अपडेट-26
रेखा बर्तन निपटा चुकी थी और अब उसे अपने भाई के पास जाना था
जिसका उसे दिन भर इन्तजार था
रेखा सरे काम निपटा कर घर का मैं दरवाजा बंद करती है और वही खड़े खड़े अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है और उसकी टैंगो से सरकता हुआ उसका पेटीकोट जमीन ओर गुर जाता है
अब रेखा अपनी मांसल गांड को मटकते हुए आगे बढ़ती है और वही छोटा सा पेटीकोट पेहेन लेती है
रेखा की आधी चूचिया अभी भी उसके ब्लाउज से लटक रही थी
रेखा अब अपनीगंड मटकते हुए अपने कमरे में जाती है
रवि पहले से hi अपनी जगह लेता हुआ था
रेखा रवि की तरफ एक नजर डालती है और रूम के अंदर जाकर अपनी जगह ओर बैठ जाती है
रवि भी रेखा की विशाल चूचियों को hi देख रहा था
पर आज रेखा कुछ अलग मुद में थी वो चुप चाप वैसे hi लेत जाती हसि रवि की तरफ अपना मुँह करके
आज रेखा ने अपना ब्लाउज नहीं उतरा था जो रवि को खटक रहा था रवि यही सोच रहा था की कब उसकी दीदी अपनी चूचियों को आजाद करे और वो अपनी दीदी की जवानी का मजा ले सके
रेखा भी रवि की नजरो से नजरे मिला कर लेती हुई थी जैसे वो रवि से इशारे इशारे में कुछ पूछ रही हो
5मिंट की शांति के बाद रवि बोल पड़ता है
रवि- दीदी आज आपको गर्मी नहीं लग रही क्या
रेखा समझ रही थी की रवि उससे गर्मी के बारे में क्यों पूछ रहा है पर वो रवि को थोड़ा तड़पना कहती ठु
रेखा- गर्मी तो बहुत लग रही है भाई
रवि- तो दीदी आप कल की तरह सो जाओ न आपको अच्छी नींद आएगी
रेखा- कल की तरह hi तो लेती हु म देख
रवि- दीदी मतलब कल आप जैसे सोई थी
रेखा को समझ तो आ रहा था की रवि क्या कहना कह रहा ह पर वो बातो को और गोल गोल घुमा रही थी
रेखा- भाई मुझे समझ नहीं आ रहा तू कैसे सोने को बोल रहा ह
रवि- दीदी मेरा मतलब गर्मी नहीं लग रही आपको
रेखा- गर्मी तो बहुत है भाई पूछ मत
रवि- तो दीदी उतर दो न इसे
रेखा- क्या उतर दू
रवि- दीदी म कह रहा हु अपना ब्लाउज उतर दो आपको गर्मी थोड़ी काम लगेगी
रेखा- अच्छा तो तुझे आज भी अपनी दीदी को नंगा करना है
रवि- दीदी मेने तो इस लिए खा की आपको गर्मी थोड़ी काम लगे
रेखा- मतलब अब मुझे रोज तेरे साथ बंगा सोना पड़ेगा
रवि- दीदी घर में तो सिर्फ मैं और आप hi है
रेखा- चल ठीक है ये ले तू hi करदे अपनी दीदी को अपने सामने नंगा
रेखा इतना बोलकर उठ जाती है और वही बैठ जाती है
रवि को अपने कानो पर अभी तक यकीन नहीं हो रहा था की उसकी दीदी उसे अपना ब्लाउज उतर कर होनी चूचिया आजाद करने का न्योता दे रही थी
रेखा- चल रवि जल्दी कर करदे अपनी दीदी को अपने सामने नंगा
रेखा अपनी बातो से रवि को लगातार उकसा रही थी जिसका असर अब रवि के लुंड पर होने लगा रहा था
रवि भी उठ कर बैठ जाता है और अपने कंपते हुए हाथो को आगे बढ़ा कर होनी दीदी के ब्लाउज की और ले जाता है
और धीरे धीरे बाकि बचे दोनों हुक खोल देता है
जैसे hi रवि आखिरी हुक खोलता है रेखा की छुछिया उछलती हुई रवि की नजरो के सामने आ जाती है
रवि की नजरे जैसे hi अपनी दीदी की चूचियों पर पड़ती है उसकी आँखे बड़ी नदी हो जाती है
रेखा रवि की हालत समझ रही थी
रेखा- क्या कर रहा है जल्दी उतर न इसे
देख कितनी गर्मी लग रही है
रेखा ऐसा बोलते हुए अपने हाथ को ुवार उठती है और अपनी पसीने से भरी हुई बगल रवि को दिखा कर इशारा करती है
रवि की नजरे अब अपनी दीदी की बगल पर गड़ी हुई थी
रेखा - तू देखता hi रहेगा या निकलेगा इसको
रवि अब उठ कर रेखा के पीछे जाता है और उसका ब्लाउज खींच कर निकल देता है
रेखा अब ऊपर से पूरी तरह नंगी अपने भाई के सामने बैठी थी
रवि रेखा के ब्लाउज को अपने हाथो में छुपा लेता है और वॉयस से आकर अपनी जगह लेत हटा है
रेखा भी अब अपनी जगह लेत गयी थी
रेखा पीठ के बल लेती हुई थी और रवि उसकी तरफ अपना मुँह करके लेता हुआ था
रेखा रवि को उकसाने के लिए अब और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगती है
जिसकी वजह से उसकी चूचिया कुछ जयादा hi फूल जाती और कभी एकदम से वो निचे को आ जाती
रवि लगातार रेखा की गदराई चूचियों को देख रहा था
अब रेखा एक कदम और आगे बढ़ती है
और अपना एक पेअर घुटनो से मोड़ कर उठा लेती है
जिससे उसका छोटा सा पेटीकोट सरकता हुआ उसकी छूट से थोड़ा सा ोेहले आकर रुकता है
अब रवि कभी रेखा की चूचियों को देखता कभी अपनी दीदी की मांसल जांघो को देखता
रवि को कैसे भी करके रेखा को चुना था
रेखा की आँखे अभी खुली हुई थी जिस वजह से रवि आगे नहीं बढ़ पा रहा था
रेखा को रवि की बैचनी साफ़ नजर आ रही थी
रेखा- क्या हुआ रे रवि तुझे नींद नहीं आ रही क्या
रवि- बस दीदी म तो सो hi रहा हु आप भी सो जाओ
सुबह जल्दी उठना है
रेखा- अरे सुबह की सुबह देखंगे अभी तो आराम से सजा मेरे प्यारे भाई
और इतना बोलजर रेखा होनी आँखे बंद कर लेती है
अभी रेखा को आँख बंद किये हुए 2मं hi हुए थे पर रवि को अपने ऊपर अब कण्ट्रोल नहीं हुआ और उसने अपना हाथ उठा कर रेखा के नंगे पेट पर रख दिया
जिसके अहसास से रेखा समझ जाती है की अब उसके भाई का खेल शुरू होने वाला है बस आज रेखा को कैसे भी करके हिलना नहीं था
वो देखना कहती थी की रवि उसके साथ सोते हुए क्या क्या करता है
रवि अब अपना हाथ को हल्का हल्का रेखा के पेट पर फेरने लगता है
रेखा अबदार hi अंदर रवि की हरकतों से पानी पानी हो रही थी
रवि अब लगातार अपने हाथ से अपनी दीदी के पेट को मसल रहा था
अब रवि थोड़ी हिम्मत दिखता है और उठ कर खड़ा हो जाता है
रेखा थोड़ी सी आँखे खोल कर अपने भाई को देख रही थी की आखिर वो क्या क्या करता है
रवि खड़ा होकर अपनी धोती खोल देता है और वही साइड में फेक देता है
जैसे hi रवि का लुंड उसकी धोती से आजाद होकर रेखा की नजरो के सामबे आता है
रेखा सेहम जाती है
रेखा( बाप रे कितना बड़ा और मोटा लुंड है इसका बिलकुल गधे जैसा अगर एक बार घुस गया तो मेरी छूट का भोसड़ा बना देगा पक्का )
रवि दुबारा से लेत जाता है और अबकी बार अपने हाथ को सीधा रेखा की चुकी पर रख देता है
रेखा समझ रही थी की दिन बी दिन अब रवि की हिम्मत बढाती जा रही है जोकि रेखा भी छाती थी
अब रवि धीरे धीरे अपने हाथो को रेखा की चूचियों पर चलना चालू करता है
रवि बड़े hi प्यार से देखते हुए अपनी दीदी की चुकी मसल रहा था
वो कभी एक चुकी पकड़ कर दबाता कभी दूसरी
अब रवि निश्चिंत होकर रेखा के जिस्म के मजे ले रहा था
रवि का एक हाथ अब तक होने लुंड पर पहुंच गया था और अब वो अपने एक हाथ से अपनी दीदी की सेवा कर रहा था और दूसरे हाथ से अपने लुंड की
फिर रवि थोड़ा आगे बढ़ता है और रेखा के एक हाथ को पकड़ कर धीरे धीरे ऊपर की और उठाने लगता है
रेखा भी रवि का ोुरा साथ दे रही थी उसने अपने हाथो को ऐसे ऊपर उठाया की रवि को पता न चले रवि ने बस हल्का सा जोर लगाया और रेखा की बगल अब उसकी आँखों के सामने थी
रवि की आँखों में हवस साफ़ नजर आ रही थी
वो अपनी दीदी की पसीने से भरी बगल को खजाने वाली नजरो से देख रहा था
रेखा जानती थी की अब रवि आगे क्या करेगा बस वो अपने आपको उस हमले के लिए तैयार कर रही थी
रवि अब दुबारा एक अपने हाथ को रेखा की चुकी पर ले जाता है और अपनी 2 उँगलियों से रेखा का निप्पल पकड़ लेता है
और सीधा अपना मुँह रेखा की बगल में घुसा देता है
इस हमले से रेखा थोड़ा सा हिलती है
पर अब रवि पर इन सब चीज़ो का कोई असर नहीं हो रहा था
वो लगातार अपनी दीदी की बगल सूंघे जा रहा था कभी जीभ निकल कर उसे चाट लेता
रेखा अबदार hi अंदर पागल हुई जा रही थी उसका मन तो कर रहा था की वो भी अपना हाथ बढ़ा कर रवि का लुंड पकड़ ले
पर चुदाई तो आज नहीं तो कल होनी hi थी
अब तक रेखा जितना तदपि थी वो सारा हिसाब ऐसे hi मजे लेकर चूका लेना कहती थी
रेखा वैसे hi आँखे बंद किये हुए अपने भाई के सरे हमले झेल रही थी
रवि लगातार रेखा की निप्पल्स को पकड़ कर खींच रहा था कभी कभी वो इतना ऊपर को निप्पल खींचता की रेखा को न कहते हुए भी अपनी पीठ थोड़ी थोड़ी उठानी पड़ती
पर रवि तो अब बस अपनी दीदी की बगल से आ रही मादक खुसबू में खो चूका था और अब वो तेजी के अपने हाथ से अपना लुंड मुठिया रहा था
जिसका अंदाजा रेखा को अपने पेअर पर लगते हुए रवि के हाथ से हुआ
रेखा समझ गयी थी की अब रवि ौरी तरह से गरमा गया है और कभी भी वो अपना माल निकल सकता है
अब रेखा एक और देव खेलती है वो थोड़ा सा हिलती है
रवि रेखा के अच्चानक हिलने से वैसे hi उसकी बगल में मुँह डेल शांत पद जता है
रेखा अपने दूसरे हाथ को पेट पर से घुमा कर रवि के लुंड की तरफ लटका देती है
अब रेखा का हाथ रवि के लुंड से थोड़ा hi दूर था
रेखा अब शांत हो जाती है और रवि दुबारा से अपने काम में लग जाता है
ओर इस बार जब रवि अपना लुंड मुठिया रहा था तो उसका हाथ बार बार रेखा की उंगलियों से टच हो रहा था
अब रवि पागल हुआ जा रहा था
वो भीत तेजी के साथ रेखा के निप्पल मरोड़ रहा था
रवि अब अपने लुंड पर से अपना हाथ हटाता है और वही करता है जिसकी रेखा को उम्मीद थी
वो रेखा की एक ऊँगली पकड़ कर हाथ को अपने लुंड की और खींचता है
रेखा ने अपना हाथ बिलकुल ढीला छोड़ा हुआ था
रवि के थोड़ा जोर लगते hi हाथ रेखा के नंगे पेट से सरकता हुआ रवि के लुंड की और बढ़ जाता है
अब रवि उसी ऊँगली को पकड़ कर अपने टोपे पर लगता है
रेखा रवि का सूपड़ा महसूस करती है अपनी ऊँगली से
औ अंदर hi अंदर कसमसा कर रह जाती है
रवि का मजा अब दोगुना हो गया था वो लगातार एक हाथ को अपनी दीदी की चुकी पर चला रहा था और दूसरे हाथ से अपनी दीदी का हाथ पड़के अपने लुंड की सेवा करवा रहा था
और रवि की जीभ अभी भी रेखा की बगल में लगातार चल रही थी
रेखा को आज से पहले इतना मजा कभी नहीं आया था
मनो उसकी जिंदगी hi एक दम से पलट गयी हो
खा पहले उसे रोज रोज बैगन से अपनी प्यास बुझानी पड़ती थी
और अब तो उसके पास बैगन से भी बड़ा एक लुंड था जो और किसी का नहीं खुद उसके छोटे भाई का था
रवि रेखा की ऊँगली को पकड़ कर थोड़ा सा और खींचता है और अब रेखा का लगभग आधा हाथ रवि के लुंड ओर था
रवि रेखा की सबसे छोटी ऊँगली को पकड़ कर उसके नाख़ून से अपने लुंड पर दबाने लगता है
और कभी कभी तो जैसे वो अपनी दीदी की ऊँगली को अपने लुंड के छोटे से छेद में घुसाने की कोशिश करता है
रेखा के नाख़ून से जो दर्द रवि के लुंड पर हो रहा था वो उसे पागल किया जा रहा था
लगभग 5 मिंट तक रवि लगातार ऐसे hi करता है और अब वो अपने चरम पर था उससे ज्यादा कण्ट्रोल भी हो पा रहा था
अब रवि रेखा के हाथ को जोरसे होनी और खींचता है और रेखा का पूरा का पूरा हाथ रवि के लुंड पर आजाता है
रवि बिना टाइम गवाए रेखा के हाथो से अपने लुंड पर अच्छे से मुट्ठी की तरह बना देता है
अब रेखा को साफ़ अंदाजा हो गया था की उसके भाई का लुंड कितना मोटा है
रवि अब अपने हाथ से रेखा की नाजुक कलाई पकड़ लेता है
और अगले hi पल वो रेखा की कलाई के शेयर रेखा से अपने लुंड की मुठ मरवाने लता है
रेखा को ये अहसास पागल कर रहा था न कहते हुए भी रेखा अपनी हथेली का दबाव रवि के लुंड पर थोड़ा बढ़ती है और उसके लुंड को थोड़ा कसकर पकड़ लेती है
रवि को इसका अहसास नहीं होता क्योंकि पहले से hi एक गदराई हुई औरत उसके सामने यदि थी जिसे देख कर वो सब कुछ भूल गया था और बस उसके जिस्म के मजे लूटना कहता था
अब रवि काफी तेज तेज अपने हाथ चला रहा था
और रेखा की चूचियों को बुरी तरह से निचोड़ने में लगा हुआ था
रेखा की कलाई ोाकद कर वो इतना तेज उसका हाथ हिला रहा था की रेखा की चूडियो की आवाज बहुत तेज तेज पुरे कमरे में गुन्ज्जज्ज रही थी
जिसे रवि अबसुना करके लगातार अपनी स्पीड बढ़ाये जा रहा था
और आखिरकार रवि के घोड़े भी फ़ैल हो जाते है
और उसका लुंड रेखा की हथेली में 1-2 झटके खता है और अपना सारा माल रेखा की जांघो पर गिराने लगता है
जैसे hi रेखा के पैरो पर रवि के गरम गरम लावे का असर होता है वो मस्ती में अपने होठो का ात ने दातो से काट लेती है
आंखे बंद किये हुए hi रेखा के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ जाती है .
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रवि अब होनी हथेली से रेखा की हथेली दबा लेता गई और धीरे धीरे अपने लुंड को निचोड़ कर आखिरी बून्द तक निकल देता है
काफी ज्यादा माल रेखा की साडी उंगलियों पर भी लग चूका थस
अब रेखा को उसके भाई की मलाई का स्वाद लेना था
वो एकदम से हरकत में आती है और अपने हाथ को खींचते हुए अपनी गांड रवि की तरफ निकाल कर लेत जाती है
अभी रवि को पूरा होश नहीं आया था
उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी
आज रवि ने पहली बार किसी औरत के शरीर का पूरा फायदा उठाया था
अब तक रवि ये तो समझ चूका था की औरत के जिस्म के हर हिस्से से हम अपने आपको और ज्यादा गर्म कर सकते है
रेखा का पेटीकोट एक चली जैसे उसकी कमर में पड़ा हुआ था
पेटीकोट यह कर कोई फायदा नहीं था वो तो ऐसे hi नंगी पड़ी थी अपने छोटे भाई के सामने
रेखा अपनी गांड कुछ ज्यादा hi रवि की तरफ निकाल कर लेती हुई थी
जिससे उसकी गांड का छेद उभर कर बहार की और आ चूका था और इस पोजीशन की वजह से उसका छेद होने आप काफी खुल चूका था
अब रवि नार्मल हो जाता है और जैसे hi उसकी नजर रेखा पर पड़ती है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है
जिस छेद से सुबह उसने हगवास निकलती हुई देखि थी अब वो उसके सामने था
रवि थोड़ा निचे सरक कर अच्छे से अपनी दीदी की गांड को देखता है और अपनी एक ऊँगली से हल्के से रेखा की गांड के सुराख़ को छू देता है
रेखा इस हमले से पागल हो जाती है
और रवि के माल से सना हुआ हाथ अपने मुँह के पास लती है और एक ऊँगली अपने मुँह में घुसा कर अच्छे से साडी मलाई चाटने लगती है
रवि एक दो बार ऐसे hi होनी दीदी की गांड को छूटा है फिर अपनी नाक को धीरे से रेखा की गांड तक ले जाता है और जोर लगा के अपनी दीदी की गांड से आ रही मादक महक को सूंघने लगता है
रेखा तो जैसे ोागल हुई जा रही थी रवि एक के बाअद एक हमले कर रहा था और हर बार वो पिछली बार से ज्यादा आगे बढ़ रहा था
रवि 5 मिंट तक रेखा की गांड सूंघने के बाद अपनी जुबान को रेखा की गांड के छेद पर अच्छे से फिरता है
रवि के ऐसा करने से रेखा एक झटका कहती है और अपनी 2, उंगलिया अपने मुँह में भर लेती है
रवि को दर भी लग रहा था और मजा भी आ रहा था
उसे दर था की अगर दीदी जाग गयी तो क्या होगा
रवि 2मिंट रुकता है और फिर दुबारा से अपनी जीभ से अपनी दीदी की गांड का छेद चाट लेता है
असल में रवि को बहुत मजा आ रहा था अपनी दीदी के साथ ऐसे गंदे काम करने में
खासकर की जब उसकी दीदी सोई हुई थी
पर ऐसा तो सिर्फ रवि को लग रहा था की रेखा बहुत गहरी नींद में सोई हुई है
रवि ज्यादा जल्दबाज़ी नहीं करना कहता था उसे भी आता था की जिंदगी भर उसकी दीदी उसके पास hi रहेगी तो हड़बड़ी में काम क्यों खराब करना
अब रवि दुबारा से अपनी जगह पर लेत जाता है
और अपनी दीदी की गांड को निहारता रहता है
फिर वो अपना हाथ आगे बढ़ा रेखा की गांड पर रख देता है और थोड़ा सा उसकी गांड को प्यार से सहलाता है
अपने भाई से इतना प्यार मिलने से रेखा की आँखे बंद हो चुकी थी वो जैसे किसी और hi दुनिआ में थी
फिर रवि एक हमला और करता है वो सीधा अपना हाथ अपनी दीदी के पैरो के बिच लेजाता है और अपना हाथ सीधा रेखा की छूट पर रख देता है
रेखा की छूट काफी गीली हो चुकी थी जिसका अहसास रवि को भी हो चूका था
रवि अपनी ऊँगली से लगातार अपनी दीदी की छूट कुरेदे जा रहा था
काफी गीलापन होने के कारन पछ्ह्ह्ह्ह पछ्ह्ह्ह्हह्ह की आवाज साफ़ साफ दोनों को सुनाई दे रही थी
वो आवाज माहौल में और भी ज्यादा गर्मी पैदा कर रही थी
रवि का हाथ लगातार चल रहा था और छूट से लेकर गांड तक वो अपनी दीदी को अच्छे से मसल रहा था
अच्चानक से रवि को याद आता है की कैसे रेखा दीदी ने सुबह अपनी गांड धोते वक़्त ऊँगली को अंदर डाला था
रवि अब अपनी ऊँगली को रेखा की गांड ओर ले जाता है और पहले तो उसके छेद को अच्छे से दबा दबा कर महसूस करता है
रेखा की गांड असल में बहुत टाइट थी
जिसका अंदाजा रवि को भी हो चूका था
रवि होनी उन्हली पर थोड़ा जोर लगता है और उसकी ऊँगली सरकते हुए रेखा की गांड में घुसने लगती है
आधी ऊँगली रेखा की गांड में समै जाती है रवि को अभी और मजा लेना था वो एकदम से जोर लगता है और अपनी पूरी की पूरी ऊँगली रेखा की गांड में थुश देता है
जिस वजह से रेखा आगे की और उछाल जाती है रवि फटक से अपनी उबगली रेखा की गांड से बहार खींच लेता है
और होनी ऊँगली को होनी नाक के पास लेकर ाचे से सूंघता है और धीरे से अपनी ऊँगली मुँह में भर कर अपनी दीदी की गांड का स्वाद पहली बार चकता है
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पूरी ऊँगली चूसने के कारन गीली हो चुकी थी रवि दुबारा से अपनी ऊँगली रेखा की गांड के छेद ओर रखता है और एक hi बार में सरकता हुआ अंदर पेल देता है
रेखा किसी जल बिन मछली की तरह लेते लेते तड़प रही थी
रवि 3-4 बार अपनी ऊँगली को अच्छे से अंदर बहार करता है और बार बार अपनी ऊँगली को मुँह में भर कर चुस्त है
रवि की ये हरकतों से रेखा बिना छूट सहलाये hi झाड़ रही थी उसकी पूरी जंघे उसके पानी से गीली हो चुकी थी
रवि ज्यादा जल्दबाज़ी नहीं करना कहता था वो अब अपने लुंड को पकड़ कर सीधा अपनी दीदी की टैंगो के बिच घुसता है पर लुंड पूरी तरह सूखा हुआ था तो नहीं जा पता
रवि अब अपना हाथ रेखा की छूट पर लेजाता है और अपनी दीदी की छूट का पानी इकठ्ठा करके अच्छे से अपने लुंड पर लगाने लगता है और थोड़ी hi देर में रवि का पूरा लुंड उसकी दीदी की छूट से निकली मलाई से सं जाता है
रवि अब दुबारा से लुंड पकड़ कर दीदी के पैरो में लगता है और अपनी कमर को थोड़ा सा आगे सरकता है
जिससे उसका लुंड सरकता हुआ रेखा की टैंगो के बिच गायब हो हटा है
इस अहसास से दोनों भाई बेहेन अंदर hi अंदर पागल हुए जा रहे थे रवि 3-4 झटके ऐसे hi लगता है
वो कभी अपने लुंड को पूरा बहार निकल क्र एक hi जहटके में पूरा लुंड रेखा की टैंगो के बिच थुश देता
ऐसे hi करीब 10-12 मिनट मस्ती करते करते
वो अपना लुंड दीदी की जांघो में घुसाए हुए सो जाता है .......
दोस्तों कहानी कैसी जा रही है जरूर बताये.