Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 4 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

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थैंक्स. मुझे लग रहा था की मैंने जो स्टार्ट मई दिखाया और हीरो को जिस कारन से लल्लू नाम दिया है वो काफी अपडेट से नहीं दिखा है तो इसी लिए ये थोड़ा अलग सोचा. अब पता नहीं ये कितना फिट बैठा है.

ककी हीरो का नाम hi लल्लू है तो उसे कही न कही लल्लू जैसा काम भी तो करना पड़ेगा नहीं तो फिर इस कहानी का कोई मतलब hi नहीं रह जाता है.

आप सब क मार्गदर्शन की मुझे समय समय पर ावसक्ता पड़ती रहेगी.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 16.

लल्लू खटिया पर जा क्र लेट गया.

सब लेडीज पार्टी खाना खा क्र उठ गई. लड़किया सरे बर्तन समेत क्र धोने को ले क्र चली गई.

माँ- तो मेरा बीटा बड़ा हो गया है. कुम्भ मई अपने दादू और काका काकी को भी बचाया है. और तो और अब कपडे भी छोटे हो गए है.

साडी काकी हुस्ने लगी ये सुन्न क्र.

लल्लू- माँ आप मेरा तारीफ क्र रही हो या मजाक ुर्रा रही हो. पता hi नहीं चल रहा.

एक बार फिर सब हुस्स दिए.

साडी काकी वही मेरे पास आ क्र बैठ गई.

रागिनी- तो लल्लू बीटा मेरे लिए क्या लाये हो मेले से.

शालिनी- लल्लू बीटा मेरे लिए भी क्या लाये हो.

माँ- आप सब क लिए तो लाया होगा या नहीं लेकिन मेरे लिए तो जरूर लाया होगा. क्यू बीटा, क्या लाया है मेरे लिए.

लल्लू- जो भी लाया हु सब काकी hi लायी है. मुझे जाते वक्त कोई पैसे क लिए पूछा था की बीटा घर से दूर जा रहा है पैसे है कुछ तेरे पास या नहीं.

सब चुप….

लल्लू कमरे मई जा क्र बैग ले आया और अपने प्यारी काकी या लुगाई कहु उसे ला क्र पकड़ा दिया.

ऋतू बैग से सामान निकल निकल क्र सब क लिए जो ले थी वो देने लगी.

अपने देवरानी क लिए वह से छुरी सिंदूर और बिंदी लायी थी.

अपने बेटियों क लिए कंगन लिपस्टिक और काफी सरे फैशन क संसाधन जो एक पुरे बैग मई था वो सारा उन लड़कियों को पकड़ा दी.

सब लड़किया अपने गिफ्ट्स प् क्र खुसी से उछलते हुई कमरे मई चली गई.

रागिनी काकी- दीदी कुम्भ मई आखिर हुआ क्या था.

ऋतू- अरे मत पूछ क्या हुआ. जैसे अभी वो बताये थे न लल्लू क काका वैसे hi हम लोगो को तो कुछ पता भी नहीं चला था की आखिर हुआ क्या था वह. वो तो लल्लू था की समय पर खींच क्र हम लोगो को गली मई ले क्र चला गया नहीं तो पीछे से भागे आते लोगो से धक्का खा क्र हम निचे गिर जाते फिर उन्ही लोगो क पैरो से रौंदे जाते.

काजल- हहैयय रामममम कितना बड़ा अनर्थ होते होते रह गया. ( काजल अपने मुँह खोल क्र उसे अपने हाथ से धक् क्र बोली)

रागिनी- सही कहा. अगर हमारा हीरो बीटा नहीं होता तो पता नहीं क्या होता सब का.

शालिनी- हमारा बीटा है hi सब से बहादुर.

ऋतू तो चुप चाप बस अपने खशम लल्लू को प्यार से देखे जा रही थी.

माँ- वैसे मैंने एक बात और गौर किया है.

सब काजल की और सुरप्रीसेड हो क्र देख रहे थे.

माँ- मई देख रही हु की कुम्भ मेले से जब से आये है दीदी (ऋतू) का चेहरा कुछ ज्यादा hi खिला खिला दिख रहा है.

ऋतू का तो सुनते hi दर से गाला सुख गया.

ऋतू- क्या बक रही है कामिनी. मई तीर्थ यात्रा पर गई थी किसी उस मई नहीं वो क्या कहते है…

शालिनी- हनीमून.

ऋतू- (सरमाती हुई) है वही. ( ग्लो तो करेगहि न तुम्हारे बेटे ने अपना गधे जैसा लौड़े से जो हुमच हुमच क्र मार खाई हु.) मन मई बोलती है.

माँ- तो फिर ये आप का चेहरा क्यू इतना चमक रहा है. हमे भी बता दो दीदी उस राज को. हम भी अपना चेहरा चमका ले.

लल्लू जो वही पास मई खटिये पर लेता था. उसे अपनी माँ की बात सुन क्र खशी आ गई.

ऋतू- (मन मई) है राम क्या बोल रही है ये रंडी. अपने बेटे से छोड़ना चाहती है. कैसे बता दू की मई अब उसकी दीदी नहीं बल्कि बहु बन गई हु और वो मेरी सासु माँ.

माँ- मुआ तुम्हे क्या हुआ तू क्यू खस्ने लगा.

लल्लू- कुछ नहीं माँ. मुँह मई माखी चला गया था.

ऋतू- चलो अब थोड़ा आराम क्र लो सब.

फिर सब उठ क्र अपने अपने कमरे मई आराम करने चले गए.

लल्लू ऋतू की और देख रहा था की सायद बुला ले उसे लेकिन ऋतू सीधा अपने कमरे मई चली गई.

लल्लू बड़ा मायुश हो गया.

खटिया पर बैठा बैठ ुब्ब गया था अब वो.

वह से उठ के वो दालान पर आ गया.

तभी ऋतू बहार निकल क्र चुपके से लल्लू को बुलाने आ रही थी लेकिन लल्लू तो जा चूका था दालान पर.

ऋतू मायुश हो क्र वापस कमरे मई चली गई.

लल्लू दालान पर आया तो सुनील बैठा हुआ था जो लल्लू को देख क्र उसे अपने पास बुलाया.

सुनील- बीटा कब चलना है बाजार.

लल्लू- जब कहे आप काका.

सुनील- थी है फिर जा क्र तैयार हो जा फिर चलते है.

लल्लू वापस आँगन मई आ क्र माँ क पास चला गया.

कमरे मई काजल अकेली सो रही थी सोने से उसका साडी उसे जनघो तक उप्पेर हो गया था.

लल्लू अपनी माँ का मोती जांघ को देख क्र उसे ऋतू की मोती गदराई जंघे याद आने लगी.

उसकी माँ की जंघे ऋतू क जांघो से और भी मोती और गोरी लग रही थी.

लल्लू ये देख क्र अपने लौड़ा मसलने लगा.

तभी काजल करवट बदल क्र सो गई.

लल्लू घबरा क्र पीछे हो गया.

लल्लू- ( पता नहीं क्या हो गया है मुझे.) माँ ू माँ. उठ.. मुझे बाजार जाना है. जरा कपडे निकल क्र दे.

माँ लल्लू कीअवह सुन क्र आँखे खोल देखि.

माँ- क्या हुआ. अभी तो नींद आया था और तुम उठा दिए.

लल्लू- माँ मुझे बाजार जाना है. कपडे दे न.

काजल उठ क्र लल्लू को कपडे निकल क्र दे दी.

लल्लू कपडे ले क्र वही सरे कपडे खोल नंगा हो गया और दूसरे कपडे जो उसे काजल निकल क्र दी थी वो पहनने लगा.

काजल- ऐसे सरे कपडे खोल क्र नंगा नहीं होते कही भी. अब तुम बड़े हो गए हो न.

काजल लल्लू क लौड़े को देखते हुए बोली.

काजल लल्लू क लौड़े को देख क्र बहकती जा रही थी.

लल्लू- माँ मई कही भी थोड़े न कपडे खोल रहा हु. मई तो कमरे मई हु.

माँ- लेकिन बीटा. अब तुम बड़े हो गए हो और यहाँ मई भी तो हु. तू मेरे सामने hi नंगा हो गए.

लल्लू- माँ तुम hi तो कहती हो की बच्चे माँ बाप क लिए कभी बड़े नहीं होते. और अब तुम hi कहती हो की मई बड़ा हो गया हु. अब तुम hi बताओ मई कौन सी बात मनु.

काजल लल्लू की बात सुन क्र अपना सर पिट ली.

काजल- बीटा आगे से ऐसे किसी क भी सामने नंगा नहीं होना. नहीं तो सब हसेंगे तुम पर.

लल्लू- ठीक है माँ.

लल्लू कपडा पहन क्र दालान पर आ गया.

वह सुनील भी तैयार था.

दोनों साथ मई बाजार को चल दिए बुलेट पर.

सुनील क पास एक बुलेट थी.

बाजार गौण से 5 कम दूर था.

वह जा क्र सुनील लल्लू को ले क्र एक रेडीमेड गारमेंट्स क दुकान मई ले गया.

सुनील- भैया जरा मेरे बेटे क नाप क अच्छे अच्छे चार सेट निकल दो.

दुकान वाला गौण का hi था जो इन लोगो को अच्छी तरह पहचानता था.

दुकानदार- इधर आ जाओ बीटा.

फिर दुकानदार लल्लू क लिए चार सेट उसके नाप क पेण्ट शर्ट गंजी जंघया सब निकल क्र एक थैले मई पैक क्र दिया.

वह से निकल क्र सुनील और लल्लू दूसरे दुकान पर आ गए.

ये शूज का दुकान था वह से सुनील ने लल्लू क लिए एक जोड़े सांडले और एक जोड़े जुटे खरीद दी.

वह से ये दोनों बहार आ गए.

सुनील- और कुछ लेना है बीटा.

लल्लू- काका क्यू न सब क लिए कुछ खाने को ले लू. बहुत दिन हो गया सब क लिए कुछ ले क्र नहीं गए है.

सुनील- वो तो ले लेंगे बीटा लेकिन तुम्हे अपने लिए कुछ और चाहिए तो बता.

लल्लू- नहीं काका जी. आप क रहते मुझे और क्या मांगना पड़ेगा. आप मांगने से पहले hi सब दे ला देते है.

फिर सुनील लल्लू क साथ एक चाट वाले क दुकान पर जा क्र सब क लिए चाट पैक करवा लिया और फिर वही से गरमागरम जलेबी भी ले ली.

सब ले क्र दोनों फिर अपने गौण को चल दिए.

घर आ क्र लल्लू अपने कपडे को माँ को पकड़ा दिया रखने को और खाने का सामान रागिनी काकी को.

रागिनी आवाज दे क्र अपने बड़ी बेटी मीनू को बुला क्र उसे वो पैकेट पकड़ा दी.

मीनू- इस मई क्या है माँ.

रागिनी- तुम लोगो को तो अपने भाई से कोई मतलब hi नहीं रहता. लेकिन ये तुम सब का ख्याल रखता है.

बाजार गया था तो सब क लिए कुछ खाने को लाया है. निकल क्र सब को दे.

मीनू ख़ुशी से उछलती हुई वो पैकेट ले क्र रसोई मई चली गई और वह जा क्र सब क लिए प्लेट मई निकल दी.

मीनू- वाओ चाट और जलेबी. बहुत दिन हो गए थे खाये हुए.

मीनू पहले दालान पर सभी मर्द लोगो को दे आई.

उसके बाद अपने माँ और ककियो क ग्रुप मई दे क्र बांकी जितना बचा था सब ले क्र अपने कमरे मई चली गई.

लल्लू खटिया पर बैठा सब देख रहा था.

वो अपने लिए इंतजार क्र रहा था की अब आएगा मेरा प्लेट अब आएगा लेकिन मीनू समझी की भाई लाया है तो वो वह खा क्र hi आया होगा. इसी चक्क्र मई लल्लू का उपवास हो गया.

काजल और ऋतू बार बार लल्लू को देख रहे थे.

काजल- मीनू… अपने भाई को नहीं दी तुम ने.

लल्लू- मई खा क्र आया हु. ( बोल क्र वो वह से उठ क्र बहार चला गया.)

बहार आ क्र लल्लू कई दिन से नदी किनारे नहीं गया था तो वह चला गया.

अँधेरा होने तक लल्लू वही बैठा रहा.

सोचता रहा की उसकी क्या गलती है की वो एक कवन लड़का हो क्र भी नादाँ है, बच्चो क जैसा है.

लल्लू को रोना आ रहा था अपने किस्मत पर की उप्पेर वाले ने उसका सरीर तो बड़ा क्र रहे है लेकिन दिमाग नहीं बढ़ा रहे.

अँधेरा होने क बाद लल्लू वह फ्रेश हुआ और चल दिया घर की और.

दालान पर आ क्र पहले नलका पर जा क्र हाथ मुँह धोया फिर आँगन आ गया.

लल्लू- माँ माँ कहा हो.

ऋतू- अब तू बड़ा हो गया है. ये बच्चो की तरह माँ माँ करना छोड़.

लल्लू- वो माँ क पास मेरे कपडे है. तो मई सोच रहा था की एक बार पहन क्र सरे देख लेता अगर कोई कमी होगी तो कल जा क्र बदलवा लेंगे.

ऋतू- ये सब अब सुबह करना. तू मेरे साथ आ.

ऋतू लल्लू का हाथ पकड़ क्र अपने कमरे मई ले गई.

वह जाते hi ऋतू लल्लू क होठो पर अपना होठ लगा क्र चूसने लगी.

लल्लू भी ऋतू का पूरा साथ दे रहा था.

लल्लू एक हाथ से ऋतू क मोठे चुके को पकड़ क्र मसलने लगा और दूसरे हाथ से उसके हाथ को पकड़ क्र अपने लौड़े पर रख दिया जो अब थोड़ा थोड़ा खड़ा हो रहा था.

ऋतू अपने आँखे बंद किये मजे से होठ चुस्ती अपना चुके मिस्वा रही थी और लल्लू क लौड़े को मशाल रही थी एक हाथ से.

ऋतू- आज रात यही सो जाना. ( ऋतू लल्लू से अलग हो क्र बोली)

लल्लू आगे बढ़ क्र ऋतू को पकड़ लिया और गले लगा क्र उसके होठो को फिर से चूसने लगा.

ऋतू लल्लू क बालो मई हाथ चलती उसका साथ दे रही थी.

ऋतू- अभी ये सब करना सही नहीं है. कोई आ जाएगा तो मुश्किल होगी. अभी तू बैठ यहाँ मई अभी आई.

ऋतू लल्लू को बीएड पर बैठा क्र खुद बहार चली गई.

थोड़ी देर बाद जब वापस आई तो उसके हाथ मई बाजार से लाया चाट और जलेबी थी.

ऋतू- ऐसे नाराज नहीं होते. मीनू समझी की तू खा क्र आया है. इसी लिए तुम्हे नहीं दी थी.

ये खा ले तब तक खाना बन रहा है.

लल्लू चुप चाप नास्ता क्र लिया.

नास्ते क बाद लल्लू बहार आ क्र आँगन मई खटिये पर बैठ गया.

काजल- दीदी क पास जा क्र थोड़ा पढाई के ले.

काजल लल्लू क पास आ क्र बोली.

लल्लू- नहीं. वह उन लोगो क पास मई नहीं जाऊंगा.

काजल- नाराज नहीं होते. वो सब तुम्हारी बहन है. सॉरी भी तो बोलै था न.

लल्लू- मई नहीं जाऊंगा.

लल्लू उठ क्र दालान पर आ गया.

शालिनी- क्या हुआ. क्या कह दी जो वो दालान भाग गया.

काजल- क्या कहु. कभी कभी इसके जीवन की मुझे बड़ी चिंता होती है. इसका बाप कुछ समझता नहीं. कैसे कटेगी इसकी जिंदगी.

ऋतू- क्यू क्या हुआ मेरे बेटे को. कितना अच्छा बहादुर बच्चा है मेरा.

काजल- पता नहीं कभी कभी क्या हो जाता है इसे. अभी बोली हु दीदी लोगो क पास जा क्र पढाई क्र ले तो मन क्र दिया और दालान पर भाग गया.

ऋतू- तू चिंता मत क्र सब ठीक हो जाएगा.

काजल- कैसे चिंता न करू. एक hi तो लड़का है. एक था तो उसे सब आर्मी मई भेज रखे है और एक ये है तो वो भी बच्चे जैसा. सरीर बढ़ रहा है लेकिन दिमाग अभी भी बच्चो का hi है.

शालिनी- इतना मत सोचा क्र. सब सही हो जाएगा. वक्त सब सही क्र देगा.

गौरई..( शालिनी गौरी को आवाज देती बोली.)

गौरी- क्या है. पढाई क्र रही हु मई.

शालिनी- जा दालान पर भाई है उसे बुला क्र ले जा अपने साथ बैठा क्र पढ़ा.

गौरी भुनभुनाती हुई दालान चली गई लल्लू को बुलाने.

गौरी- भाई पढाई करने चलो.

लल्लू- मुझे नहीं पढ़ना है.

सुनील- गन्दी बात बीटा. जा अपने बहन क साथ जा क्र पढाई क्र.

लल्लू अब सुनील काका की बात ताल भी नहीं सकता था कोई और होता तो मन भी क्र देता.

लल्लू वह से उठ क्र गौरी क साथ चल दिया.

गौरी लल्लू को ले क्र अपने कमरे मई पहुंची जहा दो टेबल लगा क्र सभी लड़किया उसके चारो और कुर्सी पर बैठे थे.

लल्लू वह जा क्र खड़ा हो गया.

गौरी- भाई पढ़ने आया है. माँ बोली है भाई को पढ़ा देने को.

सोनम- आ भाई मेरे पास बैठ.

लल्लू सोनम क पास जा क्र खड़ा हो गया. वह सोनम क पास रानी बैठी हुई थी. कोई दूसरा कुर्सी खली नहीं था.

सोनम- रानी तुम दूसरे कुर्सी पर चली जा. यहाँ भाई को बैठने दे.

रानी उठ क्र वह से दूसरी और चली गई.

लल्लू उस कुर्सी पर बैठ गया.

लल्लू- थैंक ु रानी.

रानी लल्लू की बात सुन क्र मुस्का दी.

सोनम- भाई अब मुझे बता कुम्भ मई क्या क्या किया.

लल्लू- लेकिन दीदी माँ तो पढ़ने को बोली है न.

सोनम- पढ़ेंगे भी भाई लेकिन पहले बता न वह क्या हुआ था. हम सब तुम्हारे मुँह से सुनना चाहते है.

लल्लू सर उठा क्र देखा तो सभी लल्लू क चेहरे को hi देख रहे थे.

लल्लू- दीदी सब से पहले तो सुबह जो हुआ उसके लिए सॉरी. मई ध्यान नहीं दिया. वो माँ बता रही थी की मई अभी बच्चा हु न तो इसी लिए मई दरवाजा नहीं खटकाया.

दूसरी बात कुम्भ की कहानी मई सुनाऊंगा लेकिन आप सब को मुझ से वडा करना पड़ेगा की आप सब मुझ से कभी नाराज नहीं होंगे.

ककी आप लोग मुझ से नाराज होते हो तो मेरे यहाँ( अपने छाती मई दिल वाले हिस्से पर हाथ रख क्र) बहुत दर्द होता है. मुझे जोर जोर से रोने का मन करने लगता है. फिर मेरा मन करता है की मई खुद को कुछ कर लू.

लल्लू के आँखों से आँशु निकल रहे थे और यही हाल सभी बहनो का भी था.

कोमल कुर्सी से उठ क्र दौर क्र आई और लल्लू को गले से लगा क्र पुरे चेहरे को चूमने लगी.

सोनम पास hi बैठी थी तो वो तो सब से पहले लल्लू को अपने आगोश मई ले ली.

कोमल रट हुए - ऐसी बाते करेगा तो बता तुझे मरू नहीं तो क्या प्यार करू. क्यू करता है तू ऐसा. अगर तुझे कुछ हो जाएगा तो मई कैसे जियूँगा. मई भी मर जाउंगी.

कोमल रोटी हुई बोलती भी जा रही थी और लल्लू को चूमे भी जा रही थी.

रोमा- आई मोती हैट यहाँ से. ये सिर्फ तेरा hi भाई नहीं है. हम सब का भी है.

कोमल को हटा क्र रोमा लल्लू को अपने गले से लगा ली.

मीनू- आई घोड़ी हैट यहाँ से. ये तेरा hi नहीं हम सब का भी भाई है.

रोमा को खींचती मीनू बोली.

सोनम- एक मिनट एक मिनट. सब हटो जरा यहाँ से.

सोनम सभी बहनो मई बड़ी थी तो सब सोनम की बात मानते थे.

सभी बहने लल्लू को छोड़ क्र हूत गई.

सोनम- भाई तुम ने बहुत गलत बात बोली है. जिसको तुम्हे सजा मिलेगा.

रोमा- प्लस दीदी. अब फिर मत रुलाई भाई को नहीं तो काका बहुत मरेंगे.

सोनम- चुप… सब चुप. कोई कुछ नहीं बोलेगा. जा जा क्र पहले दरवाजा लगा.

लल्लू सर झुकाये कुर्सी पर बैठा था.

रोमा जा क्र दरवाजा लगा दी.

सोनम कड़ी हो क्र लल्लू का हाथ पकड़ क्र उठाई और उसे पकड़ क्र बीएड क पास ले आई और वह बीएड पर धकेल क्र गिरा दी.

सोनम- लो भाई अब तुम सब का भाई तैयार है. सब टूट पदों एक साथ.

पहले एक एक क्र क गले लगाने मई पड़ेशानी होती थी न.

कोमल- वाओ दी. आप ने तो डरा hi दिया था. मई तो समझी की आज पक्का घर से निकलना पड़ेगा.

फिर साडी बहने एक साथ लल्लू पर टूट पड़ी.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 17.

अब बेचारा लल्लू निचे दबा हुआ था और उसके उप्पेर सोनम, रोमा, मीनू, कोमल, रानी और गौरी सभी बहने कूद गई थी.

लल्लू सब से निचे बड़ा बेबस सा बस इन लोगो का अत्याचार सही जा रहा था.

कोई लल्लू क गाल चूमती तो कोई ललाट तो कोई चीन, कोई उसे गुदगुदी लगाती तो कोई उसके गाल मई दन्त गदति.

लल्लू का हाथ भी इन लोगो क बिच दबा हुआ था जिस कारन ये किसी को अपने उप्पेर से हटा भी नहीं प् रहा था.

तभी इस उठा पटक मई किसी ने लल्लू क होठो पर अपने होठ रख दिया तो किसी ने लल्लू क लौड़े को अपने हाथ से पकड़ लिया.

अब लल्लू क लिए ये सब ज्यादा हो रहा था.

लल्लू जैसे तैसे अपना हाथ निकला निचे से तब तक किस ने उसके होठो को चुम रहा था पता hi नहीं चला. लल्लू अब अपना हाथ उस क लौड़े को पकडे हाथ को पकड़ने को बढ़ाया तो लल्लू का हाथ जा क्र सोनम क बड़े बड़े टैंकर पर जा लगा.

तब तक जिस ने लल्लू क लौड़े को पकडे था वो लल्लू क लौड़े को एक बार कास क्र मरोड़ दिया और फिर छोड़ दिया.

लल्लू क मुँह से एक ाः निकल गई.

फिर लल्लू को भी सररत सूझी.

लल्लू ने हाथ बढ़ा क्र अंडर ले गया और जिसका भी दूध पकड़ मई आया जोर से दबा दिया.

सोनम दीदी सब से पहले अलग हो गई और लल्लू को अजीब सी सनका भरी नजरो से देखने लगी.

उसके बाद लल्लू फिर एक बार निचे हाथ लाया और फिर एक दूध पकड़ क्र बड़ा दिया.

इस बार मीनू आह्हः करती अपने दूध को सहलाती हुई वह से हूत गई.

अब वह कुल चार बहने और लल्लू रह गया था.

लल्लू- दीदी लोग प्लस मुझे माफ़ क्र दो. आगे से मई कोई गलती नहीं करूँगा.

प्लस अब बक्श दो.

फिर कोमल लल्लू को छोड़ क्र अलग हो गई. अब तीन रह गए थे तो लल्लू को पता था की रोमा और रानी को गुदगुदी बहुत लगता है.

लल्लू उन दोनों को पटक क्र गुदगुदी लगाना सुरु क्र दिया.

इसी उठा पटक मई रोमा क टशरत से एक चुकी पूरा बहार आ गया.

लल्लू रोमा क दूध को देख क्र हैंग हो गया.

बिलकुल राउंड सापे मई गोरा दूध उस पर एक किसमिस क डेन क बराबर चुचुक.

रोमा मरे सरम क वह से उठ क्र भाग गई.

ये घटना रानी और गौरी भी देख ली तो वो दोनों भी धीरे से कड़ी हो गई.

लल्लू अब अकेला बीएड पर लेता हुआ था.

लल्लू उठ क्र बैठ गया.

लल्लू- दी सब आ जाओ यहाँ फिर बताता हु की वह क्या हुआ था परसो सुबह.

फिर सभी बहने एक एक क्र वह आ क्र बैठ गई लल्लू क चारो और सिवाय रीमा क.

वो सरम से उस कमरे से hi बहार चली गई.

फिर लल्लू वह कुम्भ मई जो हंगामा हुआ वो कह सुनाया.

सुन क्र सब बहने बहुत इम्प्रेस हुई.

तभी रोमा सब को खाना खाने बुलाने आई तो सब उठ क्र खाना खाने चले गए.

मर्द लोग पहले hi खाना खा चुके थे.

सभी लेडीज एक बार मई hi अपना खाना निकल क्र बैठ जाती है खाने और लल्लू को सोनम अपने साथ बैठा लेती है खाने को.

सोनम- भाई आज मेरे साथ खाना खायेगा.

काजल- क्या बात है आज बड़ा प्यार आ रहा है अपने भाई पर.

गौरी- काकी, क्या है ये. हम प्यार करे. तो बड़ा प्यार आ रहा है और न करे तो भाई से प्यार hi नहीं करता.

गौरी की बात सुन क्र सब हुस्ने लगे.

खाना हो जाने क बाद सब बहने झूठा बर्तन ले क्र चली गई.

ऋतू- लल्लू बीटा. तू आज मेरे पास सो जाना.

लल्लू- (खुश होता हुआ). ठीक है काकी.

फिर लल्लू उठ क्र ऋतू क कमरे मई चला गया सोने.

बीएड पर लेट क्र लल्लू ऋतू क आने का इंतजार करने लगा.

रात क किसी पहर लल्लू को अपने लौड़े पर कुछ गर्माहट फील हुआ तो उसकी आँखे खुल गई.

रात सोने जब आया इस कमरे मई तो ऋतू क इंतजार करते करए hi लल्लू को नींद आ गई.

बहार ऋतू सब क साथ बैठे कुम्भ की कहानी सुना रही थी.

जब सब एक एक क्र उठ क्र अपने अपने कमरे मई सोने चले गए तब भी काफी देर इंतजार करने क बाद ऋतू आई थी अपने कमरे मई.

कमरे मई आते hi ऋतू अपने पानी छोड़ती छूट क हाथो मजबूर हो क्र सरे कपडे निकल क्र एक और रख दी और लल्लू क लौड़े को धोती से निकल क्र उसे मुँह मई ले क्र चुभलाने लगी.

लल्लू का मजे से बुरा हाल था.

लल्लू ऋतू क चुके को पकड़ क्र मिलता हुआ उसके मुख छोडन का आनंद लेने लगा. थोड़ी देर बाद लल्लू ऋतू को बीएड पर खींच क्र अपने उप्पेर उल्टा लेता लिया 69 क पोजीशन मई और उसके मुँह मई फिर से अपना लौड़ा घुसा दिया.

लल्लू ऋतू क मुँह को छोड़ते हुए ऋतू का मटकी क कुंवारे छेद को अपने जीभ से कुरेदने लगा.

लल्लू- ऋतू ये कब डौगी.

मुझे तुम्हारा ये मटकी जान ले रहा है.

ऋतू- वो तब मिलेगा जब यहाँ घर मई दो दिन क लिए कोई नहीं होगा. सिर्फ हम दोनों hi होंगे.

लल्लू- क्या… ये तो कभी नहीं होगा.

ऋतू- मई अगर तुम्हारा लौड़ा अपने ढोलकी मई लुंगी तो दो दिन चाहिए मुझे रेस्ट क लिए ककी उसको तुम बिलकुल फार डोज.

और मई चिल्लाऊंगी भी बहुत तो अगर सब होंगे तो सब को पता चल जाएगा और सभी लोग हमारे कमरे मई इक्कठा हो जाएंगे.

लल्लू- ये कैसा सरत है यार.

ऋतू- क्या करू. मेरा भी मन करता है लेकिन जब चूड़ी हुई छूट का तुम माँ छोड़ दिए तो ढोलकी मई तो अभी तक कुछ भी नहीं गया है.

ऋतू लल्लू क लौड़े पर ढेर सारा थूक दाल क्र उस पर बैठ गई और उथल बैठक लगाती बोली.

लल्लू आगे हाथ से उसके चूचियों का मर्दन क्र रहा था और उधर ऋतू लल्लू क लौड़े पर कूदती हुई उसे छोड़ रही थी

ऋतू की छूट तो किसी टैंकर की तरह आज पानी छोड़ रही थी.

पुरे कमरे मई गाछ फच्च फच्च गाछ की मधुर आवाज आ रही थी.

अब लल्लू अपने मूड मई आ रहा था.

वो ऋतू को पटक क्र उसके उप्पेर चढ़ गया और उसके फटी बुर मई अपना लौड़ा एक hi बार मई जार तक घुसा क्र हचक हचक क्र छोड़ने लगा.

ऋतू आहे भर्ती हुई मजे से कराहती हुई कमर उठा उठा क्र लल्लू क ताल से ताल मिलाये जा रही थी.

छुड़वाए जा रही थी.

छूट बहुत गीली थी तो लल्लू का लौड़ा बड़ी आसानी से फिलहाल रही थी.

लल्लू लौड़ा निकल क्र उसे ऋतू क मुँह मई घुसा दिया और छूट मई तीन ऊँगली पेल क्र छोड़ने लगा.

ऋतू तो लल्लू की पूरी दीवानी हो गई थी.

लौड़े को कुश क्र उस पर लगा ऋतू क छूट का सारा पानी पिलाने क बाद एक बार फिर लल्लू ऋतू को पलटा क्र उसे घोड़ी बना दिया और उसके ढोलकी को पकड़ क्र एक hi बार मई पूरा जार तक लौड़ा थुश दिया.

दर्द से ऋतू कराह उठी.

लेकिन लल्लू को इसका कोई फर्क नहीं पड़ा.

वो अब दनादन पूरा लौड़ा टोपे तक निकल क्र एक hi बार मई जार तक ठोकता जा रहा था.

ऋतू इस बिच एक बार फारिग हो गई थी और अब दूसरी बार नम्बर लगाने वाली थी.

ऋतू-. ीिस्स मेरा होने वाला है… प्लस आराम से… हर बार दर्द देता है..

लौड़ा है की क्या है ये.

ऋतू- हैयय मा रीई. इसीसी देख काजल तेरा बीटा तेरे जेठानी को कैसे अपना घोड़ी बना रखा है.

हैय्यायी मई गईई.

ऋतू चिल्लाते हुए झरने लगी.

लल्लू ऋतू क ढोलक को सहलाता मसलता पीछे से जैम क्र छोड़ता हुआ उसके उप्पेर, ऋतू क गांड पर ढेर हो गया.

दोनों ऐसे hi लुढ़के एक दूसरे से चिपके

नींद की हसीं वादियों मई खो गए.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 18.

सुबह क 4 बजे लल्लू की नींद खुल गई.

लल्लू अंगड़ाई लेता हुआ उठ बैठा. गर्दन घुमा क्र एक बार ऋतू की और देखा.

इस समय ऋतू क मुखड़े पर पूर्ण संतुस्ती क भाव थे.

ऋतू नंगी पेट क बल एक पेअर मोर क्र सो रही थी.

लल्लू ऋतू क गोल बड़े ढोलकी को देख क्र उसका बाबूराव सर उठाने लगा.

लल्लू ऋतू क मटके को अपने दोनों हाथो से सहलाता हुआ उसके दोनों पत्तों को अपने मुँह मई भर भर क्र काटने चाटने लगा.

लल्लू को ऋतू क मुरे हुए पेअर क बिच से बुर क गुलाबी छेड़ मन लुभा रहा था.

लल्लू एक ऊँगली उस छेद मई घुसा क्र निकल लिया और अपने मुँह मई दाल क्र चूसने लगा.

ऋतू लल्लू क इन सुखद हरकतों से कुनमुनाने लगी.

लल्लू उठ क्र ऋतू क पीछे आया और अपने बाबू रॉ पर भर सारा थूक से चुपड़ क्र उसे ऋतू क छूट क सुराख़ पर लगा क्र अंडर तेल दिया.

ऋतू कसमसा क्र उठाने लगी.

लल्लू- ऐसे hi लेती रह मेरी बुलबुल. सुबह सुबह ठुकाई का मजा तो ले.

ऋतू- हैयय ढैय्या, मेरे सैय्यन क्या आप का मन रात मई नहीं भरा.

लल्लू- ऐसी लुगाई को होते हुए किस मूरख का मन भर सकता है. मेरा बस चले तो मई तो दिन रात तुम्हे ऐसे hi लेता क्र छोड़ता राहु. तेरे जैसे घोड़ी को दिन रात हुमच हुम्मच क्र छोड़ना चाहिए.

ऋतू- (मजे से ाठी भर्ती हुई..) आठ तो छोड़ न. की तू मर्द का बच्चा है. मुझे तो सक हो रहा है. तेरे निचे एक घोड़ी नंगी छोड़ने क लिए लेती है और तू चुद छोड़ने क बदले बाते छोड़ रहा है.

लल्लू ऋतू क बातो को सुन्न क्र गुस्से मई लैंड निकल क्र जार तक एक hi बार मई थोक दिया.

ऋतू- हैयय मर गयी. आअह्ह्ह ऐसी ही ठोंककक अपने घोड़ी को.

लल्लू अब ऐसे hi जोर जोर से पूरा लौड़ा टोपा तक निकल क्र जार तक ठोकता उसके गांड को जोर जोर से मसलता छोड़ने लगा.

कमरा दोनों क ाहो से गूंज रहा था.

ऋतू क कामराश से पूरा कमरा महक रहा था.

ऋतू आहे भर्ती हुई अपने होठो को दन्त से दबाये चुद रही थी.

लल्लू ऋतू को छोड़ता हुआ अपना एक ऊँगली थूक से गिला किया और ऋतू क गांड क ांचुडी गुलाबी छेद मई कुरेदते हुए घुसा दिया.

ऋतू- आह्हः मुआए ये क्या केरर रहा हैई.

आह्ह्ह भर्ती हुई ऋतू इस दोहरे हमले को झेल नहीं पाई और जहर गई.

जहर क्र ऋतू निढाल हो क्र लेट गई.

लल्लू लौड़ा निकल क्र ऋतू को पीठ क बल पलटा दिया और उसके छूट को मुँह मई भर क्र चूसने लगा.

लल्लू अपनी दो ऊँगली ऋतू क छूट मई दाल क्र छूट क अंडर घूमता हुआ ऋतू क छूट को चूस रहा था.

फिर अपने ऊँगली को निकल क्र ऋतू क मुँह मई घुसा दिया. और इधर अपना लौड़ा ऋतू क छूट मई.

लल्लू ऋतू क छूट मई लैंड दाल क्र उस मई अपने लैंड को गोल गोल घूमता हुआ छोड़ने लगा.

तभी ऋतू लल्लू क कमर मई अपने पेअर की कैची बना क्र पलट गई.

अब लल्लू निचे था और ऋतू उप्पेर.

अब कमान ऋतू क हाथ मई था.

ऋतू लल्लू क चुचुक को अपने जीभ से छेड़ते हुए अपने गांड को कभी लल्लू क कमर पर घिसते हुए आगे पीछे होती तो कभी अपने गांड को गोल गोल घूमती.

थोड़ी देर मई दोनों एक साथ झाड़ गए.

लल्लू ऋतू क एक टंकी को पकड़ क्र जोर से उसके चुचुक को दबा क्र मसल दिया.

ऋतू जोर से सिदिक उठी.

लल्लू बीएड से उतर का कपडे पहन बहार आ गया.

काजल- ( जो उठ गई थी. आँगन मई झाड़ू लगा रही थी) क्या बात है बीटा. आज तो तू लेट उठा है.

लल्लू- है माँ, आज लेट आँख खुली.

काजल- कोई बात नहीं बीटा. होता है कभी कभी.

लल्लू वह से निकल क्र दालान पर आया.

सुनील- बीटा उठ गया तू.

चल आज खेत मई पानी लगाने का काम हम काका भतीजे को मिला है.

लल्लू- कोई बात नहीं काका. ये तो सब से आसान काम है. मोटर चला क्र बस देखते रहो की कही कोई मेर न टूट गया हो. बस…

सुनील हस्ता हुआ उसके पीठ को थपथपा क्र साथ चल दिया.

लल्लू एक कुदाल अपने कंधे पर ले रखा था और एक कुदाल उसके काका.

दोनों खेत पहुंच क्र वह खेत क चारो और सुनील घूम क्र देख रहा था तब तक लल्लू भी जा क्र मोटर चालू क्र दिया.

बहुत बड़े एरिया मई पानी लगाना था जिस मई दोनों काका भतीजे को शाम हो गया.

सुनील क बांकी भाई दूसरे कामो मई बिजी थे.

इस बिच एक मजदुर को भेज क्र ये दोनों घर से अपने लिए खाना भी मंगवा लिए थे.

शाम को दोनों लोगो का सरीर बहुत दर्द क्र रहा था.

पानी दाल गया तो दोनों मोटर बंद क्र घर की और चल दिए.

लल्लू- काका आज तो आप ने पूरा थका दिया.

सुनील- नहीं बीटा. ये तो सब से आसान काम है. मोटर चालू…..

लल्लू- बस बस काका. मई समझ गया. कोई भी काम आसान नहीं होता.

सुनील- गुड, अब तुम समझदार हो गए बीटा.

लल्लू- काका मुझे आप से दो बाटे करना है.

सुनील- तुम्हे पूछने की जरुरत कब से पड़ने लगी बीटा. बेझिझक बोलो.

लल्लू- पहली बात की मुझे भी बुलेट चलना सीखा दीजिये.

सुनील- ठीक है. ये तो मई भी सोच रहा था. अब दूसरी बात बोलो.

लल्लू- दूसरी बात. मुझे भी अब अलग कमरा चाहिए. अब मई बड़ा हो गया हु न.

सुनील- हाहाहा.. ठीक है. कमरा चाहिए तो बोल देना माँ को वो साफ़ करवा देंगे.

लल्लू- काका आप hi बोल देना न. आप की बात कोई नहीं टालता. दीदी लोग जिस कमरे मई रहती है उसके बगल वाला कमरा खली hi है तो वो मई ले लूंगा.

सुनील- पता है तुम्हे. जब मेरी सदी नहीं हुआ था तब मई भी उसी कमरे मई रहता था.

लल्लू- सुच काका.

सुनील- है. बिलकुल सुच.

यु hi बाटे करते दोनों घर पहुंच गए.

आँगन आ क्र लल्लू खटिये पर जा क्र गिर गया.

लल्लू- आह, आज बहुत थक गया.

ऋतू- आ गया मेरा बीटा. थक गया है. कोई बात नहीं. आ मई तुम्हारा बदन दबा दू.

ऋतू लल्लू क पास जा क्र उसे पेट क बल उल्टा क्र उसके बदन को दबाने लगी.

माँ- घोडा जैसा हो गया है और तुझे सरम नहीं आती की अपने काकी से बदन दबवा रहा है

लल्लू- अपनी काकी से नहीं दबवा रहा बल्कि अपनी प्यारी बीबी से दबवा रहा हु. ( लास्ट का सब्द धीरे से बोलै जो सिर्फ ऋतू hi सुन पाई)

ऋतू मुसकुडती हुई उसके पीठ पर एक मुक्का लगा दी.

लल्लू- क्या हुआ क्या मई कुछ गलत कहा.

ऋतू सरमाती हुई सर न मई हिला दी.

थोड़ी देर बाद लल्लू काकी को पकड़ क्र अपने साथ खटिया पर बैठा क्र उसके चुके को सब से छुप क्र मसल देता.

ऋतू शर्मा क्र वह से भाग गई.

तब तक सोनम नास्ता ले क्र लल्लू को पकड़ा दी.

लल्लू- आएएए, आज सूरज किधर से निकला भाई. ये मई क्या देख रहा हु. दीदी किचन से निकली है.

सोनम- माँ.. देखो कैसे बोल रहा है भाई. क्या मई काम नहीं करती.( सोनम पेअर पटक क्र बच्चो की तरह नाटक करती बोली)

ऋतू- बिलकुल करती हो बेटी. लेकिन सिर्फ अपने कमरे मई अपना बीएड तोरने का.

ऋतू की बात सुन क्र सब हुस्ने लगे.

सोनम- मामा.. तुम भी सब क साथ मिल गई.

लल्लू आगे बढ़ क्र सोनम को अपने गले से लगा लिया.

लल्लू- मेरे प्यारी दीदी को काम करने की क्या जरुरत है. उन के लिए इतने लोग है तो काम करने को.

सोनम- मेरा प्यारा भाई.

सोनम कस क्र लल्लू को गले लगा ली.

सोनम की बड़े बड़े दूध लल्लू क छाती मई धुस गए.

लल्लू का रोमांच से रोया रोया खड़े हो गए.

अब लल्लू का बाबूराव अपना सर उठाने लगा था.

लल्लू भी सोनम को अपने गले से लगाए उसके पीठ पर हाथ फेर रहा था.

लल्लू को बाहत मजा आ रहा था.

अब लल्लू का लौड़ा आधा खड़ा हो गया था जिसे सोनम अपने पेट पर फील क्र रही थी.

सोनम मरे सरम क अपना मुँह लल्लू क छाती मई छुपा ली फिर लल्लू क आगोश से निकल क्र अपने कमरे मई चली गई.
 
भाई मैंने लल्लू क पापा से बड़े भाई को काका लिख क्र दिखाया है चाहे वो लल्लू क पापा क अपने सेज भाई हो या गौण क भाईचारे वाला भाई और जो लल्लू क पापा से उम्र मई छोटे है उसे चाचा..

उम्मीद है आप समझ गए होंगे.

ऐसे hi यहाँ मुझे आप लोगो क बहुमूल्य सुझाव या कमिया को बताने का अनुराद है मेरे और से ताकि मई आप लोग जैसा नहीं तो काम से काम आप लोगो क पढ़ने लायक तो स्टोरी लिख सकू.
 
ये गलती हो गया है लेकिन मई मजबूर हो जाता हु जब भी अपडेट पोस्ट करता हु फैला इतना स्लो आज कल नेट चलता है की क्या कहु.

स्फोरम का सर्वर भी बहुत पदेशन करता है.

इसी लिए इस तरह की पड़ेशानी आ रही है.

दूसरा अभी मई भी नया हु तो मुझे भी इतना आईडिया नहीं है इन चीजों को कैसे हैंडल किया जाता है.

सॉरी आप सब को परेशानी होती है.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 19.

लल्लू नास्ता क्र घर से दालान पर आ गया.

थोड़ी देर अपने दादू से बात करने क बाद उठ क्र दालान से बहार आ गया.

बहुत दिन हो गए थे गौण घुमा हुआ तो लल्लू सोचा की एक बार गौण घूम लिया जय.

शादी से अपना रेंजर बाइसिकल निकला जो एक बार जिद्द क्र सुनील काका से खरीदवाया था.

सोचा जब तक काका बुलेट नहीं सिखाते तब तक अपने इस रेंजर से hi गौण घूम लिया जय.

दालान पर जा क्र एक बार दाद्दु को बोल लल्लू अपना रेंजर ले क्र गौण भ्रमण पर निकल गया.

लल्लू का गौण बहुत बड़ा था. लगभग 1000 घर होंगे इस गौण मई.

लल्लू क दादा जी क पास अपना पुस्तैनी काफी जमीं थी और लल्लू क दादा जी दो भाई थे जिन मई एक भाई आर्मी मई कर्नल थे. उन्होंने सदी नहीं की थी.

रिटायरमेंट क कुछ साल बाद hi उनका डेथ हो गया था.

तो उनका प्रॉपर्टी पैसा सब इनको hi मिला.

लल्लू क दादा जी क पास जमीं जायदाद रुपया पैसा किसी चीज की कोई कमी है है.

कहते पिटे परिवार से है ये.

गौण मई अच्छा नाम है इनके परिवार का.

लल्लू अपने रेंजर पर बैठा गौण घूम रहा था. पहले वो बाजार गया वह पापा को एक चाय दुकान पर बैठा देख क्र वह से वापस गौण क दूसरी और चल दिया.

लल्लू डेली सुबह अपने खेत की और क एक नदी क पास जाता है जो एक गौ को दो दिशा से हो क्र बहता है. वो नदी गौण क पूरब से हो क्र आता है और लल्लू क खेत उत्तर की और है तो उस दिशा मई बहता हुआ दूसरे गौण से हो क्र आगे बढ़ जाता है.

लल्लू गौण क पूर्व दिशा को घूमता हुआ जा रहा था.

तभी एक आदमी अपने 10 साल क बेटे को छारी( स्टिक) से मर रहा था.

लल्लू वह रुक गया.

लल्लू- क्या बात है चचा क्यू मर रहे हो बचे को.

वो आदमी- पढ़ने को बोलता हु तो पढता नहीं है. सारा दिन आवारागर्दी करता रहता है. अभी घर आया है आवारागर्दी क्र क.

लल्लू- तो चाचा, आराम से प्यार से समझाओ न. जरुरी थोड़े है की बच्चे मर से hi समझते है.

वो आदमी- मई अपने बेटे को मरू या कटु तुम कौन होते हो बोलने वाले.

पढ़ेगा नहीं तो क्या तुम्हारी तरह बनादु.

लल्लू को उस आदमी की बात सीधा दिल पर लगी.

लल्लू- भगवन करे चचा मेरे जैसा किस्मत सब को मिले. जैसा मेरा परिवार है. जैसे मुझे प्यार करने वाले दादा, काका, काकी, माँ, पापा, बहन है. वैसा तो बिरले इन्शान को hi मिलता है.

वैसे मई लल्लू जरूर हु लेकिन तुम से तो समझदार hi हु.

आदमी- जाओ जाओ. मेरे दिमाग न ख़राब करो.

तभी घर से बहार उस आदमी की पत्नी आई.

औरत- माफ़ करना बीटा. ये आज फिर पी क्र आया है और तुम से उलझ गया. तुम जाओ बीटा. ये इसका रोज का काम है.

लल्लू- मई जा hi रहा था चची. चाचा बच्चे को पिट रहे थे तो मई रुक गया था.

वैसे हमारे यहाँ तो दारू का बन्न लगा है बेचना और पीना तो फिर चाचा को दारू कहा से मिल गया.

औरत- क्या बीटा. कितना भी बन्न लग जय लेकिन बेचने और पिने वाले को मिल hi जाता है.

एक नया कोई आया है वो यहाँ क पुलिस को पैसा खिला क्र उधर नदी क पास झोपडी बना क्र बेचता है. पुलिस वाले भी आ क्र पिटे है. कोई कुछ नहीं कहता है उसे.

लल्लू- अपने लड़के को घर ले जाओ काकी. रात हो रही है तो मई भी चलता हु.

आदमी वह से जा चूका था और वो औरत अपने बेटे को ले क्र घर क अंडर चली गई.

लल्लू रेंजर को पड़ले मरता हुआ आगे बढ़ गया.

लल्लू- फैला ये गौण मई नया कौन आ गया जिस ने गौण मई गंदगी फैलाना सुरु क्र दिया. देखना पड़ेगा. ( लल्लू अपने अप्प से बाटे करता नदी की और चला जा रहा था.

लल्लू- राम राम चाचा. अभी अब कहा जा रहे हो.

गौण क एक जानकर को देख क्र लल्लू रूलर हुआ बोलै.

आदमी- लल्लू बीटा ये रात को तुम कहा जा रहे हो.

लल्लू- छाछ. पहले मैंने पूछा है तो मुझे जवाब दो की अभी अब कहा चल दिए.

आदमी- वो बीटा अभी मुझे नाईट ड्यूटी लगी है तो वही ड्यूटी पर जा रहा हु. अब तुम बताओ.

लल्लू- बहुत दिन हो गया था इधर आप सब से मिले हुए तो मई भी घूमने आ गया था इधर.

आदमी- लल्लू बीटा दिन मई घुमा करो. अभी अब घर जाओ. सुनील को पता चला तो तुम्हे तो गुस्सा करेगा hi साथ hi मुझे भी डांटेगा की जब तुम देखे थे तो रात को घूमने से मन क्यू नहीं किये.

लल्लू- अच्छा ठीक है चाचा. मई भी वापस घर जाता हु.

आदमी- है बिलकुल. कल दिन मई आना. मई भी घर hi रहूँगा. चची से भी मिल लेना.

लल्लू- ठीक है चाचा.

लल्लू वह से वापस हो गया

अब कल देखता हु कौन है ये आज तो बच गया.

वापस घर आ क्र शादी मई रेंजर कड़ी क्र नलका पर हाथ पेअर धो क्र दालान पर आ गया.

अभी दालान पर सरे काका दादू क साथ बैठे थे.

सुनील- कहा से आ रही है सवारी बच्चे.

लल्लू सुनील क पास आ क्र बैठते हुए बोलै

लल्लू- काका मई तो ऐसे hi गौण घूमने गया था लेकिन आप क मित्र सरोज चाचा मिल गए तो वो वापस घुमा दिए.

दादू- कौन सरोज.

लल्लू- दादू वही जो बिजली बिभाग मई काम करते है. अभी ड्यूटी जा रहे थे तो रस्ते मई मिल गए. कहने लगे सुनील को पता चला तो हम दोनों पर गुस्सा करेगा इस लिए अभी तू घर जा. तो मई वापस घर आ गया.

पापा- तुम्हे कितनी बार बोलै है. रात को बहार नहीं जाते तुम्हारे समझ मई hi कुछ नहीं आता. गधा कही का…

लल्लू दर क्र सर झुका लिया.

लल्लू- काका बुलेट चलना कब सिखाएंगे.

पापा- कोई जरुरत नहीं है. चोट लग जाएगी. अभी तुम से वो नहीं संभालेगा. अभी तुम बच्चे हो.

लल्लू वह से उठ क्र आँगन मई आ गया.

लल्लू- ( फैला मई सुच मई गधा हु. पापा वह थे तो क्या जरुरत थी ये सब बोलने की. हआ.. मैंने देखा भी तो नहीं था पापा को वह बैठा हुआ. पता नहीं कहा चुप क्र बैठे रहे थे.)

माँ- क्या बारबरा रहा है तू अपने आप मई.

पापा- ( दालान से आँगन आते हुए) लाटसाहब बुलेट चलना सीखना चाहते हैं.

माँ- है तो क्या हो गया. सिखने दीजिये.

पापा- जैसा पागल बीटा है. वैसी hi माँ है.

पापा कमरे मई जा क्र लेट गए.

माँ आँखों मई आँशु ले क्र रसोई मई चली गई.

लल्लू आँगन मई खड़ा सब देख रहा था.

काजल को यु रोटा देख क्र लल्लू को बहुत बुरा लग रहा था.

लल्लू मुर क्र अपने बहनो क कमरे की और चला गया.

दरवाजा बंद था.

लल्लू दरवाजा खटकाया.

सोनम- खुला है आ जाओ. कौन है.

लल्लू दरवाजा धकेल क्र कमरे मई आ गया.

सोनम- भाई तुम थे. तुम्हे दरवाजे पर खड़े होने की कोई जरुरत नहीं है. सीधा अंदर आ जाया करो.

लल्लू का एक हाथ तुरंत अपने गाल पर चला गया.

सोनम- भाई. तुम हम सब क सब से प्यारे भाई हो. उस दिन जो हुआ वो भूल जाओ. अब तुम्हे कोई कुछ नहीं कहेगा. मई वडा करता हु.

वैसे क्या बात है तुम अपना मुँह क्यू लटकाये हो.

लल्लू की आँखों से आँशु गिरने लगा.

सोनम घबरा क्र लल्लू को अपने गले से लगा लिया.

साडी बहने आ क्र लल्लू को घेर क्र कड़ी हो गई.

कोमल- क्या हुआ भाई. किसी ने कुछ कहा क्या. माँ गुस्सा की है. मई अभी माँ को डाटती हु.

रोमा- है चल. ऐसे कैसे वो हमारे भाई को दन्त सकती है.

दोनों कमरे से जाने लगी.

लल्लू कोमल का हाथ पकड़ लिया.

लल्लू- पापा कहते है मई पागल हु.

लल्लू रोटा हुआ बोलै.

लल्लू- क्या सुच मई मैं पागल हु. बताओ दीदी. लोग मुझे पागल क्यू कहते है.

( पता नहीं क्यू लेकिन ये दो चार लाइन लिखते हुए मेरे आँखों से भी आँशु निकल गए.)

कोमल जल्दी से अपने हाथ से लल्लू क मुँह को दबा दी.

मीनू- प्लस कुछ मत बोल तू और भाई. हम से अब बर्दास्त नहीं होगा.

साडी बहले रोने लगी.

कोमल तो फुट फुट क्र रो पड़ी.

आखिर ट्विन्स थी. उसे लल्लू क दर्द का अंदाजा था.

रोमा कोमल को गले लगा ली.

सोनम लल्लू को चुप करा रही थी.

मीनू पीछे से लल्लू को गले लगाए थे. एक तरफ से रानी.

गौरी कोमल को पीछे से गले लगाए थी.

रोने की आवाज सुन क्र ऋतू और रागिनी दौर क्र इस कमरे मई आई.

रागिनी- क्या हुआ क्यू रो रहे हो तुम लोग. किस को क्या हुआ.

रागिनी बोलते हुए सोनम क गले लगे लल्लू को खींच क्र एक थप्पड़ लगा दी.

रागिनी- क्या किया है हमारी बेटी को बता.

सच कहते है सब तू पागल hi है.

रानी- माँ… जबान संभल क्र बोल…

सोनम- चची… आप हम सब की चची हो और हम से बड़ी हो. कोई और अभी अगर मेरे भाई को कुछ कहा होता तो मई अभी उसकी जबान खींच लेती.

सोनम लल्लू को फिर से गले लगा ली.

लल्लू का पूरा बदन कांप रहा था अभी.

तभी लल्लू सोनम क बहो मई बेजान सा बेहोश हो गया.

सोनम लल्लू को संभल नहीं पायी.

सोनम- भाई… भैई. क्या हुआ. ( बोलते हुए बीएड पर ले क्र लुढ़क गई.

सोनम- कोई सुनील चाचा को बुलाओ जल्दी से.

साडी बहने जोर जोर से रोने लगी.

ऋतू स्तब्ध कड़ी रह गई. उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की यहाँ क्या हुआ.

आवाज सुन क्र शालिनी और काजल भी दौरति हुई आ गई.

तब तक रोमा दौर का दालान पर भी सब को बता आई.

दालान से भी सभी दौर क्र आ गए.

सुनील दौर क्र लल्लू को देखा तो वो बेहोश था.

तुरंत लल्लू को गॉड मई उठा क्र बहार भगा.

सुनील- रवि बुलेट निकल जल्दी से.

रवि दौर का बुलेट स्टार्ट क्र लाया.

सुनील लल्लू को बिच मई बैठा क्र पीछे से पकड़ उसे ले क्र हॉस्पिटल ले गया जल्दी से.

गौण मई हॉस्पिटल नहीं है.

गौण से 5 कम दूर सहर है जहा अच्छे डॉक्टर्स और हॉस्पिटल्स है.

गौण मई चार पांच झोलाछाप डॉक्टर्स है बस जो सिग्नलय बुकर जुकाम चोट छोटी मोती फर्स्ट एड्स को करते है.

आँगन मई….

अनिल- कोई बताएगा क्या हुआ है यहाँ.

सोनम- चची ये क्या क्र दिया आप ने. बिना जाने बिना सोचे आप ने भाई को मारा है. उस पर से उसे वही बात बोल दिए जिस को ले क्र वो इतना पदेशन था.

कोमल- काका मुझे भाई क पास जाना है.

( बोल क्र कोमल भी वही आँगन मई बेहोश हो क्र गिर गई.)

सब घर मई और भी घबरा गए.

तब तक राम जो आज कई महीनो बाद आँगन मई अपने कमरे मई आया था.

पहले राम आँगन मई बस खाना खाने hi आता tha.kuch महीनो से. मिया बीबी मई कोई नोकझोक हो गई थी.

राम कमरे से बहार आया.

आँगन मई भीड़ देख क्र वह आया.

तब तक अनिल कोमल को उठा लिया था गॉड मई.

राम- क्या हुआ. इतना हल्ला क्यू क्र रहे हो सब.

अनिल- राम एक गारी मंगवा जल्दी से.

राम- क्या हुआ है कोमल को.

ऋतू- तुम्हे सुनाई नहीं देता क्या एक नहीं तीन गारी मंगवा जल्दी से.

( ऋतू गुस्से मई राम को बोली)

ऋतू- अगर मेरे बेटे और बेटी को कुछ हुआ तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा. सुन ले सब.

राम- मोबाइल निकल क्र गौण मई hi किसी को कॉल किया.

गारी आ रहा है. अब कोई बताएगा की यहाँ हुआ क्या है.

काजल तो एक कोने मई दीवाल क सहारे पथराई आँखों से सुण्या मई तकती बैठी थी.

ऋतू- सब बाद मई पहले मुझे मेरे बेटे क पास जाना है.

सरे घर मई टाला लगा सोनम.

कोमल को आप दालान पर ले जाइये. ( अपने पति से बोलती ऋतू अपने कमरे मई चली गई.)
 
मेरा थिंकिंग ये है की आप को कोई गैर पागल बोले तो उतना दर्द नहीं करता लेकिन कोई अपना पागल बोले तो ज्यादा चोट करता था.

माँ क आँखों मई आँशु का क्या कहु.

बस वो यही सोच क्र रोइ की जब खुद का बाप hi बेटे क लिए ऐसे वर्ड उसे करेगा तो गैर तो कुछ भी बोल सकता है.

दूसरा सोच क्र लिखने का तो मुझे माफ़ करे..

यही एक काम मुझे नहीं आता है.

मई जब लिखने बैठता हु तो फिर जो दिल और दिमाग तब कहता है लिखता चल जाता हु.

बुरा लगा हो तो सॉरी.
 
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