Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 13 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-116

रवि अपने खेतो की और जा चूका था इधर घर में भी सब अपने अपने कामो में लगे पड़े था

बस खास बात ये थी की खाना आज मल्टी बना रही थी

वो पूरी तरह पसीने से तर बतर हुई पड़ी थी उसने अपना पल्लू पहले hi हटा दिया था

ब्लाउज में से उसके निप्पल साफ़ झलक रहे थे

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रेखा खत पर बैठी बैठी मल्टी को hi डेल्ह रही थी

रेखा ( ये कमीनी तो आते hi बेशरम बनती जा रही है )

मेघा- अरे कम्मो जा अपने भाई को खाना तो दे आ

कम्मो- है दीदी बास जा hi रही हु

मल्टी- दीदी अगर आप कहे तो मैं भी जाऊ कम्मो के साथ खेतो की और

कम्मो- है दीदी जाने दो न भाभी को मेरे साथ अभी थोड़ी देर में आ जायेंगे

मेघा- ठीक है जाओ

मल्टी और कम्मो रवि का खाना लेकर निकल जाते है

रस्ते भर दोनों की बात चलती रहती है

और जब दोनों खेत में पहुंचते है तो रवि दुर्र दिखाई पड़ता है

कम्मो- भाभी आप अंदर बैठो मैं बुला कर लती हु रवि को

मल्टी- अरे अरे कम्मो इतना काम तो मुझे करने दे इसी भने रवि बाबू से थोड़ी बात चित भी हो जाएगी

कम्मो - ठीक है भाभी आप hi बुला लाओ

कम्मो इतना बोलती हुई अंदर चली जाती है

इधर कमम्मो के जाते hi मल्टी अपने पल्लू को थोड़ा निचे करती हुई कमर पर बांध लेती है और अपने ब्लाउज का एक बोटों खोल कर ब्लाउज को अंडरर की तरफ मदद लेती है

जिसकी वजह से अब मल्टी की चूचिया पहले से कहि ज्यादा दिख रही थी

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मल्टी( कब तक्क बचेगा मुर्गा आज तो इसकी हालत खराब कर दूंगी अपनी इन मस्त चूचियों से)

मल्टी अपनी भरी भरकम गांड मटकती हुई रवि की और चल जाती है

रवि बैठा बैठा खेत में सोहनी कर रहा था

उसके जिस्म पर एक मात्र्र धोती hi थी

गर्मी की वजह से उसका सुडोल बदन पूरा पसीने से भीगा पड़ा था

रवि को थोड़ा पास से देखते hi मल्टी की आँखों में चमक आ जाती है

मल्टी( क्या किस्मत दी भगवान् पति नामर्द निकला और छोटे भाई को देख कर तो लगता है की मेरे पति की मर्दानगी भी आपने इसके अंदर hi दाल दी)

मल्टी सीधा रवि के सामने जाकर बैठ जाती है

बकतने के समय उसने अपनी साडी को घुटनो तक्क खींच लिया था

जिसकी वजह से रवि की नजर सबसे पहले मल्टी कस चिकने पैरो पारर जाती है

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और जैसे hi रवि थोड़ा ऊपर की और देखता है उसके हाथ से खुरपी छूट जाती है

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मल्टी का ब्लाउज इतना डीप हो चूका था की उसका आधा निप्पल तक्क नजर आ रहा था

पर मनो मल्टी को इससे कोई फरक ना पड़ता हो

रवि की नजरे मल्टी की चूचियों पर गड़ी हुई थी जिसका असर सीधा उसके लुंड पारर हो रहा था

मल्टी की नजरो के सामने hi रवि की धोती में वो उभर उठता है

जोकि थमने का नाम नहीं ले रहा था

बड़ा होता hi जा रहा था

मल्टी( हे भगवान् ये आदमी का लुंड है ये घोड़े का)

तभी वो होता है जिसका इन्तजार मल्टी कबसे कार रही थी

रवि की धोती उसके विकराल लुंड को शांत नहीं कर पति और पक्क्क से रवि का लुंड धोती से बहार निकल जाता है

मल्टी उस लुंड को देखती रेहह जाती है

मल्टी भी अपने मोहल्ले की माधुरी थी उसने कई लुंड खाये थे पारर इतना बड़ा लुंड उसने आज तक्क देखा टककक नहीं था

मल्टी( है रामम लाटरी लग्ग गयी मेरी तो)

मल्टी जिसे बच्चा समझ रही थी वो खुद hi उसे भोगने के जुगाड़ में पहले से hi पड़ चूका था

रवि भी अपने लुंड को छुपाने की कोई कोशिश नहीं करता

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रवि- क्या हुआ भाभी चलिए खाना खाने

रवि की बात सुनकर अचानक से मल्टी का ध्यान टूटता है

मल्टी- हाह हाहा चलो चलो

मल्टी जल्दी से उठ कर आगे आगे चलने लगती है

मल्टी की शकल देख कर ऐसा लग रहा था मनो उसने कोई बहुत देख लिया हो

पर वो रवि को तिझाने में कोई कसार नबी छोड़ना कहती थी

अब भी वो जानबूझ कर अपनी गांड को कुछ ज्यादा hi मटका रही थी

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रवि मल्टी के पीछे पीछे चल रहा था पारर मल्टी की हरकते उसके लुंड को बैठने नहीं दे रही थी

रवि का मैं तो कर रहा था की अपनी कमसिन भाभी को यही पटक कर छोड़ दे

अब मल्टी अपना अगला दव्व चलती है और चलते चलते आगे की और गिरने का नाटक करती है

जैसे hi मल्टी आगे की और गिरती है रवि तुरंत hi अपने हाथ आगे बढ़ता हुआ अपनी गदराई भाभी को पकड़ लेता है

पारर इस बार रवि के दोनों हाथ सीधा मल्टी की चूचियों पारर थे

रवि जब मल्टी को सहारा देता हुआ अपनी और खीचता है तो उसका लुंड साड़ी के ऊपर से hi मल्टी की मस्तानी गांड में घुस जाता है

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मल्टी- अह्ह्ह्हह

अचानक से रवि को महसूस होता है की माहौल अब खराब हो रहा है वो तुरंत hi मल्टी से अलग हो जाता है

मल्टी न कहते हुए भी दुबारा चलने लगती है

मल्टी( है राममम कितना गजब का अहसास था इस लड़के का मुसल मेरी गांड के बिच था उसकी गर्मी को मैं सदी के ऊपर से hi महसूस कर सकती थी आह्ह्हह्ह्ह्ह)

मल्टी की छूट लगातार पानी छोड़ रही थी

मल्टी- आओ अंदर चलो कम्मो खाना निकल रही है

रवि- भाभी आप खा जा रही हो

मल्टी- देवर जी आपने गिरने से तो बचा लिया पारर इस मिटटी से नहीं बचा पाए अपनी भाभी को

रवि- वो तो शुक्र करो भाभी बचा लिया नहीं तो पूरी तरह मिटटी से नहा लेती फिरर कपडे खोल कर यही नहाना पड़ता

मल्टी( मैं तो कबसे तैयार हु रे मूवी तेरे सामने कपडे खोलने के लिए तू आगे तो बढ़)

रवि कमरे के अंदर चला जाता है झा कम्मो उसकी और पीठ घुमा कर कुछ काम कर रही थी

रवि का ध्यान अब सिर्फ और सिर्फ उसकी दीदी की मस्तानी गांड पारर hi था

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अच्चानक से रवि को याद आता है की कुछ hi दिन में उसकी दीदी की शादी होने वाली है

वो जनता था की अगर बिना चोदे उसने कम्मो दीदी को जाने दिया तो शायद वो जिंदगी में कभी भी अपनी दीदी की जवानी को नहीं साख पायेगा

रवि को डर भी था की कहि कम्मो बहादक न जाये पर अब डरने का समंय नहीं था अब तो समय hi नहीं था

रवि बिना कुछ सोचे समझे आगे बढ़ता है और सीधा कम्मो से चिपका जाता है

रवि- क्या कर रही हो दीदी

रवि का लुंड जैसे hi कम्मो की गांड पर टच होता है कम्मो के पेअर लड़खड़ाने लगते है

वो कबसे जिस पल का इन्तजार कर रही थी आखिर वो आज आ hi गया था

कम्मो की जबान लड़खड़ा रही थी

कम्मो- तुझे क्या करररणा मैं कुछ भी कररूअ

रवि अपने लुंड को बड़े hi धीरे धीरे अपनी दीदी की गांड पारर रगड़ रहा था

इधर कम्मो के ऊपर हवस का नशा हावी होता जा रहा था

रवि - क्यों आप मेरी दीदी नहीं हो

इस बार रवि अपने हाथ को आगे की और करता हुआ अपनी दीदी के नंगे पेट पर रख देता है

कम्मो- अह्ह्ह्हह्हह

दीदी तो तेरी सिर्फ एक hi है रेखा दीदी चखे उनसे फिरसात मिल गयी क्या आज जो मेरा हलचल पूछ रहा है

रवि- दीदी ऐसा क्यों बोल रही हो मैं तो हमेशा hi आपका हलचल पूछता हु

रवि अपनी धोती को थोड़ा सा सरका देता है और उसका सूपड़ा धोती के बहार आ जाता है

इतने में hi मल्टी दरवाजे पारर आती है और सबब कुछ देख लेती है

मल्टी( हे बहगवां ये लड़का तो अपनी साडी दीदियो को hi छोड़ने में लगा हुआ है

कम्मो को इसके हाथ से बचना पड़ेगा नहीं तो उसकी छूट को भी छोड़ छोड़ कर भोसड़ा बना देगा फिर मेरे भाई को क्या मिलेगा)

अच्चानक से रवि कम्मो का हाथ पकड़ता है और उसे खींचता हुआ सीधा अपने लुंड पारर रख देता है

रवि के लुंड की मोटाई का अंदाजा लगते hi कम्मो को वो रात याद आ जाती है जब्ब उसने उसकी नजरो के सामने hi रेखा दीदी की गांड फड़ी थी

कम्मो एक पल के लिए डर जाती है और अपने हाथ को आगे की और खींच लेती है

अभी रवि कुछ करता तब तक कबाब में हड्डी आ जाती है

मल्टी- अरे कम्मो तने खिलाया नहीं खाना मेरे देवर जी को

कम्मो- है है भाभी बास दे hi रही हु

कम्मो की नजरे लगातार रवि की धोती को hi घर रही थी

पर रवि ने एक बात नोटिस की की जब वो पहले अपनी भाभी से मिला तो उसका ब्लाउज आधा खुला हुआ था और अब उसकी भाभी स्ति सावित्री होने का ढोंग कर रही है

रवि के चेहरे पारर एक मुस्कान थी क्योंकि अब वो जान चूका था की उसकी गदराई भाभी भी उसके लुंड की दीवानी हो चुकी है

मल्टी( कैसे भी करके कम्मो को इससे बचनन पड़ेगा कहे इसके लिए मुझे खुद को इसके सामने क्यों न प्रोषणा पड़े

वैसे भी अब ज्यादा दिन नहीं है शादी में).....
 
अपडेट-117

नीलम का घर्रर

रेखा की लगाई हुई आग अब पूरा जंगल जलाने पर आमादा थी

नीलम की बाटे सुनकर हरिया की इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो अपनी बेटी से जाकर बात कर सके

ऊपर से उसका लुंड आज बैठने का नाम नहीं ले रहा था

जैसे तैसे रात हो जाती है

राजू भी अबतकक घर आ चूका था

नीलम घर के अंदर hi खाना बना रही थी

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नीलम का पूरा बदन पसीने से टर्र बतर था

राजू खत पर बैठा बैठा अपनी दीदी को hi देखे जा रहा था

नीलम - क्या हुआ रे राजू ऐसे क्या देख रहा है

हरिया घर के भीतर आने के लिए उठता है पर नीलम की अव्वज सुन्करर दरवाजे पर hi अपने कान चिपका देता है

राजू- देख रहा हु दीदी तुम्हारे अंदर की गर्मी दिन बी दिन बढ़ती hi जा रही है

नीलम- मेरा भाई है न मेरी गर्मी निकलने के लिए

राजू- दीदी आज तो तुमको कच्चा सभा जाऊंगा

नीलम- तो सभा जा ना

रोका किसने है तुझे

राजू- दीदी मैं तो भट्ट करता है की तुम्हारे साथ रात भर प्यार कृ तुम्हारे इस गदराये जिसमं के मजीए लू जी भर कर तुम्हारे छेड़ो को चुसू पररर

नीलम- पारर क्या राजू

राजू- दीदी वो

नीलम- खुल कर बता ना

राजू- पारर दीदी तुम रोज उस बुड्ढे के साथ लग जाती है मेरी तरफ तो तुम सिर्फ अपनी छूट घुमा देती हो और पुरे मजे उस बुड्ढे को देती हो

नीलम- बुद्धा कोण हमारा बाप

राजू- है है दीदी वही बुद्धा जो आपका और मेरा बाप है

नीलम- चल तूने कह hi दिया तो अब मैं उस बुड्ढे को अपने पास तक्क नहीं आने दूंगी

राजू- रहने दो दीदी अभी थोड़ी देर बाअद वो लार टपकता हुआ आ जायेगा

राजू और नीलम की बाटे सुनकर हरिया पूरी तरह संन्न रेहह गया था

ये बात तो वो जनता था की उसका बीटा उससे नफरत करता है

पर ये नहीं जनता था की उसका बीटा भी हरिया से उसकी बेटी को छिन्न लेना कहता है

नीलम- तुझे मेरी बात पर यकीब नहीं क्या कभी झूट सुना है तूने मेरे मुह्ह से

नीलम की बात सुनकर राजू खुसी के मरे खत से खड़ा हो जाता है

राजू- सक्छ दीदी

नीलम- तू आज रात को मेरे साथ अकेला सोयेगा

राजू- तब तो आज रात मैं तुम्हारा पूरा जिसमं चाटूँगा दीदी

मजा आ जायेगा

नीलम- अब तेरा hi तो है रे भाई ये जिसमं

नीलम की बात सुन्करर हरिया के दिल की धड़कने बढ़ने लगती है

उसका चेहरा पूरा पसीने पसीने हो गया था

हरिया को अब जाकर समझ आज्ञा था की रेखा कितनी बड़ी शातिर है और उसे कितना गहरा घाव देकर गयी है

हरिया बेचारा अपने लटके हुए लुंड जैसा मुँह लेकर दुबारा से अपनी झोपडी में आकर बैठ जाता है

हरिया( सच hi खा है किसी ने लालच बुरी बला है

इतनी सुन्दर गदराई बेटी को छोड़ कर मैं उस रंडी को छोड़ने की सोच रहा था और उसने मेरी बेटी को hi मुझसे छिन्न लिया)

हरिया को अपनी गलती पारर भट्ट पछतावा था पारर वो अंदर hi अंदर अब बदले की आग में जल रहा था

थोड़ी देर बाद राजू उसे खाने के लिए बुलाता है

और कुछ सोच कर हरिया घर के अंदर चला जाता है

नीलम दूसरी और मुह्ह घुमाये बैठी थी

आज उसने अपने बाप की थाली पहले hi निकल दी थी

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नीलम ने इस वक़्त एक पुराण ब्लाउज पहना था जोकि उसके जिस्म के हिसाब से भट्ट छोटा था

और नीलम की पीठ लगभग पूरी नंगी hi नजर आ रही थी

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नीलम की नंगी कमर देख कर हरिया का मुरझाया लुंड एक झटका खता है

राजू- दीदी आज तो मजा आ गया खाने में मैं तो लर्र रहा है तुम्हारी पूरी उंगलिया चूस लू

इतना स्वादिस्ट खाना बनाया है

नीलम दूसरी और मुँह घुमाये हुए hi कहती है

नीलम- अरे इस खाने से भी स्वादिस्ट चीज़ज़ है तेरी दीदी के पास बता अगर वो चाटेगा तू

राजू- सब कुछ चाट जाऊंगा दीदी मैं तो तुम बताओ क्या है वो

नीलम- आज रात को दूंगी तुझे चाटने को वो मस्त चीज़ज़ वो भी अकेले समझा

नीलम जानती थी की हरिया सब सुन्न रहा है

पर उस दिन के बाद से नीलम का दिल टूट गया था उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की उसका बाप अपनी हवस के लिए उसका सौदा करेगा

सब लोग अब तक खाना खा चुके थे

नीलम- राजू एक काम कर बापू का बिस्तर उस खत पर लगा दे और हम दोनों का यह लग ले निचे

हरिया- बेटी........

अभी हरिया कुछ बोलता उससे पहले hi नीलम पलट कर हरिया को देखती है

उसकी आँखों में गुसा हरिया को साफ़ नजर आ रहा था

और हरिया अब बात को और नहीं बिगड़ना कहता था

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हरिया- ठीक है बीटा लगा दे.......
 
अपडेट-118

हरिया- ठीक है बीटा लगा दे अपने इस बूढ़े बाप का बिस्तर इस खत पारर

राजू को अंदर hi अंदर हरिया की हालत पर बहुत हसि आ रही थी

हरिया अपने बिस्तर पर लेत जाता है और उसके सामने hi राजू वो बिस्तर लगा रहा था जिसपर थोड़ी देर बाद वो हरिया की बेटी के मादक अंगो का स्वाद लेने वाला था

हरिया की शकल बिलकुल रोंदू हो गयी थी

नीलम अपना काम निपटती है और और राजू के पास जाकर बैठ जाती है

राजू- दीदी और कितना तडपाओगी अब दे भी दो मुझे वो चीज़ जिसे मैं कबसे चेतना कहता हु

नीलम- अरे पागल वो चीज़ ऐसी है की जिसके लिए बड़े बूढ़े सबकी लार टपकती है

और मैं तुझे वो ऐसे hi देदू

राजू- आप तो दीदी हो मेरी

राजू नीलम का हाथ पकड़ लेता है और अपनी और खींच लेता है

नीलम भी सरकती हुई अपने भाई की बहो में गिरर्र जाती है

नीलम- अह्ह्ह राजू क्या कररर रहा है

राजू- आपकी वो स्वादिस्ट चीज़ ले रहा हु

नीलम- अच्छा तो चू....

अभी नीलम कुछ बोलती उससे पहले hi राजू अपने होठो को अपनी दीदी के गरम होठो पारर राखह देता है

राजू एक पल में hi अपनी दीदी के होठो पर लगी साडी लाली चुसस्स लेता है

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नीलम- अह्ह्ह्ह तूने तो मेरे पुरे होठ hi चिस्स लिए कमीने

राजू- बड़ी मुठे है दीदी आपके होठ

एक बार फिरसे राजू अपनी दीदी के होठो को चूसना शुरू कर देता है

हरिया सब कुछ देख रहा था और उसका लुंड तो अब खड़ा हो गया था पर खुद खड़े होने की हिम्मत नहीं थी उसमे

राजू कभी नीलम के निचले होठो को अपने दांतो से चबाने लगता तो कभी उन्हें अपने नहह में भर्र कर चूसने लगता

नीलम लगातार तड़पे जा रही थी पर िसमूह चूसै में अपने चकते भाई का लउरा साथ दे रही थी

राजू का हाथ अब तक नीलम की चूचियों तक्क पहुंच गया था और एक एक हुक करके अपनी दीदी का पूरा ब्लाउज खोल दिया

ान राजू के सामने नीलम की चुकिया बिलकुल नंगी थी

दोनक चूचियों पर एक एक ांग्जूर का दाना लटका नजर आ रहा था

नीलम के निप्पल काफी मोठे थी

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नीलम- अब क्या इन्हे भी चूसेगा तू

राजू- दीदी इन्हे चूस कर इनके अंदर का सारा रस पियूँगा आज मैं

राजू अपना एक हाथ नीलम की चुकी पारर रख देता है

राजू- आज तो तुम्हारी इन मोती मोती चूचियों को पूरा निचोड़ दूंगा दीदी

नीलम- अह्ह्ह्हह

राजू लगतरर नीलम की चुकी को जोर जोर से मसल रहा था

नीलम खुद hi अपना ब्लाउज उतर देती है

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राजू नीलम की चूचियों पर टूट पड़ता है

नीलम- अहहह काट मत्तट राजजूउउ

नीलम- अह्हह्ह्ह्ह

राजू किसी भूखे भेदजए की तरह नीलम की चिचियो को चूस रहा था

क्योंकि इतने दिनों में ये आज पहली बार था जब उसकी दीदी उसे अकेले छोड़ने के लिए मिली हो

वार्ना तो हरिया दिन भर नीलम की गांड के पीछे पीछे hi रहता और दिन दिन भर नीलम की छूट या गांड में मुह्ह घुसाए पड़ा रहता था

राजू का हाथ अब तक्क उसकी दीदी के पेटीकोट तक्क पहुंच चूका था

एक झटके में राजू पेटीकोट का नाडा खोल देता है

राजू अब भी लगातार नीलम के चूचियों को चूस रहा था और जब राजू अपना मुह्ह हटाता है तो हरिया को नजर आता है की उसका बीटा उसकी फूल सी बेटी को किश हद्द तक्क चूस रहा है

नीलम चूचिया पूरी तरह लाल हो गयी थी

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नीलम की चुकी को देख कर हरिया का भी मैं कर रहा था की वो अभी अपनी बेटी के पास जाये और उसकी रसीली चूचियों को खूब चूसे

नीलम - बास इनका hi स्वाद लेगा और भी कई जगह है तेरी दीदी के पास झा से सिर्फ और सिर्फ स्वादिस्ट चीज़े और महक आती है

हरिया अपनी बेटी को लालच भरी नेक्रो से देख रहा था

नीलंकभी बिच बिच में हरिया की और नजर मार लेती

वो अपने बापू की तड़प साफ़ देख सकती थी

राजू नीलम के दोनों हाथो को पकड़ कर ऊपर की और उठा देता है

और नीलम की पसीने से भीगी हुई बगल राजू की आँखों के सामने आ जाती है

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राजू अपनी नाक आगे बढ़ता हुआ ेल जोरदार साँस लेता है

राजू- अह्ह्ह दीदी कसम से क्या मादक महक आ रही है तुम्हारी बगल से अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मजाआ आ गया

नीलम- तेरे hi है भाई अब से सब

नीलम ये बात हरिया की और देखती हुई बोलती है जो उसे देख कर धीरे धीरे अपना लुंड मसल रहा था

इस बार राजू अपना मुह्ह सीधा नीलम की बफल में घुसा देता है

और जोर जोर से साँस लेता हुआ नीलम की मादक महक को सूंघने लगता है

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करीब 5 मिंट तक राजू ऐसे hi अपनी दीदी की बगल में मुँह घुसाए पड़ा रहता है

राजू खड़ा होते हुए सीधा नीलम का पेटीकोट खींच देता है और अपने बाप के सामने अपनी दीदी को. बिलकुल नंगा कर देता है

हरिया अपनी आँखे फाड़ता हुआ नीलम को hi देख रहा था

मनो वो नजरो hi नजरो में अपनी बेटी से माफ़ी मांग कर उसके नंगे बदन को चुना कहता था

पर नीलम हरिया को कोई भाव नबी देती उल्टा राजू की धोती पकड़ती हुई उसे एक नार में hi खींच देती है

नीलम- ान हुई न बात बराबर

तेरी दीदी भी नंगी और अब तू भी नंगाआ

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राजू का लुंड बिलकुल नीलम को होठो के पास hi था

व्वो बार बार अपने मुह्ह को राजू के लुंड के पास ले जाती और अपने बाप की और देखती

और अपने होतो पर जीभ फिरती हुई वापस से पीछे हट जाती

हरिया भी अबतकक अपना हाथ धोती में घुसा चुका था

राजू निचे बैठे जाता है

राजू- दीदी मुझे अब उस जगह के बारे में बताओ जो सांसे स्वादिस्ट हूँ

नीलम- ऐसी तो बास एक hi जगह है तेरी दीदी के पास झा से कामुक रस निकलता है

राजू- तो दीदी आज मुझे अपना वो कामुक रस पीला दो

नीलम- वो तो तुझे खुद hi निकलना पड़ेगा छोटे भाई

राजू भी हरिया को फुल तड़पने के मदद में था आज और नीलम तो जैसे राजू को और भी ज्यादा उकसाये जा रही थी

राजू- तो जगह hi दिखा दो दीदी मैं खुद hi निकल लूंगा

नीलम- कोई कुवा थोड़े hi है की निकल लूंगा पहले ये बता तूने पहले कभी वो कामुक रस पिया है

या नहीं

राजू- नहीं दीदी आज पहली बार मैं पियूँगा आपका कामुक रस

नीलम- तब तो तुझे बड़ी म्हणत करनी पड़ेगी और खूब चेतना पड़ेगा उसे बहार निकलने के लिए

अब बता भी दो दीदी किसे चेतना पड़ेगा

नीलम- तेरी दीदी की रॉस छोड़ती छुटत चटनी पड़ेगी तुझे वो कामुक रॉस निकलने के लियी

राजू- तब तो दीदी आज मैं आपकी छूट को पूरा का पूरा निचोड़ दूंगा और उसमे से निकला सारा रस पी जाऊंगा

राजू नीलम को धक्का देता हुआ दिरा देता है और नीलम भी अपने दोनों पैरो को हवा में खोल देती है

.राजू की आँखों के सामने अब उसकी दीदी की पहली हुई छुटत थिई

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नीलम की छूट पर लटके बड़े बड़े होठ बिलकुल अलग हो चुकी थे

राजू- दीदी तुम्हारी छूट तो पानी छोड़ती hi जा रही है

राजू अपना हाथ नीलम की छूट पारर रख देता है

नीलम- अह्ह्ह्हह

चाट जा भाई इसका सारा पानी आज से तेरी दीदी रोज तुझे अपनी छूट का रस चकाएगी अह्ह्ह्हह

राजू अपना मुह्ह सीधा नीलम की छूट में घुसा देता है और बरी बरी अपनी दीदी के निचले होठो को चूसने लगता है

नीलम - अह्ह्ह्हह रज्जु क्या करररर रहा है उईईई अह्हह्ह्ह्हहममअअअअअअअअहठ

हरिया कभी राजू की हरकतों को देखता तो कभी अपनी बेटी के चेहरे को निहारता

इधर राजू नीलम की छूट को चबाये जा रहा था जिसकी वजह से नीलम के चेहरे के हाव् भाव लगातार बदलते जा रहे थे

कभी वो अपने होठो को दांतो से कटती तो कभी अपनज जीभ को बहार निकल कर अपने होठो पर फेरती

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हरिया अबतक अपनी धोती को निचे सरका चूका था उसका हाथ लगातार अपने लुंड को मसले जा रहा था

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करीब 10 मिंट तक्क राजू नीलम की छूट को चाटता hi जाता है और आखिर में उसे उस कामुक रस की प्राप्ति होती है

जिसे वो हरिया को दिखा दिखा कर चतत्त रहा था

हरिया भी अपनी होठो पारर जीभ फेरता हुआ अपनी बेटी को बताने की कोशिश कर रहा थस की उसकी छूट से निकला वो कामुक रस उसके बाप को भी चखना है

नीलम और राजू दोनों हरिया को देख रहे थे

राजू को तो आज अपने बाप की इस हालत पर हासीय आ रही थी

राजू- दीदी आपकक छूट का तो सारा रस पे गया मैं अब ये बतक इसके जैसी स्वादिस्ट कोई दूसरी चीज़ है आपके पास

नीलम- है है ना........
 
अपडेट-119

नीलम है है मेरे पसस इससे भी मस्त चीज़ज़्ज़

नीलम की बात सुनते hi हरिया के कान खड़े हो जाते है

नीलम अब अपने छोटे भाई के सामने उस चीज़ की नुमाइश करने वाली थी जो उसके बाप की पसंदीदा थी

नीलम पलट कर घोड़ी बन्न जाती है

राजू को अब अपनी दीदी की गांड का वो सुनेहरा छेड़ साफ़ नजर आ रहा था

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नीलम- अब तो बास यही आखिरी चीज़ज़ बची है जो तेरी दीदी तुझे दे सकती है

राजू- दीदी आपको नहीं पता आपने तो मुझे पूरा खजाना hi दे दिया

ये बात राजू हरिया की और देखता हुआ बोलता है

मनो वो हरिया को बता रहा हो की जो कल तक्क हरिया का था आज वो उसके बेटे का हो चुका था

हरिया की आँखों में जलन साफ़ दिख रही थी

राजू सीधा अपना मुहहह नीलम दीदी की गांड में घुसा देता है

नीलम- अह्हह्ह्ह्ह सब्र्र कर भाई पूरी रात बहकी है

राजू पागलो की तरह नीलम की गांड से लेकर छूट तक्क कहते जा रहा था

कभी वो अपनी दीदी की गांड परे जोर्डरर थप्पड़ मरता और नीलम की एक जोरदार अह्ह्ह निकल पड़ती

जिसे सुनकर कहि न कहि हरिया का भी मैं कर रहा था की वो भी अपनी बेटी को ये मीठा दर्द्द दे सकी

राजू नीलम की दोनों गांड से लेकर छेद तक्क सबब छत्त रहा था

नीलम का पूरा पिछवाड़ा चमक रहा था

राजू- दीदी वो चीज़ निकालो न मुझे जिसका इन्तजार है

नीलम- अच्छा तो तुझे वो चाहिए

नीलम हरिया की और देखती हुई बोलती है

नीलम अपनी पोजीशन चेंज कर लेती है और अपनी गांड को बिलकुल बहार की और धकेल देती है

जिससे उसकी गांड का छेद खुल कर बहार को आ जाता है

हरिया की पसंदीदा चीज़ यही थी जब उसकी बेटी उसके मुह्ह पर बैठ कर पड़ा करती थी वो अंडरर तक्क मस्त हो जाता था

पर आज उसकी बेटी अपने बापू की वो पसंदीदा चीज़ भी अपने छोटे भाई को देने वाली थी

राजू तो बास इसी बात से खुश था की आज पहली बार उसकी दीदी उसके साथ अकेले में चुदाई करेगी

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नीलम अपनी 2 उंगलियों से अपनी मखमली गांड फैला देती है

नीलम- ले भाई तू खुद hi निकल ले वो चीज़ज़्ज़

राजू तो जैसे अपनी दीदी की गांड के उस छेद पर टूट पड़ता है

वो अपने दोनों होठो को छेद से चिपका देता है

और जोर जोर से चूसने लगता है

मनो वो अपनी दीदी की गांड के अंदर से कोई रसीली चीज़ज़ बहार निकलना छठा हूँ

नीलम- अह्ह्ह्ह एक hi बार में पूरा चूस लेगा क्या मेरी गांड को भैई

राजू- दीदी मैं तो कर रहा है की आपकी गांड के इस छेद को ऐसे hi जिंदगी भर चुस्त रहू

कसम से दीदी इसका तो स्वाद hi अलग है

नीलम- अच्छा और इसका स्वाद कैसा है

Pharrrrrrrrrrrrrr पूंऊऊ पटट्ट्ट्ट

नीलम एक साथ 3-4 बार पड़ती है जिसकी महक और हवा सीधा राजू के मुह्ह के अंडरर जाती है

नीलम की गांड की खुसबू को सूंघ कर रज्जु मस्त हो जाता है

करीब 20 मिंट तक वो नीलम की गांड को चुस्त और चाटता रहता है और नीलम अपने छोटे भाई के मुँह पर पड़ती रहती है

और जब वो नीलम को छोड़ता है तो नीलम के छेद से अबतक राजू का थुक्क टपक रहा था

हरिया भी आँखे फाड़ क्र नीलम की गांड को देख रहा था और धीरे धीरे अपना लुंड मसल रहा था

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नीलम की गांड का छेद चूसै के वजह से फूल गया था

नीलम खड़ी होती हुई अपने दोनों हाथो से अपनी गांड को फैलाती है

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नीलम- देख तो कमीने तूने क्या हाल कर दिया अपनी दीदी की गण्ड का

राजू भी खड़ा हो जाता है और अपनी दीदी से पूरी तरह चिपककता हुआ नीलम के कानो को मुह्ह में भर्र लेता है

राजू- दीदी हाल खराब तो अब्ब करूंगा

नीलम- हाय रम्म तू अब क्या करेगा अपनी दीदी के साथ

दोनों इतनी तेज बोल रहे था की हरिया साफ़ साफ़ सुन्न सखे

राजू अपने हाथ को आगे बढ़ता हुआ सीधा नीलम के मुह्ह में दाल देता है

करीब 5 मिंट तक अपनी दीदी के मुँह में ऊँगली घूमने के बाद राजू हाथ बहार निकलता है

राजू- दीदी इसपर थूको जितना भी थुक्क जमा है तुम्हारे मुहहह में

नीलम- पर तू मेरे थुक्क का क्या करेगगा

राजू- पहले थूको तो दीदी तुम

नीलम काफी सारा थुक्क राजू के हाथ पारर थूक देती है

राजू उसे अपने पुरे लुंड पर मसल मसल कर लगाने लगता है

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राजू- दीदी आज आपका भाई आपके इस गरम थुक्क को लगर कर आपकी ये भरी बहराकम गांड मरेगा

नीलम- हैव्व रम्म तुझे दया नबी आती अपनी दीदी पारर जो उसकी गण्ड मरने पारर तुला हुआ है

राजू- मेरी दीदी है hi इतनी बड़ी रंडी की उसे जितना छोड़ो उतना कम्मं है

आज राजू ने पहली बार नीलम को रंडी बोलै था

हरिया की तो मनो झरे जल रही हो ये सबब सुन्करर

पर नीलम को अंदर hi अंदर एक अजीब सा नशा चढ़ा राजू की बात सुन्करर

नीलम- अच्छा तो तू अब अपनी दीदी को रंडी समझ कर छोड़ेगा

राजू- नहीं आअज से मैं अपनी दीदी को अपनी रंडी बनाए कर छोडूंगा

राजू नीलम के और करीब आता है और इस बार उसका सूपड़ा सीधा नीलम की गांड के छेद पररर आकर टिक्क जाता है

नीलम- अच्छा तो मतलब आजसे मैं तेरी दीदी नहीं रंडी हु अह्ह्ह्ह

राजू- आज से आप मेरी रंडी दीदी हो समझी

राजू अबतकक पीछे से जोरर लगाना चालू कर चूका था

रवि से गांड मरवाने के बादसे तो नीलम की गांड की वासी hi बंद बजी पड़ी थी

राजू का लुंड धीरे धीरे सरकता हुआ अंदर की और घुसने लगता है

नीलम- अह्ह्ह्ह राजू क्या कर रहा है मुझे दररड हो रहा है

राजू- अह्ह्ह्ह डीडीडीईई कितनी गरम गांड है आपकी

राजू का लुंड सरकता सरकता नीलम की गांड की गहराइयो में उतर चूका था

हरिया अपने बीटा बेटी की कामलीला देख कर लगातार अपना लुंड मसल रहा था

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अब तक्क राजू नीलम की गांड मरना चालू कर चूका था

राजू अपने लुंड से घण है नीलम दीदी की गांड मरे जा रहा था

इधर हरिया ने भी अब तक अपनी धोती को उतर दिया था और अब अपने बच्चो की चुदाई को देख कर जोरो से अपना लुंड हिला रहा था

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राजू जितने जोर्डरर झटके मरता हरिया भी अपने हाथो को उतना hi तेज हिलता

नीलम- अह्ह्ह्ह राजू कितना तेज छोड़ रहा है तू अपनी दीदी को अह्ह्ह्ह तू मेरी गांड को फाड़ देना कहता है क्या अज्ज्ज अह्ह्ह्हह्ज राजू धीरे कर भाई

राजू तो जैसे आज अपनी दीदी की गांड को फाड़ hi डालना छठा था

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अच्चानक से राजू अपना लुंड बाजार निकलता है और नीलम के बालो को पकड़ कर आगे की और झुकता हुआ अपना चिपचिपा लुंड सीधा नीलम के मुह्ह में पेल देता है

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नीलम अभी इस हमले को झेल पति उससे पहले hi राजू उसके मुह्ह में झटके लगाने शुरू कर चूका था

नीलम की हालत अब उस चिड़िया की तरह थी जो बस हवा में hi उड़े जा रही थी

राजू उसे किसी चीज़ज़ की तरह इस्तेमाल कर रहा था

कभी वो अपना लुंड सीधा नीलम के गले तक्क उतर देता तो कभी उसे बहार खींचता हुआ अपनी दीदी के होठो को चूसने लगता

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इधर हरिया का लुंड फटने को था उसे कैसे भी करके अपनी बेटी को छोड़ना था उसकी आँखे पूरी लाल हो चुकी थी उसे इस वक़्त चुदाई के सिवा कुछ और नहीं दिख रहा था

पर अब भी उसके पास इतनी हिम्मत नहीं थी की अपनी बेटी को छोड़ सखे

हरिया बस अपने लुंड को मसल रहा था और आखिर कार उसका पानी भी छूट जाता है

पारर हरिया इतना गरम था की तब भी अपना लुंड नहीं छोड़ता और एकटक अपनी बेटी का मुखछोडन देखते हुए अपना लुंड हिलता रहता है

नीलम हरिया की साडी हरकते देख रही थी और अब कहि न कहि उसे अपने बाप के ऊपर तरस भी आने लगा था ाकाहिर था वो तो नीलम का बाप hi जिसने पहली बार अपनी बेटी को लुंड का स्वाद चकहय था

राजू अब अपनी दीदी को घोड़ी बनता हुआ एक झटके में पूरा का पूरा लुंड अपनी दीदी की फ़टी हुई छूट ंव पेल देता है

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नीलम का मुह्ह हरिया की तरह hi था और वो लगातार अपने बाप की नजरो में hi देख रही थी

नीलम को साफ़ पता चल रहा था की उसका बाप उसे छोड़ने के लिए बेताब है

10 मिंट तक्क राजू अपनी दीदी को ऐसे hi रगड़ रगड़ कर छोड़ता रहता है कभी छू म तो कभी गांड में

और आखिर कार रवि अपनी दीदी की छूट में hi अपना माल गिरा देता है

नीलम भी कई बार झाड़ चुकी थी नीलम हाफति हुई आगे को गिर्र जाती है

राजू भी एक किनारे गिर जाता है

नीलम अब भी हरिया की नजरो के hi देख रही थी पर इस बार उसे अपने बाप की आँखों में पछतावे के आंसू दिख रहे थे जिससे लहि न कहि नीलम भी भावुक हो चुकी थी

राजू तो गिरते hi सो जाता ह पर नीलम और हरिया काफी देर तक्क एक दूसरे को निहारते रहते है

पर बोलता कोई कुछ नहीं

अब देखना ये है की क्या हरिया अपनी गलती को सुधर पायेगा

या नीलम होने बापू से ऐसे hi नफरत पीला रखेगी.......
 
अपडेट-120

तो दोस्तों सबने देख की कल रात कैसे नीलम ने अपने बाप को तरसा तरसा कर उसके hi सामने अपने छोटे भाई से अपनी छूट और गांड मरवाई और वैसे hi उसके साथ चिपक कर सो गयी

हरिया रात भर इसी बात की उधेड़ बुनकमे लगा रहा की कैसे करके वो अपनी बेटी को दुबारा से अपने निचे लिटा सखे

खैर सुबह हो चुकी थी सब लोग अपना अपना काम में लगे हुए थे

इधर मेघा दीदी तो पहले hi अपने कमरे से बहार आ चुकी थी और जैसे hi रेखा कमरे से बहार निकलती हुई संडास करने जाती है

मौका देखते hi मल्टी तुरंत hi कमरे में घुस जाती है

शायद ये बात रेखा भी जानती थी की मल्टी उसकी और रवि की जासूसी कर रही है शायद इसी लिए उसने आज कमरे से निकलने से पहले hi रवि के लुंड को पूरी तरह से धक् दिया था

पर रवि का लुंड इतना विशाल था की रेखा उसे किसी कपडे से नबी धक् सकती थी

मल्टी जैसे hi कमरे में घुसती है उसकी सांसे अच्चानक से रुकक्क जाती है

मल्टी( हे भगवान् क्या सच में किसी का इतना बड़ा लुंड भी होता है देखो तो शकल से कितना भोला दीखता है और लुंड ऐसा की एक चुदाई में hi लौंडिया निपटा दे पूरी की पूरी)

रवि का लुंड सीधा दिवार की तरफ खड़ा था रेखा ने जो कपडा लपेटा था वो भी लुंड के साथ साथ हवा में झूल रहा था

मल्टी जानती थी की कमरे में कोई भी आ सकता है और वो इस मौके को हाथ से नबी जाने देना कहती थी

मल्टी इतनी प्यासी थी की

उसका मैं तो कर रहा था की अभी अपना पेटीकोट उठा कर रवि के लुंड पारर बैठ जाये

मल्टी हिम्मत जुटती हुई अपना हाथ आगे बढ़ती है और रवि के लुंड को जड़ से पकड़ लेती है

लुंड इतना शक्त था की मल्टी को ऐसा लग्ग रहा था मनो उसने कोई लोहे की रोड पकड़ ली हो

मल्टी( हे भगवान् वो चुटिया केशव मुझे और पहले क्यों नहीं लाया अपने गाओं इसे तो मैं पकने से पहले hi खा जाती)

मल्टी की हवस उसके चेहरे पर उभर चुकी थी

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मल्टी अपने आपको रोक नहीं पति और एक हाथ से अपनी चुकी दबती हुई अपने हाथ को सीधा धोती के अंदर सरका देती है

मल्टी की तो मनो सांसे hi थमने लगी थी

इतने बड़े लुंड को पकड़ते hi उसका पूरा शरीर काँप रहा था

मल्टी अनजाने में hi अपने हाथ को लुंड के ऊपर ले जाती है

और चमड़ी को निचे खिचती हुई गलती से अपने देवरर के सुपडे पर नाख़ून गदा देती है

रवि- अह्ह्ह्हह सोने दो ना दीदी

मल्टी तुरंत hi अपना हाथ बहार निकल कर कमरे के बहार भाग जाती है

पर उसकी सांसे थमने ला नाम नहीं ले रही थी

मल्टी जानती थी की रवि नींद में था पारर उसने नींद में जो बोलै उसे सुनने के बाद मल्टी का शकक यकीन में बदल गया था

मल्टी( हे भगवान् ये तो अपनी hi दीदियो को छोड़ रहा है वो भी इतने बड़े लुंड से )

एक hi पल में मल्टी के सामने कई साडी तस्वीरें आती है

जब रवि का लुंड मेघा ये रेखा के अंदर जाता होगा तो उनकी क्या हालत होती होगी

मल्टी( ये तो पूरा छोड़ू निकला मैं तो सोच रही थी की इतना श्ररीफ दीखता है तो कुंवारा होगा पर ये तो अपनी hi दीदियो की सवारी कर रहा है )

मल्टी के चेहरे पारर एक मुस्कान थी जिसे देख कर लग्ग रहा था मनो उसे जो चाहिए उसके लिए उसे ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ेगी .....
 
अपडेट-121

मल्टी अब मन hi मैं रवि के लुंड को अपने छेड़ो का रास्ता दिखा चुकी थी

इधर केशव भी हरी और रामलाल को लेकर घर आ जाता है

सबका आपस में परिचय होता है

रामलाल तो बास कभी कम्मो की उभरी छाती देखता तो कभी रेखा की गांड और कभी मेघा दीदी का गदराया शरीर

कुल मिलकर वो इस घर में अपने बेटे का रिश्ता करके खुशः था क्योंकि यह तो साडी की साडी hi गदराई गए थी उसकी बेटी की तरह

इधर कम्मो ने जैसे hi हरी को देखा उसकी साडी खुसी एक पल में hi गायब हो गयी

हरी को देखने से hi पता चलता था की वो एक नसेड़ी किसम का आदमी है

इधर रेखा भी मन hi मन मल्टी को गली दे रही थी और यही सोच रही थी की कैसे मल्टी ने उनकी मज़बूरी का फायदा उठाया

मेघा दीदी को भी हरी कोई खास पसंद नहीं था बल्कि अब तो वो बस यही सोच रही थी की कैसे भी करके उनकी छोटी बेटी का घर्र बास जाये

रामलाल रेखा की मस्त चूचियों को लगातार देखे जा रहा था

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रेखा की नजर जैसे hi रामलाल से मिली वो अपनी नजरे चुराने लगा

रेखा एक नजर में hi पहचान गयी थी की ये रामलाल भी एक छोड़ू किसम का आदमी है और एक बार तो रेखा ने उसे कम्मो को घूरता हुआ भी पाया

कुल मिलकर अब कहि न कहि रेखा को भी अपनी छोटी बेहेन पारर तरस आ रहा था

रेखा तो सोच रही थी की मेघा दीदी से बात करके शादी के लिए मना करवा दे पर इसके बाद कम्मो उसे अपना दुसमन समझने लगती

सबने खाना पीना खाया और खूब बाटे हुई

पर इन सब बातो के दौरान हरी सबसे अलग अलग hi रहा

उसे तो बास नशा चाहिए था

तय हुआ की रामलाल शाम को हरी को लेकर वापस चला जायेगा

रेखा जानती थी की ये दिन भर सबको गुरता रहेगा इस लिए उसने केशव को रामलाल को खेत घूमने के लिए बोलै

रामलाल जोकि इतने दिनों से अपनी गदराई बेटी को नहीं देख पाया था आज उसका प्लान था की अपनी बेटी से दिन भर बाटे करेगा

पर न कहते हुए भी रामलाल खेतो पारर जाने के लिए तैयार हो जाता है

रवि - दीदी मुझे भी काम है खेतो में मैं भी जा रहा हु केशव भइया के सठह

रवि केशव और रामलाल खेतो की और निकल जाते है

दोपहर तक्क केशव और रवि रामलाल को बहुत घूमते है और बिचारा बुद्धा थक कर वही झोपडी में एक गमछा ओढ़ कर सो जाता है

केशव रवि के साथ काम करने लगता है आज काम दूसरे खेतो में था तो रवि और केशव रामलाल को वही छोड़ कर निकल जाते है

दोपहर को खाना देने के समय मल्टी बोलती है की आज वो खाना लेकर जाएगी

बाप आया हुआ था तो मेघा दीदी ने भी इजाजत देदी और किसीने कुछ बोलै भी नहीं

मल्टी बड़ी खुश थी पर उसे खा पता था की अगर उसका बाप और पति नहीं होता तो खेतो में खाना देने जाने के लिए मार काट हो जाती

मल्टी सबका खाना लेकर निकल जाती है

मल्टी को खेतो में कोई नजर नहीं आता पर जब वो झोपडी के अंदर झक्ति है तो उसे कोई सोया हुआ दिखाई देता है

मल्टी जानती थी की दोपहर में न तो उसका बाप सोता है और ना hi उसका नामर्द पटी

रवि का ख़याल आते hi उसके मैं में लड्द्दू फूटने लगते है

मल्टी एक नजर खेतो में डालती है उसे रवि और केशव कहि दिखाई नहीं देते मल्टी तुरंत hi अंदर जाती हुई गेट को सत्ता देती है

और बिस्तर की और बढ़ाने लगती है

मल्टी अपने बापू के सर से तो गमछा नहीं हटती पर लुंड के पास से जरूर हटा देती है

रामलाल का लुंड धोती के बहार झक रहा था

लुंड आधा खड़ा था तो हो सकता है शायद वो सपने में अपनी बेटी को hi छोड़ रहा हूँ

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रामलाल का लुंड भी कोई मामूली लुंड नहीं था पर रवि के बराबर नहीं था

इधर मल्टी लालच भरी नजरो से अपने बापू के लुंड को देख रही थी रवि समझ के

मल्टी सोच चुकी थी की ान जो होगा देख जायेगा जब ये अपनी दीदियो को छोड़ सकता है तो मुझे सोध्ने से मना नबी करेगा

मल्टी तुरनत hi अपनी गांड रामलाल की तरफ घुमा कर लेत जाती है और अपना एक हाथ पीछे ले जाती हुई सीधा अपना बाप का लुंड पकड़ कर अपनी गांड पर रखते हुए पीछे की और सरक जाती है

जिसकी वजह से रामलाल का लुंड सरकता हुआए अपनी बेटी की गांड की गहराइयो में उतारर जाता है एक झटके के साथ बस मल्टी ने सदी पहनी हुई थी नहीं तो इस समंय उसके बापू का लुंड उसकी छूट में होता

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रामलाल को तब एक झटका लगता है जब उसे अहसास होता है की उसके लुंड को किसी ने जकड रखा है

मल्टी अपनी गांड को पूरी तरह से रामलाल की कममर से चिपका चुकी थी

इधर रामलाल का लुंड भी अपनी बेटी की गांड की गर्मी को महसूस करके पूरी तरह खड़ा हो चुका था

कुछ भी हो पर बाप बेटी दोनों के चेहरे पारर सुकून था

पर तभी वो होता है जो मल्टी ने सोचा न था

एक झटके के साथ दरवाजा खुलता है

मल्टी जब पलट कर डेक्टि है तो उसकी तो सांसे हवा हवाई हो जाती है

क्योंकि सामने रवि खड़ा था

और मल्टी अब तक समझ hi चुकी थी की पीछे लेता इन्सान कोई और नहीं बल्कि उसका बाप रामलाल है

मल्टी की हालत ऐसी थी मनो कटे पर खून न निकले

रवि- क्या बात है भाभी आज बड़ा ोयार जता रही हो अपने बापू को

भाभी शब्द सुन्करर तो जैसे रामलाल को भी एक झटका लगता है और वो तुरंत hi अपनी गमछी को सर से उतर फेकता है

जिसकी गांड में वो लुंड घुसाए लेता था वो और कोई नहीं बल्कि उसकी बेटी थी

इधर रामलाल अपनी कमर को पीछे की और करता है पर तुरंत hi मल्टी अपनी गांड को दुबारा से रामलाल की कमर से चिपका देती है

मल्टी ये सब करना तो नहीं छाती थी पर अगर रामलाल पीछे होता तो उसका लुंड रवि को साफ़ दिख जाता

इधर रामलाल को अपनी बेटी की गांड में लुंड फसाये हुए बड़ा ानिब लग रहा था

जब से मल्टी गदराना शुरू हुई थी कहि न कहि तबसे hi रामलाल अपनी बेटी को भोगना कहता था पर कभी मौका नहीं मिला और आज ुस्लि बेटी खुद hi अपनी गांड में उसका लुंड फसाये लेती थी

मल्टी- अरे तो और क्या तू hi ोयार कर सकता है क्या अपनी दीदियो से मैं नहीं कर सकती अपने बापू से प्यार

इतना बोलते हुए मल्टी अपना हाथ पूछ की और ले जाती हुई रामलाल का हाथ पकड़ कर अपने पेट पर रख देती है

जैसे hi रामलाल का हाथ उसकी बेटी के चिकने पेट पर पड़ता है उसका लुंड एक जोरदार झटका मरता है जिसे मल्टी भी साफ साफ़ महसूस करती है

वो अंदर hi अंदर शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी पर इधर उसकी छूट अपने बाप के लुंड को पेटीकोट के ऊपर से hi भीगने पर तुली हुई थी

रवि- करो करो भाभी प्यार करो बापू को

जब हो जाये तो खाना दे देना बहार हु मी

रवि इतना बोलकर बहार निकल जाता है

रवि के जाते hi मल्टी तुरंत उठती है और अपने बापू से माफ़ी मांगने के लिए जैसे hi पलटती है उसकी नजरे सीधा अपने बाप के काळा लुंड पर जाती है जिसे देख कर वो एक बार को चौक जाती है

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मल्टी को समझ नबी आ रहा था की अब वो अपने बाप से किन सब्दो में माफ़ी मांगे और जब रामलाल को अहसास होता है की उसकी बेटी के सामने उसका लुंड खड़ा है वो हड़बड़ाता हुआ अपनी धोती को ठीक करता है

मल्टी भी तुरंत hi बहार भाग जाती है

इधर रवि अपनी भाभी को देख कर मुस्कुराये जा रहा था

और जब सब खाना खा लेते है तो रवि बोलता है

रवि- क्यों भाभी जलालत फहमी हो गयी क्या

और जोर जोर से हसने लगता है

मल्टी रवि को कोसती हुई घर की और निकल जाती है और मन hi मन सोचती है की कमीना सब जनता है फिर भी भाव खा रहा है

इधर रवि सुबह hi समझ गया था की उसके लुंड पर नाख़ून किसने गड़ाए थे

रामलाल जिसके लिए जीवन भर तरसता रहा आखिर आज उसे वो पार्षद खाने को मिल hi गया......
 
अपडेट-122

तो आप लोगो ने देखा की कैसे मल्टी बेचारी अपने hi बनाये हुए प्लान में फास गयी और गलती से अपने बाप को अपनी गांड की गर्मी महसूस करवा बैठी

इधर दूसरी तरफ हरिया ने सोचा था की अब तो उसके दोनों हाथो में लड्डू होने पारर रेखा उसका पहला लड्डू भी उससे छिन्न ले गयी

पिछली रात हरिया की नजरो के सामने hi उसके बेटे ने उसकी बेटी को रात भर नंगी करके रगड़ा और हरिया बेचारा किसी चीटिये की तरह अपनी बेटी को छुड़ता हुआ देखता रहा

सुबह राजू ने अपनी दीदी को उठाने की कोशिश करि पारर नीलम नहीं उठी और उसका बाप भी अबतकक अपना लुंड पकडे सोया हुआ था

हरिया उन्दोनो को ऐसे hi छोड़ कर अपने काम पर निकल जाता है

करीब 10 बजे हरिया की आँख खुलती है

उसकी बेटी अब भी सोई हुई थी वो भी पूरी नंगी

नीलम को इस हालत में देखते hi हरिया का लुंड टनटना जाता है

नीलम अपनी गांड बहार को फेक कर सोती हुई थी

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नीलम की गांड का खुला हुआ छेद देख कर हरिया के मुह्ह में पानी आ चुका था

हरिया खत पर बैठा बैठा अपने लुंड को जोरर से हिला रहा था

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हरिया अपनी लार टपकत हुआ सीधा नीलम की गांड के पास पहुंच जाता है और अपनी गर्दन को निचे झुकता हुआ सीधा अपनी बेटी की गांड का छेद सूंघने लगता है जो रात बाहर छोड़ने के बाद और भी ज्यादा खूबसूरत लग्ग रहा था

हरिया को यह ब्बि डर था की कहि नीलम उठ न जाये और दुबारा से अपने बाप को धुत्कार कर भगा न दी

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हरिया का मैं तो भट्ट कर रहा था की अभी उस छेद को चूसना शुरू करदे पर कहि न कहि वो अब तक्क नीलम से डर रहा था

हरिया इस बात से बेखबर था की उसकी बेटी पहले hi जाग चुकी है और जानबूझ कर ऐसे hi नंगी लेती अपने बाप के उठने का इन्तजार कर रही थी

नीलम को अपने बाप की गरम सांसे अपनी गांड पारर साफ़ महसूस हो रही थी

नीलम रात को अपने बापू की मायूसी देख कर अंदर hi अंदर हरिया को माफ़ कर चुकी थी

नीलम अपनी गांड को थोड़ा और बहार की एयर निकल देती है

जिसकी वजह से उसकी गांड और छूट और भी ज्यादा खुलकर उसके बापू की नजरो के सामने आ जाती है

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हरिया से रहा नहीं जाता और वो एक जोरदार साँस लेता हुआ अपने मुह्ह को सीधा अपनी बेटी की छूट पर लगा देता है

नीलम को अपने बापू का उतावलापन देख कर हसी आ जाती है पर अगले hi पल वो कठोर बनती हुई एक झटके के साथ उठ जाती है और जैसे hi पलट कर हरिया को देखती है हरिया की तो मनो गांड hi फट जाती है

नीलम- क्यों बापू मैं नहीं भरा क्या कल मेरी बातो से जो आज तुम दुबारा से मेरी छूट में अपना मुह्ह घुसा रहे हो

हरिया आगे बढ़ता हुआ सीधा नीलम की नंगी टैंगो को पकड़ लेता है

हरिया- माफ़ करदे बेटी अपने इस बुड्ढे बाप को

नीलम- अरे वहहह अब माफ़ी मांग कर क्या फायदा तुम तो मुझे बेचने के जुगाड़ में लगे हुए थे पहले

नीलम इतना बोलते हुए दिवार के पास जाती है और अपनी टैंगो को खोलकर निचे बैठ जाती है जिसकी वजह से एक बार फिरसे हरिया की आंको के सामने उसकी बेटी की छूट के चिपके हुए होंठ खुल चुके थे

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नीलम की छूट को देख कर हरिया का लुब्द फिरसे झटके मरने लगता है

हवस का नशा हरिया की आँखों में साफ़ देखा जा सकता था

हरिया तुरंत hi दुबारा से नीलम के करीब पहुंच जाता है और एक बार फिरसे अपनी बेटी से माफ़ी मांगने लगता है

नीलम- मैं सब जानती हु किस लिए माफ़ी मंग्ग रहे हो तुम्हे कोई प्यार व्यार नहीं है मुझे तुम तो बास मेरा ये गदराया जिस्म भोगना कहते हो

क्यों सही खा ना बापू

नीलम अपने पेअर से हरिया को झटका मरती हुई बोलती है जिसकी वजह से हरिया पीछे की और गिर पड़ता है

हरिया का लुंड सीधा खड़ा था जिसे देख कर कहि न कहि नीलम के मुह्ह में भी पानी आ रहा था

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हरिया- बेटी मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी

नीलम- गलती तो मुझसे हो गयी जो मैंने सोचा मेरा बापू बड़ा अच्छा आदमी है

हरिया लेते लेते hi अपनी बातो को रख रहा था

हरिया - बेटी मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी जो मैं उस रैंड के चक्कर में फस्स गया

रेखा का नाम सुनते hi नीलम को गुस्सा आ जाता है और वो जोरसे अपने बापू

के लुंड पर अपना पेअर मरती है पर अपने पेअर को वही जमा देती है

हरिया को दर्द तो हुआ था पर अब उसे एक सुकून भी मिल रहा था क्योंकि उसकी बेटी के चिकने तलवे अब उसके लुंड पर था

नीलम- अच्छा तो अब क्या हुआ अब उस रंडी को नहीं छोड़ना

हरिया- बेटी उससे साली कुटिया से तो मैं ऐसा बदला लूंगा की पूरा गाओं देखेगा

नीलम अबतक अपने पेअर हरिया के लुंड पर चलना शुरू कर चुकी थी

हरिया- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बेटीई बास ऐसे hi

नीलम- बापू तुम्हे बिलकुल भी शर्म नहीं आयी थी जब तुम मुझे उस जानवर के सामने परोसने की बात कर रहे थी

हरिया- बेटी माफ़ करदे मुझे मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी

ये बात नीलम भी जानती थी की उसके बाप को उसके किये का पछतावा हो चूका है और वो भी अब अपने बापू से ज्यादा समय दुर्र नहीं रह सकती थी

नीलम अपना दूसरा पेअर भी आगे बढ़ती हुई हरिया के लुंड पर दाल देती है और अपने तलवो से अपने बापू के लुंड को जकड लेती है

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हरिया - बेटी तेरा बहुत बहुत शुक्रिया जो तूने अपने इस बुड्ढे बाप को माफ़ कर दिया

हरिया आगे की और उठता हुआ नीलम के करीब जनरे की कोशिश करता है

नीलम तुरंत hi हरिया के लुंड को दुबारा से दबा देती है जिससे हरिया तड़प उठता है और दुबारा से वही गिर्र जाता है

नीलम- ज्यादा तव्व में मैट आओ बापू जो मिल रहा है चुप चाप लेलो नहीं तो ये भी नहीं मिलेगा

Hriya-thik है बेटी तेरी जैसी मर्ज़ी अब तो तेरा ये बुद्धा बाप तेरा गुलाम बन गया है तू जो कहे वही होगा

बेटी मुझे एक बात समझ नहीं आयी तू बार बार रवि को जानवर क्यों बोल रही है

हरिया की बात सुनकर नीलम को एक झटका लगता है वो गहरी सोच में पड़ जाती है की अपने बाप को उस दिन की बात बताये या नहीं

हरिया- कहि उस हरामी ने तेरा साथ कुछहहह किया तो नहीं

हरिया की बात सुनकर नीलम की आँखों में आंसू आ जाते है उसकी आंको के सामने उस दिन के सरे चित्र घूमने लगते है जब रवि ने दिन भर नीलम को बेरहमी के साथ छोड़ा था

हरिया फिरसे आगे बढ़ने की कोशिश करता है पर नीलम उसे अपने पैरो से वही दबाये रखती है

हरिया अब तक्क समझ चूका था की आखिर उसकी बेटी क्यों डर रही थी रवि के नाम से hi क्योंकि हरिया भी वाकिफ था की रवि का लुंड किसी जानवर से कम् नहीं है

हरिया- मुझे माफ़ करदे मेरी बची पर तेरे बाप का वडा है की उस कमीने से और उसकी उस रैंड बेहेन से ऐसा बदला लूंगा की उसने जो जो तेरे साथ किया है वो पछतायेगा वो सब करने के लिए

हरिया की बाटे सुन्करर नीलम को भी थोड़ी हिम्मत मिलती है

और वो जोश में आकर और भी ज्यादा मादक अंदाज में अपने बाप के लुंड को अपने पैरो से मसलने लगती है

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इतने दिनों से हरिया का माल नहीं निकला था आज नीलम के फूटजॉब से उसका बाप भी काफी गरम hi चूका था और कुछ hi समय में हरिया भी अपना सारा माल अपनी बेटी के पैरो पारर hi गिरा देता है

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नीलम- क्या बात है बापू बड़ी मलाई जमा कर राखी थी तुमने तू

हरिया- क्या बताऊ बेटी तूने आज अपने बाप का कितना बोझ हल्का कर दिया

नीलम अपने हाथो को फैलाती हुई अपने बापू को अपने पास बुलाती है और हरिया भी अपनी बेटी की तरफ खींचा चला जाता है

दोनों बाप बेटी करीब 20 मिनट तक्क एक दूसरे का मुह्ह चूसते रहते है और जब हरिया अपनी बेटी की गॉड में लेत जाता है तो नीलम उसे उस रोज का सारा किस्सा बता देती है की कैसे रवि ने दिन भर नीलम की गांड मार मार कर सुजा दी थी

हरिया यह सब सुन्करर आग बबूला हो जाता है

हरिया- बेटी इस सबका हिसाब हम दोनों बाप बेटी मिल कर करेंगे

तू कल मेरे साथ खेतो पारर चलना वो रंडी अकसर उस कमीने से खेतो में hi चुदवाती है

नीलम- बापू पारर करोगे क्या आप

हरिया नीलम को अपना सारा प्लान बताता है जिसे सुनकर कुछ हद्द तक्क नीलम को भी अपने बापू का प्लान ठीक लगता है

इधर हरिया मन hi मन खुश था की उसकी बेटी उसे दुबारा मिल गयी और वो अब उसे मदद करने को भी तैयार है रेखा से बदला लेने के लिए....
 
अपडेट-123

उधर बाप बेटी का मिलान दुबारा हो चूका था और इधर एक दूसरा बाप अपनी बेटी के गदराये जिस्म और उसकी गद्देदार गांड का स्पर्श भूल नहीं पाए रहा था

रह रह कर रामलाल का लुंड बैचैन हो उठता

उसे दुबारा से अपनी बेटी से चिपकना था

शाम हो चुकी थी और सब लोग शाम की चाय एक साथ hi पी रहे थे

मल्टी की हालत भी कुछ खास नहीं थी वो न तो रवि से नजरे मिला पा रही थी और न hi अपने बाप से

गलती से hi सही पर आज उसने अपने बाप के लुंड को अपनी गांड के बिच फसाया था वो भी खुद अपने हाथो से

इधर रामलाल नजरे बचा बचा कर मल्टी की गदराई जवानी को निहार रहा था

कम्मो भी अब बैचैन सी रहने लगी थी

कम्मो बार बार रवि को देखती और नजरे गिरा लेती

रेखा सबकी हरकते देख रही थी और उसे इस वक्त्त रामलाल की हरकतों पर हसी आ रही थी

क्योंकि उसका कहता नजर जो आ रहा था रेखा को

अब बरी थी रामलाल और हरी के जाने की सब लोगो ने रामलाल को अलविदा खा और जब मल्टी आगे आकर अपने उसके पेअर चुने को हुई तो रामलाल ने एकदम से मल्टी को पकड़ कर गले लगा लिया

रामलाल आज काफी बैचैन था उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था

उसे बस ुस्लि बेटी चाहिए थी रामलाल मल्टी को खास कर पकड़ लेता है और मल्टी की मोती मोती चूचिया अब उसके बाप की छाती में धसने लगी थी

रामलाल की पकड़ इतनी मजबूत थी की मल्टी को इस वक़्त अपनी छूट के ऊपर अपने बापू का लुंड साफ महसूस हो रहा था और रह रह कर रामलाल का शरीर झटके खा रहा था

हर झटके के साथ उसका लुंड मल्टी की छूट को और अंदर तक्क गिला कर रहा था

रामलाल- जुगगग जुगगगग जियोऊ बेटी सदा ौसे hi फूलते फलते रो

आखिर में उसने अपनी बेटी को छोड़ दिया और बिना उससे नजरे मिलाये अपनी मंजिल की और चल दिया

रामलाल की इस हरकत ने मल्टी को अजीब दुविधा में दाल दिया था उसे अब पता चला था की उसने कितनी बड़ी गलती कर दी और अब उसका बाप उसे भोगना कहता है

सब लोग खाना खाने के बाद अपनी अपनी जगह पर चले जाते है

मल्टी और कम्मो रोज की तरह बहार hi सोई थी

मल्टी एक दम गुमसुम किसी सोच में डूबी पड़ी थी

िडजर घर के अंदर आते hi रेखा आज जल्दी सो गयी थकान की वजह से

इधर मेघा दीदी और रवि की बाटे चालू थी

रवि बार बार नजरे बचा कर दीदी के ब्लाउज की और hi देख रहा था

मेघा दीदी को भी अंदाजा हो चुका था की रवि क्या दकह रहा है पर वो भी अनजान बनती हुई और भी ज्यादा आगे को झुक गयी

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मेघा- तुझे कुछ चाहिए क्या रवि जो मुझे ऐसे घुर्र रहा है यहां पारर

रवि- दुधहहहहहहहह

अच्चानक से रवि को अपनी गलती का अहसास होता है पर अब देर हो चुकी थी

मेघा- हट बदमाश शर्म नहीं आती

रवि भी अब मन पकक्का कर चुका था

रवि- दीदी दूध कहिये

मेघा- अच्छा तो तू इन्हे क्यों घुर्र रहा है

मेघा दीदी अपनी चूचियों की तरफ इशारा करके बोलती है

रवि - दीदी इनमे भी तो दूध भरा है

मेघा- अच्छा तुझे बड़ा पता है

रवि- दीदी तभी तो इतनी मोती मोती है आपकक ये

रवि को डर भी काफी लग्ग रहा था पर वो नादाँ बनने की पूरी कोशिश कर रहा था

मेघा- अच्छा तो तुझे लगता है की जिसके ये मतलब चुके मोठे होते है उसके अंदर दूध भरा होता है

रवि- है दीदी सही बोली

मेघा- अच्छा और तुझे अपनी दीदी का दूध पीना है

रवि- हम्म्म्म

मेघा- चल ठीक है और अगले हिपल मेघा दीदी एक एक करके अपने ब्लाउज के सरे बोटों खोल देती है

रवि भी अब समझ चूका था की उसकी दीदी उस्ले साथ खुलने के लिए तैयार हो चुकी है

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मेघा- ले पी ले अपनी दीदी का दूध

मेघा दीदी का इशारा मिलते hi रवि सीधा उनकी चिचियो पर टूट पड़ता है और एक चुकी को मुँह में भरता हुआ दूसरी को अपने हाथ में पकड़ कर धीरे धीरे मसलने लगता है

रवि की हरकतों से मेघा दीदी पागल सी हुई जा रही थी

रवि कभी निप्पल को डाट से काट लेता तो कभी उसे चबाने लगता

करीब 15 मिनट टककक मेघा दीदी की दोनों चूचियों को निचोड़ता रहता है

मेघा दीदी अब उसे हटा देती है

मेघा- क्यों पी लिया अपनी दीदी का दूध

रवि- है दीदी बड़ा मजा आया और बहुत स्वादिस्ट था आपका दूध ताऊ

मेघा- हट बेशर्म

रवि- अब तो मैं रोज पियूँगा आपक दूध

मेघा- अच्छा मैं क्या कोई गयी हु जो तू रोज पियेगा मेरा दूध

रवि- हां आप मेरी गयी हो

मेघा- अच्छा चल अब सजा पी लेना कल भी वैसे भी तेरी दीदी इतने सरे दूधः का क्या करेगी

मेघा दीदी अपनी गांड रवि की और फेक कर सो जाती है इधर रवि इतनी साडी हरकतों क्र बाद से बैचैन था उसका लुंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था

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रवि रेखा की और घूम जाता है और हाथ को आगे बढ़ता हुआ सकती के साथ रेखा की एक चुकी को पकड़ लेता है

आज वास्तव में रेखा थकी हुई थी वो तुरंत hi रवि का हाथ हटा देती है .

रवि भी दुबारा से कोशिश नहीं करता क्योँकि वो जनता था की आज तक उसकी दीदी ने कभी उसे मना नहीं किया है जरूर आज कोई कारन होगा

रवि का लुंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था

अच्चानक से रवि उठता है और अपनी धोती को खड़े लुंड पर लपेटता हुआ दरवाजे से बहार निकल जाता है .......
 
अपडेट-124

रवि जैसे hi बहार आता है उसे सामने hi अपनी भाभी लेती हुई नजर आती है

कम्मो तो सो चुकी थी पर मल्टी आज अपने बाप के साथ हुई गलती के बारे में hi सोच रही थी उसकी हालत पागलो के जैसी हुई पड़ी थी

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मल्टी की नजर जैसे hi रवि पर पड़ती है वो उसे देख कर चौक जाती है और जब मल्टी की नजरे थोड़ी निचे आती है तो उसका कलेजा मुँह में आ जाता है

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रवि भी लगातार मल्टी को hi देख रहा था रवि की आँखे इस समय बिलकुल लाल थी क्योंकि मेघा दीदी ने आज उसे लाफ़ी गरम जो कर दिया था

मल्टी की तो हालत खराब थी उसने जितना सोचा था रवि का लुंड उससे बड़ा निकला

रवि जैसे hi अपने कदमो को मल्टी की और बढ़ता है

रवि के लुंड को उछलता देख मल्टी का दिल जोरो से धड़कने लगता है

रवि मल्टी के बिलकुल नजदीक पहुँचता हुआ अपने लुंड को सीधा उसकी छाती में ढसा देता है

मल्टी कुछ समझ पति उससे पहले रवि अपने लुंड को ऊपर बढ़ता हुआ सीधा मल्टी के रसीले होठो से सत्ता देता है

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अब रवि अपने लुंड को मल्टी के चेहरे पर आगे पीछे कार रहा था उसकी आँखों में किसी प्रकार का कोई डर नहीं था जिससे की मल्टी को अब और भी ज्यादा दार लगबे लगा था

रवि अपना लुंड मल्टी के गलो पर रगड़ता रगड़ता उसके होठो पर लता है और अपना एक हाथ आगे बढ़ता हुआ सीधा मल्टी की एक चुकी को पकड़ लेता है

रवि की पकड़ इतनी मजबूत थी की मल्टी अपने दर्द को दबा नहीं पति और उसके मुह्ह से एक अह्ह्ह निकल जाती है

जिसका रवि पूरा फायदा उठत्ता है और अपने लुंड को आगे धकेलता हुआ मल्टी के मुँह में एक ऊँगली फसा देता है

मल्टी भी कोई ज्यादा नाटक नहीं कर रही थी आखिर उसे भी तो ये अनकहा लुंड लेना hi था

रवि अपनी ूंगकी से उसके मुँह को खोलता हुआ अपने लुंड को भाभी के मुह्ह में ठूसने लगता है

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मल्टी बस लेती लेती लगातार रवि को देखती हुई अपनी आँखे मटका रही थी

इधर रवि के ऊपर हवस का नशा बढ़ता hi जा रहा था मल्टी का मुह्ह भी कम् गरम नहीं थी

रवि अपने हाथ को सर के पीछे ले जाता हुआ एक जोरदार झटका मरता है और अपना आधे से ज्यादा लुंड मल्टी के गले तक्क उतारर देता है

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इस झटके के साथ hi मल्टी की आँखे बाजार को निकल आयी थी अभी वो संभाल पति उससे पहले रवि एक और झटके के साथ अपना बचा हुआ लुंड भी मल्टी के मुह्ह में भर्र देता है

अब तो मल्टी को ऐसे लग्ग रहा था की किसी ने उसका मुह्ह चिर्र दिया हो दर्द्द से उसकी हालत खराब थी आँखों में आंसू साफ़ बता रहे थे की मल्टी की हालत कितनी खराब है

इधर रवि को अपनी भाभी की ये हालत देख कर तो और भी ज्यादा जोश चढ़ने लगा था

अब वो अपने लुंड को लगातार मल्टी के मुह्ह के अंडरर बहार कर रहा था मनो उसे कोई फरक hi ना पड़ता हो की कम्मो वही बगल में सोई है

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मल्टी को भी अब बड़ा मजा आ रहा था लुंड चूसने में

केशव तो सिर्फ उसे छोड़ा करता था वो भी कभी कभी

करीब 10 मिनट तक रवि ऐसे hi आराम आराम से मल्टी भाभी के मुह्ह को छोड़ता रहता है और अंतत में मल्टी के मुह्ह को ोुरा भर देता है अपने गधे सफेद विरया से

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मल्टी भी गाठ गत्त करके साडी मलाई चाट जाती है

रवि एक नजर मल्टी के ऊपर डालता है और उसकी चुकी को मसलता हुआ वापस से कमरे में चला जाता है

इधर मल्टी अपनी जीभ से अब तक्क उस रस का स्वाद नहीं भुला पा रही थी

मल्टी को समझ नहीं आ रहा था की रवि का स्वभाव उसके साथ अच्चानक से कैसे बदल गया

पर रवि का लुंड चूसने के बाद मल्टी रामलाल को भूल hi गयी थी .....
 
भाई आपकी बात सही है

जिस समय मैंने ये स्टोरी स्टार्ट की थी उस टाइम में बेरोजगार था इस लिए रेगुलर उपदटेस आ रहे थे

अब पिछले कुछ दिनों से रोजगार वाले हो गए है

इसी कारन टाइम काम मिलता है पर में कोशिश जरूर करूंगा की ज्यादा से ज्यादा उपडटेदस दे सखु

और मुझे भी तो इसके बाद नयी स्टोरी स्टार्ट करनी है.....
 
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