MANAV or DANAV sex story - part 1 - Page 16 - SexBaba
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MANAV or DANAV sex story - part 1

अपडेट 122

माहि को भी याद आ गया की उसे भी वह जाना है. तो वो भी तैयार होने चली गयी उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. उसके मन में ये बात घर कर चुकी थी की उसके पति ने, उसके दोस्त ने सुहागरात पैर भी उसके साथ कुछ नहीं किया.

सुबह 7 बजे तक सभी रेडी हो कर घर से निकल चुके थे. काजल, जय, पेय, मूड, अवनि घर पैर थे और सभी जुली की टीम के साथ मंदिर को निकल चुके थे. पब, मणि, गुरु, दीनदयाल और सैंडी एक कार में थे. पब ने माहि को आवाज दे कर अपने पास बुलाया तो माहि गुस्से से मुँह फेर कर दूसरी कार की और बाद गयी. ये सब माहि को देखते hi रहा गए. पब ने तो इसलिए बोलै था कियोकि ये सब hi हवन में हिस्सा लेने वाले थे तो इनको सबरे पहले जा कर हवन की सुरुवात करनी थी. पैर माहि तो अपनी hi सोच ने पब से गुस्सा हो कर दूसरी कार में चली गयी जिसमे पहले से hi पारी, कामिनी (ड्राइविंग), सविता, एरिका बेटी हुयी थी. अंकिता के साथ साक्षी, गोपाल, रेनू और ऐडा जा रहे थे. ऐडा की साक्षी और रेनू से अच्छी जमने लगी थी.

पारी, माहि और एरिका पीछे bêthe थे. पारी ने जब माहि का उतरा हुआ फेस देखा तो उसे समाज नहीं आया की माहि किस बात से नाराज है. तो उसने माहि से पूछ hi लिया..

पारी – माहि क्या हुआ तुम उदास क्यों लग रही हो???

माहि – नहीं पारी मैं ठीक हु बस हवन को ले कर hi सोच में थी..

पारी को लगा की बात कुछ और है और माहि बता नहीं रही है. पैर पारी को माहि का ये उदास फेस भी अच्छा नहीं लग रहा था तो वो माहि को छेड़ने की सोचने लगी. जिससे माहि का मूड ठीक हो जाये…..

पारी – चल छोड़ सब ये बता की रात को क्या हुआ. रात को तो खूब मज़े किये होंगे न….

पारी ने गलती से माहि की दुखती नस पर hi हाथ रख दिया था. पैर माहि किसी को कुछ बताना नहीं चाहती थी तो चुप hi रही..

पारी – ारे बोल मेरी बन्नो, केसा लगा हमारे पति का वो…. कही छोटा तो नहीं लगा न…

पारी की बात सुन कर सभी हसने लगे, कियोकि सब जानते थे की पब का लुंड जान निकल देता है. पैर माहि को गुस्सा आने लगा. तो वो सर निचे कर के चुप रही

पारी – अब क्यों शर्मा रही है हम सब भी उसके मज़े ले चुके है. बड़ा मज़ा आता है.. पैर साला दुबारा नहीं मिला आज तक… आअह्ह्ह्ह जाने कब वो दिन आएगा जब दुबारा उनका वो मिलेगा….

एरिका – हाहाहाहाहा.. बड़ी आग लगी है पारी तेरे अंदर तो… सभाल कही तेरी जल न जाये… हाहाहाहाहा… पैर यार मन तो मेरा भी बहुत करता है. दुबारा करने का….

सविता – अरे तुम दोनों चुप होगी की नहीं.. या सबकी पंतय खराब करनी hai….hahaahahaha

कामिनी – कामिनियों तुम सब तो काम से काम 1 बार तो मज़े कर चुकी होय अहा तो 1 बार भी नशीब नहीं हुआ. क्यों बड़का रही हो मंदिर जाते हुए इन सोये अरमानो को….

सबकी ऐसी गरम बाते सुन कर माहि को बर्दाश नहीं हो रहा था. उसे रात का सपना बार -2 याद आ रहा था. (पैर वो हकीकत है). और मन में गुस्सा और बाद रहा था…

माहि (चीखते हुए) – प्लीज स्टॉप आईटी…. प्लीज …. मैं ये सब नहीं सुन सकती… (माहि का फेस गुस्से से लाल हो गया था)

कामिनी – क्या हुआ माहि हम सब तो मजाक कर रहे है. तुम ठीक तो हो न?? किसी ने कुछ कहा क्या??? या उन्होंने कुछ कहा??

माहि – नहीं दीदी किसी ने कुछ नहीं कहा. उन्होंने कुछ भी नहीं कहा .. इस बात का hi तो दुःख है किन ा तो उन्होंने कुछ कहा और न hi कुछ किया….

कामिनी – क्या मतलब क्या नहीं किया उन्होंने ???? रात को कुछ गलत हुआ क्या??

माहि – दीदी गलत और सही तो तब होता न जब कुछ होता जब कुछ हुआ hi नहीं तो क्या गलत और क्या सही.. पता नहीं मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ की मेरी सुहागरात पैर भी कुछ नहीं हुआ….

कामिनी ये सुन कर सॉकेड हो गयी. उसके समाज hi नहीं आया की माहि क्या कहना चाहती है. कियोकि कामिनी जानती थी की यदि माहि चूड़ी नहीं होती तो अभी तक सब ख़तम हो चुक्का होता. फिर माहि किस बारे में बात कर रही है?? कामिनी कार को एक साइड में लगा कर बोली

कामिनी – तुम सब कुछ बताओ क्या हुआ. कुछ मत छुपना. रात को वो तुम्हारे पास गए थे उसके बाद से सुबह तक का सब बताओ क्या -2 हुआ… (कामिनी ने ये बात एक दम सीरियस हो कर बोली थी. और माहि भी गुस्से में सब बताती गयी की रात को क्या हुआ. और फिर बोली – जब मैं सुबह उडी तब पता चला की वो तो एक सपना था. हकीकत में ऐसा कुछ हुआ hi नहीं है. मेरा वो सपना, सपना बन कर hi रहा गया जो मेने अपनी 1सत नाईट के लिए देखा था.

कामिनी – तुम कैसे कह सकती हो की रात को कुछ नहीं हुआ?? और वो सपना था हकीकत नहीं???

माहि – उसका साबुत ये है की मैं अभी भी कुवारी हु. और मेने जो देखा था की मैं वैसे गन्दी hi सो गयी पैर सुबह में वैसी hi साफ़ थी और मेरी वो भी एक दम पहले जैसी थी. जबकि कुछ हुआ होता तो वो वैसी नहीं रहती…

माहि की ये बात सुन कर एरिका, पारी और सविता पागलो की तरह हसने लगी. कामिनी को भी नहीं समाज आया की ये तीनो इतनी सीरियस बात पैर पागलो की तरह क्यों है रही है.. कही ये पागल तो नहीं हो गयी. सविता ने हस्ते हुए कामिनी को कार चलने का इसरा कर दिया तो कामिनी ने भी कार रोड कर भगा दी. कियोकि वो और लेट नहीं होना चाहती थी. और गुरु से मिलना भी चाहती थी. कुछ देर हसने के बाद सविता बोली

सविता – कामिनी यदि तुम ये बात किसी को न बोलो तो एक बात बताऊ, तुमको भी हसी आएगी और माहि को भी पता चल जायेगा की वो सब सच में हुआ था… और माहि तुमको भी ये बात किसी को नहीं बतानी है…

कामिनी – हाँ बोलो क्या कहना है तुमको… वैसे भी हम सब किसी भी बात को किसी को से कहा hi नहीं सकते.

सविता – तुमको पता है की उनके साथ 1 रात बिताने के बाद भी हम सब भी अभी तक कुवारी है…

कामिनी – क्या क्या कहा … क्या मतलब है इस बात का???

सविता – यही मतलब है की हम सब अभी तक सील पैक है. और ये सब इसलिए है कियोकि इस किरिया में सील फिर से लग जाती है. और वो जब टूटेगी जब ये किरिया पूरी करने के लिए वो हम सबको एक साथ भोगेंगे..

सविता की ये बात सुन कर एरिका को भी शॉक लगा. सबको एक साथ छोड़ने वाली बात उसको भी नहीं पता थी. माहि और कामिनी तो इस बात को हजम hi नहीं कर प् रही थी.

पारी – अब सामजी मेरी बुलबुल वो सपना नहीं हकीकत था. सोच जरा यदि वो सपना होता तो क्या तुम सुबह बिना कपड़ो के होती. और वो अपनी सब बीबियो की बहुत केयर करते है तो मेरे हिस्सा से उन्होंने hi तुम्हारी उसको साफ़ किया होगा. और तुमको चादर से कवर भी किया होगा….

पारी की बात सुन कर अब माहि का सारा गुस्सा, सारा वहां ख़तम हो चुक्का था. उसके होंटो केर एक मुस्कान आ गयी थी. पैर वो ये भूल गयी की इन सब चक्करो में उसने अपनी सुहागरात की पूरी कहानी इन सब को बता दी थी. अब माहि का क्या होगा कालिया…… वही होगा जो मंजूरी पारी होगा…… हाहाहाःहाहा

अब क्या था पारी को माहि को छेड़ने का फुल मौका मिल चुक्का था. पारी – वैसे माहि तुम कबसे ऐसे सपने देख रही थी??

माहि – कोनसे सपने…

पारी (धिरे से उसके कान में) – यही की पब ने तुमको ऐसे छोड़ा है… कबसे आ रहे है तुमको ये सपने जो तुम्हारा सपना, सपना hi रहा गया था??? यार मुझको तो सपनो में भी नहीं करते ये……

अब माहि मरे श्रम के कुछ नहीं बोल पायी और फिर तो सब सुरु हो गए और सबने माहि को खूब परेशां किया. ये सब लोग सबसे लास्ट में मंदिर पहुंचे थे. पब हवन पैर बेथ चुक्का था. पब के सामने दीनदयाल और हवन कुंड के एक और मणि बैठे थे. और पब के पास में एक जगह खली थी जो की माहि के लिए थी. मणि जी ने इस हवन पैर पब के साथ माहि को बैठने को बोलै था. इस हवन को करने के लिए जो मंत्र थे. वो एक ग्रन्थ के रूप में दीनदयाल के पास थे. दीनदयाल वो ग्रांट पब को देता है. पैर पब को इसकी जरुरत नहीं थी. फिर भी वो उस ग्रन्थ को माथे से लगा कर अपने सामने रख लेता है.

माहि भी जा कर पब के पास बेथ चुकी थी. माहि ने पहले भी उस ग्रन्थ को पड़ने की कोसिस की थी पैर वो सफल नहीं हुयी थी. दीनदयाल हवन सुरु करने को बोलता है. तो सबसे पहले पब शुद्धिकरण के मंत्रो को पड़ता है फिर हवन को पूरा करने का संकल्प लेता है माहि हारक ऍम में पब के साथ थी. पब अपनी आखें बंद करके पहाड़ो के देवता को याद करके उनसे प्राथना करता है और फिर हवन सुरु करता है. पब के मुँह से सभी मंत्र एक दम साफ़ और तेज़ आवाज में, सुर के साथ निकल रहे थे. वह मौजूद सभी लोगो के मन और दिमाग को मंत्रो से बहुत शांति मिल रही थी. मणि, दीनदयाल और माहि हवन कुंड में आहुतिया दे रहे थे. मणि और दीनदयाल दोनों hi जानते थे किस मंत्र के बाद किस प्रकार की आहुति देनी है.
 
अपडेट 123

माहि भी जा कर पब के पास बेथ चुकी थी. माहि ने पहले भी उस ग्रन्थ को पड़ने की कोसिस की थी पैर वो सफल नहीं हुयी थी. दीनदयाल हवन सुरु करने को बोलता है. तो सबसे पहले पब शुद्धिकरण के मंत्रो को पड़ता है फिर हवन को पूरा करने का संकल्प लेता है माहि हारक ऍम में पब के साथ थी. पब अपनी आखें बंद करके पहाड़ो के देवता को याद करके उनसे प्राथना करता है और फिर हवन सुरु करता है. पब के मुँह से सभी मंत्र एक दम साफ़ और तेज़ आवाज में, सुर के साथ निकल रहे थे. वह मौजूद सभी लोगो के मन और दिमाग को मंत्रो से बहुत शांति मिल रही थी. मणि, दीनदयाल और माहि हवन कुंड में आहुतिया दे रहे थे. मणि और दीनदयाल दोनों hi जानते थे किस मंत्र के बाद किस प्रकार की आहुति देनी है.

अभी हवन सुरु हुए 15-20 मं hi हुए थे की पब को ऐसा लगने लगता है की कोई उसे चारो और से दबा रहा है. उसके गले पैर भी दबाब पद रहा था. वो मुश्किल से मंत्रो को पद प् रहा था. और ये दवाब धिरे -2 बढ़ता hi जा रहा था. सभी लोग गहरा रहे थे. पैर कोई कुछ नहीं कर सकता था. सब जानते थे की ये देवता के गुस्से के कारन हो रहा है. पब के आवाज अब बहुत काम हो गयी थी. तब मणि माहि को बोलते है – माहि ग्रन्थ खोलो और इससे आगे के मंत्रो को तुम पड़ना सुरु करो.

माहि जानती थी की वो इस ग्रन्थ को नहीं पद सकती पैर अभी कंडीशन ये थी की उसको ये करना hi था. तो वो भी पहाड़ी देवता से प्रत्न करके ग्रन्थ से मंत्रो को पड़ने लगती है. और वो बहुत hi आराम से ये कर प् रही थी. उसे खुद पैर भी विस्वास नहीं हो रहा था की वो आज आराम से इन मंत्रो को पद प् रही है जबकि पहले वो ये कभी नहीं कर पायी थी.

जैसे hi माहि ने मंत्रो को पड़ना सुरु किया. पब ने अपनी आखें बंद करके पहाड़ी देवता को याद किया और उनसे सभी की और से माफ़ी मांगने लगा. धिरे -2 पब पैर से दवाब काम होने लगा. और ीदार माहि को पेट में दर्द सुरु हो गया. तो तुर्रंत पब ने मंत्रो को पड़ना सुरु करके माहि को चुप करवा दिया… ऐसे hi चलता रहा. पब मंत्रो को पड़ता तो वो देवता के गुस्से को झेलता. कभी सरीर में जलन होती तो कभी चुभन होती, कभी लगता की वो बर्फ पैर बैठा है तो कभी मरे गर्मी के पसीना पसीना हो जाता. ऐसे hi माहि के साथ होता जब वो मंत्रो को पड़ती. पैर पब माहि को जयादा देर मंत्र नहीं पड़ने देता वो खुद hi सब सह रहा था. 2 हॉर्स में पब और माहि की हालत एक दम बुरी हो चुकी थी. सभी लोग इन दोनों की हालत देख कर दुखी थे पैर कोई कुछ कर नहीं सकता था. पब और माहि का सरीर पूरी तरह निचुड़ चुक्का था. दोनों के सरीर में नाम मात्रा की जान hi थी. फिर भी वो लगे हुए थे हवन के मंत्रो के उच्चारद में. अभी तो 1 ऑवर का हवन और बच्चा था.

जुली की पूरी टीम मंदिर के बहार पहरा दे रही थी. और पिछले 2.30 ऑवर से कोई भी वह नहीं आया था. तो ये सब थोड़े केयरलेस हो चुके थे. एक दम से एक पूरी भीड़ आती हुयी दिखाई दी थी. ये सब मला रवि के hi आदमी थे. इसमें त्रिकाल के भी लोग शामिल थे भीड़ में काम से काम 600 लोग तो थे hi. इतने लोगो को देख कर जुली और उसकी टीम की फैट गयी. ये केवल 16 थी. और इनके पास हतियार के नाम पैर कुछ नहीं था. केवल जुली एक पिस्तौल ले कर आयी थी. उसमे 10 गोलिया थी. और सामने की भेद में 600 से भी ज्यादा लोग थे. जैसे -2 ये लोग नजदीक आ रहे थे वैसे वैसे जुली की दिल की दध्कन बढ़ती जा रही थी. जुली ने देखा की उन लोगो में बहुतो के पास गन्स है और बचे हुए लगभग सब पैर कुछ न कुछ हटिया तो थे hi. जुली को लगा की आज यहाँ कोई नहीं बच सकता. तो वो भाग कर अंदर गयी और कामिनी और गुरु को सब बताने लगी. गुरु कुछ सोचने लगी और फिर बोली

गुरु – जुली तुम अपनी टीम को छुपने को बोलो. मुझको लगता है की ये लोग पहले गन्स का hi इस्तेमाल करेंगे. जब तक मैं गुरूजी से बात करके आती हु. (कामिनी की और देखते हुए) कामिनी सबसे बोलो की लड़ने को तैयार हो जाओ. आज वक्त आ गया है, हम सबको hi इस तूफान को रोकना होगा. पब हवन पैर है. और जब तक हवन पूरा नहीं हो जाता तब तक वो हमारी कोई हेल्प नहीं कर सकता. जाओ और सबको ले कर आओ…

जुली फिर से अपनी टीम के पास पहुँचती है और सबको छुपने को बोलती है वो सब तो चुप गयी पैर जैसे hi जुली छुपने लगती है. तभी गोलियों की आवाज से पूरा गोअन हिल जाता है. जुली भी खुद को बचने के लिए एक जम्प मर कर एक पिलर की आड़ में चुप जाती है पैर तब तक उसे 1 गोली लग चुकी थी. जो उसकी राइट हैंड में गुशी थी. जुली के अंदर होते hi गोलिया रुक जाती है. ीदार गुरु मणि को साडी कंडीशन कान में बताती है. तो मणि दिलदायल और पब पैर हवन छोड़ कर गुरु के साथ बहार आ जाता है. और गुरु से बोलता है – गुरुपित आज हमको दिखाना होगा की हम भी किसी से काम नहीं है. जो पावर्स आज तक किसी के सामने उसे नहीं की आज उन पावर्स को दिखाना hi होगा.

मणि मंत्र पड़ता है और अपने और गुरु के आगे एक शील्ड बना लेता है. और दोनों सबके सामने जा कर खड़े हो जाते है. इस दोनों को देख कर फिर एक बार गोलियों की बारिश होती है पैर गोलिया मणि और गुरु को छू भी नहीं पति. कुछ देर गोलिया चलती रहती है. तभी उस भीड़ में से गुरु के 2 चेले मंत्रो से हमला कर देते है. और एक तेज़ रौशनी उन दोनों पैर आ कर टकराती है. दोनों का कवज टूट चुक्का था. गुरु मंत्रो का जवाब मंत्रो से देती है. पैर यहाँ गुरु चूक गयी वो ये भूल गयी की शील्ड टूट चुकी है. और अभी भी गोलिया चल रही है. मणि तो शील्ड टूटते hi पिलर के पीछे चुप गया. पैर गुरु मंत्रो से हमला करने के लिए वही कड़ी रहा गयी.

एक गोली सनसनाती हुयी गुरु की जांघ में घुस गयी और गुरु वही जामें पैर गिर गयी. गुरु को गिरता देख जुली की टीम की एक लड़की कूद कर गुरु के आगे आ गयी और 4-5 गोली उसे लग गयी. पैर उसने गुरु को और गोली नहीं लगने दी. इतने में मणि ने फिर से वो शील्ड तैयार कर दी. पैर त्रिकाल के चलो ने भी उसे फिर से तोड़ दिया. पैर गुरु के लिए इतना समय काफी था गुरु भी दूसरे पिलर के पीछे जा चुकी थी. पैर वो लड़की मर चुक्का थी जिसको देख कर जुली और उसकी टीम की आखों में आशु और गुस्सा आ चुक्का था. ीदार इन लोगो की गोलिया भी ख़तम होने लगी थी. तो रवि की तेज़ आवाज आयी.. – छोड़ो गन्स को और हमला कर दो. हमारा टारगेट ये लोग नहीं बल्कि मंदिर के अंदर हवन करने वाले और वो साला पंकज है. चलो जाओ और सब कुछ नस्ट कर दो..

रवि की आवाज सुन कर सभी लोग मंदिर की और आने लगते है. गुरु अपने मंत्रो से उन पैर वॉर करती है तो उसके वॉर को वो डोनर ok लेते है. ीदार मणि एक तेज़ पिली रौशनी उन लोगो की और छोड़ता है तो उनमे से 2 लोग हवा में उड़ते हुए उस रौशनी की आगे आने लगते है. और वो रौशनी उनका कुछ नहीं बिगड़ पति. ये देख कर मणि चौक जाता है. और अपनी आखें बंद करके जब उनके असली रूप को देखता है तो मन में बोलता है “ ये तो आदमखोर दानव है, ये यहाँ डर्टी पैर कैसे?? डलासुर ने इनको पटल में रोक रखा था तो ये यहाँ कैसे आ गए. इनको तो मेरी उस दिव्या तलवार से hi मारा जा सकता है मंत्र तंत्र का इन पैर कोई आसार नहीं होगा.” ये सोचते hi मणि अपनी उस तलवार को याद करता है जो उसे उसके गुरु सत्यानंद जी ने दी थी. तलवार हाथ में ले कर मणि जी छीलते है – आअक्रमण….

जुली की टीम इसी पल का इन्तजार कर रही थी. वो सभी बहार आ कर मंदिर की और आने वाली भीड़ से भीड़ जाते है. ीदार मंदिर के गेट के पीछे छुपी अंकिता, सविता, पारी, कामिनी भी बहार आ जाती है. एरिका और ऐडा अंदर hi रहते है कियोकि इन दोनों ने ट्रेनिंग नहीं की हुयी थी. गुरु तो उन दोनों तांत्रिको से युद्ध कर रही थी. मणि जी उन दानवो से लड़ रहे थे की 3 और दानव उनके पास पहुंच गए. 5 दानवो को एक साथ सभालने में मणि को प्रॉब्लम हो रही थी. पैर फिर भी वो इनको किसी तरह रोक रहा था. जुली की टीम ने अभी तक 10-15 गुंडों को hi मारा था की उन सब से त्रिकाल के भेजे हुए त्रिनेड फाइटर भीड़ गए थे. जुली की टीम भी उनसे अच्छी तरह लड़ रही थी. पैर ये भीड़ मंदिर की और बढ़ती जा रही थी. कोई भी इनको नहीं रोक रहा था तो ये काम पब की उन पत्नियों ने किया पहले तो मंदिर के गेट को बहार से बंद करके एरिका को बोल दिया अंदर से भी बंद करने को. और ये चारो भी उन गुंडों से लड़ने लगी. पैर वो सब 500-600 थे और ये 4.. उप्पेर से किसी के पास कोई हतियार नहीं था. ये सब उन गुंडों से hi हतियार चीन कर उन पैर hi आजमा रही थी. सविता उन सब पैर भरी पद रही थी. सविता के एक वॉर से hi गुंडा मर जाता जबकि ये तीनो एक को भी नहीं मर प् रही थी. चारो और घमाशान युद्ध चल रहा था. कुछ गुंडे इन 4रो से बच कर मंदिर के गेट पर पहुंच चुके थे. और गेट को तोड़ने की कोसिस कर रहे थे. पैर गेट भी पुरारा मजबूत बना था. इतनी जल्दी टूटने वाला नहीं था.

जुली ने अभी तक 2 फाइटर को मर दिया था. और 3रद से लड़ रही थी. ऐसे hi उनकी टीम की 2 मेंबर भी 2 फाइटर को मर कर उन 4रो के पास पहुंच गयी थी. और भीड़ को रोकने में लगी थी. सभी के सरीर लहूलुहान हुए पड़े थे. दर्द भी हो रहा था पैर अभी रुकना पॉसिबल नहीं था. गुरु अभी तक उन दोनों को मर कर उन 4रो की और बड़ी hi थी की 2 दानव उसे घेर कर खड़े हो गए. वाकई के 8 दानवो में आपस में कुछ इसारे हुए और 2 दानव मई के पास और पहुंच गए अब 7 दानव मणि से लड़ रहे थे. और 6 दानव बाद गए मंदिर के गेट की और. और सब उन चोरो को रस्ते से हातले लगे. पारी, अंकिता और कामिनी को उन दानवो में डॉल की तरह उदा कर फेक दिया. पैर सविता एक दानव से लड़ने लगी. पैर वो भी ज्यादा देर न टिक पायी. सविता को भी एक और दक्का दे कर दानव गेट पैर पहुंच गए. और गेट को तोड़ने लगे. 4 -5 दकके सबने एक साथ मरे और गेट टूट गया. एरिका और ऐडा तो चुप गयी थी. पूरी भीड़ अंदर की और जाने लगी थी. जुली और उसकी टीम भी अभी तक सभी त्रिनेड फाइटर को मर चुकी थी. पैर उनकी हालत भी जयादा अच्छी नहीं थी. सभी के सरीर पैर घाव hi घाव थे. पैर फिर भी ये सब और वो 4 रो उस भीड़ को रोकने की कोसिस कर रहे थे. एक -2 करके उन सब गुंडों को मरते जा रहे थे. पैर ये 20 कितनो को मरती और कितनो को रोकती. वैसे भी उन दानवो को रोकना इनमे से किसी के बस का नहीं था.

अंदर हवन अभी भी 30 मं का बाकि था. पब तो किसी तरह खुद को संभल का बैठा था. माहि की हालत बहुत बुरी थी. दीनदयाल आशु बहता हुआ हवन कुंड में आहुतिया दे रहा था. इस टाइम पब और उसकी सभी पत्नियों की हालत ख़राब थी. एरिका और ऐडा को छोड़ कर सभी घायल हो चुकी थी. गुरु के तो एक गोली लगी हुयी थी. फिर भी वो उन दानवो से लोहा ले सही थी. मणि को भी अभी तक कई घाव मिल चुके थे. 2-3 जगहों घाव बहुत गहरे थे. जुली और उसकी टीम भी बस किसी तरह जिन्दा hi थी. फिर भी लड़ रही थी. खून सरीर पैर पसीने की तरह बहा रहा था. फिर भी कोई हार मैंने को तैयार नहीं था मानते भी कैसे हार मैंने का मतलब मूट थी.

ीदार गाओं के लोगो ने जैसे hi गोलियों की आवाज सुनी तो वो सब दर कर चुप गए थे. और घर से चुप कर ये तमाशा देख रहे थे. मंदिर के बहार हर तरफ खून hi खून था. और कोई नहीं बता सकता था की ये खून किसका है. सब लोग इस आशा के साथ युद्ध कर रहे थे की जल्दी hi हवन ख़तम होगा और पब उनको बचाएगा. पैर पब का सरीर तो पहले से hi निचुड़ चुक्का था अब उसके सरीर में सिर्फ जान और उसका आत्मबल भी था जिससे वो अभी भी मंत्रो को पद रहा था.

जैसे hi दानव अंदर घुसते है. उनके पीछे और भी बहुत सरे गुंडे अंदर आ जाते है. दानवो का 1सत टारगेट hi हवन पैर बैठे लोग थे. तो उनको सबसे ाशन माहि को मरना hi लगा तो एक दानव भाग कर आया और माहि पैर अपनी तरवार से बार कर दिया. पब का डायन तो इस टाइम हवन में था उसे पता भी नहीं चला की वार हो चुक्का है. और वार होते hi मंदिर में एक चीख गुज उडी. और ये चीख माहि की थी. जब पब और दीनदयाल का डायन उस चीख की तरफ गया तो सामने का नजारा देख कर दोनों पूरी तरह हिल गए. पब की आखों में खून उतर आया तो दीनदयाल वही बेहोश हो गया. कियोकि सामने एक लाश पड़ी थी. जिसका सर तोड़ी दूर पड़ा था.
 
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जैसे hi दानव अंदर घुसते है. उनके पीछे और भी बहुत सरे गुंडे अंदर आ जाते है. दानवो का 1सत टारगेट hi हवन पैर बैठे लोग थे. तो उनको सबसे ाशन माहि को मरना hi लगा तो एक दानव भाग कर आया और माहि पैर अपनी तरवार से बार कर दिया. पब का डायन तो इस टाइम हवन में था उसे पता भी नहीं चला की वार हो चुक्का है. और वार होते hi मंदिर में एक चीख गुज उडी. और ये चीख माहि की थी. जब पब और दीनदयाल का डायन उस चीख की तरफ गया तो सामने का नजारा देख कर दोनों पूरी तरह हिल गए. पब की आखों में खून उतर आया तो दीनदयाल वही बेहोश हो गया. कियोकि सामने एक लाश पड़ी थी. जिसका सर तोड़ी दूर पड़ा था.

माहि फटी आखों से उस लाश को देख रही थी. उसे विस्वास नहीं हो रहा था की उसकी बहन, उसकी सहेली साक्षी का सर उसके सरीर से जुड़ा हो चुक्का है. और अब वो इस दुनिया में नहीं रही. वो अब उसे कभी दीदी कहा कर नहीं पुकारेगी. माहि तो साक्षी के कटे सर को देखते हुए बूत बन गयी थी. उसकी आखों से आखों अभी तक भी नहीं गिरा था. वो बस कभी उस सर को देखती तो कभी उसके शांत हो चुके सरीर को. जिसमे अब कोई मोमेंट नहीं थी. मंदिर के फर्श पर खून hi खून था. माहि के फेस पर भी साक्षी के खून के चीते थे. जिससे उसका पूरा फेस लाल हो चुक्का था. तोड़ी दुरी पैर बैठे रेनू और गोपाल भी ये देख कर बेहोश हो चुके थे.

हुआ ये था की जैसे hi उस दानव ने माहि पैर तलवार से वार किया. तो माहि को सभालने में लगी साक्षी ने उसे देख लिया. और तुर्रंत माहि को पीछे हटा दिया. साक्षी जब तक खुद बचती तब तक बहुत देर हो चुकी थी. माहि पैर चलने वाली तलवार साक्षी का सर काट कर उसके सरीर से अलग कर चुकी थी. साक्षी को इतना मौका भी नहीं मिला की वो एक सब्द भी बोल पायी हो पल भर में सब कुछ हो चुक्का था. और माहि ये देख कर चीख उडी. हवन रुक चुक्का था. अभी हवन पूरा नहीं हुआ था पैर हवन बिच में hi रुक चुक्का था. पब गुस्से में आ चुक्का था. पैर वो दानव है रहा था. और उसने फिर से माहि के उप्पेर वार कर दिया. पैर पब ने बिच में hi उस तलवार को पकड़ लिया. फिर भी पब के हाथ से खून की एक बून्द भी नहीं गिरी ये देख कर दानव को बहुत आश्चर्य हुआ. पैर वो डरा नहीं उसने तलवार को पब की पकड़ से छुड़ाने की कोसिस की. पैर पब ने तलवार को जतका दे कर उसके हाथ से hi छुड़ा लिया और थोड़ा उड़ कर अपने पुरे गुस्से से उसके एक गुंस्सा मार दिया. दानव उससे दूर जा कर अपने और साथियो पैर hi गिरा. पब को इतने लोगो को मंदिर में देख कर और गुस्सा आने लगा. फिर उसे हवन की चिंता होने लगी. वो अपने आप को बहुत बेबस फील कर रहा था. जब उसे कोई रास्ता नहीं दिखा तो वो हवन से उड़ कर मंदिर की मूर्ति के सामने घुटनो के बल बेथ गया. और देवता की और देख कर बोलै. – हे देव आप तो तो देव है. और आपके रहते यहाँ मंदिर में मानव दानवो के जैसा काम कर रहे है. और आप चुप है. एक बार एक निर्दोष लड़की के लिए अपने पुरे गाओं को सजा दी. फिर आज क्यों नहीं देव… आज क्यों नहीं…. आज आप को चुप है. देखो आज फिर एक निर्दोष मरी पड़ी है. और मैं चाहा कर भी आपके हवन को बिच में छोड़ कर इस निर्दोष लड़की के हत्यारे को सजा नहीं दे सकता… क्यों देव क्यों….. अब आपको hi कुछ करना होगा.. नहीं तो आज देव और दानव एक सामान हो जायेगे. डर्टी पैर देव और दानव में कोई अंतर नहीं होगा. जागो देव जागो.. रोको इन सबको….

पब की प्राथना रंग लायी और समाये एक बार फिर रुक गया. दानव की तलवार हवा में रहा गयी जो फिर से माहि के उप्पेर उडी थी. पब को लगा अस्तिका देवी का आगमन हुआ है. पैर उसकी सोच गलत थी. देव की मूर्ति चमक उडी और उसने से आवाज आयी – पुत्र में तुम्हारे कर्म से खुश हु. तुमने सदा hi सत्य का साथ दिया है. और आज भी मेरे इतने कष्ट देने के बाद भी इस गाओं की भलाई के लिए तुम अपने करम से नहीं हेट. तुम सच्चे योद्धा हो. अस्तिका देवी ने तुमको अपनी शक्तिया देना एक दम उचित था. पैर पुत्र ये मेरी लड़ाई नहीं है ये तुम्हारी लड़ाई है और इसे तुमको hi लड़ना होगा. जाओ और करो इन दोस्तो का अंत. पहले तुम इन दुष्टो का अंत करो और फिर अपने हवन को पूरा करना. दानवो का अंत भी एक तरह का हवन है जिसमे दोस्तो की आहुति दी जाती है. और इस पृत्वी का मेरी बहन का भर काम होता है. इस हवन खुद को अपनी पत्नियों के हवाले कर दूसरे हवन कुंड में खुद जाओ. और इन दोस्तो की आहुति दे कर मेरी बहन का कर्ज चुकाओ. तुम्हारी विजय हो पुत्र……

और ये कहा कर आवाज बंद हो गयी. और समाया फिर से चल पड़ा. और उस दानव की तलवार फिर माहि की और बाद गयी पैर इस बार माहि और तलवार के बिच में पब खड़ा था जो टेलिपोर्ट हो कर वह पल भर में पहुंच चुक्का था. तलवार पब का कुछ न बिगड़ सकीय. पैर पब का एक मुक्का फिर उस दानव को लग चुक्का था. और वो दूर जा गिरा. पब ने माहि को आवाज दी. पैर माहि तो इस दुनिया में थी hi नहीं. वो तो बूत बानी अपनी बहन के उस मुखड़े को देख रही थी जो उसके सरीर से जुड़ा हो चुक्का था. जब माहि में पब की बात का कोई जवाब नहीं दिया तो पब ने माहि को जिजोड़ दिया. तब माहि को होश आया और वो पब की और देख कर बड़बड़ाने लगी. वो पब को बताना चाहा रही थी की देखो मेरी बहन के साथ क्या हुआ है. पैर उसके मुँह से बोल नहीं निकल रहे थे. वो अभी भी सदमे में थी. पब ने उसे अपने गले से लगा लिया और उसके बालो पैर हाथ फेरने लगा. और बोलै – शांत हो जा मेरी माहि शांत हो जा. जो हो चुक्का है उसे बदला नहीं जा सकता. पैर तुझको हिम्मत से काम लेना होगा. देख अपने बापू बेहोश हो चुके है सभाल उनको. देखो रेनू और गोपाल की क्या हालत है. एक बहन के लिए तुम अपने दूसरे भाई और बहन को भूल जाओगी क्या उनको कोण सभालेगा. मेरी माहि बाहत बहादुर है वो सब सभाल सकती है ऊधो और अपनों को सभलो माहि…. (तभी फिर से वो दानव पब पैर पीछे से वॉर कर देता है. पैर पब को कोई नक्शा नहीं पंहुचा पता तो वो माहि पैर हमला करता है. पैर माहि के उप्पेर उड़ने वाली तलवार को पब अपने दूसरे हाथ से पकड़ लेता है और तलवार चीन कर उसे फिर से एक पांच मर देता है. पब माहि को भी समजा रहा था और युद्ध भी कर रहा था. उसने माहि को बोल दिया था की हवन को अब तुमको सभालना है.)

बहुत समजने के बाद माहि कुछ शांत होती है और अपने बापू को उड़ाती है पानी के चितो से. ीदार पब उन सब पैर टूट पड़ता है. जो भी गुंडे मंदिर में थे वो सब मरे जा चुक्के थे. पैर दानवो से उसका युद्ध अभी भी चल रहा था. पब के हाथो के वॉर का उन पैर कोई असर नहीं था. पैर वो उनको रोके हुए था. तभी पब की नज़र ऐडा और एरिका पैर पड़ती है जो दर के मरे काँप रही थी. वो उन दोनों को लड़ते हुए hi आवाज देता है. – ऐडा एरिका यु डरने से कुछ नहीं होगा. हिम्मत से काम लो. और जाओ हवन पैर बेटो और उसको सभलो. हवन में आहुतिया रुकनी नहीं चाहिए. माहि को सभलो .. वो मंत्रो का जप करेगी और तुम दोनों आहुति डौगी.. जाओ अपने पति और अपने परिवार के लिए तुम दोनों को भी हिम्मत करनी होगी. जाओ और माहि का हवन में साथ दो….

पब की बातो से उनको हिम्मत मिली और वो भाग कर माहि के पास चाही गयी. अब पब युद्ध के लिए फ्री था. पब ने सभी दानवो को मंदिर के बहार ढकेल दिया था. और जब वो बहार आया तो बहार का नजारा देख कर उसकी रूप काँप गयी. उसकी 5 पत्निया लहूलुहान हो कर भी लड़ रही थी. जुली और उसकी टीम भी किसी तरह तिकी हुयी थी. पब के गुरु मणि जी के सरीर पैर भी एनजाइना घाव थे. गुंडे और दानव इन सब पैर भरी पद रहे थे. पड़ते भी क्यों न भाई. ये 20 और वो 600…. साथ में आदमखोर जैसे दानव….. ये देख कर पब को बहुत गुस्सा आता है और वो जोर से चिकता है – रोक जाओ सब… आप सब लोग पीछे हो जाओ. आप सब लोगो ने बहुत देर इनसब का सामना कर लिया अब ये सब मेरे शिकार है. आज इन सबकी आहुति दे कर मैं देव का और इस डर्टी माँ के कर्ज को चुकाने की कोसिस करुगा.

पब की आवाज से पूरा गाओं दहल उदा था. सब रुक गए थे. और पब की टीम के सभी लोगो के फेस पैर एक रहत थी. और वो पीछे हटने लगे थे. पैर मणि अभी भी उन दानवो के बिच hi खड़ा था. उसको पता था की इन दानवो के अंत अभी पब नहीं कर सकता.

पब मणि को वह खड़ा देख फिर बोलता है - गुरूजी आप हैट जाईये और एक मौका अपने इस bête को भी दीजिये. मेरा वादा है मैं आपको निराश नहीं करुगा. और यदि आपको लगे तो आप फिर से आ जाना मेरी सहायता के लिए.

मणि भी पता नहीं क्या सोच कर पीछे हो गया. ये देख कर रवि के फेस पैर एक मुस्कान आ गयी. वो तो आया hi पब को मरने था. और पब खुद hi अकेला उसके सभी आदमियों के सामने आ चुक्का था. रवि चुप कर ये देख रहा था और खुश भी हो रहा था. उसके हिसाब से अब पब को कोई नहीं बचा सकता था.

सभी गुंडे और दानव एक दूसरे की और देखते है और एक साथ पब की और जाते है. पब ने भी सोच लिया था की उसे क्या करना है. इसलिए वो आखें बंद करता है. और पहले अस्तिका देवी को याद करता है और फिर महादेव को याद करने लगता है. और अपने एक हाथ को आगे कर देता है. ऐसा करते hi एक तेज़ वाइट रौशनी निकलती है. जो सामने से आ रहे गुंडों के उप्पेर गिरती है. और वह ब्लास्ट हो जाता है. बहुत से गुंडे उस ब्लास्ट में मर जाते है. पब लगातार उन पैर अपनी इस पावर से हमला करता जाता है. कोई उसके नजदीक भी नहीं पहुंच प् रहा था. ये महादेव की शक्ति थी इससे बचना आसान नहीं था. वो दानव भी एक -2 करके इस रौशनी की चपेट में आते हुए मर रहे थे. 10 मं में hi पब ने सबको मार दिया था. वह पैर खून की नदी बहा रही थी चारो और खून बहा रहा था जहा भी नज़र जा रही थी वह पैर आदमियों के खून से साणे सरीर के टुकड़े पड़े थे. कोण सा सरीर का टुकड़ा किसका है ये बता पाना नामुनकिन था. ये देख कर वह खड़े सभी हेरात से मुँह फाडे खड़े थे. केवल गुरु थी जिसको इससे कोई हेरात नहीं थी. वो hi जानती थी की पब को ये पावर मिल चुकी है. मणि भी ये देख कर समाज नहीं पाया की पब के पास इतनी बड़ी शक्ति कहा से आयी. पैर सब खुश थे की खतरा ताल चुक्का है. पैर पब इन सब में खून से नाहा चुक्का था. खून के चितो ने उसे उप्पेर से निचे तक कवर कर लिया था. रवि की तो गांड hi हवा ले गयी ये नज़ारा देख कर. और वो दम दबा कर वह से भाग गया. और फ़ोन पैर संभु को यहाँ जो हुआ उसके बारे में सब बता दिया. रवि के लिए ये एक बड़ी हार थी. उसने इतने अपमियो के लिए बहुत सारा पैसा पानी की तरह बहा दिया था.

ीदार पब सभी को मार कर मणि के पास पहुँचता है और उनके पेअर छू कर अपनी विजय पैर आशिर्बाद लेता है. मणि जी उससे इस पावर के बारे में पूछते है तो वो बता देता है की देवी की अशीम कृपा से से पावर उसे मिली है. फिर पब दुवारा नहाने के लिए दीनदयाल के घर जाता है और नाहा कर फिर से हवन पैर बेथ जाता है. माहि तो बस बूत की तरह बैठी एक hi मंत्र को पद रही थी. दीनदयाल, रेनू, गोपाल भी साक्षी के शव के पास बैठा रो रहा था. ऐडा और एरिका हवन कुंड में लगातार आहुतिया दे रही थी. मणि भी पब के साथ आ गया. पब ने फिर से मंत्रो को पड़ना सुरु कर दिया. और एरिका, ऐडा और मणि उसका साथ देते रहे. माहि पब के पास में बूत की तरह बैठी रही. और अपनी बहन को देख रही थी. पब फिर से पूरी सारदा से हवन कर रहा था. अब किसी भी तरह की कोई परेशानी उसे नहीं हो रही थी.

ीदार गुरु, अंकिता खुद घायल थी फिर भी सभी का इलाज कर रही थी. एम्बुलेंस को फ़ोन कर दिया था. ये अंकिता के परिचित हॉस्पिटल की hi थी. जुली और उसकी टीम के हाल बहुत बुरे थे. पता नहीं कैसे वो युद्ध कर रही थी. पैर जैसे hi पब वह पंहुचा तो उनके सरीरो ने जवाब दे दिया. अब किसी में भी खड़े होने की भी ताकत नहीं बची थी. गुरु के पेअर में गोयल लगी थी. पैर उसने उसे न देखते हुए इन सब की जान बचने के लिए इन सब का फर्स्ट अड़ सुरु कर दिया था. कामिनी, अंकिता, पारी और सविता इन सब का हाल भी बुरा hi था. पैर अभी इनमे से किसी ने हार नहीं मणि थी. अपने घावों का फर्स्ट अड़ करके सब जुली की टीम की हेल्प कर रही थी. अंदर हवन चालू था. और बहार सब एक दूसरे को सभाल रहे थे.

कुछ hi देर में हवन भी पूरा हो गया. और हवन के पुरे होते hi समय एक बार फिर रुक गया. पैर इस बार माहि भी ये देख प् रही थी. माहि तो पहले दर गयी पैर पब ने उसे होशला दिया.
 
अपडेट 125

कुछ hi देर में हवन भी पूरा हो गया. और हवन के पुरे होते hi समय एक बार फिर रुक गया. पैर इस बार माहि भी ये देख प् रही थी. माहि तो पहले दर गयी पैर पब ने उसे होशला दिया. जब ये शांत हो गयी तब मंदिर की मूर्ति से प्रकाश निकलने लगा. और फिर वो एक बहुत hi सुन्दर और शक्तिशाली देव के रूप में बदल गयी. देव के दर्शन होते hi दोनों जमीन पैर लेट कर उन्हें कर्दम करने लगे.

देव – ऊधो बच्चो, तुम्हारा हवन पूरा हुआ. मागो क्या कामना है तुम्हारी….

पब – हम तो आपके दर्शन से तृप्त हो गए देव. पैर आप हमे देना चाहते है तो वो hi दे जिस काम के लिए हमने ये हवन किया है. इस गाओं से हमारे बापू से अपने करोड़ को शांत कर सबको अपना आशिर्बाद प्रदान करे.

देव – तुम दांया हो पुत्र, इतना कुछ होने के बाद भी तुम लोक कल्याण के लिए hi वर मांग रहे हो. तुहारी मनोकामना पूरी होगी पुत्र, वैसे भी ये तो तुम्हे हवन के फल के रूप में मिलने hi वाला था. पैर हम तुम्हारे से बहुत प्रश्न है, तुमने आज मानव जाती को ये बता दिया की यदि किसी भी परिवार में प्रेम और विश्वास हो तो मुश्किल से मुश्किल काम को किया जा सकता है. और लोक कल्याण से बड़ा कुछ भी नहीं है. न परिवार और न hi खुद . मानगो पुत्र तुम अपने लिए भी कुछ मांग लो.

देव की बाते सुन माहि बोलती है – हे देव यदि आप हमे सच में कुछ देना चाहते है तो कृपया कर मेरी बहन को जीवन दान दे.

देव माहि की बात सुन मुस्कुराते है और बोलते है – पुत्री तुम भूल रही हो जीवन और मृत्यु अटल है. इनको नहीं बदला जा सकता. तुम्हारी बहन को जीवित करने का मतलब नियति से छेड़छाड़ करना है. जो कभी भी उचित नहीं है. पुत्री तुम्हारी बहन ने तुरहरे लिए अपने जीवन को बलिदान किया है. जैसे की अल्पना ने अपने पुत्र के लिए किया है. तुमको अब अपनी बहन के बलिदान को व्यर्थ नहीं करना है. उसकी यादो को अपने दिल में भाषा कर अपने जीवन में आगे बढ़ना होगा. देखो तुम्हारी बहन तुमसे क्या चाहती है –

तभी वह पैर साक्षी की आत्मा प्रकट होती है और वो बोलती है – दीदी अपने आप को सम्भालो, और इन सबको भी सम्भालो. मैं आपसे जुड़ा नहीं हु. मैं सदा से आपकी ख़ुशी में hi अपनी ख़ुशी देखती आयी हु. जैसे अपने सदा मेरी ख़ुशी में खुश रही है. वैसे hi मैं भी आपको चाहती हु. आज तक अपने अपने परिवार के लिए क़ुरबानी दी है तो क्या आज मैं अपने परिवार के लिए कुछ नहीं कर सकती. दीदी सदैव खुश रहना और बापू को भी खुश रखना. मैं जल्दी hi लोट कर ौगी ये वादा है मेरा आपसे……

और ये कहा कर साक्षी की आत्मा वह से चली जाती है. माहि के दिल से अब वो दुःख और देव के प्रति वो गुस्सा ख़तम हो चुक्का था जो साक्षी की मरने के बाद उसके दिल में आया था. और फिर से उसके मन में अपने देवता का बही स्तन बन गया था जो की बचपन से उसके मन में था. पहाड़ो के देव ने भी शायद इसलिए hi माहि को पब के साथ समय रुकने कर सचेत रखा था. साक्षी के जाने के बाद देव फिर से बोले

देव – पुत्री क्या अभी भी तुम चाहती हो की हम नियति के साथ छेद चढ़ करे???

माहि – नहीं देव मुझसे गलती हो गयी. मेरी बहन की मूट ने मेरे सोचने और समझने की शक्ति को समाप्त कर दिया था. और मेजको लगने लगा की ये सब आपकी वजह से हुआ है. पैर मैं गलत थी.. मुझको माफ़ कर दे देव….

देव – पुत्री इसलिए hi तो हमने तुमको संजय है. तुम बचपन से hi हमारी पूजा करती आयी हो. और हमारी सच्ची बक्त भी हो. तो हम कैसे अपने बक्त के मन में गलत विचारो को रहने दे सकते है. ये बात सदा याद रखना जो हो रहा है वो नियति का खेल है. और यदि आप अपनी शक्तियों से नियति के साथ छेड़छाड़ करेंगे तो परिडाम भी आपके hi होंगे. केवल करम hi है जो मानव के भविष्य को बदल सकते है. और नियति मानव के कर्मो का फल उसे सदैव देती है. इसलिए सदा अपने कर्मो को करो. नियति अपने आप आपके कर्मो के हिसाब से आपके साथ न्याय करेगी.

फिर कुछ पल के लिए सन्ति छ जाती है. देव फिर से बोलते है – पुत्र आज जो भी तुमने किया है. या जो भी तुमने अभी तक किया है उससे मैं बहुत खुश हु. इसलिए मैं तुमको अपनी एक शक्ति दे रहा हु.

मेरी इस शक्ति से तुम अपने सरीर को कितना भी बड़ा या छोटा कर सकोगे. और जमीन पैर चलने की गति को भी कितना भी काम या ज्याद कर सकोगे. चलने से तुमको कभी भी थकन का अनुभव नहीं होगा.

और ये बोल कर देव अपने हाथ को आगे कटे है तो एक मिटटी के कलर की तेज़ रौशनी पब के सरीर में समां जाती है. और देव फिर से मूर्ति में बदल जाते है. और टाइम फिर से सुरु हो जाता है. माहि सबसे पहले अपने बापू और भाई बहन को संभालती है.

मंदिर के बहार आज फिर से एक तूफ़ान आ चुक्का था. जैसे देव के नाराज होने पैर आया था ठीक उसी तरह. इस तूफ़ान मैं सब अपनी जगह पैर hi बैठे रहा गए. तूफ़ान से अबकी आखें बंद हो चुकी थी. 2 -3 मं के तूफ़ान के बाद फिर से सब शांत हो गया. पैर मंदिर के बहार का नजर बदल चुक्का था. उन सभी गुंडों के शव गायब थे. वह खून की एक बून्द तक नहीं थी. कामिनी, गुरु, अंकिता, सविता, पारी, जुली और उनकी टीम के घाव बहुत हद तक ठीक हो चुके थे. कुछ छोटे hi बची थी. अंदर हवन पर बैठे मणि के घाव भी ठीक हो चुके थे. मंदिर के बहार से जुली की टीम की लड़की का शव भी गयव हो चुक्का था. दीनदयाल अभी भी साक्षी के सर और उसके सरीर को अपनी गोदी में ले कर बैठे थे इसलिए उसे छोड़ कर सब कुछ बदल चुक्का था. अब वह की हवाएं भी बदली बदली लग रही थी.

अभी इस तूफ़ान को रुके 20-25मं hi हुए थे की एक नया तूफ़ान मंदिर की और आ रहा था. सभी गाओं वाले मंदिर की और आने लगे थे. जबकि पब और उसके साथ सभी जाने की पूरी तैयारी कर चुके थे. साक्षी के शव को एम्बुलेंस में शिफ्ट कर दिया गया था. और ये सब भी अपनी -2 गढ़ियो में बैठने hi वाले थे. की गाओं का सरपंच और माहि के बड़े चाचा पुरे गाओं के साथ सबसे आगे आते हुए दिखे. पब को लगा कही ये लोग बापू को नुक्सान न पहुचये. इसलिए पब दीनदयाल के आगे आ कर खड़ा हो जाता है. और बोलता है

पब – रुक जाओ सब लोग, नहीं तो मैं भूल जाउगा की मेने तुम लोगो के लिए hi यहाँ आया था और अपनी प्यारी साली को भी खो दिया है. अब तुम लोग मेरे बापू और मेरी पत्नी माहि का कुछ नहीं बिगड़ सकते हो. अब मैं तुम्हारे सामने खड़ा हु दीवार बन कर.

दीनदयाल – नहीं बीटा सामने से हैट जाओ, ये मुझको मरने नहीं बल्कि माफ़ी मांगने आये है, इनकी आखें बता रही है आज इनको अपने कर्मो पर पछतावा हो रहा है.

सरपंच और दीनदयाल का भाई दोनों एक दम से आगे बाद कर दीनदयाल के पेअर पकड़ लेते है. और रोने लगते है.

दीनदयाल – नहीं आप मेरे पैरो को न पकडे. मैं भी आपकी तरह गुन्हेगार था. मुझको तो अपने कर्मो की सजा मिल चुकी है. मेने अपनी एक बेटी को खो दिया है. आज में पूरी तरह ठीक हु, पैर मैं इसका क्या करू जब मेरी बेटी मेरे साथ hi नहीं है. जाइये और अपने गाओं के देवता से माफ़ी मांगिये. आपको भी न्याय जरूर मिलेगा. (और दीनदयाल रोने लगता है)

माहि दीनदयाल को अपने गले लगाती है और बोलती है – क्यों रट हो बापू क्या मैं आपकी बेटी नहीं हु, ये रेनू भी तो है न.. फिर क्यों रट हो. सोचो साक्षी आपको रट हुए देखेगी तो कितना दुखी होगी. अब आप रोइये मत और चल कर साक्षी के अंतिम संस्कार का इंजाम करिये.

अंकिता की बुलाई हुयी एम्बुलेंस में साक्षी के शव को रखा जा चुक्का था. गोपाल और रेनू उसमे hi बैठे थे. दीनदयाल, मणि और माहि उसमे बेथ जाते है. और उनके पीछे hi बाकि के सभी अपनी कार्स से चल देते है. और ये करवा हवेली जा कर रुकता है. फिर मणि और दीनदयाल साक्षी के अंतिमसंस्कार की तैयारी करते है. और पूरी विदी पूर्वक सब करके रात को सभी लोग हवेली लोट आते है. सभी के दिल में साक्षी के जाने का दुःख था कल रात को hi तो साक्षी ने सबके साथ मिल कर पब के साथ अपने जीजू के साथ इतनी मस्ती की थी और आज वो नहीं थी. सब कल वाली साक्षी को याद कर कर के दुखी थे और सभी साक्षी के बारे में सोचते हुए सो जाते है.

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त्रिकाल – कैसे बच गए सब कैसे??? इतने लोगो से भी सब बच गए ये कैसे सम्भब है. वो 15 दानव देवताओ को भी टक्कर दे सकते है. तो कैसे वो सब मरे गए??

त्रिकाल बुरी तरह बाभलया हुआ था. उसे उम्मीद hi नहीं थी की उसका ये प्लान फ़ैल हो सकता है. उसे उन दानवो पैर पूरा विश्वास था. पैर जब उसने सुना की वो सब बच गए तो त्रिकाल इस बात को हजम hi नहीं कर प् रहा था. उसकी जिंदगी में केवल एक पब hi अभी तक ऐसा आया था जिसने उसकी हल चल को फ़ैल कर दिया था.

संभु – गुरूजी, ये सब उस पब ने hi किया है. रवि तो किसी तरह वह से बच कर भाग आया. नहीं तो उसका भी बचना मुश्किल था.

त्रिकाल – पैर उस के पास भी अभी इतनी ताकत कहा है की वो उन दानवो को मार सके. मुझको पूरी बात बताओ की वह क्या -2 हुआ था.

फिर संभु वह हुई पूरी घटना को त्रिकाल को बता देता है. जो रवि ने वह से भाग कर संभु को फ़ोन पैर बताई थी. और संभु के पास में पहले से बहुत साडी इनफार्मेशन लगातार आ रही थी. रवि भी दर गया था उस महा विनाश और उस पावर को देख कर. रवि संभु को सब बता कर फिर से छिप जाता है. कियोकि वो जनता था की यदि पब उस तक पहुंच गया तो उसे जिन्दा नहीं छोड़ेगा.

जब त्रिकाल संभु के मुँह से उस पावर के बारे में सनटैन है तो वो भी हैरान रहा जाता है. वो इस पावर का सच जानने के लिए अपनी आखें बंद कर के डायन में बेथ जाता है. और वह हुयी उस फाइट को देखता है. उसके डायन में वो सब किसी फिल्म की तरह चल रहा था. तो उसे पता चलता है की ये अस्तिका देवी की पावर का hi एक अंश है. त्रिकाल का अब पब पैर हमला करने का एक और रास्ता बंद हो चुक्का था. यदि त्रिकाल खुद जा कर हमला करे तो hi अब वो पब को हराया जा सकता था. पैर अभी ये सम्भब नहीं था. या फिर उसकी पूरी पावर उसके पास होती तो फिर उसको किसी बात का दर नहीं होता. इसलिए त्रिकाल अपनी सड़ना पैर डायन देने लगता है और कुछ नया प्लान करने की सोचता है.

अब त्रिकाल पब को कैसे टारगेट करेगा ये तो समय hi बता सकता है. पैर अभी के लिए त्रिकाल शांति से अपने नए प्लान को सोच रहा था. तो अभी हीरो पैर कोई अटैक होने की सम्भाबना नहीं थी.

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2 दिन साक्षी की मूट के दुःख में hi निकल गए थे. मणि जी भी वही पैर थे. पब के दिल में आग लगी हुयी थी. एक तो उसे अपनी माँ के साथ हुए उन जुल्मो के दुःख से उभरा भी नहीं था की साक्षी की मूट ने उसे एक और जतका दे दिया. पैर अब ये पुराण पब नहीं था जो ये सब सह न सके. दिल की आग को दिल में दबना उसको हालातो ने सीखा दिया था. कोई भी अपनी माँ के उप्पेर हुए इतने जुर्मो को सहा नहीं सकता. पैर आज पब उस आग को भी दिल दबा कर खुद को नार्मल दिखा रहा था. शायद मणि जी ने इसलिए hi इतने दिनों तक पब की माँ का सच पब को नहीं बताया था. और जब उनको लगा की अब पब इस जटके को सहा सकता है तब पूरा सच उसके सामने रख दिया. पैर ये साक्षी के साथ जो हुआ वो किसी ने सोचा तक नहीं था. इसलिए मणि ने भी इस दुःख से निकलने के लिए 2 दिन का वक्त बेकार कर दिया जबकि मणि जी जानते थे की अब 1-1 दिन कीमती है. कियोकि कुछ दिन में hi त्रिकाल की सड़ना पूरी हो जाएगी. और एक बार उसको उसकी पुराणी पावर मिल गयी तो त्रिकाल से पब को और इस दुनिया को बचाना बहुत मुश्किल हो जायेगा. अभी मणि अपने रूम में पब का वेट कर रहा था. उसने पब को मन की पावर से अपने पास बुलाया था.

पब अभी जुली और उन लड़कियों से मिलने गया था. वह भी शोक का माहौल था. जुली की टीम का एक मुम्बर ककम हो चुक्का था. अभी सभी लड़किया और जुली की टीम उसी गम में थे आज भी ट्रेनिंग नहीं की जा रही थी. पब ने वह जा कर फिर से सभी का होशला बढ़ाया था. फिर से सब इस गम को भूलने की कोसिस करते हुए अपने जीवन की रहा पर आगे चलने को तैयार हो चुके थे. अभी पब वह से लूट hi रहा था की उसे मन में मणि जी की आवाज सुनाई दी. जो उसको अपने रूम में बुला रहे थे. पब भी सीदा वह पहुंच गया.
 
हाँ भाई यदि केवल मानव होते तो गुरु, जुली, और बाकि मिल कर HI सबको हरा देते. त्रिकाल की चल केवल दो वजह से फ़ैल हुई. 1 तो उसे ये नहीं बता था की पब को देवी ने शक्ति दी है. 2 उसको ये नहीं पता चला की माहि से शादी करके उसे क्या पावर मिलने वाली है.

नहीं तो त्रिकाल जरूर जीतता...

भाई माहि को ख़ुशी तो साक्षी या पब से है. और बात ये है की ये दीनदयाल के कर्मो का फल है जो उसे साक्षी के रूप में चुकाना पड़ा है. हर इंसान को अपने गलत कर्मो का फल भुगतना होता है......

थैंक यू बीआरओ फॉर ुर लवली कमेंट
 
अपडेट 126

पब अभी जुली और उन लड़कियों से मिलने गया था. वह भी शोक का माहौल था. जुली की टीम का एक मुम्बर ककम हो चुक्का था. अभी सभी लड़किया और जुली की टीम उसी गम में थे आज भी ट्रेनिंग नहीं की जा रही थी. पब ने वह जा कर फिर से सभी का होशला बढ़ाया था. फिर से सब इस गम को भूलने की कोसिस करते हुए अपने जीवन की रहा पर आगे चलने को तैयार हो चुके थे. अभी पब वह से लूट hi रहा था की उसे मन में मणि जी की आवाज सुनाई दी. जो उसको अपने रूम में बुला रहे थे. पब भी सीदा वह पहुंच गया.

पब – प्रदम गुरूजी

मणि – बीटा आओ मेने तुमको ये याद दिलाने को बुलाया है की त्रिकाल आज भी जिन्दा है. चाहे तुम ये लड़ाई जीत गए हो. पैर अभी मंजिल बहुत दूर है. और मंजिल तक पहुंचने के लिए आगे बढ़ना होता है.

पब – आज्ञा करे गुरूजी, मैं अपने आदेश का hi इन्तजार कर रहा था.

मणि – हम्म अच्छी बात है, तो तुम तैयार हो जाओ तुमको और माहि को हिमालये की पहाड़ियों पैर जाना है. वह तुमको दस माँ के सबसे छोटे bête दयासुर मिलेंगे. उनसे तुमको अपने मंत्रो के ज्ञान को सिद्ध करना है. और वो hi तुमको बतायेगे की किस मंत्र का उपयोग कहा और कैसे करना है. और मंत्रो को सिद्ध कर उनसे पावर पाने में भी वो तुम्हारी सहायता करेंगे.

पब – जी गुरु जी, पैर इसमें तो बहुत टाइम लगेगा न??

मणि – हाँ अब काम से काम एक मंथ तक तुमको उनके पास रहा कर hi अपनी पावर को बढ़ाना है. ये पावर्स तुम्हारे आने वाले टाइम में बहुत काम आएगी. तुमको पता है, त्रिकाल अपनी साडी पावर खोने के बाद भी तुमसे ज्यादा पॉवरफुल है क्यों??? … कियोकि उसके पास उसके मंत्रो का ज्ञान आज भी है. और ये hi उसकी सबसे बड़ी पावर है. उसने बहुत सालो तक कड़ी म्हणत करके इस ज्ञान को और उसकी पावर्स को पाया था. पावर्स तो नहीं रही पैर ज्ञान आज भी उसके साथ है. ये ज्ञान hi उसकी सबसे बड़ी ताकत है. अब तुमको भी ये ज्ञान लेना होगा ताकि तुम त्रिकाल का सामना कर सको.

पब – गुरु जी मैं तैयार हु जाने के लिए. पैर मन में एक दुविद्या है.

मणि – बोलो

पब – यदि मैं यहाँ से चला जाउगा तो इन सब का डायन कोण रखेगा?? यदि त्रिकाल ने फिर से कोई अटैक कर दिया तो???

मणि – हाँ तुम्हारी ये सोच भी सही है. इन सबकी सेफ्टी भी तुहारी hi जिम्मेदारी है. पैर ये तुमको खुद hi सोचना होगा की तुम ये दोनों काम एक साथ कैसे करोगे. मैं कल सुबह hi यहाँ से चला जाउगा. अब ये तुमको सोचना है की तुम ये सब कैसे मैनेज करते हो.

पब – ठीक है गुरूजी… क्या मैं बीती हुई घटना के बारे में आपसे कुछ पूछ सकता हु??

मणि – हाँ बोलो क्या जानना चाहते हो??

पब – ये तो मैं समाज गया की ये त्रिकाल का काम है. पैर मेरे ये समाज नहीं आ रहा की उसके पास ये साडी इनफार्मेशन जाती कैसे है की हम कब और क्या करने वाले है.

मणि – ठीक वैसे जैसे की मुझको पता चलता है की अभी त्रिकाल क्या कर रहा है. पैर हम बहुत काम बाते hi पता कर पते है.

पब – पैर ये होता कैसे है??

मणि – देखो बात ये है की मेरे पास में मेरे कुछ शिष्य ऐसे है जो मेरे लिए कुछ भी करने को तैयार है. मेने उनमे से कुछ को त्रिकाल के अड्डे के अस्स पास लगा रखा है. वो hi किसी तरह से कुछ इनफार्मेशन निकल कर मुज तक पहुंचते है. पैर ये ज्यादा नहीं होती कियोकि त्रिकाल और संभु किसी को भी अपने किये के बारे में कुछ नहीं बताते. इसलिए hi मुझको इनके इस प्लान की खबर नहीं हुयी. ठीक वैसे hi संभु में भी अपने कुछ आदमी हम सब के पीछे लगा रखे होंगे. इसलिए hi गुरु तुमको अपनी शक्ति का प्रदशन करने को और अपनी शक्तियों के बारे में किसी को भी बताने से मन करती है.

पब – हम्म तब तो सबसे पहले उनको hi पकड़ कर मरना होगा.

मणि – नहीं ऐसा करने से कुछ नहीं होगा. तुम एक को मरोगे वो फिर 10 भेज देगा. इससे अच्छा है की तुम अपनी पावर्स और अपनी पत्नियों के सभी राज छुपा कर hi रखो.

पब – हम्म ये तो है. उस हिसाब से ये हवेली बहुत अच्छी है. भानु ने इसको इस तरह बनबाया है की कोई तक जाक न कर सके. उसको दर होगा की किसी को उसके अश्ली डंडे के बारे में न पता चल जाये.

मणि – हाँ ये हवेली बहुत सेफ है. इस पर हमला भी कोई यु hi नहीं कर सकता.

पब – हम्म फिर भी ये लोग बहार भी जायेगे. और क्या पता कोण कब और कैसे हमला कर दे.

मणि – हाँ ये भी है. तो तुमको खुद hi सोचो की ये जिम्मेदारी तुम कैसे निभाओगे.

पब लास्ट 2 हॉर्स से अपनी hi सोच में गम था. अपने रूम में बैठा अपनी फॅमिली की सेफ्टी के बारे में सोच रहा था. पब ने अपने मैनेजर दीपक (ालर होटल का मैनेजर) को फ़ोन करके रवि की जनम कुंडली बनाना को भी बोल दिया था. और उसकी करंट लोकेशन दुन्ने को भी बोल दिया था. पैर जो उसके लिए सबसे जरुरी बात थी वो ये थी की वो अपनी फॅमिली की सेफ्टी कैसे करे. उसको समाज hi नहीं आ रहा था की वो क्या करे. तभी रूम में गुरु आ जाती है. पब गुरु को अपनी प्रॉब्लम बताता है. गुरु कुछ देर सोच कर बोली

गुरु – आप इतनी टेंशन क्यों ले रहे है, हम सब साथ में सभी तरह के अटैक का सामना कर सकते है वैसे भी हम सब मन की पावर से के दूसरे से जुड़े हुए भी है. और आप टेलिपोर्ट हो कर कुछ hi पल मैं हम तक पहुंच सकते है. हम सब लोग हवेली से बहार काम से काम जायेगे. कियोकि हवेली पैर अटैक करना इतना भी ाशन नहीं है. यहाँ पैर जुली की टीम के साथ वो सब लड़किया भी है और इस हवेली को मणि जी ने कुछ मेट्रो से भी प्रोटेक्ट किया हुआ है. आप वह जा कर अपनी पावर बढाइये यहाँ हम सब भी अपनी पावर्स बढ़ाएंगे. और मैं सबको कुछ मंत्रो की पावर्स भी सीखा दूगी. आप बेफिक्र हो कर जाये. यहाँ की साडी जिम्मेदरी मेरी है…

गुरु की बातो ने पब की साडी मुश्किल hi ाशन कर दी. पब को गुरु पे बहुत प्यार आया तो उसने उसे अपनी बाँहों में खींच कर किश कर दिया. और फिर उस पैर अपना प्यार लुटाने लगा. जब ये दोनों एक दूसरे से अलग हुए तो पब ने एक -2 करके सबको मन hi मन अपने पास बुलाने लगा. और सब आ भी गए केवल एरिका, माहि, काजल, जय, माउद, पेय और दीनदयाल की फॅमिली को छोड़ कर. पब ने उन सबको भी पारी को भेज कर बुला लिया. जब सभी लोग वह आये तक पब बोलै.

पब – मैं और माहि कल जा रहे है और 1 मंथ के बाद आएंगे. आप सबको एक दूसरे का डायन रखना है. यदि किसी भी तरह की कोई भी परेशानी हो तो तुम सब मन hi मन मुझसे कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हो. तुम सबको अपना और अपनी इस फॅमिली का पूरा डायन रखना है. (जय की और देख कर) जय मेरे जाने के बाद यहाँ सब कुछ तुमको और गुरु को hi सभालना है. तुमको भी अपनी मन की पावर जल्दी hi पानी होगी. अब एक जंग का आगाज़ हो चुक्का है. और इस जंग में हम सबको न चाहते हुए भी भाग लेना hi है. पैर हम धर्म के साथ है. और धर्म hi हमारी पावर है. अगले 4 मंथ के लिए हमको सब कुछ भूलना होगा. यदि हम सब साथ में रहे तो हमारी जीत पक्की है.

दिलदायल – सदा hi धर्म जेट्टा आया है और इस बार भी धर्म की hi जीत होगी, मैं भी तुम्हारे साथ हु बीटा, और मैं, गोपाल और रेनू कल मणि जी के साथ उनके आश्रम में जा रहे है. एक तो वह पैर ये दोनों सेफ रहेंगे. और दूसरा अब में भी अपने गुरु का कर्ज चुकाना चाहता हु. मैं भी मणि जी के साथ इस धर्म युद्ध में तुम्हारे साथ हु.

पब – बापू ये तो अच्छी बात है. पैर फिर आपके मंदिर का डायन कोण रखेगा??

दीनदयाल – बीटा अब उसका डायन मेरे दोनों छोटे भाई रखेंगे. वो अब उस मंदिर की सेवा करके अपने पापो का प्रायश्चित करना चाहते है.

माहि – पैर हम कहा जा रहे है??

पब – मेने जो मंत्रो का ज्ञान प्राप्त किया है उसका उसे कैसे किया जाता है ये सिखने के लिए हम दोनों को हिमालये की और जाना है. गुरूजी का आदेश है.

पब की बात सुन कर उसकी सभी बिबिया दुखी हो गयी. सबसे जयादा हालत तो अवनि की खराव थी. मंदिर के हादसे को सुन कर hi उसने ये सोच लिया था की वो अब सही टाइम देख कर अपने दिल का हाल पब को बता देगी. उसको बता देगी की वो उसे कितना प्यार करती है. और उससे माफ़ी भी मांगेगी अपने किये की. कियोकि मंदिर के हादसे के बारे में सुन कर वो दर गयी थी. की यदि वह पैर कुछ भी गलत हो जाता तो उसकी तो दुनिया hi लूट जाती. वो इस संसार में अकेली रहा जाती. वो और उसका भाई hi बचते और सब ख़त्म हो जाता. इस लिए उसने सोच की वो अपने प्यार को खो दे उससे पहले hi वो उसे पा लेगी फिर यदि मूट भी आ जाये तो कोई गम नहीं. पैर फिर एक बार वो ये न कर पायी. पता नहीं किस्मत ने इस दोनों का मिलान कब तय किया हुआ है. पता नहीं मिलान होगा की भी नहीं???

नेक्स्ट डे – मणि, दीनदयाल, रेनू, गोपाल एक साथ चले गए. पब और माहि भी सभी से मिल कर टेलिपोर्ट हो कर पहुंचे हिमालये की उन पहाड़ियों में जहा सायद कुछ लोग hi पहुंच पते होंगे. चारो और बहुत खूबसूरत नजारा था. जहा भी नजर जा रही थी केवल बर्फ hi बर्फ. हर तरफ बर्फ की पहाड़िया hi थी. वह पहुंचते hi माहि की ठण्ड से हालत पतली हो गयी. वो लोग बिना किसी वूलन के वह पहुंच गए थे. माहि तो ठण्ड से पब के सीने से चिपक गयी. पब फिर से टेलिपोर्ट हो कर हवेली पंहुचा और फिर माहि को अच्छे से पैक करके फिर से वह पंहुचा. इस बार माहि को कुछ ठीक लगा. पैर फिर भी ठण्ड तो लग hi रही थी.

ये दोनों मणि जी के बताये सरते पैर चल पड़े. कुछ 1 ऑवर चलने के बाद ये दोनों उस पहाड़ी की घाटी में पहुंच चुके थे. और फिर सामने एक पहाड़ hi नजर आ रहा था. चारो और बर्फ के पहाड़ो के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था. जबकि मणि जी ने बताया था की यहाँ पैर hi दयासुर जी मिलेंगे. पब और माहि ने ीदार से उदार घूमते हुए उनको खोने में लगे रहे 3 ऑवर हो चुके थे. दोनों को भूक भी लगने लगी थी. पैर वो पहले दयासुर जी से मिलना चाहते थे. पैर इन पहाड़ियों में उनको कहा धुनें ये उनकी सोच के बहार था. जब दोनों थक गए तो एक पत्थर पैर बेथ गए. पब तो नहीं ताका था पहाड़ो के देव के वर के कारन पैर माहि की हालत ख़राब थी. इसलिए पब कुछ देर माहि को आराम देने के लिए बैठा था. और पब मन hi मन दस माँ को याद करने लगा की माँ अपने इस bête की मदत करो उसे अपने bête दयासुर से मिलवा दो. वो मन hi मन प्रे कर hi रहा था की एक 9 फुट का आदमी उन दोनों के सामने ा जाता है. और जोर से हसने लगता है. पब एक तो पहले से hi दयासुर जी केन ा मिलने से परेशान था उप्पेर से ये आदमी!!! इस आदमी की हंसी पब को बर्दाश नहीं हो रही थी. तो पब एक दम से उससे बोलता है – अरे ो भाई क्यों है रहा है. मेरा पहले से hi मूड ख़राब है. चला जय अहा से नहीं तो अभी मेरे हाथो से पिट जायेगा.

आदमी – हाहाहाहाहा … तू पिद्दी सा लड़का मुझको पिटेगा. दम है तुजमे की मुझसे टकरा सके?? तू अभी बच्चा है बच्चा… जा पहले बड़ा हो जा तब मुझसे लड़ने की sochna…..hahahahahaha

इस आदमी ने ये बात ऐसे कही जैसे वो पब का मजाक उदा रहा हो. पब ये बर्दाश नहीं कर प् रहा था. पब ने फिर उससे कहा – देख भाग जा यहाँ से, तू मुझसे जीत नहीं सकता. तू क्या तेरा बाप भी नहीं जीत सकता मुझसे. इसलिए बोल रहा हु भाग ले….

ये सुनते hi वो आदमी पब को एक जोर की लत मार देता है. पब उड़ता हुआ दूर जा कर गिरता है. पब की एक hi लात में हालत ख़राब हो गयी थी. और पब को गुस्सा आ गया था एक तो दयासुर नहीं मिल रहा था और एक इस आदमी ने बिना किसी बात के लात मर दी. पब गुस्से में बोलै

पब – मादरचोद क्यों मारा मुझको ??? अब तू मुझसे बच नहीं सकता तूने मजसे लड़ कर बहुत बड़ी गलती की है आज मैं तुझको जिन्दा नहीं छोड़ूगा….

आदमी – हहहहहहहह…. अबे चूहे तू मुझको मरेगा तेरी औकात hi क्या है जो तू मुझको छू भी सके…

उन आदमी की इस बात से पब का गुस्सा और बाद जाता है और वो भागता हुआ उस आदमी के पास आने लगता है उसे घुसा मरने के लिए. पैर तभी वो आदमी अपना एक हाथ आगे कर देता है और कुछ मंत्रो को बोलने लगता है. (पैर ये मंत्र इन दोनों को सुनाई नहीं दिए थे बस होंठ लिनते हुए दिखे थे) जिससे उसके हाथ से एक रौशनी निकलती है और वो रौशनी पब के चारो और एक बड़ा सा गोला बना देती है. पब उस गोले में कैद हो जाता है. माहि ये देख कर बहुत दर जाती है. पब अपनी पूरी कोसिस कर रहा था उस कैद से आज़ाद होने की पैर कुछ हो नहीं प् रहा था. उसका गुस्सा भी बढ़ता जा रहा था. माहि भी बहार से उस गोले को तोड़ने के लिए उस पैर घुसे मर रही थी पैर जब पब के पावर फुल पंच उस गोले का कुछ नहीं बिगड़ पते तो माहि कर hi क्या सकती थी.

थोड़ी देर तक दोनों ऐसे hi लगे रहते है पैर कुछ नहीं होता. ीदार वो दानवो जैसा आदमी उन दोनों को देख देख कर है रहा था. और उनके गुस्से को और भड़का रहा था.
 
सॉरी भाई लगता है की मैं यहाँ पैर ठीक से ये बता नहीं पाया.

देखो पहले त्रिकाल की बात करते है - त्रिकाल ने अपने जीवन में बहुत से मंत्रो को सिद्ध कर के बहुत साडी पावर्स पायी है. और उसके बाद डलासुर से ये 25 POWERS....PER आज की बात करे तो वो बिलकुल खली है. उसकी सभी पावर्स जा चुकी है. पैर आज भी मंत्रो का बहुत ज्ञान है उसके पास. ज्ञान है पैर उस ज्ञान से प्राप्त पावर्स नहीं. उसने जो भी अटैक पब पे किये है वो अपने मंत्रो को फिर से सिद्ध करके किये है. और वो अपनी खोई हुई सभी पावर्स को फिर से पाने के लिए HI ये सड़ना कर रहा है जो की 120 दिन में पूरी हो जाएगी. और इस सड़ना में HI वो हर महीने लड़कियों की बलि भी दे रहा है.

अब बात करते है पब की - पब के पास अभी तो कुछ भी पावर नहीं है. और 1 शादी बेकार हो चुकी है ऐडा के साथ उसको कोई पावर नहीं मिली. पैर अस्तिका देवी और देव ने उसको कुछ पावर्स दी है. और वो बाकि कोण -2 सी पावर्स और लगा ये देखना है.

सबसे बड़ी बात ये है की त्रिकाल के पसस अपनी अलग पावर्स है और यहाँ पब की पास अलग. देखते है आगे क्या होता है.

बसे भी अभी तक सभी पब को त्रिकाल के सामने न जाने की HI सलहा देते आ रहे है कियोकि उसके पास जो मंत्रो के ज्ञान की शक्ति है. वो HI खतरनाक है. अभी तो सब केवल पब को डलासुर के उस देव रूप को छुड़ाने के लिए HI बोल रहे है.

आगे अभी बहुत कुछ होना है भाई...... साथ बने रहे... और एन्जॉय करते रहे.......

थैंक्स....
 
अपडेट 127

थोड़ी देर तक दोनों ऐसे hi लगे रहते है पैर कुछ नहीं होता. ीदार वो दानवो जैसा आदमी उन दोनों को देख देख कर है रहा था. और उनके गुस्से को और भड़का रहा था. जब दोनों कुछ नहीं कर पते तो माहि उस आदमी से बोलती है

माहि – क्यों कर रहे हो तुम ऐसा. हम तो तुमको जानते भी नहीं तो क्यों मरना चाहते हो हमको???

आदमी – हाहाहा क्यों बताऊ तुमको मैं??? तुम्हारा पति तो अभी खुद को बहुत बड़ा योद्धा समाज रहा था न. अब क्या हुआ बहुत घमंड है न तुम्हारे पति को अपनी शक्ति का.. तो निकल कर दिखाए मेरे इस गोले से बहार… पैर जयादा टाइम नहीं है तुम दोनों के पास जल्दी करो नहीं तो इस गोले के अंदर की ऑक्सीजन ख़तम हो गयी तो ये भी मर जायेगा….. हहहहहहह

पब गोले अंदर भी इस दोनों की बात सुन प् रहा था. उस आदमी की बात सुन कर पब और भी घबरा जाता है. और फिर से उस गोले पैर अपनी टक्कट आजमाने लगता है. माहि का भी यही हाल था. कुछ देर कोसिस करके फिर से दोनों थक कर रुक जाते है. अब पब को साँस लेने में ताफलीफ सुरु हो चुकी थी. जब माहि को लगता है की उन दोनों की हर कोसिस बेकार जा रही है तो माहि अपने पहाड़ो के देव को याद करने लगती है. जिससे उसका मन शांत होने लगता है. तभी उसको याद आता है की ये गोला उस आदमी ने मंत्रो की पावर से बनाया है. और उसका पति पंकज हर प्रकार के मन्त्र को जनता है. बस जरुरत है तो शांत मन से उन मंत्रो को पहचानने की. ये समाज एते hi माहि उस गोले के पास पूछती है और पब से बोली, पब अभी साँस में ऑक्सीजन की कमी से तड़प रहा था.

माहि – पंकज सुनिए…. आप इस गोले को नस्ट कर सकते है. मेरी बात सुनिए…

पब का डायन माहि की बात उसकी और जाता है. तो माहि उसको बताती है की शांत मन से इस गोले को नस्ट करने के मंत्र को अपने अंदर खोजिये. आप को सभी मंत्र पता है. आप ये कर सकते है. पब को भी माहि की बात समाज आ जाती है और वो अपने आप को शांत करके मंत्र अपने अंदर hi खोजने लगता है. और कुछ hi देर में कामियाब भी हो जाता है. फिर मंत्र के उच्चारद के साथ hi के साथ hi वो गोला भी ख़तम हो जाता है. और जब पब उस आदमी की और देखता है. तो वो अभी भी पब पैर है रहा था. पैर अभी पब का मन शांत था तो वो समाज जाता है की ये कोई शक्तिशाली है. इससे युद्ध करके अपनी एनर्जी वास्ते करने से पहले इसके वेयर में पूछना चाहिए. क्या पता ये दयासुर जी को जनता हो.

पब – हे महाबली आप है कोण?? और मुझको क्यों मरना चाहते है??? मैं यहाँ पर किसी और काम से आया हु. और आप कहा क्यों पादरी है??

आदमी – मैं डलासुर पुत्र दयासुर हु. और मैं अपनी माँ की आज्ञा से यहाँ अयाह ु. मैं तुमको मरना नहीं चाहता. मुझको तो दस माँ ने तुमको ज्ञान देने के लिए भेजा है. और इसलिए hi मेने तुम पर हमला भी किया था.

पब और माहि ये सुनते hi खुश हो जाते है और दोनों दयासुर के पेअर छूटे है. और फिर पब बोलता है

पब – माफ़ी चाहुगा गुरूजी जो मेने आपके साथ ऐसे पेश आया. पैर आप कहना क्या चाहते है की हमला करके आप मुझको कुछ ज्ञान दे रहे थे?? पैर आपका हमला तो मेरी जान hi लेने वाला था.

दयासुर – सुनो अब में जो बताने जा रहा हु, इसे कभी मत भूलना –

1. एक तो तुम किसी अनजान जगह पर भी सचेत नहीं थे. जिस लापरवाही से तुम यहाँ बैठे थे, यदि कोई दुसमन होता तो पल भर में hi तुमको मर देता. मेरे 1 वार के बाद भी तुम उसी लापरवाही से मेरी और आने लगे. और मेने तुमको उस गोले में कैद कर लिया. यदि मेने वो गोला इतना बड़ा और कमजोर नहीं बनाया होता तो सायद तुम कुछ hi देर में मर जाते.

2. मेने तुमको जान कर गुस्सा दिलवाया और तुम क्रोधित हो गए. करोड़ एक ज्ञानी का सबसे बड़ा दुसमन है. करोड़ आपके ज्ञान को खा जाता है. और आप करोड़ में भूल जाते है की आपके पास ज्ञान है और वो ज्ञान आपको हर संकट से मुक्त कर सकता है. ज्ञानी कभी करोड़ को अपने उप्पेर हावी नहीं होने देते.

3. मुझको लगता है की तुमको घमंड है अपनी इन पावर्स का. तुम भूल रहे हो तुम्हारे सामने जो चुनौती है वो बहुत बड़ी है. बलशाली कभी अपने बल को दिखते नहीं है. जरुरत पड़ने पर hi अपनी शक्ति का इस्तिमाल करना hi एक अच्छे योद्धा की निशानी है.

4. मनरो का सही इस्तेमाल शांत मन से hi किया जा सकता है. एकाग्रता से hi मंत्रो को सिद्ध किया जा सकता है. शांत मन से जब किसी देव को याद किया जाता है तो वो भी प्रासां होते है.

तुम कहा पैर अपने मंत्रो के ज्ञान से शक्ति पाने आये हो तो सबसे पहले अपने करोड़ को त्यागना होगा. अपने करोड़ पैर काबू पाना होगा.

दयासुर की इन बातो को सुन कर दोनों दयासुर के फिर से पेअर पकड़ लेते है – हम आपकी बातो को समाज गए गुरूजी, अब आप हम दोनों को अपनी सरद में ले कर हमें दांया कर दीजिये…..

दयासुर उन दोनों को उड़ाते है. और फिर अपने साथ ले कर आगे बाद जाते है. और जब वो लोग एक पहाड़ के नजदीक पहुंचते है तो पता चलता है की पहाड़ के एक साइड से अंदर जाने का रास्ता है. जो बिना नजदीक आये देखना नामुनकिन है. तीनो उसके अंदर चले जाते है. और उस गुफा में आगे बाद जाते है. ये बहुत बड़ी गुफा थी. और इसके अंदर रौशनी और हवा कहा से आ रही थी. ये तो पब को बहुत देर में समाज में आया. किया ये गया था की गुफा के ऊपरी भाग में बड़े बड़े छेद थे. जो की बर्फ से ढके हुए थे. और दयासुर जी की पावर का कमल ये था की गुफा में ठण्ड बहार की तुलना में न के बराबर थी.

जब ये तीनो उस गुफा में दयासुर जी के निवेश स्तन पर पहुंचे तो वह पैर एक लड़की युद्ध की तरह अपनी तलवार पैर धार धार रही थी. पब तो उस लड़की के फेस को देख कर उसे देखता hi रहा गया. उसके फेस पैर एक तेज़ था. युद्धों जैसा तेज़. एक दम गोरा फेस, काली बड़ी बड़ी आखें, बाल जुड़े में बड़े हुय्र थे. होंठ बहुत पिंक थे, ऐसा लग रहा था की पिंक लिपस्टिक लगा राखी हो, पैर ये कुछ न था. वो लड़की अभी बैठी थी. और पब उसको गुरे जा रहा था और दयासुर जी ये देख कर मुस्कुरा रहे थे. जब माहि ने देखा की पब उस लड़की को बस गुरे जा रहा है तो उसने दयासुर जी की और देखा तो दयासुर जी ने भी अपने फेस पैर गुस्से के भाव ला दिए जिनको देख कर माहि ने तुरंत hi पब को हिलाया. जिससे पब दुनिया में वापिस लोटा. नहीं तो पता नहीं कहा खो गया था. जब पब ने दयासुर जी की और देखा तो उन्होंने ऐसा रियेक्ट किया जैसे उनको कुछ पता hi न चला हो. दयासुर जी फिर उन दोनों को अपने साथ ले कर तोड़ा और आगे बड़े और एक ुचे पातर की शिला कर बेथ गए और उन दोनों को भी वह राखी दूसरे पतरो पैर बैठने को बोलै. फिर दयासुर जी ने आवाज लगाई

दयासुर – सलोनी बीटा यहाँ आओ. देखो हमारे साथ कोण आया है.

सलोनी (वही लड़की जो तलवार में धार तेज़ कर रही थी. और पब उसको देख कर खो गया था)

सलोनी भी अपने बाबा की आवाज सुन कर वह अति है. तो दयासुर जी बोले – बीटा ये दोनों हमारे शिष्य है. इनको हमारी माँ ने भेजा है. आज से ये यहाँ पर hi रहेंगे. इनकी देखभाल की जिम्मेदारी तुम्हारी है मेरी बच्ची…

सलोनी ने अभी तक पब का फेस नहीं देखा था. वो पब और माहि के पीछे कड़ी थी. और जब ये दोनों अंदर आये थे तब भी उसने एक सर साडी निघा से hi देखा था. उस टाइम उसको लगा की कोई मुशाफिर फिर से यहाँ फर्श गया है तो दयासुर जी उसकी मदत के लिए उसे कहा ले आये है. ये हर महीने 2 महीने में होता रहता था. पैर आज तक कोई ऐसा नहीं आया था जिसको दयासुर ने अपना शिष्य बोलै हो. वो दानवो के राजा के bête थे. वो दानवो के बच्चो को भी अपना शिष्य नहीं बनाते थे. ये तो फिर भी मानव थे. तो सोनाली को अपने कानो पैर विस्वाश नहीं हुआ. की उसके पिता सदरद से 2 मानवो को अपना चेला बनाना को तैयार है.

सलोनी – हाहाहाःहाहा … बाबा आप इन 2 बच्चो को अपना शिष्य बनाओगे. है क्या ये??? दस माँ ने क्या सोच कर भेजा है इनको यहाँ?? ये तो 2 दिन में hi भाग जायेगे….
 
अपडेट 128

सलोनी ने अभी तक पब का फेस नहीं देखा था. वो पब और माहि के पीछे कड़ी थी. और जब ये दोनों अंदर आये थे तब भी उसने एक सर साडी निघा से hi देखा था. उस टाइम उसको लगा की कोई मुशाफिर फिर से यहाँ फर्श गया है तो दयासुर जी उसकी मदत के लिए उसे कहा ले आये है. ये हर महीने 2 महीने में होता रहता था. पैर आज तक कोई ऐसा नहीं आया था जिसको दयासुर ने अपना शिष्य बोलै हो. वो दानवो के राजा के bête थे. वो दानवो के बच्चो को भी अपना शिष्य नहीं बनाते थे. ये तो फिर भी मानव थे. तो सोनाली को अपने कानो पैर विस्वाश नहीं हुआ. की उसके पिता सदरद से 2 मानवो को अपना चेला बनाना को तैयार है.

सलोनी – हाहाहाःहाहा … बाबा आप इन 2 बच्चो को अपना शिष्य बनाओगे. है क्या ये??? दस माँ ने क्या सोच कर भेजा है इनको यहाँ?? ये तो 2 दिन में hi भाग जायेगे….

सलोनी की बात पब के दिल को चुव जाती है पैर वो बोलता नहीं कुछ. तभी दयासुर जी बोलते है – सलोनी ये क्या है बीटा??? तुम जानती क्या हो इनके बारे में?? और तुमने सोचा भी कैसे की हमारी माँ का फेशला गलत हो सकता है. तुम नहीं जानती की वो कोण है और क्या है????

सलोनी को तुरंत hi अपनी गलती का बहन होता है…. तो वो बोलती है – माफ़ करना बाबा मैं अपने बचपने में गलत बोल गयी. (फिर सलोनी पब के आगे आ जाती है और उससे बोलती है ) – सॉरी यंग मन… ी don’t वांट हार्ट यू. सॉरी one’s अगेन. ये बोल कर वो पब की और देखती है जो उसको hi देखे जा रहा था. सलोनी भी पब की आखों में खो जाती है. दोनों आमने सामने खड़े थे. पब सलोनी के सामने बच्चा लग रहा था. सलोनी पब से 8-9 इंच लम्बी थी. और उसका सरीर भी भरा हुआ था. एक दम क़यामत बॉडी. सलोनी को देख कर hi लग रहा था की इनके सरीर में बहुत जान है. तो वो थी भी एक दानव की बेटी. तो जान तो होगी hi न. उसका पूरा सरीर डाका हुआ था. उसने अजीव दांग से कपड़ो को लपेटा हुआ था. जो उसके सरीर का पूरा भूगोल भी बता रहे थे. और उसको एक हॉट लुक दे रहे थे. और उसके हाथ पेअर युद्ध के लिए फ्री भी थे. बिना मेक उप और बिना किसी अच्छी ड्रेस के भी वो बहुत हॉट लग रही थी. एक दानव कन्या जो दयासुर जैसे महँ योद्धा की बेटी हो जो दस माँ की पोती हो वो खूबसूरत और ताकतवर न हो ये कैसे हो सकता है. पब को उसे देख कर वो hi फीलिंग आ रही थी जो उसको अपनी पत्नी चुनने के लिए आणि चाहिए. और पब का मन बार -2 उसे देख कर उसकी हॉटनेस को कामिनी की हॉटनेस से कपड़े कर रहा था. जब भी कामिनी अपने जलवे पब के उप्पेर बिखेरती थी तक वो भी कुछ -2 सलोनी के जैसी hi लगती है. जैसा ख्याल पब के मन में आ रहा था. एक तरफ तो पब का मन उसे सलोनी से शादी करने को उकसा रहा था. और एक तरफ उसकी हॉटनेस देख कर पब के लुंड में बचल मचा हुआ था. पब और सलोनी को होश hi नहीं था की माहि और दयासुर भी वह मौजूद है. सलोनी को पब की आखें ऐसी लग रही थी. जैसे की वो इनके लिए hi दुनिया में आयी है. आज पब के रूप में उसे उसका जीवन साथी नजर आने लगा था. पहली बार था जब सलोनी को कोई लड़का बया हो. नहीं तो अभी तक वो 29 साल की हो चुकी थी. और वो मानव और दानव सभी से मिलती थी. पैर आज तक कोई भी उसके दिल में जगह न बना सका. मानव तो उसको वैसे भी अच्छे नहीं लगते थे. उसकी नजर में मानवो में ताकत hi कहा होती है. जो उस पहाड़ से सरीर वाली लड़की को देख भी पाए. और आज ये लड़की पब को देख कर अपना दिल उसे दे बैठी उसे लगने लगा जैसा उसका जनम केवल इस मानव के लिए hi हुआ है.

जब तोड़ी देर तक दोनों में से कोई कुछ नहीं बोलै तो माहि ने एक बार फिर पब को होश में लाया. पब होश में आ कर केवल िस्ता hi बोल पाया – it’s ok…

पब की आवाज से सलोनी भी अपने होश में आयी और अपने रूम की और चल दी और जाते हुए बोली – बाबा मैं इन दोनों के रुकने का इंतजाम करती हु….. फिर दयासुर जी पब और माहि को मंत्रो को कैसे सिद्ध किया जाता है. और कैसे मन को शांत करते है. डायन लगने की सही विदी क्या है ये समजते रहे. सड़ना तो कल से सुरु होनी थी. आज तो वो उनको बस समजा रहे थे की क्या और कैसे करना है. इन सब में hi 3 ऑवर हो गए. इस बिच सलोनी ने पब और माहि के लिए सरे अरेंजमेंट कर दिए थे. उसने एक रूम उन दोनों के लिए तैयार कर दिया था जिसमे एक फर्श का बना बिस्तर था. रूम भी ज्यादा बड़ा नहीं था. सलोनी ने सभी के लिए खाने का इंतजाम करके फिर से दयासुर के रूम में जा पहुंची. उस टाइम दयासुर और पब मन hi मन मणि जी से बात कर रहे थे. मणि जी दयासुर के बड़े भाई है ये दयासुर को भी ज्ञात नहीं था. पैर फिर भी दयासुर के लिए वो उनकी माँ के परम भक्त थे. तो वो उनसे बहुत अच्छे से पेश आ रहे थे.

जब इन दोनों का डायन टुटा तो देखा की सलोनी फिर से पब को देखने में खो चुकी है. तो दयासुर जी उसे आवाज दे कर उससे खाने के वेयर में पूछते है. फिर सब खाना खाने चले जाते है. खाने के टाइम पैर पब बताता है की उसकी आलरेडी कई शादिया हो चुकी है. और माहि भी उसकी एक पत्नी है ये सुन कर सलोनी को एक जतका लगता है. पैर वो एक दानव कन्या थी. और दानवो में एक से आदिक पत्निया रखना कोई बड़ी बात नहीं थी.

नेक्स्ट डे से दयासुर जी, पब और माहि को पहले डायन लगाना सिखाते है. 2-3 दिन में hi ये दोनों डायन लगा कर अपने मन को पूरी तरह शांत कर लेते है. पब के मन में त्रिकाल के प्रति जो आग थी या जो उसका दिल अपनी माँ पर हुए अत्याचारों से भटक रहा था. अब वो शांत हो चुक्का था. पैर ये उस समुन्द्र की तरह था जो उप्पेर से तो शांत होता है पैर उसके अंदर जवालामुखी दाहक रहा होता है. इन शार्ट पब ने अपने गुस्से को काबू कर लिया था और इस गुस्से को वो अपने दुश्मनो पैर हतियार की तरह इस्तिमाल करना चाहता था.

फिर सुरु होता है मंत्रो को सिद्ध करने का डोर.. माहि और सलोनी पब और दयासुर जी की इसमें पूरी मदत कर रही थी. साथ में पब और माहि, सलोनी से युद्ध कला भी सीखा रहे थे. सलोनी बहुत सी युद्ध कलाओ में निपुड़ थी. वो भी पुरे मन से इन दोनों को युद्ध कला सीखा रही थी.

पुरे 1 महीने की कड़ोर म्हणत ने पब को बहुत ताकतवर बना दिया था. उसने बहुत से मंत्रो को सिद्ध कर लिया था तो बहुत सरे मंत्रो के बारे में पता चल चुक्का था की किस मंत्र का कैसे इस्तिमाल करना है. साथ hi माहि ने भी कुछ सिद्दिया प् ली थी. और वो भी तलवार बजी और कुंग फु सिख चुकी थी. वो एक्सपर्ट नहीं हुई थी पर फिर भी वो बहुत कुछ सिख चुकी थी. पब का हाल भी माहि से अलग नहीं था. वो भी 3-4 टाइप की फाइट सिख चुक्का था पैर वो भी किसी में एक्सपर्ट नहीं हुआ था. वो सलोनी को भी अच्छे से टक्कर नहीं दे पता था. मंत्रो पर तो उसका पूरा कमन्द हो चुक्का था. पैर अभी भी बहुत सरे मंत्र ऐसे थे जिनको वो सिद्ध नहीं कर पाया था. और उन सबके लिए टाइम भी बहुत चाहिए था जो की पब के पास नहीं था. अभी तक उन 120 दिनों में से 35 दिन निकल चुके थे. और अभी तक वो अपने सभी मंत्रो को सिद्ध नहीं कर पाया था. कर भी कैसे सकता था. उसके पास मंत्रो का खजाना था. और हर मन्त्र को सिद्ध करने के अपने रूल होते है. किसी -2 मंत्र में तो सालो लग जाते है तो कुछ महीनो का टाइम लेते है. त्रिकाल ने न जाने कितने साल तक एहि किया था जब आज वो ीनता शक्तिशाली हुआ था. त्रिकाल की वर्षो की म्हणत के आगे पब की 1 महीने की म्हणत कैसे बराबरी कर सकती है.

अभी 2 दिन पहले hi दयासुर और पब टेलिपोर्ट हो कर मणि जी के पास पहुंचे थे. दयासुर भी अभी तक पब का टारगेट और वो यहाँ तक कैसे पंहुचा, उसकी माँ के साथ क्या हुआ सब जान चुके थे. दयासुर न जाने कब से अपने बाप को त्रिकाल की कैद से आजाद करवाना चाहता था. पैर दस माँ ने कभी भी उसे केसा करने की आज्ञा नहीं दी कियोकि यदि ऐसा होता तो दयासुर को अपने hi भाइयो से युद्ध करना पड़ता और दस माँ ये बिलकुल भी नहीं चाहती थी. दयासुर को अब पब के रूप में वो हतियार मिल चुक्का था जो त्रिकाल से उसके बाप को आजाद करवा सकता था. इसलिए दयासुर ने भी अपनी पूरी जान लगा दी. पैर जब वो दोनों मणि जी के पास पहुंचे और पब की शक्तियों का एनालिसिस किया तो मणि जी ने उसे मंत्रो की सिद्धि को हरी जांदी तो दे दी थी. पैर अभी उसे पंचमहाभूतो को सिद्ध करना बहुत जरुरी था जो की इतने काम टाइम में पॉसिबल नहीं था. दूसरा पब की फाइटिंग स्किल भी उस लेवल की नहीं हुई थी की वो त्रिकाल के उस महँ वियु में जा सके. जिससे वो डलासुर को कैद मुक्त करवा सके.. मंत्रो को सिद्ध करते हुए उसने एक भला और एक धनुष तो प् लिया था. पैर अभी जो सबसे जरुरी था वो थी एक दिव्या तलवार. जो किसी भी तरह की माया को भी काट सके. और भी कुछ कमिया थी जिनको पुरे किये बिना पब को वह जाना आत्महत्या के बराबर था. दयासुर जी अपने हिसाब से एनालिसिस कर रहे थे. और उदार मणि जी और दीनदयाल जी अपने हिसाब से. पैर हकीकत ये थी की कोई नहीं जनता था की इस चक्रवेव में त्रिकाल ने किस -2 तरह के खतरे किस किस जगह पैर बिछाये है.

2 दिन से दयासुर जी अपने एनालिसिस में hi लगे हुए थे. और ीदार हवेली में अभी पब को याद कर रहे थे. हलाकि पब डेली रात को मन hi मन सभी से बात करता था. फिर भी हवेली में जैसे जिन्दगिया थम सी गयी थी. ये सब भी अपनी ट्रेनिंग में खोये थे. कियोकि मंदिर की फाइट ने इनको बता दिया था की खतरा कितना भी बड़ा हो सकता है. बस पेय, माउद और काजल को छोड़ कर ये सब भी बहुत म्हणत कर रहे थे. यहाँ जंगल में इन सभी लड़कियों की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी थी. और वो सब अब हवेली के बेसमेंट में वापिस आ चुकी थी. अभी तो जूही उनमे से ये देख रही थी की किस लड़की का टैलेंट किस चीज में जयादा है. और अब वक्त भी आ गया था की उनको एक्सपोर्ट्स ट्रेनिंग दी जाये. अभी भी ये सभी लड़किया बहुत खूंखार हो चुकी थी. ब्लैक कमांडो भी इनके आगे फ़ैल थे. पैर पब इनको बेस्ट टीम बनाना चाहता था. इसलिए जुली गुरु से बोलल गयी थी की अब एक बार तेखुर साहब इन सभी लड़कियों से मिल ले और किस -2 एक्सपोर्ट्स को बुलाना है ये बता दे जिससे आगे इनकी ट्रेनिंग सुरु हो सके जो की जुली के बस की नहीं थी. आज पब ने हवेली आने को बोलै था की वो दयासुर जी से बात करके एक बार हवेली आएगा.

अभी अवनि और जुली दोनों एक लिस्ट को फिर से re-chk कर रही थी. ये लिस्ट तो उन दोनों ने 4 दिन पहले hi कम्पलीट कर ली थी पैर फिर से वो इस लिस्ट को re-chk कर रही थी. वो हुआ ये था की पब ने करीब 10 दिन पहले अवनि से मन hi मन बात की थी. पैर प्यार भरी नहीं, पब को एक काम था अवनि से इसलिए hi पब ने अवनि से बात की. कियोकि पब को आज भी नहीं पता था की अवनि भी पब से उतना hi प्यार करने लगी है जितना की वो उससे करता है. ऐडा वाले केस के बाद जब अवनि ने पब को मारा था तब से पब समाज बैठा था की उसे उसका पहला प्यार कभी नहीं मिलेगा. पैर इस केस को गुरु ने जितना अच्छी तरह सुलझाया था. और फिर ऐडा का पब के लिए प्यार और ऐडा की वो सब बात जो ऐडा ने अवनि से कही थी उन सभी ने अवनि के दिल में पब के लिए उस प्यार को जनम दिया था जो पब बहुत दिनों से अवनि से करता था. पैर आज तक पब को इस वेयर में पता नहीं था. कभी अवनि बताती नहीं है तो कभी उसको मौका नहीं मिलता. ये दोनों पता नहीं कब तक ऐसे hi तड़पते रहेंगे एक दूसरे के लिए………….
 
अपडेट 129

कभी अवनि बताती नहीं है तो कभी उसको मौका नहीं मिलता. ये दोनों पता नहीं कब तक ऐसे hi तड़पते रहेंगे एक दूसरे के लिए………….

पब ने अवनि को 10 दिन पहले बोलै था की वो भानु के बेसमेंट वाले रूम “किंग बी” में एक कंप्यूटर रखा है उसे देखे उसमे क्या क्या है. और एक लिस्ट बनाये की कोण सी लड़की किस एजेंट या गुंडे से भानु तक पहुंची है. कियुकी भानु कभी खुद लड़कियों को नहीं ुद्वता था. और ये लड़किया कहा -2 सप्लाई होती थी. भानु के क्लाइंट कोण -2 थे. पब ने अवनि से बोलै था की जुली इस काम में उसकी पूरी हेल्प करेगी. और अवनि ने किया भी वैसा hi. जब उस कॉम्पटर को उसने खोला तो वो पासवर्ड मांग रहा था. पैर अवनि भी आईटी एक्सपर्ट की जॉब कर चुकी थी. इसलिए hi तो पब ने ये काम अवनि को बोलै था. जब अवनि ने उस कंप्यूटर को चक किया तो उसने बहुत साडी बड़सम त्रीन्ग की रिकॉर्डिंग थी. जो की इस बेसमेंट की hi थी. और भानु का पूरा हिसाब – किताब भी था उसमे. एक स्विस बैंक अकाउंट की डिटेल भी थी जिसमे करीब 1270 करोड़ रूपीस थे. भानु के सभी क्लाइंट और सुप्प्लिएर्स के नॉश. और एड्रेस भी थे. जितना जुली को भी नहीं पता था उससे कही जयादा था उसमे. इन दोनों ने यहाँ मौजूद सब लड़कियों की लिस्ट अलग बनाई की कोण कहा से आयी थी. और क्लाइंट लिस्ट अलग. और एक कम्पलीट लिस्ट बनाई जो ये गर्ल्स सप्लाई करते थे. और एक लिस्ट वो बनाई जो अपनी पावर या पोस्ट से भानु को सपोर्ट करते थे.

ीदार पब और माहि अपनी मॉर्निंग की प्रैक्टिस करके सलोनी के साथ b.f. कर रहे थे. और दोनों का nain-mataka भी चल रहा था. माहि भी ये जानती थी पैर कुछ कहती नहीं थी कियोकि उसे भी पता था की पब ने अभी और भी शादी करनी है और पब माहि को बता चुक्का था की सलोनी में वो सब कुछ है जो की उसकी पत्नी में होना चाहिए. और पब को ये भी पता चल चुक्का था की सलोनी भी पब से शादी करना चाहती है. पैर मुद्दा ये था की दयासुर जी से कोण बात करे. जब इन सबका b.f. फिनिश हुआ तो पब दयासुर जी के पास पंहुचा आज उसको हवेली जाना था. तो दयासुर जी से आज्ञा ले कर आ गया. माहि भी साथ जाना चाहती थी पैर पब ने उसे रोक दिया. और खुद जा पंहुचा हवेली.

पब टेलिपोर्ट हो कर हवेली में अपने रूम में hi पंहुचा था. उसका रूम आज भी उतना hi साफ़ था जितना 1 महीने पहले होता था. अपने रूम में 1 मंथ बाद आ कर पब को भी अच्छा लग रहा था. इस रूम से बहुत सी यादे जुडी थी. 2-3 मं तक कुछ हसीं पालो को याद कर वो बाथरूम की और बाद गया. और फ्रेश हो कर बहार की और जाने लगा. तभी उसने कुछ सोचा और रुक गया. और मंत्र पद कर इनविजिबल हो गया. अब उसे कोई नहीं देख सकता था. और फिर वो हॉल में पहुंच गया. वह का सन देख कर उसके फेस के रंग बदलते रहे. और मन में अपनी पत्निओ के लिए प्यार उमड़ता रहा. हवेली में सबको पता था की आज पब आ रहा है. तो सब अपने आप में खोई हुई पब का वेट कर रही थी.

सविता, कामिनी और गुरु किचन में पब के पसंद का खाना बना रही थी. सविता और कामिनी ने साडी पहने हुई थी पैर दोनों बहुत अच्छे से तैयार हुई थी. दोनों के फेस पैर पब की ने की ख़ुशी की चमक दिख रही थी. तांकुरैन या कहो रानी जैसी लग रही थी. वही गुरु ने एक सेक्सी सलवार सूट पहना हुआ था. इसमें वो एक दम हसीं काली लग रही थी. ाणिक्ता और एरिका जीन्स और सॉर्ट टॉप पहन कर गेट के पास कड़ी एक दूसरे से बात कर रही थी. पैर उनका डायन गेट पैर hi था. दोनों का पेट और घरी नाभि दूर से hi अत्त्रक्ट कर रही थी. पारी आज अपने नाम की तरह पारी hi लग रही थी आज उसने एक वाइट लॉन्ग फ्रॉक पहना था. उसकी गोरी बांहे नंगी थी. वो उस ड्रेस में बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. और दिंनिंग टेबल पर बैठी अपनी hi सोच में गम थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी. जब पब की नजर अवनि पैर गयी तो वो वही पैर ठहर गयी. अवनि हॉल के सोफे पैर बैठी थी लैपटॉप उसकी गोद में रखा था. और वो उसमे काम करने में लगी हुई थी. अवनि को देख कर पब अपने part में चला गया था. कियोकि अवनि ने इस टाइम अपने ऑफिस की वो ड्रेस पहनी हुयी थी जो पब को सबसे ज्यादा पसंद थी. दरक ब्राउन ट्रॉउज़र और वाइट शर्ट विथ स्पेक्टेक्ल्स. जब ये दोनों साथ में जॉब करते थे तो पब कई बार उसकी इस ड्रेस की टैरिफ दबे सब्दो में कर चुक्का था. अवनि भी जानती थी की जब भी वो ये ड्रेस पहन कर ऑफिस जाती थी तो पब बर्बर उसे चोरी चोरी देखता था. पब भी अपने उन दिनों को याद करता हुआ बहुत देर तक उसे देखता रहा. फिर उसे अवनि के वो तप्पड़ याद आये और फिर याद आया की उस दिन के बाद अवनि ने उससे बात करना भी बंद कर दिया है. तो उसकी आखों से 2 आशु बहा गए. वो अवनि को देखने में बिजी था की ऐडा उप्पेर में चिल्लाती हुई निचे आयी वो कहा रही थी की मम्मी क्या हुआ अभी तक कोई क्यों नहीं आया?? ये पेय भी अभी तक स्कूल से नहीं आयी है. पेय तो बहाना था उसे पूछना तो अपने पति के बारे में था. कियोकि ऐडा के पास मन की शक्ति नहीं थी तो वो तो इतने दिन से पब से बात भी नहीं की थी. कामिनी भी ऐडा को देख कर मुस्कुरा कर फिर अपने काम में लग गयी और ऐडा पारी के पास वही चेयर कर जा कर बेथ गयी. पैर पब ऐडा को देख कर भड़कने लगा. उसका लुंड खड़ा हो चुक्का था. ऐडा ने इस टाइम एक जीन का शार्ट निक्कर जो उसकी आधी जंगों तक hi था और एक शार्ट शर्ट जिससे दोनों पल्ले आगे से गांठ से बन्दे हुए थे. उसका चिकना पेट पूरा दिख रहा था. बूब्स अड़े से जयादा शर्ट से बहार थे. गोरी और नंगी जंघे उसे सेक्स बम बना रही थी. इस टाइम वो सबसे हॉट लग रही थी.

पब सबको देखता हुआ आगे बड़ा तो सबसे पहले वो पारी के पास से गुजरा तो उसने पारी के गालो को सहला दिया. पारी ीदार उदार देखने लगी. पैर उसे कुछ दिखा नहीं. फिर वो गेट पैर पंहुचा और एरिका और अंकिता की नाभियो के उप्पेर अपना हाथ रख कर उनके पेट को सहला कर फिर से अंदर आ गया. दोनों एक दूसरे को देखने लगी दोनों में सोच की ये दूसरे ने किया है. एक दूसरे को घर कर देखा पैर बोलै कुछ नहीं फिर पब ऐडा के पीछे पहुंच गया. और अपना एक हाथ उसके गले की साइड से लेजाते हुए उसकी शर्ट के अंदर दाल कर उसकी चुकी को मसल दिया. ऐडा जोर से चीख उडी. और पब तुर्रंत टेलिपोर्ट हो कर किचन में पहुंच गया.

ऐडा – आआह्ह्ह्हह्ह ोुह्ह्ह कोण है… किसने किया ये….

ऐडा के चीखने से सबका डायन ऐडा की और गया. तब पारी ने पूछा – क्या हुआ ऐडा ???

ऐडा (धिरे से) – यार किसी ने मेरा बूब्स दबाया है. पैर कोई दिख नहीं रहा..

पारी – अब इतनी सेक्सी बन कर गुमेगी तो भूत भी दबा सकते है… हाहाहाःहाहा

ऐडा – कुट्टी… मैं सच कहा रही हु. तुझको मजाक लग रहा है..

इतने में पब कामिनी की गांड पैर एक जोर का तप्पड़ मार देता है. जबकि कामिनी के पीछे उस टाइम और कोई नहीं था. गुरु और सविता उसके आगे थी और सब ऐडा को देख रही थी. तप्पड़ पड़ते hi कामिनी भी उछाल जाती है..

कामिनी – ाओऊंछहः

कामिनी की आवाज सुन कर अब सब कामिनी की और देखने लगते है. तो कामिनी बोलती है – मारा किसी ने .. (और अपनी गांड को सहलाने लगती है.) ये देख कर सब डरने लगते है. गुरु को भी कुछ लगता है तो वो अपनी आखें बंद करके मंत्र पद फिर है तो उसे पब दिखाई दे जाता है पब को देखते hi उसके फेस पैर मुस्कान आ जाती है. गुरु को मुस्कुराता देख सविता बोली – क्या हुआ दीदी है क्यों रही हो ?? और इस सबको क्या हो रहा है??

गुरु कुछ बोलने वाली hi होती है की पब उसके होंटो को अपने होंटो में ले कर चूसने लगता है. सविता का मुँह खुला रहा जाता है. कियोकि गुरु के होंठ किश करने वाली शेप में थे. और लग रहा था गुरु हवा में किश कर रही है. सविता फिर कुछ बोलने को होती है की पब उसका हाथ पकड़ कर अपनी और खींच लेता है. और उसके पेट को सहलाने लगता है. सविता दर जाती है और अलग होने लगती है. तो पब किश तोड़ कर फिर से विज़िबल हो जाता है. पब को देख कर सविता फिर से उससे चिपक जाती है. और सब भी किचेन में आ कर उससे चिपक जाती है. ऐडा सबसे बाद में उसके पीछे से उसके कंदो पैर लटक जाती है बच्चो के जैसे. और एक दम से बोल पड़ती है – इसका मतलब मेरी चुकी भी अभी अपने hi मसली थी न???

ऐडा बोल तो गयी पैर जब उसका डायन आया की वो कहा क्या बोल गयी तो झेप जाती है. और उसे देख कर सब हसने लगते है….

केवल अवनि दूर से बेथ कर ये सब देख रही थी. फिर सुरु होता है पंक्तियों का सवालो का दूर… इतने सवाल करती है की बस पूछो hi मत…. (मैं लिख नहीं पाउगा). जब सवाल जवाब का डोर ठंठा है तो सुरु होता है खिलने का डोर. जब सब लोग खाना खाकर hi चूकते है. तभी जय और काजल भी आ जाते है. ये दोनों डॉ. के पास से आ रहे थे. काजल के रेगुलर चक उप के लिए. (काजल प्रेग्नेंट है ये तो सबको याद है है भाई लोगो). पब इनसे भी हाल चल पूछता है कुछ देर में माउद और पेय भी आ जाते है. पब इन दोनों के साथ कुछ देर मस्ती करता है और फिर ये दोनों भी अपने रूम में चली जाती है. अब पब पारी को जुली को बुलाने को बोलता है. फिर अंकिता से बात करता है.

पब – हाँ अंकिता तुम बता रही थी की अपना मैनेजर मुझसे कुछ बात करना चाहता था?? क्या बात थी.??

अंकिता – वो मुझको नहीं बताई उसने बोलै की सर को hi बताउगा.

पब फिर उस मैनेजर से बात करता है फ़ोन पैर. और मैनेजर की बात सुनते हुए खुश हो जाता है. और उसे हवेली पैर बुला लेता है. अभी पब ने फ़ोन रखा hi था की जुली भी आ जाती है. काजल को डॉ ने आराम करने को बोलै था तो काजल रूम में जा चुकी थी. पैर जय, अवनि और पब की साडी पत्निया यही पैर थे.

पब – जुली और अवनि, मेने जो काम दिया था वो हुआ या नहीं??

जुली – हाँ वो तो हो गया, और अब ट्रेनिंग भी पूरी हो चुक्का है. मैं जो भी सीखा सकती हटी मेने सीखा दिया. यदि आप एक्सपोर्ट्स को बुलाना चाहते है तो बुला सकते है.

पब – हम्म ok, जैसे हमने पहले तय किया था. और जिन एक्सपोर्ट्स से बात हुयी थी उन सबको बुला लो.

जुली – ok मैं बुला लेती हु. पैर सबको आने में काम से काम 4-5 दिन तो लग hi जायेगे.

पब – ok कोई बात नहीं जब तक वो लिस्ट्स दिखाओ..

अब तक अवनि लेद को अपने लेपटॉप से कनेक्ट कर चुकी थी. और वो सब दिखने लगती है जो की उसने रेडी किया हुआ था. बैंक अकाउंट के रस., बनायीं हुई साडी लिस्ट्स. उसने सभी लिस्ट बहुत अच्छे से तैयार की थी. सब अवनि और जुली की टैरिफ करते है.
 
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