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- Dec 5, 2013
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मान्य सिमरन की बुआ की बेटी ड्राइविंग सीट पर बैठी हुई थी, साथ hi उसका भाई सुरिया बैठा हुआ था. बैक सीट पर अरुणिता और नरेश बैठे हुए थे. गाड़ी रुक चुकी थी और चरों गाड़ी से उतरे बिना hi सिमरन की भरी हुई मांग और राज को देख रहे थे
राज को देख के बस उनके अंदर मैं में एक hi बात थी. वाह्ह्ह क्या हेतु जैसी लुक पाई है राज ने. तो सिमरन की भरी मांग और मुस्कान देख कर उनकी सिटी भी गम थी.
कौन ऐसा था जो सिमरन को गहराई तक नहीं जनता था. सबसे ज़यादा तो मान्य घबरा गई थी, सिमरन को इस रूप में देख के. सुरिया भी मर्द होक कुछ नर्कुस हो गया था. सिमरन को ऐसे रूप में रेख के. सब सुना था सिरमन के बारे. पर सिमरन ऐसे उसके सामने आएगी, उसने सोचा नहीं था.
सब उसे देख रहे थे, कोई नहीं उतरा तोह सिमरन मुस्कुराती हुई सब के पास पोहंच गई. मुद के राज को देखा और अपने माथे पे हाथ मार के वापिस भागी, भाग के राज के पास पोहंची और राज के हाथ को थाम के गाड़ी की और लेके चलने लगी. घर के बाकि सब मेंबर्स भी पोर्च में खड़े सब देख रहे थे.
घर आये मेहमान का सवागत भी सब भूले हुए थे. गाडी के अंदर बैठे mehman(bua फॅमिली) भी गाड़ी से नहीं उतरे थे. सिमरन के साथ वहां पोहंची.
सिमरन राज के साथ जुड़ के कड़ी थी सिमरन के चेहरे पर ज़माने भर की ख़ुशी छलक रही थी. सिमरन चहकती हुई बोली.
सिमरन-- बुआ जी, अंकल जी, मान्य मेरी बेहेन, सूर्य मेरे भाई, आओ.. आओ.. आओ न गाडी से बहार, देखो तोह मेरे साथ कौन है. राज मेरे पतिदेव.. नरेश भी अपने होंटो पर जीब फेर के रह गए. बुआ, मान्य और सूर्य भी कुछ घबराये हुए दूर खोल के गाडी से बहार आने लगे.
सिमरन और राज सूर्य वाली साइड थे. जैसे hi सूर्य बहार निकला. सिमरन ने उसका हाथ पकड़ लिया और राज को देख के बेपनाह ख़ुशी का इज़हार करते हुए सूर्य से बोली.
सिमरन-- सूर्य ये है राज तुम्हारा जीजू और राज ये है मेरी बुआ का बीटा, मैं भाई. मुझे इससे और इसे मुझसे बहुउउउउउउत्तत्ततत्तत्त प्यार है. सिमरन ने बहुत पर ज़ोर देते हुए कहा तोह सूर्य को अपने पिछले कई साल एक hi पल में याद आ गए. कैसे सिमरन ने उसे कई बार नचाया था, कैसे कैसे खेल उसके साथ खेल गई थी सिमरन. सूर्य अपने माथे पे ए पसीना को साफ़ करने लगा तोह राज के होंटो पर स्माइल आ गई. राज बहुत कुछ समझने लगा था. सिमरन का रूप जो उसे नार्मल लग रहा था. असल में था नहीं. राज ये भी सोच गया था. बाकि बाद में सोचने का मैं बना के राज ने सूर्य के साथ मिलाया, फिर सूर्य को गले से भी लगा लिया. सूर्य राज से मिल के, राज की पर्सनालिटी से खूब इम्प्रेस हुआ. पर सिमरन जैसी बाला उसके सर पर थी. इस बात पे वो कुछ नर्वस भी था.
कुछ दूरी पे सब खड़े हुए तमाशा देख रहे थे. किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी पास आने की. सिमरन का मौजूदा रूप सबको और भी डेंजरस लग रहा था.
बाकि तीनो भी सिमरन के पास आ गए.
नरेश ख़ुशी से चहकने की कोशिश करता हुआ. किसी हो तुम सिमरन बेटी. सिमरन ने अपने अंकल को देखा और चहकती हुई राज का हाथ छोड़े बिना नरेश के गले से लग गई.
सिमरन-- अंकल जब से राज मेरी ज़िंदगी में आया है, तब से मैं बहुत बहुत बहुत खुश हों. राज के होंटो पर स्माइल आई तोह बाकियो के कान में साइन साइन होने लगी. नरेश कुछ और घबरा गया. नरेश पोर्च में खड़े हुए सबको देखने लगा. बोलै कुछ नहीं, इशारा कुछ नहीं किया.
सिमरन फिर बुआ को देख के नरेश से अलग हुई और नरेश से बोली. अंकल आप भी मेरे राज से मिल लें. मई बुआ से मिल लून. बुआ भी सिमरन को देख के अपनी बहन पहला गई. बुआ दरी हुई थी. सिमरन से मिलते hi चापलूसी करने लगी.
बुआ-- मेरी बेटी कितनी सुन्दर दिख रही है. आज बरसों बाद मेरे दिल को चैन मिला है. भगवन तुझे हमेशा हर मैदान में फ़तेह दिलाये. तुम तो मेरी मान्य से भी बढ़के मुझे लगती हो.
सिमरन राज को देखते हुए-- बुआ आपकी प्रार्थना ज़रूर पूरी होगी, भगवन मुझे हर मैदान में सक्सेस देगा hi. देखना मई कितने अचे नंबरों से पास होती हों.
राज को अब कन्फर्म हो गया था. सिमरन के अंदर मन में बहुत कुछ चल रहा है. सिमरन ऊपर से कुछ भी शो नहीं होने देती थी. सिमरन इस मामले में कमल की लड़की थी. आज राज को देखना था, सिमरन उसके साथ केसा खेल खेलती है. राज अपने हिसाब से सावधान हो गया था. पर जनता नहीं था, सिमरन उसके साथ करने क्या वाली है. वो सब बाद में देखने वाली बात थी.
बुआ से मिलके सिमरन मान्य की और मुड़ी तोह मान्य भी सान्वी मानवी के जैसे कंपनी लगी थी. सिमरन ने बड़े प्यार से मान्य को गले से लगा लिया.
सिमरन--- मैं बदल गई हों मेरी बहन. देखा नहीं कैसे अब मैं एक पत्नी के रूप में हों. राज ने मुझे बदल दिए है मेरी जान. चलो तुम्हे राज से मिलवाती हों. सिमरन मान्य के हाथ पकड़ के राज के पास ले गई. बुआ और नरेश भी राज से अच्छी मिल चुके थे.
सिमरन राज के हाथ थमते हुए-- राज ये मेरी बेस्ट सीस मान्य है. मुझे इससे भी बहुत बहुत बहुत प्यार है, सुरिया से भी ज़यादा. क्यों सूर्य तुमने बताया नहीं अपने जीजू को मेरे और अपने प्यार के बारे में.
surya---hh..haan.. हाँ.. नं. नहीं दीदी सब मिल रहे थे तो बताने का समय नहीं मिला. सूर्य फिरसे घबरा गया था.
मान्य ने हाथ आगे बाध्य राज से मिलने के लिए तोह सिमरन ने उसके हाथ पे हाथ मार दिए.
सिमरन-- क्या करती हो मान्य, तेरे जीजू हाँ. हुग कर न अपने जीजू को. राज तुम भी मिलो मेरी बेस्ट सीस से.. राज सब तमाशा देखा रहा था. ये भी देख रहा था, सब पीछे खड़े हुए देख रहे थे पर कोई भी आगे नहीं आया था.. राज हरामी था, बहुत कुछ समझ गया था. सिमरन को पा के उसने सही फैसला किया है, ये सोच कर राज को खुद पर गर्व होने लगा. राज को सिंपल लड़की चाहिए भी नहीं थी. राज को चाहिए थी सिमरन जैसी hi कोई. राज जितनी लड़कियों और औरतों को छोड़ चूका था, राज के लिए कहाँ कोई अपनी फॅमिली से हटके कोई स्पेशल हो सकती थी. पर उसे सिमरन के सूरत में एक स्पेशल लड़की मिल चुकी थी. सिमरन उसे हर लिहाज़ से अपनी टक्कर की लग रही थी. राज खुद हरामी था तोह सिमरन भी खुद में स्पेशल ओने थी. राज खुश था बेहद खुद.
बड़े प्यार से राज ने मान्य को गले से लगा, एक भाई और जीजू होने का फ़र्ज़ निभाते हुए, बिना कुछ ऐसा वैसा सोचते हुए राज ने मान्य के माथे को भी चूम लिया.
नरेश, बुआ और सिया, मान्य जो सोच रहे थे, राज से गले मिल के जाने केसा फील हो. पर राज सलीक़े से मान्य को हुग करना और फिर मान्य के माथे पे किश करना सबको बेहद पसंद आया. राज के बारे में सुनके hi सब को राज पसंद आ गया था. अब तोह राज के ऐसे बर्ताव से स्टाम्प hi लग गई थी.
चरों को ने भी सिमरन के लिए रजा को पुरे मैं से एक्सेप्ट कर लिया था. राज hi एक ऐसा लड़का है, जो सिमरन जैसी लड़की के लिए परफेक्ट है.
सिमरन फिर राज का हाथ थाम के पोर्च की और बढ़ने लगी. कुछ पल के साथ सब सिमरन को भूल कर राज की पर्सनालिटी में खो गए. राज की कातिल चल भी राज को सबमे मुमताज़ कर रही थी. सिमरन के साथ राज की जोड़ी सब को ऐसी भाई, दादी और सिमरन की माँ, चची ने मैं hi मैं में भगवन से वादा कर लिया. कल hi मंदिर जा के पूरा दिन गरीबो में खाना बाँटेंगे. ऐसे hi दयालों भी थे सबके सब. ख़ुशी के मौका पर कभी भी भगवन को नहीं भूलते थे. अब्ब भी सब राज सिमरन की जोड़ी को देख कर बेहद खुश थे.
सब धीमे चाल चलते हुए सबके पास जा पोहंचे. राज राकेश वर्मा को तोह सब राज को देख रहे थे. और सिमरन सब को देख रही थी. सिमरन की ऑंखें बोल रही थी, देखो मेरी और राज की जोड़ी इस वर्ल्ड की सबसे बेस्ट जोड़ी है न. मैं में वो बोल रही थी.
सब के सब राज के साथ मिल गए हाँ. एक राज को hi नहीं, सबको सबक़ न सिखाया तोह मेरा नाम भी सिमरन नहीं... कोई भी सिमरन के मैं की बात उसकी आँखों से नहीं पढ़ सकता था.
राज को देख के बस उनके अंदर मैं में एक hi बात थी. वाह्ह्ह क्या हेतु जैसी लुक पाई है राज ने. तो सिमरन की भरी मांग और मुस्कान देख कर उनकी सिटी भी गम थी.
कौन ऐसा था जो सिमरन को गहराई तक नहीं जनता था. सबसे ज़यादा तो मान्य घबरा गई थी, सिमरन को इस रूप में देख के. सुरिया भी मर्द होक कुछ नर्कुस हो गया था. सिमरन को ऐसे रूप में रेख के. सब सुना था सिरमन के बारे. पर सिमरन ऐसे उसके सामने आएगी, उसने सोचा नहीं था.
सब उसे देख रहे थे, कोई नहीं उतरा तोह सिमरन मुस्कुराती हुई सब के पास पोहंच गई. मुद के राज को देखा और अपने माथे पे हाथ मार के वापिस भागी, भाग के राज के पास पोहंची और राज के हाथ को थाम के गाड़ी की और लेके चलने लगी. घर के बाकि सब मेंबर्स भी पोर्च में खड़े सब देख रहे थे.
घर आये मेहमान का सवागत भी सब भूले हुए थे. गाडी के अंदर बैठे mehman(bua फॅमिली) भी गाड़ी से नहीं उतरे थे. सिमरन के साथ वहां पोहंची.
सिमरन राज के साथ जुड़ के कड़ी थी सिमरन के चेहरे पर ज़माने भर की ख़ुशी छलक रही थी. सिमरन चहकती हुई बोली.
सिमरन-- बुआ जी, अंकल जी, मान्य मेरी बेहेन, सूर्य मेरे भाई, आओ.. आओ.. आओ न गाडी से बहार, देखो तोह मेरे साथ कौन है. राज मेरे पतिदेव.. नरेश भी अपने होंटो पर जीब फेर के रह गए. बुआ, मान्य और सूर्य भी कुछ घबराये हुए दूर खोल के गाडी से बहार आने लगे.
सिमरन और राज सूर्य वाली साइड थे. जैसे hi सूर्य बहार निकला. सिमरन ने उसका हाथ पकड़ लिया और राज को देख के बेपनाह ख़ुशी का इज़हार करते हुए सूर्य से बोली.
सिमरन-- सूर्य ये है राज तुम्हारा जीजू और राज ये है मेरी बुआ का बीटा, मैं भाई. मुझे इससे और इसे मुझसे बहुउउउउउउत्तत्ततत्तत्त प्यार है. सिमरन ने बहुत पर ज़ोर देते हुए कहा तोह सूर्य को अपने पिछले कई साल एक hi पल में याद आ गए. कैसे सिमरन ने उसे कई बार नचाया था, कैसे कैसे खेल उसके साथ खेल गई थी सिमरन. सूर्य अपने माथे पे ए पसीना को साफ़ करने लगा तोह राज के होंटो पर स्माइल आ गई. राज बहुत कुछ समझने लगा था. सिमरन का रूप जो उसे नार्मल लग रहा था. असल में था नहीं. राज ये भी सोच गया था. बाकि बाद में सोचने का मैं बना के राज ने सूर्य के साथ मिलाया, फिर सूर्य को गले से भी लगा लिया. सूर्य राज से मिल के, राज की पर्सनालिटी से खूब इम्प्रेस हुआ. पर सिमरन जैसी बाला उसके सर पर थी. इस बात पे वो कुछ नर्वस भी था.
कुछ दूरी पे सब खड़े हुए तमाशा देख रहे थे. किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी पास आने की. सिमरन का मौजूदा रूप सबको और भी डेंजरस लग रहा था.
बाकि तीनो भी सिमरन के पास आ गए.
नरेश ख़ुशी से चहकने की कोशिश करता हुआ. किसी हो तुम सिमरन बेटी. सिमरन ने अपने अंकल को देखा और चहकती हुई राज का हाथ छोड़े बिना नरेश के गले से लग गई.
सिमरन-- अंकल जब से राज मेरी ज़िंदगी में आया है, तब से मैं बहुत बहुत बहुत खुश हों. राज के होंटो पर स्माइल आई तोह बाकियो के कान में साइन साइन होने लगी. नरेश कुछ और घबरा गया. नरेश पोर्च में खड़े हुए सबको देखने लगा. बोलै कुछ नहीं, इशारा कुछ नहीं किया.
सिमरन फिर बुआ को देख के नरेश से अलग हुई और नरेश से बोली. अंकल आप भी मेरे राज से मिल लें. मई बुआ से मिल लून. बुआ भी सिमरन को देख के अपनी बहन पहला गई. बुआ दरी हुई थी. सिमरन से मिलते hi चापलूसी करने लगी.
बुआ-- मेरी बेटी कितनी सुन्दर दिख रही है. आज बरसों बाद मेरे दिल को चैन मिला है. भगवन तुझे हमेशा हर मैदान में फ़तेह दिलाये. तुम तो मेरी मान्य से भी बढ़के मुझे लगती हो.
सिमरन राज को देखते हुए-- बुआ आपकी प्रार्थना ज़रूर पूरी होगी, भगवन मुझे हर मैदान में सक्सेस देगा hi. देखना मई कितने अचे नंबरों से पास होती हों.
राज को अब कन्फर्म हो गया था. सिमरन के अंदर मन में बहुत कुछ चल रहा है. सिमरन ऊपर से कुछ भी शो नहीं होने देती थी. सिमरन इस मामले में कमल की लड़की थी. आज राज को देखना था, सिमरन उसके साथ केसा खेल खेलती है. राज अपने हिसाब से सावधान हो गया था. पर जनता नहीं था, सिमरन उसके साथ करने क्या वाली है. वो सब बाद में देखने वाली बात थी.
बुआ से मिलके सिमरन मान्य की और मुड़ी तोह मान्य भी सान्वी मानवी के जैसे कंपनी लगी थी. सिमरन ने बड़े प्यार से मान्य को गले से लगा लिया.
सिमरन--- मैं बदल गई हों मेरी बहन. देखा नहीं कैसे अब मैं एक पत्नी के रूप में हों. राज ने मुझे बदल दिए है मेरी जान. चलो तुम्हे राज से मिलवाती हों. सिमरन मान्य के हाथ पकड़ के राज के पास ले गई. बुआ और नरेश भी राज से अच्छी मिल चुके थे.
सिमरन राज के हाथ थमते हुए-- राज ये मेरी बेस्ट सीस मान्य है. मुझे इससे भी बहुत बहुत बहुत प्यार है, सुरिया से भी ज़यादा. क्यों सूर्य तुमने बताया नहीं अपने जीजू को मेरे और अपने प्यार के बारे में.
surya---hh..haan.. हाँ.. नं. नहीं दीदी सब मिल रहे थे तो बताने का समय नहीं मिला. सूर्य फिरसे घबरा गया था.
मान्य ने हाथ आगे बाध्य राज से मिलने के लिए तोह सिमरन ने उसके हाथ पे हाथ मार दिए.
सिमरन-- क्या करती हो मान्य, तेरे जीजू हाँ. हुग कर न अपने जीजू को. राज तुम भी मिलो मेरी बेस्ट सीस से.. राज सब तमाशा देखा रहा था. ये भी देख रहा था, सब पीछे खड़े हुए देख रहे थे पर कोई भी आगे नहीं आया था.. राज हरामी था, बहुत कुछ समझ गया था. सिमरन को पा के उसने सही फैसला किया है, ये सोच कर राज को खुद पर गर्व होने लगा. राज को सिंपल लड़की चाहिए भी नहीं थी. राज को चाहिए थी सिमरन जैसी hi कोई. राज जितनी लड़कियों और औरतों को छोड़ चूका था, राज के लिए कहाँ कोई अपनी फॅमिली से हटके कोई स्पेशल हो सकती थी. पर उसे सिमरन के सूरत में एक स्पेशल लड़की मिल चुकी थी. सिमरन उसे हर लिहाज़ से अपनी टक्कर की लग रही थी. राज खुद हरामी था तोह सिमरन भी खुद में स्पेशल ओने थी. राज खुश था बेहद खुद.
बड़े प्यार से राज ने मान्य को गले से लगा, एक भाई और जीजू होने का फ़र्ज़ निभाते हुए, बिना कुछ ऐसा वैसा सोचते हुए राज ने मान्य के माथे को भी चूम लिया.
नरेश, बुआ और सिया, मान्य जो सोच रहे थे, राज से गले मिल के जाने केसा फील हो. पर राज सलीक़े से मान्य को हुग करना और फिर मान्य के माथे पे किश करना सबको बेहद पसंद आया. राज के बारे में सुनके hi सब को राज पसंद आ गया था. अब तोह राज के ऐसे बर्ताव से स्टाम्प hi लग गई थी.
चरों को ने भी सिमरन के लिए रजा को पुरे मैं से एक्सेप्ट कर लिया था. राज hi एक ऐसा लड़का है, जो सिमरन जैसी लड़की के लिए परफेक्ट है.
सिमरन फिर राज का हाथ थाम के पोर्च की और बढ़ने लगी. कुछ पल के साथ सब सिमरन को भूल कर राज की पर्सनालिटी में खो गए. राज की कातिल चल भी राज को सबमे मुमताज़ कर रही थी. सिमरन के साथ राज की जोड़ी सब को ऐसी भाई, दादी और सिमरन की माँ, चची ने मैं hi मैं में भगवन से वादा कर लिया. कल hi मंदिर जा के पूरा दिन गरीबो में खाना बाँटेंगे. ऐसे hi दयालों भी थे सबके सब. ख़ुशी के मौका पर कभी भी भगवन को नहीं भूलते थे. अब्ब भी सब राज सिमरन की जोड़ी को देख कर बेहद खुश थे.
सब धीमे चाल चलते हुए सबके पास जा पोहंचे. राज राकेश वर्मा को तोह सब राज को देख रहे थे. और सिमरन सब को देख रही थी. सिमरन की ऑंखें बोल रही थी, देखो मेरी और राज की जोड़ी इस वर्ल्ड की सबसे बेस्ट जोड़ी है न. मैं में वो बोल रही थी.
सब के सब राज के साथ मिल गए हाँ. एक राज को hi नहीं, सबको सबक़ न सिखाया तोह मेरा नाम भी सिमरन नहीं... कोई भी सिमरन के मैं की बात उसकी आँखों से नहीं पढ़ सकता था.