MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 14 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 106

मणि – लता थोड़ा डेर्या रखो. तुमको तो अभी और भी बहुत कुछ सहना है. सायद अब वो वक्त आ गया है की वो सच तुम सबके सामने आ जाये जिसको छुपते हुए अल्पना और प्रतिक ने जान दे दी. लता मैं सब कुछ बताउगा पैर पब के होश में आने के बाद. पैर याद रहे केवल तुम और वो hi पब को अभी सभाल सकते हो. सच बहुत कड़वा है. तुमको सहन नहीं होगा. और पब तो पागल हो जायेगा. इसलिए तुमको वो सब सहन करना होगा. और पब को सभालना होगा. यदि तुम ये नहीं कर पायी तो सब ख़तम हो जायेगा.

लता – केसा क्या है जो सहन सकती के बहार है.

मणि – बहुत कुछ ऐसा है जो तुम दोनों की सहन सकती के बहार होगा. इसलिए मेने इस सच को छुपा कर रखा था. पैर अब सच को छुपना भी मिंकिन नहीं है. और तुम सब सुनो (मणि पब की सभी पत्नियों की और इसरा करते हुए) याद रहे कल कुछ भी हो पर तुम सबको एक हो कर पब को सभालना है. ये तो वक्त hi बताएगा की पब सच जान कर क्या करता है. पैर याद रहे ये सच उसकी जिंदगी को बदल देगा. अब तो कल का सूरज hi तय करेगा की ये सच कितनो की जिंदगी में बदलाब लता है.

फिर मणि जुली की और देख कर – अब तुम सुनो जुली, सायद तुमको कोई गलत फेमि हुई है. या फिर तुम पूरा सच नहीं जानती. नहीं तो किसी को की गलती का जिम्मेदार पब को न बोलती. पता नहीं किस किस से क्या क्या गलती हुई है. पैर हर वो इंसान जो इस सच से जुड़ा है को ये न सोचे की ये सब उससे हुआ है. कियोकि ये सब अपने हिसाब से सब सही hi कर रहे थे. पैर टाइम और त्रिकाल ने सब कुछ बदल दिया. न जाने कितनो की जिंदगी त्रिकाल के लिए या त्रिकाल की वजह से बर्बाद हो चुकी है और न जाने कितनी और हो रही है. (फिर मणि जी गुरु की और देखते है) गुरु मेरा मित्र दीनदयाल कहा है.

गुरु – गुरूजी वो दूसरे रूम में आराम कर रहे है. चलिए उनके पास, वो अपने मिलने के लिए hi रुके है, उनके घर पर उनके बच्चे अकेले है. एप क बार उनसे मिल कर उनको जाने की आज्ञा दे.

फिर मणि चल देता है दीनदयाल से मिलने. वो दीनदयाल से मिलकर बहुत खुश होता है. दोनों बहुत देर ताका पास में बाते करते रहते है. और दीनदयाल मिल मिलने का कहा कर अपने घर को चला जाता है. अंकिता ने उनको सैंडी के साथ भेज दिया था.

रात हो चुकी थी. पब को उसके रूम में बीएड पैर लिटा दिया था. मणि, लता, गुरु, जुली और सविता उसी रूम में थे. और सबको सोने के लिए भेज दिया था. कोई भी पब के पास से जाना नहीं चाहता था. पैर गुरु ने सबको भेज दिया था. कामिनी और ऐडा तो बहुत रोई थी. पब की उन बातो ने इन दोनों का दिल तोड़ दिया था. जिस आदमी को वो कबका भूल चुकी थी उसकी वजह से फिर आज उसको दर्द मिला था.

सब बैठे -2 सो गए थे. सुबह के 5 ऍम को पब एक चीख के साथ उड़ता है. – मम्माआआआ

लता दूध कर पब को अपनी बहो में ले लेती है. और बोली – हाँ मेरे bête में कही पैर हु. तू सो जा मेरे लाल सो जा…

पब – nahiiiiiiiiii nahiiiiiiiiiiii मैं सो नहीं सकता, मेरी वजह से, उस भानु की वजह से, मेरी माँ ने जो दर्द सहा है. अब मैं सो नहीं सकता मुझको मरना है सबको मरना है…. सबको मार के मैं खुद भी मार जाउगा. यही मेरे पापो की सजा होगी. (पब का गुस्से धिरे -2 बाद रहा था. जैसे -2 उसे रात की बाते याद आ रही थी वैसे वैसे पब का गुस्सा बढ़ता जा रहा था)

मणि – क्या हुआ है bête. किसी बाते क्यों कर रहे हो. क्या तुम भूल गए तुम्हारा टारगेट दुनिया को मिटाना नहीं उसे बचाना है.

पब – भाड़ ने जाये टारगेट और भाड़ में जाये ये दुनिया. जब इस दुनिया ने hi मुझसे सब चीन लिया तो मैं क्यों इस दुनिया को बचाओ.

मणि – कियोकि तुम जिनके लिए रो रहे हो उनकी भी यही इच्छा थी. भूल गए उस लेटर को. जो तुम्हारी माँ ने तुम्हारे लिए छोड़ा था. तुम तो एक बार मर चुके हो न और ये जिंदगी तुमको दस माँ ने दी है. इस पैर तुम्हारा नहीं उनका हक़ है. और उन्होंने hi तुमको ये काम सपा है.

पब – मैं कुछ नहीं जनता, मुझको अपनी मरी हुई माँ और बहन की सोगन्द है में उनका बदला ले कर रहुगा. हर हाल में. मैं हर उस साक्ष को उतना hi दर्द दुगा जितना मेरी माँ और बहन ने सहा है. मार दुगा में सबको.. कोई नहीं बचेगा इस दुनिया में.

मणि – मेने कब कहा की तुम बदला मत लो अपनी माँ की मूट का. पैर किस्से लोगे बदला?? किसको मरना चाहते हो?? बोलो?? इन मासूमो को?? कामिनी को, पेय को या ऐडा को?? या इस गाओं के भोले लोगो को?? बोलो किसको मरोगे?? भूल गए ऐडा, कामिनी ने तुम्हारी जान बचने के लिए अपनी जान डाव पे लगा दी. यदि वोन ा होती तो तुम कबके मर चुके होते. उस पेय को मरोगे जिसने तुमको एक छोटी बहन का प्यार दिया. एक बहन की मात का बदला दूसरी बहन को मार कर लोगे???

पब मणि की बात सुन कर चुप रहा जाता है. उसके पास मणि की इन बातो का जवाब नहीं था. और मणि की हर एक बात उसका गुस्सा काम कर रही थी. पब को संत होता देख मणि फिर बोलने लगता है.

मणि – यदि तुम मरना hi चाहते हो तो उनको मारो जिनकी वजह से तुम्हारी पूरी जिंदगी बर्बाद हुई है. जिनकी वजह से तुम्हारी फॅमिली ने हर दुःख झेला है. तुम्हारे परिवार को दर्द देने वाले हर उस साक्ष को मारो. बोलो मार सकते को उन सब को जिन्होंने तुम्हारी hi नहीं न जाने कितने परिवारों की जिंदगी ख़राब की है.

पब – गुरु जी एक बार मुझको उसका नाम बात दो मैं उन सब को अभी मार दुगा. (ये बात पब ने बहुत गुस्से में दांतो को भीचते हुए बोली)

मणि – पहले संत हो जाओ. कियोकि गुस्से से कोई भी युद्ध नहीं जीता जाता. और धर्म युद्ध तो बिलकुल भी नहीं. अपने इस गुस्से को अपने अंदर दबा लो बीटा. अपने इस गुस्से को अपनी ताकत बनाओ न की कमजोरी.

मणि की बातो का पब पे आसार हो रहा था. वो खुद को संत करने की कोसिस कर रहा था. और जैसे -2 वो संत हो रहा था वैसे -2 उसके मन में सवालो की लाइन लग्न लगी थी.

माँ के साथ ऐसा क्या हुआ की उनको यहाँ आना पड़ा.?

ट्रेनिंग के बाद माँ कहा रही. उनके साथ और क्या -2 हुआ.?

जुली ने मुझको अपनी माँ की बर्बादी का जिमीडा क्यों बोलै?? जबकि मैं तो दिल्ली में था और मुझको कुछ भी नहीं पता??

माँ के यदि र स्की वजह से आत्महत्या नहीं की तो क्या वजह थी की माँ ने वो कदम उदय??

जब माँ और पिताजी इतने काबिल थे की उन्होंने रतन ग्रुप्स की नीव राखी तो उसको मजदूरी करके जीवन क्यों बिताना पड़ा??

क्यों माँ कभी लता माँ के पास नहीं गयी??

आईज और न जाने कितने सवाल थे जो उसके मन में उड़ रहे थे. वो अपनी hi सोच में गम था. सब उसी को देख रहे थे. पैर पब खुद से hi अपने आपसे बात करने में लगा था. पैर कोई भी बात या कोई भी जवाब उसके पास नहीं था. जब उसे कुछ समाज नहीं आया तो उसने मणि की और देखा. उसकी नजरो में एक सवाल था. एक चुंबन थी. जिसे देख कर मणि जी बोले.

मणि – बीटा मुझको पता है इस टाइम तुम्हारे मन में सवालो का मेला लगा है. और तुम उनके जवाब चाहते हो. जाओ और जा कर फ्रेश हो लो. जब तक तुम्हारे जवाब भी आ जायेगे. कोई है जिसको मेने बुलाया है. कुछ hi देर में वो आता होगा.

पब भी मणि की बात मान कर फ्रेश होने चला गया. वो एक दम संत लग रहा था. पैर उप्पेर से जितना संत था. मन में उतनी hi आग लगी हुई थी. उसके मन में केवल एक hi बात घूम रही थी की उसकी माँ और बहन को वो दर्द सहना पड़ा है जिस दर्द को एक नजान लड़की के लिए भी उससे बर्दाश नहीं था. उनको सेक्स ट्रेनिंग करनी पड़ी है. कोण है इस सब के पीछे? कैसे सहा होगा माँ ने वो सब. वो जनता था की इस ट्रेनिंग में क्या -2 होता है. कैसे -2 दर्द दिए जाते है. उसे वो सब याद आ रहे थे. और उसके दिल और दिमाग को हिला रहे थे. फिर भी उसने उप्पेर से अपने आप को संत किया हुआ था.

कुछ देर में सब फ्रेश हो चुके थे. और एक जगह बैठे हुए थे. हवेली के सभी लोग वह मौजूद थे केवल ऐडा, और अवनि को छोड़ कर. इतने लोगो के होते हुए भी वह पैर मूट का सा सन्नाटा था. सब लोगो को मणि जी के बोलने का इन्तजार था. और मणि को किसी और का इन्तजार था. कुछ hi देर में मणि जी का फ़ोन बजता है. तो वो उसे नैनपुर के बस स्टैंड तक पहुंच केर वही रुकने को बोलता है.

मणि – गुरु किसी को भेज कर उन दोनों को यहाँ तक ले आओ.

मणि की बात सुन कर अंकिता उड़ कर मणि जी से उनका no. मांगती है. और सैंडी को ले कर चल देती है. सैंडी की आखों में आशु थे. अंकिता समाज जाती है की ये भी अल्पना माँ को चाहती होगी. कुछ hi देर में दोनों उन दोनों को ले कर घर पैर पहुंच जाते है. इतनी देर में कामिनी और सविता ने सबके लिए ब्रैकफास्ट रेडी कर लिया था. अभी 9ऍम हो रहे थे. अंकिता के साथ एक 35-40 साल का साधु था. और एक अंकिता की जैसे खूबसूरत लड़की थी. दोनों आ कर पहले मणि के पेअर छूटे है. और फिर मणि के पास में hi बेथ जाते है. पब उस लड़की को बड़े घोर से देख रहा था. और वो लड़की भी पब को देख कर मुस्कुरा रही थी. पब को लग रहा था की ये कोई अपनी है इसको वो अच्छे से जनता है पैर पहचान नहीं प् रहा कुछ hi पल में उसके फेस पैर हेरात के भाव आ जाते है. सब लोगो की नज़ारे पब और उस लड़की पे hi तिकी हुयी थी. पब बड़ी मुश्किल से मणि से उस लड़की की और इसरा करके बोलता है
 
अपडेट 107

मणि की बात सुन कर अंकिता उड़ कर मणि जी से उनका no. मांगती है. और सैंडी को ले कर चल देती है. सैंडी की आखों में आशु थे. अंकिता समाज जाती है की ये भी अल्पना माँ को चाहती होगी. कुछ hi देर में दोनों उन दोनों को ले कर घर पैर पहुंच जाते है. इतनी देर में कामिनी और सविता ने सबके लिए ब्रैकफास्ट रेडी कर लिया था. अभी 9ऍम हो रहे थे. अंकिता के साथ एक 35-40 साल का साधु था. और एक अंकिता की जैसे खूबसूरत लड़की थी. दोनों आ कर पहले मणि के पेअर छूटे है. और फिर मणि के पास में hi बेथ जाते है. पब उस लड़की को बड़े घोर से देख रहा था. और वो लड़की भी पब को देख कर मुस्कुरा रही थी. पब को लग रहा था की ये कोई अपनी है इसको वो अच्छे से जनता है पैर पहचान नहीं प् रहा कुछ hi पल में उसके फेस पैर हेरात के भाव आ जाते है. सब लोगो की नज़ारे पब और उस लड़की पे hi तिकी हुयी थी. पब बड़ी मुश्किल से मणि से उस लड़की की और इसरा करके बोलता है

पब (बहुत hi आश्चर्य से बोलता है) – गु… गुरु….. गगगगगगुरुजी….. ye….yeee गुरु जी…. ये di…di… ye….didi… hai…guruji ये…. दीदी है…..

मणि केवल हाँ में सर हिला देता है. उस लड़की (सोनल ) के मुस्कान गहरी हो जाती है. उसकी आखों से आशु आजाते है.. ीदार पब मणि जी का इसरा समाज कर एक दम खड़ा होता है.. उसकी आखों से आशु बहने लगते hai…wo एक दम से सोनल के पैरो में गिर पड़ता है. और उसके पैरो को पकड़ कर रोने लगता है…

पब – दीदी मुझको माफ़ कर दो. मेरी वजह से तुमको दुःख सहने पड़े. माफ़ कर दो मुझको…

सोनल में झुक कर पब को गले से लगा लिया. दोनों भाई बहिन कुछ देर तक ऐसे hi गले लगे रहे. और जब रट -2 दोनों खुद hi संत हूँ गए तो दोनों अलग हुए…

सोनल – बेतु तू तो एक दम बदल गया है क्या बॉडी बना ले है. मेरा भाई एक दम हीरो लग रहा है….

पब – चेंज तो दीदी आपमें भी आ गए है एक बार तो में आपको पहचान नहीं पाया. कियोकि आप जिन्दा हो ये मेने कभी सोचा hi नहीं था. पैर आज आप को सही देख कर मुझको बहुत ख़ुशी हो रही है. मैं बता नहीं सकता की मेरे दिल को कितना सुकून मिला है आपको जिन्दा देख कर. दिल का एक बोज उतर गया है. जीने की एक नयी उम्मीद बन कर आयी हो आप. पैर दीदी माँ को नहीं लायी कहा है माँ.

सोनल – भाई माँ नहीं रही, माँ ने सच में घर में खुद को जला लिया. करने तो वो सब मैं भी करने वाली थी पैर मुझको आग छूती उससे पहले hi में बेहोश हो गयी और वह पे गुरूजी ाँ वक्त पे पहुंच गए और मुझको गुरु जी ने बचा लिया और अपने साथ अपने आश्रम ले गए. पैर माँ ने पहले खुद को आग लगायी थी फिर घर को तो गुरूजी माँ को न बचा सके.

पब सोनल की बात सुन कर रोने लगता है. उसको लगा था की माँ भी जिन्दा होगी पैर माँ नहीं थी. उसको रोटा देख सोनल बोली – भाई तुझको ख़ुशी नहीं है की मैं जिन्दा हु जो तू रो रहा है.

पब – किसी बात करती हो दीदी. आपको सही देख कर तो मैं बहुत खुश हु. पैर मुझको लगा की माँ भी जिन्दा होगी. पैर वो तो सच में हमको अनाथ बना कर चली गयी. पैर दीदी आप इतने दिनों से कहा थी. क्यों नहीं आप मेरे पास??

सोनल पब की बात सुन कर चुप रही उसकी आखों में आशु आ गए. जिनको उन्होंने एक दम साफ़ कर दिया. ताकि पब देख न पाए. सभी लोग चुप बेथ कर भाई बहन का मिलान देख रहे थे. लता लगातार रो रही थी. उसके होंटो के एक मुस्कान भी थी. पैर उसे मणि की सामने बिच में बोलना ठीक नहीं लगा . सोनल को भी चुप देख कर मणि जी बोले.

मणि – बीटा ये मेरे साथ आश्रम में थी. इसको मेने hi रोक रखा था. मैं नहीं चाहता था की ये तुमसे मिले. जानना नहीं चाहोगे की मेने ऐसा क्यों किया?

पब हाँ मैं गार्डन हिला देता है.

मणि – पहले बात तो ये थी की तुम्हारा खुद का टिकना नहीं था. और ये वही पैर सेफ थी. दूसरी बात ये है की यदि तुम इससे मिलते तो पूछते की क्या हुआ था. आप कहा थी. क्या हुआ आपके साथ?? …ेट्स… इस तरह के बहुत सरे सवाल तुम्हारे मन में इस टाइम भी है न??

पब – हाँ, मैं ये सब जानना चाहता हु की क्या हुआ था.

मणि – तुमको याद है जब लता ने तुमसे पूछा था तुम्हारे वेयर में तब भी तुम बताते बताते बेहोश हो गए थे. और ये तो एक ऐसा सच है जो की सयद तुम बरदास hi न कर पाओ. तो बोलो मैं क्यों और कैसे तुमको ये सब बताओ.? यदि तुमको कुछ हुआ तो ये जो तुम देख रहे हो ये सब ख़तम हो जायेगा. (पब की नई फॅमिली की और इसरा करते हुए)

पब – नहीं मुझको कुछ नहीं होगा में सब बर्दाश कर लगा. पैर मुझको जानना है की हुआ क्या था.

मणि – तुम ऐसा बोल रहे हो पैर तुम कर नहीं पाओगे… तुम बहुत कमजोर हो. लड़कियों की तरह रट हो, पागलो की तरह चीखने लगते हो, किसी को भी बिना मतलब मरने लगते हो, तुम से अच्छी तो ये सब है, इतना कुछ बरदास कर के भी खुद को भी सभालती है और तुमको भी.

मणि की इस बात पे पब कुछ नहीं बोलता केवल सर निचे कर के बैठा रहता है. और पब खुद को अंदर में मजबूत बनाना की कोसिस कर रहा था. इतने में मणि जी लता को इसरा करते है तो लता तुर्रंत उड़ कर सोनल के पास चली जाती है. दोनों धिरे धिरे बात करने लगती है.

लता – मुझको पहचाना बेटी??

सोनल (रुवासी आवाज में) – आप लता माँ है. मेरी दूसरी माँ. आपको मेने 1-2 बार आसाराम में देख है. गुरूजी ने hi मुझको आपके बारे में सब बता दिया था. आप बचपन से hi मुझको बेटी मानती है. मुझको अपने गले से लगा लो माँ मैं बहुत तदपि हु पिछले 6 महीने से माँ के लिए….

लता भी तड़प उडी सोनल की बात से उसने तुर्रंत सोनल को गले से लगा लिया और बोली – आज मेरे कलेजे को ठंडक मिली है बेटी, मई तो सालो से तेरा इन्तजार कर रही थी. मेरी 2 बेतिया थी. फिर भी मैं बेटियों के लिए तड़पती रही. भगवन ने आज मुझको तमसे मिला कर मेरी खाविश पूरी कर दी बीटा. अब मेरी दोनों बेतिया मेरे पास है. मेरे साथ है मुझको अब और कुछ नहीं चाहिए.

ये दोनों ऐसे hi एक दूसने से बाते करती रही तो ीदार पब भी अपने आप को मजबूत बनता रहा. सब चुप bêthe रहे. कुछ देर बाद पब बोलै – गुरूजी बताइये क्या हुआ था मेरी माँ की साथ. अब मैं सब कुछ जानना चाहता हु.

मणि – बीटा मैं भी आज तुमको सब बता दुगा. कियोकि अब वो वक्त आ गया है की तुमको सब पता होना चाहिए. यदि अब देर कर दी तो कही बहुत देर न हो जाये.
 
अपडेट 108 (फ्लैशबैक)

मणि – बीटा मैं भी आज तुमको सब बता दुगा. कियोकि अब वो वक्त आ गया है की तुमको सब पता होना चाहिए. यदि अब देर कर दी तो कही बहुत देर न हो जाये.

मणि की स्टोरी – बीटा ये जो चल रहा है न इसकी सुरुवात अभी 1-2 या 6-7 साल पहले नहीं हुई. बल्कि इसकी सुरुवात हुई जब, जब तुम इस दुनिया में भी नहीं आये थे. उससे भी कई साल पहले की बात है.

मैं, त्रिकाल, दीनदयाल, साधु, अर्जुन और आशीष एक साथ गुरु सत्यानंदजी के आश्रम में शिक्षा ले रहे थे. और भी थे हमारे साथ पैर हम 6 सबके हुशियार थे. जब प्राथमिक शिक्षा पूरी हो गयी तो फिर गुरु जी को कुछ सपिकल चीजों को बताना था. जो बहुत खतरनाक और दिव्या थी. ये ज्ञान केवल कुछ स्टूडेंट को hi मिलता था. तो गुरूजी ने त्रिकाल को छोड़ कर हम 5 लोगो को चुन लिया. त्रिकाल एक अच्छा स्टूडेंट था. उसका मंद मुझसे भी अच्छा था. पैर उसमे दया, परोपकार, मानव कल्याड जैसी कोई भावनाये नहीं थी. पैर ये सब मुझको तब नहीं पता हटा. पैर गुरु जी से शयद ये सब जान लिया था. पैर जब हम लोगो को पता चला की त्रिकाल को नहीं चुना गया है तो मेने गुरूजी को उसे लेने को बोलै. तो गुरूजी ने मन किया मैं चुप हो गया. फिर साधु भी त्रिकाल के लिए बोल पड़ा. तो गुरु जी ने और सबका मत भी जाना. तो मैं, साधु, आशीष हम तीनो त्रिकाल के साथ थे तो दीनदयाल और अर्जुन त्रिकाल के विरुद थे. हम लोग 3 थे. तो गुरु जी ने उसको भी ले लिया. काश उस दिन हमने उसका साथ नहीं दिया होता तो ये दिन देखने को नहीं मिलता.

फिर हम 6 लोगो की वो शिक्षा भी सुरु हो गयी. और कुछ महीनो में ख़तम भी. फिर आया आश्रम के उत्तरादिकारी के चुनाव का नंबर. तो गुरु जी ने मुझको चुन लिया. और ये बात त्रिकाल को हजम नहीं हुई. वो बुरी तरह जल गया. ऐसा नहीं था की उसे आश्रम से कोई लगाव था. वो तो केवल ज्यादा से ज्यादा पावर्स चाहता था. उसे पावर्स बढ़ाने का जूनून था. उसका सपना था पूरी दुनिया पे राज करने का. सबका भगवन बनने का. वो गुरूजी के इस फैसले से इसलिए जल गया कियोकि उसको वो gyan/powers नहीं मिलनी थी जो आज मेरे पास है. गुरु जी ने ये सब केवल मुझको hi सिखाया. तो त्रिकाल को ये सब बर्दाश नहीं हुआ. और वो आशाराम छोड़ कर चला गया. उसके साथ संभु भी चला गया जो अभी कुछ दिन पहले hi आश्रम में आया था.

मेरी सिखाखा पूरी होने पैर मुझको ुत्रादिकारी बना दिया. और यहाँ त्रिकाल ने रतन को अपने जाल में पाशा लिया. त्रिकाल रतन से रस ले कर अपने लिए एक छोटा सा घर ले लिया और सड़ना में बेथ गया. उसको स्पेशल शिक्षा में दानव राज डलासुर के वेयर में पता चल चुक्का था. और ये भी उसको पता था की डलासुर केवल मंत्रो से खुश नहीं होंगे. और भी येशी बहुत से मंत्र थे जो गुरूजी ने बताये थे. और devi-devtao को खुश करने के लिए. कुछ मंत्र तो उसने आश्रम में रहते हुए hi सिद्ध कर लिए थे. और कुछ पावर्स प् भी ली थी, पैर इस वेयर में उस टाइम संभु को छोड़ कर किसी को नहीं पता था. और अब तो ये दोनों केवल मंत्रो को सिद्ध करने में लगे थे जिससे वो और बहुत सी पावर्स प् सके. ये दोनों अपनी पावर्स बड़ा रहे थे. पता नहीं कहा कहा से और किसी -2 पूजा करके इन दोनों ने बहुत पावर्स प् ली. ऐसी पावर्स गुरूजी या मेरे पास भी नहीं थी. फिर भी ये दोनों संतुष्ट नहीं थे. तब इन दोनों ने डलासुर को प्रश्न कर दानवो की पावर्स पाने का सोचा. मंत्र ज्ञान और डलासुर को खुश करने का तरीका तो गुरूजी ने शिखा में बताया hi था. पैर आईएसएम ीक परेशानी ये थी की डलासुर को खुस करने के लिए लड़कियों की बलि देनी थी. और उसके लिए लड़किया चाहिए थी. और लड़कियों के लिए चाहिए था पैसा.

रतन उनके लिए कुबेर था. उन्होंने इसके लिए रतन को पाषाण सुरु की. (फिर मणि जी ने बतया की कैसे त्रिकाल ने रतन को पाशाय, अंकिता को दूर किया, और ऐसे वो रतन के लिए सब कुछ हो गया. और फिर लता की स्टोरी भी सुना दी. ये भी बताया की पब के माँ बाप कैसे मिले लता और रतन से कैसे मिले. उन्होंने क्या -2 किया)

ीदार ये चारो अपनी दुनिया में जी रहे थे. उदार त्रिकाल रतन के पेसो से लड़कियों को किडनैप करवा कर उनकी बलि दे रहा था. 2मंथ में 18 लड़कियों की बलि दी जा चुकी थी. फिर भी डलासुर प्रकट नहीं हुए. तब त्रिकाल ने पता लगाया की यदि कोई अपनी इच्छा से अपनी hi बलि दे तो फल जयादा मिलता है. दानवराज जल्दी खुश हो जाते है. तो फिर सुरु हुई ऐसी लड़कियों की खोज जो अपनी इच्छा से बलि दे सके. 7 ऐसी लड़कियों को लगा गया जो आत्महत्या करने वाली थी. या फिर उनको पैसे के लिए मरना भी मंजूर था. इन सभी लड़कियों की बलि एक hi दिन दी जाने वाली थी. त्रिकाल ने hi महूरत निकला था बलि का. सभी लड़किया किसी न किसी मज़बूरी में hi अपनी बलि देने क मणि थी.

उन दिन ठीक महुरा पैर त्रिकाल ने मेट्रो का जाप करते हुए उन सभी लड़कियों की बलि दे दी. और हर लड़की ने मरने से पहले बोलै भी की “ मैं अपनी ख़ुशी से त्रिकाल को गुरु मन कर अपना सर दानवराज डलासुर को भेट करती हु. हे दानवराज प्रश्न हो”

इन सब लड़कियों की बलि के चलते डलासुर को आना hi पड़ा. और वो अपने भयानक दानव रूप ने प्रकट हुए. जिसको देख कर तो एक बार त्रिकाल भी दर गया. पैर वो बहुत खुश था. दानवो के राजा उसे वरदान देने आये थे.

डलासुर – मांगो पुत्र वार मांगो !!! हम तुमसे प्रश्न है…. बोलो तुम हमसे क्या चाहते हो??

त्रिकाल – मैं दांया हो गया.. जो दानव राज के दर्शन हो गए… दानव राज डलासुर की जय हो…

डलासुर – बताओ तुम्हारी क्या इच्छा है…

त्रिकाल – प्रभु मैं इस मानवो की दुनिया का भगवन बनना चाहता हु. मैं चाहता हु की पृत्वी का हर प्राणी मेरा गुलाम हो..

डलासुर – त्रिकाल ये वरदान मेरे वश में नहीं है. मैं केवल दानवो का राजा हु. इस जगत का भगवन तो सभी के भगवन है और वो है.. महाकाल..

त्रिकाल – तो क्या मेरी सड़ना बेकार हो गयी??

डलासुर – तुम कुछ और वरदान मांग लो.

त्रिकाल – हम्म जैसी आपकी मर्जी, तो आप मुझको बहुत साडी पावर्स दे दे..

डलासुर – ठीक है तुमने 25 बलिया दी है तो मैं तुमको वरदान देता हु की तुम कोई भी 25 पावर्स प् सकोगे, या अपनी कोई भी विश पूरी कर सकोगे. पैर उसके लिए तुमको सम्भोग क्रिया करनी होगी. हर सम्भोग क्रिया के बाद तुमको मन चाही 1 पावर मिल जाएगी. या तुम्हारी वो विश पूरी हो जाएगी.

त्रिकाल – ये कोण सी क्रिया है और कैसे की जाती है?? क्या इसके लिए मुझको किसी कन्या के साथ सम्भोग करना होगा?? और यदि हाँ तो क्या वो कुवारी हो केसा जरुरी है???

डलासुर – तुमने तो एक साथ इतने सवाल पूछ लिए… हाँ इसके लिए तुमको किसी भी इस्त्री के साथ सम्भोग करना होगा. चाहे वो कुवारी हो या न हो. और बाकि बाते तुम्हारे को अभी पता चल जाएगी.

फिर डलासुर अपना हाथ ऊपर करते है और उनके हाथ से एक वाइट रोजिन त्रिकाल के मंद में चली जाती है. त्रिकाल को नार्मल सम्भोग क्रिया के मंत्र, क्रिया का तरीका सब पता चल जाता है. और ये भी की यदि कोई भी क्रिया पूरी नहीं हुयी तो उसका क्या अंजाम होगा.

डलासुर – याद रहे केवल वो hi वर मग्न जो मेरे लिए सम्भब हो. और यदि तुमने इनका dur-upyog किया तो तुमको अपने कर्मो को भुगतना होगा.

ये बोल कर डलासुर वह से चले जाते है. और वो पहुते है अपनी पत्नी धाखासुरी के पास. दस डलासुर से बोलती है की जबसे अपने त्रिकाल को वरदान दिया है मुझको बेचैनी हो रही है जैसे कुछ गलत होने वाला है. डलासुर एक रहस्मयी मुस्कान के साथ चुप hi रहते है.

ीदार त्रिकाल डलासुर से वरदान प् कर खुश था. वो जनता था की अब वो अपनी मंजिल को कैसे पायेगा. वो एक बहुत बड़ी योजना (प्लान) बनता है. और उसके हिसाब से hi आगे चलने लगता है. अब संभु का काम था चुदाई के लिए लड़कियों को लेन का. जो की वो बड़े आराम से कर रहा था. वैसे भी पैसे के लिए छोड़ने वाली लड़कियों की कमी नहीं थी. 8-10 लड़किया तो संभु ने कॉल गर्ल्स को बला कर hi काम चलाया. और इससे त्रिकाल ने बहुत सी पावर भी प् ली. पैर त्रिकाल और संभु को इन लड़कियों के साथ मज़ा नहीं आ रहा था. और अब तो पावर्स भी थी. तो इन्होने घरेलु और कुवारी लड़कियों को किडनेप कर के लाना सुरु कर दिया. संभु भी क्रिया पूरी होने के बाद 1-2 बार उस लड़की से मज़े लेता था. ये दोनों पहले लड़की को मंत्रो से सम्भोहित कर लेते और फिर उसको इतना गरम कर देते की वो बिना चूड़े न रहा सके. फिर उससे अपना सम्भोहन का मंत्र हटा कर त्रिकाल मज़े से उस लड़की को छोड़ता भी और पावर भी पता. दोनों बहुत खुश थे. त्रिकाल ने अब तक 21 पावर्स को प् लिया था. अब उसके प्लान के सबसे खतरनाक और सबसे जरुरी हिस्से को अंजाम देना था.
 
भाई त्रिकाल ने ये सब हीरो के पैदा होने से पहले किया था. और वो इससे बहुत power's पहले hi प् चूका है. अभी स्टोरी फ्लैशबैक में है. त्रिकाल हीरो से बहुत ज्यादा स्ट्रांग है बीआरओ ....

अभी फ़िलहाल तो त्रिकाल अपनी सब पावर को खो चूका है. और उनको फिर से पाने के लिए hi सदना में बैठा है. यदि उसके पास उसकी पूरी पावर होती तो अभी तक वो हीरो को मार चूका होता

दोनों क्रिया शामे नहीं है. स्टार्ट के 5 अपडेट एक बार और पढ़िए. त्रिकाल ने नार्मल सम्भोग क्रिया की थी. और हीरो कुछ एक्स्ट्रा , स्पेशल सम्भोग क्रिया कर रहा है
 
अपडेट 109

त्रिकाल और संभु को इन लड़कियों के साथ मज़ा नहीं आ रहा था. और अब तो पावर्स भी थी. तो इन्होने घरेलु और कुवारी लड़कियों को किडनेप कर के लाना सुरु कर दिया. संभु भी क्रिया पूरी होने के बाद 1-2 बार उस लड़की से मज़े लेता था. ये दोनों पहले लड़की को मंत्रो से सम्भोहित कर लेते और फिर उसको इतना गरम कर देते की वो बिना चूड़े न रहा सके. फिर उससे अपना सम्भोहन का मंत्र हटा कर त्रिकाल मज़े से उस लड़की को छोड़ता भी और पावर भी पता. दोनों बहुत खुश थे. त्रिकाल ने अब तक 21 पावर्स को प् लिया था. अब उसके प्लान के सबसे खतरनाक और सबसे जरुरी हिस्से को अंजाम देना था.

उसके लिए उसने एक तालाब के पानी को मंत्रो की शक्ति से वासनामय बनाया और फिर उस तालाब के चारो और ऐसे -2 सुरक्षा के इंतजाम किये की कोई भी मानव या दानव उनको भेद न पाए. त्रिकाल ने फिर अपने अड्डे को एक सेफ्टी शील्ड से कवर कर लिया जिसमे त्रिकाल और संभु की मर्जी के बिना घुसना पॉसिबल नहीं था. (निकल कर कोई भी जा सकता है. ये त्रिकाल से भूल हो गयी थी) फिर उसने अपने पूजा हॉल में भी कुछ इंतजाम किये. उसमे अपनी सभी शक्तियों का उपयोग कर लिया था इन सब में. चाहे वो उसने डलासुर से ली थी या जो उसके पहले hi मोन्त्रो को सिद्ध करके प्राप्त की थी. सब इंतजाम करने के बाद उसने लायी हुयी लड़की के साथ सम्भोग किरिया की. और उसने मांगा की “मैं डलासुर के दोनों रूपों को एक साथ अपने पूजा हॉल में देखना चाहता हु.”

ात प्रेजेंट

पब – डलासुर के दोनों रूपों से क्या मतलब??

मणि – बीटा डलासुर और दस माँ दोनों hi के दो रूप है. एक जो अच्छी का प्रतिक है और एक जो बुराई का प्रतिक है. अच्छा रूप भगवन शिव की आराध्ना, सात करम, मानव कल्याण, प्रेम चाहता है. जबकि बुराई का रूप हवस, वासना, बलि चाहता है. और ये दोनों रूप मानव के कर्मो से और मानव इन रूपों के कर्मो में प्रभाबित होते है.

पब – पैर केसा क्यों है. वो तो दानव राज है तो वो तो बुराई hi चाहेंगे न.

मणि – नहीं बीटा तुम्हारी सोच गलत है हर दानव बुराई नहीं फैलता. प्रह्लाद, राजा बलि इसके उदहारण है. इन दोनों ने केवल भक्ति की है. और वैसे भी ये दोनों पहले देवता थे. और एक मुनि के शार्प ने इनको दानव बना दिया. और उसी शार्प के चलते hi ये दोनों सम्भोग के लिए पागल हो गए.

पब – गुरूजी में कुछ समजा नहीं??

मणि – अभी बस इतना जान लो की इनके 2 रूप है. ये बहुत लम्बी कहानी है फिर कभी बताउगा.

पब – ठीक है गुरूजी, वैसे भी आप पता नहीं क्या बता रहे है मैं तो अपनी माँ के बारे में जानना चाहता था. और आप त्रिकाल और डलासुर के बारे में बता रहे है.

मणि – तुम एक बात जान लो त्रिकाल को जाने बिना तुम अपने वेयर में कुछ नहीं जान सकते. तुम्हारे जनम से अब तक तुम्हारे और तुम्हारी फॅमिली के साथ जो भी गलत हुआ है उसमे केवल और केवल त्रिकाल और संभु का हाथ है. न तुम्हारी कोई गलती है, न लता की, न सोनल की, न अल्पना की किसी की कोई गलती नहीं तुम्हारी फॅमिली की बर्बादी का केवल वो hi जिम्मेदार है.

पब मांईजी की बातो से चौक गया. उसने त्रिकाल का नाम जिंदगी में पहली बार जुली के मुँह से सुना था. उसको अच्छे से याद था की उसने अपने घर में त्रिकाल का नाम भी नहीं सुना. और गुरूजी कहा रहे है की उसके घर को बर्बाद करने में त्रिकाल का हाथ है. उसको कुछ समाज नहीं आया. जब उसे इस बात का मतलब समाज नहीं आया तो उसने चुप रहा कर मणि की स्टोरी सुनने का सोचा. जब मणि ने सबको चुप देखा तो फिर से बोलना सुरु किया.

मणि की स्टोरी छॉंट….

त्रिकाल की विश के चलत डलासुर उस हॉल में आ गए और उन होने अपने आप को 2 रूपों में बाँट लिए. पहला रूप देव रूप (अच्छा रूप) बहुत सक्तिसाली लग रहा था. और दानव रूप (बुराई रूप) बहुत कमजोर सा था. जैसे hi ये दोनों रूप त्रिकाल के सामने आये त्रिकाल ने तुर्रंत मंत्रो का जप कर दोनों के उप्पेर एक शील्ड बना दी. देव रूप की शील्ड को गिलास के बड़े गोले में बदल कर उसे उस तालाब में पंहुचा दिया. तालाब का पानी तो पहले से hi वाशना से भरा पड़ा था. उसके उप्पेर इतनी घेरा बंदी की कोई भी वह तक जाने की सोच भी नहीं सकता.

त्रिकाल ने दानव रूप को अपने पूजा हॉल में डलासुर की मूर्ति में hi कैद कर दिया. और उस रूप की पूजा करने लगा. पूरी रात पूजा करके उसने संभु से फिर एक लड़की बुला ली. और हर बार की तरह उसको सम्भोहित करके गरम किया और फिर जब वो पूरी तरह गरम हो गयी तो उससे अपना सम्भोहन हटा कर उसके साथ सम्भोग किरिया के मंत्रो को पद उसकी साथ सम्भोग करने लगा. लड़की इतनी गरम थी की होश में आने के बाद भी त्रिकाल को मन नहीं कर पायी. और त्रिकाल ने अपनी 23 विश में माँगा की “डलासुर के 2 बेटे दानव रूप की और 2 बेटे देव रूप की सुरक्षा करे. कोई भी इन दोनों रूपों तक न पहुंच पाए. खुद वो भी नहीं. केवल मेरे या संभु के साथ आया इंसान hi उन तक पहुंच सके.”

त्रिकाल ने ये बहुत सोच समाज कर किया था कियोकि डलासुर के bête भी डलासुर की तरह hi थे. देवताओ को भी उनको हराना ाशन नहीं था. त्रिकाल की इस विश ने दस माँ का सब कुछ लूट लिया. पति तो पहले hi बंदी हो गया था. अब 4 बेटे खुद उनको बंदी बनाये रखने के लिए विवश थे. और दस माँ भी कुछ नहीं कर सकती थी. अपने पति के दिए हुए वर का मान रखना जरुरी था. और इस वजह से hi उनके bête भी अपने पिता की सुरखा के लिए चले गए. 2 बेटे तो उस तालाब के बहार पहुंच गए तो 2 बेटे त्रिकाल के उस अड्डे के बहार पहुंच गए. वो चारो आज भी वह पहरा दे रहे है.

त्रिकाल का 90% प्लान कामियाब हो चुक्का था. अब केवल 2 विश मग्न बचा था. और उनके साथ hi त्रिकाल अपने प्लान में कामियाब हो जाता. त्रिकाल ने 24 विश के रूप में मांगना था की “ दस माँ और डलासुर के देव रूप की सभी सकतिया डलासुर के दानव रूप में आ जाये” और फिर लास्ट में वो मांगता की “ डलासुर का दानव रूप मेरा गुलाम बन कर मेरे सरीर में रहे और उसकी साडी पावर्स मेरी हो जाये”

त्रिकाल का प्लान सच में बहुत खतरनाक था. कियोकि त्रिकाल डलासुर को अपने सरीर में कैद कर देवताओ पे अटैक करने वाला था. और देवताओ के पास डलासुर के दानव रूप और त्रिकाल की तांत्रिक सक्तियो को कोई थोड़ नहीं था. यदि ऐसा होता तो सच में त्रिकाल स्वर्ग को जीत लेता. पैर ऐसा हुआ नहीं…..

ात प्रेजेंट -

पब – गुरूजी त्रिकाल को उस टाइम किसने रोका. कोण था जो त्रिकाल का उस टाइम सामना कर सकता था. किस वजह से त्रिकाल वो सब नहीं कर पाया जो वो चाहता था.???????????

मणि – त्रिकाल का सपना यदि पूरा नहीं हुआ तो उसकी केवल एक वजह थी और वो थी – अल्पना …. हाँ बीटा तुम्हारी माँ ने hi त्रिकाल का सब प्लान ख़राब कर दिया.

पब को तो इस बात पैर विस्वाश hi नहीं हुआ. उसने सोचा की एक नार्मल सी औरत ने त्रिकाल को रोक दिया. जबकि मेरे पास अभी बहुत सी पावर्स है तब भी मैं त्रिकाल के किसी की वॉर को झेल नहीं पता हु. वाकई में मेरी माँ तो महँ थी.

पब – पैर गुरूजी माँ ने ये किया कैसे?? माँ त्रिकाल को कैसे जानती थी???

मणि – तुम्हारी माँ और पापा भी गुरु सत्यानंद जी के आश्रम में जाते थे लता और रतन के साथ. वह पैर वो त्रिकाल से मिल चुके थे. संभु रतन से मिलने के लिए कई वार ऑफिस आया था. तो उसने भी तुम्हारी माँ और पापा को वह देखा था. और वो दोनों भी जानते थे की ये त्रिकाल का चेला है. लता ने अल्पना को बता रखा था की रतन त्रिकाल की हर बात मंटा है.

पब – ोूहः ये बात है. पैर माँ ने रोका कैसे??

मणि – देखो बीटा अब मैं जो तुमको बताउगा. उससे तुमको दुःख भी होगा और गुस्सा भी आएगा पैर तुमको खुद पैर कण्ट्रोल करना होगा. जो भी हुआ है या जो हो रहा है उसमे किसी की गलती नहीं थी. केवल त्रिकाल की गन्दी सोच और भगवन बनने की चाहा ने सब बर्बाद कर दिया. तुम पूरी कहानी संत रहा कर सुन्ना और खुद अपने मंद से सोचना की तुमको आगे क्या करना है. और दस माँ ने तुमको क्यों चुना है.

पब – ठीक है गुरूजी मैं वादा करता हु की मैं शांत रहुगा.

मणि की स्टोरी छॉंट….

जब त्रिकाल लगभग कामयाब हो चुक्का था. और केवल 2 विश बची थी. तब तक त्रिकाल मानवो में सबसे सक्तिसाली बन चुक्का था. त्रिकाल के पास अभी इतनी पावर्स थी की वो किसी को भी मार सकता था. किसी भी देश की आर्मी को पल भर में ख़तम कर सकता था. पैर उसे तो भगवन बनना था.

एक दिन त्रिकाल और संभु दोनों अपनी कामियाबी पैर खुश हो रहे थे और आगे की बचे प्लान को पूरा करने की रुपरेखा बना रहे थे.

त्रिकाल – संभु अब मैं बहुत सक्तिसाली हो गया हु. अब भगवन बनने से मुझको कोई नहीं रोक सकता. जल्दी hi डलासुर के दानव रूप को अपना गुलाम बना कर मैं स्वर्ग पैर अटैक करुगा. और स्वर्ग का राजा बन जाउगा. मतलब मानवो का भगवन बन जाउगा…. हाहाहाहा

संभु – आप महँ हो गुरुदेव. अपने अपने सपने को सच कर दिखाया. आप जल्दी से देवराज इंद्रा को हरा कर उसका स्वर्ग चीन लो. पैर मुझको मत भूल जाना गुरुदेव..

त्रिकाल – अरे तू तो मेरे साथ है मैं तुझको कैसे भूल सकता हु. पैर अभी किसी लड़की का इंतजाम कर. अगली विश का टाइम आ गया है.

संभु – गुरूजी मैं एक बात कहु, यदि आपको ठीक लगे तो.. आप गुस्सा न हो तो…

त्रिकाल – हाँ बोल क्या बात है??

संभु – गुरूजी रतन के ऑफिस में एक लड़की है, शादीशुदा है पैर है एक दम तीखा माल, मैं उसे कब से अपने निचे लाना चाहता हु. पैर साली हाथ नहीं आती. आप कहो तो इस बार उसको hi ले औ. पहले आप उसे भोगना फिर मैं भी अपनी इच्छा पूरी कर लगा. आपको भी उसके साथ बहुत मज़ा आएगा.
 
अपडेट 110

संभु – गुरूजी रतन के ऑफिस में एक लड़की है, शादीशुदा है पैर है एक दम तीखा माल, मैं उसे कब से अपने निचे लाना चाहता हु. पैर साली हाथ नहीं आती. आप कहो तो इस बार उसको hi ले औ. पहले आप उसे भोगना फिर मैं भी अपनी इच्छा पूरी कर लगा. आपको भी उसके साथ बहुत मज़ा आएगा.

त्रिकाल – चल ले आ उसको, तूने मेरी इतनी सेवा की है तो तुझको खुश करना hi पड़ेगा. क्या नाम है उसका??

संभु – दन्यबाद गुरूजी… अब देखता हु कैसे बचती है साली… अल्पना नाम है उसका गुरूजी…

फिर ये दोनों अपनी आगे की प्लानिंग करते रहते है. ीदार त्रिकाल और संभु की बातो से अनजान अल्पना और प्रतिक अपनी दुनिया में मस्त थे. जब ये दोनों सुबह उड़े. तो अल्पना की तबियत कुछ ठीक नहीं थी. तो अल्पना ने लीव फॉर्म भर कर प्रतिक को दे दिया ऑफिस में देने के लिए. अल्पना दवा ले कर दुवारा सो गयी. सोनल माइड के साथ खेल रही थी. वैसे भी सोनल या तो माइड के साथ या लता के साथ रहती थी. अल्पना तो ऑफिस से आने के बाद hi उसे टाइम दे पति थी. दोपहर में संभु अल्पना को खोजता हुआ उसके घर पैर आ पंहुचा. पहले वो ऑफिस hi गया था. पैर वह उसको पता चला की अल्पना आज लीव पे है. तो वो प्लानिंग करता हुआ अल्पना के घर पे hi पहुंच गया. और जा कर अल्पना के बारे में पूछने लगा तो माइड ने बताया की वो सो रही है. तब संभु ने अपने प्लान के हिसाब से उससे बोलै की उनने कहो की रतन जी ने उनको ुरजेन्टलय बुलाया है. ऑफिस में एक जरुरी काम के लिए. तो जल्दी से आजाये, और मेरे साथ ऑफिस चले.

माइड भी अल्पना को ये बोल देती है. अल्पना को भी अपनी तबियत पहले से ठीक फील हो रही थी तो वो भी तैयार हो कर चल दी संभु के साथ उसको नहीं पता था की ये संभु की चल है. संभु ने रस्ते में अल्पना को वशीकरण मंत्र से अपने कभू में करके अपने आड़े पे ले गया. त्रिकाल भी अल्पना को देख कर खुश हो गया. दोनों जाने पूजा की तैयारी करते रहे और अल्पना को भोगने के बारे में सोच-2 कर खुश होते रहे. जब सभी तैयारी हो गयी तो संभु ने अल्पना को नंगा करके उसे गरम करना चालू कर दिया. अल्पना का नंगा बदन देख कर त्रिकाल को भी साबरा करना मुश्किल हो रहा था. तो वो भी संभु के साथ अल्पना के जिस्म से खेलने लगा. जब सब कुछ उसके हिसाब से हो गया तो फिर त्रिकाल ने सम्भोग की क्रिया करने के लिए अल्पना को अपने निचे लिटा लिया. अभी अल्पना इतनी गरम थी की वो खुद उछाल -2 कर त्रिकाल के लुंड पे अपनी छूट मर रही थी. उप्पेर से वशीकरण मंत्र ने उसको सब कुछ भुला दिया था. की वो कोण है क्या है. किसकी पत्नी है..

त्रिकाल ने वशीकरण मंत्र को हटाया. और शंभोग किरिया के मंत्रो को पड़ने लगा. ीदार अल्पना वशीकरण मंत्र के प्रभाब से बहार आते hi अपने आपको देखने लगी. उसका सरीर वासना में जल रहा था. उसे किसी भी तरह अपनी आग ठंडी करनी थी. पैर वो एक सच्ची औरत थी. उसे गैर मर्द के साथ ये सब करना गवारा नहीं था तो वो अपने दिल और दिमाग को मजबूत करके अपनी आग को कण्ट्रोल करने लगी. पैर ीदार त्रिकाल मंत्रो का जप कर चुक्का था. त्रिकाल के सरीर में डलासुर का अंश और अल्पना के सरीर में दस माँ का अंश आ चुक्का था. अब अल्पना को खुद पे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. ीदार त्रिकाल ने अपना लुंड अल्पना की छूट के रख दिया. और वो दक्का मरने hi वाला था की अल्पना ने उसे दक्का मार दिया. और कड़ी हो गयी. पता नहीं इस कंडीशन में अल्पना ने खुद को कैसे कभू किया था. ये तो वो hi जान रक्ति है. कियोकि दस माँ का अंश और पहले सरीर के साथ हुयी छेद चढ़ के बाद लड़की इतनी गरम हो जाती है की गली के कुत्ते से भी छुड़वा ले. पैर एक सच्ची और इमां की पक्की औरत थी. उसने वासना की आग में भी अपने दमन पे दाग नहीं लगने दिया.

त्रिकाल यु अल्पना के हैट जाने से चौक गया. उसने अल्पना को प्यार से समजने की कोसिस की. पैर अल्पना ने उसकी एक न सुनी. और अपने कपडे पहन लिए. और वह से जाने लगी. त्रिकाल अल्पना को जाता देख संभु से उसे पकड़ने को बोलै. जैसे hi संभु अल्पना की और बड़ा त्रिकाल को एक अटैक (डोरा) पद गया. और वो जमीं पे गिर गया. संभु अल्पना को छोड़ त्रिकाल को सभालने लगा. उसने बहुत कुछ किया पैर त्रिकाल को होश नहीं आया. तब उसे याद आया की त्रिकाल ने बताया था की यदि ये किरिया बिच में रुक गयी तो कुछ भी हो सकता है. त्रिकाल बेहोश पड़ा था. पैर उसका लुंड अभी भी खड़ा था. और संभु के कुछ समाज नहीं आ रहा था की वो क्या करे. जो मंत्र वो जनता था वो भी उसने तरय कर लिए फिर भी कुछ नहीं हुआ पूरी रात इस में hi निकल गयी. तब सुबह संभु डॉ. को ले आया डॉ. ने बोलै की त्रिकाल कोमा में है. संभु के कुछ भी समाज नहीं आ रहा था की वो क्या करे. तो उसने रतन को भी ये सुचना पंहुचा दी की त्रिकाल की कंडीशन ठीक नहीं है.

ीदार अल्पना अपने अंदर जवालामुखी लिए घर पहुंच गयी. उसकी कंडीशन बहुत ख़राब थी. फेस एक डैम लाल हो रहा था. बाल बिखरे हुए थे. कपडे भी असत – व्यस्त थे. उसका हाथ बार-2 उसकी छूट को मसल रहा था. उसको ये डायन नहीं था की ऐसा करते हुए और लोग भी देख रहे है. अल्पना घर पहुंचते hi बाथरूम में घुस गयी. प्रतिक भी घर पैर था प्रतिक अल्पना की ये हालत देख कर समाज गया की कुछ तो गलत है. अल्पना ठंडे पानी से नाहा कर आयी पैर फिर भी वो संत नहीं हुयी होती भी कैसे दस माँ के दानव रूप का अंश उसके सरीर में था. बाथरूम से बहार एते hi उसकी नजर प्रतिक पैर गयी प्रतीक को देख कर उसकी आखों में चमक आ गयी और उसने प्रतिक के साथ सेक्स कर लिया. (भाइयो ये सेक्स लिखना मुझको सही नहीं लगा इसलिए मेने इसको स्किप कर दिया है) पूरी रात प्रतिक के साथ सेक्स करने से जब वो संतुष्ट हुयी. दोनों इतने थक गए की उनको पता hi नहीं चला की कब सो गए.

दस माँ का अंश भी इस सेक्स से संतुष्ट हो कर चला गया. और इस सेक्स से अल्पना प्रग्नेंट हो गयी थी. ये बात अल्पना को चाहे अभी नहीं पता थी पैर दस माँ तो ये जानती थी. और दस माँ के अंश के रहते हुए अल्पना प्रग्नेंट हुयी इसलिए उन्होंने भी उस बच्चे को अपना बच्चा मान लिया. दस माँ इस सब से बहुत खुश भी थी. और आज वो समाज गयी थी की उनके पति डलासुर ने त्रिकाल को सम्भोग क्रिया के लिए क्यों बोलै और क्यों त्रिकाल के बंदी बन गए. जबकि त्रिकाल ने केवल डलासुर को 2 रूपों में देखने का वरदान माँगा था. त्रिकाल में इतनी सकती नहीं थी की वो डलासुर जैसे दानव राज को बंदी बना सके. पैर फिर भी वो बंदी बने. आज इसके पहिचे का राज दस माँ समाज चुकी थी.

जब अल्पना सुबह उडी तब उसने प्रतिक को उदय और कल की पूरी बात उसको बताई. अल्पना की बात सुन कर प्रतिक दर गया. उसको लगा की रतन ने hi अल्पना को फसा कर त्रिकाल को दे दिया. अल्पना को भी प्रतिक की बात सही लगी कियोकि संभु ने ये hi बोलै था की रतन ने उसे बुलाया है. वो दोनों बहुत दर गए. उनको लगा की त्रिकाल कभी भी फिर से अपनी हवस मिटने के लिए अल्पना को घेर सकता है. या ये भी हो सकता है की रतन फिर से अल्पना को फसा दे. और पता नहीं कितनी hi संकाओ ने उनको घेर लिया. कल तो किसी तरह अल्पना बच गयी थी पैर आगे अल्पना कैसे बचेगी. वो रतन और त्रिकाल का सामना भी नहीं कर सकते थे. जहा त्रिकाल तांत्रिक सक्तियो का मालिक था. वही रतन के पास पैसे और समाज की पावर थी.

फिर भी प्रतिक ने एक बार रतन के बारे में जानने के लिए रतन की प् को लैंडलाइन से फ़ोन किया तो रतन वह नहीं था वो त्रिकाल से मिलने गया था. ा बुनको विश्वास हो गया की रतन और त्रिकाल एक है. अल्पना ने लता से बात करने को बोलै तो प्रतिक ने ये कहा कर मन कर दिया की लता कभी भी रतन के खिलाफ नहीं होगी. और अभी तो वो आज़ाद है क्या पता लता hi उनको पैसा दे. तब दोनों ने अपनी इस दुनिया को छोड़ कर कही चुप कर रहने का सोचा.

दोनों लोगो ने सोनल को साथ ले कर अपने अकाउंट से सारा पैसा निकल कर सूरज कुंड गाओं में आ गए. और वह जमीं खरीद कर मजदूरी करते हुए दिन बिताने लगे. लता और रतन को पता hi नहीं चला की अल्पना और प्रतिक क्यों और कहा गए. ीदार त्रिकाल कोमा की कंडीशन में खड़े लुंड के साथ वैसे hi पड़ा रहा. संभु की हर कोसिस न कामियाब हो रही थी. संभु को अल्पना और खुद पैर गुस्सा आ रहा था. यदि अल्पना एक बार त्रिकाल से चुद लेती तो कुछ भी गलत नहीं होता. और संभु कभी सोचता की यदि मेने hi गुरूजी से अल्पना के बारे में न बोलै होता तो भी कुछ गलत नहीं होता. पैर वो सब हो चुक्का था. कैसे hi टाइम निकलता गया. और 9 मंथ में अल्पना ने एक सुन्दर से बच्चे को जनम दिया जिसका नाम रखा – पंकज.
 
अपडेट 111

दोनों लोगो ने सोनल को साथ ले कर अपने अकाउंट से सारा पैसा निकल कर सूरज कुंड गाओं में आ गए. और वह जमीं खरीद कर मजदूरी करते हुए दिन बिताने लगे. लता और रतन को पता hi नहीं चला की अल्पना और प्रतिक क्यों और कहा गए. ीदार त्रिकाल कोमा की कंडीशन में खड़े लुंड के साथ वैसे hi पड़ा रहा. संभु की हर कोसिस न कामियाब हो रही थी. संभु को अल्पना और खुद पैर गुस्सा आ रहा था. यदि अल्पना एक बार त्रिकाल से चुद लेती तो कुछ भी गलत नहीं होता. और संभु कभी सोचता की यदि मेने hi गुरूजी से अल्पना के बारे में न बोलै होता तो भी कुछ गलत नहीं होता. पैर वो सब हो चुक्का था. कैसे hi टाइम निकलता गया. और 9 मंथ में अल्पना ने एक सुन्दर से बच्चे को जनम दिया जिसका नाम रखा – पंकज.

समय पंख लगा कर उड़ता गया और दोनों बच्चे बड़े होने लगे. ये 4रो अपनी दुनिया में खुश थे. सब खुश अच्छा चल रहा था. गरीब होने के बाद भी अल्पना अपने बच्चो को अच्छी एजुकेशन के लिए खुद hi पड़ती थी और गाओं के स्कूल में भेजती थी.

संभु ने भी जी जान लगा कर त्रिकाल को ठीक करने का तरीका पता कर लिया था. उसे ये पता करने में hi 4 साल लग चुके थे. पैर त्रिकाल को ठीक करने के लिए जरुरी था अल्पना का मिलना. अल्पना hi त्रिकाल का इलाज थी. संभु ने अपने सभी चलो को इस काम में लगा दिया की कैसे भी अल्पना का पता किया जाये. वो लोग अल्पना और प्रतिक को हर सिटी की छोटी – बरी सभी तरह की कम्पनीज में खोजते रहे. उन्होंने सोचा भी नहीं था की इतने तेज़ दिमाग और होनहार लोग यु मजदूरी कर के अपनी जीविका चला रहे होंगे. इस तरह 10 साल बीत गए. संभु को न तो अल्पना और प्रतिक मिले. और न hi लता और रतन को. दोनों hi उनको खोज रहे थे. पैर दोनों का मकसद अलग था.

10 साल बाद प्रतिक को लगने लगा की वो बेकार में hi छुपे हुए है. अब तो त्रिकाल भी उनको भूल चुक्का होगा. और पता नहीं क्या -2 बदल चुक्का हो. उनको क्या पता था की त्रिकाल तो नीड में है पैर उनको संभु पागलो की तरह खोज रहा है. पैर प्रतिक फिर से सहर (दिल्ली) जाने की सोचने लगा. उसने अल्पना से भी ये सब बताया. पैर अल्पना इसके लिए तैयार नहीं थी. ऐसे hi कुछ महीने और बिट गए. पैर अब प्रतिक को एक बार दिल्ली जाने का भूत सवार हो गया था. कारन भी था की बच्चो की स्टडी गाओं में नहीं हो सकती थी और हायर स्टडीज के लिए रस भी चाहिए था. और उसके लिए सिटी जाना जरुरी था. कुछ मंथ तक दोनों सोचते रहे की जाये या न जाये. तब अल्पना ने प्रतिक को मणि जी से मिल कर सब पता करने को बोलै की जाना सेफ है या नहीं.

प्रतिक भी अल्पना की बात से सहमत था तो वो सिदा गुरु सत्यानंद जी के आश्रम पहुंच गया. और मणि जी से मिला. तब मणि जी ने उसे बताया की त्रिकाल कोमा में है और उसे ठीक करने के लिए संभु अल्पना को खोज रहा है. रतन उसके साथ नहीं है पैर पैसा रतन का hi लग रहा है वो तो त्रिकाल को ठीक करने के लिए संभु को पैसा देता है. और संभु उस पैसे को अल्पना को खोजने में लगा रहा है. रतन के पास जाना सेफ नहीं है और न hi देहली में वो सेफ है. दोनों के बिच और भी बहुत सी बाते हुयी, प्रतिक ने भी मणि जी को सब बताया. और मणि जी ने भी प्रतिक को सब बताया. मणि जी से सब जान कर प्रतिक वह से लोट लिया सूरज कुंड की और. पैर प्रतिक को संभु के एक आदमी ने देख लिया था और उसको बता दिया की प्रतिक आशाराम में है. संभु आश्रम में पहुँचता उससे पहले hi प्रतिक वह से जा चुक्का था ये बात उस आदमी को भी पता नहीं चली. संभु ने अपने सरे आदमियों को आश्रम से स्टेशन, बस स्टैंड और भी बहुत से रास्तो पे लगा दिया. रेलवे सटशन जाने वाले रोड पैर संभु के आदमी ने प्रतिक को देखा की वो टेक्सी से जा रहा है. पैर भगवन को कुछ और hi मंजूर था. प्रतिक का एक ट्रैक से एक्सीडेंट हो गया. और कुछ लोगो ने और ट्रैक वाले ने मिल कर उसे सरकारी हॉस्पिटल में एडमिट कर दिया. वह पे जब प्रतिक को होश आया तो प्रतिक ने उस ट्रैक वाले से गाओं के सरपंच के घर फ़ोन कर के अल्पना को ये खबर पंहुचा दी. अल्पना ये सुन कर तुर्रंत ट्रैन से वह पहुंच गयी. तब प्रतिक ने अल्पना को मणि जी की साडी बाते बता दी. और दम तोड़ दिया. ट्रैक वाला अच्छा एडमिट है उसने प्रतिक के अंतिमसंस्कार की तैयारी भी करा दी अल्पना का सब कुछ लूट चुक्का था अब बस उसकी जिंदगी में दोनों बच्चो का hi सहारा था. अल्पना अपने दोनों बच्चो को ले कर फिर से गाओं आ गयी. पैर संभु के एक आदमी ने उसे ट्रैन में बीटा हुआ देख लिया था. वो ट्रैन में चढ़ता उससे पहले ट्रैन चल दी. और फिर से अल्पना उसने दूर हो गयी पैर अब संभु को एक रूट पता चल चुक्का था की अल्पना इस रूट पे hi कही रहती है. वो फिर लग गया अल्पना की खोज में. इस खोज में संभु को कई साल लग गए. पैर ात लास्ट उसे अल्पना का पता चल hi गया. और यहाँ से hi अल्पना की बर्बादी सुरु हो गयी.

इस बिच में संभु ने ठाकुर भानु से मिल कर उसके घर में लड़कियों को सेक्स मशीन बनाना ले लिए ट्रेनिंग देना सुरु कर दिया. भानु संभु की हेल्प से hi जुली और उसकी टीम को दूसरे देश के एक कबीले से खरीद लाया था. भानु ने रस कमाने के लिए ये सब सुरु कर दिया. और संभु ने ये सोच कर सुरु किया था की जब भी त्रिकाल नीड (कोमा) से उड़ेगा तो उसे अपनी पावर्स पाने के लिए बलि देनी होगी. और वो ये जनता था की जब कोई अपनी मर्जी से अपनी बलि देता है तो काम जल्दी बन जाता है. और यदि त्रिकाल को फिर से सम्भोग किरिया करनी हुई तो उसके लिए भी ये लड़किया हर तरह से अच्छी है. इस ट्रेनिंग के बाद लड़की सेक्स के लिए पागल रहती है. ये सब सोच कर hi संभु ने रतन के पेसो से भानु को वो सब बनवाया. मणि को भी इसके वेयर में पता नहीं था. मणि को तो जब पता चला जब की वो यहाँ आया tha.(in स्टोरी स्टार्टिंग उपदटेस)

जब संभु को अल्पना का पता चल गया तो उसने एक प्लान बांया. और एक दिन अल्पना के घर जा पंहुचा. उस टाइम अल्पना घर पे अकेली थी. उसके दोनों बच्चे खेत पैर गए हुए थे. पब तब तक 12तह पास कर चुक्का था. और अब माँ के साथ खेतो में काम करता था. संभु को देख कर अल्पना दर गयी. और बचा हुआ काम संभु के साथ लायी हुयी पोथोस ने कर दिया. संभु ने अल्पना को उस दिन की कुछ फोटो दिखाई जिस दिन अल्पना त्रिकाल से बच कर भागी थी. तब तो संभु ने वो फोटो अल्पना के नंगे जिस्म की खूबसूरती को कमरे में कैद करने के लिए hi ले थी. वो अल्पना के जिस्म का दीवाना जो था. पैर आज ये फोटो उसके पास तुरुप के इक्के से काम नहीं थी. संभु के पास उन फोटो को देख कर अल्पना बहुत दर गयी. फिर भी उसने हिम्मत नहीं हरी.

संभु – क्या कहती हो जान दाल दू इन पिक्स को नेट पे. और इस गाओं में पोस्टर लगा दू इन पिक्स के??

अल्पना (डरते हुए हिम्मत से) – नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकते यदि तुमको ये करना होता तो तुम मेरे पास नहीं आते और न hi पिछले 18-19 साल से मुझको धुन रहे होते.. ये बोलो की क्यों आये हो यहाँ.. क्या चाहते हो तुम मुझसे?? जिस जिस्म से तुमको प्यार था वो तो वक्त के साथ ढल चुक्का है.

संभु – हाहाहाहा क्या बात करती है जान मेरी नजर में तू आज भी वैसी hi है जैसी की इन फोटो में दिख रही है. और मैं आज भी तुझको अपने निचे सुलाने का सपना रखता हु.

अल्पना – तो तुम्हारा ये सपना सपना hi रहेगा. मैं मार जोगी पैर वो सब नहीं करुँगी. तुम चाहे जो कर लो.. इन फोटो को नेट पे डालोगे न तो दाल दो, मैं इस गाओं को छोड़ कर फिर किसी ऐसी जगह चली जोगी जहा मैं सेफ राहु.

संभु – अरे जन्मान मैं तुझको अब कही नहीं जाने दुगा, मेरे आदमी तुज पर हर टाइम नजर रखेंगे. और जरा इन फोटो को देख कितने सुन्दर बच्चो की फोटो है. यदि तू मेरी बात नहीं मानेगी तो ये बच्चे मर भी सकते है.

संभु वो फोटो अल्पना को दे देता है, ये पब और सोनल के फोटो थे खेतो में काम करते हुए के. इनको देख कर अल्पना की हिम्मत टूट जाती है. उसकी ममता उसे सब कुछ करने पे मजबूर कर रही थी. आज उसकी दुनिया में इन 2 बच्चो के अलावा कोई नहीं था. वो अपना सब कुछ लुटा सकती थी इन दोनों पैर. आज एक औरत माँ से हार रही थी. जहा एक औरत ये सब गलत मानती थी वही माँ के लिए बच्चो से बाद कर कुछ भी नहीं था. वो रोने लगती है.

अल्पना (रट हुए) – आखिर क्या बिगाड़ा है मेने तुम्हारा, क्यों नहीं जीने देते तुम हमको, क्यों मरना चाहते हो मेरे मासूम बच्चो को, आखिर चाहते क्या हो तुम???

संभु – देख तेरी वजह से मेरे गुरूजी कोमा में है में बस ये चाहता हु की तू उनको ठीक करने में मेरी मदत कर. यदि वो ठीक हो गए तो मैं वादा करता हु मैं तुम सबको छोड़ दुगा और कभी नहीं ौगा तुम्हारे पास.

अल्पना – पैर मैं ये कैसे कर सकती हु, मैं कोई डॉ तो हु नहीं जो किसी का इलाज कर सकू… (अल्पना को लगा की संभु सच बोल रहा है, कियोकि प्रतिक ने भी अल्पना को बताया था की त्रिकाल कोमा में है और उसको ठीक करने के लिए संभु तुमको खोज रहा है. पैर प्रतिक ने ये नहीं बताया था की त्रिकाल का इलाज क्या है.)

संभु – वो सब तू मुज पैर छोड़ दे. कैसे और क्या करना है वो सब मैं देख लगा. बस तू हाँ कर, बाकि क्या और कैसे करना है वो मैं तुझको बताता रहुगा. नहीं तो तू जानती है मेरे लिए 2 बच्चो को मरना कोई बड़ी बात नहीं है.

अल्पना भी इसके लिए मान जाती है. तो संभु सबसे पहले अल्पना को एक इंजीनियरिंग का फॉर्म दे कर पब को दिल्ली भेज देता है. और एक फ़ोन अल्पना को देता है. उस फ़ोन पैर पब की रोज की पिछ सटी थी की वो क्या कर रहा है. ये सब संभु अल्पना के मन में अपना दर बनाना के लिए कर रहा था. वो रोज अल्पना को फ़ोन पैर दमकता था की जब फोटो ली जा सकती है तो जान भी ली जा सकती है. जब अल्पना की हिम्मत फ़ोन कॉल्स से पूरी तरह टूट गयी तो संभु ने अल्पना और सोनल को भानु की हवेली में जुली के पास भेज दिया. और जुली को बोलै गया की अल्पना को फिजिकल में जयादा मेंटली टॉर्चर करना है. चाहे ट्रेनिंग पूरी होने में कितना भी टाइम लगे. उस टाइम तक जुली भी जल्लाद हुआ करती थी. उसकी टीम भी उसके जैसी hi जल्लाद थी.
 
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यहाँ पैर अल्पना और सोनल पे जुर्म होते रहे और वह पब मज़े से इंजीनियरिंग करता रहा. उसको पता भी नहीं था की क्या हो रहा है. वो कभी -2 फ़ोन पे hi बात कर लेता था. जुली में इंसानियत उस टाइम तक नहीं थी. वो अल्पना पैर बहुत जुर्म करती. हमेशा उसे गली देती. कभी रंडी, कभी कुत्तिया, तो कभी हरामजादी… जुली ने कभी भी अल्पना को नाम से नहीं बुलाया. अल्पना इतना जुर्म सहती फिर भी जुली को इन्शानियत का पाठ (लेसन) पड़ती. समय बीतता गया और जुली वो बन गयी जो अल्पना चाहती थी. और अल्पना वो बन गयी जो संभु चाहता था. अल्पना को मानशिक रूप से बेकार कर दिया था. ड्रग्स और टॉर्चर ने उसको तोड़ दिया था. अब वो सेक्स की भुकी हो चुकी थी. एक वो अल्पना थी जो त्रिकाल के निचे से भाग आयी थी. और एक ये अल्पना थी जो किसी के निचे सोने को बेताब थी. उसकी आत्मा आज भी उसे डिटक्करति थी. पैर सरीर हर टाइम सेक्स के लिए उसे उकसाता था. सोनल के साथ इतना नहीं हुआ था जितना की अल्पना ने सहा था. पैर सोनल की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी थी. जब इन दोनों की ट्रेनिंग पूरी हो गयी तो जुली ने अल्पना से पूछा की तुम संभु के जाल में जैसे फर्श गयी, क्यों आयी यहाँ पैर?? क्या तुम्हारे पति ने देखा दिया तुमको?? अल्पना ने बस इतना hi बोलै की “मैं ये सब अपने bête के लिए सहा रही हु” जुली अब अल्पना को बहुत मैंने लगी थी जुली की पूरी जिंदगी hi अल्पना ने चेंज कर दी थी. और जुली को दुःख भी था की उसने खुद अल्पना के साथ ये सब किया है. उसे उस दिन से 2 लोगो से नफरत हो गयी एक तो भानु से, जिसकी वजह से उसने ये सब कप्लना के साथ किया. और एक अल्पना के bête से जिसकी वजह से अल्पना ने ये सब सहा. वो अपनी सोच में hi अल्पना के bête के लिए पता नहीं क्या क्या गलत सोचती रही. जब ट्रेनिंग पूरी हो गयी तो भानु ने संभु को बुला लिया. और जब संभु अल्पना से मिला-

संभु – क्या हाल है मेरी जान, अब मेरा सपना पूरा करेगी या नहीं, अब तो आ जा और ख़ुशी -2 अपनी छूट मुझको दे दे. देख तुझको देख कर hi मेरा लुंड कैसे खड़ा हो गया है. (और वो अपना लुंड निकल कर दिखता है)

लुंड देख कर अल्पना का मन करता है की अभी जा कर वो उससे चुद ले, पैर वो इतनी भी कमजोर नहीं थी. उसने खुद पैर काबू करते हुए कहा – संभु हमारी बात हुयी थी की तुम केवल अपने गुरु को ठीक करने के लिए मेरी मदत लोगे, और ये सब नहीं करोगे. तो फिर क्यों परेशां करते हो मुझको….

संभु मन में सोचता है, ये साली किस मिटटी की बानी है, अभी भी छोड़ने को तैयार नहीं है. और गुरु जी को ठीक करने के लिए इसे इसकी मर्जी से गुरूजी के लुंड पैर कूदना है, पैर अभी भी ये खुद को रोक रही है. आज भी ये अपनी मर्जी से छोड़ने को तैयार नहीं है. हम्म्म कुछ दिन और इसे वासना की आग में जलने देता हु. सायद ये फिर छोड़ने को तैयार हो जाये.

संभु – तो फिर ठीक है तुम अभी यहाँ पैर hi रहो….

अल्पना – पैर मैं अब यहाँ नहीं रहा सकती. तुम भी जानते हो की 10-15 दिन में मेरा बीटा घर आ रहा है. यदि में यहाँ पैर होगी तो वो मुझको और अपनी बहन को दुनेगा.

संभु – ओह्ह हाँ, तो एक काम करता हु, उस सेल को मार देता हु जो तुमको यहाँ पैर रहने से रोक रहा है.

अपने bête की मूट की बात सुन कर अल्पना का कलेजा चिर जाता है. वो रोटी हुयी संभु के पेअर पकड़ लेती है, और बोलती है.

अल्पना – प्लीज तुम ऐसा कुछ मत करना मैं कहा मन कर रही हु तुम्हारा साथ देने को, तुमने मुज पैर यहाँ नर्क के जुल्म से भी जयादा जुल्म करवाए फिर भी मेने कुछ नहीं कहा. तो क्यों मार रहे हो मेरे bête को. यदि उसे कुछ हो गया तो मैं भी मर जोगी. मेरे लिए मेरे दोनों बच्चे hi सब कुछ है. मैं भी अपने bête को देखना चाहती हु. प्लीज हमे घर जाने दो, मैं वादा करती हु की जब मेरा बीटा घर से चला जायेगा तब तुम जहा कहोगे वह तुम्हारे साथ चलुगी…. प्लीज कुछ दिनों के लिए मुझको और मेरी बेटी को हमारे घर जाने दो. प्लीज..

संभु मन में – यदि ये सच में अपने bête के लिए इतना सह सकती है तो उसकी मूट पे मार भी सकती है. और यदि ये मार गयी तो गुरु जी कभी ठीक नहीं हो सकते. इसको कुछ दिनों के लिए इसके घर छोड़ देता हु. हो सकता है इसके सरीर में ट्रेनिंग से जो आग लगी है वो कुछ दिन में भड़क जाये. और मेरा काम हो जाये…

संभु – ok ठीक है, मैं तुमको तुम्हारे घर पहुँचवा देता हु, पैर डायन रहे यदि तुमने कोई भी होशियारी करने की कोसिस की तो ये तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा. हाँ और एक बात यदि कभी छोड़ने का मन हो तो मुझको फ़ोन कर देना मैं तुर्रंत आ जाउगा…. हाहाहाःहाहा

अल्पना संभु से कुछ नहीं बोल पति. संभु भी उसे अपने आदमियों से उसके घर पहुँचवा देता है. और पुरे 15 आदमियों को इस दोनों पैर नजर रखने के लिए बोल देता है. पब का घर तो वैसे hi बहुत छोटा था पैर फिर भी उसमे कैमरे लगा दिए थे. 3 दिन बाद पब घर पहुंच जाता है. उसे कुछ नहीं पता था की उसकी माँ और बहिन के साथ क्या -2 हो रहा है. उसे बस इतना लगा की उनके सरीर में काफी चेंज आ गया है तो उसने सोचा की सायद ये दोनों पैसे कमाने के लिए दिन रात खेतो में काम कर रही है इसलिए इनका ये हाल है. अल्पना ने भी अपने bête को कुछ नहीं बताया था और सोनल को भी चुप रहने की कसम दे दी थी. कियोकि अल्पना को पता था की घर पैर नजर राखी जा रही है. अल्पना का जिस्म उससे बगावत कर रहा था. पैर अल्पना अपने आप को संभाले हुए थी. और रोज भगवन से प्रे करती की कैसे भी उसे इस मुसीवत से निकल दे.

ीदार मणि जी को दस माँ ने अल्पना के घर जा कर उसके bête को लेन का आदेश दिया. कियोकि दस माँ अल्पना को बचाना चाहती थी. मणि जी दस माँ के आदेश से अल्पना के गाओं कुरज कुंड पहुंच गए. उस टाइम पब घर पे नहीं था. दोनों माँ बेटी hi थी. सोनल तो मांईजी को नहीं जानती थी. पैर अल्पना ने तुर्रंत उनको पहचान लिया. अल्पना को लगा की भगवन ने उसकी सुन ली और अब वो संभु से बच जाएगी. अल्पना ने मणि जी को शार्ट में सब बता दिया की उसके साथ क्या हो रहा है. मांईजी को संभु पैर बहुत गुस्सा आया. पैर अभी इन तीनो को बचाना जरुरी था. तो मणि जी ने अल्पना को बोलै की आप तीनो मेरे साथ आश्रम में चलो. वह संभु आप लोगो का कुछ नहीं बिगड़ सकता है. तो अल्पना भी जाने को तैयार हो गयी. पैर उसने मांईजी को बोलै की वो अपने bête को कुछ नहीं बताना चाहती है यदि उसको ये सब पता चला तो वो संभु से लड़ने चला जायेगा. और आप जानते है संभु के आगे वो कुछ नहीं कर सकता वो मर जायेगा. मणि जी भी इस बात को तैयार हो गए. और जब पब घर आया तो मणि जी ने उसे अपने साथ चलने को कहा तो पब ने साफ़ मन कर दिया. मणि जी ने और अल्पना ने उसे संजय भी पैर उसे अभी पैसा कामना था. उसे लग रहा था की उसकी माँ और बहिन की ये हालत पैसा कमाने के लिए खेतो में काम करने से हुयी है. वो सच्चाई से अनजान था. जब पब ने साफ़ मन कर दिया तो मांईजी ने अल्पना से बोलै की इसको सोल्लगे जाने के बाद तुम दोनों मेरे साथ चलो. पैर अल्पना ने ये कहा कर मन कर दिया की संभु उसके bête को मार देगा. और यदि उसे अपने bête की चिंता नहीं होती तो वो ये सब भी क्यों करती.

मणि जी को समाज नहीं आ रहा था की वो दस माँ के आदेश को कैसे पूरा करे. वो जानते थे की यदि दस माँ ने कहा है तो ये होना hi है चाहे इसमें कुछ एक्स्ट्रा टाइम लगे. मणि जी को अल्पना और सोनल की भी चिंता थी. वो जानते थे की संभु पब को जब तक नहीं मरेगा, जब तक की त्रिकाल के इलाज के लिए अल्पना त्रिकाल से नहीं चुद लेती. मणि जी ने ये अल्पना को भी बताया की त्रिकाल को ठीक करने के लिए संभु अल्पना से क्या करवाएगा. अल्पना की तो जैसे दुनिया hi लूट गयी ये सुन कर. पैर उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था की वो क्या करे. मणि जी ने अल्पना को संजय की वो पब की चिंता न करे मैं अपने कुछ चलो को पब की सेफ्टी के लिए भेज दुगा. तुम मेरे साथ चलो. अल्पना भी इस बात पैर राजी हो गयी.

ीदार जब संभु को पता चला की मणि अल्पना के घर पे है. तो वो गुस्सा हो गया. उसको पता था की वो मणि से जीत नहीं सकता. और अब अल्पना उसके हाथ नहीं आएगी. पैर फिर उसने एक प्लान बनाया. और अपने सरे आदमियों को बुला लिया. और उनको सब समजा कर पब के घर भेज दिया. मणि जी को भी पता था की संभु कुछ न कुछ तो करेगा hi. इसलिए उन्होंने भी वह से जाने का नाटक किया और उसी गाओं में दूसरे घर में रहने पहुंच गए. मणि जी को लगा की उनको यहाँ आते किसी ने नहीं देखा है. पैर संभु ने अपने 10 आदमी मणि के पीछे hi लगा रखे थे.

ीदार मणि जी ने भी अपने चलो को बुला लिया और पब और उसके घर के चारो और फैला दिया. उनसे बोलै की तुम चुप कर संभु के आदमियों पैर नजर रखना. जैसे hi वो पब या उसकी माँ बहन के साथ कुछ भी करने की कोसिस करे तुर्रंत उनको मर देना. संभु ने भी अपने प्लान के हिसाब से 3 टीम बनायीं थी. 1सत टीम जो सबके सामने रहा कर पब के घर पेन अजर रख रही थी. 2ंद टीम मणि के पीछे थी और 3रद टीम संभु के पास थी और गाओं के बस स्टैंड के पास एक घर में थी. इसमें 50 लोग थे. मणि जी ने सोचा भी नहीं था की संभु 70-80 आदमियों के साथ वह हो सकता है.
 
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जैसे hi पब घर से निकला. मणि के कुछ आदमी पब के पीछे हो गए. और 20 के करीब घर पैर नजर रखने लगे. पैर संभु का एक भी आदमी पब के पीछे नहीं गया था. कियोकि उसको पता था की पब किस सोल्लगे में है और उसको वह पैर hi जाना है. और मैं बात ये थी की संभु का टारगेट अल्पना थी न की पब. जैसे hi पब बस स्टैंड पैर पहुंच कर बस से चला. तुर्रंत मणि उस घर से निकल कर अल्पना के पास जाने लगा. मणि ने अपना भेष बदला हुआ था. पैर संभु के आदमी तो जोक की तरह उसके पीछे थे तो वो जानते थे की ये मणि hi है. उन्होंने तुर्रंत संभु को फ़ोन पे बता दिया की मणि वह से निकल रहा है. तो संभु ने उनको मणि को ख़तम करने को बोल दिया. संभु भी जनता था की मणि को मरना उन आदमियों के बस का नहीं है. पैर वो मणि से कुछ देर लड़ते जरूर रहेंगे. इसलिए संभु ने तुर्रंत अपनी टीम 1सत को अल्पना और सोनल को लेने भेज दिया. और खुद भी अपने सभी आदमियों के साथ अल्पना के घर की और चल दिया.

ीदार मणि उन 10 आदमियों से अकेला बेडा हुआ था. उदार घर के चारो और मणि के आदमी और संभु के आदमी आपस में लड़ रहे थे. और संभु इसका फायदा उदा कर अल्पना और सोनल को ले कर अपनी कार से निकल गया. और अपने उन 50 आदमी में से केवल 10 आदमियों को अपने साथ ले कर गया दूसरी कार में. वाकई 40 आदमी को छोड़ गया मणि से बिडने के लिए. मणि जब तक उन 10 आदमियों को मार कर पब के घर पंहुचा तब तक देर हो चुकी थी. संभु उन दोनों को ले कर दूर जा चुक्का था. और मणि भी जनता था की संभु और त्रिकाल के अड्डे पैर मणि का या किसी का भी जाना इम्पॉसिवाल है. कियोकि वह दस माँ के bête पहरा देते है. और त्रिकाल की तांत्रिक सक्तियो का घेरा भी है.

वो 40 आदमी मणि को देखते hi उसको मरने को आये. पैर मणि में भी अपनी न कामियाबी का गुस्सा उन सब को मार का संत किया. कुछ जॉब अच् गए वो भाग गए. ीदार जब संभु उन दोनों को ले कर अपने अड्डे पैर पहुंच गया तब उसको सास में सास आयी. अभी अल्पना और सोनल दोनों बेहोश थी. संभु को मणि पैर और इन दोनों पैर बहुत गुस्सा आ रहा था. तो संभु ने अपना सारा गुस्सा दोनों माँ बेटी को बुरी तरह मरने लगा. मार मार कर दोनों की चमड़ी उडद दी. जब संभु का गुस्सा संत हुआ तो वो उन दोनों की हालत देख कर खुद भी दर गया. उसने फिर उन दोनों की मलहम पट्टी की. कियोकि वो इन दोनों को किसी भी सूरत में मरने नहीं देना चाहता था. 3-4 दिन ऐसे hi निकल गए. बस संभु ने अपने कुछ आदमियों को पब के पास भेज दिया था. वो भी उस पैर बस दूर से नजर रखते थे. मणि ने भी अपने आदमी पब के पीछे लगा रखे थे. जो संभु के आदमियों पैर नजर रखते थे. मणि जनता था की अल्पना और सोनल को अब नहीं बचाया जा सकता है. इसलिए वो पब को hi बचने की कोसिस कर रहा था.

4-5 दिन में जब अल्पना और सोनल दोनों पूरी तरह ठीक हो गयी तो संभु फिर से अल्पना के पास चुदाई की बात करने गया. तब अल्पना ने संभु से साफ़ कहा दिया की मैं जानती हु की तू चाहता है की मैं अपनी मर्जी से तेरे गुरु त्रिकाल से चुडु. पैर ऐसा कभी नहीं होगा. यदि तूने मुझको मेरे बच्चो को मरने की दमकी दे कर भी त्रिकाल के साथ वो सब करने पे मजबूर किया तो वो केवल मज़बूरी में किया गया सेक्स होगा. न की मर्जी से किया हुआ. तो तू ये सोचना भी मत की मैं कभी भी वो सब करुँगी जो तू चाहता है. तब संभु ने बोलै की मैं भी देखता हु की तू कैसे नहीं करती वो सब जो मैं चाहता हु.

फिर संभु ने सोनल को दूसरे रूम में बंद कर दिया और अल्पना को टॉर्चर करने लगा. उसने अल्पना को सेक्स के हाई पावर के इंजेक्शन लगा दिए. और उसके रूम में चारो और ब्लू फिल्म चला दी. फिर भी अल्पना नहीं टूटी. वो सेक्स करने को पागल हो चुकी थी. उसका पूरा सरीर सेक्स मांग रहा था. पैर वो अपनी आत्मा को इस काम के लिए तैयार नहीं कर प् रही थी. कई मंथ तक संभु उसको ऐसे hi टॉर्चर करता रहा. पैर अल्पना ने हार नहीं मणि. उसके सरीर का बुरा हाल था. उसने सेक्स के नशे में अपने आप को बहुत जगह छोटे पहुंच ली थी. फिर संभु ने दूसरी तरह से उसे टॉर्चर करने का सोचा. और उसे ड्रग्स और सेक्स के इंजेक्शन लगा कर नशे की हालत में hi त्रिकाल के लुंड पैर बैठा दिया. नशे की हालत में भी उसकी आखों से आशु निकल गए. वो रोटी रही और सभु उसे जबरदस्ती नशे में त्रिकाल के लुंड पे कुददाता रहा. न चाहते हुए भी अल्पना ये सब करती रही. और उसकी आत्मा हर पल मरती रही. वो एक ऐसी औरत बन गयी जिसके पास रट हुए छोड़ने के अलावा कोई काम नहीं था. एक सटी सावित्री औरत की जिंदगी एक रंडी से भी बत्तर हो गयी. उसकी अंतर आत्मा हल पल मरती. उसका सरीर हल पल बलात्काल का दर्द सहन करता. सायद नर्क में भी किसी को इतनी पीड़ा न मिले जितनी की अल्पना को अभी मिल रही थी. एक औरत का यदि एक बार hi r**e हो जाये तो उस 10-15 मं के दर्द से वो पूरी जिंदगी तड़पती है. यहाँ तो पूरी जिंदगी hi वो हो रहा था. जो किसी के साथ पल भर भी होने से आत्मा तक चीख उड़ती है. संभु उसे त्रिकाल के उप्पेर से एक पल को भी अलग न होने देता. या तो वो कूदती या बेहोशी के आलम में पड़ी रहती. संभु अपने हाथो से उसे खाना खिला जाता और फिर कुछ इंजेक्शन दे जाता. पैर त्रिकाल पैर कोई असर नहीं हो रहा था. उसका लुंड खड़ा का खड़ा था.

ऐसे hi अल्पना के साथ कई सालो तक होता रहा. जब भी अल्पना ये सब करने को मन करती तब संभु उसे पब को मरने की या सोनल को मरने की दमकी देता. अल्पना भी मज़बूरी में दिन और रात त्रिकाल से चुदती रही. तो कभी कई महीनो तक सेक्स के इंजेक्शन दे कर टॉर्चर किया जाता. तो कभी मार पिट कर. अल्पना के जिस्म के हर हिस्से पैर चोट के निशान बन चुके थे. वो देखने में भी अब वो नहीं रही थी जिसकी खूबसूरती का संभु देवना था.

इस तरह करीब 5 साल बिट चुके थे. अल्पना रह रह कर थक चुकी थी. वो अब जिन्दा लाश बन चुकी थी. संभु उसको जैसे नाचता वो वैसे नाचने लगी थी. संभु भी अब हिम्मत खोने लगा था. संभु को समाज नहीं आ रहा था की वो अब क्या करे की अल्पना अपनी मर्जी से त्रिकाल के साथ सेक्स करे. और ऐसा भी नहीं था की अल्पना ने कभी सेक्स को एन्जॉय नहीं किया था. वो भी कई बार सेक्स एन्जॉय कर चुकी थी. पैर बाईट 5 सालो में सायद hi कोई दिन ऐसा था जब अल्पना को सेक्स और ड्रग्स का इंजेक्शन न दिया गया हो. उसका दिमाग ख़तम हो चुक्का था. सरीर के नाम पैर हड्डियों का ढाचा बचा था. उसने सूरज को देखे भी कई साल हो चुके थे. हमेशा त्रिकाल के साथ उसी रूम में पड़ी रहती थी. संभु उसको खाना दे जाता और साथ में इंजेक्शन भी दे जाता. उसका काम त्रिकाल के उप्पेर उछलना और खाना बस इतना hi रहा गया था. उसने सोनल को भी यहाँ आने के बाद कभी नहीं देखा था. बस 2-3 बार जब उसने ज्यादा जिद की तो संभु उसे सोनल के रूम के बहार तक ले जाता और वो दूर के बहार से hi सोनल से बात कर के बापिस आ जाती. पब का भी फ़ोन बहुत काम आता था. जब आता तब संभु hi उससे बात करवाता
 
अपडेट 114 (फ्लैशबैक एन्ड)

हमेशा त्रिकाल के साथ उसी रूम में पड़ी रहती थी. संभु उसको खाना दे जाता और साथ में इंजेक्शन भी दे जाता. उसका काम त्रिकाल के उप्पेर उछलना और खाना बस इतना hi रहा गया था. उसने सोनल को भी यहाँ आने के बाद कभी नहीं देखा था. बस 2-3 बार जब उसने ज्यादा जिद की तो संभु उसे सोनल के रूम के बहार तक ले जाता और वो दूर के बहार से hi सोनल से बात कर के बापिस आ जाती. पब का भी फ़ोन बहुत काम आता था. जब आता तब संभु hi उससे बात करवाता.

जब संभु ने अपनी अल्पना से साडी उम्मीदे छोड़ दी. तब संभु ने फिर से त्रिकाल को ठीक करने के लिए पूजा सुरु की. और उस पूजा से उसे पता चला की अल्पना बिना किसी नशे के अपनी मर्जी से जब त्रिकाल के साथ सेक्स करेगी तब hi वो ठीक हो सकता है. अब संभु को खुद पे गुस्सा आ रहा था की उसने अल्पना को ड्रग्स क्यों दिए. पैर अब तो अल्पना ड्रग्स की आदि हो चुकी थी. बिना ड्रग्स के वो रहा नहीं सकती थी. तब संभु ने उसके लिए कुछ एंटीडोसी मगवाये. और इन एंटीडोसी का ये असर हुआ की जब अल्पना नशे में नहीं होती तब वो सेक्स के लिए पागल हो जाती. वैसे भी अब तक अल्पना अपना सयम, अपनी आत्मा, अपना डेर्या खो चुकी थी. 3 दिन hi हुए थे एंटीडोसी देते हुए. अल्पना को अपनी गर्मी सहन नहीं हो रही थी. उसका पूरा बदन ड्रग्स और सेक्स मैग रहा था. पैर अभी अल्पना नशे से पूरी तरह मुक्त थी. और सेक्स के लिए पागल हो चुकी थी. जब उसको कुछ नहीं सुजा तो वो त्रिकाल पे hi चढ़ गयी. जितना वो 5 साल में त्रिकाल से चूड़ी थी उतना तो प्रतिक ने भी उसे नहीं छोड़ा था. तो अब उसे त्रिकाल पे चढ़ने में कोई संकोच नहीं था. और मजे से त्रिकाल से छोड़ने लगी. एंटी दोसे का असर था की वो जड़ने का नाम नहीं ले रही थी. उसे आज बहुत मज़ा आ रहा था. 45 मं त्रिकाल के उप्पेर कूदने के बाद जब वो झड़ी तो उसे लगा की त्रिकाल भी झाड़ा है. उसने नजर उदा कर देखा तो त्रिकाल अपनी आखे खोल कर मुस्कुरा रहा था.

जब संभु ने त्रिकाल की आवाज सुनी तो उसे यकीं नहीं हुआ की उसकी म्हणत रंग लगी. उन दोनों ने अल्पना को बही छोड़ कर दूसरे रूम में चले गए. संभु ने उसे बाईट 25 सालो के वेयर में बताया. त्रिकाल ने अपनी पावर्स को चक किया तो वो खली हो चुक्का था. और यहाँ अल्पना त्रिकाल का वीर्य अपने अंदर लिए मूरति की तरह बैठी थी. उसे यकीं नहीं हो रहा था की उसने उसकी जिंदगी उसके परिवार को बर्बाद करने वाले को बचा दिया है. वो रो रही थी. और कमजोरी के चलते बेहोश हो गयी.

उदार त्रिकाल और संभु बात करते रहे. त्रिकाल ने अपने दिमाग पैर जोर डालना सुरु किया तो उसे अपने मंत्र, याद आने लगे. त्रिकाल एक लम्बी नीड से जगा था. तो वो अभी रिलैक्स होना चाहता था. संभु ने तुर्रंत भानु को फ़ोन करके कुछ लड़कियों को भेजने को बोल दिया. उन लड़कियों को ले कर जुली hi आयी थी. अड्डे के बहार संभु पहुंच गया था. वो जुली को ले कर अंदर आया. और उसके साथ लायी हुयी लड़कियों में से कुछ त्रिकाल के साथ भेज दी. और 2-3 को ले कर वो चला गया. आज दोनों बहुत खुश थे. संभु की तो सालो की म्हणत सफल हो गयी थी.

इस दोनों के जाने के बाद जुली वह बैठी रहा गयी और ीदार उदार घूमने लगी. वो घूमते हुए अल्पना के पास पहुंच गयी. जब उसने कप्लना को इस हाल में देखा तो उसनी आखों से खून के आशु निकलने लगे. जुली ने बेहोश हो चुकी अल्पना की सेवा करना सुरु कर दिया. सुबह जब अल्पना को होश आया तो अल्पना एक बार तो जुली को पहचान hi नहीं पायी उसका मंद कमजोर हो चुक्का था. जब जुली ने उसे अपने वेयर में बताया तब उसे जुली याद आयी. और वो जुली को देख कर बुरी तरह रोने लगी और बोली “ प्लीज जुली मुझको और सोनल को बचा लो, प्लीज अब ये सब सहन नहीं होता.. (फिर रोने लगी) .. bête के खातिर गुरूजी की बात भी नहीं मानी. काश वो उस दिन हम दोनों को बचा लेते.” और फिर और तेज़ रोने लगी अल्पना जुली का सहारा प् कर अपने आप को रोक नहीं पायी और अपने दिल में छुपे दर्द को आशु के रूप में बहाने लगी. और रट -2 फिर बेहोश हो गयी. जुली जब उसे फिर से उड़ने लगी तब संभु वह आ गया. और जुली को वह से भेज दिया और साथ में लायी हुयी लड़कियों को भी.

नेक्स्ट डे त्रिकाल को अपने 25 साल बेकार होने पैर गुस्सा आने लगा. तो उसने उस गुस्से को भी अल्पना पे निकला. पहले उसे बुरी तरह मारा और फिर उसके साथ सेक्स किया. त्रिकाल को जब भी गुस्सा आता त्रिकाल ऐसा hi करता. नहीं तो वो अपनी सकती वापिस पाने के लिए सोचता क्या करना है. और कुछ दिनों में उसको वो तरीका भी मिल गया जिससे उसे उसकी साडी सकतिया वापिस मिल सकती थी. तो उसने डलासुर के कैद दानव रूप की पूजा सुरु कर दी. कियोकि उसकी साडी पावर्स डलासुर के दानव रूप में hi चली गयी थी. डलासुर की दी हुयी सकती डलासुर के लिए की जाने वाली क्रिया के पुरे न होने पैर उसके पास वापिस चली गयी. अब डलासुर के दानव रूप को खुश करना था. और उसे कैद में भी रखना था. तो ये पूजा लम्बी चलने वाली थी. और दानव को खुश करने के लिए चाहिए बलि. तो उसे इस पूजा के लिए लड़कियों की बलि देनी थी. संभु ने त्रिकाल की बात सुनते hi भानु को फ़ोन पैर स्टेज 3 की लड़कियों को बुला लिया. इस बार भानु और जुली दोनों आये थे उन लड़कियों के साथ. भानु उन लड़ियो को त्रिकाल की गुलाम बना कर चला गया. और जुली लड़कियों के साथ रुक गयी संभु के कहने पैर. त्रिकाल अपने पूजा रूम में हवन कर रहा था. जुली उन लड़कियों के साथ थी. त्रिकाल एक -2 करके उन लड़कियों को बुलाता रहा और उनकी बलि देता रहा. जब ये बलि का काम पूरा हो गया तो त्रिकाल तो अपनी पूजा ने hi लगा रहा संभु जुली के पास आया और बोलै की तुम जा सकती हो. तब जुली ने पूछा क्या बात है आज अपने अपने लिए एक भी लड़की नहीं मगई. तब संभु बोलै “ नहीं आज रात में उस अल्पना की बेटी को छोड़ूगा. तब मेरा बदला पूरा होगा अल्पना से. तुम जाओ मुझको गुरूजी के साथ पूजा पैर बैठना है.” संभु ये कहा कर त्रिकाल के पास पहुंच गया. पैर जुली को लगा की उसे ये बात अल्पना को बता देनी चाहिए तो वो अल्पना के रूम में गयी. वह अल्पना जख्मी हालत में पड़ी थी. जुली ने उसे बोलै “ सुन रंडी कुछ कर नहीं तो आज तेरी बेटी भी रंडी बन जाएगी. संभु उसे आज रात छोड़ने वाला है”

जुली की ये बात सुन कर अल्पना में पता नहीं कहा से ताकत आ गयी, सायद ये उसका अपनी बेटी के लिए प्यार था. फिर अल्पना बोली – “ नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूगी. मैं अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद नहीं होने दूगी चाहे फिर bête मारे या जिए. मेने उसके लिए बहुत सहन कर लिया. और वो पैसा कमाने में अपनी माँ और बहन को भूल चुक्का है. पैर मेरी बेटी को कोई छुए भी तो मैं भी ये भूल जोगी की कोई मेरा बीटा भी था.”

जुली भी उसकी मदत करना चाहती थी तो उसने सोनल के रूम की कीस संभु के रूम से ला कर अल्पना को दे दी. और वो चली गयी. अल्पना भी छुपती हुयी सोनल के रूम में पहुंची. जब उसने सोनल को देखा तो सोनल का सरीर भी खाना काम निलने और कैद रहने से सुख चुक्का था. अल्पना और सोनल किसी तरह छुपते हुए वह से भाग निकली. ये दिल्ही के पास का जंगल hi था. तो अल्पना छुपती हुयी 3-4 दिन में मणि जी की आश्रम में पहुंच गयी. उसे लगा की मणि जी hi उसे और उसके bête को बचा सकते है.

ीदार जब संभु को पता चला की अल्पना और सोनल भाग गयी है तो वो गुस्सा हो गया. और उनके पीछे और पब के पीछे अपने आदमी भेजने लगा. तब त्रिकाल ने उसे ये कहा कर रोक दिया की क्यों उसके पीछे पड़े हो हमारा टारगेट वो दोनों नहीं बल्कि अपनी खोई हुयी ताकत को वापिस पाना है. एक बार पावर्स मिल गयी तो फिर उनको कभी भी चिति की तरह मसल सकते है.

जब अल्पना मणि जी के पास पहुंची तो वो उनके पैरो में गिर कर रोने लगी. और रट -2 बेहोश हो गयी. फिर मणि जी ने उन दोनों का ख्याल रखना सुरु कर दिया. अल्पना को अब डोरे पड़ने लगे थे. ड्रग्स न निलने से उसको बहुत प्रॉब्लम होने लगी थी. वो या तो सारा दिन चुप चाप बैठी अपने खयालो में रहती. मणि जी उससे जब भी पूछते की पिछले 5 सालो में उसके साथ क्या हुआ. तो उसे डोरा पद जाता. सोनल तो जल्दी hi रिकवर हो गयी. पैर अल्पना की हालत ठीक नहीं हो रही थी. जिस्म के घाव तो भरने लगे थे. पैर जो घाव उसके आत्मा को मिले थे उनका भर पाना न मुंकिन था. सोनल ने दूसरे फ़ोन से पब को फ़ोन करके बात की और बताया की उन्होंने दूसरा फ़ोन ले लिया है. अल्पना ये जान कर खुश थी की उसका बीटा भी ठीक है. पैर वो अपना सब कुछ खो चुकी थी. देखते hi देखते कुछ मंथ बिट गए. एक दिन पब ने अल्पना को फ़ोन पैर बताया की वो गाओं आ रहा है. पब से बात करके अल्पना सोचने लगी की वो तो यहाँ पैर है और पब गाओं पहुंचेगा. और यदि वो गाओं जाएगी तो भी उसके सरीर के बेसुमार घावों के निशानों को देख कर पूछेगा की ये कैसे हुआ. वो सोचने लगी की वो अपने bête का सामना कैसे करेगी. कुछ दिन बाद फिर फ़ोन आया जब पब ने बताया की उसने अपनी साडी कमाई किसी को बचने में लगा दी है. तो अल्पना ने उसे ज्यादा कुछ नहीं कहा. वैसे भी अल्पना के लिए पैसे की कोई अहमियत नहीं थी. पैर इससे उसे bête का सामना न करने का एक तरीका सुजा. और इस जिल्लत भरी जिंदगी से पीछा छुड़ाने का भी तरीका सूज गया.

जिस दिन पब को गाओं आना था उससे पहले वो सोनल के साथ गाओं पहुंच गयी और रात में खुद पैर और घर पैर पेट्रोल दाल कर आग लगा ली. उससे पहले hi अल्पना ने सोनल को बचने के लिए मणि को फ़ोन कर दिया था. और आग लगने से पहले एक लेटर लिख कर खिड़की से बहार फेक दिया. आग उसने सबसे पहले खुद को hi लगाई थी. आग में घर भी जलने लगा. और सोनल वह बेहोश हो गयी. तभी वह मणि पहुंच गया और उसने सोनल को बचा लिया और अपने साथ ले गया. गाओं वालो को सोनल के वह से बचने का पता नहीं चला.

(दोस्तों फ्लैशबैक ख़तम हो चुक्का है. और मेरे हिसाब से सभी सवालो के जवाब भी मिल चुके होंगे. अब कोई भी राज नहीं है. केवल दस माँ और डलासुर का राज है और गुरु का part बचा है. प्लीज बताये की आप लोगो को पब का part केसा laga.or यदि कोई सवाल आप लोगो के मन में हो तो वो भी बताना.)
 
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