Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 21 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-187

अब आलम यह था की हरिया और रवि सटासट एक के बाद एक जोरदार झटको के साथ नीलम की गांड मार रहे थे

नीलम दोनों के बिच में पड़ी किसी मछली की तरह दर्द से तड़प रही थी

पर न तो रवि को अपनी दीदी समान नीलम पर कोई तरस आ रहा था और न hi हरिया को अपनी फूल सी प्यारी बच्ची पर कोई दया आ रही थी

नीलम- अह्ह्ह्ह मा मैं तो गयी ाअजज्जजज तुम दोनों कमीने एकक साथ मेरी गांड मार रहे हो मैं मर्डर जाउंगी आज अह्हह्ह्ह्ह बापू रेहम करो कुछ तो अपनी बच्ची पररर

हरिया बड़े hi प्यार से नीलम का सर सहलाता हुआ बोलता है

हरिया- कुछ नहीं होगा बेटी कुछ नहीं होगा यह दर्द बस कुछ hi पीएलओ का है उसके बाद से तुझे भी उतना hi मजा आएगा जितना हमे आ रहा है

रवि- भूल गयी दीदी जब तुम्हारे छेद फैलेंगे तभी तो एक साथ सबके लुंड शोगी ना तुमने hi तो खा था

नीलम- मुझे नहीं छोड़ना पुरे गाओं से मेरे ऊपर रेहम करो भगवान् के लिए रुकक्क जाओ बापू मुझे बहुत दर्द हो रहा है

हालत तो नीलम की सच में टाइट थी दर्द के मरे उसका पूरा चेहरा लाल पद गया था

आँखों से आंसू टपक रहे थे

आँखों का काजल पूरी तरह से उसके कामुक चेहरे पर फ़ैल गया था

पर इन सब बातो का अब कोई मतलब नहीं था क्योंकि हरिया और रवि को एक साथ नीलम की गांड मरने में जो कसाव महसूस हो रहा था वो तो किसी ुंचुड़ी छूट से भी ज्यादा मनमोहक था

रवि- दीदी अब इस दर्द को बर्दास्त करना सिख लो क्योंकि अब तो ये दर्द तुम्हे हर रोज होगा जब तुम्हारा पति मैं और काका तीनो एक साथ तुम्हे छोड़ेंगे हहहह क्यों काका

हरिया- ः है बीटा रवि जरूर जरूर

नीलम - अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ कितनी बेरहमी से तू मेरी गांड मार रहे हो भगवान् करे की एक दिन कोई तेरी दीदी को भी इस तरह चोदे

रवि की दीदी का नाम सुनते hi हरिया के चेहरे पर चमक आ जाती है

हरिया- क्या पता वो दिन कब ौएगा जब रेखा रानी एक साथ 2-2 लुंड अपनी गांड से निगलेगी

रवि- अच्छा बुड्ढे मेरी दीदी की बड़ी पड़ी है तुझे पहले अपनी बेटी को तो भोग ले बाद में मेरी दीदी के बारे में सोचना

काफी देर से दोनों नीलम की गांड को चोदे जा रहे थे

गांड से अब तक सफेद पानी भी भेजना शुरू हो चूका था जिससे हरिया पूरी तरह भीग गया था पर चुदाई थी की रुकने का नाम नहीं ले रही थी

ठप्प्प थप्प्प्प की मादक आवाज से पूरा कमरा गूंज उठा था

यह बिगुल था उस शुरुवात का जो नीलम की जिंदगी में नया मोड़ लेन वाली थी

हरिया- बीटा तूने बताया नहीं किस्से छुड़वाएगा मेरी बेटी को

मतलब किस्से शादी करवाएगा नीलम की

रवि- हहहह काका बात तो एक hi है शादी के बाअद तो तुम्हारी बेटी को छोड़ना hi है पति चोदे या न चोदे हम तो है ना हहहह

हरिया- फिर भी बीटा कौन है वो

रवि- काका आपको याद है मैं उस दिन मल्टी भाभी के बाप को आपके घर लाया था

नीलम- वो बुद्धा तो मुझे खा जाने को तैयार था तू उससे शादी करवाएगा मेरी कमीने

रवि एक जोरदार झटका मरता हुआ कहता है

रवि- नहीं मेरी चुदड़ो उससे नहीं बल्कि उसके बेटे से

और है एक बात और हो सकता है तेरा ससुर भी तुझे छोड़ने की इच्छा जताये वैसे भी वो तुम्हारी जवानी का आधा मजा तो चख hi चूका है बचा हुआ आधा सधी के बाद शाखा देना

हरिया- तो ठीक हसि बीटा तू जल्दी hi बात कर उससे नहीं तो अगर ज्यादा देर हो गई और इसका पेट फूलना चालू हो गया तो मैं कहि का नहीं रहूंगा

रवि- पेट फुलाया भी तो तुम्ही ने है न काका

हरिया- अब जो हो गया उसे तो नहीं बदल सकते न बीटा

रवि- और वैसे भी वो कुछ hi दिन में अपनी बेटी को लेकर आने वाला है मैं तभी उससे बात करलूँगा और हो सखे तो लड़की दिखने तुम्हारे घर भी ले आऊंगा उसी

वैसे तो वो पहले hi लड़की को छुड़वाते हुए देख चूका है हाहाः

नीलम- है है हस्स ले कमीने है ले

कुछ hi देर में रवि और हरिया दोनों एक साथ नीलम की गांड में झाड़ जाते है जैसे hi दोनों लुंड मुरझाते हुआ बहार आते है नीलम की गांड से एक जोरदार पाद के साथ साथ उसके बापू और रवि का वीर्य भी बहार आने लगता है

नीलम जमीन पर पड़ी पड़ी हाफ रही थी उसकी हालत इस पल देखने लायक थी

नीलम की गांड का छेद किसी बड़ी बाल जितना खुल गया था जिसे देख कर रवि एक जोरदार छठा उसकी गांड पर मरता है

रवि- देखो तो काका कैसे खुल रहा है दीदी का छेद अब ये हो गयी एक साथ 3-3 लुंड से छुड़वाने लायक

पर अभी इसके दूसरे छेद को भी बढ़ाना होगा

नीलम रवि की बात सुनते hi पताक से खड़ी होती हुई अपने कपडे पेहेन कर बहार भाग जाती है

हरिया- बीटा आज नहीं उसे कुछ ज्यादा hi दर्द हुआ मालूम पड़ता किसी और दिन एक साथ उसकी सबूत छोड़ेंगे

रवि- तो तय रहा काका जिस दिन तुम्हारा समधी आएगा उसी दिन नीलम दीदी की छूट में एक साथ लुंड डालेंगे

हरिया - ः बीटा जरूर वैसे रेखा को भी ला सकते हो क्या तुम उस दिन बड़े दिन हो गए इससे मिले हुए

रवि- सेल बुड्डेह इजात से बात कर रहा हु तो रास नहीं आ रही चुप चाप निकल जा लौड़े नहीं तो यही झुका कर तेरा छेद भी तेरी बेटी जितना hi फैला दूंगा

हरिया रवि की बात सुनकर तुरंत hi भाग जाता है

रवि वैसे hi नंगा अपनी खत पर पसर जाता है

रवि का लुंड अब तक नीलम की गांड के निकली चिपचिपाहट से सना हुआ था

रवि- अब तुम्हे मुझसे कोई दूर नहीं कर सकता कम्मो दीदी तुम सिर्फ मेरी हो सिर्फ मेरी मेरी दोनों दीदियो पर सिर्फ मेरा हक़्क़क़ होगा सिर्फ और सिर्फ मेरा
 
अपडेट -188

नीलम को छोड़ने के बाद रवि लेता लेता यही नंगा hi सो जाता है जब उसकी आँख खुली तो शाम होने को थी

रवि जल्दी से सारा सामान समेत कर झोपडी में रखता हुआ अपने घर की और निकल जाता है

रस्ते भर रवि के दिमाग में यही तिगड़म चल रही थी की कैसे करके वो कम्मो की शादी को रोक दे और नीलम को हरी के सुर बांध दे

खैर यही सब सोचते सोचते जनाब घर पहुंच जाते है

रेखा इस समय रोटियां सेकने में बिजी थी

रवि के अंदर आते hi वो उसे पलट कर स्माइल देती है और दुबारा से रोटी बनाने में लग जाती है

रेखा - आ गया तू बड़ी देर लगा दी आज

रवि- यह नहीं आऊंगा तो खा जाऊंगा दीदी

रेखा- अच्छा मतलब कहि और भी जाने का इरादा हसि तेरा

तब तक कम्मो भी कमरे से बहार आ जाती है

उसकी हालत देख कर साफ़ पता चल रहा था की महारानी अभी अभी सू कर आ रही है

रवि- दिन में तो कहि भी रहु पर रात को तो अपनी दीदियो के पास आना hi पड़ेगा न दीदी

रेखा- है है रहने दे मस्का मत लगा अब सब जानती हु क्या करने आएगा तू रात को अपनी दीदियो के पास

रेखा एक नजर कम्मो पर डालती है

रेखा- एक निनको देखो महरानी को मेघा दीदी के जाते hi तेवर बदल गए है सुबह की सोई हुई घोड़ी अब जाकर उठ रही है

रवि- तो आप भी सो जाती न दीदी

दिन में वैसे भी आज रात को म्हणत कुछ ज्यादा hi करनी पड़ेगी

रेखा- मैं कोई थकने वाली नहीं हु समझा

जो पहले से hi सो जाऊ रात की म्हणत करने के लिए

रवि लगातार कम्मो को hi घर रहा था

कम्मो का पूरा बदन पसीने से तर बतर था उसका ब्लाउज जोकि पूरी तरह से भीग चूका था ऊपर से उसकी दोनों बगले पूरी तरह से गीली हो चुकी थी

यह नजर रवि को अपनी दीदी के प्रति और भी पागल किये जा रहा था

उसका मन तो कर रहा था की अभी उठ कर कम्मो दीदी को अपने सिकंजे में दबोच ले और उसका पूरा रास निचोड़ निचोड़ कर पी जाये

रेखा- अब ऐसे hi खड़ी रहेगी जा जा कर पानी दे दे उस बेचारे को वो तेरी तरह सोया नहीं था दिन भर म्हणत कर रहा था

कम्मो पानी का गिलास लेकर रवि के पास आती है

रवि कम्मो के हाथ से गिलास लेता हुआ बोलता है

रवि- म्हणत तो आज सच में बहुत की है दीदी और अभी तो पूरी रात म्हणत करनी है

इतना बोलते हुए रवि खली गिलास को कम्मो की और बढ़ता है

कम्मो जैसे hi गिलास पकड़ने के लिए हाथ आगे बढ़ती है रवि उसके हाथ को पकड़ कर अपनी और खींच लेता है

रवि के इस हमले से कम्मो सीधा रवि की गॉड में जा गिरती है

बल्कि यु खा जाये की कम्मो सीधा अपने छोटे भाई के खड़े लुंड पर जा गिरती है जो उसे hi देख कर खड़ा हुआ था

कम्मो उठने का प्रयास करती उससे पहले hi रवि अपने दोनों हाथो को कम्मो की कमर से घूमता हुआ उसकेपेट को दबोच लेता है

कम्मो इस हमले से कसमसा कर रह जाती है

इधर रेखा रोटी सेक रही थी और उधर अपना रवि अपनी दीदी की गरम गांड पर अपना लोहे जैसा लुंड सेक रहा था

कम्मो की गर्मी अब और बढ़ने लगी थी

हवस की खुमारी तो रवि उस पर पहले hi चढ़ा चूका था और अब जैसे hi कम्मो को रवि का लुंड अपनी भरी गांड के निचे महसूस हुआ उसने अपने आपको पूरी तरह अपने भाई के हवाले कर दिया

रेखा- क्यों रे रवि वो मल्टी कब आएगी बड़े दिन हो गए उसे गए हुए

कहि अपने किसी यार के साथ रेट रंगीन तो नहीं कर रही मायके में

रवि अपने दोनों हाथो को ऊपर की और बढ़ता हुआ सीधा कम्मो के खरबूजे जैसी मोटिनोति चूचियों को पकड़ लेता है

रवि- क्या पता क्या कर रही होगीमालती भाभी हो भी सकता है की किसी यार के साथ वो कर रही हो यह सब

इतना बोलते हुए रवि कम्मो के कान को चाटता हुआ उसे अपने दातो में पकड़ कर चबाने लगता है

कम्मो अब पूरी तरह रवि के हाथ की कठपुतली बन कर रह गयी थी उसकी आँखे तो कब की बंद हो गयी थी और रहा श जिस्म भी अब पूरी तरह से उसके छोटे भाई के हाथ में था

रवि कान को चुस्त हुआ कम्मो की गर्दन पर बह रहे नमकीन पसीने का भी स्वाद लेता हुआ लगातार उसकी चूचियों को मसल रहा था और कम्मो अब रवि के लुंड पर बैठे बैठे hi अपनी कमर को इधर उधर घुमा रही थी

रवि कम्मो का एक हाथ पकड़ कर निचे की और ले जाता है

कम्मो अपने भाईका इशारा समझ चुकी थी

वो एक नजर रेखा पर डालती है जॉब भी रोटियां hi सेक रही थी

कम्मो एक झटके में अपनी गांड को थोड़ा उठती हुई अपने हाथ को निचे घुसा कर रवि का लुंड पकड़ लेती है

कम्मो का हाथ अपने लुंड पर लगते hi रवि के शरीर में मनो करंट सा दौड़ उठता है

इस बार रवि एक झटके के साथ कम्मो के मुँह को पकड़ता हुआ अपनी और मोड़ता है और अगले hi पल अपने होठो को कम्मो के गरम और रसीले होठो पर रख कर उनका रस चूसने लगता है

दोनों भाई बेहेन लगातार एक दूसरे के होठो को कुश और चबा रहे थे

लग भाग 5 मिंट तक यही क्रिया चलती है दोनों मनो भूल hi चुके थे की सामने hi रेखा भी है

रेखा रोटी बना कर जैसे hi पलटती है दूसरी और का नजारा देख कर दांग रह जाती है

रेखा - लाज शर्म तो बेच खायी है हे भगवान् इन दोनों ने

रेखा की आवाज सुन कर रवि और कम्मो के मुँह एक दूसरे से अलग होते है

दोनों के मुँह पूरी तरह लाल हो चुके थे उनकी उखड़ी हुई सांसो को रेखा साफ़ महसूस कर सकती थी

रेखा एक जोरदार मुक्का रवि की पीठ पर मरती हुई कहती है

रवि- क्यों रे क्या कर रहा था तू इसके साथ

कम्मो अब तक कमरे में भाग चुकी थी

रवि- वही जो आपके साथ करता hi दीदी

रेखा- अच्छा तो इतनी शर्म तो कर लेता की तेरी दूसरी दीदी भी तेरे सामने hi बैठी है

रवि- शर्म करूँगा तो प्यार कैसे करूंगा अपनी दीदियो को

हट बेशरम

रेखा हस्ती हुई बहार चली जाती है और पेशाब करके वापस आती है

रेखा- जा अब उसे भी बोल दे की न शर्माय और खाना खा ले

रवि- आप hi बोल दो आपने बिच में hi काम बिगाड़ दिया

रेखा - अच्छा उल्टा चोर कोतवाल को डेट

रवि इस समय रेखा से गुस्सा होने का दिखावा कर रहा था

रेखा कम्मो को कई बार आवाज देती है और आख़िरकार कम्मो भी बहार आ hi जाती है

तीनो भाई बेहेन खाना खा रहे थे

कम्मो की नजरे तो थाली पर hi तिकी हुई थी पर रवि की नजरे इस समय अपनी दीदी के ब्लाउज पर उसकीफुलती पिचकती चूचियों पर hi थी

रेखा भी रवि की नजर पकड़ चुकी थी

रवि जल्दी hi खाना खा कर उठ जाता है एयर जैसे hi कमरे में जाने के लिए देहलीज तक पहुँचता है

रेखा उसे आवाज देती है

रवि पलट कर उसकी और देखता है

रेखा जानती थी की अपने छोटे भाई को कैसे मनाना है

रेखा - अरे ऐसे घर मत की खा जायेगा

रवि- है तो बोलो न किस लिए रोका है

रेखा- गुस्सा तो देखो जनाब का

मैं तो बस ये बोल रही थी की बिस्तर बढ़ा कर लगा लियो क्योंकि आज से कम्मो भी हमारे साथ घर में hi सोयेगी

कहि बहार इस बेचारी को कोई भेड़िया खा गया तो

इतना बोलकर रेखा जोर जोर से हसने लगती है

मुस्कराहट तो इस पल सबके केहरो पर थी

कम्मो भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी

रवि की ख़ुशी का तो ठिकाना hi नहीं था
 
अपडेट-189

दूसरी तरफ रामलाल का घर....

हरी मल्टी को नंगा देखने के बाद बैचैन हो चूका था उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की उसका बाप उसकी hi दीदी को भोग रहा है

हरी के मन में एक बार को तो आया की अभी जाकर मल्टी के नंगे बदन पर पड़ी वो एक मात्र चादर खींच कर उसे उसका असली रूप दिखा दे और उससे hi पूछ ले की आखिर ये सब कब से चल रहा है

इसी उधेड़ बन में हरी वापस से बहार पड़ी खत पर आकर लेत जाता है और न जाने कब उसकी आँख लग जाती है

हरी की आँख तब खुलती है जब उसके कानो में उसकी दीदी मल्टी की आवाज गुनती है जो उसी खत पर बैठ कर उसे उठा रही थी

हरी एक दम से आंख खोलता हुआ उठ कर बैठ जाता है

हरी का पूरा बदन पसीने से तर बतर था

मल्टी अपने पल्लू को उठती हुई अपने भाई के माथे पर बह रहा पसीना पिछती है

इस बिच हरी की नजर अपनी दीदी के ब्लाउज के अंदर झाकना शुरू कर चुकी थी

मल्टी- कोई बुरा सपना देखा क्या भाई

हरी- बहुत बुरा दीदी बहुत बुरा

मल्टी- क्या देख लिया तूने ऐसा

हरी की नजर अब भी मल्टी के ब्लाउज पर hi तिकी हुई थी जिसका अंदाजा उसे भी हो चूका था पर वो यह जानती थी की उसका भाई अभी जवान हो रहा है और इस उम्र में उसके जैसी गदराई औरत अपने भाई का ध्यान खींचने के लिए काफी है

पर मल्टी को अब तक यह नहीं पता था की हरी को हक़ीक़त का पता चल चूका है

मल्टी- इसी लिए बोलती हु की मुँह हाथ धो कर सोया कर नहीं तो ऐसे hi गंदे गंदे सपने आया करेंगे तुझे

मल्टी इतना बोलकर उठने hi वाली थी की हरी दुबारा से उसका हाथ पकड़ कर उसे खत पर बैठा देता है

इस बिच मल्टी के हाथ से उसका पल्लू छूट कर निचे गिर चूका था और अब पहले से भी ज्यादा मल्टी की चूचिया उसके छोटे भाई को नजर आ रही थी

हरी अब आँखे फाड़ कर मल्टी को देख रहा था

इधर अब मल्टी का मन भी बैचैन हो चला था की आखिर आज उसके छोटे भाई को क्या हुआ है जो उसके जोबन को यु खा जाने वाली नजरो से देख रहा है

हरी - दीदी आप नहीं जानती मैंने क्या देखा है आज

मल्टी प्यार से हरी के सर को सहलाती हुई बोलती है

मल्टी- क्या देख लिया भाई तूने ऐसा जो तू आज इतना सेहमा सेहमा सा है

हरी मल्टी का हाथ अपने सर पर पड़ते hi आगे की और झुक कर सीधा अपनी दीदी के साइन से चिपक जाता है

अब आलम ये था की मल्टी जिसे अपना प्यारा भाई समझ कर प्यार से उसका सर सेहला रही थी

वो आदमी अब अपनी hi शादी शुदा दीदी की छाती से उठ रही मादक महक को सूंघता हुआ अपना लुंड खड़ा कर रहा था

हरी मौके का फायदा उठता हुआ अपने दोनों हाथो मो मल्टी की पीठ पर रखता हुआ अपने सर को और भी ज्यादा जोर से मल्टी की गद्देदार चूचियों पर दबाने लगता है

हरी के लिए ये अहसास एक दम न्य था

उसे ऐसा लग रहा था की किसी मखमल के तकिये पर वो अपना सर रखे हुए है और जितना निचे दबाता है तकिया उतना hi फूल कर बाजार की और आ रहा है

मल्टी- बता न क्या देखा तूने

मल्टी को भी अब जानना था की हरी ने क्या सपना देखा था

पर लिए जो सपना था वो हरी की हक़ीक़त थी वो यह बात नहीं जानती थी

हरी अपने हाथ को कमर के ऊपरी हिस्से पर रखता हुआ दोनों और की चर्बी को जोर से दबाता हुआ अपनी जीभ बहार निकल कर मल्टी की छाती का थोड़ा पसीना चाट लेता है

मल्टी हरी के इस हमले से अंदर तक सिहर उठती है

उसे यकीन hi नहीं होता की उसके भाई ने अभी हो थोड़ी देर पहले किया वो एक दम होश में किया

हरी- आपको पता है दीदी मेरे सपने में आप और बापू दोनों थे

मल्टी- अच्छा और क्या हुआ तेरे सपने में

हरी- दीदी आप और बापू कुछ कर रहे थे मेरे सपने में

इतना बोलता हुआ हरी अपने अंगूठे को मल्टी के पेटीकोट के पिछले हिस्से से अंदर घुसा देता है

हरी की हरकते अब मल्टी को अंदर तक्क झझोरड़ रही थी

पर अब हरी की बाटे उसे और भी बैचैन कर रही थी की आखिर उसने ऐसा कौन सा सपना देखा जिसमे वो और उसका बापू दोनों थे और सांसे बड़ी बात आखिर हरी ने उन दोनों को सपने में क्या करते हुए देखा

मल्टी अपने हाथ को पीछे ले जाती हुई हरी के हाथ को पकड़ लेती है उसका अंगूठा अब भी मल्टी के पेटीकोट में hi घुसा हुआ था

मल्टी- बोल न क्या कर रहे थे बापू मेरे साथ

हरी- दीदी बापू तुम्हे खूब रगड़ रगड़ कर पटक पटक कर उछाल उछाल कर छोड़ड़ड़ड़ड़ रहे थे

इतना बोलता हुआ हरी गप्प्प से अपना मुँह खोलता हुआ मल्टी के एक चुकी को ब्लाउज के ऊपर से hi आधा अपने मुँह में भर लेता हसि और बिना किसी रेहम के जोर लगता हुआ अपनी दीदी की चुकी को दातो से काटता हुआ अंदर hi अंदर अपनी जीभ से उसके निप्पल को कुरेदने लगता है

हरी की बात और हमला दोनों एक साथ मल्टी संन्न रह जाती है

उसे यकीन hi नहीं होता की हरी कैसे एक पल में यह सब बोल गया वो भी बिना किसी लाज शर्म के

मल्टी को अपनी चीची पर दर्द महसूस होता है जैसे hi वो अपनी नजर निचे करती है उसे एक और झटका लगता है

बापू की बात सुनकर तो मनो वो हैसे खो गयी थी

उसे पता hi नहीं चला की निचे उसका छोटा भाई उसकी आधी चुकी को ब्लाउज के ऊपर से hi अपने मुँह में ठुसे बैठा है

मल्टी एक दम से हरी के सर को पकड़ कर अपनी छाती से दूर करती है

हरी दूर से एक नजर अपनी दीदी के भीगे हुए ब्लाउज पर डालता है

हरी के थूक की वजह से ब्लाउज इतना भीग चूका था की अब मल्टी का कला निप्पल हरी को साफ़ नजर आ रहा था

हरी मल्टी के उठने से पहले hi उसके सर को पकड़ कर अपनी एयर खींचता है

हरी- क्यों दीदी उस बुड्ढे में ऐसा क्या है जो मुझमे नहीं है या सिर्फ बापू को hi लहिस करने आयी हो ससुराल से

इतना बोलता हुआ हरी अपनी जीभ निकाल कर मल्टी के एक गाल को पूरा ऊपर से निचे तक्क छत्त जाता है

मल्टी जैसे तैसे संभालने की कोशिश कर रही थी

तब तक दरवाजे पर दस्तक होती है

हरी एक झटके में मल्टी को छोड़ देता है

मल्टी हरी से दुर्र हटती हुई जल्दी से अपनी उखड़ी हुई सांसो को संभालती हुई दरवाजे की और बढ़ जाती है

मल्टी दरवाजे पर पहुंच कर एक नजर हरी की और डालती है जो उसे डेल्ह कर एक फ्लाइंग किश देता है

मल्टी( हो गयी गड़बड़ मल्टी लगता है इसने सुबह सब देख लिया अब क्या करूंगी मैं )

मल्टी एक झटके में दरवाजा खोल देती है

बहार केशव खड़ा था

केशव घर में दाखिल होता है

मल्टी केशव के पेअर चुटी है

हरी भी टपक से आकर मल्टी से चिपक कर खड़ा हो जाता है जो अपने जीजा के पेअर छूटा है

केशव- अरे क्या बात है सेल साहब आज पहली बार आपको होश में देखा है

हरी- अरे जीजाजी अब मैं पूरी तरह सुधर गया हु

केशव- अरे वह ये कमाल कैसे हुआ भैई

हरी एक झटके में मल्टी को पकड़ लेता है

मनो वो कोई नडदन बच्चा हो

हरी- ये सब कमाल तो मेरी दीदी का है जीजाजी इन्होने एक रात में hi मुझे सुधर दिया

केशव- अरे वह मल्टी ऐसी कोनसी से घुट्टी पीला दी तुमने इसे

वैसे एक बात और कल हमे गाओं जाना है सुना है मेघा दीदी वापस अपने घर चली गयी हसि घर पर रेखा और कम्मो अकेली रह गयी है हमे वह जाना है तो अपना समान बांध लेना कल सुबह होते hi हम निकल जायेंगे

मल्टी के पास तो कोई और चारा hi नहीं था

मल्टी- ठिक्क है जीई

केशव घर के अंदर जाते हुआ बाथरूम में घुस जाता है

मल्टी भी कमरे में जाने लगती है

तब तक हरी दुबारा से उसका हाथ पकड़ लेता है

मल्टी- अरे छोड़ हरी मुझे तेरे जीजा आ गए है

हरी- छोड़ तो दूंगा दीदी पर याद है न सिर्फ आज की hi रात है तुम्हारे पास मुझे अपनी देने के लिए

मल्टी- क्या देने के लिए

मल्टी हकलाती हुई बोलती है

हरी टपक्क से सदी के ऊपर से hi मल्टी की छूट को दबोच लेता है

बड़ी सटी सावित्री बन रही हो दीदी

वही जो इसके निचे हसि और जिसमे तुम सुबह सुबह बापू का लुंड अंदर बहार कर रही थी

मल्टी हरी का हाथ झटक कर कमरे में चली जाती है

हरी हस्ता हुआ - अब तो देनी hi पड़ेगी दीदी ....
 
अपडेट-190

केशव नहा धो कर फ्रेश हो चूका था

इधर मल्टी भी रात का खाना लगभग बना hi चुकी थी

केशव और हरी दोनों एक साथ बैठे हुए गप्पे हक्क रहे थे

हरी की नजर तो अब भी कल्टी पर hi थी

अपनी दीदी की कमर से बह रहे पसीने को उसके पेटीकोट में जाता हुआ देख कर उसके लुंड में तनाव आ चूका था

इधर रामलाल एक पऊवा चढ़ा कर पूरी गरम जोशी के साथ अपने घर की और बढ़ रहा था की आज पॉवी के नशे में अपनी बेटी की खूब पेले करेगा

सुबह एक hi बार मल्टी को छोड़ने के बाद से रामलाल दिन भर यही प्लान बना रहा था की आज उसे अपनी गदराई हुई शादी शुदा बेटी के साथ क्या क्या करना है

उसके किस किस अंग्ग के साथ कैसे कैसे खेलना है उसे कैसे अपना लुंड चूसना है

यही सब सोचते हुए रामलाल पूरी मस्ती में अपने घर की और जा रहा था

इधर मल्टी को कुछ समझ hi नहीं आ रहा था की वो आज के दिन खुसी मनाये या अपने बाप से बिछड़ने का गम्म मनाये

न जाने क्यों उसके मैं में रह रह कर अपने बाप पर तरस भी आ रहा था और अपने भाई पर गुस्सा भी आ रहा था

मल्टी बस यह नहीं समझ पा रही थी की आखिर उसे रामलाल के साथ हरी ने कब और कैसे देखा

इसी बिच रामलाल भी घर आ जाता है

जैसे hi रामलाल घर के अंदर दाखिल होता है केशव को देख कर उसका मुँह किसी चुदाई के बाद मुरझाये हुए लुंड की तरह हो जाता है

केशव तुरंत hi उठ कर रामलाल के पेअर छूटा है

रामलाल को इस वक़्त केशव पर गुस्सा तो खूब आ रहा था

पर न कहते हुए भी वो केशव को आशीर्वाद देता हुआ पास पड़ी खत पर बैठ जाता है

हरी- क्या हुआ बापू कुछ हुआ है क्या

रामलाल गुस्से से हरी की और देखता है

रामलाल- क्यों

हरी- आपका मुँह मुरझाया हुआ जो लग रहा है

रामलाल अपना सारा गुस्सा पी जाता है

रामलाल- नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है

तब तक मल्टी हाथ में पानी का गिलास लेकर अपने बाप की और बढ़ती है

रामलाल प्यासी नजरो से अपनी बेटी की और देखता हुआ पानी का गिलास उसके हाथ से लेलेता है

मल्टी भी अपने बाप की नजरो में उस प्यास को देख चुकी थी जो सिर्फ और सिर्फ उसकी छूट का रस hi बुझा सकता था

हरी को तो सब मालूम hi था

वो अपने बाप को किलसने के लिए एक और वार करता है

हरी- आपको पता है बापू दीदी कल सुबह hi जीजाजी के साथ अपने ससुराल चली जाएँगी

हरी की बात सुनकर मनो रामलाल का कलेजा मुँह को आ जाता है

रामलाल हैरानी के साथ कभी मल्टी को द्केहता तो कभी केसहाव को देखता

रामलाल- अरे बीटा आअज hi आये हो एक कांड दिन और रुक जाते

केसहाव- नहीं पिताजी मेघा दीदी अपने घर वापस चली गयी है और अब रेखा कम्मो और रवि अकेले रह गए है

आपको तो पता hi है की जमाना कितना खराब है न जाने बच्चो को कोई कैसे फायदा उठा ले

हमे कल hi जाना होगा और अब तो वैसे भी आना जाना लगा hi रहेगा

अब रामलाल को भी समझ आ गया था की केशव को समझने का कोई फायदा नहीं है वो अपने मैं की कर के hi मानेगा

रामलाल चुपचाप अपना मुरझाया हुआ मुँह लटका कर बैठ जाता है

मल्टी दुबारा से खाना बनाने लगती है

रामलाल को अब बड़ा मलाल हो रहा था की क्यों आखिर क्यों उसने आज तक अपनी बेटी से इस कदर दुरी बनाये रखी

पहले तो मल्टी यही रहती थी तब अगर यह सब हुआ होता तो वो अपनी बेटी के गदराये बदन का ोुरा मजा ले सकता था

खैर यही सब सोचते हुए रामलाल निराशा के अँधेरे में डूबता चला जाता है

अब तक खाना भी बन चूका था मल्टी सबका खाना निकल कर परोसती है

थोड़ी hi देर में सब खाना खा लेता है

रामलाल- बीटा तुम लोग अंदर वाले कमरे में सो जाओ

रामलाल उदासी के साथ यह बोलता हुआ खत पर दूसरी और मुँह घुमा कर लेट जाता है

केशव के साथ साथ हरी भी कमरे में घुस जाता है

हरी- जीजाजी एक बात बोलू अगर आप गुस्सा नहीं होंगे तो

केशव- अरे बोलो बोलो सेल साहब

हरी- आज रात मैं दीदी के साथ सो जाऊ वैसे भी वो कल चली hi जाएँगी तो न जाने कब भेट हो

चुदाई करने का तो केशव का भी खूब मैं था पर अब वो इस चूतिये को मना भी कैसे करता

केशव ( कुछ न कुछ जुगाड़ कर hi लूंगा रात में मल्टी से चिपकने का )

केशव- अरे इसमें पूछने की क्या बात है

तुम्हारा घर तुम्हारी दीदी

तुम बोलो तो मैं भी बहार चला जाता हु

हरी- अरे नहीं नहीं जीजाजी हम तीनो आज साथ में सोयेंगे

हरी भी केशव के बगल में hi लेत जाता है

तब तक मल्टी भी कमरे में आकर अंदर से कुण्डी लगा देती है

मल्टी जैसे hi पलट कर देखती है उसकी आँखे हरी पर टिक्क जाती है

मल्टी- अरे तू यहां क्या कर रहा है

केशव- अरे मल्टी आज हरी भी हमारे साथ hi सोयेगा

हरी- हां दीदी आज की रात मैं भी आप दोनों के साथ hi सोऊंगा

हरी एक शैतानी हसी हस्ता हुआ मल्टी से कहता है

मल्टी को अब सच में अपने भाई से डर लगने लगा था

न कहते हुए भी मल्टी अपने बिस्तर की और बढ़ती है

हरी बाजु खिसक जाता है ताकि केशव और उसके बिच में मल्टी की जगह बन्न सखे

. मल्टी- तू एक काम कर तू अपने जीजाजी के पास सो जा

. हरी- नहीं दीदी मैं आपकी साइड hi सोऊंगा

मल्टी जानती थी की अगर वो ज्यादा बेहेस करेगी तो केशव को जरूर शक्क हो जायेगा

आखिर दोनों का रिश्ता hi ऐसा था

मल्टी लटके मुँह के साथ केशव की और देखती है

केशव उसे शांत रहने का इशारा करते हुए लेटने को कहता है

आखिर कार मल्टी भी बिस्तर पर लेत जाती है

अब उसके एक बाजु उसका भाई था और एक बाजु उसका पति

और दोनों के hi अंदर वासना का सैलाब उम्दा हुआ था

.दोनों के दोनों इसी फिराक में थे की कब दूसरा सोये और वो अपना क्रायक्रम शुरू करी ....
 
अपडेट-191

लेते लेते लगभग 1 घंटा बीत चूका था

केशव और मल्टी की बात चित अब भी जारी थी इस बिच केशव का ध्यान उसके सेल पर hi था जो की बिना किसी हलचल के चुपचाप लेता हुआ था मनो वो कितनी गहरी नींद में सो गया हो

पर हक़ीक़त तो कुछ और hi थी

मल्टी भी अब तक यही समझ रही थी की हरी सो चूका है

मल्टी केशव के होठो की एक पप्पी लेते हुए उसकी छाती पर अपना सर रख देती है

केशव भी कब से इस पल के इन्तजार के था वो मल्टी का इशारा मिलते hi उसे अपनी बहो में भर कर उसके होठो को चूसना शुरू कर देता है

दोनों मिया बीवी एक दूसरे को इस कदर चूस रहे थे की चपर चपर की आवाज से पूरा कमरा गूंज उठा था

इस बिच हरी अपनी आँख खोल कर उनकी और देखता हुआ अपने लुंड पर हाथ रख कर उसे kaçhe के ऊपर से hi मसलने लगता है

हरी ये जान चूका था की अगर उसकी दीदी अपने सगे बाप के निचे आ सकती है तो फिर वो काफी गरम औरत है

केशव का हाथ अब तक मल्टी के ब्लाउज के ऊपर से hi उसकी गुदाज चूचियों को मसल रहा था

न जाने कितनी देर तक दोनों इसी तरह एक दूसरे के मुँह में मुँह डेल पड़े रहे

लगभग 10-15 मिंट के बाद मल्टी अपने मुँह को केशव से अलग करती है

मल्टी आहिस्ता से

मल्टी- कैसा लगा जान

केशव- मजा आ गया जणू आ तो तुम्हारे मुँह की इस मिठास को कहते हुए कितने दिन हो गए थे क्या बताऊ कैसे रहता था तुम्हारे बिना

मल्टी- अब और नहीं रहना पड़ेगा मेरे बिना अब जी भर के चूस लो मेरे मुँह की इस मिठास को

केशव - हरी सो गया क्या

मल्टी और केशव एक साथ पलट कर हरी की एयर देखते है

हरी एक झटके में आँख बंद कर लेता है

दोनों दुबारा से दूसरी और मुँह करके अपना क्रायक्रम चालू कर देते है

शायद अगर मल्टी ने निचे की तरफ ध्यान दिया होता तो उसे पता लग जाता की उसका भाई उसे देख देख कर अपना लुंड मसल रहा है जोकि अब पूरी तरह से खड़ा हो चूका है

केशव - तुम्हे पता है मेघा दीदी के ससुराल वाले खुद hi आकर उन्हें लेकर गए अब दुबारा से मेरी दीदी का घर बस जायेगा

मल्टी- और हमारे घर का क्या हम क्या यु hi इधर से उधर घूमते रहेंगे

मैं तो कहती हु की यही सेहर में hi रह जाते है

वैसे भी वह गाओं में रखा hi क्या है

केशव इस बार मल्टी की बात से थोड़ा चीड़ जाता है

केशव - अच्छा गाओं में क्या रखा है तुम्हारे कहने पर मैं इतने साल अपने गाओं नहीं गया और अब जो मैं सब कुछ ठीक करना कहता हु तो तुम उसमे भी नाटक दिखा रही हो

तुम एक काम करो तुम यही रह जाओ सेहर में अपने भाई और बाप के साथ

पर है एक बात याद रखना की मुझे कभी दुबारा अपने पास नहीं देखोगी

हरी( रह जाओ दीदी रह जाओ यही जाने दो इस चुटिया आदमी को तुम्हे यही इस घर में बापू और मैं खूब थूक लगा लगा कर पेलेंगे रह जाओ दीदी)

केशव की बात सुनकर अब हटी मन hi मन दुआ कर रहा था की उसकी दीदी यही रुक जाये

पर आखिर पति पति होता है पत्नी कितनी भी खिडगराज हो जाये पर अपने सुहाग से दूर रहना उसे कभी भी कबूल नहीं होगा

यही हाल मल्टी के साथ भी हुआ

मल्टी केशव की बात सुनकर एक दम से उसके होठो पर हाथ रख देती है

मल्टी - भगवान् के लिए ऐसा मत बोलिये मैं तो आपकी दासी हु और रहूंगी अब आप झा कहे वह जाये मैं भी आपके साथ साथ hi चलूंगी

केशव इस बार मल्टी की बात सुनकर खुस्स होता है और तपाक से मल्टी के मुँह को चूमने लगता है

हरी( कुटिया साली बड़ी सटी सावित्री होने का नाटक कर रही है और जब सुबह अपने बाप के लुंड पर झूला झूल रही थी तब तो एक दम बाजारू रंडी की तरह चिल्ला रही थी)

हरी( मन तो कर रहा है की अभी जीजा को बता दू की मेरी बेहेन कितनी बड़ी रंडी है अपने hi बाप से कहता चखवावतंर्ही है फिर देखता हु ये इसकी गांड पर कितनी जोर की लात मार कर जायेगा)

मल्टी भी अब केशव की बहो में सिमटती hi जा रही थी

उसका पूरा चेहरा लाल हो चूका था

इधर केशव का हाथ अब तक मल्टी के ब्लाउज के हक्क को खोलना सुरु कर चूका था और अब मल्टी भी केशानव की छाती के बालो को सहलाती हुई अपने हाथ को निचे ले जाकर सीधा उसके पैजामे में घुसा देती है

केशव - अह्ह्ह्हह

मल्टी- क्या हुआ जी

केशव - आज बहुत दिनों बाद जो पकड़ा है तुमने इसे

हरी समझ गया था की उसकी दीदी अब उसके जीजा के लुंड से खेलना शुरू कर चुकी है

मल्टी- मेरा तो मैं करता है की दिन रात इसके साथ खेलती hi रहु

केशव - अच्छा दिन रात इसके साथ खेलोगी तो घर का काम कौन करेगा फिर

मल्टी- अरे इसके साथ खेलते खेलते hi कर लुंगी मैं सरे काम अभी आप मुझे जानते नहीं है

हरी( सच में नहीं जनता जीजा तू मेरी दीदी को इसका बस चले तो दिन रात अपनी छूट में लुंड घुसवाये हुए hi सब काम निपटा लेगी )

मल्टी केशव के पायजामे में निचे सरकती हुई उसके छोटे से लुंड को जो की अब अपनी पूरी फॉर्म में आ चूका था कस कर अपनी मुट्ठी में दबोच लेती है

केशव मल्टी के इस हमले से सिसक कर रह जाता है

केशव - अह्ह्ह्हह क्या जादू है तुम्हारे हाथो में जणू

मल्टी- अभी आपने मेरे हाथो का जादू देखा hi खा है पति देव

मल्टी ( छोटे भाई का लुंड गधे जैसा और बड़े का कहे जैसा)

इतना बोलती हुई मल्टी केशव के लुंड को जोर जोर से मुठियाने लगती है

अपनी दीदी की चूडियो की खनक से हरी जान चूका था की उसकी दीदी अब जीजा की मुठ मार रही है

हरी भी अपने लुंड को अब पूरी तरह पायजामे से बहार निकल कर मुठियाने लगता है

इधर केशव अपनी आँखे बंद किये हुए अपनी बीवी की कलाकारी का मजा लूट रहा था

गरम तो मल्टी भी इस समय खूब थी फिर भी वो ऊपर के मन से hi अपने पति का लुंड मुठिया रही थी क्योंकि जब से उसने रवि का घोड़े जैसा लुंड अपने छेड़ो में भरा था उसके बाद से उसे चीते लुंड अक्सेह hi नहीं लगते थे

करीब 5 मं के बाद केशव मल्टी के हाथो में hi झाड़ जाता है

मल्टी अपनी सदी के सल्लू से सारा माल साफ़ करती है और यु hi केशव के साथ चिपकी हुई सो जाती है

रात भर हरी जगता रहा और लगातार एक के बाद एक अपने लुंड को मुठिया हुए सारा वीर्य अपनी दीदी की सदी पर डरता गया ताकि अगले दिन वो अपनी दीदी को अहसास दिला सखे की उसका वीर्य उसके ोाती से भी गधा है

रात भर वो इसी फिराक में था की अब दीदी को चुवे पर केशव की वजह से उसने कोई उलटी सीधी हरकत नहीं की

अगर गलती से भी मल्टी हदस कर उठ गयी तो केशव को सब आता चल जायेगा

बस यही सोच कर हरी अपने आप पर कण्ट्रोल किये हुए था

पर हरी की कहानी यही ख़तम नहीं होने वाली थी अभी तो उसे अपनी दीदी का शिकार करना था जिसके लिए वो उसके साथ अब केशव के गाओं जाने का प्लान बनाने में जूता हुआ था

सोये सोये hi हरी यही तिकड़म लगा रहा था की किससे क्या बोलू जो मैं भी मल्टी दीदी के साथ उनकी ससुराल जा सखु

वो जनता था की अगर मल्टी से वो सीधा सीधा बोलेगा तब तो वो उसे वैसे भी नहीं जाने देगी

अब देखना यह है की क्या हरी मल्टी की ससुराल जा पायेगा

और अगर चला भी गया तो क्या मल्टी रवि के होते हुए इन छोटे लुंड वालो को घर भी डालेगी

क्या होगा जब रवि एक भाई के hi सामने उसकी शादी शुदा दीदी को जानवरो की तरह एक रंडी की तरह छोड़ेगा

बहुत सरे सवाल है पर जवाब तो आने वाले समय में hi मिलेंगे

तो पढ़ते रहिये

घर ( उलझते रिश्ते)........
 
अपडेट -192

दूसरी तरफ गाओं में

आज रवि काफी खुश था क्योंकि अब उसका साथ खुद रेखा भी दे रही थी

रवि कमरे में जाकर बिस्तर लगाने लगता है अपना और अपनी दोनों दीदियो का

रेखा - क्यों कम्मो रानी अब तो खुश है न तू भी

कम्मो अनजान बनती हुई दूसरी और मुँह घुमा लेती है

कम्मो- क्यों दीदी

रेखा - अच्छा ग अब एक तो चोरी ऊपर से सीना जोरि

चल कोई नहीं ऐसा कर तू बहार hi सजा

कम्मो- नहीं नहीं दीदी मैं खुश हु अंदर सोने के लिए

कम्मो की बात सुनकर रेखा जोरो से हसने लगती है

रेखा - अच्छा एक काम कर जल्दी से बर्तन धो कर आजा तेरा इन्तजार कर रहा होगा तेरा छोटा भाई

कम्मो को छेड़ती हुई रेखा अंदर चली जाती है

कम्मो भी जल्दी जल्दी अपने सरे काम निपटने में लग जाती है

जल्दी भी क्यों न होती बेचारी को आज उसे पूरी फुर्सत से अपने चीते भाई के साथ मिलान का सुख जो मिलने वाला था

रात में क्या होने वाला है यह सोच कर hi कम्मो की छूट में चीटिया रेंगने लगी थी

इधर कमरे में पहुंच कर रेखा रवि को देखती हुई उसकी और बढ़ती है

रवि पहले hi बिस्तर बिछा कर बिच में लेत गया था मनो उसे एक साथ अपनी दोनों दिदिया चाहिए थी

रेखा - क्यों रे कमीने तुझसे सब्र नहीं होता जो मेरी पीठ पीछे hi उस बेचारी को गरमा रहा था

रवि धोती के ऊपर से hi अपना लुंड मसलता हुआ रेखा की और देखता है

रवि- क्या कृ दीदी अब मेरी दिदिया है hi इतनी गरम की कण्ट्रोल hi नहीं होता

रेखा- अच्छा कण्ट्रोल नहीं होता

रुक बताती हु तुझे

इतना बोलती हुई रेखा अपने पेटीकोट का नाडा एक झटके में खोल देती है

उसका पेटीकोट पैरो से सरकता हुआ सीधा जमीन पर जा गिरता है और अब रेखा निचे से पूरी तरह नंगी थी

रेखा - कण्ट्रोल तो आज मुझसे भी नहीं हो रहा वैसे भी बहुत दिन हो गए इस छूट की खुजली को

इतना बोलती हुई रेखा अपने दोनों पेअर खोलती हुई सीधा रवि के मुँह पर बैठ जाती है

रवि का पूरा मुँह रेखा की बड़ी सी गांड के बिच में डब्ब जाता है

पर रवि भी कोई कमजोर इंसान नहीं था वो अपने हाथो को रेखा की गांड के पीछे ले जाता हुआ अपनी पूरी जीभ को रेखा की छूट में घुसा देता है

रेखा - ahhhhhhhhhhjh

रवि लपलप रेखा की छूट कके अंदर जीभ अंदर बहार किये जा रहा था और पीछे से लगातार रेखा के दोनों चूतड़ों मो मसाले जा रहा था

रेखा एक दम से पलटती हुई रवि की धोती खींच कर दूसरी और फेक देती है

और सीधा उसके लुंड को अपने मुँह में भर कर चूसने लगती है

दोनों भाई बेहेन पागलो की तरह 69 पोजीशन का लुफ़्त्त ले रहे थे

इधर इस बात से अनजान कम्मो बहार बर्तन धोने में लगी हुई थी

उसे अब भी यही चिंता थी की वो रेखा दीदी के सामने रवि के साथ वो सब कैसे करेगी

उस बेचारी को क्या मालूम था की खेल तो पहले hi शुरू हो चूका है

रेखा जितनी जोर से रवि के मुँह पर अपनी छूट दबती रवि उतना hi जोरदार झटका रेखा के मुह्ह में मरता हुआ अपने लुंड को सीधा अपनी दीदी के हलक तक उतर देता

भाई बेहेन का यह हवस भरा खेल यु hi लगातार जारी था

दोनों में से कोई भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था

रवि अपनी दोनों पैरो को ऊपर उठता हुआ रेखा की गर्दन को जकड़ता हुआ अपने लुंड पर दबा देता है

अब रवि की इस हरकत से रेखा के होठ सीधा रवि के लुंड के अंतिम पड़ाव पर आकर रुकते है

रेखा की हालत अब खराब होने लगी थी

पर रवि मनो आज अपने मन की करके hi मानाने वाला था

रवि एक झटके का साथ पलट जाता है

और अब रेखा रवि के निचे थी

रवि अपने पैरो को पीछे करता हुआ जमीन पर टिकता हुआ अपने पैरो की उंगलियों पर ऊपर की और उठता है

इस बिच रवि का लुंड अब भी रेखा के मुँह में hi था

रवि अपनी दीदी की दोनों टैंगो को और फैलता हुआ उसकी छूट को खाने लगता है

और अपनी कमर को ऊपर की और खींचता हुआ एक जोरदार और करारा झटका रेखा के मुँह में मरता है

उस झटके से रेखा पूरी अंदर तक्क हिल जाती है

रवि एक के बाद एक जोरदार झटको के साथ रेखा की मुँहपेलई कर रहा था

रेखा के आँखों का काजल आंसुओ के साथ बेहटा हुआ अब उसके चेहरे को भी कला करबे लगा था

अच्चानक से रवि अपने लुंड को बहार खींचता हुआ पलट जाता है

रेखा खासी हुई अपनी हालत ठीक करती है तब तक्क रवि अपने लुंड को सीधा रेखा की छूट से लगता हुआ एक जोरदार झटका मरता हुआ सीधा रेखा की बच्चेदानी तक पेल देता है

रेखा - अह्ह्ह्हह मायआ मर्डर गयी

रवि तुरंत hi रेखा के रसीले होठो को अपने मुँह में भर कर चुस्त हुआ उसकी चुदाई करने लगता है

इधर कम्मो सारा काम निपटा पानी से भरा हुआ लोटा लेकर कमरे में जाने लगती है

इधर रवि एक झटकी में रेखा के ब्लाउज को ऊपर की और खींचता हुआ उसके सरे हक्क टॉड देता है

रेखा भी इस वक़्त पूरी मदहोश हो चुकी थी अपने छोटे भाई का लुंड पाकर

वो भी तुरंत hi अपने ब्लाउज को निकल कर अलग फेक देती है

रेखा और रवि अब पूरी तरह नंगे थे रवि एक हाथ से रेखा की चूचियों को मसलता हुआ उसके होठ चुस्त हिअ रेखा की चुदाई कर रहा था

रेखा रवि को धक्का देते हुए पलट देती है और अच्चानक से रवि के ऊपर आती हुई अपने मुँह से हतेली पर थूक उड़ेलती हुई अपनी फटी हुई गांड पर लगाकर सीधा रवि के लुंड पर अपनी गांड का छेद टिका देती है

रवि आगे हाथ बढ़ा कर रेखा की गर्दन को दबोचते हुए एक जोरदार झटके के साथ अपना लुंड रेखा की गांड में उतार देता है

रेखा - अह्ह्ह्हह तू तो पूरा जानवर बननन गया है कमीने

रवि- दीदी इंसान से तुम्हारी प्यास बुझ सकती है क्या

इधर कम्मो जैसे hi कमरे में पेअर रखती है अंदर का नजारा देख कर उसके दिल की धड़कन दुगनी रफ़्तार से दौड़ने लगती है

उसके हाथ से लोटा अच्चानक से छुटत कर ज़मीननं पर गिरर्र जाता है

आवाज सुनकर रवि और रेखा का धयान दरवाजे की और जाता है झा कम्मो खड़ी थी

पर कम्मो को वह देख कर मनो दोनों को कोई फरक hi नहीं पड़ा

दोनों मुँह घुमा कर अपनी चुदाई में दुबारा से बिजी हो जाते है

इधर कम्मो को साफ़ दिख रहा था की रवि का लुंड किश रफ़्तार से रेखा दीदी की गांड की धज्जियाँ उड़ा रहा है

ऊपर से रवि ने रेखा की गार्डन को पकड़ कर उसका पूरा चेहरा लाल कर दिया था

कम्मो अभीष्ट अभीष्ट चली हुई कमरे में दाखिल होती हुई दोनों के मुँह के करीब जाती है

कम्मो बैठती हुई दोनों दोनों को देखने लगती है मनो अब उसे भी इस खेल में मजा आ रहा था

पर इधर तो दोनों को कोई चिंता hi नहीं थी की उन दोनों की चुदाई उनकी hi एक बेहेन देख रही है

रवि रेखा की गर्दन को छोड़ता हुआ उसके मुँह में अपनी 3 उंगलिया घुसा देता है

रेखा पगली की तरह अपनी गांड रवि के लुंड पर मार रही थी

रवि अब रेखा के गाल पर एक छठा मरता हुआ उसके बालो को पकड़ कर अपनी और खींचता हुआ उसके होठ चबाने लगता है

कमरे में पूरी तरह से थापपप थप्प्प्प की मादक आवाजे गूंज रही थी

कम्मो की छूट अब किसी ज्वाला मुखी की तरह उबाल मर्डर रही थी उसका मैं तो कर रहा की अभी अपने कपडे खोल कर इस खेल में शामिल हो जाये पर वो सीखना कहती थी अपनी दीदी से की कैसे अपने चीते भ्सी को काबू में लाये

बेचारी कम्मो इस बात से पूरी तरह अनजान थी की चुदाई के इस खेल में रेखा भी रवि के सामने घुटने तक देती थी

रवि अपने लुंड को रेखा की गांड से निकल कर सीधा खड़ा हो जाता है

रेखा यु hi पड़ी पड़ी अब भी हाफ रही थी

रवि रेखा की गांड से निकले हुए चिपचिपे लुंड को अपने हाथो से मसलता हुआ रेखा के बाल पकड़ कर उसे उठता हुआ अपना लुंड सीधा उसके मुँह में पेल देता है

कम्मो और रेखा की नजरे इस पल एक दूसरे की आँखों में hi देख रही थी दोनों hi जानती थी की अब इस खेल को खेलना hi उनकी नियति है और दोनों की जगह हमेशा से वही रहेगी जो आज रेखा की है

रवि अपने एक हाथ से रेखा के बाल तो दूसरे हाथ से उसकी गर्दन को पकड़ता हुआ उसके मुँह को छोड़ रहा था करीब 5 मिंट तक ऐसे hi अपनी दीदी की मुहचुड़ै के बाद रवि अपना सारा माल रेखा के मुँह में भर देता है

रेखा की आँखे अच्चानक से बहार आ जाती है

फिर भी रेखा गट्ट गत्त करके सारा विरया पी जाती है

उसके पास और कोई चारा भी नहीं था

आखिर कर रवि को अपनी दीदी पर रेहम आता है और वो अपने लुंड को उसके मुँह से बहार खींच लेता है

रेखा बुरी तरह से खास रही थी उसके मुँह से वीर्य और थूक की एक मोती धारर निचे जमीन ओर गिरर्र रही थी

कुछ hi पल में रेखा की हालत में कुछ सुधर आता है वो कम्मो की और द्केहती हुई उसे आँख मर्डर कर पानी लेन का इशारा करती है

कम्मो तुरंत hi उठ कर दुबारा से लोटे में पानी ले आती है

रेखा गत्त गत्त करके एक लोटा पानी पी जाती है बिना

रेखा रवि की जांघ पर हरह मरती हुई बोलती है

रेखा- क्यों घोड़े मजा आया अपनी दीदी की चढ़ाई कर के

रवि- भट्ट मजा आया दीदी तुम बोल तो एक राउंड और हो जाये

रेखा - अरे न बाबा न एक hi बार में तूने मेरी हालत पंचर कर दी अब मुझसे नहीं होगा तू सजा और कम्मो तू भी सजा सुबह जल्दी उठना है

इतना बोल कर रेखा वैसे hi नंगी दूसरी और मुँह घुमा कर सू जाती है

रेखा के फ़टे हुए सेहद अब भी कम्मो को दिख रहे थे जिनमे से रह रह कर रवि और उसकी चुदाई से पैदा हुआ काम रास बहार आ रहा था

रवि अपनी जगह पर लेत जाता है

कम्मो इस पल गहरी सोच में डूबी हुई थी उसे समझ नहीं आ रहा था की रवि की इस ताबड़तोड़ चुदाई ले बाद तो रेखा दीदी की हालत खराब होनी चाहिए

पर वो तो खूसस है और उनकी इस खुसी को वो उनके चेहरे पर साफ़ देख सकती थी

रवि और रेखा ऐसे hi नंगे थे

रवि- क्या हुआ दीदी सोना नहीं है क्या

रवि की आवाज से कम्मो एक दम से होश में आती है

कम्मो- हहहह सटी हु

कम्मो इतना बोलती हुई उठ कर कमरे को अंदर से बंद कर देती है

बिस्तर की और जाते हुए कम्मो के मैं में एक hi सवाल चल रहा था की अगर रवि उसके साथ भी वैसे hi करेः तो उसकी क्या हालत होगी .....
 
अपडेट -193

बिस्तर के करीब पहुंच कर कम्मो चुपचाप कड़ी कड़ी कुछ सोच रही थी

तभी रवि अच्चानक से उसका हाथ पकड़ते हुए उसे निचे की और खींचता है

कम्मो धड़ाम से उसके ऊपर गिर जाती है

कम्मो की तेज चलती सांसे रवि साफ़ महसूस कर पा रहा था

रवि कम्मो के कान के करीब पहुँचता हुआ उससे प्लसे पहुँचता है

रवि- क्या हुआ दीदी डर रही हो क्या मुझसे

कम्मो- मैंनं क्यों दृऊ तुझसे

मुझे सोने दे वैसे भी रात भीत हो गयी है

रवि- दीदी रात में hi तो मजा आता है

कम्मो- किस चीज़ में

रवि- भाई बेहेन के उस गंदे खेल को खेलने के जो अभी थोड़ी देर पहले तक्क मैं रेखा दीदी के सारः खेल रहा था

उतना बोलता हुआ रवि अपने हाथो को पीछे ले जाता हुआ कम्मो की दोनों गांड को दबोच लेता है

कम्मो- ahhhhhhhhhhj

रवि- क्या हुआ दीदी नहीं खेलना क्या

कम्मो रवि की बात का कोई जवाब नहीं देती पर अपने शरीर को पूरा ढीला छोड़ देती है

रवि - लगता है रेखा दीदी की चुदाई देख कर डर गयी हो तुम

बोलते हुए रवि लगातार कम्मो के पेटीकोट के ऊपर से hi उसके दोनों चूतड़ मसल रहा था

रवि- डरो मैट दीदी अभी तो तुम्हारी सील तोड़नी है न इस लिए सब आराम आराम से करूँगा

कम्मो थूक गटकती हुई बोलती है

कम्मो- और उसके बाद

रवि- उसके बाद तुम्हारी छूट इस कदर मरूंगा की मेरा पूरा लुंड एक hi बार में फतछःह से तुम्हारी छूट में घुस जायेगा

इतना बोलते हुए रवि अपनी एक ऊँगली को पेटीकोट के ऊपर से hi कम्मो की गांड की दरार में घुसा देता है

रबी की ऊँगली सीधा कम्मो के गांड के सेहद को जाकर चुटी है

रवि के इस हमले से कम्मो अंदर तक्क कम्प उठती है

कम्मो- शीइइइइइइइ ahhhhhhhhhhjh

रवि- उसके बाद इस ढक्कन को भी तो खोलना है न दीदी

रवि की बाटे अब कम्मो को डरने के साथ साथ उसके लुंड की सवारी करने को उकसाए भी रही थी

कम्मो- हॉट कमीने मैंने देखा था तू कैसे दीदी की गांड फाड़ने पर तुला हुआ था

मुझे नहीं खुलवाना तुझसे कोई ढक्कन

जरा देख तो तूने बेचारी दीदी के ढक्कन को किस कदर खोल दिया है जो ान तक बंद होने का नाम hi नहीं ले रहा है

कम्मो रेखा के फ़टे हुए गांड के छेद की और इशारा करते हुए बोलती है

दोनों भाई बेहेन की नजर इस वक़्त रेखा के उस छेद पर hi थी

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रवि - यही तो मजा है दीदी गांड मरवाने का बस एक hi बार का दर्द होता है उसके बाद तो कहे गधे का लुंड घुसवा लो अपनी गांड में कोई फर्क नहीं पड़ेगा

इतना बोलता हुआ रवि अपनी एक ऊँगली को अपने मुँह में घुसता हुआ सीधा रेखा की गांड के छेद में घुसा देता है

बिना किसी जोर के ऊँगली सीधा रेखा की गांड में समा जाती है

रेखा को तो मनो कोई फर्क hi नहीं पड़ता

वो घोड़ी जो की त्यों सोई हुई थी

कम्मो- तेरा किसी गधे से कम् है क्या

रवि- क्या दीदी

कम्मो अपनी कमर अपने पेट को थोड़ा उठती हुई अपना हाथ निचे ले जाते हुए सीधा रवि का लुंड पकड़ लेती है जो अब तक दुबारा से खड़ा होना शुरू हो चूका था

कम्मो- तेरा ये गधे जैसा लुंड

रवि- अह्ह्ह्हह दीदी तुम्हारे मुँह से ऐसी गन्दी गन्दी बाटे सुनकर बहुत मजा आता हसि सच में

कम्मो- तेरे चक्कर में जो पड़ेगा तू उन सबको बिगड़ देगा

जब तुम मेघा दीदी को नहीं छोड़ा तो किसे छोड़ेगा

रवि- अभी तो तुम्हारे साथ और भी गंदे गंदे काम करने है दीदी मुझे

इतना बोलता हुआ रवि अपने हाथो से कम्मो का पेटीकोट पकड़ कर ऊपर उठता हुआ सीधा उसकी कमर के ऊपर कर देता है

एक चपपट कम्मो की गांड पर मरता हुआ रवि दुबारा से उसकी गांड को दबोच लेता है

कम्मो - अह्ह्ह्हह कमीनी क्यों मार रहा है

रवि- तुम्हारी गांड hi इतनी फूली हुई है की खुद को रोक नहीं पता दीदी मैं क्या कृ

कम्मो- क्या गंदे काम करने है तुझे मेरे साथ

रवि- तुम्हारा मुँह चूसना है दीदी

कम्मो- और

रवि- तुम्हारी िन्न्न मोती मोती चूचियों को निचोड़ कर इनका दूध पीना है

कम्मो- हट बदमाश कोई अपनी दीदी का दूध पिता है भला

रवि- जिसकी दीदी के तंत्र इतने मोठे मोठे हो वो तो जरूर पिता होगा दीदी

कम्मो- अच्छा और क्या करेगा तू मेरे साथ गंदे गंदे काम

रवि दोनों चूतड़ों को फैलता हुआ अपनी हाथ को दुबारा से कम्मो की गांड की दरार में घुसा देता है

रवि की ऊँगली दुबारा से कम्मो की गांड के छेद को छुऊं जाती है

कम्मो- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

रवि - तुम्हारे गांड के छेद को चूसना है दीदी चेतना है इसे जी भर कर तुम्हारा खुसबू भरा पाददद सूंघना है दीदी मुझे

कम्मो- हॉट बदमाश मैं नहीं पड़ती कभी

रवि- मैं आपको पाद मरने पर मजबूर कर दूंगा दीदी

कम्मो- वो कैसे भला

रवि अपनी एक ऊँगली को कम्मो की गांड के छेद में घुसता हुआ बोलता है

रवि- तुम्हारी गांड को जब तक चुस्त और चाटता रहूंगा जब तक्क तुम मेरे मुँह पर पाद न दो

कम्मो- आह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ सच में तू बहुत कमीना hi गया है रेखा दीदी को छोड़ने के बाद से

कम्मो- और क्या क्या करेगा

असल में रवि की बाटे कम्मो को अब उस आग में जलने के लिए मजबूर कर रही थी जिसमे वो पूरी तरह से भसम होने वाली थी

रवि- तुम्हारी छूट चाटूँगा उसका सारा रस पी जाऊंगा

उसके बाद अपने लुंड से तुम्हारे मुँह को भी छोडूंगा और अपना लौड़ा तुम्हारी इन दोनों खरबूजे जैसी चूचियों के बिच में दाल कर इन्हे भी छोडूंगा फिर तुम्हारी बगल से आती हुए पसीने को जी भर कर सुंगंगा और चाटूँगा फिर तुम्हारी छूट की सील तोडूंगा और फिरर अंतत में तुम्हारी गांड का ढक्कन खोलूंगा दीदी

रवि एक hi साँस में इतना कुछ कह जाता है

कम्मो - कमीने इतना सब कुछ करने के लिए सोच कर बैठा है तू मेरे साथ तू तो एक रात में hi मुझे पूरा खोल देगा

रवि- खुलन्गा नहीं दीदी तुम्हे तो मैं लड़की से एक औरत बनाऊंगा जिसमे

कम्मो- हट कमीने मुझे नहीं बनना औरत

कम्मो इतना बोलती हुई सरक कर निचे जमीन ओर आ जाती है और अपने पेटीकोट को दुबारा से निचे करती हुई रवि की और गांड घुमा कर सोने का नाटक करने लगती है

रवि को तो लग रहा था की कम्मो दीदी अब खुद hi कूद कर उसके लुंड पर बैठ जाएगी

पर यह तो बेचारे रवि के साथ कलपद हो गया

रवि का लुंड अब पूरी तरह से तन्न कर खड़ा था

कम्मो दूसरी और मुँह घुमाये हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी

उसे मालूम था की उसने अपने छोटे भाई को पूरी तरह उकसा कर उसे बच मजधार में hi छोड़ दिया

असल में कम्मो रवि को तड़पना कहती थी

रवि( साला अब तो लगता है की मुझे खुद hi दीदी को छोड़ना ोडेगा भले hi जबरदस्ती hi क्यों नहीं पर आज रात को hi पियूँगा कम्मो दीदी की जवानी का रस)
 
अपडेट -194

रवि की आँख थी की कम्मो के पिछवाड़े से हट hi नहीं रही थी

इधर लेते लेते करीब 10 मिंट हो चुके थे फिर भी कम्मो की आँखे कुली हुई थी

असल में तो वो भी इन्तजार में थी की कब उसका छोटा भाई उस पर टूट पड़े और उसके इस गदराये बदन को निचोड़ कर जवानी का पूरा रस पी जाई

इधर रवि के दिमाग में यही उधेड़ बन चल रही थी की आखिर कम्मो दीदी को अचानक

क्या हुआ जो यु पलट कर सो गयी

रवि अब तक पूरा नंगा hi लेता था उसका खड़ा लुंड अब बैठने का नाम नहीं ले रहा था उसे तो अब बस उसकी कम्मो दीदी की छूट की गर्मी hi शांत कर सकती थी

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अच्चानक से कम्मो की गांड पर कुक गाड़ने लगता है उसे समझते देर नहीं लगती की वो क्या चीज़ है जो उसके पिछवाड़े में घुसना कहती है

कम्मो अपनी गांड को थोड़ा और पीछे की और धकेल देती है

कम्मो का इशारा रवि भाप चूका था

वो अपना हाथ आगे बढ़ता हुआ सीधा कम्मो दीदी के उठे हुए पेट पर रखता हुआ सीधा आगे की और सरकता है

जिस वजह से उसका पूरा लुंड कम्मो की गद्देदार गांड में समाए जाता है

वी तो शुक्र था उस पेटीकोट का जो अब तक कम्मो की गांड को रवि से बचाये हुए थी

रवि कम्मो की नाभि को छेड़ता हुआ उसकी गर्दन चुम्म्म लेता है

कम्मो थोड़ी सी हिलती है और फिर अच्छानक से पीछे की और पलट कर रवि की आँखों में देखने लगती है

दोनों भाई बेहेन इस वक़्त एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे बिना पलके झपकाए

और दोनों की hi आँखों में सिर्फ और सिर्फ हवस भरी थी

रवि कम्मो की आँखों में देखता हुआ अपना हाथ सीधा उसकी एक चुकी पर रख देता है और दबाने लगता है

कम्मो अपने चेहरे पर बनावटी गुस्सा लती हुई रवि को दिखती है

रवि आगे बढ़ता हुआ सीधा कम्मो के होठो को चूसने लगता है करीब 2 मिंट तक्क रवि ऐसे hi अपनी दीदी के निचले होठ को चबाता रहता है जब वो उसे छोड़ता है तो कम्मो की हालत देखने लायक थी

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कम्मो बनावटी गुस्सा दिखती हुई रवि के गाल पर एक चपत लगा देती है

अभी कम्मो ने छठा मारा hi था की रवि तुरंत उसका हाथ पकड़ कर थोड़ा पीछे हटाता हुआ अपने लुंड पर राखह देता है और दोबारा से कम्मो के होठो को चूसने लगता है

अबतक कम्मो भी काफी गरम हो चुकी थी दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को पागलो की तरह चुम्म रहे थी

कम्मो हाफति हुई अपना मुँह रवि के मुँह से जैसे तैसे दुर्र करती है तबतक रवि दुबारा से अपना मुँह आगे बढ़ता हुआ पानी जीभ को कम्मो दीदी के मुँह में घुसा देता है

कम्मो अब पुरे जोश के साथ रवि के मोठे तगड़े लौड़े को अपने नाजुक हाथो में दबोचे हुए मुठिया रही थी

इधर रवि अपना हाथ चुकी से हटाता हुआ सीधा कम्मो की छूट पर रख देता है

रवि कम्मो की छूट को पेटीकोट के ऊपर से hi सेहला रहा था

अच्चानक से कम्मो अपनी टैंगो को उठती हुई फैला देती है बस फिर क्या था रवि एक hi झटके में उसके पेटीकोट को खींचता हुआ उसकी कमर तक कर देता है और बिना किसी देर के सीधा अपने हाथ को कम्मो की छूट पर रखता हुआ उसके दबे को सहलाने लगता है

जैसे hi रवि का हाथ कम्मो की छूट पर पड़ता है उसका अंग अंग खिल उठता है उसका शरीर एक जोरदार झटका लेता है इस इस झटके के साथ hi कम्मो अपनी जीभ को रवि के मुँह में घुसा देती है

रवि कम्मो की सुत्त को सहलाता हुआ अपनी एक ऊँगली को सीधा उसकी गीली छूट में उतार देता है

रवि के इस हमले से कम्मो का बदन अकड़ से जाता है

रवि जनता था की कम्मो दीदी अब झड़ने वाली है रवि लगातार कम्मो के मुँह को चुस्त हुआ धुरे धीरे उसकी छूट में अपनी पूरी ऊँगली उतार देता है

अब आलम यह था की एक दूसरे के मुँह में दोनों भाई बेहेन की जीभ एक दूसरे की जीभ से कुस्ती लद्द्ड रही थी

रवि लगातार कम्मो की छूट में अपनी ऊँगली से आगे पीछे करता हुआ उसे चुदाई का वो सुख दे रहा था जो इससे भी ज्यादा शानदार हो सकता था अगर ऊँगली की जगह रवि का लुंड होता ताऊ

करीब 10 -15 मिंट तक दोनों भाई बेहेन ऐसे hi एक दूसरे के अंगो को सहलाने जे बाद कम्मो की छूट पानी पानी हो चुकी थी

कम्मो के कामर्स से रवि का हाथ पूरी तरह संन्न चूका था

अच्चानक से कम्मो अपनी पीठ को ऊपर उठती हुई अकड़ने लगती है

रवि अब अपनी पूरी रफ़्तार में उसकी छूट को अपनी ऊँगली से छोड़ने लगता है कुछ hi पल में कम्मो अपनी जिंदगी का पहला और बेहनतरीन चरम सुख प्रपात करती है खुद अपने hi छोटे भाई के हाथो से

रवि कम्मो के मुँह को छोड़ता हुआ उसकी और देखता हुआ अपने हाथ को चूसने और चाटने लगता है

जिसपर कम्मो की छूट का रस लगा हुआ था

यह देख कर कम्मो के अंदर एक चिंगारी सी भड़क जाती है

कम्मो रवि के लुंड को छोड़ती हुई उठ खड़ी होती है और एक झटके में hi अपना पेटीकोट के नदी को खींच कर खोल देती है

अगले hi पल रवि की नजरो के सामने उसकी दीदी का पेटीकोट उसके पैरो से सरकता हुआ सीधा जमीन पर जा गिरता है

कम्मो रवि की आँखों में देखती हुई पलट कर दरवाजे की और जाती है और दरवाजे को खोल कर एक नजर फिर रवि की और देखती है और दरवाजे के बहार चली जाती है

रवि तुरंत hi खड़ा होता हुआ दरवाजे की और भागता है जैसे hi रवि कमरे से बहार जाता है बहार का नजारा देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है

चांदनी रौशनी में उसकी कम्मो दीदी बिना किसी शर्म लाज के अपनी दोनों टैंगो को फैलाये हुए खाट पर बैठी हुई रवि की और hi देख रही थी

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कम्मो दीदी की छूट पर उसके hi कामर्स से एक अलग hi तरह की चमक पैदा हो रही थी जो रवि को रिझाने के लिए काफी थी

रवि बिना किसी देर किये सीधा कम्मो के पास पहुँचता हुआ जमीन पर बैठ कर उस छूट को करीब से देखने लगता है जिसे देखने के लिए न जाने वो कब से तड़प रहा था

रवि एक नजर कम्मो मि आँखों में देखता है

कम्मो की आँखे इस समय पूरी लाल थी

रवि तपाक से अपना मुह्ह सीधा कम्मो की छूट पर रखता हुआ उसके चिपके हुए होठो को चूसने लगता है

जैसे hi रवि के होठ कम्मो की छूट को छूटे है कम्मो अपने हाथ को आगे बढ़ती हुई सीधा रवि के सर पर रखती हुई उसे अपनी छूट पर दबाने लगती है

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इधर रवि पागलो की तरह कम्मो की छूट को छत्त रहा था उधर कम्मो की गर्मी इतनी बढ़ गयी थी की वो खुद hi अपने ब्लाउज के सरे हुक खोलती हुई रवि के एक हाथ को पकड़ कर अपनी नंगी चूचियों पर रख देती है

रवि के लिए मनो ये सब किसी सपने के जैसा था उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की उसकी कम्मो दीदी कितनी गरम औरत है

रवि अब छूट चाटने के साथ साथ अपनी दीदी की दोनों चूचियों को भी लगातार मसल रहा था

इधर कम्मो अपनी आँखे पलटते हुए गर्दन को इधर से उधर घुमा रही थी कुछ hi पल में कम्मो दूसरी बार भी झाड़ जाती है

झड़ने के समय कम्मो अपनी कम्पटी हुई टैंगो से रवि के सर को जोरसे अपनी छूट पर दबा लेती है

रवि भी अपनी पूरी ताक़त कर साथ कम्मो की दोनों चूचियों को अपनी हाथो में दबोचे हुए अपनी दीदी की छूट से निकल रहा अमृत समानं विरया पिने में लगा हुआ था

कीच hi पल में कम्मो की पकड़ रवि के सर से ढीली होती है

रवि ऊपर की और उठता हुआ अपनी दीदी की हालत देखता हुई जोकि पूरी तरह पसीने में लटपट हाफ रही थी

रवि- तुमने तो मेरा दम hi घोट दिया था दीदी

कम्मो- अच्छा और मुझे उकसाया भी तो तूने hi था न

रवि- अच्छा अभी रुको बताता हु

इतना बोलता हुआ रवि सीधा कम्मो के ऊपर आ जाता है और उसके होठो को सुस्ता हुआ दूसरे हस्त से अपना लुंड पकड़ कर कम्मो की गीली छूट पर रगड़ता हुआ उसे अहसास करता है की असली खेल तो अभी बाकि है

कम्मो भले hi 2 बार झाड़ चुकी थी पर अब तक उसका शरीर ढीला नहीं पड़ा था उसे भी अब सिर्फ और सिर्फ अपने छोटे भाई का लुंड चाहिए था वो भी सीधा छूट में

कम्मो अपनी कमर को बार बार उठा कर आगे कर रही थी ताकि रवि का लुब्द उसकी छूट में चला जाये

पर शायद बेचारी को यह नहीं मालूम था की जिस चीज़ के लिए वो इतना तड़प रही है आज की रात वो चीज़ उसे कितनी तकलीफ देने वाली है

कामो के बार बार यु कमर उठाएं से रवि भी अपने सुपडे को उसकी छूट पर सेट करता हुआ एक करारा झटका मरता है पर छूट इतनी ज्यादा चिकनी और चिपचिपी हो चुकी थी की उसका लुंड चटक कर ऊपर की और चला जाता है

इस बार कम्मो खुद hi रवि के लुंड को पकड़ कर अपनी छूट ओर लगा देती है और उसे पकडे रहती है ताकि इस बार भी वो चटक न जाये

रवि- दाल दू दीदी

कम्मो- दाल दे भाई

रवि- क्या दाल दू दीदी

कम्मो- अपना लुंड दाल दे भाई मेरी छूट में अब और गर्मी बर्दास्त नहीं होती

रवि- देख लो दीदी कहि मुझे छुड़वाने के बाद गाभिन हो गयी तो गड़बड़ हो जाएगी दुनिया कहेगी की मैंने अपनी इस गदराई हुई दीदी को दिन रात छोड़ छोड़ कर गाभिन कर दिया

कम्मो- अब तू गाभिन कर या जान लेले अपनी दीदी की जो होगा देखा जायेगा बस आज की रात अपनी इस दीदी को भी एक औरत होने का सुख देदे

रवि- ठीक है दीदी चिलाना मैट

अबदार रेखा दीदी सोई है

कम्मो- अरे वो नहीं उठने वाली अभी तू छोड़ मुझे दबा के आज की रात

कामो - हहहह आपको कैसे पता की आज वो नहीं उठेंगी

कम्मो- कमीने जिस तरह तूने रेखा दीदी की गांड मर्री है मुझे तो लगता है वो 2-3 दिन ठीक से चल नहीं पाएंगी

रवि- अरे आपको नहीं पता दीदी रेखा दीदी कितनी बड़ी खिलादन है ये तो उनका रोज का काम है जब तक 1-2 मेरा लुंड अपनी छूट या गांड में न लेले तब तक उनको चैन hi नहीं पड़ता

पता है क्या बोलती है

बाते करते हुए कम्मो अपने hi हाथ से अपने छोटे भाई के सुपडे को लगातार अपनी छूट पर घुस रही थी जिससे उसे एक अलग hi अहसास हो रहा था मनो वो आज लड़की होने का असली सुख प्रपात कर रही हो

कम् - क्या बोलती है रेखा दीदी तुझसे

रवि- बोलती है की जब से मैंने उन्हें पहले दिन छोड़ा है उसके बाद से उनकी छूट और गांड में खुजली होती है जो सिर्फ मेरा लौड़ा अंदर जाने के बाद hi शांत होती है

कम्मो- अरे तू छोड़ न रेखा दीदी की खुजली को पहले मेरी खुजली का कुछ अभी तो तेरा लौड़ा अंदर भी नहीं गया अभी से इतनी खुजली हो रही है

हैए राममम छोड़ दे रवि मुझे छोड़ दे अपनी दीदी को

कम्मो का इतना बोलना था की रवि अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठता हुआ एक जोरदार और करारा झटका मरता है

इस झटके से रवि का लुंड फनफनाता हुआ सीधा कम्मो की सील पैक छूट में घुस जाता है

रवि का आधा लुंड अब कम्मो की छूट में घुस चूका था

रवि के इस झटके की वजह से कम्मो के शरीर की नाश नाश फटने लगती है

उसकी आँखे बहार को आ जाती है

रवि तुरंत hi अपने हाथ से कम्मो के मुँह को दबा कर उसकी आवाज को रोक देता है नहीं तो शायद आज पुरे गाओं को मालूम पद जाता की कम्मो रानी की सील उसके hi छोटे भाई ने तोड़ दी
 
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रवि के इस जोरदार झटके के साथ उसका लुंड आधे से ज्यादा उसकी दीदी की गरम छूट में घुस जाता है

कम्मो इस दर्द से तड़पती हुई रवि की आँखों में देख रही थी जो अपने एक हाथ से उसके मुँह को दबाते हुए उसकी और hi देख रहा था

कम्मो की आँखों से बहते आंसू रवि को ुल्यैः अहसास करा रहे थे की उसकी दीदी कितना दर्द में है पर रवि जनता था की अगर आज उसने अपनी दीदी का छूट नहीं खोली तो न काने अगला मौका कब मिलेगा

रवि- दीदी बस थोड़ा सा और दर्द्द होगा ये बर्दास्त करलो उसके बाद मजे hi मजे है

रवि अपनी कमर को थोड़ा पीछे खींचता है

पर उसका लुंड जो का त्यों hi रहता है

मनो उसका विशाल लुंड उसकी दीदी की संकरी सबूत्त में फस्स सा गया था जो अब बिना जान लगाए न तो अंदर जाने वाला था और न hi बहार आने वाला था

अपने छोटे भाई को एक्शन में आता देख कम्मो की आँखे एक ब्वार फिर से चौड़ी हो जाती है

रवि बिना किसी सेहतवानी के एक और जबरदस्त झटके के साथ अपने लुंड को कम्मो की छूट में पूरा थोक देता है

कम्मो की तो मनो सांसे hi ृक्क गयी थी रवि के इस हमले के बाद

रवि ऐसे hi शांत लोइड को कम्मो की छूट में फसाये रहता है

निचे पड़ी चादर पूरी खूनम खून हो चुकी थी

करीब 5 मिंट तक ऐसे hi शांत रहने के बाद कम्मो का दर्द कुछ हद्द तक कम् होता है रवि अब तक अपने हाथ को उसके चेहरे से हटा चूका था

रवि- जयादा दर्द हुआ क्या दीदी

कम्मो - तू तो जान लेकर hi मानेगा रवि मेरी

रवि- क्या कृ दीदी यही तो बस एक दर्द था हमारे बिच अब आज के बाद से देखना मुझे आपसे प्यार करने के लिए कोई दर्द बिच में नहीं आएगा

कम्मो अपने हाथ को निचे ले जाती हुई रवि का लुंड टटोलने लगती है

शायद वो अंदाजा लगाना कहती थी की रवि ने कितना लौड़ा उसकी छूट में घुसाया है

जैसे hi कम्मो हाथ निग्हे ले जाती है उसके हाथ सीधा रवि के तत्तो को छूटे है जोकि पूरी तरह उआकी छूट से चिपके हुए थे

कम्मो- हेय भगवान् एक hi बार में पूरा दाल दिया तूने कमीने

कम्मो- दीदी आधा डालने में मजा नहीं आता

इतना बोलता हुआ रवि अपने लुंड को आहिस्ता से थोड़ा सा बाजार खींचता है

कम्मो एक बार फिर दर्द से तड़प उठती है

रवि तुरंत hi उसके होठो पर अपने होठ रखता हुआ उसके मुँह के अंदर अपनी जीभ घूमता हुआ अपनी दीदी का मुँह चूसने लगता है

रवि अब हलके हलके झटको के साथ कम्मो को छोड़ना शुरू कर चूका था

कम्मो भी धीरे धीरे दुबारा लाइन पर आने लगी थी

उसकी सीखे अब मादक सिसकिया बन गयी थी

रवि- क्या हुआ दीदी अब मजाआ आ रहा है ना

कम्मो - क्या बताऊ भाई कितना मजा आ रहा है मन कर रहा हसि की बस ऐसे hi पड़ी रही तेरे सामने अपनी दोनों टंगे फैलाये

रवि- अच्छा मतलब अब तुम्हारा दर्द गायब हो गया

कम्मो- है गायब हो गया

रवि - अच्छा

इतना बोलता हुआ रवि अपने लुंड को आधे से ज्यादा बहार निकलते हुए एक जोरदार झटका मरता हुआ दुबारा से कम्मो की छूट में पेल देता है

कम्मो- अह्ह्ह्ह माआ मर गयीईइ रे कमीनी मार hi डालेगा क्या आज तू मुझे

रवि- हहहह दीदी अपने hi तो बोलै था दर्द ख़तम हो गया

कम्मो- अच्छा एक तो अपना ये गधे जैसा लुंड मेरी छूट में फसाये बैठा है ऊपर से मुझसे hi मजाक कर रहा है

कोई बात नहीं बीटा बस आज भर मार ले मेरी छूट उसके बाद तुझे चुने भी नहीं दूंगी

रवि- दीदी आज की रात hi तुम्हारी ऐसी चुदाई करूंगा की तुम रोज रात अपनी ये छूट लेकर आओगी मेरे पास इसकी खुजली मिटवाने के लिए

इतना बोलता हुआ रवि एक और जोरदार झटका मरता है

कम्मो को भी अब असली चुदाई में दोगुना मजा आ रहा था

कम्मो- अच्छा इतना यकीन है तुझे की मैंनं रोज रात को आउंगी तुझसे छुड़वाने

रवि- हम्म्म तो क्या आपको मजाक लग रही है मेरी बाटे

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रवि- वैसे दीदी एक बात बताऊ रेखा दीदी को तो जरा भी दर्द नहीं हुआ था मुझे अपनी सील तुड़वाते वक़्त

कम्मो- क्या पता तूने उनकी सोते हुए पहले hi सील तोड़ दे हो वैसे भी तो वो घोड़े बेच कर सोती है

कम्मो की बात पर दोनों भाई बेहेन हसने लगते है

रवि के झटके अब तेज होने लगे थे हर झटका पहले वाले से तेज होता जिसके साथ hi काममो का पूरा शरीर हिल उठता

करीब 5 मिंट तक ऐसे hi कम्मो दीदी को छोड़ने के बाद रवि उठ जाता है

कम्मो की नजर जब रवि के लुंड पर पड़ती है तो उसकी आँखे फ़टी की फटी रह जाती है

क्योंकि इस वक़्त रवि का लुंड पूरा लाल हो गया था और ये साडी लाली कम्मो के गरम खून की hi थी

रवि कम्मो का हाथ पकड़ता हुआ उसे उठता हुआ कमरे के अंदर ले जाता है झा रेखा सोई हुई थी

रवि कम्मो को रेखा के बगल में hi घोड़ी बना कर एक झटके में अपना लुंड उसकी बुर्र में पेल देता है

कम्मो- अह्ह्ह माआ

कम्मो अपनी आवाज को दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी पर इधर रवि की चुदाई को देख कर तो यही लग रहा था की चुदाई की आवाज से वो रेखा को उठाना कहता है ताकि वो भी देख सखे की रवि आज अपनी साडी दीदियो की सवारी करने में कामयाब हो चूका है

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रवि- अब बोलो दीदी मजा आ रहा है की नहीं एक असली औरत की तरह अपने छोटे भाई से छुड़वाने में

कम्मो- बहुत मजा आ रहा है मेरे भाई बस तू मुझे छोड़ता जा अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हआआ ऐसे hi और अंदर तक पेल अपना लौड़ा मेरी बुरर्र मी अह्ह्ह फाड़ दे इसी न जाने कबसे एक लुंड के लिए तड़प रही थी कोई रेहम अह्ह्ह्हह्ह मत करना छोटे िस्परर ये साली रोज पता नहीं तेरे लुंड को याद कर कर के कितना पानी छोड़ती है

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रवि अपनी एक ऊँगली को मुँह में भर कर गिला करता हुआ सीधा कम्मो की गांड के छेद पर दबा देता है धीरे धीरे ऊँगली सरकती हुई पूरी तरह से कम्मो की गांड के छेद में उतर जाती है

अब रवि के झटके इतने तेज हो चुके थे की कम्मो अपने हाथो को और नहीं टिका पति और वो धड़ाम से सीधा रेखा का के ऊपर गिर्र जाती

रवि फिर भी रुकने का नाम नहीं लेता और सटासट कम्मो की छूट को छोड़ना जारी रखता है

अब कम्मो की चुदाई के साथ साथ रेखा का पूरा शरीर भी हिल रहा था

कुछ hi पल में रेखा की आँख खुल जाती है

पुरे कमरे में फतछः फतछः के आवाजे गूंज रही थी

उसे समझते देर नहीं लगती की ये आवाज किस चीज़ की है

रेखा कम्मो को यु अपने ऊपर नंगी पड़ी हिलती हुई देख कर एक दम से उठ कर बैठ जाती है

रेखा - आखिर छोड़ hi दिया तूने इसे भी कर ली न अपने मैं की

रेखा दोनों को देखती हुई बोलती है

रवि- क्या कृ दीदी शायद मेरे नसीब में यही लिखा यह की मैं अपनी तीनो दीदियो की छूट को अपना लौड़ा खिलौ

रवि लगातार कम्मो को पेले जा रहा था

कम्मो छटपटाती हुई सीधा रेखा का हाथ पकड़ लेती है

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रवि कम्मो की छूट से अपना लुंड निकल कर सीधा रेखा के चेहरे के आगे ले जाता है रेखा भी बिना किसी सवाल के अपना मुँह खोलती हुई कम्मो की छूट के पानी से स्ने हुए लौड़े को चूसना चालू कर देती है

रवि अब अपनी पूरी ताक़त से रेखा के मुँह को पेलने लगता है

कम्मो यु hi घोड़ी बनी अपनी बरी के इन्तजार में थी

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करीब 2-3 मिंट बाद रवि अपने लुंड को रेखा के मुँह से बहार निकलता है और फर से कम्मो के पीछे आता हुआ अपने एक घुटने को जमीन पर टिकता हुआ लुंड को निशाने पर रखता हुआ एक hi झटके में कम्मो की खुली हुई छूट में पेल देता है

कम्मो- अह्हह्ह्ह्ह मायआ माअररररर डाला रे कुट्टी

रेखा तुरंत hi आहे बढ़ती हुई कम्मो का सर अपनी नंगी जांघो पर रखती हुई उसके बालो को सहलाते हुए उसे दिलासा देने लगती है

रेखा - बस बस कम्मो बस यही दर्द तुझे एक दो बार होगा उसके बाद से ये कुत्ते जब भी तुझे छोड़ेगा तुझे सिर्फ मजे hi मजे आएंगे मेरी प्यारी लड़ो

कम्मो अपना हाथ आहे बढ़ती हुई रेखा के हाथ को पकड़ लेती है

कम्मो- दीदी मुझे तो लगता है की आज ये छोड़ छोड़ कर मेरी छूट पूरी तरह फाड़ देगा अह्ह्ह दीदी बचा लो बहुत दर्द हो रहा है

असल में तो कम्मो को काफी मजा आ रहा था पर अच्चानक से कम्मो के दिमाग में वो सीन आ गया था जब पहली बार रवि ने रेखा को उसके सामने आँगन में रात को छोड़ा था उस पल रेखा दीदी ने कम्मो को सुना सुना कर कितना नाटक किया था कम्मो आज वही सब रेखा दीदी के साथ भी करने के मुँह में थी

इधर दूसरी तरफ रवि अपने लुंड को खींचता हुआ एक झटके में फिरसे कम्मो की छूट में पेल देता

कम्मो- अह्ह्ह दीदी देख रही हो कैसे चीड़ रहा है कुत्ता कहींका मनो मैं इसकी दीदी नहीं इसकी कुटिया हूँ अह्ह्ह्हह कितना अंडरर तक्क पेल रहा है हरामी मेरी छुटत को दीदी सच में मैं मर जाउंगी आज

इधर रेखा को तो यही लग रहा था की सच मच में कम्मो को इतना दर्द हो रहा है पर वो बेचारी खा जानती थी की भाई बेहेन की इस कामलीला का एक राउंड पहले hi ाँगने में हो चूका है

रेखा- रवि बस कर तू इसे आज के लिए इतने पर hi छोड़ दे देख तो बेचारी को कितना दर्द हो रहा है

रेखा की बात सुनकर रवि हसने लगता है

रवि- आज छोड़ दिया तो मालूम कैसे पड़ेगा कम्मो दीदी को की असली कड़ाई कैसे होती है

कम्मो- ः दीदी छोड़ो इसे छोड़ने दो छोड़ने दो इसे फाड़ने दो इसे अपनी दीदी की छूट बनाने दो इसे मेरी छूट का भोसड़ा शादी के बाद जब अपने पति से छुडवानगी तो उसे भी बताउंगी की मेरे छोटे भाई ने एक hi रात में मेरी बुर्र पेल पेल कर इतनी फैला दी की अब हठी का लुंड भी गपपपप से अंदर चला जायेगा

रेखा - अच्छा साली तुझे भी मजा आ रहा है और मेरे सामने नौटंकी कर रही है

इतना बोलती हुई रेखा कम्मो की दोनों चूचियों को पकड़ते हुए दबाने लगती है और अपना मुँह आगे बढ़ती हुई सीधा कम्मो के होठो पर रख देती है

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करीब 10 मिंट तक दोनों बहने एक दूसरे के होठो को चुस्ती रहती है और इस बिच कम्मो की धुँवाधार चुदाई लगातार जारी थी

रवि- अह्ह्ह दीदी मैं झड़ने वाला हुऊ

कम्मो- अहहहहह भाई मेरी छूट में hi झाड़ जा मेरे भाई

रेखा - नहीं नहीं रवि ऐसा मत करना अगर ये गाभिन हो गयी तो अनर्थ हो जायेगा सबको पता चल जायेगा हमारे इस खेल के बारे में

कम्मो- नहीं दीदी मुझे होना है गाभिन मैं बनना कहती हु अपने छोटे भाई के बच्चे की माँ

रेखा - अरे कुटिया बन जाना इसके बच्चे की माँ एक रोज नहीं रोज रोज झड़वाने अपनी छूट में इसका माल पर अभी नहीं जब तक तेरी शादी नहीं होती तब तक अपने आपको संभाल कर रख नहीं तो पुरे गाओं में ठु ठु हो जाएगी हमारे घर की

रवि- जल्दी बताओ दीदी खा गिरौ और कण्ट्रोल नहीं होता मुझसे अब

रेखा - एक काम कर मेरे मुँह में गुरा दे वैसे भी बड़े दिन हो गए तेरा माल पिए

इतना बोलती हुई रेखा उठ कर घुटनो के बल बैठ जाती है

कम्मो भी तुरनत hi रेखा के साथ बैठ जाती है

कम्मो- मुझे भी पीना है इसका माल

रेखा- अरे अभी तू नई है इस खेल में पहले इसे खेलना तो सिख ले फिर पिटे रहना इसका माल

कम्मो- नहीं नहीं दीदी मुझे भी पीना है तो पीना है बास

रवि दोनों दीदियो के मुँह के आगे जोर जोर से अपना लुंड हिला रहा था

यह उसकी दोनों दिदिया अपना अपना मुँह खोले इन्तजार में थी की पहली धार किसके मुँह में गिरेगी

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कुछ hi पल में रवि जहदने लगता है

उसके गधे विरया का स्वाद पा कर दोनों दिदिया मस्त हो जाती है

रेखा के लिए तो यह रोज रोज का था पर कम्मो के लिए अपने छोटे भाई के विरया की उस मिठास को भुला पाना लगभग अब न मुमकिन सा था

कम्मो एक hi घुट में सारा विरया जातक जाती है

कम्मो- अहह मजा आ गया दीदी अब तो रोज पियूँगा मैं अपने छोटे भाई के लौड़े से निकला यह रस

रेखा भी सारा माल जातक जाती है

रेखा- है है पी लेना पहले अपनी इस छूट की हालत तो ठीक कर ले मुझे तो लगता है की तू कल ठीक से चल भी नहीं पायेगी

कल कहि बहार मत जाना अगर किसी बुढ़िया ने देखा तो पक्का शक हो जायेगा

कम्मो- अब दर्द हो या जो भी हो देखा जायेगा दीदी और रही बात कल कहि बहार न जाने की तो वो ठीक है क्योंकि वैसे भी कल पूरा दिन मुझे रवि से छुड़वाना है

अभी तो मेरी गांड का ढक्कन खोलना भी बाकि है जब छूट मरवाने में इतना मजा आया तो अपने छोटे भाई से गांड मरवाने में कितना मजा आएगा

रेखा एक चपत कम्मो के सर पर मरती हुई कहती है

रेखा - अरे हवस की भूखी जब गांड फटेगी न तब मालूम पड़ेगा तुझे की कितना मजा आता है गांड मरवाने में वो भी अपने छोटे भाई के इस गधे जैसे लौड़े से चल अभी के लिए सो जा कल जितना गांड मरवाना हो मरवा लेना

कम्मो- क्यों रे रवि कल तू खोलेगा न मेरी गांड का ढक्कन

रवि- ः हाह दीदी क्यों नहीं

रेखा - ः ये कमीना कब मना करेगा ये तो हसि hi गांड के छेद के पीछे पागल मुझे अब भी याद है इसने छूट से पहले मेरी गांड hi फड़ी थी

कम्मो- तभी तो इतना उछाला उछाल कर अब गांड मरवाती हो दीदी

कम्मो की बात सुनकर तीनो भाई बेहेन जोरो से हसने लगते है

रवि बिच में लेता था और उसके आजु बाजु उसकी दोनों दिदिया नंगी hi उसकी बहो में अपना सर रखे लेती रही

कम्मो के हाथ अब भी रवि के शरीर पर इधर उधर घूम रहे थे अंतत में वो भी रवि के लुंड को पकड़ कर सो जाती है मनो रात को उसके छोटे भाई का लुंड कहि भाग न जाये ..........
 
अपडेट -196

सुबह की पहली किरण के साथ hi रेखा की आँख खुल जाती है

रेखा अपनी आँखे मल्टी हुई उठ जाती है

रेखा- हे भगवान् ये दोनों तो अभी तक लिपटे पड़े है एक दूसरे से

रेखा रवि और कम्मो को देख कर बोलती है

दोनों इस कदर नंगे hi लिपटे हुए थे मनो भाई बेहेन न होकर नाग नागिन हो

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रेखा- जरा भी शर्म नहीं बची दोनों को यह मेरे होते हुए भी ऐसे बेशरम नंगे hi सोये हुए है

कम्मो एक जोरदार थप्पड़ कम्मो की मखमली गांड पर जड़ती हुई उसे उठती है

कम्मो अच्चानक से उठ बैठी है

रवि का लुंड अब भी उसके हाथ में hi था

रेखा - क्यों ऋ कमीनी कम्मो कितनी रात तक पेलवाती रही अपने छोटे भाई से जो अब तक यु hi नंगी सो रही है

रेखा की बायत सुनते hi कम्मो के गलो पर शर्म की लाली चा जाती है

कम्मो अपनी गर्दन निचे झुका लेती है

आखिर रेखा दीदी जो थी उसकी

पर क्या फर्क पड़ता है यह तो सब नंगे hi पड़े थे

रेखा - वह वह महरानी की शर्म तो देखो

रात भर छूट मरवा रही थी इस घोड़े से और अब शर्मा रही है वह जी वह

अब जल्दी से उठ जा घर का सारा काम बाकि है और इसे भी उठा दे खेत में भी जाना है

रेखा- तुम दोनों का बस चले तो यु hi दिन भर घर में ये नंगा नाच करते रहोगे

रेखा बुदबुदाती हुई यु hi नंगी कमरे से बहार निकल जाती है

कम्मो अपनी हाथ से अब तक रवि के लुंड को छोड़ चुकी थी पर उसकी आँखे अब भी वही तिकी हुई थी

अपनी hi छूट के खून से लाल हुए लुंड को देख कर कम्मो की छूट एक बार फिर गीली होना शुरू हो गयी थी

कम्मो- हट पगली रात भर तेरी कुटाई की इस पागल लुंड महाराज ने और तू दुबारा से ललचा रही है इसे देख कर

कम्मो अपनी छूट को निहारती हुई मन में बोलती है

कम्मो- रवि उट्ठह जा भाई

रवि उट्ठह जा

कम्मो रवि को हिलती हुई उसे जगाने का प्रयास कर रही थी

पर रवि तो मनो उठने को राजी hi नहीं था

आख़िरकार कम्मो मो एक तरकीब सूझती है अपने छोटे भाई को जगाने की

कम्मो रवि के अधखड़े लुंड को पकड़ती हुई एक बार में hi उसकी चमड़ी को खोलती हुई पूरा निचे तक्क कर देती है

पर अब भी रवि को कोई फरक नहीं पड़ता

कम्मो - हे भगवान् कैसे उठाऊ इसी

कम्मो को एक और तरकीब सूझती है

इस बार कम्मो आगे झुकती हुई सीधा रवि का लुंड अपने मुँह के करीब लती है और अपने मुँह को खोलती हुई सुपडे को मुँह में भरते हुए अपने दातो से काट लेती है

रवि- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

रवि एक झटके में hi उठ कर बैठ जाता है

कम्मो- हहहह क्यों बच्चू मजा आया

रवि- क्यों काट रही हो दीदी इसे दुबारा काम नहीं है क्या इसका

कम्मो- तुझे उठा उठा कर हार गयी फिर सोचा इसे hi उठा देती हु शायद तू भी उठ जाये और देख तू उठ भी गया

रवि- ये सही है रात भर इसकी सवारी करो और दिन में इसे hi काटो

कम्मो- चल जल्दी उठ जा अभी रेखा दीदी मुझे झाड़ कर गयी है दुबारा आएंगी तो तुझे भी झाड़ा लगा देंगी

कामो इतना बोल कर उठने लगती है

रवि तुरंत hi कम्मो का हाथ पकड़ कर उसे अपनी और खींच लेता है

कम्मो अपनी बड़ी गांड सीधा रवि की गॉड में रखती हुई बैठ जाती है

रवि- खा जा रही हो दीदी

कम्मो- वही झा रेखा दीदी गयी है

रवि- खा हगने जा रही हो दीदी

कम्मो रवि की बात सुनकर थोड़ा थोड़ा शर्माने लगती है

रवि- रेखा दीदी तो हगने hi जाती है इतनी सुबह

काममो - है तो मैं भी वही जा रही हु बास अब छोड़ मुझे

रवि- खा से हगोगी दीदी

कम्मो- मतलब कहि और से भी हगते है क्या

रवि- नहीं दीदी बताओ ना

कामो भी अब समझ चुकी थी की भाई बेहेन की इस बेशर्मी भरी बातो में एक अलग hi नशा है

कम्मो अपनी गांड रवि के लुंड पर रगड़ती हुई बोलती है

कम्मो- रोज की तरह आज भी अपनी इस गांड से hi हगने जा रही हु

रवि अपने हाथ को निचे ले जाता हुआ सीधा कम्मो की गांड के छेद पर रख देता है

Kammo-ahhh रवि मत्तट कर

रवि- दीदी इसी छेद से हगने जा रही हो

कम्मो- हां इसी छेद से हगने जा रही हु बस अब छोड़ दे

रवि- एक शररत पर छोडूंगा दीदी

कम्मो- कोई शरत वरत नहीं मुझे जाने दे वैसे भी बहुत जोर से हगवास लगी है मुझे

रवि- फिरर तो यही मेरी गोड़ ने hi कर लो मैं नहीं छोड़ने वाला

कम्मो- अच्छा बोल जल्दी

क्या शरत है तेरी

रवि- पहले मैं तुम्हारे हगने वाले इस छेद को जी भर कर देखना चाहता हु

कम्मो- अच्छा मुझे तेरे इरादे पता है मैं ना दिखती अपना ये छोटा सा छेद तुझे कमीने

रवि- अच्छा ठीक है फर बैठी रो यही मेरे लुंड पर अपनी गांड टिकाये

रवि अपने दोनों हाथो से कम्मो के पेट को दबा लेता है

कम्मो- अच्छा अच्छा ठीक है पेट मैट दबाए देख ले मेरा हगवास वाला छेद नहीं तो सच में तेरी गॉड में hi हैगगग देगी तेरी ये दीदी

रवि कम्मो को छोड़ देता है

कामो तो खुद भी दिखने के लिए उतावली थी अपने छोटे भाई को अपनी गांड का वो छोटा सा छेद

रवि- अब घोड़ी बन्न जाओ दीदी

कम्मो- अच्छा बीटा अपनी hi दीदी को घोड़ी बनाने के लिए बोल रहा है कोई बात नहीं बच्चू सब टाइम टाइम की बात होती है

कम्मो आगे की और झुकती हुई घोड़ी बन जाती है

और अगले hi पल रवि की आँखों के सामने कम्मो की गांड का वो छोटा आ जाता है

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रवि- आपकी गांड तो सच में बवाल है दीदी

कम्मो( अब नहीं बचने वाली मेरी गांड इस कमीने से फाड़ कर hi छोड़ेगा आज ये मेरा ये छेड़डा )

रवि- दीदी इसे फैलाओ ना

कम्मो- कैसे फैलाऊ भाई

रवि- अपने हाथो से दीदी मुझे ठीक से दिख नहीं रही आपकी गांड

कम्मो अपना एक हाथ पीछे लती हुई अपनी गांड फैलाती हुई रवि को दिखती है

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रवि एक छठा कम्मो की गांड पर मरता है

कम्मो- आह्ह्ह्ह मार क्यों रहा है कमीने

रवि - ऐसे नहीं दोनों हाथो से फैलाओ

इस बार कम्मो अपने सर को जमीन पर टिकती हुई दूसरे हाथ से भी अपनी गांड को फैला देती है और खुल कर अपने छोटे भाई को अपनी गांड दरसाहन करवाने लगती है

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रवि अपने आपको रोक नहीं पता और अपने होठो पर जीभ फहरता हुआ सीधा अपना मुँह अपनी कम्मो दीदी की गांड से भिड़ा कर उसकी गांड चूसने लगता है

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कम्मो- अह्ह्ह्ह क्या कर रहा है रवि

रवि- दीदी आपकी गांड का स्वाद साख रहा हु

कम्मो- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह रवि मत्तट कर ैसाआ कुछ बहार आ गया तू

रवि- दीदी एक पाद मारो ना

कम्मो- चीई कितना गन्दा होता है पाद और तू मेरा पाड़सुंघना साठ रहा है

रवि- दीदी तुम्हारे इस गदराये शरीर में तो हर जगह मिठास है कहे वो तुम्हारी छूट का पानी हो या गांड से निकला पहाड़

कम्मो को अपने छोटे भाई को बाटे सुनकर अब और भी ज्यादा मजा आ रहा था शायद वो रवि के मुँह पर पाद भी देती तभी बहार का गेट खुलने की आवाज आती है

कम्मो - हट जा रवि लगता है रेखा दीदी आ गयी

कम्मो अच्चानक से खड़ी हो जाती है और अपने कपडे पहनना शुरू कर देती है

रवि मायूसी से कम्मो की और देख रहा था

कम्मो- क्या हुआ पाद नहीं सुंघा तो नाराज हो गया

रवि कुछ नहीं बोलता और झूठे hi गुस्सा होने का नाटक करता है

कम्मो - अच्छा बाबा गुस्सा मत हो आज मैं खेत ओर आउंगी और जी भर कर पड़ूँगी तेरे मुँह पार

रवि- सक्छः दीदी

कम्मो- सच पर पहले तू जा कर नहा ले

इतना बोलती हुई कम्मो बहार चली जाती है और रवि वही बिस्तर पर लेत कर अपनी दीदियो के बारे में सोचने लगता है .....
 
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