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- Dec 5, 2013
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Ravi-to फिर बोल दो न भाभी
लैली - में कुछ नहीं बोलूंगी
रवि- तब तो मुझे कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिससे आप बोलने पर मजबूर हो जाये
लैली कुछ बोलती उससे पहले रवि घुटनो के बल बैठ जाता है और एक बार फिर लेले की मांसल गांड को फैलता हुआ उसके छेड़ो को देखने लगता है
लैली एक बार फिर शर्मशार हो चुकी थी
रवि उसकी एक तंग को पास hi पड़ी टेबल पर रख देता है जिससे की लेले की छूट अब और भी ज्यादा खुल कर रवि के सामने आ जाती है
रवि- देखो तो जरा भाभी आपकी जुबान भले hi कुछ न बोल रही थी पर आपकी बुर्र काफी कुछ बया कर रही है
रवि अपने अंगूठे से लेले की गरम और गीली हो चुकी छूट को सहलाने लगता है
लैली का बदन एक जोरदार झटका खता है और वो दिवार को और कसकर पकड़ लेती है
पर अभी तो सिर्फ शुरुवात थी लेले ने रात भर थी सोचा था की रवि आएगा और उसे छोड़ कर चला जायेगा जैसा की उसका पति किया करता था पर उसे इस बार का अंदाजा नहीं था की रवि उसे औरत होने के असली सुख का अहसास करवाएगा
रवि- क्या छूट है भाभी आपकी और ये इसके फैले हुए होठ कसम से इसे देखने के बाद तो कोई भी पागल हो जायेगा
रवि अपने मुँह को सीधा लेले की छूट पर रख देता है और जैसे hi उसकी जीभ लेले की छूट को चुटी है उसके बदन में एक अजीब सी लेहेर दौड़ जाती है जिसकी वजह से वो खुद hi अपनी गांड को पीछे की और धकेल देती है
इधर रवि अपने एक हाथ से उसकी छूट सेहला रहा था और दूसरी और अपनी जीभ को लेले की छूट में और अंदर तक्क घुसा कर उसके स्वाद का मजा ले रहा था
लैली से बर्दास्त करना अब मुश्किल हो चला था ये पहली बार था उसके लिए जब कोई मर्द उसकी छूट को इस तरह प्यार कर रहा था
बुरखे में ढकी लेले पागल हो चली थी वो खुद के hi होठो को चबा रही थी
अब रवि की जुबान उसकी छूट से होती हुई गांड तक्क पहुंच गयी थी
लैली की गांड का छेद बार बार खुलता और बंद होता रवि अपनी जीभ कभी गांड में घुसता तो कभी छूट में
अंतत में रवि अपने दोनों हाथो से लेले की मांसल गांड को फैलता हुआ अपने मुँह को उसकी छूट पर रख देता है और पूरा मुँह खोलता हुआ मनो उसकी छूट को खाने की कोशिश करने लगता है
अब बर्दास्त कर पाना मुश्किल था ये शायद लेले के लिए जिंदगी का पहला ओर्गास्म था जो किसी गैर मर्द की वजह से उसे मिलने वाला था
लैली के पागल पैन का अंदाजा इस बार से भी लगाया जा सकता था की वो अब अपने नाख़ून से दिवार खरीदना शुरू कर चुकी थी और लगातार अपनी गांड को रवि के मुँह पर दबती हुई इधर से उदार घुमा रही थी
रवि को सबमे बहुत मजा आ रहा था
उसे मजा आता था जब वो अपनी हरकतों से एक घरेलु पति वार्ता औरत को रंडी बनाने पर मजबूर कर देता था जिसकी शुरुवात लेले जैसे घरेलु औरत के साथ वो कर चूका था
अंतत करीब था लेले अपने हाथ से रवि का सर पकड़ कर अपनी छूट पर दबती हुई कम्पनी लगती है
रवि अपने हाथो से लेले की कम्पटी टैंगो को संभल लेता है
लैली झाड़ रही थी और साथ hi साथ उसकी छूट से पेशाब भी निकलना चालू हो जाता है
जिसे रवि अमृत समझ कर पीने लगता है
कुछ hi पालो में लेले की सांसे दुरुस्त हो जाती है
पर रवि अब भी उसकी छूट से निकल रहे सफ़ेद पानी को चाट रहा था जो उसकी जंगो पर लगा हुआ था
पेशाब की वजह से पूरा फर्श गिला हो चूका था जिसका अहसास होते hi लेले शर्म से पानी पानी हो जाती है
अपना काम पूरा करके रवि उठ खड़ा होता है
रवि- क्यों भाभी बोलो कैसा लगा
लैली बोलना तो बहुत कुछ कहती थी पर बोल नहीं पा रही थी शायद ये सब करने से उसे उसके संस्कार hi रोक रहे था
रवि भी ये बात जनता था और यही वजह थी की रवि लेले के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं करना कहता था
रवि ललिए को प्यार से अपनी और घूमता है लेले की नजरे निचे थी रवि प्यार से उसके मासूम चेहरे को ऊपर उठता हुआ उसकी आँखों में देखता है
लेले के चेहरे पर सिर्फ आँखे hi दिख रही थी बाकि का चेहरा तो अब भी बुरखे में चूका हुआ था
लैली रवि का चेहरा देख कर एक बार फिर शर्मा जाती है क्योंकि उसका चेहरा उसके पेशाब से पूरी तरह भीग चूका था था तक की बाल भी
रवि- बोलो न भाभी कैसा लगा
इस बार लेले हिम्मत जुटती है पर कुछ बोले बिना hi रवि के गले लग जाती है
रवि समझ जाता है की अब ये औरत भी उसकी दीवानी बन गयी है
और मन hi मन खुस होता है
रवि- बताओ न भाभी कैसा लगा
लैली रवि के कण में धीरे से कहती है
लैली - बहुत अच्छा
रवि- मजा आया न आपको
लैली - बहुत मजा आया
रवि- पहले कभी आया है ऐसा मजा
लैली - नहीं
रवि- भैया नहीं चाटते आपकी छूट कभी ऐसे
लैली - नहीं
रवि लेले को थोड़ा सा दूर करता है
रवि- अब तो दिखाओ चेहरा भाभी
लैली - मुझे शर्म आ रही है
रवि- शर्माती रहोगी तो बाकि का मजा कैसे लोगी भाभी
आखिरकार लैली अपने चेहरे से बुरखा हटा देती है
अब रवि एक तक्क लेले को देख रहा था
काफी देर तक्क
लैली कभी रवि को देखती तो कभी शर्मा कर अपनी नजरे निचे कर लेती
रवि को लेले की ये अदा पागल कर रही थी
लैली - क्या हुआ देख लिया न चेहरा
रवि- है देख तो लिया भाभी पर अब मन कर रहा है की देखता hi राहु
लैली - देखते hi रहोगे तो बाकि की चीज़े कब करोगे
लैली का यु खुल कर बोलना रवि को काफी अच्छा लगा
रवि- हां ये हुई न बात भाभी
रवि लेले के बुरखे को पूरी तरह उतर देता है और उसके जिस्म पर अब कोई कपडा नहीं था
लैली की मोती मोती चूचियों को देख रवि उन्हें चुम लेता है और एक बार फिर पीछे हट कर लेले के गदराये जिस्म के नजारे लेने लगता है
Ravi-to फिर बोल दो न भाभी
लैली - में कुछ नहीं बोलूंगी
रवि- तब तो मुझे कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिससे आप बोलने पर मजबूर हो जाये
लैली कुछ बोलती उससे पहले रवि घुटनो के बल बैठ जाता है और एक बार फिर लेले की मांसल गांड को फैलता हुआ उसके छेड़ो को देखने लगता है
लैली एक बार फिर शर्मशार हो चुकी थी
रवि उसकी एक तंग को पास hi पड़ी टेबल पर रख देता है जिससे की लेले की छूट अब और भी ज्यादा खुल कर रवि के सामने आ जाती है
रवि- देखो तो जरा भाभी आपकी जुबान भले hi कुछ न बोल रही थी पर आपकी बुर्र काफी कुछ बया कर रही है
रवि अपने अंगूठे से लेले की गरम और गीली हो चुकी छूट को सहलाने लगता है
लैली का बदन एक जोरदार झटका खता है और वो दिवार को और कसकर पकड़ लेती है
पर अभी तो सिर्फ शुरुवात थी लेले ने रात भर थी सोचा था की रवि आएगा और उसे छोड़ कर चला जायेगा जैसा की उसका पति किया करता था पर उसे इस बार का अंदाजा नहीं था की रवि उसे औरत होने के असली सुख का अहसास करवाएगा
रवि- क्या छूट है भाभी आपकी और ये इसके फैले हुए होठ कसम से इसे देखने के बाद तो कोई भी पागल हो जायेगा
रवि अपने मुँह को सीधा लेले की छूट पर रख देता है और जैसे hi उसकी जीभ लेले की छूट को चुटी है उसके बदन में एक अजीब सी लेहेर दौड़ जाती है जिसकी वजह से वो खुद hi अपनी गांड को पीछे की और धकेल देती है
इधर रवि अपने एक हाथ से उसकी छूट सेहला रहा था और दूसरी और अपनी जीभ को लेले की छूट में और अंदर तक्क घुसा कर उसके स्वाद का मजा ले रहा था
लैली से बर्दास्त करना अब मुश्किल हो चला था ये पहली बार था उसके लिए जब कोई मर्द उसकी छूट को इस तरह प्यार कर रहा था
बुरखे में ढकी लेले पागल हो चली थी वो खुद के hi होठो को चबा रही थी
अब रवि की जुबान उसकी छूट से होती हुई गांड तक्क पहुंच गयी थी
लैली की गांड का छेद बार बार खुलता और बंद होता रवि अपनी जीभ कभी गांड में घुसता तो कभी छूट में
अंतत में रवि अपने दोनों हाथो से लेले की मांसल गांड को फैलता हुआ अपने मुँह को उसकी छूट पर रख देता है और पूरा मुँह खोलता हुआ मनो उसकी छूट को खाने की कोशिश करने लगता है
अब बर्दास्त कर पाना मुश्किल था ये शायद लेले के लिए जिंदगी का पहला ओर्गास्म था जो किसी गैर मर्द की वजह से उसे मिलने वाला था
लैली के पागल पैन का अंदाजा इस बार से भी लगाया जा सकता था की वो अब अपने नाख़ून से दिवार खरीदना शुरू कर चुकी थी और लगातार अपनी गांड को रवि के मुँह पर दबती हुई इधर से उदार घुमा रही थी
रवि को सबमे बहुत मजा आ रहा था
उसे मजा आता था जब वो अपनी हरकतों से एक घरेलु पति वार्ता औरत को रंडी बनाने पर मजबूर कर देता था जिसकी शुरुवात लेले जैसे घरेलु औरत के साथ वो कर चूका था
अंतत करीब था लेले अपने हाथ से रवि का सर पकड़ कर अपनी छूट पर दबती हुई कम्पनी लगती है
रवि अपने हाथो से लेले की कम्पटी टैंगो को संभल लेता है
लैली झाड़ रही थी और साथ hi साथ उसकी छूट से पेशाब भी निकलना चालू हो जाता है
जिसे रवि अमृत समझ कर पीने लगता है
कुछ hi पालो में लेले की सांसे दुरुस्त हो जाती है
पर रवि अब भी उसकी छूट से निकल रहे सफ़ेद पानी को चाट रहा था जो उसकी जंगो पर लगा हुआ था
पेशाब की वजह से पूरा फर्श गिला हो चूका था जिसका अहसास होते hi लेले शर्म से पानी पानी हो जाती है
अपना काम पूरा करके रवि उठ खड़ा होता है
रवि- क्यों भाभी बोलो कैसा लगा
लैली बोलना तो बहुत कुछ कहती थी पर बोल नहीं पा रही थी शायद ये सब करने से उसे उसके संस्कार hi रोक रहे था
रवि भी ये बात जनता था और यही वजह थी की रवि लेले के साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती नहीं करना कहता था
रवि ललिए को प्यार से अपनी और घूमता है लेले की नजरे निचे थी रवि प्यार से उसके मासूम चेहरे को ऊपर उठता हुआ उसकी आँखों में देखता है
लेले के चेहरे पर सिर्फ आँखे hi दिख रही थी बाकि का चेहरा तो अब भी बुरखे में चूका हुआ था
लैली रवि का चेहरा देख कर एक बार फिर शर्मा जाती है क्योंकि उसका चेहरा उसके पेशाब से पूरी तरह भीग चूका था था तक की बाल भी
रवि- बोलो न भाभी कैसा लगा
इस बार लेले हिम्मत जुटती है पर कुछ बोले बिना hi रवि के गले लग जाती है
रवि समझ जाता है की अब ये औरत भी उसकी दीवानी बन गयी है
और मन hi मन खुस होता है
रवि- बताओ न भाभी कैसा लगा
लैली रवि के कण में धीरे से कहती है
लैली - बहुत अच्छा
रवि- मजा आया न आपको
लैली - बहुत मजा आया
रवि- पहले कभी आया है ऐसा मजा
लैली - नहीं
रवि- भैया नहीं चाटते आपकी छूट कभी ऐसे
लैली - नहीं
रवि लेले को थोड़ा सा दूर करता है
रवि- अब तो दिखाओ चेहरा भाभी
लैली - मुझे शर्म आ रही है
रवि- शर्माती रहोगी तो बाकि का मजा कैसे लोगी भाभी
आखिरकार लैली अपने चेहरे से बुरखा हटा देती है
अब रवि एक तक्क लेले को देख रहा था
काफी देर तक्क
लैली कभी रवि को देखती तो कभी शर्मा कर अपनी नजरे निचे कर लेती
रवि को लेले की ये अदा पागल कर रही थी
लैली - क्या हुआ देख लिया न चेहरा
रवि- है देख तो लिया भाभी पर अब मन कर रहा है की देखता hi राहु
लैली - देखते hi रहोगे तो बाकि की चीज़े कब करोगे
लैली का यु खुल कर बोलना रवि को काफी अच्छा लगा
रवि- हां ये हुई न बात भाभी
रवि लेले के बुरखे को पूरी तरह उतर देता है और उसके जिस्म पर अब कोई कपडा नहीं था
लैली की मोती मोती चूचियों को देख रवि उन्हें चुम लेता है और एक बार फिर पीछे हट कर लेले के गदराये जिस्म के नजारे लेने लगता है