Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 7 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-59

शाम के 5 बज चुके थे नीलम घर के कामो में लगी हुई थी और हरिया अभी तक गाओं में hi अपने बुड्ढे दोस्तों के साथ गप्पे हक रहा था

थोड़ी hi देर में राजू भी घर आ जाता है

राजू- दीदी मैं आ गया

नीलम पलट कर अपने भाई को देखती है और राजू की नजर सीधा उसकी दीदी के ब्लाउज पर जाती है

क्योंकि नीलम ने अपने ब्लाउज के 2 बोटों पहले से hi खोल रखे थे

ये सब नीलम के प्लान का hi हिस्सा था

नीलम राजू को नजर पकड़ लेती है

और अपने भाई के और करीब जाती है

नीलम- तो कैसा रहा मरे भाई का ोेहला दिन काम पर

राजू अभी भी अपनी दीदी की चूचियों को hi घर रहा था

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नीलम- ऐसे क्या देख रहा हज खा जायेगा क्या अपनी दीदी को

इतना बोलते हुए नीलम राजू के सामने झुक कर कुछ उठाने लगती है

अब राजू के सामने उसकी दीदी की विशाल चूचियां लटक रही थी

जिसे देख कर उसके मुँह से लार टपक रही थी

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नीलम अपनी तिरछी नजरो से देख रही थी की उसका भाई उसकी चूचियों को खा जाने वाली नजरो से देख रहा है

नीलम- कुछ पियेगा क्या तू राजू

राजू- है दीदी दूध

नीलम- क्या

राजू- अरे दीदी मतलब दूध वाली चाय पीला दो अपने हाथो से बना कर

मजा आ जायेगा

नीलम अबतक इतना तो समझ चुकी थी की उसे अपने छोटे भाई को पटाने के लिए ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ेगी

नीलम- चल ठीक है मैं तुझे अपने दूध की चाय बना कर पिलाती हु मतलब होने हाथ की चाय पिलाती हु तू बैठ बापू भी आते hi होंगे

राजू- दीदी बापू क्या अब रोज hi हमारे साथ सोयेंगे

नीलम- तुझे दिक्कत है क्या कोई

राजू- नहीं नहीं दीदी मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था

नीलम- भाई अब से हम तीनो साथ में hi सोयेंगे

अगर तुझे बापू से दिक्कत है तो तू झोपडी में सो जाना

राजू- नहीं दीदी मैं तो आपके पास hi सोऊंगा

नीलम- अच्छा तुझे अपनी दीदी के साथ सोना अच्छा लगता है क्या

राजू- है दीदी बड़ी अच्छी नींद आती है तुम्हारे पास सोने में

नीलम- चल अच्छा है तेरी दीदी कुछ तो काम आ रही है तेरे

थोड़ी hi देर में हरिया भी आ जाता है और नीलम अपने बापू और भाई को चाय देती है

नीलम- बापू आजतो आप पूरा दिन बहार hi रह गए मेरी याद नहीं आयी क्या जो अब खाने के समय आ रहे हो

राजू नीलम की बात सुनकर उसकी शकल देख रहा था पर अभी तक उसे कुछ अजीब नहीं लग रहा था

हरिया- है बेटी वो सब लोग बैठे थे तो वही लेत हो गया

नीलम- मुह्जे तो लगता है की इस घर में मैं सिर्फ खाना बनाने और खिलने के लिए hi हु

हरिया- अरे नहीं बेटी ऐसा क्यों कह रही है तू

तू तो हमारी जान है क्यों राजू

राजू- है दीदी हम बहुत प्यार करते है तुमसे

नीलम- दोनों करते हो या सिर्फ तू hi करता है अपनी दीदी से प्यार

राजू- दीदी आप ऐसा क्यों बोल रही हो दम दोनों आपसे प्यार करते है

. नीलम- अच्छा चल दिखा तो कितना क्यार करता है तू

इतना बोलकर नीलम होनी बहे खोल कर अपने भाई को अपने पास बुलाती है

राजू भी अपनी दीदी की तरफ खींचा जा रहा था

राजू नीलम के लगे लग जाता है इधर नीलम हरिया को आँख मार के अपने पास आने का इशारा करती है और हरिया होनी बेटी के पीछे से उसे गले लगा लेता है

राजू को थोड़ा सा अजीब तो लगता है क्योंकि हरिया पीछे से नीलम से पूरी तरह सत्ता हुआ था

पर वो इतना ध्यान नहीं देता और नीलम राजू को और जोरसे होनी और खींच लेती है इधर हरिया भी अपना लुंड नीलम की गांड में घुसाने पर तुला हुआ था

नीलम के शरीर से आ रही मादक महक से उसके बाप और भाई का लुंड पूरी तरह से खड़ा हो चुके थे

और एक उसकी गांड में और एक उसकी छूट के ऊपर उसे महसूस हो रहा था

नीलम- सच में बहुत अच्छे भाई और बापू मिले है मुझे कितना प्यार करते हो आप दोनों मुझसे

हरिया जनता था की ये सब उसकी बेटी के प्लान का hi हिस्सा है

नीलम- अह्ह्ह बापू आराम से कुछ सुबह रहा है मुझे पीछे

इतना सुनते hi हरिया की गांड फैट जाती है और वो एकदम से अपनी बेटी से अलग हो जाता है

ह्रक्य की धोती में तम्बू बन छका था उसकी बेटी से चिपकने की वजह से

राजू भी एक दम से हरिया की और देखता है और उसकी नजर उसके बाप की धोती पर जाती है

हरिया- बेटी माफ़ करदे पता नहीं कैसे

Neelam-koi बात नहीं बापू मैं जानती हु आप सुखी मत हो

राजू दोनों बाप बेटी को मुँह फाडे देख रहा था वो असल में समझने की कोशिश कर रहा था की यह चल क्या रहा है पर उसे सीधा सीधा कुछ समझ नहीं आ रहा था

नीलम एक नजर राजू पर डालती है

नीलम- और तू क्या अपनी दीदी से ऐसे hi चिपका रहेगा जैसे चन्दन से साप लिपट जाता है चल छोड़ मुझे

तेरा ये भी खड़ा हो गया है बापू की तरह और मुझे पैरो के बिच सुबह रहा है

नीलम की बात सुनकर राजू की भी गांड फैट जाती है

राजू और हरिया के अंदर अब एक दूसरे से आँखे मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी

नीलम - आप दोनों ने बहुत ल्यार दिखा लिया मुझे अब बहार जाकर बैठो मैं खाना बना कर आप दोनों को बुलाती हु

हरिया चुपचाप बहार खत पर जा कर बैठ जाता है

राजू अभी भी नीलम के पास hi खड़ा था असल में आअज ुए लग रहा था की उसकी चोरी पकड़ी गयी उसके बापू के सामने पर हरिया पर ककी फरक नहीं पड़ा था

वो जनता था की ये सब उसकी बेटी के प्लान का hi हिस्सा है

और बहुत hi जल्द उसे अपनी बेटी की रसीली छूट छोड़ने को मिलने वाली है

हरिया अंदर hi अंदर बहुत खुश था पर राजू किसी दुबिधा में था

नीलम- अरे तू भी जा बापू के पास बैठ मैं खाना बना कर बुलाती हु

राजू भी बहार खत पर आकर बैठ जाता है

अब यह से हरिया को अपना काम करना था

राजू की हिम्मत तो नहीं हो रही थी अपने बाप से आंख मिलाने की पर उसके मन में एक चीज़ बार बार आ रही थी की अपनी hi बेटी के पिछवाड़े से चिपक कर बापू का लुंड खड़ा हो गया कहि बापू भी तो मेरी तरह नीलम दीदी को छोड़ना तो नहीं कहते

राजू- बापू अब तबियत कैसी है तुम्हारी

हरिया- अब ठीक हु बीटा तेरी दीदी इतना ख्याल रखती है तो मुझे क्या होगा

राजू- बापू अभी जो हुआ उसके लिए माफ़ करदेना

हरिया- अरे बीटा माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए तू तो फिर भी जवान है अपनी बेहेन का गदराया जिस्म देख कर बहक गया पर वो तो मेरी बेटी है मैं भी अपनी hi बेटी का गदराया जिस्म देख कर फिसल गया मुझे माफ़ करदे बीटा

राजू के दिमाग में अब कई सरे सवाल एक साथ घूम रहे थे की आखिर क्यों उसका बाप बार बार अपनी hi बेटी के गदराये जिस्म का जिक्र्र कर रहा है

पर राजू भी काम हरामी नहीं था वो पहले hi सेहर की कई रंडियों को छोड़ चूका था

राजू- बापू जैसे आपके साथ हुआ वैसे hi मैं भी अपनी दीदी के बदन से आती महक को सूंघ कर बहक गया था

हरिया- कोई बास्त नहीं बीटा गलती हो गयी तो क्या दीदी है वो तेरी तुझे माफ़ कर देगी

राजू को समझ नहीं आ रहा था की आखिर उसके घर में ये चल क्या रहा है पर अब जो भी था उसे इतना पता चल चूका था की अगर वो अपनी दीदी को चुवेगा तो वो गुस्सा नहीं करेगी

राजू- बापू अब हमे कोई अच्छा सा लड़का देख कर दीदी की शादी कर देनी चाहिए

हरिया- बीटा हमारी यत्नज हैसियत नहीं है की हम कोई अच्छा लड़का देख कर तेरी दीदी की शादी कर सके

अगर लड़का मिलेगा भी तो कोई बुद्धा hi मिलेगा और वो तेरी दीदी को कभी खुस नहीं रख पायेगा

राजू को भी अब अपनी दीदी के विषय में अपने बाप से बात करने में मजा आ रहा था

राजू- पर क्यों बापू वो दीदी को खुस क्यों नहीं रख पायेगा

हरिया- अब क्या बताऊ बीटा तुझे तूने होनी दीदी का गदराया जिस्म देखा है न वो अपनी जवानी के चरम पर है उसे तो कोई हत्ता कट्टा मर्द चाहिए जो उसकी प्यास बुझा सके

राजू- है बापू दीदी पूरी तरह से गडरा गयी है उसे कोई ऐसा मर्द चाहिए जो उसे पूरा निचोड़ दे

राजू को अगले hi पल अहसास हो जाता है की वो थोड़ा ज्यादा बोल गया

राजू- माफ़ करना बापू मैंने थोड़ा ज्यादा बोल दिया

हरिया - कोई बात नहीं बीटा घर की hi बात है किसी और के सामने अपनी दीदी के बारे में ऐसी बात मत करना

और है तेरी दीदी को ऐसा hi मर्द चाहिए जो उसे निचोड़ निचोड़ कर उसे वो सुख दे सके जो आज तक उसे नहीं मिला

इतने में नीलम की आवाज आती है

नीलम- राजू आजा भाई खाना बन गया और बापू को भी ले कर आना

दोनों बाप बेटे ख़ुशी ख़ुशी उठ कर घर में चले जाते है

इधर नीलम पहले hi खाना निकल चुकी थी

तीनि बाप बेटी बैठ कर खाना खा रहे थे

नीलम को अब कोई भी शर्म नहीं थी उसने अपने ब्लाउज के 2 बोटों खोल रखे थे और अपनी दुपट्टे को भी वो पहले hi हटा चुकी थी

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पसीने मि वजह से नीलम के निप्पल वाला हिस्सा साफ़ नजर आ रहा था

दोनों बाप बेटे नीलम की चूचिया देखने में व्यस्त थे

इधर नीलम भी अंदर hi अंदर खुस थी की खा वो एक लुंड के लिए जिंदगी भर तदपि थी और अब उसे घर में hi 2-2 लुंड मिलने वाले थे

हरिया और राजू बरी बरी से नीलम को देख रहे थे और जब दोनों की नजर आपस में मिलती तो दोनों मुस्कुरा देते है

नीलम को अब वो दिन दूर नहीं दिख रहा था जब उसकी छूट और गांड में एक साथ उसके बाप का और भाई का लुंड जायेगा

थोड़ी hi देर में तीनो खाना खा लेते है और हरिया बाजार टहलने चला जाता है

राजू भी जल्दी जल्दी बिस्तर लगा देता गई है

और होनी पंत और अंडरवियर उतर कर एक धोती लपेट लेता है

नीलम अभी भी काम निपटने में बिजी थी

राजू का मन कर रहा था अपनी दीदी को चुने का

नीलम के बदन से पसीना बेहटा हुआ उसके ब्लोइसे और पेटीकोट को पूरी तरह गिला कर चूका था

अपनी दीदी को इतना भीगा हुआ देख कर राजू का लुंड थोड़ी hi देर में खड़ा हो जाता है

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अपनी दीदी की छोड़ी गांड देख कर राजू जैसे पागल हुआ जा रहा था

राजू अभी तक खत पर hi बैठा हुआ था उसके मन में यही चल रहा था की अभी दीदी को पीछे से पकड़ लू

तभी नीलम उसके पास आती है और अपनी गांड उसकी तरफ घुमा कर एक hi पल में झुक जाती है

नीलम की दोनों गांड खुल कर एक दम से राजू के सामने आ जाती है

राजू ये नजारा देख कर ोागल सा हो जाता है

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राजू होनी नाक को थोड़ा सा आगे बढ़ा कर नीलम की गांड के करीब ले जाता है और थोड़ी दूर से hi अपनी दीदी की गांड से आती मादक महक को सूंघने लगता है

राजू की गरम सांसे नीलम को होनी गांड ओर साफ़ महसूस हो रही थी वो जानती थी की उसका भाई क्या कर रहा है

नीलम को भी ये देख कर मजा आ रहा था की कैसे उसका छोटा भाई उसकी गांड से आ रही महक को मजे लेजर सूंघ रहा है

अच्चानक से नीलम आगे की और गिरने का नाटक करती है

और राजू तुरंत खड़ा होता हुआ अपनी दीदी की कमर को थम लेता है

ये सब इतना जल्दी हुआ की राजू ने ध्यान hi नहीं दिया की उसका लुंड खा है

राजू जैसे hi नीलम को पकड़ता है उसका लुंड सीधा पेटीकोट के ुवार से hi उसकी दीदी की गांड में घुस जाता है

नीलम अपने भाई का लुंड अपनी गांड के बिच महसूस करके मस्त हो जाती है

राजू को जब होश आता है जब उसे अपना लुंड किसी चीज़ के बिच में फसे होने का अहसास होता है

नीलम अभी तक झुकी hi हुई थी

राजू बिना हिले नीलम को ऐसे hi पकड़े हुआ था

नीलम आगे से सम्भलती हुई खड़ी होती है

नीलम- शुक्र है भाई तूने संभाल लिया अपनी दीदी को

राजू- है दीदी नहीं तो तुम दिर जाती

नीलम- कूटना अच्छा भाई है तू अपनी दीदी को ऐसे hi संभाले रखना भाई

राजू- दीदी आप जब जब गिरेगी ाओंका ये छोटा भाई आपको ऐसे hi संभाल लेगा

नीलम- बता तो कैसे संभालेगा

राजू भी अब तक जोश में आ चूका था

वो नीलम की पीठ को पकड़ते हुए थोड़ा धक्का देता है और अगले hi पल एक करारा झटका मरते हुए होने लुंड पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी दीदी की गांड में थुश देता है

नीलम- हैय्येई मैय्यिया ये क्या दाल दिया तूने अपनी दीदी की गांड के बीचो बिच

राजू को पता था की उसकी दीदी बुरा नहीं मानेगी

इस बार राजू नीलम को थोड़ा तेज का झटका देता है और अगले hi पल उसे दुबारा से अपनी और खींचता हुआ अपना लुंड उसकी गांड में पेल देता है

नीलम- अह्ह्ह्हह माआआआ क्या है रे ये तेरा खड़ा हो गया फिरसे अपनी दीदी की गांड के बिच में hi

इतने में hi हरिया भी घर के अंदर आ जाता है

हरिया- क्या बात है बड़ा प्यार चल रहा है भाई बेहेन के बिच

नीलम- अह्ह्ह्हह बापू तुमको पता है तुम्हारी बेटी गिरने hi वाली थी तब तक मुझे राजू ने संभाल लिया और अब ये मुझे हर बार संभाल लेगा जब जब मैं गिरूँगी

नीलम- राजू बापू को भी दिखा कैसे संभालेगा तू अपनी दीदी को

राजू को पहले तो थोड़ा दर लगता है पर अगले hi पल वो जोश में एक झटके के साथ नीलम को आगे धकेलता गई और अगले hi पल उसे वापस खींचता हुआ उसकी गांड में अपना लुंड फसा देता है

नीलम की छूट और गांड से निकलती हुई गर्मी राजू का लुंड पिघलने पर तुली हुई थी

हरिया भी दोनों भाई बेहेन को चिपका हुआ देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था

नीलम- चल अब छोड़ भी दे या रात भर अपनी दीदी को ऐसे hi पकडे रखेगा

हरिया- अरे ः राजू अभी छोड़ दे जब तेरी दीदी डिबरा गिरेगी तो फिरसे पकड़ लेना

राजू जैसे hi नीलम से अलग होता है हरिया की नजर सीधा होने बड़े के लुंड पर पड़ती है जो बिलकुल किसी रोड की तरह सीधा खड़ा था

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राजू अपने हाथ से अपने विशाल लुंड को छुपाने की नाकामियाब कोशिश कर रहा था जब उसकी नजर अपने बाप से मिलती है तो वो अपनी आँखे निचे कर लेता है

वही नीलम की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था

नीलम भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी ....
 
अपडेट-60

अबतक तीनो बाप बेटी बिस्तर पर लेत चुके थे

रोज की तरह नीलम आज भी अब ने भाई और बापू के बिच में लेती थी

पर तीनो में से किसी की आँखों में नींद का कोई नमो निशान नहीं था

नीलम हरिया की तरफ मुँह करके लेती हुई

राजू अपनी दीदी की गांड देख कर मस्त हुआ जा रहा था

और उसका लुंड अपनी औक़ात में आने लगा था

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इधर हरिया भी आँखे खोले कभी अपनी बेटी की नजरो में देखता तो कभी उसकी उठती बैठी चूचियों को देखता

नीलम भी समझ रहु थी की उसके बापू क मन में क्या चल रहा है वो अपने ब्लाउज का एक और बोटों खोल देती है

अब सिर्फ एक हुक ने उसकी चूचियों को संभाल रखा था

नीलम थोड़ा सा हिलते हुए अपनी ेल चुकी को बहार निकाल देती है

अपनी बेटी का मोटा निप्पल को देख कर हरिया का लुंड एक पल में hi किसी रोड की तरह सख्त हो जाता है

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नीलम होने बापू का सर पकड़ती हुई अपनी नंगी चुकी पर लगा देती है

और हरिया भी चुपचाप किसी बच्चे की तरह अपनी बेटी की चुकी पिने लगता है

नीलम निचे हाथ लेजाकर अपने बापू का लुंड टटोलने लगती है

पर कहि न कहि हरिया को राजू का थोड़ा बहुत सर अभी भी था

हरिया को पता था की जब उसकी बेटी उसका लुंड चुवेगी तो वो अपने आप पर काबू नहीं रख पायेगा

इसी कारन से हरिया ने नीलम का हाथ पकड़ कर अपने लुंड से हटा दिया और चुपचाप नीलम की चुकी पिता रहता है

नीलम को भी होने बापू ओर गुस्सा आ रहा था

क्योंकि वो जरूरत से ज्यादा दर रहा था

वो एक झटके से हरिया का सर पकड़ कर अपनी चुकी से हटा देती है और एक hi पल में पलट कर राजू की तरफ मुँह कर लेती है

हरिया समझ जाता है की उसकी बेटी से आज उसे कुछ नहीं मिल सकता वो चुप चाप दूसरी और करवट बदल कर सो जाता है

इधर राजू अपनी दीदी की गांड को देख कर पहले से hi पागल हुआ पड़ा था जब उसकी नजर नीलम की नंगी चुकी पर पड़ती है तो

एक साथ उसके मन में कई सवाल घूमने लगते है

राजू( ये साला बापू जरूर दीदी के साथ कुछ न कुछ तो कर रहा है देखो कैसे दीदी की चुकी बहार निकली हुई है क्या मस्त चुकी है दीदी तेरी और तेरा निप्पल तो किसी जामुन के जैसा बड़ा है दीदी)

नीलम जानती थी की उसकी इस हरकत का राजू ओर क्या असर होगा

पर वो अभी अपनी आँखे बंद किये हुए सोने का नाटक कर रही थी

वो आज की रात राजू को आजमाना कहती थी

की उसका भाई उसके मिलये आखिर किस हद्द तक पागल है

राजू भी बिना देर किये अपनी एक ऊँगली को आगे बढ़ा कर नीलम की चुकी को हल्का सा छू लेता है और अपना हाथ वापस ले आता है

नीलम को रिस्पांस नहीं देती

अब राजू की हिम्मत थोड़ी थोड़ी बढ़ रही थी वो समझ रहा था की दीदी सो चुकी है

राजू बार बार होना हाथ आगे ले जाता और नीलम के निप्पल को छू कर वापस ले आता

इन सब हरकतों से नीलम की तो सांसे फूल hi रही थी साथ साथ राजू को भी आज बहुत मजा आ रहा था

वो एक बार उठ कर अपने बापू को देखता है जो दूसरी और मुँह करके लेता हुआ था

राजू अब अपनी पूरी हथेली अपनी दीदी की विशाल चुकी पर रख देता है लार 5 मिंट तक कोई हरकत नहीं करता

इधर नीलम कह रही थी की उसका भाई कुछ ऐसा करे की उसका मंत्र खुस हो जाये

5 मिंट की शांति के बाद राजू थोड़ी हिम्मत दिखता है और अपने हाथ को नीलम की चूचियों पर बड़े प्यार से फेरने लगता है

नीलम को अपने भाई का हाथ अपनी चुकी पर महसूस करके बहुत मजा आ रहा था

अब राजू एक कदम और आगे बढ़ता है और नीलम के एक निप्पल को पकड़ कर होनी 2 उंगलियों से कुरेदने लगता है

नीलम का बदन थोड़ा सा झटका खता है पर वो वैसे hi लेती रहती है

राजू अभी भी अपनी दीदी का निप्पल ोाकडे हुए था पर ककी हरकत नहीं कर रहा था

1 hi मिनट के बाद राजू दुबारा से अपने हाथ को हरकत में लता है

और इस बार वो अपनी दीदी का निप्पल पकड़ कर खुसने लगता है

राजू की हरकतों से नीलम का बुरा हाल हो रहा था उसकी छूट पूरी गीली हो चुकी थी और लगातार पानी छोड़ रही थी

करीब 10 मिंट तक राजू नीलम के निप्पल को रगड़ रगड़ कर लाल कर देता है

अबतक राजू की हिम्मत भी थोड़ी बढ़ गयी थी

अब वो अपने हाथ को वापस लता हुआ उठ कर बैठ जाता है और होना मुँह निचे करके अपनी दीदी के निप्पल को मुँह में भर लेता है

राजू( अह्ह्ह्ह दीदी कितना मोटा है तुम्हारा निप्पल कसम से तुम ऊपर से निचे तक एक कामदेवी हो दीदी जिसको तुम मिल जाओ उसका तो जीवन hi सुधर जाये अह्ह्ह्ह)

राजू होने हाथो को आगे लता हुआ नीलम के ब्लाउज का आखिरी हुक भी खोल देता है

नीलम होने भाई की हिम्मत देख कर खुस थी और उसे अब वो दिन दूर नहीं दिख रहा था जब उसका बाप और भाई उसकी नाथ उतरेंगे

ब्लाउज खुलते hi नीलम की दूसरी चुकी भी आजाद हो जाती है

राजू होना मुँह हटते हुए थोड़ा पीछे होता है

और एक नजर अपनी दीदी की विशाल चूचियों ओर डालता है

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राजू- ( अहह दीदी क्या hi बड़ी बड़ी चूचिया है तुम्हारी कसम से कभी कभी तो मन करता है की तुमको ोुरा नागा करके साथ चिपका कर सो जाऊ आता नहीं वो दिन कब आएगा दीदी)

इतना बोलते हुए राजू अपने दोनों हाथो को नीलम की चूचियों पर रख देता है

और जोरसे मसलने लगता ह

राजू क सब्र अब जवाब दे रहा था वो जनता था की उसके बापू गहरी नींद में सोते ह पर नीलम कच्ची नींद वाली थी फिर भी सुनेह और शाम को हुई हरकतों के बाद से राजू की हिम्मत भी अब बढ़ चुकी थी

राजू लगातार अपनी दीदी की चूचियों को बेदर्दी के साथ मसल रहा था

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नीलम अपने भाई के हमलो से अंदर hi अंदर कसमसा रही थी उसका मन तो कर रहा था की अभी आँखे खोल कर राजू को अपनी से चिपका ले पर वो कोई जल्दबाज़ी नहीं करना कहती थी

इधर राजू कभी नीलम की दोनों चूचियों को दबाता तो कभी अपनी दीदी के दोनों निप्पल्स पकड़ कर एक साथ खींचने लगता

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नीलम ने आज लाल रंग की लिपस्टिक लगा रखी थी अपनी दीदी के होठो को देख देख कर राजू के मुँह में पानी आ रहा था

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राजू आगे बढ़ता हुआ अपने होठ अपनी दीदी के गरम होठो पर रख देता ह

राजू को होनी दीदी के होठ काफी मीठे लग रहे थे

वो अपना मुँह हटा कर होनी जीभ को नीलम के होठो पर फेरने लगता है

नीलम होने भाई की हरकतों से लगातार पानी छोड़ रही थी उसका दिल दिमाग काम करना बंद कर चूका था बस वो लेती लेती मजे लूट रही थी

इधर राजू को भी ान बर्दास्त करना गवारा नहीं था वो बिना समय गवाए

होनी धोती से पाना विशाल लुंड निकाल लेता है और उसे सीधा अपनी दीदी की गलो पर सहलाने लगता है

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अपनी दीदी को शांत पड़ा देख राजू की हिम्मत पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ गयी थी

वो नीलम के सर को पकड़ कर थोड़ा सा सीधा करता है और अपने लुंड को सीधा अपनी दीदी के होठो ओर रख देता है और अगले hi पल ालने विशाल लुंड को नीलम के नरम होतोह पर आगे पीछे सरकने लगता है

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नीलम को अबतक इतना तो पता चल चूका था की आने वाले समय में उसका छोटा भाई उसे उसके बाप से कहि ज्यादा मजा देगा

आखिर राजू एक मंझा हुआ खिलाडी जो था जिसने सेहर की न जाने कितनी hi रंडियो को छोड़ा था

नीलम को अपने होठो पर रगड़ खता अपने छोटे भाई का लुंड पागल किये जा रहा था

लगभग 5 मिंट तक अपने लुंड को अपनी दीदी के होठो पर रगड़ने के बाद राजू की हालत खराब होने लगी थी वो आज पहली बार अपनी दीदी को इस तरह छू रहा था

वो किसी भी समय झाड़ सकता था

राजू बिना समय गवाए अपने लुंड को नीलम के मुँह में डालने की कोशिस करता है

पर नीलम भी पक्की धित थी वो अपना मुँह बहुत hi तीते बंद किये हुए थी वो देखना कहती थी की उसका भाई उसके साथ किस हद तक जा सकता है

राजू बिना देर किये होने एक हाथ से नीलम की नाक को दबा कर बंद कर देता है

राजू की इस हरकत से नीलम अंदर तक सेहम जाती है

और सास रुकने के कारन उसे आखिरकार अपना मुँह खोलने hi पड़ता है

और जैसे hi नीलम का मुँह थोड़ा सा खुलता है राजू अपनी दीदी के मुँह में अपना लुंड ठूसने लगता है

नीलम ऐसी पोजीशन में लेती थी की राजू का लउरा लुंड तो उसके मुँह में नहीं जा सकता था

पर राजू जैसे जैसे लुंड को अंदर धकेल रहा था नीलम वैसे वैसे अपना मुँह खोलती जा रही थी

नीलम को. एक बात का अंदाजा तो लग hi गया था की उसके छोटे भाई का लुंड उसके बाप से भी ज्यादा मोटा है

जैसे तैसे करके राजू अपना 4 इंच लुंड नीलम के मुँह में घुसा देता है

नीलम के बदन की साडी गर्मी जैसे इस वक़्त उसके मुँह में इकट्ठा हो गयी थी

नीलम का गरम मुँह अपने छोटे भाई के लुंड को पिघलने पर तुला हुआ था

इधर अपनी दीदी के मुँह की गर्माहट पाकर राजू भी अपनी आँखे बंद किये धीरे धीरे अपना लुंड आगे पीछे करके अपनी दीदी का मुखछोडन कर रहा था

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करीब 5 मिंट तक अपनी दीदी के मुँह को छोड़ने के बाद राजू की हिमायत जवाब दे जाती है

और वो एक झटके में अपना लुंड बहार की और खींच लेता है

पर नीलम का मुँह अभी तक उतना hi खुला हुआ था

राजू अपने सुपडे को अपनी दीदी के मुँह की और झुकाते हुए नीलम के एक निप्पल को पकड़ लेता है और जानवरो की तरह उसे मरोड़ने लगता है और साथ hi साथ अपने लुंड को भी जोर जोर से हिलने लगता है

करीब 1 मिंट के बाद hi राजू अपना सारा वीर्य अपनी दीदी के मुँह में गिराने लगता है

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राजू 2 मिंट तक लगातार अपने लुंड से पिचकारी मर कर अपनी दीदी का लउरा मुँह भर देता है

और जब राजू के सर से हवस का बुखार उतरता है तो वो होनी दीदी की तरफ देखता है

उसकी दीदी के मुँह के अंदर और बहार सिर्फ उसका hi वीर्य था

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राजू तुरंत hi अपनी धोती को उठा कर अपनी दीदी का मुँह साफ़ करने लगता है

राजू सोचता हक़ है की धोती को नीलम के मुँह में दाल कर अंदर पड़ा माल भी साफ़ करदे

पर नीलम को तो कुछ और hi मंजूर था जैसे hi राजू होनी धोती को नीलम के मुँह में डालने की कोशिश करता है

नीलम तुरंत hi अपना मुँह बंद करके दूसरी तरफ पलट जाती है

अब राजू की गांड फैट रही थी की जब उसकी दीदी देखेगी की उसके मुँह में क्या है तो उसका क्या हाल होगा पर अब वो कुछ कर भी नहीं सकता था

राजू बिचारा चुपचाप अपनी धोती लपेट कर दूसरी तरफ करवट लेकर सो जाता है

और सोचता है की कल की कल देखंगे

इधर नीलम अपने मुँह के अंदर होने भाई का वीर्य जीभ से घुमा घुमा कर उसका पूरा स्वाद ले रही थी और एक hi झटके में वो पूरा का पूरा माल जातक जाती है

नीलम की आँखों में आज एक अलग hi चमक दिख रही थी

नीलम( मान गयी छोटे भाई तुझे तू तो अपनी दीदी का भी गुरु निकला इस मामले में अब ऐसे hi हिमायत जूता और छोड़ दे अपनी दीदी को ,)

नीलम आज पहली बार बिना झड़े hi काफी मजा लूट चुकी थी

नीलम आने वाले दिनों के सालने देखते हुए नींद की आगोश में चली जाती है .....
 
अपडेट-61

रात भर तीनो बाप बेटी होने hi सपनो में दुबे हुए सोये रहते है

सुबह 5 बजे नीलम की आँख खुलती है

उठते hi नीलम की आँखों के सामने रात वाला सारा सकने दुबारा से घूमने लगता है

नीलम के मुँह में अभी तक उसके छोटे भाई के लुंड से निकले वीर्य का स्वाद था

नीलम का ब्लाउज अभी तक खुला हुआ था

अभी वो बैठे बैठे यही सोच रही थी की उसका भाई कितना हरामी है जो पहली बार में hi उसके साथ इतना कुछ कर दिया

नीलम के शातिर दिमाग में अपने प्लान को आगे बढ़ाने का एक आईडिया आता है

अब वो अपने भाई को अपने मजे खुली आँखों से देना कहती थी न की सोते हुए

नीलम हरिया को हल्का सा हिलती है

सुबह तो हो hi गई थी हरिया भी तुरंत उठ जाता है

और उसकी नजर सांसे पहले उसकी बेटी की खुले हुए ब्लाउज पर पड़ती है

नीलम- बापू देखो मत मेरी बात सुनो

नीलम हरिया के कानो के ोास जाते हुए बोलती है

नीलम- आपको अपनी बेटी की छूट में होना ये मुसल जैसा लुंड दाल कर चुदाई करनी है न

हरिया को तो जैसे सुबह सुबह कोई खजाना मिल गया था

अपनी बेटी की बात सुनकर हरिया की आँखों में एक चमक आ जाती है

जिअसे की उसे अभी इसी वक़्त उसकी बेटी की छूट मिलने वाली हो

हरिया- है बेटी मेरी तो यही इच्छा है अब

नीलम- तो ध्यान से मेरी बात सुनो

आज आपको अपने बेटे को जलन महसूस करनी होगी

हरिया- वो कैसे बेटी

दोनों बाप बेटी बहुत धीरे धीरे बात कर रहे थे

नीलम- आप चुप चाप लेट जाओ बाकि सारा काम आपकी ये बेटी कर देगी बस जब तक मैं न बोलू अपनी आँखे मत खोलना

हरिया अपनी बेटी के आदेश का पालन करते हुए दुबारा से लेत जाता है

नीलम भी अपने बापू के साथ hi दुबारा से लेत जाती है

नीलम का ब्लाउज अभी तक खुला हुआ था

अब नीलम अपना हाथ आगे बढ़ते हुए हरिया की धोती खोलने लगती है

हरिया- बेटी मत कर राजू है अभी उसको जाने दे काम पर फिर करेंगे

नीलम- चुपचाप लेते रही बापू तुमको मेरी छूट मारनी है या नहीं

नीलम अब पुरे रणदीपाने पर उतर आयी थी

हरिया को पता था की राजू कभी भी उठ सकता है पर वो ये भी जनता था की वो अपनी बेटी से नहीं जीत सकता

आखिरकार हरिया अंतत में अपनी आँखे बंद कर लेता है और नीलम को उसका काम करने देता है

नीलम अपने बापू की धोती को पूरी तरह से खोल कर उसके शरीर से अलग कर देती है

हरिया की गांड तो फैट रही थी की जब उसका बीटा

हरिया को अपनी hi बेटी के साथ इस स्थिति में देखेगा तो क्या सोचेगा

पर वो अब कुछ कर भी नहीं सकता था

आखिर हरिया को भी उसकी बेटी की छूट का लालच जो था

नीलम अपने बापू की धोती खोलने के बाद उसके लुंड को अपने हाथ से पकड़ कर हिलने लगती है

हरिया का लुंड पहले hi अपनी बेटी की छुछिया देख कर खड़ा था

नीलम के हाथो ने उसके बापू के लुंड को पूरी तरह से खड़ा क्र दिया था

नीलम जानती थी की अब उसका छोटा भाई किसी भी वक़्त उठ सकता है

वो अपने हाथ से हरिया का लुंड पकडे रहती है

और अपना सर हरिया की छाती पर टिका देती है और अपनी एक तंग उठा कर होनी बापू की तंग के ऊपर दाल देती है

नीलम के बदन की गर्मी उसके बापू को महसूस हो रही थी जो उसके लुंड को खड़ा रखने के लिए काफी थी

आखिरकार नीलम की महबत रंग लती है

और राजू एक अंगड़ाई लेता हुआ उठ कर बैठ जाता है

हरिया और नीलम पहले hi अपनी पोजीशन संभाले हुए थे

राजू अंगड़ाई लेकर जैसे hi अपनी दीदी की तरफ देखता है उसका दिमाग एक hi पल में काम करना बंद कर देता है

सामने उसकी दीदी उसके बापू के लुंड को थामे हुए सोई थी और तो और उसका ब्लाउज भी खुला था और नीलम का पेटीकोट भी उसकी जाह्गो तक चढ़ा हुआ था

नीलम ने अपना एक पेअर अपने बापू के पैरो पर चढ़ा रखा था

राजू ये सब देख कर एक दम से सुन्नन हो जाता है उसे समझ नहीं आता की आखिर ये हो क्या रहा है

उसकी hi दीदी उसके बाप का लुंड पकडे सोई है और वो भी लगभग नंगी

राजू( साला मैं तो सोच रहा था की बापू शरीफ आदमी है पर ये तो अपनी hi बेटी के मजे लूट रहा है और मेरी दीदी को तो देखो कैसे साली होने बाप का लुंड ोाकद कर सोई है

तभी सोचु घर का माहौल एक दम से खुल्ला खुल्ला कैसे हो गया है

कहि बापू नीलम दीदी को छोड़ तो नहीं रहे

हो भी सकता है इसलिए ये होने बाप का लुंड पकड़ कर सोई है)

नीलम को आता था की उसके भाई के मन में कितने सवाल चल रहे होंगे

नीलम अपनी आँखे बंद किये हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी

राजू( साली मेरी दीदी तो एक नंबर की रंडी निकली होने hi बापू से छुड़वा रही है देख दीदी अब तू देख तेरा ये छोटा भाई कैसे तेरे इस जिस्म के मजे लेता है वो भी तेरे बाप के सामने hi )

राजू घर घर कर अपनी दीदी और बाप को देख रहा था

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नीलम की गोरी गोरी जंघे उसके छोटे भाई के लुंड में लगातार दम भर रही थी

नीलम जानती थी की उसकी हरकत अब आगे क्या रंग लेन वाली है

राजू ( दीदी तुम खुले आम रान्दीपना कर रही हो न अब अपने भाई के कारनामे देखना न तुम्हारी गांड मरी इस बुड्ढे के सामने घोड़ी बना के तो मेरा नाम भी राजू नहीं)

राजू उठ कर सीधा घर से बहार निकल जाता है

नीलम- बापू उठ जाओ काम हो गया

हरिया उठ कर देखता है की राजू बहार जा चूका है

हरिया- बेटी तेरा भाई क्या सोच रहा होगा हम बाप बेटी के बारे में

नीलम- अरे बापू आप चिंता न करो अगर मेरा निशाना सही जगह पर लगा है तो आज शाम को खुद hi देख लेना की तुम्हारा बीटा क्या सोच रहा होगा

हरिया के अंदर राजू से नजर मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी वो जल्दी से उठता है और अपनी धोती लपेटते हुए गाओं की और निकल जाता है

इधर नीलम भी अपना ब्लाउज बंद कर लेती है और होने घर के कामो में लग जाती है

राजू भी अब अपना प्लान बना रहा था

वो नीलम से इस वक़्त ज्यादा बात नहीं करता और अपना खाना खा कर काम पर निकल जाता है ......
 
अपडेट-62

राजू अपने काम पर जा चूका था

इधर हरिया भी अपने बुड्ढे दोस्तों के साथ बिजी था तो वो दूहर को hi घर पहुँचता है

नीलम अपने बापू का इन्तजार करते करते खत पर hi सो गयी थी उसका पेटीकोट उसकी टैंगो से ऊपर उठ कर जांघो तक पहुंच गया था

हरिया अपनी बेटी को इस अवस्था में देख कर जोश में आ जाता है

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अपनी सोती हुई बेटी को देख कर हरिया का ईमान दोल गया था उसका लुंड उसकी धोती के अंदर पूरी तरह से खड़ा हो चूका था

हरिया फटाफट दरवाजे को अंदर से बंद कर देता है

और नीलम की और बढ़ने लगता है

नीलम इस बात से बाख़बर सोई हुई थी

इधर उसका बाप उसे हवस भरी नजरो से देखता हुआ उसकी और बढ़ रहा था

हरिया सबसे पहले नीलम के गुलाबी होठो पर अपनी उंगलिया फहरता है

सच में नीलम के होठ बड़े hi मुलायम और कामुक थे जो हरिया को उकसाने म कोई कसार नहीं छोड़ रहे थे

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हरिया तुरंत hi अपना बनियान और धोती उतर कर पूरा नंगा हो जाता है

अब उसका लुंड उसकी बेटी के चेहरे के सामने झूल रहा था

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अगले hi पल हरिया एक hi सेकंड के अंदर अपनी बेटी के ब्लाउज के सरे हुक खोल देता है

और अब उसकी बेटी की कबुछिया उसकी आखो के सामने आजाद हो जाती है

हरिया अपने होठो पर जीभ फहरता हुआ अपना मुँह सीधा नीलम की एक चुकी पर लगा देता है और जोर से अपनी बेटी का एक निप्पल काट लेता है

नीलम- अह्ह्ह्हह्हह

नीलम दर्द के मरे तड़प उठती है और इसकी नींद खुल जाती है उसे सबसे ोेहली चीज़ अपने बापू का लुंड hi दीखता है

नीलम- आ गए बापू आप मुझे तो लगा था की अब सीधा रात को hi आओगे

हरिया- तेरे जैसी बेटी हो तो कोई दूर रह सकता है क्या

नीलम- मैंने तो सोचा था की आप अपनी बेटी को बहुत गए

हरिया- बेटी तू कोई भूलने वाली चीज़ है क्या अभी तो तुझे ोुरा चखना बाकि है

नीलम- तो साख लो न बापू किसने रोका है तुमको

हरिया नीलम के बाल ोाकड़ता हुआ उसे उठा देता है

और नीलम भी तुरंत hi खत से निचे उतर जाती है

हरिया अपनी बेटी के कंधे को निचे की और दनता है

नीलम समझ जाती है की उसका बापू क्या कहता है

नीलम अगले hi पल अपने घुटनो पर आ जाती है

हरिया का लुंड लगातार उसकी बेटी के होठो को टच हो रहा था

हरिया होना लुंड पकड़ कर नीलम के चेहरे पर रगड़ने लगता है

आज सुबह हुई हरकत के बाद से हरिया काफी गरम था

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हरिया लगातार अपने लुंड को होनी बेटी के चेहरे पर रगड़ रहा था कभी उसे उठा कर अपनी बेटी के चेहरे पर गिरा देता

अब हरिया का ध्यान उसकी बेटी के कामुक होठो की और जाता है और तुरंत hi हरिया अपने लुंड को नीलम के होठो पर रख कर अंदर धकेलने लगता है

नीलम भी अपने बापू का इशारा समझ रही थी वो अपना मुँह पूरा खोल देती है अपने बापू के लुंड को अपने मुँह में आने का रास्ता दिखती हुई

हरिया भी देर न करते हुए एक करारा झटका मरते हुए अपना पूरा लुंड अपनी बेटी के मुँह में पेल देता है

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नीलम को उम्मीद नहीं थी की उसका बापू पहले झटके में hi अपना लुंड जड़ तक उसके मुँह में उतार देगा

हरिया- अह्ह्ह बेटी तेरा मुँह कितना गरम है

जब तेरे बापू का लुंड तेरे मुह्ह में जाता है तो ऐसा लगता है मनो मैं तेरी छूट मर रहा हु

नीलम बिचारि होने मुँह में अपने बापू का लुंड ोहसए बैठी थी वो क्या hi बोलती

हरिया लगातार होनी कमर को आगे पीछे करता हुआ अपनी बेटी का मुखछोडन कर रहा था

आज हरिया कल से भी तगड़े झटके मार रहा था

नीलम के मुँह से लगातार थूक की एक धार निचे जमीन पर गुर रही थी

आज हरिया होने असली अवतार में अपनी बेटी का मुखछोडन कर रहा था

हरिया के अंदर का जानवर अब महल कर सामने आ चूका था

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हरिया जब जब झटके मरता उसके टट्टे सीधा उसकी बेटी की ठुड्डी से टकराते

और नीलम को अहसास दिलाते की अब उसके बाप का पूरा लुंड उसके नूह में भरा हुआ है

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हरिया- बेटी क्या hi मुँह दिया है भगवन ने चखे इसके सामने तो छूट भी फ़ैल हो जाये

हरिया बड्ज बेरहमी के साथ नीलम का मुँह चोदे जा रहा था

आखिरकार हरिया को अपनी बेटी की हालत देख कर थोड़ा तरस आ जाता है और वो एक झटके के साथ अपना लुंड अपनी बेटी के मुँह से निकल लेता है

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नीलम मुँह से बहुत सारा थूक बहार फेकते हुए कहती है

नीलम- बापू तुम इतनी बेरहमी से अपनी बेटी का मुँह छोड़ रहे हो थोड़ा तो रेहम करो बापू अपनी इस बेटी पर

नीलम ने अभी इतना hi बोलै था की हरिया दुबारा से एक hi बार में पूरा लुंड नीलम के मुँह में थुश देता है

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी क्या बताऊ तुझे जब मैं तुझे देखता हु तो मुझे तुझ पर बिलकुल रेहम नहीं आता बल्कि मेरा मन तो करता है की तुझे और भी ज्यादा बेरहमी के साथ छोड़ू

नीलम अपने बापू की बात सुनकर अंदर hi अंदर खुश हो रही थी

हरिया लगातार अपनी कमर को पूरी रफ़्तार में आगे ोीचे करते हुए अपना पूरा लुंड नीलम के मुँह में घुसाए जा रहा था

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हरिया- बेटी हो सखे तो अपने इस बेरहम बाप को माफ़ करदेना

मैं तेरे मुँह में इतनी बेरहमी के साथ अपना लुंड दाल रहा हु

पर क्या बताऊ बेटी तुझे देखने के बाद तेरे इस बाप को अपने ऊपर काबू hi नहीं रहता

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नीलम के मुखछोडन को लागबहग 15 मिंट हो चुके थे

अब हरिया अपने चरम पर था वो अपनी स्पीड और भी तेज कर देता है और अपने दोनों हाथो से नीलम का सर और मुँह पकड़ कर एक के बाद एक सटासट सटासट धक्के लगाए जा रहा था

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नीलम की हालत लगातार खराब हो रही थी इधर हरिया भी अपने हथियार डालने वाला था इस बार वो अपनी बेटी के मुँह को पकड़ कर ोुरा अपने लुंड पर दबा देता है

नीलम की आँखे बहार आ जाती है

नीलम के मुँह से बाद घुघुउउउउउ की आवाजे आ रही थी

पर इनसब बातो का हरिया पर कोई असर नहीं पद रहा था

आखिरकार हरिया का लुंड उसकी बेटी के गले में hi पिचकारी मरने लगता है

और नीलम के बिना निगले hi उसके बापू का सारा वीर्य उसके पेट में जा रहा था

हरिया अपने लुंड से आखिरी बून्द गिरने तक लुंड पर नीलम का मुँह दबाये रखता है

और आखिर में हरिया होना लुंड एक झटके के साथ बहार खींच लेता है

नीलम थोड़ी खास्ती हुई जोरदार सांसे ले रही थी

हरिया अपनी बेटी का सर सेहला रहा था

नीलम- अह्ह्ह्हह बापू तुम तो मेरा मुँह hi फाड़ डोज

अपनी बेटी के मुँह में कोई इस तरह लुंड पेलता है क्या

मैं क्या तुम्हारी रंडी हु क्या

हरिया- माफ़ करदे बेटी मुझे अपने ाप्प ओर काबू hi नहीं रहा

हरिया की बात सुनकर नीलम के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

नीलम- तो बापू कोण कहता है कण्ट्रोल करने के लिए

मैं तो कहती हु की तुम अपनी बेटी को रंडी समझ कर छोड़ो अब अगली बार मैं कितना भी गिड़गिड़ाउ रेहम मत करना अपनी इस बेटी पर समझे बापू

हरिया तुरंत hi नीलम का हाथ पकड़ कर उसे उठता हज और उसके गीले होठो पर अपने होठ रख देता है

दोनों बाप बेटी एक दूसरे के मुँह में अपनी जीभ घुसाए हुए एक दूसरे के मुँह का स्वाद ले रहे थे

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करीब 10 मिंट बाद दोनों बाप बेटी अलग होते है

दोनों की सांसे फूल रही थी

हरिया खत पर लेत जाता है और नीलम को भी पकड़ कर होनी और खींच लेता है

नीलम भी किसी प्रेमिका की तरह अपने बापू के साइन ओर सर रख कर लेत जाती है

हरिया- बेटी तू कब तक इस तरह से अपने बाप को तड़पायेगी

नीलम समझ रही थी की उसका बाप उसकी छूट के बारे में बात कर रहा है

नीलम - बापू अब तुम्हारी बेटी ने अपनी इस छूट पर तुम्हारा नाम लिख दिया है आज नहीं तो कल ये तुमको hi मिलेगी चिंता न करो बापू

और तुमने सुना नहीं है क्या सब्र का फल मीठा होता है

हरिया- अब सब्र नहीं होता बेटी मुझसे

तेरा ये बाप तुझे छोड़ने के लिए पागल हुआ जा रहा है

वैसे तुझे क्या लगता है राजू ने जो सुबह देखा था उसके बाद वो क्या करेगा

नीलम- बापू मैं जानती हु की राजू एक नंबर का छोड़ू है

आज शाम को पता चल जाएगा की तुमको ये छूट कब मिलेगी

हरिया और नीलम दोनों मुस्कुरा रहे थे

हरिया- वैसे बेटी तेरे दिमाग की दाद देनी पड़ेगी बड़ी शातिर है तू

नीलम- बेटी किसकी हु

हरिया- बेटी कैसे भी करके राजू को जल्दी आता नहीं तो मुझे अब काबू करना मुश्किल हो रहा है कहि ऐसा न हो की मैं तुझे जबरदस्ती छोड़ दू

नीलम- बापू तुम चिंता न करो एक दिन ऐसा आएगा की तुम्हारी ये बेटी खुद अपनी टंगे फैला कर तुम्हे ालने पास बुलाएगी

हरिया- कुछ भी कर बस जल्दी करना बेटी

नीलम- बापू यु समझ लो 1-2 दिन में काम हो जायेगा

हरिया नीलम की बात सुनकर खुश हो जाता है

दोनों बाप बेटी बहुत खुस थे

अभी राजू के आने में बहुत टाइम बाकि था

दोनों बाप बेटी एक दूसरे की बहो में बहे डेल पड़े रहते है ......
 
अपडेट-63

दोनों बाप बेटी एक दूसरे की बहो में पड़े पड़े सो गए थे

करीब 5 बजे हरिया की आँख खुलती है

वो नीलम को भी जगा देता है

हरिया- बेटी तेरे भाई के आने का समय hi गया है जल्दी से कपडे पेहेन ले

नीलम- बापू मुझे तो अब घर में नंगा रहने का hi मन करता है

हरिया- एक बार अपने भाई को अपने हुस्न के जाल में फसा ले फर मैं खुद hi तुझे घर में नंगा रखूंगा

नीलम- बापू तुमको शर्म नहीं आएगी जब तुम होनी इस बेटी को दिन भर घर में नंगा घुमाओगे

हरिया- बेटी शर्म तो तेरे बाप ने उसी दिन छोड़ दी थी जिस दिन तूने पहली बार अपने बाप का लुंड पकड़ा था

मैं गाओं की सैर करके आता हु तेरा भेज भी आता होगा

तू देख लेना

नीलम- अरे रुको न बापू

हरिया- नहीं बेटी समझा कर मैं बाप हु उसका थोड़ा बहुत तो उसके अंदर डर होगा hi और जब तुम दोनों अकेले होंगे तो शायद वो कुछ हरकत करे तेरे साथ

वैसे तो तूने सुबह hi अपने भाई को नजारे दिखा दिए थे

हरिया हस्ता हुआ घर से निकल कर गाओं में चला जाता है

इधर थोड़ी देर बाद राजू भी घर पहुंच जाता है

आज सुबह राजू ने जो देखा था उसके बाद से hi उसका अपनी दीदी को और भी ज्यादा बेरहमी से छोड़ने का मन कर रहा था

राजू जैसे hi घर में घुसता है उसकी नजरे बेसब्री से अपनी दीदी को दूध रही थी पर राजू को उसकी दीदी कहि नहीं दिखती

पर घर का दरवाजा तो पहले से hi खुला हुआ था

राजू बिना देर किये घर के पीछे खुलने वाली खिड़की की तरफ बढ़ता है

नीलम बड़े hi मजे से घर के पिछवाड़े संडास करने बैठी हुई थी

राजू की नजर जैसे hi अपनी दीदी के गांड के छेद पर पड़ती है उसकी आँखों में एक अलग तरह की चमक आ जाती है

इधर नीलम भी अपना काम करके अपनी गांड धोने लगती है और मस्ती में अपनी एक ऊँगली गांड के अंदर सरका देती है

राजू अपनी दीदी की हरकतों को डेल्ह कर जैसे पागल हुआ जा रहा

राजू का हाथ अब तक उसकी ढकती में घुस चूका था

राजू को अब एक अजीब सा नशा साधने लगा था वो जनता था की उसकी दीदी बहुत बड़ी चुड़क्कड़ है

क्योंकि सुबह hi वो अपने बाप का लुंड पकड़ कर सोई हुई थी

जैसे hi नीलम अपनी गांड धो कर पलटती है उसकी नजर सीधा राजू पर पड़ती है

जब दोनों की नजरे टकराती है तो राजू घबड़ा जाता है और तेजी से भागता हुआ कमरे में पड़ी खत पर आ कर बैठ जाता है

इधर नीलम मंद मंद मुस्काती हुई घर में आ जाती है

नीलम- क्या देख रहा था रे राजू तू उस खिड़की से

राजू- नहीं दीदी कुछ भी तो नहीं

नीलम- अपनी दीदी को संडास करते हुए देख रहा था तुझे शर्म नहीं आती क्या

राजू( है दीदी तुम्हे तो बड़ी शर्म आती है न जो अपने बापू का लुंड पकड़ कर सोती हो आता नहीं तुम्हारी छूट कितनी hi बार होने बाप का लुंड निगल चुकी होगी )

राजू- नहीं नहीं दीदी मैंने कुछ नहीं देखा

नीलम- चल छोड़ मैं तो सोच रही थी तूने देख लिया अपनी दीदी को संडास करते हुए

ये बात बोलते वक़्त नीलम के चेहरे ओर एक अलग hi मुस्कान थी

राजू- दीदी तुम इस वक़्त संडास करने गयी थी आज सुबह नहीं गयी क्या

नीलम पीछे घूम कर राजू को अपनी गांड दिखती है

नीलम- देख तो जरा तेरी दीदी का पिछवाड़ा कितना बड़ा है तुझे लगता है की ये एक बार संडास करने से खली हो जायेगा

राजू नीलम की गांड को खा जाने वाली नजरो से देख रहा था

नीलम की गांड के पास पेटीकोट थोड़ा सा गिला था जिसे देख कर राजू का लुंड लगातार उफान मार रहा था

नीलम- राजू चखे नहीं लगता की मैं दिन भर दिन मोती होती जा रही हु

राजू नीलम की चूचियों को लगातार घर रहा था

उसे बार बार सुबह वाला सीन याद आ रहा था

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नीलम की चूचिया उसको ब्लाउज को फाड़ कर आजाद होना कहती थी

राजू- अरे दीदी तुम मोती नहीं हो रही हो वो तो अब तुम पूरी तरह से एक औरत बन चुकी हो इस लिए तुमको ऐसा लग रहा है की तुम मोती हो गयी हो

नीलम- तो अब क्या तुझे तेरी दीदी एक औरत के जैसी लगती है

राजू अपनी साडी शर्म सुबह hi छोड़ चूका था

वो अब अपनी दीदी के साथ खुल कर बार करना कहता था

राजू - अरे दीदी लग्न क्या है अब तो तुम वैसे भी पूरी तरह से औरत बन चुकी हो

नीलम- तुझे कैसे पता की तेरी दीदी पूरी तरह से एक औरत बन चुकी है

राजू- दीदी अपना शरीर को देखो तुम्हारी हर चीज़ पहले से ज्यादा फैल गयी है

राजू नीलम जी चुकी की तरफ इशारा करके बोलता है

इधर अपने भाई की बाटे सुनकर नीलम की छूट लगातार पानी छोड़ रही थी

राजू- और दीदी औरत बनाने का एक और सबूत है

नीलम- वो क्या

राजू- दीदी देखो तुम कैसे दिन भर पसीने में भीगी रहती हो मुझे देखो मेरा शरीर पूरी तरह से सूखा है

पर तुम देखो तुम्हारा ब्लाउज और ये पेटीकोट देखो ौरी तरह से भीग गया है

राजू इस बार पेटीकोट के उसी हिस्से को पकड़ कर बोलता है जो नीलम की गांड धोने की वजह से हिला हुआ था

नीलम- ब्लाउज वाली बात तो तू सही कह रहा है पर ये पेटीकोट तो इस लिए गिला हुआ क्योंकि तेरी दीदी ने संडास करके अपनी गांड धोयी थी न

नीलम इतना बोलते हुए थोड़ा शर्मा जाती है

अब वो अपने छोटे भाई से खुल कर बात करना कहती थी

राजू भी समझ रहा था की अब उसकी दीदी धीरे धीरे अपने रान्दीपने पर उतर रही है

और राजू को भी तो एहि चाहिए था

अरे दीदी ये तुम्हारी ऊँगली में क्या हुआ

इतना बोलते हुए राजू उसी ऊँगली को पकड़ लेता है

जिसे नीलम थोड़ी देर पहले अपनी गांड में घुसा कर बैठी थी

नीलम भी समझ रही थी की उसका भाई क्या कह रहा है

क्योंकि राजू ने सब कुछ देखा था की नीलम अपनी गांड में ऊँगली दाल रही थी

नीलम- पता नहीं भाई लगता है कुछ सुबह गया है

राजू- लाओ दीदी दिखाओ तो जरा

राजू अपनी दीदी की ऊँगली को पकड़ कर अपनी नाक के पास ले आता है

और देखने के भने अपनी दीदी की गांड की मादक महक सूंघने लगता है

जैसे hi राजू की नाक में उसकी दीदी की गांड की खुसबू जाती है वो पूरी तरह से मस्त हो जाता है और उसकी आँखे धीरे धीरे लाल हो रही थी

राजू की पेंट में उसके लुंड का उभर साफ़ दिख रहा था

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नीलम - अरे रुक जा भाई अभी तो मैंने हाथ भी नहीं धोये है संडास भी मैंने इसी हाथ से धोयी थी

राजू- अरे दीदी हाथ धोयेंगगी तो ये कटा शायद और अंदर घुस जाये फर तो निकलना मुश्किल हो जायेगा

राजू ऊँगली को पकड़ कर अपने मुँह में भर लेता है

नीलम अपने छोटे भाई की हरकत देख कर अंदर तक गीली हो चुकी रही

नीलम- आह्हः राजू तुझे गन्दा नहीं लग रहा अपनी दीदी के संडास वाले हाथ को चाट रहा है तू

राजू- अरे दीदी इसमें गन्दा क्या लग्न आप तो मेरी प्यारी दीदी को

नीलम - क्या बात है बड़ा प्यार आ रहा है

राजू - दीदी तुमको देख कर तो बस प्यार hi आता है

राजू नीलम की ऊँगली को चूस कर अपनी दीदी की गांड के स्वाद का पूरा मजा ले रहा था

नीलम- चल अब छोड़ भी दे मुझे ऐसे hi मेरी ऊँगली चबा जायेगा क्या

राजू नीलम से रोड़ा सा दूर होकर खत पर बैठ जाता है

पर वो अब भी नीलम को घूरे जा रहा था

नीलम को आज अपने चीते भाई की नजरो में एक अलग सा नशा दिख रहा था वो अपने आपको राजू के पास जाने से नहीं रोक प् रही थी

राजू- दीदी एक मिनट आप उधर घूम जाओ मैं धोती पेहेन लेता हु बड़ी गर्मी लग रही है

नीलम- तूने अंदर कच्चा नहीं पहना क्या

राजू- नहीं दीदी मुझे खुला दुला रहना पसंद है

नीलम- अरे तो इसमें कोण सी बड़ी बात है तेरी दीदी तो तेरा ये पहले hi देख चुकी है

बदल में मेरे सामने hi और वैसे तू भी अपनी दीदी का पता नहीं क्या क्या देख चूका है

राजू अब बिलकुल बेशरम बनकर एक बहनचोद बनना कहता था

राजू- जैसा आप कहो दीदी

इतना बोलते हुए राजू अपनी पेण्ट को निचे सरकने लगता है

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राजू अपनी पेण्ट को अपने शरीर से अलग कर देता है अब उसका विशाल लुंड उसकी दीदी की आँखों के बिक्लुल सामने था वो भी बिलकुल नंगा

नीलम अपने छोटे भाई के लुंड का साइज देख कर पागल हुई जा रही थी

उसके पुरे शरीर में मनो हजारो चीटिया एक साथ रेंग रही थी

नीलम शरमाते हुए होनी आँखे निचे कर लेती है

पर आज राजू ने थान लिया था की आज वो अपनी दीदी के साथ साडी हदे पार कर जायेगा

राजू- दीदी शर्मा क्यों रही हो आपने तो पहले भी डकः है न अपने छोटे भाई का ये

राजू अपने लुंड की और इशारा करते हुए कहता है

नीलम अंदर hi अंदर बहुत खुस थी पर वो उस खुसी को जाहिर नहीं होने दे रही थी

पर वो बार बार नजरे उठा कर राजू का लुंड देख रही थी

इधर राजू आज अपनी दीदी के अंदर छुपी छुडास को बहार निकलने ओर लगा हुआ था

वो 1-2 अपने लुंड को पीछे से पकड़ कर आगे की और ालने हाथो को सरकता है

नीलम की हालत खराब हो रही थी अब उसे समझ आ रहा था की सुबह वाले सीन का उसके छोटे भाई पर क्या असर हुआ है

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राजू अपनी धोती को लपेट लेता है पर उसकी पतली सी धोती उसके लुंड को संभालने में असमर्थ थी

नीलम देख रही थी की कैसे उसका छोटा भाई आज उसे उकसा रहा है

नीलम की सांसे लगातार ऊपर निचे हो रही थी और नीलम की चूचिया इतनी ज्यादा फूल रही थी की राजू को आज उसकी दीदी की सुचिया और भी ज्यादा बड़ी दिख रही थी

जिसकी वजह से उसका लुंड लगातार झटके मार रहा था



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नीलम को समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या hi बोले

इतने में राजू एक कदम और आगे बढ़ता है और अपनी दीदी का हाथ पकड़ कर सीधा अपने लुंड पर रख देता है

नीलम को उम्मीद नहीं थी की राजू इतनी जल्दी ये सब करेगा

जैसे hi उसके छोटे भाई का लुंड उसके हाथो पर लगता है नीलम का शरीर एक झटका खता है

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राजू आज पूरी तरह से अपनी दीदी को बता देना कहता था की आखिर वो अपनी दीदी के साथ क्या करना कहता है

राजू नीलम के हाथ को मुट्ठी बना कर होने लुंड ओर लपेटे हुए था

नीलम भी अपना हाथ हटाने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी

नतीजा ये हुआ की राजू अपने हाथ को नीलम के हाथ के ऊपर रख कर अपनी दीदी के हाथो से अपनी मुठ मरवाने लगता है होने hi हाथो से

नीलम समझ चुकी थी की उसका चिटा भाई बड़ा hi कमीना है और अब वो उससे नहीं बच सकती

नीलम- तुझे शर्म नहीं आ रही अपनी hi दीदी के हाथो से अपने इस मुसल जैसे लुंड को मसलवा रहा है

राजू नीलम की आँखों में देखते हुए

राजू- दीदी अभी तो मसलवा hi रहा हु एक बार तुम बस इशारा करो फिर देखना तुम्हारा ये छोटा भाई तुमको कैसे मजे देता है

नीलम अपना हाथ एक hi झटके में राजू के लुंड से हटा लेती है

नीलम - चल हैट बड़ा आया अपनी दीदी को मजा देने वाला कैसा मजा देगा रे तू मुझे

राजू- दीदी मैं तुम्हे औरत होने का पूरा सुख दे सकता हु

बापू से भी बेहतर तरिके से

समझ रही हो न दीदी देखो तुम्हारा भाई अब पूरा मर्द बन गया है

नीलम- है मर्द तो हो hi गया है मेरा छोटा भाई तभी तो अपनी दीदी से होना ये मुसल जैसा लुंड मसलवा रहा है

चल होनी धोती ठीक कर और बाऊ को बुला कर ला चाय बन्न गयी है

नीलम के चेहरे की ख़ुशी राजू को साफ़ दिख रही थी

और उसे समझ आ गया था की अब उसकी दीदी उससे छोड़ने के लिए तैयार है

राजू भी नीलम की और देख कर एक स्माइल देता हुआ बहार निकल जाता है

नीलम ( अरे वह छोटे भइया मैं गयी तुझे तू तो अपनी दीदी का भी गुरु निकला ओर बीटा तेरी दीदी तुझे इतनी आसानी से भी नहीं मिलेगी देखता जा मैं कैसे तुझे तड़पती हु जैसे बापू को तड़पाया था)........
 
अपडेट-64

राजू अपने बापू को ढूंढता हुआ गाओं की तरफ जा hi रहा था की उसे हरिया घर की और आता हुआ दीखता है

हरिया जैसे hi राजू को देखता है वो सोचने लगता है की कहि ये सुबह वाली बायत न छेद दे क्या hi जवाब देता वो अपने बेटे को

राजू- अरे बापू तुम गाओं में घूम रहे हो वह दीदी अपने बापू के लिए परेशान है

हरिया- ः चल मैं आ रहा हु

राजू हुए हरिया दोनों घर की और चल देते है

राजू घर में घुसते हुए

राजू- लो दीदी तुम बड़ी बेसब्री से बापू को दूध रही थी न ये लो मैं बापू को धुंध लाया

नीलम राजू को देख कर मुस्कुरा रही थी और हरिया अपनी बेटी के गुलाबी होठो को मुस्कुराता हुआ देख कर hi गर्म हो रहा था

नीलम - अरे बापू खा भाग जाते हो आप

हरिया- कहि नहीं बेटी बस गाओं में hi गया था

राजू- अरे बापू मत जाया करो न गाओं में क्या है इतनी सुन्दर बेटी है तुम्हारी फिर भी गाओं घूमने चले जाते हो

हरिया समझ रहा था की राजू किस टोन में बोल रहा है

नीलम हरिया की और देख कर आँख मार देती है

हरिया भी समझ जाता है की जरूर इन दोनों भाई बेहेन के बिच कुछ हुआ है तभी राजू इतना खुलकर बात कर रहा है

अब तीनो बाप बेरी और भाई एकदम बेशर्म बनना कहते थे किसी की आँखों में कोई शर्म नहीं बची थी

हरिया- है तो सुन्दर बेटी है तो तुझे क्या दिक्कत है तेरी बेहेन भी तो एकदम मस्त है

राजू- मस्त तो है बापू पर

दीदी तो सिर्फ तुमपर hi ध्यान देती है

नीलम- मुझे सिर्फ और सिर्फ अपने बापू की hi सेवा करनी है

पुरे तन मन धन से

नीलम राजू की और देख कर एक सरारती स्माइल देते हुए कहती है

राजू- तो करो न दीदी वैसे भी तो तुम लगी hi रहती हो अपने बापू की सेवा करने में कहे दिन हो या राटट

हरिया- चल चुपचाप चाय पी परेशान मत कर मेरी बेटी को

नीलम- सुन लिया न तूने कितना प्यार करते है बापू अपनी बेटी से

राजू- है वो तो मैं देख hi रहा हु दिन रात प्यार कर रहे है

नीलम - तू बस देखता रह और हम बाप बेटी को प्यार करने दे

राजू नीलम का हाथ पकड़ कर उसे अपनी खत पर खींचता है

हरिया सामने बैठा बैठा देख रहा था

राजू- अरे दीदी मेरे अंदर क्या कांटे लगे है जो हमेशा अपने इस भाई से दूर भगति रहती हो

नीलम होना हाथ छुड़ाते हुए खत से उठ जाती है

नीलम- चल हॉट बड़ा आया प्यार करने वाला

मुझे पर सिर्फ और सिर्फ मेरे बापू का हक़्क़ है

क्यों बापू सही खा न मैंने

हरिया- है बेटी बिलकुल सही खा तुझे पर सिर्फ और सिर्फ तेरे बाप का hi हक़्क़क़ है

हरिया अपनी बेटी की छूट पाने के लालच में बिलकुल बेसहरसँ हो चूका था उसे हर जगह सिर्फ सुर सिर्फ अपनी बेटी की पानी छोड़ती छूट hi दिखाई देती थी

राजू की तो जैसे झांटे hi जल रही थी अपने बाप और दीदी की बाटे सुनकर

नीलम इतना बोलते हुए सीधा अपने बापू की गोदी में जाकर बैठ जाती है

राजू अपनी दीदी की इस हरकत को देखता रह जाता है

नीलम अब अपने पुरे रान्दीपने पर उतर गयी थी

नीलम - आअह्ह्ह्ह बापू ये क्या सुबह रहा है मेरे पिछवाड़े में

हरिया से भी अब और इन्तजार नहीं हो रहा था वो जल्दी से जल्दी अपनी बेटी को अपने लुंड पर बिठाना कहता था पर बिना कपड़ो के

राजू मुँह खोले दोनों बाप बेटी की बेशर्मी को देख रहा था

हरिया- पता नहीं बेटी लगता है कोई कटा सुबह गया है तेरे पिछवाड़े में

नीलम- अह्ह्ह बापू ये तो बहुत मोटा है

रुको मैं देखती हु

इतना बोलते हुए नीलम अपनी गांड को थोड़ा सा उढ़ाते हुए अपना हाथ अपने बापू के लुंड पर ले जाती है और उसकी धोती कोथोड़ा सा पीछे कजीचते हुए एक hi झटके में हरिया का लुंड बहार निकाल देती है

और बिलकुल सीधा पकडे हुए अपनी गांड के अंदर अपने बाप का लुब्द समाए लेती है

हरिया- अह्ह्ह बेटीई

नीलम का पेटीकोट हरिया के लुंड के साथ सरकता हुआ सीधा उसकी गांड के छेद पर जा कर रुका था

नीलम- आह्ह्ह्हह बापू बहुत मोटा कटा था पर तुम चिंता न करो तुम्हारी इस बेटी ने वो मोटा कटा अपनी इस बड़ी सी गांड में निगल लिया अह्हह्ह्ह्ह

राजू (देखो तो साली मेरी दीदी कितनी hi छुडासी है जो अपने hi छोटे भाई के सामने अपने बाप के लुंड पर बैठ गयी चिंता न करो दीदी तुम आज तक लुंड के लिए तरसी थी न पर अब देखो भगवान् ने तुमको ीक साथ दो दो लुंड दे दिए अब कबूवते रहना जिंदगी भर अपने hi बाप और छोटे भाई से कसम से दीदी अपनी रंडी बना कर रखेगा तुमको ये तुम्हारा छोटा भाई )

नीलम लगातार अपनी गांड को हरिया के लुंड पर गोल गोल घुमाये जा रही थी

इधर हरिया की भी हालत तीते थी नीलम की छूट से निकल रही गर्मी सीधा उसके बाप के लुंड को पिघला रही थी

हरिया भी अब तक पूरा जोश में आ चूका था

उसे अब कोई फरक नहीं पड़ता था की सामने उसका बीटा बैठा है या कोई और

हरिया आपने दोनों हाथ आगे बढ़ते हुए अपनी बेटी के नंगे पेट पर रख देता है और अपने हाथो से नीलम का चिकना पेट सहलाने लगता है

अब तक नीलम की छूट इतना पानी छोड़ चुकी थी की उसका बाप का लुंड पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी बेटी की छूट के पानी से पूरी तरह भीग चूका था

हरिया अपनी एक ऊँगली को लगातार अपनी बेटी की नाभि के अंदर बहार कर रहा था

नीलम भी काम नहीं वो अपनी ऊँगली से थोड़ा सा थूक निकल कर सीधा अपनी नाभि पर लगा देती है

राजू अपनी दीदी की ये हरकत देख कर अपना लुंड धोती के ऊपर से hi सेहला रहा था

नीलम सीधा सीधा अपने छोटे भाई की आँखों में देख रही थी

इधर हरिया को आज अंदाजा हुआ था की उसकी बेटी की नाभि कितनी गहरी है

हरिया की आँखों में हवस उतर आयी थी

अब वो नीलम को सिर्फ एक औरत के रूप में देखना कहता था

राजू भी बड़ी hi बेशर्मी के साथ अपने लुंड को धोती से आजाद कर देता है

राजू अपनी दीदी की नजरो में देखते हुए अपना लुंड सेहला रहा था

नीलम भी राजू की होनी नजरो से लगातार उकसाने का काम कर रही थी

इधर हरिया की हिम्मत जवाब दे रही थी उसका सब्र टूट चूका था

हरिया के हाथ अब धीरे धीरे उसकी बेटी के ब्लाउज की और बढ़ रहे थे

हरिया होनी बेटी के ब्लाउज के निचे के एक हुक को खोला हुआ अपने हाथ सीधा नीलम की चुकियो पर रख देता है और धीरे से मसल देता है

नीलम - अह्हह्ह्ह्ह बापू

ुम्माआआअह्ह्ह्हह्ह्हह्हआआ

नीलम- तू हम बाप बेटी को देख कर क्या अपना ये मुसल हिला रहा है

नीलम की बात सुनते hi हरिया की नजर सीधा अपने बेटे पर पड़ती है

राजू की आँखों में भी अब बस हवस hi थी शर्म तो जैसे मनो अब इस घर से hi गायब हो गयी थी

नीलम- बापू देखो न ये कुत्ता कैसे हम दोनों को देख कर अपना लुंड मसल रहा है

हरिया कुछ नहीं बोलना कहता था क्योंकि उसे अब समझ hi नहीं आ रहा था की राजू के सामने क्या hi बोले

नीलम- राजू तू बहार जा मेरे भाई हम दोनों बाप बेटी को प्यार करने दे

ऐसे देखना अच्छी बात नहीं

तुझे शर्म नहीं आ रही ऐसी हरकत कर रहा है अपने बापू और दीदी के सामने

नीलम बातो की माहिर थी उसके सामने किसी की भी बोलती बंद हो जाती

राजू को पता था की अगर वो आज होने बाप और दीदी को छोड़ कर बहार चला गया तो ये दोनों जिंदगी भर उसे दिक्कार कर hi रखेंगे

राजू- नहीं दीदी मैं तो यही बैठा रहूंगा और अपनी दीदी का रान्दीपना देख कर ऐसे hi लुंड मसलता रहूंगा

नीलम- हाय राम बापू सूना अपने ये कमीना अपनी बेटी को रंडी बोल रहा है

हरिया असल में अपने बेटे की बात सुनकर अंदर hi अंदर खुस हो रहा था

हरिया - कैसे बोल रहा है रे तू अपनी दीदी को अभी चप्पल निकल कर मरूंगा सेल भगा दूंगा घर से अगर मरी बेटी को दुबारा से रंडी बोलै तो

नीलम- है सुन लिया न छोटे भाई निकाल देंगे घर से फिर किसे देख कर हिलायेगा अपना ये लुंड

और बात रही रंडी की तो सुन ले मैं सिर्फ और सिर्फ अपने बापू की रंडी हु समझ आया

क्यों बापू बताओ न इसे

हरिया चुप रहता है और अपनी बेटी को सारा खेल संभालने देता है

नीलम भी राजू को इतना बेज्जत नहीं करना कहती थी असल में तो उसकी भी यही इच्छा थी की उसके बापू और. भाई का लुंड एक hi साथ अपनी छूट और गांड में लेना कहती थी

नीलम- बापू ये न ऐसे नहीं मानेगा आप ऐसा करो की इसको लेकर बहार जाओ तब तक मैं खाना भी बना लेती हु

फिर न बापू रात भर हम बाप बेटी प्यार करेंगे

किसी को देख कर हिलना है तो हिलता रहे

इतना बोलकर नीलम एक hi झटके में अपने बाप का लुंड अपनी गांड उस उगल देती है और बिना किसी हरकत के उठ कर सीधा रसोई की और अजाने लगती है

राजू की नजर उसकी दीदी की मतवाली गांड पर थी पेटीकोट का एक खास हिस्सा उसकी दीदी की गांड के छेद तक घुसा हुआ था

अगले hi पल राजू की नजर सीधा अपने बाप के लुंड पर पड़ती है

हरिया का लुंड उसकी बेटी की छूट से निकले पानी से पूरी तरह भीग चूका था

हरिया को नीलम का एक दम उठ कर जाना अच्छा तो नहीं लगा था पर आज रात के बारे में सोच कर उसकी आँखों में अलग सी चमक आ गयी थी

राजू (दीदी चिंता न करो आज की hi रात तुमको अपने बापू के लुंड के साथ साथ अपने छोटे भाई का लुंड भी तोफे में मिलेगा)

हरिया को आज एक अलग सी hi खुसी थी जो राजू भी साफ़ साफ़ अपने बाप के चेहरे पर देख सकता था

हरिया चल राजू बहार चल अपनी दीदी को खाना बनाने दे परेशान मत कर उसे

राजू( है बुड्ढे खुद तो अपना लुंड अपनी बेटी की गांड में फसा कर बैठा हुआ था और मुझे ज्ञान छोड़ रहा है कोई ना रात को देखो कैसे मैं तुम्हारी इस प्यारी बेटी को अपनी रंडी बना कर छोड़ता हु

कसम से बापू देखना तुम्हारी आँखों के सामने hi तुम्हारी बेटी को पटक पटक कर न छोड़ तो मेरा भी नाम राजू नहीं )

राजू चुपचाप अपने बाप के पीछे घर से निकल है

इधर नीलम आज बहुत hi खुस थी उसकी छूट ये सोच सोच कर hi पानी चोदे जा रही थी की आज रात को उसकी म्हणत का फल उसे मिलने वाला है

दोस्तों मैं फोटोज उपलोड़े करने की बहुत कोशिस की पर पता नहीं क्यों आज कोई भी पिछ अपलोड नहीं हो रही है .....
 
अपडेट-65

राजू गाओं का एक चक्कर लगा जार घर वापस आ जाता है

इधर हरिया भी बहार hi बैठा हुआ था

राजू हरिया के पास से गुजरता हुआ सीधा घर में घुसता है

इतने में नीलम की आवाज आती है

नीलम- बापू आजाओ खाना बन गया है

राजू के साथ साथ हरिया भी घर में घुस जाता है

राजू और हरिया आराम से खत पर बैठे हुए थे

नीलम रसोई में से 2 थाली में खाना निकाल कर लती है और एक थाली राजू के आगे रखती हुई दूसरी थाली लेकर जमीन पर बैठ जाती है

नीलम के होठो पर आज एक अलग hi मुस्कान थी जिसे वो अपने बापू और भाई से छुपा नहीं पा रही थी

हरिया - बेटी मेरा खाना नहीं लायी क्या तू

नीलम - अरे बापू खा ऊपर बैठो हो इधर आओ अपने हाथो से खिलाती हु आपको

हरिया होनी बेटी का गुलाम बन चूका था

अगले hi सेकंड हरिया लपक कर खत से निचे उतरते हुए अपनी बेटी के बिलकुल सामने बैठ जाता है

राजू भी खाना खा रहा था पर उसकी नजर उसके बाप और दीदी पर hi थी

इधर नीलम होने हाथ से एक निवाला अपने बापू के मुँह की और बढ़ती है

और हरिया भी अपना मुँह खोल कर नीलम की तीनो उंगलिया अंदर लेलेता है

Neelam-ahhh बापू क्या कर रहे हो खाना खाओ न अपनी बेटी को रात को खा लेना

हरिया थोड़ा मुस्कुराता हुआ अपनी बेटी के हाथ को छोड़ देता है

नीलम - बापू तुम भी तो खिलाओ अपनी इस बेटी को

हरिया भी एक निवाला उठा कर नीलम के मुँह में दाल देता है और अपनी ऊँगली से अपनी बेटी को होठो को रगड़ देता है

नीलम और हरिया एक दुआरे को ऐसे hi खाना खिला रहे थे

इधर राजू अपनी दीदी और बापू की हरकतों से काफी गरम हो चूका था उसका लुंड उसकी धोती के अंदर फुलना शुरू हो चूका था

आखीर में तीनो खाना खा लेते है और हरिया रोज की तरह बहार चला जाता है

राजू को अपनी दीदी के साथ कुछ हरकत करनी थी पर इधर नीलम राजू को शाम से hi इग्नोर कर रही थी

राजू फटाफट सबका बिस्तर लगा देता है और अपनी जगह पर लेत जाता है

नीलम होनी तिरछी निगाहो से अपने भाई को देख रही थी

राजू का मुँह गुस्से से फुला हुआ था ये बात नीलम को समझते देर नहीं लगी

नीलम( अरे छोटे भाई तू अपनी दीदी से इतना गुस्सा क्यों है तुझे दुःख है न की आज तेरी दीदी शाम को तेरे लुंड पर क्यों नहीं बैठी

तू गुस्सा न हो आज रात तेरी दीदी पूरी तरह से तेरी हो जाएगी फिर जैसे मन करे वैसे अपनी दीदी को चुना और जब मन करे अपनी दीदी को अपने लुंड पर बैठा लेना

बस थोड़ा सा और सब्र करले

पता है न सब्र का फल मीठा होता है )

इधर राजू के दिमाग में भी कई साडी चीज़े चल रही थी

राजू( चिंता न कर दीदी जितना जलाना है जला ले आज रात मैं तुझे ऐसा छोडूंगा की तू दिन रात होनी छूट और गांड खोले होने छोटे भाई के लुंड के पीछे भगति फिरेगी )

इतने में hi हरिया भी घर के भीतर आजाता है

हरिया अंदर आते hi मैं दरवाजा बंद कर देता है

नीलम- क्या बात है बापू आज बड़ी जल्दी है तुम्हे गेट बंद करने की

हरिया मुस्कुराता हुआ अपनी जगह पर आकर लेत जाता है

नीलम भी अपने सरे काम निपटा चुकी थी

और वो भी आकर दोनों बाप बेटे के बिच में लेत जाती है

नीलम- बापू बहुत गर्मी है न आज

हरिया- है बेटी गर्मी तो है hi

नीलम - बापू मुझे इतनी गर्मी क्यों लगती है

हरिया- बेटी तू अब एक औरत बन गयी है न इसलिए

नीलम- तो बापू एक औरत अपनी गर्मी कैसी काम कर सकती है

राजू दोनों बाप बेटी की बात सुन रहा था

इधर नीलम हरिया के ऊपर से होते हुए दूसरी तरफ पहुंच जाती है

अब नीलम और राजू की नजरे एक दूसरे से मिल रही थी

नीलम- बताओ न बापू एक औरत की गर्मी कैसी शांत करते है

नीलम अपने छोटे भाई की आँखों में देखते हुए हरिया की धोती को खोलना शुरू कर देती है

आज हरिया पहले hi अपनी बनियां उतर चूका था

हरिया एक बार तो सोचता है की वो सीधा सीधा अपने बेटे की नजरो के सामने कैसे अपनी बेटी से वो सब कर सकता है

पर अगले hi पल उसके दिमाग में आता है

की शायद आज की रात वही रात है जब उसे उसकी बेटी छोड़ने को मिलने वाली है

हरिया भी आज अपने सरे अरमान पुरे कर लेना कहता था

उसके काळा लुंड ने भी कई सालो से छूट का स्वाद भी कहा था

हरिया- बेटी एक औरत की गर्मी तो एक मर्द hi शांत कर सकता है

नीलम के होठो पर एक मुस्कान थी जिसे उसका भाई देख रहा था और नीलम बार बार राजू को दिखा कर अपने होठो पर जीभ फेर रही थी

नीलम का हाथ अब तक हरिया के लुंड तक पहुंच चूका था पर धोती के अंदर से hi

राजू अपनी दीदी को अपने बाप का लुंड सहलाते हुए साफ़ देख सकता था

नीलम- बापू एक मर्द औरत की गर्मी को कैसे शांत करता है

इतना बोलते हुए नीलम अपने नाख़ून को अपने बापू के सुपडे ओर सुबह देती है

Hriya-aahhhhhh बेटीइ क्या कर रही है टूउउउ

नीलम- बताओ न बापू

इतना बोलते हुए नीलम अपने बाप के लुंड के ऊपर से धोती को खींच कर उतर देती है

हरिया एक hi पल ने अपने बेटे बेटी की आँखों के सामने नंगा हो चूका था

पर आज हरिया की आँखों में कोई शर्म नहीं थी उसकी आँखों में अब बस हवस दिख रही थी

नीलम लगातार हरिया के लुंड को ऊपर से निचे तक सेहला रही थी

जिसका सीधा सीधा असर उसके छोटे भाई के लुंड पर हो रहा था

राजू का हाथ भी अब तक उसकी धोती के अंदर जा चूका था

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू तुम्हारा कितना मोटा हो गया है

हरिया- क्या मोटा हो गया है मेरी बच्ची

नीलम - तुम्हारा ये गधे जैसा लुंड बापू जब भी मैं इसे चुटी हु ये पहले से भी बड़ा लगता है

हरिया- ये तो तेरे इन कोमल हाथो का कम्माल है बेटी

नीलम- बताओ न बापू पहले मर्द कैसे शांत करता है एक औरत की गर्मी

हरिया भी अब बेशर्मी के इस खेल में कोई कमी नहीं छोड़ना कहता था

हरिया- बेटी मर्द औरत की गर्मी को शांत नहीं कर्त्ता बल्कि उस औरत के एक छेद से उस गर्मी को बाहर निकलता है

नीलम की आँखे पूरी तरह से लाल हो चुकी थी उसके अंदर की वासना अब उसपर हावी हो रही थी उसे कैसे भी करके आज छोड़ना था

इधर राजू भी अपने बाप और बेहेन की बेसर्मी को देख कर पागल हुआ जा रहा था

आखिर कर राजू भी अपनी बनियान और धोती निकाल देता है

और एक hi पल में अपनी दीदी की नजरो के सामने नंगा हो जाता है

नीलम की नजर बार बार अपने छोटे भाई के लुंड पर hi जा रही थी और वो हर दफा राजू के लुंड को देख कर अपने रसीले होठो पर जीभ फेरती

राजू को नीलम की हरकत से ऐसा लग रहा था मनो उसकी दीदी उसके लुंड को अपने मुँह के अंदर आने का इनविटेशन दे रही हो

नीलम-- बापू कोनसे छेद से निकलती है औरत की गर्मी

हरिया- बेटी जो छेद तेरे पैरो के बिच है न उसी से

नीलम- बापू तुम्हारी बेटी के पैरो के बिच में तो 2-2 छेद है कोनसे वाले से निकलती है

हरिया- बेटी जिससे तू पेशाब करती है न उसी से

नीलम- क्या कहते है बापू उस छेद को

हरिया- बेटी उस छेद को छूट कहते है

नीलम- और बापू दूसरे वाले छेद से क्या होता है जिससे मैं संडास बहार निकलती हु क्या उससे भी गर्मी बहार निकलती है

राजू की सांसे फूल रही थी उसका बाप और बेहेन इस खेल के पुराने खिलाडी थे पर आज इस बेशर्मी में उसका पहला दिन था

नीलम की गांड के छेद के बारे में सोच कर hi उसके छोटे भाई का लुंड झटके मार रहा था

हरिया- बेटी वो तो मर्द के ऊपर निर्भर करता है की उसे कोनसा छेद पसंद है

नीलम- बापू मुझे बहुत गर्मी लग रही अगर तुमको बुरा न लगे तो मैं अपना ब्लाउज उतर दू क्या बापू

हरिया- है है उतर दे बेटी

हरिया तो पहले से hi अपनी बेटी को नंगा करने की फिराक में बैठा हुआ था

नीलम उठ कर बैठ जाती है और अपनी छाती को अपने बापू की और धकेलते हुए बोलती है

Neelam-bapu ये ब्लाउज न बहुत तीते है मुझे नहीं खुलेगा आप hi खोल दो न

हरिया लेते लेते hi हाथ आगे बढ़ा कर एक एक करके नीलम के सरे हुक खोल देता है

और जैसे hi आखिरी हुक खुलता है राजू की नजरो के सामने उसकी दीदी की विशाल चूचिया आजाद हो जाती है

राजू ने पहले भी कई बार अपनी दीदी की चुकी देखि थी पर आज पहली बार उसे अंदाजा हुआ था की उसकी दीदी की चूचिया कितनी बड़ी और मोती है

नीलम राजू की नजरो में देखते हुए अपने बापू की छाती पर अपना सर रख कर दुबारा लेत जाती है

नीलम दुबारा से अपना हाथ अपने बाप के लुंड पर रख देती है

नीलम- अह्ह्ह बापू अब बड़ा अच्छा लग रहा है अब गर्मी काम लगेगी

हरिया- बेटी तुझे जैसे रहना है तू वैसे रह सकती है घर में

राजू बिलकुल शांत पड़ा हुआ था और वो देखना कहता था की आखिर उसका बाप और बेहेन किस हद्द तक जा सकते है

नीलम - बापू आवे ये तो बता दिया की औरत की गर्मी कोनसे छेद से निकलती है पर ये तो बताओ की कैसे निकलती है

हरिआय भी अब तक काफी गरम हो चूका था उसे होनी छाती पर अपनी बेटी की भरी भरकम चूचिया महसूस हो रही थी जिसका अहसास उसे पागल किये जा रहा था

हरिया- बेटी जब कोई मर्द अपना लुंड औरत के उस छेद में डालता है तभी उस औरत की गर्मी निकलती है

नीलम - बापू कैसे डालते है ये मुसल ये तो इतना मोटा है और मेरा छेद तो बहुत छोटा है

गांड का भी और छूट का भी ये कैसे घुसेगा बापू उन छेड़ो में

हरिया- बेटी बस पहली बार hi थोड़ी सी दिक्कत होती है उसके बाद ये अपनी जगह खुद hi बना लेता है

नीलम- बापू औरत को दर्द नहीं होगा अगर इतना मोटा लुंड उसकी गांड में जायेगा तो

ये बात नीलम राजू की आँखों में देखते हुए बोलती है

हरिया- बेटी बस एक बार hi दर्द होगा

नीलम- और उसके बाद क्या होगा बापू

हरिया- उसके बाद तो बेटी तुझे अपनी गर्मी निकलवाने में बहुत मजा आएगा

नीलम- बापू अब तक आपने कितनी औरतो की गर्मी निकली है

हरिया - कैयो की निकली है बेटी तेरी माँ की भी मैंने hi निकली थी

नीलम- तो क्या अब आप अपनी बेटी की गर्मी भी ये मुसल उसकी छूट में दाल कर निकलोगे बापू

हरिया तो अपनी बेटी को छोड़ने के लिए न जाने कबसे तैयार बैठा था

हरिया- है बेटी मेरा तो फरज़ज़ है अपनी बेटी की गर्मी को शांत करने का

नीलम- तो क्या बापू आप अपना लुंड अपनी बेटी की छूट में डालोगे

हरिया- अगर मेरी बेटी को ज्यादा दर्द न हो तो

नीलम- बापू दर्द नहीं होगा खा मेरी फूल सी छूट और खा ये तुम्हारा गधे जैसा लुंड

मेरी तो हालत खराब हो जाएगी बापू पूरी छूट hi फट जाएगी मेरी तो

ये बात नीलम राजू के लुंड को घूरते हुए बोलती है

हरिया- तू चिंता न कर बेटी बड़े hi प्यार से डालूंगा मैं होना ये लुंड अपनी बच्ची की फूल सी छूट में

नीलम- बापू कितने अक्सेह हो आप

इतना बोलकर नीलम होने बाप के होठो पर अपने गरम होठ रख देती है

राजू की हालत खराब हो रही थी वो बस अपनी दीदी का रान्दीपना देखते हुए अपना लुंड हिलाये जा रहा था

इधर नीलम होने छोटे भाई को उकसाने में कोई कसार नहीं छोड़ना कहती थी

नीलम और हरिया दोनों एक दूसरे के मुँह में होनी जीभ घुमा कर एक दूसरे के मुँह का स्वाद ले रहे थे

करीब 5 मिंट बाद दोनों बाप बेटी अलग होते है

नीलम राजू की और देखती है जो अपनी दीदी को खा जाने वाली नजरो से देख रहा था

नीलम- बापू देखो न राजू कैसे हम दोनों को देख कर अपना लुंड हिला रहा है

हरिया- कोई बात नहीं बेटी वो तेरा छोटा भाई है हिला लेने दे उसे भी उसका भी तो मात्र करता होगा न

नीलम- राजू तू बहार जाकर झोपडी में सो जा आज मेरे बापू होना ये लुंड मेरी छूट में दाल कर मेरी गर्मी निकालेंगे

हरिया कुछ नहीं बोलना कहता था उसे आता था की नीलम सब अपने प्लान के हिसाब से कर रही है

नीलम की बातो का राजू पर कोई असर नहीं होता बल्कि अब तो वो उठ कर खत पर बैठ जाता है और बैठे बैठे hi अपने हाथो में थूक लेकर होने लुंड को मसलने लगता है

अपने छोटे भाई की हरकते नीलम की छूट को लगातार भीगा रही थी

नीलम- बापू ये चुदाई क्या होता है

हरिया- बेटी जब मैं तेरी छूट में अपना लुंड दाल कर तुझे छोडूंगा तो उसे hi चुदाई कहते है

नीलम- बापू मेरी गांड के छेद में भी लुंड जा सकता है क्या

नीलम ये बात राजू को देखते हुए बोलती है

क्योंकि उसे पता था की उसका छोटा भाई उसकी गांड का दीवाना है

हरिया- बेटी तेरे हर एक छेद में लुंड जा सकता है अगर तू लेना कहे तो

नीलम- बापू ओर गांड के छेद में तो जल्दी ऊँगली भी नहीं घुसती तो ये मोटा लुंड कैसे घुसेगा

हरिया- बेटी लुंड तो खुद hi अपना रास्ता बना लेता है और तेरे तो सरे छेद hi इतने कामुक है की कोई भी अपना लुंड उसके अंदर घुसाने के लिए पागल हो जायेगा

नीलम- बापू सरे छेद मतलब मैं इसे मुँह में भी ले सकती हु क्या

हरिया- है बेटी बिलकुल

नीलम- पर बापू मेरा मुँह खा इतना सा और अपना ये लुंड तो देखो कितना मोटा है

हरिया- बेटी तुझे याद है न तू जब छोटी थी तो मैं तुझे लॉलीपॉप लेकर देता था

नीलम- है बापू सब याद है मुझे

हरिया- तो बेटी इसे भी लॉलीपॉप की तरह hi चूसते है

हरिया अपनी बेटी का मुखछोडन तो बहुत ोेहले hi कर चूका था पर दोनों इस वक़्त ये बाटे राजू को उकसाने के लिए कर रहे थे मनो आजसे पहले दोनों बाप बेटी के बिच कुछ हुआ hi नहीं

राजू( दीदी मैं नहीं जनता था की तू इतनी छुडासी है नहीं तो कब का तुझे अपने आगे घोड़ी बना चूका होता पर अब तू चिंता न कर अब से तेरा भाई तुझे हररोज छोड़ेगा वो भी बिना तुझ पर कोई रेहम दिखाए )

नीलम अपना एक हाथ निचे करके अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है

उसकी ये हरकत कोई नहीं देख पता

नीलम- बापू मुझे अब भी लॉलीपॉप चूसने का मन करता है

हरिया- मैं कल ला दूंगा होनी बच्ची के लिए बज़्ज़ार से

नीलम- बापू मुझे अभी चुसनी है लॉलीपॉप



हरिया को अपने बेटे के सामने अपनी बेटी से ऐसी गन्दी बाटे करने में बहुत मजा आ रहा था

हरिया- बेटी अभी खा से लौ तुहि बता एक काम कर तू आज अपने बाप का ये लॉलीपॉप hi चूस ले

नीलम- मैं चूस सकती हु क्या बापू ये वाली लॉलीपॉप

हरिया- तेरी hi तो है बेटी ये

और तुझे पता भी चल जायेगा की अपने मुँह के छेद में लुंड कैसे लेते है

नीलम बहुत ज्यादा खुस थी

नीलम तपपक से खड़ी हो जाती है

और जैसे hi वो खड़ी होती है उसका पेटीकोट उसकी टैंगो से सरकता हुआ निचे गिर जाता है

नीलम- अह्ह्ह बापू मेरा पेटीकोट खुल गया

हरिया- कोई बात नहीं बेटी

Neelam-bapu तुमको कोई दिखात तो नहीं न की तुम्हारी बेटी तुम्हारे सामने नंगी रहे तो

हरिया- अरे बेटी तू दिन भर घर में नंगी hi घूमना मुझे कोई दिक्कत नहीं है

हरिया तो अपनी बेटी की छूट पहले भी कई बार देख चूका था पर राजू ने आज पहली बार होनी दीदी की ोहली हुई छूट देखि थी

वैसे अभी तक उसे पूरी छूट दिखी नहीं थी पर नीलम की जांघो पर बेहटा हुआ पानी राजू को चीख चीख कस्र बता रहा था की उसकी दीदी की छूट बड़ी रसीली है

नीलम- पर बापू राजू भी देखेगा मुझे नंगा

हरिया- देखने दे बेटी चिटा भाई है वो तेरा .

राजू- ( दीदी मैं सोच रहा हु की तुम खुद चलकर मेरे पास आओ मैं अपनी दीदी से जबरदस्ती नहीं करना कहता पर अगर बापू का लुंड आज मेरे सामने तुम्हारी छूट में गया तो कसम से बापू के समाने hi तुम्हारी गांड मरूंगा ) .......
 
अपडेट-66

इधर नीलम अपने भाई और बाप के सामने बिलकुल नंगी खड़ी थी

और उसका छोटा भाई सामने खत पर बैठा हुआ उसकी नजरो में देख कर अपना मुसल जैसा लुंड मसल रहा था

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राजू को आज अपनी दीदी किसी काम देवी से काम नहीं लग रही थी

कमरे में आ रही हलकी चांदनी रौशनी में नीलम का नंगा शरीर किसी हिरे की तरह चमक मार रहा था

नीलम- बापू देखो न राजू कैसे देख रहा है मुझे और अपना लुंड जोर जोर से मसल रहा है

हरिया- क्यों रे राजू अपनी दीदी को तू ऐसे क्यों देख रहा है

राजू कुछ नहीं बोलता

पर वो लगातार अपना लुंड हिलाये जा रहा था

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नीलम- बापू मैं चूस लू आपका लुंड इस लॉलीपॉप को देख कर आपकी बेटी के मुँह में पानी आ रहा है

हरिया- बेटी तेरे लिए hi तो ये खड़ा हुआ है जितना मन करे उतना चूस

नीलम- बापू जैसे लॉलीपॉप ख़तम होने के बाद उसमे से मलाई निकलती है वैसे hi इस लॉलीपॉप में से भी मलाई निकलती है क्या

हरिया- बेटी मलाई तो निकलती है और बहुत साडी निकलती है

नीलम- बापू वो मीठा होगा या कड़वा

हरिया नीलम का हाथ पकड़ कर अपनी और खींचता है उससे और सब्र नहीं हो रहा था

हरिया- बेटी तू खुद hi साख लेना अपने बाप के लुंड से निकली मलाई

नीलम भी सरकती हुई निचे की और जाने लगती है

वो बड़े hi मादक अंदाज में अपनी गांड को राजू की और घुमा देती है और घोड़ी बनते अपना मुँह अपने बापू के लुंड के पास ले जाती है

इधर जैसे hi राजू की नजर उसकी दीदी की पहली हुई छूट और भूरे रंग के गांड के छेद पर पड़ती है उसकी हालत खराब होने लगती है

आज उसकी दीदी भले hi उसे उकसा रही थी पर अपने छोटे भाई को अपने सरे छेद दिखने में कोई कसार नहीं छोड़ रही थी

राजू की नजर अपनी दीदी के गांड के छेद पर टिक गयी थी

नीलम बार बार अपनी गांड का छेद खोल बंद कर रही थी

जिसकी वजह से राजू को खुद पर काबू करना मुश्किल होता जा रहा था

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हरिया का लुंड बिलकुल सीधा तन्ना हुआ था उसके सुपडे पर एक बून्द वीर्य की जम्मा हुई थी जिसे नीलम बिना वक़्त गवाए होनी जीभ निकाल कर चाट लेती है

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटीईईईई

नीलम- क्या हुआ बापू अच्छा लग रहा है क्या

हरिया- है बेटी बहुत अच्छा लग रहा है

नीलम राजू को अपनी गांड और छूट दिखा चुकी थी

अब वो अपनी गांड को दूसरी और घूमती है और अब राजू होनी दीदी को साइड से पूरी तरह देख सकता था

नीलम अपने बापू के लुंड को अपने चेहरे के ऊपर लगा कर उसके साइज का अंदाजा ले रही थी

नीलम राजू की और एक नजर डालती है और होना मुँह खोल कर एक hi बार में आधा लुंड अपने मुँह में भर लेती है

नीलम का मुँह काफी गरम और चिकना था हरिया का लुंड अंदर सरकता hi जा रहा था

इधर राजू से अब और इन्तजार नहीं हो रहा था उसका लुंड उसे बार बार अपनी दीदी की गांड में घुसने के लिए उकसा रहा था

नीलम आधे से ज्यादा लुंड अपने मुँह में ले चुकी थी

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नीलम अपने लूरे जोश में थी

इधर हरिया बेरहमी के साथ अपनी बेटी के मुँह को चोदे जा रहा था

हरिया अह्ह्ह्हह्हह बेटी ऐसा लग रहा है की मैं तेरी छूट मार रहा हु तेरी छूट की hi तरह तेरा मुहहह भी कितना रसीला है बेटी मजा आ गया तेरा मुह्हह्ह छोड़ के

राजू अआखिरकार अपने दोनों हाथो से नीलम की गांड को और फैला देता है

ऐसा नजारा देख कर राजू के मुहहह में पानी आ रहा था

राजू को भी पता था की अब पीछे हटने वाला टाइम नहीं है

राजू होने बिच वाली ऊँगली अपने मुँह में दाल कर गिला करता हुआ उसे सीधा नीलम की गांड के छेद पर रख देता है

नीलम कुछ बोलना छाती थी पर हरिया उसे बोलने नहीं दे रहा था वो लगातार अपना लुंड अनादर बहार किये जा रहा था

राजू अच्छे से अपना थूक अपनी दीदी की गांड पर लगाने लगता है और एक hi झटके होनी ऊँगली नीलम की गांड में पल देता है

नीलम अच्चानक हुए इस हमले से सिहर जाती है

और जैसे तैसे अपने मुँह को अपने बाप के लुंड से आजाद करती है

नीलम पलट कर राजू को देखती है जो लगातार नीलम की गांड में अपनी ऊँगली अंदर बहार किये जा रहा था

नीलम- बापू राजू मेरी गांड के छेद में ऊँगली दाल रहा है

हरिया बड़े hi प्यार से होने दोनों बच्चो को देखता है

नीलम राजू को hi देख रही थी पर वो अपने छोटे भाई को रोकने की बिलकुल भी कोशिश नहीं कर रही थी इधर राजू भी अपनी दीदी की आँखों में देखता हुआ होनी ऊँगली अंदर बहार किये जा रहा था

नीलम ( आज तो तेरी खैर नहीं नीलम रानी तेरा बापू और भाई तुझे पटक पटक कर छोड़ेंगे रात भर अभी भी टाइम है सम्भल जा नहीं तो सुबह होने तक चलने के काबिल भी नहीं बचेगी )

पर नीलम को सब मंजूर था आखिर आज उसकी इच्छा लूरि होने वाली थी

राजू बिच बिच में ऊँगली निक्काल कर नीलम की गांड ओर थूक देता और फिर उस थूक को अपनी ऊँगली के शेयर अपनी दीदी की गांड के अंदर धकेलने लगता

हरिया- बेटी वो तो ऊँगली दाल रहा है तेरी गांड में पर तुझे मजा आ रहा है क्या

नीलम- पता नहीं बापू पर अच्छा लग रहा है

हरिया- तो डालने दे न बेटी भाई hi तो है वो तेरा उसका भी तुझ पर पूरा अधिकार है जैसे तेरे बापू का है

और वैसे भी वो अपनी दीदी की गांड में सिर्फ ऊँगली hi तो दाल रहा है कोनसा उसने अपना लुंड दाल दिया तेरी गांड में

नीलम ( अह्ह्ह्ह बापू मैं तो कहती हु की मेरा छोटा भाई अपनी दीदी की गांड में होना लउरा लुंड पेल दे)

राजू( अरे बापू कहे चिंता करते हो अभी थोड़ी देर बाद लुंड भी डालूंगा)

हरिया - बेटी तू उसे उसका काम करने दे तू बस मेरे इस लुंड को अपने मुँह में घुसा ले कसम. से तेरे मुँह की गर्मी मेरे लुंड को पिघला रही है मन करता है की 24 घंटे अपना ये लुंड होनी बेटी के मुँह में डेल पड़ा रहु

नीलम- बापू अब तो आपकी ये बेटी तुम्हारी hi है होना लुंड तुम कहो तो मुँह में डालो छूट में डालो या मेरी गांड में डालो सब तुम्हारा hi है

इधर राजू को अपनी दीदी की बाटे सुनकर जोश आ जाता है और वो अपनी एक और ऊँगली को नीलम की गांड में घुसा देता है

अब राजू की 2 उंगलिया उसकी दीदी की गांड के छेद को खोलने का काम कर रही थी

इधर नीलम को भी 2 उंगलिया अपनी गांड में महसूस करके काफी ज्यादा मजा आ रहा था

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अब आलम ये था की राजू जब भी अपनी उंगलिया बहार निकलता तो नीलम की गांड का छेद उसकी उँगलियों के साइज का hi खुला रह जाता जिसे देख कर राजू और भी ज्यादा मस्त हो रहा था

उसका मन तो कर रहा था की अभी अपना लुंड अपनी दीदी की गांड में थुश दे पर वो आज की रात का पूरा मजा लेना कहता था

राजू अब अपनी दीदी की गांड का स्वाद चखना कहता था

राजू होनी उंगलियों को निकलते hi सीधा अपनी जीभ को नीलम की खुली हुई गांड में घुसा देता हीी

नीलम इस हमले से तड़प कर रह जाती है इधर राजू होनी 2 उंगलियों को निचे से नीलम की रास टपकती छूट में थुश देता है.

नीलम( अह्ह्ह्ह छोटे भाई कितना लयरा है तू अपनी दीदी के दोनों छेड़ो की सेवा एक साथ कर रहा है तू अह्हह्ह्ह्ह और अंदर दाल अपनी जीभहह मेरे भाई )

हरिया पिछले 15 मिंट से होनी बेटी का मुँह चोदे जा रहा था और आखिरकार उसकी बेटी के मुँह की गर्मी उसके लुंड को निचोड़ने लगती है

हरिया नीलम के सर को पकड़ कर अपने लुंड पर दबाता हुआ जोरदार सांसे खींचता हुआ झड़ने लगता है

हरिया- बेटी तुझे इस लॉलीपॉप की मलाई कहानी थी न अह्ह्ह्ह ये ले पूरी मालयी तेरे बापू ने तेरे मुहहह में hi निकाल डीई पी जा पूरी मलाई मेरी बच्ची

नीलम का ोुरा मुँह लुंड से भरा हुआ था हरिया का वीर्य सीधा उसकी बेटी के गले में गिर रहा था जिसे नीलम भी किसी रंडी की तरह गाठ गत्तत्त पिए जा रही थी

करीब 5 मिंट तक ऐसे hi अपनी बेटी के मुँह को अपने लुंड पर दबाते रखने के बाद हरिया की हालत थोड़ी ठीक होती है और वो अपने हाथो से अपनी बेटी का सर ाजजड़ कर देता है

नीलम जैसे hi अपना मुँह से हरिया का लुंड निकलती है उसके मुँह से वीर्य के साथ साथ उसका थूक नक़्शे की और गिरने लगता है

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पीछे से नीलम का छोटा भाई उसकी गांड को खाये जाए रहा था और अपनी 2 उंगलियों से अपनी दीदी की छूट को चोदे जा रहा था

नीलम काफी जोश में थी वो भी हरिया के लुंड को लगातार चाट चाट कर साफ़ कर रही थी मनो वो अपने बाप के लुंड से निकले वीर्य की आख्रिर बून्द तक पी जाना कहती थी

थोड़ी देर में हरिया का लुंड मुरझा जाता है

इधर नीलम की हवस पूरी जोरो पर थी

पर उसे राजू को अहसास दिलाना था की जिस गांड को वो चूस रहा है वो किसी रंडी की गांड नहीं बल्कि उसकी दीदी की hi गांड है

नीलम तेजी से पलटते हुए राजू के चेहरे ओर एक जोरदार तमाचा मारती है

हरिया भी नीलम की इस हरकत से हैरान रह जाता है

नीलम- कुत्ते इतनी देर से मेरी छूट और गांड को कहते जा रहा है अब क्या तू इसमें से मेरी संडास को चूस चूस कर बहार निकलेगा

राजू थोड़ा पीछे को गिर जाता है पर इस तमाचे का उसपर मोई असर नहीं हुआ था बल्कि कहते की वजह से तो उसकी अंदर की हवस और भी विकराल रूप ले रही थी

हरिया ( पता नहीं ये लड़की क्या करना कहती है

कैसे भी करके मुझे आज रात अपनी बेटी की छूट की सील तोड़नी hi है आखिर हक़्क़ है ये मेरा)

नीलम- मैं अपने बापू का लुंड चूसने में बिजी थी तो तू क्या मेरी गांड को चूस चूस कर फैला देगा क्या कुछ नहीं बोलो मतलब तो तू अपना लुंड पैल्ल देगा क्या मेरी गांड में

राजू चुप था उसे पता था की उसकी दीदी अपना लउरा रान्दीपना दिखने पर उतर आयी है

राजू( तू चिंता न कर दीदी इस तमाचे का बदला ऐसा लूंगा की तू भी याद रखेगी की तेरे छोटे भाई ने तुझे कितना रगड़ रगड़ कर छोड़ा था)...

अपडेट थोड़ा लेत आ रहा है उसके लिए माफ़ी कहता हु

पर अभी मैं थोड़ा बिजी चल रहा हु

कोशिस करूंगा की जल्द से जल्द मैं आप लोगो को अपडेट दे स्कू

धन्यवाद्.....
 
अपडेट-67

नीलम हरिया के लुंड को अपने पेट के निचे दबाये हुए अपने बापू के ऊपर hi लेती हुई थी

राजू का लुंड अपनी दीदी की गांड को देख देख कर झटके मार रहा था

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हरिया - बेटी कैसा लगा अपने बापू की ये लॉलीपॉप चूस कर

नीलम- मजा आ गया बापू थोड़ा दिखात हुई शुरुवात में पर जब एक बार आपका लुंड पूरा गले तक चला गया तो कोई दिखात नहीं हुई खूब मजा आया आपका लुंड चूसने में बापू

इतना बोलकर नीलम हरिया के होठो पर अपने होठ रख देती है

राजू अपने बाप और दीदी की हरकत देख कर दुबारा से अपना लुंड मसलने लगता है

हरिया- और बेटी मलाई कैसी थी

नीलम- बड़ी hi मिठास थी बापू उस मालयी में मजा hi आ गया कसम से सारा का सारा पी गयी मैं तो

हरिया - बेटी अपने इस बुड्ढे बाप को भी तो अपनी छूट का पानी पीला दे थोड़ा सा

नीलम- अरे बापू अपने आप को बुद्धा न बोलो ऐसा गधे जैसा लुंड लेकर मेरा मुह्ह छोड़ रहे थे और खुद को बुद्धा बोलते हो

हरिया- अच्छा मेरी बच्ची नहीं बोलूंगा पर अपनी छूट से निकला अमृत तो पीला मुझे

देख तो तेरा मुँह छोड़ छोड़ कर पूरा गला hi सुख गया है

नीलम- अरे बापू आपकी बेटी की छूट का सारा पानी तो आपका बीटा चूस गया कुछ भी नहीं छोड़ा इसने आपके लिए तभी तो लात मार कर भगाया है

हरिया- अरे बेटी उस बिचारे को क्यों गलियां दे रही है तेरी चूर hi इतनी रसीली है की कोई भी उसे चूसे बिना नहीं रह पायेगा

नीलम- पर बापू ये तो मेरी गांड को भी चूस रहा था

हरिया- बेटी कोई बात नहीं उसका भी तो हक़्क़ है न अपनी दीदी की गांड और छूट पर

नीलम- मेरी छूट गांड और मुहहह पर सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा हक़्क़ है बापू समझे

ये बात नीलम राजू को घूरते हुए बोलती है

राजू भी जनता था की उसकी दीदी किश तरह से उसे उकसाए रही है पर वो सब्र से काम लेना कहता था

हरिया- ठिक्क है बेटी पर उसे भी तो देखने दे की उसकी दीदी कितनी कुदसी है अगर उसने तेरी छूट और गांड चूस hi ली तो कोनसा पहाड़ टूट गया बता तूने उसे छठा मार दिया बेचारे को

हरिया- और रही तेरी छूट के पानी की बात तो बेटी तेरी छूट वो समुन्दर है जिसका पानी कभी ख़तम नहीं हो सकता

नीलम- तब तो बापू आपको बड़ी म्हणत करनी पड़ेगी अपनी बेटी की छूट से पानी निकलने के लिए

हरिया- वो तो तू मुझ पर छोड़ दे बेटी

बस तू मुझे रास्ता दिखा दे मैं पानी खुद hi निकाल लूंगा

नीलम बड़े hi मादक अंदाज में खड़ी होकर खत के पास जाती है और खत पर साध जाती है

और अपने भाई की तरफ अपना मुँह करते हुए वही खत पर hi घोड़ी बन जाती है

अब आलम ये था की खत के एक किनारे पर नीलम का मुँह और दूसरे किनारे पर उसकी छूट

नीलम- ाजाओ बापू मैंने तुम्हारे लिए अपनी छूट का रास्ता खोल दिया

हरिया भी जल्दी से ूठः कर अपनी बेटी की छूट की और बढ़ने लगता है

हरिया का लुंड दुबारा से जोश के मरे फूल चूका था

हरिया की नजर जैसे hi उसकी बेटी की छूट पर पड़ती है उसकी आँखों में एक अलग सी चमक आ जाती है

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हरिया- देख तो बेटी कैसे ये तेरी छूट तप तप टपक रही है

नीलम- बापू जल्दी से चूस लो पता लगे की कहि पानी hi ख़तम हो जाये फिर तो प्यासा hi रहना पद जायेगा तुमको

हरिया- बेटी प्यासा तो नहीं रहूंगा भले hi मुझे अपनी बेटी का मूठ पीना पड़े

नीलम- अब क्या पानी बेटी का मुत्तत भी पियोगे बापू

हरिया- अगर मेरी बेटी पिलाएगी तो जरूर पियूँगा

इतना बोलते हुए हरिया अपने दोनों हाथो से नीलम की गांड को पकड़ कर फैलता है और अपना मुँह सीधा अपनी बेटी की छूट पारर लगा देता हैईईई

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू

हरिया तो मनो जैसे अपनी फूल सी बच्ची की छूट खा जाना कहता था

हरिया छूट को चाट काम रहा था और चूस ज्यादा रहा था

नीलम - अह्ह्ह्ह बापू ध्यान से एक hi छूट है मेरे पास आज hi पूरी खा जाओगे तो छोड़ोगे किसे

हरिया अपना मुँह एक पल के लिए हटाता है

हरिया- मैं चाटूँगा भी अपनी बेटी की छूट और छोडूंगा भी अपनी hi बेटी की छूट को

अगले hi पल हरिया दुबारा से अपना मुँह होनी बेटी के पैरो में धकेल देता है

नीलम की आँखे पूरी लाल हो चुकी थी

िडजर राजू अपनी दीदी के चेहरे के अज्जेब अजीब भाव देख कर पागल हुआ जा रहा था

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राजू अच्चानक से खड़ा होता है और अपनी दीदी के पास जाने लगता है

नीलम अपने छोटे भाई को अपने पास आता हुआ देख रही थी

और उसके मन में यही चल रहा था की अब उसका छोटा भाई उसके साथ क्या करेगा

जो उसने उसे छठा मारा था उसका क्या अंजाम होने वाला है ये सोच कर hi उसका दिल सेहम जाता है

राजू नीलम के इतना करीब आ गया था की उसका लुंड उसकी दीदी के कामुक चेहरे के सामने झूलता हुआ झटके खा रहा था

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इधर हरिया अपनी बेटी को गरम करने में कोई कसार नहीं छोड़ना कहता था वो अपनी 2 उंगलिया उसकी छूट में पेल देता है

नीलम- अह्ह्ह्ह बापू अपना लुंड दाल दिया क्या तुमने मेरी छूट में

नीलम ये साडी बाते राजू को देखते हुए बोल रही थी और बार बार राजू के लुंड को घर घर कर देख रही थी

हरिया- बेटी चिंता न कर अभी तो ऊँगली hi डाली है जल्दी hi तेरा ये बाप तेरी छूट में अपना लुंड भी डालेगा

नीलम- बापू तुमको शर्म नहीं आएगी पहले तो अपनी hi बेटी के मुँह में अपना लुंड दाल कर मेरा मुखछोडन कर रहे थे

और अब छूट चाट रहे हो मेरी

और तो और अब मेरी छूट मरने की बात भी कर रहे हो

हरिया- बेटी तेरा ये गदराया बादाम देख कर तो मुझे कण्ट्रोल hi नहीं होता कसम से अगर तू मेरी बेटी न होती तो पता नहीं मैं कबका तुझे छोड़ चूका होता

नीलम- पर बापू मैं तो आपको बेटी hi हु फिर भी छोड़ोगे मुझे

हरिया- बेटी है इसलिए तो और भी मजा आएगा तुझे छोड़ने में

बड़ा मजा देगा तेरा ये बाप तुझे

अभी नीलम कुछ बोलने hi वाली थी की राजू अपने दोनों हाथो से अपनी दीदी के मुँह को पकड़ कर एक hi झटके में होना पूरा लुंड उसके मुहहह में पेल देता है

नीलम- guuugguuuuuuuuuu

हरिया अपना मुँह उठा कर नीलम की और देखता है उसे राजू का लुंड नीलम के मुँह में फसा हुआ दीखता है

हरिया एक नजर अपने बेटे की और देखता है और हस्ता हुआ अपना मुँह दुबारा से अपनी बेटी की छूट पर लगा देता है

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हरिया( लगता है आज राजू अपनी दीदी से सरे गीले सिक्वे दुर्र कर लेगा क्या hi होनहार बच्चे है मेरे)

राजू का लुंड हरिया के लुंड के hi साइज का था पर जवान होने के कारन उसका लुंड ज्यादा मोटा और ज्यादा hi सख्त था जिसका अहसास नीलम को भी हो चूका था

राजू अपने लुंड को जैसे तैसे पूरा जड़ तक्क अपनी दीदी के मुह्ह में थुश देता है

नीलम बस चटपटा रही थी और कुछ करने की न तो उसकी हालत थी और न hi इच्छा

अब राजू भी देर न करते अपनी पोजीशन सेट करता है और अपना लुंड अपनी दीदी के मुँह से खींचते हुए बहार निकाल लेता है

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नीलम- अह्ह्ह्हह्हह सेल हरामी तुझे किसने बोलै था बेहेन छोड़ मेरे मुँह में अपना लुंड डालने के लिए

राजू बड़े hi कामुक अंदाज में अपनी गर्दन अपनी दीदी के चेहरे के पास ले जाता है

और नीलम के कान में बोलता है

राजू- दीदी अभी तो मुँह में hi डाला है तू देखती जाओ अभी इस लुंड को मैं खा खा डालता हु

नीलम के चेहरे ओर एक मुस्कान आजाती है जिसे राजू भी देख सकता था

राजू- और रही बात बहनचोद की तो मैं अभी तक बना नहीं हु पर जल्दी hi दिदिचोड बन जाऊंगा

राजू नीलम का मुँह अपने हाथो से पकड़ता है

राजू के हाथो की पकड़ इतनी तीते थी की नीलम की जीभ बहार आजाती है

राजू अब अपनी दीदी को अपनी रंडी समझ कर छोड़ना कहता था

रानू अपने मुँह नीलम की नाक के ऊपर लता है और अपने मुँह से बहुत सारा थूक अपनी दीदी की नाक पर गिराने लगता है जो नीलम की नाक से होता हुआ सीधा उसकी जीभ पर गिर्र रहा था

नीलम को अपने छोटे भाई की ये हरकत पागल कर देती है

वो भी अपनी जीभ के शेयर अपने भाई का थूक अपने मुँह के अंदर लेलेती है

राजू - दीदी बापू सही hi बोल रहे थे तुम्हारा मुँह तुम्हारी छूट से जुडा रसीला है

इतना बोलते हुए राजू आगे बढ़ कर अपनी दीदी के होठो को अपने मुँह में भर लेता है

नीलम के होठो की मिठास राजू को पागल बना रही थी

इधर हरिया अपनी बेटी की छूट को चाटने में वयस्त था उधर राजू होनी दीदी के होठो को अपने दातो से चबा जाना कहता था

नीलम को उसका बाप और भाई दोहरा मजा दे रहे थे आखिरकार नीलम झड़ने के करीब पहुंच चुकी थी

नीलम का शरीर लगातार झटके मार रहा था जिसे देख कर राजू भी समझ गए था की एक बार उसकी दीदी झाड़ गयी तो कहि ऐसा न हो की पिछली बार की तरह दुबारा से उसके गलो पर थप्पड़ जड़ दे

राजू अपना मुँह नीलम के मुँह से हटा लेता है और बड़े hi प्यार से अपनी दीदी की ठुड्डी को पकड़ कर उठाते हुए होना लुंड दुबारा से अपनी दीदी के मुँह में पेल देता है

इस बार राजू बिलकुल नहीं रुकना कहता था

राजू के झटके इतने तेज थे की उसका लुंड सीधा अपनी दीदी के गली में जाकर टकरा रहा था

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नीलम की हालत खराब हो रही थी

हरिया होनी 2 उंगलियों से अपनी बेटी की छूट को लगातार चोदे जा रहा था

फातटठठ fathhhhhhhhhh

गुगुग्गूगूउऊउउउउउ

इसी प्रकार की आवाजे पुरे कमरे में गूंज रही थी

नीलम हाफ रही थी पर उसके मुँह से कोई भी आवाज निकलने में असमर्थ थी

इधर राजू का भी माल निकलने वाला था वो अपनी रफ़्तार और तेज कर देता है और नीलम की नाक को होनी 2 उंगलियों से दबा कर बंद कर देता है

नीलम को अपने छोटे भाई की ये बेरहमी

उसे पागल किये जा रही थी

इधर राजू को अपनी दीदी पर कोई रेहम नहीं आ

उल्टा उसकी दीदी जितना तड़प रही थी वो अपने धक्के उतने hi तेज किये जा रहा था

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राजू हर झटके के साथ अपनी दीदी को ये बताने पर तुला था की आज नीलम ने अपने छोटे भाई का छठा मार कर उसके अंदर से अपनी दीदी के प्रति जो इज्जत थी उसे ख़तम कर दिया है

और अब उसका भाई hi उसे भोगने वाला है

आखिर कर नीलम का शरीर अकड़ने लगता है

हरिया अपना पूरा मुँह नीलम की छूट पर लगा कर उससे निकले पार्षद को पिने के इन्तजार में था

इधर राजू भी झड़ने वाला hi था और वो होना लुंड आखिरी झटके के साथ नीलम के मुँह में पेल देता है

और उसके लुंड से पिचकारी निकलती हुई सीधा उसकी दीदी के गले में जाने लगती है

नीलम वो बिल्ली थी जिसमे मुँह अब खून लग चूका था

वो भी बड़े hi शौख से पूरा पानी पी जाती है

नीलम भी करीब 5 मिंट तक अपने बाप को अपनी छूट का पानी पिलाती रहती है

और उसके बाद हरिया तो साइड में लुढ़क कर वही जमीन पर लेत जाता है

पर राजू तो मनो रुकने का नाम hi नहीं ली रहा था

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नीलम राजू को धक्का देते हुए पीछे की और धकेल देती है पर अगले hi पल राजू दुबारा से नीलम का सर पकड़ लेता है और अपना मुरझाया हुआ लुंड उसके मुँह में पेलने लगता है

नीलम( लगता है मेने गलत पन्गा ले लिया इस कमीने से ये मेरी गांड फाड़ने से पहले hi मेरा मुहहह फाड़ देगा छोड़ छोड़ के)

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आखिरकार नीलम थी तो राजू की दीदी hi उसे भी अपनी दीदी पर थोड़ा सा रेहम आ जाता है

और वो अपना लुंड जैसे hi निकलता है नीलम के मुँह से बहुत सरे थूक के साथ राजू का वीर्य भी बहार आने लगता है

राजू पीछे हत्ता हुआ जमीन पर पड़े बिस्तर पर लेत जाता है

नीलम की सांसे अभी तक उखड रही थी उसका बाप और भाई दोनों मिलकर करीब 1 घंटे तक उसका मुँह छोड़ चुके थे

नीलम- कमीने कोई ऐसे मुँह छोड़ता है क्या मेरा मुँह फाड़ देगा हरामी तू

राजू- दीदी अभी तो देखती जाओ की मैं तुम्हारा क्या क्या फाड़ता हु

नीलम- बीटा मैं फाड़ने दूंगी तभी तो फाड़ेगा न

हरिया अपने बेटे बेटी की बात सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था .......
 
अपडेट-68

नीलम खत पर पेट के बल गिरी हुई थी

राजू को हटे हुए अभी 10 मिंट हो चुके थे

पर राजू ने आज अपनी दीदी का ऐसा मुखछोडन किया था की नीलम की सांसे दुरुस्त होने का नाम hi नहीं ले रही थी

राजू भी ज़मीन पर पड़े बिस्तर पर लेता हुआ था नीलम की नजर अपने भाई के लुंड पर hi थी जो की उसकी नजरो के सामने hi मुरझाया था पर अब वो दुबारा से एक के बाद एक झटके खता हुआ दुबारा से अपनी पुराणी स्थिति में आ रहा था

राजू की नजर अपनी दीदी पर पड़ती है

नीलम की चेहरे पर एक अलग hi प्रकार की ख़ुशी थी जिसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल था

हरिया जो अभी तक ज़मीन पर पड़ा हुआ था वो उठके नीलम के साथ hi खत पर लेत जाता है

नीलम की हालत अब थोड़ी सुधर गयी थी

नीलम- क्या हुआ बापू ज्यादा पानी पी लिया क्या तुमने मेरी छूट का

हरिया- बेटी तेरी छूट से निकला जितना पानी पिया जाये वो काम hi है

नीलम- अभी और पियोगे क्या बापू

हरिया- अगर मेरी बेटी पिलाएगी तो जरूर पियूँगा

राजू का लुंड अब तक पूरी तरह से खड़ा हो चूका था और नीलम की नजरे उसके छोटे भाई के लुंड ओर hi तिकी हुई थी

अब बस वो छोड़ना कहती थी

नीलम राजू की और देखते हुए बोलती है

नीलम- बापू पानी तो मैं तुमको दिन रात पिलाऊंगी होनी इस छूट से

पर अभी मुझे तुम्हारा ये लुंड अपनी छूट में लेना है

अपनी बेटी की बात सुनकर हरिया की आँखों में चमक आ जाती है

राजू भी नीलम को hi देख रहा था पर नीलम अब भी अपने छोटे भाई को इग्नोर कर रही थी

हरिया- बेटी तूने तो मेरे मुँह की बात चीन लिए

हरिया अपना हाथ आगे बढ़ा कर नीलम को सीधा करता हाउ उसकी एक चुकी को अपनी हथेली में दबोच लेता है

नीलम- अरे बापू सब्र करो मुझे तो लगता है की तुम अपनी बेटी को यही खत पर hi छोड़ डोज

हरिया नीलम की छूट मरने के नाम वे जैसे पागल हो गया था

नीलम जानती थी की उसका बाप भी उसे न जाने लब्ज़ छोड़ने की फिराक में बैठा है

हरिया- अब बेटी तुम hi तो खा था की तुझे अपने बाप का ये मुसल अपनी छूट में लेना है

नीलम- अरे बापू खा तो था पर अब ये खत तो नहीं तोड़नी न चलो निचे ज़मीन पर करेंगे

वैसे भी तुम जोश में आकर कुछ ज्यादा hi तगड़े तगड़े झटके मरते हो

ये बात नीलम राजू की और देखती हुई बोलती है

नीलम हरिया का एक हाथ पकड़ कर उसे खत से उठती हुई बिस्तर की और लेकर आती है झा पहले से hi राजू चित्त पड़ा हुआ था

नीलम को देख कर भी राजू वैसे hi लेता रहता है

नीलम अपने एक पेअर से राजू को थोड़ा सा धक्का देती है पर राजू तो मनो हिलने का नाम hi नहीं ले रहा था

नीलम- बापू देखो न ये सांड़ कैसे हमारे बिस्टेर पर पड़ा हुआ है

इसे हटाओ नहीं तो चुदाई कैसे होगी

हरिया राजू की और देखता है

मनो बाप बेटे की आँखों hi आँखों में कोई समझौता हुआ हो राजू निचे की और सरकता हुआ बिस्तर छोड़ देता है

नीलम- बापू तुन लेत जाओ फिर अपनी बेटी का जद्दो देखना

हरिया भी एक आज्ञाकारी बाप की तरह ज़मीन पर सीधा लेत जाता है

उसका लुंड किसी रोड की तरह हवा में लहरा रहा था

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नीलम पीछे मुद कर अपने छोटे भाई को और देखती है

राजू जमीन पर बैठा अपनी दीदी की मतवाली गांड देख कर लुंड हिला रहा था

नीलम रसोई की और बढ़ती है और वह से सरसो का तेल लेकर दुबारा से अपने बापू के पास आती है

हरिया की आँखो में एक अलग hi चमक थी क्योंकि आज उसे उसकी बेटी की छूट छोड़ने को मिलने वाली थी

नीलम तेल को हाथो में लेकर अच्छे से अपने बाप के लुंड पर मसलने लगती है

राजू अपनी दीदी की हरकत देख कर समझ गया था की अब उसकी दीदी क्या करने वाली है

नीलम भी लगातार अपने छोटे भाई ककी नजरो में hi देख रही थी

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नीलम खूब अच्छे से हरिया के लुंड ओर तेल लगा रही थी

उसे पता था की जब उसके बाप का ये गधे जैसा लुंड उसकी छूट में जायेगा तो उसकी हालत खराब हो जाएगी

इधर राजू भी नीलम को देख कर अपना लुंड मसल मसल कर दुबारा खड़ा कर रहा था

नीलम और राजू लगातार एक दुआरे को देख रहे थे

मनो दोनों भाई बेहेन आँखों hi आँखों में बाटे कर रहे हो

नीलम तेल की शीशी को राजू की और फेक देती है और अपने होठो को दातो से कटती हुई राजू को आँख मार देती है

राजू भी अपनी दीदी के इशारे समझ रहा था

वो अपने हाथो से hi अपने लुंड को तेल में डूबने लगता है

नीलम एक दम से उठती हुई अपने बापू के ऊपर बैठ जाती है और अब हरिया का लुंड उसकी बेटी की छूट के निचे दबा हुआ था

हरिया के लुंड को उसकी बेटी की भीगी ही चित का अशअस पागल किये जा रहा था

इधर नीलम आज अपने पुरे रान्दीपने पर उतर आयी थी

वो हरिया के लुंड को अपनी छूट के निचे दबाये हुए आगे पीछे होकर लगातार अपनी छूट को अपने बाप के लुंड पर रगड़ रही थी

नीलम की छूट आज इतना पानी छोड़ रही थी की उसके बाप का लुंड पूरी तरह से भीग चूका था

इधर राजू भी अपने लुंड पर इतना तेल लगा चूका था की नीलम को उसके छोटे भाई के लुंड पर उभरी हुई नशे देख कर एक अलग hi नशा साध रहा था

अब नीलम से भी सब्र करना मुश्किल था

इधर हरिया तो मनो इन्तजार hi कर रहा था की कब उसकी बेटी उसका लुंड पकड़ कर अपनी छूट में डेल

हरिया- बेटी अब डाले दे इस लुंड को अपनी इस रसभरी छूट में

नीलम को भी अब बस छोड़ना था

हरिया चुदाई के खेल में पुराण खिलाडी था वो जनता था की इस पोजीशन में नीलम को पहली बार लुंड लेने में बहुत तकलीफ होगी

हरिया नीलम को पकड़ कर पलटने की कोशिश करता है पर नीलम उसके कंधो को पकड़ कर उसका ये प्रयास फ़ैल कर देती है

हरिया कहता था की वो अपनी बेटी को लिटा कर चोदे

पर इधर नीलम कुछ और hi सोच कर बैठी थी

वो अपने बापू के लुंड के साथ साथ अपने छोटे भाई के लुंड को भी रास्ता दिखाना कहती थी

नीलम- बोलो बापू छोड़ोगे अपनी इस गदराई हुई बेटी को

हरिया- है बेटी मैं छोडूंगा अपनी बेटी को

नीलम- तो अब आप बेटीचोद बनाने के लिए तैयार हो जाओ बापू

हरिया- मैं तो कबसे तैयार बैठा हु बेटी जल्दी से मेरा लुंड अपनी इस रसीली छूट में घुसा ले और बना दे अपने इस बाप को बेटीचोद

नीलम हरिया के लुंड को पकड़ कर अपनी कमर उठा कर उसका लुंड अपनी पानी छोड़ती छूट पर लगा देती है

जैसे hi हरिया के सुपडे नीलम की छूट को छूटा है दोनों बाप बेटी के शरीर में एक अलग hi तरह की बिजली दौड़ जाती है

हरिया- अह्ह्ह्हह बेटी

नीलम - बापू बहुत मोटा है तुम्हारा मुझे नबी लगता ये अंदर जा पायेगा

हरिया- बेटी जब तेरे बाप का ये लुंड तेरे इस नाजुक मुँह में चला गया तो ये छूट क्या है बस एक बार तुझे थोड़ी तकलीफ होगी

नीलम- और उसके बाद

हरिया- उसके बाद तो तुझे दिन रात छोड़ेगा तेरा ये बाप फिर मजा hi मजा है बस्स्स

नीलम अपनी गांड का दबाव हल्का से बढ़ती है

और हरिया क सूपड़ा थोड़ा सा अंदर hi जाता है

नीलम ने भले hi कितनी hi बार अपनी छूट को सहलाया हो पर उसका कुँवारापन आज भी कायम था जिसका अंदाजा हरिया को भी था

वो नहीं कहता था की उसकी फूल की बेटी को कोई भी तकलीफ हो

पर असल में तो अपना सूपड़ा अपनी बेटी की छूट में महसूस करके हरिया भी मनो जैसे पागल हो गया था

उसका दिमाग उसका साथ नहीं दे रहा था

इस समय बस वो अपने लुंड से सोच रहा था

अभी नीलम की ह करती इससे पहले हरिया hi अपनी कमर को ऊपर उठता हुआ अपनी बेटी की कुवारी छूट में एक जोरदार झटका देता है

जिससे नीलम अंदर टककक कैंम्पप जाती है

नीलम- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बापूण आराम सीए

हरिया - बेटी ौसे तुझे दर्द होगा एक काम कर तू मेरे निचे आजा बस एक बार तेरी सील टूट जाये तो फिर कभी दर्द नहीं होगा

नीलम राजू की और देखती है

नीलम- बापू मुझे दर्द मंजूरर है बास तुम डालो इस अंदर

हरिया को पता था की उसकी बेटी बड़ी हिम्मती है पर आखिर था तो वो उसका बाप hi

राजू भी जनता था की उसकी दीदी को आज बहुत दर्द बर्दास्त करना पड़ेगा और वो भी यही कहता था की आज hi के दिन उसकी दीदी के दोनों छेड़ो की सील टूट जाये

ताकि आगे से जब उसका मैं करे वो अपनी दीदी की छूट और गांड मार सके

हरिया के झटका मरने की वजह से नीलम की छूट की झिल्ली फैट चुकी थी और उसकी छूट से हल्का हल्का खून बहार आ रहा था जिसे देख कर राजू को अपनी दीदी के ऊपर बड़ी दया आ रही थी

पर राजू को भी पता था की जब सील टूटेगी तभी तो उसकी दीदी लुंड की दीवानी बनेगी

राजू उठ कर नीलम के चेहरे के पास जाता है

हरिया भी लेते लेता राजू को देख रहा था

राजू- नीलम दीदी

अपने छोटे भाई की आवाज सुनकर नीलम का ध्यान उसकी तरफ जाता है

पर नीलम बोलती कुछ नहीं

राजू- दीदी दर्द हो रहा है क्या

आपकी छूट से खून आ रहा है

राजू की आँखों में नीलम को वही ोयार दिख रहा था जो एक छोटे भाई की आँखों में अपनी दीदी के लिए होता है

नीलम राजू को देख कर मुस्कुरा देती है

राजू भी इस खेल में अपनी पूरी भूमिका निभाना कहता था

राजू आगे बढ़ता हुआ अपनी दीदी के होठो ओर अपने होठ रख देता है

नीलम भी अपना मुँह राजू के लिए एक hi पल में खोल देती है

राजू होनी जीभ को नीलम के मुँह में घुसा देता है

और अपनी जीभ से वो नीलम का मुँह अंदर से चाटने लगता है

नीलम को ऐसा लग रहा था मनो जैसे आज वो पागल हो जाएगी

राजू अपने एक हाथ को नीलम के कंधे ओर रख कर निचे की और दबाता है

नीलम भी छोटे भाई का इशारा समझ रही थी

नीलम अगले hi पल होना मुँह राजू से अलग करती है

पर उसकी नज़ारे अभी भी अपने छोटे भाई पर hi थी

नीलम- बधाई हो बापू तुमने अपनी बेटी की सील तोड़ दी

नीलम की बात सुनकर हरिया के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

जैसे मनो उसने कोई जंग फतह कर ली हो

नीलम- बापू अब मारो झटके और घुसा दो अपना ये मुसल अपनी बेटी की छूट में और रुकना मत जबतक ये ोुरा अंदर न घुस जाये थोड़ा सा भी बहार मस्त छोड़ना बापू मुझे आपका पूरा लुंड अपनी छूट में चाहिए

नीलम की बात सुनकर दोनों बाओ बेटे समझ चुके थे की अब नीलम के सर पर हवस साध गयी है अब वो बिलकुल पागल हुई जा रही थी

नीलम का पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था

हरिया नीलम की बात सुनते hi हरकत में आजाता है और अपनी बेटी की कमर पकड़ कर निचे से एक जोरदार झटका मरता गई है

Neelam-ahhhhhhhhhhhh मर्डर गईइइइइइइइ

अभी नीलम कुछ और बोलती उससे पहले hi राजू अपना मुँह आगे बढ़ता हुआ अपनी दीदी के होठो को अपने मुँह में भर लेता है

हरिया ने इतना जोरदार झटका मारा था की उसका लुंड नीलम की छूट में आधे से ज्यादा एक hi झटके में घुस गया था

नीलम का पूरा बदन इस झटके से कांप गया था उसकी आवाज तो राजू के मुह्ह में डब्ब्ब गयी थी पर दर्द तो उसे महसूस हो hi रहा था

राजू अपनी दीदी के निचे होठ को अपने दातो से चबाने में लगा हुआ था

नीलम को जोश तो पहले से hi था बस झटके ने उसे थोड़ा सा हिला दिया था

नीलम की छूट से खून के साथ साथ उसकी छूट का पानी भी बहार आ रहा था

नीलम अब पूरी तरह से तैयार थी आखिरी झटका झेलने के लिए

इधर राजू अपनी दीदी के दोनों होठ इस तरह सभा रहा था मनो वो अपनी दीदी के होठो को खा जायेगा

हरिया भी जनता था की उसकी बेटी दर्द में है और इसीलिए वो बिना कोई हरकत किये अपना आधा लुंड अपनी बेटी की छूट में डेल पड़ा हुआ था

नीलम के चेहरे से अब दर्द के भाव उड़द चुके

इधर अपनी दीदी के होठ सभा सभा कर राजू नीलम को इतना गरम कर चूका था की नीलम अपनी छूट को ऊपर की और खींचती है और अगले hi पल अपने बाप के लुंड पर एक झटके के साथ बैठ जाती है

इस बार हरिया का 8" लुंड नीलम की छूट में जा चूका था हरिया बिना देर किये नुचे से एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लुंड अपनी बेटी की छूट में पेल देता है

नीलम इस हमले से चटपटा कर रह जाती है

नीलम की आँखे एकदम से बहार को आ गयी थी

नीलम हरिया के लुंड को अपनी छूट से निकलना कहती थी पर हरिया भी एक पुराण खिलाडी था वो अपने दोनों हाथो से अपनी बेटी की कमर को दबोच लेता है और नीलम को वही अपने लुंड पर दबा के बैठा देता है

राजू अबतक होनी जीभ नीलम के मुँह में दाल चूका था नीलम का दर्द थोड़ा बहुत कम् हुआ था

अब राजू अपनी जीभ नीलम के मुँह में दाल देता है और नीलम भी बड़े hi प्यार से अपने छोटे भाई की जीभ को चूस रही थी

नीलम अब दुबारा से जोश में आ चुकी थी उसका दर्द मनो उसके छोटे भाई ने गायब कर दिया था

हरिया के लुंड पर बैठे बैठे hi नीलम अपनी कमर को गोल गोल घुमा रही थी और अपने बाप का लुंड अपनी छूट के अंदर अच्छे से महसूस कर रही थी

अपनी बेटी की हरकत देख कर हरिया भी समझ गया था की अब उसने अपनी बेटी की छूट का रास्ता अपने लुंड के लिए हमेशा के लिए खोल दिया है......

माफ़ी कहूंगा आधा अधूरा अपडेट दिया मेने

पर आज कल टाइम की थोड़ी कमी है

जल्द से जल्द अगला अपडेट आएगा
 
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