Kamvasna - Mard ka bachcha - Page 12 - SexBaba
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Kamvasna - Mard ka bachcha

मर्द का बच्चा. अपडेट 64.

टनल से मिले उस पत्ते और जिस बॉक्स मई वो था दोनों टेबल पर रखे वो बूढ़ा अर्चयोलॉजिस्ट उसका अध्ययन क्र रहा था.

काफी देर उसका अध्ययन करने क बाद उस बूढ़े क चेहरे पर चमक आ गई.

बूढ़ा- हाहाहाहा, अब मई सर्व शक्तिमान बन जाऊंगा. मई किसी सहारे का मोहताज नहीं रहूँगा. मई अमर हो जाऊंगा. वहहह, मई अब अपनी सभी हसरते पूरी करूँगा. हाहाहाहा….

वो बूढ़ा पागल हो गया था. वो व्हील चेयर पर बैठा पुरे कमरे मई घूमता पागलो की तरह हरकत क्र रहा था.

थोड़ी देर मई जब उसका पागलपन संत हो गया तो उसने अपने उसी गार्ड को बुलाया जिस ने बॉक्स ला क्र दिया था.

बूढ़ा- इंडिया जाने की तयारी करो. हम सब कल इंडिया जा रहे है

वो गार्ड वह से चला गया.

इधर टनल से निकल क्र वो सिक्योरिटी हेड वह क ऑफिस मई गया जहा वो पीटर और गार्ड्स सुपरवाइजर की मौत का वीडियो देखा.

वो वह से बहार निकल क्र अपने कुछ सपकल गार्ड्स क साथ उस जगह पंहुचा जहा वीडियो मई दो नकाबपोश को सब को मरते देखा था.

हेड- सब फ़ैल जाओ और यहाँ देखो कुछ सुराग मिलता है क्या उस दिन क घटना से संभंधित.

सभी गार्ड्स वह उस उजर जंगल जैसे पहाड़ी पर फ़ैल गए और देखने लगे इधर उधर लेकिन उन सब को कुछ भी नहीं मिला.

फिर सभी वह से जंगल पर क्र रोड पर आ गए.

हेड- ये इलाका ज्यादातर सुनसान hi रहता है. एक्का दुक्का वहां hi चलता है यहाँ.

तो हम लोग दो हिस्से मई बात जाते है. आधा आगे को जा क्र कल हुए हादसे क समय यहाँ से कोई गाड़ी गई हो या और कोई ऐसी बात जिस पर लोगो का ध्यान गया हो. वो ढूंढेंगे. एक और बात यहाँ आस पास कोई कैमरा लगा हो कही तो उस की फुटेज भी मिल सकता है. इस से हमारा काम आसान हो जाएगा.

सभी फ़ैल जाओ और लग जाओ अपने काम पर.

ऐसे hi उन लोगो ने किया और किस्मत से आगे क एक कसबे मई एक शॉप पर बहार कैमरा लगा मिल गया जिस मई एक ब्लैक कार जाता हुआ दिख रहा था.

उन लोगो ने तुरंत उसका नंबर ले क्र आगे बॉस को भेज दिया.

बॉस उस कार क मालिक का एड्रेस निकल क्र इन्हे फॉरवर्ड क्र दिया.

सेक्. हेड अब उस कार क मालिक क एड्रेस पर उसका पता करने चल दिया.

वह ढूंढते हुए वो लोग अर्चयोलॉजिस्ट क ठिकाने पर पहुंच गए.

सेक्. हेड अपने कार से ड्रोन निकल क्र उस से जब देखा तो उसे वह बहुत टाइट सिक्योरिटी दिखा.

वो तुरंत ये सुचना आगे बड़ा दिया.

सेक्. हेड- बॉस लगता है हम सही जगह पर है. यहाँ मैंने अपने एक आदमी को भेजा था ऐसे hi भटकता हुआ राहगीर बना क्र. और फिर मैंने ड्रोन से भी देखा है अंदर का हिस्सा. बहुत टाइट सिक्योरिटी है यहाँ की. यहाँ जरूर कुछ ऐसा हो रहा है जिस कारन से इन्हे इतनी सिक्योरिटी की जरुरत है. दूसरा यहाँ जिसका ऑफिस है न वो धरती क निचे खुदाई मई निकले चीजों का hi अध्ययन करता है. या कहे तो पुराणी हिस्ट्री से रिलेटेड अर्चयोलॉजिस्ट का ऑफिस है यहाँ.

बॉस- उधर से. तो दिक्कत क्या है. अंडर जा क्र पता करो. क्या ले गया है वो. वो सामान तो के hi लेना साथ hi उस अर्चेओलॉजिस्ट को भी घसीट क्र लाना.

बॉस तो फरमान सुना दिया लेकिन यहाँ कितनी टाइट सिक्योरिटी है ये उसे कहा पता था.

फिर इन लोगो ने अपने कुछ और साथियो को बुलाया कुछ सपकल वेपन्स क साथ.

सब तयारी हो जाने क बाद उस सेक्. हेड ने एक बार फिर से अंडर उस पुरे एरिया का जायजा लिया ड्रोन से.

हर जगह हरेक बिंदु को समझने क बाद उस ने अपने साथियो को प्लान बताया.

अब इन लोगो का सीधा हमले की तयारी सुरु हो गई.

चार ड्रोन मई टाइम बम लटका क्र उसे अंदर चार दिशाओ मई भेज दिया. सभी बम मई एक मिनट्स का फर्क था. मतलब पहले बम क फटने क एक मिनट्स क बाद दूसरा फिर उसके एक मिनट बाद तीसरा और फिर ऐसे hi चौथा बम फटना था.

ड्रोन को अंडर भेज दिया गया.

सब अपने हथियार से लैश थे.

पहला बम फटा तो आवाज सुन क्र सभी उस और भागने लगे. अफरातफरी मच गई वह. तभी दूसरे दिशा मई भी एक फटा. आधे लोग वह दूसरी और भागे.

इधर ये लोग गेट से कुछ दूर खड़े ड्रोन से सब कुछ देख रहे थे.

जैसे hi गेट पर गार्ड्स की संख्या पहले ब्लास्ट मई काम हुई ये लोग वह से चल दिए गेट की और.

दूसरे ब्लास्ट मई और भी गार्ड्स काम हो गया गेट पर.

अभी गेट और सिर्फ दो गार्ड्स रह गए थे.

ये लोग जाते hi दोनों को शूट क्र दिए और गेट कूद क्र अंडर..

अंदर जा क्र पहले इन लोगो ने गेट खोल दिया फिर इन लोगो ने कुछ अपने गन्स से तो कुछ छुपे हुए गार्ड्स को ड्रोन से मर गिराया.

सारा मैदान अंदर जगह जगह लसो से पता हुआ था. इन लोगो ने काम से काम तीस गार्ड्स को वह मर गिराया था.

बहुत लम्भा चौड़ा एरिया था ये और उसके लास्ट मई वो बिल्डिंग बना हुआ था.

ये सभी बिल्डिंग मई घुश क्र वह क भी सात गार्ड्स का काम रामत क्र दिए.

अंत मई ये सभी पहुंचे उस बूढ़े क ऑफिस क सामने.

एक गार्ड आगे बढ़ क्र सतर्क हो क्र गेट खोला लेकिन वो लॉक था.

सेक्. हेड ने कुछ इसरा किया.

वह उस गेट क लॉक पर बम बांध क्र उस गेट को hi ुर्रा दिया.

अंडर व्हील चेयर पर एक बूढ़ा बैठा था साथ मई उसके दो बॉडीगार्ड भी थे आटोमेटिक गन क साथ.

दोनों और से गोलिया चलनी सुरु हो गया.

छोटी सी ऑफिस थी कब तक बचते वो लोग. अंत मई सेक्. हेड ने दोनों बॉडीगार्ड को मर दिया और उस बूढ़े क पास जा क्र एक आधी टूटी चेयर पर बैठ गया.

सेक्. हेड- जीने की तमन्ना है तो हमे चुप चाप से वो दे दो जो मेरे गार्ड्स को मर क्र टनल से छुड़ाए हो.

बूढ़ा- मैंने कुछ नहीं छुड़ाया है. मेरे पास ऐसा कुछ नहीं है जो तुम्हारे काम का हो.

सेक्. हेड- तो तुम ने सोच लिया है की तुम्हे मरना है तो हम क्या क्र सकते है.

उसने अपनी गैन निकली और उस बूढ़े क पेअर मई गोली मर दी.

बूढ़ा दर्द से चिल्लाने लगा.

फिर उस सिक्योरिटी हेड ने बन्दुक की नाल बूढ़े क पेअर क जख्मी जगह पर उस अंदर घुसा दिया.

सेक्. हेड- क्यू अब याद आया कुछ. या अभी और खातिरदारी करना पड़ेगा. मरने तो हम देंगे नहीं तुम्हे.

लेकिन वो बूढ़ा भी सोच रखा था की नहीं बताना है और उसमे नहीं बताया.

सिक्योरिटी हेड ने गैन निकल क्र उसके दूसरे पेअर का निशाना लगा लिया.

हेड- तुम तो वैसे भी व्हील चेयर पर hi हो अगर तुम्हारे दोनों पेअर बेकार भी हो जाएंगे तो क्या होगा.

फिर उसने बूढ़े क दूसरे पेअर मई भी गोली मर दी.

बूढ़ा दर्द से बेहोश हो गया था.

सेक्. हेड- इसे होश मई लाओ.

उसने अपने साथियो से कहा.

जल्दी से बूढ़े को होश मई लाया गया.

फिर से एक बार टार्चर का सिलसिला सुरु हुआ.

कभी उसके जख्मो को कुरड़ा जाता तो कभी उस मई मिर्च डाला जाता.

वो बूढ़ा भी आखिर इन्शान hi था. कब तक सहता.

फिर उस ने सब बता दिया. कैसे क्या हुआ और कहा है वो दोनों सामान.

इन लोगो ने सभी सामान ले क्र उस बूढ़े क साथ वह से निकल गए.

लल्लू वापस कमरे मई आ क्र लक्ष्मी क बगल मई सो गया.

सुबह दोनों को एक hi समय आगे पीछे नींद खुली.

पहले लक्ष्मी उठी. उसने अपने आप को देखा तो वो पूरी नंगी बीएड पर लेती हुई थी.

साथ मई लल्लू भी नंगा hi था. लक्ष्मी लल्लू क बहो मई उस क साइन से लगी हुई सो रही थी.

लल्लू का लौड़ा अभी सुबह क कारन खड़ा लक्ष्मी क जांघो क बिच घुसा हुआ था. जो लक्ष्मी छूट से ठोकर मर रहा था.

लक्ष्मी आहिस्ता से लल्लू का हाथ हटा क्र उठ बैठी.

तभी लल्लू का भी नींद खुल गया लेकिन वो अपनी आँख बंद किये हुए लेता रहा.

लक्ष्मी उठ क्र लल्लू क होठो पर एक किश की और फिर बीएड से उतर क्र अपने निघ्त्य समेत क्र वाशरूम चली गई.

लक्ष्मी क वाशरूम जाते hi लल्लू भी आँख खोल दिया.

थोड़ी देर लेते रहने क बाद वो उठने वाला था की तभी लक्ष्मी वाशरूम से बहार आ गई.

अभी भी वो नंगी hi थी.

वो अलमारी खोल क्र उस मई से अपना कपडा निकल रही थी.

लक्ष्मी का पीठ अभी लल्लू की तरफ था.

लल्लू चुपके से बीएड से उतर का पीछे से जा क्र लक्ष्मी को अपने बहो मई ले लिया.

लक्ष्मी दर से कम्प गई. जब उसे एहसास हुआ की लल्लू है तब जा क्र वो संत हुई.

लल्लू को अपने बदन से धकेलती लक्ष्मी वापस उसे बीएड पर बैठा दी.

लल्लू लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र उसे अपने गॉड मई बैठा लिया.

लक्ष्मी को अपने फुले हुए गांड क निचे लल्लू क गर्म तने हुए लैंड का एहसास हो रहा था.

लक्ष्मी की छूट एक बार फिर से गीली होने लगी.

लक्ष्मी- सुबह हो गया है. सब उठ गए होंगे. आप भी जा क्र फ्रेश हो जाइये.

लल्लू- एक बार मेरा मूड फ्रेश क्र दीजिये न. फिर मई वाशरूम चला जाऊंगा.

लक्ष्मी- मूड फ्रेश मतलब.

लल्लू- आप को इस रूप मई देख क्र मुझे कुछ कुछ होने लगा है. उसे संत क्र दीजिये न.

लक्ष्मी- नहीं अब कोई मस्ती नहीं. अब पहले जा क्र फ्रेश हो क्र आइये.

लल्लू- बड़े सयाने कह रखे है की घी जब सीधी ऊँगली से न निकले तो ऊँगली को टेढ़ी क्र क घी निकल लेना चाहिए.

लक्ष्मी- K..ky..kya m.a.t.l.a.b.

लल्लू- मेरी बुलबुल. मतलब ये की अब मई ऊँगली टेढ़ी करने वाला हु.

लक्ष्मी- Aap..aap ऐसा कुछ… नहीं करेंगे

लल्लू- क्यू नहीं करूँगा. जब अभी मई गौण मई था तब भी तरप रहा था. उस समय सजह आता है की आप नहीं थी मेरे पास लेकिन अब क्या दिक्कत है. मई अब क्यू तरप रहा हु. आप को मेरी कोई फिक्र नहीं है.

लक्ष्मी झट से लल्लू क होठो पर अपना हाथ रख दी.

लक्ष्मी- ऐसा न कहिये. आप की दासी हमेशा आप की सेबा मई हाजिर है. लेकिन अभी घर मई गेस्ट आये हुए है. हम लेट जाएंगे निचे तो लोग क्या कहेंगे. फिर आप को सुबह आईएनएस किरण क पास भी तो जाना है.

लल्लू- मैडम किरण क पास इतनी सुबह कहा जाऊंगा. वो मुझे सुबह की चाय पर नहीं बुलाया है. बल्कि ऑफिस जान है उसके और ऑफिस टाइम 10 बजे से सुरु होता है.

लक्ष्मी- यहाँ भी तो कितने मेहमान है. बुआ है पापा है. युसूफ अंकल और उनकी पूरी फॅमिली है.

लल्लू- बस बस… आप ऐसा कीजिये यहाँ बहुत साधु बाबा रहते होंगे. बहुत सिद्ध तीर्थ स्थान है ये जा किसी बाबा से मंत्र वगैरह ले क्र सन्यासी बन जाइये और मुझे भी बना दीजिये

लल्लू उठ क्र वाशरूम चला गया.

वह से सुबह का कार्य निपटा क्र वापस आया तो लक्ष्मी बीएड पर वैसे hi बैठी हुई रो रही थी.

लल्लू अपने बैग से कपडा निकल क्र पहन लिया और दरवाजा खोल क्र बहार आ गया.

बहार अभी मां और युसूफ अंकल ड्राइंग रूम मई बैठे हुए थे.

लल्लू भी जा क्र उनके पास बैठ गया.

थोड़ी देर मई hi सकीना आंटी चाय ले क्र आई और तीनो को दे दी.

सभी चाय पिटे हुए बाटे करने लगे.

लल्लू- अंकल नींद तो अच्छी आई न यहाँ.

युसूफ- बीटा हम लोग तो यहाँ आते hi रहते थे पहले भी. ये हमारा घर है. हमे बहुत अच्छी नींद आई. आप बताओ. आप पहली बार यहाँ सोये हो. पिछली बार आप को मौका hi नहीं मिला था यहाँ सोने का. आप की रात कैसी रही.

लल्लू- मेरी भी अच्छी थी अंकल.

लल्लू मुसकुडता हुआ बोलै.

फिर एक एक क्र घर क सभी उतने लगे और निचे ड्राइंग रूम मई आने लगे.

लल्लू थोड़ी देर वह बैठा फिर बहार आ क्र मोबाइल से घर मई सब से बात करने लगा.

बात करते हुए hi काफी समय निकल गया.

गौण मई राघव भैया और भाभी भी वापस आ गए थे अपने घर से.

लल्लू वह से फ्री हो क्र अंडर आ गया और फिर तैयार हो क्र चला गया किरण से मिलने को.

आज वो अकेला hi गया था.

ैप ऑफिस मई किरण आ गई थी. लल्लू क वह जाते hi दोनों लल्लू क कार से hi सेंट्रल जेल गए.

वह क जेलर से मिल क्र उसके साथ तीनो उस बैराज मई जा पहुंचे जहा लक्ष्मी क चाचा को रखा गया था.

लल्लू- क्या यही जगह है वो.

जेलर- है यही इसी बैराज मई था वो. साथ मई उसका बीटा और दो कैदी और भी था.

लल्लू- कैसे हुआ था ये हादसा.

जेलर- कुछ पता hi नहीं चला कैसे हुआ. अभी इसकी जाँच चल रही है.

लल्लू- उसने अपने बेटे को मर दिया अपने कुर्ते को गले से लपेट क्र ये तो समझ आता है लेकिन वो इस बैराज से कैसे निकला और फिर इतने बड़े जेल से कैसे बहार गया वो.

जेलर- यही तो समझ नहीं आ रहा है.

लल्लू- बांकी क दो कैदी जो थे उनका क्या रिकॉर्ड है. किस जुर्म मई कैद थे वो.

किरण- वो दोनों भी वैसे hi हैवान थे. एक ने 5 हत्या की थी तो दूसरा ड्रग्स का सप्लाई करता था.

लल्लू- उन दोनों क ठिकानो की जाँच करवाए थे.

किरण- है सब संभावित जगह की जाँच क्र लिए है.

लल्लू- मुझे क्या इन लोगो की एक कॉपी मिल सकता है.

किरण- सॉरी ये जरा मुश्किल काम है. ये हम बहार नहीं देते किसी को.

लल्लू- आप मामले की गंभीरता को नहीं समझ रही है सायद. बहुत संगीन मामला है ये जल्दी अगर नहीं पकड़ा गया ये सब तो बहुत कुछ बुरा हो सकता है वो भी सिर्फ मेरे फॅमिली क साथ hi नहीं बल्कि यहाँ क और भी लोग खतरे मई है. जिस हिसाब से आप ने इन लोगो क बारे मई बताई है. ये देख क्र तो यही लगता है.

किरण- बहुत जल्द वो सभी हमारे गिरफ्त मई होंगे. हम ने सभी वो रस्ते बंद क्र रखे है जो यहाँ सहर से बहार जाते है और हर उस जगह की जाँच की जा रही है जहा कही भी उन लोगो क होने की थोड़ी सी भी संभावना है.

फिर लल्लू जेलर को धन्यवाद् करता हुआ वह से किरण क साथ बहार आ जाता है.

किरण को उसके ऑफिस ड्राप क्र लल्लू वापस अपने घर आ जाता है.

कोई सुराग नहीं मिल रहा था जिस से की लल्लू कुछ कर सकता था. कुछ भी समझ नहीं आ रहा था अभी.

लल्लू वापस आ क्र उप्पेर अपने कमरे मई आ गया.

कमरा खली था.

लल्लू बीएड पर लेत क्र इन्ही सब चीजों क बारे मई सोचने लगा.

फिर लल्लू बहार आ क्र युसूफ को ढूंढने लगा.

पता चला की वो मां जी क साथ ऑफिस गया है.

लल्लू ड्राइंग रूम मई आ क्र बैठ गया.

काकी चाय ला क्र लल्लू को दी. लल्लू चाय पिता हुआ फिर से उन मुजरिमो क बारे मई सोचने लगा. किरण अगर कुछ मदद क्र देती तो लल्लू को आसानी होता लेकिन वो मन क्र चुकी है. अब जो करना था लल्लू को अपने डैम पर hi करना था.

फिर लल्लू सर झटक क्र वह से वापस अपने कमरे मई आ गया.

बुआ क कमरे से आवाज आ रही थी. लगता है आज बुआ क कमरे मई सब की महफ़िल जमी है. लल्लू वह जाना नहीं चाहता था क्यू की वह युसूफ की बेतिया भी होंगी.

लल्लू बीएड पर लेता हुआ था तभी लक्ष्मी कमरे मई आ गई.

लल्लू लक्ष्मी को देख क्र उठ क्र बैठ गया.

लक्ष्मी लल्लू क पास आ क्र कड़ी हो गई.

लल्लू- कहिये क्या हुक्म है.

लक्ष्मी रोटी हुई लल्लू क पेअर को पकड़ने लगी.

लल्लू झट से खड़ा हो गया.

लल्लू- क्या क्र रही हो ये सब. रो क्यू रही हो आप. अगर सुबह क लिए रो रही हो तो सॉरी. मई मजाक क्र रहा था.

लक्ष्मी- (रोटी हुई) N.n.nahi aap...aap m..m.mujh से n..n.naraj है.

लल्लू- मई कोई नाराज नहीं हु. प्लस ये रोना बंद क्र दो नहीं तो मई सुच मई नाराज हो जाऊंगा.

लक्ष्मी- म.. मुझे maaf...maaf k..ka..r दीजिये… आगे se….aa..p जो कहेंगे वो mai...man..manugi.

लल्लू- पहले अभी की बात मान लीजिये आप. ये रोना बंद कीजिये.

लल्लू लक्ष्मी को पकड़ क्र उसके आँशु को साफ़ क्र दिया. बहुत बुरा हु न मई. आप को रुला दिया. सॉरी.. मई मजाक क्र रहा था.

लक्ष्मी लल्लू क साइन मई मुँह छुपा क्र फिर से रोने लगी.

लक्ष्मी- me..mere...m.a.a..b.a.p.u m.u.jhe….mujhe...ch..chod..kr….chale...gye...plass….aap bhi….mujhe c..hh..o...d क्र मत चले जाना.

लल्लू- ओह्ह्ह गॉड.. मई मजाक क्र रहा था. प्लस.. आगे से मजाक भी नहीं करूँगा.

लल्लू लक्ष्मी क सर को उठा क्र फिर से उसके आँशु को साफ़ क्र दिया.

उसे अपने बहो मई ले क्र बीएड पर बैठ गया और उसे खींच क्र अपने गॉड मई बैठा लिया.

लल्लू लक्ष्मी को रोना बंद करने की भर सक कोसिस क्र रहा था लेकिन उसका रोना बंद hi नहीं हो रहा था.

लल्लू ने लक्ष्मी का सर उठा क्र उसके होठो को अपने होठो से बंद क्र दिया

थोड़ी देर उसे प्यार करने क बाद वो थोड़ी संभाली.

लल्लू- जाओ जा क्र पहले अपना चेहरा साफ़ क्र आओ आप.

देखो कैसे बंदरिया की तरह लग रही हो.

फिर लक्ष्मी उठ क्र वाशरूम जा क्र चेहरा धो क्र वापस आ गई.

लल्लू उसे फिर से पकड़ क्र अपने साथ बीएड पर बैठा लिया

लल्लू- और सब कहा है.

लक्ष्मी- बुआ क साथ गार्डन गई है.

लल्लू- आप नहीं गई.

लक्ष्मी- मई पीछे से आने को बोल दिया है.

लल्लू- फिर सब आप को धुंध रहे होंगे.

लक्ष्मी- नहीं ढूंढेंगे. उन्हें पता है की मई आप से मिलने आई हु.

लल्लू- वो कैसे.

लक्ष्मी- (सरमाती हुई) बुआ बोल रही थी. आप कमरे मई है ये उन्हें पता था. वो बोल रही थी की हम सब गार्डन जा रहे है तुम अपने पति क पास जाओ.

लल्लू- मतलब आप अपनी मर्जी से नहीं आई है.

लक्ष्मी- (घबरा क्र) N..a..h..I..nahi...mai...mai आना चाहती थी लेकिन सब को छोड़ क्र कैसे आती.

वो फिर रोने को तैयार हो गयी थी.

लल्लू- अरे बाप रे.. फिर से मत रोने लग्न. मुझे चुप करना नहीं आता है. बड़ी मुश्किल से अभी चुप कदया है मैंने तुम्हे.

लक्ष्मी- तो रुलाते क्यू है मुझे.

लक्ष्मी लल्लू क साइन मई मुक्का मरती बोली.

लल्लू लक्ष्मी को कास क्र अपने बहो मई भर लिया.

लल्लू- मतलब अभी हमारा रास्ता साफ़ है. यहाँ उप्पेर कोई नहीं है.

लक्ष्मी - ( शर्मा क्र) सकीना आंटी है न. इस तरफ का कमरा उनका hi है.

लक्ष्मी अपने दूसरी और का बगल वाले कमरे की और इसरा करती बोली.

लल्लू- उन्हें भी निचे भेज दो न.

लक्ष्मी- हुत्त बेसरम. मई क्या कहूँगी उन से.

लल्लू- कह देना की मेरे लल्लू पति का बड़ा मन कर रहा है. इस लिए आप एक चक्कर लगा क्र आओ.

लक्ष्मी लल्लू क साइन पर मुक्को की बरसात क्र दी.

लक्ष्मी- मुझे तंग करने मई आप को मजा आता है क्या. मई बात नहीं करुँगी आप से.

वो रूत क्र दूसरी और घूम क्र बैठ गई लल्लू से हूत क्र.

लल्लू खिशक क्र उस से जा क्र चिपक गया.

लल्लू- आप रूत गई है क्या. प्लस जरा बता दीजिये. मुझे पता नहीं चल रहा है.

लक्ष्मी- हहहह…

लक्ष्मी अपना बल झटकती हुई बोली.

लल्लू पीछे से लक्ष्मी क नंगे कंधे को चुम लिया.

लक्ष्मी का बदन कम्प गया लेकिन वो कुछ नहीं बोली.

लक्ष्मी अभी एक साडी ब्लाउज मई थी.

लल्लू घूम क्र लक्ष्मी क दूसरे कंधे को भी वैसे hi चुम लिया.

लक्ष्मी का सरीर फिर एक बार कम्पन से हिल गया.

लल्लू मुसकुडता हुआ लक्ष्मी क बालो को पीछे से हटा क्र पीछे उसके गर्दन पर चुम लिया.

लक्ष्मी कसमसा क्र अपनी गर्दन झटक क्र रह गई.

लल्लू धीरे से पीछे हुआ और झुक क्र लक्ष्मी क ब्लाउज क एन्ड पर नंगे पीठ को चुम लिया.

लक्ष्मी खिसक क्र आगे हो गई झटके से.

लक्ष्मी लल्लू की इन हरकतों का मजा ले रही थी.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र हलके से एक ऊँगली चला दिया कमर पर साइड से.

लक्ष्मी कूद क्र बीएड से निचे हो गई.

वो घूम क्र लल्लू को गुस्से वाली नजरो से देखने लगी. नाटक करती हुई.

लल्लू भी मजा लेता हुआ अपने दोनों कानो को हाथसे पकड़ क्र हलके से सॉरी बोलै जो उसके कुछ क कानो तक भी नहीं पहुंची होगी. सिर्फ होठ हिले थे.

लक्ष्मी लल्लू की और पीठ क्र क कड़ी हो गई.

लल्लू उठ क्र लक्ष्मी क पास गया और उसे गॉड मई उठा क्र बीएड पर ले आया.

लक्ष्मी लल्लू क गॉड मई हाथ पेअर चला रही थी छूटने क लिए. लेकिन उस मई बिरोध कम और सहमति ज्यादा दिख रहा था.

लल्लू ला क्र लक्ष्मी को बीएड पर लेता दिया.

लल्लू लक्ष्मी पर झुक गया और ब्लाउज क उप्पेर से hi जीभ निकल क्र उसके दूध को चाट लिया लक्ष्मी क आँखों मई देखते हुए.

लक्ष्मी शर्मा क्र लम्बी लम्बी सास लेती हुई नजरे फेर ली.

तेज सैश लेने क कारन लक्ष्मी की चूचिया बहुत hi आकर्षक लग रही थी उप्पेर निचे होते हुए.

लल्लू लक्ष्मी पर झुका हुआ hi फिर से जीभ निकल क्र उसके दोनों वक्ष की घाटियों क बिच अपना जीभ फिर दिया.

लक्ष्मी सिसक क्र लल्लू क सर को पकड़ क्र अपने चूचियों पर दबा दी.

लल्लू का मुँह पूरा लक्ष्मी की ठोस बॉल मई धसा गया.

लल्लू मुँह खोल क्र ब्लाउज सहित लक्ष्मी क एक चुकी को मुँह मई भर लिया और उसे चूसने लगा.

लल्लू क थुल से लक्ष्मी क एक चुकी का पूरा आगे का हिस्सा गिला हो गया.

लक्ष्मी आँखे बंद किये हुए गहरी गहरी ससे ले रही थी.

निचे उसकी पूरी पेंटी गीली हो गई थी जैसे उसने पेंटी मई hi मूट दिया हो.

लक्ष्मी- सुनिए

लल्लू सर उठा क्र लक्ष्मी क आँखों मई देखने लगा.

लक्ष्मी- मई आप को रोक नहीं रही हु लेकिन अच्छा होता अगर ये सब आप रात मई….

लल्लू हलके से लक्ष्मी क होठ को चुम क्र उसे छोड़ दिया.

लक्ष्मी- आप नाराज नहीं है न प्लसस

लल्लू मुसकुदा क्र गर्दन न मई हिला दिया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 65.

लल्लू का मन नहीं लग रहा था तो वो बहार आ क्र गाड़ी निकल लिया और यु hi उज्जैन क सरको पर भटकने लगा.

अचानक उसका मन किया की क्यू न एक बार महाकाल प्रभु का दर्शन hi क्र लिया जय.

लल्लू गाड़ी घुमा क्र उस और hi चल दिया.

वह पहुंच क्र लल्लू वही सरोवर मई आचमन क्र पवित्र हुआ और चला गया महाकालेश्वर क दर्शन को.

अभी साम का समय हो गया था तो ज्यादा तो नहीं फिर भी भीड़ तो थी hi.

वह जा क्र लल्लू दर्शन किया और फिर आ क्र वही मंदिर क प्रांगण मई एक इक्कंत जगह पर बैठ गया.

वह मंदिर प्रांगण मई बहुत सन्ति थी. बैठे बैठे लल्लू सोचा थोड़ा ध्यान hi क्र ले.

वो ध्यान क मुद्रा मई बैठ क्र अपना धुनि रमा लिया.

थोड़ी देर मई hi वो ध्यान मई लीन हो गया.

वो ध्यान मई एक प्रकश पुंज को देख रहा था जो लल्लू से दूर भगा चला जा रहा था. लल्लू जितना उसके निकट जाने की कोसिस करता वो प्रकश पुंज और उतना hi दूर भाग रहा था.

अंत मई वो प्रकाश एक गुफा मई घुसता हुआ दिखा.

लल्लू भी ध्यान मई बैठा हुआ उस प्रकाश क पीछे पीछे उस गुफा मई चला गया.

आगे बढ़ता हुआ लल्लू उस गुफा से बहार निकल तो एक बहुत hi खूबसूरत मैदान मई खुद को पाया.

मैदान मई चारो और हरयाली थी.

छोटे बड़े सभी तरह क पैर पौधे लगे हुए थे जिन मई तरह तरह क फूल और फल लगे हुए थे.

वही मैदान मई कई जिव छोटे बड़े जानवर और पक्षी इधर उधर खेल रहे थे.

जिन मई खरगोश हिरन बाघ सिंह सभी तरह क जानवर दिख रहे थे वह.

पक्षी मई मोर कोयल तोता ये सब भी कोई पैर की डाली पर बैठा तो कोई निचे मैदान मई इधर उधर ुरता हुआ घूम रहा था.

लल्लू ये सब मनमोहक दृश्य देख रहा था की उसके कानो मई say...say करता हुआ कोई आवाज बार बार आ रहा था जैसे हवा मई बहुत तेज कुछ छोड़ा गया हो जो हवा को चिर क्र आगे निकल जाता है जिस से ये आवाज उत्पन हो रहा था.

लल्लू चारो और नजर घुमा क्र देखता है तो एक लड़की हाथ मई धनुष लिए हुए एक पैर को निशाना लगा रही है. जैसे hi वो प्रतिंछा खींचती है उस मई अपने आप तीर आ जाता है. पहले से उसके पास कोई तीर नहीं होता. हर बार प्रतिंछा खींचने पर hi उस मई स्वतः hi तीर आ रहा था.

लल्लू कौतहल वाश चलता हुआ उस लड़की क निकट आ जाता है.

तभी वो लड़की प्रतिंछा खींच क्र छोड़ देती है. उस मई से एक तीर लहराता हुआ लल्लू की और आने लगता है.

लल्लू ध्यान नहीं दे पाया था वो इन मनमोहक दृश्य मई इतना खो गया था की वो चलता हुआ उस लड़की से सामने hi आ खड़ा हुआ था.

लड़की द्वारा छोड़ा गया तीर लल्लू को भेदता हुआ आगे निकल क्र उसके लक्ष्य पर जा क्र लगता है.

लल्लू हड़बड़ा क्र पीछे हो जाता है तीर से बचने क चक्कर मई वो पीछे को लुढ़क जाता है.

उसे जैसे लगता है आज तो वो गया. तीर उसको भेद क्र निकल गया था. वो जमीं पर लेता निस्तेज निष्प्राण हो गया था.

सिक्योरिटी हेड उस बूढ़े अर्चयोलॉजिस्ट को ले क्र अपने बॉस क सामने खड़ा था.

वह बूढ़े क बंगलो से निकल क्र जब बहार आया था तो सहर मई उसका टेम्पररी इलाज करा दिया था ताकि ज्यादा खून बहने से उसकी मौत न हो जय.

इस वक्त बॉस क सामने व्हील चेयर पर बैठा वो बूढ़ा दर से कम्प रहा था. वही बगल मई सिक्योरिटी हेड भी खड़ा था.

वो पत्ता और पीतल का बॉक्स जिस क चक्कर मई इतनी मौते हुई थी और न जाने आगे क्या होना था वो दोनों अभी बॉस क सामने रखे एक टेबल पर पड़ा हुआ था.

बॉस स्कॉच का चुस्की लेता हुआ उस टेबल पर रखे उन दोनों वस्तुओ को घर रहा था.

बॉस- ये क्या है.

वो स्कॉच का एक घुट ले क्र बूढ़े से पूछा जो अपने व्हील चेयर पर बैठा दर से अपने सूखे होठो को बार बार जीभ से चाट रहा था.

बॉस- ये बहरा है क्या.

उसने गुस्से से अपने सिक्योरिटी हेड से बोलै.

Sec.head- नहीं बॉस ये न तो बहरा है न hi गंगा है.

ैई बॉस ने क्या पूछा है. जबाब दे उसका.

बूढ़ा- एक बार फिर से अपने सूखे होठो पर जीभ फीरा क्र.

ये एक बहुत पुराणी लिपि मई लिखा हुआ भविष्यवाणी है.

बॉस- क्या लिखा है इस मई.

बूढ़ा- बूढ़ा सूखे गले से थूक गटकता बोलै.

इस मई लिखा है ki...ki किसी पवित्र नदी क संगम मई कही अमृत छुपा हुआ है. जहा से वो अमृत अमस्वस्य को एक पूजा करने पर निकलता है लेकिन वो अमस्वस्य खाश होना चाहिए. मतलब जैसे उस अमस्वस्य को सूर्य ग्रहण होना चाहिए.

बॉस- क्या बकवास है ये. ऐसा भी कही होता है क्या. यहाँ धरती पर अमृत कहा से आ गया.

बूढ़ा- है ये सभी सुच है. मैंने इसका गहन अध्ययन किया है. कितने िथश किताब कितने पवित्र ग्रन्थ पढ़ डेल है. होता है ऐसा.

बॉस- तुम्हारे कहने का मतलब है की अमृत मिल सकता है.

बूढ़ा- है, ऐसा हो सकता है लेकिन उसके लिए इंडिया जा ा पड़ेगा. वही ये सब चीजे होंगी.

बॉस सोच मई पद गया. इस बूढ़े की बात मने या क्या करे.

उसने अपने सिक्योरिटी हेड को कुछ इसरा किया.

वो सिक्योरिटी हेड उस बूढ़े को ले क्र वह से चला गया.

थोड़ी देर मई सिक्योरिटी हेड फिर से बॉस क पास आया.

बॉस- क्या लगता है. ये जो कह रहा है उस मई कितनी सच्चाई है.

हेड- बॉस मेरे ख्याल से तो वो सही कह रहा है. हमे वह जा क्र देखना चाहिए.

बॉस- उठ, फिर ऐसा करो. कुछ अपने विश्वास क लोगो को ले क्र चलो चलते है इंडिया. अभी अमावस्या मई समय है. फिर वह जा क्र भी हम सब को वो गजह ढूँढना है. कुछ वह क लोकल लोगो की भी जरुरत होगी

सिक्योरिटी हेड- एस्सस बॉस.

वो लोग अपनी तयारी मई लग गए.

नासिक…….

योग विद्या पीठ.

आचार्य अपने रूम मई बैठे किसी पुस्तक को पढ़ रहे थे.

गायत्री- क्या मई अंडर आ सकती हु गुरूजी.

आचार्य- आ जाओ पुत्री.

गायत्री- आप ने मुझे बुलाया गुरूजी. कोई काम था क्या

आचार्य- आओ यहाँ मेरे पास बैठो.

गायत्री आश्चर्य क पास आ क्र एक निचे बिछे आसनी पर बैठ गई.

गायत्री जिज्ञासा वास् आश्चर्य की और देख रही थी.

आचार्य- पुत्री तुम्हारा शिक्षा पूर्ण हो गया है. अब आगे क्या सोचा है तुम ने.

गायत्री- है गुरु जी शिक्षा तो मेरी समाप्त हो गई है. अब मई सोच रही थी की घूम घूम क्र पुरे विश्व मई योग और सन्ति का प्रचार करू.

आचार्य- बहुत उत्तम बिचार है तुम्हारे. पुत्री मेरे पास तुम्हारा कोई अमानत है जो मुझे तुम्हारे साथ मिला था.

गायत्री- गुरु जी मई कुछ समझी नहीं.

आचार्य- पुत्री ये तो तुम्हे पता है की तुम मुझे यहाँ आश्रम क गेट पर सुबह मिली थी जब तुम बहुत छोटी थी. उस समय तुम्हारे साथ एक छोटा सा थैला भी था जिस मई कुछ सामान था वो मई लता हु.

आचार्य उसी कमरे मई एक लकड़ी क बॉक्स को खोल क्र उस मई से एक थैला निकल क्र लाये.

आचार्य- पुत्री तुम्हारे साथ मई ये थैला भी था. मई तुम दोनों को ले क्र यहाँ आया फिर इस थैले को खोल क्र देखा था की क्या है इस मई तो इस थैले मई मुझे मेरे नाम की एक चिट्ठी मिली थी. जिस मई लिखा हुआ था की जब तुम्हारी शिक्षा यहाँ पूर्ण हो जाएगा तब तुम्हे ये बैग दे दू.

गायत्री- ऐसा क्या है इस बैग मई गुरु जी.

आचार्य- इस मई एक लड्डू गोपाल जी की मूरत और एक पुस्तक है पुत्री.

गायत्री उस थैले को ले क्र खोल क्र देखि

उस मई बहुत सुन्दर सोने की एक लड्डू गोपाल की मूर्ति थी. जो एक सुन्दर सा लाल कपडे मई लिपटे हुए थे.

गायत्री लड्डू गोपाल को उठा क्र अपने दोनों आँखों से लगा ली.

फिर गायत्री उस थैले को फैला क्र देखि तो उस मई एक पुस्तक रखा हुआ था.

गायत्री उस पुस्तक को निकल क्र देखि. वो पुस्तक सारा खली था.

गायत्री कौतहल से आचार्य की और देखने लगी.

आचार्य- पुत्री ये पुस्तक तुम्हारे लिए है. इस मई लिखी बाटे सिर्फ तुम्हे hi दिखना चाहिए इस लिए इस मई गुप्त लिखावट की गई है जो तुम्हे खुद hi ढूँढना है. इस मई एक चिट्ठी भी है जो तुम्हारे लिए है.

गायत्री उस पुस्तक का पेज पलट क्र देखि तो पुस्तक क बिच मई एक लिफाफा था जिस पर गायत्री का नाम लिखा हुआ था.

गायत्री उस चिट्ठी को खोल क्र उस मई से चिट्ठी निकल ली.

आचार्य- पुत्री इसे तुम अपने कमरे मई जा क्र पढ़ो.

गायत्री वह आचार्य को प्रणाम क्र वह से अपने कमरे मई आ गई.

बीएड पर बैठ क्र जल्दी से गायत्री उस चिट्ठी को निकल क्र खोल ली.

बीटा गायत्री……

अपने इस बदनसीब पिता को माफ़ करना.

तुम्हारे जन्म क बाद hi तुम्हारी माँ हम दोनों को छोड़ क्र चली गई थी और आज तुम्हारा ये अभागा बाप भी तुम्हे छोड़ क्र जा रहा है.

क्या करू. मेरे साथ तुम रहती तो तुम्हारे जान को भी खतरा रहता. इस लिए मई तुम्हे अपने से अलग क्र रहा हु. तुम मेरे ससो की डोर हो. मेरे दिल का टुकड़ा हो तुम. मेरा सब कुछ हो तुम. कुछ बुरी आत्मा हमारे पीछे पड़े हुए है. तुम्हे मई अपने पास रखना चाहता था लेकिन मई उन लोगो क नजरो मई आ गया हु और मुझे दर है की मेरे जरिये वो तुम तक भी पहुंच सकते है. तुम्हारे सिबा और है hi कौन अब मेरा. इस लिए तुम्हे मई इस आश्रम मई छोड़ क्र जा रहा हु.

मई अपने पूर्वजो क ईस्ट देव बंशी वाले की लड्डू गोपाल रूप की मूर्ति दे रहा हु. ये तुम्हारी रक्षा करेंगे. साथ मई एक पुस्तक भी है जिस की रक्षा करना अब से तुम्हारा काम है. ये पुस्तक किसी गलत हाथ मई चला गया तो अनर्थ हो जाएगा. ये पुस्तक को 7 पीढ़ी से हमारा परिवार सुरक्षा क्र रहा है. अब आगे इसकी सुरक्षा तुम्हारी जिम्मेदारी है.

लड्डू गोपाल तुम्हारी रक्षा करे.

तुम्हारा बदनसीब पिता.

गायत्री उस चिट्टी को लगातार करीब 10 बार पढ़ी थी. पढ़ क्र उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके पिता उसके साथ है. उस से बाते क्र रहे है. उस चिट्ठी को अपने साइन से लगा क्र गायत्री फुट फुट क्र रो पड़ी.

आज उसे एहसास हुआ की उस से उसके पिता कितना प्यार करते थे. वर्ण वो तो समझ रही थी किसी ने उसे यहाँ आश्रम क गेट पर फेक दिया है अपनी गलती छुपाने क लिए.

आज गायत्री को अपने आप से घिन आने लगी थी. कितना गलत सोच रखती है वो. बहुत रोना आ रहा था उसे अपने किये पर. एक उसके पिता थे जिस ने अपने कलेजे क टुकड़े को अपने से इस लिए दूर किया ताकि वो सुरक्षित रह सके और एक वो है जो क्या क्या सोच रखती थी अपने माँ बाप क लिए.

काफी देर तक गायत्री रोटी रही. कब रट रट उसे नींद आ गया उसे पता hi नहीं चला.

सुबह सुबह गायत्री उठ क्र फ्रेश हो क्र गोदावरी नदी मई दूर नौका ले क्र चल दी. ये उसका डेली का रूटीन था. वो गोदावरी नदी मई सुबह को अँधेरे निकल जाती नौका ले क्र और वही संत निर्मल जल मई नौका पर योग साधना क्र फिर वही स्नान भी क्र लेती थी और उधर से hi त्रम्ब्केश्वर महादेव की पूजा करती हुई आश्रम आती थी.

आज भी वो सुबह अंधरे मई hi निकल गई थी. नदी मई नौका उतर क्र वो चप्पू चलती हुई आगे बढ़ रही थी. अब बहुत हल्का हल्का उजाला फैलने लगा था. तभी गायत्री को किसी क चिल्लाने की आवाज सुनाई दी.

गायत्री जल्दी से नौका खेती हुई उस और चल दी.

तभी चिल्लाने की आवाज फिर से एक बार आई. गायत्री जल्दी जल्दी चप्पू चलती वह पहुंची.

वह एक 45-50 साल का व्यक्ति था जो नदी क पानी मई दुब रहा था.

वो हाथ पेअर चलता गोदावरी नदी क पानी मई उप्पेर निचे हो रहा था.

गायत्री जल्दी से पानी मई कूद क्र तैरती हुई उसके पास पहुंची.

वो व्यक्ति अब बेहोश हो गया था. गायत्री जल्दी से पानी मई डुबकी लगा क्र उसके हाथ को पकड़ ली और फिर उसे अपने पीठ पर दाल क्र तैरती हुई किनारे की और आने लगी.

किनारे पर आ क्र गायत्री उस व्यक्ति को कंधे पर लाडे हुए नदी से बहार ला क्र जमीं पर लेता दी.

खुद भी सुकि ससे चढ़ गयी थी तो वही उस व्यक्ति क पास hi जमीं पर लेट क्र लम्बी लम्बी ससे लेने लगी.

थोड़ी देर मई उठ क्र गायत्री उस व्यक्ति क पेट को दबा क्र उस ने डूबता हुए जो पानी चला गया था उस क पेट मई उसे निकलने लगी.

थोड़ी देर मई वो व्यक्ति पानी खासते हुए आँखे खोल दिया.

गायत्री- कैसा महसूस क्र रहे है अब आप.

वो व्यक्ति- आठ, अब अच्छा महसूस क्र रहा हु मई. आप का बहुत बहुत धन्यवाद्. अगर आज आप नहीं आते तो पता नहीं मेरा क्या होता.

गायत्री- आप इतनी सुबह क्या क्र रहे थे वह. पानी मई कैसे चले गए.

वो व्यक्ति- आज सोमवार है न तो मई नगर भ्रमण क लिए निकला था. तभी एक जगह मुझे थोकड लग गया और मई लुढ़कता हुआ नदी मई गिर गया.

गायत्री- ओह्ह, इतनी सुबह सुबह नगर भ्रमण की क्या जरुरत थी. सूर्य देव निकल जाने देते. और इधर क्या है जो आप इस और भ्रमण करने आ गए.

वो व्यक्ति- इस और बहुत सन्ति है. जैसे आप इधर आती है डेली योग करने वैसे hi मई भी इधर घूमने आ गया था.

गायत्री- चौकते हुए.

आप को कैसे पता की मई योग करने इधर आता हु.

वो व्यक्ति उठ क्र बैठ गया था अब.

वो व्यक्ति- मई इस और कई बार इस समय आ चूका हु और आप को नदी क बिच नव मई योग करते देख चूका हु.

गायत्री- वैसे आप का नाम क्या है महानुभाव.

वो व्यक्ति- मेरा नाम महिपाल है.

गायत्री- अच्छा अब मुझे आज्ञा दे महिपाल जी. मुझे योग करने है.

महिपाल- एक मिनट गायत्री बीटा. क्षमा करना, मैंने बिना तुम से पूछे तुम्हे बीटा कह दिया.

गायत्री- नहीं नहीं. आप क्षमा मांग क्र मुझे सर्मिन्दा न करे. मई आप की बेटी की तरह hi तो हु. कहिये क्या कह रहे थे आप.

महिपाल- बीटा, मई तुम्हे कुछ देना चाहता हु.

गायत्री- क्या देना चाहते है आप मुझे.

महिपाल- आओ मेरे साथ. यही पास hi चलना है.

दोनों वह से आगे बढ़ गए.

थोड़ी देर आगे आने पर एक खोह क पास आ क्र महिपाल रुक गए.

महिपाल- रुको बीटा. मई अभी आया

महिपाल गायत्री को वही खड़ा क्र उस खोह मई चले गए और फिर वह से कुछ hi देर मई निकल क्र आ गए.

महिपाल- ये लो बीटा. इसे सदा अपने पास रखना. ये तुम्हे बुरे लोगो से बचता रहेगा.

गायत्री- ये क्या है काका. मई आप को काका कह सकता हु न.

महिपाल- बीटा तुम मुझे बाबा कहो. सब मुझे बाबा कह क्र hi पुकारते है.

गायत्री- ठीक है बाबा. वैसे ये क्या है बाबा. मई इसे ले क्र क्या करुँगी.

महिपाल- ये एक त्रिशूल है बच्चा. इसके रहते कोई बुरी आत्मा कभी तुम्हारे पास नहीं आ पायेगी. इस की तुम्हे आगे भविष्य मई जरुरत पद सकती है. अच्छा अब मई चलता हु. है मेरी कभी कोई जरुरत हो तो मुझे सच्चे मन से याद करना. मुझे तुम अपने पास hi बॉगी.

गायत्री उस त्रिशूल को देखती हुई महिपाल को हाथ जोड़ क्र प्रणाम की.

महिपाल गायत्री क सर पर हाथ रख क्र उसे आसिष दिए.

सर पर हाथ रखते hi महिपाल क हाथ से एक प्रकाश पुंज निकल क्र गायत्री मई सर मई समां गई.

महिपाल जी गायत्री को वही छोड़ क्र आगे बढ़ गए.

थोड़ी देर मई hi वो गायत्री क आँखों से ओझल हो गए.

गायत्री वही गुमशुम कड़ी रही खींच देर अचानक उसके दिल ो दिमाग मई एक धमाका सा हुआ.

महिपाल जी ने कहा था आज सोमवार है और नगर भ्रमण को निकले है. फिर अपना नाम महिपाल बताना और अभी ये त्रिशूल दे क्र बाबा कह क्र पुकारना.

गायत्री दौड़ क्र उस और गई जिस और महिपाल जी गए थे लेकिन गायत्री को वो कही नहीं दिखे.

काफी देर तक इधर उधर गायत्री महिपाल जी को ढूंढती रही.

कभी एक दिशा मई दौड़ क्र जाती तो कभी दूसरे दिशा मई. कभी किसी ुचे टाइल पर चढ़ क्र कड़ी हो क्र चारो और घूम घूम क्र देखती.

जब गायत्री को वो महिपाल जी कही नहीं दिखे तो वो उनके दिए हुए त्रिशूल को साइन से लगा क्र वही घुटने पर बैठ गई और रोने लगी.

गायत्री- मुझे माफ़ क्र दीजिये बाबा. मई मुर्ख आप क इतने इसारे देने क बाद भी आप को नहीं पहचान पाई. मुझे माफ़ क्र दीजिये.

बस एक बार मुझे अपना दर्शन दे दीजिये. फिर मई कभी आप से कुछ नहीं मांगूगी. प्लस एक बार, सिर्फ एक बार दर्शन दे दीजिये. अपने इस अभागन बेटी पर तरस खाइये बाबा. आप तो भोलेनाथ है. महादेव है. एक बार माफ़ क्र दीजिये.

तभी गायत्री क मन मई एक आवाज आती है.

" पुत्री, मई सदैव तुम्हारे साथ hi हु. तुम कभी खुद को अकेला मत समझो. जाओ जा क्र अपनी जिंदगी जिओ. आगे बहुत परीक्षा है तुम्हारे जीवन मई. यु निराश नहीं होते. हम तो सभी प्राणी मई वाश करते है न तो फिर दर्शन की क्या बात है. अपने चारो और देखो मई hi मई दिखूंगा."

गायत्री मन मई उठती आवाज सुन क्र उसका रोना अब बंद हो गया था. अपने आँखों को साफ़ करती वो उठ कड़ी हुई और फिर उस त्रिशूल को अपने माथे से लगा क्र आश्रम को चल दी.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 66.

लल्लू वह मैदान मई लेता खुद को मारा हुआ समझ रहा था.

तभी एक बार फिर से उसके कानो मई हवा को भेद क्र लक्ष्य पर लगती इसाबेल्ला क बनो की आवाज लल्लू क कानो मई जाने लगी.

लल्लू हड़बड़ा क्र उठ खड़ा हुआ. तभी एक तीर फिर से उसके कान क लॉ को छूती निकल गई.

लल्लू कूद क्र वह से साइड हो गया.

लल्लू- क्या लौंडिया है ये. आँख बंद क्र प्रैक्टिस क्र रही है क्या. इतना लम्बा चौड़ा गब्दू जवान नहीं दिख रहा क्या इसे. बच गया मई तो. अच्छा हुआ जो सरीर क साथ यहाँ नहीं आया नहीं तो ये लड़की तो आज तीर hi गांड मई घुसा देता.

बीटा बड़ी खतरनाक है ये. बहिन की छत, मई सब की गांड क पीछे लगा रहता हु आज तो मेरी मई hi घुसने वाली थी.

लल्लू आगे बढ़ क्र उस लड़की क पास जा पंहुचा.

लल्लू- ोू hello, जरा आगे पीछे भी देख लिए क्र. यु आँखे बंद क्र क नहीं करते प्रैक्टिस.

इसाबेल्ला पर लल्लू की बातो का कोई असर नहीं हुआ.

लल्लू- क्या बात है भाई. आँख भी खुली हुई है इसकी तो. कही ये अंधी और बहरी तो नहीं है.

हो सकता है तभी तो मुझे सामने देखते हुए भी खुली आँखों से नहीं देखि थी. और अभी अब मैंने जो कहा है उसका जबाब भी नहीं दे रही.

लल्लू- फिर क्या किया जय. कौन है ये लड़की. यहाँ क्या क्र रही है. कैसे पूछा जय इस से.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र उस लड़की क कंधे पर रख दिया.

लेकिन लल्लू का हाथ इसाबेल्ला क आर पर हो गया.

लल्लू- ले बहन की छत. मई hi सुच मई लल्लू हु. लोग यु hi नहीं मुझे लल्लू कहते है. फैला खुद तो मई यहाँ मन की आँखों से देख रहा हु. सरीर है नहीं मेरा यहाँ और चला हु इस लड़की को रोकने.

भूतनी क पहले अपना सरीर प् ले नहीं तो पता चला कोई लबरीश समझ क्र मुर्दा घर न भेज दे.

लल्लू वह से घूम क्र आने लगा तभी पता नहीं क्या हुआ लल्लू फिर से एक बार इसाबेल्ला क पास जा क्र उसे देखा और उसके एक गाल को चुम क्र वापस हो लिया.

लल्लू ने जैसे hi इसाबेल्ला की चुम्मी ली. इसाबेल्ला को अपने गाल पर कुछ ठंढा सा गिला छुवन का एहसास हुआ. उसके सरीर क रोये खड़े हो गए.

वो अपना प्रैक्टिस रोक क्र अपने एक हथेली से उस गाल को छू क्र देखि तो वह गिला सा था.

इसाबेल्ला इधर उधर देखने लगी. ये क्या था

इस तरह मेरा गाल कैसे गीला हो गया. जैसे किसी ne...kisi ने मुझे चोरी से चुम लिया हो.

कौन होगा वो.

बाबा से पूछना पड़ेगा.

इसाबेल्ला आँखे बंद क्र हाथ जोड़ क्र बाबा को ध्यान करने लगी.

तभी वह बाबा आ गए.

इसाबेल्ला- बाबा ये कौन था. कैसे हुआ ये.

बाबा- पुत्री, ये एक नटखट का काम है. उसे तुम hi ठीक क्र सकती हो. बहुत जल्द तुम्हारा उस से मुलाकात होने वाला है.

इसाबेल्ला- लेकिन बाबा ये था कौन. यहाँ कैसे आ गया और दिखाई भी नहीं दे रहा था.

बाबा- पुत्री अपने मन की आँखों से देखोगी तो दिख जाएगा. वो भी तुम्हारी तरह एक इन्शान है. अपनी योग कला से वो यहाँ तक आया था या ये कहो की उसे लाया गया था. उसी ने तुम्हे प्यार दे क्र गया है.

इसाबेल्ला- बाबा मुझे कुछ भी समझ नहीं आया.

आप कह रहे है की वो हमारी तरह इन्शान है और भूत की तरह गायब था. फिर मन की आँखों से देखु. कैसे बाबा. फिर ये प्यार दे क्र जाना…

बाबा मुसकुडते हुए बोले.

" बीटा वो है तो इन्शान hi और अभी ध्यान मई बैठा हुआ था. उसे तुम यहाँ प्रैक्टिस करती दिखी तो वो यहाँ आ गया. अभी उसका सरीर वही था जहा ध्यान पर बैठा है और उसका मन यहाँ आ गया था. प्रभु की िक्षा से.

तुम दोनों एक दूसरे क पूरक हो इस लिए वो तुम्हे प्यार दे गया है. आगे की जानकारी सही ढंग से तो बाद मई hi पता चलेगा.

इसाबेल्ला चुप रह गई. अभी उसके मन मई और भी कई सबल थे लेकिन वो उसने पूछा नहीं.

इसाबेल्ला फिर से अपने प्रैक्टिस मई लग गई.

इधर लल्लू की आत्मा वापस उसके सरीर मई समां गया. आत्मा क समाते hi लल्लू का सरीर सेवन कोर्स मई चमकने लगा.

लल्लू थोड़ी देर वह आँखे बंद किये बैठा रहा फिर उठ क्र वह से बहार आया. एक बार और महाकालेश्वर प्रभु को प्रणाम क्र लल्लू वह से अपने गारी की और चल दिया.

वही दूसरी और उज्जैन मई लक्ष्मी क यहाँ सभी लल्लू को ले क्र पदेशन थे. कॉल भी कई बार कर चुके थे लेकिन लल्लू कॉल का भी जबाब नहीं दे रहा था.

सब से ज्यादा तो लक्ष्मी और दीक्षा पदेशन थी. अभी तक उन लोगो ने मां को नहीं बताया था लल्लू को ले क्र.

नहीं तो वो भी खामखा पदेशन होते.

लल्लू की गाड़ी जैसे hi मैं गेट से अंदर आई लक्ष्मी और बुआ दौड़ती हुई गाड़ी क पास पहुंची.

लल्लू दोनों को यु दौड़ क्र आता देख क्र गाड़ी रोक दिया पहले hi.

उसने सोचा क्या बात है जो दोनों इस तरह दौड़ती आ रही है.

लल्लू गाड़ी का दरवाजा खोल क्र देखा उन दोनों को फिर बहार निकल क्र उनके पास आ गया

लल्लू- क्या बात है. आप दोनों इस तरह क्यू दौड़ रही थी.

लक्ष्मी- कहा गए थे आप. कहा से आ रहे है इतनी रात को. बता क्र क्यू नहीं गए उप्पेर से कॉल भी नहीं उठा रहे थे. आप को पता है हम दोनों कितना दर गए थे. अभी तक हमारी हालत ख़राब है.

लल्लू- ओह्ह सॉरी. मोबाइल गाड़ी मई hi रह गया था. मई तो भगवन क दर्शन करने गया था. वही थोड़ी देर बैठ गया इस लिए लेट हो गया. सॉरी आगे से ध्यान रखूँगा.

बुआ- क्या ध्यान रखेगा तू. हर बार गलती होने पर तुम ऐसे hi करते हो.

लल्लू- सॉरी बुआ. माफ़ क्र दो न आगे से आप दोनों को बता क्र जाऊंगा.

लल्लू अभी दोनों क सामने अपना सर झुकाये मुजरिम की तरह खड़ा था.

लक्ष्मी- काम से काम कॉल क्र क बता तो देते.

लल्लू- अरे यार कहा तो की मोबाइल गाड़ी मई hi रह गया था. अब क्या बचे की जान लोगे.

तभी वह युसूफ की बेतिया सिबा, कोमल और जोया भी आ गई.

सिबा- ओह्ह जीजा जी आप आ गए. हमारी बहन का तो बुरा हाल था आप क चिंता मई.

लल्लू इन लोगो को देख क्र और सर्मिन्दा हो गया.

लल्लू- सॉरी आप सब को मेरे कारन पड़ेशानी हुई.

कोमल- कोई बात नहीं जीजू. आइये चल क्र खाना खा लीजिये. हमारी बहन और बुआ जी भी अभी तक कुछ नहीं खाई है.

फिर सभी घर क अंडर आ गए.

फ्रेश हो क्र लल्लू बहार आया तह कमरे मई hi तीनो का खाना ले क्र सकीना आंटी आ गई थी.

लल्लू- अरे आउंट आप क्यू तक्क्लुफ़ की. काकी या मोहिनी दीदी क हाथ से भेज देना था न.

सकीना- कोई बात नहीं बीटा. मई भी इस घर की सदस्य हु. वैसे भी करने को कुछ होता नहीं है. खली बैठे बैठे भी थक जाती हु.

लल्लू- आइये आप सब भी थोड़ा साथ दीजिये न.

सिबा- सॉरी जीजू, हम सब खाना खा लिए है. आप लोग खाइये हम सब भी अब जाते है आराम करने.

फिर वो लोग चली गई.

लल्लू- आप सब क्यू भूखी थी. खाना खा लेना था न.

बुआ- अच्छा, यहाँ हमारी जान निकली जा रही थी. भूख कहा से लगता हमे.

लक्ष्मी- रहने दीजिये बुआ. ये नहीं समझेंगे.

लल्लू- मई सब समझता हु. लेकिन आगे से इतनी फिक्र करने की कोई जरुरत नहीं है. कभी कभी हो जाता है ऐसा.

लक्ष्मी- देख रही है बुआ. इनका कहना है की ये फिर से ऐसे बिना बताये जाएंगे.

लल्लू- ारी… मेरी गुलाबजामुन.. ऐसे क्यू बोल रही हो. मई आगे से बिलकुल ऐसा नहीं करूँगा. प्रॉमिस, फिर कभी ऐसा करू तो आप जो चाहो सजा दे सकती हो.

बुआ- ये गुलाबजामुन कौन है.

लल्लू- आप हो gulabjamun..:D

लल्लू एक निवाला बना क्र बुआ क मुँह की और बढ़ा दिया.

बुआ- अब ये क्या है.

लल्लू- अब मेरी गुलाबो और गुलाबजामुन दोनों नाराज है तो उन्हें मानना तो पड़ेगा न.

लल्लू आँख मरते हुए बुआ को खाना खाने का इसरा किया.

बुआ मुँह खोल दी.

लल्लू उन्हें अपने हाथ से खिला दिया.

फिर एक निवाला लक्ष्मी को भी बना क्र उसके मुँह क आगे किया.

लक्ष्मी तुनक क्र मुँह घुमा ली.

लल्लू- खा लो न गुलाबो. अब माफ़ भी कर दो. आगे से बता क्र जाऊंगा. अरे अकेला जाऊंगा hi नहीं तुम्हे भी साथ hi ले क्र जाऊंगा. प्लस. माफ़ क्र दो.

बुआ- माफ़ क्र दे बेटी. अब इसे सजा मिल गई है. आगे से नहीं करेगा.

लक्ष्मी मुँह खोल दी.

लल्लू प्यार से देखते हुए लक्ष्मी को खिला दी.

लल्लू फिर से एक निवाला बना क्र बुआ की और बढ़ा दिया.

बुआ अपने हाथ का निवाला लक्ष्मी की और क्र दी.

फिर बुआ लल्लू क हाथ से खा ली और लक्ष्मी बुआ क हाथ से.

लक्ष्मी भी दोनों को देख क्र एक निवाला लल्लू की और बढ़ा दिया तो लल्लू मुँह खोल क्र लक्ष्मी क हाथ की उंगलिया भी हलके से काट लिया.

लक्ष्मी- आठ. बदमाश.

लक्ष्मी दूसरे हाथ से एक थप्पड़ लगाई प्यार से लल्लू को.

बुआ- चलो अब जल्दी ख़त्म करो खाना.

फिर सभी खाना खा लिए.

लल्लू हाथ धोने वाशरूम चला गया.

बुआ और लक्ष्मी वह की सफाई करने लगी.

लक्ष्मी- बुआ आप रहने दीजिये. आप जा क्र हाथ दो लीजिये. मई ये बर्तन निचे रख क्र आती हु.

बुआ- तुम हाथ दो लो. मई रख क्र आती हु.

लक्ष्मी- नहीं नहीं बुआ आप मेरी मेहमान है. साथ hi मुझ से बड़ी भी है. जाइये आप मई करती हु न.

लक्ष्मी बुआ को वह से हटा क्र खुद सफाई क्र क जूठा बर्तन समेत क्र निचे रखने चली गई.

बुआ भी वाशरूम जा क्र हाथ धोने लगी

लल्लू कमरे मई आ क्र बैठ गया बीएड पर. बुआ भी हाथ दो क्र आ गई.

लल्लू- बुआ निचे चले क्या गार्डन मई.

बुआ- ठीक है चलते है.

फिर दोनों निचे आ गए. वही लक्ष्मी भी मिल गई.

लल्लू लक्ष्मी का हाथ पकड़ क्र गार्डन मई ले आया.

लल्लू- बुआ यहाँ आप का मन नहीं लग रहा होगा न.

बुआ- ऐसा क्यू लग रहा है तुम्हे.

लल्लू- ककी यहाँ अभी आप नै है. सही से जान पहचान नहीं है किसी से इसी लिए मैंने पूछा आप से.

बुआ- ऐसा कुछ नहीं है. हम लेडीज को जान पहचान क लिए ज्यादा समय नहीं लगता.

लल्लू- चलिए ये तो अच्छी बात है. वैसे मई सोच रहा हु कल आप सब को शॉपिंग करा दू.

लक्ष्मी- ये आप ने पहली बार अच्छी बात की है. मुझे भी कुछ सामान लेना था लेकिन यहाँ आने क बाद से मौका hi नहीं मिला.

लल्लू- ठीक है फिर तैयार रहिएगा.

लल्लू- शॉपिंग क लिए तो हम हमेसा तैयार रहते है.

तीनो थोड़ी देर वही गार्डन मई इधर उधर घूम क्र वापस अपने कमरे मई आ गए.

बुआ अपने कमरे मई चली गई.

लक्ष्मी नाईट गाउन ले क्र वाशरूम चली गई और लल्लू कमरे मई hi बदल लिया अपना कपडा.

लल्लू बीएड पर लेट गया और लक्ष्मी का इंतजार करने लगा.

थोड़ी देर मई लक्ष्मी भी अपना कपडा बदल क्र वापस आ गयी.

लल्लू- बड़ी देर लगा दी आने मई.

लक्ष्मी- कहा देर हुआ है.

लल्लू- काहिर छोड़ो वो सब.

लल्लू लक्ष्मी को हाथ पकड़ क्र अपने पास खींच लिया.

लल्लू- अब मेरी गुलाओ नाराज तो नहीं है.

लक्ष्मी- उह्ह्ह,( सोचने का नाटक करती हुई) लगता तो नहीं है. वैसे आप को प्रॉमिस करना पड़ेगा की आगे से ऐसा दुबारा कभी नहीं करेंगे आप और कल शॉपिंग का अपना वडा भी आपको पूरा करना पड़ेगा.

लल्लू- जो हुक्म मेरी हुस्ना ै मलिका का.

लक्ष्मी लल्लू क साइन मई मुँह छुपा ली.

लल्लू लक्ष्मी क रेशमी बालो मई अपना चेहरा रगड़ा उसके बालो से निकलते खुसबू मई मदहोस हो रहा था.

लल्लू- तो क्या ख्याल है. अपना काम सुरु करे क्या.

लक्ष्मी- कौन सा काम अभी अब रात को सुरु करना है.

लल्लू- वही जो आप ने सुबह रोक दिया था ये कह क्र की अभी सब जग गए है और हमे भी बहार चलना चाहिए.

लक्ष्मी- हुत्त बेसरम, आप का ध्यान वही अटका रहता है.

लल्लू- अब इतनी सुन्दर बीबी है तो इस मई मेरा क्या कसूर है.

लक्ष्मी- आप से एक काम है. गुस्सा नहीं करेंगे तो बताऊ.

लल्लू- एक क्या से बताइये. आप से गुस्सा हो क्र कहा जाना है मुझे..

लक्ष्मी- बजी लोग चाचा क दर से अपने काम पर नहीं जा प् रहे है. क्या आप सुबह उन्हें उनके ऑफिस छोड़ आया करेंगे

लल्लू- बिलकुल ये भी कोई कहने की बात है.

लल्लू लक्ष्मी क उन्नत वक्षो से खेलता हुआ बोलै.

लल्लू- कितने ठोस है.

लक्ष्मी- (आँखे बंद किये हुए) क्या

लल्लू- आप क दोनों आजम.

लक्ष्मी शर्मा क्र लल्लू से और चिपक गई.

लल्लू लक्ष्मी क पीठ को सहलाता हुआ उसे अपने मई समां लेना चाहता था

लल्लू एक हाथ से लक्ष्मी क गाउन का स्ट्रेप खोल क्र उसे लक्ष्मी क छाती से निचे खिशका दिया.

अब लक्ष्मी दोनों अमृत कलश आजाद हो क्र लल्लू क हाथो मई चुप गए थे.

लल्लू उन्हें हाथो मई ले क्र प्यार से मसल रहा था.

लक्ष्मी- आप इसे बड़ा क्यू करने मई लगे है.

मुझे सरे कपडे अब छोटे होने लगे है यहाँ से.

लल्लू- कल शॉपिंग पर इसी लिए ले जा रहा हु. सब दो साइज बड़ा ले लेना. अभी ये और बड़े होने है.

लक्ष्मी लल्लू क पीछे हाथ से उसका पीठ सहला रही थी.

लक्ष्मी- पता है कोमल बजी कह रही थी की……

लल्लू- क्या कह रही थी.

लक्ष्मी- नहीं नहीं... छोड़िये. मई नहीं बताउंगी. मुझे लाज आ रही है.

लल्लू- ये क्या बात हुई. मुझे क्या सर्मना. मई तो आप का पति भी हु और दोस्त भी. और अपने पति और दोस्त से कोई कुछ भी नहीं छुपता न hi सरमाता है.

लक्ष्मी- नहीं मुझे से नहीं कहा जाएगा.

लल्लू लक्ष्मी को पलट क्र उसके एक छाती को मुँह मई ले क्र प्यार करने लगा.

लल्लू- बताओ क्या कह रही थी कोमल.

लल्लू छाती से मुँह हटाता बोलै.

लक्ष्मी-( लम्बी लम्बी ससे लेती हुई.) कोमल बजी कह रही थी की…. मुझ मई सदी क बाद और निखार आ गया है.

लल्लू- अभी और भी निखार आना बांकी है. तुम जितना खुल क्र प्यार करोगी मुझे उतनी hi और निखरती जाओगी.

लक्ष्मी- न न मुझे और नहीं निखारना है. नहीं तो आप पता नहीं मेरा क्या हाल करो.

लल्लू सरकता हुआ लक्ष्मी क कमर तक लक्ष्मी को प्यार करता आ गया.

साथ hi वो गाउन को भी खोल क्र अलग क्र दिया.

लल्लू जल्दी से अपना कपडा भी खोल क्र अपने बदन से अलग क्र फेक दिया.

अब वो लक्ष्मी पर झुक क्र उसके अमृत द्वार को जीभ निकल क्र उसका बहता राश चाटने लगा था.

लक्ष्मी मजे से आँखे बंद किये हुए दोनों हाथो मई चादर को पकड़ राखी थी.

लल्लू पलट क्र अपना कमर लक्ष्मी की और क्र मुँह लक्ष्मी क कमर की और कर लिया.

लक्ष्मी- ये क्या क्र रहे है.

लल्लू- प्यार क्र रहा हु और क्या.

लल्लू फिर से अपने काम मई लग गया.

इधर लल्लू का बाबूराव गुस्से मई फुफकारता हुआ कभी कभी लक्ष्मी क चेहरे पर कभी गाल तो कभी होठो पर ठोकर मर रहा था.

लक्ष्मी क नाक मई लल्लू क बाबूराव से निकलते आनंद की बूंदो की खुसबू समां क्र उसे और मदहोश क्र रही थी.

लल्लू क होठो पर लगे लल्लू क प्रे छुम को लक्ष्मी माधोसी मई आँखे बंद किये हुए चाट क्र गई जीभ निकल क्र.

लक्ष्मी को बड़ा अजीब सा स्वाद लगा उसका.

इधर लल्लू लक्ष्मी क छूट को कुरेदता उसके जीभ घुसा क्र अंदर तक लक्ष्मी क अमृत रास को साफ़ करता जा रहा था.

लक्ष्मी अपने चरम सुख को अग्रशर थी.

इधर लल्लू भी उत्तेजना मई अपना लैंड अब लक्ष्मी क चेहरे पर रगड़ने लगा था.

कभी कभी लल्लू का लैंड लक्ष्मी क दोनों होठो क बिच घुस क्र लक्ष्मी क दांतो की सफाई भी क्र देता था. लेकिन ये सिर्फ छणिक समय क लिए होता था.

लल्लू जल्दी से अपना कमर उठा क्र उसे लक्ष्मी क होठो से फिर दूर क्र लेता

धीरे धीरे लक्ष्मी उत्तेजना मई अपना मुँह खोलने लगी थी जिसका अंदाजा खुद लक्ष्मी को भी नहीं था.

इधर लक्ष्मी अपना चरम पर पहुंच क्र जैसे भी लल्लू क मुँह को अपने रास से भरने लगी उत्तेजना मई लक्ष्मी का मुँह पूरा खुल गया और उसी समय लल्लू अपने कमर को निचे क्र दिया जिस कारन लल्लू का खड़ा सख्त गर्म रोड सीधा लक्ष्मी क मुँह मई एक चौथाई चला गया.

लक्ष्मी मरे उत्तेजना क कम्पटी हुई लल्लू क लौड़े को मुँह मई ले क्र उसे चूसने लगी.

लक्ष्मी चादर छोड़ क्र लल्लू क कमर को दोनों हाथो से जाकर क्र अपने जंघा मई लल्लू का मुँह दबा ली और पुरे जोश से लैंड चूसने लगी.

लल्लू हवा मई उरने लगा.

लक्ष्मी क मुँह की गर्माहट को फील क्र लल्लू से रहा नहीं गया लल्लू झटके से लैंड निकल लिया.

लैंड निकलते निकलते भी अपना पानी छोड़ दिया जिस से लक्ष्मी का थोड़ा सा मुँह और फिर छाती पूरा लल्लू क वीर्य से सं गया..

लक्मषि मुँह बनती जल्दी से उठ क्र वाशरूम चली गई वह जा क्र हो कुल्ला करने लगी.

थोड़ी देर मई लक्ष्मी वाशरूम से बहार आ गई.

लक्ष्मी- छी ये क्या किये अभी आप ने. मुझे से प्लस ये नहीं होगा.

लल्लू- सॉरी आगे से ख्याल रखूँगा

लक्ष्मी को पकड़ क्र अपने गले से लगाया लल्लू बोलै.

लक्ष्मी को गॉड मई ले क्र उसे बीएड पर ले क्र बैठ गया

लल्लू झुक क्र फिर से लक्ष्मी क दूध को मुँह मई ले क्र चूसने लगा.

लल्लू लक्ष्मी को गॉड मई बैठाये हुए hi उठा क्र उसके दोनों पैरो को अपने कमर से दोनों और कर क लपेट लिया और उसे हल्का सा उठा क्र अपना लौड़ा लक्ष्मी क मखमली छूट मई उतर दिया

इस आसान मई लल्लू का पूरा लैंड लक्ष्मी क अंदर पहुंच गया था

लक्ष्मी जल्दी से अपने हाथ को लल्लू क कंडे पर रख क्र थोड़ा सा उठ गई.

लक्ष्मी को लगा जैसे उसके पेट मई कोई गरम सरिया घुस गया हो.

लल्लू पीछे से निचे हाथ ले जा क्र लक्ष्मी क गद्देदार गांड को पकड़ क्र उसे अपने गॉड मई बैटःए अपने लैंड पर उछलने लगा.

लक्ष्मी लल्लू क होठो को चुस्ती उसके कंधे को पकड़े लैंड पर उप्पेर निचे हो क्र अपने छूट मई लैंड को निगले जा रही थी.

धीरे धीरे दोनों एक बार फिर अपने चरम पर पहुंचने लगे थे.

लल्लू लक्ष्मी क छूट मई लैंड घुसाए उसे बीएड पर लेता क्र उसके उप्पेर चढ़ गया और तेज गहरे स्ट्रोक लगाने लगा.

थोड़ी देर मई hi दोनों एक दूसरे को तृप्त करते संत हो गए

लल्लू निढाल हो क्र लक्ष्मी क सरीर पर लुढ़क गया

आँख बंद किये लल्लू वही थोड़ी देर लेता रहा.

थोड़ी देर बाद लल्लू आहिस्ता से उठा और लक्ष्मी क छूट से अपना लैंड निकल लिया.

लैंड निकलते hi ऐसी आवाज आई जैसे पेप्सी क बोतल का ढक्कन खुला हो.

लक्ष्मी क छूट से दोनों का मिला हुआ रास बहार निकल क्र बीएड पर गिरने लगा.

लल्लू लक्ष्मी क बगल मई लेट गया उसे अपने बहो मई ले क्र.

लक्ष्मी- मुझे साफ़ करना है खुद को. ऐसे नींद नहीं आएगी

लल्लू उठ क्र लक्ष्मी को गॉड मई ले क्र वाशरूम चला गया.

वह दोनों अपने आप को साफ़ किये.

लल्लू पानी से अपने आप को साफ़ कर रहा था तभी उसे कुछ ख्याल आया और उसका हाथ रुक गया.

लल्लू वह से तुरंत बहार निकल क्र अपना मोबाइल उठाया और आईएनएस. किरण को कॉल लगा दिया.

लल्लू- Hello, सॉरी इतने रात को डिस्टर्ब किया.

कॉल उठाने क बाद लल्लू किरण से बोलै.

आईएनएस. किरण- नहीं नहीं, कोई बात नहीं. अभी मई डिनर कर क hi उठी हु. कहिये कैसे कॉल किया

लल्लू- आप से एक बात पूछनी थी.

आईएनएस. किरण- है कहिये.

फिर लल्लू ने किरण से कुछ कहा.

आईएनएस. किरण- ओह्ह्ह नूवो. मई ये कैसे भूल गई.

मई अभी जाँच करवाती हु.

लल्लू- अगर बुरा न मने तो क्यू न हम दोनों hi चले.

आईएनएस. किरण- (थोड़ी देर चुप रहने क बाद) ठीक है आप तैयार रहिये. मई आ रही हु आप को लेने. एड्रेस मैसेज क्र दीजिये अपना.

लल्लू किरण को एड्रेस मैसेज क्र दिया और उठ क्र कपडे पहनने लगा

लक्ष्मी- कहा जा रहे है अभी आप.

वाशरूम से निकलती लक्ष्मी बोली.

लल्लू- अभी किरण आ रही है. उसके साथ जा रहा हु. सुबह तक आऊंगा. आप बुआ क आपस जा क्र सो जाओ.

लल्लू बिच का दरवाजा खोल क्र लक्ष्मी को बुआ क पास ले आया.

बुआ- क्या हुआ. अभी तो इतना हल्ला क्र रहे थे. अब ये कपडे पहन क्र कहा की तयारी है.

लक्ष्मी सर झुका ली सरम से.

लल्लू- मुझे थोड़ा काम है. आप लक्ष्मी जी को यही अपने पास सुला लीजिये. मई सुबह तक आऊंगा

बुआ- अभी इतनी रात को कहा जा रहा है.

लल्लू- मई जरा ठाणे जा रहा हु. किरण आ रही है लेने. उसे कोई काम है केस से रिलेटेड.

लल्लू इन लोगो को सचाई नहीं बताना चाहता था ककी ये लोग फिर सचाई जान क्र लल्लू को जाने नहीं देते.

लल्लू लक्ष्मी को वह छोड़ क्र बहार आ गया.

बहार गए पर खड़ा हो क्र लल्लू किरण का इंतजार करने लगा.

थोड़ी देर मई hi किरण अपनी गाड़ी ले क्र आ गई.

लल्लू- मेरे ख्याल से इस गारी को आप यही छोड़ दीजिये. ये पुलिस की गाड़ी दूर से hi पहचान मई आ जाएगी.

किरण- सही कहा आप ने लेकिन फिर किस से चले

लल्लू- मई अपना गाड़ी ले लेता हु.

किरण- ये सही रहेगा

फिर किरण अपनी गाड़ी वही पोर्च मई लगा दी और लल्लू अपना गाड़ी ले क्र वह से निअक्ल गया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 67.

लल्लू और किरण गाड़ी मई बैठ वह से ैप ऑफिस पहुंचे.

वह जा क्र किरण अपने ठाणे मई मौजूद स्टाफ को बुलाई.

किरण- हम सभी अभी तक पुरे सहर मई सोमनाथ (लक्ष्मी क चाचा) और उनके साथी को धुंध लिए है लेकिन एक अहम् जगह छूट गया हम से.

वह मौजूद सभी पुलिस वाले किरण को देखने लगे की अब ऐसी कौन सी जगह है जो इन से छूट गया है जब की वो लोग पुरे सहर मई तो करि जाँच क्र चुके है.

किरण- हम ने सरे सहर का एक एक गली एक एक नुक्कड़ सब छान मरे है लेकिन हम सब से एक अहम् जगह छूट गया और वो है शिप्रा नदी. शिप्रा नदी मई हम ने अभी तक नहीं ढूंढा है उन लोगो को. वह वो लोग किसी बोट या स्टीमर मई छुपे हो सकते है.

" सही कहा आप ने मम. हम से वो जगह रह गया है. हम सभी कल hi लग जाएंगे इस काम मई."

वह खड़ा एक S.I बोलै.

किरण- जब ये कल hi करना था तो हम अभी क्यू आये यहाँ. कल पर क्यू चोदे इस काम को. अभी क्या आप की बारात आने वाली है.

किरण गुस्से मई उस S.I को बोलै.

" सॉरी मम." वो S.I सर झुका क्र बोलै.

किरण- मुझे अभी सब तैयार चाहिए. वह अँधेरा होगा नदी मई. उसके लिए नाईट विज़न गिलास और सर्च लाइट्स सब तयारी क्र लो.

सभी लोग वह से अपनी तयारी मई लग गए.

लल्लू किरण क साथ उसके ऑफिस मई बैठा था.

दोनों एक मैप निकल क्र टेबल पर फैलाये बाटे क्र रहे थे.

थोड़ी देर मई एक कांस्टेबल आ क्र सभी तयारी हो जाने की बात बताई.

दोनों वह से निकल क्र अपनी गाड़ियों मई बैठ गए.

बांकी पुलिस वालो क लिए एक दूसरी कार माँगा ली है थी.

सभी सादे ड्रेस मई गाड़ी मई बैठ क्र चल दिए.

किरण- सर्च कहा से सुरु किया जय.

लल्लू- हम सभी अभी सिद्धवट घाट चलते है. वह हम दो गुटों मई बात जाएंगे. एक गट एक दिशा मई जा क्र सर्च करेगा और दूसरा गट दूसरे दिशा मई.

किरण- ये सही रहेगा.

दोनों गाड़ी सिद्धवट घाट जा क्र रुक गई

सभी उतर क्र वह गाड़ी एक साइड मई लगा क्र अपना अपना सभी सामान ले क्र तैयार हो गए.

किरण- एक गट मई मई और मेरे साथ तीन कांस्टेबल रहेंगे.

बांकी दूसरे गट मई ललित क साथ आप सभी.

दोनों गट वह लगे हुए स्टीमर मई चढ़ गए.

नदी क एक दिशा मई किरण अपने साथी पुलिस वालो क साथ कहली गई और दूसरी और नदी क ललित कुछ कांस्टेबल और सी क साथ.

क्षिप्रा नदी मई ये दोनों ग्रुप दूर दूर तक फैले बॉट्स और स्टीमर्स को धुंध धुंध क्र उस मई देखने लगे.

ढूंढते हुए रात से सुबह होने को आ गया लेकिन कही कोई सफलता इन दोनों ग्रुप मई से किसी क हाथ नहीं लगा था.

किरण मोबाइल क द्वारा ललित & पार्टी से बराबर संपर्क मई थी.

दोनों ग्रुप अभी उज्जैन से बहार निकल आये थे.

तभी एक पुराण सा स्टीमर ललित क ग्रुप मई सी को दिखा

सभी अब हताश हो गए थे और नींद से सभी लोगो की पलके भी बोझिल थी.

S.I- क्या करना है अब ललित बाबू. ये आगे एक स्टीमर दिख रहा है इसके अलावा तो कही दूर दूर तक कोई छोटी सी नव भी नहीं है. इसके बाद मम को बोल क्र वापस चलते है अब.

लल्लू- हतास मत होइए S.I साहब. परिश्रम का फल मीठा होता है. वैसे एक बात तो बताइये

स. ी- कहिये क्या पूछना चाहते हैं

लल्लू- मान लीजिये इस अगले स्टीमर मई वो लोग हुए तो क्या कीजियेगा उनके साथ.

स. ी - उन फलो की तो मई… छोड़िये. मुझे नहीं लगता इस मई भी वे लोग होंगे. वो सहर से बहार भाग गए होंगे. आखिर दो दिन हो गया है. काम समय नहीं होता.

लल्लू- अरे जनाब आप निराश क्यू होते है. उप्पेर वाला हमेसा धर्म का hi साथ देता है. आज भी हमे सफलता जरूर मिलेगा. अब आप मेरे पुज्हे गए सवाल का जबाब तो दे दीजिये. उन लोगो क साथ क्या कीजियेगा.

स. ी- अगर वो लोग मिल गए तो सीधा थोक दूंगा फलो को. ताकि दुबारा भागने की कोसिस hi नहीं करेंगे ककी भागने क लिए वो लोग जिन्दा hi नहीं रहेंगे.

धीरे धीरे लल्लू लोगो का स्टीमर उस आगे वाले स्टीमर क नजदीक आता जा रहा था.

रात का अँधेरा छत गया था. वैसे अभी सूर्य देव अभी नहीं निकले थे लेकिन अब चारो और उजाला फैलने लगा था.

आगे वाले स्टीमर मई बहार कोई भी नहीं दिख रहा था.

लल्लू- मेरे ख्याल से अपना स्टीमर यही रोक देना चाहिए.

दो लोग हम तैर क्र उस स्टीमर तक जाएंगे फिर उसके 10 मिनट्स बाद अपना स्टीमर आगे वाले स्टीमर से लगा देना.

S.I- मेरे ख्याल से तो सीधा अपना स्टीमर उस स्टीमर क साथ लगा क्र ढाबा बोल दिया जय, जैसे की अभी तक सभी स्टीमर को जांचे है.

लल्लू- नहीं नहीं. मेरा सिक्स्थ सेंस कह रहा है की इस मई जरूर वही लोग है. हमे साबधान हो क्र उनके स्टीमर पर कब्ज़ा करना है.

S.I- खतरा लेने की क्या जरुरत है. हम मैडम को भी यही बुला लेते है. साथ मई कुछ फाॅर्स भी बुला लेंगे लेकिन पहले देख तो ले पास जा क्र की वही लोग है इस मई या नहीं.

लल्लू- आप मेरे साथ चल रहे है या मई अकेले देखु वह जा क्र. वैसे मई अकेला भी काफी हु उन लोगो क लिए.

S.I - जब आप जाने की जिद्द पर अरे है तो फिर चलिए देखते है उन हरामजादो को.

तुरंत दोनों आहिस्ता से पानी मई उतर क्र तैरते हुए आगे वाले स्टीमर की और बढ़ गए

पीछे एक कांस्टेबल किरण को भी कॉल क्र बता दिया साडी बात

किरण भी तुरंत वह से मूव क्र गई इन लोगो की और आने क लिए.

लल्लू सी क साथ तैरता हुआ आगे वाले स्टीमर क पास पहुंच गया था

लल्लू- आप पीछे से जाइये मई आगे से जाता हु.

लल्लू तैरता हुआ आगे को आ गया और उप्पेर सर निकल क्र हलके से डेक पर देखा.

वह अभी कोई नहीं था.

लल्लू हाथ बढ़ा क्र निचे साइड मई लगे हुए तुबे को पकड़ क्र उसके सहारे उप्पेर डेक पर आ गया.

वह एक साइड चुप क्र चारो और देखा.

कही कोई नहीं दिख रहा था.

लल्लू अपने कदमो को आहिस्ता से आगे बढ़ता हुआ बिना आवाज किये स्टीमर क अंडर झक क्र देखा गेट से.

अंडर पांच लोग थे जिन मई से चार लोग तो सो रहे थे निश्चिंत हो क्र लेकिन एक वही चेयर पर बैठा हाथ मई आटोमेटिक गन लिए हुए ऊंघ रहा था.

लल्लू सतर्क हो गया. यही लोग है जिसके तलाश मई ये लोग रात काली क्र रहे थे.

तब तक सी भी पीछे से चढ़ क्र खिड़की से झांक क्र देख चूका था.

वो अपने साथियो को इसरा क्र दिया आने को.

लल्लू आहिस्ता से आगे बढ़ता हुआ उस चेयर पर बैठे ऊंघते साक्ष क पास पीछे जा क्र खड़ा हो गया.

लल्लू अपने कमर से पिस्तौल निकल क्र एक हाथ से मज़बूरी से पकड़ क्र उप्पेर हवा मई उठा लिया और दूसरे हाथ से झट से उस चेयर पर बैठे साक्ष का मुँह बंद क्र दिया.

हवा मई उप्पेर उठा हाथ तेजी से उस चेयर पर बैठे साक्ष क सर और आ क्र लगा.

वो साक्ष अपना हाथ पेअर मरता छूटने की कोसिस करने लगा तब तक लल्लू एक बार और पिस्तौल का मजबूत प्रहार उस साक्ष क सर पर कर दिया.

उसका सर फैट चूका था जिस से गधा लहू निकल क्र उस बैठे साक्ष क साथ लल्लू क भी कपड़ो मई कई जगह लग गया.

वो अब बैठा बैठा hi बेहोश हो चूका था.

लल्लू और सी दोनों अब सब से पहले वह जितने भी हथियार दिख रहे थे वो सब एक जगह समेत क्र रख लिए और कुर्सी लगा क्र दोनों उन चारो क सर और पेअर क पास बैठ गए.

तब तक इन लोगो का स्टीमर भी इस स्टीमर क साथ लग चूका था.

बांकी क कांस्टेबल भी वह आ गए थे.

लल्लू फिर आगे बढ़ क्र लक्ष्मी क चाचा क सर क पास आ क्र उसे सोये हुए मई hi एक जोर का तमाचा लगा दिया.

तमाचे की मर से लक्ष्मी क चाचा सोमनाथ जल्दी से अपने गाल को सहलाता उठ बैठा.

सोमनाथ- किसने मारा है मुझे.

आवाज सुन क्र उसके बांकी क तीनो साथी भी जल्दी से उठ क्र इधर उधर हाथ मरते हुए अपने हथियार ढूंढने लगे

हथियार तो पहले hi इन दोनों ने समेत क्र एक और रख दिए थे.

लल्लू अभी अपना चेहरा धक् रखा था जैसे सोमनाथ से पहली बार मिला था लक्ष्मी क घर पर.

लल्लू- कैसे है चमन चूतिये. कितना समझाया था तुझे नहीं आयी न समझ तुझे.

सोमनाथ- tu...tum..tum यहाँ क्या क्र रहे हो. ये लोग कौन है.

लल्लू- तेरे ससुराल वाले है. ले जाने आये है तुझे.

क्या लगा था तुझे की तू बच जाएगा. लगता है भूल गया तू मेरे को.

सोमनाथ- देख मेरी तुम्हारी कोई दुश्मनी नहीं है. तू बोल कितना पैसा चाहिए तुम्हे मई दूंगा. हम सब को जाने दे यहाँ से. हम तुम सब को इतना पैसा देंगे की तुम्हे फिर कही और कोई काम करने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

लल्लू- वह रे भिखारी. कहा से इतना पैसा ले आया है दो दिनों मई. पहले तो तेरे पास मैंने फूटी कैसी भी नहीं छोड़ी थी.

सोमनाथ- आम कहने से मतलब रखो न पैर क्यू गईं रहे हो.

लल्लू- क्या करू बहुत बुरी बीमारी है. जब तक पैर नहीं गईं लेता आम खाने का मन hi नहीं करता.

सोमनाथ- तुम हमारे ग्रुप मई शामिल हो जाओ. तुम जैसे साथी की hi हमे जरुरत है. तुम सब को पैसे से टेल देंगे हम.

लल्लू- सी साहब ये कुछ ज्यादा hi नहीं बोल रहा. क्या आप को गुस्सा नहीं आता.

सी- मई तो अब तक थोक दिया होता. वो तो आप hi बातो मई समय बर्बाद क्र रहे है

लल्लू- (सोमनाथ को देख क्र) देख रहा है. तेरा कल्याण करने को कितने बैचेन है ये. बता कहा से इतने पैसे आये तेरे पास. नहीं बताया तो फिर सी साहब hi तुम से पुचिन्गे. वो कैसे पुचिन्गे ये तो उनके तेवर से तुम्हे पता चल hi गया होगा.

सोमनाथ- ओह्ह तो तुम सब पुलिस वाले हो. कितना कमा लेते हो महीने मई. 40000- 50000. मई इसका डबल ट्रीपले दे सकता हु हर महीने तुम्हे. मेरे साथ काम करो.

लल्लू- सी साहब अब ये आप क जिम्मे है. जो मर्जी वो करो बस जान से मत मरना.

लल्लू गन निकल क्र बांकी क तीनो को थोक दिया.

तीनो की आत्मा अपने परमात्मा से मिलने पहुंच गए.

सोमनाथ- ये क्या किया तुम ने. यही तो था हमारे कुबेर की चाभी.

लल्लू- सी साहब इसे भी थोक क्र ख़त्म करो कहानी. ये तो फैला प्यादा निकला.

सी अपनी गन निकल क्र सोमनाथ पर तन दिया

सोमनाथ- रुको... रुको मई सब बताता हु.

लल्लू- अब आया न लाइन पर. चल बता अपने बेटे को क्यू मारा जेल मई. वो क्या बिगड़ा था.

सोमनाथ- वो अब सुधरने की बाते करता था. जब देखो तब भाषण देने लगा था की मैंने उसे बिगड़ा था. वो सरकारी गवाह बन क्र आगे अपनी लाइफ अच्छा इन्शान बन क्र जियेगा. साला पकक्का दिया था बोल बोल क्र. इसी लिए उसे उप्पेर अच्छा इन्शान बनाने क लिए भेज दिया.

लल्लू- जेल से कैसे भगा था.

सोमनाथ- उस मई कौन सी बड़ी बात है. पैसा फेको तमाशा देखो.

वह काम करने वाले संत्री को 100000 दिया वो हम तीनो को कचरे क गाड़ी मई बैठा क्र जेल से बहार क्र दिया.

लल्लू- वहहह क्या बात है. वो संत्री कौन था.

सोमनाथ- गंगाराम नाम है उसका. तुम लोग भी आ जाओ हमारे साथ. अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है.

लल्लू- पैसे कहा रखे है.

सोमनाथ- इस बार नहीं बताऊंगा अब कुछ मई. नहीं तो फिर से तुम मुझे फशा क्र चलते बनोगे.

लल्लू- सी साहब अब ये अगर एक बार भी इंकार करे तो इसे ऐसे जगह गोली मरना की ये बस मरे नहीं.

चल बता. पैसे कहा है.

सोमनाथ- यही उस बैग मई.

वही रखे दो बैग की और इसरा करता हुआ बोलै वो.

सोमनाथ- तुम्हारी मुझ से क्या दुश्मनी है. क्या बिगाड़ा है मैंने तेरा.

सी- तूने इनके ससुर और सासु माँ का मर्डर किया है फैले.

सोमनाथ- क्या बक रहे हो. मैंने किस का खून क्र दिया

लल्लू- अपने भाई और भाभी का.

सोमनाथ- क्या… लक्ष्मी की सदी कहा हुई थी. झूठ बोल रहे हो तुम.

लल्लू- अब हो गई है.

तभी गोलियों का बढ़ उस स्टीमर पर आया.

लल्लू कूद क्र अपने सिपाहियों पर गिरा और उन्हें बचता हुआ एक यह मई चुप गया.

सी- ये कौन है.

सोमनाथ- बहुत ुर्र रहे थे न. अब क्यू चुप रहे हो आ जाओ बहार. तुम्हे भी तुम्हारे ससुर और सैश क पास भेज देता हु.

सोमनाथ अपने कमर से एक छोटी सी पिस्तौल निकलता हुआ बोलै.

लल्लू- सी साहब, मई बोल रहा था न फैले को गोली मर दो लेकिन तुम्हे इस पर बड़ा प्यार आ रहा था लो कर लो और प्यार.

सी- ललित भाई मई कहा कुछ क्र रहा था. आप hi उस से बातो मई बिजी थे.

लल्लू- तो मुझे रोक नहीं सकते थे. अगर मुझे hi इस हलकट से प्यार हो गया था तो तुम भी आ क्र थोड़ा सा इस से मीठी मीठी बाटे क्र लेते.

लल्लू एक झगड़ालू औरत की तरह हाथ नचा क्र बोलै.

सी मुँह फारे लल्लू की हरकतों को देख रहा था छुपा हुआ

सोमनाथ- तुम दोनों की बाटे हो गई हो तो अब अपना हाथ उप्पेर उठा क्र बहार आ जाओ.

लल्लू- ऐसे कैसे बहार आ जाऊ. हलवा है क्या. पहले मई इस सी का दिमाग ठिकाने लाऊंगा. इसने हमारे प्यारे दुलारे महबूब क बारे मई गलत बोलै है. इसकी सजा तो इसे मई दे क्र रहूँगा मेरे दिल क मालिक.

लल्लू फिर से हाथ नाचता सोमनाथ को देख क्र बोलै फिर एक करारा मुक्का सी को लगा दिया.

सी इसके लिए बिलकुल तैयार नहीं था.

सी- तुम ने हिम्मत कैसे की मुझ पर हाथ उठाने की. एक ों ड्यूटी पुलिस वाले पर हाथ उठाने का अंजाम जानते हो तुम.

लल्लू- तुम ने हमारे प्यार भरी बातो मई अपना गन्दा मुँह घुसाया है. मई आज इस मुँह को तोर दूंगा.

लल्लू मुक्का बनता एक बार फिर से सी पर झपट पड़ा.

सोमनाथ- बस्स्स… बहुत हुआ ये नाटक. अब दोनों बहार आ जाओ. नहीं तो अच्छा नहीं होगा.

लल्लू- हैयय मई लूट गया.. बर्बाद हो गैया. जिसके लिए मई यहाँ लड़ाई क्र रहा हु वही इसे नाटक कह रहा है. हेय प्राणनाथ मई तो आप की तरफ से hi इस मरदूद को सजा दे रहा था ये हम दोनों क प्यार भरी बातो मई अपना पोलियो मारा तंग अडया है. मई इसका तंग तोड़ दूंगा.

लल्लू बोलता हुआ झपट क्र एक बार फिर से सी क पास गया और उसका गिरेबान पकड़ क्र खींच क्र अपने से चिपका लिया.

लल्लू- तुम भी ऐसे hi नाटक करो. मेरे पर हमला करो.

लल्लू सी क कान मई धीरे से बोलै.

लल्लू- आज मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगा. तुम ने हमारी प्यार भरी बातो मई विघ्न डाला है. कितने आरसे बाद तो मई अपने प्रीतम से मिला था और तुम तुम फिर से हमे अलग करने आ गए. तुम्हे मई जिन्दा नहीं छोडूंगा.

इधर सोमनाथ हाथ मई पिस्तौल पकडे कभी लल्लू की और तन देता तो कभी सी की और उसे समझ नहीं आ रहा था की अचानक लल्लू ये कैसी हरकते करने लगा है.

सी लल्लू की बात समझ गया था.

वो एक मुक्का लल्लू क मुँह पर लगा दिया.

लल्लू चिल्लाता हुआ दूर जा गिरा.

लल्लू- हैयय मर दिया नासपीए ने. मुझे मारा है. मई जरूर बदला लूंगा. तेरा खून पि जाऊंगा. चाहे साडी दुनिया हमारे प्यार का दुसमन बन जय लेकिन मई अपने प्रीतम का साथ नहीं छोड़ सकता.

लल्लू कूद क्र खड़ा हुआ और जम्प ले क्र सी पर कूद गया.

दोनों एक दूसरे को पकडे हुए गिर गए.

दोनों एक दूसरे को अपने दोनों हाथो से पकड़ रखे थे.

कभी लल्लू उप्पेर और सी निचे आ जाता तो कभी सी उप्पेर और लल्लू निचे.

दोनों एक दूसरे को लात घुसा भी मरे जा रहे थे.

लड़ते हुए दोनों अब बहार आ गए थे.

सामने hi सोमनाथ हाथ मई गन लिए हुए उनके सर पर खड़ा था.

लल्लू सी क साइन से अपना पेअर लगा क्र सोमनाथ की और उछाल दिया.

सी ुरता हुआ सोमनाथ से जा टकराया और उसे लिए हुए निचे जा गिरा.

लल्लू झपट क्र गन उठा लिया.

लल्लू- मेरे प्रीतम प्यारे अब तुम हाथ उप्पेर क्र क खड़े हो जाओ. मुझे अभी तुम्हे पप्पिया झप्पिया लेनी है.

लल्लू गन नाचता सोमनाथ को देख क्र बोलै.

सी और सोमनाथ दोनों उठ क्र खड़े हो गए.

सोमनाथ- तो ये सब तुम्हारा नाटक hi था. मुझे लग hi रहा था.

लल्लू- वहहह मेरे प्राण प्यारे तो बहुत समझदार हो गया है लेकिन थोड़ा लेट हो गया.

अब तो मई तुम्हे तुम्हारे ससुराल hi ले जाउगा.

इधर गोली दोनों और से चल रहा था.

एक और सोमनाथ क कुछ साथी थे दूसरे स्टीमर मई और दूसरी और लल्लू और सी क बांकी क पुलिस वाले.

लल्लू- सी साहब हमारे प्राण नाथ का जरा अच्छी तरह से खातिरदारी क्र दीजिये. बहुत दिन बाद मिले है मेरे महबूब मुझ से.

सी- जरूर, ऐसी खातिरदारी करूँगा की आप क महबूब को अगले जन्म तक ये खातिरदारी याद रहेगी.

लल्लू- बहुत बढ़िया. तब तक मई जरा हमारे प्यार क दुश्मनो से निपट लू.

लल्लू वह से एक आटोमेटिक गन उठा क्र बहार डाक पर चल दिया.

लल्लू क बहार जाते hi वो सी सोमनाथ की खातिरदारी मई लग गया.

सी जम्म क्र सोमनाथ की पिटाई करने लगा.

जगह जगह से सोमनाथ क बदन से खून निकल रहा था.

सी बहुत बुरी तरह से उठा उठा क्र सोमनाथ को पटका था.

लल्लू छुपता हुआ बहार आया तो देखा की उसके तीन कांस्टेबल मई से दो बुरी तरह से घायल हो गए थे.

सामने से लगातार गोलिया चल रही थी.

लल्लू छुपता हुआ बहार निकल क्र देखा तो सामने वाले स्टीमर मई तीन लोग दिखे जो आटोमेटिक गन से गोलिया चला रहे थे.

लल्लू घूम क्र पीछे चला गया अपने स्टीमर क और वह से निचे पानी मई उतर क्र वो सामने वाले स्टीमर क पीछे जा पंहुचा तैरता हुआ.

उस स्टीमर क पीछे से चढ़ क्र लल्लू उन तीनो गुंडों क पेअर का निशाना बना क्र अपना गन का मुँह खोल दिया.

तीनो गुंडे वही अपने जगह पर लुढ़क गए.

लल्लू फिर उस स्टीमर क डाक पर आ क्र अपने साथी कांस्टेबल को गोली चलने से रोक दिया.

लल्लू कॉल क्र किरण को साडी बात बता दी साथ hi सोमनाथ को क्रॉस फ़िरेंग मई मरने की खबर भी दे दी.

किरण आगे अपने अधिकारीयों को कॉल क्र तुरंत जरुरी सहायता भेजने क लिए बोलै.

अब सुबह हो गया था और सूर्य देव आसमान मई निकल आये थे.

सभी स्टीमर को एक साथ लगा क्र लल्लू एक एक क्र सभी को अपने स्टीमर पर ले आया.

लल्लू- इस बेकार को धो क्र क्या फायदा सी साहब. इसे यही नदी मई समाधी बना दीजिये इसका.

लल्लू लक्ष्मी क चाचा सोमनाथ को देख क्र कहा.

सी सोमनाथ क भेजे मई एक गोली उतर दिया.

सोमनाथ सक पर कटे वृक्ष की तरह गिर गया.

लल्लू अपने स्टीमर मई आ क्र सभी घायलों का फर्स्ट ऐड क्र दिया तब तक एक हेलीकाप्टर घायलों को हॉस्पिटल ले जाने को आ गया.

सभी को उस मई दाल क्र लल्लू और सी अपने स्टीमर से नदी की घाट की और वापस चल दिए.

घाट पर किरण पहले से hi मौजूद थी.

फिर सभी दोनों गाड़ियों मई पहले ैप ऑफिस गए फिर लल्लू वह से अपने घर को चल दिया.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 68.

लल्लू गाड़ी से निकल क्र अंदर आया तो ड्राइंग रूम मई मां क साथ युसूफ अंकल बैठे हुए थे.

मां- कहा से आ रहे हो बीटा. कल सुबह से अब दिखे हो.

लल्लू- सोमनाथ का पता चल गया था मां जी. उसी को पकड़ने गए थे.

मां + युसूफ अंकल- क्या वो धूर्त पकड़ा गया बीटा.

दोनों उत्तेजित हो क्र अपने जगह से उठाते हुए बोले

लल्लू- है अंकल वो पकड़ा गया.

मां- कहा छुपा था वो बीटा.

लल्लू- क्षिप्रा नदी मई दूर एक स्टीमर पर अपने साथियो क साथ छुपा था मां.

युसूफ- बड़ा चालक है वो. नदी मार्ग से भागने क फ़िराक मई होगा वो.

लल्लू- सही कह रहे है आप अंकल लेकिन उसे भागने से पहले hi पकड़ लिया गया.

मां- कहा है अब वो.

लल्लू- बेचारा अब नहीं रहा मां.

युसूफ- क्या.. अभी अभी तो तुम बोले की पकड़ा गया वो फिररर….

लल्लू- पुलिस क साथ मुठभेड़ मई मारा गया वो.

मां- अच्छा hi हुआ जो वो मारा गया. अब कोई दर नहीं रहा हमारी बेटी को.

युसूफ- सही कहा भाई साहब आप ने. अब हमारी लक्ष्मी बेटी सुकून से रहेगी नहीं तो अभी वो बहुत दर गई थी उसके जेल से भागने का सुन क्र.

मां- है सही कहा आप ने. उस रात जो उसका हालत था. देख क्र तो एक बार को मई भी दर गया था.

युसूफ- अभी उम्र hi क्या हुआ था भाई साहब. अभी तो बच्ची hi थी वो. उस मनहूष ने हमारी बेटी का तो जीवन hi बर्बाद क्र देना था. वो तो अच्छा हुआ की ललित बीटा मिल गया रस्ते मई और लक्ष्मी बेटी की जिंदगी बदल गई.

मां- जा बीटा. तू जा क्र आराम क्र.

फिर लल्लू वह से अपने कमरे मई आ गया.

अभी सभी लोग वही बैठे हुए थे.

सिबा- जीजू सुबह सुबह कहा से आ रहे है. मॉर्निंग वाक गए थे क्या.

लक्ष्मी- जनाब रात से hi गायब थे. अब आये है.

कोमल- क्या रात से hi…. जीजू एक तो आप वैसे hi लेट आये थे फिर रात मई hi कहा चले गए थे.

लल्लू- पहले जरा मई फ्रेश हो जाऊ फिर बताता हु. अभी सरे कपडे गीले है मेरे.

" कपडे क्यू गीले हो गए. कहा थे आप. ऐसा क्या क्र रहे थे." एक साथ सभी पूछने लगा.

लेकिन लल्लू तब तक अपना कपडा ले क्र वाशरूम जा चूका था.

थोड़ी देर मई फ्रेश हो क्र आ गया बहार.

लल्लू- लळष्मी जी एक कप चाय मिलेगा क्या. वैसे सब से पूछ लीजिये अगर सब पीना चाहे तो सब क लिए ले आइये.

सकीना- तुम लोग बाटे करो. मई ले क्र आती हु.

लल्लू- आंटी आप बैठिये ये ले आएगी. आप क्यू तकलीफ क्र रही है.

सकीना- नहीं नहीं. मेरे रहते मेरी बेटी काम करे ये क्या मुझे अच्छा लगेगा.

लल्लू- अपने माँ बाप से कौन काम करता है. आप बैठ जाइये. आज से आप कोई काम नहीं करेंगी. जिसकी चार चार जवान बेटी हो उस माँ को काम करना पड़े ये अच्छी बात नहीं है.

जोया- जीजू आप ये क्या क्र रहे हो. जरा हम सब पर तरस खाओ

लक्ष्मी- आप बात क्यू बदल रहे है. पहले ये बताइये की आप कहा गए थे

लल्लू- पहले सब क लिए चाय. फिर चाय पिटे हुए बताऊंगा की मई रात से कहा था.

सिबा- मई चाय लती हु. आप सब बैठिये.

फिर सिबा वह से किचन मई चाय लेने चली गई.

लल्लू- कोमल दी आप क्या करती है.

कोमल- मई आप की दीदी नहीं हु. साली हु. आप मुझे सिर्फ कोमल hi कहिये.

लल्लू- आप लखमी जी की दीदी है तो मेरा भी दीदी हुई न.

कोमल- बिलकुल नहीं. मई आप की साली हु. मुझे दीदी नहीं सिर्फ कोमल hi कहेंगे आप.

जोया- जीजू, वैसे भी साली आधी घरवाली होती है. इस लिए कोमल दी आप को दीदी कहने से मन क्र रही है.

सकीना- चुप क्र बेसरम कही की. कुछ भी बक्ति रहती है.

सिबा- अम्मी क्यू दन्त रही हो जोया को. सही hi तो कह रही है ये. कोमल इसी लिए मन क्र रही है.

सकीना- तुम तो चाय लेने गए थे न क्या हुआ.

सिबा- काकी ला रही है. मई बना रही थी की वह काकी आ गई और मुझे फिर वह से ये कह के भगा दिया की मई खुद ले क्र आ रही हु.

वैसे अम्मी अब्बू आप को बुला रहे है.

सकीना वह से अपने कमरे मई चली गई.

बुआ- अब बताओ कहा थे रात से.

फिर लल्लू सभी को रात मई जो कुछ भी हुआ बता दिया संछेप मई

सभी सोमनाथ का एनकाउंटर का सुन क्र चैन की सैश लिए.

सिबा- अच्छा हुआ. उस हत्यारे क साथ यही होना था.

कोमल- मुझे मिल जाता तो उसे मई hi मर देती.

लक्ष्मी तो सुन क्र hi बुआ क कंधे पर सर रख क्र रोये जा रही थी.

जोया- आह दीदी. उस मरदूद ने जीना हराम क्र रखा था. उसके चक्कर मई घर से बहार निकलना मुश्किल था.

लल्लू- अब आप सभी अपने पहले वाला रूटीन फिर से फॉलो क्र सकते है. अब कोई दर नहीं है.

कोमल- जीजू जो काम इतने दिन से पुलिस नहीं क्र पायी वो आप ने एक रात मई कर दिखाया. सुच मुझे तो लक्ष्मी क किस्मत से जलन हो रहा है.

जोया- जीजू आप न मुझ से भी सदी क्र लीजिये. वैसे भी साली आधी घरवाली hi होती है.

बुआ- बीटा यहाँ बच क्र रहना. देख ले सब तेरे पीछे पड़े है.

कोमल- लेकिन जीजू तो सिर्फ हमारे लक्ष्मी क पीछे hi पड़े है. हम सब की तरफ तो देखते भी नहीं है.

तभी काकी चाय ले क्र आ गई.

सब चाय पिटे हुए बाटे करने लगे.

लक्ष्मी- आज आप सब को शॉपिंग करने वाले है भूल नहीं जाइएगा.

लल्लू- याद है मुझे मैडम. कितने बजे जाना है.

कोमल- जीजू यहाँ से 3 बजे चलेंगे. पहले मूवी फिर शॉपिंग फिर वापस आ जाएंगे.

लल्लू- ठीक है. सब तैयार रहिएगा.

बुआ- अब सभी चलो यहाँ से. ये रात से जगा है और बहुत थका हुआ भी होगा. आराम करने दो इसे

जोया- सही कहा बुआ जी आप ने. जीजू अब आप आराम क्र लो.

सभी वह से बहार आ गए.

लल्लू भी आँखे बंद क्र सोने की कोसिस करने लगा.

इधर नासिक……

गायत्री वह से अपने गुरु कुल आ गई.

गुरुकुल मई गायत्री की शिक्षा पूर्ण हो गया था.

उसे अब यहाँ से जाना था. गायत्री अपने जाने की तयारी करने लगी.

उसने अपने जरुरत की सरे सामान को एक बैग मई रख लिया और फिर वह से आचार्य क पास इन से आज्ञा लेने आ गई.

गायत्री आगे बढ़ क्र आचार्य की चरण छू क्र प्रणाम किया और उन्हें बता दिया की वो अब जा रही है यहाँ से.

आचार्य- पुत्री ये गुरुकुल तुम्हारा घर भी था बिच बिच मई जब भी तुम्हारा दिल करे यहाँ आते रहना.

आचार्य भीगे आँखों से देखते हुए गायत्री को बोले.

फिर थोड़ी देर दोनों मई ऐसे hi भाबुक बाटे हुए और फिर गायत्री वह से इजाजत ले क्र अपना बैग ले क्र गुरुकुल से बहार आ गई.

गायत्री क कंधे पर बैग टेंगा हुआ था और एक हाथ मई कमंडल और दूसरे हाथ मई त्रिशूल.

वो वह से निकल क्र एक रिक्शा पकड़ क्र रेलवे स्टेशन आई जहा उसने देखा की एक ट्रैन कड़ी है स्टेशन पर.

गायत्री उसी ट्रैन मई चढ़ गई.

गायत्री अभी एक साध्वी क भेष मई थी.

बदन पर केशरी चोला, गले मई कई रुद्राक्ष का माला, एक दुपट्टा जिस पे "ॐ नमः शिवाय" लिखा हुआ था.

समय चेहरा जिस पर हमेशा एक चमक रहता था.

हाथ मई कमंडल और त्रिशूल लिए एक कपार्ट मई जा क्र एक खली शीट पर बैठ गई.

अभी साम का समय था. सभी कम्पार्टमेंट मई लाइट्स जल रहे थे. कुछ सीटों और बैठे यात्री आपस मई बाटे क्र रहे थे तो कुछ अपने सीट पर बैठे हुए ऊंघ रहे थे.

चाय नास्ता वाले बिच बिच मई आ क्र सभी को आवाज लगता हुआ चाय पानी क लिए पूछते हुए उस कपार्ट से गुजर जाते थे.

गायत्री आँखे बंद किये हुए अपने जीवन क बारे मई सोच रही थी.

कैसी थी उसकी जिंदगी. कितने उतर चढ़ाव थे उसके जिंदगी मई.

कल तक उसे कुछ नहीं पता था अपने बारे मई की वो कौन है कहा से आया है. कौन है उसके पिता. लेकिन आज उसे पता भी है तो भी वो अकेली hi है आज भी वो.

पहले उसके जीवन का उद्देश्य इसके माता पिता को ढूँढना था.

लेकिन अब उसके जीवन का उद्देश्य hi बदल गया है. अब उसे अपने पिता से जिस क कारन अलग होना पड़ा था उसे ढूँढना था. उसे इस बारे मई अभी कुछ नहीं पता था. अभी उसे एक ठिकाना भी चाहिए था. ककी जब तक कोई ठिकाना नहीं होगा. वो अपने मकशद क लिए कार्य कैसे सुरु करेगी.

रात मई थोड़ा बहुत जो कुछ आचार्य ने उसे रस्ते मई खाने को दिया था वही खा क्र सो गई.

रात क किसी पहर गर्मी और सोर से गायत्री का नींद खुल गया.

आँखे खोल क्र देखि तो कम्पार्टमेंट मई थोड़ा अँधेरा था.

दो चार लोग और भी जग गए थे.

सभी आपस मई बाटे क्र रहे थे. सुनाने पर पता चला की आगे कोई ट्रैन एक्सीडेंट क्र गया है. जब तक रास्ता क्लियर नहीं होगा ये ट्रैन आगे नहीं जा सकती है.

कुछ यात्री उतर क्र बहार इधर उधर टहलने लगे.

वही तीन लड़के उच्चक्के तयप क आ क्र गायत्री क अगल बगल क खली जगह पर बैठ गए.

गायत्री की पलके अभी भी नींद से बोझिल थी.

गर्मी बहुत था कम्पार्टमेंट मई और गर्मी मई ालश कुछ ज्यादा hi आता है यही हाल गायत्री क साथ भी हो रहा था.

एक तो रात और अभी नींद पूरी भी नहीं हुई थी.

वो एक बार फिर से अपने आँखे बंद क्र सोने की कोसिस करने लगी बैठे बैठे hi.

तभी जैसे गायत्री को उसके जंघा पर कुछ सरसराता सा फील हुआ.

उसने आँख बंद किये hi अपने जंघा पर हाथ से सहलाया तो एक हाथ गायत्री क हाथ से टकरा गया.

गायत्री क पुरे बदन मई बिजली सी दौर गई.

वो अपने हाथ से उस हाथ को दबोच लिया.

अभी भी गायत्री की आँखे बंद थी.

गायत्री उस अनजाने हाथ को पकड़ क्र कास क्र दबा दी.

वो अंजना हाथ कड़क की आवाज करता हुआ बेकार हो गया.

तभी एक दर्द भरी आवाज वह उस डब्बे मई गूंज उठा.

गायत्री उस बेजान हाथ को छोड़ दिया.

तभी गायत्री क कानो मई एक खटके की आवाज सुनाई दिया जैसे कोई चाकू खोला हो.

गायत्री को अपनी और हवा का दवाब का अनुभव हुआ.

वो आँखे बंद किये हुए hi एक हाथ से हवा मई लहराते चाकू वाले हाथ को पकड़ क्र मरोड़ दी.

तभी एक और दर्द भरी आवाज वह गूंज गया.

गायत्री- जान प्यारी है तो चुप चाप यहाँ से चलते बनो. नहीं तो सभी क हाथ पेअर बेकार हो जाएंगे.

गायत्री सार्ड आवाज मई गुर्राई.

वो तीनो उच्चके लड़के दुम्म दबा क्र वह से उठ क्र भाग गए.

उनके जाने क बाद गायत्री भी वह से अपना सामान ले क्र उठ कड़ी हुई.

ट्रैन से उतर क्र गायत्री उस और बढ़ गई जिस दिशा मई एक्सीडेंट हुआ था.

थोड़ी देर ट्रैन की पटरी क सहारे शहर चलने क बाद गायत्री वह जा पहुंची.

ट्रैन क कई डब्बे पटरी से उतर गए थे. बहुत सरे लोग घायल हो गए थे जिन्हे आस पास क गौण क लोग आ क्र मदद क्र रहे थे. पुलिस और प्रशासन अभी अभी आई थी वो भी सभी घायलों को हॉस्पिटल भेज रहे थे.

गायत्री ट्रैन क चारो और घूम क्र देख रही थी की कोई ऐसा तो नहीं जिसे मदद की जरुरत हो.

वही घूमते हुए गायत्री को कुछ लोगो पर सुख हुआ की ये लोगो की मदद करने क बदले उन्हें लूट रहे है.

गायत्री उन लोगो का पीछा करने लगी. वो लोग 5 साथी थे.

सभी लोग घायलों को मदद करने क बहाने से उनका कीमती सामान और रुपया पैसा लूट रहे थे.

वो पांचो लोगो को लूट क्र अँधेरे मई भागे जा रहे थे सुनसान रस्ते पर.

गायत्री उन लोगो का पीछे छुपते हुए लगी हुई थी.

आगे जा क्र एक पुराने खंडहर मई वो सभी चले गए.

गायत्री भी उनके पीछे छुपते हुए अंडर जा पंहुचा.

वह अँधेरा बहुत था. गायत्री सम्भल क्र आगे बढ़ते हुए उन लोगो की आवाज सुन क्र आवाज की दिशा मई अनुमान से hi आगे बढ़ रही थी.

वो कोई पुराण किला जैसा लग रहा था जो अब टूट गया था रख रखाव नहीं होने क कारन.

अँधेरे मई भी टूटे हुए छत और बॉउंड्री दिख रहा था.

संभल क्र सीढिया चढ़ती हुई गायत्री फर्स्ट फ्लोर पर पहुंच गई जहा वो पांचो बदमाश टोर्च जला क्र सभी लुटे हुए सामान को बैग से निकल क्र निचे एक पुराण कपडा बिछाये उस पर रख रहे थे.

गायत्री दिवार क सहारे अँधेरे मई कड़ी उन लोगो क हरकतों को देख रही थी.

काफी सरे सामान उन लोगो ने लूट लिया था.

गायत्री- अब ये सारा सामान यही छोड़ क्र निकलते बनो यहाँ से. अगर जान प्यारी है तो.

गायत्री की आवाज सुन क्र वो लोग चौक क्र खड़े हो गए वह और टोर्च इधर उधर घुमा क्र ढूंढने लगे की कौन है यहाँ.

गायत्री एक मोठे पिलर क पीछे अँधेरे मई छुपी हुई देख रही थी इन्हे.

गायत्री- सुनाई नहीं दिया क्या तुम्हे. सब सामान यही छोड़ क्र निकलो यहाँ से.

एक बाँदा- सामना आ कौन है. चुप क्र कौन हमे आदेश दे रहा है. हिम्मत है तो सामने आ.

गायत्री - सामने आ गई तो फिर जिन्दा नहीं छोडूंगी.

दूसरा बाँदा- भाग यहाँ से. अगर और भी हुए इसके साथी तो हमे पुलिस से कोई नहीं बचा सकता. क्या पता कितने लोगो को बता चुकी हो.

तीसरा- भाग साला फत्तू. अब चाहे कुछ भी हो जय लेकिन ये माल तो अब अपना है. अगर किसी को चाहिए तो आ क्र हम से चीन क्र ले जय.

गायत्री वह अँधेरे मई टटोल क्र कुछ (ब्रिक्स) इत् इक्कठा क्र ली और उन सब पर दो इत् लगातार निशाना लगा क्र फेक मरी.

तीन बन्दों क सर पर जा क्र लगा वो इत्.

सभी पास पास hi खड़े थे तो तीनो सर पकड़ क्र एक दूसरे पर गिर परे

गायत्री अँधेरे से बहार निकल क्र उन लोगो क पास पहुंची और त्रिशूल क डंडे से उन गिरे हुए सभी बदमासो की अच्छी तरह से खातिरदारी क्र डाली.

गायत्री- आखरी मौका दे रही हु. जीवन मई फिर कभी ऐसे गंदे काम नहीं करोगे ये वचन दो मुझे. किसी भी मजबूर क मज़बूरी का फायदा नहीं उठाओगे. बोलो सब.

गायत्री सब को मरती हुई बोली.

सब एक साथ वडा किये की आगे से वो कभी ऐसा कोई गलत काम नहीं करेंगे और अच्छे इन्शान की तरह म्हणत की कमाई खाएंगे.

गायत्री- चलो अब निकलो यहाँ से.

वो सभी लोग गिरते पड़ते वह से जैसे तैसे भाग खड़े हुए.

गायत्री सभी सामान को फिर से बैग मई दाल क्र वापस ट्रैन क पास आई.

वह एक पुलिस अधिकारी को वो सारा सामान दे क्र संछेप मई सभी घटना बता दी.

पुलिस वाला बहुत खुश हुआ और गायत्री को धन्यवाद् कहा

अब वह से सभी घायलों को इलाज क लिए आगे हॉस्पिटल पंहुचा दिया गया था.

जो हलके घायल थे उन्हें यही उपचार क्र दिया गया था.

ट्रैन की पटरी भी खली किया जा रहा था और उम्मीद थी की थोड़ी देर मई ये भी काम हो जाएगा.

अभी सुबह होने मई कुछ समय था.

गायत्री वही एक चाय वाले से चाय ले क्र घायलों क लिए बनाये टैंट मई जा क्र आराम करने लगी.

थोड़ी hi देर मई गायत्री को नींद आ गया.

पता नहीं कब तक सोती रही थी वो.

सोर सुन क्र गायत्री की नींद खुली.

आँखे खोल क्र देखा तो सुबह हो गया था.

गायत्री उठ क्र वही मुँह हाथ धो क्र एक चाय पि और अपना सामान ले क्र आगे बढ़ गई एक कच्चे रस्ते पर.

आगे थोड़ी दूर पर ावादी वाला इलाका सुरु हो गया था.

गायत्री चलती हुई आगे बढे जा रही थी. उसका अभी न तो कोई मंजिल का पता था न रास्तो का. जिधर दिल किया चल दी.

आगे जा क्र गायत्री को वही खंडहर दिखा जहा रात मई उसने बदमाशों को पिता था.

गायत्री वह से आगे बढ़ी तो एक गौण मई प्रवेश क्र गई.

गौण क्या कुछ 20-25 घर थे. सभी कच्चे माकन बने हुए थे.

लगता था जैसे सभी यहाँ क रहने वाले मजदुर किशन है.

गायत्री आगे बढ़ती जा रही थी.

गौण क बिच मई एक छोटा सा मंदिर दिखा महादेव का.

गायत्री वही मंदिर मई जा क्र एक जगह अपना बैग और कमंडल और त्रिशूल रख दी.

वह पूजा करने कुछ गौण क दो चार लोग आये थे.

एक देवी की तरह सुन्दर नव यौवन लड़की को साध्वी क रूप मई देख क्र सभी चकित थे

आज तक उस गौण वालो ने सिर्फ पुरुष साधु को hi देखे थे.

गायत्री क मुख मंडल पर एक अलग hi तेज था जो सामने वाले को अपनी और श्रद्धा से आकर्षित करता था.

वो सभी जो वह थे. हाथ जोड़ क्र गायत्री का अभिवादन किये.

एक महिला- आप कौन हो बेटी. कभी आप को इधर देखा नहीं.

गायत्री- है माता जी. मई इधर पहली बार आई हु. यही पास मई ट्रैन का एक्सीडेंट हो गया है तो इस लिए इधर hi चली आई. यहाँ मंदिर देख क्र थोड़ी देर क लिए रूक गई. जरा स्नानं कर क मई भी आशीर्वाद ले लू शिव संकर भोले नाथ का.

दूसरी महिला- बहुत अच्छा किया आप ने बेटी.

यही मंदिर मई स्नानं का ब्यबस्था है आप आ जाओ. मई दिखा देती हु

वो महिला गायत्री को मंदिर क पास hi उस प्रांगण मई थोड़ा हूत क्र एक बाथरूम बना था वह ले जा क्र दिखा दी.

गायत्री वह जा क्र स्नानं क्र फिर वही प्रभु की पूजा की.

तब तक मंदिर की पुजारी बाबा भी वही आ गए थे जिन्हे उन महिलाओ ने बता दिया था गायत्री क बारे मई.

पुजारी गायत्री क खाने का भी वही प्रभंश क्र दिया.

पूजा करने क बाद गायत्री आ क्र एक साइड मई बैठ गई ाशन लगा क्र और ध्यान करने लगी.

आज भागदौड़ मई ध्यान लगाना वो भूल hi गई थी.

गायत्री ध्यान मई बैठी थी तब तक वह मंदिर क पुजारी कई बार आ क्र उसे खाने को बोलने आ चुके थे लेकिन हर बार पुजारी को गायत्री ध्यान मई hi दिखती तो वो बिना कुछ बोले वापस चले जाते

तब तक मंदिर मई पूजा करने और भी गौण क कई लोग आये जिस ने भी गायत्री को देखा वो उसके रूप को देख क्र उसे एक देवी hi समझता.

धीरे धीरे ये बात उस पुरे गौण मई फ़ैल गई थी की एक देवी मंदिर मई आई है.

अब सभी वह पूजा करने क बदले गायत्री को hi देखने आ रहे थे.

जो भी गौण वाले आते गायत्री क लिए कोई न कोई उपहार जरूर लेट.

जिस की जैसी श्रद्धा और हैसियत थी.

कुछ समय बाद गायत्री ध्यान से उठी तो देखती है की काफी सरे लोग जिन मई पुरुष महिला और बचे सभी थे.

वह गायत्री को घेरे खड़े थे.

पहले तो गायत्री इतने सरे लोगो को यु घेरे देख क्र चौक गई. तभी वह मंदिर क पुजारी आ गए.

पुजारी- अरे आप सब ऐसे क्यू घेरे खड़े है. चलिए जरा इन्हे रास्ता दीजिये. अभी तक कुछ भी खाये नहीं है तो पहले खाना खाने दीजिये इन्हे आप लोग.

सभी लोग फिर एक तरफ हो गए.

पुजारी- आओ बीटा. पहले आप कुछ खाना खा लो. फिर ये गौण वाले आये है आप से मिलने क लिए तो इन सभी से मिल लेना.

गायत्री- पहले इन से hi मिल लेते है न बाबा. मुझ से मिलने क लिए ये लोग अपने सरे काम धंधा छोड़ क्र आये है. मई कैसे इन्हे इंतजार करता हुआ छोड़ क्र खाने को चला जाऊ.

पुजारी- बहुत अच्छी बात कही तुम ने बीटा.

ये सभी गौण वाले तुम्हारे लिए कुछ उपहार लाये है बीटा. यहाँ क सभी लोग खेतो मई काम क्र अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते है. इसलिए उपहार को मत देखना उनका साफ़ दिल देखना.

गायत्री- कैसी बात क्र रहे है आप. पहली बात तो इन्हे इतना सब करना hi नहीं था. मई ये सब ले क्र क्या करुँगी. मई सन्ति और प्रेम की भूखी हु. मुझे बस निश्छल स्नेह चाहिए आप सब का और कुछ भी नहीं. मेरे लिए आप सभी लोग यहाँ आये यही मेरे लिए बहुत बड़ी बात है. आप सब अपने अपने काम छोड़ क्र आये है. जाइये सभी अपने घर जाइये. मई आप सब का उपहार नहीं ले रही हु. लेकिन उसके बदले मई मुझे आप सभी से बस एक वडा चाहिए की जीवन मई कैसे भी वक्त आ जय कभी सन्ति और प्रेम का रास्ता नहीं छोड़ेंगे आप लोग. मेरे लिए यही आप सब का सब से बड़ा उपहार होगा.

गायत्री सभी लोगो क आगे हाथ जोड़ क्र बोली.

पुजारी- बीटा बहुत स्नेह से ये लोग तुम्हारे लिए कुछ लाये है. इन्हे न नहीं कहो.

गायत्री- बाबा मई ये सब ले क्र क्या करुँगी. आप ऐसा कीजिये, ये सभी आप मंदिर क कोस मई जमा क्र लीजिये.

पुजारी- लेकिन बीटा ये सब तुम्हारे लिए लाये है. इन्हे मंदिर मई कैसे रख सकता हु.

गायत्री- मई इनको ले क्र इन सभी गौण वाले भाई बहनो की तरफ से मंदिर मई दे रहा हु बाबा. इन सभी उपहार को मई ग्रहण करता हु फिर मई इसे मंदिर को देता हु. भोले बाबा अपना आशीर्वाद सदा इस गौण पर बनाये रखे.

सभी गौण वाले भोले नाथ की जयकारा करते हुए फिर वह से अपने घर चले गए.

पुजारी सभी उपहार ले क्र मंदिर क एक कक्षा मई रख दिए.

पुजारी- बीटा बहुत समय हो गया है. अब आ क्र कुछ खाना खा लो.

फिर गायत्री और वो पुजारी बाबा साथ मई hi खाना खाये.

पुजारी- बेटी तुम कहा से आ रहे हो.

गायत्री- नासिक से आ रहा हु मई बाबा.

पुजारी- आहे तुम तो बहुत पवित्र जगह से आ रही हो. वो भी महादेव की भूमि है. यहाँ भी महादेव की hi भूमि है.

गायत्री- है बाबा वो तो है.

पुजारी- अब आगे कहा की यात्रा है.

गायत्री- अभी तो बस जिस और पेअर बढ़ जाते है चला जा रहा हु बाबा. देखते है आखिर कहा जा क्र मंजिल मिलती है.

पुजारी- बहुत अच्छी बात है बीटा लेकिन साम क बाद इधर मत निकलना क्यू की यही पास मई घाना जंगल भी सुरु हो जाता है. इस जंगल मई कई जंगली जानवर रहते है और कुछ तो ऐसे जानवर है जिसे कभी देखा सुना भी नहीं है ..

गायत्री- ध्यान रखूँगा बाबा.

फिर दोनों वह से भोजन क लिए वही मंदिर क प्रांगण मई थोड़ा साइड मई बने रसोई घर मई गए.

जहा पुजारी की धरम पत्नी खाना बना राखी थी.

जल्दी से उसने दोनों क लिए आसान लगा दी. फिर पुजारी और गायत्री घोजं किये.

गायत्री- बहुत उत्तम भोजन बना है. बहुत दिनों बाद ऐसा स्वादिस्ट भोजन किया है. धन्यवाद् आप सब का.

पुजारी- कैसी बात क्र रही हो बीटा. ये तो हमारा धर्म है. हमे खुसी है की आप को हमारे यहाँ का रुखा सूखा पसंद आया.

गायत्री- इसे रुखा सूखा कहते है क्या. ये इतने तरह क स्वादिस्ट भोजन अगर रुखा सूखा है तो मई तो यही कहूँगी की भोलेनाथ सभी को ये रूखी सुखी सदा उपलब्ध करते रहे.

" ये सब मेरे अकेले का किया हुआ नहीं है. आप क यहाँ आने का सुन क्र सभी गौण वालो ने ये सारा इंतजाम किया है.

गायत्री- आप सभी को मैंने बहुत तकलीफ दे दी उसके लिए क्षमा और इतना अच्छा भोजन क लिए बहुत बहुत धन्यवाद्.

फिर भोजन क बाद गायत्री वह से चलने की आज्ञा मांगी.

पुजारी- बीटा आप ने सभी गौण वालो का दिया उपहार यही मंदिर मई दे दिया है इस लिए सभी गौण वालो और हम सभी क तरफ से आप को कुछ देना चाहता है और ये आप को लेना hi होगा.

गायत्री- ठीक है मई ले लुंगी.

फिर वह से दोनों मंदिर आये जहा अंडर जा क्र पुजारी जी एक छोटा सा डिब्बा उठा लाये.

पुजारी- बीटा अब अपनी आँखे बंद करो.

गायत्री उत्सुकता से आँखे बड़ी क्र देखने लगी.

पुजारी- बेटा.. मैंने आने बंद करने को कहा है बड़ी करने को नहीं.

गायत्री- सॉरी.. सॉरी..

फिर गायत्री आँखे बंद क्र ली.

पुजारी उस डब्बे को खोल क्र उस मई से एक कंगन निकल क्र गायत्री क हाथो मई थमा दिए.

पुजारी- देखो बीटा. ये मुझे ऐसे hi तुम्हारी तरह एक दिन एक साधु बाबा आये थे और उन्होंने देते हुए कहा था की कभी अगर ये किसी को देने का दिल करे तो उसे दे देना. खुद न पहन लेना.

गायत्री पुजारी की बाटे सुन आँखे खोल क्र देखि.

वो एक अजीब से धातु का कंगन था जो सांप क जैसा उस मई जॉइंट पर उसका मुँह और टेल बना क्र उसे चिपका दिया गया था.

वो कंगन सांप क जैसे hi ट्विर्लय भी था.

गायत्री वो कंगन ले क्र भोलेनाथ क आगे नतमस्तक हो क्र सर बनाया और फिर पुजारी जी को प्रणाम क्र अपना सामान ले क्र उस गौण से चल दी आगे क सफर की और.

वो कंगन अभी भी गायति क मुठी मई hi थी.

बड़ा अजीब सा था वो कंगन.

गायत्री चलती हुई अब गौण से बहार आ गई थी. आगे अब आबादी नहीं दिख रहे थे. सरक क दोनों और खेत hi खेत थे और छोटे बड़े पैर पौधे लगे हुए थे.

कुछ लोग खेत मई अभी भी काम क्र रहे थे.

गायति चलती हुई आगे वो इलाका पर क्र गई फिर वही गांजलि इलाका था आगे जिसके बारे मई पुजारी जी बता रहे थे

गायत्री कंगन को दोनों हाथो क उंगलियों क बिच नाचती उसके साथ खेलती आगे बढ़ी जा रही थी.

तभी गायत्री को एक चीख सुनाई दी.

चीख जंगल की और से hi आया था. गायत्री लम्बे डेग भर्ती जंगल की और बढ़ गई.

किसी ानिस्ट की आशंका से गायति अब दौड़ने hi लगी थी.

चीख की आवाज अब आणि बंद हो गई थी. गायत्री अंदाज से hi एक और को दौड़ी चली जा रही थी.

बदन पर उप्पेर एक गेंडुआ कुरता और निचे एक धोती को लपेटे घुटने तक मोर क्र जिस से उसे दौड़ने मई कोई कठिनाई नहीं हो रही थी.

एक हाथ मई त्रिशूल लिए हुए और कंधे पर बैग लटकाये गायत्री जंगल मई अभी थोड़ा hi आगे गई थी की जैसे लगा को पीछे से कोई आ रहा है.

गायत्री एक उप्पेर पैर से लटकी हुई लता को पकड़ क्र उसके सहारे 180 डिग्री मई घूम गई तो देखती है की पीछे से एक भेड़िया ठीक उसी वक्त पर आगे गायत्री पर छलांग लगा चूका था लेकिन तब तक तो गायत्री घूम क्र साइड हो गई थी.

वो भेड़िया आगे जम्प लेता हुआ झाड़ियों मई खो गया.

गायत्री भेड़िया को अपने उप्पेर यु झपटता देख क्र सतर्क हो गई और समझ गई की ये जंगल कितना ज्यादा खतरनाक होगा.

चिल्लाने की आवाज अब नहीं आ रही थी.

पुजारी बाबा का दिया कंगन अभी भी गायति क हाथ मई hi था जिसे वो अब अपने कलाई मई पहन लेने की सोच रही थी.

आखिर पुजारी बाबा और गौण वालो का स्नेह को याद करती वो कंगन को कलाई मई दाल ली.

जैसे hi कंगन कलाई मई गया तभी वो हाथ मई चमकने लगा.

वो कंगन चमकता हुआ गायत्री क हाथ मई समां गया.

अब जैसे गायत्री को लग रहा था की वो कंगन पिघल क्र उसके खून क साथ hi वो पिघला हुआ कंगन गायत्री क हाथ की कलाई से उप्पेर उसके कंधे की और बढ़ रहा है.

गायति को असीम दर्द हो रहा था. गायति वही सामने क एक पैर को पकड़ क्र उस से पीठ लगा क्र बैठ गई.

गायत्री से दर्द सहा नहीं जा रहा था. अब उसे लग रहा था की क्यू उसने ये कंगन पहन लिया.

ये माजरा क्या है आखिर वो कंगन मई ऐसा क्या था की वो पिघल क्र उसके सरीर मई कंधे की और बढ़ता जा रहा है.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 69.

धीरे धीरे गायत्री का दर्द इतना बढ़ गया की वो उसे सह नहीं पाई और बेहोश हो गई.

न जाने कितनी देर वो उस पेड़ क साथ लग क्र बेहोस रही.

जब बेहोशी टूटी तो सूरज अब ढलने लगा था.

वैसे भी अभी वो जंगल मई थी और वह उजाला काम hi था.

वो वह पेड़ पकड़ क्र उठ कड़ी हुई और अपना सामान ले क्र आगे जाने को तैयार थी.

तभी गायत्री को अपने कंगन की याद आई.

उसने अपने कलाई को देखा तो अब वह कोई कंगन नहीं था लेकिन उस जगह अब एक कंगन क जैसा hi टैटू बन गया था.

गायत्री सरप्राइज होती हुई उसे देखने लगी. उस टैटू को खुरच क्र अपने कलाई से निकलने की कोसिस की तो वो भी नहीं हो पाया उसके बदले कलाई hi छील गया जहा से हल्का खून भी आ गया था.

गायत्री तक हर क्र वह से आगे कही सुरक्षित स्थान की तलाश करना hi सही समझी.

वह से आगे बढ़ते हुए वो जंगल मई और अंदर को चल दी.

थोड़ी देर चलने क बाद उसे प्यास लग गया.

यहाँ कही न तो कोई पानी का साधन था न hi खाने को.

भूख तो अभी नहीं लगा था लेकिन प्यास क कारन उसका अब गाला सुख रहा था.

जब प्यास लगता है और पास मई कही पानी नहीं दीखता है तो पानी की तालाब कुछ ज्यादा hi पदेशन करती है.

यही हाल अभी गायत्री का भी हो रहा था.

वो पानी की खोज मई जल्दी जल्दी आगे बढ़ रही थी चारो और देखते हुए.

जंगल अब घाना होता जा रहा था जिस मई बड़े बड़े पैर तो थे hi साथ hi उन पेरो क निचे छोटी छोटी घनी झाडिया भी थी जिन मई ज्यादातर कटीली झाडिया थी.

गायति उन झाड़ियों को अपने त्रिशूल से हटती किसी तरह आगे बढ़ रही थी. कई जगह उसका सरीर चील गया था. जहा से हल्का हल्का खून निकल रहा था. उस चिली हुए जगह मई जलन भी दे रहा था लेकिन गायत्री को अभी प्यास ज्यादा hi लगी थी तो उसे अभी इन छिलने और उस मई से उठाते जलन का एहसास नहीं था.

काफी देर चलती हुई वो जंगल मई इधर उधर भटकती रही पानी की खोज मई. अब जंगल मई अँधेरा भी होने लगा था और अभी तक न तो कही खाने पिने को खुश दिखा और न hi रात बिताने क लिए कोई सुरक्षित ठिकाना.

पूरा बदन पसीने से भींग गया था.

गायति माथे से बाह क्र आँखों मई जाते पसीनो को अपने दुपट्टा से साफ़ करती आगे बढ़ रही थी तभी उसे एक खरगोश दिखा जो उसके आगे आगे दौड़ता कूदता भगा जा रहा था.

गायत्री को वो खरगोश बहुत प्यारा लगा. वो खरगोश को देख क्र अपना भूख प्यास भूल क्र उसके पीछे खरगोश पकड़ने क लिए भागने लगी.

वो खरगोश गायत्री को चकमा देता कभी चुप जाता तो कभी निकल क्र उसके आगे दौड़ता हुआ दूर निकल जाता.

गायत्री दूर तक उस खरगोश का पीछा करती हुई जंगल क बिच मई पहुंच गई थी.

तभी खरगोश एक झाड़ियों क बिच घुस गया.

गायत्री क लिए आगे अब रास्ता hi नहीं था. वह की झड़ी काफी घनी और ुचि थी.

वो अपने त्रिशूल से झाड़ियों को हटा क्र उस खरगोश को देखने क लिए झुक क्र बैठ गई.

बैठते hi गायति चौक गई.

उन झाड़ियों क पीछे एक रास्ता जैसा बना था. वो एक तरह से घडियो मई गुफा जैसा था जिसका मुहाना उन जाहदियो ने बंद क्र रखा था.

गायत्री कौतुहल वाश उस खोह मई घुस गई झुक क्र.

त्रिशूल को हाथ मई पकड़ क्र बिलकुल सजग वो उस ों होह मई आगे बढ़ रही थी. कही कही उस खोह मई लड़ाई की टहनिया इधर उधर फैले हुए थे तो उन्हें कभी अपने हाथ से तो कभी त्रिशूल से एक और करती गायत्री सब और नजर फिरती आगे बढ़ रही थी.

तभी उसे वो खरगोश आगे बिच मई बैठा दिखा.

गायत्री को देखते hi वो फिर से आगे को भाग निकला.

गायति मुसकुडती हुई उस खरगोश क पीछे भागी.

तभी आगे एक और मुर क्र खाद्गोष गम हो गया.

गायत्री वह जा क्र देखि तो वह से हल्का ज्यादा उजाला आ रहा था.

जब गायत्री थोड़ी सी झाड़ियों और लताओं को अपने हाथ से हटा क्र देखि तो उसकी आँखे चमक उठी.

ख़ुशी से उसका चेहरा चमकने लगा.

आगे सामने एक छोटी सी झरना था. वह चारो और कई तरह क छोटे छोटे पौधे उगे हुए थे जिन मई रंग बिरंगी फूल खिले हुए थे और साथ hi कई फलो क पैर भी थे जिन मई बहुत सरे फल लगे हुए थे.

गायत्री सब खुसी से देखती उसकी आँखे नाम हो गई. वो सर घुमा कर खाद्गोष को देखि तो वो खरगोश सामने बैठा गायत्री को देख रहा था.

गायत्री मुसकुडती हुई उस खरगोश को देख क्र दोनों हाथ जोड़ क्र उसे प्रणाम क्र ली.

वो खाद्गोष कूदता हुआ गायत्री क पास आ क्र कभी उसके पैरो को कूद क्र छू लेता और फिर भाग जाता तो कभी गायत्री क चारो और चक्कर लगाने लगता.

गायत्री बैठ क्र अपने दोनों हाथो को फैला दी.

इस बार जैसे hi खरगोश पास आया गायत्री लपक क्र उसे पकड़ ली और प्यार से उसके पीठ को सहलाने लगी.

गायत्री उस खरगोश को गॉड मई ले क्र उस खोह से बहार निकल आई.

बहुत जोर प्यास लगी थी गायत्री को तो वो एक पैर क डाली से अपने बैग को लटका दी और वही पैर पर त्रिशूल रख क्र वो वही पास क पैर से एक फल तोर क्र खरगोश को दे दी खाने क लिए और खुद झरने को और चल दी फ्रेश होने को.

मुँह हाथ धो क्र गायत्री ग भर पानी पि क्र अपनी प्यास बुझाई.

ठंढे ठंढे स्वक्ष जल से फ्रेश होने क बाद और अपनी प्यास बुझा क्र गायत्री की आत्मा तृप्त हो गई.

गायत्री प्यास बुझा क्र वापस आ क्र एक पैर क निचे बैठ गई.

खरगोश वही गायत्री क आस पास घूम घूम क्र उछाल कूद करता फल खा रहा था.

रात हो गया था. चारो और अँधेरा फैला हुआ था. जंगल मई जंगली जानवर और कीरो की आवाजे आ रही थी.

गायत्री पर से पीठ लगाए आँखे बंद किये हुए सो रही थी.

कल रात भी सही से नहीं सो पाई थी. अभी इसे बड़े जोरो की नींद आ रही थी.

पता नहीं क्या समय हो रहा था. कुछ आहात होने से गायत्री की नींद खुल गई.

आँखे खोल क्र देखि तो सुबह नहीं हुआ था अभी लेकिन रात का अँधेरा अब चाटने लगा था.

गर्दन घुमा क्र गायत्री जब अपने आस पास देखि तो वो चौक कर बैठ गई.

कुछ ऐसा नजारा था की देख क्र गायत्री की आँखे बड़ी हो गई.

अभी जहा लेती थी उस हिस्से को छोड़ क्र एक गोल घेड़ा मई गायत्री क चारो और रंग बिरंगे फूल से सजाया हुआ था.

वह चारो और भी कुछ सजावट की जा रही थी. लेकिन सब से विचित्र दृश्य जिसे देख क्र गायत्री अचंभित थी वो ये था की वह कई बौने थे जो अपने छोटे छोटे पैरो पर दौड़ दौड़ क्र सारा सजावट वह की क्र रहे थे.

तभी एक बौने की नजर गायत्री की और गया.

गायत्री उठ क्र बैठ गई थी और उन बिचित्र बौनों क क्रिया कलाप को देख रही.

उस बौने ने जैसे hi देखा की गायत्री जग गई है और उन लोगो की और hi देख रही है तो वो बौना अपने बौने साथियो से अपनी लैंग्वेज मई कुछ कहा.

अचानक चलती हुई मशीन जैसे रुक जाती है सब वैसे hi रुक गए और गायत्री को देखने लगे.

जैसे hi सब की नजर गायत्री पर गया. सभी वही अपने जगह पर hi हाथ जोड़ क्र लेट गए.

गायत्री अचंभित सभी बौनों को देख रही थी बैठी हुई.

जब थोड़ी देर हो गया और वो बौने वैसे hi लेते रहे तो गायत्री उठ क्र कड़ी हो गई और चलती हुई उन बौनों क निकट जा पहुंची.

गायत्री- ये आप सब क्या क्र रहे है. ऐसे क्यू लेट गए है. कौन है आप सब.

एक बौना जो सभी का सरदार लगता था भेष भूषा मई वो उठ खड़ा हुआ और फिर हाथ जोड़ क्र अपने घुटने पर बैठ गया.

बौना सरदार- हमारी मल्लिका की सदा जय हो. मल्लिका, हमारे मालिक नहीं है आप क साथ. वो नहीं आये. कहा है हमारे आका.

वो बौना अपना सर झुकाये गायत्री से बोलै.

गायत्री- आप सब कौन है. मई तो आप सब को जानती भी नहीं. आप मुझे अपना मल्लिका क्यू कह रहे है. मई तो एक सधार सी लड़की हु जो भटकती हुई इस और आ गई.

बौना सरदार- माफ़ करे मल्लिका. आप भटकती हुई यहाँ तक नहीं आये है बल्कि आप को यहाँ लाया गया है. आप कौन है ये आप को नहीं याद है. जैसे hi सब आप को याद आ जाएगा आप समझ जाएंगी.

हम सभी हमारे जीन लोक क बचे हुए लोग है जो अभी आप क सामने है. बांकी क पुरे राज्य को फुदन अपने कब्जे मई क्र रखा है जिसका साथ कोई और भी दे रहा है. अब तो बस हमारे आका hi है जो हमे वापस हमारे राज्य मई ले जा सकते है. अभी हम सभी का अपने राज्य मई जाने की पाबन्दी है. अगर हम गए तो हमारी साडी सकती ले क्र, हमे मर दिया जाएगा.

गायत्री- मेरे तो कुछ भी पल्ले नहीं पद रहा. आप क्या कह रहे है. मई यहाँ जंगल की और से जा रहा था की कही से चीखने की आवाज आई. …… फिर गायत्री अभी तक की साडी बाटे बता दी.

बौना सरदार- मल्लिका, आप ने जो चीख की आवाज सुनी थी वो मई hi था. मई आज आप को मंदिर मई जाते हुए देख लिया था. जब मई गौण का भर्मण क्र रहा था तो. मई देखते hi आप को पहचान गया था. ककी आप बिलकुल भी नहीं बदली है. फिर भी मई आप की परीक्षा क लिए पुजारी को हमारे राज्य का प्रतिक एक कंगन दिया था आप को देने क लिए.

उस कंगन की विशेस्ता है की यदि कोई हमारे राज्य से बहार का व्यक्ति या प्राणी उस कंगन को पहनने की कोसिस करेगा तो वो तभी जल क्र भाषाम हो जाएगा.

यादो वो हमारे राज्य का होगा तो कंगन उसके सरीर मई समां क्र एक टैटू बन क्र उसके साथ जुड़ जाता है.

आप हमारी मल्लिक्का है तो ठीक वैसा hi हुआ जैसा हम सब ने सोचा था. जंगल मई जो खरगोश आप को मिला जिस क पीछे आप यहाँ तक आयी थी वो भी मई hi था.

मंदिर से ले क्र यहाँ तक हर पल आप हमारे आँखों क सामने थी. बस हम hi अभी आप क सामने आये है ककी अभी तक हमने आप क स्वागत की कोई तयारी जो नहीं की थी.

अभी थोड़ी सी तयारी बांकी है. जब तक आप नेचुरल कॉल से फ्री होंगी हम सभी बांकी की तयारी भी क्र लेंगे.

गायत्री क समझ मई अभी भी कुछ भी नहीं आ रहा था. उसे लग रहा था जैसे वो अभी भी नींद मई है और कोई सपना देख रही है परियो और राजकुमारी हो वाली.

ऐसी बाते तो उसने अभी तक बस किस्से कहानियो मई hi सुनी थी गायत्री ने.

वो वह से फ्रेश होने क लिए झरने की और चल दी.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 70.

लल्लू सब क जाने क बाद सो गया था. पूरी रात थका देने वाली घटना क बाद अब जा क्र सुकून मिला था. लक्ष्मी जी क चाचा को भी उसके किये का सजा मिल गया. अब उसे भी चैन मिला होगा और उनके माँ पापा की आत्मा को सन्ति.

लल्लू क दिमाग मई अभी सभी बाटे घूम रहा था.

आसमान मई सूरज दादा अपने पुरे सबब पर चमक रहे थे तभी देखते देखते आसमान मई काळा बदल चने लगा.

चारो और अँधेरा छ गया था. बिजलिया कड़कने लगी थी. बदल गरज रहा था और इन सब से धरती माता कम्प रही थी.

तभी आसमान मई एक पोर्टल खुल गया.

धीरे धीरे वो पोर्टल बड़ा हो गया और उस मई से अजीब अजीब से जिव निकल क्र धरती की और आने लगे थे.

बड़ा भयानक रूप था इनका.

विशाल सरीर, गले से निचे तो इन्शान क जैसा hi सरीर था लेकिन गले क उप्पेर अजीब अजीब जानवर का सर लगा हुआ था.

सभी की आँखों मई जैसे अंगारे दाहक रहे थी.

ुचि ुचि हुंकार भरता हुआ वो सभी जिव डर्टी पर बड़ी तेजी से बढ़ रहे थे.

निचे धरती पर चारो और कोहराम मचा हुआ था. लोगो का जिधर जगह दीखता उस और को भागे चले जा रहे थे.

वो सभी जिव आसमान से आग का वर्षा क्र रहे थे जिस किसी और भी वो आग का गोला गिरता वो माँ की तरह पिघल जाता था.

तभी उन दानवो मई से एक की नजर लल्लू पर पड़ी.

वो ुरता हुआ एक आग का गोला लल्लू पर फेक मारा.

लल्लू उस आग क गोले क देख क्र वह से भागने लगा.

लल्लू बड़ी तेज दौड़ रहा था लेकिन ये क्या उसके पेअर तो तेजी से चल रहा था लेकिन जमीं फिशलटी जा रही थी.

वो वही क वही रह जाता था.

दर से लल्लू की हलक सुख गए थे. पूरा बदन दर क मरे कम्प रहा था. सर से पसीना टपक रहा था. पसीना से पूरा कपडा गिला हो गया था.

तभी वो आग का गोला आ क्र लल्लू क उप्पेर गिरा.

लल्लू जोर से चौखटा हुआ उठ बैठा.

लल्लू- ओह्ह्हू बड़ा भयानक सपना था.

लल्लू बीएड से उठता हुआ अपने चेहरे पर आये पसीनो को टॉवल से साफ करता खुद से hi बोलै.

तभी वह दौड़ती हुई लक्ष्मी और बुआ आ गई.

बुआ- क्या हुआ तुम इतने जोर से चीखे क्यू.

लक्ष्मी भी आ क्र बुआ क पूछे सवाल का जबाब सुनाने क लिए लल्लू क चेहरे को देखने लगी.

लल्लू- एक बुरा सपना देख लिया था.

लक्ष्मी- कैसा सपना.

लल्लू- वो बहुत भयानक था. ओह्ह गॉड अब तो याद भी नहीं क्या देखा था.

बुआ- कोई बात नहीं जाओ जा क्र फ्रेश हो जाओ. फिर कुछ खा लेना.

लल्लू क्लॉक की और देखता वाशरूम की और चला गया.

फ्रेश हो क्र लल्लू बहार आया तो वह कमरे मई अकेली बुआ hi कड़ी थी.

बुआ- अब ठीक हो तुम.

लल्लू बुआ क गाल को चुम लिया.

लल्लू- है अब बहुत अच्छा लग रहा है. वैसे आप सब तैयार है शॉपिंग पर जाने क लिए.

बुआ- मई नहीं जाउंगी. बांकी सब को ले जाओ.

लल्लू- आप नहीं जाओगे तो फिर किस को ले जाऊ मई. और आप क्यू नहीं जाना चाहती है.

बुआ- मई इन लड़कियों क साथ जा क्र क्या करुँगी. तुम इन लोगो को ले जाओ.

लल्लू- जाएंगे तो सभी जाएंगे या फिर कोई नहीं जाएगा.

लक्ष्मी- कहा कोई नहीं जाएगा.

लक्ष्मी लल्लू क लिए एक प्लेट मई खाना ले क्र रूम मई प्रवेश करती हुई बोली.

लल्लू- बुआ कह रही है की वो शॉपिंग नहीं जाएंगी और सब को ले जाऊ

लक्ष्मी- नहीं. मई तो बुआ क साथ hi जाउंगी. नहीं तो मई भी नहीं जोगी

लल्लू- गुड, सुन लिया बुआ. अब बताओ. आप जाओगे या नहीं.

बुआ- ठीक है, ठीक है. दोनों दोनों मिया बीबी से तो मई बूढी जित नहीं सकती. अब चलना hi पड़ेगा.

बुआ मुसकुडती हुई बोली.

लल्लू- तो जाइये जल्दी से तैयार हो जाइये. लक्ष्मी जी बांकी लोग तैयार है क्या.

लक्ष्मी- अभी बोलती हु सब को तैयार होने क लिए.

लल्लू खाना कहते हुए सर हिला दिया.

खाना खाने क बाद लल्लू भी तैयार हो क्र बुआ को देखने उनके रूम मई चला गया

बुआ निचे पेटीकोट पहने हुए कड़ी उप्पेर ब्रा का हुक पीछे लगाने की कोसिस क्र रही थी.

लल्लू- मई कुछ मदद करू अपनी जान को.

लल्लू पीछे से जा क्र बुआ क पीठ से चिपका हुआ बोलै.

बुआ को अपने नितम्ब पर लल्लू क सख्त लैंड का एहसास हो रहा था.

बुआ- क्या ये हमेसा खड़ा हो रहता है.

लल्लू- आप को देख क्र खड़ा हो जाता है. क्या करे ये भी आप हो hi गजब की खूबसूरत.

बुआ- अच्छा तो ये खूबसूरत लोगो को देख क्र खड़ा हो जाता है.

लल्लू- न न ये सिर्फ आप को देख क्र खड़ा हुआ है.

लल्लू पीछे से हाथ बढ़ा क्र बुआ क दोनों अमृत कलश को अपने पंजे मई ले क्र हलके से दबाता हुआ बोलै.

बुआ लल्लू क हाथ पर एक चपत लगाई.

बुआ- ये मत क्र. देख मेरी ब्रा छोटी हो गई है. अब ये लगता hi नहीं. कैसे कैसे लगाती हु फिर लगता है जैसे डैम घुट रहा है.

लल्लू- वाओ. म्हणत का फल मीठा होता है. बुआ मीठा फल कब मिलेगा.

अपने पंजे को थोड़ा जोर लगता बोलै लल्लू.

बुआ- उठ, ीिसस्स छोड़ दे अब. कोई आ जाएगा. तुम्हारे म्हणत का फल मिलेगा तुम्हे. 9 महीने बाद देख लेना.

लल्लू बुआ को घुमा क्र उसके होठो को अपने मुँह मई ले क्र चूसने लगा.

बुआ लल्लू क बालो मई ऊँगली फसती हुई लल्लू का बहरपुर साथ देने लगी.

जब दोनों का गम घुटने लगा तो किश तोड़ क्र लम्बी लम्बी ससे लेने लगे.

बुआ- अब तुम यहाँ से जाओ. मुझे तैयार होने दो. कभी भी कोई आ सकता है बुलाने क लिए. और है जाते जाते ये लगते जाओ.

बुआ ब्रा को देखती बोली.

लल्लू ब्रा का हुक लगा क्र बुआ को एक बार और हलके से चुम क्र बहार आ गया वह से.

लल्लू निचे आ क्र ड्राइंग रूम मई बैठ गया.

काकी- चाय लौ बीटा.

लल्लू- है काकी एक कप प्यारी चाय पीला दो.

थोड़ी देर मई सभी तैयार हो क्र आ गए.

लल्लू तो देखता hi रह गया सब को. क्या लग रही थी सब. सभी एक से बढ़ क्र एक थी लेकिन लक्ष्मी जी का तो कहना hi क्या.

वो एक रेड साडी मई स्लीवलेस ब्लाउज पहने हुए क़यामत लग रही थी.

लल्लू तो उन लोगो को सीढ़ियों से उतरता हुआ आँख फाडे देख रहा था.

सिबा- जीजू मुँह बंद क्र लीजिये वर्ण मक्खी चली जाएगी.

सब ठहाका लगा क्र हुस्स दिए.

लल्लू झपटा हुआ मुँह निचे क्र लिया.

लल्लू- क्या बात है. आज तो मॉल मई नदिअ बहँगी.

कोमल- मॉल मई नदिया? वो क्यू भला और किस चीज की नदिअ जीजू.

लल्लू- खून की नदिया. आप सब वह अपने खूबसूरती से क़त्ल जो करने वाली हो सब का.

लक्ष्मी- क्या कुछ भी बोलते रहते है आप. अब चलिए लेट हो रहे है हम.

लल्लू- लेकिन आंटी कहा है.

कोमल- वो नहीं जाएंगी. उन्होंने मन क्र दिया.

फिर सभी लोग बहार आ क्र गाड़ी मई बैठ गए.

लल्लू उन लोगो को ले क्र मॉल आ गया.

लल्लू- आप सब चलो मई गाड़ी पार्क क्र आ रहा हु.

कोमल- आप सब चलिए. मई जीजू क साथ आती हु.

जोया- देख अकेले प् क्र जीजू का रपे मत क्र देना.

सभी जोया की बात पर हुस्ने लगी.

कोमल- नहीं नहीं मई बहुत सरीफ लड़की हु. मई तो इस लिए साथ जा रही हु की कही ये खो गए तो हमारी बहन का क्या होगा.

फिर बांकी लोग वही एंट्रेंस पर उतर गए और लल्लू कोमल क साथ बेसमेंट पार्किंग मई जा क्र गाड़ी पार्क क्र दी.

कोमल- जीजू आज हम सब को क्या क्या शॉपिंग कराएगा आप.

लल्लू- जो आप सब का दिल करे वो ले लेना. आप सब क खुसी से बढ़ क्र क्या है मेरे लिए.

कोमल- सो नीस ऑफ़ यू जीजू. वैसे जीजू यहाँ कोई दिख नहीं रहा है निचे आप का कही रपे न हो जय.

लल्लू- नहीं नहीं. ऐसा जुल्म मत कीजियेगा. मई किसी को मुँह दिखने लायक नहीं रहूँगा. मई बहुत सरीफ घराने का हु.

लल्लू डरने का एक्टिंग करता हुआ बोलै.

कोमल मुसकुडती हुई लल्लू का बाह पकड़ क्र अपने साइन से लगाती उसके साथ चिपका क्र चलने लगी.

लल्लू- ऐसे चलेंगी तो सब समझेंगे की मिया बीबी जा रहे है.

कोमल- सो व्हाट… साली भी तो आधी घरवाली hi होती है.

लल्लू- काश पूरी होती.

लल्लू धीरे से होठो मई बुदबुदाया.

कोमल- क्या कहा आप ने अभी.

लल्लू- कुछ भी नहीं. ये लिफ्ट नहीं दिख रहा. सालो ने इतना निचे पंहुचा दिया है पार्किंग मई. लिफ्ट भी नहीं दे रखे है.

कोमल- जीजू आप बात मत बदलो. अभी आप ने क्या कहा था.

लल्लू- क्या कहा था?

कोमल- मई आप से पूछ रही हु. बताइये न.

कोमल खीझ क्र बोली.

लल्लू- अरे यार मैंने कहा था की मेरी साली बहुत सुन्दर दिख रही है आज.

कोमल लल्लू की बात सुन क्र शर्मा गई.

कोमल- क्यू बांकी दिन बुरी दिखती हु.

लल्लू- बांकी दिन भी अच्छी दिखती है लेकिन आज ये श्रीनगर आप को चौदहवी का चाँद बना रहा है.

कोमल- बस बस मस्का मत लगाइये.

लल्लू- अरे सुच बोल रहा हु यार.

तभी कुछ लोग वह से गुजरने लगे तो लल्लू उन से लिफ्ट का पूछा.

उन लोगो ने एक और इसरा क्र दिया.

फिर लल्लू और कोमल बाटे करते हुए लिफ्ट तक पहुंच गए.

लल्लू- इतनी दूर लिफ्ट होता है क्या. गाड़ी तो एक कम आगे लगा रखा हु.

कोमल- अभी से घबरा गए आप अभी तो सुरु भी नहीं हुआ है शॉपिंग.

लल्लू- ठीक है चलिए.

फिर वह से लिफ्ट से दोनों मॉल क अंडर पहुंच गए.

ग्राउंड फ्लोर पर hi सभी खड़े थे.

इन दोनों क आते hi फिर सुरु हुआ इनका शॉपिंग और लल्लू का काम था बैग्स उठाना.

पुरे दो घंटे तक लल्लू इनके साथ भटकता रहा एक शॉप से दूसरे शॉप पर तब जा क्र उनका शॉपिंग पूरा हुआ.

जोया- जीजू अब मूवी दिखने का वडा किये थे आप वो पूरा करो.

लल्लू पहले hi इवनिंग का टिकट ले लिया था जा क्र.

फिर सभी वही मूवी देखने चले गए डट सिनेमाज मई.

वह से निकल क्र जब बहार आये तो कोमल का गाल कुछ ज्यादा hi लाल था सरम से.

सिबा- अब रात तो हो hi गई है तो डिनर भी यही क्र क चलते है. क्या कहते हो आप सब.

लक्ष्मी- है बहुत दिन हो गया बहार का खाना खाये हुए.

अब भाई लक्ष्मी जी का भी मन था तो लल्लू तो अब मन करने से रहा.

सब को ले कर वही फ़ूड कोर्ट मई गया.

कोमल- मई वाशरूम से आती हु.

लल्लू- मई भी चालू क्या कुछ मदद क्र दूंगा आप को फ्रेश होने मई.

लल्लू कान मई कोमल से बोलै.

कोमल- क्यू सिनेमा हॉल मई जो बदमासी किये है आप उस से मन नहीं भरा आप का.

लल्लू न मई सर हिला दिया.

कोमल जीभ निकल क्र चिढ़ाती हुई वाशरूम चली गई.

तब तक ये लोग एक टेबल पर बैठ गए और आर्डर दे दिए थे.

कोमल क वापस आते आते इन लोगो का आर्डर भी आ गया था.

फिर सब खाना खा क्र वह से घर को आ गए.

रात ज्यादा हो गया था तो घर मई सभी सो गए थे.

ये लोग भी खाना खा क्र hi आये थे और सभी थके हुए भी थे तो सभी अपने कमरे मई जा क्र सोने की तयारी करने लगे.

लल्लू जाते hi फ्रेश हो क्र बीएड पर लुढ़क गया.

लल्लू- ओह्ह गॉड लड़कियों क साथ शॉपिंग पर जाना किसी लड़ाई मई जाने से भी कठिन है. पूरा निचोड़ देती है ये लोग.

लक्ष्मी- अच्छा इतना hi बुरा लगा था तो गए hi क्यू.

लल्लू- क्या करे अब सदी सुधा हो गया हु तो न भी तो नहीं क्र सकता.

लल्लू लक्ष्मी को चिढ़ाती हुआ बोलै.

लक्ष्मी- ठीक है. अब आगे से कभी आप को पदेशन नहीं करुँगी.

लल्लू जब देखा की लक्ष्मी बोलते बोलते रोने जैसा फेस बना ली है तो आगे बढ़ क्र उसे पीछे से गले से लगा लिया.

लल्लू- अरे यार मई मजाक क्र रहा था. आप तो नाराज हो गई. मई आप क साथ तो कही भी जाने को तैयार हु ये शॉपिंग क्या चीज है.

लक्ष्मी- है है मुझे सब पता है आप अब मस्का मत लगाइये. मई जान गई हु की आप को मेरे साथ शॉपिंग पर जहा अच्छा नहीं लगता है.

लल्लू- जान मुझे क्यू अच्छा नहीं लगेगा. हर समय तुम मेरे नजर क सामने रहती थी. मुझे तो बड़ा अच्छा लग रहा था बस कभी कभी बिच मई अगर एक आध चुम्मी दे दिया करती तो सोने पे सुहागा hi जाता.

लक्ष्मी घूम क्र लल्लू क साइन से लग क्र सरमाती हुई अपना चेहरा उसके साइन मई रगड़ने लगी.

लल्लू लक्ष्मी क पीठ पर हाथ चलता हुआ उसे मन रहा था.

थोड़ी देर बाद लल्लू लक्ष्मी को गॉड मई उठा क्र बीएड पर ले क्र चला गया.

एक एक क्र लक्ष्मी क बदन से सरे कपडे उतरने क बाद लल्लू खुद भी जन्मजात नंगा हो गया और फिर दोनों क बिच एक तूफान आया जो दोनों को तृप्त करता संत हो गया.

लल्लू लक्ष्मी को अपने साइन से चिपकाये उसके बालो मई ऊँगली घूमता सुलाने लगा.

कब थोड़ी देर मई लक्ष्मी सो गई तो लल्लू उठ क्र दूसरे कमरे मई बुआ क पास चला गया.

बुआ भी आज काफी थक गई थी. वो गहरी नींद मई सो रही थी.

लल्लू जा क्र आहिस्ता से बुआ क निघ्त्य को उठा क्र उनके कमर तक क्र दिया.

दीक्षा बुआ ने अंडर और कुछ भी नहीं पहनी थी.

बल्ब की रौशनी मई उनकी पाक साफ़ छूट चमक रहा था.

लल्लू झुक क्र अपना जीभ निकल क्र उसे चाटने लगा.

बुआ क छूट पर जैसे hi लल्लू क जीभ का स्पर्श हुआ बुआ झटके से जग गई.

वो दर गई थी की ये क्या हो गया. कौन आ गया इतनी रात को.

जब उन्होंने लल्लू को देखा तो वो सरमाती हुई फिर से लेट क्र अपने पैरो को और भी फैला दी.

ताकि लल्लू और अच्छे से अंडर तक जीभ दाल क्र मुख छोडन करे उनका.

थोड़ी देर मई hi बुआ भलभला क्र अपना पानी बहा दी.

लल्लू घूम क्र बुआ क सर क पास आ गया.

लल्लू- बुआ इसे जरा गिला क्र दो न.

बुआ सरमाती हुई न मई सर हिला दी.

लल्लू- प्लस बड़ा मन क्र रहा है. बस थोड़ा सा.

बुआ फिर से मन क्र दी.

लल्लू- फिर मई सूखा hi दाल दूंगा अंडर. मुझे न कहना को दर्द हो रहा है रुक जाओ थोड़ा. फिर तो ट्रैन स्टेशन पर पहुंच क्र hi रुकेंगे.

बुआ फिर सरमाती सुकचति हाथ बड़ा क्र उसके लौड़े को पकड़ ली.

लल्लू और बुआ दोनों क मुँह से एक हलकी आह निकल गई.

बुआ- हाय्यय राम कितना भयानक दिख रहा है और कितना गर्म है ये.

लल्लू- क्यू तारपा रही हो ले लो न मुँह मई.

बुआ हलके से जीभ निकल क्र लल्लू क लौड़े क टोपे पर फिर दी.

लल्लू का तो मजे से आँखे बंद हो गई.

पहले बुआ दो चार बार वैसे hi की फिर होठ खोल क्र उसके टोपे को मुँह मई ले क्र सिर्फ टोपे पर hi जीभ चलने लगी.

लल्लू बुआ क मुँह की गर्मी महसूस क्र हवा मई ूर्णे लगा मजे से.

धीरे धीरे बुआ लौड़े को आधा अपने मुँह मई ले क्र उसे एक हाथ से पकडे बड़े मजे से चुप्पा लगाने लगी.

लल्लू- ससीई कितन मजा आ रहा है. कैसे नखरे क्र रही थी तुम. ाःह इस मजे क आगे तो सब कुछ फ़ैल है. ऐसे hi करती रहो. बहुत मजा आ रहा है.

लल्लू बुआ क सर पर हाथ चलता बड़बड़ा रहा था.

बुआ लल्लू की बाते सुन क्र और जोश से उसके लौड़े को चूसने लगी.

लल्लू से अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था. वो बुआ क सर को दोनों हाथो से पकड़ क्र खुद hi जोर जोर से कमर हिलता हुआ उसकी मुँह छोड़ने लगा.

दस बारह बार जोरदार प्रहार करने क साथ hi लल्लू बुआ क मुँह मई अपना गर्म गर्म लावा उगल दिया.

बुआ क होठो से बहता हुआ लल्लू का पानी उनके छाती पर भी गिरने लगा.

बुआ- बड़ा बदमाश है तू. बता नहीं सकता था क्या. देखो सब गन्दा क्र दिया.

लल्लू- खड़ा तो करो इसे.

बुआ- अब मुझ से नहीं होगा. जा सो जा जा क्र.

लल्लू आगे बढ़ बुआ की बड़ी बड़ी चूचियों को निघ्त्य क उप्पेर से hi दबोच लिया और उसे जोर जोर से मसलने लगा.

लल्लू- आज जो खरीद दिया था नया ब्रा वो नहीं पहनी क्या तुम.

बुआ- कल पहनुंगी. अभी रात को नहीं पहनी.

लल्लू बुआ क निघ्त्य को निकल क्र अलग क्र दिया और उसे पलट क्र घोड़ी बना दिया.

लल्लू- कितनी बड़ी क्र राखी हो अपनी मटकी को.

लल्लू बुआ क गोर फुले हुए नितम्ब को चूमता चाटता हुआ बोलै.

बुआ मजे से आँखे बंद किये हुए दोनों हाथ से तकिये को दबोचे अपना सर गड़ाए हुए थी तकिये से.

लल्लू बुआ क गोर गोर नितम्ब को काट क्र और मसल क्र पूरा लाल क्र दिया

जब दोनों तरफ फुल आग पकड़ लिया तो लल्लू उठ क्र अपना लौड़ा पीछे से बुआ क छूट मई लगा दिया और उसके चौड़ी गांड को पकड़ क्र हुमच क्र एक धक्का लगा दिया.

एक बार मई hi पुअर लैंड जार तक बुआ क छूट मई घुस गया.

बुआ ाःह क्र क रह गई.

बुआ- आराम से क्र न. कोई सुन लेगा मेरी चीख.

लल्लू बुआ क गांड को सहलाता हुआ लम्बे लम्बे स्ट्रांग स्ट्रोक लगाने लगा.

लल्लू टोपी तक बहार निकल कर फिर से एक बार मई hi पूरा लैंड अंदर घुसा देता.

बुआ तो हेय हेय क्र क रह जाती.

वो लल्लू क हर धक्के पर आगे को गिरने लगती जिसे लल्लू बुआ को गांड से पकड़ क्र दुबारा सही क्र लेता.

थोड़ी देर इस आसान मई छोड़ने क बाद लल्लू बुआ को पलटा क्र उसके दोनों पैरो को मोर क्र बुआ क चूचियों से लगा दिया और फिर से अपना लौड़ा एक बार मई hi घुसा क्र रेन गाड़ी चालू क्र दिया.

लल्लू और बुआ दोनों क जंघा दोनों हर धक्के पर एक दूसरे से जोर से टकराये थे जिसकी आवाज उस पुरे कमरे मई गूंज उठता.

लल्लू ताबरतोड़ बुआ क छूट को और भी फैलाये जा रहा था.

बुआ दो बार जहर चुकी थी इस बिच.

वो लल्लू क बाह को काश क्र पकडे हुए लल्लू क धक्को को होठो को दबाये सह रही थी.

जैसे hi लल्लू अपना लौड़ा जार तक घुसा देता की बुआ का मुँह खुल जाता था.

लल्लू बुआ क दोनों चूचियों को मसलता हुआ अपने कमर को जोर जोर से आगे पीछे करने लगा.

अब लल्लू अपने पड़ाव क नजदीक hi था.

वो दन्त भींचे दनादन स्ट्रोक लगाए जा रहा था.

मुश्किल से चार पांच और स्ट्रोक लगा क्र वो बुआ क छूट को पूरा अपने लावा से भर दिया.

बुआ अपनी बच्चेदानी मई लल्लू क गर्म गर्म बीज महसूस क्र भलभला क्र पानी बहा दी.

लल्लू बुआ क छूट से अपना लैंड निकल क्र उसके होठो को चुम लिया और फिर वापस अपने कमरे मई लक्ष्मी जी क पास आ क्र लेट गया उसे बहो मई ले क्र.
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 71.

गायत्री फ्रेश हो क्र आ गई थी.

बौनों ka.sardar अजीब सा ब्रश पहने हुए अपने निकले हुए पेट ( तोंद) पर हाथ की उंगलियों से तबला बजता हुआ खड़ा था और अपने साथी बौनों से कुछ बात क्र रहा था.

गायत्री आ क्र वह कड़ी हो गई.

बौनों का सरदार और बांकी सभी बौने गायत्री क आगे एक बार फिर से झुक गए.

गायत्री- अब आगे क्या करना है. कैसे मई तुम लोगो की बात मन लू.

बौने का सरदार- मल्लिका, सब से पहले आप जरा तैयार हो जाइये.

उसने अपने टोली की महिलाओ को कुछ इसरा किया.

वह चार पांच बौनी औरते भी थी वो आगे बढ़ क्र गायत्री को ले जा क्र एक फूलो क आसान पर बैठा दिया.

जिसे इन लोगो ने तब बनाया था जब गायत्री सो रही थी.

यह एक झटकों (हेक्सागॉन) आकर का घेरा था जिस मई सभी रंगो क फूल थे.

गायत्री को वह बैठा क्र वो सभी औरते कुछ मंत्र पढ़ते हुए गायत्री क चारो और घूमने लगे. उन लोगो क साथ मई बौने भी जोड़ा बना क्र चारो और कुछ पढ़ते हुए चक्कर लगाने लगे.

थोड़ी देर बाद hi वो हेक्सागॉन बना हुआ पूरा हिस्सा जमीं छोड़ क्र एक फुट उप्पेर हवा मई उठ गया.

गायत्री क पहने हुए गेड़ुवा वस्त्र बदल क्र एक सही वस्त्र का रूप ले लिया.

अब गायत्री क बदन पर एक सुन्दर मल्लिका का hi पोषक था.

सभी बौने अब हवा मई तैरते हुए गायत्री का चक्कर लगा रहे थे.

फिर गायत्री क हाथ मई एक एक कंगन आ गया जो बिलकुल वैसा hi था जैसा की उसे मंदिर क पुजारी बाबा ने दिया था. बस इस कंगन का कलर नीला था.

फिर गायत्री की बाह मई एक बाजूबंद आ क्र सेट हो गया.

इसी तरह सभी आभूषण एक एक क्र आ क्र खुद hi अपने जगह बांधते गए.

गायत्री आँखे बंद किये हुए बैठी थी और सभी बौने कुछ मंत्र पढ़ते हुए चक्कर लगा रहे थे गायत्री क.

काफी देर ये सिलसिला चलता रहा. तभी आसमान से एक बिजली गिरा जो सीधा जा क्र गायत्री क उप्पेर hi गिरा था.

सभी बौने चक्कर लगा बंद क्र अपने जगह पर hi झुक गए थे आँखे बंद किये हुए.

कुछ छान बाद सभी खड़े हो क्र गायत्री को देखे तो अभी गायत्री का पूरा सरीर ब्लू कलर मई चमक रहा था.

अभी गायत्री क सर पर एक क्राउन था जिस मई एक ब्लू कलर का स्टोन लगा हुआ था.

गायत्री क सर पर ब्लू क्राउन देख क्र वो बौने लोग बहुत खुश हुए.

बौना सरदार- मल्लिका की जय्य. हमारी मल्लिका वापस आ गई. अब बहुत जल्द हम सभी अपने राज्य मई अपने परिजनों क साथ होंगे.

सभी क चेहरे पर ख़ुशी की चमक देखि जा सकती थी.

सभी बार बार गायत्री क आगे झुकते हुए जैकारा लगा रहे थे.

गायत्री तो अभी भी अपनी आँखे बंद किये हुए बैठी थी.

थोड़ी देर बाद गायत्री आँखे खोल क्र देखि तो सभी सर झुकाये गायत्री क सामने खड़े थे हाथ जोड़ क्र.

गायत्री- ये क्या क्र रहे हो तुम लोग. बार बार मेरे सामने ऐसे क्यू झुक कहते हो. मुझे ये सब पसंद नहीं है. अब आगे से ऐसा नहीं करना.

बौना सरदार- मल्लिका हम सब का ये आप क प्रति आदर है. ये अधिकार है हमारा. ये हम से मत चिङिये.

गायत्री- क्या बा मई इस पर से उठ जाऊ.

सरदार- जी मल्लिका. अब आप वह से उठ सकती है.

गायत्री- अब बताओ क्या पता चला तुम्हे मेरे बारे मई. कैसे मई तुम सब का मल्लिका हु और तुम लोगो का मलिका कहा है. कुछ पता चला उसका.

सरदार- हमारी मल्लिका ै आलिया, सायद आप ने खुद पर गौर नहीं किया. एक बार आईने मई खुद को देख लीजिये फिर आगे कुछ पूछियेगा.

सरदर अपने हाथ को हवा मई लहराया और उसके हाथ मई एक बड़ा सा आइना आ गया.

उस आइना को सरदार ले जा क्र गायत्री क सामने क्र दिया.

गायत्री उस आईने मई खुद क रूप को देख क्र चौक गई.

रानी महारानी की तरह एक वस्त्र पहने हुए और वैसे hi आभूषण और सर पर क्राउन.

सब देख क्र गायत्री को तो अपने आँखों पर यकीं hi नहीं हुआ.

गायत्री- ये सब क्या है. कैसे हुआ ये. कब किये तुम लोग ऐसा. अच्छा अब समझा जब मई आँखे बंद क्र क बैठी थी तभी तुम लोगो ने अपने जादू से ये सब किया है. है न ऐसी hi बात.

सरदार- नहीं नहीं मल्लिका ै आलिया. हमारी इतनी मजाल कहा की हम आप की और देख भी सके. ये सब तो आप क सकती से हुआ है. हम तो बस आप की यदि और सकती को जगाने की कोसिस क्र रहे है.

गायत्री- मई कैसे मान लू की तुम लोग कोई जादू नहीं किये हो.

बौना सरदार- इसका प्रमाण मई आज नहीं दे सकता हु. है धीरे धीरे आप की सकती और यादे दोनों आने लगेगी अब फिर आप को खुद hi एहसास हो जाएगा की मैंने कोई जादू नहीं किया है.

गायत्री- कब तक याद आएगा मुझे.

बौना सरदार- अब बहुत जल्द आप को सभी कुछ याद आने वाला है ककी अब आप का क्राउन भी वापस आ गया है आप क पास और वो किसी साधारण इन्शान क सर पर नहीं रह सकता है. वो आप की सभी यादो को खींच लाएगा आप क पास तक.

गायत्री- अब मुझे इन सभी से आजादी कैसे मिलेगी. मई अपने साधारण वस्त्र मई hi रहना चाहती हु.

सरदार- अपनी आँखे बंद क्र आप अपने मन मई स्मरण कीजिये. जैसा वस्त्र आप चाहेगी वो आप क तन पर आ जाएगा.

गायत्री मन से अपने साधारण गरुअ वासकतृ को याद की और उसके तन पर गरुवा वस्त्र आ गया.

गायत्री- क्या तुम लोग यही रह रहे हो अपना राज्य को छोड़ने क बाद से.

बौना सरदार- नहीं मल्लिका ै आलिया, हम सब उस झरने क पीछे एक गुफा है उस मई रहते है. यह एक तपोवन हुआ करता था कभी. यहाँ क रिशु मुनि ने एक बार श्राप दे दिया था एक दानव को की यहाँ इस वन मई कोई भी ऐसा जीवन नहीं आ सकता जिसकी भावना हिंशक होगा.

इस लिए हम सब यहाँ सुरक्षित है. यहाँ हमारे दुसमन नहीं आ सकते है.

गायत्री- अच्छी बात है. अब आगे क्या करना है. तुम्हारे मालिक का कैसे पता चलेगा.

सरदार- मल्लिका ै आलिया, अब आप ने अपना रूप प् लिया है तो आप की सकती और यदि दोनों आप को धीरे धीरे मिलने लगेगी. मालिक कहा है ये भी तभी पता चलेगा जब आप पूर्ण रूप से हमारी मल्लिका बन जाएगी. अभी आप कही न कही इस सब को स्वीकार करने से हिचक रही है और सब कुछ हमारे जादू का हिस्सा समझ रही है.

जब तक आप का दिल ये स्वीकार नहीं करेगा की आप हमारी मल्लिक्का है तब तक आप को मालिक क बारे मई कुछ भी पता नहीं चलेगा.

गायत्री- ठीक है फिर देखते है क्या होता है.

सरदार- आइये अब आप थोड़ा सा जलपान क्र क आराम क्र लीजिये.

फिर उन लोगो ने सब क लिए खाने का मंगवा लिया और कुछ फल वह क बाजीचे से भी तोड़ लिए.

गायत्री खाना खा क्र आराम करने वही पैर क निचे चली गई और ये बौने लोग अपने गुफा मई कुछ हवन को तयारी मई लग गए ताकि जल्द से जल्द गायत्री को पुराणी यदि वापस आ जय.

सुबह लल्लू का नींद खुला तो अपने उप्पेर एक चादर पाया.

बगल मई देखा तो वह अभी लक्ष्मी नहीं थी. लल्लू उठ क्र अपना पजामा पहन लिया और वाशरूम की और बढ़ गया.

वाशरूम से पानी गिरने का आवाज आ रहा था.

लगता है वाशरूम मई लक्ष्मी फ्रेश हो रही है.

लल्लू वापस आ क्र बीएड पर लेट गया.

थोड़ी देर मई hi लक्ष्मी वाशरूम से नाहा क्र बहार निकली.

लल्लू- तो मैडम बड़ी महक रही है आप आज.

लक्ष्मी- जल्दी से आप भी जा क्र फ्रेश हो जाइये. आप भी महकने लगेंगे.

लल्लू लळष्मी का हाथ पकड़ क्र अपने पास बीएड पर बैठा लिया और उसके गॉड मई सर रख क्र लेट गए.

लक्ष्मी लल्लू क बालो क साथ खेलती उसे देख रही थी.

लल्लू साडी क उप्पेर से लक्ष्मी क पेट को चुम लिया.

लक्ष्मी जल्दी से उठ क्र कड़ी हो गई.

लक्ष्मी- यहाँ का सारा काम ख़त्म हो गया है. अब आप भी जल्दी तैयार हो जाइये तो हम सब पूजा करने चलते है. कल हमे गौण जाना है.

लल्लू- वह आप ने तो दिल खुस क्र दिया. इसी बात पर एक चुम्मी दे दीजिये न.

लक्ष्मी- बिलकुल नहीं अभी मई नाहा क्र आई हु. आप मुझे पूजा से पहले जूठा मत कीजिये.

आप भी जल्दी तैयार हो जाइये. बुआ भी तैयार हो रही है.

लक्ष्मी आईने क सामने जा क्र खुद को तैयार करने लगी.

लल्लू उठ क्र वाशरूम चला गया. वह से थोड़ी देर मई नाहा क्र बहार आ गया.

कमरे मई लक्ष्मी अभी नहीं थी. सायद बुआ क पास होगी.

लल्लू जल्दी से कपडा पहन क्र तैयार हो गया और निचे ड्राइंग रूम मई चला आया.

ड्राइंग रूम मई अभी सभी घर क बैठे हुए थे.

लल्लू सब को अभिवादन करता हुआ जा क्र एक सोफे पर बैठ गया

मां- कहा की तयारी है बीटा.

लल्लू- मां अब यहाँ का काम तो ख़त्म हो गया है तो आज सोचा है जरा पूजा क्र आये फिर कल गौण को निकल चलते है.

मां- मई भी यही कहने वाला था बीटा. मुझे थोड़ा काम है तो मई तो आज hi निकल जाउगा. तुम लोग कल आराम से आ जाना.

लल्लू- ठीक है मां.

युसूफ- कुछ दिन और रुक जाते बीटा तो बड़ा अच्छा होता.

लल्लू- अंकल रुक जाते लेकिन अभी गौण मई भी बहुत काम है. पापा लोग कुछ नया बिज़नेस सुरु क्र रहे थे और खेती बरी भी काफी है. अभी तो मुझे बिलकुल समय नहीं था लेकिन अब काम hi ऐसा था की मई आ गया. अगली बार आऊंगा तो आप जितने दिन कहेंगे मई रुकूंगा. अभी हमे जाने दीजिये.

युसूफ- ठीक है बीटा.

लक्ष्मी और बुआ भी तैयार हो क्र आ गई.

फिर तीनो महाकालेश्वर मंदिर पूजा करने चले गए.

वह आज बहुत भीड़ था मंदिर मई भक्तो का.

तीनो क़तर मई लग गए दर्शन क लिए.

लल्लू- आज क्या है जो इतने लोग है यहाँ.

लक्ष्मी- आज सोमवार है. हर सोमवार को दूसरे दिनों से ज्यादा hi भीड़ होता है.
 
सूर्र्यीय, माफ़ी दे दो भाई लोग.

वो क्या है की ये जो थ्रेट स्टार्ट किया था तो उस समय हमेसा मोबाइल मई hi घुसा रहता था.

घर वालो ने मोबाइल hi ले लिया था गुस्से मई :डी:

अभी थोड़ी देर पहले मिला है जब आज भूख हरताल किया है मैंने तो.

वो भी इस सरत पर की दिन मई दो घंटे से ज्यादा नहीं मिलेगा मोबाइल चलने को.

कोसिस करूँगा कल से अपडेट स्टार्ट करने का.

माफ़ करना भाई लोग...
 
मर्द का बच्चा. अपडेट 72.

इंद्रा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नई दिल्ली.

अभी अभी एक इंटरनेशनल प्लेन लैंड किया था. जिस कारन अभी यहाँ बहार काफी भीड़ थी विदेशी लोगो की.

इस भीड़ मई कुछ जाने पहचाने चेहरे भी थे जो अपने साथी को धुंध रहे थे.

बॉस- क्या हुआ तुम ने तो कहा था की तुम्हारा आदमी पहले से hi इंडिया मई है और सभी इंतजाम क्र रखा है. अभी अब लेने भी नहीं आया.

बूढ़ा- आ रहा होगा. एक मिनट कॉल क्र क पूछता हु.

बूढ़ा- Hello, कहा मर गए. अभी तक आये क्यू नहीं. हम सभी बहार तुम्हारा इंतजार क्र रहे है.

बूढ़ा अर्चयोलॉजिस्ट भुनभुलता हुआ कॉल कट क्र दिया.

बॉस- क्या हुआ. कहा है तुम्हारा बाँदा.

बूढ़ा- आ गया है. मैं एंट्रेंस पर है.

थोड़ी देर मई दो गाड़ी आ क्र उन लोगो क सामने रुकी

सभी उन गाड़ियों मई बैठ गए.

बॉस- क्या नाम है तुम्हारा. हमारे रहने का क्या इंतजाम किये हो.

बूढ़े का हेड गार्ड- सिर्र.. मेरा नाम पॉल है. मैंने यहाँ दिल्ली क बहार एक फार्महाउस ले रखा है आप सब क रहने क लिए.

बॉस- पॉल, गुड. हम सभी फार्महाउस मई रहेंगे लेकिन तुम अपने साथी क साथ कही और कमरा ले क्र रहना. जिस से किसी को हम पर सूचक न हो.

पॉल- हम ऐसे hi करेंगे बॉस.

सभी बाटे करते हुए फार्महाउस पहुंच गए.

बॉस- अच्छी जगह है ये. सहर क घिर से दूर है. पॉल, हमे यहाँ क कुछ पॉलिटिशियन और पुलिस वालो की कमजोरी, उनकी कोई दुखती राग का पता लगाना है. ये हमारे काम का अहम् हिस्सा होगा. जिस से अगर कही हमे कोई रुकावट आये अपने कामो मई तो उन्हें ब्लैकमेल क्र अपना काम निकल सके.

पॉल- हो जाएगा.

बॉस- यहाँ क लोकल गुंडों से भी संपर्क बनाओ. उन्हें hi तो हमारा काम करना है.

पॉल- ये मैंने पहले hi क्र लिया है.

बॉस- उन लोगो से तुम hi संपर्क मई रहोगे. अब तुम अपने ठिकाने पर जाओ. जब जरुरत होगी तुम्हे कॉल क्र बुला लिया जाएगा.

पॉल अपने साथी क साथ चला गया. बॉस और उनके साथियो क लिए पॉल ने फार्महाउस मई पहले hi दो किराये का गाड़ी रख दिया था.

पॉल क जाने क बाद बॉस उसका सिक्योरिटी हेड क साथ बूढ़े अर्चेओलॉजिस्ट क पास आ गया.

बॉस- अब हमे ये पता लगाना है की कहा पर ये घटना होने वाला है. क्या सब लिखा है उस पत्ते पर जरा खुल क्र बताओ.

बूढ़ा- ज्यादा कुछ नहीं बस इतना hi लिखा है की सूर्य ग्रहण क समय पूजा लड़ने से संगम से एक मटका निकलेगा जिस मई अमृत होगा. जो यह अमृत प् लेगा वह अमर हो जाएगा. इस पत्ते मई बस इतना hi लिखा है.

बॉस- संगम कहा है इंडिया मई. कितनी जगह है ये.

बूढ़ा- एक hi जगह है ये इलाहबाद मई.

बॉस- फिर हम सभी को वही चलना चाहिए. यहाँ दिल्ली मई क्या करना है. वैसे भी सूर्य ग्रहण मई अब ज्यादा दिन नहीं है.

उस ने अपने सिक्योरिटी हेड को देख क्र बोलै.

सिक्योरिटी हेड अपना गर्दन हिलता हुआ वह से बहार को चला गया.

बॉस- उस बॉक्स मई क्या लिखा है. जिस मई ये पत्ता रखा हुआ था.

बूढ़ा- K..ku..kuch n..na...nahi.

बॉस- सुच सुच बताओगे या और खातिरदारी करवाना चाहते हो. सायद तुम ने अभी तक मुझे पहचाना नहीं.

Budha-Us mai..mai ku..kuch नहीं लिखा है.

बॉस उठ क्र एक चमड़े क बैग से वो बॉक्स निकल क्र उसे अच्छे से मुआइना करने लगा.

बॉस- ऐसा हो hi नहीं सकता है. तुम हमे पूरी जानकारी नहीं दे रहे हो. ये जो कुछ तुमने बताया है ये आधी अधूरी बात है. या तो खुद से बता दो या फिर तैयार रहो अंजाम भुगतने क लिए. इस बॉक्स को मई यही किसी से दिखा लूंगा.

बूढ़ा- नहीं नहीं मुझे माफ़ क्र दीजिये मई अभी उस बॉक्स को सही से देखा hi नहीं है. मुझे मौका hi नहीं मिला उसे देखने का. जब तक उस बॉक्स को देखता की आप क आदमी आ क्र हम से वो चीन लिए थे.

बॉस- तो फिर देर क्यू क्र रहा है ये बॉक्स तुम्हारे सामने रखा है इसे देख क्र बता क्या लिखा है इस मई.

बूढ़ा अपनी व्हील चेयर घसीट क्र टेबल क पास लाया और फिर अपने बैग से गिलास निकल के उस बॉक्स का जाँच करने लगा.

काफी देर उस बॉक्स की गहन जाँच करने क बाद वो अपने सर पर आये पसीने को साफ़ करता हुआ बोलै.

बूढ़ा- अभी कुछ नहीं हो सकता है. हमे अभी इंतजार करना पड़ेगा.

इस मई लिखा है की वो ग्रहण तभी फलदाई होता है जब कुम्भ भी लग रहा हो और इस मई दो बुक्स क बारे मई भी लिखा है. जब तक हमे वो दो बुक्स का पता नहीं लगेगा हम कुछ नहीं क्र पाएंगे.

बॉस- अब ये क्या नया बकवाश क्र रहे हो तुम. अब ये कुम्भ क्या है और दो बुक्स कहा से आ गया इस मई.

बूढ़ा- इस बॉक्स मई जो लिखा है वो मैंने बता दिया है आप को. इस से ज्यादा मुझे नहीं पता.

वो बूढ़ा दर से कंपता हुआ बोलै.

बॉस- शीट अब क्या करे फिर.

बूढ़ा- पहले बुक्स ढूँढना है फिर कुम्भ तक इंतजार करना पड़ेगा.

बॉस- बुक्स कौन सा है. ये कहा मिलेगा.

बूढ़ा- ये बुक नासिक मई किसी महा पुरोहित क यहाँ है. हमे सब से पहले अब इस बुक को ढूँढना होगा.

बॉस सोफे से उठ क्र बेचैनी मई अपने एक का को मुठी बना क्र दूसरे हाथ क हथेली पर मरता इधर से उधर चहलकदमी करने लगा था.

फिर उस ने मोबाइल निकल क्र कही कॉल मिला क्र बात करने लगा.

थोड़ी देर मई hi वह उस बॉस का सिक्योरिटी हेड भी आ गया.

हेड- क्या बात है सर. आप ने जल्दी मई क्यू बुलाया.

बॉस गुस्से मई गन निकल क्र बूढ़े को गोली मर दी.

बॉस- इस फैले ने हमे सही जानकारी नहीं दी. आधी अधूरी जानकारी दे क्र हमे भटकने की कोसिस की है. अभी अब हमे यहाँ से वापस चलना चाहिए अपने मुल्क. वह जा क्र hi हम चैन से एक बार फिर नए सिरे से प्लान करेंगे की आगे क्या करना है.

हेड- ऐसा क्या हो गया इतनी देर मई hi बॉस. सब ठीक तो चल रहा था.

बॉस- Nahi...nahi ये फैला हम से बहुत कुछ छिपा गया. सब नहीं बताया था इस ने हमे पहले. अभी बता रहा है की कोई दो बुक है वो चाहिए फिर वो अमृत तभी निकलता है जब कुम्भ लगता है और अभी ये कुम्भ क्या है ये भी नहीं पता हमे.

बॉस कमरे मई चारो और चक्कर लगता बोल रहा था.

बॉस- अभी हम सब वापस अपने कंट्री चलते है. वह नए सिरे से सोचेंगे क्या करना है.

सब क चलने की तयारी करो.

फिर सिक्योरिटी हेड वह से चला गया.

दूसरे दिन ये लोग वापस अपने मुल्क को चले गए.

लल्लू बुआ और लक्ष्मी क साथ मंदिर मई भोलेनाथ क पूजा क लिए प्रवेश किया.

आज कुछ ज्यादा hi भीड़ था मंडे होने क कारन. वह क पांडा( पुजारी) उस उमेश भरे गर्मी मई अपना तोंद फुलाए पसीने से लथपथ सभी को जल्दी जल्दी पूजा क्र वह से आगे बढ़ते जाने को बार बार कह रहा था.

ये तीनो भी वह पूजा क्र आगे बढ़ते हुए जयकारा लगा रहे थे.

लल्लू महादेव को नमन करता हुआ आँख बंद क्र दोनों हाथ जोड़ क्र आगे बढ़ता जा रहा था.

कुछ छान बाद वो जैसे hi अपनी आँख खोला तो लल्लू जोर से उछाल पड़ा.

वो मंदिर मई न हो क्र कही और एक ुचे पहर क सब से ुचि छोटी पर खड़ा था.

लल्लू क आस पास काळा काळा और मटमैले से बदल इधर उधर आसमान मई तैर रहे थे.

लल्लू अपने आस पास घूम क्र देख रहा था.

वो यहाँ कैसे आ गया. अभी तो वो बुआ और लक्ष्मी क साथ पूजा क्र रहा था मंदिर में महादेव का.

ये कैसा चमत्कार है. कैसे आ गया है वो यहाँ. मंदिर मई बुआ और लक्ष्मी जब मुझे अपने साथ नहीं देखेंगे तब क्या होगा.

लल्लू- हे भगवन. ये कैसा लीला दिखा रहे हो. ये कहा ला पतला है मुझे. ऐसा क्या क्र दिया मैंने. यहाँ तो कोई दिख भी नहीं रहा है. यहाँ कैसे आ गया मई.

लल्लू उप्पेर देख क्र हाथ जोड़े भगवन से फर्याद क्र रहा था.

" मैंने लाया है तुम्हे बच्चा."

तभी लल्लू क पीछे से एक आवाज आई.

लल्लू- ओह्ह आप. आप यहाँ क्या क्र रहे है. और आप मुझे यहाँ क्यू लाये है बाबा.

लल्लू अपने पीछे खड़े एक साधु को देख क्र बोलै.

बाबा- मैंने कुम्भ मई तुम्हे मिला था और एक प्रशाद दिया था तुम्हे खाने को. उसका परिणाम दिखा तो लेकिन ऐसा नहीं जैसा दिखना चाहिए था. इसी लिए मुझे यहाँ तुम्हे ले क्र आना पड़ा.

लल्लू- मेरे तो कुछ समझ मई hi नहीं आया की आप क्या कह रहे है बाबा.

बाबा- तुम्हारे अंडर कुछ सकती है जिसे जगाने क लिए मैंने प्रसाद दिया था तुम्हे. जब तुम मुझे घायल मेरे टैंट मई लाये थे याद है तुम्हे.

लल्लू- है याद है मुझे.

बाबा- तुम्हारे सरीर मई जो ये जगह जगह टैटू बने है ये उसी का कारन है. तुम ने अपने सकती को जान तो लिया है लेकिन उसे पाया नहीं. अभी तक उस को साधा नहीं है. इस लिए मुझे यहाँ आना पड़ा है. बहुत जल्द तुम्हे इसकी जरुरत पड़ने वाली है.

लल्लू- क्यू मुझे क्यू इसकी जरुरत पड़ेगा. ऐसा क्या होने वाला है.

बाबा- ये मई अभी नहीं बता सकता तुम्हे. बस इतना समझ लो की कुछ बहुत बुरा होने वाला है जिस से बचने क लिए तुम्हे प्रयत्न करना है लेकिन बिना सकती क तुम कुछ भी नहीं क्र सकते हो. तुम्हे अपने सकती को पाना होगा. और वो भी जल्द से जल्द.

लल्लू- मुझे क्या करना है अभी मुझे सिर्फ ये बता दीजिये. मुझे आप की कोई भी बात समझ नहीं आ रहा.

वह मंदिर मई बुआ और लक्ष्मी मुझे गायब देख क्र पदेशन हो रही होंगी.

बाबा- कल तुम अपने गौण जा रहे हो. वह डेली बिना एब्सेंस क सुबह सुबह नदी किनारे आओगे. वही मई बताऊंगा की तुम्हे क्या करना है.

अब तुम अपनी आँखे बंद करो.

लल्लू अपनी आँख बंद क्र लिया.

कुछ hi चनो मई वो खुद को मंदिर मई बुआ और लक्ष्मी क पास खड़ा था.

लक्ष्मी लल्लू को हाथ पकड़ क्र जोर जोर से हिला रही थी जैसे लल्लू सो रहा हो और वो लल्लू को नींद से जगा रही है.

लल्लू- है, क्या हुआ.

लक्ष्मी- आप को क्या हुआ है. कब से आवाज दे रही हु.

लल्लू- पूजा तो हो गया यहाँ. अब चलो बाजार से सब क लिए कुछ सामान खरीद लेते है और कुछ खा भी लेंगे. लोग कहते है की तीर्थ स्थान मई कुछ खाना जरूर प्रसाद समझ क्र खा लेना चाहिए.

तीनो वह से वही पास क बाजार मई घर क सभी लोगो क लिए सामान खरीद लिया फिर एक अच्छे रेस्टोरेंट मई जा क्र तीनो नास्ता किये.

बुआ- अब घर चलना है या अभी भी कुछ लेना रह गया है.

लल्लू- नहीं बुआ अब आप घर चल सकती हो. आज मां गौण चले गए होंगे. हम लोग कल सुबह निकल चलेंगे.

तीनो बाटे करते हुए घर आ गया.

सिबा- बड़ी देर लगा दिए आने मई.

लक्ष्मी- है आज मंडे था तो कुछ ज्यादा hi भीड़ था वह पर.

कोमल- कुछ दिन और रह जाओ न आप लोग. बहुत अच्छा लग रहा था सब क साथ.

लल्लू- वह का काफी सारा काम छोड़ क्र आया था मई यहाँ. अभी हम सब को जाने दीजिये. हम लोग फिर जल्दी hi आएंगे यहाँ फिर.

जोया- हम इंतजार करेंगे जीजू आप लोगो का. लेकिन अब बुआ जी तो नहीं आ पैगे.

बुआ- कोई बात नहीं. जब सिबा की सदी होगी तब कॉल करना मई जरूर आयूंगी.

सोबिअ- वो तो आप सब को आना hi पड़ेगा. आप सब क बिना कहा होगी सदी.

यु hi सब बाटे करते हुए बैठे थे.

एक और अपडेट आ रहा है थोड़ी देर मई.
 
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