Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 2 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

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नदी क किनारे रधिया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 3.

अनिल काका- लल्लू बीटा, आज अपने पदोष मई सदी है तो नयी क यहाँ चला जा और अपना हुलिया सही करवा ले. देख कितने बड़े बाल हो गए है.

लल्लू- काका ये तो कुछ भी नहीं है मई तो और भी बड़ा करने का सोच रहा था.

पापा- चुप चाप जा क्र बाल कटवा. जानवर क जैसा लगता है.

लल्लू- पापा, गधा तो जानवर hi है न.

पापा- है क्यू.

लल्लू- आप hi तो बार बार मुझे गधा कहते है. जब जानवर जैसा दीखता हु तभी तो कहते है.

अनिल- तुम्हे मई क्या कहा है. जा क्र वो क्र.

लल्लू मुँह लटका क्र वह से जाने लगा.

सुनील- इधर आ.

लल्लू मुँह लटकाये हुए सुनील काका क पास गया.

सुनील- ये कुछ पैसे रख ले. नै क पास जा और उसे कहना की बाल न कटे बस इसे अच्छे से सेट क्र दे. और कही किसी से उलझ मत जाना. चुप चाप जाना और फिर बाल बनवा क्र आ जाना.

लल्लू अब खुश हो गया. पैसा ले क्र वो गौण क बहार जो चौक है वह छोटा सा बाजार लगता है तो उस और चल दिया.

आज तो नदी क तरफ भी नहीं गया. नदिया रानी आज इंतजार hi करती रह गई आज.

लल्लू गौण क गलियों से होता हुआ आगे बढ़ रहा था.

एक लड़का- अरे वो देख लल्लू आ रहा है. चल उसके साथ थोड़ा मजे लेते है.

दूसरा लड़का- बीटा उस पर कब पागलपन सवार हो जय उसका पता नहीं. गांड मर लेगा बिना थूक लगाए

अगर एक बार उसका सर घूम गया तो.

तीसरा लड़का- तू तो फत्तू है साला. जा बहन की चड्डी मई जा क्र घुस जा.

पहला लड़का- बहन क या माँ क. ( तीनो हस्ता हुआ)

तीसरा- अबे बहन का इस लिए कहा है की कही माँ क चड्डी मई घुसेगा और वह से कही अंदर hi घुस गया तो हमे भी निकलने मई गन्दा होना पड़ेगा लेकिन बहन वाली तो अभी खुली नहीं होगी तो वह अभी अंडर नहीं जा पाएगा और मन लो अगर खुल भी गया होगा तो ज्यादा बड़ा रास्ता नहीं होगा तो भी ये सेफ है ककी ये ज्यादा दूर नहीं जा पाएगा तो हमे भी निकलने मई ज्यादा म्हणत नहीं करना पड़ेगा.

दूसरा लड़का-( जो अभी इतने देर से बेजत्ती करवा रहा था.)

बहिन छोड़ो जब वो लल्लू तुम दोनों की माँ और बहन की चड्डी उतरेगा न तब मेरे पास न आना मेरा लैंड पकड़ने.

पहला लड़का- तेरा लैंड पकड़ने क्यू आऊंगा. मई अपना खुद पकड़ लूंगा.

फिर दोनों हुस्ने लगे.

लल्लू उनके पास आ गया था.

दूसरा लड़का- नमस्ते लल्लू भैया.

लल्लू- क्यू रे चिरकुट. यहाँ क्या अपनी माँ छुड़वा रहा है. गौण मई ब्याह है तो उस आँगन जा वह कुछ काम धाम क्र. अभी थोड़ी देर मई आ रहा हु अगर यहाँ दिखा तो सब की बहन की चड्डी खोल क्र लुल्ली दाल क्र देखूंगा की कौन चूड़ी है और कौन बिंछूड़ी.

तीनो लड़के वह से चुपचाप भाग गए.

लल्लू थोड़ा आगे बढ़ा तो पदोष की एक चची मिल गई.

चची- कहा जा रहे हो लल्लू.

लल्लू- चाक जा रहा हु. कोई काम था क्या चची.

चची- देख न तेरे चाचा कब क डॉक्टर क पास गए है दवाई लेन. लगता है बनाने hi लगे.

लल्लू- क्यू क्या हुआ. तबियत सही नहीं है क्या.

चची- बचे को दस्त आ रहा है बीटा.

लल्लू- ज्यादा दूध पीला दिए क्या चची.

चची- पता नहीं बीटा. जरा जा रहे हो तो चाचा को जल्दी से भेज देना.

लल्लू- ठीक है चची.

लल्लू वह से निकल क्र लम्बे डेग भरता हुआ चाक की और चल दिया.

चाक पहुंच क्र पहले डॉक्टर क क्लिनिक पर गया तो वह क्लिनिक बंद था.

लल्लू पडोसी चाचा को ढूंढने लगा.

वो एक चाय दुकान पर बैठ क्र वह राजनीती पर बहस करने मई लगे थे.

लल्लू दवाई दुकान ढूंढने लगा तो वो भी बंद था अभी.

दोपहर को अमूमन गौण मई दुकाने बंद क्र देते है सब फिर सब 3-4 क करीब खोलते है.

लल्लू आस पास देखा तो एक बाइसिकल दिख गया.

वो ले क्र डॉक्टर क घर चला गया. वह डॉक्टर से दवाई ले क्र वो चची क घर आया.

यहाँ चची घर क बहार hi इंतजार क्र रही थी.

लल्लू आ क्र बाइसिकल से उतरा.

लल्लू- लो चची डॉक्टर का क्लिनिक बंद था. और चाचा वही इंतजार क्र रहे है. मई उसके घर से ले आया हु.

चची- आह लल्लू. बीटा तुझे मेरी भी उम्र लग जय. आ बीटा बैठ थोड़ा पानी पि आराम क्र फिर जाना.

लल्लू- नहीं चची. मुझे और भी काम है. अभी चलता हु फिर आऊंगा.

चची- चुप चाप बैठ यहाँ. थोड़ी देर से कुछ नहीं हो जाएगा.

लल्लू घर क अंदर जा क्र बैठ गया.

चची का बच्चा अभी 2 साल का था.

चची पहले उसे दवाई पिलाई और फिर पानी ला क्र लल्लू को दी.

चची- क्या क्र रहा था तेरा चाचा.

लल्लू- चाय दुकान पर चाय वाले की घरवाली घरवाली से बात क्र रहे the.:D

लल्लू- चची ये क्या है. ( बीएड पर चची का ब्रा रखा हुआ था वो उठा क्र बोलै.

चची- ye..ye. तू रहने दे. ( लल्लू क हाथ से ब्रा झपट क्र लेती हुई बोली.

लल्लू- चची इसका क्या होता है.

चची- ये तेरे काम का नहीं है.

लल्लू- तो किस क काम का है ये चची.

चची- ये औरते पहनती है.( कितना भोला है ये.)

चची को नहीं पता की आग का गोला है ये.

लल्लू- चची औरते तो साडी पहनती है. ये छोटा सा कैसे पहनती है.

चची- जब तेरा ब्याह होगा तब अपनी घर वाली से पूछ लेना.

लल्लू- क्या ये बात सिर्फ घर वाली hi बताती है.

चची- है ये सिर्फ घरवाली hi बताती है.

लल्लू- चची तो फिर आप hi बता दो न. आप भी तो घर वाली hi हो कौन सा बहार वाली ho.:D :lol:

चची- (सर पर हाथ मरती हुई अपने मन मई.) कहा फस्स गई मई. क्यू इसे साथ ले क्र आ गई. भला होता जो बहार से hi भेज देती. लेकिन कितना भोला है. कुछ भी नहीं पता इसे.

चची- इसे अंडर पहनते है.

लल्लू- अंदर मतलब चची. घर क अंदर पहनते है. (होठ पर ऊँगली रख क्र सोचता हुआ.)

चची- नहीं रे बुद्धू. साडी क निचे पहनते है इसे.

लल्लू- क्या चची. साडी क निचे तो पेटीकोट होता है.

चची- ( खीझ क्र) मई दिखती हु.

चची कड़ी हुई और दरवाजा बंद क्र दिया जा क्र बहार का फिर अंदर आ क्र वो दरवाजा भी बंद क्र दिया.

लल्लू का लुल्ली खड़ा होने लगा.

चची अपने छाती से साडी हटा क्र ब्लाउज खोल दी.

ब्लाउज खुलते hi चची की दूध से भरी दोनों टंकी कुद्द क्र बहार आ गए.

गोर गोर उस दूध से भरे बड़े बड़े गुब्बारे को देख क्र लल्लू का लुल्ली तो खड़ा हो hi गया साथ hi खुद भी खड़ा हो गया वो.

गुब्बारे क उप्पेर एक इंच का चुचुक गुलाबी घेरा ाः, आनंदमई दृश्य.

लल्लू ये देख क्र कपट कदमो से आगे चची क पास जा पंहुचा.

चची तो ब्लाउज निकलने मई मस्त थी.

लल्लू देखा की उन एक इंच बड़े चुचुक से बून्द बून्द क्र क दूध निकल रहा है.

लल्लू- चची इस मई से दूध निकल रहा है.

चची- है बचे का तबियत ख़राब है तो अभी ये पि नहीं रहा है न इस लिए भरा हुआ है. बहुत दर्द करता है.

लल्लू- चची m.a.i मई kh..a..li क्र दू.( कपट हुए बोलै.)

चची- नहीं नहीं. किसी को पता चल गया तो मई कही की नहीं रहूंगी.

लल्लू- किसी को कौन बताएगा. क्या आप बताओगे. और आप को दर्द भी क्र रहा है न.

चची- नहीं मई खली क्र लुंगी.

लल्लू- कैसे. आप कैसे करोगे.

चची- अपने हाथ से और कैसे.

लल्लू- चची फिर तो वो बर्बाद हो जाएगा. मई खली क्र देता हु जरा सा भी बर्बाद नहीं होगा.( लल्लू अपने होठ पर जीभ फिरता बोलै जो इस दृश्य को देख क्र सुख गया था.)

चची- तुम कैसे करोगे.

लल्लू- जैसे अपना मुन्ना करता है.

चची- क्या.. tu..tum पियोगे.

लल्लू- है. आप मेरी माँ क जैसी hi तो हो. जैसे मुन्ना है वैसा मई भी तो hi आप का.

चची- नहीं नहीं किसी को पता चल गया तो.

लल्लू- किसी को पता नहीं चलेगा.( लल्लू बोलते बोलते एक चुचुक को मुँह मई भर चूका था.

चची घबरा क्र हटना चाहती थी लेकिन लल्लू क होठो मई तो एक अंगूर जा चूका था.

लल्लू आँखे बंद किये उस आनंद को अनुभव करता हुआ एक हाथ से दूसरे गुब्बारे को पकड़ क्र सहलाने लगा.

चची की मजे से आँखे बंद हो गई.

लल्लू थोड़ा आगे हो क्र दूसरे हाथ से चची को पीछे से अपने से चिपका लिया.

चची आँखे बंद किये हुए लल्लू का सर सहला रही थी.

लल्लू गटागट टंकी से दूध खली किये जा रहा था और दूसरे को हौले हौले सहला रहा था की उस का दूध न छलके.

चची- बीटा, ये खली हो गया. अब दूसरा भी क्र दे.

लल्लू अब इस को मुँह से निकल क्र इस को हाथ मई ले लिया और उस वाले को मुँह मई.

लल्लू मुँह खोल क्र जितना उसके मुँह मई जा सकता था उतना दाल क्र चूसक रहा था.

चची- ीिसस्स… आराम से बीटा. दर्द करता है.

लल्लू अब जो खली हो गया था उसे दबाते हुए दूसरे हाथ को चची क पीछे उसके पीठ पर ले जा क्र उसे सहलाने लगा.

लल्लू पीठ सहलाता सहलाता अपना दूसरा हाथ निचे करने लगा और एक समय आया की उसका हाथ निचे कमर पर आ गया जहा चची साडी बांध राखी थी.

चची लल्लू क सर को अपने छाती मई अब घुसाए जा रही थी सहलाते सहलाते.

चची की मजे से आँखे बंद थी.

लल्लू अपना हाथ अब चची क कमर से फिर उप्पेर ला क्र पुरे पीठ पर सहलाने लगा.

चची मजे से सिसकी लिए जा रही थी.

अब मजे से चची का पेअर कम्पनी लगा.

लल्लू का हाथ एक बार फिर निचे का सफर क्र रहा था.

अब उस से भी सबर नहीं हुआ और उसका हाथ कमर से निचे चची क नितम्ब पर जा पंहुचा.

चची मजे मई लल्लू क बालो को कास क्र पकड़ क्र मुँह उठा दी और उसके होठो पर अपना होठ लगा दी.

लल्लू अब दूध पीना छोड़ क्र चची क मुँह का सहद चखने लगा.

लल्लू का हाथ अब चची क नितम्ब पर फिलहाल रहा था.

लल्लू से बर्दास्त नहीं हुआ और उसका पहला हाथ जरा जोर से एक चुचुक को दबा दिया और दूसरा हाथ चची क नितम्ब का एक फांक मुठी मई भर क्र मशाल दिया.

चची लल्लू क होठो को अपने दांतो से कुचलती हुई झरने लगी.

मदहोशी मई झरते हुए चची पूरा लल्लू क साइन पर ढेर हो गई.

लल्लू उन्हें आगोश मई लिए हुए अभी भी उनके होठो का रास पि रहा था.

चची की जब खुमारी हटी तो वो एक झटके मई लल्लू को परे धकेल दिया.

लल्लू जा क्र बीएड पर गिरा.

चची तुरंत अपना ब्लाउज पहन ली और साडी सही क्र ली.

चची- लल्लू बीटा. तुम्हे काम था चाक पर. लेट हो जाएगा तुम्हे. अपना काम क्र लो जा क्र.

लल्लू चुप चाप वह से निकल लिया.

लल्लू बाइसिकल उठाया और चाक चला गया.

वह जिसका बाइसिकल था उसे दे के थैंक्स किया और नाई क पास चला गया.

नाइ इस समय खली hi बैठा था तो तुरंत उस से अपना बाल सेट करवाया और वापस घर की और चल दिया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 4.

घर आ क्र लल्लू आंगन मई जा क्र नाले पर नहाने चला गया.

वह से नाहा क्र वो घर आया. अपने कपडे निकल क्र पहने लगा.

माँ- आज ये वाले कपडे पहन ले बाबू. वो पुराने हो गए है.

लल्लू- पुराने हो गए तो क्या हुआ है तो मेरे hi. नया मई पहना हु तो पुराण कौन पहनेगा.

माँ- ये बाद मई पहन लेना. आज ये पहन ले.

लल्लू माँ क दिए कपडे पहनने लगा.

गौण मई अमूमन लोग धोती hi पहनते थे पहले. अब तो लगता hi नहीं की गौण है. वह भी सरे फैशन वाले कपडे पहुंच गए है.

धोती खोल क्र वो पेण्ट पहनने लगा तो दोनों पेअर एक साइड hi दाल रहा था.

माँ वही कड़ी हो क्र देख रही थी.

एक तो कच्चे मई उसका लुल्ली खड़ा था तो माँ क नजर का मुख्या आकर्षण का केंद्र तो वही था लेकिन ये लल्लू जो बेढंगा कपडा पहन रहा था.

माँ देख क्र हुस्ने लगी.

लल्लू दोनों पेअर एक साइड दाल रहा था और वो उस मई जा नहीं रहा था तो लल्लू डगमगा क्र गिरने लगा.

माँ वही पास कड़ी थी तो लल्लू माँ को hi पकड़ने को हाथ बढ़ाया और लल्लू की किस्मत…

उसके हाथ मई माँ का कंधे क बदले उसकी एक चुकी आ गई.

लल्लू को हाथ मई गुदगुदी मुलायम लग रहा था तो वो पकड़ क्र जोर से दबा दिया.

माँ की सिसकी निकल गई.

माँ- क्या क्र रहा है मुआ छोड़ मुझे.( लल्लू क हाथ पर थप्पड़ मरती बोली.

लल्लू सर उठा क्र देखा तो देखता है की गलती से दूध पकड़ लिया है माँ का तो उसने हड़बड़ा क्र छोड़ दिया.

लल्लू- माँ मेरे से नहीं पहना जा रहा ये. कैसे पह्नु इसे.

माँ- ला मई पहना देती हु.

फिर माँ बैठ क्र उसे पेण्ट पहना दी.

फिर उसके उप्पेर शर्ट पहन लिया.

माँ- (आँखों से काजल निकल क्र उसे कान क पीछे लगते हुए.) बहुत सुन्दर लग रहा है मेरा राजा बीटा.

लल्लू- मेरी माँ भी तो सब से सुन्दर है.

माँ- अब जा और ब्याह वाले घर जा क्र देख वह तुम्हारी सभी बहन गई है.

लल्लू- तुम नहीं गई माँ.

माँ- अब मई भी जाउंगी.

लल्लू- फिर यहाँ कौन रहेगा माँ.

माँ- अभी तो तेरा प्यारी काकी रहेगी. जब बारात आ जाएगा तब तेरे दादा जी यहाँ रहेंगे और काकी भी आ जाएगी वह.

लल्लू - ठीक है माँ फिर चलो हम साथ hi चलते है.

फिर माँ भी तैयार होने चली गई.

लल्लू बहार आ गया और इधर उधर देखने लगा.

लल्लू- कहा छुपी हो काकी. मई कब से तुम्हे धुंध रहा हु.

ऋतू काकी- क्यू मुझे क्यू धुंध रहा था. आज बड़ा सुन्दर लग रहा है मेरा बीटा.

लल्लू- मेरी प्यारी काकी भी तो सुन्दर है.

काकी- है है मस्का मत लगा. बता क्यू धुंध रहा था.

लल्लू- आप अभी हमारे साथ नहीं चल रही हो सदी वाले घर.

काकी- मई वह जाउंगी तो यहाँ कौन रहेगा.

लल्लू- तो क्या मई तुम्हारे साथ रुक जाऊ.

काकी- न बीटा तू जा वह मजे क्र. बस अपना ख्याल रखना. किसी से लड़ना नहीं वह बहुत से लोग आये होंगे.

लल्लू- ठीक है काकी. आप कहती हो तो नहीं रुकता. वैसे आप का मन हो तो बता देना. मई अमृत ले क्र आ जाऊंगा.

काकी- चल भाग. ( काकी उसे कमरे से धकेलते हुए बोली.)

लल्लू वह से बहार आँगन मई आ गया.

तभी काजल तैयार हो क्र बहार निकली.

आह क्या लग रही थी. बिलकुल मक्खन.

लल्लू तो मुँह खोले बस अपनी माँ को hi देखे जा रहा था.

माँ- मुँह बंद क्र ले माखी चला जाएगा. ( माँ मुसकुडती बोली.

लल्लू- माँ आप इतनी सुन्दर कैसे हो.

लल्लू- चुप. मार खायेगा. बिलकुल चुप चाप चल.( होठो पर ऊँगली रखती लल्लू को देख क्र बोली.)

लल्लू अपने होठो पर वैसे hi ऊँगली रख लिया जैसे काजल दिखाई थी.

काजल आगे आगे और लल्लू उसके मटके को उप्पेर निचे होता हुआ चलता देख रहा था.

लल्लू- माँ ये इतना बड़ा कैसे हो गया.

माँ- (मुर क्र लल्लू को देखता हुआ) क्या बड़ा हो गया है.

लल्लू- यही आप क कमर तक लहराते लम्बे काळा घने बाल.

माँ- तुम्हे बोलै था न चुप चाप चलने को.

लल्लू फिर ऊँगली अपने होठो पर रख क्र चलने लगा.

थोड़ी देर मई दोनों माँ बेटे सदी वाले घर पहुंच गए.

माँ- जा क्र काका से पूछ लेना कोई काम हो तो क्र देना और किसी से लड़ना झगड़ना नहीं.

लल्लू- ठीक है माँ.

लल्लू वह से बहार चल दिया जहा बारातियो क रहने की वयवस्था थी.

बहार टेंट लगा दिया गया था और बहुत सुन्दर सजावट क साथ वह सारा इंतजाम हो रखा था.

लल्लू वह से घूमता हुआ जहा खाना बन रहा था वह जा क्र देखा.

तो वह भी ऑलमोस्ट सब रेडी hi था बस बारातियो का इंतजार था.

सब कुछ देख क्र लल्लू घूमता हुआ वह से सदी वाले आँगन मई आ गया.

आँगन मई एक से एक फुलझड़ी थी. जैसे एक से एक तितलियाँ बगीचे मई एक फूल से दूसरे फूल पर मडराते रहती है वैसे hi आज यहाँ एक से एक फुलझड़िया इधर उधर क्र रही थी.

लल्लू घूमता हुआ ऐसे hi घर क पीछे की और निकल गया उधर पालतू जानवरो क लिए शादी बना हुआ था और दो कमरे भी थे.

लल्लू इधर उधर धरकता वह शादी क पास आ क्र उसके निचे बैठ गया.

तभी एक कमरे से कुछ आवाज आई.

लल्लू उठ क्र उधर गया देखा तो कमरे बंद थे बहार से.

वह से वापस आने लगा तो फिर आवाज आई उधर से hi.

लल्लू अब कोई खिड़की देखने लगा जहा से अंदर देखा जय.

जब घूम क्र कमरे क पीछे गया तो एक खिड़की टूटी हुई थी जिस पर पर्दा लगा हुआ था.

उस परदे को उठा क्र देखा तो देखा है की एक औरत झुकी हुई है और उसके पीछे एक लड़का हिल रहा है.

उसका पंत उसके पैरो मई जमीं पर गिरा हुआ था.

लल्लू का दिल क्या की इन्हे डरा क्र भगा दे लेकिन फिर सोचा की देखे तो सही ये है कौन.

2 मिनट्स बाद लड़का खली हो गया उस औरत क अंदर और साइड हो क्र अपना पेण्ट पहनने लगा.

वो औरत भी कड़ी हो गई.

जब वो घूम क्र खिड़की की और हुई तो लल्लू उसका चेहरा देख क्र चक्र गया.

बहनचोद ये यहाँ मरवा रही है.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 5.

लल्लू- ये बर्चोढी सब को बताती है और मुझे डाटती है. अभी बताता हु.

लल्लू इधर उधर देखा फिर कुछ सोच क्र.

लल्लू- यहाँ क्या क्र रहे हो काका. कोई काम था तो मुझे बताओ.( थोड़ा जोर से ताकि ये दोनों सुन ले.)

लल्लू- ( आवाज बदल क्र) अरे बचुवा इस कमरे मई कुछ सामान है वो निकलना है. चाभी खो गया है कही तो इस टूटी खिड़की से hi जा क्र निकल लेंगे.

लल्लू- ( अपने आवाज मई) क्या निकलना है काका मुझे बताओ. मई निकल दूंगा. कहा आप इस कमरे मई जाओगे.

और फिर लल्लू उस कमरे मई घुस गया.

लल्लू- ओह्हो, आप लोग भी यही है. क्यू रे बहनचोद वह तेरे बहन की सदी है और यहाँ इस रंडी की बुर मई घुसा जा रहा है तू. ( एक थप्पड़ लगता हुआ) भाग मादरचोद नहीं तो अभी गांड लाल क्र दूंगा.

वो लड़का जो लल्लू से बड़ा था लेकिन अभी मर खा क्र जल्दी जल्दी कपडा पहन क्र खिड़की से निकल क्र भाग गया.

लल्लू- है तो रंडी. अब ये बता की सब को तो तू बात रही है अपनी छूट जैसे बाबा जी का लड्डू हो और मुझे डट रही है. ये क्या बात हुई.

मेरे लुल्ली मई क्या बदबू है क्या.

औरत- बीटा प्लस माफ क्र दे. आगे से कभी कुछ नहीं करुँगी.

लल्लू- बहनचोद दोनों माँ बेटी एक नंबर की रंडी है. आज तो बिना बुर फारे नहीं जाने दूंगा.

औरत- प्लस बीटा. आगे से मई कुछ नहीं करुँगी. यही मुझे बहला क्र लाया था की इस कमरे से सामान लाना है. और ये सब हो गया.

लल्लू- है रे रंडी. उसे सामान तो लेना hi था और ले भी लिया. अब थोड़ा मुझे भी जल्दी से सामान दे दो अपना.

औरत- नहीं नहीं बीटा मुझे जाने दो.

लल्लू- बिना छुड़वाए नहीं जाने दूंगा आज तो.

औरत- ( रोटी हुई) प्लस मई तुम्हारे पेअर पार्टी हु मुझे माफ़ क्र दे. मई आगे से ऐसा कुछ नहीं करुँगी. किसी क भी साथ.

लल्लू- चुप क्र ये तेषुवा न बहा क्र दिखा. मेरे तो समझ hi नहीं आता. बहनचोद सब से तू लोग छुड़वा लेती हो लेकिन मेरे समय मई क्यू बिदक जाती हो. चल भाग जा यहाँ से लेकिन याद रखना गंगू तै तू और तेरी वो फटी बुर वाली बेटी कभी भी घर क बहार दिखी उसी दिन अपना लुल्ली निकल क्र दोनों को पेट से क्र दूंगा ये गत बांध ले अब.

लल्लू एक थप्पड़ उसके नंगी गांड पर लगता गंगू तै को बोलै.

लल्लू वह से निकल क्र अपने घर की और चल दिया.

उसका मूड ख़राब हो गया था.

सब उसके लुल्ली को खड़ा क्र देते है लेकिन जब असली काम की बरी आती है तो सब ठेंगा दिखा देते है.

घर आ क्र अपना कपडा खोल क्र कमर मई वही अपना धोती लपेट लिया और खटिया पर लेट गया.

आज खेत मई बहुत काम किया था फिर पुरे दिन भागादौड़ी मई लल्लू थक भी गया था तो खटिया पर लेटते hi उसे नींद आ गई.

इधर घर क कमरे मई ऋतू काकी भी सदी वाले घर जाने वाली थी.

तो वो भी तयारी मई लगी थी.

नयी हरी रंग की साडी, उस से मैचिंग ब्लाउज, पेटीकोट. हाथो मई हरी चुरिया. हरी बिंदी. होठो पर लाल लिपस्टिक. लिपस्टिक तो ऐसा लगाई थी ऋतू काकी की लग रहा था जैसे अभी होठो से टपक पड़ेगा.

इस परिवार मई जैसे एक वरदान मिला हो सब लेडीज को उनकी बाल कमर तक लम्बे है सब क.

ऋतू काकी तैयार हो क्र अपनी नयी सांडले निकली लेकिन वो जमा नहीं फिर धुंध क्र एक हरी जुटी निकल क्र वो पहन ली.

बिलकुल माल लग रही थी.

अभी ऋतू काकी ऐसी लग रही थी जैसे आज इनका hi सदी होने वाली है और इनका hi सुहागरात हो.

वो तैयार हो क्र बहार निकली और नलका पर बाथरूम करने चली गई.

फिर वह से आ क्र सभी कमरों को बंद क्र क अचे से टाला लगा क्र लॉक क्र दी.

चाभी एक जगह छुपा क्र जिस क बारे मई घर क सभी को पता रहता है.

फिर ऋतू काकी सदी वाले घर जाने लगी.

तभी उसने देखा की खटिया पर कोई सोया है.

वो चौक गई. ये कौन आ क्र सोया है यहाँ.

पास आ क्र देखि तो लल्लू सोया था.

ऋतू काकी आ क्र उसके खटिया पर बैठ गई. लल्लू क सर को छू क्र देखि की कही कोई तबियत तो नहीं ख़राब हो गया है.

काकी- बीटा, क्या हुआ. यहाँ क्यू सोया है. तू तो सदी मई गया था न. क्या हुआ तो ठीक है न.

लल्लू- काकी सोने दे न. बहुत नींद आ रही है.

काकी- पहले बता तो सही. तू ठीक है न. कोई लड़ाई झगड़ा तो नहीं हो गया किसी से. या तबियत तो नहीं ख़राब हो गया तेरी.

लल्लू- काकी सब ठीक है. तुम इतना चिंता मत करो मेरा.

काकी- कैसे न करू चिंता. तू तो मेरा प्यारा बीटा है.

लल्लू- क्या काकी नींद तोड़ दी पूरा तुम ने. सदी मई नहीं गई तुम.( लल्लू आँख खोल क्र काकी को देखता बोलै)

लल्लू का मुँह खुल गया इस अप्सरा रूप को देख क्र.

लल्लू- हैयय मर दिया रे…( अपने छाती पर हाथ मरते हुए.)

काकी- ( घबरा क्र) क्या हुआ बीटा. यहाँ दर्द क्र रहा है क्या. क्या हुआ तुम्हे. किसी ने मारा है क्या यहाँ. चोट लगी है क्या. ला जल्दी दिखा.

लल्लू- काकी.. मेरी प्यारी काकी. मुझे कुछ नहीं हुआ. मई तो तेरे हुस्ना का मारा हुआ हु. किस का क़त्ल करने जा रही है.

काकी- चुप मुआए डरा दिया. कितना नाटक करता है. फिर कभी ऐसा किया न तो चप्पल से मरूंगी.

लल्लू- हाय्यय मेरी जान. तू एक बार प्यार से देख तो ले. तेरा आशिक तो उसी से मर जाएगा.

काकी- है राम, मरे तेरे दुसमन. ऐसा फिर बोलै तो मई कभी बात नहीं करुँगी तेरे से. ( काकी वह से उठ क्र जाती हुई बोली)

लल्लू खटिया से उतर क्र निचे घुटने पर बैठ गया एक हाथ आगे फैला क्र.

लल्लू-

कहाँ चल दिए, इधर तोह आओ

मेरे दिल को न ठुकराओ, भोली सितम कर

मान भी जाओ

मान भी जाओ

मान भी जाओ.

ऋतू काकी वही रुक क्र आश्चर्य से लल्लू को देखने लगी.

लल्लू-

झुकी झुकी सी नज़र, बेकरार है के नहीं..

दबा दबा सा सही, दिल में प्यार है के नहीं..

झुकी झुकी सी नज़र..

तू अपनी दिल की जवान धड़कनो को, गईं के बता..

तू अपनी दिल की जवान धड़कनो को, गईं के बता..

मेरी तरह तेरा दिल, बेकरार है के नहीं...

दबा दबा सा सही, दिल में प्यार है के नहीं..

झुकी झुकी सी नज़र…..

काकी शर्मा क्र नजरे झुका ली.

काकी-

हाय बाली उमरिया में

आरी ब्याह के आयी

आरी मैं भोली बलमा नादान

अरे हाय कैसी बिपत पड़ी मोरी गुइयाँ

आरी कछु न समझे नादान

सैयां मिले लरकियाँ मैं का Karun(X7)

हाय मैं क्या करू….

सैयां मिले लरकियाँ मैं का

करूँ…

लल्लू उठ क्र गया और काकी को बहो मई भर लिया.

लल्लू- काकी तुम आज क़यामत लग रही हो. मई क्या करू. मुझ से कोई गलती हो जय तो पागल बीटा समाज क्र माफ क्र देना.

काकी कास क्र लल्लू को अपने आगोश मई ले ली.

काकी- फिर कभी ऐसा बोलै तो बहुत पिटाई करुँगी.

लल्लू काकी क तुषि पकड़ क्र अपनी और घुमा क्र उसके आँखों मई देखने लगा.

दोनों क आँखों मई एक नशा था.

दोनों आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन पहल कौन करे.

काकी दर रही थी. शर्मा रही थी. तो लल्लू दर रहा था कही काकी नाराज हो गई तो मई कैसे जियूँगा.

लेकिन लल्लू काकी का ये हुस्ना देख क्र काकी मई खोता जा रहा था.

दोनों एक दूसरे की आँखों मई देखते देखते मदहोश हो गए और दोनों की आँखे बंद हो गई.

जैसे जैसे आँखे मुंड रही थी वैसे वैसे दोनों क होठ खुलते जा रहे थे.

एक दूसरे क पास आते जा रहे थे.

दोनों एक दूसरे की रोमांच मई बढ़ी हुई

धारकानो को सुन प् रहे थे.

दोनों की आँखे बिलकुल बंद हो गई और मन की आँखे खुल गई.

दोनों क होठ एक बार स्पर्श क्र क अलग हो गए.

दोनों क सरीर मई एक चिंगारी निकल जो दोनों क पुरे सरीर मई फ़ैल गए.

दोनों से बर्दास्त नहीं हुआ और जल्दी से फिर दुबारा दोनों क होठ एक दूसरे मई समां गए.

लल्लू का हाथ काकी क पीठ और नितम्ब पर था तो काकी का हाथ लल्लू क दोनों गलो को और बालो को सहला रही थी.

लल्लू मुँह खोल क्र काकी क एक होठ ले क्र चूसने लगा काटने लगा.

लल्लू काकी का सब से प्यारा था तो काकी भी लल्लू की ड्रीम थी. उसके लिए लल्लू किसी से भी लड़ जाता था. यहाँ तक की काका से अपनी माँ से भी.

आज वही ड्रीम उसका पूरा होता. अपना होता लग रहा था.

लल्लू अपना दोनों हाथ से काकी क नितम्ब से पकड़ क्र उठा लिया और अपने से चिपका लिया.

दोनों क होठो का युद्ध अभी भी चल रहा था.

जैसे hi काकी को लल्लू क हाथो का स्पर्श अपने गांड पर हुआ.

काकी कचकचा क्र लल्लू क होठो को कट क्र ली.

लल्लू सीईसीईए क्र अपना मुँह अलग करलिया.

काकी मुसकुडती हुई लल्लू की आँखों मई देखने लगी.

लल्लू क होठो से खून रश रहा था हल्का हल्का.

काकी- क्यू उत्तरी मस्ती या अभी बांकी है.

लल्लू- काकी जान तुम इस छोटी सी अपने पैर से मेरे प्यार को आंक रही हो.

मैंने कहा तो था. तुम्हारे लिए मई मर सकता हु और किसी को मार भी सकता हु.

काकी अपने होठ से उसके मुँह को बंद क्र दी.

एक बार फिर दोनों चूसने लगे एक दूसरे क होठो को.

लल्लू अपने होठो क बिच से अपना जीभ निकला और काकी क दातो मई ठोकर मरने लगा.

काकी समझ नहीं पाई लेकिन जब बार बार लल्लू ऐसा करने लगा तो काकी अपने दातो को खोल दी.

लल्लू अपना जीभ काकी क मुँह मई घुसा क्र उन के मुँह क अंडर घूमने लगा.

काकी तो हवा मई उड़द रही थी.

काकी काश क्र लल्लू को अपने से चिपका ली.

काकी क पेअर कम्पनी लगा उन्हें लगा जैसे वो साडी मई hi पेशाब क्र देगी.

काकी अब लल्लू क पास से हटना चाहती थी की कही साडी मई पेशाब न हो जय. लेकिन काकी का मन जितने का क्र भी नहीं रहा था.

काकी को बहुत आनंद आ रहा था. ऐसा मजा ऐसा सुख पुरे जीवन मई नहीं मिला था उन्हें.

लल्लू जीभ निकल क्र अब काकी क चेहरे को चाटने लगा.

पुरे चेहरे को चाट गया फिर लल्लू काकी क गर्दन को चाटने लगा और फिर काकी क फूली हुई बड़ी बड़ी दूध जो पूरा ब्लाउज मई आ hi नहीं पता था उस पर अपना जीभ फिरने लगा.

काकी गंगना क्र लल्लू क बालो को खींचती हुई जहर गई.

काकी तो जैसे लल्लू क बहो मई hi सो गई.

लल्लू काकी को उठा क्र खटिया पर ले क्र लेट गया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 6.

लल्लू काकी को अपने से चिपका क्र लेता काकी क मुख पर जो असीम आनंद की आभा थी उसे गौर से देख रहा था.

लल्लू काकी क एक गाल को सहलाता अपना प्यार लुटा रहा था.

जब काकी थोड़ी संभाली तो आँख खोल क्र देखि.

लल्लू को यु प्यार से निहारते देख क्र काकी शर्मा क्र लल्लू क छाती मई सर छिपा ली.

लल्लू- कितनी प्यारी है तू काकी.

काकी- तू खुद प्यारा है इसी लिए सब तुम्हे प्यारे लगते है.

अब उठ और मुझे जाने दे ब्याह मई. सब इंतजार क्र रहे होंगे मेरा.

लल्लू- मुझे छोड़ क्र चली जाएगी. कहा किसी और क ब्याह मई जाएगी. आ हम दोनों भी ब्याह क्र लेते है.

काकी-( लल्लू क गाल को दांतो से कटती हुई.) मेरा पगलू बीटा. मई तुम्हारी काकी हु. काकी से ब्याह नहीं करते. मेरा ब्याह तेरे काका से हो गया है.

लल्लू- तू क्या हुआ. तू आज दुल्हन की तरह सज्जी हुई है. ब्याह हो गया तो क्या हुआ एक बार और मेरे से भी क्र ले.

काकी- तेरे लिए मई सब से सुन्दर दुल्हन धुंध क्र लाऊंगी. जिस से तुम्हारा ब्याह करौंगी. अब मुझे जाने दे.

लल्लू- मुझे सिर्फ तुम से ब्याह करना है. किसी और से नहीं.

काकी- मेरे मई ऐसा क्या है जो मेरे hi पीछे पड़ा है तू.

लल्लू- क्या तुम्हे मई पसंद नहीं हु.

काकी- बीटा मई बूढी हो गई हु. तुम्हारी सदी तो तुम्हारे उम्र क लड़की से करवा दूंगी न.

लल्लू- मई जो पूछ रहा हु वो बोलो न काकी. क्या मई तुम्हे पसंद नहीं हु.

काकी- मई तुम्हारी काकी हु पगले.

लल्लू- बात को घुमाओ मत न. मई तुम्हे पसंद हु या नहीं.

काकी- तू बहुत अच्छा लड़का है बीटा लेकिन मई तेरी काकी हु. हम एक दूसरे से सदी नहीं क्र सकते.

लल्लू- मई जिंदगी भर तुम्हे प्यार करता रहूँगा. तू मेरी काकी हो या लुगाई उसे मुझे अब कोई मतलब नहीं है.

काकी- लल्लू मुझे ब्याह मई जाने दे. तेरी माँ और काकी सब धुंध रहे होंगे मुझे. कोई घर भी आ जाएगा मुझे देखने.

लल्लू- मेरे से ब्याह क्र ले न काकी.

काकी- (खीझ क्र) मुझ से ब्याह क्र क क्या करेगा.

लल्लू- वो तो ब्याह क बाद तू बताएगी न काकी. इसी लिए तो तुझ से ब्याह करूँगा न.

काकी- चल मुआ मुझे जाने दे. अब साडी भी बदलनी पड़ेगी.

( लल्लू को खटिया से धकेल क्र हटती काकी उठ कड़ी हुई)

काकी साडी बदलने क लिए अपने कमरे मई चली गई.

खटिया पर बैठा लल्लू कुछ सोच रहा था.

वो खटिया से उठा और पुझा घर मई गया वह कुछ देख क्र काकी क रूम मई गया.

काकी साडी क निचे जो चड्डी पहनी थी उसे निकल रही थी साडी उप्पेर क्र क.

लल्लू को काकी की गांड मई फाशी कच्ची देख मन मई उथल पुथल मचने लगा.

काकी कच्ची निकल क्र एक और फेक दी.

लल्लू काकी क पास आ क्र एक हाथ पकड़ लिया और पूजा घर मई ले आया.

लल्लू- काकी मुझ से ब्याह करोगी.

काकी- पागल हो गया है क्या तू. कुछ भी बोले जा रहा है. मई बोल रही हु न की तेरी सदी मई बहुत सुन्दर लड़की से क्र दूंगी.

लल्लू- वो सुन्दर लड़की तुम हो और मुझे सिर्फ तुम से सदी करनी है. बोलो मुझ से ब्याह करोगी. सिर्फ है या न बोलना.

काकी को कुछ समझ hi नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे.

काकी- मई तेरी ऐसे hi काकी हु. तू मुझे वैसे hi प्यार करता है और मई भी बहुत प्यार करती हु तुझसे. सदी की क्या जरुरत है.

लल्लू- काकी भाषण नहीं. सिर्फ है या न…

काकी- अपनी काकी से ब्याह करेगा. फिर तेरे काका का क्या होगा ये बता.

लल्लू- तो क्या हो गया. काका तो वैसे भी अब बहार hi रहते है. तो बहार काका तेरी सैया और घर मई मैं तेरा सैय्यन.

लल्लू काकी का हाथ पकड़ क्र पूजा घर मई जहा माँ गौरी का पीढ़ी था वह बैठ जाता है और वह रखे सिंदूर उठा क्र काकी क मांग मई भर देता है.

काकी क कुछ भी समाज नहीं आया.

काकी आँखे बंद किये वह बैठी रही.

लल्लू- काकी आज से तू मेरी काकी भी है और लुगाई भी.

काकी आँख खोली थी लल्लू क हाथो क उंगलियों मई अब भी सिंदूर लगा था.

काकी क आँखों मई आँशु आ गए. समझ hi नहीं आ रहा था की अब वो क्या रियेक्ट करे.

थोड़ी देर वह बैठी रहने क बाद उठ क्र अपने कमरे मई चली गई.

लल्लू- कही कोई गर्बर तो नहीं क्र दिया. काकी कुछ बोल नहीं रही है.

लल्लू काकी क रूम मई देखने चल दिया.

काकी आईने क सामने कड़ी हो क्र मांग मई चमकते सिंदूर को एक तक देखे जा रही थी.

लल्लू कमरे मई आ क्र देखा तो काकी आईने क सामने कड़ी है.

लल्लू जा क्र काकी क पास सर झुका क्र खड़ा हो गया.

लल्लू- काकी अगर तुम्हे लगता है की मैंने कुछ गलत क्र दिया है तो मुझे माफ़ क्र देना.

काकी लल्लू को एक तक देख रही थी. उसे पता था लल्लू उसे बहुत प्यार करता है लेकिन अब जो ये रिस्ता बन गया है काकी उस रिश्ते को ले क्र असमंजश मई थी की अब आगे वो क्या करे.

कौन सा रिस्ता किस से निभाए.

एक मन तो इस ब्याह से बहुत खुश था. अंदर hi अंदर छोटे छोटे फुलझड़िया फुट रही थी लेकिन एक संस्कारी मन कह रहा था की ये जो हुआ वो गलत हुआ है.

काफी सोच बिचार क बाद आखिर काकी ने कुछ फैसला क्र ली.

काकी बहार आ क्र देखि तो लल्लू दरवाजे से बहार सर झुकाये खड़ा था.

काकी लल्लू को गुस्से से देख रही थी.

लल्लू सर उठा क्र देख तो देखता है की काकी बहुत गुस्से मई उसे देख रही है.

लल्लू क आँखों से जहर जहर क्र क आँशु निकल क्र गिरने लगा.

काकी आगे बढ़ क्र लल्लू का हाथ पकड़ क्र उसे कमरे मई खींच ली और खुद बहार निकल क्र कमरे का दरबाजा बंद क्र दी.

काकी लल्लू को कमरे मई बंद क्र खुद रसोई घर मई चली गई.

वह कुछ देर खातर पातर करने क बाद एक हाथ मई गिलास लेकर आती हुई दिखी.

कमरे मई आ क्र देखा तो लल्लू अभी भी सर झुकाये खड़ा वैसे hi रो रहा था.

काकी लल्लू को एक धक्का दिया. लल्लू बीएड पर जा क्र गिर गया.

काकी चलती हुई गिलास ले क्र बीएड पर आ गई.

काकी- क्यू ब्याह करते समय तो बड़ा मर्द बनता था. अब मर्द का बच्चा है तो सामना क्र अपनी लुगाई का.

लल्लू- काकी पता नहीं मर्द का बच्चा हु ला गधे का क्यू की पापा तो हमेशा गधा गधा hi करते रहते है. लेकिन मई आप का बच्चा तो जरूर हु.

काकी- मुआए अब तू मेरा बच्चा नहीं मेरा खशम.. है.

आ और अपनी लुगाई का सामना क्र.

लल्लू- काकी क्यू डरा रही हो बच्चे को.

काकी- मुआ तू अब बच्चा नहीं है. आ बड़ा कह रहा था न की तेरे पास डंडा है तो आ अब मर आ क्र मुझे.

लल्लू- काकी वो तो मई मजाक क्र रहा था.

काकी- अब मई तेरी काकी नहीं लुगाई हु. तो अब अकेले मई मुझे ऋतू hi कहा करना. जब सब साथ हो तब काकी कहना.

काकी- ये ले दूध पि. ब्याह तो क्र लिया मेरे से अब आगे क्या करेगा. अब तो वह ब्याह मई भी नहीं जा सकती. अपने नए नए पति देव को छोड़ क्र कहा जाऊ.

काकी दूध का गिलास लल्लू को पकड़ती बोली.

लल्लू दूध का गिलास ले क्र मुँह से लगा लिया.

काकी- सारा मत पि जाना अपने लुगाई क लिए भी थोड़ा छोड़ देना.

लल्लू आधा पि क्र बांकी काकी को पकड़ा दिया.

काकी- मुआ ब्याह करना तो बड़ा आया. झट से सिंदूर ले क्र मेरे मांग मई भर दिया. अब दूध भी अपने हाथ से पीला दे.

लल्लू- रात मई कौन सा मैंने पिलाया था अँधेरे मई. खुद hi पाइप निकल क्र पि ली थी न तो अभी भी पि ले.

काकी सुन क्र शर्मा गई. ( मुआ अँधेरे मई भी पहचान गया.

लल्लू गिलास ले क्र ऋतू क मुँह से लगा दिया.

ऋतू काकी दूध पि क्र गिलास खली क्र दी.

लल्लू काकी का हाथ पकड़ क्र बीएड पर खींच लिया.

काकी खींचती हुई बीएड पर जा क्र लल्लू पर लुढ़क गई.

काकी की सांसे लल्लू क चेहरे पर पद रहा था.

दोनों की धरकने दोगुनी रफ़्तार से चल रहा था की इस से आगे क्या होगा.

लल्लू काकी क चेहरे को देखते हुए उस मई खोता जा रहा था. लल्लू दोनों हाथ से काकी क चेहरे को थम रखा था और हलके हलके सहला रहा था.

ऋतू लल्लू क साइन पर हाथ रखे उसके छाती क घुंगराले छोटे छोटे बालो को सहला रही थी.

काकी बड़े प्यार से लल्लू को देख रही थी.

लल्लू काकी का चेहरा पकडे उसे अपने चेहरे पर झुकाने लगा और अपना मुँह भी हलके से उठा लिया.

दोनों अपने अपने जीभ निकल क्र उन्माद मई सूखे होठो को हलके से भीगा क्र एक दूसरे क होठो पर टूट पड़े.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 7

ऋतू लल्लू क साइन पर लती हुई उसके होठो को चूसे जा रही थी.

काकी का मजे से आँखे बंद थी.

उसे तो जैसे लग रहा था की हवा मई परवाज क्र रही है.

ऐसा आनंद इतना मजा ऋतू को कभी भी पुरे लाइफ मई नहीं आया जितना भी लल्लू क साथ आ रहा था.

लल्लू एक हाथ से ऋतू क पीठ सहला रहा था तो दूसरे हाथ से बाल.

तभी बहार कुछ आवाज आई.

ऋतू काकी झट से लल्लू पर से उठ क्र बैठ गई और अपने कपडे को सही करने लगी.

आवाज फिर से आया तो ऋतू काकी दरवाजा खोल क्र बहार आ गई.

बहार ऋतू को देखने शालिनी और सोनम आई थी.

सोनम- माँ क्या हुआ. अभी तक तुम आई नहीं. बाराती बस आने hi वाला है. चल जल्दी.

रति- बीटा मई आ hi रही थी की लल्लू आ गया. उसके सर मई दर्द था तो उसके सर की मालिश क्र रही थी.

शालिनी- क्या ज्यादा दर्द हो रहा है लल्लू को.

रति- नहीं अब ठीक है.

सोनम- माँ जल्दी चल नहीं तो मई चली जाउंगी.

रति- को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे.

कभी मन करता न जय वह फिर एक मन करता चली जाती हु नहीं तो कही किसी को पता चल गया तो.

उधर बन मई फुस्सी ऋतू कड़ी थी.

सोनम- चची हम चलते है. इसे लल्लू की सेवा करने दो.

शालिनी- दीदी क्या हुआ. क्या ज्यादा तबियत ख़राब है. कहिये तो किसी मर्द को बुला क्र लौ.

ऋतू- नहीं नहीं. अब ठीक है वो लेकिन उसे अब अकेले छोड़ क्र जाना भी तो सही नहीं होगा.

शालिनी- है दीदी. आप ऐसा कीजिये. मई तो सुबह से hi वही हु. तो मई रुक जाती हु यहाँ लल्लू क पास. आप लोग चली जाइये. काजल को मत बताइयेगा लल्लू क लिए. नहीं तो पदेशन हो जाएगी.

ऋतू- नहीं नहीं तू चली जा. तुम्हे ब्याह देखना अच्छा लगता है. मई यही हु.

सोनम- अब ये क्या लगा रखे हो. तुम जाओ तो तुम जाओ. जिसको चलना है चलो जल्दी. मेरा सब इंतजार क्र रहे होंगे.

ऋतू- जा तू चला जा शालिनी. मई यहाँ हु लल्लू क पास.

फिर शालिनी और सोनम दोनों ब्याह देखने चले गए.

ऋतू एक बार फिर चारो और घूम क देख आई की कही कोई है तो नहीं और फिर अपने कमरे मई आ गई.

लल्लू आँखे बंद किया हुआ लेता था.

ऋतू एक तक लल्लू को देखे जा रही थी.

देखते देखते अचानक ऋतू की नजर लल्लू क कमर से निचे चला गया.

ऋतू चौक गई.

ऋतू- मुआ का कितना बड़ा है. देखो कैसे खड़ा कितना भयानक दिख रहा है. अभी छुपा है तो ऐसा दिख रहा है निकल क्र कैसा लगेगा.

ऋतू कड़ी कड़ी दातो से होठ कटती सोच रही थी.

अनायाश ऋतू का हाथ अपने बुर पर चला गया और उसे सहलाने लगी.

ऋतू- है राममम मुआए बिलकुल पागल बना दिया है मुझे अपने जैसा.

लल्लू सो गया क्या. ( आवाज देती ऋतू बोली.)

लल्लू सो गया था.

ऋतू मन मासोद क्र रह गई.

फिर तैयार हो क्र उस कमरे का दरवाजा बहार से लगा दी और दालान पर चली गई.

दालान मई ऋतू क ससुर बैठे थे.

ऋतू- बाबू जी मई ब्याह वाले घर जा रही हु. अभी थोड़ी देर मई आ जाउंगी. कमरे मई लल्लू सो रहा है. जरा ध्यान रखियेगा.

जब ऋतू लल्लू क पास से बहार देखने गई की कौन है तभी अचानक लल्लू क सर मई बहुत भयानक दर्द उठा था.

बहार सब बातो मई लगी हुई थी और कमरे मई लल्लू दर्द से बेहाल.

जैसे लग रहा था की सर फैट जाएगा.

इस दर्द से लल्लू बेहोश हो गया था जिसे ऋतू लल्लू का सो जाना समझ क्र ब्याह वाले घर चली गई.

रात क किसी पहर लल्लू उठा.

खुद को बीएड पर सोया पाया.

कमरे मई अँधेरा था.

पता नहीं क्या समय हुआ है. अँधेरे मई जैसे तैसे उठ क्र टटोलता हुआ दरवाजे तक आया फिर दरवाजा खोल क्र बहार निकल आया. नलका पर जा क्र सब से पहले हल्का हुआ और फिर पानी पि ककी खाना भी नहीं खाया था तो भूख भी लगा था.

अभी आधी रत हो चुकी थी तो पानी पि क्र hi काम चला लिया.

वह से फिर उसी कमरे मई आ गया. दरवाजा बंद क्र क जब बीएड पर आया तो लगा जैसे बीएड पर कोई और भी है सोया हुआ.

लल्लू टटोल क्र देखा मन मई सोचा लगता है ऋतू काकी है.

लेकिन दर भी लग रहा था की कही कोई और हुआ तो मर पड़ेगी.

फिर लल्लू वह जो कोई भी सोया हुआ था उसको पीछे से झप्पी दाल क्र खुद भी आँखे बंद क्र क सोने की कोसिस करने लगा.

सुबह 4 बजे लल्लू की नींद खुली.

वो उठ क्र बहार आ गया और चल दिया नदी की और वह जा क्र फ्रेश हुआ और वही नदी किनारे बैठ गया.

काफी देर बैठे रहने क बाद लल्लू देखा की उधर लोग आने लगे है तो फिर लल्लू उठ क्र घर की और चल दिया.

दालान पर आ क्र नलका पर पहले हाथ पेअर धोया और दालान पर आ गए.

दालान पर दादू और सुनील काका बैठे थे.

काका- कहा से आ रहा है लल्लू बीटा.

लल्लू- ऐसे hi सुबह बहार घूमने गया था काका. कोई काम था क्या.

दादू- है, आ यहाँ बैठ.

लल्लू जा क्र अपने दादू क साथ उन क बीएड पर बैठ गया.

दादू- हम कुम्भ मेला मई स्नान करने जा रहे है.

लल्लू- कब जा रहे है. और कौन कौन जा रहा है.

सुनील- तुम्हारे दादू, बड़े काका और काकी, और मई. हम कल जा रहे है.

लल्लू- मई भी चलाऊंगा.

काका- फिर यहाँ घर पर कौन रहेगा.

लल्लू- ये मुझे क्या पता. पापा रहेंगे और छोटे काका रहेंगे.

सुनील अपने पिता की और देखने लगे.

दादू- तुम यही रहो बीटा. वह से तुम जो बोलोगे मई ला दूंगा.

लल्लू- nahi..nahi..nahi. मई भी जाऊंगा तो जाऊंगा.

लल्लू कूद क्र उठ खड़ा हुआ और तमतमाता हुआ वह से आँगन मई चला गया.

दादू- अब क्या करे. इसे नहीं ले जाएंगे तो ये जब तक याद रहेगा हंगामा खड़ा किये रहेगा.

सुनील- है ये तो है. ऐसा करते है फिर. आप भैया भाभी और लल्लू चले जाइये.

दादू- ठीक है फिर उसे बोल दे अपना तयारी कर ले आज hi क्यू की कल सुबह hi निकलना है हमे.

सुनील उठ क्र आँगन मई चला गया जहा लल्लू खटिया पर लेता था गुस्से मई.

सुनील- लल्लू बीटा. ऐसे गुस्सा नहीं होते. अपना तयारी क्र ले. कल सुबह निकलना है. और अपने दादू और काका काकी का ख्याल रखना. वह भीड़ बहुत होता है तो थोड़ा संभल क्र जहा.

ऋतू- कहा जाने की बात हो रही है. पता नहीं कहा से आया है. मुँह फुलाए लेता है कब से.

सुनील- अरे भाभी, अभी हम बात क्र रहे थे. कल पिता जी कुम्भ स्नान करने जा रहे है आप और भैया क साथ तो वही पिताजी लल्लू बीटा से बोले की यहाँ सब का ख्याल रखना. बस फिर वह से गुस्से मई भाग आया है. ये भी जाना चाहता है.

ऋतू- ओह्हो बीटा. तुम हमारे साथ चले जाओगे तो फिर यहाँ सब का ख्याल कौन रखेगा.

लल्लू- नहीं मई तो दादू क साथ जाऊंगा. वह उनका ख्याल रखूँगा.

सुनील- ठीक है ठीक है. तुम भी जाना. भाभी आप अपना तयारी क्र लीजिये साथ मई भैया और लल्लू का भी कर दीजियेगा. सुबह सुबह hi निकलना पड़ेगा आप लोगो को.

ऋतू- ठीक है.

लल्लू ख़ुशी से खटिया से उठ क्र सुनील को गले से लगा लिया.

लल्लू- आप सब से बेस्ट काका हो.

सुनील- है है. पता है मुझे. वह सब का ख्याल रखना. किसी को तंग मत करना और इधर उधर कही जाना नहीं. सब क साथ hi रहना.

लल्लू- बिलकुल काका. मई सब क साथ hi रहूँगा.

यु hi तयारी मई वो दिन बिट गई.

रात मई लल्लू खाना खा क्र खटिया आँगन मई लगा क्र सो गया.

सुबह उसे दादू और काका काकी क साथ कुम्भ मई जाना है तो वह क्या क्या करेगा यही सब सोचते सोचते सो गया.

सुबह हर रोज की तरह 4 बजे उसे नींद खुल गया.

उठ क्र नलका पर जा क्र पानी पिया और नदी किनारे चला गया.

वह फ्रेश हो क्र बैठ गया.

नदी की और से ठंढी ठंढी हवा आ रहा था जो बहुत अच्छा लग रहा था.

आज नदी पर ज्यादा देर नहीं रुका और जल्दी hi घर आ गया वह आ क्र नाले पर हाथ पेअर धोया. फिर दालान पर आ गया.

वह सब बैठे थे. दादू और काका स्नान क्र चुके थे और जाने की तयारी क्र रहे थे.

अनिल- जा भाई जल्दी तैयार हो जा. हम सब को निकलना भी है.

लल्लू जल्दी से आँगन गया और जा क्र स्नान क्र क नया कपडा पहन लिया.

माँ- देख बीटा. वह जा रहा है तो सब का ख्याल रखना और किसी को तंग मत करना. सब क साथ hi रहना. इधर उधर घूमना नहीं.

लल्लू- मुझे सब पता है. तुम चिंता मत करो.

कोमल- ोये गधा तू मत जा वह. कही कोई उलटी हरकत क्र दिया तो सब पदेशन हो जाएंगे. वो अपना गौण नहीं है.

लल्लू- तू वापस क्यू आ गई. कविता क साथ hi चली जाती.( कविता जिस की अभी सदी हुई है.)

कोमल- आहे मई चली जाती तो तुम्हारा कान कौन उखड़ता. (मुँह चिढ़ाती कोमल बोली)

माँ- अब अभी तुम दोनों लड़ना मत सुरु क्र दो.

सुनील- सब तैर हो गए तो चलो. गारी आ गई है.

फिर लल्लू और ऋतू आँगन से दालान पर आ गए जहा बहार एक कार कड़ी थी.

लल्लू जा क्र कार मई आगे बैठ गया.

फिर दादू काका और काकी भी आ गए और कार मई बैठ गए. सारा सामान पहले hi ला क्र सुनील गारी मई रख दिया था.

सुनील- ये ले कुछ पैसे रख ले. वह काम आएंगे. सब का ख्याल रखना. अपने काकी का हमसे हाथ पकडे रहना.

फिर गारी चल पड़ी.

स्टेशन आ क्र सब उतर गए. लल्लू सरे बैग्स ले क्र चल दिया.

ट्रैन लगी हुई थी तो सब जल्दी से अपने डब्बे मई बैठ गए जा क्र.

थोड़ी देर मई ट्रैन चल पड़ी.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 8.

शाम क समय ये सभी ट्रैन से प्रयाग पहुंच गए.

वह से ऑटो क्र क ये लोग कुम्भ क स्थान पर पहुंचे.

वह पहुंच क्र अनिल सब को एक जगह खड़ा क्र क खुद एक धर्मशाला मई रूम क लिए चले गए.

ये चार लोग थे और ऋतू काकी साथ थी तो दो रूम लिए अनिल ने.

वह से आ क्र सब को ले क्र अपने कमरे मई पहुंच गए.

सब पहले फ्रेश हुए फिर कमरे मई जा क्र आराम करने लगे.

दादू और अनिल काका एक कमरे मई रह रहे थे और लल्लू ऋतू क साथ.

ऋतू घर से नास्ता बना क्र ले थी तो सब ने वही खाना खा क्र सोने का फैसला किया ककी कल सुबह जल्दी उठ क्र उन्हें कुम्भ स्नानं करना था.

तो दादू और अनिल काका सो गए.

दूसरे कमरे मई लल्लू और ऋतू रुके थे.

ये दोनों साथ मई खाना खा रहे थे.

खाना हो जाने क बाद हाथ मुँह दो क्र दोनों अपने कपडे बदल लिए.

लल्लू सोने क लिए बीएड पर आ गया. उस ने सिर्फ एक धोती पहना था. उप्पेर से नंगा hi था.

ऋतू- तू उप्पेर क्यू नहीं पहना कुछ.

लल्लू- काकी यहाँ बहुत गर्मी है. मई तो कहता हु आप भी मत पहनो ये इतना सारा.

ऋतू- है गर्मी तो है लेकिन क्या मई तेरे साथ नंगी सो जाऊ.

लल्लू- नहीं नहीं. आप सब कुछ खोल क्र सिर्फ साडी लपेट क्र सो जाओ.

ऋतू- न बाबा न. मेरे से ऐसे नींद नहीं आएगी.

लल्लू- मई लोरी गए क्र सुला दूंगा न.

ऋतू- पता नहीं तू लोरी गए क्र सुलाएगा या लोरा दाल क्र सुलाएगा ( धीरे से बड़बड़ाती बोली) लेकिन लल्लू सुन लिया था.

लल्लू का लुल्ली तो ऋतू की बात सुन क्र hi खड़ा हो गया.

लल्लू- काकी यहाँ कौन दूसरा है. खोल क्र लपेट लो साडी. मुझ से क्या सर्मना.

ऋतू का भी मन क्र रहा था लेकिन वो घबरा रही थी. दो दिन पहले बच गई नहीं तो उसी दिन चुद जाती लेकिन आज पता नहीं क्या हो सुबह तक.

लल्लू उठ क्र ऋतू क पास आ गया.

लल्लू और ऋतू दोनों की धड़कन बढ़ गई.

लल्लू ऋतू को पकड़ क्र खड़ा क्र दिया.

ऋतू क बदन क सरे रोये खड़े हो गए.

लल्लू ऋतू को प्यार से देखते हुए उसके साडी को पकड़ क्र खोलने लगा.

ऋतू कसमसा क्र लल्लू का हाथ पकड़ ली.

ऋतू चाहती थी की ये जो हो रहा है वो अपने अंजाम तक पहुंच जय लेकिन एक सरम था एक घबराहट थी.

बगल वाले कमरे मई उसके ससुर और पति दोनों सो रहे थे.

लल्लू हाथ छुड़ा क्र ऋतू की साडी उसके बदन से निकल क्र अलग रख दिया.

ऋतू- पहले लाइट बंद क्र. फिर मई खोल क्र साडी पहन लुंगी.

लल्लू- मई पहना देता हु न. लाइट बंद क्र दूंगा तो आप अँधेरे मई कैसे पहनेगी.

ऋतू- नहीं पहले लाइट बंद क्र और तू बीएड पर जा. मई आ रही हु.

लल्लू- मई करता हु न. आप क्यू म्हणत करोगी.

ऋतू- फिर छोड़ दे मई ऐसे hi सो जाउंगी. मुझे गर्मी नहीं लग रहा है.

लल्लू- अच्छा अच्छा. मई लाइट बंद क्र देता हु.

लल्लू लाइट बंद क्र दिया और बीएड पर जा क्र बैठ गया.

ऋतू- मुआ कितना बेचैन है मेरे लिए. पता नहीं क्या दीखता है इसे मुझ बूढी मई. अब तो सदी भी क्र ली है इस हरामी ने. पति बन गया है मेरा अब तो.

ऋतू सरे कपडे खोल क्र साडी उठती मन मई बोल रही थी.

तभी लल्लू आगे हो क्र ऋतू को बहो मई ले लिया और बीएड पर लेट गया.

ऋतू पूरी नंगी थी. वो घबरा गई. ये अचानक क्या हुआ.

लल्लू ऋतू क चेहरे को पकड़ क्र अपना होठ ऋतू क होठो पर लगा दिया.

ऋतू लल्लू को अब अपना पति मान चुकी थी.

ऋतू विरोध करना छोड़ दिया. अपने आप को वो लल्लू क हवाले क्र दी.

लल्लू ऋतू क होठो को चुस्त हुआ अपने एक हाथ से ऋतू क चुके को सहलाने लगा.

ऋतू मजे से अपना चुके मिचवा रही थी लल्लू से.

लल्लू ऋतू क पुरे चेहरे को चाटने लगा जीभ निकल क्र.

ऋतू लल्लू क निचे लेती उसके पीठ पर हाथ से सहला रही थी. कभी बालो मई ऊँगली घुसा क्र घुमा रही थी.

लल्लू आज रुकने क बिलकुल मूड मई नहीं था. वो चेहरे को चाटता हुआ ऋतू क कण मई अपना जीभ घुसा दिया.

ऋतू क पुरे बदन क रोये खड़े हो गए.

लल्लू ऋतू क कान क लौ को अपने मुँह मई ले क्र चूसने लगा. काटने लगा.

ऋतू मजे से आँखे बंद किये. लल्लू क बालो को पकड़ क्र उसे पलट दी और खुद उसके उप्पेर आ गई.

उप्पेर आ क्र ऋतू लल्लू क पुरे चेहरे को चुम्मी से गिला क्र दिया फिर उसके होठो को अपने मुँह मई ले क्र चूसने लगी.

लल्लू ऋतू क निचे लेता ऋतू क नितम्ब को दोनों हाथो मई ले क्र मशलने लगा जोर जोर से.

ऋतू मजे से अपनी चूचियों को लल्लू क छाती मई रगरती हुई लल्लू क होठो को कुश रही थी.

लल्लू एक हाथ से ऋतू का एक चुकी पकड़ क्र उसे गुथने लगा.

ऋतू ससीएससी करती हुई अपना जीभ निकल क्र लल्लू क मुँह मई दाल दी.

लल्लू गुप् से ऋतू क जीभ को लपक क्र मुँह मई ले क्र चूसने लगा.

अब लल्लू दोनों हाथो से ऋतू क एक चुके को मैच रहा था.

बहुत कैसे हुए थे ऋतू क चुके और बहुत बड़े भी थे. लल्लू क एक हाथ मई नहीं आ रहा था.

लल्लू- आअह्ह्ह काकी मेरी जान… कितने बड़े है तेरे दूध.

ऋतू- मुआए अब काकी तो मत बोल…

तेरी लुगाई हु मई. अकेले मई ऋतू hi बोलै क्र.

लल्लू- ऋतू.. मेरी रानी.. क्या माल है तू. कितनी गद्देदार है तेरी ये चुके और गांड.

ये मेरी रातो की नींद ुर्रा दी है.

ऋतू काकी- अब ये सब तेरा है लेले जितना मजा लेना है इनका.

लल्लू अब दूसरे चुके को मैथ रहा था.

लल्लू फिर ऋतू को ले क्र पलट गया.

बिछावन निचे hi लगा हुआ था. दोनों उठा पटक मई बीएड से बहार नंगे फर्श पर आ गए थे.

ऋतू क पीठ मई ठंढा ठंढा नंगा फर्श और उप्पेर लल्लू ऋतू क एक चुके का चुचुक मुँह मई ले क्र कुश रहा था और दूसरे को हाथ से गूथ रहा था.

ऋतू क बुर से नदिया बाह रही थी.

लल्लू ऋतू क चुके को मैच क्र काट क्र बिलकुल लाल गुब्बारे की तरह क्र दिया था.

लल्लू बरी बरी दोनों चुके को पि रहा था.

फिर लल्लू चुके को छोड़ क्र निचे ऋतू क पेट पर आ गया.

अपना जीभ निकल क्र लल्लू ऋतू क पुरे पेट को चाट रहा था.

पूरा पेट चाट क्र लल्लू ऋतू क गहरी नाभि मई अपना जीभ दाल क्र उस मई घूमने लगा.

ऋतू कमर उठा उठा क्र पटकने लगी.

वो एक बार जहर गई थी.

लल्लू नाभि से फ्री हो क्र उस से निचे आ गया और एक हाथ से दूध दबाता हुआ और एक हाथ से दोनों मोती जांघो को फैला कर लल्लू ऋतू क जांघो को चाटने काटने लगा.

ऋतू उठ क्र बैठ गई और लल्लू क बालो मई ऊँगली घुसा क्र उसे खींचने लगी.

ऋतू इस मजे से तरप रही थी.

ऋतू को हाथ से ढाका दे क्र लेता दिया और दोनों जांघो को हाथ से उठा क्र मोर दिया लल्लू ने.

ऋतू तकिये से मुँह को दबाये अपने सर को दये बाये पटक रही थी मजे से.

लल्लू ऋतू क छूट क पास नाक ले जा क्र उस मई से आती सुगंध क्र सूंघने लगा.

ऋतू क छूट से बहुत मादक खुशबु आ रही थी.

अभी अभी ऋतू एक बार झरि थी तो खुशबु थोड़ी ज्यादा hi आ रही थी.

लल्लू से अब बर्दास्त करना मुश्किल हो गया था.

लल्लू मुँह खोल क्र ऋतू क छूट को पूरा एक बार मई hi मुँह मई भर लिया.

ऋतू- ाःह. ये क्या क्र रहा है. वो गन्दी जगह है. वह से मुँह हटा मुआए. ( ऋतू लल्लू क सर पर हाथ से सहलाती बोली)

लल्लू तो अभी बहरा हो गया था. वो तो किसी और दुनिया मई पहुंच गया था. वो मजे से ऋतू क छूट को पूरा मुँह मई भरे चूसे जा रहा था और दोनों हाथो से ऋतू क दूध को मैच रहा था.

ऋतू- आठ. जरा धीरे बीटा. बहुत मजा आ रहा है. कहा था अब तक तू. मुझे पता होता की इतना मजा आएगा तो कब का तुम से छुड़वा लेती.

ऋतू का पूरा बदन थरथरा रहा था मजे से.

लल्लू अब छूट मई अपना जीभ निकल क्र घुसाए जा रहा था.

ऋतू दूसरी बार झरने वाली थी.

ऋतू- आह्हः, मुआए क्या क्र दिया तूने. ये कैसा आग लगा दिया. मुझे ये क्या हो रहा है.

मर जाउंगी मई. प्लस छोड़ दे मुझे…

आह्हः…. माईई.. गयी रे… मुआए..

ऋतू दूसरी बार झरने लगी…

ऋतू का पूरा सरीर कम्प रहा था.

लल्लू अपना मुँह लगाए छूट रस पिने मई लगा हुआ था. बड़ा मजेदार लग रहा था.

ऋतू अभी तक कम्प रही थी.

लल्लू ऋतू को पकड़ क्र अपने आगोश मई ले लिया.

थोड़ी देर मई जब संभाली ऋतू तो लल्लू क पीठ पर दो मुक्का लगा दी.

ऋतू- ये क्र दिया था मुझे तू मुआ. मुझ से सास hi नहीं लिया जा रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे मई किसी और hi दुनिया मई पहुंच गई हु.

लल्लू- एक बार फिर जाना चाहेगी उस दुनिया मई.

ऋतू- न बाबा न. अब मेरे मई इतनी ताकत नहीं बची. अब मई मर hi जाउंगी.

लल्लू- कुछ नहीं होता. अभी मरी क्या तुम. मजे से भी कोई मरता है क्या.

ऋतू- तू hi क्र ऐसा मजा. मुझे नहीं करना.

लल्लू- जब तू नहीं करेगी तो मई क्या अकेले मजे करू.

ऋतू लेती हुई लल्लू क मुँह को पकड़ क्र उसके पुरे चेहरे को चूमने लगी.

ऋतू- कहा से सीखा ये सब.

लल्लू- बस तुम्हे देख क्र अपने आप आ गया रानी.

लल्लू ऋतू का एक हाथ पकड़ क्र उसे अपने लैंड पर रख दिया.

लल्लू- बहुत दर्द क्र रहा है अब इसका कुछ क्र दे न.

ऋतू- क्या क्र दू.

लल्लू- ज्यादा कुछ नहीं तो काम से काम जैसे उस रात की थी वैसे hi क्र दे.

ऋतू- तू चुप चाप यु hi लेता रह.

ऋतू लल्लू क उप्पेर आ क्र उसके पुरे चेहरे को चाटने लगी फिर उसके छाती पर आ क्र लल्लू क एक चुचुक को अपने जीभ क नोक से सहलाने लगी.

लल्लू सिसक उठा.

लल्लू अपने हाथ से ऋतू क गांड को पकड़ क्र दबाने लगा.

ऋतू एक चुचुक से खेलने क बाद ऐसे hi दूसरे क साथ भी की.

फिर ऋतू उस से निचे आ क्र लल्लू क छाती को छाती हुई उसके पेट को चाटने लगी.

पेट से होता हुआ ऋतू लल्लू क कमर से निचे आ क्र उसके बॉल्स को मुँह मई ले क्र चूसने लगी.

फिर मुँह हटा क्र काफी सारा थूक लल्लू क लैंड पर थूक क्र उसे हाथ से मलने लगी.

और फिर एक बार लल्लू क बॉल्स को मुँह मई ले ली.

लल्लू का लैंड ऋतू क एक हाथ मई पूरा समां नहीं रहा था तो ऋतू दोनों हाथो से उसके लैंड को मालिश दे रही थी.

लल्लू से अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था.

लल्लू उठ क्र ऋतू क कमर को पकड़ क्र अपनी और घुमा लिया और अपने उप्पेर खींच लिया अब दोनों 69 पोजीशन मई आ गए थे.

लल्लू ऋतू क गांड को दोनों हाथो से फैला क्र उस मई अपना मुँह घुसा दिया.

ऋतू को मजे से बंद बज गई वो मुँह हटा क्र लल्लू क लोले को अपने मुँह मई ले ली.

लल्लू का लौड़ा ऋतू क मुँह क हिसाब से मोटा ज्यादा था लेकिन जितना जा रहा था ऋतू उतने को hi मुँह मई ले क्र चुभला रही थी जीभ चला रही थी लौड़े क टोपे पर.

लल्लू ऋतू क गांड क फलो को फैलाये उस क गुलाबी छेद मई जीभ घुमा रहा था.

फिर लल्लू जीभ को ऋतू क पानी छोड़ती छूट मई लगा क्र चाटने लगा.

अब लल्लू क बॉल्स फूलने पिछलने लगा था.

जैसे कुछ निकलने वाला है.

लल्लू ऋतू को हटा दिया और उसे पलट क्र उसके चुके को मुँह मई ले क्र काटने लगा.

ऋतू अचानक इस हमले से घबरा गई और लल्लू को मुक्के सार्ने लगी.

लल्लू को इस से क्या होने वाला था.

फिर लल्लू मुँह उठा क्र ऋतू क होठो को मुँह मई भर क्र चूसने लगा.

ऋतू अपने दोनों पैरो को उठा क्र कैची बना क्र लल्लू को अपने से पूरा जाकर ली

लल्लू होठो को चुस्त हुआ ऋतू क दूध को मैच रहा था.

ऋतू- ऊऊह्ह्ह अब मुझे बर्दास्त नहीं होगा. अब कुछ क्र कब तक तर्पया रहेगा. छोड़ दे मुझे ये डंडा दाल क्र मर मुझे.

लल्लू उठ क्र ऋतू क पैरो को पास आ गया और ढेर सारा थूक निकल क्र अपने लैंड पर लगा लिया.

लल्लू ऋतू क दोनों पेअर को उठा क्र अपने दोनों हाथो मई ले क्र अपना लोला ऋतू क छूट क छेद पर लगा दिया.

ऋतू तकिया उठा क्र अपने मुँह पर रख लिया दबा क्र.

लल्लू एक हल्का धक्का लगाया.

ये लल्लू का पहली बार था तो उसे सही अंदाजा भी नहीं था.

लल्लू का लोला फिसल क्र ऋतू क पेट पर जा पंहुचा.

ऋतू- मुआए इतना बड़ा लोला रखा है और कैसे छोड़ते है ये भी नहीं पता.

ऋतू लल्लू क लौड़े को पकड़ क्र अपने बुर क छेद क्र लगा दिया और पकडे रही.

ऋतू- मर हलके से धक्का.

लल्लू कमर पीछे क्र एक धक्का लगा दिया.

लल्लू का लोला फिसलता हुआ ऋतू क छूट को फैला क्र टोपा तक अंडर चला गया.

ऋतू अपने हाथ से अब तकिये को दबा क्र पकड़ लिया.

लल्लू को लग रहा था जैसे अंदर उसका लोला पिघलता जा रहा है. इतनी गर्मी थी अंदर छूट मई. भट्टी की तरह गर्मी था अंदर.

लल्लू मजे से बेहाल था.

लल्लू कमर पीछे किया और एक धक्का लगा दिया. उसे ज्यादा पता तो था नहीं धक्का थोड़ा जोर लग गया.

ऋतू कराहती हुई छटपटाने लगी.

लल्लू का लोला आधे से ज्यादा घुश गया था ऋतू क छूट को फैला क्र.

ऋतू को लग रहा था जिसे किसी ने गर्म सरिया उसके छूट मई घुसा दिया है.

ऋतू- मुआए आराम से क्र. मरेगा क्या. आह फैट गई मेरी छूट. हैयय कहा फास गई हे भगवन. फैट गई मेरी छूट.. गधे का लोला है हरामी का.

लल्लू को अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था.

वो अब रुक नहीं प् रहा था. ऋतू क चुके को घुटता हुआ लल्लू जितना लौड़ा अंदर गया था इतने से hi ऋतू की चुदाई सुरु क्र दी.

लल्लू सतसुत अपना लोला निकल क्र पेले जा रहा था.

ऋतू को बहुत दर्द क्र रहा था.

अनिल अब ऋतू क साथ सोना कई सालो से छोड़ दिया था.

ऋतू की कई साल से ठुकाई नहीं हुई थी तो अभी उसका छूट की झिल्ली छोटी हो गई थी.

ऋतू- आराम आराम से छोड़ मुआ.. बहुत दर्द क्र रहा है.

ऋतू लल्लू को पकड़ क्र अपने उप्पेर खींच ली.

लल्लू का पूरा लौड़ा ऋतू की गहराई मई घुस गई.

ऋतू- आठ ये तो पेट फार देगा. आह माँ रीई. हाय्यय आज तो मर्डर गईई… हे मा. बचा ली.. रे..

लल्लू ऋतू पर लेता अब घाचा घच चोदे जा रहा था.

लल्लू अब अपने आप को रोक नहीं प् रहा था वो पूरा लौड़ा निकल निकल क्र ऋतू की छूट मई पेले जा रहा था.

ऋतू- मर्डर.. गई.. ाः आह क्या करते रहहा है.. आरम्म से.

लल्लू तो सातवे आसमान पर ुर्र रहा था. उसका लोला किसी पिस्टन की तरह ऋतू की छूट मई अंदर बहार हो रहा था.

लल्लू- ाःह ऋतू. कितना गरममम गयी अंदर.. मई पिघलल रहा हु…

लल्लू बैठ क्र ऋतू क गांड क निचे दोनों हाथ दे क्र उठा लिया और सतशत पेलने लगा.

ऋतू- ाः.. आठ.. आठ. धीरे… क्र न मरे गए. क्या…

ऋतू दो बार इस बिच जहर चुकी थी.

ऋतू क छूट से अब fuch...ffuchh की आवाजे आ रही थी..

लल्लू भी अब अपने चरम पर पहुंच चूका था.

लल्लू एक हाथ से गांड उठाये एक हाथ से ऋतू क चुके को जोर जोर से दबाता पूरी गहराई मई अपना लौड़ा उतरता झरने लगा.

ऋतू- ाःह.. मैई गयी री माईई.. करती हुई लल्लू क लावे को दिल करता वो भी झरर गई.

लल्लू जार तक अपना लौड़ा थोक क्र ऋतू क उप्पेर ढेर हो गया.

दोनों पसीने से पूरा भेज गए थे. बिस्तर तो अब बचा hi नहीं था इन दोनों क मल्ल्युद्ध मई.

दोनों वही नंगे एक दूसरे से चिपके hi ऐसे hi सो गए.
 
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