Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 9 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-79

दुअरी तरफ .......

इधर रेखा अपनी दीदी को चरमसुख का आनंद दे चकली थी इधर उसकी छोटी बेहेन एक आस के साथ रवि के खेतो की और बढ़ रही थी मनो आज कम्मो के दिमाग में कुछ अजीब hi चल रहा था वो रवि को किसी भी कीमत पर हासिल करना कहती थी

दूर से hi कम्मो को अपना छोटा भाई खेतो में हल चलता हुआ दिखाई पड़ता है

कम्मो के चेहरे पर रवि को देख कर मुस्कान आ जाती है और वो बड़े बड़े कदमो के साथ रवि की और बढ़ने लगती है

कम्मो- अरे ू भाई आकर खाना खले कितनी म्हणत करेगा तू

रवि भी अपनी कम्मो दीदी की बात सुनकर खाना खाने के लिए अपनी झोपडी की तरफ जाने लगता है

कम्मो रवि के पहुंचने से पहले hi दोनों का खाना निकल चुकी थी

रवि- अरे दीदी आज 2-2 थाली में खाना क्यों निकला है

कम्मो- तुझे तो अपनी इस दीदी से जैसे कोई मतलब hi नहीं तो मैंने सोचा क्यों न आज दोपहर का खाना तेरे साथ hi खा लिया जाये ताकि तुझे पता चल सके की तेरी 2 दीदियो के अलावा एक और दीदी है

रवि ये तो जनता था की जब से उसने रेखा दीदी को छोड़ना शुरू किया है तबसे hi वो कम्मो दीदी से ज्यादा मिल नहीं पता और शायद इसी लिए कम्मो दीदी के कान गरम हुए पड़े है

रवि- अरे दीदी ऐसी बात नहीं है आप एक दिन पहले hi तो आयी हो

कम्मो- 2 दिन हो गए पर तू तो सिर्फ रेखा दीदी और मेघा दीदी के आगे पीछे hi घूमता रहता है मुझसे तो तूने एक बार बैठ कर बात भी नहीं की

रवि अभी तक नहीं समझ पा रहा था की उसकी दीदी को सब पता है की वो अपनी दोनों दीदियो के शरीर का कैसे मजा लूट रहा है

रवि नहीं जनता था की आज उसकी दीदी किश इरादे से उसके पास आयी है

कम्मो एक थाली को रवि के पास रख देती है और खुद खत से निचे बैठ जाती है और जैसे hi रवि खत पर आकर बैठता है उसकी नजर सीधा अपनी दीदी के तने हुए कुछो ओर पड़ती है जोकि आधे से ज्यादा नंगी थी

कम्मो तो आज जैसे घर से hi सब प्लान बना कर आयी थी की रवि को कब और क्या दिखाना है

कम्मो का ब्लाउज भी काफी डीप गले का था

जैसे hi कम्मो की नजरे रवि से टकराती है वो समझ जाती है की कैसे उसका छोटा भाई उसकी चूचियों को खा जाने वाली नजरो से घर रहा है

कम्मो तुरंत hi अपना दुपट्टा सही करते हुए अपनी छाती को धक् देती है और रवि का ध्यान एक दम से टूटा है

कम्मो- ऐसे क्या घर रहा है तू चल चुप चाप खाना खा

रवि भी चुपचाप गर्दन निचे लटककर एक निवाला तोड़ता है और अपने मुँह तक ले जाता है तभी कम्मो एक और दव्व चलती है और अपने दोनों पैरो को आगे बढ़ा कर सीधा कर देती है और उसका पेटीकोट उसके घुटनो से निचे सरकता हुआ गिर जाता है

रवि की तो जैसे हालत hi तीते हो जाती है उसके हाथ से निवाला निचे गिर्र जाता है और वो एक पल के लिए अपनी दीदी की गोरी गोरी टैंगो का मुरीद हो जाता है

रवि का लुंड एक झटके में hi आधे से पूरा खड़ा हो जाता है

होता भी क्यों न कम्मो की गुदाज टंगे जोकि एकदम गोरी बालो का कहि कोई निशान नहीं एक दम दूध की तरह सफ़ेद कोई भी मर्द देख कर पागल हो जाता

कम्मो तुरंत hi अपना पेटीकोट खींच कर सही कर देती है

और दोनों चुपचाप खाना खाने लगते है

कम्मो मन hi मन काफी खुश थी क्योंकि वो रवि के चेहरे के एक्सप्रेशन देख कर समझ गयी थी की उसने जिस इरादे से अपने भाई को अपना जिस्म दिखया है वो सफल हुआ है

रवि को पता था की आज नहीं तो कल वो कम्मो दीदी को भी छोड़ेगा पर वो ये नहीं जनता था की आज वो अपनी दीदी के बनाये हुए जाल में फास्ट hi जायेगा

दोनों भाई बेहेन अब तक खाना खा चुके थे

रवि- दीदी आप एक काम करो घर चली जाओ मुझे आज बहुत काम है खेतो में

कम्मो- नहीं हम दोनों साथ में hi चलेंगे

रवि- ठीक है दीदी फिर एक काम करो आप न इधर खत पर लेत जाओ मैं तब तक काम करके आता हु

कम्मो- चल ठीक है तू जा मैं यही लेती हु

रवि एक नजर अपनी दीदी की जवानी को घूरता है और वापस से हल चलने चला जाता है

कम्मो भी लेती लेती रवि की और hi देख रही थी और उसे रवि का मरदाना जिस्म धुप में चमकता हुआ साफ़ दिखाई दे रहा था जिसे डेल्ह कर न जाने क्यों कम्मो की छूट लगातार पानी चोदे जा रही थी

लेते लेते न जाने कम्मो की कब आँख लग जाती है और जब उसकी आँख खुलती है तो काफी अँधेरा hi चूका था अब तक रवि भी झोपडी में सब समान रख चूका था और अब अपनी दीदी को जगाने hi जा रहा था

इधर कम्मो खुद भी यही कहती थी की उसका छोटा भाई खुद hi उसे जगाये

कम्मो दुबारा से आँखे बंद कर लेती है

इधर रवि अपनी दीदी के पास पहुंचते hi बिना किसी हरकत के अपनी दीदी को ऊपर से निचे तक्क घूरने लगता है और वो समझ रहा था की अभी टक्क उसकी दीदी सोई हुई है तो वो थोड़ा फायदा उठाने के चक्कर में था

इधर कम्मो रवि की साडी हरकते चोरी चोरी देख रही थी

रवि अपने सर को निचे ले जाता हुआ सीधा अपनी दीदी की छूट पर ले जाता है और दुर्र से hi जोरदार तरिके से सनस खींचता हुआ कम्मो की छूट की खुसबू को सूंघने की कोशिश करता है

कम्मो अपने छोटे भाई की हरकट देख कर अंदर तक्क सिहर हटी है और उसकी सुखी हुई छूट एक बार फिरर पानी छोड़ना शुरू लार देती है

रवि का मैं इतने से नहीं भरता वो तुरंत hi अपना मुह्ह कम्मो दीदी की छूट के ऊपर रख देता है और अपनी नाक को अपनी दीदी की छूट में घुसा कर अपनी दीदी की जवानी की खुसबू सूंघने लगता है

कम्मो को एक के बाद एक झटके लग्ग रहे थे वो समझ hi नहीं पा रही थी की रवि का अगला कदम क्या होगा रवि तो अपनी दीदी से भी एक कदम आगे निकला था

कम्मो की छूट तो आज दिन भर पानी छोड़ती रही थी जिसका फलिस वक़्त रवि को मिल रहा था

अपनी दीदी की छूट को पेटीकोट के ऊपर से hi सूंघ कर रवि का दिमाग खराब हो गया था उसका लुंड मनो फटने को हो रहा था

कम्मो की छूट इतनी मादक महक छोड़ रही थी की रवि अगर एक पल और उसे सूंघता तो मनो वो अपना आप खो देता

एक hi पल में रवि अपना मुह्ह हटा लेता है और जोरदार सांसे लेता हुआ कम्मो दीदी के चेहरे को देखने लगता है

रवि के दिम्माग में हजारो सवाल चल रहे थे क्योंकि आज तक्क वो छूट के लिए कभी तड़पा नहीं था पर इस वक़्त उसे ऐसा लग रहा थस की अभी अपनी दीदी को यही पटक कर छोड़ दे पर वो जनता था की कम्मो दीदी अगर एक बार गुस्सा हो गयी तो दुबारा जल्दी उसके निचे नहीं आने वाली

करीब 5 मं बाद दोनों भाई बेहेन की हालत थोड़ी ठीक होती है

रवि- दीदी उठो देखो शाम हो गयी

दीदी डीडीडीईई उठ जाओ

कम्मो तो जैसे आज उठने के लिए तैयार hi नहीं थी

अगले hi पल रवि अपने हाथ को कम्मो की बड़ी बड़ी चुकी पर रख देता है और कम्मो की तो मनो साँस hi अटक जाती है

अपनी दीदी की चुकी को जोरसे मसलते हुए रवि एक बार फिर से वजा लगता है

आज पहली बार कम्मो की ुनचुइ चुकी को उसके छोटे भाई ने चुवा था

कम्मो एक झटके में hi उठ कर बैठ जाती है और रवि भी तुरंत hi अपना हाथ हटा लेता है

रवि- क्या हुआ दीदी बड़ी गहरी नींद में सोई थी आपतो

कम्मो- मुझे ऐसा लगा जैसे किसीने जोरसे मेरी छाती पकड़ ली हो

छाती तो सच में पकड़ी गयी थी ये तो दोनों जानते थे पर नाटक करना भी तो जरूरी था

रवि- दीदी यह मेरे अलावा और कोण है और मैं अपनी दीदी की छाती को क्यों दबाने लगा

जरूर आपने कोई सपना देखा होगा

कम्मो- है हो सकता है चल घर चलते है

रवि- ः दीदी चलो नहीं तो आप दुबारा सो जाओगी

कम्मो- है और अगर सो गयी तू अपनी इस भरी भरकम दीदी को उठा कर लेजाना घर

दोनों भाई बेहेन हस्ते हुए घर की और निकल जाते है ......
 
अपडेट-80

दोनों भाई बेहेन एक साथ घर की और बैश चले थे

रवि अपनी दीदी के पीछे पीछे चलता हुआ कम्मो दीदी की मतवाली गांड के पुरे नजारे ले रहा था इधर कम्मो भी जानती थी की उसके छोटे भाई की नजर इस वक़्त उसकी गांड पर है और वो लहुड भी कुछ ज्यादा hi मटक मटक कर चल रही थी

ताकि रवि असल में जान पाए की कम्मो का शरीर भी उसकी दोनों दीदियो से बढ़ कर है

और ये बात तो खुद रवि भी आज कम्मो दीदी की छूट को सूंघ कर जान चला था

कम्मो- अरे रवि तू एक काम कर तू घर चल मैं नीलम दीदी के घर हो कर आती हु

रवि- नहीं दीदी चलो मैं भी साथ में चलता हु

कम्मो- अरे तू चल न मैं 5 मिंट में आती हु

रवि- दीदी अगर मैं तुम्हारे बिना घर गया तो रेखा दीदी मुझे कच्चा चबा जाएँगी मैं तुमको ले कर hi घर जाऊंगा

यह कम्मो अंदर hi अंदर रवि को गालिया दे रही थी क्योंकि असल में उसका राजू के साथ चक्कर चल रहा था और कम्मो आज अपने आशिक़ से मिलने के मदद में थी

वैसे तो रवि हमेशा hi जुगाड़ में रहता था कम्मो को छोड़ने के पर हमारी कम्मो भी कुछ काम नहीं थी उसने बस 1-2 बार hi राजू से अपनी चूचिया मसलवायी थी बाकि तो उसने कभी राजू को चुने भी नहीं दिया था

कम्मो- चल ठीक है तू नहीं मानेगा तो तू भी चल

दोनों धीरे धीरे चलते हुए नीलम के घर के करीब पहुंच जाते है

शाम का वक़्त था तो कम्मो जानती थी की राजू घर पर hi होगा

अभी रवि दरवाजे की तरफ बढ़ hi रहा था की कम्मो उसे रोक देती है

रवि- क्या हुआ दीदी

कम्मो- चल पीछे की खिड़की से देखते है की रजऊ मतलब नीलम दीदी क्या कर रही है

रवि- क्यों दीदी आगे के दरवाजे से चलते है ना

कम्मो- जितना बोल रही हु उतना hi सुन्न समझा

रवि चुपचाप अपनी दीदी के पिछवाड़े के पीछे पीछे चलने लगता है

और दोनों भाई बेहेन थोड़ी सी म्हणत करने के बाद नीलम के घर की पिछली खिड़की तक्क पहुंच जाते है

और जैसे hi नीलम खिड़की से अंदर झांक कर देखती है उसका कलेजा मुह्ह को आ जाता है

कम्मो की आँखे मनो बहार hi आने वाली थी

िडजर रवि भी अपना आँखों से अंदर झाँकने लगता है और वो भी एक पल की लिए मनो वही जम्म जाता है

अंदर का नजारा यह था की

नीलम दीदी अपनी दोनों टैंगो को फैलाये हुए अपने हाथो से पकड़े हुए थी और उसका छोटा भाई राजू अपनी जीभ को बहार निकलता हुआ अपनी दीदी की गांड और छूट को एक साथ छत्त रहा था

कम्मो का तो पता नहीं पर अपने हीरो का लुंड यह नजारा देख कर खडाहो जाता है

आखिर वो भी तो रोज रेखा दीदी के साथ यही करता था

कम्मो की भी हालत खराब थी उसे समझ नहीं आ रहा था की आखिर ये हो क्या रहा है नीलम दीदी अपने hi भाई से अपनी छूट और गांड चटवा रही है

कम्मो का थोड़ा सा पेअर फिसलता है तभी उसे तुरंत रवि पीछे से थम लेता है और जिसका डर था वही होता है रवि का विशाल लुंड एक झटके में hi कम्मो की गांड में पेटीकोट के ऊपर से hi घुस जाता है

कम्मो की तो जैसे हालत hi टाइट हो जाती है

रवि के दोनों हाथो ने उसकी दीदी की नंगी कमर को थमा हुए थे और वो अपने हाथो से कम्मो दीदी की नाजुक कमर को बड़े hi प्यार से लगातार मसले जा रहा था

बड़े hi आराम से रवि अपने मुह्ह को कम्मो दीदी के कानो के पास लेजाता है

और जैसे hi कम्मो को अपनी गर्दन पर रवि की गरम सांसे महसूस होती है वो अंडरर तक सिहर जाती है

रवि- दीदी ये रज्जुऊ क्या कर रहा है नीलम दीदी के सठह

कम्मो को समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या जवाब दे

इधर रवि एक मंजगे हुए खिलाडी की तरह एक जोरदार झटके के साथ अपनी दीदी को याद दिला देता है की उसका लुंड अभी भी उसकी गांड में फसा हुआ था

एक बार फिरर कम्मो का बैलेंस बिगड़ता है और इस बार रवि एक कदम और आगे बढ़ता हुआ सीधा कम्मो दीदी की बड़ी बड़ी चूचियों को थम लेता है

कम्मो की तो जैसे हालत hi खराब हो जाती है

रवि- देखो दीदी मैं आपको गिरने से बचा लिया

इतना बोलते हुए रवि एक बार अपनी दीदी की दोनों चूचियों को बड़े hi मादक अंदाज में मसल देता है

कम्मो की आँखे बन्द्द हो जाती है और उसके मुह्ह से एक दबी हुई अह्ह्ह निकल जाती है

रवि कोई जल्दबाज़ी नहीं लरना कहता था क्योंकि वो जनता था की जिसकी गांड में वो अपना लुंड फसाये खड़ा है वो और कोई नहीं बल्कि उसकी सबसे छोटी दीदी है

रवि अपना मासूम पना दिखते हुए बोलता है

रवि- दीदी ये राजू नीलम दीदी की नुन्नी को क्यों चाट रहा है और नीलम दीदी पूरी नंगी क्यों है

अभी कम्मो कुछ बोलती उससे पहले hi राजू खड़ा होता है और अपनी दीदी के बालो को पकड़ता हुआ उसे घुटनो के बल बैठा देता है

कम्मो की आँखे बड़ी बड़ी हो जाती है वो देखना कहती थी की अब राजू अपनी दीदी के साथ क्या करने वाला है क्योंकि आज नहीं तो कल कम्मो भी अपने छोटे भाई के साथ यही सबब करना कहती थी

इधर रवि भी अपनी कमर को बड़े hi होल होल चलता हुआ अपनी दीदी की गांड को पेटीकोट के ऊपर से hi छोड़ने में लगा था

अब राजू अपने विकराल लुंड को हाथो में थामे हुए अपनी दीदी के होठो पर रगड़ रहा था और देखते hi देखते उसने एक hi झटके में अपना पूरा का पूरा लुंड नीलम के मुह्ह में उतार दिया

रवि तो मनो ये सबब देख कर अपना आप hi खोता जा रहा था उसकी रफ़्तार भी काफी हद्द तक बढ़ चुकी थी और इधर कम्मो की छूट भी लगातार पानी चोदे जा रही थी जिसकी गर्मी की वजह से उसका छोटा भाई ोागल हुआ जा रहा था

दोनों तरफ भाई अपनी दीदियो की सेवा करने में लगे थे की तभी बहार का दरवाजा खुलता है और अच्चानक से हरिया कमरे में आजाता है

कम्मो की नजर जैसे hi हरिया पर पड़ती है उसके मन में सबसे पहला ख्याल यही आता है की अब तो नीलम दीदी की खैर नहीं

और होता भी यही है कमरे में घुसते घुसते hi हरिया अपनी धोती को भी उतर देता है

हरिया- अरे तुम दोनों अपने बाप के बिना hi चालू हो गया

नीलम- बापू मैंने तो इस कमीने को बोलै था की बापू के आने तक्क ृक्क जा पर ये मन hi नहीं और मुझे तब्ब से अपना लुंड चुसये जा रहा है

कम्मो को यकीन नहीं हो रहा था की खा वो एक लुंड के लिए तरस रही है और खा ये मोती काली नीलम 2-2 लुंड का मजा लूट रही है वोभी अपने भाई और बाप का

Neelam-bapu आज क्या मरना कहोगे अपनी बेटी की छूट या गण्ड

हरिया- सच में बेटी हो तो तेरे जैसी आज तो मेरी तेरी ये मस्तवाली गांड hi मरूंगा बेटी इतना बोलते हुए हरिया पास पड़े तेल को अपने लुंड ओर अच्छे से मसलने लगता है

रवि- दीदी ये हरिया काका भी अपनी नुन्नी पर तेल रगड़ रहे है मुझे समझ नहीं आ रहा की आखिर ये दोनों अब नीलम दीदी के साथ करने क्या वाले है

कम्मो- अह्ह्ह जो भी करने वाले हो पारर मुझे लगता है की आज नीलम दीदी की खैर नहीं

रवि- वो कैसे दीदी

कम्मो- देख रहा है न तू खुद hi देख ले

इस बार रवि थोड़ा सा ोीचे होता हुआ अपनी धोती को साइड में करता हुआ अपना लुंड बहार निकल लेता है और अभी कम्मो पलट कर उसे द्केहती उससे पहले hi वो जोरदार झटके के साथ दुबारा से अपना लुंड अपनी दीदी की गांड में पेल देता है

इस बार कम्मो को रवि के पुरे लुंड का अहसास हो रहा था और वो समझ चुकी थी की रवि ने अपनी धोती हटा दी है और इस वक़्त उन्दोनो के लुंड और गण्ड के बिच में सिर्फ उसका पेटीकोट hi है

इधर राजू जमीन पर लेत जाता है और नीलम भी तुरंत hi अपने छोटे भाई की कमर पर चढ़ते हुए उसके लुंड को सीधा पकड़ कर अपनी छूट पर सताती है और गप्प से एक hi बार में राजू के लुंड पर बैठ जाती है

रवि- दीदी देखा आपने राजू की नुन्नी को कैसे नीलम दीदी की नुन्नी ने अपने अंदर घुसा लिया

रवि लगातार अपनी दीदी के चुके मसाले जा रहा था जिसकी वजह से कम्मो के निप्पल tañn कर बिलकुल खड़े हो चुके थे और रवि भी फायदा उठता हुआ अपनी दीदी के निप्पल्स को कुरेदने में लगा हुआ था

नीलम की गांड खिड़की की तरफ hi थी और वो जोर होर से अपने छोटे भाई के लुंड के ऊपर कूड़े जा रही थी तभी हरिया आगे की और बढ़ता है और दोनों भाई बेहेन एक पल के लिए रुकते है और राजू अपनी दीदी की गांड के दोनों पतों को पकड़ कर फैला देता है और नीलम की गांड का छेद उसके बापू के सामने खुल कर आ जाता है

2-2 लुंड नीलम ले रही थी पारर हालत कम्मो की खराब हुई जा रही थी वो हर पल यही सोचती की अब आगे क्या होगा

अगले hi पल हरिया अपनी बेटी के ऊपर झुकता हुआ अपना सूपड़ा नीलम की गांड पर स्टेट हुए एक झटके के साथ hi पूरा का पूरा लुंड नीलम की गांड में उतार देता है

कम्मो यह देख कर वही खड़ी खड़ी झड़ने लगती है और उसने इस वक़्त खिड़की को इतनी जोरसे पकड़ा हुआ थक ी थोड़ी सी आवाज हो जाती है और अंदर चुदाई समारोह ृक्क जाता है

कम्मो को भी तुरंत hi अपनी गलती का अहसास होता है और वो तुरंत hi रवि का हाथ पकड़ कर वह से भाग जाती है

हरिया के बार घर के पीछे आकर देखता है और फिर घर में चला जाता है

नीलम- क्या हुआ बापू कौन था व्हा

हरिया- पता नहीं बेटी कौन था लगता है कोई जानवर hi होगा

राजू- अरे जो भी हो बापू छोड़ो न पहले आकर मेरी दीदी को छोड़ो ये तो मुझे एक भी झटका नहीं मरने दे रही बोलती है की दोनों बाप बेटो से एक साथ छुड़ेगी

हरिया- अच्छा तो ये है मेरी बेटी की इच्छा तो लो मैं अभी पूरी कर देता हुआ

और अगले hi पल हरिया दुबारा से अपना मुसल जैसा लुंड अपनी बेटी की गांड में पेल देता है

इधर कम्मो की सनसे थमने का नाम hi नहीं ले रही थी

उसके मैं में यही चल रहा था की ाकाहिर हरिया काका ने और राजू ने नीलम दीदी को कितना छोड़ा है की उन दोनों का लुंड एक hi बार में पूरा का लउरा घुस गया और नीलम को कोई फरक hi नहीं पड़ा

कम्मो समझ चुकी थी की यह खेल बहुत पहले से चल रहा है

रवि- दीदी आपने देखा हरिया काका और राजू अपनी नुन्नी को कैसे एक साथ hi नीलम दीदी के दोनों छेड़ो में दाल रहे थे

कम्मो- ः जो तूने देखा वो मैंने भी डकः

रवि- दीदी उन दोनों की नुन्नी इतनी बड़ी थी नीलम दीदी को बिलकुल दर्द्द नहीं हुआ होगा क्या

कम्मो- चल चुपचाप घर चल और सुन्न घर पर किसी से कुछ मैट कहना समझा नहीं तो तेरी ये दीदी तुझसे नाराज हो जाएगी समझा

रवि- नहीं कहूंगा दीदी पर मुझे भी तो बता दो की आखिर वो लोग नीलम दीदी के साथ कर क्या रहे था

कम्मो( जनता तो सबब है बीटा तू और मुझे hi चुटिया बना रहा है कोई बात नहीं थोड़ा और समय ृक्क फिरर मैं hi बता दूंगी की वो लोग क्या कर रहे थे नीलम दीदी के साथ)

रवि भी चुप्प हो जाता है क्योंकि वो जनता था की अगर कम्मो दीदी एक बार गुस्सा हो गयी तो उसे सपने में भी कम्मो दीदी की छूट चाटने को नहीं मिलने वाली जिसको सूंघने के बाद वो उसका दीवाना हो चूका था....
 
सॉरी दोस्तों टाइम की बहुत कमी है इस वक़्त काम भी बहुत ही और प्रेशर भी बहुत ज्यादा है मुझे ध्यान है की आप लोग बहुत बेसब्री से अपडेट का इन्तजार कर रहे है पर टाइम की थोड़ी कमी है इस लिए मैं स्टोरी नहीं लिख पा रहा हु बस थोड़ा समय और उसके बाद आप लोगो को अपडेट मिल जायेगा थोड़ी मज़बूरी है

मुझे उम्मीद है आप लोग समझ पा रहे होंगे मेरी मज़बूरी . .......
 
अपडेट-81

रवि और कम्मो दोनों घर पहुंच जाते है

रवि चुपचाप अंदर वाले कमरे में जाकर लेत जाता है

इधर कम्मो की सांसे अभी तक्क उखड़ी उखड़ी सी चल रही थी उसकी आँखों के सामने बार बार वही दृस्य चल रहा था

कैसे नीलम दीदी बिना किसी शर्म लाज के एक साथ अपने बाप और छोटे भाई से अपनी छूट और गांड मरवा रही थी

और दोनों के लुंड एक साथ सटासट नीलम की छूट और गांड की धज्जिया उड़ने पर तुले हुए थे

और इधर रवि लगातार अपनी दीदी की गांड में अपना लुंड रगड़े जा रहा था जिसकी वजह से काममो काफी गरम हो चुकी थी और उसकी छूट लगातार पानी चोदे जा रही थी

कम्मो जल्दी hi अपने एक जोड़ी कपडे लेकर बाजार लगे हेण्डपम्प पर नहाने चली जाती है ताकि उसकी छूट की गर्मी थोड़ी शांत हो सके

इधर रवि के दिमाग में भी वही सब बाटे चल रही थी उसका लुंड अपनी पूरी औक़ात में आ चूका था

इस वक़्त रवि अपनी छाती के बल लेता हुआ था और अपना लुंड धीरे धीरे ज़मीन के ऊपर रगड़ रहा था

तभी कमरे में मेघा दीदी की एंट्री होती है

मेघा- अरे रवि क्या हुआ तुझे ऐसे क्यों लेता हुआ है तू

मेघा दीदी की बात सुन कर रवि को होश आता है

पर रवि वैसे hi उल्टा लेता रहता है क्योंकि वो जनता था की उसका लुंड इस वक़्त खड़ा है और वो नहीं कहता था को मेघा दीदी इस वक़्त अपने भाई को इस हालत ने देखे

मेघा दीदी आगे बढ़ती हुई रवि के सिरहाने बैठ जाती है और रवि का सर पकड़ कर अपनी गॉड में रख लेती है

मेघा- क्या हुआ तेरी तबियत खराब है क्या रवि

रवि- नहीं दीदी बस हल्का हल्का सर में दर्द हो रहा है

मेघा बड़े hi प्यार से अपने छोटे भाई का सर दबाने लगती है

जिसकी वजह से बार बार रवि का मुह्ह उसकी दीदी की गदरायी जांघो पर डब्ब रहा था और उसे अपनी दीदी के जिस्म की मादक महक आ रही थी

मेघा- चाय पियेगा क्या चू बोल में बना देती हूँ

रवि- नहीं दीदी रेखा दीदी खा गयी है

मेघा- अरे वो तो थोड़ी देर पहले hi नीलम के घर की और गयी है बोल रही थी की कुछ काम है उसे नीलम से

रवि को दुबारा से नीलम दीदी के घर वाला नजारा याद आ जाता है और वो अपने दोनों हाथो को आगे बढ़ता हुआ एक नाटकीय अंदाज में अपनी दीदी की कमर पर लपेट देता है

मेघा तो खुद hi कहती थी की उसका भाई उसके साथ हर वक्त्त चिपका रहे

रवि अपने हाथो से अपनी दीदी के कमर के ऊपर वाले हिस्से को सेहला रहा था झा काफी हद्द तक मेघा दीदी की चर्बी जमा थी

रवि की हरकतों से मेघा दीदी भी धीते धीरे मदद में आ रही थी

इधर रवि अपने हाथो से मेघा दीदी की कमर को पकड़ता हुआ थोड़ा ऊपर की और सरक जाता है जिसकी वजह से उसका मुह्ह सीधा उसकी दीदी की छूट के ऊपर आ जाता है

मेघा अपने छोटे भाई की इस हरकत पर अंदर तक्क कम्प जाती है

और वो भी इस बार रवि का सर थोड़ा जोर से दबा देती है जिसकी वजह से रवि को अपने मुह्ह पर अपनी दीदी की छूट से निकल रही गर्मी साफ़ साफ़ महसूस हो रही थी

रवि जनता था की अगर वो ज्यादा देर तक ऐसे hi अपनी दीदी की छूट की खुसबू और गर्मी के अहसास करता रहा तो जल्दी hi उसका लुंड पानी छोड़ देगा

मेघा दीदी की छूट भी अबतक ोानी छोड़ना शुरू कर चुकी थी

और वो बार बार अपने छोटे भाई के सर को पहले से ज्यादा दबती जिससे रवि भी समझ चूका था की उसकी दीदी मदद में आ चुकी है

रवि- दीदी कम्मो दीदी खा गयी है

मेघा- अरे वो नहा रही है और अभी तो वो 1 घंटे से पहले नहीं आने वाली नहा कर

रवि भी अब काफी मदद में आ चूका था और अब वो अपनी दीदी के साथ थोड़ा थोड़ा खुलना कहता था ताकि वक़्त आने पारर वो अपनी दीदी को भोग सकी

रवि एक पलटी के साथ hi घुम्म जाता है और मेघा की आँखों की आँखों के सामने एक झटके में hi उसके छोटे भाई का विशाल लुंड आ जाता है

पिछली रात भले hi मेघा दीदी अपनी गांड में अपने भाई का लुंड फसा कर सोई थी पर वो जितना अंदाजा लगा कर बैठी थी रवि का लुंड उस अंदाजे से काफी हद्द तक्क बड़ा और मोटा था

सिर्फ एक धोती रवि के लुंड को ढके हुए थी

अपनी दीदी का खुला मुहहह देख कर रवि अंदर hi अंडरर खुश हो रहा था की उसकी दीदी कैसे ललचाई नजरो से उस्ले लुंड को देख रही है

रवि- क्या हुआ दीदी

मेघा को तो जैसे एक दम से होश आता है

मेघा अपनी नजरे रवि के लुंड से हटा लेती है

मेघा- कुछःह नहीं कुछः नहीं हुआए

रवि- दीदी आप चाय बनाने की बोल रही थी ना

मेघा की नजरे न कहते हुए भी बार बार रवि के लुंड पर जाकर टीककक जाती

मेघा- हां तू पियेगा क्या चाय

रवि- नहीं दीदी मैं चाय भट्ट कम्मं hi पिता हु

मेघा का हलक अपने छोटे भाई के लुंड को देख कर बार बार सुख रहा था

मेघा- चाय नहीं पिता तो लया दूध पिता है चू

रवि- हां दीदी मैं दोष भट्ट पिता हु

मेघा- इसी लिए तो इतना बड़ा लू............

मेघा तुरंत hi अपनी बात को संभालती हुई बात पलट देती है

मेघा- हां हा तभी तो इतना बड़ा शरीर हो गया है तेरा दूध पी पी कररर

इतना बोलकर मेघा हसने का नाटक करने लगती है

पर रवि अपनी दीदी की पिछली बात का अर्थ समझ चूका था

मेघा- पर मेरे प्यारे छोटे भाई अभी इस वक़्त तो दूध मिलेगा नहीं

रवि थदो मायूस होने का नाटक करता है

मेघा- अरे तू निराश न हो अभी थोड़ी देर में रेखा दूध लेकर आएगी तब्ब पी लेना

रवि- पारर दीदी मेरा मैं तो अभी दूध पिने का कर रहा है

मेघा- अभी खा से दूध पुलाव तुझे मैं

रवि- दीदी आपके दूध इतने मोठे मोठे है मैंने सुना है जिस औरत के दूध जितने मोठे होते है उसके दूध में उतना hi कयदा दूध होता है

रवि बसी hi मासूमियत के साथ एक hi सास में साडी बाटे बोल जाता है

मेघा का तो जैसे मुह्ह hi खुला का खुला रेहह जाता है वो समझ hi नहीं पा रही थी की उसका छोटा भाई इतना मासूम है की वो उसके बारे में क्या सोचे

मेघा को समझ नहीं आ रहा था की अब्ब वो रवि की बात का क्या जवाब दे

अभी मेघा कुछ बोलती की रवि अपना अगला हमला करता है और अपने हाथ को ऊपर की और बढ़ता हुआ अपनी दीदी की गदरायी चुकी को पकड़ लेता है

मेघा की तो हालत ऐसी थी मनो काटो तो खून नहीं

मेघा- अरे मेरी चुकी में दूध नहीं आता है छोड़ इसी

रवि- दीदी इसे चुकी बोलते है क्या

मेघा को अब समझ आता है की वो जोश जोश में अपने छोटे भाई को अपने बदन के हिस्सों के मादक नाम बताने का काम कर रही है

मेघा- अरे नहीं नहीं इसे दूध hi बोलते है

रवि- नहीं दीदी मैं समझ गया इसे दूध नहीं चुकी hi बोलते है और दीदी देखो न आपकी चुकी तो कितनी बड़ी बड़ी है इसमें तो पका भट्ट सारा दूध भरा हुआ होगा

अगले hi पल रवि अपनी दीदी की चुकी को मसल देता है और मेघा के मुहहह से एक मादक सिसकी निकल जाती है

मेघा कहती तो थी की अभी वो रवि का हॉट अपनी चुकी पर से हटाए दे पर उसको भी कहि न कहि अपने छोटे भाई की हरकतों से भट्ट मजा आ रहा था

अब रवि भी अपनी हदी पार करना कहता था और वो लगातार अपनी दीदी की चुकी को धीरे धीरे मसले जा रहा था

जिसकी असर मेघा दीदी की छूट पारर हो रहा था और वो लगातार पानी छोड़ रही थी

इधर मेघा दीदी की आँखों में हवस साफ़ साफ़ नजर आ रही थी

रवि का लुंड भी बार बार झटके मार रहा था जिसकी वजह से उसके लुंड पर पड़ी धोती पूरी तरह से हॉट चुकी थी और मेघा दीदी की नजरो के सामने उसके छोटे भाई का विकराल लुंड हवा में बिलकुल सीधा खड़ा था

मेघा से अब बर्दास्त कर पाना मुश्किल होता जा रहा था

इधर रवि भी अपनी दीदी की नरम नरम चुकी को मसले जा रहा था

रवि- दीदी थोड़ा दूध पीला दो न मुझे अपनी चुकी से देखो कितनी नरम नरम है मुझे तो लग्ग रहा है इसके अंदर बहुत सारा दूध भरा हुआ है

इस बार रवि अपने हाथो की पूरी ताकत से अपनी दीदी की चुकी को मसल देता है

मेघा- ahhhhhhhhhh मैट कर रवि इसमें कोई दूध नहीं है सच में

इस बार रवि अपने दूसरे हाथ को भी मेघा दीदी की दूसरी चुकी पारर रख देता है और ेल साथ अपनी दीदी की दोनों चूचियों को मसल कर अपनी दीदी को अपनी ताक़त का अहसास करा देता है

मेघा तो जैसे अब अपने छोटे भाई के सामने हार मैं चुकी थी एयर वो बिना किसी विरोध के अपनी चूचियों को मसलवा रही थी

मेघा के हाथ अब रवि की छाती पर जमी छोटे छोटे बालो को सेहले रहे थे और उसका हाथ लगातार निचे की अपने छोटे भाई के लुंड की और बढ़ता जा रहा था

मेघा अपना आपा खो चुकी थी और वो बॉस अब अपने भाई के लुंड को पकड़ना कहती थी

तभी बहार के दरवाजे पर आवाज होती है और दोनों भाई बेहेन समझ जाते है की जरूर कम्मो या रेखा कोई न कोई आ गया है

मेघा तुरंत hi अपनी हालत संभालती हुई उठ जाती है और रवि भी दुबारा से पलटी मार कर लेत जाता है ताकि अपने खड़े लुंड को अपनी बाकि दीदियो से छुपा सकी.....
 
अपडेट-82

घर में घुसते hi कम्मो की आवाज सुनाई देती है

दीदी- क्या खाना बनाऊ

कम्मो की आवाज सुनते hi दोनों भाई बेहेन एक दम से अलग हो जाते है और मेघा दीदी कमरे से बहार की और निकल जाती है

इधर अपना रवि दुबारा से पेट के बल लेट जाता है

मेघा- अरे कुछ भी बना ले रोज रोज क्या पूछती है तू

असल में आज मेघा दीदी को कम्मो पर बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि कम्मो अगर थोड़ा समय और बाद आती तो शायद मेघा दीदी आज अपने छोटे भाई का लुंड अपने हाथो में पकड़ कर उसकी मोटाई को नाप लेती

पर मेघा दीदी माहौल की नजाकत को समझते हुए अपने मैं को शन्तत करती है और अपने मैं में सोचती है की ाब्ब्ब तो जिंदगी भर उसे यही रहना है और आज नहीं तो कल उसका छोटा भाई उसके हाथे लग्ग hi जायेगा

इधर रवि लेता लेता सोच रहा था

रवि( कसम से कम्मो दीदी अगर आज ाप्प थोड़ा और लेत आती तो मैं मेघा दीदी की चूचियों को निचोड़ निचोड़ कर उनमे से दूध बहार निकल देता सच में क्या hi चुकी है मेघा दीदी की मजा hi आगया आज पहली बार मेघा दीदी की चुकी पकड़ कर)

इधर कम्मो खाना बनाने में लग्ग जाती है और रवि अंदर कमरे में hi लेता लेता अपनी आगे की प्लानिंग करने लगता है

इधर कम्मो खाना बना रही थी और मेघा दीदी सामने खत पर लेती लेती मन hi मैं कम्मो को कोष रही थी

दूसरी तरफ जब्ब तक्क रेखा नीलम के घर पहुँचती तब तक चुदाई का क्रायक्रम ख़तम हो चूका था

हरिया बहार बैठा हुआ था और राजू गाओं में टहलने के लिए चला गया था

रेखा को आते हुए हरिया दूर से hi देख लेता है

रेखा- नमस्कार काका

हरिया- नमस्ते नमस्ते बेटी रेखा कैसी है तू आज इधर का रास्ता कैसे भूल गयी

हरिया ऊपर से निचे तक्क एक नजर रेखा के उभर कहते जिसमं को निहारता है

रेखा- नहीं नहीं काका बास भट्ट दिनन हो गए थे नीलम से मिले हुए तो सोचा आज मिल लेती हु

हरिया- जा बेटी नीलम अंदर hi है खाना बना रही होगी

रेखा नीलम के घर के अंदर की और बढ़ने लगती है

हरिया पीछे से रेखा की चौड़ी गांड देख कर मस्त हो जाता है

हरिया( क्या मस्त गांड है रे साली की इसने तो नीलम को भी फ़ैल कर रखा है पता नहीं किससे अपनी गांड छुड़वा रही है जो दिन बा दिन इस साली की गांड चौड़ी होती जा रही हैई किसी दिनन अगर मौका मिला तो इस साली की सिर्र्फ गांड hi मरूंगा कसम से दिल खुश हो गया रे रेखा बेटी तेरी गांड देख कररर)

रेखा- अरे नीलम तू क्या खाना नहीं बनाएगी जो अभी टककक सोई हुई है

नीलम बेचारी पिछले एक घंटे से अपने बाप और भाई से अपनी गांड और छूट छुड़वा छुड़वा के थक गयी थी और थकान के मरे अभी तक्क खट्ट पर चित्त पड़ी थी

रेखा की आवाज सुन्न कर नीलम का ध्यान रेखा की और जाता है

नीलम अपनी स्थिति संभालती हुई उठ कर बैठ जाती है

नीलम- अरे वह आज तुझे मेरे घर का रास्ता कैसे याद आ गया

रेखा- अरे तू तो ऐसे बोल रही है जैसे मैं कोई बरसो बाद आयी हु

नीलम- अरे नहीं ऐसी बात नहीं है बास ऐसे hi बोल दिया

रेखा- ाचा दोनों बाप बेटी एक hi बात बोल रहे हो क्या बात है

नीलम- बापू ने भी तुझे यही बात बोली क्या

रेखा- है बिलकुल जैसे तूने बोलै वैसा hi हरिया काका ने भी बोलै दोनों बाप बेटी एक hi बात बोलते हो

रेखा के मुह्ह से अपने और हरिया का नाम एक साथ सुन्न कर नीलम गद्गद्द हो जाती है

नीलम- अरे वो तो बापू कुछ भी बोलते है तू उनकी बात का बुरा मैट मन कर समझी

रेखा- बोलने का तो ठिक्क है पारर तेरा बापू तो मुझे ऐसे घूरता है जैसे मुझे यही पटक कररर छोड़ देगा

नीलम- अरे अरे तू तो मेरे बापू को ऐसे hi बदनाम कर रही है तू क्या जाने मेरा बापू कितना शरीफ है

रेखा- है है देखा है तेरा बापू कितना शरीफ है मेरी गांड और चुकी को तो ऐसे घर रहा था मनो जैसे मैं नंगी hi खड़ी हुऊ

नीलम को जानती थी की रेखा कहि न कहि सच hi केहह रही है क्योंकि नीलम ये बात जानती थी की रेखा के गदराये जिस्म के आगे उसके बदन की कोई वैलुए नहीं थी

नीलम- अब मुझे नहीं पता अगर तुझे लगता है तो तू खुद hi बापू से जाकर पूछ ले वैसे मेरे हिसाब से तो बापू तुझे भी उसी नजर से देखते है जिस नजर से मुझे देखते है

रेखा- अच्छा जी तब्ब तो तेरा बापू जरूर दिनन ृत्त तेरी चूचिया और गांड hi घूरता होगा और हमेशा तुझे छोड़ने के जुगाड़ में hi रहता होगा

अब बेचारी रेखा खा जानती थी की कहि न कहि वो सच hi बोल रही थी और अब्ब तक्क तो हरिया काका अपनी बेटी के तीनो छेड़ो को छोड़ छोड़ कर फैला चूका था

नीलम- अरे तू छोड़ न खा तू मेरे बापू के पीछे गयी

अभी नीलम कुछ बोलती उसे पहले hi रेखा की नजर ज़मीन पारर पड़ती है और जमीन पारर साफ़ साफ़ पता चल रहा था की किसी न किसी का वीर्य गुरा हुआए है

रेखा मैं hi मैं बहुत साडी कहानिया बना चुकी थी उस वीर्य को देख कर पारर वो उस बारे में नीलम को कुछ नहीं बोलती

इधर नीलम खूब साडी बाटे रेखा के साथ करती है और थोड़ी देर बाद रेखा नीलम के घर से निकल कर अपने घर की और निकल जाती है

रेखा( ये ज़मीन पर वीर्य किसका गुरा था और नीलम भी बूत ज्यादा खुस नजर आ रही थी हो न जरूर ये राजू से अपनी प्यास बुझवा रही है खैर आज नहीं तो कल मुझे पता तो लग्ग hi जाएहा

इधर रेखा के जाने के बाद नीलम की नजर भी अपने बापू के वीर्य पर पड़ती है जो उसके बापू ने थोड़ी देर पहले hi उसके मुह्ह में झाड़ा था जिसका थोड़ा सा हिस्सा ज़मीन पारर गिरा था जिसे रेखा देख चुकी थी

नीलम( कहि रेखा ने बापू का वीर्य तो नहीं देखा लिया नहीं नहीं अगर देखा होगा तो वो मैं में क्या सोच रही जोगी अगर वो सोचेगी की मैं अपने बापू से छुड़वा रही हु और अगर उसने मुझसे ुचा तो मैं क्या जवाब दूंगी )

नीलम( अगर वो पूछेगी भी तो मैं साफ़ साफ़ बता दूंगी की हां मैं अपने बापू से कड़वा रही हु अपनी छूट और गांड उसके बाद देखा जायेगा वो क्या रिएक्शन देती है)........
 
दोस्तों आपलोगो के सुझाव के लिए धन्यवाद्

पर मैं अपने दिमाग में पहले hi पूरी कहानी सोच चूका हु और वैसे hi लिख रहा हु और आगे भी कहानी ऐसे hi चलेगी

उम्मीद है आपलोगो को कहानी पढ़ने में मजा आ रहा होगा

आजकल समय की थोड़ी समस्या है इस लिए मैं रेगुलर उपदटेस नहीं दे पा रहा हु पर थोड़े थोड़े समय पर आप लोगो को अपडेट मिलते रहेंगे

धन्यवाद्.....
 
अपडेट-83

इधर रेखा होने घर पहुंच गयी थी

अब तक कम्मो भी खाना बना चुकी थी

कम्मो- खा गयी थी रेखा दीदी खाने का इन्तजार कर रहे है हम लोग कब से

रेखा- अरे वो मैं नीलम के घर गयी थी बहुत दिन हो गए थे मिले हुए तो सोचा मिल लेती हु आज कल टाइम hi खा मिलता है

कम्मो- है दीदी आज कल आप कुछ ज्यादा hi बिजी जो रहती हो

कम्मो( दिन रात अपने छोटे भाई के लुंड की सवारी करोगी तो लहै टाइम मिलेगा दीदी)

मेघा- क्यों ये खा बिजी रहने लगी खाना तू बनती है खेतो में काम मेरा प्यारा भाई करता है ये घोड़ी तो दिन भर घर में hi पड़ी रहती है

Rekha-are दीदी तुम तो रहने hi दो इतना काम करो उसके बाद भी कोई नाम नहीं है मेरा

कम्मो- अरे मेघा दीदी रेखा दीदी बहुत म्हणत करती है

मेघा- मेने तो नहीं देख आज तक इसको कुछ करते हुए तूने देखा है क्या री कम्मो

कम्मो( देखा तो बहुत कुछ है दीदी पर आपको कैसे बताऊ की रेखा दीदी किस तरह की म्हणत करती है )

कम्मो- है कभी कभी बर्तन धो देती है

तीनो बहने हसने लगती है

अपनी दीदियो की आवाज सुन्न कर रवि भी कमरे से बहार आ जाता है

रेखा- अरे तू अभी तक्क सो रहा था क्या

रवि- हां दीदी आज तबियत थोड़ी खराबब है

रेखा तुरंत hi रवि के नजदीक जाते हुए उसके माथे पर हाथे रख कर बुखार देखती है

रेखा- बुखार तो नहीं है

रवि- दीदी बास सर में दर्द है

मेघा- अरे हो जाता है कभी कभी तू इधर आ मेरे पास

रवि चुपचाप अपनी मेघा दीदी की और जाता है और अपनी दीदी के बगल में चिपक कर बैठ जाता है

मेघा बड़े hi प्यार से रवि का सर सहलाते हुए उसके अपनी गॉड में लिटा लेती है और अपने प्यारे भाई का सर दबाने लगती है

इधर कम्मो खाना निकल लेती है और सबके लिए खाना परोस देती है

कम्मो- चलो दीदी मैंने खाना निकल दिया ही ाजाओ खा लो फिर रवि भी आराम कर लेगा. .

मेघा का मैं तो नहीं था रवि को अपनी गॉड से हटाने का पर वो न कहते हुए भी रवि को खाना खाने के लिए बोलती है और अपनी गॉड से हटते हुए उठ जाती है

सब लोग खाना खाने लगते है

खाना कहते वक़्त कभी रेखा रवि की और देख कर मुस्कुराती और कभी मेघा दीदी अपने छोटे भाई की एयर देख कर मुस्कुराती

दूसरी तरफ कम्मो का ध्यान सिर्फ और सिर्फ रेखा दीदी की हरकतों पर था और इधर रेखा की नजर जब्ब रवि की नजरो से टकराती तो वो एक क़ातिल मुस्कान के साथ अपने छोटे भाई को आँख मार देती जिसे देख कर कम्मो अंदर hi अंडरर जलने लगती

और उसके दिमाग में यही बात चल रही थी की जैसे राजू नीलम दीदी को छोड़ रहा था क्या उसका छोटा भाई भी रेखा दीदी को ऐसे hi छोड़ता होगा

पर बेचारी कम्मो खा जानती थी की चुदाई के खेल में तो रवि ने अपनी रेखा दीदी के साथ साडी हदे पर कर दी थी और वो अपनी दीदी को किसी जानवर की तरह घंटो छोड़ता था

थोड़ी hi देर में सबब लोग खाना खा लेते है और रवि दुबारा से रूम में जाकर लेत जाता है

दरससल आज उसकी तबियत थोड़ी ढीली थी जिसकी वजह से लेटते के साथ hi उसकी आँख लग जाती है

इधर कम्मो और रेखा बाकि के काम निपटने में लग जाती है और मेघा दीदी भी घर के बहार hi टहलने लगती है

थोड़ी देर बाद सब लोग अपनी अपनी जगह पर जाकर लेत जाते है

मेघा पहले hi कमरे में जा चुकी थी इधर कम्मो अपनी खत पर लेत जाती है और रेखा कमरे में घुसते hi कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर देती है

कम्मो( बड़ी जल्दी है दीदी तुमको रवि के लुंड की सवारी करने की पहले तो कभी दरवाजा नहीं बंद करती थी पर अब तो कमरे में घुसते hi दरवाजा बंद कर लेती हो कोई बात नहीं दीदी आज तुम्हारा टाइम है कल मेरा भी आएगा देखना एक दिन तुम्हारे सामने hi मैं भी रवि के गधे जैसे लुंड की सवारी करूंगी जैसे तुम करती हो और उस दिन देखती हु तुम मुझे क्या बोलती हो )
 
अपडेट-84

सब लोग अपनी अपनी जगह आकर लेत चुके थे इधर बहार कम्मो के दिमाग में बार बार अपने छोटे भाई के लुंड का ख्याल आ रहा था और उसे याद कर कर के वो धीरे धीरे अपनी छूट का दाना सहलाये जा रही थी

कमरे के अंदर का माहौल कुछ ऐसा था रवि पेट के बल सोया हुआ था और उसकी आँख भी लग चुकी थी और मेघा दीदी ये बात जानती थी की आज उसके छोटे भाई की तबियत थोड़ी सुस्त है इसलिए वो भी जल्दी hi रवि की और पीठ करके सो जाती है

इधर रेखा आज सुबह से hi रवि से छुड़वाने के लिए तड़प रही थी पर जब से मेघा दीदी आयी थी उसके बाद से hi रेखा की चुदाई मनो थम सी गयी थी

खा पहले रवि अपनी रेखा दीदी को दिन में 5-5 बार छोड़ा करता था और अपनी दीदी के छेड़ो में अपना गधे जैसा लुंड घुसाए घर में hi पड़ा रहता था पर मेघा और कम्मो के आने के बाद से तो मनो रेखा बेचारी की छूट गीली होकर दुबारा सुख जाया करती पर उसे अपने छोटे भाई के लुंड पर सवार होने का मौका hi नहीं मिलता

आज मेघा दीदी तो जल्दी सो गयी पारर उनसे पहले रवि भी सो चूका था और रेखा बेचारी मायूसी के साथ रवि की पीठ पर हाथ फेरते फेरते सो जाती है

और मैं hi मंत्र मेघा और कम्मो को खूब कोसती है कैसे उन्दोनो के आने के बाद उसकी जिंदगी में आयी भार वापस चली गयी थी

इधर सबको सोये हुए लगभग 1-2 घंटे हो चुके थे थोड़ी देर बाद रवि की आँख खुलती है और वो उठ कर बहार की और चला जाता है पेशाब करने के लिए

और जब वो पस्षाब करके वापस लौटता है तो उसकी नजर अपनी कम्मो दीदी पर पड़ती है

कम्मो ने आज रवि के लुंड को याद करके अपनी छूट को खूब रगड़ा था और ऐसे hi असत वायस हालत में सो गयी थी

कम्मो अपनी पीठ के बल लेते हुए नाक बजा रही थी

और उसका पेटीकोट उसके घुटनो तक्क चढ़ा हुआ था और ब्लाउज के ऊपर के 2 हक्क भी खुले हुए थे अपनी सबसे छोटी दीदी के अधनंगे बदन को देख कर रवि को फिर से वही बात याद आ गयी कैसे आज नीलम और राजू की चुदाई के वक्त्त उसने अपनी दीदी की गांड में अपना लुंड घुसा दिया था

इतना याद करते करते उसका लुंड पूरी तरह से खड़ा हो चूका था और रवि न कहते हुए भी कम्मो दीदी की और बढ़ने लगता है

इधर कम्मो दुनिआ से बेखबर होकर सोई हुई थी और उसका भाई वासना भरी उम्मीद से कम्मो दीदी की और बढ़ रहा था

रवि अपनी दीदी के करीब पहुंच कर अपनी नाक को कम्मो दीदी की छूट के ऊपर की और ले जाता है और अपनी नाक लगा कर अपनी दीदी की छूट की महक को सूंघने की कोशिश करता है और जब उसकी नाक में अपनी दीदी की छूट की मादक महक पड़ती है तो उसका लुंड एक जोरदार झटका मरता है अगले hi पल रवि तुरंत अपना मुँह हटा लेता है

क्योंकि रवि जनता था की अगर वो ज्यादा देर तक्क कम्मो दीदी की छूट को सूंघता रहेगा तो उसका अपने ऊपर से कण्ट्रोल छूट जायेगा और कहि जोश जोश में वो कुछ गड़बड़ न करदे जिस्सके कारन कम्मो दीदी भड़क जाये

रवि वापस से अपने कमरे की और जाने लगता है पर जैसे hi वो दरवाजे तक्क पहुँचता है उसका मैं नहीं मंटा और वो तुरंत hi पलट कर दुबारा से कम्मो दीदी की खत के पास पहुंच जाता है

इस बार रवि अपनी नाक को कम्मो दीदी की बगल के करीब ले जाता है और जोरदार सास के साथ अपनी दीदी की पसीने की महक को खींचता हुआ मस्त हो जाता है

रवि इतना मस्त हो चूका था की उसका एक हाथ खुद बा खुद hi कम्मो दीदी की एक चुकी को थम लेता है और पूरी चुकी को अपने हाथो में पकड़ते हुए मसल देता है

कम्मो इस हमले से नींद में hi कसमसा जाती है

कम्मो- शीइइइइहह्ह्ह्हह्हह

रवि तुरंत hi पीछे हट जाता है और वापस से अपने कमरे की और बाद जाता है

रवि का दिल जोरो से धड़क रहा था उसका मैं कर रहा था की वो दुबारा से कम्मो दीदी के करीब जाये पर वो कोई भी जल्दबाज़ी नहीं करना कहता था क्योंकि रवि कम्मो का गुस्सा जनता था और वो अपनी दीदी को इतना उकसाना कहता था की कम्मो खुद hi एक दिन अपने छोटे भाई के सामने अपनी टंगे खोल दे

इधर रवि कमरे में एते हुए फिरसे दरवाजा लगा देता है

और वापस से अपनी दोनों दीदियो के बिच आकर लेत जाता है

आज रवि का लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था उसे कैसे भी करके अपने लुंड को शांत करना था

रवि जनता था की उसके पास अपनी हवस को पूरा करने के लिए रेखा दीदी है जो की किसी भी वक़्त रवि से छुड़वाने के लिए तैयार रहती थी पारर रवि को यह भी डर था की कहि मेघा दीदी चुदाई के बिच में hi न उठ जाये पारर आज पहली बार था की रवि को बॉस कैसे भी करके अपनी अंदर की गर्मी निकालनी थी शायद यह बुखार का hi असर था जो उसके बदन के साथ साथ उसका लुंड भी किसी भट्टी की तरह तप्प्प रहा था

रवि एक बार मेघा दीदी की कमर को पकड़ता हुआ जोरसे हिलता है और तुरंत hi अपनी जगह पारर आकर लेत जाता है

पर मेघा दीदी को इसका कोई फरक नहीं पड़ता इस बार रवि अपने हाथ को आगे की और ले जाता हुआ मेघा दीदी की एक चुकी को पकड़ कर जोरसे मसल देता है

और वो ये सबब कुछ इस तरह से करता है मनो वो काफी नींद में हो पारर इस बार भी मेघा दीदी के कानो पर ज़ू तक्क नहीं रेंगती

अब रवि के हौसले बुलंद हो चुके थे और वो तुरंत hi उठता हुआ अपनी धोती को अपने बदन से अलग कर देता है और अगले hi पल रेखा दीदी के सिरहाने आकर बैठ जाता है

रवि का लुंड रेखा के होठो के पास किसी दाल की तरह झूल रहा था इधर रेखा अपनी hi दुनिआ में मगन गहरी नींद में सोई हुई थी

अगले hi पल रवि अपने लुंड को रेखा दीदी के गलो पर रगड़ने लगता है कभी आँखों पर कभी नाक पर कभी रेखा दीदी होठो पारर

रवि जोशः में पूरा पागल हो चूका था वो अपने लुंड से रेखा दीदी के होठों को लगातार रगड़े जा रहा था और अब रेखा के होठो तो खुल चुके थे पर रेखा दीदी का मुह्ह अभी भी बंद था अब रवि अपनी दीदी के दातो पर अपना लुंड रगड़ रहा था मनो वो अपनी दीदी के दातो को अपने लुंड से ब्रश करके साफ़ कर रहा हो

इधर रेखा नींद की बड़ी पक्की थी ये बात रवि भी जनता था और अगले hi पल रवि को ेल आईडिया आता है और वो रेखा दीदी की नाक को पकड़ता हुआ दबा कर बंद कर देता है कुछ hi पल बाद रेखा दीदी को साँस लेने के लिए नींद में hi अपना खोलना hi पड़ता है और जैसे hi रेखा अपना मुह्ह खोलती है रवि तुरंत hi अपना लुंड अपनी रेखा दीदी के मुह्ह में पूरा अंदर तक्क ठुस्स देता है पर वो अभी भी रेखा की नाक को दबाये हुए था

इधर रेखा की नाक तो पहले से hi बंद थी और मुह्ह को भी रवि ने अपना लुंड दाल कर बंद कर दिया था करीब 10 सेकेंड के अंदर hi रेखा को साँस लेने में दिक्कत होने लगती है और दम्म घुटने की वजह से रेखा छटपटाते हुए उठ जाती है

और जैसे hi रेखा आँख खोलती है उसे सामने रवि बैठा हुआ दीखता है जिसका लुंड उसके हलक तक्क उतरा हुआ था पर रेखा को इससे कोई दिक्कत नहीं थी बल्कि उसके चेहरे ओर तो एक अलग hi मुस्कान थी

रवि अब तक्क रेखा की नाक को छोड़ चूका था और अपनी दीदी के मुँह को बड़े hi प्यार से अपना लुंड अंदर बहार करते हुए छोड़ रहा था

रेखा को भी मनो अपने छोटे भाई से अपना मुह्ह छुड़वाने में बड़ा hi मजा आ रहा था

इधर रवि का लुंड पूरी तरह से गिला हो चूका था और उसकी वासना भी पुरे चरम पारर था

रवि तुरंत उठ जाता है और जैसे hi रवि अपना लुंड रेखा के मुह्ह से निकलता है रेखा के मुह्ह में जमा हुआ सारा थुक्क बहार की और आ जाता है

रवि तुरंत hi रेखा की कमर को पकड़ कर खींचता हुआ अपनी दीदी को घोड़ी बना देता है और एक hi झटके में रेखा का पेटीकोट पकड़ कर कमर तक्क उठा देता है

और अपने हाथ में थूक लेता हुआ अपनी रेखा दीदी की गांड के छेद पारर अच्छे से थूक लगाने लगता है

रेखा मैं hi मैं बहुत खुस थी वो जानती थी की रवि भी काफी गरम है और आज उसका छोटा भाई उसकी गांड की धज्जिया उड़ने वाला है

रेखा एक बार अपना मुह्ह घुमा कर मेघा दीदी की और देखती है जोकि दूसरी और मुह्ह घुमा कर नाक बजती हुई मस्त सोई हुई थी

रवि अपने लुंड को रेखा दीदी की गांड के छेद पर सेट करता हुआ अंदर की और सरकने लगता है

रवि अपनी दीदी को गांड को छोड़ छोड़ कर इतना फिआला चूका था की अब बिना किसी म्हणत के hi रेखा की गांड अपने छोटे भाई का पूरा का पूरा लुंड निगल जाया करती थी

पारर आज रवि काफी जोश में था जैसे जैसे रवि का लुंड रेखा की गांड की गहराइयो में उतरता जाता वैसे वैसे रेखा के चेहरे की मुस्कान और भी ज्यादा जटिल होती जाती मनो रेखा को कोई खजाना मिल गया हो

अभी आधा लुंड hi अंदर गया था की रवि अपने लुंड को बहार खींचता हुआ एक ज़ोरदार झटका मरता है और एक hi झटके में अपना पूरा का पूरा लुंड रेखा दीदी की गांड में जड़ तक्क उतर देता है

झटका इतना जोरदार था की रेखा तुरंत hi पास पड़ी चादर को अपने मुह्ह में दबा लेती है पर उसके चेहरे पर दर्द्द के साथ एक मुस्कान भी थी जो की इसकी गवाही दे रही थी की उसे अब अपने छोटे भाई से अपनी गांड की धज्जिया उड़वाने में काफी मजा आ रहा था

इधर रवि पागलो की तरह एक के बाद एक जोरदार झटके मरे जा रहा था रेखा जानती थी की रवि इतना जोश में आ चूका है की वो यह भी भूल चूका है की कमरे में उन्दोनो के अलावा उसकी बड़ी दीदी भी है जो की किसी भी वक़्त चुदाई की आवाज सुनकर उठ सकती थी

रेखा अब चुदाई के इस खेल की एक माहिर खिलाडी बन चुकी थी

रेखा बार बार अपनी गांड के छेद को सिकोड़ लेती जिसकी वजह से रवि का लुंड पूरी तरह से उसकी दीदी की गांड की छेद में जकड जाता और उसके दर्द्द के साथ साथ एक अनोखे मजी का अहसास होता

रवि आज सुबह से hi गरम था और वो आज इस रेस में ज्यादा दुर्र तक्क नहीं भाग सकता था

रवि आगे की और झूलता हुआ रेखा दीदी के दोनों चुचो को ब्लाउज के ऊपर से hi पकड़ लेता है और अपनी पूरी ताक़त से अपनी दीदी की चूचियों को निचोड़ने लगता है

रेखा के दर्द का अंदाजा उसके चेहरे पर पड़ते भावो से साफ़ नजर आता

कभी वो एक दम्म से अपनी आँखे बंद कर लेती और तड़पने लगती और अगले hi पल उस्ले चेहरे पर एक मुस्कान होती और उसकी आँखे अधखुली होती

रेखा ने अभी भी चादर को अपने मुह्ह में दबाये हुआ था

इधर रवि झड़ने के करीब था और वो अब अपने लुंड को पूरा जड़ तक रेखा दीदी की गांड में उत्तर देता है और अपनी दीदी की पीठ पर साध कर पूरी तरह से रेखा से चिपक जाता है

और कई सरे झटको के साथ अपना पूरा का पूरा वीर्य अपनी रेखा दीदी की गांड में उड़ेल देता है

इधर रेखा को साफ़ साफ़ अहसास हो रहा था जब्ब उसके भाई का गरमा गरम वीर्य उसकी गांड में गिरता तो उसे ऐसा लग्ग रहा था मनो किसी ने उसकी गांड में गरम पानी उड़ेल दिया हो

रवि पहले से hi बीमार था और अपनी दीदी की गंडचुड़ै के बाद वो और भी ज्यादा थक्क गया था और साइड में सरकता हुआ सीधा सो जाता है

रेखा भी अपना पेटीकोट सही कसरती हुई रवि की धोती को उसके ऊपर दाल कर जैसे तैसे लपेट देती है

अब तक्क रवि सो चूका था अपने छोटे भाई का मासूम चेहरा देख कर रेखा को उसपर बड़ा hi प्यार आता है और वो तुरंत hi आगे बढ़ती हुई रवि के माथे को चूमती हुई उसके होठो को चुम लेती है और अपनी जगह पर लेत जाती है

अपनी गांड चुदाई के बाद रेखा मस्त हो चुकी थी और सुकून से चुकी थी......
 
अपडेट-85

रेखा की रात बड़ी दर्दभरी और रंगीन रही थी रवि ने कल रात बिना किसी रेहम के मेघा दीदी के होते हुए भी रेखा दीदी की गांड की धज्जिया उदा दी थी

सुबह के 5 बजे थे कम्मो रोज की तरह उठ कर अपने कामो में लग गयी थी

इधर कमरे का दरवाजा अभी तक्क बंद था कम्मो जब जब उस बंद दरवाजे को देखती तो मन hi मन अपनी रेखा दीदी को कोसती की कैसे उसकी दीदी अपने छोटे भाई के मजी अकेले अकेले लूट रही है और कम्मो बेचारी अपनी छूट रगड़ रगड़ कर अपनी प्यास को जैसे तैसे बुझाने की कोशिश कर रही है

थोड़ी देर बाद hi रेखा रानी की आँख भी खुल जाती है

रेखा के बदन में एक अजीब सा मीठा मीठा दर्द हो रहा था जो कहि न कहि उसे अंदर तक्क मस्त किये जा रहा था

रेखा की नजर रवि की और जाती है रवि मेघा दीदी से पूरी तरह चिपका हुआ था और उसकी धोती भी इस समंय ठीक से बंधी हुई थी

रेखा उठ कार्ड दरवाजा खोलती है और एक अंगड़ाई लेते हुए लोटे में पानी लेकर संडास करने निकल जाती है

इधर कमरे में रवि अपने लुंड को मेघा दीदी के बड़े से पिछवाड़े में ठुसे हुए चैन की नींद सो रहा था

कम्मो का दिल नहीं मंटा और वो बिना देर किये कमरे के अंदर पहुंच जाती है जैसे hi उसकी नजर मेघा दीदी और रवि पर पड़ती है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

मेघा दीदी तो अपनी गांड रवि की और घुमा कर सोई थी और रवि पूरी तरह से मेघा दीदी के पीछे से चिपका हुआ अपना हाथ मेघा दीदी के पेट पर रखे मजे से सोया हुआ था

ये नजारा देख कर कम्मो का हलक सूखने लगता है

क्योंकि कम्मो अपने छोटे भाई के लुंड का साइज जानती थी और उसे ये भी अब तक्क समझ आ गया था की रवि अपना पूरा लुंड मेघा दीदी की गांड में ठुसे हुए पड़ा है

और मेघा दीदी भी बड़े hi मजे से अपने छोटे भाई के लुंड को अपनी विशाल गांड में छुपाये सोये हुई थी

कम्मो( मैं तो सोच रही थी की रवि से सिर्फ रेखा दीदी hi छुड़वा रही है पारर अब तो मुझे लग रहा है की रात के अँधेरे में कमरे का दरवाजा बंद करके मेरी दोनों दिदिया मेरे छोटे भाई के साथ हवस का नंगा नाच कस्र रही है और मैं बहार खत पर पड़ी पड़ी जिंदगी भर अपनी छूट hi रगड़ती रह जाउंगी मुझे जल्दी hi कुछ करना पड़ेगा नहीं तो मैं ऐसे hi रह कुवारी मर्डर जाउंगी और रवि तो है hi बिचारा इतना भोला की इन दोनों चुडलो ने उसे अपनी छूट और गांड दिखा कर अपने काबू में कर लिया है)

कम्मो सोच तो बहुत कुछ रही थी पारर वो यह नहीं जानती थी की जिसे वो भोला भंडारी समझ रही है वो किसी जमाने में भोला भला रवि हुस करता था पर आज की डेट में वो दिन रात अपनी तीनो दीदियो से चिपकने की कोशिश में hi लगा रहता था और दिन रत अपनी दीदियो को छोड़ने के सपने देखा करता था

कम्मो अभी अपने भाई बेहेन को चिपका हुआ देख कर लम्बी लम्बी सांसे खींच hi रही थी की तभी उसे बहार से रेखा दीदी के आने की आहत आती है और वो तेजी में कमरे से बहार निकल जाती है

इधर रेखा भी घर में आने के बाद कामो में लग जाती है

थोड़ी देर बाद hi मेघा दीदी की भी आँख खुल जाती है

मेघा दीदी को अपनी गांड के बिच कुछ मोती सी चीज़े महसूस होती है और जैसे उसे समझ आता है वो चीज़ क्या है मेघा दीदी की सांसे थम सी जाती है और उनकी धड़कन तेजी के साथ चलने लगती है

अभी मेघा दीदी कुछ करती उससे पहले hi रवि दूसरी और पलटता हुआ अपना लुंड अपनी दीदी की गांड से बहार खींच लेता है और दूसरी तरफ पलट कर सो जाता है

एक पल में hi मेघा दीदी की छूट से झरना बहना शुरू हो चूका था वो कहती थी की उसका छोटा भाई दिन रात उसके साथ ऐसे hi चिपका रहे

पर मेघा दीदी को कम्मो और रेखा का डर भी था की कहि उन दोनों को उसपर शक न हो जाये

खैर मेघा दीदी किसी तरह अपने आपको संभालती है और उठ कर कमरे से बहार चली जाती है

कम्मो- क्या बात है दीदी बड़ी देर तक्क सो रही हो आज कल आप दोनों

कम्मो रेखा की और अजीब नजरो से देखती हुई बोलती है

रेखा भी कम्मो का निशाना समझ रही थी पर अब रेखा को इस खेल में मजा आने लगा था

मेघा- क्यों तू भी सो जाया कर देरर तक तुझे किसी ने रोका है क्या

कम्मो- नहीं दीदी ऐसा नहीं है पर मैं खा अकेली सोती हु और आपलोग

इतना बोलते हुए कम्मो चुप हो जाती है

मेघा- अरे तू तो खुद hi बोलती थी न की मुझे अकेले सोना hi पसंद है तो अब क्या हुआ

कम्मो- कुछ नहीं हुआ छोड़ो दीदी ये सबब

ये बताओ खाने में क्या खाओगी

रेखा- कुछ भी बना ले ना क्या तू रोज रोज पूछती है

कम्मो- अरे मैं आपसे नहीं पूछ रही हु मैं तो अपनी मेघा दीदी से पूछ रही हु

मेघा- बड़ा ध्यान रखती है अपनी दीदी का मेरी कम्मो रानी

कम्मो- दीदी ख़याल तो हम सबका रवि रखता है हम तो बास डेली वाले काम hi करते है

रेखा सब समझ रही थी की कम्मो किस दिशा में बायत कर रही है पर अपनी छोटी बेहेन को यु तड़पता हुआ देख कर रेखा को अंदर hi अंदर बहुत मजा आ रहा था

रेखा- है दीदी कम्मो सच बोल रही है और आपको पता है रवि सबसे ज्यादा ख्याल तो तो मेरा रखता है क्यों कम्मो

रेखा एक क़ातिल मुस्कान के साथ कम्मो की और डेक्टि हुई बोलती है

कम्मो-( है है वो तो मैं जानती hi हु जब दिन रात अपने छोटे भाई के लुंड पर छड़ी रहोगी और उसे अपनी छूट और गांड खोल कर दिखती रहोगी तो ध्यान तो उसका सबसे ज्यादा तुम पर hi रहेगा ना)

मेघा- अरे तुम दोनों ऐसे मत झगड़ा करो वो हम तीनो का भाई है और तीनो का ख्याल रखता है समझी अब जाओ अपना अपना काम करो मैं भी संडास करके आती हु

मेघा दीदी लोटा लेकर संडास करने के लिए निकल जाती है

इधर कम्मो खाना बनाने बैठ जाती है

रेखा( मुझे सब पता है की तुझे पता चल चूका है की मैं रवि से छुड़वा रही हु और तू भी अब अपने छोटे भाई के सामने अपनी टंगे खोलने के लिए पागल हुई जाए रही है पारर कम्मो मैं तुझे अब और भी ज्यादा तड़पाऊंगी ये मेरा वडा है छुड़ेगी तो तू जरूर रवि से पर हवस में पूरी तरह पागल होने के बाद)

इतना सोचते हुए रेखा को कम्मो को और भी ज्यादा तड़पने का एक आईडिया आता है

और रेखा तुरंत hi उठ कर कमरे के अंदर चली जाती है झा उसका छोटा भाई चैन की नींद सो रहा था

रेखा को अपने छोटे भाई के लुंड का उभर साफ़ साफ़ नजर आ रहा था धोती के अंदर से

रेखा- अरे रवि कब्ब तक्क सोयेगा चल उठ जा

ये बात रेखा थोड़ी जोरसे कम्मो को सुनती हुई बोलती है

और उसके बाद एक दम शांत हो जाती है

रेखा की आवाज सुनकर रवि अंगड़ाई लेता हुआ एक दम सीधा पेट के बल लेत जाता है और उसका अधखड़ा लुंड सीधा धोती के बहार आ जाता है

कम्मो जानती थी की रेखा दीदी जरूर कुछ न कुछ करेगी जिसे देखने के लिए कम्मो अंदर hi अंदर बहुत ज्यादा उत्सुक भी थी

रेखा अपनी तिरछी निगाहो से कम्मो का hi इन्तजार कर रही थी और जैसे hi कम्मो दरवाजे के पास आकर छुपने की नाकाम कोशिश करती है रेखा दीदी के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वो अपना काम शुरू कर देती है

रेखा बड़े hi प्यार से अपने हाथ में थूकते हुए अपने छोटे भाई का लुंड थम लेती है और उसे ऊपर निचे करती हुई खड़ा करने की कोशिश करने लगती है

रेखा- अरे मेरे राजा भाई कितनी देर तक्क सोयेगा रात को क्या तू पहाड़ खोद रहा था क्या

रवि- दीदी पहाड़ तो नहीं खोद रहा था पारर कुछ तो कर रहा था ाशी रात टककक

रवि और रेखा की बाटे कम्मो को साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी इधर कम्मो के दिल की धड़कने लगातार बढ़ती hi जा रही थी जिस तरह से रेखा दीदी उसके समाने hi छोटे भाई का लुंड मसल रही थी वो देख कर वो पागल हुई जा रही थी

रेखा- कुछ तो कर रहा था मतलब क्या कर रहा था तू

रवि- अब क्या बताऊ दीदी मैं ना अपनी दीदी की गांड के छेद में अपना लुंड दाल कर किसी रंडी की तरह अपनी दीदी की गांड की धज्जिया उदा रहा था

ये सुनकर तो मनो कम्मो के पैरो के निचे से ज़मीन hi खिसक गयी वो सोच भी नहीं सालती थी की जिसे वो भोला भला समझती थी वो अपनी बड़ी दीदी की गांड मरता होगा और उसके साथ ऐसी बात करता होगा

रेखा- अच्छा तेरी दीदी क्या कोई रंडी है जो तू अपनी दीदी को किसी रंडी की तरह छोड़ रहा था और अपनी दीदी की कोई गांड मरता है क्या तुझे रेहम नहीं आता अपनी दीदी पररर

रवि- दीदी मेरी दीदी सिर्फ और सिर्फ मेरी रंडी है और रही बात गांड की तो मैं तो अपनी दीदी के सरे छेद hi छोड़ता हु और मुझे अपनी दीदी पारर बिलकुल भी रेहम नहीं आता बल्कि मेरा मैं तो करता है की अपनी दीदी को पूरा नंगा करके खुद रगड़ रगड़ कर पटक पटक कर छोड़ू

रवि और रेखा दीदी की बात सुन्करर कम्मो की हालत खराब होना शुरू हो गयी थी और अब उसका हाथ खुद बा खुद hi अपनी चुकी को मसलना शुरू कर चूका था

रेखा- है रम्म तू तो बड़ा hi छोड़ू है मेरे भाई

रवि- दीदी कम् तो तुम भी नहीं हो जब्ब जब्ब मैं तुम्हारी गांड मरता हु तो मुझे ऐसा लगता है की मैं पहली बार hi तुम्हारी गांड छोड़ रहा हु

रेखा- अरे पागल लड़के कभी अपनी दीदी की छूट का भी ख्याल कर लिया कर पानी छोड़ छोड़ कर पागल हो जाती है तेरी दीदी की ये छूट

रेखा तुरंत hi अपनी टंगे रवि के सामने खोल देती है और अपने पेटीकोट को ऊपर उठा देती है

रवि भी तुरंत hi अपना हस्त आगे बढ़ा कर अपनी दीदी की छूट को पकड़ लेता है

रवि- दीदी ये तो सच में hi पानी पानी हुई जा रही है

रेखा- तुझे तो सिर्फ मेरी गांड का छेद hi दिखाई देता है कभी इसकी और भी देख लिया कर

रवि- दीदी आज रात को मेघा दीदी के सोने के बाद रात भर तुम्हारी छूट hi मरूंगा आज की रात मेरी दीदी की छूट के नाम

अब खुस्स हो न दीदी

रेखा- है मेरे प्यारे भाई आज मैं बड़ी खुस हु

रेखा तुरंत hi झुकती हुई रवि का लुंड पकड़ कर अपने मुह्ह में भर लेती है

रवि- अह्ह्ह दीदी आपका मैं नहीं भरा क्या

रेखा- तेरा लुंड hi ऐसा है मेरे छोड़ू भाई की जब जब इसे देखती हु तो मैं करता है की इसे अपने किसी न किसी छेद में घुसा लयऊ

रवि- अह्ह्ह दीदी आज तो काफी दिनों बाद सुबह सुबह hi तुमने मेरा लुंड चूसा है आज का तो दिन hi बन्न गया दीदी क़स्साम से अह्ह्ह्हह

इतना बोलते हुए रवि अपने हाथो को रेखा दीदी के सर पर रखता हुआ एक झटके में अपनी दीदी का सर दबाता हुआ अपना पूरा का पूरा लुंड अपनी दीदी के हलक तक्क उतारर देता है

रेखा तो जैसे कहती hi यही थी वो कम्मो को जो दिखाना कहती थी उससे काफी जायदा दिखा चुकी थी और कम्मो पर उसका असर भी हुआ था

कम्मो तेज तेज सांसे लेती हुई एक हाथ से अपना निप्पल मसल रही थी और दूसरे हाथ से पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी छूट का दाना रगड़ रही थी

रेखा भी पुरे जोश में आ चुकी थी और खूब तेजी के साथ अपना मुँह ऊपर निचे करके अपने छोटे भाई से अपना मुखछोडन करवा रही थी

रकेः जानती थी की कम्मो सबब देख रही है पारर उसे डर था की कहि मेघा दीदी ना आ जाये

रवि तो पुरे जोश में आकर रेखा दीदी का सर पूरी ताक़त से पड़के हुआ था पर रेखा जैसे तैसे रवि का हाथ हटती है और अपना मुँह पीछे खींच लेती है

रेखा के मुह्ह से लगातार थुक्क टपक रहा था जिसे देख कर कम्मो को अंदाजा हो चूका था की रवि सचमुच में रेखा दीदी के छेड़ो को किसी जानवर की तरह छोड़ता है

रवि- दीदी आपने इसे खड़ा तो कर दिया अब इसका जोश तो पी लू

रेखा- अभी नहीं कम्मो और मेघा दीदी घर पर hi है गड़बड़ हो जाएगी

रात को तेरे लुंड का जोश पियूँगी भी और अपने छोटे भाई को अपनी छूट का रस पिलाऊंगी भी

रवि- आज्ज तो आपकी छूट का सारा रस चूस चूस कर पी जाऊंगा दीदी

रेखा- अब ये छूट तेरी hi है तू इसे पी छोड़ चाट जो मैं करे वो कर समझा अब मैं जा रही हु मेघा दीदी संडास करने गयी है तू भी उठ जा खेतो पारर नहीं जाना क्या तुझे

रवि- दीदी आज खाना लेकर तुम आओगी क्या खेत पर

रेखा- क्यों मैं आउंगी तो क्या करेगा

रवि- तुमको पूरी नंगी करके तुम्हारे सरे छेड़ो को छोडूंगा

रेखा- न बाबा न मुझे तो डर लगता गई है तेरे इस गाडगे जैसे लुंड से पता नहीं तू कब इस मुसल को मेरे कोनसे छेद में घुसा देगा

इतना बोलकर रेखा हसने लगती है

रेखा- अच्छा चल तिल है मैं कोशिश करूंगी अब उठ जा

इतने में मेघा दीदी भी बहार का हेण्डपम्प चला कर हाथ धोने लगती है और रेखा भी तुरंत hi कमरे के बहार निकल जाती है

रेखा की नजर कम्मो पर पड़ती है कम्मो अपनी खाना बनाने वाली जगह पारर वापस आकर बैठ चुकी थी

इधर रेखा दीदी कम्मो को दिखते हुए अपने मुह्ह पर लगा हुआ थुक्क साफ़ करती है और रेखा को अपनी छोटी बेहेन की लाल हो चुकी आँखों में हवस साफ़ साफ़ नजर आ रही थी

रेखा जानती थी की कम्मो अब अंदर hi अंदर रवि के निचे लेटने के लिए तड़प रही है

इधर कम्मो भी समझ चुकी थी की अब रेखा दीदी उसे दिखा दिखा कर और भी ज्यादा तड़पना कहती है

अब कम्मो अपने दिमाग में रवि से कैसे छुड़वाना है इसकी प्लानिंग करने लगी थी ......
 
अपडेट-86

मेघा दीदी संडास करके घर के भीतर आ चुकी थी

इधर रेखा दीदी बार बार कम्मो को देख देख कर एक अलग hi अंदाज में मुस्कुरा रही थी

और कम्मो बेचारी की नजर जब जब रेखा की उस मुस्कान को देखती तो अंदर hi अंदर पागल सी हो जाती और कहि न कहि उसके जेहन में अभी भी रवि का वो विशाल लुंड घूम रहा था जिसे थोड़ी देर पहले रेखा दीदी अपना थूक लगा लगा कर मसल रही थी

खैर कम्मो खाना बना चुकी थी

अब सब लोग नाश्ता करने की तैयारी में बैठे थे

मेघा- अरे रेखा जा रवि को तो बुला ला वो अभी तक्क कमरे में hi है

रेखा- अरे कम्मो जा जरा अपने छोटे भाई को तो बुला ला नाश्ता करने के लिए

कम्मो उठ कर कमरे के दरवाजे तक्क जाती है और वही से दरवाजा बजाते हुए रवि को आवाज लगाने लगती है

रवि तो पहले से hi जगा हुआ था वो कम्मो की आवाज सुनकर तुरंत hi बिस्तर से खड़ा हो जाता है

रवि- हां दीदी आया

थोड़ी hi देर में रवि बहार आकर मेघा दीदी के बगल में बैठ जाता है

मेघा बड़े hi प्यार से अपने छोटे भाई के माथे पर अपना हाथ फूर्ति है और उसके सर को अपनी और झुकाती हुई उसे अपनी गॉड में लिटा लेती है

मेघा- क्यों रे रवि तुझे भूख नहीं लगती क्या जो अभी तक्क सोया हुआ था

रवि- दीदी भूख तो लगी थी पर मैं जनता था की आपलोग मुझे खुद hi बुला लोगे खाना बनने के बाद

रेखा- है अब एक hi तो भाई है वो भी छोटा तो उसका तो हर्र तरह से ख्याल रखना hi पड़ेगा ल्यो है न मेघा दीदी

कम्मो( ः हर तरह से मैं समझती हु रेखा दीदी अपने भाई से अपना मुँह छूट गांड सब छुड़वाओ )

मेघा- अरे है है क्यों नहीं हम लोग हमारे छोटे भाई का ध्यान नहीं रखेंगे तो कौन कोई पड़ोसी आएगा क्या

सब लोग हसने लगते है सिवाय कम्मो के उसके मैं में अलग hi उधेड़ बुन्न चल रही थी

रेखा- अरे कम्मो तेरा ध्यान खा है खा खोई हुई है तू सुबह से hi देख रही हु गुमसुम सी है

मेघा- है ऋ कम्मो तुझे क्या हुआ है जो इतनी गुमसुम सी बैठी है

अब मेघा दीदी खा जानती थी की रेखा कम्मो को सुबह सुबह hi एक बड़ा सा कला साप दिखा चुकी है जिसे देखने के बाद कम्मो मनो अंदर hi अंदर पागल सी हुई जा रही है

थोड़ी hi देर में सब लोग नष्ट कर लेते है और रवि सबसे विदा लेते हुए खेतो की और निकल जाता है इधर उसकी तीनो दिदिया अपने अपने कामो मस लग जाती है

कम्मो बाकि के बचे कूचे बर्तन धो रही थी और रेखा बहार लगे हेण्डपम्प पर कुछ कपडे धोने के लिए चली जाती है

इधर मेघा दीदी अंदर वाले कमरे में आकर लेत जाती है झा थोड़ी देर पहले रेखा अपने छोटे भाई के लुंड को अपना थूक लगा लगा कर मसल रही थी

मेघा( पता नहीं मेरी इस छूट को क्या हो गया है न जाने क्यों जब मेरे छोटे भाई का लुंड मेरी छूट के करीब होता है तो ये न कहते हुए भी पानी पानी हो जाती है और मैं कितनी भी कोशिश कृ रवि से दूर होने की जब मुझे रवि के उस मुसल लुंड का अहसास अपने दोनों चूतड़ों के बिच होता है तो मैं पागल सी हो जाती हु और मुझे अपने छोटे भाई से और भी ज्यादा चिपकने का मैं करता है )

ऐसे hi सोचते सोचते न जाने कब दोपहर हो जाती है

इधर कम्मो रोज की तरह अपने छोटे भाई का खाना बांधने में लगी हुई थी और रेखा और मेघा दीदी सामने पड़ी चारपाई पर बैठे हुए थे

मेघा- क्यों रे कम्मो तू कब्ब जाएगी रवि को खाना देने

अभी कम्मो कुछ बोलती उससे पहले hi रेखा बोल पड़ती है

रेखा- दीदी मैं सोच रही हु क्यों न आज मैं अपने छोटे भाई का खाना खिला औ

कम्मो आज सुबह से hi काफी कुछ प्लान कर के बैठी रही जैसे hi उसे रेखा दीदी के इरादे मालूम पड़ते है वो अंदर hi अंदर आग बबूला हो जाती है

कम्मो- अरे अरे रोज तो मैं जाती हु रवि का खाना लेकर आज अच्चानक तुमको क्या हुआ दीदी

रेखा- क्यों रिइइइ मैं नहीं जा सकती क्या अपने छोटे भाई के लिए खाना लेकर मेरा हक़्क़ नहीं है क्या रवि के ऊपर

कम्मो( ः हक़्क़ तो पता है और ये भी पता है की खाना खिलने के भने तुम खेतो मद जाकर अपने छोटे भाई से अपनी गांड मरवाओगी )

कम्मो- ये कोई बात थोड़े न हुई रोज मैं जाती हु तो आज भी मैं hi जाउंगी

सुबह जब्ब से रेखा ने रवि का लुंड मसला था तब्ब से hi रेखा की छूट में एक साथ हजारो चीटिया रेंग रही थी और रेखा आज अपने छोटे भाई के सामने घोड़ी बनने के लिए बड़ी बेताब थी

इधर मेघा दीदी को आज अपनी दोनों बहनो को लड़ता हुआ देख कर बड़ा hi मजा आ रहा था पारर मेघा ये नहीं जानती थी की ये दोनों आखिर लड़ क्यों रही है

रेखा- अरे तूने कोई लिखा थोड़े hi रखा है की रवि का खाना सिर्फ तू hi लेकर जाएगी उसकी और भी 2 दिदिया है

कम्मो- आप hi बताओ मेघा दीदी अब ये मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया है रवि के लिए खाना ले जाना अगर नहीं ले जाउंगी तो मैं दिन भर क्या करूंगी

रेखा- कुछ भी कर तू तो पहले से hi मस्ती खोर है

मेघा- अरे तुम दोनों तो सिर्फ खाना ले जाने के लिए जंगली बिल्लियों की तरह झगड़ रही हो

रेखा- दीदी कीच भी खो आज तो अपने छोटे भाई के लिए दोपहर का खाना सिर्फ मैं hi लेकर जाउंगी

कम्मो- तो ठीक है दीदी तुम शेर हो तो ये कम्मो भी सवा शेर है आज तो खाना मैं hi लेजर जाउंगी

रेखा को अब कम्मो पर इतना गुसा आ रहा था की अगर यहां मेघा दीदी न होती तो सच में आज कम्मो को रेखा दीदी का एक छठा पड़ hi जाता

रेखा- मैं भी देखती हु तू कैसे जाती है छोटी है तो छोटी बन्न कर hi रेहह

अब तक्क रवि के के लिए दोनों छोटी बेहेने अखाड़े में लड़ रही थी और अब से था सबसे बड़ी दीदी के अखाड़े में उतरने का

रेखा- मेघा दीदी अब्ब आप hi बताओ कक कौन सही है और कौन जलालत

मेघा- अरे अरे तुम दोनों तो लगता गई है की सिर्फ रवि को खाना देने के लिए एक दूसरे के उप्पर गोलिया चला डौगी

मेघा- मैं तो बास ये केहह रही थी की तुम दोनों में से कोई भी जाओ पर मुझे भी साथ ले चलना

इतना सुनते hi रेखा और कम्मो दोनों का मुह्ह उतर जाता है

कम्मो- अरे दीदी आप क्या करोगी वह खेतो में जाकर

रेखा- ः दीदी बड़ी गर्मी होती है दोपहर में तो और आपको तो धुप बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती

मेघा- अरे अरे अभी थोड़ी देर पहले तक्क तो दोनों एक दूसरे से लड़ रही थी और अब्ब दोनों मुझे hi समझने लगी

क्यों मेरा मैं नहीं करता क्या अपने छोटे भाई को काम करते हुए देखने का

अब हालत ये थे की रेखा और कम्मो के पास बोलने के लिए शब्द hi नहीं थे झा दोनों थोड़ी देर पहले एक दूसरे को रोकने में लगी थी

वही अब दोनों के मैं में यही बात चल रही थी की मेघा दीदी को कैसे रोका जाये

रेखा- अरे दीदी बात मनो आओ बोर हो जाओगी वह खेतो में

मेघा- मैंने कह दिया तो कह दिया आज मैं भी चलूंगी बास अब आगे मुझे कुछ भी नहीं सुन्ना समझी तुम दोनों

इस बार कम्मो और रेखा अच्छे से समझ गए थे की अब बात को ज्यादा खींचने का कोई फायदा नहीं है

कम्मो- तो दीदी एक कम्मो करो आज आप hi चली जाओ रवि का खाना लेकर मैं कल चली जाउंगी

रेखा भी खा पीछे रहने. वाली थी

रेखा- ः दीदी ठिक्क है आज आप अकेली चली जाओ और कल कम्मो चली जाएगी मैं परसो चली जाउंगी क्यों तिल है न कम्मो

कम्मो बेचारी अब क्या hi बोलती

कम्मो- ः ठीक है रेखा दीदी

मेघा- तो तैय्य हुआ हम्म तीनो एक एक करके एक के बाद एक दिन रवि का खाना लेकर जाएँगी ठीक है ना

ये फैसला कम्मो के लिए थोड़ा घाटे ला सौदा था पारर वही ये चीज़ रेखा के लिए बड़ी फायदेमंद थी अब उसे हफ्ते में 2 दिन रवि से खुल कर अपनी छूट और गांड छुड़वाने का मौका मिलने वाला था

रेखा की ख़ुशी उसके चेहरे पारर साफ़ नजर आ रही थी

इधर कम्मो भी रेखा की ख़ुशी को पहचान चुकी थी की आखिर उसकी दीदी खुश क्यों है

रेखा- ठीक है दीदी जैसे आपकी मर्ज़ी

मेघा - अरे कम्मो तू क्यों एक दम से उदास हो गयी कोई दिक्कत है क्या तुझे

कम्मो- नहीं नहीं दीदी ठीक है जैसा आओ बोले वैसा hi ठिक्क है

मेघा- ठीक है तो तैय रहा ......
 
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