Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 16 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-143

कुछ देर तक्क मल्टी मेघा दीदी के पैरो की मालिश करती रही और जब उसे लगा की मेघा दीदी सो चुकी है तो वो एक नजर रवि की और डालती है जो उसे hi देख रहा था

रवि मल्टी को आँख मरता हुआ अपना लौड़ा पकड़ कर उसे धोती के ऊपर से hi दिखता है जोकि पूरी तरह खड़ा था

मल्टी आँखे फाड़ फाड़ कर रवि का लुंड देख रही थी

इधर मेघा और कम्मो दोनों hi सो चुकी था

रेखा की भी आँखे बंद थी शायद वो भी नींद की आगोश में जा चुकी थी

रवि मल्टी को देखता हुआ अपनी दिति सरका देता है और उसका विशाल लुंड एकाएक दिति के बहार आ जाता है

रवि का लुंड देख कर मल्टी की आँखों में एक अलग hi चमक थी

एक झटके के साथ रवि पीछे होता है और अपने लुंड को रेखा की गांड में टच करता हुआ

एक झटके में hi पेटीकोट के ऊपर से hi उसकी गांड में ठूसने लगता है

और अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर सोढा रेखा की एक चुकी पर रख देता है

यह नजारा देख कर मल्टी की छूट पनिया गयी थी अभी कुछ और होता उससे पहले hi मेघा दीदी खासते हुए रवि की तरफ करवट बदल ले लेती है

रवि अपना हाथ रेखा की चुकी से हटा लेता है पर उसका लुंड अब भी उसकी दीदी की गांड में कहि गम था

न कहते हुए भी मल्टी उठ कर बहार निकल जाती है

रवि का लुंड देखने के बाद से hi मल्टी का मन कर रहा था की उस लुंड की सवारी करे

पर अभी ुए मुमकिन नहीं था

मल्टी सीधा बहार निकल जाती है

और अपनी गर्मी शांत करने के लिए वो थोड़ा पानी पीती है

मल्टी की हालत ऐसी थी की उसके हाथ पॉव कप्प रहे थे

जिसकी वजह से आधे से ज्यादा पानी उसकी चूचियों पर गिर चूका था

पानी की वजह से मल्टी का पतला सा ब्लाउज पूरी तरह भीग गया था और उसकी बड़ी बड़ी चूचियों पर लगे उसके शानदार निप्पल साफ़ नजर आने लगे थे

पर मल्टी को इस बात का बिलकुल भी ध्यान नहीं था वो जैसे तैसे अपने आपको शांत करती हुई अपने बिस्तर तक्क पहुँचती है

झा उसका बापू पहले hi खत पर लेट चूका

मल्टी को लगा की रामलाल सो चूका है वो चुपचाप अपनी शादी को खोलती हुई अलग कर देती है

जैसे hi मल्टी शादी को निकलती है वैसे hi रामलाल उठ कर बैठ जाता है

उसकी नजर सबसे पहले अपनी बेटी की तनी हुई चूचियों पर पड़ती जोकि साफ नजर आ रही थी

मनो मल्टी ने ब्लाउज पहना hi न हो

जब मल्टी अपने बापू की नजरो का पीछा करती है तो उसकी सांसे मनो उसके गले में hi अटक जाती है

अच्चानक से रामलाल को याद आता है की जिसकी चूचियों को वो ाआँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा है वो और कोई नहीं उसकी खुद की बेटी है

अच्चानक से रामलाल अपनी नजरे हटा लेता है

पर उसका दिल तो अब भी कार्र रहा था की अपनी बेटी की रसभरी चूचियों का सारा रस निचोड़ ले

मल्टी- क्या हुआ बापू आओ सोये नहीं

रामलाल- बेटी मुझे पेशाब लगी है वही सोच रहा था की खा जाऊ

मल्टी को भी अंदाजा हो चूका था की उसके निप्पल साफ़ नजर आ रहे है और शायद उसके बापू की नजर गलती से hi उसकी चूचियों का दीदार कर गयी

मल्टी- अरे बापू इसमें सोचना क्या है बहार जाकर कहि भी मुट्ठ लो

रामलाल- बेटी मेरी बेटी की ससुराल है न इसलिए सब कुछ सोच समझ कर करना पड़ता है

मल्टी- अरे बापू इतना मैट सोचो चलो मैं ले चलती हु आपको

आगे बढ़ते हुए मल्टी रामलाल का हाथ पकड़ लेती है

आज पहली बार था जब खुद की hi बेटी के स्पर्श से रामलाल के लुंड और शरीर में एक अलग प्रकार का झटका लगा था

आगे आगे मल्टी और पीछे पीछे रामलाल दोनों घर के बहार निकल आते है

मल्टी- जाओ बापू वह मुट्ठ लो

रामलाल आगे बढ़ता हुआ अपना आधा खड़ा लुंड धोती से निकलता है और मूतने लगता है

मल्टी दूसरी तरफ मुँह घुमा कर खड़ी थी पार उसके कानो में उसके बाप की मूतने की आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी

और पता नहीं क्यों मल्टी को भी आज ये आवाज सुनने में काफी मजा आ रहा था

कुछ देर में रामलाल मुट्ठ लेता है

और वापस से अपनी बेटी के पास आता है

रामलाल- चले बेटी हो गया मेरा

मल्टी- आप घर में चलो बापू मुझे भी भीत जोरो की पेशाब लगी है मैं भी मुट्ठ कर आती हु

रामलाल- ठीक है बेटी मैं जाता हु

रामलाल घर की और तो बढ़ता है पारर उसका बड़ा मैं था की अपनी बेटी को मूतते हुए देखे

दरवाजे के पास पहुंच कर अच्चानक से रामलाल ृक्क जाता है और जैसे hi पीछे पलट कर देकता है वो नजारा देख कर उसका लुंड मनो एक झटके के साथ hi पूरा खड़ा हो जाता है

मल्टी दूसरी तरफ मुँह घुमा कर बैठी मुट्ठ रही थी

चांदनी रौशनी की वजह से रामलाल को उसकी बेटी की गद्देदार गांड साफ़ नजर आ रही थी

पर लुंड खड़ा होने का असली कारन वी नहीं था

असल में चाँद की रौशनी में मल्टी की मुट्ठ की चमचमाती धरर भी रामलाल को साफ़ नजर आ रही थी

रामलाल का मैं तो कर रहा था की अभी जाकर अपनी के निचे बैठ जाये और जो अमृत उसकी छूट से निकल रहा है उसे सीधा अपने मुह्ह में लेकर पी जाये

अच्चानक से मल्टी उठ जाती है और रामलाल की गांड फट जाती है

वो तुरंत अंदर की और भागता है और जैसे तैसे अपनी उखड़ी हुई सांसो को काबू करता हुआ खत पर लेट जाता है

पर कम्बख्त रामलाल का लुंड उस नजारे को देखने के बाद से hi बैठने का नाम नहीं ले रहा था.....
 
अपडेट-144

रामलाल की सांसे थमने का नाम नहीं ले रही थी

जो कुछ उसने थोड़ी देर पहले देखा था

रह रह कर वही सीन उसके दिमाग में घूम रहा था

नीलम के साथ उसने जो कुछ किया था उसके बाद से hi उसका अपनी बेटी की तरफ खिचाव बढ़ गया था

उसका दिल तो कर रहा था की अभी अपनी बेटी को जाकर दबोच ले और उसे बता दे की उसका खुद का उसकी छूट से निकल रहा गरम पिशाब पीना कहता है और अपनी hi बेटी की सवारी करना कहता है

अच्चानक से कमरे का दरवाजा खुलता है और रवि बहार आजाता है

जैसे hi रामलाल की नजर रवि पारर पड़ती है वो तुरंत अपनी आँखे बंद कर लेता है

रवि एक नजर रामलाल पर डालता है जोकि अपनी आँखे बंद किये पड़ा था पारर उसकी तेज सांसे रवि को साफ़ साफ़ इशारा कर रही थी की वो जगा हुआ है

रवि चेहरे पर एक मुस्कान लिए मैं दरवाजे की तरफ बढ़ता है

रामलाल उसके पैरो की आवाज को सुनकर अपनी आँखे खोल कर उसे देखने लगता है

अभी तक्क रामलाल को यही लग रहा था की रवि पेशाब करने जा रहा है

रवि दरवाजे पर hi खड़ा था मनो उसे पता हो की रामलाल उसे hi देख रहा है

जैसे hi मल्टी दरवाजे के अंदर घुसती रवि उसे अपनी बहो में दबोच लेता है

यह नजारा देख कर तो मनो रामलाल को एक झटका सा लगता है

मल्टी रवि की गिरफ्त में आते hi छटपटाने लगती है

ऐसे नहीं था की वो खुद को रवि से बचना कहती थी

बास उसे डर था क्योंकि वो जानती थी की इसी कमरे में उसका बाप भी सोया हुआ है

रवि एक हाथ पीछे करता हुआ सीधा मल्टी की गद्देदार गांड मसलने लगता है

रवि जनता था की रामलाल पर इन सब चीज़ो का क्या असर होगा

कुल मिलकर रवि एहि कहता था की आज की रात रामलाल भी बेटीचोद बन्न जाये

रवि के हमले लगातार तेज होते जा रहे थे

मल्टी बेचारी बिन पानी की मछली के जैसे तड़पती हुई लगातार अपने बाप को hi देख रही थी

इधर रवि एक हाथ से अपनी भाभी की चुकी मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूचियों को मसल रहा था

मल्टी कुछ नहीं बोल रही थी बस अपनी सिसकियों पर काबू किये हुए रवि के हाथो की कटपुतली बनी हुई थी

रवि अपने होठ सीधा मल्टी के होठो पारर रख देता है और जी भर करे मल्टी के रसीले होठो का रस पिने लगता है

यह नजारा देख कर रामलाल का लुंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था

इधर रवि लगतरर मल्टी के होठो को चूसते हुए उसकी गांड को दबा रहा था

अच्चानक से रवि अपनी धोती को निकल देता है और उसका खड़ा लुंड सीधा मल्टी की छूट को पेटीकोट के ऊपर से hi ठोकर मरने लगता है

मल्टी को ये तकिन हो चूका था की उसका बूढ़ा बाप अब सो चुका है

मल्टी भी एक हाथ आगे बढ़ती हुई रवि का लुंड थम लेती है और अपने देवर के लुंड की लम्बाई और मोटाई को महसूस करके लम्बी लम्बी सबसे खींचने लगती है

रवि ज्यादा देर नहीं करना कहता था क्योंकि उसे डर था की कहि उसकी कोई दीदी उसे ढूंढती हुई बहार न आ जाये

तुरनत hi रवि मल्टी को पलट कर दरवाजे की तरफ कर देता है

और उसके कंधो को निचे दबाता हुआ उसे निचे बैठा देता है

मल्टी अपनी पोजीशन जानती रही

वो भी अपने घुटने मोड़ती हुई निचे बैठ जाती है

रवि आज कोई भी रेहम करने के मुद में नहीं था

रवि एक हाथ से मल्टी के बाल पकड़ता हुआ दूसरे हाथ से उसके मुँह को पकड़ता हुआ सीधा अपने लुंड की सिद्ध में करता है और अपने लुंड को हवा में लहराता हुआ मल्टी के मुलायम गलो पारर रगड़ने लगता है

मल्टी इतनी गरम हो चुकी थी की जब जब रवि का लुंड उसके होठो के पास आता वो अपना मुँह खोल कर उसे अंडरर लेने की कोशिश करती

रवि को अपनी भाभी का यह रंडी पना देख कर बड़ी हसी आ रही थी

इस बार रवि अपने लौड़े को उसके होठो कलपर रगता हुआ सीधा मल्टी के मुँह में सरका देता है

मल्टी भी बिना किसी नाटक के अपना मुँह रवि के लुंड के लिए खोल देती है

अभी आधा लुंड hi मल्टी के मुह्ह में गया था

मल्टी का गार्डन मुह्ह रवि को एक अलग hi मजा दे रहा था

मल्टी के जिस्म की hi तरह उसका थुक्क भी काफी गरम था

रवि एक नजर रामलाल की तरफ देखता है और मुस्कुराने लगता है

इस बार तो रामलाल को भी ऐसा लगता है की मनो रवि जनता हो की वो जगा हुआ है और सब कुछ देख रहा है

आज दिनभर में रामलाल यह तो जान चूका था की रवि कितना कमीना है

पर वो यह नहीं जनता था की रवि कमीना hi नहीं बल्कि कमीनो का सरदार है

रवि एक झटके के साथ अपना लुंड सुपडे तक्क बहार खींचता है और बिना किसी चेतावनी के एक झटके के साथ अपना आधे से ज्यादा लुंड मल्टी के गले तक्क उतार देता है

इस झटके के साथ hi मल्टी का शरीर अकड़ सा जाता है आखिर एक मोटा तजा लुंड उसके गले में उतारर चूका था

रवि बिना देर किये मल्टी की ठुड्डी को पकड़ता हुआ सीधा करता है और एक के बाद एक जोरदार झटको के साथ अपनी भाभी का मुखछोडन करने लगता है

रवि के झटके लगातार बढ़ते hi जा रहे थे वो मल्टी को किसी रंडी की तरह अपना लुंड चूसा रहा था

मल्टी के मुँह से थुककक नुचे गिरर्र रहा था और उसकी आवाजे पुरे कमरे में गुंजरहि थी

घ्हुउउउउउहुहू

Guuuuuuuguuuuuuuuuu.....

जब रवि अपना पूरा लुंड मल्टी के मुँह से बाहर निकलता तो एक थूक की मोती धार निचे गिरने लगती

रामलाल को अब अपनी बेटी की हालत देख कर उसपर तरस आ रहा था

पर इस वक़्त हालत ऐसे थे की रामलाल अपनी बेटी को बचने के लिए कुछ कर भी नहीं सकता था

करीब 15 मिनट तक रवि लगतरर मल्टी के मुह्ह को छोड़ता रहता है

और आखिर में रवि का लुंड मल्टी के रसभरे गरम मुह्ह के सामने हर्र जाता है

रवि तूअंत अपने लुंड को मल्टी के मुँह के बहार खींचता है

और अपने गीले लुंड को पकड़ कर हिलने लगता है

मल्टी अब भी मुँह खोले उस ज्वाला मुखी के फटने का इन्तजार कर रही थी

आखिर कार ज्वालामुखी फटता है और सारा का सारा वीर्य धुरे धीरे करके मल्टी के पुरे चेहरे पर फाइल जाता है

रामलाल को अपनी बेटी का यह रान्दीपना देख कर एक अलग hi मजा आ रहा था

यह नजारा देख कर रामलाल का लुंड फटने को उतारू हो चुका था

आखिर कार रवि के लुंड से आखिर बून्द भी मल्टी के चेहरे पर गुर जाती है

रवि और मल्टी दोनों hi लम्बी लम्बी सांसे खींच रहे थी

मल्टी आगे बढ़ती हुई चाट चाट कर रवि का पूरा लुंड साफ़ कर देती है

रवि मल्टी के गले को दबाता हुआ उसके गाल पर एक छप्पड़ जड़ देता है

रवि- तुझे छोड़ने में तो मजा आ जायेगा भाभी तू एक दम किसी रंडी के जैसा मजा देती है

रवि की आवाज इतनी तेज थी की रामलाल भी साफ़ सुन्न सकता था

आखिर में रवि मल्टी को उसी हालत में कॉड कर अपनी धोती लपेटता हुआ कमरे की तरफ बढ़ने लगता है और जाते जाते भी रामलाल की तरफ देख कर मुस्कुराता हुआ अंदर चला जाता है

मल्टी वही बैठी हुई अपनी सांसो को डिरिसत कर रही थी उसका पूरा चेरा अब भी उसके देवर के वीर्य से सना हुआ था

अपनी बेटी की हालत देख कर रामलाल का मैं तो कर रहा था की अभी जाकर अपनी बेटी को अपना लुंड वैसे hi चुसये जैसे रवि ने चुसाया था

पर आखिर कर वो उसका बाप था

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भाई गजब के विचार है आपके

आपका कमेंट पढ़ते पढ़ते मुझे सच में हसी आ गयी

आपतो भविस्यवादी कर रहे है वो भी कहानी की

गजब के आदमी हो यार तुम

अगर इतनी hi दिक्कत है तो मत पढ़ो कहानी

सबसे बड़ी बात तो ये है की यह कहानी मेरी है और मेरा जैसे मन करेगा मई वैसे hi लिखूंगा

तो कृपया आप मेरी कहानी से दूर रहे और अपने विचार अपने पास रखे

धन्यवाद्...
 
अपडेट-145

मल्टी की सांसे अब कुछ हद्द तक्क उसके काबू में आ चुकी थी

वो बेचारी चुप चाप उठ कर बहार जाती है और अपने मुँह पर लगा वीर्य साफ़ करके वापस आ जाती है

अंदर पहुंच कर जैसे hi वो दरवाजे को बंद करती है रामलाल तुरंत hi आँखे बंद कर लेता है

पर उसका लुंड अब भी पूरी तरह तन्ना हुआ था

मल्टी अंदर आकर एक नजर अपने बापू पर डालती है

मल्टी को डर था की कहि उसकी मुहचुड़ै को उसके बाप ने देख न लिया हो

मल्टी अपने एक हाथ से रामलाल को हिलती हुई 2-3 बार बापू बापू पुकारती है

रामलाल जो का त्यों पड़ा रहता है

अबतक मल्टी को यकीन हो चूका था की उसका बाप सो चूका है

अब मल्टी भी निश्चिंत होकर खत पर hi अपने बापू के बगल में लेट जाती है

पहले तो वो रामलाल की पीठ की तरफ hi मुह्ह करके लेटती है

पर जैसे hi वो इस पोजीशन में लेटती है उसकी गुदाज चूचिया सीधा रामलाल की छाती पर टकराती है

रामलाल को तो मनो ऐसा लगता है की किसी ने उसकी पीठ पर स्पंज से भरे हुए 2 गुब्बारे रख दिए हो यह अहसास रामलाल को पागल किये जा रहा था

रामलाल का लुंड लगातार झटके खा रहा था कुछ देर मल्टी ऐसे hi लेती रहती है और अंतत में वो दूसरी तरफ पीठ करके लेट जाती है

जिससे उसकी गांड सीधा रामलाल की गांड से चिपक जाती है

मल्टी की गांड भी गद्देदार थी

कुल मिलकर रामलाल के तो मजे hi मजी थे

अपनी hi बेटी की गांड से निकल रही गर्मी लगातार रामलाल का बदन पिघलने में लगी हुई थी

उस गर्मी को महसूस करके रामलाल को अंदाजा हो चूका था की उसकी बेटी की टैंगो के बिच कोई भट्टी जल रही है जिसकी आंच बढ़ती hi जा रही है

थोड़ी hi देर में मल्टी सो जाती है

रामलाल जनता था की उसकी बेटी को साइट समय नाक बजाने की आदत है

और बस वो उसी आवाज के आने का इन्तजार कर रहा था

आखिर कर मल्टी के खरातो की आवाज आना शुरू होती है

यह अव्वज सुन्न कर रामलाल के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान आ जाती है

मनो आज वो भूल गया हो की वो मल्टी का बाप है

करीब 10 मिंट तक्क इन्तजार करने के बाद रामलाल हिम्मत करता है और धीरे धीरे सरकता हुआ दूसरी तरफ करवट बदल लेता है

इस बार रामलाल का लुंड सुधा उसकी बेटी की गांड की दरार में जा फास्ट है

मल्टी के खरातो की आवाज जो की त्यों थी

पर रामलाल का पूरा शरीर काँप रहा था

उसका लुंड अब सीधा मल्टी की गांड से निकल रही गर्मी को महसूस कर रहा था

रामलाल की सांसे इतनी तेज थी की मल्टी के खरातो की आवाज को भी पीछे छोड़ गयी थी

रामलाल थोड़ी और हिम्मत करता है और अपने लुंड को थोड़ा और आगे की और दबाता हुआ अपनी बेटी की गद्देदार गांड में ठूसने लगता है

रामलाल का लुंड भी काफी मोटा था

इस हमले से मल्टी कुड़बुड़ाती हुई थोड़ा सा हिलती है और रामलाल तुरंत hi आँखे बंद करके वैसे hi लेट जाता है

कुछ देर बाद रामलाल अच्चानक से उठता है और घर से बहार निकल जाता है

उसका लुंड जो का त्यों खड़ा था

थोड़ी देर टहलने के बाद वो वापस से घर में आता है और धीरे से दरवाजा बंद करने के बाद सीधा अपनी बेटी के सामने आ जाता है

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रामलाल का लुंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था

वी एक नजर अपने बेटी पारर डालता है जो बिलकुल बेसुध यदि हुई थी इस बात से अनजान की उसका hi बाप उसे भोगने की नजर से देख रहा है

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रामलाल से रहा नहीं जाता और वो अपना हाथ आगे बढ़ता हुआ मल्टी की गुडाज्ज़ चूचियों को छुऊं लेता है

अपनी hi बेटी के बदन को इस तरह चुने से रामलाल को एक अलग hi रोमांस महसूस हो रहा था

उसे जितना डर लग रहा था उतना hi मजा आ रहा था

इस बार रामलाल की नजर अपनी बेटी के रसीले होठो पारर पड़ती है जिन्हे देख कर वो उनका रस पिने के लिए पागल हुआ जा रहा था

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मल्टी की मांग में सजा हुआ सिंदूर उसके माथे ओर लगी हुई बिंदी और उसके रसीले होठो को चमकती हुई लाल लिपस्टिक उसे एक अलग hi रुप्प दे रही थी

रामलाल अपनी बेटी की चुकी से लेकर उसके चेहरे तक्क अपने हाथो को चला रहा था

उसके दिमाग में सिर्फ यही सब बाटे चल रही थी की जिस बेटी को उसने इतने लाड प्यार से पल कर बड़ा किया वो अब बड़ी होकर कितने बड़े बड़े लुँडो से खेल रही है और उसका शरीर तो मनो अपने hi बाप को उसका गुलामं बना रहा हो

रामलाल का हाथ अब तक्क अपने लुंड को मसलना शुरू कर चूका था

रामलाल आगे की और झुकता हुआ अपनी जीभ निकाल कर मल्टी के दोनों होठो को चाट लेता है

होठो की मिठास पाकर रामलाल मस्त हो जाता है और इस बार वो सीधा खत के पास बैठते हुए दुबारा से अपनी जीभ अपनी hi बेटी के होठो ोाररर है लगा देता है और पुरे जोश के साथ अपनी बेटी के होठो पर लगी मिठास को चाटने लगता है

उसका एक हाथ अब भी लगातार उसका लुंड मुठिया रहा था

रामलाल बे चाट चाट कर अपनी बेटी के होठो को पूरी तरह भीगा दिया था इस बार रामलाल खड़ा होता है और अपने लुंड को पकड़ता हुआ सीधा अपना सूपड़ा मल्टी के होठो ओर लगा देता है

पहले hi वो अपनी बेटी के होठो को चूस चूस कर गिला कर चूका था

गीलेपन की वजह से उसका सूपड़ा मल्टी के होठो पर लगते hi एक अलग तरह का मजा देता है

रामलाल अपने सूपड़ा को लगातार मल्टी के होठो पर रगड़ रहा था उसका मैं तो कर रहा था की अभी अपनी बेटी का मुह्ह खोल कर अपना लुंड सीधा उसके मुह्ह में ठुस्स्स दे पर आखिर वो उसका बाप था

करीब 10 मिंत्तत तक्क रामलाल ऐसे hi अपने लुंड को मल्टी के होठो से लेकर पुरे चेहरे तक्क घूमता रहता है

गीलेपन की वजह से अब मल्टी का पूरा चेहरा थुक्क से संन्न गया था

इस बार रामलाल को लगता है की अगर वो नहीं रुका तो उसका पानी निकल जायेगा और बस इसी डर से वो ृक्क जाता है

रामलाल अपनी जगह पर वापस आकर लेट जाता है और इस बार वो अपनी पीठ को अपनी बेटी की तरफ किये हुए था

करीब 10 मिंट ऐसे hi बीतत जाते है

उसका लुंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था

उसका जोश पहले से ज्यादा हो चुका था

एक बार फिरै रामलाल अपनी बेटी की गदराई जवानी पर डाका डालने के लिए उसकी और पलटता है

मल्टी के बदन की गर्मी लगातार बढ़ती hi जा रही थी जो न कहते हुए भी उसके बाप को उसके साथ वो सब करने पर मजबूर कर रही थी

इस बार रामलाल की हिम्मत पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ चुकी थी

रामलाल पूरी तरह मल्टी से चिपक जाता है और अपने लुंड को सीधा मल्टी की गरमा गरम गांड से चिपका देता है

मल्टी की गांड इतनी बड़ी और छोड़ी थी की देखते hi देखते रामलाल का आधा लुंड उसकी बेटी की गांड की गहराइयो में खो जाता है

इस बार रामलाल रुकने के मदद में नहीं था रह रह कर उसके दिमाग में वही सीन घूम रहा था की कैसे उसकी बेटी के hi देवर ने जबरदस्त तिरके से उसके मुह्ह की चुदाई की और आखिर में अपने लुंड से निकली साडी मलती उसकी बेटी को छटा कर वापस चला गया

अब रामलाल को खुद की बेटी किसी रंडी की तरह लग्ग रही थी जिसकी जिंदगी में सिर्फ एक hi मकसद होता है मोठे मोठे लुँडो को शांत करना

बिना देर किये रामलाल सीधा अपनी बेटी के जोबन पर डाका डालता है और अपने हाथ को आगे बढ़ता हुआ जबरदस्त तरिके से मल्टी की एक चुकी को दबोच लेता है

आज पहली बार रामलाल को अंदाजा हुआ था की उसकी बेटी की चूचिया कितनी विशाल और गुदाज है

इनके सामने तो वो साडी रंडिया फ़ैल थी जिन्हे आज तक्क उसने छोड़ा था

अब रामलाल की इच्छाएं बढ़ती hi जा रही थी वो लगातार मल्टी की चुकी को दबाता हुआ अपने लुंड को उसकी गांड में आगे पीछे करने में लगा हुआ था

अगर मल्टी ने पेटीकोट नहीं पहना होता तो शायद आज उसका खुद का hi बाप उसकी छूट को छोड़ कर बेटीचोद बन्न जाता

और अगर इतनी गदराई बेटी सामने सोई होतो कोई बाप कैसे खुद को रोक सकता है बेटी छोड़ बनने से

अब रामलाल की उंगलिया अपनी बेटी के ब्लाउज के हुक्स को खोलने लगी थी

धीरे धीरे करके वो सरे हक्क खोल देता है

बस अफ़सोस यह था की मल्टी ने अंदर ब्रा पहनी हुई थी जोकि वो हमेशा पहना करती थी

रामलाल यह बात अच्छे से जनता था

रामलाल पूरी ताक़त से अपने लुंड को मल्टी की गांड में दबा रहा था और अपने बेटी की गर्दन को चाटता हुआ उसकी चूचियों के साथ खेल रहा था

गर्मी के कारण मल्टी अब तक पूरी तरह पसीने में भीग चुकी थी

खुद की hi बेटी के पसीने का नमकीन स्वाद साख कर रामलाल मनो पागल हो चुका था

वो बिना किसी दर के अपने लुंड को लगातार आगे पीछे करता हुआ अपनी बेटी के गदराये जिस्म का पूरा लुफ़्त्त उठा रहा था

वो इतनी तेजी के साथ सब कुछ कर रहा था की मल्टी के चेहरे के एक्सप्रेशन लगातार बदल रहे था

मल्टी गहरी नींद में भले hi थी पर उसे भी ऐसा लग रहा था की वो सपना देख रही है और सपने में hi अपने गदराये जिसमे को किसी मर्द से मसलवा रही है

शायद मल्टी के सपनो में रवि था

पर वो बेचारी खा जानती थी की असल में खुद hi उसका बाप उसके गदराये जिस्म को मसल मसल कर अपने लुंड की प्यास बुझाना कहह रहा है

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करीब 10 मिनट और ऐसे hi अपनी बेटी को मसलने के बाद रामलाल पागल सा हो गया था

अबतकक मल्टी की छूट भी इतना पानी छोड़ चुकी थी की उसका पेटीकोट गिला होकर उस पानी को सीधा उसके बाप के लुंड तक्क पहुंचा रहा था

इस मजी को रामलाल और बर्दास्त नहीं कर पाया और आख़िरकार वो हफ्ता हुआ झड़ने लगता है

रामलाल जोश में यह भी भूल चूका था की वो सारा का सारा वीर्य सुधा अपनी बेटी की गांड की गहराइयो में गिरा रहा है

रामलाल के लुंड से निकली आखिर बून्द तक्क मल्टी के पेटीकोट को भीगती हुई सीधा उसकी छूट और गांड को भीगा रही थी

आखिर कर रामलाल का जोश कुछ हद्द तक ठंडा हो चूका था

वो बिचारा बुद्धा इस बार इतना थक्क गया था की वैसे hi अपने बेटी की चुकी को थामे हुए उसकी गांड में लुंड ठुसे न जाने कबबब सो जाता है ......

हैप्पी नई ईयर दोस्तों
 
अपडेट- 146

रात भर रामलाल अपनी बेटी की hi बेटी की गद्देदार गांड को अपने लुंड का तकिया बनाये उसमे सोया रहा

मल्टी अब भी गहरी नींद में सोई हुई थी उसी अवस्था में उसका ब्लाउज अब भी खुला हुआ था उसकी चूचिया अब भी उसके बापू के हाथो में थी

सुबह के 4 बजे रोज की तरह मल्टी की आँख खुल जाती है

पहले तो वो आआँख खोल कर बंद कर लेती है पर जब उसे अंदाजा होता है की उसकी गांड में कोई मोती चीज़ फसी हुई है तो आच्चंक से उसकी आँखे बड़ी हो जाती है

मल्टी की धड़कने अचानक से बढ़ गयी थी शायद उसे अंदाजा हो गया था की वो चीज़ क्या है उसका पूरा बदन कम्पनी लगा था क्योंकि वो जानती थी की वो जिसके साथ सोई है वो और कोई नहीं बल्कि उसका खुद का बाप है

रामलाल इस बात से निश्चिंत होकर चैन की नींद सोया था

मल्टी को जब अपनी चूचियों पर रामलाल का हाथ महसूस होता है तो वो एक नजर अपनी hi चूचियों को देखती है जोकि पूरी तरह उसके बाप की गिरफत में थी

मल्टी की सांसे लगातार तेज होती जा रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे

अबतो मल्टी को यह भी डर था की कहि कोई बाजार आकर उसे अपने hi बाप के साथ इस हालत में न देख ले

मल्टी एक हाथ से रामलाल की मजबूत पकड़ को अपनी चूचियों पर से छुड़ाने की कोशिश करती है

पर शायद अब उसका बाप अपनी बेटी पर पूरा अपना पूरा अधिकार जमाने के मकसद से hi उसकी चूचियों को पकड़ कर सोया था.

मनो वो उसकी बेटी न हो बल्कि उसकी बीवी हो

जैसे तैसे मल्टी अपने बापू का हाथ अपनी चूचियों पर से हटाने में कामियाब हो जाती है

पर अभी मल्टी के सामने एक और समस्या सर उठाये खड़ी थी

वो थी उसके बाप का खड़ा लुंड जो अब भी उसकी गांड के बीचो बिच फसा हुआ था

मल्टी डर भी रही थी और कम्प भी रही थी

कहि न कहि उसे अपने बापू की ये हरकत गुस्सा भी दिला रही थी और उसकी छूट को पानी भने पर मजबूर भी कर रही थी

मल्टी जानती थी की जो कुछ भी रामलाल ने रात को उसके साथ किया वो गलत था

पर उसे ये तक्क अंदाजा नहीं था की खुद उसके hi बाप बे रात भर उसके साथ कितनी गन्दी गन्दी हरकते की थी

न कहते हुए भी मल्टी अपना हाथ पीछे ले जाती है और अपनी कमर को थोड़ा आगे धकेलती हुई

अपनी हथेली को सीधा अपने बाप के लुंड के करीब ले जाने लगती है

मल्टी को यह भी डर था की अगर उसका बाप जग्ग गया तो न तो वो कभी उससे नजरे मिला पायेगी और न hi रामलाल कभी अपनी बेटी से नजरे मिला पायेगा

कपट हाथो से आख़िरकार मल्टी अपने बाप के लुंड की जड़ को पकड़ लेती है और उसे कस कर थामे हुए वो अपनी गांड को बहार की और खींचने लगती है

रामलाल का वीर्य अबतक उसकी बेटी की दरार में था जिसकी वजह से लुंड फिसलता हुआ बहार आ जाता है

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मल्टी जल्दी hi अपने हाथ को हटा लेती है

और उठ कर सीधा बहार की और भाग जाती है

बहार पहुंचने के बार मल्टी के दिमाग में एक बात बार बार आ रही थी उसे एक बार तो अपने बाप का लुंड देख लेना चाहिए था

मल्टी जैसे तैसे अपने आप ओर काबू पति है और लोटे में पानी लेते हुए घर के बहार निकल जाती है

चलते समय उसे अपनी गांड को दरार में हो रही चिपचिपाहट साफ़ महसूस हो रही थी

पर अब तक्क वो यही सोच रही थी की शायद ये उसकी छूट से निकला पानी है जिससे उसका पेटीकोट भीग गया है

मल्टी घर के पिछवाड़े पहुंच कर अपने पेटीकोट उठा कर हगवास करने बैठ जाती है

इस बार मल्टी अपने एक हाथ को सीधा अपनी छूट पर रख देती है उसका मुआयना करने के लिए ओर जब उसकी एक ऊँगली उसकी गांड के छेद पर लगती है तो वह जमा जेल्लीनुमा पानी उसे अचम्भे में दाल देता है

मल्टी कोई बच्ची तो थी नहीं

उसे समझते देर नहीं लगती ये चीज़ क्या है

इस बार मल्टी अपनी दो उंगलियों को सीधा अपनी गांड के छेद पारर रख देती है और जमे हुए उस पानी को ाचे से अपनी गांड के छेद पर मल्टी हुई अपनी उंगलिया नाक के पास ले आती है

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अपनी उंगलियों पर लगा वो पानी सूंघने के बाद मल्टी का शकक यकीन में बदल जाता है उसकी आँखे बड़ी बड़ी हो जाती है

क्योंकि अब तक्क वो यही सोच रही थी की शायद काम जगह होने के कारन hi उसके बाप का लुंड उसकी गद्देदार गांड में जा फसा होगा

पर यह तो उसके बाप ने रात भर उसके जिस्म के साथ अपने अरमान पुरे किये थे

ये सोच कर hi मल्टी सेहम जाती है की उसका खिड़ का hi बाप उसे भोगना कहता है और अपनी hi बेटी की गांड और छूट पर अपने वीर्य की पिचकारी मार कर रात भर उससे चिपक कर सोया रहा

यही सब सोचती सोचती मल्टी हगवास करने लगती है और अंतत में वो जब्ब अपनी गांड धोती है तो अच्चानक से वो ऊँगली अंदर चली जाती है जिस पर उसके बाप का विरया लगा था

मल्टी- अह्ह्हह्ज बापू यह क्या क्या कुया तुमने रात भर अपनी बेटी के साथ

आखिर कर hi दिया तुमने अपनी hi बेटी को गंदा.......
 
अपडेट-147

मल्टी संडास करके घर के अंदर आ चुकी थी

अबतक रामलाल भी उठ चूका था पर उसके अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी की अपनी hi बेटी से नजरे मिला सके

असल में रामलाल को अंदाजा हो गया था की रात भर अपनी बेटी के साथ उसने जो कुछ किया वो गलत तो था hi पर वो मल्टी को उसी अवस्था में छोड़ कर सो गया था

अब रामलाल को पछतावा हो रहा था

इसलिए नहीं की उसने रात भर अपनी बेटी के साथ गन्दी गन्दी हरकते की

बल्कि पछतावा इस बात का था की उसने रात को वो सब करने के बाद मल्टी के कपडे ठीक क्यों नहीं किये

अंदर घुसते हुए मल्टी की नजरे सीधा रामलाल से मिलती है जो उसे देखते hi अपनी नजरे निचे झुका लेता है

मल्टी समझ जाती है की उसकी बाप की नजरे क्यों निचे हो गयी है

मल्टी नहीं छाती थी की उसका बाप रात हुई हरकत के लिए शर्मिंदा हो आखिर बेटी थी वो उसकी और उसपर रामलाल का सबसे ज्यादा हक्क था

मल्टी- क्या हुआ बापू इतने सुस्त सुस्त से बैठे हो

रामलाल- हाहा हां बेटी कुछ नहीं हुआ मैं तो बस ऐसे hi

मल्टी- ऐसे hi क्या यु मुँह लटकाये बैठे हो

अपनी बेटी के घर आये हो कोई खुसी नहीं है क्या आपको

अब मल्टी क्या समझ पति की खुस तो रामलाल बहुत था

आखिर उसने कल रात अपनी hi बेटी के जिस्म के साथ अपने दावे अरमान पुरे जो किये थे

अब रामलाल को भी लगने लगा था की मल्टी नार्मल बर्ताव कर रही है तो हो सकता है की रात को उसने उसके कपडे ठीक कर दिए हो पर रामलाल को याद नहीं है

रामलाल भी कुछ हद्द तक नार्मल हो जाता है

रामलाल- कुछ नहीं बेटी बास थोड़ी सी सुस्ती है और आज मैं फिरसे अपनी बेटी से दुर्र चला जाऊंगा न इसलिए थोड़ा उदास हु

रामलाल की बात सुनकर मल्टी को अच्चानक से झटका सा लगता है

मल्टी- क्यों चले जाओगे बापू तुम

रामलाल- अरे मेरी बच्ची मैं अपनी बेटी के ससुराल में एक रात रहा वही बहुत था इससे ज्यादा नहीं ृक्क सकता

रामलाल की बाटे अब मल्टी को मायूस कर रही थी

जाने के नाम से तो रामलाल भी खुस नहीं था पर वो झूटी मुस्कान के साथ मल्टी से बात कर रहा था

मनो वो अपनी बेटी का बसा हुआ घर देख कर बहुत खुस है

पर इस झूटी मुस्कान के पीछे सिर्फ और सिर्फ हवस भरी हुई थी

एक बाप की हवस अपनी बेटी के गदराये जिस्म के प्रति

मल्टी- नहीं बापू तुम आये और एक दिन रहे और अब जाने की बात कर रहे हो मैं नहीं जाने दूंगी तुम्हे

रामलाल अब एक अच्छा वाला बाप बनने का नाटक कर रहा था

रामलाल- समझा कर बेटी तेरी ससुराल है ये और मैं तेरा बाप

1 रात मैं अपनी बेटी के साथ रहा वही भट्ट था

मल्टी- पारर मुझे आपके साथ और रेट गुजारनी है बापू

अच्चानक से मल्टी को अहसास होता है की वो बातो hi बातो में कुछ ज्यादा hi बोल गयी

मल्टी की बात सुनकर रामलाल के भी कान खड़े हो जाते है

मल्टी तुरंत hi बात को संभाल लेती है

मल्टी- मतलब मुझे हर रोज आपने बापू के साथ रहना है

रामलाल- जिद्द नहीं करते बेटी तू मेरी बेटी है और मैं अपनी बेटी से मिलने फिरर आऊंगा तू चिंता मैट कर

बस तू चाय बना दे फिर मैं निकलता हु

मल्टी जानती थी की उसका बाप उसकी ससुराल मैं और नहीं रुकने वाला

पर सुबह हुई चीज़ो के बाद से hi मल्टी का मैं कर रहा था की वो अपने बापू के साथ और समय बिताये

मल्टी मायूसी के साथ कूल्हे पर चाय चढ़ा देती है

और लटका हुआ मुँह लेकर रसोई में hi बैठ जाती है

कीच 5-7 मिंट के बाद से अच्चानक से मल्टी के दिमाग में एक आईडिया आता है और वो दौड़ती हुई अपने बापू के पास पहुंच जाती है

रामलाल एक तक अपनी बेटी की गुदाज चूचियों को हिलता हुआ देख रहा था

मल्टी- बापू एक तरीका है

रामलाल- क्या तरीका है बेटी

मल्टी- मतलब एक तरीका है जिससे हम दोनों कुछ और पल साथ रह सकते है

मल्टी की बात सुन्करर रामलाल के चेहरे पर एक आश्चर्य साफ़ नजर आ रहा था की आखिर उसकी बेटी दोनों के साथ रहने पर इतना जोर क्यों दे रही है

पर वो बेटी थी रामलाल की तो हो सकता है ये बाप बेटी वाला प्यार हो या बाप बेटी वाली प्यासस

ये तो अब आने वाले समय में hi पता चलने वाला था

रामलाल- मतलब साथ रह सकते है मैं तेरी बात समझा नहीं बेटी

मल्टी- अरे बापू मतलब मुझे अपने बापू की सेवा करनी है देखो तो मेरे यह आने के बाद से तुम कैसे सुख गए हो वो गंजेड़ी हरी तो दिन भर नशा करके पड़ा रहता होगा और तुम अकेले क्या कहते पिटे हो पता नहीं

रामलाल- पूरी बात बता बेटी

मल्टी- पूरी बात यह है की मैं मेघा दीदी से बात कर लुंगी और मैं भी आपके साथ घर चलती हु

रामलाल- ये क्या बोल रही है बेटी तू अपनी ससुराल छोड़ कर तू वह मेरे साथ रहेगी लोग. क्या बोलेंगे और फिर तेरे ससुराल वाले क्या बोलेंगे

मल्टी- अरे बापू तुम लोगो की छोड़ो और रही बात ससुराल की तो यह सब लोग बहुत अच्छे है

रामलाल - पर क्या तेरी मेघा दीदी तेरी बात मानेंगी

मल्टी- वो सब तुम अपनी बेटी पारर छोड़ दो बापू

इतना बोलकर मल्टी अपनी गांड को मटकती हुई अंदर की और जब लगती है

रामलाल ( वहहह बेटी वह अब तो लगता है की तेर ये बाप दिन रात तेरी गांड में मुह्ह डेल पड़ा रहेगा )

मल्टी की बातो से रामलाल अंदर hi अंदर बूत खुस था और उसकी ये खुसी उसके चेहरे से साफ़ जहलक रही थी........

दोस्तों अब ये मत बोलना की रवि से बिना चोदे hi मल्टी को वापस भेज रहे हो

यह भी कहानी का एक हिस्सा है और रही बात आगे की तो अभी कहानी बहुत लम्बी है ........
 
अपडेट-148

मल्टी अब तक मेघा दीदी को मना चुकी थी

मेघा ने भी ज्यादा न नुकुर नहीं की क्योंकि अभी घर के कामो के लिए कम्मो और रेखा तो थी hi और न तो घर hi इतना बड़ा था

मेघा ने यही सोच कर है करदी की एक बेटी अपने बाप के साथ कुछ समय बित्नना कहती है उसे तो ये सबजगया नहीं मिला तो आखिर वो मल्टी से उसका हक़्क़ कैसे छीने

पर मेघा दीदी खा जानती थी की ये दोनों बाप बेटी हवस के नशे में पूरी तरह डुब्ब चुके है

रामलाल के साथ जाने की खुसी मल्टी को कुछ ज्यादा hi थी पारर अब कहि न कहि रवि को बुरा लग्ग रहा था

पर इस बात की खुसी भी थी की अब वो और उसकी दिदिया फिरसे घर में अकेली है और वो अपने घर में तांडव मचने के लिए अब पूरी तरह आजाद था

न कोई बहार वाला न hi कोई शर्म

उसकी साडी दिदिया अब तक्क उसके मनसूबे जान चुकी थी

खैर रेखा तो पहले से hi रवि के लुंड के इशारो पारर नाचती थी अब उसे मेघा और कम्मो को भी अपनी दीदियो से दसिया बनाना था

मल्टी जल्द hi तैयार होकर कमरे से बहार आ चुकी थी

मल्टी एक लाल जोड़े में किसी नई नवेली दुल्हन की तरह सजी हुई थी गलो पे लाली

होठो पर लाल सुर्ख लिपस्टिक

आँखों में काजल

मांग में सिंदूर

आखिर ये उसकी ससुराल से पहली बार विदाई जो थी

अपनी hi बेटी को देख कर आज पहली बार रामलाल का ईमान दोल गया था

रवि से खुंदक में पहले hi खेतो पारर चला गया था

इधर मेघा और कम्मो मल्टी की विदाई के लगी हुई थी

रेखा भी रवि के लिए खाना लेकर खेतो की और निकल जाती है

अंतत में रामलाल अपनी फूल सी बेटी को लेकर अपने घर की और निकल जाता है ....
 
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मल्टी अपने बापू के साथ घर की और जाती हुई
 
अपडेट-149

मल्टी और रामलाल बस स्टैंड तक्क पहुंच चुके थे यह से उन्हें सेहर के लिए बस पकड़नी थी

करीब 2-3 घंटे का सफरर था

थोड़ा इन्तजार करने के बाद hi रामलाल को बुसस आती हुई नजर आती है

रामलाल जनता था की यह से सेहर जाने वाली बस में कच्चा खच भीड़ होती है

और हुआ भी यही बस की भीड़ देख कार्ड मल्टी के भी पसीने छूटने लगे

मल्टी- बापू इतनी भीड़ है कैसे जायेंगे हम इस बस में

रामलाल - बेटी ये भीड़ तो हमेशा ऐसे hi रहेगी तू चिंता मैट कर तेरा ये बूढ़ा बाप तेरा ख्याल रखेगा बस में और तुझे इस भीड़ से कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा में

मल्टी की उदासी एक पल में hi गायब हो जाती है वो भी सामान उठा कर तैयार हो जाती है बिस में चढ़ने के लिए

जैसे hi बस रूकती है उसमे से कुछ लोग बहार निकलते है

रामलाल तुरंत hi सामान लेकर चढ़ता है एक सीट खली देखते hi वो उसपर सामान रख देता है और वापस से बहार आकर अपनी बेटी और उसका बेग लेकर ऊपर चढ़ जाता है

मल्टी- बापू सीट तो है hi नहीं

रामलाल- बेटी तू चिंता मैट कर तेरे लिए मेने एक सीट घेर ली है

अब तक्क बस फिरसे भरना शुरू हो चुकी थी

लगातार लोग बस में साध रहे थे

रामलाल- बेटी तू जल्दी से सीट पर बैठ जा नहीं तो ये सीट भी भर जाएगी

मल्टी- तुम खड़े रहोगे और मैं बैठ जाऊ नहीं बापू मैं इतनी भी मतलबी बेटी नहीं हु

रामलाल - बेटी में खड़ा रह लूंगा तू थकक जाएगी

मल्टी- अच्छा मैं थकक जाउंगी इतनी गदराया शरीर लेकर मैं थकक जाउंगी और मेरा बूढ़ा बापू खड़ा रहेगा पुरे रस्ते

रामलाल - तो तू क्या कहती है की हम दोनों hi ऐसे खड़े होकर जाये

मल्टी- एक उपायी है बापू

रामलाल- जल्दी बता बेटी अपना उपायी देख कैसे भीड़ बढ़ती hi जा रही है

मल्टी - एक काम करो तुम बैठ जाओ और मैं तुम्हारी गोड़ पारर बैठ जाउंगी

रामलाल - बेटी बात तो सही है पर अपनी जवान बेटी को मैं अपनी गोड़ में बैठाऊंगा तो लोग क्या कहेंगे

मल्टी- बापू तुम्हे न लोगो की बड़ी चिंता है

रामलाल- बेटी एक बाप होने के नाते बहुत कुछ सोचना पड़ता है

मल्टी- अच्छा मैं बेटी होकर अपने बापू की गॉड में बैठने को तैयार हु

और तुम अपनी hi बेटी को गोड़ में बैठने पर दुनियादारी की बात कर रहे हो

बचपन में भी तो तुम मुझे गॉड में बैठाया करते थे न बापू

रामलाल- अच्छा अच्छा अब बस कर मुझे पता है मैं तुझसे नहीं जीत सकता

चल आजा अब और बैठ जा अपने बापू की गोड़ में

मल्टी के मैं में तो लड्डू फूटना चालू हो गए थे

पर रामलाल जनता था की वो जब अपनी बेटी को गोड़ में बैठायेगा तो उसका अंजाम क्या होगा

वो अपने लुंड को काबू में नहीं रख पायेगा बास इसी डर से रामलाल मल्टी को मना कर रहा था पर मल्टी की जिद्द के सामने आखिर उसे झुकना hi पड़ा

रामलाल के सीट पर बैठते hi मल्टी भी उसकी गॉड में बैठ जाती है

जैसे जैसे बस के झटके लग रहे थे वैसे वैसे hi मल्टी लगातार अपनी गद्देदार गांड को अपने बापू के लुंड के सेण्टर में लेजा रही थी

अब रामलाल के लुंड पर उसकी बेटी की भरी भरकम गांड का असर होना शुरू हो चूका था

इधर लगातार बस हिलने की वजह से मल्टी जोरो से हिल रही थी एक बार तो वो गिरने से बची

रमल तुरंत hi अपना हाथ सीट से लगाकर अपनी बेटी को गिरने से बचता है

मल्टी बहुत शातिर थी वो अपने बाप को आखिरी हद्द तक्क ले जाना कहती थी

मल्टी तुरंत hi रामलाल के दोनों हाथो को पकड़ कर अपनी नंगी कमर पर लगा देती है

मल्टी की चिकनी कमर पर हाथ पड़ते hi रामलाल का लुंड एक जोरदार झटका मरता है

जिसे मल्टी भी साफ़ महसूस करती है

वो अंदर hi अंदर खुस्स थी आखिर उसके बाप का लुंड उसकी गांड के निचे जो तड़प रहा था

मल्टी- बापू आपने बोलै था न की मेरी हिफाजत करोगे बुसस में तो मुझे ऐसे hi पकड़ कर बैठो नहीं तो तुम्हारी ये बेटी गिर्र जाएगी

रामलाल जैसे तैसे अपने जज्बातो को काबू में रखने की कोशिस कर रहा था

पर आखिर वो भी तो एक मर्द hi था और ऐसी गदराई हुई औरत के सामने तो कोई भी बहक जाता भले hi उसका कुछ भी रिश्ता हो

यही हुआ रामलाल के साथ भी उसका लुंड लगातार अकड़ता hi जा रहा था

मल्टी को यह अहसास एक अलग hi मजा दे रहा था की उसकी गांड के निचे उसके बाप का लुंड लगातार बड़ा होता जा रहा है

मल्टी जान बुझ कर ऐसे हिल रही थी की अपने बापू के लुंड को हर्र झटके के साथ अपनी भरी गांड सर रगड़ देती

ऊपर से अपनी hi बेटी की चिकनी कमर पर जब रामलाल के हाथ फिसलते तो उसका मिज्जाज खराब हो जाता

आज असल मायने में रामलाल को पता चला था की उसकी बेटी का जिसमं अब्ब पूरी तरह एक औरत का जिसमं बन्न चूका है जो उसे वो मजा दे सकता है जो एक रंडी कभी नहीं दे सकती

जिनके पास वो हर्र हफ्ते जाया करता था

जैसे तैसे सफर बीत जाता है पर अब तक्क रामलाल का लुंड अपनी पूरी औक़ात में आ चूका था वो तो शुक्र था की मल्टी जैसी गदराई घोड़ी उसपर बैठी थी

अगर कोई दुबली पतली लड़की होती तो कबका वो उस लुंड पारर तंग गयी होती

रामलाल- चल बेटी हम अपनी मंजिल पर पहुंच गए

बस खली होना शुरू हो चुकी थी

सबके उतरने के बाद मल्टी भी अपने बापू की गोड़ से उठ जाती है और चोरर नजरो से एक नजर अपने बापू के लुंड पर डालती है जो पूरी तरह तन्ना हुआ था

मल्टी अंदर hi अंडरर खुस्स होती हुई आगे की और निकल जाती है

रामलाल को समझ नहीं आ रहा था की जब उसकी बेटी ने उसके मुसल को अपनी गांड पारर महसूस किया होगा तो उसने अपने बापू के बारे में क्या सोचा होगा

रामलाल एक बैग से अपने लुंड को छुपता हुआ बहार निकल जाता है

मल्टी बहार खड़ी उसका hi इन्तजार कर रही थी

रामलाल ने अपनी धोती को बैग से छुपा रखा था

अपने बापू की हालत देख कर मल्टी को अंदर hi अंडरर हसी आ रही थी

वो अपने बापू को अभी कोई भी हिंट नहीं देना कहती रही

मल्टी और रामलाल दोनों hi घर की और चल देते है.....
 
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