Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 8 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-69

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हरिया इतने तेज झटके मार रहा था की मनो आज वो अपनी बेटी की छूट को भोसड़ा बना कर hi मानेगा

वही नीलम हर झटके के साथ अपनी गांड को उठा कर अपने बाप की जांघो पर मरती जिससे थप ठप्प की आवाज पुरे कमरे में गूंज रही थी

अब बरी थी राजू की राजू अभी तक नीलम की जीभ को अपने मयह में घुसा कर अपनी दीदी की जीभ का स्वाद ले रहा था

राजू भी देर नहीं करना कहता था

राजू अपना मुँह दीदी के मुँह से हटाता हुआ सीधा खड़ा हो जाता है

और उसका लुंड उसकी दीदी के चेहरे के सामने लटक रहा था

जिसे देख कर नीलम को और भी ज्यादा जोश आ रहा था

अभी नीलम कुछ करती इससे पहले हरिया इतना जोरदार झटका मरता है की नीलम अपने आपको संभालने के लिए अपने हाथ से अपने छोटे भाई का लुंड पकड़ लेती है

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नीलम- अह्ह्ह बापू ahhhhhhhhhhh

अपनी बेटी की सीखे सुनकर हरिया मनो और भी ज्यादा जोश में आ रहा था

इधर राजू का लुंड पूरी तरह तेल से भीगा हुआ था

और हर झटके के साथ नीलम होने छोटे भाई के लुंड को मसले जा रही थी

नीलम को अब अपना दूसरा छेद भी लुंड से भरना था

सोच सोच कर hi उसकी हालत खराब हो रही थी की उसकी खा हालत होगी जब एक साथ उसके छोटे भाई और बाप का लुंड उसकी छूट और गांड में जायेगा तो

नीलम राजू का लुंड छोड़ देती है और अपनी गर्दन को आगे घूमते हुए एक हाथ निचे टिका कर दुआरे हाथ को अपने मुँह में डालते हुए 2 उंगलिया गीली करके सीधा अपनी गांड के छेद में घुसा देती है

राजू अपनी दीदी के इरादे बखूबी समझ रहा था

राजू धीरे धीरे अपनी दीदी के पीछे पहुंच जाता है

इधर नीलम राजू की और एक नजर देखती है

आज राजू की नजरो में उसे अपना छोटा भाई काम और उसकी गांड मरने के लिए उतावला एक आदमी जयादा दिख रहा था

नीलम बड़े hi कामुक तरिके से अपना सर हरिया की छाती पर टिका देती है और अपने हाथो को ोीचे ले जाते हुए अपनी गांड को अपने छोटे भाई के लिए खोल देती है

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हरिया के झटके लगातार चालू थे

नीलम- अह्ह्ह्हह बापू कितना मस्त छोड़ रहे हो तुम

पूरा अह्हह्ह्ह्हहपुरा डालो बापू और तेज भीत तदपि हु मैं छोड़ने के लिए आज छोड़ दो अपनी बेटी को बापू

कोई रेहम मत करना

राजू अपनी दीदी की बाटे औंकार जैसे पागल हुआ जा रहा था उसे लग रहा था मनो उसला लुंड फैट जायेगा

राजू भी अपनी पोजीशन नीलम की कमर के पास सेट करता है और जैसे hi वो अपना सूपड़ा अपनी दीदी की गांड पर रखता है

नीलम की आँखे बंद हो जाती है ुए पता था की अब आगे कोनसी तबाही आने वाली है

इधर हरिया भी झटके मरना बंद कर देता है उसे भी पता था की अब उसकी बेटी की गांड में उसके बेटे का लुंड घुसने वाला है

नीलम-- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

बापू ये देखो न राजू मेरी गांड में अपना लुंड घुसाने को कोशिश कर रहा है

हरिया- बेटी घुसा लेने दे तेरा भाई hi तो है

नीलम- पर बापू उसका लुंड तो तुमसे भी मोटा है मेरी तो गांड hi फाड़ देगा इसका लुंड

हरिया नीलम के सर पर अपने हाथ रख लेता है और बड़े hi प्यार से अपनी बेटी के बालो को सहलाने लगता है

हरिया- बेटी तेरी इस छोटी सी छूट में भी तो तेरे बाप का लुंड चला गई गया न

तू चिंता न कार आज हम बाप बेटे मिलकर तेरे दोनों छेद हमेशा के लिए खोल देंगे

नीलम- बापू जब मेरे दोनों छेद खुल जायेंगे तो उसके बाद

हरिया- उसके बाद क्या बेटी बस तुझे दिन रात छोड़ेंगे तेरा बाप और भाई

अपने बापू की बात सुनकर नीलम के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है

नीलम अपनी कमर को और नहुका देती है जिससे उसकी गांड और भी ज्यादा खुल कर बहार आ जाती है

हरिया भी नीलम का मुँह पकड़ कर उसके मुँह में अपनी जीभ दाल देता है

अब राजू की बरी थी वो अपना सूपड़ा नीलम की गांड पर रगड़ रहा था

नीलम हर पल यही सोच रही थी की उसका भाई अब झटका मरेगा

और यही सोच कर hi उसकी हालत खराब हुयी जा रही थी

राजू एक हल्का सा झटका लगता है पर उसका लुंड फिसलता हुआ ऊपर की और चला जाता है

राजू ऐसे hi 3-4 बार कोशिश करता है पर उसकी दीदी की गांड इतनी कसी हुई थी की उसके सरे प्रयास फ़ैल हो रहे थे

राजू तो अपनी दीदी को बड़े hi प्यार से छोड़ना कहता था पर शायद पहली बार के लिए ये मुमकिन नहीं था

नीलम ( अरे छोटे भाई तेरी दीदी की गांड एक दम ुंचुड़ी है थोड़ा जोर्का झटका मारर्र ऐसे थोड़े hi खुकेगा इसका ढक्कन )

राजू समझ चूका था की प्यार से काम नहीं चलेगा

वो होने लुंड को नीलम की गांड पर दुबारा से रखता गई है और अपने दोनों हाथो से अपनी दीदी की कमर को थम लेता है

और एक जोरदार झटके के साथ उसका लुंड अपनी दीदी की गांड को फाड़ता हुआ आधा अंदर घुस जाता है

नीलम को ये तो पता था की दर्द होगा पर ये नहीं पता था की इतना दर्द होगा

राजू के लुंड में भी काफी दर्द हो रहा था पर वो अब पीछे नहीं हटना कहता था

नीलम अभी पहले झटके से उभरी भी नहीं थी

की राजू होनी कमर को पीछे की और खींचता है

नीलम भी होनी तैयारी कर लेती है अगले झटके के लिए

और राजू बड़ी hi बेरहमी के साथ एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लुंड अपनी दीदी की गांड में थुश देता है

नीलम चिल्लाना कह रही थी पर उसके बाप ने उसके मुँह में अपना मुँह भर रखा था

नीलम की. आँखे लाल हो चुकी थी और उसका चेहरा भी पूरी तरह से लाल हो चूका था

हरिया नीलम का मुह्ह छोड़ देता है

नीलम तुरंत hi पीछे मुड़ती है

नीलम -अह्हह्ह्ह्ह तूने तो मार hi दिया दे राजू अपनी दीदी को पूरा का पूरा लुंड एक hi बार में पेल दिया मेरी गांड में इतना बेरहम तो मेरे बापू भी नहीं है रे अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

नीलम का शररीर दर्द से बुरी तरह काँप रहा था पर वो आज इस दर्द को मजी में बदल दबा कहती थी

राजू भी आज अपनी दीदी के ऊपर रेहम करने के मुद में नहीं था

अभी नीलम कुछ बोलने hi वाली थी की राजू अपने लुंड को टोपे तक बहार निकलता हुआ एक झटके के साथ दुबारा से पूरा लुंड नीलम की गांड में थोक देता है

नीलम- अह्ह्ह्हह्हह रे. कुत्ते फ्री में मिली है तो एक hi दिन में फाड़ देगा क्या

राजू के चेहरे पर एक मुस्कान थी मनो है आज वो मिल गया हो जिसके लिए न जाने कबसे तड़प रहा था वो

अब राजू लगातार अपनी दीदी की गांड में झटके लगा रहा था इधर हरिया भी दुबारा से अपनी बेटी की छूट मरना स्टार्ट कर चूका था

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नीलम- अह्ह्ह्हह कितनी तेज तेज छोड़ रहे हो तुम दोनों मुझ बेचारी को

हरिया - बेटी तू बेचारी नहीं है तू तो बिलकुल एक काम देवी है बेटी

राजू- अह्ह्ह्हह दीदी कितनी hi मस्त टाइट गांड है तुम्हारी मजा आ गयाए

नीलम- आह्ह्ह्ह सेल कुत्ते तूने आज मेरी गांड का बजा बजा दिया और बोलता है कितना मजा आ रहा है

राजू- बहुत बोलती है दीदी तू छुड़वाते समय

इतना बोलते हुए राजू अपनी दीदी के बालो को पकड़ कर अपनी और खींचता है

और नीलम भी अपने भाई के हाथ के शेयर अपना मुँह उसके मुँह के पास ले जाती है

राजू होनी जीभ नीलम के मुँह में घुसा देता है दोनों बाप बेटे बड़ी hi बेरहमी के साथ नीलम को छोड़ रहे थे.

नीलम मनो सेंडविच के बिच में पड़ी पनीर जैसी हो गयी थी इधर हरिया भी अपने दोनों हाथो से अपनी बेटी की छूछीयो को दबोचे हुए था

राजू- क्यों दीदी मजा आ रहा है या नहीं एक साथ डोडो लुओडो की सवारी करके

Neelam-aahhhhhhhhh मजा तो आ रहा है छोटे भाई ओर हालत भी खराब हो रही है तुम दोनों बाप बेटो के लुंड hi गधे जैसे है और तो और एक hi झटके में घुसा दिया

राजू अपना लुंड निकाल कर खड़ा हो जाता है और अपनी दीदी के बाल पकड़ता हुआ उसकी गर्दन को अपनी और घूमता हुआ एक hi झटके में अपना पूरा लुंड अपनी दीदी के मुँह में थुश देता है

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राजू - दीदी अब तो ये तेरा छोटा भाई तुझे रोज इसी तरह दर्द देकर मजा करवाएगा

अगले hi पल राजू अपना लुंड बहार खींच लेता है

और नीलम के बालो को पकड़े हुए hi उसे खड़ा कर देता है

हरिया तो मनो अपनी बेटी की छूट में झटके मरने में इतना वयस्त था की एकदम से जब नीलम अपनी छूट से उसका लुंड निकलती है तो उसका ध्यान टूटता है

हरिआय की नजर अपने बेटे बेटी पर जाती है जो दोनों एक दुआरे के मुँह म मुँह डेल एक दूसरे का मुँह चूस रहे थे

राजू - दीदी लगता है बापू थक गए है तुम्हारी छूट नार मार कर

नीलम- बड़ा आया तू ताकतवर मेरे बापू के सामने कुछ भी नहीं है तू

रुक दिहाती हु

राजू अपनी दीदी से अलग हो जाता है और इस बार नीलम अपने बाप का हाथ पकड़ कर उसे खड़ा करती है

नीलम अपना एक पेअर हवा में उठाते हुए खत पर रख देती है और सामने से hi अपने बापू का लुंड पकड़ कर होनी छूट में घुसाने लगती है

हरिया भी मनो जैसे पूरा पागल हो गया था

हरिया नीलम की एक चुकी को पकड़ कर मुँह में भरता हुआ एक झटके के साथ hi अपना लुंड अपनी बेटी की छूट में भर देता है

Neelam-hayyyyyeee मर गईइइइइइ मैं बापुउउउउउउ

अभी नीलम संभाल ोाती इतने में hi राजू अपनी दीदी के ोीचे आकर खड़ा हो जाता है

नीलम के हाथ पहले से hi उसके बाप के गले में पड़े हुए थे

हरिया राजू को देख कर उसके मनसूबे समझ जाता है और अपनी गदराई हुई बेटी की टैंगो को पकड़ कर एक hi बार में उसे उठा लेता है

हरिया का लुंड अब भी नीलम की छूट में घुसा हुआ था

राजू नीलम की पीठ को चाटता हुआ उसकी गांड के छेद पर अपना लुंड लगा कर होना टोपा अंदर बहार कर रहा था

नीलम- देखा तूने मेरे बापू की ताक़त अपनी बेटी को कैसे हवा में तंग कर छोड़ रहे है

राजू हस्ता हुआ - रुको दीदी अभी मैं भी अपनी ताक़त दिखता हु

इतना बोलते hi राजू एक जोरदार झटके के साथ अपना लुंड पूरा जड़ तक अपनी दीदी की गांड में पेल देता है

Neelam-ahhhhhhhhh ूमममहहहहहहह



नीलम की छूट और गांड ोानी ोानी हो चुकी थी

इस चुदाई को लगभग आधा घंटा हो चला था और अब तक नीलम 3 बार झाड़ चुकी थी पर उसका बाप और भाई झड़ने का नाम नहीं ले रहे थे

हरिया- अह्ह्ह्ह बेटी मेरा पानी निकलने वाला है

नीलम- बापू पूरा पानी छूट में hi भर दो मैं भी तो देखु तुम्हारा पानी छूट में कैसा महसूस होता है

इधर पीछे से राजू भी नीलम को जोरसे दबोच लेता है

नीलम समझ चुकी थी की अब उसके छोटे भाई की भी हिमायत जवाब दे चुकी है

शता सात शता सात

करीब 5 मिंट तक दोनों बाप बेटे नीलम को दबोच कर छोड़ते रहते है

नीलम भी अब 4थी बार झाड़ रही थी

इधर राजू भी अपना पानी पूरा का पूरा नीलम की गांड में भरता जा रहा था



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राजू और हरिया के झटके अब लगातार कमजोर ोाद रहे थे और हर झटके के साथ उनका वीर्य नीलम के कामुक छेड़ो से रह रह कर रिस रहा था

इधर नीलम को एक साथ अपनी छूट और गांड में अपने बाप और भाई का गरमा गरम वीर्य महसूस करके मनो एक अलग hi मजा आ रहा था

नीलम मन hi मन कहती थी की उसका बापू और छोटा भाई उसकी छूट और गांड में ऐसे hi लुंड डेल झड़ते रहे

राजू अपना लुंड नीलम की गांड से निकल देता है और अब तक हरिया की ोाकद भी ढीली हो चुकी थी राजू बिना देरी की ये अपनी दीदी के कंधे को पकड़ कर नीलम को निचे की और बैठा देता है

अब नीलम के मुँह के सामने उसके बापू और भाई के लुंड झूल रहे थे जोकि उसकी छूट और गांड के पानी की वजह से पूरी तरह चमक रहे थे

राजू अपने लुंड को नीलम के होठो पर रख कर दबाने लगता गई है

नीलम भी समझ रही थी की उसका भाई कहता है की अपनी गंदगी वो खुद hi चाट कर साफ़ करे

नीलम भी बिना डियर किये अपना मुँह खोल देती है

इस मौके को हरिया भी खा छोड़ने वाला था राजू के साथ साथ हरिया भी अपना लुंड नीलम के मुँह में घुसा देता है

नीलम भी खा काम थी उसके लिए तो अच्छा hi था एक से भले दो

नीलम बड़े मजे लेलकर दोनों के लुंड मुँह के अंदर hi चाट चाट कर साफ़ कर रही थी

दोनों बाप बेटे अपने लुंड पर लगा सारा पानी नीलम के मुँह में hi साफ़ करके मस्त hi हेट है

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नीलम को 1 घंटे तक रगड़ने क्व बाद दोनों बाप बेटे उसे अपने बिच में लिटा कर उसे दोनों तरफ से दबोच लेते है

राजू का लुंड होनी दीदी की गांड में दुबारा से सुबह रहा था

नीलम अपने गांड को हाथ से उठती हुई राजू के लुंड को होनी गांड में बिच दबा लेती है और अपनी दोनों टैंगो के बिच अपने बाप का लुंड दबा लेती है

और ऐसे hi गरमा गरम बाटे करते हुए तीनो बाप बेटी नींद की आगोश में चले हेट है ......
 
अपडेट-70

जैसा की आपलोगो ने देखा नीलम की सुनी जिंदगी में उसका बापू और छोटा भाई भर बन कर आये

अब नीलम को अपनी जिंदगी से कोई गिला सिकवा नहीं था वो बस अब दिन रात नंगी hi घर में पड़ी रहती और जब हरिया या राजू का मन होता उसके किसी भी छेद में अपना लुंड घुसा देते

कुल मिलाकर अब तीनो बाप बेटे और बेटी की जिंदगी मस्त काट रही थी

इधर राजू भी काम से जल्दी घर आ जाता और अब उसकी सेहर में रुकने वाली आदात भी नीलम की वजह से छूट गयी थी

रेखा का घर.......

रेखा अपने छोटे भाई की गॉड में बैठी थी दोनों भाई बेहेन एक दम नंगे थे

रवि का लुंड उसकी दीदी की गांड में जड़ तक घुसा हुआ था

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रेखा का चेहरा देख कर साफ़ मालूम चल रहा था की उसका छोटा भाई दिन रात उसकी सेवा अपने लुंड से कर रहा है

दोनों भाई बेहेन एक दुआरे के मुँह में मुँह घुसाए एक दूसरे का मुँह चूस रहे था

रवि के दोनों हाथ अपनी दीदी की गदराई चूचियों पर थी

कभी वो रेखा के दोनों निपल्स को पकड़ कर खींच देता तो कभी पूरी चुकी को अपने हाथो में दबोच कर अपनी दीदी का दूध निकलने की कोशिश करता

इधर रेखा एक अजीब से दर्द से कराह रही थी

जिसे सुनकर साफ़ पता चल रहा था की उसे इस दर्द में भी काफी मजा आ रहा गई है

रेखा- ahhhhhhhhhhhhh

रवि- दीदी तुम्हारी चुकी तो और भी ज्यादा मोती हो गयी है

रेखा- अब तू दिन रात मुझे नंगा करके अपने लुंड पर चढ़ाये रखता है और इन्हे हमेशा चुस्त रहता है तो मेरी चूचियों का साइज तो बढ़ेगा hi न

रवि- दीदी बढ़ तो बहुत कुछ गया है आपका

रेखा- है कमीने तूने दिन रात छोड़ छोड़ कर मेरी छूट गांड सब फाड़ दी है

रवि- पर दीदी मजा तो ाओको भी आ रहा है न

रेखा- मजा आ रहा है तभी तो किसी रंडी की तरह तेरी दीदी तेरी गॉड में अपनी गांड में तेरा लुंड फसाये बैठी हुई है

रवि- पर दीदी एक बात तो है मैं तुमको जब भी छोड़ता हु न तो एक अलग सा अहसास होता है मनो मैं तुमको पहली बार छोड़ रहा हु

रेखा- है बीटा अपनी दीदी की छूट और गांड फ्री में मिल गयी है तो छोड़ता जा

रेखा बड़े hi आराम आराम से अपनी गांड को घुमा रही थी इधर रवि का लुंड रेखा की गांड के आखिर चोर पर जाकर टिका हुआ था

रवि अब झड़ने वाला था

रवि- दीदी मेरा झड़ने वाला है

रेखा- तो बता क्यों रहा है वैसे भी तो तू रोज कभी छूट कभी गांड और कभी मेरे मुँह में hi झाड़ता है

रवि- हहहहह दीदी इसलिए बता रहा हु ताकि मेरी दीदी ये न बोले की मुझे पानी छूट या मुँह में लेना है

इतना बोलते हुए रवि अपने दोनों हाथो से अपनी दीदी के पेट को पकड़ते हुए अपनी और खींचता हुआ रेखा के होठो पर होने होठ रख देता है

रवि का शरीर लगातार झटके खा रहा था

रेखा को अपनी गांड की गहराइयो में अपने छोटे भाई का वीर्य साफ महसूस हो रहा था

करीब 5 मिंट तक रवि लगातार अपनी दीदी के होठो को चुस्त हुआ उसकी गांड में अपना वीर्य गिरता रहता है

और आख़िरकार रवि की पकड़ थोड़ी ढीली होती है तो रेखा तुरंत hi उठने का प्रेयस करती है

रवि भी एक झटके में दुबारा से अपनी दीदी की दोनों चूचियों को जकड लेता है

रेखा- अब तो तेरा पानी निकल गया न अब तो जाने दे मुझे बहुत काम पड़े है

तू सुबह से hi मेरी गांड और छूट मार रहा है

रवि- दीदी बैठो न थोड़ी देर काम तो होते रहेंगे

रेखा- है तेरा बस चले तो अपनी इस दीदी की गांड में दिन रात लुंड घुसाए पड़ा रहे

वैसे आज तुझे खेतो पर नहीं जाना क्या

रवि- दीदी खेतो पर तो थोड़ा लेत जाऊंगा तो भी काम करलूँगा

रेखा- है बीटा पहले तो बड़ा भागता था खेतो की और और अब दिन रात अपना ये गधे जैसा लुंड लेके नेरी गांड के पीछे पड़ा रहता है

रेखा भले hi रवि को समझती थी पर आखिरकार तो वो भी यही कहती थी की उसका चिटा भाई उसे दिन रात छोड़ता रहे

करीब 10 मिंट बाद रवि अपनी दीदी को छोड़ देता गई है

और रेखा जैसे hi खड़ी होती है

पछ्ह्ह्ह की आवाज के साथ रवि का लुंड उसकी दीदी की गांड से बहार आ जाता है

उसका लुंड अधमरा हो चूका था पर अभी भी वो खड़ा hi था

रेखा की गांड से उसके छोटे भाई का वीर्य निकलता हुआ उसकी जांघो से निचे की और बह रहा था

रेखा की नजर जब अपने छोटे भाई के लुंड पर पड़ती है तो वो एक पल के लिए सोच में पद जाती है

रेखा( क्या hi लुंड दिया है भगवान् तूने मेरे छोटे भाई को जितनी बार झड़ता है उतनी hi बार ये दुबारा से खड़ा हो जाता है )

रवि के लुंड पर उसके वीर्य के साथ साथ उसकी दीदी की गांड से निकला सफेद पानी भी लगा हुआ था जिसकी वजह से ुका लुंड एक अलग hi चमक मार रहा था

रेखा अभी जाने hi वाली रही को रवि उसका हाथ पकड़ लेता है

रेखा- अब क्या हुआ अब तो जाने दे

रवि- दीदी उसे साफ़ तो कार्डो

रेखा- तू सरे काम मुझसे hi करवाना पहले मेरी गांड मार उसके बाद अपना लुंड भी अपनी दीदी से hi साफ़ करवा वह रे छोटे भाई

इतना बोलते हुए रेखा निचे गिरा पेटीकोट उठा कर रवि का लुंड साफ़ करने hi वाली थी

की तभी रवि उसका हाथ पकड़ लेता है

रवि- दीदी ऐसे नहीं

रेखा- तो फिर कैसे साफ़ कृ

रवि- दीदी अपने मुँह से साफ़ करो न बहुत hi अच्छा लगता है जब तुम अपनी जीभ से मेरा लुंड चाटती हो कसम से मजा आ जाता है

होने छोटे भाई की ये गन्दी गन्दी बाटे सुनकर रेखा के मुँह पर एक मुस्कान आजाती है

रेखा- बड़ा hi गंदा है रे तू मेरी गांड को छोड़ छोड़ कर पूरा लुंड सं गया है तेरा मेरी और तेरी गंदगी से और तू कहता है की मैं इसे चाट कर साफ़ कृ

ये पहली बार नहीं था जब रेखा अपनी गांड से निकला लुंड चाटने जा रही थी पर वो हर बार अपने छोटे भाई को ये अहसास दिलाती थी की जिसके साथ वो ये सब गंदे काम कर रहा है वो उसकी दीदी है

रवि- अब क्या कृ दीदी मुझे ऐसी चीज़े hi अच्छी लगती है

रेखा - चलो अच्छा hi है करवा ले बीटा अपनी दीदी से जो करवाना है वैसे भी थोड़े दिनों में कम्मो आ जाएगी तो ये सब बंद हो जायेगा

रवि- दीदी बाद की बाद में सोचेंगे अभी का मजा क्यों खराब करना देखो तो कितनी मलाई लगी है नेरे लुंड पर अब जल्दी से चाट लो इसे कहि सुख न जाये

रेखा हस्ते हुए अपने घुटनो पर बैठ जाती है और अपनी जीभ निकाल कर अपने छोटे भाई का लुंड चाटने लगती है

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रवि बड़े hi प्यार से अपनी दीदी के बालो को सेहला रहा था और इधर रेखा भी बड़े hi मजे से अपने छोटे भाई के लुंड पर लगी माली को चाट चाट कर साफ़ कर रही थी

करीब 5 मिंट लुंड चाटने के बाद नीलम पूरा लुंड साफ़ करदेती है

और जैसे hi वो उठने को होती है रवि उसका सर पकड़ता हुआ एक hi झटके में अपना आधा खड़ा लुंड अपनी दीदी के मुह्ह में पेल देता है

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रेखा को ब्बि अपने छोटे भाई का ये सवभाव अच्छा लगता था की वो हमेशा hi रेखा को छोड़ने की फिराक में रहता था

1-2 झटके मरने के बाद रवि अपनी दीदी के मुँह को आजाद कर देता है

पर रेखा रवि का लुंड पकडे हुए अब भी अपने चेहरे पर सताये हुए थी

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रेखा- तू सच में बड़ा हरामी हो गया है रवि

रवि- दीदी मैं हरामी नहीं हु

रेखा- तो फिर क्या है रे तू देख तो कैसे ये दुबारा से खड़ा हो गया है

रवि- दीदी मैं हरामी नहीं बल्कि बेहेन छोड़ हु

दोनों भाई बेहेन हसने लगते है

तभी दरवाहे पर खत खत खत की आवाज होती है

रेखा को तो मनो ये ावाह सुनकर सेआप सूंघ जाता है

रेखा- इतनी सुबह सुबह कोण आ गया

रवि- पता नहीं दीदी हमारे घर तो कोई आता भी नहीं गाओं का कहि आपकी शैली नीलम दीदी तो नहीं

रेखा- है वो भी हो सकती है

तभी दरवाजे के उस और से आवाज आती है

दीदी खोलो न दरवाजा कितनी देर लगाओगी जल्दी खोलो

ये आवाज सुनकर दोनों भाई बेहेन की गांड फट जाती है

क्योंकि ये आवाज किसी और की नहीं बल्कि कम्मो की थी

रेखा- ये साली कुटिया खा से आ गयी

रवि उठ कर अपनी धोती पेहेन लेता है

और रेखा भी जल्दी जल्दी अपना ब्लाउज और पेटीकोट पेहेन लेती है और जमीन पर गिरा सफेद पानी अपने पेअर से पॉच देती है

रेखा- तू एक काम कर तू अंदर जाकर लेत जा

और अभी बहार मत आना

रवि रेखा की बात सुबते hi तुरंत कमरे में जाकर लेत जाता है

रेखा अपने आपको संभालते हुए जल्दी से दरवाजे की और जाती है और जैसे hi दरवाजा खोलती है उसकी नजर अपनी छोटी बेहेन कम्मो और बड़ी बेहेन मेघा पर पड़ती है

कम्मो दिमाग की बड़ी hi शातिर थी वो रेखा के चेहरे पर टेंशन भाप जाती है और रेखा के होठो की लिपस्टिक पूरी तरह से बिखरी हुई थी मनो कोई रेखा को चूस रहा हो

रेखा- अरे दीदी आओ आओ

इतने में मेघा रट हुए रेखा के गले लग्ग जाती है

रेखा अभी कुछ समझ पति उससे पहले hi कम्मो बोल पड़ती है

कम्मो- दीदी अब से मेघा दीदी हमारे साथ hi रहेंगी हमेशा के लिए

कम्मो की बात सुनकर रेखा के होश उड़ जाते है

रेखा- पर हुआ क्या

मेघा कुछ बोलने की हालत में नहीं थी वो बस अपनी बेहेन को पकड़ कर रोटी hi जा रही थिई

कम्मो- मेगा दीदी के ससुराल वालो ने इन्हे घर से निकाल दिया क्योंकि ये बाँझ है और अब जीजा दुअरी षादी कर रहे है

मेघा- तू जानती है रेखा मुझमे कोई कमी नहीं है कमी उस सुवर में है

रेखा- कोई बात नहीं दीदी आप रू मैट हम बात करेंगे उनलोगो से

मेघा- अब बात करके कोई फायदा नहीं मुझे भी उस घर में नहीं रहना झा कोई इजात न हो

कम्मो अब तक अंदर वाले कमरे में जा चुकी थी झा उसे रवि लेता हुआ दिखाई देता है

रवि अपनी आँखे बंद किये हुए दरवाजे की और गांड घुमा कर लेता था और तो और वो इतनी ओवर एक्टिंग कर रहा था मि कम्मो का शातिर दिमाग उसकी चोरी पकड़ लेट है

कम्मो( जरूर कुछ तो गड़बड़ है उधर रेखा दीदी की हालत ऐसी है मनो जैसे कोई उनके होठो को चूस रहा हो और इतना रोना धोना होने के बाद भी ये नहीं उठा

जरूर कुछ तो चल रहा है इन दोनों के बिच पता करना पड़ेगा)

मेघा- अगर तुझे दिक्कत है तो बता दे रेखा मैं कहि और चली जाउंगी

रेखा- अरे दीदी कैसी बात कर रही हो आपका hi तो घर है अब से आप भी हम लोगो के साथ hi रहना

मेघा- मेरा भाई खा है अब वही तो हमारा सहारा है बास

रेखा- है दीदी बस अब रवि hi हमारा सहारा है वो अभी सोया हुआ है

मेघा- रवि देख तेरी दीदी आ गयी

कम्मो अभी भी कमरे में hi खड़ी थी और उसकी नजरे रवि पर hi थी रवि भी जनता था की उसके पीछे कोई खड़ा है पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी पीछे मुड़ने की

मेघा ने बहुत hi धीरे से आवाज दी थी पर रवि एक दूँ से उठता हुआ कम्मो से नजरे बचते हुए कमरे से बहार निकल जाता है

कम्मो( अब तो पक्का हो गया जरूर रेखा दीदी ने इसे अपने जाल में फसा लिया है और दिन रात अपने छोटे भाई के लुंड के मजी लूट रही है जल्दी से पता लगाना पड़ेगा कहि रेखा दीदी रवि को अपने जाल में न फसा ले फिर मेरा क्या होगा)

रवि जैसे hi मेघा दीदी को देखता है उसकी आँखे अपनी बड़ी दीदी के गदराये जिस्म पर टिक्क जाती है

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रवि की नजर अपनी दीदी के बड़े बड़े चुचो पर टिक्क गयी थी

असल में गदराये शरीर के मामले में तो मेघा रेखा से भी एक कदम आगे थी

रेखा अपने छोटे भाई की नजरो को पकड़ चुकी थी की कैसे वो अपनी दूसरी दीदी की चूचियों को खा जाने वाली नजरो से देख रहा है

रवि का लुंड अब धीरे धीरे अपनी औक़ात में आ रहा था रेखा की नजर जैसे hi रवि की धोती पर जाती है उसे उसके छोटे भाई के लुंड का उभर साफ़ दिखाई दे रहा था

रेखा - अरे दीदी बैठो न अब तो सबको साथ में hi रहना है

रेखा नहीं कहती थी की रवि की नासमझी की वजह से उसकी जिंदगी दुबारा से वीरान हो जाये

मेघा तुरंत hi आगे बढ़ते हुए रवि को अपने गले लगा लेती है

जैसे hi रवि को अपनी दीदी के मादक जिस्म की खुसबू उसकी नाक में जाती है रवि का लुंड एक झटका मरता गई है जिसे मेघा भी अपनी छूट के ऊपर महसूस करती है पर वो इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देती

रवि का चेहरा उसकी दीदी की चूचियों में घुसा हुआ था

मेघा का ब्लाउज पसीने से पूरा भीगा हुआ था और उसकी पसीने की खुसबू से रवि मनो अंदर hi अंदर जल रहा था

रेखा समझ रही थी की अगर ये दोनों ज्यादा देर तक चिपके रहे तो पक्का आज काम खराब हो जायेगा

रेखा- अरे रवि तुझे खेतो ओर नहीं जाना क्या

रेखा रवि को गुस्से से देखती हुई बोलती है

रवि भी एक hi बार में रेखा की बात समझ जाता है और जैसे तैसे मेघा से अलग होता है

रवि- दीदी आप आराम करो शाम को खूब साडी बाटे करेंगे

रेखा- अरे अब मेघा दीदी हमारे साथ hi रहेंगी तू जब कहे इनसे बात करलेना

रेखा दोनों के बिच में खड़ी हो जाती है ताकि मेघा दीदी को उसके छोटे भाई के लुंड न दिखाई दे जाये

और रेखा बिलकुल नहीं कहती थी की उसकी चुदाई का खेल कभी बंद हो

रवि- दीदी मैं जा रहा हु खेतो पर

रेखा- ठीक है तू जा मैं खाना लेकर आउंगी तेरा

रवि तुरंत hi निकल जाता है

इधर कम्मो कमरे के अंदर से सब कुछ देख रही थी और उसके शातिर दिमाग ने सवाल जवाब शुरू कर दिए थे

कम्मो( अभी तक ये सोया हुआ था और हल्की सी आवाज से मेघा दीदी के पास चला गया और तो और रेखा दीदी के बोलने से ये खेतो ओर भी चला गया पर दोनों के बिच आँखों से क्या इशारा हुआ इसका पता लगाना पड़ेगा

कोई बात नहीं रेखा दीदी तुम देखती जाओ कैसे मैं तुम्हारी चोरी को मेघा दीदी के सामने लती हु )

सोचते सोचते कम्मो वही कमरे में लेत जाती है

और मेघा और रेखा बैठ कर बाटे करने लगती है ............
 
अपडेट-71

रवि अपने खेतो की और जा चूका था

इधर कम्मो कमरे में लेती लेती सो जाती है

और दोनों बहने आंगन में बैठे बाटे कर रही थी

यु तो रेखा को मेघा और कम्मो का अच्चानक से आना अच्छा तो नहीं लग रहा था क्योंकि वो इन दोनों के आजाने से घर में खुल कर नहीं छुड़वा सकती थी

पर थे तो सब भाई बेहेन hi आज नहीं तो कल ये होना hi था

मेघा- और बता कैसी चल रही है जिंदगी

रेखा- दीदी हमारी जिंदगी तो वैसे hi पहले की तरह सुनसान पड़ी है मजे तो तुम्हारे है

रेखा और मेघा की उम्र में 5 साल का अंतर था पर दोनों बहने किसी शैली की तरह रहती थी और बिलकुल खुल कर बाटे करती थी

मेघा- तेरा ये गदराया हुआ शरीर देख कर तो नहीं लगता की तेरी जिंदगी सुनसान है

रेखा- अरे दीदी हमे खा कोई मिला है कहने वाला

मजे तो आपके है अपने आपको तो देखो आपने तो मेरे जिस्म को भी फ़ैल कर दिया है

लगता है जीजा जी खूब रगड़ रगड़ कर छोड़ते है तुमको

मेघा- अरे छोड़ तू उस हरामी की बात न कर आज तक उसने कभी मुझे वो सुख नहीं नहीं सेल का आधा लुंड खड़ा होता है और उसमे भी 2-3 मिंट में hi झाड़ जाता है

रेखा थोड़ी उदास होते हुए

रेखा- तब तो दीदी आपकी प्यास भी आज तक नहीं बुझ पायी मेरी तरह

मेघा- क्या करेगी बहना जब किस्मत में hi इतने छोटे छोटे लुंड लिखे है तो इस प्यासी छूट की प्यास कैसे बुझेगी

मेघा ये नहीं जानती थी की उसकी छोटी बेहेन उससे भी ज्यादा मजे लूट चुकी है और वो भी अपने छोटे भाई के साथ

रेखा अपने एक हाथ से अपनी दीदी की चुकी दबा देती है

रेखा- दीदी इनको देख कर तो लगता है की कोई खूब कास कास कर निचोड़ता है इन्हे

Megha-hhhhhhhahhhhhh

अरे ये तो अपने आप hi फूल गयी और तेरी भी तो किसी से काम नहीं है

मेघा अपने दोनों हाथो से रेखा की छुछिया पकड़ कर दबा देती है

रेखा- दीदी मैं तो खुद से hi निचोड़ लेती हु इन चिचियो का सारा दूध

मेघा ने आज तक खुद को खुद से प्यार नहीं किया था बस कभी कभी वो अपनी पति के झड़ने के बाद अपनी छूट में ऊँगली दाल कर पानी निकाल लेती थी पर आज तक उसने अपने मादक जिस्म का पूरा मजा नहीं लुटा था

उसका पति भी एक शिला आदमी था जो सीधा धोती खोलते hi मेघा के ऊपर साध जाता और 3-4 मिंट में hi अपना पानी गिरा कर सो जाता

सच तो ये था की मेघा भी अब उस घर में नहीं रहना कहती थी उसके सास ससुर सोचते थे की दोष उसके अंदर hi है

पर मेघा बिचारि क्या hi बताती उन लोगो को

मेघा- अरे क्या बात कर रही है तू अपने आपसे भी कभी मजा आता है क्या

रेखा- दीदी तुमने कभी नहीं किया कुछ खुद से

मेघा- नहीं रे मेरे पास तेरे जितना दिमाग खा है

रेखा - तब तो दीदी आपने कुछ भी मजी नहीं किये है जिंदगी में

आप चिंता न कर्रूआ अब आप यह आ गयी हो तो हम दोनों बहने मिलकर खूब मजा करेंगे

मेघा- अच्छा तू मुझे भी मजा करवाएगी

रेखा- कोशिश करूंगी दीदी

दोनल बहने हसने लगती है

पर रेखा की आँखों में एक अलग hi तेज़ था मनो उसका शातिर दिमाग कोई प्लान तैयार कर रहा हो

रेखा- दीदी आप यही लेती मैं खाना बना लेती हु रवि को भी खाना देने जाना है

मेघा- ठीक है

मेघा वही बाजार पड़ी खत पर लेट जाती है

इधर रेखा को आज खेतो पर जाने की बड़ी जल्दी थी रवि रोज दिन में 3-4 बार अपनी दीदी की छूट और गांड मरता था

पर आज सुबह वो अपनी दीदी की गांड hi मार पाया था की तभी ये दोनों बहने आ गयी और रेखा की छूट प्यासी hi रह गयी

रेखा की छूट में चीटिया रेंग रही थी उसके मन में बस ीक hi बात आ रही थी की खेतो पर जाकर रवि से अपनी छूट चुवायेगी

उसकी छूट में मनो इस समय चीटिया रेंग रही थी

असल बात तो ये थी की रेखा अब अपने छोटे भाई की आदि हो गयी थी

वो कहती थी की हर वक़्त उसका भाई उसके बदन के किसी न किसी हिस्से को सहलाता रहे

और आज से पहले करीब 20 दिनों तक यही हुआ रवि बस काम काम से खेतो पर जाता था नहीं तो दन रात दोनों भाई बेहेन घर में नंगे hi एक दुआरे को चरमसुख की प्राप्ति करवाते रहते

रेखा जल्दी जल्दी खाना बना लेती है और कमरे में जाकर कम्मो को देखती है जो घोड़े बेच कर सो रही थी

रेखा( चलो अब मेघा दीदी को उठा कर जल्दी से अपने भाई के पास जाती हु )

रेखा के चेहरे पर एक अलग hi चमक थी

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रेखा बहार आकर एक नजर मेघा दीदी पर डालती है

मेघा की चूचियां आधे से ज्यादा उसके ब्लाउज से बहार झक रही थी

और सोते हुए वो किसी कामदेवी से कम् नहीं लग्ग रही थी

मेघा- सच में दीदी जैसा तुम्हारा बदन है न उस हिसाब से तो तुम हक़दार हो एक मोठे ताजे लुंड की

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रेखा- तभी तो खु दीदी की तुमको देख कर मेरे छोटे भाई का लुंड क्यों झटके मार रहा था

रेखा - दीदी चलो उठ जाओ

मेघा तुरंत hi आँखे मलते हजे उठ जाती है

रेखा- दीदी खाना खा लो मैं खेतो पर जा रही हु रवि को खाना देने

मेघा- अरे अरे रुक जरा इतनी तेजी में क्यों है तू

रेखा अपनी दीदी की बात सुनकर रुक जाती है

मेघा- चल मैं भी चलती हु खेतो पर

रेखा- अरे दीदी तुम खाना खाओ खा प्रेषण होती फिरोगी वैसे भी आप थक गयी होंगी

मेघा- अरे मैं कोनसा फ़ौरन सा आयी हु जो थक जाउंगी और मुझे भूख नहीं है वैसे भी 1-2 दिन से संडास नहीं आ रही है खुल के

रेखा अंदर से बिकुल उदास हो चुकी थी

उसके सरे अरमान पानी में मिलते दिख रहे थे

Rekha-thik है दीदी चलो तुम भी चलो

मेघा को रेखा के चेहरे पर उदासी साफ़ नजर आ रही थी

मेघा- अरे तू इतनी उदास क्यों हो गयी तूने खेत में कोई खजाना गाड़ रखा है क्या जो मैं जाकर लूट लुंगी

रेखा( अब क्या बताऊ दीदी खेतो में खजाना तो नहीं है पर वो लुंड जरूर है जिससे मैं दिन रात छुड़वाना कहती हु)

रेखा- अरे नहीं नहीं दीदी मैं क्यों उदास होउंगी

चलो चलते है

रेखा जबरदस्ती अपने चेहरे पर मुस्कान लती हुई बोलती है

दोनों बहने घर से खेतो की और निकल जाती है .....
 
अपडेट-72

दोनों बहने जल्दी hi खेतो पर पूछ जाती है

रवि थोड़ा दिर hi काम कर रहा था

उसके बदन पर सिर्फ एक धोती थी और गर्मी की वजह से उसका पूरा बदन पसीने में भीगा हुआ था और एक अलग hi चमक मार रहा था

मेघा- देख रही है रेखा तू हमारा छोटा भाई कितनी म्हणत कर रहा है

रेखा- है है दीदी मुझे पता है और वैसे भी आज कल हमारा छोटा भाई दिन रात म्हणत करता है

मेघा नहीं जानती थी की रेखा कोनसी म्हणत की बात कर रही थी

मेघा- सच में वक़्त भी बड़ा बलवान है समय से पहले hi बड़ा हो गया हमारा भाई

रेखा- है दीदी सच कह रही हो तुम

वक़्त बड़ा बलवान है छोटी सी उम्र में hi देखो खेतो में काम कर करके देखो तो कैसे एक मर्द के जैसा बना गया है हमारा छोटा भाई

रेखा- रवि ोोू रवि आजा भाई खाना खा ले

रवि के कानो में जैसे hi रेखा की आवाज आती है उसकी थकान एक सेकंड में उतर जाती है और उसका लुंड अपनी दीदी के नाम से एक झटका मरता है

पर जैसे hi रवि पलट कर देखता है उसकी खुसी एक दम से मायूसी में बदल जाती है

क्योंकि रेखा के साथ मेघा दीदी भी खड़ी थी

रवि( लगता है रेखा दीदी की बात सच हो रही है अब कम्मो दीदी और मेघा दीदी के अजाने के बाद मुझे दीदी को छोड़ने का मौका नहीं मिलने वाला)

रवि अपना फावड़ा कंधे पर लेता हुआ अपनी दीदियो की तरफ जाने लगता है

रेखा की नजर तो उसके छोटे भाई को खा जाने वाली नजरो से देख रही थी पर मेघा के दिमाग में अलग hi ख्याल चल रहे थे असल में वो रवि को एक हीरो की नजर से देखती थी जिसने बचपन में hi अपनी दीदियो की जिमीगरी उठा ली

मेघा- आ गया मेरा छोटा भाई देख तो कैसे पसीने से तर बतर हुआ पड़ा है

रवि का मुद मेघा और रेखा की गदराई जवानी को देख कर एक hi पल में मस्त हो जाता है

दोनों बहने पसीने से भीग चुकी थी

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रवि- दीदी भेजी तो आप दोनों भी हुई हो

रवि मेघा को ऊपर से निचे तक घर रहा था पर मेघा की नजर उसके छोटे भाई के इरादे नहीं जानती थी

पर रेखा जरूर जानती थी की की उसका छोटा भाई अपनी दीदी को उसी नजर से देख रहा हज जिस नजर से वो रेखा को देखता है

रेखा जानती थी की अगर ज्यादा देर तक रवि मेघा दीदी को देखता रहेगा तो उसका लुंड खड़ा हो जायेगा जिसे मेघा दीदी भी देख लेगी और सारा काम खराब हो जायेगा

रवि बार बार नजरे चुरा कर मेघा दीदी की चूचियों पर ले जाता

असल में मेघा ने बहुत hi डीप गले का ब्लाउज पहना हुआ था जिसके वजह से उसके निप्पल्स के ऊपर का सारा हिस्सा साफ़ दिख रहा था

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मेघा- है है चल खाना महा ले थक गया होगा तू भी काम कर करके

तीनो भाई बेहेन झोपडी के अंदर पहुंच जाते है और ज़मीन पर hi एक चादर बिछा कर तीनो ुज़ार बैठ जाते है

रेखा अभी खाना निकल कर रवि को दे रही थी

पर रवि की नजर तो मनो अपनी मेघा दीदी के ब्लाउज पर hi टिक्क गयी थी

रवि( क्या hi चूचिया है दीदी तुम्हारी कैसे ये कैद हो सकती है एक पतले से ब्लाउज में )

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रेखा अब तक रवि के समाने थाली रख चुकी थी

रेखा की नजर दुबारा से रवि पर पड़ती है वो मेघा दीदी को hi देख रहा था और अगले hi पल रेखा की नजर अपने छोटे भाई की धोती पर जाती है झा उसे रवि के लुंड का उभर साफ़ नजर आ रहा था

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रेखा नहीं कहती थी की रवि की नासमझी की वजह से उसका चुदाई कार्यक्रम हमेशा के लिए रुक जाये

रेखा- अरे तुझे भूख नहीं है क्या

रेखा रवि को गुस्से से घूरते हुए बोलती है

रवि भले दिन रात अपनी दीदी की छूट और गांड मरता था पर वो अभी भी अंदर hi अंदर रेखा से डरता था

आखिर वो उसकी बड़ी दीदी जक थी

रवि भी चुपचाप नजरे झुका कर खाना खाने लगता है

रवि को अचानक से एक आईडिया आता है मेघा दीदी को चुने का

रवि- अरे दीदी आप दोनों मेरे लिए तो खाना ले आये पर आप लोग भी तो खाओ

रेखा - तू खले मैंने खा लिया है

रवि- और मेघा दीदी ने

मेघा- अरे मेरा पेट सही नहीं है तू खा ले

रवि- ऐसा कैसे चलेगा दीदी मुझे खिलाओगी और खुद भुकी रहोगी

रवि एक निबला तोड़ता हुआ मेघा के होठो के पास ले जाता है

रवि- लो दीदी खा लो अपने छोटे भाई के हाथ से

मेघा- अरे तू खा ले रवि सच में मुझे भूख नहीं है और तो और सनदास भी ठीक तरह से नहीं हो रहा है 1-2 दिन उपवास करूंगी तो ठीक हो जायेगा

सबदास की बात सुनकर रवि का माथा एक दम से ठनक जाता है और उसका लुंड धोती में hi एक झटका मरता है

रवि भी कदम फुक फुक कर रख रहा था वो नहीं कहता था की उसकी हरकतों की वजह से रेखा दीदी या मेघा दीदी उससे नाराज हो जाये

रवि- दीदी बस एक निबला खा लो फिर मत खाना मेरा भी मैं रख लो

मेघा- तू नहीं मानेगा बड़ा जिद्दी हो गया है तू

मेघा इतना बोलते हुए अपने होठ खोल देती है और रवि भी बिना किसी देर के निवाला अंदर डालता हुआ अपनी थोड़ी सी ऊँगली मेघा के मुह्ह में दाल देता है और अपना हाथ हटते समय मेघा के होठो को रगड़ देता है

रेखा- चल अब जल्दी खाना खा ले

असल में रेखा को चिंता थी की कहि मेघा दीदी के आने के बाद रवि उसकी तरफ ध्यान देना बंद न करदे

पर शायद वो नहीं जानती थी की वो आज भी रवि की पहली पसंद थी

रवि खाना खा लेता है

मेघा- अरे रवि चल थोड़ा आराम करले

रवि- दीदी बहुत काम है खेतो में

मेघा- काम तो दिन भर करता रहेगा थदो आराम भी करले मेरे भाई

रेखा भी छाती थी की वो रवि के साथ थोड़ा वक़्त बिताये चुदाई तो अब होने से रही काम से काम अपने छोटे भाई के नजदीक तो रह सके

रेखा- ः दीदी सही कह रही है चल आजा यही ज़मीन पर लेट जाते है दोपहर बीत जाने दे तब हम भी घर चले जायेंगे और तू भी काम निपटा लेना

अब रवि रेखा को कैसे मना करता

रेखा जल्दी से बिस्तर बचती है और टपक से बिच में लेत जाती है

मेघा को रेखा की ये हरकत देख कर हससीई आ जाती है

मेघा- अरे जो थका हुआ है वो तो लेता hi नहीं और इनको देखो महरानी कैसे टपक से लेत गयी बिच में

इतना बोलते हुए मेघा रेखा के एक और लेत जाती है

रवि भी बिना किसी देरी के रेखा दीदी के बगल में लेत जाता है

मेघा- रवि तुझे याद नहीं आती थी तेरी दीदी की

मेघा और रेखा दोनों पीठ के बल लेती थी

और रवि दोनों बहनो की और मुँह करके दोनों की चूचियों को देख रहा था

मेघा जब सास अंदर खींचती तो उसकी चूचिया एक दम से ुवार की और तन जाती और उसके पतले ब्लाउज से उसके अंगूर जैसे निप्पल्स का उभर साफ़ दिखने लगता

रवि ये नजारा देख कर मस्त हो गया था

इधर रेखा चुपचाप लेती थी पर उसके मन में यही ख्याल चलरहा था की अगर आज मेघा दीदी न आयी होती तो रवि उसे इसी बिस्टेर पर पटक कर छोड़ रहा होता

रवि- दीदी याद तो बहुत आती थी पर आप रहती हु नहीं थी हमारे पास

मेघा- अब तो आ गयी हु न मैं अब जी भर के प्यार कर लेना अपनी दीदी को

रवि के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है

वो अपना हाथ सरकता हुआ रेखा की जांघो को चुने लगता है

रेखा रवि का हाथ पकड़ कर उसे शांत रहने का इशारा करती है ओर रवि खा मानाने वाला था वो अपनी उंगलियों में शेयर रेखा का पेटीकोट ुवार खींचने लगता है

रेखा जानती थी की उसका छोटा भाई मानाने वाला नहीं है और आखिर रेखा भी तो यही कहती थी की रवि उसे चुवे

रेखा करवट बदल कर अपनी गांड को रवि की और घुमा देती है

रवि अपनी गर्दन उठा कर देखता है मेघा दीदी की आँखे अभी खुली हुई थी

रवि अब दुबारा से अपनी कोशिश में लग जाता है और थोड़ी hi देर में वो रेखा का पेटीकोट सरकता सरकता उसकी गांड तक उठा देता है

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रेखा निचे से पूरी नंगी थी उसने कभी जिंदगी में पंतय पहनी hi नहीं थी

रवि अपने हाथो से रेखा दीदी की गांड सहलाये जा रहा था रेखा के ऊपर भी अब हवस का नशा साधने लगा था

पर उसके अंदर एक दर भी था की कहि मेघा दीदी जाग न जाये

सबको लेते हुए 20 मिंट हो चुके थे और मेघा की आँखे अबतक बंद हो चुकी थी

इधर रवि अपनी दीदी की गांड मरने के जुगाड़ में था

रवि अपने 2 उंगलिया मुँह में डालके गिला करते हुए एक hi बार में रेखा की गांड में थुश देता है

रेखा इस हमले से अंदर hi अंदर कराह कर रह जाती है

पर उसके मुँह से कोई आवाज बहार नहीं आती

रेखा मुद कर रवि की और देखती है जो उसके देखता हुआ हस्स रहा था और आखिर में वो अपनी दीदी को आँख मरते हुए अपना लुंड धोती से बहार निकल देता है

रेखा मि नजर मनो उसके छोटे भाई के लुंड पर टिक जाती है

रेखा के मुह्ह में पानी आ रहा था उसका बड़ा मन था की वो अपने छोटे भाई का लुंड अपने गले तक उतर कर उसे पीयर करे पर मेघा दीदी से डर भी था

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रवि का लुंड पूरी तरह से खड़ा हो चूका था

इधर रेखा की छूट में दुबारा से चीटिया रेंग रही थी पर उसे समझ नहीं आ रहा था की वो करे तो क्या करे

रेखा का हाथ सरकता हुआ खुद बी खुद hi रवि के लुंड लार चला जाता है

रवि जल्दी जल्दी सरे काम निपटारन कहता था उसे पता था की मेघा दीदी कभी भी उठ सकती है

रवि रेखा का हाथ हटते हुए

अपने लुंड को थूक से मसलने लगता है रेखा रवि के इरादे भाप चुकी थी

रवि 2 मिंट के अंदर hi अपने पुरे लुंड को थूक से मसल मसल कर पूरी तरह से गिला क्र चूका था

जल्दी hi रवि आगे सरकता हुआ अपना लुंड रेखा दीदी की गांड के छेद लार रख कर अंदर घुसाने की कोशिश करता है

अब सूपड़ा अंदर गया hi था की रेखा उसका लुंड पकड़ कर बहार निकाल देती है

रेखा ( बहुत हरामी लड़का है ये दिन रात मेरी गांड hi मरने की फिराक में रहता है )

रवि अगले hi पल दुबारा से अपना सूपड़ा रेखा दीदी की गांड पर लगता है पर अगले hi पल रेखा दुबारा से उसका लुंड हटा देती है

रवि समझ नहीं पा रहा था की उसकी दीदी कहती क्या है वो एक बार और प्रेयस करता है पर इस बार वो अपना लुंड रेखा की छूट पर सताता हुआ

हल्का सा दबाता है

रेखा मि छूट पहले से hi पानी पानी थी इधर रवि का लुंड भी थूक से पूरी तरह सना हुआ था

रवि का लुंड बिना म्हणत के hi धीरे धीरे सरकता हुआ उसकी दीदी की छूट के अंदर जा रहा था

इस बार रवि वही कर रहा था जो रेखा कहती थी वो भी ख़ामोशी के साथ अपने भाई का लुंड अपनी छूट में घुसवा रही थी

थोड़ी hi देर में रवि का पूरा लुंड रेखा दीदी की छूट में घुस जाता है

अब रवि अपने लुंड को बड़े hi प्यार से अंदर बहार कर रहा था बिना कोई आवाज किये

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आज पहली बार रेखा को ऐसा मजा आ रहा था आज उसका छोटे भाई पहली बार सुकून के साथ बड़े hi प्यार से अपनी दीदी की छूट को छोड़ रहा था

रेखा के चेहरे के भाव लगातार बदल रहे थे उसकी आँखों के सामने hi मेघा दीदी सोई हुई थी और इधर पीछे से उसका छोटा भाई उसकी छूट मरने में व्यस्त था

रवि आगे बढ़ता हुआ अपनी दीदी के कान को अपने मुँह में भर कर चूसने लगता है और एक हाथ आगे बढ़ता हुआ रेखा की चूचियों पर रख देता है

रेखा इतने मजे में सुबि हुई थी की वो रवि का हाथ हटाने की कोशिश नहीं करती पर जैसे hi रवि अपनी दीदी का ब्लाउज खोलने की कोशिश करता है रेखा उसका हाथ पकड़ कर रोक देती है

रवि जनता था की रेखा दीदी कोई रिस्क नहीं लेना कहती इस लिए वो दुबारा से अपनी दीदी की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi दबाने लगता है

रेखा हवस के समुन्दर में दुप्की लगा रही थी उसकी छूट से इतना सफेद पानी निकल रहा था की रवि का पूरा लुंड उस पानी से भीगा हुआ सफेद नजर आ रहा था जिसे देख कर रवि और भी पागल हुआ जा रहा था

इस बार रेखा भी अपने भाई के लिए अपना मुँह पीछे की और घुमा देती है और रवि भी बिना देर किये अपना जीभ रेखा दीदी के मुँह में घुसा देता है और जैसे hi दोनों भाई बेहेन के होठ मिलते है दोनों एक दूसरे के होठो को खा जाना कहते थे

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रवि अपनी दीदी के मुँह में जीभ घूमता हुआ और भी ज्यादा जोश में आ चूका था उसके झटको की रफ़्तार धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी

और जब उसकी जंघे रेखा के पिछवाड़े से टकराती तो थप थप थप थप

की आवाजे आती

और जैसे hi रेखा के कानो में उसकी चुदाई की मधुर आवाज जा रही थी वो और भी मस्त होकर छुड़वाना कहती थी पर उसके मन में एक डारर भी था कहि मेघा दीदी न जाग जाये

करीब 15 मिंट से रवि अपनी दीदी की छूट मार रहा था

रेखा की छूट तो मनो सुबह हुई गांड चुदाई के बाद से hi पनियाई हुई थी

इस कामुक चुदाई में रेखा अबतक 3 बार झाड़ चुकी थी पर रवि रुकने का नाम नहीं ली रहा था

पछ पछहः पछ्ह्ह्ह

रवि का लुंड पूरी तरह से उसकी दीदी की छूट से निकले चिपचिपे पानी से सनआ हुआ था और इतनी ज्यादा चिचिपाहट होने के कारन अब चुदाई की आवाजे पुरे कमरे में गूंज रही थी पर भीत हल्की हल्की

रवि अब झड़ने के करीब था

रवि लगातार अपनी दीदी के मुँह को चूसे जा रहा था और एक हाथ से चुकी मसलता हुआ ोीचे से अपना लुंड अपनी दीदी की राश छोड़ती छूट में पेले जा रहा था

रवि की तेजी देख कर रेखा भी समझ गयी थी की उसका छोटा भाई अब अपने हतियार डालने वाला है

रेखा की छूट 3 बार झड़ने की वजह से पूरी तरह से फूल गयी थी

रवि को ऐसा लग रहा था मनो उसकी दीदी की छूट उसके लुंड को अंदर hi निचोड़ रही है

रवि अपने लुंड को बहार खींचता हुआ एक लास्ट झटका मरता है और इस बार रवि का लुंड सीधा उसकी दीदी की बच्चेदानी से टकराता है

रेखा का शरीर भी अकड़ रहा था उसका एक हाथ उसकी दूसरी चुकी को मसल रहा था

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दोनों भाई बेहेन एक दूसरे से बुरी तरह चिपके हुए थे

इधर रवि के लुंड का ज्वालामुखी फुट जाता है और अगले hi पल उसका लुंड रेखा दीदी की छूट में बरसने लगता है

रेखा अपनी छूट में गिरते गरम पानी का अहसास पाकर अनादर तक काँप उठती है

और दोनों भाई बेहेन एक साथ hi झड़ने लगते है दोनों के मुँह अभी भी एक दुआरे के हटोहो को चूसने और काटने में लगे हुए थे

करीब 5 मिंट तक बिना हिले डुले दोनों उसी अवस्था में पड़े रहते है

और आखिर में रवि अपना लुंड रेखा दीदी की छूट से बहार निकलता है

और उसका लुंड पक्क्क से बहार आ जाता है

रवि रेखा की गर्दन को छूटा हुआ उसके ब्कनो को चूमते हुए बोलता है

रवि- दीदी मजा आया

रेखा भी अपना मुँह उठाते हुए बोलती है

रेखा- भट्ट

रवि- दीदी मेरा लुंड तो साफ़ करो देखो न आपकी छूट की साडी मलाई इस पर hi लगी है

रेखा- क्यों सिर्फ मेरी छूट hi मलाई छोड़ती है क्या तेरा लुंड नहीं छोड़ता

रवि- पर दीदी तुम्हारी छूट कुछ ज्यादा hi माली छोड़ती है

रेखा- तो खा लेना अपनी दीदी की छूट से निकली मलाई

रवि- दीदी अभी नहीं रात को खाऊंगा पेट भरके

अभी तो आप इसे चाट कर साफ करदो ना

रेखा- हॉट बदमाश देख नहीं रहा रेखा दीदी यही सोइ है

रवि- तो कब करोगी

रेखा- रात को

दोनों भाई बेहेन बड़ी hi धीरे धीरे खुसुर फुसुर कर रहे थे जिसे मेघा दीदी नहीं सुन्न सकती थी

दोनों के चेहरे पर एक मुस्कान थी और रवि अपनी दीदी के पेटीकोट को पकड़ कर अपने लुंड पर लगा सारा काम रास पॉच देता है और रेखा भी एक अच्छी दीदी की तरह अपना पेटीकोट सही करते हुए होनी आँखे बंद कर लेती है

इधर रवि भी अपनी धोती सही कर लेता है पर अगले hi पल वो पीछे से अपनी दीदी से चिपक जाता है और अपने हाथो को आगे बढ़ता हुआ अपनी दीदी की चूचियों को सहलाने लगता है

रेखा- तेरा मैं नहीं भरा अभी

रवि- नहीं दीदी और छोड़ना है मुझे

रेखा- अरे कुत्ते कुछ तो शर्म कर मेघा दीदी उठ जाएगी

रवि- दीदी तुमको आधे घंटे से छोड़ रहा था तब तो उठी नहीं अब कैसे उठ जाएगी

अपने छोटे भाई का बचपना देख कर रेखा के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

रेखा- रात को पक्का ठीक है छोटे भाई

रवि- ठीक है दीदी पक्का

रवि के हाथ अभी भी उसकी दीदी की चूचियों को सेहला रहे थे और रेखा ने अपने हाथो को रवि के हाथो के ऊपर रखा हुआ था.......
 
अपडेट-73

इधर रेखा अंदर hi अंदर बड़ी खुस थी की कैसे उसके छोटे भाई ने उसे दीदी के सामने hi छोड़ दिया और मेघा दीदी को कोई खबर भी नहीं मिली

रवि अपने हाथ को रेखा की एक चुकी के ऊपर दाल कर सो गया था

रवि से छूट मरवाने के बाद रेखा भी मस्त होकर सोई हुई थी

शाम को करीब 5 बजे मेघा दीदी की आँख खुलती है

जैसे hi वो उठ कर अपनी आँखे मल्टी हुई रेखा की तरफ देखती है उसके चेहरे ओर एक मुस्कान आ जाती है

रवि का हाथ अभी भी रेखा की एक चुकी पर था पर रेखा सोने से पहले hi अपने कपडे ठीक कर चुकी थी

मेघा( कितना प्यार है दोनों भाई बेहेन में देखो तो कैसे एक दूसरे से लिपटे हुए है सच में मेरा भाई लाखो में एक है भगवान ऐसा भाई सबको दे )

मेघा को ऊपर वाला प्यार तो दिख रहा था पर वो ये नहीं जानती थी की उसका छोटा भाई अपनी दीदी को जानवरो की तरह दिन रात छोड़ता है और रात भर अपनी दीदी की गांड में लुंड घुसाए सोता है

मेघा- अरे उठ जा रेखा कब तक सोयेगी

रेखा आओनी आँख मलते हुए उठ जाती है और रेखा के उठनर की वजह से रवि का हाथ सरकता हुआ रेखा की छूट के ऊपर आजाता है

रेखा एक नजर मेघा दीदी पर डालती है और उसे अगले hi पल अहसास होता है की उसके छोटे भाई का हाथ बिलकुल उसकी छूट के ऊपर है

रेखा जल्दी से रवि के हाथ को अपने शरीर से अलग कर देती है

मेघा- अरे दिन भर यही अपने छोटे भाई के साथ चिपकी रहेगी क्या

मेघा की बात सुनकर रेखा की आँखे बड़ी बड़ी हो जाती है उसका दिल जोरो से धड़क रहा था की कहि मेघा दीदी को पता तो नहीं चल गया की उसके छोटे भाई और उसके बिच चुदाई का खेल होता है

रेखा - अरे दीदी मैं नहीं चिपकती ये तो रवि hi सोते वक़्त अपने हाथ पेअर फेक कर सोता है आप hi बताओ क्या कृ

रवि की भी नींद खुल चुकी थी पर वो चुपचाप आँखे बंद किये लेता अपनी दोनों दीदियो की बात सुन रहा था

मेघा- अरे चिपकता भी है तो उसमे क्या हो गया वो कोई गैर थोड़े hi है जो तुझे गलत इरादे से चुवेगा तेरा छोटा भाई hi तो है

मेघा की बात सुनकर रेखा की टेंशन गायब हो जाती है और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

रेखा ( अब क्या बताऊ दीदी तुमको की तुम्हारा छोटा भाई अपनी इस दीदी को कितने गंदे गंदे इरादों से छूटा है वो मेरे साथ कितने गंदे गंदे काम करता है वक़्त आने दो आप खुद hi जान जाओगी)

मेघा- चल जल्दी उठ जा और घर चल वो अकेली परेशान हो रही होगी

और रवि तू भी उठ जा जल्दी

मेघा रवि को एक बार हिलती हुई इतने में hi रवि उठ कर बैठ जाता है

मेघा- मैं ोेशब करके आती हु तू भी बहार आजा घर चलते है

मेघा इतना बोलते हुए बहार निकल जाती है

रेखा जैसे hi उठने को होती है उसका छोटा भाई उसकी कलाई को पकड़ कर अपनी और खींच लेता है

और रेखा तो हमेशा hi अपने छोटे भाई की बहो में जाने के लिए बेताब रहती थी

रेखा एक झटके में hi गिरती हुई सीधा रवि के लुंड के ऊपर बैठ जाती है जो अबतक आधा खड़ा हो चूका था

रवि- खा जा रही हो दीदी रुक जाओ न मेरे साथ चलना घर

रेखा के होठो पर एक मुस्कान थी

रेखा- हट जा कमीने दीदी यही बहार hi है

रवि- तो क्या हुआ

रेखा- है रम्म तो तू क्या मुझे दीदी के सामने hi छोड़ेगा

रवि- अभी छोड़ा तो था आपको दीदी के सामने

रेखा- बड़ा कमीना है रे तू चल छोड़ मुझे

रवि- देखो न दीदी तुम्हारी इस भरी भरकम गांड का भर महसूस करके मेरा लुंड दुबारा से खड़ा हो गया इसे तो शांत कार्डो

रेखा- और कैसे शांत होगा तेरा ये मुसल

रवि- दीदी इसे अपनी गांड के छेद में दाल लो अपने आप शांत हो जायेगा

रवि का लुब्द पूरी तरह से खड़ा होकर रेखा की गांड में घुस चूका था

रेखा को भी बड़ा मजा आ रहा था अपने छोटे भाई के लुंड पर कूदते हुए

दोनों को जैसे कोई चिंता hi नहीं थी की यह उनके अलावा कोई तीसरा भी है

रवि ने अपने हाथो को रेखा के पेट पर टिका दिया था और वो अपनी एक ऊँगली को अपनी दीदी की नाभि के अंदर बहार कर रहा था

रेखा- छोड़ दे रवि दीदी आ जाएँगी

रवि- दीदी पहले इसे तो शांत कार्डो

नहीं तो ये ऐसे hi रहेगा रात भर

रेखा- मैं नहीं करती तू खुद करले

अभी रवि कुछ बोलता उससे पहले hi मेघा की आवाज दुबारा से कमरे में गूंज जाती है

मेघा- अरे खा रह गयी रे रेखा तू

रवि भी अपनी बड़ी दीदी की आवाज सुनकर डर जाता है और एक दम से रेखा को छोड़ देता है

रेखा भी अगले hi पल एक झटके में खड़ी हो जाती है

और एक नजर अपने छोटे भाई के लुंड पर डालती है जिसका उभर ऐसा था की रवि की धोती उसके लुंड ओर लूरि तरह से चिपकी हुई थी और उसका साइज धोती के ऊपर से hi मालूम पड़ रहा था

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रेखा- चल अब तुहि इसे शांत करना

मंत्र तो रेखा का भी खूब था इस वक़्त रवि से अपनी गांड मरवाने का पर बहार से मेघा दीदी लगातार आवाजे मार रही थी

रवि- नहीं दीदी शांत तो तुमको hi करना पड़ेगा अभी नहीं तो रात को

रेखा- पर रात को तो मेघा दीदी भी हमारे साथ में सोयेंगी

रवि- तभी तो मजा आएगा दीदी और आज मैं मेघा दीदी के सामने तुम्हारी गांड मरूंगा जब वो सो जाएँगी तब

अपने छोटे भाई के मुँह से ऐसी बाटे सुनकर hi रेखा की छूट पानी पानी हो चुकी थी

रेखा अपने पेअर से रवि के लुंड को दबा देती है

रवि -अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

रेखा- बड़ा आया मेरी गांड मरने वाला चल हॉट

रेखा इतना बोलकर एक कामुक मुस्कान के साथ बहार निकल जाती है

और दरवाजे के बाजार hi मेघा खड़ी थी

मेघा- अरे तू कितना टाइम लगती है

रेखा- दीदी वो न रवि दुबारा सो गया था इसीलिए लेत हो गयी उसे जगाने में

बड़ा बदमाश है ये लड़का

मेघा- अरे बदमाश नहीं है वो हमारा छोटा भाई है उसे प्यार किया कर तू उसे डाटा मत कर

तुझे पता है वो भी तुझसे बहुत प्यार करता है दोपहर में कैसे तेरी चुकी पर हाथ रख कर सोया हुआ था

Rekha(ab क्या बताऊ दीदी तुम्हारा छोटा भाई कितना बदमाश है और क्या क्या करता है वो मैं कैसे बताऊ तुमको)

मेघा की बात सुनकर रेखा के कान खड़े हो जाते है

रेखा- कब दीदी मुझे तो पता hi नहीं रुको इसको घर आने दो बताती हु अपनी hi दीदी की चुकी पकड़ कर सोता है कमीना

मेघा- अरे पगली वो कोई गैर थोड़े hi है तेरा छोटा भाई है अगर उसने तेरी चुकी को छू भी लिया तो क्या होगया

उसका इरादा गलत नहीं था समझी

रेखा- है दीदी समझ गयी

रेखा आगे आगे चल रही थी और मेघा पीछे

मेघा- अरे तेरा पेटीकोट क्यों गिला हक़ पीछे से

रेखा को अच्चानक याद ात है की दूहर में कैसे रवि ने उसकी छूट चुदाई के बाद अपना लुंड पेटीकोट में hi पॉच दिया था

रेखा का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था की अब क्या hi बोले अपनी दीदी को

रेखा- अरे दीदी ये बदन देखो इतना गडरा गया है और तो और मेरी तो कोई सेवा करने वाला भी नहीं है जीजा की तरह

बहुत पसीना आता है दीदी उसी से भीगा होगा

मेघा- ः चल जल्दी बड़ी सेवा करता है तेरा जीजा मेरी

दोनों बहने घर की और जाने लगती है ....
 
अपडेट-74

दोनों दिदिया घर पहुंच चुकी थी इधर कम्मो भी पहले से hi खाने की तैयारी में लगी हुई थी

मेघा- हाय राम कितनी गर्मी है रे बहार

रेखा- है दीदी गर्मी का तो पूछो मत और ऊपर से ये गदराया बदन

मेघा- सही कह रही है तू इतना भरी शरीर है तो गर्मी तो लगेगी hi न

मेघा अपनी सदी को खोलते हुए अलग कर देती है और सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में hi आंगन में यदि खत पर लेत जाती है

रवि भी 7:30 पर घर पहुंच जाता है और जैसे hi वो घर में घुसता है उसकी नजर मेघा दीदी की गांड की और पड़ती है

मेघा अपना मुँह दूसरी तरफ करके रेखा से बाटे करने में वयस्त थी

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रवि का लुंड एक जहटके में hi अपनी बड़ी दीदी की मतवाली गांड देख कर खड़ा हो गया

पेटीकोट काफी हद तक मेघा के बड़े पिछवाड़े में घुसा हुआ था

रेखा की नजर जैसे hi राजू पर पड़ती है वो समझ जाती है की ये अब अपनी बड़ी दीदी के गदराये बदन का दीवाना हो गया है

रेखा- अरे रवि तू दरवाजे ओर hi खड़ा रहेगा क्या

मेघा भी पलट कर अपने भाई को देखती है

मेघा- अरे आ गया मेरा प्यारा भाई अजा बैठ जा मेरे पास थक गया होगा

रेखा- अरे दीदी ये थकने वाला नहीं थकने वाला है

ये बात सुनकर कम्मो रेखा की तरफ हैरत भरी नजरो से देखती है

रेखा को अगले hi पल समझ आता है की वो कुछ ज्यादा hi बोल गयी

मेघा- अरे म्हणत करेगा तो थकेगा hi तू परेशान मत किया कर मेरे भाई को कितना ख्याल रखता है अपनी तीनो दीदियो का

कम्मो- है ये बात तो सच है और सबसे ज्यादा ख्याल तो ये रेखा दीदी का hi रखता है

अब रेखा को भी कम्मो की बाटे सुनकर कुछ गड़बड़ लग रही थी

रेखा( ये ऐसी बाटे क्यों कर रही है कहि इसने कुछ देख तो नहीं लिया नहीं रवि को समझना पड़ेगा की अबसे ख्याल रखे की कम्मो की नजर में न आये कीच गड़बड़ करता हुआ)

रवि- दीदी दिन भर काम करके भीग गया हु पसीने की बदबू आ रही है मैं पहले नहा कर आता हु फिर आराम से बैठ कर बात करेंगे

रेखा - अरे तू जा आराम से नहा ले वैसे भी रात को मेघा दीदी हमारे पास hi सोयेंगी आराम से रात भर बाटे करना अपनी दीदी के साथ

रेखा एक शरारती मुस्कान के साथ रवि की और देखती है

रवि( दीदी रात भर तो मुझे तुम्हारी गांड फाड़नी है अपना लुंड दाल कर )

अगले hi पल रेखा की नजरो में एक शर्म दिखती है

मनो जैसे उसने समझ लिया हो की उसका छोटा भाई क्या सोच रहा है

रवि नहाने चला जाता है

इधर कम्मो जल्दी जल्दी खाना बना लेती है

अबतक रवि भी नहा कर आ चूका था इधर तीनो दिदिया खाना निकले अपने छोटे भाई का इन्तजार कर रही थी

मेघा- आजा रवि जल्दी खाना खले गरमा गरम

रवि- बस एक मिनट आया दीदी

रवि और रेखा दोनों रोज hi एक थाली में खाना कहते थे

मेघा- आज तू मेरे साथ hi खले

रवि भी मेघा दीदी के पास बैठ जाता है

इधर रेखा बड़ी hi मायूसी से रवि की और देख रही थी

रवि भी रेखा की और एक नजर मात्रा है

उसे अपनी दीदी को सताने का मैं कर रहा था

रवि- दीदी अब तो मैं रोज hi आपके साथ खाना खाऊंगा

मेघा- है है खा लेना मैंने कोनसा मना किया है छोटा भाई है तू मेरा

मेघा बड़े hi प्यार से एक निवाला तोड़ते हुए अपने भाई को खिलाती है

रवि भी काम हरामी नहीं था वो बार बार खाना कहते वक़्त मेघा दीदी की उंगलियों को मुँह में भर लेता और चूस लेता

मेघा को तो रवि की ये हरकते बचकानी लग रही थी पर ुए ये नहीं आता था की अगर वो रवि के जाल में फास गयी तो इसी बचने के साथ वो उसकी छूट और गांड फाड़ देगा

रेखा को तो मनो आज खाना खाने का मैं hi नहीं कर रहा था

रवि भी बार बार मेघा दीदी को निवाला खिलते समय अपनी दीदी के होठो को रगड़ देता

ये सब हरकते वो जानबूझ कर कर रहा था ताकि रेखा दीदी को जलन महसूस हो

और हो भी यही रहा था रेखा को अब मेघा दीदी अपनी शौतन लगने लगी थी

कम्मो- अरे रेखा दीदी खा खो गयी तुम

खाना नहीं खाना क्या

रेखा- ः कहती हु

कम्मो- सबने खा लिया और आप न जाने क्या सोच रही हो बैठ क्र

रवि मेघा और कम्मो हस्स रहे थे

पर रेखा के चेहरे पर हसि नहीं थी

रवि भी जनता था की रेखा दीदी उसे कितना कहती है और उसे कभी भी किसी चीज़े के लिए मना नहीं करती

मौका देख कर रवि रेखा दीदी को आँख मर कर एक किश देदेता है

रेखा दीदी तो बेचारी प्यार की भूखी थी रवि की हरकत मनो उसकी दीदी के अंदर जान फुक देती है और रेखा के चेहरे पर एक मुस्कान आजाती है

सब लोग खाना खा चुके थे

मेघा- ला कम्मो मैं तेरी मदद करवा देती हु बर्तन धोने में

कम्मो- अरे दीदी कितने hi बर्तन है मैं धो लुंगी आप जाओ आराम करो

मेघा रेखा और रवि तीनो कमरे में पहुंच जाते है

रवि एक साइड में खड़ा था और मेघा और रेखा दोनों बिस्तर लगा रहे थे

जैसे hi बिस्तर लगता है रेखा तुरंत hi बिच में सो जाती है

रेखा की छूट और गांड में चीटिया रेंग रही थी उसके मुहहह में लगातार पानी आ रहा था वो अब अपने छोटे भाई का लुंड चूसने की आदि हो गयी थी और आज सुबह से hi उसने एक बार भी रवि का लुंड नहीं चूसा था

मेघा- अरे कितनी थकी हुई है तू हमेशा hi बिस्तर लगते hi गिर जाती है

रेखा- है दीदी थक तो जाती hi हु

मेघा- तू एक काम कर बिच में मत सो रवि को सोने दे बिच में

मेघा की बात सुनकर मनो रेखा का चेहरा मुरझा जाता है

रेखा- पर क्यों दीदी

मेघा- अरे रवि क्या सिर्फ तेरा hi भाई है वो मेरा भी तो छोटा भाई है न मुझे भी तो प्यार करने दे अपने भाई को

रेखा जानती थी की रवि जरूर किसी न किसी तरह रात को उसको छोड़ेगा वो चुपचाप साइड में सरक जाती है और रवि भी बिच में आकर लेत जाता है

अब रवि की दोनों तरफ उसकी दोनों दिदिया सोई हुई थी

जिनका गदराया जिस्म एक से बढ़ कर एक था

मनो दोनों का बदन एक दूसरे को टक्कर दे रहा हो

रवि पहले hi अपनी बनियान उतार चूका था और सिर्फ एक धोती पहने हुए था

इधर मेघा और रेखा दीदी दोनों hi ब्लाउज और पेटीकोट में अपने छोटे भाई के अगल बगल लेती हुई थी

दोनों की चूचिया साँस लेने के साथ साथ ऊपर निचे हो रही थी जिन्हे देख कर रवि का लुंड अंदर hi अंदर उफान मार रहा था....
 
अपडेट-75

रवि की नजर बार बार मेघा दीदी की चूचियों की तरफ जा रही थी

मेघा की आँखे भी अभी तक खुली हुई थी

इधर रेखा की छूट से उसका गरमा गरम पानी बह रहा था वो सोच सोच कर पागल हुई जा रही थी की क्या होगा जब उसका छोटा भाई उसकी दीदी के सामने hi उसकी गांड मरेगा वो उस दर्द को कैसे बर्दास्त कर पायेगी जब रवि एक hi झटके में पूरा लुंड उसकी गांड की गहराइयो में उतर देगा

कुल मिलाकर रेखा और रवि दोनों hi बेसब्री से मेघा दीदी के सोने का इन्तजार कर रहे थे

इधर मेघा की आँखों से नींद कोशो दूर थी आज उसका भी बड़ा मन था चुदाई का उसकी छूट रह रह कर उसे उकसा रही थी छोड़ने के लिए पर मेघा की जिंदगी तो मनो जैसे वीरान हो चुकी थी

उसकी शादी भी ऐसे आदमी से हुई थी जो उसके गदराये जिस्म का पूरा मजा भी नहीं लूट पता था

रेखा- क्या हुआ दीदी नींद नहीं आ रही क्या

रवि मेघा दीदी की और अपना मुँह करके लेता हुआ था

मेघा- नहीं रे रेखा पता नहीं आज क्या हुआ है नींद hi नहीं आ रही आज

रवि- दीदी आज गर्मी भी काफी है

मेघा- गर्मी तो रोज hi रहती है

रेखा- दीदी तुम्हारा बदन भी काफी भर गया है इसी लिए शायद तुमको गर्मी ज्यादा लगती है

मेघा रवि को अभी तक एक बच्चा समझती थी

पर उसे नहीं पता था की ये बच्चा उसकी बेहेन को दिन रात छोड़ता है वो भी जानवरो की तरह

मेघा- बदन तो तेरा भी गडरा गया है पूरी तरह से

रेखा- है दीदी पर क्या hi कर सकते है इस जिस्म का

मेघा- मुझे तो लगता है की तू भी किसी से खूब म्हणत करवा रही है इस गदराये जिस्म पर

मेघा की बात सुनकर रवि का लुंड एक झटका मरता है

मेघा जिसको नासमझ समझ रही थी वो बच्चा अब अपनी मेघा दीदी को नंगा देखने के सपने देख रहा था

रेखा- अरे हमारी ऐसी किस्मत खा दीदी म्हणत तो तुमने करवाई है जीजाजी से देखो तो कितना फैला दिया है उन्होंने तुम्हे थोक थोक कर

रेखा की बात सुनकर मेघा के गाल लाल हो जाते है

मेघा- चुप कर बेशरम देख नहीं रही बिच में हमारा छोटा भाई सोया है

कुछ तो शर्म कर

रेखा( क्या शर्म कृ दीदी अभी तुम सो जाओगी तो ये छोटा भाई जो तुम्हारे बगल में सोया है मेरी गांड मर मर कर फाड़ेगा

और तुम इसे अभी तक बच्चा समझ रही हो )

मेघा- तुझे भी नींद नहीं आ रही क्या रवि

रवि- नहीं दीदी मुझे भी नींद नहीं आ रही

रवि रेखा को छोड़ छोड़ कर काफी होसियार और शयना हो गया था

रवि - दीदी मुझे एक बात समझ नहीं आती

मेघा - बता क्या समझ नहीं आता तुझे

रवि- दीदी आपका जिस्म और रेखा दीदी का जिस्म तो एकदम गदराया हुआ है इसलिए आप दोनों हमेशा hi पसीने में भीगी रहती हो पर मेरा शरीर तो गदराया हुआ नहीं है तो फिर मुझे इतनी गर्मी क्यों लगती है दीदी

रेखा( मंत्र गयी तुझे मेरे भाई बड़ा hi कमीना है तू कैसे अपनी दीदी को अपने जाल में फसा रहा है पर कहि जोश जोश में गलती न कर बैठना तू 2-2 दीदियो को संभाल नहीं पायेगा)

रवि की बात सुनकर मेघा हसने लगती है

रवि- अरे दीदी आप तो अब हैश रही हो बताओ तो

मेघा- तूने बात hi हसने वाली की है

रवि- इसमें हसने वाली क्या बात है दीदी

रेखा बस लेते लेते दोनों की बाटे सुन रही थी

मेघा- अरे बुद्धू सिर्फ औरतो का जिस्म गदराया करता है मर्दो का नहीं

रवि अपनी दीदी को आजमाना कह रहा था की आखिर उसकी मेघा दीदी खा तक खुलना कहती है

रवि- पर क्यों दीदी

मेघा- अरे तू hi समझा इसे रेखा

रेखा- मेरे समझने से ये समझने वाला नहीं है दीदी आप hi समझा दो अपने लादले भाई को

मेघा- देख जब रेखा और मैं लड़की थे मतलब तेरी उम्र के थे तो हम भी तेरी तरह नार्मल शरीर वाले थे

पर जैसे जैसे लड़की एक औरत बनती है तो उसके बदन का हर हिस्सा फैलने लगता है

रवि- अच्छा दीदी तो मतलब आप मेरी दोनों दीदी अब एक औरत बन चुकी है

मेघा - है मेरे भाई तेरी दोनों दिदिया अब पूरी तरह से औरत बन चुकी है इसीलिए तो हम दोनों पूरी तरह से गडरा गयी है

अब चुपचाप सजा मुझे नींद आ रही है

मेघा जानती थी की अगर वो रवि से ज्यादा बाटे करेगी तो वो लगातार अपने नासमझी वाले सवाल पूछेगा और मेघा क्या hi जवाब देती उसके सवालों का

रवि की नजर लगातार मेघा दीदी की चूचियों पर थी जो हर बार साँस लेने पर और भी ज्यादा फूल जाती

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मेघा का ब्लाउज काफी डीप गले का था जिसकी वजह से उसकी आधी चूचिया बहार की और झक रही थी

रवि- दीदी मुझे तो नींद नहीं आ रही

मेघा- चल आजा अपनी दीदी के साथ सजा तुझे भी नींद आ जाएगी

अगले hi पल मेघा थोड़ा सा सरकते हुए रवि को अपनी और खींचती है

रवि तो मनो पहले से hi तैयार था अपनी दीदी से चिपकने के लिए

उसका लुंड पहले से hi धोती के अंदर झटके मार रहा था

जैसे hi रवि पूरी तरह से मेघा दीदी से चिपकता है

मेघा की छूट एक दम से किसी सख्त चीज़ से टकराती है और जैसे hi उसे अहसास होता है की ये कुछ और नहीं बल्कि उसके छोटे भाई का लुंड है वो अंदर तक कम्प उठती है

मेघा मि सांसे एक पल की लिए मनो ृक्क जाती है

रवि को पता था की उसकी दीदी उसे एक भोला भला बच्चा समझती है जिसका वो पूरा फायदा उठाना छठा था

अगले hi पल रवि अपने हाथो को मेघा दीदी की पीठ पर डालता हुआ अपने सर को अपनी दीदी की अधनंगी चूचियों ओर टिका देता है

मेघा पसीने से पूरी तर बतर थी और जैसे hi रवि की नाक में उसकी दीदी की चूचियों से उठती मादक गंध पड़ती है उसका लुंड एक झटका मरता है जिसका अहसास मेघा को भी होता है

मेघा न कहते हुए भी रवि से चिपकी हुई थी उसे तो यही लग रहा था की रवि अब जवान हो रहा है शायद ये सब उसी वजह से हो रहा है और उसके छोटे भाई के दिमाग में उसके लिए कोई भी गलत ख्याल नहीं है

पर वो खा जानती थी की रवि उसे पटक पटक कर छोड़ना कहता है

झा मेघा एक तरफ अपने छोटे भाई के लुंड के अहसास को झुटला रही थी वही दूसरी तरफ उसकी छूट लगातार पानी छोड़ रही थी जिसके वजह से उसका पेटीकोट पूरी तरह से भीग गया था और अब तो रवि को भी अपनी दीदी की तपती छूट का अहसास अपने लुंड पर हो रहा था

रवि किसी भी प्रकार की जल्द बाज़ी नहीं करना कहता था

वो थोड़ा आगे की और सरकता हुआ अपने हाथ को पीठ से सरकता हुआ मेघा दीदी की कमर तक ले जाता है

गांड के ठीक ऊपर मेघा की कमर पर मॉस का एक भराव था जिसकी बनावट और लचीलापन के सामने मनो मेघा की गांड भी फ़ैल थी

रवि सीधा उस हिस्से को पकड़ कर दबा देता है बिलकुल किसी नासमझ बच्चे की तरह मेघा के शरीर में एक बिजली दौड़ जाती है और वो न छाती हुए भी अपने एक पेअर को थोड़ा उठाते हुए और आगे सार्क जाती है

मेघा के तंग उठाते hi रवि बड़ी चालाकी से अपनी धोती को पीछे खींचता हुआ अपने लुंड को ोुरा नंगा कर देता है

मेघा जोश जोश में ऐसा कदम उठती है जिसका परिणाम ये होता है की मेघा के तंग उठाने की वजह से रवि का नंगा लुंड मेघा की टैंगो से सरकता हुआ सीधा मेघा दीदी की छूट के निचे पहुंच जाता है

और जैसे hi मेघा अपनी टैंगो को बंद करती है उसके होश hi उड़द जाते है रवि का विशाल लुंड उसकी दीदी की दोनों टैंगो के बिच बिलकुल जड़ तक घुसा हुआ था

आज पहली बार मेघा को अहसास हुआ था की जिसे वो बच्चा समझती थी उसका लुंड तो किसी घोड़े से भी बड़ा है

रेखा की दिन रात चुदाई से रवि बड़ा hi शातिर बन चूका था

रवि लगतार अपने हाथो से मेघा दीदी की कमर को मसल रहा था

वो ये सब ऐसे कर रहा था मनो जैसे वो अपनी दीदी को प्यार कर रहा था

इधर मेघा भी यही समझ रही थी की रवि तो नासमझ है

मेघा की छूट में लगातार चीटिया रेंग रही थी वो झड़ने के करीब पहुंच गयी थी

इधर रेखा भी लेते लेते अपने भाई और दीदी की हरकतों को देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी

और उसे पता था की अब वो दिन दूर नहीं जब उसका भाई दुबारा से उसे रात भर नंगा करके छोड़ेगा और वो भी मेघा दीदी के सामने

रेखा सीधी लेती हुई थी वो अपना पेटीकोट का नाडा खोल देती है और उसका हाथ सरकता हुआ खुद बा खुद उसकी छूट पर पहुंच जाता है

रेखा की प्यास भी चरम पर पहुंच चुकी थी उसके हाथ बड़ी hi तेजी के साथ उसकी छूट के कुरेदने में लगे हुए थे

इधर मेघा के सर पर भी हवस का नशा साध चूका था आज तक उसके पति ने सिर्फ उसे गरम किया था पर कभी भी वो चरमसुख का आनंद नहीं ले पायी थी 2 -3 मिंट ने hi उसका पीटीआई उसकी छूट में झाड़ जाता और मेघा को प्यासा छोड़ कर सो जाता

जैसे तैसे मेघा अपनी जिनगी इस प्यास के साथ जी रही थी पर आज उसे एक ऐसे लुंड का अहसास हुआ था जो उसके पति के लुंड से काफी मोटा और लम्बा था

और ये लुंड खुद उसके छोटे भाई का था जिसे वो बच्चा समझती थी

रवि भी काफी गरम हो चूका था उसका मैं तो कर रहा था की अभी मेघा दीदी का पेटीकोट पकड़ कर उठा दे और एक hi झटके में अपना लुंड मेघा दीदी की छूट में पेल दे

पर रवि अपना काम नहीं खराब करना कहता था

इधर मेघा मनो पागल हुई जा रही थी उसका अपने आप पर कोई काबू नहीं था उसकी कमर खुद बा खुद hi धीरे धीरे आगे पीछे हो रही थी

रवि ने भी खूब कस कर मेघा को पकड़ा हुआ था और अपनी गरम सांसे लगातार मेघा दीदी की चूचियों पर मार रहा था जिसके वजह से मेघा लगतार गरम हो रही थी

मेघा दीदी के शरीर से उठ रही पसीने की मादक गंध रवि को पागल बना रही थी वो जैसे तैसे अपने आप पर काबू करके लेता हुआ था पर हालत तो उसकी भी खराब थी

इधर मेघा की सनसे भी काफी तेज चल रही थी

कमरे के अंदर तीनो भाई बेहेन हवस की आग में जल रहे थे

लगातार आगे पीछे होने की वजह से रवि का लुंड लगातार उसकी दीदी की छूट को रगड़ता हुआ आगे पीछे हो रहा था जिसकी वजह से मेघा पुरे जोश में आ चुकी थी और वो अपने एक हाथ को रवि की पीठ पर डालते हुए उसे अपने से चिपका लेती है और अपनी कमर को थोड़ा तेजी से आगे पीछे करना शुरू कर देती है

मेघा दीदी को रवि के जाल में फास्ट हुए देख रेखा भी अंदर hi अंदर खुश हो रही थी और लगातार अपने छूट को मसल रही थी

इधर मेघा दीदी की कमर लगातार तेजी के साथ आगे ोीचे हो रही थी

मैं तो मेघा का भी कर रहा था की अपने छोटे भाई के लुंड को बिना पेटीकोट के अपनी छूट पर महसूस करे

वो समझ रही थी की वो अपने नासमझ भाई का फायदा उठा रही है और अपनी हवस के लिए उसे इस्तेमाल कर रही है

पर मेघा को क्या पता था की उसका छोटा भाई उसे पूरी तरह से नंगा करके उसकी गांड मरने के जुगाड़ में है

मेघा दीदी की स्पीड देख कर रवि भी समझ गया था की अब उसकी दीदी झड़ने वाली है रवि भी मेघा दीदी के गदराये जिस्म के पुरे मजी ले रहा था और अपनी दीदी की कमर को खूब कास कस कर मसल रहा था

आखिरकार मेघा को जिंदगी में पहली बार किसी मर्द के लुंड की वजह से चरमसुख की प्राप्ति होने वाली थी उसका बदन पूरी तरह से आकडने लगता है और मेघा दीदी रवि को खुद कस कर अपने से चिपका लेती है और रवि का पूरा मुह्ह उसकी दीदी की चूचियों में घुस जाता है

रवि भी अपने हथियार दाल देता है मेघा का शरीर लगातार झटके खता हुआ झाड़ रहा था और रवि को अपने लुंड पर अपनी मेघा दीदी की छूट से निकला गरम पानी साफ़ महसूस हो रहा था

रवि झड़ना तो नहीं कहता था पर हालत ऐसे थे की वो कहह कर भी मेघा दीदी से अलग नहीं हो सकता था आखिर में रवि का लुंड भी एक के बाद एक कई साडी पिचकारी मरने लगता है और मेघा दीदी का सारा पेटीकोट गिला हो जाता है

जैसे hi मेघा को अहसास हो है की उसका पेटीकोट निचे से पूरा भीग गया है तो उसे समझते देर नहीं लगती की उसके साथ साथ उसका छोटा भाई भी झाड़ गया है

दोनों भाई बेहेन ऐसे hi लिपटे रहते है

अबतक रेखा भी झाड़ चुकी थी और वो भी नार्मल होकर लेती हुई थी

इधर मेघा के चेहरे पर एक अलग hi मुस्कान थी उस मुस्कान को समझ पाना मुश्किल था

मेघा का अंग अंग आज खिल चूका था झा उसकी जिनगी सुनसान पड़ी हुई थी आज उसी सुनसान जिंदगी में उसके छोटे भाई का लुंड भार बन्न कर आया था

रवि का झड़ने की वजह से मेघा बिलकुल भी नाराज़ नहीं थी उसे पता था की उसने अपने छोटे भाई के साथ जो हरकट की है उसकी वजह से hi रवि झड़दा है और ये बात मेघा बखूबी समझती थी

और अभी भी वो रवि को एक बच्चा hi समझ रही थी

इधर रवि भी अंदर hi अंदर खुस था और वैसे hi अपना लुंड अपनी दीदी की टैंगो में फसाये हुए अपनी दीदी की पसीने की महक का आनंद ले रहा था

करीब 10 निंत के बाद hi रवि का लुंड फिरसे खड़ा हो जाता है और मेघा को बड़ा hi ताजुब्ब होता है की उसका भाई इतना छोटा बच्चा है फिर भी उसका लुंड खड़ने के बाद 20 मिंट के अंदर hi दुबारा से खड़ा हो गया

पर इस बार मेघा भी मजी से रवि के लुंड को अपनी टैंगो के बिच फसा कर उसका अहसास लेने में वयस्त थी

इधर रवि भी अपनी दीदी को खूब कस कर पकडे हुए उससे चिपका हुआ था

िडजर रेखा इन्तजार में थी की कब उसका चिटा भाई दीदी की सेवा करने के बाद उसकी सेवा करेगा.....
 
अपडेट-76

अपने छोटे भाई के लुंड को अपनी जांघो के बिच दबा कर लेते लेते मेघा की न जाने कब आँख लग गयी

करीब 15 मिंट बाद पीछे से रेखा अपने छोटे भाई की गांड के निचे से हाथ घूमते हुए उसके तत्तो को बड़े hi प्यार से सहलाने लगती है

जैसे hi रेखा दीदी का हाथ रवि को अपने तत्तो

पर महसूस होता है उसका लुंड एक जोरदार झटका मरता है

रवि न कहते हुए अभी मेघा दीदी की टैंगो के बिच से अपना लुंड निकलने को मजबूर था क्योंकि उसे अपनी दूसरी दीदी की सेवा भी तो करनी थी

काफी म्हणत करने के बाद रवि अपना लुंड मेघा दीदी की जांघो से बहार निकल लेता है

जैसे hi वो पलट कर सीधा होता है रेखा की नजर अपने भाई के लुंड पर पड़ती है जो मेघा दीदी की छूट से निकले पानी से पूरी तरह भीगा हुआ किसी हिरे की तरह चमक रहा था

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रवि अपनी गर्दन को रेखा दीदी के चेहरे की तरफ सरकने लगता है

रेखा के चेहरे का भाव देख कर साफ़ पता चल रहा था की अब उसके इन्तजार की वो घड़ी ख़तम हो गयी और आखिर वो पल आ hi गया जब उसका छोटा भाई उसे छोड़ छोड़ कर उसकी हवस मिटाएगा

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रवि अपने होठो को सीधा रेखा दीदी के रसीले होठो ओर रख देता है

रेखा एक पल में hi तड़प उठती है और उसका शरीर एक जोरदार झटका मरता है

आज लम्बे इन्तजार की वजह से

उसे अब तक इतना तो समझ आ चूका था की अब वो अपनी बाकि की जिंदगी में वो अब एक पल भी अपने छोटे भाई के बिना नहीं रह सकती

आअज रेखा बड़ी बेशब्र थी अभी रवि अपनी दीदी के होठो का रास पिने में hi लगा था की रेखा धीरे धीरे अपने ब्लाउज के सरे बोटों खोल देती है और एक पल ने hi उसके तरबूज समान चुके बहार को आ गिरते है

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रेखा खुद hi अपने भाई का एक हाथ पकड़ कर अपनी चुकी के ऊपर रख देती है

रवि तो वैसे hi आज मेघा दीदी की हरकत की वजह से पागल हुआ पड़ा था

जैसे hi उसके हाथ रेखा दीदी की चूचियों पर पड़ते है वो जोरदार तरिके से रेखा की चुकी को मसल देता है

रेखा- ahhhhhhhhhhh

रवि तुरंत hi अपना मुँह हटा डेरा है और इस बार वो अपने मुँह को सीधा रेखा के निप्पल पर ले जाता है

और जबरदस्त तरिके से रेखा के निप्पल को चूसने लगता गई है

बिच बिछे में वो अपनी दीदी के निप्पल को दातो से काट लेता है

इस हरकत से रेखा मनो पागल हो जाती है और उसका हाथ सीधा अपने छोटे भाई के लुंड पर चला जाता गई है जोकि पहले से hi खड़ा था

पर रेखा को आज रवि का लुंड काफी चिपचिपा लग रहा था

रवि इस बार अपनी दीदी के कानो के पास अपना मुह्ह लता हुआ उसके कान को अपने मुह्ह में भर लेता है

रेखा तो मनो रवि की गुलाम बन चुकी थी रेखा की आँखे खुद hi बंद हो चुकी थी बस उसका शरीर किसी भट्टी की तरह गर्मी छोड़ रहा था

रवि- दीदी देखो मेघा दीदी ने मेरा पूरा लुंड गन्दा कर दिया

रवि- की बात सुनकर रेखा मनो एक hi झटके में गहरी नींद से जाग जाती है

रेखा- क्या

रवि- है दीदी देखो न हाथ लगा कर

रेखा तो पहले hi उस चिपचिपाहट को महसूस कर चुकी थी

रेखा को मनो एक पल के लिए झटका लगता है

पर अगले hi पल उसकी आँखों में एक चमक आ जाती है और उसके दिमाग में मनो ख्यालो की बढ़ आ जाती है

मेघा की हरकत की वजह से रेखा ने ये तो समझ लिया था की अब वो दिन दूर नहीं जब वो अपने छोटे भाई की लुंड की सवारी पहले की तरह कर पायेगी

झा पहले की तरह कोई डर नहीं होगा और वो पूरी नंगी होकर मेघा दीदी के सामने hi अपने छोटे भाई से अपनी गांड और छूट छुड़वा पायेगी

रेखा- पर कैसे

रवि- पता नहीं दीदी जब मैं मेघा दीदी से चिपका हुआ था तो पता नहीं कैसे मेरा लुंड खड़ा हो गया और मेघा दीदी ने भी अपनी टैंगो को फैला कर मेरा लुंड अपनी छूट के निचे दबा लिया

रेखा- तुझे समझाया था न मैंने तू एक दम पागल है

रवि बड़ा hi भोला भला छोटा भाई बनने की नाकाम कोशिस कर रहा था

उसका एक हाथ अभी भी रेखा के निप्पल्स को तोड़ने मरोड़ने में लगा हुआ था

रवि- दीदी सच में मैंने जानभूझ कर नहीं किया पता नहीं कैसे खड़ा हो गया और मेघा दीदी ने भी मेरा लुंड अपनी टैंगो के बिच दबा लिया

रेखा( ः जानती हु तू कितना शरीफ है छोटे भाई और अब मैं मेघा दीदी की भी क्या बुराई कृ जब मैं खुद hi अपने छोटे भाई का लुंड महसूस करके इससे छोड़ना छाती थी

मेघा दीदी तो शादी शुदा होते हुए भी कुवारी है इसमें उनकी भी क्या गलती है )

रेखा- कोई बात नहीं दीदी ने कुछ बोलै तो नहीं न तुझे

रवि- नहीं दीदी देखो तबसे ऐसे hi सोइ हुई है

रेखा- चल ठीक है तू भी सजा

रेखा ने मुह्ह बनाते हुए खा

रवि- अभी खा नींद आएगी दीदी

रेखा- तो फिर कब नींद आएगी तुझे

रवि- दीदी अभी तो आपकी गांड मरना बाकि है भूल गयी आपने वडा किया था खेतो में

रेखा- ः पता है तू ये सब वेड थोड़े hi भूलता है

रवि- बोलो दीदी डौगी या नहीं अपने इस छोटे भाई को अपनी गांड

रेखा बड़े hi प्यार से रवि के गलो को सहलाते हुए उसके होठो को एक प्यारी सी पप्पी जड़ देती है

रेखा- कभी मना किया है तेरी इस दीदी ने तुझे अपना कोई छेद देने से

रेखा की बात सुनकर रवि के चेरे पर एक शैतानी स्माइल आजाती है

रेखा अभी घूमने hi वाली थी की रवि उसे पकड़ लेता है

रवि- अरे रुको तो दीदी

रेखा- क्या हुआ अब नहीं मरेगा अपनी दीदी की गांड

रवि- आपकी गांड मरने के लिए तो हमेशा ये लुंड तैयार रहता है दीदी

रेखा- तो फिर क्या हुआ

रवि- दीदी देखो न पूरा लुंड कैसे सूखा पड़ा है

रेखा- सूखा नहीं है इस पर तो तेरी बड़ी दीदी की छूट से निकली मलाई चिपकी पड़ी है

रवि- दीदी साफ़ कार्डो न पहहले इसी

रेखा तुरंत hi अपना पेटीकोट पकड़ कर रवि के लुंड की और ले जाती है पर रवि भी एक झटके में hi रेखा का हाथ पकड़ लेता गई

रेखा- अरे हट अब साफ़ करने दी

रवि- ऐसे नहीं दीदी

रेखा जानती थी की अब रवि क्या बोलने वाला है उसके चेहरे पर शर्म के साथ साथ एक उतावला पैन भी था

रवि- दीदी इस चाट कर साफ़ कार्डो न

रेखा- अच्छा जी अपने लुंड पर मलाई लगवा तू मेघा दीदी की छूट की और साफ़ रेखा दीदी के मुह्ह में दाल कर करवाएगा वहहह जी वहहह

रवि- कार्डो न दीदी

रेखा- मैं नहीं करती जा तू मेघा दीदी से hi साफ़ करवा कर आ फिर मर लेना मेरी गांड

रवि- दीदी तुम जानती हो न मेघा दीदी नहीं करेगी

रेखा- अच्छा मतलब करती तो तू करवा लेता मेघा दीदी से अपना लुंड चटवा चटवा कर साफ़

रवि- दीदी वो भी तो मेरी दीदी है न तुम्हारी तरह

रेखा- चल ठीक है वो भी दीदी है इसी लिए साफ़ कर देती हु आगे से अगर किसी की छूट में ये लुंड डालके मेरे पास आया न साफ़ करवाने तो बताउंगी तुझे

रवि- दीदी तुम्हारी कसम मैं अपनी दीदियो की छूट के अलावा किसी की छूट में भी ये लुंड नहीं डालूंगा पक्का वडा बास

अब तो साफ़ कार्डो न दीदी

रवि की बात सुनकर मनो मेघा अंदर hi अंदर खुसी से फूल गयी थी उसके चेरे पर एक मुस्कान थी

अपना सर निचे ले जाते hi मेघा ने रवि के लुंड को अपने हाथो में पकड़ कर उसे सूंघना शुरू कर दिया

रेखा को अपने छोटे भाई के वीर्य और अपनी बड़ी दीदी की छूट से निकली मलाई की सुगंध महसूस हो रही थी जिसे सूंघ कर वो मस्त हो चली थी

अभी रेखा नहीं अपना मुँह खोला hi था की रवि अपने हाथ को रेखा दीदी के सर के पीछे की और लेट हुए अपनी दीदी के सर को अपने लुंड पर दबा देता है

रवि लगातार अपने हाथो से रेखा दीदी का सर दबाता जा रहा था और आखिर में जब रेखा का मुँह रवि के लुंड के चोरे पर आकर लगता गई तो वो रुकता है

रेखा को यकीन नहीं हो रहा था की उसके छोटे भाई ने उसे पीछे कुछ दिनों में अपना लुंड चूसा चूसा कर उसका मुह्ह इतना खोल दिया है की बिना किसी परेशानी के hi रेखा आराम से रवि का लुंड निगल गयी

रवि के अंदर का जानवर जाग चूका था वो अपने दोनों हाथो को रेखा के सर के ऊपर ले जाता है और बड़े hi प्यार से अपनी दीदी के बालो को अपने दोनों हाथो में पकड़ लेता है

रेखा जानती थी की अब उसका छोटा भाई किसी जानवर की तरह अपनी दीदी का मुख छोडन करेगा

पर उसे इस बात से कोई डर नहीं था आखिर कर वो भी यही कहती थी

डर तो इस बात का था की कहि बगल में सोई मेघा दीदी जाग न जाये

रवि अपने दोनों हाथो से रेखा दीदी के सर को संभाकृ है और बालो को पकड़ कर रेखा का सर ऊपर की और खींचता है

रेखा तो मनो होने छोटे भाई के इशारे ओर चलने वाली कोई गुड़िया बन्न चुकी थी

पूरा लुंड बहार आने के बाद रवि एक जोरदार झटके के साथ रेखा के सर को दुबारा से अपने लुब्द के आखिरी चोर तक दबा देता है

रेखा इस हमले से सकपका जाती है उसकी आँखे मनो बहार आने को हो जाती है

पर जैसे तैसे वो अपने आपको संभालती है

इधर रवि लगातार अपनी दीदी के मुह्ह में अपने लुंड पेले जा रहा था

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रेखा के मुहहह से ना कहते हुए भी घूऊ हूउउउउ की आवाजे आ रही थी

आज रवि की जटके इतने जोरदार थे मि वो अपनी आवाज को कहते हुए भी दबा नहीं पा रही थी

रेखा जानती थी की इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ मेघा दीदी है उन्ही की वजह से रवि का जोश दोगुना हुआ है

रेखा जानती थी की आज उसकी गांड की कैर नहीं

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रेखा के मुह्ह से थुक्क बेहटा हुआ रवि के पेट पर गिर्र रहा था

करीब10 मिंट तक अपनी दीदी का मुखछोडन करने के बाद रवि को लग्ग रहा था की कहि उसका लुंड रेखा दीदी के मुँह में hi न झाड़ जाये वो तरनत hi अपने लुब्द से रेखा दीदी के मुह्ह को आजाद करता है

अभी रेखा अपनी सांसे दुरुस्त करने में hi लगी हुई थी की रवि एक दम से खड़ा होता है और रेखा को पकड़ कर पलट देता है

रेखा भी तुरंत hi पलट कर उल्टा लेत जाती है रवि अपनी दीदी की कमर को पकड़ कर ऊपर उठता हुआ अपनी दीदी को घोड़ी बना देता है

अब वो छूट और गांड रवि के समाने थी जिनगी रवि ने पिछले कुछ दिनों में छोड़ छोड़ कर पहाड़ दिया था



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इस बार रवि रेखा के मुह्ह से अपने हाथ को हटा देता है

रेखा- अह्ह्ह्हह कुत्ते कोई ऐसे मरता है क्या अपनी दीदी की गांड सेल हरामी

रवि- तू चीज़ hi ऐसे है दीदी जब मैं तेरी गांड देकता हु तो खुद को रोक hi नहीं पता और मैं करता गई है की तुझे किसी रंडी की तरह छोड़ू

रेखा- अह्हह्ह्ह्ह है ऐसे hi और अंदर तक पेल

अह्ह्ह्हह

तूने पहले किसी रंडी को छोड़ा है क्या

रवि- तुमको छोड़ा है न दीदी तुम किसी रंडी से कम् थोड़े hi होऊ

रेखा- अच्छा अब तुझे तेरी दीदी रंडी लगती है

रवि- हआ पारर सिर्फ मेरी रंडी

रेखा- तो क्या तू अपनी साडी दीदियो को अपनी रंडी बनाएगा

रवि- अगर तुम कहो तो दीदी

रेखा- मेरे कहने से क्या होगा तू तो एक नंबर का छोड़ है

रवि- दीदी मैंने तुम्हे सिर्फ छोड़ा hi नहीं है मैं तुमसे प्यार करता हु एक दम सच्चा वाला तुम जिसे बोलोगी मैं सिर्फ उसे hi छोडूंगा

रेखा- अह्ह्ह्हह्हह mmaaaaaaaaaaaaa किटन्ना तेजजजजज छोड़ता है रे कुत्ते तू अपनी डीडीई की गंडड उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़

रवि- बोलो न दीदी बाकि दोनों दीदियो को भी छोड़ दू क्या

रेखा- मैं कहती तो यही थी की चखे किसी के साथ भी न बटु पर अगर मैंने मेघा दीदी और कम्मो को तुझे छोड़ने से रोका तो ये गलत होगा वो भी तेरी दिदिया है

ठीक है तू अपनी तीनो दीदियो को छोड़ पर आगे क्या करना है वो तू समझ कैसे पटना है

रवि- वो सब तुम मुझ पर छोड़ दो दीदी

कसम से दीदी हो तो तुम्हारे जैसे

रेखा- पर कहि अपनी दोनों दीदियो के चक्कर में इस दीदी को मैट भूल जाना

रवि- कैसी बात करती हो दीदी तुम तुमने hi तो सिखाया है की कैसे एक औरत को खुस किया जाता है

रेखा- अभह चल अब जल्दी छोड़ मुझे कितनी देरर से मेरी गांड मार रहा है अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत जलन हो रही है

रवि- अह्ह्ह्हह दीदी बास होने वाला है

तुमको एक चीज़ दिखाऊ दीदी

रेखा- है दिखा न

अगले hi पल रवि अपने एक हाथ को उठा कर मेघा दीदी की विशाल चुकी पर रख देता है

ये देख कर तो रेखा की मनो गांड hi फट जाती है पर रवि के तेज झटको के आगे उसकी हिम्मत खा थी की वो रवि को रोक पाए

रेखा- क्या कर रहा है तू कमीने जाग जाएँगी दीदी तो

रवि- तो मेघा दीदी को भी छोड़ दूंगा आज नहीं तो कल तो मुझे hi अपनी साडी दीदियो की प्यास बुझानी है न

रवि लगर मेघा की चुकी को हल्का हल्का मसल रहा था इधर मेघा की सांसे भी उखड़ना शुरू हो चुकी थी

आखिर कार रवि एक जोरदार झटके के साथ अपने लुंड को रेखा की गांड में आखिर तक पेल देता है और वैसे hi तेहेर जाता है मनो वक़्त एक पल के लिए रूक गया हो

कई सरे झटको के साथ रवि रेखा दीदी की गांड को अपने वीर्य से भर देता है और आखिरी बून्द गिरने तक रवि रेखा को चूमता चाटता रहता है और फिर वो फिसलता हुआ साइड में गिर जाता है

रेखा- बड़ी सेवा करि तूने आज अपनी दीदियो की सजा मेरे छोटे प्यारे भाई

रवि की आँखे बंद थी रेखा रवि की और देखती है और बड़े hi प्यार से उसके माथे को चुम लेती है और उसकी धोती को उठा कर उसका लुंड धक् देती है

अगले hi पल रवि पलट कर मेघा दीदी से चिपक जाता है

रेखा- तू नहीं सुधरेगा कमीने

रेखा भी अपना पेटीकोट निचे करते हुए अपने ब्लाउज के बोटों बंद कर लेती है और पलट कर लेत जाती है

रवि का वीर्य अभी भी रेखा की गांड में था जिसकी गर्माहट रेखा को बड़ा hi सुकून दे रही थी

थोड़ी hi देर में रेखा की भी आँख लग जाती है

एयर इधर रवि भी अधपक्की नींद में था पर मेघा दीदी के जिस्म से उठती गर्मी महसूस करके उसका लुंड दुबारा से खड़ा हो चूका था

इधर दूसरी तरह बहार कम्मो अपनी खत पर पड़ी हुई बदु hi तेजी के साथ अपनी छूट मसल रही थी

उसका एक हाथ उसकी छूट को सेहला रहा था कर दूसरे हाथ से वो अपनी चुकी को ब्लाउज के ऊपर से hi मसल रही थी

कम्मो( अह्ह्ह कितना बड़ा है रवि तेरा लुंड एक बार बास एक बार अपनी इस दीदी को अपने लुंड की सवारी करवा दे देख तो जरा तेरी दीदी की छूट कैसे तेरे लुंड को याद करके कितना पानी छोड़ रही है भाई आजा जल्दी से अपनी दीदी की छूट की सील को अपने लुंड से तोड़ दे कब तेरा ध्यान रेखा दीदी से हटेगा और तू अपनी इस कम्मो दीदी को छोड़ेगा)

कम्मो( मुझे पका अंदाजा है की मेरा जाने की बाद रेखा दीदी तुझे खुद रगड़ रगड़ कर चूड़ी है तभी तो कैसे उसकी गांड और बहार को आ गयी है और रेखा दीदी के चेहरे पर अब एक अलग hi निखार रहता है मुझे भी वो निखार चाहिए

पता नहीं तू किस तरह से रेखा दीदी को छोड़ता होगा ओर सच बोलती हु तू मुझे जैसे कहे वैसे छोड़ तेरी दीदी मन्ना नहीं करेगी तुझे )

थोड़ी hi देर में कम्मो भी कम्पटी हुई झड़ने लगती है और अपने कपडे ठीक करके अपनी आँखे बंद कर लेती है और उस पल के बारे में सोचते हुए सोने लगती है जब रवि अपने लुंड से उसकी छूट का उद्धघाटन करेगा और उसे ौरी तरह से एक औरत बनाएगा...........
 
अपडेट-77

रात भर हुई मस्त चुदाई के बाद रेखा सुबह अंगड़ाई लेती हुई उठती है

उसके बदन में एक ानिब सा मीठा मीठा दर्द हो रहा था जिसकी वजह रात को हुई चुदाई थी

अभी तक रवि अपनी मेघा दीदी से चिपका हुआ लेता था

रवि मेघा से पीछे से पूरी तरह से चिपका हुआ था

रेखा की नजर जैसे hi रवि और मेघा दीदी पर पड़ती है उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

रेखा कमरे से बहार जाती हुई आंगन में आजाती है झा कम्मो पहले से hi घर के कामो में लगी पड़ी थी

कम्मो- क्या बात है दीदी आज कल बड़ी लेत उठती हो

रेखा- बस नींद थोड़ी अच्छी आयी रात को इसी लिए सुबह देर से आँख खुली

कम्मो( ः मुझे पता है जब रात भर अपने छोटे भाई से अपनी छूट मरवाओगी तो सुबह उठने में देर तो होगी hi न)

कम्मो- पता नहीं क्यों दीदी मुझे तो आजकल नींद hi नहीं आती रात को

रेखा- चल अब तू बातो में मैट लगा मुझे बहुत जोरसे संडास लगी है पहले में करके आती हु

इतना बोलते हुए रेखा आंगन में पड़े लोटे में पानी भरते हुए घर के पिछवाड़े की और निकल जाती है

जब रेखा जा रही थी तो कम्मो की नजर लगातार अपनी दीदी की गांड को घर रही थी

दरअसल रवि से लगातार गांड और छूट मरवाने की वजह से रेखा की चल में एक अजीब सा बदलाव आ गया था

कम्मो( दीदी तुम्हारी गांड को तो देख कर लग रहा है की रवि जबरदस्त तरिके से तुमको दिन रात छोड़ रहा है)

रेखा घर की पीछे पहुंचते hi जल्दी से अपना पेटीकोट उठती हुई अपनी चौड़ी गांड को फैला कर बैठ जाती है

और एक जोरदार आवाज के साथ

Frrrrrhhhr4rr.... उसकी गांड से संडास बहार आने लगती है

और जैसे hi रेखा गर्दन निचे करके अपनी संडास को देखती है उसके गाल शर्म से लाल हो जाते है

असल में रेखा की हगवास के साथ साथ उसके छोटे भाई का वीर्य भी निकल रहा था जिसे रेखा रात भर अपनी गांड में क़ैद किये सोई हुई थी

रेखा अभी संडास करने में वयस्त थी इधर कम्मो सफाई करते करते कमरे के अंदर घुस जाती है

और जैसे hi उसकी नजर मेघा दीदी और रवि के ऊपर पड़ती है उसका मुह्ह खुला का खुला रेहह जाता और उसके मुह्ह से झाड़ू एक झटके में hi गिर जाती है

कम्मो समझ नहीं पा रही थी की आखिर इस घर में रवि दोनों दीदियो को प्यार कर रहा है पर उसकी तरफ ध्यान भी नहीं दे रहा

कम्मो को इतना तो विस्वास था की रेखा दीदी अपने छोटे भाई की नासमझी का फायदा उठा कर उससे चुद रही है पर

आज जैसे रवि मेघा दीदी की गांड में अपना लुंड फसा कर सोया था उससे कम्मो समझ नहीं पा रही थी की आखिर मेघा दीदी और रवि के बिच किस तरह का रिश्ता है

कम्मो जानती थी की रवि का लुंड किसी गधे के लुंड के समान है और जिस तरह से वो मेघा दीदी के पिछवाड़े से चिपका हुआ था कम्मो समझ चुकी थी की उसके छोटे भाई का लुंड उसकी दीदी की मतवाली गांड में फस्स हुआ था

कम्मो बहुत बैचैन हो चुकी थी वो बिना देर किये आगे की और बढ़ती है और मेघा के पैरो के पास जाकर बैठ जाती है और रवि की धोती को थोड़ा सा उठती हुई उसके लुंड को ढूंढने लगती है

और थोड़ी सी म्हणत करने के बाद hi कम्मो को वो दिख जाता है जो वो देखना कहती थी

ये नजारा देख कर कम्मो की हालत खराब हो जाती है उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था क्योंकि जो उसने सोचा था असल में वही निकला

रवि का लुंड पूरी तरह से खड़ा था और अपने आखिरी चोर तक मेघा दीदी की गांड में पेटीकोट के ऊपर से hi घुसा हुआ था और मेघा दीदी भी किसी रंडी की तरह अपने छोटे भाई का लुंड अपनी गांड में फसाये बड़े hi आराम से सोई थी मनो मेघा दीदी को कोई फरक hi नहीं पड़ता था की रवि उनकी गांड में अपना लुंड फसाये सोया था

बहार से कुछ आवाज आती है अभी कम्मो संभाल पति उससे पहले hi रेखा कमरे के अंदर आ जाती है और कम्मो अभी भी मेघा दीदी के पैरो के पास रवि की धोती को उठाये बैठी थी

रेखा की नजर जैसे hi कम्मो पर पड़ती है उसके चेहरे का रंग उड़द जाता है

कम्मो को भी समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या hi करी

कम्मो तेजी के साथ उठती हुई उसी तेजी के साथ कमरे के बहार चली जाती है

रेखा ( हे भगवान् न जाने ये लड़का क्या करवा के मानेगा कहि ये कम्मो पगली शोर न मचाने लगे रवि की हरकते देख कर

खैर शोर मचा कर भी क्या hi करेगी आखिर उसे भी एक न एक दिन इसी लुंड के निचे आना है)

रेखा निचे बैठी हुई रवि की बाजु ोाकद कर उसे अपनी और खिचती है और जैसे hi रवि उसकी और पलटता है रेखा की सांसे मनो एक पल के लिए थम जाती है क्योंकि रवि का लुंड अपने पुरे विकराल रूप में मेघा दीदी की गांड में घुसा हुआ था अगर मेघा दीदी ने पेटीकोट न पहना होता तो पक्का रवि का लुंड उनकी छूट में घुस चूका होता

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और जैसे hi में रेखा की नजर मेघा दीदी की गांड पर पड़ती है रेखा को एक और झटका लगता है क्योंकि रवि के लुंड की जितनी मोटाई थी उसी मोटाई के साथ मेघा दीदी के पेटीकोट में एक छेद बना हुआ था जोकि पेटीकोट के साथ साथ मेघा दीदी की टैंगो की जड़ तक गया हुआ था

रेखा को विस्वास नहीं हो रहा था की रवि किश हद्द तक मेघा दीदी से रात भर चिपका रहा और तो और मेघा दीदी ने रात में उसे एक बार भी अपने से अलग नहीं किया

रेखा के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान थी

उसे समझ आ गया था की कहि न कहि मेघा दीदी भी अब उसके छोटे भाई के लुंड की दीवानी हो गयी है

रेखा जोरदार तरिके से रवि के लुंड को पकड़ती हुई दबा देती है

रवि एक hi झटके में उठ जाता है और घर कर देखता है

रेखा और जोरसे उसका लुंड दबा देती है और रवि की हालत इस समय ऐसी थी मनो वो अभी रू देगा

रेखा- तू रात भर इस शैतान को मेघा दीदी की गांड में फसा कर सोया हुआ था तुझे डर नहीं लगा

अब तक रेखा अपनी पकड़ थोड़ी ढीली क्र चुकी थी रवि के लुंड से और अब उस्ले हाथ अपने छोटे भाई के लुंड को सहलाने में लगे थे

रवि- पता नहीं दीदी मैं तो आराम से लेता था पता नहीं कब्ब मेघा दीदी पलट कर लेत गयी और ये अपने आप hi उनकी गांड में घुस गया

रेखा- तो क्या तू इसी कहि भी घुसता फिरेगा तुझे पता है कम्मो भी देख कर गयी तुझे कैसे तू अपना ये मुसल अपनी दीदी की गांड में थोक कर सोया हुआ था वो सब देख गयी है

रेखा दीदी की बात सुनकर रवि की मनो गांड hi फट जाती है

रवि- सछह में दीदी कम्मो दीदी हमे ऐसे सोते हुए देख कर गयी है क्या

रेखा अपने हाथो पर थूक उड़ेलती हुई उसे रवि के लुंड पर मसल देती है और अब रेखा के हाथ आराम से उसके छोटे भाई के लुंड को सहलाने में लगे थे

रेखा- तुझे लगता है मैं झूट बोल रही हु ृक्क उसे hi बुला देती हु तू उसी से पूछ लेना

रवि- अरे नहीं नहीं दीदी ऐसा न कारु अह्हह्ह्ह्ह

रवि जनता था की कम्मो की तरह की है वो एक hi पल में भड़क जाती थी और तेज तेज चिल्लाने लगती थी

रेखा- क्यों तुझे डर लगता है क्या कम्मो से

रवि- आप तो जानती हो न दीदी कम्मो दीदी कैसी है

रेखा- अरे मेरे बुद्धू भाई इतना डरेगा तो कैसे छोड़ेगा अपनी कम्मो दीदी को

रवि- दीदी वो तो टाइम आने पर hi पत्ता चलेगा

रेखा- अच्छा एक बात बता तू कम्मो से डरता है तुझे मुझसे डर नहीं लगता क्या

रवि- दीदी आपसे तो और भी ज्यादा डर लगता है मुझे

रवि के होठो पर एक मुस्कान थी

रेखा- अच्छा कमीने इतना डरता है इसी लिए रात को अपनी दीदी को रंडी समझ कर किसी जानवर की तरह मेरी गांड मरता है

रवि- दीदी आपकी बात तो सबसे अलग है आप मेरी दीदी भी हो बीवी भी हो और मेरी रंडी भी हो

अभी दोनों कुछ और बोलते उससे पहले मेघा दीदी थोड़ा हिलते हुए पलट कर सिद्ध हो जाती है

रेखा तुरंत hi रवि की धोती को उस्ले लुंड पर फेक देती है और तेजी के साथ खड़ी हो जाती है

रेखा- अरे मेघा दीदी कब्ब तक्क सोयेंगी आप उठ भी जाओ अब्ब 9 बज्ज गए है

मेघा- अरे ः उठ गयी पता नहीं आज रात कितनी मस्त नींद आयी की होश hi नहीं रहा की इतनी देरर तक सोई रही मैं

रेखा( ः दीदी मस्त नींद तो आएगी hi जब ये गधे जैसा लुंड होनी गांड में घुसा कर औयेंगी तो मजे की नींद तो आएगी hi)

रेखा- दीदी जल्दी उठ जाओ कम्मो नाश्ता बना चुकी है

मेघा उठ कर बैठ जाती है और रवि पहले से hi बैठा हुआ था

मेघा- मेरा प्यारा भाई तू भी अभी उठा है क्या

रवि- है दीदी आज मुझे भी बड़ी पक्की नींद आयी

मेघा- कोई बात नहीं बच्चे तेरा जब तक्क मैं करे तू तब तक्क सोया करर

रवि- है दीदी आज मैं आपके साथ सोया था न इसी लिए इतनी अच्छी नींद आयी

मेघा आगे बढ़ते हुए रवि के गलो को चुम लेती है और उसे अपने साइन से लगा लेती है

मेघा- तब तो अब हर्र रोज तुझे ऐसे hi मस्त और गहरी नींद आएगी

रवि- और आपको भी दीदी

दोनों भाई बेहेन उठ कर अपने अपने काम में लग्ग जाते है और इधर रेखा चैन की साँस लेती है की आज तो वो बाल बाल बच गयी नहीं तो कहि मेघा दीदी उसे रवि का लुंड मुठियाते हुए देख लेती तो क्या hi होता

पर रेखा झा अपनी चोरी न पकडे जाने का झासँ मना रही थी

उसे पत्ता नहीं था की एक बेहेन से तो वो अपनी चोरी छुपा चुकी है पारर दूसरी बेहेन उसकी चोरी पकड़ चुकी थी

दरअसल जब रेखा कमरे में रवि के लुंड को थुक्क लगा लगा कस्र मसल रही थी उसे कम्मो कमरे के बहार से देख चुकी थी और कम्मो को विस्वास हो चूका की रेखा दीदी रवि के लुंड के पुरे मजी लूट रही है

रेखा जब कमरे से बहार आती है तो उसे कम्मो देख रही थी और उसकी आँखों के सामने बार बार वही नजारा आ रहा था की कैसे रेखा

दीदी थूक लगा लगा कर उसके छोटे भाई का लुंड मसल रही थी और कम्मो की कुंवारी छूट लगातार पानी चोदे जा रही थी .....
 
अपडेट-78

दोपहर हो चली थी रवि अब तक अपने खेतो की और जा चूका था

कम्मो सारा खाना बनाने के बाद नहाने चलाई गयी थी इधर मेघा दीदी और रेखा दीदी दोनों बैठ कर गप्पे हक़ रही थी

रेखा- दीदी तुमको याद नहीं आती जीजाजी की

मेघा- अरे क्या याद आएगी रे उसकी

रेखा- क्यों पति है वो तुम्हारे

मेघा- अरे उसने आज तक पति वाला कोई सुख दिया hi नहीं मुझे तो किस बारे में सोच कर उस नाले को याद कृ

रेखा- मतलब वो कुछ नहीं करते थे आपके साथ

मेघा- अरे घोड़ी खुल के बोल न

रेखा- मतलब दीदी वो तुम्हारे साथ कुछ नहीं करते थे रात को

मेघा- अरे वो कोशिश तो भट्ट करता था पर उस बिचारे से कुछ हो hi नहीं पता था

रेखा- मतलब उसका हथियार खड़ा नहीं होता था

मेघा- खड़ा तो होता था पर बहुत छोटा और पतला था कुछ मालूम hi नहीं पड़ता था मनो अंदर जा भी रहा है या नहीं और 2 मिंट में hi उसका पंप फ़ैल हो जाता

दोनों बहने जोर जोर से हसने लगती है

रेखा - पर दीदी तुंहारा ये गद्दार जिस्म देख कर तो लगता गई है मनो कोई खूब चढाई करता हो तुम पारर

अभी मेघा कुछ बोलती इससे पहले hi कम्मो नहा कर कमरे में आ जाती है

कम्मो- क्या है है दीदी बड़ी जोर जोर से हस्स रही है आपलोग

कुछ खास है तो मुझे भी बता दो

रेखा- अरे कुछ खास नहीं है बस यही पुराणी बाटे याद करके हस्स रहे थे

तू एकक काम कर खाना निकल ले और रवि का खाना बांध दे मैं दे आती हु उसको

कम्मो पहले hi इस रेस में अपनी दोनों दीदियो से पीछे थी और दिन भर में उसे एक hi मौका मिलता था रवि के साथ अकेले वक़्त बिताने का और ये मौका वो किसी भी कीमत पर जाने नहीं देना कहती थी

कम्मो- अरे दीदी अब मैं आ गयी हु तुम खा इस धुप में घूमोगी मैं खुद hi अपने छोटे भाई को खाना दे आती हु

रेखा को अब अंदर hi अंदर कम्मो पर गुस्सा आ रहा था

आज सुबह जब रेखा ने रवि को लुंड सहलाया था उसके बाद से hi उसकी छूट में हजारो चीटिया रेंग रही थी और वो आज खुल कर अपने छोटे भाई से अपना बदन तुड़वाना कहती थी

रेखा - अरे तू दे या मैं दू एक hi बात है ला आज मैं दे आती हु कल तू डाना

कम्मो( ः साली मुझे पता है की तू देने नहीं उसका लुंड अपनी छूट में लेने जा रही है पर आज दिनभर तू ऐसे hi अपने छोटे भाई के लुंड के लिए तरसती रहेगी )

कम्मो रेखा का सारा दर्द समझ रही थी और वो अपनी दीदी के मजे लेने में कोई कसार नबी छोड़ना कहती थी

कम्मो- अरे नहीं नहीं दीदी अब तो मैं खुद hi रोज अपने छोटे भाई के लिए खाना लेकर जाउंगी मेरे होते हुए आप क्यों कसत उठाएंगी

कम्मो के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी जिसे रेखा भी नहीं समझ पा रही थी

अभी रेखा कुछ बोलती उससे पहले hi मेघा दीदी बोल पड़ती है

मेघा- अरे जाने दे न उसे तू क्यों बच्चो के जैसे झिड कर रही है

रेखा का सपना मनो एक hi पल में चूर चूर हो गया था वो सुबह से hi सोच कर बैठी थी की खाने देने के भने रवि से खेतो में खूब छुड़ेगी पर इस कम्मो ने सारा काम खराब कर दिया

कम्मो को अपनी रेखा दीदी की आँखों में गुस्सा साफ़ दिख रहा और वो इस गुस्से को देख कर अंदर hi अंदर खुस थी की कैसे आज उसने अपनी दीदी की गीली छूट को सूखा दिया

कम्मो फटाफट अपना और रवि का खाना बांध कर रेखा दीदी को एक पप्पी देकर खेतो की और निकल जाती है

इधर मेघा और रेखा दोनों hi खाना खा चुके थे और दोनों जानते थे की अब कम्मो और रवि दोनों शाम को hi घर आएंगे

रेखा बहार का दरवाजा लगा देती है और दोनों बहने कमरे में लगे बिस्तर पर जाकर लेत जाती है

रेखा - दीदी बताओ न

मेघा- क्या बताऊ

रेखा- वही जो मैं पूछ रही थी कम्मो के आने से पहले

मेघा- अरे तू ऐसे घुमा मत सीधा सीधा पूछ

रेखा- अरे दीदी आप भी बहुत बड़ी भुल्लकड़ हो

बताओ न की जब जीजा जी तुम्हारी सवारी hi नबी कर पते तो ये तुम्हारा बदन ऐसा क्यों हुआ जा रहा है मनो एक साथ कई कई मर्द तुमपर चढ़ते हो

मेघा को अपनी छोटी बेहेन की बात सुनकर हस्सी आ जाती है

इधर रेखा भी जानती थी की अब मेघा दीदी भी अंदर hi अंदर रवि के लुंड को अपनी छूट में उतरने के लिए तरस रही है वो तो बास अबडजा लेना कहती थी की मेघा दीदी कितना पानी में ही

मेघा- अब पता नहीं की ये शरीर इतना कैसे गडरा गया ओर एक बात तो है जिसकी नजर भी मेरे इस जिस्म पर पड़ी है उसने मुझे अपनी नजरो hi नजरो में छोड़ा जरूर है वो कहे मेरा ससुर हो या मेरा देवर

रेखा- क्या बात कर रही हो दीदी आपके ससुर और देवर भी आपको उस नजर से देखते थे

मेघा- सिर्फ देखते hi नहीं थे मुझे देखते देखते अपना लुंड भी मसलते थे पर मैंने कभी उन दोनों को घास नहीं डाली

रेखा- तो दीदी आप अपनी इस जरुरत को पूरा कैसे करती थी

मेघा- कभी कभी अपनी छूट मसल लेती थी हटो से वार्ना तो मनो मेरी जिंदगी वीरान hi रही है हमेशा

रेखा- दीदी सच बोल रही है आप आपको देख कर तो कोई भी मर्द खड़ा खड़ा hi अपना पानी गिरा देगा

इतना बोलते हुए रेखा अपना हाथ उठा कर मेघा दीदी की चुकी पर रख देती है और इस बार मेघा दीदी भी कोई विरोध नहीं करती

और रेखा तुरंत hi फायदा उठाते हुए अपनी दीदी के तने हुए निप्पल को अपनी उंगलियों में पकड़ कर मसल देती है

मेघा- अह्हह्ह्ह्ह क्या कर रही है तू आराम सी अह्ह्ह्हह

रेखा अब अपनी दीदी की नाजुक नबज पहचान चुकी थी

मेघा- तूने मेरा हाल तो जान लिया पर अपना भी तो बता

रेखा- पूछो न दीदी कि पूछना है

रेखा अपने हाथो से लगातार मेघा दीदी एक चुकी को मसाले जा रही थी

आज काफी दिनों बाद मेघा को किसी ने इस तरह चुवा था

जिसकी वजह से आज काफी दिनों बाद उसकी सुखी पड़ चुकी छूट दुबारा से पानी छोड़ने पर मजबूर हो चुकी थी

मेघा- तेरा बदन भी तो देख कर यही लगता है तू की जरूर कोई न कोई दिन रात तुझे मसल मसल कर छोड़ रहा है

रेखा जानती थी की अपनी दीदी की बातो का नदाज उसे किस ाण्डज्ज में देना है

रेखा अपने हाथ को निचे सरकती हुई अपनी दीदी के गहरी नाभि में अपनी ऊँगली घुसा देती है

रेखा इस हमले से मनो एक hi पल में तड़प उठती है और उसके बेजान पड़े शरीर में एक सनसनी दौड़ उठती है

रेखा- दीदी मैंने तो आज तक्क किसी का लुंड देख तक्क नहीं तू छोड़ना और छुड़वाना तो बूट दुर्र की बात ही

रेखा इस बार अपने हाथ को सरकती हुई मेघा दीदी के पेटीकोट की डोरी पर घूमने लगती है और धीरे धीरे मेघा का पेटीकोट खोल देती है

और मेघा को पता भी नहीं चलता

रेखा- मुझे तो नहीं लगता की तूने लुंड न देखा हो आज टककक और नहीं तेरा शरीर डेल्ह कर ऐसा लगता है की तू आज तक ुंचुड़ी hi है

इस नार रेखा होने हाथ को सरकते हुए मेघा के पेटीकोट के अंदर ले जाती है और अपनी दीदी की हलकी झांटो वाली फूली हुई बुर्र को अपनी हथेली में दबोच लेती है

अब मेघा ने रेखा का हाथ पकड़ा hi था की रेखा एक कदम आगे बढ़ते हुए अपनी एक ऊँगली को सरका के सीधा मेघा दीदी की भीगी हुई छूट में सरका देती है

और जैसे hi मेघा को अहसास होता है की अब उसकी छोटी बेहेन की ऊँगली उसकी छूट के मुहाने तक्क पहुंच चुकी है उसका बदन एक अजीब से आनंद के सागर में गोते लगाने लगता है और उसकी पकड़ मनो खुद बा खुद hi ढीली पड़ जाती है

रेखा भी मेघा दीदी को जल्दी hi लाइन पर लाना कहती थी ताकि वो खुल कर अपने छोटे भाई को अपनी दीदी के साथ बात सकी

मेघा की पकड़ ढीली पड़ते hi रेखा अपनी दो उंगलियों को मेघा दीदी की छूट के अंदर धकेल देती है

मेघा- siiiiiihhhhhhhhhhj क्या कर रही है मुयी चू

रेखा- दीदी तुम तो पूरी पानी पानी हो चुकी हो

अपनी दीदी की छूट का गीलापन देख कर रेखा समझ चुकी थी की चुदाई के इस खेल में उसकी दीदी उसे कड़ी टक्कर देने वाली है

मेघा कुछ बोलने की हालत में नहीं थी तभी रेखा अपना अगला हमला करती है

रेखा- दीदी आपको पता है मैंने लुंड देखा तो नहीं है पर हां एक भट्ट मोटा तजा लुंड महसूस जरूर किया है

रेखा का पूरा हाथ पानी पानी हो चूका था और उसे अपनी दीदी की हालत खराब होता देख बड़ा hi सुकून मिल रहा था

मेघा- अह्ह्ह्हह क्या खा तूने किसका लुंदड़ महसूस किया है तूने और कहा पारर महसूस किया ही अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सीईईई

रेखा की उँगलियों की रफ़्तार लगातार बढ़ती hi जा रही थी

रेखा- दीदी आपको पता है जब मैं रात को सोती हु तो मैं एक सपना देखती हु जो बिलकुल हक़ीक़त जैसा लगता है

मेघा- अह्ह्ह्ह क्या होता है उस सपने मी तेरे सठह

रेखा- पता नहीं दीदी वो सपना है या हक़ीक़त पर उस सपने में कोई मेरे पीछे लेटस होता है और अपने लुंड को मेरे पेटीकोट के ुवार से hi मेरी गांड के छेद में घुसाने की कोशिश करता है

मेघा- पर तूने हक़ीक़त में नहीं देखा कभी उस लुंड को

रेखा- कैसे देखूंगी दीदी जब मैं उठ कर पीछे देखती हु तो सिर्फ रवि hi दिखाई देता है

और अब आप hi बताओ रवि की उम्र के हिसाब से उसका लुंड इतना बड़ा थोड़े hi होगा और अगर होगा भी तो वो थोड़े hi अपने लुंड को अपनी दीदी के गांड के छेद में डालने की कोशिश करेगा

रेखा की बात सुनकर मेघा का शरीर अकडने लगता है क्योंकि वो जानती थी की उसकी छोटी बेहेन जिस गधे जैसे लुंड की बात कर रही है वो उसके छोटे भाई रवि का hi है

मेघा- है है ये बात सही है रवि तो काफी अच्छा बच्चा है वो थोड़े hi अपना लुंड तेरी छूट या गांड में डालने की कोशिश करेगा

रेखा,( मेरी गांड में नहीं डालेगा तो क्या तुम्हारी गांड में डालेगा दीदी तुम जितना मर्ज़ी घमंड करो की रेखा नहीं जानती रवि के लुंड के बारे में पर असली रानी तो मैं hi हु दीदी और हमेशा रहूंगी)

इधर मेघा अंदर hi अंदर खुस थी की चलो रेखा भी नहीं जानती की उसके छोटे भाई का लुंड कितना विशाल और मोटा है

मेघा का बदन लगातार अकड़ रहा था सुर उसकी कमर अपने आप hi ऊपर निचे हो रही थी

मेघा रेखा के हाथो को पकड़ कर अपनी छूट पर दबा देती है और अपनी छोटी बेहेन के हाथ को पूरी तरह से अपनी छूट से निकले हुए अमृत से भर देती है

रेखा - अह्ह्ह दीदी कितना गरमा गरम पानी छोड़ा है तुमने कोई मरद्द होता तो सारा का सारा छत्त कर जाता

अपना हाथ मेघा दीदी के पेटीकोट से निकलते हुए रेखा अपनी उंगलियों को चाटने लगती है

रेखा की ये हरकत देख कर मेघा दीदी अंदर hi अंदर पागल हुई जा रही थी और उसकी टैंगो के बिच बार बार उसे अपने छोटे भाई का लुंड महसूस हो रहा था

मेघा- सच में तू बहुत बड़ी कमीनी है

रेखा- ाचा तब तो इस कमीनी ने आज आपको चरम सुख तक्क पहुंचाया है

दोनों बहने हसने लगती है और ऐसे hi गप्पे हाकते हाकते दोनों सो जाती है

आज की हरकत से रेखा ये तो समझ चुकी थी की उसकी तरह hi मेघा दीदी भी किसी रंडी की तरह छोड़ने के लिए बेताब है और जैसे hi इसे एक इशारा मिलेगा वो किसी भूखी शेरनी की तरह रवि के लुंड पर टूट पड़ेगी

पर रेखा अभी इस खेल को थोड़ा लम्बा खेलने के नद्द में थी क्योंकि कैसे न कैसे रवि उसको रोज hi छोड़ रहा था

और ररेखा जानना कहती थी की मेघा दीदी की तड़प खा तक उनका साथ देती है और कब्ब उनके सब्र्र का बांध टूटेगा.......
 
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