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- Dec 5, 2013
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Part 46मेहुल एकदम घबरा सी गयी थी. उसे अच्छे से समझ आ गयी थी के उसके भाई के शरीर पर एक कपडा भी नहीं है. उसके बाद तो कुछ ऐसा हुआ के मेहुल की हैरानी की कोई सीमा hi न रही. रोहन ने अपने दोनों हाथों से मेहुल को कमर से पकड़ा और उसे अपनी गॉड में बिठा कर उसने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
मेहुल ने पहले भी उसके साथ किश की थी तो किश करने में तो उसे कोई हर्ज नहीं था पर इस वक्त स्थिति कुछ और hi थी. रोहन एकदम नंगा था और उसने उसे गॉड में बिठाया था तो उसका लोहे की तरह सख्त हो चूका लुंड मेहुल की छूट को इस तरह स्पर्श कर रहा था के सलवार पहने होने के बावजूद वो महसूस हो रहा था जैसे डायरेक्ट hi स्पर्श हो रहा हो.
मेहुल की सोचने समझने की शक्ति एक बार तो जा चुकी थी. वो अपने भाई के साथ बहुत कुछ चाहती थी पर उसे ये उम्मीद कटाई नहीं थी के उसका भाई इस तरह का सुप्रिसे देगा उसे. खैर अभी के लिए उसने सोचा के किश का आनंद तो लिया जाये.
रोहन बड़े शिद्दत के साथ उसके होंठों के रास को चूस रहा था और मेहुल खुद उतने hi जूनून के साथ उसके होंठों को चूस रही थी. दोनों पागल प्रेमियों की तरह इस किश में खोये हुए थे. रोहन के लुंड को भी मेहुल की छूट का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था. वो चाहता तो ये था के अपनी बहिन के कपडे निकल के उसकी छूट में hi दाल थे पर वो अपनी किसी भी बेवकूफी की वजह से अपनी प्यारी दीदी को नाराज नहीं करना चाहता था.
मेहुल ने उसे अभी बहुत ज्यादा आगे बढ़ने के लिए उत्साहित नहीं किया था. इसलिए वो भी मज़बूरी बस hi सही अपनी सीमाओं के अंदर था. पर एक बात तो थी उसे इतना मज़ा दूसरी लड़कियों के साथ सेक्स में न आया हो शायद जितना अपनी बहिन के साथ किश और उसके शरीर के स्पर्श से आ रहा था.
बहुत hi सुडौल शरीर था मेहुल का एकदम भरवा. हालाँकि उसे मोती नहीं कहा जा सकता था पर वो स्लिम ट्रिम भी नहीं थी. उसकी गोल मटोल छातियां देखकर किसी के भी मुँह में पानी आ सकता था. इस बात को मेहुल ने कई बार महसूस भी किया था के उसकी छातियों को बहुत ज्यादा घुरा जाता है.
खैर अभी शायद दोनों में से किसी ने ये नहीं सोचा होगा के इस किश के बाद क्या होना है. थोड़ी देर बाद किश टूटी तो मेहुल रोहन से अलग होकर बगल में बैठ गयी और बैठते hi boli…..bhai तूने आज कपडे क्यों नहीं पहने हैं.
रोहन मुस्कुरा कर bola…didi आपको मालूम तो है के मैं ऐसे hi सोता हूँ. बिना कपड़ों के.
मेहुल थोड़ी सीरियस सी आवाज़ में boli….par मेरे आने तक तो कपडे पहने रखता भाई. हम लोग पहले hi काफी आगे बढ़ चुके हैं. थोड़ा लिमिट में hi रहते हैं न.
रोहन ज़िद सी करते हुए bola…par आपने तो ट्रैन में भी मेरी मुठ मार दी थी.
मेहुल को उसकी बचपने से वाली बात पर हंसी आ गयी और वो boli….bhai ट्रैन में बात और थी. कपडा लिया हुआ था और उस वक्त मैं भावनाओ में बह गयी थी.
आज रोहन पता नहीं क्या सोचकर बैठा था. उसका हाथ पकड़कर लुंड पर रखते हुए bola…aaj भी चद्दर है ऊपर दीदी. काम से काम उतना तो कर hi सकती हो आप जितना ट्रैन में किया था.
मेहुल दुविधा में फंस गयी थी. उसने अपना हाथ तो नहीं हटाया उसके लुंड से. पर अभी भी वो दुविधा में थी के जो कर रही है क्या वो सही कर रही है? कहीं रोहन और आगे बढ़ गया और उसकी छूट मरने को हुआ तो क्या वो उसे रोक पायेगी. नहीं उसे अपनी छूट वो हरगिज नहीं मरने देगी. ऊपर ऊपर से इसे मज़े दे देती. पर छूट देने का तो कोई सवाल hi पैदा नहीं होता. मैं इसे किसी लड़की से मिलवा दूंगी. और रिक्वेस्ट करुँगी के वो मेरे प्यारे भाई की इच्छा पूरी कर दे.
मेहुल इस तरह खोयी हुई थी अपने विचारों में और इधर बेचारे रोहन से सब्र hi नहीं हो रहा था. वो दीदी का हाथ पकड़कर हिलाते हुए bola…kis सोच में पद गयी दीदी. हिलाओ न इसे. क्यों तड़पा रही हो अपने प्यारे भाई को.
मेहुल अपने विचारों से बहार आयी और मजनूरी में hi सही उसने अपना हाथ हिलना शुरू कर दिया. हालाँकि मेहुल को उसके लुंड के स्पर्श से असीम सुख महसूस हो रहा था. वो ऑंखें बंद करके उसके लुंड को हिलाये जा रही थी.
इतने में रोहन जो बगल में बैठा था उसने उसके कंधे पर हाथ रख दिया और हाथ इस तरह से रखा के उसके दाहिने बूब को स्पर्श कर रहा था. उसके हाथ का अपने बूब पर स्पर्श पाते hi मेहुल की छूट में किड़ियाँ सी लड़ने लगीं. उसकी छूट गीली हो चुकी थी और उसके अरमान पूरी तरह से जाग चुके थे. शायद अगर इस वक्त रोहन उसे जोर देकर बोलता तो वो चुद भी जाती. पर दोनों एक दुसरे को बोलने से झिझक रहे थे.
रोहन ने देखा के मेहुल ने उसके हाथ के स्पर्श पर कुछ बोलै नहीं है तो उसने पहले तो अपने हाथ का दबाव मेहुल के बूब पर बढ़ा दिया. मेहुल को बहुत अच्छा लगा. वो उसे रोकना छह रही थी. पर उसे पता था उसका भाई एक नंबर का ज़िद्दी है. वो रूत जायेगा अभी जितना चल रहा है उतना तो चलने hi देते हैं न. कौन सा ये मेरी छूट मार रहा है.
वो अभी ये सब सोच hi रही थी के रोहन ने उसके खुले गले वाली कुर्ती के अंदर hi अपना हाथ घुसा दिया और उसके एक बूब को पकड़कर ऊगली को उसके निप्पल पर पहुँचाया तो बंद आँखों से मेहुल ने स्वयं को सातवें आसमान पर पाया. वो और भी बहुत कुछ चाहती थी पर अभी तक जितना हो रहा था वो उसी से खुश थी. हालाँकि उसका एक मन अभी भी उसे रोकने को बोल रहा था. पर वो उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर रही थी.
मेहुल की ऑंखें बंद थी. रोहन ने देखा तो उसने सोचा के थोड़ी मस्ती की जाये दीदी के साथ. उसने अपने ऊपर से चद्दर हटा दी. मेहुल को समझ तो आ गयी थी के चद्दर हैट चुकी है और उसका लुंड नंगा हो चूका है. इसलिए उसने अपनी ऑंखें बंद hi राखी.
रोहन जो पूरी मस्ती के मूड में था अपनी बहिन को bola…didi ऑंखें खोलो.
मेहुल नाराज होते हुए boli…tune मुझे ऑंखें खोलने लायक छोड़ा कहाँ है. पहले अपने ऊपर चद्दर लो फिर खोलूंगी.
रोहन ज़िद करते हुए bola…please दीदी एक बार खोल दो मेरे कहने से. तुम्हे एक दिन अपना लुंड दिखाना hi है तो आज क्यों नहीं.
मेहुल फ्लो फ्लो में बोल gayi….mujhe नहीं देखना तुम्हारा lund.use जल्द hi अपनी गलती का एहसास हुआ के उसने ये क्या बोल दिया और अपने दांतो टेल जीभ दबा ली.
रोहन की आह्हः निकल गयी अपनी बहिन के मुँह से ये सुनकर. वो bola….didi आपको दिखाना तो है hi मैंने. और आपके मुँह से लुंड सुनकर बहुत अच्छा लगा मुझे. प्लीज खोलो न ऑंखें. अपने भाई की बात नहीं मानोगे.
मेहुल खीझकर boli…ab तक भाई की बात hi तो मानी है और ये शब्द गलती से निकल गया मेरे मुँह से. प्लीज रोहन मुझे इतना परेशां मत करो नहीं तो मैं चली जुआंगी अपने रूम में.
रोहन ने फिर से मासूम सा बनते हुए kaha…ok ठीक है दीदी जैसी आपकी mari…halanki उसे अपनी दीदी के मुठ मारने में इतना मज़ा आ रहा था के बताया नहीं जा सकता.
रोहन ने मन hi मन सोचा के दीदी कहीं बगावत भी न कर ले. जो मिल रहा है कहीं उससे भी जाता रहे. पर मेहुल सोच रही thi…kahin मेरा भाई नाराज न हो जाये मुझसे. अब उसकी इतनी बातें मान ली हैं तो एक और बात सही.
पर तभी उसके दुसरे मन ने उसे चेताया के अगर उसने एक बार बात मान ली तो वो और आगे बढ़ने को बोलेगा और मेहुल उसके लिए कटाई तैयार नहीं थी.
रोहन का उसके बूब पर भी हाथ ढीला सा पद गया, मेहुल को अंदाज़ा हो गया था के रोहन कुछ नाराज हो गया है. उसने मुठ मारनी जारी राखी और उसकी इच्छा पूरी करने के लिए मेहुल ने अपनी ऑंखें खोलकर रोहन की और देखते हुए bola…apni साडी ज़िद पूरी करता है न तू.
रोहन मुस्कुराते हुए bola…abhi ज़िद पूरी कहाँ हुई है दीदी. मेरे लुंड की और देखो न.
मेहुल झुंझलाकर boli…rehne दो न भाई. क्यों इतना तड़पते हो मुझे.
रोहन bola…dekho आपने सच में मेरी बहुत बातें मानी हैं दीदी अभी ये भी मान लो तो बहुत एहसान होगा आपका.
मेहुल ने जिस हाथ से उसके लुंड को पकड़ा हुआ था उसी हाथ से लुंड पर थप्पड़ मरते हुए boli…hat पगले एहसान की क्या बात करता है. बहिन भाई के लिए कुछ कर दे तो वो कब से एहसान हो गया भला. आगे से ये बात न करना.
फिर उसके लुंड को देखकर उसे खुश करने के लिए बोलती है. भाई आपका ये सच में बहुत बड़ा है. मेहुल ने पोर्न में तो कई बार लुंड देखा था पर सामने इस तरह से पहली बार देख रही थी. उसे उसका ऊपर वाला गोल गोल भाग बहुत अच्छा लग रहा था. उसका मन कर रहा था के वो पोर्न फिल्मो की तरह उस गोल हिस्से को अपने मुँह में भर ले. पर उसने कुछ नहीं किया वो बस एकटक उस प्यारे से लुंड को देखती hi रही. रोहन की उत्तेजना इतनी बढ़ गयी के उसने मेहुल के बूब पर अपना दबाव बढ़ा diya…halanki मेहुल को थोड़ा दर्द हुआ पर उससे कहीं ज्यादा उसे मज़ा आया.
मेहुल ने पहले भी उसके साथ किश की थी तो किश करने में तो उसे कोई हर्ज नहीं था पर इस वक्त स्थिति कुछ और hi थी. रोहन एकदम नंगा था और उसने उसे गॉड में बिठाया था तो उसका लोहे की तरह सख्त हो चूका लुंड मेहुल की छूट को इस तरह स्पर्श कर रहा था के सलवार पहने होने के बावजूद वो महसूस हो रहा था जैसे डायरेक्ट hi स्पर्श हो रहा हो.
मेहुल की सोचने समझने की शक्ति एक बार तो जा चुकी थी. वो अपने भाई के साथ बहुत कुछ चाहती थी पर उसे ये उम्मीद कटाई नहीं थी के उसका भाई इस तरह का सुप्रिसे देगा उसे. खैर अभी के लिए उसने सोचा के किश का आनंद तो लिया जाये.
रोहन बड़े शिद्दत के साथ उसके होंठों के रास को चूस रहा था और मेहुल खुद उतने hi जूनून के साथ उसके होंठों को चूस रही थी. दोनों पागल प्रेमियों की तरह इस किश में खोये हुए थे. रोहन के लुंड को भी मेहुल की छूट का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था. वो चाहता तो ये था के अपनी बहिन के कपडे निकल के उसकी छूट में hi दाल थे पर वो अपनी किसी भी बेवकूफी की वजह से अपनी प्यारी दीदी को नाराज नहीं करना चाहता था.
मेहुल ने उसे अभी बहुत ज्यादा आगे बढ़ने के लिए उत्साहित नहीं किया था. इसलिए वो भी मज़बूरी बस hi सही अपनी सीमाओं के अंदर था. पर एक बात तो थी उसे इतना मज़ा दूसरी लड़कियों के साथ सेक्स में न आया हो शायद जितना अपनी बहिन के साथ किश और उसके शरीर के स्पर्श से आ रहा था.
बहुत hi सुडौल शरीर था मेहुल का एकदम भरवा. हालाँकि उसे मोती नहीं कहा जा सकता था पर वो स्लिम ट्रिम भी नहीं थी. उसकी गोल मटोल छातियां देखकर किसी के भी मुँह में पानी आ सकता था. इस बात को मेहुल ने कई बार महसूस भी किया था के उसकी छातियों को बहुत ज्यादा घुरा जाता है.
खैर अभी शायद दोनों में से किसी ने ये नहीं सोचा होगा के इस किश के बाद क्या होना है. थोड़ी देर बाद किश टूटी तो मेहुल रोहन से अलग होकर बगल में बैठ गयी और बैठते hi boli…..bhai तूने आज कपडे क्यों नहीं पहने हैं.
रोहन मुस्कुरा कर bola…didi आपको मालूम तो है के मैं ऐसे hi सोता हूँ. बिना कपड़ों के.
मेहुल थोड़ी सीरियस सी आवाज़ में boli….par मेरे आने तक तो कपडे पहने रखता भाई. हम लोग पहले hi काफी आगे बढ़ चुके हैं. थोड़ा लिमिट में hi रहते हैं न.
रोहन ज़िद सी करते हुए bola…par आपने तो ट्रैन में भी मेरी मुठ मार दी थी.
मेहुल को उसकी बचपने से वाली बात पर हंसी आ गयी और वो boli….bhai ट्रैन में बात और थी. कपडा लिया हुआ था और उस वक्त मैं भावनाओ में बह गयी थी.
आज रोहन पता नहीं क्या सोचकर बैठा था. उसका हाथ पकड़कर लुंड पर रखते हुए bola…aaj भी चद्दर है ऊपर दीदी. काम से काम उतना तो कर hi सकती हो आप जितना ट्रैन में किया था.
मेहुल दुविधा में फंस गयी थी. उसने अपना हाथ तो नहीं हटाया उसके लुंड से. पर अभी भी वो दुविधा में थी के जो कर रही है क्या वो सही कर रही है? कहीं रोहन और आगे बढ़ गया और उसकी छूट मरने को हुआ तो क्या वो उसे रोक पायेगी. नहीं उसे अपनी छूट वो हरगिज नहीं मरने देगी. ऊपर ऊपर से इसे मज़े दे देती. पर छूट देने का तो कोई सवाल hi पैदा नहीं होता. मैं इसे किसी लड़की से मिलवा दूंगी. और रिक्वेस्ट करुँगी के वो मेरे प्यारे भाई की इच्छा पूरी कर दे.
मेहुल इस तरह खोयी हुई थी अपने विचारों में और इधर बेचारे रोहन से सब्र hi नहीं हो रहा था. वो दीदी का हाथ पकड़कर हिलाते हुए bola…kis सोच में पद गयी दीदी. हिलाओ न इसे. क्यों तड़पा रही हो अपने प्यारे भाई को.
मेहुल अपने विचारों से बहार आयी और मजनूरी में hi सही उसने अपना हाथ हिलना शुरू कर दिया. हालाँकि मेहुल को उसके लुंड के स्पर्श से असीम सुख महसूस हो रहा था. वो ऑंखें बंद करके उसके लुंड को हिलाये जा रही थी.
इतने में रोहन जो बगल में बैठा था उसने उसके कंधे पर हाथ रख दिया और हाथ इस तरह से रखा के उसके दाहिने बूब को स्पर्श कर रहा था. उसके हाथ का अपने बूब पर स्पर्श पाते hi मेहुल की छूट में किड़ियाँ सी लड़ने लगीं. उसकी छूट गीली हो चुकी थी और उसके अरमान पूरी तरह से जाग चुके थे. शायद अगर इस वक्त रोहन उसे जोर देकर बोलता तो वो चुद भी जाती. पर दोनों एक दुसरे को बोलने से झिझक रहे थे.
रोहन ने देखा के मेहुल ने उसके हाथ के स्पर्श पर कुछ बोलै नहीं है तो उसने पहले तो अपने हाथ का दबाव मेहुल के बूब पर बढ़ा दिया. मेहुल को बहुत अच्छा लगा. वो उसे रोकना छह रही थी. पर उसे पता था उसका भाई एक नंबर का ज़िद्दी है. वो रूत जायेगा अभी जितना चल रहा है उतना तो चलने hi देते हैं न. कौन सा ये मेरी छूट मार रहा है.
वो अभी ये सब सोच hi रही थी के रोहन ने उसके खुले गले वाली कुर्ती के अंदर hi अपना हाथ घुसा दिया और उसके एक बूब को पकड़कर ऊगली को उसके निप्पल पर पहुँचाया तो बंद आँखों से मेहुल ने स्वयं को सातवें आसमान पर पाया. वो और भी बहुत कुछ चाहती थी पर अभी तक जितना हो रहा था वो उसी से खुश थी. हालाँकि उसका एक मन अभी भी उसे रोकने को बोल रहा था. पर वो उसे रोकने की कोशिश भी नहीं कर रही थी.
मेहुल की ऑंखें बंद थी. रोहन ने देखा तो उसने सोचा के थोड़ी मस्ती की जाये दीदी के साथ. उसने अपने ऊपर से चद्दर हटा दी. मेहुल को समझ तो आ गयी थी के चद्दर हैट चुकी है और उसका लुंड नंगा हो चूका है. इसलिए उसने अपनी ऑंखें बंद hi राखी.
रोहन जो पूरी मस्ती के मूड में था अपनी बहिन को bola…didi ऑंखें खोलो.
मेहुल नाराज होते हुए boli…tune मुझे ऑंखें खोलने लायक छोड़ा कहाँ है. पहले अपने ऊपर चद्दर लो फिर खोलूंगी.
रोहन ज़िद करते हुए bola…please दीदी एक बार खोल दो मेरे कहने से. तुम्हे एक दिन अपना लुंड दिखाना hi है तो आज क्यों नहीं.
मेहुल फ्लो फ्लो में बोल gayi….mujhe नहीं देखना तुम्हारा lund.use जल्द hi अपनी गलती का एहसास हुआ के उसने ये क्या बोल दिया और अपने दांतो टेल जीभ दबा ली.
रोहन की आह्हः निकल गयी अपनी बहिन के मुँह से ये सुनकर. वो bola….didi आपको दिखाना तो है hi मैंने. और आपके मुँह से लुंड सुनकर बहुत अच्छा लगा मुझे. प्लीज खोलो न ऑंखें. अपने भाई की बात नहीं मानोगे.
मेहुल खीझकर boli…ab तक भाई की बात hi तो मानी है और ये शब्द गलती से निकल गया मेरे मुँह से. प्लीज रोहन मुझे इतना परेशां मत करो नहीं तो मैं चली जुआंगी अपने रूम में.
रोहन ने फिर से मासूम सा बनते हुए kaha…ok ठीक है दीदी जैसी आपकी mari…halanki उसे अपनी दीदी के मुठ मारने में इतना मज़ा आ रहा था के बताया नहीं जा सकता.
रोहन ने मन hi मन सोचा के दीदी कहीं बगावत भी न कर ले. जो मिल रहा है कहीं उससे भी जाता रहे. पर मेहुल सोच रही thi…kahin मेरा भाई नाराज न हो जाये मुझसे. अब उसकी इतनी बातें मान ली हैं तो एक और बात सही.
पर तभी उसके दुसरे मन ने उसे चेताया के अगर उसने एक बार बात मान ली तो वो और आगे बढ़ने को बोलेगा और मेहुल उसके लिए कटाई तैयार नहीं थी.
रोहन का उसके बूब पर भी हाथ ढीला सा पद गया, मेहुल को अंदाज़ा हो गया था के रोहन कुछ नाराज हो गया है. उसने मुठ मारनी जारी राखी और उसकी इच्छा पूरी करने के लिए मेहुल ने अपनी ऑंखें खोलकर रोहन की और देखते हुए bola…apni साडी ज़िद पूरी करता है न तू.
रोहन मुस्कुराते हुए bola…abhi ज़िद पूरी कहाँ हुई है दीदी. मेरे लुंड की और देखो न.
मेहुल झुंझलाकर boli…rehne दो न भाई. क्यों इतना तड़पते हो मुझे.
रोहन bola…dekho आपने सच में मेरी बहुत बातें मानी हैं दीदी अभी ये भी मान लो तो बहुत एहसान होगा आपका.
मेहुल ने जिस हाथ से उसके लुंड को पकड़ा हुआ था उसी हाथ से लुंड पर थप्पड़ मरते हुए boli…hat पगले एहसान की क्या बात करता है. बहिन भाई के लिए कुछ कर दे तो वो कब से एहसान हो गया भला. आगे से ये बात न करना.
फिर उसके लुंड को देखकर उसे खुश करने के लिए बोलती है. भाई आपका ये सच में बहुत बड़ा है. मेहुल ने पोर्न में तो कई बार लुंड देखा था पर सामने इस तरह से पहली बार देख रही थी. उसे उसका ऊपर वाला गोल गोल भाग बहुत अच्छा लग रहा था. उसका मन कर रहा था के वो पोर्न फिल्मो की तरह उस गोल हिस्से को अपने मुँह में भर ले. पर उसने कुछ नहीं किया वो बस एकटक उस प्यारे से लुंड को देखती hi रही. रोहन की उत्तेजना इतनी बढ़ गयी के उसने मेहुल के बूब पर अपना दबाव बढ़ा diya…halanki मेहुल को थोड़ा दर्द हुआ पर उससे कहीं ज्यादा उसे मज़ा आया.