Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 12 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-107

हरिया- क्या हुआ नीलम बेटी ये कैसी आवाज आ रही है अंदर क्या हो रहा है

हरिया लगातार दरवाज बजाए जा रहा था

पर इससे रेखा को तो मनो कोई फरक hi नहीं पड़ता था

वो बड़े सुकून के साथ घुटनो के बल बैठी हुई रवि के लुंड पर चिपका कॉमर्स चाटने में लगी हुई थी

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नीलम- रेखा मान जा बंद कर ये सब देख बापू भी बहार hi खड़ा है

रेखा- तो क्या मैं तेरे बापू के डर से अपने भाई का लुंड भी ना साफ़ कृ

एक तो बिचारे ने इतनी मस्त चुदाई की है अपनी दीदी की ऊपर से तू कहती है मैं इसके लुंड को ऐसे hi चिपचिपा छोड़ दू

रवि- नीलम दीदी अगर आप कहो तो आप hi साफ़ कार्डो मेरा लुंड देखो न रेखा दीदी की छूट की साडी मलाई अभी तक्क इसपर चिपकी हुई है

रेखा - नहीं नहीं आज तो ये साडी मलाई सिर्फ मेरी hi है मैं और किसी के साथ नहीं बाटूंगी इसे

इतना बोलते हुए रेखा पूरा का पूरा लुंड एक झटके में अपने गले तक्क उतारर लेती है

रवि भी खा काम था वो रेखा का सर पकड़ लेता है और एक बार फिरसे अपनी दीदी का मुँह छोड़ना शुरू कर देता है

नीलम( हे भगवान् आज पता नहीं ये रेखा रंडी क्या सोच कर मेरे घर छुड़वाने आयी है )

अभी नीलम कुछ बोलती उससे पहले hi हरिया दरवाजे पर एक जोरदार झटका देता है और दरवाजा खुल जाता है

जैसे hi हरिया अंदर का नजारा देखता है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

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रेखा एक दिवार के शेयर घुटनो के बल बैठी हुई थी और उसका छोटा भाई उसके मुँह को घण है छोड़ने में लगा हुआ था

जैसे hi रेखा और रवि को दरवाजा खुल की आवाज आती है दोनों अपना सर दरवाजे की और घूमते है पर न तो रेखा अपने मुँह में से लुंड बहार निकलती है और न hi रवि अपनी दीदी के सर को छोड़ता है

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हरिया अंदर का ये कामुक नजारा देख कर अंडरर तक्क मस्त हो जाता है

आज पहली बार उसने रेखा को पूरा नंगा देखा था वो भी अपने hi छोटे भाई का लुंड चूसते हुए

हरिया( मैं तो सोचता था ये साली एक शरीफ लड़की है इसलिए मेरे हाथ नहीं आती पर ये साली तो बहुत बड़ी रंडी निकली)

हरिया घर के अंदर दाखिल हो जाता है और तुरंत hi दरवाजे को दुबारा से बंद कर देता है

Hriya-ye क्या रंडी पन्ना चल रहा है नीलम हमारे घर में

नीलम का डर भी अब ख़तम हो चूका था क्योंकि वो भी जानती थी की रेखा को नंगा देखने के बाद उसके बापू का मुद अब चुदाई का बन गया है

नीलम- देखो न बापू ये कमीनी रवि को लेकर सुबह सूयभ hi हमारे घर आ गयी और जब से आयी है बस छुड़वाए जा रही है

रेखा अब तक्क पूरा का पूरा लुंड छत्त कर साफ़ कर चुकी थी और उठ कर अपने कपडे पेहेन रही थी

रवि भी अबतक अपनी धोती लपेट चूका था

हरिया- बेटी तूने मुझे पहले hi क्यों नहीं बताया इस रेखा को मैं तभी सबक सीखा देता

रेखा- अरे बुड्ढे तू क्या मुझे सबक सिखाएगा जा जा मुझे भी पता है की मुझे नंगी देखने के बाद तेरा मन मेरे ऊपर चढ़ने का कर रहा होगा

पर एक बात जान ले इस जनम में क्या अगले 7 जनम तक्क ये रेखा तेरे हाथ नहीं आने वाली देख नहीं रहा मेरे पास क्या मस्त ह्तिहयार है

ये मेरी साडी गर्मी निकल देता है

और है अगर तेरे तत्तो में ज्यादा hi खुजली हो रही है तो अभी साध जा नीलम पर वैसे भी रवि और मैं सबब जानते है

रेखा की बात सुन्करर हरिया का मुँह खुला का खुला रह जाता है

और ये नजारा द्केहने के बाद हरिया ने जितने भी प्लान बनाये थे सबकी माँ चुड़ जाती है

हरिया( ये साली तो बहुत तेज निकली सोचा था बदनामी के डर से hi क्या आता मेरे. निचे लेत जाये पर ये साली तो उल्टा बर्बाद कर देगी )

हरिया अब एक अलग दाव खेलने की सोचता है वो दरवाजे पर खड़ा खड़ा hi अपनी धोती को अपने बदन से अलग कर देता है

उसका कला लुंड अपनी पूरी औक़ात में आ चूका था

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हरिया का लुंड बड़ा तो था पर रवि के लुंड के आगे उसकी कोई गिनती नहीं थी

और ये बात इस कमरे में मौजूद हर आदमी जनता था सिवाए हरिया के

रेखा- हूऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह

रेखा के इस तरह हहह से hi हरिया को अपनी बेज्जती महसूस होती है

रेखा- धोती तो ऐसे उतर कर फेकि जैसे अंदर से क़ुतुब मीनार निकलेगा हूऊऊऊह्ह्

रवि के गधे जैसे लुंड से चुद चुद कर रेखा को अब हरिया का 8इंच का लुंड बच्चा लगने लगा था

नीलम सामने hi खड़ी सब कुछ देख रही थी और उसे अबतक उसके बाप की नियत का पता चल चुका था

हरिया धीरे धीरे चला हुआ नीलम के बिलकुल पीछे पहुंच हटा है और पूछे से पानी बेटी से बिलजुल चिपक जाता है

हरिया- देख रही है बिटिया ये तेरे बाप के लुंड की बेज्जती कर रही है

नीलम- अब क्या करोगे बापू जिसका छेद hi बड़ा हो उसे कोई भी लुंड छोटा hi लगेगा

नीलम भी जानती थी की रेखा ने हरिया के लुंड को छोटा क्यों खा पर उसने अपने बापू का दिल रखने के लिए उसकी साइड ली

हरिया अपने हाथो को आगे बढ़ता हुआ नीलम की छाती पारर ले जाता है

और अगले hi पल एक एक करके अपनी बेटी के बलिउसे के सरे हक्क खोल देता है

और एक झटके के साथ पेटीकोट का बड़ा भी खोल देता है

नीलम के पैरो से सरकता हुआ पेटीकोट सीधा जमीन पारर जा गिरता है और जब तक्क नीलम कुछ समझ पति वो सबके सामने पूरी की पूरी नंगी खड़ी थी

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नीलम को नंगा देख कर रवि का हाथ खुद बा खुद hi अपने लुंड पर चला जाता है

नीलम भी ये हरकत देख लेती है और अंदर तक्क सेहम जाती है

रेखा चुपचाप सब कुछ देख रही थी वो देखना कहती थी की हरिया उसके सामने अपनी बेटी के साथ किश हद्द तक जाता है

हरिया नीलम को दूसरी और घूमता हुआ निचे लिटाते हुए घोड़ी बना देता है

और अब नीलम के दोनों छेद खुल कर सबके सामने आ चुके थे

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हरिया अपनी एक ऊँगली को मुंह में डालता हुआ उसे सीधा नीलम की गांड के छेद पर सेट करता है और अंदर सरका देता है

और अपनी ऊँगली को लगातार अंदर बहार करने लगता है

नीलम की शैली के सामने hi उसका बाप उसकी गांड के छेद को अपनी ऊँगली से छोड़ रहा था

ये सब सोच कर hi वो पागल हुई जा रही थी

रवि का लुंड भी अबतक खड़ा हो चूका था और तो और रवि ने खुद hi अपनी धोती भी सरका दी

जैसे hi हरिया की नजर रवि के लुंड पर पड़ती है उसका मुह्ह खुला का खुला रह जाता है

और जो ऊँगली अब तक्क अपनी बेटी की गांड छोड़ रही थी वो एक दम से ृक्क जाती है

रेखा- हाहाःहाह क्या हुआ बुड्ढे बोलै था न तेरा लुंड नहीं लुल्ली है देख मेरे छोटे भाई का हथियार क्या मस्त खड़ा है

देख ले देख ले जी भर कर देख ले और अगर यकीन न होतो अपनी गांड में लेकर देख ले हाहाहाहाहा

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रेखा की बाटे हरिया के सर के ऊपर से जा रही थी

वो तो जैसे रवि के लुंड को देख कर कहि खो गया था नीलम भी पीछे मदद कर रवि का फनफनाता लुंड देख लेती है

पुराणी यदि सोच कर hi नीलम की टंगे कम्पनी लगी थी

क्योंकि वो जानती थी की अगर रेखा ने रवि को छूट दे दी तो वो यही उसके घर में hi पटक पटक कर छोड़ेगा

और वो यह भी जानती थी की उसका बाप भी उसे नहीं बचा सकता रवि उसे एक पल में hi धूल छटा देता

हरिया ( हे बहगवां ये साला लुंड है या लुंड का बाप कैसे लेती होगी ये कुटिया इसे अपनी छूट में तभी इसे मेरा लुंड भी छोटा लग रहा है ये साली तो बड़ी चूड़ाकड किसम की निकली)

हरिया- बेटी सच hi खा था तूने इस लुंड के समाने तो मेरा लुंड तुझे लुल्ली लगेगा hi मैं हार मंटा हु बास अब तू खुस्स है

रेखा- चल चल बुड्ढे अब तेल मत लगा और छोड़ ले इसे नहीं तो तेरा लुंड बैठ जायेगा अहःअहः

रेखा लगातार बूढ़े हरिया को बेज्जत किये जा रही थी

हरिया- अरे बेटी तेरे जैसी मस्त घोड़ी को नंगी देख लिए आज मैंने अब तो लगता है की 7 जनम तक्क तेरे काका का ये लुंड बैठने वाला नहीं

रेखा- है तो ठीक hi है न तू एक काम करना सतो जनम तक अपनी बेटी को इसपर बैठाये रखना

रेखा- चल रवि घर चलते है

रेखा रवि का हाथ पकड़ कर गेट की और जाने लगती है

हरिया अब नीलम की पीठ पर साध चूका था और अपने दोनों हाथो से नीलम के दोनों चुड़ताड़ फैलाये हुए था

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हरिया- रेखा बिटिया

रेखा और रवि पलट कर देखते है और जैसे hi रवि की नजर दुबारा से उन छेड़ो पर जाती है वो अपने लुंड को मसल देता है

और ये चीज़ हरिया भी जनता था और उसका आगे का प्लान इससे hi बनने वाला था शायद.........
 
अपडेट-108

शयद बड़ा hi अजीब शरत है सारा प्लान बनाओ उस हद्द तक जाओ झा तक किसी के सामने जाना बहुत बड़ी बात है

और अंतत में शायद आपका प्लान काम कर जाये

यही हुआ हमारे बूढ़े हरिया काका के साथ उसने भी अपने प्लान को सक्सेस करने के चक्कर में एक गलती करदी

रेखा- अब क्या हमे तू दिन भर अपनी के छेद hi दिखता रहेगा

छोड़ना है तो छोड़ ले देख बिचारि कैसे थकी हुई सी नजर आ रही है

हरिया - बेटी अगर रवि कहे तो मेरी बेटी को छोड़ सकता है

नीलम के कानो में जैसे hi वो बात पड़ती है की उसका बाप अपने कामसुख के लालच में उसे एक जानवर के सामने परोस रहा है वो अंदर तक्क सेहम जाती है

और मछली की तरह हरिया की गिरफ्त से निकलती हुई सीधा दिवार के शेयर बैठ जाती है और अपने हाथो से अपनी छूट छुपा लेती है

रेखा- हहह क्या हुआ काका ऐसे hi ऑफर डोज हालत तो देखो बिचारि की

रेखा नीलम को अहसास दिलाना कहती थी की न तो वो रेखा जितनी गरम है और न hi चुड़क्कड़

रेखा- इसकी तो चुदाई के नाम से hi फट गयी कोना पकड़ लिया

और अगर गलती से मेरे छोटे भाई ने इसे थोड़ा रगड़ कर छोड़ दिया तो ये तो मर्डर hi जाएगी हहहहः

नीलम सच में रवि से छोड़ने के नाम से hi सेहम गयी थी उसके मैं में अब बस एक hi बात चल रही थी की जिस बाप के सामने उसने खुद को परोस दिया आज वही बाप किसी और को छोड़ने के लालच में उसे किसी और के सामने परोस रहा है

रेखा- अच्छा उसकी छोड़ो तुम ये बताओ काका आगे से छोड़ सकता है या पीछे से

इतनी बात सुनते hi रवि का चेहरा खिल उठता है

और वो रेखा की तरफ देखता हुआ मुस्कुराता है

रवि की खुसी में hi रेखा की खुसी थी

हरिया- झा उसका मैं करे वह चोदे गांड में या छूट में

रवि- और मुह्ह में

रेखा इस बात पारर बड़ी खुस्स होती है और जोर जोर से हसने लगती है

रेखा- हाहाहाहा

रेखा- अहहह मुह्ह में है तो बोल न बुड्ढे अब मुँह में भी छोड़ सकता है क्या मेरा छोटा भाई तेरी बेटी को

हरिया एक बहार नीलम की और द्केहता है

उसे साफ़ नजर आ रहा था की उसकी बेटी सेहमी हुई है पर उसकी हवस के सामने वो इसे भी नजर अंदाज कर देता है

हरिया- हां मुह्ह में भी छोड़ सकता है

नीलम अब तक्क जान चुकी थी की अगर अब वो नहीं संभाली तो आज उसकी खैर नहीं

नीलम तुरंत hi उठ कर अपने कमरे में बजाग जाती है और दरवाजा बंद कर देती है

रेखा- हहहहह ये तो भाग गयी

हरिया- चुदाई तो दरवाजा तोड़ कर भी हो सकती है

सच खेतो हरिया आज रेखा को नंगा दकह कर जैसे उस काम देवी का पुजारी हो गया था वो रेखा को भोगने के लिए किसी भी हद्द तक्क जाने को तैयार था

रेखा- तो फिर यही सही समझ ले आज तेरी बेटी की खैर नहीं

जा बीटा रवि जा अपनी दीदी का नाम रोशन करके आना

रबी एक बार अपनी दीदी की तरह मुस्कुरा कर द्केहता है और आगे जाने लगता है

हरिया- रुको

रवि के कदम तुरंत hi ृक्क जाते है

रेखा- अब क्या हुआ

हरिया - इसके बदले में मुझे भी कुछ चाहिए

रेखा- खुल कर बोलो काका

कहते क्या हो तुम

हरिया- तेरा भाई अंदर मेरी बेटी को छोड़ेगा और मैं यह बहार तेरी गांड मरूंगा

इतना सुनते के साथ hi रवि आएग बबूला हो जाता है और आगे की और बढ़ता है

रेखा तुरंत hi रवि का हाथ पकड़ लेती है और हरिया को हड्डिया टूटने से बचा लेती है

रवि इस बार रेखा को भी गुस्से से देखा है

रेखा उसे शांत रहने का इशारा करती है

जैसे तैसे रवि शांत हो जाता है

रेखा- अच्छा तो ये प्लान था काका तुम्हारा

चलो कोई बात नहीं आपने इतनी हिम्मत की तो मैं भी कुछ नरम पड़ती हु

मुझे आपककी शरत मंजूर है

हरिया का चेहरा टमाटर की तरह लाल हो जाता है

उसकी खुसी का ठिकाना नहीं था

हरिया- सच बेटी आज तू अपने काका से गांड मरवायेगी तुझे मैं बता नहीं सकता की मैं कितना खुश हु

जाए रवि घुस जा अंदर उड़ा दे आज मेरी बेटी की धज्जिया जा मैं तुझे छूट देता जो जो करना है काररर मेरी बेटी के साथ

रेखा - पारर मेरी भी एक शरत है

हरिया- क्या शरत है बेटी अब्ब्ब्ब

रेखा- जब नीलम खुद सामने से आकर बोलेगी रवि से छुड़वाने के लिए

उसके बाद hi मैं तेरे सामने घोड़ी बनूँगी

हरिया को ये शरत बहुत hi आसान लगी

क्योंकि जिस रूप में उसने आज तक अपनी बेटी नीलम को देखा था उससे तो उसे यही लगता था की नीलम हर वक़्त चुदाई के लिए तैयार रहती है

इधर रेखा जानती थी की उसके छोटे भाई ने एक बार की चुदाई में hi नीलम को अंदर तक्क रोड के रख दिया है और अब दुबारा उसकी हिम्मत नहीं होगी कभी भी नहीं

हरिया- इसमें कोनसी बड़ी बात है तू कपडे उतर मैं उसे लेकर आता हु

रेखा- अरे अरे काका आज नहीं रहने दो आज तुम उसे मना लो और कल एक बार उसे मेरे घर भेज देना

हरिया - बेटी अब सब्र नहीं होता

रेखा- कर लो काका थोड़ा सब्र फिर तो मेरी छूट भी आपकी और गांड भी

हरिया - सच बेटी

रेखा- और मुह्ह भी

रेखा मुस्कुराती हुई रवि की और देखती है

और आँख मार देती है

रवि की आँखों में गुस्सा साफ़ दिख रहा था जिसे कण्ट्रोल करने के लिए रेखा ने उसका हाथ कसके पकड़ रखा था

हरिया- सोच कर hi मुहहह में पानी आ गया कल तो तुझे पूरा का पूरा कच्चा hi चबा जाऊंगा बेटी

रेखा - नीलम का इंतजार रहेगा काका

हरिया- बेटी जुबान पर कायम रहना

रेखा अपनी एक ऊँगली मुँह में डालती है और उसे थूक से अच्छी तरह गिला करती है

और अगले hi पल वो उस थूक से भरी ऊँगली को हरिया के होठो पर लगती हुई रगड़ देती है

रेखा की इस हरकत से हरिया को एक करंट सा लगता है

एक पल के लिए तो उसे ऐसा लगता है की वो झड़ने वाला है

रेखा- सबूत मिल गया माँ काका

हरिया अपनी जीभ से अपने होठ चाट रहा था और रेखा के गरम थूक का स्वाद ले रहा था

रेखा रवि का हाथ पकडे हुए घर से निकल जाती है

थोड़ी दूर आते hi रवि अपना हाथ छुड़ा लेता है और रेखा को अपनी और घुमा लेता है

ये सब उसने गुस्से में किया था

रेखा- जानती हु तू गुस्सा है जो भी मैंने किया

रवि- दीदी आपको पता है आपने क्या बोलै मतलब वो बुद्धा साला हरामी तुम्हरी गांड मरेगा

रेखा- तुझे लगता है मैं किसी और के सामने घोड़ी बानगी

मेरी गांड और छूट में सिर्फ तेरा hi लुंड जायेगा समझा वो भी जिन्ढी भर

रवि - और अगर किसी और का लुंड तुम्हारे छेड़ो में गया तो कसम से दीदी उसकी जान ले लूंगा मैं

रेखा- तेरी दीदी ने उस बुड्ढे की गांड मरने का एक प्लान बनाया है और द्केहना ये है की वो कितना काम करता है

रवि- और दीदी कहि वो साली रैंड मैं गयी मुझसे दुबारा छुड़वाने के लिए तो

रेखा- तुझे लगता हैई वो गलती से भी तुझसे दुबारा छुड़वाना पसंद करेगी

हाहाहाहा

Ravi-hhahahahahaahhaahhaah......
 
अपडेट-109

रेखा हरिया के घर में आग लगा कर अपने घर की और निकल चुकी थी

रेखा के बाजार जाते hi हरिया अपना लुंड झूलता हुआ नीलम के कमरे की और बढ़ने लगता है

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दरवाजा खोलता हुआ हरिया कमरे के अंदर दाखिल होता है

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नीलम अब भी पूरी तरह से नंगी थी

हरिया उसके करीब पहुँचता हुआ उसके चेहरे को पकड़ कर ऊपर उठता है

नीलम की आँखों में आंसू थे उसका पूरा का पूरा चेहरा लाल हो चूका था

हरिया नीलम को रोटा हुआ देख कर दुखी हो जाता है

क्योंकि वो जनता था की ये सब उसकी वजह से hi हुआ है

हरिया- क्या हुआ मेरी बच्ची तू रू क्यों रही है

नीलम कुछ नहीं बोलती पर हरिया की और घर कर देखती है

हरिया- देख बेटी तेरे बाप का लुंड तुझे धुंध रहा है और तू यह बैठी हुई रो रही है

नीलम - तुमको शर्म आती है या नहीं बापू

हरिया- बेटी जिस दिन पहली बार तेरी इस मस्त छूट में मैंने अपना लुंड पेला था उसी दिन से शर्म ह्या सब गायब हो गयी

नीलम- इसलिए तुम इतने बेशरम हो गए की रेखा जैसी रांण्ड को छोड़ने के चक्कर में मुझे उस जानवर के सामने परोस रहे थे

नीलम लगातार रोये जा रही थी उसकी बातो में गुस्सा साफ़ झलक रहा था

हरिया- बेटी मैं तुझे क्या बताऊ जब मेने उस साली को नंगा देखा वो भी अपने छोटे भाई का लुंड चूसते हुए तब से hi मैं पागल हुआ जा रहा हु उस रांदड़ को छोड़ने के लिए

नीलम- सच में बापू मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की तुम इतने हरामी हो की किसी और को छोड़ने के चक्कर में अपनी बेटी का hi सौदा कर डोज

हरिया- बेटी तू गलत समझ रही है और तू खुद hi बताए अगर तू मेरे लिए एक बार रवि से छुड़वा भी लेगी तो क्या गलत हो जायेगा

आखिर कितनी देर टिकेगा वो है टी बच्चा hi तू एक बार मेरी खातिर अपनी छूट में किसी और का लुंड नहीं ले सकती क्या

हरिया आगे बढ़ता हुआ नीलम की चुकी पर हाथ रख देता है

हरिया की बात सुनकर नीलम का माथा ठनक जाता है वो हरिया के हाथ को झटक देती है और बगल में पड़ा हुआ तकिया उठा कर सीधा हरिया के मुह्ह पारर मरती है

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नीलम- सेल हरामी भद्दे तुजने कभी उसे छोड़ते हुए देख है अगर देख लेता तो शायद ऐसा नहीं कहता

हरिया अभी भी पीछे हटने को राजी नहीं था

हरिया- बेटी तू अपने इस बुड्ढे बाप की खातिर एक बार नहीं चुद सकती उस रवि से

हरिया की आवाज में एक विनती थी

वो बस अब यही कहता था की कैसे भी करके उसे बस एक बार रेखा मिल जाये छोड़ने के लिए कहे रवि उसकी बेटी का जो भी हाल करे उसे सब मंजूर था

नीलम- मुझे छोड़ना अच्छा लगता है अपना बलात्कार करवाना नहीं

उस कमीनी ने रवि जैसे बच्चे को ऐसा जानवर बना दिया है जो हड्डी समेत पूरा मास्स खा जाता है

इस बार हरिया सीधा नीलम के पैरो को पकड़ लेता है

नीलम ने सोचा था की उसके इतना सब बताने से उसका बापू उसकी थोड़ी फ़िक्र करेगा पारर यह तो हरिया पीछे हटने को राजी नहीं था

हरिया- बेटी बास के बार देख न तेरे बाप का लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा है उस साली कुटिया को छोड़ने के नाम से ही

नीलम एक जोर्डरर लात मरती है जो सीधा हरिया के मुह्ह पारर लगती है

नीलम- भाग जा हरामी बुड्ढे दिन रात तेरे लुंड को अपना किसी न किसी छेद में फसाये रखती थी और सोचती थी की मेरा बाप मुझे बहुत प्यार करता है

पर तू तो इतना कमीना निकला की उस कमीनी रेखा के चक्कर में मुझे hi किसी से छुड़वाना कहता है बहुत बड़ा हरामी है बापू तू

हरिया- बेटी मैं तो बास

अभी हरिया कुछ और बोलता उससे पहले hi नीलम बगल में रखा गिलास उठा कर हरिया की और चलती है

अगर हरिया सही समय पर अपना हाथ आगे न लता तो अब तक उसका मुह्ह फुट चूका होता

नीलम- भाग जा कमीने यह से नहीं तो मैं पक्का तेरा कुंण कर दूंगी

हरिया समझ चूका था की अब मामला बिगड़ चूका है वो तुरंत hi दरवाजे से बहार निकल जाता है

नीलम- ठीक से लुंड खड़ा होता नहीं है और बुड्ढे को इस उम्र में दूसरी छूट चाहिए

नीलम भट्ट तेज चिल्ला रही थी

इतना तेज की अगर हरिया के घर के आस पास कोई होता तो साडी बाटे आराम से सुन्न सकता था

हरिया भी बड़ा समझदार था वो तुरंत hi मैं गेट और कमरे का गेट दोनों बंद कर देता है

नीलम- है है करले गेट बंद क्योंकि आज के बाद इस कमरे में घुसा तो काट डालूंगी

हरिया पूरी तरह लसिने से भीग चूका था उसका पूरा बदन कम्प रहा था उसका पूरा का पूरा प्लान फ़ैल हो चूका था

नीलम- और आज के बाद सपने में भी मुझे छोड़ने की मत सोचना

जो आदमी मुझे किसी और से hi छुड़वाना कह रहा हो उसके लुंड को मैं देखना भी पसंद नहीं करूंगी

कभी गलती से भी अपना मुरझाया लुंड लेकर मैट आना नहीं तो काट डालूंगी

हरिया तुरंत hi मैं दरवाजे से बहार भाग जाता है और गाओं की और निकल जाता है

हरिया( साली मादरचोद रांदड़ खुद तो यह उस लौड़े से चुड़ कर चली गयी और मेरे घर में आग लगा गयी सच में बड़ी कमीनी है साली कुटिया

ले दे के एक नीलम थी जिसे मैं जब मर्ज़ी तब छोड़ सकता था अब तो लगता है की कई दिनों तक्क छूट नसीब नहीं होने वाली)

हरिया पूरी तरह से दुखी था

झा वो थोड़ी देर पहले तक्क रेखा की गांड मरने के सपने देख रहा था

वही अब वो ये सोच रहा की क्या तिकड़म लगाए और नीलम का गुस्सा शांत करी

हरिया( तेरी तो अगर मैंने सरे बाजार गांड नहीं मारी तो मेरा भी नाम हरिया नहीं )

हरिया गाओं में घूमता रहता और शाम को भी लेत घर जाता है न तो नीलम हरिया की और देखती है और न hi हरिया की हिमायत होती है की वो जाकर नीलम से माफ़ी मांग सकी

दूसरी तरफ्फ़.......

रेखा और रवि घर पहुंच जाते है

अब रेखा का गुस्सा थोड़ा शांत नजर आ रहा था

आंगन में hi उसे मल्टी और मेघा दीदी दिख जाते है

रेखा - ये अभी तक यही है

Megha-are तुम लोग खा गायब हो गए थे जल्दी अंदर आ तुझसे एक जरूरी बात करनी है

मेघा दीदी रेखा को कमरे में ले जाती है

और रवि भी अपनी दीदियो के पीछे पीछे कमरे की और चल देता है

मेघा- अरे मल्टी तू क्यों रुक गयी अब इधर आ जल्दी

मल्टी- नहीं दीदी मैं यही ठीक हु आपलोग बात करलो

( कहि ये चुड़ैल फिर भड़क गयी और मेरे मुह्ह से भी कुछ उल्टा सीधा निकल गया तो पारा प्लान फ़ैल हो जायेगा )

मेघा- तू चुप चाप अंदर आ जल्दी

अब दीदी का हुकुम तो सबको मानना होता था और ये बात अब तक्क मल्टी भी समझ चुकी थी वो भी कमरे में चली जाती है

सबके कमरे में जाते hi कम्मो भी दौड़ कर दरवाजे के पास पहुंच जाती है और अपने कानो को दरवाजे से चिपका देती है

उसके चेरे पे एक शर्म थी क्योंकि वो जानती थी की मेघा दीदी को रेखा दीदी से क्या जरूरी बार करनी है

मेघा- रवि बीटा तू बहार जा

जब मैं खेत में आउंगी तो आराम से तुझे साडी बाटे समझा दूंगी

मेघा दीदी की बात सुनते hi रवि के चेहरे पारर मुस्कान आ जाती है

क्योंकि वो समझ चूका था की उसकी प्यारी दीदी को याद है की आज अपने भाई के लुंड का इलाज करना है

रवि बहार निकल जाता है और एक नजर कम्मो पर डालता है जो रवि को देखते hi अपनी नजरे निचे गिरा लेती है

रवि भी चुपचाप घर से निकल जाता है

रेखा - है दीदी बटोआ क्या जरूरी बात थी और इसे अंदर क्यों बुलाया जब बात हमारे घर की है तू

मेघा- अरे अब ये भी तो हमारे घर की hi है

अच्छा मेरी बात ध्यान से सुन्ना और सोच समझ कर जवाब देना

रेखा- अच्छा ठीक है बताओ

मेघा- देख मेरा घर बसा फिर उजाड़ गया

तेरा कभी बस्स्स नहीं पाया और लगता है कम्मो का भी हम दोनों जैसा हाल होने वाला है

रेखा- दीदी आप बात को इतना घुमा क्यों रही है सीधा सीधा बोलो न

और मेरा घर बसने न बसने का कोई दुःख नहीं है अब तो सिर्फ और सिर्फ रवि hi मेरी जिंदगी भर का सहारा है

मल्टी को रेखा की ये बात थोड़ी अटपटी लगती है

मल्टी घर कर रेखा की और देखती है मनो वो कुछ कन्फर्म करना कहती हो

रेखा उसे एक स्माइल देती है

मनो वो नजरो से कह रही हो

है मेरी जान ये सछह है

मेघा- मेरे पास और मल्टी के पास एक ुवे है जिससे हम कम्मो को इस अँधेरे कुवे में गिरने से बचा सकते है

रेखा- मतलब

मेघा- उआकी शादी कर देते है

रेखा- दीदी मजाक है क्या

शादी में लड़का देखना पड़ेगा पैसा लगेगा और भी बहुत कुछ है

मेघा दीदी अपनी चूचियों के बिच से पैसे निकलती हुई रेखा के हाथ पर रख देती है

इतने सरे पैसे देख कर रेखा का मुँह खुला का खुला रेहह जाता है

मेघा- पैसा हो गया अब एक सुबह लड़का भी देख लेना

मेघा दीदी साडी बात रेखा को बता देती है

और समझा देती है की केशव अपने ससुर अउ सेल को लेने hi गया है

मेघा- अब तू बता तू क्या कहती है

रेखा कमीनी थी पर इतनी नहीं की अपनी छोटी बेहेन का घर बसने से पहले hi उजाड़ दे

रेखा- दीदी जब आपको मंजूर है तो सबको मंजूर है होगी हमारी बेहेन की शादी हमारा घर नहीं बसा तो क्या हुआ उसका घर बसेगा

बहार खड़ी कम्मो का मैं रेखा दीदी की बात सुनते hi झुम्म उठता है

अब उसे वो खुसी मिलने वाली थी जिसके शायद उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी

कम्मो जानती थी की उआकी जिंदगी अब बदलने वाली है पर किस हद्द तक्क बदलने वाली है इस बात का उसी अंदाजा नहीं था........
 
बहुत बहुत धन्यवाद् आपका जो आपने मुझे प्रॉब्लम बताई

अब मैं क्लियर कर देता हु

मैंने कभी नहीं खा की ये कहानी पूरी तरह से भाई बेहेन की hi होने वाली है

शायद आपने ध्यान न दिया हो

और है एक बात और है आप एक बार कहानी के टाइटल को ध्यान से देखिये उसका मतलब समझने की कोशिश करे

उलझते रिश्ते

इन दो सब्दो का अगर आप मीनिंग ढूढ़ते है शायद तब ये दो शब्द बहुत बड़े अध्याय बन जाये

और कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ती जाएगी आपलोगो को शायद पता चलता जाये की कैसे रिश्ते उजलह्ते है और किस हद्द तक उलझ सकते है

वैसे बंधन में भी शायद कुछ कुछ ऐसा hi चल रहा है

आगे भी आपका कोई डॉट हो तो जरूर बताना

धन्यवाद्....
 
अपडेट-110

अब टककक रवि खेतो की और जा चूका था

इधर मल्टी और मेघा की बाटे ख़तम होने का नाम नहीं ले रही थी

रेखा- दीदी मैं जा रही हु खेतो में रवि का खाना लेकर

मेघा रेखा की आवाज सुनते hi बाजार आ जाती है

मेघा- अरे रुक तू खा चली भूल गयी क्या आ मुझे जाना है

रेखा- दीदी आप जाओ या मैं जाऊ बात तो एक hi है न

मेघा- कैसे बात एक hi है तू ये डब्बा मुझे दे आज मैं खाना खिलाऊंगी अपने छोटे भाई को

मेघा दीदी रेखा के हाथो से डब्बा छिन्न लेती है

रेखा ( अरे वह दीदी बड़ी बैचैन हो उसका लुंड पकड़ने के लिए मेरी मनो दूर रो नहीं तो अपने छेड़ो को छुपाती फिरोगी उससे)

मेघा- क्यों री तू हस्स क्यों रही है

रेखा- कुछ नहीं दीदी आप जाओ कुछ याद आ गया था

मल्टी- दीदी अगर आप कहे तो मैं भी चलु आपके साथ रवि बाबू को खाना देने

मेघा दीदी की टेंशन तो ख़तम होने का नाम नहीं ले रही थी

मेघा- अरे नई नई भू आयी है आज hi से गाओं में घूमना शुरू कर दे क्या जा चुप चाप आराम कर घर में

इस बार मेघा दीदी की आवाज में मल्टी के लिए थोड़ा गुसा था जोकि मल्टी को भी थोड़ा अजीब लगा

कम्मो- भाभी दीदी सही कह रही है मैं आपको कभी शाम को ले चलूंगी खेतो की और घूमने

इन सब बातो को सुन्करर रेखा मंद मंद मुस्कुरा रही थी और मल्टी की और hi देख रही थी

मेघा दीदी खेतो की और निकल जाती है और रेखा भी चुपचाप कमरे में जाकर लेत जाती है

रेखा के डर से मल्टी कमरे में नहीं जाती और कम्मो के साथ अपना मेल जॉल बढ़ाने में लग्ग जाती है

कम्मो के बर्ताव से मल्टी समझ चुकी थी की कम्मो उसके घर की बहु बनने के लिए तैयार है

बस मल्टी को डर इसी बात का था की जब सदी के बाद हरी की सच्चाई कम्मो के सामने आएगी तो क्या होगा

पर मल्टी अपने भाई को बचने के लिए किसी भी हद्द तक्क जाने को तैयार थी

रवि मेघा दीदी को दुर्र से hi आते हुए देख लेता है

रवि( आज तो जम्म कर मजा लूंगा दीदी तुम्हारे इस गदराये जिसमं का)

रवि तुरंत hi सारा ककाम धाम छोड़ कर झोपडी की और आ जाता है

रवि- दीदी कितना लेत कर दिया खाना आपने कबसे इन्तजार कर रहा हु

मेघा- अरे वो तेरी भाभी की बाटे ख़तम hi नहीं होती

वैसे ये बता भाभी कैसी लगी तुझे

रवि- ठीक hi है आगे पता चलेगा की बुरी भाभी है या अच्छी भाभी

मेघा- छोड़ उसे वैसे भी तुझे भाभी से क्या लेना तेरे पास तेरी दीदी है ना

रवि- चलो दीदी जल्दी खाना निकालो

बहुत भूख लगी है

मेघा बहार hi पेड़ के निचे खाना निकल देती है और रवि खाना खाना शुरू कर देता है

मेघा दीदी रवि के सामने hi बैठी थी और बैठते hi उन्होंने अपना पल्लू अपनी छाती से अलग कर दिया था

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रवि की नजर बार बार अपनी दीदी की मस्तानी चूचियों पारर जा रही थी जोकि ब्लाउज फाड़ने को उतावली थी

देखते hi देखते रवि का लुंड पूरी तरह से खड़ा हो चूका था और वो उसे छुपाने की बिलकुल भी कोशिश नहीं कर रहा था

अब नजारा ये था की रवि चोरी चोरी मेघा दीदी की चुकी देख रहा था

और मेघा दीदी अपने छोटे भाई के लुंड का उभर देख रही थी

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खाना ख़तम हो चूका था और अच्चानक से रवि खड़ा होता है

खड़े होते हुए उसकी धोती आगे से बिलकुल हट जाती है और उसका विकराल लुंड सीधा मेघा दीदी के सामने आ जाता है

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मेघा दीदी का मुह्ह खुला का खुला रेहह जाता है उनकी आँखे रवि के लुंड की असली लम्बाई नाप लेना कहती थी

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उस लुंड को देख कर मेघा दीदी के चेहरे पारर एक सुकून का भाव था जिसे रवि भी भाप चूका था

रेखा दीदी को अपनी रण्डी बनाने के बाद रवि इतना बेशरम हो गया था की वो अपने लुंड को छुपाने की बिलकुल भी कोशिश नहीं कर रहा था

मेघा( हे भगवान ये इन्सान का लुंड है ये किसी घोड़े का

भगवान् तूने मुझे कितना भाग्य शैली बनाया

जो मुझे ऐसा भाई मिला इससे एक बार चुद कर तो इस छूट की बरसो की प्यास बुझ सकती है

माफ़ कर देना रवि अपनी दीदी को जो तेरी दीदी तेरी शराफत और न समझी का फायदा उठा रही है)

रवि- दीदी आज तबियत सही नहीं है मैं अंदर झोपडी में आराम करने जा रहा हु आप घर चली जाओ

मेघा- चल मैं भी चलती हु तेरे साथ झोपडी में और वैसे भी घर पारर मल्टी दिमाग खा गयी है अपने मायके की बाटे बता बता कर

रवि और मेघा दीदी दोनों जोड़ी के अंदर आ जाते है

झोपडी के अंदर का तापमान बहुत अधिक था और अब तक मेघा और रवि दोनों के दोनों भीग चुके थे

मेघा दीदी का ब्लाउज पूरी तरह भीग चूका था जिसकी वजह से उनके अङ्गगोर जैसे निप्पल साफ़ नजर आ रहे थे

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मेघा- हे भगवान् कितनी गर्मी है यह पारर कैसे आराम करेगा तू यह पारर

रवि सिर्फ एक धोती में खड़ा था

रवि- दीदी जितने कम् कायदे रहेंगे उतनी hi कम् गर्मी लगेगी

मेघा- अच्छा तू इस खत पारर सियेगा तो तेरी ये मोती दीदी खा सोयेगी

रवि- दीदी आप भी आज जाओ खट्ट पारर

मेघा- तेरी ये कमजोर खत तेरी दीदी का वजन संभाल पायेगी क्या

रवि- संभाल लेगी दीदी आप आओ तो सही और अगर टूट गयी तो मैं आपका पूरा वजन संभाल लूंगा

मेघा- अच्छा तो तू इतना बड़ा हो गया की अपनी दीदी का वजन संभाल लेगा

रवि- पहले आओ तो दीदी

रवि अब तक्क लेत चूका था मेघा दीदी भी अपनी सदी को खोल देती है और ब्लाउज एयर पेटीकोट में रवि के सामने खड़ी हो जाती है

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मेघा दीदी के गदराये बदन की बनावट देख कर रवि अंदर hi अंदर पागल सा हुआ जा रहा था उसका लुंड मेघा दीदी के अंदर जाना कहता था कहे वो किसी भी रस्ते से जाये

मेघा - देखना कहि ये खत न टूट जाये

इतना ब्लोटे हुए मेघा दीदी रवि के लुंड के पास बैठ जाती है

और अब रवि का लुंड सीधा मेघा दीदी कमर पारर टकरा रहा था उसका लुंड किसी लोहे की रोड के समान खड़ा था जोकि मेघा दीदी की कमर खोदने को तैयार था

मेघा( है राम कितना विशाल और तगड़ा है इसे संभाल कर लेना होगा अंडरर अगर गलती हुई तो ये छूट कडुबारा छोड़ने लायक नहीं छोड़ेगा

और अगर एक बार ले लिया तो फिर तो जिंदगी भर कभी प्यासी नहीं रहना पड़ेगा)

मेघा दीदी भी ान तक्क रवि के बगल में लेत चुकी थी

रवि का लुंड सीधा मेघा दीदी की चर्बीदार कमर में घुसा पड़ा था जो बार बार झटके मार रहा था

हर झटके को मेघा दीदी महसूस कार्र्टी और अंदर तक्क सिहर जाती

मेघा जानती थी की ये स्वाभाविक है इस लिए उन्हें रवि पारर कोई शक़्क़क़ नहीं था

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लेटने की वजह से मेघा दीदी की चूचिया और भी ज्यादा बहार को आ गयी थी

मेघा- कितनी गर्मी है रे यह पूरी की पूरी भीग गयी ऊपर से निचे तक्क

रवि- दीदी यह कपडे पेहेन कर नहीं सो सकती इसलिए मेने भी उतर रखे है

मेघा- है राम तो तू क्या छठा है मैं तेरे सामने hi नंगी सोउ

रवि- तो इसमें क्या हुआ दीदी और वैसे भी मैं तो अआप्का छोटा भाई हु मेरे देखने से क्या होगा

मेघा- कितना भोला है रे तू

एक काम कर तू पहले दरवाजा बंद करदे कहि कोई आ गया तो क्या सोचेगा मेरी जैसी घोड़ी अपने छोटे भाई के साथ चिपकी पड़ी है वो भी नंगी

रवि तुरंत hi दरवाजे को अंदर से बंद कर देता है

मेघा दीदी खत पर बैठी बैठी hi अपने ब्लाउज के सरे हक्क खोल देती है और एक बार रवि की एयर देखती है जो उन्हें hi घुर्र रहा था

मेघा( अब तुझसे क्या सर्मना सब तो तेरा hi है )

अगले hi पल मेघा अपना ब्लाउज पूरी तरह से निकाल देती है

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मेघा दीदी की विशाल और गदराई चूचियों के सामने रेखा भी फ़ैल थी

रवि का मुह्ह खुला का खुला रेहह जाता है

रवि- दीदी जब दरवाजा बंद hi जो गया है तो पुरे के पुरे कपडे निकल देते है वैसे भी कमरे में बास हम 2 लोग hi है तो है

अभी मेघा कुछ बोलती उससे पहले hi रवि अपनी धोती को निचे गिरा देता है और एक बार फिर से मेघा दीदी की नजरो के सामने उनके छोटे भाई का लुंड लटका हुआ था

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मेघा- हाय राम तू तो पूरा नंगा हो गया बेशरम कहि का

रवि- दीदी आपके सामने कैसे श्रमण आपतो मेरी दीदी हो

अबतक रवि दुबारा अपनी जगह पारर आ चूका

उसका खड़ा लुंड नार नार मेघा दीदी की कमर पर टकरा रहा था

मेघा दीदी भी अब रवि के लुंड की पूजा करना कहती थी वो और आगे बढ़ती हुई रवि के लुंड को अपने नंगे बदन पर महसूस करना कहती थी

मेघा- ये गर्मी तो मार hi डालेगी तू तो मुये नंगा होकर सो गया अपनी दीदी को गर्मी में तड़पता छोड़ कर

रवि- दीदी मैं तो कबसे बोल रहा हु पार आप सुन्न hi नहीं रही हो

मेघा- क्या बोल रहा है

रवि- दीदी कपडे उतर दो बिलकुल गर्मी नहीं लगेगी

मेघा- तू किसी से बताएगा तो नहीं की तेरी दीदी तेरे साथ नंगी सोई थी

रवि- मैं क्यों कहूंगा किसी से मुझे क्या अपनी दीदी की इज्जत डुबनि है

रवि की समझदारी पर मेघा दीदी का दिल भर आता है

और वो एक झटके के साथ अपना पेटीकोट का नाडा खोल देती है

अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठती हुई

मेघा- खींच दे इसे और करदे कमीने अपनी दीदी को नंगा

रवि तो कबसे इस मौके के इन्तजार में बैठा था

वो तुरंत hi मेघा का पेटीकोट खींच देता है और अपनी दीदी को अपने सामने ौरी नंगी कर देता है

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मेघा दीदी शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी

वो अपने एक हाथ से अपनी छूट को धक् लेती है

मेघा- अब तू क्यों बैठा है लेत जा

रवि भी लेत जाता है इस बार मेघा दीदी की कमर पर टकरा रहा था

बस इस बार मजा दोगुना था क्योंकि बिच में कोई कपडा नहीं था

मेघा( कितना गरम है इसका लुंड लग रहा है अभी अभी किसी बहटतति में से निकला हो )

इस बार मेघा दीदी एक कदम और आगे बढ़ने का फैसला करती है और अपनी गांड को सीधा रवि की और घुमा देती है

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मेघा दीदी एक दम गोरी थी पर उनकी गांड का छेड़ इतना कला था की पहली नजर में hi रवि का उस छेद पारर डिल आ गया

मेघा- अरे तुझे क्या होगया अब आराम नहीं करेगा

इस बार रवि उसी पोजीशन में आगे बढ़ता और अपने लुंड को सीधा मेघा दीदी की छूट तक्क घुसा देता है

अपनी छूट पर अपने छोटे भाई का लुंड महसूस करके मेघा दीदी अंदर तक्क सिहर उठती और उनके मुह्ह से एक अह्ह्ह्हह निकल जाती है

मेघा - कुछ नहीं अब बहुत आराम है गर्मी से तूने सच खा था नंगी सोने में तो बिलकुल भी गर्मी नहीं लगती

मेघा रवि के हाथ को अपने पेट के ऊपर रख देती है जिसकी वजह से उसका लुंड मेघा दीदी की छूट में मुहाने तक्क आ जाता है और छूट को कुरेदने लगता है

चुदाई के इस खेल में रवि उस्ताद था

रवि- दीदी प्यास लगी है पानी पी कर आता हु

रवि उठते हुए अपनी धोती लपेट लेता है

मेघा- जल्दी आना कोई आ गया तो दिक्कत हो जाएगी

रवि- बास दीदी गया और आया

रवि बाजार आ जाता है और जोड़ी के पीछे जाता है झा वो पहले hi तेल की बोतल फेक चूका था

वो बहुत सारा सरसो का तेल अपने लुंड पर लगा देता है जिसकी वजह से उसका पूरा लुंड चमक रहा था

और तुरंत hi वो वॉयस कमरे में आ जाता है

पर इस बार वो मेघा दीदी के सामने धोती नहीं निकलता बल्कि अपनी जगह पारर आकर अपनी धोती को निकलता है

इधर मेघा दीदी को कोई अंदाजा नबी था की जिसे वो भोला भला समझ रही है वो अपने लुंड पर तेल रगड़ कर आया है ताकि वो अपनी दीदी की छूट में ज्यादा से ज्यादा अंदर जा सखे

रवि अपनी जगह लेता है और अपने हाथ को मेघा दीदी के पेट के ुवार रखता हुआ जैसे hi अपनी कमर को आगे करता है उसका चिकना लुंड सरकता हुआए मेघा दीदी की मादक छूट में घुसने लगता है

रवि का सूपड़ा मेघा दीदी की छूट में ग़ुस्साआ छुका था

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मेघा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआ मर्डर गईइइइइइ

मेघा दीदी रवि के हाथ को पकड़ लेती है और दबाने लगती है

रवि भी बड़ा श्याना था वो जान चूका था की उसकी दीदी अब आप खो रही है वो अपने हाथ से मेघा दीदी का पेट सहलाने लगता है जिसकी वजह से उसकी कमर आगे पीछे होने लगती है

और खुश हद्द तक वो अपनी दीदी की चुदाई शुरू कर देता है

पर बास उसका सूपड़ा hi अंदर बहार हो रहा था और इससे आगे बढ़ने की रवि के अंदर अभी हिम्मत नहीं थी

रवि का मैं तो कर रहा था की अभी मेघा दीदी के कंधे को पकड़े और पेल दे एक झटके में अपना लुंड पर वो जैसे तैसे अपने ऊपर काबू किये हुए था

इधर मेघा दीदी की भी हालत खराब हुई जा रही थी छूट से सफेद पानी hi पानी बाजार आ रहा था जिससे रवि का लुंड पूरी तरह भीग चूका था

मेघा दीदी रवि के हाथ को पकड़ कर सीधा अपनी एक चुकी पर रख देती है और जोरसे उसका हाथ दबाए देती है

मेघा दीदी की चुकी को पकड़ कर रवि एकदम मस्त हो जाता है और हल्का सा आगे की और दबाव बनता है जिसकी वजह से उसला एक तिहाई लुंड मेघा दीदी की छूट में घुसस्स जाता है

मेघा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

रवि- क्या हुआ दीदी

मेघा दीदी कुछ नहीं बोलती बास रवि के हाथ को अपनी चुकी पारर दबाये जा रही थी

मेघा( है रामममम कितना मस्त लुंड है मैं तो कर रहा है पूरा का पूरा भर लू इसे अपनी छूट में )

मेघा दीदी छोड़ना तो कहती थी पर जल्दबाज़ी नहीं करना कहती थी उनके दिम्माग में तो यही था की ये रवि की पहली चुदाई है और कहि वो डर न जाये

मेघा भी अब अपनी कमर को हल्का हल्का रवि के लुंड पर दबा रही थी

इधर रवि का आधा लुंड बड़े आराम से मेघा दीदी की छूट के अंदर बहार हो रहा था

और अब खुद hi रवि मेघा दीदी की चुकी को हल्का हल्का मसल रहा था

करीब 1-30 घंटे तक्क ये मीठी चुदाई चलती रही

इस बिच न तो रवि कुछ बोलै एयर न hi मेघा दीदी

इस बिच मेघा दीदी 4 बार झाड़ चुकी थी और निचे बची हुई पूरी चादर भीग चुकी थी

मेघा( है राममम ये घोडा तो पानी छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है )

रवि भी पूरी तरह से मदमस्त होकर मेघा दीदी को मीठा मीठा दर्द दिए जा रहा था उसकी उसका हाथ अब भी चुकी पर था और वैसे hi हल्का हल्का आगे पीछे हो रहा था

मेघा को रवि पर अब तक्क शकक नहीं हुआ था

करीब 10 मिनट बड्ड रवि का लुंड फूलने लगता है

रवि को अब जल्दी से जल्दी झड़ना था और जोश में आकर उसने मेघा दीदी की चुकी को जोरसे थम लिए

मेघा- ahhhhhhhhhh

रवि का लुंड झटके मरता झड़ने लगता है

उसके लुंड से एक के बाद एक पिचकारी निकल रही तजि जो सीधा मेघा दीदी की गरम छूट में अंडरर तक्क जा रही थी

मेघा दीदी तो इस गरम पानी को अपनी क्यूट में महसूस करके पागल सी हो गयी थी और तुरंत hi अपनी आँखे बंद कर लेती है

करीब 5 मिंट तक्क रवि थोड़ा थोड़ा करके झड़ता रहता है और अपनी दीदी की पूरी छूट को भर देता है

मेघा आज कई दिनों बाद जी भर कर झड़ी थी और एक मस्त लुंड को अपनी छूट में घुसाए पड़ी थी

मेघा दीदी का मैं hi नहीं करे रहा था की वो उस लुंड को अपनी छूट से बाहर निकले

दोनों भाई बेहेन झड़ने के बाद भी वासी hi लेते रहते है और दोनों की आँख लग्ग जाती है ........
 
अपडेट-111

मेघा दीदी मस्त छुड़वा कर सोई हुई थी इधर रवि का आधा लुंड अब भी मेघा दीदी की छूट में hi घुसा हुआ था

लगभग 6 बजे मेघा दीदी की आँख खुलती है और उन्हें अपनी स्थिति का जैसे hi अंदाजा होता है वो अंदर तक्क सिहर जाती है क्योंकि उसके छोटे भाई का लुंड अब भी उनकी छूट में hi था

मेघा दीदी अपने हाथ को निचे ले जाती है और रवि के लुंड को छू कर उसका अहसास लेने लगती है

मेघा( मस्त कर दिया रे रवि तूने तो आज अपनी दीदी को लगता है वर्षो की प्यास बुझा दी किसीने अभी तो आधा लुंड hi गया था पूरा जिस दिन जायेगा उस दिन तो मजा hi आ जायेगा)

मेघा दीदी की छूट पूरी तरह से चिपचिपे सफ़ेद पानी से शनी हुई थी जो की दोनों भाई बहनो का hi था

मेघा दीदी का हाथ उस कामरस से पूरा भग्ग जाता है

मेघा दीदी भी खा मौका छोड़ने वाली थी वो तुरंत hi अपने हाथ को अपने मुँह तक्क लती है और अपने छोटे भाई के वीर्य को सूंघने लगती है

एक बार पहले भी मेघा दीदी रवि का वीर्य चाट चुकी थी जिसमे उन्हें बहुत मजा आया था तो आज वो मौका कैसे छोड़ देती वो अपना पूरा हाथ चाट जाती है

एक एक ऊँगली को मुँह में भर का चुस्ती है मनो उनके हाथक पर किसी ने मक्खन मलाई लगा दी हो

मेघा दीदी रवि के लुंड को अपनी छूट से बहार तो नहीं निकलना कहती थी पारर समय ज्यादा हो चूका था इसलिए वो न कहते हुए भी अपनी जगह से उठ खड़ी होती है

पककककक की आवाज के साथ रवि का लुंड बहार आ जाता है

मेघा दीदी की छूट से अब तक दोनों का कॉमर्स बह रहा था

मेघा( कमीने पहली बार में hi अपनी दीदी की चित्त बजार दी पूरी तरह )

रवि पीठ के बल लेत जाता है उसकी आँखे अभी भी बंद थी पारर शायद वो जगा हुआ था

मेघा दीदी की नजर एक बार फिरसे अपने छोटे भाई के लुंड पारर पड़ती है और उनके मुह्ह में पानी आ जाता है

मेघा( ये लुंड है या क़ुतुब मीनार बैठने का नाम hi नहीं लेता कैसे चमंक रहा है हाय रवि क्या लुंड है तेरा )

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मेघा दीदी आपको रू नहीं पायी और रवि के लुंड की और झुकती चली गयी

रवि की आँखे तो बंद थी पारर उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी मनो उसे कुछ खास मिलने वाला हो

मेघा दीदी की सांसे फूल रही थी वो अब थोड़ा और आगे बढ़ना कहती थी

मेघा दीदी सीधा रवि के लुंड के करीब आकर रुकी

उनका सर इतना करीब था की मेघा दीदी की गरम सांसे रवि के लुंड को पिघला रही थी

मेघा दीदी बड़े hi मादक ाण्डज्ज में अपनी जीभ को बहार निकलती है और सीधा रवि के सुपडे पर लगी उस बून्द को चाट लेती है जो शायद अभी अभी निकली थी

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अगले hi पल मेघा दीदी उठने लगती है फिर न जाने उनके दिमाग में क्या आता है और दुबारा से झुकती हुई सीधा रवि के लुंड को मुहहह में ले लेती है

रवि का आधे से ज्यादा लुंड मेघा दीदी के गरम मुह्ह में था

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रवि का शरीर एक झटका खता है और मेघा दीदी तुरनत hi अपना मुह्ह खली कर देती है

मेघा- अरे उठ जा रवि देख शाम हो गयी है

रवि भी तुरनत hi उठ जाता है और सीधा अपने कपडे पहनने लगता है

मेघा दीदी भी पति बैक होती हुई बहार निकल जाती है

दोनों भाई बेहेन चुपचाप घर की और निकल जाते है

मेघा दीदी आगे आगे थी और रवि पीछे पीछे अपनी दीदी का बड़ा पिछवाड़ा देखता हुआ चल रहा था

रवि के चेरे पर एक मुस्कान थी मनो उसे पता हो की आज पहली बार उसकी दीदी ने उसके लुंड की मिठास को कहा हो
 
अपडेट-112

दिन का उजाला ढल चूका था और रात की परछाई अब इस गाओं को अपने अंदर समेत रही थी

आज कई ऐसी चीज़े हुई जिसकी वजह से को लोगो की जिंदगी hi बदल गयी

जैसे की मेघा दीदी ने आज पहली बार रवि के लुंड को अपनी छूट की गहराइयो में आने का रास्ता दिखाया था

इधर दूसरी और नीलम पूरी तरह से अपने बापू से बहादकी हुई थी जो अपनी hi वासना के लिए उसका सौदा एक जानवर के साथ कर रहा था

इधर हरिया जो रेखा को छोड़ने का सपना देख रहा था

रेखा की hi बदौलत अब उसे उसकी बेटी भी छोड़ने को नहीं मिलने वाली थी

हरिया का दिमाग पूरी तरह से गरम हो रखा था उसका मैं तो कर रहा अभी रेखा के घर में उसे पूरी नंगी करके खूब चोदे और इतना चोदे की रेखा उससे रेहम की भीख मांगे पारर हरिया उसे छोड़ता hi रहे कभी गांड में तो कभी छूट में

ये सब सोच कर हरिया के चेहरे पारर एक मुस्कान आ चुकी थी

पर इतना तो आप लोग भी जानते है की हरिया के बस की बात नहीं की वो रेखा को चोदे और रेखा उससे रेहम की भीख मांगे

इधर मेघा दीदी और रवि घर की और आ चुके थे

कम्मो अपनी मस्तानी भाभी के साथ बहार hi बैठी थी

मेघा- अरे कम्मो आज बड़ी बात चल रही है तेरी भाभी के साथ

कम्मो - है दीदी भाभी बहुत अच्छी अच्छी बाटे करती है

मेघा- अच्छा जा जरा हमारे लिए चाय बना दे

कम्मो अपनी गांड मटकती हुई घर के अंदर चली जाती है

कम्मो की गांड देख कर रवि का सोया लुंड एक झटका मरता है और रवि अपनी दीदी की जाते हुए देखने लगता है

मल्टी रवि की ये हरकत पकड़ लेती है और अगले hi पल जब उसकी नजर रवि की धोती पारर जाती है तो मल्टी चौंक जाती है

क्योंकि रवि का लुंड अब तक्क थोड़ा उभर ले चूका था जोकि धोती में साफ़ नजर आ रहा था

मल्टी( हे भगवन केशव तो बता रहा था की उसका छोटा भाई बहुत शरीफ है ये कमीना तो अपनों hi दीदी की गांड पारर रोटियां सेकना कहता है)

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मल्टी( इसका उभर देख कर तो ऐसा लग रहा है की शायद इसका केशव से बड़ा होगा)

रवि भी घर के भीतर चला जाता है और मेघा दीदी और मल्टी की बात एक बार फिर से शुरू हो जाती है

रवि सीधा अपने कमरे में चला जाता है झा रेखा पहले से hi लेती हुई थी

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रवि सीधा रेखा के साथ चिपक जाता है

रेखा की आँख भी खुल जाती है

रवि- दीदी आज एक चमत्कार हुआ

रेखा अबतक उठ कर बैठ चुकी थी

क्या चमत्कार हुआ रे जो तू इतना खुस्स है आज

रवि रेखा को साडी बाटे बता देता है ओर ये नहीं बताता की उसने आज मेघा दीदी को पहली hi बार में छोड़ दिया

रेखा,- अरे वह मेरे राजा बड़ी मस्त किस्मत है तेरी सुबह अपनी एक दीदी को उसी की शैली के घर में छोड़ा और दोपहर में अपनी दूसरी दीदी के साथ दिन भर खेत में नंगा सोया रहा और तो और दीदी को लुंड भी चूसा दिया वहहह तू तो गुरु निकला री

रवि- दीदी सीखा भी तो आपसे hi हु

रेखा - तब तो आज रात तुझे इनाम मिलना चाहिए

रवि- क्या इनाम मिलेगा दीदी मुझको

रेखा -वो तो रात को hi आता चलेगा बाबू थोड़ा सब्र रखना भी सिख

तब तक्क कमरे में मेघा दीदी और मल्टी भी आ जाती है

और रवि जो अपना लुंड रेखा की गांड से चिपका कर लेता हुआ था एक अच्चानक से दूर हट जाता है और अपने लुंड को हाथ से दबाने लगता है

मेघा दीदी तो उसकी इस हरकत को नहीं देख पति पारर मल्टी की तेज नजरे सब कुछ देख लेती है

की कैसे रवि रेखा की गांड से चिपका हुआ था और दोनों को देख कर अच्चानक हट गय्या

मल्टी का तेज दिमाग गुदा भाग करना शुरू कर चूका था जब उसकी नजर रवि की धोती पारर जाती है तो उसकी सांसे फूलने लगती है

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रवि का लुंड पूरी तरह से खड़ा था और उसे वो खुद भी नहीं छुपा पा रहा था

मल्टी( हे भगवान् इसका लुंड है या गधे का लुंड कितना बड़ा दिख रहा है इसे ये अपनी दीदी की गांड में गड़ाए हुए बैठा क्या रेखा को पता नहीं लगा होगा की उसका छोटा भाई उसे किश तरिके से छूटा ये द्केहता है

पता नहीं इस घर में क्या चल रहा है पर पता करना पड़ेगा की रवि और रेखा के बिच क्या चल रहा है

बस एक बार कम्मो की शादी हरी से हो जाये फिर इस रवि को भी अपने जाल में फसा लुंगी और इस घर पर राज करूंगी हहहह)
 
अपडेट-113

सभी लोग साथ मिल कर खाना खा चुके थे

इधर रेखा पहले hi कमरे में जाकर सो जाती है ताकि मल्टी को वो अपने कमरे से दूर रख सके

मेघा- अरे मल्टी तू एक काम कर यही बहार कम्मो के साथ सजा वैसे भी कमरे में बहुत गर्मी रहती है

मल्टी- ठीक है दीदी मैं सो जाउंगी यही बहार

असल में तो मेघा दीदी भी नहीं छाती थी की उनके और रवि के बिच कोई आये

मेघा दीदी भी कमरे में घुस जाती है

रेखा- खा सोयेगी दीदी तुम्हारी नई नवेली बहु

मेघा- बाजार hi सोयेगी तुझे क्या करना चुपचाप सू हमेशा दुसरो को ऊँगली करने में लगी रहती है

रेखा( है है दीदी सुला लो मुझे जल्दी मैं भी जानती हु की आज आपको रवि का लुंड चूसने का मैं बहुत कर रहा है ये तो होना hi था आपने उसका स्वाद जो चख लिया है )

रेखा बाथरूम करबे जाती है बहार hi रवि टहल रहा था

रेखा - क्यों रे रात भर टहलता hi रहेगा

रवि- दीदी बस आता हु थोड़ी देर में

रेखा- जल्दी कमरे में चल इनाम नहीं चाहिए क्या तुझे

रेखा रवि का हाथ पकड़ती हुई सीधा कमरे में घुस जाती है और सीधा दरवाजे को अंदर से बंद कर देती है

रेखा का ये बर्ताव मल्टी को बहुत अजीब लग रहा था

पहले तो वो बहार गयी फिर अपने छोटे भाई का हाथ पकड़ती हुई तेजी से कमी में घुस गयी किसी की और देखा तक्क नहीं

मल्टी एक बार कम्मो की और देखती है की शायद उसे कुछ पता हो

पर कम्मो अनजान बनती हुई अपने कामो को ख़तम करने में लग जाती है

मल्टी ( कमाल है एक बेहेन है की अपने छोटे भाई का पूरा फायदा उठा रही है और इसे देखो बन तो ऐसे रही है जैसे इसको कुछ पता hi न हो

आज नहीं तो कल मैं सब जान hi जाउंगी फिर देखते है कौन कितना शयना बनने की ख्वाहिश करता है )

दरवाज बंद होते hi रवि अपनी जगह पारर लेत जाता है

उसकी आँखों के सामने उसकी दीदी का उठा हुआ पेट और तानी हुई चूचिया थी

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रेखा भी अपनी जगह पारर आकर बैठ जाती है

और एक नजर मेघा दीदी की और डालती हुई सीधा अपना ब्लाउज खोलने लगती है

जैसे hi मेघा दीदी की नजर रेखा पर पड़ती है वो तुरंत hi उठ कर बैठ जाती है

रेखा अब तक सरे बोटों खोल चुकी थी बस सक hi हुक बाकि था

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मेघा- अरे ये क्या कर रही है तू रेखा

रेखा- क्या दीदी कुछ भी तो नहीं

मेघा- अरे कमीनी कुछ नहीं कर रही तो अपना ये ब्लाउज क्यों निकल रही है चू

रेखा - दीदी मैंने आपको बताया था न की इतने सरे कपडे पेहेन कर मैं नहीं सो सकती

मेघा- अरे पगली तेरे और मेरे अलावा भी कोई है कमरे में कुछ तो शर्म कर

रेखा- कौन है दीदी हमारे यह कोई गैर अच्छा आप इस्सकी बात कर रही है ये तो मेरा प्यारा छोटा भाई है इससे मुझे क्या शर्माना

वैसे भी बचपन भर इसको नंगा देखा है और अगर ये अब अपनी जवान दीदी को नंगा देख लेगा तो क्या हो जायेगा

रवि मन hi मन बहुत खुश था उसे अपने इनाम का अंदाजा हो गया था

रवि( दीदी अब तो लग रहा है की वो दिन दूर नहीं जब मैं बरी बरी अपनी दोनों दीदियो को चुदुँगा वो भी इसी कमरे के अंदर एक साथ मजा आ जायेगा

एक की छूट मरूंगा और एक दीदी की गण्ड)

रेखा इतना बोलते ब्लाउज के सरे हक्क खोल देती है और एक झटके के साथ ब्लाउज को अपने शरीर से अलग कर देती है

रेखा के बड़े बड़े चुके उछलते हुए रवि की नजरो के सामने आ जाते है

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रेखा की हरकते देख कर मेघा दीदी समझ चुकी थी की उनकी तरह hi अब रेखा भी अपनी हवस पारर काबू नहीं कर पा रही है और अब उसे बास एक लुंड चाहिए उसकी प्यास बुझाने के लिए कहे वो लुंड किसी का भी हो

मेघा- सच में तू बड़ी कमीनी है रीई अपने छोटे भाई के सामने hi नंगी हो गयी

रेखा- अरे दीदी अभी नंगी खा हुई हु अभी तो मेने पेटीकोट उतरा hi नहीं है आप बोलो तो इसे भी उतर दू

मेघा- अरे अरे एक दिन में hi इस बिचारे को सब कुछ दिखा देगी क्या

मेघा दीदी को अगले hi पल अंदाजा होता है की वो जोश जोश में कुछ ज्यादा बोल गयी

मेघा की बात सुनकर रेखा अंदर hi अंदर खुश हो रही थी

इधर रवि का लुंड भी खड़ा होना शुरू हो चूका था

रवि अपनी आँखे बंद किये हुए था ताकि वो अपनी दीदियो की बात को सुन सके और वो ुए सोया हुआ समझे

मेघा- मेटा मतलब तू तो बड़ी बेशरम है री

रेखा - ठीक है दीदी अब आपने बोल दिया तो आज ब्लाउज उतरा है कल पेटीकोट उतरूंगी हहहह

मेघा- तुझे हसी आ रही है

रेखा- दीदी अब हसु नहीं तो बताओ और क्या कृ इतनी गर्मी में कायदे उतरे है उसपर भी आप गुस्सा कर रही हो

मेघा- सब समझ रही हु मैं की तू क्या कहती है

रेखा- बड़ी समझदार हो दीदी आपतो मैं तो कबसे समझने की कोशिश कर रही थी आपको

रेखा- दीदी मैं तो कहती हु की आप भी नंगी हो जाओ मेरी तरह

मेघा- मैं तेरी तरह कोई बेहराम थोड़े hi हु जो अपने छोटे भाई के सामने hi नंगी हो जाऊ

रेखा- अरे दीदी छोटा भाई hi तो है कोई दीसरा मर्द थोड़े hi है जो तुम्हे नंगा देख कर छोड़ दे.....

रेखा बोलती बोलती रुकक्क जाती है

मेघा- है है बोल क्या बोल रही थी

रेखा- दीदी वो तो बास ऐसे hi निकल गया

अब तो मेघा दीदी का भी मैं कर रहा था अपना ब्लाउज उतरने का

रेखा - दीदी मैं लो मेरी बात उतर दो अपना ब्लाउज और वासी भी किस्से सहरमाना ये रवि तो सो चूका है

मेघा दीदी एक नजर रवि पारर डालती है

मेघा- तू सही hi कह रही है इतनी गर्मी में कौन इतने कपड़े पेहेन कर सोयेगा उतर hi देती हु पर सुबह दरवाजा खोलने से पहले मुझे उठा देना

मेघा दीदी भी एक एक करके अपने ब्लाउज के सरे बोटों खोलती हुई उसे निकल कर रवि के सिरहाने रख देती है

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मेघा- अब तो खुश है न कमीनी तू अपनी तरह मुझे भी नंगा करवा दिया तूने इसके सामने hi

रवि की नजर जैसे hi अपनी दोनों दीदियो की लटकती हुई चिचियो पर पड़ती है उसका लुंड एक झटके के साथ खड़ा हो जाता है और धोती को ऊपर उठता हुआ सीधा तंत्र जाता है

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रेखा अपना थूक गटकती हुई

रेखा- दीदी इसे देख रही हो

मेघा दीदी की सांसे उस चीज़ को देख कर फुलबे लगती है......
 
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रेखा- दीदी िए देख रही हो

मेघा अपना थूक गटकते हुए - हां री मुझे भी दिख रहा है

रेखा- पारर दीदी ये खड़ा क्यों है वो भी इतनी रात को

मेघा- लगता है रवि सो गया है

रेखा - अरे दीदी वो तो सो गया पारर उसका यव जुगाड़ खड़ा क्यों है

है रामममम कितना बड़ा है दीदी इसका लूँ.........

Megha-cchup कर तू

रेखा- दीदी लगता है की ये सपने में किसकी ली रहा है वह भी खूब रगड़ रगड़ कर

रेखा की बात सुनकर मेघा दीदी कुछ सोचने लगती है और उनकी छूट पानी पानी हो जाती है

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मेघा( लगता है की ये सपने में मुझे hi देख रहा है

है राममम कितना गन्दा भाई है मेरा सपने में अपनी hi दीदी को पटक पटक कर छोड़ रहा है )

मेघा दीदी अपने मैं की hi बात सोच कर अंदर तक्क सिहर जाती है

असल में तो अब उस शाक्त लुंड को वो भी इस्तेमाल करना छाती थी

रेखा- अरे दीद खा खो गयी

मेघा दीदी का ध्यान रखा की बात से टूटता है

रेखा - दीदी आपको नहीं लगता मेरी बात सही है

मेघा- है ऋ मुझे भी लग्ग रहा है की ये जरूर गन्दा सपना देख रहा है

रेखा- दीदी सपना नहीं देख रहा ये तो अपने इस गधे जैसे लुंड से छोड़ रहा है

रेखा अपने एक हाथ से लगातार अपनी चुकी सहलाये जा रही थी

मेघा दीदी भी रेखा की ये हरकत देख लेती है

पर अब मेघा दीदी ये भी जाएं चुकी थी की जो उन्हें चाहिए वही रेखा को भी चाहिए

रेखा एक हाथ से रवि का पेट सेहला रही थी और धीरे धीरे अपने हाथ को निचे सरकते हुए रवि की झांटो तक्क पहुंच चुकी थी

मेघा बास रेखा को देख रही थी इधर रेखा भी पूरी गरम हो चुकी थी

इस वक़्त मेघा दीदी को रेखा की आँखों में सिर्फ और सिर्फ हवस hi दिख रही थी

मेघा- ये क्या कर रही है रेखा तू छोड़ दे रवि का वो नबी तो जाग जायेगा रवि

रेखा - दीदी अब इसके साथ कुछ भी करलो ये नहीं जागने वाला

रेखा रवि को जोर से हिलती है ओर रवि तस से मास्स नहीं होता

मेघा- कुछ भी करलो मतलब

रेखा - दीदी मैं इसे एक बार पकड़ लू

मेघा- तूने सुबह hi वडा किया था

रेखा - दीदी ये सपने में किसी रंडी को छोड़ रहा है और यह इसकी खुद की दीदी एक लुंड के लिए तरस रही है क्या मैं एक बहार इसे चूक कर भी नहीं देख सकती

रवि( क्या बात है रेखा दीदी आज तो लगता है मेघा दीदी के सामने hi तुम्हारी छूट में लुंड जायेगा)

मेघा भी अब बेहेस करने के मुद में नहीं थी छूट तो उसकी भी पानी पानी हुई पड़ी थी

मेघा- ठीक है पकड़ ले पर जल्दी करना

रेखा - दीदी इसकी धोती निकल देती हु तब इसके जागने का चांस काम रहेगा

मेघा दीदी अभी कुछ बोलती उससे पहले hi रेखा धोती को खींच कर रवि के शरीर से अलग कर देती है

और दोनों दीदियो की आँखों के सामने रवि का दहाड़ता हुआ लुंड झटके खाने लगता है

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रेखा- देख रही हो दीदी घोड़े का भी लुंड इतना बड़ा नहीं होता होगा

मेघा दीदी भी अब उस लुंड में खो चुकी थी

रेखा अपने हाथो पारर थुकि हुई हाथ को सीधा रवि के लुंड पर रख देती है

और अपने गरम थूक से अपने छोटे भाई के पुरे लुंड को नेहला देती है

मेघा दीदी रेखा की इस हरकत को देख कर अपनी टैंगो को थोड़ा खोल सा देती है

रेखा मेघा दीदी की हर्र हरकट देख रही थी

रेखा- कसम से दीदी लग रहा है लुंड नहीं कोई लोहे की रोड पकड़ी है

एक बार छू कर देख लो

मेघा दीदी रेखा की बात सुनते hi आगे को आती है पर हाथ को उठाते उठाते रोक देती है

मेघा- ये गलत नहीं होगा क्या रेखा हम अपने भाई का फायदा उठा रहे है

रेखा- अरे दीदी कोई फ़ायदा नहीं उठा रहे ौड भूल गयी क्या घर में सब एक दूसरे का ख्याल रखते है

अगले hi पल मेघा दीदी अपने हाथ को तेजी के साथ रवि के लुंड से सताए देती है

दोनों दीदियो का हाथ एक साथ रवि के लुंड पर चल रहा था

रवि की तो मानक चंडी hi चंडी थी उसे खूब मजा आ रहा था और मन hi मन वो रेखा दीदी के दिमाग की तारीफी किये जा रहा था

मेघा - ये तो सच में बड़ा तगड़ा है रे रेखा

रेखा - दीदी केरे छोटे भाई का लुंड है तगड़ा तो होगा hi हाहाहाहा

रेखा की बात सुन्कररर मेघा दीदी को भी हसी आ जाती है

अगले hi पल रेखा उठ जाती है और अपने पेटीकोट के नदी को पकड़ती हुई एक झटके में खोल देती है

और मेघा दीदी की नजर जब तक उसपर पड़ती वो पूरी की पूरी नंगी हो चुकी थी

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मेघा- अरे तू तो बिलकुल hi बेहराम हो गयी है पूरी की पूरी नंगी हो गयी

रेखा - दीदी जब अपने छोटे भाई के लुंड को सहलाना hi है तो पूरी बेशरम होकर hi सेहलाऊंगी

मैं तो बोलती हु आप भी खोल दो इसे वैसे भी इस कमरे में हमारी इजात का रखवाला hi लेता है उससे क्या बचाओगी दीदी

मेघा सब समझ रही थी की रेखा घुमा घुमा कर चुदाई की hi बाटे कर रही है

मेघा- तू मुख्य मैट पढ़ा और जल्दी कर और इसकी धोती लपेट दे

रेखा - दीदी अपना हाथ तो हटाओ

मेघा दीदी तुरंत hi अपना हाथ रवि के लुंड से हटती है

मनो वो हाथ को जमा कर भूल गयी थी

रेखा फिर से अपने हाथ पर बहुत सारा रहुक्ति है और उस सरे थूक को रवि के लुंड पर मसल मसल कर लगाने लगती है

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अगले hi पल रेखा अपनी टंगे खोलती हुक अपनी फ़टी हुई छूट को मेघा दीदी की नजरो के सामने ला देती है

मेघा दीदी तो हैरान थी की अब रेखा नंबिना उनसे पूछे hi सबब कर रही है

मेघा( इसे हलकी सी दबिल और दी तो अभी छुड़वाने लग जाएगी रवि से)

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इसकी छूट देख कर तो लगता है की कोई इसे दिन रात छोड़ता होगा

रेखा अपने यह हाथ से अपनी छूट रगड़ रही थी और दूसरे हाथ से रवि का लुंड मुठिया रही थी

रेखा देखो न दीदी पूरी की पूरी छूट गीली हो गयी इसका लुंड पकड़ते hi पता नहीं अगर ये कभी मेरे अंदर गया तो क्या होगा मेरा

मेघा- ज्यादा सपने मैट देख और जल्दी कार्र

सोना भी है

रेखा- अआप सो जाओ दीदी जब्ब मेरा हो जायेगा तो मैं भी सो जाउंगी

मेघा- अच्छा ग मैं सो जाऊ और तुझे जागने दू ताकि तू रात भर अपने सोते हुए भाई के लुंड पारर कढ़ी रहे

रेखा- दीदी इरादा तो यही है मेरा भी

मेघा- हट बदमाश चल तू जा अब सोऊ

रेखा - अरे दीदी काम से कम् मेरी छूट से पानी तो निकल जाने दो

मेघा दीदी रेखा का हाथ झटक देती है और तुरंत hi रवि के लुंड पर धोती को दाल देती है

मेघा दीदी थोड़े गुस्से में रेखा को सोने के लिए बोलती है

क्योंकि वो समझ चुकी थी की अगर थोड़ा गुस्सा न किया तो रेखा आज hi चढाई भी करवा लेगी

पर मेघा दीदी अपने जवान होते भाई के ौरे मजी लेना कहती थी

मेघा दीदी को गरम होता देख रेखा ठंडी पद गयी और वैसे hi नंगी अपनी गांड रवि की और घुमा कर सो गयी

मेघा दीदी की नजरे अब भी धोती के उस उभर पर hi थी

इन सब के बिच रवि बिचारा बुरा फसा हुआ था

उसका माल निकलते निक्लत्ते रह गया ....
 
अपडेट -115

सुबह मेघा दीदी जल्दी hi उठ जाती है और एक नजर रवि के लुंड पारर डालती है जो अभी भी खड़ा था

मेघा( इस लड़के का लुंड तो हर्र वक्त्त सलामी दिए रहता है इसे जल्दी से पूरा छूट में लेना पड़ेगा अब सब्र नहीं होता)

मेघा दीदी रेखा को भी उठा देती है

और दोनों बहने पुरे कपडे पेहेन कर रूम से बहार निकल जाती है

मेघा और रेखा आज साथ में hi संडास करने गयी थी

इधर कम्मो बहार लगे हेण्डपम्प पर कपडे धो रही थी और मल्टी अभी तक आंगन में बैठी हुई थी

जैसे hi मेघा और रेखा कमरे से निकलते है

मल्टी तुरंत hi कमरे के अंडरर घुस जाती है

और जैसे hi उसकी नजर रवि के विकराल लुंड पारर पड़ती है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

मल्टी( हे भगवान् इस बच्चे का लुंड कितना बड़ा है इसके सामने तो इसके भाई के लुंड की कोई गिनती hi नहीं )

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मल्टी उस उभर कक देख कर मनो अपने मैं में hi उससे छुड़वा रही थी

मल्टी( है राम क्या लौड़ा है कसम से एक बार इसे अपनी छूट में लेलु तो मजा आ जाई)

मल्टी( पर ये क्या इसकी धोती पूरी तरह खुली हुई है और सिर्फ ऊपर से hi इसका लुंड ढका हुआ है कहि ये रात को अपनी दोनों दीदियो को छोड़ता तो नहीं वो भी एक साथ

नहीं नहीं मेघा दीदी तो बहुत शरीफ है

पर जो भी हो पता करना पड़ेगा और जल्दी से जल्दी इसे अपनी छूट का रास्ता भी दिखाना पड़ेगा)

मल्टी कमरे से बहार आकर दुबारा से चारपाई पर बैठ जाती है

उसके कामुक चेहरे पारर एक जटिल मुकाएं थी मनो उसे कुछ खास मिला हो

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अब तक रेखा और मेघा दीदी भी संडास करके आ चुके थे

मल्टी की नजरे रेखा से मिलती है और इस बार मल्टी बस मुस्कुराये जा रही थी जैसे की वो रेखा का कोई राज जान गयी है

रेखा( अब इस साली रंडी को क्या हो गया डाट फाडे जा रही है तब से )

तभी रेखा का माथा ठनकता है और वो तेजी के साथ कमरे की और भगति है

रवि अब तक उसी अवस्था में सोया हुआ था

उसका लुंड जो का त्यों खड़ा था

रेखा अपना सर पकड़ लेती है

रेखा( हे भगवान् कहि उस चुड़ैल ने इसका लुंड तो नहीं देख लिए )

रेखा जैसे hi बहार आती है उसकी नजर मल्टी से दुबारा से मिलती है

और इस बार मल्टी और भी ज्यादा भाव में मुस्कुरा रही थी

मल्टी( स्बरर कर रेखा रानी तेरी सामने hi तेरे छोटे भाई से छोडूंगी और तू बास देखती रहेगी बस सही टाइम आने का इन्तजार कररर)

मल्टी के मैं में अब बास यही चल रहा था की वो अपने गदराये बदन से रवि को पूरी तरह अपनी और आकर्षित कर लेगी और उसके बाद इस घर की रानी बन जाएगी

फिर क्या रेखा और क्या मेघा सब उसके गुलाम

रेखा ( हास तो ऐसे रही है जैसे कोई खूब गहरा राज जाएं गयी हो किसी दिन इसके सामने hi रवि से छुड़वा लुंगी फिर इस साली कुटिया का मुह्ह देखने लायक होगा)

अब रेखा भी मुस्कुरा रही थी

कुल मिलकर अब देखना ये था की रेखा इस खेल को अपनी मर्ज़ी से चला पति है या मल्टी रेखा के खिलाडी को hi अपनी टीम में लेलेती है.......
 
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