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अपडेट-107
हरिया- क्या हुआ नीलम बेटी ये कैसी आवाज आ रही है अंदर क्या हो रहा है
हरिया लगातार दरवाज बजाए जा रहा था
पर इससे रेखा को तो मनो कोई फरक hi नहीं पड़ता था
वो बड़े सुकून के साथ घुटनो के बल बैठी हुई रवि के लुंड पर चिपका कॉमर्स चाटने में लगी हुई थी
नीलम- रेखा मान जा बंद कर ये सब देख बापू भी बहार hi खड़ा है
रेखा- तो क्या मैं तेरे बापू के डर से अपने भाई का लुंड भी ना साफ़ कृ
एक तो बिचारे ने इतनी मस्त चुदाई की है अपनी दीदी की ऊपर से तू कहती है मैं इसके लुंड को ऐसे hi चिपचिपा छोड़ दू
रवि- नीलम दीदी अगर आप कहो तो आप hi साफ़ कार्डो मेरा लुंड देखो न रेखा दीदी की छूट की साडी मलाई अभी तक्क इसपर चिपकी हुई है
रेखा - नहीं नहीं आज तो ये साडी मलाई सिर्फ मेरी hi है मैं और किसी के साथ नहीं बाटूंगी इसे
इतना बोलते हुए रेखा पूरा का पूरा लुंड एक झटके में अपने गले तक्क उतारर लेती है
रवि भी खा काम था वो रेखा का सर पकड़ लेता है और एक बार फिरसे अपनी दीदी का मुँह छोड़ना शुरू कर देता है
नीलम( हे भगवान् आज पता नहीं ये रेखा रंडी क्या सोच कर मेरे घर छुड़वाने आयी है )
अभी नीलम कुछ बोलती उससे पहले hi हरिया दरवाजे पर एक जोरदार झटका देता है और दरवाजा खुल जाता है
जैसे hi हरिया अंदर का नजारा देखता है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है
रेखा एक दिवार के शेयर घुटनो के बल बैठी हुई थी और उसका छोटा भाई उसके मुँह को घण है छोड़ने में लगा हुआ था
जैसे hi रेखा और रवि को दरवाजा खुल की आवाज आती है दोनों अपना सर दरवाजे की और घूमते है पर न तो रेखा अपने मुँह में से लुंड बहार निकलती है और न hi रवि अपनी दीदी के सर को छोड़ता है
हरिया अंदर का ये कामुक नजारा देख कर अंडरर तक्क मस्त हो जाता है
आज पहली बार उसने रेखा को पूरा नंगा देखा था वो भी अपने hi छोटे भाई का लुंड चूसते हुए
हरिया( मैं तो सोचता था ये साली एक शरीफ लड़की है इसलिए मेरे हाथ नहीं आती पर ये साली तो बहुत बड़ी रंडी निकली)
हरिया घर के अंदर दाखिल हो जाता है और तुरंत hi दरवाजे को दुबारा से बंद कर देता है
Hriya-ye क्या रंडी पन्ना चल रहा है नीलम हमारे घर में
नीलम का डर भी अब ख़तम हो चूका था क्योंकि वो भी जानती थी की रेखा को नंगा देखने के बाद उसके बापू का मुद अब चुदाई का बन गया है
नीलम- देखो न बापू ये कमीनी रवि को लेकर सुबह सूयभ hi हमारे घर आ गयी और जब से आयी है बस छुड़वाए जा रही है
रेखा अब तक्क पूरा का पूरा लुंड छत्त कर साफ़ कर चुकी थी और उठ कर अपने कपडे पेहेन रही थी
रवि भी अबतक अपनी धोती लपेट चूका था
हरिया- बेटी तूने मुझे पहले hi क्यों नहीं बताया इस रेखा को मैं तभी सबक सीखा देता
रेखा- अरे बुड्ढे तू क्या मुझे सबक सिखाएगा जा जा मुझे भी पता है की मुझे नंगी देखने के बाद तेरा मन मेरे ऊपर चढ़ने का कर रहा होगा
पर एक बात जान ले इस जनम में क्या अगले 7 जनम तक्क ये रेखा तेरे हाथ नहीं आने वाली देख नहीं रहा मेरे पास क्या मस्त ह्तिहयार है
ये मेरी साडी गर्मी निकल देता है
और है अगर तेरे तत्तो में ज्यादा hi खुजली हो रही है तो अभी साध जा नीलम पर वैसे भी रवि और मैं सबब जानते है
रेखा की बात सुन्करर हरिया का मुँह खुला का खुला रह जाता है
और ये नजारा द्केहने के बाद हरिया ने जितने भी प्लान बनाये थे सबकी माँ चुड़ जाती है
हरिया( ये साली तो बहुत तेज निकली सोचा था बदनामी के डर से hi क्या आता मेरे. निचे लेत जाये पर ये साली तो उल्टा बर्बाद कर देगी )
हरिया अब एक अलग दाव खेलने की सोचता है वो दरवाजे पर खड़ा खड़ा hi अपनी धोती को अपने बदन से अलग कर देता है
उसका कला लुंड अपनी पूरी औक़ात में आ चूका था
हरिया का लुंड बड़ा तो था पर रवि के लुंड के आगे उसकी कोई गिनती नहीं थी
और ये बात इस कमरे में मौजूद हर आदमी जनता था सिवाए हरिया के
रेखा- हूऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह
रेखा के इस तरह हहह से hi हरिया को अपनी बेज्जती महसूस होती है
रेखा- धोती तो ऐसे उतर कर फेकि जैसे अंदर से क़ुतुब मीनार निकलेगा हूऊऊऊह्ह्
रवि के गधे जैसे लुंड से चुद चुद कर रेखा को अब हरिया का 8इंच का लुंड बच्चा लगने लगा था
नीलम सामने hi खड़ी सब कुछ देख रही थी और उसे अबतक उसके बाप की नियत का पता चल चुका था
हरिया धीरे धीरे चला हुआ नीलम के बिलकुल पीछे पहुंच हटा है और पूछे से पानी बेटी से बिलजुल चिपक जाता है
हरिया- देख रही है बिटिया ये तेरे बाप के लुंड की बेज्जती कर रही है
नीलम- अब क्या करोगे बापू जिसका छेद hi बड़ा हो उसे कोई भी लुंड छोटा hi लगेगा
नीलम भी जानती थी की रेखा ने हरिया के लुंड को छोटा क्यों खा पर उसने अपने बापू का दिल रखने के लिए उसकी साइड ली
हरिया अपने हाथो को आगे बढ़ता हुआ नीलम की छाती पारर ले जाता है
और अगले hi पल एक एक करके अपनी बेटी के बलिउसे के सरे हक्क खोल देता है
और एक झटके के साथ पेटीकोट का बड़ा भी खोल देता है
नीलम के पैरो से सरकता हुआ पेटीकोट सीधा जमीन पारर जा गिरता है और जब तक्क नीलम कुछ समझ पति वो सबके सामने पूरी की पूरी नंगी खड़ी थी
नीलम को नंगा देख कर रवि का हाथ खुद बा खुद hi अपने लुंड पर चला जाता है
नीलम भी ये हरकत देख लेती है और अंदर तक्क सेहम जाती है
रेखा चुपचाप सब कुछ देख रही थी वो देखना कहती थी की हरिया उसके सामने अपनी बेटी के साथ किश हद्द तक जाता है
हरिया नीलम को दूसरी और घूमता हुआ निचे लिटाते हुए घोड़ी बना देता है
और अब नीलम के दोनों छेद खुल कर सबके सामने आ चुके थे
हरिया अपनी एक ऊँगली को मुंह में डालता हुआ उसे सीधा नीलम की गांड के छेद पर सेट करता है और अंदर सरका देता है
और अपनी ऊँगली को लगातार अंदर बहार करने लगता है
नीलम की शैली के सामने hi उसका बाप उसकी गांड के छेद को अपनी ऊँगली से छोड़ रहा था
ये सब सोच कर hi वो पागल हुई जा रही थी
रवि का लुंड भी अबतक खड़ा हो चूका था और तो और रवि ने खुद hi अपनी धोती भी सरका दी
जैसे hi हरिया की नजर रवि के लुंड पर पड़ती है उसका मुह्ह खुला का खुला रह जाता है
और जो ऊँगली अब तक्क अपनी बेटी की गांड छोड़ रही थी वो एक दम से ृक्क जाती है
रेखा- हाहाःहाह क्या हुआ बुड्ढे बोलै था न तेरा लुंड नहीं लुल्ली है देख मेरे छोटे भाई का हथियार क्या मस्त खड़ा है
देख ले देख ले जी भर कर देख ले और अगर यकीन न होतो अपनी गांड में लेकर देख ले हाहाहाहाहा
रेखा की बाटे हरिया के सर के ऊपर से जा रही थी
वो तो जैसे रवि के लुंड को देख कर कहि खो गया था नीलम भी पीछे मदद कर रवि का फनफनाता लुंड देख लेती है
पुराणी यदि सोच कर hi नीलम की टंगे कम्पनी लगी थी
क्योंकि वो जानती थी की अगर रेखा ने रवि को छूट दे दी तो वो यही उसके घर में hi पटक पटक कर छोड़ेगा
और वो यह भी जानती थी की उसका बाप भी उसे नहीं बचा सकता रवि उसे एक पल में hi धूल छटा देता
हरिया ( हे बहगवां ये साला लुंड है या लुंड का बाप कैसे लेती होगी ये कुटिया इसे अपनी छूट में तभी इसे मेरा लुंड भी छोटा लग रहा है ये साली तो बड़ी चूड़ाकड किसम की निकली)
हरिया- बेटी सच hi खा था तूने इस लुंड के समाने तो मेरा लुंड तुझे लुल्ली लगेगा hi मैं हार मंटा हु बास अब तू खुस्स है
रेखा- चल चल बुड्ढे अब तेल मत लगा और छोड़ ले इसे नहीं तो तेरा लुंड बैठ जायेगा अहःअहः
रेखा लगातार बूढ़े हरिया को बेज्जत किये जा रही थी
हरिया- अरे बेटी तेरे जैसी मस्त घोड़ी को नंगी देख लिए आज मैंने अब तो लगता है की 7 जनम तक्क तेरे काका का ये लुंड बैठने वाला नहीं
रेखा- है तो ठीक hi है न तू एक काम करना सतो जनम तक अपनी बेटी को इसपर बैठाये रखना
रेखा- चल रवि घर चलते है
रेखा रवि का हाथ पकड़ कर गेट की और जाने लगती है
हरिया अब नीलम की पीठ पर साध चूका था और अपने दोनों हाथो से नीलम के दोनों चुड़ताड़ फैलाये हुए था
हरिया- रेखा बिटिया
रेखा और रवि पलट कर देखते है और जैसे hi रवि की नजर दुबारा से उन छेड़ो पर जाती है वो अपने लुंड को मसल देता है
और ये चीज़ हरिया भी जनता था और उसका आगे का प्लान इससे hi बनने वाला था शायद.........
हरिया- क्या हुआ नीलम बेटी ये कैसी आवाज आ रही है अंदर क्या हो रहा है
हरिया लगातार दरवाज बजाए जा रहा था
पर इससे रेखा को तो मनो कोई फरक hi नहीं पड़ता था
वो बड़े सुकून के साथ घुटनो के बल बैठी हुई रवि के लुंड पर चिपका कॉमर्स चाटने में लगी हुई थी
नीलम- रेखा मान जा बंद कर ये सब देख बापू भी बहार hi खड़ा है
रेखा- तो क्या मैं तेरे बापू के डर से अपने भाई का लुंड भी ना साफ़ कृ
एक तो बिचारे ने इतनी मस्त चुदाई की है अपनी दीदी की ऊपर से तू कहती है मैं इसके लुंड को ऐसे hi चिपचिपा छोड़ दू
रवि- नीलम दीदी अगर आप कहो तो आप hi साफ़ कार्डो मेरा लुंड देखो न रेखा दीदी की छूट की साडी मलाई अभी तक्क इसपर चिपकी हुई है
रेखा - नहीं नहीं आज तो ये साडी मलाई सिर्फ मेरी hi है मैं और किसी के साथ नहीं बाटूंगी इसे
इतना बोलते हुए रेखा पूरा का पूरा लुंड एक झटके में अपने गले तक्क उतारर लेती है
रवि भी खा काम था वो रेखा का सर पकड़ लेता है और एक बार फिरसे अपनी दीदी का मुँह छोड़ना शुरू कर देता है
नीलम( हे भगवान् आज पता नहीं ये रेखा रंडी क्या सोच कर मेरे घर छुड़वाने आयी है )
अभी नीलम कुछ बोलती उससे पहले hi हरिया दरवाजे पर एक जोरदार झटका देता है और दरवाजा खुल जाता है
जैसे hi हरिया अंदर का नजारा देखता है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है
रेखा एक दिवार के शेयर घुटनो के बल बैठी हुई थी और उसका छोटा भाई उसके मुँह को घण है छोड़ने में लगा हुआ था
जैसे hi रेखा और रवि को दरवाजा खुल की आवाज आती है दोनों अपना सर दरवाजे की और घूमते है पर न तो रेखा अपने मुँह में से लुंड बहार निकलती है और न hi रवि अपनी दीदी के सर को छोड़ता है
हरिया अंदर का ये कामुक नजारा देख कर अंडरर तक्क मस्त हो जाता है
आज पहली बार उसने रेखा को पूरा नंगा देखा था वो भी अपने hi छोटे भाई का लुंड चूसते हुए
हरिया( मैं तो सोचता था ये साली एक शरीफ लड़की है इसलिए मेरे हाथ नहीं आती पर ये साली तो बहुत बड़ी रंडी निकली)
हरिया घर के अंदर दाखिल हो जाता है और तुरंत hi दरवाजे को दुबारा से बंद कर देता है
Hriya-ye क्या रंडी पन्ना चल रहा है नीलम हमारे घर में
नीलम का डर भी अब ख़तम हो चूका था क्योंकि वो भी जानती थी की रेखा को नंगा देखने के बाद उसके बापू का मुद अब चुदाई का बन गया है
नीलम- देखो न बापू ये कमीनी रवि को लेकर सुबह सूयभ hi हमारे घर आ गयी और जब से आयी है बस छुड़वाए जा रही है
रेखा अब तक्क पूरा का पूरा लुंड छत्त कर साफ़ कर चुकी थी और उठ कर अपने कपडे पेहेन रही थी
रवि भी अबतक अपनी धोती लपेट चूका था
हरिया- बेटी तूने मुझे पहले hi क्यों नहीं बताया इस रेखा को मैं तभी सबक सीखा देता
रेखा- अरे बुड्ढे तू क्या मुझे सबक सिखाएगा जा जा मुझे भी पता है की मुझे नंगी देखने के बाद तेरा मन मेरे ऊपर चढ़ने का कर रहा होगा
पर एक बात जान ले इस जनम में क्या अगले 7 जनम तक्क ये रेखा तेरे हाथ नहीं आने वाली देख नहीं रहा मेरे पास क्या मस्त ह्तिहयार है
ये मेरी साडी गर्मी निकल देता है
और है अगर तेरे तत्तो में ज्यादा hi खुजली हो रही है तो अभी साध जा नीलम पर वैसे भी रवि और मैं सबब जानते है
रेखा की बात सुन्करर हरिया का मुँह खुला का खुला रह जाता है
और ये नजारा द्केहने के बाद हरिया ने जितने भी प्लान बनाये थे सबकी माँ चुड़ जाती है
हरिया( ये साली तो बहुत तेज निकली सोचा था बदनामी के डर से hi क्या आता मेरे. निचे लेत जाये पर ये साली तो उल्टा बर्बाद कर देगी )
हरिया अब एक अलग दाव खेलने की सोचता है वो दरवाजे पर खड़ा खड़ा hi अपनी धोती को अपने बदन से अलग कर देता है
उसका कला लुंड अपनी पूरी औक़ात में आ चूका था
हरिया का लुंड बड़ा तो था पर रवि के लुंड के आगे उसकी कोई गिनती नहीं थी
और ये बात इस कमरे में मौजूद हर आदमी जनता था सिवाए हरिया के
रेखा- हूऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह
रेखा के इस तरह हहह से hi हरिया को अपनी बेज्जती महसूस होती है
रेखा- धोती तो ऐसे उतर कर फेकि जैसे अंदर से क़ुतुब मीनार निकलेगा हूऊऊऊह्ह्
रवि के गधे जैसे लुंड से चुद चुद कर रेखा को अब हरिया का 8इंच का लुंड बच्चा लगने लगा था
नीलम सामने hi खड़ी सब कुछ देख रही थी और उसे अबतक उसके बाप की नियत का पता चल चुका था
हरिया धीरे धीरे चला हुआ नीलम के बिलकुल पीछे पहुंच हटा है और पूछे से पानी बेटी से बिलजुल चिपक जाता है
हरिया- देख रही है बिटिया ये तेरे बाप के लुंड की बेज्जती कर रही है
नीलम- अब क्या करोगे बापू जिसका छेद hi बड़ा हो उसे कोई भी लुंड छोटा hi लगेगा
नीलम भी जानती थी की रेखा ने हरिया के लुंड को छोटा क्यों खा पर उसने अपने बापू का दिल रखने के लिए उसकी साइड ली
हरिया अपने हाथो को आगे बढ़ता हुआ नीलम की छाती पारर ले जाता है
और अगले hi पल एक एक करके अपनी बेटी के बलिउसे के सरे हक्क खोल देता है
और एक झटके के साथ पेटीकोट का बड़ा भी खोल देता है
नीलम के पैरो से सरकता हुआ पेटीकोट सीधा जमीन पारर जा गिरता है और जब तक्क नीलम कुछ समझ पति वो सबके सामने पूरी की पूरी नंगी खड़ी थी
नीलम को नंगा देख कर रवि का हाथ खुद बा खुद hi अपने लुंड पर चला जाता है
नीलम भी ये हरकत देख लेती है और अंदर तक्क सेहम जाती है
रेखा चुपचाप सब कुछ देख रही थी वो देखना कहती थी की हरिया उसके सामने अपनी बेटी के साथ किश हद्द तक जाता है
हरिया नीलम को दूसरी और घूमता हुआ निचे लिटाते हुए घोड़ी बना देता है
और अब नीलम के दोनों छेद खुल कर सबके सामने आ चुके थे
हरिया अपनी एक ऊँगली को मुंह में डालता हुआ उसे सीधा नीलम की गांड के छेद पर सेट करता है और अंदर सरका देता है
और अपनी ऊँगली को लगातार अंदर बहार करने लगता है
नीलम की शैली के सामने hi उसका बाप उसकी गांड के छेद को अपनी ऊँगली से छोड़ रहा था
ये सब सोच कर hi वो पागल हुई जा रही थी
रवि का लुंड भी अबतक खड़ा हो चूका था और तो और रवि ने खुद hi अपनी धोती भी सरका दी
जैसे hi हरिया की नजर रवि के लुंड पर पड़ती है उसका मुह्ह खुला का खुला रह जाता है
और जो ऊँगली अब तक्क अपनी बेटी की गांड छोड़ रही थी वो एक दम से ृक्क जाती है
रेखा- हाहाःहाह क्या हुआ बुड्ढे बोलै था न तेरा लुंड नहीं लुल्ली है देख मेरे छोटे भाई का हथियार क्या मस्त खड़ा है
देख ले देख ले जी भर कर देख ले और अगर यकीन न होतो अपनी गांड में लेकर देख ले हाहाहाहाहा
रेखा की बाटे हरिया के सर के ऊपर से जा रही थी
वो तो जैसे रवि के लुंड को देख कर कहि खो गया था नीलम भी पीछे मदद कर रवि का फनफनाता लुंड देख लेती है
पुराणी यदि सोच कर hi नीलम की टंगे कम्पनी लगी थी
क्योंकि वो जानती थी की अगर रेखा ने रवि को छूट दे दी तो वो यही उसके घर में hi पटक पटक कर छोड़ेगा
और वो यह भी जानती थी की उसका बाप भी उसे नहीं बचा सकता रवि उसे एक पल में hi धूल छटा देता
हरिया ( हे बहगवां ये साला लुंड है या लुंड का बाप कैसे लेती होगी ये कुटिया इसे अपनी छूट में तभी इसे मेरा लुंड भी छोटा लग रहा है ये साली तो बड़ी चूड़ाकड किसम की निकली)
हरिया- बेटी सच hi खा था तूने इस लुंड के समाने तो मेरा लुंड तुझे लुल्ली लगेगा hi मैं हार मंटा हु बास अब तू खुस्स है
रेखा- चल चल बुड्ढे अब तेल मत लगा और छोड़ ले इसे नहीं तो तेरा लुंड बैठ जायेगा अहःअहः
रेखा लगातार बूढ़े हरिया को बेज्जत किये जा रही थी
हरिया- अरे बेटी तेरे जैसी मस्त घोड़ी को नंगी देख लिए आज मैंने अब तो लगता है की 7 जनम तक्क तेरे काका का ये लुंड बैठने वाला नहीं
रेखा- है तो ठीक hi है न तू एक काम करना सतो जनम तक अपनी बेटी को इसपर बैठाये रखना
रेखा- चल रवि घर चलते है
रेखा रवि का हाथ पकड़ कर गेट की और जाने लगती है
हरिया अब नीलम की पीठ पर साध चूका था और अपने दोनों हाथो से नीलम के दोनों चुड़ताड़ फैलाये हुए था
हरिया- रेखा बिटिया
रेखा और रवि पलट कर देखते है और जैसे hi रवि की नजर दुबारा से उन छेड़ो पर जाती है वो अपने लुंड को मसल देता है
और ये चीज़ हरिया भी जनता था और उसका आगे का प्लान इससे hi बनने वाला था शायद.........