Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 17 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-150

इधर रामलाल अपनी बेटी को लेकर घर की और निकल पड़ा था

रामलाल के घर से निकलने से पहले hi रवि गुस्से में खेतो की और निकल गया था

कहि न कहि रेखा समझ गयी थी की ाकाहिर उसके छोटे भाई का मदद क्यों खराब है

रेखा अब रवि से और दुर्र नहीं रहना कहती थी

वो तो खुद hi कहती थी की उसके और रवि के बिच में कोई बहार वाला न आये

कहि न कहि मल्टी के यु चले जाने से सबसे ज्यादा खुश मल्टी hi थी

उसकी खुसी उसके चेहरे से साफ़ झलक रही थी

रेखा भी जल्द hi खाने की पोटली उठा कर खेतो की तरफ चल देती है

रेखा जानती थी की अपने प्यारे भाई का मुद कैसे सही करना है

खेतो में पहुंच क्र रेखा को रवि कहि दिखाई नहीं पड़ता जब वो झोपडी में पहुँचती है तो उसे उसका भाई अंदर hi लेता हुआ दिखाई देता है

मनो रवि खूब गहरी सोच में पड़ा हुआ था

आखिर उसका दाव जो उल्टा पड़ गया था

रेखा अपनी गांड मटकती हुई उसके करीब पहुँचती है और खाने को साइड रखती हुई वो भी खत पर लेट जाती है

रवि पीछे पललट कर देखता है और दुबारा से अपना मुह्ह आगे की और घुमा लेता है बिना कुछ बोले

रेखा- क्या हुआ बाबू तू मुझसे भी नाराज्ज है क्या

रवि- दीदी अभी मेरा मदद ठीक नहीं है तुम जाओ

रेखा- अच्छा जी तेरा मदद भी खराब होता है क्या

इतना बोलते हुए रेखा अपना एक हाथ आगे ले जाती हुई अपने छोटे भाई की छाती को सहलाने लगती है

रवि तुरंत hi रेखा का हाथ पकड़ लेता है और उसे अपने ऊपर से हटाने लगता है

रेखा- अच्छा तो वो रंडी अपने बापू के साथ चली गयी इसके लिए तेरा मदद खराब है क्या

रेखा की बात तो सही थी पर रवि कैसे बताता की वो हार गया

रवि- दीदी आप जाओ बाद में बात करेंगे

रेखा- मैं सब जानती हु तू उस रंडी को नहीं रगड़ पाया तुझसे पहले hi उसका बाप उसे ले गया अब पता नहीं वो तेरे हाथ लगेगी या नहीं

बात करते हुए रेखा दुबारा से अपना हाथ रवि की छाती पारर रख देती है और धीरे धीरे अपने छोटे भाई की छाती को सहलाने लगती है

इस बार रवि कुछ नहीं बोलता

रेखा- अच्छा चल बता तेरा मदद सही कैसे होगा

रवि- दीदी छोड़ो ना बाद में बात करेंगे मैं खाना खा लूंगा आप जाओ

रेखा- अब तो मैं अपने प्यारे भाई का मुद सही करके hi यह से जाउंगी

इतना बोलते हुए रेखा इस बार अपने हाथ को सीधा रवि को धोती के ऊपर रख देती है और अपने भाई के अधखड़े लुंड को मजबूती से पकड़ लेती है

रेखा- चल बता कैसे तेरा मदद सही होगा अपनी दीदी की छूट छोड़ के या गांड मार के

कहि यु मेरा मुह्ह तो नहीं छोड़ना कहता

रेखा काफी मजबूती के साथ रवि के लुंड को मसल रही थी मनो वो उसे उसकी असली औक़ात में आने पारर मजबूर कर रही थी

रवि- अह्ह्ह दीदी क्या कर रही हो

रेखा- अपने छोटे भाई का लुंड तैयार कर रही हु ताकि इससे अपनी प्यास बुझा सखु

रेखा अपने होठो को रवि के कान के पास ले जाती है और अपनी गरम सांसो से अपने छोटे भाई को अहसास करने लगती है की उसकी दीदी कितनी गरम हो चुकी है

रेखा- वैसे तू एक दम पागल है जरा सोच कर देख तो उसे कमीनी के जाने से तेरा hi काम आसान हो गया

रवि को रेखा की बात कुछ अटपटी सी लगती है

रवि- काम आसान हो गया मतलब दीदी

रेखा- अरे मेरे बुद्धू भाई तू अब अपनी दीदियो का शिकार कर सकता है

रवि- अच्छा

इस बार रवि भी पलट जाता है

और रेखा की और मुह्ह घुमा लेता है

रवि- शिकार कर सकता हु मतलब दीदी

रेखा- अरे मेरे छोड़ू राजा सोच जरा जब घर में कोई बहार वाला hi नहीं रहेगा तो सिर्फ और सिर्फ तेरा कब्ज़ा होगा घर पारर भी और तेरी दीदियो पर भी

रवि अब रेखा की बायत को गंभीरता से सुन्न रहा था

रवि- दीदी राज तो वैसे भी है मेरा

रेखा- हां पारर सिर्फ मुझह पर सोच जब तुझसे मेघा दीदी भी खुल कर अपने सरे छेद छुडवाएंगी तो कितना मजा आएगा

रवि- मेघा दीदी तो लगभग लगभग राजी हो hi गयी है

रेखा- तू बस मेरी बाटे मैं और मैं आज रात को hi तेरे सामने मेघा दीदी को परोस दूंगी फिर नोच लेना अपनी बड़ी दीदी के गदराये बदन को

दोनों भाई बेहेन हसने लगते है

रवि- सच में दीदी बताओ न क्या करने वाली हो आप रात को

झा पहले रवि गुमसुम सा था वही अब वो रेखा की बातो में बड़ी रूचि ले रहा था

रेखा एक माहिर खिलाडी थी उसे पता था की रवि को क्या चाहिए और उसने उससे वही वडा किया

रेखा- वो तो अब तुझे रात को hi पता छोड़ेगा

तेल लगा कर तैयार कर ले अपने इस मुसल को रात को तुझे एक साथ 2-2 दीदियो को संभालना है

रवि- दीदी तुम 2 की बात कर रही हो मैं तो एक साथ आप तीनो को संभाल सकता हु

रेखा- अच्छा बीटा अब मुझसे hi दिलोगबाज़ी कर रहा है

तू देख आज रात को तुझे गेहू में घुन की तरह ना पिसा तो

रवि- हाहाहाःहाहा दीदी

रेखा- हस्स क्यों रहा है कमीने

रवि- आप क्या पिसोगी मुझे दीदी

आखिर मेरा hi लुंड तो जायेगा तुम्हारे छेड़ो में हाहाहाहा

देखना आज तुम्हारी जम्म कर गांड मरूंगा

मेघा दीदी के सामने hi

रेखा- अच्छा चल वो तो रात को hi पता चलेगा

रवि- दीदी रात को छोड़ो ना अभी तुमको छोड़ने का मैं कर रहा है

इतना बोलते हुए रवि अपने एक हाथ रेखा की चुकी पर रख देता है

रेखा भी रवि को रात के लिए तैयार कर रही थी

रेखा तुरंत hi खड़ी हो जाती है

रवि- क्या हुआ दीदी

रेखा- तू तो बोल रहा था की रात को मेरी गांड मरेगा मेघा दीदी के सामने

तो अभी क्यों मेरी लेने की फ़िराक में लगा है

रवि- दीदी अब तुमने इस जानवर को जगा दिया है तो तुम्हे इसको शांत भी तो करना पड़ेगा ना

रेखा- अब तो तुझे जो भी मिलेगा वो रात को hi मिलेगा

रवि खड़ा होता हुआ रेखा को पकड़ने की कोशिश करता है

रेखा भी खा काम थी वो तुरंत hi झोपडी के बहार भाग जाती है

रवि अपने लुंड को मसलता रह जाता है और रेखा घर की और निकल जाती है

आज रात को तो तुम दोनों का एक साथ बजा बजाऊंगा दीदी.......
 
अपडेट-151

दूसरी तरफ.....

बस से उतरने के बाद रामलाल अपनी बेटी के पीछे पीछे घर की और चल पड़ा था

बस स्टॉप से लग भाग 10 मं पैदल चलना था

बस में हुई चीज़ो से रामलाल का मैं बार बार अपनी बेटी के गदराये बदन को चुने का कर रहा था

मल्टी ने अनजाने में hi सही पारर अपने बाप को पूरा गरम कर दिया था

बस रामलाल को यही बात बार बार खटक रही थी की इतने मोठे लुंड पर मल्टी 2 घंटे तक्क बैठी रही पर उसने ऐसा बिलकुल जाहिर नहीं होने दिया

आखिर मल्टी के मैं में क्या था ये तो रामलाल भी नहीं जनता था

मल्टी आगे चलती हुई चोर नजरो से अपने बापू को देख रही थी जो उसकी मटकती हुई गांड को देखते हुए hi आगे बढ़ रहा था

मल्टी अब हद्द से आगे जाना कहती थी

इस बार वो अपनी चल को थोड़ा बदल देती है और अब वो अपनी गांड को और भी ज्यादा मटका मटका कर चल रही थी

मनो वो अपने बाप को न्योता दे रही हो की आकर अपनी बेटी की गांड चाट ले

इधर रामलाल का लुंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था

उसकी खुद की बेटी उसके लुंड को लगातार झटके खाने पारर मजबूर कर रही थी

रामलाल के मैं में एक बार आता है की कहि मल्टी भी तो वही नहीं छाती जो रामलाल कहता है

पर रामलाल के अंदर छुपा अच्छा बाप उसे ये बोलकर धुत्कार देता है

की उसकी फूल सी बच्ची की सोच ऐसी नहीं हो सकती

की आपने बाप पर hi साध जाये

अभी रामलाल अपने आपको समझा hi रहा था की उसकी बेटी की सोच उसके जैसी गन्दी नहीं है तभी मल्टी कीच ऐसा करती है की रामलाल के अंदर अपनी बेटी के प्रति हवस और भी बढ़ जाती है

मल्टी अपने एक हाथ को पीछे लेजाती हुई सीधा अपनी गांड के दोनों पतों के बिच घुसा देती है और जोरसे खुजाती हुई अपनी गांड को अपने हाथ से hi मसल देती है

अपनी बेटी की इस हरकत को देख कर मनो रामलाल पागल सा हो जाता है और अपने होठो पर जीभ फेरता हुआ आगे बढ़ने लगता है

मनो उसका मैं कर रहा हो की अभी जाकर अपनी मुह्ह को अपनी बेटी की उस गहरी खायी में घुसा दे

जल्द hi दोनों बाप बेटी घर तक्क पहुंच जाते है और रस्ते में न जाने कितनी hi बार मल्टी वही हरकत दोहराती जाती है जिससे रामलाल का लुंड जो का त्यों खड़ा रहता है

घर के अंदर घुसते hi दोनों को हरी दिखाई पड़ता है जो बहार वाले कमरे में hi गुरा पड़ा था वो भी एक दम नंगा

मल्टी- हैए राममम बापू इस कुत्ते को देखो ये नहीं सुधरने वाला फिरसे पी कर पड़ा हुआ है सवार कहींका

रामलाल जनता था की. उसका बीटा अब सुधरने वाला नहीं है

वो तुरंत hi अंदर वाले कमरे में भागता है चादर लेन के लिए

तभी मल्टी के दिमाग में एक खुराफात आती है और वो झट से जमींन पर थुक्क देती है

रामलाल जैसे hi कमरे से बहार आता है

मल्टी बैठती हुई अपने hi थूक को अपने उंगलियों से उठती हुई अपनी उंगलियों पारर मसलने लगती है

रामलाल ये दृस्य देख कर वही ृक्क जाता है

मल्टी जानती थी की उसका बाप उसे hi देख रहा है

मल्टी अपने hi थुक्क को छत्त जाती है और आगे बढ़ती हुई एक बार हरी के मुरझाये हुए लुंड को पकड़ कर मसल देती है

जैसे hi मल्टी हटती है रामलाल भी आगे आ जाता है

रामलाल- क्या हुआ बेटी

मल्टी- देखो न बापू कमीने ने पूरा घर गन्दा कर रखा है

मल्टी अपने hi थूके हुए थूक की तरफ इशारा करती है

रामलाल नहीं जनता था की यह मल्टी की hi चल है

रामलाल- ये कमीना नहीं सुधरेगा हम इसकी शादी करवाने में लगे हुए है और ये हरामी पुरे घर में hi गंडपना फैला रहा है

मल्टी मन hi मन खुस्स हो जाती है

आखिर वो अपने बाप को यकीन दिलाने में कामयाब हो चुकी थी की उसका छोटा भाई मुठ मार कर सोया है और अपना वीर्य भी यही जमीन पर गिराया हुआ है

रामलाल- छोड़ बेटी तू ध्यान मैट दे ये नहीं सुधरने वाला तू एक काम कार तू हाथ मुह्ह धो ले मैं बहार से कुछ खाने को ले आता हु

मल्टी- ठीक है बापू पर इस कमीने का क्या करे

रामलाल- इसे छोड़ दे इसके हल पर hi हम दोनों. Hi खा लेंगे

मल्टी(. वैसे भी मैं जो करने आयी हु उसमे इसकी कोई जरूरत hi नहीं है बापू)

मल्टी- ठीक है बापू वैसे भी गर्मी के कारन पूरा बदन चिपचिपा रहा है

आगे बढ़ती हुई मल्टी दुबारा से अपनी गांड के बीचो बिच हाथ दाल कर खुजाने लगती है

मनो वो अपने बाप को बताना कहह रही हो की गर्मी से उसकी पूरी गांड भीग कर चिपचिपाने लगी है

रामलाल खड़ा खड़ा मल्टी को बाथरूम में जाता हुआ देख कर अपना लुंड मसल देता है

रामलाल ( बेटी तू एक बार अपने इस बुड्ढे बाप को इशारा तो दे कसम से चाट चाट कर तेरी गांड के बिच की इस चिपचिपाहट को साफ़ कर दूंगा)

रामलाल बहार निकल जाता है और कुछ देर बाद कुछ खाने को लेकर वापस घर आता है

इस बार रामलाल जब अपनी बेटी का रूप देखता है तो मनो उसके पेअर hi जाम हो जाते है

मल्टी ने एक पेटीकोट डाला हुआ था और एक पुराण सा ब्लाउज

और सबसे दिलचसप बात तो यह थी की उसकी बेटी ने आज कोई भी ब्रा नहीं पहनी थी

मल्टी के मोठे मोठे निप्पल रामलाल को साफ़ नजर आ रहे थे

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अपनी बेटी का ये कामुक रूप देख कर रामलाल अपने आप पर जैसे तैसे काबू करता है और घर में घुसता हुआ अंदर से बंद कर देता है

दोनों बाप बेटी साथ में खाना कहते है

खाना कहते वक़्त भी रामलाल बार बार चोर नजरो से अपनी बेटी के जोबन को घुर्र रहा था

अपने बापू की हालत देख कर मल्टी अंडरर hi अंडरर बहुत खुस्स थी

पर रामलाल के मैं में एक बात बार बार खटक रही थी की आखिर आज उसकी बेटी ने ब्रा क्यों नहीं पहनी क्योंकि झा तक रामलाल को याद था उसकी बेटी हर्र समय ब्रा पहना करती रही कहे दिन हो या रात

खैर जल्दी hi दोनों बाप बेटी खाना खा लेते है

रामलाल- बेटी तू एक काम कर अंदर जाकर सो जा थक्क गयी होगी तू

मल्टी- और आप खा सोयेंगे

रामलाल- मैं यही बहार सो जाऊंगा बेटी मेरा क्या है

मल्टी- अरे बापू ये कमीना अभी भी नशे में है पता नहीं अभी और क्या क्या करेगा एक काम करो आप भी मेरे साथ अंदर hi सो जाओ

रामलाल- तेरे साथ मतलब तेरे पास

मल्टी- क्यों अपनी बेटी के साथ मतलब पास सोने में शर्म आती है क्या आपको

मल्टी तो अब अपने बाप को खुल्ला न्योता दे रही थी तो रामलाल कैसे मना करता

रामलाल- मुझे क्यों शर्म आएगी बेटी तेरे साथ सोने में ाअखिर बेटी है तू मेरी

मल्टी- तो चलो आज अपनी बेटी के साथ hi रात गुजार लो बापू मतलब साथ सो जाओ

मल्टी की बातो में डबल मीनिंग साफ़ पता चल रहा था जिसका असर सीधा रामलाल के लुंड पर हो रहा था

रामलाल- चल तू एक काम कर तू अबदार चल मैं पेशाब करके आता हु

मल्टी एक नजर रामलाल की धोती पर डालती है और फिर पलट कर अपनी गांड मटकती हुई अंडरर चली जाती है

पर इस बार जब मल्टी ने रामलाल के लुंड की और देखा था तो रामलाल को अपनी बेटी की नजरो में कुछ और hi नजर आ रहा था और उसकी बाटे भी आज रामलाल को उकसा रही थी की वो अपनी बेटी के साथ साडी हाडे पारर कर दे

रामलाल बाथरूम में जाकर अपनी धोती खोल कर अंडरवियर उतरत देता है

उसका कला लुंड फनफनाता हुआ बहार आ जाता है

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रामलाल अपने लुंड को पकड़ कर मुठियाने लगता है वो सिर्फ और सिर्फ मल्टी के बारे में hi सोच रहा था और अपने लुंड को जोरो से हिला रहा था वो जनता था की मल्टी के करीब रहते हुए इस लुंड को काबू में करना मुश्किल है न जाने उसकी बेटी आगे क्या करने वाली थी

जल्दी hi रामलाल अपना वीर्य गिरा देता है और कमरे के अंदर पहुंच जाता है

अंदर पहुंच कर रामलाल जो देखता है उसपर एक पल को यकीन भी नहीं कर पता

मल्टी ने सर्फ एक चटाई बिछाई थी जो काफी छोटी थी

रामलाल( आज तो फिरसे मजा आने वाला है तुझे रामलाल)

रामलाल- बेटी मेरा बिस्तर नहीं लगाया तूने

मल्टी- लगाया तो है बापू

रामलाल- मतलब आज भी हम दोनों को इस छोटे से बिस्तरर पर एडजस्ट करने सोना पड़ेगा

मल्टी हस्ती हुई रामलाल की और देखती है

मनो उसकी उस कामुक मुस्कान में hi हां थी

रामलाल बिस्तर की और बढ़ता है

मल्टी- बापू अंडरर से दरवाजा बंद कार्डो

रामलाल- बेटी ये कुत्ता उठेगा तो पता नहीं चलेगा

मल्टी- उठने दो बापू उसे वैसे भी आज की रात उसका कोई काम नहीं है

आज की रात मैं सिर्फ अपने बापू के साथ बिताना कहती हु

इस बात ने रामलाल के सरे डॉट क्लियर कर दिए थे

रामलाल बिना कुछ बोले पलट कर दरवाजे को अंदर से बंद कर देता है

रामलाल की खुसी का ठिकाना नहीं था क्योंकि वो जो करना कहता था उसकी बेटी उसमे उसका साथ देने के लिए पूरी तरह राजी थी.....
 
अपडेट-152

रेखा के जाने के बाद से hi रवि दिन भर झोपडी में hi पड़ा रहा न तो उसका मैं काम में लग रहा था

उसके दिमाग में बास एक hi बात चल रही थी की आखिर रेखा दीदी आज रात को अपना कौन सा खेल दिखने वाली है

सूरज ढल चूका था तो रवि अपने खेतो से निकल कर घर की और बढ़ने लगता है

अभी रबी कुछ hi दुर्र निकला था की उसे पीछे से किसी की आवाज आती है

वो पीछे पलट कर देखता है तो हरिया तेज कदमो से चलता हुआ उसकी और hi आ रहा था

हरिया- अरे बीटा रवि इतनी देर तक्क खेतो में hi था तू आज

रवि- हां काका काम कुछ ज्यादा था तुम बताओ

हरिया- अपना भी ठीक है तेरे साथ रेखा बिटिया नहीं आयी क्या आज

रेखा का नाम सुनते hi रवि हरिया को घुर्र कर देखने लगता है

हरिया - अरे अरे बीटा नाराज मैट हो मेरा वो मतलब नहीं था मैंने तो सिचा बास ऐसे hi

रवि- है है बुड्ढे मैं सब जनता हु तू दीदी के बारे में क्यों पूछ रहा है चल निकल ले अब यह से

हरिया- अरे बीटा मेरी पूरी बात तो सुन्न ले

रवि- तो जल्दी बताए न मुझे और भी काम है

हरिया- बेटे तुझे नीलम याद कर रही थी

रवि- अच्छा तो अब तेरे लुंड से तेरी बेटी की छूट को शांति नहीं मिल पति इसीलिए हर्र वक़्त मुझे ढूंढती रहती है

हरिया- क्या कृ बेटे तूने मेरी बेटी को आदत hi ऐसी लगा दी है की उसका काम अब एक लुंड से नहीं चलता

रवि- अच्छा चलो ठीक है फिर किसी दिन आता हु तेरे घर और तेरे साथ मिलकर तेरी बेटी को छोडूंगा चलो अब मैं चलता हु

हरिया - अरे अरे ृक्क बीटा पूरी बात तो सून्नन मेरी

इस बार रवि गुस्से में हरिया को दुबारा से देखता है

हरिया- बीटा गुस्सा मैट हो तेरे hi फायदे की बात बता रहा हु

रवि- अरे काका जल्दी बोलो नहीं तो दीदी गुस्सा हो जाएगी मैं लेट हो रहा हु

हरिया - वो क्या है न राजू की ड्यूटी नाईट शिफ्ट होने वाली है सोमवारर से तो नीलम कहती है की तू रात को घर आये और रात भर मेरी बेटी के साथ गुजरे

रवि- ये तो बड़ा मुश्किल है पारर मैं कोशिश करूंगा बोल देना अपनी बेटी को की अपने छेड़ो की तेल लगा कर सेवा करे मेरे आने के बाद उसे तकलीफ होने वाली है

हरिया- उसकी चिंता नहीं है बीटा मुझे वो क्या है न की मैं कहता हु की जब तू रात को घर्र आये तो रेखा को भी साथ लेकर आना

रवि हरिया की बात सुनकर आगबबूला हो जाता है और हरिया को मरने के लिए आगे बढ़ता है

रवि- सेल बुढऊ

लुंड खड़ा होता नहीं और दिन रात मेरी दीदी के सपने देखता है तू ृक्क बताता हु तुझे

हरिया - अरे बीटा पूरी बात तो सुन्न मतलब जब तू रेखा को लेकर आएगा तो तेरी बाकि दिदिया भी तुझे नहीं रोक ेंगी और तू एक साथ रात भर नीलम और रेखा का बजा बजाना

रवि- अच्छा मैं तेरी बेटी को पेलुँगा और तू क्या करेगा

हरिया - बीटा मेरा क्या है बूढ़ा हो चूका हु अब न तो शरीर में जान बची है और न hi लुंड में बास देख कर hi गुजरा कर लूंगा

रवि बिना कुछ बोले वह से निकल जाता है

हरिया( तू बस एक बार रेखा को मेरे घर ले आ

आखिरी बार उसने खुद hi मुझे अपनी छूट चूसने दी थी मुझे यकीन है की इस बार वो मेरे लुंड पर खुद बा खुद hi बैठ जाएगी हहहहह)

हरिया रेखा के गदराये जिस्म को सोच कर पागल हुआ जा रहा था
 
गुल अहमद भाई मैं आपके ख्यालो की कदर करता हु

आप मेरी स्टोरी के रेगुलर रीडर है और आपने मेरी स्टोरी को सपोर्ट भी बहुत किया

पर सच खु तो मेरे दिमाग में दूर दूर तक्क ये ख्याल नहीं है की रेखा किसी और से चूड़े

शायद आपको बुरा लगे पर मुझे यकीन है आप सिचुएशन समझ सकते है

अगर घर की औरते बहार भी छोड़ने लगेंगी तो फिर इस कहानी का कोई मतलब hi नहीं रह जायेगा

आपने टाइटल पढ़ा है न घर ुझलहते रिश्ते

बस यही एक कारन है की घर की औरतो को बाजारू नहीं बना सकते

उम्मीद है आप आगे भी मेरी कहानी को ऐसे hi सपोर्ट करते रहेंगे

धन्यवाद्.......
 
अपडेट-153

हरिया को गली देता हुआ रवि अपने घर की और निकल जाता है उसके मैं में बस यही उधेड़ बुन्न चल रही थी की आज रात को क्या होगा जब वो अपनी दोनों दीदियो को एक साथ छोड़ेगा

क्या होगा जब उसकी दोनों दिदिया एक साथ अपने गदराये बदन लेकर रवि के लुंड पर चढ़ेंगी

खैर कुछ भी हो पारर आज रवि को इतना जरूर पता था की आज रात के बाद से उसकी जिंदगी एकदम से बदल जाएगी

रवि जैसे hi घर पहुँचता है उसे बहार hi कम्मो दिख जाती है जो झुक कर हैंडपंप चला रही थी

रवि एक नजर घर के दरवाजे पर मरता है झा कोई नहीं था

रवि तुरंत hi तेजी से आगे बढ़ता हुआ हैंडपंप के पास पहुंच जाता है और कम्मो के पीछे से चिपक जाता है

कम्मो को एकदम से झटका सा लगता है की आखिर ये कौन आकर उससे चिपक गया

कम्मो हड़बड़ा कर पीछे की और देखती है

रवि- अरे अरे दीदी ड्रॉ मत मैं hi हु

कम्मो - तूने तो मुझे डरा hi दिया भाई

रवि- दीदी इसमें डरना कैसा मेरे अलावा कोई आपपको इस तरह छू सकता है क्या

कम्मो इस बात पर कुछ नहीं बोलती और दुबारा से आगे की और घूमती हुई हैंडपंप चलने लगती है

रवि- वैसे दीदी एक बात तो है

कम्मो- क्या बात है रवि

रवि- तुमको न हैंडपंप चलना बिलकुल नहीं आता

इतना बोलते हुए रवि अपने हाथ आगे की और बढ़ा कर सीधा कम्मो के हाथो पर रख देता है और पूरी तरह अपनी दीदी से चिपक जाता है

कम्मो अपने छोटे भाई के इरादे जानती थी

वो पहले hi देख चुकी थी रवि के कारनामे

रवि- दीदी देखो ऐसे चलते है हैंडपंप

इतना बोलकर रवि अपने हाथो की मदद से कम्मो के हाथो से हैंडपंप चलवाने लगता है

उसके लुंड में अब तक तनाव आना शुरू हो चूका था

जिसका अंदाजा अब तक कम्मो को भी हो चुका था

रवि जैसे जैसे हाथ ऊपर निचे करता वैसे वैसे उसकी कमर भी कम्मो की गांड ओर ऊपर निचे हो रही थी

जिसकी वजह से रवि का लुंड लगातार अपनी दीदी की गांड को घिसे जा रहा था

इस गांड रगड़े का असर अब कम्मो पर भी होने लगा था

कम्मो अपनी आँखे बंद किये बस रवि के हाथो के इशारो पर चलने को मजबूर हो चली थी मनो वो उसके हाथो की कटपुतली हो

रवि जनता था की उसकी मंजिल अब दूर नहीं है वो लगातार अपने लुंड का दबाव कम्मो की गांड पर बढ़ता hi जा रहा था

इधर कम्मो को साफ़ अहसास हो रहा था की उसके छोटे भाई का लुंड लगातार फूलता hi जा रहा है जो अब सीधा उसकी गांड की दरार में घुसने को आतुर हो चला था

रवि- देखो दीदी ऐसे चलते है हैंडपंप

इतना बोलते हुए रवि अपने हाथो को कम्मो की कमर पर जकड देता है और अपनी दीदी की कमर मसलता हुआ अब भी लगातार अपनी कमर को ऊपर निचे किये जा रहा था

फर्क बास इतना था की अब रवि के हाथ नहीं बल्कि उसका लुंड हैंडपंप चलना रहा था

कम्मो के शरीर में एक साथ हजारो चीटिया काट रही थी उसकी ुनचुइ छूट अब लगातार पानी छोड़ रही थी

उसकी छूट से निकला रस उसकी जांघो पर बेहटा हुआ निचे की और आ रहा था

रवि- क्या हुआ दीदी तुम्हारी सांसे क्यों फूल रही है

अभी बेचारी कम्मो कुछ बोल पति उससे पहले hi रवि अपने हाथो को कमर से ऊपर ले जाता हुआ सीधा अपनी कम्मो की दीदी की नरम और गुदाज चूचियों पारर रख देता है

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कम्मो के गदराये जिस्म में अच्चानक से एक झटका सा लगता है वो अपनी गांड को पूरी तरह से बहार की और निकल देती है उसकी आँखे पलट चुकी थी

इधर रवि भी समझ चूका था की उसकी तीसरी दीदी भी अब पूरी तरह से उसके काबू में आ चुकी है

रवि एक हाथ से कम्मो की चूचियों को मसलता हुआ अपना दूसरा हाथ दुबारा से निचे की और बढ़ा ने लगता है और कमम्मो की नाभि में अपनी ऊँगली घूमने लगता है

आज पहली बार था जब कम्मो का चिटा भाई खुल कर उसके जिस्म के साथ खेल रहा था मनो वो उसकी दीदी न हो बल्कि रवि का कोई खिलौना हो पर कुछ भी हो कम्मो को इस खेल में उतना hi मजा आ रहा था जितना रवि को आ रहा था और कुल मिलकर दोनों भाई बेहेन अपने शरीर को एक दूसरे के बदन पर दबाये जा रहे थे

रवि अपने होठो को कम्मो की गर्दन के पास लता हुआ एक किश करता है

और अगले hi पल अपनी जीभ से कम्मो की गर्दन चाटने लगता है

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कम्मो का तो मनो पूरा जिस्म hi हवा में तैर रहा था उसके पेअर अब उसका साथ देना छोड़ चुके थे

उसका पूरा बदन कम्प रहा था

अच्चानक से रवि कम्मो की नाभि को चिढ़ता हुआ निचे की और बढ़ता है और एक झटके में कम्मो के पेटीकोट का नाडा खोल देता है

कम्मो को अच्चानक से अहसास होता है की उसका भाई उसे पूरा नंगा करने वाला है और तुरंत hi वो अपना पेटीकोट गिरने से रोक लेती है

पर अब टककक देर हो चुकी थी रवि का हाथ अब तक पेटीकोट के अंदर घुस चूका था और कम्मो की फूल सी छूट पर ूगी हुई झाटो को सेहला रहा है

रवि- दीदी एक बात बताऊ आपको

कम्मो की हालत कुछ बोलने की तो थी नहीं तो वो बेचारी वैसे hi गर्दन हिला देती है

रवि- दीदी तुम्हारी झाटो को सहलाने में बहुत मजा आ रहा है

सच में मैंने कभी किसी औरत की झट नहीं देखि रेह्का दीदी भी हमेशा hi अपनी झट चील कर रखती है

अब रवि अपनी दीदी के साथ पूरी बेशर्मी के साथ बाटे कर रहा था

तभी उसे पीछे से रेखा की आवाज आती है और वो तुरंत hi कम्मो से अलग हो जाता है

कम्मो आपने आपको संभालती हुई तुरंत hi बैठ जाती है

रवि को इस वक़्त रेखा पर बहुत गुस्सा आ रहा था

रवि बोक्लय हुआ घर के अंदर जाने लगता है

रेखा- क्यों रे कमीने थोड़ा तो स्बरर कर ले अपने जीजा से पहले तेरा hi इरादा है क्या कम्मो के साथ सुहागरात मनाने का

रवि तुरंत hi रेखा ओर पलटवार करता है

और उसे दरवाजे के साथ लगता हुआ सीधा रेखा की गर्दन पकड़ कर दबा देता है

रवि- क्यों रे दीदी तुझे भी तो मेने hi छोड़ा था न तुझे तो कोई जीजा छोड़ने नहीं आया न

बिलकुल वैसे hi अपनी साडी दीदियो पर सिर्फ मेरा हक़्क़ है और अगर कोई अऊर मेरे दीदियो को छोड़ने के बारे में भी सोचेगा तो गर्दन उखाड़ दूंगा उसकी

रवि की पकड़ काफी मजबूत थी रेखा का पूरा चेहरा लाल हो चूका था उसकी आँखों में आंसू तक्क आ गए थे

पर आखिर रेखा भी तो रवि के इसी सवभाव की hi दीवानी थी

रेखा- तो मैं कब कह रही हु की तेरी दीदियो को कोई बाजार वाला छोड़ेगा पर क्या है न कम्मो की शादी होने वाली है और मुझे तो लगता है की वो तेरे हाथ नहीं आने वाली तुझे मुझसे hi काम चलना पड़ेगा

रवि गुस्से में रेखा की गर्दन झटकता हुआ अंदर चला जाता है

रेखा( तेरी यही आदत तो मुझे तुझ पर जान लुटाने को मजबूर कर देती है तुझे गुस्सा बड़ा जल्दी आता है मेरे भाई और यही तेरी कमजोरी है बस और रही बात तेरी दीदियो की तो तेरी तीनो दिदिया सर्फ और सिर्फ तेरी है )........
 
अपडेट-154

खाना खाने के समय रवि बार बार कम्मो की और देख रहा था

जब जब कम्मो की नजर रवि से मिलती तो वो अपनी नजरे चुराने लगती

उसे आज अपने छोटे भाई की नजरो में वो भूख साफ़ नजर आ रही थी जो उसका जिस्म खा जाना कहती थी

क्योंकि आज रवि जिस हद्द तक्क गया था पहले वो कभी इतना आगे नहीं बढ़ा था कम्मो के साथ

इधर रेखा भी सब समझ रही थी और अंदर hi अंदर हस्स भी रही थी की कैसे आज उसने अपने छोटे भाई का काम बिगड़ दिया

जब रबी की नजर हस्ती हुई रेखा पर पड़ी तो वो उसे गुस्से से देख रहा था

पर रेखा उसे आँख मरती हुई एक किश कर देती है

इधर मेघा दीदी रेखा की हरकतों को देख रही थी पर ये सब अब उसके लिए भी आम हो गया था क्योंकि मेघा पहले hi देख चुकी थी की रेखा अपने छोटे भाई के साथ भाई बेहेन के रिश्ते की साडी सीमाएं लाँघ चुकी है

जल्द hi सब खाना खा लेते है कम्मो बर्तन धोने लगती है और मेघा दीदी चुप चाप कमरे में जाकर अपनी जगह लेट जाती है

रवि घर के बहार निकल जाता है टहलने के लिए

रेखा भी उसके पीछे पीछे घर से बहार आ जाती है

रेखा- क्या हुआ मेरे प्यारे भाई अपनी इस वाली दीदी से नाराज है क्या तू

रवि- हुफ्फ मैं क्यों नाराज होंगे तुमसे दीदी

जाओ अपना काम करो मैं ठीक हु

रेखा - पर मैं तो ठीक नहीं हु मेरे राजा भाई

रवि एक नजर रेखा के बदन पर डालता है

वो पसीने से भीगी हुई थी उसके बदन पर सिर्फ एक पेटीकोट और ब्लाउज hi था

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रवि- अच्छा तो मैं क्या कृ

रेखा- तू कर तो बहुत कुछ सकता है पर इस वक़्त तो बस तू मेरे साथ पिछवाड़े चल मुझे बहुत जोर से पेशाब लगा है

रवि- खुद चली जाओ

रेखा- अच्छा मेरे भाई अब गुस्सा मत हो चल न मेरे साथ

रेखा जबरदस्ती रवि का हाथ पकड़ती हुई उसे अपने साथ ले जाती है और घर के पीछे पहुंच कर उसका हाथ छोड़ती हुई थोड़ी दुर्र पर जाकर अपना पेटीकोट उठती हुई बैठ जाती है

रवि को अपनी दीदी के मूतने की आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी पर ये सब उसके लिए कोई न्य नहीं था वो बिना ध्यान दिए चुपचाप खड़ा रहता है

पर रेखा जानती थी की रवि का मदद कैसे ठीक करना है

रेखा पेहसाब करके उठती है और उठते उठते चिल्लाने का नाटक करती है

रवि- क्या हुआ दीदी

रेखा- है राम रवि मेरे भाई देख तो तेरी दीदी की गांड में कोई कीड़ा घुस गया

रवि- दीदी इतनी टाइट छेद में कीड़ा कैसे घुस सकता है

रेखा- तूने उसे पहले जैसा टाइट छोड़ा hi खा है कमीने अब नाटक मैट कर और जल्दी से देख नहीं तो तुझसे पहले ये कीड़ा hi तेरी दीदी की गांड खा जायेगा

रेखा आगे की और झुकती हुई अपना पेटीकोट उठा कर किसी घोड़ी की तरह आगे की और झुक्क जाती है जिससे की उसकी गांड पूरी तरह से खुल कर बहार आ जाती है

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इस बार रेखा कामयाब हो जाती है

अपनी दीदी की गांड का फटा हुआ छेद देख कर रवि अपने आपको रोक नहीं पता और आगे बढ़ता हुआ सीधा निचे बैठ जाता है और बिना कुछ बोले hi अपना मुँह सीधा रेखा की गांड में घुसा देता है

रेखा के चेहरे पर अब एक मुस्कान आ चुकी थी उसका प्लान जो काम कर गया था

इधर रवि पागलो की तरह कभी रेखा की गांड को चाटने लगता तो कभी अपने होठ उसकी गांड के छेद से चिपका कर चूसने लगता मनो वो कुछ बहार निकलना कहता हो

चाँद की रौशनी और रवि के थुक्क से अब रेखा का गांड का छेद और भी ज्यादा चमक रहा था जिसे रवि बड़ी हसरत भरी नजरो से देखता और दुबारा से अपना मुह्ह उस पर भिड़ा देता

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रेखा - आह कमीने तू क्या कररहा है

रवि एक पल के लिए अपने मुह्ह को गांड से हटाता है और हफ्ता हुआ बोलता है

रवि- दीदी तुम चिंता मैट करो मैं उस कीड़े को चूस चूस कर बहार निकल लूंगा तुम्हे याद है न मैंने कैसे तुम्हारी गांड से कटा निकला था ऐसे hi चूस चूस कर

रेखा- आह थोड़ा धुरे कर कहि कुछ और न बहार आ जाये मेरे भाई

इतना बोलते हुए रेखा एक जोरदार पड़ अपने छोटे भाई के मुह्ह पर मार देती है

जिसकी गन्धः से रवि मनो पागल हो जाता है और तुरंत hi अपनी धोती को खींचता हुआ अलग कर देता है

इधर कम्मो नहीं जानती थी की रेखा और रवि दोनों बहार है

उसे भी पेशाब लगा था वो भी घर के पिछवाड़े जाने लगती है और जैसे hi उसकी नजरे सामने चल रहे सीन पारर पड़ती है उसके पाँव मनो जमीन में hi गड्ड जाते है

रवि अपना खड़ा लुंड मसलता हुआ रेखा की छूट और गांड कहते जा रहा था और रेखा पागलो की तरह अपना हाथ रवि के सेरर पे फेरे जा रही थी

रवि खड़ा होता हुआ अपना लुंड सीधा रेखा की गांड से लगा देता है

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रेखा - अह्ह्ह्ह ृक्क जा रवि यहां नहीं रुकक्क जा

रेखा जानती थी की अगर उसने अभी रवि को नहीं रोका तो वो यही खड़े खड़े hi उसकी गांड मरना शुरू कर देगा

रेखा अपना एक हाथ पीछे ले जाती हुई रवि का लुंड पकड़ लेती है और खुद भी खड़ी हो जाती है

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कम्मो तुरंत hi अपने कदम पीछे हटती हुई चुप्प जाती है

रेखा- ृक्क जा राजा आज यहां नहीं

रवि- दीदी कितने दिनन हो गए ढंग से तुमको चोदे हुए आज तो करने दू

रेखा- आज तू जाम कर अपनी इस दीदी की छूट और गांड मरना पारर यहां नहीं

रवि- फिररर खा दीदी

रेखा- अरे बुद्धू कमरे में और खा

भूल गया मैंने क्या खा था

आज तुझे अपनी दोनों दीदियो की प्यास बुझानी है

रेखा की बात सुनकर कम्मो का मुह्ह खुला का खुला रेहह जाता है

क्योंकि वो रेखा और रवि के बारे में तो जानती थी पर कभी ये नहीं सोचा था की मेघा दीदी भी रवि से चुदवाती होगी

कम्मो को अपने कानो पर यकीन hi नहीं हो रहा था

रेखा- चल तू एक काम कर तू कमरे में चल मैं बस 2 मिनट में आती हु

रवि मदद कर घर की और जाने लगता है

रेखा- और सुन्न अपने लुंड को खड़ा hi रखना

इतना बोलकर रेखा हसने लगती है

रवि घर की और बढ़ने लगता है

कम्मो अपनी जगह पर hi छुपी रहती है और रवि उसे देख भी नहीं पता

रवि घर के अंदर आते hi एक नजर दौड़ा कर कम्मो को ढूंढता है पर वो कहि नहीं दिखती और वो चुपचाप घर में चला जाता है

रवि के अंदर जाते hi कम्मो भी घर में आ जाती है

और रेखा भी पीछे पीछे घर में आ जाती है

रेखा- क्या हुआ कम्मो तू अब तक्क सोई नहीं

कम्मो- दीदी मैं सोच रही थी की मेघा दीदी के पैरो की मालिश करदु

रेखा- नहीं नहीं तू रहने दे मैं खुद hi कर दूंगी

एक काम कर तू एक कटोरी में मुझे सरसो का तेल देदे

कम्मो चुपचाप कटोरी में सरसो का तेल निकल कर रेखा को दे देती है

कम्मो( तेरी छूट और गांड तो मेरा भाई पहले hi पहाड़ चूका है दीदी अब तेल लगा कर भी क्या करेगी उसके लुंड पर )

रेखा कटोरी लेकर कमरे में चली जाती है और अंदर से दरवाजा बंद कर लेती है
 
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कमरे के अंदर पूरी तरह शांति थी

मेघा दीदी दूसरी और मुह्ह घुमा कर लेती हुई थी और रवि चुपचाप उसे hi देख रहा था

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रवि का हाथ अपने लुंड पर hi था और वो लगातार उसे मसल रहा था मेघा दीदी की छोड़ी गांड को देखते हुए

रेखा एक एक करके अपने सरे कपडे उतार देती है

और पूरी की पूरी नंगी हो जाती है और एक चुन्नी लेकर अपने गदराये जिस्म को ढकने की कोशिश करती है

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रेखा खड़े खड़े hi मेघा दीदी को आवाज लगती है

रेखा - दीदी सो गयी क्या आप

मेघा दीदी तो वैसे hi जगी हुई थी वो चुपचाप पीछे की और घूम जाती है और जैसे hi उसकी नजर रेखा पर पड़ती है उसका मुह्ह खुला का खुला रह जाता है

मेघा- ये क्या रेखा तूने अपने कपडे क्यों उतारर दिए

रेखा- दीदी मुझे ना कपडे पेहेन कर सोना अच्छा नहीं लगता लाऊ आपके पैरो में तेल लगा देती हु

इस बार रवि मेघा दीदी के घूमते hi रेखा की तरफ घूम गया था और वो भी सिर्फ एक धोती में hi था वो भी उसने धोती को सिर्फ अपने ऊपर डाला हुआ था न की उसे बंधा हुआ था

मेघा- तू एक दम पागल हो चुकी है

रेखा- इस पागलपन में कितना मजा है आप क्या जानोगी दीदी एक बार आप भी यह पागल पैन करके देखो

रेखा अपनी जगह पर बैठ जाती है और रवि को आवाज देती हुई उसे हल्का सा धक्का देकर घुमा देती है

रवि तो मनो इसी धक्के के इन्तजार में था और वो तुरंत hi पलट कर सीधा हो जाता है

लुंड तो उसका पहले से hi खड़ा था और अब उसका लुंड हवा में किसी टावर की तरह खड़ा था

मेघा दीदी की नजरे मनो अपने छोटे भाई के लिंड पर hi गड्ड जाती है

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रेखा- है रम्म यह क्या है दीदी इसका लुंड तो एक सीधा खड़ा है कौनसा सपना देख रहा है ये

मेघा दीदी अपने हलक से थूक निचे गटकते हुए बिना कुछ बोले रह जाती है

अगले hi पल रेखा उस धोती को भी खींच देती है और अब रवि भी पूरा का पूरा नंगा पड़ा था

मेघा दीदी पहले से hi रेखा और रवि के बारे में जान चुकी थी

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रेखा- दीदी कितना बड़ा और मोटा लुंड है हमारे छोटे भाई का जरूर ये सपने में किसी गदराई औरत को hi छोड़ रहा होगा

रेखा अब बिलकुल साफ़ साफ़ बोल रही थी और अब उसके अंदर शरण नाम की कोई भी चीज़ज़ नहीं बची थी

मेघा- तेरा दिमाग खराब हो गया है जो तू ऐसी बाटे कर रही है

रेखा- दीदी ऐसा लुंड देख कर तो अच्छा अच्छा का दिमाग खराब हो जाये तो मैं किश खेत की मूली हु

मेघा-( है है कमीनी कर ले और नाटक मैं सब जानती हु की तू इस घोड़े जैसे लुंड की सवारी पहले hi कर चुकी है और अब मेरे सामने सटी सावित्री होने का ढोंग कर रही है)

रेखा अपना हाथ आगे बढ़ती हुई रवि के लुंड पारर रख देती है

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रेखा- देखो दीदी इसके लुंड पर नशे कैसे चमक रही है

मैं तो करता है की इसे जिंदगी भर्र ऐसे hi पकडे रहु

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मेघा- तुझे शर्म नहीं आती अपने hi छोटे भाई का लुंड पकड़ कर ऐसी बाटे कर रही है

रेखा- दीदी तुम शर्म की बात कार्र रही हो अब तुमसे क्या छुपाना मेरा मैं तो करता है की इसे अभी अपनी छूट में घुसा लू वासी भी इसे देखने के बाद से hi मेरी छूट पानी पानी हुई जा रही है

मेघा- तेरी हवस ने

तेरा दिमाग खराब कर दिया है और अब तू अपने जिस्म की गर्मी को अपने भाई के लुंड के माध्यम से निकलना कहती है तुझे बिलकुल भी शर्म नहीं आती ऐसी बाटे करते हुए. रेखा चुप चाप अपना हाथ वापस खींच लेती है और तेल की कटोरी से अपने हाथ पर तेल लेती हुई दुबारा से रवि का लुंड थम लेती है

इस बार रेखा के हाथो में तेल था जिसका पता मेघा दीदी को भी नहीं था

रेखा एक बार उसे लुंड पर ऊपर से निचे तक मसलती हुई अपना हाथ वापस खींच लेती है

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रेखा- दीदी सच बताना इसे देखने के बाद आपका मैं नहीं करता इस चुनी का

इस बार मेघा दीदी रेखा की बात का कोई जवाब नहीं देती

पर रेखा दुबारा से अपना हाथ रवि के लुंड पर टिका देती है और इस बार वो लगातार अपने हाथो से रवि का लुंड मुठियाने लगती है

रेखा- देखो दीदी कितना मस्त लुंड है अगर हम दोनों बहने कहे तो हम दोनों की छूट की प्यासस घर्र में hi बुझा सकती है और किसी को कानो कान खबर भी नहीं होगी

रेखा की बात सुनकर मेघा दीदी के होश उड़द जाते है

क्योंकि वो रेखा के बारे में तो पहले से hi जानती थी पर आज उसकी छोटी बेहेन अपने hi छोटे भाई से छुड़वाने के लिए मेघा दीदी को न्योता दे रही थी

रेखा- दीदी सोच लो कहि देर न हो जाये और हम दोनों बहने ऐसे hi अपनी छूट की गर्मी से जल कर मर्डर जाये

इधर रवि पड़ा पड़ा बस अपनी दीदियो की बात सुन रहा था और उसका लुंड लगातार झटके मरे जा रहा था

मेघा- तू क्या समझती है मुझे पागल

रेखा- दीदी पागल तो मैं हुई जा रही हु अपने छोटे भाई का लुंड पकड़ कर शादी का सुख तो मुझे मिला नहीं काम से काम अपनी छूट का सुख तो लेलु भले hi वो लुंड मेरे छोटे भाई का hi क्यों न हो

मेघा- अच्छा तू क्या समझती है की मुझे कुछ पता नहीं है

पता नहीं कितनी hi बार तू अपनी छूट में ये लुंड ले चुकी है और मेरे सामने ये भाई बेहेन वाला नाटक कर रही है

रेखा- जब आप सब कुछ जानती hi हो तो अब शर्म किस बात की दीदी

रेखा उठ कर बैठ जाती है और अब वो अपने दोनों हाथो से रवि का लुंड पकड़ लेती है

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रेखा अब लगातार अपने हाथो से रवि का लुंड मसल रही थी

रेखा- दीदी मैं पहले से hi जानती हु की इस गधे ने मुझे तुम्हारे सामने hi छोड़ा था रात को जब मैं सो रही थी और सक्छ खु तो मुझे इसमें कोई शिकायत भी नहीं है क्योंकि आप मेरी दीदी हो और ये मेरा छोटा भाई

अब आप hi बताओ मेरे इस गदराये बदन की गर्मी को शांत करने के लिए अगर मैं गाओं के 3-4 लौंडे एक साथ अपने ऊपर चड़वॉ तो घर की बेज्जती नहीं होगी क्या और अगर उन 3-4 लुँडो की जगह मेरी प्यास इस एक लुंड से hi बुझ जाती है तो इसमें हर्ज्ज़ hi क्या है

वैसे भी जिंदगी ने हमे कौन सी खुसी दी है ान तक्क जो हम इस समाज के नियमो को मान कर उस पर चलते रहे

इतना बोलते हुए रेखा झुकने लगती है और लपक कर रवि का लुंड पर एक किश करती है और अगले hi पल उसका सूपड़ा अपने रसीले मुँह में लेलेती है

रवि को यकीन नहीं हो रहा था की आज उसका सपना पूरा होने वाला है और वो एक साथ अपनी दोनों दीदियो को छोड़ेगा

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अब तो मेघा दीदी की भी छूट पनियाने लगी थी और अब छूट की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी की वो बार बार अपने दोनों पैरो को एक दूसरे से रगड़ रही थी मनो वो बार बार अपनी छूट का पानी साफ़ कर रही हो

रेखा- दीदी आप कहे मुझे कितनी भी बुरी समझो पर सच तो ये है की मैं जब भी अपने छोटे भाई के लुंड की सवारी करती हु तो मुझे की साडी चिंताए ख़तम हो जाती है और सिर्फ ुर सिर्फ मजा अत है

रेखा अपने दातो के बिच रवि का लुंड फसा कर काट रही थी और यह हरकत मेघा दीदी को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी

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रेखा अपना सर वह से हटती है और इस बार वो मेघा दीदी के पैरों को पकड़ती हुई सहलाने लगती है

रेखा - दीदी मान जाओ मेरी बात मुझे भी पता है की आप भी तड़पती हो एक लुंड के लिए और यह एक सुनेहरा मौका है घर की बात घर में hi रहेगी हम तीनो पूरी रात मजा कर सकते है एक रात नहीं हररर रात और वो भी जिंदगी भर्र

आखिर में तो मेघा को मन्ना hi था क्योंकि वो एक बार रवि के लुंड का स्वाद साख चुकी थी जिसे वो आज तक्क नहीं भूली थी

मेघा- तो तू क्या कहती है की तेरे साथ साथ मैं भी अपने छोटे भाई से अपनी छूट मरवाऊ

रेखा- दीदी ये सिर्फ छूट और लुंड की बात नहीं है यह तो हम भाई बहनो के प्यार को एयर मजबूत करता है

सोचो जब हम आपस में hi चुदाई करेंगे तो हमारा रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत हो जायेगा फिर न हममे कोई शर्म रहेगी और न hi कोई डर रहेगा तो सिर्फ और सिर्र्फ प्यार जो ऐसे hi जिंदगी भर चलता रहेगा

इतना बोलते हुए रेखा मेघा दीदी का हाथ पकड़ कर रवि के लुंड पर रख देती है और मेघा दीदी भी इस बार बिना किसी नाटक के अपना हाथ अपने छोटे भाई के लुंड पारर टिका देती है

मेघा का हाथ अपने लुंड पर पड़ते hi मनो रवि को एक सुकून सा मिलता है और वो अंदर hi अंडरर खुस हो जाता है

मेघा- पारर अगर किसी को पता चला तो

रेखा- दीदी ये बात इसी कमरे में रहेगी और किसी को पता नहीं चलेगा अब बास तुम मजे लूटो अपनी चढ़ती जवानी के वैसे भी पता नहीं ये गदराया हुआ शरीर तुम कैसे संभालती हो मुझे तो लगता है की इतने भरी शरीर के लिए तुम्हे एक साथ 2-2 लुँडो की जरूरत पड़ेगी

मेघा- चुप कर पगली कुछ भी बोलती है तू

रेखा- चिंता मैट करो दीदी अब तक मैंने रवि को इस काबिल बना दिया है की यह अकेला hi कई बार तुम्हारा पानी निकलवा देगा

इस बार रेखा उठती हुई मेघा दीदी के पीछे आ जाती है और खुद hi उसे उठा कर बैठती हुई उसकी चूचियों को थम लेती है

मेघा- ये क्या कर रही है तू

रेखा- क्यों तुम्हारे शरीर पर क्या सिर्फ इस गधे का hi हक़्क़क़ है मैं भी तो अपनी दीदी के गदराये बदन के मजे लेलु

मेरे पास लुंड नहीं है तो क्या हुआ हाथ तो है ना

इतना बोलते हुए रेखा अपना एक हाथ निचे ले जाती हुई सीधा मेघा दीदी के पेटीकोट में घुसा देती है और जैसे hi उसके हाथ मेघा दीदी की गीली छूट पर पड़ता है मेघा को मनो एक झटका सा लगता है और वो रवि के लुंड को और टाइट पकड़ लेती है

मेघा- अह्ह्ह क्या कर रही है रेखा तू ृक्क जा मेरी बेहेन

रेखा- रुको मैट दीदी ये रुकने का समय नहीं है तुम्हारे हाथ में एक मुसल जैसा लुंड है उसके मजी लो और मुझे अपनी सेवा करने दो

इतना बोलते हुए रेखा मेघा दीदी का सर पकड़ कर रवि के लुंड पारर दबाने लगती है

मेघा दीदी किसी कटी पतंग की तरह गिरती hi जा रही थी और जब रवि का लुंड उसके गलो पर चुभता है तो उसे अहसास होता है की वो खा से खा टाक आ चुकी है

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इधर रेखा लगातार मेघा दीदी की छूट में अपनी 2 उंगलिये पेले जा रही थी और कभी कभी वो अपनी उंगली उनकी गांड के छेद ताकक ले जाती और उसे मसल कर वापस से उँगलियों को छूट के अंडरर घुसा देती

मेघा दीदी रवि के लुंड को लगातार चूमे जा रही थी उसके होठो पर लगी लिपस्टिक पूरी तरह लुंड पर लग्ग चुकी थी

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रेखा- दीदी सिर्फ चूमती hi रहोगी एक बार इसे चूस कर तो देखो कसम से तुमको मजा आ जायेगा

मेघा दीदी अपना मुह्ह खोल कर सुपडे को अंदर लेती है

और जैसे hi उसकी नजर रवि पर पड़ती है वो तुरंत hi उठ जाती है

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रेखा- अरे क्या हुआ दीदी डर क्यों गयी तुम

रेखा रवि की और देखती है

रेखा- क्यों रे कमीने डरा दिया ना तूने दिदिको

दीदी गम ड्रॉ मैट इसे भी तुमको छोड़ना है और ये कमीना पहले से hi जगा हुआ है बस सोने का नाटक कार्र रहा था

मेघा- पारर रेखा

अभी मेघा कुछ बोलती उससे पहले hi रेखा एक साथ अपनी 3 उंगलिया मेघा दीदी की छूट में पेल देती है

मेघा- अहहहजहह माआ मर्डर गयीईइ

रेखा- दीदी इतनी उम्र में भी तुम्हारी छूट तो भट्ट तिहगत है

रवि अपना हाथ आगे बढ़ता हुआ मेघा दीदी की विशाल चूचियों पर रख देता है और तुरंत hi उठ कर बैठता हुआ अपने होठ भी मेघा के होठो पर लगा देता है

सब कुछ इतना आच्चंक हुआ की मेघा को सम्भलने का मौका hi नहीं मिला और अब रेखा लगातार अपनी 3no उंगलियों से मेघा की छूट छोड़ रही थी और इधर रवि मेघा दीदी के होठो को छत्त और चूस रहा था

अच्चानक से रेखा अपने निचे वाले हाथ को हटा लेती है और उसे ऊपर लेकर देखती है जो पूरी तरह से भीग चूका था

रेखा- रवि देख तो जरा तेरी दीदी की छूट तो पानी पानी हुई पड़ी है

रवि रेखा के हाथ को देखते hi उस ओर झपट पड़ता है

मेघा की आँखों के सामने hi उसका छोटा भाई उसके छूट से निकले पानी को सेहद की तरह छत्त रहा था

रेखा - दीदी तुम्हे पता है रवि को छूट का पानी कितना पसंद है

आपने दूसरे हाथ से रेखा मेघा दीदी का मुह्ह पकड़ कर अपनी औरर घूमती है और अपनी जीभ बहार निकलती हुई उसके होठो को छत्त जाती है

रवि- जब्ब पानी इतना मस्त है तो छूट कितनी मस्त होगी दीदी तुम्हारी

अबतकक रेखा के दोनों हाथ मेघा दीदी का ब्लाउज खोलना शुरू कर चुके थे और कुछ hi पल में मेघा दीदी की दोनों चूचिया उछलती हुई बहार आ जाती है

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रवि बिना देर किये अपनी दीदी की चूचियों पर टूट पड़ता है और एक एक करके दोनों चूचियों का रससपन करने लगता है

अब मेघा दीदी इतनी गरम हो चुकी थी की वो खुद भी अपनी जभ रेखा के मुह्ह में घुसा रही थी और दोनों बहने एक दूसरे का मुह्ह चूसे जा रही थी

अच्चानक से रवि खड़ा होता है और उसका विशाल लुंड अब उसकी दोनों दीदियो के सामने था जिसे देख कर दोनों की hi आँखों में एक अलग तरह की चमक थी

रेखा- देखा दीदी पास से देखने पर तो लगता है मनो ये किसी गधे का लुंड हो

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रेखा अपने हाथ को आगे बढ़ती हुई रवि का लुंड पकड़ती है और उसे अपनी और खींचती हुई मेघा दीदी के मुह्ह के बिलकुल पास लाती है

मेघा दीदी एक बार रवि की और देखती है जो उसे hi देख रहा था और उसके चेहरे पर खुसी साफ़ झलक रही थी

अगले hi पल मेघा दीदी भी मुह्ह खोल देती है

और रबी धीरे धीरे आगे की और सकर्ता हुआ अपनी दीदी के और भी नजदीक आ जाता है

जिससे की उसका आधे से ज्यादा लुंड मेघा दीदी के मुह्ह में घुस जाता है

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रेखा पीछे से मेघा दीदी के पेटीकोट का नाडा भी खोल देती है और उसे खींच कर निकल देती है

अब तीनो भाई बेहेन एक दम नंगे थे और रवि का लुंड अब लगातार मेघा दीदी के मुह्ह में अंदर बाजार हो रहा था पारर धीरे धीरे आखिर वो उसकी सबसे बड़ी दीदी जो थी

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कभी कभी रवि जोश में आकर थोड़ा जोर लगता पर रेखा उसे तुरंत hi पीछे की और तेल देती

रवि भी आराम आराम से मेघा दीदी का मुह्ह छोड़ रहा था उसे मेघा दीदी का मुखछोडन करने में एक अलग hi मजा आ रहा था इधर पीछे से रेखा लगातार मेघा की छूट के डेन को रगड़ रही थी जिससे की मेघा दीदी का जोश भी साथ आसमान पारर था

मेघा दीदी ने एक हाथ से लुंड को पकड़ रखा था और अब जोश बढ़ने के साथ साथ उनका लुंड चूसने का तिरका भी बदलता hi जा रहा था

वो लुंड को पूरा बहार निकल कर उसे अच्छे से चाट रही थी जिसे देख आकर रेखा अबदार hi अंदर खुस्स थी की आखिर में वो दिन आ hi गया जब्ब वो कुल कर अपने छोटे भाई से छुड़वा सकती थी बिना किसी रोक टोक के

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और आखिर कार इस लुंड चूसै से. रवि का लुंड भी हार मान जाता है और उसके लुंड का ज्वालामुखी फाटत जाता है

पूरा का पूरा वीर्य मेघा दीदी के चेहरे पररर गिर्र चुका था

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कुछ मुह्ह के अंदर तो कुछ बहार

रवि थक्क कर वही बैठ जाता है

रेखा तुरंत hi मेघा दीदी का मुह्ह पकड़ती हुई अपनी और घूमती है और अपनी दीदी के चेहरे को चाटते हुए अपने होठो सीधा मेघा दीदी के होठो से लगा देती है

इस बार मेघा दीदी भी रेखा का ोुरा साथ दे रही थी

शायद मेघा दीदी अब तक्क ये समझ चुकी थी की इस खेल को जितना गंदे तरिके से खेला जाये मजा उतना hi ज्यादा आएगा

दोनों बहने इस तरह से एक दूसरे का मुह्ह चूस रही थी की रवि को साफ़ पता चल रहा था दोनों दिदिया उसके वीर्य को एक दूसरे के मुह्ह में थुककक रही है और दोनों दीदियो की यह हरकत रवि को एक अलग hi तरह का मजा दे रही थी

रेखा का एक हाथ मेघा दीदी के निप्पल को पकड़ कर मरोड़ रहस्य था तो दूसरा हाट से उनकी छूट को लगातार मसल रही थी जिसकी वजह से मेघा दीदी मनो पागल सी हो गयी थी

दोनों बहने एक दूसरे के शरीर से ऐसे चिपकी हुई थी मनो कोई साप चन्दन से चिपका हो

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रवि पड़ा पड़ा अपनी दोनों दीदियो की हरकत देख कर दुबारा से गरम हुआ जा रहा था

रेखा- क्यों दीदी मजा आया ना बोलो

मेघा इस बात का कोई जवाब नहीं देती बस रेखा की और देख कर थोड़ा सा मुस्कुरा देती है

रेखा अच्चानक से खड़ी होती है और मेघा दीदी के कंधो को पकड़ कर उन्हें निचे लिटा देती है

और आगे बढ़ती हुई उनके दोनों पैरो को पकड़ कर मोड़ते हुए हवा में झूला देती है

जिससे की मेघा दीदी की छूट एक दम से खुल कर रवि के सामने आ जाती है

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मेघा दीदी की छूट काफी बड़ी थी शायद ये उनकी उम्र की वजह से था

पर जो भी हो उनकी छूट में एक अलग hi चमक थी

छूट के लटके हुए होठो को देख कर रवि से रहा नहीं जाता और वो एक झटके में उठता हुआ अपने होठ मेघा दीदी की छूट पारर टिका देता है

मेघा दीदी के बदन में एक करंट सा लगता है

रेखा दोनों हाथो से लगातार मेघा की चूचियों को मसाले जा रहा थी

Megha-ahhhhhhh

रेखा- दीदी आज तो तुम्हे जन्नत की सैर करने का मौका मिलने वाला है

अबतक रवि की जीभ अपनी दीदी की छूट का कामर्स चाटते हुए उसके अंदर जा चुकी रही और वो लगातार अपनी जीभ से मेघा की छूट को पूरी तरह चाटते हुए उसे खाने की कोशिश कर रहा था

मेघा की हालत तब खराब होती जब्ब रवि उसके लटके हुए होठो को अपने दांतो के बिच दबा कर चबाने लगता

मेघा का बदन बार बार अकड़ रहा था उसको सांसे मनो उसके शरीर का साथ hi छोड़ चली थी

इधर रेखा एक हाथ से अपनी छूट को मसलते हुए अब अभी मेघा की एक एक निप्पल को मरोड़े जा रही थी और उसके होठ तो मनो मेघा के होठो को hi खा जाना कहते थी

करीब 10 मिनट तक रवि ऐसे hi मेघा दीदी की छूट का कामर्स पीटा रहा और अंतत में मेघा का शरीर बुरी तरह अकड़ने लगता है और अगले hi पल वो अपने छोटे भाई के मुह्ह पर मूतने लगती है

अपनी दीदी का पेशाब रवि को किसी अमृत से कम् नहीं लग रहा था

मेघा दीदी एक अलग hi अंदाज में झाड़ रही थी जिसका एक अलग hi मजा था

रवि तुरंत उठ कर बैठ जाता है और दुबारा से अपनी दीदी की छूट को देखता हुआ उसपर हाथ रख देता है

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वो बार बार मेघा की छूट के लटके हुए हिस्से को खींच रहा था बड़ी बेरहमी के साथ और अपने छोटे भाई की ये हरकत मेघा के अंदर एक अलग hi तरह की चिंगारी सुलगा रही थी

रवि उठता हुआ सीधा मेघा के सर के पास आता है झा रेखा बैठी हुई थी

और रेखा के बालो को पकड़ता हुआ उसका सर सीधा करता है और अपने होठ रेखा के होठो पारर रख देता है

मौका देख कर मेघा दीदी थोड़ा साइड होजाती है पर वो अब भी वही नंगी पड़ी थी

रबी पागलो की तरह रेखा का मुह्ह चूस रहा था

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कभी रेखा अपनी पूरी जुबान बहार निकल कर रवि को चूसने को देदेती तो कभी उसे वापस अंदर खींच लेती जिससे की रवि दुबारा से अपनी जीभ रेखा के मुँह में घुसता हुआ उसे चूसने लगता इधर अपने एक हाथ को रवि के लुंड पर टिका चुकी थी और लगातार उसका लुंड मुठिया रही थी

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रवि का लुंड अब दुबारा से पूरी तरह खड़ा हो चूका था वो बिना देर लिए खड़ा होता है और एक झटके के साथ रेखा के सर को अपने दोनों हाथो से पकड़ता हुआ अपना लुंड उसके होठो पर टिका देता है

रवि एक नजर मेघा दीदी की और डालता है जो की बड़ी हैरानी के साथ उन दोनों को hi देख रही हो

रवि मेघा की नजरो में देखता हुआ hi एक जोरडार झटका मरता है और उसका लुंड रेखा के मुह्ह को चीरता हुआ उसके गले तक्क घुस जाता है

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रवि का पूरा का पूरा लुंड रेखा के मुह्ह के अंदर रहा इधर इस जोरदार झटके की वजह से रेखा का पूरा शरीर अकड़ सा जाता है

रवि बिना कोई रेहम दिखाए रेखा के मुँह को छोड़ना शुरू कर चूका था इधर मेघा दीदी हैरानी के साथ अपने छोटे भाई की हरकतों को देख रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था की रवि अपनी hi दीदी का मुखछोडन कर रहा है वो भी इतनी बेरहमी से

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रेखा की हालत इस समय देखने लायक थी रवि लगातार झटके मरता मरता एक दम से अपना लुंड रेखा के गले तक दबा देता और एक झटके के साथ hi उसे बहार खींच लेता

जैसे hi रवि का लुंड बहार आता रेखा के मुँह से थुक्क की एक मोती धार जमीन पर गिरने लगती अभी रेखा संभाल पति उससे पहले रवि दुनारा से अपना लुंड अपनी रेखा दीदी के मुह्ह में पेल देता

करीब 5 मिंट तक ऐसे hi ताबड़तोड़ रेखा का मुँह छोड़ने के बाद रवि रेखा से अलग होकर लेत जाता है

उसका लुंड अब भी पूरी तरह रेखा की लार से सना हुआ था

इधर रेखा का सावला चेहरा पूरी तरह लाल हो चुका था और थुक्क पूरी तरह से उसके चेरे पारर सना हुआ था

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रेखा जल्द hi अपनी उखड़ती सांसो पर लबु पा लेती है और जब वो मेघा की और देखती है तो उसे हसी आ जाती है

क्योंकि मेघा मनो ये सब देखने के बाद सदमे में चली गयी थी

रेखा मेघा का हाथ पकड़ती हुई उसे हॉज में लती है

रेखा- अरे दीदी लगता है आपतो डर गयी

मेघा एक नजर रवि पर डालती है जो अब भी अपनी दोनों दीदियो को देखता हुआ अपना खड़ा लुंड सेहला रहा था

मेघा- तुझे तकलीफ नहीं हुई क्या

रेखा- दीदी तकलीफ तो हुई मगर सच खु तो इस पागलपण में एक अलग hi मजा है मुझे मजा आता है जब मेरा छोटा भाई मुझे किसो जानवर की तरह बिना किसी रेहम के छोड़ता है तो

मेघा- सच में पागल हो चुकी है तू

रेखा- दीदी एक दिन आपको भी ये पागलपन ठीक लगेगा

मेघा- नहीं नहीं ये जंगलियों वाला तरीका मुझे नहीं पसंद

रेखा- दीदी वैसे ये स्पेशल तरीका सिर्फ मेरे लिए है और मेरे अलावा इस कमीने का पागलपन कोई और झेल भी नहीं सकती

इतना बोलकर रेखा हसने लगती है और मेघा का हाथ पकड़ती हुई उसे रवि के लुंड के नजदीक ले जाती है

रवि अपने दोनों हाथो से अपनी दोनों दीदियो के सर को सेहला रहा था और इधर रेखा और मेघा रवि के लुंड को hi निहारे जा रही थी

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रेखा- देखा दीदी आपने मुझे तो ये किसी जानवर का लुंड लगता है बैठने का नाम hi नहीं लेता जितना छोड़ता है उतना hi खड़ा होता जाता है

रेखा झुक कर रवि के लुंड को चाटने लगती है

मेघा दीदी भी अपने आपको रोक नहीं पा रही थी इधर रवि बार बार मेघा दीदी के सर को अपने लुंड की तरफ hi दबा रहा था

आपने छोटे भाई के इशारो को मेघा बखूबी समझ रही थी और वो भी बिना किसी नाटक के अपने सर को झुकाती चली जाती है और अब आलम ये था की रवि की दोनों hi दिदिया बरी बरी से उस्ले लुंड को चाट रही थी

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करीब 15 से 20 मिंट तक दोनों दिदिया लगातार रवि का लुंड चाटती hi जाती है और इधर रवि दोनों दीदियो की चूचियों को मसलता hi जा रहा था

अंतत में रेखा अपने हाथो पर थुक्क लेती हुई मेघा दीदी की छूट पर मसलते हुए रवि के लुंड की जड़ तक मुट्ठी लेकजाकर उसे पकड़ लेती है जिससे की उसका लुंड और भी ज्यादा विकराल रूप लेलेता है

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रेखा- दीदी अब समय है जन्नत की सैर करने का आ जाओ...
 
अपडेट-157

रेखा अपने छोटे भाई के लुंड को अपनी मुट्ठी में पकड़े हुए थी और खुद की hi दीदी को उसकी सवारी करने को बोल रही थी

ये नजारा सच में बहुत hi मादक था

मेघा दीदी एक नजर रेखा की और देखती है और अगले hi पल रवि की और देखती है

उसे अपने भाई बेहेन की नजरो में सिर्फ और सिर्फ हवस hi दिख रही थी जिसके आगे अब मेघा भी घुटने तक चुकी थी

आखिरकार वो भी तो एक औरत hi थी जो की प्यासी थी और उस प्यास को बुझाने वाला पानी उसे सिर्फ और सिर्फ उसका छोटा भाई hi दे सकता था

मेघा अपनी जगह से उठती हुई रवि के ऊपर आ जाती है

उसे ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ती सबकुछ तो रेखा पहले hi तैयार कर चुकी थी उसने रवि के लुंड को इस तरह पकड़ा था की मेघा दीदी को सिर्फ अपनी छूट लेकर उसपर बैठना था

और मेघा करती भी यही है वो बिना देर किये अपनी किस्मत को अपना लेती है और अपनी छूट के छेद को बिलकुल लुंड के बिस्बो बिच लती हुई उसपर बैठना शुरू कर देती है

रवि का लुंड काफी मोटा था उपर से एक बार झड़ने के बाद मनो उसका सूपड़ा और भी ज्यादा फूल चूका था

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अभी सूपड़ा अंदर गया hi था की मेघा की छूट में एक अजीबब सा दर्द होता है आखिर उसके भाई का लुंड इतना मोटा जो था

मेघा- अह्ह्ह्ह कितना मोटा है रे रेखा इसका लूँ........

रेखा- दीदी एक बार इसे पूरा अंदर लेलेगी तो जिंदगी भर अपनी छूट खोले इसके आगे पीछे hi भगति फिरोगी

मेघा- तुझे क्या लगता है मैं इसका लुंड अपनी छूट में पहली बार ले रही हु

इस कमीने ने तो मुझे 3 दिन पहले hi छोड़ दिया था वो भी बिना मेरी मर्जी की

रेखा- क्या बात कर रही हो दीदी इसने तो मुझे बताया भी नहीं

रवि का लुंड अब फटने को उतारू हो चुका था उसका सूपड़ा मेघा दीदी की छूट की गर्मी को और बर्दास्त नहीं कर पा रहा था ऊपर से मेघा की छूट लगातार पानी चोदे जा रही थी जोकि रवि के लुंड को और भी चिकना करने का काम कर रहा था

अच्चानक से रवि मेघा दीदी की गर्दन पकड़ लेता है और उसे अपने ऊपर खींचता हुआ निचे से एक जोरदार झटका देता है

फट्ट्ठह्ह से पूरा का पूरा लुंड एक झटके में hi मेघा की छूट में समा जाता है

रवि- बहुत बात करती हो तुम दोनों यह मेरा लुंड फटने वाला है और तुम दोनों की बात hi कहत्म नहीं होती अब बात नहीं होगी अब तो सिर्फ और सिर्फ चुदाई होगी तुम दोनों की चुदाई आज की रात मैं अपनी दोनों दीदियो को अपनी रंडी बना लूंगा और जिंदगी भर तुम दोनों को ऐसे hi एक साथ पटक पटक कर छोडूंगा आज के बाद से तुम दोनों मेरे लुंड की गुलाम हो बास और कुछ नहीं जिसे मैं जब कहे तब्ब छोड़ सकता हु

झटका इतना जोरदार था की मेघा का पूरा बदन अकड़ जाता है पीछे से रेखा तुरंत hi मेघा को संभालती है

रेखा को तो रवि की बातो में एक अलग hi मजा आ रहा था पर इधर मेघा की छूट की हालत ऐसी हो मनो आज किसी ने वर्षो बाद फिरसे उसकी छूट की सील तोड़ी हो

Megha-ahhhhh रवि रुकक्क जा मेरे भाई भट्ट दर्द्द हो रहा है

रवि - अब तो इस दर्द की आदत दाल लो दीदी क्योंकि अब ये दर्द आपको रोज रात को होने वाला है और इसी दर्द के साथ अब आपको अपने छोटे भाई के लुंड की सेवा करनी है

रवि अपना लुंड थोड़ा बहार खींचता हुआ एक और जोरडार झटका मरता है

इस बार मेघा का दर्द खिड़ा कम् था वो बिना देर किये hi अपना भरी शरीर लेकर रवि के लुंड पर बैठ जाती है

मेघा को पता था अगर वो ऐसा करती है तो रवि एयर झटके नहीं मार पायेगा और उसे कुछ रहत मिलेगी

अब रवि का पूरा का पूरा लुंड मेघा दीदी की छूट के अंदर उनकी बच्चेदानी पर थोडार मार रहा था

जिसका अहसास पाकर मनो मेघा के तन बादब में एक आग सी लग गई थी

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रवि के लुंड पर बैठे बैठे hi मेघा इधर उधर अपनी कमर घुमा रही थी मनो वो अंदर hi अंदर अपने छोटे भाई के लुंड को अपनी छूट में घुमा रही हो

आज पहली बार मेघा को इतना मजा आया था जो उसने कभी जिंदगी में नहीं लिया था

रवि बिना देर किये मेघा की गर्दन को अपनी और खींचता हुआ अपने होठ उसके गरम और रसीले होठो पारर राखह देता है

और इसतरह से न कहते हुए भी मेघा को आगे की और झुकना पड़ता है जिससे की उसकी कमर ऊपर की और उठ जाती है

सही मौका देखते hi रवि अपने लुंड को बहार खींचता हुआ एक और झटका मारता है और जैसे hi मेघा चिल्लाने को होती है रवि उसके होठो को अपने दांतो में पकड़ कर चबाने लगता है

इधर रवि एक के बाद एक शता सत् धक्के मरे जा रहा था और लगातार अपनी बड़ी दीदी के होठो का रस लिए जा रहा था

मेघा की हालत इतनी खराब थी की उसके मुह्ह ला पूरा का पूरा थुक्क उसके छोटे भाई के मुह्ह में गिर्र रहा था जिसे रवि बिना किसी संकोच के निगल जा रहा हो मनो वो थूक न हो बल्कि उसकी दीदी के मुह्ह से निकला अमृत हो जिसकी बून्द बून्द में सिर्फ और सिर्फ हवस थी

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मेघा दीदी को मजा तो भट्ट आ रहा था पर अंदर hi अंदर उसका पूरा श्रृरर टूट रहा था जिसे तोड़ने का काम खुद्द उसका छोटा भाई कर रहा था

मेघा दीदी को यु तड़पता हुआ देख कर रेखा को एक अलग hi मजा आ रहा था वो मौके का फायदा उठती हुई अपनी 2 उंगलियों को मुँह में डालती हुई गिला करती है और बिना किसी चेतावनी के सीधा मेघा दीदी की गांड में घुसा देती है

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मेघा इस हमले से तड़प उठती है उसकी गांड के छेद को आज तक्क किसी ने नहीं चुवा था यह तक की रवि ने भी नहीं

मेघा पीछे मदद को रेखा को गली देने hi वाली थी तबतक रवि दुबारा से उसका मुह्ह अपनी और घुमा कर उसके होठो का रसपान करने लगता है

इधर पीछे से रेखा लग्तारर मेघा दीदी की गांड में अपनी उंगलियों को अंदर बहार कर रही थी

मनो वो अपनी दीदी की गांड को अपने छोटे भाई के लुंड के लिए तैयार कर रही हो

करीब 10 मिनट की चुदाई के बाद रवि मेघा दीदी की गर्दन को छोड़ देता है और मेघा फिसलती हुई उसके लुंड से उतर कर जमींन पारर चित्त पद जाती है

उसकी छूट से सफेद पानी बेज रहा था

पर वो रवि का विरया नहीं था वो तो मेघा दीदी की छूट से निकल रहा काम रास था जो की इस बात का साबुत था की उसकी छूट रवि का लुंड अंदर लेकर भट्ट खुस है

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इधर रवि पड़ा पड़ा हाफ रहा था और उधर रेखा ललचाई नजरो से रवि के चिकने लुंड को देख रही थी जो पूरी तरह से मेघा दीदी की छूट के चिकने और गधे पानी से सना हुआ था

बिना देर किये रेखा रवि के लुंड पारर टूट पड़ती है और उसे चाटने लगती है

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इधर मेघा दीदी की सांसे अब कीच हद्द तक्क शांत हो चुकी थी पर उसकी छूट के अंदर मनो एक सुनामी उठ चुकी थी जो अब रुकने का नाम hi नहीं ले रही थी

रवि रेखा के सर को पड़ता हुआ उठ जाता है और अपने दोनों हाथो से उसके सर को थमता हुआ अपने लुंड को रेखा के रसीले मुँह के अंदर घुसाने लगता है

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धीरे धीरे उसका पूरा का पूरा लुंड रेखा के मुह्ह में समा जाता है

रवि एक पल के लिए ृक्क जाता है और अपनी धोती उठा कर अपना पसीना पोछने लगता है

ओर इस बिच अब भी उसका विशाल लुंड उसकी दीदी के मुँह के अंदर hi था

अगले hi पल रवि एक झटके के साथ अपना लुंड रेखा के मुँह से बहार खींच लेता है और रेखा हाफति हुई अपने मुँह से बहुत सारा थूक गिराने लगती है

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अभी रेखा संभल पति उससे पहले hi रवि दुबारा से अपना लुंड रेखा के मुह्ह में पेल देता है और बड़ी hi बेरहमी के साथ रेखा का मुखछोडन करने लगता है

मनो वो मेघा दीदी को दिखाना चाहता हो की वो उसके साथ और क्या क्या करना कहता है

इधर रेखा को मजा तो काफी आ रहा था पर हमेशा की तरह आज भी उसकी हालत खराब हो रही थी

पर इस बार मेघा को बड़ा मजा आ रहा था उसे तब तकलीफ हुई थी जब रेखा ने उसके दर्द को दोगुना करते हुए उसकी गांड के छेद के अपनी 2 उंगलिया घुसा दी थी और अब रेखा की ताबड़तोड़ मुहचुड़ै को देख कर मेघा अंदर hi अंदर मुस्कुरा रही थी

पर इस बार मेघा को अपने छोटे भाई के अंदर का जानवर साफ़ नजर आ चुका था और रवि भी बार बार उसकी और hi देख रहा था मनो वो मेघा दीदी को दिखा रहा हो की यही अब उनके साथ भी होने वाला है

पर जो भी हो अब मेघा के ऊपर रबी के लुंड का जादू पूरी तरह से चल चूका था और वो भी अब अंदर hi अंदर उसकी गुलाम बन चुकी थी

इधर रवि करीब 10 मिनट तक्क ऐसे hi रेखा दीदी का मुखछोडन करता रहता है और अंतत में उसे घोड़ी बना देता है

जैसे hi मेघा दीदी की नजर रेखा की छूट और गांड पर पड़ती है मनो उसकी धड़कने ृक्क सी जाती है .......
 
अपडेट-158

जैसे hi मेघा दीदी की नजर रेखा के छेड़ो पर पड़ती है उसका कलेजा मुँह को आ जाता है

मेघा( हे भगवान् ये इस बच्चे ने क्या किया है रेखा के साथ )

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मेघा दीदी का हैरान होना लाजिम था

आखिर रवि ने काम hi ऐसा किया तह

उसने इतने दिनों में रेखा को छोड़ छोड़ के उसकी छूट और गांड का वो हॉरर किया था की कोई भी देख कर डर जाता

उसकी छूट तो रवि ने फड़ी hi थी पर अपनी hi दीदी की गांड को छोड़ छोड़ कर उसने उसका छेद इस कदर बड़ा कर दिया था की 2-3 ुंलिया तो उसमे बिना किसी म्हणत के hi घुस जाये

रबी मेघा की और hi देख रहा था और लगतरर अपने लुंड को रेखा की गांड के उस फटी हुए छेद पर रगड़े जा रहा था मनो वो मेघा को बता रहा हो की देखो दीदी तुम्हारे छोटे भाई को अपनी दीदियो की गांड मरने का भी शौक है

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धीरे धीरे अपने लुंड को रेखा की गांड पर दबाता हुआ वो अपना मुसल जैसा लुंड रेखा की गांड में उतर देता है एक hi बार में पूरा का पूरा

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इधर रेखा अपने चेरे को जमीन पर गड़ाए बस लुंड को अपनी गांड में जाता महसूस कर रही थी उसका बदन एक अजीब सी अंगड़ाई ले रहा था मनो उसका पूरा शरीर hi यही कहता हो की रवि का लुंड बस उसके शरीर में घुसा रहे

इधर मेघा की सांसे थमने का नाम नहीं ले रही थी क्योंकि मेघा ने कभी जिंदगी में नहीं सोचा था की कोई आदमी किसी औरत की गांड भी मरता होगा और यह तो उसका छोटा भाई अपनी hi दीदी की गांड में पूरा लुंड घुसाए बैठा था

रवि अपने हाथो को रेखा के ककन्धो पर टिकता हुआ एक जोरदार झटका मरता है

रेखा- ुंहहाहहाआहहहहह मर्डर गयी ममअअअअअअ

रवि- अभी खा मर गयी दीदी अभी तो तुम्हारी गांड मरना बाकि है

रवि अपनी शीतनी मुस्कान लेकर दुबारा से मेघा दीदी की एयर देखता है और अपने लुंड को टोपे तक बहार निकलता हुआ एक और करारा झटका मरता है

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अब रवि का लुंड बिना किसी मुश्किल के रेखा की गांड में आसानी से अंदर बहार हो रहा था

वो कमीना हर्र बार अपना लुंड पूरा बहार निकलता और एक करारे झटके के साथ वापस से उसे रेखा की गांड में ठुस्स देता

जिससे की रेखा का पूरा बदन तड़प उठता

पर मनो रवि को अपनी दीदी के ऊपर कोई दया hi न हो बल्कि वो तो उसे तड़पता हुआ देख कर और भी करारे झटके मारने की तैयारी में था

अभी तक तो रवि की स्पीड स्लो थी पर धीरे धीरे उसके झटके और भी जोरदार होते जा रहे थे और उसकी स्पीड मनो बढ़ती hi जा रही थी

वो सटासट रेखा की गांड में लुंड पेले जा रहा था

अपनी छोटी बेहेन की इस बेरहम गंदपलाई से मनो मेघा दीदी और भी ज्यादा गरम हो रही थी उसकी झड़ी हुई छूट एक बार फिरसे पानी छोड़ना शुरू कर चुकी थी और वो उसका एक हाथ खुद बा खुद hi अपनी छूट को सहलाने पहुंच गया था

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रवि को भी अपनी बड़ी दीदी की ये हरकत पसंद आ रही थी अब उसे पूरी तरह से यकीन हो गया था की उसकी दीदी अब हमेशा हमेशा के लिए सिर्फ और सिर्फ उसकी है

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रेखा की गांड भी अब रवि के करारे झटको का जवाब बखूबी दे रही थी उसकी गांड से भी पानी बहार आ रहा था

पत् पत् की आवाजों से पूरा कमरा गुंज्ज उठा था

रवि का लुंड एक सुनहरे सरिये की तरह चमक रहा था शायद अपनी दीदी की गांड में इतनी गहराई तक घुसने की वजह से उसपर रेखा की हगवास लग चुक्की थी जोकि रवि के लुंड को और भी खूबसूरत बना रही थी

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इधर मेघा दीदी की स्पीड भी बढ़ चुकी थी वो अपनी 2 उंगलियों से लगातार अपनी छूट चोदे जा रही थी

मेघा को देख कर रवि का जोश और भी दोगुना हो चुका था आज उसके झटके इतने तेज थे की रेखा भी चिल्लाने पर मजबूरर हो गयी थी

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रवि का लुंड अब रेखा की गांड में hi झड़ने लगा था पारर उसके झटके अब भी काम नहीं हो रहे थी अंतत में वो अपना लुंड रेखा की गांड से बहार निकल लेता है

और अब नजारा देखने वाला था

रेखा की गांड का छेद फ़ैल कर इतना बड़ा हो चूका था की उसमे कोई छोटी गेंद आसानी से घुस जाती

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रेखा- देखो दीदी इस कमीजें ने मेरी गांड फाड़ दी

इतना बोलते हुए रेखा अपनी 3 उंगलियों को अपनी गांड में घुसा का रवि का वीर्य बहार निकलने लगती है

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रवि थक कर लेत जाता है

रेखा भी उसके बाजु में लेत जाती है इधर मेघा दीदी के दिमाग में अब भी वही नजारा घुम्म रहा था की कैसे उसका छोटा भाई उसकी बेहेन की गांड फाड़ रहा था अपना मुसल दाल कर

पर रेखा अब बिलकुल नार्मल हो चुकी थी

रेखा - क्या हुआ दीदी किश सोच में डूबी हो

मेघा- सोच में हा कुछः नहीं वो तो बस्स्स

रेखा- मुझे पता है दीदी तुम इसका तरीका देख कर डर गयी हो है ना

रेखा अपना हाथ आगे बदजाती हुई मेघा का हाथ थमती हुई उसे अपनी और खींचती है और अब रवि की दोनों दिदिया उसके आजुबाजु लेती हुई थी

रवि- हाफफ्फ्फ़ कसम से मेघा दीदी और रेखा दीदी आज तो मजा आ गया आप दोनों को कैसा लगा

रेखा- मुझे तो खूब मजा आया छोटे आज

तुझे पता है कितने दिनों से मेरी गांड में कीड़े काट रहे थे पर आज तूने उन् सबको शन्तत कर दिया

मेघा को लगा था की रवि जबरदस्ती रेखा की गांड मार रहा था पर रेखा का जवाब सुन्न कर तो तो मेघा का मुँह खुला का खुला hi रह गया

रेखा- मुझे तो खूब मजा आया बाकि तू मेघा दीदी से hi पूछ ले

मेघा- तुझे जरा भी तक़लीफफ नहीं हुई रेखा जब ये तेरी गैन......

इतना बोलते बोलते मेघा ृक्क जाती है

रेखा- अरे दीदी बोलो न अब क्यों शर्मा रही हो सच खु तो मैं सबसे ोेहली बार रवि से गांड hi मरवाई थी और ये कमीना तब से hi मेरी गांड के पीछे पड़ा हुआ है आपने देखा न इसने मेरी गांड मार मार कर उसका क्या हाल कर दिया है

अब तो हगने भी बैठती हु तो बिना जोर लगाए hi टट्टी बहार आ जाती है और दीदी एक दिन तो इसने मुझे हगते हुए hi छोड़ दिया था

रेखा- दीदी मैंने आपसे खा था न की एक बार जब आप रवि का लुंड लेलेगी तो इसके लुंड की गुलाम बन जाओगी जैसे मैं बन गयी

रवि- मेघा दीदी आपको कैसा लगा

जब मैं आपकी छूट मार रहा था

मेघा इस बात का कोई जवाब नहीं देती

बेचारी बोलती भी क्या उसका खुद का छोटा भाई उससे थोड़ी देर पहले हुई चुदाई के बारे में जो पूछ रहा था

रवि- मुझे पता है दीदी आप मुझे डर रही हो की मैंने जो जो रेखा दीदी के साथ किया हज वैसा hi आपके साथ भी करूंगा

दीदी मुझे उस रात के लिए माफ़ करदेना जब मैंने आपको जबरदस्ती छोड़ा था पर सच खु तो दीदी मैं आपको हमेशा से छोड़ना कहता था और आज जाकर मेरा सपना पूरा हुआ

आज तो उस रात से भी ज्यादा मजा दिया आपने मुझे

रेखा- दीदी अब बोल भी दो देखो न बिचारा कैसे माफ़ी मांग रहा है आज तक इसने मुझसे माफ़ी नहीं मांगी

मेघा- और कुछ मत बोल रवि तूने मुझे आज वो खुसी दी है जो शायद मेरी जिंदगी में दुबारा मिल पाना मुश्किल थी और तूने आज अपनी दीदी को औरत होने का असली सुख दिया है तू मेरा प्यारा भाई है

मेघा अपना हाथ आगे बढ़ती हुई सीधा रवि का मुरझाया लुंड पकड़ लेती है

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रवि- दीदी अब ये खुसी मैं आपको मरते दम तक देता रहूंगा और कभी रोजज आपको छूट का पानी पी कर उसे ठंडा करूंगा

मेघा- जाट बदमाश बड़ा आया मेरी छूट का पानी पिने वाला

तुझे गन्दा नहीं लगता ये सबब

रवि- मेरी दीदियो के छेड़ से कोई गंदगी नहीं निकलती जो मुझे गन्दा लगेगा

आपको यकीन नहीं तो रेखा दीदी से पूछ लो

रेखा- अरे दीदी इसे कुछ गन्दा नहीं लगता आपको पता है एक बार तो इसने मेरी गांड के छेद से चूस चूस कर एक कटा बहार निकला था

क्यों हैना रवि

मेघा- तुम दोनों एकदम पागल हो और अब मुझे लगता है अपने साथ साथ मुझे भी पागल कर डोज

रवि बार बार रेखा को कोहनी मार रहा था

रेखा- अरे तू क्यों खोद रहा है बार बार मुझे खुद hi बोल देना मेघा दीदी से

मेघा- क्या बात है रवि

रेखा- दीदी देखो अब ये आपका शरीफ छोटा भाई कैसे शर्मा रहा है अपनी बड़ी दीदी से अभी जब थोड़ी देर पहले जब आपके सामने मेरी गांड छोड़ छोड़ कर फाड़ रहा था तब तो इसे ाआपसे शर्म नहीं आ रही थी

Megha-btaa न रवि क्या बात है जो भी है खुल कर बता

रवि- दीदी मुझे आपकी गांड मारनी है

रवि के मुह्ह से ये बात सुनते hi मेघा दीदी चौंक जाती है

रेखा - क्या हुआ दीदी आपको भी झटका लग्ग गया इस कमीने की बात सुनकर

मेघा- न बाबा ना मैं नहीं मरवाने वाली तुझसे अपनी गांड मैंने देखा है तूने रेखा की गांड का ककया हाल किया है

रेखा- अरे दीदी मान जाओ बस एक बार दर्द होगा उसके बाद तो आपकी गांड का छेद आपको छूट से भी ज्यादा मजा देगा

मेघा- ठीककक है पारर आज नहीं

रवि- ठीक है दीदी ाकि मर्जी जब आप तैयार हो तब्ब

मेघा- है ठीक है चल अब सजा तुझे कल से एक साथ अपनी 2-2 दीदियो की सेवा करनी है

रवि- मैं तो अब भी सेवा कर सकता हु अपनी दोनों दीदियो के छेड़ो की

मेघा- आज के लिए काफी है मेरी छूट भी दर्द्द कर रही है तूने इतना मोटा मुसल जो पेल दिया इसमें एक झटके में चल अब सजा

वैसे भी अब तेरी ये दीदी तेरी hi है हर्र रात समझा

दोनों दिदिया रवि को बहो में भर लेती है

थोड़ी hi देर में तीनो भाई बेहेन एक मस्त चुदाई के बाद नींद की आगोश में चले जाते है पर उन्हें ये नहीं पता था की उनकी इन् गन्दी हरकती को कोई और भी देख रहा था.....
 
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