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- Dec 5, 2013
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अपडेट -197
दूसरी तरफ रामलाल का घर्र.....
सुबह के लगभग 4 बजे रामलाल जो का त्यों अपनी आँखे खोले पड़ा था
रात भर बिचारे को नींद भी नहीं आयी
इसकी गवाही उसकी लाल हो चुकी सुर्ख आँखे दे रही थी
तभी कमरे का दरवाजा खुलता है
रामलाल एक बा एक पलट कर दरवाजे की और देखता है और अब उसके मुरझाये हुए चेहरे पर एक मुस्कराहट फ़ैल जाती है
क्योंकि दरवाजा खुद मल्टी ने hi खोला था
अपने बाप को जगा हुआ देख कर मल्टी से भी रहा नहीं जाता क्योंकि उसे भी अभी अपने बाप को अपना देहसुख देना था जोकि केशव और हरी की वजह से वो ना दे पायी
मल्टी धीरे से दरवाजे को फिरसे चिपका देती है और दौड़ी चली जाती है
अपने बापू की और
रामलाल तुरंत hi उठ कर बैठ जाता है
मल्टी उसके पास जाते hi सीधा उसकी गॉड में बैठ जाती है
मनो उसे अपने बूढ़े बाप का प्यार चाहिए था
मल्टी- सोये नहीं बापू आप
Ramlal-teri याद ने सोने hi नहीं दिया बापू
मल्टी- क्यों याद करते हो बापू मुझे इतना की तुमको नींद hi ना आये
मल्टी अपनी हथेली को रामलाल के साइन पर ोहेर्टी हुई बोलती है
रामलाल - बेटी तू आज जा रही है और ना जाने कब तेरा ये बाप तुझे ठीक से देख पायेगा
रामलाल इतना बोलता हुआ भावुक हो जाता है और मल्टी को अपने साइन से लगा देता है
मल्टी- ऐसा न बोलो बापू आ जाए रही हु इसी लिए तो इतनी सुबह उठ कर आयी हु ताकि मैं अपने बापू को सही ढंग से अलविदा कह सखु
रामलाल - अच्छा बेटी तू मेरे लिए उठी है इतनी सुबह
मल्टी- हां बापू सर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए
रामलाल का लुंड अब अपनी hi बेटी की गांड से निकल रही गर्माहट से खड़ा होना शुरू हो चूका था जिसका जिसका अंदाजा अब टक्क मल्टी को भी हो चुका था
रामलाल- बेटी एक काम कर ये दरवाजा बहार से बंद कर दे
मल्टी- क्यों बापू
रामलाल- बेटी मैं कहता हु की एक आखिरी बार मैं तुझे जी भर कर प्यार कर सखु और हमारे बिच कोई दूसरा तीसरा न आये कहे वो तेरा पति हो या भाई
मल्टी- ठीक है बापू रुको
मल्टी जान बुझ कर अपनी गांड रगड़ती हुई उठ कर दरवाजे को बहार से बंद कर देती है और वापस आ कर उसी अवस्था में अपने बाप की गॉड में बैठ जाती है
मल्टी- अह्ह्ह्हह्हह
रामलाल मल्टी के नाजुक होठो परर अपनी उंगलिया फिरता हुआ बोलता है
मल्टी- बापू तुम्हारा ये सुबह रहा है मुझे पीछे से
रामलाल - खा सुबह रहा है मेरी बेटी को मेरा ये
मल्टी- मेरी गंड़द में बापू
रामलाल का दूसरा हाथ अब मल्टी के मांसल उठे हुए पेट को सहलाना चालू कर चूका था
एक बाप के लुंड का उभर hi काफी है उसकी बेटी को गर्माने के लिए
फिर यह तो रामलाल जी पूरी तरह से अपनी बेटी के मादक अंगो को छू रहे थे
रामलाल- जानती है बेटी वो क्या है जो तेरी गण्ड में सुबह रहा है
मल्टी भी अब अपने बाप के साथ गन्दी बाते करना कहती थी
मल्टी- क्या है बपु जो मेरी गांड में सुबह रहा है
रामलाल मल्टी की गर्दन को चूमता हुआ बोलता है
रामलाल - ये तेरे बाप का लुंड है बेटी
इतना बोलता हुआ रामलाल अपने पेट वाले हाथ को दबाता हुआ मल्टी की पेट की चर्बी को मसल देता है
मल्टी एक अजीब दर्द से कराह उठती है
मल्टी- अह्हह्ह्ह्ह बापू भट्ट बड़ा है तुम्हारा लुंड तो
रामलाल का हाथ अब ऊपर की और आता हुआ अपनी hi शादी शुदा बेटी के ब्लाउज तक आ पहुंचा था
रामलाल मल्टी के पल्लू को पकड़ता हुआ सरका देता है
अपनी hi बेटी की रसभरी चूचियों को ब्लाउज में कैद देख रामलाल की ललजिब्ह लपलपाने लगती है
रामलाल - बेटी लेगी अपने बाप का लुंड
रामलाल इतना बोलता हुआ अपने दोनों हाथो को मल्टी के ब्लाउज के ऊपर रख देता है और अपनी बेटी के चुचो को हलके हलके दबाने लगता है
बाप का इस तरह से चुना hi मल्टी के अंदर एक अलग तरह की चिंगारी भड़का रहा था
आज तक्क उसकी छूट में ऐसी खुजली नहीं हुई थी जो अब हो रही थी
मनो मल्टी मदहोश सी हो गयी थी अपने बाप की गॉड में बैठे बैठे
मल्टी- अह्ह्ह बापू खा लू आपका लुंड
रामलाल एक एक करके मल्टी के ब्लाउज के हुकक्क खोलना शुरू कर चुका था क्योंकि वो भी जनता था की समय ज्यादा नहीं है और अगर कोई उठ गया तो बाद में बड़ा पछतावा रह जायेगा
रामलाल- अपनी छूट में लेले बेटी
मल्टी- अह्ह्ह्हह शहीईई सिर्फफछुटत मई hi लयऊ क्या बापू
रामलाल- मुह्हह्ह मई भी लीलेना बेटीइ
मल्टी- ठीक है बापू पर जल्दी करना अगर केशव उठ गया तो क्या कहेगा की मैं अपने बापू का लुंड मुँह और छूट में ले रही थी
रामलाल- ये तो हर बेटी का कर्त्वा है बेटी की जब बेटी जवाब हो जाये तो वो अपने बूढ़े बाप को अपने मादक और गदराये अंगो का पूरा मजा दे
बात करते करते रामलाल अपनी बेटी के ब्लाउज को पूरी तरह खोल चूका था और अब मल्टी की भरी भरकम चूचिया उसकी आँखों में सामने झूल रही थी
मल्टी- बापू तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताई ये बात अब मुझे बहुत बुरा लग रहा है की मैं शादी के पहले भी आपको अपने अंगो का मजा दे पति तो कितना अच्छा रहता
रामलाल अपने दोनों हाथो से मल्टी की गदराई चूचियों को निचोड़ने लगता है
मल्टी- अह्ह्ह्ह बापू इतना तेज मैट दबाओ अभी दूध नहीं है इसमें
रामलाल- क्या आता मेरे निचोड़ने से दूध निकल आये बेटी तेरी चूचियों सी
मल्टी- अह्ह्ह बापू तब तो तुम पक्का पी लेना मेरा दूध पियोगे न मेरा दूध बापू
रामलाल जोरो से चूचिया मसलता हुआ मल्टी के कान चूसने लगता है
रामलाल- हां बेटी जरूर पियूँगा मैंने तेरा दूध
मल्टी बापू जल्दी करो कहि कोई जाग गया तो गड़बड़ हो जाएगी
रामलाल - क्या कृ बेटी
मल्टी- अह्ह्ह्ह बापू बास मुझे प्यार क्रू मेरे इन रास भरे अंगो का सारा रस निचोड़ लो बापू कीच भी करो बस अपनी बेटी की ोयास बुझा दो बापू...
बाकि का अपडेट बाद में
टाइम की कमी के कारन आधा hi लिख पाया सॉरी फॉर डिले दोस्तों....
दूसरी तरफ रामलाल का घर्र.....
सुबह के लगभग 4 बजे रामलाल जो का त्यों अपनी आँखे खोले पड़ा था
रात भर बिचारे को नींद भी नहीं आयी
इसकी गवाही उसकी लाल हो चुकी सुर्ख आँखे दे रही थी
तभी कमरे का दरवाजा खुलता है
रामलाल एक बा एक पलट कर दरवाजे की और देखता है और अब उसके मुरझाये हुए चेहरे पर एक मुस्कराहट फ़ैल जाती है
क्योंकि दरवाजा खुद मल्टी ने hi खोला था
अपने बाप को जगा हुआ देख कर मल्टी से भी रहा नहीं जाता क्योंकि उसे भी अभी अपने बाप को अपना देहसुख देना था जोकि केशव और हरी की वजह से वो ना दे पायी
मल्टी धीरे से दरवाजे को फिरसे चिपका देती है और दौड़ी चली जाती है
अपने बापू की और
रामलाल तुरंत hi उठ कर बैठ जाता है
मल्टी उसके पास जाते hi सीधा उसकी गॉड में बैठ जाती है
मनो उसे अपने बूढ़े बाप का प्यार चाहिए था
मल्टी- सोये नहीं बापू आप
Ramlal-teri याद ने सोने hi नहीं दिया बापू
मल्टी- क्यों याद करते हो बापू मुझे इतना की तुमको नींद hi ना आये
मल्टी अपनी हथेली को रामलाल के साइन पर ोहेर्टी हुई बोलती है
रामलाल - बेटी तू आज जा रही है और ना जाने कब तेरा ये बाप तुझे ठीक से देख पायेगा
रामलाल इतना बोलता हुआ भावुक हो जाता है और मल्टी को अपने साइन से लगा देता है
मल्टी- ऐसा न बोलो बापू आ जाए रही हु इसी लिए तो इतनी सुबह उठ कर आयी हु ताकि मैं अपने बापू को सही ढंग से अलविदा कह सखु
रामलाल - अच्छा बेटी तू मेरे लिए उठी है इतनी सुबह
मल्टी- हां बापू सर्फ और सिर्फ तुम्हारे लिए
रामलाल का लुंड अब अपनी hi बेटी की गांड से निकल रही गर्माहट से खड़ा होना शुरू हो चूका था जिसका जिसका अंदाजा अब टक्क मल्टी को भी हो चुका था
रामलाल- बेटी एक काम कर ये दरवाजा बहार से बंद कर दे
मल्टी- क्यों बापू
रामलाल- बेटी मैं कहता हु की एक आखिरी बार मैं तुझे जी भर कर प्यार कर सखु और हमारे बिच कोई दूसरा तीसरा न आये कहे वो तेरा पति हो या भाई
मल्टी- ठीक है बापू रुको
मल्टी जान बुझ कर अपनी गांड रगड़ती हुई उठ कर दरवाजे को बहार से बंद कर देती है और वापस आ कर उसी अवस्था में अपने बाप की गॉड में बैठ जाती है
मल्टी- अह्ह्ह्हह्हह
रामलाल मल्टी के नाजुक होठो परर अपनी उंगलिया फिरता हुआ बोलता है
मल्टी- बापू तुम्हारा ये सुबह रहा है मुझे पीछे से
रामलाल - खा सुबह रहा है मेरी बेटी को मेरा ये
मल्टी- मेरी गंड़द में बापू
रामलाल का दूसरा हाथ अब मल्टी के मांसल उठे हुए पेट को सहलाना चालू कर चूका था
एक बाप के लुंड का उभर hi काफी है उसकी बेटी को गर्माने के लिए
फिर यह तो रामलाल जी पूरी तरह से अपनी बेटी के मादक अंगो को छू रहे थे
रामलाल- जानती है बेटी वो क्या है जो तेरी गण्ड में सुबह रहा है
मल्टी भी अब अपने बाप के साथ गन्दी बाते करना कहती थी
मल्टी- क्या है बपु जो मेरी गांड में सुबह रहा है
रामलाल मल्टी की गर्दन को चूमता हुआ बोलता है
रामलाल - ये तेरे बाप का लुंड है बेटी
इतना बोलता हुआ रामलाल अपने पेट वाले हाथ को दबाता हुआ मल्टी की पेट की चर्बी को मसल देता है
मल्टी एक अजीब दर्द से कराह उठती है
मल्टी- अह्हह्ह्ह्ह बापू भट्ट बड़ा है तुम्हारा लुंड तो
रामलाल का हाथ अब ऊपर की और आता हुआ अपनी hi शादी शुदा बेटी के ब्लाउज तक आ पहुंचा था
रामलाल मल्टी के पल्लू को पकड़ता हुआ सरका देता है
अपनी hi बेटी की रसभरी चूचियों को ब्लाउज में कैद देख रामलाल की ललजिब्ह लपलपाने लगती है
रामलाल - बेटी लेगी अपने बाप का लुंड
रामलाल इतना बोलता हुआ अपने दोनों हाथो को मल्टी के ब्लाउज के ऊपर रख देता है और अपनी बेटी के चुचो को हलके हलके दबाने लगता है
बाप का इस तरह से चुना hi मल्टी के अंदर एक अलग तरह की चिंगारी भड़का रहा था
आज तक्क उसकी छूट में ऐसी खुजली नहीं हुई थी जो अब हो रही थी
मनो मल्टी मदहोश सी हो गयी थी अपने बाप की गॉड में बैठे बैठे
मल्टी- अह्ह्ह बापू खा लू आपका लुंड
रामलाल एक एक करके मल्टी के ब्लाउज के हुकक्क खोलना शुरू कर चुका था क्योंकि वो भी जनता था की समय ज्यादा नहीं है और अगर कोई उठ गया तो बाद में बड़ा पछतावा रह जायेगा
रामलाल- अपनी छूट में लेले बेटी
मल्टी- अह्ह्ह्हह शहीईई सिर्फफछुटत मई hi लयऊ क्या बापू
रामलाल- मुह्हह्ह मई भी लीलेना बेटीइ
मल्टी- ठीक है बापू पर जल्दी करना अगर केशव उठ गया तो क्या कहेगा की मैं अपने बापू का लुंड मुँह और छूट में ले रही थी
रामलाल- ये तो हर बेटी का कर्त्वा है बेटी की जब बेटी जवाब हो जाये तो वो अपने बूढ़े बाप को अपने मादक और गदराये अंगो का पूरा मजा दे
बात करते करते रामलाल अपनी बेटी के ब्लाउज को पूरी तरह खोल चूका था और अब मल्टी की भरी भरकम चूचिया उसकी आँखों में सामने झूल रही थी
मल्टी- बापू तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताई ये बात अब मुझे बहुत बुरा लग रहा है की मैं शादी के पहले भी आपको अपने अंगो का मजा दे पति तो कितना अच्छा रहता
रामलाल अपने दोनों हाथो से मल्टी की गदराई चूचियों को निचोड़ने लगता है
मल्टी- अह्ह्ह्ह बापू इतना तेज मैट दबाओ अभी दूध नहीं है इसमें
रामलाल- क्या आता मेरे निचोड़ने से दूध निकल आये बेटी तेरी चूचियों सी
मल्टी- अह्ह्ह बापू तब तो तुम पक्का पी लेना मेरा दूध पियोगे न मेरा दूध बापू
रामलाल जोरो से चूचिया मसलता हुआ मल्टी के कान चूसने लगता है
रामलाल- हां बेटी जरूर पियूँगा मैंने तेरा दूध
मल्टी बापू जल्दी करो कहि कोई जाग गया तो गड़बड़ हो जाएगी
रामलाल - क्या कृ बेटी
मल्टी- अह्ह्ह्ह बापू बास मुझे प्यार क्रू मेरे इन रास भरे अंगो का सारा रस निचोड़ लो बापू कीच भी करो बस अपनी बेटी की ोयास बुझा दो बापू...
बाकि का अपडेट बाद में
टाइम की कमी के कारन आधा hi लिख पाया सॉरी फॉर डिले दोस्तों....