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- Dec 5, 2013
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अपडेट-59
शाम के 5 बज चुके थे नीलम घर के कामो में लगी हुई थी और हरिया अभी तक गाओं में hi अपने बुड्ढे दोस्तों के साथ गप्पे हक रहा था
थोड़ी hi देर में राजू भी घर आ जाता है
राजू- दीदी मैं आ गया
नीलम पलट कर अपने भाई को देखती है और राजू की नजर सीधा उसकी दीदी के ब्लाउज पर जाती है
क्योंकि नीलम ने अपने ब्लाउज के 2 बोटों पहले से hi खोल रखे थे
ये सब नीलम के प्लान का hi हिस्सा था
नीलम राजू को नजर पकड़ लेती है
और अपने भाई के और करीब जाती है
नीलम- तो कैसा रहा मरे भाई का ोेहला दिन काम पर
राजू अभी भी अपनी दीदी की चूचियों को hi घर रहा था
नीलम- ऐसे क्या देख रहा हज खा जायेगा क्या अपनी दीदी को
इतना बोलते हुए नीलम राजू के सामने झुक कर कुछ उठाने लगती है
अब राजू के सामने उसकी दीदी की विशाल चूचियां लटक रही थी
जिसे देख कर उसके मुँह से लार टपक रही थी
नीलम अपनी तिरछी नजरो से देख रही थी की उसका भाई उसकी चूचियों को खा जाने वाली नजरो से देख रहा है
नीलम- कुछ पियेगा क्या तू राजू
राजू- है दीदी दूध
नीलम- क्या
राजू- अरे दीदी मतलब दूध वाली चाय पीला दो अपने हाथो से बना कर
मजा आ जायेगा
नीलम अबतक इतना तो समझ चुकी थी की उसे अपने छोटे भाई को पटाने के लिए ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ेगी
नीलम- चल ठीक है मैं तुझे अपने दूध की चाय बना कर पिलाती हु मतलब होने हाथ की चाय पिलाती हु तू बैठ बापू भी आते hi होंगे
राजू- दीदी बापू क्या अब रोज hi हमारे साथ सोयेंगे
नीलम- तुझे दिक्कत है क्या कोई
राजू- नहीं नहीं दीदी मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था
नीलम- भाई अब से हम तीनो साथ में hi सोयेंगे
अगर तुझे बापू से दिक्कत है तो तू झोपडी में सो जाना
राजू- नहीं दीदी मैं तो आपके पास hi सोऊंगा
नीलम- अच्छा तुझे अपनी दीदी के साथ सोना अच्छा लगता है क्या
राजू- है दीदी बड़ी अच्छी नींद आती है तुम्हारे पास सोने में
नीलम- चल अच्छा है तेरी दीदी कुछ तो काम आ रही है तेरे
थोड़ी hi देर में हरिया भी आ जाता है और नीलम अपने बापू और भाई को चाय देती है
नीलम- बापू आजतो आप पूरा दिन बहार hi रह गए मेरी याद नहीं आयी क्या जो अब खाने के समय आ रहे हो
राजू नीलम की बात सुनकर उसकी शकल देख रहा था पर अभी तक उसे कुछ अजीब नहीं लग रहा था
हरिया- है बेटी वो सब लोग बैठे थे तो वही लेत हो गया
नीलम- मुह्जे तो लगता है की इस घर में मैं सिर्फ खाना बनाने और खिलने के लिए hi हु
हरिया- अरे नहीं बेटी ऐसा क्यों कह रही है तू
तू तो हमारी जान है क्यों राजू
राजू- है दीदी हम बहुत प्यार करते है तुमसे
नीलम- दोनों करते हो या सिर्फ तू hi करता है अपनी दीदी से प्यार
राजू- दीदी आप ऐसा क्यों बोल रही हो दम दोनों आपसे प्यार करते है
. नीलम- अच्छा चल दिखा तो कितना क्यार करता है तू
इतना बोलकर नीलम होनी बहे खोल कर अपने भाई को अपने पास बुलाती है
राजू भी अपनी दीदी की तरफ खींचा जा रहा था
राजू नीलम के लगे लग जाता है इधर नीलम हरिया को आँख मार के अपने पास आने का इशारा करती है और हरिया होनी बेटी के पीछे से उसे गले लगा लेता है
राजू को थोड़ा सा अजीब तो लगता है क्योंकि हरिया पीछे से नीलम से पूरी तरह सत्ता हुआ था
पर वो इतना ध्यान नहीं देता और नीलम राजू को और जोरसे होनी और खींच लेती है इधर हरिया भी अपना लुंड नीलम की गांड में घुसाने पर तुला हुआ था
नीलम के शरीर से आ रही मादक महक से उसके बाप और भाई का लुंड पूरी तरह से खड़ा हो चुके थे
और एक उसकी गांड में और एक उसकी छूट के ऊपर उसे महसूस हो रहा था
नीलम- सच में बहुत अच्छे भाई और बापू मिले है मुझे कितना प्यार करते हो आप दोनों मुझसे
हरिया जनता था की ये सब उसकी बेटी के प्लान का hi हिस्सा है
नीलम- अह्ह्ह बापू आराम से कुछ सुबह रहा है मुझे पीछे
इतना सुनते hi हरिया की गांड फैट जाती है और वो एकदम से अपनी बेटी से अलग हो जाता है
ह्रक्य की धोती में तम्बू बन छका था उसकी बेटी से चिपकने की वजह से
राजू भी एक दम से हरिया की और देखता है और उसकी नजर उसके बाप की धोती पर जाती है
हरिया- बेटी माफ़ करदे पता नहीं कैसे
Neelam-koi बात नहीं बापू मैं जानती हु आप सुखी मत हो
राजू दोनों बाप बेटी को मुँह फाडे देख रहा था वो असल में समझने की कोशिश कर रहा था की यह चल क्या रहा है पर उसे सीधा सीधा कुछ समझ नहीं आ रहा था
नीलम एक नजर राजू पर डालती है
नीलम- और तू क्या अपनी दीदी से ऐसे hi चिपका रहेगा जैसे चन्दन से साप लिपट जाता है चल छोड़ मुझे
तेरा ये भी खड़ा हो गया है बापू की तरह और मुझे पैरो के बिच सुबह रहा है
नीलम की बात सुनकर राजू की भी गांड फैट जाती है
राजू और हरिया के अंदर अब एक दूसरे से आँखे मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी
नीलम - आप दोनों ने बहुत ल्यार दिखा लिया मुझे अब बहार जाकर बैठो मैं खाना बना कर आप दोनों को बुलाती हु
हरिया चुपचाप बहार खत पर जा कर बैठ जाता है
राजू अभी भी नीलम के पास hi खड़ा था असल में आअज ुए लग रहा था की उसकी चोरी पकड़ी गयी उसके बापू के सामने पर हरिया पर ककी फरक नहीं पड़ा था
वो जनता था की ये सब उसकी बेटी के प्लान का hi हिस्सा है
और बहुत hi जल्द उसे अपनी बेटी की रसीली छूट छोड़ने को मिलने वाली है
हरिया अंदर hi अंदर बहुत खुश था पर राजू किसी दुबिधा में था
नीलम- अरे तू भी जा बापू के पास बैठ मैं खाना बना कर बुलाती हु
राजू भी बहार खत पर आकर बैठ जाता है
अब यह से हरिया को अपना काम करना था
राजू की हिम्मत तो नहीं हो रही थी अपने बाप से आंख मिलाने की पर उसके मन में एक चीज़ बार बार आ रही थी की अपनी hi बेटी के पिछवाड़े से चिपक कर बापू का लुंड खड़ा हो गया कहि बापू भी तो मेरी तरह नीलम दीदी को छोड़ना तो नहीं कहते
राजू- बापू अब तबियत कैसी है तुम्हारी
हरिया- अब ठीक हु बीटा तेरी दीदी इतना ख्याल रखती है तो मुझे क्या होगा
राजू- बापू अभी जो हुआ उसके लिए माफ़ करदेना
हरिया- अरे बीटा माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए तू तो फिर भी जवान है अपनी बेहेन का गदराया जिस्म देख कर बहक गया पर वो तो मेरी बेटी है मैं भी अपनी hi बेटी का गदराया जिस्म देख कर फिसल गया मुझे माफ़ करदे बीटा
राजू के दिमाग में अब कई सरे सवाल एक साथ घूम रहे थे की आखिर क्यों उसका बाप बार बार अपनी hi बेटी के गदराये जिस्म का जिक्र्र कर रहा है
पर राजू भी काम हरामी नहीं था वो पहले hi सेहर की कई रंडियों को छोड़ चूका था
राजू- बापू जैसे आपके साथ हुआ वैसे hi मैं भी अपनी दीदी के बदन से आती महक को सूंघ कर बहक गया था
हरिया- कोई बास्त नहीं बीटा गलती हो गयी तो क्या दीदी है वो तेरी तुझे माफ़ कर देगी
राजू को समझ नहीं आ रहा था की आखिर उसके घर में ये चल क्या रहा है पर अब जो भी था उसे इतना पता चल चूका था की अगर वो अपनी दीदी को चुवेगा तो वो गुस्सा नहीं करेगी
राजू- बापू अब हमे कोई अच्छा सा लड़का देख कर दीदी की शादी कर देनी चाहिए
हरिया- बीटा हमारी यत्नज हैसियत नहीं है की हम कोई अच्छा लड़का देख कर तेरी दीदी की शादी कर सके
अगर लड़का मिलेगा भी तो कोई बुद्धा hi मिलेगा और वो तेरी दीदी को कभी खुस नहीं रख पायेगा
राजू को भी अब अपनी दीदी के विषय में अपने बाप से बात करने में मजा आ रहा था
राजू- पर क्यों बापू वो दीदी को खुस क्यों नहीं रख पायेगा
हरिया- अब क्या बताऊ बीटा तुझे तूने होनी दीदी का गदराया जिस्म देखा है न वो अपनी जवानी के चरम पर है उसे तो कोई हत्ता कट्टा मर्द चाहिए जो उसकी प्यास बुझा सके
राजू- है बापू दीदी पूरी तरह से गडरा गयी है उसे कोई ऐसा मर्द चाहिए जो उसे पूरा निचोड़ दे
राजू को अगले hi पल अहसास हो जाता है की वो थोड़ा ज्यादा बोल गया
राजू- माफ़ करना बापू मैंने थोड़ा ज्यादा बोल दिया
हरिया - कोई बात नहीं बीटा घर की hi बात है किसी और के सामने अपनी दीदी के बारे में ऐसी बात मत करना
और है तेरी दीदी को ऐसा hi मर्द चाहिए जो उसे निचोड़ निचोड़ कर उसे वो सुख दे सके जो आज तक उसे नहीं मिला
इतने में नीलम की आवाज आती है
नीलम- राजू आजा भाई खाना बन गया और बापू को भी ले कर आना
दोनों बाप बेटे ख़ुशी ख़ुशी उठ कर घर में चले जाते है
इधर नीलम पहले hi खाना निकल चुकी थी
तीनि बाप बेटी बैठ कर खाना खा रहे थे
नीलम को अब कोई भी शर्म नहीं थी उसने अपने ब्लाउज के 2 बोटों खोल रखे थे और अपनी दुपट्टे को भी वो पहले hi हटा चुकी थी
पसीने मि वजह से नीलम के निप्पल वाला हिस्सा साफ़ नजर आ रहा था
दोनों बाप बेटे नीलम की चूचिया देखने में व्यस्त थे
इधर नीलम भी अंदर hi अंदर खुस थी की खा वो एक लुंड के लिए जिंदगी भर तदपि थी और अब उसे घर में hi 2-2 लुंड मिलने वाले थे
हरिया और राजू बरी बरी से नीलम को देख रहे थे और जब दोनों की नजर आपस में मिलती तो दोनों मुस्कुरा देते है
नीलम को अब वो दिन दूर नहीं दिख रहा था जब उसकी छूट और गांड में एक साथ उसके बाप का और भाई का लुंड जायेगा
थोड़ी hi देर में तीनो खाना खा लेते है और हरिया बाजार टहलने चला जाता है
राजू भी जल्दी जल्दी बिस्तर लगा देता गई है
और होनी पंत और अंडरवियर उतर कर एक धोती लपेट लेता है
नीलम अभी भी काम निपटने में बिजी थी
राजू का मन कर रहा था अपनी दीदी को चुने का
नीलम के बदन से पसीना बेहटा हुआ उसके ब्लोइसे और पेटीकोट को पूरी तरह गिला कर चूका था
अपनी दीदी को इतना भीगा हुआ देख कर राजू का लुंड थोड़ी hi देर में खड़ा हो जाता है
अपनी दीदी की छोड़ी गांड देख कर राजू जैसे पागल हुआ जा रहा था
राजू अभी तक खत पर hi बैठा हुआ था उसके मन में यही चल रहा था की अभी दीदी को पीछे से पकड़ लू
तभी नीलम उसके पास आती है और अपनी गांड उसकी तरफ घुमा कर एक hi पल में झुक जाती है
नीलम की दोनों गांड खुल कर एक दम से राजू के सामने आ जाती है
राजू ये नजारा देख कर ोागल सा हो जाता है
राजू होनी नाक को थोड़ा सा आगे बढ़ा कर नीलम की गांड के करीब ले जाता है और थोड़ी दूर से hi अपनी दीदी की गांड से आती मादक महक को सूंघने लगता है
राजू की गरम सांसे नीलम को होनी गांड ओर साफ़ महसूस हो रही थी वो जानती थी की उसका भाई क्या कर रहा है
नीलम को भी ये देख कर मजा आ रहा था की कैसे उसका छोटा भाई उसकी गांड से आ रही महक को मजे लेजर सूंघ रहा है
अच्चानक से नीलम आगे की और गिरने का नाटक करती है
और राजू तुरंत खड़ा होता हुआ अपनी दीदी की कमर को थम लेता है
ये सब इतना जल्दी हुआ की राजू ने ध्यान hi नहीं दिया की उसका लुंड खा है
राजू जैसे hi नीलम को पकड़ता है उसका लुंड सीधा पेटीकोट के ुवार से hi उसकी दीदी की गांड में घुस जाता है
नीलम अपने भाई का लुंड अपनी गांड के बिच महसूस करके मस्त हो जाती है
राजू को जब होश आता है जब उसे अपना लुंड किसी चीज़ के बिच में फसे होने का अहसास होता है
नीलम अभी तक झुकी hi हुई थी
राजू बिना हिले नीलम को ऐसे hi पकड़े हुआ था
नीलम आगे से सम्भलती हुई खड़ी होती है
नीलम- शुक्र है भाई तूने संभाल लिया अपनी दीदी को
राजू- है दीदी नहीं तो तुम दिर जाती
नीलम- कूटना अच्छा भाई है तू अपनी दीदी को ऐसे hi संभाले रखना भाई
राजू- दीदी आप जब जब गिरेगी ाओंका ये छोटा भाई आपको ऐसे hi संभाल लेगा
नीलम- बता तो कैसे संभालेगा
राजू भी अब तक जोश में आ चूका था
वो नीलम की पीठ को पकड़ते हुए थोड़ा धक्का देता है और अगले hi पल एक करारा झटका मरते हुए होने लुंड पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी दीदी की गांड में थुश देता है
नीलम- हैय्येई मैय्यिया ये क्या दाल दिया तूने अपनी दीदी की गांड के बीचो बिच
राजू को पता था की उसकी दीदी बुरा नहीं मानेगी
इस बार राजू नीलम को थोड़ा तेज का झटका देता है और अगले hi पल उसे दुबारा से अपनी और खींचता हुआ अपना लुंड उसकी गांड में पेल देता है
नीलम- अह्ह्ह्हह माआआआ क्या है रे ये तेरा खड़ा हो गया फिरसे अपनी दीदी की गांड के बिच में hi
इतने में hi हरिया भी घर के अंदर आ जाता है
हरिया- क्या बात है बड़ा प्यार चल रहा है भाई बेहेन के बिच
नीलम- अह्ह्ह्हह बापू तुमको पता है तुम्हारी बेटी गिरने hi वाली थी तब तक मुझे राजू ने संभाल लिया और अब ये मुझे हर बार संभाल लेगा जब जब मैं गिरूँगी
नीलम- राजू बापू को भी दिखा कैसे संभालेगा तू अपनी दीदी को
राजू को पहले तो थोड़ा दर लगता है पर अगले hi पल वो जोश में एक झटके के साथ नीलम को आगे धकेलता गई और अगले hi पल उसे वापस खींचता हुआ उसकी गांड में अपना लुंड फसा देता है
नीलम की छूट और गांड से निकलती हुई गर्मी राजू का लुंड पिघलने पर तुली हुई थी
हरिया भी दोनों भाई बेहेन को चिपका हुआ देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था
नीलम- चल अब छोड़ भी दे या रात भर अपनी दीदी को ऐसे hi पकडे रखेगा
हरिया- अरे ः राजू अभी छोड़ दे जब तेरी दीदी डिबरा गिरेगी तो फिरसे पकड़ लेना
राजू जैसे hi नीलम से अलग होता है हरिया की नजर सीधा होने बड़े के लुंड पर पड़ती है जो बिलकुल किसी रोड की तरह सीधा खड़ा था
राजू अपने हाथ से अपने विशाल लुंड को छुपाने की नाकामियाब कोशिश कर रहा था जब उसकी नजर अपने बाप से मिलती है तो वो अपनी आँखे निचे कर लेता है
वही नीलम की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था
नीलम भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी ....
शाम के 5 बज चुके थे नीलम घर के कामो में लगी हुई थी और हरिया अभी तक गाओं में hi अपने बुड्ढे दोस्तों के साथ गप्पे हक रहा था
थोड़ी hi देर में राजू भी घर आ जाता है
राजू- दीदी मैं आ गया
नीलम पलट कर अपने भाई को देखती है और राजू की नजर सीधा उसकी दीदी के ब्लाउज पर जाती है
क्योंकि नीलम ने अपने ब्लाउज के 2 बोटों पहले से hi खोल रखे थे
ये सब नीलम के प्लान का hi हिस्सा था
नीलम राजू को नजर पकड़ लेती है
और अपने भाई के और करीब जाती है
नीलम- तो कैसा रहा मरे भाई का ोेहला दिन काम पर
राजू अभी भी अपनी दीदी की चूचियों को hi घर रहा था
नीलम- ऐसे क्या देख रहा हज खा जायेगा क्या अपनी दीदी को
इतना बोलते हुए नीलम राजू के सामने झुक कर कुछ उठाने लगती है
अब राजू के सामने उसकी दीदी की विशाल चूचियां लटक रही थी
जिसे देख कर उसके मुँह से लार टपक रही थी
नीलम अपनी तिरछी नजरो से देख रही थी की उसका भाई उसकी चूचियों को खा जाने वाली नजरो से देख रहा है
नीलम- कुछ पियेगा क्या तू राजू
राजू- है दीदी दूध
नीलम- क्या
राजू- अरे दीदी मतलब दूध वाली चाय पीला दो अपने हाथो से बना कर
मजा आ जायेगा
नीलम अबतक इतना तो समझ चुकी थी की उसे अपने छोटे भाई को पटाने के लिए ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ेगी
नीलम- चल ठीक है मैं तुझे अपने दूध की चाय बना कर पिलाती हु मतलब होने हाथ की चाय पिलाती हु तू बैठ बापू भी आते hi होंगे
राजू- दीदी बापू क्या अब रोज hi हमारे साथ सोयेंगे
नीलम- तुझे दिक्कत है क्या कोई
राजू- नहीं नहीं दीदी मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था
नीलम- भाई अब से हम तीनो साथ में hi सोयेंगे
अगर तुझे बापू से दिक्कत है तो तू झोपडी में सो जाना
राजू- नहीं दीदी मैं तो आपके पास hi सोऊंगा
नीलम- अच्छा तुझे अपनी दीदी के साथ सोना अच्छा लगता है क्या
राजू- है दीदी बड़ी अच्छी नींद आती है तुम्हारे पास सोने में
नीलम- चल अच्छा है तेरी दीदी कुछ तो काम आ रही है तेरे
थोड़ी hi देर में हरिया भी आ जाता है और नीलम अपने बापू और भाई को चाय देती है
नीलम- बापू आजतो आप पूरा दिन बहार hi रह गए मेरी याद नहीं आयी क्या जो अब खाने के समय आ रहे हो
राजू नीलम की बात सुनकर उसकी शकल देख रहा था पर अभी तक उसे कुछ अजीब नहीं लग रहा था
हरिया- है बेटी वो सब लोग बैठे थे तो वही लेत हो गया
नीलम- मुह्जे तो लगता है की इस घर में मैं सिर्फ खाना बनाने और खिलने के लिए hi हु
हरिया- अरे नहीं बेटी ऐसा क्यों कह रही है तू
तू तो हमारी जान है क्यों राजू
राजू- है दीदी हम बहुत प्यार करते है तुमसे
नीलम- दोनों करते हो या सिर्फ तू hi करता है अपनी दीदी से प्यार
राजू- दीदी आप ऐसा क्यों बोल रही हो दम दोनों आपसे प्यार करते है
. नीलम- अच्छा चल दिखा तो कितना क्यार करता है तू
इतना बोलकर नीलम होनी बहे खोल कर अपने भाई को अपने पास बुलाती है
राजू भी अपनी दीदी की तरफ खींचा जा रहा था
राजू नीलम के लगे लग जाता है इधर नीलम हरिया को आँख मार के अपने पास आने का इशारा करती है और हरिया होनी बेटी के पीछे से उसे गले लगा लेता है
राजू को थोड़ा सा अजीब तो लगता है क्योंकि हरिया पीछे से नीलम से पूरी तरह सत्ता हुआ था
पर वो इतना ध्यान नहीं देता और नीलम राजू को और जोरसे होनी और खींच लेती है इधर हरिया भी अपना लुंड नीलम की गांड में घुसाने पर तुला हुआ था
नीलम के शरीर से आ रही मादक महक से उसके बाप और भाई का लुंड पूरी तरह से खड़ा हो चुके थे
और एक उसकी गांड में और एक उसकी छूट के ऊपर उसे महसूस हो रहा था
नीलम- सच में बहुत अच्छे भाई और बापू मिले है मुझे कितना प्यार करते हो आप दोनों मुझसे
हरिया जनता था की ये सब उसकी बेटी के प्लान का hi हिस्सा है
नीलम- अह्ह्ह बापू आराम से कुछ सुबह रहा है मुझे पीछे
इतना सुनते hi हरिया की गांड फैट जाती है और वो एकदम से अपनी बेटी से अलग हो जाता है
ह्रक्य की धोती में तम्बू बन छका था उसकी बेटी से चिपकने की वजह से
राजू भी एक दम से हरिया की और देखता है और उसकी नजर उसके बाप की धोती पर जाती है
हरिया- बेटी माफ़ करदे पता नहीं कैसे
Neelam-koi बात नहीं बापू मैं जानती हु आप सुखी मत हो
राजू दोनों बाप बेटी को मुँह फाडे देख रहा था वो असल में समझने की कोशिश कर रहा था की यह चल क्या रहा है पर उसे सीधा सीधा कुछ समझ नहीं आ रहा था
नीलम एक नजर राजू पर डालती है
नीलम- और तू क्या अपनी दीदी से ऐसे hi चिपका रहेगा जैसे चन्दन से साप लिपट जाता है चल छोड़ मुझे
तेरा ये भी खड़ा हो गया है बापू की तरह और मुझे पैरो के बिच सुबह रहा है
नीलम की बात सुनकर राजू की भी गांड फैट जाती है
राजू और हरिया के अंदर अब एक दूसरे से आँखे मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी
नीलम - आप दोनों ने बहुत ल्यार दिखा लिया मुझे अब बहार जाकर बैठो मैं खाना बना कर आप दोनों को बुलाती हु
हरिया चुपचाप बहार खत पर जा कर बैठ जाता है
राजू अभी भी नीलम के पास hi खड़ा था असल में आअज ुए लग रहा था की उसकी चोरी पकड़ी गयी उसके बापू के सामने पर हरिया पर ककी फरक नहीं पड़ा था
वो जनता था की ये सब उसकी बेटी के प्लान का hi हिस्सा है
और बहुत hi जल्द उसे अपनी बेटी की रसीली छूट छोड़ने को मिलने वाली है
हरिया अंदर hi अंदर बहुत खुश था पर राजू किसी दुबिधा में था
नीलम- अरे तू भी जा बापू के पास बैठ मैं खाना बना कर बुलाती हु
राजू भी बहार खत पर आकर बैठ जाता है
अब यह से हरिया को अपना काम करना था
राजू की हिम्मत तो नहीं हो रही थी अपने बाप से आंख मिलाने की पर उसके मन में एक चीज़ बार बार आ रही थी की अपनी hi बेटी के पिछवाड़े से चिपक कर बापू का लुंड खड़ा हो गया कहि बापू भी तो मेरी तरह नीलम दीदी को छोड़ना तो नहीं कहते
राजू- बापू अब तबियत कैसी है तुम्हारी
हरिया- अब ठीक हु बीटा तेरी दीदी इतना ख्याल रखती है तो मुझे क्या होगा
राजू- बापू अभी जो हुआ उसके लिए माफ़ करदेना
हरिया- अरे बीटा माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए तू तो फिर भी जवान है अपनी बेहेन का गदराया जिस्म देख कर बहक गया पर वो तो मेरी बेटी है मैं भी अपनी hi बेटी का गदराया जिस्म देख कर फिसल गया मुझे माफ़ करदे बीटा
राजू के दिमाग में अब कई सरे सवाल एक साथ घूम रहे थे की आखिर क्यों उसका बाप बार बार अपनी hi बेटी के गदराये जिस्म का जिक्र्र कर रहा है
पर राजू भी काम हरामी नहीं था वो पहले hi सेहर की कई रंडियों को छोड़ चूका था
राजू- बापू जैसे आपके साथ हुआ वैसे hi मैं भी अपनी दीदी के बदन से आती महक को सूंघ कर बहक गया था
हरिया- कोई बास्त नहीं बीटा गलती हो गयी तो क्या दीदी है वो तेरी तुझे माफ़ कर देगी
राजू को समझ नहीं आ रहा था की आखिर उसके घर में ये चल क्या रहा है पर अब जो भी था उसे इतना पता चल चूका था की अगर वो अपनी दीदी को चुवेगा तो वो गुस्सा नहीं करेगी
राजू- बापू अब हमे कोई अच्छा सा लड़का देख कर दीदी की शादी कर देनी चाहिए
हरिया- बीटा हमारी यत्नज हैसियत नहीं है की हम कोई अच्छा लड़का देख कर तेरी दीदी की शादी कर सके
अगर लड़का मिलेगा भी तो कोई बुद्धा hi मिलेगा और वो तेरी दीदी को कभी खुस नहीं रख पायेगा
राजू को भी अब अपनी दीदी के विषय में अपने बाप से बात करने में मजा आ रहा था
राजू- पर क्यों बापू वो दीदी को खुस क्यों नहीं रख पायेगा
हरिया- अब क्या बताऊ बीटा तुझे तूने होनी दीदी का गदराया जिस्म देखा है न वो अपनी जवानी के चरम पर है उसे तो कोई हत्ता कट्टा मर्द चाहिए जो उसकी प्यास बुझा सके
राजू- है बापू दीदी पूरी तरह से गडरा गयी है उसे कोई ऐसा मर्द चाहिए जो उसे पूरा निचोड़ दे
राजू को अगले hi पल अहसास हो जाता है की वो थोड़ा ज्यादा बोल गया
राजू- माफ़ करना बापू मैंने थोड़ा ज्यादा बोल दिया
हरिया - कोई बात नहीं बीटा घर की hi बात है किसी और के सामने अपनी दीदी के बारे में ऐसी बात मत करना
और है तेरी दीदी को ऐसा hi मर्द चाहिए जो उसे निचोड़ निचोड़ कर उसे वो सुख दे सके जो आज तक उसे नहीं मिला
इतने में नीलम की आवाज आती है
नीलम- राजू आजा भाई खाना बन गया और बापू को भी ले कर आना
दोनों बाप बेटे ख़ुशी ख़ुशी उठ कर घर में चले जाते है
इधर नीलम पहले hi खाना निकल चुकी थी
तीनि बाप बेटी बैठ कर खाना खा रहे थे
नीलम को अब कोई भी शर्म नहीं थी उसने अपने ब्लाउज के 2 बोटों खोल रखे थे और अपनी दुपट्टे को भी वो पहले hi हटा चुकी थी
पसीने मि वजह से नीलम के निप्पल वाला हिस्सा साफ़ नजर आ रहा था
दोनों बाप बेटे नीलम की चूचिया देखने में व्यस्त थे
इधर नीलम भी अंदर hi अंदर खुस थी की खा वो एक लुंड के लिए जिंदगी भर तदपि थी और अब उसे घर में hi 2-2 लुंड मिलने वाले थे
हरिया और राजू बरी बरी से नीलम को देख रहे थे और जब दोनों की नजर आपस में मिलती तो दोनों मुस्कुरा देते है
नीलम को अब वो दिन दूर नहीं दिख रहा था जब उसकी छूट और गांड में एक साथ उसके बाप का और भाई का लुंड जायेगा
थोड़ी hi देर में तीनो खाना खा लेते है और हरिया बाजार टहलने चला जाता है
राजू भी जल्दी जल्दी बिस्तर लगा देता गई है
और होनी पंत और अंडरवियर उतर कर एक धोती लपेट लेता है
नीलम अभी भी काम निपटने में बिजी थी
राजू का मन कर रहा था अपनी दीदी को चुने का
नीलम के बदन से पसीना बेहटा हुआ उसके ब्लोइसे और पेटीकोट को पूरी तरह गिला कर चूका था
अपनी दीदी को इतना भीगा हुआ देख कर राजू का लुंड थोड़ी hi देर में खड़ा हो जाता है
अपनी दीदी की छोड़ी गांड देख कर राजू जैसे पागल हुआ जा रहा था
राजू अभी तक खत पर hi बैठा हुआ था उसके मन में यही चल रहा था की अभी दीदी को पीछे से पकड़ लू
तभी नीलम उसके पास आती है और अपनी गांड उसकी तरफ घुमा कर एक hi पल में झुक जाती है
नीलम की दोनों गांड खुल कर एक दम से राजू के सामने आ जाती है
राजू ये नजारा देख कर ोागल सा हो जाता है
राजू होनी नाक को थोड़ा सा आगे बढ़ा कर नीलम की गांड के करीब ले जाता है और थोड़ी दूर से hi अपनी दीदी की गांड से आती मादक महक को सूंघने लगता है
राजू की गरम सांसे नीलम को होनी गांड ओर साफ़ महसूस हो रही थी वो जानती थी की उसका भाई क्या कर रहा है
नीलम को भी ये देख कर मजा आ रहा था की कैसे उसका छोटा भाई उसकी गांड से आ रही महक को मजे लेजर सूंघ रहा है
अच्चानक से नीलम आगे की और गिरने का नाटक करती है
और राजू तुरंत खड़ा होता हुआ अपनी दीदी की कमर को थम लेता है
ये सब इतना जल्दी हुआ की राजू ने ध्यान hi नहीं दिया की उसका लुंड खा है
राजू जैसे hi नीलम को पकड़ता है उसका लुंड सीधा पेटीकोट के ुवार से hi उसकी दीदी की गांड में घुस जाता है
नीलम अपने भाई का लुंड अपनी गांड के बिच महसूस करके मस्त हो जाती है
राजू को जब होश आता है जब उसे अपना लुंड किसी चीज़ के बिच में फसे होने का अहसास होता है
नीलम अभी तक झुकी hi हुई थी
राजू बिना हिले नीलम को ऐसे hi पकड़े हुआ था
नीलम आगे से सम्भलती हुई खड़ी होती है
नीलम- शुक्र है भाई तूने संभाल लिया अपनी दीदी को
राजू- है दीदी नहीं तो तुम दिर जाती
नीलम- कूटना अच्छा भाई है तू अपनी दीदी को ऐसे hi संभाले रखना भाई
राजू- दीदी आप जब जब गिरेगी ाओंका ये छोटा भाई आपको ऐसे hi संभाल लेगा
नीलम- बता तो कैसे संभालेगा
राजू भी अब तक जोश में आ चूका था
वो नीलम की पीठ को पकड़ते हुए थोड़ा धक्का देता है और अगले hi पल एक करारा झटका मरते हुए होने लुंड पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी दीदी की गांड में थुश देता है
नीलम- हैय्येई मैय्यिया ये क्या दाल दिया तूने अपनी दीदी की गांड के बीचो बिच
राजू को पता था की उसकी दीदी बुरा नहीं मानेगी
इस बार राजू नीलम को थोड़ा तेज का झटका देता है और अगले hi पल उसे दुबारा से अपनी और खींचता हुआ अपना लुंड उसकी गांड में पेल देता है
नीलम- अह्ह्ह्हह माआआआ क्या है रे ये तेरा खड़ा हो गया फिरसे अपनी दीदी की गांड के बिच में hi
इतने में hi हरिया भी घर के अंदर आ जाता है
हरिया- क्या बात है बड़ा प्यार चल रहा है भाई बेहेन के बिच
नीलम- अह्ह्ह्हह बापू तुमको पता है तुम्हारी बेटी गिरने hi वाली थी तब तक मुझे राजू ने संभाल लिया और अब ये मुझे हर बार संभाल लेगा जब जब मैं गिरूँगी
नीलम- राजू बापू को भी दिखा कैसे संभालेगा तू अपनी दीदी को
राजू को पहले तो थोड़ा दर लगता है पर अगले hi पल वो जोश में एक झटके के साथ नीलम को आगे धकेलता गई और अगले hi पल उसे वापस खींचता हुआ उसकी गांड में अपना लुंड फसा देता है
नीलम की छूट और गांड से निकलती हुई गर्मी राजू का लुंड पिघलने पर तुली हुई थी
हरिया भी दोनों भाई बेहेन को चिपका हुआ देख कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था
नीलम- चल अब छोड़ भी दे या रात भर अपनी दीदी को ऐसे hi पकडे रखेगा
हरिया- अरे ः राजू अभी छोड़ दे जब तेरी दीदी डिबरा गिरेगी तो फिरसे पकड़ लेना
राजू जैसे hi नीलम से अलग होता है हरिया की नजर सीधा होने बड़े के लुंड पर पड़ती है जो बिलकुल किसी रोड की तरह सीधा खड़ा था
राजू अपने हाथ से अपने विशाल लुंड को छुपाने की नाकामियाब कोशिश कर रहा था जब उसकी नजर अपने बाप से मिलती है तो वो अपनी आँखे निचे कर लेता है
वही नीलम की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था
नीलम भी मंद मंद मुस्कुरा रही थी ....
