कर,
सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ननद रानी, माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऐसी हीई,
शशि- अह्हह्ह्ह्ह बेटे का लुंड होता hi माँ की सेवाआआअह्ह्ह्ह के लिए है. कर्मा कैसी लग रही है तेरी माँ की छूट.
में- बुआहहहहह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह हर बेटे के लिए उसकी माँ कीई चूऊत्त जन्नत का द्वार होतीय है,
शशि- बेटाःह्ह्ह माँ तेरे जैसी हो तो बीटा उस जन्नत के द्वार की सैर ज़रूर करता है,
ये कहते हुए बुआ माँ और मेरी टैंगो के बीच बैठ गयी और अपनी जीभ आगे कर माँ की गांड चाटने लगी, माँ का मज़ा दोहरा होने लगा, माँ अहहैं भरने लगी.
सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह ऐसी हीईई शशी घुसा दे अपनी जीभ मेरी गांड में अह्ह्ह्ह दोनों बुआ भतीजा मिल कर छोड़ो मुझे,
हम दोनों कर भी वही रहे थे, मैं लुंड माँ की छूट में चला रहा था तो बुआ अपनी जीभ माँ की गांड में, कुछ देर माँ को छोड़ने के बाद मैंने उन्हें ऊपर से हटाया और बुआ और माँ दोनों को नीचे एक दुसरे के बगल में पीठ पर लिटा दिया और बुआ की टांगो के बीच में आकर अपना लुंड उनकी छूट में घुसा कर तेजी से छोड़ने लगा,
माँ भी बुआ के चेहरे पर हाथ फिरते हुए उनकी टांगो को थामे बुआ की चुदाई में मेरी मदद कर रही थी,

शशि- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन ईई ऐसी hi.
सभ्य- ुहम्म्म्म लल्लाहहहह छोड़ और तेज छोड़ अपनी रैंड बुआ को,
में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह माह बड़ी मस्त छूट हीी बाः की.
सभ्य- जानती हु बेटाःह्ह्ह तभी तो तेरे पापा भी सालों पहले अपनी बहन को छोड़ने से रोक नहीं पाए.
शशि- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह तेराअहहह लुंडडडड तो हमेशा की तरह hi मज़ेदार है अह्हह्ह्ह्ह...
सभ्य- लुंड तो मज़ेदार होगा hi जब बुआ की छूट मज़ेदार होगी तो,
ये कहकर माँ ने चेहरा आगे कर अपने होंठों को बुआ के होंठों से मिला दिया और दोनों बड़े कामुक ढंग से एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी, होंठों को चूसते हुए दोनों के बीच का प्यार साफ़ दिख रहा था, साथ hi उन्हें देख कर मुझे मज़ा आ रहा था, मेरी कामुक माँ और चुड़क्कड़ बुआ मेरे सामने बिलकुल नंगी हो कर इतने कामुक तरीके से एक दुसरे के होंठों को चूस रही थी और मेरा लुंड मेरी बुआ की गरम छूट में था, इससे अछि ज़िन्दगी क्या hi हो सकती थी, पर इससे ाचा भी हुआ होंठों को चूसते हुए जल्दी hi वो एक दुसरे की जीभ चूसने लगी, माँ बुआ की जीभ को किसी लुंड की तरह होंठों में लेकर चूसने लगी.

ये नज़ारा देख कर तो मेरे झटके अपने आप तेज हो गए और लुंड फूलने लगा, मुझे लगा मेरा रास दोबारा से लुंड की और बहने लगा है तो खुद को शांत करने के लिए मैंने लुंड को बुआ की छूट से निकाल लिए,
पर उन दोनों को जैसे कोई फ़र्क़ hi नहीं पड़ा और वो लगातार एक दुसरे के होंठों को चूसने में लगी हुई थी, मैंने कुछ पल दोनों को यूँ hi देखा और फिर अपना लुंड माँ के पैरों के बीच आकर उनकी छूट में पेल दिया और छोड़ने लगा,
पर इससे भी उनका चुम्बन टूटा नहीं बल्कि और गहरा hi हुआ, मैं उन्हें देखते हुए माँ की छूट में धक्के लगाने लगा,
माँ ने तो जैसे आज ठान लिए था की बुआ की जीभ का सारा रास चूस कर hi रहेंगी और लगातार बुआ की जीभ को चूसे जा रही थी, बुआ भी माँ का पूरा साथ दे रही थी, एक पल के लिए दोनों के होंठ अलग होते पर अगले hi पल फिर से जुड़ जाते, मुझे देखकर जब इतना मज़ा आ रहा था तो उन्हें कितना आ रहा होगा ये वो दोनों hi जानती होंगी.

मैंने उन्हें देखते हुए hi ना की छूट से बापिस लुंड निकला और बुआ के पैरों के बीच आकर उनकी गांड में घुसा दिया, जिससे बुआ थोड़ी मछली ज़रूर पर उन्होंने माँ से अपने होंठ अलग नहीं किये, मुझे दोनों की लगन देख कर बड़ा ाचा लगा, साथ hi बुआ की गांड में लुंड घुसा कर भी बहुत ाचा लग रहा था,
मैं लम्बे लम्बे धीमे धक्कों से बुआ की गांड मारने लगा, और हाथ ऊपर कर उनकी चूचियों को मसलने लगा, वही दुसरे हाथ से माँ की एक छुच्छी को, दो गदराई औरतों को एक साथ छोड़ने का मुझे भरपूर मज़ा मिल रहा था और जब दोनों गदराई औरतें अपनी माँ और बुआ हो तो मज़ा कई गुना बढ़ जाता है, और ऐसा hi मेरे साथ हो रहा था, बुआ की गांड कुछ देर मरने के बाद मैंने उनकी गांड से लुंड निकला और बापिस माँ की छूट में घुसा दिया और दददद उन्हें छोड़ने लगा. माँ और बुआ का छपाम्णा अभी भी जारी था, मेरा लुंड माँ की छूट में किसी मशीन की तरह अंदर बहार हो रहा था. बुआ अपने एक हाथ से अपनी छूट को सहलाते हुए माँ के होंठों को चूम रही थी,

एक बार फिर से मुझे मेरे लुंड में उबाल आता हुआ महसूस हुआ तो मैंने उसे रोका नहीं बल्कि और तेज माँ को छोड़ने लगा, और कुछ पल बाद माँ की छूट से लुंड निकल कर बापिस बुआ की छूट में घुसा दिया और तेज तेज छोड़ने लगा, ऐसे hi बदल बदल कर मैं दोनों की छूट छोड़ता रहा और दोनों को hi उनके चरम पर ला दिया,
माँ और बुआ एक साथ झड़ने लगी तो मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और जैसे hi मेरा निकलने को हुआ तो मैंने दोनों की चूचियों और पेट को निशाना बनाया और उन्हें अपने रास से रंग दिया.. और बिस्तर पर लेट कर लम्बी लम्बी सांसें लेने लगा,
इधर बुआ और माँ एक दुसरे के बदन से मेरा रास चटनी की तरह चाट रही थी, कभी बुआ माँ की चूचियां और पेट चाटती तो कभी माँ बुआ की, फिर दोनों ने रास को एक दुसरे के साथ होंठों से होंठ मिला कर बांटा, आउट फिर दोनों मेरे बगल में आ कर लेट गयी,
शशि- आह्ह्ह्हह्ह थक गए.
सभ्य- हाँ थकना तो था hi इतनी चुदाई करने के बाद,
में- मुझे तो नींद आ रही है,
शशि- सही कहा लल्ला सो जाते हैं हम लोग भी कल भी जल्दी उठना है बहुत काम हैं,
सभ्य- हाँ सो जाते हैं अब,
हम तीनो वैसे hi एक दुसरे से चिपक कर सो गए.
चोदामपुर
कर्मा और उसका परिवार साथ hi किरण, शैलेश और ममता तो रिश्तेदारी में चले गए थे शाम का वक़्त हो चूका था,
गुंजन- सबको गए कुछ घंटे hi हुए हैं और घर में बिलकुल सूना सा लग रहा है, हैं न जीजी,
गुंजन ने रसोई में काम करते हुए कहा,
शालू- सही कहा तूने गुंजन, जीजी जीजा और बच्चों के बिना ये घर अधूरा सा लगता है,
गुंजन- वही तो, अरे जीजी बाबा ने चाय बनवाई थी बन गयी है छान के दे दो न, मैं बर्तन धो रही हूँ.
शालू- हाँ अभी छान देती हूँ पर पता नहीं अब पिएंगे भी की नहीं?
गुंजन- अरे खुद hi तो बोले थे बनाने को पिएंगे की नहीं,
शालू- आ दिखाती हूँ क्यों नहीं पिएंगे.
शालू गुंजन को बाजू से पकड़ कर रसोई के बाहर की और लाकर आंगन की और इशारा करती है, गुंजन सामने देखती है और मुस्कुराने लगती है,
गुंजन- अब तो मुश्किल hi पिएंगे, तुम hi पि लो जीजी अब नहीं तो ठंडी हो जाएगी,
गुंजन सामने देखते हुए हुए कहती है जहाँ आँगन में पड़ी खाट पर कर्मा के नाना बिलकुल नंगे पेअर लटकाये लेते हैं और उनके ऊपर कर्मा की प्यारी रज्जो चची पूरी नंगी होकर उनका लुंड अपनी छूट में लिए हुए उछाल रही हैं.

कुछ पल दोनों इस अद्भुत नज़ारे को देखते हैं फिर अपने काम पर लग जाते हैं.
रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह चच्चा आह्हः,
रज्जो उछालते हुए आहें भर्ती है,
नाना- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बितीयआह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह बहुतत्त मस्त्त्त बडंण है तेराअहहह आह्ह्ह्ह क्या छूट पाई है तूने,
रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह चचहहहःजीईई बड़ीई इच्छ्हा थी मेरिइइइइइ अह्ह्ह्ह अपनी बाप से छुड़वाने कीई अह्ह्ह पर वो तो नाहीई रही अह्हह्ह्ह्ह पर तुमसे छुड़वा कर यही लगता है अपनी बाप से छुड़वा रही हुन्न्न्नन्नन्न...
नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह तुह्ह्ह ममताहहह मँजूह गुंजन हमारी बेटियां hi तो होऊ, अह्हह्ह्ह्ह हमारे लुंड के पैदाइश नहीं तो क्या हुआहहह तुम सब कोह्ह्ह्ह छोटी और बड़ी जितना hi लाआहहहहड्द करते हैं हम्म्म्म...
रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह चचहहहःजीईई तुमहारी बितीयआह्ह्ह्ह बनकर अह्ह्ह्ह बड़ीई खुषीयी हो रही हीी.
नाना- अह्हह्ह्ह्ह मैंन तो कहूंगाःह चुहठ भी मुझे चाचा नाहीइ अह्ह्ह बबआ hi कहा कर,
रज्जो ये सुनकर खुश भी हुई और भावुक भी और नाना की और देख बोली- ओह्ह्ह्हह्ह babaaaahhhhhhhhhhhhhhh छोड़ो और तेज़्ज़ज़ अपनीइ रज्जो बितीयआह्ह्ह्ह को,
नाना ये सुनकर रज्जो को ऊपर से उठा कर नीचे लिटाते हैं और खुद ऊपर आ कर दनादन धक्के लगाने लगते हैं.
दोनों hi चुदाई के आनंद में आहें भरते हुए एक दुसरे का उत्साह बढ़ाते हैं और फिर
जल्दी hi दोनों अपने अपने चरम पर एक साथ पहुँच कर झाड़ जाते हैं, झड़ने के बाद नाना को याद आता है की उन्होंने चाय मंगवाई थी तो गुंजन को आवाज़ देते हैं,
नाना- अरे बहु हमारी चाय बनाई का?
इतने में शालू निकल कर आती है और कहती है- बनाई थी बाबा पर तुम रज्जो जीजी के साथ प्यार के पल बिता रहे थे इसलिए नहीं दी.
ये सुन रज्जो भी मुस्कुराने लगती है,
नाना- तो अब दे दे.
शालू- नहीं अब नहीं मिलेगी, अब खाना खाओ सीधा चाय पियोगे तो भूख मर जाएगी,
रज्जो- हाँ बाबा सही कह रही है शालू,
रज्जो ने अपने कपडे पहनते हुए कहा,
शालू- और जीजी तुम कहाँ कपडे पहनने लगी, उतारो और तुम भी बैठो अपने बाबा के साथ खाने,
रज्जो- अरे घर जाना है शालू काम पड़ा होगा सारा,
गुंजन- कुछ नहीं पड़ा होगा जीजी, नीतू और लाडो हैं तो और नहीं होगा तो मैं करवा दूंगी जा कर तुम खाने बैठो.
नाना- अरे ये ाचा रहेगा आजा रज्जो साथ में खाते हैं,
रज्जो ने भी ज़्यादा ज़िद्द नहीं की और नंगी hi नाना के साथ बैठ गयी, और दोनों को शालू और गुंजन ने खाना खिलाया, वो खाना खा कर उठ hi पाए थे की बाकी लोग भी यानी सागर, जमुना और राजन पल्ली भी आ गए.
रज्जो को नंगा देख कर सबके मन में अरमान ज़रूर जगे पर शालू और गुंजन ने सबको पहले खाने के लिए बैठा दिया,
रज्जो ने इतने में कपडे पहन लिए और बोली- बाबा अब तुम मेरे साथ चलो, आज रात मेरे घर रहोगे.
नाना- अरे बिटिया ये भी तो तेरा hi घर है.
रज्जो- वो मुझे नहीं पता तुम एक बार भी नहीं गए अभी तक अब चलो,
नाना- अच्छा ठीक है.
शालू- जाओ बाबा रज्जो जीजी से भी सेवा करवाओ थोड़ी.
रज्जो- और क्या तभी तो ले जा रही हूँ.
रज्जो नाना को लेकर चली गयी, बाकी सब ने खाना खाया, शालू पल्ली और गुंजन तीनो ने मिलकर सारा कान निपटा लिया,
शालू- जीजा, बाबा तो रज्जो जीजी के यहाँ गए तो कौन कैसे सोयेगा.
शालू ने अपने पल्लू से हाथ पोंछते हुए कहा.
राजन- एक आदमी का तो बैग में सोना ज़रूरी है तो हम बाग़ में सो जायेंगे,
शालू- अकेले hi?
राजन- हाँ अकेले क्या दिक्कत है?
शालू- तुम्हे कोई दिक्कत नहीं है इसे तो होगी,
शालू ने हाथ बढाकर लुंगी के ऊपर से hi उनका लुंड मसलते हुए कहा,
राजन- हाँ इसे तो दिक्कत होती hi है हमेशा.
राजन ने भी हाथ बढाकर शालू की भरी चुकी को ब्लाउज के ऊपर से hi मसल दिया,
शालू- मैं चल लेती हूँ न साथ,
राजन- तू क्या करेगी वहां?
शालू- मैं क्या करुँगी, दोनों करेंगे, खुले में छोड़ना अपनी साली को,
इधर सब की बातें चल hi रही थी की दरवाज़े पर खटखटाने की आवाज़ आई तो सागर ने जाकर खोला तो सामने मंजू और प्रेमा थी,
सागर- आओ बुआ आओ भाभी.
सागर ने दोनों को अंदर लेते हुए कहा,
मंजू और प्रेमा आँगन में आ गए.
शालू- अरे जीजी आओ बैठो, खाना लगाऊं.
मंजू- अरे खाना वगेरा सब निपटा कर आई हूँ, तुम लोगो ने खा लिया?
गुंजन- हाँ जीजी खा लिए सारा कान निपटा लिया,
प्रेमा- नाना नहीं दिख रहे?
शालू- वो तो रज्जो जीजी लिवा गयी उन्हें रात के लिए अपने साथ,
मंजू- कल मैं ले जाउंगी, अब बोलेन वो बिटिया अरे वो.
इस पर सब हंसने लगे,
राजन- अरे तुम्हारे सामने कौन बोल सकता है भाभी. तुम्हारे आगे तो भैया नहीं बोलते.
मंजू- तुम तो बोल रहे हो देवर जी,
राजन- देवर भाभी के सामने hi बोल सकता है,
मंजू- ाचा अब सुनो, ऐ गुंजन तू पल्ली को लेकर घर चली जा, तेरे जीजा बड़ा बोल रहे हैं की सलहज से नहीं मिले,
गुंजन- ठीक है जीजी चली जाती हूँ, जीजा की सेवा भी कर दूंगी,
मंजू- क्यों जमुना भेज दूँ तेरी लुगाई को, याद तो नहीं आएगी तुझे रात में,
जमुना- अरे जीजी तुम्हारे होते हुए किसी और की याद क्यों आएगी.
मंजू- चल फिर देर न करो पल्ली जा बीटा मामी को लेजा अपनी.
पल्ली- ठीक है तै, चलो मामी,
गुंजन- हाँ चल बिटिया.
पल्ली और मामी निकल जाते हैं,
राजन- चलो फिर हम भी चलते हैं,
मंजू- तुम कहाँ चले देवर जी,
राजन- अरे भाभी वो बाग़ में सोयेंगे सामान खुला पड़ा है न इसलिए,
शालू- हाँ जीजी मैं भी जा रही थी जीजा के साथ hi कहीं अकेले न पद जाएँ इसलिए.
मंजू- ाचा ाचा, वैसे तो तुम लोग रुकते तो मज़ा आता पर कोई नहीं जाना भी ज़रूरी है.
शालू- मज़े के लिए जमुना और सागर है न जीजी खूब देगा तुम्हे,
राजन- प्रेमा को तो मिलने भी लगे,
राजन ने एक और इशारा करके कहा तो सबने देखा तो पाया की सागर ने प्रेमा का ब्लाउज खोल लिए है और उसकी चूचियों को पि रहा है,
शालू- चलो हम लोग भी चलते हैं.
राजन- हाँ.
कुछ hi पलों में शालू और राजन भी निकल गए, इधर सागर ने प्रेमा को तब तक पूरा नंगा कर दिया था और खुद भी अपने कपडे उतारने लगा, जमुना ने प्रेमा के नंगे बदन को देखा तो उसे अपनी और खींच बाहों में भर लिया, वहीँ सागर खुद नंगा हुआ और फिर अपनी मंजू बुआ के होंठों पर टूट पड़ा, मंजू भी सागर का पूरा साथ देने लगी, सागर मंजू के होंठों को चूसते हुए उनके कपडे उतरने लगा और जल्दी hi मंजू भी बाकी सब की तरह पूरी नंगी हो चुकी थी, सागर ने होठों को चूसने के बाद अपना ध्यान मंजू की मोती चूचियों पर लगाया और उसे चूसने लगा,
मंजू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बच्चाः ऐसी हीई खा जाए बुआ की छुछियां अह्हह्ह्ह्ह,
सागर भी वही कर रहा था, दूसरी और जमुना भी प्रेमा के होंठों को चूसते हुए उसकी चूचियों को मीनजह रहा था, प्रेमा अपने रास से भरे होंठों का स्वाद जमुना को बड़ी लगन से दे रही थी, जल्दी hi दोनों के होंठ अलग हुए तो जमुना ने प्रेमा की चुकी को मुँह में भर लिया और पागलों की तरह चूसने लगा,
प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मामाहः ुहम्म्म्म
प्रेमा जमुना का सर अपनी चूचियों में दबाते हुए आहें भरने लगी, उसने आँगन में दूसरी और देखा तो पाया उसकी सास अपने घुटनों पर बैठी है और उनके सामने सागर खड़ा है और उसकी सास का मुँह छोड़ रहा है,

सागर- अह्हह्ह्ह्ह सआईईईई रनडीईई बुहाहह क्या गरम मुँह है तेराअहहह ahhhhhhhhhh,
सागर मंजू का मुँह छोड़ते हुए बड़बड़ाया.
जमुना- ऐ, ऐसे बात करते हैं बुआ से,
जमुना ने अपने बेटे को हड़काते हुए कहा साथ hi प्रेमा को बिस्तर पकड़ कर झुका दिया और खुद उसके पीछे आकर उसके चूतड़ों को मसलने लगा, और फिर चूतड़ों को फैलाकर खुद घुटनों पर बैठ कर अपना मुँह प्रेमा में चूतड़ों के बीच घुसा दिया और उसकी छूट और गांड चाटने लगा,
सागर- ठीक है पापा, वो थोड़ा बहक गया था, माफ़ कार्डो बुहाहह,
मंजू ने ये सुनकर उसका लुंड मुँह से निकला और बोली- ऐ जमुना, मेरे लल्ला को क्यों डांटा अपनी बुआ के साथ hi तो कर रहा है, और चुदाई के वक़्त वो गाली दे सकता है मुझे मज़ा आता है,
ये कहकर मंजू ने दोबारा सागर का लुंड मुँह में भर लिया,
जमुना- ठीक है जीजी पर देखना तुम्हारे लाड में ये बिगड़ न जाये,
जमुना ने बापिस अपना मुँह प्रेमा के चूतड़ों में घुसाते हुए कहा,
सागर- अरे पापा मुझे पता है कब क्या बोलना है.
प्रेमा- और काहहह सागर भैया समझदार हैं अह्ह्ह्हह्हह मामाहः ऐसी hi,
प्रेमा ने अपनी गांड में जमुना की जीभ घुसते हुए महसूस कर सिसकते हुए कहा..
इधर सागर ने भी अपने लुंड को मंजू के मुँह से निकला और उसे भी झुका कर उसकी छूट चाटने लगा,
मंजू- अह्ह्ह्ह लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है ऐसी hi घुमा जीभ.
जहाँ सागर छूट चाट रहा था उसके पापा तो आगे बढ़ चुके थे टी
उन्होंने प्रेमा की गांड पहले तो खूब अचे से छाती और फिर उसे बिस्तर के किनारे लिटाकर अपना लुंड उसकी गांड में घुसा दिया और धीमे धीमे लुंड अंदर बाहर करने लगे,

प्रेमा भी अपनी गांड मरवाते हुए आहें भरने लगी थी.
प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मामाहः ऐसी hi ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पूरा घुसादो अब,
जमुना- अह्हह्ह्ह्ह बहूऊऊह्ह्ह अह्ह्ह्हह बड़ीईई मस्त्त गांड हीी टेरिइइइइइ अह्हह्ह्ह्ह इतनी कस्यी हुई और गरमममम. आह्हः लिए पुराहहह
ये कह जमुना ने अपना पूरा लुंड जड़ तक प्रेमा की गांड में घुसा दिया, और प्रेमा और वो दोनों मज़े से आहें भरने लगे.
जमुना ने प्रेमा की गांड मारते हुए अपने बेटे की और देखा अब वो भी चुदाई के खेल में आगे बढ़ चूका था और अभी मंजू को पीछे रसोई की स्लिप से टिका कर खड़े खड़े hi उसकी एक तंग को कंधे पर रख कर दनादन उसको छोड़ रहा था,

मंजू भी जवान लुंड से छुड़वाते हुए खूब तेजी से आहें भर रही थी और सागर को चुदाई के लिए और उकसा रही थी.
मंजू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बच्चाः ऐसी hi ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऑर्डर तेजज छूवोड्ढड्ड अपनीईईई चुड़क्कड़ buaaaaahhhhhhhhhh को.
सागर- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन बुआहहहहह लिए सआईईईई..
प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह मामाहः देखूहहह कैसी तुम्हारा बेटाःह्ह्ह मेरिइइइ चुड़क्कड़ रनडीईई सास को छोड़ रहा है अह्हह्ह्ह्ह.
जमुना- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन बहूऊऊह्ह्ह चू भी तेरी सास की तरह पूरी रैंड हैई,
जमुना ने प्रेमा की गांड में धक्के लगाते हुए कहा,
इधर मंजू को उस आसान में तकलीफ होने लगी तो उसने सागर को बदलने को कहा, तो सागर उसे अपने पापा और प्रेमा के पास ले आया और दोनों बाप बेटे ने मिलकर सास बहु को एक दुसरे के ऊपर 69 के आसान में लिटा दिया और खुद एक एक छोर पर आकर अपना अपना लुंड दोनों की गांड में पिरो दिया वही सास बहु एक दुसरे की छूट पर अपनी जीभ फिरने लगी, मंजू की गांड में जमुना का लुंड था और प्रेमा की गांड में सागर का,
दोनों की गांड मारते हुए बाप बेटे ने एक दुसरे की और देखा और मुस्कुरा पड़े दोनों hi जानते थे की रात अभी लम्बी चलने वाली है,
इधर बाग़ में इस समय राजन और शालू इस समय बिस्तर पर तो नहीं थे बल्कि खुले आस्मां के नीचे ठंडी हवा ने उनकी उत्तेजना को और भड़का दिया था और अभी उसी उत्तेजना वस् शालू पूरी नंगी होकर एक पेड़ के सहारे कड़ी हुई थी और उसके पीछे राजन भी पूरे नंगे थे और शालू की छूट में अपना लुंड पिरो रहे थे,

शालू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीजा आह्हः ऐसी खुले में बड़ा मज़ा आ अह्ह्ह्ह रहा ही.
राजन- खुले में चुड़ाईयाहज काहहह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह hi अलग हीी रानी ुहममम.
राजन शालू के होंठों को चूमते हुए बोले साथ hi उनका लुंड शालू की गरम छूट में लगातार अंदर बहार हो रहा था, शालू की मोती छुछियां हर झटके पर झूल रही थी...
जारी रहेगी.
ममता भी हर झटके पर आहें भरते हुए चिल्ला कर उनका उत्साह बढ़ने लगी, अब आगे...
अपडेट 236
जहाँ विनीत तो अपने ताऊजी के साथ मिलकर ममता की दोहरी चुदाई करने लगा था वहीँ सभ्य पेशाब करने के बाद बाहर आई तो उसने आँगन में खुद को अकेला पाया, हालाँकि सभ्य को सरे hi कमरों से आहें सुनाई दे रही थी तो सभ्य ने सोचा शायद विनीत अपनी मम्मी के कमरे में चला गया होगा, यही सोच सभ्य अपनी ननद शशि के कमरे की और बढ़ी और दरवाज़े के पास पहुँच कर दरवाज़े को खोल कर देखती है तो सामने का नज़ारा देख कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है,
सामने उसकी ननद शशि उसके बेटे कर्मा के लुंड पर उछाल रही होती है, कर्मा बिस्तर के किनारे टांग लटका कर लेता है और शशि उसका लुंड लिए वैसे hi टांगें लटका कर उसके ऊपर उछाल रही होती है,

शशि की नज़र भी अपनी भाभी पर पड़ती है जो बिलकुल नंगी होकर दरवाज़े से झाँक रही है,
शशि- अंदर आ जाओ भाभी क्या झाँक रही हो,
शशि की बात सुनकर सभ्य अंदर आती है,
सभ्य- अरे वाह यहाँ तो बुआ भतीजे का प्यार दिख रहा है,
सभ्य ने पास आकर शशि की मोती छुछियां पकड़ते हुए कहा,
शशि- ननद भाभी का भी दिखने लगेगा तुम कहो तो,
शशि हाथ आगे बढ़ा कर सभ्य को खुद से चिपका लेती है, कर्मा नीचे लेट कर लगातार धक्के लगता रहता है अपनी बुआ की छूट में,
सभ्य- मैं तो चाहती हूँ इतनी प्यारी ननद से प्यार नहीं मिला तो भाभी का जीवन बेकार है,
ये कहकर सभ्य अपने होंठ शशि के होंठों से भिड़ा देती है और दोनों पागलों की तरह एक दुसरे के होंठों को चूसने लगती हैं, कर्मा भी अपनी बुआ और माँ का कामुक मिलान देख और उत्तेजित होकर बुआ की छूट में धक्के लगाने लगता है,
दोनों ननद भाभी काफी देर तक एक दुसरे के होंठों को चूसती हैं, और जब दोनों के होंठ अलग होते हैं तो दोनों के hi चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान होती है, सभ्य शशि के होंठों से नीचे सरकते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगती है तो शशि माँ बेटे के हमलो से आहें भरने लगती है,
सभ्य थोड़ा और नीचे सरकती है और शशि के एक छूछे को मुँह में भर कर चूसने लगती है और दुसरे को हाथ से मसलने लगती है, शशि अहहैं भरते हुए सभ्य के सर को पकड़ कर अपनी चूचियों पर दबाने लगती है.
शशि- अह्हह्ह्ह्ह मेरिइइइइइ राहाँदददद भाभीयी अह्हह्ह्ह्ह कितिया पी जा मेरा दूध सारा पीजा,
सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म्म्म...
सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह भाभीयी तुम्हारे साथ ये सबबबब करने के लिए मैं न जाने कब से बेचैन थी अह्ह्ह्हह्हह ाजजज मौका मिलाआहहह हैई,
कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह buaaaaahhhhhhhhhh सही कहा, तुम दोनों को एक साथ छोड़ने का मौकाअहह मुझे भी पहली बार मिलने वल्लाह है,
सभ्य- ुहम्म्म्म मैंन तो अपनी रंडी ननद का स्वाद आअज अचे से चखूंगी.
सभ्य अपना मुँह पल भर के लिए शशि की चुकी से हटा कर कहती है और फिर से उसे मुँह में भर लेती है,
कर्मा अपनी बुआ की कमर को थामे लगातार धक्के लगता रहता है, और उसे अपने लुंड पर उछलता रहता है, सभ्य कुछ देर शशि की चुकी चूसने के बाद उसके पेट और नाभि को चाटती हुई नीचे बैठती चली जाती है और नीचे बैठ कर पहले तो शशि की छूट के दाने को अपनी जीभ से सहलाती है जिससे शशि की हालत ख़राब होने लगती है. और शशि अपने चरम की और बढ़ जाती है, शशि की झड़ने के करीब देख सभ्य उसकी छूट से जीभ हटती है और अपने बेटे की गलियों को चाटने लगती है जो की हर धक्के के साथ ऊपर नीचे हो रही होती हैं,

कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह माहहहह बुआहहहहह ओह्ह्ह्हह्ह मज़ाआ आ रहा है,
कर्मा भी दोहरे मज़े से सिहरने लगता है, सभ्य पर इतने पर hi नहीं रूकती और कर्मा की टांगें थोड़ी और फैला कर अपनी जीभ को नुकीला कर कर्मा के गांड के छेड़ को कुरेदने लगती है जिससे कर्मा का पूरा बदन hi अकड़ने लगता है,
कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआहहहह अह्ह्ह्हह्हह,
शशि को भी अचानक से कर्मा का लुंड अपनी छूट में फूलता हुआ महसूस होता है,
कर्मा गुर्राते हुए दो चार तगड़े धक्के अपनी बुआ की छूट में लगता है जिससे शशि भी अपने चरम पर पहुँच जाती है उसी समय कर्मा भी बुआ की छूट में झड़ने लगता है अपने रास से बुआ की छूट को भरने लगते है..
दोनों का झड़ना ख़त्म होता है तो सभ्य अपने बेटे का लुंड अपनी ननद की छूट से निकलती है और उसे मुँह में भर कर साफ़ करती है, लुंड साफ़ करने के बाद सभ्य शशि को कर्मा के ऊपर से हटा कर उसके बगल में hi बिस्तर के किनारे लिटा देती है
शशि- दोनों को एक साथ झड़वा दिया भाभी तुमने.
सभ्य- तभी तो तुम दोनों का मिला हुआ रास चखने को मिल रहा है मुझे.
ये कहकर सभ्य अपना मुँह शशि की छूट में घुसा देती है और जीभ घुसा घुसा कर अपने बेटे और ननद के मिश्रित रास को चाटने लगती है,
कर्मा शांत होते हुए इस नज़ारे को देखता है, वहीँ शशि अपनी भाभी की जीभ का आनंद लेते हुए दोबारा गरम होने लगती है,
सभ्य जब संतुष्ट हो जाती है तो शशि की छूट से मुँह हटती है पर अब शशि पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी होती है और वो अपनी भाभी पर टूट पड़ती है और सभ्य की चूचियों को चूसने लगती है...
शशि तो पागलों की तरह अपनी भाभी के बदन को चाटती चूमती है जिससे हर पल सभ्य की आहें तेज़ होती जाती hain.itne में कर्मा का लुंड भी दोनों की कामुक हरकतें देख सर उठाने लगता है, तो दोनों औरतों का ध्यान खड़े लुंड पर जाता है,
शशि- इधर आ बीटा इस मोठे लुंड को हमारे पास ला,
बुआ मेरे लुंड को घूरते हुए कहती हैं
सभ्य- अह्हह्ह्ह्ह रंडी अभी मन नहीं भरा तेरा मेरे बेटे के लुंड से.
शशि- तेरा भरा आज तक रैंड?
दोनों की कामुक बातों को सुनते हुए कर्मा उनके पास जाकर लुंड आगे कर देता है और दोनों hi उसके लुंड पर टूट पड़ती हैं

एक साथ दो जोड़े गरम होंठ कर्मा के लुंड पर चलने लगते हैं जिससे कर्मा सिसकने लगता है.
कर्मा- अह्हह्ह्ह्ह माहहहह बुआहहहहह ओह्ह्ह्हह्ह मज़ाआ आए रहा है, कबसे दोनों को एक साथ छोड़ने की इच्छा थी अह्हह्ह्ह्ह आअज पूरी हो रही है.
(कर्मा की ज़ुबानी)
शशि- बेटाःह्ह्ह आज तेरी बुआ और माँ तुझे जन्नत की सैर कराएंगी.
बुआ ने मेरा लुंड अपने मुँह से निकल कर माँ के मुँह में घुसते हुए कहा, कुछ देर ऐसे hi लुंड चूसने के बाद बुआ बोली- ुहम्म भाभी अब लल्ला के लुंड की सवारी करो मुझे भी देखना है कैसे चुदती हो अपने बेटे से,
सभ्य- मेरी छूट तो वैसे भी लुंड के लिए कुलबुला रही थी,
शशि- ाहहब तो अब मितवती हूँ तुम्हारी खुजली अपने भतीजे के लोडे से,
बुआ माँ को पकड़ कर मेरे ऊपर चढ़ा देती हैं और माँ भी तुरंत मेरा लुंड पकड़ कर अपनी छूट में घुसा लेती हैं, मैं माँ के चूतड़ों को पकड़ कर नीचे अपने लुंड पर उछलने लगा वहीँ बुआ भी माँ के चूतड़ों को मसलने लगी,

शशि- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाभी कैसा लग रहा है अपने बेटे से चुद कर,
सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह ननद रानी, माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है, अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऐसी हीई,
शशि- अह्हह्ह्ह्ह बेटे का लुंड होता hi माँ की सेवाआआअह्ह्ह्ह के लिए है. कर्मा कैसी लग रही है तेरी माँ की छूट.
में- बुआहहहहह ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह हर बेटे के लिए उसकी माँ कीई चूऊत्त जन्नत का द्वार होतीय है,
शशि- बेटाःह्ह्ह माँ तेरे जैसी हो तो बीटा उस जन्नत के द्वार की सैर ज़रूर करता है,
ये कहते हुए बुआ माँ और मेरी टैंगो के बीच बैठ गयी और अपनी जीभ आगे कर माँ की गांड चाटने लगी, माँ का मज़ा दोहरा होने लगा, माँ अहहैं भरने लगी.
सभ्य- ओह्ह्ह्हह्ह ऐसी हीईई शशी घुसा दे अपनी जीभ मेरी गांड में अह्ह्ह्ह दोनों बुआ भतीजा मिल कर छोड़ो मुझे,
हम दोनों कर भी वही रहे थे, मैं लुंड माँ की छूट में चला रहा था तो बुआ अपनी जीभ माँ की गांड में, कुछ देर माँ को छोड़ने के बाद मैंने उन्हें ऊपर से हटाया और बुआ और माँ दोनों को नीचे एक दुसरे के बगल में पीठ पर लिटा दिया और बुआ की टांगो के बीच में आकर अपना लुंड उनकी छूट में घुसा कर तेजी से छोड़ने लगा,
माँ भी बुआ के चेहरे पर हाथ फिरते हुए उनकी टांगो को थामे बुआ की चुदाई में मेरी मदद कर रही थी,

शशि- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन ईई ऐसी hi.
सभ्य- ुहम्म्म्म लल्लाहहहह छोड़ और तेज छोड़ अपनी रैंड बुआ को,
में- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह माह बड़ी मस्त छूट हीी बाः की.
सभ्य- जानती हु बेटाःह्ह्ह तभी तो तेरे पापा भी सालों पहले अपनी बहन को छोड़ने से रोक नहीं पाए.
शशि- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह तेराअहहह लुंडडडड तो हमेशा की तरह hi मज़ेदार है अह्हह्ह्ह्ह...
सभ्य- लुंड तो मज़ेदार होगा hi जब बुआ की छूट मज़ेदार होगी तो,
ये कहकर माँ ने चेहरा आगे कर अपने होंठों को बुआ के होंठों से मिला दिया और दोनों बड़े कामुक ढंग से एक दुसरे के होंठों को चूसने लगी, होंठों को चूसते हुए दोनों के बीच का प्यार साफ़ दिख रहा था, साथ hi उन्हें देख कर मुझे मज़ा आ रहा था, मेरी कामुक माँ और चुड़क्कड़ बुआ मेरे सामने बिलकुल नंगी हो कर इतने कामुक तरीके से एक दुसरे के होंठों को चूस रही थी और मेरा लुंड मेरी बुआ की गरम छूट में था, इससे अछि ज़िन्दगी क्या hi हो सकती थी, पर इससे ाचा भी हुआ होंठों को चूसते हुए जल्दी hi वो एक दुसरे की जीभ चूसने लगी, माँ बुआ की जीभ को किसी लुंड की तरह होंठों में लेकर चूसने लगी.

ये नज़ारा देख कर तो मेरे झटके अपने आप तेज हो गए और लुंड फूलने लगा, मुझे लगा मेरा रास दोबारा से लुंड की और बहने लगा है तो खुद को शांत करने के लिए मैंने लुंड को बुआ की छूट से निकाल लिए,
पर उन दोनों को जैसे कोई फ़र्क़ hi नहीं पड़ा और वो लगातार एक दुसरे के होंठों को चूसने में लगी हुई थी, मैंने कुछ पल दोनों को यूँ hi देखा और फिर अपना लुंड माँ के पैरों के बीच आकर उनकी छूट में पेल दिया और छोड़ने लगा,
पर इससे भी उनका चुम्बन टूटा नहीं बल्कि और गहरा hi हुआ, मैं उन्हें देखते हुए माँ की छूट में धक्के लगाने लगा,
माँ ने तो जैसे आज ठान लिए था की बुआ की जीभ का सारा रास चूस कर hi रहेंगी और लगातार बुआ की जीभ को चूसे जा रही थी, बुआ भी माँ का पूरा साथ दे रही थी, एक पल के लिए दोनों के होंठ अलग होते पर अगले hi पल फिर से जुड़ जाते, मुझे देखकर जब इतना मज़ा आ रहा था तो उन्हें कितना आ रहा होगा ये वो दोनों hi जानती होंगी.

मैंने उन्हें देखते हुए hi ना की छूट से बापिस लुंड निकला और बुआ के पैरों के बीच आकर उनकी गांड में घुसा दिया, जिससे बुआ थोड़ी मछली ज़रूर पर उन्होंने माँ से अपने होंठ अलग नहीं किये, मुझे दोनों की लगन देख कर बड़ा ाचा लगा, साथ hi बुआ की गांड में लुंड घुसा कर भी बहुत ाचा लग रहा था,
मैं लम्बे लम्बे धीमे धक्कों से बुआ की गांड मारने लगा, और हाथ ऊपर कर उनकी चूचियों को मसलने लगा, वही दुसरे हाथ से माँ की एक छुच्छी को, दो गदराई औरतों को एक साथ छोड़ने का मुझे भरपूर मज़ा मिल रहा था और जब दोनों गदराई औरतें अपनी माँ और बुआ हो तो मज़ा कई गुना बढ़ जाता है, और ऐसा hi मेरे साथ हो रहा था, बुआ की गांड कुछ देर मरने के बाद मैंने उनकी गांड से लुंड निकला और बापिस माँ की छूट में घुसा दिया और दददद उन्हें छोड़ने लगा. माँ और बुआ का छपाम्णा अभी भी जारी था, मेरा लुंड माँ की छूट में किसी मशीन की तरह अंदर बहार हो रहा था. बुआ अपने एक हाथ से अपनी छूट को सहलाते हुए माँ के होंठों को चूम रही थी,

एक बार फिर से मुझे मेरे लुंड में उबाल आता हुआ महसूस हुआ तो मैंने उसे रोका नहीं बल्कि और तेज माँ को छोड़ने लगा, और कुछ पल बाद माँ की छूट से लुंड निकल कर बापिस बुआ की छूट में घुसा दिया और तेज तेज छोड़ने लगा, ऐसे hi बदल बदल कर मैं दोनों की छूट छोड़ता रहा और दोनों को hi उनके चरम पर ला दिया,
माँ और बुआ एक साथ झड़ने लगी तो मैं भी खुद को रोक नहीं पाया और जैसे hi मेरा निकलने को हुआ तो मैंने दोनों की चूचियों और पेट को निशाना बनाया और उन्हें अपने रास से रंग दिया.. और बिस्तर पर लेट कर लम्बी लम्बी सांसें लेने लगा,
इधर बुआ और माँ एक दुसरे के बदन से मेरा रास चटनी की तरह चाट रही थी, कभी बुआ माँ की चूचियां और पेट चाटती तो कभी माँ बुआ की, फिर दोनों ने रास को एक दुसरे के साथ होंठों से होंठ मिला कर बांटा, आउट फिर दोनों मेरे बगल में आ कर लेट गयी,
शशि- आह्ह्ह्हह्ह थक गए.
सभ्य- हाँ थकना तो था hi इतनी चुदाई करने के बाद,
में- मुझे तो नींद आ रही है,
शशि- सही कहा लल्ला सो जाते हैं हम लोग भी कल भी जल्दी उठना है बहुत काम हैं,
सभ्य- हाँ सो जाते हैं अब,
हम तीनो वैसे hi एक दुसरे से चिपक कर सो गए.
चोदामपुर
कर्मा और उसका परिवार साथ hi किरण, शैलेश और ममता तो रिश्तेदारी में चले गए थे शाम का वक़्त हो चूका था,
गुंजन- सबको गए कुछ घंटे hi हुए हैं और घर में बिलकुल सूना सा लग रहा है, हैं न जीजी,
गुंजन ने रसोई में काम करते हुए कहा,
शालू- सही कहा तूने गुंजन, जीजी जीजा और बच्चों के बिना ये घर अधूरा सा लगता है,
गुंजन- वही तो, अरे जीजी बाबा ने चाय बनवाई थी बन गयी है छान के दे दो न, मैं बर्तन धो रही हूँ.
शालू- हाँ अभी छान देती हूँ पर पता नहीं अब पिएंगे भी की नहीं?
गुंजन- अरे खुद hi तो बोले थे बनाने को पिएंगे की नहीं,
शालू- आ दिखाती हूँ क्यों नहीं पिएंगे.
शालू गुंजन को बाजू से पकड़ कर रसोई के बाहर की और लाकर आंगन की और इशारा करती है, गुंजन सामने देखती है और मुस्कुराने लगती है,
गुंजन- अब तो मुश्किल hi पिएंगे, तुम hi पि लो जीजी अब नहीं तो ठंडी हो जाएगी,
गुंजन सामने देखते हुए हुए कहती है जहाँ आँगन में पड़ी खाट पर कर्मा के नाना बिलकुल नंगे पेअर लटकाये लेते हैं और उनके ऊपर कर्मा की प्यारी रज्जो चची पूरी नंगी होकर उनका लुंड अपनी छूट में लिए हुए उछाल रही हैं.

कुछ पल दोनों इस अद्भुत नज़ारे को देखते हैं फिर अपने काम पर लग जाते हैं.
रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन अह्हह्ह्ह्ह चच्चा आह्हः,
रज्जो उछालते हुए आहें भर्ती है,
नाना- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बितीयआह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह बहुतत्त मस्त्त्त बडंण है तेराअहहह आह्ह्ह्ह क्या छूट पाई है तूने,
रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह चचहहहःजीईई बड़ीई इच्छ्हा थी मेरिइइइइइ अह्ह्ह्ह अपनी बाप से छुड़वाने कीई अह्ह्ह पर वो तो नाहीई रही अह्हह्ह्ह्ह पर तुमसे छुड़वा कर यही लगता है अपनी बाप से छुड़वा रही हुन्न्न्नन्नन्न...
नाना- अह्हह्ह्ह्ह बितीयआह्ह्ह्ह तुह्ह्ह ममताहहह मँजूह गुंजन हमारी बेटियां hi तो होऊ, अह्हह्ह्ह्ह हमारे लुंड के पैदाइश नहीं तो क्या हुआहहह तुम सब कोह्ह्ह्ह छोटी और बड़ी जितना hi लाआहहहहड्द करते हैं हम्म्म्म...
रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह चचहहहःजीईई तुमहारी बितीयआह्ह्ह्ह बनकर अह्ह्ह्ह बड़ीई खुषीयी हो रही हीी.
नाना- अह्हह्ह्ह्ह मैंन तो कहूंगाःह चुहठ भी मुझे चाचा नाहीइ अह्ह्ह बबआ hi कहा कर,
रज्जो ये सुनकर खुश भी हुई और भावुक भी और नाना की और देख बोली- ओह्ह्ह्हह्ह babaaaahhhhhhhhhhhhhhh छोड़ो और तेज़्ज़ज़ अपनीइ रज्जो बितीयआह्ह्ह्ह को,
नाना ये सुनकर रज्जो को ऊपर से उठा कर नीचे लिटाते हैं और खुद ऊपर आ कर दनादन धक्के लगाने लगते हैं.
दोनों hi चुदाई के आनंद में आहें भरते हुए एक दुसरे का उत्साह बढ़ाते हैं और फिर
जल्दी hi दोनों अपने अपने चरम पर एक साथ पहुँच कर झाड़ जाते हैं, झड़ने के बाद नाना को याद आता है की उन्होंने चाय मंगवाई थी तो गुंजन को आवाज़ देते हैं,
नाना- अरे बहु हमारी चाय बनाई का?
इतने में शालू निकल कर आती है और कहती है- बनाई थी बाबा पर तुम रज्जो जीजी के साथ प्यार के पल बिता रहे थे इसलिए नहीं दी.
ये सुन रज्जो भी मुस्कुराने लगती है,
नाना- तो अब दे दे.
शालू- नहीं अब नहीं मिलेगी, अब खाना खाओ सीधा चाय पियोगे तो भूख मर जाएगी,
रज्जो- हाँ बाबा सही कह रही है शालू,
रज्जो ने अपने कपडे पहनते हुए कहा,
शालू- और जीजी तुम कहाँ कपडे पहनने लगी, उतारो और तुम भी बैठो अपने बाबा के साथ खाने,
रज्जो- अरे घर जाना है शालू काम पड़ा होगा सारा,
गुंजन- कुछ नहीं पड़ा होगा जीजी, नीतू और लाडो हैं तो और नहीं होगा तो मैं करवा दूंगी जा कर तुम खाने बैठो.
नाना- अरे ये ाचा रहेगा आजा रज्जो साथ में खाते हैं,
रज्जो ने भी ज़्यादा ज़िद्द नहीं की और नंगी hi नाना के साथ बैठ गयी, और दोनों को शालू और गुंजन ने खाना खिलाया, वो खाना खा कर उठ hi पाए थे की बाकी लोग भी यानी सागर, जमुना और राजन पल्ली भी आ गए.
रज्जो को नंगा देख कर सबके मन में अरमान ज़रूर जगे पर शालू और गुंजन ने सबको पहले खाने के लिए बैठा दिया,
रज्जो ने इतने में कपडे पहन लिए और बोली- बाबा अब तुम मेरे साथ चलो, आज रात मेरे घर रहोगे.
नाना- अरे बिटिया ये भी तो तेरा hi घर है.
रज्जो- वो मुझे नहीं पता तुम एक बार भी नहीं गए अभी तक अब चलो,
नाना- अच्छा ठीक है.
शालू- जाओ बाबा रज्जो जीजी से भी सेवा करवाओ थोड़ी.
रज्जो- और क्या तभी तो ले जा रही हूँ.
रज्जो नाना को लेकर चली गयी, बाकी सब ने खाना खाया, शालू पल्ली और गुंजन तीनो ने मिलकर सारा कान निपटा लिया,
शालू- जीजा, बाबा तो रज्जो जीजी के यहाँ गए तो कौन कैसे सोयेगा.
शालू ने अपने पल्लू से हाथ पोंछते हुए कहा.
राजन- एक आदमी का तो बैग में सोना ज़रूरी है तो हम बाग़ में सो जायेंगे,
शालू- अकेले hi?
राजन- हाँ अकेले क्या दिक्कत है?
शालू- तुम्हे कोई दिक्कत नहीं है इसे तो होगी,
शालू ने हाथ बढाकर लुंगी के ऊपर से hi उनका लुंड मसलते हुए कहा,
राजन- हाँ इसे तो दिक्कत होती hi है हमेशा.
राजन ने भी हाथ बढाकर शालू की भरी चुकी को ब्लाउज के ऊपर से hi मसल दिया,
शालू- मैं चल लेती हूँ न साथ,
राजन- तू क्या करेगी वहां?
शालू- मैं क्या करुँगी, दोनों करेंगे, खुले में छोड़ना अपनी साली को,
इधर सब की बातें चल hi रही थी की दरवाज़े पर खटखटाने की आवाज़ आई तो सागर ने जाकर खोला तो सामने मंजू और प्रेमा थी,
सागर- आओ बुआ आओ भाभी.
सागर ने दोनों को अंदर लेते हुए कहा,
मंजू और प्रेमा आँगन में आ गए.
शालू- अरे जीजी आओ बैठो, खाना लगाऊं.
मंजू- अरे खाना वगेरा सब निपटा कर आई हूँ, तुम लोगो ने खा लिया?
गुंजन- हाँ जीजी खा लिए सारा कान निपटा लिया,
प्रेमा- नाना नहीं दिख रहे?
शालू- वो तो रज्जो जीजी लिवा गयी उन्हें रात के लिए अपने साथ,
मंजू- कल मैं ले जाउंगी, अब बोलेन वो बिटिया अरे वो.
इस पर सब हंसने लगे,
राजन- अरे तुम्हारे सामने कौन बोल सकता है भाभी. तुम्हारे आगे तो भैया नहीं बोलते.
मंजू- तुम तो बोल रहे हो देवर जी,
राजन- देवर भाभी के सामने hi बोल सकता है,
मंजू- ाचा अब सुनो, ऐ गुंजन तू पल्ली को लेकर घर चली जा, तेरे जीजा बड़ा बोल रहे हैं की सलहज से नहीं मिले,
गुंजन- ठीक है जीजी चली जाती हूँ, जीजा की सेवा भी कर दूंगी,
मंजू- क्यों जमुना भेज दूँ तेरी लुगाई को, याद तो नहीं आएगी तुझे रात में,
जमुना- अरे जीजी तुम्हारे होते हुए किसी और की याद क्यों आएगी.
मंजू- चल फिर देर न करो पल्ली जा बीटा मामी को लेजा अपनी.
पल्ली- ठीक है तै, चलो मामी,
गुंजन- हाँ चल बिटिया.
पल्ली और मामी निकल जाते हैं,
राजन- चलो फिर हम भी चलते हैं,
मंजू- तुम कहाँ चले देवर जी,
राजन- अरे भाभी वो बाग़ में सोयेंगे सामान खुला पड़ा है न इसलिए,
शालू- हाँ जीजी मैं भी जा रही थी जीजा के साथ hi कहीं अकेले न पद जाएँ इसलिए.
मंजू- ाचा ाचा, वैसे तो तुम लोग रुकते तो मज़ा आता पर कोई नहीं जाना भी ज़रूरी है.
शालू- मज़े के लिए जमुना और सागर है न जीजी खूब देगा तुम्हे,
राजन- प्रेमा को तो मिलने भी लगे,
राजन ने एक और इशारा करके कहा तो सबने देखा तो पाया की सागर ने प्रेमा का ब्लाउज खोल लिए है और उसकी चूचियों को पि रहा है,
शालू- चलो हम लोग भी चलते हैं.
राजन- हाँ.
कुछ hi पलों में शालू और राजन भी निकल गए, इधर सागर ने प्रेमा को तब तक पूरा नंगा कर दिया था और खुद भी अपने कपडे उतारने लगा, जमुना ने प्रेमा के नंगे बदन को देखा तो उसे अपनी और खींच बाहों में भर लिया, वहीँ सागर खुद नंगा हुआ और फिर अपनी मंजू बुआ के होंठों पर टूट पड़ा, मंजू भी सागर का पूरा साथ देने लगी, सागर मंजू के होंठों को चूसते हुए उनके कपडे उतरने लगा और जल्दी hi मंजू भी बाकी सब की तरह पूरी नंगी हो चुकी थी, सागर ने होठों को चूसने के बाद अपना ध्यान मंजू की मोती चूचियों पर लगाया और उसे चूसने लगा,
मंजू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बच्चाः ऐसी हीई खा जाए बुआ की छुछियां अह्हह्ह्ह्ह,
सागर भी वही कर रहा था, दूसरी और जमुना भी प्रेमा के होंठों को चूसते हुए उसकी चूचियों को मीनजह रहा था, प्रेमा अपने रास से भरे होंठों का स्वाद जमुना को बड़ी लगन से दे रही थी, जल्दी hi दोनों के होंठ अलग हुए तो जमुना ने प्रेमा की चुकी को मुँह में भर लिया और पागलों की तरह चूसने लगा,
प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मामाहः ुहम्म्म्म
प्रेमा जमुना का सर अपनी चूचियों में दबाते हुए आहें भरने लगी, उसने आँगन में दूसरी और देखा तो पाया उसकी सास अपने घुटनों पर बैठी है और उनके सामने सागर खड़ा है और उसकी सास का मुँह छोड़ रहा है,

सागर- अह्हह्ह्ह्ह सआईईईई रनडीईई बुहाहह क्या गरम मुँह है तेराअहहह ahhhhhhhhhh,
सागर मंजू का मुँह छोड़ते हुए बड़बड़ाया.
जमुना- ऐ, ऐसे बात करते हैं बुआ से,
जमुना ने अपने बेटे को हड़काते हुए कहा साथ hi प्रेमा को बिस्तर पकड़ कर झुका दिया और खुद उसके पीछे आकर उसके चूतड़ों को मसलने लगा, और फिर चूतड़ों को फैलाकर खुद घुटनों पर बैठ कर अपना मुँह प्रेमा में चूतड़ों के बीच घुसा दिया और उसकी छूट और गांड चाटने लगा,
सागर- ठीक है पापा, वो थोड़ा बहक गया था, माफ़ कार्डो बुहाहह,
मंजू ने ये सुनकर उसका लुंड मुँह से निकला और बोली- ऐ जमुना, मेरे लल्ला को क्यों डांटा अपनी बुआ के साथ hi तो कर रहा है, और चुदाई के वक़्त वो गाली दे सकता है मुझे मज़ा आता है,
ये कहकर मंजू ने दोबारा सागर का लुंड मुँह में भर लिया,
जमुना- ठीक है जीजी पर देखना तुम्हारे लाड में ये बिगड़ न जाये,
जमुना ने बापिस अपना मुँह प्रेमा के चूतड़ों में घुसाते हुए कहा,
सागर- अरे पापा मुझे पता है कब क्या बोलना है.
प्रेमा- और काहहह सागर भैया समझदार हैं अह्ह्ह्हह्हह मामाहः ऐसी hi,
प्रेमा ने अपनी गांड में जमुना की जीभ घुसते हुए महसूस कर सिसकते हुए कहा..
इधर सागर ने भी अपने लुंड को मंजू के मुँह से निकला और उसे भी झुका कर उसकी छूट चाटने लगा,
मंजू- अह्ह्ह्ह लल्लाहहहह अह्हह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आए रहा है ऐसी hi घुमा जीभ.
जहाँ सागर छूट चाट रहा था उसके पापा तो आगे बढ़ चुके थे टी
उन्होंने प्रेमा की गांड पहले तो खूब अचे से छाती और फिर उसे बिस्तर के किनारे लिटाकर अपना लुंड उसकी गांड में घुसा दिया और धीमे धीमे लुंड अंदर बाहर करने लगे,

प्रेमा भी अपनी गांड मरवाते हुए आहें भरने लगी थी.
प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मामाहः ऐसी hi ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पूरा घुसादो अब,
जमुना- अह्हह्ह्ह्ह बहूऊऊह्ह्ह अह्ह्ह्हह बड़ीईई मस्त्त गांड हीी टेरिइइइइइ अह्हह्ह्ह्ह इतनी कस्यी हुई और गरमममम. आह्हः लिए पुराहहह
ये कह जमुना ने अपना पूरा लुंड जड़ तक प्रेमा की गांड में घुसा दिया, और प्रेमा और वो दोनों मज़े से आहें भरने लगे.
जमुना ने प्रेमा की गांड मारते हुए अपने बेटे की और देखा अब वो भी चुदाई के खेल में आगे बढ़ चूका था और अभी मंजू को पीछे रसोई की स्लिप से टिका कर खड़े खड़े hi उसकी एक तंग को कंधे पर रख कर दनादन उसको छोड़ रहा था,

मंजू भी जवान लुंड से छुड़वाते हुए खूब तेजी से आहें भर रही थी और सागर को चुदाई के लिए और उकसा रही थी.
मंजू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बच्चाः ऐसी hi ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऑर्डर तेजज छूवोड्ढड्ड अपनीईईई चुड़क्कड़ buaaaaahhhhhhhhhh को.
सागर- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन बुआहहहहह लिए सआईईईई..
प्रेमा- अह्हह्ह्ह्ह मामाहः देखूहहह कैसी तुम्हारा बेटाःह्ह्ह मेरिइइइ चुड़क्कड़ रनडीईई सास को छोड़ रहा है अह्हह्ह्ह्ह.
जमुना- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हॉँण्णन बहूऊऊह्ह्ह चू भी तेरी सास की तरह पूरी रैंड हैई,
जमुना ने प्रेमा की गांड में धक्के लगाते हुए कहा,
इधर मंजू को उस आसान में तकलीफ होने लगी तो उसने सागर को बदलने को कहा, तो सागर उसे अपने पापा और प्रेमा के पास ले आया और दोनों बाप बेटे ने मिलकर सास बहु को एक दुसरे के ऊपर 69 के आसान में लिटा दिया और खुद एक एक छोर पर आकर अपना अपना लुंड दोनों की गांड में पिरो दिया वही सास बहु एक दुसरे की छूट पर अपनी जीभ फिरने लगी, मंजू की गांड में जमुना का लुंड था और प्रेमा की गांड में सागर का,
दोनों की गांड मारते हुए बाप बेटे ने एक दुसरे की और देखा और मुस्कुरा पड़े दोनों hi जानते थे की रात अभी लम्बी चलने वाली है,
इधर बाग़ में इस समय राजन और शालू इस समय बिस्तर पर तो नहीं थे बल्कि खुले आस्मां के नीचे ठंडी हवा ने उनकी उत्तेजना को और भड़का दिया था और अभी उसी उत्तेजना वस् शालू पूरी नंगी होकर एक पेड़ के सहारे कड़ी हुई थी और उसके पीछे राजन भी पूरे नंगे थे और शालू की छूट में अपना लुंड पिरो रहे थे,

शालू- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जीजा आह्हः ऐसी खुले में बड़ा मज़ा आ अह्ह्ह्ह रहा ही.
राजन- खुले में चुड़ाईयाहज काहहह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह hi अलग हीी रानी ुहममम.
राजन शालू के होंठों को चूमते हुए बोले साथ hi उनका लुंड शालू की गरम छूट में लगातार अंदर बहार हो रहा था, शालू की मोती छुछियां हर झटके पर झूल रही थी...
जारी रहेगी.

































































































