Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 19 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-169

रामलाल का घर.....

हरी चुपचाप बैठा अपने बूढ़े बाप और गदराई बेहेन की रासलीला देख कर मनो पागल सा हुआ जा रहा था

उसे समझ hi नहीं आ रहा था की आज इतने बरसो बाद इन बाप बेटी का कौन सा प्यार जाग गया यु अच्चानक से

खैर जल्द hi दोनों बाप बेटी एक दूसरे को खाना खिला चुके थे

रामलाल- वह बेटी मजा आ गया आज तो खाने में

मल्टी- तो बनाया किसने था बापू आपकी बेटी ने

रामलाल- तभी तो बोल रहा हु दिल खुस हो गया अपनी बेटी के हाथो का बना खाना खा कर

मन तो करता है की बनाने वाली की उंगलिया चूस जाऊ

ये बात रामलाल थोड़ा जोर देकर बोलता है वो भी पूरी बेशर्मी के साथ

जबकि सामने hi उसका बीटा भी बैठा था

इधर मल्टी खा मौका छोड़ने वाली थी

अगले hi पल मल्टी अपना एक हाथ अपने बापू के चेहरे की और बढ़ा देती है

मल्टी- तो चूस लो ना तुम्हारी बेटी के hi हाथ तो है बापू

रामलाल तो मनो इसी मौके की तलाश में बैठा था वो बिना समय गवाए आगे बढ़ता हुआ सीधा मल्टी के हाथ को पकड़ता हुआ उसकी 2 उंगलियों को अपने मुँह में भर लेता है

िडजर हरी अपने बापू की हरकतों को आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा था पर उसे ये सब अब भी नार्मल hi लग रहा तथा

पर अंदर का हाल तो मल्टी hi जानती थी

आपने मुँह के अंदर रामलाल अपनी सगी बेटी की उंगलियों को चूस hi नहीं रहा था बल्कि उनपर अपनी जीभ इस कदर चला रहा था मनो वो अपनी बेटी को अहसास दिलाना कहता हो की उसका बूढ़ा बाप उसकी छूट को चाट चाट कर ऐसे hi उसका भी स्वाद लेना कहता है

लगभग 5 मं तक रामलाल अपनी. बेटी की उंगलियों को उसी मादक अंदाज में चाटता hi रहता है

मल्टी- अह्ह्ह बापू छोड़ो ना आज hi साडी उंगलिया चूस जाओगे क्या मेरी

मल्टी एक झटके में अपनी उंगलिया अपने बापू के मुँह से बहार खींच लेती है

रामलाल किसी बच्चे की तरह उदासी से अपनी बेटी की और देखता रह जाता है

उसकी आँखों में एक लालसा थी

जो मल्टी को चीख चीख कर बता रही थी की उसने ये सही नहीं किया

मल्टी- राजू तू चल हम सबका बिस्तर लगा मैं आती हु

राजू अंदर कमरे में चला जाता है

मल्टी अपने बापू की और देखती हुई अपनी गीली उंगलियों को अपने मुँह के भर लेती है

यह नजारा इतना मादक था की रामलाल का खड़ा लुंड धोती के अंदर hi एक जोरदार झटका खता है जिसे मल्टी भी देख लेती है

अपनी बेटी को इस कदर अपना hi थूक चाटता हुआ देख मनो रामलाल पागल सा हो जाता है

और आज उसकी बेटी ने साफ़ साफ़ अपने बापू को अपने इरादे जाहिर कर दिए थे जिसे देख कर रामलाल पागल सा हुआ जा रहा था

रामलाल एक हाथ से अपनी धोती में खड़े लुंड को पकड़ता हुआ मल्टी की एयर झपटता है

मल्टी अभी अपने बूढ़े बाप को अपनी जवानी का रस चखने के लिए और तरसना कहती थी

मल्टी तुरंत hi भगति हुई कमरे की और बढ़ जाती है

मल्टी- चलो बापू लेत हो रहा है सोना नहीं है क्या

मल्टी इतराते हुए बोलती है

रामलाल वही खड़ा अपना खड़ा लुंड पकडे ललचाई नजरो से अपनी बेटी को कमरे के अंदर जाता देखता रह जाता है

पर रामलाल को एक बात की खुसी थी की जो वो कहता है उसकी बेटी भी वही कहती है

अगला अपडेट कुछ hi समय में

ाआधे अधूरे अपडेट के लिए माफ़ी....
 
अपडेट-170

रामलाल अपना खड़ा लुंड अपने हाथो में थामे बस अपनी बेटी को देखता रह जाता है

इधर मल्टी अपने बूढ़े बाप को मुँह चिढ़ाती हुई कमरे में चली जाती है

रामलाल थोड़ी देर ऐसे hi खड़ा अपना लुंड थामे थोड़ी देर पहली हुई घटनाओ को हाड करता है और फिर वो भी कमरे में चला जाता है झा पहले से hi उसकी बेटी और बीटा बिस्तर पर लेत चुके थे

मल्टी रामलाल की तरफ hi देख रही थी

और अपने बापू को जीभ चिढ़ाती हुई हरी की तरफ घूम जाती है

रामलाल भी चुपचाप मल्टी के बगल में लेत जाता है

लगभग 5 मिंट तक ऐसे hi शांति बनी रहती है

पर इस वक़्त भी तीनो बाप बेटी जाग रहे थे

हरी को तो दारू न पिने की वजह से नींद नहीं आ रही थी और दोनों बाप बेटी एक दूसरे के नशे में दुबे हुए थे

मल्टी- क्यों रे हरी तू सोयेगा नहीं क्या आज

हरी- दीदी पता नहीं क्यों आज नींद hi नहीं आ रही है

रामलाल- है है तुझे नींद क्यों आएगी आज तूने दारू जो नहीं पीया

मल्टी रामलाल को छेड़ती हुई बोलती है

मल्टी- ाचा बापू इसने दारू नहीं पिया तो इसे नींद नहीं आ रही और तुम्हारा क्या

अब हरी अपनी बेटी को बताना तो कहता था की उसपर खुद की बेटी की जवानी को चकने का नशा साध गया है पर हरी के होते हुए वो कुछ नहीं कर सकता था

रामलाल- अब क्या बताऊ मेरी बच्ची तुझे मैं की तेरे इस बूढ़े बाप को क्यों नींद नहीं आ रही

मल्टी- मुझे तो खूब नींद आ रही है

रामलाल- एक काम करदे बेटी सोने से पहले

मल्टी- है बोलो बापू

रामलाल- बेटी एक गिलास पानी पीला दे बहुत गला सुख रहा है

मल्टी अपनी बड़ी सी गांड मटकती हुई कमरे से बहार चली जाती है

रामलाल का मन तो बहुत था की अभी बहार जाकर अपनी बेटी को दबोच ले पर जैसे hi वो हरी की खुली हुई आँखे देखता है उसका मन बदल जाता है

और अपने बेटे को गली देता हुआ वो वैसे hi लेता रहता है

इधर मल्टी बहार आकर गिलास में पानी भर्ती है फिर ना जाने उसके दिमाग में क्या खुराफात आती है वो पानी को वापस से मटके में दाल कर खली गिलास हाथ में लिए बाथरूम की और बढ़ जाती है

बाथरूम में जाकर मल्टी पहले तो अपनी सदी खोल कर पेटीकोट और ब्लाउज में होजाती है फिर अपने पेटीकोट को उठती हुई सीधा निचे बैठते हुए गिलास को वापस से अपने हाथो में पकड़ कर सीधा अपनी छूट के निचे लगती गिलास में मूतने लगती है

मल्टी पेशाब से पूरा का पूरा गिलास भर देती है और जब तक उसकी छूट की आखिरी बून्द उसमे नहीं कीर्ति वो गिलास को वैसे hi अपनी छूट के निचे पकडे रहती है

अंतत में वो गिलास को ऊपर उठती हुई इसे देखती है

अपना पीला पेशाब देख कर न जाने मल्टी को क्या सूझता है और वो खुद hi उसे अपने होठो पर लगा कर एक घुट मरती है

मनो वो अपने पेशाब को अपने बापू को पिलाने से पहले उसे पहले खुद hi साख कर देख रही हो की उसमे कोई कमी तो नहीं है

अपना खुद का hi पेशाब पी कर मल्टी के बदन में एक अजीब से झुरझुरी होती है

मल्टी( कुछ तो कमी है )

मल्टी पास hi पड़ी अपनी सदी उठती है और अपनी छूट को खूब रगड़ रगड़ कर उस पर लगी पेशाब की आखिरी बूंदो को साफ़ करती है

और अगले hi पल वो गिलास को साइड में रखती हुई अपनी दो उंगलिया अपने मुँह में दाल कर गिला करती हुई सीधा अपनी छूट में घुसा देती है

ये सोच सोच कर hi मल्टी का बुरा हाल था की जब वो अपने बापू को खुद के पेशाब से भरा गिलास पिने के लिए देगी तो उस वक़्त उसका बूढ़ा बाप उसके बारे में क्या सोचेगा

और यही सब सोच सोच कर वो लगातार अपनी छूट में 2 उंगलिया पेले जा रही थी मनो वो उसमे से कुछ निकलना साहहह रही हो

करीब 5 मिनट की म्हणत के बाद मल्टी को फल मिलता है और उसकी चिपचिपी छूट से सफ़ीद पानी की बुँदे बहार निकलने लगती है

मल्टी पहले तो अपनी दोनों उँगलियों के डेक्टि हुई उन्हें सूंघती है औरफिर खुद की hi छूट से निकली मलाई को चाट जाती है

उसके चेहरे की चमक साफ़ बता रही थी की उसे जो चाहिए था ये वही मलाई थी

मल्टी दुबारा से गिलास को उठती हुई अपनी छूट के निचे लगती है और एक हाथ से पानी छूट को फिकल्टी हुई उस मलाई को गिलास में गिराने लगती है

ज्यादा तो नहीं पर 5-7 बुँदे तो गिलास में गिरती hi है

मल्टी दुबारा से गिलास को अपनी नाक के पास लती हुई सूंघती है

मल्टी( है अब सही है अब पियो बापू अपनी बेटी का गरम गरम पेशाब )

मल्टी पेटीकोट और ब्लाउज में hi पेशाब से भरा गिलास लेकर कमरे के अंदर दाखिल होती है

रामलाल अब भी लेता hi हुआ था

मल्टी- लो बापू पानी

रामलाल- बड़ी देर लगा दी बेटी पानी लेन में

मल्टी- अब पी लो देर लगी तो क्या हुआ बस मेरे बापू की प्यास बुझनी चाहिए

मल्टी अपने पेशाब से भरा गिलास अपने बापू की तरफ बढ़ती है

उसके हाथ पाँव इस वक़्त काँप रहे थे न जाने उसके बापू का पेशाब पिने के बाद क्या रिएक्शन होगा

और यही सोच सोच कर लगातार मल्टी की सांसे भरी होती hi जा रही थी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था

रामलाल अपनी बेटी को प्यासी नजरो से देखता हुआ गिलास पकड़ लेता है और बिना देर किये उसे अपने होठो से लगता हुआ पिने लगता है

अभी 2 घुट hi अंदर गया होगा की रामलाल ृक्क जाता है

और गिलास को हटाता हुआ अपनी बेटी की तरफ हैरानी भरी नजरो से देखता है

मनो उसे पता चल गया हो की गिलास में पानी नहीं बल्कि उसकी बेटी का गरम पेशाब है

मल्टी कंपते हुए होठो से बोलती है

मल्टी- क्या हुआ बापू

रामलाल एक बार गिलास को अपनी नाक तक लता हुआ जोरदार साँस खींचता है

उसकी आँखे इस वक़्त हवस से पूरी तरह लाल हो चुकी थी

रामलाल- कुछ नहीं बेटी बहुत मिठास है पानी में

अगले hi पल रामलाल दुबारा से गिलास को होठो पर लगता हुआ एक hi सांसे में अपनी बेटी का सारा का सारा पेशाब पी जाता है

और गिलास खली होते hi अपने होठो पर लगे पेशाब को भी चाट जाता है

रामलाल- अह्ह्ह मजा आ गया बेटी तेरा ये पानी पी कर तो

मल्टी खुश थी की उसके बापू को उसका पेशाब स्वाद लगा

मल्टी- मेरे बापू की प्यास बुझी या नहीं

रामलाल- प्यास तो बुझ गयी बेटी पर मैं नहीं भरा मन तो करता है की ये पानी पीटा hi जाऊ पिता hi जाऊ थोड़ा और पीला देगी तो तेरी बड़ी मेहरबानी होगी तेरे इस बूढ़े बाप पर

मल्टी इतराती हुई अपनी जगह वापस से लेत जाती है

और अपनी गांड दुबारा से अपने बापू की और घुमा देती है

मल्टी- बापू अब तो टंकी खली हो गयी और चाहिए तो कल सुबह hi मिल सकता है

रामलाल- ठीक है बेटी पर सुबह सुबह मुझे सबसे पहले यही पानी चाहिए

हरी बड़ी हैरानी से अपने बाप और बेहेन की बाटे सुन्न रहा था उसे कुछ समझ hi नहीं आ रहा था और अंतत में वो भी बोल उठता है

हरी- अरे दीदी टंकी कैसे खली हो गयी अभी तो भरी थी शाम को

मल्टी- तू जयादा दिमाग मत चला और चुप चाप सो जा बड़ो के बिच नहीं बोलते

हरी बेचारा चुप कर जाता है

रामलाल दुबारा से गिलास को पलटता हुआ आखिरी बची बुँदे भी जातक जाता है

और एक धकार मरता हुआ अपनी जगह लेत जाता है

रामलाल का एक हाथ अब भी उसके खड़े लुंड पर था और उसकी नजरे इस वक़्त अपनी गदराई हुई बेटी की मांसल कमर पर थी झा जमा हुई चर्बी लगातार उसके खड़े लुंड को उकसाये जा रही थी

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रामलाल अपने लुंड को मसलता हुआ अपनी बेटी के उस हिस्से को लगातार देखे जा रहा था

इधर मल्टी को भी अंदाजा हो गया था की अपना गरम पेशाब पीला कर उसने अपने बापू को पूरी तरह से ग्रीन सिग्नल दे दिया है और अब उसके बाप के अंदर कोई भी शर्म नहीं बेचने वाली

और न जाने अब ये बाप बेटी का हिस्सा की हद्द तक गन्दा होने वाला है ....
 
अपडेट-171

रामलाल की हवस से भरी लाल आँखे लगातार अपनी गदराई बेटी की कमर को hi देखे जा रही थी

सबको लेते हुए लगभग 20-25 मिंट हो चुके थे

कमरे में एक दम सन्नाटा था पर मल्टी जानती की उसने अपने बापू को जो चीज़ छकाया है उसके बाद से वो शांत नहीं बैठने वाला और बस अब वो अपने बापू के हमले का इन्तजार hi कर रही थी

इधर रामलाल अपनी hi बेटी को पीछे से देख देख कर अपना लुंड मसले जा रहा था

यह तक की उसने अपनी धोती को साइड करते हुए लुंड को भी आजाद कर दिया था

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और आखिर कर रामलाल एक बार उठ कर अपने बेटे पर नजर मरता है जोकि पूरी तरह गहरी नींद में सो चूका था

रामलाल अपने चेहरे पर एक शैतानी हसी के साथ दुबारा अपनी जगह पर लेत जाता है और इस बार वो अपनी बेटी के और भी ज्यादा करीब खिसक जाता है

मल्टी को भी अब तक अंदाजा लग चूका था की उसके बापू का खेल शुरू होने वाला है

पहले तो रामलाल अपने चेहरे को आगे करता हुआ अपनी बेटी की गर्दन पर बह रहे पसीने को सूंघता है अपनी hi शादी शुदा बेटी के पसीने को सूंघते hi उसकी आँखों में मनो अंगारे उतर आते है

अगले hi पल रामलाल अपनी जीभ से उस पसीने को चाट जाता है

अपने बूढ़े बाप की इस हरकत इस मल्टी कसमसा जाती है और ना कहते हुए भी उसके मुँह से एक मादक सिसकारी निकल जाती है

मल्टी- शहीईईईईईईई

रामलाल भी अपनी बेटी की सिसकारी सुन्नन लेता है पर अब वो रुकने वाला नहीं था

रामलाल एक कदम और आगे बढ़ता है और अपना एक हाथ से मल्टी की कमर को सहलाता हुआ उसकी पीठ तक ले जाता है और फिर आगे बढ़ता हुआ सीधा अपनी बेटी के उठे हुए पेट पर रख देता है

मल्टी अंदर hi अंदर गरम हुए जा रही थी

पर जैसे तैसे खुद पर काबू करके वो लेती हुई थी

इधर रामलाल अब रुकने वाला नहीं था वो एक हाथ से अपने लुंड को मुठियाता हुआ दूसरे हाथ से अपनी बेटी के गुदाज पेट की चर्बी को लगातार मसले जा रहा था

आपने बाप की मकबूत पकड़ से मल्टी का तन बदन मनो टूट सा रहा था वो अपने बापू की बहो में टूटने के लिए अब पूरी तरह से तैयार थी पर वो इस बाप बेटी के खेल को और भी गन्दा बनाना कहती थी

अच्चानक से रामलाल अपना अगला हमला करता हुआ अपने हाथ को सीधा मल्टी की एक चुकी पर रख देता है

हालत का अंदाजा होते hi मल्टी का बदन एक झटका खता है पर अगले hi पल वो दुबारा से शांत पड़ जाती है

रामलाल को भी अब तक समझ आ चूका था की उसकी बेटी जाग रही है और उसकी हरकतों का पूरा मजा ले रही है

रामलाल पहले तो ब्लाउज के ऊपर से hi उसकी एक चुकी की मोटाई को नापता है और जब उसका दिल नहीं भरता तो वो अपने हाथ को और थोड़ा ऊपर ले जाते हुए ब्लाउज के ऊपरी हिस्से से अपने हाथ को अपनी बेटी के जोबन के अंदर डालने का प्रयास करता है

पर इस वक़्त ये मुमकिन नहीं था क्योंकि रामलाल लेते लेते ये नहीं कर सकता था अंतत में रामलाल अपने हाथ को दुबारा से ब्लाउज के निचले हिस्से तक लता है और अपनी बेटी के ब्लाउज के अंतिम हक्क को खोलने की कोशिश करता है

2-3 बार की कोशिश के बाद hi रामलाल सफल हो जाता है

पर रामलाल का मैं इससे भी नहीं भरता और वो अगले हक्क को भी खोल देता है

मल्टी तो पहले से hi अपने बापू को अपनी जवानी चखने के मदद में आयी थी उसने ब्लाउज के अंदर कुछ नहीं पहना था

और इसी का फायदा उठते हुए इस बार रामलाल अपना हाथ सीधा अपनी बेटी के ब्लाउज के अंदर घुसा देता है

जैसे hi रामलाल के हाथ में उसकी बेटी के पूरी चीची आती है वो मनो खुसी से पागल सा हो जाता है और थोड़ा और आगे खिसक जाता है

रामलाल अब भी अपने लुंड को लगातार मसले जा रहा था

इस बार लुंड हिलाते समय बार बार उसका हाथ उसकी बेटी की गुदाज गांड पर टच हो रहा था जिससे की मल्टी को भी अंदाजा हो चूका था की उसका बाप उसकी चुकी के साथ खेलने के साथ साथ उसकी पीठ पीछे क्या करम कर रहा है

जिसे सोच सोच कर hi वो पानी पानी हुई जा रही थी

पर अब तक रामलाल ने अपनी बेटी के निचले हिस्से को नहीं चुवा था जिसका मल्टी को इन्तजार था

रामलाल बरी बरी दोनों चूचियों को अपने हाथो में दबोचता हुआ मसल रहा था

मनो वो आज अपनी बेटी की चूचियों को दुहना कहह रहा था

इधर मल्टी अंदर hi अंदर अपने बाप की हरकतों से पागल हुई जा रही थी

रामलाल करीब 10 मिंट तक अपनी बेटी की दोनों चूचियों को मसलता रहता है और अगले hi पल वो अपनी 2 उंगलियों के बिछे अपनी बेटी के कड़क हो चुकी एक निप्पल को पकड़ लेता है

मल्टी के निप्पल का साइज इस वक़्त एक बड़े अंगूर्र जितना था

मल्टी की तो इस पल मनो सांसे hi ृक्क जाती है

न जाने अब उसका बाप क्या करने वाला था

इधर रामलाल पर तो मनो अपनी शादी शुदा बेटी की जवानी का नशा इस कदर हावी हो चूका था की उसकी आँखे हवस की आग में पूरी तरह लाल हो चुकी थी

अगले hi पल रामलाल बड़ी hi बेरहमी के साथ मल्टी के निप्पल को पकड़ कर मड़ोरने लगता है

आपने बाप के इस हमले से मल्टी कसमसा जाती है और ना कहते हुए भी वो अपना हाथ बढ़ती हुई अपने बापू के हाथ पर रख कर उसे रोकने का प्रयास करती है

इस पल रामलाल के चेहरे पर एक हसी थी उसे अंदाजा था की उसकी बाटी जाग रही है और अब उसका अंदाजा सही था

रामलाल बिना किसी संकोच के लगातार उसी बेरहमी के साथ अपनी बेटी के निप्पल के साथ खेले जा रहा था

रामलाल बिना किसी रेहम के साथ मल्टी के निप्पल को मसल रहा था

मल्टी कसमसाती हुई डाट पइसे जा रही थी दर्द से उसका हाल बुरा था उसे अंदाजा भी नहीं था की उसका बूढ़ा बाप उसके साथ इतनी बेरहमी दिखायेगा

पर मल्टी जब से अपने देवर रवि से मिली थी न जाने क्यों उसे ये बेरहमी अच्छी लगने लगी थी

अगले hi पल रामलाल अपने हाथ को ब्लाउज के बाजार निकलता हुआ पहले तो अपनी बेटी के कोमल होठो पर फिरता है और होठो को अपने हाथो से मसलता हुआ अपनी एक ऊँगली को अपनी बेटी के गरम मुह्ह में धकेल देता है

कुछ देर तक वो अपनी उंगली को वैसे hi मल्टी के मुँह में अंदर बहार करता रहता है मनो वो अपनी ऊँगली से अपनी शादी शुदा गदराई बेटी का मुह्ह छोड़ रहा हो

और उसके बाद वो दुबारा से अपनी थुक्क से लटपट ऊँगली को बहार निकलता हुआ उस थूक को अपनी बेटी के होठो पास मसलने लगता है

और अगले hi पल वो अपनी उँगलियों के बिच मल्टी के निचले होठ को पकड़ कर मसल देता है अपने बापू की इस क्रूरता को देख कर मल्टी का रोम रोम टूट सा रहा था

रामलाल आगे बढ़ता हुआ दुबारा से अपने हाथ को ब्लाउज तक लता है और इस बार वो ब्लाउज के निचले हिस्से को पकड़ता हुआ ऊपर की और खींचने की कोशिश करता है

सामने hi हरी लेता हुआ था इसी डर से मल्टी तुरंत hi अपने बापू का हाथ पकड़ कर उसे रोकने की कोशिश करती है

पर शायद अब उसका बूढ़ा बाप रुकने के मुद में नहीं था

रामलाल अपनी बेटी के नाजुक हाथो को पकड़ता हुआ पहले तो उसे सहलाता है और अगले hi पल अपनी बेटी के हाथ को पीछे की और खींचता हुआ सीधा अपने लुंड पारर रख देता है

जैसे hi मल्टी का हाथ उसके बापू के विकराल लुंड पर पड़ता है वो झट्ट से अपना हाथ हटा लेती है पर रामलाल को ये मंजूरर नहीं था अगले hi पल वो दुबारा से अपनी बेटी की नाजुक कलाई को कठोरता के साथ पकड़ता हुआ उसकी हथेली को अपने लुंड पर रख देता है

इस बार भी मल्टी अपने हाथ को हटाने की कोशिश करती है पर रामलाल की पकड़ के सामने उसकी कोशिश बेकार थी

रामलाल अपनी hi बेटी के हाथ को अपनी लुंड पर लपेटता हुआ अपने हाथ से hi उसके कलाई को पकड़ कर उससे अपनी मुठ मरवाने लगता है

मल्टी की आँखे भी अब हवस से लाल हो चुकी थी उसके बूढ़े बाप की ये हरकते उसे अंदर तक झकझोर रही थी

दोनों बाप बेटी जाग रहे थे और इस गंदे खेल को खेल रहे थे पर बोल कोई नहीं रहा था

करीब 5 मिनट तक रामलाल ऐसे hi अपनी बेटी की कलाई को पकड़कर अपना लुंड मुठियाता रहता है और जब वो अपना हाथ हटाता है तब उसकी बेटी खुद hi अपने बापू के लुंड को छोड़ने का नाम नहीं ले रही थी

मल्टी की पकड़ अब अपने बाप के लुंड पर और भी टाइट हो चुकी थी वो लगातार लुंड की चमड़ी को पूरी जड़ तक ले जाती जिससे उसके बाप का फुला हुआ सूपड़ा खुल कर बाजार आ जाता रमला को इस सबमे एक अलग hi सुख मिल रहा था

वो जनता था की इस खेल में उसकी बेटी खिलादन है

अगले hi पल रामलाल अपने हाथ को दुबारा से आगे ला जाता हुआ सीधा ब्लाउज के निचे हिस्से पर रखता हुआ उसे ऊपर की और खींच देता है

इस बार मल्टी अपने बाप को रोकने का कोई प्रयास नहीं करती

शायद अब वो समझ चुकी थी की अब वो अपने बापू को कहह कर भी नहीं रोकक सकती

मल्टी की विशाल चूचिया एक साथ उछलती हुई बहार आ जाती है

मल्टी एक नजर अपने भाई को डेक्टि है और दुबारा से अपनी आँखे बंद किये अपने बापू का लुंड मुठियाने लगती है

जैसे hi मल्टी की चूचिया ब्लाउज के बहार आती है रामलाल उनपर टूट पड़ता है और यही नहीं वो पीछे से अपना मुह्ह भी मल्टी की िथ से सताता हुआ अपनी बेटी की पीठ पर लगे नमकीन पसीने को चाटने लगता है

माहौल इतना मादक और कामुक था की मल्टी और रामलाल दोनों hi इतने गरम हो चुके थे की अब उनपर खुद का भी कोई काबू नहीं था

रामलाल कभी पूरी चुकी को पकड़ कर मसलता तो कभी अपनी बेटी के सख्त निप्पल्स को मरोड़ने लगता तो कभी एक सारः दोनों निप्पल्स को पकड़ कर दोनों को एक साथ मिलाने की कोशिश में दोनों को एक hi तरफ खींचता

इस सबके बिच मल्टी लगातार दबी आवाज में सिसकिया ली रही थी

और उसकी पकड़ अपने बाप के लुंड पर और भी बढ़ती जा रही थी कभी वो अपने अंघूठे को लुंड के ऊपर जाती हुई अपने बापू के खुले सुपडे को अपने अंघूठे से दबा देती तो कभी अपने अंगूठे के नाख़ून से अपने बाप के पेशाब वाले छेद में चुभने लगती

अपनी बेटी की इन सब हरकतों के सामने अब रामलाल भी हार मानाने को मजबूरर हो चुका था अच्चानक से रामलाल अपना हाथ मल्टी की चूचियों से हटाता हुआ सीधा अपना लुंड पकड़ लेता है और अगले hi पल उसे पकड़ कर पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी बेटी की गांड के बिच ठुस्स देता है

इस पल रामलाल का पानी निकलने hi वाला था वो इतना गरम हो चुका था की लाज शर्म सबब छोड़ता हुआ अपना लुंड उसकी गांड के बिच ठूसता हुआ उससे पूरी तरह चिपक जाता है

मल्टी समझ चुकी थी की उसका बाप अब अपना वीर्य छोड़ने वाला है

मल्टी की छूट से निकल रही गर्माहट को उसला पेटीकोट को भी नहीं रोक पा रहा था अब वो गर्माहट सीधा सीधा उसके बापू के लुंड को पिघलने पर आमादा थी

रामलाल पूरी तरह मलती से चिपकता हुआ वापस से अपना हाथ आगे ले जाता है और इस बार वो अपनी बेटी के चेहरे को पकड़ता हुआ अपनी एयर घूमता है

मल्टी भी बिना किसी लाज शर्म के अपने बूढ़े बाप का हर हुकुम मानने को तैयार थी

मल्टी जैसे hi अपना चेहरा रामलाल की और घूमती है

पहली बाप दोनों बाप बेटी की हवस में लाल हो चुकी आँखे एक दूसरे से मिलती है

रामलाल- बेटी

मल्टी- बापुउउउउ

बस इतने hi वर्ड्स दोनों बाप बेटी के मुह्ह से निकलते है और अगले hi पल रामलाल आगे बढ़ता हुआ अपने होठ अपनी बेटी के रसीले होठो पर रख देता है

हवस की आग में दोनों बाप बेटी पागल हो चुके थे

इस वक़्त मल्टी बिना संकोच के अपने बाप से अपना मुह्ह चुसवाने के लिए अपना मुह्ह ल्होल चुकी थी

पर शायद उसके बूढ़े बाप के इरादे तो कुछ और hi थे

रामलाल अपनी बेटी के निचले होठो को इस कदर चबा रहा था की मणि वो अभी अपनी बेटी को उस होठ को खा जाना कहता हो

कभी वो दोनों होठो से निचले होठ को चुस्त तो कभी होठ को अपने दांतो के बिच पकड़ कर चबाने लगता

इस बिच रामलाल की कमर भी लगातार आगे पीछे हो रही थी वो पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी बेटी को छोड़ रहा था

करीब 5 मिनट तक्क अपनी बेटी के होठ चूसने के बाद रामलाल अपनी जीभ को सीधा अपनी शादी शुदा बेटी के मुह्ह में घुसा देता है

और अगले hi पल उसके लुंड से ज्वाला मुखी फुट पड़ता है सारा का सारा वीर्य मल्टी के पेटीकोट को भीगता हुआ सीधा उसकी छूट को भीगा रहा था

आपने बापू का गरम और चिपचिपे वीर्य को अपनी छूट पर साफ़ साफ़ महसूस कर रही थी

अब भी रामलाल अपने लुंड को अपनी बेटी को गांड में आगे पीछे करता हुआ उसके मुह्ह को चूस रहा था और लगभग 2-3 मिंट तक वो ऐसे hi झटके मरता रहा और अपनी बेटी की जीभ को चुस्त रहा

इस बिच मल्टी भी झाड़ चुकी थी

दोनों बाप बेटी की काम अग्नि भले hi शांत हो गयी थी पर दोनों के मुह्ह अब भी जुड़े हुए थे मनो दोनों एक दूसरे को सांस दे रहे हो ......
 
मास्स भाई आप मेरी कहानी के रेगुलर रीडर्स में से एक है

आपके सुग्गेस्टियन्स मुझे काफी हद्द तक्क ठीक भी लगते है

पर यह सीन कुछ अलग है मेरे हिसाब से सेडक्टिव hi सांसे अच्छी चीज़ज़ है क्योंकि जब एक बार चुदाई हो जाती है तो सब कुछ ख़त्म हो जाता है

दोनों hi लोग एक दूसरे से पूरी तरह खुल चुके होते है

मेरे कहने का मतलब यही है की भले hi कहानी कितनी भी लम्बी क्यों न जाये पर मेरे रीडर्स को पूरा मजा आना चाहिए

होप आप मेरी बात से एग्री करेंगे

धन्यवाद्....
 
अपडेट-172

रामलाल को झड़े हुए लगभग 10-15 मिंट बीत चुके थे

वो अब भी अपनी बेटी से पूरी तरह चिपका हुआ लगातार उसके बदन से निकल रही मादक महक को सूंघे जा रहा था

आपने बूढ़े बाप की तेज गति से चलती सांसो को मल्टी साफ सुन्न सकती थी

इधर रामलाल कभी मल्टी की गर्दन को चूमता तो कभी अपनी बेटी के कानो को मुह्ह में भर कर चूसने लगता

आज मल्टी को भी अहसास हो चूका था की उसका बाप काम अग्नि में किश कदर जल रहा था और अंदर hi अंदर मल्टी को खुद पर नाज़ था की आज उसने एक बेटी होने का असल फरज़ज़ अदा किया

इधर हरिया के एक हाथ अब भी अपनी बेटी के निप्पल को मसलने में लगा हुआ था

मल्टी अंदर hi अंदर कसमसा रही थी पर बिना हिले डुले वो पूरा मजा ले रही थी

आखिरकार उसकी टैंगो के बिच की चिपचिपाहट काफी बढ़ जाती है और मल्टी उसे साफ़ करने का फैसला लेती है

पहले तो मल्टी मुद कर एक नजर अपने बापू पर डालती है जो अपनी आँखे बंद किये हुए hi अपनी बेटी के अंगो के साथ खेल रहा था

मल्टी अपना मुँह आगे घूमती हुई थोड़ा आगे की और सरकती है और अपना एक हाथ पीछे ले जाते हुए बिना किसी शर्म संकोच के सीधा अपनी दोनों गांड के बिच घुसती हुई अपने बापू का मुरझाया हुआ लुंड पकड़ लेती है

मल्टी का हाथ जैसे hi अपने बापू के चिपचिपे हो चुके लुंड पर पड़ता है उसे अंदाजा हो जाता है की उसके बाप ने कितना माल अपने लौड़े में दबा के रखा हुआ था जो आज उसकी वजह से बहार आ पाया

मल्टी एक पल के लिए लुंड को थामे रहती है और अगले hi पल लुंड को वैसे hi पकडे पकडे अपनी गांड को बहार की एयर खींच लेती है

जैसे hi रामलाल का लुंड बहार आता है मनो उसे एक दम से होश आ जाता है

रामलाल एकाएक अपनी आँखे खोल देता है

उसका सिकुड़ा हुआ लुंड अब भी उसकी बेटी के हाथ में hi था

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मल्टी अपना हाथ हटती हुई उठ कर बैठ जाती है और झट से अपनी आजाद हुई चूचियों को पकड़ कर ब्लाउज में कैद करती हुई उठ कर कमरे से बहार निकल जाती है

इधर रामलाल अपनी बेटी को जाता हुआ देख कर दुबारा से अपनी गर्दन निचे करके लेत जाता है

मल्टी कमरे से निकल कर सीधा बाथरूम में घुस जाती है और अपने पेटीकोट क्र नदी को पकड़ कर एक झटके में खोल देती है

उसका पेटीकोट सरसराता हुआ एक पल में hi निचे गिर जाता है

अब मल्टी निचे से पूरी तरह नंगी थी

मल्टी अपनी अपनी दोनों टंगे फैलाती हुई अपने एक हाथ को अपनी टैंगो के बिच ले जाती है और उस पर लगा अपने बाप का विरया साफ़ करने लगती है

एक बार तो मल्टी अपने हाथ को अपने चेहरे तक लती है और उसे सूंघते हुए अपनी आँखे बंद कर लेती है

करीब 1 मिंट तक खुद के hi बाप के विरया को सूंघ कर उसके चेहरे पर चमक सी आ जाती है

मल्टी की खुसी उसके चेहरे पर साफ़ चमक रही थी

मल्टी दुबारा से अपनी छूट और गांड को पानी से साफ़ करना शुरू कर चुकी थी

इधर मल्टी को गए हुए करीब 5 मिंट hi हुए थे और रामलाल अपनी बेटी के वापस आने का इन्तजार कर कर के मनो पागल सा हुआ जा रहा था

उसका एक हाथ अब भी अपना मुरझाये हुआ लुंड सेहला रहा था

मनो वो अपनी बेटी के वापस आने से पहले अपने लुंड को दुबारा से तैयार करना कहह रहा हो .......
 
अपडेट-173

रामलाल अच्चानक से उठ खड़ा होता है

उसकी कमर पर लपटि हुई अधखुली धोती एक पल में hi खुल कर निचे गिर जाती है

रामलाल लगभग नंगा हो चूका था

वो उसी हालत में कमरे के बहार चल देता है

अब तक उसका लुंड भी लगभग दुबारा से खड़ा हो चूका था

चलते समय भी लगातार अपने लुंड को मिथिये जा रहा था

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इधर बाथरूम में मल्टी अपनी छूट और गांड को रगड़ रगड़ कर साफ़ कर रही थी

रामलाल जैसे hi बाथरूम के गेट तक पहुंच कर अंदर का नजारा देखता है उसकी काम अग्नि एक बार फिरर से अपनी बेटी के प्रति भड़क उठती है

अंदर मल्टी सिर्फ एक ब्लाउज पहने हुए अपनी गांड रामलाल की और घुमाये खड़ी थी

बिना किसी डर यया शर्म के रामलाल वैसे hi अपना लुंड थामे हुए अपनी बेटी की और बढ़ जाता है

दरवाजे को अंदर की और धकेलता हुआ रामलाल अंदर दाखिल होता है

दरवाजे की आवाज से मल्टी एक दम से पलट कर देखती है और वह कोई और नहीं बल्कि उसका बाप अपना लुंड थामे खड़ा था

मल्टी और रामलाल की नकरे एक बार फिर से मिलती है

दोनों hi निचे से पूरी तरह नंगे थे पर इस पल इन दोनों बाप बेटी की आँखों में कोई लाज शर्म नहीं थी

रामलाल की सुर्ख लाल आँखों को देख कर तो लग रहा था की आज वो अपनी फूल सी बेटी के इस गदराये बदन को नोच खायेगा

मल्टी की नजर जैसे hi थोड़ी निचे को जाती है

अपने बूढ़े बाप का खड़ा लुंड देख कर उसकी आँखों में एक अलग सी चमक आ जाती है

इधर रामलाल अपनी शादीशुदा बेटी की आँखों में देखता हुआ बड़ी hi बेशर्मी के साथ अपना लुंड मसले जा रहा था

मल्टी कभी रामलाल की आँखों में देखती तो कभी नजरे निचे झुकाती हुई अपने बाप के लुंड को देखने लगती है

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रामलाल अपने लुंड को मसलता हुआ अपनी बेटी की और बढ़ता है

इधर मल्टी की धड़कने यही सोच कर बढ़ती जा रही थी की अब उसका बाप उसके साथ क्या करेगा

पर इस बिच मल्टी ने भी अपने नंगे जिस्म को ढकने की कोई कोशिश नहीं की

रामलाल- बेटी

मल्टी- बापू

दोनों बाप बेटी के बिच बस इतनी hi बात हुई थी की रामलाल अपनी बेटी के नंगे जिस्म को नोच खाने के लिए उस पर झपट पड़ता है

अपनी बेटी को गिरफ्त में लेते hi रामलाल सीधा उसके रसीले होठो को चूसना शुरू कर देता है

मल्टी तो किसी जल बिन मछली की तरह तड़पड़ती हुई अपने बाप की बहो में सिमटती hi जा रही थी

अपने बापू के इस तरह अपना मुँह चूसे जाने से मल्टी का पूरा तन बदन एक दम से गंगना उठा था

मल्टी के होंठ इतने रसीले थे की उसका बूढ़ा बाप अब उसके निचले होठ को अपने मुँह में भर कर चूस रहा था

कभी उसके होठो को अपने दातो के बिच पकड़ कर चबाने लगता

अब तक रामलाल का एक हाथ मल्टी की चूचियों पर तो एक हाथ पीछे से होता हुआ अपनी बेटी की मांसल कमर को जकड चूका था

मल्टी- अह्ह्ह्हह

रामलाल एक दम से अपना मुँह मल्टी से अलग करता है

दोनों बाप बेटी एक दुआरे को hi देख रहे थे

रामलाल अपनी बेटी की आँखों में देखता हुआ उसकी कमर पर उभरी हुई चर्बी को मसल देता है

मल्टी अपने बाप के इस हमले से कसमसा उठती है

मल्टी- अह्ह्ह्हह

रामलाल- बेटी तू तो पूरी तरह एक औरत बन गयी है

मल्टी अपने कंपते होठो से बोलती है

मल्टी- पर अब भी तो मैं आपकी बेटी hi हु न बापू

रामलाल मल्टी को पूरी तरह दिवार से चिपका चूका था

रामलाल - पर अब मेरी बेटी एक गदराई हुई औरत बन गयी है और मैं इस औरत के बदन को चखना कहता हु

मल्टी- आपने hi तो दिया है बापू मुझे ये शरीर और अब ये गदराई हुई बेटी आपको औरत होने का पूरा मजा देगी

इतना बोलते हुए मल्टी अपना हाथ आगे बढ़ती हुई सीधा अपने बाप का लुंड पकड़ लेती है

जैसे hi मल्टी का हाथ रामलाल के लुंड पर पड़ता है उसका पुरे शरीर में एक बिजली की लेहेर दौड़ जाती है

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रामलाल- अह्ह्ह्हह्हह बेटीईईई

मल्टी- क्या हुआ बापू

रामलाल- बेटी तेरे इस बाप के लुंड लो बहुत दिनों बाद किसी औरत ने चुवा है

मल्टी- और वो औरत ाकि hi बेटी है

इतना बोलते हुए मल्टी अपने बाप के गाल पर एक चूमा देती है उसकी छाती को चूमते छुटते हुए निचे की और सरकने लगती है

अपनी बेटी की हरकतों से रामलाल मनो हवा में उड़द रहा था

उसका लुंड रह रह कर झटके खाये जा रहा था और ऊपर से मल्टी अपने हाथो से लगातार अपने बाप के लुंड को मिथियाती जा रही थी

अंतत में मल्टी निचे सरकती हुई अपना चेहरा अपने बापू के लुंड के करीब ले जाती हुई और अपने दूसरे हाथ से रामलाल के तत्तो को पकड़ कर उसके लुंड को मसल मसल का निचोड़ना चालू कर देती है

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रामलाल- अह्ह्ह्ह बेटी तू तो सच में खिलादन है

मल्टी- अभी आपने अपनी बेटी का पूरा खेल देखा hi खा है बापू

रामलाल- तो दिखा दे न बेटी अपने इस बूढ़े बाप को अपना पूरा खेल

मल्टी लुंड की चमड़ी को पूरा पीछे खींचती हुई अपने बाप के लुंड का टोपा पूरा खोल देती है

अपनी बेटी की इस हरकत से रामलाल तड़प उठता है

इधर मल्टी अब तक अपनी जीभ से टोपे को चेतना शुरू कर चुकी थी

रामलाल- बेटी तू सच में एक औरत का मजा दे रही है मुझे आज

मल्टी- बापू तुम्हारी इस बेटी के अंग्ग अंग्ग में मजा है अभी तो पूरा बाकि मजा देना बाकि है

अभी रामलाल कुछ करता या मल्टी कुछ करती उससे पहले hi बहार से कुछ आवाज आती है और दोनों बाप बेटी घबरा कर अलग हो जाते है

मल्टी- बापू लगता है हरी जाग गया

रामलाल- इस मादरचोद को भी अभी जागना था

मल्टी- अरे बापू उस बेचारे को क्यों गली दे रहे हो

अपनी बेटी की इस गदराई जवानी को कल साख लेना

मल्टी बड़ी hi बेरहमी के साथ रामलाल के तत्तो को मसलती हुई बोलती है और एकाएक अपना पेटीकोट पहनती हुई बाजार निकल जाती है

रामलाल को इस समय अपने बेटे पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था ओर कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था

वो बुचरा बुद्धा सदा सा मुँह बना कर बहार आ जाता है

और कमरे में जाकर देखता है तो हरी सच में जगा हुआ था एयर मल्टी से बाटे कर रहा था

रामलाल चुप चाप सो जाता है

मल्टी को अपने बाप की हालत देख कर हसी आ रही थी .....
 
अपडेट-174

दूसरी तरफ

रात होते होते रवि अपने घर पहुंच जाता है

रेखा और मेघा दोनों hi घर के बहार खटिया बिछा कर बैठी हुई थी

रेखा- क्या बात है रवि आज लेत कैसे हो गया

रवि- अरे दीदी वो हरिया काका मिल गए थे

रेखा- क्या बोल रहा था वो साला हरामी बुद्धा

मेघा- अरे क्यों गली देती रहती है तू हरिया काका को

रवि- वही सब इधर उधर की बात और कह रहे थे की नीलम दीदी के लिए कोई अच्छा लड़का धुंध रहे है

रवि की बात सुन्न कर रेखा जोरो से हसने लगती है

मेघा- अरे पगली इसमें हसने की क्या बात है वो एक बाप का फरज़ज़ निभा रहा है और तुझे हसी आ रही है

रेखा एक नजर रवि की और देखती है और आँखों hi आँखों में कुछ पूछती है

रवि भी अपनी दीदी की नजरो में देखता हुआ हां में सर हिला देता है

रेखा - अरे दीदी हसु ना तो और क्या कृ आप बताओ

वो साला हरामी अपनी बेटी के लिए कोई अच्छा वाला लड़का धुंध रहा है

मेघा- अच्छा तो इसमें हसने की क्या बात है

रेखा- अरे मेरी भोली भली दीदी

बात ये है की वो साला सुवर का बच्चा हरामी होने के साथ साथ बेटीचोद भी है और दिन रात अपनी बेटी की छूट और गांड में मुह्ह डेल पड़ा रहता है

जब उसे अपनी सगी बेटी का गदराया जिस्म नोचने से फुर्सत मिलेगी तब तो देखेगा कोई अच्छा वाला लड़का

रेखा इतराती हुई एक hi साँस में साडी बाटे बोल देती है

इधर मेघा दीदी का मुँह ये सब सुन्न कर खुला का खुला रह जाता है

मेघा को तो मनो साप सूंघ क्या था

मेघा- क्या बात कर रही है रेखा तू

इतने में रवि भी मेघा दीदी के बगल ने चिपकता हुआ बैठ जाता है और अपनी दीदी के करीब अत हुआ उसकी खुसबू को सूंघता हुआ अपना एक हाथ सीधा मेघा दीदी के पेट पर रख देता है

रवि- रेखा दीदी सच कह रही है दीदी और यही नहीं हरिया काका के साथ साथ राजू भी अपनी दीदी को छोड़ता है

अब तो मनो मेघा की साँस hi फूलने लगी थी अपने छोटे भाई बेहेन की बात सुनकर

मेघा- है राम ये दोनों बाप बेटे नीलम को छोड़ते है

रेखा- यही नहीं मेरी प्यारी दीदी दोनों बाप बेटे एक साथ नीलम की छूट और गांड में अपना लुंड दाल कर उसे पेलते है

और वो कुटिया भी खूब मजे ले ले कर अपने बाप और भाई से एक साथ अपने दोनों छेद पेलवाती है

अब तक रवि का हाथ मेघा दीदी की जांघो के बिच हरकत करना शुरू कर चूका था

पर मेघा को मनो अब इससे कोई फरक hi नहीं पड़ता था

रवि- दीदी मैंने और रेखा दीदी ने देखा था हरिया काका नीलम की छूट छोड़ रहे थे और पीछे से राजू नीलम दीदी की गांड में अपना लुंड दाल कर उन्हें छोड़ रहा था

इतना बोलते हुए रवि अपने हाथ को सीधा सदी के ऊपर से hi मेघा की छूट पर रख देता है

मेघा अपने छोटे भाई के इस हमले से तड़प उठती है

वो अपना हाथ रवि के हाथ पर रखते हुए अपनी छूट पर दबाने लगती है

रवि समझ चूका था की उसकी बाते उसकी दीदी को पूरी तरह गरम कर चुकी है

अगले hi पल रवि अपने एक हाथ को मेघा की चुकी पर रखता हुआ अपने होठ सीधा मेघा दीदी के होठो पर रख देता है

रेखा और रवि की बातो से मेघा इस कदर गरम हो गयी थी की रवि को अपनी बड़ी दीदी के होठो की तपिश साफ़ महसूस हो रही थी

मेघा अभी कुछ करती उससे पहले hi कम्मो की पायल की आवाज आती है और मेघा झट्ट से रवि को दुर्र करती हुई उसके हाथ को भी हटा देती है

कम्मो- दीदी खाना परोस दिया है आजाओ

मेघा और रेखा दोनों कम्मो को देख रही थी

और कम्मो की नजर तो चुप चुप कर रवि को देख रही थी

इधर रवि कम्मो को दिखता हुआ अपने लौड़े को धोती के ऊपर से hi मसल रहा था

आपने छोटे भाई की बेशरमी को देख कर कम्मो पानी पानी हुई जा रही थी

मेघा- चल रवि खाना खा ले दिर सोना भी तो है

रवि कम्मो की एयर देखता हुआ बोलता है

रवि- आज की रात इतनी जल्दी नींद नहीं आने वाली दीदी मुझे

मेघा- अरे चल खाना खा ले फिर तेरा जो मन हो वो करना

तीनो भाई बेहेन उठ कर घर के अंदर चल देते है झा कम्मो पहले से hi सबका खाना परोस चुकी थी ......
 
अपडेट-175

थोड़ी hi देर में सब लोग खाना खा चुके थे

इस बिच कम्मो बार बार नजर चुरा कर रवि को hi देख रही थी

रवि भी जनता था की उसने जो हरकत कम्मो के साथ दोपहर में की थी उसके बाद से कम्मो की बेचैनी बढ़ना लाजिम सी बात थी

पर असल में तो रवि को भी अब उस पल का इन्तजार था जब सब सो जायेंगे और वो कम्मो दीदी को किया हुआ वडा निभाएगा

खाना खाने के तुरंत बाद hi मेघा दीदी कमरे में जाती हुई अपनी जगह पर लेत जाती है

जब से उसने अपने भाई बेहेन के मुँह से नील के परिवार के बारे में सुना था उसके गदराये जिस्म में एक अजीब सी झुरझुरी हो रही थी

उसकी छूट तो मनो सूखने का नाम hi नहीं ले रही थी

मेघा की आँखों के सामने रह रह के बस यही कल्पना चल रही थी की किस तरह नीलम अपने hi छोटे भाई और बाप से एक साथ अपनी छूट और गांड मरवाती होगी

क्या उसे मजा अत होगा या हरिया और राजू जबरदस्ती उसे छोड़ते है

कुछ भी हो पर इन सब बातो का असर अब सीधा सीधा मेघा दीदी की छूट पर होने लगा था

वो इतनी गर्म हो चुकी थी की यह सब सोचते सोचते उसका हाथ खुद बा खुद hi अपनी एक चुकी को ब्लाउज के ऊपर से hi सेहला रहा था

इधर खाना खा कर कम्मो बर्तन धोने लगती है और रेखा पास hi पड़ी खट्ट पर लेत जाती है

रेखा- है राममम आज तो लग रहा है मेरी कमर hi टूट जाएगी

रवि भी रेखा के साथ लग कर खत पर बैठ जाता है

रबी क्या हुआ दीदी कमर को क्या हुआ अभी तो मैंने कुछ किया hi नहीं है

रवि कम्मो की और देखता हुआ बोलता है

कम्मो भी रवि की बाटे साफ़ सुन्न सकती थी पर वो बिना मुड़े अपना काम जारी रखती है

रेखा - किया नहीं है और कर भी नहीं सकता

रवि- मतलब दीदी

रेखा- मतलब ये की आज तुझे सिर्फ मेघा दीदी से काम चलना पड़ेगा मेरा महीना आए गया है

रवि- तो उसमे क्या हुआ खून hi तो निकल रहा है

वो कौन सी बड़ी बात है

रेखा- अच्छा बड़ी बात नहीं है कमीने अगर मैं पेट से हो गई न तो पता है कितनी बदनामी होगी

आज तो तुझे मेघा दीदी hi मिलेगी बास

रवि थोड़ा इतराते हुए बोलता है

रवि- चलो कोई नहीं एक नहीं तो दूसरी दीदी hi सही हाहाहाहाहा

कम्मो को अपने छोटे भाई की यह बात सुनकर अजीबब सा महसूस होता है

उसके बदन में बिजली की एक लेहेर सी दौड़ जाती है

कम्मो जानती थी की रवि किस तरह रेखा दीदी को छोड़ता है

पर क्या वो मेघा दीदी के साथ भी वही तरीका अपनाता है

अब कम्मो को यह बात जननी थी की क्या रवि अपनी सबसे बड़ी दीदी को भी किसी रंडी की तरह छोड़ता है

यही सब सोच सोच कर कम्मो की छूट से रह रह कर कुछ बुँदे टपक रही थी जो सीधा उसके पेटीकोट को गिला किये जा रही थी

रवि- ठीक है दीदी लगता है आप आज यही सोने वाली हो वैसे भी आपका आज अंदर कोई काम नहीं है हहहह

रेखा- अच्छा कमीने आज मेरी खवारी आयी है तो तुझे मेरा काम नहीं है भूल मत तुझे सबसे पहले छूट का स्वाद मैंने hi चखाया था

रवि- अरे ः दीदी भड़कती क्यों हो चलो अंदर चलते है वैसे भी मुझे लग रहा है की तुम्हारी बातो से मेघा दीदी पूरी गरम हो चुकी है

रेखा- चल फिर बजा दे आज अपनी बड़ी दीदी का बजा

रेखा और रवि उठ कर कमरे के अंदर जाने लगते है

अंदर घुसते घुसते रवि कम्मो की और देखता है और जैसे hi दोनों भाई बेहेन की नकार मिलती है रवि एक जोरदार छठा जड़ देता है रेखा की मांसल गांड पर

बिना पंतय के सिर्फ पेटीकोट पहने रेखा इस तमाचे से गंगना जाती है

आवाज इतनी तेज की मेघा दीदी भी सुन्न सकती थी

कम्मो अपने भाई की हरकत देखकर सिहर उठती है

रवि कम्मो को देखता हुआ उसे चुम्मा देता हुआ अंदर घुस जाता है

रेखा भी अपनी गांड सहलाती हुई कमरे के अंदर घुसते हुए कमरे को अंदर से बंद कर देती है

इधर कम्मो भी जल्दी जल्दी बर्तन धोने लगती है आखिर उसे देखना भी तो था की आज उसका छोटा भाई अपनी सबसे बड़ी दीदी के साथ क्या क्या करेगा .......
 
अपडेट -176

कमरे के अंदर जाते hi रेखा सीधा बिस्तर पर गिर जाती है

मेघा- अरे तुझे क्या हुआ री रेखा

रेखा- दीदी आज मेरा महीना आया व है लग रहा है की शरीर में जान hi नहीं है

कमर तो मनो टूट hi जाएगी आज

मेघा- हहहह लगता है तूने अपने छोटे भाई से कुछ ज्यादा hi ठुकाई करवा ली है अपने पिछवाड़े की जो तेरी कमर टूटने लगी है

रेखा पलट कर मेघा दीदी की और देखती है क्योंकि ये आज पहली बार था जो मेघा दीदी खुल कर बोल रही थी

रेखा- अरे ः हस्स लो दीदी हस्स लो आज जब ये आपकी ठुकाई करेगा न तब देखना कल कैसे चलोगी टंगे फैला कर

मेघा- अच्छा मतलब तू भी इससे ठुकवाने के बाद टंगे फैला लार चलती है हहहह

रेखा - अरे दीदी मुझे परेशान मैट करो मुझे तो आज सोना है बास

मेघा - अरे रवि बोल आज किसको छोड़ेगा मेरी छूट मरेगा या अपनी रेखा दीदी की गांड हहहह

रवि- दीदी अब तो मेरा भी मैं कर रहा है की रेखा दीदी की गांड का एक राउंड लगा hi लू वैसे भी इनको डर है की अगर मैंने इनकी छूट में छोड़ा तो ये माँ बन जाएगी

मेघा- अरे तो क्या हुआ गांड छोड़ने से माँ थोड़े hi बनेगी आज तो तू इसकी गांड hi मार्ले

वैसे भी जब महावारी आती है तो औरतो को कुछ ज्यादा hi छुड़वाने का शौक चढ़ता है

रेखा अब पूरी तरह चिड़चिड़ी हो चुकी थी

रेखा - अरे आप hi छुड़वाओ इससे अपनी गांड और छूट आज मेरा कोई मैं नहीं है और अगर रवि तू मेरे पास भी आया न तो कसम से आज मैं तेरा लुंड तोड़ दूंगी

तीनो भाई बेहेन कमरे में खुओ कर बात कर रहे थे और यह हमारी काममो रानी भी अपनी पोजीशन पर पहुंच कर कमरे के अंदर देखते हुए साडी बाटे सुन्न रही थी

कम्मो को यकीन नहीं हो रहा था की उसकी मेघा दीदी जैसी इज्जतदार औरत भी बंद कमरे के अंदर किसी रंडी की तरह बात कर रही थी

यह सब सुन्न कर कम्मो की साँस फूलना शुरू हो चुकी थी उसे तो बस अब इन्तजार था चुदाई का

इधर कमरे के अंदर रवि खड़ा खड़ा hi एक झटके में अपनी धोती को अलग कर देता है और जैसे hi वो मेघा दीदी की और बढ़ता है तभी उसकी नजर घर के पिछवाड़े खुलने वाली खिड़की पर पड़ती है

चांदनी रौशनी में झक्ति दोनों आँखे रवि को साफ नजर आ रही थी और वो यह भी जान चूका था की वो आँखे किसकी है

रवि- अच्छा तो कम्मो दीदी अब तुम्हारी छूट की गर्मी इतनी बढ़ गयी हसि की अब तुम सीधा कमरे के अंदर झाकने लगी हो

आज तो ऐसी चुदाई करूंगा मेघा दीदी की की तुम खड़े खड़े hi मूतने लगोगी

रवि अपने लुंड को हाथो में लेकर मसल रहा था इधर मेघा दीदी जो की पहले से hi भट्टी की तरह गरम थी उसे अपने छोटे भाई के लुंड की नशे देख कर एक ानिब प्रकार का नशा साध रहा था

मेघा के नथुने लगातार फूलते hi जा रहे थे

रवि- क्या हुआ दीदी डर लग रहा है क्या

मेघा- नहीं तो मैं क्यों डरूंगी तुझसे

रवि एक नजर रेखा पर डालता है जो की अब तक नाक बजान शुरू कर चुकी थी

रवि- क्योंकि अब मैं आपकी ठुकाई करने वाला हु और जैसा की रेखा दीदी ने खा था आज सुबह आपको टंगे फैला कर hi चलना पड़ेगा

आपने छोटे भाई के मुँह से यह बात सुन्न कर मेघा का दिल जोरो से धक् धक् करने लगता है

इधर बहार खड़ी कम्मो भी सब सुन्न रही थी और उसकी हालत भी कुछ कुछ मेघा दीदी के जैसी hi थी

रवि अपने मुसल समान लुंड को मसलता हुआ आगे बढ़ता हुआ मेघा दीदी के करीब अत है

इधर मेघा जो की त्यों बैठी बैठी कुछ सोच hi रही थी की अच्चानक उसे होश आता हसि जब तक उसके छोटे भाई का लुंड उसकी आँखों के सामने लटक रहा था

मेघा अपना थूक गटकते हुए उसे देखती है

रवि बड़े hi प्यार से अपनी बड़ी दीदी के सर पर हाथ फहरता हुआ उसे अपनी और खींचता है

मेघा समझ चुकी थी की उसका छोटा भाई उसके साथ अब क्या करने वाला हसि मेघा थोड़ा जोर लगती हुई जटास की मास्स रहती है

इस बार रवि थोड़ा सख्त होता हुआ सीधा मेघा के बालो को पकड़ कर अपनी और खींचता है

इस बार मेघा की चालाकी कोई काम नहीं आती और वो किसी कटी पतंग की तरह अपने छोटे भाई के लुंड की तरफ गिरने लगती है

रवि का लुंड अब मेघा के माथे को छू चउकस था

उसकी गर्माहट को वो साफ़ महसूस कर सकती थी पर न जाने क्यों उसके अंडरर अब भी अपने छोटे भाई का लुंड देखने के बाद एक डर सा पनप रहा था

इधर रवि उसके बालो को मजबूती से पकडे हुए hi दूसरे हाथ से लुंड मो थमते हुए अपनी दीदी के सर के ऊपर मरने लगता है

मेघा को अब ऐसा लग रहा था मनो उसके सर पर कोई हथोड़ा मार रहा हो

रवि- क्या हुआ दीदी अब डर लग रहा है न मेरे लुंड को इतना पास से देख कर

मेघा अपना थूक गटकती हुई हम्म्म करती है

रवि- अरे अभी तो कुछ किया hi नहीं है मैंने और आप अभी से डरने लगी अभी तो आपकी असली ठुकाई होना बाकि है

मेघा- तुझे शर्म नहीं आती अपनी बड़ी दीदी के सामने ऐसी बाटे करता है

रवि- दीदी शर्म तो मुझे तब आएगी जब तुम्हारे इस गदराये बदन को अपने लुंड पर उछलूँगा और तुम्हारे मुँह से चीखे निकलवाऊंगा

रवि की बाटे अब मेघा को और भी गरम कर रही थी

मेघा- तो क्या तू रेखा की hi तरह मुझे भी छोड़ेगा

रवि- दीदी रेखा दीदी की ब्रांडी कोई नहीं कर सकता पर हां ये मेरा वडा है की जिस तरह मैं उन्हें छोड़ता हु उसी बेरहमी के साथ आज आपको भी छोडूंगा

आपने छोटे भाई के लुंड की गर्माहट से और उसकी बातो से अब तक मेघा की छूट कॉमर्स छोड़ना शुरू कर चुकी थी

इधर बहार खड़ी कामो का हाथ भी अब तक अपने पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी ुंचुड़ी छूट को कुरेदना शुरू कर चुकी थी
 
अपडेट-177

अब ाजी...

रवि अपने लुंड को लगातार मेघा दीदी के मुँह के आगे घूमता हुआ मसल रहा था

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इधर मेघा की धड़कन लगातार बढ़ती जा रही थी

रवि आगे बढ़ता हुआ अपने लुंड की चमड़ी को पोछे खीचता हुआ अपने लाल सुपडे को सीधा मेघा दीदी के रसीले होठो पर रख देता है

रवि- चुसो न दीदी अपने छोटे भाई का लुंड

मेघा- बिना कुछ बोले hi अपना थोड़ा सा मुँह खोल कर अपने छोटे भाई के लुंड को रास्ता देती है

रवि बिना देर किये अपना लुंड मेघा दीदी के मुँह में सरकने लगता गई

मेघा का मुँह चीरता हुआ रवि का विशाल लुंड अब सीधा उसके गरम मुँह की गहराईयों में उतरता hi चला जा रहा था

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इस बार रवि देर न करता हुआ सीधा मेघा के सर के पिछले हिस्से को पकड़ता हुआ अपनी कमर को आगे की ाहर दबाता हुआ आधे से ज्यादा लुंड मेघा के मुँह में ठुस्स देता है

मेघा अपने छोटे भाई की इस हरकत से अंदर तक्क सुहार उठती है

वो जान चुकी थी की आज उसकी दमदार ठुकाई होने वाली है

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मेघा की तड़प और दर्द से आज रबी को कोई फरक नहीं पड़ने वाला था

रवि अपनी दीदी के मुँह में लुंड डेल हुए hi अपनी दोनों टैंगो को फैलता हुआ अपनी पोजीशन बनता है

उसके एक हाथ ने अब भी मेघा दीदी के बालो को कसकर पकड़ रखा था

इस बार रवि अपना दूसरा हाथ भी मेघा के सर पर रखा हुआ अपने लुंड को बाजार खींचता हुआ एक दमरार झटका मरता हुआ मेघा के गरम मुँह को छोड़ना शुरू कर देता है

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कुछ hi पल में पूरा का पूरा लुंड मेघा के गले तक्क जा रहा था

मेघा को भले hi तकलीफ हो रही थी पर उसे इस बात का गर्ग भी था की आखिर कर उसने भी अपने छोटे भाई के लुंड को अपने गले तक उतार लिया

रवि बिना रुके लगातार झटके मरे जा रहा था

मेघा दीदी का चेहरा पूरी तरह लाल हो चूका था मनो ौरे शरीर का खून उसके चेहरे पर hi जम्म सा गया था

रवि अब अपना एक हाथ हटाता हुआ सीधा मेघा के ब्लाउज में घुसा देता है और अपनी दीदी की बड़ी बड़ी चूचियों को बेरहमी से मसलने लगता है

मेघा इस हमले से कसमसा जाती है

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रवि अपने लुंड को बड़े hi कामुक तिरके से आहिस्ता से बहार खींचता है उसके लुंड ने छोड़ छोड़ कर मेघा के मुँह को पूरा चिपचिपा कर दिया था और अब वही चिपचिपा रस मेघा कके मुह्ह से बाजार निकलने लगा था

रवि बिना देर किये निचे की और बैठता हुआ सीधा अपने होठो को मेघा दीदी के होठो पर रखता हुआ अपनी दीदी के मुह्ह से बेहटा कॉमर्स चाटने लगता है

उस्ले दोनों हाथ अब तक मेघा के ब्लाउज को खोलना शुरू कर चुके थे

मेघा भी बिना किसी शर्म लाज के अपने दोनों हाथो को उठती हुई अपने छोटे भाई को अपना ब्लाउज उतरने में पूरा सहयोग करती है रवि अपने दोनों हाथो से मेघा की दोनों चूचियों को निचोड़ने लगता है मेघा की आँखों से अब तक पानी आना शुरी हो चूका था

रवि अपने होठ हटाता हुआ मेघा दीदी के लाल हो चुके चेहरे को देखता है

मेघा- क्या हुआ ऐसे क्या देख रहा हसि देख तूने क्या हालत कर दी है मेरी

रवि - दीदी देख रहा हु की मेरी दीदी के इस गरम मुह्ह को अभी चुदाई की एयर जरूरत है

अगले hi पल रवि खड़ा हो जाता है और एक बार फिर से मेघा के मुँह के सामने उसके छोटे भाई का चिपचिपा लुंड लहराने लगता है

अबतक मेघा भी ौरी तरह जोश में आ चुकी थी मेघा हाथ बढ़ा कर सीधा रवि के लुंड को पकड़ लेती है और उसे मसलती हुई उसके ाँद सहलाने लगती है

मेघा- रवि अब बास कर मेरा मुह्ह दर्द कर रहा है इसे मेरी छूट में दाल दे भाई

रवि- दीदी मुँह छोड़ने में ज्यादा मजा अत है

मेघा- तुझे अपनी दीदी पर बिलकुल भी दया नहीं आती क्या देख मेरे मुँह की क्या हालत कर दी है तूने

मेघा अपना मुँह खोल कर रवि को दिखती है

रवि सीधा मेघा की ठुड्डी को पकड़ कर ऊपर की और उठता हुआ अपनी दीदी का खुला हुआ मुँह देखने लगता है

और अगले hi पल अपने लुंड को पकड़ कर उस खुले मुँह पर राखह देता है

रवि- दीदी हालत तो अब खराब होगी तुम्हारी जब मैं तुम्हारे इस मुँह को छोड़ छोड़ कर पूरी तरह फिआला दूंगा

यकीन मनो फिर कभी तुम्हारा मुँह इस मुहचुड़ै से दर्द नहीं होगा

रवि की बात सुनकर मेघा की आँखें फ़टी की फ़टी रह जाती है

रवि एक नजर खिड़की पर डालता है झा से कम्मो सब देख रही थी

अगले hi पल रवि एक झटके के साथ अपने पुरे लुंड को मेघा दीदी के गले तक उतारर देता है

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झटका इतना जोरदार था की मेघा का पूरा जिस्म कांप उठता है

वो अपने दोनों हाथो से रवि का हाथ अपने सर से हटाने की कोशिश करती है पर कोई फायदा नहीं था आज रवि अपनी दीदी पर रेहम करने के मुँह में नहीं था

रवि बिना रुके एक के बसद एक झटको के साथ मेघा दीदी के मुह्ह को चोदे जा रहा था

बिच बिच में वो अपने लुंड को पूरा गले तक ठूसता हुआ तेहेर जाता और मेघा की नाक को भी अपने हाथ से बंद कर देता

रवि की इस हरकत से मेघा की सास ृक्क जाती और उसका दूध सा सफ़ेद चेहरा और भी जयादा कामुक और लाल हो जाता

मेघा अपने दोनों हाथो को अपने छोटे भाई की जांघ ओर मरती हुई उसे बताने की कोशिश करती की उसका दम्म घुट्ट रहा है

रवि को थोड़ी दया अति और वो अपना पूरा लुंड एक झटके में बहार खींच लेता

मेघा दीदी खास्ती हुई अपने मुह्ह से बहुत सारा चिपचिपा थुक्क बहार उड़ेलने लगती

रवि अपने लुंड को मेघा के चेहरे पर घूमर पूरा थूक उसके चेहरे पर मलता hi जा रहा था

मेघा संभाल पति उससे पहले hi रवि उसे गिरता हुआ उसला पेटीकोट निकल देता है और अपनी दीदी की कमर को पकड़ता हुआ उसे घोड़ी बनाता हुआ अपना लुंड सीधा उसकी छूट में पेल देता है

लुंड एक hi झटके में सीधा मेघा की बच्चेदानी से टकराता है

मेघा दर्द्द से कराह उठती है

पर शतड आज मेघा को कोई बचने वाला नहीं था

इधर बाहर खड़ी कम्मो अपने छोटे भाई और बड़ी बेहेन की चुदाई देख कर इतनी गरम हो चुकी थी की उसकी छूट रस छोड़ छोड़ कर उसकी जांघो को गिला करने लगी थी

रवि बिना रुके अपनी दीदी को छोड़ता hi जा रहा था

रवि- बड़ी मस्त छूट है दीदी तुम्हारी आज तो पक्का इसका भोसड़ा बनाऊगा मैं

रवि के मुँह से ऐसी बाटे सिनकर मेघा के बदन में मनो करंट सा दौड़ने लगा था

वो भी अब अपनी गांड को पीछे की एयर मार कर अपने छोटे भाई से छुड़वाने का पूरा मजा ले रही थी

जब जब रवि का लुंड मेघा की बच्चेदानी से टकराता तो उसका पूरा अस्तित्व hi हिल जाता

आज पहली बार था की रवि मेघा दीदी को इस तरह छोड़ रहा था

रवि आगे हाथ बढ़ता हुआ मेघा के बालो को पकड़ता हुआ उसकी गर्दन को पीछे की एयर खीचता और एक हाथ से मेघा की गर्दन को पकड़ कर दबाने लगता है मनो वो अपनी दीदी का गला घोटत रहा हो

मेघा भी पागलो तरह आवाजे निकल रही थी

मेघा- अह्ह्ह्हह रवीए और अंडररर टककक डालल आह्हः तेरा लूंणड़द मेरीए अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मसमंमंमहा बच्चेदानी को मार रहा है रवि

रवि- आज तो तुम्हारी बच्चेदानी में hi बच्चा डालना है दीदी

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रवि- की बायत सुनकर मेघा को और भी जोश चढ़ने लगता है

जो काम उसका पति नहीं कर पाया वो उसका चिटा भाई करने की बात जो कह रहा था

मेघा को हमेशा से hi एक बच्चा चाहिए था

मेघा- तू सक्छः कह रहा है मेरे भाई तू मेरी बच्चेदानी में वीज डालेगा

रवि- हां दीदी मैं आपको बच्चा दूंगा

मेघा और रवि की बात सुनकर बहार खड़ी कामो की टंगे थरथर कम्पनी लगती है

मेघा- अह्ह्ह्हह रवि छोड़ दे अपना विरया मेरी छूट में बना दे अपनी दीदी को अपने बच्चे की मस्सासाअअअअ आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितना मस्त्त लौड़ा है रे मेरे भाई तेरा मैं तो धन्या हो गयी तेरे जैसा भाई पाए कर जो काम तेरा जीजा नहीं कर पाया वो तू करेगा आह्हः कितना अच्छा है रे मेरे राजा भाई तू

रवि सटासट अपना लुंड मेघा की छूट में पेले जा रहा था पूरा कमरा थप थप चुदाई की मादक आवाज से गूंज रहा था

रवि- अरे वो तो चक्का था दीदी तुम्हारा पति जो तुम्हारे जैसी गदराये बदन वाली औरत के जिस्म के मजे नहीं ले पाया पर तुम चिंता मैट करो तुम्हारा यह भाई तुम्हे जब तक छोड़ता रहेगा जब तक तुम पेट से न हो जाओ

दोनों भाई बहेनो का जोश अब आसमान छू रहा था

मेघा- हां हां हकड़ता रह मुझे दिन रात छोड़ तेरी hi तो दीदी हु तू नहीं छोड़ेगा तो कौन छोड़ेगा मुझे मेरा वो चक्का पति सेल का लुंड भी ठीक से नहीं उठता था

भगवान् ने मुझे ये गदराया जिस्म इसी लिए तो दिया है की मैं अपने छोटे भाई को औरत होने का पूरा सुख दे सखु

रवि- अभी तुमने पूरा सुख दिया hi खा है दीदी मुझे

मेघा- अह्ह्ह्ह और क्या चाहिए तुझे मेरे भाई

रवि- मुझे तुम्हारी गांड का कसीला छेद चाहिए दीदी छोड़ने को

मेघा- एक बार मुझे माँ बन जाने दे उसके बाद से दिन रात मेरी मेरी गांड मरना ये वडा है अह्ह्ह पर अभी तू सिर्फ अपनी दीदी की छूट को अपने वीर्य से भरने का कम् कर

इस बिच मेघा 4 बहार झाड़ चुकी थी उसकी छूट की हालत इतनी खराब थी की वो लगातार चुड़ते हुए भी म्यूट जा रही थी

करीब 35 मिंट की धुवादार चुदाई के बाद रवि अपने गरम वीर्य की से अपनी दीदी की छूट को भरने लगता है मेघा की छूट में जैसे hi रबी का गरम वीर्य गिरना शुरू होता है

उसके बदन में आनंद मि एक अजीब सी लेहेर दौड़ जाती है

मेघा आगे की और झुकती हुई सीधा निचे गिर जाती है

रवि भी मेघा के ऊपर की और गिरता हुआ 5 मिंट तक अपनी दीदी की छूट में लुंड ठुसे रहता है ताकि उसके वीर्य की एक बून्द भी बहार न गिरने पाए .

आखिर उसे भी तो जल्द से जल्द अपनी दीदी की गांड छोड़नी थी

5 मिनट बाद रवि उठता हुआ अपनी धोती लपेटने लगता है

मेघा वैसे hi पड़ी पड़ी लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी

मेघा- खा जा रहा है

रवि- कुछ अधूरा काम पूरा करना है दीदी तुम सो जाओ मैं थोड़ी देर में आता हु

रवि की चुदाई के आगे मेघा का पूरा बदन टूट रहा था उसके बदन में अब जरा सी भी जान नहीं थी की वो कुछ और कर सके

इधर बाजार खड़ी कामो रवि की बात सुनकर जल्दी से भाग कर अपनी खत पर आकर लेत जाती है

कम्मो की जांहग और छूट अब भी उसकी छूट से निकले कॉमर्स से पूरी तरह लटपट थी

उसका दिल जोरो से धड़क रहा था शायद वो जानती थी की उसका छोटा भाई अपनी बड़ी दीदी से किस अधूरे काम को पूरा करने की बात कर रहा था......
 
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