Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 31 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -282

Ravi-to फिर बोल दो न भाभी

लैली - में कुछ नहीं बोलूंगी

रवि- तब तो मुझे कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिससे आप बोलने पर मजबूर हो जाये

लैली कुछ बोलती उससे पहले रवि घुटनो के बल बैठ जाता है और एक बार फिर लेले की मांसल गांड को फैलता हुआ उसके छेड़ो को देखने लगता है

लैली एक बार फिर शर्मशार हो चुकी थी

रवि उसकी एक तंग को पास hi पड़ी टेबल पर रख देता है जिससे की लेले की छूट अब और भी ज्यादा खुल कर रवि के सामने आ जाती है

रवि- देखो तो जरा भाभी आपकी जुबान भले hi कुछ न बोल रही थी पर आपकी बुर्र काफी कुछ बया कर रही है

रवि अपने अंगूठे से लेले की गरम और गीली हो चुकी छूट को सहलाने लगता है

लैली का बदन एक जोरदार झटका खता है और वो दिवार को और कसकर पकड़ लेती है

पर अभी तो सिर्फ शुरुवात थी लेले ने रात भर थी सोचा था की रवि आएगा और उसे छोड़ कर चला जायेगा जैसा की उसका पति किया करता था पर उसे इस बार का अंदाजा नहीं था की रवि उसे औरत होने के असली सुख का अहसास करवाएगा

रवि- क्या छूट है भाभी आपकी और ये इसके फैले हुए होठ कसम से इसे देखने के बाद तो कोई भी पागल हो जायेगा

रवि अपने मुँह को सीधा लेले की छूट पर रख देता है और जैसे hi उसकी जीभ लेले की छूट को चुटी है उसके बदन में एक अजीब सी लेहेर दौड़ जाती है जिसकी वजह से वो खुद hi अपनी गांड को पीछे की और धकेल देती है

इधर रवि अपने एक हाथ से उसकी छूट सेहला रहा था और दूसरी और अपनी जीभ को लेले की छूट में और अंदर तक्क घुसा कर उसके स्वाद का मजा ले रहा था

लैली से बर्दास्त करना अब मुश्किल हो चला था ये पहली बार था उसके लिए जब कोई मर्द उसकी छूट को इस तरह प्यार कर रहा था

बुरखे में ढकी लेले पागल हो चली थी वो खुद के hi होठो को चबा रही थी

अब रवि की जुबान उसकी छूट से होती हुई गांड तक्क पहुंच गयी थी

लैली की गांड का छेद बार बार खुलता और बंद होता रवि अपनी जीभ कभी गांड में घुसता तो कभी छूट में

अंतत में रवि अपने दोनों हाथो से लेले की मांसल गांड को फैलता हुआ अपने मुँह को उसकी छूट पर रख देता है और पूरा मुँह खोलता हुआ मनो उसकी छूट को खाने की कोशिश करने लगता है

अब बर्दास्त कर पाना मुश्किल था ये शायद लेले के लिए जिंदगी का पहला ओर्गास्म था जो किसी गैर मर्द की वजह से उसे मिलने वाला था

लैली के पागल पैन का अंदाजा इस बार से भी लगाया जा सकता था की वो अब अपने नाख़ून से दिवार खरीदना शुरू कर चुकी थी और लगातार अपनी गांड को रवि के मुँह पर दबती हुई इधर से उदार घुमा रही थी

रवि को सबमे बहुत मजा आ रहा था

उसे मजा आता था जब वो अपनी हरकतों से एक घरेलु पति वार्ता औरत को रंडी बनाने पर मजबूर कर देता था जिसकी शुरुवात लेले जैसे घरेलु औरत के साथ वो कर चूका था

अंतत करीब था लेले अपने हाथ से रवि का सर पकड़ कर अपनी छूट पर दबती हुई कम्पनी लगती है

रवि अपने हाथो से लेले की कम्पटी टैंगो को संभल लेता है

लैली झाड़ रही थी और साथ hi साथ उसकी छूट से पेशाब भी निकलना चालू हो जाता है

जिसे रवि अमृत समझ कर पीने लगता है

कुछ hi पालो में लेले की सांसे दुरुस्त हो जाती है

पर रवि अब भी उसकी छूट से निकल रहे सफ़ेद पानी को चाट रहा था जो उसकी जंगो पर लगा हुआ था

पेशाब की वजह से पूरा फर्श गिला हो चूका था जिसका अहसास होते hi लेले शर्म से पानी पानी हो जाती है

अपना काम पूरा करके रवि उठ खड़ा होता है

रवि- क्यों भाभी बोलो कैसा लगा

लैली बोलना तो बहुत कुछ कहती थी पर बोल नहीं पा रही थी शायद ये सब करने से उसे उसके संस्कार hi रोक रहे था

रवि भी ये बात जनता था और यही वजह थी की रवि लेले के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं करना कहता था

रवि ललिए को प्यार से अपनी और घूमता है लेले की नजरे निचे थी रवि प्यार से उसके मासूम चेहरे को ऊपर उठता हुआ उसकी आँखों में देखता है

लेले के चेहरे पर सिर्फ आँखे hi दिख रही थी बाकि का चेहरा तो अब भी बुरखे में चूका हुआ था

लैली रवि का चेहरा देख कर एक बार फिर शर्मा जाती है क्योंकि उसका चेहरा उसके पेशाब से पूरी तरह भीग चूका था था तक की बाल भी

रवि- बोलो न भाभी कैसा लगा

इस बार लेले हिम्मत जुटती है पर कुछ बोले बिना hi रवि के गले लग जाती है

रवि समझ जाता है की अब ये औरत भी उसकी दीवानी बन गयी है

और मन hi मन खुस होता है

रवि- बताओ न भाभी कैसा लगा

लैली रवि के कण में धीरे से कहती है

लैली - बहुत अच्छा

रवि- मजा आया न आपको

लैली - बहुत मजा आया

रवि- पहले कभी आया है ऐसा मजा

लैली - नहीं

रवि- भैया नहीं चाटते आपकी छूट कभी ऐसे

लैली - नहीं

रवि लेले को थोड़ा सा दूर करता है

रवि- अब तो दिखाओ चेहरा भाभी

लैली - मुझे शर्म आ रही है

रवि- शर्माती रहोगी तो बाकि का मजा कैसे लोगी भाभी

आखिरकार लैली अपने चेहरे से बुरखा हटा देती है

अब रवि एक तक्क लेले को देख रहा था

काफी देर तक्क

लैली कभी रवि को देखती तो कभी शर्मा कर अपनी नजरे निचे कर लेती

रवि को लेले की ये अदा पागल कर रही थी

लैली - क्या हुआ देख लिया न चेहरा

रवि- है देख तो लिया भाभी पर अब मन कर रहा है की देखता hi राहु

लैली - देखते hi रहोगे तो बाकि की चीज़े कब करोगे

लैली का यु खुल कर बोलना रवि को काफी अच्छा लगा

रवि- हां ये हुई न बात भाभी

रवि लेले के बुरखे को पूरी तरह उतर देता है और उसके जिस्म पर अब कोई कपडा नहीं था

लैली की मोती मोती चूचियों को देख रवि उन्हें चुम लेता है और एक बार फिर पीछे हट कर लेले के गदराये जिस्म के नजारे लेने लगता है
 
अपडेट -283

लैली - ऐसे क्यों देख रहे हो तुम मुझे शर्म आती है

रवि- अब शर्माओ या कुछ भी करो भाभी पर में तो तुम्हारा दीवाना हो गया

लैली - बड़ी बड़ी बाते है तुम्हारी

रवि- लगता है ठीक से देख नहीं भाभी आपने और भी कुछ बड़ा है मेरा

रवि अपने लुंड को मसलता हुआ कहता है

लैली इस पर कुछ नहीं बोलती पर नजरे उसकी भी वही थी

रवि - तो क्या कहती हो भाभी

लैली - में क्या कहु

रवि चलो फिर मत कहो

रवि ललिए के करीब आता हुआ उसे बीएड पर धकेल देता है और खुद उसके ऊपर साध कर अपने होठो को सीधा लेले के होठो पर रख देता है

लैली भी काफी उत्सुक थी रवि से छुड़वाने के लिए आखिर उसने उसे पागल हो बना दिया था

रवि लेले के होठो को चुस्त हुआ उसकी दोनों चूचियों को दबाना भी शुरू कर चूका था इस बिच उसका लुंड सीधा लेले की छूट के पर रगड़ खा रहा था जिससे दोनों के hi बदन जलने लगे थे

इधर लेले फिर एक बार जोश में आ चुकी थी और अब वो अपना पूरा मुँह खोल खोल कर रवि के मुँह में घुसाने लगी थी

रवि को ये ाचा लग रहा था एक संस्कारी और धार्मिक औरत की ये रणदीपाने वाली हरकते मनो रवि के होश को दोगुना कर रही थी

दूसरी और रवि अब होठो को छोड़ कर चूचियों को चूसना शुरू कर चूका था बिच बिच में वो लेले के निपप्लीस को करने लगता लेले रवि के इस हमले से तड़प उठती पर उसे मजा पूरा आ रहा था

रवि अपनी पूरी जान लगा कर लैली की चूचियों को निचोड़ने में लगा हुआ था

इस बिच लेले का हाथ खुद बा खुद hi रवि के लुंड पर खींच चूका था और वो उसे अपनी छूट पर लगती हुई अपनी कमर को उठा रही थी मनो उसे अंदर ले जाने की कोशिश कर रही हो

पर बार बार रवि अपनी कमर को उठा लेता

काफी देर तक यही सब चलता रहा लैली खुद hi रवि का लुंड पकड़ कर अपनी छूट पर रगड़ रही थी पर जब वो उसे अंदर डालने की कोशिश करती तो रवि अपनी कमर ऊपर उठा लेता

काफी देर बाद रवि लेले की आँखों में देखता है जो हवस में पूरी तरह लाल हो चुकी थी

रवि- क्या हुआ भाभी

लैली बस अपनी लाल सुराख़ आँखों से रवि को देख रही थी बिना कुछ बोले मनो अभी उसे कच्चा hi खा जाएगी

रवि- दाल दू क्या भाभी

लैली - हम्म्म

रवि- क्या दाल दू भाभी

लैली जानती थी की जब तकवो इस बेशरम के साथ बेशरमी पर नहीं उतरेगी ये कुछ नहीं करेगा

लेले - अपना लौड़ा मेरी छूट में दाल कर छोड़ो मुझे

रवि- देखा भाबी इतना भी मुश्किल नहीं था

लैली - जल्दी करो मुझसे और बर्दास्त नहीं होता

रवि- जो हुकुम मेरी भाभी जान

पर थोड़ा दर्द होगा

लैली - हम्म कोई बात नहीं

रवि लेले की टैंगो को अच्छे से फैला कर खुद उसके ऊपर आ जाता है और अपने लुंड को उसकी छूट पर लगता हुआ एक झटका मरता है

छूट काफी टाइट होने की वजह से लुंड उछला कर ऊपर आ जाता है

रवि- लगता है भैय्या ने ठीक से छोड़ा नहीं है आपको अभी तक्क

लैली - छोड़ा होता तो आज मेरी सास तुम्हे यह क्यों लती मुझे छुड़वाने के लिए

रवि- हम्म बात तो सही कहि भाभी आपने पर आप चिंता मत करो अब में आपको एक hi चुदाई में त्रिपत कर दूंगा

रवि एक बार फिर अपने लुंड को उसकी छूट पर लगता है और इस बार साथ hi साथ काफी सारा थूक अपने लुंड और लेले की छूट पर भी लगता है

और एक झटका मरता है जिससे की लेले की आधी फटी हुई छूट पूरी तरह फट जाती है और रवि का आधे से ज्यादा लुंड उसकी छूट में घुसा जाता है

रवि की आँखे इस झटके से बहार को आ जाती है इतना दर्द लेले को शायद hi कभी हुआ था

खूब निकलना चालू हो गया था

रवि लेले की चूचियों को सहलाता हुआ उसके होठो को चूसने लगता है

रवि- बस भाभी बस थोड़ा सा और दर्द होगा बस बस हो गया

इतना बोलता हुआ रवि एक और झटका मरता है और इस बार उसका पूरा लुंड लेले की छूट में समा जाता है

लेले छटपटाने लगती है वो रवि के निचे से निकलना कहती थी रवि जनता था की अगर ये आज भाग गयी थी फिर कभी हाथ नहीं आने वाली

रवि अपनी मजबूत पकड़ से लेले को थम लेता है

आंसुओ के साथ साथ लेले की आँखों का काजल भी अब बहने लगा था

रवि को अच्छा तो नहीं लग रहा था पर ये करना उसकी मज़बूरी थी

रवि लेले के दोनों हाथो को ऊपर की और उठा कर पकड़ लेता है और अपने लुंड को ऐसे hi अंदर डेल लेले के चूचियों को चूसना शुरू कर देता है

करीब 10 मिंट के बाद रवि धीरे धीरे अपना लुंड आगे पीछे करना शुरू कर देता है

लेले की छूट का कसाव कमाल कर था एक दम कुवारी लड़की की तरह जो उसे उसकी दीदी कम्मो की पहली चुदाई की याद दिला रहा था

रवि- कुछ काम हुआ भाभी दर्द

लैली बिना कुछ बोले है में सर हिलती है

रवि धीरे धीरे छोड़ना शुरू कर चूका था

धीरे धीरे लेले को भी चुदाई का अहसास अच्छा लगने लगा था वो भी अब अपनी कमर को हल्का हल्का ऊपर निचे कर रही थी

दोनों एक दूसरे के मुँह को पागलो की तरह चूसना चेतना चालू कर चुके थे

रवि की रफ़्तार धीरे धीरे बढ़ती जा रही थी

इधर लेले भी अब मजे से छुड़वा रही थी दर्द ने अब एक कामुक अहसास का रूप ले लिया था जिसे महसूस कर वो पागल सी हुई जा रही थी

रवि के धक्के इतने तेज हो चले थे की वो एक hi पल में अपने लुंड को जड़ तक पेल रहा था

हर झटके के साथ लेले का जिस्म एक जोरदार झटका खता और वो पागल हो जाती

काफी देर तक रवि उसे ऐसे hi छोड़ता रहा जिस बिच लेले 2 बार झाड़ चुकी थी और अब उसकी छूट पहले से भी टाइट हो चली थी जो की रवि को अब और मजा दे रही थी

रवि- भाभी अब घोड़ी बन जाओ

रवि जैसे hi अपना लुंड निकलता है सफ़ेद पानी के साथ खून का मिश्रण लेले की छूट से बेहेन लगता है जो सीधा चादर पर गिर रहा था पर इस बार की परवाह किये बिना लेले घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड को बहार की और निकल देती है

रवि एक बार उसकी छूट को चूमता है और अगले hi पल अपने लुंड पर थूक मसलता हुआ उसकी छूट में घुसा देता है एक hi झटके में पूरा लुंड

लैली - अह्ह्ह मारर्र गयी

रवि लेले की कमर को थामे हुए लगातार उसे छोड़ रहा था

दूसरी और लेले चादर में मुँह घुसाए दर्द से तड़प रही थी पर इस दर्द में एक अलग hi मजा था उसके दोनों हाथ चादर को मुट्ठी में जकड़े हुए थे

रवि लगातार चोदे जा रहा था और लेले लगातार छुड़वाते जा रही थी

दोनों पागल हो चले थे

आख़िरकार रवि लेले की छूट में hi झड़ने लगता है

लेले के ऊपर hi गिर जाता है

लेले को अपनी छूट के अंदर गिर रहे गरम वीर्य का अहसास हो रहा था मनो किसी ने लावा दाल दिया हो उसकी छूट के अंदर

काफी देर तक्क रवि लेले की छूट में hi लुंड घुसाए रखता है और जब वो उसे बहार निकलता है तो उसके वीर्य के साथ साथ लेले का खून और वीर्य भी बहार निकलने लगता है

रवि- अरे अरे भाभी घूम जाओ सारा माल तो गिर गया

लेले - गिरने दो न

रवि- बच्चा नहीं चाहिए क्या

लेले - क्यों तुम फिर नहीं आओगे क्या

रवि- फिरर किस लिए

रवि अपने कपडे पहनते हुए बोलता है

लैली - अपनी भाभी को छोड़ने के लिए

लैली अब शरीफ औरत से एक कामुक रंडी में परिवर्तित हो चुकी थी एक hi चुदाई में

रवि- हम्म अब तो सारा वीर्य बहार बह गया अगर खला से किया वडा पूरा करना है तो आना hi पड़ेगा

रवि लेले के होठो को चुम कर बहार आ जाता है

सलमा- क्या हुआ बीटा काम हो गया

रवि- काम तो हुआ खला पर मेरा माल ज्यादा नादर नहीं जा पाया काफी वीर्य बहार hi गिर गया

सलमा - कोई बात नहीं बीटा तूने जो किया में उसके लिए तेरी शुकरगुजर हु वैसे भी एक दिन में बच्चा थोड़े hi रुकता है तू कहे तो रात को आ जाना

रवि- मतलब रात भर में भाभी को छोड़ू

सलमा- अगर तेरा मन करे तो

रवि- ठीक है खला में आऊंगा जरूर पर रात का मुश्किल है आप तो जानती hi है दीदी का भी ख्याल मुझे hi रखना है

सलमा- तेरा जब मन करे तब आज जाना

रवि- अच्छा खला सुनो अब ये बाटे जब आप गिरजा देवी को बताना तो खूब नमक मिर्च लगा कर बताना

सलमा - उससे क्या फायदा हो गए भला तेरा

रवि- अरे होगा खला होगा फायदा

Salma-smjh गयी कमीने तू गिरजा को भी पेलना कहता है चल में तेरी इसमें मदद करुँगी पक्का पर याद रहे जल्दी आना

रवि घर की और निकल जाता है और सलमा कमरे में जाकर अपनी बहु को देखती है जो थक कर सोऊ चुकी थी उसकी छूट देख कर सलमा भी सोच में पड़ जाती है

छूट से अब भी खून टपक रहा था पूरी चादर खराब हो चुकी थी

सलमा लेले को उसी हालत में छोड़ देती है और उसके जिस्म पर एक चादर दाल कर कमरे का दरवाजा लगा देती है ....
 
अपडेट -284

दूसरी और जैसे hi गिरजा और रवि घर से बहार जाते है कुछ देर बाद hi कामो घर का मैं दरवाजा बंद कर देती है

और रसोई से सरसो का तेल लेती हुई खुद पूरी की पूरी नंगी हो जाती है

कामो- लाइए ससुर जी आज में आपकी मालिश कर दू

जैसे hi सुखिया का ध्यान अपनी बहु पर जाता है उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है

ऐसा नहीं था की वो बिलकुल भी hi दल नहीं सकता था बस उसका शरीर ठीक से काम नहीं कर पता था पर अब काफी सुधर था वो खुद अपनी गर्दन को इधर उधर घुमा पता था

कामो- देखना मेरी मालिश से आप जल्दी hi चलने लगेंगे

कामो खत पर बैठ जाती है और एक एक करके सुखिया के सरे कपडे उतरने लगती है

सुखिया अपनी बहु की हरकतों से अंदर hi अंदर बावला हुआ का रहा था पर बेचारा कह कुछ नहीं सकता था

इधर कामो उसके सरे कपडे उतर चुकी थी और अब तक उसके बदन पर तेल दाल कर मालिश भी करने लगी थी

सुखिया को अपनी बहु के नरम हाथ काफी आराम दे रहे थे पर इस सब का असर उसके लुंड पर भी हो रहा था जो कामो की आँखों क सामने hi अब सर उठाने लगा था

कामो- ससुर जी में तो आपकी मालिश करने आयी थी पर आप मुझ पर गन्दी नजरे दाल रहे है देखो तो आपका लौड़ा कैसे टनटना गया है

सुखिया अपनी बहु से नजरे चुराने लगा और दूसरी और मुँह देर लिया तभी कामो अपने हाथ को अपने ससुर के लुंड पर रख देती है और खूब सारा तेल लगती हुई उसे मुठियाने लगती है

सुखिया काफी आनंद में था इस बुढ़ापे में एक बहरी पूरी जवान बहु जो उसका लुंड मुठिया रही थी

कुछ hi देर में सुखरिया का पानी झाड़ जाता है

कम्मो - ओफ्फो हो ससुर जी ये क्या किया में तो इसकी मालिश कर रही थी और आपने अब रुको पहले इसे साफ़ करती हु

कामो अपने पेटीकोट से सुखिया का लुंड साफ़ करती है

और इस बार वो अपने जिस्म पर भी खूब सारा तेल लगती है

सुखिया को लग रहा था की उसकी गलती की वजह से मालिश ख़तम हो गयी पर असली मालिश तो अब शुरू होने वाली थी

कामो- देखो ससुर जी इस बार मत गिरना अपनी मलाई कह देती हु नहीं तो सासु माँ से सिखयात कर दूंगी

अपनी बहु की बात सुनकर सुखिया के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है जिसे कामो भी देख रही थी

कामो सीधा अपने ससुर के ऊपर लेट जाती है और अपने जिस्म से उसके जिस्म पर तेल लगाने लगती है

इस बिच सुखिया का लुंड जो की सिकुड़ चूका था वो एक बार खीर खड़ा होने लगा था

कामो सच में एक काम की देवी थी जिसे खुद उसके छोटे भाई ने तैयार किया था

कामो अपनी हरकतों से सुखिया को पागल कर रही थी किसी के आने का कोई डर नहीं था जिस वजह से वो आज और भी ज्यादा खुल कर अपने ससुर को मजा देना कहती थी ऊपर से उसका भाई भी नहीं था आज उसे रोकने टोकने के लिए

कामो मालिश करती हुई अपने ससुर के इतना पास चली जाती की सुखिया को अपनी बहु की ससंसो की महक तक आने लगती

कई बार तो सुखिया ने प्रयास भी किया की अपनी गर्दन को उठा कर अपनी बहु के गुलाबी होठो को चुम ले पर ये हो न सखा

पर कम्मो इतनी भी निर्दयी नहीं थी वो अपने ससुर की हरकतों से अंदाजा लगा चुकी थी की वो क्या करना कहते है

इस लिए कामो अब खुद hi बार बार अपने होठो को सुखिया के होठो पर लगा देती

कई बार तो सुखिया अपने मुँह से जीभ बहार निकलने में कामयाब भी रहता ताकि वो अपनी बहु के रसीले होठो को चाट सखे

कामो भी इसमें उसका पूरा साथ देती

वो काफी देर तक्क अपने होठो को सुखिया के होठो पर रखती उसे महसूस होता कैसे उसका बूढ़ा ससुर अपनी जीभ को धीरे धीरे हिला कर उसके होठ चाट रहा है

कामो भी अब काफी गरम हो चुकी थी

सुखिया का लुंड कामो की छूट के ठीक निचे था और बार बार उसकी छूट के डेन से टकरा रहा था

जिसके अहसास से hi कामो पागल हुई जा रही थी उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की अपने ससुर से छुड़ेगी पर आज ये होने वाला था और शायद कामो भी यही कहती थी

कामो अपनी कमर को थोड़ा सा उठती हुई सुखिया का लुंड सीधा करती हुई उसपर बैठ जाती है

एक hi झटके में सुखिया का लुंड कम्मो की फटी हुई बुर्र में घुसा जाता है

कामो के लिए तो ये आसान था क्योंकि उसका छोटा भाई पहले hi उसकी छूट को बर्बाद कर चूका था

पर सुखिया उसे तो मनो जन्नत मिल गयी थी उसे अंदाजा भी नहीं था की उसकी बहु ऐसा कुछ करेगी

उसके लकवा ग्रस्त शरीर को मनो ऐसा लग रहा था की वो किसी गरम भट्टी के अंदर घुस गया hi

खास का उसका लुंड जिसने काफी दिनों से छूट का स्वाद नहीं कहा था

जैसे hi सुखिया का लुंड छूट के अंदर जाता है कामो जोश में आ जाती है और अपनी जीभ अपने ससुर के मुँह में घुसा कर

उसका मुँह चाटने लगती है

कामो सच में किसी रंडी के जैसा बर्ताव कर रही थी पर सुखिया को अपनी बहु का यह रूप काफी पसंद आ रहा था

कामो लगातार अपनी कमर को ऊपर निचे करती हुई अपने ससुर से छुड़वाने का सुख ले रही थी

कामो- कैसा लग रहा है ससुर जी अपनी अपनी बहु को छोड़ कर

सुखिया बेचारा कुछ कह तो नहीं सकता था पर अपनी आँखों से काफी कुछ कह रहा था जिसे उसकी संस्कारी बहु समझ भी पा रही थी

कामो- कोई बात नहीं ससुर जी में सब जानती आप बीमार हो अब देखना में आपको कैसे ठीक करती हु ऐसे hi रोज छुड़ेगी आपकी बहु आपसे बस आप सासुमा को मत बताना और है मेरे भाई को भी मत बताना क्या है न उसे पसंद नहीं है की उसके अलावा मुझे कोई और चोदे उसका बस चलता तो आपके बेटे से भी नहीं छुड़वाने देता वो कमीना मुझे

सुखिया अपनी पलके झपका कर अपनी सहमति देता है

कामो- ठीक है लीजिये अब अपनी बहु का दूध पीजिये

कामो अपनी एक चुकी को पकड़ कर सुखिया के मुँह में धकेल देती है मुँह तो सुखिया का पहले से hi खुला था अब वो अपनी बहु के मोठे मोठे अंगूर के दानो के समान निप्पल पर अपनी जीभ फिर्रा रहा था और जितना उससे हो पा रहा था उतना उन्हें चूसने की कोशिस कर रहा था

कुछ hi देर में सुखिया एक बार फिर हफ्ता हुआ झड़ने लगता है और इस बार अपना सारा वीर्य अपनी बहु की छूट में hi गिरा देता है

कम्मो तब तक नहीं रूकती जब तक की उसके ससुर का लुंड सिकुड़ कर मूंगफली के डेन के समान नहीं हो जाता

कामो- ओफ्फोहो ससुर जी फिर कर दी न गड़बड़ 2-2 बार झाड़ गए आप और इस बार तो मेरी छूट के अंदर hi हद करते है आप भी इतना समझने के बाद भी नहीं मने

कामो उठ कर फिर से अपनी छूट को पेटीकोट से साफ़ करती है

कामो- आप तो 2-2 बार झाड़ गए पर मेरा क्या मेरा तो एक बार भी नहीं हुआ

तभी कामो को कुछ सूझता है

और अब वो अपने ससुर को और मजा देना कहती थी

कम्मो अपनी दोनों टैंगो को फैला कर अपने ससुर के चेहरे के ऊपर आ जाती है अब सुखिया को उसकी बहु की बर्बाद हो चुकी फटी हुई छूट साफ़ नजर आ रही थी जोकि काफी बड़ी थी और खास कर की उसके लटके हुए होठ मनो किसी औरत के मुँह के होठो हो इतने मोठे मोठे

कम्मो अपनी छूट को सहलाती हुई उसे सुखिया के चेहरे पर रगड़ने लगती है

सुखिया समझदार था वो अपनी जीभ बहार निकल लेता है और अब वो अपनी बहु की छूट चाट रहा था

इधर कम्मो छूट को सहलाना छोड़ अब अपनी 3 उंगलिया छूट के अंदर पेल देती है और तेजी से आगे पीछे करने लगती है

काफी देर तक्क ऐसे hi चलता रहता है इस बिछे कम्मो की छूट से रिस्ता हुआ सफ़ेद गधा पानी सीधा सुखिया के मुँह में जा रहा था जिसे वो बिना किसी शरत के गाठ गाठ पिए जा रहा था

कामो की टंगे कम्पनी लगती है वो इतनी आनंदित हो चुकी थी की अपने ससुर के मुँह पर hi मूतने लगती है और ससुर भी इतना सहरीफ़ की अपनी बहु के पेहसाब को अमृत समझ पिने लगता है

काफी देर तक कामो उसके मुँह पर बैठी रहती है और अंत में उठ खड़ी होती है

कामो- माफ़ करना ससुर के मेने आपके चेहरे पर hi पेहसाब कर दिया

कामो अपनी सदी से ाचे से सुखिया का चेहरा साफ़ करती है

कामो- ठीक है अब आप आराम कीजिये में नहाने जा रही हु

सुखिया अपनी गर्दन थोड़ी सी हिलता है

कामो जाने लगती है वो फिर पलट कर सुखिया के करीब आती है

कामो- ससुर जी कैसा लगा अपनी बहु की छूट का पानी और पेशाब

सुखिया बिना कुछ बोले अपनी पलके झपका देता है

मनो कह रहा हो बहुत स्वादिस्ट

कामो- अगर आप वडा करे की कल ज्यादा देर तक छोड़ेंगे मुझे तो कल में आपसे अपनी गांड मरवाउंगी क्या आप मरना कहते है अपनी बहु की गांड

इस बार सुखिया के चेहरे पर मुस्कान थी और वो हिमायत जूता कर अपनी गर्दन को हां में हिलता है

कामो- तो ठीक है कल आप मेरी गांड मरना ठीक है पर ध्यान रहे न तो सासु माँ को पता चले न hi मेरे भाई को

कामो नंगी hi बाथरूम में चली जाती है ....
 
अपडेट -285

उसी रोज शाम को...

रवि के जाने के बाद लेले का जिस्म दर्द के साथ साथ काफी हल्का भी हो चूका था

काफी समय तक अपनी बहु को बहार न देख कर सलमा खुद hi उसके पास जाती है

अब भी लेले उसी तरह नंगी सोई हुई थी

सलमा अपनी बहु के जिस्म को ऊपर से निचे तक देखती है

जिसे रवि ने पूरा मसल डाला था

लैली की छूट देख कर तो एक बार को सलमा को भी अपनी बहु पर तरस आ जाता है

Salma-kaise छोड़ा है हरामी में मेरी बहु को एक दम से छूट का भोसड़ा hi बना दिया कमीने ने

सलमा रसोई में आती है और पानी गरम करके फिर अपनी बहु के पास पहुंच जाती है

सलमा बिना किसी लोक लाज के गरम पानी से अपनी बहु की छूट की सीकई करने लगती है

हाथो में रुमाल लिए वो बड़े hi प्यार से अपनी बहु की छूट साफ़ कर रही थी

तभी लेले अंगड़ाई लेती हुई उठ जाती है

खुद को नंगा और अपनी सास के हाथो में खून से सना रुमाल देख कर लेले हड़बड़ा जाती है और अपने नंगे जिस्म को चादर में छुपाने की कोशिश करती है

सलमा- अब क्या शर्माना बेटी हो होना था हो गया देख तो हरामी ने तेरी क्या हालत कर दी है

सलमा लेले के जिस्म से चादर हटा देती है

लैली थोड़ा शर्मा रही थी पर वो जानती थी जो हुआ है उसकी सास की वजह से hi हुआ है इस लिए वो भी लोक लाज कापरड़ा हटा देती है और अपने हाथो को सीधा करती हुई अपनी सास के सामने नंगी hi बैठ जाती है

Salma-dekh तो कमीने ने क्या हाल किया है तेरा

लेले - पर अम्मी उसे बुलाया भी तो आपने hi था न मेरे साथ सोने के लिए

सलमा- में खा जानती थी बहु की बच्चे के चक्कर में वो तुझे घंटो छोड़ेगा

माफ़ कर देना मुझे तुझे इतनी तकलीफ हुई मेरी वजह से

सलमा लेले के आगे हाथ जोड़ती हुई आंसू भने लगती है

लैली इतनी कठोर नहीं थी उसका दिल ये बर्दास्त नहीं कर पता की उसकी सास उसके सामने माफ़ी मांगे और रोये

वो तुरंत अपनी सास को गले लगा लेती है

लैली - अम्मी जो हुआ उसमे हम तीनो की मर्जी थी ऐसा नहीं है की उसने मुझे मेरी मर्ज़ी के बगैर छोड़ा है आप जानती थी उसका हथियार कितना बड़ा है क्योंकि वो आपको पहले hi छोड़ चूका है

अपनी बहु की बात सुनकर सलमा का मुँह खुला का खुला रह जाता है

Salma-tujhe कैसे पता ये बात

लैली - जिस दिन आप उसे पहली दफा घर लायी थी तभी मेने आप दोनों की बाटे सुनें ली थी और तभी में समझ गयी थी की आप उसे घर तक क्यों लायी है

सलमा - तो तूने मना क्यों नहीं किया बहु

लैली - अम्मी आपकी खुसी में hi मेरी खुसी है और बच्चे के आ जाने से हमारा परिवार पूरा हो जायेगा उसके लिए भले hi मुझे थोडया ज्यादा दर्द सहमना पड़े में पीछे नहीं हटूंगी जो काम आपने शुरू किया है उसे में ख़तम करके रहूंगी

सलमा - है मेरी बहु कितनी समझदार है पर देख तो जरा अपनी छूट को हरामी ने एक hi बार में इसका भोसड़ा बना दिया

ला दिखा मुझे इसकी हालत सुधरने दे

लैली भी अब पूरी तरह खुल चुकी थी वो बिना किसी दूसरी बात के अपनी सास के सामने अपनी टंगे खोल देती है

सलमा- रज़्ज़ाक मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा अगर उसे पता चल गया की में उसकी पीठ पीछे उसकी बीवी को गैर मर्दो से छुड़वा रही हु

सलमा दुबारा से लेले की छूट को गरम पानी से साफ़ करने लगती है

लैली - उन्हें कुछ पता नहीं चलेगा अम्मी मेरा यकीन कीजिये और वैसे भी रवि हमेशा के लिए यह थोड़े hi रहने वाला है

बच्चा रुकने के बाद में खुद उससे नाता तोड़ लुंगी

सलमा- मतलब इतना दर्द झेलने के बाद भी तुझेसिल उस हरामी से छोड़ना है

लैली - हवस के लिए नहीं अम्मी बच्चे के लिए

अपनी बहु की बातो से सलमा समझ रही थी की अब उसकी बहु को भी छुड़वाने का चस्का लग चूका है

वो अंदर hi अंदर अपने नपुंसक बेटे को कोष भी रही थी पर अब सच्चाई तो यही थी जिसे उसे अपनाना hi था

लैली - वैसे अम्मी आप रवि को इतनी गालिया क्यों दे रही है वो तो इतना भोला और शरीफ लगता है आपको पता है मेरी इजाजत के बिना उसने कुछ नहीं किया जब तक मेने बोलै नहीं

बोलते बोलते लेले ृक्क जाती है

Salma-kya नहीं बोलै बहु

लैली - कुछ नहीं मजी बस मुझे ये पता है की वो शरीफ है आप बताइये आप उसे क्यों इतना गालिया दे रही हो

सलमा लगातार अपनी बहु की छूट को कपडे से सेहला रही थी जिसकी वजह से अब लेले की छूट के अंदर से एक बार फिर पानी बहना शुरू हो गया था जिसका कारन शायद रवि के बारे में हो रही बाटे थी

Salma-ab तुझे क्या बताऊ बहु

वो कितना हरामी है

लैली - बताइये न अम्मी मुझे जानना है उसने आखिर ऐसा क्या किया है

सलमा- बहु तू जिसे शरीफ और नेक इंसान समझ रही है उसकी हक़ीक़त एक दम अलग है अब तुझे कैसे बताऊ की वो रोज रात को अपनी hi दीदी को छोड़ता है

अपनी सास की बात सुनकर लैली की आँखे फ़ाइल जाती है

एक पल को तो वो भी सोच में पद जाती है की आखिर उसकी सास ये क्या बोल गयी

लेले - अम्मी क्या आप सच कह रही है पर मेने तो सुना है गिरजा काकी की बहु बहुत संस्कारी है

Salma-dekhne में तो मुझे भी संस्कारी hi लगती है बहु वो पर तू नहीं जानती गिरजा की संस्कारी बहु रात को बंद कमरे में आपने hi छोटे भाई के सामने रंडी बन जाती है और दोनों भाई बेहेन रात भर कमरे में चुदाई का नंगा नाच करते है

रवि के बारे में अब लेले की जिज्ञासा बढ़ने लगी थी

उसकी छूट से पानी अब और ज्यादा बहार निकल रहा था जिससे की पूरा टॉवल चिपचिपाने भी लगा था

लैली - आपको ये बात किसने बताई अम्मी

सलमा - और कौन बताएगा खुद मुझे गिरजा ने hi ये बात बताई

वो भी इसे हजम नहीं कर पा रही थी पर अब मुझे भी लगने लगा है की वो भी इन भाई बेहेन के रिश्ते को अपना चुकी है

लैली - ऐसा क्यों लगता है आपको

Salma-wo मुझे 1-2 बार मिली नहीं थी मेने जिक्र किया पर उसने बात को घुमा दिया जबकि इस बार को उसने मुझे खुद hi बताया था

लैली - हो सकता है काकी को ये रिश्ता सही समझ आता हो

सलमा - या फिर कुछ और

लैली - और क्या अम्मी

सलमा - कहि गिरजा की छूट भी तो गीली नहीं हो गयी रवि के लुंड को देख कर hi सकता है इतना मस्त लौड़ा देख कर उसकी सालो की दबी छुड़वाने की इच्छा एक बार फिर जाग गयी होगी

लेले इस वक़्त काफी गरम हो चुकी थी

वो अपनी सास के हाथ से रुमाल खींच लेती है और उसके हाथ को अपनी छूट पर दबाने लगती है

सलमा अपनी बहु की हालत समझ रही थी वो बिना कपडे के hi लेले की छूट सहलाने लगती है मजा तो उसे भी आ रहा था अपनी बहु से पहली बार ऐसे बाटे करने में

लैली - या फिर अम्मी कुछ और हो सकता है

Salma-aur क्या हो सकता है बहु

लैली - अम्मी मुझे तो ऐसा लग रहा है की अपनी बहु के साथ साथ गिरजा काकी भी उस कमरे के अंदर रवि के साथ चुदाई का नंगा नाच खेलती है

सलमा- क्या मतलब रवि सास बहु दोनों को छोड़ रहा है

लैली की छूट से अब ढेर सारा चिपचिपा पानी बह रहा था जिसे सलमा भी महसूस कर रही थी

लैली - ठीक जैसे यह उसने किया बस फरक इतना है की यह पहले सास चुडु और वह बहु

सलमा- नहीं बहु ऐसा नहीं हो सकता

लैली - पर क्यों नहीं अम्मी क्या रवि का लुंड देखने के बाद आपको उससे छुड़वाने का मन नहीं हुआ में सच बताती हु भले hi में शरीफ हु सीधी सधी परिवार्ता हु पर उसके गधे जैसे लुंड को देखने के बाद तो मुझ जैसे खातून का भी मन डगमगा गया और गिरजा काकी उन्होंने तो लम्बे समय से नहीं छुड़वाया है क्या आपको नहीं लगता की मौका देख कर उन्होंने भी अपनी बहु के छोटे भाई से अपनी चुदाई करवा ली होगी

सलमा - हो सकता है पर अगर ऐसा होता तो मुझे पता होता

लैली - मुझे तो नहीं लगता की गिरजा काकी आपको कभी खुद के मुँह से बताएंगी की घर में चल रहे चुदाई के उस खेल में अपनी बहु के साथ साथ वो भी शामिल हो गयी है

सलमा- पर वो मेरी बचपन की शैली है

लैली सलमा का हाथ अपनी छूट पर दबाने लगती है और अपनी आँखे बंद कर लेती है वो झड़ने वाली थी पहली बार अपनी सास के हाथो से वो भी रवि की सच्चाई जानते हुए

उसे काफी मजा आ रहा था एक पल को तो वो भी भूल गयी थी की जिससे वो अपनी छूट मसलवा रही है वो और कोई नहीं बल्कि उसकी सास है

लैली - ओह्ह्ह्ह अम्मी आप कितनी भोली है क्या अगर आज रवि ने मेरे साथ साथ आपको भी छोड़ा होता तो आप अपनी पक्की शैली को ये बता देती की उसकी बहु का छोटा भाई हम दोनों सास बहु को एक hi बिस्तर पर नंगा करके छोड़ता है एक साथ दोनों सास बहु को बरी बरी दोनों की छूट छोड़ता है बरी बरी दोनों की प्यास बुझाता है ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में गयी अम्मीी

लेले इतना बोलती हुई बिस्तर पर गिर जाती है

सलमा अपनी बहु को यु बेशरम बनते हुए देख रही थी उसके लिए ये न्य था

लैली चुपचाप आँखे बंद किये बिष्ट्र पर पड़ी लम्बी सांसे खींच रही थी उसने अपनी सास से जो कुछ भी खा उसके लिए उसे कोई पछतावा नहीं था क्योंकि ये रास्ता खुद उसकी सास ने hi उसके लिए चुना था

बल्कि अपनी सास और खुद को अपनी सोच में रवि से एक साथ छुड़वाते हुए सोचने भर से hi उसकी छूट में खलबली मच गयी थी

सलमा- अगर ऐसा है तो फिर मुझे गिरजा से ये बात उगलवानी होगी

लैली - क्या गिरजा काकी जानती है की आप और में दोनों रवि से छुड़वा चुके है

सलमा - अब तक्क जान गयी होगी उसे बताया था मेने की मुझे रवि से क्या चाइये

लैली - कहि ऐसा तो नहीं की गिरजा काकी ने खुद hi रवि के आगे हमे परोस दिया

होने को कुछ भी हो सकता है अम्मी

सलमा- कुछ भी हुआ हो बहु पर शुरुवात तो अब हो चुकी है

लैली - और इसे ख़तम भी करना होगा

सलमा- कैसे ख़तम करेंगे हम इसे

लैली - अब एक hi रास्ता है अम्मी मुझे रवि से तब तक छोड़ना होगा जब तक की मेरे पेट में बच्चा न ठहर जाये और अगर इस काम के लिए आपको भी दुबारा से उससे छुड़वाना हो तो मेरी कसम है आप पीछे मत हटना नहीं तो मेरा ये दर्द ये पीड़ा सब बेमायने हो जायेगा ......
 
अपडेट -286 शाम होने से पहले रवि घर पहुंच चूका था

अभी तक्क गिरजा घर नहीं आयी थी

कामो - अरे रवि तू आज जल्दी आ गया सासुमा खा रह गयी रवि- हां दीदी वो में थोड़ा जल्दी आ गया वो भी आती hi होगी

कम्मो- तेरा काम बना या नहीं रवि- बस जल्दी hi बन जायेगा तब तक के लिए तुम हो न

रवि कामो को अपनी बहो में भर लेता है कम्मो कसमसाती हुई अपने भाई की बहो में पिघलने लगती है

रवि- दीदी बड़ा मन कर रहा है कम्मो- क्या मन कर रहा है तेरा

रवि- मन कर रहा है तुम्हे छोड़ने को

कम्मो- रात भर छोड़ लियो तुझे किसने रोका है

रवि- मन तो यही इसी वक़्त तुम्हारी गांड छोड़ने का है कामो- रात भर छोड़ता है कमीने तूने मेरी गांड मार मार कर इतनी फिआला दी है की हगने बैठती हु तो बिना जोर लगाए hi हगवास बहार आने लगती है

रवि- हैए दीदी ऐसी बाटे बोल कर लुंड खड़ा मत करो कम्मो- अच्छा तो मेरी हगवास का नाम सुनकर तेरा लुंड खड़ा हो गया अच्छा हुआ तूने मुझे हगते हुए नहीं देखा नहीं तो धोती में hi पानी छोड़ देता

रवि- काश ऐसा मौका मिला होता दीदी कभी काश कभी ऐसा मौका मिलता तुम्हारी गांड से हगवास निकलते टाइम hi तुम्हारी गांड में लुंड पेल देता

कामो - तब तो मेरी हगवास तेरे लौड़े पर लग जाती भाई रवि- तभी तो मजा आता दीदी जब जब में अपना लौड़ा तुम्हारी गांड से बहार निकलता थिस थुश करके हगवास के टुकड़े बाहर आते और तभी बिच में में लुंड दुबारा से अंदर पेल देता

कामो- तब तो बड़ा मजा आता भाई एक तरफ मेरी गांड से हगवास बहार निकल रही होती और एक तरफ मेरा छोटा भाई मेरी गांड मार रहा होता

ऐसे आईडिया तुझे खा से सूझते है

रवि- गांड देखि है दीदी अपनी ऐसी गांड देख कर तो ये बुद्धा भी इसे छोड़ने की ख्वाहिश पाल लेगा

रवि सुखिया की और इशारा करता हुआ कम्मो की गांड से पेटीकोट ऊपर उठा कर उसकी गांड मसलने लगता है

कामो- अहह रवि छोड़ दे सासुमा आती हु होंगी

रवि- अरे अभी नहीं आएगी वो और आ भी गयी तो देख लेने दो न बहु कैसे पुरे मजे ले रही है अपने छेड़ो से

कामो- हट कमीने तू मझे मरवा के मानेगा रवि कामो को गांड फैलता हुआ अपनी ऊँगली उसकी गांड के छेद पर मसलने लगता है

कामो - अहह मत कर भाई

रवि ऊँगली को थोड़ा अंदर धरा है जिससे बिना किसी परेशानी के उसकी ऊँगली अंदर घुस जाती

रवि- क्यों दीदी क्या हो रहा है

कामो- गुदगुदी हो रही है या गांड मरवाने का मन कर रहा है दीदी देखो तो जरा छुड़वा छुड़वा कर क्या हाल बना लिया है आपने अपनी इस रसीली गांड का

रवि बिना देर किये दूसरी ऊँगली भी अपनी दीदी की गांड में घुसा देता है

कामो- हां कर रहा है मैं गांड मरवाने का और कमीने ये सब तेरा hi करा धरा है तूने hi मुझे ऐसा बना दिया है तेरी वजह से hi मुझे छूट से ज्यादा गांड मरवाने का चस्का लग गया है

रवि- तो मरवा लो न दीदी देखो तो मेरा लुंड भी खड़ा है पूरा

वैसे आईडिया अच्छा था न तुम्हे हगते हुए छोड़ने का

कम्मो- ये सिर्फ आईडिया hi है या तू सच में मुझे हगते हुए छोड़ना छठा है

रवि- दीदी में तो मरा जा रहा हु आपकी इस गांड से हगवास निकलती देखने के लिए और अगर ऊपर से मौका मिला उसी वक़्त इसे छोड़ने का तो जिंदगी में इससे बड़ा कोई हसीं पल नहीं होगा मेरे लिए

रवि अपनी दोनों उंगलियों को जड़ तक कम्मो की गांड में घुसा देता है

कामो- अह्ह्ह तू भी क्या याद करेगा क्या दीदी मिली थी तुझे कल सुबह उठ जाना मेरे साथ

रवि- क्या सच में दीदी

कामो- है हम घर के पिछवाड़े hi चलेंगे वह कोई देख नहीं सकता

तू वही अपने सपने को पूरा कर सकता है

दोनों भाई बेहेन कुछ आवाज करते उससे पहले कुछ आहत होती है जैसे hi दोनों का ध्यान दरवाजे पर जाता है सामने गिरजा खड़ी थी जो आँखे फाडे दोनों भाई बेहेन को hi देख रही थी

गिरजा को देख कर कामो की हालत खराब हो जाती है उसके छोटे भाई की उंगलिया अब भी उसकी गांड में थी और सदी पीछे से पूरी उठी हुई

कामो हड़बड़ी में पीछे की और घूम कर कमरे में भाग जाती है

गिरजा और कामो का दिल जोरो से धड़क रहा था पर इस बिच कोई ऐसा भी था जिसके चेहरे पर न तो डर का कोई भाव था और न hi किसी और बात का मनो उसके लिए सब नार्मल था

रवि अपनी उँगलियों को गिरजा को दिखता हुआ चूसने लगता है

रवि की यह हरकत गिरजा की छूट को गिला करने के लिए काफी थी

हलाकि गिरजा ये नहीं जानती थी की ये उंगलिया उसकी बहु के कोनसे छेद से निकली है

पर दूसरी तरफ रवि को ये बिलकुल भी गन्दा नहीं लग रहा था उसके लिए उसकी बेहेन के तीनो छेड़ो में अमृत भरा हुआ जिसका वक़्त वक़्त पर वो भरपूर सेवन भी किया करता था

रवि आंगन से अपना चाय का गिलास लेकर बहार आकर बैठे जाता है बिना गिरजा से नजरे मिलाये मनो वो उससे नाराज हो

गिरजा ने जो देखा था वो कोई नई बात नहीं थी वो पहले से hi दोनों भाई बेहेन के रिश्ते को जानती थी वो जानत इतनी दोनों हद्द पर कर चुके है

पर नई बात तो ये थी की उसकी बहु ने भी आज उसे देख लिया था गिरजा के मन में अब यही चल रहा था की अपनी बहु से किस तरह बात करे कैसे उसे बताये की उसे उसके इस रिश्ते से कोई ऐतराज़ नहीं है

बल्कि वो भी इस रिश्ते को अपना चुकी है

वही दूसरी और कामो कमरे में बैठी थी उसका चेहरा पूरा सफेद पद चूका था उसे समझ hi नहीं आ रहा था की अपनी सास से कैसे नजरे मिलाये कैसे उसके सामने जाये

जिस सास के आगे वो संस्कारी बहु होने का ढोंग करती थी आज उसी सास ने उसे अंगद में खड़े खड़े अपनी छोटे भाई से गांड में ऊँगली डलवाते हुए देख लिया था

गिरजा इस वक़्त अपनी बहु से बात करना वाजिब नहीं समझती वो भी बहार आ जाती है झा पहले से hi रवि बैठा हुआ था

गिरजा उसके बाजु में बैठ जाती है

दोनों चुप्प थे एक दम खामोश

गिरजा भले hi रवि से मन hi मन नफरत करती थी पर आज सुबह जब उसने उसे छठा मारा उसके बाद से hi रवि का उसे तू नजरअंदाज करना अंदर hi अंदर खाये जा रहा था

वो रवि से बात करना कहती थी उसे समझना कहती थी की उसे गलफहमी हो गयी थी जबकि था ठीक उल्टा उस बेचारी को ये टक्क नहीं पता था की रवि रोज अपनी बहन की बुर्र को वीर्य से लबालब भरता था और ससुराल आने से पहले से hi उसकी कोख में अपना बीज बो चूका था

उसे तो मनो रवि की कहि हर बात सच लग रही थी

Girja-Ravi बीटा

गिरजा हिम्मत जूता कर रवि के कंधे पर हाथ रखती हुई उसे बोलती है

रवि थोड़ा और बाजु खिसक कर बैठ जाता है

मनो नाटक करना उसे बखूबी आता था

Girja-me जानती हु बीटा तू मुझसे नाराज है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था जो मेने सुबह किया मेने जो किया बिना सोचे समझे किया हो सखे तो मुझे माफ़ कर देना

रवि को गिरजा की बाटे सुकून दे रही थी वो अंदर hi अंदर खुश भी था क्योंकि अब गिरजा को कोई परेशानी नहीं थी कहे रवि उसकी बहु को आंगन में चोदे या बंद कमरे में

रवि- मुझे कोई बात नहीं करनी आपसे

गिरजा- पर मुझे करनी है बीटा तू जनता है मेने आज टक्क किसी पे हाथ नहीं उठता

रवि- पर मुझ पर तो उठाया न क्यों क्योंकि में सगा वाला नहीं हु इसीलिए न

आपको पता है मेने आपको मम्मी बोलै था माँ का प्यार मुझे आज तक नहीं मिला जिसे पहली बार माँ कह कर बुलाया उसी से छठा खाया

रवि एक स्वाद में अपनी बाटे बोल जाता है

रवि की बाटे गिरजा को अंदर टक्क झकझोर देती है

गिरजा अपना हाथ रवि के हाथ पर रख देती है अब टक्क गिरजा की आँखों से आंसू बहना शुरू हो गए थे

गिरजा - बीटा में नहीं जानती थी सच्चाई में गलत सोच रही थी माफ़ करदे मुझे

रवि- ठीक है मम्मी आप ऐसे रू मत में अब कोई गुस्सा नहीं हु

रवि की बात सुनकर गिरजा खुस हो जाती है वो बिना सोचे समझे रवि को गले लगा लेती है

रवि तो मनो मौके के इन्तजार में hi था वो गले लगे लगे hi खड़ा हो जाता है और अपने बाजुओ को गिरजा की पीठ पर फिरता हुआ उसे अपनी पकड़ में जकड़ने लगता है

दूसरी और रवि का खड़ा लुंड अब सीधा गिरजा की छूट के ऊपर था जिसका अहसास होते hi गिरजा के तन बदन में आग सी लग जाती है

गिरजा की ये ममता अब कामुक रूप ले रही थी

उसकी हवस उसकी ममता पर हावी होने लगी थी

इधर रवि अपनी कमर को आगे की और दबाता हुआ गिरजा के जिस्म से उठ रही मादक महक को सूंघ रहा था

काफी देर तक दोनों चिपके रहते है मनो कबके बिछड़े हो

जब गिरजा रवि से अलग होती है तो उसकी नजर सीधा रवि की धोती पर जाती है जो आगे से एकदम उठी हुई थी 90° के जंगल पर

दूसरी और गिरजा की छूट इतना पानी छोड़ रही थी की उसकी छूट से निकल रहा गरम पानी अब उसे अपनी जांघो से निचे बेहटा हुआ महसूस हो रहा था

गिरजा कुछ देर और रूकती तो शायद वो खुद आगे हाथ बढ़ा कर रवि का लुंड थम लेती

पर वो अपने आप पर काबू करती है

गिरजा- जा बीटा बहु से बात कर उसे समझा मुझे सब पता है नहीं तो वो इसी ग़लतफहमी में रहेगी की उसने मुझे और अपने पति को धोखा दिया ये बाटे उसे अंदर hi अंदर खा जाएगी

रवि- सच में सास मिले तो आप जैसे

गिरजा- ह है जा अब मस्का मत मार जा पहले अपनी दीदी को समझा

रवि - वैसे मम्मी जी रात का क्या प्रग्राम है आपका

Girja-Mera तो कुछ नहीं है

रवि- तो ठीक है रात को आ जाना कल की तरह आज भी में दीदी की आँखे धक् दूंगा

पर आज गलत मत समझ लेना

गिरजा- हट बदमाश जा पहले अपनी दीदी को समझा जो हुआ उसके बारे में

रवि- है है ठीक है में जाता हु रात को आ जाना पर टाइम से ...
 
अपडेट -287

रवि जैसे hi कमरे में जाता है कम्मो उसके ऊपर चीज़े फेकने लगती है

कामो- देखा कमीने तूने क्या किया अब कैसे जाउंगी में उनके सामने कैसे मुँह दिखाउंगी अपनी सास को

रवि- अरे दीदी मेरी पूरी बात तो सुनो

कामो - चला जा तू अभी यह से मेरा दिमाग खराब हो चूका है मुझे नहीं सुननी तेरी कोई भी बात

इस बिच गिरजा बहार दरवाजे पर अपने कान लगाए दोनों भाई बेहेन की बाते सुन्न रही थी

रवि- देखो दीदी जो हुआ में वो नहीं छठा था पर अगर आप मेरी बात नहीं सुनोगी तो में कैसे समझाऊंगा

कामो की आँखों से आंसू बह रहे थे रवि उसके करीब पहुंच कर उसे गले लगाना कहता था पर कामो ने उसे पहले hi धकेल कर खुद से दूर कर दिया

कामो- अब समझने वाली बात क्या है मेरी बदनामी खुद मेरे भाई ने करवा सी मेरे hi ससुराल में

समझ नहीं आ रहा सासुमा से कैसे बात करूंगी में इस सबके बाद

रवि- दीदी तुम सच में बड़ी भोली हो

कम्मो- हम्म और तू कमीना बोलै था रात तक्क रुक जा अगर वही काम रात को करता तो क्या में तुझे रोकती परर नहीं तुझे तो तभी खुले आंगन में मेरी गांड में ऊँगली घने की खुजली हो रही थी

गिरजा की छूट ये बात सुनकर गीली होने लगती है

रवि- ारी दीदी अब घुसा दी सो घुसा दी मेरा तो मुद था ऊँगली की जगह अपना लुंड घुसाने का पर एण्ड वक़्त पर आपकी सासुमा आ गयी

कामो- हम्म और उन्होंने सब देख लिया न जाने मेरे बारे में वो क्या सोच रही होंगी

रवि- अच्छा क्या सोच रही होंगी

Kaamo-yhi सोच रही होंगी की कितनी बड़ी रंडी को में अपने घर की बहु बना कर ले आयी हु जो दिन धड़े अपने hi छोटे भाई से अपनी गांड में उंगलिया पेलवा रही थी

रवि - हाहाहा

कामो - तुझे हसी आ रही है यह मेरी जान हलक को आ गयी है और तुझे हसी आ रही है

कमीने

रवि- अरे दीदी उन्होंने कोई पहली बार थोड़े hi देखा है तुम्हे इस हालत में

रवि की बात सुनकर इस बार कम्मो को झटका लगता है

और गिरजा भी सोच में पद जाती है जब रवि उसकी बहु को उसकी असलियत बताएगा तो क्या वो उसे पहले जैसी इज्जत देगी या फिर अपना रंडी प्न वो और खुलकर करेगी

कामो- मतलब क्या है तेरा जो बोलना है सीधे सीधे बोल मेरा मुद खराब हो रहा है

रवि- मतलब ये है दीदी की वो आपको पहले भी मेरे साथ देख चुकी है

कम्मो- मतलब जो कुछ हमारे बिच होता था सासुमा पहले hi देख चुकी है कबबब

रवि- दूसरे hi दिन में आपको बताने hi वाला था

कम्मो- कब बताने वाला था हरामी तू

रवि- अरे दीदी गुस्सा मत हो मेरा यकीन करो

Kaamo-tera मतलब है की सासुमा को हमारे रिश्ते से कोई अहतराज नहीं है

रवि- अरे दीदी यही तो बता रहा हु उन्होंने खुद मुझे आपको समझने के लिए भेजा है

कामो- कहि ऐसा तो नहीं की तू मेरी पीठ पीछे रोज मजी को खेतो में लेजाकर छोड़ रहा है खा मेरी कसम ये सच नहीं है

कामो रवि के करीब आ जाती है और उसका हाथ अपने सर पर रखवाती हुई कहती है

दूसरी और अपनी बहु के मुँह से खुद के बारे में ऐसी बाटे सुनकर गिरजा का दिल जोरो से धड़क रहा था साथ hi साथ उसकी छूट पानी पानी हो चली थी

Ravi-aapki कसम दीदी मेने अब तक आपको सासुमा को कुछ नहीं किया

कामो- हम्म तब ठीक है

कम्मो घूम जाती है

रवि अपनी दीदी की उठी हुई मतवाली गांड देख कर एक बार फिर पागल हो चला था

उसका ाधखडा लुंड फिर अपनी औक़ात में आने लगता है

कामो- मतलब मेरे अपने hi छोटे भाई से छुड़वाने से मेरी सासुमा को कोई परेशानी नहीं है

रवि अपनी धोती खोल कर अलग कर देता है और अब उसका लुंड एक बार फिर हवा में लहरा रहा था

गिरजा यह नजारा देख कर अपनी छूट पर हाथ रख लेती है मनो उसकी छूट जोरो से किसी भट्टी की तरह जल रही थी

रवि - है दीदी इतनी देर से थी तो समझने की कोशिश कर रहा हु अब जितना छुड़वाना है छुड़वा सकती हो अब तो तुम्हारी सास भी तुम्हारे साथ है

रवि कामो के पीछे जाकर चिपक जाता है

कामो - क्या कर रहा है तू

रवि कामो के पेटीकोट का नाडा एक झटके में खोल देता है और पेटीकोट उसकी टैंगो से सरकता हुआ निचे जा गिरता है

रवि- वही जो बहार अधूरा छोड़ दिया था

Kaamo-hatt जा रवि सासुमा आ जाएँगी

रवि- अब तो उन्हें भी आ जाने दो दीदी वो भी तो देखे उनकी बहु कितने सूख से अपने छोटे भाई से गांड चुदवाती है एक दम रंडी की तरह

कामो कुछ बोलती उससे पहले खड़े खड़े hi अपना लुंड कम्मो की गांड पर सेट करता हुआ एक जोरदार झटका मरता है लुंड hi बार में फिसलता हुआ कामो की गांड की गहराइयो में उतर जाता है

कामो - अहह हरामी खड़े खड़े hi छोड़ेगा क्या

रवि- मजा तो इसी में है दीदी अब तो झा कहे वह छोडूंगा

इधर दूसरी और अपनी बहु को गांड मरवाते देख गिरजा पागल हुई जा रही थी उसकी हालत खराब होने लगी थी मनो एक साथ उसकी छूट में हजारो वाल्ट का करंट दौड़ने लगा था

गिरजा से अब बर्दास्त कर पाना मुश्किल था वो अपनी सदी को कमर टक्क उठा कर अपनी छूट मसलना शुरू कर देती है

उसकी बहु की कामुक सिसकिया उसे और मदहोश कर रही थी छूट मसलते मसलते न जाने कब उसकी 2 उंगलिया छूट में अंदर बहार होने लगती है जो उसकी प्यास को बुझाने की जगह और बढ़ा रही थी

कामो- अहह भाई आखिर तूने अपने मन की कर hi ली ना

रवि- अभी खा की है दीदी मेने अपने मन की आपको पता है मेरे मन में क्या है

कामो- हां भाई हहआ अह्ह्ह्ह में जानती हु तू क्या कहता है और अब तो मुझे लगता है तेरा सपना जल्दी hi पूरा होने वाला है अह्ह्ह कितनी जोर से मेरी गांड छोड़ रहा है कमीने थोड़ा तो रेहम कर अपनी दीदी पारर अह्ह्ह फाड़ कर रख दी है तूने मेरी गांड

रवि- अभी खा फड़ी है दीदी फाड़ूंगा तो रात को अभी तो बस में अपना लौड़ा शांत कर रहा हो जो तुम्हारी सास को देख कर खड़ा हो गया था

कामो- अब जल्द hi वो भी तेरे निचे आ जाएँगी तू जो छठा था वो तुझे मिल जायेगा भाई तेरी दीदी की दवा है ये

रवि- में तो कहता हु की एक hi बिस्तर पर तुम दोनों सास बहु को लिटा कर पेलू एक दम रंडियो की तरह

कामो- अह्ह्ह मार भाई और तेज मार अपनी दीदी की गांड अह्ह्ह फाड़ दी है तूने मेरी गांड अह्ह्ह्हह्हह माआ हगवास भी अब तो आसानी से निकलती है बिना जोर लगाई

तो क्या तू मेरी सास को भी मेरी hi तरह छोड़ेगा

रवि - मेरी प्यारी दीदी

तुम्हारी बात अलग है और तुम्हारी सास की बात अलग वो बेचारी वर्षो से प्यासी है जब तक्क जबरदस्त तरिके से उसे छोड़ा नहीं जायेगा तब टक्क उसकी प्यास बुझने वाली नहीं है

कम्मो- अहह भाई तू सच कह रहा है मेरी सास सच में प्यासी है बेचारी को इस प्यास से तू hi मुक्ति दिला सकता है ससुर जी में तो अब इतनी ताकत है नहीं की सासु माँ जैसे गदराई घोड़ी को हचड़ हचड़ कर छोड़ सखे

रवि- एक दम सही खा दीदी इसी लिए तो ऊपर वाले ने मुझे भेजा है ताकि तुम्हारी घोड़ी जैसी गदराई सास की लगाम अपने हाथ में लेकर जी भर कर उसकी सवारी करू

अंदर चल रही भाई बेहेन की बाटे गिरजा को पागल कर रही थी उसकी आँखे बंद थी और उसके दिमाग में वही सब चल रहा था जो बाटे नादर हो रही थी रवि एक साथ दोनों सास बहु को छोड़ रहा था

गिरजा की सांसे उखड़ने लगी थी उसके नथुने फूल रहे थे आखिरी वक़्त था उसकी टैंगो ने कंपते हुए जवान दे दिया बेचारी थक कर बैठ गयी पर नादर से आ रही आवाजे लगातार उसे उकसा रही थी छूट में उंगलिया अब भी अंदर बहार हो रही थी

आख़िरकार गिरजा झड़ने वाली थी आप तो वो पहले hi खो चुकी थी

ऊपर से उसकी छूट ने ऐसी बगावत की थी की अब वो बिना लुंड लिए शांत नहीं होने वाली थी

गिरजा का पेशाब छूटने लगता है साथ hi साथ सफेद पानी भी

इधर दूसरी और रवि अब तक अपनी दीदी की गांड में वीर्य गिरा चूका था और अब उसकी प्यारी बहना अपने छोटे भाई के महान लुंड को चाट चाट कर साफ़ कर रही थी उसपर लगा वीर्य चाट और खा रही थी

गिरजा को जबतक होश आता है तब तक उसकी बहु बहार आने वाली थी

वो बिना देर किये अपने कमरे की और जाती है

इधर कामो दरवाजे पर पानी गिरा देख कर आश्चर्य में पद जाती है उसे कुछ समझ नहीं आता पर वो इसे अनदेखा करके आंगन में चली जाती है

तभी गिरजा अपनी हालत सही करके कमरे से निकलती है

कामो के कदम अपनी सास को देख कर थम जाते है

गिरजा उसके करीब आती है

अभी अभी गांड छुड़वाने के बावजूद भी कामो की गांड लप्लपा रही थी न जाने उसकी सास उसे क्या कहेगी

गिरजा बिना देर किये कामो के करीब आती है और अपनी सदी का पल्लू उठती हुई अपनी संस्कारी बहु के मुँह पर लगा विरया साफ़ करती है

रवि दरवाजे पर खड़ा यह नजारा देख रहा था

गिरजा- ठीक से मुँह तो साफ़ कर लेती बहु जा काम कर ले जो बाकि है

कामो मन hi मन खुश थी उसे पता था उसकी सास ने अभी अभी अपनी सदी से क्या साफ़ किया है ये एक तरह से कामो के लिए हरी झंडी थी खुल के छुड़वाने की

कामो - जी मजी

कामो बाल्टी लेकर बहार पानी लेने चली जाती है

गिरजा रवि के करीब आती है

गिरजा- क्यों रे रवि तुझे बहु को समझने भेजा तय उसकी गांड मरने को

Ravi-ab क्या करू मम्मी जी दीदी की गांड देख कर पागल सा हो गया था में और अपने तो देखा hi था कितनी देर से लौड़ा खड़ा था दीदी ने गांड दिखाई मेने पेल दी

पर तब तो आपने सब सुना भी होगा

गिरजा- वो सब छोड़

अब रात को क्या होगा

Ravi-hahah बड़ी उत्सुक है आप अपनी बहु की चुदाई देखने को रात को वही होगा जो तैय है बस आप समय से आ जाना

गिरजा - ठीक है पर ध्यान रहे उसे पता न चले की में भी मौजूद हु कमरे में

रवि - आप फ़िक्र मत करो बस आप भी मजे लो मम्मी जी ...
 
अपडेट -287

रवि गिरजा को रात को होने वाली चुदाई देखने का निमंत्रण दे कर अंदर चला जाता ह

गिरजा उसकी बातो में मनो खो सी जाती है

कल से आज तक जो जो हुआ था और अब तो उसकी बहु भी जानती थी की इन दोनों भाई बेहेन का रिस्ता गिरजा को मालूम है

खैर खाने के तुरंत बाद hi गिरजा अपने कमरे में चली जाती है दिन शाम को हुए वाकये को वो हजम नहीं कर पा रही थी वो अंदर से अपने कमरा बंद कर लेती है

इधर कामो बर्तन धो रही थी

रवि उसे पीछे से पकड़ लेता है और उसके गले को चूमता हुआ उसकी चूचिया दबाने लगता है

कामो- मजी जानती है इसका मतलब ये नहीं है की तुझे एक दम से उन्होंने छूट देदी है की उनकी बहु को झा मर्ज़ी वह छोड़ दे समझना

रवि - अच्छा तो समझा दो मकई की बहु को खा छोड़ू

कम्मो- छोड़ना hi है न तो चल कमरे में में आती हु थोड़ी देर में

रवि- अब भी छोड़ने का मन कर रहा है दीदी तुम्हारा

कामो- क्यों तेरा छोड़ने का मैं नहीं है क्या अगर नहीं है तो रहने दे में भी सो जाती हु और तू भी सो जा ऐसे चिपक कर क्यों अपने लौड़े को मेरी कमर में गाड़ रहा है

रवि- अरे दीदी आप तो नाराज हो गयी आपतो जानती हो न मेरा लौड़ा हर वक़्त चुदाई के लिए तैयार रहता है

कामो- है और उसी वजह से आज मेरी सास हम दोनों का राज़ जान चुकी है

रवि- ये तो खैर अच्छा हु हुआ न दीदी

कामो- है है जानती हु क्या अच्छा हुआ जो कुछ भी अच्छा हुआ तेरे लिए अच्छा हुआ मेरे लिए कुछ नहीं

रवि- अरे दीदी आप जी भर के छुड़वाओ न आपको क्या दिक्कत है मन करे तो अपनी सास के सामने hi आकर मेरे लौड़े पर बैठ जाना

कामो - हम्म और उसके बाद क्या मुझे अपनी सास के साथ वो चीज़ बॉटनी पड़ेगी जिससे में सबसे ज्यादा प्यार करती हु

रवि - दीदी छुड़वाने के चक्कर में आप एक दम स्वार्थी हो गयी हो आप नहीं कहती की जितनी खुश आप हो उतनी hi खुश आप की सास भी रहे और याद है न आपने hi पहले दिन खा था मुझसे की अगर वो राजी हो गयी तो आपको कोई दिक्कत नहीं है

कामो- है है मालूम है मेने खा था पर उस वक़्त टक्क में ये नहीं जानती थी की मेरी सास भी साली एक नंबर की चुड़क्कड़ है छिनाल साली मेरे भाई का लौड़ा देखा नहीं की उसकी छूट फडफसने लगी

रवि- अच्छा अब इतनी जलन हो रही है की गालिया दे रही हो अपनी सास को

कामो- तो क्या तेरे लौड़े के साथ साथ उसकी बुर्र की भी आरती उतारू

रवि- अरे दीदी समझो बात को एक साथ सोचो कितना मजा आएगा एक तरफ तुम और एक तरफ तुम्हारी सास एक hi बिस्तर पर और बिच में मैं

कामो- हां हां में जानती हु हरामी सब तेरा hi किया धरा है जरूर तू उसे पहले दिन से hi लुंड दिखा रहा होगा जिससे उस बेचारी की बुरर्र भी पानी पानी हो गयी होगी

रवि - अच्छा ऐसा भी होता है क्या लौड़ा देख कर कोई छोड़ने को तैयार हो जायेगा क्या दीदी

कामो- तू नहीं जनता भाई औरत की सबसे बड़ी कमजोरी hi लुंड है और अगर वो तेरे जैसा हो तो इसके लिए सब कुछ छोड़ सकती है सिर्फ एक चुदाई के लिए वो मरने को भी तैयार हो जाएगी

रवि- अच्छा ऐसे बात है

कम्मो- रेखा दीदी, मेघा दीदी, मल्टी भाभी , नीलम दीदी, जानकी बुआ, और में

हमारे अलावा भी कोई और है तो बता दे मुझे

सबको तो तूने अपना ये लौड़ा दिखा कर hi फसाया था न

रवि- क्या बात करती हो दीदी भूल गयी मेरा लौड़ा देखने के पहले से hi सबकी छूट लुंड धुंध रही थी अब इसमें मेरी क्या गलती है की मेरा इतना बड़ा लुंड है तो

कामो- तू कहना क्या कहता है सीधा सीधा बोल

रवि- देखो दीदी गुस्सा मत होना

कामो- में क्यों गुस्सा हूँगी तू बोल

रवि- दीदी बात ऐसे है की आपको तो मालूम hi है की आपको मजी हमारे रिश्ते के बारे में सब जानती है और काफी मर्तबा हमारी चुदाई भी देख चुकी है

कामो- हां तो

देख ली तो देख ली उसमे अब में क्या कर सकती हु

रवि- वो बात नहीं है दीदी असल में आज रात भी वो आएँगी

कामो बर्तन छोड़ कर खड़ी हो जाती है और गुस्से से रवि की और देखने लगती है

रवि जनता था कामो का गुस्सा काफी खतरनाक है इसी लिए वो इतनी देर से उसे अपनी बातो में फसा रहा था

रवि- अरे अरे दीदी मेने खा था न गुस्स्सा मत होना

कामो- तू क्या छठा है तेरी बेहेन दुनिया के सामने एक रंडी बन कर रह जाये

रवि- अरे दीदी दुनिया खा से आ गयी बिच में भूल गयी वो आपकी सास है और ऊपर से एक औरत और वो भी बरसो की प्यासी

आप खुद इतने मजे से चुदवाती हो मुझसे जरा एक बार उस बेचारी का भी तो सोचो कितना तड़प रही होगी

Kammo-sab समझ रही हु में कमीने जिसे बेचारी बना रहा है एक बार मिलने के बाद उसे hi तू रंडियो की तरह मसल मसल कर छोड़ेगा

रवि- दीदी वो तो बाद की बात है अभी का तो सोचो क्या आप नहीं कहती की आपकी सास के साथ आपका रिश्ता और भी गहरा हो जाये

रवि इस बार काफी गहरी बात बोल देता है और अपनी दीदी को सोच में पड़ता देख उसे अपने प्लान को और आगे बढ़ने का मौका मिल जाता है

रवि- जरा सोच कर देखो खून के रिश्ते से भी पवित्र है ये चुदाई का रिश्ता एक बार अगर आप दोनों एक दूसरे के सामने खुल गयी तो कभी कोई क्लेश नहीं होगा सास बहु वाली लड़ाई नहीं होगी कोई झंझट नहीं

दीदी सच कहु तो में आपकी सास को सिर्फ आपके लिए छोडूंगा हां मेरा भी स्वार्थ है उसमे

पर क्या करू दीदी इस लौड़े को गरम गरम छूटो का पानी पिने की आदत जो पद गयी है

कामो- पर बहुत अजीब लगेगा रवि ये सब

रवि- अरे दीदी कुछ अजीब नहीं लगेगा आप बस ये सोचना की वो था है hi नहीं

Kaamo-par जब आँखे खोलूंगी तो वो सामने hi रहेगी न

रवि- एक उपाए है दीदी मेरे पास

कामो- बोल

रवि- जैसे कल आँखों पर पट्टी बंधी थी वैसे hi आज भी बांध लेना

कम्मो- है ये ठीक रहेगा

कम्मो ये नहीं जानती थी की उसके भाई ने पछली रात भी गिरजा को बुलाया था और अगर रवि ये बात उसे बता देता तो शायद बवाल बड़ा हो जाता इसी लिए रवि भी कामो को ये बात नहीं बताता

कम्मो- चल ठीक है तेरे लिए hi सही तेरी दीदी दुनिया के सामने एक बार नंगी हो जाएगी

रवि- दीदी सिर्फ नंगी hi नहीं होना है

Kaamo-to

रवि- दीदी आज आपको रेखा दीदी की तरह बनाना पड़ेगा

Kaamo-unki तरह कोई नहीं बन सकता ये बात तू भी जनता है छुड़वाने के मामले में वो एक दम पागल है

रवि- में अच्छी तरह जनता हु दीदी पहली छूट और गांड मेने उन्ही की छोड़ी थी और आज देखो एक से बढ़ कर एक औरतो को अपने निचे लिटा चूका हु

कामो- हम्म ठीक है में कोशिश करूंगी रेखा दीदी की तरह बनाने की

रवि - याद रहे दीदी आज की चुदाई देख कर गिरजा देवी इतनी गरम हो जनि चाइये की उसकी छूट से पानी बहना कभी बंद hi न हो

कामो- तू एक दम चिंता मत कर मेरे छोटे भाई आज तू अपनी दीदी का रूप देखना आज की रात में रेखा दीदी को भी पछाड़ दूंगी

रवि खुद हो जाता है अपनी दीदी की बात सुनकर और कामो के होठो को चुम लेता है

कामो- तू चल कमरे में में आती हु बस थोड़ी देर में उसके बाद धमाल मचाएंगे

रवि कमरे में चला जाता है

कामो- माजी जब आपको सब पता hi है आपने सब देख hi लिया है तो अब अपनी बहु का असली रूप भी देखो अब देखो में कैसे इस घर में रान्दीपना करती हु आप खुद भी अब मुझे रोक नहीं पाएंगी क्योंकि अनजाने में hi सही पर आपने खुद मेरे छोटे भाई को मुझे ठंडा करने की जिम्मेदारी सूप दी है

और यकीन करो अपनी बहु का रान्दीपना देख कर आप भी छोड़ने छुड़वाने को मजबूर हो जाएँगी ....
 
अपडेट -288

कमरों के कमरे में जाते hi रवि उसे अपनी बहो में जकड लेता है

कामो - अरे रुक जरा मेरी प्यारी सासु माँ को तो आने दे

रवि- पता नहीं क्या कर रही है आपकी सासु माँ अंदर

कामो- थोड़ा इन्तजार कर मेरे भाई सुना नहीं है तूने सब्र का फल मीठा होता है

रवि- एक बार मिलने तो दो दीदी तुम्हारी सास जितना सब्र करवाया है उसने सब वसूल लूंगा

कामो- चल ठीक है तेरा जो मन करे वो करना उसके साथ पर फुइलहाल तो आज की रात अपनी दीदी पर hi ध्यान रख

रवि- याद रहे दीदी आज की चुदाई ऐसे होनी चाहिए की गिरजा देवी उसे कभी अपनी जिंदगी में न भूल पाए

कामो- तू चिंता मत कर मेरे भाई

तेरे लिए आज तेरी दीदी रंडी बनाने को भी तैयार है बस तू एक बार उसे आने तो दे

रवि- तो ठीक है चलो तैयारी कर लेते है

कामो- ले आज मेरी आँखों पर ये बांध

रवि- पर दीदी ये तो बहुत पतला है

कम्मो- ये बात तुझे और मुझे पता है उसे थोड़ी hi पता है में भी तो देखु जब किसी की बहु उसके hi सामने अपने छोटे भाई से रखैल की तरह चुदवाती है तो उसका कैसा रिएक्शन होता है

रवि- आज देख hi लो दीदी तुम अपनी सास को

रवि उस पतले से दुपट्टे से कामो की आँखों को कुछ इस तरह बांध देता है

की सामने वाले को तो लगे की उसे कुछ नहीं दिख रहा है पर कम्मो सब देख सकती थी

रवि- अब ऐसे hi बैठो दीदी

कम्मो- जा उसे एक बार आवाज देदे पता नहीं साली रंडी क्या कर रही है अंदर यह मेरी छूट में आग लगी पड़ी है

रवि - हहह दीदी एक hi दिन में सासु माँ से रंडी

कामो- आदत दाल रही हु भाई वैसे भी तुझसे छुड़वाने के बाद वो यही बन जाएगी

रवि- क्यों ऐसा क्या खास है मुझमे

कामो - तुझमे भी खास है और तेरे लौड़े में भी जब तू अपनी दीदियो की अपनी रखैल बना सकता है तो ये मेरी सास किस खेत की मूली है जा जाकर देख खा माँ छुड़ा रही है वो

दूसरी और गिरजा ने शाम को जो देखा और सुना था वो सब सोच सोच कर hi उसकी हालत खराब हो रही थी अब उसकी बहु भी जान चुकी थी की गिरजा सब जानती है

गिरजा की छूट का चिपचिपा पैन ख़तम होने का नाम hi नहीं ले रहा था

शाम से अब तक्क 4 बार वो उंगलियों के शेयर अपनी छूट को ठंडा कर चुकी थी पर कुछ देर बाद hi दुबारा से उसकी बुर्र पानी पानी हो जाती

गिरजा देवी की छूट अब बगावत पर उतर आती थी इतने सालो की प्यास मनो अब समुन्दर से hi भरने वाली थी

इधर गिरजा देवी अपनी छूट को मसल रही थी उदार रवि उसके कमरे के दरवाजा बजता है

गिरजा चौक जाती है

गिरजा- कौन

रवि- मम्मी जी ाजाओ जल्दी

गिरजा- हम्म्म्म

गिरजा बस इतना hi बोल पति है आगे का बोलने की हिम्मत नहीं जूता पति बेचारी

रवि कमरे में पहुंच कर अपने कपडे उतरने लगता है

अपने भाई का खड़ा लुंड देख कर कामो के रसीले होठो पर मुस्कान चा जाती है

रवि बिस्तर पर चढ़ते hi अपनी दीदी से लिपट जाता है और उसके होठो की ललिल चूसने लगता है

कामो- क्या हुआ आ रही है

रवि- इशारा तो दे दिया

कम्मो - कहि वो नहीं आयी तो

रवि- आना तो पड़ेगा hi दीदी अब उसे छूट में आग जो लगी पड़ी है उस बेचारी के

तभी दरवाजे से झक्ति हुई गिरजा दिखती है

दोनों भाई बेहेन की नजरे दरवाजे पर hi थी

रवि गिरजा को चुप रहते हुए अंदर की और आने का इशारा करता है

गिरजा दबे पाँव अंदर आ जाती है

कामो- भाई तूने दरवाजा बंद नहीं किया न अभी तक्क

रवि- अब कौन आएगा दीदी

कामो पूरी बेशरम हो चुकी थी वो अपनी सास के सामने hi अपने छोटे भाई का लुंड मुठिया रही थी और बिच बिच में अपने होठ उसके होठो से मिला देती

कामो- कहि सासुमा आ गयी तो

रवि - अरे दीदी इतना क्यों डर्टी हो वो इतनी अच्छी है और तुम इतना डर्टी हो उनसे

कम्मो- अच्छी है तो क्या हुआ तू क्या चाहता है तेरी दीदी अपनी सास के सामने रंडी बन्न जाये

रवि- नहीं नहीं में ऐसा तो बिलकुल नहीं कहता में तो बस यही कहता हु की तुम सिर्फ मेरे सामने hi रंडी बनो

कामो- रंडी तो तूने बना hi दिया है छोटे भाई अपनी दीदी को तेरा लुंड न देखु तो अब शायद मुझे नींद भी नआए

पर पहले जाकर दरवाजा बंद करदे

रवि चुपचाप उठ कर दरवाजा बंद कर देता है और एक पलके लिए गिरजा के बिलकुल सामने खड़ा हो जाता है

रवि का लुंड सीधा खड़ा था जो सीधा अब गिरजा की जांघो पर सत्ता हुआ था

लुंड के अहसास से hi गिरजा का रोम रोम खिल उठता है

रवि- मम्मी जी आज की रात मजे लेकर देखो अपनी बहु की चुदाई और हआ मन करे तो आप वो सब भी कर सकती है

गिरजा रवि को इतना पास महसूस करके पागल हुई जा रही थी मन तो उसका भी यही कर रहा था की अभी अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसका लुंड थम ले और पानी बहु से पहले खुद की चुदाई करवा ले

इधर अपने भाई और सास के बिच hi रही गुफ्तगू को देख कर कम्मो मन hi मन हस्स रही थी

अपनी सास को अपने भाई के चुंगुल में फास्ट हुआ देख रही थी

कामो - खा रह गया रवि जल्दी आना था मेरी छूट में आग लगी पड़ी है और तू वह क्या कर रहा है

रवि- आज की रात आग hi तो बुझानी है दीदी

कम्मो- किसीकी

रवि- अरे आपकी और किसकी अब आपको छोड़ के आपकी सासु माँ की आग थोड़े hi बुझाने जाऊंगा में

कामो- जा जाकर उनकी भी आग बुझा दे

रवि- पहले आप को तो ठंडा कर लू फिर देखेंगे सासु माँ को भी

रवि फटाफट अपनी दीदी के सरे कपडे उतर कर उसे नंगी कर देता है

कामो के अंदर शर्म मनो अब बची hi नहीं

कामो - है राम एक hi बार में पूरा नंगा कर दिया हरामी तूने

रवि- अब रंडी को तो नंगा करके hi छोड़ा जाता है न दीदी और खासकर की जब रंडी दीदी हो तो उसे नंगा करके छोड़ने का मजा hi अलग है

दोनों भाई बेहेन की बाटे सुन सुन कर गिरजा देवी एक बार फिर गरम होने लगी थी

वो न कहते हुए भी अपनी छूट को सदी के ऊपर से hi दबा लेती है जो पहले से hi पनियाई हुई थी और अब तो उसका हाल और बुरा हो गया था

कामो अपने हाथ पर थूकती हुई अपने भाई का लुंड मुठियाने लगती है थूक की वजह से लुंड पूरा चिकना होकर चमक रहा था

कामो बिना देर करती हुई बीएड से निचे आती है और अपने घुटनो पर बैठ कर अपने भाई को अपना मुँह छोड़ने का निमंत्रण देती है

इस बार कामो अपनी सास के काफी करीब थी ताकि वो आराम से अपनी बहु का रान्दीपना देख सखे

खैर रवि बिना देरी किये अपनी दीदी के होठो को चुस्त हुआ उसके लाल गरम होठो पर अपना लुंड घिसने लगता है

कामो किसी रंडी की तरह कभी अपने होठो खोल देती तो कभी उन्हें आपसमे चिपका लेती तो कभी अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकलती हुई अपने छोटे भाई के लुंड को और चिकना बना देती ताकि वो आराम से उसके होठो का मजा ले सखे

इधर गिरजा अपनी बहु का रान्दीपना देख कर पानी पानी हुई जा रही थी वो धीरे धीरे अपनी छूट को दबाना शुरू कर चुकी थी

रवि- दीदी मुँह खोलो न

कामो- नहीं में नहीं खोलूंगी मुँह

रवि- दीदी खोलो न मुझे इसे अंडरर डालना है

Kaamo-aur अंदर दाल कर क्या करेगा तू

रवि- आपका मुँह छोडूंगा दीदी

कामो - कमीने छूट और गांड छोड़ता है वो क्या काम है जो मेरा मुँह भी छोड़ेगा वो दोनों तो तूने पहले hi फिआला दिए है अब क्या मुँह भी फैलाएगा

रवि - है दीदी

इस बार कामो कुछ ऐसा करती है जिससे की गिरजा देवी का कलेजा भी मुँह को आ जाता है

कामो एक hi झटके में अपना मुँह खोलती हुई सीधा अपने भाई के लुंड पर दबती जाती है और देखते hi देखते इतना बड़ा लुंड उसकी बहु के मुँह में गायब हो जाता है

यह नजारा देख कर गिरजा की हालत पतली होने लगती है उसकी टंगे थरथर कम्प रही थी

उसका दिमाग अब काम करना बंद कर गया था अपनी बहु की हरकते देख कर

इधर कम्मो लगातार अपने भाई के लौड़े से खुद hi अब अपना मुँह छुड़वा रही थी

एक hi झटके में वो पूरा लुंड मुँह में घुसा लेती तो अगले hi पल उसे बहार निकल देती

रवि- अह्ह्ह दीदी कितना गरम है तुम्हारा मुँह और गिलास

कमाओ अह्ह्ह्ह भाई तुजे मजा आ रहा है न ले अब तू छोड़ मेरा ये गरम मुँह तेरे लिए hi तो है ये

कामो खुद hi अपने छोटे भाई के हाथो को अपने सर पर रख देती है

अगले hi पल रवि कामो का मुँह छोड़ना चालू कर देता है एक एक झटके के साथ वो अपना लुंड पूरा उसके गले तक्क थिस रहा था

गिरजा अपनी चूचियों के साथ साथ अपनी छूट को भी कुरेद रही थी

रवि कामो को घोड़ी बना देता है और ुलिस बार कामो की छूट और गांड सीधा उसकी सास के सामने थी

गिरजा पानी बहु के फ़टे हुए छेड़ो को देख कर दांग रह जाती है मनो फटने के बाद उनकी खूबसूरती में चार चाँद लग गए हो

गिरजा से रहा नहीं जाता वो वही बैठ कर देखने लगती है

डीआजर रवि आग से तो अपनी दीदी को लुंड चूसने लगता है और पीछे हाथ लेजाकर गिरजा को अपनी दीदी की गांड फैला फिआला कर दिखने लगता है

रवि अपने ठीक से कामो की गांड का छेद कुरेदना शुरू कर देता है और देखते hi देखते अपनी 2 उंगलियों को अपनी दीदी की गांड में उतार देता है

कामो- आगे मजे से लुंड चूस रही थी और मन hi मन सोच रही थी की उसकी सास की इस वक़्त क्या हालत होगी

अब टक्क गिरजा का हाथ सदी के भीतर पहुंच चूका था और वो भी बेशर्मो की तरह रवि के सामने अपनी छूट का दाना रगड़ रही थी

रवि जैसे hi अपनी उंगलिया निकलता है कामो जान बुझ कर जोर लगती हुई एक पाद मरती है जो सीधा गिरजा के मुँह पर जाता है

अपनी hi बहु का पाद सूंघ कर मनो गिरजा का नशा डबल हो जाता है जो उसकी आँखों से साफ़ बया हो रहा था

गिरजा अपनी स्पीड बढ़ा देती है और कुछ hi पल में हाफति हुई झड़ने लगती है

पर अभी इतना काफी नहीं था

रवि बिना देर किये सीधा गिरजा के सामने आ जाता है और अपने लुंड को कामो की गांड पर सेट करता हुआ एक जोरदार झटका मरता है लुंड एक hi बार में पूरा अंदर घुस जाता है

कामो- अह्ह्ह माँ हरामी एक hi बार में पूरा दाल देता है

रवि- हां दीदी इसी में मजा आता है एक hi बार में पूरा लौड़ा मेरी दीदी की गांड के अंडरर

क्या आपको मजा नहीं आता

Kammo-bhut मजा आता है भाई फाड़ दे आज मेरी बची कुछ गांड भी और मेरे बाद मेरी सासुमा की गांड भी फाड़ देना

रवि- पर दीदी क्या वो मुझसे अपनी गांड मरवाउंगी

कामो- तू चिंता मत कर में खुद उन्हें बताउंगी की कितना मजा आता है गांड मरवाने में अगर एक बार आदत लग जाये तो छूट से ज्यादा गांड में खुजली होती है

रवि- कितनी अच्छी हो दीदी तुम

रवि झटके लगाना शुरू कर देता है

इधर गिरजा पागल हुई जा रही थी देखते hi देखते उसकी साई कमर से ऊपर जा चुकी थी और फूली हुई बिना बालो वाली छूट को वो मस्ती में सेहला रही थी

इस बार रवि अपना लुंड निकल कर अपनी दीदी को घुमा देता है और अब गिरजा की आँखों के सामने उसकी बहु का मासूम प्यारा चेहरा था

गिरजा एक पल को डर जाती है पर जैसे hi वो अपनी बहु के चेहरे के बदल रहे भाव देखती है उसका गर्मी मनो फिर साधने लगती है

इधर रवि भी अब गिरजा की छूट देख रहा था उसका फूलापन मजेदार था जिसे रवि चुना छठा था

इधर दूसरी और कामो अपनी सास को अपनी छूट रगड़ती हुई देख कर और भी मस्त हुई जा रही थी

रवि कभी कामो की छूट में लुंड घुसा कर छोड़ता तो कभी उसकी गांड में

कुछ hi पल बाद रवि झड़ने लगता है और अपनी दीदी की छूट को अपने गधे वीर्य से भर देता है
 
अपडेट -289

रवि अपने वीर्य से कम्मो की छूट लबालब भर देता है

Kaamo-ahhh इतनी जल्दी झाड़ गया आज तू भाई

रवि- दीदी निचोड़ लिया आपके छेड़ो ने मेरा लुंड

कामो- कोई बात नहीं अभी तो पूरी तार बाकि है तू देखता जा तेरी दीदी तुझे कैसे निचोड़ती है

इधर गिरजा भी जल्दी hi झड़ने वाली थी अब तक वो वैसे hi अपनी छूट मसाले जा रही थी

रवि उठ कर उसके करीब आटा है और सीधा उसके सामने बैठ जाता है

गिरजा अपनी नशीली आँखों से कभी रवि की आँखों में देखती तो कभी उसके चिपचिपे लुंड को देखती जो अब कलभी खड़ा था

और उसपर उसकी बहु की छूट का अंधरुनि पानी लगा हुआ था

रवि चुपचाप गिरजा को देख रहा था

कामो भी जमीन पर पड़ी अपनी सास को अपनी छूट मसलते हुए देख रही थी

रवि एक कदम आगे बढ़ता है और गिरजा के कानो में बोलता है

रवि - लाइए मम्मी जी में कुछ मदद कर देता हु

हवस की आग में गिरजा पहले hi अंधी हो चुकी थी

रवि का हाथ सीधा उसकी छूट पर जाता है जो की काफी गरम और चिपचिपी हुई पड़ी थी

रवि बिना समय गवाए गिरजा की छूट का दाना सहलाने लगता है

गिरजा के लिए यह पहली बार था की कोई गैर मर्द उसके गुप्त अंगो को छू रहा था

वो रवि के चुने भर से पागल सी हो गयी थी

रवि गिरजा की मदहोशी का फायदा उठता हुआ उसके हाथ को सीधा अपने लुंड पर रख देता है

जैसे hi गिरजा के हाथ में ये चिपचिपी चीज़ आती है वो तुरंत आँखे खोल देती है

पर आँखों में अब भी हवस थी उसके शरीर के साथ साथ उसके होठ भी काँप रहे थे

गिरजा तुरंत अपना हाथ रवि के लुंड से हटा लेती है

पर रवि दुबारा से वही काम करता है और इस बार गिरजा की कलाई को पकडे रहता है

गिरजा 1-2 बार हाथ हटाने की कोशिश करती है पर नाकाम होने की वजह से वो अपना हाथ वही लुंड पर टिका देती है और न कहते हुए भी उसकी मुट्ठी में अब रवि का लुंड था

चिपचिपाहट की वजह से गिरजा का हाथ रवि के लुंड पर काफी अच्छे से चल रहा था रवि जिसका पूरा फायदा उठा रहा था और गिरजा की कलाई को पकडे हुए hi उसे अपने लुंड की मुठ करवा रहा था और अपने दूसरे हाथ से गिरजा की छूट मसल रहा था

गिरजा को मजा आ रहा था वो झड़ने के करीब थी

तभी रवि आगे बढ़ता हुआ अपने होठ गिरजा के कंपते होठो पर रख देता है

गिरजा भी बिना देर किये अपना मुँह खोल देती है और रवि के होठो का स्वागत करती है

अच्चानक से रवि अपनी एक ऊँगली गिरजा की छूट में घुसता है

चरणान्त गिरजा की आँख खुल जाती है

मनो वो होश में आ गयी हो

वो अपनी हालत देख कर भौचक्की रह जाती है रवि की ऊँगली उसकी छूट के अंदर तो उसकी जीभ उसके मुँह के अंदर इधर उधर घूम रही थी

गिरजा चरणान्त अपने आप को संभालती है और रवि को धक्का देती हुई दरवाजा खोल कर बहार भाग जाती है और तुरंत hi अपने कमरे में जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर लेती है

कामो- क्या हुआ भाई क्या हुआ मेरी सासु माँ को

होने भाई बेहेन जमीन पर hi लोट पॉट होने लगते है

रवि- दीदी बस यु समझ लो चिड़िया हाथ में आने hi वाली है

कामो- एक बार बिल्ली के मुँह खून लग जाता है तो वो ज्यादा देर उससे दूर नहीं रह सकती शुरुवात तूने की है और अब देख तेरी दीदी कल से कैसे अपनी सास को उकसाती है तुझसे छोड़ने के लिए

Girja-hayee भगवन ये में क्या कर रही थी मुझे पता कैसे नहीं चला वो मेरी छूट के अंदर ऊँगली दाल रहा था

गिरजा थक चुकी थी आखिर सुबह से वो 5-6 बार जो झाड़ चुकी थी

सोचती सोचती बेचारी नींद की आगोश में चली जाती है

इधर रवि और कामो अब भी नंगे एक दूसरे की बहो में पड़े थे

रवि- कल से क्या करोगी दीदी

कम्मो- अब जब सासु माँ को सब पता hi है अपनी बहु के बारे में उसे छुड़ता हुआ देख कर वो अपनी छूट मसलती है तो उन्हें पूरा हक़्क़ है अपनी बहु का रंडी प्न देखने का बस तू मेरा साथ देना

रवि - में तो हमेशा साथ हु दीदी

कामो- तो बस अब तू देखता जा कैसे में कल से इस घर में नंगा नाच करती हु

मेरा रान्दीपना देख कर सासुमा खुद तुझे आकर कहेगी की बीटा अपनी दीदी के साथ साथ मुझे भी छोड़ दे...
 
अपडेट -290

अगली सुबह करीब 4 बजे गिरजा की आँख खुल जाती है

रात में अपनी छूट का पानी निकल कर वो मस्त सोई थी तभी उसकी आँखों के सामने रात वाला सीन चलने लगता है

कैसे रवि उसकी बहु को उसके hi सामने छोड़ रहा था और वो खुद वह बेशर्मो की तरह अपनी बहु को छुड़ता हुआ देख कर अपनी छूट मसल रही थी

रवि ने जिस तरह से उसे चुवा था एक बार को तो वो खुद भी पानी पानी हो गयी थी

रवि का उसकी छूट में यु ऊँगली घुसते हुए उसके मुँह को चूसना उसे अब भी पागल कर रहा था

यही सब सोचते सोचते गिरजा की छूट एक बार फिर पानी पानी होने लगती है

गिरजा अपनी छूट पर हाथ रख कर उसके गीलेपन का जायज़ा लेती है

गिरजा- है भगवन इस लड़के ने तो मुझे पागल बना दिया है मेरी बुर्र सूखने का नाम hi नहीं ले रही है न जाने ये सब खा जाकर रुकेगा

गिरजा अपने बिस्तर से उठ खड़ी होती है और अपने शरीर को तोड़ती हुई एक कामुक अंगड़ाई लेती हुई कमरे से बहार निकल जाती है

बहार अब भी अँधेरा था पर ये उसका लगभग रोज वाला टाइम नहीं था आज वो कुछ ज्यादा hi जल्दी उठ गयी थी

गिरजा कुछ और सोचती उससे पहले उसकी नजर अपने बहु के कमरे पर जाती है जिसका दरवाजा अब टक्क खुला hi हुआ था

गिरजा के कदम न कहते हुए भी अपने बहु के कमरे की और चल पड़ते है

गिरजा का दिल जोरो से धड़क रहा था उसके मैं में यही चल रहा था की क्या अभी तक्क उसकी बहु छुड़वा hi रही होगी या दोनों भाई बेहेन सो गए होंगे

गिरजा देवी जैसे hi कमरे में पहुँचती है उसे दोनों भाई बेहेन जमीन पर hi लेते मिलते है

रवि दूसरी साइड तो कामो दरवाजे की साइड थी

रवि एक दम सीधा लेता हुआ था और कामो दूसरी और पलटी हुई अपने छोटे भाई से चिपकी हुई थी

गिरजा की छूट में तूफ़ान तो तब आ जाता है जब वो पानी बहु को ध्यान से देखती है

असल में कामो की छूट और गांड रात भर छुड़वाने की वजह से पूरी तरह फूल चुकी थी

गांड और छूट से अब भी रवि का वीर्य बहार बह रहा था

गिरजा अपने दिल को थम कर आगे बढ़ती है वो जानती थी की दोनों थके हुए है और अभी नहीं उठने वाले वैसे भी अभी सवेरा होने में काफी समय बाकि था

गिरजा अपनी बहु के करीब पहुंच जाती है और उसकी हालत को ाचे से देखने लगती है

गिरजा-( कितनी भोली लगती है देखने में मेरी बहु और अब देखो किसी रंडी की तरह पड़ी है अपने hi छोटे भाई की बहो में क्या इसे इतना मजा आता है की सोये समय भी इसका लुंड थम कर सोती है )

कामो ने अब भी रवि का लुंड पकड़ हुआ था मनो रात में वो उसके साथ खेलते खेलते सो गयी हो

गिरजा पास से अपनी बहु को देख रही थी इधर कमरे में एक अजीब सी महक थी

मनो कमरे की हवा में hi हवस घुल चुकी थी जिसका असर गिरजा पर भी होने लगा था

देखते hi देखते उसकी आँखे लाल होने लगी थी

प्यासी तो वो काफी समय से थी ऊपर से उसकी बहु का ये न्य रूप आग में घी डालने का काम कर रहा था

गिरजा पानी बहु को देख hi रही थी तभी उसके मन में न जाने क्या आता है

वो अपनी एक ऊँगली से कम्मो की गांड का छेद चुने लगती है जो पहले से hi लाल हुआ पड़ा था और काफी पहला हुआ भी था

देखते hi देखते गिरजा अपनी एक ऊँगली कम्मो की गांड में सरका देती है

कामो की गांड काफी चिकनी हो गयी थी रात भर छुड़वा छुड़वा कर छेद तो पहले से hi रवि ने काफी बड़ा कर रखा था

गिरजा को हैरानी होती है कितनी आसानी से उसकी ऊँगली उसकी बहु की गांड में चली गयी

गिरजा का मन अब और कुछ करने की कह रहा था जिसे वो कहह कर भी रोक नहीं पा रही थी

गिरजा अपनी ऊँगली बहार निकल लेती है

उसकी ऊँगली बहार निकलते hi कामो की गांड से एक मादक पाद छूट जाता है

उस हवा में साथ साथ रवि का वीर्य भी बहार बहने लगता है जो की कामो रात भर अपनी गांड में इकठ्ठा किये हुई थी

गिरजा- बड़ी गांद्वि निकली बहु तू तो

अपने hi भाई से अपनी गांड की धज्जीया उड़वा ली

गिरजा रवि के गिरजा को अपनी उंगलियों में लेती हुई इस बार अपनी 2 उंगलियों को अपनी बहु की गांड में उतार देती है जो की बिना किसी तकलीफ के कामो की गांड में घुस जाती है

गिरजा- ये तो सच में काफी खुल गयी है

गिरजा हैरान थी और उत्सुक भी

अब उसका भी मन करने लगा था गांड मरवाने का आखिर ऐसा क्या था गांड मरवाने में जो उस मजे के लिए उसकी प्यारी संस्कारी बहु ने अपनी छुड़वा छुड़वा कर अपनी गांड की ये हालत करवा ली थी

करीब 5 मिंट तक्क गिरजा अपनी उंगलियों को अच्छे से अंदर बहार करती है और अंतत में जैसे hi वो उन्हें बहार निकलती है मनो कामो की गांड के छेद से नदिया बहने लगती है

काफी सारा वीर्य एक पिले रंग के पानी के साथ बहार आने लगता है

गिरजा को समझते देर नहीं लगती की ये पीला रंग किस चीज़ का है आखिर सुबह होने वाली थी और सबकी हगवास इस समय hi होती है

गिरजा अपनी बहु को छोड़ देती है और अपने कदम बढ़ती हुई उसके भाई के करीब पहुंच जाती है

रवि का लुंड अब भी कामो के हाथ में था

रवि का मुरझाया हुआ लुंड देख कर उसे कल की बाटे याद आने लगती है जब उसने रवि का लुंड पकड़ था वो कितना चिपचिपा था उसे कितना अच्छा लगा था उस एक पल में जब वो उसके हाथो में था

गिरजा बड़े आराम से अपनी बहु के हाथ से लुंड को आजाद करती है और उसकी जगह अपना हाथ रख देती है

गिरजा की सांसे अब ऊपर निचे हो रही थी

इधर दूसरी तरफ एक नए हाथ की गर्मी महसूस करते hi रवि का लुंड खुद hi अपना सर उठाने लगा था

देखते hi देखते वो मुरझाया हुआ लुंड गिरजा के हाथ में फूल फूल कर किसी लोहे की रोड के समान हो गया था

लुंड देख कर गिरजा की आँखों में चमक थी

वो बिना देर किये अपने हाथ से उसे ऊपर निचे करने लगती है

जैसे hi वो टोपे की चमड़ी को खोलती है उसके मुँह में पानी आ जाता है अंदर का लाल हिस्सा देख कर

गिरजा मनो पागल हुई जा रही थी

गिरजा अपना मुँह आगे ले जाती है और लुंड की महक सूंघने लगती है

जिसपर लगभग ऐसे महक थी मनो वो रात को उसकी बहु के हर छेद में घुमा हो

छूट के पानी से लेकर कामो की गांड की हगवास तक्क हर किस्म की महक गिरजा को आ रही थी

गिरजा पीछे हो जाती है उसका हाथ खुद hi अपनी छूट पर चला जाता है

और देखते hi देखते वो रवि का लुंड मुठियाने लगती है और साथ hi साथ अपनी छूट को भी मसलने लगती है

गिरजा की सांसे ऊपर निचे हो रही थी इधर रवि का लुंड लगातार झटके मार रहा था

कभी भी मनो वो झाड़ सकता था

गिरजा आगे बढ़ कर ऊपर से थूक देती है और अब उसके हाथो में लुंड और अच्छी तरह से आगे पीछे हो रहा था

गिरजा की आँखे बंद थी

वो बिना किसी डर के अपना काम बखूबी कर रही थी

कभी वो चमड़ी को पूरा निचे तक्क खींच देती तो कभी अपने हाथ को सबसे ऊपर ले जाती और अपने अंगूठे से सूपड़ा मसलती हुई उसपर अपने नाख़ून गदा देती

अब तक्क गिरजा की 2 उंगलिया भी उसकी छूट में उतर चुकी थी जो काफी तेज गति से आगे पीछे हो रही थी

आखिर कर गिरजा की पकड़ में रवि का लुंड हार मान लेता है

और झटके खता हुआ झड़ने लगता है

काफी सारा वीर्य गिरजा के चेहरे की और आता है कुछ तो उसकद होठो पर भी आ गिरता है जिसे वो तुरंत अपनी जीभ से छत्त जाती है

अंततः में लुंड को वैसे hi पकडे पकडे वो अपनी छूट का पानी भी निकल देती है

जैसे hi वो लुंड को छोड़ कर खड़ी होने वाली थी अच्चानक से रवि उसका हाथ पकड़ लेता है

रवि की इस हरकत से गिरजा अंदर तक्क सेहम जाती है उसे उम्मीद नहीं थी की रवि जाग रहा था उसने उसके साथ इतना कुछ किया सब यही जान कर की वो थक कर सोया हुआ है

पर शायद बेचारी गिरजा नहीं जानती थी की ये सब तो रवि का रोज का रूटीन था

गिरजा अपने हाथ को छुड़ाने की नाकाम कोशिस कर रही थी

पर रवि की पकड़ काफी मजबूत थी

रवि जैसे तैसे खड़ा होता है साथ hi साथ गिरजा भी उठ खड़ी होती है

रवि उसे दरवाजे तक्क लता है

गिरजा के दूसरे हाथ में अभी भी उसकी छूट का पानी लगा हुआ था जिसे पकड़ कर रवि सूंघता हुआ उसकी उँगलियों को मुँह में भर कर चूसने लगता है

रवि- क्या हुआ मम्मी जी रात को अच्छे से ठंडी नहीं हुई थी क्या जो सुबह सुबह फिरसे मेरा माल निकल कर अपना बिलहि निकल लिया

गिरजा- रावी बेताऑ मुझसे गलती हो गयी न जाने कैसे हो गया ये सब छोड़ दे बता मुझे अभी बहु जाग जाएगी अनर्थ हो जायेगा बेटा

रवि- हरकते तो अपनी ऐसे hi की मन करता है आपकी बहु के सामने hi पटक कर पेल दू आपको

रवि के मुँह से ऐसी बात सुनकर एक बार फिर गिरजा की छूट में आग लग जाती है

अगर रवि थोड़ी जबरदस्ती करता तो गिरजा भी अपने हथियार दाल देती शायद थी सोच कर वो यह आयी भी थी पर नाटक तो करना hi था थोड़ा बहुत

गिरजा- नहीं नहीं बीटा तू मुझे कैसे में तेरी माँ की उम्र की हु बीटा छोड़ दे मुझे

रवि- अरे माँ की उम्र की हो माँ तो नहीं हो न

और आपके जैसे औरत अगर मेरी माँ भी होती न तो में उसे भी छोड़ने में इतना समय नहीं लगता

रवि गिरजा के होठो को चुम लेता है

गिरजा चरणान्त अपना मुँह घुमा लेती है

रवि एकदम से सत्र कर खड़ा हो जाता है जिससे की रवि काधखडा लुंड सीधा गिरजा की छूट को ठोकर मरने लगता है

रवि- तो अब सुनिए मम्मी जी बात ऐसे है की आज रात मुझे आपको छोड़ना है

गिरजा तो अब यही कहह रही थी उसका मन तो अभी छुड़वाने का था पर कहि न कहि एक संस्कारी पतिवर्ता औरत होने की वजह से वो थोड़ा हिचकिचा भी रही थी

Girja-nhi बीटा ऐसा मत बोल में नहीं कर सकती ये में सोच भी नहीं सकती ये सब भगवन के लिए ऐसा मत बोल बीटा

रवि गिरजा का हाथ छोड़ देता है

पर गिरजा वही खड़ी थी मनो उसका मन hi नहीं था की रवि का लुंड उसकी छूट से दुर्र हो उसका सपर्श अपनी छूट पर महसूस करके hi वो अंदर hi अंदर पानी पानी हुई पड़ी थी

रवि- तो ठीक है जैसे आपकी मर्ज़ी आज देखो में आपको क्या क्या दिखता हु

और अब तो दीदी भी जानती है की आपको सब पता है और जो हो रहा है सब आपकी रज़ामंदी से हो रहा है

आज देखना अपनी बहु को कैसे में उसके अंदर की रंडी को बहार निकलता हु

गिरजा- भगवन के लिए ऐसा मत बोल बीटा तेरी बेहेन है वो दीदी है तेरी

रवि- मम्मी जी दीदी को रंडी बनाया भी तो मेने है और जब उसकी गांड और छूट में उंगलिया घुसा रही थी तब क्या वो बहु नहीं थी आपकी

गिरजा एक बार फिर चौक जाती है

Girja-mtlb तू जाग रहा था

रवि- आप जब कमरे में आयी में तभी जाग गया था में तो बस देखना कहता था आप क्या क्या करेंगी

मुझे क्या पता था की अपनी बहु के छेड़ो के साथ भी खेलगो वासी अच्छा hi है जब दोनों सास बहु को एक साथ छोडूंगा तो जी भर के खेलना पानी बहु के छेड़ो के साथ

गिरजा चुपचाप खड़ी थी

रवि- तो ठीक है अब आप जाइये पर ध्यान रहे आज की रात में आपको चौडूँगा

Girja-Aisa कभी नहीं हो सकता

रवि- तो ठीक है आप देखते रो आज दिन भर में क्या क्या करता हु आपकी बहु के साथ

और मेरा वडा है अगर वो सब देखने के बाद आप खुद मुझसे छुड़वाने नहीं आयी तो में कल hi ये गाओं छोड़ कर चला जाऊंगा और फिर कभी दीदी को छूवूँगा भी नहीं

गिरजा- ठीक है मुझे मंजूर है

रवि- पर ध्यान रहे अगर में जितना तो एक साथ दोनों सास बहु को एक hi बिस्तर पर छोडूंगा बहु तो पहले से hi इस लौड़े की गुलाम है सास को भी अपनी रखैल बनूँगा बोलो मंजूर है

गिरजा अब काफी गरम हो चुकी थी उसे मंजूर था रवि की रखैल बनना ये शर्त्त तो बस एक बहाना भर थी छोड़ने छुड़वाने की

गिरजा- मुझे मंजूर है जैसा भी होगा मुझे सब मंजूर है

रवि अचानक से पीछे हाथ जाता है

रवि का लुंड छूट से हटते hi गिरजा चैन की सास लेती है रवि वापस से अपनी दीदी के पीछे लेट जाता है और अपने लुंड को सेट करता हुआ सोते सोते hi अपनी दीदी की छूट छोड़ना चालू कर देता है

कुछ hi देर में कमरे में पछ पाछह की आवाजे आने लगती है

कुछ देर गिरजा यह नजारा देखती है उसके बाद वो भी वह से भाग खड़ी होती है

अगर कुछ देर और वो ये सब देख लेती तो शायद रात से पहले वो अभी hi रवि के लुंड से छुड़वाने की भीख मांगने लगती

दूसरी तरह कामो बेफिक्र सू रही थी और इधर पीछे से रवि उसकी छूट मरता हुआ अपना लुंड उसकी गांड में घुसा कर उससे चिपक कर सो जाता है

गांड में पूरा लुंड घुसते hi कामो थोड़ा सा हिलती है और अपनी गांड में पूरा लुंड महसूस करते hi वो अपने भाई से अच्छा तरह चिपक जाती है

रवि अपनी दीदी की गांड में लुंड घुसाए उससे चिपक कर सो जाता है ....
 
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