Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 27 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -245

रवि मल्टी और हरिया को सेहर पहुंचने में शाम हो जाती है जिसका कारन था रोड पर हैवी ट्रैफिक

पर रहत की बात यह थी की दिन ढलते ढलते तीनो सेहर पहुंच चुके थे और पैदल hi अपनी मंजिल की और निकल जाते है

हरिया आगे आगे चल रहा था उसके मन में अपनी बेटी से मिलान की तिवरा इच्छा जो थी

रवि को उदास देख मल्टी उसे दिलासा देती है

मल्टी - मुझे पता है देवर जी अआप कम्मो के साथ न रह पाने की वजह से दुखी है

रवि- भाभी में सबसे ज्यादा प्यार कम्मो दीदी से hi करता हु कहे वो रूहानी हो या जिस्मानी

मल्टी - अच्छा बाबा मुझे पता है सब आप कम्मो को कितना कहते है और आज की रात हम सब की वजह से आपको उससे दूर रहना पड़ेगा पर अभी तो कल की रात है न आपके पास और वैसे भी कम्मो कौनसा ज्यादा दूर जा रही है कुछ hi दूर उसकी ससुराल है जब कहे तब चले जाना और जता आना अपनी दीदी से प्यार जिस्मानी और रूहानी दोनों

दोनों भाभी देवर हस्ते हुए आगे की और बढ़ जाते है

कुछ hi देर में सब घर पहुंच जाते है

नीलम दरवाजा खोलती है और दरवाजे पर अपने बूढ़े बाप को देख कर खुसी से झूम उठती है

हरिया एक नजर अपनी बेटी के कपड़ो पर डालता है

नीलम के ब्लाउज के 2 बोटों टूटे हुए थे और न तो उसने कोई दुपट्टा डाला हुआ था न hi पेटीकोट के ऊपर कोई सदी

नीलम अपने बाप से चिपक जाती है

नीलम - बापू तुम नहीं जानते मेने कितना याद किया तुम्हे

हरिया - मेरा भी थी हाल है बेटी तुझसे दुर्र रह पाना बहुत मुश्किल है

नीलम- अरे रवि तू भी आया है आज तो लगता है मेरी लाटरी लगने वाली है

नीलम रवि को अपनी बहो में भर लेती है

रवि भी मौके का फायदा उठता हुआ नीलम की मदमस्त गांड को दबोच लेता है

रवि- दीदी लगता है ससुर और पति दोनों hi खूब सेवा कर रहे है

Neelam-koi कितनी भी सेवा कर ले पर तेरे साथ जो मजा आता है न वो कोई नहीं दे पता

नीलम की बात मल्टी साफ़ सुन्न सकती थी अब तक नीलम ने मल्टी को नहीं देखा था

पर अपनी भाभी की बात सुनकर मल्टी के बदन में हजारो चीटिया रेंगने लगी थी

कैसा होगा जब आज की रात वो इतने सरे मर्दो के बिच पिसेगी

क्या वो सबको खेल पायेगी

यही सब सवाल मल्टी के दिमाग में चला रहे थे

इधर नीलम तो मनो बहुत खुश थी उसे एक साथ 4-4 लुंड जो मिलने वाले थी

रवि- अरे दीदी देखो तो जरा में एक और मेहमान को लेकर आया हु

रवि साइड हो जाता है जिससे नीलम और मल्टी एक दूसरे को देख कर खुश हो जाती है

नीलम - अरे दीदी नहीं भाभी ओह्हू अब क्या खु आपको

रवि- कुछ भी कहलो दीदी क्या फरक पड़ता है जैसी आप मेरे लिए हो वैसे hi भाभी भी है

रवि अपने दोनों हाथो से अपनी भाभी के कंधो को दबाता हुआ बोलता है

नीलम - हां हां मुझे सब पता है तुझसे भला कोई बच सकता है क्या तूने दीद का भी शिकार कर hi दिया

नीलम की बात सुनकर सब हसनी लगते है

इधर घर के अंदर वाले कमरे में ह्री लेता हुआ था वो तो अपने बाप का इंतजार कर रहा था की कब वो दारू लेकर आएगा और दोनों बाप बीटा दारू पी कर उसकी hi बीवी को नोचेंगे

सच खु तो इसे समय घर में नीलम का hi राज था भले hi दोनों बाप बेटे उसे जानवरो की तरह छोड़ा करते थे पर मजाल थी कोई नीलम के फैसले पर सवाल उठा दे

शायद औरत की ताक़त उसके छेड़ो में hi होती है ( कोई बुआ न मने सिर्फ कहानी के वे में ये लाइन लिखी गयी है )

जिससे वो मर्दो को अपने इशारो पर नचा सकती है

हरी आवाज सुनकर बहार आता है और सबके साथ साथ अपनी दीदी को देख कर खुश हो जाता है

उसे अपने बाप और बीवी की बात याद आ जाती है जब उन्दोनो ने वडा किया था की जिस दिन मल्टी दीदी घर आएगी वो उसे मदद करेंगे अपनी दीदी को पटाने में

पर बिचारा हरी खा जनता था की मल्टी तो पहले से hi नंगा नाचा करने का मुद बना कर आयी है

हरी- दीदी आप अच्चानक

नीलम - अरे कोई समझाये इन्हे दीदी कहे जब भी आये उनका बजे खोल कर स्वागत करना चाहिए

नीलम खुद hi अपने पति को आगे की और धक्का देती है और हरी सीधा अपनी बहे खोल अपनी दीदी को बहो में भर लेता है

मल्टी की बड़ी बड़ी कठोर चूचिया हरी के लुंड की नशे फाड़ रही थी उसका लुंड रह रह कर झटके मार रहा था

हरी अपने दोनों हाथो को पीछे ले जाकर अपनी दीदी को पीठ सहलाता हुआ उसकी कमर तक पहुंच गया था और इस समय अपनी दीदी की चिकनी कमर की चिकनाहट का पूरा मजा ले रहा था

रवि - दीदी लगता है इन भाई बेहेन का प्यार रत भर ऐसे hi चलता रहेगा

नीलम - तू इनकी जगह होता क्या इतनी जल्दी छोड़ देता अपनी दीदी को

रवि- में तो रात भर नहीं छोड़ता दीदी आज की रात तुम hi देख लेना

मल्टी - अरे छोड़ ना हरी पूरा प्यार अभी hi जता देगा क्या

रवि- अरे है है हरी भैय्या छोड़ दो मेरी भाभी को अभी तो पूरी रात बाकि है

मल्टी - पिताजी खा है

Hari-wo बाजार गए है सामान लेने

Neelam-accha रवि तूने बताया नहीं यु सब एक साथ कोई खास बात है क्या

रवि नीलम को पूरी बात बता देता है और ये भी बता देता है की सबको उसके साथ चलना है

रवि की बात सुनकर नीलम खुसी से झूम उठती है और एक बार फिर रवि के गले लग जाती है

रवि पूरी बेशर्मी के साथ नीलम के शरीर को अपने हाथो से मसल रहा था

हरी- देखा दीदी यही होता है भाई बेहेन का प्यार देखो देखो कैसे दोनों जुड़ते hi जा रहे है

नीलम - ये तो खूब अच्छी बात बताई टाइम आखिर मेरी बेहेन का भी घर बस hi गया
 
अपडेट - 246

थोड़ी hi देर में रामलाल भी घर आ जाता है और अपनी बेटी के साथ साथ रवि को देख कर खुश होता हुआ गले लगा लेता है

नीलम - अच्छा रवि सुन जरा इधर ऑटो

और आप भी आओ इधर अंदर

नीलम हरी और रवि को लेकर कमरे में चली जाती है और कमरे के दरवाजे को बंद कर देती है

हरी- क्या हुआ नीलम

नीलम- अरे बाबूजी तो सिर्फ शराब लेकर आये है आप जाओ और मुर्गा ले आओ ये लो पैसे

नीलम अपने भेज हुए ब्लाउज में से पैसे निकल कर हरी के हाथ में देती है

रवि- अच्छ दीदी वो तो ठीक है पर जीजाजी के साथ मुझे क्यों बुलाया है

नीलम - रवि अब तुझसे क्या छुपाना तेरे जीजा तेरी भाभी यानि अपनी hi दीदी को अपने निचे लाना कहते है

रवि - दीदी इसमें घूमने की क्या बात है सीधा सीधा बोलो न हरी भैय्या अपनी दीदी को छोड़ना कहते है

हरी- हां सही खा रवि तूने एक दम सही

रवि- और आप मुझे क्या छाती हो मेरी दीदी

रवि पूरी तरह से नीलम के पीछे आकर चिपक जाता है और अपने दोनों हाथो को आगे लता हुआ नीलम के पेट को मसलता हुआ दोनों हाथो को सीधा उसकी चूचियों पर ले जाता है

सामने hi नीलम का पति खड़ा था पर इससे रवि को कोई फरक नहीं पड़ता था

नीलम - आठ कमीने तू थी चालू हो गया अपने जीजाजी के सामने hi

रवि- दीदी में तो बस दिखा रहा हु जीजा को की कैसे उसे अपनी बेहेन को प्यार जताना है आप भी तो मेरी बेहेन हो न

Hari-are रवि वो तो ठीक है पर ये होगा कैसे

रवि - आप उसकी चिंता मत करो में ऐसा माहौल बना दूंगा की आपकी दीदी खुद hi अपनी टंगे खोल देगी

वैसे आपको पता है आपको दीदी भी था छुड़वाने के मकसद से hi आयी है पर आपसे नहीं बल्कि अपने बाप से अब अगर बाप और भाई एक साथ चोदे तो क्या hi फरक पड़ता है

हहहह

नीलम - आप बिलकुल चिंता मत करो ये सब संभल लेगा आप जाकर मुर्गा ले आओ

चल हम भी बहार चलते है सब इन्तजार कर रहे होंगे

रवि- सब इन्तजार कर रहे होंगे या आपका बाप इन्तजार कर रहा होगा

Neelam-bhut कमीना है तू

रवि - तभी तो आपकी सवारी कर पाया दीदी अगर शरीफ होता तो क्या आप मेरे सामने अपना रान्दीपना दिखती

अपनी hi बीवी और उसके मुंहबोले भाई की बातो का हरी पर बहुत असर हो रहा था वो इस वक़्त अपनी बीवी को न देख कर एक भाई बेहेन को देख रहा था जो उसके लिए काफी दिलचसप था

रवि- देखो न दीदी कैसे खड़ा हो गया है आपकी गांड से सताते hi

नीलम - तू पागल हो गया है सब बहार hi है

रवि- अरे तो में कौनसा तुम्हे नंगी होने को कह रहा हु

में तो बस इतना कह रहा हु इसे एक बार शांत कार्डो

Neelam-tera दिमाग खराब हो गया है

हरी- अरे सही hi तो कह रहा है बिचारा वैसे भी ये शर्मी ह्या का पर्दा थोड़ी hi देर में सबके बिच से हट जायेगा और इतने दिनों बाद अगर कोई अपनी बेहेन से मिलेगा तो किसका मन नहीं होगा

रवि- ये बात तो सही की आपने

हरी- मेरा बस चलता तो मल्टी दीदी को घर में घुसते hi घोड़ी बना देता और अपना मुँह उसकी छूट में घुसा कर चाटने लगता पर मेरी ऐसी किस्मत खा

रवि- अरे जीजाजी अब वडा किया है तो जरूर निभाउंगा यकीन करो मेरा

हरी- तेरी दीदी ने बोल दिया तो मुझे पूरा यकीन है तू मजे कर अपनी दीदी के साथ में आता हु

हरी जाने hi वाला था की तभी रवि उसका हाथ पकड़ लेता है

रवि- अरे रुको न जीजा खा जा रहे हो 5-10 मिंट लगेंगे दोनों चूसते है न दीदी को लुंड

दोनों भाई बेहेन की कामुक बाटे सुनकर हरी का लुंड भी फटने को था उसे रवि की बात सही लगती है वैसे भी तो वो इतने दिनों से अपनी बीवी को अपने बूढ़े बाप के साथ बात रहा था आज भाई के साथ hi सही

नीलम- अच्छा तो अब में तुम जीजा सेल का लुंड चुसू

हरी - तुम्हारा मंत्र नहीं है क्या चूसने का बापू का लुंड तो दिन रात चुस्ती हो

रवि - अरे आप नहीं जानते मेरी दीदी को रुको में दिखता हु इन्हे कैसे मनाना है

रवि अपनी पंत को खोल कर निचे सरका देता है और अपने खड़े लुंड पर नीलम का हाथ रख देता है

Neelam-ye कमीना जनता है मेरी कमजोरी

नीलम खुद बा खुद hi निचे बैठ जाती है और अपने पति और भाई के लुंड को अपने गले तक उतार कर चूसना चालू कर देती है

इधर दूसरी और मल्टी को अपनी भाभी से कोई बात करनी थी वो कमरे के पास आती हुई दरवाजा थोड़ा सा खोलती है और उसकी नजरो के सामने उसका देवर और भाई नीलम का मुँह बेरहमी से छोड़ रहे थे

मल्टी की आँखे फटी की फटी रह जाती है

इधर रवि को नजर मल्टी पर पड़ती है

रवि- जीजा देखो तो हमे कोई और भी देख रहा है

हरी नजर उठा कर अपनी दीदी को देखता है और अपने चेहरे पर मुस्कान के साथ अपनी बीवी के मुँह में धक्के लगाने लगता है

जैसे hi मल्टी की नजर उसके छोटे भाई से मिलती है वो एक पल के लिए मनो शौक हो जाती है और अगले hi पल वो दरवज्जे से हट जाती है

उसका दिल जोरो से धड़क रहा था उसे अपने छोटे भाई को मुस्कान से साफ़ पता चल गया था की आज की रात वो उसके साथ भी वही सब करने का इरादा रखता है

कुछ hi देर में हरी और रवि दोनों hi अपना विरया नीलम के मुँह में गिरा देते है जिसे वो पूरा चतत्त कर जाती है कुछ बचा कुछ वीर्य उसके चेहरे पर लगा था वो उसे पोछने hi वाली थी की रवि उसे प्लान के मुताबिक सीधा मल्टी के पास जाने के लिए बोलता है

नीलम भी एक नंबर की रंडी थी वो मुस्कुराती हुई कमरे के बहार चली जाती है

नीलम - भाभी आप दूध रही थी मुझे

मल्टी नीलम का चेहरा देखती रह जाती है जो पूरी तरह विरया से सना हुआ था

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मल्टी - अरे ये तुम्हारे चेहरे पर क्या लगा है नीलम

नीलम अपने हाथ से चेहरे पर लगा वीर्य अपनी ऊँगली पर इख्ठा करती हुई उसे चूस जाती है

नीलम - अरे दीदी आप नहीं जानती की आपका भाई और मेरा भाई कितने कमीने है रात तक का सब्र भी नहीं हुआ दोनों से और कमरे में बुला कर मेरा मुँह छोड़ दिया आठ कितना दुःख था है वो छोड़ो भाभी ये सब तो आज रात भर चलेगा आप बताओ

मल्टी - अच्छा इसे साफ़ करलो और चलो खाने की तैयारी करते है

नीलम मुस्कुराती हुई अपना प्लान सफल होता देख है ...
 
अपडेट -247

हरी और रवि बाजार चले जाते है और इधर रामलाल और हरिया अपनी अपनी बेटियों को देख कर आंखे सेंक रहे थे

दोनों बुद्धो का मन तो था की अभी जाकर उन्हें पकड़ ले और दोनों ने कोशिश भी की पर नीलम और मल्टी ने मनो मन hi मन अपने बूढ़े बापू को तड़पने का मन बना लिया था

Neelam-ye देख रही हो दीदी कैसे बैचैन है ये लोग

मल्टी - सब समझती हु में इनकी बैचनी इनका बस चले तो हमे कच्चा hi चबा जाये

नीलम- दीदी बस रात होने दो फिर देखना ीे से कोई नहीं सोचेगा की कौन किसी बहु बेटी या बेहेन है

मल्टी- वैसे तुम्हारे सबंध कब बने अपने पिता के साथ

नीलम - दीदी अब इसमें क्या छुपाना मुझे तो मेरे बापू ने शादी के पहले hi छोड़ दिया था और एक खास बात बताऊ दीदी

मेने खुद hi बापू को उकसाया था वो तो बचना कहते थे

पर मेने उन्हें ऐसी ऐसी चीज़े दिखाई की एक दिन खुद hi मुझे पकड़ कर पेल दिया

और आपका क्या दीदी

Malti-mera भी कुछ यही हाल था पिछली बार जब घर आयी तो मेने महसूस किया की मेरे बापू का नजरिया अब मेरे पार्टी बदल चूका है और कहि न कहि मुझे भी उन्हें वो प्यार देना था जिसके बारे में मेने कभी कल्पना भी नहीं की थी

आग तो दोनों तरफ लगी थी बस मेने चिंगारी को थोड़ा और बड़का दिया और उसके बाद बापू खुद hi मेरे पास आये और मेरे बदन से खेलना चालू कर दिया

उन्होंने जब मुझे चुना शुरू किया तो मनो में उनके साथ hi बहने लगी न तो मेने उन्हें रोकना की कोशिश की और न hi वो रुके

नीलम- दीदी कुछ भी कहो पर बाप और भाई के साथ जो मजा आता है न वो किसी और के साथ छुड़वाने में नहीं आता

मल्टी- तुमने क्या अपने बाप और भाई दोनों से hi छुड़वाया है

नीलम- अब आपसे क्या छुपाना दीदी

मुझे तो कैयो ने छोड़ा है आपके पिता भाई मेरे भाई पिता और ये कमीना रवि इस सेल का हथियार hi अलग है मनो लोहे का हो साला जल्दी बैठता hi नहीं है

मल्टी- मतलब तुमने

Neelam-are है है दीदी मेरे अपने बापू और भाई से भी एक बार छुड़वाया है और जिस दिन से ससुराल आयी हु उसी दिन से आपके पिता की भी सेवा कर रही हु दिन रात कुछ दिनों से तो दोनों बाप बेटो की सेवा एक साथ कर रही हु

Malti-hmmmmm तो तुम बहु होने का असली फ़र्ज़ निभा रही हो

Neelam-ab क्या करे दीदी अगर औरत को छुड़वाने का शौक लग जाये तो वो नहीं देखती की लुंड किसका है और मुझे तो ये शौक मेरे घर से hi लग गया था और सच बताऊ तो तुम्हारे पिता ने तो शादी के पहले hi एक बार मेरा मुँह मीठा करवा दिया था यह आने के बाद मेने उनका करवा दिया

दोनों नन्द भाभी एक दूसरे से ऐसे hi गरम गरम बाटे करते हुए रोटियां सेंक रही थी

इधर घर के आंगन में बैठे दोनों बुड्ढे भी अपना प्लान बना रहे थे

हरिया - तो संधि जी आपकी सेवा कर रही है या नहीं मेरी रानी बिटिया

रामलाल - सेवा तो ऐसी कर रही है की पूछो hi मत अपने पति से ज्यादा तो वो मेरा ख्याल रखती है

हरिया - आखिर बेटी किसकी है संधि जी

और आज की रात देखना पूरा मजा आएगा

रामलाल - आज रात तो मेरा प्लान है की रत भर अपनी बहु और बेटी को अपनी बहो में भर कर सोया रहु

हरिया- अरे ऐसा मत करना अगर आप दोनों को लेकर सो जाओगे तो हम छोड़ेंगे किसको हाहाहा

रामलाल - आज रात यकीनन यादगार रहेगी

हरिया - 4 मरद्द है और 2 hi औरते आज की रात तो यकीनन यादगार रहेगी संधि जी

रामलाल - तो ठीक है आज की रात न सोयेंगे और नहीं सोने देंगे

थोड़ी hi देर में रवि और हरी भी वापस आ जाते है

और सब मर्द साथ बैठ कर दारू पीने लगते है और कुछ hi देर में सब नशे में हो जाते है और सब साथ बैठ कर खाना कहते है

रामलाल नीलम को सनका बिस्तर बहार hi लगाने को कहता है ...
 
अपडेट -248

नीलम जल्द hi बिस्तर लगा रही थी

सब बिस्तर को hi देख रहे थे मनो

वो लगने के बाद hi खेल चालू होगा

पर रवि के ऊपर नशे का सर दोगुना था शायद ये उसका पहली बार जो था

रवि- अरे दीदी बिस्तर लगाने की क्या जरूरत है ऐसे hi रहने दो न बिस्तर क्यों खराब करना

रवि नीलम के हाथ से चादर खींचता हुआ उसे अपनी और खींच लेता है सब उसकी हरकत देख रहे थे

रवि- दीदी कितने दिन हो गए न तुमने अपने भाई को प्यार नहीं दिया

नीलम - मेने तो तुझे खा hi था न जब मेरी याद आये आ जाना पर तू hi नहीं आता तुझे तो रेखा से फुर्सत hi नहीं मिलती न जाने क्या जादू कर रखा है उसने तुझ पारर

रवि - दीदी जादू रेखा दीदी में hi है उनके आगे तो सब फ़ैल है

नीलम - में भी

रवि- ये तो चेक करना पड़ेगा दीदी

नीलम - तो कर लेना चेक

रवि नीलम का हाथ पकड़ कर उसे खत की और खींचता है और एक झटके में अपनी धोती उतर कर खत पर बैठ जाता है

रवि के खड़े लुंड को देख कर सबको आँखे फटी पड़ी थी

रवि- तो आजाओ दीदी देखते है आपमें कितना जादू है

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नीलम एक नजर सबको देखती है और अंतत में मल्टी की और देखती हुई बोलती है

नीलम- देख लिया न दीदी कितना कमीना है आपका देवर सबके सामने hi अपनी दीदी की टेस्ट ड्राइव ले रहा है

मल्टी कुछ बोल पति उससे पहले hi रवि नीलम का चेहरा पकड़ कर उसके होठो को चुस्त हुआ अपने लुंड पर दबा देता है

नीलम तो जैसे पहले से hi तैयारी करके आयी थी वो खुद hi अपना मुँह खोलती चली जाती है और आधे से ज्यादा लुंड उसके मुँह में घुस जाता है

रवि- अह्ह्ह दीदी मजा तो तुममे भी काम नहीं है

रवि खुद hi अपनी दीदी के बालो को पकड़ कर उसका सर ऊपर निचे करने लगता है

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और देखते hi देखते रवि का आधे से ज्यादा लुंड नीलम के मुँह में था जिसे वो बड़े मजे से चूस रही थी

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इधर हरी मनो अपने बाप को आँखों hi आँखों में कुछ इशारा करता है

रामलाल - तो संधि जी हम भी शुरू करे

हरिया- जैसे आपकी मर्ज़ी में तो पहले अपनी बेटी का hi भोग लगाऊंगा

हरिया आगे बढ़ता हुआ अपनी बेटी के पेटीकोट को पकड़ कर ऊपर उठा देता है

अपनी बेटी की छूट और गांड देख कर हरिया की आँखों में चमक आ जाती है

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हरिया- आँखे तरस गयी थी इन छेड़ो को देखने के लिए

हरिया अपना मुँह सीधा नीलम की टैंगो के बिच घुसा देता है और पूरी शिद्धत के साथ अपनी बेटी की छूट और गांड से बह रहे पानी को चाटने लगता है

इधर मल्टी खड़ी खड़ी ये नजारा देख रही थी उसकी टैंगो के बिच अब पानी रिश्मा चालू हो गया था

रामलाल खुद hi अपनी बेटी के पास पहुंच जाता है

रामलाल - देख रही है बेटी कैसे एक बाप अपनी बेटी के लिए तड़प रहा है

मल्टी - हां बापू देख रही हु

रामलाल अपनी बेटी को बहो में भरता हुआ उसकी गांड मसलने लगता है

मल्टी - बापू हरी भी यही है

रामलाल - तो क्या हुआ कर लेने दे उसे भी अपनी दीदी से प्यार तुझे नहीं पता तेरा छोटा भाई कितना तड़पा है तेरे लिए

मल्टी कुछ बोल पति उससे पहले hi हरी अपनी दीदी को पीछे से बहो में भर लेता है

मल्टी को महसूस होता है की उसके छोटे भाई ने अपने सरे कपडे पहले hi उतर दिए है

हरी मल्टी के कान को चुस्त हुआ उसके कान में बोलता है

Hari-didi होने दो न जो हो रहा है

में आपको बहुत चाहता हु जैसा प्यार आप बापू को देती हो वैसा hi प्यार मुझे भी दो न दीदी

हरी अपनी दीदी के कान में बोलता हुआ अपने लुंड को उसकी गांड पर रगड़ता हुआ अपने हाथो से अपनी दीदी का गुदाज पेट दबा रहा था

Malti-dekh रहे हो बापू कैसी कैसी बाटे कर रहा है ये कमीना

ये कहता है की इसे भी में वही प्यार दू जो आपको करती हु

रामलाल - दे दे न बेटी इसे भी वही प्यार तेरा भाई hi तो है

मल्टी कुछ बोलती उससे पहले हरी अपनी दीदी का पेटीकोट पकड़ कर खोल देता है और अपनी दीदी की गांड को दोनों हाथो से फैलता हुआ उसकी गांड के छेद से आ रही खुसबू को सूंघता हुआ अपना मुँह सीधा अपनी दीदी की गांड में घुसा देता है

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इधर मल्टी खुद hi अपने बाप की धोती पकड़ कर खोलती हुई अपने बाप का लुंड पकड़ लेती है

मल्टी - बापू हरी मेरी गांड चाट रहा है अह्ह्ह्ह

रामलाल अपनी बेटी के होठो को चूसना चालू कर देता है

इधर दूसरी तरफ रवि बुरी तरह से नीलम को लुंड चूसा रहा था एक एक झटके के साथ वो अपना पूरा का पूरा लुंड नीलम के मुँह में पेल देता नीलम बेचारी इस हमले से तड़प कर रह जाती और अपने हाथो को रवि की जांघो पर मरती हुई उससे थोड़ी दया की उम्मीद करती पीछे से उसका खुद का बाप उसकी छूट और गांड को इस तरह चाट रहा था मनो कितने hi वर्षो का भूखा हो

हरिया उठ खड़ा होता है

हरिया- अब और इन्तजार नहीं होता बेटी आजा घुसा ले अपने बूढ़े बाप का लुंड अपनी बुर्र में अब और इन्तजार नहीं होता

हरिया की बात सुनकर रवि भी उसे छोड़ देता है नीलम अपने मुँह से ठीक गिरती हुई कमीना पर गिर जाती है उसके हालत सच में खराब थी

हरिया अपनी बेटी को सहारा देता हुआ अपने ऊपर खिंच लेता है और अपनी बेटी के गीले होंटो हो चूसता हुआ अपने लुंड को पकड़ कर उसकी छूट पर सेट करता हुआ अंदर की और धकेल देता है

नीलम अभी कुछ समझ पति उससे पहले उसका भाई रवि भी अपना गिला लुंड उसकी गांड में पेल देता है

नीलम इस हमले से कसमसा कर रह जाती है

रवि और हरिया नेथासा नीलम को छोड़ रहे थे

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इधर दूसरी और हरी भी अपनी दीदी को खड़े खड़े छोड़ना चालू कर चूका था रामलाल तो अब भी अपनी बेटी के मुँह से मुँह हटाने के लिए राजी नहीं था दोनों बाप बेटी का थूक एक होकर जमीन पर गिर रहा था और दोनों hi उसका खुद आनंद ले रहे थे

काफी देर तक रवि और हरिया नीलम को अलग अलग आसान में छोड़ते रहते है

इधर रामलाल भी अपनी बेटी को हरी के ऊपर लिटा देता है और पीछे से अपना लुंड उसकी गांड में पेल देता है

रात भर थी सब चलता है कभी रवि और हरी एक साथ नीलम को छोड़ते तो कभी मल्टी को

दोनों बुड्ढे भी पीछे नहीं थे दोनों ने कई बार एक साथ अपनी अपनी बेटियों को छोड़ा

सुबह के करीब 5 बजे सब तैयार होकर गाओं के लिए निकल जाते है ..
 
अपडेट 249

आखिर वो दिन आ hi गया था जिसका सबको बेसब्री से इन्तजार था सिवाय रवि और कम्मो के

सुबह से hi पूरा घर शादी की तैयारी में लगा हुआ था

इस बिच घर के सब लोग समझ चुके थे की रवि क्यों मायूस है पर क्या करे कोई और चारा भी तो नहीं था

मल्टी - देख रही हो दीदी कितना मायूस है हमारा हीरो

रेखा - सब देख रही हु भाभी पर कर भी क्या सकती हु में जानती हु ये दोनों एक दूसरे को कितना कहते है पर समाज के सामने तो हमे वही करना होगा न जो रीत है

मल्टी - हम्म ये तो है पर उसे आप एक बार समझा कर तो देखो की कम्मो कोई हमेशा के लिए थोड़े hi जा रही है जब मन करे अपनी दीदी से जाकर मिल आये

रेखा- रुको में देखती हु और वैसे भी कम्मो के जाने के बाद हम दोनों तो है hi न भैय्या और रवि की सेवा करने के लिए

मल्टी - सिर्फ रवि की सेवा करने के लिए

रेखा - मतलब

मल्टी - मतलब ये की कम्मो की शादी के बाद आपके भैय्या भी सेहर चले जायेंगे पैसे कमाने

रेखा - तब तो हमे hi संभालना होगा रवि को

मल्टी - अरे हमे नहीं वो हमे संभालेगा हहहहह

रेखा - भाभी वैसे इस खेल में एक और खिलादन आ गयी है

मल्टी - वो कौन है भला

रेखा - अरे भाभी जानकी बुआ मेने खुद देखा है कैसे लपक लपक कर अपनी गांड मरवा रही थी मेरे भाई से

मल्टी - है राम ये क्या बता रही हो दीदी बुढ़िया में अब भी इतनी गर्मी है

रेखा - अरे भाभी बुढ़िया नहीं उसके गांड मरवाने के तरिके से तो लग रहा था की अपने जमाने की अवल्ल दर्जे की रंडी रह चुकी है वो

मल्टी - वो तो हम पता लगा hi लेंगे

रेखा - हां भैय्या चले जायेंगे उसके बाद उसकी खबर लेंगे

रेखा उठ कर रवि के पास जाती है

रेखा- क्यों रे मुँह लटका कर क्यों बैठा है तू

रवि- सब तो जानती हो फिर भी पूछ रही हो

इस बिच रेखा रवि से चिपक कर बैठ जाती है

इधर मल्टी भी आकर रवि के दूसरी बाजु बैठ जाती है

मल्टी - अरे देवरर जी हमे सब पता है आप क्यों उदास है पर आप भी तो सोचो हम कम्मो को हमेशा घर में तो नहीं रख सकते ना

रवि- क्यों रेखा दीदी भी तो यही रहती है न

रेखा - अरे बुद्धू कम्मो छोटी है अभी अगर उसकी शादी अब नहीं हुई तो कभी नहीं होगी जरा तू भी तो सोच तेरी बेहेन का घर बस जाएगा तो क्या तुझे ख़ुशी नहीं होगी

रवि- और यह मेरा घर जो उजाड़ रहा है उसका क्या दीदी

मल्टी - अरे अरे देवर जी पहले बात तो सुनो पूरी

कम्मो खा हमेशा हमेशा के लिए जा रही है जब मन करे हो आना अपनी दीदी के पास और छोड़ आना उसे उसकी hi ससुराल में अपने मुसल से

मल्टी सबसे नजर बचा कर रवि के अधखड़े लुंड को मसल देती है

रवि- हम्म ठीक है भाभी

रेखा - और देख वैसे भी तेरे पास में और भाभी तो है hi न

मल्टी - हम्म हम तो है hi न और हां अगर तुम हमारी बात मानोगे तो हम दोनों भी तुम्हारी साडी बात मानेंगे

रवि - देख लो भाभी

रेखा - अरे देखना क्या है सीधी सी बात है केशव भैय्या भी सेहर जाने वाले है तो उसके बाद तू जैसे कहे हम दोनों को इस्तेमाल कर

मल्टी रवि के कण तक आकर बोलती है

मल्टी - जैसे कहे वैसे इस्तेमाल करना बिलकुल किसी चीज़ की तरह समझे देवर जी अपनी दीदी और भाभी के साथ जैसे मर्ज़ी वैसे खेलना कोई नहीं रोकेगा आपको

रेखा - हम्म देखा भाभी भी मान गयी है अब तो इस सड़े हुए मुँह पर थोड़ी मुस्कान लाडे कमीने

रवि हल्का हल्का मुस्कुराता है

रवि- दीदी ठीक है शादी की तैयारी करते है वैसे भी आज तो कम्मो दीदी चली hi जाएँगी

मल्टी - तेरी दीदी भले hi जा रही है पर साथ में अपने पेट में तेरा बीज भी तो लेजा रही है न उसके लिए hi खुश होजा

रेखा - और देख तो जरा मेघा दीदी की और उनका पेट भी अब फूलना शुरू हो गया है वो भी तेरा hi बच्चा है

Ravi-didi मुझे आपके पेट में भी अपना बीज डालना है

मल्टी - अरे देवर जी में हु न बीज गिराने के लिए मुझे तो खुद तुम्हारे भैय्या ने hi ये काम करवाने के लिए बोलै है

रवि- वो तो में पहले hi गिरा चूका हु भाभी

रेखा - अरे तो फिर गिरा देना क्यों भाभी

मल्टी - हम्म्म तेरा मन करे तो अभी गिरा दे

हहहहह सब हसने लगते है और अब रवि के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान भी आ गयी थी

रवि- अच्छा दीदी मुझे खेत में थोड़ा काम है वो निपटा कर आता हु

रेखा - अरे आज भी खेतो पर जाना जरूरी है क्या

रवि- हां दीदी कुछ जरूरी काम है बस जल्दी hi आ जाऊंगा

रवि वह से निकल कर खेतो की और चल देता है

इधर रेखा मेघा दीदी को सारा किस्सा बता देती है और आशंका भी जाती है की कहि रवि कम्मो से दूर होने के चक्कर में कुछ उल्टा सीधा न कर ले

मेघा दीदी भी अपने पहले हुए पेट के साथ खेतो की और निकल जाती है

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अपडेट -250

रवि के पीछे पीछे उसकी सबसे बड़ी दीदी भी खेतो में पहुंच जाती है

मेघा चारो तरफ अपनी नजरे दौड़ती है पर उसे उसका भाई कहि नहीं दीखता अंतत में मेघा झोपडी की और चल देती है

अंदर रवि बैठा था जो काफी उदास और मायूस था मेघा अंदर पहुंच कर उसके बगल में बैठ जाती है

मेघा - क्यों रे आज के दिन भी तुझे चैन नहीं है खेती से

( मेघा जानती थी रवि उदास है और वो अपनी पूरी कोशिश करने वाली थी रवि की उदासी को दूर करने की)

Ravi-bas दीदी ऐसे hi आ गया था

मेघा - अच्छा अब चल मेरे साथ घर चल सब दूध रहे है तुझे

रवि- आप चलो दीदी में आता हु थोड़ी देर में

मेघा - अच्छा मेरी बात भी नहीं मानेगा

रवि- दीदी

मेघा - अच्छा वो सब छोड़ में तो तुझे ये बताने आयी थी की तेरी म्हणत रंग लायी

रवि- मतलब दीदी

मेघा - देख तूने मेरे खेत में जो अपना बीज डाला था वो पनप गया

मेघा रवि का हाथ उठा कर अपने पहले हुए पेट पर रख देती है

रवि- सच दीदी कितना अच्छा लगेगा न जब आपका बच्चा होगा और मुझे मां कहेगा

मेघा - पर है तो तू इसका पापा न

रवि- पर दुनिया की नजर में तो मां hi रहूंगा न

मेघा - भाड़ में जाये दुनिया मेरी नजर में तो तू हमेशा मेरे बच्चे का बाप hi रहेगा और न जाने अभी तो तुझे अपनी दीदी की कोख से कितने hi बच्चे पैदा करवाने है

रवि- सच कह रही हो दीदी

मेघा- है मेरे राजा भाई सच कह रही हु मुझे बहुत सरे बच्चे चाहिए और सबका बाप भी मेरा छोटा भाई hi होना चाहिए

मेघा - तुझे पता है अब तो ये शैतान लात भी मरता है

रवि मेघा के पेट पर अपना सर रख देता है और अपने होने वाले बच्चे की आवाज सुनाने लगता है तभी वो एक लात मरता है जो सीधा रवि के मुँह पर लगती है

रवि- दीदी ये तो सच में लात मार रहा है

रवि खुसी से मेघा के गले लग जाता है

दोनों भाई बेहेन बहुत खुश थे

रवि की नाक में उसकी दीदी के जिस्म की महक जाते hi उसका लुंड तूफानी गति से खड़ा होने लगता है

और जल्द hi वो मेघा के भोसड़े पर टक्कर मरने लगता है

मेघा भी अपने छोटे भाई की बहो में आकर पिघलने लगी थी न जाने कबसे वो प्यासी थी पति तो उसका नाम मात्र्र hi चुदाई किया करता था हलाकि बच्चे को लेकर खुश तो वो भी था

रवि अपनी मेघा दीदी की गर्दन को चूमता हुआ उसके होठो को चूसने लगता है जिसमे मेघा भी उसका पूरा साथ दे रही थी

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रवि- ओह्ह्ह दीदी मेने आपको कितना याद किया

मेघा का हाथ अब निचे जा चूका था और धोती के ऊपर से hi अपने छोटे भाई के मुसल को बेतहाशा मसल रही थी

मेघा - अच्छा मेरी बड़ी याद आती थी तेरे पास औरतो की कमी थोड़े hi है कम्मो और रेखा तो है hi

मुझे तो लगता है अपनी भाभी का शिकार भी तूने अब टक्क कर hi लिया होगा

रवि- दीदी तुम्हारी बात hi कुछ और है

मेघा - अच्छा ऐसा क्या खास है रे मुझमे

रवि अपने दोनों हाथो से मेघा दीदी की गांड को मसलने लगता है

रवि- यही खास है आपमें आपकी ये मदमस्त गण्ड अहह कितनी मखमली है दीदी आपको गांड

मेघा - अच्छा तो मेरा छोटा भाई मेरी गांड का दीवाना है मुझे तो पता hi नहीं था

रवि- दीदी तुम नहीं जानती ऐसी गांड के लिए तो कटलल टक्क हो जाये

मेघा - और ऐसे लुंड के लिए तो कोई भी औरत अपनी आप hi तेरे सामने घोड़ी बन जाई अह्हह्ह्ह्ह

मेघा अपने घुटनो पर बैठ कर रवि का लुंड चूसना चालू कर देती है

इधर रवि अपनी दीदी के बालो को सहलाता हुआ उसके मुँह को हलके हलके छोड़ रहा था

मेघा भी जोश में आधे से ज्यादा लुंड अंदर तक्क लेकर चूस रही थी अचानक hi रवि आपकी कमर की स्पीड बढ़ता हुआ मेघा की मुँह की चुदाई तेज कर देता है

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मेघा कुछ देर तक्क ऐसे hi अपना मुँह चुदवाती है और खड़े होकर अपने जिस्म से एक एक करके सब कपडे उतार कर खत पर अपनी टंगे फैला कर बैठ जाती है

रवि अपनी दीदी की छूट देख कर पागल सा हो जाता है और अगले hi पल अपनी दीदी की छूट चाटने लगता है

मेघा - अह्ह्ह छत्त खा जा भाई मेरी छूट बहुत परेशां करती थी ये तेरे पास आने के लिए अह्ह्ह कितना मस्त चूसता है रे तू मेरे भाई मेरे बच्चे

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रवि पागलो की तरह मेघा की छूट को चूस रहा था

अनंतत में मेघा झड़ने वाली थी

वो रवि का सर पकड़ कर हटाने को कोशिश करती है पर रवि उसका हाथ झटक कर अपना काम जारी रखता है

अनंत में मेघा खुद पर काबू नहीं कर पति और ना कहते हुए भी अपने भाई के मुँह में मूतना शुरू कर देती है

यह नजारा बेहद hi कामुक हो चला था एक अधेड़ उम्र की दीदी हवस की आग में इतना पागल हो चुकी थी की अपने जवान भाई के मुँह में पेशाब करने लगी थी

कुछ hi पल में मेघा के अंदर का तूफ़ान शांत होता है और जैसे hi वो रवि का गिला चेहरा देखती है बेचारी खुद hi शर्मा जाती है

ऐसा पहली बार हुआ था शायद इतने दिनों से उसकी छूट प्यासी थी इसी लिए

रवि- बड़ा मजा आया दीदी आज तो अआपने मेरे मुँह में hi मुट्ठ दिया

मेघा कुछ नहीं बोलती बस अपनी नजरे झुका लेती है

रवि समझ जाता है उसकी दीदी अपनी गलती पर पचता रही है रवि उसके करीब जाता है और मेघा का चेहरा उठा कर बोलता है

रवि- दीदी ऐसे मत शर्माओ जो आपने आज किया है न उसमे सच में मुझे बहुत मजा आया

मेघा - तो क्या तुझे बुरा नहीं लगा मेरे तेरे मुँह में hi पेशाब कर दिया

रवि- ऐसा कौन सा भाई होगा दीदी जो अपनी दीदी के पेहसाब को गन्दा समझेगा में तो नहीं समझता दीदी इसे गन्दा मेरे लिए तो ये अमृत से काम नहीं है

रवि मेघा के होठो को चूसने लगता है और अपने मुँह में बचा कुछ पेशाब मेघा को भी पिलाने लगता है

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के मुँह में थूक अदला बदली कर रहे थे

मेघा को भी अब अपने छोटे भाई के साथ ऐसी गन्दी हरकते करने में मजा आने लगा था

और सबसे रोमांचित तो उसे खुद के hi पेहसाब का स्वाद लग रहा था

इस सब के बिच रवि का खड़ा लुंड उसकी छूट पर लगातार ठोकर मार रहा था

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मेघा खुद hi लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर रगड़ने लगती है

रवि भी मौका देख कर अपनी कमर को आगे की और सरकता हुआ अपना लुंड मेघा की छूट में घुसा देता है

मेघा का शरीर एक झटका खता है रवि अपना काम जारी रखता हुआ मेघा के होठो को चूसने चबाते हुए उसकी छूट छोड़ने लगता है

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मेघा भी अब पागल हुई जा रही थी रवि की स्पीड लगातार बढ़ रही थी

इस बिच मेघा अपना हाथ निचे लेजाकर रवि के तत्तो को पकड़ लेती है

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रवि- अह्ह्ह दीदी ऐसा मैट करो

मेघा - ह्म्म्मम्म तू बस छोड़ता जाआ

रवि- दीदी पीछे घूमो माँ

मेघा - क्यों पीछे से क्या मेरी गांड मरेगा तू

रवि- हआ दीदी आजजज आपकी गांड ने मुझे पागल कर दिया है

मेघा बिना कुछ बोले घोड़ी बन जाती है

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मेघा खुद hi अपनी गांड का गुलाबी छेद अपने भाई को फैला कर देखती है

रवि- दीदी ये तो पूरा चमक रहा है

मेघा - अच्छा चमक रहा है कमीने तू आज इसे भी बर्बाद करके hi मानेगा

रवि बिना कुछ बोले अपना मुँह मेघा दीदी की गांड पर भिड़ा देता है

रवि की जीभ अपनी गांड पर महसूस होते hi मेघा तड़प उठती है

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रवि पागलो की तरह मेघा की गांड और छूट चाट रहा था बिच बिच में वो अपने दोनों हाथो से फैला कर अपनी दीदी की गांड के छेद को देखता और उसी पल मेघा की गांड का छेद बड़े hi मादक अंदाज में खुलता और एक मधुर आवाज के साथ हलकी सी हवा बहार आती और रवि तुरंत अपना मुँह गांड से सत्ता देता और अपनी दीदी के पास को सीधा अपने अंदर खींच लेता

मेघा अपने छोटे भाई की हरकतों से पानी पानी हुई जा रही थी उसे अब लग रहा था की वो किसी भी पल झड़ने वाली है

और हुआ भी यही मेघा उसी पोजीशन में मूतना शुरू कर देती है

रवि को तो मनो इसी का इन्तजार था वो तुरंत अपना मुँह गांड से निचे सरकता हुआ छूट पर ले जाता है और अपनी दीदी का गरमा गरम पेहसाब जिसमे उसकी दीदी की छूट से निकला सफेद पानी भी था मस्त होकर पिने लगता है

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रवि कुछ देर टक्क अपनी दीदी की छूट और गांड चाटने के बाद उठ कर पास hi पड़ा तेल अपने लुंड पर लगाने लगता है

मेघा अपने छोटे भाई को अपनी hi गांड मरने को तैयारी करती हुई देख रही थी

उसे ये काफी रोमांचित भी लग रहा था उसे पता था दर्द होगा पर उसके बाद मजा आएगा वो ये भी जानती थी

आखिर कैसा मजा आता होगा जब लुंड गांड में अंदर बहार होता होगा यही सब उसके अंदर चल रहा था

अंतत में रवि एक हाथ से तेल को अपनी दीदी की गांड पर लगता हुआ अपनी एक ऊँगली से तेल अंदर तक लगाने लगता है

देखते hi देखते रवि 2 उंगलिया मेघा की गांड में सरका देता है

मेघा अपना मुँह आगे किये पड़ी थी वो बस उस लम्हे के इन्तजार में थी जब रवि अपना मुसल उसकी गांड में डालेगा

और अगले hi पल रवि अपने टोपे को मेघा की गांड के छेद पर रख कर दबाने लगता है

रवि- दीदी बस थोड़ा दर्द होगा बर्दास्त कर लेना एक बार एक खुल गयी तो उसके बाद दर्द की जगह मजा hi मजा

मेघा- तू मेरी फ़िक्र मैट कर भाई

तू बस अपना काम जारी रख और खोल दे मेरी गांड का ढक्कन भी जैसे तूने कम्मो रेखा और मल्टी का खोला है

रवि अपने लुंड को अंदर की और दबाने लगता है इधर मेघा अपने मुँह पर चादर दबती है

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देखते hi देखते रवि का लुंड अंदर की और जाने लगता है और कुछ hi पल में उसका पूरा का पूरा लुंड उसकी दीदी की मतवाली गांड में समम् जाता है

मेघा- घुस गया क्या

रवि- हम्म्म दीदी भुत्तत्त तीते गांड है तुम्हारी

मेघा - अब तो तीते नहीं रहेगी भाई तूने फाड़ दी अब तो अह्ह्ह कितना दुःख रहा है लग रहा है किसी ने कोई मोती रोड घुसा दी है अंदर

रवि- दीदी जो होना था वो तो हो गया अब तो गांड मरवाने का मजा लो

मेघा - अब फट गयी है तो मारवणी hi पड़ेगी न मार अब अपनी दीदी की गांड और बना दे इसे भी कुवा

रवि दे देना दान मेघा की गांड मरना शुरू कर देता है

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काफी देर टक्क मेघा की गांड की गांड मरने के बाद रवि अपना लुंड निकल कर अपनी दीदी का पिछवाड़ा फैला कर देखता है और अपने लुंड की करामात देख कर एक hi झटके में अपना लुंड घुसा देता है

मेघा अपने छोटे भाई के इस हमले से कराह उठती है

रवि हर 1 मिनट के बाद यही काम करता है कभी अपना लुंड एक झटके में उसकी छूट में घुसा देता है तो कभी गांड में और अंतत में अपना सारा पानी मेघा दीदी की गांड की गांड में hi गिरा कर साइड में लेट जाता है

मेघा - अब तो खुश है ना तू अपनी बड़ी दीदी की गांड भी थोक दी न

रवि- हम्म दीदी अब तो खुश हु

मेघा- चल अब घर चलते है सब इन्तजार कर रहे होंगे

मेघा और रवि दोनों hi कपडे पेहेन कर घर की और निकल जाते है

रेखा - भाभी आपको मेघा दीदी की चल बदली हुई नहीं लग रही

मल्टी - दीदी मुझे तो लग रहा है खेतो में hi देवर जी ने दीदी को लिटा दिया

रेखा - भाभी लिटाया तो पहले भी है पर इस बार तो लगता है इस बार इसने दीदी का पिछवाड़ा पेल दिया

मल्टी - हम्म दीदी सही कह रही हो देखो तो इतनी फैली हुई गांड भला देवर जी छोड़ने वाले है क्या

रवि आकर मल्टी और रेखा को आँख मर्डर कर अंदर चला जाता है

रेखा - क्या हुआ दीदी टंगे क्यों फैला कर चल रही हो

मेघा गुस्से में रेखा और मल्टी को देखती है क्योंकि असली दर्द तो उसकी गांड में अब हो रहा था

मेघा - कमीनी तूने भेजा था उसे मानाने के लिए और उसने मेरा पिछवाड़ा hi खोल दिया

रेखा - हाहाहाहा दीदी देखा भाभी मेने बोलै था ना

मेघा- चलो अब तुम दोनों ज्यादा दन्त मत पहाड़ो और जाओ काम में लग जाओ में थोड़ा आराम करके आती हु

मल्टी - दीदी देखना कहि देवर जी दुबारा से आकर ना पेल दे आपका पिछवाड़ा

मेघा अंदर चली जाती है और दोनों नन्द भाभी इधर उधर की बातो के साथ काम में लग जाती है ....
 
अपडेट -251

अब समय था बरात आने का सब लोग इकट्ठे हो चुके थे नीलम हरिया रामलाल हरी

मेघा के ससुराल वाले

गाओं के मेहमान और बाकि के लोग भी

कुछ hi देर में बरात भी आ जाती है और सब मिलजुल कर बारात का स्वागत करते है बारातियो को पानी पिलाते है

रवि भी उनमे शामिल था सुबह से hi वो कोशिश कर रहा था की कम्मो से दूर रह सके पर कहि न कहि उसके दिल में एक इच्छा भी थी की एक आखिरी बार अपनी दीदी से मिल ले

कम्मो का भी यही हाल था वो दिन भर घर के भीतर hi थी और अपने छोटे भाई का इन्तजार कर रही थी ताकि अपनी ससुराल जाने से पहले एक आखिरी बार अपने भाई की बहो में सुकून ले सखे

रवि से बर्दास्त नहीं हो पा रहा था उसे पता था अब अंतिम पल नजदीक है और जल्द hi कम्मो फेरो के बाद ससुराल रवाना हो जाएगी

रवि पानी छोड़ कर घर के भीतर चला जाता है और सीधा उस कमरे में पहुँचता है झा कम्मो का शिरंगार चल रहा था जोकि लगभग पूरा हो चूका था

कमरे के अंदर दाखिल होते hi उसे कम्मो दिखाई देती है जो भगति हुई आकर उसके गले लग जाती है पास में hi मल्टी भी खड़ी थी जो दोनों भाई बेहेन का प्रेम देख कर भावुक हो चुकी थी

कम्मो - खा था कित्ते तू एक बार भी तुझे तेरी दीदी की याद नहीं आयी

कितना कमीना है तू सुबह से hi अपनी दीदी को तड़पा रहा है बोल भाई बोल मेरे प्यार में क्या कोई कमी रह गयी थी जो तू मुझे अपने से इतना दुर्र कर रहा है

कम्मो अनाप स्नेप बोलती हुई रवि की छाती पर मुक्के मार रही थी इधर रवि के भी आंसू निकलना शुरू हो गए थे

रवि- दीदी में नहीं जनता में आपके बिना रह पाउँगा या नहीं में नहीं जनता में क्यों आपसे दूर रहा दिन भर नहीं जनता में दीदी मुझे कुछ नहीं समझ नहीं आ रहा

कम्मो रवि के मुँह पर हाथ रख देती है

खबरदार जो ऐसी बाटे की तूने में कोई हमेशा के लिए थोड़े hi जा रही हु तुझे छोड़ कर जब तेरा मन करे तब मेरे घर आ जाया करना वैसे भी मेरे छोटे भाई को कौन मना करेगा

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के गले लग कर एक दूसरे की बहो में समा जाना कहते थे

रवि- भाभी क्या हमे थोड़ी देर अकेले रहने का मौका डौगी

मल्टी - देवर जी बरात आ गयी है कुछ hi देर में फेरे भी होने वाले है आप तो जानते hi हो न अगर रेखा को पता चला तो वो मेरी जान ले लेगी उसने मुझे पहले hi बोल दिया था आपको कमरे में न आने दे

कम्मो - भाभी मेने आज तक्क आपसे कुछ नहीं माँगा बस आज मुझे मेरे भाई के साथ कुछ पल देदो न जाने ऐसा मौका फिर कभी मिलेगा या नहीं

मल्टी भी ये भाई बेहेन का प्यार देख कर भावुक हो चुकी थी

मल्टी - ठीक है पर बस 5 मिंट पर याद रखना देवर जी कुछ गड़बड़ न करना और तुम भी ध्यान रखना कम्मो आअज तुम्हारी शादी है

कम्मो - ठीक है भाभी बस 5 मिंट

मल्टी बहार चलो जाती है

मल्टी के बहार जाते hi कम्मो दरवाजे को अंदर से बंद कर देती है

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को खा जाने वाली नजरो से देख रहे थे और अगले hi पल दोनों पागलो की तरह एक दूसरे को चूमने चाटने लगते है कुछ hi पल में रवि अपनी दीदी के होठो पर लगी साडी लाल लिपस्टिक चाट जाता है

कम्मो - ज्यादा समय नहीं है भाई जल्दी कर

कम्मो पीछे की और घूम कर अपना लेहंगा अपनी कमर तक उठा देती है रवि भी अपनी दीदी की कच्ची को साइड सरकता हुआ अपना सूखा लुंड उसकी गीली छूट से भिड़ा कर एक जबरदस्त झटका मरता है

कम्मो - ठीक तो लगा लेता भाई पूरा का पूरा लुंड सूखा hi घुसा दिया तूने तो अह्ह्ह

रवि- दीदी थूक लगाने का भी समय नहीं है

रवि कम्मो की गर्दन पकड़ कर अपनी और घूमता है और उसके मुँह में अपना मुँह सताता हुआ दे देना दान अपनी दीदी की चुदाई करने लगता है

करीब 10 मिनट तक दोनों भाई बेहेन इसी तरह एक दूसरे से लिपटे रहते है

इधर बहार से रेखा मल्टी को कम्मो को बहार लेन का इशारा करती है

मल्टी दरवाजे को खोलने का प्रयास करती है पर दरवाजा अंदर से बंद था

मल्टी बेतहाशा दरवाजा पीट रही थी पर इधर अंदर दोनों भाई बेहेन एक दूसरे से नाग नागिन की तरह चिपके हुई चुदाई का मजा ले रहे थे

कम्मो - रवि भाभी आ गयी

रवि- बस होने वाला है दीदी

रवि अपने हाथो को अपनी दीदी के ब्लाउज में घुसा कर उसकी चूचियों को मसलता हुआ धक्को की रफ़्तार बढ़ा देता है

कुछ hi देर में रवि अपना सारा का सारा वीर्य कम्मो की छूट में गिरा देता है और दोनों भाई बेहेन हफ्ते हुए एक दूसरे से अलग हो जाते है

कम्मो अपने कपडे सही करती है रवि दरवाजा खोल देता है

कम्मो की हालत देख मल्टी भगति हुई उसकी तरफ जाती है और जल्दी जल्दी उसके कपडे ठीक करती है

मल्टी - क्यों देवर जी मेने खा था न आपसे कुछ गड़बड़ मत करना देखो तो जरा क्या हाल किया है

रवि बिना कुछ बोले जाने लगता है

इधर मल्टी जल्दी जल्दी दुबारा से कम्मो के होठो पर लाल लिपस्टिक लगाने लगती है

अभी मल्टी का काम कहत्म भी नहीं हुआ था की दोनों भाई बेहेन एक दूसरे की और भागते हुए दुबारा से एक दूसरे के होठो को चूसने लगते है

मल्टी उन्हें अलग करने की कोशिश कर रही थी पर मनो दोनों अलग होना hi नहीं कहते थे

लाख कोशिशों के बाद आखिरकार रवि और कामो अलग होते है

मल्टी तुरंत hi रवि को बहार की और धकेल कर दरवाजा बंद कर देती है और कम्मो की हालत सुधरने लगती है

मल्टी कम्मो का लेहंगा उठा कर डेक्टि है तो उसकी टंगे पूरी तरह रवि के विरया से भरी हुई थी मल्टी उसे कपडे से साफ़ करने का प्रयास करती है पर कम्मो उसे रोक देती है और ऐसे hi बहार चलने को बोलती है

कम्मो और मल्टी बहार आजाते है हर कोई कामो को hi देख रहा था आखिर वो थी hi इतनी खूबसूरत खास कर रवि जिसकी नजरे खुद की hi बेहेन से नहीं हट रही थी

कम्मो को उसकी दिदिया और भाभी मिल कर मंडप तक लती है और फेरे मंत्रो के बाद फेरे चालू हो जाये है

एक एक कर कम्मो अपने होने वाले पति के साथ सात फेरे लेती है

फेरे लेते हुए हर पल उसे अपनी छूट से अपने छोटे भाई का गरम विरया अपने टैंगो पर निचे के और फिसलता महसूस हो रहा था

आख़िरकार शादी सम्पन्न होती है और कम्मो विदाई का समय आ जाता है

सब लोग कम्मो को शुभकामनाये देते है और कम्मो सबके गले लगती है

अंतत में वो अपने छोटे भाई के पास आती है जिसकी आँखों में आज उसने पहली बार इतने आंसू देखे थे

कम्मो - मैट रू मेरे भाई में तुझे छोड़ कर थोड़े hi जा रही हु

रवि- दीदी कैसे रहूंगा में आपके बिना

दोनों एक दूसरे के गले लग जाते है और दोनों ने hi अपने अंदर के ज्वालामुखी को पता नहीं कैसे काबू में कर रखा था नहीं तो दोनों का hi मन था एक दूसरे में समाए जाने का

काफी देर तक दोनों एक दूसरे से लिपटे रहते है

भाई बेहेन के इस अटूट बंधन को देख कर शादी में आये हर एक मेहमान की आँखे नम्म हो जाती है

अंतत में खेसव रेखा को कुछ इशारा करता है और रेखा रवि के कान में कुछ बोलती है और रवि न कहते हुए भी कम्मो को अपनी गिरफ्त से छोड़ देता है अंतत में कम्मो रोटी हुई अपने ससुराल के लिए विदा कर दी जाती है.....
 
अपडेट -252

शादी बीत चुकी थी सब लोग खुस थे रवि भी अब थोड़ा बहुत संभल चूका था

इधर अब मेहमान भी वापस जाना शुरू हो गए थे

रामलाल और जारी को भी आज hi निकलने का प्लान बनता है

रवि घूमते घूमते नीलम के घर पहुंच जाता है झा सब तैयारी कर चुके थे

रवि- अरे हरी भइया खा जाने की तैयारी हो रही है

हरी- अरे आओ आओ रवि बस अब शादी बीत गयी तो हम भी अपने घर जा रहे है

रवि नजरे दौड़ा कर देखता है उसे हरिया एक कोने में मायूस दिखाई पड़ता है

रवि- वो तो ठीक है पर काका का मुँह कहे लटका है भाई

रामलाल - अब क्या बताये बीटा रात भर सब साथ hi सोये थे और तभी से काका मुझे बोल रहे है की नीलम को यही छोड़ दू

रवि- तो छोड़ दीजिये न काका नीलम दीदी को थोड़े दिनों के लिए यही

रामलाल - अब कैसे तुम्हे बताऊ बीटा मेरा न अब मन नहीं लगता बहु के बिना और अब तो बहु वैसे भी पेट से है देख तो कैसे बेचारी का पेट निकलना शुरू हो गया है

नीलम चुपचाप खड़ी सबको बाटे सुन रही थी उसके दिल में भी यही रुकने की कहह थी

और रामलाल अब नीलम को किसी के भी साथ बाटने को तैयार नहीं था उसका बास चलता तो अपने बेटे को भी उसे न चुने देता

हरिया - अरे समधी जी बेटी है मेरी बेटी बड़े लड़ो से पाल पॉश कर बड़ा किया है आपको क्या लगता है मेरे साथ रहेगी तो क्या में इसके पेट में जो बच्चा है उसका ख्याल नहीं रख सकता

रामलाल - नहीं नहीं समधी जी आप गलत समझ रहे है मेरा मतलब वो नहीं था नीलम पर मुझसे ज्यादा तो आपका hi अधिकार है

रवि- है है काका वो तो है hi पर आखिर थोड़े दिन नीलम दीदी यह रहेगी तो सबको अच्छा लगेगा मेरी एक दीदी तो आज मुझसे दुर्र चली गयी काम से काम थोड़े दिन तो नीलम दीदी को यही छोड़ दीजिये

रामलाल( सब जनता हु में कमीना दीदी दीदी बोल कर दिन रात बजायेगा मेरी बहु को )

हरी- ठीक hi तो है बापू कुछ दिन नीलम को यही छोड़ दो फिर में आकर खुद hi इसे ले जाऊंगा तुम क्या कहती हो नीलम तुम्हारा मन है या नहीं अपने पिता के साथ रहने का

नीलम- ऐसी कौन सी बेटी होगी जी जो अपने पिता के साथ नहीं रहना कहेगी

हरी- तो तैय हुआ हम लोग निकल रहे है और हां पिताजी हमारे साथ केशव जीजाजी भी चल रहे है

रामलाल - रवि बीटा तुम जरा जाकर दामाद जी को बोल दो की हमे रोड पर मिले हम निकल रहे है

रवि अंदर hi अंदर हास रहा था झा थोड़ी देर पहले तक्क हरिया का मुख मुरझाया हुआ था अब वह खुसी थी और अब रामलाल का मुँह लटके हुए लुंड की तरह लटक गया था

रवि- ठीक है काका आप चलिए

हरी और रामलाल घर से निकल जाते है

रवि- क्यों काका अब तो खुश हो न

हरिया - पूछ मत बीटा कितना खुश हु

रवि नीलम के पास आता हुआ उसकी गांड पर एक जोरदार चपत लगता हुआ बोलता है

Ravi-aur तुम मेरी दीदीजाण तुम खुश हो या नहीं

नीलम - तेरे जैसा भाई हो तो कौन बेहेन दुखी रहेगी रे

नीलम प्यार से रवि के गलो पर हाथ फिरती हुई उसके होठो को चुम लेती है

रवि- तो ठीक है काका में भी आता हु थोड़ी देर में केशव भैय्या को रोड पर छोड़ कर

तब टक्क इन्तजार करना याद रहे मेरी वजह से hi दीदी रुकी है

हरिया- तू बस जल्दी आना बीटा इन्तजार नहीं होता अब

हरिया धोती में अपना खड़ा लुंड मसलता हुआ बोलता है

नीलम - दीदी में बस अभी आया

वह से निकल कर रवि केशव को लेकर रोड पर पहुंच जाता है झा पहले से hi हरी और रामलाल उसका इन्तजार कर रहे थे

बस भी आ जाती है सब एक दूसरे से विदा लेते है

हरी- अरे सुनो रवि मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है

हरी अपनी जेब से एक दवाई का पत्ता निकल कर रवि को थमा देता है

रवि- अरे यह क्या है हरी भैय्या

हरी- इसे में लाया था दीदी के लिए पर समय hi नहीं मिला तो सोचा तुम्हारे काम hi आ जाएगी वैसे भी नीलम अब यह है तो ये मेरे किश काम की

रवि- पर ये है क्या

Hari-ise खा कर आप काम से काम 2 2:30 घंटे तक किसी भी औरत पर चुदाई कर सकते हो

रवि हस्ते हुए - अरे भैय्या इसकी मुझे जरूरत नहीं आपने तो मेरी फुर्ती देखि hi है न

रवि उसे दवाई वापस देता हुआ कहता है

हरी- अरे बाबू सब कुछ है तुम्हारे पास मुझे भी पता है पर एक बार इसे आजमा कर देखना और सच बोलता हु मजा hi मजा पाओगे इसे खाने के बाद जो जोश आएगा वो कभी नहीं आया होगा

रवि- ठीक है भैय्या आप इतना बोल रहे है तो जरूर तरय करूंगा

हरी - उम्मीद करता हु तुम इसे खा कर मेरी बेहेन के ऊपर hi चढ़ोगे

रवि- ठीक खा आपने और मेरे पास है hi कौन जब तक शादी नहीं हुई तब टक्क तो भाभी से hi काम चलना पड़ेगा न

ये बात हरी को नीलम पहले hi बता चुकी थी की रवि अपनी दीदियो की चुदाई करता है पर हरी इस बात को रवि के सामने नहीं करना चाहता था

हरी- तो चलो ठीक है ध्यान रखना मेरी दीदी का इसे खा कर बेचारी को इतना मत छोड़ देना की चल फिर भी न पाए हहह

रवि- नेफिक्र्र रहिये भैय्या आप इस बार पूरी तरह तैयार करके बहेजूँगा आपकी दीदी को आपके पास ....
 
अपडेट -253

रवि केशव को बस में बैठा कर दुबारा से नीलम के घर की और निकल जाता है

रवि के हाथ में वही दवाई का पत्ता था जिसे देखते हुए वो अपनी मंजिल की और बढ़ रहा था

रवि - साला आखिर क्या है इस दवाई में जो हरी बोल रहा था की इसे खाने के बाद आदमी घोडा बन जाता है

चलो इसे अभी इस्तेमाल करके देखते है नीलम दीदी के साथ

जल्द hi रवि हरिया के घर पहुंच जाता है झा हरिया पहले से hi घर के बहार बनी झोपडी में बैठ कर चिलम खींच रहा था

हरिया- अरे बीटा कबसे तेरा इन्तजार कर रहा हु

रवि - क्या कृ काका बस hi साली लेत आयी पर मानना पड़ेगा काका आपने अकेले अकेले मजे नहीं लिए मेरा इन्तजार किया

हरिया- अब क्या कृ बीटा मन तो बहुत था की तेरे जाते hi अपनी बेटी से चिपक जाऊ पर तुझे जुबान जो दी थी चल अब देर मत क्र ये ले थोड़ी चिलम पी ले तू भी जोश बढ़ जायेगा तेरा

रवि- अरे काका चिलम पी कर तुम जोश बढ़ाओ मेरे पास तो दूसरा hi बंदोस्बस्त है

रवि दवाई का पत्ता दिखता हुआ उसके से एक गोली निकल कर निगल जाता है

hariya-ye क्या है बीटा

रवि - काका एक दोस्त ने दी है और बोलै है की इसे खाने के बाद आदमी घोडा बन जाता है

हरिया - क्या तू सच कह रहा है

रवि- काका मेने भी तरय नहीं किया है ये तो अब नीलम दीदी के पास जाने के बाद hi पता चलेगा

hariya-to ला एक मुझे भी दे दे वैसे भी बड़े दिन हो गए नीलम को ठीक से प्यार किये हुए

ravi-ye लो काका तुम भी तरय करो

रवि हरिया को भी एक गोली से देता है दोनों 10 मिंट तक ऐसे hi बाटे करते रहते है

अब तक दोनों की hi आँखे लाल हो चुकी थी और मनो उन दोनों के hi अंदर हवस का एक सैलाब सा उमड़ रहा था जिसे अब एक औरत हु शांत कर सकती थी

हरिया - रवि बीटा मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है

रवि - काका अजीब तो मुझे भी लग रहा है साला लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा

हरिया- यही हाल तो मेरा भी है बीटा

रवि - लगता है दवाई सच में कारगर है काका

हरिया - चल अब अंदर चलते है इस दवाई को खाने के बाद तो मनो कण्ट्रोल hi नहीं हो रहा है

दोनों घर के अंदर पहुंच जाते है झा नीलम खाना बनाने में लगी हुई थी शादी तो वो पहले hi उतर चुकी थी और इस वक़्त उसका गदराया मांसल बदन पेटीकोट और ब्लाउज में मनो उसके पिटे और मुंहबोले भाई के ऊपर बिजलिया गिरा रहा था


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हरिया दरवाजे को अंदर से बंद कर देता है

नीलम का धयान अब रवि और हरिया की और जाता है उसे साफ़ साफ़ नजर आ रही थी अपने बाप और भाई की आँखों में वो हवस जो उसे बर्बाद कर देना चाहती थी

नीलम - बापू आप लोग थोड़ी देर बैठो बस में खाना बना लेती हु

हरिया अपना खड़ा लुंड मसलता हुआ अपनी बेटी की और बढ़ता है

हरिया - बेटी अब ये भूख रोटी से शांत नहीं होने वाली

नीलम - अच्छा बापू तो कैसे होगी तुम्हारी ये भूख शांत

हरिया पीछे से नीलम को पकड़ कर उसके गले को चूमता हुआ अपना लुंड उसकी गांड से भिड़ा देता है

hariya-ab तो ये भूख मेरी बेटी के जिस्म को भोग कर hi शांत होगी बेटी

नीलम - अच्छा ऐसी बात है

रवि - दीदी मुझे भी वही भूख है जो काका को है

नीलम - में तुम दोनों के इरादे पहले से hi जानती हु पर क्या तुम दोनों इतनी देर भी नहीं रुक सकते की खाना तैयार हो जाये

रवि अपनी धोती को खोल देता है और रवि का विशाल लुंड एक दम से नीलम की आँखों के सामने आ जाता है

जो पहले से भी बड़ा हो चूका था शायद ये उस दवाई का हीअसर था जो रवि के लुंड पर उभरी हुई नशे अब नीलम को साफ़ दिखाई दे रही थी

नीलम - बापू ये इसका लुंड तुम्हे पहले से बड़ा नहीं लग रहा

हरिया - बेटी जब सामने तेरे जैसी मस्त गदराई घोड़ी कड़ी हो तो किसका लुंड नहीं फूलेगा उसकी तो छोड़ अपने बाप का हाल देख

हरिया पीछे से नीलम की गांड पर एक धक्का मरता हुआ उसे अहसास दिलाता है की उसका लुंड भी खड़ा है


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रवि- दीदी अब खाने को करो साइड और चलो तुम्हे छोड़ने का कार्यक्रम शुरू करते है

नीलम भी अब पूरी तरह छुड़वाने के मुँह में आ गयी थी उसकी छूट से रस बहना शुरू हो चूका था

हरिया - बेटी तू नहीं जाती मेने तुझे कितना याद किया

नीलम अपनी गांड को हरिया के लुंड पर रगड़ती हुई कहती है - इसी लिए तो में यह ृक्क गयी बापू ताकि में एक बार फिर आपकी सेवा कर सखु

अब तक रवि नीलम के पास पहुंच जाता है और उसके होठो को कसना चालू कर देता है इधर हरिया अपनी बेटी की चूचियों को दबाता हुआ उसके गले कान हर हिस्से को चूसने लगता है

2-2 मर्दो के खड़े लुंड एक साथ नीलम की छूट और गांड पर धक्के मार रहे थे मनो नीलम दोनों के बिच पिघलने लगी थी

नीलम - अह्ह्ह बापू आज का दिन यादगार बना देना

हरिया - बेटी आज hi क्या क्यों जब तक्क तू यह रहेगी हर दिन हर रात यादगार बनाएगा तेरा ये बूढ़ा बाप

रवि - और दीदी अगर काका से कुछ कसार रह जाये तो मुझे बुला लेना

नीलम- हहहह हां तू तो है hi एक नंबर का छोड़ू

रवि- असली चुदाई तो आज होगी क्यों काका

हरिया - सही खा बीटा रवि तूने मेरी बेटी की असली चुदाई तो आज होगी

अब तक्क हरिया भी अपनी धोती खोल चूका था

नीलम दोनों का लुंड सहलाती हुई घुटनो के बल बैठ जाती है और एक एक नजर दोनों के लुंड पर डालती हुई उन्हें चूसना चेतना चलतु कर देती है

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कुछ hi पल बाद हरिया नीलम को उठा कर पास पड़ी खत पर लिटा देता है और अपनी बेटी की छूट पर मुँह लगा कर उसकी बुर्र से बह रहे मादक रस को चूसने लगता है

इधर रवि दुबारा से अपना लुंड नीलम के मुँह में घुसा देता है और जोरदार झटको के साथ नीलम के गरम मुँह को छोड़ने लगता है

काफी देर तक अपनी बेटी की छूट चूसने के बाद हरिया अपना लुंड उसकी छूट में घुसा देता है और अपनी बेटी को छोड़ना शुरू कर देता है

इधर रवि लगातार नीलम के मुँह के झटके मार रहा था और उसके मुँह की जबरदस्त तरिके से चुदाई कर रहा था

यही हाल हरिया का भी था नीलम को भी आज अपने बापू का जोश कुछ ज्यादा hi बढ़ा हुआ लग रहा था

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रवि- काका अकेले अकेले छोड़ोगे क्या अपनी बेटी को

हरिया - अरे तू भी आजा बीटा मेरा तो मन hi नहीं कर रहा इसकी छूट से लुंड निकलने का

रवि उठ खड़ा होता है और अपना लुंड लहराता हुआ नीलम के मुँह पर मरने लगता है

नीलम को सच में आज रवि का लुंड और भी मोटा लग रहा था

रवि- मुझे तो गांड मारनी है काका आपकी बेटी की क्या मारलू में इसकी गांड

हरिया - अरे बीटा ये भी पूछने की बात है कोई आजा

अब हरिया जमीन पर लेट जाता है

रवि नीलम के बाल पकड़ कर उसके होठो को चुस्त हुआ उसे उसके बाप के ऊपर धक्का दे देता है

अपनी बेटी को बहो में थमते hi हरिया उसके रस टपकते होठो को चबाते हुए अपना लौड़ा उसकी बुर्र में पेल देता है इधर रवि भी पीछे से एक hi जटके के साथ अपना लुंड नीलम की गांड में घुसा देता है

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रवि का लुंड पहले से कही ज्यादा फूल चूका था

नीलम की गांड में लुंड घुसते hi वो बेचारी दर्द से तिलमिला उठती है

चीला तो सकती नहीं थी बेचारी क्योंकि उसका खुद का बाप उसके होठो के साथ खेल जो रहा था

दर्द में तड़पती हुई नीलम अपने बाप के होठो को काट लेती है

अपनी बेटी की इस हरकत से मनो हरकत से मनो हरिया का जोश और भी बढ़ जाता है और अब वो निचे से शता सात अपनी बेटी की छूट की गहराईयों में धक्के लगा रहा था

इधर रवि भी काफी बेरहमी के साथ नीलम की गांड छोड़ रहा था बिच बिच में वो अपना लुंड बहार खींच लेता और गांड को दोनों हाथो से फैलता हुआ नीलम की गांड के बर्बाद होते छेद को एक नजर देखता और अगले hi पल एक झटके के साथ अपना काम लौड़ा जड़ तक उसकी गद्देदार गांड में पेल देता

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जब जब रवि अपना लुंड बहार खींचता नीलम की गांड से सफ़ेद पानी की बूंदो में साथ एक जोरदार हवा निकलती

रवि नीलम के हाथ को पकड़ कर उसकी hi गांड के छेद पर रख देता है और अपने हाथो से उसकी उंगलियों को पकड़ कर उसकी hi गांड में दाल देता है

नीलम को ताज्जुब हो रहा था क्योंकि उसकी गांड इस हद्द तक खुल चुकी थी की उसकी पूरी कलाई hi उसमे घुसा जा रही थी

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रवि उसके हाथो को बहार निकलता हुआ उसकी उँगलियों को चूसने लगता जिसपर उसकी गांड की गहराईयों से आ रही खुसबू के साथ साथ पानी भी भी था और फिरसे अपना लुंड उसकी गण्ड में ठूसता हुआ छोड़ने लगता

करीबन 20 मिंट से दोनों नीलम को इसी पोजीशन में छोड़ रहे थे हरिया तो मनो आज अपनी बेटी की छूट से लुंड निकलना hi नहीं चाहता था

नीलम की छूट से निकल रहे सफ़ेद गरम पानी से हरिया के लुंड के साथ साथ उसके टट्टे भी भीग चुके थे और अब पाछह पाछह की आवाजों से पूरा कमरा गूंजने लगा रहा

तभी रवि अपना लुंड नीलम की गांड से निकल कर उसकी छूट में घुसाने लगता है

हरिया अब भी अपनी बेटी के होठो का रसपानं कर रहा था

नीलम रवि के इरादे जान कर अपनी साँस रोक लेती है

वो समझ जाती है की अब एक साथ दो दो लोउडो से उसकी छूट छोड़ने वाली है

थोड़ी hi कोशिश के बाद रवि का टोपा उसकी छूट में समा जाता है झा पहले से hi उसके बाप का लुंड मौजूद था

रवि एक जोरदार जतका मरता हुआ अपना लुंड नीलम की छूट में ठुस्स देता है

नीलम इस धक्के से कराह उठती है और अपने बूढ़े बाप की छाती पर ढेर हो जाती है

रवि उसकी कमर को पकड़ते हुए चुदाई चालू कर देता है

अब एक साथ 2 2 लुंड नीलम के एक hi छेद को छोड़ रहे थे

नीलम को दर्द तो बहुत हो रहा था पर साथ hi साथ उसे ऐसा मजा आ रहा था जो पहले कभी नहीं आया था

इधर हरिया अपनी बेटी के गरमा गरम ठीक को लगातार पिए जा रहा था जो उसके पुरे मुँह को भीगा चूका था

सच में नीलम का थूक हरिया को किसी मिठाई से भी ज्यादा मीठा लग रहा था

शायद ये एक बाप का प्यार hi था अपनी बेटी के लिए

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चुदाई को करीब आधा घंटा बीत चूका था

इस दर्द भरी जबरदस्त चुदाई से नीलम का हाल बेहाल हो चूका था पर दोनों मर्दो में से कोई भी हार मानाने को तैयार नहीं था

रवि- सच में काका बड़ी जबरदस्त बेटी पैदा की है तुमने पूरा रंडियो वाला मजा देती है

करीब आधे घंटे बाद हरिया अपनी बेटी के मुँह से अपना मुँह हटाता है और अपने गले में जमा अपनी बेटी का थूक अंदर घोंटते हुए बोलता है

हरिया - बीटा पैदा तो ये भी शरीफ हुई थी रंडी तो मेने बनाया है इसे

बेटी को छोड़ने से बड़ा सुख कोई नहीं बीटा सच बता रहा हु

रवि- हम्म काका ये तो है जब मेरी बेटी पैदा होगी तो में भी उसे नीलम दीदी के जैसा hi बनाऊंगा

हरिया - अरे वो जब होगी तब होगी न अभी तो तू मेरी बेटी के मजे ले देख नहीं रहा कैसे मस्त हो कर छुड़वा रही है साली एक नंबर की चिनार हो गयी है उस सेल रामलाल के पास जाकर

रवि नीलम के बालो को पकड़ कर उसके मुँह को चुस्त हुआ बोलता है

रवि- काका अब तो ये साली इतनी बड़ी रंडी हो गयी है की मायके में बाप और भाई से एक साथ चुदवाती है और वह ससुराल में अपने पति और ससुर से एक साथ चुदवाती है

हरिया- म्हणत मेने की और फल साला वो हरामी रामलाल खा रहा है में तो सच कहता हु बीटा अब इसे वह नहीं जाने दूंगा अब ये यही रहेगी

हरिया अपनी बेटी के गले को दबाता हुआ उसे पूछता है

हरिया - बोल बेटी रहेगी न यही मायके में अपने बाप की रखैल बन कर

नीलम- हास बापू रहूंगी तुम्हारी रखैल बन कर और थी मायके में तुम्हारा बच्चा जानूँगी अह्ह्ह ः. हहहहहहहआ ऐसी hi छोड़ते रो बस मुझे दिन रात

अह्ह्ह बापू सच खु तो अब मेरा भी वह जाने का मन नहीं है वो साला हरामी मेरा पति उसके लौड़े में तो जान hi नहीं है ससुर थोड़ा ठीक थक छोड़ता है पर वो भी मुझे संतुस्ट नहीं कर पता बापू

हरिया - चिंता मत कर बेटी अब तेरा बाप तुझे हर रोज संतुस्ट करेगा

40 मिंट बेट चुके थे अब नीलम का पूरा शरीर दर्द के मरे गंगना रहा था

नीलम- क्या खाया है हरामियों तुम दोनों ने आज चोदे hi जा रहे हो तब से अह्ह्ह्ह मर जाउंगी में अज्ज्ज तो अह्ह्ह्ह बापू थोड़ा रेहम करो अपनी बेटी पारर इस सैंड को भी चढ़ा दिया तुमने आजजज अह्ह्ह कभी गांड मार रहा है तो कभी छूट आज्ज तो मेरी छूट और गांड को पहाड़ hi डोज तुम दोनों

रवि - बहुत बोलती है साली रंडी दीदी रुक तेरा मुँह बंद करता हु

रवि नीलम के बाल पकड़ कर उसे उठता हुआ पास पड़ी खत के शेयर टिका देता है

जैसे hi नीलम की छूट से हरिया का लुंड बहार आता है तेज धार के साथ नीलम की छूट से पेहसाब निकलने लगता है

हरिया इस मौके को खा जाने देने वाला था वो तुरंत अपना मुँह लगा कर अपनी बेटी का गरम पेहसाब पिने लगता है

इधर रवि नीलम के बालो को पकडे हुए उसके सर को अपनी दोनों टैंगो के बिच लता है और एक झटके के साथ hi अपना पूरा लुंड उसके मुँह में घुसा देता है

नीलम तड़प उठती है और छटपटाहट में अपने पेअर मारती है जिसे तुरंत hi उसका बाप पकड़ लेता है और दुबारा से अपनी बेटी की छूट से बह रहा सफ़ेद पानी चाट चाट कर साफ़ करने लगता है

रवि अपनी पूरी रफ़्तार में नीलम के मुँह की चुदाई कर रहा था

नीलम को हालत खराब थी उसका पूरा मुँह लाल हो चूका था आँखों से आंसुओ के साथ अब काजल बेहटा हुआ उसके चेहरे पर एक लिकर बनता हुआ निचे गिर रहा था

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काफी देर तक रवि ऐसे hi नीलम के मुँह को छोड़ता रहता है जब हरिया अपनी बेटी की छूट को चाट चाट कर पूरा साफ़ कर देता है तो वो भी उठ कर अपनी बेटी के बालो को पकड़ते हुए एक झटके के साथ hi अपना लौड़ा उसके मुँह में घुसा देता है और उसके बालो को थामे हुए उसके मुँह को छोड़ने लगता है

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रवि के साथ साथ अपने बापू की बेरहर्मी को देख कर नीलम को समझ आ गया था की उसका बाप उसके लिए कितना तड़पा है

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रवि- अह्ह्ह सच में आज्ज तो बड़ा मजा आए रहा है काका वो दवाई खा कर नीलम दीदी को छोड़ने में

दवाई की बात सुनते hi नीलम के कान खड़े हो जाते है क्योंकि उसका पति हरी भी दवाई खा कर hi उसे कबीदा करता था ये बात अलग थी की दवाई खाने के बाद भी वो नीलम जैसी मदमस्त औरत को 10 मिनट तक्क hi छोड़ पता था

हरिया- सच कह रहा है बेटे तू आज तो एशिया लग रहा है मनो में फिरसे जवान हो गया हु अह्ह्ह कितना मजा आ रहा है बेटी तेरा मुँह छोड़ने में

करीब 10 मिनट टक्क दोनों नीलम को अपना अपना लुंड चूसते है

रवि- चलो काका अब एक साथ नीलम दीदी की गांड मरते है

क्यों दीदी मारवणी है न गांड एक साथ 2-2 लोउडो से

नीलम- हरामी दवाई खा कर छोड़ रहे हो तुम दोनों मुझे तभी सोचु साला तेरे साथ साथ ये बुद्धा भी इतनी देर तक कैसे छोड़ रहा है मुझे

हरिया - बेटी अब तो तू बस देखती hi जा ये बुद्धा क्या क्या करता है चल आजा देख तेरे भाई की क्या ख्वाइश है

दोनों मर्द एक साथ जमीन पर लेट जाते है

नीलम- आज्ज तो तुम दोनों मुझे बर्बाद करके hi छोड़ोगे

हरिया- अरे बेटी जब बाप और भाई बर्बाद करे तो हो जाना चाहिए बर्बाद ऐसा मौका हमेशा हमेशा थोड़े hi मिलता है

नीलम दोनों लुंड एक साथ मिलती हुई इकठ्ठा करती है और अपनी गांड के छेद पर लगती हुई अपने शरीर का भर अपनी गांड पर डालने लगती है

रवि पहले hi काफी हद्द तक उसकी गांड को खोल चूका था धीरे धीरे दोनों लुंड नीलम की गांड में सरकने लगते है और देखते hi देखते नीलम 2-2 लोउडो से अपनी गांड छुड़वाने लगती है

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हरिया और रवि दोनों बस जमीन पर पड़े थे साडी म्हणत तो बेचारी नीलम hi कर रही थी

दोनों ने बस उस बेचारी के पैरो को पकड़ कर उसे सहारा दिया हुआ था

करीब 1:30 घंटे तक दोनों अलग अलग अवस्था में नीलम को छोड़ते रहे और आखिरकार दोनों hi मर्दो नई नीलम के मुँह को छोड़ते हुए उसके मुँह के अंदर अपना अपना विरया दिरा देते है

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नीलम कुछ देर तक उस मलाई के साथ मुँह के अंदर hi खेलती है जिसके लिए वो पीछे 1:30 घंटे से जानवरो की तरह छुड़वा रही थी

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अपने बापू और रवि की नजरो में नजर मिलती हुई नीलम मुँह बंद करती है और एक घूंट में hi सारा विरया निगल जाती है और अगले hi पल वो दुबारा से अपना मुँह खोल कर दोनों मर्दो को दिखती है जो पूरी तरह से साफ़ था वीर्य का कोई नमो निशान तक नहीं था नीलम के मुँह के अंदर

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अपनी बेटी के इस रंडी पने को देख कर हरिया को फिरसे जोश आ जाता है और एक बार फिर वो अपनी बेटी का मुँह चूसने लगता है अपनी जीभ अंदर घुसा घुसा का अपनी बेटी के थूक को अपने मुँह मु खींचने लगता है

शाम हो चुकी थी तो रवि को अब घर भी जाना था

रवि - आप मजा करो काका दीदी के साथ रात भर में फिर कभी आऊंगा

इतना बोल कर रवि कपडे पहनने लगता है

नीलम इसे कपडे पहनते हुए hi देख रही थी और साथ hi साथ अपने बाप से अपने मुँह के साथ साथ अपनी जीभ भी चुसवा रही थी

अंतत में नीलम हरिया को धक्का देकर हटती है जो उसे छोड़ ने को तैयार hi नहीं था

नीलम- फिर कब आएगा रवि तू

रवि- क्यों दीदी ज्यादा hi मजा आया क्या आज्ज

नीलम- तभी तो पूछ रही हु हरामी

रवि- जब आप खो

नीलम - अच्छा तेरे पास अब भी वो दवाई है क्या

रवि- है है तो

नीलम- तो तू एक मुझे भी दे देना

रवि- आप क्या करोगी दीदी इस गोली का

नीलम - अरे बुद्धू मेरे लिए नहीं बापू के लिए मांग रही हु और जब भी तू सेहर जाना तो मुझसे पैसे ले जाना और ढेर साडी ले आना

रवि- अच्छा जी मतलब आज रात भर काका से छुड़वाने का प्रोग्राम है आपका क्यों दीदी

नीलम- अब क्या बताऊ तुझे भाई इतने दिनों से प्यासी हु की दिन रात भी छुडवाउंगी तो ये प्यास बुझने वाली नहीं है

हरिया अपनी बेटी के इरादे जानकर अंदर hi अंदर गड़बड़ हो रहा था

रवि- कोई नई दीदी में जब भी सेहर जाऊंगा तो ढेर साडी लेकर आऊंगा आखिर मेरे घर में भी औरते है न दीदी उनको भी तो वही मजा मिलना चाहिए जो आपको मिला है

हरिया - है है बीटा जरूर

रवि- तो ये दीदी फ़िलहाल 2 गोलिया लेलो

बाकि में 1-2 दिन में जाऊंगा तो और ले आऊंगा

रवि नीलम को दवाई देकर जाने लगता है तभी वो गेट पर ृक्क कर बोलता है

रवि- काका देखा मेने बोलै था न दीदी ससुराल जाकर और भी बड़ी चुड़क्कड़ चैनल बन गयी है देख रहे हो न आज की रात आपको सोने नहीं देगी ये रंडी

नीलम- में तो बोलती हु तू भी यही ृक्क जा तुझे भी नहीं सोने दूंगी

रवि- अरे नहीं नहीं दीदी घर पर 2 औरते है जो लुंड के लिए तरस रही है 2 दिन से उनका भी तो ख्याल रखना है ना आप काका को hi सम्भालो आज रात के लिए में जल्द hi आऊंगा और आज से भी बुरी तरह से पेलुँगा तुमको

नीलम- इन्तजार रहेगा भाई मेरे तेरी इस दीदी को तेरा जा जाकर अपनी दूसरी दीदी की प्यास भी बुझा दे और हां एक दवाई खा लेना शायद रेखा को भी ऐसी hi चुदाई की जरुरत है

रवि - है है क्यों नहीं आजाओ काका दरवाजा लगा लो और साध जाओ दुबारा से अपनी बेटी पर

रवि के जाते hi हरिया दरवाजा बंद करके एक बार फिर अपनी बेटी को अपनी गिरफ्त में लेकर उसका मुँह चूसने लगता है और देखते hi देखते एक बार फिर हरिया का लुंड नीलम की छूट पर धक्के मरने लगता है

रवि वह से विदा लेकर अपने घर की और निकल जाता है झा रेखा और मल्टी बेसब्री से उसका इंतज़ार कर रही थी आखिर उन्हें भी तो 2 दोनों से लुंड नहीं मिला था

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इधर रवि अपने घर की और निकल जाता है और उसके जाते hi हरिया दरवाजे को बंद करके एक बार फिर अपनी बेटी से लिप्त कर उसके होठो को चूसना चालू कर देता है

कुछ hi देर में रवि भी अपने घर पहुंच जाता है

रेखा- अरे खा रह गया था रे तू

रेखा को रवि की लाल सुर्ख आँखे देख कर एक अजीब सा आभास होता है कुछ अलग तयप का जिसे बया कर अपना मुश्किल है

रवि बिना कुछ बोले कमरे में चला जाता है

मल्टी - दीदी कुछ हुआ है क्या देवर जी को

रेखा - भाभी मुझे तो लगता है आज हम दोनों की खैर नहीं है जल्दी जल्दी रोटियां बना लो पता नहीं आज ये क्या करेगा हमारे साथ

मल्टी - अरे दीदी कुछ भी करे मजा तो हमे hi आएगा न

रेखा- वो तो वक़्त hi बताएगा भाभी आखिर तुम उससे इतना बड़ा वडा जो कर बैठी हो

मल्टी - कौन सा वडा

रेखा - यही की वो हम दोनों के साथ जो मर्ज़ी वो कर सकता है

मल्टी - है है तो इसमें बुराई hi क्या है आखिर इतने मांसल जिस्म को जब तक कास कर तोडा मरोड़ा न जाये तब तक मजा hi खा आएगा दीदी

मल्टी रेखा की एक चुकी को मसल देती है

रेखा - हम्म ये तो है भाभी चलो जल्दी जल्दी काम निपटा लेते है सुबह से hi मेरी बुर्र में खुजली हो रही है

मल्टी - हां दीदी खुजली तो मेरी बुर्र में भी हो रही है अब तो इसे एक मोटा तजा लुंड hi शांत कर सकता है

दोनों नन्द भोजाई रोटियां प्लेन लगती है रवि कमरे में जाकर देखता है की उसकी बुआ दूसरी और पलट कर सोई है है वो भी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में

रवि का लुंड बुआ के गदराये जिस्म और उसकी मतवाली गांड को देख कर एक बार फिर अपना सर उठाने लगता है

शायद ये दवाई का hi असर था जिससे अब हवस रवि की आँखों में उत्तरी हुई थी

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रवि अपनी धोती को अलग करता हुआ बुआ का पेटीकोट पीछे से उठा देता है और अपने सुपडे पर थूक लगता हुआ एक hi झटके में उसे जानकी बुआ की गांड में घुसा देता है

झटका इतना जबरदस्त था की बुआ की फटी हुई गांड भी दर्द करने लगती है और वो एक झटके में hi गड़बड़ के उठ जाती है

बुआ- कोँण कोँण है अह्ह्ह्हह मर्डर गयी

रवि बुआ की गर्दन को दबाता हुआ उसकी चुदाई चालू कर देता है

रवि- चुप चाप पड़ी रह साली रंडी बुआ

रवि की आवाज सुन्न कर बुआ को थोड़ी शांति मिलती है

Bua-ahhh रवि बीटा आराम से दाल न अह्ह्ह

रवि- साली बुढ़िया फटा बुआ छेद छोड़ रहा हु उसमे भी बोलती है आराम से छोड़ तेरी माँ को छोड़ू साली रंडी कितने hi लुंड खा चुकी है इस गांड से और मुझे बोलती है आराम से छोड़ने के लिए

रवि के झटके अब और भी तेज हो जाते है जिससे की चारपाई भी चर्र चर्र करने लगती है

इधर रेखा और मल्टी भी आवाज को सुन्न लेते है

मल्टी - दीदी लगता है बुआ की ठुकाई चालू हो गयी

Rekha-chlo चलो दीदी देखते है कैसे छोड़ रहा है मेरा छोड़ू भाई बुढ़िया को

दोनों दरवाजे के पास चली जाती है और अंदर का नजारा देखते hi दोनों की आँखों की पुतलिया चौड़ी हो जाती है

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अब तक रवि जानकी बुआ को घोड़ी बन कर उसे जबरदस्त तरिके से छोड़ रहा था

रेखा - है राममम कैसे छोड़ रहा है भाभी ये बुआ को

मल्टी - हां दीदी काश बुआ की जगह में घोड़ी बनी होती

रेखा - बड़ी गर्मी साध रही है न भाभी खाना खा लो पहला नंबर तुम्हारा hi लगवाउंगी आज

मल्टी हां हां दीदी में कौनसा मना कर रही हु में तो कहती hi हु की देवर जी मुझे भी पटक पटक कर चोदे

मल्टी रेखा के पेटीकोट में हाथ दाल कर उसकी छूट मसलने लगती है

Rekha-ahh भाभी क्या कर रही हो अभी सारा पानी निकल डौगी क्या

मल्टी- क्यों दीदी पानी बचा कर क्या छोटे भाई को पिलाओगी

इधर रवि बुआ को ताबड़तोड़ तरिके से छोड़ रहा था बिच बिच में अपना लुंड निकल कर बुआ की गांड का बड़ा सा छेद देखता जो उसने hi खोला था और अपना मुँह करीब लता हुआ उसमे थूक कर एक बार फिर से अपना लुंड उसमे पेल देता

कुछ hi देर में रवि अपना विरया बुआ की गांड में छोड़ देता है और अलग हो जाता है

रवि पूरा पसीना पसीना हो चूका था

इधर बुआ बेहाल वही चित्त हो जाती है

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रेखा- चलो चलो भाभी खाना बना लेते है

Malti-ha है दीदी चलो जल्दी नहीं तो देवर जी यही हमे भी छोड़ना चालू कर देंगे और रात भर खली पेट hi छुड़वाना पड़ेगा इनसे ..
 
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