Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 14 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

पेज 329 पर दे दिया है भाई.

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मर्द का बच्चा. अपडेट 80.

लल्लू थोड़ी देर छत और भटकता रहा फिर थक क्र वही लेट गया अपने बिस्तर पर.

रात क किसी पहर मई उसे प्यास लगी. नींद खुल गया. पानी लाना भूल गया था आज.

उठ क्र निचे नलका पर चल दिया.

लगता है आज लाइट भी चली गई है. आँगन मई चारो और अँधेरा था.

लल्लू नलका पर आ क्र जैसे hi पानी क लिए आगे बढ़ा तभी उसके कानो मई कुछ आवाज आई.

आवाज जैसे सिटी बज रहा हो.

लल्लू क कान खड़े हो गए. ये आवाज कैसा है. आवाज तो बहुत पास से आ रहा था. तभी लल्लू को लगा की यहाँ कोई और भी है उसके अलावा.

लल्लू दिमाग लगाया तो फिर उसे एहसास हुआ की ये सिटी की आवाज किस चीज की थी.

पहले कान खड़े हुए थे लल्लू क अब जब पता चल गया उस सिटी का कारन तो फिर कुछ और भी खड़े हो गए लल्लू क.

लल्लू डैम साढ़े एक और खड़ा हो गया.

वो जो कोई भी थी मूत्र बिसर्जन क्र अपने बुर को धो क्र फिर चली गई.

लल्लू थोड़ी देर खड़ा रहा वह फिर पानी पि क्र वापस आँगन मई आ गया.

एक नजर सभी कमरे पर डाला तो रागिनी काकी क कमरे मई उजाला था. जैसे उन्होंने एमर्जेन्सी लाइट जला राखी हो.

लल्लू पास जा क्र दरवाजा देखा तो वो ऐसे hi सत्ता हुआ था.

लल्लू अंदर झक क्र देखा तो एक बार को उसे अपने आँखों पर यकीं hi नहीं हुआ.

रागिनी काकी फुल नंगी बीएड पर लेती हुई थी और उनका हाथ कमर क निचे बहुत तेजी से चल रहा था.

गहरी सास लेने क कारन बड़े बड़े चुके उप्पेर निचे हिल रहे थे.

उस पर एक इंच का खड़ा निप्पल दूर से hi लल्लू क तन बदन मई आग लगा रहा था.

लल्लू का डंडा फुल जोबन मई खड़ा था.

अब उसे कोई बिल चाहिए था तभी वो बैठता नहीं तो अब लल्लू को नींद नहीं आणि थी.

अब वो जय तो कहा जय.

ऋतू काकी का तो कल वो बुरा हाल क्र दिया था वो आज चुने भी नहीं देगी. शालिनी काकी वैसे hi हाथ नहीं लगाने देगी ककी पहली बार hi जरा जोरदार हो गया था. लक्ष्मी क पास सभी बहने सो रहे होंगे.

माँ, अब एक आखरी उम्मीद माँ पर hi तिकी हुई थी लल्लू की.

लेकिन आज तो उसका मन अपने रागिनी काकी का लेने का हो रहा था.

लल्लू आहिस्ता से दरवाजे को सत्ता क्र एक बार हलके से नॉक क्र दिया दरवाजा.

लल्लू- मेरा चैन चीन ली है काकी तुम ने ऐसे हाहाकारी बदन दिखा क्र. तो तुम्हे भी चैन कैसे लेने दूंगा.

आवाज सुन क्र रागिनी काकी चौक पड़ी.

वो जल्दी से एक निघ्त्य उठा क्र पहन ली.

काकी- कौन है.

काकी कमरे से hi हलके से बोली.

लल्लू- काकी मई हु लल्लू.

काकी झट से बहार आ गई.

काकी- क्या बात है. सब ठीक तो है न.

लल्लू- है काकी. मुझे प्यास लगी थी तो पानी पिने आया था. आप क कमरे का लाइट जल रहा था तो देखने चला आया.

काकी की तो गांड सुख गई ये सुन क्र.

काकी- कही इस नासपीटे ने कुछ देख तो नहीं लिया.

काकी मन मई गालिया देती सोची.

काकी- वो मई भी अभी अभी नलका से आई थी. अब सोने hi जा रही थी की तुम ने दरवाजा नॉक क्र दिया.

लल्लू- काकी मुझे अब नींद नहीं आ रहा है क्या मई आप क पास hi सो जाऊ.

काकी- तुम तो छत पर सो रहे थे न. वह बिस्तर भी लगा होगा.

लल्लू- है काकी. आप चाहो तो चलो वही चलते है सोने. मजा आएगा.

लल्लू काकी का हाथ पकड़ लिया.

काकी- नहीं नहीं. मई नहीं सोऊंगी छत पर. मई कभी नहीं सोइ हु. ोष गिरता है छत पर. मई बीमार हो जाउंगी.

लल्लू- मई हु न काकी. मई कुछ नहीं होने दूंगा आप को. मई अपने प्यारी काकी को कैसे बीमार पर्ने दे सकता हु.

काकी- नहीं नहीं. तू जा मई तो निचे hi सो जाऊंगा.

लल्लू- अकेले तो अब मुझे नींद hi नहीं आएगी काकी. ठीक है आप जाओ. मई यही आँगन मई बैठता हु.

लल्लू काकी का हाथ छोड़ क्र उदाश होने का नाटक करता हुआ बोलै.

काकी झट से हाथ छुड़ा क्र अपने कमरे मई घुस गई.

काकी क तो तन मन मई कोई और hi आग लगी थी जिस मई लल्लू ने पानी दाल क्र बजाने का प्रयाश किया था लेकिन काकी की आग और भड़क गई थी.

काकी अंदर तो चली गई लेकिन अब उनका मन नहीं मन रहा था. लल्लू आँगन मई बैठा रहे और वो कमरे मई सो जय.

मन मर क्र वो बहार निकली तो लल्लू सच मई खटिया पर बैठा हुआ था.

लल्लू काकी क जाते hi खटिया पर hi लेट गया था लेकिन जैसे hi उसने दरवाजा खुलने की आवाज सुनी वो झट से उठ बैठा.

काकी- आ जा यही सो जा आ क्र.

लल्लू- अब तो मुझे छत की आदत हो गई है काकी. मुझे कमरे मई नींद नहीं आएगा. आप सो जाओ. मई बैठा हु यहाँ.

काकी अब करे तो क्या करे. लल्लू को इस तरह यहाँ बैठा छोड़ क्र सोने भी नहीं जा प् रही थी. आखिर प्यार जो करती थी.

घर का सब से छोटा और लाडला भी था सब का.

काकी- ठीक है चल मई भी चलती हु छत पर.

लल्लू- क्या सुच मई काकी.

लल्लू दौड़ क्र रागिनी काकी क पास जा पंहुचा.

काकी- है आ रही हु मई लाइट बंद क्र क.

फिर काकी लाइट बंद क्र बरवाजा लगा क्र बहार आ गई.

लल्लू- आप बहुत अच्छी हो मेरी प्यारी काकी.

लल्लू खुसी से काकी को बहो मई भर क्र उनका गाल चुम लिया दोनों एक एक बार.

जो आग थोड़ी देर पहले काकी दबाने की कोसिस क्र रही थी वो लल्लू क यु बहो मई ले क्र गाल चूमने से एक बार फिर से भड़क गया.

रागिनी काकी को उस सुबह ऋतू काकी क रूम क बहार तक आती आवाज याद आ गई.

रागिनी काकी की बुर से दो बून्द आँशु निकल क्र लुढ़क गए उनके मोठे केले जैसी जांघो पर.

काकी झट से अँधेरे का लाभ उठा क्र अपने निघ्त्य को पकड़ क्र अपने बुर को जोर से मसल दी.

इसका नतीजा ये हुआ की बुर और अच्छी तरह से पनिया गई.

लल्लू काकी का हाथ पकड़ क्र लगभग खींचते हुए छत पर ले आया.

लल्लू- काकी आप बहुत अच्छी हो. आप तो मेरी सब से प्यारी काकी को.

लल्लू अँधेरे का फायदा उठा क्र काकी क निघ्त्य क अंदर नंगे झूलते मोठे चुके को अपने साइन से मसलता उन्हें अपने बहो मई कस लिया.

काकी क होठो से मददकता की एक मीठी ससीइससकारी निकल गई.

लल्लू सब समझ क्र नासमझ बनता काकी को ले क्र अपने बिस्तर पर आ गया.

रागिनी एक और सो गई और फिर उनके बगल मई लल्लू सो गया.

लल्लू- काकी आप क्या क्र रही थी कमरे मई.

लल्लू काकी से मजे लेता हुआ बोलै.

काकी लल्लू की बाते सुन क्र धक्क्क से रह गई.

दर और सरम से रागिनी क होठो से कोई बोल नहीं फुट रहा था.

लल्लू- बताओ न काकी. क्या क्र रही थी कमरे मई.

काकी- s..s..o...o ra..hi t..h..I.

लल्लू- लेकिन मैंने देखा था तो आप कुछ और hi क्र रही थी जो सायद अधूरा hi रह गया.

बस हो गया कल्याण.

काकी को तो मनो काटो तो खून नहीं वाली हालत थी.

लल्लू- ये सब नेचुरल है काकी. इस मई सर्मना कैसा. मई भी करता था पहले.

काकी- मतलब…

काकी शर्मा रही थी लेकिन लल्लू क ऐसा कहने से अनायाश उनके होठो से निकल गया.

लल्लू- मतलब. पहले मई भी ऐसे hi अपने को संत करता था. अब तो कभी बड़ी काकी तो कभी छोटी काकी कभी लक्ष्मी सब है प्यार करने को. अब इसकी जरुरत नहीं पड़ती.

काकी- हैयय राम कितना बेसरम है ये.

काकी अपने मन मई बोली.

लल्लू- आप सब मेरी माँ हो. मई आप सब क जिस्म का हिस्सा hi हु. जैसे आप क हाथ है पेअर है सर है पेट है वैसे hi मई भी आप का hi एक अंग हु. मुझ से कैसा सर्मना और कैसा पर्दा.

काकी- चुप क्र. ये सब अच्छी बात नहीं है.

लल्लू- बुरी बात होती तो क्या आप वो करती. अगर ये बुरा होता तो क्या मई इस दुनिया मई आया होता. कोई नहीं करता ऐसा. ये बुरा कैसे हो गया. ये तो सब की जरुरत है. मुझे भी है. माँ को भी है. काकी को भी… सब को इसकी जरुरत होता है.

काकी- ऐसी बाटे अपने माँ या काकी से नहीं करते. ये सब अपने बीबी से करते है.

लल्लू- क्यू ऐसा क्यू. जब एक माँ अपने बच्चे को वह से निकल सकती है. जन्म दे सकती है तो फिर माँ या काकी से बात क्यू नहीं क्र सकते.

काकी- मुझे नहीं पता तू सो जा अब.

लल्लू- आप नाराज क्यू होती हो. आप नहीं बताओगे तो मई किस से पूछूंगा. मेरा तो दोस्त भी आप लोग hi हो और माँ भी.

काकी- ये सिर्फ पति पत्नी क बिच hi होता है.

लल्लू- ऐसा क्यू है. प्यार तो कोई किसी से भी क्र सकता है. फिर ये बंदिश क्यू.

काकी- देख मई इतना नहीं जानती. मुझे बस ये पता है की ये सब सिर्फ पति पत्नी क बिच hi होना चाहिए.

लल्लू- अगर पानी अपने पत्नी क साथ न करे तो क्या होगा. काकी जो करती है, मई जो करता हु क्या ये गलत है. आप ऐसे तृप्ति रहती है क्या ये सही है. प्यार का तो सब को हक्क है फिर ये क्यू की सिर्फ पति पत्नी hi क्र सकते है. दूसरा कोई नहीं.

काकी- मुझे नींद आ रही है. तू भी सो जा.

काकी दूसरी और मुँह क्र ली लल्लू की और पीठ क्र सोने की कोसिस करने लगी.

लल्लू काकी की और घूम गया.

काकी की निकली हुई गोल गद्देदार गांड क साथ लल्लू का लुल्ली टच हो गया.

काकी क मुँह से फिर एक आह निकल गई.

बुर से तो नदी बाह निकली.

काकी जोरो से अपने दोनों पैरो को चिपका ली.

लल्लू- काकी नाराज हो गई आप.

लल्लू पीछे से काकी क पीठ से चिपकता हुआ बोलै.

लल्लू का टोपा काकी क निघ्त्य को अंदर धकेल क्र उनके पनियाई बुर मई हल्का सा टच हो गया.

काकी का पूरा सरीर गंगना उठा.

लल्लू अपने हाथ को आगे ले जा क्र काकी क पेट पर रख दिया.

काकी लल्लू क इस दोतरफा हमले को दन्त दबाये झेल रही थी.

रह रह क्र उनके पानी बहती बुर फरक उठती थी.

काकी सैश रोके लेती हुई थी.

लल्लू अपने हाथ को काकी क पेट पर हलके से सहलाने लगा था.

काकी लल्लू क हाथ को पकड़ क्र अपने पेट से हटा दी.

लल्लू- माफ़ क्र दो न काकी. क्या मैंने कुछ गलत कह दिया था.

लल्लू दुबारा से अपने हाथ को काकी क पेट पर रख दिया.

काकी- बीटा सोने दे अब. तंग मत क्र.

लल्लू- मुझे पता है काकी अब आप को नींद नहीं आणि.

लल्लू फिर अपने हाथो से काकी क चिकने सपाट पेट को सहलाने लगा.

वो अपने हाथ को निचे से सहलाता हु ले जाता और काकी क फुले हुए गुब्बारे की तरह मस्त चुके क निचे तक ला क्र रोक देता.

लल्लू क हाथो मई काकी की चूचियों की गर्माहट का एहसास हो रहा था.

काकी झट से लल्लू क हाथ को पकड़ ली जैसे hi लल्लू उप्पेर उनके चूचियों की और हाथ लेन लगा था.

लल्लू पीछे से हलके से अपने होठो को काकी क नंगे गर्दन पर पीछे चिपका दिया.

काकी क सरीर क सरे रोये खड़े हो गए.

छूट फरफराते हुए मोठे मुसल की मांग करने लगा था.

लल्लू हलके से काकी क हाथ से अपना हाथ छुड़ा क्र फिर से एक बार उन से और अचे से चिपक गया पीछे से.

लल्लू का लोला काकी क फुले हुए बुर क दोनों होठो को निघ्त्य सहित फैलता हल्का सा जा घुसा.

काकी मजे से कराह क्र रह गई.

आनंद से उनकी आँखे मुंड गई.

मन क्र रहा था की उठ क्र एक hi बार मई पूरा जार तक लल्लू क लैंड को अपने बुर मई थुश ले लेकिन लाज सरम उन्हें कुछ भी करने से रोक रहा था.

लल्लू अब अपने हाथ को पेट से काकी क छतियो की और बढ़ने लगा था.

पतली निघ्त्य क अंडर पहले हुए गुब्बारे जैसे लल्लू को नंगे hi लग रहे थे.

लल्लू का लैंड काकी की बुर मई उसके होठो से फसा हुआ एक ठुनका मर उठा.

काकी सिसकती हुई लल्लू क लोले की और अपने बड़े बहार को निकली गांड को ढकेल दे जिस से लल्लू का डंडा थोड़ा सा और काकी क बुर को फैला दिया.

वो हिस्सा जहा लल्लू क लैंड का टोपा था निघ्त्य का, उस पुरे हिस्से को काकी की रास छोड़ती बुर भिनगा दी थी अपने रास से.

लल्लू एक हाथ से अपने डंडे पर से धोती हटा क्र नंगा क्र दिया.

अब काकी क रास की गागर और लल्लू क गन्ने क बिच सिर्फ काकी की पतली कॉटन की निघ्त्य hi थी.

काकी को भी एहसास हो गया था की लल्लू का गणना नंगा है.

लल्लू हलके हाथो से काकी की दोनों बिल्स को सहला रहा था.

काकी क चुके पर दोनों मई नोकदार चुचुक उभर आये थे. जो उस पतले निघ्त्य क अंदर होने पर भी बिलकुल खड़े हो क्र हर बार लल्लू क हाथो मई घर्षण पैदा क्र रहा था.

जब जब लल्लू का हाथ उन दोनों पर लगता काकी कम्प जाती.

अब उन्हें बर्दास्त करना बहुत hi मुश्किल लग रहा था.

मन तो क्र रहा था की जैसे ऋतू काकी जिनिस सुबह चीख निकल दी थी लल्लू ने, वैसे hi अभी उन्हें भी पूरी गर्मी संत क्र दे लेकिन लोक लाज संस्कार अभी भी कही बांकी रह गया था.

लल्लू एक हाथ से काकी क साइन को सहला रहा था तो दूसरे हाथ को आशनाई काकी क मांशल जांघ और रख दिया.

लल्लू दूसरे हाथ से काकी क मोठे चिकने जांघ को सहलाने लगा था.

धीरे धीरे लल्लू जांघ सहलाने क बहाने काकी की निघ्त्य समेत क्र उनके जांघ तक क्र दिया था.

लल्लू भी घबरा रहा था. कही काकी बिदाई न जय.

लल्लू अपने एक हाथ मई अब काकी की एक पोस्ट चूचियों को जितना समां सकता था उतना ले क्र हलके हलके मसाज देने लगा.

काकी आँखे बंद किये. अपने होठो को दांतो से कटती सोने का नाटक क्र रही थी.

किसी भी छान उनकी बर्दास्त की हाडे समाप्त हो सकती थी.

निचे से पूरी निघ्त्य गीली हो गई थी.

बुर से टपकता हुआ रास उनके जांघ को एक तरफ से पूरा गिला क्र दिया था.

लल्लू हिम्मत करता दूसरे हाथ से निघ्त्य पकड़ क्र उठा लिया और हलके से पीछे हो क्र उसे काकी क कमर पर कर दिया.

लल्लू का लौड़ा सोच क्र hi फुल क्र पूरा रोड बन गया था.

निघ्त्य हटा क्र लल्लू फिर एक बार आहिस्ता से आगे हो क्र काकी को अपने बहो मई ले लिया.

लल्लू का नंगा लैंड काकी की नंगी बड़ी सी मटकी जैसी गांड क दोनों पतों क निचे से उनके बुर क सुराख़ पर जा लगा.

काकी का पूरा सरीर गंगना उठा.

लल्लू भी अब काकी क चुके को थोड़ा सा जोर से मसलना सुरु क्र दिया था.

काकी अब जल्द दे जल्द लल्लू क लौड़े को अपने अंडर चाहती थी.

वो कमर पीछे क्र लल्लू क लैंड क टोपे को अपने बुर मई घुसाने की कोसिस करने लगी थी.

लल्लू पीछे से उनके गले को चूमता हुआ एक हाथ से उनके बहार निकली गद्देदार गांड को सहलाता हुआ अपने लौड़े को आगे धकेल क्र अपना टोपा उनके बुर मई फसा दिया.

काकी भलभला क्र झरने लगी.

लल्लू अपने लैंड क टोपे पर काकी की योनि रास को फील क्र एक जोर का धक्का धीरे से लगा दिया.

लल्लू ा लैंड का मोटा सुपर काकी की बुर की मोती फैंको को फैलता हुआ एक चौथाई अंडर जा घुसा.

काकी दर्द और मजे क मिले जुले भाव से कराह क्र संत हो गई.

लल्लू को भी अब रुकना मुहाल हो गया था.

वो पीछे से चिपका हुआ hi काकी क बुर मई अपनी कमर हिला हिला क्र उतने लैंड से पहले ढीली करने लगा.

दो मिनट्स मई hi काकी फिर से आहे भरने लगी थी.

लल्लू झट से काकी को काश क्र एक हाथ से बहो मई लिए हुए उठ बैठा और अपने लिखे पर बैठा लिया सामने को घूमता हुआ.

एक hi बार मई पूरा जार तक लैंड काकी की गीली छूट मई फिसलता हुआ चला गया.

काकी सर इधर उधर करती लल्लू क पीठ पर नाख़ून गदा दी.

लल्लू दर्द को पूरा हुआ काकी क बदन से निघ्त्य निकल फेका.

अब काकी की चूचिया लल्लू की नंगी छाती मई डाब क्र रगड़ खाने लगी.

लल्लू निचे से काकी की पतली कमर को दोनों हाथो से पकडे उन्हें हलके हलके अपने लैंड पर झूला झूलने लगा.

काकी दर्द से बार बार लल्लू क कंधे को पकडे कभी नाख़ून गदति तो कभी सर इधर उधर पटकती.

सरम से वो कुछ बोल नहीं प् रही थी.

थोड़ी देर बाद लल्लू काकी को लेता क्र उनपर झुकता हुआ उनके चुके का एक निप्पल अपने होठो से दबा क्र पिने लगा था.

काकी मजे मई लल्लू क सर को सहलाती उसे अपने चुके पर दबाने लगी.

लल्लू मुँह खोल क्र ज्यादा से ज्यादा हिस्सा चुके का मुँह मई भर क्र पिने लगा.

लल्लू अब कास कास क्र काकी क बुर को ढीली करता हुआ उन्हें छोड़ने लगा था.

काकी की बुर भी पूरी तरह तैयार थी. वो पानी बहती फच फच की आवाज करती अपनी गांड उठा उठा क्र लल्लू का पूरा साथ दे रही थी.

लल्लू- कैसा लग रहा है काकी.

काकी- कहा से सीखा ये सब रे. ऐसा लग रहा है जैसे मई जन्नत मई हु.

लल्लू- तो क्या रोज मेरे साथ इस जन्नत का सैर करने चलोगी.

काकी- मुझे पता hi नहीं था इतना मजा आता है. नहीं तो मई तो कब की तुम्हारे साथ ये मजा ले लेती.

लल्लू- अब तो पता चल गया न. बताओ न काकी अब डेली मेरे साथ चलोगी जन्नत देखने.

काकी- है अब डेली मई तुम्हारे साथ यहाँ चाट पर आया करुँगी. मुझे डेली ऐसे hi नंगी क्र क छोड़ना.

लल्लू- क्या करूँगा काकी एक बार फिर बताना.

काकी- अभी मुझे काश काश क्र छोड़. बहुत ज़माने बिट गए चूड़े हुए. ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई थी. खूब जोर जोर से मर रे. हैयय क्या आग लगा दी तूने.. मई गईई..

काकी चिल्लाते हुए जहर गई थी.

लल्लू अब पूरा लौड़ा निकल क्र ठोकना चालू क्र दिया था.

वो काकी की दोनों चूचियों को मसल मसल क्र लाल क्र दिया था.

काकी की चुचुक तन क्र खड़े थे जिन्हे लल्लू अपने चुटकी मई दबा क्र मसल दिया करता था.

लल्लू एक हाथ से काकी क साइन को सहला रहा था तो दूसरे हाथ को आशनाई काकी क मांशल जांघ और रख दिया.

लल्लू दूसरे हाथ से काकी क मोठे चिकने जांघ को सहलाने लगा था.

धीरे धीरे लल्लू जांघ सहलाने क बहाने काकी की निघ्त्य समेत क्र उनके जांघ तक क्र दिया था.

लल्लू भी घबरा रहा था. कही काकी बिदाई न जय.

लल्लू अपने एक हाथ मई अब काकी की एक पोस्ट चूचियों को जितना समां सकता था उतना ले क्र हलके हलके मसाज देने लगा.

काकी आँखे बंद किये. अपने होठो को दांतो से कटती सोने का नाटक क्र रही थी.

किसी भी छान उनकी बर्दास्त की हाडे समाप्त हो सकती थी.

निचे से पूरी निघ्त्य गीली हो गई थी.

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लल्लू हिम्मत करता दूसरे हाथ से निघ्त्य पकड़ क्र उठा लिया और हलके से पीछे हो क्र उसे काकी क कमर पर कर दिया.

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काकी का पूरा सरीर गंगना उठा.

लल्लू भी अब काकी क चुके को थोड़ा सा जोर से मसलना सुरु क्र दिया था.

काकी अब जल्द दे जल्द लल्लू क लौड़े को अपने अंडर चाहती थी.

वो कमर पीछे क्र लल्लू क लैंड क टोपे को अपने बुर मई घुसाने की कोसिस करने लगी थी.

लल्लू पीछे से उनके गले को चूमता हुआ एक हाथ से उनके बहार निकली गद्देदार गांड को सहलाता हुआ अपने लौड़े को आगे धकेल क्र अपना टोपा उनके बुर मई फसा दिया.

काकी भलभला क्र झरने लगी.

लल्लू अपने लैंड क टोपे पर काकी की योनि रास को फील क्र एक जोर का धक्का धीरे से लगा दिया.

लल्लू ा लैंड का मोटा सुपर काकी की बुर की मोती फैंको को फैलता हुआ एक चौथाई अंडर जा घुसा.

काकी दर्द और मजे क मिले जुले भाव से कराह क्र संत हो गई.

लल्लू को भी अब रुकना मुहाल हो गया था.

वो पीछे से चिपका हुआ hi काकी क बुर मई अपनी कमर हिला हिला क्र उतने लैंड से पहले ढीली करने लगा.

दो मिनट्स मई hi काकी फिर से आहे भरने लगी थी.

लल्लू झट से काकी को काश क्र एक हाथ से बहो मई लिए हुए उठ बैठा और अपने लिखे पर बैठा लिया सामने को घूमता हुआ.

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काकी सर इधर उधर करती लल्लू क पीठ पर नाख़ून गदा दी.

लल्लू दर्द को पूरा हुआ काकी क बदन से निघ्त्य निकल फेका.

अब काकी की चूचिया लल्लू की नंगी छाती मई डाब क्र रगड़ खाने लगी.

लल्लू निचे से काकी की पतली कमर को दोनों हाथो से पकडे उन्हें हलके हलके अपने लैंड पर झूला झूलने लगा.

काकी दर्द से बार बार लल्लू क कंधे को पकडे कभी नाख़ून गदति तो कभी सर इधर उधर पटकती.

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काकी मजे मई लल्लू क सर को सहलाती उसे अपने चुके पर दबाने लगी.

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काकी की बुर भी पूरी तरह तैयार थी. वो पानी बहती फच फच की आवाज करती अपनी गांड उठा उठा क्र लल्लू का पूरा साथ दे रही थी.

लल्लू- कैसा लग रहा है काकी.

काकी- कहा से सीखा ये सब रे. ऐसा लग रहा है जैसे मई जन्नत मई हु.

लल्लू- तो क्या रोज मेरे साथ इस जन्नत का सैर करने चलोगी.

काकी- मुझे पता hi नहीं था इतना मजा आता है. नहीं तो मई तो कब की तुम्हारे साथ ये मजा ले लेती.

लल्लू- अब तो पता चल गया न. बताओ न काकी अब डेली मेरे साथ चलोगी जन्नत देखने.

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काकी- अभी मुझे काश काश क्र छोड़. बहुत ज़माने बिट गए चूड़े हुए. ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई थी. खूब जोर जोर से मर रे. हैयय क्या आग लगा दी तूने.. मई गईई..

काकी चिल्लाते हुए जहर गई थी.

लल्लू अब पूरा लौड़ा निकल क्र ठोकना चालू क्र दिया था.

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लल्लू दूसरे हाथ से काकी क मोठे चिकने जांघ को सहलाने लगा था.

धीरे धीरे लल्लू जांघ सहलाने क बहाने काकी की निघ्त्य समेत क्र उनके जांघ तक क्र दिया था.

लल्लू भी घबरा रहा था. कही काकी बिदाई न जय.

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काकी आँखे बंद किये. अपने होठो को दांतो से कटती सोने का नाटक क्र रही थी.

किसी भी छान उनकी बर्दास्त की हाडे समाप्त हो सकती थी.

निचे से पूरी निघ्त्य गीली हो गई थी.

बुर से टपकता हुआ रास उनके जांघ को एक तरफ से पूरा गिला क्र दिया था.

लल्लू हिम्मत करता दूसरे हाथ से निघ्त्य पकड़ क्र उठा लिया और हलके से पीछे हो क्र उसे काकी क कमर पर कर दिया.

लल्लू का लौड़ा सोच क्र hi फुल क्र पूरा रोड बन गया था.

निघ्त्य हटा क्र लल्लू फिर एक बार आहिस्ता से आगे हो क्र काकी को अपने बहो मई ले लिया.

लल्लू का नंगा लैंड काकी की नंगी बड़ी सी मटकी जैसी गांड क दोनों पतों क निचे से उनके बुर क सुराख़ पर जा लगा.

काकी का पूरा सरीर गंगना उठा.

लल्लू भी अब काकी क चुके को थोड़ा सा जोर से मसलना सुरु क्र दिया था.

काकी अब जल्द दे जल्द लल्लू क लौड़े को अपने अंडर चाहती थी.

वो कमर पीछे क्र लल्लू क लैंड क टोपे को अपने बुर मई घुसाने की कोसिस करने लगी थी.

लल्लू पीछे से उनके गले को चूमता हुआ एक हाथ से उनके बहार निकली गद्देदार गांड को सहलाता हुआ अपने लौड़े को आगे धकेल क्र अपना टोपा उनके बुर मई फसा दिया.

काकी भलभला क्र झरने लगी.

लल्लू अपने लैंड क टोपे पर काकी की योनि रास को फील क्र एक जोर का धक्का धीरे से लगा दिया.

लल्लू ा लैंड का मोटा सुपर काकी की बुर की मोती फैंको को फैलता हुआ एक चौथाई अंडर जा घुसा.

काकी दर्द और मजे क मिले जुले भाव से कराह क्र संत हो गई.

लल्लू को भी अब रुकना मुहाल हो गया था.

वो पीछे से चिपका हुआ hi काकी क बुर मई अपनी कमर हिला हिला क्र उतने लैंड से पहले ढीली करने लगा.

दो मिनट्स मई hi काकी फिर से आहे भरने लगी थी.

लल्लू झट से काकी को काश क्र एक हाथ से बहो मई लिए हुए उठ बैठा और अपने लिखे पर बैठा लिया सामने को घूमता हुआ.

एक hi बार मई पूरा जार तक लैंड काकी की गीली छूट मई फिसलता हुआ चला गया.

काकी सर इधर उधर करती लल्लू क पीठ पर नाख़ून गदा दी.

लल्लू दर्द को पूरा हुआ काकी क बदन से निघ्त्य निकल फेका.

अब काकी की चूचिया लल्लू की नंगी छाती मई डाब क्र रगड़ खाने लगी.

लल्लू निचे से काकी की पतली कमर को दोनों हाथो से पकडे उन्हें हलके हलके अपने लैंड पर झूला झूलने लगा.

काकी दर्द से बार बार लल्लू क कंधे को पकडे कभी नाख़ून गदति तो कभी सर इधर उधर पटकती.

सरम से वो कुछ बोल नहीं प् रही थी.

थोड़ी देर बाद लल्लू काकी को लेता क्र उनपर झुकता हुआ उनके चुके का एक निप्पल अपने होठो से दबा क्र पिने लगा था.

काकी मजे मई लल्लू क सर को सहलाती उसे अपने चुके पर दबाने लगी.

लल्लू मुँह खोल क्र ज्यादा से ज्यादा हिस्सा चुके का मुँह मई भर क्र पिने लगा.

लल्लू अब कास कास क्र काकी क बुर को ढीली करता हुआ उन्हें छोड़ने लगा था.

काकी की बुर भी पूरी तरह तैयार थी. वो पानी बहती फच फच की आवाज करती अपनी गांड उठा उठा क्र लल्लू का पूरा साथ दे रही थी.

लल्लू- कैसा लग रहा है काकी.

काकी- कहा से सीखा ये सब रे. ऐसा लग रहा है जैसे मई जन्नत मई हु.

लल्लू- तो क्या रोज मेरे साथ इस जन्नत का सैर करने चलोगी.

काकी- मुझे पता hi नहीं था इतना मजा आता है. नहीं तो मई तो कब की तुम्हारे साथ ये मजा ले लेती.

लल्लू- अब तो पता चल गया न. बताओ न काकी अब डेली मेरे साथ चलोगी जन्नत देखने.

काकी- है अब डेली मई तुम्हारे साथ यहाँ चाट पर आया करुँगी. मुझे डेली ऐसे hi नंगी क्र क छोड़ना.

लल्लू- क्या करूँगा काकी एक बार फिर बताना.

काकी- अभी मुझे काश काश क्र छोड़. बहुत ज़माने बिट गए चूड़े हुए. ऐसी चुदाई कभी नहीं हुई थी. खूब जोर जोर से मर रे. हैयय क्या आग लगा दी तूने.. मई गईई..

काकी चिल्लाते हुए जहर गई थी.

लल्लू अब पूरा लौड़ा निकल क्र ठोकना चालू क्र दिया था.

वो काकी की दोनों चूचियों को मसल मसल क्र लाल क्र दिया था.

काकी की चुचुक तन क्र खड़े थे जिन्हे लल्लू अपने चुटकी मई दबा क्र मसल दिया करता था.

काकी चिहुँक क्र दुगुने जोश मई कमर उठा उठा क्र लल्लू क लैंड पर पटक रही थी.

लल्लू भी इस बेलगाम घोड़ी को लगाम लगता मसलता हुआ कास कास क्र छोड़ने मई लगा हुआ था.

काकी फिर एक बार तैयार थी पानी बहाने को.

लल्लू का स्पीड भी अब किसी पिस्टन की तरह हो गया था.

छूट से अजीब अजीब सी आवाजे निकल रही थी.

लल्लू अब काकी क दोनों पैरो को कंधे और उठा क्र दाल लिया और जार तक ठोकता उन क चूचियों को मसल रहा था.

लल्लू क खून का बहाव जैसे अब निचे की और हो क्र लैंड से निकल जाना चाहता था बहार को.

लल्लू दन्त भींचे काकी क जांघो मई होठ रगड़ता हुआ दोनों चुचो को मुठी मई दबाये ताबरतोड़ गधा खोदने मई लगा हुआ था.

काकी अब लल्लू से जैसे जोंक की तरह चिपक गई थी. वो किसी भी छान झरने वाली थी.

काकी जोर जोर से कराहती हुई भलभला क्र लल्लू क लैंड को भिगोने लगी.

लल्लू भी दो चार ताकतवर धक्का लगा क्र काकी क बच्चेदानी को अपने गर्म लावा से नहलाना सुरु क्र दिया.

काकी लल्लू क गर्म लावे को अपने बच्चेदानी पर फील क्र फिर से कम्पटी हुई झरने लगी.

अभी तो ऐसे लग रहा था जैसे काकी ने मूट hi दिया हो. रह रह क्र बुर से पिचकारी निकल रही थी.

लल्लू काकी और लुढ़का हुआ लेता था.

काकी कास क्र उसे अपने से चिपकाये पानी बहा रही थी.

थोड़ी देर मई लल्लू जब काकी की हाथो का बंधन ढीला देखा तो उन और से उतर क्र साइड मई लेट गया.

थोड़ी देर मई काकी की ससे बहाल हुई तो वो घूम क्र लल्लू क चेहरे पर चुम्मी की झरि लगा दी.

काकी- हैयय तूने आज कैसा मजा दिया रे. अब तो मुझे चैन hi नहीं मिलेगा तेरे बिना.

लल्लू- जब भी आप का दिल करे आ जाना मेरे पास.

काकी- लेकिन तू खली रहेगा तब न.

लल्लू- आप एक बार इसरा क्र देना मई कुछ न कुछ क्र लूंगा.

काकी लल्लू क होठो को मुँह मई ले क्र अनरियो की तरह चूस ली. फिर उठ क्र चाट और hi एक और मूतने चली गई.

मूत क्र आई तो लल्लू उनके पैरो को फैला क्र उनके कमर क निचे एक तकिया लगा दिया.

काकी की पौरोति की तरह फूली हुई बुर उभर क्र लल्लू क सामने आ गई.

लल्लू झुक क्र काकी की क्लीन शवेद छूट को चुम लिया.

काकी आह्हः क्र क रह गई.

काकी- क्या क्र रहा है. गन्दी है ये जगह.

लल्लू- करने दो न काकी. मुझे मत रोको. आज मई तुम्हे पूरा खा जाऊंगा.

लल्लू झुक क्र काकी क बुर को मुँह मई भर लिया और उसे चूसने लगा.

काकी तो जैसे हिंडोले पर सैर क्र रही थी.

वो तकिये पर सर रखे इधर उधर सर हिलती लल्लू क सर को दोनों हाथो से थम ली.

काकी- हैयय राममम क्या जादू है रे. इतना मजा.. मई कही मर्डर hi न जाऊ. खा जा पूरा मेरी बुर को खा जा.

लल्लू जीभ निकल क्र बुर क अंडर घुसा घुसा क्र काकी को जीभ से hi बुर छोड़ने लगा था.

काकी इस मजे को बर्दास्त नहीं क्र पाई और जोर से लल्लू क बालो को खींचती हुई जरने लगी.

लल्लू एक एक बून्द पि गया बुर का पानी.

लल्लू- कैसा लगा काकी.

काकी- मई तो आज तक नहीं जानती थी की ऐसा भी होता है. इतना मजा आता है इस मई.

लल्लू- तो आ जाओ. आज तुम्हे गन्ने का रास चखता हु.

लल्लू अपना लैंड काकी क गाल और रगड़ता हुआ बोलै.

काकी पहले तो न नुकुर करती रही लेकिन बाद मई जीभ निकल क्र अनारी की तरह उसे चारो और से चाटने लगी.

लल्लू- मुँह खोल क्र अंडर लो न. जैसे कुल्फी चूसते है वैसे इस कुल्फी को भी खाओ न काकी.

काकी मुँह खोल क्र लल्लू क फुले हुए लैंड क टोपे को होठो से दबा क्र जीभ चलने लगी.

लल्लू- ऐसे hi काकी. आअह्ह्ह क्या चुस्ती हो. ऐसे hi चुस्ती रहो. मजा आ गया. हेय क्या गर्म मुँह है. जैसे निचे से गर्म है वैसे hi उप्पेर से भी हो तुम.

थोड़ी देर मई hi लल्लू को लगने लगा की वो मुँह मई hi खली न हो जय.

लल्लू वह से उठ क्र काकी क पैरो क पास आ गया और काकी को घोड़ी बना क्र उनके मोती गांड को चपत लगता अपना लोला उनके पानी बहती छूट पर लगा दिया.

काकी- एक बार मई hi घुसा दे पूरा. कोई रहम मत करना. आज कूट दे इस निगोड़ी बुर को. बहुत सताती थी ये.

लल्लू तो सुन क्र hi खुस हो गया.

वो कास क्र काकी क गांड को पकड़ क्र एक बार मई hi पूरा जार तक थोक दिया अपने लैंड को.

दोनों क होठो से एक कराह निकल गई.

काकी को लगा जैसे किसी ने गर्म सरिया दाल दिया है छूट मई.

लल्लू को भी अपने चमड़ी पर लगा जैसे चील गया है.

लल्लू काकी क गांड को पकडे बिना सरम क ताबरतोड़ धक्का लगाने लगा.

थोड़ी देर गांड को सहलाने मसलने क बाद लल्लू एक ऊँगली से काकी क गांड क भूरे छोटे से छेद को कुरेदने लगा.

काकी क सरीर मई चीटिया काटने लगा.

वो मजे से गांड पीछे धकेलती लल्लू का पूरा साथ दे रही थी.

लल्लू जोर जोर से पेलता काकी की गांड क सुराख़ को कुरेदने मई लगा हुआ था.

काकी एक बार और झरने को तैयार थी.

लल्लू भी समझ गया की काकी झरने वाली है.

वो एक हाथ से काकी की एक लटकती चुकी को मसलता गहरे गहरे धक्के लगाने लगा.

कक्की हुंकार भर्ती भलभला क्र झरने लगी उसकी समय लल्लू दो ऊँगली काकी की बुर से निकलते पानी से गिला क्र उनके गांड मई दोनों ऊँगली घुसा दिया.

काकी गांड हिलती दोनों ऊँगली निकलने की कोसिस करने लगी.

काकी- क्या क्र रहा है. मरेगा क्या. बहुत दर्द हो रहा है मान जा.

लल्लू नॉनस्टॉप चुदाई चालू किये हुए उप्पेर से दो उंगलियों से भी काकी की गांड का चला ढीली करने मई लगा हुआ था.

लल्लू बिच बिच मई कमर हिलता हुआ काकी क गांड क छेद मई थूकता भी जा रहा था.

जब अछि तरह से वो चिकना हो गया. तो लल्लू हौले हौले अपने लैंड को काकी की छूट मई गोल गोल घूमने लगा.

काकी- हैयय ये कैसा मजा है. गैन मई भी कीड़े कुलबुलाने लगे.

ऐसे hi करता रह. रुकना नहीं मई आने hi वाली हु.

लल्लू गोल गोल घूमता लैंड काकी को छोड़ रहा था.

थोड़ी देर मई काकी फिर तैयार थी रास बहाने को.

जैसे hi काकी रास बहाई लल्लू लैंड छूट से निकल क्र वह दो ऊँगली लगा दिया काम पर और यहाँ फंड क छेद पर लैंड लगा क्र छूट रास से गीली लैंड को काकी की गांड मई तेल दी.

लैंड का टोपा अंदर जा क्र फस्स गया.

काकी दर्द से जोर से चिक पड़ी.

लल्लू का लैंड का टोपा अब न अंडर हो रहा था न बहार.

लल्लू छूट मई ऊँगली से उसके क्लीट को सहलाता हुआ अपने कमर को एक कास क्र धक्का मारा.

लल्लू का आधा लैंड काकी की गांड मई चली गई.

काकी सर तकिये पर रखे हुए जोर से अपने हाथो से चादर पकडे आँशु बहा रही थी.

काकी की गांड फैट गई थी.

हल्का सा खुल निकल आया था. रात क ुँडेरे मई किसी को पता नहीं चला.

लल्लू बहुत आराम आराम से काकी क गांड का कुटाई करने लगा.

थोड़ी देर मई जब काकी संभाली तो लल्लू धीरे धीरे अपना स्पीड बढ़ा दिया.

अभी दो इंच और बच गया था लल्लू का लैंड बांकी सारा थोक दिया था अपने मुसल को काकी की जन्मऋ गांड मई.

लल्लू कमर हिलता ताबरतोड़ धक्के लगाने लगा.

अब उस से रुकना मुश्किल हो रहा था.

काकी भी गांड हिला क्र साथ दे रही थी लल्लू की.

दोनों की जंघे टकरा क्र थप थप थप थप आवाज निकल रहा था यहाँ संत वातावरण मई छत पर.

काकी मजे से किलकारी मरती चुद रही थी लल्लू से.

अब लल्लू होने hi वाला था.

वो काकी क गांड को दबोचे कास कास क्र शॉट लगाने मई लगा था.

दो चार तगड़े शॉट लगा क्र दोनों एक साथ hi झरर गए.

अब किसी मई जान नहीं बची थी.

ऐसे hi दोनों सो गए.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 81.

अँधेरा होने मई अब ज्यादा समय नहीं बचा था.

कुछ सैनिक वही आस पास क चैत्र मई चोरो और फ़ैल गए.

थोड़ी देर मई एक सैनिक आया वापस.

सैनिक- राज कुमारी जी, यही पास मई एक जगह है जो खली है थोड़ा सा. वह हम अपने घोड़ो को कड़ी क्र देंगे और उसके चारो और क पैर पर बैठने का भी अच्छा इंतजाम हो सकता है ककी आस पास ुचि और मोठे पैर भी है.

बल्ला- अच्छी बात है. बांकी सैनिक को भी आने दो फिर हम उधर hi चलते है.

थोड़ी देर मई बांकी क सैनिक भी आ गए.

बल्ला- किसी को मिला कोई स्थान रहने लायक.

एक सैनिक- राज कुमारी जी, मुझे थोड़ा आगे एक पहाड़ी जैसा दिखा है जिस मई लग रहा था जैसे कोई खोह हो.

इसाबेल्ला और सैनिको की और देखा.

बांकी क सैनिक गर्दन न मई हिले दिए.

बल्ला- क्या हमे उस पहाड़ी क खोह मई जाना सही होगा.

एक सैनिक- कुछ कह नहीं सकते की वो सुरक्षित होगा या नहीं. वह जंगली जानवर भी हो सकते है या फिर जिसके खोज मई हम आये है वो भी हो सकता है.

बल्ला- यहाँ हम सब तो पैर पर चढ़ जाएंगे लेकिन हमारे घोड़े की सुरक्षा नहीं हो पायेगी.

अँधेरे मई कोई जंगली जानवर उस पर हमला क्र सकता है.

दूसरा सैनिक- इसके अलावा हमारे पास कोई चारा भी तो नहीं है.

बल्ला- कुछ मशाल जला क्र हम चारो और क पैर पर लगा देंगे, जिस से यहाँ उजाला रहेगा और जंगली जानवर भी दर क्र नहीं आएंगे.

फिर सभी सैनिक उसी खली जगह मई जा क्र जमा हो गए.

कुल मिला क्र 14 लोग थे ये.

सभी अपने साथ कुछ खाने का सामान पिने का पानी और अपने अपने हथियार को जिस मई माहिर था ले रखे थे.

सभी सैनिक घोड़ी को एक एक क्र चारो और क पैर मई बांध दिए.

फिर सब ने बैठ क्र खाना पीना किये.

जब पूरी तरह अँधेरा हो गया तो सभी ने जो कसबे से चलते समय मशाल क लिए जानवरो क खाल को लाये थे जलने को वो तैयार क्र जगह जगह जला क्र पैर क साथ लगा दिया.

फिर एक एक क्र सभी चारो और क पेरो पर अलग अलग जा क्र बैठ गए.

बल्ला क लिए भी दो सैनिक एक ुचे पैर पर मचान बना क्र उस पर नरम कपडे से बिछावन क्र दिया.

बल्ला उस मचान पर जा क्र बैठ गई.

सभी सैनिक थके हुए थे लेकिन नींद अभी किसी क आँखों मई नहीं थी.

इधर जैसे hi गुरु का ग्रुप कसबे मई पंहुचा तो अँधेरा हुए काफी समय हो गया था.

जब वह गुरु को पता चला की बल्ला उनके जाने क बाद अपने टुकड़ी क साथ जंगल चली गई है तो वो बहुत ज्यादा घबरा गया.

वो गुस्से मई लपक क्र जल्दी से सैनिक का गिरेबान पकड़ लिया.

गुरु- तुम लोगो ने उन्हें जाने क्यू दिया जंगल मई.

सैनिक- मई कैसे रोक सकता था उन्हें. मई एक साधारण सैनिक और वो हमारी राज कुमारी. वो जो कहेंगे हम वही तो करेंगे.

गुरु जल्दी से अपने चार सैनिक को ले क्र उस और भध चला हिसार बल्ला की टुकड़ी गई थी.

गुरु और उसके साथी हाथो मई मसल लिए हुए बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहे थे.

गुरु राज कुमारी की सुरक्षा को ले क्र बहुत चिंतित हो गया था.

आते समय महाराज ने विषेस रूप से राज कुमारी की सुरक्षा की जिम्मेदारी गुरु को दिए थे.

ये लोगो जंगल मई पागलो की तरह राज कुमारी राज कुमारी चिल्लाते हुए आगे भागे जा रहे थे.

न तो इन्हे अपना होस था न hi ये खबर था की ये लोग सही दिशा मई जा रहे है या नहीं.

इधर बल्ला और उसके सैनिक पैर पर बैठे हुए चारो और देखते हुए सतर्क थे.

जंगली जानवरो क साथ साथ अनजाने दुसमन से भी खतरा था.

अभी आधी रात हो गई थी.

आसमान मई टारे टिमटिमा रहे थे. अँधेरी रात थी. जंगल मई कभी कभी किसी जानवर की चीखने की आवाज सुनाई देने लगी थी.

ये लोग चारो और देखते हुए अपने अपने हथियार ले क्र तैयार बैठे हुए थे.

तभी निचे जहा घोड़े बंधे हुए थे. वह गुर्राने की आवाज सुनाई दी.

सब क कान खड़े हो गए.

सभी इधर उधर देखने लगे की ये आवाज कहा से आई.

तभी एक सैनिक को एक भेड़िया दिखा. उस ने जल्दी से उस का निशाना लगा क्र तीर छोड़ दिया.

तीर जा क्र सीधा उस भेड़िये क पेट मई घुस गया.

तब तक बांकी क सैनिक भी देख लिए थे उसे.

बल्ला- ये एक नहीं होगा. भेड़िये झुण्ड मई hi आते है. सब सतर्क रहो.

तभी और कई भेडियो क गुर्राने की आवाज आई.

जब सब ने देखा तो चौक गए.

निचे कई भेड़िये चारो और से घोड़ो को घेरे गुर्रा रहे थे.

सभी सैनिक सतर्क थे hi. अपने अपने तीर धनुष से उन पर निशाना लगा दिए. कुछ hi समय मई पांच भेड़िये जमीं पर गिरे पड़े थे.

बांकी सैनिक जिन क पास तीर धनुष नहीं था वो अपने अपने भले से hi बांकी भेड़िये पर हमला क्र दिए.

भेड़िये भी कुछ सतर्क हो गए थे. कुछ तो भले से भी मरे गए और कुछ भाग गए वह से.

देखने पर पता चला की टोटल 9 भेड़िये मरे गए थे.

सब चैन की सास लिए.

थोड़ी देर मई hi सब पर नींद हावी होने लगा था.

पुरे दिन भगा दौरि मई सभी सैनिक थके हुए थे.

कब किस को नींद आई कोई पता नहीं.

इधर गुरु अपने साथियो क साथ जंगल का खाक चांटा राज कुमारी राज कुमारी चिल्लाता हाथ मई मशाल लिए पूरी रात भटकता रहा लेकिन कही राज कुमारी नहीं मिली.

वो लोग खुद इस सब मई रास्ता भटक गए.

कसबे मई अलग सरे सैनिक परेशां थे.

इसाबेल्ला अपने पैर पर लकड़ियों से बनाये मचान पर लेती ऊंघ रही थी.

बिच बिच मई नींद भरी आँखों से हल्का आँखे खोल क्र देख लेती चारो और फिर ुंगने लगती.

सभी सैनिको का भी यही हाल था.

जंगल मई कभी किसी जानवर क सोर पर इनकी आँखे खुल जाती और जैसे hi उनका आवाज संत होता तो इनकी भी आँखे बंद होने लगती.

तभी जंगल मई एक और बड़ी तेज आवाज आई और फिर चारो और प्रकाश फ़ैल गया.

प्रकाश फैलते hi जंगल क सभी जानवर चीखने चिल्लाने लगे.

इसाबेल्ला की आँखे भी खुल गई थी साथ hi सभी सैनिको की भी.

सभी अपने अपने पैर पर बैठ उस और देखने लगे जिधर से ये तेज आवाज आई थी.

फिर तभी तेज प्रकाश भी हुआ जो कुछ छान क लिए पुरे जंगल को प्रकाशित क्र दिया था.

इसाबेल्ला झट से पैर से निचे उतर गई.

उसे निचे देख क्र सरे सैनिक भी उतर आये.

बल्ला- तुम सब ने देखा ये कैसी आवाज थी और फिर इतनी तेज प्रकाश.

सैनिक- जी राज कुमारी जी.

बल्ला- सब तैयार हो जाओ फिर. हम अभी उस दिशा मई आगे बढ़ेंगे. देखे तो सही वह हुआ क्या है जो इतनी तेज आवाज आई और प्रकाश भी फ़ैल गया था चारो और.

एक सैनिक- हम जब तक वह पहुंचे हे तब तक सुबह भी हो जाएगा.

वो आसमान की और देखता हुआ बोलै.

सभी सैनिक जल्दी से अपना सामान समेत क्र घोड़े को खोल उस पर बैठ गए और सभी अपने हाथो मई मसल लिए आगे बढ़ने लगे उस दिशा मई हिसार से तेज प्रकाश आई थी.

रात का समय और उप्पेर से जंगल.

अभी वो स्पीड नहीं था इन लोगो का जो दिन मई था.

रस्ते मई खाने क लिए उस सीकर किये हुए भेड़िये मई से एक को उठा लिए थे.

चलते चलते सुबह हो गई थी लेकिन अभी तक ये लोग अपने मंजिल पर नहीं पहुंचे थे.

तो ये सभी एक छोटे से पानी क सोते पर रुक क्र उस भेड़िये को आग पर भून क्र खाने की व्यवस्था करने लगे.

इधर गुरु को भी वो आवाज सुनाई दिया था और फिर तेज प्रकाश भी दिखा था.

गुरु और उनके साथी साडी रात राज कुमारी को ढूंढते हुए जंगल मई भटक रहे थे.

उन्हें जंगल मई दो जगह जंगली जानवर भी मिले थे लेकिन वो खुद दर क्र भाग गए.

गुरु को राज कुमारी जी को ढूँढना ज्यादा जरुरी लग रहा था.

गुरु- ये क्या बाला था. कैसी आवाजे थी ये फिर इतनी तेज प्रकाश. क्या हो सकता है ये सब..

सैनिक- मुझे लगता है की हम जिस अनदेखे क पीछे भाग रहे है वही तो नहीं.

दूसरा सैनिक- हो सकता है. ये वही हो. हमे उस और जाना चाहिए.

गुरु- लेकिन राज कुमारी जी को ढूँढना ज्यादा जरुरी है.

सैनिक- क्या पता राज कुमारी जी ने भी ये देखा हो और वो भी उसी तरफ निकल गई हो.

गुरु- हो सकता है. तो अब पहले हम इस प्रकाश का पता लगाएंगे फिर अगर वह राज कुमारी नहीं मिली तो राज कुमारी जी का पता लगाएंगे.

यही तय क्र ये लोग भी उसी और मुर गए.

अब दो और से ये लोग उधर बढ़ रहे थे.

एक और से बल्ला की टुकड़ी और दूसरी और से गुरु की.

सुबह लल्लू की नींद खुली तो देखा सुबह का उजाला हो गया था.

रागिनी काकी एक तरफ को पीठ क बल लेती सो रही थी.

लल्लू उठ क्र बैठ गया.

अभी सूर्य देव नहीं निकले थे.

लल्लू अभी उजाले मई काकी क गदराये बदन को देख क्र बबला हुआ जा रहा था.

मोठे मोठे गोर चुके जिस पर उप्पेर का हिस्से मई गोलाई लिए हुए भूरा भाग और उस क बिच भूरे रंग का सर उठाये चुचुक.

निचे नजर किया तो सपाट चिकनी पेट और उस मई कमर से उप्पेर एक गहरी नाभि.

नाभि किसी कुए क जैसा लग रहा था.

लल्लू उठ क्र खड़ा हो गया.

सुबह सुबह ऐसा नजारा देख क्र उसका उस्ताद पुरे सबब पर खड़ा तैयार था किला फतह करने को.

लल्लू खड़ा हो क्र काकी क नाभि से निचे नजर घुमाई तो निचे का नजर हैयय क्या कहना था.

लल्लू क मुँह से एक आह्हः निकल क्र रह गया.

पतली कमर और फिर उस से निचे का जो नजारा था वो देख क्र तो लल्लू की आँखे वही चिपक क्र रह गई.

एक गुलाब का फूल जिस की दो पंखुडिया कुछ ज्यादा hi फूली हुई थी.

लगता है लल्लू कुछ ज्यादा hi म्हणत क्र दिया रात मई. इसी कारन दोनों होठ फुल क्र एक दूसरे से चिपक गए थे.

चारो और लल्लू और काकी क काम रास क साथ कुछ लाल रंग का काकी क योनि क खून मिक्स हो क्र फ़ैल गया था.

होठो क बिच एक छोटी सी पहाड़ी जो उस खाई से सर उठाये लल्लू को देख रहा था.

मोती मांशल जांचे जो अपने बिच काकी क खजाने को छुपाये हुए थी.

लल्लू झुक क्र काकी क योनि को जीभ निकल क्र चाट लिया.

लल्लू जैसे hi अपनी जीभ निकल क्र काकी क फुले हुए बुर पर फिराया की काकी कुनमुना उठी.

लल्लू फिर से काकी क योनि को एक बार चाट लिया.

काकी आह क्र क आँखे खोल क्र देखि.

लगता है रात की कुटाई क कारन अभी भी दर्द हो रहा था काकी को.

काकी जैसे hi आँखे खोल क्र देखि तो लल्लू अपना जीभ निकले काकी क बुर पर चला रहा था.

काकी झट से उठ क्र बैठ गई.

काकी- बस बीटा ये सब मत क्र. रात जो भी हुआ उसे भूल जा अब जा यहाँ से तू.

काकी रात उत्तेजना मई ये सब तो करवा ली लेकिन अब जागने क बाद उन्हें दिन क उजाले मई लल्लू क साथ ये सब करना अच्छा नहीं लग रहा था.

कही न कही उनका दिल भी अभी अब फिर से ये सब करने से रोक रहा था.

लल्लू काकी की बातो को अनसुना करता हुआ एक बार फिर से काकी क बुर को जीभ से कुरेद दिया.

काकी- लल्लू मैंने क्या कहा सुना नहीं तुम ने.

काकी थोड़ी गुस्से से बोली. फिर झट से अपने कपड़े से अपना बदन सारा धक् ली.

लल्लू- क्या हुआ काकी. क्या आप को अच्छा नहीं लग रहा.

काकी- अब तू निचे जा. ये सब जो भी हुआ उसे भूल जा.

लल्लू काकी का गुस्सा भरा चेहरा देख क्र उठ क्र अपना धोती लपेट लिया और गंजी पहन क्र निचे आ गया.

निचे ऋतू काकी आँगन साफ़ क्र रही थी.

काकी- उठ गया तू. आज खेत नहीं गया.

लल्लू- नींद लेट से खुला था काकी. कुछ चाय hi बना लो.

काकी- अभी कोई नहीं उठा है. तू hi बना ले अपने दोनों क लिए.

लल्लू नलका पर जा क्र फ्रेश हुआ और फिर रसोई मई जा क्र गैस पर चाय बनाने को रख दिया.

थोड़ी देर मई चाय बन गया था.

तब तक माँ और छोटी काकी भी उठ गई थी.

रागिनी काकी जब लल्लू नलका पर गया था तभी छत पर से आ क्र अपने कमरे मई चली गई थी.

लल्लू एक एक कप अपने माँ दोनों बड़ी और छोटी काकी को पकड़ा दिया जो आँगन मई बैठी हुई थी.

फिर एक कप ले क्र रागिनी काकी क पास आ गया.

लल्लू को देखते hi काकी समझी की लल्लू फिर उन्हें तंग करने आया है.

काकी- तुम्हे एक बार मई समझ नहीं आ रहा है क्या. तू क्यू मुझे बदनाम करने पर तुला हुआ है. अगर मेरे पास भी फटका अब तो मई सब को बता दूंगी.

लल्लू- काकी क्यू इतना परेशां हो आप. मई तो आप को चाय देने आया था.

लल्लू कप वही पास मई रखे टेबल पर रख दिया और वह से बहार आ गया.

माँ- क्या बात है आज तो हमारे भाग्य खुल गए. आज तुम ने चाय बनाई है.

शालिनी काकी- अब तो हमारी बहु क साथ साथ बीटा भी रसोई का काम करने मई माहिर हो गया. अब हम सब को कुछ करने की जरुरत hi नहीं है.

ऋतू काकी- बहुत अच्छी चाय है. अब डेली मई तो तेरे हाथ की hi चाय पियूँगी.

" मई भी."

माँ और छोटी काकी भी एक साथ बोल पड़ी.

लल्लू- ठीक है जिस दिन मई खेत की और नहीं जाऊंगा उस दिन मई चाय बना दूंगा.

ऐसे hi हस्सी मजाक मई सब चाय पि क्र बैठे थे.

इधर कमरे मई लेती रागिनी काकी काफी परेशां थी.

उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या करे.

एक मन कहता की रात जो भी हुआ वो गलत था तो दूसरा मन कहता की ये सब सही हुआ है.

प्यार करना कोई पाप नहीं है.

फिर अभी चाय ले क्र आया था लल्लू तो रागिनी उसे कुछ और समझ क्र गुस्सा हो गई थी तो उसके लिए भी रागिनी काफी सर्मिन्दा थी.

रात मई भी कही न कही उसका भी मन था तभी तो वो सब हुआ.

अगर रागिनी एक बार भी गुस्से मई लल्लू को मन क्र देती तो लल्लू ये सब नहीं करता.

फिर लल्लू कहा से गलत हो गया.

रागिनी बीएड पर बैठ क्र लल्लू की ले चाय पीती हुई सोचो मई गुम्म थी.

चाय ख़त्म होने क बाद भी कप को होठो से लगाए चाय पिने की कोसिस क्र रही थी.

जब दूसरी बार भी चाय मुँह मई नहीं गया तब कप देखि तो खली था कप.

काकी कप वापस टेबल पर रख क्र बीएड पर लेट गई.

चाय पिने क बाद लल्लू बहार चला गया.

आज लेट उठा था तो नदी की और नहीं गया.

अब चाय पि क्र वो बुलेट ले क्र खेत को चल दिया.

खेत पहुंच क्र एक चक्कर अपने खेतो का लगा लिया.

अभी सुबह hi हुआ था तो मजदुर अभी अपने कामो मई लगे हुए थे.

कुछ गई भेष का दूध निकल रहे थे तो कुछ उनके चारा पानी का व्यवस्था क्र रहे थे.

लल्लू वही बने एक शादी मई जा क्र खटिया पर बैठ गए.

एक औरत जल्दी से अभी निकला तजा दूध का एक बड़ा गिलास ला क्र लल्लू को पकड़ा दिया.

लल्लू- नहीं काकी अभी घर से चाय पि क्र आ रहा हु.

औरत- फिर का हुआ. अभी तुम्हरे जइसन मरद तो एक बाल्टी दूध पि क्र डकार तक नहीं लेते.

वो औरत जबरदस्ती लल्लू क हाथ मई गिलास पकड़ा दी.

जैसे तैसे लल्लू वदूद का गिलास खली किया पि क्र.

लल्लू- काकी काम कैसा चल रहा है.

औरत- अबकी बार तो बहुत बढ़िया है. Aisan(aisa) फसल तो पहले kabhu(kabhi) नाही हुआ रहा.

लल्लू- आप सब को कोई दिक्कत तो नहीं हो रही यहाँ.

औरत- नाही, हम सब को कउनो( कोई) दिक्कत नाही.

लल्लू वह बैठा हुआ सब को काम करता हुआ देख रहा था.

तभी वह रवि काका भी आ गए.

काका- तू यही है. मई तुम्हे नदी की और से भी देख आया था.

लल्लू- क्यू, कोई काम था क्या.

काका- है, मई आज जरा बाजार जा रहा हु तो तुम इधर का देख लेना.

उस तरफ क फसल को आज पानी लगाना है. मक्का भी कुछ कटवा लेना वो तैयार हो गया है.

काका एक और इसरा करते हुए बोले.

लल्लू- ठीक है मई करवा लूंगा.

काका- अब यही रहना. साम मई hi जाना. खाना पीना यही बन जाएगा तुम्हारा, मई बोल देता हु.

फिर काका एक और चले गए जहा सभी मजदूरों क लिए खाना बनता है.

थोड़ी देर मई वो वापस आ गए.

काका- ठीक है फिर मई जा रहा हु.

लल्लू- ठीक है काका.

फिर रवि काका चले गए.

लल्लू थोड़ी देर वही बैठा रहा.

तभी एक औरत आई.

औरत- नास्ता का बनाये बचवा. का खाओगे.

लल्लू- जो आप लोग कहते हो वही बना लो. मई भी वही खा लूंगा.

औरत- ऐसे कैसे वही खा लोगे. आज पहली बार खेत पर खाना खाओगे. तोहार काका कह घायल रहीं की तोहार वास्ते कुछो अच्छा खाना बना दे.

( तुम्हारे काका कह गए है की तुम्हरे लिए कुछ अच्छा खाना बना दे)

लल्लू- नहीं काकी. मई तो आज वही खाना चाहता हु जो आप सब कहते हो. वैसे भी खाना सभी अच्छा hi होता है. कोई अच्छा बुरा नहीं होता.

औरत- न रे बचुआ. तोहार काका को पता चली तो हमरा क मर hi देबे.

( नहीं बीटा. तुम्हरे काका को पता चला तो वो मुझे मर hi देंगे.)

फिर वो औरत वह से चली गई.

लल्लू उठा और अपने साथ तीन मजदूरों को ले क्र कुदाल ले क्र चल पारा उस खेत की और जहा पानी लगाना था.

लल्लू- चलो भैया वाटर पंप चालू कर दो.

एक लड़का जो उम्र मई लल्लू से कुछ ज्यादा होगा वो जा क्र पंप वाले रूम मई मोटर चालू क्र दिया.

लल्लू मजदूरों को खेत क क्यारी को चेक करने को बोल दिया और खुद भी एक और से देखने लगा की कही से मेर टुटा हुआ तो नहीं है की पानी वास्ते चला जय.

फिर ये लोग वही पानी लगाने मई लगे रहे.

तीन घंटे बाद लल्लू वह से वापस खलिहान आ गया.

वह बांकी क मजदूरों को मक्का की तुरई मई लगा क्र एक और बैठ गया वही खेत के मेर पर.

लल्लू साम तक खेत पर hi रहा.

दोपहर मई खाने क समय सभी मजदूर एक साथ आ क्र खलिहान मई शादी क निचे खाना खाने बैठ गए.

वो औरत जो खाने क लिए लल्लू से सुबह पूछने आई थी.

वो लल्लू को अलग कमरे मई दे रही थी खाना लेकिन लल्लू वही मजदूरों क साथ hi निचे बैठ क्र उन क बिच hi खाया था.

साम मई सारा काम निपटा क्र लल्लू घर को चल दिया.

घर आते आते अँधेरा हो गया था.

बुलेट कमरे मई लगा क्र लल्लू हाथ पेअर धो दालान पर आ गया.

अभी काका और पापा कोई भी बाजार से नहीं आये थे.

दादू- क्या बात है बीटा. आज फुल ड्यूटी लगी थी क्या खेत मई.

लल्लू- है दादू काका को बाजार मई काम था और खेत मई भी आज काम था तो आज फुल ड्यूटी लग गई.

दादू- जा फिर पहले नाहा क्र फ्रेश हो ले.

फिर लल्लू वह से आँगन आ गया.

ऋतू- कहा था सुबह से. काम से काम बता क्र तो जाया क्र. पता है सब कितना परेशां हो गए थे. रागिनी का रो रो क्र बुरा हाल हो गया है. जा पहले उस से मिल ले जा क्र.

लल्लू देखा तो रागिनी काकी कही दिखी hi नहीं.

लल्लू- काकी रागिनी काकी कहा है. दिख hi नहीं रही.

ऋतू- वो छत पर है.

लल्लू- तो पहले मई जरा नाहा लेता हु. फिर छत पर मिल आऊंगा.

शालिनी- कल से कही जाने की जरुरत नहीं है. वह खेत और काम करने क लिए मजदुर है. और अगर नहीं होता है उन से काम तो एक भाई खेत पर hi रहेंगे. तुम घर से बहार नहीं जाओगे अब.

माँ- बीटा कही गया था या खेत पर था. काम से काम हम सब को तो बता दिया क्र. वो तो दोपहर मई तेरे दादू जब खाना खाने आये थे तब हमे पता चला की तू खेत पर है.

ऋतू- गलती इसकी भी नहीं है. ये तो वैसे hi खेत गया था सुबह जैसे डेली जाता है. गलती तो इन लोगो की है जो यहाँ भी नहीं बताये कुछ और वह इसे भी फसा क्र चले गए खुद बाजार.

फिर लल्लू वह से कमरे मई आया और अपना कपडा ले क्र घुस गया नहाने को बाथरूम मई.

लक्ष्मी सोनम कोमल सब क साथ रसोई मई खाना बनाने मई लगी हुई थी.

लल्लू नाहा क्र जैसे hi बहार निकला की वह मीनू आ धमकी.

मीनू- भाई कहा थे तुम. पता है तुम्हे क्या हाल हो गया था यहाँ सब का. भाभी और दीदी लोग का रो रो क्र बुरा हाल है. सब नाराज है तुम से. दीदी से तो बच क्र hi रहना अभी.

लल्लू अभी अभी नाहा क्र निकला था.

कमर मई बस एक टॉवल लपेटे खड़ा रह गया मीनू की बाटे सुन क्र.

मीनू बोलते बोलते लल्लू क तरसे हुए गठीले बदन को घर रही थी.

लल्लू जल्दी से एक t-shirt निकल क्र पहन लिया फिर निचे एक धोती लपेट लिया.

घर मई मोस्टली वो धोती hi लपेट लिया करता था.

फैशन का उसे कोई शौक नहीं था या कही की लल्लू को इन चीजों का पता नहीं था तो ये कहना भी सही hi होगा.

खैर.. वो नाहा क्र पहले छत पर चला गया.

वह रागिनी छत क मुंडेर पर कड़ी आँगन की और hi देख रही थी.

लल्लू जा क्र रागिनी क पास खड़ा हो गया.

किसी क आने की आवाज सुन क्र रागिनी पीछे पलट क्र देखि तो लल्लू सर झुकाये खड़ा था.

रागिनी दौड़ क्र लल्लू को अपने बहो मई भर ली और उसके चेहरे को पूरा गीला क्र दी अपने होठो से भी और अपने आंशुओ से भी.

लल्लू क गलो को होठो को पुरे चेहरे को चूमते हुए रोये जा रही थी.

काकी- कहा चला गया था. क्या मई तुम्हे दन्त भी नहीं सकती हु. रात तो इतनी बड़ी बड़ी बाटे क्र रहा था और सुबह होते hi सब भूल गया. तुम्हे हमारी जरा भी फिक्र नहीं हुई. सुबह से क्या हालत हुई है हमारी उसका जरा सा भी अंदाजा है तुम्हे.

लल्लू- काकी लेकिन हुआ क्या है. आप रो क्यू रही हो.

एक लड़का जो उम्र मई लल्लू से कुछ ज्यादा होगा वो जा क्र पंप वाले रूम मई मोटर चालू क्र दिया.

लल्लू मजदूरों को खेत क क्यारी को चेक करने को बोल दिया और खुद भी एक और से देखने लगा की कही से मेर टुटा हुआ तो नहीं है की पानी वास्ते चला जय.

फिर ये लोग वही पानी लगाने मई लगे रहे.

तीन घंटे बाद लल्लू वह से वापस खलिहान आ गया.

वह बांकी क मजदूरों को मक्का की तुरई मई लगा क्र एक और बैठ गया वही खेत के मेर पर.

लल्लू साम तक खेत पर hi रहा.

दोपहर मई खाने क समय सभी मजदूर एक साथ आ क्र खलिहान मई शादी क निचे खाना खाने बैठ गए.

वो औरत जो खाने क लिए लल्लू से सुबह पूछने आई थी.

वो लल्लू को अलग कमरे मई दे रही थी खाना लेकिन लल्लू वही मजदूरों क साथ hi निचे बैठ क्र उन क बिच hi खाया था.

साम मई सारा काम निपटा क्र लल्लू घर को चल दिया.

घर आते आते अँधेरा हो गया था.

बुलेट कमरे मई लगा क्र लल्लू हाथ पेअर धो दालान पर आ गया.

अभी काका और पापा कोई भी बाजार से नहीं आये थे.

दादू- क्या बात है बीटा. आज फुल ड्यूटी लगी थी क्या खेत मई.

लल्लू- है दादू काका को बाजार मई काम था और खेत मई भी आज काम था तो आज फुल ड्यूटी लग गई.

दादू- जा फिर पहले नाहा क्र फ्रेश हो ले.

फिर लल्लू वह से आँगन आ गया.

ऋतू- कहा था सुबह से. काम से काम बता क्र तो जाया क्र. पता है सब कितना परेशां हो गए थे. रागिनी का रो रो क्र बुरा हाल हो गया है. जा पहले उस से मिल ले जा क्र.

लल्लू देखा तो रागिनी काकी कही दिखी hi नहीं.

लल्लू- काकी रागिनी काकी कहा है. दिख hi नहीं रही.

ऋतू- वो छत पर है.

लल्लू- तो पहले मई जरा नाहा लेता हु. फिर छत पर मिल आऊंगा.

शालिनी- कल से कही जाने की जरुरत नहीं है. वह खेत और काम करने क लिए मजदुर है. और अगर नहीं होता है उन से काम तो एक भाई खेत पर hi रहेंगे. तुम घर से बहार नहीं जाओगे अब.

माँ- बीटा कही गया था या खेत पर था. काम से काम हम सब को तो बता दिया क्र. वो तो दोपहर मई तेरे दादू जब खाना खाने आये थे तब हमे पता चला की तू खेत पर है.

ऋतू- गलती इसकी भी नहीं है. ये तो वैसे hi खेत गया था सुबह जैसे डेली जाता है. गलती तो इन लोगो की है जो यहाँ भी नहीं बताये कुछ और वह इसे भी फसा क्र चले गए खुद बाजार.

फिर लल्लू वह से कमरे मई आया और अपना कपडा ले क्र घुस गया नहाने को बाथरूम मई.

लक्ष्मी सोनम कोमल सब क साथ रसोई मई खाना बनाने मई लगी हुई थी.

लल्लू नाहा क्र जैसे hi बहार निकला की वह मीनू आ धमकी.

मीनू- भाई कहा थे तुम. पता है तुम्हे क्या हाल हो गया था यहाँ सब का. भाभी और दीदी लोग का रो रो क्र बुरा हाल है. सब नाराज है तुम से. दीदी से तो बच क्र hi रहना अभी.

लल्लू अभी अभी नाहा क्र निकला था.

कमर मई बस एक टॉवल लपेटे खड़ा रह गया मीनू की बाटे सुन क्र.

मीनू बोलते बोलते लल्लू क तरसे हुए गठीले बदन को घर रही थी.

लल्लू जल्दी से एक t-shirt निकल क्र पहन लिया फिर निचे एक धोती लपेट लिया.

घर मई मोस्टली वो धोती hi लपेट लिया करता था.

फैशन का उसे कोई शौक नहीं था या कही की लल्लू को इन चीजों का पता नहीं था तो ये कहना भी सही hi होगा.

खैर.. वो नाहा क्र पहले छत पर चला गया.

वह रागिनी छत क मुंडेर पर कड़ी आँगन की और hi देख रही थी.

लल्लू जा क्र रागिनी क पास खड़ा हो गया.

किसी क आने की आवाज सुन क्र रागिनी पीछे पलट क्र देखि तो लल्लू सर झुकाये खड़ा था.

रागिनी दौड़ क्र लल्लू को अपने बहो मई भर ली और उसके चेहरे को पूरा गीला क्र दी अपने होठो से भी और अपने आंशुओ से भी.

लल्लू क गलो को होठो को पुरे चेहरे को चूमते हुए रोये जा रही थी.

काकी- कहा चला गया था. क्या मई तुम्हे दन्त भी नहीं सकती हु. रात तो इतनी बड़ी बड़ी बाटे क्र रहा था और सुबह होते hi सब भूल गया. तुम्हे हमारी जरा भी फिक्र नहीं हुई. सुबह से क्या हालत हुई है हमारी उसका जरा सा भी अंदाजा है तुम्हे.

लल्लू- काकी लेकिन हुआ क्या है. आप रो क्यू रही हो.

लल्लू काकी क गलो पर बहते आंशुओ को अपने हाथ से साफ़ करता हुआ बोलै.

काकी- कहता है हुआ क्या है. एक सुबह निकला है घर से और अब रात जब हो गई है तब आया है. एक तरफ तो कहता है की हम सब तुम्हारी माँ है और दूसरी और अपने माँ से hi नाराज हो गया.

लल्लू- किस ने कहा की मई नाराज हु.

काकी- तो क्या तू मेरे से नाराज हो क्र नहीं गया था.

लल्लू- मई क्यू आप से नाराज हो क्र जाऊंगा.

काकी- तो कहा था सुबह से.

लल्लू- वो तो सुबह मई खेत घूमने गया था की पीछे से छोटे काका भी पहुंच गए और बोले की खेत और hi रह जा आज काम ज्यादा है और साम को घर चले जाना. तो मई वही काम करवाने लगा था. मुझे क्या पता था की काका यहाँ घर मई नहीं बताये है.

काकी- सिसकती हुई रोटी लल्लू क चेहरे को अपने हटो से सहलाती उसे अपने बड़े बड़े सख्त साइन से चिपकाये कड़ी थी.

लल्लू- अब तो रोना बंद क्र दो काकी. अब क्यू रो रही हो आप.

काकी- मुझे माफ़ क्र दे. तू पहली बार तो चाय बनाया था और मई तुम दन्त भी दी थी.

लल्लू- काकी आप सब मेरी माँ हो. और माँ अपने बेटे को किसी गलती पर दन्त hi दिया तो क्या हुआ. ये तो अच्छी बात है न. अगर गलती होने पर आप डाँटोगे नहीं तो फिर सुभर कैसे होगा.

काकी- लेकिन तुम ने कोई गलती की कहा थी.

लल्लू- क्यू नहीं की थी. मैंने आप को कितना परेशां किया है कल से. गलती तो की hi है न मैंने.

काकी- नहीं मेरे लाल. तूने कोई गलती नहीं की है. अगर कोई गलती की है तो वो मई हु.

लल्लू- अच्छा ये सब छोड़िये और ये बताइये की आप यहाँ छत पर क्या क्र रही है. आप छत पर तो कभी नहीं आती.

काकी- अब मुझे आदत हो गई है इस छत की. मई भी अब यही सोया करुँगी.

काकी लल्लू क गाल को चुम क्र बोली.

लल्लू- नहीं नहीं. कभी कभी ठीक है. आप डेली यहाँ नहीं सो सकती. आप की तबियत ख़राब हो जाएगी.

काकी- वो मई नहीं जानती मई तो यही सोऊंगी. अपने बांकी ककियो को कैसे मानना है ये तुम जानो.

लल्लू- आप यहाँ क्यू सोना चाहती है. वो कल तो मई वैसे hi आप को पकड़ क्र ले आया था.

काकी- तो समझ ले ये उसी की सजा है. मई तो अब डेली सोऊंगी.

लल्लू- ठीक है फिर तबियत ख़राब होगा तो मुझे मत कहियेगा.

काकी- ठीक है.

काकी पुरे समय लल्लू को अपने आगोश मई hi अपने से चिपकाये कड़ी थी.

लल्लू काकी क बदन की गर्मी प् क्र उसका मन मई लड्डू फूटने लगे.

उसका अगजर अपना सर उठाना सुरु क्र दिया था.

कुछ hi समय मई लल्लू का डंडा अपने पुरे सबब पर खड़ा था.

काकी को अपने पेट मई कमर से थोड़ा hi उप्पेर लल्लू क डंडे की चुभन महसूस होने लगा था.

लल्लू दर क्र काकी क बहो से निकलना चाहा लेकिन काकी लल्लू को और अपने से चिपका ली.

दोनों क बिच अभी इतनी भी जगह नहीं बची थी की वह से हवा भी पास हो जय.

लल्लू भी अब बहकने लगा था. कब तक वो अपने पर संयम रखता.

वो पीछे हाथ ले जा क्र काकी क नंगे पीठ के सहलाने लगा था.

काकी मजे से आंखे बंद करती हुई अपने दांतो से होठो को कटाने लगी.

लल्लू काकी क पीठ पर हाथ फिसलताता हुआ निचे उनके बहार को निकले गोल नितम्ब पर ले आया और हौले से उसे सहला भर दिया.

लल्लू को दर भी लग रहा था लेकिन अगर ऐसे नहीं करता तो वो आगे काकी गुस्सा है या नहीं है मान गई है ये उसे पता कैसे चलता.

रागिनी काकी को अपने नितम्ब पर लल्लू क हाथ का स्पर्श लगते हुए एक बार को कम्प गई वो.

काकी की बुर निचे आँशु बहाने लगी थी.

लल्लू सर उठा क्र एक बार काकी की और देखा तो काकी आँखे बंद किये हुए अपने सूखे होठो पर बार बार जइब फेर रही थी.

लल्लू आगे सर को झुकता हुआ काकी क सूखे होठो पर अपना जीभ फिर क्र गिला करने लगा.

काकी अपने नशीली आँखों को थोड़ा सा खोल क्र लल्लू को देखि फिर एक बार छत पर आने वाली दरवाजे को.

काकी- अब छोड़ दे दरवाजा खुला हुआ है. कोई आ जाएगा.

लल्लू काकी का हाथ पकड़ क्र दरवाजे तक आया और दरवाजे को बंद क्र दिया और काकी की और घूम गया.

काकी सरमाती हुई नजरे झुका ली.

लल्लू वही दिवार क सहारे काकी को लगा क्र उनके पतले होठो को अपने होठो मई दबा क्र उस का रास निचोड़ने लगा.

थोड़ी देर मई जब दोनों का डैम घुटने लगा तो लल्लू अपना होठ अलग क्र लिया.

काकी अपने साइन पर हाथ रखती लम्बी लम्बी ससे लेने लगी.

सास लेने से उनकी बड़ी बड़ी चूचिया उप्पेर निचे क्र रहा था.

लल्लू एक बार फिर से काकी क होठो को अपने होठो मई कैद क्र लिया.

फिर जीभ निकल क्र काकी क मुँह मई घुसा क्र काकी क मुँह क चारो और घूमने लगा.

काकी गंगना क्र लल्लू से और जोर से चिपक गई.

लल्लू एक हाथ से काकी की एक चुकी को ब्लाउज क उप्पेर से हलके हलके दबाने लगा और दूसरे हाथ से उनके भरी गांड को मसलने लगा था.

काकी सुबह से hi रात की बाटे याद क्र गीली हो रही थी फिर चाट पर लल्लू क आते hi उनकी बुर गीली होने लगी थी.

वो लल्लू का ये दोहरा हमला झेल न सकीय.

काकी भलभला क्र झरती हुई लल्लू क जीभ को निकल क्र निढाल हो क्र उसके साइन से लग गई.

लल्लू काकी क नंगे कमर को सहलाता हुआ कभी उनके गाल पर तो कभी गर्दन पर अपना जीभ फिरने लगा.

काकी मदहोश हुई लल्लू क साइन से लगी हुई थी.

लल्लू अपने दोनों हाथो को पीछे ले जा क्र काकी क गांड क दोनों पत् को अलग क्र उसे अपने मुठी मई ले क्र भिचने लगा था.

काकी की मुँह से दर्द और मजे की कराह निकलने लगी थी.

वो सरम से लल्लू को छोड़ने को भी नहीं कह प् रही थी.

लल्लू इसका फायदा उठा क्र काकी को दबोचे हुए उसके हाहाकारी मादक सरीर का पूरा मजा ले रहा था.

रागिनी काकी सभी ककियो मई ग़दर माल थी.

उनकी चुकी और गान दोनों सभी काकी और माँ से भरी थी.

लल्लू जब देखा की काकी फिर से गर्म हो रही है तो वो काकी को पीछे घुमा क्र उन से चिपक गया और उनके पीछे गर्दन और पीठ को चूमने चाटने लगा था.

काकी क पुरे सरीर मई चीटिया रेंग रही थी.

काकी का मन कर रहा था की लल्लू अब पूरा नंगा क्र दे उन्हें और जम्म क्र पेले.

लल्लू क मोठे कहते का वो रात hi से दीवानी हो गई थी.

लल्लू उनके बगल से हाथ निकल क्र उनके दोनों धय धय किलो क चूचियों को पकड़ क्र कास कास क मसलने लगा था.

पीछे लल्लू का बाबूराव रोड की तरह खड़ा काकी क बहार को निकली गांड क दोनों हिस्सों क बिच ग़ुस्सा जा रहा था साडी क उप्पेर से.

काकी आँखे बंद किये दिवार को पकड़े अपने होठो को दांतो से काट रही थी.

लल्लू से भी अब सबर करना मुश्किल हो रहा था.

वो धीरे धीरे चुकी मसलता हुआ काकी क ब्लाउज क सरे बटन खोल दिए.

अब काकी क कंधे पर ब्लाउज झूल रहा था.

लल्लू होठो को काकी क पीठ पर रगड़ता हुआ उनके काली ब्रा क हुक को अपने दांतो से खोल दिया.

काकी क सरीर क सरे रोये खड़े हो गए थे.

पेंटी निचे उनके छूट रास से पूरा गिला हुआ पड़ा था.

बुर की फेक फरफरा रही थी लल्लू क मोठे डंडे क लिए.

लल्लू अपने हाथो से ब्रा क कप को चुके पर से हटा क्र काकी क नंगे दूध क्र पकड़ क्र फिर से मसलने लगा और हलके हलके पीछे से उनके गांड पर धक्के लगाने लगा.

काकी क मुँह से मजे से अजीब अजीब आवाजे निकल रही थी.

लल्लू अपना एक हाथ पीछे ला क्र अपने धोती को खोल दिया. अब लल्लू निचे से पूरा नंगा था.

फिर वो काकी क साडी और पेटीकोट को पकड़ क्र काकी क कमर तक उठा दिया.

काकी मरे सरम क अपनी आँखे कस क बंद क्र ली.

लल्लू झुक क्र काकी क काली पेंटी को पकड़ क्र उनके पैरो से निचे क्र दिया और उनकी गोरी मखमली गांड को देख क्र लल्लू क बाबू रॉ ने तुनकने सुरु क्र दिया था.

लल्लू काकी की जन्मऋ गांड को देख क्र उसको अपने दांतो से काटने लगा.

बिच बिच मई जीभ निकल क्र दोनों पत् जो आपस मई चिपका क्र भूरे छेद को छुपा रखे थे वह फिर देता.

काकी कास क्र अपने दांतो को एक दूसरे पर दबाये दिवार को पकडे कड़ी थी.

मर्द उत्तेजना क उनकी टंगे कम्प रही थी.

लल्लू झुक क्र काकी क गीली छूट पर अपना मुँह लगा दिया.

अपने छूट पर लल्लू क गर्म ससो को फील क्र काकी एक बार फिर से लल्लू क मुँह मई झरर गई.

लल्लू काकी का सारा पानी चाट क्र साफ़ क्र दिया फिर गांड क दोनों हिस्सों को अपने हाथो से अलग क्र लल्लू उनके बिच जीभ से चाटने लगा.

काकी थोड़ी देर मई hi फिर से तैयार थी.

अबकी लल्लू खड़ा हो क्र अपने लैंड पर थोड़ा सा अपने मुँह से थूक निकल क्र मॉल क्र गिला क्र लिया और पीछे से hi काकी क गांड को पकड़ क्र उन्हें अपनी और खींचता उनके पनिये छूट पर अपना गर्म डंडा लगा दिया.

काकी अपने बुर क मुँह पर लल्लू क गर्म लैंड को महसूस क्र अपने दोनों पैरो को फैला क्र थोड़ा सा झुक क्र गांड बहार को निकल ली.

लल्लू काकी की कमर पकड़ क्र हलके से एक धक्का लगा दिया.

लैंड का टोपा जा क्र काकी क बुर की दोनों फको को फैलता हुआ अंडर गुस्स गया.

काकी आह्हः क्र रह गई.

लल्लू क गर्म रोड की तरह सख्त लैंड को अपने बुर मई फील क्र काकी अपने गांड को पीछे की तरफ पुश करने लगी.

लल्लू काकी क मन की बात समझ क्र एक धक्का और लगा दिया.

पानी बहती बुर मई लल्लू का डंडा फिसलता हुआ आधा जा धसा.

काकी कराह क्र रह गई.

लल्लू काकी क दोनों चूचियों को हाथ बढ़ा क्र थम लिया और उसे मसलता हुआ आधे लैंड से हल्का हल्का चुदाई करने लगा.

काकी अपनी गांड पीछे क्र लल्लू का फुल सपोर्ट करती हुई आहे भर्ती हुई मजे ले ले क्र कुटाई करने लगी.

लल्लू जब देखा की काकी फुल जोश मई है तो लल्लू एक करारा धक्का और लगा दिया और जार तक अपना लैंड थोक दिया काकी की बुर मई.

काकी क होठो से जोर की आह निकल गई.

लल्लू से अब रुकना मुश्किल हो रहा था.

बुर क अंडर की गर्माहट को फील क्र लल्लू का लैंड और कड़क हो गया था.

वो काकी की गांड को मसलता हुआ दनादन जार तक अपना डंडा निकल क्र ठोकना लगा.

कुछ hi समय मई काकी एक बार फिर से पानी बहती हुई ढीली हो गई.

लल्लू काकी को घुमा क्र अपने बहो मई ले लिया और उनके बड़े बड़े झूलते पपीते को पकड़ क्र मसलता हुआ करीब एक इंच लम्बे नोकीले निप्पल होठो मई बड़ा क्र चुभलाने लगा.

काकी मजे से आँखे बंद किये हुए लल्लू क सर क बालो मई उंगलिया फिरने लगी.

लल्लू- कैसा लगा काकी.

काकी- ीिसस्स बड़ा मजा आया. ऐसा जैसे स्वर्ग मई पहुंच गई हु. धीरे काट न.

लल्लू- अब तो नाराज नहीं होगी न आप.

काकी- नहीं रे. पता नहीं क्या जादू किया है तुम ने. अब तो बस इस डंडे को मेरे अंडर दाल क्र हमेसा रखने का मन करता है.

लल्लू- फिर मुझे अपनी बुर डेली डौगी न छोड़ने को.

काकी- कितना गन्दा बोलता है. ऐसे भी कोई बोलता है क्या.

लल्लू- मैंने क्या बोल दिया. यही तो कहा है की अपनी ये बुर मुझे डेली डौगी न कूटने को.

लल्लू काकी की बुर को मुठी मई दबोच क्र बोलै.

काकी- आअह्ह्ह क्या क्र रहा है. छोड़ उसे, वो गन्दा जगह है. कभी मुँह लगता है वह कभी हाथ लगता है. छी तुम्हे घिन नहीं लगता.

लल्लू- घिन कैसा काकी. मई तो इस मई अपना लैंड भी लगता हु. ये नहीं कहा आप ने. ये दुन्या का सब से नायब चीज है. कभी आप भी मेरा ले क्र देखना मुँह मई.

काकी- मई ये सब गंदे काम नहीं करने वाली.

लल्लू- जैसे आप की बुर मारा हु वैसे hi कभी ये गांड भी मरूंगा और मुँह भी.

काकी- छी छी कितना गन्दा बोलै है. उस सब मई भी कोई वो लेता है क्या.

लल्लू- किस मई क्या लेता है काकी.

लल्लू काकी की दूध को मसलता हुआ बोलै.

काकी- वही मुँह मई और पीछे.

लल्लू- गोल गोल क्या बोलती हो कुछ ऐसा बोलो न की समझ मई आये.

काकी- मुझे पता है तुम जानबूझ क्र मुझे तंग क्र रहे हो. मई नहीं बोलती कुछ.

लल्लू काकी क गांड को मसलता हुआ बोलै.

लल्लू- काकी इसे आप क्या कहती हो.

काकी- चुप क्र. जो कर रहा है वो क्र चुप चाप.

लल्लू- बता भी दो काकी. अब मुझ से क्या सर्मना.

काकी- नहीं मुझ से नहीं बोलै जाएगा.

लल्लू काकी क एक पेअर को अपने हाथ से पकड़ क्र उठा लिया.

काकी- क्या क्र रहा है. मई गिर जाउंगी.

लल्लू- आप क बुर मई लौड़ा घुसा क्र छोड़ने जा रहा हु. चुड़ोगी न मुझ से काकी.

काकी लल्लू को काश क्र अपने बहो मई भर ली.

लल्लू काकी क बुर क मुँह पर लैंड लगा क्र एक जोर का धक्का लगा दिया.

लैंड सरकता हुआ जार तक जा ग़ुस्सा.

लल्लू- कैसा लग रहा है.

काकी- लग रहा है जैसे पेट फार क्र बहार निकल आएगा.

लल्लू- मजा नहीं आ रहा है.

काकी- बहुत मजा आ रहा है.

काकी अपनी दूसरी पेअर भी उठा क्र लल्लू क कमर से लपेट ली.

लल्लू काकी क गांड क निचे हाथ लगा क्र उन्हें अपने गॉड मई उठा क्र जोर जोर से उछाल क्र पेलने लगा सटासट.

लल्लू- लैंड पर ऐसे कभी झूली हो काकी.

काकी- कौन झूलता पहले. तू hi तो प्यारा बीटा है मेरा जो इस तरह प्यार करता है मुझे.

काकी अपनी छाती को लल्लू क साइन से रगड़ती बोली.

लल्लू- काकी आपकी चुकी का चुचुक मेरे साइन मई छेद क्र रहा है.

काकी- तो मई क्या करू. तू मेरे पेट मई जो छेद क्र रहा है तो मैंने कहा है क्या.

लल्लू- मई तो आप क बुर मई छेद क्र रहा हु. पेट मई कहा.

काकी- वही बुर से पेट तक पहुंच गया है तू.

लल्लू- मुँह बंद क्र लो नहीं तो कही मुँह से न निकल जय.

काकी झट से लल्लू क होठो को अपने मुँह मई भर क्र पागलो की तरह चूसने लगी थी.

लल्लू निचे से दनादन पेले जा रहा था काकी को उछलता हुआ.

फिर लल्लू काकी क गांड क पत् को फैला क्र उस मई एक ऊँगली ग़ुस्सा क्र छोटे से सुराख़ को अपने ऊँगली से कुरेदने लगा.

काकी अपने गांड क सुराख़ पर लल्लू क ऊँगली को महसूस क्र कचकचा क्र उसके होठो को अपने दन्त से कुचल दी.

लल्लू क मुँह से एक आह निकल गया जो काकी क मुँह मई डाब गया.

लल्लू घाचा घच काकी को पेले जा रहा था.

वही रखे एक टेबल पर लल्लू चलता हुआ गया और काकी को उस पर बैठा दिया.

लल्लू काकी क दोनों पेअर को फैला क्र अपने कंडे पर दाल लिया और उनके बड़े बड़े चुके को हाथ से मसलता हुआ फिर से छोड़ने लगा.

लल्लू- ये आप की चुकी इतनी मस्त कैसे हो गई है.

काकी- दो दो बचे हुए है. दोनों ने सिद्ध पि है इस से तो बड़े तो होंगे hi.

लल्लू- और छूट इतना गर्म कैसे है अंडर से. लग रहा है जैसे मेरे लैंड को पिघला देगा.

काकी- तुम्हारा डंडा भी तो बहुत गर्म है.

लल्लू- बहुत कासी हुई माल हो काकी आप.

लल्लू काकी क दोनों निप्पल को चुटकी मई पकड़ क्र मसल दिया.

काकी दर्द से मुँह खोल दी. मुँह से कोई आवाज नहीं निकली.

लल्लू झट से उनके मुँह मई अपना जीभ निकल क्र घुसा दिया.

काकी लपक क्र लल्लू क जीभ को पकड़ क्र उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी थी.

लल्लू निचे कमर हिलता हुआ काकी क चुके को मसल रहा था.

अब लल्लू भी अपने चरम पर पहुंच गया था.

वो काकी क गांड को कस क्र पकड़ लिया और तूफानी गति से धक्का लगा हुआ काकी क अंडर hi खली होने लगा.

काकी लल्लू क पिचकारी को अपने बच्चेदानी मई फील क्र वो भी भलभला क्र झरर गई.

लल्लू काकी क गले को पकड़ क्र उनके होठो को चुभलाने लगा था.

लल्लू- जैसे अभी मेरा जीभ चूस रही थी वैसे hi एक बार लैंड चुसवाऊँगा.

काकी- सपना मत देख.

लल्लू- एक सपना तो पूरा हो गया मेरा.

काकी- कौन सा.

लल्लू- आप को छोड़ने का.

काकी- हैट बेसरम कही का. अब नाराज नहीं है न मुझ से.

लल्लू- मई तो पहले भी नाराज नहीं था. आप hi नाराज थी सुबह.

काकी लल्लू क होठो पर एक छोटी सी किसी क्र दी फिर टेबल से निचे उतर आई.

निचे उतारते hi दोनों का मिला जुला रास बुर से बाह क्र काकी क जांघो पर फ़ैल गया.

काकी जैसे hi चले क लिए कदम बधाई वो लड़खड़ा गई.

लल्लू झट से उन्हें थम लिया.

काकी शर्मा क्र नजरे झुका ली.

लल्लू काकी का तुषि पकड़ क्र चेहरा उप्पेर किया और उनके सर को चुम लिया फिर दोनों आँखों को फिर नाक को उसके बाद दोनों गाल को अपने दन्त से काट लिया फिर होठो को चुम्म लिया.

काकी मुसकुडती हुई लल्लू क साइन से लग गई.

थोड़ी देर मई लल्लू अलग हो क्र काकी को उनका पेंटी ला क्र दे दिया.

काकी पेंटी को अपने पैरो मई फशा क्र उप्पेर क्र ली.

लल्लू- एक बार मुँह मई ले लो न.

काकी- प्लस बीटा. मैंने कभी नहीं किया है ऐसा.

लल्लू- फिर अपने गांड मई कब लोगी.

काकी- मर खायेगा अब.

लल्लू काकी क दूध को पकड़ क्र मसल दिया.

काकी झट से उसके हाथ पर एक चपत लगाई.

फिर अपने ब्रा और ब्लाउज को सही क्र पहन ली.

कड़ी हो क्र साडी खोल क्र दुबारा से पहन ली फिर बाल सही क्र हलके हलके चलती हुई सीढ़ियों की और चल दी.

दरवाजा खोल क्र एक बार लल्लू को देखि मुस्कुराती हुई फिर निचे चली गई.

लल्लू भी अपना धोती उठा क्र पहन लिया.
 
लॉक डाउन क बाद दुबारा काम सुरु हुआ तो जरा काम का प्रेशर है भाई लोग.

ग्राउंड लेवल का जॉब है मेरा. में पावर से ले क्र प्रोडक्शन तक देखना पड़ता है.

पीछे फेब्रुअरी से ले क्र जुलाई तक क प्रोडक्ट्स का डिटेल्स देना और उसे इसी महीने हर हाल मई पूरा करवाना.

बहुत प्रेशर है यार अभी.

दिमाग फ्री हो तो कही कहानी आये मंद मई. अभी तो हर वक्त काम और काम hi घुसा रहता है.

थोड़ा वक्त दो भाई लोग. मई यही हु. कही नहीं गया हु. नैन भाई और अपने डॉ. साहब क थ्रेट पर मिल जीऊंगा कभी भी.

अगर आप सब चाहो तो मई 10-15 दिन क लिए इस थ्रेट को बंद क्र दू.

जैसे hi एक बार थोड़ा वर्क लोड काम होगा स्टोरी फिर से सुरु क्र दूंगा.

वैसे भी इसे ऐसे hi सुरु क्र दिया था. मंद मई कोई कहानी कोई रूप रेखा कुछ नहीं था.

जब तक आप सब चाहोगे खींचती रहेगी.

जिस दिन कहदोगे की अब बोर क्र रहा है कहानी बंद क्र दूंगा.

बस थोड़ा और वक्त दे दो.

सायद अगस्त मिड तक सब सेट हो जय.
 
पेज no. 343 लास्ट अपडेट.

एक बार पढ़ ले इस से आगे साम तक दे रहा हु. अभी 1/3 टाइप हो गया है बांकी पूरा क्र क साम तक दे रहा हु.

सॉरी नहीं कहूंगा आप सब को ककी ये बहुत छोटा सब्द होगा आप सब क साथ जो किया मैंने उसके लिए.

यकीं मानिये मई भी स्टोरी पूरा करना चाहता हु लेकिन एक तो लोखड़ौन क बाद वापस से जॉब सुरु हुआ तो उसे नए सिरे से स्टार्ट करना बहुत मुश्किल था.

फिर स्टोरी मैंने बिना कुछ सोचे समझे सुरु किया था. तो आगये स्टोरी मई क्या लिखू ये भी समझ नहीं आ रहा था.

एक तो समय की कमी उप्पेर से स्टोरी का कोई प्लाट नहीं था जो की अभी भी नहीं है. तो मई इन दोनों क बिच फास गया था.

अब थोड़ा फुर्शत मिला है. दुबारा स्टार्ट क्र रहा हु. ये तो नहीं कहूंगा की अब से डेली अपडेट आएगा लेकिन ये है की अब से ये पहले क जैसे बिलकुल बंद नहीं रहेगा.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 82.

इसाबेल्ला की टुकड़ी रात क अँधेरे मई जितनी जल्दी क्र सकते थे वो इतनी जल्दी जंगल को पर करते हुए आगे बढ़ रहे थे हाथो मई मसल लिए हुए.

अब कुछ समय मई प्रातः काल की प्रथम बेला होने का था.

सभी सैनिक भरसक कोसिस करते हुए जल्द से जल्द गंतव्य स्थान पर पहुंचने की कोसिस मई लगे थे.

थोड़ी देर मई वो उस स्थान पर पहुंच गए.

अभी थोड़ा थोड़ा उजाला होने लगा था.

वह जंगल क एक बड़े हिस्से मई आग लग गई थी.

सैनिक- यही लगता है वो हादसा हुआ है. वो उतना उजाला हुआ था और जोरदार आवाज भी.

उसी से ये आग लग गया है.

बल्ला चोरो और देख रही थी. फिर वो एक और निचे जमीं पर बैठ गई और आँख बंद क्र कुछ मंत्र पढ़ने लगी थी.

कुछ समय बल्ला अपनी क्रिया करती रही थी की जंगल क जिस हिस्से मई आग लगी हुई थी ठीक उस हिस्से क उप्पेर आसमान मई काळा बदल बनाने लगा और बिजलिया कड़कने लगी थी.

देखते hi देखते आग लगे हिस्से मई मूसलाधार बारिश होने लगी.

थोड़ी देर मई hi आग बुझ गया था.

बल्ला भी अब अपने आँखों को खोल दी थी फिर वो उठ क्र कड़ी हो गई.

बल्ला- आग बुझ गया है अब सावधानी से सभी आगे बढ़ेंगे. यही कही वो गोला भी होना चाहिए.

सभी अपने हाथो मई भला और तलवार लिए आगे बढ़ रहे थे. कुछ सैनिक जिन क हाथो मई तीर धनुष था वो अपने तीरो को दानुष पर चढ़ाये सावधानी से चारो और देखते हुए आगे बढ़ रहे थे.

थोड़ी देर मई वो सभी आग लगे हिस्से मई प्रवेश क्र चुके थे.

आगे एक बहुत बड़ा गड्ढा हो रखा था वह. जिस मई एक वाइट बड़ा सा गोला था जो रह रह क्र अपना रंग बदल क्र लाल हो जा रहा था.

एक सैनिक- ये क्या है. इतना बड़ा.

दूसरा सैनिक- लगता है जैसे कोई अंडा हो. लेकिन ये सफ़ेद से लाल कैसे हो जा रहा है.

बल्ला- ये अभी गर्म हो जा रहा है. जब भी ये सफ़ेद से लाल होता है तो ये गर्म हो रहा है और फिर लाल से सफ़ेद होता है तो इसकी गर्माहट काम हो जाता है.

लेकिन ये है क्या.

एक सैनिक आगे बढ़ता हुआ अपने भले को आगे किये हुए सावधानी से बढ़ रहा था.

सैनिक- बहुत गर्म है. इसके पास नहीं जा सकते अभी.

वो वह से वापस आता हुआ बोलै.

दूसरा सैनिक- हम इसके ठंढा होने का इंतजार करते है.

फिर सभी सैनिक वही आस पास चारो और देखते हुए एक समतल साफ़ जगह पर अपना बेरा दाल लिए.

थोड़ा बहुत जो कुछ भी खाने को बचा हुआ था वो निकल क्र सभी हल्का खाना खाये.

वह उस विचित्र अंडे क पास दो सैनिक पहरा दे रहे थे ताकि अगर उस अंडे क साथ कोई और बात होती है तो वो जल्दी से जा क्र इसकी जानकारी अपने टुकड़ी क प्रमुख राज कुमारी इसाबेल्ला को दे.

इसाबेल्ला एक तम्बू मई आराम क्र रही थी तभी एक सैनिक दौरता हुआ चिल्लाता आया.

सैनिक- राज कुमारी जी, उस अंडे मई हरकत हो रही है.

बल्ला अभी कच्चे नींद मई थी वो जल्दी से उठ क्र अपने ढल और तलवार को ले क्र तम्बू से बहार आई और फिर उस तरफ दौर लगा दी.

वह जा क्र देखती है की वह कुछ सैनिक भी खड़े है जो बल्ला से पहले आ गए थे.

उस अंडे मई से आप एक अजीब सा जिव निकल चूका था.

वह अब कोई अंडा नहीं था. एक बड़ा सा कला सांप जैसा जइब जिसके दो पंख लगे हुए थे. दो छोटे छोटे पेअर जिस क सहारे वो अपने गर्दन से उप्पेर का हिस्सा उठाये हुए थे और बांकी का हिस्सा जमीं से लगा हुआ घिसट रहा था. लम्बा सा मुँह जिस से उसके बड़े बड़े बहार को निकले दो दन्त चमक रहा था.

वो अजीब सा जिव इन लोगो क आने तक वह जो एक सैनिक था उसे निगल चूका था.

दूसरा सैनिक तो तम्बू क पास सब को बताने चला गया था.

लगता है उसी बिच ये अजीब सा सांप जैसा जिव उस सैनिक को पकड़ क्र अपना सीकर बना लिया.

उस सैनिक को चीखने तक का मौका नहीं मिला.

बल्ला को जैसे hi इस बात का एहसास हुआ की उसका एक सैनिक इस जिव का सीकर हो गया है वो गुस्से मई कम्पटी हुई उस सांप जैसे जिव की और अपनी तलवार और ढल लिए दौर पड़ी.

वो जइब जैसे hi देखा की एक सीकर और आ रहा है उसके नजदीक वो भी तैयार हो गया उसके सीकर करने को.

इधर सरे सैनिको क मुँह से एक चीख निकल गई जैसे hi सभी ने देखा की बल्ला उस सांप जैसे जिव क निकट जा पहुंची है.

बल्ला क एक हाथ मई उसका वजनी ढल और दूसरे हाथ मई तलवार था.

वो जइब अपने मुँह को हल्का सा खोले हुए आहिस्ता से बल्ला की और बढ़ रहा था.

जैसे hi दोनों क बिच की दुरी थोड़ी सी काम हुई वैसे hi उस सांप ने एक झटके से अपने गर्दन को आगे झुकता हुआ बल्ला को अपने जबड़े मई फ़साना चाहा लेकिन बल्ला को इसका अंदाजा पहले hi हो गया था.

वो एक और जम्प करती हुई अपने तलवार से उस सांप क गले पर वॉर की लेकिन बड़ी मोती चमड़ी थी उस सांप की.

बल्ला क तलवार से कुछ भी नहीं हुआ उसे.

उल्टा वो फुफकारता हुआ एक बार फिर से बल्ला की और झपटा लेकिन इधर जो सैनिक खड़े थे वो सभी भी पहले हमले से चौक गए थे.

एक बार को तो उन सभी सैनिको की ससे hi अटक गई थी वो लोग जल्दी से अपने धनुष पर बाण चढ़ा क्र ताबरतोड़ उस जिव पर वॉर करने लगे.

लेकिन जब बल्ला क तलवार से कुछ नहीं हुआ था उसे तो इन तीरो से क्या होता उस सांप को.

वो एक बार को गर्दन घुमा क्र उन सैनिको की और देखा और फिर बल्ला की और आकर्षित हो गया ककी बल्ला सैनिको क मुकाबले ज्यादा नजदीक थी उस सांप क.

इधर जैसे hi सांप सैनिको की और देखा तक तक बल्ला को मौका मिल गया और वो एक बार फिर से तैयार थी उस सांप से दो दो हाथ करने को.

इस बार बल्ला तलवार को अपने माथे से लगा क्र कुछ मंत्र बुदबुदाई और फिर तैयार हो गई की कब सांप एक बार फिर से हमला क्र बल्ला क तलवार क सांप आती है.

इधर वो सांप एक बार फिर से तैययर था बल्ला पर झपटने को.

वो आगे बढ़ता हुआ एक बार फिर से बल्ला क निकट आया और फिर अपने गर्दन को निचे करता हुआ बल्ला को अपने जबड़े मई फ़साना चाहा लेकिन बल्ला भी तैयार थी. जैसे hi सांप ने अपना गर्दन झुकाया बल्ला का तलवार हवा मई लहराया और उस सांप क जबड़े क पास से होता हुआ उसके एक बहार को निकले दन्त को तोड़ता हुआ निकल गया.

जैसे hi उस सांप का एक दन्त टुटा वैसे hi वो सांप अपने पूछ पर पूरा सीधा खड़ा हो गया और अपने पूछ से एक जोर का झटका बल्ला को दिया.

उस सांप क पूछ से अभी काळा रंग का बिजली क जैसा निकल रहा था.

बल्ला को पूछ से काम, उस बिजली का ज्यादा जोर का झटका लगा था.

बल्ला उस झटके से बच नहीं पायी और ूर्ति हुई दूर जा गिरी.

जब सभी सैनिक बल्ला को यु दूर गिरते देखे तो जोर से चीख परे.

कुछ सैनिक दौर क्र जाने लगे बल्ला की और लेकिन बल्ला ने सब को मन क्र दिया.

कुछ सैनिक अपने भले को उस सांप क उप्पेर जोर से फेका लेकिन वो सभी भला उस सांप से टकरा क्र वापस निचे गिर गया.

सभी सैनिक बहुत पदेशन हो गए की आखिर इस सांप को कैसे मर गिराया जय. उस पर इन लोगो क किसी भी हथियार का कोई असर hi नहीं हो रहा है.

इधर बल्ला क दूर गिरने से उसके हाथ से तलवार छूट गया था. अभी बल्ला क पास सिर्फ एक ढल रह गया था दूसरे हाथ मई.

वो सांप अपने पंख फरफराता हुआ एक बार फिर तेजी से निचे बल्ला की और आने लगा था.

बल्ला क पास अब तलवार नहीं था जो कुछ करना था ढल क सहारे hi क्र सकती थी.

बल्ला ढल को उस सांप क जबड़े क सामने करती हुई लुढ़क क्र अपने तलवार की और आने लगी. लेकिन वो सांप भी तैयार था जैसे hi बल्ला जम्प ले क्र उस सांप क जबड़े पर ढल मरती लुढ़कती हुई तलवार की और बढ़ी की सांप ने बल्ला को अपने पूछ से लपेट लिया और हवा मई उप्पेर उठ गया.

सभी सैनिक चिल्लाते हुए दौर पड़े.

इधर गुरु भी नजदीक आ गया था वो सभी सैनिको का चिल्लाना सुन क्र अपने साथियो को और तेज चलने को कहता हुआ अपने घोड़े को और तेज दौरान लगा था.

तभी गुरु क एक साथी को उप्पेर कुछ दिखा.

सैनिक- वो देखो उप्पेर वो क्या है.

गुरु और बांकी सैनिक जैसे hi उस सैनिक क कहे दिशा मई देखते है तो चौक जाते है.

एक सांप जैसा बड़ा सा जइब बल्ला को अपने पूछ मई लपेटे उप्पेर हवा मई ुर्र रहा था.

सभी ये दृश्य देखते हुए जल्दी से उस दिशा मई बढ़ चले.

कुछ hi छान मई ये सभी बल्ला क टुकड़ी क पास पहुंच गए.

गुरु वह पहुंचते hi अपने घोड़े से कूद क्र दौरता हुआ उस जगह पहुंच गया जहा सांप जैसा वो विशाल जइब बल्ला को अपने साथ लिए हुए उप्पेर हवा मई झूल रहा था.

बल्ला उस सांप क पूछ से लिपटी रह रह क्र उस पूछ से निकले बिजली क झटको को सहते हुए उस क चंगुल से छूटने की कोसिस क्र रही थी.

गुरु कुछ मंत्र पढ़ क्र अपने तलवार को उस सांप की और क्र दिया.

गुरु क तलवार से एक रे निकल क्र उस सांप को लगता है.

जैसे hi वो रे सांप को लगा वो सांप बल्ला को ले क्र और उप्पेर ुरता हुआ एक और बढ़ने लगा था.

सभी सैनिक निचे चिल्लाते हुए उस सांप क दिशा मई दौरने लगे साथ hi गुरु भी.

तभी एक दिशा से एक चमकता हुआ तीर आया और उस साप जैसे अजीब जिव क एक आँख मई घुस गया.

वो शाप तरप क्र उप्पेर से निचे गिरने लगा साथ hi तीर लगने से उस सांप क पाकर मई जो राजकुमारी बल्ला थी वो भी उस सांप क पाकर से छूट गई और वो भी उस सांप क साथ hi गिरने लगी.

बल्ला गिरती हुई एक पैर पर लटक गई.

वही वो सांप जैसा जिव अजीब अजीब आवाजे निकलता हुआ अपने लम्बे पूछ को इधर उधर पटकता तरप रहा था.

तभी उप्पेर आसमान मई एक लड़का दिखा जिसके दो लम्बे स्वेत पंख थे. जिसके सहारे वो आसमान मई ुर्र रहा था.

हाथ मई एक धनुष लिए हुए वो लड़का ुर्राता हुआ उस सांप क पास पंहुचा और उसके बड़े से जबड़े पर अपना दया पॉ रख क्र झुक गया और उसके मुँह मई अपना एक हाथ घुसा दिया.

हाथ घुसा क्र वो लड़का उस सांप क मुँह से उसका एक दन्त तोड़ लिया और उसे फिर गौर से देखने लगा.

थोड़ी देर मई वो उस टूटे हुए दन्त को अपने धनुष मई बने एक खचे मई फिट क्र दिया.

जैसे hi वो दन्त उस धनुष मई फिट हुआ की वो धनुष जो पहले एक गोल्डन कलर का लग रहा था वो अब बिलकुल ब्लैक हो गया.

सभी सैनिक गुरु क साथ दौरते हुए वह पहुंच गए.

उप्पेर बल्ला पैर क उप्पेर अचेत अवस्था मई लटकी हुई थी.

गुरु जल्दी से उस पैर पर बन्दर क जैसे कूद क्र चढ़ता हुआ बल्ला क पास जा पंहुचा फिर अपने कंधे पर बल्ला को दाल क्र अपने दोनों हाथो को फैला दिया और पैर से निचे कूद गया.

गुरु बल्ला को ले क्र आहिस्ता से निचे जमीं पर आ गया.

बल्ला को आहिस्ता से निचे साफ़ जगह पर लेता दिया गया.

तब तक वो नौजवान भी उनलोगो क पास आ गया था.

वो नौजवान झुक क्र अपना हाथ बल्ला क सर पर देर दिया.

उसके हाथ से एक स्काई ब्लू कलर की रे निकल क्र बल्ला क सरीर मई चला गया.

फिर वो नौजवान खड़ा हो गया.

" थोड़ी देर मई ये ठीक हो जाएंगी. लेकिन अभी खतरा टाला नहीं है. ये सिर्फ सुरुवात था अभी. आप सब जितनी जल्दी हो सके इस जंगल से निकल जाओ."

उस नौजवान ने गुरु को देख क्र बोलै.

" मई गुरु, डोमिनिक राज्य का एक मामूली सिपाही और ये राजकुमारी इसाबेल्ला वह की राजकुमारी, आप को प्रणाम करता हु."

" आप सभी राजकुमारी को ले क्र जल्द से जल्द यहाँ से अपने राज्य चले जय ककी अभी ये तो सुरुवात था अभी इस से बहुत बड़ा खतरा आने वाला है. जिस मई आप सब क जान क साथ hi आप सब क राजकुमारी क जान को भी खतरा है."

" आप ने अपना परिचय नहीं दिया. वैसे हम यहाँ जंगल मई उसी खतरे की जानकारी क लिए आये है जिस ने कुछ दिनों से इस जंगल से लगे हमारे राज्य क नागरिको को बहुत परेशां क्र रखा है. " गुरु उस नौजवान को देख क्र कहा.

" मई सप्तरंगी साम्राज्य का राजकुमार चक्रम हु. यहाँ से गुजर रहा था तो काली सकती का एहसास हुआ मुझे. वो सकरी अभी भी बहुत ज्यादा मात्रा मई मैं महसूस क्र रहा हु. इसी लिए आप सब से अनुरोध है की अपने राजकुमारी को ले क्र यहाँ से निकल जाइये."

" नहीं, जब तक हम इस मुसीबत का जार से समाप्ति नहीं क्र देते तब तक हम वापस नहीं जाएंगे." राजकुमारी इसाबेल्ला जो होस मई आने क बाद चक्रम की बाटे पता नहीं कब से सुन रही थी उस ने कबाब दिया.

" राजकुमारी जी, आने वाले खतरे से आगाह करना हमारा परम कर्त्तव्य था जो की हम ने पूरा किया. आगे आप सब की मर्जी. वैसे मई बता दू की ये जो अभी हुआ है वो आने वाले मुसीबत क सामने कुछ भी नहीं है. तो आप सब उसी से अंदाजा लगा सकते है की खतरा कितना ज्यादा होगा." चक्रम राजकुमारी इसाबेल्ला को अदब से बोलै.

" तुम अगर हमे डरा क्र यहाँ से भागना चाहते हो तो भूल जाओ की हम जाएंगे. वो तो हम इसे काम क्र क आंक लिए थे नहीं तो ये नौबत नहीं आना था. वैसे अब हम सब किसी भी खतरे का मुहतोड़ जबाब देने क लिए बिलकुल तैयार है." बल्ला उठ क्र कड़ी होती हुई बोली.

" हमारी इतनी बिशात कहा की डोमिनिक राज्य क राजकुमारी को डरने की जुर्रत करे. आप जैसा चाहेंगी वैसा hi होगा. अच्छा अब मुझे आज्ञा दे." चक्रम हाथ जोर क्र अभिवादन करता हुआ मुस्कुरा क्र बोलै.

" Nahi...nahi राज कुमार. हमारी राजकुमारी क कहने का वो मतलब नहीं था. आप अन्यथा न ले. हमारे राज्य क जनता बहुत परेशां है और उनकी परेशानी को दूर करना हमारा पहला कर्त्तव्य. हम सब इस मुसीबत को ख़त्म किये बिना वापस नहीं जा सकते है. हमारी भी मज़बूरी है. वैसे भी हम अगर यहाँ से वापस चले गए तो फिर इस मुसीबत से निजात कैसे मिलेगी हमारे राज्य क जनता को."

गुरु आगे बढ़ क्र राज कुमार चक्रम क आगे हाथ जोर क्र अपने एक घुटने को मोर क्र उस पर बैठा बोलै.

" जैसा आप सब ठीक समझे."

चक्रम वापस उस मरे हुए अजीब से सांप क पास आया तो वो सांप अब धुए क रूप मई बदल क्र हवा मई गायब हो रहा था.

सभी सैनिक गुरु और राजकुमारी सहित इस दृश्य को देख क्र चकित थे.

" यहाँ से दूर हो क्र किसी सुरक्षित जगह सब छुप जाइये. ककी कुछ hi समय मई यहाँ इस से भी भयानक कई सरे ऐसे hi जिव आने वाले है." चक्रम वापस गुरु को देख क्र बोलै.

" जैसा आप कहे राज कुमार."

राजकुमारी इसाबेल्ला जिज्ञाषा से उस राजकुमार चक्रम को देख रही थी. अभी तक उसे पता नहीं चला था की ये रूपवान नौजवान कहा का राजकुमार है.

गुरु अपने सिपाही और राजकुमारी बल्ला को ले क्र वह से दूर सुरक्षित जगह क खोज मई चला गया.

बल्ला उन लोगो क साथ चलती हुई का तो रही थी लेकिन अभी भी उसे समझ नहीं आ रहा था की वो इतना सुन्दर सजीला राजकुमार कौन था जिसका नाम गुरु ने चक्रम बताया था.

" कितनी प्यारी आँखे थी दिल करता था सरे जहाँ को भूल क्र उन नीली आँखों मई डूब जाऊ." बल्ला अपने आप से बाटे करते हुए जा रही थी.

" राजकुमारी जी…. राजकुमारी जी…."

जब दो बार आवाज देने क बाद भी बल्ला जवाब नहीं दी तो गुरु पास आ क्र बल्ला क का दे पर हाथ रख क्र उसे हिलाया.

" है, क्या हुआ."

" कब से आवाज दे रहा हु. क्या सोच रही है."

" Y..ye कौन था."

" कौन राजकुमारी जी." गुरु समझ नहीं पाया की राजकुमारी किस बारे मई पूछ रही है.

" w...wo...Waha वो राजकुमार कौन था." राजकुमारी बल्ला झिझकते हुए गुरु से बोली.

" वो सप्तरंगी साम्राज्य क राजकुमार चक्रम थे. सुन्ना है बहुत वीर राजकुमार है. आज क समय मई इन से वीर कोई नहीं हमारे सभी राज्यों मई. मई भी आज hi मिला हु."

यु hi बाटे करते हुए वो लोग वह से काफी दूर निकल आये थे. तभी उन्हें बहुत जोरो से जंगल क जानवरो क चीखने चिल्लाने की आवाज सुनाई दी.

जंगल क पक्षी भी बड़ी संख्या मई ुर्र क्र एक दिशा से दूसरे दिशा को ुर्र क्र बड़ी तेजी से जा रहे थे.

लग रहा था जैसे सभी जान बचा क्र भाग रहे है.

जंगली जानवरो और पक्षियों क सोर से पूरा वातावरण बड़ा hi डरावना लग रहा था.

सभी लोग रुक क्र समझने की कोसिस करने लगे की अचानक क्या हुआ.

" लगता है जिस बारे मई हम सब को राजकुमार जगह क्र रहे थे वही होने वाला है इसी लिए जंगल क सभी जिव दर क्र भाग रहे है." गुरु जिस दिशा से अभी आ रहे थे उधर देखता हुआ बोलै.

" फिर हम सभी को उधर चलना चाहिए. क्या पता कही राजकुमार किसी मुसीबत मई हो." बल्ला चिंतित होते हुए बोली.

" नहीं अब राजकुमार चक्रम भी वह नहीं होंगे. हम सब क निकलते hi वो भी निकल गए होंगे वह से." गुरु बोलै.

" फिर अब क्या करे. वैसे भी हमे ये तो देखना hi होगा की वह ऐसा क्या है की जंगल क सभी जिव दर क्र भाग रहे है." बल्ला एक बार फिर बोली.

" पहले हमे यही कुछ समय इंतजार करना चाहिए. कुछ समय बाद देखते है क्या हालत है फिर आगे कोई प्लान करेंगे. तब तक सभी अलग अलग पैर पर चढ़ क्र अपना स्थान ले लो. हो सकता है वो मुसीबत इधर hi आ जय. हमे एक जगह नहीं रहना चाहिए."

सभी सेंकी फ़ैल क्र वही आस पास क पेरो पर अपना डेरा जमा लिए.

सभी इंतजार करने लगे की कुछ पता चलेगा. क्या है ऐसा इस जंगल मई.

अभी एक सांप जैसे जिव से तो राजकुमारी जी बल बल बची थी. वो तो भला हो उस राजकुमार चक्रम का जो समय पर आ गए थे नहीं तो पता नहीं क्या हो जाता.

तभी जंगल एक बार को एक अजीब से आवाज से थरथरा उठा.

बड़ा भयानक डहर था. जैसे लग रहा था कही बहुत सक्तिसाली कई जिव एक साथ चिल्लाया हो.

जितने सैनिक थे सभी उस डहर को सुन क्र कामो गए. एक बार को ऐसा लगा जैसे पूरा जंगल कम्प गया हो.

सभी जहा भी पैर पर बैठे थे उसे मजबूती से पकड़ लिए थे.

तभी एक बार फिर जैसे लगा की 100 हाथियों का झुण्ड एक साथ चिंघार रही है. इतना तेज आवाज आ रहा था.

सभी सैनिक बहुत सरे हुए थे.

तभी सभी सैनिक गुरु और इसाबेल्ला सहित सभी ने देखा की दो बहुत विशाल वैसे hi सांप जैसा जिव जो पहले वाले से करीब तिगुना बड़ा और मोटा था.

जिसके दो बड़े बड़े पंख थे वो जंगल क उप्पेर आसमान मई चिल्लाते हुए चक्कर लगा रहे थे और चिल्लाते हुए उन दोनों क मुँह से आग की लपटे निकल क्र चारो और फ़ैल रही थी.

वह निचे जंगल मई भी आग लग गया था.

सभी उस अजीब से इतने विशाल जिव को देख क्र दर गए थे.

" ये क्या है. ये दोनों तो उस पगले वाले से बहुत ज्यादा hi विशाल है. इन दोनों को कैसे रोकेंगे हम. लग रहा है जैसे बहुत गुस्से मई है ये."

बल्ला जो गुरु क पास hi एक दूसरे पैर पर बैठी थी उसने गुरु से पूछा.

" हम सब मिल क्र भी इसका मुकाबला नहीं क्र सकते." गुरु उन दोनों जीवो की और देखता हुआ बोलै.

तभी वो दोनों विशालकाय जिव गोटा लगा क्र निचे जंगल मई घुस गए और फिर से चिल्लाते हुए जंगल को तबाह करने लगे.

एक बार फिर सभी दम साढ़े उस खौफनाक मंजर को देख रहे थे.

इन लोगो को समझ नहीं आ रहा था की इस मुसीबत से कैसे निकला जय.

तभी सभी ने देखा की जंगल क उप्पेर वही जहा अभी कुछ देर पहले वो दोनों कला जिव था वह राजकुमार चक्रम अपने हाथ मई उसी काळा धनुष लिए जिस का प्रत्यंचा खींचे निचे जंगल की और देखते हुए चक्कर लगा रहे थे.

तभी सब ने देखा की राजकुमार चक्रम प्रत्यंचा छोड़ दिए और जंगल मई एक भीषण धमाका हुआ.

धमाका इतना जोर दर था की उसकी धमक से पूरा जंगल तेजी से कैंप उठा.

राजकुमार चक्रम एक बार फिर से प्रत्यंचा खींच चुके थे.

तभी जंगल से वो दोनों विशाल जिव निकल क्र उप्पेर आसमान मई निकल रहे थे.

चक्रम एक बार फिर से अपना प्रत्यंचा रिलीज़ क्र दिया.

एक जिव क सरीर मई बड़े तेजी से विस्फोट हुआ.

थोड़ी देर क लिए सब को दिखना बंद हो गया.

इतना तेज प्रकाश फैला था वह.

जब प्रकाश कुछ काम हुआ तब सभी ने जो देखा वो देख क्र सभी की आँखे आश्चर्य से फटने को हो गई.

कुछ भी नहीं हुआ था उस जिव को इतने बड़े धमाके से भी.

अब वो दोनों जिव बड़ी तेजी से चक्रम की और बाद रहे थे.

चक्रम ने जैसे hi देखा की दोनों जिव उसकी और आ रहा है तो उसने फिर एक बार अपने धनुष का प्रत्यंचा खींचा और उसी जिव को निशाना ले क्र छोड़ दिया जिसे इस से पहले निशाना लगाया था.

लेकिन इस बार वो जिव भी तैयार था वो एक ड्राइव मर क्र दोसे दे गया चक्रम क निशाने को.

अब वो दोनों जिव चक्रम क नजदीक आ गया था.

तभी चक्रम ने जल्दी से प्रत्यंचा खींच क्र फिर से छोड़ दिया.

इस बार फिर से एक जिव ने गोटा लगाया और दोसे क्र दिया उसके निशाने को लेकिन दूसरे क सरीर मई जा क्र बड़ा धमाका हुआ.

इस बार चक्रम दोनों पर एक साथ निशाना लगाया था.

लेकिन धक् क तीन पात.

कुछ भी असर नहीं हुआ इस प्रहार का उन दोनों पर.

चक्रम धनुष को उप्पेर हवा मई फेक दिया. वो धनुष उप्पेर हवा मई जा क्र गायब हो गया.

चक्रम अपने दोनों हाथ को उप्पेर किया और उसके हाथ मई एक दबा सा ढल और वैसे hi बड़ा सा तलवार आ गया.

दोनों मई बिजली कौंध रही थी.

दोनों जिव चक्रम क पास आ क्र चिंघाड़ते हुए उस पर अपने मुँह से आग छोड़ दिए.

यहाँ पैर पर बैठी बल्ला जब ये देखि तो जोर से अपनी आँखे बंद क्र ली.

उसका दिल बड़ी जोरो से धारक रहा था.

आँखे मूंदे वो अपने कुलदेवी को याद करती चक्रम को बचा लेने क लिए बार बार पुकार रही थी.

इधर चक्रम देखा की ये दोनों उस पर आग से हमला क्र रहे है.

तो वो इसका फायदा उठा क्र उस आगे मई hi अपने ढल को आगे लिए हुए उन दोनों मई से एक जिव क पास चला गया और अपने तलवार को आग देखते एक जिव क मुँह मई घुसा दिया.

दिल दहला देने वाली चीख निकली उस जिव क मुँह से.

तभी दूसरा जिव अपने पूछ से एक जोरदार प्रहार किया चक्रम पर.

चक्रम ुर्राता हुआ कई हवा मई कई कलाबाजी खा गया.

जिस जिव क जबड़े मई अपना तलवार घुसाया था वो तो तड़पता हुआ निचे गिरने लगा लेकिन थोड़ा निचे आने क बाद एक बार फिर से वो उप्पेर आ गया.

वो जिव अभी भी तरप रहा था चीख रहा था.

दूसरा जिव अपने खूंखार आँखों से चक्रम को hi देख रहा था.

चक्रम अब संभल क्र एक बार फिर से इन दोनों जीवो से दो दो हाथ करने को तैयार था.

पहला जिव अभी भी पूरी तरह सम्भला नहीं था की तभी चक्रम अपने तलवार को फेक मारा उस जिव की और.

दूसरा वाला जैसे hi देखा की चक्रम ने तलवार फेक क्र मारा है पहले वाले को की उसने अपने पूछ से एक सोनिक वेव छोड़ी उस तलवार की और लेकिन वो तलवार भी कोई मामूली नहीं लग रहा था.

पालक झपकते hi वो तलवार पहले वाले जिव क मुँह को फरता हुआ एक और से दूसरी और निकल गया और हवा मई hi रुक गया.

वो तलवार एक बार फिर से पूछे से hi उस जिव क गले को मक्खन की तरह उसके धार से अलग क्र वापस चक्रम क हाथ मई वापस आ गया.

जैसे hi दूसरे जिव ने पहले वाले का ये हाल देखा की वो पागलो की तरह जोर से चिंघाड़ते हुआ अपने मुँह से आग की भयानक ज्वाला छोड़ता हुआ चक्रम की और बढ़ चला.

चक्रम पहले से hi तैयार था उसने बड़ी जोर से उसके जबड़े पर अपने ढल से मारा.

प्रहार इतना तगड़ा था की वो जिव उलट क्र एक और को हो गया.

चक्रम घूम क्र अपने तलवार को उप्पेर उठा क्र नाचता हुआ उस जिव क गले पर जोर से चला दिया वो दूसरे जिव का भी गर्दन धार से अलग हो क्र निचे को गिरने लगा.

पहला जिव का सरीर तो पहले hi जंगल मई निचे गिर गया था.

दूसरे जिव का भी वही हाल हुआ.

सभी आँख फारे इस दृश्य को देख रहे थे.

" असंभव, आज जो मई देखा हु वैसा अभी तक अपने जिंदगी मई कभी नहीं देखा था." गुरु उत्शाह से बोलै.

बांकी सभी तो ये लड़ाई देख क्र hi होस खो बैठे थे.

गुरु क जोशीले आवाज को सुन्न क्र सभी होश मई आये.

" हमे अब एक बार चल क्र देखना चाहिए." इसाबेल्ला जो इतने देर से अपने दिल क धड़कनो को बड़ी मुश्किल से संभाले अपने कुलदेवी को याद क्र रही थी वो बोली.

जल्दी से सभी पैर से उतर क्र उस दिशा मई दौड़ परे.

सभी अभी दोगुने उत्साह मई जा रहे थे तो जल्दी hi वह पहुंच गए.

वह जा क्र देखे तो सब को अपने आँखों पर यकीं नहीं हो रहा था.

इतना विशाल दो अजीब जिव को चक्रम ने अकेले hi मर गिराया था.

" आप ठीक तो है न. आप को कुछ हुआ तो नहीं." इसाबेल्ला तो जाते hi चक्रम क साइन से जा लगी.

उसे पता hi नहीं चला की वो क्र क्या रही है. इसाबेल्ला क सभी सैनिक गुरु सहित आश्चर्य से देखते हुए मुस्कुरा रहे थे.

" मई ठीक हु राजकुमारी जी. आप को चिंता करने की कोई जरुरत नहीं." चक्रम बल्ला क कंधे को थपथपाता हुआ बोलै.

बल्ला अभी भी चक्रम क साइन से लगी हुई उसके सरीर को जगह जगह से टटोल क्र देख रही थी की चक्रम कही झूठ तो नहीं बोल रहा.

" आप का बहुत बहुत धन्यवाद् राजकुमार चक्रम. हम डोमिनिक वाशी सदा आप क आभारी रहेंगे. आप ने बहुत बड़े संकट से हमारे राज्य क जनता को बचाया है." गुरु हाथ जोर क्र एक घुटने पर बैठता हुआ बोलै.

गुरु को देख क्र उसके सरे सैनिक भी एक घुटने पर बैठ गए.

" ये क्या क्र रहे है आप सब. चलिए खड़े होइए. ये हमारा फर्ज था जो हम ने किया है. हम ने आप सब पर या आप क राज्य पर कोई एहसान नहीं किया है जो आप सब ऐसा क्र रहे है या बोल रहे है." चक्रम बल्ला क सर को सहला क्र उसे अपने से अलग क्र गुरु को कंधे से पकड़ क्र उठता हुआ गले लगा क्र बोलै.

" ये आप का बर्रप्पन है राजकुमार चक्रम. आप ने पहली बार राजकुमारी बल्ला की जान बचाई और दूसरी बार इस जंगल मई रहने वाले इतने जिव और इस से लगे डोमिनिक राज्य क जनता की भी जान बचाई है." गुरु राजकुमार चक्रम से अलग हो क्र बोलै.

" आप सब तो जबरदस्ती मुझे चने क झाड़ पर चढ़ा रहे है. ऐसा कुछ नहीं है. मेरे जगह कोई भी होता तो यही करता." क्यू राजकुमारी जी?

" Nahi..nahi. सब ऐसे नहीं होते. आप का दिल सोने का है. " इसाबेल्ला एक बार फिर से चक्रम को गले लगती हुई बोली.

" अच्छा अब मुझे इजाजत दीजिये. हमे भी अपने साम्राज्य मई जल्द से जल्द पहुंचना था.

" फिर कब मिलेंगे." बल्ला चक्रम क गले लगी हुई बोली.

" आप जब हुक्म करेंगी, हम हाजिर हो जाएंगे राजकुमारी जी. चक्रम बल्ला को छेड़ता हुआ बोलै.

" अब राजकुमार को जाने दीजिये राजकुमारी जी. हमे भी अब चलना चाहिए." गुरु बोलै.

इसाबेल्ला सरमाती हुई चक्रम से अलग हो गई.

चक्रम अपने साइन क पास हाथ ले गया तो उसके हाथ मई चक्रम का धनुष आ गया.

चक्रम उस धनुष को ले क्र उन दोनों मरे हुए जिव क पास आ गया.

पहले जिव क मुँह मई हाथ दाल क्र उसका एक दन्त तोड़ दिया. उस जिव का दन्त भी काफी बड़ा था.

उस दन्त को अपने धनुष से लगाया चक्रम तो वो दन्त आकर मई छोटा हो गया. फिर वो दन्त को ले क्र चक्रम अपने धनुष क एक खचे मई दाल दिया.

धनुष काफी तेज चमक उठा और उस मई बिजली कड़क उठी.

ऐसे hi चक्रम दूसरे जिव क दन्त क साथ भी किया.

इसाबेल्ला, गुरु और उनके बांकी सैनिक सभी कौतहल से देख रहे थे.

फिर चक्रम इन लोगो क पास आ क्र अपने धनुष को एक बार झटक दिया तभी उस धनुष से एक दूसरा वैसा hi धनुष निकल आया.

" ये लीजिये राजकुमारी जी. ये मेरे तरफ से आप क लिए उपहार. हम पहली बार मिले है, इस मई प्रत्यंचा खींच क्र जिस पर भी निशाना लगाएंगे अचूक निशाना लगेगा. इस मई तीर की जरुरत नहीं होता." चक्रम एक धनुष इसाबेल्ला की और बढ़ता हुआ बोलै.

" अच्छा अब इजाजत दीजिये." चक्रम बल्ला को देख क्र बोलै. जो अभी चक्रम क दिए धनुष को ले क्र बड़े प्यार से उसे देख रही थी.

" फिर कब मिलेंगे." बल्ला चक्रम का हाथ पकड़ क्र बोली.

" जब आप हुक्म करेंगे. बाँदा हाजिर हो जाएगा आप की सेवा मई."

बांकी सभी सैनिक और गुरु दिलचस्पी से इन दोनों को देख रहे थे.

फिर चक्रम सब से बीड़ा ले क्र वह से चल दिया.

उसके कंधे पर लगा पंक तेजी से फैला और चक्रम उप्पेर हवा मई उठता हुआ आकाश मई जा पंहुचा और एक और को ुर्र गया.

" अब हमे भी जल्द से जल्द चलना चाहिए राजकुमारी जी." गुरु ने कहा.

बल्ला सर हिला क्र है बोली.

फिर सभी जंगल से बहार की और चल दिए.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 83.

रात क खाने का समय.

घर क सभी मर्द आँगन मई खाने को बैठे थे.

दादू, तीनो काका, लल्लू क पापा और लल्लू सभी एक क़तर मई बैठे भोजन क्र रहे थे.

" आप सब से अगर काम नहीं पूरा हो रहा है तो दो चार और लोगो को रख लो काम करने क लिए. मेरा बीटा कल से कोई काम नहीं करेगा."

ऋतू अपने पति अनिल को खाने की थाली आगे बढ़ाते हुए बोली.

" ऐसा क्या हो गया आज." सुनील बोलै.

" क्या हो गया. आज ये नालायक सुबह उठ क्र खेत गया और उधर hi रह गया. कोई ये भी बताने वाला नहीं था की ये आखिर है कहा. क्र क्या रहा है. अँधेरा होने क बाद अभी थोड़ी देर पहले आया है. हम सब की क्या हालत हुई है आज वो हम hi जानते है."

ऋतू एक बार फिर अपना गुस्सा सब पर निकलती हुई बोली.

" नहीं नहीं, घर पर तो बताना था न बीटा. ये तो सुच मई बहुत गलत बात है." सुनील खाना खता हुआ बोलै.

" काका, मई तो रोज की तरह खेत गया था की छोटे काका आ क्र बोले की मुझे जरुरी काम आ गया है तो बाजार जा रहा हु. तुम खेत पर रह लो आज. काका खेत से hi बाजार चले गए थे जब की मई समझा की काका घर जाते हुए बता देंगे. बस यही बात हो गई." लल्लू अपना सर झुकाये हुए बोलै.

" दो मिनट क लिए आ क्र घर सब को बता hi देता तो क्या हो जाता. नालायक कही का. एक काम भी ढंग से नहीं हो पता तुम से." राम गुस्से मई बोलै.

लल्लू का खाना उठाया हाथ रुक गया अपने पापा की बात सुन क्र.

उसके आँखे नुम हो गई.

आखिर यहाँ उसकी गलती कहा से आ गई.

खैर जैसे तैसे वो उठे हाथ को मुँह तक ले जा क्र खाना जबरदस्ती चबाने लगा.

दिल क साथ तो अब पेट भी भर गया उसका अपने पापा की मीठी बाटे सुन क्र.

" बहुत बढ़िया है ये आप सब का. गलती खुद करो और दोष इस बच्चे पर दाल क्र खुद बच जाओ." रागिनी जो सब क लिए दही ले क्र आई थी वो अपने छोटे देवर की बात सुन क्र बोली.

ऋतू जो वही पास कड़ी थी वो भी रागिनी की बाते सुन क्र पहले जो राम को डाटने वाली थी तो चुप हो गई.

सब खाना खा क्र एक एक क्र दालान पर चले गए.

लल्लू भी जैसे तैसे खाना खाया जितना खाया गया और चाट पर जा क्र लेट गया.

आँखों से नींद कोशो दूर थी.

दिमाग मई कही न कही आप इ पिता की कही बाटे घूम रही थी. फिर सर झटक क्र आँखे बंद क्र सोने की कोसिस करने लगा.

सुबह अपने समय पर लल्लू की आँखे खुल गई.

उठ क्र अपने पसंदीदा जगह नदी पर पहुंच गया फिर फ्रेश हो क्र धयान मई बैठ गया.

रात से मन कुछ असंत था तो बार बार ध्यान टूट जा रहा था.

फिर वह से वापस घर आ गया.

घर आया तो अभी सिर्फ ऋतू काकी उठी हुई थी.

लल्लू काकी को पकड़ क्र वापस कमरे मई ले गया और साडी उठा क्र अपना मुँह उनके खजाने पर लगा दिया.

काकी कसमसा क्र रह गई.

पुरे सरीर मई मेक की लहार उठाने लगी थी.

आज कल कुछ ज्यादा hi खुजली होने लगी थी ऋतू को.

तो वो भी लल्लू क सर को अपने जांघो क बिच दबाये मजे से सिसकते हुए उसके बालो मई ऊँगली फिर रही थी.

रह रह क्र काकी क होठो से मजे की सिसकी निकल जाती जिसे वो रोकने की भरषक कोसिस क्र रही थी.

कुछ hi देर मई लम्बी लम्बी आहे भर्ती हुई ऋतू काकी लल्लू क मुँह को अपने अमृत रास से भर दी.

लल्लू पूरा रास चाट क्र काकी क साडी से अपना सर निकल लिया.

खड़ा हो क्र लल्लू काकी क एक चुकी को पकड़ क्र ब्लाउज क उप्पेर से मसलता हुआ अपने होठो को काकी क होठो पर लगा दिया.

दोनों दीवनदार एक दूसरे क होठो को खाने मई लग गए.

लल्लू एक हाथ से काकी की बड़ी बड़ी ठोस चुकी को मसलता हुआ दूसरे हाथ से अपना धोती खोल क्र अलग क्र लिया.

दोनों को जब दम घुटने लगा तो अलग हो क्र लम्बी लम्बी ससे लेने लगे.

लल्लू काकी को पकड़ क्र झुका दिया.

ऋतू बीएड पाकर क्र झुक गई.

लल्लू पीछे आ क्र साडी काकी क कमर पर क्र दिया और ऋतू काकी की बड़ी सी 38 की मटके को मसलता हुआ अपने मुसल को उनके रास बहती नहर मई लगा दिया.

अपने पौरोति की तरह फुले हुए छूट क मुँह पर लल्लू क गर्म लैंड को फील क्र मजे से आँखे बंद की की ऋतू ने.

सिसकते हुए उसकी छूट मई तो जैसे कोई बढ़ आ गई हो.

लल्लू काकी क मटकी को सहलाता मसलता पहले अपने लैंड को थोड़ा काकी क छूट क मुँह पर रगड़ क्र गिला करने लगा.

हर गुजरते पल क साथ ऋतू मेक से बेहाल हो रही थी.

ऐसा लग रहा था जैसे पुरे सरीर मई छोटी छोटी पटाखे फुट रही हो.

तभी लल्लू एक जोर का धक्का लगा दिया.

उसका आधा लैंड ऋतू क छूट को फैलता हुआ अपना जगह बना लिया.

ऋतू क तो दर्द और मजे से मुँह खुल गई.

लल्लू तभी दूसरा झटका लगा दिया और उसका मुशल जार तक ऋतू क छूट मई….

" आह.. मर दिया हरामी. आराम से क्र न. कही भागी नहीं जा रही."

" कितनी गरम है तू. दिन पर दिन जैसे और गर्मी बढ़ती जा रही है तेरे अंडर."

" तो खूब थोक थोक क्र अपना पानी डाला क्र मुझ मई ताकि मेरी गर्मी काम रहे."

" मेरा बस चले तो मई तो निकलू hi न तेरे छूट से अपना लौड़ा. Ha...aayy.. कितना मजा देती है tu….aahh…" लल्लू सिसकता हुआ कमर हिला रहा था.

निचे झुकी हुई काकी भी अपना कमर हिला क्र लल्लू क ताल से ताल मिला रही थी.

" ऐसे hi थोक जोर से. हैयय ये निगोड़ी बहुत सताती है… आअह्ह्ह… हहहयययय… maaa…kahi मई मजे से मर hi न जाऊ."

" ऐसे कैसे मरने दूंगा. अभी तो बहुत मजे लेना बांकी है मेरी जान. क्या मटकी जैसी हैंड है तेरी. आज तो दोनों को थोम थोक क्र भरता बना दूंगा."

" ऊऊह्ह्ह्ह.. .इस्सस.. और tej..haa..aise h..hii.. orrr...orrr... orrr….tejjj. mai...aane...walllii.. hu...hayyyyy"

काकी कराहती हुई जहर गई.

लल्लू उसी समय अपना मुशल निकल क्र ऋतू क जान मरी मटकी मई एक hi बार मई घुसा दिया जार तक.

अभी अभी मजे से ऋतू निकली भी नहीं थी की इतनी hi तेज दर्द पुरे बदन मई जैसे बिजली की तरह दौड़ गई.

" मर डाला कमीने ne...hayyy nikal...harami...mar dala...hayyy ाःह."

लल्लू तो पेलमपेल लगा हुआ था काकी क कमर को पकड़ क्र.

" क्या काकी कितनी प्यारी हो तुम. मजा आ गया."

हाथ बढ़ा क्र काकी क दोनों दूध को निचोड़ता हुआ लम्बे लम्बे धक्के लगाने लगा.

" थोड़ा सैश तो ले लेने देता कमीना. मैंने क्या मन किया था. Aahhh...aise...hii...jor से.. मई आयी रे मा…."

काकी एक बार फिर मजे से कराहती हुई झरर गई.

लल्लू एक हाथ की तीन ऊँगली ख्हाछह से काकी क बुर मई घुसा दिया.

" मुआए मारर्र क्र hi मानेगा. हैयय मर्डर डाला."

लल्लू ताबरतोड़ धक्के लगाए जा रहा था और अपने तीन ऊँगली से काकी की छूट को भी ढीली करता जा रहा था.

वो भी अब नजदीक hi था अपने मंजिल क.

कुछ देर मई hi फिर दोनों आहे भरते हुए साथ साथ अपना गर्मी निकल दिए.

लल्लू थक क्र काकी क उप्पेर hi लुढ़क गया.

काकी भी बीएड पर लुढ़क गई.

थोड़ी देर बाद जब दोनों की सषे सम्भली तो दोनों उठ क्र अपने अपने कपडे पहन क्र सही से कमरे से बहार निकल आये.

बहार अभी भी सभी नहीं उठे थे.

वह से लल्लू अपने कमरे की और चल दिया जहा दरवाजा बंद था.

वापस आ क्र लल्लू रसोई मई घुस गया जहा वो सब क लिए चाय चढ़ा दिया.

तब तक माँ और रागिनी काकी भी उठ गई.

माँ लल्लू को रसोई मई देख क्र उधर hi आ गई.

" क्या बात है. तू तो सुच मई डेली चाय बनाने लगा सब क लिए. मुझे उठा देता."

मालललू क गाल पर किश करती हुई बोली.

" क्या हो गया फिर. मई थोड़ा जल्दी उठ गया था और आप लोग पुरे दिन घर का काम क्र क थक जाती हो. इस लिए नहीं उठाया." लल्लू माँ को गले लगता हुआ बोलै.

" चल तू बहार बैठ मई लती हु तेरे लिए चाय." माँ लल्लू से अलग होती हुई बोली.

" आप जाओ और जा क्र फ्रेश हो जाओ. तब तक चाय बन क्र तैयार हो जाएगी." लल्लू माँ को पकड़ क्र वाशरूम की और प्यार से धकेलता हुआ बोलै.

Kajal(MAA) भी फिर फ्रेश होने को चली गई.

थोड़ी देर मई चाय बन क्र तैयार हो गया तो लल्लू सब से पहले शालिनी काकी को उठा क्र चाय दिया.

" आह मेरे लाल ऐसा सुख तो मेरी बहुओ क आने पर भी कभी नहीं मिला. युग युग जी मेरे लाल." शालिनी काकी लल्लू को चाय बना क्र लता देख बोली.

फिर ऋतू काकी और रागिनी काकी भी आ गई थी फ्रेश हो क्र तो इन दोनों को दिया लल्लू ने चाय.

दोनों काकी लल्लू क पुरे गाल को चुम चुम क्र गिला क्र दी ख़ुशी मई.

लल्लू भी पहले ऋतू काकी को तो खुराक दे hi दिया था अब इसी बहाने से थोड़ा रागिनी काकी को भी मजे से दिया.

फिर लल्लू चाय ले क्र अपनी जानेजिगर, जानबहार, गुलगुलजार क कमरे की और बेहद गया.

" रहने दे बीटा. महारानियो को सोने दे उठ क्र खुद गर्म क्र पियेंगी ये सब अपना चाय." ऋतू काकी गुस्से से बोली.

" काकी अब जब मैंने बना hi दिया है तो पि लेने दो मेरे दीदियो को भी."

" है है और सर पर चढ़ा ले सब को. अपने ससुराल मई भी ऐसे hi सब 10 बजे तक सोई रहेंगी और इनका खशम इन्हे ऐसे hi चाय बना क्र पिलायेगा."

तब तक लल्लू चाय ले क्र अपने बहनो क कमरे तक जा पंहुचा.

दरवाजा मीनू ने खोला था.

लल्लू सभी का चाय मीनू दीदी को पकड़ा दिया. फिर वह से ऐसे hi दालान पर भी दे आया सभी को चाय.

तब तक माँ भी फ्रेश हो क्र आ गई थी तो वो अपना और लल्लू का चाय ले क्र आँगन मई हो खटिया पर आ गई.

तब तक लल्लू भी सब को चाय बाँट क्र वापस आ गया था.

फिर सभी वही आँगन मई बैठ क्र चाय पिए.

" आज से तू कही खेत वेट नहीं jaiga..jis को जरुआत हो वो अपना मजदुर लगा क्र करेगा काम." ऋतू काकी बोली.

" है बीटा, तुम्हे नहीं पता जब तक बाबू जी नहीं बताये थे मेरी क्या हालत हो गई थी. मुझे तो इतना दर बैठ गया था दिल मई की अगर और थोड़ी देर होती तो मई दर से hi मर जाती." रागिनी काकी डबडबाई आँखों से बोली.

लल्लू आगे बढ़ क्र काकी क आँखों को चुम लिया.

" ऐसा नहीं बोलते काकी. आप को मेरे रहते कुछ नहीं होगा. थोड़ी सी ग़लतफ़हमी हो गई थी नहीं तो मई आ क्र बता जाता सब को."

लल्लू रागिनी काकी को गले से लगाए हुए बोलै.

" भाई बहुत बढ़िया चाय थी. आज तो मेरा दिन hi बन गया. तुम्हारे हाथ की चाय पि क्र." गौरी आ क्र पीछे से लल्लू को गले लगाती हुई बोली.

" है रे नासपीटी, तुम सब ऐसे hi कुम्भकरण की तरह सोई रह और ये सब क लिए चाय बनता फायर." शालिनी काकी पीछे से आ क्र उसकी छोटी पकड़ क्र खींचती हुई बोली.

" आह माँ, माँ दर्द क्र रहा है. प्लस छोड़ दो. मेरे bal...aahhh माँ प्लस छोड़ दो न."

गौरी कुछ सुच कुछ नाटक करती बोली.

लल्लू आगे बढ़ क्र अपनी प्यारी नटखट बहन को गले लगा क्र अपनी काकी क हाथ से उसकी छोटी को छुड़ा दिया.

" काकी जब तक इन सभी का ये भाई जिन्दा है आप सब मेरी बहनो को काम क लिए मत कहिये." लल्लू गौरी दीदी क गाल को चुम क्र बोलै.

" है जब ब्याह क्र अपने ससुराल जाएगी तब तुम्ही जा क्र इसका सारा काम करना घर का. ककी ये लोग तो सीखेंगी भी नहीं इस तरह."

" मई अपनी बहन का सदी ऐसे घर मई करूँगा जहा इसे कोई काम न करना पड़े. ये बस महारानी बन क्र रहेगी."

" है चढ़ा दे चने क झाड़ पर." रागिनी काकी बोली.

यु hi फिर चाय क बाद सब अपने कमरे से निकल क्र घर क कामो मई लग गए.

लल्लू भी आँगन से निकल क्र दालान पर आ गया.

दादू स्नानं और पूजा करने क बाद बहार टहल रहे थे.

लल्लू- दादू क्या क्र रहे हो.

दादू- बीटा, थोड़ा धुप लगा रहा हु सरीर मई. वैसे अब क्या प्लान है तुम्हारा. घर से तो हुक्म आया है की अब तुम कोई काम नहीं करोगे खेत सब का.

लल्लू- दादू ऐसा कुछ नहीं है. वो तो रात सब गुस्से मई थे इस लिए ऐसा बोल दिए.

दादू- देख ले बीटा. बाद मई मुझे मत फसा देना. भले hi घर बैठा रह. ये लोग अपना संभल लेंगे.

लल्लू- कुछ नहीं होता दादू. कल बस सब थोड़ा गुस्सा थे. मई मन लूंगा सब को.

थोड़ी देर और दादू से बात करने क बाद लल्लू आँगन आ गया.

लक्ष्मी और भाभी सभी बहनो क साथ घर क कामो मई लगी हुई थी.

लल्लू जा क्र रसोई मई देखा तो लक्ष्मी वही काम क्र रही थी.

लल्लू थोड़ी देर खरा रहा वह.

सब से बचा क्र आँखों से इसरा किया लक्ष्मी को.

लक्ष्मी सरमाती हुई मन क्र दी.

लल्लू ने फिर से इसरा किया.

" आप क्या क्र रहे हो यहाँ. सुबह की चाय बना दी थी न आप ने. बस हो गया आप का कोटा पूरा. अब आप बहार जाओ. हम सब क्र रहे है काम."

ये सैतान गौरी थी जो लल्लू को इसरा करते देख ली थी. वो मजे ले रही थी लल्लू से.

देख तो बांकी लोग भी लिए थे लेकिन सब चुप चाप मुस्कुराते हुए मजे ले रहे थे लेकिन इस सैतान की नानी को तो लल्लू की तंग खींचना था.

लल्लू थोड़ी देर वही चक्कर लगता रहा लेकिन जब लक्ष्मी नहीं बोली वह से तो लल्लू वापस वह से अपने कमरे मई आ क्र लेट गया.

" जाओ बहभी देख आओ नहीं तो आप क पिया नाराज हो जाएंगे." मीनू लल्लू क जाने क बाद बोली.

" नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है." लक्ष्मी सरमाती हुई बोली.

" मन तो आप का भी क्र रहा होगा. जाओ मिल लो." कोमल मीनू क हाथ पर ताली मरती हुई बोली.

लक्ष्मी शर्मा क्र रह गई.

" चला जा मिल ले. ये लोग ऐसे hi तेरा मजाक बनाएंगे. कौन से इनके खसम से मिलने जा रहे हो. जा हम लोग तब तक क्र रहे है यहाँ का काम." भाभी जबरदस्ती लक्ष्मी को भेज दी.

लक्ष्मी सरमाती हुई कमरे मई आई तो लल्लू बीएड पर लेता हुआ था.

लक्ष्मी को देख क्र लल्लू उठ क्र उसके पास गया और दोनों हाथ पकड़ क्र बीएड पर बैठा दिया.

लल्लू- क्र दिया न सब क सामने मेरे इज्जत की ऐसी तैसी.

लक्ष्मी- मई क्या करती. सब वही थे तो मई कैसे आ जाती.

लल्लू- तो फिर अभी कैसे आई आप.

लक्ष्मी- वो अभी तो भाभी ने भेजा है.

लक्ष्मी वापस से सरमाती हुई बोली.

लल्लू- मन नहीं था तो नहीं आती. अभी भी क्यू आई.

लक्ष्मी- नाराज मत होइए न प्लस…

लल्लू- मई क्यू नाराज होने लगा.

लक्ष्मी की आँखे भर आई. उसे लगा लल्लू सुच मई कही नाराज हो गया फिर. माँ बापू क गुजर जाने म बाद एक यही तो था जो उसे संभाला था. किस हालत मई सदी हुई और फिर भी उस सदी को भी मान क्र एक अच्छे पति की तरह उसे हमेसा मान सम्मान दिया है और उसने क्या की आज बुलाये और नहीं आ पाई.

लक्ष्मी को सोच सोच क्र रोना आ रहा था.

माँ क्या सब बताती थी की पति परमेश्वर होता है. उनकी हर बात माननी चाहिए और यहाँ मई क्या क्र दी. कितनी बुरी हु मई.

लल्लू जब देखा की काफी देर से लक्ष्मी कुछ बोल नहीं रही है तो वो सर उठा क्र लक्ष्मी को देखा.

" ओह्ह तेरी आप रो क्यू रही है. क्या हुआ."

लल्लू चौक क्र उठा और लक्ष्मी क आँशु को साफ क्र उसे गले से लगा लिया.

" Hayy...hayy मई मजाक क्र रहा था. प्लस रोना नहीं. मुझे कोई काम नहीं था. मई तो ऐसे hi वह तुम्हे परेशां करने गया था. प्लस प्लस रोना नहीं. देखो मेरी और देखो… ये गलत बात है. रोना बंद करो."

लल्लू लक्ष्मी को गले लगाए एक हाथ से उसका सर सहला रहा था तो दूसरे हाथ से पीठ पर थपकी दे क्र उसे चुप करने की कोसिस.

" माँ देखो भाई भाभी को रुला दिया है."

एक जोर की आवाज आई दरवाजे क बहार.

लल्लू और लक्ष्मी झटके से अलग हो गए जैसे बिजली का झटका लगा हो.

लक्ष्मी जल्दी से अलग हो क्र वाशरूम चली गई और वह अपने फेस को वाश करने लगी.

लल्लू तो सुरप्रीसेड रह गया.

तभी रूम मई माँ और काकी लोग आ गई.

" क्या हुआ. क्या किया है तूने. क्या कहा है बहु को." काजल आते hi बोली.

" मैंने क्या क्र दिया है. कुछ भी तो नहीं. उस नौटंकी की बातो मई आ गई." लल्लू नजर चुराता हुआ बोलै.

" बहु कहा है." तब तक ऋतू काकी बोली.

" वाशरूम गई है."

" ठहर जा तू. तुम्हे बड़ी सररत सूझ रहा है न अभी बताता हु मई." लल्लू गौरी को बोलै.

" मैंने जो देखा वही तो बोलै था." गौरी मासूम सा फेस बना क्र बोली.

" क्या देखि तुम." काजल पूछी गौरी से.

" हद्द है अब किसी को मेरे पर तो विस्वाश hi नहीं है." लल्लू बोल क्र वह कमरे से खिशाकने मई भलाई सामजी तो वो आराम से कमरे से बहार निकलने लगा.

" तू कहा चला यही खड़ा रह जब तक बहु नहीं आती." काजल आँख दिखा क्र बोली.

" तू बता क्या देखि थी." रागिनी काकी गौरी से बोली.

" मई भाभी को कुछ पूछने आई थी तो मई देखि की भाभी सुबक क्र दो रही थी और भाई बीएड पर बैठा हुआ था." गौरी बोली.

"ओह्ह गॉड, कितनी सफाई से झूठ बोलती है. किसी को भी यकीं हो जाएगा की ये सुच कह रही है." लल्लू सर पर हाथ मरता हुआ बोलै.

तभी लक्ष्मी भी वाशरूम से बहार आ गई.

" क्या हुआ था बीटा, तू सुच सुच बता. इसने क्या किया तेरे साथ. अभी मई इसकी तंग तोड़ती हु." माँ गुस्से मई मुझे देख क्र बोली.

" कुछ भी तो नहीं हुआ है माँ जी." लक्ष्मी सर झुका क्र बोली.

" देख तुझे डरने की कोई जरुरत नहीं है. हम है न. तू बता क्या किया है इस नालायक ने. अभी इसकी खबर लेती हु मई." ऋतू काकी बोली.

" कुछ भी नहीं हुआ है बड़ी माँ. दीदी ऐसे hi मजाक क्र रही है आप सब से." लक्ष्मी ऋतू काकी को बोली.

" नहीं बड़ी माँ, भाभी सुच मई रो रही थी. ये झूठ बोल रही है अभी." गौरी तभी लक्ष्मी की बात सुन्न क्र ऋतू को बोली.

माँ आगे आ क्र लक्ष्मी को हाथ पकड़ क्र अपने साथ अपने कमरे मई ले गई.

सब आग बरसाती आँखों से लल्लू को देखा और कमरे से बहार चले गए.
 
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