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Part 37वो अंदर आयी और जैसे hi आगे बढ़ने लगी तो रोहन दरवाजा बंद करने के बाद उसकी और लपका और पीछे से उसे अपनी बाँहों में भर लिया. रोहन का खड़ा लुंड मेहुल की गांड में धस गया और रोहन पीछे से उसकी गर्दन को चूसने लगा. उसके चूसने में सेक्स का आभास हो रहा था. मेहुल का मन कर रहा था धक्का मारे अपने भाई को.
दोस्तों अब तक की वोटिंग के हिसाब से मुझे यही लग रहा है के ज़्यदातर जनता सेडक्टिव HI चाहती है. वैसे मेरी खुद की भी यही मंशा थी. थैंक्स ा लोट इस पोल्ल का हिस्सा बनने के लिए. अब कहानी को आगे कंटिन्यू कर रहा हूँ.
रोहन धक्का लगने की वजह से एकदम से पीछे हैट गया और दिवार से लगा. मेहुल को उसके ऐसे दिवार से टकराने पर तरस सा आ गया और वो उसके पास गयी और उसके होंठों पर हलकी सी किश कर दी. और एकदम से पीछे हैट गयी.
रोहन बुलाने laga….didi अब किश करने लगे थे तो अच्छे से करनी थी न. मेहुल मुस्कुराते हुए पीछे hi हटती जा रही थी.
रोहन ने देखा के दीदी का मन तो है किश करना का पर वो शर्मा रही है. इसलिए वो आगे बढ़ा मेहुल की गाल पर दोनों साइड हाथ रखकर अपने होंठ उसके होंठो से जोड़ दिए. मेहुल को इस बात का अंदाजा भी था और इंतज़ार भी.
रोहन बड़ी hi शिद्दत के साथ अपनी प्यारी बहिन के होंठों को चूसने लगा. मेहुल ने सोचा अब शर्म करके क्या फायदा कौन सा ये पहली बार हो रहा है. वो भी उस किश का भरपूर आनंद लेने लगी. उसके हाथ रोहन की पीठ पर ऐसे चल रहे थे के उसे किश का आनंद दुगुना बढ़ गया. रोहन ने आज दीप्ति की फुद्दी मारी थी और उसे सिर्फ एक hi बार चुदाई नसीब हुई थी. ये लुंड का स्वाभाव है के उसे जिस दिन एक बार चुदाई नसीब हो और वो दूसरी बार चाहता हो तो वो लाठी की तरह अकड़ा hi रहता है. आप उसे जितना मर्जी शांत कर लो हाथ से वो कभी होता hi नहीं.
मेहुल रोहन के लुंड को अपनी छूट पर महसूस कर रही थी. उसे उस स्पर्श से आनंद तो पूरा मिल रहा था पर वो कश्मकश में थी के उसे अपने भाई के लुंड को इस तरह से महसूस करके आनंद लेना चाहिए या नहीं. पर दूसरी और वो ये भी सोच रही थी के उसके बस में कहाँ है. ये तो कुदरती एहसास हैं और इन्हे त्यागा नहीं जा सकता, इसलिए उसने सोचा के जो जैसा चल रहा है उसे चलने देते हैं.
ऐसे hi किश बहुत लम्बी चल रही थी, दोनों की मंजूरी थी, दोनों को hi आनंद आ रहा था और दोनों को टोकने वाला कोई था नहीं क्यूंकि दोनों अकेले जो थे रूम में. रोहन अपने लुंड को जानबूझकर अपनी दीदी की छूट में धकेल रहा था. उसका लुंड अंडरवियर में एकदम खुला था, इसलिए मेहुल को भी उसका पूरा एहसास मिल रहा था.
मेहुल ने भी सूट और सलवार पहना था. सलवार पतली hi होती है तो हलके से दो परदे hi थे लुंड और छूट के बीच में. मेहुल एक तरफ घबरा भी रही थी और दूसरी और आनंदित भी हो रही थी.
रोहन बहुत ज्यादा जोश में था. इतना जोश में के अब तो मेहुल को साँस लेना भी मुश्किल हो गया था. जोश जोश में रोहन ने थोड़ी जल्दबाजी दिखा दी. उससे गलती हो गयी. मस्ती में भर कर उसने अपनी दीदी के बूब्स को पकड़ लिया. दोनों हाथों से दोनों और मजबूत पकड़ बना ली.
मेहुल शॉकेड रह गयी. उसे अपने भाई से इस तरह की हरकत की बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी. अभी किश तक तो उसके मन ने एक्सेप्ट कर लिया था. कपडे के बीच अपने आप हो रहे स्पर्श को भी उसने एक तरह से स्वीकृति दे दी थी. पर वो अभी जानबूझकर किसी सेक्सुअल एक्टिविटी को करने नहीं देना चाहती थी. इसलिए उसने रोहन को परे धकेल दिया और जोर से boli…bhai…ye क्या कर रहे हो तुम. किश कर रहे थे किश तक hi सिमित रहते न. ये हरकत मत करो. हम भाई बहिन हैं.
रोहन का चेहरा एकदम से बुझ गया. उसे तो लगा उसकी दीदी अब हर चीज के लिए तैयार है. किश वो बड़ी शिद्दत के साथ कर रही थी, लुंड का स्पर्श भी उसको मंजूर था फिर ये मुम्मे छूटे hi इसे क्या हो गया. वो सोचने लगा के हाँ उससे जल्दबाजी हो गयी.
उधर मेहुल भी अपने भाई को विचारों में गुमसुम सा देख कर एकदम से परेशान हो गयी. उसे अपने पर गुस्सा आने लगा. उसे अपने भाई के साथ ऐसे नहीं करना चाहिए था. उसे उसको आराम से समझाना चाहिए था. पर फिर उसने सोचा के ये उसने जानबूझकर तो किया नहीं. ये तो अपने आप होने वाली हरकत थी.
उसे लगा भाई को मानना चाहिए, वो बड़े hi प्यार से boli…bhai इधर आओ. रोहन यंत्रवत सा उसकी और आया और मेहुल ने उसके दोनों हाथ पकड़कर kaha….dekho भाई. इतना सोचो मत. पर हाँ हमें कुछ तो मर्यादा में रहना चाहिए. हम भाई बहिन हैं. किश तो चलो ठीक है. पर आप मेरे इन अंगों को नहीं पकड़ सकते न. ये गलत है.
रोहन भी धीरे से उदास स्वर में bola….wo दीदी आज फिर सेक्स हुआ. दीप्ति आयी थी पूजा की फ्रेंड. वो तो साफ़ सफाई देखने आयी थी. हम दोनों से hi रहा नहीं गया और सेक्स हो गया. हम तो दूसरी बार भी करना चाहते थे पर उसको काम आ गया था. तो दीदी इसलिए मेरा फिर से मन कर रहा था. क्यूंकि एक आस सी थी दुसरे सेक्स की. इसलिए ये इस हाल में है तो मुझसे रहा नहीं गया और हो गया.
मेहुल ने उसके लुंड की और देखा जो अंडरवियर से बहार निकलने को तैयार था. मेहुल के चेहरे पर स्माइल सी आ गयी. उसे अपने भाई पर तरस भी आ रहा था. पर वो मजबूर थी और उसकी कोई मदद नहीं कर सकती थी.
इसलिए वो रोहन से boli….bhai बाथरूम में जाकर हल्का हो आओ. नहीं तो सर दर्द करने लगेगा तुम्हारा.
रोहन bola…abhi रहने देते हैं दीदी इसे ऐसे hi. मैं कपडे पहन लेता हूँ ताकि आपको कोई परेशानी न हो. मेहुल हँसते हुए boli…arey कोई बात नहीं ऐसे hi रहो मुझे कोई परेशानी नहीं है. अभी एक बार देख hi लिया है तो कोई बात नहीं.
फिर उसके बाद मेहुल ने चेंज किया. पता नहीं क्यों उसने आज अंडरवियर और ब्रा नहीं पहनी. पतला सा लोअर और डीप नैक टीशर्ट सी पहनी.
खाना खाने के बाद वो दोनों बीएड पर लेट गए. मेहुल रोहन के नजदीक आकर उससे चिपक गयी. अंडरवियर के बिना उसने कुछ नहीं पहना था. रोहन ने उसकी टैंगो में टंगे फंसा दी. अब उसका लुंड एकदम उसकी छूट पर था. उसके बूब्स रोहन की छाती पर स्पर्श कर रहे थे और ये रगड़ रोहन को मस्त कर रही थी. मेहुल ने खुद hi एक बार किश करनी शुरू कर दी. वो अपने भाई को थोड़ा सा मज़ा देना चाहती थी.
वो उसे फिर से boli…bhai जाओ बाथरूम में जाकर इसे ठंडा कर दो.
रोहन bola…nahi बहिन मैं इसे ठंडा नहीं करना चाहता अभी. ऐसे hi आनंद लेने दो न. उसका मतलब था अगर ये शांत हो गया तो उसकी छूट के स्पर्श का आनंद नहीं ले सकता था न.
मेहुल बात बदलते हुए boli…bhai हम लोग कल चले जायेंगे. एक बार अपनी दोस्त पूजा से बात कर लेते. रोहन को उसकी बात अच्छी लगी. उसने तुरंत पूजा को फ़ोन मिला दिया.
पूजा भी जैसे उससे फ़ोन पर बात करने को तैयार hi बैठी thi…boli…are रोहन अगर तुम फ़ोन न करते तो मैं फ़ोन करने वाली थी तुम्हे. पता है आज घर पर कोई भी नहीं है. मैं अकेली बोर हो रही थी.
रोहन bola…pooja मैंने ये बताने के लिए फ़ोन किया था के हम लोग कल वापिस जा रहे हैं तो अब पता नहीं कब मुलाकात हो तुमसे.
Pooja…par तुम लोग चेक आउट तो मेरे आने के बाद hi करोगे न.
रोहन bola…nahi यार हमारी ट्रैन अर्ली मॉर्निंग की है तो हम सुबह 8 बजे निकल जायेंगे.
पूजा उदास सी हो गयी और boli…to क्या तुम मुझे मिलकर नहीं जाओगे.
रोहन हँसते हुए bola…waise मिल तो हम अब भी सकते hain…usne ये बोलते वक्त अपने लुंड पर हाथ फेरा और इस चक्कर में उसका अंगूठा मेहुल की छूट से टकरा गया और मेहुल के मुँह से सीई की आवाज़ आयी. उसको बहुत अच्छा लगा था रोहन के अंगूठे के अपनी छूट पर स्पर्श से.
पूजा boli…main कैसे मिल सकती हूँ. अगर तुम चाहो तो मेरे घर आ जाओ. यहाँ कोई भी नहीं है.
रोहन bola…arey नहीं यार मैं अनजान शहर में अपनी दीदी को अकेले छोड़कर नहीं जा सकती. अगर तुम यहाँ आ जाओ. उसका हाथ अभी भी अपने लुंड पर hi चल रहा tha.aur साथ hi अपनी बहिन की छूट से भी स्पर्श हो रहा था. मेहुल को हालाँकि एहसास था के उसके भाई का हाथ उसकी छूट से टच हो रहा है पर वो कुछ बोल नहीं रही थी रोहन को.
पूजा boli…chalo फिर ठीक है 15 मिनट इंतज़ार करो मैं तुम्हारे पास आ रही हूँ. पर तुम्हारी दीदी को तो कोई ऐतराज़ नहीं होगा न मेरे इस तरह रूम में आने से.
फ़ोन स्पीकर पर था तो रोहन ने अपनी दीदी की और देखा जिसने ये बात सुनते hi ना में गर्दन हिला दी तो रोहन bola…yaar दीदी को कोई ऐतराज़ नहीं है. तुम आ जाओ बस.
पूजा boli…abhi आयी. कहकर उसने फ़ोन रखा तो रोहन ख़ुशी के मारे अपनी दीदी के ऊपर hi चढ़ गया और bola…ooo दीदी मैं बहुत खुश हूँ, पूजा जो आ रही है और कुछ तो hoga..wo मेहुल की छूट से स्पर्श करके छोड़ने वाले स्टाइल में धक्के से मरने लगा. मेहुल को हंसी आ गयी और रोहन भी हंसने लगा. पर उसके ऐसा करने से दोनों को खूब मज़ा आ रहा था.
दोस्तों अब तक की वोटिंग के हिसाब से मुझे यही लग रहा है के ज़्यदातर जनता सेडक्टिव HI चाहती है. वैसे मेरी खुद की भी यही मंशा थी. थैंक्स ा लोट इस पोल्ल का हिस्सा बनने के लिए. अब कहानी को आगे कंटिन्यू कर रहा हूँ.
रोहन धक्का लगने की वजह से एकदम से पीछे हैट गया और दिवार से लगा. मेहुल को उसके ऐसे दिवार से टकराने पर तरस सा आ गया और वो उसके पास गयी और उसके होंठों पर हलकी सी किश कर दी. और एकदम से पीछे हैट गयी.
रोहन बुलाने laga….didi अब किश करने लगे थे तो अच्छे से करनी थी न. मेहुल मुस्कुराते हुए पीछे hi हटती जा रही थी.
रोहन ने देखा के दीदी का मन तो है किश करना का पर वो शर्मा रही है. इसलिए वो आगे बढ़ा मेहुल की गाल पर दोनों साइड हाथ रखकर अपने होंठ उसके होंठो से जोड़ दिए. मेहुल को इस बात का अंदाजा भी था और इंतज़ार भी.
रोहन बड़ी hi शिद्दत के साथ अपनी प्यारी बहिन के होंठों को चूसने लगा. मेहुल ने सोचा अब शर्म करके क्या फायदा कौन सा ये पहली बार हो रहा है. वो भी उस किश का भरपूर आनंद लेने लगी. उसके हाथ रोहन की पीठ पर ऐसे चल रहे थे के उसे किश का आनंद दुगुना बढ़ गया. रोहन ने आज दीप्ति की फुद्दी मारी थी और उसे सिर्फ एक hi बार चुदाई नसीब हुई थी. ये लुंड का स्वाभाव है के उसे जिस दिन एक बार चुदाई नसीब हो और वो दूसरी बार चाहता हो तो वो लाठी की तरह अकड़ा hi रहता है. आप उसे जितना मर्जी शांत कर लो हाथ से वो कभी होता hi नहीं.
मेहुल रोहन के लुंड को अपनी छूट पर महसूस कर रही थी. उसे उस स्पर्श से आनंद तो पूरा मिल रहा था पर वो कश्मकश में थी के उसे अपने भाई के लुंड को इस तरह से महसूस करके आनंद लेना चाहिए या नहीं. पर दूसरी और वो ये भी सोच रही थी के उसके बस में कहाँ है. ये तो कुदरती एहसास हैं और इन्हे त्यागा नहीं जा सकता, इसलिए उसने सोचा के जो जैसा चल रहा है उसे चलने देते हैं.
ऐसे hi किश बहुत लम्बी चल रही थी, दोनों की मंजूरी थी, दोनों को hi आनंद आ रहा था और दोनों को टोकने वाला कोई था नहीं क्यूंकि दोनों अकेले जो थे रूम में. रोहन अपने लुंड को जानबूझकर अपनी दीदी की छूट में धकेल रहा था. उसका लुंड अंडरवियर में एकदम खुला था, इसलिए मेहुल को भी उसका पूरा एहसास मिल रहा था.
मेहुल ने भी सूट और सलवार पहना था. सलवार पतली hi होती है तो हलके से दो परदे hi थे लुंड और छूट के बीच में. मेहुल एक तरफ घबरा भी रही थी और दूसरी और आनंदित भी हो रही थी.
रोहन बहुत ज्यादा जोश में था. इतना जोश में के अब तो मेहुल को साँस लेना भी मुश्किल हो गया था. जोश जोश में रोहन ने थोड़ी जल्दबाजी दिखा दी. उससे गलती हो गयी. मस्ती में भर कर उसने अपनी दीदी के बूब्स को पकड़ लिया. दोनों हाथों से दोनों और मजबूत पकड़ बना ली.
मेहुल शॉकेड रह गयी. उसे अपने भाई से इस तरह की हरकत की बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी. अभी किश तक तो उसके मन ने एक्सेप्ट कर लिया था. कपडे के बीच अपने आप हो रहे स्पर्श को भी उसने एक तरह से स्वीकृति दे दी थी. पर वो अभी जानबूझकर किसी सेक्सुअल एक्टिविटी को करने नहीं देना चाहती थी. इसलिए उसने रोहन को परे धकेल दिया और जोर से boli…bhai…ye क्या कर रहे हो तुम. किश कर रहे थे किश तक hi सिमित रहते न. ये हरकत मत करो. हम भाई बहिन हैं.
रोहन का चेहरा एकदम से बुझ गया. उसे तो लगा उसकी दीदी अब हर चीज के लिए तैयार है. किश वो बड़ी शिद्दत के साथ कर रही थी, लुंड का स्पर्श भी उसको मंजूर था फिर ये मुम्मे छूटे hi इसे क्या हो गया. वो सोचने लगा के हाँ उससे जल्दबाजी हो गयी.
उधर मेहुल भी अपने भाई को विचारों में गुमसुम सा देख कर एकदम से परेशान हो गयी. उसे अपने पर गुस्सा आने लगा. उसे अपने भाई के साथ ऐसे नहीं करना चाहिए था. उसे उसको आराम से समझाना चाहिए था. पर फिर उसने सोचा के ये उसने जानबूझकर तो किया नहीं. ये तो अपने आप होने वाली हरकत थी.
उसे लगा भाई को मानना चाहिए, वो बड़े hi प्यार से boli…bhai इधर आओ. रोहन यंत्रवत सा उसकी और आया और मेहुल ने उसके दोनों हाथ पकड़कर kaha….dekho भाई. इतना सोचो मत. पर हाँ हमें कुछ तो मर्यादा में रहना चाहिए. हम भाई बहिन हैं. किश तो चलो ठीक है. पर आप मेरे इन अंगों को नहीं पकड़ सकते न. ये गलत है.
रोहन भी धीरे से उदास स्वर में bola….wo दीदी आज फिर सेक्स हुआ. दीप्ति आयी थी पूजा की फ्रेंड. वो तो साफ़ सफाई देखने आयी थी. हम दोनों से hi रहा नहीं गया और सेक्स हो गया. हम तो दूसरी बार भी करना चाहते थे पर उसको काम आ गया था. तो दीदी इसलिए मेरा फिर से मन कर रहा था. क्यूंकि एक आस सी थी दुसरे सेक्स की. इसलिए ये इस हाल में है तो मुझसे रहा नहीं गया और हो गया.
मेहुल ने उसके लुंड की और देखा जो अंडरवियर से बहार निकलने को तैयार था. मेहुल के चेहरे पर स्माइल सी आ गयी. उसे अपने भाई पर तरस भी आ रहा था. पर वो मजबूर थी और उसकी कोई मदद नहीं कर सकती थी.
इसलिए वो रोहन से boli….bhai बाथरूम में जाकर हल्का हो आओ. नहीं तो सर दर्द करने लगेगा तुम्हारा.
रोहन bola…abhi रहने देते हैं दीदी इसे ऐसे hi. मैं कपडे पहन लेता हूँ ताकि आपको कोई परेशानी न हो. मेहुल हँसते हुए boli…arey कोई बात नहीं ऐसे hi रहो मुझे कोई परेशानी नहीं है. अभी एक बार देख hi लिया है तो कोई बात नहीं.
फिर उसके बाद मेहुल ने चेंज किया. पता नहीं क्यों उसने आज अंडरवियर और ब्रा नहीं पहनी. पतला सा लोअर और डीप नैक टीशर्ट सी पहनी.
खाना खाने के बाद वो दोनों बीएड पर लेट गए. मेहुल रोहन के नजदीक आकर उससे चिपक गयी. अंडरवियर के बिना उसने कुछ नहीं पहना था. रोहन ने उसकी टैंगो में टंगे फंसा दी. अब उसका लुंड एकदम उसकी छूट पर था. उसके बूब्स रोहन की छाती पर स्पर्श कर रहे थे और ये रगड़ रोहन को मस्त कर रही थी. मेहुल ने खुद hi एक बार किश करनी शुरू कर दी. वो अपने भाई को थोड़ा सा मज़ा देना चाहती थी.
वो उसे फिर से boli…bhai जाओ बाथरूम में जाकर इसे ठंडा कर दो.
रोहन bola…nahi बहिन मैं इसे ठंडा नहीं करना चाहता अभी. ऐसे hi आनंद लेने दो न. उसका मतलब था अगर ये शांत हो गया तो उसकी छूट के स्पर्श का आनंद नहीं ले सकता था न.
मेहुल बात बदलते हुए boli…bhai हम लोग कल चले जायेंगे. एक बार अपनी दोस्त पूजा से बात कर लेते. रोहन को उसकी बात अच्छी लगी. उसने तुरंत पूजा को फ़ोन मिला दिया.
पूजा भी जैसे उससे फ़ोन पर बात करने को तैयार hi बैठी thi…boli…are रोहन अगर तुम फ़ोन न करते तो मैं फ़ोन करने वाली थी तुम्हे. पता है आज घर पर कोई भी नहीं है. मैं अकेली बोर हो रही थी.
रोहन bola…pooja मैंने ये बताने के लिए फ़ोन किया था के हम लोग कल वापिस जा रहे हैं तो अब पता नहीं कब मुलाकात हो तुमसे.
Pooja…par तुम लोग चेक आउट तो मेरे आने के बाद hi करोगे न.
रोहन bola…nahi यार हमारी ट्रैन अर्ली मॉर्निंग की है तो हम सुबह 8 बजे निकल जायेंगे.
पूजा उदास सी हो गयी और boli…to क्या तुम मुझे मिलकर नहीं जाओगे.
रोहन हँसते हुए bola…waise मिल तो हम अब भी सकते hain…usne ये बोलते वक्त अपने लुंड पर हाथ फेरा और इस चक्कर में उसका अंगूठा मेहुल की छूट से टकरा गया और मेहुल के मुँह से सीई की आवाज़ आयी. उसको बहुत अच्छा लगा था रोहन के अंगूठे के अपनी छूट पर स्पर्श से.
पूजा boli…main कैसे मिल सकती हूँ. अगर तुम चाहो तो मेरे घर आ जाओ. यहाँ कोई भी नहीं है.
रोहन bola…arey नहीं यार मैं अनजान शहर में अपनी दीदी को अकेले छोड़कर नहीं जा सकती. अगर तुम यहाँ आ जाओ. उसका हाथ अभी भी अपने लुंड पर hi चल रहा tha.aur साथ hi अपनी बहिन की छूट से भी स्पर्श हो रहा था. मेहुल को हालाँकि एहसास था के उसके भाई का हाथ उसकी छूट से टच हो रहा है पर वो कुछ बोल नहीं रही थी रोहन को.
पूजा boli…chalo फिर ठीक है 15 मिनट इंतज़ार करो मैं तुम्हारे पास आ रही हूँ. पर तुम्हारी दीदी को तो कोई ऐतराज़ नहीं होगा न मेरे इस तरह रूम में आने से.
फ़ोन स्पीकर पर था तो रोहन ने अपनी दीदी की और देखा जिसने ये बात सुनते hi ना में गर्दन हिला दी तो रोहन bola…yaar दीदी को कोई ऐतराज़ नहीं है. तुम आ जाओ बस.
पूजा boli…abhi आयी. कहकर उसने फ़ोन रखा तो रोहन ख़ुशी के मारे अपनी दीदी के ऊपर hi चढ़ गया और bola…ooo दीदी मैं बहुत खुश हूँ, पूजा जो आ रही है और कुछ तो hoga..wo मेहुल की छूट से स्पर्श करके छोड़ने वाले स्टाइल में धक्के से मरने लगा. मेहुल को हंसी आ गयी और रोहन भी हंसने लगा. पर उसके ऐसा करने से दोनों को खूब मज़ा आ रहा था.