Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 15 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-133

रामलाल के दिल की धड़कने लगातार बढ़ती hi जा रही थी

उसकी आँखों के सामने hi एक बाप अपनी hi बेटी के कपड़ो को एक एक करके उसके गदराये बदन से अलग कर रहा था जिसे देख कर कहि न कहि रामलाल को मल्टी याद आ रही थी

कई बार तो उसे नीलम की जगह अपनी बेटी hi दिखाई पड़ी

और जब उसे ऐसा लगता की मनो वो भी अपनी गदराई बेटी को ऐसे hi करके धीरे धीरे नंगा कर रहा है

उसका लुंड इतना जोरदार झटका खता की रामलाल की हालत खराब हो जाती

इधर नीलम अपने रान्दीपने पर उतर आयी थी वो सीधा सीधा रामलाल की आँखों में hi देख रही थी पर उसका निशाना रवि की धोती के अंदर था

रामलाल भी रवि की धोती का उभर देख चूका था और वो अब तक्क समझ गया था की जिसे वो बहुत भोला समझता था वो एक नंबर का छोड़ू है

पीछे से हरिया भी अपनी बेटी के कुछो को जबरदस्त तरिके से मसल रहा था

और जब नीलम की आह निकल जाती तो हरिया अपनी बेटी की सिसकी सुन्न कर और भी मस्त हो जाता

इधर रवि बैठे बैठे hi अपनी धोती को अपने बदन से अलग कर देता है

रवि का विशाल लुंड देख कर रामलाल की तो मनो गांड hi फट जाती है

पर आज रवि का लुंड देखने के बाद नीलम के चेहरे पारर एक चमक थी मनो वो इसी का इन्तजार कर रही हो

रवि- अरे काका आपके होश क्यों उड़द गए

रामलाल- कुछहहहह हीईई बीबीबीटा

रवि- अरे अरे काका डरो मत मैं आपकी गांड थोड़े hi मरूंगा की आप मेरा लुंड देख कर डर रहे हो

रवि की बात सुनकर कमरे में सबब हसने लगते है सिवाय रामलाल के

नीलम- आज तो इस बबरर शेर की सवारी सिर्फ मैं hi करूंगी

रवि- सुना न काका आपने आज इस लुंड की सवारी सिर्फ और सिर्फ नीलम दीदी hi करेंगी

नीलम अपना हाथ आगे बढ़ती हुई सीधा लुंड पारर रख देती है

एक हाथ से रवि का लुंड संभालना मुश्किल थी नीलम झुके हुए hi अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ती हुई लुंड को दोनों हाथो से पकड़ लेती है

नीलम- बापू संभाल कर पकड़ना कहि आपकी ये बेटी गिर्र न जाये लुंड पकड़ने के चक्कर में

हरिया - रुकक्क बेटी मैं कुछ करता हु

नीलम तो पहले से hi नंगी खड़ी थी इधर हरिया भी ेल झटके में अपनी धोती उतर देता है और अपनी बेटी को आगे झुकता हुआ निचे बैठे कर दोनों हाथो से अपनी बेटी की गद्देदार गांड फैलता हुआ अपना मुँह सीधा अपनी बेटी के छेड़ो पर लगा देता है

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू

हरिया- अब नहीं गिरेगी मेरी बच्ची बस अपने इन् छेड़ो से अपने इस बूढ़े बाप को अमृत पिलाती जा और तेरा ये बाप तुझे मरते दम्म तक्क थामे रहेगा

नीलम- अह्ह्ह्हह सब तुम्हारा hi तो है बापू

नीलम अपने दोनों हाथो को तेजी के साथ रवि के लुंड पर चला रही थी और बिच बिच में वो ऊपर से hi अपना गर्म थूक रवि के लुंड पारर गिरा देती

रवि भी आज नीलम की हरकते देख कर पागल हुआ जा रहा था

खा वो कभी नीलम को जबरदस्ती छोड़ा करता था और आज खुद नीलम hi उसे एक जबरदस्त चुदाई के लिए उकसा रही थी

करीब 10 मिनट तक ऐसे hi रवि का लुंड अपने हाथो से मसल मसल कर पूरा थुक्क से सन्न जाता है

इधर हरिया पिछले 10 मिनट से अपनी बेटी के छेड़ो को चूस चूस कर पूरा चिकना कर चुका था

नीलम सीधा खड़ी हो जाती है और एक झटके में अपनी गांड रवि की और घुमा देती है

रवि भी खा पीछे रहने वाला था वो अपने हाथो को बढ़ता हुआ नीलम की गांड को फैला कर उसकी गांड का फटा हुआ छेद देखता है और देखते hi देखते उसमे अपनी एक ऊँगली पेल देता है

नीलम रवि की इस हरकत से मस्त हो जाती है

नीलम- अब समय हो गया बापू आपकी बेटी की सवारी का मुझसे आशीर्वाद दो की मैं इस गधे जैसे लुंड कर पानी अपने छेड़ो में निकल कर hi इससे निचे उतरु

नीलम आगे की और झुकती चली जाती है और जब वो हरिया के पैरो को चुटी है तो उसकी छूट और गांड एक दम से फट कर रामलाल के सामने आ जाती है

रामलाल तो मनो कोई सपना देख रहा था

नीलम की छूट के फैले हुए नोट होठ उसकी गांड में पेली हुई रवि की ऊँगली उसे अंदर hi अंदर पागल किये जा रही थी

बिचारा रामलाल चुतियो की तरह अब भी अपना लुंड अपनी दोनों टैंगो के बिच दबाये बैठा था

इधर रवि लगातार अपनी ऊँगली को नीलम की गांड में अंदर बहार किये जा रहा था मनो उसे कोई फरक hi ना पड़द रहा हो की सामने hi उसकी बेहेन का होने वाला ससुर बैठा है

इधर नीलम जब खड़ी होती है तो खड़े होते होते वो हरिया के लुंड के पास ृक्क जाती है

जो की बिलकुल सीधा खड़ा था

.नीलम आगे बढ़ती हुई अपने बापू के लुंड को चुम्म्म लेती है और खड़ी हो जाती है

नीलम- बापू लगता है की आज आपका भी मैं कर रहा है अपनी बेटी की सवारी करने का

हरिया - जब तेरे जैसी गदराई बेटी हो तो किस बाप का मैं नहीं करेगा की वो अपनी बेटी की सवारी करी

हरिया की ये बात सीधा रामलाल के लुंड पर वार करती है

मनो हरिया ने रामलाल के मैं की बात कह दी हो

रवि रामलाल के हाव् भाव पहचान जाता है

और अब रवि के चेहरे पर एक मुस्कान थी मणि वो जो कहह रहा था वही हो रहा हो

दोस्तों टाइम की कमी है

तो आधा अपडेट hi लिख पाया

माफ़ी कहूंगा

पर अगला अपडेट जल्दी hi आएगा

हैप्पी दीपावली आप सभी को ..
 
अपडेट-134

दोस्तों देरी के लिए माफ़ी कहूंगा

उम्मीद है कहानी में आपलोगो को आगे भी उतना hi मजा ए जैसे पहले था

नीलम अपने दोनों हाथो से अपनी गांड को फैलाती हुई रवि को उस छेद के दर्शन करवाती है जिसका वो दीवाना था

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नीलम के फ़टे हुए छेड़ो को देख कर रामलाल के मुह्ह से लार्जर टपक जाती है

भले hi इस समय नीलम अपना रान्दीपना दिखा रही थी पर रामलाल की आँखों के सामने तो इस समय ॉर्फ और सिर्फ मल्टी hi थी जो अपने बापू को उकसाने में कोई कसार नहीं छोड़ रही थी

इधर रवि अपने हाथ पर थुक्का हुआ सीधा नीलम की गांड पर रख देता है और नीलम की फ़टी हुई गांड के छेद को अपने थुक्क से गिला करता हुआ धीरे से एक ऊँगली अंदर सरका देता है

नीलम- अह्ह्ह्हह्हह माआआआ

नीलम आगे की और झुकती हुई अपनी गांड को और भी ज्यादा खोल देती है

और सीधा अपने बापू के गले पड़ जाती है

नंगी बेटी अपने बाप से ऐसे चिपक रही हो तो किसी का भी मुद अपनी बेटी के लिए खराब हो जाये और यही हाल था रामलाल का जो अब मन hi मन अपनी बेटी को बहो में भरने के लिए तड़प रहा था

उसे अब पछतावा भी हो रहा था की जब उसकी बेटी इतने समय उसके साथ रही तो उसने अपनी बेटी के अंगो को क्यों नहीं सहलाया क्यों नहीं ले पाया वो आज तक अपनी मादक बेटी के मादक ाँगो की खुसबू

असल में आज जो कुछ भी रामलाल की आँखों के सामने हो रहा था उसे देख कर कहि न कहि रामलाल को हरिया से जलन हो रही थी

और इधर हरिया अब रेखा के चक्कर में इतना पागल हो चूका था की वो किसी गैर मर्द के सामने hi अपनी बेटी को रवि के लुंड पर बैठने पर उतावला था

रवि अपनी ऊँगली को लगातार आगे पीछे किये जा रहा था जिसे देख कर रामलाल का लुब्द भी अपनी औक़ात में आ चूका था

भले hi रामलाल अपने लुब्द को दोनों हाथो से दबाये बैठा था पर उसकी उंगलिया हरकत में आ चुकी थी

हरिया अपने हाथो को नीलम के मुँह के पास लेकर रोकता है

हरिया- ला बेटी दे दे अपने इस बुड्ढे बापू को अपना गरम थुक्क

नीलम तुरंत hi हरिया का हाथ पकड़ कर हटा देती है

नीलम- बापू आज ऐसे नहीं देखो तो जरा आज हमारे यहां मेहमान आये है

दोनों बाप बेटी एक नजर रामलाल की तरफ देखते है

नीलम- आज तो कुछ खास होना चाहिए न बापू

हरिया- अब मेरी बेटी है तो कुछ तो जरूर खास करेगी तू कर जो तेरा मन है

नीलम बिना कुछ बोले सीधा अपने बापू के सर को पकड़ती हुई अपने होठो को हरिया के होठो पर लगा देती है

रामलाल की आँखों में मनो अंगार उतर आये हो उसकी हालत देखने लायक थी इधर रवि भी अब एक की जगह 2 उंगलिये नीलम की गांड में पेले जा रहा था

नीलम ने भी थांन लिया था की अब इस रान्दीपने वाली जिंदगी में उसे एक अलग hi मुकाम हासिल करना है

दोनों बाप ब्वती कभी एक दुआरे के होठो को बुरी तरह चूसते तो कभी एक दूसरे के होठो को काट लेते और सबसे बड़ी बात दोनों एक दूसरे में मुह्ह में थुक्क का आदान पर्दाब किये जा रहे थे जिसकी वजह से नीलम के मुँह में काफी थुक्क जमा हो चुका था

अचानक से नीलम अपना नूह हटा लेती है और अपने बापू के कंधो को पकड़ कर निचे दबती हुई अपना मुह्ह सीधा उसके मुह्ह के ऊपर ले आ टी है

हरिया समझ चुका था की आज उसकी बेटी ने क्या खास सोच रखा है

नीलम के इशारे से पहले hi हरिया अपना मुह्ह खोल देता है

और इधर जैसे hi नीलम अपना मुह्ह खोलती है

एक पतली धार के साथ उसके मुह्ह में जमा सारा का सारा थुक्क सीधा उसके बापू के मुह्ह में गिरने लगता है

नजारा इतना गरम था की कोई मुर्दा भी यह नजारा देख कर मुठ मरने पर मजबूरर हो जाये

यही हाल रामलाल का भी हुआ वो सोच भी नहीं सकता था की एक बाप बेटी किश हद्द तक्क जा सकते है

असल में जो जो हरिया कर रहा था नीलम के साथ अब वही सब रामलाल को भी मल्टी के आठ करना था

रामलाल इतना सोचते सोचते के झटके में hi अपने लुंड को पकड़ लेता है

रवि एक नजर रामलाल की और देखता है और जैसे hi रामलाल को अपनी हालत का अंदाजा होता है वो तुरंत लुंड वाला हाथ हटा लेता है

रवि के चेहरे पर एक मुस्कान थी

रवि- अरे काका क्यों इतना सोच रहे हो देखो ये दोनों बाप बेटी होकर इतना नहीं शर्मा रहे जितना आप शर्मा रहे हो

जो करना है वो करो मैं पक्का मल्टी भाभी को कुछ नहीं बताऊंगा

मल्टी का नाम सुनते hi रामलाल का जोश दोगुना हो जाता है

इधर नीलम अब तक्क हरिया का मुँह पूरी तरह अपने गरम थुक्क से भर चुकी थी

वो ईशर से हरिया का मुँह सीधा रवि के लुंड के ऊपर ले जाती है और एक हाथ से रवि के लुंड को पकड़ती हुई उसकी चमड़ी को खोल देती है

नीलम- अब गिराओ बापू इसपर मेरा गरम थुक्क ताकि तुम्हारी बेटी जब इस गधे समान लुंड को अपनी इस कसी हुई गांड में ले तो उसे तकलीफ न हो

हरिया किसी पालतू कुत्ते की तरह अपनी बेटी की साडी बाटे मैं रहा था वो तुरनत hi अपना मुँह खोल देता है और सारा का सारा थुक्क रवि के लुंड पर गिरने लगता है जिसे नीलम लगातार अपनी हाथो से रवि के लुंड पर मसल रही थी

और कुछ hi पल में रवि का लुंड पूरी तरह से चिकना हो जाता है

हरिया भी अब खड़ा हो चूका था

नीलम रवि का हाथ पकड़ती हुई उसे उठती है और निचे जमीन पर लिटा देती है

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रवि का विशाल लुंड बिलकुल सीधा खड़ा था 90° के एंजेल परर जिसे देख कर कोई भी डर जाता ओर आज नीलम के चेरे पर डर का कोई नमो निशान नहीं था

इधर नीलम अपनी दोनों टैंगो को फैलती हुई रामलाल की और पलटती हुई अपनी गांड रवि की और घुमा देती है और अपने मुँह में 2 उंगलिया दाल कर अच्छे से गिला करती हुई दोनों उंगलिया सीधा अपनी गांड में ठुस्स देती है

2-3 बार ऊँगली आगे पीछे करने के बाद वो सीधा निचे की और बैठ जाती है जिससे अब उसका वो कोमल छेद सीधा रवि के लुंड के ऊपर था

रवि भी देर न करते हुए निशाना बराबर करता हुआ अपने लुंड को सीधा नीलम की गांड के छेद पर रख देता है

बस फिरर क्या था धीरे धीरे नीलम निचे की और बैठना शुरू करती है और देखते hi देखते नीलम की गांड एक मुसल समान लुंड निगल जाती है

नीलम के चेहरे के हाव् भाव देख कर रामलाल और हरिया दोनों hi पागल हुए जा रहे थे

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रवि अपने लुंड को बहार खींचता हुआ एक जोरदार झटका मरता है और दुबारा से अपना पूरा का पूरा लुंड नीलम की गांड में ठुस्स देता है

नीलम दर्द और मजी के एक अनोखे मेल से तड़प उठती है

हरिया भी तुरंत hi एक एक करके अपने सरे कपडे उतरता हुआ पूरा नंगा हो जाता है और अपनी बेटी को गांड मरवाता हुआ देख अपना लुंड मसलने लगता है

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रामलाल समझ चूका था की अब क्या होने वाला है

इधर हरिया आगे बढ़ता हुआ अपनी बेटी के करीब पहुँचता है और एक झटके के साथ उसका सर पकड़ता हुआ अपनी और खीचता है

नीलम भी तुरंत hi अपने बापू के लुंड के लिए अपना गिला मुह्ह खोल देती है और हरिया एक झटके के साथ अपना कला लुंड अपनी बेटी के नाजुक गले तक्क उतर देता है

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हरिया- अह्ह्ह बेटी तेरा मुँह तो गजब का मजा दे रहा है

रवि- अरे काका तुम्हारी बीती के तो सरे छेद एक अलग hi मजा देते है

हरिया बिना रुके करीब 5 मिनट तक अपनी बेटी का मुँह छोड़ता रहा और अंतत में अपने कल लुंड को नीलम के मुँह से निकलता हुआ उसकी टैंगो को फैलते हुए सीधा नीलम की छूट के मुहाने पर टिका देता है और एक झटके के साथ अपना लुंड अपनी बेटी की रास टपकती बुर्र में पेल देता है

नीलम- अह्ह्ह्ह कसम से मजा आ गया बापू तुम जब जब अपना लुंड मेरी छूट में डालते हो तो गजब का मजा आता है और आज तो ये मुस्टंडा भी आया है एक साथ दो दो लुंड खाने का मजा hi अलग है दोनों छेड़ो में एक एक लुंड आह्ह्ह्हह्ह मैं तो करता है की जिंदगी भर इनदोनो को अपनी छूट और गांड से बहार hi न निकलू कसम से एक अलग hi मजा है एक साथ दोनों छेद भरने का

रवि- दीदी अगर तुम कहो तो एक साथ अपने तीनो छेद भर सकती हो

रवि की आवाज इतनी तेज थी की कमरे में मौजूद हर आदमी बे उसकी बात सुनी थी

रामलाल रवि की बात सुनकर चौंक जाता है क्या सच में हरिया उसे भी अपनी बेटी को छोड़ने देगा

मन तो रामलाल का भी भीत था पर एक झिझक थी उसके अबदार जो उसे अपनी बेटी के देवर के सामने इज्जतदार बनने पर मजबूर कर रही थी

नीलम रवि की बात सुनकर हस्ती हुई रामलाल की और देखती है और आँख मार देती है

नीलम को अब तीसरा लुंड भी कह्ज्ये था और वो समझ चुकी थी की रामलाल अभी तक रिस्तो की डोर से जकड़ा हुआ है और ये डोर अब नीलम को hi तोड़नी होगी

इधर हरिया और रवि दोनों ताबड़तोड़ तरिके से नीलम की छूट और गांड मरने में लगे हुए थे

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मनो नीलम किसी समान की तरह दोनों के बिच में पड़ी हुई हो और दोनों बरी बरी उसके छेड़ो में अपना लुंड और अंदर तक डालने की कोशिश कर रहे हो

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करीब 10 मिंट तक्क ऐसे hi बेरहमी के साथ रवि नीलम की गांड मरता जाता है और हरिया अपनी बेटी की छूट का भोसड़ा बनाने पर तुला रहता है

तीनो के शरीर पूरी की पूरी तरह पसीने से भीग चुके थी

अंततः में नीलम हरिया को ढका देती हुई अलग करती है और उठती हुई सीधा रामलाल के करीब आने लगती है

रामलाल बिलकुल गरम हो चूका था अब उसे कुछ नहीं सूझ रहा था क्या अच्छा है और क्या बुरा

नीलम रामलाल के करीब पहुँचती हुई उसे धक्का देती है और रामलाल खुद बा खुद hi खत की दूसरी तरफ पलट जाता है

नीलम भी तुरंत hi खत पर चढ़ जाती है और अपनी कमर के निचे का हिस्सा कुछ इस तरह खत के किनारे पर टिकती है की उसके दोनों दीवाने उसके दोनों छेड़ो का मजा फिर से लूट सखे

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नीलम के छेड़ो से अब तक्क कामर्स टपक रहा था

इधर हरिया और रवि आगे बढ़ते हुए दुबारा से अपने अपने पसंदीदा छेद पर अपने लुंड टिकते हुए एक दूसरे की नजरो में देखते हुए एक साथ जबरदस्त झटके के साथ दोनों लुंड नीलम के दोनों छेड़ो में पेल देते है

इस समय नीलम कुछ ऐसे यदि थी की खत की एक तरफ उसकी कमर थी जिससे वो रवि और हरिया के लुंड का मजा ले रही थी और खत के दूसरी तरफ उसका मुहहह था जिससे अब वो तीसरा लुंड खाने की तैयारी में थी

झटका इतना जबरदस्त था की नीलम एक जोरदार चीख के साथ सीधा रामलाल की धोती पकड़ लेती है

और जैसे hi उसे आगे खींचती है रामलाल की धोती खुलती हुई निचे गिर जाती है

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रामलाल की आँखे सुर्ख लाल हो चुकी थी उसका पागलपन इस कदर बढ़ चूका था की उसे इस वक़्त नीलम की जगह मल्टी hi नजर आ रही थी जो उसे अपनी और खींच रही थी और आज वो ये मौका अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहता था

रामलाल आगे बढ़ता हुआ नीलम के माथे को चुम लेता है

रामलाल - कितना ध्यान रखती है मेरी बेटी अपने बूढ़े बाप का

रामलाल की बात सुनकर एक पल के लिए नीलम सोच में पद जाती है और तुरंत hi समझ जाती है की रवि इसे कुछ अलग hi चक्कर से यह लाया है

पर उसे क्या था उसे तो आज एक साथ तीन तीन लुंड जो मिल रहे थे

नीलम- बापू मैं आपकी बेटी हु मैं नहीं रखूंगी अपने बूढ़े बाप का ध्यान तो क्या पड़ोसी रखेंगे

नीलम इतना बोलते हुए अपने चेरे को आगे बढ़ती हुई रामलाल के लुंड के नजदीक ले जाती है

और जैसे hi नीलम के गरम और गीले होठ रामलाल के सुपडे को छूटे है उसके मुँह से एक अह्ह्ह निकल जाती है

और रामलाल आगे बढ़ता हुआ नीलम का सुर अपने दोनों हाथो से थम लेता है

रामलाल- अह्ह्ह्ह बेटी मैट कर अपने इस बूढ़े बाप को इतना प्यार कहि तेरा ये बाप कोई पाप न कर बैठे अपनी फूल सी बेटी के साथ

नीलम- बापू अपनी इस बेटी को फूल भी आपने hi बनाया और अब अपनी बेटी को फूल से काली बनाने की जिम्मेदारी भी आपकी hi है और इसके लिए कहे कितना भी गन्दा पापप आपको करना पड़े मेरी कसम है एक बार भी मात्त सोचना और जो आपके मैं में आये वो करो अपनी इस फूल सी बेटी के सठह....

दोस्तों किसी वजह से अपडेट पूरा नहीं हो पाया पर अगले अपडेट में आपलोगो को यह भी आता चल जायेगा की आखिर उस रात मेघा दीदी के साथ क्या हुआ था......
 
अपडेट-135

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एक साथ नीलम के तीनो छेड़ो में एक से बढ़ कर एक लुंड घुस रहे थे

अब रामलाल भी अपनी पूरी ताक़त के साथ नीलम को मल्टी समझते हुए उसके मुँह को छोड़ छोड़ कर फाड़ने पर तुला हुआ था

इधर हरिया और रवि भी नीलम को किसी रंडी की तरह लगातार चोदे जा रहे थे

चुदाई को शुरू हुए करीब 40 मिंट हो चुके थे

नीलम के छेड़ो की ताबड़तोड़ चुदाई का नतीजा यह हुआ की जब जब हरिया और रवि अपना लुंड उसके छेड़ो से बहार निकलते तो नीलम की छूट और गांड दोनों से hi सफेद रंग का कामर्स बहार आने लगता जिसे देख कर दोनों का जोश चार गुना हो जाता और दुबारा से अपना लुंड नीलम के मादक छेड़ो में थुश देते

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रामलाल भी अब रवि के बिछाये जाल में बुरी तरह फस्स चूका था और किसी और की बेटी को अपनी बेटी समझ कर उसका मुखछोडन कर रहा था

रामलाल के झटके इतने जोरदार थे की नीलम उर्फ मल्टी की सांसे hi उसके गले में अटक सी गयी थी

मनो नीलम कोई औरत नहीं एक सामान हो जिसके सरे छेद छोड़ने लायक थे

और उसके तीनो यार उसके तीनो छेड़ो का पूरा फायदा उठा रहे थे

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रामलाल अपनी बेटी का मुखछोडन करते करते अपना पूरा लुंड उसके गले में एक पल के लिए फसा देता और अपने खड़े लुंड पर अपनी बेटी के गले की गर्मी को महसूस करके पागल सा हो जाता

नीलम के मुँह से थुक्क बुरी तरह गिर्र रहा था जिसकी वजह से उसकी छाती और गला पूरी तरह उसके गरम थूक से भीगा पड़ा था

पारर अपनी बेटी की हालत देख कर रामलाल को उसपर कोई दया नहीं आ रही थी

बल्कि उसका जोश और भी बढ़ता hi जा रहा था

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जब जब रामलाल नीलम के मुँह से अपना लुंड बहार खींचता तो थूक के बुलबुलो के साथ नीलम बहुत सारा थूक अपने मुह्ह से बहार फेकती और थूक बहार होते hi रामलाल दुबारा से अपना लुंड उसके मुह्ह में पेल देता

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अभी तीनो लोग नीलम को नोचने में लगे hi हुए थे की तभी दरवाजे के बहार से राजू की आवाज आती है जिसे सुन्न कर सब चौंक जाते है

रवि- अरे दीदी यह खा से आ गया

हरिया- बीटा रवि जल्दी करो तुम रामलाल जी को लेकर ोीचे के दरवाजे से निकल जाओ

रवि - अरे क्यों काका उसे भी बुला लो न आखिर वो भी देख लेगा की उसकी दीदी चुदाई के इस खेल में इतनी माहिर खिलाडी बन गयी है की अपने सरे छेड़ो में एक साथ लुंड पेलवा रही है

नीलम जानती थी की अगर उसकी यह हरकत राजू को पता चली तो वो उसे मर डालेगा

राजू अपनी दीदी और उसके मादक बदन से सच्चा प्यार करता था और वो अपनी दीदी को किसी के साथ भी बाटना नहीं कहता था यह तक की हरिया के साथ भी नहीं और यह तो 2-2 बहार के लोग थे

नीलम तुरंत hi खड़ी हो जाती है

नीलम- नहीं रवि तू अभी जा फिर कभी तू काका को लेकर आना फिर से मजा करेंगे

अगर राजू को पता लग्ग गया तो अनर्थ हो जायेगा हमारा पूरा घर ख़राब हो जायेगा

रवि- अरे दीदी आप इतना उछाल उछाल कर अपनी गांड मरवा रही हो हमसे और हम आपका घर खराब करेंगे आप चिंता मैट करो

रामलाल को मनो अब होश आया था वो नीलम को आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा था मनो उसे अब जाकर समझ आया था की वो जिसका मुखछोडन कर रहा था वो असल में उआकी बेटी नहीं थी

रवि और रामलाल कपडे पेहेन कर तुरंत hi बहार निकल जाते है

रवि- क्यों काका मजा आया

रामलाल अब भी थोड़ी झिझक दिखा रहा था

रवि- अरे काका अब तो तुमने नीलम दीदी का मुँह भी छोड़ लिया मेरे सामने बस अपनी मलाई नहीं खिला पाए अपनी बेटी को हहहहहह

बेटी का नाम सुन्करर रामलाल का गला सूखने लगता है

उसे अच्चानक से ध्यान आता है की नीलम का मुँह छोड़ने के टाइम उसने क्या क्या बोलै था

रामलाल- बीटा ऐसी बात नहीं है वो तो बस हरिया जी की बेटी थी तो मेने भी उसे बेटी बोल दिया

रवि - अब काका तुम मुझे चुटिया मत बनाओ मैं दुनिया को चुटिया बनता हु

रामलाल- बीटा मैं तेरे हाथ जोड़ता हु मल्टी को इसके बारे में कुछ मैट बताना नहीं तो मैं मर्डर जाऊंगा

रवि- अरे काका कैसी बात करते हो तुम जरा भी चिंता मैट करो मैं मल्टी भाभी को बिलकुल भी नहीं बताऊंगा की आज आपने किसी और की बेटी को अपनी बेटी समझ कर उसकी मुँह की जबर्दस्त चुदाई की हहहह

रवि की बाटे रामलाल के पल्ले नहीं पद रही थी पर अब तक वो इतना समझ चूका था की रवि जनता है की रामलाल अपनी बेटी के जिस्म का दीवाना है

खैर समय काफी हो चूका था और अबधेरा भी होना शुरू हो चूका था

रवि रामलाल को लेकर सीधा घर की और निकल जाता है

दोस्तों यह अपडेट तो कम्पलीट हुआ अब अगले अपडेट के लिए अभी से अपने अपने लुंड बांध कर रखना कहि पढ़ते पढ़ते hi पानी न निकल जाये😁😁
 
अपडेट-136

रामलाल का लुंड अब तक जो का त्यों खड़ा था

उसने नीलम की गले की गर्मी अपने लुंड पर महसूस तो की पर अपने लुंड के पानी से उसका गाला गिला नहीं कर पाया था

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रवि- अरे काका हम घर पहुंचने वाले है भूलो मत की वह मेरी दीदियो के साथ आपकी बेटी भी रहती है

रामलाल मनो किसी अलग hi दुनिया में खोया था और रवि की बात सुनते hi वो वापस इस दुनिया में आ गया हो

रामलाल- क्या क्या बीटा

रवि- अरे काका अपने इस मुसल को बैठा लो नहीं तो अगर तुम्हारी बेटी और मेरी भाभी ने तुम्हारा ये खड़ा लुंड देख लिया तो कैसे समझाओगे अपनी बेटी को की तुम अभी किसी और की बेटी का गला अपने लुंड से गिला करके आ रहे हो

रामलाल बीटा तेरी बात तो सही है

अगर मेरी बच्ची ने मुझे इस हालत में देख लिया तो न जाने क्या सोचेगी

तुम एक काम करो बीटा तुम आगे चलो मैं पेशाब करके आता हु तो शायद ये ठीक हो जाये

रवि चुप चाप आगे बढ़ जाता है

रवि( भौसीके बुड्ढे बन तो इतना शरीफ रहा है और उधर नीलम को बेटी बेटी कह कर अपना लुंड उसके गले तक्क ठुस्स रहा था

चिंता मैट कर बुड्ढे तेरे सामने hi तेरी बेटी की गांड मरूंगा और तब देखता हु सेल तू क्या करता है)

थोड़ी hi देर में रवि घर पहुंच जाता है बहार hi मल्टी और कम्मो बैठे थे

रवि को आता देख कम्मो जल्दी से उठ कर पानी लेन चली

असल में कम्मो आज बड़े hi मस्त मुद के साथ रवि को दोपहर में खाना देने गयी थी पर आज वो उसे वो वह मिला hi नहीं बस तब से hi वो अपने छोटे भाई का बेशब्री से इन्तजार कर रही थी

कम्मो के जाते hi मल्टी रवि की और देखती है जो उसे hi देख रहा था

आज एक बात खास थी की मल्टी ने भी इस समय सदी उतर राखी थी और सिर्फ और सिर्फ एक पेटीकोट ब्लाउज में hi बैठी हुई थी

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मल्टी की आधे से ज्यादा चूचिया बहार की तरफ झक रही थी

रवि ने आज दिन में चुदाई तो बहुत की थी पर अफ़सोस उसका लुंड भी अब तक शांत नहीं हो पाया था

रवि तुरंत hi मल्टी के करीब पहुँचता हुआ सीधा अपना एक हाथ उसके ब्लाउज में घुसा देता है

मल्टी तो मनो इसी मौके की तलाश में बैठी हुई थी वो भी तुरंत hi अपना हाथ रवि की धोती के ऊपर रख देती है

मल्टी- क्या बात है देवर जी आज कल तो लुंड खड़ा करके hi घर में आ रहे हो

रवि- अब तुम्हरे जैसी भाभी मिली है तो छोड़ने के लिए तो पहले से hi तैयार रखना होगा न

मल्टी- हाफ्फफ्फ्फ्फ़ बड़ा आया छोड़ने वाला कल रत क्या हो गया था जो मुझे अधूरी hi छोड़ दिया

रवि- अरे वो मुद बदल गया था अब चिंता मत करो भाभी इस बार तुम्हे दबा कर छोडूंगा छूट भी और गांड भी

और हां तुम्हारा ये रसीला मुँह भी

रवि मल्टी के होठो को अपनी उंगलियों से कुरेदता हुआ बोलता है

मल्टी- अपनी बहनो से खली होगा तब तो मेरा ख्याल रखेगा न

रवि जनता था की मल्टी को भनक लग चुकी है की वो अपनी दीदियो के रसीले बदन का रस पी रहा है

रवि- अरे भाभी तुमने लुंड देखा है न मेरा एक साथ तुम चारो को छोड़ सकता हु

मल्टी- चल देखते है तू कितनो को एक साथ छोड़ता है

रवि- अरे भाभी एक बात बताना तो भूल hi गया

मल्टी- कौनसी बात

रवि- अरे ाँ तुम्हारे बापू आये है

मल्टी- कब

रवि- दोपहर में

Malti-dophar से खा थे

रवि- अरे मैं उनको गाओं घुमा रहा था

मल्टी- और अब खा है

रवि- अब क्या बताऊ तुम्हे मेरी प्यारी भाभी

मल्टी- बता ना

रवि- अरे जब वो आ रहे थे तो अच्चानक से रुक गए और मुझे बोलने लगे की बीटा तुम चलो मैं आता हु थोड़ी देर में

मल्टी हैरान होते हुए- ऐसा क्या हुआ जो बापू अँधेरे में आधे रस्ते ृक्क गई

रवि- भाभी वो तो नहीं पता पर मैंने एक चीज़ज़ का ध्यान दिया

मल्टी- अरे तो बता न कहि बापू किसी मुसीबत में तो नहीं

रवि- अरे भाभी मस्त रो टेंशन मत लो असल में जब तुम्हारे बापू ने मुझे आगे चलने को खा तो मेरा ध्यान सीधा उनकी धोती पर गया

मल्टी- क्या देखा तूने बापू की धोती में रवि

रवि- भाभी तुम यकीन नहीं करोगी जितनी उम्र ठहरे बापू की है उससे लगता नहीं की तुम्हारा बापू ऐसी हरकते अभी भी करता होगा

रवि की बाटे मल्टी के सर के ऊपर से जा रही थी

मल्टी- अरे तू सीधा सीधा बता ना

रवि- अब सुनो तुम्हारे बापू की धोती में उसका लुंड देखा मेने और वो भी पूरी तरह से खड़ा था एकदम सीधा तना हुआ

रवि की बाटे सुन्करर मल्टी की आँखे बड़ी हो जाती है

एक पल के लिए वो सोच में पड़ जाती है की आखिर रवि क्या बोल गया

मल्टी- क्या बोल रहा है तू

रवि- जो देखा वही बोल रहा हु

वो दिन भर मेरे साथ घूमे पर लुंड खड़ा नहीं हुआ और जब अपनी बेटी के घर आने को हुए तो अच्चानक से उनकी धोती फूल गयी भाभी यकीन मनो मुझे तो कुछ गड़बड़ लग रही है

बाकि आप जानो और आपके बापू

इतना बोलता हुआ रवि अंदर की और चल देता है

असल में वो मल्टी को पूरा समय देना कहता था ताकि वो सोच और समझ सखे की आखिर उसके बाप के पास भी एक लुंड है और वो प्यासा है .......

दॉतो जैसा की आपको पता होता है की हर्र एक part काफी बड़ा होता है

एक अपडेट में पूरा लिख पाना मुश्किल है

और न hi इतना टाइम मिल पता है

उम्मीद है आपको छोटे छोटे उपदटेस में भी भरपूर मजा मिले

Dhanyawad...mm
 
अपडेट-137

मल्टी के अंदर शक की चिंगारी को भड़कता बुआ रवि घर के अंदर की और जाने लगता है

रवि के चेहरे पर एक मुस्कान थी मनो उसे पता था की उसकी बातो का असर मल्टी पर किस कदर होने वाला है

अभी रवि घर में घुसने hi वाला था की तभी कम्मो मैं दरवाजे से एक गिलास में पानी पकडे हुए बहार निकलती है

कम्मो की भरी भरकम चूचिया अच्चानक से रवि की मजबूत छाती से टकराती है और कम्मो खुद को संभाल नहीं पति

पानी तो कम्मो के ब्लाउज पर गिरता है और कम्मो निचे गिरने को होती है तभी रवि अपनी मजबूत बहो से अपनी दीदी को सहारा देता हुआ पकड़ लेता है

रवि और कम्मो का समय एक पल के लिए मनो थम सा जाता है

कम्मो की गरम सांसे सीधा रवि के चेहरे पर चोट मारर रही थी

जिसका नतीजा यह रहा की उसकी पकड़ अपनी दीदी पर और मंबत होती चली जा रही थी

पानी गिरने की वजह से कम्मो के अंगूर समान निप्पल्स तान्न कर खड़े हो चुके थे

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पानी गिरने की वजह से कम्मो का ब्लाउज लगभग ादराय हो चूका था

उसकी मोती मोती गुदाज चूचियों के ऊपर सजी उसके निप्पल्स मनो रवि को ललचा रहे हो

रवि लगातार अपनी दीदी के जोबन को घूरे जा रहा था और जब ये बात कम्मो को समझ आयी तो उसे एक झटका सा लगा

आखिर कहती तो वो भी यही थी

कम्मो तुरंत hi अपने आपको संभालती है

कम्मो- वो वो पनीईई गुर्जर गया में तेरे लिए दूसरा गिलास ले कर आती हु

कम्मो पलट कर जाने लगती है

इधर रवि अब पूरी तरह से यह समझ चूका था की उसके घर की साडी औरतो कहे उसकी दीदी हो या भाभी सिर्फ और सिर्फ उसका hi अधिकार है

अभी कामो पलट कर जब hi वाली थी की तभी रवि पीछे से उसकी कमर में हाथ डालता हुआ पकड़ लेता है और अपने होठ सीधा अपनी दीदी की सुराही जैसी गर्दन पर रख देता है

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अपने छोटे भाई की इस हरकत से कम्मो तड़प कर रह जाती है

रवि लगातार कम्मो की कमर को मसलता हुआ उसकी गर्दन के एक हिस्से को लगातार चूसे जा रहा था

मनो उसे किसी का कोई डर hi न हो

तभी अंदर से कुछ आवाज आती है और दोनों अलग हो जाते है

कम्मो अपनी नजरे बचती हुई अंदर की और भाग जाती है

उसकी सांसे अभी तक उखड़ी हुई थी अंदर hi अंदर कम्मो अपने छोटे भाई की इस हरकत से भट्ट खूसस थी

कम्मो के पीछे पीछे रवि भी घर में घुस जाता है

इधर बहार मल्टी बेसब्री से अपने बापू का इन्तजार कर रही थी

आखिर कार उसे दूर से hi रामलाल आता हुआ दिखाई देता है

मल्टी दुआडी हुई आपने बापू की और जाने लगती है

रामलाल भी अपनी फूल सी बच्ची को देख कर उसकी और तेजी से बढ़ने लगता है

पर आज रामलाल की नकार उसकी फूल सी बच्ची के जोबन ओर थी और उसे आज अहसास हुआ था की जिसे वो बच्ची समझता था आज वो एक गदराई हुई गए बन चुकी है जिसके ठान इतने भरी हो चुके है की भागने के साथ साथ इतना ऊपर निचे हो रहे है की मनो अभी उसकी बेटी का ब्लाउज फाड़ कर बहार आ जायेंगे

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रामलाल अपनी hi बेटी की चूचियों को देख कर अपने होठो पर जीभ फहरता है

मनो वो अपनी इस काऊ का दूध खुद hi पीना छठा हो

मल्टी रामलाल के करीब पहुंचते hi जोरसे अपने बापू के गले लग जाती है

मल्टी के मादक बदन की गर्मी और उसकी खुसबू सूंघ कर रामलाल को एक झटका सा लगता है और वो जोश में आकर अच्चानक से अपने दोनों हाथ अपनी बेटी की पीठ पर डालता हुआ उसे जोरसे अपने से चिपका लेता है

रामलाल का लुंड जो एक बार मुठ मरने के बाद शांत हुआ था वो अपनी बेटी की बहो में आते hi एक बार फिरसे खड़ा होने लगता है

कुछ hi पल में मल्टी को भी अहसास हो जाता है की उसके रवि की बात सही थी और अब भी उसके बापू का लुंड खड़ा है जो गलती से hi सही पर इस वक़्त उसकी जांघो पर टकरा रहा है

मल्टी जानती थी की उसकी माँ के मरने के बाद से hi उसका बाप अकेला है

पर उसे इस बात से झटका लगा था की

उसका बाप अपनी hi बेटी को छू कर लुंड खड़ा किये बैठा है

मल्टी के मैं में हजारो सवाल थे

इधर रामलाल मैं भर कर अपनी बेटी की खुसबू को सूंघना कहता था

क्या पता फिरर कभी मौका मिले न मिले

इन सब के बिच मल्टी ने एक चीज़ को बार बार महसूस किया था की

हर बार उसका बाप और लम्बी सांस खींचते हुए उसे और भी मजबूत पकड़ में दबोच रहा था

करीब 10 मिंट तक रामलाल मल्टी को ऐसे hi जकड़े रहता है और जब दोनों बाप बेटी अलग होते है तो एक पल के लिए मल्टी की नजर सीधा अपने बापू की धोती पर पड़ती है जिसे देखते hi वो अंदर टककक सिहाररर उठती है

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रामलाल इतना कुस था की उसे ये तक नहीं पता था की वो अपनी ची बेटी के सामने लुंड खड़ा किये हुए खड़ा है

मल्टी रामलाल को बैठती हुई घर के अंदर चली जाती है

एक चीज़ज़ का अहसास मल्टी को चलते हुए होता है

कहि न कहि उसके बापू के लुंड का अहसास अपनी टैंगो पर महसूस करके उसकी छूट भी गीली हो गयी थी

जिसका गीलापन बेहटा हुआ अब उसकी गुदाज जांघो तक्क पहुंच गया था

इधर रवि जाब्ब घर में घुसता है तो उसे बहार hi रेखा और कम्मो दिख जाती है दोनों की दोनों खाना बना रही थी

तभी कम्मो उसे पानी देती है पर नजरे नहीं मिलती और इधर जब रवि अपनी सबसे प्यारी दीदी रकेः की और देखता है तो वो उसे ऐसा इशारा करती है

(लुंड खड़ा किये क्यों घूम रहा है मेरे छोड़ू भाई )

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रवि रेखा को आँख मरता हुआ कमरे के अंदर घुस जाता है झा मेघा दीदी गुमसुम सी पड़ी हुई थी

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मेघा दीदी का आधा पेटीकोट उनकी जांघो तक्क साध गया था

अपनी बड़ी गांड रवि की तरफ घुमाये मेघा दीदी अपनी आँखे खोले पड़ी हुई थी उसे कोई खबर नहीं थी

रवि मेघा दीदी को इस हाल में पड़े एक शैतानी मुस्कान के साथ उसकी और बढ़ता है

आगे बढ़ता हुआ रवि सीधा निचे लेट जाता है और अपनी एक नंगी तंग को मेघा दीदी की नंगी जांघो पर रखता हुआ सीधा उनसे चिपक जाता है

जैसे hi मेघा दीदी को रवि का लुंड अपनी गांड में धस्ता हुआ महसूस होता है उसे समझते देर नहीं लगती की पीछे कोण है

रवि ऐसे hi शांत होकर पड़ा रहता है

इधर मेघा दीदी भी उसी हाल में पड़े पड़े कल हुई घटना के बारे में सोचने लगती है जब रवि आधी रात को आकर ऐसे hi अपनी दीदी से चिपक गया था और उसके बाद उसने जो किया उसने मेघा को अबदार तक हिला दिया था.......
 
अपडेट-138

पिछली रात भर मेघा दीदी जिस ानिब से दर्द से तदपि थी आज रवि ने दुबारा से अपना खड़ा लुंड उनकी गांड से चिपका कर उस दर्द का दुबारा अहसास करवा दिया था

रवि का लुंड सीधा मेघा दीदी की चिपकी हुई गांड से जा भिड़ा था जो लगातार अपनी दीदी की गांड को फैलाने का प्रयास कर रहा था

इधर मेघा दीदी आंखे खोले शांत पड़ी हुई थी और उनके साथ रवि ने जो जो किया उसके बारे में hi सोच रही थी

पिछली रात-----

रवि बहार से अपनी सबसे छोटी दीदी को मसल कर सीधा अपने कमरे में आ चूका था वो भी पूरा नंगा उसका लुंड हवा में इस कदर झूल रहा था मनो शेर अपना शिकार धुंध रहा हो

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रवि एक नजर रेखा की और डालता है जो मस्त हो कर सो रही थी

और जैसे hi रवि की नजर अपनी सबसे बड़ी दीदी पर पड़ती है उसका लुंड एक जोरदार झटका मरता है

न जाने क्यों आज रवि मेघा दीदी को देख कर अपने ऊपर काबू नहीं कर पाया

शायद इसकी जिम्मेदार मेघा दीदी खुद hi थी उनका पहनावा रह रह कर उनके छोटे भाई को उकसा रहा था

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मेघा दीदी के ब्लाउज के निचे के 2 बोटों खुले हुए थे और उनकी भरी भरकम चूचिया इस कदर ब्लाउज से बहार झांक रही थी की उनके निप्पल्स तक ब्लाउज से बहार आ चुके थे जिसे देख कर रवि का जोश दोगुना हो जाता है

और इसी पल रवि अपने मैं में थान लेता है की आज वो अपनी बड़ी दीदी से बिना डरे उनको भोग कर रहेगा कहे इसके लिए उसे कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े

रवि कमरे के एक कोने की तरफ बढ़ता हुआ एक कटोरी उठता है और उस कटोरी में से बहुत सारा तेल अपने हाथो पर लगता हुआ सीधा अपने लुंड ओर मसलने लगता है

करीब 5 मिनट तक वो लगातार अपने लुंड को तेल लगाकर मसलता रहता है मनो वो अपने हतियार को तैयार कर रहा हो अपनी दीदी के छेद को फाड़ने के लिए

आगे बढ़ता हुआ रवि मेघा दीदी के बगल में लेट जाता है

अब भी रवि के जिस्म पर कोई कपडा नहीं था

वो पूरा का पूरा नंगा hi अपनी दीदी के बगल में लेता था

पर आज उसके अंदर डर नहीं था बल्कि उसकी हिम्मत इतनी बढ़ चुकी थी की वो अपना एक हाथ आगे बढ़ता हुआ सीधा अपनी दीदी का पेटीकोट पकड़ कर ऊपर की और उठाने लगता है

जल्द hi रवि मेघा दीदी की गांड को पूरा नंगा कर देता है और जब वो उठ कर एक झलक अपनी दीदी की गांड को देखता है तो मनो वो पागल सा हो जाता है

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मेघा दीदी की गांड जितनी बड़ी और फैली हुई थी उनकी गांड का छेद उतना hi कसा हुआ और टाइट नजर आ रहा था जिसे देख कर रवि दुबारा लेट जाता है

अपने लुंड को सीधा मेघा दीदी की छूट पर लगा देता है

अभी रवि ने हल्का सा धक्का मारा hi था की तेल की वजह से उसका सूपड़ा सरकता हुआ सीधा मेघा दीदी की छूट के अंदर घुस जाता है

मेघा दीदी के बदन में एक ानिब सी हलचल होती है और अच्चानक से उनकी आँख खुल जाती है ......
 
अपडेट-139

मेघा दीदी की आँख अचानक से खुल जाती है

अभी वो कुछ समझ पति उससे पहले hi रवि एक जबरदस्त झटका मरता हुआ अपना आधे से ज्यादा लुंड मेघा दीदी की छूट में घुसा देता है

झटका इतना जोरदार था की मेघा दीदी समझ पति उससे पहले उनके बदन में एक दर्द की लेहेर दौड़ जाती है

और जैसे hi उन्हें समझ आता है की कोई मोती और लम्बी चीज़ उनकी छूट के अंदर घुसी हुई है उससे पहले hi रवि अपने हाथ को आगे बढ़ता हुआ मेघा दीदी के गुदाज पेट पर रखता है और एक और जबरदस्त झटका मरता है

और अपना गधे जैसा लुंड पूरा का पूरा अपनी बड़ी दीदी की छूट में ठुस्स देता है

मेघा दीदी की छूट में काफी समय के बाद लुंड घुसा था वो भी इतनी बेरहमी के साथ उनका पूरा का पूरा बदन अकड़ सा जाता है और जब वो बेचारी पीछे पलट कर देखती है तो उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है

पीछे उनका छोटा भाई जिसे वो दुनिया का सबसे सीधा बच्चा मानती थी

वही अपना मुसल उनकी छूट में ठुसे बैठा था

मेघा दीदी की हालत ऐसी थी मनो काटो तो खून नहीं

छोड़ना तो वो कहती थी पर उन्हें ये नहीं पता था की उनका प्यारा भाई इस खेल में खुद hi पहल करेगा जो हमेशा hi मेघा दीदी को एक सीधा सदा भाई लगता था

पर आज उनका नजरिया hi बदल गया था

एक पल में मेघा दीदी को समझ आ गया की वो अपने छोटे भाई को पहचानने में गलती कर बैठी

रवि कुछ देर ऐसे hi पड़ा रहता है और इस बार अपने हाथ से मेघा दीदी का पेट मसलता हुआ थोड़ा पीछे की और सरकता हुआ अपना आधा लुंड बहार खींच लेता है

जैसे hi मेघा दीदी को होश आता है वो तुरंत अपने हाथ को पीछे लेजाती हुई रवि के लुंड को पकड़ लेती है

जो पूरी की पूरी तरह उनकी छूट के चिपचिपे पानी से भीगा हुआ था

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मेघा दीदी पीछे पलटती हुई रवि को रोकना कहती है

पर तुरंत hi रवि पेट पर रखे हुए ह्क़्त को ऊपर लेजाता हुआ मेघा दीदी की चुकी को दबोच लेता है

मेघा- ृक्क जा रवि

रवि बिना कुछ सुने दूसरे हाथ से मेघा दीदी की हथेली पकड़ते हुए अपने लुंड को दुबारा से अंदर पेल देता है

मेघा- अह्ह्ह्ह रुकक्क जा रवि

रवि अपने लुंड को अंदर घुसाए हुए hi

मेघा के कान के करीब जाता है

रवि- दीदी मैट रोको मुझे मेरा लुंड बार बार तुम्हारा ये गदराया जिस्म देख कर खड़ा हो जाता है मैट रोको मुझे दीदी आज नहीं तो मेरा लुंड फैट जाएगा

आगे बढ़ता हुआ रवि मेघा दीदी के उस कान को चूसने लगता है

कभी वो अपनी जीभ से मेघा दीदी का कान चाटने लगता तो कभी उनके कान को मुह्ह में भर कर चूसने लगता

मेघा दीदी अपने छोटे भाई की इन हरकतों से मनो अंदर hi अंदर पागल सी हुई जा रही थी

इस वक़्त उनकी छूट इतना पानी छोड़ रही थी की लुंड के साइड से बह बह कर पानी रवि की पूरी कमर को गिला कररर चूका था

मेघा दीदी कसमसाती हुई दुबारा से कुछ कहने की कोशिश करती है और अपनी शरीर को आगे की और खींचती है ताकि रवि का लुंड उसकी छूट से बहार आ सखे

रवि भी आज थान कर hi आया था की वो अपनी दीदी को बिना चोदे नहीं छोड़ेगा कहे जो भी हो रवि भी आगे की और सरक जाता है

रवि- दीदी क्यों निकलना कहती हो तुम इसे बहार

मेघा- रवि मुझे बहुत दर्द हो रहा है

रवि- दीदी बस थोड़ी देर दर्द होगा उसके बाद आपको भी वैसे hi मजा आएगा जैसा बाकि लोगो को आता है

रवि की बात सुनते hi मेघा दीदी समझ जाती है की जिसे वो सीधा साधा बच्चा समझती थी वो बहुत पहले से चुदाई का ये खेल खेलता आ रहा है

मेघा- मतलब तूने और किसके किसके साथ किया है यह सब

रवि- अरे मेरी प्यारी दीदी बड़ी जल्दी में हो रुको जरा

पहले आपके साथ तो कर लू फिर आपको सब बताऊंगा की किस किस को मैंने छोड़ा है और किसको किसको छोड़ने वाला हु

Ahhhhhhhhhh.......
 
अपडेट-140

मेघा दीदी पूरी तरह गरमा चुकी थी पर उसके अंदर अब भी एक लिहाज था

क्योंकि वो जानती थी की जो गधे जैसा लुंड उसकी छूट में फसा हुआ है वो किसी और का नहीं बल्कि उसके छोटे भाई का है

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मेघा अपने छोटे भाई से छुड़वाना तो कहती थी पर इन हालातो में नहीं

उसे तो हमेशा से यही लगता था की किसी दिन उसे खुद hi अपने भाई के सामने अपनी टंगे खोलनी पड़ेगी

रवि- दीदी देखो न मेरा लुंड तो ोुरा का पूरा आपकी छूट के अंदर फस्स गया है

अह्ह्ह्ह दीदी तुम्हारी छूट की यह गर्मी लग रहा है मेरा लुंड आपकी छूट में hi पिघल जायेगा दीदी

अब भी आप कहती हो की मैं इसे बहार निकल लू

बेचारी मेघा की हालत तो मनो ऐसी थी की न तो वो है कर सकती थी और न hi मना कर सकती रही

आखिर थी तो वो भी एक औरत hi और ऊपर से प्यासी

मेघा- रवि देख रेखा यही सोई है अगर वो उठ गयी तो अनर्थ हो जायेगा मैं किसी को मुँह दिखने लायक नहीं रहूंगी

रवि- अरे सोई है तो सोई रहने दो न दीदी और तुमको किसी और को मुँह को दिखाना है आज के बाद तो तुम्हे मुझसे hi फुर्सत नहीं मिलेगी अह्ह्ह्हह

मेघा- नहीं भाई आज नहीं किसी और दिन कर लेना तू ये सब मेरे साथ आज भट्ट दर्द हो रहा है और आवाज निकल गयी तो कम्मो मल्टी और रेखा की नजरो में मेरी इज्जत कहि की नहीं बचेगी

अरे मेरी प्यारी दीदी तुम कितनी चिंता करती हो

जिन जिन का तुम नाम ले रही हो वो तो पहले से hi तुम्हारे छोटे भाई के लुंड की गुलाम बन चुकी है

रवि की बात सुन्न कर मेघा दीदी का मुँह खुला का खुला रह जाता है

झटका लगता भी क्यों न आखिर रवि अपनी hi दीदियो और भाभी के बारे में जो बता रहा था अपनी दीदी को

मेघा- मतलब तूने उन तीनो को भी छु.......

मेघा बोलते बोलते ृक्क जाती है

तभी रवि अपना अगला दाव चलता है और अपने एक हाथ को मेघा दीदी के ब्लाउज के अंदर घुसा कर सीधा उनकी एक चुकी को जकड लेता है

रवि- अरे बोलो न दीदी

वैसे आपने थोड़ा थोड़ा सही बोलै तीनो को तो नहीं छोड़ा मैंने अभी

अभी तो कम्मो दीदी बाकि है

मेघा- मतलब तू मल्टी और रेखा को छोड़ चूका है

रवि- सही समझी दीदी

मेघा- नहीं यह नहीं हो सकता तू झूट बोल रहा है मुझे अपनी बातो में फ़साने के लिए

रवि- क्या दीदी अब तुमको अपने प्यारे भाई पर इतना भी भरोषा नहीं रहा रुको दिखता हु तुमको

आच्चंक से रवि खड़ा होता है

उसका मुसल जैसा लुंड एक झटके में मेघा दीदी की छूट से बहार आ जाता है

जैसे hi रवि का लुंड मेघा की छूट से बहार आता है उसकी छूट के अंदर से बहुत सारा पानी जमीन पर गिरने लगता है

मनो रवि का लुंड अपनी दीदी की छूट को बंद किये बैठा था

रवि खड़ा हो जाता है

रवि का लुंड पूरी तरह से कॉमर्स से सना हुआ था उसकी विशाल लुंड पर मेघा दीदी की छूट का पानी कुछ इस तरह लगा हुआ था की पूरा का पूरा लुंड किसी हिरे के समान चमक रहा था

रवि का लुंड देख कर मेघा दीदी अपना थूक गटकती हुई उसे देखने लगती है आखिर वो क्या करने वाला है

रवि अपने लुंड को अपने hi हाथो से मसल रहा था

मनो वो किसी जुंग की तैयारी कर रहा हो

रवि अपना लुंड मसलता हुआ मेघा दीदी की एयर देखता है जो उसे hi घुर्र रही थी

रवि की नजरो में अब अपनी दीदियो के लिए कोई शर्म नहीं बची थी उसकी आँखों में सिर्फ और सिर्फ हवस थी जिसको आज मेघा दीदी भी भाप गयी थी

इधर रेखा पीठ के बल सीधा लेती हुई थी

उसका पेटीकोट उसके पैरो से साध कर उसके घुटनो तक्क पहुंच चुका था

आगे बढ़ता हुआ रवि सीधा रेखा का पेटीकोट उसकी कमर तक खींच देता है

एक झटके में मनो उसे कोई डर hi न हो की कहि रेखा जाग जाये

रेखा बिलकुल बेसुध सी सोई हुई थी

रवि उसकी दोनों टैंगो को पकड़ कर हवा में फैला देता है और बिना देर किये अपने लुंड को सीधा उसकी छूट ओर रखता हुआ एक जोरदार और करारा झटका मरता है

पूरा का पूरा लुंड एक hi झटके में रेखा की फ़टी हुई छूट में समै जाता है

रेखा का बदन एक झटका खता है और वो कसमसाती हुई रवि की कमर को पकड़ लेती है

यह नजारा देख कर मेघा दीदी की आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

बिना समय गवाए रवि थोड़ा थोड़ा सा पीछे हत्ता है और एक और जोरदार झटका मरता है

झटका इतना जोरदार था की रेखा की एक दर्द भरी अह्ह्ह निकल जाती है जिसे मेघा दीदी भी साफ सुन्न सकती थी

अब तक मेघा अपने कपडे ठीक कर चुकी थी और वैसे hi शांत पड़ी हुई अपने छोटे भाई की हरकतों को देख रही थी

दर्द की वजह से रेखा की आँख भी खुल जाती है

रेखा- अह्ह्ह क्या कर रहा है कमीने दीदी यही सोई है और तू पेलम पेल धक्के मार रहा है

रवि एक नजर मेघा दीदी की और देखता है जो चोर नजरो से अब भी रवि को hi देख रही थी

रवि- दीदी सोई है तो क्या हुआ दीदी एक न एक दिन तो उनको भी मेरे लुंड से hi छोड़ना है

बाटे करते हुए भी रवि के झटके रुकने का नाम नहीं ले रहे थे उसका लुंड लगातार रेखा की छूट के अंदर बहार हो रहा था

मेघा दीदी का दिमाग अब यह नजारा देख कर काम करना बंद कर चूका था

उन्हें एक प्रेजेंट भी ऐसा नहीं लगा था की रवि पहले से hi अपनी दीदियो को भोग रहा है

और रेखा के उठने के बाद से तो रवि की कहि हर्र एक बात सच हो गयी थी

आगे बढ़ता हुआ रवि अपने होठो को रेखा के होठो पर रख देता है और लगातार अपनी दीदी की चुदाई चालू रखता है

करीब 10-15 मिंट तक वो ऐसे hi रेखा के होठो को चबाता हुआ उसे छोड़ता रहता है और अंतत में वो अपना सारा का सारा वीर्य उसकी छूट में hi गिरा देता है

जब भाई बेहेन की चुदाई का यह खेल ख़तम होता है तो दोनों जोर जोर से हाफ रहे थे

इधर मेघा दीदी का दिल इतना जोर से धड़क रहा था की उन्हें खुद अपनी धड़कन सुनाई दे रही थी

बेचारी मेघा ऊपर से निचे तक्क पानी पानी हुई पड़ी थी

रवि- मजा आ गया दीदी

रेखा- मजा तो आ गया कहि दीदी उठ गयी न तो तेरा भट्ट बना देगी

रवि- अरे तुम दीदी की चिंता मत करो उन्हें भी मैंने आता hi लिया है बास एक दो दिन में मैं उन्हें भी इसी बिस्तर पर छोडूंगा तुम्हारे सामने

रवि- और फिर मैं अपनी दोनों दीदियो को एक साथ छोडूंगा

रेखा- मैं तो कबसे उस पल का इन्तजार कर रही हु जब मेघा दीदी तुझसे छुड़वाने के लिए राजी हो जाये और तू हम दोनों बहनो को रात भर यही नंगा करके चोदे

रवि- अपनी दीदियो की प्यास बुझाना तो मेरा धरम है दीदी तुम चिंता मैट करो वो समय भी बस आने hi वाला है

रेखा- जल्दी करना अब मेरी छूट मुझे पहले से भी ज्यादा परेशान करती है

रवि- तुम्हारा बस चले तो तुम तो दिन रात चुदवाती hi रो

रेखा- तेरा लुंड hi ऐसा है कमीने

मेरा बस चले तो इसे अपनी छूट और गांड के अंदर से कभी निकलू hi न

गांड सब्द्द सुन्न कर मेघा दीदी का कलेजा मुह्ह को आ जाता है

वो बेचारी सोच में पड़ जाती है की आखिर कैसे रेखा ने इस विशाल लुंड को अपने उस छोटे से छेद में घुसाया होगा कितनी तकलीफ हुई होगी बेचारी को

रवि- अरे दीदी बस 2-3 दिन रुको उसके बाद रात भर तुम्हारी छूट भी मरूंगा और गांड भी

रेखा- मेरे तो सरे छेद अब तेरे है भाई जब मैं करे छोड़ लेना

रवि- दीदी पहले इसे साफ़ करो

रवि सीधा खड़ा हो जाता है

उसके लुंड की चमक अब पहले से भी ज्यादा बढ़ गयी थी

रेखा भी अब काफी समझदार हो गयी थी और अपने छोटे भाई का हर्र हुकुम मानती थी

बिना देर किये रेखा उठ कर बैठ जाती है और अपना मुँह खोलते हुए उस चिपचिपे लुंड को अपने गले तक्क उतार लेती है

एक बार को तो इन दोनों भाई बेहेन की हरकत मेघा दीदी को घिनौनी लगती है पर वो कर भी क्या सकती थी

धीरे धीरे रेखा सारा का सारा काम रास चाट जाती है और बिना कुछ बोले अपनी जगह ओर लेट जाती है

रवि भी मेघा दीदी की और देख कर हस्ता हुआ आँख मरता है

और रेखा के पीछे लेटते हुए उसकी एक चुकी को थम लेता है

बस उसी पल से न जाने मेघा दीदी किस दुनिया में खो सी गयी थी.....
 
अपडेट-141

मेघा अपने भाई के hi बारे में सोच रही थी की कैसे कल रात उसने उसके hi सामने अपनी दूसरी दीदी को छोड़ा

और न जाने ये सब कब चल रहा था

वो तो बेचारी रवि को एक भोला भला बच्चा hi समझा करती रही

अच्चानक से रवि एक झटका मरता है और अपने लुंड को पेटीकोट के ऊपर से hi मेघा दीदी की छूट के करीब पहुंचा देता है

इस झटके से अच्चानक मेघा को होश आता है और उसे अहसास होता है की अब भी उसका छोटा भाई अपना लुंड गड़ाए उसके साथ चिपका हुआ है

आगे बढ़ता हुआ रवि मेघा के गले को चूमता हुआ उसके कान के करीब पहुँचता है

रवि- क्या सोच रही हो दीदी

मेघा रवि की बात का कोई जवाब नहीं देती पर वो उसके लुंड को अब भी अपनी जांघो के बिच दबाये लेती थी

रवि जनता था की उसकी बड़ी दीदी कितनी प्यासी है और बस इसी बात का वो पूरा फायदा उठाना कहता था

रवि- दीदी बोलो न खा कहि गयी

इतना बोलते हुए रवि अपने हाथ को आगे बढ़ता हुआ मेघा दीदी के पेट पर रख देता है

मेघा- तेरी इन हरकतों के बारे में सोच रही हु

रवि- दीदी ज्यादा मत सोचो नहीं तो दिमाग फट जायेगा

मेघा- न सोचु तूने कल रात जो रेखा के साथ किया वो सब देखने के बाद भी न सोचु आखिर तू कहता क्या है

रवि- मैं बस यह कहता हु की कल रात रेखा दीदी जैसे मेरे लुंड के मजे ले रही थी वैसे hi मेरी बड़ी दीदी भी अपनी प्यास इस लुंड से बुझाये

रवि के लुंड का असर अब तक मेघा दीदी के ऊपर होना भी शुरू हो चूका था

उसकी छूट किसी गरम भट्टी की तरह जल रही थी और रवि को अपने लुंड पर अपनी बड़ी दीदी की छूट की गर्मी साफ़ महसूस हो रही थी

इतनी बात सुनते hi मेघा की छूट को एक जोरदार झटका सा लगता है

और वो बेचारी न कहते हुए भी अपनी छूट को रवि के लुंड के ऊपर दबा देती है

रवि तो मनो इसी मौके के इन्तजार में बैठा था

बिना देर किये रवि अपने हाथ को ऊपर सरकता हुआ सीधा मेघा के ब्लाउज में घुसा देता है और अब उसका हाथ उसकी दीदी की भरी भरकम चूचियों के बिच था

मेघा न कहते हुए भी अपने छोटे भाई के हाथो की कटपुतली बनती जा रही थी

रवि अपने हाथ को सरकता हुआ सीधा मेघा की एक चुकी पर टिका देता है और पूरी की पूरी चुकी को अपनी मरदाना गिरफत में ले लेता है

रवि की पकड़ इतनी मजबूत थी की मेघा अपनी सिसकारी नहीं रोक पति

रवि- क्या हुआ दीदी ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा है क्या

मेघा- क्यों तुझे कोई फरक ोाड़ता है क्या तेरी दीदी को दर्द हो रहा है या नहीं

रवि- ये तो आपको रेखा दीदी से hi पूछना पड़ेगा दीदी

अभी रवि अपनी बात पूरी करता उससे पहले hi दरवाजा खुलता है और रेखा अबदार आ जाती है

असल में वो मेघा दीदी और रवि को खाने के लिए बोलने आयी थी पर अंदर का नजारा देख कर तो मनो उसकी आँखों में चमक सी आ जाती है

रवि के अंदर अब बिलकुल भी डर नहीं बचा था

वो न तो अपने हाथ को मेघा के ब्लाउज से निकलता है और न hi अपने लुंड को उसकी टैंगो के बिच से

रेखा आगे बढ़ती हुई मेघा के करीब पहुँचती है

रवि रेखा की और hi देख कर मुस्कुरा रहा था

रेखा- क्या बात है बड़ा प्यार चल रहा है भाई बेहेन के बिच

मेघा दीदी के अंदर अब भी थोड़ी शर्म बची थी इसलिए वो बेचारी अपनी आँखे बंद किये लेती थी

रवि- हां अब मैं सिर्फ आपको hi प्यार कृ ये तो ाचा नहीं है न दीदी

मेघा दीदी को भी तो मुझे hi प्यार करना है न

रेखा- है है तो कर ले न प्यार अपनी मेघा दीदी से मेने तुझे रोका खा है जी भर कर कर ले

रेखा देख चुकी थी की रवि का हाथ मेघा दीदी के ब्लाउज में घुसा हुआ है और उसने मजबूती से मेघा की एक चुकी पकड़ी हुई है और जिस अवस्था में वो लेता था उसका लुंड भी मेघा दीदी की गांड की गहराइयो में उतरा हुआ है

यह नजारा देख कर रेखा को अपना रास्ता साफ़ होता हुआ दिखता है

रवि- दीदी आप भी आजाओ

रेखा- अच्छा मैं भी आ जाऊ एक दीदी से पेट नहीं भर रहा क्या की तुझे एक hi समय पर 2-2 दिदिया चाहिए

रवि- दीदी मैं तो आप दोनों को एक समय पर प्यार कर सकता हु

आप तो जानती hi है न मेरी काबिलियत

रवि- बड़ा आया एक साथ दो दो दीदियो को संभालने वाला जल्दी से उठ और खाना खा ले मेहमान आये हुए है

रवि- दीदी थोड़ी देर तो रुक जाती देखो न मैं और मेघा दीदी सोये हुए है

रेखा- मेघा दीदी तो सोई हुई है पर तू उनसे चिपक कर जो कर रहा है न मैं सब जानती हु चल अब जल्दी आजा और जो करना हो रात को कर लेना

अब रेखा भी साडी बाटे सीधा सीधा बोल रही थी क्योंकि वी स्थिति को देख कर समझ चुकी थी की अब मेघा दीदी भी रवि के लुंड से छोड़ने के लिए तैयार है

रेखा- और है दीदी को भी जगा दे

रेखा यह बोलकर वही खड़ी रहती है और रवि की और देख कर आँख मार देती है

रवि भी जनता था की अगर रेखा और मेघा दीदी को एक साथ छोड़ना है तो मेघा दीदी को भी बेशरम बनाना पड़ेगा जिसमे वो माहिर था

रवि- दीदी उठो न देखो खाना तैयार हो गया फिर हम खाना खा कर दुबारा से ऐसे hi चिपक कर सोयेंगे

बोलते हुए रवि लगातार मेघा दीदी की चुकी को मसले जा रहा था

अंदर hi अबदार मेघा को बड़ा मजा आ रहा था उस बेचारी को लगा की रेखा अब तक्क जा चुकी है और जैसे hi मेघा आँखे खोलती है उसकी आँखों के सामने hi रेखा नजर आती है जो उसे hi देख रही थी और मंद मंद मुस्कुराये जा रही थी

रेखा- पुरे मजे ले रही हो

इतना बोलकर रेखा बहार चली जाती है और मेघा वही पड़े पड़े रेखा की बात का अर्थ समझने की कोशिश करती है

रवि- दीदी ज्यादा मत सोचो

जिसे आपने अपनी टैंगो के बिच दबाया हुआ है न उसे रेखा दीदी रोज अपनी छूट गांड और मुँह में लेती है

मेरी मनो ज्यादा मैट सोचो और बहार आ जाओ

इतना बोलकर रवि बहार निकल जाता है

थोड़ी देर बाद मेघा भी बहार आ जाती है

झा सब खाना निकले उसका hi इन्तजार कर रहे थी...
 
अपडेट-142

जब मेघा दीदी बहार आयी तो सब उसका hi इन्तजार कर रहे थे

बहार रामलाल भी था जो उठ कर मेघा को नमस्कार करता है

मेघा भी हस्ते हुए सबके साथ बैठ जाती है और जब जब उसकी नजरे रवि से मिलती है तो वो अपनी दीदी को आँख मार देता है और मेघा तुरंत hi अपनी नजरे झुका लेती है

मेघा को दररर था की कहि रवि की हरकते कोई देख न ले

पर रेखा को आज मेघा दीदी की हालत देख कर बहुत हसी आ रही थी

इधर रामलाल के सामने तो मनो मॉल hi मॉल था वो कभी मेघा की देखता तो कभी रेखा को और कभी खुद की hi होने वाली बहु की जवानी को देख कर उसका लुंड उछलने लगता

पर जब जब उसकी नजरे अपनी खुद की बेटी पारर पड़ती तो मनो उसका लुंड एक झटका खता और रामलाल को अहसास करता की कैसे उसने दिन में किसी और की बेटी को खुद की बेटी समझ कर उसका मुखछोडन किया था

खैर जल्द hi सब खाना खा लेते है और सब

आज रामलाल आया था तो उसे बहार नहीं सुला सकते थे

मल्टी बर्तन धोने में लग्ग जाती है

मेघा रेखा और कम्मो को अंदर बुलाती है और आज दोनों को hi कमरे में सोने के लिए बोलती है ताकि बहार रामलाल सो सखे

रेखा तो आज कुछ और hi सोच कर बैठी थी पर मेघा दीदी की बात सुन्करर वो भी मुह्ह बनती हुई हां कर देती है

जल्द hi मेघा दीदी मल्टी को भी समझा देती है की आज उसे अपने बापू के साथ hi सोना पड़ेगा

बाप बेटी एक साथ सो सकते थे शायद यही सोच कर मेघा ने मल्टी को ऐसा बोलै पर मेघा दीदी की बात सुनने के बाद से hi मल्टी का दिल जोरो से धड़क रहा था

आखिर कर मल्टी भी हां कर देती है

अबतक सारा काम हो चूका था

मल्टी जानती थी की उसके बाप को खाने के बाद चाय पिने की आदत है

जल्द hi वो सबके लिए चाय बना देती है और कमरे में जाकर सबको चाय देदेती है

और जब वो रामलाल को चाय देने जाती है तो झुकने के साथ hi उसका पल्लू निचे सरक जाता है और इस बार अच्चानक से रामलाल की नजरो के सामने उसकी बेटी की गुदाज चूचिया आ जाती है मनो वो अभी ब्लाउज फाड़ कर बहार आना कहती हो

मल्टी अपने बाप की नजरे भाप चुकी थी

वो तुरंत hi अपने आपको संभालती हुई खड़ी होती है और जब उसकी नजर रामलाल की धोती पर पड़ती है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगता है

मनो मल्टी को अंदेशा हो चूका था की अब उसकी दुनिया पलटने वाली है

मल्टी सबके बर्तन समेत लेती है और कुछ देर कमरे में hi मेघा दीदी के पेअर दबाने के बाद वो बहार आती है

झा उसे अपने बापू के साथ आज की रात गुजारनी थी .....
 
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