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अपडेट-150
इधर रामलाल अपनी बेटी को लेकर घर की और निकल पड़ा था
रामलाल के घर से निकलने से पहले hi रवि गुस्से में खेतो की और निकल गया था
कहि न कहि रेखा समझ गयी थी की ाकाहिर उसके छोटे भाई का मदद क्यों खराब है
रेखा अब रवि से और दुर्र नहीं रहना कहती थी
वो तो खुद hi कहती थी की उसके और रवि के बिच में कोई बहार वाला न आये
कहि न कहि मल्टी के यु चले जाने से सबसे ज्यादा खुश मल्टी hi थी
उसकी खुसी उसके चेहरे से साफ़ झलक रही थी
रेखा भी जल्द hi खाने की पोटली उठा कर खेतो की तरफ चल देती है
रेखा जानती थी की अपने प्यारे भाई का मुद कैसे सही करना है
खेतो में पहुंच क्र रेखा को रवि कहि दिखाई नहीं पड़ता जब वो झोपडी में पहुँचती है तो उसे उसका भाई अंदर hi लेता हुआ दिखाई देता है
मनो रवि खूब गहरी सोच में पड़ा हुआ था
आखिर उसका दाव जो उल्टा पड़ गया था
रेखा अपनी गांड मटकती हुई उसके करीब पहुँचती है और खाने को साइड रखती हुई वो भी खत पर लेट जाती है
रवि पीछे पललट कर देखता है और दुबारा से अपना मुह्ह आगे की और घुमा लेता है बिना कुछ बोले
रेखा- क्या हुआ बाबू तू मुझसे भी नाराज्ज है क्या
रवि- दीदी अभी मेरा मदद ठीक नहीं है तुम जाओ
रेखा- अच्छा जी तेरा मदद भी खराब होता है क्या
इतना बोलते हुए रेखा अपना एक हाथ आगे ले जाती हुई अपने छोटे भाई की छाती को सहलाने लगती है
रवि तुरंत hi रेखा का हाथ पकड़ लेता है और उसे अपने ऊपर से हटाने लगता है
रेखा- अच्छा तो वो रंडी अपने बापू के साथ चली गयी इसके लिए तेरा मदद खराब है क्या
रेखा की बात तो सही थी पर रवि कैसे बताता की वो हार गया
रवि- दीदी आप जाओ बाद में बात करेंगे
रेखा- मैं सब जानती हु तू उस रंडी को नहीं रगड़ पाया तुझसे पहले hi उसका बाप उसे ले गया अब पता नहीं वो तेरे हाथ लगेगी या नहीं
बात करते हुए रेखा दुबारा से अपना हाथ रवि की छाती पारर रख देती है और धीरे धीरे अपने छोटे भाई की छाती को सहलाने लगती है
इस बार रवि कुछ नहीं बोलता
रेखा- अच्छा चल बता तेरा मदद सही कैसे होगा
रवि- दीदी छोड़ो ना बाद में बात करेंगे मैं खाना खा लूंगा आप जाओ
रेखा- अब तो मैं अपने प्यारे भाई का मुद सही करके hi यह से जाउंगी
इतना बोलते हुए रेखा इस बार अपने हाथ को सीधा रवि को धोती के ऊपर रख देती है और अपने भाई के अधखड़े लुंड को मजबूती से पकड़ लेती है
रेखा- चल बता कैसे तेरा मदद सही होगा अपनी दीदी की छूट छोड़ के या गांड मार के
कहि यु मेरा मुह्ह तो नहीं छोड़ना कहता
रेखा काफी मजबूती के साथ रवि के लुंड को मसल रही थी मनो वो उसे उसकी असली औक़ात में आने पारर मजबूर कर रही थी
रवि- अह्ह्ह दीदी क्या कर रही हो
रेखा- अपने छोटे भाई का लुंड तैयार कर रही हु ताकि इससे अपनी प्यास बुझा सखु
रेखा अपने होठो को रवि के कान के पास ले जाती है और अपनी गरम सांसो से अपने छोटे भाई को अहसास करने लगती है की उसकी दीदी कितनी गरम हो चुकी है
रेखा- वैसे तू एक दम पागल है जरा सोच कर देख तो उसे कमीनी के जाने से तेरा hi काम आसान हो गया
रवि को रेखा की बात कुछ अटपटी सी लगती है
रवि- काम आसान हो गया मतलब दीदी
रेखा- अरे मेरे बुद्धू भाई तू अब अपनी दीदियो का शिकार कर सकता है
रवि- अच्छा
इस बार रवि भी पलट जाता है
और रेखा की और मुह्ह घुमा लेता है
रवि- शिकार कर सकता हु मतलब दीदी
रेखा- अरे मेरे छोड़ू राजा सोच जरा जब घर में कोई बहार वाला hi नहीं रहेगा तो सिर्फ और सिर्फ तेरा कब्ज़ा होगा घर पारर भी और तेरी दीदियो पर भी
रवि अब रेखा की बायत को गंभीरता से सुन्न रहा था
रवि- दीदी राज तो वैसे भी है मेरा
रेखा- हां पारर सिर्फ मुझह पर सोच जब तुझसे मेघा दीदी भी खुल कर अपने सरे छेद छुडवाएंगी तो कितना मजा आएगा
रवि- मेघा दीदी तो लगभग लगभग राजी हो hi गयी है
रेखा- तू बस मेरी बाटे मैं और मैं आज रात को hi तेरे सामने मेघा दीदी को परोस दूंगी फिर नोच लेना अपनी बड़ी दीदी के गदराये बदन को
दोनों भाई बेहेन हसने लगते है
रवि- सच में दीदी बताओ न क्या करने वाली हो आप रात को
झा पहले रवि गुमसुम सा था वही अब वो रेखा की बातो में बड़ी रूचि ले रहा था
रेखा एक माहिर खिलाडी थी उसे पता था की रवि को क्या चाहिए और उसने उससे वही वडा किया
रेखा- वो तो अब तुझे रात को hi पता छोड़ेगा
तेल लगा कर तैयार कर ले अपने इस मुसल को रात को तुझे एक साथ 2-2 दीदियो को संभालना है
रवि- दीदी तुम 2 की बात कर रही हो मैं तो एक साथ आप तीनो को संभाल सकता हु
रेखा- अच्छा बीटा अब मुझसे hi दिलोगबाज़ी कर रहा है
तू देख आज रात को तुझे गेहू में घुन की तरह ना पिसा तो
रवि- हाहाहाःहाहा दीदी
रेखा- हस्स क्यों रहा है कमीने
रवि- आप क्या पिसोगी मुझे दीदी
आखिर मेरा hi लुंड तो जायेगा तुम्हारे छेड़ो में हाहाहाहा
देखना आज तुम्हारी जम्म कर गांड मरूंगा
मेघा दीदी के सामने hi
रेखा- अच्छा चल वो तो रात को hi पता चलेगा
रवि- दीदी रात को छोड़ो ना अभी तुमको छोड़ने का मैं कर रहा है
इतना बोलते हुए रवि अपने एक हाथ रेखा की चुकी पर रख देता है
रेखा भी रवि को रात के लिए तैयार कर रही थी
रेखा तुरंत hi खड़ी हो जाती है
रवि- क्या हुआ दीदी
रेखा- तू तो बोल रहा था की रात को मेरी गांड मरेगा मेघा दीदी के सामने
तो अभी क्यों मेरी लेने की फ़िराक में लगा है
रवि- दीदी अब तुमने इस जानवर को जगा दिया है तो तुम्हे इसको शांत भी तो करना पड़ेगा ना
रेखा- अब तो तुझे जो भी मिलेगा वो रात को hi मिलेगा
रवि खड़ा होता हुआ रेखा को पकड़ने की कोशिश करता है
रेखा भी खा काम थी वो तुरंत hi झोपडी के बहार भाग जाती है
रवि अपने लुंड को मसलता रह जाता है और रेखा घर की और निकल जाती है
आज रात को तो तुम दोनों का एक साथ बजा बजाऊंगा दीदी.......
इधर रामलाल अपनी बेटी को लेकर घर की और निकल पड़ा था
रामलाल के घर से निकलने से पहले hi रवि गुस्से में खेतो की और निकल गया था
कहि न कहि रेखा समझ गयी थी की ाकाहिर उसके छोटे भाई का मदद क्यों खराब है
रेखा अब रवि से और दुर्र नहीं रहना कहती थी
वो तो खुद hi कहती थी की उसके और रवि के बिच में कोई बहार वाला न आये
कहि न कहि मल्टी के यु चले जाने से सबसे ज्यादा खुश मल्टी hi थी
उसकी खुसी उसके चेहरे से साफ़ झलक रही थी
रेखा भी जल्द hi खाने की पोटली उठा कर खेतो की तरफ चल देती है
रेखा जानती थी की अपने प्यारे भाई का मुद कैसे सही करना है
खेतो में पहुंच क्र रेखा को रवि कहि दिखाई नहीं पड़ता जब वो झोपडी में पहुँचती है तो उसे उसका भाई अंदर hi लेता हुआ दिखाई देता है
मनो रवि खूब गहरी सोच में पड़ा हुआ था
आखिर उसका दाव जो उल्टा पड़ गया था
रेखा अपनी गांड मटकती हुई उसके करीब पहुँचती है और खाने को साइड रखती हुई वो भी खत पर लेट जाती है
रवि पीछे पललट कर देखता है और दुबारा से अपना मुह्ह आगे की और घुमा लेता है बिना कुछ बोले
रेखा- क्या हुआ बाबू तू मुझसे भी नाराज्ज है क्या
रवि- दीदी अभी मेरा मदद ठीक नहीं है तुम जाओ
रेखा- अच्छा जी तेरा मदद भी खराब होता है क्या
इतना बोलते हुए रेखा अपना एक हाथ आगे ले जाती हुई अपने छोटे भाई की छाती को सहलाने लगती है
रवि तुरंत hi रेखा का हाथ पकड़ लेता है और उसे अपने ऊपर से हटाने लगता है
रेखा- अच्छा तो वो रंडी अपने बापू के साथ चली गयी इसके लिए तेरा मदद खराब है क्या
रेखा की बात तो सही थी पर रवि कैसे बताता की वो हार गया
रवि- दीदी आप जाओ बाद में बात करेंगे
रेखा- मैं सब जानती हु तू उस रंडी को नहीं रगड़ पाया तुझसे पहले hi उसका बाप उसे ले गया अब पता नहीं वो तेरे हाथ लगेगी या नहीं
बात करते हुए रेखा दुबारा से अपना हाथ रवि की छाती पारर रख देती है और धीरे धीरे अपने छोटे भाई की छाती को सहलाने लगती है
इस बार रवि कुछ नहीं बोलता
रेखा- अच्छा चल बता तेरा मदद सही कैसे होगा
रवि- दीदी छोड़ो ना बाद में बात करेंगे मैं खाना खा लूंगा आप जाओ
रेखा- अब तो मैं अपने प्यारे भाई का मुद सही करके hi यह से जाउंगी
इतना बोलते हुए रेखा इस बार अपने हाथ को सीधा रवि को धोती के ऊपर रख देती है और अपने भाई के अधखड़े लुंड को मजबूती से पकड़ लेती है
रेखा- चल बता कैसे तेरा मदद सही होगा अपनी दीदी की छूट छोड़ के या गांड मार के
कहि यु मेरा मुह्ह तो नहीं छोड़ना कहता
रेखा काफी मजबूती के साथ रवि के लुंड को मसल रही थी मनो वो उसे उसकी असली औक़ात में आने पारर मजबूर कर रही थी
रवि- अह्ह्ह दीदी क्या कर रही हो
रेखा- अपने छोटे भाई का लुंड तैयार कर रही हु ताकि इससे अपनी प्यास बुझा सखु
रेखा अपने होठो को रवि के कान के पास ले जाती है और अपनी गरम सांसो से अपने छोटे भाई को अहसास करने लगती है की उसकी दीदी कितनी गरम हो चुकी है
रेखा- वैसे तू एक दम पागल है जरा सोच कर देख तो उसे कमीनी के जाने से तेरा hi काम आसान हो गया
रवि को रेखा की बात कुछ अटपटी सी लगती है
रवि- काम आसान हो गया मतलब दीदी
रेखा- अरे मेरे बुद्धू भाई तू अब अपनी दीदियो का शिकार कर सकता है
रवि- अच्छा
इस बार रवि भी पलट जाता है
और रेखा की और मुह्ह घुमा लेता है
रवि- शिकार कर सकता हु मतलब दीदी
रेखा- अरे मेरे छोड़ू राजा सोच जरा जब घर में कोई बहार वाला hi नहीं रहेगा तो सिर्फ और सिर्फ तेरा कब्ज़ा होगा घर पारर भी और तेरी दीदियो पर भी
रवि अब रेखा की बायत को गंभीरता से सुन्न रहा था
रवि- दीदी राज तो वैसे भी है मेरा
रेखा- हां पारर सिर्फ मुझह पर सोच जब तुझसे मेघा दीदी भी खुल कर अपने सरे छेद छुडवाएंगी तो कितना मजा आएगा
रवि- मेघा दीदी तो लगभग लगभग राजी हो hi गयी है
रेखा- तू बस मेरी बाटे मैं और मैं आज रात को hi तेरे सामने मेघा दीदी को परोस दूंगी फिर नोच लेना अपनी बड़ी दीदी के गदराये बदन को
दोनों भाई बेहेन हसने लगते है
रवि- सच में दीदी बताओ न क्या करने वाली हो आप रात को
झा पहले रवि गुमसुम सा था वही अब वो रेखा की बातो में बड़ी रूचि ले रहा था
रेखा एक माहिर खिलाडी थी उसे पता था की रवि को क्या चाहिए और उसने उससे वही वडा किया
रेखा- वो तो अब तुझे रात को hi पता छोड़ेगा
तेल लगा कर तैयार कर ले अपने इस मुसल को रात को तुझे एक साथ 2-2 दीदियो को संभालना है
रवि- दीदी तुम 2 की बात कर रही हो मैं तो एक साथ आप तीनो को संभाल सकता हु
रेखा- अच्छा बीटा अब मुझसे hi दिलोगबाज़ी कर रहा है
तू देख आज रात को तुझे गेहू में घुन की तरह ना पिसा तो
रवि- हाहाहाःहाहा दीदी
रेखा- हस्स क्यों रहा है कमीने
रवि- आप क्या पिसोगी मुझे दीदी
आखिर मेरा hi लुंड तो जायेगा तुम्हारे छेड़ो में हाहाहाहा
देखना आज तुम्हारी जम्म कर गांड मरूंगा
मेघा दीदी के सामने hi
रेखा- अच्छा चल वो तो रात को hi पता चलेगा
रवि- दीदी रात को छोड़ो ना अभी तुमको छोड़ने का मैं कर रहा है
इतना बोलते हुए रवि अपने एक हाथ रेखा की चुकी पर रख देता है
रेखा भी रवि को रात के लिए तैयार कर रही थी
रेखा तुरंत hi खड़ी हो जाती है
रवि- क्या हुआ दीदी
रेखा- तू तो बोल रहा था की रात को मेरी गांड मरेगा मेघा दीदी के सामने
तो अभी क्यों मेरी लेने की फ़िराक में लगा है
रवि- दीदी अब तुमने इस जानवर को जगा दिया है तो तुम्हे इसको शांत भी तो करना पड़ेगा ना
रेखा- अब तो तुझे जो भी मिलेगा वो रात को hi मिलेगा
रवि खड़ा होता हुआ रेखा को पकड़ने की कोशिश करता है
रेखा भी खा काम थी वो तुरंत hi झोपडी के बहार भाग जाती है
रवि अपने लुंड को मसलता रह जाता है और रेखा घर की और निकल जाती है
आज रात को तो तुम दोनों का एक साथ बजा बजाऊंगा दीदी.......