Incest Story - Didi Ki Chinta - Page 6 - SexBaba
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Incest Story - Didi Ki Chinta

Part 46मेहुल एकदम घबरा सी गयी थी. उसे अच्छे से समझ आ गयी थी के उसके भाई के शरीर पर एक कपडा भी नहीं है. उसके बाद तो कुछ ऐसा हुआ के मेहुल की हैरानी की कोई सीमा hi न रही. रोहन ने अपने दोनों हाथों से मेहुल को कमर से पकड़ा और उसे अपनी गॉड में बिठा कर उसने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

मेहुल ने पहले भी उसके साथ किश की थी तो किश करने में तो उसे कोई हर्ज नहीं था पर इस वक्त स्थिति कुछ और hi थी. रोहन एकदम नंगा था और उसने उसे गॉड में बिठाया था तो उसका लोहे की तरह सख्त हो चूका लुंड मेहुल की छूट को इस तरह स्पर्श कर रहा था के सलवार पहने होने के बावजूद वो महसूस हो रहा था जैसे डायरेक्ट hi स्पर्श हो रहा हो.

मेहुल की सोचने समझने की शक्ति एक बार तो जा चुकी थी. वो अपने भाई के साथ बहुत कुछ चाहती थी पर उसे ये उम्मीद कटाई नहीं थी के उसका भाई इस तरह का सुप्रिसे देगा उसे. खैर अभी के लिए उसने सोचा के किश का आनंद तो लिया जाये.

रोहन बड़े शिद्दत के साथ उसके होंठों के रास को चूस रहा था और मेहुल खुद उतने hi जूनून के साथ उसके होंठों को चूस रही थी. दोनों पागल प्रेमियों की तरह इस किश में खोये हुए थे. रोहन के लुंड को भी मेहुल की छूट का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था. वो चाहता तो ये था के अपनी बहिन के कपडे निकल के उसकी छूट में hi दाल थे पर वो अपनी किसी भी बेवकूफी की वजह से अपनी प्यारी दीदी को नाराज नहीं करना चाहता था.

मेहुल ने उसे अभी बहुत ज्यादा आगे बढ़ने के लिए उत्साहित नहीं किया था. इसलिए वो भी मज़बूरी बस hi सही अपनी सीमाओं के अंदर था. पर एक बात तो थी उसे इतना मज़ा दूसरी लड़कियों के साथ सेक्स में न आया हो शायद जितना अपनी बहिन के साथ किश और उसके शरीर के स्पर्श से आ रहा था.

बहुत hi सुडौल शरीर था मेहुल का एकदम भरवा. हालाँकि उसे मोती नहीं कहा जा सकता था पर वो स्लिम ट्रिम भी नहीं थी. उसकी गोल मटोल छातियां देखकर किसी के भी मुँह में पानी आ सकता था. इस बात को मेहुल ने कई बार महसूस भी किया था के उसकी छातियों को बहुत ज्यादा घुरा जाता है.

खैर अभी शायद दोनों में से किसी ने ये नहीं सोचा होगा के इस किश के बाद क्या होना है. थोड़ी देर बाद किश टूटी तो मेहुल रोहन से अलग होकर बगल में बैठ गयी और बैठते hi boli…..bhai तूने आज कपडे क्यों नहीं पहने हैं.

रोहन मुस्कुरा कर bola…didi आपको मालूम तो है के मैं ऐसे hi सोता हूँ. बिना कपड़ों के.

मेहुल थोड़ी सीरियस सी आवाज़ में boli….par मेरे आने तक तो कपडे पहने रखता भाई. हम लोग पहले hi काफी आगे बढ़ चुके हैं. थोड़ा लिमिट में hi रहते हैं न.

रोहन ज़िद सी करते हुए bola…par आपने तो ट्रैन में भी मेरी मुठ मार दी थी.

मेहुल को उसकी बचपने से वाली बात पर हंसी आ गयी और वो boli….bhai ट्रैन में बात और थी. कपडा लिया हुआ था और उस वक्त मैं भावनाओ में बह गयी थी.

आज रोहन पता नहीं क्या सोचकर बैठा था. उसका हाथ पकड़कर लुंड पर रखते हुए bola…aaj भी चद्दर है ऊपर दीदी. काम से काम उतना तो कर hi सकती हो आप जितना ट्रैन में किया था.

मेहुल दुविधा में फंस गयी थी. उसने अपना हाथ तो नहीं हटाया उसके लुंड से. पर अभी भी वो दुविधा में थी के जो कर रही है क्या वो सही कर रही है? कहीं रोहन और आगे बढ़ गया और उसकी छूट मरने को हुआ तो क्या वो उसे रोक पायेगी. नहीं उसे अपनी छूट वो हरगिज नहीं मरने देगी. ऊपर ऊपर से इसे मज़े दे देती. पर छूट देने का तो कोई सवाल hi पैदा नहीं होता. मैं इसे किसी लड़की से मिलवा दूंगी. और रिक्वेस्ट करुँगी के वो मेरे प्यारे भाई की इच्छा पूरी कर दे.

मेहुल इस तरह खोयी हुई थी अपने विचारों में और इधर बेचारे रोहन से सब्र hi नहीं हो रहा था. वो दीदी का हाथ पकड़कर हिलाते हुए bola…kis सोच में पद गयी दीदी. हिलाओ न इसे. क्यों तड़पा रही हो अपने प्यारे भाई को.

मेहुल अपने विचारों से बहार आयी और मजनूरी में hi सही उसने अपना हाथ हिलना शुरू कर दिया. हालाँकि मेहुल को उसके लुंड के स्पर्श से असीम सुख महसूस हो रहा था. वो ऑंखें बंद करके उसके लुंड को हिलाये जा रही थी.

इतने में रोहन जो बगल में बैठा था उसने उसके कंधे पर हाथ रख दिया और हाथ इस तरह से रखा के उसके दाहिने बूब को स्पर्श कर रहा था. उसके हाथ का अपने बूब पर स्पर्श पाते hi मेहुल की छूट में किड़ियाँ सी लड़ने लगीं. उसकी छूट गीली हो चुकी थी और उसके अरमान पूरी तरह से जाग चुके थे. शायद अगर इस वक्त रोहन उसे जोर देकर बोलता तो वो चुद भी जाती. पर दोनों एक दुसरे को बोलने से झिझक रहे थे.

रोहन ने देखा के मेहुल ने उसके हाथ के स्पर्श पर कुछ बोलै नहीं है तो उसने पहले तो अपने हाथ का दबाव मेहुल के बूब पर बढ़ा दिया. मेहुल को बहुत अच्छा लगा. वो उसे रोकना छह रही थी. पर उसे पता था उसका भाई एक नंबर का ज़िद्दी है. वो रूत जायेगा अभी जितना चल रहा है उतना तो चलने hi देते हैं न. कौन सा ये मेरी छूट मार रहा है.

वो अभी ये सब सोच hi रही थी के रोहन ने उसके खुले गले वाली कुर्ती के अंदर hi अपना हाथ घुसा दिया और उसके एक बूब को पकड़कर ऊगली को उसके निप्पल पर पहुँचाया तो बंद आँखों से मेहुल ने स्वयं को सातवें आसमान पर पाया. वो और भी बहुत कुछ चाहती थी पर अभी तक जितना हो रहा था वो उसी से खुश थी. हालाँकि उसका एक मन अभी भी उसे रोकने को बोल रहा था. पर वो उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर रही थी.

मेहुल की ऑंखें बंद थी. रोहन ने देखा तो उसने सोचा के थोड़ी मस्ती की जाये दीदी के साथ. उसने अपने ऊपर से चद्दर हटा दी. मेहुल को समझ तो आ गयी थी के चद्दर हैट चुकी है और उसका लुंड नंगा हो चूका है. इसलिए उसने अपनी ऑंखें बंद hi राखी.

रोहन जो पूरी मस्ती के मूड में था अपनी बहिन को bola…didi ऑंखें खोलो.

मेहुल नाराज होते हुए boli…tune मुझे ऑंखें खोलने लायक छोड़ा कहाँ है. पहले अपने ऊपर चद्दर लो फिर खोलूंगी.

रोहन ज़िद करते हुए bola…please दीदी एक बार खोल दो मेरे कहने से. तुम्हे एक दिन अपना लुंड दिखाना hi है तो आज क्यों नहीं.

मेहुल फ्लो फ्लो में बोल gayi….mujhe नहीं देखना तुम्हारा lund.use जल्द hi अपनी गलती का एहसास हुआ के उसने ये क्या बोल दिया और अपने दांतो टेल जीभ दबा ली.

रोहन की आह्हः निकल गयी अपनी बहिन के मुँह से ये सुनकर. वो bola….didi आपको दिखाना तो है hi मैंने. और आपके मुँह से लुंड सुनकर बहुत अच्छा लगा मुझे. प्लीज खोलो न ऑंखें. अपने भाई की बात नहीं मानोगे.

मेहुल खीझकर boli…ab तक भाई की बात hi तो मानी है और ये शब्द गलती से निकल गया मेरे मुँह से. प्लीज रोहन मुझे इतना परेशां मत करो नहीं तो मैं चली जुआंगी अपने रूम में.

रोहन ने फिर से मासूम सा बनते हुए kaha…ok ठीक है दीदी जैसी आपकी mari…halanki उसे अपनी दीदी के मुठ मारने में इतना मज़ा आ रहा था के बताया नहीं जा सकता.

रोहन ने मन hi मन सोचा के दीदी कहीं बगावत भी न कर ले. जो मिल रहा है कहीं उससे भी जाता रहे. पर मेहुल सोच रही thi…kahin मेरा भाई नाराज न हो जाये मुझसे. अब उसकी इतनी बातें मान ली हैं तो एक और बात सही.

पर तभी उसके दुसरे मन ने उसे चेताया के अगर उसने एक बार बात मान ली तो वो और आगे बढ़ने को बोलेगा और मेहुल उसके लिए कटाई तैयार नहीं थी.

रोहन का उसके बूब पर भी हाथ ढीला सा पद गया, मेहुल को अंदाज़ा हो गया था के रोहन कुछ नाराज हो गया है. उसने मुठ मारनी जारी राखी और उसकी इच्छा पूरी करने के लिए मेहुल ने अपनी ऑंखें खोलकर रोहन की और देखते हुए bola…apni साडी ज़िद पूरी करता है न तू.

रोहन मुस्कुराते हुए bola…abhi ज़िद पूरी कहाँ हुई है दीदी. मेरे लुंड की और देखो न.

मेहुल झुंझलाकर boli…rehne दो न भाई. क्यों इतना तड़पते हो मुझे.

रोहन bola…dekho आपने सच में मेरी बहुत बातें मानी हैं दीदी अभी ये भी मान लो तो बहुत एहसान होगा आपका.

मेहुल ने जिस हाथ से उसके लुंड को पकड़ा हुआ था उसी हाथ से लुंड पर थप्पड़ मरते हुए boli…hat पगले एहसान की क्या बात करता है. बहिन भाई के लिए कुछ कर दे तो वो कब से एहसान हो गया भला. आगे से ये बात न करना.

फिर उसके लुंड को देखकर उसे खुश करने के लिए बोलती है. भाई आपका ये सच में बहुत बड़ा है. मेहुल ने पोर्न में तो कई बार लुंड देखा था पर सामने इस तरह से पहली बार देख रही थी. उसे उसका ऊपर वाला गोल गोल भाग बहुत अच्छा लग रहा था. उसका मन कर रहा था के वो पोर्न फिल्मो की तरह उस गोल हिस्से को अपने मुँह में भर ले. पर उसने कुछ नहीं किया वो बस एकटक उस प्यारे से लुंड को देखती hi रही. रोहन की उत्तेजना इतनी बढ़ गयी के उसने मेहुल के बूब पर अपना दबाव बढ़ा diya…halanki मेहुल को थोड़ा दर्द हुआ पर उससे कहीं ज्यादा उसे मज़ा आया.
 
Part 47मेहुल और रोहन शायद दोनों को hi उम्मीद नहीं होगी के ये दोनों इतनी जल्दी इतना आगे बढ़ जायेंगे. हालाँकि मेहुल ने तो रोहन का लुंड देख लिया था पर रोहन ने अभी तक मेहुल की छूट नहीं देखि थी हाँ ट्रैन में उसने उसकी छूट को अपने हाथ से शांत जरूर किया था.

मेहुल तड़प रही थी क्यूंकि इतना कुछ कामुकता से भरा हो रहा था जिसकी वजह से उसकी छूट में खलबली मची हुई थी. वो पागल हुई जा रही थी अपनी छूट को शांत करने के लिए. पर वो अभी इतनी आगे नहीं बढ़ पायी थी के अपने भाई के सामने छूट को सहलाने लगे.

जब किसी इंसान को कुछ हासिल हो जाता है तो वहां पर hi थोड़े टिकता है. वो और ज्यादा चाहने लगता है. ऐसे hi रोहन ने जब देखा के उसकी बहिन ने उसकी बात को मानते हुए उसके लुंड के दर्शन कर लिए तो वो उसे और ज्यादा की आशा करते हुए कहता hai…..didi तुम भी अपने कपडे निकल दो न. सच्ची बहुत मज़ा आएगा.

मेहुल उसे ऑंखें दिखती हुई बोलती hai….bhai जितना मिल रहा है न उतने में सब्र karo…fir उसमे पता नहीं कैसे जोश आ जाता है, वो आगे बोलती hai….tumhe तो फिर भी संतुष्ट कर रही हूँ. इधर मेरी तो जान निकली पड़ी है.

रोहन मुस्कुराते हुए बोलता hai….tabhi तो बोल रहा हूँ दीदी निकल दो अपने कपडे आपको जन्नत की सैर कराऊंगा.

एक बार को तो मेहुल इमेजिन करने लगती है के उसके भाई ने उसकी छूट में लुंड डाला है और उसके हाथ उसके बूब्स पर हैं. ये सोचते hi उसके शरीर में सिरहन सी उठ जाती है वो हिल जाती है पर तुरंत असलियत में वापिस लौटकर बोलती hai…nahi भाई ऐसा नहीं हो sakta…fir थोड़ा सोचकर बोलती hai…achha एक काम करो अपना हाथ मेरे यहाँ डालकर मुझे अपने हाथ से संतुष्ट कर दो जैसे ट्रैन में किया था.

रोहन के चेहरे पर मुस्कराहट आ जाती है. वो समझ तो रहा था के उसकी बहिन चाहती तो बहुत कुछ है पर झिझक के मारे, शर्म के मारे या फिर सही गलत के मारे वो डीडे नहीं कर पा रही के क्या करे.

पर रोहन को जो मौका मिला था वो उसे थोड़े गँवा सकता था. उसने देर ना करते हुए तुरंत अपना हाथ बूब्स से हटा कर उसकी सलवार में दाल दिया और उसकी मखमली, उभरी हुई छूट पर रख दिया. पहले तो उसने धीरे धीरे ऊपर से उस पर हाथ फेरना शुरू किया, मेहुल की आहें निकालनी शुरू हो गयी.

कुछ देर बाद उसकी एक ऊँगली छूट के अंदर चली जाती है, और दो उँगलियों से वो इर्द गिर्द का फूला हुआ हिस्सा सेहला रहा था. रोहन ने बड़े ध्यान से अपनी बहिन की आँखों में देखा जिनमे अब लाल डोरे तैर रहे थे.

मेहुल की तो क्या hi कहें, अपनी बहिन के मुलायम स्पर्श की वजह से रोहन का लुंड टैंकर लोगे की रोड बन चूका था. उसे अब अपनी बहिन पर इतना प्यार आ रहा था के उसका मन कर रहा था के वो उसे नंगा करके चोदे. हालाँकि उसे पता था के अभी ऐसा कुछ भी होने के आसार नहीं हैं. जितना उसकी बहिन उसके लिए कर रही थी वही उसके लिए बहुत था.

मेहुल का हाथ अब बड़ी तेजी से रोहन के लुंड पर चल रहा था. वो बड़ी हसरत से अपने भाई के प्यारे से लुंड को देख रही थी. रोहन भी अपना फ़र्ज़ निभाते हुए अपनी बहिन की छूट के साथ खेलने में लगा हुआ था. आज उसने पहले उसके बूब्स का स्पर्श पाया फिर अब नरम मुलायम छूट का. इससे रोहन के मन में ऐसे कामुक एहसास जागे के उसका मन एक बार तो ऐसा हुआ के वो चाहे जबरदस्ती hi अपनी बहिन की छूट मार ले पर मार ले.

लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकता था. रोहन की तरह मेहुल भी ठीक वैसे hi सोच रही थी. उसकी छूट पर रोहन के स्पर्श से उसमे इतनी उत्तेजना भर गयी थी के उसे संभालना मुश्किल हो गया था. उस पर रोहन के लुंड का स्पर्श उसे पागल किये जा रहा था. किसी ऐसी लड़की के लिए, जो कभी किसी लड़के के संपर्क में ना रही हो, लुंड का स्पर्श मिल जाना बहुत बड़ी बात थी.

दोनों सोचते सोचते एक दुसरे में इतना खो गए के अपनी गतिविधि को जारी रखते हुए उनके होंठ आपस में कब मिल गए उन्हें पता hi नहीं चला. कभी रोहन मेहुल के होंठों को चुस्त को कभी मेहुल अपने भाई के रसीले होंठों को चुस्ती. अब ये दोनों उत्तेजना के शिखर पर पहुँच गए थे. दोनों में इतनी उत्तेजना भर गयी के एक मिनट के अंतराल में दोनों ने hi अपना अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया.

मेहुल की तो सलवार hi भीगी थी. रोहन ने तो इतना माल निकला आज के बीएड शीट के साथ साथ जो चद्दर ऊपर ली हुई थी वो भी गीली हो गयी. पर इस बात की परवाह किसे थी. दोनों एक दुसरे का रास तब तक निकालते रहे जब तक के आखरी बूँद नहीं गिर गयी.

ठंडा होने के बाद दोनों लेट गए. फिर दोनों ने एक दुसरे की और मुँह करके लेट गए.

रोहन bola…didi आपका शरीर कितना भरवा है न. देखो आपकी गोलियां कितनी बड़ी बड़ी कितनी प्यारी हैं.

मेहुल मुस्कुरा दी अपने भाई की बात sunkar…sharm नहीं आती अपनी दीदी के गुप्त अंगों के बारे में बात करते हुए.

रोहन मुस्कुराते hue…jab दीदी इतनी सेक्सी हो तो बात करनी hi पड़ती है और मुझे पता है मेरी दीदी का जो भी है वो मेरा है. इसलिए मुझे कोई शर्म नहीं है. और आपकी छूट तो इतनी मखमली है, उसको स्पर्श करते हुए ऐसे लग रहा था जैसे टेडी बेयर को छू रहा हूँ.

मेहुल की मुस्कराहट और भी चौड़ी हो गयी. वो boli..makhan लगाना तो कोई तुझसे सीखे. पर इसका मतलब ये नहीं के मैं तुझे इससे आगे बढ़ने दूंगी.

रोहन bola…wo बाद में देखेंगे दीदी अच्छा ये तो बताओ आपको मेरे लुंड का स्पर्श कैसा लगा.

मेहुल शैतानी मुस्कान के saath…haan अच्छा tha…rohan दरअसल उसके मुँह से अपने लुंड के लिए तारीफ सुन्ना चाहता था पर उसकी दीदी ने तो सस्ते में hi निपटा दिया था.

रोहन bola…iska मतलब ज्यादा अच्छा नहीं लगा आपको.

मेहुल boli…maine ऐसा तो नहीं बोलै. मैंने तो बोलै के अच्छा लगा.

रोहन bola…khulkar बताओ न. क्या क्या करना चाहोगी इसके साथ.

मेहुल झूठा गुस्सा दिखते हुए boli…jitna किया है उससे ज्यादा नहीं. हम भाई बहिन हैं समझे.

Rohan…achha तो भाई बहिन एक दुसरे की मास्टरबेशन करते हैं न?

मेहुल अब सोच में पद गयी के इसे क्या जवाब दें.

थोड़ी देर बाद मेहुल boli…kuchh भी हो भाई. पर हम दोनों में एक सीमा तो होनी चाहिए न. अच्छा अब मैं चलती हूँ. कह कर मेहुल उठने को हुई तो रोहन ने हाथ पकड़कर उसे फिर से लिटा दिया वैसे hi.

Mehul…jane दो भाई. रूही उठ गयी तो उसको जवाब देना मुश्किल हो जायेगा.

Rohan…main खुद उसे जवाब दे दूंगा दीदी. अपनी दीदी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहा हूँ. भला रोज रोज कहाँ मिलता है ये मौका.

मेहुल मुस्कुराते हुए boli…achha अगर रोज आ जॉन तो?

रोहन तो उछाल hi पड़ा उसकी बात सुनकर और bola…agar ऐसा हो जाये दीदी तो कसम से मौज hi बन जाये. आप सच कह रही हो क्या?

मेहुल अब थोड़ा गंभीर होकर boli…nahi भाई रोज आना तो मुश्किल है. आज तो रूही सो गयी थी. पता है वो बहुत लेट तक जगती रहती है. हफ्ते में एक दो बार तो हो सकता है पर इससे ज्यादा मुश्किल है भाई. क्यूंकि कभी घर वाले भी तो देख सकते हैं न. मैं क्या जवाब दूंगी के भाई के कमरे में इतनी रात को क्या कर रही हूँ.

रोहन बोलै. बात तो आपकी भी सही hai.chalo सोचते हैं कुछ. पर आप रूही की चिंता छोड़ दो. उसे तो मैं किसी तरह से समझा दूंगा.

Mehul…dekho bhai..itne के लिए तो मैं कभी भी तैयार हूँ. पर इससे ज्यादा की उम्मीद न रखना मैं नहीं कर पाऊँगी. मेहुल ने अपनी मज़बूरी बताते हुए कहा. और हाँ दूसरी बात रूही से क्या कहोगे. हम दोनों को इस बात का ख्याल भी रखना होगा के हम दोनों के साथ साथ परिवार की इज़्ज़त भी बची रेहनी चाहिए.

रोहन भी थोड़ा गंभीर होकर बोलै. आप सही कह रही हो दीदी. मैं ख्याल रखूँगा के ऐसी कोई बात न हो जिससे खंडन की इज़्ज़त को कोई नुकसान पहुंचे.



मेहुल की एक कमजोरी थी वो कुछ भी देख सकती थी अपने भाई का उदास सा चेहरा नहीं देख सकती थी. वो एकदम से रोहन के नजदीक हुई उसको जोर से जफ्फी डाली, रोहन के लुंड को अपनी जांघो के बीच में लिया और बड़ी hi शिद्दत के साथ अपने भाई के होंठो को चूसने लगी इतनी शिद्दत के साथ के उसका सांस लेना भी मुश्किल हो गया.
 
Part 48 (Maha-Episode)मेहुल ने की दो घंटे बिताये थे रोहन के साथ. और इन दोनों के बीच जो भी हुआ एक सीमा तक hi हुआ. रोहन तो पूरी तरह से इन्सेस्ट फीलिंग्स में डूब गया था. पर मेहुल अभी दुविधा में hi फांसी थी. इतना कुछ होने के बाद भी उसे अपनी सीमा का ध्यान था. उसने अभी तक अपने भाई को अपना कोई अंग जान बूझकर नहीं दिखाया था. हालाँकि जब वो एक दुसरे का कर रहे होते हैं तो उसका मन करता है के वो अपना सब कुछ खोल दे और बोल दे अपने भाई को के कर लो अपने मन की. पर फिर वही मर्यादा उसको रोक देती है.

अगले हफ्ते रोहन ने दो दिन के लिए खंडाला जाना था रूही और उसके दोस्तों के साथ. उसके बारे में सोचकर वो बहुत ज्यादा एक्ससिटेड था. वो सोच रहा था अगर दीक्षा रेडी हुई तो उसकी छूट मिल सकती है. उसका लुंड अब छूट के लिए पागल हो गया था. अभी अभी कुछ दिनों में उसने दो दो जवान लड़कियों को बड़ी शिद्दत के साथ छोड़ा था. रात को तो छोडो अभी दिन में उसे छूट hi ख्यालों में आ रही थी.

वो अभी सोच hi रहा था के उसकी नज़र अपनी मसि यानि के रूही की मम्मी पर पड़ी जो किचन में नाश्ता तैयार कर रही थी. किचन ओपन थी, तो वहां का सारा नज़ारा डाइनिंग एरिया से दीखता था. पीछे से जब उसने पतली सी राधा की मोती सी गांड देखि तो उसके लुंड ने झटका मारा जो छूट के बारे में सोचकर जाग चूका था. रोहन ने अपने सर पर चपत सी लगाई, ये क्या तू अपनी बहनो के बारे में तो सोचता hi था अब अपनी मसि को भी गन्दी नज़र से देखने लगा है. फिर अपने लुंड पर भी एक चपत लगाकर बोलै, सुधर जा सेल वर्ण बहुत मार खायेगा, माँ सामान होती है मसि और तू उसे देखकर झटके मार रहा है. अभी वो ये सोच hi रहा था के इतने में माँ आ गयी जो कपडे धो के हटी थी. इस वजह से उसकी निघ्त्य पूरी तरह से भीग चुकी थी.

वो रोहन के सामने आकर बैठ गयी और राधा से boli…laa राधा चाय तो पीला मुझे. निधि का रूटीन था ये, कपडे धोने के बाद वो डाइनिंग टेबल पर बैठकर चाय पीती थी. फिर उसके बाद hi उसका नहाना धोना होता था.

पहले भी ना जाने कितनी बार रोहन ने अपनी माँ को देखा पर आज जो उसने देखा उसके तो होश hi उड़ गए. मम्मी ने ब्रा नहीं पहनी थी. कॉटन की पतली सी निघ्त्य उसके बूब्स से चिपकी हुई थी और उसके बूब्स की शेप का बड़ी hi आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता था.

मेहुल बिलकुल अपनी माँ पर गयी थी उसके बूब्स अपनी माँ जैसे hi तो थे. माँ के तो और भी बड़े थे. रोहन के लुंड ने ये दृश्य देखकर एक बार और झटका मारा तो रोहन मन hi मन उसे गलियां देने लगा के साले मैं तो बोल रहा था के तू माँ सामान मसि को देखकर झटके मार रहा है अब तो तूने हद hi कर दी बहिन छोड़ सेल तू अपनी माँ को देखकर hi झटके मार रहा है. बाज आ जा. पर लुंड का ना तो दिमाग होता है न ऑंखें ना कान वो तो हमारे कानो से सुनता है, हमारी आँखों से देखता है और हमारे दिमाग से hi तो चलता है. उसने अपनी हरकतें जारी राखी.

रोहन को लगा के यहाँ ज्यादा देर तक टिकना नहीं चाहिए. वो एकदम से उठ कर अपने कमरे की और भाग गया और तैयार होने का सोचने लगा. रूही कॉलेज जा चुकी तह पापा और चाचा भी काम पर जा चुके थे अभी घर में मम्मी मसि रोहन और मेहुल hi थे. वो दोनों तो अपने अपने काम में लगी थी. रोहन ने नाश्ता कर लिया था और अभी वो क्यूंकि खली था स्टडी के बाद तो अक्सर वो घूमने चला जाता था नाश्ते के बाद.

उसने अभी ग्रेजुएशन hi की थी, तो उसके पापा चाहते थे के वो काम से काम पोस्ट ग्रेजुएशन करके जॉब के लिए अप्लाई करे पर रोहन चाहता था के पहले वो जॉब करे और उसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन खुद के डैम पर प्राइवेट कर ले. इनके माँ बाप इन्हे बस सलाह देते थे. ज्यादा फाॅर्स नहीं करते थे इन्हे किसी भी बात के लिए.

इसलिए रोहन ने एक एग्जाम दिया था टैक्सेशन डिपार्टमेंट में इंस्पेक्टर की पोस्ट के लिए और वो इंटरव्यू भी दे आया उसका सिलेक्शन लेटर उसे आज जोइनिंग लेटर मिल गया था. इसलिए वो बहुत खुश था. सारे घर वाले रात को रेस्टोरेंट में पार्टी करने जा रहे थे. हालाँकि मेहुल को इस बात की ख़ुशी थी के उसके भाई की म्हणत रंग लाइ, पर उसे इस बात का दुःख भी था के उसका भाई उससे कितना दूर हो जायेगा.

यही दुःख रूही की आँखों में भी देखा जा सकता था. उसे भी तो अपना भाई उतना hi प्यारा था, जितना मेहुल को था. सब लोगों ने रेस्टोरेंट में खूब चाव से अपनी अपनी पसंद का खाना आर्डर किया क्यूंकि इन सबके प्रिय रोहन की मन की मुराद जो पूरी हो गयी थी. मेहुल जो के रोहन के बगल में बैठी थी रोहन के कान में boli…bhai तुम्हारी जोइनिंग की ख़ुशी में आज तुम्हे एक सरप्राइज मिलने वाला है. रोहन के लुंड ने फिर से झटका मारा क्यूंकि उसे पता था के ये सरप्राइज सेक्स से रिलेटेड hi होगा. वो मन hi मन सोचने लगा क्या दीदी मुझे अपना जिस्म दिखाएगी या फिर कहीं वो सेक्स के लिए तो तैयार नहीं हो गयी. फिर खुद को hi समझते हुए बोलै. नहीं नहीं इतना ज्यादा मत सोच वो ऐसा कुछ नहीं करने वाली. और हल्का सा हंस देता है अपनी सोच पर.

जैसे मेहुल पहले रूही और रोहन की नजदीकियों को सेहन नहीं कर प् रही थी वैसे hi अब रूही नोटिस कर रही थी के पुणे के टूर के बाद ये दोनों कुछ ज्यादा hi क्लोज हो गए हैं. कल भी दीदी रात दो बजे तक गायब थी. कोई डेढ़ बजे रूही की नींद खुली थी पेशाब के लिए तो उसने देखा के उसकी बहिन बगल में नहीं है. वो पेशाब करने के बाद उत्सुकतावश रोहन के कमरे के बहार गयी तो उसे उन दोनों आवाज़ें आ रही थी. रात थी तो वो उन दोनों की बातें बड़ी आसानी से सुन प् रही थी. वो दोनों भी बिंदास बात कर रहे थे सोच रहे होंगे के कौन सा कोई सुनने वाला है इस वक्त. उसे तो मेहुल अपनी सौतन की तरह नज़र आ रही थी आज. बहुत जल रही थी रूही. पर उसे इस बात की ख़ुशी थी के एक दो दिन में वो अपने भाई के साथ खंडाला जाने वाली थी.

रेस्टोरेंट से फ्री होकर रोहन आज फिर से कपडे निकल कर चद्दर ओढ़कर लेट गया. वो मेहुल का इंतज़ार करने लगा. उसे पता था मेहुल रूही के सोने के बाद hi आएगी. पर उसका लुंड खड़ा हो चूका था और वो किसी भी हालत में उसकी कोई बात नहीं सुन रहा था. वो तो बार बार एक hi बात बोल रहा tha…mujhe मेहुल की छूट chahiye…rohan झल्लाकर bola…sale मेहुल की छूट कोई हलवा है क्या जो तुझे आसानी से मिल जायेगा.

इधर रूही ने जानबूझकर ऑंखें बंद कर ली, वो देखना चाहती थी के क्या मेहुल आज भी रोहन के पास जाएगी और जाएगी तो ये लोग क्या क्या करते हैं. वो लोग रेस्टारेंट से तो रूही मेहुल को ये बोलकर लेट गयी थी के दीदी मुझे तो बहुत नींद आ रही है. उसके ऑंखें बंद करने के पंद्रह मिनट बाद जब मेहुल सूरे हो गयी के रूही सो गयी है वो अपने कमरे से निकल कर रोहन के कमरे में आ गयी. उसे क्या पता था के रूही सोने का नाटक कर रही है.

उसे पक्का पता था रोहन ने दरवाजा तो बंद नहीं किया होगा. तो दरवाजा खुल गया और जब उसने देखा के वो आज भी चद्दर ओढ़कर लेता है तो मेहुल ने चद्दर को एकदम से खींचते हुए bola…kamine कहीं के मुझे पहले से पता था के तू नंगा hi लेता होगा.

रोहन उसे अपने ऊपर खींचते हुए bola…itni सेक्सी बहिन का इंतज़ार कर रहा था मैं और मेरा लुंड. क्या मैं कपडे पहनकर उसकी जवानी का निरादर ना करता.

मेहुल मुस्कुराकर boli…bahut बदमाश हो गए हो भाई तुम

रोहन फिल्मी अंदाज़ में bola…abhi आपने मेरी बदमाशी देखि कहाँ है दीदी. कहकर उसने अपने होंठ मेहुल के होंठों पर रख दिए. मेहुल का भी ये पसंदीदा काम था. दोनों एक दुसरे के होंठों का रसपान करने लगे. मेहुल तो आज इतनी पागल सी हो गयी थी के उसने रोहन के होंठ चूसते हुए उसके बाल बुरी तरह से जकड़े हुए थे और कमाल की बात तो ये थी के उसे दर्द की बजाये मज़ा आ रहा था.

कुछ देर इस किश का आनंद लेने के बाद मेहुल एक झटके से रोहन से अलग हुई और बोली …भाई होंठ hi चूसते रहना है या कुछ और भी चाहिए.

रोहन शैतानी भरी मुस्कान के saath…mujhe तो तुम्हारी छूट मारनी है दीदी.

मेहुल मुस्कुराते hue…wo नहीं मिलेगी बच्चू. पर कुछ तो मिलेगा.

रोहन के मुँह में पानी और लुंड में उछाल आ जाता है ये सुनकर. वो अपनी बहिन के स्पर्श से पहले hi आसमान की और उड़ने को तैयार था.

मेहुल कड़ी हुई और अपनी पॉकेट में से कुछ कपडे की रस्सी निकली और boli…agar मज़े लेने हैं तो जैसा मैं कर रही हूँ मुझे करने देना. बीच में तंग नहीं udana,....fir थोड़ा हँसते हुए boli…waise तुम तंग अदने के काबिल भी नहीं रहोगे.

हँसते हँसते उसने रोहन की एक बाजु पकड़ी और उसकी एक रस्सी से बांधकर बीएड के एक छोर में बांध दिया. ऐसा hi उसने दुसरे हाथ के साथ किया. रोहन से रहा नहीं गया तो वो पूछने laga….kya बात दीदी बांध कर रपे करने का इरादा है क्या? आप तो बिना बंधे भी कुछ भी कर सकते हो.

मेहुल ने उसके मुँह पर ऊँगली रखते हुए bola…maine कहा न मेरे काम में तंग मत अदाओ. इसका मतलब चुपचाप महसूस करो बस जो भी मैं कर रही हूँ. तुम्हे बोलना भी नहीं है. समझे.

रोहन मुस्कुरा कर bola…samajh गया didi….wo समझ तो गया था के उसे कुछ अच्छा मिलने वाला है आज.

इसके बाद मेहुल एक एक करके उसकी दोनों टंगे बांध देती है. रोहन फिर से सवाल करने लगता है पर वो चुप कर जाता है के कहीं उसकी दीदी नाराज न हो जाये.

अंत में वो एक रुमाल के साथ उसकी आँखों पर भी पट्टी बाँध देती है और उसे बोलती hai…rohan कुछ नज़र तो नहीं आ रहा न तुम्हे.

रोहन jhujhlakar…kamaal करती हो दीदी. भला जब तुमने मेरी आँखों पर पट्टी hi बांध दी तो भला मुझे नज़र कैसे आएगा.

मेहुल खिलखिलाकर हँसते हुए कहती hai….to अब शुरू होता है तेरी दीदी का ये प्यार भरा खेल.

रोहन भी एक्ससिटेड होकर बोलता hai….haan दीदी मुझे इंतज़ार है इस खेल का.

मेहुल ने हाथों में चूड़ियां और पैरों में पायल पहनी हुई थी. जो के छान छान कर रही थी. अब मेहुल ने अपना खेल खेलना शुरू कर दिया था. उसने एक एक करके अपने सभी कपडे उतर दिए. ये जो छान छान हो रही थी. ये उसकी चूड़ियां और पायल तब बज रहे थे जब वो कपडे उतार रही थी.

फिर सब कुछ उतरने के बाद वो boli….suno भाई अब मैं कुछ ऐसा करुँगी, बल्कि बहुत कुछ ऐसा करुँगी जो तुम्हे पसंद आएगा. और जब भी मैं तुम्हारी आँखों पर पट्टी बांधूंगी तो एकदम से बेशरम बन जाउंगी. आज भी मैं बेशरम बनने जा रही हूँ. तुम्हे अच्छा लगेगा न.

रोहन तो ख़ुशी से उछाल hi pada…bola ….बहुत अच्छा लगेगा दीदी.

मेहुल जो अब रोहन और इन्सेस्ट के रंग में रंग चुकी थी बीएड के ऊपर चढ़ी रोहन के इर्द गिर्द टंगे करके दोनों घुटने बीएड पर लगा के छाती से थोड़ा निचे बैठ गयी. और ऊपर की और झुककर ऐसे बैठी के रोहन के शरीर से बिलकुल भी टच न हो. उसने अपनी गांड थोड़ी ऊपर की और उठाई हुई थी.

मेहुल ने सबसे पहले रोहन के एक कान में चूड़ियां खंखाई, फिर दूसरे कान में और boli…batao तो भाई ये क्या है.

रोहन bola…didi आपकी चूड़ियों की खनखनाहट. उसे मेहुल के शरीर की खुशबु तो आ रही थी पर उसे समझ नहीं आ रही थी के दीदी करना क्या चाहती है.

फिर वो घुटनो के सहारे बैठकर थोड़ा ऊपर की और उठी और अपनी छूट को टच किये बिना रोहन की नाक के पास लेकर गयी और boli…rohan तुम्हे कोई गंध आ रही है क्या?

रोहन जो के उस गंध से मस्त हो चूका था bola…didi मुझे पता है ये आपकी छूट की प्यारी प्यारी सी खुशबु है. आज दीदी आप बस करती जाओ जो भी करना है.

मेहुल खिलखिलाकर हंसकर boli…sahi जवाब. इसलिए तुम्हे उम्मीद से भी ज्यादा इनाम मिलेगा.

रोहन खुश हो गया. पर बोलै कुछ नहीं. क्यूंकि उसकी बहिन ने उसे ज्यादा बोलने से मन जो किया था.

मेहुल ने थोड़ा सा दबाव देकर अपनी छूट को रोहन के नाक पर दबा दिया. जहाँ रोहन कामुकता से भर चूका था वहीँ मेहुल भी तो पूरी कामुक हुई पड़ी थी. उसकी छूट गीली सी थी जब उसकी नरम और गीली छूट रोहन के नाक पर लगी तो एक बार को तो वो उछाल hi पड़ा. और bola…ohhh दीदी मार डालोगी क्या?

मेहुल फिर से प्यार भरी हंसी हँसते हुए boli…bas इतने में मर जाओगे भाई. अभी तो कुछ किया hi नहीं है.

रोहन को उस स्वर्ग भरे स्पर्श से इतना मज़ा आया के उसका लुंड सख्त होकर टूटने पर आमदा हो गया. अभी वो इस सुख को अनुभव कर hi रहा था के मेहुल ने दूसरा अटैक कर दिया.

वो उसके लुंड के थोड़ा ऊपर बैठ गयी और झुककर रोहन के माथे पर किश कर दी. एक तो उसकी किश का असर दुसरे उसकी छूट का लुंड के ठीक ऊपर स्पर्श और रोहन सिहर उठा उसकी इस किश से क्यूंकि किश करते वक्त मेहुल के निप्पल्स जो के सख्त हो चुके थे उसकी छातियों से टकरा रहे थे. और लुंड उसकी गांड पर प्रहार पर प्रहार करने लगा. इतना उछाल रहा था.

रोहन का बहुत मन हो रहा था के वो उसे पकडे या फिर उसकी दीदी hi पकड़ ले पर नहीं. वो तो बेबस हुआ पड़ा था. फिर मेहुल और निचे की और आयी. उसकी गालों पर किश कर दी. फिर उसके नाक पर और दोनों कानो पर. रोहन के मुँह से सिसकारिआं निकल रही थी जो के मेहुल को उत्तेजित कर रही थी.

बहार भी एक शख्स था जो कान लगाकर खड़ा था. उसको तो विश्वास hi नहीं हो रहा था के उसके भाई बहिन अंदर कमरे में हवस का नंगा नाच नाच रहे हैं. वो चाहे जो भी चाहती हो पर उसे इतनी उम्मीद नहीं थी के उसके दोनों भाई बहिन नंगे होकर सेक्स की एक्टिविटीज में इन्वॉल्व हैं. पर जब सेक्स होता है तो किसी को कुछ समझ नहीं आता. न करने वाले को न महसूस करने वाले को. वहां बस एक hi अनुभूति होती है काम की. तो रूही भी काम के बनो से घायल हो चुकी थी और उसका एक हाथ अपनी छूट पर और दूसरा एक बूब पर था. वो मसलने लगी अपने बूब को और सहलाने लगी अपनी छूट को.

मेहुल ने फिर कुछ देर रोहन के होंठों को अपना ठिकाना बनाया और उसके बाद गर्दन और फिर छाती पर आकर चूमने लगी. उसके बाद वो पेट पर आयी और धीरे धीरे निचे की और जाने लगी. उसने उसके लुंड के इर्द गिर्द पता नहीं कितनी किश जड़ दी पर उसके लुंड को छुआ तक नहीं.

रोहन तो तड़प उठा उसे बड़ी उम्मीद थी के उसकी दीदी उसके लुंड को भी चूसेगी. वो bola…didi इसे क्यों छोड़ दिया. इसको मुँह में लेकर चुसो न.

हालाँकि रोहन को आज स्वर्गीय सुख मिल रहा था क्यूंकि उसकी प्यारी सी दीदी उसके एक एक अंग को चुम रही थी और उसके कुछ अंगों का उसके अंगों पर स्पर्श हो रहा था जिसे महसूस करके उसकी जान निकली जा रही थी. पर फिर भी उसे तो अपना असली काम करवाना था. कहीं भी किश हो जाये तो ठीक पर उसकी असली चीज लुंड किश से अछूता रह जाये तो क्या hi फायदा है फिर.

मेहुल boli…bhai अपनी दीदी पर विश्वास नहीं है क्या तुम्हे. आज तुम्हे इतना सुख दूंगी के तुम्हारा लुंड तो क्या तुम्हारी आत्मा तक तृप्त हो जाएगी. मेहुल ने जैसा बोलै था वो बेशरम बन चुकी थी.

रोहन कम्प गया उसकी बात सुनकर और bola…han दीदी मुझे इंतज़ार है आप ऐसा करोगे और हाँ भला मुझे अपनी दीदी पर विश्वास नहीं होगा.

मेहुल मुस्कुराते hue…to बस चुपचाप ये हवस का खेल महसूस करते रहो बस.

उसकी जांघों पर किश करने के बाद मेहुल फिर से ऊपर की और गयी. इस बार उसने रोहन के लुंड को अपनी दोनों टांगों में जांघों के बीचो बीच दबाया लिया जोर से. रोहन के मुँह से nikla…aaahhh दीदी.

मेहुल boli…kyun आया न लुंड को मज़ा…

रोहन तड़पकर bola…haan दीदी मज़ा आया. उसके चेहरे से hi समझा जा सकता था के उसे कितना सुख मिल रहा था.

मेहुल फिर से boli…bhai ऐसा नहीं के तुम्हारे लुंड को hi मज़ा आ रहा है, मेरी छूट और चूचियों को भी खूब मज़ा आ रहा है. ये कहकर उसने अपनी चूचियों को रोहन के मुँह पर फेरा. रोहन ने अपने मुँह में उसकी एक घूमती हुई चुकी पकड़ ली और उसे चूसने लगा. मेहुल ने भी उसे चूसने दिया और boli…kaisa लग रहा है अपनी दीदी की चुकी को चूसकर.

रोहन bola…agar दुनिया में कोई सबसे बड़ा सुख है तो ये hi है दीदी. इससे ऊपर कुछ नहीं. मेहुल की छूट में चींटियां सी दौड़ गयी उसकी बात सुनकर. उसने उसके लुंड पर और जोर से दबाव बना लिया.

मेहुल खिलखिलाकर हंस पड़ी और उसने अपनी दूसरी चुकी भी रोहन के मुँह में दाल दी. रोहन ने उसे भी बड़ी शिद्दत से चूसा और ऐसे चूसा मानो उसमे से दूध निकल रहा हो. मेहुल ने जल्द hi उन्हें उसके मुँह से निकला और निचे की और हो ली. फिर उसने अपनी चूचियों को उसकी छाती पर रगड़ा. सख्त सख्त निप्पल रोहन की छाती पर ऐसे प्रहार कर रहे थे मनो उसे तोड़ hi देंगे. पर ये उसे ऐसा सुख दे रहे थे के वो खुद को सातवे आसमान पर महसूस कर रहा था.

मेहुल और निचे आयी और उसके पेट से होते हुए उसने रोहन के लुंड को अपनी उन दोनों पहाड़ियों में कैद कर लिया और उनके दोनों सिडों पर अपने हाथ लगाकर उसे अच्छे से मसलने लगी अपनी चूचियों से. रोहन ने तो कभी उम्मीद भी नहीं की थी इस सुख की. दो तरफ से मेहुल अपनी चूचियों को अपने हाथों से दबा रही थी और फिर ऊपर से छाती का दबाव. रोहन को लगा मानो वो इतना हल्का हो गया है के वो उड़ रहा है.

रोहन bola..didi थैंक यू सो मच. आप मुझे वो दे रही हो जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी.

मेहुल boli…mere प्यारे bhai…meri चूचियां मेरा शरीर अपने प्यारे भाई के लिए hi तो है. अभी तो तुम्हे और भी कुछ देना है.

रोहन बोलै क्या??

मेहुल boli…dekhte रहो भाई. ओह सॉरी देखते नहीं बस महसूस करते रहो अपनी दीदी की सेक्सुअल हरकतें. चुदाई ना होकर भी चुदाई से ज्यादा सुख न दिया तो मेरा नाम भी मेहुल नहीं.

रोहन हंसकर bola…didi आपने सही बोलै था.

मेहुल हैरान होकर boli…maine क्या बोलै था भाई. वो अभी भी लुंड को मसल रही थी अपनी चूचियों के साथ.

रोहन bola…aapne कहा था मैं आज बेशरम बन जानूँगी. और हंसने लगता है.

मेहुल भी थोड़ा हंसकर बोलती hai…wo तो मैं बानी हुई हूँ भाई. देखो न तुम्हारे साथ एकदम नंगी हूँ इससे ज्यादा और क्या बेशर्मी हो सकती है भला. और कौन सा शब्द है जो मैंने नहीं बोलै. और पता है ये सब मैं अपने प्यारे भाई की ख़ुशी के लिए hi तो कर रही हूँ. तुम्हारी दीदी को पता है तुम्हारी कितनी चितना है.

रोहन bola…isme कोई शक नहीं मुझे मेरी दीदी से ज्यादा कोई प्यार कर hi नहीं सकता.

बहार कड़ी रूही के दिल को ठेस पहुँच जाती है ये सुनकर. वो सोचती है इसका मतलब मैं भाई के लिए नंबर दो पर हूँ क्या? उसका तो कबका पानी निकल चूका था अंदर चल रही वार्तालाप सुनकर और कल्पना से अंदर की.

मेहुल बोली अभी और कुछ भी मिलने वाला है तुम्हारे लुंड को भाई.

रोहन bola…meri प्यारी didi…mujhe बेसब्री से इंतज़ार है.

मेहुल ने फिर कुछ ऐसा कर दिया के रोहन की चीखें hi निकल गयी. मेहुल ने अब उसके लुंड को पकड़ा और अपना मुँह उस पर रख दिया. रोहन को समझते देर थोड़ी लगनी थी के क्या हो रहा है. आनंद के मारे उसकी चीखें निकल गयी. और उसके garm.narm मुँह के स्पर्श ने तो उसे उछलने पर मजबूर कर दिया.

पर अच्छे से बंधा होने के कारन वो ज्यादा नहीं उछाल पा रहा था. उसे अब अपनी दीदी का उसे यूँ बांधने का सबब समझ में आ रहा था. उसने बस बिना कुछ और सोचे इस बेहतरीन स्पर्श को महसूस करने की सोची. वो महसूस कर रहा था उसकी दीदी ने उसका सूपड़ा निगल लिया था. बहुत छोटा था अभी रोहन पर उसका लुंड एक मर्द की तरह तैयार हो चूका था और सुपडे का दिए अच्छा खासा था.

मेहुल ने उसके पेट पर हाथ फेरते उसके लुंड को बिना छुए चूसना शुरू किया. उसे खुद भी इतना मज़ा आ रहा था के वो भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी. वो उसे चूसे जा रही थी मनो वो लोल्ली पॉप हो. रोहन का लुंड भी ताँता hi जा रहा था. और कहाँ जायेगा ये उसे समझ नहीं आ रही थी. पर आनंद की चार्म सीमा थी ये तो.

जांघों पर मेहुल की चूचियां, लुंड उसके मुँह में और घुटने पर छूट का स्पर्श और उसके बाद पेट पर मेहुल का हाथ फेरना कुछ इस तरह के वो उत्तेजना की शिखर पर पहुँच जाए. रोहन को स्पर्श के मीठे एहसास के साथ साथ मेहुल के सपद सपद करते हुए चूसने की जो आवाज़ आ रही थी वो उसकी उत्तेजना को दुगुना नहीं बल्कि कई गुना कर रही थी.

वो कितनी hi देर उसे ये सुख देती रही पर हर चीज की एक सीमा होती है एक अंत होता है. कोई पंद्रह मिनट बाद रोहन के लुंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया और उसकी हैरानी की सीमा न रही के उसकी बहिन ने वो पानी जातक लिया. न सिर्फ गतका बल्कि उसके बाद जो लुंड पर लगा रह गया उसे भी वो चाट चाट कर साफ़ कर गयी.

मेहुल boli…haan तो भाई मेरे, कैसा लगा मेरा ये हवस का खेल.

रोहन आह भरकर bola…didi इसे हवस का खेल नहीं हवस का नंगा नाच बोलो. बहार दो बार झाड़ चुकी रूही ने जब अपने वाले शब्द सुने तो उसके मुँह से हंसी सी छूती जिसे उसने हाथ रखकर रोक लिया.

मेहुल बोली. वो तो ठीक है भाई पर तुम हो बड़े स्वार्थी.

रोहन हैरान होकर bola…wo कैसे दीदी?

मेहुल शिकायत भरे लहजे में boli….khud तो संतुष्ट हो गए पर दीदी की संतुष्टि की सोची भी नहीं.

रोहन गलती मानते हुए bola…oh सो सॉरी दीदी. आप मुझे खोलो बस एक बार. दस मिनट में इसे दुबारा खड़ा करके आपकी छूट में न डाला तो मेरा नाम भी रोहन नहीं.

मेहुल हँसते हुए boli…nahi भी डालोगे तब भी तुम्हारा नाम रोहन hi रहेगा. और हाँ ये क्या तुम हमेशा छूट मारने को तैयार रहते हो. देखो न मैंने तुम्हे बिना छूट के hi संतुष्ट कर दिया न ऐसे hi तुम भी मुझे संतुष्ट करोगे. कहते हुए मेहुल ने रोहन के ठीक मुँह पर अपनी छूट टिका दी.

रोहन ने बिना कुछ बोले अपनी जीभ निकलकर पहले तो उसे कुरेदना शुरू किया. वह क्या टास्ते था, नमकीन सा स्वाद मखमली छूट का स्पर्श और बीच में डेन का तीखा सा महसूस होना., रोहन के आनंद की कोई सीमा न रही. अभी अभी मुरझाये लुंड में फिर से जान सी पद गयी.

मेहुल तो सीई सीई करते हुए आनंद के सागर में डूब गयी. Boli…haan भाई ऐसे hi करते रहो. थोड़ी देर कुत्ते की तरह जीभ से चटवाने के बाद वो बोली अब इसे अपने होंठों से चुसो. दो बार झाड़ चुकी मेहुल को अभी भी चाहिए था एक और बार झड़ना. वो ऊपर आसमान की और देख रही थी उसने bola…bhai अपने हाथ मेरी चूचियों पर रखो. रोहन ने एक आज्ञाकारी बालक की तरह अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों पर रखे और उन्हें दबाना शुरू कर दिया.

मेहुल ज्यादा देर तक खुद को संभल नहीं सकीय और उसने रोहन के मुँह में hi झड़ना शुरू कर दिया. वो बोले जा रही thi….aah भाई आनंद आ गया तुम बहुत अच्छे हो. हाँ इसे चाट चाट कर साफ़ कर दो. रूही की तो इमेजिन करते hi सिरहन सी फ़ैल गयी शरीर में वो इस दौरान तीसरी बार झड़ी पर बेचारी अपने हाथ से झड़ी.

मेहुल शांत और संतुष्ट होने के बाद रोहन के बगल में लेट गयी और अपना शरीर उसके शरीर पर दाल दिया. अपनी एक तंग को हलके से खड़े लुंड पर रख दिया. रोहन के लिए आज का दिन उसकी ज़िन्दगी का सबसे सुहाना दिन था और ये मेहुल के लिए भी था. पर बेचारी रूही के लिए तो ये तड़प भरा दिन था. इनका खेल ख़तम होने के बाद वो तुरंत अपने रूम की और भागी.



*****तो दोस्तों कैसा लगा ये भाग और मैं कैसे इतना बड़ा भाग लिख सका तो मैं आप लोगों को बता दूँ के मैं घर पर वाइफ से झूठ बोलकर तीन दिनों के लिए स्पेशलय आप लोगों की खातिर पहाड़ों में गया. और हाँ ये सिर्फ आप लोगों के लिए नहीं था मेरा खुद का भी स्वार्थ था. पंजाब के एक सिटी से मेरी एक फ्रेंड बहुत दिनों से पहाड़ों पर जाना चाहती थी और जब उसने बताया के उसकी एक सहेली भी पहाड़ों में घूमना चाहती है तो भाई क्या बताऊँ अपने तो मज़े hi हो गए. ये जो ऊपर आज के episode में दृश्य हैं इनमे ज्यादातर काल्पनिक नहीं हैं मेरा इन तीन दिनों का तजुर्बा शामिल है इनमे. बहुत आनंद लिया और समय था तो लिख बैठा इतना बड़ा भाग. पर यार इतनी उम्मीद न लगाना के मैं हर बार इतना बड़ा भाग लिख पाउँगा. दरअसल मैं रोहन और मेहुल के मिलान वाला भाग थोड़ा बड़ा hi लिखना चाहता था. एक और बात बताना चाहूंगा के इस कहानी में और भी ऐसे करैक्टर आने वाले हैं जिनकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी और वो इन्सेस्ट से रिलेटेड hi होंगे. आपकी आशाओं पर खरा उतरने की कोशिश करूँगा और अब आप लोग भी मेरी आशाओं पर खरे उतारते हुए काम से काम 100 कमैंट्स इस part पर दाल दो. नहीं तो मेरा दिल टूट जायेगा.
 
दोस्तों बहुत उम्मीदों से इतना बड़ा EPISODE लिखा है के आप लोग बहुत अच्छा रिस्पांस डोज. इस कहानी को और भी लाजवाब बना दूंगा अगर आप लोगों का रिस्पांस अच्छा रहा. नहीं तो भाई लोगो मेरा दिल टूट जायेगा. अच्छा दोस्तों बताना आप लोगों को ये EPISODE कैसा लगा क्यूंकि बहुत म्हणत की है इस को लिखने में तो आप लोग भी कमेंट लिखते वक्त उस चीज का ख्याल रखना.
 
Thanks a lot bro...भाई आपके शब्दों के बारे में क्या बोलूं, मेरी रचना को सफल कर देते हैँ! रूही का अभी नहीं हो सकता ना भाई जी, सेक्वेन्स इस तरह से होगा, पहले ट्रिप, फिर 25th और रूही का जन्मदिन जिस दिन उसे तोहफा मिलेगा, फिर रोहन जॉब ज्वाइन करेगा, उसके बाद और 25th के दौरान कुछ ऐसी घटनाएँ घटने वाली हैँ कि मज़ा आने वाला है आपको 😊😊😊 बहुत बहुत आभार भाई! ऐसे ही आशीर्वाद बनाये रखें 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
 
Part 49मेहुल ने रोहन की आँखों पर पट्टी बांधते हुए उसे बोलै था के जब तक पट्टी बंधी रहेगी वो पूरी बेशरम बानी रहेगी और पट्टी के खुलते hi वो नार्मल बन जाएगी और रोहन उससे कुछ भी ऐसा एक्सपेक्ट नहीं करेगा जो वो कर या बोल न सके. रोहन को भला इसमें क्या प्रॉब्लम हो सकती थी.

वैसे रोहन ने पूरे मज़े लिए थे. चाहे उसके हाथ पेअर बंधे हुए थे चाहे आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी पर उसका शरीर उसका मन और यहाँ तक के उसकी आत्मा तक तृप्त हो गयी सब कुछ बंधे होने के बावजूद. ये उसके लिए एक अनोखा एक्सपीरियंस था. दो दो लड़कियों को छोड़ने के बाद, जिनमे से एक वर्जिन भी थी, उसे जो तजुर्बा आज मिला था उसकी चुदाई से कोई तुलना hi नहीं की जा सकती.

हमारा मन किसी आसान चीज से मोहित hi नहीं होता उसे तो कुछ अलग सा चाहिए होता है. तो जब रोहन को इतना अलग एक्सपीरियंस मिला वो गदगद हो गया और आशा करने लगा के आगे भी उसे ये सब प्राप्त होगा.

और अगर हम बात करें मेहुल की तो वो तो इतना खुश थी भाई को तृप्त करके जैसे उसे खुद तृप्ति मिल गयी हो. वैसे उसकी छूट को भी तृप्ति मिली अपने भाई के चूसने और चाटने से पर उसे असली ख़ुशी इस बात की थी के उसके भाई को उसकी वजह से इतना सुख मिला.

हालाँकि अभी भी वो अपने भाई को सीधे तौर पर अपना शरीर दिखने में hi झिझक रही थी, छूट देना को बहुत दूर की बात है. इसलिए उसने सोच लिया था के जब तक चलता है ऐसे hi चलने देते हैं. भाई को ये सुख देते रहेंगे अपने तरीके से hi चाहे.

उसके बाद दो दिन तक मेहुल को मौका नहीं मिल सका रोहन के पास जाने का. वो दरअसल रूही के दो आखरी पेपर रह गए थे, सो वो देर तक तयारी करती रहती थी. ये टर्मिनल एग्जाम थे. हालाँकि इतने इम्पोर्टेन्ट नहीं थे पर फिर भी रूही पढाई को बहुत hi सीरियसली लेती थी.

पर यहाँ देखा जाये तो शायद रूही जानबूझकर ऐसा कर रही थी. वो उन दोनों को अलग रखने की कोशिश कर रही थी. उसके अंदर जलन सी थी जो उसको ऐसा करने पर मजबूर कर रही थी. ऐसा नहीं था के उसके पेपर नहीं थे. पर पहले भी तो वो दिन में तयारी कर लेती थी. अभी क्यों उसे रात में hi तयारी की सूझी.

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रोहन क्यूंकि रूही के साथ दो दिन के लिए बहार जा रही थी और मेहुल इन दो दिनों में अपने भाई से नहीं मिल सकती थी तो उसके अंदर एक तड़प सी जाएगी. जब रूही तैयार हो रही थी तो मेहुल अपने भाई के कमरे में आ गयी. उसे पता था रूही तो तैयार होने में में दो घंटे लगाएगी और उसका भाई 15 मिनट में तैयार होने वालों में से है.

दरवाजा खुला hi था और रोहन बड़ी hi बेबाकी से अपने ऊपर चद्दर ओढ़कर सो रहा था. मेहुल अच्छे से जानती थी के रोहन बिलकुल नंगा होगा या ज्यादा से ज्यादा उसने अंडरवियर पहना होगा. सो उसने चद्दर उठाई और वो रोहन के साथ उसमे घुस गयी. वो तड़प रही थी अपने भाई के लिए क्यूंकि कुछ दिनों से वो उसे मिल नहीं पा रही थी रूही की वजह से.

घुसते hi उसने रोहन को जफ्फी दाल के उसके होंठों पर होंठ रख दिए. रोहन कसमसा गया नींद में उसे लगा ये सब सपने में हो रहा है वो budbudaya…didi तुम तो मेरे सपने में भी यही सब करती रहती हो. बहुत कमाल की हो.

मेहुल ने अपना एक हाथ जब उसके निचे की और पहुँचाया तो उसने पाया वो सच में नंगा hi था उसने उसका लुंड पकड़ लिया जो लगभग खड़ा hi था, एक तो मॉर्निंग बौनेर और दुसरे बहिन का स्पर्श. अब जब मेहुल ने हिलना शुरू किया और दुसरे अपनी गुलाबी पंखड़ियों से रोहन के होंठों को चूसते हुए अपना रसपान करना शुरू किया तो रोहन की आंख खुल hi गयी और उसने चौंकते हुए bola…didi आप सुबह सुबह यहाँ?

मेहुल कातिल मुस्कान के साथ boli…ruhi जाने के लिए तैयार हो रही थी सोचा इस समय का फायदा उठा लिया जाए. रोहन मुस्कुरा दिया और जब उसे महसूस हुआ के उसकी बहिन का हाथ उसके लुंड पर है तो उसने bola….didi हाथ से नहीं मुँह se…please चुसो न इसे.

अब उसके लुंड के मुँह को खून लग चूका था. पर मेहुल उसे तड़पाते हुए boli…wo सब बेशर्मियन तुम्हे अच्छे से बांधने के बाद hi हो सकती हैं. अभी जितना सुख मिल रहा है न उसी में राजी हो जाओ बस.

रोहन बेचारा क्या करता. उसने जब मेहुल के निचे की और हाथ बढ़ाये तो पाया के वो स्कर्ट पहने हुए थी. रोहन ने उसकी स्कर्ट को थोड़ा ऊपर किया और जब उसका हाथ उसकी छूट पर गया तो उसने पाया के मेहुल ने निचे पंतय नहीं पहनी थी. रोहन की मुस्कराहट दुगुनी हो गयी ये देखकर उसने अचानकर झटका सा दिया मेहुल को उसे निचे लिया और खुद ऊपर आकर अपने लुंड को उसकी टांगों के बीचो बीच ले गया.

मेहुल लाख बोलती rahi….nahi भैया ऐसा नहीं करना. देखो मैंने मन किया है न बिना परमिशन के कुछ भी करने se….ab तक तो रोहन का लुंड उसकी छूट से टकरा चूका tha…wo हालाँकि बहुत एन्जॉय कर रही थी और पूरे उन्माद में आ चुकी थी पर फिर भी ना जाने क्या था उसके मन में कुछ हद तक भाई बहिन का रिश्ता अभी भी हव्य था उस par…wo boli…bhai मेरी बात नहीं मानोगे तो चली जाउंगी और फिर कभी नहीं आउंगी.

रोहन मुस्कुरा कर bola…chinta मत करो मेरी बहना मैं कोई अंदर नहीं दाल रहा हूँ बस रगड़ रहा हूँ उस पर. अब जब इतना कुछ हो चूका है हम दोनों में तो ये भी हो सकता है न. मैं ऊपर ऊपर से मज़े लूंगा और दूंगा. तुम थोड़ा सा सहयोग दो मेराफिर देखना दोनों कैसे मज़े लेते हैं.

मेहुल को ये बात शायद समझ में आ गयी उसकी छटपटाहट सी बंद हो गयी और वो ढीली सी होकर निचे चल रही लुंड और छूट की गतिविधियों को महसूस करके हवस में डूब गयी. ऊपर से रोहन ने उसके रसभरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को दबाने लगा. मेहुल इस तिहरे प्रहार को झेल नहीं पायी और झाड़ गयी. उसके अंदर उत्तेजना hi बहुत ज्यादा भर चुकी थी.

रोहन ने अपने लुंड की स्किन पर गर्म गर्म माल को महसूस किया. रोहन मुस्कुरा कर bola…didi आप तो झाड़ चुकी ho…mehul ने शर्मीली मुस्कान के साथ अपनी गर्दन एक और गिराते हुए धीरे से kaha...haan भाई.

कुछ देर बाद रोहन का भी झाड़ गया. आज इन्होने एक अलग hi आनंद को महसूस किया था. जिसकी आते हुए मेहुल ने कल्पना भी नहीं की थी. चद्दर उन दोनों के ऊपर hi थी. मेहुल boli…bhai कभी भी कोई काम मेरी मर्जी के बिना न करना और हाँ अंदर से ढककर कोई बात नहीं पर मैंने तुम्हे अपना नंगा शरीर नहीं दिखाना.

रोहन मेहुल के होंठों को हलके से चूमते हुए bola….main अपनी दीदी की मर्जी के बिना कुछ नहीं करूँगा. रोहन बैठा था और चद्दर वैसे hi ोधी हुई थी.

मेहुल उसकी गॉड में बैठ गयी उसकी और मुँह करके. निचे अभी भी नंगे लुंड और छूट टकरा रहे थे. मेहुल ने फिर से अपने भाई को एक जोरदार किश दी रोहन का लुंड फिर से खड़ा होने लगा था. मेहुल हँसते हुए boli…bhai इसे खड़े होने के सिवाय और कोई काम नहीं है क्या. वो उसके ऊपर से उठ गयी और जाते जाते boli…apne हाथ से कर लो अब बाथ रूम में जाकर. इससे ज्यादा नहीं मिलेगा कुछ समझे.

रोहन धीरे से हँसते हुए bola…jhalli दीदी.

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रूही और रोहन को आज रूही के दोस्तों के साथ खंडाला जाना था. रूही के इलावा उसकी दोस्त दीक्षा, रूचि और अब एक और लड़की तैयार हो गयी थी उसका नाम वाणी था, वो उन दो लड़को में से एक नमन की गफ थी, उसके इलावा एक और लड़का प्रथम था इनके साथ.

सब लोगों ने डीडे किया था बाइक्स पर hi चलना है. हम लोगों (मैंने रूही और दीक्षा) ने तो पहले भी ट्रिप्ली मारी है. इस बार भी हम लोग ट्रिपल hi जा रहे थे. वाणी और नमन एक बाइक पर थे, प्रथम और रूचि एक बाइक पर.

नमन ने अचानक आज सुबह सुबह hi डिक्लेअर कर दिया था के उसकी गफ वाणी भी साथ जा रही है. किसी को भला क्या प्रॉब्लम होती जब रूही अपने भाई यानि रोहन को ले जा सख्त थी तो ये भी तो ले जा सकता था अपनी गर्ल फ्रेंड को. वैसे रूही के दोस्तों में नमन एक ऐसा शख्स था जो के इनसे ज्यादा खुला नहीं हुआ था. उसके बारे में किसी को ज्यादा पता नहीं था. उसकी गफ वाणी देखने में hi उससे उम्र में ज्यादा लग रही थी. पता चला दोनों एडल्ट hi हैं.

प्रथम और रूचि दो साल से रिलेशनशिप में थे. वैसे अभी वो दोनों एडल्ट हो चुके थे. और देखने में hi पता चल रहा था के उनकी फिजिकल बॉन्डिंग बहुत मजबूत है क्यूंकि रूचि प्रथम से चिपक कर बैठी थी.

तो जनाब कहा जाये तो हम तीनो hi ऐसे थे जो कपल्स नै थे. वैसे तो दीक्षा के साथ मेरा सेक्सुअल एनकाउंटर हो चूका था पर वो सामयिक hi था अभी हमने एक दुसरे से रिलेशनशिप की एक्सपेक्टाइव नहीं की थी.

रास्ते में नमन ने हम तीनो को एक साथ एक hi बाइक पर बैठे देखा तो हमें छेड़ते हुए bola…bhai आपके तो मज़े हैं, हमारे पास तो एक hi गर्ल फ्रेंड है और आपके पास तो दो दो हैं.

रूही का दिल सा धड़क गया खुद को अपने भाई की गर्ल फ्रेंड सुनते हुए पर दीक्षा बोल padi…kya बोल रहे हो नमन. रूही रोहन की बहिन है. वो सोच रही थी के उसके ऐसा कहने पर कहीं रोहन नाराज़ न हो जाये पर रोहन तो नार्मल था वो तो कब से अपने बहनो को गर्ल फ्रेंड की तरह छोड़ना चाहता था.

नमन bola…oh के ों दीक्षा मैं सिर्फ मज़ाक कर रहा था. तुम तो सीरियस हो गई.

दीक्षा फिर से उसी टोन mein…chalo कोई नहीं नमन एक बार तो बोल दिया पर दूसरी बार ध्यान रखना कुछ भी बोलते वक्त के ये दोनों भाई बहिन हैं.

अबकी बार प्रथम bola…wo तो हम समझ रहे हैं दीक्षा पर जब रूही के भाई आये हैं साथ में तो उन्हें थोड़ा लिबरल बनकर रहना होगा. क्यूंकि हम दोनों अपनी गर्ल फ्रेंड्स के साथ आये हैं. और तुम्हे तो पता hi है हम सब मौज मस्ती करने आये हैं तो कपल्स की मौज मस्ती थोड़ी ज्यादा होती है न.

रोहन जो अब तक चुप था बोल pada….arey तुम लोग चिंता न करो यार. मैं वैसा नहीं हूँ जो छोटी छोटी बात पर खींच खींच करूँ. ये तुम लोगों पर निर्भर है के तुम लोग किस लेवल पर कुछ करना चाहते हो, मेरी तरफ से तो तुम्हे खुली छूट है अगर तुम लोग कम्फर्टेबले हो तो वहां पौंछकर ओपन में hi कर लेना चाहे. मैं रूही का भाई hi नहीं दोस्त भी हूँ.

मेरी बात सुनकर नमन, प्रथम, रूचि और वाणी तो हैरान हुए hi इधर दीक्षा भी हैरान रह गयी. उसके मुँह पर हाथ अपने आप चला गया. एक शख्स था जो इस बात से हैरान नहीं हुआ था बल्कि खुश हुआ था. वो थी रूही वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

वैसे मेरे ऐसा बोलने का कुछ तो असर हुआ वो दोनों अब खुल से गए थे अपनी गफ्स के साथ. पीछे मुद मुद कर बार बार उनके होंठों पर किश कर रहे थे.

वहां पहुंचकर हमने तीन रूम लिए. मैंने उन सबसे बोलै के हम तीनो यानि मैं रूही और दीक्षा एक hi रूम में रहेंगे तो वाणी जो ज्यादा hi टेंशन लेती थी बातों की boli…diksha तुम्हे अगर परेशानी हो तो हम एक और रूम ले लेते हैं.

दीक्षा मुस्कुराते हुए boli…mujhe कोई टेंशन नहीं है वाणी. हम तीनो एक साथ बड़े मज़े से रहेंगे.

नमन मन hi मन budbudaya…kahin थ्रीसम तो नहीं करोगे. रूचि ने सुन लिया था उसने नमन के कंधे पर थप्पड़ मारा. दीक्षा को लगा उसने कुछ तो गलत bola….kya बोलै नमन तुमने.

नमन शैतानी मुस्कान के saath….tere कान बज रहे हैं दीक्षा मैंने तो कुछ नहीं बोलै, क्यों रूचि मैंने बोलै कुछ क्या?

रूचि खीझकर boli…mujhe क्या पता कुछ बोलै के नहीं तुमने. उसे बुरा लगा था वो थ्रीसम बोलकर उसकी बहिन को भी बीच में इन्वॉल्व कर रहा था. जबकि रोहन तो सच में सोच रहा था काश ऐसा हो जाये. पर उसे इस बात का अच्छे से पता था के उसकी बहिन चाहे एक हफ्ता hi काम हो पर अठारह से काम थी अभी.

यहाँ दीक्षा ने एक बात सभी के सामने बोलकर सबको चौंका diya…waise आप लोगों की इनफार्मेशन के लिए बोल दूँ, मैंने और रोहन ने किश किया है हाँ ये बात अलग है के हमने खुद को कपल डिक्लेअर नहीं किया.

ये सुनकर दोनों जोड़े चौंक गए और फिर ये बोलकर दीक्षा ने रूही की और देखा तो वो boli…mujhe पता है दीक्षा सब कुछ पता है. तुम्हे बताया तो भाई ने के हम भाई बहिन के साथ साथ दोस्त भी हैं. हम दोनों एक दुसरे से कुछ नहीं छुपाते.

वो चरों के चेहरे से लग रहा था के उन्होंने रूही की बात को अप्प्रेसियते किया है.

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रोहन की छूट का उन दोनों कपल्स ने खूब फायदा उठाया. होटल एक वीराने से इलाके में था. जहाँ शायद कपल्स hi आते होंगे. उसके बगल में hi बहुत बड़ा ग्राउंड था. सभी लोग उस ग्राउंड में चले गए वहां जगह जगह पर बेंच लगे हुए थे. जहाँ पहले से कुछ कपल्स बैठे प्यार की खुमारी में अपने हिसाब से जितना कुछ ओपन में हो सकता है कर रहे थे.

इन दोनों जोड़ों और इन तीनो को भी तीन बेंच मिल गए और ये बैठ गए. उन दोनों ने अपनी अपनी गफ को किश करना शुरू कर दिया. रूही दीक्षा को देखकर मुस्कुराते हुए boli…tum दोनों मेरी वजह से शरमाना मत चोंच लड़नी है तो लड़ा लो.

शायद हम दोनों उसके कहने का hi इंतज़ार कर रहे the…ham दोनों भी खूब पशनातेली एक दुसरे को किश करने लगे. दिसखा भी जैसे तैयार hi बैठ थी उसने रोहन के सर के पीछे हाथ रखे और रोहन के हाथ दीक्षा की पीठ को सेहला रहे थे. तीनो कपल्स में इन दोनों किश सबसे ज्यादा परफेक्ट थी.



रूही मुस्कुराते हुए उन दोनों की इस पैशनेट किश को देख रही थी और उसका खुद का मन कर रहा था अपने भाई के साथ किश करने को. बल्कि उसकी तो छूट में भी खुजली उठ रही थी. वैसे उसे इस बात का अच्छे से पता था के उसका भाई उसके अठारह का होने से पहले कभी नहीं मानेगा.
 
दोस्तों एक बार फिर से आ गया है आपका दोस्त एक नया अपडेट लेकर. मुझे उम्मीद है आपको पसंद आएगा. अब जब रोहन के पापा मम्मी की 25वि और रूही का अठारहवा बर्थडे आ रहा है तो आपको आने वाले कुछ उपदटेस में ऐसा मज़ा आएगा के आप लोगों के हाथ अपने लुंड और छूटों पर HI रहेंगे. पर मैं चाहता हूँ उन हाथों को चाँद सेकण्ड्स के लिए अपने प्राइवेट पार्ट्स से हटा कर कमैंट्स भी लिखते रहना. अभी भी मुझे इतना बड़ा अपडेट लिखने के बावजूद भी ज्यादा कमैंट्स नहीं मिले. प्लीज ऐसा ज़ुल्म न किया करो. मुझे आपके कमेंट्स और लाइक्स से हौसला मिलता है. हज़ारों लोग पढ़ते हैं और बिना रिएक्शन दिए निकल जाते हैं. मैं आपसे कोई पैसा नहीं मांग रहा, भगवन का दिया बहुत कुछ है, बस आपकी प्रतिक्रिया मांग रहा हूँ. वो जरूर दिज्जिए दोस्तों एक लेखक की रचना तभी सफल होती है जब आप लोग उस रचना के बारे में कुछ बोलते हो.
 
Part 50रोहन दीक्षा की आँखों में ऑंखें डालकर उसे किश कर रहा था. दीक्षा इन पलों का पूरा लुत्फ़ उठा रही थी. उसकी जीभ अब रोहन के मुँह में थी जिसे वो पूरी शिद्दत से चूस रहा था. दीक्षा की पीठ पर हाथ फेरते हुए जब रोहन के हाथ दीक्षा की ब्रा की स्ट्रिप से टकराये तो उसके लुंड ने एक झटका मारा.

रोहन उत्तेजित हो चूका था. उसका मन कर रहा था के वो दीक्षा को पकड़कर छोड़ दे. पुणे में उसने चाहे जितने भी मज़े ले लिए थे पर यहाँ वापिस आने के बाद उसे मेहुल हो या दीक्षा दोनों ने hi और किसी चीज से चाहे मन ना किया हो पर चुदाई से मन कर दिया था और उसने नहीं पता था के एक लड़की उससे छोड़ना चाहती है और उसके बगल में hi बैठी है.

रोहन ने जितना मिल रहा था उतने के hi मज़े लेने की सोची. के ज्यादा की इच्छा से जो मिल रहा है वो भी नहीं मिलेगा. इसलिए वो उसके साथ किश में खो गया. रूही तड़प रही थी अपने सभी के साथ संपर्क के लिए. कैसे भी करके उसका टच मिले. हालाँकि रोहन की पीठ थी और उसकी एक बाजु से टच हो रही थी पर उसे पता नहीं कहाँ उसका टच चाहिए था.

तीनो थोड़ी देर अपने अपने पार्टनर से किश करते रहे, रोहन किश करते हुए दीक्षा की ब्रा की स्ट्रिप से छेड़ छड़ कर रहा था तो वहीँ नमन ने वाणी की टीशर्ट में पीछे से हाथ डेल हुए थे और वो उसकी नंगी पीठ पर हाथ फेर रहा था, पर इधर प्रथम ने तो हद hi कर दी thi…usne किश करते हुए अपना हाथ रूचि की जीन्स के बीचो बीच यानि उसकी छूट पर टिकाया हुआ था और वो उसके मज़े ले रहा था.

ये लोग अपने अपने हिसाब से मज़े ले रहे थे, इतने में एक होटल की सिक्योरिटी वाला आया और बोलै, बचो आप लोग किश से थोड़ा आगे बढ़ रहे हो, जो भी करना है अपने रूम में जाकर करो, यहाँ एक हद तक hi अल्लोवेद है, वैसे भी तुम लोग काम उम्र के बचे लग रहे हो. हाँ ये साहिब जरूर एडल्ट लग रहे हैं, उसने रोहन की और इशारा करते हुए बोलै.

नमन bola…apko आधार कार्ड तो सबमिट किया है सबका. हम सब एडल्ट हैं. वो रूही का भी छुपा गया क्यूंकि वैसे उसका भी तो 18 के नजदीक hi था.

सिक्योरिटी wala…are बाबा मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है, अगर पुलिस आ गयी तो सबको अंदर कर देगी आप लोगों की हरकतें देखकर.

सब लोग खड़े हो गए थे और होटल में अपने अपने रूम की और जाने लगे. सिक्योरिटी वाला पीछे से आवाज़ देकर bola…ek मिनट रुकिए.

Bola…mujhe पता है सब लोग जो यहाँ घूमने आते हैं उनकी कुछ इच्छाएं होती हैं. जैसे के बहार प्यार karna…wo सिक्योरिटी वाला इतना बोल्डली बोल रहा था के लड़कियां शर्मा गयी तो प्रथम बोलै.

Pratham…arey यार ये क्या बात कर रहे हो आप अंकल. स्पष्ट बोलो न क्या कहना चाहते हो.

सिक्योरिटी…. तो सुनिए. बात ये है के अगर तुम लोग ऐसे ओपन में अपनी इच्छाओं की पूर्ति करना चाहते हो तो होटल वालों ने उसका भी अरेंजमेंट कर रखा है. यहाँ से कोई एक किलोमीटर दूर जंगल से होते हुए नदी के किनारे एक फार्म हाउस बना हुआ है जो होटल के मालिकों का hi है. वहां पर आप जो चाहो मनमर्जी का कर सकते हो. आप लोगों को अपने हिसाब से दूरी रखनी पड़ेगी. मतलब ये हमारी और से कोई नियम नहीं है पर मुझे पता है आप लोग ऐसे रखोगे hi. पर इसकी फीस है.

रोहन ….कितनी फीस है?

Security…sahib एक कपल का 2000/- है.

Naman….arey ये तो बहुत ज्यादा है.

Rohan…beta अगर घूमने आना है तो या तो पैसा देख लो या फिर घूम hi लो.

Pratham…mujhe तो कोई दिक्कत नहीं है.

Naman….to फिर मुझे भी क्या दिक्कत होगी भला. मैं भी रेडी हूँ.

पर फिर रोहन कुछ सोचते हुए bola….uncle दरअसल हम तीन लोग हैं और आप लोग कपल का 2000/- चार्ज करते हो.

उसकी बात पर सिक्योरिटी थोड़ा अजीब से ढंग से मुस्कुराते हुए bola…koi बात नहीं साहिब आप वाले कपल में मैं तीन लोगों को एडजस्ट करवा दूंगा.

Rohan…waise वहां जायेंगे कैसे. जंगल में कोई जानवर मिल सकता है.

Naman…good क्वेश्चन.

सिक्योरिटी…. ये समझदार हैं क्यूंकि इनकी उम्र सही है यहाँ आने के लिए. फिर रोहन को देखकर bola…waise तो इस एरिया में कोई खतरनाक जानवर नहीं है फिर भी हमारी गाड़ी आप लोगों को छोड़कर आएगी और जब भी आप लोग वापिस आना चाहोगे तो आपको एक फ़ोन करना है, वही गाड़ी आपको लेने आ जाएगी.

फिर वो आगे बोलता hai…iske इलावा आप लोग अगर यहाँ से खाना ले जाना चाहे तो आपकी इच्छा वर्ण 500/- पैर हेड के हिसाब से दो टाइम का खाना आपको मिलेगा.

Rohan…ye तो और भी अच्छी बात बताई आपने. वहां अगर ज्यादा टाइम स्पेंड करना पद गया तो खाने की भी टेंशन नहीं रहेगी. आप लोग हमारा तो इंतज़ार कर दो, फिर नमन और प्रथम की और देखकर bola…aap लोग भी बता दो आपने क्या डीडे किया है.

Pratham…oye सदी तो हाँ है ji….hanste हुए बोलै और रूचि को चुम लिया.

नमन भी उसी टोन में हँसते हुए bola…oye फिर तो सदी भी हाँ hai…vani के कमर में हाथ डालकर उसे किश कर लेता है.

Rohan…to ठीक है आप इंतज़ाम करो हमारे वहां पर जाने का.

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कोई चार पांच एकड़ में बसा ये फार्महाउस जंगल में मंगल कर रहा था क्यूंकि इसे कुछ ऐसे डिज़ाइन किया गया था के दो दो बीघे को पेड़ों की दीवारों से अलग किया हुआ था. और दो बीघे में दो कपल्स के लिए बहुत अच्छे से अरेंजमेंट हो सकता था.

उन दो बीघे में भी तीन चार पार्टिशन्स पेड़ों से कर राखी थी यानि अगर लोग ज्यादा हों तो दो बीघे में चार कपल्स भी एडजस्ट हो सकते थे.

इस तरह दो दो बीघे की कोई 12-13 पार्टिशन्स थी और हरेक में चार पार्टिशन्स थी. उन तीनो कपल्स को दो बीघे की एक hi पार्टीशन में अलॉटमेंट दी गयी क्यूंकि इन सबकी यही इच्छा थी के पास पास hi रहें. और फिर जब हमाम में सभी नंगे थे तो फिर किसको किस्से शर्म.

दो बीघे की जो चार पार्टिशन्स थी उनमे कुछ इस तरह इंतज़ाम था के एक रूम था, चाहे छोटा था पर फुल्ली फर्निश्ड था, साथ में अटैच्ड बाथरूम, बड़ा सा एक लॉन जिसमे हर दिशा में बेंच रखे हुए थे. जिन पर कपल्स एन्जॉय भी कर सकते थे.

पेड़ों के बीच में झाड़ियां भी थी जो दीवारों का काम करती थी. अभी रोहन रूही और दीक्षा एक बेंच पर बैठे hi थे के झाड़ियों के दूसरी तरफ से आवाज़ें भी आणि शुरू हो गयी. ये नमन और वाणी की थी.

वाणी शर्मीली सी हंसी हंस रही thi…arey छोडो न नमन कोई देख लेगा.

Naman…koi नहीं देखेगा. देखो ना बीच में झाड़ियां हैं. और फिर वो लोग भी तो लगे होंगे अपने कार्यक्रम में. नमन हँसते हुए बोलै.

ये लोग मुस्कुरा रहे थे उनकी बातें सुनकर.

वाणी boli…arey उसके साथ उसकी बहिन भी है. हो सकता है उन लोगों का कार्यक्रम ना हो पाए.

Naman…aisa हो hi नहीं सकता. रोहन सबसे ज्यादा शिद्दत के साथ लगा हुआ था दीक्षा को किश करने. अब तक तो उसने उसे नंगा करके घास पर लेता भी दिया होगा. तुम्ही नखरे कर रही हो और दूसरी बात, मुझे तो शक है रोहन और रूही में भी कुछ तो है. जो रोहन इस तरह से उसके सामने hi किश करने को लगा हुआ था.

नमन की ये बात सुनकर दीक्षा और रोहन दोनों ने रूही की और देखा जो बिलकुल नार्मल दिख रही थी. दीक्षा boli….arey वो नमन तो पागल है. तुम्हे तो पता hi है उसका. तभी तो सबसे गलियां खता है.

रूही मुस्कुराते हुए boli…arey मैं कौन सा उसकी बातों का बुरा मान रही हूँ. उसको बोलने de….jabke मन में रूही यही सोच रही थी के अगर वैसा कुछ हो जैसा नमन बोल रहा है तो कितना मज़ा आ जाये.

अब नमन के ऐसा बोलने के बाद जो वाणी बोली, उसको सुनकर ये तीनो हैरान रह गए. वाणी boli…wo तुम्हारी तरह बहिन छोड़ नहीं है साले. अपनी hi बहिन को छोड़ते रहते हो. तीनो तो हक्के बक्के रह गए वाणी की बात को सुनकर.

नमन हँसते हुए bola…to दीदी तुम्हे मज़ा नहीं आता भाई से छोड़ने पर? देखो कैसे टंगे उठा उठा कर देती हो अपनी छूट और मेरा लोढ़ा कैसे मुँह में लेकर मस्त चुस्ती हो. और हाँ एक और बात, हमें ये बातें इतनी ऊँची आवाज़ में नहीं करनी चाहिए. किसी को सुन गया तो?

वाणी बोली हाँ तुम सही बोल रहे ho…aur आह्हः साले बहनचोद एक झटके में hi अंदर दाल दिया. सब्र नाम की तो तुम्हारे अंदर कोई चीज hi नहीं है साले. आह धीरे, मुझे भी मज़े लेने दे न भाई. मुम्मे चूस मेरे. हाँ बिलकुल ऐसे hi.

ये तीनो मस्त होकर उनकी बातें सुन रहे थे. दीक्षा रूही के सामने कम्फर्टेबले नहीं हो पा रही थी तो रूही वहां से उठकर अंदर जाने लगी bolkar…ke मैं थोड़ी देर आराम कर लेती हूँ. पर दीक्षा boli…agar तू अंदर गयी तो तीनो अंदर जायेंगे.

Ruhi…nahi यार तुम लोग मेरे सामने कम्फर्टेबले नहीं फील कर रहे हो.

Rohan….tum यहीं बैठो ना रूही. जरुरी तो नहीं हम लोग कुछ करें. बैठ कर बातें करते हैं ना. जरुरी तो नहीं वही कुछ ho.mausam का आनंद लेते हैं. क्यों दीक्षा.

दीक्षा का अंदर से तो मन था के वो कुछ करे रोहन के साथ. पर उसे रूही पर भी तरस आ रहा था. Boli…rohan आप सही कह रहे हो. जरुरी नहीं वही सब हो. देखो ना मौसम कितना अच्छा है. लग रहा है अभी बारिश शुरू हो जाएगी.

रूही…. उन दोनों को डांटते hue…oye मुझ पर रेहम करने की कोई जरुरत नहीं हो. तुम लोग कपल नहीं हो पर मुझे पता है तुम लोग बहुत कुछ कर चुके हो. दोनों रजामंदी से जो मर्जी कर लो, मैं तुम दोनों के बीच में कबाब हड्डी नहीं बनना चाहती इसलिए अंदर जा रही हूँ के तुम लोगों का मज़ा क्यों ख़राब करूँ.

Rohan…chal फिर यहीं बैठ अगर तुम्हे दिक्कत न हो तो. तू दूसरी तरफ मुँह करके बैठ जा.

Ruhi…hanste hue…aur अगर मैं ये ब्लू फिल्म देखना चहुँ.

Rohan…tumhe अपने भाई को ऐसा करते देखकर शर्म तो नहीं आएगी?

Ruhi…dekhna hi तो है न. कुछ करना थोड़े है.

Diksha…ruhi की और dekhkar…tumhe वाकई कोई दिक्कत नहीं होगी. रूही न में गर्दन hilakar…bilkul भी नहीं.

दीक्षा रोहन की और देखकर हँसते hue…to फिर लग जाओ अपने काम पर. रोहन हँसते हुए दीक्षा को अपनी बाँहों में भर लेता है. उससे थोड़ी बहुत किश करने के बाद वो उसके शरीर को चूमने लगता है. दीक्षा पूरी मस्त हो चुकी थी.

सबसे पहले उसी ने शुरुआत करके रोहन के सारे कपडे उतर दिए थे. रोहन का लुंड लगभग खड़ा हो चूका था. दीक्षा का हाथ लगते hi उसने एक झटका मारा. रोहन ने अपने लुंड के ऐसा करने के बाद रूही की और देखा जो बड़ी hi हसरत भरी निगाह से सामने बैठी उसके लुंड को देख रही थी. दीक्षा की पीठ थी उस और क्यूंकि वो रोहन के लुंड को मुँह में ले चुकी थी. उसको ऐसा करते देख रूही का हाथ अपने आप hi उसकी छूट पर चला गया. वो भाई की परवाह किये बिना अपनी छूट को सहलाने लगी.

रोहन को दीक्षा की सकिंग से इतना आनंद नहीं आ रहा था जितना रूही की हसरत भरी नज़रों से और जितना उसकी मास्टरबेट करते हुए देखने से आ रहा था. पर हाँ दीक्षा का सॉफ्ट और हॉट टच उसे बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रहा था. ऐसी hi उत्तेजना का परवाह दीक्षा के अंदर भी हो चूका था और वो बहुत hi तेजी के साथ सकिंग करने लगी.

कुछ देर बाद रोहन ने hi उसे bola…muh में hi पूरा माल उगलवाना है क्या? उठो और कपडे उतरो. आज तुम्हारी नाथ उतरवाई करते हैं. उस दिन तो तुमने मन कर दिया था. आज तो तुम्हे अपनी छूट मुझे देनी hi होगी.

पता नहीं क्या जादू था रोहन की बातों में के दीक्षा यंत्रवत उठी और अपने कपडे उतरने लगी. उसने मुड़कर रूही की और देखा जिसका हाथ अपनी छूट पर था. वो उसे देखकर मुस्कुराई और बोली चाहो तो कपडे उतर कर कर लो ये.



रूही ने रोहन की और देखा तो उसने अपनी सहमति में गर्दन हिला दी. इतने में इन लोगों को एक जोरदार चीख सुनाई di….haye रे मार डाला कमीने ने. छूट hi फाड़ डाली मेरी तो. कोई बचाओ रे मुझे. ये रूचि की आवाज़ थी. हम लोग उस और भागे जिस और प्रथम और रूचि थे.
 
दोस्तों मैंने 50 कमैंट्स मांगे थे और आये हैं सिर्फ 10 ये वो लोग हैं जो रेगुलरली कमेंट करते हैं. इनके इलावा दो चार लोग और हैं जो कमैंट्स करते हैं. मैं इन सभी का तहे दिल से शुक्रिया ऐडा करता हूँ. पर हजारों लोग पढ़ते हैं और ऐसे HI निकल जाते हैं. उन्हें जरा भी एहसास नहीं होता के कोई लिखने में कितनी म्हणत और दिमाग खर्च करता है.
 
Part 51उस साइड जाकर पता चला के प्रथम जोरदार ढंग से रूचि की चुदाई करने में लगा हुआ था. उनकी बातों से hi लग रहा था के इन दोनों की hi पहली चुदाई है. रूही भी इनके साथ hi कड़ी थी. अब क्या शर्म आणि थी उसे जब भाई को अपनी सहेली के साथ चुदाई करते देख रही थी तो एक चुदाई और सही. तीनो के चेहरे पर स्माइल थी जो उन दोनों की बातों को सुनकर आयी थी.

प्रथम बोल रहा tha….tum चीखें मार रही हो रूचि यहाँ तो मेरा लुंड फटने को आ गया है. सेल के टांके उधड़ गए हैं.

रूचि….. अरे बहनचोद तुम्हारे लुंड का क्या बिगड़ रहा है भला. मेरी छूट देखो, लहू लुहान कर दिया है तूने.

प्रथम ने एक और जोरदार धक्का मारा जोश जोश में तो रूचि boli….haye मादरचोद मार डाला तूने सेल कमीने गश्ती की औलाद. क्या करते हो.

Pratham…saali तुझे मज़ा भी आ रहा है और बोल रही हो मार डाला. अंदर जो ये मूसल फिर रहा है अच्छा नहीं लग रहा क्या तुझे?

Ruchi…haye अच्छा तो बहुत लग रहा है. पर जो तू जोरदार धक्के मार रहा है न, उससे मेरी छूट लीर लीर हो जाएगी फटके.

Pratham…ab जो होना था वो हो गया. अब और दर्द नहीं होगा मेरी जान. अब तो मज़े हैं बस.

दीक्षा जो के रोहन को उनकी बातों में मस्त हुआ देख रही थी boli…ab ऐसे hi दूसरों की चुदाई देखनी है या खुद भी कुछ करना कराना है. रूही हँसते हुए boli…diksha तुम्हे बहुत जल्दी है अपनी सील तुड़वाने की.

दीक्षा हँसते hue…man तो तेरा भी बहुत है लड़ो रानी. पर तुझे चुदाई का लाइसेंस मिलने में अभी कुछ दिन बाकी हैं. नहीं तो तुम दोनों भी नमन और वाणी की तरह चोदम चुदाई वाला खेल खेल रहे होते. रूही ने जब उसे ऑंखें दिखाई तो दीक्षा boli…ye ड्रामा छोडो मुझे सब पता है तुम्हारे मन में क्या है क्या nahi…aur हंसने लगती है. वो हंस hi रही थी के रोहन ने पकड़कर उसे वहीँ घर पर hi पटक दिया.

दोनों एकदम नंगे थे. वो उसके दोनों दुद्धूओं को बरी बरी से पीने लगा. दीक्षा आह आह की आवाज़ें निकलने लगी. अब वो सब कुछ भूल चुकी थी कौन नमन कौन वाणी, कौन प्रथम कौन रूचि और कौन ruhi…use तो बस अब दो hi नज़र आ रहे थे वो खुद और उसका प्रेमी रोहन. बल्कि उससे भी आगे जाएँ तो उसका ध्यान दो hi चीजों पर था एक प्रथम का लुंड दूर उसकी खुद की छूट पर.

रोहन ने उसके पूरे शरीर पर ताबड़ तोड़ किश करना शुरू कर दिया और उसके दोनों बूब्स को अपने हाथों से निचोड़ने लगा. वो दोनों हालाँकि सख्त थे और खड़े थे पर पूरी तरह से स्पंजी थे. रोहन को मज़ा आना hi था उधर दीक्षा को तो जन्नत के नज़ारे नज़र आ रहे थे.

इधर रूही ने अब एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपना हाथ अपनी लोअर में डालकर छूट को सहलाना शुरू कर दिया. उसे मज़ा तो आ रहा था पर उसे उससे कहीं ज्यादा मज़ा चाहिए था.

रोहन के लुंड ने अब उसे माँ बहिन की गलियां देनी शुरू कर di…saale हाथों और मुँह को तो पूरे मज़े दिला रहा है, मुझे क्या सिर्फ घिसने के लिए लाया है. ज्यादा घिसा न तो छूट में जाये बिना hi पानी छोड़ दूंगा.

रोहन अपने लुंड की बात सुनकर घबरा गया और चुदाई की तयारी करने लगा. पर उसे पता था के ये दीक्षा की पहली बार है तो उसकी छूट को पहले तैयार करना पड़ेगा. उसके लिए उसने निचे की और रुख किया और पहले तो उसकी छूट का अवलोकन किया.

क्या छूट थी यार दीक्षा की, एकदम कुंवारी, फूली हुई बीचो बीच एक छोटी सी दरार. इर्द गिर्द हलके हलके से बाल. और पिंकिश कलर में ये इतनी बेहतरीन दिख रही थी के रोहन का मन किया इसे पूरी जबरदस्त चुदाई से फाड़ डेल. पर वो प्रथम की तरह न hi बचा था ना hi नासमझ.

उसने उसकी छूट पर अपना मुँह रख दिया. और पहले तो सूंघने लगा. उसकी प्यारी प्यारी सुगंध ने रोहन को मदहोश कर दिया. रोहन ने बहुत hi हलकी हलकी सी किस्सेस दिसक्षा की छूट पर करनी शुरू कर दी.

दीक्षा की धीमी धीमी सी आहें रोहन के लुंड को हरकत करने पर मजबूर कर रही थी. लुंड अब समझ तो गया था के उसका नंबर आने hi वाला है पर लुंड तो लुंड hi होता है न. उसका दिमाग तो होता नहीं न, तो लगा था रोहन को प्रोवोके करने.

रोहन छूट के चरों तरफ किश करने लगा, दीक्षा बंद आँखों से उन हसीं पलों को महसूस करने लगी जो पूरी ज़िन्दगी के लिए उसके मानस पटल पर दर्ज होने वाले थे. आज के बाद उसने कुंवारी नहीं रहना था. जब रोहन ने उसे बोलै था के आज वो चुदाई करके hi रहेगा तो दीक्षा की मौन स्वीकृति उसे मिल गयी थी.

रोहन ने छूट को चूमते हुए अपनी एक ऊँगली उस महीन दरार में डाली तो ऊँगली भी रास्ता बना पाने में असमर्थ लगी. रोहन सोचने laga…saali ऊँगली भी जा नहीं rahi..lund जायेगा तो इसका क्या हाल होगा. फिर सोचा सबके साथ यही तो होता है. इसलिए उसने जोर से ऊँगली दाल दी उसकी छूट mein….diksha के मुँह से एक आह सी निकली.

रूही बेचारी खुद सेहला रही थी अपनी छूट को उसे अभी ये आनंद नहीं मिलने वाला था. उसने सोचा दीक्षा को कितना मज़ा आ रहा होगा उसका भाई उसकी छूट के साथ कैसे खेल रहा है. वो जब उसकी छूट पर किश करता तो रूही को महसूस होता के वो उसकी छूट पर किश कर रहा है. और जब उसने दीक्षा की छूट में ऊँगली डाली तो रूही ने अपनी ऊँगली भी खुद की छूट में डालनी चाही और उसे महसूस हुआ के ये ऊँगली रोहन की है. उसकी तो छूट उसी समय झाड़ गयी. वो रोहन को महसूस करके इतना मस्त हो चुकी थी के ज्यादा सेह नहीं पायी.

रोहन ने ऊँगली के बाद अपनी जीभ दीक्षा की छूट में घुसेड़ दी. दीक्षा ऐसे आहें भर रही थी ाँ ाँ करके जैसे रो रही हो पर ये उत्तेजना की इन्तहा थी अभी के लिए, क्यूंकि उत्तेजना की इन्तहा तो कभी नहीं होती. दीक्षा से जब और बर्दाश्त ना हुआ तो उसने आखिर बोल hi diya…ab तो दाल hi दो rohan….aur यही पुकार उसके लुंड की भी थी.

रोहन ने अब देर न करते हुए अपना प्रेकम से लबाब दीक्षा की छूट पर रख दिया और और उसकी छूट पर पहले धीरे धीरे घिसने laga…diksha की काम से भरी हुई आवाज़ ने उसके लुंड को उसकी गुफा में घुसने को मजबूर कर दिया और हलके से धक्के के साथ रोहन का नाग दीक्षा की छूट की दरार में से घुसता हुआ आगे बढ़ा. जैसे hi ये थोड़ा सा अंदर गया दीक्षा की तो जान hi निकल गयी. उसने अभी उस दिवार को पार नहीं किया था जिसे लड़कियां अपनी जवानी तक संभल कर रखती हैं पर फिर भी उसे असीम दर्द हुआ.

दीक्षा boli…dhire रोहन. रोहन bola…abhi गया कहाँ है. अब थोड़ी देर के लिए खुद को ढीला छोड़ दो नहीं तो चुदाई का आनंद नहीं ले सकोगी. दीक्षा ने ऑंखें बंद कर राखी थी. उसे लग रहा था के अब थोड़ी देर में उसको बहुत तेज दर्द होने वाला है.

उसकी बात जल्द hi सही साबित हो गयी क्यूंकि रोहन के एक जोरदार धक्के ने उस पतली सी दिवार को छेड़ डाला और लुंड उसके कुनुवारेपन को ढहता हुआ आगे बढ़ जाता है अपने असली मिशन पर. उस सॉफ्ट सी गुफा में अंदर तक जीवन का असली आनंद लेने के लिए.

हालाँकि पूजा भी कुंवारी hi थी पर दीक्षा की छूट तो इतनी टाइट थी के उसका लुंड अंदर जा hi नहीं पा रहा था पर उस झिल्ली के फटने से दीक्षा की ऐसी जोरदार चीख निकली के रूही डरकर बेंच से उठकर कड़ी हो गयी. पर रोहन ने दीक्षा के मुँह पर किश स्टार्ट कर दी तो दीक्षा की जो और चीखें निकालनी थी वो उसकी किश में दबकर रह गयी.

रोहन ने सोचा थोड़ी देर तेजी से चुदाई की जाए. वो जोरदार धक्के मरने लगा. रूही एक बार फिर से अपनी छूट सहलाने लगी हुई थी. इस बार तो उसने हद hi कर दी थी अपने लोअर को उसने निचे खिसका दिया था. रोहन का चेहरा उसकी और hi था. आज रूही ने अपने भाई को अपनी प्यारी सी छूट के दर्शन करवा दिए थे.

रोहन की उत्तेजना बढ़ने में इसका बहुत तगड़ा रोले था. रोहन दनादन चुदाई में लगा हुआ था. अब उसका मुँह होंठों से निचे उतारकर दीक्षा की चूचियों पर आ गया था और उसने एक एक करके उसके निप्पल्स को चूसना शुरू कर दिया था. ऐसा नहीं के दीक्षा को दर्द नहीं हो रहा था पर चुदाई के आनंद में वो थोड़ा डाब गया था और वो निचे से अपनी बॉडी को हिलाकर रोहन का साथ देने लगी थी.

रूही ने अपनी मिडिल फिंगर छूट के बीचो बीच रख राखी थी और उससे वो ऊपर निचे करके अपनी छूट को सेहला रही थी और दुसरे हाथ से अपनी चूचियों को बरी बरी से मसल रही थी, इससे वो बेचारी खुद को आनंद दे रही थी.

रोहन का मन तो बहुत था के वो अपनी इस प्यारी सी बहिन को भी खुश कर दे पर अभी उसकी मजबूरी थी वो ऐसा नहीं कर सकता था. लेकिन दीक्षा के साथ भी उसे काम मज़ा नहीं आ रहा था. उसने जल्दबाजी में कंडोम नहीं चढ़ाया था या फिर शायद दीक्षा की पहली चुदाई वो डायरेक्ट hi करना चाहता था. पर इस वजह से दीक्षा और रोहन दोनों hi सेक्स का असली लुत्फ़ उठा रहे थे. दोनों की स्किन जब आपस में घर्षण कर रही थी तो दोनों की उत्तेजना पूरे शिखर पर पहुँच चुकी थी.

दीक्षा तो दो तीन बार झाड़ चुकी होगी इस दौरान और अब बारी थी रोहन की, रोहन उत्तेजना की अधिकता को झेल नहीं पाया और उसने एकदम से उसके अंदर hi पिचकारियां छोड़नी शुरू कर दी और उसके साथ hi साथ दीक्षा ने भी एक और बार अपना पानी छोड़ा. एक मिनट तक तो रोहन अपना कामर्स छोड़ता रहा होगा. दीक्षा की तो सांसें hi फूलने लगी थी.

रोहन भी चुदाई के बाद दीक्षा के बगल में ढेर हो गया. रूही भी जब अपनी चार्म पर पहुँच गयी तो उसका भी पानी निकल गया था. दीक्षा एक तंग रोहन के ऊपर रखकर लेट गयी. सबने अपना अपना पानी निकाल लिया था और अपने अपने हिसाब से आनंद ले लिया था.
 
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