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- Dec 5, 2013
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सविता – दीदी हमारे तो समाज में hi नहीं आ रहा की क्या करे. कैसे अपने सुहाग की मदत करे कुछ समाज नहीं आ रहा.
गुरु – ये फ़ोन कब से बज रहा है काम से काम इसको तो उदा कर बात कर सकते थे न.
गुरु ये बोल कर पब के हाथ से मोबाइल निकलती है. तो देखती है की उसमे माहि की 6 मिस कॉल्स है. वो देख hi रही थी की फ़ोन फिर बज उड़ता है. तो गुरु फ़ोन को उड़ाती है.
गुरु – hello माहि मैं गुरु बोल रही हु.
माहि – नमस्ते दीदी, दीदी ये कहा है बात करते -2 चुप हो गए थे. और अब फ़ोन नहीं उदा रहे. ये ठीक तो है न.
गुरु – माहि अभी ये ठीक नहीं है. तुम बाद में बात करना.
ये कहा कर गुरु फ़ोन डिसकनेक्ट कर देती है और कामिनी और जय को हल्दी का पानी लेन को बोलती है. वह पेय, माउद और काजल भी थी. तो गुरु काजल और जय को इसरा करती है की इन दोनों को ले कर अंदर जाओ. गुरु अवनि और पारी को ऐडा के साथ अंदर भेज देती है. ऐडा का ख्याल रखने के लिए. खुद, अंकिता और सविता की मदत से पब के पापडे उतरने लगती है. एरिका भी इनकी मदत कर रही थी. एरिका को कुछ समाज नहीं आ रहा था. पैर ये तो वो भी समाज चुकी थी की पब की जान खतरे में है. सरीर अकड़ा होने की वजा से कपडे निकल नहीं प् रहे थे तो उनको पहाड़ कर निकल दिया जाता है. गुरु पब की बॉडी को देखते है तो उसके सीने पे चमज जयादा थी. पैर वो चमक पूरी बॉडी पे भी थी. पैर सीने की तुलना में काम थी. गुरु पब के सरीर को हल्दी के पानी से दोने लगती है. पब अभी भी सोफे पे hi था. पब के सरीर से वो चमक निकल कर सोफे में जाने लगती है. ये लोग बड़ी मुश्किल से पब को हिल्ला प् रहे थे. वो तो सविता थी जो पब को हिल्ला प् रही थी. पब की बॉडी से चमक के पाउडर को निकलने के लिए उसको पलटा और हिलना पद रहा था. पब का सरीर मिटटी के पुतले के जैसा हो गया था. जैसे मूर्ति का हाथ, पेअर जैसे हो वैसे hi रहते है वैसे hi पब के सरीर का हाल था. मूर्ति की तरह उसको घुमा कर उसकी पूरी बॉडी को साफ़ किया जा रहा था.
अभी पब की सफाई चल hi रही थी की फिर से पब का फ़ोन बजने लगा. गुरु को फ़ोन बजने पे गुस्सा आया. पैर फिर भी वो फ़ोन को रेसवे करने गयी अंकिता और सविता सफाई कर रही थी. और एरिका और कामिनी हल्दी का पानी बना कर उनको दे रही थी. गुरु ने देखा तो माहि का hi फ़ोन था. तो गुरु को और भी गुस्सा आया. उसने फ़ोन उड़ाते hi गुस्से में बोलै.
गुरु – माहि कहा न की इनकी तबियत ठीक नहीं है. बाद में बात करना. समाज नहीं आ रहा है क्या.
दीनदयाल – जी मैं दीनदयाल बोल रहा हु. माहि बहुत देर से रो रही है. पंकज जी को क्या हो गया है. और आप कोण बोल रही है?
गुरु अपने गुस्से को कण्ट्रोल करके – जी मैं गुरुपित पंकज जी की पत्नी बोल रही हु. अभी इनकी तबियत ठीक नहीं है. दीनदयाल जी माहि को समझाइये की रोने से कुछ नहीं होगा. वैसे hi हमारे समाज नहीं आ रहा की क्या और कैसे करे.
दीनदयाल – जी आप तो मणि जी की शिष्य है न. तो मणि जी से क्यों नहीं पूछती उनके पास हल बीमारी का इलाज है. और यदि मणि जी से बात हो तो उनको मेरा प्रदम कहना.
गुरु – आप गुरूजी को कैसे जानते है. मेने गुरूजी से पूछा था वो आ रहे है. पैर उनके पास भी इस प्रॉब्लम का सलूशन नहीं है.
दीनदयाल चोकते हुए – क्या कहा रही हो मणि जी को सभी आयुर्वेद का गायन गुरु सत्यानंद जी ने दिया है. उनको जितना ज्ञान प्राप्त है उससे वो हर रोगी को ठीक कर सकते है. फिर पंकज जी को ऐसा क्या हो गया है की मणि जी के पास उसका इलाज नहीं है.
गुरु – ोूहः हाँ याद आया अपने और गुरु जी ने एक साथ गुरु सत्यानंद जी से दीक्षा ली है न. मुझको पब ने बताया था. सॉरी मेने आपसे गुस्से में बात की.
दीनदयाल – कोई बात नहीं मैं जनता हु तुम बहुत परेशां हो. पैर मुझको बताओ तो पंकज जी को हुआ क्या है.
गुरु – गुरूजी ने बताया है की इन पैर स्थिलासँ का प्रयोग किया गया है.
दीनदयाल चोकते हुए – क्या कहा स्थिलासँ? पैर ये तो दानवो की क्रिया है. पंकज पैर इसे किसने कर दी.
गुरु – त्रिकाल ने
दीनदयाल – ओह्ह तो त्रिकाल इस हद तक गिर चुक्का है की प्रतिबंदित क्रियाओ का भी प्रयोग कर रहा है. पैर मणि जी तो इसका तोड़ जानते है. गुरु जी ने हम 6 लड़को को hi ये क्रिया सिखाई थी की यदि कोई दानव कभी किसी मानव पे किसका गलत इस्तेमाल करे तो उसे कैसे तोडा जाता है.
गुरु – तो क्या आप भी जानते है इसका तोड़?? वो क्या है गुरु जी को आने में समय लगेगा और गुरूजी ने बताया है की यदि 6 हॉर्स में इसको नहीं ख़त्म किया गया तो ये मर जायेगे. (ये कहा कर गुरु रोने लगती है. जो अभी तक अपने आप को सभले हुई थी. और सबको भी सभाल रही थी. किसी को बिना कुछ बताये पब के मूट के दर को अकेले hi सहा रही थी. दीनदयाल को सहारे के रूप में देख कर गुरु को रोना आ जाता है)
दीनदयाल – प्लीज आप रोइये मत. मैं जनता तो था. पैर मुझको पूरी तरह याद नहीं है. पैर यदि मणि जी मुझको गाइड करे तो में कर सकता हु.
गुरु – पैर गुरूजी तो बोले थे की इसके लिए एक स्पाइकल पत्ते के पाउडर की जरुरत होती है.
दीनदयाल – हाँ ये तो मुझको भी पता है. वो पाउडर तो मेरे पास है पैर मुझको मंत्र पूरीतरह याद नहीं है. और न hi मैं सरीर से ठीक हु की वो सब कर सकू.
गुरु – आप उन सब की चिंता मत करिये. वो सब तो मैं देख लगी. मंत्रो के लिए मणि जी फ़ोन पे आपको सब बट्टे जायेगे. और जो भी फिजिकल करना होगा उसके लिए हम सब है. बस आप जल्दी से वो पाउडर ले कर ाजैये. आपका हम सब पैर बहुत बड़ा एहसान होगा.
दीनदयाल – किसी बात करती हो. वो मेरे लिए भी सब कुछ है उसके कारन hi आज मेरे घर में ख़ुशी है. वो मेरी बेटी की जिंदगी है. और मेरी बेटी मेरी. तो कोई अपनी जिंदगी बचा कर भी किसी पे एहसान करता है क्या. आप चिंता मत कीजिये में जल्द से जल्द पहुंचने की कोसिस करता हु. मैं माहि को साथ ले कर आ रहा हु.
गुरु – ठीक है आप जल्दी आओ. पैर आप कैसे आएंगे??
दीनदयाल – जी बस से..
गुरु – ठीक है आप वह से बस से निकालिये मैं यहाँ से कार बजती हु. आप अपनी बस का नंबर दे देना. आपको कार रस्ते में hi पिक कर लेगी.
दीनदयाल – जी ठीक है मैं भी निकलता हु.
दीनदयाल माहि को अपना पुराण संदूक लेन को बोलते है. उसमे से वो उस पाउडर को निकल कर माहि के साथ चल देते है. वैसे तो उनकी कंडीशन अभी चलने लायक नहीं थी. पैर फिर भी वो तेज़ी से चलते हुए हाइवे पे आ कर बस में बेथ जाते है. माहि बस का No. पब के फ़ोन पैर भेज देती है.
ीदार गुरु ने भी फ़ोन को डिसकनेक्ट होते hi अंकिता को सैंडी के साथ माहि के घर की और भगा दिया. गुरु ने अंकिता से बस इतना कहा था की यदि पब को जिन्दा देखना है तो माहि और उसके पिता जी को जल्दी से जल्दी ले कर आये. अंकिता ये सुन कर सैंडी को साथ में एक ले कर फुल स्पीड से कार डोढ़ा देती है.
गुरु मणि जी को फ़ोन करती है और दीनदयाल जी की साडी बाते बता देती है. मणि दीनदयाल का नाम सुन कर खुश हो जाता है. कियोकि दीनदयाल एक अच्छा स्टूडेंट था गुरुकुल के दिनों में. और मणि जी के दोस्तों में से एक था. आज वो दोस्ती वो साथी hi काम आने वाला था. गुरु ने मणि जी से बात करके सविता, कामिनी और एरिका को भी दीनदयाल के बारे में बता दिया था. एरिका को बस इतना hi समाज आया की कोई पब को बचने के लिए आ रहा है.
अंकिता को घर से निकले 15 मं hi हुए थे. की गुरु ने उसको फ़ोन कर दिया.
गुरु – अंकिता मिल गए दीनदयाल जी??
अंकिता – दीदी तोड़ा सब्र करिये. मैं कार में हु. और कार से दीनदयाल जी के घर तक पहुंचने में 2.5-3 हॉर्स लगते है.
गुरु – क्या इतनी दूर घर है उनका??
अंकिता – हाँ दीदी, और फ़ोन रखती हु. कार फुल स्पीड में है. बात करते हुए चलने में प्रॉब्लम हो रही है. ok bye
फिर अंकिता फ़ोन कट कर कार की स्पीड बड़ा देती है.
सविता – दीदी हमारे तो समाज में hi नहीं आ रहा की क्या करे. कैसे अपने सुहाग की मदत करे कुछ समाज नहीं आ रहा.
गुरु – ये फ़ोन कब से बज रहा है काम से काम इसको तो उदा कर बात कर सकते थे न.
गुरु ये बोल कर पब के हाथ से मोबाइल निकलती है. तो देखती है की उसमे माहि की 6 मिस कॉल्स है. वो देख hi रही थी की फ़ोन फिर बज उड़ता है. तो गुरु फ़ोन को उड़ाती है.
गुरु – hello माहि मैं गुरु बोल रही हु.
माहि – नमस्ते दीदी, दीदी ये कहा है बात करते -2 चुप हो गए थे. और अब फ़ोन नहीं उदा रहे. ये ठीक तो है न.
गुरु – माहि अभी ये ठीक नहीं है. तुम बाद में बात करना.
ये कहा कर गुरु फ़ोन डिसकनेक्ट कर देती है और कामिनी और जय को हल्दी का पानी लेन को बोलती है. वह पेय, माउद और काजल भी थी. तो गुरु काजल और जय को इसरा करती है की इन दोनों को ले कर अंदर जाओ. गुरु अवनि और पारी को ऐडा के साथ अंदर भेज देती है. ऐडा का ख्याल रखने के लिए. खुद, अंकिता और सविता की मदत से पब के पापडे उतरने लगती है. एरिका भी इनकी मदत कर रही थी. एरिका को कुछ समाज नहीं आ रहा था. पैर ये तो वो भी समाज चुकी थी की पब की जान खतरे में है. सरीर अकड़ा होने की वजा से कपडे निकल नहीं प् रहे थे तो उनको पहाड़ कर निकल दिया जाता है. गुरु पब की बॉडी को देखते है तो उसके सीने पे चमज जयादा थी. पैर वो चमक पूरी बॉडी पे भी थी. पैर सीने की तुलना में काम थी. गुरु पब के सरीर को हल्दी के पानी से दोने लगती है. पब अभी भी सोफे पे hi था. पब के सरीर से वो चमक निकल कर सोफे में जाने लगती है. ये लोग बड़ी मुश्किल से पब को हिल्ला प् रहे थे. वो तो सविता थी जो पब को हिल्ला प् रही थी. पब की बॉडी से चमक के पाउडर को निकलने के लिए उसको पलटा और हिलना पद रहा था. पब का सरीर मिटटी के पुतले के जैसा हो गया था. जैसे मूर्ति का हाथ, पेअर जैसे हो वैसे hi रहते है वैसे hi पब के सरीर का हाल था. मूर्ति की तरह उसको घुमा कर उसकी पूरी बॉडी को साफ़ किया जा रहा था.
अभी पब की सफाई चल hi रही थी की फिर से पब का फ़ोन बजने लगा. गुरु को फ़ोन बजने पे गुस्सा आया. पैर फिर भी वो फ़ोन को रेसवे करने गयी अंकिता और सविता सफाई कर रही थी. और एरिका और कामिनी हल्दी का पानी बना कर उनको दे रही थी. गुरु ने देखा तो माहि का hi फ़ोन था. तो गुरु को और भी गुस्सा आया. उसने फ़ोन उड़ाते hi गुस्से में बोलै.
गुरु – माहि कहा न की इनकी तबियत ठीक नहीं है. बाद में बात करना. समाज नहीं आ रहा है क्या.
दीनदयाल – जी मैं दीनदयाल बोल रहा हु. माहि बहुत देर से रो रही है. पंकज जी को क्या हो गया है. और आप कोण बोल रही है?
गुरु अपने गुस्से को कण्ट्रोल करके – जी मैं गुरुपित पंकज जी की पत्नी बोल रही हु. अभी इनकी तबियत ठीक नहीं है. दीनदयाल जी माहि को समझाइये की रोने से कुछ नहीं होगा. वैसे hi हमारे समाज नहीं आ रहा की क्या और कैसे करे.
दीनदयाल – जी आप तो मणि जी की शिष्य है न. तो मणि जी से क्यों नहीं पूछती उनके पास हल बीमारी का इलाज है. और यदि मणि जी से बात हो तो उनको मेरा प्रदम कहना.
गुरु – आप गुरूजी को कैसे जानते है. मेने गुरूजी से पूछा था वो आ रहे है. पैर उनके पास भी इस प्रॉब्लम का सलूशन नहीं है.
दीनदयाल चोकते हुए – क्या कहा रही हो मणि जी को सभी आयुर्वेद का गायन गुरु सत्यानंद जी ने दिया है. उनको जितना ज्ञान प्राप्त है उससे वो हर रोगी को ठीक कर सकते है. फिर पंकज जी को ऐसा क्या हो गया है की मणि जी के पास उसका इलाज नहीं है.
गुरु – ोूहः हाँ याद आया अपने और गुरु जी ने एक साथ गुरु सत्यानंद जी से दीक्षा ली है न. मुझको पब ने बताया था. सॉरी मेने आपसे गुस्से में बात की.
दीनदयाल – कोई बात नहीं मैं जनता हु तुम बहुत परेशां हो. पैर मुझको बताओ तो पंकज जी को हुआ क्या है.
गुरु – गुरूजी ने बताया है की इन पैर स्थिलासँ का प्रयोग किया गया है.
दीनदयाल चोकते हुए – क्या कहा स्थिलासँ? पैर ये तो दानवो की क्रिया है. पंकज पैर इसे किसने कर दी.
गुरु – त्रिकाल ने
दीनदयाल – ओह्ह तो त्रिकाल इस हद तक गिर चुक्का है की प्रतिबंदित क्रियाओ का भी प्रयोग कर रहा है. पैर मणि जी तो इसका तोड़ जानते है. गुरु जी ने हम 6 लड़को को hi ये क्रिया सिखाई थी की यदि कोई दानव कभी किसी मानव पे किसका गलत इस्तेमाल करे तो उसे कैसे तोडा जाता है.
गुरु – तो क्या आप भी जानते है इसका तोड़?? वो क्या है गुरु जी को आने में समय लगेगा और गुरूजी ने बताया है की यदि 6 हॉर्स में इसको नहीं ख़त्म किया गया तो ये मर जायेगे. (ये कहा कर गुरु रोने लगती है. जो अभी तक अपने आप को सभले हुई थी. और सबको भी सभाल रही थी. किसी को बिना कुछ बताये पब के मूट के दर को अकेले hi सहा रही थी. दीनदयाल को सहारे के रूप में देख कर गुरु को रोना आ जाता है)
दीनदयाल – प्लीज आप रोइये मत. मैं जनता तो था. पैर मुझको पूरी तरह याद नहीं है. पैर यदि मणि जी मुझको गाइड करे तो में कर सकता हु.
गुरु – पैर गुरूजी तो बोले थे की इसके लिए एक स्पाइकल पत्ते के पाउडर की जरुरत होती है.
दीनदयाल – हाँ ये तो मुझको भी पता है. वो पाउडर तो मेरे पास है पैर मुझको मंत्र पूरीतरह याद नहीं है. और न hi मैं सरीर से ठीक हु की वो सब कर सकू.
गुरु – आप उन सब की चिंता मत करिये. वो सब तो मैं देख लगी. मंत्रो के लिए मणि जी फ़ोन पे आपको सब बट्टे जायेगे. और जो भी फिजिकल करना होगा उसके लिए हम सब है. बस आप जल्दी से वो पाउडर ले कर ाजैये. आपका हम सब पैर बहुत बड़ा एहसान होगा.
दीनदयाल – किसी बात करती हो. वो मेरे लिए भी सब कुछ है उसके कारन hi आज मेरे घर में ख़ुशी है. वो मेरी बेटी की जिंदगी है. और मेरी बेटी मेरी. तो कोई अपनी जिंदगी बचा कर भी किसी पे एहसान करता है क्या. आप चिंता मत कीजिये में जल्द से जल्द पहुंचने की कोसिस करता हु. मैं माहि को साथ ले कर आ रहा हु.
गुरु – ठीक है आप जल्दी आओ. पैर आप कैसे आएंगे??
दीनदयाल – जी बस से..
गुरु – ठीक है आप वह से बस से निकालिये मैं यहाँ से कार बजती हु. आप अपनी बस का नंबर दे देना. आपको कार रस्ते में hi पिक कर लेगी.
दीनदयाल – जी ठीक है मैं भी निकलता हु.
दीनदयाल माहि को अपना पुराण संदूक लेन को बोलते है. उसमे से वो उस पाउडर को निकल कर माहि के साथ चल देते है. वैसे तो उनकी कंडीशन अभी चलने लायक नहीं थी. पैर फिर भी वो तेज़ी से चलते हुए हाइवे पे आ कर बस में बेथ जाते है. माहि बस का No. पब के फ़ोन पैर भेज देती है.
ीदार गुरु ने भी फ़ोन को डिसकनेक्ट होते hi अंकिता को सैंडी के साथ माहि के घर की और भगा दिया. गुरु ने अंकिता से बस इतना कहा था की यदि पब को जिन्दा देखना है तो माहि और उसके पिता जी को जल्दी से जल्दी ले कर आये. अंकिता ये सुन कर सैंडी को साथ में एक ले कर फुल स्पीड से कार डोढ़ा देती है.
गुरु मणि जी को फ़ोन करती है और दीनदयाल जी की साडी बाते बता देती है. मणि दीनदयाल का नाम सुन कर खुश हो जाता है. कियोकि दीनदयाल एक अच्छा स्टूडेंट था गुरुकुल के दिनों में. और मणि जी के दोस्तों में से एक था. आज वो दोस्ती वो साथी hi काम आने वाला था. गुरु ने मणि जी से बात करके सविता, कामिनी और एरिका को भी दीनदयाल के बारे में बता दिया था. एरिका को बस इतना hi समाज आया की कोई पब को बचने के लिए आ रहा है.
अंकिता को घर से निकले 15 मं hi हुए थे. की गुरु ने उसको फ़ोन कर दिया.
गुरु – अंकिता मिल गए दीनदयाल जी??
अंकिता – दीदी तोड़ा सब्र करिये. मैं कार में हु. और कार से दीनदयाल जी के घर तक पहुंचने में 2.5-3 हॉर्स लगते है.
गुरु – क्या इतनी दूर घर है उनका??
अंकिता – हाँ दीदी, और फ़ोन रखती हु. कार फुल स्पीड में है. बात करते हुए चलने में प्रॉब्लम हो रही है. ok bye
फिर अंकिता फ़ोन कट कर कार की स्पीड बड़ा देती है.