Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 22 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -197

दूसरी तरफ रामलाल का घर्र.....

सुबह के लगभग 4 बजे रामलाल जो का त्यों अपनी आँखे खोले पड़ा था

रात भर बिचारे को नींद भी नहीं आयी

इसकी गवाही उसकी लाल हो चुकी सुर्ख आँखे दे रही थी

तभी कमरे का दरवाजा खुलता है

रामलाल एक बा एक पलट कर दरवाजे की और देखता है और अब उसके मुरझाये हुए चेहरे पर एक मुस्कराहट फ़ैल जाती है

क्योंकि दरवाजा खुद मल्टी ने hi खोला था

अपने बाप को जगा हुआ देख कर मल्टी से भी रहा नहीं जाता क्योंकि उसे भी अभी अपने बाप को अपना देहसुख देना था जोकि केशव और हरी की वजह से वो ना दे पायी

मल्टी धीरे से दरवाजे को फिरसे चिपका देती है और दौड़ी चली जाती है

अपने बापू की और

रामलाल तुरंत hi उठ कर बैठ जाता है

मल्टी उसके पास जाते hi सीधा उसकी गॉड में बैठ जाती है

मनो उसे अपने बूढ़े बाप का प्यार चाहिए था

मल्टी- सोये नहीं बापू आप

Ramlal-teri याद ने सोने hi नहीं दिया बापू

मल्टी- क्यों याद करते हो बापू मुझे इतना की तुमको नींद hi ना आये

मल्टी अपनी हथेली को रामलाल के साइन पर ोहेर्टी हुई बोलती है

रामलाल - बेटी तू आज जा रही है और ना जाने कब तेरा ये बाप तुझे ठीक से देख पायेगा

रामलाल इतना बोलता हुआ भावुक हो जाता है और मल्टी को अपने साइन से लगा देता है

मल्टी- ऐसा न बोलो बापू आ जाए रही हु इसी लिए तो इतनी सुबह उठ कर आयी हु ताकि मैं अपने बापू को सही ढंग से अलविदा कह सखु

रामलाल - अच्छा बेटी तू मेरे लिए उठी है इतनी सुबह

मल्टी- हां बापू सर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए

रामलाल का लुंड अब अपनी hi बेटी की गांड से निकल रही गर्माहट से खड़ा होना शुरू हो चूका था जिसका जिसका अंदाजा अब टक्क मल्टी को भी हो चुका था

रामलाल- बेटी एक काम कर ये दरवाजा बहार से बंद कर दे

मल्टी- क्यों बापू

रामलाल- बेटी मैं कहता हु की एक आखिरी बार मैं तुझे जी भर कर प्यार कर सखु और हमारे बिच कोई दूसरा तीसरा न आये कहे वो तेरा पति हो या भाई

मल्टी- ठीक है बापू रुको

मल्टी जान बुझ कर अपनी गांड रगड़ती हुई उठ कर दरवाजे को बहार से बंद कर देती है और वापस आ कर उसी अवस्था में अपने बाप की गॉड में बैठ जाती है

मल्टी- अह्ह्ह्हह्हह

रामलाल मल्टी के नाजुक होठो परर अपनी उंगलिया फिरता हुआ बोलता है

मल्टी- बापू तुम्हारा ये सुबह रहा है मुझे पीछे से

रामलाल - खा सुबह रहा है मेरी बेटी को मेरा ये

मल्टी- मेरी गंड़द में बापू

रामलाल का दूसरा हाथ अब मल्टी के मांसल उठे हुए पेट को सहलाना चालू कर चूका था

एक बाप के लुंड का उभर hi काफी है उसकी बेटी को गर्माने के लिए

फिर यह तो रामलाल जी पूरी तरह से अपनी बेटी के मादक अंगो को छू रहे थे

रामलाल- जानती है बेटी वो क्या है जो तेरी गण्ड में सुबह रहा है

मल्टी भी अब अपने बाप के साथ गन्दी बाते करना कहती थी

मल्टी- क्या है बपु जो मेरी गांड में सुबह रहा है

रामलाल मल्टी की गर्दन को चूमता हुआ बोलता है

रामलाल - ये तेरे बाप का लुंड है बेटी

इतना बोलता हुआ रामलाल अपने पेट वाले हाथ को दबाता हुआ मल्टी की पेट की चर्बी को मसल देता है

मल्टी एक अजीब दर्द से कराह उठती है

मल्टी- अह्हह्ह्ह्ह बापू भट्ट बड़ा है तुम्हारा लुंड तो

रामलाल का हाथ अब ऊपर की और आता हुआ अपनी hi शादी शुदा बेटी के ब्लाउज तक आ पहुंचा था

रामलाल मल्टी के पल्लू को पकड़ता हुआ सरका देता है

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अपनी hi बेटी की रसभरी चूचियों को ब्लाउज में कैद देख रामलाल की ललजिब्ह लपलपाने लगती है

रामलाल - बेटी लेगी अपने बाप का लुंड

रामलाल इतना बोलता हुआ अपने दोनों हाथो को मल्टी के ब्लाउज के ऊपर रख देता है और अपनी बेटी के चुचो को हलके हलके दबाने लगता है

बाप का इस तरह से चुना hi मल्टी के अंदर एक अलग तरह की चिंगारी भड़का रहा था

आज तक्क उसकी छूट में ऐसी खुजली नहीं हुई थी जो अब हो रही थी

मनो मल्टी मदहोश सी हो गयी थी अपने बाप की गॉड में बैठे बैठे

मल्टी- अह्ह्ह बापू खा लू आपका लुंड

रामलाल एक एक करके मल्टी के ब्लाउज के हुकक्क खोलना शुरू कर चुका था क्योंकि वो भी जनता था की समय ज्यादा नहीं है और अगर कोई उठ गया तो बाद में बड़ा पछतावा रह जायेगा

रामलाल- अपनी छूट में लेले बेटी

मल्टी- अह्ह्ह्हह शहीईई सिर्फफछुटत मई hi लयऊ क्या बापू

रामलाल- मुह्हह्ह मई भी लीलेना बेटीइ

मल्टी- ठीक है बापू पर जल्दी करना अगर केशव उठ गया तो क्या कहेगा की मैं अपने बापू का लुंड मुँह और छूट में ले रही थी

रामलाल- ये तो हर बेटी का कर्त्वा है बेटी की जब बेटी जवाब हो जाये तो वो अपने बूढ़े बाप को अपने मादक और गदराये अंगो का पूरा मजा दे

बात करते करते रामलाल अपनी बेटी के ब्लाउज को पूरी तरह खोल चूका था और अब मल्टी की भरी भरकम चूचिया उसकी आँखों में सामने झूल रही थी

मल्टी- बापू तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताई ये बात अब मुझे बहुत बुरा लग रहा है की मैं शादी के पहले भी आपको अपने अंगो का मजा दे पति तो कितना अच्छा रहता

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रामलाल अपने दोनों हाथो से मल्टी की गदराई चूचियों को निचोड़ने लगता है

मल्टी- अह्ह्ह्ह बापू इतना तेज मैट दबाओ अभी दूध नहीं है इसमें

रामलाल- क्या आता मेरे निचोड़ने से दूध निकल आये बेटी तेरी चूचियों सी

मल्टी- अह्ह्ह बापू तब तो तुम पक्का पी लेना मेरा दूध पियोगे न मेरा दूध बापू

रामलाल जोरो से चूचिया मसलता हुआ मल्टी के कान चूसने लगता है

रामलाल- हां बेटी जरूर पियूँगा मैंने तेरा दूध

मल्टी बापू जल्दी करो कहि कोई जाग गया तो गड़बड़ हो जाएगी

रामलाल - क्या कृ बेटी

मल्टी- अह्ह्ह्ह बापू बास मुझे प्यार क्रू मेरे इन रास भरे अंगो का सारा रस निचोड़ लो बापू कीच भी करो बस अपनी बेटी की ोयास बुझा दो बापू...

बाकि का अपडेट बाद में

टाइम की कमी के कारन आधा hi लिख पाया सॉरी फॉर डिले दोस्तों....
 
अपडेट -198

रामलाल- बेटी काश मैंने पहले hi जान लिया होता की मेरी बेटी भी मुझसे अपने मांसल जिस्म का स्वाद चखना कहती है

मल्टी- तो क्या करते बापू अगर आपको पहले hi पता चल गया होता तो

रामलाल - बेटी तेरा ये बाप हर पल तुझे प्यार करता तेरे शरीर के हर एक हिस्से को प्यार करता

मल्टी- अह्ह्ह्हह बापू जल्दी से अब करो ना

रामलाल - क्या कृ बेटी

मल्टी- अपनी बेटी के मांसल जिस्म को प्यार बापू

रामलाल अपने दोनों हाथो से मल्टी को खड़ा करता है और खुद भी खड़ा होता हुआ सुधा उसे अपनी बहो में भर लेता है

मल्टी की नुकीली चिचिया रामलाल की छाती में मनो जखम बना रही हो

अपनी hi बेटी को इस तरह अधनंगी हालत में गले लगाने का मजा hi कुछ और था

इधर मल्टी अपनी दोनों बहो से रामलाल की पीठ को जकड़ती हुई अपनी चिचियो को पूरी तरह से अपने बूढ़े बाप की छाती में दहसाआ रही थी

इन सब के बिच रामलाल का लुंड खड़ा होकर धोती के अंदर से hi उसकी बेटी की टैंगो को ठोकर मरना शुरू कर चूका था

जिसका अहसास मल्टी को और भी ज्यादा पागल किये जा रहा था

अगले hi पल रामलाल अपनी पकड़ थोड़ी ढीली करता हुआ एक हाथ से मल्टी के चेहरे को पकड़ कर अपने आगे लता है

अब रामलाल एक तक अपनी बेटी के सुन्दर चेहरे को निहार रहा था

मल्टी भी अपने बाप की इस नजर से शर्मा कर पानी पानी हुई जा रही थी

मल्टी- ऐसे क्या देख रहे हो बापू

रामलाल- देख रहा हु मेरी बेटी की सुंदरता के आगे इस जहां में कुछ भी नहीं है

मल्टी- अच्छा आज तक नहीं दिखी मैं आपको सुन्दर

रामलाल- बेटी तेरी इन झील सी गहरी आँखों को देख कर तो कोई भी इनमे दुब जाये

मल्टी- अच्छा और क्या क्या सुन्दरर है बापू मेरा

रामलाल - वैसे तो मेरी बच्ची तू ऊपर से निचे तक्क पूरी तरह एक अप्सरा hi लगती है पर सच खु तो तेरे इन रसभरे होठो को देख कर लगता है मनो इन्ही

रामलाल अपने अंगूठे से मल्टी के निचले होठ को रगड़ता हुआ निचे की और करता है और बोलता बोलता ृक्क जाता है

मल्टी- क्या मन करता है बापू आपका मेरे इन रसभरे होठो को देख कर

मल्टी भी अब पूरी तरह रंडी पने पर उतर आयी थी

वो अपनी गीली जीभ को होठो पर फेरती हुई अपने बाप को दिखा कर बोलती है

रामलाल- मंत्र करता है की तेरे इन होठो कर सारा रस पी जाऊ बेटी

मल्टी- तो पी जाओ ना बापू किसने रोक्का है तुम्हे ाकाहिर मैं तुम्हारी hi तो बेटी हु और हर एक बाप का कर्तव्या होता है की उसकी बेटी के होठो कर रस पिए

मल्टी की बात सुनते hi रामलाल एक झटके में अपने होठ अपनी बेटी के होठो से चिपका देता है और गप्प से अपनी जुबान अपनी बेटी के मुँह में घुसा देता है

दोनों बाप बेटी पागलो की तरह एक दूसरे को चूस रहे थे

इस बिच मल्टी निचे हाथ ले जाती हुई सीधा धोती की गांठ खोल देती है और एक झटके में धोती जमीन पर गिर्र जाती है

मल्टी अपने बुड्ढे बाप के लुंड को अपने दोनों हाथो से पकड़ती हुई आगे पीछे करने लगती है

रामलाल को एक अलग hi तरह का मजा आ रहा था जो उसने कभी सोचा भी नहीं था

रामलाल भी एक झटके में अपनी बेटी का पेटीकोट खोल देता है और अपने दोनों हाथो को पीछे ले जाता हुआ अपनी बेटी की नंगी गांड दबोचता हुआ मसलने लगता है

कभी रामलाल अपनी जीभ मल्टी के मुँह में घुसा देता तो कभी मल्टी अपनी जीभ को अपने बाप के मुँह में घुसा देती

अच्छानक से मल्टी अपना मुँह पीछे करती हुई हट जाती है

मल्टी जानती थी की समय कम् है और अगर उसने जल्दी न किया तो आज भी उसका बाप ऐसे hi भूखा रह जाएगा

मल्टी अपने बाप की छाती ओर हाथ ोहेर्टी हुई निचे की और बैठ जब्ती है और एक हाथ से बापू का लुंड पकड़ कर पल भर उसे देखती है और अगले hi पल अपनी जीभ निकल कर सुपडे पर लगी हुई विरया की एक बुण्ड को चाट लेती है जो शायद उसकी वजह से hi निकली थी

रामलाल- अह्ह्ह्ह बेटी तू कितनी ाची है कितना ख्याल रखती है अपने बूढ़े बाप का अह्ह्ह्ह

रामलाल का हाथ खुद बा खुद hi अपनी बेटी के सर के पीछे चला जाता है

अगले hi पल मल्टी अपना बड़ा सा ममुह खोलती हुई सुपडे को अपने गरम मुह्ह में भर लेती है

रामलाल अपने हाथ से मल्टी के सुर्र को दबा देता हसि और एक झटके के साथ उसका आधे से ज्यादा लुंड मल्टी के मुँह में घुस जाता है

अच्छानक से रामलाल उसके मुँह को हटा देता है

मल्टी हैरान होती हुई अपने बाआप को देखती है

रामलाल लाल अपनी खत पर लेत जाता है

रामलाल अब आजा बेटी मेरे उपारर

मल्टी समझ जाती है की उसके बाप को एक साथ दो दो मजे चाहिए

मल्टी भी अपनी दोनों टैंगो को अपने बाप के सर के िरद गिर्द रखती हुई दुबारा से लुंड को नूह में भर कर चूसने लगती है

अब रामलाल के आँखों के सामने उसकी खुद की hi बेटी की फ़टी हुई छूट थी जिससे बेहटा हुआ रस उसे साफ़ नजर आ रहा था

रामलाल अपने आप पर और काबू नहीं कर पता और अपनी जीभ को बाजार निकलता हुआ एक बार पूरी छूट पर जीभ फिर कर उस रस को चाटता

रामलाल चाप छप्प फ्री छूट को चाट चाट कर गीला कर देता है

इधर मल्टी को भी भीत मजा आ रहा था अपने hi बूढ़े बाप से अपनी छूट चटवाने में और उसका लुंड चूसने में

यही हाल रामलाल का भी था एक साथ दोहरा मजा पाकर वो मनो पागल सा हुआ जा रहा था

अब रामलाल अपनी जीभ को मल्टी की फ़टी हुई छूट में घुसा घुसा कर अपनी बेटी को छोड़ रहा था अपनी जीभ से

मल्टी भी खा काम थी वो भी एक हवथ से अपने बूढ़े बाप के तत्तो को सहलाते हुए मजे से उसका लुंड किसी लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी

करीब करीब 10 मिंट तक दोनों बाप बेटी के दूसरे को ऐसे hi देह सुख देते रहते है

मल्टी को डर था की कहि कोई जाग्ग न जाये न कहते हुए भी मल्टी ूठः जाती है

हलाकि रामलाल ने मजबूती के साथ मल्टी की कमर को पकड़ा हुआ था और मल्टी को उठने के लिए बहुत म्हणत करनी पड़ी

मल्टी उठ कर देखती है की उसके बाप का मुँह पूरी तरह से थूक और उसकी छूट के पानी से सना हुआ है

मल्टी- हहह आप तो एक दम बच्चे बन गए है बापू

रामलाल- बेटी तेरी छूट से निकल रहा अमृत पी कर मन धन्य हो गया मन hi नहीं करता की तेरी छूट से अपना मुँह हतौ

मल्टी- अरे बापू छूट hi चाटते रहोगे तो अपनी इस गदराई बेटी को छोड़ोगे कबबब

इतना बोलती हुई मल्टी रामलाल का लुंड पकड़ कर सीधा करती है और बैठती हुई अपनी छूट पर लगा कर धीरे से अपना बदन ढीला छोड़ देती है

रामलाल अपनी बेटी की इस अड्डा से बावला हो जाता है वो एक जोरदार धक्का निचे से कमर उठता हुआ मरता है और सत् से एक hi झटके में उसका पूरा लुंड उसकी बेटी की छूट में समा जाता है

मल्टी- अह्ह्ह बापू मार डाला तुमने तो

रामलाल पागल हो चूका था अपने लुंड को अपनी बेटी की छूट में महसूस करके

मनो मल्टी की छूट अपने hi बाप के लुंड को गला देने पर उतारू थी

उस गर्मी को महसूस करके रामलाल क्या कोई भी बाप पागल हो जाता

रामलाल मल्टी के सर को पकड़ता हुआ अपनी और खींचता है और उसके होठो को मुँह में भरता हुएच्बने लगता है

निचे से धक्के बदस्तूर जारी थी

सात सात शता सात

एक के बाद एक झटको के साथ मल्टी का पूरा बदन हिल रहा था

चार चार की आवाज सुन कर लग रहा था की दोनों बाप बेटी की चुदाई के आगे आज ये ोुरानी खत टिकने वाली नहीं

मल्टी की छूट से अब सफेद पानी निकलना चालू हो गया था जो हर्र धक्के के साथ अब और भी गधा होता जा रहा था और अब अपने बापू के तत्तो को भिगोना भी शुरू कर चूका था

ाकाहिर था भी तो बाप बेटी का मिलान जो अपने आप में hi एक अनोखा मिलान है

कोई बाआप अपनी बेटी को पाल पॉश कर इतना बड़ा करे

अपनी बेटी के शरीर की हिफाज़त करे जब तक वो एक गदराई हुई घोड़ी न बन जाये और अंतत में क्या कोई बहार वाला आकर उसकी बेटी को भोगे उसके गदराये जिस्म का मजा ले और अपनी प्यास बुझाये

आज असल में रामलाल ने अपनी बेटी को पा लिया था

अच्छानक से रामलाल मल्टी की कमर को पकड़ता हुआ उसे उठा देता है और खुद खत से उतर कर मल्टी को भी निचे आने को कहता हुआ उसे घोड़ी बना देता है

मल्टी जैसे hi घोड़ी बनती है उसकी सफेद पानी से शनी हुई छूट रामलाल के सामने आ जाती है

जो प्रतीक थी बाप बेटी के इस अनोखे मिलान का

रामलाल गप्प से अपनी जीभ निकल कर गांड से छूट तक चाटता हुआ सारा पानी छत्त जाता है और अपने गीले लुंड को दुबारा से उसकी छूट ओर लगता हुआ एक धक्के में hi पूरा लुंड छूट के अंदर उतार देता है

मल्टी आगे की और झुकी हुई हर झटके के साथ गिरने से खुद को बचा रही थी

दार दूसरी तरफ उसके बाप की स्पीड लगातार बढ़ती hi जा रही थी

रामलाल अब झड़ने को था और वो इसी उतावले पैन में मल्टी की चुटिया को पकड़ कर खींचता है जिससे मल्टी का सर खुद बा खुद hi उठ जाता है

रामलाल बिना किसी रेहम के उसकी गर्दन को पकड़ता हुआ एक बार फिर अपनी बेटी का मुँह चूसने लगता है

और करीब 5 मिंट तक ऐसे hi अपनी बेटी को छोड़ने के बाद उसके छूट में hi झड़ने लगता है

मल्टी को अपनी छूट में गिरता हुआ अपने बूढ़े बाप का गरम विरया साफ़ मेषसुस हो रहा था

मल्टी भी अब तक 2-3 बार चढ़ चुकी थी जिससे अब उसकी छूट भी ढीली पड़ चुकी थी

रामलाल आखिरी बून्द गर्ने टककक मल्टी की छूट में अपना लौड़ा पेले रहता है और अंततः में पच्छ की आवाज के साथ लुंड बहार आ जाता है

मल्टी होशियार थी वो तुरंत hi घूम कर लेत जाती है ताकि उसके बाप के वीर्य की एक एक बून्द उसकी बच्चेदानी तक पहुंच जाये

रामलाल एक तक अपनी बेटी की छूट को देख रहा था जिसे छोड़ छोड़ कर उसने उसका हुलिया hi बिगाड़ दिया था

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अपडेट -199

मल्टी अपने बुड्ढे बाप से छुड़वाने के बाद दरवाजा खोल देती है और खुद बाथरूम में घुस जाती है

इधर रामलाल के उदास चेहरे पर अब थोड़ी रौनक नजर आ रही थी आख़िरकार उसने अपनी बेटी को खुल कर जो छोड़ लिया था न जाने अब कब उसे ऐसा मौका मिलने वाला था

थोड़ी hi देर में सब लोग उठ जाते है और नहा धो कर तैयार होने लगते है

मल्टी इस वक़्त रसोई में खाना बनाने में वयस्त थी

केशव अंदर कपडे पेहेन रहा था तभी उसके पास हरी आता है

हरी- जिजाजिएक बात करनी है

केशव - है बोलो न हरी

हरी- जीजाजी मेरा भी मन है की आप लोगो के साथ गाओं चलु बहुत दिन हो गए है गाओं घूमे हुए आपको तो मालूम hi है की हमारा तो गोअन भी नहीं रहा अब क्या मैं आपके साथ चल कर थोड़े दिन गाओं में गुजार सकता हु

केशव कुछ सोच कर बोलता है

केशव - अरे अरे ठीक है भाई चलो इसमें इतना सोचने की क्या बात है आखिर वो भी तो तुम्हारा hi घर है न

हरी- आपकी बात तो ठीक है जीजाजी पर प्लीज आप बापू और दीदी को मना लेना

केशव - तुम बस अपना सामान बांधलो और ये चिंता मुझपर छोड़ दो

हरी खुस हो जाता है आखिर वो अपने प्लान में कामियाब जो हो रहा था

हरी अपना सामान एक बैग में डालने लगता है

इधर केशव बहार आकर मल्टी को बोलता है की अपने खाने के साथ हरी का खाना भी रख ले वो भी हमारे साथ चल रहा है

हरी के जाने की बात सुन्न कर तो मल्टी की सकल hi हवा हो जाती है

रामलाल भी वही बैठा था

रामलाल- अरे बीटा केशव वो उसकी होने वाली ससुराल है वो कैसे जा सकता है

केशव - अरे बाबूजी आप चिंता मत कीजिये और वैसे भी किसे मालूम है की वो उसकी होने वाली ससुराल है और वैसे भी हरी इस वक़्त अपनी दीदी की ससुराल जा रहा है न की अपनी

क्यों मल्टी

मल्टी न कहते हुए भी केशव की हां में हां मिलती है

मल्टी( ये कमीना जरूर मुझ पर नजर रखने जा रहा है आने दो इसे वही सबक सिखाऊंगी कमीने को )

रामलाल - ओर बीटा अगर कुछ उच्च नीच हो गयी तो

केशव - वो सब आप मुझ पर छोड़ दो बाबूजी

ऐसा कुछ नहीं होगा हमारे बच्चे बहुत शरीफ है

मल्टी( वो तो मैं जानती हु की कितने शरीफ है

अब तुम्हे क्या बताऊ पति देव की तुम्हारा छोटा भाई अपनी बड़ी दीदी रेखा को किसी रानन्द की तरह छोड़ता है और अब छोटी बेहेन पर अपनी नजरे गड़ाए बैठा है )

हरी भी अपना सामान लेकर बहार आ जाता है

वो मल्टी की और देखता हुआ आँख मार देता है

वही मल्टी उसे ौरे गुस्से के साथ देख रही थी मनो अभी अपने भाई को खा जाएगी

सब रामलाल से विदा लेकर घर से गाओं की और निकल जाते है .........
 
अपडेट -200

मल्टी और हरी के साथ केशव अपने गाओं की तरफ रवाना हो गया था

रामलाल दरवाजे पर खड़ा अपनी बेटी को जाता हुआ देख कर बिलकुल मायूस हो गया था

आखिर उसकी बेटी थी hi ऐसी जिसने 2 दिनों में hi अपने बूढ़े बाप को अपनी जवानी का ऐसा स्वाद चखाया की अब न जनर रामलाल कैसे रह पायेगा उसके बिना

यह दूसरी तरफ रवि हाथ मुँह धो कर नाश्ता कर चूका था और अब खेतो पर जाने के लिए तैयारी कर रहा था

कम्मो रोज की तरह अपने कामो में लगी हुई थी

रेखा खत पर बैठी बैठी रवि और कम्मो को hi देख रही थी

दोनों बार बार एक दूसरे से नजरे मिलते और स्माइल के साथ दूसरी और देखने लगते

रेखा को भी अब समझ आ चूका था की अगर उसने कम्मो को रवि दूर करने की और कोशिश की तो कहि ऐसा न हो की रवि खुद hi उससे दूर हो जाये

और वो कोशिश करे भी क्यों उसने जिस तरह अपने चीते भाई का प्यार पाया था कम्मो का भी पूरा हक़्क़ है उसको भी वो प्यार मिलना hi चाहिए

रवि- दीदी मैं जा रहा हु

रवि दरवाजे तक पहुंचा hi था की रेखा उसे आवाज देती हुई रोक देती है

रेखा - कम्मो तू भी जा रवि के साथ

कम्मो और रवि रेखा की बात सुनकर खुश हो जाते है

कम्मो तो सुबह से hi छुडासी थी उसकी अभी अभी फ़टी हुई छूट सुबह से hi अपने छोटे भाई का लुंड निगलने के लिए लार टपका रही थी

रवि कभी रेखा की और देखता तो कभी कम्मो की और

रेखा - अरे तुम दोनों को क्या हुआ जाओगे या यही खड़े खड़े मुझे देखते रहोगे

रेखा की बात सुनकर दोनों होश में आते है

कम्मो भाग कर घर में से एक चुन्नी लेकर अपनी चौड़ी छाती ढकती हुई जल्दी जल्दी खाना बांध लेती है

रेखा रवि के करीब आती है

रेखा - तुझे गांड मारनी है न कामो की

रवि- आप तो सब जानती हो दीदी

रेखा - तरस मत दिखाना कम्मो पर कोई भी जिस तरह मेरी फड़ी थी उसी तरह फाड़ना

रवि- आप चिंता मैट करो दीदी आज तो दिन भर कामो दीदी की गांड hi मरूंगा मैं खेतो में

कम्मो खाना बांध कर आ जाती है

रेखा - अरे कम्मो रानी बड़ी खुस लग रही है

कम्मो- दीदी वो तो बस ऐसे hi

रेखा - सब कुछ ले लिया तूने

कम्मो- है दीदी ले लिया

रेखा - जरा दिखा तो क्या क्या लिया है

रेखा कम्मो के हाथ से झोला पकड़ कर देखती है

रेखा - ये देखो महरानी ने सब कुछ ले लिया पर सरसो का तेल तो भूल hi गयी

कम्मो को रेखा की बात कुछ हजम नहीं होती

कम्मो- दीदी सरसो का तेल वो किस लिए

रेखा - ये देखो इसे तो लगता है कुछ पता hi नहीं

बताया नहीं क्या तूने रवि

कम्मो आचार्य से रेखा और रवि की और देख रही थी

रेखा - अरे मेरी भोली बहना सरसो का तेल इस लिए क्योंकि तेरे इस छोड़ू भाई का आज तेरी गांड मरने का प्रोग्राम है और सच बताऊ तो अगर इसका गधे जैसा लुंड तेरी गांड के छोटे से छेद में ऐसे hi सूखा सूखा जायेगा तो सच में बहुत तकलीफ होगी तुझे इस लिए सरसो का तेल लेकर जा

कम्मो अपनी बड़ी बेहेन की बात सुनकर पानी पानी हो गयी थी

कम्मो- पर दीदी

रेखा - पर वॉर कुछ जा पहले तेल लेकर आ तभी जाने दूंगी इस संध का क्या भरोषा ऐसे hi कहि सूखा लुंड घुसा दिया तेरी गांड में तो नहीं नहीं तू तेल लेकर आ जा

रेखा कम्मो के हाथ से थैला ले लेती है

कम्मो अपना सर झुकाये हुए एक छोटी बोतल में तेल लेकर आती है और रेखा से झोला लेती हुई उसमे रख लेती है

रेखा - हां अब ठीक है जाओ तुम दोनों

और सुन्न रवि अच्छे से तेल लगा कर मरना मेरी गुड़िया की गांड कहि एक hi झटके में न पेल देना अपना मुसल इसकी गांड में जैसे मेरी गांड में ठुस्स दिया था

रवि- अरे दीदी आप चिंता न करो खूब तेल पिलाऊंगा पहले कम्मो दीदी की गांड को उसके बाद hi डालूंगा अपना ये मुसल

कम्मो और रवि रेखा से विदा लेकर खेतो की और निकल जाते है

रेखा हस्ती हुई

( पता hi नहीं चलता की बच्चे कब बड़े हो जाते है देखो तो जरा मेरा hi छोटा भाई आज मेरी छोटी बेहेन की गांड का उद्घाटन करने जा रहा है सच में भाई बेहेन का रिश्ता hi अजीब है सिर्फ प्यार hi प्यार है इसमें और कुछ नहीं )

इधर राष्टीय में चलती हुई कम्मो रवि की पीठ पर एक जोरदार मुक्का मरती है

रवि- अह्ह्ह क्या हुआ दीदी मार क्यों रही हो

कम्मो- क्यों रे कमीने रेखा दीदी को बताने की क्या जरुरत थी की आज तू मेरी गांड मरने वाला है

रवि हस्ता हुआ- अरे दीदी पता नहीं आज रेखा दीदी को क्या हुआ उन्हों ने hi आकर मुझे बोलै की आज कम्मो की गांड मार लेना खेत में

आपने देखा नहीं उन्होंने hi तो एक दम से बोलै आपको मेरे साथ जाने के लिए नहीं तो हमारा प्लान तो तब का था न जब आप खाना लेकर आती

कम्मो को भी अब बात समझ में आ जाती है

कम्मो- रेखा दीदी का भी कुछ आता नहीं कब क्या एक्शन ले ले

चल खैर जो भी हो फायदा तो अपना hi हुआ अब क्या प्लान है

रवि- अब क्या प्लान बनाना

अब तो दिन भर तुम्हारी गांड मरूंगा

कम्मो एक मुक्का फिर मरती है

कम्मो- हट कमीना कहिका मेरी गांड मरेगा

रवि- दीदी आपको पता है रेखा दीदी ने बोलै है की कोई रेहम मत करना कम्मो ओर और एक hi झटके में अपना लुंड पेल देना उसकी गांड में हहहहह

कम्मो- तुझे तो हाथ भी न लगाने दू मैं आज अपनी ये प्यारी सी गांड

दोनों भाई बेहेन अपनी मस्ती में खेत की और निकल चले थे

इधर दूसरी और केशव और मल्टी का काफिला भी अपने गाओं के करीब hi थी

अब देखना यह है की क्या रवि केशव के आने से पहले अपनी कम्मो दीदी की गांड का ढक्कन खोल पायेगा

या मल्टी अपने घर की होना वाली बहु की गांड क्र घक्कन को बचा पायेगी छूट तो बचा नहीं पायी बेचारी क्या पता हरी के लिए कम्मो की गांड hi बचा ले .....
 
अपडेट -201

रवि अपनी दीदी के पीछे पीछे चलता हुआ उसकी मतवाली गांड को थिरकता हुआ देख रहा था

जोकि अब कीच hi समय में उसे मिलने वाली थी

तभी पीछे से हरिया रवि को आवाज लगता है

रवि और कम्मो दोनों hi पीछे पलट कर देखते है

रवि- लो आ गया साला सनीचर

दीदी आप एक काम करो आप खेत में चलो में आता हु इस सेल बुड्ढे की बात सुनकर

हरिया के साथ नीलम भी खड़ी थी जिसे देखने के बाद कम्मो के अंदर जलन होने लगी थी क्योंकि कम्मो पहले से hi जानती थी की उसका छोटा भाई नीलम के छेड़ो को भी फैला चूका है

कम्मो- मैं तो जा रही हु पर तू जल्दी आना कहि इस छिनाल के चक्कर में देर मत कर देना नहीं तो मैं वापस घर चली जाउंगी समझा

रवि - अरे दीदी समझ गया आप गुस्सा मत हो और वैसे भी ये तो साली रैंड है दिन रात अपनी छूट मरवाती है अपने बुड्ढे बाप और भाई से आपके आगे इस साली छिनाल की क्या बराबरी आप चलो मैं बस इन दोनों बाप बेटी की बात सुनकर आता हु

कम्मो खेत की और बढ़ जाती है और रवि हरिया के पास पहुँचता है

हरिया- क्या हाल है रवि बीटा

रवि- मेरा हाल ठीक है तुम बताओ काका क्यों आवाज दी

हरिया- आज कम्मो बिटिया को बड़ी सुबह सुबह hi ले आये हो खेत्तों में कुछ जरूरी काम है

रवि - अब्बे सेल बुड्ढे तू अपना काम बता न मेरी दीदी मेरे साथ मेरे hi खेतो में जा रही हसि तो तेरी क्यों माँ चुद रही है

हरिया - अरे अरे बीटा गुस्सा मत हो मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था

रवि - मत पूछो समझे

जल्दी काम बताओ मुझे बहुत काम है आज खेतो में

नीलम- रवि तूने खा था न कोई लड़का देखेगा मेरे लिए

रवि- अरे मेरी रंडी नीलम दीदी छुड़वा तो रही हो न राजू और अपने बाप से तो एक और लुंड की इतनी तड़प क्यों है तुम्हे

नीलम अपने फुले हुए पेट पर हाथ रख कर बोलती है

नीलम - लुंड की तो कमी नहीं है भाई पर इसका क्या करू दिमाग hi काम नहीं कर रहा मेरा तो

जब से तूने बोलै है की कोई लड़का देखेगा तब से रोज बापू मेरी छूट में hi अपना वीर्य गिरा रहे है मुझसमे तो बहुत चिंता हो रही है देख तो जरा अब तो पेट फूलना भी शुरू हो गया है मेरा न जाने क्या लिखा है मेरे भाग में

रवि आगे बढ़ कर नीलम की गदराई गांड पर जोरदार छठा मरता हुआ दबोच लेता है

रवि- अरे मेरी चुदड़ो दीदी तुम बिलकुल भी चिंता न करो बस मैं जब उस लड़के को तुमसे मिलवाने ले कर औ तो उसे ऐसा मजा दबा जैसा कोई रंडी भी न दे पाए ताकि वो तुम्हारे अलावा किसी और के बारे में सोचे भी न

नीलम- वो तो ठीक है तू तो जनता है न मेरा जादू पर आखिर कब लेकर आएगा तू उस लड़के को

रवि- झा तक मेरा अनुमान है जल्द hi लेकर आऊंगा लड़का नहीं तो उसका बाप

बस ये समझ लो दीदी अगर एक को भी फसा लिया तो तुम उस घर की बहु बन कस्र hi रहोगी समझी

रवि की बात सुनकर नीलम के चेहरे पर खुसी आ जाती है

रवि- और सुन बे बुड्ढे सेल शर्म नहीं आती पहले तो अपनी hi बेटी को छोड़ छोड़ कर पेट से कर दिया और अब जब वो गाभिन है तो भी रोज छोड़ कर अपना माल गुरा रहा है अपनी बेटी की छूट में सेल सुधर जाआ हरामी

रवि- इतना बोलता हुआ अपने खेत की और चल देता है

हरिया - अब तो सुन लिया न बेटी उसने बोलै है तो जल्दी hi लेकर आएगा तू चिंता मत कर

नीलम- आपको तो कोई चिंता है नहीं बापू

हरिया - बेटी जब लुंड खड़ा होता है न तो मर्द दिमाग से नहीं लुंड से सोचने लगता है देख तो जरा तेरी बाटे सुनकर ये साला फिर खड़ा हो गया चल अब घर चल जल्दी

हरिया नीलम का हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर रख देता है जोकि नीलम और रवि की बाटे सुनकर सच में खड़ा हो गया था

नीलम- सच कहता है बापू रवि तुम सच में बहुत बड़े हरामी हो अभी सुबह hi तो मेरे मुँह में माल गिराया था तुमने

हरिया- अरे इस सेल रवि का क्या है बस टाइम आने दे फिर बताऊंगा इसे मैं किस खेत की मूली हु और वैसे भी मैं हरामी नहीं बेटी छोड़ सुन्ना ज्यादा पसंद करता हु हहहहह

चल अब जल्दी चल नहीं तो तेरे बाप का लुंड फट जायेगा

वैसे भी अब तू जल्दी hi अपनी ससुराल चली जाएगी

जब तक है तब तक तो अपने बाप की सेवा कर नीलम- बाप की सेवा करू या उसके लुंड की

हरिया - दोनों की हहहहह

हरिया नीलम का हाथ पकड़ कर अपने घस्र की और चल देता है

अब आलम ये थस की एक बाप अपनी बेटी को छोड़ने के लिए जा रहा था तो दूसरी और एक भाई अपनी दीदी को .....

दोस्तों अपडेट छोटा है माफ़ी चाहूंगा

इस समय वर्क लोड इतना है की फुर्सत hi नहीं है

पर वडा है अगला अपडेट पक्का जबरदस्त होगा ...
 
अपडेट -202

रवि अपने खेत में पहुँचता है उसे कम्मो दीदी कहि भी दिखाई नहीं पड़ती

रवि( अब दीदी खा गयी ये सेल हरामी बाप बेटी ने पुरे मुद की माँ छोड़ दी मादरचोद सेल)

रवि को जब कम्मो कहि नहीं दिखती तो वो सीधा अपनी झोपडी की और जाता है

झा कम्मो पहले से hi अपने छोटे भ्सी का इंतज़ार कर रही थी

शायद कम्मो पहले hi देख चुकी थी की रवि आ रहा है

कम्मो अपने छोटे भाई की खातिर अपने शरीर का हर एक कपडा उतारर कर बिलकुल नंगी खत ओर लेती हुई थी और अपने ुवार सिर्फ एक चादर डाली हुई थी

रवि- अरे दीदी खा खा नहीं देखा आपको और आप यह आराम से लेती हो

कम्मो- मुझे तो लगा तू उस हरिया के साथ मिल कर उसकी बेटी को छोड़ रहा होगा

रवि- अरे दीदी जब आप जैसी दीदी पास में हो तो उस छिनाल को देख कर तो मेरा लुंड भी खड़ा न हो

रवि सीधा जाकर अपनी दीदी के बगल में बैठ जाता है

रवि को अब तक यह मालूम नहीं था की उसकी दीदी बिलकुल नंगी लेती हुई है

कम्मो- ज्यादा माखन मत लगा समझा

रवि - दीदी आज माखन नहीं आज तो तेल लगाऊंगा वो भी सरसो का हहहहह

कम्मो रवि की बात सुनकर शर्मा जाती है

कम्मो - पहले जा कर अपना काम तो निपटा ले खेतो का फिर लगाना तेल सरसो का

रवि- आज तो दीदी बस एक hi काम है

कम्मो - और वो काम क्या है

रवि- आज मुझे अपनी दीदी की गांड का ढक्कन खोलना है बस और कोई काम नहीं करना

कम्मो- मुझे नहीं खुलवाना कोई ढक्कन वाक्कायन समझा

एक छेड़ा तो खोल दिया साला पानी रुकने का नाम hi नहीं ले रहा है सुबह से टप्प टप्प टप्प चुवे hi जा रहा है दुसरा खोलेगा तो आता नहीं क्या क्या निकलने लगेगा

रवि- दीदी उस पानी को अमृत बोलते है जो भी उसे पिता है वो अमर हो जाता है और अगर पानी अपनी hi दीदी के छेद से पियो तब तो बात hi कुछ और है

कम्मो- अच्छा

रवि- वैसे दीदी आपने बताया नहीं मुझे सुबह की आपके उस छेद से पानी टपक रहा है

कम्मो- अगर बता देती तो क्या करता रे तू

रवि- सारा पानी छत्त कर जाता और अमर बन जाता

कम्मो- और कैसे छत्त कर जाता तू

रवि- अपने मुँह से छत्त छत्त कररर

सब्र तो अब कम्मो से भी नहीं हो रहा था

सुबह से hi उसकी छूट पनियाई हुई थी और अब तो आलम यह था की उसकी छूट से लगातार पानी रिश्ता जा रहा था जिसकी दवा सर्फ और सिर्फ उसके छोटे भाई के पास थी

कम्मो- तो ये ले अब छत्त कर जा

कम्मो अपने नंगे बदन पर पड़ी एक मात्र चादर को खींच कर हटा देती है

और अपने छोटे भाई के सामने एक दम नंगी हो जाती है

कम्मो को शर्म भी काफी आ रही थी क्योंकि आज पहली बार ऐसा हुआ था जब दिन के उजाले में कम्मो ने रवि के सामने पुरे कपडे उतरे थे चुदाई भले hi हो चुकी थी पर ये काम बाकि था जोकि अब पूरा हो गया था

रवि अपनी आँखे फाड़ कर कम्मो दीदी के बदन को hi निहारे जा रहा था

मणि सामने उसकी दीदी नहीं बलि कोई सवर्ग से उतरी गदराई अप्सरा लेती हो वो भी एक दम नंगी

रवि सबसे पहला काम करता है भाग कर दरवाजे को बंद कर देता है और पास hi पड़ी चादर से अच्छे से खिड़की को भी धक् देता है

रवि अब भी खड़ा खड़ा अपनी नंगी पड़ी डूडी को hi देख रहा था

कम्मो को साफ़ नजर आ रहा था की उसके गदराये जिस्म के दर्शन पाकर कैसे उसके छोटे भाई की लुल्ली अब एक असली लुंड में तब्दील हो रही है

कम्मो- ऐसे क्या देख रहा है

रवि- दीदी देख रहा हु क्या कमाल की माल हो तुम

कम्मो- हट कमीने अपनी दीदी को कोई माल बोलता है

रवि- जब ऐसी दीदी हो तो बोलना hi पड़ता है

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कम्मो के मादक शरीर पर बाल का एक टुकड़ा तक नहीं था एक दम स्पॉट चिकना जिस्म जिसे जिंटा छतो उसकी मिठास उतनी hi बढ़ती जाये

रवि अपने धोती को पकड़ कर खींच देता है और एक झटके में धोती जमीन पर गिर जाती है

अब कम्मो को भी अपने छोटे भाई के लुंड के दर्शन हो चुके थे जो की अब पूरी तरह से खड़ा था....
 
अपडेट -203

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कम्मो एक तक तक ताकि लगाए अपने छोटे भाई के खड़े लुंड को निहार रही थी

रवि आगे बढ़ता हुआ

रवि- ऐसे क्या देख रही हो दीदी

कम्मो- देख रही हु तेरा लुंदड़ है या क्या है ये इतना बड़ा

रवि- दीदी लुंड तो बच्चो का होता है ये तो लौड़ा है लौड़ा

जिससे आज मैं तुम्हारे सरे छेद खोल कर तुम्हे पूरी औरत बनाऊंगा

कम्मो- अच्छा तू बनाएगा मुझे औरत

रवि- आपको कोई शक है तो रेखा दीदी से पूछ लेना

कम्मो- मुझे नहीं पूछना किसीसे

रवि- तब तो आपको कर के hi दिखाना पड़ेगा दीदी

कम्मो - क्या कर के दिखायेगा तू मुझे

रवि - औरत बनाने वाला काम हाहाहा

रवि आगे बढ़ता हुआ अपनी कम्मो दीदी के पंजो को पकड़ कर उसकी पेअर की उंगलिया चूमता हुआ ऊपर की और बढ़ने लगता है

कम्मो - हहहाआआ शहहहहह ऐसे बनाएगा तू मुझे औरत

रवि- देखती जाओ बस दीदी

रवि आगे बढ़ता है और घुटने के निचले हिस्से को चुम चूमने चाटने के बाद कम्मो की जांघो को अपने दोनों हाथो से मसलता हुआ उन्हें चूमने लगता है

कम्मो के लिए यह अहसास एक दम न्य था

उसके गदराये बदन में एक अजीब प्रकार की गुदगुदी हो रही थी जो आजसे पहले कभी नहीं हुई थी

कम्मो अपनी गर्दन को इधर उधर झटकी हुए अपना एक हाथ रवि के सर पर रखती हुई अपने छोटे भाई के बालो को पकड़ कर उसे ऊपर की और खींचती है

रवि एक पल के लिए अपनी दीदी की छूट के पास आकर रुकते हुए एक जोरदार साँस खींच कर उसकी महक को महसूस करता हुआ ऊपर बढ़ जाता है

कम्मो अपने होठो को अपने छोटे भाई के होठो से मिला देती है

दोनों एक दूसरे को पागलो की तरह चुम रहे थे मनो जन्मो जन्मो की प्यास बुझानी हो आज इन दोनों भाई बेहेन ने

रवि अपने हाथ से अपनी दीदी की सख्त चूचियों को मसलता हुआ अपनी जीभ दीदी के मुँह में घुसा कर उसके अंदर की मिठास को चाटने लगता है

कामू भी कीच काम नहीं थी बिच बिच में वो भी अपनी जीभ अपने छोटे भाई के मुँह में घुसा देती

कम्मो अब किसी जंगली बिल्ली की तरह रवि की पीठ पर अपने नाख़ून गड़ाए रही थी

इधर इन सब के बिच रवि का विकराल लुंड लगातार उसकी दीदी की छूट को ठोकर मार रहा था

कम्मो अपने एक हाथ को निचे ले जाती हुई उसे पकड़ कर अपनी भीगी हुई छूट पर रगड़ने लगती है

रवि भी अब पागल हुआ जा रहा था उसके लिए भी और बर्दाश्त करना मुश्किल था पर वो अपनी दीदी की जवानी को खुल कर लूटना कहता था आराम आराम से पर पूरा

कम्मो की बैचैन अब बढ़ती hi जा रही थी उसका दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था की आवाज रवि को भी सुनाई दे रही थी

कम्मो लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर दबती है

रवि तुरंत hi अपनी कमर को पीछे खींच लेता है और तुरंत अपना मुँह कम्मो के रसीले मुँह से हटा लेता है

कम्मो को अपने छोटे भाई का यह बर्ताव बिलकुल भी पसंद नहीं आता

वो उसे घूरते हुए देखती है और एक छठा उसके गलो पर जड़ देती है

रवि को अपनी दीदी की लाल आँखों में सिर्फ और सिर्फ हवस दिख रही थी

अब ये छठा तो क्या कोई भी इन भाई बेहेन को चुदाई से नहीं रोक सकता था

छठा पड़ने के तुरंत बाद रवि अपने दोनों हाथो से अपनी दीदी के दोनों हाथो को पकड़ कर ऊपर की और दबा लेता है और एक हाथ से पकड़ता हुआ दूसरे हाथ को कम्मो की मखमली चूचियों पर ले जाता हुआ धीरे से अपनी दीदी का निप्पल खींचता हुआ उसे देखता है

रवि- क्या हुआ दीदी इतनी गुस्सा हो की छठा मार दिया अपने छोटे भाई को

कम्मो- अह्ह्ह कमीने तू जो करने लाया था वो कर न मुझे

रवि लगतार निप्पल को तोड़ मरोड़े रहा था जिसका नशा कम्मो को और भी पागल कर रहा था

रवि- क्या करने लाया था दीदी मैं तुम्हे

कम्मो- बहुत हरामी है तू रवि अह्ह्ह्ह औछहहहहह ारामममम से कररररर न कुत्ते

रवि- दीदी तुम्हारी छूट का पानी बहना बंद हुआ या नहीं अभी टककक

कम्मो- मुझे नहीं पता खुद hi देख ले

रवि कम्मो की चुकी को छोड़ कर अब अपना हाथ निचे ले जाता है और सीधा अपनी दीदी की छूट पर रख देता है

कम्मो की छूट पर अपनी उंगलिया चलता हुआ रवि धीरे से एक ऊँगली अपनी दीदी की छूट में सरका देता है

कम्मो - ahhhhhhhhhh मायआ

रवि- दीदी तुम्हारी छूट से तो रस बह रहा है

कम्मो- है तो रास बह रहा है तो

रवि- दीदी थोड़ा रास पीला दो न अपनी छूट से

कम्मो- मैं नहीं पिलाऊंगी तुझे अपनी छूट का रास

इस बिच रवि ने अब भी कम्मो के दोनों हाथो को दबोच रखा था और अपनी ऊँगली को लगातार उसकी छूट के अंदर बहार कर रहा था

रवि- दीदी नहीं हो आप मेरी

कम्मो- कोई भाई अपनी दीदी की छूट का रस पिता है भला जो मैं तुझे पीला दू

रवि- हां मैं पिता हु अपनी दीदियो की छूट का रस अब तो पीला दो देखो न दीदी कितना सारा निकल रहा है तुम्हारी छुटत से

रवि अपनी भीगी हुई ऊँगली को ऊपर लता है और कम्मो को दिखता हुआ उस ऊँगली को अपने मुँह में भर कर उस पर लगा कम्मो की क्यूट का पानी छत्त कर जाता है

कम्मो अपने छोटे भाई की इस हरकत से पानी पानी हो जाती है

रवि- अह्ह्ह सच में दीदी बहुत मीठा है तुम्हारी छूट का ये रस तो मन कर रहा है सीधा छूट पर hi मुँह लगा कर पी लू

रवि इतना बोलता हुआ सीधा निचे की और सरकता है

अब तक वो कम्मो के हाथो को छोड़ चूका था

कम्मो भी बीएस अब इसी इन्तजार में थी की कब उसके छोटे भाई को जीभ उसकी रस छोड़ती छूट को चुवेगी

रवि एक नजर जी भर कर कम्मो दीदी की छूट को देखते हुए उसे अपने दोनों हाथो से फैला देता है

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पहले तो रवि जी भर कर अपनी दीदी की छूट को देखता है उसकी सुगंध को सूंघता है और फिर अच्चानक से अपनी गरम जीभ को अपनी दीदी की भीगी हुई छूट पर निचे से ऊपर की और फहरता हुआ उस पर लगा सारा रास एक पल में चाट जाता है

अपने छोटे भाई की इस हरकत से कम्मो का मांसल जिस्म एक जोरदार झटका खता है

और वो अच्चानक से अपने दोनों हाथ रवि के सर पर जोर से दबती हुई अपने भाई के सर को अपनी छूट पर दबा देती है

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कम्मो अपनी पूरी ताकत से रवि का सर अपनी छूट पर दबा रही थी इधर रवि भी खा काम था अब तक वो अपनी जीभ को अपनी दीदी की पनियाई बुर्र में काफी अंदर तक गुसा चूका था और अब अंदर का पानी चूसने में लगा हुआ था

नमकीन मीठा एक अलग hi स्वाद था उसकी दीदी की बुर्र का जो उसने आज तक किसी छूट से नहीं चखा था

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रवि अपनी दोनों हाथो को ऊपर की और ले जाता हुआ अपनी दीदी की गुदाज चूचिया मसलने लगता है

इधर अब कम्मो पागल हुई जा रही थी उसकी छूट के अंदर रवि की जीभ एक अलग hi प्रकार की तबाही मचा रही थी

कम्मो अपनी गर्दन को इधर से उधर झटकते हुए अपने छोटे भाई के सर के बाल नोच रही थी

अच्चानक से रवि कम्मो के दोनों पैरो को ऊपर की और उठा देता है जिससे उसकी दीदी की छूट और भी ज्यादा खुलकर उसके मुँह के सामने ा जाती है

फिर क्या था रवि दुबारा से हमला कर देता है और इस बार कम्मो की छूट के साथ साथ उसकी गांड का छेद भी चाटने लगता है जिसका ढक्कन आज उसे खोलना था
 
अपडेट -204

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रवि- दीदी सच में जन्नत है तुम्हारी टैंगो के बिच तो

कम्मो भी अब फुल गरमा गयी थी उसे बस अब रवि का लुंड चाहिए था

कम्मो- तो लूट ले न अपनी दीदी की जन्नत को कमीने

अगले hi पल रवि अपनी जबान फिर से अपनी दीदी की छूट से भिड़ा देता है और इस बार वो पागलो की तरह कम्मो की गांड और छूट को छत्त रहा था

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कम्मो- अह्ह्ह हां बाससस ऐसी hi चायत रवि पी जा मेरी छूट का सारा अमृत छत्त जा अपनी दीदी की छूट से निकला पूरा पानी

कम्मो अब पूरी मस्ती आ चुकी थी उसकी छूट झड़ने के करीब थी

इधर रवि अपने हवथों को ऊपर की और ले जाता हुआ कम्मो दीदी के दोनों निप्पल को पकड़ कर खींचता हुआ उसकी छूट में जीभ घुसा कर आगे पीछे करने लगता है

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कम्मो की जवानी का पानी आज उसका खुद का छोटा भाई पी रहा था

कम्मो को मजा तब दोगुना हो जाता जब रवि उसकी छोटे से गांड के छेद में अपनी जीभ घुसाने की कोशिश करता तो

कम्मो को रवि की यह हरकत बर्दास्त नहीं होती और वो एक जोरदार पड़ मर देती है जो सीधा रवि के मुँह के अंदर चला जाता है

कम्मो को अपनी गलती का अहसास हो गया था पर इधर रवि के ऊपर इसका उल्टा प्रभाव हुआ

अपनी दीदी की गांड से निकली हवा को सूंघ कर रवि की आँखों में लाल अंगार उतर आये

उसके लुंड की नशे एक दम से तन गयी

रवि पागलो की तरह कम्मो की छूट और गांड को कभी काट तो कभी खा रहा था

कम्मो भी मस्ती में मस्त अपने दोनों पैरो को अपने भाई के सर पर रख कर उसके सर को लगातार अपने छेड़ो पर दबा रही थी

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कम्मो इस दोहरे मजे को और बर्दाश्त नहीं कर पति और पागलो की तरह छटपटाती हुई अपनी छूट से सफेद लावा बहार उगलने लगती है

रवि को तो मनो इसी का इंतज़ार था उसकी म्हणत का फल उसे मिल गया था

रवि बिना अपना मुँह हटाए वो सारा सफेद पानी छत्त जाता है जो उसकी दीदी की छूट से निकल रहा था

करीब 2 मिंट तक रवि अपनी जीभ चलता रहता है और जब उसे मालूम पड़ता है की कुवा सुख गया है तो वो ऊपर की और आता हुआ अपनी दीदी के बगल में लेट जाता है जो अब भी नंगी पड़ी हुई हाफ रही थी

रवि- मजा आ गया दीदी

तुम्हारी छूट का पानी पी कर तो

कम्मो अपनी लाल हो चुकी आँखों से रवि की और देखती है

कम्मो- तुझे गन्दा नहीं लगा वो

रवि- कैसी बात कर रही हो दीदी गन्दा और वो भी तुम्हारी छूट का पानी अह्ह्ह्हह सच में इतना मजा तो रेखा दीदी और मेघा दीदी की छूट भी नहीं देती जितना स्वाद तुम्हारी छूट में है

कम्मो- हालत hi खराब कर दे तूने तो रवि

रवि- दीदी हालत तो तब ख़राब होगी जब मैं तुम्हारी गांड का ढक्कन खोलूंगा अभी खा

कम्मो- अच्छा चल तब का तब देखा जायेगा

पहले अपनी इस दीदी को भी तो पीला दे अपने लुंड का पानी मैं भी तो देखु कितना स्वाद है उसमे

रवि- देख लो दीदी काफी म्हणत करनी पड़ेगी तुम्हे उसका स्वाद चखने के लिए

कम्मो- अच्छा बीटा चुनौती दे रहा है तू मुझे

रवि- बाद में मत कहना की मेरा मुँह दर्द हो रहा है या मुँह फट गया मेरा ष्शशः

कम्मो- हहहह सही है बीटा सही है ला मैं खुद hi देख लेती हु की कितनी म्हणत करनी ोडेगी या चुटकियो में निकल जायेगा

कम्मो खत से उतर कर जमीन पर बैठ जाती है और अपना हाथ आगे बढ़ती हुई अपने छोटे भाई का खड़ा लुंड पकड़ लेती है

कम्मो- बाप रे कितना बोटा है रवि तेरा लुंड तो

ये तो मेरे हवथ से भी मोटा है

रवि- हहाहा दीदी खस था न ये लुंड नहीं हसि लौड़ा है लौड़ा

हाहाहाहा

कम्मो अपनी हथेली को निचे खींचती हुई लौड़े की चमड़ी को पीछे खींच देती है

जिससे रवि के काळा लुंड का लाल सूपड़ा खुल कर बहार आ जाता है

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रवि - अह्ह्ह दीदी

कम्मो लगातार रवि के लुंड को पूरा निचे तक मुठिया रही थी

इधर कम्मो के हाथो का जादू अब रवि ओर होना शुरू हो गया था

कम्मो आगे की और झुकती हुई पहले तो एक चुम्मा लेती है सुपडे का फिर से धीरे से अपना मुँह खोल कर सूपड़ा अंदर करते हुए उसे जोर से अपने दोनों दांतो के बिच दबा लेती है

अपनी दीदी की इस हरकत से हवस के नशे में डूबा हुआ रवि दर्द से सकपका जाता है

रवि - अह्ह्ह्हुछःह

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कम्मो- बोल कमीने काट दू तेरा ये मुसल

रवि- अह्ह्ह्ह दीदी इसे काट डौगी तो छुडवाओगी किस्से

कम्मो- अच्छा बीटा मुझे छोड़ेगा तू

कम्मो एक दफा फर से रवि के लुंड को दातो से काट लेती है

रवि- अह्ह्ह दीदी रहने दो ना क्यों घायल कर रही हो इसे

कम्मो - इसी लिए घायल कर रही हु ताकि तू अपनी दीदियो का शिकार न कर सखे

रवि हस्ते हुए- शिकार तो मैं करके रहूंगा दीदी और रोज करूंगा

कम्मो अबतक रवि का टोपा अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर चुकी थी

उसका रसीला मुँह लगातार अपने छोटे भाई के आधे लुंड को मुँह के अंदर बहार कर रहा था जिसका अहसास hi अनोखा था मनो भाई बेहेन बने hi इसी लिए हो ताकि एक दूसरे को यह अनोखा सुख दे सखे

रवि- अह्ह्ह्ह दीदी क्या मस्त चुस्ती हो तुम

कम्मो बिना कीच बोले बस लुंड चूस रही थी

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रवि का मन तो बहुत कर रहा था की अभी अपनी दीदी का मुँह पकड़ कर पूरा लुंड उसके गले में उतर दे

पर वो अभी कम्मो को परखना कहता था की वो किस हद्द तक जा सकती है

नहीं तो कहि पता चले की एक hi मुहचुड़ै के बाद कम्मो रवि से दूर भाग जाये

पर रवि को यह अहसास भी था की उसकी साडी दिदिया एक से बढ़ कर एक खिलादन है

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कम्मो अपने छोटे भाई की आँखों में देखती हुई उसका लुंड चूस रही थी

अपनी दीदी की आँखों में इस समय रवि को सिर्फ और सिर्फ प्यार दिख रहा था एक बेहेन का प्यार अपने छोटे भाई के लिए

रवि- अह्ह्ह दीदी तुम्हारा मुँह कितना गरम है लग रहा है मेरा लौंदा तुम्हारे मुँह में hi पिघल जायेगा अह्ह्ह्ह दीदी अह्ह्ह्हह ऐसे hi चुस्ती रो

कम्मो मुँह से लुंड निकल कर अपनी जीभ का कमाल दिखती है जो रवि को और भी मतवाला बना देती है

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कम्मो अपनी जीभ से तो कभी अपने होठो को आगे पीछे करती हुई रवि का लुंड चाट रही थी

मनो उसे इस खेल में महारत हासिल हो

इधर रवि की बैचैन बढ़ती hi जा रही थी उसे लग रहा था की अब और देर तक वो अपने वीर्य को बहार आने से नहीं रोक पायेगा

आखिर क्या था कम्मो में जो रवि को इतनी जल्दी पानी गिराने ओर मजबूर कर देता था

यह बात अब तक रवि भी नहीं समझ पाया था

अभी लगभग 10 मिंट hi हुए थे कम्मी को कमान संभाले हुए

रवि कम्मो के मुँह को जोरसे पकड़ लेता है

कम्मो समझ चुकी थी की अब उसका छोटा भाई झड़ने वाला है मतलब वो जीत गयी

सूपड़ा मुँह में भरे हुए भी कम्मो अपनी जीभ से लुंड के सुराख़ को कुरेद रही थी ताकि उसे वो अमृत और जल्दी मिल जाये

करीब 2 मिंट के अंदर hi रवि अपने हथियार दाल देता है और हफ्ते हुए अपनी दीदी के मुँह में hi झड़ने लगता है

रवि- अह्ह्ह्ह दीदी अह्ह्ह्ह हो गया मेरा अह्ह्ह सच में दीदी कुछ तो बात है आप में जो मेरा इतनी जल्दी निकल गया

रवि के वीर्य से उसकी दीदी का ोुरा मुँह भर गया था जिसे गाठ गाठ करके कम्मो पूरा का पूरा पी गयी मनो कोई अमृत पी रही हो

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कम्मो अपना मुँह खोल कर रवि को दिखती है

कम्मो- देख ले बच्चू मिल गया मुझे भी

और म्हणत भी बहुत काम करनी पड़ी

रवि- सच में दीदी तुमने आता नहीं क्या जादू किया मेरे लौड़े पर नहीं तो एक बसर रेखा दीदी से पूछ कर देखना वो बताएगी की कितनी म्हणत करनी पड़ती है

कम्मो- मेरी बात hi अलग है छोटे आखिर दीदी हु तेरी मैं

रवि- आपकी गांड छोड़ने में तो अब और मजा आएगा दीदी

कम्मो- पहले मेरी छूट की प्यास बुझा और अगर तेरी दीदी को सच में मजा आया तो तुझे तेरी दीदी की गांड भी छोड़ने को मिलेगी

रवि- और अगर मजा नहीं आया तो

कम्मो- तो आज तेरा लुंड काट दूंगी हाहाहा

रवि- दीदी एक बार छुड़वा कर देखो मजा न आया तो देखना

कम्मो- अच्छा चल खाना खा ले पहले वैसे भी दोपहर हो गयी है

रवि- क्या दीदी इतना गदराई हुई दीदी सामने हो तो खाना किसे खाना होगा

कम्मो- अरे कमीने चल पहले खाना खा ले फिर खा लेना अपनी गदराई हुई दीदी को समझा

कम्मो ऐसे hi नंगी उठ कर खाना निकलने लगती है

दोनों भाई बेहेन नंगे hi एक दूसरे को खाना खिलने लगते है

मनो दोनों तैयारी कर रहे हो भाई बेहेन का असली खेल खेलने की .....
 
अपडेट -205

कम्मो अपने हाथो से खाना खिला कर अपने छोटे भाई को चुदाई के लिए तैयार कर रही थी

यह नजारा बड़ा hi कामुक था एक बेहेन जब नंगी बैठी हुई अपने छोटे भाई को निवाला खिलाये

खाना ख़त्म होते hi रवि कम्मो की और लपक कर उसे अपनी बहो में भर लेता है

कम्मो - अरे बाबा मैं कहि भाग थोड़े hi रही हु

रवि- दीदी तुम्हे यु अपने सामने नंगी देख कर मेरे लुंड की नशे फटने वाली है जल्दी इसका कुछ करो

कम्मो- अच्छा तो ये बात है तो चल आज

कम्मो वही बैठी बैठी अपनी टंगे खोलती हुई अपने छोटे भाई के सामने अपनी छूट परोस देती है

रवि तुरंत hi अपने लुंड पर थूक लगता हुआ अपनी पोजीशन बनता है और अपनी दीदी के ऊपर आ जाता है

उसका लुंड बार बार कम्मो की छूट को ठोकर मार रहा था

जिसक्के अहसास भर hi कम्मो के पुरे शरीर में खलबली मचाने के लिए काफी था

कम्मो- अह्ह्ह्ह अब दाल भी दे कुट्टी

रवि- दाल रहा हु मेरी कुटिया दीदी

आज पहली बार रवि ने कम्मो से इस तरह की बात की थी पर कम्मो को बिलकुल भी बुरा नहीं लगा बल्कि रवि की बात से तो उसके तन बदन में एक चिंगारी धोद उठी

कम्मो- अब जल्दी से अपना लुंड अपनी कुटिया दीदी की बुरर्र में दाल कर पेले चालू कर और बर्दास्त नहीं होता

रवि अपने लुंड को कम्मो की छूट पर ऊपर निचे घिसने लगता है

रवि- लगता है मेरी कुटिया दीदी की बुर्र बहुत पानी छोड़ रही है

कम्मो रह रह कर अपनी कमर को ऊपर की और उठके रवि का लुंड लेने की कोशिश कर रही थी

कम्मो - छोड़ न कुत्ते छोड़ छोड़ कर गाभिन कर दे अपनी कुटिया को अह्ह्ह्हह अब ये गर्मी बर्दास्त नहीं होती मेरे भाई

रवि को भी अपनी दीदी की हॉस्ट देख कर उसपर दया आ जाती है

रवि अपनी कमर को एक झटका देता हुआ अपना मोटा सूपड़ा अपनी दीदी की छूट में घुसा देता है

कम्मो उस हमले से तड़प उठती है

कम्मो- हैइए रामममम जान hi लेलेगा क्या तू कमीने आज अपनी दीदी की

रवि अपनी कमर को थोड़ा पीछे की और करता हुआ एक जोरदार और करारा झटका मरता है

जिससे की उसका आधे से ज्यादा लुंड उसकी दीदी की पनियाई बुर्र में घुस जाता है

कम्मो का बदन इस हमले से ैथ जाता है

रवि - आज तो सच में जान लैलूंगा मैं तेरी मेरी कुटिया डीडीईई

कम्मो - अह्ह्ह रवि आराम से छोड़ना कल hi छूट फड़वाई है मैंने

रवि- एक बार जब लौड़ा छूट में घुस जाता है न दीदी तब वो अपनी जगह पक्की कर लेता है उस छूट में

इतना बोलते हुए रवि एक और जानदार ढका मरता हुआ पूरा का पूरा लुंड अपनी दीदी की छूट में घुसा देता है

कम्मो- अह्ह्ह्हह मार डाला रे कमीने तूने तो अपनी कुटिया को

रवि भी अब पागल सा हो गया था अपनी दीदी की गरम बाटे सुनकर

रवि बिना किसी रेहम के अपनी कमर थोड़ी पीछे करता हुआ एक बार फिरसे अपना लुंड अपनी दीदी की छूट की गहराइयो में उतार देता है

कम्मो तो पिछले झटके से ुइ उबार नहीं पायी थी की तब तक उसकी धुवा धार चुदाई चालू हो जाती है

रवि- अह्ह्ह्ह कितनी गरम छूट हसि तेरी कुटिया

कम्मो का दर्द अब सिसकियों में तब्दील हो चूका था

कम्मो- अह्ह्ह हआ भाई तेरी कुटिया की छूट भट्ट गरममम अह्ह्ह्हह है ऐसे hi बस अपनी कितिया की पेले करता जाए अपने मुसाल से ओह्ह्ह्हह कितना मजा आ रहा है अपने छोटे भाई से छुड़वाने में

दोनों भाई बेहेन एक दीसरे से बाटे करते हुए एक दूसरे का मुँह भी चूस रहे था कभी रवि अपनी दीदी के मुँह में जीभ घुसा देता तो कभी उसके निचले होठ को अपने दातो से चबाने लगता

इन सबका असर कम्मो पर इस कदर हो रहस्य था की उसकी छूट से अब चिपचिपा सफेद पानी निकलना शुरू हो गया था जो हर झटके के साथ और भी घड़ा हो जाए रहा था

फतछः फैठ्ठ की आवाजों से पूरी झोपडी गूंज उठी थी

अच्चानक से रवि अपना पूरा लुंड बहार खींच लेता है और उसे दोबारा से हाथ में पकड़ता हुआ एक झटके के साथ पूरा का पूरा अपनी दीदी की छूट में ोेल देता है

अपने छोटे भाई की इस हरकत से कम्मो की आँखे उलट जाती है

कम्मो- अह्ह्ह्ह धुरी कर न भैई

कम्मो की जबान अब लड़खड़ाने लगी थी उसकी शरीरर अब उसके दिमाग का साथ देना छोड़ चुका था

इधर रवि की नजर अब अपने लुंड पर थी जिस पर उसकी दीदी की छूट का सफेद चिपचिपा गधा पानी लगा हुआ था जो हर झटके के साथ और बढ़ता hi जा रहा था

रवि यह नजारा देख कर अपने आपको रोक नहीं पता और पच्छ से अपनी दीदी की छूट से अपना लुंड निकल कर सीधा अपना मुँह दीदी की छूट ओर भिड़ा देता है

कम्मो इस दोहरे मजे से कम्प उठती है

रवि पागलो की तरह अपनी दीदी की छूट से निकली मलाई को चाट चाट कर खा रहा था मनो कोई आइसक्रीम खा रहा हो

कम्मो अपने हाथो से अपने छोटे भाई का सुर अपनी छूट पर दबती हुई दुबारा से उसके मुँह में झड़ने लगती है

रवि भी चाट चाट कर पूरा माल पी जाता है

कम्मो- अह्ह्ह्ह कीटनाआ मस्त पेलता है तू कुत्ते

रवि- अभी तो तेरी असली पेले बाकि है कितिया चल अब सच में कुटिया बन जा

कम्मो अपने छोटे भाई का इशारा समझ जाती है और घूम कर कुटिया बनती हुई पहले तो अपने भाई के लुंड को सूंघती है जिसपर उन्दोनो की कामलीला का कॉमर्स लगा हुआ था

रवि- क्या सूंघ रही है मेरी कुटिया

कम्मो- सूंघ रही हु मेरे कुत्ते में अभी दम बाकि है या नहीं

रवि अपने लुंड को पकड़ कर अपनी दीदी के होठो पर रगड़ने लगता है

कुछ hi पल में कम्मो अपना मुँह अपने छोटे भाई के लिए खोल देती है

रवि अब अपनी दीदी के सर को पकडे हुए आधे से ज्यादा लुंड उसके मुँह के अंदर बहार करता अपनी दीदी का मुखछोडन शुरू कर चूका था

कम्मो के मुँह से बस लार गिर्र रही थी जिसमे खुद उसकी छूट से निकली मलाई भी शामिल थी

करीब 5 मिंट तक ऐसे hi अपनी दीदी का मुँह छोड़ने के बाद रवि लुंड बहार निकल लेता है

कम्मो के मुँह से अब भी काफी सारा थूक गिर रहा था

अपनी दीदी की यह हालत देख कर रवि से रहा नहीं जाता और वो झुकता हुआ अपना मुँह सीधा कम्मो के मुँह से भिड़ा कर उसके मुँह में जमा थूक पिने लगता है

जिसका स्वाद अमृत से भी मीठा था

कम्मो की हालत किसी गुड़िया की तरह हो गयी थी झा उसका मालिक उसे घुमायेगा वो वही घूमेगी

रवि कम्मो का मुँह छोड़ कर उसे पलटने का इशारा करता है कम्मो भी तुरंत hi अपने छोटे भाई की तरफ अपनी गांड करके बहार को निकल देती है

रवि दुबारा से अपनी दीदी की छूट और गांड चाटने लगता है

कम्मो एक जोरदार पड़ मरती है सीधा रवि के मुँह के अंदर और जोरसे हसने लगती है

अपनी दीदी का पाद सूंघ कर रवि का दिमाग खराब हो जाता है वो अपने दोनों हाथो से गांड को फैलता हुआ सीधा अपना मुँह गांड के छेद से भिड़ा देता है और जोर जोर से चुसनी लगता है मनो उसे अपनी दीदी की गांड से कुछ बहार निकलना हो

कम्मो रह रह कर कई सरे पाद मरती है

ठुस्स्सस्स ठुसस्सस परररररररर पूंऊऊ

रवि अब खड़ा होता हुआ लुंड पकड़ कर एक hi झटके में दुबारा से अपनी दीदी की छूट में पेल देता है

कम्मो- अह्ह्ह्ह अब पता चला रेखा दीदी को कैसे तूने अपना गुलाम बनाया होगा

रवि- गुलाम तो तुझे भी बनाऊगा मेरी कुटिया तेरी गांड मार कर

.रवि के ऊपर अब हवस का नशा पूरी तरह हावी हो चूका था

कम्मो भी अपनी गांड को बार बार पीछे को और मार रही थी ताकि उसके छोटे भाई का लुंड और भी गहराई तक उसके जिस्म में जा सखे

कम्मो- शठ अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह हाआआ रावी पेलता जा अपनी कुटिया को और बना ले अपनी दीदी को अपनी रखैल अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बस छोड़ छोड़ कर मेरी छुटत फ़ायद दे भईईई अह्ह्ह्हह माआआआ कीटनाआ मस्त लोढ़ा है तेरा सरे ड़ड़ड़ड़ड़ड़ भुलाए देता है जब अंदर जाता है ताऊ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सेल कुट्टी अपनी दीदी को रंडी की तरह छोड़ रहा है शर्म नहीं आती तुझे हरामी कुत्ते सेल हरामी

रवि की स्पीड बढ़ने के साथ साथ hi कम्मो की हालत भी तीते होती जा रही थी जिसकी वजह से अब उसे खुद नहीं पता चल रहा था की वो क्या अनाप स्नेप बककक रही है जो उसके मुँह में आ रहा था बोले जा रही थी

इधर रवि का भी हाल ऐसा hi था

कम्मो की छूट 3 बार झाड़ चुकी थी और अब अंदर hi अंदर वो अपने छोटे भाई के लुंड को निचोड़ रही थी

रवि- अह्ह्ह मेरी कुटिया मेरा मल्ल निकलने वाला ही

कम्मो- अह्ह्ह्हआआह्ह्ह्चोड़ छोड़ कुत्ते छोड़ मुझे हरामी सारा माल मेरी छूट में hi गुरा दे और बना दे मुझे गाभिन

रवि- तुझे गाभिन होना है ना कुटिया ृक्क आज्ज तुझे गाभिन कर के hi छोडूंगा

रवि हफ्ता हुआ कम्मो की छूट में hi झड़ने लगता है

उसका विशाल लुंड जितना वीर्य उगलता है उसकी दीदी की रसभरी बुर्र सारा का सारा छत्त कर जाती हसि बस कुछ बुँदे hi बहार गिरती है

काफी देर तक ऐसे hi पड़े रहने के बाद रवि दूसरी और सरक जाता है

पछहः से उसका लुंड दीदी की छूट से बहार सा जाता है

कम्मो की छूट की दशा अब देखने लायक थी

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कम्मो की छूट फूल कर बिलकुल लाल हो गयी थी और रह रह कर उसकी छूट से दोनों भाई बेहेन का विरया बहार आ रहा था

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दोनों की सांसे भले hi तेज चल रही थी पर इस वक़्त दोनों के दोनों गहरी सोच में दुबे हुए थे मनो उन दोनों को hi अहसास जो गया था की दोनों भाई बेहेन ने जोश में आकर कितनी बड़ी गलती कर दी है

आगे की कहानी जल्द hi

अपनी रायए जरूर दे

धन्यवाद्.....
 
अपडेट -206

रवि और कम्मो की सांसे अब तक उनके काबू में आ चुकी थी

रवि- दीदी हमने बहुत बड़ी गलती करदी है

कम्मो- अब कर दी है तो क्या कर सकते है मेरे भाई

रवि- अगर रेखा दीदी को मालूम पद गया तो क्या होगा

कम्मो - रेखा दीदी मेरी छूट के अंदर झक कर थोड़े hi देखेगी की तेरा माल कितना अबदार तक गया है

कम्मो रवि की चौड़ी छाती पर अपना सर रख देती है

रवि अपनी दीदी के सुनहरे बालो को सूंघता हुआ उसमे अपनी उंगलिया घूमने लगता है

रवि- दीदी पर जब सच समने आये तब क्या होगा

Kammo-jaisa मैंने सोचा है अगर वैसा hi हुआ तो कुछ नहीं होगा तू मुझ पर यकीं रख बस छोटे दीदी हु तेरी

रवि- वो तो ठीक है दीदी पर अगर तुम सच में गाभिन हो गयी तो क्या होगा

कम्मो- मैं तो कहती hi हु की मैं गाभिन हो जाऊ बस तू चिंता मत कर और अब आजा तेरा इनाम लेले

कम्मो अपना सर उठा कर अपने छोटे भाई के होठो से होठ मिला देती है

रवि भी अपनी दीदी की गर्म सांसे महसूस करके सब कुछ भूल जाता है और अपनी दीदी के होठो को चुस्त हुआ अपना हाथ निचे ले जाकर सीधा कम्मो की गांड मसलने लगता है

कम्मो- अह्ह्ह्ह तूने जो मजा दिया है न भाई उसे मैं मरते दम तक नहीं भूलूंगी और हमेशा तेरे लुंड की ऐसे hi सेवा करती रहूंगी

कम्मो रवि के मुरझाये हुए लुंड को पकड़ कर मुठियाने लगती है

रवि- दीदी मजा तो अब दूंगा मैं तुम्हे तुम्हारी गांड का ढक्कन खोल क्र

कम्मो भी अब दुबारा से गरम हो गयी थी आखिर उसके मन में भी उत्सुकता थी की कैसा मजा आता है अपने hi छोटे भाई से अपनी गांड छुड़वाने में

कम्मो- अह्ह्ह्ह अब और देर मत कर मेरे भाई छोड़ दे मुझे मार ले अपनी कितिया की गांड और भर दे अपनी दीदी की गांड को भी अपने विरया से

कम्मो की बाटे रवि पर ऐसा असर दिखा रही थी की देखते hi देखते रवि का लुंड अपनी दीदी के हाथो में फुल तीते हो जाता है

रवि- जरूर भरूंगा दीदी जैसे तुम्हारी छूट भरी है वैसे hi तुम्हारी गांड भी भरूंगा अपने विरया से अह्ह्ह क्या मस्त गांड है दीदी तुम्हारी

रवि उठ कटा है कम्मो भी घोड़ी बन कर अपनी गांड खोल देती है ताकि उसका छोटा भाई अपने इनाम को ठीक ढंग से देख सखे

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रवि पीछे की और झिकता हुआ अपनी दीदी की गांड को निहारने लगता है

रवि- अह्ह्ह क्या मस्त गांड है तेरी कुटिया

कम्मो - तेरे लिए hi तो अब तक इसे बचा कर रखा था मेरे कुत्ते

रवि पीछे की और झूलता हुआ अपनी दीदी की गांड को सूंघता हुआ उसे चाटने लगता है

कम्मो- अह्ह्ह क्या कर रहा है

रवि- अपनी कुटिया की गांड को सूंघ रहा हु

कम्मो- अह्ह्ह्ह सिर्फ सूंघता hi रहेगा

रवि- सूंघने के बाद तेरी गांड फाड़ूंगा दीदी चिंता मत कर आज तुझे पूरी औरत बना कर hi घर ले जाऊंगा

कम्मो- छत्त और अंदर तक जीभ घुसा कुत्ते अपनी कुटिया की गांड में

अपने छोटे भाई की जीभ को अपनी गांड पर चलता हुआ महसूस करते hi कम्मो का जोश एक दम से दोगुना हो जाता है और वो अपने सामने लटके हुए लुंड को गप्प्प से अपने मुँह में भर लेती है

रवि भी पागलो की तरह कम्मो की गांड चाट रहा था और यह कम्मो अपने छोटे भाई का आधे से ज्यादा लुंड मजे से चूस रही थी

करीब 5 मिंट तक दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के अंगो को ऐसे hi चूसते रहते है और अच्चानक से रवि पीछे की और आता है

रवि- दीदी अपनी गांड को फिकलाओ

कम्मो एक कुटिया की तरह अपने कुत्ते की बात मानती हुई अपने दोनों हाथो से अपनी गांड पकड़ कर फैला देती है

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रवि- दीदी बड़ा दर्द होगा तुम्हे तो

इतना बोलता हुआ रवि एक साथ अपनी 2 उंगलियों को जबरदस्ती अपनी दीदी की गांड में थुश देता है

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कम्मो- अहह कितना जालिम है रे तू

रवि- रेखा दीदी ने hi खा था की कम्मो पर कोई रेहम मत करना हहहह

राव लगातार अपनी 2 उँगलियों को अपनी दीदी की गांड के अंदर बहार कर के छोड़ रहा था

कम्मो का दर अब मजे में बदल गया था

कम्मो अब भी अपने दोनों हाथो से अपनी गांड फैलाये अपने छोटे भाई की उंगलियों से अपनी गांड चुदाई के मजे ले रही थी जिसमे उसे काफी मजा आ रहा था

करीब 5 मिंट तक ऐसे hi अपनी दीदी की गांड को छोड़ने के बाद रवि अचानक से अपनी उंगलिया निकल लेता है

कम्मो की गांड से सफेद पानी के बुलबुले के साथ hi एक जोरदार पहाड़ निकलता है

परररररररर पूंऊऊऊ

रवि तुरंत hi अपना मुँह अपनी दीदी की गांड पर लगा देता है और उसकी खुली हुई गांड से आने वाले पानी को चाट जाता है

कम्मो की गांड का छेद लगातार खुल बंद हो रहा था जिससे की अब रवि को अपनी दीदी की गांड में अपनी जीभ घुसाने में आसानी हो रही थी

कम्मो अभी संभाल पति उससे पहले रवि दुबारा से अपनी 2 उँगलियों को उसकी गांड में धकेल कर छोड़ना शुरू कर देता है

इसबार रवि की चुदाई की स्पीड पहले से ज्यादा थी

रवि 3-4 बार ऊँगली अंदर बहार करने के बाद उसे निकाल लेता और जैसे hi हवा के साथ सफेद पानी बहार आता फिरसे मुँह अपनी दीदी की गांड से भिड़ा कर उस पानी को पी जाता और अपनी दीदी की गांड से निकल रही हवा को अपने अंदर खुश लेता करीब करीब 10 मिंट तक रवि यही चीज़ दोहराता रहा

जब रवि अपनी उँगलियों को निकल कर कम्मो की गांड पर मुँह लगा कर चूसने लगता तो उसका पूरा बदन सिहर उठता

उसे अब रवि पर बहुत प्यार आ रहा था अब वो उसके लिए गांड तो क्या जान भी देने के लिए तैयार थी

क्योंकि लोग जिसे गन्दी जगह मानते थे रवि अपनी दीदी की उसकी जगह से निकले अमृत को पी कर मस्त हो रहा था

कम्मो की गांड अब काफी हद्द तक खुल चुकी थी

जिसे देखता हुआ रवि अपना लुंड मसल कर उसे थूक से भिगो रहा था

कम्मो की गांड का छेद तो वैसे hi अपने छोटे भाई के थूक से तर बतर हो चूका था

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आखिर कर रवि अपने थूक से भीगे हुए सुपडे को अपनी दीदी की गांड के छेद से सत्ता देता है

कम्मो की सांसे थम सी जाती है पुरे कमणरे में सन्नाटा च गया था

तूफ़ान जो आने वाला था

कम्मो अपनी सांसे रोके हुए उस पल का इन्तजार कर रही थी जब उसका छोटा भाई पहला झटका मार कर आज सच में उसकी गांड का ढक्कन खोलेगा

और अगले hi पल रवि आगे की और झुकता हुआ एक जोरदार झटका मरता है

कामो की किस्मत अच्छी थी की लुंड फिसलता हुआ उसकी छूट में पक्क्क से घुस जाता है

कम्मो अपने शरीर को आगे की और खिचती हुई ढीला छोड़ देती है

रवि लुंड को छूट से निकल कर दुबारा अपनी दीदी की गांड पर सेट करता है और इस बार एक दम स्टिक निशाना लगता हुआ एक करारा झटका मरता हुआ अपना मोटा सूपड़ा अपनी दीदी की गांड में ठुस्स देता है

कम्मो के गदराये जिस्म में दर्द की एक तेज लेहेर दौड़ उठती है

कम्मो- अह्ह्ह्ह मा कुट्टी अरम्म से नहीं डाल सकता एक hi बार में पूरा लुंड पेल दिया मेरी गांड के अंदर

रवि- अरे मेरी कितिया तेरी जैसी गदराई माल की गांड आराम से मरने में मजा hi नहीं है साली बहुत मटका मटका कर चलती है न अपनी गांड ृक्क आज तेरी गांड की धज्जियाँ न उड्दै तो मेरा नाम रवि नहीं

और वैसे भी अभी तो सिर्फ मेरा टोपा hi अंदर गया है पूरा लुंड तो अभी तेरी गांड को खिलाना बाकि है मेरी चुदड़ो कुटिया

अपनी दीदी पर बिना कोई रेहम दिखाए रवि एक और करारा झटका मरता है और अपना आधे से ज्यादा लुंड अपनी दीदी की गांड में पेल देता है

कम्मो की आँखे अब उल्ट चुकी थी उसकी हालत सच में बहुत खराब थी

उसे भी पता था की छूट फटने से ज्यादा दर्द गांड फ़तवाने में होता है

पर अब उसकी साडी सोच धरी की धरी रह गयी थी

क्योंकि जिस तरह उसके छोटे भाई ने उसकी गांड चुदाई की शुरुवात की थी .वो आगे आने वाले पीएलओ को सोच कर hi कांप उठी थी

आज सच में उसका छोटा भाई उसकी गांड की धज्जियाँ उदा देगा

रवि आधा लुंड अपनी दीदी की गांड में फसाये उसकी गर्दन पकड़ कर ऊपर की और उठता है और उसका मुँह चूसने लगता है

उसका लुंड अब भी जो का त्यों कम्मो की गांड में फसा हुआ था

कम्मो का दर्द से बुरा हाल था उसका दूध सा सफेद चेहरा पूरा लाल पद गया था आँखों में आंसू थे पर रवि मनो आज अपने मन की करने के बाद hi रुकने वाला था

रवि कम्मो के निचले होठ को अपने मुँह में लेकर चुस्त हुआ अपनी कमर आगे पीछे करता हुआ अपनी दीदी की गांड चुदाई चालू कर चूका था

इधर कम्मो की गांड फटने का दर्द अब कुछ हद्द तक काम हो चूका था और अब कम्मो को भी अपने छोटे भाई से अपनी गांड छुड़वाने में मजा आ रहा था

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रवि दोनों हाथो से अपनी दीदी की कममर को थामे हुए सटासट धक्के मार रहा था

कम्मो की चीखे अब सिसकियों में बदल गयी थी

कम्मो- अह्ह्ह्ह बास बस्स्स रवि ऐसे hi छोड़ अह्ह्ह मैं मर्डर जाउंगी रवि ये क्या कर दिया तू मेरी गांड के साथ हरामी कुत्ते खिङके

रवि- अरे मेरी कुटिया अभी तो कुछ नहीं किया करूँगा तो अब

कामो दीदी का जोश देखता हुआ रवि एक जोरदार झटका लगता है और पूरा का पूरा लुंड इस झटके के साथ अपनी दीदी की गांड में पेल देता है

कम्मो की आँखे बहार को आ जाती है उसके मुँह से एक जोरदार चीख निकल पड़ती है

कम्मो- अह्ह्ह्हह हैए रे मार डाला तूने कमीने पूरा पेल दिया अह्ह्ह्हह्हह माआआ फ़ायद दी मेरी गांड

रवि - गांड तो अब फाड़ूंगा तेरी कुटिया

रवि अपना लुंड थोड़ा सा बहार खींचता हुआ एक और जोरदार झटका मरता है और फिरसे अपने लुंड को जड़ तक अपनी दीदी की गांड में पेल देता है

कम्मो दर्द से तड़प रही थी पर रवि अपनी दीदी पर बिना किसी रेहम दिखाए लगातार उसकी गांड छोड़ने में लगा हुआ था

कम्मो- अह्ह्ह्ह रवि हाथ जोड़ती हु तेरे किसी और दिन मार लेना मेरी गांड निकल ले भाई अपना लौड़ा बहार

रवि- चुप कर साली कितिया इतनी बड़ी गांड लेकर घूमती है और एक लौड़ा नहीं संभाल सकती

कम्मो- हरामी लोढ़ा थोड़े hi तेरा तेरा तो गधे का लौड़ा है अह्ह्ह्ह मार डाला रे हरामी सुवर कुत्ते

रवि- मेरी कुटिया अब तो मैं तभी रुकूंगा जब तेरी इस मतवाली गांड को अपने विरया से भर दूंगा

रवि एक के बाद एक जोरदार झटके लगता हुआ अपनी दीदी की गांड के परखच्चे उड़ने में लगा हुआ था

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रवि एक झटके के साथ अपना लुंड बहार निकल जाता है

कम्मो की गांड का छेद अब पूरी तरह से खुल चूका था इतना खुल चूका था की इतना खुल चूका था की अब रवि को अपनी दीदी के गांड के अंदर का लाल हिस्सा भी साफ़ नजर आ रहा था

कम्मो की गांड लगातार पाद रही थी

कम्मो की साँस में साँस आती है वो संभाल पति उससे पहले रवि अपना लुंड पकड़ कर पूरा एक बार में हु थुश देता है

कम्मो- अह्ह्ह्हह मा मर गयी रे

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रवि कम्मो के बाल पकड़ता हुआ उसे खड़ा कर देता है और उसी अवस्था में अपनी दीदी की गांड मरने लगता है

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कम्मो को भी अब मजा आ रहा था

लगभग 15 मिंट तक ऐसे hi अपनी दीदी की गांड मरने के बाद रवि उसकी गांड में hi झाड़ जाता है

दिन भर में रवि 2 बहार और कामो की चुदाई करता है

कभी उसका लुंड अपनी दीदी की छूट में होता तो कभी उसकी गांड में तो कभी उसके मुँह में

पूरा कमरा दोनों भाई बेहेन की चुदाई से महक उठा था

कामो भी अब इतना छुड़वा चुकी थी की शायद hi कभी उसे एक दिन में इतनी चिड़ै नसीब हो

इधर दूसरी तरफ शाम हो चुकी थी और हरी मल्टी और केशव घर आ गए

रेखा सबका स्वागत अच्छे से करती है

मल्टी घर में घूम कर देखती है उसे कम्मो कहि भी नजर नहीं आती

मल्टी- अरे रेखा दीदी हमारी कम्मो रानी नजर नहीं आ रही

रेखा ( अब क्या बताऊ भाभी तुम्हारी कम्मो रानी अपनी गांड मरवाने में वयस्त है वो भी तुम्हारे देवर से)

रेखा - अरे भाभी

वो रवि को खाना देने गयी थी तब से अस्यी hi नहीं लगता है वही खेतो में ृक्क गयी

मल्टी को रेखा की बात कुछ हजम नहीं होती

मल्टी रेखा को टेढ़ा टेढ़ा देख रही थी मनो उसे साख हो रहा था की कहि उसके होने वाली बहु के छेड़ो का उद्घाटन तो नहीं कर रहा उसका देवर

इधर दूसरी तरफ रवि कम्मो के साथ घर की और निकल पड़ा था

कम्मो की हालत ऐसी थी की उसे चला भी नहीं जा रहा था रवि उसका हाथ पकड़ कर उसे सहारा देकर घर की और ला रहा था

कम्मो- हरामी एक hi बार में ऐसी हालत करदी है तूने की अब तो संडास भी नहीं लिकलेगी मेरी अह्ह्ह मा कितना जालिम है रे तू

रवि- हहहह दीदी तुमने hi तो मुझे चढ़ाया था भूल गयी

कम्मो- बहुत बड़ी गलती हो गयी मुझसे

रवि- दीदी कुछ भी हो पर बड़ा मजा आया तुम्हारी गांड छोड़ कर

और अब तो वैसे भी जो होना था जितना दर्द होना था हो गया अब तो सिर्फ चुदाई होगी अब बिना किसी तकलीफ के सटासट लुंड तुम्हारी छूट और गांड में जायेगा

कम्मो- अब न मरवाने वाली मैं तुझसे अपनी गांड

रवि- दीदी मेरा तजुर्बा कहता है की एक बार जब औरत गँड़मरि हो जाती है तो उसकी गांड में कीड़े काटने लगते है और वो खुद hi अपनी गांड मरवाने के लिए आगे आती है

कम्मो- अच्छा जैसे कौन

रवि- जैसे रेखा दीदी

कम्मो- हहहह

रवि- हहाहाः

दोनों भाई बेहेन घर पहुंच जाते है

मल्टी- अरे कम्मो क्या हुआ तू ऐसे क्यों चल रही है

केशव और मल्टी को देख कर कम्मो और रवि थोड़ा दर जाते है पर पास में hi खड़ी रेखा को देख कर दोनों की जान में जान आती है

रेखा तुरंत आगे बढ़ती हुई कम्मो को थम लेती है

केशव - अरे रवि इसे क्या हुआ जो इतना लंगड़ा कर चल रही है

रवि- भैय्या वो दीदी गिर गयी और उनका पेअर मुद गया

कम्मो- है है भैया ऐसा hi हुआ

मल्टी को कुछ अजीब hi लग रहा था उसे दर था की कहि उसका अनुमान सही न निकल जाये और कम्मो सच में अपने छोटे भाई से छुड़वा कर आ रही हो क्योंकि वो देख चुकी थी की उसके देवर का लुंड कितना बड़ा और मोटा है

कम्मो जैसी कच्ची काली तो क्या अगर कोई औरत भी रवि से ठीक से छुड़वा ले तो ढंग से चल नहीं पायेगी

रेखा कम्मो को घर में ले जाती है

रेखा - क्यों ऋ कम्मो खुलवा ली तूने अपनी गांड मेरे भाई से

रेखा की बात सुनकर कम्मो पानी पानी हो जाती है

रेखा - अरे अब बोल भी दे अपने छोटे भाई से गांड मरवाते हुए शर्म नहीं आयी और अब शर्मा रही है

कम्मो- दीदी सच में बड़ा जालिम है रवि बिना तेल कगाये hi पेल दिया और दिन भर में 2 बार 1-1 घंटे तक मेरी गांड मरता रहा

रेखा - अच्छा

. रेखा कम्मो को अपने साइन से लगा लेती है

रेखा- तुझे मजा आया या नहीं

कम्मो- आया पर दर्द भी बहुत हुआ दीदी

रेखा - वो तो होना hi था पर अब तुझे सिर्फ मजा hi मजा आएगा मेरी रानी

Kammo-didi हमारा भाई बड़ा जालिम है अपनी दीदियो पर भी रेहम नहीं खता मुआ

रेखा- अरे मेरी गुड़िया अब जो उसने तेरे छेद खोल दिए है न तो सच बताऊ तो अब तू भी यही कहेगी की वो तुझ पर बिना रेहम दिखाए तेरा बदन नोच खाये

कम्मो - दीदी तुम्हे भी तो ऐसे hi छुड़वाने में मजा आता है न

कम्मो रेखा की छूट को पेटीकोट के ऊपर से hi सेहला देती है

रेखा - पूछ मत जब वो मुझे जानवरो की तरह छोड़ता है तो कितना मजा अत है मन करता है की अपने हर छेद को उसके लुंड और उसके लुंड से निकले पानी से भर लू

कम्मो - दीदी ये भाभी खा से आ गयी

रेखा - पूछ मत ये साली रैंड कभी भी मुँह उठा कर आ जाती है

कम्मो- दीदी अब हमारा क्या होगा

रेखा कम्मो की चुकी मसल देती है जिसे रवि पहले hi लाल कर चूका था

कम्मो- अह्ह्ह्ह

रेखा - अभी टंगे फैला कर चल रही थी और अब पूछ रही है की हमारा क्या होगा

कम्मो- पता नहीं क्यों दीदी दर्द तो बहुत हो रहा है पर मन कर रहा है की मुझे वैसी hi तकलीफ दुबारा हो

रेखा - फ़िक्र मत कर मैं कुछ रास्ता निकलती हु

तू आराम कर और सुन उस हरमन से ज्यादा बात मत करना मुझे लगता है की उसे हम पर शक हो गया है

कम्मो है में गर्दन हिलती है रेखा बहार आ जाती है

रवि अब तक नहाने चला गया था इधर रवि की बात सही हो रही थी कम्मो की गांड में अब सच में कीड़े काट रहे थे और दर्द के बावजूद भी उसका मन कर रहा था की रवि दुबारा से उसकी गांड मरे......
 
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