अपडेट-183
रात भर कम्मो बेचारी उस मीठे दर्द को बर्दास्त करती रही जिसे उसका छोटा भाई छोड़ कर गया था
कम्मो को अब भी लग रहा था की उसके छोटे भाई का मोटा सूपड़ा उसकी बुर्र में फसा हुआ है
कामो को बेसब्री से अगले दिन का इन्तजार था जब वो खुल कर अपने छोटे भाई से अपनी छूट का भोसड़ा बनवा सखे
इधर कमरे के अंदर रवि दूसरी और पलट कर सो चूका था पर रेखा की आँखों से मनो नींद गायब hi हो गयी थी
रह रह के रेखा के मन में यही सवार आ रहा था की कहि रवि दरवाजा बंद करके कम्मो को छोड़ तो नहीं रहा था
यही सब सोचते सोचते दोनों बहनो की आँख लग जाती है
इधर दूसरी तरह रामलाल का घर..
हरी अपने बापू को हिलता हुआ उठता है
हरी - बापू बापू उठो बापू
रामलाल को सुबह सुबह अपने बेटे को देख कर खुंदक आ जाती है
रामलाल - क्यों भोक रहा है कुत्ते की तरह
हरी- बापू दीदी को तेह बुखार है बापू देखो ना अभी तक सोई हुई है
मैं दवाई लेने जा रहा हु दीदी के लिए तब तक आप चाय बना दो दवाई खा कर आराम हो जायेगा दीदी को
रामलाल उठ कर बैठ जाता है और सीधा मल्टी की कममर पर हाथ डालता हुआ अपनी बेटी का बुखार चेक करने लगता है
मल्टी का बदन किसी भट्टी की तरह टप्प रहा था
रामलाल- अरे तेरी दीदी को तो सच में बुखार आ गया है तू जा जल्दी से दवाई ले कर आजा
हरी जल्दी hi घर से निकल जाता है
रामलाल भी उठ कर बाथरूम जाता है और वापस आकर कूल्हे पर चाय चढ़ता हुआ दुबारा से अपनी बेटी के कमरे में जाता हुआ उसके सामने बैठ जाता है
रामलाल ( कितनी मासूम लगती हसि मेरी बेटी सोते वक़्त है इसके ये उठे हुए मादक हिस्से पता hi नहीं चला की मेरी बेटी कब औरत बन्न गयी )
रामलाल का लुंड अब धीरे धीरे खड़ा होना शुरू हो चूका था
रामलाल आगे बढ़ता हुआ मल्टी के माथे को सहलाता हुआ उसके गलो को सहलाने लगता है
मल्टी तो मनो बेसुध सी पड़ी हुई थी
रामलाल उसके गलो को सहलाता हुआ सीधा अपनी उंगलियों को अपनी बेटी के रसीले होठो पर रख कर रगड़ देता है
रामलाल- क्या होठ है बेटी तेरे मनो इस दुनिया का सारा रस तेरे इन 2 होठो में hi समय हूँ मन करता है की इनका सारा रस चूस जाऊ
रामलाल का हाथ निचे की और बढ़ता है और अपनी बेटी की पसीने से चिपचिपी छाती को रगड़ता हुआ वो अपना हाथ वापस से हटा लेता है
रामलाल रसोई में जाकर चाय उतरता है अब तक्क हरी भी आ चूका था
रामलाल- तू एक काम कर अपनी दीदी को कुछ खिला कर दवाई देदे तब तक मैं बहार से आता हु
रामलाल घर के बहार निकल जाता है और हरी भी उसके कहे मुताबिक मल्टी को कुछ हल्का फुल्का खिला कर दवाई दे देता है
हरी- दीदी आप आराम करो मैं बहार जा रहा हु
मल्टी- पर बापू खा है हरी वो नहीं दिख रहे कहि
हरी- अरे वो खा जायेंगे अभी आ जाएंगे किसी काम से बहार गए है
मल्टी- और तू खा जा रहा है
हरी प्यार से अपनी दीदी के चेहरे को पकड़ता हुआ उसे देखता है
मल्टी- ऐसे क्या देख रहा है
हरी- दीदी मैंने तुमसे वडा किया था न की मैं अब सुधर जाऊंगा
आज मैंने एक नौकरी ढुंढी है बस वही जा रहा हु पहला दिन है तो लेत नहीं होना कहता नहीं तो पहले दिन hi निकल देगा मेरा सेठ अभी बापू आकर कुछ खाना बना देंगे तब तक आप आराम करो मैं चलता हु दीदी
मल्टी के चेहरे पर खुसी साफ़ दिख रही थी वो खुश थी की उसका भाई अब नशा छोड़ कर अपनी जिंदगी पर दुबारा से ध्यान देगा
हरी दरवाजे को बहार से बंद करता हुआ निकल जाता है
इधर रामलाल कुछ दवाई और कुछ समान लेकर घर में आता है
बहार से दरवाजा बंद देख कर रामलाल को थोड़ा ानीब लगता है जैसे hi वो दरवाजा खोलता है उसे हरी तो कहि दिखाई नहीं देता पर अपनी बेटी को देख कर रामलाल की आँखों में वही रात वाला प्यार फिर से पनपने लगता है
मल्टी की हलालत hi कुछ ऐसी थी
बुखार उतरने की वजह से मल्टी का पूरा शरीर टूट रहा था
जिसकी वजह से वो बार बार करवट बदल रही थी और उसी कारन उसके पुरे कपडे असत व्यस्त हो चुके थे
मल्टी का पेटीकोट उसकी जांघो तक उठा हुआ था रामलाल अपनी बेटी की और देखता हुआ दरवाजे को अंदर से बंद कर देता है और एक नजर ौरे घर में दुआदाता है
रामलाल - अच्छा हुआ चला गया साला पनौती
अब जी भर के अपनी बेटी का रस पियूँगा
रामलाल थैले को वही रखता हुआ कमरे के बदर पहुंच जाता है
रामलाल अपने लुंड को धोती के ऊपर से मसलता हुआ अपनी बेटी को एकटक निहारे जा रहा था ऊपर से निचे
अच्छानक से रामलाल अपनी धोती को पकड़ता हुआ उसे एक झटके में खोल देता है
अगले hi पल रामलाल अपने कुर्ते को भी निकलता हुआ अपने शिर से अलग कर देता है
रामलाल अब पूरा का पूरा नंगा खड़ा था अपनी hi बेटी के गदराये बदन को देख कर उसका मुसल जैसा लुंड झटके खाये जा रहा था
रामलाल अपने लुंड को थामे हुए आगे बढ़ता है और सीधा मल्टी की गांड के ऊपर मुँह लगता हुआ उसकी गांड से उठती मादक महक को सूंघने लगता है
मल्टी सी बात से बिलकुल अण्डां थी की उसका बाप किस इरादे से उसे छू रहा था
रामलाल की आँखों में साफ़ वासना दिख रही थी
एक बाप की वासना अपनी hi बेटी के गदराये बदन को निचोड़ निचोड़ कर उसका कॉमर्स पिने की
रामलाल वापस से उठ जाता है
रामलाल क्या महक है बेटी तेरी मनो तूने दुनिया की साडी खुस ु को अपने इस मादक बदन में समेत लिया हो
रामलाल आगे की और आता हुआ मल्टी के चेहरे के पास बैठ कर उसके माथे और गलो को सहलाने लगता है
रामलाल - लगता है कल की hi बात हो जब मैं तुझे अपनी गॉड में उठाये पुरे गांव के चक्कर लगाया करता था और तू भी अपने इस बुड्ढे बाप की गॉड से उतरने का नाम तक नहीं लेती थी
पर देख न बेटी वक़्त फिर से अपने आप मो दोहरा रहा है तेरा ये बाप आज फिरर से तुझे अपनी गॉड में बैठना कहता है
रामलाल का लुंड सीधा सीधा मल्टी के गाल को छू रहा था जिसका रामलाल को कोई डर नहीं था
उसे पिछली रात hi मालूम पड़ चूका था की उसकी बेटी क्या कहती है
रामलाल अपनी शादी शुदा बेटी के गलो से खेलता हुआ उसके होठो को मसलने लगता है
और एक हाथ से अपने लुंड को पकड़ कर मल्टी के मुलायम गलो पर रह्ता हुआ उसकी बदन की गर्मी को अपने लुंड पर महसूस करने लगता है
रामलाल - आह्ह्ह्ह बेटी कमाल का जिस्म पाया है तूने
तेरे इस मांसल गदराये जिस्म के सामने तो कोई विप रंडी भी फ़ैल हो जाएगी
न जाने तू कैसे आज तक मुझसे बची रही मुझसे गलती हो गयी जो मैं तेरे बदन पर ध्यान hi नहीं दिया तू नहीं जानती की आज तक मैंने कितना कुछ खो दिया पर आज नहीं आज के बाद से तेरे इस बाप को कोई नहीं रोक सकता अपनी बेटी को भोगने से
रामलाल ये साडी बाटे खुल कर बोल रहा था
ये दवाई का hi असर था जो मल्टी अब तक्क शांत पड़ी हुई थी
मैं जनता हु बेटी आज तुझे बुखार है पर क्या कृ बेटी तेरा बाप हु और मैं जनता हु की ये बुखार कैसे ख़तम होगा जब मैं तेरी गरम छूट में अपना लुंड डालकर तुझे छोडूंगा तो तेरे बदन फिर से चुस्त दुरुस्त हो जायेगा ये वडा है मेरा
इतना बोलता हुआ रामलाल अपने लुंड को पकड़ कर सीधा मल्टी के होठो पर लगा देता है
रामलाल अपने एक हाथ को सीधा मल्टी के ब्लाउज पर रखता हुआ उसकी एक चुकी को दबोच लेता है
रामलाल - अहह बेटी क्या चुकी है तेरी एक दम्म नरम
रामलाल अपने लुंड को मल्टी के दोनों होठो पर दबाता हुआ उन्हें खोलने का प्रयास करता है और कुछ hi देर की म्हणत के बाद वो सफल भी हो जाता है
जैसे hi मल्टी के दोनों होठ अलग होते है रामलाल अपने लुंड को अपनी hi बेटी के मुँह में धकेलने लगता है
मल्टी कसमसाती हुई अपनी आँख खोलती है उसका बाप सामने hi बैठा था और उसका आधे से ज्यादा लुंड उसके मुँह में थे
जब तक मल्टी को कुछ समझ आता रामलाल अपनी बेटी की आँखों में देखता हुआ उसके सुर को पीछे से पकड़ लेता है और बोलता है
रामलाल - बेटी हो सखे तो माफ कर देना अपने इस बुड्ढे बाप को पर अब कोई और चारा नहीं है तेरी इस सुंदरता को देख कर मैं खुद को और नहीं रोक पा रहा हु माफ कर देना बेटी मुझे माफ़ कर देना
इतना बोलता हुआ रामलाल बैठे बैठे hi एक जोरदार झटका मरता हुआ अपने लुंड को आधे से ज्यादा मल्टी के मुँह में पेल देता है
इस झटके से मल्टी की तो मनो आँखे hi बाजार आ जाती है वो अपने हाथो को रामलाल की जांघो पर मरती हुई उसे हटाने की कोशिश करती है पर शायद आज रामलाल का कोई इरादा नहीं था अपनी बेटी पर रेहम करने का
रामलाल अपने दूसरे हाथ से मल्टी के हाथ को पकड़ता हुआ एक और झटका मरता है और अपना पुरे का पूरा लुंड अपनी बेटी के गले तक उतार देता है
मल्टी अपने बूढ़े बाप की इस हमले से तड़प कर रह जाती है
मल्टी छटपटाती हुई छूटने की कोशिस कर रही थी पर रामलाल उसके बालो को इस तरह पकडे हुए था की वो उसके निचे से नहीं निकल सकती थी
दोनों बाप बेटी अब भी एक दूसरे की आँखों में hi देख रहे थे
रामलाल अब धीरे धीरे अपनी बेटी के मुँह को छोड़ना चालू कर चूका था
झटके हलके थे पर गहरे थे जिसकी वजह से रामलाल का सूपड़ा सीधा उसकी बेटी के हलक को जाकर छू कर वापस आता और फिर अगले hi पल वो अपना लुंड अंदर की तरफ पेलता
जब रामलाल का लुंड मल्टी के रसीले मुँह की गहराई तक जाता तो उसके मुँह से थुक्क बाहर की और रिसने लगता
मनो उसके बूढ़े बाप के लुंड ने उसके मुँह के अंदर की साडी जगह कब्जा ली हो
रामलाल एक के बाद एक झटके लगता हुआ अपनी बेटी के मुखछोडन का मजा ले रहा था
इधर मल्टी को भी अब काम तकलीफ हो रही थी क्योंकि रवि पहले hi अपने विशाल लुंड से कई बार मल्टी की मुहचुड़ै कर चूका था
रामलाल- बेटी मैंने उस दिन देखा था
देखा था मैंने कैसे वो मादरचोद रवि तेरे मुँह को बेरहमी से छोड़ रहा था मेरी बेटी के मुँह को मेरे hi सामने वो हरामी छोड़ रहा था कैसे बर्दाश्त किया मैंने बेटी ये मुझे hi पता है
ये सब बाटे ुसंकर मल्टी की आँखे और भी बड़ी हो चुकी थी
रामलाल अपनी बेटी को ये बाटे बताता हुआ अपनी स्पीड को लगातार बढ़ाये hi जा रहा था
मल्टी- guuuguuuuuuuguuuuuuguuuuuuuuuuhhhhuuuu
इधर रामलाल की मनो कोई फरक hi नहीं पड़ता था वो तो जैसे किसी रंडी की छूट को छोड़ते है उसी तरह अपनी hi सगी शादी शुदा बेटी के मुँह को चोदे जा रहा था
रामलाल अपने लुंड से मल्टी के मुँह को करीब 10 मिंट तक छोड़ता रहा और कुछ hi देर में वो अपने लुंड को बहार निकल लेता है मल्टी खास्ती हुई थुक्क की उलटी करने लगती है
रामलाल बिना कुछ बोलते उठता हुआ बहार जाकर वो थैला उठा लता है
मल्टी अपने बाप को hi देख रही थी पर बोल कुछ नहीं रही थी असल में तो उसके दिल की बात भी पूरी हो hi रही थी
रामलाल उस थैले में से एक गोली निकलता है और पानी के साथ जातक जाता है
मल्टी को समझते देर नहीं लागत की ये गोली किश काम आती है
मल्टी के अंदर ये सोच कर hi जोश बढ़ गया था की उसका बाप जसे गोली खा कर छोड़ने वाला है मतलब ये छुड़ाई का सिलसिला अब काफी लम्बा चलने वाला है
रामलाल दवाई खाने के बाद वापस से मल्टी की और बढ़ता है
रामलाल - बेटी आज तुझे एक बेटी होने का असली फरज़ज़ निभाना है
मल्टी- आधा तो निभा दिया न बापू
रामलाल- अभी तो सिर्फ तेरा ये रसीला मुँह छोड़ा है बेटी अभी तो तेरी इस बुर्र को भी छोड़ना है
मल्टी अपनी टैंगो को फैलाती हुई बोलती है
मल्टी- तो छोड़ दो न बापू अपनी बेटी की इस बुर्र को और बन जाओ बेटी छोड़
रामलाल- बेटी छोड़ बनने का भी एक अलग hi मजा है बेटी
मैंने न जाने कितने दिनों से इस पल का इन्तजार किया है बेटी
मल्टी- अब और इन्तजार नहीं बापू इतना बोलते हुए मल्टी एक झटके में अपने पेटीकोट का नाडा खोलती हुई उसे अपने बदन से अलग कर देती है और अगले hi पल घोड़ी बनती हुई अपने बाप के सामने अपनी छूट और गांड के छेद को खोल कर परोस देती है
मल्टी दोनों हाथ पीछे ले जाती हुई अपनी गांड को फैला कर अपने बाप को दिखती है
रामलाल- यकीन नहीं होता की ये छूट और गांड मेरे hi लुंड से बने है
मल्टी- और आज इसी में अपना लुंड दाल कर आपको बेटी छोड़ बनना है बापू
रामलाल- जब तेरे जैसी गदराई बेटी हो तो कौन हरामी नहीं बनना कहेगा बेटीचोद
मल्टी- दाल दो बापू अपना ये लुंड अपनी hi बेटी की छूट में और बना दो अपनी बेटी को भी बाप होदी
रामलाल- बनाऊंगा बनाऊगा जरूर बनाउगना पहले तेरे इन रसभरे केहदो का रस तो पी लू बेटी फिर तेरे इन छेड़ो को छोड़ छोड़ कर तेरा बुझार भी तो उतरना है
इतना बोलता हुआ रामलाल अपना मुँह सीधा मल्टी की बड़ी गांड में ग़ुस्सा देता है
और अपनी जुबान सीधा अपनी बेटी के छोटे से गांड के छेद पर रख देता है
मल्टी अपने बाप के इस हमले से कसमसा जाती है और अपनी गांड को छोड़ते हुए आगे की और गिरती हुई धरती को पकड़ लेती है
इधर रामलाल पागलो की तरह अपनी बेटी की गांड और छूट चाट रहा था मनो वो उन छेड़ो को चाट नहीं बल्कि खा रहा हो
मल्टी- यकीन नहीं होता बापू माँ को छोड़ कर तुमने मुझे पैदा किया और अब मुझे छोड़ कररर
रामलाल तुरंत hi अपना मुँह ऊपर उठता है
रामलाल- तुझे छोड़ कर अपने नाती को पैदा करूंगा
इतना बोलता हुआ रामलाल दुनारा से अपनी बेटी की मांसल गांड में मुँह घुसा देता हैई
मल्टी- अह्ह्ह्ह हआ बापू ख़ास जाओ मेरी छूट को आह्हः छोड़ छोड़ड़ड़ कर अपनी hi बेटी को गभिन्न बनाए दो भर दो मेरी बच्चेदानी को अपने विरया से जिससे मैंने पैदा हुई हुऊ अह्ह्ह्हह क्या चतत्त रहे हो बापुउउउउ आप उस कमीने रवि ने तो आज तक्क ऐसे नहीं छत्ता
रामलाल दुबारा से अपना मुँह ऊपर की और उठता है
रामलाल- उस हरामी का तो नाम मत ले बेटी उसने जो तेरे साथ किया है ना उसका बदला तो मैं उसकी बह कम्मो से लूंगा तेरी कसम तेरे सामने hi उसे इस घर में नंगी नहीं घुमाया तो मेरा नाम भी रामलाल नहीं
इतना बोलता हुआ रामलाल डिबरा से अपने काम पर लग्ग जाता है
मल्टी- ाःह हहहहआ बापू बड़ी बेरहमी करता है वो कमीना तुम्हे नहीं पता वो साला अपनी दोनों दीदियो को छोड़ रहा है और अब उसकी नजर तुम्हारी भू पर है उसकी हाथ पड़ने से पहले अपनी बहु को अपने घर ले आओ बापू नहीं तो तुम्हे छूट की जगह सिर्फ और सिर्फ भोसड़ा hi मिलेगा मैंने झेला है उस जालिम का लुंड बहुत बड़ा है किसी गधे के समाननं
रामलाल फिर से अपनी गर्दन को उठता है
रामलाल- सिर्फ अपनी दीदी को hi नहीं बेटी बल्कि वो नीलम को भी कबोडा है वो भी उसके hi बापू क्र साथ मिलकर
रामलाल अपनी गर्दन दुबारा से निचे झुकता हुआ अपनी बेटी की छूट चाटने लगता है
सुप्पोपपपपपपपपप chapplppppppppppp
मल्टी की छूट एक दम पानी पानी हुई पड़ी थी
चप्पलपचापपपपपप की आवाजे से पूरा कमरा गूंज उठा था
रामलाल- ले आऊंगा बेटी अपनी बहु को भी मैं उस हरामी के चुंगल से छुड़ा कर और फर अपनी बहु और बेटी को एक साथ इसी कमरे में नंगा करके दिनन रात छोडूंगा
छोड़ छोड़ा कर तुझे भी गाभिन करूंगा और अपनी बहु को भी गांधीन करूंगा
मल्टी की छूट चाटते हुए रामलाल को क्रीं 10 मिंट हो चुके इस बिच मल्टी अपने बाप के मुँह में 2 बार अपनी मलाई चबोड़ चुकी थी जिसे रामलाल किसी क्रीम की तरह पूरा छत्त गया था
रामलाल अपने मुँह को हटाता हुआ अपनी पोजीशन बदलता है और अपने लुंड को मल्टी की बुरर्र पर रखता हुआ अपने लुंड को अंदर की और दबा देता है
पक्क्क की आवाज के साथ रामलाल का आधा लुंड उसकी बेटी की बुरर्र में घुस जाता है
मल्टी- अह्ह्ह्ह बापू आखिर बन hi गए आप बेटीचोद
रामलाल- और मेरी बेटी बन गयी बापचोड़ी
रामलाल अपनी बेटी को कमर को थमता हुआ ेककरारा झटका मरता हुआ एक hi झटके में अपना पूरा लुंड उसकी छूट में धकेल देता है
मल्टी- आह्ह्ह्ह बापू पूरा दाल दिया एक hi झटके में रेहम नहीं आता तुम्हे
रामलाल - अभी रेहम की बात मत कर बेरी तेरे बाप को तुझे गाभिन करना है और उसके लिए तेरे बाप को तुझे जबरदस्त तरिके से छोड़ना पड़ेगा अह्ह्ह्ह
रामलालके झटके लगातार बढ़ते hi जा रहे थे
उसका लुंड अब सीधा मल्टी की बच्चेदानी को चोट मार रहा था
रामलाल- आह बेटी तेरी छूट की गहराई तो ख़तम होने का नाम hi नहीं लेती लगता है मेरा लुंड किसी गहरी खायी में डुबकी लगा रहा है
असल में तो रवि एक hi बात में मल्टी को छोड़ कर उसकी छूट को ौरी तरह खोल चूका था जिसका अंदाजा अब तक रामलाल को भी हो चूका था
मल्टी- हआ बापू तुम्हारी बेटी की छुटत बड़ी गहरी है और अब तुम्हे hi इसे अपने लुंड से नापना पड़ेगा हहहहहह मर्डर गयी बापुउउउउ कितना बड़दा लुंदड़ है तुम्हारा मेरी लगता है मेरी छूट को पहाड़ कर मेरे पेटट में घुसस्स जाएःआआआ हम्म्म्म्मममअअअअ
रामलाल आगे हाथ बड़जात्या हुआ अपनी बेटी को चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi बेरहमी के साथ मसलने लगता है
मल्टी- अह्ह्ह आराम से बापू इन्ही चूचियों से मुझे आपके नाती को दूध भी पिलाना है
रामलाल - नाती को तो बाद में पिलाना पहले अपने इस बूढ़े बाप को तो पीला दे बेटी अपना दूध
इतना बोलता हुआ रामलाल अपनी बेटी के ब्लाउज को पकड़ कर एक hi झटके में फाड़ देता है
मल्टी समझ चुकी थी की दवाई का असर अब पूरी तरह से हो चूका है
ब्लाउज के फटते hi रामलाल एक झटके में खड़ा होता है और मल्टी के ब्लाउज को पकड़ कर उसके बदन से अलग कर देता है
अब दोनों बाप बेटी एक दम नंगे थे बिना किसी शर्म लाज के
रामलाल एक झटके के साथ मल्टी को पलटता हुआ दुबारा से बिस्तर पर गिरा देता है
और निचे झुकता हुआ अपनी बेटी की चित से निकले सफेद पानी को चाटता हुआ दुबारा से ऊपर आते हुए अपना लुंड सेट करता हुआ एक hi झटके में अपनी बेटी की बुर्र में पेल देता हीी
मल्टी - अह्ह्ह्ह बापू आराम से मर्डरर गयी
ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
रामलाल तेज झटके मरता हुआ दोनों हाथो से मल्टी की भरी भरकम चूचियों को थम लेता है और जोर से मसलता हुआ अपने होठो से अपनी बेटी का रसीला मुँह चूसने लगता है
मल्टी दर्द और मजे से तड़प रही थी इधर रामलाल अपनी बेटी को बिना किसी रेहम के बास चोदे hi जा रहा था
नाज नर कितनी देर तक वो लगातार मल्टी की छूट को चिढ़ता hi गया और इस बिच मल्टी की हलालत खस्ता हाल हो चुकी थी
इस बिच वो 5 बार झाड़ चुकी थी
आखिर कार रामलाल के झटको की सईद भी काम होती है और वो हफ्ता हुआ अपनी बेटी की बच्चेदानी को अपने गधे विरया से भरने लगता है
जैसे जैसे मल्टी के गर्भ में उसके बाप का बीज जा रहा था उसकी आँखे चौड़ी होती जा रही थी मनो उसकी पेट में कोई गरम गरम लावा गिरा रहा हो
करीब 5 मिनट तक रामलाल अपनी बेटी की छूट में झड़ता रहता है और अंततः में अपनी बेटी के मुँह में मुँह घुसाए शांत पड़ जाता है
रामलाल को झड़े हुए करीब 10 मिंट हो चुके थे
पर मल्टी को अब भी अपनी छूट में घुसा अपने बाप का लुंड और भी फूलता हुआ महसूस हो रहा था
दोनों बाप बेटी पसीने से तर बतर एक दूसरे के ऊपर पड़े हुए थी
मल्टी- आखिर दाल hi दिया न बापू आपने होना बीज अपनी hi बेटी के अंदर
रामलाल - अब तुझे भी तेरे hi जैसा एक प्यारा बच्चा होगा
मल्टी- बस एक चुदाई से थोड़े hi होता है बच्चा और मैं कहती हु की मेरा बीटा भी अपने नाना मि hi तरह ताक़तवरर हो ताकि वक़्क़ट आने पर अपनी माँ मि सवारी कार सखे
रामलाल- अच्छा तो मेरी बेटी को मेरे होने वाले नाती से भी छुड़वाना है
मल्टी- वो मुझे हमेशा आपकी याद दिलाएगा बापू देखना उसका सब कुछ आपके जैसा hi होगा
रामलाल- भगवान् तेरी दवा कबूल करे बेटी ये तेरे बाप का आशीर्वाद है पर नाती से पहले तो उसका नाना तुझे दबा कर छोड़ेगा
मल्टी- और छोड़ छोड़ कर अपनी बेटी की छूट का भोसड़ा बना डोज तो नाती के लिए क्या छोड़ोगे
रामलाल - पहले तो मुझे बेटीचोद होने का पूरा सुख चाहिए न फिर तू बना बतछोड़ि
मल्टी- अब भी कुछ कमी है बापू आपके पूरी तरह बेटीचोद बनने में
रामलाल अपनी बेटी के माथे से प्यार से बालो को हटाता हुआ पूछता है
रामलाल - अब क्या कमी है बेटी
मल्टी- अभी तो आपको अपनी बेटी की कासी हुई गांड को भी फैलाना है ताकि आपका नाती बिना किसी दर्द के अपनी माँ की गांड को छोड़ सखे
रामलाल - कितनी अच्छी है मेरी बेटी
अपनी छूट के साथ साथ अपनी गांड भी अपने इस बूढ़े बाप को परोस रही है
मल्टी- मैं जानती हु बापू जब मैं जाउंगी तो वो हरामी सबसे पहले मेरी गांड hi मरेगा और मुझे इस बात का कोई गम्म नहीं है पर मैं कहती हु की अगर मेरी गांड की सील टूटनी hi है तो सांसे पहले इसमें मेरे बापू का hi लुंड जाये
रामलाल - बस एक बार हरी की शादी हो जाने दे बेटी उसके बाद से उस हरामी रबी के चुंगल से माओं तुझे छुड़ा कर ले आऊंगा ये मेरा वडा है तुझसे बस तब तक थोड़ा सा बर्दास्त करले तू
मल्टी- मुझे अपनी फ़िक्र नहीं है बापू जैसा आप कह रहे हो मैं वैसा hi करूंगा बस एक बार उस कमीनी कम्मो को यह इस घर में ले औ फुर देखना उसे रंडी की तरह तुमसे न छुड़वाया तो मैं भी तुम्हारी बेटी नहीं
रामलाल- क्या बेटी दी है भगवान् ने मुझे खुद के साथ साथ अपनी भाभी को भी छुड़वाने वाली है मजा आ जायेगा जब तेरे सामने उस रैंड को पटक पटक कर छोडूंगा
अभी तक रामलाल का लुंड मल्टी की छूट में hi फसा हुआ था
दोनों बाप बेटी कीच बोलते उससे पहले hi बाजार से हर्रई दरवाजा खटखटाने लगता है
रामलाल- इस हरामी को भी हमेशा से गलत टाइम पर hi आने की आदत है
तू एक काम कर तू ऐसे hi पड़ी रह तब तक मैं इसे भगा कर आता हु
रामलाल जैसे hi उठता है उसका लुंड फटछ से बहार आ जाता है
मल्टी को एक झटका सा लगता है मनो एक पल में hi उसकी छूट से किसी ने कोई हिस्सा निकाल दिया हो
अपने बापू के वीर्य से स्ने हुए लुंड को देख कर मल्टी भी शर्मा जाती है
रामलाल अपनी धोती को लपेटता हुआ दरवाजे की और बढ़ने लगता है
इधर मल्टी उठ कर एक नजर अपनी छूट पर डालती हसि
मल्टी- बापू तुमने तो एक hi चुदाई में अपनी बेटी की बुरर्र के परखच्चे उड़ा दिया पता नहीं तुम मेरी गांड के साथ क्या करोगे
हक़ीक़त में मल्टी की छूट इस वक़्त देखने लायक थी जोकि पूरी तरह खुल चुकी थी और उसके अंदर थे धीरे धीरे रिश्ता हुआ उसके बाप का विरया बाजार टपक रहा था
मल्टी अपने पेटीकोट और फ़टे हुए ब्लाउज को समेतस्ति हुई एक चादर ओढ़ कर वैसे hi नंगी लेत जाती है
इधर रामलाल दरवाजा खोलता है और हरी तुरंत hi घर में आ जाता है
रामलाल- क्यों रे क्यों इतना दरवाजा बजा रहा था
अपने बाप को यु सिर्फ धोती में पसीने से लटपट देख कर हरी को कुछ अजीब लगता है
पर वो इस बात को नजरअंदाज करता हुआ घर में आ जाता है और बहार पड़ी चारपाई पर बैठ जाता है
हरी- बापू काम के लिए गया था कल से बुलाया है बहार गर्मी बहुत ज्यादा है इस लिए घर भाग आया
अब गर्मी ज्यादा तो थी hi रामलाल उसे भगा भी नहीं सकता था ऊपर से दवाई की वजह से रामलाल का लुंड बैठने का नाम तक नहीं ले रहा था
रामलाल- अच्छा ठीक है तू यही आराम करले मुझे थोड़ा बैंक में जाना है मैं शाम तक आऊंगा
अपने बापू की आवाज सुनकर मल्टी उदास हो जाती है क्योंकि अभी तो उसका अपने बाप से गांड मरवाने का भी प्रोग्राम था जो अब उसे फ़ैल होता हुआ दिख रहा था
रामलाल आगे बढ़ता हुआ अपना एक दूसरा कुरता उठता है
जब रामलाल चल रहा था तो हरी को साफ़ साफ़ दिख रहा था की उसके बाप की धोती में कैसे उसका खड़ा हिचकोले खा रहा है
हरी( कुछ तो गड़बड़ लग रही है पता करना पड़ेगा आखिर चल क्या रहा है यह मेरे घर में मेरे पीठ पीछे)
रामलाल अपना कुरता पेहेन कर गाइट खोलता हुआ हरी की और देखता है
रामलाल- यही खत पर आराम करले अपनी दीदी को परेशान मत करियो उसकी तबियत ठीक नहीं है बेचारी को सोने दे उसे परेशानी नहीं होनी चाहिए समझा
हरी- जी बापू
इतना बोलकर रामलाल से बाजार चला जाता है हरी तुरंत hi गेट को अंदर से बंद कर देता है
हरी- कुछ तो गड़बड़ है पता लगाना पड़ेगा बीटा हरी आखिर तेरे घर में चल क्या रहा ह
इतना बोलते हुए हरी दीदी दीदी आवाज लगता हुआ कमरे की एयर बढ़ता है
मल्टी को डर था की कहि हरी चादर न हटा दे और उसकी चोरी पकड़ी न जाये
मल्टी वैसे hi बिना हिले डुले चुपचाप पड़ी रहती है
हरी जैसे hi कमरे के अंदर पहुँचता है उसके होश उड़ जाते है क्योंकि मल्टी के सिरहाने hi उसके बाप का कुरता पड़ा हुआ था जो उसने सुबह पहना था और जैसे hi वो बिस्तर को देखता है उसका शक्ख यकीन में बदल जाता है
क्योंकि इस बाप बेटी की धुवा दार चुदाई से बिस्तर पूरी तरह खराब हो चूका था और हरी अपनी दीदी की आदत जनता था की वो कभी भी ऐसे नहीं सोती की बिस्तर खराब हो जाये
हरी ( अच्छा तो बापू मुझे hi छोड़ना सीखा रहा था सोने दियो मेरी बेटी को ये बात है इसी लिए सोने दू ताकि तुम फिर वापस आकर अपनी बेटी को छोड़ स्खो )
इतना सोचता हुआ हरी वापस से कमरे के बहार निकल जाता है और बाहर पड़ी चारपाई पर जाकर लेत जाता है और अपने बाप और बेहेन के बारे में सोचने लगता है
न जाने कब सोचते सोचते हरी का हाथ खुद hi अपने लुंड पर चला जाता है और उसका लुंड भी पूरी तरह खड़ा हो चूका था जो ज्यादा बड़ा तो नहीं फिर भी 5" का था
इधर मल्टी पड़ी पड़ी यही सोच रही थी की जब हरी थोड़ी देर में सो जायेगा तो वो जाकर कपडे पेहेन लेगी पर उसकी सोच को अब उसका भाई गलत साबित करने वाला था
हरी वापस से उठ कर अपनी दीदी की और बढ़ने लगता है
इधर मल्टी इस बात से अनजान थी की अब उसके छोटे भाई के भी इरादे वही है जो थोड़ी देर पहले तक उसके बाप के थी........
बने रहिये कहानी में आगे जानने के लिए क्या होता है
धन्यवाद् ......