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- Dec 5, 2013
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रवि मल्टी और हरिया को सेहर पहुंचने में शाम हो जाती है जिसका कारन था रोड पर हैवी ट्रैफिक
पर रहत की बात यह थी की दिन ढलते ढलते तीनो सेहर पहुंच चुके थे और पैदल hi अपनी मंजिल की और निकल जाते है
हरिया आगे आगे चल रहा था उसके मन में अपनी बेटी से मिलान की तिवरा इच्छा जो थी
रवि को उदास देख मल्टी उसे दिलासा देती है
मल्टी - मुझे पता है देवर जी अआप कम्मो के साथ न रह पाने की वजह से दुखी है
रवि- भाभी में सबसे ज्यादा प्यार कम्मो दीदी से hi करता हु कहे वो रूहानी हो या जिस्मानी
मल्टी - अच्छा बाबा मुझे पता है सब आप कम्मो को कितना कहते है और आज की रात हम सब की वजह से आपको उससे दूर रहना पड़ेगा पर अभी तो कल की रात है न आपके पास और वैसे भी कम्मो कौनसा ज्यादा दूर जा रही है कुछ hi दूर उसकी ससुराल है जब कहे तब चले जाना और जता आना अपनी दीदी से प्यार जिस्मानी और रूहानी दोनों
दोनों भाभी देवर हस्ते हुए आगे की और बढ़ जाते है
कुछ hi देर में सब घर पहुंच जाते है
नीलम दरवाजा खोलती है और दरवाजे पर अपने बूढ़े बाप को देख कर खुसी से झूम उठती है
हरिया एक नजर अपनी बेटी के कपड़ो पर डालता है
नीलम के ब्लाउज के 2 बोटों टूटे हुए थे और न तो उसने कोई दुपट्टा डाला हुआ था न hi पेटीकोट के ऊपर कोई सदी
नीलम अपने बाप से चिपक जाती है
नीलम - बापू तुम नहीं जानते मेने कितना याद किया तुम्हे
हरिया - मेरा भी थी हाल है बेटी तुझसे दुर्र रह पाना बहुत मुश्किल है
नीलम- अरे रवि तू भी आया है आज तो लगता है मेरी लाटरी लगने वाली है
नीलम रवि को अपनी बहो में भर लेती है
रवि भी मौके का फायदा उठता हुआ नीलम की मदमस्त गांड को दबोच लेता है
रवि- दीदी लगता है ससुर और पति दोनों hi खूब सेवा कर रहे है
Neelam-koi कितनी भी सेवा कर ले पर तेरे साथ जो मजा आता है न वो कोई नहीं दे पता
नीलम की बात मल्टी साफ़ सुन्न सकती थी अब तक नीलम ने मल्टी को नहीं देखा था
पर अपनी भाभी की बात सुनकर मल्टी के बदन में हजारो चीटिया रेंगने लगी थी
कैसा होगा जब आज की रात वो इतने सरे मर्दो के बिच पिसेगी
क्या वो सबको खेल पायेगी
यही सब सवाल मल्टी के दिमाग में चला रहे थे
इधर नीलम तो मनो बहुत खुश थी उसे एक साथ 4-4 लुंड जो मिलने वाले थी
रवि- अरे दीदी देखो तो जरा में एक और मेहमान को लेकर आया हु
रवि साइड हो जाता है जिससे नीलम और मल्टी एक दूसरे को देख कर खुश हो जाती है
नीलम - अरे दीदी नहीं भाभी ओह्हू अब क्या खु आपको
रवि- कुछ भी कहलो दीदी क्या फरक पड़ता है जैसी आप मेरे लिए हो वैसे hi भाभी भी है
रवि अपने दोनों हाथो से अपनी भाभी के कंधो को दबाता हुआ बोलता है
नीलम - हां हां मुझे सब पता है तुझसे भला कोई बच सकता है क्या तूने दीद का भी शिकार कर hi दिया
नीलम की बात सुनकर सब हसनी लगते है
इधर घर के अंदर वाले कमरे में ह्री लेता हुआ था वो तो अपने बाप का इंतजार कर रहा था की कब वो दारू लेकर आएगा और दोनों बाप बीटा दारू पी कर उसकी hi बीवी को नोचेंगे
सच खु तो इसे समय घर में नीलम का hi राज था भले hi दोनों बाप बेटे उसे जानवरो की तरह छोड़ा करते थे पर मजाल थी कोई नीलम के फैसले पर सवाल उठा दे
शायद औरत की ताक़त उसके छेड़ो में hi होती है ( कोई बुआ न मने सिर्फ कहानी के वे में ये लाइन लिखी गयी है )
जिससे वो मर्दो को अपने इशारो पर नचा सकती है
हरी आवाज सुनकर बहार आता है और सबके साथ साथ अपनी दीदी को देख कर खुश हो जाता है
उसे अपने बाप और बीवी की बात याद आ जाती है जब उन्दोनो ने वडा किया था की जिस दिन मल्टी दीदी घर आएगी वो उसे मदद करेंगे अपनी दीदी को पटाने में
पर बिचारा हरी खा जनता था की मल्टी तो पहले से hi नंगा नाचा करने का मुद बना कर आयी है
हरी- दीदी आप अच्चानक
नीलम - अरे कोई समझाये इन्हे दीदी कहे जब भी आये उनका बजे खोल कर स्वागत करना चाहिए
नीलम खुद hi अपने पति को आगे की और धक्का देती है और हरी सीधा अपनी बहे खोल अपनी दीदी को बहो में भर लेता है
मल्टी की बड़ी बड़ी कठोर चूचिया हरी के लुंड की नशे फाड़ रही थी उसका लुंड रह रह कर झटके मार रहा था
हरी अपने दोनों हाथो को पीछे ले जाकर अपनी दीदी को पीठ सहलाता हुआ उसकी कमर तक पहुंच गया था और इस समय अपनी दीदी की चिकनी कमर की चिकनाहट का पूरा मजा ले रहा था
रवि - दीदी लगता है इन भाई बेहेन का प्यार रत भर ऐसे hi चलता रहेगा
नीलम - तू इनकी जगह होता क्या इतनी जल्दी छोड़ देता अपनी दीदी को
रवि- में तो रात भर नहीं छोड़ता दीदी आज की रात तुम hi देख लेना
मल्टी - अरे छोड़ ना हरी पूरा प्यार अभी hi जता देगा क्या
रवि- अरे है है हरी भैय्या छोड़ दो मेरी भाभी को अभी तो पूरी रात बाकि है
मल्टी - पिताजी खा है
Hari-wo बाजार गए है सामान लेने
Neelam-accha रवि तूने बताया नहीं यु सब एक साथ कोई खास बात है क्या
रवि नीलम को पूरी बात बता देता है और ये भी बता देता है की सबको उसके साथ चलना है
रवि की बात सुनकर नीलम खुसी से झूम उठती है और एक बार फिर रवि के गले लग जाती है
रवि पूरी बेशर्मी के साथ नीलम के शरीर को अपने हाथो से मसल रहा था
हरी- देखा दीदी यही होता है भाई बेहेन का प्यार देखो देखो कैसे दोनों जुड़ते hi जा रहे है
नीलम - ये तो खूब अच्छी बात बताई टाइम आखिर मेरी बेहेन का भी घर बस hi गया
रवि मल्टी और हरिया को सेहर पहुंचने में शाम हो जाती है जिसका कारन था रोड पर हैवी ट्रैफिक
पर रहत की बात यह थी की दिन ढलते ढलते तीनो सेहर पहुंच चुके थे और पैदल hi अपनी मंजिल की और निकल जाते है
हरिया आगे आगे चल रहा था उसके मन में अपनी बेटी से मिलान की तिवरा इच्छा जो थी
रवि को उदास देख मल्टी उसे दिलासा देती है
मल्टी - मुझे पता है देवर जी अआप कम्मो के साथ न रह पाने की वजह से दुखी है
रवि- भाभी में सबसे ज्यादा प्यार कम्मो दीदी से hi करता हु कहे वो रूहानी हो या जिस्मानी
मल्टी - अच्छा बाबा मुझे पता है सब आप कम्मो को कितना कहते है और आज की रात हम सब की वजह से आपको उससे दूर रहना पड़ेगा पर अभी तो कल की रात है न आपके पास और वैसे भी कम्मो कौनसा ज्यादा दूर जा रही है कुछ hi दूर उसकी ससुराल है जब कहे तब चले जाना और जता आना अपनी दीदी से प्यार जिस्मानी और रूहानी दोनों
दोनों भाभी देवर हस्ते हुए आगे की और बढ़ जाते है
कुछ hi देर में सब घर पहुंच जाते है
नीलम दरवाजा खोलती है और दरवाजे पर अपने बूढ़े बाप को देख कर खुसी से झूम उठती है
हरिया एक नजर अपनी बेटी के कपड़ो पर डालता है
नीलम के ब्लाउज के 2 बोटों टूटे हुए थे और न तो उसने कोई दुपट्टा डाला हुआ था न hi पेटीकोट के ऊपर कोई सदी
नीलम अपने बाप से चिपक जाती है
नीलम - बापू तुम नहीं जानते मेने कितना याद किया तुम्हे
हरिया - मेरा भी थी हाल है बेटी तुझसे दुर्र रह पाना बहुत मुश्किल है
नीलम- अरे रवि तू भी आया है आज तो लगता है मेरी लाटरी लगने वाली है
नीलम रवि को अपनी बहो में भर लेती है
रवि भी मौके का फायदा उठता हुआ नीलम की मदमस्त गांड को दबोच लेता है
रवि- दीदी लगता है ससुर और पति दोनों hi खूब सेवा कर रहे है
Neelam-koi कितनी भी सेवा कर ले पर तेरे साथ जो मजा आता है न वो कोई नहीं दे पता
नीलम की बात मल्टी साफ़ सुन्न सकती थी अब तक नीलम ने मल्टी को नहीं देखा था
पर अपनी भाभी की बात सुनकर मल्टी के बदन में हजारो चीटिया रेंगने लगी थी
कैसा होगा जब आज की रात वो इतने सरे मर्दो के बिच पिसेगी
क्या वो सबको खेल पायेगी
यही सब सवाल मल्टी के दिमाग में चला रहे थे
इधर नीलम तो मनो बहुत खुश थी उसे एक साथ 4-4 लुंड जो मिलने वाले थी
रवि- अरे दीदी देखो तो जरा में एक और मेहमान को लेकर आया हु
रवि साइड हो जाता है जिससे नीलम और मल्टी एक दूसरे को देख कर खुश हो जाती है
नीलम - अरे दीदी नहीं भाभी ओह्हू अब क्या खु आपको
रवि- कुछ भी कहलो दीदी क्या फरक पड़ता है जैसी आप मेरे लिए हो वैसे hi भाभी भी है
रवि अपने दोनों हाथो से अपनी भाभी के कंधो को दबाता हुआ बोलता है
नीलम - हां हां मुझे सब पता है तुझसे भला कोई बच सकता है क्या तूने दीद का भी शिकार कर hi दिया
नीलम की बात सुनकर सब हसनी लगते है
इधर घर के अंदर वाले कमरे में ह्री लेता हुआ था वो तो अपने बाप का इंतजार कर रहा था की कब वो दारू लेकर आएगा और दोनों बाप बीटा दारू पी कर उसकी hi बीवी को नोचेंगे
सच खु तो इसे समय घर में नीलम का hi राज था भले hi दोनों बाप बेटे उसे जानवरो की तरह छोड़ा करते थे पर मजाल थी कोई नीलम के फैसले पर सवाल उठा दे
शायद औरत की ताक़त उसके छेड़ो में hi होती है ( कोई बुआ न मने सिर्फ कहानी के वे में ये लाइन लिखी गयी है )
जिससे वो मर्दो को अपने इशारो पर नचा सकती है
हरी आवाज सुनकर बहार आता है और सबके साथ साथ अपनी दीदी को देख कर खुश हो जाता है
उसे अपने बाप और बीवी की बात याद आ जाती है जब उन्दोनो ने वडा किया था की जिस दिन मल्टी दीदी घर आएगी वो उसे मदद करेंगे अपनी दीदी को पटाने में
पर बिचारा हरी खा जनता था की मल्टी तो पहले से hi नंगा नाचा करने का मुद बना कर आयी है
हरी- दीदी आप अच्चानक
नीलम - अरे कोई समझाये इन्हे दीदी कहे जब भी आये उनका बजे खोल कर स्वागत करना चाहिए
नीलम खुद hi अपने पति को आगे की और धक्का देती है और हरी सीधा अपनी बहे खोल अपनी दीदी को बहो में भर लेता है
मल्टी की बड़ी बड़ी कठोर चूचिया हरी के लुंड की नशे फाड़ रही थी उसका लुंड रह रह कर झटके मार रहा था
हरी अपने दोनों हाथो को पीछे ले जाकर अपनी दीदी को पीठ सहलाता हुआ उसकी कमर तक पहुंच गया था और इस समय अपनी दीदी की चिकनी कमर की चिकनाहट का पूरा मजा ले रहा था
रवि - दीदी लगता है इन भाई बेहेन का प्यार रत भर ऐसे hi चलता रहेगा
नीलम - तू इनकी जगह होता क्या इतनी जल्दी छोड़ देता अपनी दीदी को
रवि- में तो रात भर नहीं छोड़ता दीदी आज की रात तुम hi देख लेना
मल्टी - अरे छोड़ ना हरी पूरा प्यार अभी hi जता देगा क्या
रवि- अरे है है हरी भैय्या छोड़ दो मेरी भाभी को अभी तो पूरी रात बाकि है
मल्टी - पिताजी खा है
Hari-wo बाजार गए है सामान लेने
Neelam-accha रवि तूने बताया नहीं यु सब एक साथ कोई खास बात है क्या
रवि नीलम को पूरी बात बता देता है और ये भी बता देता है की सबको उसके साथ चलना है
रवि की बात सुनकर नीलम खुसी से झूम उठती है और एक बार फिर रवि के गले लग जाती है
रवि पूरी बेशर्मी के साथ नीलम के शरीर को अपने हाथो से मसल रहा था
हरी- देखा दीदी यही होता है भाई बेहेन का प्यार देखो देखो कैसे दोनों जुड़ते hi जा रहे है
नीलम - ये तो खूब अच्छी बात बताई टाइम आखिर मेरी बेहेन का भी घर बस hi गया