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अपडेट-169
रामलाल का घर.....
हरी चुपचाप बैठा अपने बूढ़े बाप और गदराई बेहेन की रासलीला देख कर मनो पागल सा हुआ जा रहा था
उसे समझ hi नहीं आ रहा था की आज इतने बरसो बाद इन बाप बेटी का कौन सा प्यार जाग गया यु अच्चानक से
खैर जल्द hi दोनों बाप बेटी एक दूसरे को खाना खिला चुके थे
रामलाल- वह बेटी मजा आ गया आज तो खाने में
मल्टी- तो बनाया किसने था बापू आपकी बेटी ने
रामलाल- तभी तो बोल रहा हु दिल खुस हो गया अपनी बेटी के हाथो का बना खाना खा कर
मन तो करता है की बनाने वाली की उंगलिया चूस जाऊ
ये बात रामलाल थोड़ा जोर देकर बोलता है वो भी पूरी बेशर्मी के साथ
जबकि सामने hi उसका बीटा भी बैठा था
इधर मल्टी खा मौका छोड़ने वाली थी
अगले hi पल मल्टी अपना एक हाथ अपने बापू के चेहरे की और बढ़ा देती है
मल्टी- तो चूस लो ना तुम्हारी बेटी के hi हाथ तो है बापू
रामलाल तो मनो इसी मौके की तलाश में बैठा था वो बिना समय गवाए आगे बढ़ता हुआ सीधा मल्टी के हाथ को पकड़ता हुआ उसकी 2 उंगलियों को अपने मुँह में भर लेता है
िडजर हरी अपने बापू की हरकतों को आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा था पर उसे ये सब अब भी नार्मल hi लग रहा तथा
पर अंदर का हाल तो मल्टी hi जानती थी
आपने मुँह के अंदर रामलाल अपनी सगी बेटी की उंगलियों को चूस hi नहीं रहा था बल्कि उनपर अपनी जीभ इस कदर चला रहा था मनो वो अपनी बेटी को अहसास दिलाना कहता हो की उसका बूढ़ा बाप उसकी छूट को चाट चाट कर ऐसे hi उसका भी स्वाद लेना कहता है
लगभग 5 मं तक रामलाल अपनी. बेटी की उंगलियों को उसी मादक अंदाज में चाटता hi रहता है
मल्टी- अह्ह्ह बापू छोड़ो ना आज hi साडी उंगलिया चूस जाओगे क्या मेरी
मल्टी एक झटके में अपनी उंगलिया अपने बापू के मुँह से बहार खींच लेती है
रामलाल किसी बच्चे की तरह उदासी से अपनी बेटी की और देखता रह जाता है
उसकी आँखों में एक लालसा थी
जो मल्टी को चीख चीख कर बता रही थी की उसने ये सही नहीं किया
मल्टी- राजू तू चल हम सबका बिस्तर लगा मैं आती हु
राजू अंदर कमरे में चला जाता है
मल्टी अपने बापू की और देखती हुई अपनी गीली उंगलियों को अपने मुँह के भर लेती है
यह नजारा इतना मादक था की रामलाल का खड़ा लुंड धोती के अंदर hi एक जोरदार झटका खता है जिसे मल्टी भी देख लेती है
अपनी बेटी को इस कदर अपना hi थूक चाटता हुआ देख मनो रामलाल पागल सा हो जाता है
और आज उसकी बेटी ने साफ़ साफ़ अपने बापू को अपने इरादे जाहिर कर दिए थे जिसे देख कर रामलाल पागल सा हुआ जा रहा था
रामलाल एक हाथ से अपनी धोती में खड़े लुंड को पकड़ता हुआ मल्टी की एयर झपटता है
मल्टी अभी अपने बूढ़े बाप को अपनी जवानी का रस चखने के लिए और तरसना कहती थी
मल्टी तुरंत hi भगति हुई कमरे की और बढ़ जाती है
मल्टी- चलो बापू लेत हो रहा है सोना नहीं है क्या
मल्टी इतराते हुए बोलती है
रामलाल वही खड़ा अपना खड़ा लुंड पकडे ललचाई नजरो से अपनी बेटी को कमरे के अंदर जाता देखता रह जाता है
पर रामलाल को एक बात की खुसी थी की जो वो कहता है उसकी बेटी भी वही कहती है
अगला अपडेट कुछ hi समय में
ाआधे अधूरे अपडेट के लिए माफ़ी....
रामलाल का घर.....
हरी चुपचाप बैठा अपने बूढ़े बाप और गदराई बेहेन की रासलीला देख कर मनो पागल सा हुआ जा रहा था
उसे समझ hi नहीं आ रहा था की आज इतने बरसो बाद इन बाप बेटी का कौन सा प्यार जाग गया यु अच्चानक से
खैर जल्द hi दोनों बाप बेटी एक दूसरे को खाना खिला चुके थे
रामलाल- वह बेटी मजा आ गया आज तो खाने में
मल्टी- तो बनाया किसने था बापू आपकी बेटी ने
रामलाल- तभी तो बोल रहा हु दिल खुस हो गया अपनी बेटी के हाथो का बना खाना खा कर
मन तो करता है की बनाने वाली की उंगलिया चूस जाऊ
ये बात रामलाल थोड़ा जोर देकर बोलता है वो भी पूरी बेशर्मी के साथ
जबकि सामने hi उसका बीटा भी बैठा था
इधर मल्टी खा मौका छोड़ने वाली थी
अगले hi पल मल्टी अपना एक हाथ अपने बापू के चेहरे की और बढ़ा देती है
मल्टी- तो चूस लो ना तुम्हारी बेटी के hi हाथ तो है बापू
रामलाल तो मनो इसी मौके की तलाश में बैठा था वो बिना समय गवाए आगे बढ़ता हुआ सीधा मल्टी के हाथ को पकड़ता हुआ उसकी 2 उंगलियों को अपने मुँह में भर लेता है
िडजर हरी अपने बापू की हरकतों को आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा था पर उसे ये सब अब भी नार्मल hi लग रहा तथा
पर अंदर का हाल तो मल्टी hi जानती थी
आपने मुँह के अंदर रामलाल अपनी सगी बेटी की उंगलियों को चूस hi नहीं रहा था बल्कि उनपर अपनी जीभ इस कदर चला रहा था मनो वो अपनी बेटी को अहसास दिलाना कहता हो की उसका बूढ़ा बाप उसकी छूट को चाट चाट कर ऐसे hi उसका भी स्वाद लेना कहता है
लगभग 5 मं तक रामलाल अपनी. बेटी की उंगलियों को उसी मादक अंदाज में चाटता hi रहता है
मल्टी- अह्ह्ह बापू छोड़ो ना आज hi साडी उंगलिया चूस जाओगे क्या मेरी
मल्टी एक झटके में अपनी उंगलिया अपने बापू के मुँह से बहार खींच लेती है
रामलाल किसी बच्चे की तरह उदासी से अपनी बेटी की और देखता रह जाता है
उसकी आँखों में एक लालसा थी
जो मल्टी को चीख चीख कर बता रही थी की उसने ये सही नहीं किया
मल्टी- राजू तू चल हम सबका बिस्तर लगा मैं आती हु
राजू अंदर कमरे में चला जाता है
मल्टी अपने बापू की और देखती हुई अपनी गीली उंगलियों को अपने मुँह के भर लेती है
यह नजारा इतना मादक था की रामलाल का खड़ा लुंड धोती के अंदर hi एक जोरदार झटका खता है जिसे मल्टी भी देख लेती है
अपनी बेटी को इस कदर अपना hi थूक चाटता हुआ देख मनो रामलाल पागल सा हो जाता है
और आज उसकी बेटी ने साफ़ साफ़ अपने बापू को अपने इरादे जाहिर कर दिए थे जिसे देख कर रामलाल पागल सा हुआ जा रहा था
रामलाल एक हाथ से अपनी धोती में खड़े लुंड को पकड़ता हुआ मल्टी की एयर झपटता है
मल्टी अभी अपने बूढ़े बाप को अपनी जवानी का रस चखने के लिए और तरसना कहती थी
मल्टी तुरंत hi भगति हुई कमरे की और बढ़ जाती है
मल्टी- चलो बापू लेत हो रहा है सोना नहीं है क्या
मल्टी इतराते हुए बोलती है
रामलाल वही खड़ा अपना खड़ा लुंड पकडे ललचाई नजरो से अपनी बेटी को कमरे के अंदर जाता देखता रह जाता है
पर रामलाल को एक बात की खुसी थी की जो वो कहता है उसकी बेटी भी वही कहती है
अगला अपडेट कुछ hi समय में
ाआधे अधूरे अपडेट के लिए माफ़ी....