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- Dec 5, 2013
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Part 49मेहुल ने रोहन की आँखों पर पट्टी बांधते हुए उसे बोलै था के जब तक पट्टी बंधी रहेगी वो पूरी बेशरम बानी रहेगी और पट्टी के खुलते hi वो नार्मल बन जाएगी और रोहन उससे कुछ भी ऐसा एक्सपेक्ट नहीं करेगा जो वो कर या बोल न सके. रोहन को भला इसमें क्या प्रॉब्लम हो सकती थी.
वैसे रोहन ने पूरे मज़े लिए थे. चाहे उसके हाथ पेअर बंधे हुए थे चाहे आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी पर उसका शरीर उसका मन और यहाँ तक के उसकी आत्मा तक तृप्त हो गयी सब कुछ बंधे होने के बावजूद. ये उसके लिए एक अनोखा एक्सपीरियंस था. दो दो लड़कियों को छोड़ने के बाद, जिनमे से एक वर्जिन भी थी, उसे जो तजुर्बा आज मिला था उसकी चुदाई से कोई तुलना hi नहीं की जा सकती.
हमारा मन किसी आसान चीज से मोहित hi नहीं होता उसे तो कुछ अलग सा चाहिए होता है. तो जब रोहन को इतना अलग एक्सपीरियंस मिला वो गदगद हो गया और आशा करने लगा के आगे भी उसे ये सब प्राप्त होगा.
और अगर हम बात करें मेहुल की तो वो तो इतना खुश थी भाई को तृप्त करके जैसे उसे खुद तृप्ति मिल गयी हो. वैसे उसकी छूट को भी तृप्ति मिली अपने भाई के चूसने और चाटने से पर उसे असली ख़ुशी इस बात की थी के उसके भाई को उसकी वजह से इतना सुख मिला.
हालाँकि अभी भी वो अपने भाई को सीधे तौर पर अपना शरीर दिखने में hi झिझक रही थी, छूट देना को बहुत दूर की बात है. इसलिए उसने सोच लिया था के जब तक चलता है ऐसे hi चलने देते हैं. भाई को ये सुख देते रहेंगे अपने तरीके से hi चाहे.
उसके बाद दो दिन तक मेहुल को मौका नहीं मिल सका रोहन के पास जाने का. वो दरअसल रूही के दो आखरी पेपर रह गए थे, सो वो देर तक तयारी करती रहती थी. ये टर्मिनल एग्जाम थे. हालाँकि इतने इम्पोर्टेन्ट नहीं थे पर फिर भी रूही पढाई को बहुत hi सीरियसली लेती थी.
पर यहाँ देखा जाये तो शायद रूही जानबूझकर ऐसा कर रही थी. वो उन दोनों को अलग रखने की कोशिश कर रही थी. उसके अंदर जलन सी थी जो उसको ऐसा करने पर मजबूर कर रही थी. ऐसा नहीं था के उसके पेपर नहीं थे. पर पहले भी तो वो दिन में तयारी कर लेती थी. अभी क्यों उसे रात में hi तयारी की सूझी.
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रोहन क्यूंकि रूही के साथ दो दिन के लिए बहार जा रही थी और मेहुल इन दो दिनों में अपने भाई से नहीं मिल सकती थी तो उसके अंदर एक तड़प सी जाएगी. जब रूही तैयार हो रही थी तो मेहुल अपने भाई के कमरे में आ गयी. उसे पता था रूही तो तैयार होने में में दो घंटे लगाएगी और उसका भाई 15 मिनट में तैयार होने वालों में से है.
दरवाजा खुला hi था और रोहन बड़ी hi बेबाकी से अपने ऊपर चद्दर ओढ़कर सो रहा था. मेहुल अच्छे से जानती थी के रोहन बिलकुल नंगा होगा या ज्यादा से ज्यादा उसने अंडरवियर पहना होगा. सो उसने चद्दर उठाई और वो रोहन के साथ उसमे घुस गयी. वो तड़प रही थी अपने भाई के लिए क्यूंकि कुछ दिनों से वो उसे मिल नहीं पा रही थी रूही की वजह से.
घुसते hi उसने रोहन को जफ्फी दाल के उसके होंठों पर होंठ रख दिए. रोहन कसमसा गया नींद में उसे लगा ये सब सपने में हो रहा है वो budbudaya…didi तुम तो मेरे सपने में भी यही सब करती रहती हो. बहुत कमाल की हो.
मेहुल ने अपना एक हाथ जब उसके निचे की और पहुँचाया तो उसने पाया वो सच में नंगा hi था उसने उसका लुंड पकड़ लिया जो लगभग खड़ा hi था, एक तो मॉर्निंग बौनेर और दुसरे बहिन का स्पर्श. अब जब मेहुल ने हिलना शुरू किया और दुसरे अपनी गुलाबी पंखड़ियों से रोहन के होंठों को चूसते हुए अपना रसपान करना शुरू किया तो रोहन की आंख खुल hi गयी और उसने चौंकते हुए bola…didi आप सुबह सुबह यहाँ?
मेहुल कातिल मुस्कान के साथ boli…ruhi जाने के लिए तैयार हो रही थी सोचा इस समय का फायदा उठा लिया जाए. रोहन मुस्कुरा दिया और जब उसे महसूस हुआ के उसकी बहिन का हाथ उसके लुंड पर है तो उसने bola….didi हाथ से नहीं मुँह se…please चुसो न इसे.
अब उसके लुंड के मुँह को खून लग चूका था. पर मेहुल उसे तड़पाते हुए boli…wo सब बेशर्मियन तुम्हे अच्छे से बांधने के बाद hi हो सकती हैं. अभी जितना सुख मिल रहा है न उसी में राजी हो जाओ बस.
रोहन बेचारा क्या करता. उसने जब मेहुल के निचे की और हाथ बढ़ाये तो पाया के वो स्कर्ट पहने हुए थी. रोहन ने उसकी स्कर्ट को थोड़ा ऊपर किया और जब उसका हाथ उसकी छूट पर गया तो उसने पाया के मेहुल ने निचे पंतय नहीं पहनी थी. रोहन की मुस्कराहट दुगुनी हो गयी ये देखकर उसने अचानकर झटका सा दिया मेहुल को उसे निचे लिया और खुद ऊपर आकर अपने लुंड को उसकी टांगों के बीचो बीच ले गया.
मेहुल लाख बोलती rahi….nahi भैया ऐसा नहीं करना. देखो मैंने मन किया है न बिना परमिशन के कुछ भी करने se….ab तक तो रोहन का लुंड उसकी छूट से टकरा चूका tha…wo हालाँकि बहुत एन्जॉय कर रही थी और पूरे उन्माद में आ चुकी थी पर फिर भी ना जाने क्या था उसके मन में कुछ हद तक भाई बहिन का रिश्ता अभी भी हव्य था उस par…wo boli…bhai मेरी बात नहीं मानोगे तो चली जाउंगी और फिर कभी नहीं आउंगी.
रोहन मुस्कुरा कर bola…chinta मत करो मेरी बहना मैं कोई अंदर नहीं दाल रहा हूँ बस रगड़ रहा हूँ उस पर. अब जब इतना कुछ हो चूका है हम दोनों में तो ये भी हो सकता है न. मैं ऊपर ऊपर से मज़े लूंगा और दूंगा. तुम थोड़ा सा सहयोग दो मेराफिर देखना दोनों कैसे मज़े लेते हैं.
मेहुल को ये बात शायद समझ में आ गयी उसकी छटपटाहट सी बंद हो गयी और वो ढीली सी होकर निचे चल रही लुंड और छूट की गतिविधियों को महसूस करके हवस में डूब गयी. ऊपर से रोहन ने उसके रसभरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को दबाने लगा. मेहुल इस तिहरे प्रहार को झेल नहीं पायी और झाड़ गयी. उसके अंदर उत्तेजना hi बहुत ज्यादा भर चुकी थी.
रोहन ने अपने लुंड की स्किन पर गर्म गर्म माल को महसूस किया. रोहन मुस्कुरा कर bola…didi आप तो झाड़ चुकी ho…mehul ने शर्मीली मुस्कान के साथ अपनी गर्दन एक और गिराते हुए धीरे से kaha...haan भाई.
कुछ देर बाद रोहन का भी झाड़ गया. आज इन्होने एक अलग hi आनंद को महसूस किया था. जिसकी आते हुए मेहुल ने कल्पना भी नहीं की थी. चद्दर उन दोनों के ऊपर hi थी. मेहुल boli…bhai कभी भी कोई काम मेरी मर्जी के बिना न करना और हाँ अंदर से ढककर कोई बात नहीं पर मैंने तुम्हे अपना नंगा शरीर नहीं दिखाना.
रोहन मेहुल के होंठों को हलके से चूमते हुए bola….main अपनी दीदी की मर्जी के बिना कुछ नहीं करूँगा. रोहन बैठा था और चद्दर वैसे hi ोधी हुई थी.
मेहुल उसकी गॉड में बैठ गयी उसकी और मुँह करके. निचे अभी भी नंगे लुंड और छूट टकरा रहे थे. मेहुल ने फिर से अपने भाई को एक जोरदार किश दी रोहन का लुंड फिर से खड़ा होने लगा था. मेहुल हँसते हुए boli…bhai इसे खड़े होने के सिवाय और कोई काम नहीं है क्या. वो उसके ऊपर से उठ गयी और जाते जाते boli…apne हाथ से कर लो अब बाथ रूम में जाकर. इससे ज्यादा नहीं मिलेगा कुछ समझे.
रोहन धीरे से हँसते हुए bola…jhalli दीदी.
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रूही और रोहन को आज रूही के दोस्तों के साथ खंडाला जाना था. रूही के इलावा उसकी दोस्त दीक्षा, रूचि और अब एक और लड़की तैयार हो गयी थी उसका नाम वाणी था, वो उन दो लड़को में से एक नमन की गफ थी, उसके इलावा एक और लड़का प्रथम था इनके साथ.
सब लोगों ने डीडे किया था बाइक्स पर hi चलना है. हम लोगों (मैंने रूही और दीक्षा) ने तो पहले भी ट्रिप्ली मारी है. इस बार भी हम लोग ट्रिपल hi जा रहे थे. वाणी और नमन एक बाइक पर थे, प्रथम और रूचि एक बाइक पर.
नमन ने अचानक आज सुबह सुबह hi डिक्लेअर कर दिया था के उसकी गफ वाणी भी साथ जा रही है. किसी को भला क्या प्रॉब्लम होती जब रूही अपने भाई यानि रोहन को ले जा सख्त थी तो ये भी तो ले जा सकता था अपनी गर्ल फ्रेंड को. वैसे रूही के दोस्तों में नमन एक ऐसा शख्स था जो के इनसे ज्यादा खुला नहीं हुआ था. उसके बारे में किसी को ज्यादा पता नहीं था. उसकी गफ वाणी देखने में hi उससे उम्र में ज्यादा लग रही थी. पता चला दोनों एडल्ट hi हैं.
प्रथम और रूचि दो साल से रिलेशनशिप में थे. वैसे अभी वो दोनों एडल्ट हो चुके थे. और देखने में hi पता चल रहा था के उनकी फिजिकल बॉन्डिंग बहुत मजबूत है क्यूंकि रूचि प्रथम से चिपक कर बैठी थी.
तो जनाब कहा जाये तो हम तीनो hi ऐसे थे जो कपल्स नै थे. वैसे तो दीक्षा के साथ मेरा सेक्सुअल एनकाउंटर हो चूका था पर वो सामयिक hi था अभी हमने एक दुसरे से रिलेशनशिप की एक्सपेक्टाइव नहीं की थी.
रास्ते में नमन ने हम तीनो को एक साथ एक hi बाइक पर बैठे देखा तो हमें छेड़ते हुए bola…bhai आपके तो मज़े हैं, हमारे पास तो एक hi गर्ल फ्रेंड है और आपके पास तो दो दो हैं.
रूही का दिल सा धड़क गया खुद को अपने भाई की गर्ल फ्रेंड सुनते हुए पर दीक्षा बोल padi…kya बोल रहे हो नमन. रूही रोहन की बहिन है. वो सोच रही थी के उसके ऐसा कहने पर कहीं रोहन नाराज़ न हो जाये पर रोहन तो नार्मल था वो तो कब से अपने बहनो को गर्ल फ्रेंड की तरह छोड़ना चाहता था.
नमन bola…oh के ों दीक्षा मैं सिर्फ मज़ाक कर रहा था. तुम तो सीरियस हो गई.
दीक्षा फिर से उसी टोन mein…chalo कोई नहीं नमन एक बार तो बोल दिया पर दूसरी बार ध्यान रखना कुछ भी बोलते वक्त के ये दोनों भाई बहिन हैं.
अबकी बार प्रथम bola…wo तो हम समझ रहे हैं दीक्षा पर जब रूही के भाई आये हैं साथ में तो उन्हें थोड़ा लिबरल बनकर रहना होगा. क्यूंकि हम दोनों अपनी गर्ल फ्रेंड्स के साथ आये हैं. और तुम्हे तो पता hi है हम सब मौज मस्ती करने आये हैं तो कपल्स की मौज मस्ती थोड़ी ज्यादा होती है न.
रोहन जो अब तक चुप था बोल pada….arey तुम लोग चिंता न करो यार. मैं वैसा नहीं हूँ जो छोटी छोटी बात पर खींच खींच करूँ. ये तुम लोगों पर निर्भर है के तुम लोग किस लेवल पर कुछ करना चाहते हो, मेरी तरफ से तो तुम्हे खुली छूट है अगर तुम लोग कम्फर्टेबले हो तो वहां पौंछकर ओपन में hi कर लेना चाहे. मैं रूही का भाई hi नहीं दोस्त भी हूँ.
मेरी बात सुनकर नमन, प्रथम, रूचि और वाणी तो हैरान हुए hi इधर दीक्षा भी हैरान रह गयी. उसके मुँह पर हाथ अपने आप चला गया. एक शख्स था जो इस बात से हैरान नहीं हुआ था बल्कि खुश हुआ था. वो थी रूही वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी.
वैसे मेरे ऐसा बोलने का कुछ तो असर हुआ वो दोनों अब खुल से गए थे अपनी गफ्स के साथ. पीछे मुद मुद कर बार बार उनके होंठों पर किश कर रहे थे.
वहां पहुंचकर हमने तीन रूम लिए. मैंने उन सबसे बोलै के हम तीनो यानि मैं रूही और दीक्षा एक hi रूम में रहेंगे तो वाणी जो ज्यादा hi टेंशन लेती थी बातों की boli…diksha तुम्हे अगर परेशानी हो तो हम एक और रूम ले लेते हैं.
दीक्षा मुस्कुराते हुए boli…mujhe कोई टेंशन नहीं है वाणी. हम तीनो एक साथ बड़े मज़े से रहेंगे.
नमन मन hi मन budbudaya…kahin थ्रीसम तो नहीं करोगे. रूचि ने सुन लिया था उसने नमन के कंधे पर थप्पड़ मारा. दीक्षा को लगा उसने कुछ तो गलत bola….kya बोलै नमन तुमने.
नमन शैतानी मुस्कान के saath….tere कान बज रहे हैं दीक्षा मैंने तो कुछ नहीं बोलै, क्यों रूचि मैंने बोलै कुछ क्या?
रूचि खीझकर boli…mujhe क्या पता कुछ बोलै के नहीं तुमने. उसे बुरा लगा था वो थ्रीसम बोलकर उसकी बहिन को भी बीच में इन्वॉल्व कर रहा था. जबकि रोहन तो सच में सोच रहा था काश ऐसा हो जाये. पर उसे इस बात का अच्छे से पता था के उसकी बहिन चाहे एक हफ्ता hi काम हो पर अठारह से काम थी अभी.
यहाँ दीक्षा ने एक बात सभी के सामने बोलकर सबको चौंका diya…waise आप लोगों की इनफार्मेशन के लिए बोल दूँ, मैंने और रोहन ने किश किया है हाँ ये बात अलग है के हमने खुद को कपल डिक्लेअर नहीं किया.
ये सुनकर दोनों जोड़े चौंक गए और फिर ये बोलकर दीक्षा ने रूही की और देखा तो वो boli…mujhe पता है दीक्षा सब कुछ पता है. तुम्हे बताया तो भाई ने के हम भाई बहिन के साथ साथ दोस्त भी हैं. हम दोनों एक दुसरे से कुछ नहीं छुपाते.
वो चरों के चेहरे से लग रहा था के उन्होंने रूही की बात को अप्प्रेसियते किया है.
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रोहन की छूट का उन दोनों कपल्स ने खूब फायदा उठाया. होटल एक वीराने से इलाके में था. जहाँ शायद कपल्स hi आते होंगे. उसके बगल में hi बहुत बड़ा ग्राउंड था. सभी लोग उस ग्राउंड में चले गए वहां जगह जगह पर बेंच लगे हुए थे. जहाँ पहले से कुछ कपल्स बैठे प्यार की खुमारी में अपने हिसाब से जितना कुछ ओपन में हो सकता है कर रहे थे.
इन दोनों जोड़ों और इन तीनो को भी तीन बेंच मिल गए और ये बैठ गए. उन दोनों ने अपनी अपनी गफ को किश करना शुरू कर दिया. रूही दीक्षा को देखकर मुस्कुराते हुए boli…tum दोनों मेरी वजह से शरमाना मत चोंच लड़नी है तो लड़ा लो.
शायद हम दोनों उसके कहने का hi इंतज़ार कर रहे the…ham दोनों भी खूब पशनातेली एक दुसरे को किश करने लगे. दिसखा भी जैसे तैयार hi बैठ थी उसने रोहन के सर के पीछे हाथ रखे और रोहन के हाथ दीक्षा की पीठ को सेहला रहे थे. तीनो कपल्स में इन दोनों किश सबसे ज्यादा परफेक्ट थी.
रूही मुस्कुराते हुए उन दोनों की इस पैशनेट किश को देख रही थी और उसका खुद का मन कर रहा था अपने भाई के साथ किश करने को. बल्कि उसकी तो छूट में भी खुजली उठ रही थी. वैसे उसे इस बात का अच्छे से पता था के उसका भाई उसके अठारह का होने से पहले कभी नहीं मानेगा.
वैसे रोहन ने पूरे मज़े लिए थे. चाहे उसके हाथ पेअर बंधे हुए थे चाहे आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी पर उसका शरीर उसका मन और यहाँ तक के उसकी आत्मा तक तृप्त हो गयी सब कुछ बंधे होने के बावजूद. ये उसके लिए एक अनोखा एक्सपीरियंस था. दो दो लड़कियों को छोड़ने के बाद, जिनमे से एक वर्जिन भी थी, उसे जो तजुर्बा आज मिला था उसकी चुदाई से कोई तुलना hi नहीं की जा सकती.
हमारा मन किसी आसान चीज से मोहित hi नहीं होता उसे तो कुछ अलग सा चाहिए होता है. तो जब रोहन को इतना अलग एक्सपीरियंस मिला वो गदगद हो गया और आशा करने लगा के आगे भी उसे ये सब प्राप्त होगा.
और अगर हम बात करें मेहुल की तो वो तो इतना खुश थी भाई को तृप्त करके जैसे उसे खुद तृप्ति मिल गयी हो. वैसे उसकी छूट को भी तृप्ति मिली अपने भाई के चूसने और चाटने से पर उसे असली ख़ुशी इस बात की थी के उसके भाई को उसकी वजह से इतना सुख मिला.
हालाँकि अभी भी वो अपने भाई को सीधे तौर पर अपना शरीर दिखने में hi झिझक रही थी, छूट देना को बहुत दूर की बात है. इसलिए उसने सोच लिया था के जब तक चलता है ऐसे hi चलने देते हैं. भाई को ये सुख देते रहेंगे अपने तरीके से hi चाहे.
उसके बाद दो दिन तक मेहुल को मौका नहीं मिल सका रोहन के पास जाने का. वो दरअसल रूही के दो आखरी पेपर रह गए थे, सो वो देर तक तयारी करती रहती थी. ये टर्मिनल एग्जाम थे. हालाँकि इतने इम्पोर्टेन्ट नहीं थे पर फिर भी रूही पढाई को बहुत hi सीरियसली लेती थी.
पर यहाँ देखा जाये तो शायद रूही जानबूझकर ऐसा कर रही थी. वो उन दोनों को अलग रखने की कोशिश कर रही थी. उसके अंदर जलन सी थी जो उसको ऐसा करने पर मजबूर कर रही थी. ऐसा नहीं था के उसके पेपर नहीं थे. पर पहले भी तो वो दिन में तयारी कर लेती थी. अभी क्यों उसे रात में hi तयारी की सूझी.
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रोहन क्यूंकि रूही के साथ दो दिन के लिए बहार जा रही थी और मेहुल इन दो दिनों में अपने भाई से नहीं मिल सकती थी तो उसके अंदर एक तड़प सी जाएगी. जब रूही तैयार हो रही थी तो मेहुल अपने भाई के कमरे में आ गयी. उसे पता था रूही तो तैयार होने में में दो घंटे लगाएगी और उसका भाई 15 मिनट में तैयार होने वालों में से है.
दरवाजा खुला hi था और रोहन बड़ी hi बेबाकी से अपने ऊपर चद्दर ओढ़कर सो रहा था. मेहुल अच्छे से जानती थी के रोहन बिलकुल नंगा होगा या ज्यादा से ज्यादा उसने अंडरवियर पहना होगा. सो उसने चद्दर उठाई और वो रोहन के साथ उसमे घुस गयी. वो तड़प रही थी अपने भाई के लिए क्यूंकि कुछ दिनों से वो उसे मिल नहीं पा रही थी रूही की वजह से.
घुसते hi उसने रोहन को जफ्फी दाल के उसके होंठों पर होंठ रख दिए. रोहन कसमसा गया नींद में उसे लगा ये सब सपने में हो रहा है वो budbudaya…didi तुम तो मेरे सपने में भी यही सब करती रहती हो. बहुत कमाल की हो.
मेहुल ने अपना एक हाथ जब उसके निचे की और पहुँचाया तो उसने पाया वो सच में नंगा hi था उसने उसका लुंड पकड़ लिया जो लगभग खड़ा hi था, एक तो मॉर्निंग बौनेर और दुसरे बहिन का स्पर्श. अब जब मेहुल ने हिलना शुरू किया और दुसरे अपनी गुलाबी पंखड़ियों से रोहन के होंठों को चूसते हुए अपना रसपान करना शुरू किया तो रोहन की आंख खुल hi गयी और उसने चौंकते हुए bola…didi आप सुबह सुबह यहाँ?
मेहुल कातिल मुस्कान के साथ boli…ruhi जाने के लिए तैयार हो रही थी सोचा इस समय का फायदा उठा लिया जाए. रोहन मुस्कुरा दिया और जब उसे महसूस हुआ के उसकी बहिन का हाथ उसके लुंड पर है तो उसने bola….didi हाथ से नहीं मुँह se…please चुसो न इसे.
अब उसके लुंड के मुँह को खून लग चूका था. पर मेहुल उसे तड़पाते हुए boli…wo सब बेशर्मियन तुम्हे अच्छे से बांधने के बाद hi हो सकती हैं. अभी जितना सुख मिल रहा है न उसी में राजी हो जाओ बस.
रोहन बेचारा क्या करता. उसने जब मेहुल के निचे की और हाथ बढ़ाये तो पाया के वो स्कर्ट पहने हुए थी. रोहन ने उसकी स्कर्ट को थोड़ा ऊपर किया और जब उसका हाथ उसकी छूट पर गया तो उसने पाया के मेहुल ने निचे पंतय नहीं पहनी थी. रोहन की मुस्कराहट दुगुनी हो गयी ये देखकर उसने अचानकर झटका सा दिया मेहुल को उसे निचे लिया और खुद ऊपर आकर अपने लुंड को उसकी टांगों के बीचो बीच ले गया.
मेहुल लाख बोलती rahi….nahi भैया ऐसा नहीं करना. देखो मैंने मन किया है न बिना परमिशन के कुछ भी करने se….ab तक तो रोहन का लुंड उसकी छूट से टकरा चूका tha…wo हालाँकि बहुत एन्जॉय कर रही थी और पूरे उन्माद में आ चुकी थी पर फिर भी ना जाने क्या था उसके मन में कुछ हद तक भाई बहिन का रिश्ता अभी भी हव्य था उस par…wo boli…bhai मेरी बात नहीं मानोगे तो चली जाउंगी और फिर कभी नहीं आउंगी.
रोहन मुस्कुरा कर bola…chinta मत करो मेरी बहना मैं कोई अंदर नहीं दाल रहा हूँ बस रगड़ रहा हूँ उस पर. अब जब इतना कुछ हो चूका है हम दोनों में तो ये भी हो सकता है न. मैं ऊपर ऊपर से मज़े लूंगा और दूंगा. तुम थोड़ा सा सहयोग दो मेराफिर देखना दोनों कैसे मज़े लेते हैं.
मेहुल को ये बात शायद समझ में आ गयी उसकी छटपटाहट सी बंद हो गयी और वो ढीली सी होकर निचे चल रही लुंड और छूट की गतिविधियों को महसूस करके हवस में डूब गयी. ऊपर से रोहन ने उसके रसभरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को दबाने लगा. मेहुल इस तिहरे प्रहार को झेल नहीं पायी और झाड़ गयी. उसके अंदर उत्तेजना hi बहुत ज्यादा भर चुकी थी.
रोहन ने अपने लुंड की स्किन पर गर्म गर्म माल को महसूस किया. रोहन मुस्कुरा कर bola…didi आप तो झाड़ चुकी ho…mehul ने शर्मीली मुस्कान के साथ अपनी गर्दन एक और गिराते हुए धीरे से kaha...haan भाई.
कुछ देर बाद रोहन का भी झाड़ गया. आज इन्होने एक अलग hi आनंद को महसूस किया था. जिसकी आते हुए मेहुल ने कल्पना भी नहीं की थी. चद्दर उन दोनों के ऊपर hi थी. मेहुल boli…bhai कभी भी कोई काम मेरी मर्जी के बिना न करना और हाँ अंदर से ढककर कोई बात नहीं पर मैंने तुम्हे अपना नंगा शरीर नहीं दिखाना.
रोहन मेहुल के होंठों को हलके से चूमते हुए bola….main अपनी दीदी की मर्जी के बिना कुछ नहीं करूँगा. रोहन बैठा था और चद्दर वैसे hi ोधी हुई थी.
मेहुल उसकी गॉड में बैठ गयी उसकी और मुँह करके. निचे अभी भी नंगे लुंड और छूट टकरा रहे थे. मेहुल ने फिर से अपने भाई को एक जोरदार किश दी रोहन का लुंड फिर से खड़ा होने लगा था. मेहुल हँसते हुए boli…bhai इसे खड़े होने के सिवाय और कोई काम नहीं है क्या. वो उसके ऊपर से उठ गयी और जाते जाते boli…apne हाथ से कर लो अब बाथ रूम में जाकर. इससे ज्यादा नहीं मिलेगा कुछ समझे.
रोहन धीरे से हँसते हुए bola…jhalli दीदी.
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रूही और रोहन को आज रूही के दोस्तों के साथ खंडाला जाना था. रूही के इलावा उसकी दोस्त दीक्षा, रूचि और अब एक और लड़की तैयार हो गयी थी उसका नाम वाणी था, वो उन दो लड़को में से एक नमन की गफ थी, उसके इलावा एक और लड़का प्रथम था इनके साथ.
सब लोगों ने डीडे किया था बाइक्स पर hi चलना है. हम लोगों (मैंने रूही और दीक्षा) ने तो पहले भी ट्रिप्ली मारी है. इस बार भी हम लोग ट्रिपल hi जा रहे थे. वाणी और नमन एक बाइक पर थे, प्रथम और रूचि एक बाइक पर.
नमन ने अचानक आज सुबह सुबह hi डिक्लेअर कर दिया था के उसकी गफ वाणी भी साथ जा रही है. किसी को भला क्या प्रॉब्लम होती जब रूही अपने भाई यानि रोहन को ले जा सख्त थी तो ये भी तो ले जा सकता था अपनी गर्ल फ्रेंड को. वैसे रूही के दोस्तों में नमन एक ऐसा शख्स था जो के इनसे ज्यादा खुला नहीं हुआ था. उसके बारे में किसी को ज्यादा पता नहीं था. उसकी गफ वाणी देखने में hi उससे उम्र में ज्यादा लग रही थी. पता चला दोनों एडल्ट hi हैं.
प्रथम और रूचि दो साल से रिलेशनशिप में थे. वैसे अभी वो दोनों एडल्ट हो चुके थे. और देखने में hi पता चल रहा था के उनकी फिजिकल बॉन्डिंग बहुत मजबूत है क्यूंकि रूचि प्रथम से चिपक कर बैठी थी.
तो जनाब कहा जाये तो हम तीनो hi ऐसे थे जो कपल्स नै थे. वैसे तो दीक्षा के साथ मेरा सेक्सुअल एनकाउंटर हो चूका था पर वो सामयिक hi था अभी हमने एक दुसरे से रिलेशनशिप की एक्सपेक्टाइव नहीं की थी.
रास्ते में नमन ने हम तीनो को एक साथ एक hi बाइक पर बैठे देखा तो हमें छेड़ते हुए bola…bhai आपके तो मज़े हैं, हमारे पास तो एक hi गर्ल फ्रेंड है और आपके पास तो दो दो हैं.
रूही का दिल सा धड़क गया खुद को अपने भाई की गर्ल फ्रेंड सुनते हुए पर दीक्षा बोल padi…kya बोल रहे हो नमन. रूही रोहन की बहिन है. वो सोच रही थी के उसके ऐसा कहने पर कहीं रोहन नाराज़ न हो जाये पर रोहन तो नार्मल था वो तो कब से अपने बहनो को गर्ल फ्रेंड की तरह छोड़ना चाहता था.
नमन bola…oh के ों दीक्षा मैं सिर्फ मज़ाक कर रहा था. तुम तो सीरियस हो गई.
दीक्षा फिर से उसी टोन mein…chalo कोई नहीं नमन एक बार तो बोल दिया पर दूसरी बार ध्यान रखना कुछ भी बोलते वक्त के ये दोनों भाई बहिन हैं.
अबकी बार प्रथम bola…wo तो हम समझ रहे हैं दीक्षा पर जब रूही के भाई आये हैं साथ में तो उन्हें थोड़ा लिबरल बनकर रहना होगा. क्यूंकि हम दोनों अपनी गर्ल फ्रेंड्स के साथ आये हैं. और तुम्हे तो पता hi है हम सब मौज मस्ती करने आये हैं तो कपल्स की मौज मस्ती थोड़ी ज्यादा होती है न.
रोहन जो अब तक चुप था बोल pada….arey तुम लोग चिंता न करो यार. मैं वैसा नहीं हूँ जो छोटी छोटी बात पर खींच खींच करूँ. ये तुम लोगों पर निर्भर है के तुम लोग किस लेवल पर कुछ करना चाहते हो, मेरी तरफ से तो तुम्हे खुली छूट है अगर तुम लोग कम्फर्टेबले हो तो वहां पौंछकर ओपन में hi कर लेना चाहे. मैं रूही का भाई hi नहीं दोस्त भी हूँ.
मेरी बात सुनकर नमन, प्रथम, रूचि और वाणी तो हैरान हुए hi इधर दीक्षा भी हैरान रह गयी. उसके मुँह पर हाथ अपने आप चला गया. एक शख्स था जो इस बात से हैरान नहीं हुआ था बल्कि खुश हुआ था. वो थी रूही वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी.
वैसे मेरे ऐसा बोलने का कुछ तो असर हुआ वो दोनों अब खुल से गए थे अपनी गफ्स के साथ. पीछे मुद मुद कर बार बार उनके होंठों पर किश कर रहे थे.
वहां पहुंचकर हमने तीन रूम लिए. मैंने उन सबसे बोलै के हम तीनो यानि मैं रूही और दीक्षा एक hi रूम में रहेंगे तो वाणी जो ज्यादा hi टेंशन लेती थी बातों की boli…diksha तुम्हे अगर परेशानी हो तो हम एक और रूम ले लेते हैं.
दीक्षा मुस्कुराते हुए boli…mujhe कोई टेंशन नहीं है वाणी. हम तीनो एक साथ बड़े मज़े से रहेंगे.
नमन मन hi मन budbudaya…kahin थ्रीसम तो नहीं करोगे. रूचि ने सुन लिया था उसने नमन के कंधे पर थप्पड़ मारा. दीक्षा को लगा उसने कुछ तो गलत bola….kya बोलै नमन तुमने.
नमन शैतानी मुस्कान के saath….tere कान बज रहे हैं दीक्षा मैंने तो कुछ नहीं बोलै, क्यों रूचि मैंने बोलै कुछ क्या?
रूचि खीझकर boli…mujhe क्या पता कुछ बोलै के नहीं तुमने. उसे बुरा लगा था वो थ्रीसम बोलकर उसकी बहिन को भी बीच में इन्वॉल्व कर रहा था. जबकि रोहन तो सच में सोच रहा था काश ऐसा हो जाये. पर उसे इस बात का अच्छे से पता था के उसकी बहिन चाहे एक हफ्ता hi काम हो पर अठारह से काम थी अभी.
यहाँ दीक्षा ने एक बात सभी के सामने बोलकर सबको चौंका diya…waise आप लोगों की इनफार्मेशन के लिए बोल दूँ, मैंने और रोहन ने किश किया है हाँ ये बात अलग है के हमने खुद को कपल डिक्लेअर नहीं किया.
ये सुनकर दोनों जोड़े चौंक गए और फिर ये बोलकर दीक्षा ने रूही की और देखा तो वो boli…mujhe पता है दीक्षा सब कुछ पता है. तुम्हे बताया तो भाई ने के हम भाई बहिन के साथ साथ दोस्त भी हैं. हम दोनों एक दुसरे से कुछ नहीं छुपाते.
वो चरों के चेहरे से लग रहा था के उन्होंने रूही की बात को अप्प्रेसियते किया है.
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रोहन की छूट का उन दोनों कपल्स ने खूब फायदा उठाया. होटल एक वीराने से इलाके में था. जहाँ शायद कपल्स hi आते होंगे. उसके बगल में hi बहुत बड़ा ग्राउंड था. सभी लोग उस ग्राउंड में चले गए वहां जगह जगह पर बेंच लगे हुए थे. जहाँ पहले से कुछ कपल्स बैठे प्यार की खुमारी में अपने हिसाब से जितना कुछ ओपन में हो सकता है कर रहे थे.
इन दोनों जोड़ों और इन तीनो को भी तीन बेंच मिल गए और ये बैठ गए. उन दोनों ने अपनी अपनी गफ को किश करना शुरू कर दिया. रूही दीक्षा को देखकर मुस्कुराते हुए boli…tum दोनों मेरी वजह से शरमाना मत चोंच लड़नी है तो लड़ा लो.
शायद हम दोनों उसके कहने का hi इंतज़ार कर रहे the…ham दोनों भी खूब पशनातेली एक दुसरे को किश करने लगे. दिसखा भी जैसे तैयार hi बैठ थी उसने रोहन के सर के पीछे हाथ रखे और रोहन के हाथ दीक्षा की पीठ को सेहला रहे थे. तीनो कपल्स में इन दोनों किश सबसे ज्यादा परफेक्ट थी.
रूही मुस्कुराते हुए उन दोनों की इस पैशनेट किश को देख रही थी और उसका खुद का मन कर रहा था अपने भाई के साथ किश करने को. बल्कि उसकी तो छूट में भी खुजली उठ रही थी. वैसे उसे इस बात का अच्छे से पता था के उसका भाई उसके अठारह का होने से पहले कभी नहीं मानेगा.