मर्द का बच्चा. अपडेट 83.
रात क खाने का समय.
घर क सभी मर्द आँगन मई खाने को बैठे थे.
दादू, तीनो काका, लल्लू क पापा और लल्लू सभी एक क़तर मई बैठे भोजन क्र रहे थे.
" आप सब से अगर काम नहीं पूरा हो रहा है तो दो चार और लोगो को रख लो काम करने क लिए. मेरा बीटा कल से कोई काम नहीं करेगा."
ऋतू अपने पति अनिल को खाने की थाली आगे बढ़ाते हुए बोली.
" ऐसा क्या हो गया आज." सुनील बोलै.
" क्या हो गया. आज ये नालायक सुबह उठ क्र खेत गया और उधर hi रह गया. कोई ये भी बताने वाला नहीं था की ये आखिर है कहा. क्र क्या रहा है. अँधेरा होने क बाद अभी थोड़ी देर पहले आया है. हम सब की क्या हालत हुई है आज वो हम hi जानते है."
ऋतू एक बार फिर अपना गुस्सा सब पर निकलती हुई बोली.
" नहीं नहीं, घर पर तो बताना था न बीटा. ये तो सुच मई बहुत गलत बात है." सुनील खाना खता हुआ बोलै.
" काका, मई तो रोज की तरह खेत गया था की छोटे काका आ क्र बोले की मुझे जरुरी काम आ गया है तो बाजार जा रहा हु. तुम खेत पर रह लो आज. काका खेत से hi बाजार चले गए थे जब की मई समझा की काका घर जाते हुए बता देंगे. बस यही बात हो गई." लल्लू अपना सर झुकाये हुए बोलै.
" दो मिनट क लिए आ क्र घर सब को बता hi देता तो क्या हो जाता. नालायक कही का. एक काम भी ढंग से नहीं हो पता तुम से." राम गुस्से मई बोलै.
लल्लू का खाना उठाया हाथ रुक गया अपने पापा की बात सुन क्र.
उसके आँखे नुम हो गई.
आखिर यहाँ उसकी गलती कहा से आ गई.
खैर जैसे तैसे वो उठे हाथ को मुँह तक ले जा क्र खाना जबरदस्ती चबाने लगा.
दिल क साथ तो अब पेट भी भर गया उसका अपने पापा की मीठी बाटे सुन क्र.
" बहुत बढ़िया है ये आप सब का. गलती खुद करो और दोष इस बच्चे पर दाल क्र खुद बच जाओ." रागिनी जो सब क लिए दही ले क्र आई थी वो अपने छोटे देवर की बात सुन क्र बोली.
ऋतू जो वही पास कड़ी थी वो भी रागिनी की बाते सुन क्र पहले जो राम को डाटने वाली थी तो चुप हो गई.
सब खाना खा क्र एक एक क्र दालान पर चले गए.
लल्लू भी जैसे तैसे खाना खाया जितना खाया गया और चाट पर जा क्र लेट गया.
आँखों से नींद कोशो दूर थी.
दिमाग मई कही न कही आप इ पिता की कही बाटे घूम रही थी. फिर सर झटक क्र आँखे बंद क्र सोने की कोसिस करने लगा.
सुबह अपने समय पर लल्लू की आँखे खुल गई.
उठ क्र अपने पसंदीदा जगह नदी पर पहुंच गया फिर फ्रेश हो क्र धयान मई बैठ गया.
रात से मन कुछ असंत था तो बार बार ध्यान टूट जा रहा था.
फिर वह से वापस घर आ गया.
घर आया तो अभी सिर्फ ऋतू काकी उठी हुई थी.
लल्लू काकी को पकड़ क्र वापस कमरे मई ले गया और साडी उठा क्र अपना मुँह उनके खजाने पर लगा दिया.
काकी कसमसा क्र रह गई.
पुरे सरीर मई मेक की लहार उठाने लगी थी.
आज कल कुछ ज्यादा hi खुजली होने लगी थी ऋतू को.
तो वो भी लल्लू क सर को अपने जांघो क बिच दबाये मजे से सिसकते हुए उसके बालो मई ऊँगली फिर रही थी.
रह रह क्र काकी क होठो से मजे की सिसकी निकल जाती जिसे वो रोकने की भरषक कोसिस क्र रही थी.
कुछ hi देर मई लम्बी लम्बी आहे भर्ती हुई ऋतू काकी लल्लू क मुँह को अपने अमृत रास से भर दी.
लल्लू पूरा रास चाट क्र काकी क साडी से अपना सर निकल लिया.
खड़ा हो क्र लल्लू काकी क एक चुकी को पकड़ क्र ब्लाउज क उप्पेर से मसलता हुआ अपने होठो को काकी क होठो पर लगा दिया.
दोनों दीवनदार एक दूसरे क होठो को खाने मई लग गए.
लल्लू एक हाथ से काकी की बड़ी बड़ी ठोस चुकी को मसलता हुआ दूसरे हाथ से अपना धोती खोल क्र अलग क्र लिया.
दोनों को जब दम घुटने लगा तो अलग हो क्र लम्बी लम्बी ससे लेने लगे.
लल्लू काकी को पकड़ क्र झुका दिया.
ऋतू बीएड पाकर क्र झुक गई.
लल्लू पीछे आ क्र साडी काकी क कमर पर क्र दिया और ऋतू काकी की बड़ी सी 38 की मटके को मसलता हुआ अपने मुसल को उनके रास बहती नहर मई लगा दिया.
अपने पौरोति की तरह फुले हुए छूट क मुँह पर लल्लू क गर्म लैंड को फील क्र मजे से आँखे बंद की की ऋतू ने.
सिसकते हुए उसकी छूट मई तो जैसे कोई बढ़ आ गई हो.
लल्लू काकी क मटकी को सहलाता मसलता पहले अपने लैंड को थोड़ा काकी क छूट क मुँह पर रगड़ क्र गिला करने लगा.
हर गुजरते पल क साथ ऋतू मेक से बेहाल हो रही थी.
ऐसा लग रहा था जैसे पुरे सरीर मई छोटी छोटी पटाखे फुट रही हो.
तभी लल्लू एक जोर का धक्का लगा दिया.
उसका आधा लैंड ऋतू क छूट को फैलता हुआ अपना जगह बना लिया.
ऋतू क तो दर्द और मजे से मुँह खुल गई.
लल्लू तभी दूसरा झटका लगा दिया और उसका मुशल जार तक ऋतू क छूट मई….
" आह.. मर दिया हरामी. आराम से क्र न. कही भागी नहीं जा रही."
" कितनी गरम है तू. दिन पर दिन जैसे और गर्मी बढ़ती जा रही है तेरे अंडर."
" तो खूब थोक थोक क्र अपना पानी डाला क्र मुझ मई ताकि मेरी गर्मी काम रहे."
" मेरा बस चले तो मई तो निकलू hi न तेरे छूट से अपना लौड़ा. Ha...aayy.. कितना मजा देती है tu….aahh…" लल्लू सिसकता हुआ कमर हिला रहा था.
निचे झुकी हुई काकी भी अपना कमर हिला क्र लल्लू क ताल से ताल मिला रही थी.
" ऐसे hi थोक जोर से. हैयय ये निगोड़ी बहुत सताती है… आअह्ह्ह… हहहयययय… maaa…kahi मई मजे से मर hi न जाऊ."
" ऐसे कैसे मरने दूंगा. अभी तो बहुत मजे लेना बांकी है मेरी जान. क्या मटकी जैसी हैंड है तेरी. आज तो दोनों को थोम थोक क्र भरता बना दूंगा."
" ऊऊह्ह्ह्ह.. .इस्सस.. और tej..haa..aise h..hii.. orrr...orrr... orrr….tejjj. mai...aane...walllii.. hu...hayyyyy"
काकी कराहती हुई जहर गई.
लल्लू उसी समय अपना मुशल निकल क्र ऋतू क जान मरी मटकी मई एक hi बार मई घुसा दिया जार तक.
अभी अभी मजे से ऋतू निकली भी नहीं थी की इतनी hi तेज दर्द पुरे बदन मई जैसे बिजली की तरह दौड़ गई.
" मर डाला कमीने ne...hayyy nikal...harami...mar dala...hayyy ाःह."
लल्लू तो पेलमपेल लगा हुआ था काकी क कमर को पकड़ क्र.
" क्या काकी कितनी प्यारी हो तुम. मजा आ गया."
हाथ बढ़ा क्र काकी क दोनों दूध को निचोड़ता हुआ लम्बे लम्बे धक्के लगाने लगा.
" थोड़ा सैश तो ले लेने देता कमीना. मैंने क्या मन किया था. Aahhh...aise...hii...jor से.. मई आयी रे मा…."
काकी एक बार फिर मजे से कराहती हुई झरर गई.
लल्लू एक हाथ की तीन ऊँगली ख्हाछह से काकी क बुर मई घुसा दिया.
" मुआए मारर्र क्र hi मानेगा. हैयय मर्डर डाला."
लल्लू ताबरतोड़ धक्के लगाए जा रहा था और अपने तीन ऊँगली से काकी की छूट को भी ढीली करता जा रहा था.
वो भी अब नजदीक hi था अपने मंजिल क.
कुछ देर मई hi फिर दोनों आहे भरते हुए साथ साथ अपना गर्मी निकल दिए.
लल्लू थक क्र काकी क उप्पेर hi लुढ़क गया.
काकी भी बीएड पर लुढ़क गई.
थोड़ी देर बाद जब दोनों की सषे सम्भली तो दोनों उठ क्र अपने अपने कपडे पहन क्र सही से कमरे से बहार निकल आये.
बहार अभी भी सभी नहीं उठे थे.
वह से लल्लू अपने कमरे की और चल दिया जहा दरवाजा बंद था.
वापस आ क्र लल्लू रसोई मई घुस गया जहा वो सब क लिए चाय चढ़ा दिया.
तब तक माँ और रागिनी काकी भी उठ गई.
माँ लल्लू को रसोई मई देख क्र उधर hi आ गई.
" क्या बात है. तू तो सुच मई डेली चाय बनाने लगा सब क लिए. मुझे उठा देता."
मालललू क गाल पर किश करती हुई बोली.
" क्या हो गया फिर. मई थोड़ा जल्दी उठ गया था और आप लोग पुरे दिन घर का काम क्र क थक जाती हो. इस लिए नहीं उठाया." लल्लू माँ को गले लगता हुआ बोलै.
" चल तू बहार बैठ मई लती हु तेरे लिए चाय." माँ लल्लू से अलग होती हुई बोली.
" आप जाओ और जा क्र फ्रेश हो जाओ. तब तक चाय बन क्र तैयार हो जाएगी." लल्लू माँ को पकड़ क्र वाशरूम की और प्यार से धकेलता हुआ बोलै.
Kajal(MAA) भी फिर फ्रेश होने को चली गई.
थोड़ी देर मई चाय बन क्र तैयार हो गया तो लल्लू सब से पहले शालिनी काकी को उठा क्र चाय दिया.
" आह मेरे लाल ऐसा सुख तो मेरी बहुओ क आने पर भी कभी नहीं मिला. युग युग जी मेरे लाल." शालिनी काकी लल्लू को चाय बना क्र लता देख बोली.
फिर ऋतू काकी और रागिनी काकी भी आ गई थी फ्रेश हो क्र तो इन दोनों को दिया लल्लू ने चाय.
दोनों काकी लल्लू क पुरे गाल को चुम चुम क्र गिला क्र दी ख़ुशी मई.
लल्लू भी पहले ऋतू काकी को तो खुराक दे hi दिया था अब इसी बहाने से थोड़ा रागिनी काकी को भी मजे से दिया.
फिर लल्लू चाय ले क्र अपनी जानेजिगर, जानबहार, गुलगुलजार क कमरे की और बेहद गया.
" रहने दे बीटा. महारानियो को सोने दे उठ क्र खुद गर्म क्र पियेंगी ये सब अपना चाय." ऋतू काकी गुस्से से बोली.
" काकी अब जब मैंने बना hi दिया है तो पि लेने दो मेरे दीदियो को भी."
" है है और सर पर चढ़ा ले सब को. अपने ससुराल मई भी ऐसे hi सब 10 बजे तक सोई रहेंगी और इनका खशम इन्हे ऐसे hi चाय बना क्र पिलायेगा."
तब तक लल्लू चाय ले क्र अपने बहनो क कमरे तक जा पंहुचा.
दरवाजा मीनू ने खोला था.
लल्लू सभी का चाय मीनू दीदी को पकड़ा दिया. फिर वह से ऐसे hi दालान पर भी दे आया सभी को चाय.
तब तक माँ भी फ्रेश हो क्र आ गई थी तो वो अपना और लल्लू का चाय ले क्र आँगन मई हो खटिया पर आ गई.
तब तक लल्लू भी सब को चाय बाँट क्र वापस आ गया था.
फिर सभी वही आँगन मई बैठ क्र चाय पिए.
" आज से तू कही खेत वेट नहीं jaiga..jis को जरुआत हो वो अपना मजदुर लगा क्र करेगा काम." ऋतू काकी बोली.
" है बीटा, तुम्हे नहीं पता जब तक बाबू जी नहीं बताये थे मेरी क्या हालत हो गई थी. मुझे तो इतना दर बैठ गया था दिल मई की अगर और थोड़ी देर होती तो मई दर से hi मर जाती." रागिनी काकी डबडबाई आँखों से बोली.
लल्लू आगे बढ़ क्र काकी क आँखों को चुम लिया.
" ऐसा नहीं बोलते काकी. आप को मेरे रहते कुछ नहीं होगा. थोड़ी सी ग़लतफ़हमी हो गई थी नहीं तो मई आ क्र बता जाता सब को."
लल्लू रागिनी काकी को गले से लगाए हुए बोलै.
" भाई बहुत बढ़िया चाय थी. आज तो मेरा दिन hi बन गया. तुम्हारे हाथ की चाय पि क्र." गौरी आ क्र पीछे से लल्लू को गले लगाती हुई बोली.
" है रे नासपीटी, तुम सब ऐसे hi कुम्भकरण की तरह सोई रह और ये सब क लिए चाय बनता फायर." शालिनी काकी पीछे से आ क्र उसकी छोटी पकड़ क्र खींचती हुई बोली.
" आह माँ, माँ दर्द क्र रहा है. प्लस छोड़ दो. मेरे bal...aahhh माँ प्लस छोड़ दो न."
गौरी कुछ सुच कुछ नाटक करती बोली.
लल्लू आगे बढ़ क्र अपनी प्यारी नटखट बहन को गले लगा क्र अपनी काकी क हाथ से उसकी छोटी को छुड़ा दिया.
" काकी जब तक इन सभी का ये भाई जिन्दा है आप सब मेरी बहनो को काम क लिए मत कहिये." लल्लू गौरी दीदी क गाल को चुम क्र बोलै.
" है जब ब्याह क्र अपने ससुराल जाएगी तब तुम्ही जा क्र इसका सारा काम करना घर का. ककी ये लोग तो सीखेंगी भी नहीं इस तरह."
" मई अपनी बहन का सदी ऐसे घर मई करूँगा जहा इसे कोई काम न करना पड़े. ये बस महारानी बन क्र रहेगी."
" है चढ़ा दे चने क झाड़ पर." रागिनी काकी बोली.
यु hi फिर चाय क बाद सब अपने कमरे से निकल क्र घर क कामो मई लग गए.
लल्लू भी आँगन से निकल क्र दालान पर आ गया.
दादू स्नानं और पूजा करने क बाद बहार टहल रहे थे.
लल्लू- दादू क्या क्र रहे हो.
दादू- बीटा, थोड़ा धुप लगा रहा हु सरीर मई. वैसे अब क्या प्लान है तुम्हारा. घर से तो हुक्म आया है की अब तुम कोई काम नहीं करोगे खेत सब का.
लल्लू- दादू ऐसा कुछ नहीं है. वो तो रात सब गुस्से मई थे इस लिए ऐसा बोल दिए.
दादू- देख ले बीटा. बाद मई मुझे मत फसा देना. भले hi घर बैठा रह. ये लोग अपना संभल लेंगे.
लल्लू- कुछ नहीं होता दादू. कल बस सब थोड़ा गुस्सा थे. मई मन लूंगा सब को.
थोड़ी देर और दादू से बात करने क बाद लल्लू आँगन आ गया.
लक्ष्मी और भाभी सभी बहनो क साथ घर क कामो मई लगी हुई थी.
लल्लू जा क्र रसोई मई देखा तो लक्ष्मी वही काम क्र रही थी.
लल्लू थोड़ी देर खरा रहा वह.
सब से बचा क्र आँखों से इसरा किया लक्ष्मी को.
लक्ष्मी सरमाती हुई मन क्र दी.
लल्लू ने फिर से इसरा किया.
" आप क्या क्र रहे हो यहाँ. सुबह की चाय बना दी थी न आप ने. बस हो गया आप का कोटा पूरा. अब आप बहार जाओ. हम सब क्र रहे है काम."
ये सैतान गौरी थी जो लल्लू को इसरा करते देख ली थी. वो मजे ले रही थी लल्लू से.
देख तो बांकी लोग भी लिए थे लेकिन सब चुप चाप मुस्कुराते हुए मजे ले रहे थे लेकिन इस सैतान की नानी को तो लल्लू की तंग खींचना था.
लल्लू थोड़ी देर वही चक्कर लगता रहा लेकिन जब लक्ष्मी नहीं बोली वह से तो लल्लू वापस वह से अपने कमरे मई आ क्र लेट गया.
" जाओ बहभी देख आओ नहीं तो आप क पिया नाराज हो जाएंगे." मीनू लल्लू क जाने क बाद बोली.
" नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है." लक्ष्मी सरमाती हुई बोली.
" मन तो आप का भी क्र रहा होगा. जाओ मिल लो." कोमल मीनू क हाथ पर ताली मरती हुई बोली.
लक्ष्मी शर्मा क्र रह गई.
" चला जा मिल ले. ये लोग ऐसे hi तेरा मजाक बनाएंगे. कौन से इनके खसम से मिलने जा रहे हो. जा हम लोग तब तक क्र रहे है यहाँ का काम." भाभी जबरदस्ती लक्ष्मी को भेज दी.
लक्ष्मी सरमाती हुई कमरे मई आई तो लल्लू बीएड पर लेता हुआ था.
लक्ष्मी को देख क्र लल्लू उठ क्र उसके पास गया और दोनों हाथ पकड़ क्र बीएड पर बैठा दिया.
लल्लू- क्र दिया न सब क सामने मेरे इज्जत की ऐसी तैसी.
लक्ष्मी- मई क्या करती. सब वही थे तो मई कैसे आ जाती.
लल्लू- तो फिर अभी कैसे आई आप.
लक्ष्मी- वो अभी तो भाभी ने भेजा है.
लक्ष्मी वापस से सरमाती हुई बोली.
लल्लू- मन नहीं था तो नहीं आती. अभी भी क्यू आई.
लक्ष्मी- नाराज मत होइए न प्लस…
लल्लू- मई क्यू नाराज होने लगा.
लक्ष्मी की आँखे भर आई. उसे लगा लल्लू सुच मई कही नाराज हो गया फिर. माँ बापू क गुजर जाने म बाद एक यही तो था जो उसे संभाला था. किस हालत मई सदी हुई और फिर भी उस सदी को भी मान क्र एक अच्छे पति की तरह उसे हमेसा मान सम्मान दिया है और उसने क्या की आज बुलाये और नहीं आ पाई.
लक्ष्मी को सोच सोच क्र रोना आ रहा था.
माँ क्या सब बताती थी की पति परमेश्वर होता है. उनकी हर बात माननी चाहिए और यहाँ मई क्या क्र दी. कितनी बुरी हु मई.
लल्लू जब देखा की काफी देर से लक्ष्मी कुछ बोल नहीं रही है तो वो सर उठा क्र लक्ष्मी को देखा.
" ओह्ह तेरी आप रो क्यू रही है. क्या हुआ."
लल्लू चौक क्र उठा और लक्ष्मी क आँशु को साफ क्र उसे गले से लगा लिया.
" Hayy...hayy मई मजाक क्र रहा था. प्लस रोना नहीं. मुझे कोई काम नहीं था. मई तो ऐसे hi वह तुम्हे परेशां करने गया था. प्लस प्लस रोना नहीं. देखो मेरी और देखो… ये गलत बात है. रोना बंद करो."
लल्लू लक्ष्मी को गले लगाए एक हाथ से उसका सर सहला रहा था तो दूसरे हाथ से पीठ पर थपकी दे क्र उसे चुप करने की कोसिस.
" माँ देखो भाई भाभी को रुला दिया है."
एक जोर की आवाज आई दरवाजे क बहार.
लल्लू और लक्ष्मी झटके से अलग हो गए जैसे बिजली का झटका लगा हो.
लक्ष्मी जल्दी से अलग हो क्र वाशरूम चली गई और वह अपने फेस को वाश करने लगी.
लल्लू तो सुरप्रीसेड रह गया.
तभी रूम मई माँ और काकी लोग आ गई.
" क्या हुआ. क्या किया है तूने. क्या कहा है बहु को." काजल आते hi बोली.
" मैंने क्या क्र दिया है. कुछ भी तो नहीं. उस नौटंकी की बातो मई आ गई." लल्लू नजर चुराता हुआ बोलै.
" बहु कहा है." तब तक ऋतू काकी बोली.
" वाशरूम गई है."
" ठहर जा तू. तुम्हे बड़ी सररत सूझ रहा है न अभी बताता हु मई." लल्लू गौरी को बोलै.
" मैंने जो देखा वही तो बोलै था." गौरी मासूम सा फेस बना क्र बोली.
" क्या देखि तुम." काजल पूछी गौरी से.
" हद्द है अब किसी को मेरे पर तो विस्वाश hi नहीं है." लल्लू बोल क्र वह कमरे से खिशाकने मई भलाई सामजी तो वो आराम से कमरे से बहार निकलने लगा.
" तू कहा चला यही खड़ा रह जब तक बहु नहीं आती." काजल आँख दिखा क्र बोली.
" तू बता क्या देखि थी." रागिनी काकी गौरी से बोली.
" मई भाभी को कुछ पूछने आई थी तो मई देखि की भाभी सुबक क्र दो रही थी और भाई बीएड पर बैठा हुआ था." गौरी बोली.
"ओह्ह गॉड, कितनी सफाई से झूठ बोलती है. किसी को भी यकीं हो जाएगा की ये सुच कह रही है." लल्लू सर पर हाथ मरता हुआ बोलै.
तभी लक्ष्मी भी वाशरूम से बहार आ गई.
" क्या हुआ था बीटा, तू सुच सुच बता. इसने क्या किया तेरे साथ. अभी मई इसकी तंग तोड़ती हु." माँ गुस्से मई मुझे देख क्र बोली.
" कुछ भी तो नहीं हुआ है माँ जी." लक्ष्मी सर झुका क्र बोली.
" देख तुझे डरने की कोई जरुरत नहीं है. हम है न. तू बता क्या किया है इस नालायक ने. अभी इसकी खबर लेती हु मई." ऋतू काकी बोली.
" कुछ भी नहीं हुआ है बड़ी माँ. दीदी ऐसे hi मजाक क्र रही है आप सब से." लक्ष्मी ऋतू काकी को बोली.
" नहीं बड़ी माँ, भाभी सुच मई रो रही थी. ये झूठ बोल रही है अभी." गौरी तभी लक्ष्मी की बात सुन्न क्र ऋतू को बोली.
माँ आगे आ क्र लक्ष्मी को हाथ पकड़ क्र अपने साथ अपने कमरे मई ले गई.
सब आग बरसाती आँखों से लल्लू को देखा और कमरे से बहार चले गए.