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- Dec 5, 2013
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अपडेट-116
रवि अपने खेतो की और जा चूका था इधर घर में भी सब अपने अपने कामो में लगे पड़े था
बस खास बात ये थी की खाना आज मल्टी बना रही थी
वो पूरी तरह पसीने से तर बतर हुई पड़ी थी उसने अपना पल्लू पहले hi हटा दिया था
ब्लाउज में से उसके निप्पल साफ़ झलक रहे थे
रेखा खत पर बैठी बैठी मल्टी को hi डेल्ह रही थी
रेखा ( ये कमीनी तो आते hi बेशरम बनती जा रही है )
मेघा- अरे कम्मो जा अपने भाई को खाना तो दे आ
कम्मो- है दीदी बास जा hi रही हु
मल्टी- दीदी अगर आप कहे तो मैं भी जाऊ कम्मो के साथ खेतो की और
कम्मो- है दीदी जाने दो न भाभी को मेरे साथ अभी थोड़ी देर में आ जायेंगे
मेघा- ठीक है जाओ
मल्टी और कम्मो रवि का खाना लेकर निकल जाते है
रस्ते भर दोनों की बात चलती रहती है
और जब दोनों खेत में पहुंचते है तो रवि दुर्र दिखाई पड़ता है
कम्मो- भाभी आप अंदर बैठो मैं बुला कर लती हु रवि को
मल्टी- अरे अरे कम्मो इतना काम तो मुझे करने दे इसी भने रवि बाबू से थोड़ी बात चित भी हो जाएगी
कम्मो - ठीक है भाभी आप hi बुला लाओ
कम्मो इतना बोलती हुई अंदर चली जाती है
इधर कमम्मो के जाते hi मल्टी अपने पल्लू को थोड़ा निचे करती हुई कमर पर बांध लेती है और अपने ब्लाउज का एक बोटों खोल कर ब्लाउज को अंडरर की तरफ मदद लेती है
जिसकी वजह से अब मल्टी की चूचिया पहले से कहि ज्यादा दिख रही थी
मल्टी( कब तक्क बचेगा मुर्गा आज तो इसकी हालत खराब कर दूंगी अपनी इन मस्त चूचियों से)
मल्टी अपनी भरी भरकम गांड मटकती हुई रवि की और चल जाती है
रवि बैठा बैठा खेत में सोहनी कर रहा था
उसके जिस्म पर एक मात्र्र धोती hi थी
गर्मी की वजह से उसका सुडोल बदन पूरा पसीने से भीगा पड़ा था
रवि को थोड़ा पास से देखते hi मल्टी की आँखों में चमक आ जाती है
मल्टी( क्या किस्मत दी भगवान् पति नामर्द निकला और छोटे भाई को देख कर तो लगता है की मेरे पति की मर्दानगी भी आपने इसके अंदर hi दाल दी)
मल्टी सीधा रवि के सामने जाकर बैठ जाती है
बकतने के समय उसने अपनी साडी को घुटनो तक्क खींच लिया था
जिसकी वजह से रवि की नजर सबसे पहले मल्टी कस चिकने पैरो पारर जाती है
और जैसे hi रवि थोड़ा ऊपर की और देखता है उसके हाथ से खुरपी छूट जाती है
मल्टी का ब्लाउज इतना डीप हो चूका था की उसका आधा निप्पल तक्क नजर आ रहा था
पर मनो मल्टी को इससे कोई फरक ना पड़ता हो
रवि की नजरे मल्टी की चूचियों पर गड़ी हुई थी जिसका असर सीधा उसके लुंड पारर हो रहा था
मल्टी की नजरो के सामने hi रवि की धोती में वो उभर उठता है
जोकि थमने का नाम नहीं ले रहा था
बड़ा होता hi जा रहा था
मल्टी( हे भगवान् ये आदमी का लुंड है ये घोड़े का)
तभी वो होता है जिसका इन्तजार मल्टी कबसे कार रही थी
रवि की धोती उसके विकराल लुंड को शांत नहीं कर पति और पक्क्क से रवि का लुंड धोती से बहार निकल जाता है
मल्टी उस लुंड को देखती रेहह जाती है
मल्टी भी अपने मोहल्ले की माधुरी थी उसने कई लुंड खाये थे पारर इतना बड़ा लुंड उसने आज तक्क देखा टककक नहीं था
मल्टी( है रामम लाटरी लग्ग गयी मेरी तो)
मल्टी जिसे बच्चा समझ रही थी वो खुद hi उसे भोगने के जुगाड़ में पहले से hi पड़ चूका था
रवि भी अपने लुंड को छुपाने की कोई कोशिश नहीं करता
रवि- क्या हुआ भाभी चलिए खाना खाने
रवि की बात सुनकर अचानक से मल्टी का ध्यान टूटता है
मल्टी- हाह हाहा चलो चलो
मल्टी जल्दी से उठ कर आगे आगे चलने लगती है
मल्टी की शकल देख कर ऐसा लग रहा था मनो उसने कोई बहुत देख लिया हो
पर वो रवि को तिझाने में कोई कसार नबी छोड़ना कहती थी
अब भी वो जानबूझ कर अपनी गांड को कुछ ज्यादा hi मटका रही थी
रवि मल्टी के पीछे पीछे चल रहा था पारर मल्टी की हरकते उसके लुंड को बैठने नहीं दे रही थी
रवि का मैं तो कर रहा था की अपनी कमसिन भाभी को यही पटक कर छोड़ दे
अब मल्टी अपना अगला दव्व चलती है और चलते चलते आगे की और गिरने का नाटक करती है
जैसे hi मल्टी आगे की और गिरती है रवि तुरंत hi अपने हाथ आगे बढ़ता हुआ अपनी गदराई भाभी को पकड़ लेता है
पारर इस बार रवि के दोनों हाथ सीधा मल्टी की चूचियों पारर थे
रवि जब मल्टी को सहारा देता हुआ अपनी और खीचता है तो उसका लुंड साड़ी के ऊपर से hi मल्टी की मस्तानी गांड में घुस जाता है
मल्टी- अह्ह्ह्हह
अचानक से रवि को महसूस होता है की माहौल अब खराब हो रहा है वो तुरंत hi मल्टी से अलग हो जाता है
मल्टी न कहते हुए भी दुबारा चलने लगती है
मल्टी( है राममम कितना गजब का अहसास था इस लड़के का मुसल मेरी गांड के बिच था उसकी गर्मी को मैं सदी के ऊपर से hi महसूस कर सकती थी आह्ह्हह्ह्ह्ह)
मल्टी की छूट लगातार पानी छोड़ रही थी
मल्टी- आओ अंदर चलो कम्मो खाना निकल रही है
रवि- भाभी आप खा जा रही हो
मल्टी- देवर जी आपने गिरने से तो बचा लिया पारर इस मिटटी से नहीं बचा पाए अपनी भाभी को
रवि- वो तो शुक्र करो भाभी बचा लिया नहीं तो पूरी तरह मिटटी से नहा लेती फिरर कपडे खोल कर यही नहाना पड़ता
मल्टी( मैं तो कबसे तैयार हु रे मूवी तेरे सामने कपडे खोलने के लिए तू आगे तो बढ़)
रवि कमरे के अंदर चला जाता है झा कम्मो उसकी और पीठ घुमा कर कुछ काम कर रही थी
रवि का ध्यान अब सिर्फ और सिर्फ उसकी दीदी की मस्तानी गांड पारर hi था
अच्चानक से रवि को याद आता है की कुछ hi दिन में उसकी दीदी की शादी होने वाली है
वो जनता था की अगर बिना चोदे उसने कम्मो दीदी को जाने दिया तो शायद वो जिंदगी में कभी भी अपनी दीदी की जवानी को नहीं साख पायेगा
रवि को डर भी था की कहि कम्मो बहादक न जाये पर अब डरने का समंय नहीं था अब तो समय hi नहीं था
रवि बिना कुछ सोचे समझे आगे बढ़ता है और सीधा कम्मो से चिपका जाता है
रवि- क्या कर रही हो दीदी
रवि का लुंड जैसे hi कम्मो की गांड पर टच होता है कम्मो के पेअर लड़खड़ाने लगते है
वो कबसे जिस पल का इन्तजार कर रही थी आखिर वो आज आ hi गया था
कम्मो की जबान लड़खड़ा रही थी
कम्मो- तुझे क्या करररणा मैं कुछ भी कररूअ
रवि अपने लुंड को बड़े hi धीरे धीरे अपनी दीदी की गांड पारर रगड़ रहा था
इधर कम्मो के ऊपर हवस का नशा हावी होता जा रहा था
रवि - क्यों आप मेरी दीदी नहीं हो
इस बार रवि अपने हाथ को आगे की और करता हुआ अपनी दीदी के नंगे पेट पर रख देता है
कम्मो- अह्ह्ह्हह्हह
दीदी तो तेरी सिर्फ एक hi है रेखा दीदी चखे उनसे फिरसात मिल गयी क्या आज जो मेरा हलचल पूछ रहा है
रवि- दीदी ऐसा क्यों बोल रही हो मैं तो हमेशा hi आपका हलचल पूछता हु
रवि अपनी धोती को थोड़ा सा सरका देता है और उसका सूपड़ा धोती के बहार आ जाता है
इतने में hi मल्टी दरवाजे पारर आती है और सबब कुछ देख लेती है
मल्टी( हे बहगवां ये लड़का तो अपनी साडी दीदियो को hi छोड़ने में लगा हुआ है
कम्मो को इसके हाथ से बचना पड़ेगा नहीं तो उसकी छूट को भी छोड़ छोड़ कर भोसड़ा बना देगा फिर मेरे भाई को क्या मिलेगा)
अच्चानक से रवि कम्मो का हाथ पकड़ता है और उसे खींचता हुआ सीधा अपने लुंड पारर रख देता है
रवि के लुंड की मोटाई का अंदाजा लगते hi कम्मो को वो रात याद आ जाती है जब्ब उसने उसकी नजरो के सामने hi रेखा दीदी की गांड फड़ी थी
कम्मो एक पल के लिए डर जाती है और अपने हाथ को आगे की और खींच लेती है
अभी रवि कुछ करता तब तक कबाब में हड्डी आ जाती है
मल्टी- अरे कम्मो तने खिलाया नहीं खाना मेरे देवर जी को
कम्मो- है है भाभी बास दे hi रही हु
कम्मो की नजरे लगातार रवि की धोती को hi घर रही थी
पर रवि ने एक बात नोटिस की की जब वो पहले अपनी भाभी से मिला तो उसका ब्लाउज आधा खुला हुआ था और अब उसकी भाभी स्ति सावित्री होने का ढोंग कर रही है
रवि के चेहरे पारर एक मुस्कान थी क्योंकि अब वो जान चूका था की उसकी गदराई भाभी भी उसके लुंड की दीवानी हो चुकी है
मल्टी( कैसे भी करके कम्मो को इससे बचनन पड़ेगा कहे इसके लिए मुझे खुद को इसके सामने क्यों न प्रोषणा पड़े
वैसे भी अब ज्यादा दिन नहीं है शादी में).....
रवि अपने खेतो की और जा चूका था इधर घर में भी सब अपने अपने कामो में लगे पड़े था
बस खास बात ये थी की खाना आज मल्टी बना रही थी
वो पूरी तरह पसीने से तर बतर हुई पड़ी थी उसने अपना पल्लू पहले hi हटा दिया था
ब्लाउज में से उसके निप्पल साफ़ झलक रहे थे
रेखा खत पर बैठी बैठी मल्टी को hi डेल्ह रही थी
रेखा ( ये कमीनी तो आते hi बेशरम बनती जा रही है )
मेघा- अरे कम्मो जा अपने भाई को खाना तो दे आ
कम्मो- है दीदी बास जा hi रही हु
मल्टी- दीदी अगर आप कहे तो मैं भी जाऊ कम्मो के साथ खेतो की और
कम्मो- है दीदी जाने दो न भाभी को मेरे साथ अभी थोड़ी देर में आ जायेंगे
मेघा- ठीक है जाओ
मल्टी और कम्मो रवि का खाना लेकर निकल जाते है
रस्ते भर दोनों की बात चलती रहती है
और जब दोनों खेत में पहुंचते है तो रवि दुर्र दिखाई पड़ता है
कम्मो- भाभी आप अंदर बैठो मैं बुला कर लती हु रवि को
मल्टी- अरे अरे कम्मो इतना काम तो मुझे करने दे इसी भने रवि बाबू से थोड़ी बात चित भी हो जाएगी
कम्मो - ठीक है भाभी आप hi बुला लाओ
कम्मो इतना बोलती हुई अंदर चली जाती है
इधर कमम्मो के जाते hi मल्टी अपने पल्लू को थोड़ा निचे करती हुई कमर पर बांध लेती है और अपने ब्लाउज का एक बोटों खोल कर ब्लाउज को अंडरर की तरफ मदद लेती है
जिसकी वजह से अब मल्टी की चूचिया पहले से कहि ज्यादा दिख रही थी
मल्टी( कब तक्क बचेगा मुर्गा आज तो इसकी हालत खराब कर दूंगी अपनी इन मस्त चूचियों से)
मल्टी अपनी भरी भरकम गांड मटकती हुई रवि की और चल जाती है
रवि बैठा बैठा खेत में सोहनी कर रहा था
उसके जिस्म पर एक मात्र्र धोती hi थी
गर्मी की वजह से उसका सुडोल बदन पूरा पसीने से भीगा पड़ा था
रवि को थोड़ा पास से देखते hi मल्टी की आँखों में चमक आ जाती है
मल्टी( क्या किस्मत दी भगवान् पति नामर्द निकला और छोटे भाई को देख कर तो लगता है की मेरे पति की मर्दानगी भी आपने इसके अंदर hi दाल दी)
मल्टी सीधा रवि के सामने जाकर बैठ जाती है
बकतने के समय उसने अपनी साडी को घुटनो तक्क खींच लिया था
जिसकी वजह से रवि की नजर सबसे पहले मल्टी कस चिकने पैरो पारर जाती है
और जैसे hi रवि थोड़ा ऊपर की और देखता है उसके हाथ से खुरपी छूट जाती है
मल्टी का ब्लाउज इतना डीप हो चूका था की उसका आधा निप्पल तक्क नजर आ रहा था
पर मनो मल्टी को इससे कोई फरक ना पड़ता हो
रवि की नजरे मल्टी की चूचियों पर गड़ी हुई थी जिसका असर सीधा उसके लुंड पारर हो रहा था
मल्टी की नजरो के सामने hi रवि की धोती में वो उभर उठता है
जोकि थमने का नाम नहीं ले रहा था
बड़ा होता hi जा रहा था
मल्टी( हे भगवान् ये आदमी का लुंड है ये घोड़े का)
तभी वो होता है जिसका इन्तजार मल्टी कबसे कार रही थी
रवि की धोती उसके विकराल लुंड को शांत नहीं कर पति और पक्क्क से रवि का लुंड धोती से बहार निकल जाता है
मल्टी उस लुंड को देखती रेहह जाती है
मल्टी भी अपने मोहल्ले की माधुरी थी उसने कई लुंड खाये थे पारर इतना बड़ा लुंड उसने आज तक्क देखा टककक नहीं था
मल्टी( है रामम लाटरी लग्ग गयी मेरी तो)
मल्टी जिसे बच्चा समझ रही थी वो खुद hi उसे भोगने के जुगाड़ में पहले से hi पड़ चूका था
रवि भी अपने लुंड को छुपाने की कोई कोशिश नहीं करता
रवि- क्या हुआ भाभी चलिए खाना खाने
रवि की बात सुनकर अचानक से मल्टी का ध्यान टूटता है
मल्टी- हाह हाहा चलो चलो
मल्टी जल्दी से उठ कर आगे आगे चलने लगती है
मल्टी की शकल देख कर ऐसा लग रहा था मनो उसने कोई बहुत देख लिया हो
पर वो रवि को तिझाने में कोई कसार नबी छोड़ना कहती थी
अब भी वो जानबूझ कर अपनी गांड को कुछ ज्यादा hi मटका रही थी
रवि मल्टी के पीछे पीछे चल रहा था पारर मल्टी की हरकते उसके लुंड को बैठने नहीं दे रही थी
रवि का मैं तो कर रहा था की अपनी कमसिन भाभी को यही पटक कर छोड़ दे
अब मल्टी अपना अगला दव्व चलती है और चलते चलते आगे की और गिरने का नाटक करती है
जैसे hi मल्टी आगे की और गिरती है रवि तुरंत hi अपने हाथ आगे बढ़ता हुआ अपनी गदराई भाभी को पकड़ लेता है
पारर इस बार रवि के दोनों हाथ सीधा मल्टी की चूचियों पारर थे
रवि जब मल्टी को सहारा देता हुआ अपनी और खीचता है तो उसका लुंड साड़ी के ऊपर से hi मल्टी की मस्तानी गांड में घुस जाता है
मल्टी- अह्ह्ह्हह
अचानक से रवि को महसूस होता है की माहौल अब खराब हो रहा है वो तुरंत hi मल्टी से अलग हो जाता है
मल्टी न कहते हुए भी दुबारा चलने लगती है
मल्टी( है राममम कितना गजब का अहसास था इस लड़के का मुसल मेरी गांड के बिच था उसकी गर्मी को मैं सदी के ऊपर से hi महसूस कर सकती थी आह्ह्हह्ह्ह्ह)
मल्टी की छूट लगातार पानी छोड़ रही थी
मल्टी- आओ अंदर चलो कम्मो खाना निकल रही है
रवि- भाभी आप खा जा रही हो
मल्टी- देवर जी आपने गिरने से तो बचा लिया पारर इस मिटटी से नहीं बचा पाए अपनी भाभी को
रवि- वो तो शुक्र करो भाभी बचा लिया नहीं तो पूरी तरह मिटटी से नहा लेती फिरर कपडे खोल कर यही नहाना पड़ता
मल्टी( मैं तो कबसे तैयार हु रे मूवी तेरे सामने कपडे खोलने के लिए तू आगे तो बढ़)
रवि कमरे के अंदर चला जाता है झा कम्मो उसकी और पीठ घुमा कर कुछ काम कर रही थी
रवि का ध्यान अब सिर्फ और सिर्फ उसकी दीदी की मस्तानी गांड पारर hi था
अच्चानक से रवि को याद आता है की कुछ hi दिन में उसकी दीदी की शादी होने वाली है
वो जनता था की अगर बिना चोदे उसने कम्मो दीदी को जाने दिया तो शायद वो जिंदगी में कभी भी अपनी दीदी की जवानी को नहीं साख पायेगा
रवि को डर भी था की कहि कम्मो बहादक न जाये पर अब डरने का समंय नहीं था अब तो समय hi नहीं था
रवि बिना कुछ सोचे समझे आगे बढ़ता है और सीधा कम्मो से चिपका जाता है
रवि- क्या कर रही हो दीदी
रवि का लुंड जैसे hi कम्मो की गांड पर टच होता है कम्मो के पेअर लड़खड़ाने लगते है
वो कबसे जिस पल का इन्तजार कर रही थी आखिर वो आज आ hi गया था
कम्मो की जबान लड़खड़ा रही थी
कम्मो- तुझे क्या करररणा मैं कुछ भी कररूअ
रवि अपने लुंड को बड़े hi धीरे धीरे अपनी दीदी की गांड पारर रगड़ रहा था
इधर कम्मो के ऊपर हवस का नशा हावी होता जा रहा था
रवि - क्यों आप मेरी दीदी नहीं हो
इस बार रवि अपने हाथ को आगे की और करता हुआ अपनी दीदी के नंगे पेट पर रख देता है
कम्मो- अह्ह्ह्हह्हह
दीदी तो तेरी सिर्फ एक hi है रेखा दीदी चखे उनसे फिरसात मिल गयी क्या आज जो मेरा हलचल पूछ रहा है
रवि- दीदी ऐसा क्यों बोल रही हो मैं तो हमेशा hi आपका हलचल पूछता हु
रवि अपनी धोती को थोड़ा सा सरका देता है और उसका सूपड़ा धोती के बहार आ जाता है
इतने में hi मल्टी दरवाजे पारर आती है और सबब कुछ देख लेती है
मल्टी( हे बहगवां ये लड़का तो अपनी साडी दीदियो को hi छोड़ने में लगा हुआ है
कम्मो को इसके हाथ से बचना पड़ेगा नहीं तो उसकी छूट को भी छोड़ छोड़ कर भोसड़ा बना देगा फिर मेरे भाई को क्या मिलेगा)
अच्चानक से रवि कम्मो का हाथ पकड़ता है और उसे खींचता हुआ सीधा अपने लुंड पारर रख देता है
रवि के लुंड की मोटाई का अंदाजा लगते hi कम्मो को वो रात याद आ जाती है जब्ब उसने उसकी नजरो के सामने hi रेखा दीदी की गांड फड़ी थी
कम्मो एक पल के लिए डर जाती है और अपने हाथ को आगे की और खींच लेती है
अभी रवि कुछ करता तब तक कबाब में हड्डी आ जाती है
मल्टी- अरे कम्मो तने खिलाया नहीं खाना मेरे देवर जी को
कम्मो- है है भाभी बास दे hi रही हु
कम्मो की नजरे लगातार रवि की धोती को hi घर रही थी
पर रवि ने एक बात नोटिस की की जब वो पहले अपनी भाभी से मिला तो उसका ब्लाउज आधा खुला हुआ था और अब उसकी भाभी स्ति सावित्री होने का ढोंग कर रही है
रवि के चेहरे पारर एक मुस्कान थी क्योंकि अब वो जान चूका था की उसकी गदराई भाभी भी उसके लुंड की दीवानी हो चुकी है
मल्टी( कैसे भी करके कम्मो को इससे बचनन पड़ेगा कहे इसके लिए मुझे खुद को इसके सामने क्यों न प्रोषणा पड़े
वैसे भी अब ज्यादा दिन नहीं है शादी में).....