Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 5 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

मान्य सिमरन की बुआ की बेटी ड्राइविंग सीट पर बैठी हुई थी, साथ hi उसका भाई सुरिया बैठा हुआ था. बैक सीट पर अरुणिता और नरेश बैठे हुए थे. गाड़ी रुक चुकी थी और चरों गाड़ी से उतरे बिना hi सिमरन की भरी हुई मांग और राज को देख रहे थे

राज को देख के बस उनके अंदर मैं में एक hi बात थी. वाह्ह्ह क्या हेतु जैसी लुक पाई है राज ने. तो सिमरन की भरी मांग और मुस्कान देख कर उनकी सिटी भी गम थी.

कौन ऐसा था जो सिमरन को गहराई तक नहीं जनता था. सबसे ज़यादा तो मान्य घबरा गई थी, सिमरन को इस रूप में देख के. सुरिया भी मर्द होक कुछ नर्कुस हो गया था. सिमरन को ऐसे रूप में रेख के. सब सुना था सिरमन के बारे. पर सिमरन ऐसे उसके सामने आएगी, उसने सोचा नहीं था.

सब उसे देख रहे थे, कोई नहीं उतरा तोह सिमरन मुस्कुराती हुई सब के पास पोहंच गई. मुद के राज को देखा और अपने माथे पे हाथ मार के वापिस भागी, भाग के राज के पास पोहंची और राज के हाथ को थाम के गाड़ी की और लेके चलने लगी. घर के बाकि सब मेंबर्स भी पोर्च में खड़े सब देख रहे थे.

घर आये मेहमान का सवागत भी सब भूले हुए थे. गाडी के अंदर बैठे mehman(bua फॅमिली) भी गाड़ी से नहीं उतरे थे. सिमरन के साथ वहां पोहंची.

सिमरन राज के साथ जुड़ के कड़ी थी सिमरन के चेहरे पर ज़माने भर की ख़ुशी छलक रही थी. सिमरन चहकती हुई बोली.

सिमरन-- बुआ जी, अंकल जी, मान्य मेरी बेहेन, सूर्य मेरे भाई, आओ.. आओ.. आओ न गाडी से बहार, देखो तोह मेरे साथ कौन है. राज मेरे पतिदेव.. नरेश भी अपने होंटो पर जीब फेर के रह गए. बुआ, मान्य और सूर्य भी कुछ घबराये हुए दूर खोल के गाडी से बहार आने लगे.

सिमरन और राज सूर्य वाली साइड थे. जैसे hi सूर्य बहार निकला. सिमरन ने उसका हाथ पकड़ लिया और राज को देख के बेपनाह ख़ुशी का इज़हार करते हुए सूर्य से बोली.

सिमरन-- सूर्य ये है राज तुम्हारा जीजू और राज ये है मेरी बुआ का बीटा, मैं भाई. मुझे इससे और इसे मुझसे बहुउउउउउउत्तत्ततत्तत्त प्यार है. सिमरन ने बहुत पर ज़ोर देते हुए कहा तोह सूर्य को अपने पिछले कई साल एक hi पल में याद आ गए. कैसे सिमरन ने उसे कई बार नचाया था, कैसे कैसे खेल उसके साथ खेल गई थी सिमरन. सूर्य अपने माथे पे ए पसीना को साफ़ करने लगा तोह राज के होंटो पर स्माइल आ गई. राज बहुत कुछ समझने लगा था. सिमरन का रूप जो उसे नार्मल लग रहा था. असल में था नहीं. राज ये भी सोच गया था. बाकि बाद में सोचने का मैं बना के राज ने सूर्य के साथ मिलाया, फिर सूर्य को गले से भी लगा लिया. सूर्य राज से मिल के, राज की पर्सनालिटी से खूब इम्प्रेस हुआ. पर सिमरन जैसी बाला उसके सर पर थी. इस बात पे वो कुछ नर्वस भी था.

कुछ दूरी पे सब खड़े हुए तमाशा देख रहे थे. किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी पास आने की. सिमरन का मौजूदा रूप सबको और भी डेंजरस लग रहा था.

बाकि तीनो भी सिमरन के पास आ गए.

नरेश ख़ुशी से चहकने की कोशिश करता हुआ. किसी हो तुम सिमरन बेटी. सिमरन ने अपने अंकल को देखा और चहकती हुई राज का हाथ छोड़े बिना नरेश के गले से लग गई.

सिमरन-- अंकल जब से राज मेरी ज़िंदगी में आया है, तब से मैं बहुत बहुत बहुत खुश हों. राज के होंटो पर स्माइल आई तोह बाकियो के कान में साइन साइन होने लगी. नरेश कुछ और घबरा गया. नरेश पोर्च में खड़े हुए सबको देखने लगा. बोलै कुछ नहीं, इशारा कुछ नहीं किया.

सिमरन फिर बुआ को देख के नरेश से अलग हुई और नरेश से बोली. अंकल आप भी मेरे राज से मिल लें. मई बुआ से मिल लून. बुआ भी सिमरन को देख के अपनी बहन पहला गई. बुआ दरी हुई थी. सिमरन से मिलते hi चापलूसी करने लगी.

बुआ-- मेरी बेटी कितनी सुन्दर दिख रही है. आज बरसों बाद मेरे दिल को चैन मिला है. भगवन तुझे हमेशा हर मैदान में फ़तेह दिलाये. तुम तो मेरी मान्य से भी बढ़के मुझे लगती हो.

सिमरन राज को देखते हुए-- बुआ आपकी प्रार्थना ज़रूर पूरी होगी, भगवन मुझे हर मैदान में सक्सेस देगा hi. देखना मई कितने अचे नंबरों से पास होती हों.

राज को अब कन्फर्म हो गया था. सिमरन के अंदर मन में बहुत कुछ चल रहा है. सिमरन ऊपर से कुछ भी शो नहीं होने देती थी. सिमरन इस मामले में कमल की लड़की थी. आज राज को देखना था, सिमरन उसके साथ केसा खेल खेलती है. राज अपने हिसाब से सावधान हो गया था. पर जनता नहीं था, सिमरन उसके साथ करने क्या वाली है. वो सब बाद में देखने वाली बात थी.

बुआ से मिलके सिमरन मान्य की और मुड़ी तोह मान्य भी सान्वी मानवी के जैसे कंपनी लगी थी. सिमरन ने बड़े प्यार से मान्य को गले से लगा लिया.

सिमरन--- मैं बदल गई हों मेरी बहन. देखा नहीं कैसे अब मैं एक पत्नी के रूप में हों. राज ने मुझे बदल दिए है मेरी जान. चलो तुम्हे राज से मिलवाती हों. सिमरन मान्य के हाथ पकड़ के राज के पास ले गई. बुआ और नरेश भी राज से अच्छी मिल चुके थे.

सिमरन राज के हाथ थमते हुए-- राज ये मेरी बेस्ट सीस मान्य है. मुझे इससे भी बहुत बहुत बहुत प्यार है, सुरिया से भी ज़यादा. क्यों सूर्य तुमने बताया नहीं अपने जीजू को मेरे और अपने प्यार के बारे में.

surya---hh..haan.. हाँ.. नं. नहीं दीदी सब मिल रहे थे तो बताने का समय नहीं मिला. सूर्य फिरसे घबरा गया था.

मान्य ने हाथ आगे बाध्य राज से मिलने के लिए तोह सिमरन ने उसके हाथ पे हाथ मार दिए.

सिमरन-- क्या करती हो मान्य, तेरे जीजू हाँ. हुग कर न अपने जीजू को. राज तुम भी मिलो मेरी बेस्ट सीस से.. राज सब तमाशा देखा रहा था. ये भी देख रहा था, सब पीछे खड़े हुए देख रहे थे पर कोई भी आगे नहीं आया था.. राज हरामी था, बहुत कुछ समझ गया था. सिमरन को पा के उसने सही फैसला किया है, ये सोच कर राज को खुद पर गर्व होने लगा. राज को सिंपल लड़की चाहिए भी नहीं थी. राज को चाहिए थी सिमरन जैसी hi कोई. राज जितनी लड़कियों और औरतों को छोड़ चूका था, राज के लिए कहाँ कोई अपनी फॅमिली से हटके कोई स्पेशल हो सकती थी. पर उसे सिमरन के सूरत में एक स्पेशल लड़की मिल चुकी थी. सिमरन उसे हर लिहाज़ से अपनी टक्कर की लग रही थी. राज खुद हरामी था तोह सिमरन भी खुद में स्पेशल ओने थी. राज खुश था बेहद खुद.

बड़े प्यार से राज ने मान्य को गले से लगा, एक भाई और जीजू होने का फ़र्ज़ निभाते हुए, बिना कुछ ऐसा वैसा सोचते हुए राज ने मान्य के माथे को भी चूम लिया.

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नरेश, बुआ और सिया, मान्य जो सोच रहे थे, राज से गले मिल के जाने केसा फील हो. पर राज सलीक़े से मान्य को हुग करना और फिर मान्य के माथे पे किश करना सबको बेहद पसंद आया. राज के बारे में सुनके hi सब को राज पसंद आ गया था. अब तोह राज के ऐसे बर्ताव से स्टाम्प hi लग गई थी.

चरों को ने भी सिमरन के लिए रजा को पुरे मैं से एक्सेप्ट कर लिया था. राज hi एक ऐसा लड़का है, जो सिमरन जैसी लड़की के लिए परफेक्ट है.

सिमरन फिर राज का हाथ थाम के पोर्च की और बढ़ने लगी. कुछ पल के साथ सब सिमरन को भूल कर राज की पर्सनालिटी में खो गए. राज की कातिल चल भी राज को सबमे मुमताज़ कर रही थी. सिमरन के साथ राज की जोड़ी सब को ऐसी भाई, दादी और सिमरन की माँ, चची ने मैं hi मैं में भगवन से वादा कर लिया. कल hi मंदिर जा के पूरा दिन गरीबो में खाना बाँटेंगे. ऐसे hi दयालों भी थे सबके सब. ख़ुशी के मौका पर कभी भी भगवन को नहीं भूलते थे. अब्ब भी सब राज सिमरन की जोड़ी को देख कर बेहद खुश थे.

सब धीमे चाल चलते हुए सबके पास जा पोहंचे. राज राकेश वर्मा को तोह सब राज को देख रहे थे. और सिमरन सब को देख रही थी. सिमरन की ऑंखें बोल रही थी, देखो मेरी और राज की जोड़ी इस वर्ल्ड की सबसे बेस्ट जोड़ी है न. मैं में वो बोल रही थी.

सब के सब राज के साथ मिल गए हाँ. एक राज को hi नहीं, सबको सबक़ न सिखाया तोह मेरा नाम भी सिमरन नहीं... कोई भी सिमरन के मैं की बात उसकी आँखों से नहीं पढ़ सकता था.
 
सिमरन मम्मी मन में-- भगवन बुरी नज़र से बचाये, कितनी सुन्दर जोड़ी है.

संवी-- उम्म्म्म जीजू कितने हैंडसम हाँ. दीदी के साथ उनकी जोड़ी कितनी झक्कास दिख रही है. ऐसे hi विचार सबके भी थे. सब राज को hi निहार रहे थे और राज सब को

सिमरन भी सबको देख रही थी. सब खुश थे तोह दुःख में सिमरन भी नहीं थी. सबसे पहले दादी आगे बढ़ी तोह राज ने संस्कार दिखते हुए दादी के पहले पेअर छुवे. दादी खुश होक राज को आशीर्वाद देने लगी, फिर राज के माथे को चुम लिया. गले से लगा के घर के जमाई को प्यार दिए. राकेश वर्मा भी राज से मिले.

किशन और अमीता भी राज से मिल के बहुत खुश हुए. सान्वी और मानवी का मंत्र तोह बहुत था, राज के ऊपर पजल फ़ेंक के राज का एक असली जमाई के जैसा सवागत किया जाये. पर उनमे इतनी हिम्मत नहीं थी.

चाचा चची, फिर सिमरन के सभी भाई, और बहने भी राज से मिली. सभी को राज से मिलके बहुत अच्छा लगा था. और राज हरामीपन से कुछ देर के लिए साइड रख के सबसे मिला. नए और बड़े लोग थे. सोच समझ कर मिलना था. हरामीपन तोह उसके अंदर से जाने वाला था नहीं. कभी न कभी तोह राज ज़रूर हरामीपन करता.

सिमरन एक एक की ख़ुशी से चमक रहे चेहरे देख रही थी. जो कुछ देर के लिए सिमरन का दर को भूल गए थे. बुआ फॅमिली भी सबसे मिली. कुछ देर बाद सब अंदर प्रवेश करने लगे.

सिमरन ने एक बार फिरसे राज का हाथ पकड़ लिया था. सिमरन कमल की लड़की थी, अभी तक वो अपने एक्सपेलशन अपने कण्ट्रोल में रखे हुए थी.

सब ड्राइंग रूम में थे. राज और सिमरन सबसे अलग एक सूफी पे एक साथ बैठे हुए थे और दोनों ने अभी भी एक दूसरे का हाथ थाम रखा था. कुछ पल के लिए सब खामोश हो गए थे. सब सिमरन और राज को देखने लगे.

राज का अच्छे से सवागत करने के बाद सबका धयान फिरसे सिमरन की और हो गया था. सिमरन जिसके होंटो पर अब एक अजीब सी मुस्कान नज़र आने लगी थी. राज भी सिमरन की इस मुस्कान को देख रहा था. राज के अंदर भी हलचल मची हुई थी. राज हरामी थी, पर सिमरन के दिल का हाल नहीं जनता था. नहीं जनता था, सिमरन आगे क्या करने वाली है. कुछ करेगी भी या नहीं, क्या वो अभी के लिए सब को ऐसे hi टेंशन देगी.

राकेश वर्मा या कोई और कुछ नहीं बोल रहा था. सान्वी और मानवी किचन में थी. कुछ देर में वो एक ट्रे में राज के लिए कुछ पिने को ले ै. सांई के साथ hi मानवी भी थी.

सान्वी ने बड़े समानिआ अंदाज़ में झुक के राज के आगे वो ट्रे कर दिए. राज ने सान्वी को थैंक्स बोल के गिलास उठा लिया और सिमरन को देखते हुए बोलै.

राज-- लो पहले तुम पि लो. सिमरन मुस्कुरा पड़ी.

सिमरन-- पत्नी पहले कभी नहीं पीती राज. तुम पीओ कुछ बचा के मुझे अपना झूठा पीला देना. मैं भी सबकी नज़रों में एक संस्कारी पैंटी एक्सपोज़ हो जाऊँगी. राज ने स्माइल से सिमरन को देखते हुए आधा गिलास खली करके सिमरन को थमा दिए.

सिमरन ने बिना कोई एक्सप्रेशन अपने फेस पे लाये आधा बचा हुआ गिलास खली कर दिए. सब राज और सिमरन को hi देख रहे थे. राज सबकी नज़र में परफेक्ट सबत हो चूका था.

सबने राज को पुरे मैं से एक्सेप्ट कर लिया था. न भी करते तोह राज ने कोई ऑप्शन भी नहीं छोड़ा था. सिमरन की मांग भर के सिमरन को अपनी पत्नी बना लिया था. अब बस सब चाहते थे सिमरन भी राज को मैं से अपना पति मान ले.

पर ये इतना आसान नहीं था. कई की नज़र में तोह अब भी ये एक नामुमकिन बात थी, सिमरन बदल जाए, राज को एक्सेप्ट कर ले, ये हो नहीं सकता था. सिमरन के अंदर इस टाइप का कोई कीड़ा नहीं था, ये बात भी सब जानते थे.

सिमरन के बदले रूप को देख के सब पहले से hi समझे हुए थे, सिमरन राज को एक्सेप्ट करे या न करे, पर राज के साथ वो कुछ ऐसा वेस ज़रूर करने वाली है. जो बहुत भयंकर होगा.

सिमरन की राज के लिए दिखाई दे रही चाहत भी एक भयंकर तूफ़ान के आने से पहले का साउंड थी. और ये साउंड राज समेत सबको सुनाई दे रहा था. सिमरन ने बड़े प्यार से गिलास खली किया और साने टेबल पर रख दिए.

सिमरन सब को देखने लगी. अब सिमरन कुछ बोलने वाली थी. सिमरन कुछ बोलती उससे पहले के सिमरन के पापा बोल पड़े. वो बैठे नहीं रहे वो उठ खड़े हुए. सब उन्हें देखने लगे. सिमरन के होंटो की मुस्कान गहरी हो गई. राज भी उन्हें देखने लगा.

किशन-- राज बीटा.. दर की कई किस्में होती हाँ. एक दर वो है जो तुम्हे हम सब के चेहरों पर दिखाई दे रहा है. वो मर्द hi क्या जो किसी से दर जाये. जो दर गया वो मर गया. भगवन की दया से हम भी उसके शिव किसे से नहीं डरते. इस परिवार में तुम्हे जितने भी मर्द मिलेंगे सब के सब असली मर्द हाँ, किसी से न डरने वाले. हम किसी से लड़ाई नहीं करते, पर लड़ने पर पीठ दिखाना भी हमारी आदत नहीं है. हमारा असली दर हमारा खुद का एक दूसरे से जुड़ा होना है. राज बीटा जो रिश्तो की डोर में, प्यार की डोर में बंधा होता है, उसे डरते रहना चाहिए. यही दर hi तोह रिश्तो की डोर को, प्यार की डोर को इतना स्ट्रांग बनता है, फिर वो डोर कभी टूट नहीं सकती. हम सब का डर सिमरन के लिए भी ऐसा hi दर है. हम सब जितना सिमरन से डरते हाँ, उससे कहीं बढ़ कर सिमरन से प्यार भी करते हाँ. सिमरन से पहले और सिमरन के बाद भी कई ऐसी हाँ हमारे खंडन में, जो कइयों की लाड़ली हाँ. पर सिमरन सबसे अलग है, सबकी चाहती है. मेरी बेटी होने पर सिमरन को गर्व हो के न हो, पर मुझे हमेशा गर्व रहेगा सिमरन के पापा होने पर.

(यहाँ किशन कुछ इमोशनल भी हो गए थे. सिमरन की आँखों ने भी पल शन्न के लिए रंग बदल लिया था. सब किशन को और सिमरन को अब प्यार की नज़रों से देखने लगे थे. ऐसा hi था ये परिवार)

जितना प्यार हम सब सिमरन से करते हाँ, उतना hi प्यार सिमरन भी हम सबसे करती है. तुम्हारी पहली मुलाक़ात सिमरन से रोड पर हुई थी राज बीटा. सिमरन ने एक रेहड़ी वाले को थोड़ दिए था. शायद तुम आगे की बात नहीं जानते. उस गाडी वाला का मौका पर hi नहीं नुकसान पूरा नहीं हुआ था, उसे कहीं बढ़ कर भी पैसे दे दिए थे. ये सब हमारी और से था. और सिमरन की और से..

किशन मोबाइल निकल कर एक वीडियो प्ले करने लगा. वीडियो देख के राज दांग रह गया. सिमरन एक झोपड़ पट्टी में थी. सिमरन उसी रेहड़ी वाले के साथ मौजूद थी और उसके पूरी परिवार के साथ थी.

किशन-- राज बीटा उस रेहड़ी वाले की hi नहीं, उसके पुरे परिवार की लाइफ सिमरन ने सेट कर दी है. सिमरन ऐसे मामलों में हमसे भी कहीं बढ़कर है. सिमरन के जैसा दिल हमारे पुरे खंडन में किसी के पास नहीं है. सिमरन का मुकाबला कोई नहीं कर सकता. मैं भी नहीं.

राज सब को देख रहा था. सबकी आँखों में सिमरन के लिए प्यार और सम्मान की इन्तहा देखने को मिल रही थी. ऐसा राज ने सोचा भी नहीं था. कैसा अजीब परिवार था, कहाँ सब सिमरन से डरते थे और कहाँ एंटी शिद्दत के साथ सिमरन को प्यार भी करते थे.

किशन-- राज बीटा हमें चाहिए था अपनी सिमरन बेटी के लिए एक ऐसा लड़का जो हमारी सिमरन के जैसा हो. कई रिश्ते आये कई गए, सिमरन ने सबको ठुकरा दिया तो कई हमें पसंद नहीं आये थे. सिमरन एक ब्रिलेंट ब्रेन गर्ल भी है. स्टेट टोपर भी है. कैसे फिर सिमरन किसी को भी एक्सेप्ट कर सकती थी. सिमरन के इस वीडियो में दिखाया गया रूप और अब के रूप के बाद एक वो रूप भी है जो तुम पहली बार देख चुके थे. ऐसे hi रूप रंगों से भरी है मेरी बेटी सिमरन.

राज बीटा हम इस शहर के 10 तेन रिचेस्ट परिवारों के से एक हाँ. इस शहर का स्टील किंग हो, या क्लॉथ किंग, कोई बिल्डर हो या फिर कोई पॉलिटिशियन .. राज बीटा तुम ने दो hi मुलाक़ों में सबको पिछड़ कर सिमरन को अपनी बना लिया है. ऐसा सब हम सोच भी नहीं सकते थे. पर ऐसा हो चूका है. तुम खुद को हमारी सिमरन के लिए परफेक्ट सबत कर चुके हो. हमें तुम्हे अपनी सिमरन के लाइफ पार्टनर के रूप में देख के बहुत अच्छा लगा. ये सिर्फ मेरे hi विचार नहीं हाँ ये सबके विचार हाँ. मेरे पिता पहले hi तुम्हे एक्सेप्ट कर चुके हाँ, मुझे समेत मेरा पूरा परिवार तुम्हे दिल से एक्सेप्ट कर चूका है. और फिर तुम सिमरन की मांग भर के सबके मोह पर ताला भी लगा चुके हो.

अब आखरी बार कह के मैं बैठ जाऊँगा. सिमरन अब से तुम्हारी पैंटी hi नहीं तुम्हारी ज़िम्मेदारी भी है. उसे समझना भूतगण तुम्हारा काम है. हमसे जितना हो सका, तुम्हारे लिए करेंगे. तुमने खुद से सिमरन की लाइफ में एंट्री मारी है और अब तुम्हे hi सिमरन को हैंडल करना पड़ेगा.

किशन इतना बोल के बैठ गया. सिमरन की मम्मी अमीता उठ कड़ी हुई.

आमेटा-- सबसे होश समझला है राज बीटा, भगवन ने कभी मुझे दुःख नहीं दिए. ढेरों खुशियों के साथ मैं परवान चढ़ी हों. इस घर में आने के बाद भगवन ने मुझे वो खुशियां भी दे दीं, तो पहले मेरी ज़िन्दगी में नहीं आ सकीय थी. इस घर में मेरा एक एक पल खुशियों से भरा बीता है राज बीटा. भगवन ने मुझे 2 बेटे तीन बेटियां दी हाँ. अब तुम्हे भी मुझे दे के भगवन ने पलड़ा बराबर कर दिए है. 3 बेटे और 3 बेटियां.

राज बीटा मुझे तुम बहुत पसंद आये हो, तुम बहुत प्यारे हो. तुम मेरी, हम सब की ख़ास सिमरन के राज हो. जितनी स्पेशल मेरे लिए, हम सब के लिए सिमरन है, उतने hi तुम भी हो.

राज बीटा मेरी सिमरन फूल सी नाज़ुक भी है और पत्थर भी. तुम सिमरन के दोनों रूप देख चुके हो. (अमीता दोनों हाथ जोड़ते हुए) राज बीटा अब इस परिवार में शामिल हो hi गए हो तो मेरी खुशियों भरी ज़िन्दगी को और भी खुशियों से भर देना. मुझे अपनी सिमरन के लिए बड़ी परेशानी भी है. तुमने जैसे पहले खुद को सबत किया है, आगे भी सबत करके सिमरन के पत्थर दिल को अपने लिए भी नरम कर लेना. बास मेरी इतनी hi विनती है.

अमीता भी बेथ गई. किशन के बाद अमीता की बातों ने माहौल को इमोशनल बना दिए था.

राज की लाइफ में इमोशंस नौरीन के बेहेवियर के बाद से hi कुछ स्ट्रांग होने लगे थे. दीपिका के दर्द भरी बातें, राज के लिए बुरे शब्द, राज की माँ का सच, फिर नाना नानी से मिलना, दोनों का प्यार और जज़्बाती बातें सुन्ना राज के अंदर बहुत कुछ चेंज ले आया था. हरामी पैन तोह उसकी राग राग में था, वो तोह जाने वाला नहीं था. पर इमोशंस राज के अंदर कुछ और स्ट्रांग हो गए थे.

राज की प्यार इस भले परिवार के साथ और भी बढ़ने लगा था.

सिमरन अपनी मम्मी की बातों पर कुछ इमोशनल होने लगी थी. पर जो उसके मैं में था, जो वो थान चुकी थी, वो तो सिमरन कर के hi रहने वाली थी.

बुआ उठ कड़ी हुई-- राज बीटा मेरा अपना एक परिवार है. मैं अपने पति और अपने बच्चू के साथ बहुत खुश हों. सिमरन के लिए जो दर तुमने हमारी आँखों में देखा था, वो असल में सिमरन के लिए हमारा प्यार hi था.

नरेश भी उठे और बोले- राज बीटा मैं भी एक मर्द हों और हमेशा खुद पर गर्व भी रहा है एक मर्द होने पर. एक शेर जैसा बीटा सूर्य भी है मेरा. वो भी चार चार से अकेला लड़ सकता है. पर सिमरन के लिए वो भी अपनी जान एक hi पल में दे सकता है.

एक एक करके सब खड़े होक ऐसी hi बातें करने लगे. सिमरन का बड़ा भाई हरीश खड़ा हुआ.

हरीश-- राज तुम मुझसे. मेरी बेहेन से छोटे हो. पर मैं अपनी सिमरन से इतना प्यार करता हों, उसके लिए किसी भी हद तक जा सकता हों. अपने पापा के बाद मुझे hi बिज़नेस किंग कहा जाने लगा है. 2 साल में hi मैंने अपने पारवारिक बिज़नेस को उस ऊँचाई पर पोहंचा दिए है, जहाँ पापा या दाद्दु नहीं पोहंचा सके. पर मैं अपनी सिमरन के लिए तुम्हे हमेशा अपने बराबर या अपने से भी बढ़कर समझता रहूँगा.

सिमरन 2ंद भाई रवि : और मैं.. मैं स्टूडेंट लीडर रवि वर्मा हों राज भाई. मेरे एक इशारे पर पूरा का पूरा शहर जैम हो सकता है. मेरी एक कॉल पे पुरे सिटी के स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज बंद हो सकती हाँ. सब मुझसे डरते नहीं, मुझे रेस्पेक्ट देते हाँ. स्टडी के साथ साथ मैं अपना बिज़नेस भी देख रहा है. तुम्हे अपने जीजू के रूप में देख के मैं बहुत खुश हुआ हों. हमें तुम्हारे जैसा hi चाहिए था अपनी सिमरन के लिए. तुमने समय से पहले hi सिमरन की मांग भर के सिमरन को अपना बना लिया. तुम हमारी नज़रों में खुद को सबत कर चुके हो जीजू. हाथ जोड़के... बस हमारी सिमरन की नज़रों में भी खुद को सबत कर देना.

सान्वी आंसू बहती हुई उठ कड़ी हुई-- जीजू.. मुझे मम्मी से भी ज़यादा दीदी से प्यार है जीजू.. मेरी दीदी को सदा खुश रखना.

मानवी भी आंसू बहती हुई--- जीजू दीदी इतनी अच्छी हाँ, इतनी अछि है, पुरे संसार में मेरी दीदी के जैसी कोई नहीं है.. जीजू आप भी मुझे बहुत पसंद आये जीजू. दीदी का दिल जीत लेना जीजू.

राज सब को बारी बारी सुन रहा था. एक एक शब्द पर, एक एक एक्सप्रेशन पर अपना फोकस बढ़ा दिए था राज ने. ऐसा समय पहले कभी राज की ज़िन्दगी में नहीं आया था. राज ने सिमरन की लाइफ में एंट्री मर कर कइयों की ज़िन्दगी में हलचल मचा दी थी. राज ने सिमरन के जैसी एक भी लड़की आज तक नहीं देखि थी.. खतरनाक, घमंडी, ज़िद्दी और दरया दिल, कितने hi रूप थे सिमरन के.

और राज के पास भी कुछ रूप थे, सबसे स्ट्रांग हरामीपन, दूसरा अपने के लिए जान पर खेल जाना, उन्हें बेइंतेहा मोहब्बत देना और उनके लिए कुछ भी कैसे भी कर जाना.

सिमरन परिवार के सभी मेंबर्स की बातों ने राज को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिए था.

सबकी बातें ख़तम हुई तोह सिमरन सब को देखती हुई उठ कड़ी हुई. सिमरन चलती हुई सबके बीच में कड़ी हो गई. और बड़े प्यार से मुद के राज को देखने लगी. राज और बाकि सब भी सिमरन को देखने लगे. सिमरन के होंटो की मुस्कान गहरी होती जा रही थी और राज समेत सबके दिलों की धड़कन बढ़ती जा रही थी.
 
सिमरन कड़ी होक सबको देखने के बाद राज को देखने लगी. सबके साथ साथ राज के दिल की धड़कन भी कुछ तेज़ हो गई थी. सस्पेंस hi इतना था, कैसे कोई अपने दिल की धड़कनो पर कण्ट्रोल बना सकता था. सिमरन का रूप कुछ और दिखा रहा था. पर सब जानते थे सिमरन बात कुछ और hi करने वाली है. क्या करने वाली है, कुछ कुछ अंदाज़ा था सबको. पर सही से कोई भी अंदाज़ा नहीं लगा पाया था.

सिमरन राज से बात करने लगी तोह बड़े प्यार से बोली.

सिमरन-- राज हमारी पहली दोनों मूलकें बड़ी अजीब हुई हाँ. पहली बार तुमने मुझे किश किया और खिसक लिए. दूसरी बार मैंने तुम्हे ढूंढ के तुम्हे बाइक समेत थोक दिया. पर तुम बच गए. तुम्हे चोट लगी, पर तुम एक्टिव रहते हुए खुद को बचा गए और थोड़ी सी चोट आ गई तुम्हे. सर से निकलने वाले खून से तुमने बिना देरी के मेरी मांग भर दी. और फिरसे खिसक लिए. उस दिन तुम वहां रहते तो कन्फर्म था, मैं तुम्हे जान से मार देती. मैं ऐसी hi हों राज, कोई मेरे साथ इस हद तक आगे बढे और फिर ज़िंदा रहे, नहीं राज, ये मुमकिन नहीं है.

पर अब मैं तुम्हे नहीं मार सकती. क्यूंकि तुमने कुछ भी किया, कैसे भी किया पर मुझे अपने पत्नी बनाने में सफल रहे.

सिमरन की इस बात पर राज के होंटो पर स्माइल आई तोह कइयों की रुकी हुई सांस बहाल हो गई.

सिमरन-- राज मैं जो भी हों, जैसी भी हों, अपणु के लिए जहाँ इतनी खास hon,koi भी मेरे लिए कुछ भी कर जाए. वहीँ मैं अपने आप में एक घमंडी, खुड़सर लड़की भी हों.

लडककी हूँ... पर मुझमे लड़कियों वाली कोई भी बात नहीं है राज. फिगर से भले hi मैं एक लड़की दिखती हों, पर थॉट्स से नहीं हों मैं लड़की.

एक ये बात है मुझे राज, तोह दूसरी बात है मेरे अंदर के इमोशंस लड़कियों वाले नहीं है, मेरा दिल कुछ ऐसा है मैं खुद को लड़की तोह समझ सकती हों. पर कोई भी मर्द मेरी ज़िन्दगी में अस ा मेल शामिल नहीं हो सकता. पर तुम आ गए मेरी ज़िन्दगी में और मेरी मांग भर कर मुझे अपनी पत्नी बना लिया. मैं भी एक हिंदुस्तानी नारी होने के नाते, अपने परिवार से मिले संस्कारों के नाते तुम्हे अपना पति स्वीकार करती हों राज.

राज खिल उठा तोह सब जैसे शॉकेड हो गए. सिमरन इतना बोल के खामोश हो गई थी. सब कुछ शन्न शॉकेड रहे, फिर एक एक करके उठने लगे.

सिमरन-- सब बेथ जाएँ प्ल्ज़, मेरी बात अभी पूरी नहीं हुई है. सब बेथ गए, सिमरन की और से सबकी चिंता ख़तम हो गई थी. अब बस राज के लिए परेशानी थी. जाने राज के लिए सिमरन के मैं में क्या था. वो क्या राज को कहने वाली है. राज के साथ क्या करने वाली थी.

पर राज जो सिमरन को hi देख रहा था, सुन रहा था, सिमरन के मीठे शब्दों को एक एक करके अपने अंदर उतार रहा था.

सिमरन-- राज मैंने अभी कहा, मुझे मिले संस्कार और मेरा धरम मुझे इस बात की इजाज़त नहीं देता, मांग भर जाने के बाद मैं तुम्हे स्वीकार न करूँ. सच कहूं तोह तुमने इन्सिडेंटली या जैसे भी मेरी मांग भरी है, तुम्हे ने खुद को मेरे लायक सबत करने की फर्स्ट स्टेज पार कर दी है. मैं ये नहीं कहूँगी राज तुम मुझसे कमतर हो. पत्नी के हिसाब से बात करूँ तोह मैं पूरी ज़िन्दगी भी तुम्हारे पेअर धो धो के पियों तो भी तुमसे बरतर नहीं हो सकती. पति का स्थान बहुत ऊंचा होता है राज. और मैं पति स्थान बारे बोहत अच्छे से जानती भी हों.

पर मैं एक एक्सपेरिएंस्ड गर्ल भी हों. ज़माने को जितना तुमने देखा है, समझा परखा है, मैंने कुछ साल बढ़कर समझा परखा है. राज मुझे आज तक कभी गर्ल्स फीलिंग्स नहीं आई, कभी कोई ऐसा नहीं आया जिसे देख के मुझे लगे, मैं भी एक लड़की हों, और ऐसा hi एक मर्द मेरी ज़िन्दगी में भी शामिल होना चाहिए. सबके जैसे मैं भी एक खुशहाल मैरिड लाइफ जियों. पर मैं ऐसी सभी सोचों से परे की लड़की हों राज.

तुम मेरी लाइफ में ज़बरदस्ती घुसे आये राज. और मेरी लाइफ में आज तक कोई ऐसा नहीं आया है, जो मुझपर अपनी मर्ज़ी थोप सका हो. तुम्हे सबत करना होगा राज, मर्द होने के नाते तुम मुझसे बढ़कर हो. ऐसा नहीं कहूँगी मैं क तुम मेरे लायक नहीं हो. नहीं मैं ऐसी बात नहीं कहूँगी. लायक न होते तोह मैं अपनी मांग पिरसे कभी न भर्ती, या तुम्हे भरने देती. तुम मेरे लायक हो राज. शायद कहीं न कहीं मेरे अंदर भी ये बात आ गई है राज क तुम कुछ ऐसा कर जाओ, मैं भी एक पत्नी के साथ साथ तुम्हारी लवर बन के सबके जैसी मैरिड लाइफ जीने लागूं.

पर ऐसा अभी दूर दूर तक कोई चांस नहीं है राज. ऐसा तुम और सब भी समझते होंगे.

तुम मेरे बारे में कुछ नहीं जानते. सबने मेरे लिए कुछ न कुछ बोलै है पर ये किसी ने नहीं बताया कह मैं अब तक 135 करोड़ कमा भी चुकी हों. यू क्नोव राज मैं स्टेट टोपर होने के साथ साथ बिज़नेस नॉलेज में भी बेस्ट हों. क्या कुछ नहीं है मुझमे.

शायद ये बात भी मुझे घमंडी बना गई है, इसी कारण hi मेरा अक्सर दूसरा रूप भी सबको देखने को मिलता है.

राज तुम्हे भी खुद को सबत करना होगा. मैंने अपनी कुछ सेविंग्स के साथ अपने ब्रेन का उसे किया और 135 करोड़ कमा लिए. तुम्हे भी कुछ ऐसा hi करना होगा. अपने पैसे से, अपने दुम्म पर एक सक्सेसफुल इंसान बनना होगा, कुछ भी करके मेरा दिल जीतना होगा, मेरे अंदर गर्ल्स फीलिंग्स लानी होंगी. मुझे एहसास करना होगा, मैं भी एक लड़की हों, एक दिल रखती हों और उस दिल की धड़कने तुम्हारे लिए हाँ राज. तुम मेरे दिल में धड़कन बन कर धड़को राज. मुझे चरों और तुम hi तुम नज़र आओ. फिर तुम्हारी जीत होगी.

इस बीच "जब भी मुझे मौका mila"main तुम्हे चीट भी करती रहूंगी, तुम्हे तुम्हारी मंज़िल से भटकने की कोशिश करती रहूंगी. कुछ ऐसा भी कर सकती हों, जिसके कारण तुम्हे या तुम्हारे किसी अपने को परेशानी भी हो बन सकती है.

अगर मैं कभी पहले वाले रूप में आई तोह तुम्हारे साथ कुछ गलत भी कर सकती हों.

पहले जैसे विचार फिरसे भी मेरे अंदर आ सकते हाँ राज. और तुम्हे खुद को मुझसे सेफ भी रखना होगा. जान कभी नहीं लुंगी मैं तुम्हारी. ऐसा सब करने का मुझे हक़ भी है राज. क्यूंकि तुम ने भी मुझे चीटिंग से हासिल किया है. बिना अपनी और मेरी फॅमिली को बीच में लाये किये, बिना मुझे जाने और बिना मुझे चाहे तुमने मेरी मांग भर के मुझे अपनी पत्नी बनाया है. अब जब ऐसा कर hi चुके हो तो खुद को मेरी नज़रों में भी सबत करो. मेरी मांग भर कर तुम मेरे पति तोह बन चुके हो, अब रियल में भी बांके दिखाओ.

सिमरन इतना बोल के खामोश हुई तोह राज को पहली बार अपने दिल की धड़कने ुनरदेरेद फील हुई. कितना कुछ बोल गई थी सिमरन. कितने साफ़ शब्दों में वो अपनी बात कह गई थी.

सब जो पहले सिमरन की बातें सुन कर खुश हुए थे. सिमरन की लास्ट बातें सुनके पहले से भी ज़यादा परेशान हो गए थे. राकेश वर्मा जो आज कुछ ज़यादा hi खामोश थे. अब भी वो खामोश hi थे. पर वो अकेले थे जो परेशान नहीं थे. शायद राज से हुई बातों से वो राज को अच्छे से परख गए थे. राज कुछ भी कर जायेगा, ऐसा उन्हें यकीं था.

अमीता किशन को देखते हुए फिरसे मायूस नज़र आने लगी थी. सिमरन राज की पत्नी बनकर भी एक मैरिड लाइफ नहीं जी सकती थी. सिमरन ने खुले शब्दों में राज से कह जो दिया था, वो राज का जगा जगा चीट करेगी. राज को एक सक्सेसफुल इंसान बनना होगा. और सिमरन उसे मंज़िल से भटकने की भी कोशिश करेगी. ऐसा कैसे हो सकता था. अमीता समझ गई थी, सिमरन ने एक इम्पॉसिबल टास्क राज को दे दिए है.

पर राज था हरामियों का हरामी, ऐसा हरामी, शायद hi कहीं कोई और पेड हुआ होगा. राज टेढ़ा था, बहुत ज़यादा टेढ़ा. ब्रिलियंट ब्रेन तो राज भी था. पर उसका मैं पढाई में नहीं, नारिओ की छूट और गांड में था.

अब सिमरन उसकी लाइफ में आ गई थी तो हरामी के जीने का ढंग भी बदल गया था. माँ की असल जान के भी वो कुछ बदल गया था, सिमरन को पा के और भी बदल गया था. सिमरन के महान परिवार को प् के भी कुछ बदल गया था. पर उसके अंदर का हरामीपन कभी जाने वाला नहीं था. उसका हरामीपन समय के साथ साथ बढ़ता hi चला जा रहा था. होश सम्भलते hi जो अपनी माँ की छूट में ऊँगली करने लगा हो. उससे बढ़ कर कोई हरामी कैसे हो सकता था.

सिमरन अपनी बात बोल के बैठी तोह राज उठा और सब को देखने लगा. राज के चेहरे के भाव देख के सब बड़े हैरान हुए. सब को लगा जैसा वो राज को नहीं देख रहे, किसी राजकुमार को देख रहे हों. राज के चेहरे के भाव बेइंतेहा संजीदगी ले आये थे. पुख्तगी लिए हुए थे. सिमरन ने राज को देखा तोह बस देखती hi रह गई. उसके दिल की धड़कने तो ुनरदेरेद नहीं हुई. पर दिल hi दिल में राज के फेस को देख कर वो राज को खुद के लिए प्रीफेक्ट ज़रूर कह गई थी.

राज ऐसा hi लड़का था. छोड़ता था, तो कमल कर देता था. मस्ती मज़ाक करता था, छेड़ छड़ करता था तोह एक लापरवा और लुच्चा लफंगा लड़का दिखाई देता था. पर अब जैसी संजीदगी राज के फेस पर आई थी, देख के लगता था, राज से बढ़कर चटनी इरादों वाला कोई और हो hi नहीं सकता. राज के जैसी मर्दानगी वाला भी कोई और नहीं हो सकता.

राकेश वर्मा दिल hi दिल में बोले. जिओ मेरे शेर.. ऐसे hi सदा रहना. देखना एक दिन तुम मंज़िल ज़रूर पाओगे.

राज ने सिमरन का हाथ पकड़ कर फिरसे उठा दिए. सिमरन जो अपनी जगा पर बैठ गई थी. राज सिमरन को लेके सबके बीच में आया और सिमरन को हुग कर लिया.

सिमरन राज को देखती रह गई. राज ने सिमरन का हाथ पकड़ के फिरसे सब को देखा तोह सब राज को निहारने लगे.

अब राज के बोलने की बारी थी......

राज---- सिमरन की बातो पर सबको बहुत झटके लगे होंगे. पर मुझे कोई झटका नहीं लगा. सिमरन कैसी है, आप सब मुझसे बेहतर जानते होंगे. सिमरन किस रूप में क्या कुछ कर गुज़रती है, ये भी आप जानते हाँ, मैं नहीं जनता. सिमरन को पूरी तरह से न जानते हुए भी मैं सिमरन की और से नर्वस नहीं हों.

मुझे झटका तब लगा था, जब मैंने दाद्दु को अपने बारे में सब बता दिया था. पर दाद्दु ने कहा ये सब तोह जवानी में चलता hi रहता है.

जवानी में हर किसी की लाइफ रंगीन हु करती है और मैं दूसरों से बढ़कर जवानी के रंगों से रंगा हुआ एक लड़का हों. मेरी एक आदत रही है, जिसके साथ चलता हों, जिसे दिल से अपना मान लेता, उसके लिए कुछ भी कर गुज़रता हों. मेरी माँ है, चार बहने हाँ, चाचा, चची उनकी एक बेटी और 3 बेटे हाँ. सब मुझसे जितना परेशान रहते हाँ, उतनी hi मुझसे मोहब्बत भी करते हाँ. रोज़ मेरी बात होती है सबसे. मैंने सब को सिमरन के साथ जो हुआ वो सब बता दिए है. सब मेरे लिए इतने परेशान है, मुझे वापिस लौटने का बोल रहे थे. मुझे देखे बिना उन्हें नींद नहीं आती न.

राज सिमरन के हाथ को उठा के दूसरा हाथ उसके हाथ पे रख के दबाता हुआ आगे बोलै. मेरी दीपिका दीदी जो मुझसे सबसे ज़यादा प्यार करती है, सबसे ज़यादा परेशान भी वही है मुझसे. वो कहती है राज तुम जितने बड़े हरामी हो, सिमरन चाहे जैसी भी हो अगर वो अपनी पावर का उसे न करे तोह तुमसे कभी जीत नहीं सकती.

राज ने हरामी वाला शब्द बोलै तोह कुछ ने अजीब सा मोह बना लिया था. पर राज के लिए बुरे विचार मन में लाये थे. अब तो ला भी नहीं सकते थे. राज इस घर जा जमाई था.

राज-- सच कहा था दीपिका दीदी ने, मैंने कभी हारना नहीं सीखा, और सिमरन तो फिर भी मेरी ज़िन्दगी में मेरी ज़िन्दगी बन के आई है. मुझे शहर की लाइफ जीने की कभी छह नहीं रही थी. पैसो का न तो लालच है मुझे और न hi ज़यादा की छह. शहर की लड़की से hi मेरी शादी होगी, ऐसा पहले कभी मैंने नहीं सोचा था. पर सिमरन को पा के आप सब से मिल के मुझे भी शहर में जीने की छह हो गई है.

सिमरन ने अपनी और से जो भी कहा, जितना भी कहा, मई कुछ नहीं कहूंगा अपनी और से. और मर्दों को ऐसे मामलों में शर्तो की ज़रूरत नहीं रहती. दिल वाला हों तोह दिल जीतने के लिए शर्त की ज़रूरत नहीं समझता. सिमरन चाहे जो भी मेरे साथ करे, कर सकती है. सिरमन के कुछ भी किये पर मैं उफ़ तक नहीं करूँगा. आखिर सिमरन मेरे दिल की रानी है. और अपनी रानी की और से मिलने वाले सजा भी मेरे लिए सौग़ात hi होगी.

राज अब खुशगवार मूड में आ गया था. राज बड़े प्यार से सिमरन को देख रहा था. और सिमरन भी मुस्कान से राज को देख रही थी.

राज की दिल वाली बात पे गर्ल्स ने सीटिया ज़रूर बजा दी थी. तो बाकि सब राज को और भी चाओ से देखने लगे.

किशन पास आया और राज को गले से लगा लिया.

किशन-- शाबाश राज बीटा, मर्द हो तो तुम जैसा, जमाई हो तो तुम जैसा. अब बस जल्द hi सिमरन के दिल बदल कर उसकी मम्मी जैसा बना दो. तुम्हारी सास बहुत सॉफ्ट दिल वाली, बहुत लोविंग हाँ यार. मेरी बेटी को भी उसके जैसा बना दो.

माहौल अब अच्छा हो गया था. सिमरन की बातों से जो सबके दिल में हलचल मची थी. राज की बातों से, उसके इरादे से सब की हिम्मत बांध गई थी.

सिमरन-- राज का हाथ पकड़ के. चलो राज तुम्हे मैं अपना कमरा दिखा दो. और मुझे कुछ और बातें भी तुमसे करनी हाँ. सिमरन राज को लेके अंदर जाने लगी. और सब बैठे राज और सिमरन की बातें करने लगे.
 
मानवी सान्वी से-- दीदी जीजू कितने अच्छे हाँ. कितने सख्त कितने नरम हाँ न. हमारे जितने हाँ, पर कितने बड़े दिख रहे थे.

सान्वी-- हाँ हमसे छोटा होक भी हमसे बड़ा दिख रहे थे जीजू. सच में मानवी जीजू बहुत अच्छे हाँ. भगवन ने राज जीजू को दीदी से जोड़ के हम सबकी झोली खुशियों से भर दी है.

वहीँ दादी भी राकेश वर्मा से कह रही थी-- राकेश आपने सही कहा था, राज hi हमारी सिमरन के लिए बेस्ट है. पहले जो डॉब्टस थे, अब नहीं रहे. राज बीटा बहुत अच्छा भी है और इरादों का पक्का भी. कितना मासूम कितना प्यारा भी है न. कितना प्यार करता है, अपने परिवार से.

राकेश-- हाँ और हमारी सिमरन का भी दिल एकदिन जरूर जीत लेगा.

किशन-- क्यों अमीता अब कहो क्या कहती हो तुम. अब भी कोई परेशानी है क्या तुम्हे.

अमीता खुश होक-- किशन परेशानी तो राज के लिए है, पता है आज सिमरन उसके साथ क्या करती है. सिमरन का कुछ पता भी तो नहीं चलता. पर मुझे को देख के ये ज़रूर लगा है, राज सिमरन को बदल देगा. वो दिन हमारी ज़िन्दगी में ज़रूर आएगा किशन, जब हम सिमरन को बदला हुआ देखेंगे.

वहीँ चची अपने पति से-- कोटि कोटि धन्यवाद भगवन तेरा... कुणाल आज मुझे बड़ी ख़ुशी मिली है. पहले में बहुत डर गई थी, जब पता चला, सिमरन राज के साथ घर आ रही है.

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कुणाल-- हम सब भी तो भागे भागे घर ए थे दीप्ति. पर सिमरन ने भी हमें निराश नहीं किया है. सिमरन बेटी ने राज को स्वीकार तो कर hi लिया है. और राज को देख के लगता है, एकदिन सिमरन का दिल जित hi लेगा.

दीप्ति-- हाँ कुणाल, हहह वो दिन कितनी खुशियां लेके आएगा.

कुणाल दीप्ति के कान में-- चलो इस ख़ुशी के मौका पर हम भी कमरे में चल के कुछ खुशियां मन लेते हाँ. कितने दिनों से, तुम्हारे इस सुन्दर शरीर के दिन में नज़ारे नहीं किये.

दीप्ति आस पास देख के शर्मा गई. किसी का धयान नहीं था इस तरफ, सब अपनी अपनी बातों में लगे हुए थे. दीप्ति के दिल की धड़कन बढ़ गई थी. वो भी खुश हो गई थी. रात दो बार कुणाल से छोड़ने के बाद एक बार फिरसे दिन के समय उसे छोड़ने का मौका मिल रहा था. दिन में चुदाई अलग hi आनंद दे जाया करती थी दीप्ति को.

दीप्ति कुणाल के साथ के कमरे में जाने लगी. सब उन्हें देख के फिरसे बातों में लग गए.

हरीश -- रवि यार राज तोह हमसे भी बढ़कर डेरिंग वाला लड़का है.

रवि हस्ता हुआ-- मैं तोह समझता था, मेरी आवाज़ से बढ़कर किसी की आवाज़ नहीं हो सकती. पर जीजू को देख के मुझे लगा जैसे मैं किसी महान नायक को देख रहा हों.

वहीँ मान्य और सूर्य, तो अरुणिता और नरेश भी ऐसी hi बातों में लगे हुए थे. वही चाचा के बेटे और बेटियां भी अपनी अपनी गाथेरिंग में लगे हुए थे. अन्य खुश थी तोह इशिता राज की पर्सनालिटी पर मोहित हो चुकी थी. इशिता कुछ कुछ दूसरों से हटके थी.

सेक्स किसी से नहीं कर पाई थी. पर मस्ती मज़ाक और टचिंग वो खूब कर चुकी थी. राज की जानदार पर्सनालिटी पर वो घायल हो गई थी. राज सिमरन का था, इशिता का जीजू था. पर इशिता मन में राज के साथ कुछ मस्ती करने का सोच चुकी थी. ऐसा सोच के hi इशिता के बदन में सनसनी दौड़ रही थी. इशिता के बदले भाव राज भी देख चूका था. इशिता कुछ नहीं जानती थी.

राज हरामी था, उसकी ज़िन्दगी में कोई भी आता तोह वो उसे माफ़ी देने वाला नहीं था.

कुणाल और दीप्ति कमरे में पोहंचे तोह दूर बंद करके कुणाल ने दीप्ति को अपणु बहन में भर लिया और चूमने लगे. दीप्ति पिघलने लगी तोह कुछ hi देर में कुणाल ने दीप्ति को नंगा करके पे लिया दिए. दीप्ति के बूब्स कास कास के निचोड़ते हुए कुणाल ने अपने लुंड को दीप्ति की छूट पर सेट कर धक्का मार दिए. 5इंच लुंड दीप्ति की छूट में एक hi बार में सारा घुसता चला गया.

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बूब्स कास कास के दबाते हुए कुणाल दीप्ति को छोड़ने लगा.

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5 मिंट में hi कुणाल दीप्ति की छूट में अपने लुंड को खली कर गया.

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दीप्ति भी इतनी देर में झाड़ गई थी. दीप्ति को पता था, उसके पति का टाइम कितना है, दीप्ति उतने समय में hi खुद भी झाड़ जाया करती थी. दीप्ति सोचा करती थी, इतने छोटे से भी वो हमेशा संतुष्ट hi रही है. इसी लुंड से hi तोह उसे इतने बच्चे हुए हाँ. दीप्ति कुणाल से उसके लुंड से खुश थी. संस्कारी थी, फिल्मो में बड़े लुंड देख के भी कुणाल के लुंड से खुश रहा करती थी. कोई और लुंड उसके नसीब में भी तो नहीं था. दीप्ति फिर क्यों किसी बड़े लुंड के बारे में सोचती.

पर दीप्ति, कुणाल या कोई और ये नहीं जनता था, अब इस घर में एक बड़े लुंड वाले की एंट्री हो चुकी है. और वो इतना बड़ा हरामी है, अपनी बहनो के सामने hi अपनी माँ की छूट में लुंड दाल के सारा डालने की धमकी दे जाता है. इस घर की भी बहुत सी छूट राज के लुंड से डिस्टर्ब होने वाली थी. कुछ खुलने वाली थी तोह कुछ रिसने वाली थी.

दीप्ति और कुणाल लम्बी लम्बी सांसे लेने के बाद रिलैक्स हुए तोह कुणाल बोलै-- दीप्ति तुम आज भी उतनी ने मस्त हो, जितनी जवानी में हुआ करती थी.

दीप्ति मोह बनाते हुए-- मतलब अब मई जवान नहीं रही. और मोह साइड कर लिया. कुणाल हसने लगा.. अरे नहीं नहीं मेरी जान, तुम तोह अभी भी जवान हो. देखा नहीं, आज भी तुम्हारे इस सुन्दर शरीर को देख के कितनी जल्दी मेरा लुंड खड़ा हो जाता है. तुम जवान और मस्त न होती तो कैसे इस आगे में भी मेरा लुंड खड़ा होता.

दीप्ति खुश हो गई और कुणाल को पकड़ के एक किश करदी... कुणाल हसने लगा. जब तुम खुद से मुझे किश करती तोह कसम से एक राउंड और लगाने को मैं करता है.

दीप्ति कुणाल की आँखों में देखती हुई-- एक राउंड और होना भी चाहिए कुणाल.. आज मैं बहुत खुश हों और अपनी ख़ुशी को और भी बढ़ाना चाहती हों.

कुणाल साइड लेट गया. तो करो मेरे लुंड को फिरसे खड़ा. अभी एक राउंड और खेल लेते है. दीप्ति ख़ुशी ख़ुशी कुणाल के गीली लुंड को पकड़ पकड़ के मसलने लगी.

इनका सेक्स इतना hi tha..kiss, बूब्स दबाना, लुंड दबाना, लुंड मसलना और छूट में डालना. दीप्ति की गांड आज भी सील बंद थी. आज भी उसकी गांड का छेड़ गहरे रेड कलर का था. कुणाल स्टुपिड था, जो दीप्ति की छूट का कलर बदलने के बाद दीप्ति की गांड की और कभी धयान नहीं दे पाया था. कुणाल को गांड मरने की आदत भी नहीं थी. उसने तो कभी धयान से दीप्ति की लाल लाल छेड़ वाली गांड भी बहुत काम देखती थी.

पर अब देखने वाला इस कोठी में घुस आया था. वो महा हरामी था. ऐसे ऐसे डायलाग बोल के गांड में घुस जाया करता था, पता तब चलता था, जब आधा लुंड बेइंतेहा दर्द देके अंदर घुस जाया करता था. सील टूटी और खून निकलने लगता. तब पता चला करता था. दीप्ति ने बड़े लुंड फिल्मो में देख रखे थे, रियल में कभी नहीं देखे थे. इसलिए कभी बड़े लुंड की छह नहीं हुई थी. इसलिए जल्दी झाड़ भी जाया करती थी. जब राज का लुंड उसकी छूट और गांड में घुस के कई कई मिंट तक चुदाई करता तोह दीप्ति को कुणाल का 5इंच लुंड लुल्ली hi दिखती.. हाहाहा

सिमरन कमरे में प्रवेश करि तो दूर लॉक नहीं किया उसने. वो जानती थी उसके कमरे में कोई नहीं आएगा. सिमरन राज को तो राज सिमरन को देखने लगा.

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सिमरन इतनी सुंदर और हॉट थी, राज उसे देखता तो उसमे खो सा जाता था. अब भी राज ने सिमरन को देखा तोह सिमरन को खेंच के अपनी बहन में भर के एक किश करदी..

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सिमरन राज की आँखों में देख के आँखों से स्माइल करने लगी. कुछ देर राज ने अच्छे से सिमरन के होंटो का रास पिया फिर सिमरन को छोड़ दिया.

सिमरन राज को स्माइल से देखते हुए बोली-- राज तुम बहुत हॉट हो, बहुत कमीने भी हो, सच में तुम जैसा कोई और नहीं होगा. तुम जानते भी हो, मुझे किश विस्स से फर्क नहीं पड़ने वाला, फिर भी तुम बाज़ नहीं आते, मुझे पकड़ के किश कर देते हो.

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राज-- हरामी स्माइल से... क्या करूँ अब तोह मुझे परमिट भी मिल चूका है, तुम्हारे इन होंटो की शराब को पिने का. देखता हों तोह मचल जाता है, कितनी अलग शेप पाई है तुम्हारे होंटो ने.

सिमरन-- हेहेहे कितनो के होंटो का रास पि चुके हो तुम..

राज-- गिनती नहीं कर सकता. बहुत सी आई मेरी ज़िन्दगी में. पर तुम जैसी कोई नहीं आई.

सिमरन-- ये तो मैं भी जानती हों राज, मेरी जैसी कोई और हो hi नहीं सकती. सच में मुझे भगवन ने फुर्सत से बनाया है.

राज कुछ हरामीपन करते हुए-- भगवन के उसी फुर्सत में लम्हो में तराशी इस मूरत को जी भर के देखने को मैं करता है. सिमरन ने राज की आँखों में देखा तोह इस बार खुद से राज को किश करदी. ये लव वाली किश नहीं थी. इतनी जल्दी सिमरन बदल जाये, सिमरन का दिल बदल जाये, राज की अपने लिए तारीफ सुनके पिघल जाये, ये हो नहीं सकता था.

सिमरन-- राज तुम ने मुझे हर रूप में देखने का हक़ प्राप्त कर लिया है. तुम चाहो तोह मेरे इस सुंदर शरीर के नज़ारे कर सकते हो. कोई और मेरे सामने होता तोह अब तक वो इस दुन्या से उठ चूका होता. पर तुम्हे में मैं शरीर को देखने छूने से नहीं रोक सकती.

राज-- वूववव फिर तो आज मज़े hi हो jayenge..raj ने सिमरन को घुमाया और पीछे से हुग करते हुए सिमरन की शर्ट ब्रा ऊपर करते हुए सिमरन के बूब्स नंगे करने लगा. सिमरन ने मुद के राज को देखा तोह राज सिमरन के बूब्स प्रेस करता हुआ सिमरन को किश करने लगा. सिमरन भी राज का किश में साथ देने लगी.

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सिमरन राज से अलग हुई और अपने शर्ट उतार दी. राज तोह सिमरन की असली सुंदरता देख कर hi मोहित होने लगा. सिमरन ब्रा पंतय में क़यामत ध रही थी. अगर राज आम लड़का होता तोह ज़रूर सिमरन के बदन की चमक देख कर अँधा हो जाता. सिमरन ने भी राज को शिरट्लेस्स किया और राज से बोली..

simran--raj हमारा कपल हर एंगल से एक परफेक्ट कपल है. पर अभी मेरा दिल की धड़कने तुम्हारे लिए नहीं हाँ. यही तुम्हारा मिशन भी है राज, तुम्हे मेरी धड़कनो में सामना होगा, मेरी हर धड़कन बस राज राज राज hi पुकारने लगे. तब तुम्हारी जीत होगी.

राज ने फिरसे सिमरन को पीछे से पकड़ा लिया. राज सिमरन के बदन से ा रही मस्त खुसबू अपने अंदर उतारते हुए बोलै.--- तुम जेसीओ के लिए बोलै जाता है सिमरन. मैं तुम्हारे लिए आस्मां से तारे भी तोड़ कर ला सकता है. और मैं.. सिमरन मई भी तुम्हारे लिए कुछ भी कर जाऊँगा.

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राज का लुंड खड़ा हो चूका था. सिमरन ने अपनी गांड पे राज के लुंड को महसूस किया तोह उसे लगा राज का लुंड नार्मल नहीं है. नार्मल से बढ़कर है. वो कुछ हैरान हुई. मुद कर देखा तो राज के लुंड का उभर देख कर सिरमन मैं में बोली.. ववव राज हैवे ान स्ट्रांग ंद पॉवरफुल डिक.. राज ने भी सिमरन को देखा तोह मुस्कुरा उठा.

राज-- देख सकती सिमरन तुम भी मेरे लुंड को. जैसे तुम्हे देखने छूने का हक़ मई प् चूका हों, तुम भी पा चुकी हो. तुम भी देख सकती हो.

सिमरन--- राज की आँखों में देख kar..hehehe राज इसे देखने का हक़ तोह मई सच में hi प् चुकी हों. तुम भी मुझे देखने छूने का हक़ भी प् चुके हो. पर पति पत्नी में केवल देखने छूने की बात नहीं हुआ करती राज. दिल में उतरना पड़ता है.

इतना बोल के सिमरन ने अपनी ब्रा और पंतय को उतर दिए. सिमरन ज़रा भी शर्म नहीं कर रही thi.raj तोह बस सिमरन की बेपनाह सुंदरता में hi खोने लगा था. सिमरन फुल नुदे होक राज की पंत को अंडरवियर समेत निचे कर राज के लुंड को ताड़ने लगी. जो सर उठाये सिमरन को शूट करने के लिए बेताब था.

सिमरन-- राज सच में तुम्हारे जैसा मर्द hi हर लड़की का आइडियल हुआ करता है. पर्सनालिटी में, इरादों में, मसल्स में और लुंड के मामले में तुम एक कमल के लड़के हो. किसी के भी आइडियल हो सकते हो.

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किसी भी पत्नी को ऐसा लुंड उम्र भर मिले तोह उसकी लाइफ सेट हो जाएगी राज. पर मैं ऐसी नहीं हों. जानना चाहोगे राज मई ऐसा क्यों बोली.

राज सिमरन की आँखों में देखने लगा तोह सिमरन आगे बोली-- राज एक लड़की, जो कुंवारी भी हो, उन छुई भी हो. तुम जैसे मर्द के साथ हो, और नुदे भी हो तोह क्या वो खुद की फीलिंग्स पर काबू रख सकती है. नहीं रख सकती राज. मुझे देखो राज, मेरी आँखों में देखो, क्या तुम्हे कहीं से भी ऐसा लगा रहा है, तुम्हारे इस मरदाना रूप पर, तुम्हारे जानदार लुंड को देख कर मेरी आँखों में कुछ रंग उतरे हों, मेरे बदन में तुम्हे कोई सनसनी सी दौड़ती हुई महसूस हुई हो. नहीं राज, इतना आगे बढ़ने पर भी मैं नार्मल हों राज. मेरे रगों में कोई सनसनी नहीं दौड़ रही राज. मेरे मैं में तुम्हे देख के तुम्हारे साथ इन लम्हों को जीने की छह जनम नहीं ले रही. जबकि तुम मुझे अपनी पत्नी बना चुके हो. आज कल की लड़कियों तो रिलेशन में आते hi किसी को ढूंढ कर सबसे पहले अपनी सील hi खुलवाती हाँ, और लड़का कुछ और सोचे बिना उस लड़की को छोड़ देता है.

सिमरन निचे बैठी और राज के लुंड को मोहन में भर लिया. और राज को देखने लगी. राज की तोह हालत hi ख़राब होने लगी थी. सिमरन के मोह में अपने लुंड को पा के राज के पुरे शरीर में करंट दौड़ने लगा था.

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सिमरन ने फिर राज के लुंड को पकड़ के ऊंचा किया और बॉल्स को मोह में भर लिया. सिमरन फिरसे राज को देखने लगी. सिमरन की आँखों में शरारत थी, शोखी थी, मस्ती थी.

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सिमरन फिर कड़ी हुई, बीएड टेबल पर रखे जग में से पानी एक गिलास में भरा और राज को बीएड पर गिरा के राज के पैरों पर आ के बेथ गई. साथ hi राज के लुंड को पकड़ कर सेहलती हुई बोली.

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सिमरन-- राज इतना सब करके भी मेरे अंदर बेचैनी नहीं बढ़ी, मेरे अंदर की फीलिंग्स नहीं जाएगी. तुम्हारा साथ यक़ीनन बहुत दिलकश होगा मेरे लिए, अगर मेरे अंदर की फीलिंग्स जाग जाती हाँ तो. पर नहीं, कुछ भी मेरे अंदर का नहीं जगा है राज. ऐसे समय एक लड़की पानी पानी हो जाया करती है. हर हद पार कर जाने के लिए पागल हो उठती है. मैं न हो पागल हुई हों और न hi हर हद पार कर जाने बारे सोच रही हों. इतनी आगे बढ़ के भी मेरी पहली जैसी हों राज. सिमरन ने पानी पि के ग्लास टेबल पर रखा और लेट गई..

सिमरन-- देखो राज, अभी ताज मेरी छूट सूखी पड़ी है. न तोह इसमें पानी आया है और न hi दूर दूर तक आने का कोई चांस है.

राज जो सिमरन की छूट, छूट की शेप, कलर और गांड का कलर देख कर hi पागल होने लगा. सिमरन के जैसी सच में hi कोई लड़की आज तक उसकी ज़िन्दगी में नहीं आई थी. सिमरन कितने खतरनाक रूप में राज के सामने आई थी. राज के लिए खुद पर काबू रखना मुश्किल होने लगा. राज छूट देख के तोह हमेशा hi मचल जाया करता था. किसी अपनी सिमरन की छूट देख के वो न मचलता. ऐसी छूट भी तोह उसने पहले कभी नहीं देखि थी. ऐसी रंगत वाली छूट, ऐसी शेप वाली, सील पैक छूट कहाँ देखि थी राज ने. राज का लुंड झटके पर झटके खाने लगा.

सिमरन खिलखिला के हसने लगी.

सिमरन-- राज दूर से क्या देख रहे, तुम चाहो तो छू के देख सकते हो, स्मेल कर सकते हो, चाट सकते हो. पर सेक्स नहीं कर सकते. कर भी सकते हो राज, पर ऐसा करके तुम हमेशा के लिए मुझे खो डोज.

राज अपने होंटो पर जीब फेरते हुए झुका और स्मेल करने लगा. राज मैं ने कह रहा था. आह्ह्ह्ह सच में मेरी सिमरन का कोई मोल नहीं है. मेरी सिमरन के शरीर का हर एक अंग बेमिसाल है. कोई भी कहीं से भी मेरी सिमरन के जैसी नहीं है. कितना सही काम किया है मैंने सिमरन को अपनी पत्नी बना के.

फिर हरामियों वाली सोच उसके अंदर आई और सिमरन की छूट चाटने लगा. साथ hi वो सोचने भी लगा, सिमरन मैं तुम्हे सही से नहीं जनता तो तुम भी तोह मुझे अच्छे से नहीं जानती. कोई नहीं जल्द hi जान जाओगी.

सिमरन राज को अपनी छूट चाटने हुए देख रही थी. उसके होंटो पर स्माइल थी. कुछ देर में hi सिमरन ने राज को अपनी छूट से अलग कर दिए.

सिमरन-- पत्थर पर भी कटरा कटरा पानी का गिरता रहे राज, तोह उसमे में भी छेड़ बन जाया करता है. मेरा शरीर के साथ खेल के तुम मुझे सेक्स की दुन्या की लड़की बना सकते हो, मेरे अंदर की फीलिंग्स को भी जगा सकते. पर मेरे दिल में हलचल नहीं मचा सकते. छत्ते रहने से तोह कोई भी लड़की बेचैन हो उठेगी. उसकी भी छूट में बारह आने लगेगी. कोई 80 साल की बुद्धि भी क्यों न हो, कुछ देर तक उसकी भी छूट चाटने से पानी निकलने लगता है राज. मैं तोह फिर भी जवान लड़की हों. मैं भी ऐसे मचल सकती हों. और फिर सेक्स के दौरान कई मिंटो तक जारी रहने वाली रगड़ भी फीलिंग्स को जगा दिए करती है. जैसे एक लड़की का रपे हो और फिर वो प्रेग्नेंट भी हो जाया करती है राज. मतलब रपे होते हुए भी उसे कुछ पलों के लिए मज़ा भी मिलने लगता है.

राज तुम ऐसी कोई हरकत नहीं करोगे मेरे साथ. चीटिंग करके मुझे हासिल तोह कर सकते हो तुम, पर जीत नहीं सकते.

एक बात और हमारे परिवार में तुम्हे कोई भी बड़ी या छोटी उम्र की ऐसी नहीं मिलेगी जो ऐसे खुल के सेक्स से रिलेटेड बातें करे. मैं अपनी लाइफ के फर्स्ट एक्सपीरियंस में hi तुमसे इतनी खुल गई हों. सोचो एक लड़की फर्स्ट टाइम इतना कैसे खुल सकती है राज. राज किसी भी लड़की के लिए ऐसा फर्स्ट टाइम बेपनाह शर्म लेके आता है, पर मुझे कोई शर्म फील नहीं हो रही. अब्ब जो मैं तुम्हारे सामने इतनी खुली हुई हों न. तो अगर तुम मुझे जीत जाते हो तोह फिर तुम्हारे सामने अपने खुद को नुदे पा के मैं सर उठाने लायक नहीं रहूंगी. ऐसी होती है हिंदुस्तानी नारी राज.. मुझे जीत के मेरे अंदर की एक हिंदुस्तानी नारी, एक शर्म वाली पत्नी को सामने लाना होगा तुम्हे राज. इतना सब करके तुम्हे ये बताना भी था, मैं तुम्हारे साथ चीटिंग करके भी सिंकेरे हों. वर्ण तुम्हे ऐसा सब देखने करने को भी नहीं मिलता. इससे तुम्हे हौसला भी मिलेगा और मेरे लिए तुम मचलते भी रहोगे.

सिमरन के होंटो पर बड़ी कातिल मुस्कान थी. राज सिमरन की बातें सुन रहा था. समझ भी रहा था. ऐसी बातें तोह वो कुछ जल्द hi समझ जाया करता था.

राज हरामियों वाली मुस्कान के साथ फिरसे झुका और सिमरन की गांड के छेड़ को चाटने लगा.

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सिमरन-- हाहाहा रजा तुम सच में बहुत बड़े हरामी हो. मेरी इतनी बातों पर भी मुझे ये नहीं लगा, जैसे तुम मेरी बातों को सीरियसली ले रहे हो. ऐसा लग रहा है, जैसे मेरे बदन को देख के तुम अपने लुंड से सोचने लगे हो..

राज उठा और अपने लुंड को सिमरन की छूट पर रख के रगड़ता हुआ सिमरन को किश करने लगा.. सिमरन को अपनी छूट और गांड के टास्ते का एहसास हुआ तोह राज को धक्का दे दिए. और उठ कर बीएड से उतर गई..

सिमरन जग को मोह लगा के वही कमरे में कुली करने लगी.. राज ज़ोर ज़ोर से हसने लगा.

सिमरन राज को खुनी आँखों से देखने लगी. अच्छे से अपने मोह को क्लीन करके सिमरन राज से बोली.. हरामी इंसान ये क्या किया तुमने..

राज-- हाहाहा तुम्हे मुझे इतने जलवे दिखा रही थी, इतनी बातें कर रही थी. अरे पत्नी हो यार तुम मेरी. जहाँ इतना हक़ मुझे दे रही हो तोह इतना भी तो मिलना चाहिए..

सिमरन-- बस अब जाओ, हरामीपन से hi जीतने की कोशिश करोगे तोह मुझसे और भी दूर होते जाओगे.

राज ने सिमरन को फिरसे अपनी बहन में भरा तोह सिमरन के निप्पल राज के सीने में गढ़ने लगे. तुम कितनी हसीं हो सिमरन. मई तो पागल हो उठा हों. अब तो तुम्हे पाने के लिए कुछ भी करना पड़े मैं करूँगा.

सिमरन मैं में... इडियट इसी लिए तो तुम्हे इतना सब करने दिए है. तुम कुछ सोचो, तुम्हे मेरे साथ बिताया एक एक पल कभी भूल नहीं सकेगा. तुम्हारा धयान कभी सलामत में रहने hi नहीं दूंगी. देखती हों तुम कैसे मुझसे जीतते हो.

राज-- तेरा धयान किधर है रे तेरा हेरा इधर है.. सिमरन को ख्यालों में गम देख कर राज गुनगुनाने लगा तोह सिमरन राज को देख के है पड़ी.

सिमरन-- अब छोडो भी मुझे या लुंड की हीट से छूट प् पानी पिघलने का इरादा है. इतनी जल्दी नहीं पिघलने वाला. सिमरन का -1000 डिग्री कोल्ड वाटर है.. इतनी हीट से वो पिघलने वाला नहीं है.

राज भी सिमरन की बात पे हस्ता हुआ सिमरन को छोड़ गया और अपने कपडे पहनने लगा.

सिमरन-- एक बात और तुम्हारे गाओं का नाम----- है न. वहां तुम्हारी माँ आराधना, तुम्हारी 4 बहने और .......... रहती हाँ और सिमरन राज को उसकी ज़िन्दगी के भयंकर हक़ीक़त बताने लगी. राज सब सुनकर हैरान रह गया. सिमरन इतनी फ़ास्ट भी हो सकती है, वह नहीं जनता था. सिमरन ने राज का सारा कच्चा छठा खोल कर रख दिए था.

सिमरन -- राज मैं ये सब को बता क्र तुम्हे अपनी लाइफ से निकल भी सकती थी. पर मैं ऐसा नहीं करुँगी. यू क्नोव एक बार मांग भर जाने के बाद मैं फिरसे किसी और के नाम का सिन्दूर अपनी मांग नहीं भरना चाहती. इस लिहाज़ से मैं एक पक्की हिंदुस्तानी नारी हों. तुम रहो न रहो, तुम मुझे जीत सको या हार जाओ. फिर भी मेरी लाइफ में तुम्हारे बाद कोई और नहीं आएगा.

राज सिरमन की इस बात पर खुश भी हो गया था. सिमरन कई मामलों में एक टेढ़ी लड़की थी, पर कुछ रूल्स उसके बहुत अच्छे थे, सोच के मामले में भी सिमरन एक ग्रेट लड़की थी. राज को खुद पर गर्व भी होने लगा था सिमरन को अपनी लाइफ में शामिल करने पर.

राज कपडे बदल कर कमरे से निकल गया. सिमरन भी बाथरूम में घुस कर ब्रश करने लगी. सिमरन मैं में. साले ने मुझे hi मेरी छूट और गांड का टास्ते करवा दिए. कुछ ज़यादा hi हरामी है.. सिरमन फिर हसने लगी.. तेरा वो हाल करुँगी बच्चू, कभी भूल नहीं पाओगे. ऐसा खेल खेलूंगी तुम बस देखते hi रह जाओगे. मेरे बिछाए जाल से निकल नहीं पाओगे. अपने बूब्स और पुरे जिस्म को आईने में निहारते हुए. और जो जलवे मैंने तुझे दिखा दिए हाँ. उन्हें भी कभी भूल नहीं पाओगे.
 
राज हरामी था तोह सिमरन भी काम नहीं थी. सिमरन में हरामीपन नहीं था. पर वह भी खुद में बहुत कुछ थी. राज से काम नहीं थी. राज को ऐसे झटके दिए थे उसने राज अपने खड़े लुंड के साथ कमरे से निकला तोह सिरमन के नशा सर चढ़ कर बोल रहा था.

राज सिमरन के बदन से ट्रांफर हुई तरंगें अपने पुरे शरीर में महसूस कर प् रहा था. राज नशे में था, कहा जाये तोह फुल टल्ली भी था राज.

राज बहुत कुछ सोच रहा था. एक तो राज सोच रहा था. सिमरन जो बहुत आगे की चीज है, उसके बारे में इतना सब कुछ जान गई थी. अब उसे सिमरन की इंटेलेजन्स को सामने रखते हुए हर स्टेप लेने था. सिमरन किसी भी करके उसे हर मामले में चीट करेगी. जीतने नहीं देगी. और राज यही सोच रहा था कैसे सिमरन से जीतना है, कैसे खुद को सिमरन में धड़कनो में बसना है.

राज हरामी था तोह बहुत कुछ जनता था. पर यहाँ मामला दिल का था. राज इसे लिघ्टलय

नहीं ले सकता था. उसे सिमरन को पाना था, खोना नहीं चाहता था. अपने चेहरे से राज ने सिमरन को अंदाज़ा नहीं होने दिए था अपने दिल के हालत का. वर्ण राज कुछ समय के कंफ्यूज ज़रूर हुआ था.

राज सिमरन के नशे में खोया कमरा से निकला तोह उसका लुंड पूरा चार्म पर था. जैसा नशा उसे सिमरन के शबाब से प्राप्त हो चूका था, वो जाने वाला नहीं था. सिमरन के शरीर का एक एक अंग राज की आँखों के सामने लेह रहा था. जब तात नशा में कमी नहीं आती, राज का लुंड भी बैठने वाला नहीं था.

राज हरामी सोचने लगा, जब लुंड इस घर में खड़ा हुआ है, तोह बैठना भी इसी घर में चाहिए. अब जब वो शरीफो से जुड़ गया था तोह खुद को शरीफ बन नहीं सकता था. सबको अपने जैसा बनाने के बारे में सोचने लगा. और फिर यहाँ तो छूट और गांड की लाइन लगी हुई थी. सबकी सब शर्म वाली, संस्कारो वाली थी. राज को एक एक के साथ मस्ती करने में बहुत मज़ा आने वाला था. राज ये बात भी सोच रहा था और सोच के अंदर hi अंदर मज़े भी ले रहा था.

राज मैं में-- सिमरन तुम बहुत सुन्दर हो और जहाँ से निकली हो, यक़ीनन वो छूट भी दुन्या की सबसे सुंदर छूट होगी. तुम्हारी छूट ऐसे hi तोह नहीं कमल की है. ज़रूर सासु माँ की छूट में भी तुम्हारी छूट की झलक मिलेगी. इस घर की सभी छूट से बढ़ कर होगी सासु माँ की छूट.

राज ये भी सोचने लगा, सब जानते हाँ, राज हरामी है. तोह राज को फिर अपनी सिमरन के लिए बर्दाश्त भी करना hi पड़ेगा. राज ने इधर उधर देखा, वहां कोई नहीं था, राज अपने लुंड को मसलते हुए एक और बढ़ने लगा.

राज को दादी दिखाई दी. जो ऊपर 3रद फ्लोर पर जा रही थी. साथ में सिमरन की चची थी. राज को देख के रुक गई. दादी की नज़र राज के लुंड पर नहीं गई. पर चची की ज़रूर पद गई थी. वो नज़रें झुका के शरमाने लगी. वो समझ गई, राज और सिमरन ने कमरे में कुछ मस्ती करि है. वो हैरान भी थी और खुश भी. सिमरन में धीरे धीरे बदलाव जो आ रहा था. वहीँ चची ने राज के लुंड के उभर से राज के लुंड का साइज और मोटाई को भी जान लिया था. पर शरीफ थी, कुछ और नहीं सोच सकीय.

राज चलता हुआ दोनों के पास पोहंचा तोह दादी बोली-- राज बीटा कुछ क्या सिमरन बेटी ने.

राज हरामी कुछ पलों में hi फैसले ले लिया करता था. दोनों को देख के, चची के एक्सप्रेशन देख के राज के हरामी मंद में कुछ प्लान आ गए थे. राज ने अपने भाव बदल दिए और निराशा भाव फेस पे सजाये दादी से बोलै

राज-- बहुत पापड़ बेलने पड़ेंगे दादी. बहुत मुश्किल काम है सिमरन को राह पे लेन के लिए.

दादी-- राज बीटा, ऐसा मत कहु, तुम नहीं उसे बदल सकते तो कोई भी नहीं बदल सकता.

राज ने आगे बढ़के दादी को गले से लगा लिया. दादी को राज के लुंड का एहसास अपनी छूट पे हुआ तोह वो गड़बड़ा गई.

राज-- दादी आप सब की दी हिम्मत hi मुझे सिमरन को अपने वश में करने में मदद देगी. सिमरन के मैं को बदलने में मदद देगी. आप सब के प्यार से मुझे भी बड़ी हिम्मत मिलेगी.

दादी राज के लुंड को भूल तोह नहीं पाई पर राज को खुद से अलग नहीं किया..

दादी-- राज बीटा, हम तोह सदा तुम्हारे साथ hi हाँ.

चची तोह बस राज के लुंड वाली जगा पे hi देख रही थी. वो सोच रही थी, सासु माँ ने राज को खुद अलग क्यों नहीं किया. राज ने चची को देख के आंख मार दी. चची को झटका लगा. चची हैरान हुई राज उसे आंख भी मर सकता है. फिर चची के होंटो पे मुस्कान भी आ गई. राज बहुत नटखट था न इसलिए. चची स्माइल कर गई थी. पर वो जानती नहीं थी राज को..

राज-- दादी मम्मी कहाँ हाँ. राज ने अपनी सास को मम्मी कहा तोह दादी खिल उठी. राज दादी से अलग हुआ तो दादी न चाहते भी राज के लुंड को एक नज़र देख गई.

दादी मैं में... सिमरन तुम कितनी स्टुपिड हो, ऐसा शानदार मर्द मिला है तुझे फिरसे उसकी कदर नहीं कर रही.. पर ये खड़ा केसा हो गया.. क्या सिमरन के कमरे में कुछ.. दादी मन hi मन में खुश होने लगी. चलो अच्छा हुआ, आग़ाज़ अच्छा हुआ है राज और सिमरन का. दादी की कुछ टेंशन काम हुई. ये भूल गई, कुछ देर पहले राज ने कहा था, सिमरन को राह पे लान मुश्किल काम है.

राज ने फिरसे सासु माँ का पुछा तोह दादी बोली.. राज बीटा वो निचे फ्लोर पर हाँ. उनका कमरे वहीँ है.

राज-- अच्छा! आप कहाँ जा रही थी.

राज ने दादी और चची का एक एक हाथ पकडे हुए पूछा.

चची -- राज बीटा ऊपर रीडिंग रूम बना हुआ है, वही बेथ के कुछ टाइम स्पेंड करती हाँ हम..

राज के दिमाग ने काम करना शुरू कर दिए.

राज-- दादी और कोण कोण होता है इस समय वहां.

दादी-- इस समय और कोई नहीं जाता वहां राज बीटा. सेकंड टाइम hi वहां बाकि सब जाते हाँ तोह कुछ डिनर के बाद वहां जाते हाँ. मैं और तेरी चची hi इस समय वहां जाती हाँ.

दीप्ति अपने पति से चुद के फ़ौरन hi नाहा ली थी. उसका पति फिरसे ऑफिस चला गया था. तो दीप्ति दादी के साथ ऊपर जा रही थी. राज ने धयान दिए, चची पहले कुछ और ड्रेस में थी, अब किसी और ड्रेस में थी. पहले चची मेकअप में थी तो अब वो लाइट मेकअप के साथ थी. राज समझ गया ज़रूर चची चाचा से चूड़ी है. चची की आँखों में संतुष्टि देख के भी राज समझ गया था.

एक समय पे राज किसी एक के साथ मस्ती कर सकता था.

राज-- चची आप कॉफ़ी ले आएं में दादी के साथ वही आपको मिलता हों. चची ने राज को घोर से देखा, पर कुछ जांच नहीं पाई.

चची वापिस चली तोह राज ऊपर रीडिंग रूम में जाने लगा. वहां पोहंच के दादी राज को बुक शेल्फ दिखने लगी. राज दादी के पीछे खड़े होक एक एक बुक को देखने लगा. राज ने अपनी चीन को दादी के कंधे पर रखा हुआ था. दादी बड़ी खुश थी. पर दादी की ख़ुशी तब गई जब राज सीधा होक दादी को पीछे से हुग कर गया.

राज का लुंड आप सही से दादी को अपनी गांड में चुभा तोह दादी कुछ नर्वस हो गई. इतने पोते थे दादी के, किसी ने भी कभी दादी को ऐसे हुग नहीं किया था.

दादी-- राज बीटा ऐसा हुग न करो मुझे. कितना अजीब लगता है ऐसे. लुंड की हीट से भी दादी को उलझन होने लगी थी. दादी इस आगे को पोहंच के कुछ ठंडी हो रही थी. और राज को दादी के अंदर की ठण्ड को ख़तम करना था. दादी को भी नानी के जैसे गर्म करके अपना बनाना था. एक एक करके सबको अपने साथ मिलाना था. कभी सिमरन ने कुछ और गड़बड़ी की सोची भी तोह तब तक सब राज के साथ हो चुके होते. और फिर राज को अपने से जुडी किसी छूट वाली को माफ़ी देने की आदत भी तोह नहीं थी.

राज झुका और के गाल के साथ अपने गाल जोड़ते हुए बोलै-- दादी आपको दाद्दु ने बता दिए था, मैं केसा लड़का हों.

दादी-- हाँ राज बीटा मुझे सब पता है.

राज-- तो आपने दाद्दु को ये नहीं कहा, राज सही लड़का नहीं है, सिमरन के लिए, हमारे खंडन से जुड़ने के लिए. आप कोई और लड़का भी तोह ढूंढ सकती थी अपनी सिमरन के लिए.

दादी -- राज बीटा ये तुम किसी बात कर रहे हो. तेरे दाद्दु को तुम सही लगे थे तभी तोह हमने भी तुम्हे स्वीकार कर लिया.

राज-- मतलब आपको भी मैं स्वीकार हों.

दादी-- हाँ राज बीटा, सच कहु तोह तुम मुझे भी बहुत भये हो.... मैं में. पर ये सब गलत है.. इस एक बात के शिव बाकि सब तुममे बहुत बढ़िया है.

राज-- मेरे बारे में आप सब जानती भी हाँ न तोह भी ऐसा कह रही हाँ. राज ने अपने लुंड को दबा दिए. अब लुंड का उभर दादी की गांड की दरार में था. राज के हाथ दादी के पेट पे फेरता हुआ दूसरे हाथ से एक बुक उठा के देखता हुआ बोलै तोह दादी की छूट में तोह खलबली नहीं मची पर दादी को परेशानी बड़ी होने लगी..

राज बुक को देखने लगा, साथ में दादी के पेट को सहलाते हुए अपने लुंड को दादी की गांड में रङ्गने लगा.

दादी को कुछ ग़ुस्सा आने लगा -- राज बीटा ये क्या कर रहे हो तुम. तुम्हे कुछ एहसास भी है तुम क्या और किसके साथ कर रहे हो.

राज फुल हरामीपन में आ गया-- क्यों दादी मेरे लुंड की गर्मी से आपको परेशानी हो रही है या मेरे लुंड की सख्ती से.

दादी का तो मोह hi खुला रह गया. राज ने बुक राखी और दादी के दूध को पकड़ कर दबा दिए. दादी का मोह और भी खुल गया. राज ने दादी को घुमाया तोह दादी इतने ज़यादा शॉक में आ गई थी. राज देख के है पड़ा.

राज-- दादी क्या हुआ आपको. बुरा लगा क्या.. राज दादी को शॉकिंग हालत में देख के हरामी पैन से देखने लगा.

दादी को एक ेकी बड़ा ग़ुस्सा आया, दादी का मन किया एक खेंच के थप्पड़ मार दे राज को. पर राज के चेहरे पर इन्तहा का कमीना पैन देख के दादी को हिमत नहीं हुई. दादी राज को ग़ुस्से से देखने लगी.

दादी-- क्यों किया तुमने ऐसा सब मेरे साथ. दादी कुछ लाउड बोली तोह राज ने दादी के मोह पर हाथ रख दिए और बोलै-- दादी क्या करूँ आपने देख तोह लिया है न, कैसे सिमरन ने मेरे लुंड को खड़ा करके मुझे कमरे से बहार निकल दिए. दादी मैंने कहा था न सबके सामने मेरी दीदी भी मुझे हरामी कहती हाँ. फिर भी आप सब ने मुझे ये नहीं कहा "राज बीटा यहाँ ऐसा कुछ मत करना" आप सब ने मुझे मेरे हरामीपन के साथ स्वीकार किया है दादी. और अब तोह मैं सिमरन को पत्नी बना के आप के परिवार में शामिल भी हो चूका हों. सिमरन कितनी टेढ़ी है न दादी, फिर भी आप सब उसे बर्दाश्त कर रहे हाँ. कितना प्यार करते हाँ आप सब सिमरन से. मुझे भी प्यार करें और सिमरन के जैसे मुझे भी सहन करें. राज दादी को स्माइल से देखता हुआ बोलै.

दादी मैं में--- आठ सिमरन ये तूने किस्से पन्गा ले लिया. आठ सिमरन कैसा लड़का तुम्हारी ज़िनदगी में शामिल हो गया, हम सब में शामिल हो गया. कितना अच्छा है, फिर भी कितना बड़ा हरामी है. आह्हः कैसे इसे इस सबब से रोकूं मैं. मुझ बूढी को भी नहीं माफ़ किया इसने.

राज-- ज़यादा मत सोचें दादी. सरररय आपको ज़यादा परेशान किया. वो क्या है न, इस शहर में मुझे कोई जनता नहीं था. आते hi एक रंडी से दुआ सलाम हो गई थी. सिमरन तो मुझ कुछ करने नहीं देगी. उसने तोह मुझे अपनी छूट और गांड चटवा कर मेरी हालत hi ख़राब कर दी है. अब मुझे उस रंडी के पास hi जाना पड़ेगा. वही अब मेरे लुंड को ठंडा कर सकती है. आप तोह इस उम्र में मेरे साथ कुछ करेंगी नहीं. वही रंडी मेरे काम आएगी.

आप को परेशान किया उसके लिए सॉरी दादी. ये सब करना ज़रूरी भी था. वर्ण आप सब को कैसे पता चलता, मई कैसा लड़का हों.

राज हरामी दादी के साथ गेम खेलने लगा. दादी को कुछ रहत मिली तोह परेशान भी हो गई. राज रंडी के पास जायेगा. कहीं राज को कोई बीमारी न लग जाये. कहीं हमारी इज़्ज़त न मिटटी में मिल जाये. दादी ये सब भी सोचने लगी. राज ने दादी के मोह से हाथ हटाया तोह दादी लम्बी सांस लेने लगी.

राज एक किताब उठा के देखने लगा.

दादी सोचती चली गई. सिमरन के बारे में, राज के बारे में hi उनकी सोचें थी. जितनी मोहब्बत सिमरन से थी, उतनी hi राज से भी होने लगी थी. राज भी तोह सिमरन का पति था. एक वही सिमरन को बदल सकता था. राज को निराश करना सही नहीं था.

दादी-- राज बीटा किसी बाज़ारो लड़की के पास मत जाना. प्ल्ज़ कुछ तो हमारी इज़्ज़त का ख्याल कर लो.

राज ने दादी को देखा, एक हाथ में बुक तो दूसरे हाथ से दादी की छूट को पकड़ लिया. दादी की तोह फिरसे जल उठी. वो ग़ुस्से और परेशानी से राज को देखने लगी. राज हरामी था. उसे किसी की परवा कहाँ होने लगी.

राज-- मुझे भी किसी बाज़ारो लड़की के पास जाने की कोई ज़रूरत नहीं है दादी. आप मुझे कुछ मज़ा करने की िजाज़ार दे दें. सच कहता हों, मेरा मैं शांत हो जायेगा. देखें तो सही कितनी देर से खड़ा है मेरा लुंड, बैठने का नाम hi नहीं ले रहा. आप तो जानती हाँ न, जब तक इसे ठंडा न किया जाए, ये बैठेगा नहीं.

राज ने दादी का हाथ पकड़ के अपने लुंड पर रखा तोह दादी थार थार कंपनी लगी. और दूर को देखने लगी.

दादी कनपटी हुई-- राज बीटा छोडो मुझे, दीप्ति बेटी आती hi होगी.

राज-- तो क्या हुआ, मैं उनके सामने भी पकड़ सकता हों. मुझे किसी के सामने शर्म नहीं आती.

दादी हैरान हो गई. सोचने लगी राज कैसा लड़का है. एक तोह इस सब उसके साथ कर रहा है, ऊपर से किसी के आने की भी टेंशन नहीं ले रहा. दादी को अब ग़ुस्सा नहीं आ रहा था. राज की उनकी छूट पर चल रहे हाथ ने अपना काम दिखने शुरू कर दिए था. दादी अब चुदाई की दुन्या से दूर हो चुकी थी. कहाँ अब राकेश वर्मा उनकी छूट में घुसने लायक रहा था. दादी बरसो से ठंडी थी. और राज ने दादी की छूट के पानी को पिघलना शुरू कर दिए था.

दादी-- राज बीटा. दीप्ति आ गई तोह मैं क्या मोह दिखाऊँगी उसे. न करो न प्ल्ज़, मुझे बख्श दो.

राज-- आपको वडा करना पड़ेगा, बाद में मेरा साथ देना होगा, तभी छोड़ोगे. दादी सोच में भी पड़ी और राज के हाथ की गुस्ताखी पर भी मस्त होने लगी. राज बूढी छूट को अच्छे से मसल रहा था.

कदमो की चाप सुनाई दी तोह दादी बोल पड़ी..

दादी-- राज बीटा छोडो दीप्ति आ रही है.

राज-- जल्दी से वडा करें न दादी. दादी को तोह जान पर बन आई थी. वो बोली. हाँ ठीक है, मई वडा करती हों. अब छोडो मुझे.

राज-- सिरमन की कसम खाएं आप... दादी परेशान होक दूर को देखने लगी. जहाँ कदमो की चाप पास पोहंचती जा रही थी.

दादी--- सिमरन की कसम. राज ने हरामी स्माइल दे दादी को छोड़ दिए. दादी दो कदम के फासले पर एक कुर्सी पर बेथ गई. उसी समय चची 3 कप कॉफ़ी के लिए अंदर दाखिल हुई.

दादी अपने सर को पकडे बैठी थी. और राज उन्हें देख कर स्माइल कर रहा था. चची ने ट्रे टेबल पर रखा और दोनों को देखने लगी. दादी को सर थामे देखा तो कुछ परेशान हुई, राज को दादी को देख कर स्माइल करते देखे तोह कुछ समझ नहीं पाई.

राज ने दादी को देखने के बाद चची की और अपने कदम बढ़ा दिए. चची कुछ समझ नहीं प् रही थी. दादी अपने होश में नहीं रही थी.
 
राज चची के पास पोहंचा तोह चची कुछ कंफ्यूज हो चुकी थी. राज ने एक हाथ चची के कंधे पर रखा तोह दूसरा हाथ चची की कमर पर रख दिए.

चची देख के और भी हैरान हो गई.

राज-- चची आपने कभी डांस किया है. चची हैरान रह गई थी.

राज चची को डांस पोज़ में लाने लगा.

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राज-- कभी ऐसे पोज़ में आई हाँ कभी चाचा के साथ.. दादी भी दादा के साथ ऐसा कभी नहीं कर पाई. देखो तो दादी की हालत किसी हो गई थी. अब चची समझी दादी ऐसे क्यों बैठी हाँ.

चची राज से खुश हो गई और राज का हाथ पकड़ क्र बिठा दिए और राज हस्ते हुए बोली.

चची -- कसम से राज बीटा तुम बहुत कमल के लड़के हो. मई तोह सोच भी नहीं सकती थी. तुम इतनी क्यूट भी हो सकते हो.

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राज--- अब भी तोह बड़ी कमल की हाँ चची. राज फिर झुका और बोलै. चची लगता है आज चाचा ने दिन में hi आपको खूब मज़ा कराया है. राज ऐसे बोलै.. चची फाटक से बोल पड़ी.. और नहीं तोह क्या, पता कितने दिनों के बाद दिन के समय----

फ़ौरन hi चची चुप भी हो गई अपने मोह पर हाथ रख दिया.. राज हरामी हसने लगा. कितनी बारीकी से राज ने चची नोट किया था. चची शर्मा कर राज को देखने लगी.

राज ने चची का हाथ पकड़ा और सहलाते हुए बोलै.. चची ऐसे मत शरमाया करें. लाइफ को खुल के एन्जॉय करना चाहिए. राज ने चची के हाथ को दबाया तोह चची शर्मा से लाल पड़ने लगी.

राज-- आपको पता है चची, आप बहुत बहुत सुंदर हाँ. इतनी सुंदर मैंने आज तक कोई महिला नहीं देखि. ज़रूर आपक भी जवानी में सिमरन के जैसी hi दिखती होंगी. चची अपनी तारीफ पे खिलखिलाने के हसने लगीं

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चची-- ओह्ह राज बीटा तुम कितने क्यूट, कितने मज़े के लड़के हो.. हेहेहे मुझे तुम अब और भी पसंद आने लगे हो..

राज-- हाँ वो तो में हों, आप भी मुझे बहुत पसंद आने लगी है चची.. अच्छा मुझे बताया नहीं आपने, डांस करना आता है न आपको.

चची हस्ते हुए-- राज बीटा तुम्हे मेरे डांस से क्या लेना देना है.

राज---- चची बहुत लेना देना है. अब मैं मैरिड बॉय हों चची. अपनी पत्नी को खुश रखने के लिए मुझे डांस भी सीखना पड़ेगा. और भी पता नहीं क्या क्या नखरा मुझे स्मरण के उठाने पड़ेगा. पता नहीं किसी रत मुझे क्लब ले गई तोह, अगर मुझे डांस न आता हुआ तोह, कितनी शर्मिंदगी होगी मुझे सबके सामने.

चची-- हेहेहे तोह मई क्या करूँ. ये तुम्हारा मटर है, तुम खुद hi सोल्वे करो इसे.

राज-- वही तो कर रहा हों. मुझे डांस सीखने का है चची. वो भी शहर वाला. अब शहर के बेस्ट क्लब में मैं विलेज डांस करता अच्छा लगूंगा क्या..

चची हंसी तोह दादी भी है पड़ी. दादी जो राज से परेशान थी. राज की अब की बातें और अंदाज़ इतना हटके था, दादी भी खुद को रोक नहीं पाई और हसने लगी. राज अब जैसा भी था, सहन तोह करना hi था.

चची राज के साथ hi बैठी थी, हस्ते हुए अपने हाथ संभल नहीं पाई और राज के लुंड पर हाथ रख बैठी. राज का लुंड अभी भी खड़ा था. चची को एहसास हुआ तोह राज ने नॉटी भाव चेहरे पे लाते हुए चची की हाथ पे अपना हाथ रख के दबा दिए. चची को राज के लुंड की मोटाई और चौड़ाई अच्छे से फील हुई तोह

चची मैं में.. उफ्फ्फ ये क्या है, ये तोह सच में बहुत बड़ा है.. हमारी सिमरन के तोह भाग hi खुल गए.. चची अब भी वो नहीं सोच पाई, जो राज के मैं में था. चची ने भी राज को देखा और अपना हाथ हटा लिया.

चची ने एक नज़र है रही दादी को देखा और राज के कान से मोह लगा के बोली.. राज बीटा ये जिस के काम का है न, उसी पे तरय करो.

राज कुछ हैरान हुआ, चची ऐसी बातों को लेके कॉंफिडेंट भी थी. राज को लगा चची के साथ खुला जा सकता है.

राज-- चची सिमरन के काम पता नहीं कब आएगा. मैं तोह कहता हों, चाचा को आने में समय लगेगा. दादी को मैं भेज देता हों, क्यों न आप hi इसे देख के अच्छे से इसकी सेवा कर दें. और फिर बेटे की और बेटे के सामान की रक्षा करना hi तोह धरम है न, प्यार है न. अपनापन है न.

चची कुछ और हैरान हुई और टेबल पे पड़ा कॉफ़ी उठा के राज को दे दी.

चची भी मस्ती करते हुए-- राज बीटा इतनी देर से सर्दी के कारण ये कॉफ़ी खूब ठंडी हो गई है. इसे पि लो, तुम भी ठन्डे पद जाओगे. ठन्डे पड़े तोह सब कुछ एकदुम्म से शांत पद जायेगा.

राज हस्ता हुआ कॉफ़ी का कप थाम गया.

चची उठी और एक कप दादी को थमा दिए. कॉफ़ी अभी भी कुछ कुछ ग्राम थी. चची ने ऐसे hi कहा था. राज ने एक सिप लिया और चची से बोलै.

राज-- चची आप से इतना खुल के बात करके मज़ा आ रहा है.

चची दादी को देखती हुई-- राज बीटा मई अपने मायके ऐसे hi रहती हों. यहाँ का हिसाब कुछ और है. चची धीमे लहजे में बोली. और ऐसी लाइफ जीने में मुझे भी खूब मज़ा आता है. संस्कारी तोह मई भी बहुत हों. पर अपणु से लिमिट में रहते हुए इतना सब हंसी मज़ाक न हो तोह लाइफ का मज़ा जाता रहता है.

राज मैं में.. आठ चची कसम से तुझे छोड़ने में मझे खूब मज़ा आएगा. संस्कारी भी हो और मस्ती से भरपूर भी.

चची -- क्या सोचने लगे राज बीटा. चची भी कॉफ़ी पीते हुए बोली.

राज---- चची चाचा का सज़ा मेरे जितना है न.

चची-- ऑंखें दिखती हुई-- इतना भी फ्री नहीं होना मुझसे समझे..

राज-- बताएं न चची. वर्ण कोण इतना बड़ा पकड़ के चैन से बेथ सकती है. ज़रूर चाचा का भी मेरे जितना होगा.

राज ने अपने भाव नार्मल बूत मस्ती वाले रखे थे. जैसी मस्ती आम हुआ करती थी. चची भी खुलती जा रही थी.

चची-- राज बीटा, मुझे ऐसा सोचने की आदत नहीं है. और जितना इस मामले में मिलता आ रहा है. उतने में hi मई बहुत खुश हों. ज़यादा की छह नहीं पाली कभी मेने और न hi सोचा है. अब भी मेरे मैं में कुछ ऐसा वैसा नहीं आया.

चची पुरे कॉन्फिडेंस से बोली.. तो राज को लगा, चची दादी के जैसी नहीं हाँ. दादी तो फस गई थी. चची जल्दी नहीं फंसेगी. पर राज हरामी था. जब मैं बना लेता, तोह कुछ भी कर सकता था.

कॉफ़ी के बाद कुछ और बातें हुई, दादी ने बहुत काम बातें करि थी. वो राज से दरी हुई भी थी, और सोच रही थी, राज उसके साथ अब क्या करेगा, वो तोह सिमरन की कसम भी खा चुकी थी.

राज ने भी दादी को देख के स्माइल कर दी थी. दादी कुछ और भी घबरा गई थी. आधे घंटे बाद राज जाने लगा तोह उसका लुंड नार्मल था. राज ने मैं बदल लिया था. वर्ण चची न आती, दादी अकेली होती तोह ज़रूर कुछ कर जाता. कोठी साडी hi भरी हुई थी, राज के लिए इतनी जल्दी आसानी तो बन से रही.

जाते हुए राज चची को कास के गले से लगा गया. दादी बड़े धयान से राज को देख रही थी. चची ने भी राज को अपने सीने में कास लिया. चची के बड़े बड़े चुके राज के सीने में डाब गए थे. पर चची के मैं में कुछ नहीं आया था.

राज कैसे इस मोके में चुकता-- चची अगली बार मुझसे मिलना हो न तोह ब्रा निकल देना.

राज चची के कान में धीरे से बोलै तोह चची ने राज की कमर पर चुटकी काट दी.

चची राज को ऑंखें दिखने लगी तोह राज हरामीपन से है पड़ा.

दादी से मिला तोह दादी की गांड में भी ऊँगली कर दी. दादी फिरसे परेशान हो उठी. राज ने तसली से दादी की छूट में ऊँगली करि और फिर दादी के कान बोलै..

राज-- दादी आपने वडा किया है, सिमरन की कसम खाई है. अब मुझे आप कुछ भी करने से नहीं रोकेंगी, वर्ण--

दादी दर गई कुछ नहीं बोली..

राज लंच तक वही रहा, सब से खूब बातें करि राज ने. चची से राज की सबसे ज़यादा जमने लगी थी. राज लिमिट क्रॉस करता तो चची राज को ऑंखें दिखा देती, साथ में स्माइल भी करने लगती. सिमरन फिरसे चहकने लगी थी.. वो भी राज को देख रही थी. राज को समझने की कोशिश भी कर रही थी. उसकी बातों से, उसके अंदाज़ से. पर राज ने सिमरन के पल्ले कुछ नहीं पड़ने दिए.

इशिता की आँखों में देख के राज बहुत कुछ समझ गया था. राज समझ गया, इस घर में इशिता hi एक ऐसी लड़की है, जिसे पटाने की ज़रूरत नहीं है. वो पति पाते लड़की है. राज ने सोच लिया, अगली बार आया तोह उसे स्वर्ग यात्रा पे लेजायेगा.

मम्मी और सबसे खूब बातें हुई, दाद्दु से भी खूब बातें की राज ने. और फिर निकल पड़ा राज कोठी से. सबसे बहुत प्यार से, बड़े सम्मान से राज को रुखसत किया.

राज बाइक पे बैठा सबको एक नज़र देखने के बाद निकल पड़ा.

अब राज को अपने मिशन पर धयान देना था, मिशन सिमरन भी उसकी लाइफ के बहुत बड़ा मिशन था. पर असल मिशन तोह मिशन माँ था. जिसे हर मिशन से पहले पूरा करना था.

राज समझ रहा था, अब ये मिशन भी आसान मिशन नहीं रहा, सिमरन के आ जाने से ये मिशन भी बहुत टफ हो गया था. पता नहीं सिमरन किस जगा केसा खेल खेलते हुए इस मिशन को राज के लिए और भी हार्ड बना देती. राज नहीं जनता था.

राज को हर हाल में ये मिशन पूरा करना था. इसी मिशन के लिए hi तोह वो दिल्ली आया था. राज बाइक पे बैठा हुआ शहर में गुमने लगा. 4 बजे के करीब राज को उर्वशी अपने पति के साथ एक गाडी में बैठी कहीं जाती हुई दिखाई दी तोह राज भी उर्वशी का पीछा करने लगा. राज खुश था, आज के hi दिन उसे उर्वशी दिख गई थी.

उर्वशी अपने पति के साथ एक सुपर स्टोर जा पोहंची. राज भी बाइक पार्किंग में कड़ी करके अंदर घुसता चला गया.
 
"अरे शर्मा जी आइये आइये, कैसे हाँ आप"

राज के नाना मोहल्ले में निकले तोह उनकी hi आगे के एक आदमी ने उन्हें रोक लिया.

नाना --- अरे पण्डे जी, कहिये कैसे हाँ आप. आज तोह बड़े दिनों बाद नज़र आये आप. कहाँ थे इतने दिन.

पण्डे--- शर्मा जी, बेटी के पास था शहर में. अब तोह उम्र हो गई है. कभी एक इधर तोह कभी उधर. दामाद जी की कुछ तबियत भी सही नहीं थी तोह वहां कुछ रह लिया

नाना-- अच्छा. अब कैसा है वो.

पण्डे-- अब वो अच्छा है शर्मा जी. मेरी बेटी ने बड़ी सेवा कृ है दामाद जी की. बहगवां सभी को मेरी बेटी जैसी बेटी दे... पण्डे हरामी नाना जी को ताना मार hi बैठा. नाना भी उसकी बात का मतलब समझ गए थे.

पण्डे फिर बोलै-- और सुना है आपके हाँ जो लड़का राज रहता है, आज जल बड़ा हवा में उड़ रहा है वह.

नाना उसे हेरात से देखने लगे-- क्या मतलब पण्डे जी, मैं कुछ समझा नहीं

पण्डे कामिनी हंसी है पड़ा-- सुना नहीं आपने शर्मा जी, वर्मा की इकलौती बेटी को बीच सड़क पर अपनी पत्नी बना लिए उसने. इस बात को तोह कुछ दिन भी बीत चुके हाँ. आधा मोहल्ला जनता है, क्या आपको नहीं पता.

नाना ऐसी hi बातें सुनने के आदि नहीं थे. राज का ये वाला काम नाना को पसंद नहीं आया था. ये तोह सरासर लुछो वाला काम था. और फिर राज ने कुछ बताया भी नहीं था उनको. ऊपर से पण्डे का अंदाज़ भी बड़ा ज़हरीला था.

पण्डे-- शर्मा जी अब क्यों संस्कार का दिखावा करते हाँ आप. राज जैसे लड़के को घर में रखा हुआ है. और खुद सबको शिक्षा देने में लगे हुए हाँ.

नाना कुछ और नहीं बोल पाए. फ़ौरन वापिस घर को पलट लिए.

घर पोहंचे तोह नानी से बोले-- राज ने उस दिन वाली लड़की से शादी कर ली और हमें बताया hi नहीं. नानी भी अनजान थी. सुनके हैरान रह गई.

नानी-- क्या. मुझे भी नहीं बताया उसने.. ज़रूर चोट लगने के कारण भूल गया होगा.

नाना -- जो भी है, पर उसे हमें ये बताना चाहिए था. मोहल्ले में मुझे पण्डे ने बताया. कमीना और भी बहुत कुछ बोल रहा था. देखो मल्टी मेने पहले भी कहा था, राज कुछ भी करे, पर मेरा सर नहीं झुकता चाहिए. पता है, जैसा वो पण्डे बात कर रहा था, मेरा सर hi नहीं उठ पा रहा था. नानी सुनके परेशान हो गई.

बात उतनी बड़ी नहीं थी, जितनी नाना बना रहे थे.

नानी-- शर्मा जी आप ग़ुस्से में हो, राज आता है तोह उससे पूछूँगी.

नाना-- ये भी पूछ लेना, उससे कह भी देना, ऐसे लुच्चे काम मुझे पसंद नहीं है. वो वर्मा की पोती है. कल को कोई यहाँ आ कर तमाशा करेगा तो कैसे सहन करूँगा मैं. सालों से यहाँ हों, सब मुझे जानते हाँ. किसी किसी बातें सुनने को मिल सकती हाँ मुझे. जो दो चाट परिवार वाले अपने बच्चे भेजते हाँ, वो भी भेजना बंद कर देंगे.

नाना की टोन बदलने लगी थी. नानी परेशान होने लगी.

राज सुपर स्टोर में घुसा उर्वशी और उसके हस्बैंड को देखने लगा. दोनों शॉपिंग में लगे हुए थे.

राज मैं में.. साली कितनी ग़ज़ब के फिगर की है. पिछ में तो सही से दिखाई hi नहीं दी थी. अब देखने पर कितनी हॉट एंड सेक्सी दिखाई दे रही है. राज उर्वशी को ऊपर से निचे तक देखता हुआ मैं में बोलै

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उर्वशी अपने पति के साथ हैप्पी मूड में शॉपिंग कर रही थी. कुछ देर में राज भी चलता हुआ उनके पास जा के कुछ सामान देखने लगा. राज करीब से उर्वशी के फिगर को देख रहा tha.badi ग़ज़ब की माल थी उर्वशी. राज का सोया लुंड फिरसे हरकत करने लगा.

उर्वशी का हस्बैंड जो इधर उधर देख रहा था. उसकी राज पर नज़र पड़ी तोह राज को धयान से देखने लगा.

उर्वशी का हस्बैंड भी राज को रोड पर देख चूका था. राज ने जब सिमरन की मांग भरी थी तोह वो वही एक गाडी में था.

वो चलता हुआ राज के पास आया. उर्वशी के हस्बैंड का नाम आदित्य था.

आदित्य -- हे यू.... तुम वही हो न, जिसने उस दिन बीच रोड पर सिमरन की मांग भरी थी. आदित्य चहकता हुआ बोलै तोह राज को लगा उसका काम आसान हो गया है.

उर्वशी भी पलट कर राज को देखने लगी. आदित्य के शब्द वो भी सुन चुकी थी. वो हैरान होक राज को देखने लगी. दिल hi दिल में राज की पर्सनालिटी पर फ़िदा भी होने लगी. पर कुछ और नहीं सोचा उसने.. वो भी आदित्य, राज के पास ा गई.

राज-- स्माइल से... हाँ वही हों. यक़ीनन आप भी वहीँ थे, जब ये सब हुआ था.

आदित्य कन्फर्मेशन के बाद एकदुम्म से राज के गले लग गया.

आदित्य-- अरे यार तुम तोह हायर सोसाइटी में हॉट टॉपिक बन गए हो यार. क्या कमल का सन बनाया है तुमने. बीच रोड कर लड़की की मांग भरना, और वो भी सिमरन जैसी लड़की की.. बी गॉड तुम ने कमल कर दिखाया है यार.

आदित्य से अपनी ख़ुशी छुपाई नहीं जा रही थी.

उर्वशी भी बोल पड़ी-- आदि ये तोह सच में कमल का लड़का हुआ न फिर... उर्वशी ने भी अपने हस्बैंड के सामने राज से गले मिलने में कोई झिझक महसूस नहीं की. राज भी उर्वशी से गले मिला तोह खिल उठा. उर्वशी के मस्त बदन से आ रही मस्त खुशबु अपने अंदर उतर के राज खिल उठा था. इस मोके को राज जैसे छोड़ सकता था. आदित्य से नज़र बचा के राज ने उर्वशी की गांड में ऊँगली कर दी थी. और कान में बोल दिए था.

राज-- सिमरन से पहले तुम मुझे क्यों नहीं मिल गई. मैं तुम्हारी hi मांग भर देता. उस घमंडी लड़की की मांग से सुंदर तोह तुम्हारी मांग है.

उर्वशी को झटका भी लगा और अपनी तारीफ पे खिल भी उठी. राज अब एक फेमस लड़का भी था. तोह उर्वशी की राज की ऊँगली का बुरा नहीं मनाया. उल्टा उसे राज का ये अंदाज़ और बेजिझक होने पसंद आया था.

आदित्य-- राज बिजी तो नहीं हो न

राज-- नहीं तोह, क्यों?

आदित्य-- यार किसी रेस्टोरेंट में बेथ के कॉफ़ी शोफी पीते हाँ. कुछ स्नैप्स भी तुम्हारे साथ लूंगा. आखिर अपने फ़िरेन्ड्स को शेयर भी तोह करनी है. बुरा तोह नहीं लगेगा न तुम्हे.

राज उर्वशी को देखते हुए हरामीपन से-- मुझे भी आप दोनों के साथ कुछ स्नैप्स की छह होने लगी हो. मेरे मोबाइल की शोभा भी बढ़ जायेगी.

तीनो है पड़े. आदित्य ने अपना और उर्वशी का नाम राज को बताया, जो राज पहले से hi जनता था. कुछ देर में तीनो बहार निकल पर करीब के रेस्टोरेंट की और बढ़ रहे थे.
 
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