Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 3 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-19

रवि को भी कम्मो का उयउ जाना अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि उसे जो मजा आ रहा था उस मजे का पथ रवि को कम्मो दीदी ने hi पढ़ाया था

फिर भी रवि के पास अभी कम्मो से भी अच्छा एक ऑप्शन था अपने दबे अरमान पुरे करने का वो थी रेखा जिसके बदन के आगे तो कम्मो का बदन भी फीका लगता था

और ये बात रवि पिछले 2 दिनों में जान चूका था

रवि खेतो में काम कर hi रहा था की उसे रेखा की आवाज आती है

रेखा- अरे रवि अजा भाई खाना खले गरम गरम

रवि रेखा की और देखता है और आपने हल रख कर रेखा की और बढ़ने लगता है

और अपने हाथ पेअर धो कर वो खाना खाने बैठ जाता है

और रेखा उसे खाना परोस कर देदेती है

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को चोर नजरो से देखे जा रहे थे दोनों अब एक दूसरे में समै जाना कहते थे

रेखा के मन में अब यही चल रहा था की वो जल्दी से जल्दी ररवी के लुंड पर अपना पेटीकोट उठा कर बैठ जाये और रवि का लुंड अपनी छूट में शमा ले

और अब तो उसके रस्ते का कांटा भी हैट गया था कम्मो मेघा के घर जा चुकी थी

रेखा की नजरे लगातार रवि की धोती में कुछ धुंध रही थी पर वो उसे नजर नहीं आ रहा था क्योंकि अभी रवि का पूरा फोकस खाना खाने पर था

जल्दी hi रवि खाना खा लेता है और रेखा बर्तन लेकर वापस घर की एयर निकल जाती हसि एयर रवि बचा कुछ काम निपटने लगता है ......

भाई लोगो कहानी कैसी लग रही है जरूर बताना अगर कुछ वर्ड्स मिस्टेक हो तो माफ़ करना

और कमैंट्स जरूर करना ताकि हम कहानी को और अच्छे ढंग से आगे बढ़ा सके

धन्यवाद.......
 
अपडेट--20

शाम हो चुकी थी अब तक रवि भी अपने सरे काम निपटा चूका था

दरअसल आज रवि को थोड़ा ज्यादा hi टाइम लग गया था खेतो में अँधेरा अपने चरम पर पहुंच चूका था रवि धीरे धीरे घर की और बढ़ने लगता है

थोड़ी hi देर बाद रवि अपने घर पहुंच जाता है और जैसे hi वो अंदर जाता है रेखा का पहनावा देख कर उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

असल में रेखा ने आज ऐसे कपडे पहने थे की उसे देख कर किसी बुड्ढे का भी लुंड खड़ा हो जाये और यही हाल रवि का भी हुआ

रेखा ने ेल बहुत hi छोटा सा पेटीकोट पहना हुआ था जो मुश्किल से उसके घुटनो तक आ रहा था और उसके ब्लाउज के तो क्या कहने जगह जगह से फता हुआ था और उसने सिर्फ ऊपर का एक हुक और निचे ला एक हुक लगाया हुआ था

जिस वजह से रेखा की विशाल चूचिया साफ़ नजर आ रही थी

रवि की हालत देख कर रेखा को यकीन हो जाता है की वो रवि को जो दिखाना कहती थी रवि वो देख चूका है

रवि आंखे फाड़ फाड़ कर रेखा को hi देख रहा था

रवि के ऐसे देखने की वजह से रेखा पानी पानी हो रही थी

रेखा- क्या देख रहा है रवि

रवि को रेखा की बायत सुन कर एकदम से होश आता है

रवि- कुछ नहीं दीदी बस आपको देख रहा था

आप बहुत सुन्दर लग रही है आज

रेखा एक नजर अपने आपको देखती है और फिर उसकी नजर रवि की धोती में बने हुए तम्बू पर पड़ती है

रेखा- अच्छा तो आज में पहली बार तुझे सुन्दर दिख रही हु

रेखा भी अब लगातार रवि के लुंड को घर रही थी

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे में समै जाना कहते थे पर पहल कोण करता

रेखा -अब रात भर सिर्फ देखता hi रहेगा या कुछ करेगा भी

रवि- क्याआ करूऊ दीदी.

रेखा- हस्ते हुए.... कुछ मत कर चल खाना खा ले

और रवि हाथ पेअर धो कर खाना खाने बैठ जाता है .

सामने hi रेखा भी बैठ कर खाना खा रही थी

रेखा जब जब रोटी की निवाला खाने के लिए झुकती उसकी ब्लाउज में से उसकी चूचिया बहार आने को बेताब हो जाती

इधर रवि की हालत आज कुछ ज्यादा hi खराब हो रही थी

रेखा अपने दोनों पेअर आती पलटी मार्के बैठी थी जिस वजह से उसका पेटीकोट उसके घुटनो से भी ऊपर उठ गया था और उसकी मांसल जंघे साफ़ नजर आ रही थी

जिसे रवि खा जाने वाली नजरो से देख रहा था

आज खाना खाने में कुछ ज्यादा hi वक़्त लग गया था खैर खाना पीना हो चूका था

और रेखा बर्तन धोने लगती है और रवि अंदर दोनों का बिस्तर लगाने लगता है

रवि बिस्तर लगा कर उसपर लेते हुए अपनी दीदी का इन्तजार कर रहा था

वही दूसरी तरफ रेखा आज बहुत खुश नजर आ रही थी बर्तन धोते समय भी उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी

जल्दी hi रेखा भी अपना काम निपटा कर अंदर रूम में आ जाती है और रवि की और एक नजर डालती है

रवि पीठ के बल लेता हुआ था और अपनी दीदी को रूम में एते हुए देख रहा था रेखा आज कुछ ज्यादा hi गरम थी

उसकी नजरे जब जब रवि की नजरो से मिलती वो अंदर तक सिहर जाती उसका छोटा भाई अब उसे एक बड़े लुंड वाला मर्द दिखने लगा था जिसे अब वो अपना बनाना छाती थी 30 सल्ल की घोड़ी होने के बावजूद भी आज तक वो कुंवारी hi थी अब वे कुँवारापन रेखा से बर्दास्त नहीं हो रहा था

रेखा- क्या हुआ रवि नींद नहीं आ रही क्या तुझे

रवि- नहीं दीदी आज बहुत गर्मी लग रही है

रेखा- है रे गर्मी से तो पूरी अंदर तक भीग चुकी हु मैं भी

तू एक काम कर बनियान उतर दे थोड़ा आराम मिलेगा तुझे

रेखा के इतना कहते hi रवि अपनी बनियान को अपने शरीर से अलग कर देता है

इतने में रेखा भी उसके बगल में आकर लेत जाती है

रवि- दीदी गर्मी तो आपको भी लग रही होगी न

रेखा- बता तो रहु हु तुझे में तो पूरी अंदर तक भीगी हुई हु

रवि- तो दीदी आप भी उतर दो न ये अपना ब्लाउज

रवि के मुँह से ब्लाउज उतरने की बात सुनकर रेखा अंदर hi अंदर गदगद हो जाती है

और उसकी छूट अब लगातार पानी चोदे जा रही थी

रेलः अभी रवि की तरफ घूम कर लेती हुई थी कमरे में हल्की चांदनी रौशनी आ रही थी जिस वजह से रेखा की चूचिया रवि को नजर तो आ रही थी पर अभी भी 1-2 हुक लगे हुए थे

रेखा- अच्छा जे तो अब तू अपनी दीदी को अपने सामने नंगा करेगा

रवि- नहीं दीदी मेरा मतलब था की गर्मी ज्यादा है और वैसे भी अभी तो सिर्फ दम दोनों hi है यह पर तो उतर दो आपको गर्मी काम लगेगी

रेखा- तुझे कोई दिक्कत नहीं होगी अगर तेरी दीदी तेरे सामने नंगी हो जाये तो

रवि- दीदी आप तो मेरी दीदी हो मुझे क्या दिक्कत होगी

और रवि बड़े ोयार से आगे बढ़ कर रेखा के गाल पर एक किश जड़ देता है

रेखा को अब रवि की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल रहा था जिसका उसे इन्तजार था

रेखा उठ कर बैठ जाती है और एक एक करके अपने ब्लाउज के सरे हुक खोल देती है और एक झटके में hi उसकी चूचिया रवि की आँखों के सामने आजाद हो जाती है जिन्हे रवि आंखे फाड् फाड् कर देख रहा था

रेखा अपना ब्लाउज अपने शरीर से अलग करके एक कोने में फेक देती है

और दुबारा से उसी स्थिति में रवि के सामने लेत जाती है

रवि की नजरे तो मनो रेखा की निप्पल्स की काली काली घुंडियो पर टिक गयी थी

अब तक रेखा भी काफी गरमा चुकी थी जिस वजह से उसके निप्पल्स पूरी तरह से तन गए थे बिलकुल किसी काळा जमुन की तरफ

अब इन सब चीज़ो का असर रवि के लुंड ओर होने लगता है

और रेखा अपनी तिरछी नजर से रवि के धोती में बना तम्बू देख लेती है और मन hi मन आने वाली खुसियो का स्वागत करती है

रवि लगातार रेखा की निप्पल्स को देख रहा था आज पहली बार था की वो सीधा सीधा रेखा की चूचिया देख रहा हो और रेखा भी उसे खा जाने वाली नजरो से देख रही थी

रेखा - अब देखता hi रहेगा क्या

रवि- क्याआ दीयड़ी मैं तो कुछ नहीं देख रहा

रेखा- अच्छा मुझे तो लगा की तू कुछ देख रहा है

रवि- दीदी वैसे आजकल गर्मी बहुत ज्यादा पद रही है न

इतना बोलकर रवि अपना हाथ आगे बढ़ता है और रेखा की छूछीयो पर लगे पसीने को पॉच कर रेखा को अपना हाथ दिखता है

रवि- दीदी आप तो सैमी पूरी भीगी पड़ी हो

जब रवि का हाथ रेखा की निप्पल को टच करके निकलता है तो रेखा का शरीर एक झटका खता है

उसे पता था की उसका गदराया हुआ जिस्म देख कर रवि आज अपना आप खो देगा

और ये बात सच थी रवि बस अब अपनी दीदी के शरीर से लिपटना कहता था

रेखा - भाई गर्मी तो हमेशा hi रहती है और आगे भी रहेगी हम मिलकर एक दूसरे की गर्मी का हल निकल सकते है

रवि- वो कैसे दीदी

रेखा- देख आज तू मेरे सामने अकेला है इसलिए मेने अपना ब्लाउज उतर दिया ताकि गर्मी थोड़ी काम लगे और तुझे भी तो कोई दिक्कत नहीं है न अगर तेरी दीदी तेरे सामने अपना ब्लाउज उतर देता

रेखा ने अपनी चूचियों की तरफ इशारा करके खा

रवि- दीदी मुझे कोई दिक्कत नहीं है बस आपको गर्मी काम लगे

रेखा- पर एक चीज़ का ध्यान रखना कभी किसी को मत बताना की तेरी दीदी तेरे सामने नंगी हो जाती है

रवि- नहीं दीदी म किसकी बताऊंगा

रेखा- नहीं तो तेरी दीदी की बड़ी बदनामी होगी और में किसी को मुँह नहीं दिखा पाऊँगी समझा भाई

और है कम्मो को भी मत बताना

रेखा को क्या पता था की कम्मो तो रेखा के पहले से hi रवि के सामने नंगा नाच कर रही थी

रवि- नहीं दीदी म किसी को नहीं बताऊंगा की मेरी दीदी मेरे सामने नंगी सोती ह

रेखा- अरे भाई वैसे में नंगी नहीं हु देख मेने अभी भी पेटीकोट पहना हुआ है

और रेखा अपने हाथ से अपने पेटीकोट को पकड़ कर थोड़ा ऊपर की और सरका देती है

पेटीकोट पहले से hi छोटा था थोड़ा सा सरकने की वजह से पेटीकोट पूरा आधी जांघो तक चढ़ जाता है

रवि की नजर जब रेखा की जांघो पर पड़ती है तो उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है पेटीकोट तो सिर्फ नाम का था जिससे बस रेखा की छूट और गांड ढकी पड़ी थी

रेखा की केले के तने जैसे गदरायी जंघे देख कर रवि पागल हुआ जा रहा था और अपनी धोती में बने तम्बू को कण्ट्रोल करना अब उसके मुँह से बहार होता जा रहा था

रेखा- चल अब रात बहुत हो चुकी है जल्दी सजा सुबह जल्दी उठना है कम्मो तो ह नहीं सारा काम मुझे hi करना पड़ेगा

रवि- दीदी मैं मदद करदूंगा आपकी काम में

रेखा- अच्छा ग तो अब तू इतना बड़ा भी हो गया की अपनी दीदी की मदद करेगा

रवि- दीदी अब म पूरा मर्द बन गया हु आप देख लेना म हर काम में आपकी मदद करूंगा एयर आपको आराम मिलेगा

रेखा- चल ठीक ह ज्यादा मस्का मत लगा और सजा

रवि ठीक ह दीदी चलो सो जाते है और रवि इतना बोलकर आगे बढ़ कर रेखा के माथे ओर एक गहरा चुम्बन लेटस है और वापस अपनी जगह पर लेत कर आँख बंद कर लेता है

पर रवि अभी भी चोर नजरो से रेखा की छूछीयो को घर रहा था

जिसे रेखा भी देख रही थी

और रेखा अंदर hi अंदर इतना खुस थी की मनो आजसे उसे पूरी दुनिया की खुसी मिल गयी थी

आजसे पहले कभी इतनी खुस नहीं हुई थी जितना की आज वो अपने भाई के सामने नंगी पड़ी महसूस कर रही थी

रेखा भी अपनी आँखे बंद कर लेती है और दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के सामने अधनंगे पड़े सोने लगते है ....
 
अपडेट-21

रेखा और रवि को लेते करीब 10-15 मिंट hi हुए थे रवि लगातार अपनी चोर नजरो से रखा की छूछीयो को घर रहा था

वही दूसरी तरफ रेखा अपनी आँखे बंद किये यही सोच रही थी की कैसे उसका भाई उसकी चूचियों को घर रहा है और थी सब सोच कर उसकी छूट बहुत सारा पानी छोड़ रही थी

रवि का अपने ऊपर कण्ट्रोल करना मुश्किल था उसे लग रहा था की रेखा दीदी अब तक सो चुकी है यही सोच कर रवि अपने एक हाथ को आगे भ्धता है और रेखा के निप्पल जो अभी तक तने हुए थे उसे हल्का सा छेद कर अपना हाथ दुबारा से हटा लेता है

रवि की इस हरकत से रेखा सिहर जाती है अब उसके बदन में एक अजीब सी खलबली मची हुई थी वो रवि के सामने ऐसी नंगी पड़ी थी मनो वो रवि की दीदी न हो बल्कि उसकी बीवी हो

खैर अब रवि को भरोषा हो गया था की दीदी सो चुकी है वो दुबारा से अपना हाथ आगे बढ़ता है और रेखा के निप्पल को पकड़ कर हल्का सा होनी और खींचता है

रेखा के मुँह से न कहते हुए भी एक अह्ह्ह्हह्ह्ह्नीकल जाती है और रवि दुबारा से अपना हाथ हटा लेता है

रेखा थोड़ा सा हिलती है और फिर सीधा होकर लेत जाती है

अब रेखा अपने दोनों हाथ ऊपर की और कर लेती है और अपना एक पेअर घुटनो से मोड़ कर उठा लेती हसि और एक पेअर ऐसे hi जमीन पर सीधा किये लेते रहती है

अब रवि की नजरो के सामने उसकी दीदी की हल्की भूरे बालो वाली पसीने से भीगी हुई बगल थी जो रवि की सबसे पसंदीदा जगहों में से एक थी

रवि लगभग 10 मिंट तक रेखा के सोने का इन्तजार करता है पर उसे खा पता था की रेखा भी किसी चीज़ के इन्तजार में अपनी आँखे बंद किये हुए पड़ी है

रवि होना हाथ धीरे से उठा कर रेखा के पेट पर रख देता है और वैसे hi लेता रहता है

रवि को उसका विशाल लुंड बहुत hi परेशान कर रहा था ढकती के अंदर इसलिए वो अपनी धोती को उतर कर साइड में रख देता है और दुबारा से अपना हाथ रेखा के पेट पर रख कर वैसे hi लेत जाता है

अब आलम ये था की रवि का लुंड सीधा अपनी दीदी की जांघो पर टकरा रहा था

जिसे महसूस करके रेखा को अहसास होता है की उसके छोटे भाई का लुंड कितना विशाल और कठोर है

रवि अब अपने हाथ को चलना चालू करता है पहले तो वो धीरे धीरे रेखा के पेट को सहलाने लगता है धीरे धीरे वो ोएत सहलाता सहलाता अपनी एक ऊँगली रेखा की नाभि में दाल देता है

रेखा की नाभि बड़ी गहरी थी मनो जैसे किसी की गांड का छेद हो रवि को नाभि में ऊँगली करना बहुत hi अच्छा लग रहा था वो लगातार ररेखा की नाभि को छेड़े जा रहा था

जिसके करना रेखा अब और भी ज्यादा गरम हो रही थी और अब तो उसे और भी ज्यादा पसीना आना शुरू हो गया था

रवि अब अपने हाथ को थोड़ा ऊपर की और लेजाता है और धीरे से अपने हाथ को अपनी दीदी की एक चुकी पर रख देता है

रेखा तो बिस्तर ओर पड़ी पड़ी सिर्फपोानी चोदे जा रही थी अपने शरीर से भी और अपनी छूट से भी

रवि को अब इस खेल में और भी ज्यादा मजा आने लगा था

रवि अब अपने हाथ को थोड़ी सख्ती के साथ रेखा की चूचियों पर चलने लगता है

रेखा से बर्दास्त तो नहीं हो रहा था फिर भी वो हिम्मत करके वैसे hi लेती हुई थी

वो रवि को डरना नहीं कहती थी या वो ऐसा कोई भी काम नहीं करना कहती थी जिसकी वजह से उसका बनता काम बिगड़ जाये

रवि की नजर अब रेखा की बगल पर जाती है रवि बिना देर किये अपना मुँह रेखा की बगल में घुसा देता है और जोरदार सांसे खींचने लगता है

जैसे वो अपनी दीदी की साडी खुसबू खींच लेना चाहता था

रेखा इस हमले के लिए तैयार नहीं थी जैसे hi रवि ालना मुँह उसकी बगल में घुसता है रेलः थोड़ा सा हिलती है और अपना जमीन पर पड़ा हुआ पेअर भी मोड़ कर उठा लेती है

अब आलम ये था की पेटीकोट सिकुड़ कर किसी छल्ले की तरह रेखा की कमर से चिपका हुआ था और अब रेखा की गांड भी साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी

रवि दर के मरे वैसे hi रेखा की बगल में मुँह घुसाए पड़ा हुआ था लगभग 5 मिंट बाद रवि दुबारा से अपनी हरकते चालू करता है और इस बार उसका लुंड सीधा रेखा की गांड से टकरा रहा था

जिसका अहसास रवि को अंदर hi अंदर और ज्यादा गरम कर रहा था

रवि लगातार अपनी गरम गरम सांसे रेखा की बगल में छोड़ रहा था जिसकी गर्मी से रेखा पिघल रही थी अंदर hi अंदर

रेखा की चित इतना पानी छोड़ चुकी थी की उसका पेटीकोट निचे की तरफ से पूरा गिला हो चूका था

रवि अब एक कदम एयर आगे बढ़ता है और अपनी जीभ निकल कर रेखा की बगल में बालो के ऊपर फिरने लगता है

रेखा तो मनो जैसे जन्नत के मजे लूट रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसका छोटा भाई इन सब मामलो में उससे भी जयादा शयना था

रवि अब लगातार रेखा की बगल चाट रहा था और अब वो रेखा की चुकी को अपने कदम हाथो से थोड़ा कास कास के दबा रहा था

रेखा को अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था आज पहली बार था की कोई मर्द उसे ऐसे छू रहा था और ऊपर से वो मर्द खुद उसका छोटा भाई था

रवि अब रेखा के निप्पल को पकड़ कर ऊपर की और खींचता और फिर छोड़ देता जिससे रेखा की पूरी चुकी उछला जाती

रवि बार बार ऐसा hi कर रहा था जिसके मजे के आगे रेखा भी ढेर हो गयी और उसका बदन अकड़ने लगता है

जैसे hi रेखा के शरीर में थोड़ा मूवमेंट होती है रवि उसी पोजीशन में शांत हो जाता है

रेखा लगभग 1 मिंट तक झड़ती रहती है और लम्बी लंबी सांसे लेने लगती है जिसे रवि साफ़ साफ़ सुन ोा रहा था और अब वो शायद समझ भी रहा था की अब उसकी दीदी को भी इस खेल में मजा आ रहा है

रेखा की सांसे थोड़ी देर में दुरुस्त होती है और वो दूसरी तरफ मुँह करके लेट जाती है

अब रेखा की गांड रवि की तरफ थी जिसे रवि बड़े गौर से देख रहा था

पेटीकोट का वो हिस्सा जो बुरी तरह से गिला हो चूका था वो भी रवि को साफ़ नजर आ रहा था

रवि अपना हाथ निचे की और लेजाता है और पेटीकोट को पकड़ कर उसका गीलापन दलहन लगता है

रेखा का पेटीकोट पूरी तरह से चिपचिपा हु चूका था

जिसे महसूस करके रवि समझ जाता है की जो 2 दिन पहले उसके साथ हुआ था वही चीज़ दीदी के साथ भी हुई है

और अब रास्त भी काफी हो चुकी थी

रवि थोड़ा आगे को सरकता है और होना लुंड सीधा रेखा की जांघो के बिच घुसा देता है जिसे रेखा महसूस करके अपनी टैंगो को थोड़ा सा ऐसे खोलती है जिससे रवि को पता न चले की वो जाग रही हसि और रवि का पूरा का पूरा लुंड अपनी दीदी की दोनों टैंगो के बिच घुस कर गायब हो हटा है

जिसका अहसास रवि को पागल कर देता है

रेखा का शरीर ऐसे तप रहा था मनो रवि ने किसी बहतती में अपना लुंड घुसा दिया हो

अब रवि अपना एक हाथ फिरसे आगे लेजाता है और दुबारा से रेखा की चुकी को पकड़ लेता है

पर इस बार वो कुछ नहीं करता और ऐसे hi रेखा की चुकी पकडे पकडे नींद की आगोश में चला जाता है

लगभग 10-15 मिंट बाद जब रवि के खरातो की आवाज रेखा के कानो में जाती हसि तो उसे समझते देर नहीं लगती की अब उसका कुम्भकरण भाई सो चूका है

अब रेखा को अपने दबे अरमान पूरा करने का मौका मिल गया था

वो अपना हाथ निचे लेजाकर रवि के लुंड का महसूस करती है और रवि के सुपडे को अपने हाथो से थोड़ा सहलाती है

पर अभी उसे मजा नहीं आ रहा था अब रेखा अपनी एक तंग को थोड़ा ऊपर उठा क्र रवि का लुंड पकड़ कर थोड़ा ऊपर की और सरकती है और लुंड को बिलकुल अपनी छूट से चिपका कर दुबारा से अपनी दोनों टैंगो का दबाव रवि के लुंड पर दाल देती है

अब रेखा फिरसे अपना हाथ निचे ले जाती है और रवि के लुंड के सुपडे पर अपना अंगूठा रख कर थोड़ा दबती है और धीरे धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करने लगती है

रेखा की हरकतों से उसकी छूट दुबारा पानी छोड़ने लगी थी जिस वजह से रवि का पूरा लुंड अपनी दीदी की छूट से निकल रही मलाई से सना हुआ था

रेखा की आधी जंघे भी बिलकुल चिपचिपी हो चुकी थी

अब रेखा अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ा देती है और अपनी कमर को थोड़ी तेजी के साथ आगे पीछे करने लगती है

देखने में ऐसा लग रहा था की जैसे रेखा अपनी मांसल जांघो से रवि की मुठ मर रही थी

रेखा का मन तो लार रहा था की लुंड को पकड़ कर अभी अपनी छूट पर लगा कर एक hi झटके में पूरा का पूरा लुंड अंदर लेले

पर अभी रेखा के पास बहुत समय था चुदाई के लिए पहले वो अपने गदराये जिस्म का पूरा मजस लेना कहती थी

रेखा अपने अंगूठे से लगातार रवि के सुपडे को कुरेद रही थी

और अपनी गांड को लगातार आगे पीछे कर रही थी

रवि का लुंड अपनी रैंड दीदी के इन झटको को ज्यादा देर तक बर्दास्त नहीं कर पाया और थोड़ी hi देर में रवि के लुंड ने अपना ज्वाला बहार निकलना चालू कर दिया जिसे रेखा अपने हाथ में इकट्ठा किया जा रही थी

पर अभी भी रेखा लगातार अपनी कमर को आगे पीछे किये जा रही थी और अब उसने अपने पैरो को और भी टाइट कर लिया था

मनो रेखा रवि के लुंड से बाह रही मलाई की आखिरी बून्द तक निकल लेना छाती थी

अब तक रवि की पूरी टंकी खली हो चुकी थी और अब उसका लुंड भी थोड़ा सिकुड़ गया था

रेखा की पूरी मुठी रवि के माल से भरी हुई थी

रेखा ज्यादा देर न करते हुए अपनी तबगो से रवि के लुंड को आजाद करती है और उठ कर बहसर जाने लगती है अपनी नंगी चूचियों के साथ

बहार बरामदे में आकर पहले तो वो अपने हाथ की मुट्ठी खोल कर देखती है

और रेखा की आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

दरअसल रवि के लुंड से कुछ ज्यादा hi वीर्य निकला था जिससे रेखा की पूरी मुट्ठी भर गयी थी

रेखा- ीुययय भगवान् कितना माल निकलता है रवि का अगर किसी औरत को एक बार ढंग से छोड़ दे तो वो एक hi बार में माँ बन जाएगी

और रेखा देर न करते हुए अपने हाथ को अपनी नाक के पास लती है और अपने भाई के माल की खुसबू सूंघने लगती है जोकि रेखा को मदहोश कर रही थी

रेखा की आँखे बिलकुल लाल सुर्ख हो चुकी थी अब रेखा का हाथ अपने आप hi उसके होठो तक पहुंच जाता है और अपनी जीभ निकल कर वो बड़े चौ से होने छोटे भाई के लुंड से निकली मलाई चाटने लगती है

धीरे धीरे रेखा पूरा माल चाट के अपना हाथ साफ़ कर देती है और जब उसे होश आता है तो वो अपने हाथ को देख कर शर्मा जाती है

दरअसल रेखा इतनी गरमा गयी थी की वो पूरा का ोुरा माल चाट गयी थी अब रेखा वही बैठ कर परेशब करती है और दुबारा से कमरे में आजाती है

रवि अभी भी उसी पोजीशन में सोया हुआ था

रवि को देख कर रेखा का मन तो बहुत कुछ करने का कर रहा था पर वो ज्यादा जल्दबाज़ी नहीं करना कहती थी इसलिए वो दुबारा से वैसे hi लेत जाती है

और अपनी पेटीकोट को पकड़ कर कमर तक चढ़ा के उसे दुबारा से एक चला जैसा बना देती है

अब रेखा अपने भाई के सामबे मादरजात नंगी लेती हुई थी

अभी भी रेखा ने अपने पैरो के बिच लगा माल साफ़ नहीं किया था

रेखा दुबारा से अपनी एक तंग उठा कर बड़े प्यार से रवि का लुंड पकड़ती है और 2-3 बार उसे अच्छे से पूरी मुट्ठी में भर कर सहलाती है और फिरसे उसे अपनी छूट से चिपका कर अपनी दोनों टैंगो को लॉक कर देती है

अब दुबारा से रवि का लुंड अपनी दीदी की भट्टी की जैसी ताप्ती हुई छूट के निचे था 1 मिनट में hi रवि का लुंड दुबारा से अपनी पूरी औक़ात में आजाता है

जिसे रेखा भी महसूस करती है

रेखा- कितनी गर्मी भरी है रे इस लहंद में हमेशा खड़ा hi रहता है ये

और रेखा उसी पोजीशन में लेले लेते थोड़ी देर तक सोचती रहती है

और थोड़ी hi देर में रेखा भी नींद की आगोश में चली जाती है ......
 
रात काफी मजेदार रही थी रेखा की सिलिये आज वो निश्चिंत होकर सोइ हुई थी

और कम्मो भी नहीं थी अब उसके और रवि के बिच में आने के लिए

घर के अंदर सीधा सूरज की रौशनी आ रही थी पर दोनों भाई बेहेन एक दूसरे से चिपके हुए दुनि दरी से बिलकुल बेखबर थे

थोड़ी देर बाद रेखा की आँख खुलती है

और उसे सबसे पहली चीज़ जो महसूस होती है वो था रवि का लुंड जो अभी तक बिलकुल फुला हुआ उसकी छूट से चिपका हुआ था

रेखा ये देख कर हैरान रह जाती है की कैसे किसी आदमी का लुंड हर वक़्त खड़ा रह सकता है

खैर ये तो रेखा के लिए अच्छा hi था

रेखा को पता था की थोड़ी देर में रवि भी उठ जायेगा

पर आज वो रवि को कुछ सीखना कहती थी ताकि रवि और जायदा तेजी से आगे बढ़ कर अपनी दीदी के गदराये बदन को भोगे

रेखा अपने उस हाथ को अपने मुँह के पास लती है जिसपर पिछली रात उसका भाई ने अपना सारा माल उड़ेल दिया था

और बड़ी hi प्यारी सी मुस्कान के साथ उस हाथ को सूंघती है

रेखा अब दुबारा से गर्माने लगी थी पर उसे अपने आप पर अभी भी काबू था

अब रेखा अपने हाथ पर बहुत सारा थूक लेती है और अपनी टैंगो को थोड़ा फैला कर सारा का सारा थूक रवि के लुंड पर लगा देती है

2-3 दफा वो ऐसे hi अपने हाथ पर थूक लेकर रवि के लुंड पर मसलने लगती है

अब तक रवि का पूरा लुंड अपनी दीदी के थूक से सना हुआ था

रेखा 2-3 बार रवि के लुंड को मुठियाती है

रवि थोड़ा सा हिलता है और रेखा झट से अपना हाथ खींच कर अपने पैरो को दुबारा से वैसे hi बंद कर लेती है

और वैसे hi अपनी आँखे बंद किये रवि के उठने का इन्तजार करने लगती है

इन सब के बिच रेखा की छूट लगातार पानी छोड़ रही थी ये सोच सोच कर की आज उसके भाई का क्या रिएक्शन होगा जब वो अपनी दीदी की छूट पहली बार देखेगा

थोड़ी hi देर में रवि का हाथ थोड़ा सा हिलता है

रेखा समझ जाती है की अब वो उठने वाला है और अपनी आँखे बंद किये लेती रहती है

करीब 5 मिंट क बाद रवि की आँख खुलती है

और उसे अपनी स्थिति देख कर अंदाजा होता है की रात को कैसे वो अपने लुंड को अपनी दीदी के पैरो के बिच फसा कर सो गया और ऊपर से रवि ने अपनी धोती भी उतर दी थी

रवि एक चीज़ से खुश था की रेखा दीदी अभी तक नहीं उठी नहीं तो वो उसके बारे में क्या सोचती

पर रवि को खा पता था की ये सब तो खुद उसकी दीदी रेखा hi कर रही है रवि के लुंड से अपनी बुर्र छुड़वाने के लिए

अभी भी रवि का लुंड रेखा की गांड में फसा हुआ था

रवि थोड़ा सा पीछे की और होता है और उसका लुंड सरकता हुआ बहार आ जाता है

लुंड के ऐसे बहार निकलने पर रवि अंदर तक हिल जाता है उसे ऐसा अहसास पहले कभी नहीं हुआ था जो अभी 1 मिंट पहले उसके सारः हुआ था

रवि की नजर जब उसके लुंड पर पड़ती है तो वो हैरान रह जाता है

क्योंकि उसका लुंड पूरी तरह किसी चिपचिपी चीज़ से स्नाआ हुआ था

जिसपर सूरज की रौशनी पड़ने के कारन चमक भी आ रही थी

रवि आने हाथ से अपने लुंड को पकड़ता है

रेखा का सारा थूक अब रवि के हाथ पर लग चूका था

रवि उसे अपनी नाक के पास लता है और थोड़ा सूंघता है उसे समझ नहीं अत की ये किस चीज़ की महक है

अब रवि को ये जनाना था की उसका लुंड इतना गिला कैसे हुआ

यही सोचते सोचते वो अपना हाथ अपनी दीदी की गांड पर ले जाता है

और जैसे hi वो अपना हाथ दोनों गांड के बिच सरकता है उसका हाथ चिकनाहट के कारन फिसलता हुआ रेखा की छूट पर चला जाता है जो की बेहद hi गरम थी

रवि ने पहले भी 1-2 अपनी दीदियो को मूतते हुए देखा था तो उसे ये तो पता था की लड़कियों के पास बुर्र्र्र होती है

पाए ये नहीं पता था की बुर को चुने में इतना अच्छा लगता है

जैसे hi रवि का हाथ रेखा की छूट पर पड़ता है

रेखा का तो कलेजा उसके मुँह को आ जाता है पर जैसे तैसे वो हिम्मत करके वैसे hi लेती रहती है

अब रवि अपनी ीक ऊँगली को रेखा की छूट पर अच्छे से घुमा रहा था

काफी ज्यादा चिपचिपा होने के कारन रवि को अपने हाथ चलने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी

रवि अपनी ऊँगली को रेखा की छूट के डेन तक ले जाता और फिर उसे निचे की तरफ खींच कर लता

रवि को तो बहुत मजा आ रहा था

पर रेखा की हालत पूरी तरह से टाइट हो चुकी थी

उसकी आँखे खुली हुई थी और वो बीएस अब अपने छोटे भाई से छोड़ना कहती थी

रवि को दर था की कहि रेखा न उठ जाये

इसलिए वो अपना हाथ हटा लेता है

जोकि रेखा को बिलकुल अच्छा नहीं लगता वो तो दिनभर ऐसे hi रवि के साथ लेते रहने के लिए तैयार थी

पर उसे ये भी अंदाजा था की रवि को अब तक एहि लग रहा ह की मैं सोई हुई हु और मुझे कुछ पता नहीं

रवि उठने hi वाला था की उसके दिमाग में कुछ आता है और वो धीरे से लेत जाता है

और अपने लुंड को पकड़ कर एक hi बार में रेखा की टैंगो के बिच सरका देता है

रेखा को इस हमले का अंदाजा नहीं था वो आच्चंक हुए इस हमले से उसके मुहहह से एक ahhhhhhhhhh निकल जाती है

जिसे सुनकर रवि घबरा जाता है और जल्दी से अपना लुंड निकल कर बहार की और भाग जाता है

रेखा को रवि की इस हरकत पर हसि आ जाती है और वो ऐसे hi लेती रहती है

वो कहती थी की रवि उसे खुद आकर उठाये

तो दोस्तों कहानी कैसी लग रही है जरूर बताये

आगे जैसे जैसे मुझे टाइम मिलेगा मैं अपडेट देता रहूंगा

अगर किसी दिन अपडेट न आये तो गली मत देना समझ लेना की आपका भाई बिजी है

धन्यवाद्.....
 
अपडेट -23

रवि अब तक संडास करके नहा भी चूका था और घर के आंगन में hi अपने कपडे पेहेन कर पास पड़ी चारपाई पर बैठ जाता है

उसे रेखा कहि भी नजर नहीं आ रही थी

रेखा को देखतने के लिए रवि दुबारा से अपने कमरे की तरफ बढ़ता है

जब रवि रेखा को अभी तक सोता हुआ पता है तो अपने आपको रेखा के पास जाने से रोक नहीं पता

इधर रेखा दुनिया से बेखबर सोई हुई थी उसे क्या पता था की उसका भाई उसके नंगे बदन को निहार रहा है

रवि पहले तो ऊपर से लेकर निचे तक रेखा को अच्छी तरह से देखता है

रेखा अभी भी उसी पोजीशन में सोई हुई थी जैसा रवि उसे छोड़ कर गया था

रवि अब आगे बढ़ता है और रेखा के सर के पास बैठ जाता है

अब रवि के हाथ न छटवे हुए भी अपनी दीदी की विशाल चूचियों की तरफ बढ़ने लगते है

रवि अपने दोनों हाथो का दबाव रेखा की चूचियों पर बनता है और ेल बार अच्छे से पूरी चुकी को अपनी हथेली में भरता है और छोड़ देता है

रवि को अपनी दीदी को इस तरह चुने में बहुत मजा आ रहा था

अब रवि एक बार रेखा के चेहरे की तरफ देखता है उसे रेखा सोइ हुई बहुत प्यारी लग रही थी

रवि आगे बढ़ कर रेखा के गलो पर एक गहरा चुम्बन लेता है और अब अपने हाथो से रेखा के दोनों निप्पल्स को पकड़ कर पहले तो थोड़ा सा उन्हें मदोरत्स्य है फिर थोड़ा जोरसे अपनी और खुचटा है

अच्चानक हुए इस हमले से रेखा के मुँह से एक अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मिकल जाती है

जब रेखा की आँख खुलती है तो उसे रवि अपने सामने बैठा मिलता है

रवि के हाथ अभी तक रेखा की निप्पल्स पर थे

रेखा- अह्ह्ह्हह्हह...... क्या कर रहा है भाई सोने देना

रवि- दीद सुबह हो गयी कब तक सोयेंगी आप

रेखा अपने हाथो को आगे बढ़ा कर रवि के गाल को खींच लेती है

रेखा- तू नहीं मानेगा अपनी दीदी को उठा कर hi मानेगा तू

रेखा- अच्छा चल म उठ जाती है पहले मेरी चुकी तो छोड़

रवि का ध्यान जब अपने हाथ पर जाता है तो वो शर्म के मरे पानी पानी हो जाता है

रवि धीरे से अपना हाथ हटा लेता है और अब उसकी नजरे निचे थी उसे थोड़ा अजीब लग रहा था अपनी दीदी के सामने ये सब करने में

पर वही दूसरी और रेखा इस पल का पूरा मजा ले रही थी

रवि अब उठ कर बहार की और जाने लगता है

रेखा अभी उठ कर बैठी hi थी उसकी दोनों विशाल चूचिया हवा में झूल रही थी

. रेखा - अरे अब खा जा रहा ह

रवि- दीदी मुझे खेत पर जाना ह आप भील गयी क्या

रेखा- आज तो वैसे भी काफी लेत तक सोती रही म पता नहीं रात को कैसी नींद आयी जो सीधा अभी खुली है

रवि- है दीदी म भी रात को बहुत मजे में सोया

रेखा( जब अणि दीदी की छूट में लुंड फसा का सोयेगा तो मजे की hi नींद आएगी न भाई तुझे)

रेखा - है रे भाई मुझे भी आज गर्मी बहुत काम लगी ब्लाउज उतरने का फायदा हुआ

रवि ब्लाउज का नाम सुनकर दुबारा से अपनी नजर रेखा की चूचियों पर गदा देता है

रेखा- अब ऐसे hi देखता रहेगा क्या खाना भी बनाना है मुझे

और अभी तक तो मैं संडास भी नहीं गयी

रवि- जाओ दीदी पहले आप सबदास करलो

रेखा- पर भाई अब तो दिन निकल गया ह

अगर कोई इस तरफ आ गया तो मेरी इज़्ज़त का क्या होगा

रवि - दीदी कोई नहीं आता इधर

रेखा- तुझे क्या पता तू तो दिन भर खेतो म रहता है कोई न कोई इस रस्ते से हमेशा जाता रहता है

रवि- तो फिर दीदी आप शाम को संडास कर लेना

रेखा अपना मुँह बनाते हुए कहती है

रेखा- नहीं रे रवि बहुत जोर की लगी है मुझे संडास

रवि- दीदी ोहिर कैसे करोगी

रेखा- एक रास्ता है

रवि- क्या दीदी बताओ

रेखा- तू चल मेरे साथ और थोड़ी दूर खड़ा हो जाना म जल्दी hi संडास करलूँगी

ऐसे मुहझे कोई नहीं देखेगा

रवि- पर दीदी म तो वही रहूंगा न आपको कोई दिक्कत नहीं होगी

मेरा मतलब म वही पास में रहूंगा तो

रेखा समझ रही थी की रवि क्या कहना कहता है

रेखा- नहीं रे भाई मुझे कोई दिक्कत नहीं है अगर संडास करते समय तू मेरे सामने हो तो है अगर और किसी ने मुझे हगते हुए देख लिया तो समझ की तेरी दीदी की इज्जत गगयी

रवि- ठीक ह दीदी चलो म भी चलता हु आपके साथ

रेखा - ठीक ह चल जल्दी बहुत जोर से लगी है नहीं तो म यही कर दूंगी

रवि- चलो दीदी

रेखा- अच्छा सुन मेरा ब्लाउज तो दे ऐसे hi जाउंगी क्या म

रवि अपनी नजरे कमरे में दौड़ता है

रवि- दीदी खा रखा था अपने अपना ब्लाउज रात को उतर के

रेखा- रात को दिखाई देता है क्या

रवि- रुको दीदी धुनता हु

और रवि कमरे में इधर उदाहर रेखा का ब्लाउज ढूंढने लगता है और रेखा वही वैसे hi बैठी रहती है

रवि को काफी ढूंढने के बाद के बाद एक कोने में रेखा का ब्लाउज पड़ा हुआ मिलता है

रवि लपक कर बलिउसे उठा लेता है

और एक नजर अपनी दीदी की तरफ मरता है रेखा अभी दरवाजे की और देख रही थी

रवि बलोसुए को अपनी नाक के पास लेकर थोड़ी महक लेता है

रेखा के ब्लाउज में से अभी भी उसके बदन की मादक महक आ रही थी जो रवि के लुंड को दुबारा से परेशान कर रही थी

अब रवि ब्लाउज को पूरी तरह से अपने चेहरे से चिपका लेता है

और भूल जाता है की रेखा भी उसी कमरे में है

जब रेखा की नजर रवि पर पड़ती है तो वो अंदर तक सेहम जाती है अपने भाई की हरकत देख कर

रवि लगातार रेखा के ब्लाउज के ब्लाउज को अपनी नाक पर लगाए सूंघ रहा था

रेखा- क्या हुआ रवि मिला नहीं क्या मेरा ब्लाउज

रवि रेखा की आवाज सुनकर घबड़ा जाता है

रवि- है दीदी मिल गया लाया

रवि ब्लाउज लेकर रेखा को देदेता है और बहार निकल जाता है

जल्दी hi रेखा अपना ब्लाउज पेहेन लेती है और बहार आजाती है

रवि बहार hi रेखा को खत पर बैठा हुआ मिल जाता है

रवि रेखा की और देखता है रेखा अपना छोटा सा पेटीकोट उतर कर एक नार्मल पेटीकोट पहने हुई थी

रेखा- चल भाई जल्दी चल बहुत तेज लगी है मुझे संडास

रवि- है दीदी चलो

और दोनों भाई बेहेन घर से निकल कर घर के पीछे की और जाने लगते है

रवि के घर के पीछे थोड़े पेड़ पौधे थे

कोई ज्यादा विशाल जंगल नहीं था और वो एरिया भी ज्यादा बड़ा नहीं था

रवि एक किनारे खड़ा हो जाता है

रवि- जाओ दीदी जल्दी से करलो

रेखा आगे बढ़ती हुई थोड़ी hi दूर पीछे मुद कर रवि को अपनी क़ातिल नजरो से देखती है और अपनी गांड रवि की और घुमा कर अपना पेटीकोट पकड़ कर सीधा अपनी कमर तक उठा लेती है

रवि की नजरो सामने एक पल में hi उसकी दीदी की विशाल गांड नंगी हो जाती है

रवि लगातार रेखा की और देखे जा रहा था

रेखा को भी पता था की रवि उसकी गदरायी जवानी को देख कर अपनी आँखे सेक रहा है

रेखा ान अपना अगला देव खेलती है

और अपनी गांड को थोड़ा पीछे की और निकल कर सीधा निचे बैठ जाती है

रेखा रवि से ज्यादा दूर नहीं थी

रवि की नजरो के सामने अब रेखा का भूरा रंग का गांड का सुराख़ था जिसे रवि लगातार देखे जा रहा था

और रेखा भी जान भुज कर कभी अपनी गांड के छेद जो सिकुड़ लेती कभी कुछ ज्यादा hi जोर लगाकर अपनी गांड के छेद को फैला लेती

रवि के ऊपर अब इन सब चीज़ो का असर होना शुरू हो चूका था उसका हाथ खुद बी खुद उसके लुंड तक पहुंच गया था और अब रवि अपने लुंड को धोती के ऊपर से hi धीरे धीरे सेहला रहा था

रेखा लगातार अपनी गांड को बंद खोल रही थी जान भुज कर

अब रेखा थोड़ा सा जोर लगती है

और उसकी छूट से पेशाब की धार निकलने लगती है

रवि के कान में उसकी दीदी की छूट से निकलती सिटी की आवाज साफ़ नजर आ रही थी

रेखा अब धीरे धीरे और जोर लगती है और उसकी गांड के सुराख़ से हगवास बहार आने लगती है

रवि लगातार अपनी दीदी को हगते हुए देख रहा था

रेखा को भी पता था की रवि उसकी गांड को देख रहा ह पर उसे ये नहीं पता था की रवि का एक हाथ अपनी दीदी को संडास करते हुए डेल्ह कर अपना लुंड मसल रहा था.

रेखा- रवि मैं पानी लाना तो भूल hi गयी जा भाई घर मेसे पानी लेकर आजा

रवि रेखा की बात सुनके न कहते हुए भी घर की और बढ़ता है

और एक लोटे में पानी लेकर वापस घर की पिछवाड़े अलनी दीदी का ोिछवाडा देखने पहुंच जाता है

रवि- दीदी मैं पानी ले आया

रेखा- ले आया तो ला दे न मुझे या वही से मेरी धो देगा

रेखा की बाटे अब रवि को अंदर hi अंदर और गरम कर रही थी

रवि- नहीं नहीं दीदी ऐसा नहीं ह रुको म आता हु

रवि धीरे धीरे चलता हुआ रेखा के पास पहुंच जाता है और अपना हाथ आगे बढ़ा कर रेखा को लोटा पकड़ा देता है और वापस से थोड़ा पीछे होकर खड़ा हो जाता है

अब रवि पहले से भी जयादा करीब था रेखा के

रेखा अपने हाथो में पानी लेकर अच्छे से अपनी गांड और छूट को धोती है

आज रेखा इन सब कामो में कुछ ज्यादा hi ओवर टाइम लगा रही थी वो जान भुज कर अपनी एक ऊँगली को लगातार अपनी छूट से अपनी गांड तक फिर रही थी

और अच्चानक रेखा वो करती है जिससे रवि की आँखे फटी की फ़टी रह जाती है

रेखा अपनी बिच वाली ऊँगली से छूट और गांड को अच्छे से ऊपर से निचे सेहला रही थी

और अचानक से वो बिच वाली ऊँगली को मोड़ कर गांड के छेद तक लती है और एक hi पल में उसकी आधी ऊँगली उसकी गांड में समै जाती है

रेखा तो जैसे बहुत hi चुकी थी की उसका छोटा भ्सी उसके पिक्सी खड़ा उसे ये सब करते देख रहा है

पर रेखा तो कहती hi यही थी की रवि उसे देखे ऐसा करते हुए

रेखा 1-2 बार अपनी ऊँगली को गांड के अंदर बहार करती है और एक दम से कढ़ी हो जाती है

जब रेखा पलट कर रवि की और देखती है तो वो रवि को देखती hi रह जाती है

रवि की धोती में से उसका लुंड का उभार साफ़ नजर आ रहा था

रवि की आँखे पूरी लाल हो चुकी थी मनो आज उसने जैसे कोई बहुत देख लिया हो

रेखा आगे बढ़ती हुई रवि के पास आती है

रेखा- चल भाई हो गया मेरा तो अब पेट हल्का हो गया

रवि को रेखा की आवाज सुनकर एक दम से होश आता है

और रवि एक बार रेखा की सकल की तरफ देखता है और फिर अपनी नजर घुस कर रेखा की गांड से निकली हगवास पर डालता है

आज रेखा ने कुछ ज्यादा hi हगा था जिसे देख कर रवि को एक अजीब सी खुमारी चढ़ रही थी

रेखा जानती थी की रवि क्या देख रहा है और क्यों देख रहा है

रेखा- अब देखता hi रहेगा क्या मेरी टट्टी को या घर में भी चलेगा

रवि- है है दीदी चलो चलो

रवि की जबान लड़खड़ा रही थी उसका शरीर थोड़ा थोड़ा काँप रहा था जिसका अंदाजा रेखा को भी लग गया था

रेखा अब घर की और बढ़ने लगती है और रवि उसके पीछे पीछे घर में घुस जाता है

रवि- दीदी म नहा कर आता हु आप जल्दी खाना बना दो मुझे खेतो पर जाना ह आज काम ह थोड़ा खेत में

रेखा- ठीक ह तू नहा ले मैं तब तक रोटी बना देती हु

और रेखा घर के भीतर आ जाती हसि और खाने की तैयारी करने लगती है और रवि बहार लगे हेण्डपम्प पर जाकर नहाने की तैयारी करने लगता है

रवि की नजरो के सामने लगातार उसकी दीदी की गांड का छेद घूम रहा था जिसे देख कर वो पागल सा हो गया था

जिस वजह से रवि का लुंड बैठने का नाम नहीं ले रहा थस

खैर थोड़ी hi देर बाद रवि नहा कर घर में आता है और खाना खाने बैठ जाता है

रेखा खाना बना चुकी थी

रेखा- भाई तू खाना खा ले मैं भी नहा लेती हु और मेने तेरा दोपहर का खाना भी रख दिया है तू लेजाना आज अपने साथ

क्योंकि म लेत हो गयी हु आज मुझे भी बहुत काम है ऊपर से कम्मो भी नहीं है

रवि - ठीक ह दीदी जाओ आप भी नहा लो

रवि बहार आंगन में खत पर बैठा खाना खा रहा था

रेखा वही उसके सामने अपना ब्लाउज उतर देती है और अपनी चूचियों को हिलाते हुए आंगन में लगे हेण्डपम्प पर जाकर अपनी पीठ रवि की तरफ करके बैठ जाती है

रवि की नजर दुबारा से रेखा पर थी पर वो लेत हो रहा था इसलिए वो जल्दी hi खाना खा लार खेतो की और निकल जाता है

और इधर रेखा भी नःसमा कर कपडे पेहेन चुकी थी

रेखा की नजरो के सामने भी अब सिर्फ रवि. का विशाल लुंड घूम रहा था

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे में समै जाना कहते थे

पर रेखा रवि के साथ पूरा मजा लेना कहती थी

रेखा को कोई जल्दी नहीं थी क्योंकि अब उसे पता था की रवि सिर्फ और सिर्फ उसका है .........
 
अपडेट-24

रवि का आज खेतो में बिलकुल भी मन नहीं लगा रहा था जब जब उसकी नजरो के सामने रेखा की गांड का भूरा छेद आता तब तब रवि का लुंड झटके मरने लगता

रवि खाना खा कर अपनी कुटिया में लेता हुआ था और आँख ब्नद करके सोने की कोशिश कर रहा था पर जब जब वो आँख बंद करता कभी उसके सामने रेखा की गदराई चूचिया आजातिऔर कभी उसकी आँखों के सामने रेखा हगते हुए नजर आने लगती

अब तक रवि का हाथ उसके लुंड तक पहुंच चूका था और वो अपनी दीदी के साथ हुए घटना को याद करके अपना लुंड लगातार सहलाये जा रहा था

रवि का लुंड अपने पुरे विशाल रूप में वव गया था

रवि अब अपनी धोती पकड़ कर साइड कर देता है और अपने विशाल लुंड को आजाद करदेता है

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अब रवि लगातार अपने लुंड को सेहला रहा रहा था और तेज तेज सांसे ले रहा था

रवि की आँखे पूरी तरह से बंद थी

और वो अपनी दीदी के गदराये जिस्म को सोच कर अपना लुंड मिथिया रहा था जिसमे उसे खूब मजा आ रहा था

अब रवि की स्पीड काफी बढ़ चुकी थी

रवि- अह्हह्ह्ह्ह डीडीई क्या बदन है आपका

आपको देखते है पता नहीं ल्यो मेरा लुंड अपने आप खड़ा हो जाता है दीदी

मैं क्या कृ मुझे आपको और अच्छे से चुने का मन करता है

आपके साथ चिपक कर सोने का मन करता है

मैं क्या कृ दीदी

रवि की स्पीड अब तक काफी बढ़ चुकी थी

और थोड़ी hi देर बाद रवि की लुंड से उसका चिपचिपा माल बहार निकलने लगता है

रवि का बदन एक के बाद एक कई जहटके लेता गई और वो अपना पूरा लुंड निचोड़ कर सारा पानी निकल देता है

थोड़ी थकान की वजह से रवि की आँख लग जाती है और वो वही झोपडी में पड़े पड़े सो जाता है

इधर दूसरी तरफ रेखा भी अपने भाई के लिए तड़प रही थी

जिसका अंदाजा रवि को नहीं था

रेखा भी अपने सरे काम निपटा चुकी थी

अब रेखा घर का मैं दरवाजा बंद कर देती है और वही बहार पड़ी चारपाई पर लेत जाती है

और सुबह हुई घटना के बारे में सोचने लगती है की कैसे आज उसने रवि के सामने अपनी गांड खोल दी थी सुबह और उसके सामने hi हगवास करने बैठ गयी थी

रेखा के मन में यही सवाल चल रहे थे की जब रवि ने उसकी गांड का छेद देखा होगा तो उसे कैसा लगा होगा

यही सोचते सोचते वो अपना पेटीकोट अपनी टैंगो से ऊपर उठा कर अपनी गांड तक चढ़ा लेती है और अपने दोनों पेअर खोल देती है

अब तक रेखा का हाथ उसकी छूट पर पहुंच चूका था

जब रेखा अपनी छूट पर हाथ लगती है तो उसे पता चलता है की रवि को सोच सोच कर उसकी छूट कितना पानी छोड़ रही है

रेलः अब अपनी छूट पर अच्छे से अपना हाथ फेरने लगती है

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अब रेखा से बर्दास्त नहीं हो रहा था

वो अपनी 2 उंगलियों को अपने मुँह में डालके अच्छे से गिला करती है और फिर अपनी उंगलिया निचे लेजाकर अपनी छूट को अच्छे से चिकना करती है और धीरे से दोनों ऊँगली अपनी छूट में घुसा देती है

रेखा- ahhhhhhhhhh.... Maiyaaaaaaaaaa

कितना बड़ा लुंड है रे रवि तेरा तुझे याद कर कर के तेरी दीदी की छूट देख कितना पानी छोड़ रही है

जल्दी से अपनी दीदी को छोड़ दे भाई अब मुझसे बर्दास्त नहीं होता

इस छूट की गर्मी से मैं जलती जा रही हु

जल्दी से अपना मुशल मेरी छूट में डालके मुझे छोड़ दे

अब रेखा लगातार अपनी छूट म इ अपनी उंगलिया पेले जा रही थी

अब रेखा एक और ऊँगली को अपनी छूट में दाल देती है अब 3 उंगलियों के साथ रेखा अपनी छूट को लगातार अंदर बहार करके छोड़ रही थी

और रेखा का मजा अब सातवे आस्मां पर था

रेखा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह रवि मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तेरा लुंड मेरी छूट में जा रहा है कितना बड़ा है रे तेरा लुंड मेरे भाई

अपनी दीदी को पटक पटक कर छोड़ मेरे भाई ....

रेखा के मुँह से यही सब निकल रहा था

अब रेखा अपने आपको ज्यादा देर नहीं रोक पायी और उसका बदन ैठने लगता है

अब रेखा की छूट से एक विशाल झरना बहना चालू होता है

जो रुकने का नाम नहीं ले रहा था

रेखा का बदन लगातार जहटके खा रहा था

उसकी छूट से निकलता सफ़ेद पानी किसी अमृत से काम नहीं था

थोड़ी hi देर में रेखा अपना सारा पानी निकल देती है

और पड़े पड़े यही सोचती रहती है की जब रवि का नाम लेकर अपनी छूट में ऊँगली डालने में इतना मजा आ रहा है तो जब उसका लुंड मेरी छूट में जायेगा तो कितना मजा आएगा

यही सब सोचते सोचते पता नहीं कब रेखा की आँख लग जाती है .......
 
अपडेट-25

रवि अपनी दीदी को यार करता हुआ आज अपने खेतो में hi सो गया था

जब उसकी आँख खुलती है तो उसे पता चलता है की दीदी की याद में आज वो कितना लेत हो गया है

अँधेरा अपने चरम पर आ चूका था

रवि जल्दी जल्दी अपना सारा सामान झोपडी में रखता है और घर की तरफ तेजी के साथ निकल जाता है

इधर रेखा भी परेशान थी की आज रवि इतना लेत कैसे हो गया आजसे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था

रेखा आंगन में इधर से उधर घूमे जा रही थी

उसके फेस पर टेंशन साफ़ नजर आ रही थी

रेखा को लग रहा था की कहि उसके द्वारा की जा रही हरकतों से रवि परेशान तो नहीं हो रहा है

आखिर वो रेखा के सामने तो अभी भी बच्चा hi था

वही दूसरी तरफ रवि को पता था की आज उसे बहुत साडी गालिया मिलेंगी क्योंकि उसकी दीदी ने उसे साफ़ कह रखा था की अँधेरा होने से पहले घर आजाना कैसे भी ये एक नियम था

जिसे रवि आज तोड़ चूका था

रवि लम्बे लम्बे कदम नापता हुआ घर पहुंच जाता है जैसे hi वो दरवाजा खोलता है

रेखा की नजर भी दरवाजे पर जाती है वो रवि को देखते hi दौड़ कर रवि के पास आती है

रवि की तो गांड फैट रही थी की आज दीदी उसे क्या बोलेगी

रेखा भागते हुए आकर सीधा रवि को पकड़ लेती है और उसे अपने साइन से लगा लेती है

रेखा ने बहुत जोरसे रवि को अपनी बहो में कास रखा था जिस वजह से रवि का मुँह रेखा की चूचियों में घुस गया था

रेखा 5 मिंट तक रवि को ऐसे hi जकड़े रहती है और फिर उसे अपनी बहो से आजाद करती है

और रवि के गलो को चूमने लगती है

रेखा- मेने तुझे बोलै था न की लगाम होने से पहले घर अजय करो

रवि- दीदी वो काम थोड़ा ज्यादा था तो टाइम का पता hi नहीं चला

रवि रेखा को बताता भी क्या

की वो उसकी गांड चूचिया और गांड का छेद याद करके अपना लुंड मुठिया रहा था

रेखा को रवि की बात सुनकर उसपर यकीन होता है की चलो कोई बात नहीं खेतो म hi तो था

रेखा- आगे से कभी ऐसा मत करना रवि

रवि- नहीं दीदी अबसे में टाइम से घर आज जाऊंगा

रेखा- चल ठीक ह आज तूने ज्यादा काम किया ह थक गया होगा हाथ मुँह धो ले मैं खाना निकल देती हु

ये बोलकर रेखा खाना निकलने लगती है और रवि अपने हाथ पेअर धो कर वही आंगन में पड़ी खत पर बटिह जाता है

रेखा आज एक hi थाली में दोनों भाई बेहेन का खाना निकलती है

रेखा थाली लेकर रवि के आगे रख देती है

रवि- दीदी आप नहीं खाओगी क्या खाना

रेखा- मेरा भाई ोयार से खिलायेगा तो क्यों नहीं खाउंगी

आज भी रेखा ने ब्लाउज और पेटीकोट hi पहना था और ऊपर एक पतला सा दुपट्टा लिया हुआ था

रवि- बैठो न दीदी मैं जरूर खिलूँगा अपनी दीदी को खाना

रेखा रवि के बिलकुल सामने बैठ जाती है

और रवि पहले एक निबला रेखा के मुँह में डालता है

जब रवि रेखा को खिला रहा था तो उसकी उंगलिया रेखा को होठो को हल्का सा टच होती है

जिससे रेखा बैचैन होने लगती है

रेखा भी एक निवाला िथति है और रवि को खिला देती है

रवि अपने हाथो से रेखा को खिला रहा था और रेखा रवि को खाना खिला रही थी

रवि बार बार रेखा को निवाला खिलते वक़्त अपने अंगूठे से उसके हित रगड़ देता जिसकी वजह से रेखा अंदर तक सिहर जाती

उसकी छूट का बुरा हाल हो रहा था

अब रेखा अपना अगला देव खेलती है

और अपनी छाती पर पड़ा दुपट्टा धीरे से सरका देती है

जैसे hi रवि की नजर अपनी दीदी के ब्लाउज पर पड़ती है उसके हाथ एक दम से सुन्नन पद जाते है अब रवि रेखा को खिलाना बंद कर चूका था और लगातार अपनी दीदी की चूचिया निहार रहा था

इसका कारन यह था की रेखा ने अपने निचे के सरे हुक खोल दिए थे बस ऊपर के 2 हुक लगे हुए थे जिसकी वजह से रेखा की आधे से ज्यादा चूचिया ब्लाउज से निचे को लटक कर बहार आ रही थी जो रवि को साफ़ साफ़ नजर आ रही थी

रेखा भाप जाती है की उसका भाई क्या देख रहा है

रेखा- अब देखता hi रहेगा या खिलायेगा भी अपनी दीदी को.

रवि को रेखा की बात सुनकर होश आता है

और अब रवि दुबारा से रेखा को खाना खिलने लगता है

पर रवि की नजरे अभी भी लगातार रेखा की अधनंगी चूचियों को. लगातार घूरे जा रही थी

रवि की ये हरकत रेखा को अंदर hi अंदर पागल किया जा रही थी

रेखा बार बार अपने पैरो को थोड़ा हिला कर अपनी छूट को थोड़ा सहमत करने की कोशिश कर रही थी

पर वो जितनी कोशिश करती उसकी छूट उतनी hi बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी

और रवि लगातार अपने हमले तेन करता जा रहा था वो हर निवाले के साथ रेखा के होठो को रगड़े जा रहा था

रेखा के बस की बात नहीं थी अब और बर्दास्त करना

वो जल्दी hi उठ जाती है

रवि- क्या हुआ दीदी और नहीं खाओगी

रेखा- नहीं भाई मेरा पेट भर गया तू खले अब

मैं बर्तन धो लेती हु

ये बोलकर रेखा बर्तन धोने चले जाती है और रवि भी अपना खाना निपटा कर कमरे में जाकर बिस्तर लगाने लगता हसि और लेत कर अपनी दीदी का इन्तजार करने लगता है

इधर रेखा बर्तन धोते धोते रवि की हरकतों के बारे में सोच रही थी रवि की हरकते दिन बी दिन रेखा को और भी जयादा पागल कर रही थी

रवि का उसके होठो को यु चुना उसे पागल बना चूका था

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को गरम करने में लगे हुए है

अब देखना ये है की ये गर्मी कैसे शांत होती है .......
 
अपडेट-26

रेखा बर्तन निपटा चुकी थी और अब उसे अपने भाई के पास जाना था

जिसका उसे दिन भर इन्तजार था

रेखा सरे काम निपटा कर घर का मैं दरवाजा बंद करती है और वही खड़े खड़े अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है और उसकी टैंगो से सरकता हुआ उसका पेटीकोट जमीन ओर गुर जाता है

अब रेखा अपनी मांसल गांड को मटकते हुए आगे बढ़ती है और वही छोटा सा पेटीकोट पेहेन लेती है

रेखा की आधी चूचिया अभी भी उसके ब्लाउज से लटक रही थी

रेखा अब अपनीगंड मटकते हुए अपने कमरे में जाती है

रवि पहले से hi अपनी जगह लेता हुआ था

रेखा रवि की तरफ एक नजर डालती है और रूम के अंदर जाकर अपनी जगह ओर बैठ जाती है

रवि भी रेखा की विशाल चूचियों को hi देख रहा था

पर आज रेखा कुछ अलग मुद में थी वो चुप चाप वैसे hi लेत जाती हसि रवि की तरफ अपना मुँह करके

आज रेखा ने अपना ब्लाउज नहीं उतरा था जो रवि को खटक रहा था रवि यही सोच रहा था की कब उसकी दीदी अपनी चूचियों को आजाद करे और वो अपनी दीदी की जवानी का मजा ले सके

रेखा भी रवि की नजरो से नजरे मिला कर लेती हुई थी जैसे वो रवि से इशारे इशारे में कुछ पूछ रही हो

5मिंट की शांति के बाद रवि बोल पड़ता है

रवि- दीदी आज आपको गर्मी नहीं लग रही क्या

रेखा समझ रही थी की रवि उससे गर्मी के बारे में क्यों पूछ रहा है पर वो रवि को थोड़ा तड़पना कहती ठु

रेखा- गर्मी तो बहुत लग रही है भाई

रवि- तो दीदी आप कल की तरह सो जाओ न आपको अच्छी नींद आएगी

रेखा- कल की तरह hi तो लेती हु म देख

रवि- दीदी मतलब कल आप जैसे सोई थी

रेखा को समझ तो आ रहा था की रवि क्या कहना कह रहा ह पर वो बातो को और गोल गोल घुमा रही थी

रेखा- भाई मुझे समझ नहीं आ रहा तू कैसे सोने को बोल रहा ह

रवि- दीदी मेरा मतलब गर्मी नहीं लग रही आपको

रेखा- गर्मी तो बहुत है भाई पूछ मत

रवि- तो दीदी उतर दो न इसे

रेखा- क्या उतर दू

रवि- दीदी म कह रहा हु अपना ब्लाउज उतर दो आपको गर्मी थोड़ी काम लगेगी

रेखा- अच्छा तो तुझे आज भी अपनी दीदी को नंगा करना है

रवि- दीदी मेने तो इस लिए खा की आपको गर्मी थोड़ी काम लगे

रेखा- मतलब अब मुझे रोज तेरे साथ बंगा सोना पड़ेगा

रवि- दीदी घर में तो सिर्फ मैं और आप hi है

रेखा- चल ठीक है ये ले तू hi करदे अपनी दीदी को अपने सामने नंगा

रेखा इतना बोलकर उठ जाती है और वही बैठ जाती है

रवि को अपने कानो पर अभी तक यकीन नहीं हो रहा था की उसकी दीदी उसे अपना ब्लाउज उतर कर होनी चूचिया आजाद करने का न्योता दे रही थी

रेखा- चल रवि जल्दी कर करदे अपनी दीदी को अपने सामने नंगा

रेखा अपनी बातो से रवि को लगातार उकसा रही थी जिसका असर अब रवि के लुंड पर होने लगा रहा था

रवि भी उठ कर बैठ जाता है और अपने कंपते हुए हाथो को आगे बढ़ा कर होनी दीदी के ब्लाउज की और ले जाता है

और धीरे धीरे बाकि बचे दोनों हुक खोल देता है

जैसे hi रवि आखिरी हुक खोलता है रेखा की छुछिया उछलती हुई रवि की नजरो के सामने आ जाती है

रवि की नजरे जैसे hi अपनी दीदी की चूचियों पर पड़ती है उसकी आँखे बड़ी नदी हो जाती है

रेखा रवि की हालत समझ रही थी

रेखा- क्या कर रहा है जल्दी उतर न इसे

देख कितनी गर्मी लग रही है

रेखा ऐसा बोलते हुए अपने हाथ को ुवार उठती है और अपनी पसीने से भरी हुई बगल रवि को दिखा कर इशारा करती है

रवि की नजरे अब अपनी दीदी की बगल पर गड़ी हुई थी

रेखा - तू देखता hi रहेगा या निकलेगा इसको

रवि अब उठ कर रेखा के पीछे जाता है और उसका ब्लाउज खींच कर निकल देता है

रेखा अब ऊपर से पूरी तरह नंगी अपने भाई के सामने बैठी थी

रवि रेखा के ब्लाउज को अपने हाथो में छुपा लेता है और वॉयस से आकर अपनी जगह लेत हटा है

रेखा भी अब अपनी जगह लेत गयी थी

रेखा पीठ के बल लेती हुई थी और रवि उसकी तरफ अपना मुँह करके लेता हुआ था

रेखा रवि को उकसाने के लिए अब और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है

जिसकी वजह से उसकी चूचिया कुछ जयादा hi फूल जाती और कभी एकदम से वो निचे को आ जाती

रवि लगातार रेखा की गदराई चूचियों को देख रहा था

अब रेखा एक कदम और आगे बढ़ती है

और अपना एक पेअर घुटनो से मोड़ कर उठा लेती है

जिससे उसका छोटा सा पेटीकोट सरकता हुआ उसकी छूट से थोड़ा सा ोेहले आकर रुकता है

अब रवि कभी रेखा की चूचियों को देखता कभी अपनी दीदी की मांसल जांघो को देखता

रवि को कैसे भी करके रेखा को चुना था

रेखा की आँखे अभी खुली हुई थी जिस वजह से रवि आगे नहीं बढ़ पा रहा था

रेखा को रवि की बैचनी साफ़ नजर आ रही थी

रेखा- क्या हुआ रे रवि तुझे नींद नहीं आ रही क्या

रवि- बस दीदी म तो सो hi रहा हु आप भी सो जाओ

सुबह जल्दी उठना है

रेखा- अरे सुबह की सुबह देखंगे अभी तो आराम से सजा मेरे प्यारे भाई

और इतना बोलजर रेखा होनी आँखे बंद कर लेती है

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अभी रेखा को आँख बंद किये हुए 2मं hi हुए थे पर रवि को अपने ऊपर अब कण्ट्रोल नहीं हुआ और उसने अपना हाथ उठा कर रेखा के नंगे पेट पर रख दिया

जिसके अहसास से रेखा समझ जाती है की अब उसके भाई का खेल शुरू होने वाला है बस आज रेखा को कैसे भी करके हिलना नहीं था

वो देखना कहती थी की रवि उसके साथ सोते हुए क्या क्या करता है

रवि अब अपना हाथ को हल्का हल्का रेखा के पेट पर फेरने लगता है

रेखा अबदार hi अंदर रवि की हरकतों से पानी पानी हो रही थी

रवि अब लगातार अपने हाथ से अपनी दीदी के पेट को मसल रहा था

अब रवि थोड़ी हिम्मत दिखता है और उठ कर खड़ा हो जाता है

रेखा थोड़ी सी आँखे खोल कर अपने भाई को देख रही थी की आखिर वो क्या क्या करता है

रवि खड़ा होकर अपनी धोती खोल देता है और वही साइड में फेक देता है

जैसे hi रवि का लुंड उसकी धोती से आजाद होकर रेखा की नजरो के सामबे आता है

रेखा सेहम जाती है

रेखा( बाप रे कितना बड़ा और मोटा लुंड है इसका बिलकुल गधे जैसा अगर एक बार घुस गया तो मेरी छूट का भोसड़ा बना देगा पक्का )

रवि दुबारा से लेत जाता है और अबकी बार अपने हाथ को सीधा रेखा की चुकी पर रख देता है

रेखा समझ रही थी की दिन बी दिन अब रवि की हिम्मत बढाती जा रही है जोकि रेखा भी छाती थी

अब रवि धीरे धीरे अपने हाथो को रेखा की चूचियों पर चलना चालू करता है

रवि बड़े hi प्यार से देखते हुए अपनी दीदी की चुकी मसल रहा था

वो कभी एक चुकी पकड़ कर दबाता कभी दूसरी

अब रवि निश्चिंत होकर रेखा के जिस्म के मजे ले रहा था

रवि का एक हाथ अब तक होने लुंड पर पहुंच गया था और अब वो अपने एक हाथ से अपनी दीदी की सेवा कर रहा था और दूसरे हाथ से अपने लुंड की

फिर रवि थोड़ा आगे बढ़ता है और रेखा के एक हाथ को पकड़ कर धीरे धीरे ऊपर की और उठाने लगता है

रेखा भी रवि का ोुरा साथ दे रही थी उसने अपने हाथो को ऐसे ऊपर उठाया की रवि को पता न चले रवि ने बस हल्का सा जोर लगाया और रेखा की बगल अब उसकी आँखों के सामने थी

रवि की आँखों में हवस साफ़ नजर आ रही थी

वो अपनी दीदी की पसीने से भरी बगल को खजाने वाली नजरो से देख रहा था

रेखा जानती थी की अब रवि आगे क्या करेगा बस वो अपने आपको उस हमले के लिए तैयार कर रही थी

रवि अब दुबारा एक अपने हाथ को रेखा की चुकी पर ले जाता है और अपनी 2 उँगलियों से रेखा का निप्पल पकड़ लेता है

और सीधा अपना मुँह रेखा की बगल में घुसा देता है

इस हमले से रेखा थोड़ा सा हिलती है

पर अब रवि पर इन सब चीज़ो का कोई असर नहीं हो रहा था

वो लगातार अपनी दीदी की बगल सूंघे जा रहा था कभी जीभ निकल कर उसे चाट लेता

रेखा अबदार hi अंदर पागल हुई जा रही थी उसका मन तो कर रहा था की वो भी अपना हाथ बढ़ा कर रवि का लुंड पकड़ ले

पर चुदाई तो आज नहीं तो कल होनी hi थी

अब तक रेखा जितना तदपि थी वो सारा हिसाब ऐसे hi मजे लेकर चूका लेना कहती थी

रेखा वैसे hi आँखे बंद किये हुए अपने भाई के सरे हमले झेल रही थी

रवि लगातार रेखा की निप्पल्स को पकड़ कर खींच रहा था कभी कभी वो इतना ऊपर को निप्पल खींचता की रेखा को न कहते हुए भी अपनी पीठ थोड़ी थोड़ी उठानी पड़ती

पर रवि तो अब बस अपनी दीदी की बगल से आ रही मादक खुसबू में खो चूका था और अब वो तेजी के अपने हाथ से अपना लुंड मुठिया रहा था

जिसका अंदाजा रेखा को अपने पेअर पर लगते हुए रवि के हाथ से हुआ

रेखा समझ गयी थी की अब रवि ौरी तरह से गरमा गया है और कभी भी वो अपना माल निकल सकता है

अब रेखा एक और देव खेलती है वो थोड़ा सा हिलती है

रवि रेखा के अच्चानक हिलने से वैसे hi उसकी बगल में मुँह डेल शांत पद जता है

रेखा अपने दूसरे हाथ को पेट पर से घुमा कर रवि के लुंड की तरफ लटका देती है

अब रेखा का हाथ रवि के लुंड से थोड़ा hi दूर था

रेखा अब शांत हो जाती है और रवि दुबारा से अपने काम में लग जाता है

ओर इस बार जब रवि अपना लुंड मुठिया रहा था तो उसका हाथ बार बार रेखा की उंगलियों से टच हो रहा था

अब रवि पागल हुआ जा रहा था

वो भीत तेजी के साथ रेखा के निप्पल मरोड़ रहा था

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रवि अब अपने लुंड पर से अपना हाथ हटाता है और वही करता है जिसकी रेखा को उम्मीद थी

वो रेखा की एक ऊँगली पकड़ कर हाथ को अपने लुंड की और खींचता है

रेखा ने अपना हाथ बिलकुल ढीला छोड़ा हुआ था

रवि के थोड़ा जोर लगते hi हाथ रेखा के नंगे पेट से सरकता हुआ रवि के लुंड की और बढ़ जाता है

अब रवि उसी ऊँगली को पकड़ कर अपने टोपे पर लगता है

रेखा रवि का सूपड़ा महसूस करती है अपनी ऊँगली से

औ अंदर hi अंदर कसमसा कर रह जाती है

रवि का मजा अब दोगुना हो गया था वो लगातार एक हाथ को अपनी दीदी की चुकी पर चला रहा था और दूसरे हाथ से अपनी दीदी का हाथ पड़के अपने लुंड की सेवा करवा रहा था

और रवि की जीभ अभी भी रेखा की बगल में लगातार चल रही थी

रेखा को आज से पहले इतना मजा कभी नहीं आया था

मनो उसकी जिंदगी hi एक दम से पलट गयी हो

खा पहले उसे रोज रोज बैगन से अपनी प्यास बुझानी पड़ती थी

और अब तो उसके पास बैगन से भी बड़ा एक लुंड था जो और किसी का नहीं खुद उसके छोटे भाई का था

रवि रेखा की ऊँगली को पकड़ कर थोड़ा सा और खींचता है और अब रेखा का लगभग आधा हाथ रवि के लुंड ओर था

रवि रेखा की सबसे छोटी ऊँगली को पकड़ कर उसके नाख़ून से अपने लुंड पर दबाने लगता है

और कभी कभी तो जैसे वो अपनी दीदी की ऊँगली को अपने लुंड के छोटे से छेद में घुसाने की कोशिश करता है

रेखा के नाख़ून से जो दर्द रवि के लुंड पर हो रहा था वो उसे पागल किया जा रहा था

लगभग 5 मिंट तक रवि लगातार ऐसे hi करता है और अब वो अपने चरम पर था उससे ज्यादा कण्ट्रोल भी हो पा रहा था

अब रवि रेखा के हाथ को जोरसे होनी और खींचता है और रेखा का पूरा का पूरा हाथ रवि के लुंड पर आजाता है

रवि बिना टाइम गवाए रेखा के हाथो से अपने लुंड पर अच्छे से मुट्ठी की तरह बना देता है

अब रेखा को साफ़ अंदाजा हो गया था की उसके भाई का लुंड कितना मोटा है

रवि अब अपने हाथ से रेखा की नाजुक कलाई पकड़ लेता है

और अगले hi पल वो रेखा की कलाई के शेयर रेखा से अपने लुंड की मुठ मरवाने लता है

रेखा को ये अहसास पागल कर रहा था न कहते हुए भी रेखा अपनी हथेली का दबाव रवि के लुंड पर थोड़ा बढ़ती है और उसके लुंड को थोड़ा कसकर पकड़ लेती है

रवि को इसका अहसास नहीं होता क्योंकि पहले से hi एक गदराई हुई औरत उसके सामने यदि थी जिसे देख कर वो सब कुछ भूल गया था और बस उसके जिस्म के मजे लूटना कहता था

अब रवि काफी तेज तेज अपने हाथ चला रहा था

और रेखा की चूचियों को बुरी तरह से निचोड़ने में लगा हुआ था

रेखा की कलाई ोाकद कर वो इतना तेज उसका हाथ हिला रहा था की रेखा की चूडियो की आवाज बहुत तेज तेज पुरे कमरे में गुन्ज्जज्ज रही थी

जिसे रवि अबसुना करके लगातार अपनी स्पीड बढ़ाये जा रहा था

और आखिरकार रवि के घोड़े भी फ़ैल हो जाते है

और उसका लुंड रेखा की हथेली में 1-2 झटके खता है और अपना सारा माल रेखा की जांघो पर गिराने लगता है

जैसे hi रेखा के पैरो पर रवि के गरम गरम लावे का असर होता है वो मस्ती में अपने होठो का ात ने दातो से काट लेती है

आंखे बंद किये हुए hi रेखा के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ जाती है .

.

रवि अब होनी हथेली से रेखा की हथेली दबा लेता गई और धीरे धीरे अपने लुंड को निचोड़ कर आखिरी बून्द तक निकल देता है

काफी ज्यादा माल रेखा की साडी उंगलियों पर भी लग चूका थस

अब रेखा को उसके भाई की मलाई का स्वाद लेना था

वो एकदम से हरकत में आती है और अपने हाथ को खींचते हुए अपनी गांड रवि की तरफ निकाल कर लेत जाती है

अभी रवि को पूरा होश नहीं आया था

उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी

आज रवि ने पहली बार किसी औरत के शरीर का पूरा फायदा उठाया था

अब तक रवि ये तो समझ चूका था की औरत के जिस्म के हर हिस्से से हम अपने आपको और ज्यादा गर्म कर सकते है

रेखा का पेटीकोट एक चली जैसे उसकी कमर में पड़ा हुआ था

पेटीकोट यह कर कोई फायदा नहीं था वो तो ऐसे hi नंगी पड़ी थी अपने छोटे भाई के सामने

रेखा अपनी गांड कुछ ज्यादा hi रवि की तरफ निकाल कर लेती हुई थी

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जिससे उसकी गांड का छेद उभर कर बहार की और आ चूका था और इस पोजीशन की वजह से उसका छेद होने आप काफी खुल चूका था

अब रवि नार्मल हो जाता है और जैसे hi उसकी नजर रेखा पर पड़ती है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

जिस छेद से सुबह उसने हगवास निकलती हुई देखि थी अब वो उसके सामने था

रवि थोड़ा निचे सरक कर अच्छे से अपनी दीदी की गांड को देखता है और अपनी एक ऊँगली से हल्के से रेखा की गांड के सुराख़ को छू देता है

रेखा इस हमले से पागल हो जाती है

और रवि के माल से सना हुआ हाथ अपने मुँह के पास लती है और एक ऊँगली अपने मुँह में घुसा कर अच्छे से साडी मलाई चाटने लगती है

रवि एक दो बार ऐसे hi होनी दीदी की गांड को छूटा है फिर अपनी नाक को धीरे से रेखा की गांड तक ले जाता है और जोर लगा के अपनी दीदी की गांड से आ रही मादक महक को सूंघने लगता है

रेखा तो जैसे ोागल हुई जा रही थी रवि एक के बाअद एक हमले कर रहा था और हर बार वो पिछली बार से ज्यादा आगे बढ़ रहा था

रवि 5 मिंट तक रेखा की गांड सूंघने के बाद अपनी जुबान को रेखा की गांड के छेद पर अच्छे से फिरता है

रवि के ऐसा करने से रेखा एक झटका कहती है और अपनी 2, उंगलिया अपने मुँह में भर लेती है

रवि को दर भी लग रहा था और मजा भी आ रहा था

उसे दर था की अगर दीदी जाग गयी तो क्या होगा

रवि 2मिंट रुकता है और फिर दुबारा से अपनी जीभ से अपनी दीदी की गांड का छेद चाट लेता है

असल में रवि को बहुत मजा आ रहा था अपनी दीदी के साथ ऐसे गंदे काम करने में

खासकर की जब उसकी दीदी सोई हुई थी

पर ऐसा तो सिर्फ रवि को लग रहा था की रेखा बहुत गहरी नींद में सोई हुई है

रवि ज्यादा जल्दबाज़ी नहीं करना कहता था उसे भी आता था की जिंदगी भर उसकी दीदी उसके पास hi रहेगी तो हड़बड़ी में काम क्यों खराब करना

अब रवि दुबारा से अपनी जगह पर लेत जाता है

और अपनी दीदी की गांड को निहारता रहता है

फिर वो अपना हाथ आगे बढ़ा रेखा की गांड पर रख देता है और थोड़ा सा उसकी गांड को प्यार से सहलाता है

अपने भाई से इतना प्यार मिलने से रेखा की आँखे बंद हो चुकी थी वो जैसे किसी और hi दुनिआ में थी

फिर रवि एक हमला और करता है वो सीधा अपना हाथ अपनी दीदी के पैरो के बिच लेजाता है और अपना हाथ सीधा रेखा की छूट पर रख देता है

रेखा की छूट काफी गीली हो चुकी थी जिसका अहसास रवि को भी हो चूका था

रवि अपनी ऊँगली से लगातार अपनी दीदी की छूट कुरेदे जा रहा था

काफी गीलापन होने के कारन पछ्ह्ह्ह्ह पछ्ह्ह्ह्हह्ह की आवाज साफ़ साफ दोनों को सुनाई दे रही थी

वो आवाज माहौल में और भी ज्यादा गर्मी पैदा कर रही थी

रवि का हाथ लगातार चल रहा था और छूट से लेकर गांड तक वो अपनी दीदी को अच्छे से मसल रहा था

अच्चानक से रवि को याद आता है की कैसे रेखा दीदी ने सुबह अपनी गांड धोते वक़्त ऊँगली को अंदर डाला था

रवि अब अपनी ऊँगली को रेखा की गांड ओर ले जाता है और पहले तो उसके छेद को अच्छे से दबा दबा कर महसूस करता है

रेखा की गांड असल में बहुत टाइट थी

जिसका अंदाजा रवि को भी हो चूका था

रवि होनी उन्हली पर थोड़ा जोर लगता है और उसकी ऊँगली सरकते हुए रेखा की गांड में घुसने लगती है

आधी ऊँगली रेखा की गांड में समै जाती है रवि को अभी और मजा लेना था वो एकदम से जोर लगता है और अपनी पूरी की पूरी ऊँगली रेखा की गांड में थुश देता है

जिस वजह से रेखा आगे की और उछाल जाती है रवि फटक से अपनी उबगली रेखा की गांड से बहार खींच लेता है

और होनी ऊँगली को होनी नाक के पास लेकर ाचे से सूंघता है और धीरे से अपनी ऊँगली मुँह में भर कर अपनी दीदी की गांड का स्वाद पहली बार चकता है

.

पूरी ऊँगली चूसने के कारन गीली हो चुकी थी रवि दुबारा से अपनी ऊँगली रेखा की गांड के छेद ओर रखता है और एक hi बार में सरकता हुआ अंदर पेल देता है

रेखा किसी जल बिन मछली की तरह लेते लेते तड़प रही थी

रवि 3-4 बार अपनी ऊँगली को अच्छे से अंदर बहार करता है और बार बार अपनी ऊँगली को मुँह में भर कर चुस्त है

रवि की ये हरकतों से रेखा बिना छूट सहलाये hi झाड़ रही थी उसकी पूरी जंघे उसके पानी से गीली हो चुकी थी

रवि ज्यादा जल्दबाज़ी नहीं करना कहता था वो अब अपने लुंड को पकड़ कर सीधा अपनी दीदी की टैंगो के बिच घुसता है पर लुंड पूरी तरह सूखा हुआ था तो नहीं जा पता

रवि अब अपना हाथ रेखा की छूट पर लेजाता है और अपनी दीदी की छूट का पानी इकठ्ठा करके अच्छे से अपने लुंड पर लगाने लगता है और थोड़ी hi देर में रवि का पूरा लुंड उसकी दीदी की छूट से निकली मलाई से सं जाता है

रवि अब दुबारा से लुंड पकड़ कर दीदी के पैरो में लगता है और अपनी कमर को थोड़ा सा आगे सरकता है

जिससे उसका लुंड सरकता हुआ रेखा की टैंगो के बिच गायब हो हटा है

इस अहसास से दोनों भाई बेहेन अंदर hi अंदर पागल हुए जा रहे थे रवि 3-4 झटके ऐसे hi लगता है

वो कभी अपने लुंड को पूरा बहार निकल क्र एक hi जहटके में पूरा लुंड रेखा की टैंगो के बिच थुश देता

ऐसे hi करीब 10-12 मिनट मस्ती करते करते

वो अपना लुंड दीदी की जांघो में घुसाए हुए सो जाता है .......

दोस्तों कहानी कैसी जा रही है जरूर बताये.
 
अपडेट-27

रवि की पिछली रस्स्त बहुत रंगीन रही थी उसे पहली बार औरत का मलतब समझ आया था

अब वो जान चूका था की औरत अपने जिस्म के हर जिससे से मर्द को सुकून दे सकती है

सुबह के 7 बज चुके थे और दोनों भाई बेहेन दुबिया से बेखबर सोये हुए थे

उन्हें जैसे अब किसी और से कुछ मतलब नहीं था दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए सोये थे

रेखा बिलकुल सीधा लेती हुई थी और रवि ने अपना एक पेअर उसकी टैंगो के ऊपर फेक रखा था जिस वजह से उसका लुंड लगातार अपनी दीदी के ोैरो पर ठोकर मार रहा था

और रवि का हाथ रेखा की छाती पर था

रेखा थोड़ी सी आबख खोलती है

उसे कमरे में आ रही सूरज की रौशनी साफ़ दिखाई दे रही थी

पर वो रवि को छोड़ कर उठना नहीं कहती थी

अब रेखा रवि की तरफ घूम जाती है और अपनी बहे रवि के गले में दाल देती है

अब आलम ये था की रेखा की दोनों चूचिया रवि की छाती में घुसी हुई थी

और रवि का लुंड सीधा रेखा की छूट के ऊपर था

जिसका अहसास पर रेखा होने आपको रोक नहीं पति और रवि के सुपडे पर अपनी छूट टिका देती है और अपनी कमर को थोड़ा थोड़ा हिलने लगती है

रेखा को इस काम में बहुत मजा आ रहा था

पर थोड़ी hi देर में रवि थोड़ा सा हिलता है और रेखा उसे हिलता देख शांत होकर लेत जाती है

रवि आँख खोल कर देखता है की सुबह हो चुकी है रवि का लुंड अभी भी रेखा की छूट के डेन पर था

रवि अपने लुंड को थोड़ा पीछे खींचता है और अपनी बिच वाली ऊँगली रेखा के होठो के पास ले जाता है

रेखा तो पहले से hi जगी हुई थी उसे रवि की हरकत बहुत प्यारी लग रही थी

रवि बड़े hi प्यार से अपनी ऊँगली को रेखा के होतेहो पर फेर रहा था फिर वो अपनी ऊँगली को थोड़ा सा दबाता है रेखा के मुँह के अंदर

रेखा इशारा समझ कर धीरे से अपना मुँह खोल देती है और रवि की ऊँगली उसके मुँह में चली जब्ती है अब रवि अपनी ऊँगली को अच्छे से रेखा के मुँह में घूमता है और ौरी तरह से गीली करके बहार निकल लेता है

और फिर उस ऊँगली को रेखा की गांड के छेद पर रख कर थोड़ा सा दबाता है एक hi बार में असधि से ज्यादा ऊँगली रेखा की गांड में समै जाती है

रेखा इस हमले से अंदर hi अंदर कसमसा कर रह जाती है

रवि अब आगे बढ़ कर रेखा से पूरी तरह चिपक जाता है और उसका लुंड सीधा अपनी दीदी की छूट पर ठोकर मरने लगता है

रेखा को मस्ती सूझती है

वो अपनी गांड के छेद को बिकुल टाइट कर लेती है

अब रवि की ऊँगली उसकी दीदी की गांड में आधी फसी हुई थी

रवि थोड़ा जोर लगता है

रेखा भी और जोरसे अपनी गांड को भींच लेती है

रवि लगातार जोर लगाककर अपनी ऊँगली खींच रहा था

अगले hi पल रेखा अपनी गांड के सुराख़ को ढीला छोड़ देती है और पांच से रवि की ऊँगली बहार आ जाती है

रवि रेखा की इस हरकत से और भी ज्यादा हवस की आग में डूबने लगता है अब नहीं उठ कर बैठ जाता है और रेखा के पीछे की और जाकर धोरे से अपनी दीदी की गांड से आ रही महक को अच्छे से सूंघने लगता है

रेखा अंदर hi अंदर मचल रही थी

वो पानी पानी हुए जा रही थी क्योंकि उसका छोटा भाई उसकी गांड को किसी कुत्ते की तरह सूंघ रहा था

सूरज सर पर चढ़ आया था रवि देर न करते हुए खड़ा हो जाता है और अपनी धोती को अपनी कमर पर लपेट लेता है

और दुबारा से रेखा के सर के पास जाकर बैठ जाता है

और अपनी एक ऊँगली से रेखा के कामुक होठो को छूटा है

रेखा को थोड़ी थोड़ी किसी चीज़ की महक आने लगती है

उसे समझते देर नहीं लगती की ये महक उसकी hi गांड की है

असल में रवि उसी ऊँगली से अपनी दीदी के होठ छू रहा था जो थोड़ी देर पहले तक रेखा की गांड में फांसी हुई थी

अब रवि रेखा को देख देख कर और भी गरम होता जा रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था की उसे अपनी दीदी को ऐसे चुना क्यों अच्छा लग रहा है

पर जवानी की चिंगारी भड़क चुकी थी जिसे अब सिर्फ चुदाई hi शांत कर सकती थी

रवि अपने अंगूठे से रेखा के निचले होठ को मसल देता है

और अपना हाथ आगे बढ़ा कर दोनों हाथ रेखा की चूचियों पर रख देता है

और खूब जोर से रेखा की दोनों चूचियों को अपनी मुठी में भर लेता है

रवि के इस हमले से रेखा अंदर hi अंदर तड़प के रह जाती है

रेखा अपनी आँख को थोड़ा सा खोलती है

रवि लगातार अपनी दीदी की चूँची को घूरे जा रहा था

जब रेखा अपनी नजर थोड़ा ऊपर की और उठती है तो उसकी सांसे अटक जाती है

रवि का विशाल लुंड उसके सर के ऊपर नंगा झूल रहा था

रवि के लगातार हिलने की वजह से उसका लुंड बार बार रेखा के सर के ऊपरी हिस्से से टकरा रहा था

रेखा की हालत अब खराब होने लगी थी उसकी सांसे लगातार फूल रही थी

और रवि था की लगातार अपने हाथो की पकड़ को बढ़ता जा रहा था

पर इस मामले में अपनी रेखा भी काम नहीं थी

उसकी तो दिली इच्छा थी की कब कोई गबरू जवान उसके जिसम को पूरी तरह मसल कर चोदे

और आज उसकी वो इच्छा आधी पूरी तो हो hi गयी थी

रवि अब चूचियों को छोड़ कर एक साथ रेखा के दोनों निप्पल पकड़ लेता है और एक hi साथ दोनों को मसलने लगता है

रेखा के निप्पल एक दम खड़े हो गए थे जैसे कोई कला जामुन किसी ने रेखा की चूचियों के ऊपर सजा दिया था

रवि के लगातार मदोरंस के कारन रेखा के काळा निप्पल भी अबतक लाल हो चुके थे

अपनी दीदी के बड़े बड़े निप्पल देख कर रवि अपने आपको रोक नहीं पता और थोड़ा सा झुकते हुए एक निप्पल को मुँह में भर लेता है

रेखा की तो मनो आज साडी इच्छाएं पूरी हो रही थी एक के बाद एक

जैसे hi रवि झुकता है उसका लुंड सीधा आकर रेखा के गलो पर लगता है

जिसे महसूस करके रेखा की छूट झटके खाने लगती है

रेखा की हालत ऐसी थी मनो उसे सब कुछ चाहिए पर वो अपना हाथ बढ़ा कर वो चीज़ उठा नहीं सकती

रवि अब निप्पल को ोगतार चूसे जा रहा था

और बार बार हिलने की वजह से उसका लुंड लगातार रेखा के गलो पर आगे पीछे हो रहा था

रेखा का मन तो कर रहा था की अभी वो अपना मुँह खोल कर रवि का पूरा लुंड अपने मुँह में लेले

पर सब्र का फल मीठा होता है

और अपने भाई के साथ तो कुछ ज्यादा hi मीठा होता है

ये बात रेखा को अबतक समझ आ गयी थी

वो सबकुछ करना कहती थी पर धीरे धीरे आराम से

वो हर एक चीज़ का मजा लेना कहती थी जो भी उसने आज तक मिस की थी

रवि को लगता है की उसे कुछ ज्यादा hi देर हो गयी है वो उठ कर खड़ा होजाता है और रेखा का ब्लाउज पहले से hi धुंध कर रेखा के सिरहाने रख देता है

रवि अपनी हालत ठीक करता है

और रेखा को जगाने लगता है

रेखा अभी रवि ले सामने बिलकुल नंगी पड़ी थी

रेखा की हलकी हलकी झट रवि को साफ़ नजर आ रही थी

रवि रेखा के पेट पर हाथ फेर कर उसे उठाने लगता है

रवि- दीदी उठ जाओ कितनी देर तक सोयेगी आप

रेखा तो पहले से hi उठी हुई थी

पर वो रवि को यकीन दिलाना कहती थी की वो खूब गहरी नींद में सोती है

रवि- िठो दीदी दीदी

उठो न कितनी देर सोयेंगी आप

दीदी दीदी उठो सुबह हो गयी है उठो

करीब 5 मिंट तक रवि रेखा के पेट को सहलाता रहता है और लगातार आवाजे मरता रहता है

रेखा एक अंगड़ाई के साथ अपने दोनों पैरो को खोल देती है

और एक पल के लिए रवि के सामने उसकी दीदी की काली छूट खुलकर सामने आ जाती है

अगले hi पल रेखा उठ कर बैठ जाती है और जब वो अपना हाथ अपने गाल पर लगती है तो उसे हल्का पानी लगा महसूस होता है जो उसके भाई के लुंड से निकला था वो फटक से उसे होनी ऊँगली में लगाकर सीधा अपने मुँह में दाल लेती है

रवि उसे देख नहीं पता

जब वो रवि की शकल डेक्टि है तो उसे पता चलता है की अपनी छूट दिखने का रवि पर क्या असर हुआ है

रवि का चेहरा ऐसा था मनो उसने कोई बहुत देख लिया हो

रेखा- क्या बात है बड़ी जल्दी उठ गया मेरा भाई आजतो

रवि- दीदी म तो उठ गया पर आप कब उठोगी

रेखा- आज कल तो मुझे उठने का मन hi नहीं करता भाई पता नहीं कैसे इतनी अच्छी नींद ात्ति है आजकल

तुझे पता है मैं तो अब रात को मूतने के लिए भी नहीं उठती

रवि- दीदी अब आपको गर्मी काम लगती है न इसलिए ऐसे अच्छे वे सोती हो आप

रेखा- है भाई पर ये सिर्फ तेरी वजह से हुआ है अगर तू मुझे अपने सामने ब्लाउज उतरबे के लिए नहीं कहता तो आज तक म वैसे hi गर्मी में सड़ती रखती

तू सच में मेरा अच्छा भाई है

ये बोलकर रेखा अपने हाथ आगे बढ़ा कर रवि को अपनी और खींच लेती है और जोरसे गले लगा लेती है

रवि को अपनी छाती पर रेखा की भरी भरकम चूचिया महसूस हो रही थी

5 मिंट तक ऐसे hi चिपके रहने के बाद रेखा अपनी पकड़ ढीली करती है और रवि को अपनी बहो से आजाद कर देती है

रवि- चलो दीदी जल्दी करो उठ जाओ

रेखा- उठ जाउंगी रे भाई हमारी कोनसी ट्रैन छूट रही है

रवि- दीदी सबेरा हो गया ह आपको संडास भी तो करवाना है

भूल गयी कोई आ जायेगा तो क्या होगा आपकी इज़्ज़त खराब हो जाएगी

रवि ने तो मनो रेखा के मन की बात बोल दी थी

रवि की बात सुनकर रेखा के चेहरे पर एक क़ातिल मुस्कान आजाती है

रेखा- कितना ख्याल रखता है भाई तू मेरा

चल जल्दी चल अपनी दीदी के साथ संडास करने

रात में जो भी होता था रेखा उसका पूरा मजा लूट रही थी पर रवि के सामने वो यही दिखती थी जैसे मनो वो खूब गहरी नींद में सो रही हो

और वही दूसरी तरफ वो अपनी बातो से लगातार रवि को उकसाने का काम करती थी

रेखा अब तक उठ कर खड़ी हो गयी

उसकी लटकती हुई चूचिया रवि को पागल बना रही थी

रेखा- चल भाई चल

और रेखा आगे को बढ़ने लगती है

रवि- दीदी रुको

रेखा- क्या हुआ भाई बोल

रवि अपना हाथ बढ़ा कर हल्का सा रेखा की चुकी को टच करता है

रवि- दीदी ऐसे hi नंगी जाओगी क्या बहार

और पास hi पड़ा ब्लाउज उठा कर रेखा की और बढ़ता है

रेखा- कितनी फ़िक्र है रे भाई तुझे मेरी

और रेखा आहे बढ़ कर रवि के दोनों गलो को चुम लेती है

और फता फैट अपना ब्लौसे पेहेन कर अपने छोटे भाई के साथ हगवास करने के लिए रेड्डी हो जाती है

दोनों भाई बेहेन घर के मैं दरवाजे पर पहुंचते है

रेखा दरवाजे को खोल डीटी है और बहार जाने लगती है

रवि- रुको दीदी 2 मं

रेखा- अब और मत रुकवा भाई नहीं तो माकन यही खड़ी खड़ी हुग दूंगी फिर तुहि साफ़ करना मेरी हगवास

रवि जल्दी से पानी का लोटा लेकर दरवाजे से बहार की और निकलता है

रेखा रवि को देख कर मुस्कुरा देती है

और अपने मन में सोचती है

( कितना अच्छा भाई मिला है मुझे कितना ख्याल रखता है अपनी दीदी का )

रवि- है अब चलो दीदी

रेखा- तू तो बहुत शयना हो गया ह रे भाई

रवि- क्या हुआ दीदी

रेखा- तुझे पता है की तेरी दीदी को अपना पिछवाड़ा साफ़ करने के लिए पानी चाहिए इसलिए आज तूने पहले hi पानी ले लिया.

कितना अच्छा भाई है मेरा

रवि- मेरी दीदी इतनी अच्छी है तो मैं क्यों न अच्छा रहु

अब तक दोनों घर के पिछवाड़े पहुंच चुके थे

रेखा थोड़ी दूर जाकर अपना छोटा सा पेटीकोट उठा कर अपनी गांड पूरी नंगी करती है और वैसे hi 2 मिंट खड़ी रहती है फुर एकदम से अपनी चौड़ी गांड फैला कर अपनी गांड का छेद खोल कर अपने भाई को दिखने लगती है

रवि को अब वो नजारा दिखने वाला था जिसका वो कल सुबह से दुबारा देखने का इन्तजार कर रहा था

रेखा- भाई तुझे भी तो संडास करना होगा न तू भी करले

और काम पानी से धोना तू नहीं तो तुझे दुबारा पानी लेने जाना पड़ेगा

देख रहा है न तेरी दीदी का पिछवाड़ा कितना बड़ा है

रवि बिचारा भोला भला लड़का अपनी दीदी की हर बात सुनता और उसपर अमल भी करता पर अब रेखा की बाटे उसे अंदर तक हिला जाती थी

जिसका कारन वो अभी तक नहीं समझ प् रहा था की उसकी दीदी उसे जानबूझ कर उकसा रही है

रवि चुपचाप अपनी धोती उठा कर हगने बैठ जाता

रवि अपना मुँह रेखा की गांड की तरफ करके बैठा था जिसका अहसास रेखा को हो चूका था

अब रेखा अपनी गांड से मोती मोती हगवास बहार निकलना चालू करती है

जिसे देख कर रवि अपना आप खो देता है और उसका हाथ उसके लुंड पर चला जाता है

असल में आज रवि रेखा के कुछ ज्यादा hi नजदीक बैठा था जिससे उसे रेखा की गांड साफ़ साफ़ नजर आ रही थी

एकदम हद में😂

रवि का हाथ अब अपने लुंड पर लगातार चल रहा था

जिसे रेखा अपनी तिरछी आँखों से देख चुकी थी

पर पलट कर वो अपना बनाया ोलन फ़ैल नहीं करना कहती थी

वो कहती थी की उसका छोटा भाई अपनी दीदी के बदन का पूरा मजा ले और आखिर में एक दिन अपनी दीदी को पटक पटक कर किसी रंडी की तरह चोदे

अब रवि के हाथो की स्पीड काफी बढ़ गयी थी

और इधर रेखा लगातार अपनी गांड को खोल बंद किये जा रही थी

आखिर कर रवि की हिम्मत भी जवाब दे जाती है

और उसका शरीर कई सरे झटको के साथ अपना सारा मॉल बहार निकलने लगता है

रवि जब तक अपना हाथ नहीं रोकता जब तक उसके लुंड से वीर्य की आखिरी बून्द नहीं गिर जाती

रवि को अब थोड़ी रहत महसूस होती है और वो अपनी गांड को धो कर पानी लेजर रेखा के पास रख देता है

रवि- दीदी ये लो पानी

रेखा- तेरा हो गया क्या

रवि- है दीदी हो गया

रेखा- चल मेरा भी हो गया

रवि बिलकुल रेखा के पास खड़ा था

और रेखा साली चैनल अपने छोटे भाई के सामने hi अपनी गांड को रगड़ रगड़ कर अच्छे से धो रही थी

रेखा- चल भाई

रवि आगे आगे चलने लगता है

और रेखा उसके पीछे पीछे

चलते चलते रेखा की नजर कुछ धुंध रही थी जो उसे थोड़ी hi देर में मिल जाता है और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जस्ती है

असल में रेखा वो जगह दूध रही झा रवि ने अपना सारा वीर्य गुरया था

और वो देख कर रेखा को पता चलता है की उसके भाई की वीर्य की टंकी कितनी बड़ी है

दोनों भाई बेहेन घर में पहुंच कर पाने अपने काम में लग जाते है

और रवि नहाने चला जाता है

और थोड़ी देर में खाना खा कर थोड़ा खाना साथ लेकर खेतो में निकल जाता है ........
 
अपडेट-28

रवि को खेतो में आज बहुत काम था पर आज सुबह जो जो हुआ था उसके बाद से रवि का मन बिलकुल भी नहीं लग रहा था खेतो में

रवि जल्दी जड़ली अपना बचा हुआ काम निपटा कर अपने घर की और चल देता है

अब तक अच्छा खासा अँधेरा हो चूका था

रवि तेजी से चलते हुए अपने घर पहुंच जाता है

रेखा भोजन पकने में लगी हुई थी

रवि घर के मैं दरवाजे से अंदर आते हुए आंगन में पड़ी खत पर बैठ जाता है

रेखा पीछे पलट कर रवि का आता देखती है

रेखा- आज तो बड़े टाइम से आ गया मेरा भाई

रवि- है दीदी आपने खा था न की म टाइम से घर अजय कृ

रेखा- कितना अच्छा है रे तू मेरे भाई अपनी दीदी की हर बात मंटा है

रेखा अपने हाथो में 2 गिलास लेकर रवि की और बढ़ती है और उस्ले ठीक सामने जमीन पर बैठ जाती है

रेखा- ले भाई मेने चाय बनाई है तू भी पी ले

रेखा रवि की और अपना हाथ बढ़ती है जिसकी वजह से उसका दुपट्टा सरकता हुआ उसकी गॉड में जा गिरता है

पर रेखा उसपर कोई ध्यान नहीं देती और वैसे hi बैठी बैठी चाय की चुस्की लेने लगती है

इधर रवि में चाय का हिल्स तो पकड़ लिया था पर उसकी हालत तीते हो रही थी अपनी दीदी को देख कर

असल में रेखा दिन बी दिन अपने छोटे भाई के सामने और भी ज्यादा बेशरम बनती जा रही थी

आज रेखा ने जो ब्लाउज पहना था वो कुछ इस तरह था की उसने अपने एक निप्पल के ऊपर से ब्लाउज को ऐसे फाड़ा था की उसमे निप्पल के ऊपर सिर्फ 3-4 धागे बचे थे

जिस वजह से रवि को अपनी दीदी की जामुन जैसे निप्पल्स साफ़ साफ़ उन धागो में दबे हुए नजर आ रहे थे

रेखा भाप चुकी थी की रवि की नजर खा है

रवि की नजरे अपनी चूचियों पर पड़ता देख उसके निप्पल्स अपने आप hi तीत होने लगते है

और अब रेखा का वो निप्पल पूरी तरह से तना हुआ था

अगर कोई उन धागो को पकड़ कर काट देता तो उसके ब्लाउज के ऊपर से hi उसकी निप्पल बहार आ जाती

रवि धीरे धीरे चाय का गिलास खली कर देता है

और अब रेखा उठ कर वापस से कूल्हे के पास जाकर अपनी गांड रवि की और करके बैठ जाती है और खाना बनाने लगती है

रवि वही खत पर लेत जाता है और अपनी दीदी की मकर पर बहते हुए पसीने को बड़ी गौर से देख रहा था

और अब उसका हाथ उसकी धोती पर जा चूका था और रवि रेखा को सीखता हुआ धीरे धीरे अपना लुंड मसल रहा था

इधर रेखा रवि को अपनी तिरछी निगाहो से देख कर अंदर hi अंदर खुश हो रही थी

कैसे उसका छोटा भाई अपनी दीदी को देख कर अपना लुंड मसल रहा है

रवि की आँखे लगातार रेखा को घूरे जा रही थी जिसकी वजह से उसकी दीदी पानी पानी हुए जा रही थी

लगभग 1/2 घंटे तक यही सीन चलता रहता है

और अब तक रेखा सारा खाना बना चुकी थी

रेखा जैसे hi उठती है रवि अपना हाथ लुंड पर से हटा लेता है और नार्मल होकर लेत जाता है

रेखा आगे बढ़ती हुई रवि के पास पहुँचती है

रवि- दीदी आज तो बड़ी जल्दी खाना बन गया

रेखा- है भाई मुझे पता था की मेरा भाई भूखा होगा दिन भर म्हणत करके इसलिए मेने फटाफट खाना बना लिया

रवि- आप कितनी अच्छी दीदी हो

रेखा- मेरा भाई भी तो कितना अच्छा है

ये बोलकर रेखा होना एक हाथ रवि के गलो पर फेर देती है

रेखा- चल थोड़ा उधर सरक मुझे भी लेटने दे मैं भी थक गयी हु

रवि बिना कुछ बोले उसी पोजीशन में थोड़ा सा पीछे की और सरक जाता है

और रेखा होनी गांड रवि की तरफ घुमा कर लेत जाती है

चारपाई ज्यादा बड़ी नहीं थी इसलिए रेखा के लेटते hi उसकी गांड सीधा जाकर रवि के लुंड पर लगती है

रवि को पहले तो थोड़ा सा दर लगता है की कहि उसकी दीदी को पता लग गया की उसका लुंड उनकी गांड में टच हो रहा है तो दीदी गुस्सा होगी

रवि वैसे hi बिना कोई हरकत करे वैसे hi लेता रहता है और रेखा अपने भाई का लुंड अपनी गांड पर महसूस करके लगातार पानी चोदे जा रही थी

रेखा को बर्दास्त नहीं हो रहा था

वो कहती थी की अब उसका भाई जल्दी से जल्दी उसे गदराये बदन को मसल मसल कर मजा दे

रेखा 5 मिंट बाद hi उठ कर खड़ी हो जाती है

और अपनी एक नजर रवि के लुंड ओर डालती है जो फूल कर पूरी तरह से अपनी औक़ात में आ चूका था

रेखा- चल जल्दी खाना खा लेते है

रवि- दीदी अभी तो 7-30 बजे है

रेखा- मुहे नींद आ रही है भाई बहुत जोरसे

चल खा लेते है

रवि ठीक है दीदी निकल खाना

रेखा उठ कर रसोई की और जाती है और एक थाली में खाना निकल कर ले आती है

अब रेखा रवि के बिलकुल सामने आकर बैठ जाती है

रेखा का दुपट्टा अभी भी वही जमीन पर गिरा हुआ था और रवि के सामने उसकी दीदी का एक खुला हुआ निप्पल था जिसे देख कर रवि के मुँह में पानी आ रहा था

रेखा अपने हाथ में एक निवाला उठा कर रवि की और बढ़ती है पर रवि तो कहि और hi अपना ध्यान लगाए हुए था

रेखा- भाई देखता hi रहेगा या खायेगा भी

रेखा की बात सुनकर रवि का ध्यान खाने की और जाता है और वो मुँह खोल कर निवाला सीधा होने मुँह में लेलेता है .

रेखा रवि को 2-3 कौर खिलाती है और अपनी ऊँगली हर बार उसके मुँह के थोड़ी अंदर तक ले जाती

रेखा- रवि भूख मुझे लगी है और मैं तुझे खिला रही हु

तू नहीं खिलायेगा क्या अपनी दीदी को

रवि- क्यों नहीं दीदी जरूर खिलाऊंगा अपनी दीदी को अपने हाथ से

रवि अब रोटी तोड़ कर रेखा के मुँह की और बढ़ता है

और रेखा अपना ोुरा मुँह खोल देती है एक छोटा सा निवाला लेने के लिए

रवि 3-4 बार रेखा को ऐसे hi खिलता है

और फिर रेखा को एक मस्ती सूझती है

रवि जब रेखा के मुँह के अंदर निवाला छोड़ता है तभी रेखा अपना मुँह बंद कर लेती है

और रवि की एक ऊँगली उसके मुँह में से फिसलती हुई बहार आती है

रवि अपनी ऊँगली को देखता है जो रेखा के थूक से पूरी तरह गीली हो चुकी थी

रवि को भी अब इस खेल में मजा आने लगा था वो लगातार ऐसे hi कर रहा था जिसका असर सीधा रेखा की छूट पर हो रहा था

खाना अब तक ख़तम हो चूका था और रेखा बर्तन लेकर आंगन में hi फिने बैठ जाती है

रवि वही खत ओर पड़ा पड़ा अपनी दीदी के बारे में सोचने लगता है

रेखा- आज तू यही बहार सोयेगा क्या रवि

रेखा क मुँह से ये बात सुनकर रवि एक दम से बोल पड़ता गई

रवि- नहीं दीदी मैं तो आपके पास hi सोऊंगा हमेशा की तरह

रेखा- तो यह क्यों लेता है चल बिस्तर लगा मैं आती हु बर्तन धो कर आज थोड़ा जल्दी सो जायेंगे

रवि उठ कर रूम में चला जाता है और अपना और रेखा का बिस्तर लगा कर वही लेत जाता है और रेखा का इन्तजार करने लगता है .

रेखा अपने सरे काम निपटा कर अपना वही छोटा वाला पेटीकोट पेहेन लेती है और रूम के अंदर आ जाती है

अब ोुरा घर पूरी तरह से लॉक था अब टाइम था सोनो भाई बेहेन के मिलान का

रेखा आकर रवि के बगल में बैठ जाती है

वो एक नजर रवि के ऊपर डालती है

रवि की शकल देख कर उसे लगता है की रवि किसी दुविधा में है

रेखा को वो दुविधा समझते देर नहीं लगती और वो एक एक करके अपने सरे हुक खोल देती है

और अपना ब्लाउज बड़े hi प्यार से उतारते हुए रवि के सर के बगल में रख देती है

ये नजारा देख कर रवि के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

जिसे रेखा भी साफ़ साफ़ देख लेती है

आज. रवि ने एक चीज़ नोटिस की थी की आज रेखा ने अपने होठो पर लाल रंग की लिपस्टिक लगाई हुई थी जो रवि को और भी पागल किये जा रही थी

रेखा- चल भाई तू भी सजा मुझे बहुत नींद आ रही है

अब रेखा अपनी आँखे बंद कर लेती है और अपनी गांड रवि की और करके लेत जाती है

अब रेखा को इन्तजार था की कब उसका छोटा भाई उसके अंगो को चुवेगा

इधर रवि लेते लेते अपनी दीदी के सोने का इन्तजार कर रहा था

अभी रेखा को लेते हुए 5 मिंट hi हुए थे

रवि को अब बर्दास्त नहीं हो रहा था वो आपने हाथ आगे बढ़ा कर अपनी दीदी की बड़ी सी गांड पर रख देता है

रवि का हाथ अपने पिछवाड़े पर महसूस करते hi उसके चेहरे पर एक मुस्कान आजाती है

रेखा( लो अब हो गया खेल चालू मेरे भाई का )

रवि धीरे धीरे पेटीकोट के ऊपर से hi रेखा की गांड को बड़े प्यार से सेहला रहा था जिसका रेखा भी ोुरा मजा ले रही थी

अब रवि थोड़ा और आगे बढ़ता है और पेटीकोट को कमर की और सरकने लगता है

थोड़ी hi देर में रेखा की गांड रवि के सामने नंगी हो जाती है

जिसे रवि होनी बड़ी बड़ी आँखों से घूरे जा रहा था

रवि अपनी धोती को खींच कर निकल देता है और पूरा नंगा हो जाता है

और दुबारा से रेखा के पीछे लेत जाता है

आज रवि की हिम्मत कुछ ज्यादा hi बढ़ चुकी थी अब उसे लगता था की उसकी दीदी कुम्भकरण की नींद सोती है और दीदी के साथ वो कुछ भी करे पर वो सुबह से पहले नहीं उठेगी

रवि अपनी ऊँगली को रेखा की गांड के छेद ओर ले जाता है और अपनी दीदी की गांड का जायजा लेने लगता है

रेखा लेते लेते अपने भाई का पूरा साथ दे रही थी

रवि अब अपनी ऊँगली पर थोड़ा थूक लेता है और अच्छे से अपनी दीदी की गांड के छेद को मलने लगता है

थोड़ी hi देर में रवि रेखा की गांड को पूरा चिकना कर देता है

अबक्रवी अपनी बिच वाली ऊँगली को गांड के छेद पर लगता है और थोड़ा सा धक्का देता है

जिससे उसकी ऊँगली फिसलती हुई उसकी दीदी की गांड में गायब हो जाती है

रवि के लिए ये सब चीज़े नई थी जिसकी वजह से उसका ोुरा शरीर काम रहा था वो लेत कर ाचे से कुछ नहीं कर पा रहा था

आखिर कर रवि उठ कर बैठ जाता है

और अपनी ऊँगली को दुबारा से रेखा की गांड पर लगता है और एक hi बार में उसे पूरा का पूरा अंदर सरका देता है

रेखा की गांड बहुत कासी हुई थी

आज तक उसने अपनी गांड के साथ कुछ नहीं किया था और न hi गांड मरवाने के बारे में कभी सोचा था पर अब रवि की ये हरकते उसे पागल कर रही थी

अब रेखा अलनी गांड को लगातार खोल बंद किये जा रही थी

रवि को फिरसे थोड़ी दिक्कत महसूस होती है

रवि थोड़ा दिमाग चलता है और अपनी पूरी मुट्ठी बंद करके सिर्फ एक ऊँगली को खोलता है बिच वाली सांसे बड़ी ऊँगली और सीधा रेखा की गांड में पेल देता है

इस बार रवि रुकने वाला नहीं था

रेखा होनी गांड को जितना ज्यादा तीत करती उसे अब उतना hi मजा आ रहा था

रवि एक हाथ से अपना लुंड मुठिया रहा था और एक हाथ से अपनी दीदी की गांड के अंदर लगातार ऊँगली डेल जा रहा था

फिर रवि अच्चानक से अपनी ऊँगली निकल लेता है

रेखा के चेहरे पर एक परशान भाव नजर आता है की आखिर रवि ने उसकी गांड से ऊँगली क्यों निकल ली

पर वो पूछ तो नहीं सकती थी वो वैसे hi लेती रहती है

इस बार रवि वो करता है जिसकी उसे उम्मीद नहीं थी रवि खड़ा होकर आगे आता है और रेखा के सर के पास बैठ जाता है

रेखा थोड़ी सी आँख खोल कर देखती है तो उसका कलेजा उसके मुँह को आजाता है

रवि का कला लुंड उसके होठो के ठीक सामने लहरा रहा था

रेखा का मन तो कर रहा था की अभी मुँह खोल दे अपने भाई के लिए पर वो वैसे hi लेती रहती है

रवि अपनी उसी बिच वाली ऊँगली को रेखा के होठो के पास लेजाता है और उसके होठो पर रेखा की गांड से निकला पानी रगड़ने लगता है

रेखा को महक से पता चल जाता है की रवि क्या कर रहा है

रेखा रवि की इस हरकत से पानी पानी हुए जा रही थी

सेक्स के मामले में तो उसका भाई उससे भी गन्दा था

रेखा लेते लेते साडी चीज़ो का मजा लूट रही थी

और रवि अपनी दीदी को मसल कर उसका मजा लूट रहा था

अब रवि एक कदम और आगे बढ़ता है और आगे की और झुक कर अपनी जीभ निकल कर रेखा के गरमा गरम होठो पर रख देता है

और धीरे धीरे रेखा के दोनों होठ चाटने लगता है

ये सब करते हुए रवि लगातार अपना लुंड हिला रहा था

रेखा के होठो का स्वाद रवि को बहुत अच्छा लग रहा था उसका मन hi नहीं कर रहा था अपनी दीदी के होठ छोड़ने का

रवि अब लगातार अपनी जीभ को रेखा के होठो पर फेर रहा था

रवि के थूक से रेखा के होठ पूरी तरह से गीले हो चुके थे

रेखा एक कदम बढ़ती है और अपना मुँह थोड़ा सा खोल देती है

रवि की जीभ आच्चंक से रेखा के दातो पर लगती है

अब रवि अपनी जीभ को रेखा के मुँह में घुसा देता है

और रवि के होठ अपने आप hi रेखा के होठो पर लग जाते है

रेखा रवि द्वारा अपने होठ चूसे जाने से पागल हुई जा रही थी

पर वो जैसे तैसे वही शांत पड़ी हुई थी

अब रवि अपनी जीभ निकल लेता है और एक बार रेखा के चेहरे की तरफ देखता है

रेखा का चेरा पूरी तरह से लाल हो गया था

रवि को अब किसी बात की फ़िक्र नहीं थी वो हवस की आग में पागल हो चूका था

रवि दुबारा से अपना चेहरा रेखा के मुँह पर झुकता है

और अपने दोनों होठो से रेखा का निचे वाला होठ पकड़ कर दबा लेता है और उसे अच्छे से चूसने लगता है

रवि की हरकतों से रेखा पागल हुई जा रही थी पर अभी चुदाई होने में समय था

दोनों भाई बेहेन घर में अकेले थे जिसका रेखा पूरा फायदा उठा रही थी

अब रवि अपने दातो के बिच रेखा का होठ पकड़ता है और उसे चबाने लगता है

एक के बाद एक रवि के हमले लगातार बढ़ते जा रहे थे रेखा से बर्दास्त करना अब मुश्किल हो चूका था

काफी देर तक रेखा को होठो को चूस चूस कर रवि अपनी दीदी के होठो पर लगी पूरी लिपस्टिक चाट जाता है.

और अब रवि दुबारा से रवि पीछे की और आकर बैठ जाता है

और इस बार वो अपने अंगूठे को आगे लेजाकर रेखा के मुँह में दाल कर ाचे से गिला करता है

और उसे दुबारा पीछे लेकर रेखा की गांड ओर लगा देता है

रेखा समझ जाती है की अब क्या होने वाला है

रेखा पहले से hi इस हमले के लिए अपने आपको तैयार कर चुकी थी

अंगूठा ऊँगली से ज्यादा मोटा होता है

और रवि जैसे हट्टे काटते बन्दे का अंगूठा तो कुछ ज्यादा hi मोटा था

रवि थोड़ा सा अपना अंगूठा प्रेस करता है

और अपनी दीदी की गांड में घुसाने लगता है

थोड़ी म्हणत करने के बाद पूरा अंगूठा रेखा की गांड में समै जाता है

अब रवि अपनी 2 उंगलियों को आगे बढ़ता हुआ सीधा रेखा की छूट पर रख देता है

रेखा की छूट किसी गरम भट्टी की तरह तप रही थी जो रवि को साफ़ महसूस हो रहा था

रवि देर न करते हुए दोनों उंगलिया रेखा की छूट में सरका देता है

रेखा की पूरी छूट भीगी हुई थी जिस वजह से थोड़ा सा धक्का देने से hi रवि को दोनों उंगलिया. सीधा रवि की छूट में घुस जाती है

अब आलम ये था की रेखा की गांड में रवि का अंगूठा था और उसकी छूट में 2 उंगलिया

रवि लगातार अपना हाथ चलाये जा रहा था

वो लगातार अपनी उंगलियों से अपनी दीदी की छूट और गांड को कुरेद रहा था

अब तक रवि का पूरा हाथ रेखा की छूट से निकल रहे अमृत से भीग चूका था

पर रवि रुकने का नाम नहीं ले रहा था

कमरे में चैपपपपप कहपपपपपप की आवाजे साफ़ सुनाई दे रही थी अब रवि अपने लुंड को छोड़ कर द्वारा हाथ आगे बढ़ा कर रेखा की चुकी पर रख देता है और सीधा रेखा का एक निप्पल पकड़ लेता है और उसे अपनी दो उंगलियों में पकड़ कर मड़ोरने लगता है

रेखा की तो मनो लाटरी लग गयी थी

रवि एक साथ उसके शरीर के हर हिस्से के साथ खेल रहा था

रेखा इतना मजा बर्दास्त नहीं कर पति और थोड़ी hi देर में रवि को महसूस होता है की उसकी दीदी की छूट से बहुत सारा चिपचिपा पानी निकल रहा है

रवि को समझते देर नहीं लगती की उसकी दीदी की छूट अब झाड़. चुकी है

रेखा का बदन धुरे धीरे 1-2 झटके लेता है और अपना सारा माल रवि के हाथ पर निकल देती है

अब रेखा की सांसे लम्बी लम्बी चल रही थी जिसे रेखा जैसे तैसे करके कण्ट्रोल कर रही थी

रवि तो जैसे अपनी दीदी की छूट से गरम पानी को निकलता देख पगला गया था

वो अपना हाथ हटाने को राज़ी hi नहीं था

रेखा की छूट झड़ने के बाद थोड़ी ढीली पद गयी थी

अब इतना ज्यादा ोानी नहीं निकल रहा था पर रेखा की हालत अब पहले से भी ज्यादा खराब थी

पिछले आधे घंटे से रवि उसकी गांड और छूट में ऊँगली पेले जा रहा था

आखिर कर रवि को अपनी दीदी की छूट के ऊपर दया आ जाती है और वो अपना हाथ हटा लेता है और दुबारा से लेत जाता है

अब रेखा को भी थोड़ी रहत महसूस होती है

रेखा होनी सांसे दुरुस्त करने में लगी थी और उधर रवि होने हस्त को अच्छे से देख रहा था उसकी दीदी की छूट से निकला सफ़ेद अमृत उसके हाथो पर हर जगह लग्स था

रवि की सांसे भी काफी तेज तेज चल रही थी जिसे रेखा साफ़ साफ़ सुन सकती थी

रवि एक एक करके होनी साडी उंगलिया चाट जाता है

उसे अपनी दीदी की छूट से निकली मलाई बहुत नमकीन और मीठी लग रही थी

रेखा को पता था की उसका जिस्म तो हल्का हो गया है पर उसका भाई अभी भी उस आग में जल रहा है

रेखा देर न करते हुए पलट कर सीधा लेत जाती है और अपना एक हाथ रवि के ोएत के ऊपर फेक कर दुबारा सोने का नाटक करने लगती है

रेखा के यु अच्चानक पलटने से रवि थोड़ा घबरा जाता है और ऐसे hi शांत लेता रहता है 5 मिंट तक

थोड़ी देर की शांति के बाद रवि दुबारा अपने काम में लग जाता है और अपना हाथ आहे बढ़ा कर रेखा की एक चुकी पकड़ कर जोरसे दबा देता है

जिससे रेखा अंदर hi अंदर कसमसा कर रह जाती है

अब रवि रेखा के हाथ को पकड़ कर अपने लुंड के ऊपर ले जाता है

रवि सीधा सोया हुआ था जिससे उसका लुंड बिलकुल किसी टावर की तरह खड़ा था

रवि अबतक रेखा के हाथो से मुट्ठी बना कर अपने लुंड पर लपेट चूका था और कास कर रेखा की मुट्ठी को पकड़ लेता है

रेखा जब देखती है की उसका भाई उसके हाथ को दबा रहा है तो वो इस बात का फायदा उठाते हुए

अपने हाथ की पकड़ अपने भ्सी के लुंड पर कुछ जिदा hi मजबूत कर देती है

अब रवि लगातार रेखा के हस्थो से अपना लुंड मुठिया रहा था

काफी तेज तेज

रेखा की चुडिया बहुत तेजी से आवाज कर रही थी

पर रवि को इस बात से कोई फरक नहीं पड़ता था

वो लगातार रेखा के हाथ को अपने लुंड पर ऊपर से निचे की और कार्ट्स जा रहा था

अच्चानक से रवि को कुछ सूझता है और वो रेखा के हस्त को अपने लुंड से हटा देता है

और उठ कर बैठ जाता हसि

रेखा के मन में सवाल चल रहे थे की आखिर उसका भाई अब क्या करने वाला है

रवि बिना देर किये रेखा के हाथ को पकड़ क्र ऊपर बहुत सारा थूक गिरा देता है

और दुबारा से लेत जाता है

और फिरसे रेखा के हाथ को अपने लुंड पर लपेट लेता है

अब रबी का पूरा लुंड उसके थूक से सना हुआ था

अब रेखा का हाथ आराम से ऊपर से निचे की तरफ फिसल रहा था जिससे रेखा कको अब और नहीं जिदा मजा आ रहा था

रेखा( मैं तो इसे बच्चा समझती थी पर इन सब मामलो में तो ये अपनी दीदी से भी आगे निकला)

रवि को ये अहसास पागल कर रहा था वो ज्यादा देर होने आपको रोक नहीं पता और अच्चानक से उसका लुंड पूरी तरह से टाइट हो जाता है

और उसके लुंड से वीर्य की मोतीधार उड़ने लगती है

रवि एक के बाद एक कई सरे झटके खता है और आखिरी बून्द के निचोड़ने तक रेखा के हाथ को अपने लुंड पर चलने लगता है

अब रवि रेखा के हाथो को आजाद कर देता है और अपने पेट पर गिरे माल को थोड़ा सा उठा कर अपनी ऊँगली रेखा के होठो पर लेजाता है

और अपना वीर्य रेखा के होठो पर लगाने लगता है जैसे वो अपनी दीदी को लिपस्टिक लगा रहा हो

ढोड़ी hi देर में रेखा के होठ उसके भाई के वीर्य से चमकने लगते है जिसे देख कर रवि के चेहरे पर एक मुस्कान आजाती है और वो दुबारा से अपनी जगह लेत जस्ता है

रेखा को अब रवि की हरकते उकसा रही थी रवि दिन बी दिन एक क नाद एक गन्दी से गन्दी हरकते क्स्र्त जा रहा था

जो रेखा को बहुत पसंद थी

अब रेखा को कैसे भी करके जल्दी से होनी छूट रवि के लुंड से मारवणी थी

रेखा अलनी जीभ निकल कर अपने होठो पर फेरती है और अपने होठो पर लगी साडी मलाई चाट जाती है

अब दोनों भाई बेहेन कुछ हद तक शांत लेते थे

रवि की आँखे अबतक बंद हो चुकी थी

रेखा उसकी तरफ एक नजर डालती है और अपने मन में सोचती है

रेखा( देखो अपनी दीदी के साथ इतनी गन्दी गन्दी हरकत करके कैसे भोला बन के सो रहा है मेरा भाई)

और रेखा रवि की तरफ पलट जाती है और अपना एक पेअर रवि के लुंड के ऊपर फेक देती है

और अपना एक हाथ रवि की छाती पर फेक देती है और अपना चेहरा सरका कर रवि की छाती से चिपका देती है

अब रेखा को इतना सुकून मिल रहा था की मनो जैसे वो अपने पति की बहो में सोई हो

उसकी आँखे अपने आप hi बंद हो जाती है एयर दोनों भाई बेहेन एक दूसरे से लिपटे नींद की आगोश में चले जाते है ......
 
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