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- Dec 5, 2013
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Part 52इधर मेहुल की भी थोड़ी बात हो जाये. बेचारी का मन hi नहीं लग रहा था अपने भाई के बिना. किचन में माँ की हेल्प कर रही थी. चाय में चीनी की जगह नमक दाल दिया बिना सोचे समझे. माँ ने उसे हिलाकर पूछा, आजकल तेरा ध्यान कहाँ है. सुबह तूने टीशर्ट भी उलटी पहनी हुई थी. किसके ख्यालों में खोयी हो, कोई बॉय फ्रेंड तो नहीं बना liya…maa हँसते हुए बोली.
मेहुल अपनी माँ के हल्का सा मरते hue…arey माँ अगर होगा तो क्या आपको नहीं बताउंगी. और सारा दिन तो घर में पड़ी रहती हूँ. कहाँ से बनाउंगी बर्फ.
Nidhi…aajkal बर्फ बनाने के लिए बहार जाने की क्या जरुरत है. सोशल मीडिया पर इतना तो मटेरियल पड़ा है. लोग उसी प्लेटफार्म को चुनते हैं आजकल साथी ढूंढने के लिए.
Mehul…arey मेरी भोली माँ, जो साथी होते हैं वो बहार मिलने को बुलाते हैं, वो चीज ना भी दूँ हुग और किश तो सभी को चाहिए के नहीं चाहिए.
Nidhi..muh पर हाथ rakhkar…haye कैसे बेशर्मो की तरह बात कर रही हो.
मेहुल हँसते हुए…25 साल होने को आये आपको ये सब करते हुए आपको शर्म नहीं आती शर्म करते हुए.
अबके निधि उसको मारती हुई बोलती hai…aajkal के बचे कितने बेशर्म हो गए हैं.
मेहुल …मन mein….mujhe बेशर्म बोल रही. खुद पापा के इलावा चाचा से भी चुदती hai.tab शर्म कहाँ जाती है इनकी.
Nidhi…ab कहाँ खो गयी फिर से.
Mehul…arey मम्मी आप इस बात को छोडो न. मिलवा दूंगी जब भी होगा कोई.
Nidhi…achha मेरी माँ. चलो तुम दाल को तड़का लगाओ मैं अभी आयी बाथरूम जाकर.
मेहुल फिर से भाई की यादों में खो जाती है. उसे याद आता है वो समय जब रोहन उसकी छूट को कुत्ते की तरह चाट रहा था. मेहुल को अभी भी अपनी छूट पर उसकी जीभ महसूस होने लगती है. आनंद से उसकी ऑंखें मैच जाती है.
मेहुल का हाथ अपने आप अपनी छूट पर पहुँच जाता है. वो उसे सहलाने लगती है. और भाई का नाम पुकारने लगती है. कोई दस मिनट के इस ख्याल में मेहुल अपने चार्म पर पहुंचकर झाड़ जाती है. जब उसका पानी निकल जाता है तो उसे याद अत है के उसकी माँ उसे कुछ काम बोलकर गयी थी.
फिर वो याद करने की कोशिश करती है के निधि ने उसे क्या करने को बोलै था. पर सेक्स के उन्माद की वजह से वो भूल जाती है. इतने में निधि आती है और देखती है के मेहुल फिर से कड़ी सोच रही है. वो आते hi बोलती hai…lagta है अब तेरे पापा को बोलना hi पड़ेगा, के एक अदद दामाद जी का इंतज़ाम कर दें. आपकी बेटी का काम नहीं चल रहा. मेहुल अपनी माँ को मरते हुए गुस्से में बोलती hai…mummy…
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दीक्षा और रोहन नंगे hi लेते हुए थे. दीक्षा रूही को बोलती है तूने अपने भाई के साथ किश तो किया है तो अभी भी किश तो कर hi सकती है न. रूही को दीक्षा की वजह से थोड़ी शर्म आ रही थी. तो वो बैठी रहती है. रोहन उठता है अंडरवियर डालता है और और उसी हाल में रूही के पास जाकर उसको अपनी गॉड में बिठाकर उसके होंठों पर होंठ रख देता है.
दीक्षा को भी लग रहा था के रूही को थोड़ा तो कुछ मिलना चाहिए. इसलिए उसने उसके बारे में सोचा और बोलै. रोहन रूही के कोमल मुलायम और रसीले होंठों को चूसना शुरू कर देता है. रूही को भी ये चाहिए था तो वो भी इस किश का आनंद लेते हुए अपना पूरा जोर लगा देती है किश में.
वो उसकी गॉड में बैठी थी तो ऊपर से घिसती रहती है और इस तरह से जल्दी hi अपना पानी छोड़ देती है. बेचारी को अभी चुदाई का तजुर्बा कहाँ था.
उसको तो जैसे इस किश में hi चुदाई का आनंद मिल रहा था. उसके साथ किश करते करते रोहन का मूड बन गया . हालाँकि वो दो बार पहले भी दीक्षा के साथ चुदाई कर चूका था पर उसे फिर से ठरक जाग जाती है और वो वहां से उठकर अपना अंडरवियर उतर फेंकता है
और सीधे जाकर अपना लुंड दीक्षा के मुँह में घुसेड़ देता है उसके चूसने के लिए. दीक्षा भी एक आज्ञाकारी बचे की तरह उसके लुंड को चूसना शुरू कर देती है. रोहन लुंड चुसवाने में ज्यादा टाइम नहीं लगवाता वो चुदाई में ज्यादा टाइम लगाना छह रहा था.
उसने लुंड को सीधा छूट का रास्ता दिखा दिया और अब तो दानन्दन चुदाई शुरू कर दी सीधे hi. उसने कोई फोर्मलिटी नहीं की के पहले छूट को छठा जाये या उस पर कोई लुबे लगाया जाये. दीक्षा भी दो बार चुदाई करवा के थोड़ा खुल चुकी थी और वो इस मज़ेदार चुदाई का आनंद लेने लगी.
रोहन ने उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर अपने हाथों से उसकी दोनों चूचियों को मसलना शुरू कर दिया. दीक्षा को कभी ज़िन्दगी में भी अंदाजा नहीं हुआ होगा के चुदाई में इस हद तक मज़ा आता है. वो तो सोचती थी के सिर्फ थोड़ा बहुत आनंद आता होगा उसके नहीं पता था के चुदाई मतलब स्वर्ग के झूठे.
एक बार अंदर पिचकारी मार दो या दस बार, क्या फर्क पड़ता है. रोहन ने फिर से दीक्षा के अंदर hi पिचकारी मार दी. थोड़ा सुस्ताने के बाद उन लोगों ने अंदर जाने का निर्णय लिया क्यूंकि अब सबको भूख लगी थी.
अंदर कुछ सैंडविच और टोस्ट पड़े थे और ओवन का भी इंतज़ाम कर रखा था उन्होंने. तो बस उन्हें उसको गर्म करके खाना था. चाय और कॉफ़ी के पाउच पड़े थे और कैटल भी थी जिससे वो लोग खुद अपनी अपनी चॉइस का ड्रिंक बना कर पि सकते थे.
सबने कॉफ़ी hi पि और एक एक चीज़ पेट्टी खाई तो कुछ रहत सी मिली. खाना खाने के लिए उन लोगों को रेस्टोरेंट जाना पड़ना था. इतनी हिम्मत उनमे से किसी में नहीं थी. इसलिए उन लोगों ने अभी सोने का निर्णय लिया. तीनो एक hi बीएड पर लेट गए. दोनों लड़कियां रोहन के इर्द गिर्द लेती थी. रोहन बाबू की तो फुल चढ़ाई थी.
शाम को जब इन तीनो की आंख खुली तो भूख के मारे पेट फटने को आ रहे थे इन तीनो के. अब रेस्टोरेंट जाकर hi गुजरा था. खाना टोटली फ्री था. तीनो पूरे कपडे दाल कर निकल लिए रेस्टोरेंट की और. उन्होंने देखा के प्रथम, ruchi,naman और वाणी वहां पहले से बैठे खाना ठूंस रहे थे.
बुफे सिस्टम था. सबने अपनी अपनी प्लेट्स उठाई और अपने हिसाब से खाना डालना शुरू कर दिया. और जब उन लोगों का खाना दाल गया तो वो लोग उन चरों के पास hi आ गए. नमन जो कभी मज़ाक करने से बाज नहीं आता था उसने छेड़ते हुए बोलै.
नमन …हँसते hue…ek के साथ एक फ्री.
Rohan…gusse mein…kya मतलब है तेरा बे.
Naman…muskura kar…chill बीआरओ मैं तो मज़ाक कर रहा हूँ. वैसे भी रूही तो तेरी बहिन है.
Rohan…mazakiya लहजे mein…vani की और देखते hue…aur कुछ लोग तो बहना को भी नहीं chhodte.chod डालते हैं/
नमन और वाणी तो एकदम सकपका गए रोहन की बात सुनकर. वाणी की तो गर्दन hi झुक गयी.
Rohan…mazak भरे लहजे mein…kyun नमन आया मज़ा या तुझे और दिलों मज़ा. प्रथम को बताया तूने?
नमन …अब गुस्से mein…kya बताना है प्रथम को?
Rohan…wahi जो तुम दोनों बातें कर रहे थे झाड़ियों के पीछे se…fir वाणी की और देखते हुए bola…kyun वाणी तुम तो काफी बड़ी लग रही हो नमन से कैसे बानी इसकी गफ. बताओगी क्या? मेरी उम्र की लग रही हो तुम तो.
वाणी ने तो खाना hi छोड़ दिया. उसे लगा उन लोगों की पोल खुल गयी है वो अब नमन को ऑंखें निकाल रही थी और नमन मन hi मन सोच रहा था बहिन छोड़ ये तो पन्गा hi ले लिया इस बन्दे के साथ मज़ाक करके.
Pratham…arey तुम लोग ये इशारों में क्या बातें किये जा रहे हो. हम सब दोस्त हैं. आपस में खुलकर चुदाई कर सकते हैं तो बातें भी खुलकर कर सकते हैं यार. यहाँ कौन सा कोई बेगाना है.
Rohan…mazak में नमन se..oye भेनचोद बता दे न प्रथम को क्या बात है?
नमन और वाणी रोहन के एकदम फ्रैंक होने से घबरा से गए और उन्हें लगा के रोहन दीक्षा और रूही के सामने तो पोल खुल चुकी है अब प्रथम और रूचि के आगे ना खुल जाये कहीं.
Naman…arey यार क्या बातें कर रहे हो रोहन. कुछ भी तो नहीं है. अगर तुम्हे लगता है कुछ है तो तुम hi बता दो न. हम तो दोस्त हैं. और यार सच में सॉरी मैंने तुम्हारे साथ उस वक्त गलत मज़ाक कर दिया. देखो अब तुम्हारे हाथ में है सब कुछ.
रोहन को अब उसका स्वर मिन्नत वाला लगा. तो उसने सोचा चलो इसे बचा लिया जाए.
Rohan…pratham se…kuchh नहीं यार वो हमें इनकी झाड़ियों के पीछे से आवाज़ें आ रही थी. मैंने सुना के नमन जब पहली बार वाणी की चुदाई करने लगा तो अंदर डालने से पहले hi इसका झाड़ गया.
मेरी बात पूरी होते hi प्रथम और रूचि जोर से हंस पड़े. दीक्षा और रूही मेरी और हैरानी से देख रहे थे और नमन को जैसे लगा उसकी जान में जान आ गयी है. वाणी भी अब चैन की सांस ले रही थी.
नमन ने मेरी और ऐसे देखा जैसे के रहा ho..thank यू यार.
प्रथम ने नमन से poochha...oye बहिन छोड़ रोहन सही कह रहा है क्या?
नमन को जबरदस्ती हाँ में सर हिलना पड़ा और वो हड़बड़ा कर bola…hhhhaan.
वो ऐसे बोल hi रहा था के मेरी एक कोने पर बैठे कपल पर निगाह गयी जो किश करने में तल्लीन tha…maine तुरंत रूही से bola…ruhi उधर देख kaun…ruhi ऑंखें फाडे उस कपल को देखने लगी.
दोस्तों आज जितना भी अपडेट मिला है उससे गुजरा करना पड़ेगा और अब से लेकर दस दिन तक आप लोगों को इंतज़ार करना पड़ेगा अगले अपडेट के लिए. क्यूंकि दशहरे तक तो मैं इस साइट को खोलकर भी नहीं देखूंगा. तब तक के लिए अलविदा.
मेहुल अपनी माँ के हल्का सा मरते hue…arey माँ अगर होगा तो क्या आपको नहीं बताउंगी. और सारा दिन तो घर में पड़ी रहती हूँ. कहाँ से बनाउंगी बर्फ.
Nidhi…aajkal बर्फ बनाने के लिए बहार जाने की क्या जरुरत है. सोशल मीडिया पर इतना तो मटेरियल पड़ा है. लोग उसी प्लेटफार्म को चुनते हैं आजकल साथी ढूंढने के लिए.
Mehul…arey मेरी भोली माँ, जो साथी होते हैं वो बहार मिलने को बुलाते हैं, वो चीज ना भी दूँ हुग और किश तो सभी को चाहिए के नहीं चाहिए.
Nidhi..muh पर हाथ rakhkar…haye कैसे बेशर्मो की तरह बात कर रही हो.
मेहुल हँसते हुए…25 साल होने को आये आपको ये सब करते हुए आपको शर्म नहीं आती शर्म करते हुए.
अबके निधि उसको मारती हुई बोलती hai…aajkal के बचे कितने बेशर्म हो गए हैं.
मेहुल …मन mein….mujhe बेशर्म बोल रही. खुद पापा के इलावा चाचा से भी चुदती hai.tab शर्म कहाँ जाती है इनकी.
Nidhi…ab कहाँ खो गयी फिर से.
Mehul…arey मम्मी आप इस बात को छोडो न. मिलवा दूंगी जब भी होगा कोई.
Nidhi…achha मेरी माँ. चलो तुम दाल को तड़का लगाओ मैं अभी आयी बाथरूम जाकर.
मेहुल फिर से भाई की यादों में खो जाती है. उसे याद आता है वो समय जब रोहन उसकी छूट को कुत्ते की तरह चाट रहा था. मेहुल को अभी भी अपनी छूट पर उसकी जीभ महसूस होने लगती है. आनंद से उसकी ऑंखें मैच जाती है.
मेहुल का हाथ अपने आप अपनी छूट पर पहुँच जाता है. वो उसे सहलाने लगती है. और भाई का नाम पुकारने लगती है. कोई दस मिनट के इस ख्याल में मेहुल अपने चार्म पर पहुंचकर झाड़ जाती है. जब उसका पानी निकल जाता है तो उसे याद अत है के उसकी माँ उसे कुछ काम बोलकर गयी थी.
फिर वो याद करने की कोशिश करती है के निधि ने उसे क्या करने को बोलै था. पर सेक्स के उन्माद की वजह से वो भूल जाती है. इतने में निधि आती है और देखती है के मेहुल फिर से कड़ी सोच रही है. वो आते hi बोलती hai…lagta है अब तेरे पापा को बोलना hi पड़ेगा, के एक अदद दामाद जी का इंतज़ाम कर दें. आपकी बेटी का काम नहीं चल रहा. मेहुल अपनी माँ को मरते हुए गुस्से में बोलती hai…mummy…
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दीक्षा और रोहन नंगे hi लेते हुए थे. दीक्षा रूही को बोलती है तूने अपने भाई के साथ किश तो किया है तो अभी भी किश तो कर hi सकती है न. रूही को दीक्षा की वजह से थोड़ी शर्म आ रही थी. तो वो बैठी रहती है. रोहन उठता है अंडरवियर डालता है और और उसी हाल में रूही के पास जाकर उसको अपनी गॉड में बिठाकर उसके होंठों पर होंठ रख देता है.
दीक्षा को भी लग रहा था के रूही को थोड़ा तो कुछ मिलना चाहिए. इसलिए उसने उसके बारे में सोचा और बोलै. रोहन रूही के कोमल मुलायम और रसीले होंठों को चूसना शुरू कर देता है. रूही को भी ये चाहिए था तो वो भी इस किश का आनंद लेते हुए अपना पूरा जोर लगा देती है किश में.
वो उसकी गॉड में बैठी थी तो ऊपर से घिसती रहती है और इस तरह से जल्दी hi अपना पानी छोड़ देती है. बेचारी को अभी चुदाई का तजुर्बा कहाँ था.
उसको तो जैसे इस किश में hi चुदाई का आनंद मिल रहा था. उसके साथ किश करते करते रोहन का मूड बन गया . हालाँकि वो दो बार पहले भी दीक्षा के साथ चुदाई कर चूका था पर उसे फिर से ठरक जाग जाती है और वो वहां से उठकर अपना अंडरवियर उतर फेंकता है
और सीधे जाकर अपना लुंड दीक्षा के मुँह में घुसेड़ देता है उसके चूसने के लिए. दीक्षा भी एक आज्ञाकारी बचे की तरह उसके लुंड को चूसना शुरू कर देती है. रोहन लुंड चुसवाने में ज्यादा टाइम नहीं लगवाता वो चुदाई में ज्यादा टाइम लगाना छह रहा था.
उसने लुंड को सीधा छूट का रास्ता दिखा दिया और अब तो दानन्दन चुदाई शुरू कर दी सीधे hi. उसने कोई फोर्मलिटी नहीं की के पहले छूट को छठा जाये या उस पर कोई लुबे लगाया जाये. दीक्षा भी दो बार चुदाई करवा के थोड़ा खुल चुकी थी और वो इस मज़ेदार चुदाई का आनंद लेने लगी.
रोहन ने उसके होंठो पर अपने होंठ रखकर अपने हाथों से उसकी दोनों चूचियों को मसलना शुरू कर दिया. दीक्षा को कभी ज़िन्दगी में भी अंदाजा नहीं हुआ होगा के चुदाई में इस हद तक मज़ा आता है. वो तो सोचती थी के सिर्फ थोड़ा बहुत आनंद आता होगा उसके नहीं पता था के चुदाई मतलब स्वर्ग के झूठे.
एक बार अंदर पिचकारी मार दो या दस बार, क्या फर्क पड़ता है. रोहन ने फिर से दीक्षा के अंदर hi पिचकारी मार दी. थोड़ा सुस्ताने के बाद उन लोगों ने अंदर जाने का निर्णय लिया क्यूंकि अब सबको भूख लगी थी.
अंदर कुछ सैंडविच और टोस्ट पड़े थे और ओवन का भी इंतज़ाम कर रखा था उन्होंने. तो बस उन्हें उसको गर्म करके खाना था. चाय और कॉफ़ी के पाउच पड़े थे और कैटल भी थी जिससे वो लोग खुद अपनी अपनी चॉइस का ड्रिंक बना कर पि सकते थे.
सबने कॉफ़ी hi पि और एक एक चीज़ पेट्टी खाई तो कुछ रहत सी मिली. खाना खाने के लिए उन लोगों को रेस्टोरेंट जाना पड़ना था. इतनी हिम्मत उनमे से किसी में नहीं थी. इसलिए उन लोगों ने अभी सोने का निर्णय लिया. तीनो एक hi बीएड पर लेट गए. दोनों लड़कियां रोहन के इर्द गिर्द लेती थी. रोहन बाबू की तो फुल चढ़ाई थी.
शाम को जब इन तीनो की आंख खुली तो भूख के मारे पेट फटने को आ रहे थे इन तीनो के. अब रेस्टोरेंट जाकर hi गुजरा था. खाना टोटली फ्री था. तीनो पूरे कपडे दाल कर निकल लिए रेस्टोरेंट की और. उन्होंने देखा के प्रथम, ruchi,naman और वाणी वहां पहले से बैठे खाना ठूंस रहे थे.
बुफे सिस्टम था. सबने अपनी अपनी प्लेट्स उठाई और अपने हिसाब से खाना डालना शुरू कर दिया. और जब उन लोगों का खाना दाल गया तो वो लोग उन चरों के पास hi आ गए. नमन जो कभी मज़ाक करने से बाज नहीं आता था उसने छेड़ते हुए बोलै.
नमन …हँसते hue…ek के साथ एक फ्री.
Rohan…gusse mein…kya मतलब है तेरा बे.
Naman…muskura kar…chill बीआरओ मैं तो मज़ाक कर रहा हूँ. वैसे भी रूही तो तेरी बहिन है.
Rohan…mazakiya लहजे mein…vani की और देखते hue…aur कुछ लोग तो बहना को भी नहीं chhodte.chod डालते हैं/
नमन और वाणी तो एकदम सकपका गए रोहन की बात सुनकर. वाणी की तो गर्दन hi झुक गयी.
Rohan…mazak भरे लहजे mein…kyun नमन आया मज़ा या तुझे और दिलों मज़ा. प्रथम को बताया तूने?
नमन …अब गुस्से mein…kya बताना है प्रथम को?
Rohan…wahi जो तुम दोनों बातें कर रहे थे झाड़ियों के पीछे se…fir वाणी की और देखते हुए bola…kyun वाणी तुम तो काफी बड़ी लग रही हो नमन से कैसे बानी इसकी गफ. बताओगी क्या? मेरी उम्र की लग रही हो तुम तो.
वाणी ने तो खाना hi छोड़ दिया. उसे लगा उन लोगों की पोल खुल गयी है वो अब नमन को ऑंखें निकाल रही थी और नमन मन hi मन सोच रहा था बहिन छोड़ ये तो पन्गा hi ले लिया इस बन्दे के साथ मज़ाक करके.
Pratham…arey तुम लोग ये इशारों में क्या बातें किये जा रहे हो. हम सब दोस्त हैं. आपस में खुलकर चुदाई कर सकते हैं तो बातें भी खुलकर कर सकते हैं यार. यहाँ कौन सा कोई बेगाना है.
Rohan…mazak में नमन se..oye भेनचोद बता दे न प्रथम को क्या बात है?
नमन और वाणी रोहन के एकदम फ्रैंक होने से घबरा से गए और उन्हें लगा के रोहन दीक्षा और रूही के सामने तो पोल खुल चुकी है अब प्रथम और रूचि के आगे ना खुल जाये कहीं.
Naman…arey यार क्या बातें कर रहे हो रोहन. कुछ भी तो नहीं है. अगर तुम्हे लगता है कुछ है तो तुम hi बता दो न. हम तो दोस्त हैं. और यार सच में सॉरी मैंने तुम्हारे साथ उस वक्त गलत मज़ाक कर दिया. देखो अब तुम्हारे हाथ में है सब कुछ.
रोहन को अब उसका स्वर मिन्नत वाला लगा. तो उसने सोचा चलो इसे बचा लिया जाए.
Rohan…pratham se…kuchh नहीं यार वो हमें इनकी झाड़ियों के पीछे से आवाज़ें आ रही थी. मैंने सुना के नमन जब पहली बार वाणी की चुदाई करने लगा तो अंदर डालने से पहले hi इसका झाड़ गया.
मेरी बात पूरी होते hi प्रथम और रूचि जोर से हंस पड़े. दीक्षा और रूही मेरी और हैरानी से देख रहे थे और नमन को जैसे लगा उसकी जान में जान आ गयी है. वाणी भी अब चैन की सांस ले रही थी.
नमन ने मेरी और ऐसे देखा जैसे के रहा ho..thank यू यार.
प्रथम ने नमन से poochha...oye बहिन छोड़ रोहन सही कह रहा है क्या?
नमन को जबरदस्ती हाँ में सर हिलना पड़ा और वो हड़बड़ा कर bola…hhhhaan.
वो ऐसे बोल hi रहा था के मेरी एक कोने पर बैठे कपल पर निगाह गयी जो किश करने में तल्लीन tha…maine तुरंत रूही से bola…ruhi उधर देख kaun…ruhi ऑंखें फाडे उस कपल को देखने लगी.
दोस्तों आज जितना भी अपडेट मिला है उससे गुजरा करना पड़ेगा और अब से लेकर दस दिन तक आप लोगों को इंतज़ार करना पड़ेगा अगले अपडेट के लिए. क्यूंकि दशहरे तक तो मैं इस साइट को खोलकर भी नहीं देखूंगा. तब तक के लिए अलविदा.