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पब ने भी उसको अपनी बाँहों में भर लिया और उसके बालो को सहलाने लगा. फिर ये दोनों घर लोट आये. अभी माहि के फेस पे एक बड़ी सी स्माइल थी. जिसे देख कर शशि बोली – क्या बात है दीदी बड़ी खुस लग रही हो. लगता है भगवन ने आपकी सुन ली. (फिर धिरे से कान में) कही पंकज से प्यार का इजहार तो नहीं कर दिया अपने..
और फिर हसने लगी. पब को पता नहीं लगा की दोनों बहनो में क्या खिचड़ी पाक रही है. वो दीनदयाल जी के पास बेथ गया. और माहि और शशि किचन में आ गयी. रेनू और गोपाल बहार खेल रहे थे. पब दीनदयाल जी से बात कर रहा था. उसको अपनी शादी की बात करने में हिचक हो रही थी. और अंदर किचन में दोनों बहाने बाते कर रही थी. बात ये थी की माहि और शशि बहाने छुम फ्रेंड्स थी. तो माहि ने सोल्लगे लाइफ से hi अपने दिल का हाल शशि को बता रखा था. माहि के सोल्लगे से आने के बाद शशि ने बहुत कहा की एक बार बात तो करो. पैर माहि ने पीछे मुद कर नहीं देखा उसने अपनी फॅमिली को hi सब मान लिया था, उसने सोचा की यदि उसका प्यार सच्चा है तो पंकज उसको जरूर मिलेगा और जिंदगी भर पब का इंतजार करने की ठान ली थी. पैर वो इन्तजार भी उस दिन ख़तम हो गया जब पब और अंकिता उसकी शॉप पे पहुंचे थे. एक तो अंकिता जैसी खूबसूरत वाइफ उसके साथ थी. और देखने से hi लग रहा था की पब अब आमिर बन गया है इसलिए माहि ने अपना इंट्रो पब को नहीं दिया. पैर उसके जाने के बाद वो खूब रोइ. शशि hi थी जिसने उसे संभाला था. उसके बाद वो जैसे तैसे खुद को संभल कर अपनी जिंदगी में लोटी थी की पब फिर से आ धमका. इसलिए hi वो उसे भगा रही थी. पैर आज जो हुआ उसके बाद तो जैसे उसकी दुनिया hi बदल गई. भगवन ने उसे उसका प्यार दे दिया. इतने दिनों का इन्तजार और तड़फ देख कर भगवन ने उसकी सुन ली थी. और आज वो हो गया जो न जाने कब से उसका सपना था.
शशि – दीदी बताओ न क्यों इतनी खुस हो. क्या अपने पंकज को अपने दिल हाल बता दिया. क्या कहा उसने? बोलो न दीदी आपकी मुस्कान बता रही है की कुछ तो हुआ है.
माहि – (इतराते हए) मैं नहीं बताती तुझको कुछ. तू मुझको बहुत परेशां करती है.
शशि – बताओ न दीदी. भाव क्यों खा रही हो.. मेरी अच्छी दीदी हो न.. बोलो क्या हुआ मंदिर में..
माहि – पहले वादा कर मुझको सताएगी नहीं
शशि – वादा, मैं तो वैसे भी नहीं सताती आपको (मासूम सा फेस बना कर)
माहि – आज उन्होंने शादी के लिए बोलै. खुद उन्होंने पूछा की मैं उनसे शादी करना चाहती हु या नहीं…
माहि की बात सुन कर शशि की ख़ुशी से चीख निकल गई – क्या सच में..
शशि की चीख सुन कर, दीनदयाल – क्या हुआ बेटी चीची क्यों.
माहि – कुछ नहीं हुआ बापू ये पागल हो गयी है.
फिर माहि शशि से – पागल है क्या इतनी तेज़ बोलता होगा कोई. वो बहार bêthe है क्या सोचेंगे…
शशि – ोुह्ह्ह्ह अभी से वो, और उनकी सोच की चिंता… एक hi पल में मैं परै हो गई…
माहि – देख तू फिर शुरू हो गई.
अब ये दोनों बहने ऐसे hi लगी रही खट्टी मीठी बातो में. और पब के लिए खाना बनाना लगी. बहार पब ने भी हिम्मत कर के दीनदयाल से बात करना सुरु किया.
पब – अंकल में आज आपसे कुछ मांगने आया हु. क्या आप देंगे मुझे..
दीनदयाल – बीटा किसी बात करते हो, मुज गरीब पे है hi क्या जो में तुम कुछ दे सकू, फिर भी तुम बताओ क्या चाहते हो. तुम्हारे लिए कुछ करके मुझे बहुत ख़ुशी होगी.
पब – अंकल गलत मत समझियेगा. मैं माहि से शादी करना चाहता हु. आप माहि का हाथ मेरे हाथो में देंगे.
दीनदयाल पब को देखता रहा गया. एक दम से उसकी बेटी की शादी की बात वो भी इतने बड़े आदमी से, और उससे जिसकी पहले से hi कई पत्नी है. वो अपनी सोच में गम हो गया. और पब चुप बैठा उसके जबाब का इन्तजार काने लगा. काफी देर तक वह ख़ामोशी छै रही. पब फिर हिम्मत कर के बोलै.
पब – अंकल, एक बार माहि से भी बात कर लेना कोई भी जवाब देने से पहले. वो भी मुझसे प्यार करती है.
दीनदयाल को भी पता था की कोई है जो माहि के दिल में बसा है. पैर कोण है वो ये नहीं जनता था. उसने अपनी बेटी को रातो में रोटा देखा था. वो जब भी शादी की बात करता तो माहि ताल जाती. और जब उससे पूछता की तुम किसी से प्यार करती हो तो चुप रहती. बेटी के दिल का हाल दीनदयाल से छुपा नहीं था. पैर माहि ने आज तक अपने दिल का हाल अपने बापू को नहीं बताया था. वैसे भी लड़किया अक्सर ये बाते अपनी माँ से करती है और माहि की कोई माँ तो थी नहीं. वो किस्से कहती. दीनदयाल काफी देर तक सोचता रहा. फिर पब को बोल कर किचन में आ गया जहा पैर उसकी दोनों बेतिया बहुत खुश थी. और खाना बना रही थी. आरसे बाद दीनदयाल ने अपनी बेटी के फेस पे ख़ुशी देखि थी.
दीनदयाल – माहि बीटा, क्या पंकज hi वो लड़का है जिसका तुमको इन्तजार था?
माहि तो मरे सरम के कुछ नहीं बोल पति, नजरे निचे कर के कड़ी रहती है. पैर शशि ने दिलदायल को जवाब दिया.
शशि – हाँ बापू, ये hi है वो जो दीदी के दिल में बास्ते है.
माहि शशि की और घूरती है तो दिलदायल वह से चले जाते है और दोनों बहनो की नौकचौक फिर सुरु हो जाती है. अब दीनदयाल पब के सामने बेथ कर बोलते है.
दीनदयाल – बीटा मुझको कुछ अजीव लग रहा है. अपनी बेटी का हाथ उस आदमी के हाथो में देते हुए जिसकी पहले से इतनी पत्नी है. तुम आमिर भी बहुत हो. और मैं तुमको शादी में कुछ दे भी नहीं पाउगा. और साफ़ कहु तो दिल में एक दर है की कही तुम मेरी बेटी को बाद में छोड़ न दो.
पब – अंकल पहली बात तो ये की मुझको केवल माहि चाहिए. और कुछ भी नहीं. और दूसरी बात ये की आप अपना ये दर अपने मन से निकल दो की मरने से पहले में माहि को छोड़ सकता हु. यदि आप हाँ कहेगे तो आपको वो बात भी बता दुगा जिस वजह से मैं इतनी शादी कर रहा हु. और क्यों माहि को कभी नहीं छोड़ सकता…
दीनदयाल – बीटा मेरी तरफ से तो हाँ है. आज सालो बाद मेरी बेटी के फेस पिउ ो चमक है जो पता नहीं कहा चली गई थी. और ये सब तुम्हारी वजह से है मैं ये भी जनता हु. तो तुमको न कहा कर मैं अपनी बेटी को जिंदगी भर दुखी नहीं रखा चाहता. पैर फ्यूचर में भी वो दुखी न हो इसलिए तुमसे रिक्वेस्ट है की उसको कभी बिच मजदार में छोड़ मत देना.
पब – नहीं अंकल ऐसा कभी नहीं होगा, ये मेरा वादा है आपसे…
दीनदयाल – बीटा अब अंकल नहीं पापा या बापू कहा सकते हो..
तभी ये दोनों लड़की भी खाना ले कर आ गयी. और दीनदयाल की ये बात सुन ली शशि तो ख़ुशी से उछाल पड़ी, पैर माहि सरमने लगी. और खाने की 2 थालिया रख कर जाने लगी.
पब – माहि तुम यहाँ बैठो तुमसे और बापू से कुछ बात करनी है. शशि क्या तुम हम तीनो को कुछ देर के लिए अकेला छोड़ सकती हो.
पब की बात सुन कर शशि घर से बहार चली गयी और माहि अपने बापू के पास बेथ गयी.
पब – अब में जो बताने जा रहा हु सायद आपको उस पैर विस्वाश न हो, पैर ये सच है. और उसका साबुत में खुद हु.
दीनदयाल – ऐसी क्या बात है बीटा..
पब – अंकल मेरा एक टारगेट है. सयद अपने दस माँ और डलासुर के बारे में सुना हो.
दीनदयाल – बीटा में उनके बारे में सब जनता हु. वो दानवो के राजा रानी है. पैर तुम कैसे उनको जानते हो.
पब – मैं जो भी हु दस माँ की कृपा से हु. फिर पब अपने बारे में बताने लगा. की कैसे जंगल में पंहुचा, कैसे उसे दस माँ ने एक टारगेट के लिए चुना. वो अपनी पूरी बात को शार्ट में बताता गया. उसने सेक्स और जुली के पास मिली लड़कियों को छोड़ कर सब बता दिया और ये भी बता दिया की वो माहि से शादी करके भी एक पावर को हाशिल करेगा. और उस पावर को सेव रखने के लिए माहि का उसके साथ हमेशा रहना जरुरी है. इसलिए वो उसे कभी नै छोड़ सकता. और वो hi उस हवन को भी करेगा.
दीनदयाल – बीटा यदि तुम केवल ये भी बोल देते की तुम पैर मणिशंकर जी का हाथ है तो मैं तुमसे बिना कुछ पूछे माहि से तुम्हारी सधी करवा देता. मेने उनके साथ में hi गुरु सत्यानंद जी से ज्ञान प्राप्त किया है. बाद में मणि जी को गुरूजी ने आश्रम का मुखिया बनाया. और हम लोग अपने -2 रस्ते हो लिए. कुछ आज भी वही आश्रम में मणि जी के साथ अपना जीवन काट रहे है.
पब – तो आप मणि जी को जानते हिअ ये तो अच्छी बात है. तो बताइये शादी कब करनी है. वैसे भी ये शादी तो उस क्रिया के हिसाब से होगी तो उसने गुरु के अलावा किसी का भी काम नहीं है.
दीनदयाल – वो सब तो ठीक है. पैर मेरी और मेरे और बच्चो की इच्छा का क्या होगा. हम तो अपनी बेटी की नार्मल शादी होते देखना चाहते है.
पब कुछ सोच कर गुरु को फ़ोन करके दीनदयाल की इच्छा बताता है तो गुरु कहा देती है की वो सब होने के बाद भी क्रिया की जा सकती है बस सुहागरात नहीं होनी चाहिए.
पब की बात से माहि शर्मा के भाग जाती है और दीनदयाल और पब है देते है.
दीनदयाल - बीटा आज से 10 दिन बाद शादी का अच्छा महूरत है. तो उस दिन hi सभी रस्मो को पूरा कर देते है.
पब – ठीक है ये सब आप कहा करना चाहेंगे, यहाँ गाओं में या कही और.
दीनदयाल – गाओं में hi ठीक रहेगा.
पब – ok, मैं सब अरेंजमेंट कर दुगा.
पब ने भी उसको अपनी बाँहों में भर लिया और उसके बालो को सहलाने लगा. फिर ये दोनों घर लोट आये. अभी माहि के फेस पे एक बड़ी सी स्माइल थी. जिसे देख कर शशि बोली – क्या बात है दीदी बड़ी खुस लग रही हो. लगता है भगवन ने आपकी सुन ली. (फिर धिरे से कान में) कही पंकज से प्यार का इजहार तो नहीं कर दिया अपने..
और फिर हसने लगी. पब को पता नहीं लगा की दोनों बहनो में क्या खिचड़ी पाक रही है. वो दीनदयाल जी के पास बेथ गया. और माहि और शशि किचन में आ गयी. रेनू और गोपाल बहार खेल रहे थे. पब दीनदयाल जी से बात कर रहा था. उसको अपनी शादी की बात करने में हिचक हो रही थी. और अंदर किचन में दोनों बहाने बाते कर रही थी. बात ये थी की माहि और शशि बहाने छुम फ्रेंड्स थी. तो माहि ने सोल्लगे लाइफ से hi अपने दिल का हाल शशि को बता रखा था. माहि के सोल्लगे से आने के बाद शशि ने बहुत कहा की एक बार बात तो करो. पैर माहि ने पीछे मुद कर नहीं देखा उसने अपनी फॅमिली को hi सब मान लिया था, उसने सोचा की यदि उसका प्यार सच्चा है तो पंकज उसको जरूर मिलेगा और जिंदगी भर पब का इंतजार करने की ठान ली थी. पैर वो इन्तजार भी उस दिन ख़तम हो गया जब पब और अंकिता उसकी शॉप पे पहुंचे थे. एक तो अंकिता जैसी खूबसूरत वाइफ उसके साथ थी. और देखने से hi लग रहा था की पब अब आमिर बन गया है इसलिए माहि ने अपना इंट्रो पब को नहीं दिया. पैर उसके जाने के बाद वो खूब रोइ. शशि hi थी जिसने उसे संभाला था. उसके बाद वो जैसे तैसे खुद को संभल कर अपनी जिंदगी में लोटी थी की पब फिर से आ धमका. इसलिए hi वो उसे भगा रही थी. पैर आज जो हुआ उसके बाद तो जैसे उसकी दुनिया hi बदल गई. भगवन ने उसे उसका प्यार दे दिया. इतने दिनों का इन्तजार और तड़फ देख कर भगवन ने उसकी सुन ली थी. और आज वो हो गया जो न जाने कब से उसका सपना था.
शशि – दीदी बताओ न क्यों इतनी खुस हो. क्या अपने पंकज को अपने दिल हाल बता दिया. क्या कहा उसने? बोलो न दीदी आपकी मुस्कान बता रही है की कुछ तो हुआ है.
माहि – (इतराते हए) मैं नहीं बताती तुझको कुछ. तू मुझको बहुत परेशां करती है.
शशि – बताओ न दीदी. भाव क्यों खा रही हो.. मेरी अच्छी दीदी हो न.. बोलो क्या हुआ मंदिर में..
माहि – पहले वादा कर मुझको सताएगी नहीं
शशि – वादा, मैं तो वैसे भी नहीं सताती आपको (मासूम सा फेस बना कर)
माहि – आज उन्होंने शादी के लिए बोलै. खुद उन्होंने पूछा की मैं उनसे शादी करना चाहती हु या नहीं…
माहि की बात सुन कर शशि की ख़ुशी से चीख निकल गई – क्या सच में..
शशि की चीख सुन कर, दीनदयाल – क्या हुआ बेटी चीची क्यों.
माहि – कुछ नहीं हुआ बापू ये पागल हो गयी है.
फिर माहि शशि से – पागल है क्या इतनी तेज़ बोलता होगा कोई. वो बहार bêthe है क्या सोचेंगे…
शशि – ोुह्ह्ह्ह अभी से वो, और उनकी सोच की चिंता… एक hi पल में मैं परै हो गई…
माहि – देख तू फिर शुरू हो गई.
अब ये दोनों बहने ऐसे hi लगी रही खट्टी मीठी बातो में. और पब के लिए खाना बनाना लगी. बहार पब ने भी हिम्मत कर के दीनदयाल से बात करना सुरु किया.
पब – अंकल में आज आपसे कुछ मांगने आया हु. क्या आप देंगे मुझे..
दीनदयाल – बीटा किसी बात करते हो, मुज गरीब पे है hi क्या जो में तुम कुछ दे सकू, फिर भी तुम बताओ क्या चाहते हो. तुम्हारे लिए कुछ करके मुझे बहुत ख़ुशी होगी.
पब – अंकल गलत मत समझियेगा. मैं माहि से शादी करना चाहता हु. आप माहि का हाथ मेरे हाथो में देंगे.
दीनदयाल पब को देखता रहा गया. एक दम से उसकी बेटी की शादी की बात वो भी इतने बड़े आदमी से, और उससे जिसकी पहले से hi कई पत्नी है. वो अपनी सोच में गम हो गया. और पब चुप बैठा उसके जबाब का इन्तजार काने लगा. काफी देर तक वह ख़ामोशी छै रही. पब फिर हिम्मत कर के बोलै.
पब – अंकल, एक बार माहि से भी बात कर लेना कोई भी जवाब देने से पहले. वो भी मुझसे प्यार करती है.
दीनदयाल को भी पता था की कोई है जो माहि के दिल में बसा है. पैर कोण है वो ये नहीं जनता था. उसने अपनी बेटी को रातो में रोटा देखा था. वो जब भी शादी की बात करता तो माहि ताल जाती. और जब उससे पूछता की तुम किसी से प्यार करती हो तो चुप रहती. बेटी के दिल का हाल दीनदयाल से छुपा नहीं था. पैर माहि ने आज तक अपने दिल का हाल अपने बापू को नहीं बताया था. वैसे भी लड़किया अक्सर ये बाते अपनी माँ से करती है और माहि की कोई माँ तो थी नहीं. वो किस्से कहती. दीनदयाल काफी देर तक सोचता रहा. फिर पब को बोल कर किचन में आ गया जहा पैर उसकी दोनों बेतिया बहुत खुश थी. और खाना बना रही थी. आरसे बाद दीनदयाल ने अपनी बेटी के फेस पे ख़ुशी देखि थी.
दीनदयाल – माहि बीटा, क्या पंकज hi वो लड़का है जिसका तुमको इन्तजार था?
माहि तो मरे सरम के कुछ नहीं बोल पति, नजरे निचे कर के कड़ी रहती है. पैर शशि ने दिलदायल को जवाब दिया.
शशि – हाँ बापू, ये hi है वो जो दीदी के दिल में बास्ते है.
माहि शशि की और घूरती है तो दिलदायल वह से चले जाते है और दोनों बहनो की नौकचौक फिर सुरु हो जाती है. अब दीनदयाल पब के सामने बेथ कर बोलते है.
दीनदयाल – बीटा मुझको कुछ अजीव लग रहा है. अपनी बेटी का हाथ उस आदमी के हाथो में देते हुए जिसकी पहले से इतनी पत्नी है. तुम आमिर भी बहुत हो. और मैं तुमको शादी में कुछ दे भी नहीं पाउगा. और साफ़ कहु तो दिल में एक दर है की कही तुम मेरी बेटी को बाद में छोड़ न दो.
पब – अंकल पहली बात तो ये की मुझको केवल माहि चाहिए. और कुछ भी नहीं. और दूसरी बात ये की आप अपना ये दर अपने मन से निकल दो की मरने से पहले में माहि को छोड़ सकता हु. यदि आप हाँ कहेगे तो आपको वो बात भी बता दुगा जिस वजह से मैं इतनी शादी कर रहा हु. और क्यों माहि को कभी नहीं छोड़ सकता…
दीनदयाल – बीटा मेरी तरफ से तो हाँ है. आज सालो बाद मेरी बेटी के फेस पिउ ो चमक है जो पता नहीं कहा चली गई थी. और ये सब तुम्हारी वजह से है मैं ये भी जनता हु. तो तुमको न कहा कर मैं अपनी बेटी को जिंदगी भर दुखी नहीं रखा चाहता. पैर फ्यूचर में भी वो दुखी न हो इसलिए तुमसे रिक्वेस्ट है की उसको कभी बिच मजदार में छोड़ मत देना.
पब – नहीं अंकल ऐसा कभी नहीं होगा, ये मेरा वादा है आपसे…
दीनदयाल – बीटा अब अंकल नहीं पापा या बापू कहा सकते हो..
तभी ये दोनों लड़की भी खाना ले कर आ गयी. और दीनदयाल की ये बात सुन ली शशि तो ख़ुशी से उछाल पड़ी, पैर माहि सरमने लगी. और खाने की 2 थालिया रख कर जाने लगी.
पब – माहि तुम यहाँ बैठो तुमसे और बापू से कुछ बात करनी है. शशि क्या तुम हम तीनो को कुछ देर के लिए अकेला छोड़ सकती हो.
पब की बात सुन कर शशि घर से बहार चली गयी और माहि अपने बापू के पास बेथ गयी.
पब – अब में जो बताने जा रहा हु सायद आपको उस पैर विस्वाश न हो, पैर ये सच है. और उसका साबुत में खुद हु.
दीनदयाल – ऐसी क्या बात है बीटा..
पब – अंकल मेरा एक टारगेट है. सयद अपने दस माँ और डलासुर के बारे में सुना हो.
दीनदयाल – बीटा में उनके बारे में सब जनता हु. वो दानवो के राजा रानी है. पैर तुम कैसे उनको जानते हो.
पब – मैं जो भी हु दस माँ की कृपा से हु. फिर पब अपने बारे में बताने लगा. की कैसे जंगल में पंहुचा, कैसे उसे दस माँ ने एक टारगेट के लिए चुना. वो अपनी पूरी बात को शार्ट में बताता गया. उसने सेक्स और जुली के पास मिली लड़कियों को छोड़ कर सब बता दिया और ये भी बता दिया की वो माहि से शादी करके भी एक पावर को हाशिल करेगा. और उस पावर को सेव रखने के लिए माहि का उसके साथ हमेशा रहना जरुरी है. इसलिए वो उसे कभी नै छोड़ सकता. और वो hi उस हवन को भी करेगा.
दीनदयाल – बीटा यदि तुम केवल ये भी बोल देते की तुम पैर मणिशंकर जी का हाथ है तो मैं तुमसे बिना कुछ पूछे माहि से तुम्हारी सधी करवा देता. मेने उनके साथ में hi गुरु सत्यानंद जी से ज्ञान प्राप्त किया है. बाद में मणि जी को गुरूजी ने आश्रम का मुखिया बनाया. और हम लोग अपने -2 रस्ते हो लिए. कुछ आज भी वही आश्रम में मणि जी के साथ अपना जीवन काट रहे है.
पब – तो आप मणि जी को जानते हिअ ये तो अच्छी बात है. तो बताइये शादी कब करनी है. वैसे भी ये शादी तो उस क्रिया के हिसाब से होगी तो उसने गुरु के अलावा किसी का भी काम नहीं है.
दीनदयाल – वो सब तो ठीक है. पैर मेरी और मेरे और बच्चो की इच्छा का क्या होगा. हम तो अपनी बेटी की नार्मल शादी होते देखना चाहते है.
पब कुछ सोच कर गुरु को फ़ोन करके दीनदयाल की इच्छा बताता है तो गुरु कहा देती है की वो सब होने के बाद भी क्रिया की जा सकती है बस सुहागरात नहीं होनी चाहिए.
पब की बात से माहि शर्मा के भाग जाती है और दीनदयाल और पब है देते है.
दीनदयाल - बीटा आज से 10 दिन बाद शादी का अच्छा महूरत है. तो उस दिन hi सभी रस्मो को पूरा कर देते है.
पब – ठीक है ये सब आप कहा करना चाहेंगे, यहाँ गाओं में या कही और.
दीनदयाल – गाओं में hi ठीक रहेगा.
पब – ok, मैं सब अरेंजमेंट कर दुगा.