MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 2 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 10

गुरु – उह देखो तुम्हारा लुंड भी खरा हो गया है मेरे चुचो को देख कर. आओ न इनको दबा कर देखो…. तुमको बहुत मजा आएगा…..

पब अभी भी चुप था. और गुरु को आखें फर फर के देख रहा था. गुरुपित जैसी सुन्दर लड़की को इस अवस्था में देख कर और उसके मुँह से चुके लुंड जैसे सब्द सुन कर वो उत्तेजित होने लगा था. उसका लुंड तो बिना बात के भी खरा हो जाता था. पैर अभी गुरु को देख कर उसके मन में उत्तेजना आ रही थी. उसका मन भी उसकी चुचो की घाटी को देख कर उसके बूब्स को दवना चाहा रहा था. उसकी चुकी उसके ब्लाउज में से 50% तक नंगी दिख रही थी. एक दम गोरी चुकी थी. साइज भी एक दम धसू था. पैर उसने किसी तरह खुद पे काबू रखा था.

गुरु उसको और बड़का रही थी. ऐसा लग रहा था की गुरु सेक्स के नशे में पागल हो गई है

गुरु – ऊऊह्ह्ह ाहूओ न और प्यार करो मुझको. आज मुझको अपना बना लो. में सालो से इस मिलान को तरफ रही हु. क्या में तुमको अच्छी नहीं लगती. (और वो ये कहा कर उसकी आँखों में देखती है जो की उसकी चुचिओ पर तिकी थी) ओह्ह्ह तुम इनको देखना चाहते हो न. लो देखो इनको (और अपना ब्लाउज उतर कर फेक देती है). अब बताओ किसी है मेरी चुकी? पसंद आयी तुमको?? आओ न छू कर देखो. ये बहुत सख्त है. अऊ और इनको दबा दबा कर मुलायम कर दो. ाऊओ ना खा जाओ इनको. (गुरु बहुत hi सेक्सी ऐडा से बुला रही थी.)

पंकज तो बस चुप चाप बैठा उसकी अदाओ को देख रहा था. उसके मन में केवल वासना hi वासना थी. पैर वो गुरु के इसतरह एक दम से इनविटेशन से सकते में आ गया था. आज वो भी उसको पाना चाहता था. पैर न जाने क्यों उसका मंद उसे रोक रहा था. इसलिए वो बस गुरुपित की सेक्सी अदाओ का बेथ कर मजे ले रहा था. और उसका मन कर रहा था की वो अभी जाकर उसे पाकर ले और बना ले उसको अपनी. पर फिर उसने सोच की चलो पहले ये तो देख ले ये और क्या करती है. इतना कुछ देख कर उसको ये तो यकीं था की आज उसको एक छूट मिलेगी hi मिलेगी. उसके मंद ने sahi-galat सोचना बंद कर दिया था. वो तो गुरु की अदाओ का देवना होता जा रहा था. और गुरु भी उसको अपनी नंगी चुचिओ को हिल हिला कर दिखा रही थी. और वो इस सन को देख कर उसके मजे ले रहा था. गुरु के पिंक निप्पल एक दम तन गए थे. गुरु बहुत hi सेक्सी -2 बाटे बोल रही थी. उन बातो से उसका रुकना मुश्किल हो रहा था. पैर वो देखना चाहता था की गुरु कहा तक जाती है. इसलिए वो चुप चाप बेथ कर उसको देख रहा था.

पर गुरु उसको कुछ भी न करता देख उसको और भड़काने के लिए उसके सीने को शर्ट के ुकर से hi सहलाने लगती है. उसकी एक चुकी उसकी एक बाजु को छू रही थी. उसके स्पर्श से वो रोमांचित हो जाता है और वो अपना हाथ आगे बढ़ाने लगता है पर फिर सोचता है की यदि मेने ेशा किया तो ये सन यही पे बंद हो जायेगा और फिर कमान मेरे hi हाथ में होगी. इसलिए वो पहले गुरु के सेक्सी सन के पुरे मजे लेना चाहता था. फिर उसको छोड़ना चाहता था.

जब गुरु देख थी है की पंकज कुछ भी नहीं कर रहा है. तो वो उसके सीने को सहराते हुए कहती है – क्या हुआ मेरी चुकी पसंद नहीं आयी क्या. छू कर देखो न. (और उसके एक हाथ को पाकर कर अपने चुचो पे रख दिति है)

पंकज को तो मनो मुँह मागि मुराद मिल गयी थी. उसके चुचो को छूटे hi एक कुर्रत सा डोर गया उसके सरीर में. और वो उसके बूब्स को फील करने लगा. उसको बारे मजा आ रहा था.

पैर गुरु को लगा की वो कुछ नहीं कर रहा है तो वो बोलती है – ओह्ह्ह मुझको याद आया तुमको मेरी छूट बहुत पसंद है न. जंगल में कैसे देखा रहे थे. और छूने की कोकिलः भी कर रहे थे. लो अभी दिखती हु तुमको. सायद तुम उस दिन ढग से नहीं देख पाए. लो आज देख लो इसको जे बार के. (और ये कहते हुए वोट क पल में hi अपने बचे हुए कपड़े भी निकल देती है. अब गुरुपित एक दम नंगी थी. क्या बदन था उसका सोने से भी खरा. एक दम अप्सरा लग रही थी. और लगती भी क्यों न. अप्सरा (दस) से hi तो उसको ये बदन मिला था. 36 की चुकी जिनमे कोई झुकाव नहीं है एक दम सख्त. फिर एक दम पतली कमर 26 की जो माखन से भी जयादा चिकनी थी. उसमे उसकी गहरी नाभि जो बहुत hi सुन्दर थी उसके पास के टिल्ट है जिसको देख कर कोई भी अपना होश खोबेते. और फिर एक दम बड़े सी गांड 38 की जो बहुत hi मुलायम लग रही थी. और भरी हुई जंगो के बिच में एक छोटी सिक् छूट. कोई भी देख कर उसके लिए अपना सब कुछ लुटा दे. पैर गुरु तो आज अपना सब कुछ पंकज को सपना चाहती थी. उसका फेस वासना की आधी में एक दम लाल हो गया था. और वो आधी लेती हुई पंकज के सामने अपनी छूट को तागे खोल कर दिखा रही थी. वो इस टाइम एक दम बाजारू रंडियो की तरह कर रही थी. सायद उसको अब कण्ट्रोल नहीं हो प् रहा था. तो वो अपने एक हाथ से अपनी छूट को सहला रही थी और दूसरे हाथ से अपने चुकी को दबा रही थी. बहुत hi कामुक सन था.
 
अपडेट 11

पैर पंकज तो जैसे इस टाइम यहाँ था hi नहीं. पंकज वो जंगल वाली बात सुनते hi उसको सब यद् आ गया था. जो की वह हुआ था. कैसे वो बड़का और क्यों उसने अपने आप को रोका. वो तो ये सब hi सोच रहा था. उसको पता hi नहीं चला की गुरु नंगी हो कर उसके सामने लेती है. और अपने बदन से खेल रही है.

गुरु अपने बदन से खेलते हुए एक दम बोली – तुमको याद है पंकज मेने जंगल में भी तुमको इसरा किया था. पर तुम नहीं समजे उल्टा मुझसे और दूर रहने लगे. आज बड़े दिनों बाद हाथ आये हो आज में तुमको अपना बना कर रहूगी. में बहुत प्यासी हु. मेरी प्यास भिजा डा ….. आआह्ह्ह्ह पंकज कुछ तो करो न तुम कुछ करते क्यों नहीं ..आअह्हह्ह्ह्ह….

पंकज तो अब अपने आप से लड़ने में बिजी था. उसका मान और लुंड नहीं मन रहा था. वो तो बस गुरु को छोड़ना चाहते थे. पैर मंद उनको रोक रहा था. तभी उसके मन में आया की 1 बार यदि में छोड़ भी हु तो क्या होगा 10 बार में तो बहुत सकती प् सकूगा न. ये सोचते hi वो आगे बर्न लगा पर तभी उसके मन में मणि जी की एक बात आयी “तुम्हारा संयम hi तुमको जीत दिलाएगा” ये बात याद एते hi उसने अपने बरते हु हाथ की डिश बदल कर जमीं पे जोर से दे मारा.

ये देख कर गुरु बोली – हाथ को जमीं पर नहीं मेरे पे चलाओ. देखो मेरी छूट कितनी गर महो गई है.

और वो पब का हाथ पाकर कर अपनी छूट पर रखने लगी. पर पब ने उससे अपना हाथ छुड़ा लिया और एक थप्पड़ दिया उसके गोर गाल पर. थप्पड़ एंटी तेज़्ज़ था की उसके मुँह से कौन आ गया. और वासना में लाल गाल एक दम लाल हो गया. फिंगर के निशान बन गए. पब तप्पड़ मर के रोने लगा उसका लुंड बहुत दर्द कर रहा था. पर लुंड से जयादा उसके दिल में दर्द था.

तभी गुरु उसकी और देखने लगी और कुछ बोलने वाली थी की पब बोलै – चुप एक दम चुप अब तू कुछ भी बोली तो तुझको यही मर दुगा. तू तो एक दम गठिया निकली. कहा मेने तुझको अपना गुरु मन था. पर तू तो वासना की पुजारन निकली. साली कुटिया कही की. तूने आज हमारे बिच के सरे रिश्ते इस वासना की आदि में थोड़ दिए मेने तुझको अपना दोस्त, साथ, हमदम, गुरु पता नहीं क्या – 2 नहीं मन तू तो एक रंडी निकली. जा चली जय अहा से में अब तेरी सूरत भी नहीं देखना चाहता हु. … और पब रोने लगता है उसके दिल में एक दर्द था.

इतने में गुरु ने अपने कपड़े पहन लिए थे. उसके होतो पर एक विजयी मुस्कान थी. वो बहुत खुश लग रही थी. ऐसा लग रहा था की इतनी गली सुन कर वो पागल हो गई है. और मुस्कुरा रही है. कियोकि यदि कोई और लड़की होती तो ासे आदमी से, जिसने उसको नंगी होते हुए भी ठुकरा दिया हो, ासे आदमी से इतनी गली सुन के वो मरना पसंद करती. पर ये तो मुस्कुरा रही थी. वो कुछ देर चुप चाप खरी रही. और पब को देखती रही. उसका डायन जैसे hi पब के लैंड पे गया जो की अभी भी खरा था. तो उसकी मुस्कान और गहरी हो गयी.

गुरु – पंकज सुनो…

पब – में अब तुम्हारी कोई भी बात नहीं सुन्ना चाहता हु और न hi तुमको देखना चाहता हु. तुम अब जा सकती हो….

गुरु – तुम बस एक बार मेरी बात सुन लो फिर भी तुम कहोगे तो में चली जोगी.

पब – (उसकी और देखते हुए) – बोलो क्या कहना है तुम्हे

गुरु – मैं आज जीत गयी हु. मेरा विस्वाश जीत गया. तुमको पता है अभी जॉब hi हुआ वो तुम्हारा एक टेस्ट था. मेने जो भी किया वो मणि जी के आदेश पे किया है.

पब – क्यों मतलब ? टेस्ट? केसा टेस्ट??

गुरु – मणि जी ये देखना चाहते थे की जिस काम के लिए तुमको चुना है तुम वो कर भी सकते होय ा नहीं. इसलिए पिछले 17 दिनों से तुम्हारा टेस्ट hi हो रहा था. जंगल में टाइगर के हमले से लेकर अब तक जॉब hi हुआ वो तुम्हारा टेस्ट था.

पब – नहीं तुम अब झूट बोल कर अपने किये पर पर्दा डालना चाहती हो.

गुरु – दस माँ की कसम, ये सब दस माँ की इच्छा से hi हुआ है.

पब को ये सुनते hi यकीं हो गया था की गुरु सच कहा रही है कियोकि वो उसकी भक्ति को देख चुक्का था. अब उसको दर लगने लगा था गुरु की बातो से. तो वो एक दम बोलै

पब – ओह्ह यदि ये टेस्ट था तो यदि में इसमें तुमको च…. (वो बोलते बोलते रुक गया)

गुरु – मुस्कुराते हुए) – बोल सकते हो. कोई बात नहीं…. तुम ये hi जानना चाहते हो न की तुम यदि मुझको छोड़ देते तो में क्या करती.. …

पब – हां में सर लीला देता है

गुरु – तुमको मार देती. यही आदेश था मेरे लिए. (लहजा बहुत सख्त था. जैसे वो दन्त पीस कर बोली हो)

पब के सरीर में दर की लहार डोर गयी. और उसको कुछ देर पहले अपना बहकना याद आया. पर गुरु उसको देख कर बात गुमटी हुई बोली – पर में अब बहुत खुस हु तुमने सब टेस्ट में खरे उतरे हो. यदि तुम मेरे साथ कुछ भी करते तो सच में मुझको बहुत दुःख होता. मेरा तुम पर जो विस्वास है वो टूट जाता. तुम बहुत अच्छे हो पंकज……

पब – नहीं में अच्छा नहीं हु. में तुमको और देखा नहीं दे सकता हु. तुम मुझपर विस्वास करती हो और में तुमको हमेशा वासना किन अजर से देखता हु. में तुम्हारे विस्वास के लायक नहीं हु. तुम अभी कुछ नहीं जानती हो …… (और रोने लगता है)

गुरु – यार तुम बात – 2 पर मत रोया करो लड़कियों की तरह, मैं जानती हु तुम क्या कहना चाहते हो, …. यही न की उस दिन जंगल में पहले तुम बहक गए फिर तुमने अपने आप पर कण्ट्रोल किया. और आज भी वैसा hi हुआ था न.

पब – चौक जाता है….. तुमको कैसे पता

गुरु – तुम्हारे फेस से सब पता चलता है. की तुम क्या चाहा रहे हो. पर इसमें भी तुम्हारी गलती नहीं है.

पब – वो कैसे???
 
अपडेट 12

गुरु – तुम्हारे फेस से सब पता चलता है. की तुम क्या चाहा रहे हो. पर इसमें भी तुम्हारी गलती नहीं है.

पब – वो कैसे???

गुरु – तुमको पता है तुम्हारा लुंड के साथ डलासुर की सकती है. और मेरे रूप में दक्षसूरी का रूप. तो तुम्हारा भड़कना नार्मल है. बल्कि तुम डलासुर की सक्तियो को काबू करके खुद पे कण्ट्रोल कर लेती हो ये बरी बात है.

पब उसके मुँह से लुंड सुन कर ीदार उदार देखने लगता है. तो गुरु बोलती है – ऊहे ोये अब देखो कैसे गैब्रराहा हाईल ुण्ड सुन कर. और अभी टोरी देर पहले तो इनके मुँह से मेरे लिए फूल जहर रहे थे. मेरे तो कान hi पाक गए इतनी गाली सुन कर….

पब सर्मिन्दा सा हो जाता है. और सॉरी बोलता है

तो गुरु – कोई बात नहीं, मुझको तुम्हारा गाली देना भी अच्छा लगा. कियोकि वो मेरे नाटक की सफलता का इनाम था. (तभी उसकी नजर फिर से उसके लुंड कर जाती है जो अभी भी खरा था.)

तो गुरु उसके पास जा कर उसकी पेण्ट उतने लगती है. तो पब हड़बड़ा कर पीछे तो जाता है. तो गुरु थोड़ा डेट हुए कहती है – साइड खरे रहो. और एक शब्द भी मुँह से न निकगे..

पब खड़ा हो जाता है. और गुरु उसकी पेण्ट उतर कर उसके लुंड को बहार निकल कर सहलाने लगती है. वो ऐसे झुकी हुई थी की लुंड से वीर्य निकले तो उसके उप्पेर न गिरे. 4-5 बार सहलाने से hi उसका सुका हुआ वीर्य निकल जाता है. और दोनों की मुँह से एक आअह्ह्ह्ह भी निकल जाती है…. फिर जब पब को होश आता है तो वो उसे देखता है क्यू. भरी नजरो से….

गुरु – यदि नहीं निकलती तो ये पहात जाता समजे….

पब – वो उसकी बात पे मुस्कुरा देता है… और कहता है – और ये तुम्हारे मुँह से आह्ह्ह्ह क्यों निकली. निकला तो मेरा थान ा….

गुरु – यार में भी एक लड़की हम एरा भी मान होता है… (और सरमने लगती है)

पब – तुम और लड़की????… हहहहहहह

गुरु – उसको झूठे गुस्से से – क्या मतलब में लड़की नहीं हु???

पब – नहीं नहीं तुम वाकई में एक खूबरूरत लड़की हो बहार से भी और अंदर से भी..

गुरु अपनी टैरिफ सुन कर कर कुश होती है और शर्मा जाती है….

गुरु – चोलो अब सो जाओ सुबह हमको नार्थ साइड में जाना है. वह तुमको तुम्हारी पहली बीबी मिलेगी. वो वही से सब सुरु होगा.

पब – तुमको कैसे पता इतने दिन में तो एक भी नहीं मिली. अब कैसे??

गुरु – अरे बताया न की वो सब टेस्ट था. मैं जान कर तुमको वह नहीं ले गई जहा तुमको जाना था. क्यों भूल गए दस माँ ने क्या कहा था मैं तुमको मार्ग बताऊगी और तुम चलोगे. और नहीं तो क्या में ासे hi तुम्हारे साथ गम रही हु. यदि मुझको कुछ भी नहीं पता तो…..

पब – दांया हो आप गुरु माँ. आप दांया हो … (और उसके पाऊँ पाकर लेता है.)… पहले तो बच्चे की मर लो फिर कहो की टेस्ट था. सब हो गया या और लेनी है…

गुरु – चल अब सो जा और ये नाटक बंद कर.. नालायक कही का……

पब – एक बात कहु. मैं सोच रहा हु की तुमको देख कर मेरे ांदन उत्तेजना आती है. तो कही मैं कुछ गलत न कर बेतु. अभी कुछ देर पलहे मेरी यही तमन्ना थी…………. क्या कुछ आएसा नहीं हो ससक्त की मैं अपने अप्प पे और काबू रख सकू.

गुरु – हम्म सही कह रहे हो तुम मेरे साथ तो कुछ नहीं कर पाओगे. तुम अभी मुझको जानते नहीं हो. पर हाँ तुमको अपने सयम को बढ़ाना चाहिए. चलो कल से hi में तुमको डायन लगाना सिखाती हु. अब सो जाओ….

पब – (एक दम से गुरु के नजदीक जाते हुए) क्यों, क्यों नहीं कर सकता तुम्हारे साथ कुछ. क्या तुम मुझको नहीं चाहती हो. क्या तुम मेरी तमन्ना पूरी नहीं करोगी (वो ये बात गुरु की आँखों में देखते हुए बोलता है)

ये सब सुन कर गुरु भी एक पल को बहक जाती है और उसकी और बरती है अभी दोनों के फेस के बिच बस कुछ ींचो का फैसला था. दोनों एक दूसरे की आखों में देखने लगते है. पैर कुछ पालो में hi दोनों सभाल जाते है. और एक दूसने से नजसे चुराने लगते है. और दू रो कर ग्रेस पे लेट जाते है.

गुरु बड़बड़ाती हुई बोलती है लोफर कही का और मुस्कुराने लगती है. वो भी मुस्कुराते हुए सो जाता है.

दोनों सूरज की पहले किरण के साथ उड़ते है. और अपने डेली वाले कामो को कर की ा जाते है बापस. तब गुरु पब को डायन लगाना सिखाती है. और दोनों hi डायन में बेथ जाते है. काफी देर तक डायन लगाने के बाद दोनों उड़ते है. तो पब को अच्छा फील हो रहा था. अभी उसका लुंड खरा नहीं था.

फिर दोनों चल देते है गुरु के बताये हुए रस्ते पर. अभी वो कसबे के बाजार में hi पहुंचे थे. की गुरु एक दुकान के सामने रुक जाती है. ये एक जवलरी शाप थी. वो उस दुकान को देख रही थी. पब को लगता है की गुरु कुछ लेना चाहती है. पैर उनके पास तो रस नहीं थे.

पब – गुरु चलो न यहाँ क्यों रुक गयी. हम अभी कुछ भी नहीं खरीद सकते है. हमारे पास रस नहीं है.

गुरु – (उसको खा जाने वाली नजरो से देखते हुए) किसी से एक पेन और पेपर ले कर आओ.

पब चुप चाप ले आता है किसी से मैग कर. और गुरु को दे देता है. गुरु उस पेपर पर एक डिज़ाइन बनती है. एक सिम्ब्ले टाइप का था. पंकज के तो कुछ समाज में नहीं आया. गुरु उस डिज़ाइन को कम्पलीट कर के पब को देती है और कहती है की ये सामने वाली शॉप के मालिक को दे दो. और वो जॉब hi दे ले आना चुप चाप. उसको मत बाटना की मैं यहाँ खरी हु.
 
अपडेट 13

पब चुप चाप ले आता है किसी से मैग कर. और गुरु को दे देता है. गुरु उस पेपर पर एक डिज़ाइन बनती है. एक सिम्ब्ले टाइप का था. पंकज के तो कुछ समाज में नहीं आया. गुरु उस डिज़ाइन को कम्पलीट कर के पब को देती है और कहती है की ये सामने वाली शॉप के मालिक को दे दो. और वो जॉब hi दे ले आना चुप चाप. उसको मत बाटना की मैं यहाँ खरी हु.

पब उसको गुरता है और बिना कुछ कहे शॉप में चला जाता है. शॉप को अंदर से देख कर सोचता है की सायद ये इस कसबे की सबसे आमिर आदमी की दुकान है. बहुत hi अच्छा इंटीरियर हो रखा था. वो शॉप में जाकर एक वर्कर से पूछता है ओनर के बरी में तो वो एक केबिन की और इशारा कर देता है. वो उस केबिन में जाता है तो एक 40-45 साल का मर्द (बहुत हे अच्छे सरीर का) एक चेयर पे बेथ था. उसने जैसे hi पब को देख तो वो बोलै – आए लड़के कहा चले आ रहे हो. नॉक भी नहीं किया. क्यों आये हो यहाँ??

पब उससे और उसके रुतबे से कुछ दर सा गया था तो वो बिना कुछ बोले वो पेपर उसको दे देता है. वो उस पेपर को डायन से देखता है. उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे.

शॉप ो. – आप कब मिले माँ से. और क्या दुबारा भी मिलोगे??

पब को कुछ समाज नहीं आता वो चुप hi रहता है. पैर वो इतना समज गया था की वो गुरु की बात कर रहा है.

S.O. उसको चुप देख कर कुछ नहीं पूछता और मुद कर अपने पीछे राखी तिजोरी को खोल कर कहता है – जितना भी रस चाहिए लेलो.

पब का तो मुँह hi खुला रहा जाता है इतना रस देख कर. और वो भी ये सोच कर की वो चाहे जितना ले सकता है. वो उस आदमी को समाज नहीं प् रहा था. कोई अपनी तिजोरी एक अनजान के सामने खोल कर कैसे रख रक्त है. क्या है इसका गुरु से रिस्ता. कही से उसका बीटा तो नहीं. वो सोचते हुए 2 लाख रस ले लेता है ुस्तिजोरी से. और जाने को मुड़ता है पर वो अपनी भावनाओ को दवा नहीं पाया और बोल पारा

पब – क्या आप गुरुपित के bête हो???

बस इतना hi सुना S.O. ने वोट क दम आग बबूला हो गया. उसने तुरंत अपने आदमियों को आवाज लगाई. और उसके आदमी जिन की तरह आ गए. तो उसने पब को पकड़ने को बोलै. ये सब बस 2 मं में हो गया था. पब को जब थक कुछ समाज में आता वो उसके आदमियों की कैद में था. उसको तो अभी भी समाज नहीं आया था की जो आदमी एक मं पहले अपनी साडी दौलत देने को तैयार था उसने अभी क्यों पाकर रखा है. तभी

S.O. – (गुस्से में) तू कोई बहरूपिया है. तू माँ अक भक्त नहीं हो सकता यदि होता तो उनका नाम ऐसे नहीं लेता. बता तू कोण है.. बता नहीं तो तुझको सही मर दुगा.

पब अब फस चुक्का था. वो उसको क्या कहे और क्या नहीं उसके कुछ समाज में नहीं आ रहा था. वो एक 20 साल का लड़का था और वो 60+ आगे की औरत का नाम ाइसे ले रहा था जैसे वो उसकी दोस्त हो. पैर था भी तो एहि सच गुरु उसकी दोस्त hi तो थी बल्कि उनकी दोस्ती कुछ आगे hi बाद चुकी थी. कर पब समाज नहीं प् रहा था की वो क्या करे. इतने में सो ने एक गन निकल ली और उसके सर पे रख दी. गन देख के तो उसके तोते hi उड़ गए. वो समाज गया उसका अंत नजदीक है. पैर वोट क बार कोसिस करना चाहता था. वो उनसे लड़ कर तो नहीं जीत रक्त था कियोकि अकेला S.O. hi इसके जैसे 10 के लिए भी बहुत था. और यहाँ तो गन और उसके आदमी भी थे. तो वो लास्ट कोसिस में बहुत जुड़ से चिलता है – गुरुपित बचाओ मुझे गुरुपित बचाओ!!!

S.O. – अबे चिल्ला क्यों रहा है तेरे आवाज यहाँ से बहार नहीं जा रक्ति. ये साउंड प्रूफ शॉप है. और तुज जैसे बेहरुपीये के लिए क्या माँ खुद आएगी अपनी सड़ना को झोड़ कर. चल चिलाना बंद कर और बोल कोण है तू. नहीं तो यही मर दुगा.

ये सुन के तो पब को पक्का यकीं हो गया की वो अब मर जायेगा. पैर बहार खरी गुरु को फील हो जाता है की पब खतरे में है तो वो तुर्रंत शॉप पर आने लगती है. और जैसे hi उसके कदम शॉप में पड़ते है. बसे hi S.O. पहिचे हो जाता है कियोकि उसको अहसास हो गया था की माँ आ गयी है. और वो अपने एक आदमी से बहार देखने को कहता है की देखो कोण है बहार.

आदमी बहार को जाहि रहा था की गुरु अंदर आ जाती है. उसको देख क ीक मं को तो सो उसे पहचान नहीं पता. पैर अगले hi पल उसे पहचान जाता है (कियोकि अभी गुरु 18 साल की लड़की के रुओ में थी. जबकि उस आदमी ने उसको एक भूड़ी के रूप में hi देखा था)

उसे पहचानते hi वो आदमी उसके पाऊँ में गिर जाता है और उसके पाऊँ को पाकर के कहता है मैं दांय हो गया माँ जो आप खुद मेरी शॉप कर आयी. आज ये शॉप दांय हो गयी जो इस कर आपके चरण परे………

गुरु – बीटा उठो. और इस लड़के को छोड़ो इसको मेने hi भेजा था.

S.O. के आदमी ये सुनते hi पब को छोड़ देते है. पब की भी सास में सास आती है.

गुरु – अच्छा दयाराम हम अब चलते है हमको बहुत दूर जाना है.

दयाराम (सो) – नहीं माँ ऐसा मत कहो आज तो अपनों मेरे पास रुकना hi होगा. में आपकी सेवा करना चाहता हु. बस 1 दिन दे दो मुझको.

गुरु – नहीं bête आज हम नहीं रुक सकते. हम दस माँ के आदेश से एक जरुरी यात्रा पे निकले है. हम पहले hi लेट हो चुके है.

दया – माँ हम आपकी किसी बात को नहीं ताल सकते है. पैर आपको भी हमारी एक विनती माननी होगी. अभी बस 1 ऑवर यहाँ रुकिए. हम आज आपका प्रशाद पाना चाहते है.

गुरु भी अब मन नहीं कर पायी. दया गुरु माँ को ले कर उसकी चेयर पे बिठा दिया. और पब की और इशारा करके बोलै – आओ तुम भी माँ की चरणों में बेटो सायद तुमको कुछ अकाल आ जाये.

गुरु – नहीं ये हमारे चरणों में नहीं बेथ सकता या तो ये हमरे साथ दूसरी चेयर पे बीतेगा या हम इसके साथ जमीं पर.

गुरु की बात सुन कर दया चौक गया. कियोकि उसने आज तक किसी को भी गुरु के इतने पास नहीं देखा था. पैर वो गुरु की आगे कुछ नहीं बोल सकता था. तो उसने तुर्रंत दूसरी चेयर पर पब को बैठ दिया और जल्दी hi बापिस आने को बोल कर निकल गया.

उसके जाने के बाद पब – माँ ये क्या चक्कर है. ये कोण है. और आपसे कोण सा प्रशाद मैग रहा है. इसके पास तो खुद hi इतना पैसा है फिर??

गुरु – हस्ते हुए – ोये तेरे समाज नहीं आता क्या तुजसे बोलै न मुझको माँ मत बोलै कर. लगता है तू पिटेगा मुझसे..

पब – अप्प पिट लो चलिए. पैर ये सांड तो नाम लेने कर सीधे गोली मर देगा. मुझको नहीं मरना अभी..

गुरु – हाहाहाहा, सांड हाहाहाहा, तुम तो बहुत दर गए हो लगता है.. चील कर यार में हु ना ये तुझको कुछ नहीं कहिया. और ये सांड नहीं मेरा एक बक्त hai.iske पास ये साडी दौलत मेरी कृपा से hi मिली है.

पब- हम्म समजा पर ये प्रशाद ???

गुरु – तू रहेगा गधे का गधा hi. अकाल तो है नहीं. पता नहीं दस माँ ने किस उल्लू के पत्ते को मेरे पल्लू से बाद दिया hai…..uuhhh (मुस्कुराते हुए मुँह बनती है) अरे ये हमको खाना खिलाये बस. और जो बचेगा खुद खायेगा. जैसे भगवन का प्रशाद लगता है ाइसे वो मेरा लगएगा. समजा… पागल ..
 
अपडेट 14

गुरु – तू रहेगा गधे का गधा hi. अकाल तो है नहीं. पता नहीं दस माँ ने किस उल्लू के पत्ते को मेरे पल्लू से बाद दिया hai…..uuhhh (मुस्कुराते हुए मुँह बनती है) अरे ये हमको खाना खिलाये बस. और जो बचेगा खुद खायेगा. जैसे भगवन का प्रशाद लगता है ाइसे वो मेरा लगएगा. समजा… पागल ..

पब – हम्म समजा पर ये क्या था मेने कोण सा काम नहीं किया. और में आपके पल्लू से बढ़ा हु मतलब (कियोकि पब भी जनता था की पल्लू से बढ़ना मतलब सधी)

गुरु – अच्छा तुजसे कहा था न की कुछ मत बोलना बस जो दे वो ले कर आजाना. तुमने जरूर मुँह खोला होगा. तभी इसने तुज पर गन राखी. नहीं तो ये मेरे सिम्ब्ले को देख के बिना कुछ बोले hi कुछ भी दे सकता है. मेरे तुझको बेजा था की यदि कुछ रस होंगे तो हमको प्रॉब्लम काम होगी. पर तू तो सब गुड़ गोबर कर दिया. अब 2-3 ऑवर बेकार हो जायेगे और होगा भी कुछ नहीं.

पब – मेने तो बस ये पूछ था की क्या तुम गुरुपित के bête हो. पर वो तो बादक गया.

गुरु –तुम मेरा नाम मेरे भक्तो के सामने ऐसे hi लोगे तो वो भड़केगा hi. वो तो अच्छा है की में आगयी रही टाइम पैर नहीं तो तुम तो गए थे (बच गए ये बात पलट गई)

पब –हम्म ये तो है तुम सही टाइम पे नहीं आती तो ये मुझको मार देता. पैर एक बात बताओ की जब ये हमको रस दे सकता था तो 2 दिन पहले मुझसे जो मजदूरी करबै वो क्या था.

गुरु – अरे बताया तो था की वो सब तुम्हारा टेस्ट था. पैर तुमने अकेले किट hi क्या मैं भी तो थीं ा साथ में…

पब – हाँ वो तो है पैर तुमने क्यों की??

गुरु कुछ नहीं बोल पति है. तब पब फिर उससे पूछता है

पब – और वो पल्लू से बढ़ने वाली बात. चाकर क्या है तुम कुछ बताओगी. जो में समाज रहा हु क्या वो सही है….

गुरु अब फस चुकी थी. उसके पास सुच बोलने के अलावा और कोई हाल नहीं था. इसलिए वो बोली –(नजरे झुका कर) हाँ ये सच है जो तुम सोच रहे हो. मेरी शादी तुमसे hi होगी. पैर उसमे अभी टाइम है. जब तुम अपना टारगेट पूरा कर लोगे तो मैं तुमको गिफ्ट के रूप में मिलूगी. और तुम अपनी तमन्ना भी पूरी करोगे जो कल रात को थी.

पब – आअह्ह्ये यदि गिफ्ट इतना खूबसूरत हो तो में तो कुछ भी करने को तैयार हु. तुम मेरी होगी क्या बात है. इतनी हसीं लड़की मेरी बीबी बनेगी. मजा आ जायेगा. तब तो.

गुरु – जायदा खुस मत हो अभी बहुत टाइम है. सपनो से बहार आओ. में अभी तुम्हारी नहीं हुई हु ok.

पब – हम्म कोई नहीं तुम मेरी होगी एहि मेरे लिए काफी है. मैं तुम्हारा हमेश इंतजार करुगा मेरी बुलबुल.

गुरु ये सुन के शर्मा जाती है. पैर वो खुस थी पंकज का प्यार देख कर.

गुरु – तुमको पता है न तुमको इस टारगेट को पूरा करने में बहुत समय लगेगा. और तुम्हारी 11 बीबी और भी होगी.

पब – हम्म पता है. पर तुम 1सत हो मेरी लाइफ में जिसको में अपनी पत्नी बनाना चाहत हु. और 2 लड़की थी जिनको देख कर मुझको अच्छा फील होता था. पर कभी उनसे शादी का नहीं सोच. और न hi कभी प्यार वाली बाटे की. मैं कभी भी किसी लड़की से बात नहीं करता था. मुझको हमेश दर लगता था लड़कियों से अपने लुंड की वजह से. में हमेश दूर भागता रहा. उस दोनों से भी बस काम की बाटे की. पैर तुमको देख कर कभी दर नहीं लगा. बस तुमको जब भी देखता हु दिल में एक प्यार आता है. तुमसे कुछ भी कहने में नहीं हिचकिचाता. तुम्हारे साथ कही भी रहने में कुछ भी करने में बस एक अलग hi मज़ा आता है. तुमको पता है मेने कभी ऐसा फील नहीं किया. में अपनी फीलिंग सायद कभी तुमको नहीं बताता यदि तुम मुझको ये बात नहीं कहती हो. मेने तुमसे दूर रहने की भी कोसिस की पर नहीं रहा पाया. तुमको याद है में अपनी हिम्मत हर्र अहा था. कियोकि में तुमको लेकर परेशां था. की मेरी जिंदगी का टारगेट है, मुझको पूरा करना है. तुम बेकार में अपना टाइम वेट कर रही हो. तुम्हारे भी कुछ सपने होंगे कुछ अरमान होंगे. जब hi तो तुमने ये रूप मांगा था माँ से. पर तुमको दूर जाने को भी नहीं कहा सका. दर रहा था की कैसे जीऊगा तुम्हारे बिना. कभी सोचता की तुम हमेसा को मेरी हो जाओ तो कभी लगता की तुमको भी अपनी जिंदगी जीने का हक़ है तुमको जाना चाहिए. पर में आज बहुत खुस हु. में अब साडी उम्र तुम्हारा इंतजार कर सकता हु. पर क्या तुम खुस हो मुज जैसे को अपनी जिंगदी में प् कर या बस किसी के कहने पर मेरे साथ हो………….

गुरु पंकज की इन प्यार भरी बातो में खो गई थी. वो भी अपने दिल की बात को जुबान पे लेन की सोचती है.

गुरु – तुमको पता है में एक बढ़ सूरत लड़की थी में अपनी जवानी से ले कर अब तक केवल मर्दो की नजरो में अपने लिए नफरत hi देखि है. में बचपन से hi एक सपना देखती आयी हु की में बहुत सुन्दर हो गई हुए क दम पारी जैसी. और मेरा राजकुमार भी बहुत सुन्दर ही और वो नेक दिल है. और उसके पास बहुत सकती है. और में उसकी बहो में सुसक्षित हु वो मुझसे बे हीनता प्यार करता है.

में इस सपने के साथ hi बरी हुई और इसको साकार करने के लिए मेने बहुत कुछ किया. और बहुत कुछ पाया भी पर अपना सपना पूरा नहीं कर पाई. तब दस माँ ने तुम्हारी साथ रहने की जिम्मेदारी दी पैर में एक पराये मर्द का छूना भी पसंद नहीं करती तो तुम्हारे साथ कैसे रहती. तब माँ ने कहा बेटी ये hi है तेरा राजकुमार ये hi है तेरा होने वाला पति. और फिर मेरा सपना मुझको पूरा होता दिखा. कियकी तुम इस युद्ध में बहुत सी सकती पाओगे. और तुम मुझको पसंद भी थे. बस तुम्हारे मान में अपने लिए प्रेम जगाना था. और उसमे मेरी हेल्प करने वाला था मेरा रूप. पैर जंगल में मुझको बचने की लिए आगे आना मेरा दिल में उतर गया. मुझको जो एक सक्तिसाली राजकुमार से चाहिए था. वो तुमने बिना किसी सकती की दे कर मेरा दिल चुरा लिया और मेने आपको अपना पति मन लिया, वो मेरी hi योजना थी पैर तुम टेस्ट में तो पास हुए hi पर मुझसे hi मुझको चुरा के ले गए. तुम hi वो पहले मर्द थे जिसने मुझको औरत होने का गर्व प्रदान किया. पैर तुम्हारा लास्ट टेस्ट मेरे लिए बहुत हार्ड था. कियोकि यदि तुम फ़ैल होते तो अपने पति को hi मरना था. और तुम पास हो जाते तो मुझको एक गिरी हुई लड़की समझते जो एक टेस्ट के लिए नंगी हो सकती है उसको कोई भी रंडी hi समजेगा. और फिर तुम्हारी वो गालिया मेरे दिल में शूल की तरह घुस रही थी. तुम्हारा हर सब्द मुझको मर रहा था में रोना चाहती थी पैर नहीं रो सकती थी उस टाइम. मुझको लगा hi सायद में हु hi रंडी जो किसी की बीबी नहीं बन सकती.. (इतना कहती हुए गुरु फुट -2 कर रोने लगी) उसके आशु नहीं रुक रहे थी और न hi मुँह से सब्द निकल रहे थे. पब ने बरी हिम्मत कर के उसको गले लगा लिया. उसके गले लगते hi वो संत हो gai.tab पब बोलै…

मुझको माफ़ कर दो मेरे तुम्हारा दिल दुखाया है. पर में भी क्या करता. पहले तो में भी बहक गया कुछ पालो के लिए. पैर तुम्हारा वो रूप देख के मेरे दिल में वासा वो प्यार, जिसको में अभी अपनी सोच में भी नहीं आने दिया था, वो टुक्रो में बिखर रहा था. दिल से आशु निकल रहे थे. और तुमको कुछ कहा भी नहीं प् रहा था. पैर तुमको रोकना था. और दिल में एक गुस्सा भी था. तो जो दिल में आया वो कहता चला गया तुमने दिल से निकले के लिए. पैर तुमने मुझको उस सच को बता कर मुझको जीवन दान दिया था. में सुच कांटा हु की उन कुछ पालो को छोड़ कर मेने तुमको कभी भी गलत नहीं समजा. और में उनके लिए बहुत सर्मिन्दा भी हु. सॉरी प्लीज मुझको माफ़ कर दो……..

गुरु – हाँ में जानती हु, मेने देखा था सच सुनने के बाद तुम्हारी आँखों में मुझको वह केवल प्यार और मेरे लिए सम्मान hi नजर आया और में तुम्हारे इस विस्वास से और जायदा तुम्हारी हो गई थबी तो तुमको ये सब बता पाई न… नहीं तो में मर भी जाती पर अपने प्यार को गली नहीं देने देती …..

पब – हम्म में आज बहुत खुस हु मुझको मेरा पहला प्यार जो मिल गया है. अब में तुमको कभी भी दूर नहीं जाने दुगा. अब तो मुझको बस ये सब जल्दी से जल्दी ख़तम करना है ताकि तुम्हारी ले सकू. अरे मतलब तुम्हारा पति बन सौ..

गुरु – एक स्माइल के साथ – हाँ सब जानती हु तुम क्या चाहते हो. जाओ में तुमसे बात नहीं करती बहुत गंदे हो तुम……

पब अरे अभी तो बीबी बानी भी नहीं और बीबियो की तरह रुत भी गए….

गुरु – हाँ क्या किस्मत है तुम तो मेरे पति हो बहुत दिनों से, पर में तुम्हारी बीबी नहीं हु. पता नहीं कब तक इंतजार करना पड़ेगा. काश हम अभी मिल सकते…….. तुम से एक बात बोलू तुम मानोगे…..

पब – तुमको पूछने की जरुरत नहीं है. तुम्हारा हक़ है मुज पर बोलो

गुरु – अभी तुम्हारी 11 शादी होने वाली है एकेक कर के. और वो भी मेरे hi सामने. मुझको सब मंजूर है. पर बस एक रिक्वेस्ट है अपना ये प्यार कखि काम मत होने देना. में तुम्हारी 12वे वाइफ बनने को तैयार हु. पैर मुझको अपनी 11 बीबियो में भूल मत जाना. में अब जी नहीं पाउगी तुहरे बिना. मेने बहुत नफरत देखि है अपने लिए अपनों की hi आँखों में. यदि वो नफरत कभी तुम्हारी आँखों में आये तो अब में बर्दाश नहीं कर पाउगी. प्लीज मेरा इन्तजार करना में तो तुम्हारी पत्नी बन कर हमेश hi तुम्हारी दाल बन कर रहूगी. पैर तुम मुझको हमेश मुझको याद रखना……..

पब उसकी भावनाओ को समाज रहा था. और कुछ सोच भी रहा था.

पब – तुम मुझसे प्यार करती हो न तो मेरी एक बात का जबाब सच-2 डौगी. तुमको मेरे प्यार की कसम है…

गुरु – आँखें बरी कर के – हाँ बोलो आएसी क्या बात है.

पब – नहीं पहले कसम खाओ

गुरु – ok कसम है मुझको हरारे प्यार की…

पब – में एक लड़की से शादी करना छटा हु. क्या में कर सकता हु? में उसको अभी नहीं छोड़ूगा. पैर क्या शादी हो सकती है?

गुरु – हाँ हो सकती है (वो समाज नहीं पायी किप बी ने किसके लिए पूछ है), पैर कोण है वो लड़की.?

पब गुरु की हाँ सुनते hi उसके पास में राखी लोहे की अलमारी के कोने से अपना अगुडा कर लिटा है. और खरा हो कर उसकी मांग भर देता है.

गुरु – अरे क्या कर रहे हो मेरे सर पर?? पैर जैसे hi वो अपना हाथ अपने माथे पर लगा कर देकते है तो उसको खून देखता है. तो वो चौक जाती है और फटी – 2 नजरो से उसको देखने लगती है.

पब – आज से तुम मेरी पत्नी हो में तुमको अपनी पहली पत्नी के रूप में सुविकर्ता हु. क्या तुम मुझको पति रूप में स्वीकार टी हो.

गुरु – अब तब संभल चुकी थी. तो वो तुरंत झुक कर पंकज के पाऊँ छू लेती है.

पब – उसको अपनी भाहो में लेलेता है और कहता है – अब तो तुम खुस हो न की तुम मेरी पहली बीबी हो अब तुमको मुझसे कोई भी जुड़ा नहीं कर सकता. पर में तुमको पत्नी का पूरा दर्जा अभी नहीं दे सकता तुम भी इस बात को अच्छे से जानती हो. पैर है आज से hi हम पति पत्नी है.

गुरु – उसको कास कर अपनी भाहो में भींच लेती है. – आज में बहुत खुस हु मेरे बचपन का सपना तुमने आज कुरा कर दिया है. और अपनी 1सत वाइफ होने का हक़ भी दिया है. अब तो मूट भी आ जाये तो गम नहीं. आज मुझको जीवन से सब कुछ मिल गया है….

पब – तुर्रंत अपना हाथ उसके मुँह पर रख देता है – आज के बाद कखि भी मारने की बात नहीं करोगी. अब तुम्हारी ये जिंदगी मेरी है. अभी तो हमको बहुत कुछ करना है. अरे बच्चे भी तो करने है. तुम बनोगी मेरे बच्चो की माँ

गुरु – आँखें झुका लिटी है सरम से और हां में गार्डन हिलती है. तो उसकी नजर उसके अगड़े से बैठे खून पैर पर जाती है. उसका हाथ उसके मुँह पे hi था. तो वो उसके अगड़े को मुँह में ले कर चूसने लगती है. उसके होठो पे खून लग जाता है.

पब – देखो अभी बीबी बानी है और बीबी बनते hi खून पिने लगी….

गुरु – उसके अगड़े को मुँह से निकल कर देखती है तो खून बंद हो चुक्का था. हटो में आपसे बात नहीं करती. बहुत गंदे हो आप….

पब – ोुह्ह्ह लू अब तो बीबी की तरह रोड भी गयी….

पंकज की बात सुन कर दोनों हसने लगते है. दोनों बहुत खुस थे. उनको उनका प्यार जो मिल गया था.

तभी गेट कुलटा है और दयाराम अंदर आ जाता है. और गुरु को विश करता है

दया – माँ मुझको आने ने देर होगी उसके लिए माफ़ी चाहता हु. आप ए और मुझको दांया कर दे.

दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए चलने का इसरा करते है और पब और गुरु बहार की और चल देते है. तो बहार शॉप बंद थी और दया की पूरी फॅमिली आ चुकी थी. सब आ कर गुरु के पाऊँ छूटे और हाथ जोड़ कर खरे हो जाते है. वह पर एक टेबल पैर बहुत तरह की खाने की डिश थी काम से काम 30-35 तो होगी hi. और उस टेबल के पास में एक चेयर थी. दया माँ को उस चेयर पे बेथ कर खाने को बोलता है. पैर पब को नहीं बोलता. ये देख कर पब चलते हुए रुक जाता है. कियोकि वो guru-chele के बिच में नहीं आना चाहता था. पैर गुरुपित उसका हाथ पाकर कर उसको अपने साथ चलने को इसरा करती है. और उसे लेजा कर चेयर के बैठ देती है. और खुद खड़े हो कर उसको अपने हाथ से खिलने लगती है. जो की दया को पसंद नहीं आता .
 
दया – माँ आप ये क्या कर रही है ये चेयर और ये सब आपके लिए है. आप बैठे. और कोण है ये जिसको आप खुद खिला रही है. जहा तक मुझको पता है आज तक कोई आपके नजदीक तक जाने की हिम्मत नहीं कर सका है और अप्प इसको खुद…..

वो इतना hi बोल पाया था की गुरु अपना हाथ आगे कर देती है. और गुस्से से – बस दया बस बहुत सुनली तेरी मैं संत हु इसका मतलब तू मेरे करोड़ को और मुझको भूल गया क्या. तूने इनके बारे में बोलने से पहले ये क्यों नहीं जानना चाहा की ये कोण है. तूने इनको क्या समाज रखा है. ये मेरे पति है. वो भी माँ दस की कृपा से. और तू इनके लिए बोलने लगा. तूने इनका अपमान किया है. तो अब में यहाँ नहीं रुक सकती हु.

(गुरु 1 पल चुप रहा कर, फिर एक दम करोड़ में , तेज़ आवाज में बोली) – “जय माँ दक्षसूरी की” और मंत्रो को पर्ने लगी. पब दस माँ की जय सुन की समज गया की गुरु करोड़ में कुछ गलत करने जारही है. उसने तुरंत खरे हो कर उसको अपनी और कर के अपनी बाहों में ले लिया और उसको संत करने लगा. और फिर उसकी आँखों में देखने लगा. गुरु पब की बाहों में उसकी आखों में देखने से कुछ संत हुई. पैर वो अभी भी गुस्सा थी. उसने मंत्रो को पर्ण रोक दिया था. फिर पब बोलै – गुरु तुम इनको कोई भी श्राप नहीं डौगी. ये तुम्हारे भक्त है और ये तुम्हारे बदले रूप को नहीं समाज पाए. अब एक दम संत हो जाओ.

गुरु – जैसा आप कहे. (फिर दया की और इशारा कर के) आज तुझको इनके कहने पे छोड़ रही हु नहीं तो तू सबसे ज्यादा मुझको जनता है मेरे भक्तो में. (और फिर गुरु अपने आप को संत करने की कोसिस करती है)

दया तो बस तर तर कैंप रहा था जब से गुरु गुस्सा होइ थी. वो तो कुछ बोलने वाली इस्तिति ने था hi नहीं. दूसरी तरफ दया की बीबी भी दर गयी थी कियोकि वो भी गुरु को पहले से जानती थी. दया के नौकर तो मूक दर्शक थे.

जब गुरु का कुछ गुस्सा संत हुआ तो वो पब का साथ पाकर के बोली – चलो अब में यहाँ एक पल भी नहीं रुकना चाहती हु.

पब भी उसकी मानशिक दशा को समझते हुए उसके साथ चल देता है. की तभी दया की बीबी गुरु के पाऊँ को पाकर लेती है. और बोलती है – माँ हमको माफ़ कर दो. मेरे पति से जो भी हुआ अनजाने में हुआ है. में भी एक औरत हु ने जानती हु की आप पर क्या बीती होगी. पर आप मुझको ऐसे निराश करके नहीं जा सकती. मेरे पति इस बात को कभी बर्दास्त नहीं कर पायेगी. आप उनको अच्छे से जानती हो. अपने सदा हम पैर दया की है. और आपकी कृपा में हमारा परिवार है. आज फिर में आपसे आपकी दया मांगती हु.

दया अपनी बीबी को ऐसा करते देख वो भी तुर्रंत पब के पाऊँ पाकर लेता है. और बोलता है – आप भी मुझको माफ़ केर दो. में आपको नहीं जनता था. और में अपनी माँ की अभिलना बर्दाश नहीं कर पाया. और ये पाप केर बेथ. मुज मूरख को माफ़ कर दो.

पब –(उसको उठता है)- आप मेरे दोषी नहीं है. में आप से नाराज नहीं था. कियोकि इसमें भी मुझको आपका अपनी माँ के प्रति प्यार hi नजर आया. पैर आपने अपनी माँ अक दिल दुखाया है. आप उनसे माफ़ी मांगे.

पब की बात सुन कर गुरु एक दम संत हो गई और वो उसकी बातो पैर गुर करने लगी. तब उसको एहसास हुआ की दया ने उसके प्रति जो उसकी आस्था है, उसमे बहा कर ये गलती कर दे है. और उसने खुद भी तो दया को पब का परिचय नहीं करवाया था. तो उसकी नाराजगी भी काम हो गयी. तब उसने दया की बीबी को उठाया और गले से लगा कर बोली – बेटी जब इन्होने hi माफ़ कर दिया तो हम क्यों नाराज रहने लगे. हम तुमसे नाराज नहीं है. तुम सब कर माँ दक्षसूरी अपना आशीर्वाद वनाये रखे.

गुरु की बात सुन कर सबके फेस पर एक सुकून लौट आया था. अब माहौल संत था. तो दया की बीबी ने फिर से बोलै – माँ यदि अप्प हमसे नाराज नहीं है तो अब आप बेथ कर प्रशाद ग्रैहम करे.

और उसने एक नौकर को इशारा कर के दूसरे चेयर लेन को बोलै.

गुरु उसकी बात सुन कर पब की तरफ देखा तो पब उसके कान में बोलै – यार अब जल्दी से खाने बेटो न, बहुत तेज़ भूक लगी है. नहीं तो में तुमको hi खा जाउगा.

पब की बात सुन कर वो मुस्कुरा दी. और वो दोनों बेथ गए खाने. खाना खा कर उन दोनों ने दया से विदा ली और चल दिए नए सफर की और.
 
अपडेट 15

गुरु उसकी बात सुन कर पब की तरफ देखा तो पब उसके कान में बोलै – यार अब जल्दी से खाने बेटो न, बहुत तेज़ भूक लगी है. नहीं तो में तुमको hi खा जाउगा.

पब की बात सुन कर वो मुस्कुरा दी. और वो दोनों बेथ गए खाने. खाना खा कर उन दोनों ने दया से विदा ली और चल दिए नए सफर की और.

बहार आ कर पब ने गुरु को डे अक गिफ्ट दिखाया. जो की उसने विदा के समय किया था. वो एक और चलते जा रहे थे. पब ने उस गिफ्ट को खोला तो उसको देख कर वो चौक गया उसमे रस थे. वो भी काम से काम 10 लाच तो हूजे hi. वो अब बस स्टैंड पहुंच कर बस से आगे का सफर तय करने बाले थे.

अभी वो उस कसबे से नार्थ साइड में जाने वाली बस में बेथ चुके थे. वो बस अपनी मंजिल की तरफ आगे जा रही थी दोनों hi संत bêthe थे. कुछ देर में गुरु की आखों में आशु आ गए. जिनको पब ने देख लिया. और उसने उसके फेस को अपनी तरफ किया. और उसकी आँखों में देकने लगा. और न में गार्डन हिलने लगा. गुरु उसकी और देखते हुए बोली – आप मुझको माफ़ ….. (वो इतना hi बोल पायी थी की पब ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया)

पब – तुमको कुछ भी कहने की जरुरत नहीं है. न तो तुम्हारी गलती थी और न hi दया की. तो उस बात को भूल जाओ. (और फिर उसके आखो को चुम लिया और उसके आशुओ को चाटने के लिए जीब बहार hi निकली थी की गुरु ने अपना फेस घुमा लिया)

गुरु – क्या कर रहे हो जी. हम बस में है कोई क्या सोचेगा.

पब – ओह्ह्ह आह्ह्ह्ह ासे बात करोगी तो में अपने आप को रोक नहीं पाउगा. (धीमी आवाज में) यही पट्टक कर छोड़ दुगा. फिर कहती रहना की सब देख रहे है.

गुरु – (उसकी बात पैर मुस्कुरा जाती है और एक तप्पड़ उसके कंधे पर मरती है) – गंदे.. हमेश बस यही सूझता है. जाओ जी में नहीं बात करती आपसे …

पब – अरे ये क्या बात हुई. हम तो आपसे बात करने को तरस रहे है और आप है की हमसे बात hi नहीं करना चाहती. (बहुत hi प्यार से) सुनो तो जान…. हमारी तरफ देखो..

गुरु – जान सुन कर बहुत खुस हो जाती है और उसकी और देखती है और दोनों की नजरे आपस में मिल जाती है. और वो एक दूसरे में खो जाते है. उनको याद है रहता की वो बस में है. वो तो एक दूसरे को देखने में बिजी थे. और देखते – 2 उनके होठ एक दूसरे के नजदीक आ जाते है. तभी बस को झटका लगता है सायद कोई गड्ढा हो. पैर दोनों दुनिया में बापिस आ जाते है. और नजरे घुमा के देखते है की कोई देख तो हेयर अहा था. पैर किसी का डायन नहीं था इस तरफ कियाकि वो 2ंद लास्ट सीट पे थे. कुछ देर की ख़ामोशी के बाद पब बोलै

पब – में तुमसे कुछ मगु तो क्या तुम डौगी?

गुरु – हां यदि बस में होना तो जरूर. तुम कुछ भी मांग लो..

पब – में चाहता हु की तुम हम दोनों को बहकने से रोको. कियोकि में पहले से hi तुमको देख कर बरी मुश्किल से खुद को रोक पता था. पैर अब तो तुम मेरी बीबी हो. तो अब खुद को रोकना बारे कठिन है. वैसे तो में भी रोकूंगा खुद को. पैर तुमको ज्यादा डायन रखना है. और मैं अब रोज डायन भी लगाऊगा इस सब के लिए.

गुरु – आप जैसा कहे. वैसे भी यदि आप न भी कहते तो भी मुझको आपको रोकना hi था. जब ताका प अपना टारगेट नहीं प् लेते.

पब – हम्म अच्छी बात है. पैर ये आप आप क्या लगा रखा है. पहले तो तू कहा कर भी बोलती थी.

गुरु – कियोकि अब हमारी सधी हो गयी है.

पब – शादी हो गयी तो क्या तुम मेरी दासी हो गयी. तुम आज भी मेरे साथ पहले की तरह रह सकती हो. तब भी तो तुम मुझको अपना पति मानती थी न. तो अब क्या हुआ.

गुरु – सोच रही थी की तुमको बुरा न लगे. इसलिए…..

पब – हम्म ये हुई न बात मेरी बीबी वाली. में तुमको किसी बंदन में बंद कर नहीं सखणा चाहता हु. तुम मेरे साथ मेरी बीबी नहीं मेरी लवर बन कर रहो. मेने तुमसे शादी इसलिए की की तुमको और मुझको अलग होने का दर न रहे. अब तुम बताओ तुम क्या चाहती हो लवर बन के एन्जॉय करना या बीबी बनना.

(मन में- वैसे भी बीबी वाले कर तो करने नहीं डौगी अभी…)

गुरु – खुस होते हुए लवर बनना. तुम मेरे हर सपने को सच करोगे क्या इस उम्र में.

पब – ऐ लड़की क्या बोली , उम्र मतलब … तू अभी एक 18 साल की मेरी लवर है और कुछ नहीं. यदि कभी फिर कुछ ऐसा बोली तो एक रख कर dunga…….samji

गुरु – समाज गई माय डिअर जानू, माय हुब्बी… माय लव…. ी लव ु…

पब – लव ु तू माय डार्लिंग (और उसके गाल पे किश कर देता है)

गुरु उसको देख कर हसने लगती है. दोनों इसी तरह बस के सफर का मजा ले रहे थे. और जा पहुंचते है 8 ऑवर के सफर के बाद एक पहाड़ी (हिल्स) इलाके में. वो जहा उतरे ते वह से पहाड़ 50कम दूर था.

गुरु – मुझको यहाँ तक का hi पता था अब तुमको खुद दुर्नी है लड़की.

पब – क्यों तुम नहीं दुनोगी अपने पति के लिए कोई dusri…(usne ये बात मजाक में बोली पर गुरु के दिल को चूब गयी और उसकी आखें भर गई)

पब –(उसको देखते hi उसको अपनी गलती का अहसास हो गया) – सॉरी यार में तो मजाक कर रहा था. सॉरी..

गुरु – it’s ok. बूत आगे से ऐसा मत करना.

पब – हम्म ok. पर हम डरेगी कैसे??

गुरु – तुमको दुखी लोगो की हेल्प करनी होगी तब hi तुम उसको दूँ पाएंगे.

पब – वो क्यों??

गुरु –देखो तुम्हारा उन लड़कियों से मिलान प्रकृति ने करवाना है. और हम सब hi प्रकृति है न. तो यदि हम एक दूसने के काम आते है तो हमारे अभी काम आसान हो जाते है.

पब –कितनी गान की बात बोली है यदि आदमी ये hi समाज ले तो सारा जगरा hi ख़तम. पर सब अपना -2 hi करते है.

गुरु – बस बस अब चलो, पर पहले कुछ सामान ले लेते है. यहाँ तो बाजार है पर आगे नहीं मिलेगा.

और दोनों सामान खरीद कर चलने लगते है. उनको जो भी दुखी मिलता उसकी मदत कर देते. किसी की रस से तो किसी की बातो से. तो किसी को दवा (जारी बूटियों से), जैसे भी बन परता वो लोगो की वैसे hi मदत कर रहे थे. और ये कटे हुए 2 दिन बिट चुके थे. और 3रे दिन वो एक गाओं में पहुंचे जो की पहाड़ की जड़ में था.

सुबह के समय वो वह पहुंचते है तो वह लोग भी अपनी मस्ती में मस्त और गाओं की तरह बिजी थे. वो गाओं में एक टिया की दुकान पे पहुंच कर टिया पि रही थे. दोनों ने रात तो जंगल में hi बितायी थी. तो अब उनको नहाने का झगड़ करना था. और अपने लिए एक लड़की कीतलाश भी करनी थी. तो टिया की दुकान पैर पब एक गाओं के आदमी से पूछता है

पब – भाई यहाँ पे कोई आस पास नदी या कोई तालाब है क्या?

Admi(A1) – हाँ भाई एक झरना है गाओं के उस और बारे hi सुन्दर है. (वो एक दिशा में इशारा करता है) पैर तुम यहाँ के तो नहीं हो किस्से मिलने आये हो.

पब – बभाई हम तो राहगीर है. हम दोनों को घूमे का सोक है. तो गम रहे है.

ा1 – तब तो तुमको वह जरूर जाना चाहिए. बहुत hi सुन्दर जगह है.

पब – थैंक ु बही. हम वह जरूर जायेगे. अच्छा चलते है…..

और वो दोनों चल देते है उस दिशा की और. रस्ते में दोनों बात करते हुए जा रहे थे. और पब हर लड़की को देखता हुआ जा रहा था. पैर कोई भी उसको नहीं मिल रही. थी. ये तो उसके रोज का काम था. पहले लड़कियों को तैरता और फिर गर्म हो जाता तो गुरुपित को परेशां karta.per कभी भी सीमा नहीं पार की. अपने ऊपर सयम रखता था. अब तो उसका कण्ट्रोल भी खुद पैर बाद रहा था. रोज डायन लगाने से.

वो दोनों झरने के पास पहुंच जाते है. तो वह की सुंदरता को देखते रह गए थे. बहुत hi सुंदर सा नजारा था. एक और पहाड़ी से झरना गिर रहा था. और चारो तरफ हरे भरे पेड़ (ट्री) थे. कुछ फॉलो के पेड़ भी थे जिनकी सुगंद पुरे वातावरण में थी. सुबह की ठंडी हवा और झरने का गिरता पानी दोनों से एक सुकून सा भर रखा था. कानो में ब्रीड्स का मदुर संगीत गुल रहा था. और जब वो झरने के करीब पहुंचे तो झरने का गिरता पानी एक रिवर के रूप में बहा रहा था. और वो इतना साफ़ था की उसमे परे पत्तर भी साफ़ दिख रहे थे. और उस रिवर के किनारे पैर कुछ गाओं की लेडीज नाहा कर अपने कपड़े दो रही थी और एक दूसरे के साथ मस्ती भी कर रही थी.

औरतो के बदन पे उनके कपड़े गीले हो कर चिपक गए थे. सब एक से एक क़यामत लग रही थी. उनको देख कर पब का लुंड करा हो गया था. जैसे hi उन औरतो की नजर पब पे पारी तो तुरंत एक औरत (अउ1) बोली – ऐ ऐ कहा चले आ रहे हो ये लेडीज के नहाने का टाइम है पता नहीं है क्या?? (तभी उसकी नजर गुरु पे पारी.) केवल ये आ सकती इस टाइम यहाँ तुम जाओ यहाँ से. और तुम हो कोण आज से पहले तो तुमको अपने पानीपुर (विलेज नाम) में कभी नहीं देखा

पब – सॉरी हम यहाँ के नहीं है. हम तो घूमने आये थे. तो इस झरने पे नहाने चले आये. बहुत hi खूबसूरत नजारा है यहाँ का. क्या हम यहाँ पैर नाहा सकते है??

अउ1 – नहीं तुम नहीं नाहा सकते अभी ये हम लोगो का टाइम है. तुम हमारे जाने के बाद आना. हाँ पैर ये लड़की नाहा सकती है.

गुरु – पैर हम दोनों को तो साथ में जाना है. बाद में फिर सायद और आदमी भी आते हूजे तो में कैसे नाहा पाउगी. और यदि में अभी नाहा लू और ये न नहाये तो फिर हम कैसे जायेगे??

अउ1 – हम्म्म ok तुम ऐसा करो तुम तो हमारे साथ नाहा लो. और ये लड़का उदार आगे जा कर नाहा सकता है.

पब – हम्म ये ठीक है. गुरु तुम यहाँ नहाओ में आगे जा कर नाहा कर आता हु.

गुरु – ok

फिर पब आगे को जाने लगता है. कुछ दूर जा कर वो रिवर की और बढ़ता है तो देखता है की एक औरत वह पैर कपड़े दो रही है. और जैसे hi वो उसका फेस देखता है बस उसको देखता रहा जाता है. न तो उसको देख कर उसके लुंड ने दुमका मारा था. और न hi उसके मान में कोई गलत ख्याल आया था. बस दिल में एक गुदगुदी सी हुई. और उसको देखते रहने को मान हुआ. क्या फेस था उसका. एक चमक सी थी उसके फेस पैर. वो उसकी और देकने लगा और तभी उस औरत की नजरे भी उस पैर गई. और दोनों की आखें चार हो गई. उसकी आखें तो गहरी झील सी थी. पैर उन आखों में एक अकेलेपन का दुःख था. और पता नहीं क्या था उन आखों में की वो ुश्कि आखों में खो गयाउसने यही तक उसके फेस को hi देखा था. कहा पब के नजर सबसे पहले लड़की के बूब्स को देखती थी फिर फेस को पैर आज तो उसको फेस से नजर hi नहीं हटा प् रहा था. उसको उस औरत का फेस किसी अपने का लग रहा था. कुछ hi पल में उस औरत ने अपनी नजरे घुमा ली और बोली – क्या चाहिए ???

उसकी आवाज से वो घायल हो गया और वो उसके दिल में उतर गयी. वो हकलाने लगा – वो वो.. वोऊ उन .. वो उन औरतो ने बोलै की आगे जा कर नहाओ तो में यहाँ आ गया. सॉरी.. में जाता हु यहाँ se…(or वो गुरु की तरफ चल दिया और भाग कर गुरु के पास पहुंच गया)…

पब – अरे आप ने मुझको वह भेज दिया वह पैर भी तो एक औरत नाहा रही hai.(guru की और देख कर) में झरने के निचे जा कर नाहा लेता हु. तुम यही रुकना (अभी गुरु ने कपड़े खोलने सेरे hi किये थे. की पब की आवाज से वो रुक गई थी)

अउ1 – अरे कोण था वह

अउ2 – वो hi होगी डायन…

अउ1 – हां सही कहा … हाहाहाहा

उस औरत के लिए डायन जैसा सब्द सुन कर उसको गुस्सा आया. वो फिर बोलै – आप उनको डायन क्यों बोली. देखने में तो बरी hi भली लगती है.

अउ1 – हाहाहा वो डायन है डायन वो भी खूबसूरत उससे दूर hi रहना नहीं तो पता नहीं तुम्हारा क्या होगा.

पब – क्यों क्या किया है उन्होंने ???

अउ2 – सधी होते hi अपने पति को खा गई. 15 दिन बाद hi मर गया बेचरा.

अउ1 – सोचा तो था उसने की अब ये उसके बच्चो को सभालेगी. पैर वो तो उस को hi खा गई.

पब – (मन में - उसको गुस्सा आ रहा था. उसने सोच की पहले पूरी बात पता होनी चाहिए तभी तो पता चलिए की वो औरत सही है या गलत. पैर गलत लगती तो नहीं है. पैर ये तो उसको डायन बोल रही है कुछ तो गलत किया होगा उसने) – यदि उसका पति सधी के 15 दिन बाद hi मर गया तो इसमें इसकी क्या गलती है. इसने मारा था क्या अपने पति को.

अउ1 – नहीं मारा तो था वो अपनी बीमारी के चलते hi. पैर हरिया (उस औरत का पति – पूरा नाम - हरिदास) जब से भी तो जे रहा था न उन बीमारियों के साथ. इसके एते hi उसकी जान ले ली.

पब – क्या हरिया के पलहे भी सधी हो चुकी थी.

अउ2 – हाँ दो बच्चे भी थे उसके. और हरिया ने उन दोनों बच्चो को बड़े प्यार से पला था. पैर जब से बीमार हुआ तो उनकी तरफ नहीं देख प् रहा था. तो उसने इस डायन से सधी कर ली और मारा गया.

पब – फिर हरिया के बच्चे कहा है??

अउ1 – इसके hi पास है. अब बेटी को काम पे सहर भेज दिया है. ताकि उसकी कमाई से यहाँ मजे कर सके.

तभी गुरु बोली – यदि एक लड़की नौकरी कर के अपने परिवार की मदत करती है तो इसमें गलत क्या है.

अउ3 – पैर क्या जवान लड़की को दूसरे सहर भेज कर नौकरी करवाना रही है??

गुरु – देखो भाभी आप खुद जानती है की यदि लड़की को बिगड़ना होगा तो वो घर में रहा कर भी मुँह कला करवा देगी. और नहीं तो उसका दूसरे सहर में भी क्या बिगड़ जायेगा. और रही बात सुरक्षा की तो हर सरीफ लड़की खुद सब देख कर hi रहती है. आपको क्या लगता है की आपके गाओं में गलत काम नहीं होते हूजे??

अउ1 – वो तो सब जगा hi होते है. हर आदमी अच्छा तो नहीं हो सकता है.

पब – जब एक हाथ की सब फिंगर बराबर नहीं होती. तो एक गाओं या सहर के लोग कैसे एक जैसे हो सकते है. वो छोड़ो ये बताओ उन्होंने क्या गलत किया है. जो आप उनको डायन बोली.

अउ2 –15 दिनों में पति को खा गई इससे भी ज्यादा कुछ है करने को.

पब समाज गया की इन औरतो ने जान कर hi उसको गलत मान लिया है. जैसे की अक्सर होता है की एक बार किसी को गलत मन लेते है. या उसके बारे में गलत सुन लेते है तो हम उसके बारे में गलत hi सोचते है कभी उसकी तरफ से सही सोचने की कोसिस नहीं करते. चाहे वो सही भी क्यों न हो. इस hi वजह से एक बार जेल गया आदमी कभी सुंदर नहीं पता.

अब पब उनके दिमाग से उस औरत के प्रति गलत सोच को मिटने की सोचता है.

पब – अच्छा एक बात बताओ आपके गाओं में और कोई विधवा भी है क्या??

अउ1 – हाँ बहुत साडी है.

अउ2 – काम से काम 20 तो होगी hi.

पब – ओह्ह तब तो आपके गाओं में बहुत साडी डायन है. आप लोगो को दर नहीं लगता इतनी डायनो के भींच में.

अउ3 – क्या मतलब?

पब – अरे जितनी भी विधवा है सब डायन hi हुयी न.

अउ1 – ऐसे कैसे ? उनके पति तो अपनी स्वाभिक मूट hi मरे है किसी के मरने को कोई रोक तो नहीं सकता न.

पब – क्यों तो क्या इनके पति की मूट बीमारी से नहीं हुई. वो स्वाभिक नहीं था. तुम तो ज्यादा जानते होंगे की उनको क्या बीमारी थी. तो ये डायन और बाकि की भली ??

पब की बात सुन कर सभी औरते चुप रह गई. सब को लगा की बात तो सही है.

पब – एक बात बताओ उस टाइम उस औरत पे क्या बिट्टी है. जब उसका पति मरता है. आप सब औरत है ये अच्छे से जानती होगी. पैर उस औरत को समलते है उसके अपने….. (वो कुछ देर चुप रहा और वो सब इस बात को सोचती रही. उस सबने देखा था न जाने कितने औरतो को विद्वा होते हुए. पैर सब को सभालने के लिए कोई न कोई था. पैर इसके साथ …. कोई भी औरत इससे आगे न सोच पाई और रोने लगी. सब रो रही थी. सब को अपनी गलती का अहसास हो रहा था.

पब – जब आप लोगो को उनके साथ होना चाहिए था तब तो कोई नहीं होगा na..or आज भी उसके साथ नहीं हो. क्यों क्या गलती है उसकी. बस यही की उसने एक बीमार आदमी की पत्नी होना स्वीकार किया. उसके अनाथ बच्चो को अपने बच्चे समाज.

सब औरते – हमको अब और जलील मत करो हम और नहीं सुन पायेगी. तुम कैसे जानते हो सविता को?

पब – कोण सविता??

अउ1 – लो जिस के लिए लड़ रहे हो उसका नाम तक नहीं जानते और उसके लिए इतना अपना पैन.

पब – ओह्ह मेने उनका नाम पहुंच hi नहीं था. और रही अपने पैन की बात तो में तो सब को अपना hi मंटा हु.
 
ySqXSbd


सविता
 
अपडेट 16

पब – कोण सविता??

अउ1 – लो जिस के लिए लड़ रहे हो उसका नाम तक नहीं जानते और उसके लिए इतना अपना पैन.

पब – ओह्ह मेने उनका नाम पहुंच hi नहीं था. और रही अपने पैन की बात तो में तो सब को अपना hi मंटा हु.

तभी एक दम से किसी के गिरने की आवाज आयी. सब ने उस तरफ देख तो सविता बेहोश पारी थी. वो हुआ ये था की जैसे hi पब सविता से सॉरी बोल कर वह से निकला तो सविता भी उसके बिछे -2 आ गई पैर वो इन औरतो के सामने नहीं पर्ण चाहती थी नहीं तो फिर से जाली कटी सुनती. और वो जैसे hi वापस जाने को मूर्ति तो वो अपने बारे में बाते सुन कर जा न सकीय और उन बातो को सुनने लगी. आज कोई पहली बार उसके लिए लड़ रहा था. वो भी एक अनजान. वो कभी खुस होती तो कभी दुखी. और जब उसके पति की मूट के समय उसके साथ देने की बात आयी तो उसको वो मंजर याद आ गया और वो रट -2 बेहोश हो गई.

सब लोग उस तरफ भागे. जब सविता को बेहोश देखा तो एक औरत (अउ3) उसके पास बेथ कर उसको देखने लगी. ये गाओं के वेद की बीबी (सुसमा) थी. ये hi औरतो का इलाज करती थी गाओं में. फिर वो बोली

सुसमा – अरे ो पड़तनि (अउ2) (कमला). इसको उड़ाकर पेट (ट्री) के निचे लिटा दो. इसको कमजोरी है. और ये रो भी रही थी. लगता है इसने हमारी बाते सुन ली है.

कमला – लग तो ऐसा hi रहा है. चलो ले चलते है इसको. (और सब उसको उदा कर ट्री के निचे लिटा देते है) वैसे भी हम सब की गलत सोच को इसने भुगता है. हमें इससे माफ़ी मागणी चाइये.

अउ1 (लीलादेवी , सरपंच की बीबी) – अरे पर पहले इसको होश में तो लाओ. जब hi तो इससे माफ़ी मागीजी.

फिर सुसमा उसकी मुँह पे पानी मरने लगी. तो उसको होश आ गया. उसको होश में देख कर सब के फेस खिल उड़े और सब एक साथ बोली – तुम ठीक तो हो न सविता बहन

सविता इंटने प्यार भरी बात सुन कर रट हुए बोली – हाँ में आज ठीक हो गई. तुम लोगो में मुझको अपना मान लिया ये hi बहुत है मेरे लिए.

सब – प्लीज हमको माफ़ कर दो हम सब कभी तुमको समाज hi नहीं पाए.

सविता – में तो आप लोगो को कब का माफ़ कर चुकी हु. पैर आज तुम सब का प्यार देख के खुस हु. पैर मेरी किस्मत में ख़ुशी hi नहीं है. मेरी तो किस्मत hi ख़राब है. मैं सच में एक डायन हु….. और वो रट रट भाग गई.

सब उसको जाता देखते रहा गए. की अब इसको क्या हुआ. पैर पब को कुछ समाज में आ रहा था उसको लग रहा था की वो सयद किसी और बात से बहुत परेशां है. और वो उसी परेशानी और आज की बातो से कुछ का कुछ बोल गई है. पैर वो चुप रहा. वह की औरतो के कुछ समाज नहीं आया था. और उनको वह काफी देर भी हो गई थी तो वो सब भी चली गई. अब केवल गुरु और पब hi थे झरने पर. पब कुछ बोलने को hi था की गुरु बोली – हम बादमे बात करेंगे पहले नाहा लो और चलो यहाँ से. फिर दोनों नाहा कर चल दिया गाओं की और. और पब ने उसको रस्ते में सब बता दिया. ये भी की उसको देख कर उसस्के मान में प्यार आया न की वासना. ये बात सुन कर गुरु चौक गई. दोनों सोचने लगे की ये कुवारी तो होगी नहीं. तो फिर इसको hi देख कर ऐसा क्यों हुआ पब के साथ.

गुरु – नहीं कुछ तो बात है पंकज नहीं तो इसको देख के तुहरे दिल में प्यार आना. और फिर उसके दर्द को बिना कहे समझना कोई नार्मल बात नहीं है. ये एक इसरा hai.humko इससे मिलना होगा.

पब – हम्म वैसे भी मुझको लगा था की वो अभी किसी परेशानी में है. सयद हम उसकी कुछ हेल्प कर दे.

गुरु – क्या बात है बड़ी चिंता हो रही है उसकी.

पब – अरे मुझको कही से जलने की बू आ रही है. क्या जल रहा है.

गुरु (सीने पे हाथ रख के, नोटंकी करते हुए) – ये दिल जल रहा है तुम नहीं संजो गए पंकज बाबू.

पब – कहो तो मलहम लगा दू.

गुरु – चलो -2 बारे आये मलहम लगाने वही.

पब ने ीदार उदार देखा तो कोई नहीं था तो उसने गुरु को बहो में ले लिया. और उसके गलो पे किश कर दिया.

गुरु – ये क्या हो रहा है जनाब (जबकि वो भी यही चाहा रही थी)

पब – मलहम लगा रहा हु कहो और कहा पे लगाना है. यहाँ पे lagau.(uski गर्दन पे उगलिया फिरते हुए) या काया पे लागू (उसके ब्लाउज के ऊपर चूचियों के खुले भाग पे सहलाता है)

गुरु सेसकने लगती है. – आअह्ह्ह्ह छोड़ दो यार नहीं तो में काबू नहीं रख पाउगी. कब से तुम ऐसे hi तारपा कर छोड़ देते हो…..

पब उसको छोड़ देता है. पैर वो भी उदास हो जाताहै.

पब – क्या करू जान किस्मत hi ऐसी है तुम साथ हो, तुम भी छाती हो और में भी पैर फिर भी नहीं मिल सकते. आठ कब ख़तम होगा हमारा इंतजार.

गुरु उसकी सीने में सर रख कर – जल्दी hi होगा. वैसे भी तो में तुम्हारी हु न. जल्दी hi हम एक हो जायेगे. जब तब जुदाई का मज़ा लो.

पब – नहीं मुझको तो चुदाई का मजा चाहिए तुम्हारे साथ. कही ऐसा न हो इतनी लम्बी जुदाई के बाद तुम मेरी चुदाई झेल hi न पाओ.

गुरु मन में – हाँ सायद कुछ ऐसा hi हो. इसकी और hi इसरा था दस माँ का. और वो ये सोचते हुए उसकी आखों में एक आशु आ जाता है.

पब – अरे यार तुम रोने क्यों लगी. में तो मजाक कर रहा था. तुमको लगता है की में कभी तक्लीक दे सकता हु.

गुरु – अरे नहीं ये तो तुम्हारे प्यार को देख कर आखें जलक गई थी. अब चलो भी सविता के घर भी जाना है.

और दोनों गाओं में पहुंच जाते है. और सविता का पता पूछते है. पैर जिससे भी पूछते वो मुँह बना कर नजर फेर लेता. पब को गुस्सा तो बहुत अत पैर किस किस को मरता. और वो थक कर उसी टिया की दुकान पे पहुंच जाते है जहा से उन्होंने सुबह टिया ली थी. और टिया का ोडेर कर के उसी दुकानदार से पूछते है सविता का घर. वो कहता है कोण है आप लोग और उसके पास क्यों जाना चाहते है. मत जाओ वह वो पहले से hi दुखी है.

पब – अरे भाई हम तो उनकी हेल्प करने के लिए जा रहे है.

दुकानदार – हैरानी से उनको देखता है. तो पब को समाज आ गया की ये सविता का कोई हितेषी है. ताब वो उसको झरने की घटना को शार्ट में बता देता है. तो दुकानदार भी खुस होता है और कहता है की 4 खेत के बाद गाओं के लास्ट में एक घर है वो hi सविता का है. तो वो दोनों उसको थैंक्स बोल कर चल देते है उस घर की और.

जैसे hi वो उसके घर का गेट खटखटाने hi वही थे तभी उनको सविता के रोने की आवाज आती है. तो वो दोनों गेट खटखटाने की जगह पास बानी विंडो से अंदर देखते है. तो वह पर 2 लोग खड़े थे. फेस से hi गुंडे लग रहे थे. और सविता जमीं कर बेटी रो रही थी.

1सत गुंडा – तू भेजती है अपनी लोदिया को या उदा ले जाये तुम दोनों को ..

सविता – प्लीज हम को छोड़ दो. आखिर क्या बिगाड़ा है हमने ठाकुर का. जो वो ये सब कर रहे है.

2ंद गुंडा – देख हम तुझको बहुत बार प्यार से समजा चुके है अब लास्ट बार बोलते है, तू जानती है ठाकुर साहब को उनका दिल आ गया है तुम दोनों पर. हो भी तो दोनों कमल की चीज. साला लुंड खड़ा हो जाता है देख कर.

1सत गुंडा – हाँ यार पैर पता नहीं ठाकुर साहब ने भी क्या सोच कर इसको छोड़ने का फैसला कर लिया और इसकी बेटी से शादी कर के अपनी रकेल बनने का सोचा. साला इससे तो अच्छा होता दोनों को hi उदा लेते और खूब रगड़ रगड़ कर छोड़ते.

2ंद गुंडा – हाँ पैर ठाकुर साहब तो अब भी इसकी बेटी को दिन रात छोड़ेगे पर हमको नहीं मिलेगा कुछ. उदा लेते तो हम को भी मौका मिल जाता. देख ठाकुर साहब ने तुजपे रहम किया है नहीं तो अब तक तेरे लोडे को मर के तुम दोनों को छोड़ कर बेच देते किसी कोठे पर. अब तू उनका दिमाग ख़राब करेगी तो वो तुम 3no को नहीं छोड़ेगे.

सविता रोइ जा रही थी उसको सहन नहीं हो रही थी उन गुंडों की गन्दी -2 बाते. और बहार खड़े पब का तो खून खोल रहा था. वो तो गुरु ने उसको रोक लिया था नहीं तो अब तक वो अंदर चला गया होता.

सविता (रट हुए) – मुझको 2 दिन (डे) का टाइम और दे दो. में खुद अपनी बेटी को ठाकुर के पास छोड़ कर अपने बेटे को ले जोगी. बस 2 दिन (ऐसा लग रहा था की ये बात कहते हुए उसकी आत्मा तक छलनी हो गई और उससे निकला खून उसकी आखों से निकलने लगा)

1सत गुंडा – अरे जानेमन ठाकुर साहब से अब साबरा नहीं हो रहा है. उन्होंने तुम दोनों को उदा कर लेन को बोलै है. यदि नहीं ले गए तो वो हमपे गुस्सा हूजे. (दूसरे गुंडे की और आँख मर देता है. हकीकत में ठाकुर में इन दोनों को केवल सविता को डरने को भेजा था)

सविता – बस 2 दिन दे दो.. (और उनके पवन पकड़ती है)

1सत गुंडा – चल मन ले हम ठाकुर साहब से बात कर के तुझको 2 दिन दिलवा भी दे तो हमारा क्या फायदा होगा.

2ंद गुंडा – बोल क्या देगी हमको … हाहाहाहाहा

सविता – में आप लोगो को क्या दे सकती हु??

1सत गुंडा – ाहहए मेरी जान तू तो बहुत कुछ दे सकती है. (और निचे जुक कर उसके चुके दबा देता है कपड़ो के ऊपर से hi) …. चल जब ठाकुर साहब ने hi तुझको छोड़ दिया है तो हम भी कुछ नहीं करेंगे. पर तू हमको डंडा कर दे. (और अपनी पेण्ट उत्तर कर अपना लुंड हिलाते हुए बोलै) देख तेरी ये जवानी देख कर कैसे बेचें है बेचारा. चल अब जल्दी से मुँह खोल…

और उसको देखते हुए दूसरा गुंडा भी अपनी पेण्ट निकल देता है. और दोनों मिलके उसके मुँह को छोड़ने लगते है दो बार सविता को उलटी भी हो गयी. पर वो नहीं रुके. और दूसरी तरफ पब की आखो में खून उतर आया था. पर गुरु ने उसको जाने नहीं दिया. वो अपना गुस्सा दिवार पे हाथ मर के निकल रहा था. और ीदार वो दोनों गुंडे अपना वीर्य उसके मुँह और कपड़ो पे गिरा कर अपनी पेण्ट पहनते है

1सत गुंडा – तू क्या चीज है. तेरे मुँह भी किसी रंडी की छूट से ज्यादा मजा देता है. कास तू मिल जाती. (और फिर अपना लुंड मसल देता है) पैर हां याद रहे 2 दिन बस उसके बाद हम ले जायेगे तुम दोनों माँ बेटी को और मार देंगे तेरे बेटे को…… याद रखना….

और चल देते है बहार की तरफ. और सविता वैसी hi हालत में जमीं पैर पड़ी रोटी रहती है. और बेहोश हो जाती है. दोनों गुंडों को बहार आता देख कर पब और गुरु घर के पहिचे चले जाते है.

पब – ये सब देख कर तो मुझको मर जाना चहिये. क्यों नहीं जाने दिया उनको मरने के लिए. (वो बहुत गुस्से में था)

गुरु – हां जाते और पिट कर एते या वो तुमको मार देते.

पब – मार देते तो मार देते काम से काम ये सब तो न देखना परता.

गुरु – और इससे वो सविता को छोड़ देते और वो बच जाती.?? नहीं कभी नहीं… तुम समाज क्यों नहीं रहे तुम अभी किसी से टक्कर लेने लायक नहीं हो. पहले अपनी सकती पाओ. और फिर इनको मार देना में भी साथ चलुगी इन सब को मरने.

गुरु की बातो से उसको समाज आ गया. पर वो दुखी था तो वही बेथ कर रोने लगा. गुरु उसको अपने सीने से लगा कर चुप करने लगी.

गुरु – चलो अब वो लोग चले गए होंगे. सविता को हमारी जरुरत है…

फिर दोनों घर के अंदर आ जाते है. तो देखते है की सविता बेहोश पारी है जमीं पर. गुरु उसकी नब्ज देखती है और फिर

गुरु – तुम इसको अंदर कमरे में सुला दो. में एक मं में आये.

पब उसको लेजाकर अंदर बीएड पे लिटा देता है. इस टाइम उसके फेस पर वीर्य हल्का सा सूखने लगा था. उसकी आँखों के निचे कला घेरा फेल गया था. बाल बिखरे हुए थे. सरे कपड़ो पर भी वीर्य लगा था. उसकी हालत ख़राब थी. पब उसकी हालत को देख hi रहा था की गुरु आ गई. और एते hi किचन देखने लगी. और किचिन में पहुंच कर अपने साथ लाये जड़ीबूटी से दवा बना कर लायी और सविता के पास गई. उसकी हालत देख कर गुरु की आखों में आशु आ गए. पैर उसने हिम्मत से काम लिया. पब तो बस उसको देख hi रहा था. कुछ नहीं कर रहा था. उसके फेस पैर एक के बाद दूसरे भाव बदल रहे थे.

गुरु ने सविता के पास पहुंच कर पब से कहा की एक टॉवल और 1 मग पानी लाओ. पैर उसने नहीं सुनी तब गुरु का डायन उसकी हालत पर गया. तो उसने उसको हिलाया. और पब एक दम होश में आ गया . गुरु चिकटे हुए – जाओ और टॉवल और 1 मग पानी लाओ.

पब चला गया. जैसे hi वो पानी टॉवल लाया. गुरु ने उसको बहार जाने को बोलै और कहा की अभी कुछ न सोचे वो सब ठीक कर देगी.

पब भी बहार जा के बेथ गया एक चेयर पैर. और गुरु ने सविता की हालत ठीक की और उसको दवा दे दी. और उसको सोता हुआ छोड़ कर किचन में चली गई. और सामान देख कर खाना बनाने लगी. आज वो के सालो के बाद खाना बना रही थी. पैर कुछ देर में खाना बना कर बहार आजाती है. और पब को देखती है जो एक चेयर पैर बीटा था. पैर वो बहुत हद तक सभाल चूका था. पैर उसका दिल संत नहीं था.

गुरु – पंकज सभाओ खुद को, ऐसे कुछ नहीं कर पाओगे.

पब – नहीं अब ने ठीक हु. और तुमने जो किया वो भी रही था. में उनमे से एक का भी मुकाबला नहीं कर पता. पैर गुरु में उनको मरना चाहता हु में ठाकुर को मार कर उसको सजा देना चाहता हु. सोचो गुरु एक औरत खुद अपनी बेटी को रखेल….. किसे किसे तैयार हुई होगी वो, और क्या बीत रही होगी उस पर.. में नहीं छोड़ूगा उन कमीनो को. बस अब तुम कोई सरता बताओ जिससे में वो सकती प् सकू. ….

गुरु – वो रास्ता खुद सविता hi है..

पब – क्या मतलब??
 
अपडेट 17

गुरु – वो रास्ता खुद सविता hi है..

पब – क्या मतलब??

गुरु – कियोकि वो कुवारी है..

पब – चोकते हुए – क्या… क्यों.. … मतलब कैसे…… तुमको कैसे पता वो कुवारी है.

गुरु – वो क्यों कुवारी है ये तो वो hi जाने. पैर उसके कपड़े चेंज करते हुए मेने उसको खुद चक किया है. वो पूरी तरह कुवारी है.

पब – पर तुमने ऐसा क्यों किया.

गुरु – तुम्हारी वजह से हम जिस लिए यहाँ ए थे. मुझको पहले hi लगा था की कुछ ऐसा hi होगा. कियोकि उसका पति 15 दिन में hi मर गया. और तुमको भी वो सब फील हुआ जो बस किसी कुवारी को देख कर hi होना था.

पब – हम्म, पर इनको अभी क्या हुआ था.

गुरु – हार्ट अटक …..(बस इतना hi बोलै था की गेट से एक लड़की अंदर आगि सायद सविता की बेटी होगी. पैर पब उसको आखें फार फार के देखने लगा जैसे कोई दूसरे ग्रह की लड़की को देखा हो. और वो लड़की भी उसको देखती रहा गयी.)

दोनों एक दूसरे को देख रहे थे. कोई कुछ नहीं बोल रहा था. बस आखें अख्खों से बाटे कर रही थी. पब को गुरु ने हिलाया. कियोकि उसने अभी तक उस लड़की को नहीं देख था. उसकी पथ गेट की और थी और गेट भी खुला था तो आवाज भी नहीं हुई थी. और बोली – तुमने सुना सविता को हार्ट अटक हुआ था. कहा खो गए हो तुम.

पब – अवनि , अवनि तुम…. अवनि तुम यहाँ…. पर अवनि तो गुरु की बात से मूर्ति बन गयी थी…

गुरु अवनि सुन कर और पब की नजरो का पीछा करते हुए पीछे मुड़ी तो वो भी अवनि को देखने लगी. और बोली – तुम कोण हो और यहाँ क्यों आयी हो..

अवनि गुरु की बात सुन कर होश में आ कर बोली – क्या मतलब है आपका. ये मेरा घर है और में यहाँ रहती हु. पैर तुम कोण हो. और अपने अभी क्या कहा था की सविता को क्या हुआ है. कहा है वो….

गुरु – (समाज जाती है की ये सविता की बेटी है) – अच्छा तुम सविता जी की बेटी हो. उनको एक छोटा सा हार्ट अटक हुआ था. पर अब वो खतरे से बहार है. मेने उनको दवा दी है वो जल्दी hi होश में आ जाएगी.

अवनि – कहा है माँ.. और रूम में जाने लगती hai...guru भी उसके पीछे चल देती है.

पब तो जब से सुना था की अवनि सविता की बेटी है तब से चुप चाप बीटा सोच में गम हो गया था. वो सोच रहा था की अवनि सविता की बेटी है तो 2 दिन बाद अवनि hi ठाकुर की रखेल बन जाएगी. इतने दिन बाद मिली है तो इन हालत में. और पता नहीं क्या -2 सोचे जा रहा था.

और पब की सोच से बे खबर गुरु और अवनि सविता के पास पहुंच गए और अवनि अपनी माँ को पुकारने लगी. उसकी आवाज सुन कर सविता भी होश में आ गयी 1 मं को तो वो भूल hi गयी थी की उसके साथ क्या हुआ था. पहले उसने अपनी हालत देखि. उसकी ड्रेस चेंज थी. वो कुछ समाज नहीं पाई की वो तो उस हालत में बहार बेहोश हो गई थी. फिर यहाँ बीएड पैर दूसरी ड्रेस के साथ. तभी उसकी नजर गुरु पे पारी वो उसको पहचान गयी की ये सुबह झरने पे मिली थी उस लड़के के साथ. वो समाज गयी की ये सब इसने या उस लड़के ने किया है पैर उसके मन में और भी सवाल थे पैर वो अवनि की वजह से चुप रही. अवनि अपनी माँ को खोया हुआ देख कर बोली – माँ क्या हुआ कहा खो गई. अब तबियत किसी है.

सविता – में ठीक हु मुझको क्या हुआ है मेरी बच्ची. में ठीक हु एक दम. तुम कब आयी.

अवनि – बस अभी अभी आयी थी. तो बहार …. उसको कुछ याद आ जाता है और बहार के रूम में आने लगती है. तभी वो पंकज से टकरा जाती है.

अवनि – अरे पंकज सर आप यहाँ कैसे??

पैर पंकज तो कुछ बड़बड़ाता हुआ. कमरे में अंदर जा रहा था. उसको अवनि से टकराना और उसके बोलने से भी कोई फरक नहीं पारा. वो सीधा पहुंच सविता के पास और बोलै – क्या आप मुझसे चुड़ोगी???

पब का इतना बोलना hi था की उसके पीछे कड़ी अवनि ने उसको घुमाया और एक टेपार दिया गाल pe….or रोने लगी. तभी सविता से उसको अपनी और घुमाया और दिया एक गाल पे …….. 2 टप्पर खा के भी पब फिर बोलो – आप चाहे जितना मर लो पैर एक बार मुझसे छोड़ने को तैयार हो जाओ. में आपके सामने भिक मांगता हु. बस एक बार चुद लो मुज से. नहीं तो अवनि…….

वो इतना hi बोल पाया था की गुरु ने उसको अपने गले से लगा लिया कास के – पंकज चुप एक दम चुप संत हो जाओ एक दम.. देखो अपनी बीबी की आखों में. देखो तुम मुझसे प्यार करते हो न. तुम मेरी बात नहीं मानोगे. (और उसके फेस को अपनी चूचियों पे रख देती है)

यहाँ अवनि और सविता अपनी अपनी सोच में गम थी दोनों के कुछ समाज नहीं आ रहा था.

अवनि सोच रही थी की पंकज सर को क्या हो गया है. ये तो किसी लड़की से बात भी नहीं करते थे और आज माँ को छोड़ना चाहते है. और छोड़ने की भिक मांग रहे है. जैसे नहीं छोड़ा तो कोई मर जायेगा. ये इनकी सोच को क्या हो गया है. और ये लड़की क्या कह रही है ये इनकी वाइफ है. ये कैसे हो सकता है इन्होने सधी कर ली. इनकी आखों में मेने जो देखा था वो क्या था. और अभी भी मेरा नाम ले रहे है. ये हो क्या रहा है. पंकज सर अपनी वाइफ के सामने मेरी माँ को छोड़ने की भिक मैग रहे है.

और ीदार सविता सोच रही थी – कोण है ये लड़का और क्या चाहता है मुझसे ये मुझको ऐसे कुल आम छोड़ने की बात कर रहा है जैसे खाना मैग रहा हो. छी कितना गन्दा लड़का है. कहा इसने सुबह मेरे सम्मा के लिए और औरतो से लड़ रहा था. और अब ये मुझको खुद hi ऍम्निट कर रहा है. सुबह इसको देख के लगा की कोई इसके जैसा होता जो मेरे लिए लड़ सकता तो ये जिंदगी कितनी हसीं होती. और अब छहि छी पता नहीं क्या लड़का है. अरे इसको तो अवनि भी जानती है पैर कैसे. इतने गंदे लड़के को कैसे जानती है ये. और इसकी बीबी इसकी इस हरकत पे कुछ नहीं कह रही. क्या लड़की है. लगता है दोनों मियाबीबी hi गंदे है. पैर कुछ देर पहले इन्होने जो किया वो क्या था. मुझको बचाया. और अब .. हो क्या रहा है कुछ समाज में नहीं आता…

पब कुछ देर के लिए संत हो जाता है. गुरु उसको संत कर रही थी – तुम मुझसे प्यार करते हो न तो कुछ मत बोलना में सब समाज गई हु. तुम करते हो न मुझसे प्यार….

पब – हाँ में तुमसे बहुत प्यार करता हु. पैर अवनि … अवनि का क्या होगा सोचो न गुरु मेरी अवनि …. नहीं गुरु में ऐसा नहीं होने दुगा. गुरु तुम बोलै न सविता ने वो चुद जाये मुज से. तुम समजाओ न उसको.. अरे पैर वो तुम्हारी बात भी क्यों मानेगी.. वो एक दम से अणि की और पलट जाता है – अवनि अवनि तुम समजाओ न अपनी माँ को वो मुज से चुद जाये बस एक बार . तुम कहोगी तो वो जरूर मानेगी. तुम्हारे लिए, तुम कहोगी तो वो मन जाएगी.. कहो न apni….(bus फिर वो बेहोश हो जाता है , सॉरी होता नहीं है गुरु बिगड़ते हालत को देख कर, उसकी गर्दन की एक नाश दबा देती है.)

गुरु उसको बेशस कर के बाग़ के जाती है और एक टॉवल को गीला कर के उसके सर पे रख देती है. और उसके कंडे की, फिर हाथो की, फिर पेरो की मालिश करने लगती है. साथ में कुछ दबा भी रही थी. इतनी देर तक माहौल एक दम संत हो चूका था. कोई कुछ नहीं बोल रहा था. दोनों माँ बेटी गुरु को पंकज की सेवा करते हुए देख रहे थे. गुरु की आखों में आशु थे. पैर वो कुरी तरह से अपने काम में जुटी थी.

तभी सविता – ये लड़की कोण हो तुम और ये बत्तमीज लड़का कोण है. और क्या कर रहे हो तुम मेरे घर में. निकलो यहाँ से. नहीं दो में दकके मर के बहार निकल दूगी.

गुरु – अभी संत रहिये में आपको सब बताती हु. कुछ देर रुको. अभी इसकी हालत ठीक नहीं है.

सविता गुस्से में – में क्या करू यदि इसकी हालत ठीक नहीं है तो मरता हो तो मर जाये. ऐसे गंदे लड़के को में अपने घर में बर्दास्त नहीं कर सकती.

ये सुन कर जहा अवनि को दक्का लगा वही गुरु पब के मरने की बात से पागल हो उडी. वो एक दम से अपनी भूड़ी वाली आवाज में गुरै – ये लड़की यदि अब आगे एक सब्द भी बोलै न तो तू मुझको अभी जानती नहीं है और न hi इसको जानती है. इसलिए कहती हु चुप हो जा नहीं तो में क्या करुँगी तू सोच भी नहीं सकती.

ऐसी आवाज सुन कर दोनों माँ बेटी दर जाती है. पैर अवनि हिम्मत कर के बोलती है – कोण हो तुम और पंकज सर को कैसे जानती हो. इनको क्या हुआ है. क्या तुम इनकी वाइफ हो?

गुरु अवनि को गुरते हुए उसी आवाज में– कहा न चुप तो एक दम चुप. हाँ में इसकी वाइफ हु. और इसको अभी डोरा पारा है तेरी वजह से. अब चुप हो जा. जब तब में कुछ न कहु.

दोनों माँ बेटी को कुछ समाज नहीं आता की हो क्या रहा है. पैर वो दर से कुछ नहीं बोलती. बस गुरु को देखती रहती है. और गुरु उसके इलाज में लगी हुई थी. वो कुछ जड़ीबूटी भी ले आयी थी बहार जा कर. और उनको पब को दे दिया था. कुछ देर की कड़ी म्हणत राग लायी और पब अब नार्मल हो गया था. और गुरु ने अवनि को इशारा किया तो दोनों मिल कर उसको ले कर बीएड पे लिटा देती है. सविता एक और कड़ी बस देख रही थी. गुरु दोनों को ले कर बहार आ जाती है. हाँ अब बोलो क्या बोलना है. और एक चेयर पे जा कर बेथ गई.
 
Back
Top